taaja khabar..भारत में बड़ा आतंकी हमला करने की फिराक में है इस्लामिक स्टेट, रूस ने साजिश रच रहे आत्मघाती हमलावर को हिरासत में लिया..भाजपा का सिसोदिया पर पलटवार, कहा- केजरीवाल जिसे देते हैं ईमानदारी का सर्टिफिकेट वो जरूर जाता है जेल..शहनवाज हुसैन को सर्वोच्च न्यायालय से मिली बड़ी राहत, हाई कोर्ट के आदेश पर लगी रोक..आबकारी घोटाले में 'टूलकिट माड्यूल' की जांच, स्टैंडअप कामेडियन और हैदराबाद से जुड़े शराब के व्यापारी भी रडार पर..प्रधानमंत्री 24 अगस्त को हरियाणा और पंजाब में अस्पतालों का उद्घाटन करेंगे..आबकारी नीति मामला: भाजपा की दिल्ली इकाई का केजरीवाल के आवास के बाहर प्रदर्शन..

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जम्मू, झज्जरकोटली पुलिस ने कश्मीर से जम्मू आ रही एक टैक्सी में से भारी मात्रा में मादक पदार्थ भुक्की को बरामद किया। नशे की इस खेप को पंजाब के दो तस्कर जिन में एक महिला भी शामिल है कश्मीर से लेकर आ रहे थे और इसे पंजाब लेकर जाने की फिराक में थे। भुक्की की तस्करी के आरोप में पकड़े गए जोरा सिंह पुत्र दर्शन सिंह निवासी ढोलना, जिला लुधियाना, पंजाब और कुलविंदर कौर पत्नी पीपल सिंह निवासी अकबर वाला, फिरोजपुर, फतेहगढ़, पंजाब से कुल 42.160 किलो भुक्की बरामद हुई। जब्त भुक्की को जांच के लिए पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में भेज दिया गया है। मादक पदार्थों की तस्करी की पुख्ता सूचना पर झज्जरकोटली पुलिस थाना प्रभारी विक्रम शर्मा ने एसडीपीओ नगरोटा प्रदीप कुमार की देखरेख में शनिवार सुबह तड़के जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के दोमेल इलाके में नाका लगाया। इस दौरान कश्मीर से जम्मू की ओर आ रही एक टैक्सी जेके16-2179 को जांच के लिए रोका। टैक्सी चालक ने पुलिस को बताया कि वह श्रीनगर से सवारियां बैठा कर जम्मू जा रहा है। चूंकि पुलिस के पास यह पुख्ता सूचना थी कि टैक्सी में नशे की खेप है। उन्होंने टैक्सी में सवार लोगों की तलाशी लेनी शुरू कर दी। महिला समेत दो यात्रियों के चार बैग को जब पुलिस कर्मियों ने खोला तो उसके अंदर से भुक्की के पैकेट बरामद हुए। दोनों यात्रियों को पूछताछ के लिए झज्जरकोटली पुलिस थाने में ले जाया गया। दोनों के बैग से 42 किलो से अधिक भुक्की हुई। पकड़े गए दोनों लोगों से पुलिस यह पूछताछ कर रही है कि नशे की इस खेप को वह कश्मीर से किसी हिस्से से लेकर आए थे और पंजाब में कहा पर लेकर जा रहे थे। दोनों से मिली जानकारी के आधार जम्मू पुलिस ने पंजाब पुलिस से संपर्क किया है ताकि मादक तस्करी के इस नेटवर्क में जुड़े लोगों की गिरफ्तारी की जा सके।
नई दिल्‍ली: बार और रेस्‍तरां में सुब‍ह 3 बजे तक शराब परोसने की अनुमति देने से पहले दिल्‍ली पुलिस से सलाह ली गई थी? गुरुवार को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार से यह सवाल किया। अदालत नैशनल रेस्‍टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) की एक याचिका पर विचार कर रही थी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा, 'निर्व‍िवाद रूप से, कितने समय तक सार्वजनिक मनोरंजन की जगह खुली रहेगी, यह जनव्‍यवस्‍था का मुद्दा है। ऐसा हर जगह है, केवल दिल्‍ली या भारत में नहीं।' AAP सरकार ने वकील ने कहा कि दिल्‍ली पुलिस की सहमति की जरूरत नहीं क्‍योंकि आबकारी विभाग पूरी तरह से निर्वाचित सरकार के मातहत आता है। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि वह रिकॉर्ड देखना चाहती है। जस्टिस वर्मा ने कहा कि आबकारी विभाग का काम राजस्‍व कमाना है लेकिन व्‍यवस्‍था बनाए रखना पुलिस की जिम्‍मेदारी है। अदालत ने कहा, 'आप उन्‍हें (बार और रेस्‍तरां) सुबह‍ 6 बजे तक खुलने और सर्व करने की इजाजत दे सकते हैं, आपका ध्‍यान राजस्‍व पर है।' अदालत ने कहा कि अन्‍य चिंताओं पर भी विचार करना जरूरी है और सुनवाई को शुक्रवार तक स्‍थगित कर दिया। दिल्‍ली पुलिस से भी अदालत का सवाल अदालत ने दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें 'किसी को कहीं भी दुकान खोलने की अनुमति' दी गई। बाद में इस फैसले से नगर निगमों और पुलिस जैसी अन्‍य एजेंसियों को समस्‍या होने लगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के विरोध पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि अगर सुबह 3 बजे की विंडो के दौरान ज्‍यादा अपराध होते हैं तो भी इसका कोई सबूत नहीं है कि यह शराब से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि पांच सितारा होटलों में तो 24 घंटे शराब परोसी जाती है। NRAI की याचिका में कहा गया कि कानूनी तौर पर रेस्‍तरां देर रात तक खुले रह सकते हैं मगर पुलिस उन्‍हें सुबह 1 बजे के बाद ऑपरेट करने नहीं देती। पुलिस के तर्क कि देर रात तक बार खुलने से कानून-व्‍यवस्‍था की समस्‍या खड़ी होती है, याचिका में कहा गया कि नोएडा और गुरुग्राम में देर तक शराब सर्व होती है मगर दिल्‍ली को बेवजह सजा दी जा रही है।
चंडीगढ़ : पंजाब में सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद आम आदमी पार्टी को लेकर विरोध तेज हो गया है। स्थिति यह है कि सीएम भगवंत मान से लेकर पार्टी के विधायक लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं। पंजाब में सरदूलगढ़ से आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत सिंह शुक्रवार को सुबह सिद्ध मूसेवाला के घर पहुंचे थे।. आप विधायक को देखते ही लोगों का गुस्सा भड़क गया। आप विधायक किसी तरह से वहां से बाहर निकले। अब सवाल यह है कि आखिर दो महीने में ही सूबे में ऐसा क्या हो गया कि जिस आम आदमी पार्टी पर लोगों ने जान छिड़की थी अब उसके नेताओं को दौड़ा रहे हैं। चुनाव में बंपर जीत अब लोग कर रहे विरोध पहले बात सरदूलगढ़ के विधायक गुरप्रीत सिंह बनवाली की कर लेते हैं। गुरप्रीत सिंह बनावली को इस बार हुए पंजाब चुनाव में 41 हजार से अधिक मतों से जीत मिली थी। बनावली को करीब 50 फीसदी वोट मिले थे। बनवाली ने यहां कांग्रेस के उम्मीदवार बिक्रम सिंह को हराया था। बिक्रम सिंह को 34 हजार 446 वोट मिले थे। शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार दिलराज सिंह भूंदर तीसरे स्थान पर रहे मानसा में आप उम्मीदवार बने थे 'लखपति' सिंगर सिद्धू मूसेवाला ने मानसा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। यहां भी आम आदमी पार्टी को लोगों का जोरदार समर्थन मिला था। मानसा से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. विजय सिंगला को एक लाख से अधिक वोट मिले थे। सिंगला ने कांग्रेस उम्मीदवार शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला को 63 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। यहां आम आदमी पार्टी को 57 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। हालांकि, भ्रष्टाचार में नाम आने के बाद भगवंत मान ने सिंगला को मंत्री पद से हटा दिया था। संगरूर उपचुनाव पर पड़ेगा असर पंजाब में सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद से कानून और व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी और सीएम भगवंत मान विपक्ष के साथ ही लोगों के निशाने पर हैं। कानून व्यवस्था के साथ ही लोग वीआईपी सुरक्षा को घटाए जाने को लेकर भी नाराजगी दिखा रहे हैं। इस बीच 23 जून को संगरूर लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है। माना जा रहा है कि विपक्ष लोगों के इस गुस्से को आप के खिलाफ भुनाना चाहेगा। ऐसे में संभव है कि संगरूर उपचुनाव पर इसका कुछ असर दिखे। संगरूर सीएम भगवंत मान की सीट रही है। मान ने यहां से 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव जीता था। सीएम मान की तरह ग्रामीण क्षेत्र में मूसेवाला की लोकप्रियता पंजाब चुनाव में कांग्रेस की असफलता के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ना वजह रहा। आम आदमी पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रो में बेहतर प्रदर्शन किया था। जानकारों का मानना है कि सीएम भगवंत मान की तरफ से सिंगर सिद्धू मूसेवाला भी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हैं। मूसेवाला के अंतिम संस्कार में हजारों लोगों की उमड़ी भीड़ से इस बात के संकेत भी दिखाई दिए। वहीं, मूसेवाला की हत्या के बाद विपक्ष ने वीआईपी लोगों की सिक्योरिटी कम किए जाने को लेकर भी सरकार को निशाने पर लिया है। बठिंडा लोकसभा में 9 विधानसभा सीट सिंगर सिद्धू मूसेवाला की सीट मानसा बठिंडा लोकसभा क्षेत्र में आती है। बठिंडा लोकसभा में लांबी, भूचो मंडी, बठिंडा शहरी, बठिंडा ग्रामीण, तलवंडी साबो, मौर, मानसा, सरदूलगढ़ और बुढलाढा 9 विधानसभा सीट आती हैं। इन सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी। इन सभी सीटों पर आप उम्मीदवार को 37 से लेकर 57 प्रतिशत तक वोट मिले थे।
चंडीगढ़। कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति कमीशन के पूर्व चेयरमैन राजकुमार वेरका भी कांग्रेस को अलविदा कहने की तैयारी में हैं। वेरका भारतीय जनता पार्टी में अपनी नई सियासी पारी खेलेंगे। माना जा रहा है कि 4 जून शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चंडीगढ़ दौरे के दौरान वेरका भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी की भी चल रही है, लेकिन वह भाजपा ज्वाइन करेंगे या नहीं, इसे लेकर पुष्टि नहीं है। सोनी की विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा के साथ बातचीत चल रही थी। तब सोनी केंद्र में कोई ओहदा चाह रहे थे, लेकिन उस समय बात नहीं बन पाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी रहे राजकुमार वेरका लंबे समय से अपने स्तर पर कांग्रेस पार्टी के लिए बयान जारी कर रहे थे। बीते 27 मई को उन्होंने कांग्रेस हाईकमान पर हमला बोला था। उन्होंने कांग्रेस हाईकान को मूक दर्शक और तमाशबीन बताया था। वेरका का यह बयान तब आया था जब पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की थी कि उन्हें कैप्टन से पूछताछ कर कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान रेत-बजरी की काम करने वाले कांग्रेसी नेताओं की लिस्ट हासिल करनी चाहिए और उस पर कार्रवाई करनी चाहिए। इस पर कैप्टन ने कहा था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अगर उनसे लिस्ट मांगेगे तो वह उन्हें मुहैया करवा देंगे। रंधावा के इस बयान से कांग्रेस पार्टी में खासी खलबली मच गई थी। कई नेताओं की जान सांसत में आ गई थी कि अगर कहीं कैप्टन ने मुख्यमंत्री को लिस्ट दे दी तो उनकी परेशानी बढ़ जाएगी। इसी प्रतिक्रम में राजकुमार वेरका द्वारा हाईकमान को मूकदर्शक और तमाशबीन बताए जाने के बाद से ही यह संकेत मिलने लगे थे कि वह भी कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। हालांकि वेरका ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने की अभी पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि वह एक दो दिनों में ही भाजपा ज्वाइन कर सकते है। वेरका अगर भाजपा ज्वाइन करते हैं तो वह कांग्रेस पांचवें बड़े नेता होंगे, क्योंकि इससे पहले सुनील जाखड़, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, फतेह जंग बाजवा, मोगा से डा. हरजोत कांग्रेस को छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं। वहीं, ओपी सोनी को लेकर जिस प्रकार से चर्चा गर्म है। उसे देखते हुए लगता है कि आने वाले दिनों में ओपी सोनी भी कांग्रेस को झटका दे सकते हैं।
जालंधर। वीरवार को लगातार दूसरे दिन तहसील कंपलेक्स स्थित सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में किसी भी तरह की प्रापर्टी की रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इसी के चलते दिनभर लोग बैरंग लौटते रहे। बताया जा रहा है कि वीरवार को विभिन्न तरह की प्रापर्टी की रजिस्ट्री करवाने के लिए 34 लोगों ने अपाइंटमेंट ली थी, जिनकी रजिस्ट्री अब सोमवार को ही होनी संभव है। सोमवार को ही होगा लोगों का प्रापर्टी संबंधी काम उल्लेखनीय है कि होशियारपुर में सब रजिस्ट्रार पर बिना एनओसी के प्रापर्टी की रजिस्ट्री करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। इसके विरोध में राज्य भर के सबरजिस्ट्रार हड़ताल पर चले गए हैं। भले ही यह हड़ताल 3 जून तक ही है, लेकिन शनिवार व रविवार को सरकारी छुट्टी होने के चलते अब लोगों का प्रापर्टी संबंधी काम सोमवार को ही हो सकेगा। वहीं इस हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में रेवेन्यू आफिसर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गुरदेव सिंह का कहना है कि बिना किसी जांच के अधिकारियों पर कार्रवाई करना नियमों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए राज्य भर की यूनियन संगठित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इंसाफ मिलने तक यूनियन के सदस्य संघर्ष करते रहेंगे। बरनाला तहसील के दफ्तर में भी खाली दिखीं कुर्सियां बता दें कि, बुधवार को इस हड़ताल के चलते बरनाला तहसील के दफ्तर में भी कुर्सियां खाली दिखाई दीं। बरनाला तहसील में आए लोगों ने कहा कि हम रजिस्ट्री करवाने आए थे, लेकिन अब बिना काम करवाए ही वापस लौटना पड़ रहा है। लोगों के चेहरों पर मायूसी साफ देखी जा सकती थी।
चंडीगढ़ पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या से आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार बैकफुट पर आ गई है। सबसे अहम सिक्योरिटी कटौती की सूचना लीक होना है। जिसको लेकर अब हाईकोर्ट ने भी जवाबतलबी की है। AAP सरकार को इस हत्याकांड के बाद सोमवार सुबह बुलाई कैबिनेट मीटिंग रद्द करनी पड़ी। इसके बाद विधायकों का ट्रेनिंग सेशन रखा गया था। जिसे भी टाल दिया गया है। 3 बार कटौती की सूचना बाहर आई मान सरकार ने पंजाब के VIP की सुरक्षा में 3 बार कटौती की। तीनों बार इसकी सूचना लीक हो गई। पहली बार 184, फिर 8 और आखिर में 424 वीआईपी की सिक्योरिटी घटाई गई थी। जिसमें सिद्धू मूसेवाला का नाम शामिल था। इसके अगले ही दिन मूसेवाला की हत्या हो गई। यह मामला अब हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। मंत्री की बर्खास्तगी से थी चर्चा में CM भगवंत मान की AAP सरकार हेल्थ मिनिस्टर डॉ. विजय सिंगला की बर्खास्तगी से चर्चा में थी। इसका पता किसी को नहीं था, फिर भी मान ने कमीशनखोरी की बात कह मंत्री को बर्खास्त कर दिया। जिसके बाद उन्हें खूब वाहवाही मिल रही थी। हालांकि सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद सरकार पूरी तरह से घिर गई है। लोकसभा उपचुनाव में बढ़ेगी टेंशन पंजाब में संगरूर सीट पर लोकसभा का उपचुनाव होना है। इसके लिए नामांकन शुरू हो चुके हैं। 23 जून को वोटिंग है। इससे पहले ही मूसेवाला की हत्या पर मान सरकार की कारगुजारी सवालों में घिर गई है। अभी तक आप के लिए यहां से जीत स्पष्ट समझी जा रही थी। हालांकि नए हालातों में अब आप के लिए यह मुश्किल पैदा कर सकती है। कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा इसे जोर-शोर से उठा रहे हैं।
चंडीगढ़ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में अब दूसरे पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख का नाम उछल रहा है। गैंगस्टर दविंदर बंबीहा और विक्की गौंडर ग्रुप ने औलख का नाम लिया है। इसमें शक जताया गया है कि औलख गैंगस्टर लॉरेंस का करीबी है। पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में आपसी दुश्मनी के चलते यह हत्या कराई गई है। पुलिस इस मामले में सिंगर मनकीरत औलख से पूछताछ कर सकती है। इस मामले में अभी तक औलख का कोई पक्ष सामने नहीं आया है। गैंगस्टर बंबीहा ग्रुप ने क्या कहा मूसेवाला की हत्या के बाद दविंदर बंबीहा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली। इसमें कहा कि लॉरेंस और गोल्डी बराड़ ने मूसेवाला को मारकर गलत किया है। इस कत्ल में सिंगर मनकीरत औलख का पूरा हाथ है। वह सारे सिंगर्स से पैसे इकट्‌ठा करता है। वह उनकी पर्सनल इन्फॉर्मेशन लॉरेंस को देता है। मनकीरत औलख को सिक्योरिटी दी हुई है। बिना बात के मूसेवाला की सिक्योरिटी छीनकर शोर मचा दिया गया। मूसेवाला का किसी गैंगस्टर से कोई कॉन्टैक्ट नहीं था। गौंडर ग्रुप का यह दावा विक्की गौंडर ग्रुप ने लिखा कि सिद्धू मूसेवाला का कत्ल रुपयों के लिए हुआ है। इसके पीछे सिंगर मनकीरत औलख है। जितने भी सिंगर हैं, मनकीरत औलख उन सबकी पर्सनल इन्फॉर्मेंशन गैंगस्टर लॉरेंस और गोल्डी बराड़ के साथ शेयर करता था। मनकीरत औलख की सिक्योरिटी क्यों वापस नहीं ली गई?
अमृतसर पंजाब कांग्रेस ने अपने नेता और पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, रणदीप सुरजेवाला और इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ-साथ पंजाब कांग्रेस के तमाम नेताओं ने मूसेवाला के मर्डर के लिए पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए CM भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की है। पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मूसेवाला की हत्या की CBI, NIA या किसी सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की। वड़िंग ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर पंजाब के गवर्नर से मिलेगी। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग भी की जाएगी। उधर वड़िंग के अलावा दूसरी तरफ अन्य कांग्रेसियों ने भी सिद्धू मूसेवाला की मौत के बाद दुख जताते हुए VIP कल्चर खत्म करने के नाम पर AAP सरकार के सिक्योरिटी कम करने के फैसले को मुद्दा बनाया है। पिता ने फोन पर जताई चिंता वडिंग ने कहा कि सिद्धू मूसेवाला के पिता से उनकी रविवार सुबह ही बात हुई थी। इस बातचीत में मूसेवाला के पिता ने अपने बेटे की सिक्योरिटी घटाने पर चिंता जताई थी। पंजाब सरकार ने सिक्योरिटी घटाने के बाद पंजाबी सिंगर के पास जो दो गैनमैन छोड़े, उन दोनों ने आराम करने के नाम पर रविवार शाम को सिद्धू मूसेवाला के साथ जवाहरके गांव जाने से छूट मांग ली थी। ऐसे में सिद्धू मूसेवाला को बिना गनमैन वहां जाना पड़ा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सिद्धू मूसेवाला के मर्डर पर दुख जताते हुए कहा कि पंजाब ने उस शख्स को खो दिया, जिसने मूसेवाला गांव का नाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। गृह मंत्रालय CM के पास इसलिए वह जिम्मेदार कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी सिद्धू मूसेवाला की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि पंजाब में होम मिनिस्टरी खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास है और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं की है। यह जांच का विषय है कि किसके कहने और किन तथ्यों के आधार पर सरकार ने सिद्धू मूसेवाला की सिक्योरिटी को कम किया? इतना ही नहीं, पंजाब में सिद्धू मूसेवाला के चाहने वाले भी राज्य में लॉ एंड ऑर्डर की बिगड़ रही स्थिति को लेकर AAP सरकार को कोस रहे हैं।
चंडीगढ़ मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश तिहाड़ जेल में रची गई। कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस यही बंद है। उसने कनाडा बैठे गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। इसमें पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख का मैनेजर भी शामिल बताया जा रहा है। पहले भी मूसेवाला की हत्या की कोशिश हुई थी। हालांकि जब गैंगस्टर्स के गुर्गे मूसेवाला के गांव पहुंचे तो वहां AK 47 वाले कमांडो देख लौट आए। बाद में हत्या के लिए उन्होंने गोल्डी बराड़ से रूसी AN 94 ( एवतोमैत निकोनोव) मंगवाई थी। जिससे ही ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर कल मूसेवाला की हत्या की गई। इसके पीछे तिहाड़ जेल से चल रहे 9643****** मोबाइल नंबर भी सामने आ रहा है। इस मामले में पंजाब पुलिस ने उत्तराखंड में रेड की है। यह रेड उत्तराखंड STF के साथ मिलकर की गई है। टीम ने उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर स्थित गांव से एक संदिग्ध को उठाया है। जो लॉरेंस का गुर्गा बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने ऑफिशियल तौर पर जानकारी नहीं दी है। हाईकोर्ट ने की जवाबतलबी इस मामले में अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने पूछा कि VIP सिक्योरिटी में कटौती की जानकारी लीक कैसे हुई?। कई नेताओं ने HC में याचिका दायर कर यह मुद्दा उठाया था। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जून को होगी। मेडिकल बोर्ड बना लेकिन पोस्टमार्टम का इंतजार मानसा में अभी तक मूसेवाला का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। पुलिस ने मेडिकल के लिए बोर्ड बना दिया है। जिसमें फारेंसिक एक्सपर्ट समेत 5 डॉक्टर शामिल किए गए हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच यहां मूसेवाला के प्रशंसक लगातार इकट्‌ठा हो रहे हैं। पंजाब पुलिस ने वारदात के एक किलोमीटर दायरे के मोबाइल डंप उठाकर जांच तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस की पूछताछ में सामने आई थी साजिश सूत्रों की मानें तो इसका खुलासा दिल्ली में कुछ समय पहले गिरफ्तार हुए शाहरुख ने किया है। शाहरुख ने बताया था कि गोल्डी बराड़ और लॉरेंस कोई बड़ी साजिश रच रहे हैं। शाहरुख ने खुद मूसेवाला की हत्या के लिए रेकी भी की थी। अब हत्याकांड में इस्तेमाल हुई बोलेरो वही है, जिसका इस्तेमाल शाहरुख ने साथियों के साथ मूसेवाला की रेकी के लिए किया था। इस मामले में हरियाणा के भी कुछ गुर्गों का नाम सामने आ रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या दिल्ली पुलिस ने यह इनपुट पंजाब पुलिस के साथ शेयर किए या नहीं?। अगर हां तो फिर पंजाब पुलिस ने उनकी सिक्योरिटी में कटौती क्यों की?। इन लोगों के नाम आए सामने शाहरुख से पूछताछ के बाद मूसेवाला हत्याकांड में 8 लोगों की भूमिका पर शक जताया जा रहा है। जिसमें गोल्डी बराड़, लॉरेंस, जग्गू भगवानपुरिया, मनप्रीत औलख का मैनेजर सचिन, अजय गिल, सतेंद्र काला, सोनू काजल और अमित काजला शामिल हैं। शाहरुख ने पूछताछ में बताया कि उसकी गोल्डी बराड़ से सिगनल एप पर बात होती थी। शाहरुख का फोन अब दिल्ली पुलिस जब्त कर चुकी है। लॉरेंस के भी सिगनल एप पर बात करने का शक है। हाईकोर्ट के सिटिंग जज करेंगे जांच मूसेवाला हत्याकांड की जांच अब हाईकोर्ट के सिटिंग जज करेंगे। मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने यह मांग की थी। इसके बाद CM भगवंत मान ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में NIA के अलावा जिस भी जांच एजेंसी की जरूरत होगी, सरकार उसमें मदद करेगी। इसके अलावा पंजाब सरकार और पुलिस भी जांच में पूरा सहयोग करेगी। DGP की सफाई, मूसेवाला को गैंगस्टर नहीं कहा DGP वीके भावरा ने सफाई दी कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि मूसेवाला गैंगस्टर है। वह किसी गैंगस्टर ग्रुप से जुड़ा हुआ है। उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया। उनके दिल में भी मूसेवाला के प्रति बहुत सम्मान है। मूसेवाला के पिता ने कहा था कि DGP ने उनके बेटे पर गलत आरोप लगाए। वह इसके लिए माफी मांगें। इसके बाद CM भगवंत मान ने DGP को स्पष्टीकरण देने को कहा था। मान ने सुरक्षा की जानकारी लीक होने के मामले में भी जांच के आदेश दिए हैं। मां पूछती है शुभदीप कब आएगा? क्या जवाब दूं सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने CM भगवंत मान को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि आपकी सरकार की नाकामियों से मेरे बेटे की हत्या हुई। मूसेवाला की मां मुझे पूछती है कि शुभदीप कहां है?, वह घर कब आएगा?। मैं उसे क्या जवाब दूं। मैं उम्मीद करता हूं कि मुझे इंसाफ मिलेगा। मानसा में 1 IG और 2 SSP तैनात मानसा में तनावपूर्ण माहौल के बीच कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पंजाब पुलिस के बठिंडा रेंज के IG पीके यादव, मानसा SSP गौरव तूरा और बठिंडा के SSP जे. एलेनचेजियन को मानसा में ही कैंप करवा दिया गया है। मूसेवाला की रविवार शाम साढ़े 5 बजे ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। एक दिन पहले ही पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने उनकी सिक्योरिटी वापस ली थी। लॉरेंस और बंबीहा गैंग आमने-सामने, गैंगवार की आशंका बढ़ी मूसेवाला की हत्या के बाद पंजाब में गैंगवार की आशंका बढ़ गई है। मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस गैंग ने ली है। लॉरेंस गैंग और उनके साथी कनाडा के गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने कहा कि हमने मोहाली में कत्ल किए विक्की मिड्‌डूखेड़ा की हत्या का बदला लिया है। वहीं अब गैंगस्टर दविंदर बंबीहा गैंग भी सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि मूसेवाला उनसे नहीं जुड़ा था। फिर भी उसका नाम हमारे साथ जोड़ा जा रहा है। इसलिए वह इसका बदला लेंगे। जेलों में दोनों के गैंगस्टर अलग किए गए इस धमकी को देखते हुए पंजाब की जेलों में लॉरेंस गैंग के बंदियों को अलग कर दिया गया है। जहां-जहां इस गैंग के मेंबर हैं, वहां सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। बंबीहा गैंग के मेंबर भी जेलों में बंद हैं। उन्हें भी अलग कर दिया गया है। दोनों गैंग आपस में न भिड़ें, इसको लेकर सभी जेलों में हाई अलर्ट कर दिया गया है। पंजाब पुलिस ने SIT बनाई पंजाब पुलिस ने मूसेवाला की हत्या की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बना दी है। जिसमें मानसा के SP (इन्वेस्टिगेशन) धर्मवीर सिंह, DSP (इनवेस्टिगेशन) बठिंडा विश्वजीत सिंह और मानसा के CIA इंचार्ज प्रिथीपाल सिंह शामिल हैं। बुलेट प्रूफ फॉर्च्यूनर घर छोड़ जीप लेकर निकले थे पंजाबी सिंगर इस बीच यह अहम बात भी सामने आई है कि मूसेवाला घर से अपनी निजी बुलेट प्रूफ फॉर्च्यूनर लेकर निकलने वाले थे। इसे उन्होंने बाहर भी निकाल लिया था। हालांकि, फिर उसे घर के अंदर खड़ी कर थार निकाल ली। मूसेवाला ने ऐसा क्यों किया?, इसको लेकर भी पुलिस जांच में जुट गई है। DGP बोले- गनमैन और बुलेट प्रूफ गाड़ी नहीं ले गए मूसेवाला DGP वीके भावरा ने कहा कि मूसेवाला साढ़े 4 बजे घर से निकले। साढ़े 5 बजे वह खुद थार चलाकर जा रहे थे। उनके साथ 2 लोग थे। इनके पीछे एक गाड़ी थी और 2 गाड़ियां सामने से आईं। उन्हें गोलियां मारी गईं। अस्पताल पहुंचने तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौके से 3 तरह के हथियार के खोल मिले हैं। इस दौरान 30 से ज्यादा फायर हुए। DGP ने कहा कि मूसेवाला के पास पंजाब पुलिस के 4 कमांडोज हैं। घल्लूघारा दिवस की वजह से उनके 2 कमांडो वापस लिए गए थे। 2 कमांडो उनके पास थे। जब वह गए तो कमांडो को साथ नहीं ले गए। कमांडो को कहा कि उन्हें साथ आने की जरूरत नहीं है। मूसेवाला के पास प्राइवेट बुलेट प्रूफ गाड़ी थी, उसे भी वे नहीं ले गए। CM भगवंत मान के आदेश पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई जा रही है। इसके लिए रेंज के IG को कह दिया गया है। यह मामला गैंगवार का है। सिद्धू मूसेवाला के मैनेजर शगनप्रीत का नाम मोहाली में हुए विक्की मिड्‌डूखेड़ा के मर्डर में आया था। शगनप्रीत ऑस्ट्रेलिया में है। उसका बदला लेने के लिए लॉरेंस गैंग ने यह मर्डर करवाया है। इसकी जिम्मेदारी कनाडा बैठे गैंगस्टर ने ले ली है। महीनेभर में दूसरी बार फेल रही पंजाब पुलिस पंजाब पुलिस की इंटेलिजेंस इस महीने में दूसरी बार फेल रही। पहले उनके अपने ही ऑफिस पर रॉकेट अटैक हो गया। इसके बारे में वह पहले अलर्ट नहीं दे सके। अब मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के खतरे को नहीं भांप सके। उनकी सिक्योरिटी में कटौती करवा दी गई। इससे पंजाब पुलिस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गैंगस्टर्स के निशाने पर थे, पंजाब सरकार ने सुरक्षा घटाई सिद्धू मूसेवाला गैंगस्टर्स के निशाने पर थे। इसके बावजूद शनिवार को पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा घटा दी। उनके पास 2 ही गनमैन रह गए थे। सुरक्षा को लेकर मूसेवाला भी चिंतित थे। उन्होंने वकील से भी इस बारे में बात की थी। इसके अलावा अपने करीबी सिंगर अमृत मान को भी मिलने बुलाया था। मूसेवाला ने कोई जरूरी बात करने की बात कही थी। माना जा रहा है कि वह सुरक्षा के बारे में ही बात करने वाले थे। इसको लेकर अब पंजाब सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई बार बंदूकों के साथ नजर आते थे मूसेवाला​​ मूसेवाला पर गानों में गन-कल्चर को बढ़ावा देने का आरोप शुरू से लगते रहे हैं। 2020 में पंजाब पुलिस की शूटिंग रेंज में गोली चलाते मूसेवाला का वीडियो वायरल हुआ। कोरोना लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ केस हुआ। वायरल वीडियो में सिद्धू मूसेवाला बंदूक दिखा रहे थे। एके-47 राइफल के साथ ट्रेनिंग लेते भी दिख रहे थे।
चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी की पहली रैली 'अब बदलेगा हरियाणा' रविवार को कुरुक्षेत्र में संपन्न हुई। रैली में दिल्ली के सीएम और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भाजपा को खुला चैलेंज किया। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा 2024 का चुनाव वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम पर लड़कर दिखाए। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पत्रकार ने बताया कि भाजपा वाले सीएम मनोहर लाल को चुनाव से पहले पद से हटा देंगे। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा में फ्री बिजली चाहिए तो सरकार बदलनी पड़ेगी। पंजाब में हमारा स्वास्थ्य मंत्री पैसे मांग रहा था। कोई और पार्टी होती तो पार्टी फंड में पैसा जमा करवा लेती। हमने उस मंत्री को बर्खास्त कर जेल भेज दिया। दिल्ली में मेरा मंत्री राशन वाले से पैसे मांग रहा था। किसी को नहीं पता था, लेकिन मैंने अपने मंत्री को सीबीआई के हवाले कर दिया। मेरा बेटा भी कल को बदमाशी करेगा तो उसे छोडूंगा नहीं। आज तक दूसरी पार्टियों ने अपने किसी मंत्री को कभी जेल भेजा, क्योंकि पैसा दिल्ली तक जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और पंजाब में भ्रष्टाचार खत्म किया। साथ ही लोगों से कहा कि नगर निकाय चुनावों में अपनी ताकत दिखाइए। निगम को भी झाडू से साफ करेंगे और 2024 में पूरे हरियाणा को भ्रष्टाचार से साफ करेंगे। किसानों ने भाजपाइयों का घमंड तोड़ा सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा और पंजाब के किसानों ने अंहकारी सरकार को झुका दिया। 36 बिरादारियाें और सारे धर्म के लोगों ने मिलकर आंदोलन एक साल तक लड़ा। ठंड, गर्मी में किसान डटे रहे। अंहकार तो रावण का भी नहीं चला, इन्हें घमंड हो गया था। त्रेता युग में रामचंद्र ने रावण का, द्वापर युग में कृष्ण ने कंस और कलयुग में किसानों ने भाजपाइयों का घमंड तोड़ा है। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को बधाई देना चाहते हैं। बोले कि मैं सीधा सादा छोरा हूं। मन्ने काम करना आवें, मेरे से कितना ही काम करवा लो। दिल्ली के सरकारी स्कूल शानदार हो गए। 4 लाख बच्चों ने प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। दो साल पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप इंडिया आए। ट्रंप की पत्नी हमारे स्कूल देखने आई। हरियाणा के स्कूल देखने कोई नहीं आया केजरीवाल ने कहा कि मोदी ने ट्रंप की पत्नी को बहुत समझाया, कि बहन मान जाओ। मैं भाजपा वालों के स्कूल दिखा दूंगा। परंतु वो नहीं मानी और दिल्ली के स्कूल देखने आईं और प्रंशसा भी की। हरियाणा के खट्‌टर के स्कूल को कौन देखने आया। श्रीलंका वाला कोई देखने भी नहीं आया। जो अपने बच्चों को इंजीनियर, वकीला बनाना चाहता है वो हमारे साथ आ जाओ और जो अपने बच्चों को गुंडा,दंगाई और बलात्कारी बनाना चाहते हैं वो उनके साथ चले जाओ। उनकी पार्टी में दंगाई, लफंगे और बलात्कारी भरी पड़े हैं, ये दंगा करने वालो का सम्मान करते हैं। कुछ गुंडों ने मेरे घर पर हमला कर दिया, इन्होंने उन सारे गुंडों का सम्मान किया। यूपी में किसानों पर इनकी पार्टी वालाें ने गाड़ी चढ़ा दी और बड़े बड़े वकील खड़े कर दिए। देश में कहीं बलात्कार हो जाए, इनकी पार्टी वाले सम्मान करने पहुंच जाते हैं। आप पार्टी शरीफों और देशभक्तों, ईमानदारों की पार्टी है। गुंडों का भारत चाहते हो या दंगाईयों का भारत? अरविंद केजरीवाल ने कहा भाजपा नेता अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं और आप के बच्चों को दंगा करवाने के लिए तैयार करेंगे। हरियाणा में सभी पेपर लीक हो जाते हैं। पुलिस भर्ती, एचएसएससी, पटवारी, टीजीटी भर्ती, डेंटल सर्जन भर्ती का पेपर लीक हो गया। सीएम मनोहर लाल एक पेपर नहीं करवा सकते वो सरकार क्या चलाएंगे। अभी गुजरात गया था, वहां पर भी पेपर लीक हो रहे हैं, भाजपा की सरकार है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भाजपा का नाम पेपर लीक करवाने के लिए लिखा जा रहा है। भिवानी में पवन नामक युवक ने आर्मी की भर्ती बंद होने के कारण आत्महत्या कर ली। कल पीएम को पत्र लिखकर भर्ती शुरू करवाने का अनुरोध करेंगे।
फतेहाबाद हरियाणा के फतेहाबाद में रविवार को कांग्रेस की रैली में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर 6 हजार रुपए बुढ़ापा पेंशन देंगे। इस दौरान उन्होंने भाजपा-जजपा सरकार पर भी जमकर हमला बोला। पूर्व सीएम हुड्‌डा ने कहा कि वर्तमान भाजपा-जजपा सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है। विकास, शिक्षा, रोजगार में जिले का साथ प्रदेश बुरी तरह पिछड़ गया है। स्कूलों में मास्टर में नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं और ऑफिसों में कर्मचारी नहीं हैं। जिन्हें बच्चों को पढ़ना चाहिए वो नशा कर रहे हैं। सरकार की संरक्षण में ये सब हो रहा है। रोज हत्या, लूट और डकैती की वारदात हो रही हैं। कानून नाम की कोई चीज नहीं है। रोजाना नए-नए घोटाला सामने आ रहे हैं और प्रदेश कर्ज में डूब गया है। रैली फतेहाबाद स्थित नई सब्जी मंडी में सुबह 11 बजे शुरू हुई। रैली में पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, कैप्‍टन अजय यादव भी पहुंचे। सीएम और केजरीवाल की रैलियों पर तंज भूपेंद्र हुड्‌डा बोले की हमने फतेहाबाद में रैली रखी तो सब पार्टियों ने रैली रख दी। हुड्‌डा ने कहा कि हमने 29 मई की तारीख रखी तो इनके चूहे दौड़ने लग गए। सीएम का नाम लिए बिना हुड्‌डा ने कहा कि एक ने सिरसा में रख ली और एक ने टोहाना में रख ली, लेकिन टोहाना वाला कैंसल कर गया। कुरुक्षेत्र और सिरसा वाली रैली इससे आधी ही रही। ये साफ दर्शाता है कि आने वाला समय कांग्रेस के साथ रहेगा। दीपेंद्र हुड्‌डा ने भी सरकार पर साधा निशाना वहीं इससे पहले राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जब 2014 में कांग्रेस की सरकार थी तो प्रदेश देश में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार में नंबर 1 पर था। अब राज्य बेरोजगार, भ्रष्टाचार में नंबर वन बन गया है। भाजपा के 8 साल के शासनकाल में प्रदेश विकास की पटरी से उतर गया। खिलाड़ियों को बिना भेदभाव नौकरी देंगे दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार में किसी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि आगामी सरकार कांग्रेस की बनेगी। प्रदेश फिर से देश में नंबर वन बनेगा। खिलाड़ियों को बिना किसी भेदभाव के नौकरी दी जाएगी। किसानों को हर खेत में पानी दिया जाएगा। दीपेंद्र ने कहा तहसील कार्यालयों से लेकर आबकारी विभाग में खूब भ्रष्टाचार हो रहा है। अब तो हमारे रोहतक के सांसद भी प्रदेश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर खूब बोल रहे हैं। इसका मतलब अब भ्रष्टाचार बहुत अधिक है। प्रदेश में आगामी डेढ़ साल बाद फिर से कांग्रेस की सरकार होगी। ऐसे में सभी मिलकर कार्य करें। निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ने का फैसला कल गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा रैली से एक दिन पहले ही फतेहाबाद पहुंच गए। देर रात कांग्रेसी नेताओं से मंथन किया। हुड्डा ने बताया कि निकाय चुनाव कांग्रेस सिंबल पर लड़ेगी या नहीं इसका फैसला सोमवार को किया जाएगा। सोमवार को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया जाएगा। वहीं रैली के पोस्टरों में कार्यकारी अध्यक्षों की फोटो न होने संबंधी आरोपों पर हुड्डा ने कहा कि यह उनका काम नहीं है।
चंडीगढ़, आम आदमी पार्टी ने पंजाब में राज्यसभा के दो सीटों के लिए हाेनेवाले चुनाव के लिए अपने प्रत्‍याशियों के नाम तय कर लिए हैं। पार्टी ने पदमश्री संत बलबीर सिंंह सीचेवाल और पदम श्री विक्रमजीत सिंह साहनी के नाम पर मुहर लगाई है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल नदियों को प्रदूषण मुक्‍त बनाने के अपने अभियान के लिए जाने जाते हैं। बाबा सीचेवाल और ईको (ECO) बाबा के नाम से है मशहूर संत सीचेवाल को सुल्तानपुर लोधी में 160 किलोमीटर लंबी काली बेन नदी की सफाई कर उसे नया स्‍वरूप देने के लिए जाने जाते हैं। उन्‍होंंने अकेले 2007 में काली बेन नदी की सफाई शुरू की थी। जालंधर के किसान परिवार में जन्मे बाबा सीचेवाल कई सालों से नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने की मुहिम चला रहे हैं। उनको 2017 में पद्मश्री के सम्‍मान से नवाजा गया था। दूसरे उम्‍मीदवार बिक्रमजीत सिंह साहनी ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साहनी सालों से समाज कल्याण के कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। उनको मॉरीशस के राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से सम्‍मानित कर चुके हैं। साहनी ने विश्व पंजाबी संसदीय मंच का गठन कर विश्व भर में पंजाबी संस्कृति का प्रचार किया। उन्‍होंने 'बोले सो निहाल', 'गुरु मान्यो ग्रंथ' और 'सरबंसदानी' जैसे कई कार्यक्रम कराए। उन्होंने हजारों पंजाबी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप मुहैया कराई। उन्‍होंने वर्ल्ड पंजाबी आर्गेनाइजेशन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए 22 से ज्यादा देशों में पंजाब के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते बढ़ाने में अहम योगदान दिया। विक्रमजीत साहनी ने 500 से अधिक अफगान हिंदुओं और सिखों के पुनर्वास की जिम्मेदारी ली। कोविड-19 के समय विक्रमजीत साहनी ने पंजाब के गांवों में कोविड-19 टेस्टिंग क्लीनिक, एंबुलेंस और दो हजार से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद मुहैया कराए थे।
चंडीगढ़ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत ने 4 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इसमें से 5 लाख रुपए CBI को दिए जाएंगे। जुर्माना न भरने पर 6 महीने की सजा अतिरिक्त भुगतनी पड़ेगी। कोर्ट में बचाव पक्ष ने दिव्यांगता के आधार पर सहानुभूति रखने की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने हेली रोड, पंचकूला, ,गुरुग्राम, असोला की संपत्तियां भी सीज करने के आदेश दिए। CBI के वकील अजय गुप्ता ने बताया कि आरोपी ने 10 दिन का समय दिया जाने की मांग की, ताकि मेडिकल रिपोर्ट करवाई जा सकें। परंतु कोर्ट ने कहा कि जो मेडिकल टेस्ट करवाने हैं, जेल में करवाए। सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें कस्टडी में ले लिया गया। कोर्ट में उनके बेटे अभय चौटाला और पोते अर्जुन भी थे। अभय चौटाला ने कहा कि वे हाइकोर्ट जाएंगे। अभी वकीलों के साथ रायशुमारी करेंगे। चौटाला के वकील की दलील इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यु कोर्ट में गुरुवार को सजा पर वकीलों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। चौटाला की ओर से वकील ने अदालत में दलील दी है कि उनकी उम्र 87 साल है और लंबे समय से बीमार हैं। उनके पास 60 प्रतिशत दिव्यांगता का सर्टिफिकेट है, लेकिन अब वह 90 प्रतिशत दिव्यांग हो चुके हैं। स्वास्थ्य खराब रहता हैं और अपने कपड़े भी खुद बदल नहीं पाते। इससे पहले JBT भर्ती मामले में जेल में सजा काट चुके हैं। जेल में रहते हुए 10वीं और 12वीं पास की है। वहीं, CBI के वकील ने दलील दी है कि पूर्व CM को कम सजा देने से गलत संदेश जाएगा। गौरतलब है कि चौटाला को अदालत ने 21 मई को दोषी करार दिया गया था। CBI ने आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में चौटाला के खिलाफ 106 गवाह पेश किए थे। पूर्व CM के खिलाफ CBI ने 2005 में यह मामला दर्ज किया था। 2010 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट के बाद 16 जनवरी 2018 को ओपी चौटाला के बयान दर्ज हुए थे। CBI ने चौटाला और उनके बेटों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। ये है पूरा मामला आय से अधिक संपत्ति का मामला कांग्रेसी नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला की शिकायत पर CBI ने 2005 में दर्ज करवाया था। CBI ने आरोप पत्र दाखिल किया था कि निर्धारित अवधि के दौरान ओपी चौटाला की आय उनकी 3.22 करोड़ रुपए की आय से 189 प्रतिशत अधिक थी। अजय चौटाला के पास उनकी आय से 339.27 प्रतिशत अधिक संपत्ति थी। मई 1993 से मई 2006 के बीच उनकी आय 8.17 करोड़ रुपए रही। अभय चौटाला की संपत्ति 2000 से 2005 के बीच के आयकर आंकड़ों के अनुसार 22.89 करोड़ रुपए की उनकी कमाई से पांच गुना अधिक की थी। मामले में ED ने 6 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क कर ली है। इसमें दिल्ली, पंचकूला और सिरसा की प्रॉपर्टी शामिल है। तेजाखेड़ा फार्म हाउस को किया था सीज ओपी चौटाला के तेजाखेड़ा फार्म हाउस के कुछ हिस्से को ED ने 4 दिसंबर 2019 को सीज किया था। उस समय ED के साथ CRPF के जवान थे। यह कार्रवाई सुबह 7 बजे की गई। इसके बाद ED ने पूर्व CM की पत्नी स्नेहलता और पुत्रवधू कांता चौटाला की संपत्ति का ब्यौरा भी जुटाया। हालांकि, कार्रवाई को चौटाला परिवार ने राजनीति से प्रेरित बताया था। चौटाला की दिल्ली और पंचकूला की संपत्ति भी ED ने सीज की हुई है।
लुधियाना सांसद रवनीत सिंह बिट्‌टू ने पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी पर तंज कसा है। बिट्‌टू ने कहा कि सूबे में AAP सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे हवा हवाई साबित हुए हैं। पंजाब सरकार हर फ्रंट पर फेल साबित हुईन है। सरकार अपनी छवि बचाने के लिए नए-नए स्टंट कर रही है। भ्रष्टाचार के मामले में अपने स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को पद से हटाकर और उस पर केस दर्ज करवा कर स्टंटबाजी कर रही है। सांसद बिट्‌टू ने कहा कि संगरूर उपचुनाव से पहले इस तरह मंत्री को बर्खास्त करने से भ्रष्टाचार का जो कलंक पार्टी पर लगा है, वह धुलेगा नहीं। इस तरह की स्टंटबाजी कर आम आदमी पार्टी लोगों को अब और बेवकूफ नहीं बना सकती। सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसी स्टंटबाजी कर रही है। बिट्‌टू ने कहा कि पंजाब के लोगों ने एकतरफा वोट देकर आप की सरकार बनाई, लेकिन सरकार बनने के बाद पार्टी ने लोगों से धोखा किया। पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था बेहाल है। रोजाना अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी हो रही है। विकास कार्य रुके पड़े हैं। सरकारी दफ्तर के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। इस बार संगरूर उपचुनाव में लोग आम आदमी पार्टी को हार का मुंह दिखाकर उसका अहंकार तोड़ेंगे।
चंडीगढ़पंजाब में रिश्वत के रुपए लेने का एक वीडियो सामने आया है। मोगा जिले के अजीतवाल के गांव चूहड़चक का यह मामला है। यहां एक मीटर रीडर ने एक परिवार से एक हजार रुपए की रिश्वत ले ली। तभी लोगों ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान मीटर रीडर ने वीडियो बनती देख ली और तुरंत 500 के 2 नोट अपने मुंह में डाल लिए और उसे चबाने लगा। यह देख ग्रामीणों ने उसके मुंह में हाथ डालकर रिश्वत के नोट बाहर निकाले। बिजली बोर्ड के अफसरों ने अब इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह है मामला मीटर रीडर की रीडिंग लेने के लिए नई ड्यूटी लगी थी। वह गांव में मीटर रीडिंग लेने गया। वहां एक परिवार का मीटर उसने खराब बताया। घर में सिर्फ महिला मौजूद थी। मीटर रीडर ने उन्हें जुर्माने के नाम पर डराया। फिर जुर्माना न लगाने की बात कह एक हजार की रिश्वत मांगी। ग्रामीण इस बात से नाराज हो गए, क्योंकि मीटर घर के बाहर लगा है। उसमें कोई दिक्कत है तो उसके लिए रिश्वत मांगने पर वह भड़क उठे। ग्रामीणों ने फोटोकॉपी करवाकर दिए नोट जब मीटर रीडर के रिश्वत मांगने का पता चला तो ग्रामीणों ने उसे पकड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने 500 रुपए के 2 नोट की फोटो कॉपी करवाई। उसके बाद उन्हें मीटर रीडर को पकड़ा दिया। जैसे ही उसने नोट जेब में रखे तो ग्रामीणों ने उसे घेर लिया। घबराए मीटर रीडर ने बचने के लिए जेब से रुपए निकाले और उन्हें चबाने लगा। यह देख ग्रामीणों ने उसके मुंह में हाथ डालकर नोट निकलवा लिए। वहीं मीटर रीडर कह रहा है कि मीटर में डिफेक्ट था।
चंडीगढ़: पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भ्रष्टाचार के आरोप में आप सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. विजय सिंगला (Dr Vijay Singla sacked) को बर्खास्त कर दिया। ऐंटी करप्शन ब्रांच ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। भगवंत मान सरकार का यह कदम बेहद साहसी बताया जा रहा है। सिंगला पर पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में हर काम और टेंडर के बदले 1 फीसदी कमीशन मांगने का आरोप है। भगवंत मान ने इसकी जांच कराकर स्वास्थ्य मंत्री को पद से बर्खास्त कर दिया। विजय सिंगला पेशे से डेंटिस्ट रहे हैं। वह मानसा सीट पर सिद्धू मूसेवाला को हराकर विधायक चुने गए थे। आगे पढ़िए, डॉ. विजय सिंगला के बारे में- कौन हैं डॉ. विजय सिंगला? उम्र -52 साल निर्वाचन क्षेत्र - मानसा शिक्षा- साल 1992 में पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी से डेंटल सर्जरी में ग्रैजुएशन पेशा- डेंटल सर्जन संपत्ति- 6.5 करोड़ 6.5 करोड़ की संपत्ति के मालिक सिंगला डॉ. विजय सिंगला ने पंजाब विधानसभा चुनाव में लोकप्रिय पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला को मानसा सीट से 63,323 वोटों से हराया था। उन्होंने डेंटल सर्जरी में ग्रैजुएशन किया है। वह पेशे से डेंटिस्ट हैं और शहर में डेंटल क्लीनिक चलाते हैं। सिंगला करीब सात साल पहले आप में शामिल हुए थे। डॉ. विजय सिंगला के पास कुल 6.5 करोड़ की संपत्ति है। 19 मार्च को ली मंत्री पद की शपथ मानसा सीट पर आम आदमी पार्टी की लहर के बीच कांग्रेस का स्टार फैक्टर काम नहीं आया और डॉ. विजय सिंगला ने पंजाबी गायक को हराया। डॉ. विजय सिंगला ने 19 मार्च को पंजाब में मंत्री पद की शपथ ली थी। वह पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री थे। सिंगला पर आरोप और उसकी जांच डॉ. सिंगला पर आरोप है क‍ि वह ठेके के लिए अधिकारियों से 1 फीसदी कमीशन की मांग कर रहे थे। पंजाब सीएमओ के अनुसार पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्‍हें पद से हटाया गया है। इसकी शिकायत जब सीएम भगवंत मान तक पहुंची तो उन्होंने गुपचुप तरीके से इसकी जांच कराई। सिंगला को तलब कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपनी गलती मान ली। इसके बाद उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया। भगवंत मान ने कहा कि अगर वह चाहते तो इस केस को दबा देते लेकिन इससे लोगों का भरोसा उठ जाता। पुलिस को डॉ. विजय सिंगला के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए गए।
नई दिल्लीहरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी करार दिए गए हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है। गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।
रोडरेज केस में 1 साल कैद की सजा के बाद कांग्रेस ने नवजोत सिद्धू को अकेले छोड़ दिया है। पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सिद्धू से दूरी बना ली है। वह संगरूर में वर्करों के साथ चाय-पकौड़े खाते नजर आए। कैप्टन अमरिंदर सिंह को सबक सिखाने के लिए सिद्धू को प्रमोट करने वाले ही उनके खिलाफ हो गए हैं। पूर्व डिप्टी CM सुखजिंदर रंधावा ने तो यहां तक कह दिया कि जो काम कांग्रेस हाईकमान को करना चाहिए था, वह सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया। साफ तौर पर उनका इशारा सिद्धू को किसी न किसी तरह से कांग्रेस से बाहर निकालने का है। सिद्धू के करीबी रहे परगट सिंह भी उनसे मिलने नहीं पहुंचे। वड़िंग को बर्थडे विश करने पहुंच गए थे सिद्धू, तारीफ भी करते रहे पंजाब कांग्रेस प्रधान बनने के बाद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सिद्धू से छत्तीस का आंकड़ा बना लिया है। हालांकि, जब सिद्धू प्रधान बने तो वह बर्थडे विश करने के लिए ही वड़िंग के घर गिद्दड़बाहा पहुंच गए थे। वहीं जब वड़िंग ने बादल परिवार की ट्रांसपोर्ट पर कार्रवाई की तो सिद्धू लगातार उनकी पीठ ठोकते रहे। अब वड़िंग ने सिद्धू से पूरी तरह किनारा कर लिया है। समर्थक बोले- साथ खड़े होना चाहिए था सिद्धू के समर्थक अश्वनी शेखड़ी, हरदयाल कंबोज और सुरजीत धीमान ने कहा कि वह पहले भी सिद्धू के साथ थे और बुरे वक्त में भी उनके साथ हैं। सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने सजा दी है, इसलिए कानून को मानना होगा। ऐसे वक्त पर पार्टी को सिद्धू के साथ खड़ा होना चाहिए। पूर्व विधायक पिरमल खालसा ने कहा कि जो रंधावा सिद्धू के जेल जाने से खुश हो रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि वह डिप्टी CM भी सिद्धू की वजह से ही बने हैं। पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज ने कहा कि सिद्धू को प्रधान बनाते वक्त सबसे आगे झंडा लेकर रंधावा ही चल रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मिलाने वाले रंधावा कौन होते हैं।
रोड रेज केस में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को अब जेल जाना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को क्यूरेटिव पिटीशन तत्काल सुनने से इनकार कर दिया है। सिद्धू को अब कोर्ट में सरेंडर करना होगा, नहीं तो पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी। इससे पहले, सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की पिटीशन पर जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा कि हम चीफ जस्टिस के पास मामले को भेज रहे हैं, वे ही इस पर सुनवाई का फैसला करेंगे। सिद्धू ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर सरेंडर के लिए कोर्ट से एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी। सिद्धू की अर्जी पर अगर आज सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें 10 जुलाई तक राहत नहीं मिलेगी। क्योंकि कोर्ट में 23 मई से 10 जुलाई तक गर्मी की छुट्टी है। इस दौरान सिर्फ अर्जैंट मैटर पर सुनवाई होती है। हाईकोर्ट से सेशन कोर्ट पहुंचेगा ऑर्डर सुप्रीम कोर्ट के सिद्धू को एक साल कैद की सजा का आदेश पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचेगा। वहां से उन्हें पटियाला के जिला एवं सेशन कोर्ट को भेजा जाएगा। सिद्धू खुद सरेंडर करेंगे तो ठीक, वर्ना संबंधित पुलिस थाने को उन्हें गिरफ्तार करने को कहा जाएगा। क्या है पूरा मामला 27 दिसंबर 1988 को सिद्धू का पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से झगड़ा हुआ। सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा। बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर सिंह पर गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ। 1999 में सेशन कोर्ट ने सिद्धू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। पीड़ित पक्ष इसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चला गया। 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू को 3 साल कैद की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जनवरी 2007 में सिद्धू ने कोर्ट में सरेंडर किया। जिसमें उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद सिद्धू सुप्रीम कोर्ट चले गए। 16 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को गैर इरादतन हत्या के आरोप में लगी धारा 304IPC से बरी कर दिया। हालांकि IPC की धारा 323, यानी चोट पहुंचाने के मामले में एक हजार जुर्माना लगा। इसके खिलाफ पीड़ित परिवार ने SC में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। 19 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू पर अपना फैसला बदलते हुए 323IPC यानी चोट पहुंचाने के आरोप में एक साल कैद की सजा सुना दी। क्यूरेटिव पिटीशन क्या होता है? क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी सजायाफ्ता को राहत का अंतिम जरिया होता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल 142 का उपयोग करता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सपा नेता आजम खान को अंतरिम जमानत देने में और राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी को रिहा करने में इस आर्टिकल का इस्तेमाल किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट किसी भी विचाराधीन मामले में अपनी शक्ति का उपयोग कर फैसला करता है। सिद्धू समर्थकों काे पटियाला बुलाया गया सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 34 साल पुराने रोडरेज केस में सिद्धू की सजा एक साल बढ़ा दी। वहीं सिद्धू के सरेंडर के वक्त समर्थकों को बुला लिया गया है। पटियाला जिला कांग्रेस के प्रधान नरिंदरपाल लाली ने पार्टी वर्करों को इस बाबत मैसेज भी भेजा है। सिद्धू फिलहाल अपने पटियाला वाले घर में मौजूद हैं। जहां उनके समर्थक कांग्रेस नेता पहुंचने लगे हैं। अकाली नेता बोले- कल हाथी पर चढ़े थे, आज तबियत खराब हो गई यूथ अकाली दल के प्रधान परमबंस सिंह बंटी रोमाणा ने सिद्धू पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि हाथी पर चढ़ने के वक्त तो सेहत बढ़िया थी। सरेंडर करते वक्त घबराहट हो रही है। कल तो कहा था कि कानून का पूरा सम्मान करते हैं। सिद्धू की सर्जरी हुई है, वह जेल जाने से नहीं डरते : मीडिया सलाहकार इस पर सिद्धू के मीडिया सलाहकार सुरिंदर डल्ला ने कहा कि सिद्धू ने सांकेतिक प्रदर्शन किया था। उनकी सर्जरी हुई है। जिसका अभी ट्रीटमेंट चल रहा है। सिद्धू गेहूं की रोटी नहीं खा सकते, वह स्पेशल डाइट खाते हैं। उनकी लिवर की प्रॉब्लम है। उनके पैर में भी प्रॉब्लम है। सिद्धू जेल से नहीं डरते लेकिन वहां जाने से पहले पूरी जानकारी दे रहे हैं। सिद्धू किसी भी वक्त सरेंडर के लिए तैयार हैं। पीड़ित परिवार ने कहा - हम संतुष्ट हैं मृतक गुरनाम सिंह के परिवार ने कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट हैं। उनकी बहू परवीन कौर ने कहा कि 34 साल की लड़ाई में कभी उनका मनोबल नहीं टूटा। उन्होंने कभी सिद्धू के क्रिकेटर और नेता के रसूख पर ध्यान नहीं दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ सिद्धू को सजा दिलाना था। जिसमें वह कामयाब रहे।
चंडीगढ़ पंजाब में सनौर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा विवादों में घिर गए हैं। उन पर चुनाव के दौरान आपराधिक केस की जानकारी छुपाने का आरोप है। इस संबंध में उनसे चुनाव हारे अकाली नेता हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने विधायक हरमीत सिंह से 15 जुलाई तक इसका जवाब तलब कर लिया है। इससे पहले चुनाव के वक्त हरमीत सिंह पर केस की जानकारी छुपाने के आरोप में FIR दर्ज हो चुकी है। सनौर के जुलका पुलिस थाने में रिटर्निंग अफसर जसलीन कौर भुल्लर की शिकायत पर यह केस दर्ज हुआ था। जिस केस में भगोड़े, वह छुपाया अकाली नेता हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि हरमीत सिंह ने चुनाव लड़ते वक्त एफिडेविट में सभी केसों की जानकारी नहीं दी। इनमें एक केस ऐसा है, जिसमें उन्हें भगोड़ा करार दिया गया है। इसकी जानकारी उन्होंने अपने एफिडेविट में नहीं दी। उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन किया है। इसलिए उनका निर्वाचन रद्द किया जाए। आरोप सही साबित हुए तो रद्द होगा निर्वाचन चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक चुनाव लड़ने वाले को अपने ऊपर दर्ज केसों और उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है। जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत इसे अनिवार्य किया गया है। अगर हाईकोर्ट में चंदूमाजरा का आरोप सही साबित हो जाता है तो नियम के मुताबिक हरमीत सिंह का निर्वाचन रद्द हो सकता है। जानकारी छुपाने पर विधायक अपने पद पर बने रहने में अयोग्य हो जाता है।
चंडीगढ़ पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर संभालने के लिए पुलिस ने केंद्र से अर्धसैनिक बलों की 10 कंपनियां मांगी हैं। सूत्रों के मुताबिक DGP वीके भावरा ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को लेटर लिखा है। हालांकि, औपचारिक तौर पर पंजाब पुलिस या मान सरकार ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसका पता चलने पर कांग्रेस ने मान सरकार पर तंज भी कसा है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि यह न मान लिया जाए कि पंजाब में सिक्योरिटी थ्रेट से निपटने में मान सरकार फेल रही है। पंजाब में माहौल बिगाड़ने की साजिश हो रही सूत्रों के मुताबिक पंजाब पुलिस ने हवाला दिया है कि यहां माहौल बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। पहले पटियाला में हिंसा हुई। इसके बाद मोहाली में इंटेलिजेंस विंग के ऑफिस पर अटैक किया गया। जिसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, विदेशों में बैठे गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) की साजिश सामने आई है। इसके अलावा करनाल में भी पंजाब के रहने वाले आतंकी विस्फोटक के साथ पकड़े गए। पंजाब में अमृतसर समेत कई जगहों से RDX समेत अन्य विस्फोटक बरामद हुआ। जून में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी, उससे पहले मांगी फोर्स जून महीने में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी होती है। इस दौरान पंजाब में हर साल हालात तनावपूर्ण रहते हैं। एक सप्ताह तक इस संबंध में लंगर और अरदास कराई जाती है। यही वजह है कि DGP ने उससे पहले ही फोर्स भेजने के लिए कहा है, ताकि पंजाब की संवेदनशील जगहों पर उनकी पहले ही तैनाती की जा सके। इससे शरारती तत्वों को माहौल खराब करने से रोका जा सकेगा। पंजाब के कमांडों केजरीवाल की सुरक्षा में और केंद्र से मदद मांग रहे : वड़िंग पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने ट्वीट करते हुए लिखा - पंजाब सरकार ने सिक्योरिटी थ्रेट से निपटने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बल मांगे हैं। भगवंत मान साहब, क्या यह स्वीकार करना नहीं है कि आप पंजाब के सिक्योरिटी थ्रेट से निपटने में फेल हो गए हो। पंजाब पुलिस के कमांडोज अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा में लगाए गए हैं और आप केंद्र से मदद मांग रहे हो।
पंजाब के दिग्गज नेता सुनील जाखड़ नई सियासी पारी शुरू करने की तैयारी में हैं। उन्होंने 2 दिन पहले ही कांग्रेस छोड़ी। इसके बाद सोमवार को वह अचानक दिल्ली रवाना हो गए। वहां उनके BJP या आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेताओं से मुलाकात हो सकती है। हालांकि, औपचारिक तौर पर जाखड़ के उनके करीबी कुछ नहीं कह रहे हैं। उनके भाजपा में जाने की चर्चा है, लेकिन जाखड़ का कद देख आम आदमी पार्टी भी उन्हें साथ में जोड़ सकती है। कांग्रेस छोड़ने से पहले सोशल मीडिया पर लगाया तिरंगा सुनील जाखड़ ने कुछ दिन पहले ही कांग्रेस छोड़ने के संकेत दे दिए थे। जाखड़ ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर तिरंगा लगा दिया था। राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा की नीति हमेशा स्पष्ट रही है। वहीं आम आदमी पार्टी भी जगह-जगह चुनाव प्रचार में तिरंगे का सहारा लेती है। ऐसे में जाखड़ किस तरह जाएंगे, इसको लेकर कयास लग रहे हैं। कैप्टन बनेंगे भाजपा और जाखड़ के बीच मध्यस्थ? जाखड़ की भाजपा में एंट्री में पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह मध्यस्थ बन सकते हैं। इसकी वजह जाखड़ का कैप्टन के करीबी होना है। कैप्टन के CM रहते जाखड़ पंजाब में कांग्रेस के प्रधान थे। कैप्टन के साथ उनकी अच्छी ट्यूनिंग रही। इस वक्त कैप्टन भाजपा के साथ गठबंधन में हैं। ऐसे में वह भाजपा की सीनियर लीडरशिप के पास तक जाखड़ की बात आसानी से पहुंचा सकते हैं। उनमें तालमेल कराने में भी कैप्टन अहम भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस पर बड़े आरोप लगा जाखड़ ने छोड़ी पार्टी सुनील जाखड़ ने कांग्रेस छोड़ने से पहले पार्टी नेताओं पर बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व चापलूसों से घिरा हुआ है। राहुल गांधी फैसले नहीं लेते। उन्हें दोस्त और दुश्मन की पहचान करनी चाहिए। जाखड़ ने अंबिका सोनी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब में ज्यादातर कांग्रेस इंचार्ज सोनी की ही कठपुतली बनकर काम करते रहे। सोनी से जाखड़ की नाराजगी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि जब कैप्टन के बाद उन्हें CM बनाया जा रहा था तो सोनी ने ही विरोध किया था। सोनी ने कहा था कि पंजाब में सिख CM ही होना चाहिए। चरणजीत चन्नी को प्रमोट करने के पीछे भी सोनी को ही माना जा रहा है।
चंडीगढ़; अवैध रेत खनन के आरोप में फाजिल्का जिले के जलालाबाद में की गई पंजाब पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। यहां से पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा है। उससे 5 किलो रेत, टोकरी, कस्सी और 100 रुपए कैश बरामद होने का दावा किया गया है। पुलिस ने किसान पर अवैध माइनिंग का केस भी दर्ज कर डाला। किसान का कहना है कि वह तो अपनी जमीन को समतल कर रहा था। अवैध रेत खनन करता तो मौके पर टिप्पर और ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं मिलते। पुलिस का दावा पुलिस के मुताबिक गांव मोहर सिंह वाला का किसान कृष्ण सिंह अपने खेत में रेत की अवैध खड्‌ड चला रहा है। पुलिस ने वहां रेड की तो रेत उठाने वाली टोकरी, कस्सी और 5 किलो रेत मिली। कृष्ण सिंह की तलाशी लेने पर 100 रुपए का कैश भी मिला। पुलिस ने थाना सदर जलालाबाद में कृष्ण सिंह पर अवैध माइनिंग का केस दर्ज कर लिया है। किसान बोला- पुलिस ने मुझ पर नाजायज कार्रवाई की किसान कृष्ण सिंह ने बताया, 'मेरी जगह ऊंची थी और पड़ोसी की नीचे थी। उस वजह से मैंने वहां से समतल के लिए मिट्‌टी-रेत उठवा दी। वहां कोई अवैध माइनिंग नहीं कर रहा था। मैं अपने खेत में खड़ा था। मैंने पुलिस को भी बताया लेकिन वह मुझे अरेस्ट कर ले गए। टोकरी और रेत भी मेरे यहां से कुछ नहीं मिला। पुलिस ने अपने नंबर बनाने के लिए मुझ पर कार्रवाई कर दी। मुझ पर नाजायज कार्रवाई हुई है।' अब पुलिस दे रही सफाई किसान पर कार्रवाई करने वाले ASI सतनाम दास का कहना है कि जहां पुलिस ने रेड की वहां अवैध माइनिंग हो रही थी। बेशक मौके पर हमें ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं मिली, लेकिन कस्सी और टोकरी को हमने जब्त कर लिया है। जिस 5 किलो रेत बरामदगी की चर्चा है, वह हमने सैंपल के तौर पर कब्जे में ली है। SHO गुरजंट सिंह ने कहा कि किसान पर अवैध रेत खनन करने का केस दर्ज किया गया है।
चंडीगढ़; अवैध रेत खनन के आरोप में फाजिल्का जिले के जलालाबाद में की गई पंजाब पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। यहां से पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा है। उससे 5 किलो रेत, टोकरी, कस्सी और 100 रुपए कैश बरामद होने का दावा किया गया है। पुलिस ने किसान पर अवैध माइनिंग का केस भी दर्ज कर डाला। किसान का कहना है कि वह तो अपनी जमीन को समतल कर रहा था। अवैध रेत खनन करता तो मौके पर टिप्पर और ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं मिलते। पुलिस का दावा पुलिस के मुताबिक गांव मोहर सिंह वाला का किसान कृष्ण सिंह अपने खेत में रेत की अवैध खड्‌ड चला रहा है। पुलिस ने वहां रेड की तो रेत उठाने वाली टोकरी, कस्सी और 5 किलो रेत मिली। कृष्ण सिंह की तलाशी लेने पर 100 रुपए का कैश भी मिला। पुलिस ने थाना सदर जलालाबाद में कृष्ण सिंह पर अवैध माइनिंग का केस दर्ज कर लिया है। किसान बोला- पुलिस ने मुझ पर नाजायज कार्रवाई की किसान कृष्ण सिंह ने बताया, 'मेरी जगह ऊंची थी और पड़ोसी की नीचे थी। उस वजह से मैंने वहां से समतल के लिए मिट्‌टी-रेत उठवा दी। वहां कोई अवैध माइनिंग नहीं कर रहा था। मैं अपने खेत में खड़ा था। मैंने पुलिस को भी बताया लेकिन वह मुझे अरेस्ट कर ले गए। टोकरी और रेत भी मेरे यहां से कुछ नहीं मिला। पुलिस ने अपने नंबर बनाने के लिए मुझ पर कार्रवाई कर दी। मुझ पर नाजायज कार्रवाई हुई है।' अब पुलिस दे रही सफाई किसान पर कार्रवाई करने वाले ASI सतनाम दास का कहना है कि जहां पुलिस ने रेड की वहां अवैध माइनिंग हो रही थी। बेशक मौके पर हमें ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं मिली, लेकिन कस्सी और टोकरी को हमने जब्त कर लिया है। जिस 5 किलो रेत बरामदगी की चर्चा है, वह हमने सैंपल के तौर पर कब्जे में ली है। SHO गुरजंट सिंह ने कहा कि किसान पर अवैध रेत खनन करने का केस दर्ज किया गया है।
अमृतसर। ट्रांसफार्मर में धमाका होने की वजह से गुरु नानक देव अस्पताल में आग लगी है। यह ट्रांसफॉमर्स एक्स-रे यूनिट की बैक साइड में रखा था। आग तेजी से फैलती चली गई। आनन-फानन में अस्पताल की विभिन्न वार्डों में उपचाराधीन 600 से अधिक मरीजों को बाहर निकाला गया। इस दौरान ऑपरेशन थियेटर में डाक्टर मरीज सर्जरी भी कर रहे थे। आग लगने के बाद मरीज में डॉक्टर बाहर निकले। इस घटना में एक कर्मचारी का स्कूटर भी जल गया है। सभी मरीजों को बाहर निकाल कर सड़क पर लाया गया। अस्पताल में फंसे कुछ मरीजों को बाहर निकालने के लिए खिड़कियां भी तोड़ी गई, क्योंकि धुआं बहुत ज्यादा था। घटना दोपहर 2:00 बजे के करीब गुरु नानक देव अस्पताल में हुई। शनिवार होने के कारण ओपीडी में मरीज नहीं थे, लेकिन अस्पताल में 650 के करीब मरीज भर्ती हैं। ओपीडी के पिछली ओर और एक्स-रे यूनिट के पास दो ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनसे पूरे अस्पताल को बिजली सप्लाई हो रही है। दोपहर के समय इन ट्रांसफार्मरों में अचानक ब्लास्ट हुआ और आग लग गई। आग की लपटें काफी ऊपर तक गईं। ट्रांसफार्मरों के बिल्कुल ऊपर स्किन वार्ड है। धुंआ इतना ज्यादा था कि वार्ड के मरीजों को तुरंत बाहर निकालना पड़ा। आग ट्रांसफार्मरों पर लगने के कारण पूरे अस्पताल में धुआं फैल गया। मरीजों का धम घुटने लगा। इसके बाद सभी मरीजों को अस्पताल से बाहर सड़क पर लाया गया। एकदम मची भगदड़ के कारण कई मरीजों को खिड़कियां तोड़ बाहर निकाला गया। गाैरतलब है कि शहर में गर्मी के कारण आगजनी की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। इन घटनाओं में प्रशासन की नाकामी भी सामने आ रही है।
चंडीगढ़: कांग्रेस की वर‍िष्‍ठ नेता और कभी पंजाब के अध्‍यक्ष रहे सुनील जाखड़ (Sunil Kumar Jakhar) ने कांग्रेस (Congress) से इस्‍तीफा दे दिया है। हाल ही में उन्‍हें शोकॉज नोटिस देकर पार्टी से सभी पदों से हटा दिया था। जाखड़ ने अपने फेसबुक पेज पर दिल की बात (Dil ki baat) के दौरान इस्‍तीफा देने का ऐलान किया। लगभग 45 मिनट के फेसबुक लाइव में उन्‍होंने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) सह‍ित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्‍होंने कहा क‍ि वे 50 साल तक कांग्रेस में रहे। लेकिन उनके साथ गैर जैसा व्‍यवहार किया गया। अपने दिल की बात में सुनील जाखड़ ने कहा क‍ि मेरे दिल की बात लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की है जो शायद चिंतन श‍िवि‍र में नहीं की जायेगी। क्‍योंक‍ि वहां मौजूद कांग्रेस के शीर्ष नेता में से कितने बस चीयरलीडर्स बनकर रह जाएंगे, कितने अपने दिल की बात कह पाएंगे, ये तो दो दिन के पता चल ही जायेगा। वे आगे कहते हैं क‍ि पार्टी के साथ लंबे समय तक रहा। ऐसे में मेरा कर्तव्‍य है क‍ि मैं जाने से पहले पार्टी के लिए कुछ कहके जाऊं। आज समय है पार्टी को बचाने का तो उस समय दिखाने के लिए चिंतन श‍िविर आयोजित कर रही है। पार्टी को इस समय पार्टी को बचाने की बात करनी चाह‍िए। घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत... अपने वीडियो में सुनील जाखड़ ने कांग्रेस के चिंतिन श‍िव‍िर पर तंज कसते हुए वसीम बरेलवी का एक शेर सुनाया- घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत ब'अद का है पहले ये तय हो कि इस घर को बचाएँ कैसे उन्‍होंने कहा क‍ि कांग्रेस चिंतन श‍िविर में देश की अर्थव्‍यस्‍था और कृष‍ि पर चिंता कर रही है। ऐसा लग रहा जैसे देश की जिम्‍मेदारी उसी के ऊपर है। उसे पहले अपनी पार्टी बनाने की कोश‍िश करनी चाह‍िए। आज पार्टी खुद के वजूद को बचाये रखने के लिए जूझ रही है। ऐसे में पहले सजाने से पहले घर को बचाने की कोश‍िश होनी चाहिए। ऐसे में चिंतन नहीं, चिंता का श‍िविर होना चाह‍िए। पार्टी को सोचना चाह‍िए क‍ि उत्‍तर प्रदेश में उसकी स्‍थ‍िति इतनी बदतर क्‍यों हुई। कांग्रेस के नेताओं को चुनाव में ग्राम प्रधान से भी कम वोट मिले। 'अंब‍िका सोनी ने किया बेड़ागर्क' सुनील जाखड़ ने अंब‍िका सोनी पर कई गंभीर आरोप लगाये। उन्‍होंने कहा क‍ि कांग्रेस का बेड़ा गर्क में अगर किसी नेता का हाथ है तो वह हैं अंब‍िका सोनी। सुनील जाखड़ ने कहा क‍ि अंब‍िका सोनी ने पंजाब का अपमान किया है। उन्‍होंने सिखों को बदनाम किया। उन्‍होंने ह‍िंदू और सिखों के बीच लड़ाई करवाने की कोश‍िश की थी। उन्‍होंने कहा था क‍ि अगर पंजाब में ह‍िंदू सीएम बनेगा को राज्‍य में आग लग जायेगी। सोनिया जी मैं आपसे निवेदन करूंगा क‍ि आप अंब‍िका पर सख्‍त कार्रवाई करेगी। उन्‍होंने आगे कहा क‍ि पंजाब में कांग्रेस का बुरा हाल दिल्‍ली में बैठे नेताओं ने की। जब तक ऐसे नेताओं को हटाया नहीं जायेगी, तब कांग्रेस की स्‍थ‍ित‍ि पंजाब ही क्‍या, किसी भी राज्‍य में नहीं सुधरेगी। दिल भी तोड़ा तो तूने... सुनील जाखड़ वीडियो में बोलते-बोलते इमोशनल हो जाते हैं। वे कहते हैं क‍ि मुझे पार्टी से निकालने का मेल भेजा गया। जबकि मैं तो किसी पद पर था ही नहीं। सोनिया जी आपने बस संबंध नहीं तोड़े, मेरा दिल तोड़ा। इसके बाद उन्‍होंने महताब आलम का शेर पढ़ा- दिल भी तोड़ा तो सलीक़े से न तोड़ा तुम ने बेवफ़ाई के भी आदाब हुआ करते हैं उन्‍होंने आगे बोलते हुए कहा क‍ि आन सुनील जाखड़ को नोटिस दे रहे हो। 50 साल, तीन पीढ़‍ियों का संबंध है हमारा। मुझसे बात कर ली जाती। मैं सारे सवालों के जवाब दे देता। मुझे एक ऐसे तारीक अनवर जी से नोटिस दिलवाया गया जिन्‍होंने 20 साल पहले कांग्रेस यह कहकर छोड़ दिया था क‍ि एक विदेश मह‍िला कांग्रेस की अध्‍यक्ष नहीं कन सकती। मुझे इसलिए नोटिस दिलवाया गया क्‍योंक‍ि सोनिया जी मैंने आपकी सलाहकारा के ख‍िलाफ अपशब्‍द बोले थे। 'खाट पर है कांग्रेस' उन्‍होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी निशाना साधते हुए कहा क आप लोग एक फैसला नहीं ले पाये। ये क्‍या फैसला था क‍ि सुनील जाखड़ से पद ले लिया जाये। आपको फैसले लेने होंगे। जिस दिन आपने नोटिस भिजवाया, हमारा संबंध उसी दिन खत्‍म हो गया। आप लोग दोस्‍त और दुश्‍मन समझिए। राहुल जी, आपसे विनती है क‍ि आप पार्टी की कमान संभालिए। इस तरह के चिंतन श‍िविर से कुछ नहीं होगा। आज कांग्रेस पार्टी खटिया पर नजर आ रही। अगर आज समय रहते नहीं संभले तो... वक्‍त की फ‍िक्र कर नादां क‍ि कयामत आने वाली है तेरा जिक्र भी ना होगा दास्ता सुनील जाखड़ ने अपनी बात इसी शेर के साथ खत्‍म की और कहा क‍ि कांग्रेस के साथ मेरा सफर यहीं खत्‍म हुआ। पार्टी को बहुत शुभकामनाएं।
पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर भी विरोधी दल सियासत नहीं छोड़ रहे। पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि CM भगवंत मान को तुरंत सर्वदलीय मीटिंग बुलानी चाहिए। इसमें हमें बताना चाहिए कि पंजाब में शांति और सुरक्षा की स्थिति को कायम रखने के लिए पंजाब सरकार क्या कदम उठा रही है?। उन्होंने कहा कि राज्य में लॉ एंड ऑर्डर की बिगड़ती स्थिति खतरनाक है। उन्होंने कहा कि बड़ी मेहनत से पंजाब में आई शांति को फिर से बिगाड़ने की कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमलावरों की गिरफ्तारी में देरी की वजह से विरोधियों को अब मान सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल रहा है। कैप्टन बोले- वही हुआ, जिसका डर था पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पहले से चेतावनी देते रहे हैं कि सीमा पार बैठे भारत विरोधी पंजाब में गड़बड़ी कर सकते हैं। वह लगातार ड्रोन के जरिए ड्रग्स और हथियार भेज रहे हैं। उनके कुर्सी से हटने के बाद चन्नी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने नए सीएम भगवंत मान को कहा कि इसे गंभीरता से लेकर कदम उठाएं। सुखबीर ने डीजीपी-CM की तालमेल की कमी पर उठाए सवाल अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने डीजीपी वीके भावरा और CM भगवंत मान के बीच तालमेल की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीएम हमलावरों को गिरफ्तार करने का दावा कर रहे हैं। वहीं कुछ घंटों में ही डीजीपी इससे इन्कार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में शांति कायम करें और हमलावरों को बेनकाब कर सजा दें।
पंजाब में पंचायती जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले में CM भगवंत मान ने फरमान जारी कर दिया है। मान ने अवैध कब्जे छोड़ने के लिए 31 मई तक अवैध कब्जे छोड़ने को कहा है। मान ने चेतावनी दी है कि अगर कब्जा नहीं छोड़ा तो फिर पुराने खर्चे और पर्चे दर्ज किए जाएंगे। CM भगवंत मान ने लिखा - जिन व्यक्तियों ने सरकारी या पंचायती जमीनों पर अवैध कब्जे किए हैं, चाहे वह राजनीतिक लोग, अफसर या फिर कोई रसूखदार हों, मैं उन्हें अपील करता हूं कि 31 मई तक अवैध कब्जे छोड़ जमीन सरकार को दे दें, वर्ना उन पर पुराने खर्चे और पर्चे डाले जा सकते हैं। 31 मई तक 5 हजार एकड़ जमीन मुक्त कराने का लक्ष्य, 300 एकड़ ही खाली हुई मान सरकार ने पंजाब में 31 मई तक 5 हजार एकड़ पंचायती जमीन खाली कराने का टारगेट रखा है। हालांकि, अभी तक सरकार सिर्फ 300 एकड़ जमीन ही छुड़ा सकी है। पंचायती विकास मंत्री कुलदीप धालीवाल मोहाली, अमृतसर के अलावा कई जगहों पर जमीन खाली करा चुके हैं। कुछ जगहों पर उन्हें किसान यूनियन का भी विरोध झेलना पड़ा। इसके बाद CM मान ने यह सीधी चेतावनी जारी कर दी है। पंजाब में 50 हजार एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे पंजाब में सत्ता मिलने के बाद मान सरकार ने पंचायती जमीनों पर अवैध कब्जों की जांच की। इसमें पता चला कि करीब 50 हजार एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे हैं। कब्जा करने वालों में नेता, रिटायर्ड अफसर और रसूखदार लोग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन जमीनों का फायदा पंचायत को होना चाहिए। इसलिए इन्हें खाली करवाकर पंचायतों को सौंपा जाएगा। इसे वह आगे ठेके पर देकर खेती के जरिए कमाई कर सकेंगी।
चंडीगढ़ पंजाब सीएम भगवंत मान का गुजरात दौरा सरकारी खजाने पर भारी पड़ा है। मान ने गुजरात के लिए प्राइवेट एयरक्राफ्ट हायर किया था। जिसके बदले सिविल एविएशन विभाग ने 44.85 लाख का बिल खजाने को भेजा है। बठिंडा के RTI एक्टिविस्ट हरमिलाप ग्रेवाल ने यह जानकारी मांगी थी। इसको लेकर मान अब विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस ने मान सरकार से पूछा कि क्या यही वह बदलाव और इंकलाब है?, जिसका वादा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किया था। केजरीवाल संग पार्टी कैंपेन लांच करने गए थे सीएम भगवंत मान 1 से 3 अप्रैल को गुजरात दौरे पर गए थे। जहां दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल भी उनके साथ थे। दोनों ने दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव के लिए पार्टी कैंपेन की शुरूआत की थी। बाजवा बोले- पंजाब के टैक्सपेयर का 45 लाख बर्बाद किया पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि चुनाव से पहले भगवंत मान ने बदलाव और इंकलाब का वादा किया था। अब अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए प्राइवेट जेट्स हायर किए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के चुनाव कैंपेन में पंजाब के टैक्स पेयर के 45 लाख रुपए बर्बाद कर दिए गए। क्या इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?। हिमाचल विजिट का नहीं मिला जवाब आरटीआई एक्टिविस्ट हरमिलाप ग्रेवाल ने हिमाचल विजिट के दौरान हुए खर्च की भी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कहा गया कि वहां मान 6 अप्रैल को सरकारी हेलिकॉप्टर से गए थे। इसके खर्च का आकलन नहीं किया जा सकता। इस बारे में हरमिलाप ग्रेवाल ने कहा कि सत्ता में आने से पहले मान चरणजीत चन्नी के पंजाब में हेलिकॉप्टर यूज पर आलोचना करते थे। अब पार्टी कैंपेन के लिए प्राइवेट जेट हायर कर रहे हैं।
चंडीगढ़ पंजाब सीएम भगवंत मान का गुजरात दौरा सरकारी खजाने पर भारी पड़ा है। मान ने गुजरात के लिए प्राइवेट एयरक्राफ्ट हायर किया था। जिसके बदले सिविल एविएशन विभाग ने 44.85 लाख का बिल खजाने को भेजा है। बठिंडा के RTI एक्टिविस्ट हरमिलाप ग्रेवाल ने यह जानकारी मांगी थी। इसको लेकर मान अब विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस ने मान सरकार से पूछा कि क्या यही वह बदलाव और इंकलाब है?, जिसका वादा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किया था। केजरीवाल संग पार्टी कैंपेन लांच करने गए थे सीएम भगवंत मान 1 से 3 अप्रैल को गुजरात दौरे पर गए थे। जहां दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल भी उनके साथ थे। दोनों ने दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव के लिए पार्टी कैंपेन की शुरूआत की थी। बाजवा बोले- पंजाब के टैक्सपेयर का 45 लाख बर्बाद किया पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि चुनाव से पहले भगवंत मान ने बदलाव और इंकलाब का वादा किया था। अब अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए प्राइवेट जेट्स हायर किए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के चुनाव कैंपेन में पंजाब के टैक्स पेयर के 45 लाख रुपए बर्बाद कर दिए गए। क्या इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?। हिमाचल विजिट का नहीं मिला जवाब आरटीआई एक्टिविस्ट हरमिलाप ग्रेवाल ने हिमाचल विजिट के दौरान हुए खर्च की भी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कहा गया कि वहां मान 6 अप्रैल को सरकारी हेलिकॉप्टर से गए थे। इसके खर्च का आकलन नहीं किया जा सकता। इस बारे में हरमिलाप ग्रेवाल ने कहा कि सत्ता में आने से पहले मान चरणजीत चन्नी के पंजाब में हेलिकॉप्टर यूज पर आलोचना करते थे। अब पार्टी कैंपेन के लिए प्राइवेट जेट हायर कर रहे हैं।
नयी दिल्ली,केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) 40 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में पंजाब के संगरूर में तीन स्थानों पर आम आदमी पार्टी (आप) विधायक जसवंत सिंह गज्जन माजरा से जुड़े परिसरों पर छापेमारी कर रही है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमरगढ़ से विधायक माजरा के खिलाफ मामले के सिलसिले में संगरूर जिले के मलेरकोटला इलाके में छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
अमृतसर,पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍य की आम आदमी पार्टी की सरकार और आप के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल पर‍ निशाना साधा है। सिद्धू ने राज्‍य में रेत मा‍फिया को लेकर भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाया। इसके साथ ही उन्‍होंंने केजरीवाल के लिए अमर्यादित शब्‍द का प्रयोग किया और कहा कि वह 'गपोड़ शंख' हैं। दूसरी ओर, सिद्धू अपने खिलाफ पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष हरीश चौधरी की शिकायत के बारे में चुप्‍पी साध ली। रेत माफिया को लेकर उठाए सवाल, कहा- गपोड़ शंख हैं अरविंद केजरीवाल सिद्धू ने यहां मीडिया से बात करते हुए राज्‍य में रेत के बढ़ते दामों का मामला उठाया और माइनिंग माफिया पर आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि माइनिंग रोकना इसका हल नहीं है बल्कि ठेकेदारी सिस्टम खत्म करके ही इससे सरकार को पैसे आ सकते हैं। सिद्धू ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रेत माइनिंग से 20 हजार करोड़ रुपये की कमाई होने के दावे पर सवाल उठाया। सिद्धू ने कहा कि न तो अकाली सरकार और न ही कांग्रेस की सरकार रेत खनन से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा सकी है। केजरीवाल के दावे भी झूठ का पुलिंदा ही हैं। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले जब कांग्रेस की सरकार थी तो रेत 900 रुपये सैकड़ा थी यानि 3600 रुपये में एक ट्राली रेत मिल जाती थी। इसके एक महीले बाद 2200 रुपये सैकड़ा हो गई यानी 88 सो रुपये की एक ट्राली। अब एक ट्राली रेत 16000 रुपये में मिल रही है। इस कारण निर्माण कार्य बंद पड़े हुुए हैं और बेरोजगार मजदूर सरकार की तरफ देख रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार में निर्माण का सारा ही व्यापार ठप पड़ा हुआ है। बातें आप आम आदमी की करते हैं पर रेत तो खास के लिए भी लेनी मुश्किल हुई पड़ी है। जिन लोगों ने घर बनाने के लिए लोन लिया हुआ था वे भी सरकार की नीतियों से परेशान हैं। सिद्धू ने अपने अंदाज में कहा, आम आदमी पार्टी की सरकार का कोई वकार ही नहीं है। जब तक ठेकेदारी सिस्टम खत्म नहीं होता 20 हजार करोड़ रुपये तो क्या आप (राज्‍य सरकार) रेत खनन से 200 करोड़ रुपये भी निकाल कर दिखाएं तो मैं मान जाऊंगा। जब तक पंजाब सरकार की नीति आएगी तब तक तो पंजाब बर्बाद हो जाएगा। अपने शायराना अंदाज में सिद्धू ने कहा, ' मिट गया जब मिटने वाला, फिर पयाम आया तो क्या, दिल की बर्बादी के बाद उनका सलाम आया तो क्या।' सिद्धू ने कहा कि आप सरकार ने 7000 करोड़ का ने कर्जा उठा लिया है। पहले बड़ी-बड़ी घोषणा करते थे। पंजाब में अराजकता इसलिए है क्योंकि सबसे खतरनाक आदमी है भूखा आदमी। मजदूर को जब रोजगार ही नहीं मिलेगा तो गरीब क्या करेगा। आप के नेताओं ने पंजाब में झूठ बेचा है इसलिए इस अराजकता के लिए भी आप ही जिम्मेदार हैं। पत्रकारों ने यह पूछे जाने पर पंजाब कांग्रेस इस विषय पर बोल नहीं रही आप ही बोल रहे हैं, इस पर सिद्धू ने कहा कि मेरे पास नैतिकता की ताकत है और मुझे किसी का डर नहीं है। उन्होंने कहा कि रेत का मसला इतना गंभीर मामला है कि सरकार इस पर गिर चुकी है। अकेली माइनिंग रोक देना इसका हल नहीं है। जब तक लोगों को सही दर पर में रेत नहीं मिलेगी तब तक मजदूरों को भी रोजगार नहीं मिलेगा। सिद्धू ने कहा कि इससे आपकी नीयत का पता चलता है कि आपके पास कोई माइनिंग पालिसी नहीं थी और आपने झूठ बोला था। अगर पालसी होती तो वह पहले दिन से लागू होती। मेरा मकसद यही बताना है कि पंजाब नीतियों से आगे आएगा। केजरीवाल पर हमला करते हुूए उन्होंने कहा कि हिमाचल की ठंडी हवाओं में उन तक पंजाब की बात नहीं पहुंचेगी। लेकिन पंजाब की पीठ लगाकर मैं उन्‍हें आगे नहीं निकलने दूंगा। उनके झूठ का सिद्धू पर्दाफाश करता ही रहेगा। दुनिया में बड़े झूठे देखे पर केजरीवाल से बड़ा कोई नहीं है। आप तो सुखबीर गप्पी को भी पार कर गए हो। आप 'गपोड़ शंख' हो। उन्होंने कहा कि पंजाब के कानून-व्‍यवस्‍था को छोड़कर हर मसले का हल आय के स्त्रोत हैं। इन लोगों से तो कानून-व्‍यवस्‍था भी कंट्रोल नहीं हो रहा और पंजाब गिरवी रख दिया है। लोगों के इन मुद्दों पर पहरा देना मेरी ड्यूटी थी है और मैं करता रहूंगा।
पटियाला। पटियाला में शिवसेना बाल ठाकरे के खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च के विरोध में कुछ गर्म ख्याली सिख युवकों ने भी मार्च निकाला। उन्होंने शिव सैनिकों को 'बंदर सेना' नाम देते हुए मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसी दौरान काली माता मंदिर में हिंदू और सिख संगठनों में भिड़ंत से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दोनों गुटों की ओर से पत्थरबाजी होने लगी। तलवारें लहराई गईं। मौके को काबू करने के लिए एसएसपी ने पहुंचकर 15 राउंड हवाई फायर किए। इस दौरान एक हिंदू नेता और थाना त्रिपड़ी के एसएचओ कर्मवीर सिंह घायल हुए। पुलिस ने दोपहर तीन बजे के आसपास स्थिति पर काबू पाया। हालांकि सिख संगठनों के सदस्यों ने शहर के फव्वारा चौक पर धरना लगा दिया है। युवक धरने के दौरान ही सड़क पर बैठकर खाना खा रहे हैं। उधर, पंजाब बाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा और लुधियाना के सांसद रवनीत बिट्टू सहित विभिन्न सियासी दलों के नेताओं ने घटना की तीखी निंदा की है। वहीं, सीएम भगवंत मान ने घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इलाके में शांति बहाल कर दी गई है। हम किसी को भी राज्य में अशांति पैदा नहीं करने देंगे। पंजाब की शांति और सद्भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइजी पटियाला रेंज राकेश कुमार अग्रवाल ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। राकेश अग्रवाल ने कहा कि अफवाहों पर कतई ध्यान न दें। फिलहाल शांति कायम हो गई है। राकेश अग्रवाल से यह पूछे जाने पर कि कितने लोग घायल हुए हैं, उन्होंने कहा कि अभी उनका ध्यान शांति व्यवस्था कायम करने पर है। मौके पर डीसी साक्षी साहनी भी पहुंची। उन्होंने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार खालिस्तान समर्थकों ने तलवार से एसएचओ पर हमला किया। पुलिस की तरफ से स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए करीब 15 राउंड हवाई फायर किए जा चुके हैं। पुलिस की ओर से फायरिंग अभी भी जारी है। काली माता मंदिर के बाहर भारी संख्या में खालिस्ताना समर्थक इकट्ठे हो गए हैं। बता दें कि शिवसेना बालठाकरे के पंजाब कार्यकारी प्रधान हरिश सिंगला के नेतृत्व में आर्य समाज चौक से खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च मिकाला गया। शिव सैनिक खालिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए चल रहे थे। हरीश सिंगला ने कहा कि शिवसेना कभी भी पंजाब में खालिस्तान नहीं बनने देगी और ना ही किसी खालिस्तान काे नाम लेने देगी। सिंगला ने कहा कि सिख फॉर जस्टिस के कन्वीनर गुरपतवंत पन्नू ने 29 अप्रैल को खालिस्तान का स्थापना दिवस मनाने की घोषणा की है। इनको जवाब देने के लिए शिवसेना ने भी 29 अप्रैल को खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च निकालने का ऐलान किया था। वहीं मार्च की सूचना मिलने पर भारी संख्या में खालिस्तान समर्थक पहुंच गए। इधर, डीसी ने कुछ मीडिया चैनलों पर चल रहे थाने के एसएचओ का हाथ काटने की खबर का खंडन किया है। डीसी ने कहा है कि इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई या केवल अफवाह है।
मोरिंडा (रूपनगर)। नवजोत सिंह सिद्धू इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार पर आक्रामक रहे हैं। कैप्टन के लिए जब सिद्धू ने मुश्किलें खड़ी की तो उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। अब चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम की जिम्मेदारी दी गई तो सिद्धू उनके कामकाज में भी हस्तक्षेप करने लगे हैं। सरकार में सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए सिद्धू पंजाब कांग्रेस प्रधान पद छोड़ चुके हैं। अब उन्होंने डीजी व एजी की नियुक्ति को लेकर ट्वीट कर सीधे-सीधे सरकार पर निशाना साधा है। इसके जवाब में चन्नी ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी का काम करें। अगर उन्होंने अपनी बात रखनी है तो पार्टी फोरम का इस्तेमाल करें। मोरिंडा में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिद्धू पार्टी का काम करें। हम दोनों तालमेल से काम करें, हम काम करना चाहते हैं और कर रहे हैं। यदि कोई किसी तरह की आपसी कोई बात पसंद नहीं आ रही तो पार्टी फोरम में बैठकर कोआर्डिनेशन कमेटी में आकर बात की जा सकती है। चन्नी ने कहा कि खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि आम लोगों के बीच से चुना हुआ नुमाइंदा आगे है। आम साधारण बंदा है। सरकार का काम है वो ईमानदारी से का करे और सबको साथ लेकर चले। चन्नी ने सिद्धू के ट्वीट पर कहा कि अभी डीजीपी की नियुक्ति होनी है। इसके लिए सीधा सा कानून है और मैंने सिद्धू साहिब से इस बारे में बात की है। उन्हें पता है। चन्नी ने कहा कि पंजाब का डीजीपी लगाने के लिए उन अफसरों के नाम केंद्र सरकार को भेजे गए हैं, जिनकी सेवा तीस साल पूरी हो चुकी है। तीन नाम का पैनल केंद्र सरकार ने हमें भेजना है। उन्हीं नामों को लेकर सिद्धू साहिब से भी और विधायकों-मंत्रियों से बातचीत करके डीजीपी लगाया जाएगा। डीजीपी लगेगा तभी, जब केंद्र का पैनल आएगा। अभी अस्थायी प्रबंध किए गए हैं। 58 वाले अब नौजवानों के लिए सीट खाली करेंः चन्नी चन्नी ने कहा कि जो 58 साल का हो गया है वो सरकारी कर्मचारी अधिकारी अपनी सीट खाली करे, ताकि नए नौजवानों के लिए सीट खाली हो सके। इसके लिए स्पष्ट कानून है जिनके 58 साल पूरे हो गए हैं वो छुट्टी करके जाएं। नए लड़कों को भर्ती किया जाए। इसके लिए तय कर लिया गया है और किसी को भी इसमें राहत नहीं दी जाएगी। 2.85 लाख परिवारों के कर्जे हुए हैं माफ चन्नी ने कहा कि पंजाब में खेत मजदूर के लिए पांच सौ बीस करोड़ रुपये के कर्जे माफ किए जा रहे हैं। पच्चीस हजार रुपये तक के कर्जे जो ब्याज लगकर लाखों में पहुंच गए हैं वो मूल और ब्याज दोनों माफ किए जा रहे हैं। पंजाब के 2.85 लाख परिवारों का कर्जा माफ किया जा रहा है। इसमें हलका चमकौर साहिब के 7450 परिवार शामिल हैं। अब लाल लकीर में रह रहे लोग जगह के मालिक पंजाब के लाल लकीर के अंदर रहने वाले लोगों के मकान की जगह का मकान में रह रहे परिवार को मालिक बनाया जा रहा है। इससे उन्हें कर्जा लेने, बेचने खरीदने में आसानी हो। गांवों के लोगों के बीच झगड़े न हों और लोग अमन प्यार के साथ एकजुटता के साथ रहें। चन्नी ने कहा कि शहरों में भी ऐसे लोग जो स्लम एरिया में रहते हैं उन्हें भी बसेरा स्कीम के तहत जगह की सनद करवाकर दे रहे हैं। सिस्टम पारदर्शी हो और सही चले, ये मेरा उद्देश्य चन्नी ने कहा कि पंजाब की जनता खुश है और मैं लोगों को अच्छा सिस्टम देना चाहता हूं। मेरी सोच है कि व्यवस्था पारदर्शी हो, सिस्टम सही तरीके से काम करे। पुलिस वाला बेकार में लोगों को रोककर तंग न करे। हर व्यक्ति को आ रही दिक्कतों को मैं दूर करूंगा। मुझे राज करने की लालसा नहीं है।
चंडीगढ़,पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा देने के बाद नवजाेत सिंह सिद्धू ने बड़ा बयान दिया है। उन्‍होने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनका इस्‍तीफा पंजाब के हितों व नैतिकता के सवाल पर है। मैं इनसे समझौता नहीं करुंगा। जीवन में अंतिम सांस तक सच्‍चाई और पंजाब के हितों की लड़ाई लड़ता रहूंगा। न हाईकमान को गुमराह करूंगा न होने दूंगा। उन्‍होंने कहा कि पंजाब के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मकसद के लिए लड़ता रहूंगा। मेरे लडा़ई निजी लड़ाई नहीं है , यह हक और मुद्दे की लड़ाई है। कोई पद मायने रखता ही नहीं था और आगे भी रहेगा। मैं गुरु के आदर्शों व दिखाए मार्ग पर चलूंगा। सिद्धू ने चरणजीत सिंह सरकार पर सवाल उठा दिए और कहा कि इस सरकार का तरीका भी कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की तरह ही है, कुछ नहीं बदला है। नवजाेत सिं‍ह सिद्धू ने अपने ट्विटर हैंडल पर बुधवार को एक वीडियो डालकर अपने इस्‍तीफे पर अपना पक्ष रखा। सिद्धू ने कहा कि मेरे लिए पद नहीं सिद्धांत और मकसद अहम है। मैं नैतिकता और पंजाब के हितों से समझौता नहीं सकता। सिद्धू ने कहा कि वह कांग्रेस हाईकमान को गुमराह नहीं कर सकता। मैं ने कांग्रेस नेतृत्‍व को कोई गुमराह नहीं किया है। सिद्धू बोले- मैं अड़ूंगा और लड़ूंगा, सब जाता है तो जाए। उन्‍होंने कहा कि दागी अफसरों को पंजाब का पहरेदार बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्‍होंने डीजीपी बनाए गए आइपीएस इकबाल प्रीत सिंह सहोता काे हवाला देते हुए कहा कि बादलों को क्लीनचिट देने वालों को उत्तरदायित्व दिया जा रहा है। सुमेध सैनी को ब्लैंकेट बेल दिलाने वाले को एजी लगा दिया गया। मांओं की कोख उजाडऩे वालों, बच्चों पर जुल्म करने वालों को पंजाब का पहरेदार बनाया जा रहा है। बता दें कि सहोता 2015 में गठित उस विशेष जांच दल के सदस्‍य थे। इसे बेअदबी मामले पर तत्‍कालीन अकाली सरकार ने गठित किया था। सिद्धू ने कहा कि पंजाब के हित मेरे लिए सबसे ऊपर हैं और मैं उससे समझाैता नहीं कर सकता। उन्‍होंने पंजाब के नए एडवो‍केट जनरल (AG) और कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्‍होंने कहा कि जिन लोगाें ने बेदअदबी के लिए दोषी लोगों को सुरक्षा दी और उनके केस लड़े उनकी नियुक्तियां हो रही हैं। उन्‍होंने कहा कि पंजाब में हालात वही हैं जो कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के समय थे। उन्‍होंने कुछ अधिकारियों की तैनाती पर भी सवाल उठाए हैं। वीडियो में नवजोत सिंह सिद्धू के पुराने वाले तेवर नजर आ रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि मेरे लिए सिद्धांतों, नैतिकता और पंजाब के हितों से ऊपर कोई पद नहीं है। जब बदलाव के बाद भी वही हालात हैं तो फिर पद पर बने रहने का कोई मायने व मतलब नहीं है। उन्‍होंने कहा, मैं अपने सिद्धांतों के लिए कोई भी बलिदान दे सकता हूं। मुझे ऐसा करने में मुझे कुछ सोचने की जरूरत नहीं है। मैंने उस सरकार को छोड़ दिया जिसमें दागी मंत्री और अफसर थे, अब फिर ऐसे लोग फिर लगाए जा रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि अब ऐसे दागी मंत्री और अधिकारी न‍हीं लगाए जा सकते। मैं इनका विरोध करुंगा।
चंडीगढ़,पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे को लेकर पैदा हालात पर विचार करने के लिए चरणजीत सिंह चन्‍नी कैबिनेट की बैठक समाप्‍त हो गई है। चरणजीत सिंह चन्‍नी प्रेस कांन्‍फ्रेंस कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि मैं पंजाब का दौरा कर रह‍ा हूं और लोगों की समस्‍याओं को दूर करने की दिशा में काम कर रहा हूं। उन्‍होंने 53 लाख लोगों के पुराने बिजली बिल माफ करने की घोषणा की। पुराने बिल का पावरकाम काे सरकार चुकाएगी। चन्‍नी ने कहा कि नवजाेत सिं‍ह से आज भी फोन पर बात हुई है और जल्‍द ही सारे मसले सुलझ जाएंगे। सिद्धू के साथ बैठकर बात करेंगे। दूसरी ओर , बताया जाता है कि सिद्धू ने अपना इस्‍तीफा वापस लेने को कुछ शर्तें रखी हैं। यहां मीडिया से बातचीत में सिद्धू के इस्‍तीफे की चर्चा करते हुए सीएम वरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि यह मामला आज से लेकर कल तक हल कर लिया जाएगा। पार्टी का प्रधान हेड होता है। हेड को परिवार में बैठकर बात करनी होती है। मैंने आज भी सिद्धू साहिब से बात की है। मैंने सिद्धू से कहा कि पार्टी सुप्रीम होती है। आपको जो गलतियां लग रही हैं उस पर बात कर लेते हैं। चन्‍नी ने कहा कि परगट सिंह और कई मंत्री उनसे मिलने गए थे। इस्तीफा देना पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं है। उनके साथ बात करेंगे। पंजाब में कांग्रेस के प्रति माहौल बन रहा है। पंजाब के लोगों के मसलों से मैं पीछे नहीं हटूंगा। उन्‍हाेंने कहा है कि हम स्पेशल प्रॉसिक्यूटर की टीम तैयार कर रहे हैं तो हमारे लंबित केसों को स्टडी करेगी। मेरी कोई इगो नहीं है । बेअदबी मामले में पीछे नहीं हटूंगा, भ्रष्टाचार नहीं होगा। ऐसे किसी मामले से पीछे नहीं हटूंगा उधर परगट सिंह ने कहा कि हमारे कुछ आंतरिक मसले हैं और उन्हें हल कर लिया जाएगा। एजी को बदलने के बारे में कुछ नहीं कह सकता है। हर बंदे का एक स्टाइल होता है। मैं उनके इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं गया था उनसे मिलने, राजा वडिंग भी मेरे साथ थे। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की है। परगट ने कहा कि हाईकमान से इस बारे में कोई बात हुई है या नहीं इस बारे में मुझे नहीं पता है। यहां मीडिया से बात करते हुए चन्‍नी ने बिजली उपभोक्‍ताओं काे बड़ी राहत देने की ऐलान किया। इसके साथ ही उन्‍होंने रेत माफिया पर जल्द ही नकेल कसने की बात की। उन्‍होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू से आज भी फोन पर बात हुई है और आज या कल उनके साथ बैठकर बात करेंगे। उन्‍हाेंने कहा कि सिद्धू पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष हैं और प्रदेश प्रधान पूरी पार्टी का हेड होता है। उन्‍होंने कहा कि दो मंत्रियों अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की कमेटी भी सिद्धू से बात कर रही है और सारा मामला सुलझ जाएगा। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि 1500 रुपये फीस दोबारा कनेक्शन लगाने की फीस है। वह भी हम भरेंगे। लाेगों में क्षमता नहीं है बिल भरने की इसलिए उनकी ओर बकाया खड़ा है। हमने उनको माफ करने का फैसला लिया है कैबिनेट में । ऐसे 53 लाख परिवार हैं। ऐसा करने पर 1200 करोड़ रुपए के लगभग बोझ खजाने पर पड़ेगा। उधर, कांग्रेस हाईकमान का रुख सख्‍त हो गया है। बताया जाता है कि कांग्रेस नेतृत्‍व अब सिद्धू को नहीं मनाएगा आलाकमान ने पूरा मामला अब पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह पर छोड़ दिया है। दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत भी चंडीगढ़ नहीं पहुंचे हैं। हरीश रावत कांग्रेस का घमासान सुलझाने के लिए चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। जल्द ही मुख्यमंत्री सहित पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बात करेंगे। बता दें कि सरी ओर चन्‍नी ने फिर आज कैबिनेट की बैठक बुलाई। बैठक में सिद्धू के इस्‍तीफे से पैदा हालात पर चर्चा हुई। दूसरी ओर बताया जाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू भी पटियाला से चंडीगढ़ आ रहे हैं। पंजाब विधायक दल में केंद्रीय पर्यवेक्षक हरीश चौधरी भी चंडीगढ़ पहुंचे हैं। उनकी नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाकात की संभावना है। सीएम चन्‍नी ने अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग व परगट सिंह की दो सदस्‍यीय कमेटी बनाई कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाई कमान अब इस्‍तीफे को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू को नहीं मनाएगी। हाईकमान ने पूरे मामले को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर छोड़ दिया है। हाईकमान ने चन्नी से कहा है कि वह सिद्धू से बात कर पूरे मामले को सुलझाएं। मामले के हल और सिद्धू से बात करने लिए चन्नी ने दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसमे अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और परगट सिंह शामिन हैं। दोनों ने आज सुबह पटियाला में सिद्धू से मुलाकात की थी और इसके बात कैबिनेट की बैठक में सिद्धू से हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी थी। दूसरी ओर, सिद्धू के करीबी विधायक कुलबीर जीरा कहना है कि शाम तक मामला सुलझ जाएगा। कुलबीर जीरा ने कहा कि सिद्धू को पहले बात करनी चाहिए थी। दो सदस्यीय कमेटी जिसमें राजा वड़िंग और परगट सिंह है । बता दें कि पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा देना पंजाब के कई कैबिनेट मंत्रियों को नागवार गुजरा है। अधिकतर मंत्री सिद्धू के इस तरह इस्तीफा देने से खासे नाराज हैं। कांग्रेस में इस्तीफे का बाद उत्पन्न हुई स्थिति को लेकर मंगलवार को भी मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लंबी बैठक की। मंगलवार को पदभार ग्रहण करने के कारण मंत्री सचिवालय में ही मौजूद थे। मंत्रियों के साथ चर्चा करने के लिए चन्नी ने उन्हें अपने दफ्तर में बुला लिया। इस्‍तीफे से पैदा हालात के बारे में चर्चा के लिए चन्‍नी कैबिनेट की बुधवार स‍ुबह फिर बैठक बुला ली गई। सूत्रों के अनुसार सिद्धू के इस्‍तीफे पर ज्यादातर मंत्री सीधे कमेंट्स करने से बचते रहे लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि सिद्धू का इस्तीफा सही कदम नहीं बताया है। उनका कहना है कि वह मुख्यमंत्री के साथ खड़े है। मंगलवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जब मंत्रियों को उनके दफ्तर में बैठा रहे थे और सचिवालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमावड़ा लगा हुआ था तभी सूचना आई की सिद्धू ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। सिद्धू का फैसला सही नहीं, ऐसे कदमों से पार्टी कमजोर होती है: आशु खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा देने का फैसला सही नहीं है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे कांग्रेस पार्टी कमजोर होती है। जो भी कदम पार्टी को कमजोर करेगी वह उसका समर्थन नहीं करते है। आशु ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं।
चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी नए मंत्रिमंडल के लिए विधायकों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। बताया जा रहा है कि यह सूची उन्होंने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित को सौंप दी है। नए मंत्रियों के लिए शपथ ग्रहण समारोह रविवार को आयोजित होने की संभावना है। चन्नी शुक्रवार को ही दिल्ली से लौटे थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली में उन्होंने नए मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर पार्टी के आलाकमान के साथ अंतिम चरण की चर्चा की। उसके बाद सूची तैयार हुई। राज्यपाल तक पहुंची सूची! शनिवार को सूची पर अंतिम मोहर लगने के साथ ही उन्होंने यह सूची राज्यपाल को दे दी है। अब रविवार को इस सूची में शामिल सभी मंत्री शपथग्रहण करेंगे। कुल 15 मंत्री लेंगे शपथ सूत्रों ने बताया कि चन्नी के मंत्रिमंडल में सात नए चेहरों को शामिल किया गया है। इन नए चेहरों को मिलाकर कुल 15 नए मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम रविवार को शाम साढ़े चार बजे आयोजित किया जाएगा। क्या चाहता है पंजाब हाइकमान कहा जा रहा है कि अमरिंदर सिंह की सरकार में मंत्री रहे पांच विधायकों का पत्ता कट सकता है। हाईकमान की योजना है कि पंजाब में किसी भी नेता या चेहरे के हाथ में असीमित अधिकार नहीं रहने दिया जाए। यही वजह है कि प्रदेशाध्यक्ष होने के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू पर नजर रखी जा रही है, ताकि फिर से एक क्षत्रप चुनौती न बन सके। ये बनेंगे मंत्री सूत्रों की मानें तो दिल्ली में पंजाब सीएम के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए चेहरों के अलावा विभागों पर चर्चा हुई। नया मंत्रिमंडल युवा और अनुभवी चेहरों का संगम होगा। सूत्रों के मुताबिक, जिन चेहरों को जगह मिलने की बात है उनमें अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, परगट सिंह, संगत सिंह गिलजियां, रणदीप नाभा, सुरजीत धीमान और राजुकुमार वेरका जैसे नामों की चर्चा है। पुराने मंत्रियों पर विचार करते समय उनके काम, उनकी छवि जैसी चीजों पर गौर किया गया। कांग्रेस चाहती है कि नए सीएम और मंत्रिमंडल के जरिए कैप्टन सरकार के प्रति एंटी इनकंबेंसी को कम किया जा सके।
चंडीगढ़/नई दिल्‍ली,पंजाब के नए मुख्‍यमंत्री का फैसला आज हाे जाने की संभावना है। सुखजिंदर सिंह रंधावा का पंजाब के नया सीएम बनना लगभग तय हाे गया है। बताया जाता है कि कांग्रेस विधायकों की बैठक में सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम पर सहमति हो गई और उनका नाम आलाकमान को भेज दिया गया है। वीडियो कांन्‍फ्रेंसिंग से भी सोनिया गांधी को विधायक दल के फैसले के बारे में बता दिया गया। वह आज ही शपथ ले सकते हैं। बताया जाता है कि जातीय समीकरण काे साधने के लिए दो उपमुख्‍यमंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके लिए अरुणा चौधरी व भारत भूषण आशु के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। रंधावा के घर पर कांग्रेस विधायकों का तांता लगा हुआ है। अरुणा चौधरी और भारत भूषण आशु बनाए जा सकते हैं उपमुख्‍यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा 2017 में तीसरी बार विधायक बने थे। वह कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की सरकार में जेल एवं स‍हकारिता मंत्री थे। वह पंजाब के डेरा बाबा नानक से कांग्रेस विधायक रहे हैं। वह कभी कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी थे, लेकिन बाद में उनसे बगावत कर दी। नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने के बाद रंधावा ने तीन अन्‍य मंत्रियों तृप्‍त राजिंदर सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्‍नी और सुखबिंदर सिंह सरकारिया के साथ मिलकर कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत का झंडा बुलुद कर दिया। बताया जाता है कि रंधावा के सीएम बनने पर उपमुख्‍यमंत्री के रूप में दीनानगर की कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी और लुधियाना वेस्‍ट से कांग्रेस विधायक भारत भूषण आशु उपमुख्‍यमंत्री बनेंगे। दोनों कैप्‍टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट में भी मंत्री थे। विधायक दल की बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा ही कैप्टन अमरिंदर सिंह उनके बुजुर्ग हैं और फैमली के हेड हैं। जो बहुत बोलता है वो काम नहीं करता है। रंधावा ने कहा कि वह कैप्टन के साथ 2002 से साथ रहे हैं और उम्‍मीद है आगे भी रहेंगे। दूसरी ओर, तृप्त राजिंदर बाजवा,परगट सिंह और मोहम्मद मुस्तफा रंधावा के घर पहुंचे। कांग्रेस विधायक प्रीतम कोटभाई ने कहा कि विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों ने राज्‍य के अगले सीएम के लिए सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम काे समर्थन किया और इसे आलाकमान को भेजा गया है। इससे पहले अंबिका सोनी के इन्‍कार के बाद मामला फिर उलझ गया था। इसके बाद पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत और पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने पार्टी विधायकों से फिर से रायशुमारी की। इसमें पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष सुनील जाखड़ का नाम सबसे आगे रहा। बताया जाता है कि विधायकों से जो फीडबैक लिया गया है उसमें करीब 40 विधायकों ने सुनील जाखड़ के पक्ष में सहमति दी। दूसरे नंबर पर सुखजिंदर रंधावा रहे। उनके लिए 20 विधायकों ने सहमति दी। तीसरे नंबर पर नवजोत सिंह सिद्धू रहे और करीब 12 विधायकाें ने उनको नया सीएम बनाने का समर्थन किया। इससे पहले अंबिका सोनी का नाम लगभग तय हो गया था, लेकिन उन्‍होंने इस पेशकश से इन्‍कार कर दिया। उन्‍होंने रविवार को कहा कि उन्‍होंने यह पद लेने से इन्‍कार कर दिया है। मेरे विचार से किसी सिख को सीएम होना चाहएि। इन सबके बीच बताया जा रहा है कि उनको मनाने की कोशिशें जारी हैं। वह पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी से मिलने पहुंची हैं। इससे पहले कांग्रेस विधायक दल के नए नेता व सीएम के लिए कल तक सुनील जाखड़ का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन देर रात पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी का नाम भी चर्चाओं में आ गया। बाद में यह बात सामने आई कि अंबिका साेनी ने स्वास्थ्य कारणाें का हवाला देते हुए आलाकमान से पंजाब सीएम पद के लिए इन्कार कर दिया है। अंबिका सोनी ने भी रविवार दोपहर पंजाब के सीएम पद को स्‍वीकार करने से इन्‍कार करने की बात कही। हालांकि वह कांग्रेस के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी के बुलावे पर उनसे मिलने पहुंचीं। बताया जा रहा है पंजाब में नेताओं के बीच खींचतान को देखते हुए हाईकमान अंबिका सोनी को सीएम बनाना चाहती है। अंबिका सोनी से पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत व चंडीगढ़ पहुंचे दो केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और हरीश राय चौधरी ने भी बात की है। अब नए सीएम के लिए सभी की निगाहें कांग्रेस की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गांधी पर टिक गई हैं। उधर रविवार को पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने त्यागपत्र दिया। दूसरी ओर, आज होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक को स्‍थगित कर दिया गया है। ऐसे में सीएम पद का मामला उलझता दिख रहा है। यह भी चर्चा है कि अंबिका साेनी को फिर से मनाने की काेशिश की जा रही है।
सोनीपत । कृषि कानून का विरोध कर रहे आंदोलनकारियों से बातचीत कर कुंडली बार्डर पर जीटी रोड के एक तरफ का रास्ता खुलवाने के लिए रविवार को आयोजित लेवल मीटिंग में आंदोलनकारी नही पहुंचे। सोनीपत के दीन बंधु छोटूराम विश्वविद्यालय में हुई मीटिंग में कोई हल नही निकला। इसका मुख्य वजह प्रदर्शनकारियों की तरफ से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचना बताया जा रहा है। बैठक में हरियाणा सरकार के एसीएस राजीव अरोड़ा, हरियाणा डीजीपी पीके अग्रवाल समेत जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी और कारोबारी मौजूद रहे। बैठक में उद्योगपतियों ने प्रभावित हुए औद्योगिक क्षेत्र को लेकर अपनी बात रखी। एसीएस राजीव अरोड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक यह मीटिंग बुलाई गई थी। जब तक एक तरफ का रास्ता नहीं खुल जाता तब तक बार-बार प्रयास किया जाएगा। मीटिंग में पहुंचे उद्योगपतियों की समस्या को भी सुना गया। आंदोलनकारियों को बुलाया गया था लेकिन वे नहीं पहुंचे। यह कमेटी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए ही बनाई गई है।
लुधियाना।किसान आंदोलन (kisan Andolan) का सबसे अधिक असर पंजाब (punjab) पर पड़ रहा है, क्योंकि पंजाब के किसानों की इसमें सबसे अधिक शमूलियत है। पंजाब का आर्थिकता पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में इस मसले को हल करने के लिए केन्द्र सरकार को तत्काल उचित कदम उठाने चाहिए। यह कहना था कैबिनेट मंत्री पंजाब राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (Cabinet Minister Rana Gurmeet Singh Sodhi) का। वह शुक्रवार को लुधियाना (Ludhiana) के जनपथ एस्टेट में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। साेढ़ी ने कहा कि इस पूरे मामले में माेदी सरकार को आगे आकर तत्काल इसका हल ढूंढना चाहिए। सुखबीर बादल ने किसानाें के मुद्दे पर कोई आवाज नहीं उठाई साेढ़ी ने कहा कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल (SAD President Sukhbir Badal) अब मार्च निकालने की बात कर रहे है, लेकिन सरकार में रहते हुए इस मुद्दे पर कोई आवाज नहीं उठाई। इस मुद्दे के हल के लिए केंद्र सरकार को एक कमेटी का गठन करना चाहिए। पंजाब में नशे को खत्म करने के लिए ढेरों प्रयास सफल हुए हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को साफ कर दिया है कि वह सीएम का पद छोड़ दें। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि आज कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी दोपहर 2 बजे विधायकों की एक बैठक बुलाई है। अमरिंदर के इस्तीफे के बाद पंजाब का नया सीएम बनाए जाने को लेकर तीन नामों पर चर्चा तेज हो गई है। सुनील जाखड़ की सबसे मजबूत दावेदारी पंजाब में कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक से पहले पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि पंजाब सीएम के तौर पर वह सबसे ज्यादा मजबूत दावेदार हैं। सुनील जाखड़ ने शनिवार को ट्वीट, 'वाह राहुल गांधी, आपने बेहद उलझी हुई गुत्थी के पंजाबी संस्करण के समाधान का रास्ता निकाला है। आश्चर्यजनक ढंग से नेतृत्व के इस साहसिक फैसले ने न सिर्फ पंजाब कांग्रेस के झंझट को खत्म किया है, बल्कि इसने कार्यकर्ताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है और अकालियों की बुनियाद हिला दी है।' गांधी परिवार की खास, अंबिका सोनी को मिलेगा इनाम? पंजाब कांग्रेस के महासचिव परगट सिंह ने बताया कि कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटने के लिए कहा गया है और अंबिका सोनी, सुनील जाखड़ और अन्य के नाम सीएम के लिए संभावित रूप से सामने आ रहे हैं, उन्होंने कहा कि सीएलपी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होगी। पंजाब सीएम की दौड़ में अंबिका सोनी का नाम भी सामने आ रहा है। 13 नवंबर 1942 को लाहौर में जन्मी अंबिका सोनी गांधी परिवार की खास हैं। उन्होंने 1969 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पार्टी जॉइन की थी। वह 1976 में पहली बार राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। यूपीए सरकार में वह सूचना एवं प्रसारण मंत्री भी रहीं थीं। इसलिए सिद्धू को नाराज नहीं करना चाहती कांग्रेस कांग्रेस को लगता है कि सिद्धू अगर किसी प्रतिद्वंद्वी के साथ जुड़ते हैं, तो पार्टी को नुकसान पहुंचाने की मारक क्षमता रखते हैं, भले ही यह व्यक्तिगत रूप से उनकी बहुत मदद न करें। वह अकाली दल में शामिल नहीं हो सकते हैं, आम आदमी पार्टी निश्चित रूप से उनके लिए एक विकल्प है। आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए पहले से ही चुनाव प्रचार के लिए प्रशांत किशोर को काम दिया है। सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है लेकिन अमरिंदर से उनकी खींचतान कम नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि सिद्धू पंजाब का सीएम बनना चाहते हैं। उनकी वजह से ही पंजाब में यह विवाद पैदा हुआ है। उन्हें सीएम बनाए जाने पर चर्चा हो सकती है।
किसान नेता, अखिल भारतीय जाट महासभा चंडीगढ़ के अध्यक्ष राजिंदर सिंह बडहेड़ी ने पंजाब राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की। उन्होंने किसान, पंजाब के ज्वलंत मुद्दों और जाट महासभा के मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान बाजवा ने इस संबंध में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। बडहेड़ी ने प्रताप सिंह बाजवा से कहा कि पंजाब के सत्तारूढ़ नेतृत्व को अन्य दलों के साथ मिलकर ऐसा निर्णय लेना चाहिए, जिससे किसानों को कोई नुकसान न हो। कोई भी राजनीतिक दल किसानों से सीधे टकराव की स्थिति में न हो। कोई भी बयान जारी नहीं किया जाना चाहिए, जिससे शरारती तत्वों को फायदा हो। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर गंभीरता ऐसा फैसला लें जिससे पिछले साढ़े नौ महीने से चल रहे किसान आंदोलन पर कोई असर न पड़े। किसानों की लड़ाई सिर्फ केंद्र की भाजपा सरकार से है। इसलिए अन्य किसी भी राजनीतिक दल का किसानों से टकराव नहीं होना चाहिए। पंजाब सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों को घोषित बकाया बकाया राशि जारी किए जाने के पीछे प्रताप सिंह बाजवा की बड़ी भूमिका सकारात्मक रही है। पिछले महीने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने गन्ने के दामों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। बाजवा ने उस घोषणा में भी बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बाजवा वर्तमान में किसानों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। क्रीमी लेयर से नीचे के जाट बहुत गरीब बडहेड़ी ने कहा कि अब प्रताप सिंह बाजवा को अगला विधानसभा चुनाव बटाला निर्वाचन क्षेत्र से लड़ना है, इसलिए अब वह स्थानीय मुद्दों खासकर किसानों पर ध्यान दे रहे हैं। एक घंटे तक चली बैठक के दौरान बडहेड़ी ने बाजवा को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अखिल भारतीय जाट महासभा से पहले किए गए वादों की भी याद दिलाए। उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर से नीचे के जाट बहुत गरीब हैं। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने सभी की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाला है। पंजाब सरकार को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। बडहेड़ी ने कहा कि पाकिस्तान में बैठे पंजाब के कुछ शरारती तत्व पंजाब की शांति भंग करने के लिए तैयार रहते हैं। इसलिए पंजाब की सत्ताधारी पार्टी को इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। किसानों और अन्य धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर अब पंजाब में राज्य की शांति के लिए कोई खतरा नहीं होना चाहिए। बडहेड़ी ने कहा कि प्रताप सिंह बाजवा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित अपने आवास पर उनसे बात करते हुए इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने का आश्वासन दिया। इन सभी मुद्दों को कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस हाईकमान के संज्ञान में भी लाएंगे। बाजवा ने कहा कि वह पिछले तीन दिन लगातार बटाला निर्वाचन क्षेत्र में थे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों की शिकायतें सुनीं और उनके समाधान के लिए कार्रवाई शुरू की। उनके निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के लोग रहते हैं इसलिए वह सांप्रदायिक एकता और आपसी सद्भाव के महत्व से पूरी तरह वाकिफ हैं।
नई दिल्ली/सोनीपत । लघु सचिवालय में मंगलवार को जिला व पुलिस प्रशासन के साथ कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों की एक बैठक का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त ललित सिवाच ने की। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से जीटी रोड के एक तरफ का रास्ता खोलने का अनुरोध किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना व जनहित में सहयोग की अपील की है। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने इस पर सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया है। उपायुक्त ललित सिवाच ने बताया कि मोनिका अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जीटी रोड खोलने की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जनहित में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर कुंडली-सिंघु बार्डर पर आंदोलनकारियों से एक तरफ के मार्ग पर आम लोगों को रास्ता दिलाया जाए। इस निर्णय के आलाेक में उपायुक्त ने संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते हुए आग्रह किया कि वे दिल्ली से सोनीपत-पानीपत मार्ग को खोल दें। इस मार्ग पर आंदोलनकारियों की संख्या भी बहुत कम है। इसके साथ ही यह मार्ग काफी जर्जर हो चुका है, जिसकी मरम्मत की सख्त आवश्यकता है। उपायुक्त सिवाच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में आंदोलनकारियों का सहयोग अपेक्षित है। इसके साथ ही आम जनमानस को हो रही परेशानियों को भी दूर करने में मदद मिलेगी। इसके लिए आंदोलनकारियों को सोच-विचार कर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों का रोजाना दिल्ली आना-जाना होता है। किंतु मार्ग अवरुद्ध होने के कारण लोगों को अत्यधिक समस्याएं उठानी पड़ रही हैं। यही नहीं, उपायुक्त ने बताया कि कि आंदोलन के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का निर्माण कार्य भी लंबे समय से अवरुद्ध है। ऐसे में यदि आंदोलनकारी एक तरफ का रास्ता देते हैं तो राष्ट्रीय राजमार्ग का एक ओर का निर्माण कार्य भी जल्द पूरा हो सकेगा। बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस पर सकारात्मक विचार करेंगे। इसके लिए वे मोर्चा के अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जल्द प्रशासन को सूचित करेंगे। वहीं, कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि एकतरफ का मार्ग छोड़ने की स्थिति में उन्हें वैकल्पिक जगह उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग का बंद किया जाना और दीवार खड़ी करना सबसे बड़ी समस्या है। बैठक में पुलिस अधीक्षक जशनदीप सिंह रंधावा, डीएसपी विरेंद्र सिंह, डीएसपी सतीश कुमार, संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि मंजीत सिंह, कुलदीप सिंह, जगवीर सिंह चौहान, बलवंत सिंह, मेजर सिंह पूनावाल, मुकेश चंद्र, गुरप्रीत, जोगेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, कुलप्रीत सिंह, बलवान सिंह, करतार सिंह, सुभाषचंद्र सोमरा, सरदार सतनाम सिंह, विक्रमजीत सिंह आदि मौजूद थे।
चंडीगढ़,आंदोलन के नाम पर कुछ लोगों की अराजकता का दुष्परिणाम है कि लुधियाना के लाजिस्टिक पार्क के बाद अब फिरोजपुर का साइलो भी बंद हो गया है। यह अजीब मनमानी है कि कुछ किसान ऐसे संस्थानों के बाहर कई माह से डटे हुए हैं और कामकाज नहीं होने दे रहे। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ऐसा करके कुछ किसान केवल उस संस्थान व पंजाब की आर्थिकी को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि इसका खामियाजा राज्य के ही कई किसानों व उद्यमियों को भी भुगतना पड़ रहा है। जिस तरह लुधियाना का लाजिस्टिक पार्क बंद होने से वहां कार्यरत कई युवा बेरोजगार हो गए थे उसी तरह फिरोजपुर का साइलो बंद होने से भी अनेक श्रमिकों का कामकाज छिन गया है। हैरानी इस बात की है कि धरना-प्रदर्शन करने वाले कुछ किसान यह भी नहीं देख रहे कि जिनका रोजगार छिन रहा है, वे युवा भी किसान परिवारों से ही हैं। जैसे लाजिस्टिक पार्क बंद होने से उद्यमियों को अपना माल देश-विदेश में भेजने की सुविधा कम हो गई वैसे ही साइलो बंद होने से किसानों को फसल बेचने में असुविधा हो सकती है। यह विडंबना ही है कि सरकार लगातार किसानों को कुछ भी करने की खुली छूट देती जा रही है, जबकि दूसरी ओर अगर कोई वर्ग किसी मंत्री या मुख्यमंत्री का आवास घेरने जाता है तो उसे पहले ही रोक दिया जाता है। इसके लिए बल प्रयोग करने से भी संकोच नहीं किया जाता। जब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार कुछ वर्गो पर सख्ती कर सकती है तो फिर आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाने वाले कुछ लोगों को इतनी छूट देना राज्य व यहां के लोगों के हितों से खिलवाड़ करने देना ही है। राज्य में टोल प्लाजा बंद पड़े हैं, कई कंपनियों के शोरूम कई माह से खुलने नहीं दिए गए हैं और अब वे स्थायी तौर पर बंद होने के कगार पर हैं। इसका एक दुष्परिणाम यह भी है कि अब केवल कृषि सुधार कानून रद करने को लेकर ही नहीं, अन्य किसी भी मांग को लेकर किसान या अन्य कोई भी हाईवे या ट्रैक जाम करने बैठ जाता है। इससे आए दिन आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। यह सवाल हर किसी के जहन में उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा? सरकार को इस तरह कानून हाथ में लेने और आम जनता के लिए परेशानी पैदा करने के साथ-साथ राज्य के ही किसानों, उद्यमियों और आर्थिकी को नुकसान पहुंचाने वालों को खुली छूट नहीं दी जानी चाहिए। उनकी मांगों पर गौर किया जाए, उचित मंच पर उचित तरीके से उन पर चर्चा हो, लेकिन ऐसी अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
हिसार। करनाल के बसताड़ा टोल प्रकरण पर तीनों कृषि सुधार कानून विरोधी आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद मनोहर बने रहने वाले मुख्यमंत्री पहली बार लाल हैं। होना भी चाहिए, क्योंकि आंदोलनकारी अराजकता की हद कर चुके हैं। रेखांकित कर लें कि अराजकता के पीछे प्रमुख कारण हरियाणा में आंदोलन के दो प्रमुख चेहरे राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढ़ूनी के बीच हरियाणा के आंदोलनकारियों के नेतृत्व को लेकर छिड़ी जंग भी है। दोनों एक दूसरे के प्रति मुखर भले न हों, लेकिन अपनी भड़ास जरूर जाहिर कर देते हैं। इस बार चढ़ूनी केंद्र में हैं। आंदोलनकारियों द्वारा पुलिस बल के जवानों पर हमला करने के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए बलप्रयोग किया। आंदोलनकारियों ने पथराव किया। आंदोलनकारी भी घायल हुए। पुलिस के जवान भी। कुछ आंदोलनकारी हिरासत में लिए गए तो चढ़ूनी ने पूरे हरियाणा में यातायात बाधित करा दिया। चढ़ूनी ने बसताड़ा प्रकरण के विरोध में आंदोलनकारियों की बैठक बुलाई, जिसे पंचायत का नाम दिया गया। लेकिन टिकैत उस पंचायत में नहीं गए। एक दिन पहले ही घायल आंदोलनकारियों को देखने अस्पताल पहुंच गए। उनकी दो तस्वीरें वायरल हुईं। एक घायल युवा सिख आंदोलनकारी के साथ और दूसरी करनाल के एक कांग्रेस नेता के भाई के साथ। चढ़ूनी ने भी पंचायत में साफ कह दिया कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे की नौ सदस्यीय कोर टीम या तो कोई फैसला ले, अन्यथा हरियाणा के किसान अब लाठियां नहीं खाएंगे। इसपर न तो राकेश टिकैत की, न संयुक्त किसान मोर्चे के किसी नेता की प्रतिक्रिया आई। इस घटनाक्रम के बाद हरियाणा में आंदोलनकारियों का एक बड़ा वर्ग अपने स्वजातीय राकेश टिकैत की जय जयकार कर रहा था। चढ़ूनी भी जानते हैं कि आंदोलनकारी जितना अराजक होंगे, वह उनके नायक के रूप में उभरेंगे। बसताड़ा प्रकारण के दो दिन पहले चढ़ूनी अपने चार पांच सौ समर्थकों के साथ अंबाला की शाहाबाद अनाज मंडी में सभा कर रहे थे। भारतीय किसान यूनियन (भाईचारा गुट) के प्रदेश अध्यक्ष नरपत राणा भी अपने पंद्रह बीस समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। उन्होंने चढ़ूनी को काले झंडे दिखाए। इसके बाद चढ़ूनी समर्थकों ने विरोधी गुट के किसानों को दौड़ा दौड़ाकर बुरी तरह पीटा। लेकिन जब आंदोलनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो चढ़ूनी इसे अलोकतांत्रिक बताने लगे। यद्यपि आंदोलनकारियों की तरफ से अराजक आचरण आए दिन होता रहता है, लेकिन बीते एक महीने से कुछ शांति थी। कारण, राकेश टिकैत तस्वीर से बाहर थे और चढ़ूनी को संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं ने तब से उपेक्षित कर रखा है, जब से उन्होंने पंजाब में चुनाव लड़ने का सुझाव दिया है। लेकिन इस बीच जो घटनाक्रम हुए उसमें अराजकता का प्रदर्शन करने का अवसर मिल गया और चढ़ूनी ने इसका श्रेय हाथोहाथ लिया। बसताड़ा प्रकरण की शुरुआत के पहले ही इसकी स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी था। करनाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेशस्तरीय बैठक थी। मुख्यमंत्री मनोहरलाल और प्रदेश भाजपाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ सहित लगभग दो सौ प्रतिनिधियों को पहुंचना था। चढ़ूनी ने आंदोलनकारियों से भाजपा का कार्यक्रम न होने देने का आह्वान किया। कार्यक्रम स्थल करनाल शहर में था। पुलिस ने जबरदस्त नाकेबंदी की थी। एसडीएम ने कह रखा था कि नाका किसी भी हालत में नहीं टूटना चाहिए। जो नाका तोड़े, उसका सिर फोड़ दो। जब आंदोलनकारी भाजपा की बैठक को बाधित करने में असफल रहे तो उन्होंने शहर के बाहर स्थित बसताड़ा टोल पर यातायात बाधित कर दिया। इसके बाद पुलिस पर हमला हुआ और टकराव हो गया। एक दिन बाद यमुनानगर में भाजपा के पूर्वांचल प्रकोष्ठ की बैठक थी। वहां भी आंदोलनकारियों ने उपद्रव किया। राकेश टिकैत इस समय हरियाणा से इतर अन्य प्रदेशों में घूम रहे हैं। चढ़ूनी को लगता है कि आंदोलनकारियों को उकसाकर वह हरियाणा के आंदोलनकारियों के नेता के रूप में फिर स्थापित हो सकते हैं। ऐसा भी नहीं कि टिकैत अराजकता का समर्थन नहीं करते। करते हैं, वह चढ़ूनी को क्रेडिट भी नहीं देना चाहते, फिर भी निश्चिंत हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि जिस दिन वह चाहेंगे, हरियाणा के आंदोलनकारी उनके पीछे खड़े हो जाएंगे। उन्हें पता है कि हरियाणा के आंदोलनकारियों का विरोध तीनों कृषि कानूनों से नहीं है, हरियाणा की चौधर को लेकर है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल क्यों है, इसे लेकर है। पांच वर्ष पहले जाट आंदोलन का कारण भी यही था और इस आंदोलन के मूल में भी यही कारण है। सो, वह जब चाहेंगे सरकार के विरोध में कोई भी बहाना लेकर आह्वान करेंगे। अराजकता होगी और चढ़ूनी जो आज खुश हो रहे हैं, फिर पीछे चले जाएंगे।
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू अब पार्टी हाईकमान के प्रति भी बगावत पर उतर आए हैं। पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कल कहा था कि सिद्धू विवादित बयान देने वाले अपने सलाहकार को हटा दें, अगर पर वह ऐसा नहीं करते हैं तो वह हटा देंगे। इस घटनाक्रम के बाद आज सिद्धू के सलाहकार मालविंदर सिंह माली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब आज सिद्धू ने कहा, अगर आप मुझे निर्णय लेने नहीं देंगे तो किसी को नहीं छोड़ूंगा, ईंट से ईंट बजा दूंगा। बता दें, नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से ही पार्टी में घमासान मचा हुआ है। पार्टी सीधे-सीधे दो गुटों में बंट चुकी है। सिद्धू अपने बयानों से अपनी ही सरकार को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। अब सिद्धू ने हाईकमान को भी चुनौती देनी शुरू कर दी है। सिद्धू समर्थक विधायक व मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाने की मुहिम चलाए हुए हैं। इस बीच, सिद्धू के सलाहकारों के बयानों के कारण वह खुद घिर गए। नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मालविंदर सिंह माली ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया था। कहा था कि कश्मीर अलग देश था। यही नहीं, माली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी का भी विवादित कार्टून डाल दिया था। इसके बाद पार्टी के भीतर व बाहर सिद्धू पर उनको हटाए जाने का दवाब बन रहा था। जब सिद्धू ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की तो पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत को कहना पड़ा कि अगर सिद्धू ने अपने सलाहकार को नहीं हटाया तो वह उन्हें हटा देंगे। इसके बाद आज माली ने दबाव में सलाहकार पद छोड़ने की घोषणा कर दी। बताया जा रहा है कि सिद्धू इसी बात को लेकर नाराज हैं। अभी तक पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमलावर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने आज हाईकमान को भी आंखें दिखाई। कहा कि अगर उन्हें अधिकार नहीं मिले तो वह ईंट से ईंट बजा देंगे।
जालंधर पंजाब कांग्रेस में सियासी तूफान के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू का खेमा अब भी बंटा हुआ है। सिद्धू के माफी मांगने की मांग पर अड़े अमरिंदर सिंह से नवजोत सिंह सिद्धू खेमे ने किसी भी तरह की माफी मांगने से इनकार किया है। इसके विपरीत अब सिद्धू का खेमा चाहता है कि पंजाब सीएम कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष से माफी मांगे। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पार्टी आलाकमान दोनों के बीच शांति चाहता है, लेकिन दोनों एक साथ काम नहीं कर सकते और दोनों पक्ष तालमेल के अपने विकल्पों को बंद कर रहे हैं। अमरिंदर के मीडिया सलाहकार ने मंगलवार की रात को यह स्पष्ट कर दिया कि वह सिद्धू से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि वह सीएम पर हमला करने वाले अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं मांगते। वहीं परगट सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि अमरिंदर को माफी मांगनी चाहिए क उन्होंने राज्य की जनता से किए गए अपने वादे पूरे नहीं किए। अमरिंदर की प्रतिष्ठा पर सवाल कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, सिद्धू और अमरिंदर के बीच चल रही इस लड़ाई में कई विधायक सिद्धू के खेमे में शामिल हो रहे हैं। वे अपना रुख सख्त कर रहे हैं और दोनों ही खेमों में यह लग रहा है कि वे द्वंद्व के अंतिम दौर के लिए तैयार हैं। एक कांग्रेसी नेता ने कहा कि अमरिंदर की छवि और प्रतिष्ठा खराब हो गई है, क्योंकि उनकी मर्जी के खिलाफ और विरोध के बावजूद सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की कमान दी गई है। दोनों में से एक चुनने की तैयारी कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि अब अमरिंदर की कुर्सी को भी खतरा है, क्योंकि कई विधायक अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए सिद्धू के पास जा रहे हैं। विधायकों को दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ सकता है और उनके सख्त रुख से पता चलता है कि वह सिद्धू को चुनने की तैयारी कर रहे हैं। सिद्धू पर पलटवार का मौका सीएम ने पहले ही पार्टी आलाकमान के लिए काम कठिन बना दिया था क्योंकि उनके खेमे ने 'सांप्रदायिक और जाति संतुलन' कार्ड खेला था और पीसीसी में अब चार कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। पार्टी की राज्य इकाई के सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस सांसदों का उनके साथ हाथ मिलाना और विशेष रूप से उनके कट्टर प्रताप सिंह बाजवा के साथ हाथ मिलाना भी इस बात का संकेत था कि अब सिद्धू के जीवन को कठिन बनाने और सीएम की कुर्सी को उनके लिए सपना बनाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अमरिंदर के पाले में विधायकों के लौटने का दावा इस बीच, कुछ विधायक दो नावों में सवार होकर दोनों तरफ से दिखाई देने की कोशिश कर रहे हैं। एक कांग्रेस विधायक, जो अभी भी अमरिंदर के प्रति वफादार है, उन्होंने खुलासा किया कि मंगलवार तक सिद्धू को बधाई देने वाले कुछ विधायक सीएम के पास वापस आए हैं। क्षमा याचना अब पीछे हो गई है और अब अगला दौर यह हो सकता है कि कौन पहले हमला करता है और कैसे।
चंडीगढ़। पंजाब में कोरोना संक्रमण को लगाए गए संडे कर्फ्यू व रात्रि कर्फ्यू को खत्म कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोविड रिव्यू करते हुए यह फैसला लिया। इसी के साथ राज्य में सभी बार, रेस्टोरेंट, सिनेमा हाल, स्वीमिंग पूल, माल, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, चिड़ियाघर आदि खोलने की इजाजत दे दी गई। इस बात का ध्यान जरूर रखा जाएगा कि स्टाफ मेंबर को वैक्सीन की कम से कम एक डोज जरूर लगी हुई हो। राज्य में अब समारोहों के दौरान इनडोर में 100 लोगों के एकत्र होने की इजाजत होगी। घर के बाहर 200 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दे दी गई है। वहीं, सीएम ने डीजीपी को निर्देश दिए कि रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में कोविड नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी नेताओं के चालान करें। हालांकि सीएम ने कहा कि वह उम्मीद जताते हैं कि ऐसा करने वाले नेताओं में समझ पैदा होगी। राज्य में स्कूल अभी बंद ही रहेंगे। कॉलेज, कोचिंग सेंटर और उच्च शिक्षा के अन्य सभी संस्थानों को संबंधित जिला उपायुक्त द्वारा खोलने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि कम से कम 2 सप्ताह पहले उन्होंने वैक्सीन ली है। मुख्यमंत्री ने कोविड की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि 20 जुलाई को फिर से स्थिति की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा करते हुए निर्देश दिया कि हर समय मास्क का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पंजाब में कोविशिल्ड नहीं, कोवैक्सिन का सिर्फ एक दिन का स्टाक सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राज्य में कोविशिल्ड नहीं है, जबकि कोवैक्सिन का सिर्फ एक दिन का स्टाक बचा है। सीएम ने केंद्र सरकार से इसकी आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम से कम एक खुराक लेने वालों को दूसरी खुराक समय पर लगे इसके लिए राज्य का वैक्सीन कोटा बढ़ाए जाने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि पंजाब में पहले ही लगभग 83 लाख पात्र व्यक्तियों (लगभग 27 प्रतिशत आबादी) का टीकाकरण कर लिया गया है। कहा कि राज्य में वैक्सीन का पूरी तरह से उपयोग किया जा रहा है। पहली खुराक 70 लाख लोगों को दी गई है, जबकि 13 लाख लोगों को दूसरी खुराक मिली है।
चंडीगढ़ हर‍ियाणा की मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) सरकार ने प्रदेश में बंद स्‍कूलों को खोलने को लेकर बड़ा फैसला क‍िया है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने हर‍ियाणा में 16 जुलाई से नौवीं से 12वीं तक की कक्षा शुरू करने की घोषणा की है। जबक‍ि 23 जुलाई से छठी से आठवीं कक्षा के लिए स्कूल खुलेंगे। इसके अलावा स्‍कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी। सरकार की ओर से कहा गया है क‍ि स्‍कूल खुलने पर क्‍लास लगाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी। वहीं बच्‍चों के स्कूल आने की बाध्यता नहीं होगी। इससे पहले हर‍ियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) को लेकर एक समीक्षा बैठक की। इसमें स्कूल्स रीओपनिंग की चर्चा की। हरियाणा के सीएम ने कहा कि कोविड-19 का ग्राफ नीचे आ चुका है। इसलिए कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करते हुए अब स्‍कूल-कॉलेज खोले जाने चाहिए। कम हुए कोरोना संक्रमण के मामलों के मद्देनजर जल्द से जल्द स्कूल्स खोलने को लेकर एक प्लान बनाया जाना चाहिए।
नई दिल्‍ली, केंद्र की मोदी सरकार के विस्‍तार के बाद अब हरियाणा की मनोहरलाल के नेतृत्‍व वाली भाजपा-जजपा मंत्रिमंडल में भी बदलाव की तैयारी है। इसकी सुगबुगाहट तो काफी दिनों से चल रही है, लेकिन अब फेरबदल जल्‍द होेने की संभावना है। मनोहरलाल कैबिनेट से कुछ दिग्‍गज मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है तो कई नए चेहरों को एंट्री मिलने की उम्‍मीद है। उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी जजपा के कोटे से भी एक मंत्री बनेगा। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को उनके कामकाज की कसौटी पर कसकर राज्यों के लिए भी नजीर पेश की है। इससे केंद्र की तरह अब हरियाणा मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह अपने मंत्रिमंडल से भी कई मंत्रियों की कामकाज के आधार पर छुट्टी और पदोन्नति कर सकते हैं। इसके लिए अब मनोहर लाल को पार्टी संगठन में सहमति बनाने में भी कोई कठिनाई नहीं आएगी। कोरोना महामारी के दौरान मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा रिपोर्ट पर बदले जा सकते हैं कई चेहरे मुख्यमंत्री मनोहर लाल राज्य में भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। फिलहाल राज्य मंत्रिपरिषद में दो मंत्रियों के पद रिक्त हैं। इनमें से एक भाजपा को तो दूसरा सरकार में सहयोगी जननायक जनता पार्टी के विधायक को दिया जाना है। मनोहर लाल मंत्रिमंडल में इस समय मुख्यमंत्री से अलग सात कैबिनेट और चार राज्य मंत्री सहित कुल 12 मंत्री हैं। राज्य में अधिकतम 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं। सीएम के व्यवस्था परिवर्तन अभियान में सहयोगी नहीं बन पाए मंत्रियों की छुट्टी करने का बना आधार कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही जजपा ने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक अपने हिस्से के एक मंत्रिपद के लिए भाजपा पर दबाव बनाया हुआ है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल मंत्रिमंडल विस्तार को पिछले कई माह से टालते आ रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल मोदी की तरह अपने मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल करना चाहते हैं। वह कोरोना महामारी के दौरान मंत्रियों के कामकाज की प्रगति रिपोर्ट के आधार पर कुछ मंत्रियों को बदलना चाहते हैं। हरियाणा में जो मंत्री मुख्यमंत्री मनोहर लाल के राज्य में व्यवस्था परिवर्तन के अभियान में सहयोगी नहीं बन पाए,उनकी छुट्टी की जा सकती है। मनोहर लाल ने अपने पहले कार्यकाल में भी कामकाज के आधार पर दो मंत्रियों की छुट्टी की थी। तब उन्होंने अहीरवाल के अटेली से विधायक विक्रम ठेकेदार और भिवानी से विधायक घनश्याम सर्राफ को हटाकर विपुल गोयल, डाक्टर बनवारी लाल और मनीष ग्रोवर को मंत्री बनाया था। अब तक उपचुनाव रहे मंत्रिमंडल विस्तार टालने का कारण राज्य में ऐलनाबाद सीट पर होने वाले उपचुनाव को भी मंत्रिमंडल विस्तार टालने का कारण माना जा रहा है। इससे पहले बरोदा हल्के में उपचुनाव हो चुका है। कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन के कारण हुए बरोदा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। भाजपा के लिए बरोदा के बाद ऐलनाबाद उपचुनाव भी चुनौती भरा है। यह सीट इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला के त्यागपत्र देने के कारण रिक्त हुई है। भाजपा रणनीतिकार मानते हैं कि यदि ऐलनाबाद उपचुनाव के दौरान राज्य मंत्रिपरिषद में एक-दो मंत्री पद रिक्त रहते हैं तो इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों को कई बार विराम दे चुके हैं सीएम मुख्यमंत्री मनोहर लाल कोरोना महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही मई माह के आखिरी सप्ताह से लेकर चार जुलाई तक चौथी बार दिल्ली आ चुके हैं। इन दौरों में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की है। जजपा नेता और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी दिल्ली में अमित शाह से मिलकर अपने हिस्से का मंत्री बनाए जाने का आग्रह कर चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंत्रिमंडल में विस्तार की तमाम संभावनाओं को एक नहीं कई बार खारिज किया है। मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल की संभावनाओं को खारिज किए जाने के बाद भी मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं चंडीगढ़ से दिल्ली तक प्रबल रहती हैं। इनको बनाया जा सकता है मंत्री और ये हो सकते हैं बाहर, कुछ के पंख भी कतरे जाएंगे यहां तक कहा जाता है कि सीएम सिर्फ दो मंत्रियों के रिक्त पद के साथ मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव करना चाहते हैं। इसमें तीन से चार मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मंत्री बनाने से लेकर कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी शामिल है। इस फेरबदल के क्रम में यह बात भी सामने आई कि विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को मंत्रिपरिषद में शामिल करके अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी अन्य अनुभवी विधायक को बैठाया जा सकता है। मनोहर सरकार में तीसरे क्रम के मंत्री अनिल विज से गृह विभाग वापस लिया जाएगा। किसान संगठनों के आंदोलन में भी जिन मंत्रियों ने जमीन पर उतरकर काम नहीं किया। उनके लिए भी आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। कामकाज को लेकर जिन मंत्रियों पर सवाल खड़े होते रहे हैं उनमें कृषि मंत्री जेपी दलाल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ओमप्रकाश यादव, बिजली मंत्री रणजीत सिंह, महिला विकास राज्यमंत्री कमलेश ढांडा और खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह हैं।
चंडीगढ़/नई दिल्ली पंजाब कांग्रेस के चल रही गुटबाजी और आपसी कलह का समाधान अभी तक सामने नहीं आया है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके विरोधियों के बीच खींचातानी चल रही है। कैप्टन के एक प्रमुख विरोधी नवजोत सिद्धू हाल में ही कांग्रेस हाइकमान से मिलकर गए हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाइकमान सिद्धू को उनकी मांग के अनुसार प्रदेश संगठन की कमान सौंपने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि यह फैसला ले पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि सिद्धू को मनाने के चक्कर में पार्टी के सामने न सिर्फ कैप्टन की नाराजगी बढ़ने का खतरा है, बल्कि पंजाब के तमाम नेता इसके विरोध में मुखर हो उठेंगे। संतुलन बनाने की चुनौती कांग्रेस लीडरिशप दोनों ही पक्षों के बीच संतुलन बनाना चाह रही है। जहां सिद्धू अपने लिए प्रदेशाध्यक्ष पद चाहते हैं, वहीं पार्टी की ओर से उन्हें डिप्टी सीएम बनाने के साथ-साथ चुनाव कैंपेन कमिटी के अध्यक्ष पद देने का विकल्प भी रखा गया है। कहा जाता है कि सिद्धू ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। उधर कैप्टन भी सिद्धू को ये अहम जिम्मेदारियां देने के पक्ष में नहीं थे। कहा जा रहा है कि अगर सिद्धू को बड़ी जिम्मेदारी दी गई तो कैप्टन अपने बागी तेवर दिखा सकते हैं। सिद्धू ने की थी प्रियंका और राहुल से मुलाकात कैप्टन ने अपने तेवर तो उसी समय दिखा दिए थे, जब सिद्धू की प्रियंका व राहुल से मुलाकात के अगले दिन उन्होंने हिंदू नेताओं को अपने घर लंच पर बुलाया था। कहने को लंच पर हुई यह मुलाकात राज्य के शहरी इलाकों में रह रही हिंदू आबादी को कांग्रेस की ओर आकर्षित करने को लेकर थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इसमें प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कौन हिंदू चेहरा हो सकता है, इसे लेकर भी मंथन हुआ। जिसमें दो नाम प्रमुखता से सामने आए, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद मनीष तिवारी व कैप्टन सरकार में मंत्री विजय इंदर सिंगला का। कहा जाता है कि इस मीटिंग में कैप्टन ने सिद्धू को बड़ी जिम्मेदारी दी जाने की सूरत में अपने विधायकों व समर्थक नेताओं की राय भी जानने की कोशिश भी की। सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के विरोध की वजह सिद्धू को प्रदेश की कमान न देने के पीछे कैप्टन की दलील है कि यह पद किसी हिंदू को देना चाहिए, ताकि प्रदेश के हिंदुओं को प्रतिनिधित्व भी हो सके। कैप्टन का मानना है कि सीएम व प्रदेश चीफ दोनों ही अगर जाट होते हैं तो दूसरे समुदायों को मौका नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी हिंदू हैं। वहां हिंदू समुदाय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। ऐसे में कांग्रेस को डर है कि कहीं यह तबका छिटककर बीजेपी या आप की तरफ न चला जाए। कैप्टन ने की थी बाजवा को हटाने की मांग दरअसल, उस समय कैप्टन तत्कालीन प्रदेश चीफ प्रताप सिंह बाजवा को हटाने की मांग कर रहे थे। बाजवा राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे और बाजवा को प्रदेश की कमान सौंपने के पीछे राहुल का हाथ ही माना जा रहा था। आखिरकार कांग्रेस हाइकमान को कैप्टन की जिद के आगे बाजवा को हटाना पड़ा। प्रदेश की कमान कैप्टन के हाथों दी गई और कैप्टन ने अपने दम पर पिछले चुनावों में पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया। सत्ता बचाए रखने की चुनौती कांग्रेस की एक बड़ी चुनौती पंजाब में अपनी सत्ता बचाए रखना है। वहां किसान आंदोलन के चलते कांग्रेस के लिए अभी भी गुंजाइश बनी हुई है। पार्टी को लगता है कि पिछले एक डेढ़ महीने से चल रही प्रदेश में खींचतान और सिद्धू की बयानबाजी को लेकर वहां लोगों के बीच पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है। प्रदेश के एक नेता का कहना था कि अगर सिद्धू को मुंहमांगा मिलता है तो सिर्फ सीएम और उनके समर्थक ही नहीं, संगठन के बड़े नेता व कैप्टन के दूसरे विरोधी भी सिद्धू के खिलाफ गोलबंद हो सकते हैं। उत्तराखंड में नए सीएम बनने के बाद मुखर होते विरोध का उदाहरण देते हुए इन नेताओं का कहना है कि जब बीजेपी में दिल्ली (नरेंद्र मोदी वऔरअमित शाह) के फैसले पर विरोध का सुर बुलंद हो सकता है तो पंजाब कांग्रेस में क्यों नहीं?
चंडीगढ़। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में मिली सफलता से हरियाणा भाजपा खासी उत्साहित है। तीन कृषि कानूनों के विरोध में सात माह से चल रहे किसान संगठनों के आंदोलन के बावजूद पंचायत चुनाव में मिली सफलता को भाजपा भविष्य के लिए अच्छे संकेत में रूप में देख रही है। हरियाणा में भी सितंबर-अक्टूबर में पंचायत व निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा को लग रहा कि उत्तर प्रदेश की सफलता का असर हरियाणा में भी दिखाई देगा। उत्तर प्रदेश में 75 जिला परिषद के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 67 सीटों पर जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तथा पूर्व उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने अलग-अलग बयान तथा ट्वीट में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्वीट के जरिये कहा कि उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में मिली सफलता मेहनती बूथ कार्यकर्ताओं तथा मजबूत संगठन की जीत है। गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्वीट में कहा कि भाजपा की इस जीत से पंचायती राज व्यवस्था को अधिक मजबूती मिलेगी। प्रदेश में पढ़ी लिखी पंचायतों की व्यवस्था देने वाले हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष एवं पूर्व पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि प्रदेश में जब भी चुनाव होंगे तो यहां भी पार्टी को पूरी सफलता मिलेगी। पूर्व उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को मिली सफलता ने साबित कर दिया है कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा आंदोलन राजनीति से प्रेरित होने के अलावा कुछ नहीं है। हरियाणा में सितंबर या अक्टूबर में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव होने प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही कह चुके कि हाई कोर्ट में 22 अगस्त को सुनवाई के बाद जो भी फैसला आएगा, उसके आधार पर तय किया जाएगा कि पंचायत चुनाव कब होने हैं। 22 जिला परिषदों के चुनाव को लेकर खासी आपाधापी रहने की संभावना है। प्रदेश सरकार ने जिला परिषदों को यहां काफी पावरफुल कर रखा है। हरियाणा में 44 शहरी निकायों के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। राज्य चुनाव आयोग के नए आयुक्त धनपत सिंह हालांकि हर जिले में पंचायत चुनाव की धीरे-धीरे तैयारियां करने में जुटे हैं, लेकिन कानूनी अड़चनें खत्म होने तथा सरकार का इशारा मिलने के बाद चुनाव का ऐलान किया जा सकता है। लोगों ने शहरी निकायों और गांवों में अपने-अपने स्तर पर पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर रखी है।
चंडीगढ़।हरियाणा सरकार ने कई नई छूट के साथ राज्य में लाकडाउन 12 जुलाई तक बढ़ा दिया है। प्रदेश सरकार जनता की सुविधाओं को देखते हुए हर सप्ताह लाकडाउन में ढील दे रही है। लोग इस ढील का दुरुपयोग करते हुए कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करने को लेकर गंभीर नहीं हैं। प्रदेश में बेशक पाजिटिवटी रेट काफी नीचे आ गया है, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते अभी खतरा टला होने का दावा नहीं किया जा सकता। हरियाणा के गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने लोगों से कहा है कि वह लाकडाउन में कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती के साथ अनुपालन करें। इसमें उनके स्वयं के साथ-साथ दूसरे लोगों का भी फायदा है। मुख्य सचिव विजयवर्धन की ओर से जारी नए आदेश के तहत महामारी अलर्ट-सुरक्षित हरियाणा के तहत 12 जुलाई को सुबह पांच बजे तक लाकडाउन लगा रहेगा। इस दौरान सरकार ने चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टीट्यूट्स को सीए की परीक्षाएं कराने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह परीक्षाएं पांच जुलाई से 20 जुलाई के बीच होंगी। राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि परीक्षाओं के लिए केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों व गाइडलाइन का अनुपालन जरूरी है। इसके अलावा सरकार ने आर्मी द्वारा हिसार में भर्ती के लिए होने वाले कामन एंट्रेंस टेस्ट (सीईई) की भी अनुमति प्रदान कर दी है। बाकी सभी छूट पहले की तरह रहेंगी। अब तक ये हैं छूट, जो रहेंगी बरकरार 1. विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की अनुमति, लेकिन इनमें फिलहाल रिसर्च स्कालर ही आ सकेंगे। 2. विश्वविद्यालयों में लैब में प्रैक्टिकल के लिए भी छात्र-छात्राओं को अनुमति 3. विश्वविद्यालयों में शिक्षक सिर्फ उन विद्यार्थियों की क्लास ले सकेंगे, जिनके पढ़ाई में कुछ डाउट्स (संशय) हैं। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को लिए 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। 4. खेल स्टेडियम पहले ही खोल दिए थे, लेकिन अब इनमें आउटडोर गेम्स भी हो गए हैं। 5. दुकानें खुलने का समय सुबह नौ बजे और बंद करने का समय रात आठ बजे पहले की तरह है। 6. माल सुबह 10 बजे से रात को आठ बजे तक खुल रहे हैं। 7. रेस्टोरेंट, बार (होटल व माल समेत) का समय सुबह 10 बजे खुलकर रात 10 बजे तक है। बैठने की क्षमता 50 फीसद ही रखी गई है। 8. खाने की होम डिलीवरी रात 10 बजे तक की जा सकेगी। 9. धार्मिक स्थल एक बार में 50 लोगों की मौजूदगी रह सकती है। 10. सभी कारपोरेट आफिस पूरी हाजिरी के साथ खुल रहे हैं। 11. ओपन स्पेस में 50 लोगों के जमा होने की अनुमति। 12. बरात लाने व ले जाने पर अभी प्रतिबंध ही रहेगा। लोग नहीं माने तो हमें सख्ती करनी पड़ेगी हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका अभी खत्म नहीं हुई है। देखने में आ रहा है कि लोग धीरे-धीरे लापरवाह होते जा रहे हैं। यह उनकी खुद के स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। लोगों को दो गज की दूरी और मास्क की गाइड लाइन का सख्ती से अनुपालन करना होगा। उन्हें सेनेटाइजर से अपने हाथ साफ करने होंगे। तीसरी लहर से बचने के लिए सरकार व जनता के संयुक्त प्रयासों की जरूरत है। यदि लोग नहीं माने तो हमें मजबूरी में सख्ती करनी पड़ेगी।
चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही महीनों का वक्त बचा है लेकिन सत्ताधारी दल कांग्रेस की अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही। उल्टे सिद्धू के बाद पंजाब में प्रताप सिंह बाजवा के रूप में एक और गुट तैयार हो रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने वैसे तो इससे इनकार किया है लेकिन इशारों-इशारों में कांग्रेस हाई कमान को संदेश दे दिया है। दरअसल पंजाब में ट्विटर वॉर के बाद अब पंजाब में पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है। हाल ही में पंजाब के कुछ हिस्सों में अमरिंदर सिंह के होर्डिंग्स के बाद गुरुवार को अमृतसर में नवजोत सिंह सिद्धू और फरीदकोट में राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के पोस्टर देखे गए। इससे वहां अमरिंदर के खिलाफ दो गुटों की चर्चा तेज होने लगी। फरीदकोट में पास-पास लगे तीनों की होर्डिंग्स फरीदकोट में एक चौराहे में तीनों की होर्डिंग्स पास-पास लगाई गई हैं। अमृतसर में सिद्धू के समर्थन वाले पोस्टरों में लिखा, 'सारा पंजाब सिद्धू नाल 2022'। वहीं बाजवा के पोस्टर फरीदकोट जिले के जैतो और कोटकपुरा में लगाए गए हैं। 'मैंने हस्तक्षेप किया तब पार्टी में आए सिद्धू' जब इस बारे में प्रताप सिंह बाजवा से पूछा गया तो उन्होंने कहा,'जब नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में आए थे तो पंजाब लीडरशिप ने समस्याएं पैदा की थीं, वे नहीं चाहते थे कि सिद्धू आएं। मैंने हस्तक्षेप किया और सिफारिश कि वह (सिद्धू) पार्टी के लिए खजाना साबित होंगे। तब जाकर उन्हें पार्टी में लिया गया। वह मेरे भाई की तरह हैं।' 'टॉप पोजिशन में पहुंचने में समय लगता है' बाजवा ने आगे कहा, 'हाई कमान, कार्यकर्ता और मैं चाहता हूं कि उन्हें महत्वपूर्ण पद मिले लेकिन टॉप पोजिशन पर पहुंचने के लिए समय लगता है। तीन सदस्यीय कमिटी के सामने इसे स्पष्ट किया गया। उन्हें रोल दिया जाना चाहिए लेकिन पार्टी के वफादार जो यहां 40 से 45 साल से हैं उनका भी ध्यान रखना चाहिए।' 'कोई रातोंरात कर्नल से जनरल नहीं बन जाता' बाजवा ने आगे कहा, 'कोई भी कर्नल रातोंरात जनरल नहीं बन जाता। सबसे योग्य कर्नल को भी कुछ समय तक इंतजार करना पड़ता है। हमने इसे पार्टी हाई कमान पर छोड़ दिया है, हमें उनका फैसला स्वीकार्य होगा। मैंने यह भी साफ कर दिया है कि मैं किसी पोस्ट का उम्मीदवार नही हूं।' सिद्धू को ऑफर हुआ था डेप्युटी सीएम का पद दरअसल पंजाब विवाद के निपटारे के लिए कांग्रेस की तीन सदस्यीय कमिटी ने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश में डेप्युटी सीएम बनाने का फार्म्युला दिया जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया है। इस बीच पार्टी ने उन्हें संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर पद दिए जाने का भी प्रस्ताव दिया है लेकिन उसे भी सिद्धू ने नकार दिया है। सिद्धू का कहना है कि वह पंजाब की राजनीति में ही दिलचस्पी रखते हैं। अब सिद्धू क्या करवट लेंगे, इसे लेकर अब भी संशय है। पार्टी हाईकमान से मीटिंग के बाद से वह सामने नहीं आए हैं और न ही कोई ट्वीट किया है।
चंडीगढ़,हरियाणा में तीन कृषि कानूनों के विरोध को लेकर पिछले छह माह से आंदोलनकारियों की अगुवाई कर रहे भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी, राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव अब शक्ति प्रदर्शन पर उतर आए हैं। आंदोलन के दौरान कई मौके ऐसे आए, जब चढूनी और टिकैत के बीच अप्रत्यक्ष रूप से जुबानी टकराव हो चुका है। चढूनी जहां किसान लीडरशिप अपने हाथ में रखने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार दिखाई दे रहे हैं, वहीं टिकैत भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा में अपनी पैठ जमाने की कोशिश में हैं। राजनीतिक विश्‍लेषकों का मानना है कि दरअसल ये तीनों किसान नेता अपना खोया सियासी भविष्‍य हरियाणा में तलाश रहे हैं। जाट नेता यशपाल मलिक भी जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कर चुके ऐसे प्रयास हरियाणा में किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन से पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं। जाट आरक्षण आंदोलन इसका बड़ा उदाहरण है। उस समय उत्तर प्रदेश के जाट नेता यशपाल मलिक ने पूरे समय हरियाणा में डेरा डाले रखा। अब भी यशपाल मलिक हरियाणा के लोगों के संपर्क में हैं। गुरनाम चढूनी को नागवार गुजर रही राकेश टिकैत की अपने क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां राजनीतिक विश्‍लेषकों का कहना है कि ठीक उसी तर्ज पर राकेश टिकैत की निगाह भी हरियाणा के लोगों पर है। टिकैत यहां अपना राजनीतिक व संगठनात्मक भविष्य मजबूत करने की काेशिश में हैं, जो गुरनाम सिंह चढूनी को नागवार गुजर रहा है। हरियाणा में चल रहा किसान जत्थेबंदियों का यह आंदोलन कहीं न कहीं जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई राजनीतिक गतिविधियों से मेल खा रहा है। इसमें कुछ लोग सामने हैं तो कुछ परदे के पीछे खेल खेल रहे हैं। चढूनी की पत्‍नी आम आदमी पार्टी के टिकट पर हरियाणा में लड़ चुकी हैं चुनाव गुरनाम सिंह चढ़ूनी आम आदमी पार्टी के टिकट पर हरियाणा से अपनी पत्‍नी को चुनाव लड़वा चुके हैं। चढूनी की गतिविधियां करीब एक साल पहले तक कुरुक्षेत्र और कैथल जिले तक सीमित थी, लेकिन तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन ने उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को हवा दी है। आंदोलन चला रहे संयुक्त किसान मोर्चा के 40 संगठन भले ही दिखने में एक होने का दावा करते रहें, लेकिन पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े इन किसान नेताओं के अपने निजी राजनीतिक मसले भी हैं। चढूनी चाहते हैं कि उन्हें हरियाणा में किसानों का सर्वमान्य नेता स्वीकार कर लिया जाए, लेकिन यहां भाकियू नेता रतन सिंह मान भी सक्रिय हैं। चढूनी की मत्‍वाकांक्षा को भांप चुके हैं टिकैत चढूनी की इस महत्वाकांक्षा को कहीं न कहीं राकेश टिकैत भी भांपते हैं। ऐसा कई बार हो चुका, जब टिकैत चढूनी के थोड़े बहुत असर वाले इलाकों में अपनी गाड़ी का पहिया घूमा चुके हैं। चढूनी को टिकैत की ये गतिविधियां नागवार गुजर रही हैं। इसी का नतीजा है कि कई ऐसे मौके आए, जब किसान संगठनों के आंदोलन को लेकर चढूनी और टिकैत के अलग-अलग बयान सुनने को मिले। इन सबके बीच स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव की निगाह दक्षिण हरियाणा की राजनीति पर है। टिकैत और चढूनी के बीच रस्साकसी का फायदा उठाने की का‍ेशिश में यादव कभी आम आदमी पार्टी की राजनीति के केंद्र बिंदु रह चुके योगेंद्र यादव स्वयं चुनाव लड़ चुके हैं। वह टिकैत व चढूनी के बीच चल रही रस्साकसी का राजनीतिक फायदा उठाते हुए दक्षिण हरियाणा की बंजर जमीन पर राजनीतिक फल पैदा करने की काेशिश में हैं। यही वजह है कि हरियाणा में किसान संगठनों के नाम पर राजनीति कर रहे किसान जत्थेबंदियों के यह नेता अपने-अपने शक्ति प्रदर्शन का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। किसी को रिहा करने का काम सरकार नहीं अदालत का : विज '' आंदोलनकारी नेता कहते हैं कि किसानों पर जो केस दर्ज हुए हैं, उनको खारिज किया जाए और जो किसान गिरफ्तार हैं, उनको छोड़ा जाए। यह काम सरकार का नहीं, बल्कि अदालत का है। वे लोग वहां जाकर अपनी अर्जी लगाएं। किसानो की भारी संख्‍या में इकट्ठे होने से कई बार रोका गया। कोरोना का भी उन्हें डर नहीं है। इस पूरे माहौल में राजनीति हावी है। ये लोग मानते ही नहीं। इनको टीका लगवाने के लिए भी कहा गया और टेस्ट करवाने के लिए भी, लेकिन उन्होंने इस मामले में सरकार को कोई भी सहयोग नहीं दिया। किसानों के दिल्ली की तरफ कूच से निसंदेह फिर कोरोना का असर बढ़ सकता है। यह सभी के लिए खतरा है। इस बात को समझने की जरूरत है। - अनिल विज, गृह स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, हरियाणा।
अमृतसर । कई भाषाओं की जननी संस्कृत (Sanskrit) पंजाब में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। सरकार ने इसके उत्थान व प्रचार-प्रसार से अपने हाथ पूरी तरह खींच लिए हैं। पंजाब में किसी वक्त 90 गैर सरकारी संस्कृत कालेज या संस्थान थे, जिनकी संख्या अब महज सात तक सिमट गई है। इनकी भी आर्थिक दशा दयनीय है। अमृतसर के श्री लक्ष्मी नारायण संस्कृत कालेज में पिछले दो वर्षो से कोई दाखिला नहीं हुआ है, इतना ही नहीं एडिड (सरकारी सहायता प्राप्त) स्कूलों में भी संस्कृत अध्यापकों के पद खत्म कर दिए गए हैं। इस वक्त एडिड स्कूलों में सिर्फ अमृतसर में ही एक संस्कृत अध्यापक है। अमृतसर स्थित हिंदू सभा स्कूल में कार्यरत संस्कृत अध्यापक हेमराज शर्मा डेढ़ साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इन स्कूलों में संस्कृत भाषा की पढ़ाई का विकल्प भी खत्म कर दिया गया है। संस्कृत का कोई भी अध्यापक भर्ती नहीं किया जा रहा। पंजाब में साल 1980 से पहले ज्यादातर स्कूलों में संस्कृत पढ़ाई जाती थी। 1980 के बाद आतंकवाद के दौर में इस भाषा को काफी नुकसान पहुंचा। साल 2009 के बाद से संस्कृत कालेजों के लिए पंजाब सरकार व स्कूल शिक्षा विभाग (डीपीआइ) से कोई ग्रांट नहीं दी गई। कभी अमृतसर जिले में ही संस्कृत पढ़ाने वाले 20 संस्थान थे, जो अब सिर्फ दो ही रह गए हैं। इन कालेजों में शास्त्री, प्रभाकर और आचार्य की पढ़ाई होती थी। अभी गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग तो है, लेकिन यहां विद्यार्थी नाममात्र ही हैं। जीएनडीयू में एमए संस्कृत व पीएचडी की व्यवस्था है, लेकिन विद्यार्थी नहीं हैं। स्वयंसेवी संस्थाएं उठा रहीं खर्च पंजाब में अमृतसर में दो, दीनानगर में एक, होशियारपुर में एक, खन्ना में एक, सरहिंद (फतेहगढ़ साहिब) में एक और करतारपुर में एक कालेज है, जिसका खर्च स्वयंसेवी संगठन उठा रहे हैं। इन कालेजों में दो से तीन विद्यार्थी ही हैं। अखिल भारतीय संस्कृत विकास परिषद की कोशिशों से शास्त्री को ग्रेजुएशन और आचार्य को एमए के बराबर मान्यता मिल गई है, लेकिन विद्यार्थियों का इस ओर कोई रुझान नहीं है, क्योंकि रोजगार के अवसर नहीं हैं। सुनियोजित तरीके से कम किए गए संस्कृत के विद्यार्थी: पुष्पराज शास्त्री श्री लक्ष्मी नारायण संस्कृत कालेज के प्रिंसिपल पुष्पराज शास्त्री कहते हैं, 'सरकारों ने सुनियोजित तरीके से संस्कृत के विद्यार्थी कम किए। सरकार अगर स्कूलों में संस्कृत के अध्यापकों की भर्ती शुरू कर दे, तो संस्कृत दोबारा अपना खोया सम्मान पा सकती है। संस्कृत कालेजों को प्रति वर्ष 26 हजार रुपये की मामूली ग्रांट दी जाती थी। वह भी बंद है। शास्त्री अध्यापकों के पदों को बहाल किया जाना चाहिए। संस्कृत भाषा के अंकों को कुल अंकों में जोड़ा जाए, न कि इन्हें आप्शनल अंकों के रूप में लिया जाए। आज बीएएमएस की मेडिकल पढ़ाई करने के लिए संस्कृत जरूरी होती है, लेकिन विद्यार्थियों को संस्कृत का पूरा ज्ञान न होने के कारण उनको आयुर्वेद में डिग्री हासिल करने में मुश्किल आती है। हम 16 संस्कारों की शिक्षा प्रदान कर रहे: डा. प्रेम अध्यक्ष अखिल भारतीय संस्कृत विकास परिषद व हिंदू महासभा के राज्य प्रभारी डा. शिव कुमार प्रेम के अनुसार परिषद का गठन साल 1841 में लाहौर में हुआ था। इसका कार्यालय अमृतसर में है। संस्कृत को जीवंत रखने के लिए परिषद हर स्तर पर कोशिश करती रही है, लेकिन सरकारें ही गंभीर नहीं हैं। संस्कृत में शास्त्री को ग्रेजुएशन व आचार्य को एमए के बराबर करवाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। हम भाषा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ 16 संस्कारों की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने वैक्सीनेशन को लेकर पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार वैक्सीन की कृत्रिम कमी पैदा कर लोगों के जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। वहीं, उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू पर आरोप लगाया कि वह 400 रुपये के सरकारी रेट पर टीके खरीद कर प्राइवेट अस्पतालों को 1060 रुपये में बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने करोड़ रुपये का घोटाला किया है क्योंकि प्राइवेट अस्पताल 1500 से 2000 रुपये लेकर टीके लगा रहे हैं। सुखबीर बादल ने मांग की कि स्वास्थ्य मंत्री पर पर्चा दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, उन्होंने राहुल गांधी से सवाल पूछा कि वह सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने की मांग कर रहे हैं, जबकि पंजाब में 1500 रुपये में टीके लगाए जा रहे हैं। क्या वह इसका समर्थन करते हैं। सुखबीर ने कहा कि अकेले मोहाली में एक दिन में करीब दो करोड़ रुपये का लाभ कमाने के लिए निजी संस्थानों को 35000 वैक्सीन की डोज बेची गई। उन्होंने कहा कि राज्य में अकाली दल की सरकार बनने पर इस सारे मामले की न्यायिक जांच करवाई जाएगी। सुखबीर ने कहा कि मुख्य सचिव विनी महाजन ट्वीट कर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार ने वैक्सीन वितरण का निगमीकरण करके लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को त्याग दिया है। झूठ बोलने की भी हद होती है: सिद्धू स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू का कहना है कि झूठ बोलने की भी हद होती है। सुखबीर बादल सिरे से झूठ बोल रहे हैं। राज्यों के पास वैक्सीन की कमी है, यह जग जाहिर है। स्वास्थ्य विभाग वैक्सीन की न तो खरीद कर रहा है और न ही वितरण। इसके लिए नोडल एजेंसी बनाई गई है। हमारा काम वैक्सीन लगाना है। प्राइवेट अस्पताल खुद वैक्सीन खरीद कर लगा रहे हैं।
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने वैक्सीनेशन को लेकर पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार वैक्सीन की कृत्रिम कमी पैदा कर लोगों के जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। वहीं, उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू पर आरोप लगाया कि वह 400 रुपये के सरकारी रेट पर टीके खरीद कर प्राइवेट अस्पतालों को 1060 रुपये में बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने करोड़ रुपये का घोटाला किया है क्योंकि प्राइवेट अस्पताल 1500 से 2000 रुपये लेकर टीके लगा रहे हैं। सुखबीर बादल ने मांग की कि स्वास्थ्य मंत्री पर पर्चा दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, उन्होंने राहुल गांधी से सवाल पूछा कि वह सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने की मांग कर रहे हैं, जबकि पंजाब में 1500 रुपये में टीके लगाए जा रहे हैं। क्या वह इसका समर्थन करते हैं। सुखबीर ने कहा कि अकेले मोहाली में एक दिन में करीब दो करोड़ रुपये का लाभ कमाने के लिए निजी संस्थानों को 35000 वैक्सीन की डोज बेची गई। उन्होंने कहा कि राज्य में अकाली दल की सरकार बनने पर इस सारे मामले की न्यायिक जांच करवाई जाएगी। सुखबीर ने कहा कि मुख्य सचिव विनी महाजन ट्वीट कर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार ने वैक्सीन वितरण का निगमीकरण करके लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को त्याग दिया है। झूठ बोलने की भी हद होती है: सिद्धू स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू का कहना है कि झूठ बोलने की भी हद होती है। सुखबीर बादल सिरे से झूठ बोल रहे हैं। राज्यों के पास वैक्सीन की कमी है, यह जग जाहिर है। स्वास्थ्य विभाग वैक्सीन की न तो खरीद कर रहा है और न ही वितरण। इसके लिए नोडल एजेंसी बनाई गई है। हमारा काम वैक्सीन लगाना है। प्राइवेट अस्पताल खुद वैक्सीन खरीद कर लगा रहे हैं।
चंडीगढ़ । कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को 45 दिन का समय दिया है। इस समय के दौरान उन्होंने गुरु को लेकर जो वादे किए थे उसे पूरा करें। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों व संगत पर गोली चलाने वालों को पकड़ें। इन 45 दिनों में अगर ऐसा नहीं होता है तो प्रताप सिंह बाजवा भी आजाद होंगे और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी। यह 45 दिन की अवधि जुलाई के पहले सप्ताह में खत्म होगी। बाजवा ने कहा कि हम केवल यह चाहते हैं कि गुटका साहिब हाथ में लेकर गुरु से जो वादे किए गए थे वह पूरे किए जाएं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान रहे प्रताप सिंह बाजवा से जब पूछा गया कि क्या 2022 के चुनाव पर कांग्रेस की धड़ेबंदी का असर नहीं पड़ेगा और इस विवाद का अंत क्या होगा, इस पर उन्होंने कहा कि यह कोई धड़ेबंदी नहीं है। हम केवल यही तो चाह रहे हैं कि जो वादे 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किए थे, उसे मुख्यमंत्री पूरा कर दें। हम किसी की मुखालफत नहीं कर रहे हैं, बल्कि वही बात उठा रहे हैं जिसे पूरा करने का वादा खुद कैप्टन ने किया था। बाजवा ने कहा, मुख्यमंत्री अगर जुलाई के पहले सप्ताह तक ऐसा नहीं करते हैं तो फिर वह भी आजाद होंगे और मैं भी। हालांकि बाजवा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कैप्टन और वह आजाद कैसे होंगे। एक अन्य सवाल के जवाब में बाजवा ने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि गुरु के साथ जो वादे किए गए हैं उन्हें पूरा किया जाए, हम उसके संपर्क में है। क्या बाजवा सिद्धू के संपर्क में हैं? इसके जवाब में बाजवा ने कहा, हां हम संपर्क में है। अगर सरकारी एजेंसियां किसी के खिलाफ भी कोई जुर्म करेगी तो हम एकजुट होंगे। अहम बात यह है कि बाजवा ने यह कहकर उन चर्चाओं को निर्मूल साबित कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि हाईकमान की घुड़की के बाद विरोधी गुट शांत पड़ गया है। बीते कल ही कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल से बात कर राज्य की राजनीतिक स्थिति से अवगत करवाया था। इसके बाद जाखड़ ने बयान जारी कर आम आदमी पार्टी में संभावनाएं ढूंढने वाले पार्टी नेताओं से सचेत रहने की अपील की थी। जाखड़ ने भले ही इस बयान में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा था कि वह प्रताप सिंह बाजवा पर ही हमला कर रहे हैं। हालांकि बाजवा ने जाखड़ के इस बयान पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन यह जरूर बता दिया कि कैप्टन के खिलाफ खड़ा होने वाला ग्रुप शांत नहीं हुआ है। हालांकि 45 दिन के बाद क्या होगा इसे लेकर बाजवा अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं।
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने कोविड से पीड़ित अपने राज्य के गरीब लोगों की मदद के लिए सरकारी खजाने का द्वार खोल दिया है। प्रदेश सरकार ने विशेष कार्य योजना के तहत निर्णय लिया है कि पैसे की कमी के चलते किसी गरीब का ईलाज नहीं रुकेगा। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले ऐसे लोग, जो घर में रहकर उपचार करा रहे हैं यानी होम आइसोलेट हैं, उन्हें सरकार एकमुश्त पांच हजार रुपये की चिकित्सा सहायता राशि प्रदान करेगी। यह राशि सीधे गरीब मरीजों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। हरियाणा के गृह, शहरी निकाय और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने रविवार को प्रदेश सरकार के इस अहम फैसले की जानकारी दी। इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निजी अस्पतालों में हरियाणा के लोगों के इलाज को प्राथमिकता देने वाले तथा बीपीएल कार्ड धारक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए कई अहम घोषणाएं की थी। हरियाणा सरकार पहले ही निर्णय ले चुकी है कि किसी भी अस्पताल में सात दिन तक इलाज कराने पर बनने वाले बिल में बीपीएल कार्डधारक व्यक्ति को 35 हजार रुपये की छूट प्रदान की जाएगी। इसके अलावा हरियाणा के लोगों को अपने यहां इलाज के लिए भर्ती करने पर कोविड रजिस्टर्ड अस्पतालों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन एक हजार रुपये दिए जाएंगे, जो अधिकतम सात दिन के लिए होंगे। यानी सात हजार रुपये की सहयोग राशि ऐसे अस्पतालों को मिलेगी। हरियाणा सरकार के अस्पतालों में करीब 40 फीसद मरीज ऐसे हैं, जो दिल्ली के हैं, लेकिन सरकार उन्हें भी इलाज के लिए मना नहीं कर रही है। इसके बावजूद सरकार चाहती है कि अपने राज्य के मरीजों को इलाज में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री राज्य के ग्रामीण इलाकों में रह रहे करीब 40 लाख परिवारों तक इलाज पहुंचाने के लिए आठ हजार टीमों का गठन पहले ही कर चुके हैं। 500 परिवारों पर एक टीम काम करेगी, जो गांव देहात में कोरोना महामारी से पीड़ित लोगों को राहत प्रदान करेगी। हरियाणा में 6700 गांव हैं। शहरी परिवारों की संख्या 20 लाख के आसपास है। साथ ही हर गांव में कोविड आइसोलेशन सेंटर बनाने की भी योजना है। गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज हाल ही में एक ऐसी किट भी लांच कर चुके हैं, जिसमें अंग्रेजी व देसी दवाइयों के साथ जरूरी उपकरण हैं, जो होम आइसोलेट मरीजों को मिलेगी। राज्य में करीब 98 हजार होम आइसोलेट मरीज हैं। किट की कीमत पांच हजार रुपये है।
लुधियाना पंजाब के लुधियाना में कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले लोगों को जेल की हवा खाने पड़ सकती है। जी हां, सरकार ने कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के लिए चार अस्थायी जेल तैयार की है। ये अस्थायी जेल बहादुर नगर के न्यू एसडी स्कूल, पाखोवाल रोड पर इनडोर स्टेडियम, मोती नगर में गुरु नानक स्टेडियम और वाल्मीकि भवन में स्थापित किए गए हैं। लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा ने एक ट्वीट कर यह जानकारी दी है। कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बना लुधियाना पंजाब में पहली बार कोरोना संक्रमण ने सबसे बड़ी छलांग लगाई है। शनिवार को एक दिन में संक्रमण के 9100 नए मामले सामने आए तो वहीं 171 लोगों की मौत भी हो गई। लुधियाना और मोहाली कोरोना संक्रमण को लेकर हाट स्पाट बने हुए हैं। वहीं बठिंडा में भी कोरोना ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा नहीं होने देंगे लॉकडाउन का उल्लंघन पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह ने दोहराया है कि पंजाब में कोविड-19 से उत्पन्न विकट परिस्थितियों के चलते सप्ताहांत लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने में नाकामी को छिपाने के लिये लॉकडाउन लागू किया है और वह केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को कमजोर करना चाहती है। सिंह ने कहा कि ये पाबंदियां लोगों की जान बचाने के लिये लागू की गई हैं।
चंडीगढ़,किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते, सवाल सारे गलत थे जवाब क्या देते।' हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रख्‍यात शायर मुनीर नियाजी की इन पंक्तियों के साथ विपक्ष को बजट प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अपना जवाब दिया। विधानसभा की मंगलवार को दो सीटिंग बजट प्रस्तावों पर हुई चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने देर रात नौ बजे तक सदन में विपक्ष द्वारा उठाए हर सवाल का बखूबी जवाब दिया। किस्से-कहानियों, चुटकुलों और शायरी के बीच सदन का माहौल बेहद खुशनुमा नजर आया। कभी मनोहर लाल ने किस्से सुनाए तो कभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने हरियाणवी अंदाज में कहावतें रखीं। इस दोरान राज्‍य में गरीबी को लेकर नए मापदंड भी रखे। रात नौ बजे तक चला सदन, सीएम ने दो घंटे तक दिया बजट प्रस्तावों पर जवाब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार देर शाम सात बजे बजट प्रस्तावों पर हुई चर्चा के बाद करीब दो घंटे तक अपनी बात रखी। उन्‍हाेंने हिंदी के महान कवि दुष्यंत की कविता की पंक्तियों से अपना जवाब खत्म किया। बाेले- 'हो गई पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए, सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए।' मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सदन में कहा, हम एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक आय वाले हर व्यक्ति को गरीब की श्रेणी में रखेंगे। भले ही उसके पास कार या चार मंजिला पक्का मकान हो। जातिवादी व्यवस्था से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की सोच करनी होगी। हर जिला मुख्यालय पर 200 बेड के अस्पताल बनाएंगे, 10 जिले ऐसे जहां 100 बेड के अस्पताल उन्होंने कहा कि हम हर जिला मुख्यालय पर 200 बेड के अस्पताल बनाएंगे, 10 जिले ऐसे हैं, जहां 100 बेड के अस्पताल हैं। नूंह में सबसे कम हैं। हम इन अस्पतालों को अपग्रेड करने को लेकर गंभीर हैं। डाक्टरों की कमी पूरी करने के लिए डाक्टरों की भर्ती लगातार होती रहेगी। उन्होंने विवादों का समाधान योजना शुरू करने का एलान किया, जिससे विभागों की पालिसी में बदलाव होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम बजट में ज्यादा काम करेंगे, ऐसे अफसरों को हम शाबाशी देंगे। साल के आखिर में दुरुपयोग होने वाले बजट को रोकेंगे। अंत्योदय योजनाओं में हम एक लाख गरीब परिवारों को लाभान्वित करेंगे। केंद्र व राज्य की योजनाओं का लाभ सबसे पहले गरीबों को मिलेगा। 32 सालों से शहरी व पंचायत निकायों को मजबूत करने की दिशा में पिछली सरकारों ने कोई काम नहीं किया, लेकिन हम इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पांच एस स्वावलंबन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वाभिमान पर रहेगा सरकार का फोकस उन्होंने कहा कि हमारा पांच एस पर फोकस रहेगा। यह पांच एस स्वावलंबन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वाभिमान हैं। र¨नग स्कूलों को अपग्रेड करने पर हमारा जोर है। दो लाख बच्चे ऐसे मिले, जिन्होंने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में दाखिले ले रखे थे। आधार कार्ड से इन्हें ¨लक करने के बाद यह गड़बड़ पकड़ी गई। मनोहर लाल ने कहा कि यह बजट किसानों को समर्पित है। कृषि क्षेत्र का पूरा ध्यान रखा गया है। माइक्रो इरीगेशन को बढ़ाने पर हमारा जोर है। 2006 के बाद के कर्मचारियों की पेंशन पर इसका असर पड़ सकता है। कोई व्यक्ति बीमार न हो, ऐसी व्यवस्थाएं करेंगे। 1100 वेलनेस सेंटर बनाने की योजना है। बची हुई बिजली सब्सिडी की राशि को विकास के कामों पर करेंगे खर्च मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि बिजली क्षेत्र में सब्सिडी कम होना अच्छी बात है। हमने बिजली की चोरी रोकी और हानियां कम की हैं। इसके बावजूद हमने न बिजली की कमी होने दी और न ही पानी की कमी रहने दी। सब्सिडी कम करने का मतलब है कि सरकार की बचत हो रही है। यह राशि किसी दूसरी जगह विकास के काम आएगी। हमने साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये बिजली सब्सिडी के क्षेत्र में ज्यादा रखे हैं। एक लाख का कर्जदार व्यक्ति 12.91 लाख की संपति का मालिक मुख्यमंत्री मनो‍हरलाल ने राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष को आंकड़ों के साथ जवाब दिया। उन्होंने माना कि हरियाणा पर दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। हर व्यक्ति पर यदि एक लाख रुपये का कर्ज है तो संपत्ति वैल्यू के हिसाब से वह 12 लाख 91 हजार रुपये का मालिक भी है। ऐसा नहीं है कि यह पैसा किसी के घर चला जाएगा या कोई व्यक्ति एक लाख रुपये का कर्ज दे देगा। यह सिर्फ आकलन है। हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र का दृश्‍य। हुड्डा बोले- सारे काम आपने ही कर दिए, मनोहर ने कहा चित-पट आपकी नहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के भाषण में कई बार हस्तक्षेप करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल ऐसा दावा कर रहे हैं कि जैसे सारे काम उन्होंने ही कर दिए। उनसे पहले ही किसी सरकार ने आज तक कोई काम नहीं किया। हुड्डा ने चुटकी ली कि मनोहर लाल यह भी कह सकते हैं कि हरियाणा उन्होंने ही बनाया। प्रदेश पर चढ़ रहे कर्ज को लेकर हुड्डा ने कहा कि हमारे कार्यकाल में कर्ज काफी कम था, लेकिन भाजपा ने कर्ज लेकर घी पीने का काम किया है। हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के कर्ज, आय और कामों की तुलना दूसरे राज्यों से करना गलत है। सरकार को अपना ठीक हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार वही वादे जनता से करे, जो पूरे कर सके। इसके जवाब में मनोहर लाल ने कहा कि ऐसा नहीं चलेगा कि चित भी आपकी और पट भी आपकी। हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के कर्ज, आय और कामों की तुलना दूसरे राज्यों से करना गलत है। सरकार को अपना ठीक हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार वही वादे जनता से करे, जो पूरे कर सके। इसके जवाब में मनोहर लाल ने कहा कि ऐसा नहीं चलेगा कि चित भी आपकी और पट भी आपकी।
अजनाला [अमृतसर]। भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगी कंटीली तार के पार जाकर सुरक्षा एजेंसियों ने सात किलो हेरोइन बरामद की है। यह कंसाइनमेंट पाकिस्तानी तस्करों ने BOP ध्यान सिंह पोस्ट के पास इनवर्टर वाली बैटरी में डालकर जमीन में दबा रखी थी। इसे भारतीय तस्करों ने मौका मिलते ही ठिकाने लगाना था, लेकिन स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को संयुक्त आपरेशन में यह बड़ी सफलता मिली है। मामले में 15 लाख की ड्रग मनी सहित दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपितों के कब्जे से चार मोबाइल भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों की पहचान तरनतारन के कोट बुड्ढा निवासी विशाल शर्मा और बोवाल निवासी प्रभजीत सिंह के रूप में बताई है। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापामारी कर रही है। STF के डीएसपी वविंदर महाजन ने बताया कि बार्डर आब्जर्विंग पोस्ट डीएस पुरा के पास हेरोइन की खेप छिपाकर रखी गई थी। लगभग चार घंटे बाद जमीन में दबी एक खाली बैटरी बरामद की गई। जब बैटरी को खोला तो उसमें छह किलो, 780 ग्राम हेरोइन छिपाकर रखी गई थी। STF ने कंटीली तार के साथ लगते चार गांवों से दर्जनभर संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दरअसल, रविवार को BSF ने फायरिंग कर चार तस्करों को गिरफ्तार किया था। आरोपित कंटीली तार पर स्थित BOP फतेहपुर के पास दो पाकिस्तानी तस्करों से मुलाकात करने पहुंचे थे। लगातार सर्च अभियान के बावजूद BSF को उस जगह से कोई खेप बरामद नहीं कर पाई, लेकिन बुधवार की शाम फतेहपुर पोस्ट से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित ध्यान सिंह BOP के नजदीक STF ने छह किलो 780 ग्राम हेरोइन बरामद कर ली। सीमा के साथ लगते चीचा गांव के पास पुलिस ने बुधवार शाम हेरोइन तस्करी के आरोप में एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपित के कब्जे से दो किलो हेरोइन, 35 हजार ड्रग मनी और बाइक बरामद की गई है। एसएसपी ध्रुव दहिया ने बताया कि मामले की जांच करवाई जा रही है। आरोपित रोशन सिंह से सीआइए स्टाफ में पूछताछ की जा रही है। गिरोह की महिला सदस्य संदीप कौर उर्फ बिल्लो की गिरफ्तारी के लिए छापे मारे जा रहे हैं। डीएसपी अभिमन्यु राणा ने बताया कि चीचा गांव का रेशम सिंह कुछ दिन पहले पाकिस्तान से भारत पहुंची हेरोइन की खेप को ठिकाने लगाने के लिए निकला था। नाके पर तलाशी के दौरान उसके थैले से दो किलो हेरोइन, 35 हजार रुपये ड्रग मनी और दो मोबाइल बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह अपने साथी सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा के साथ मिलकर पाकिस्तान द्वारा भेजी गई हेरोइन की कंसाइनमेंट को ठिकाने लगा चुका है। सुक्खा फरवरी 2020 में मारा गया था। डीएसपी ने बताया कि आरोपित ने स्वीकार किया है कि उसके गिरोह में लादोवाल गांव निवासी संदीप कौर उर्फ बिल्लो भी शामिल है। इसके बाद पुलिस ने बिल्लो के घर पर छापामारी कर दस ग्राम हेरोइन और दो मोबाइल बरामद किए हैं।
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में बढ़ रहे कोरोना (COVID19) के मामलों को लेकर कुछ और प्रतिबंधों का एलान किया है। राज्य में 31 मार्च तक शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने तथा सिनेमा हाल व मॉल की क्षमता पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज सभी जिलों के डीसी, एसएसपी व वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इस दौरान सीएम ने कोविड प्रोटोकाल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। कैप्टन ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी मास्क पहनने का सख्ती से पालन करें और जीवन को बचाने के लिए अन्य सुरक्षा सावधानियों को अपनाएं। कैप्टन ने इस बात के भी संकेत दिए कि सर्वाधिक कोरोना संक्रमित क्षेत्रों में कुछ और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पंजाब में सिनेमा हाल में क्षमता से 50 फीसद लोगों को ही एंट्री मिलेगी। माल में 100 अधिक व्यक्ति नहीं रह सकते। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि कोरोना की ट्रांसमिशन चेन को तोड़ने के लिए कम से कम दो हफ्ते तक सोशल एक्टिविटी से दूरी बनाए रखें। 11 सबसे प्रभावित जिलों में अंतिम संस्कार व शादियों को छोड़कर सभी सामाजिक समारोहों और संबंधित कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दिया गया है। अंतिम संस्कार व शादियों में 20 व्यक्तियों की उपस्थिति की ही परमिशन दी जाएगी।
मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (Punjab School Education Board PSEB) ने 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं एक माह के लिए स्थगित कर दी हैं। ऐसा राज्य में बढ़ते कोरोना के मामलों के कारण किया गया है। 12वीं की परीक्षाएं पहले 22 मार्च से शुरू होनी थी। अब यह परीक्षाएं 20 अप्रैल से होंगी, जबकि 10वीं की परीक्षा 9 अप्रैल से शुरू होनी थी। यह परीक्षा अब 4 मई से शुरू होगी। बता दें, इससे पहले पंजाब शिक्षा विभाग ने स्कूलों को बंद करने का फैसला किया था। हालांकि तब यह कहा गया था कि राज्य में परीक्षाएं जारी रहेंगी। परीक्षाएं आफलाइन ही करने की बात कही गई थी। पंजाब में बोर्ड परीक्षाएं अब एक माह देरी से शुरू होंगी। बारहवीं की 22 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाएं अब 20 अप्रैल से 24 मई तक होगी। वहीं दसवीं की परीक्षाएं 4 मई से 24 मई तक चलेगी। परीक्षाओं के समय में कोई तबदीली नहीं की गई। दसवीं की परीक्षाएं सुबह 10 से दोपहर सवा एक बजे तक होगी, जबकि बारहवीं की परीक्षा दोपहर दो बजे शुरू होकर 5.15 तक चलेगी। परीक्षाओं से संबंधित ज्यादा जानकारी बोर्ड की बेवसाइट पर ली जा सकती है। बारहवीं की ऐसे होगी परीक्षाएं 20 अप्रैल को आट्र्स की फिलास्पी, बुक कीपिंग अकाउंटेंसी, कॉमर्स ग्रुप अकाउंटेंसी 22 अप्रैल हिस्ट्री, सांइस, केमिस्ट्री, बिजनेस इकनोमिक्स, केमिस्ट्री 23 अप्रैल संस्कृत, बिजनेस आर्गेनाइजेशन एंड मैनजमेंट 26 अप्रैल जनरल अंग्रेजी 27 अप्रैल होम सांइस 28 अप्रैल जनरल पंजाबी, पंजाबी हिस्ट्री एंड कल्चरल 29 अप्रैल शारिरिक शिक्षा 30 अप्रैल पब्लिक एडमिनीस्ट्रेशन, बिजनेस स्टडीज 1 मई एनएसक्यूएफ विषय 3 मई रिलीजन, बायोलॉजी 4 मई इलेक्टिव विषय 5 मई वातावरण शिक्षा 6 मई कंप्यूटर एप्लीकेशन 7 मई डांस एडं एग्रीकल्चरल 10 मई राजनीतिक शास्त्र, फिजिक्स 11 मई स्वागत जिंदगी 12 मई कंप्यूटर साइंस 13 मई नेशनल केंडेट कॉप्स 15 मई गणित 17 मई भूगोल 18 मई म्यूजिक, फंडामेटल ऑफ ई बिजनेस 19 मई म्यूजिक 21 मई इकनोमिक्स 24 समाजशास्त्र दसवीं की इन दिनों होगी परीक्षा 4 मई पंजाबी ए 5 मई संगीत वादन 6 मई संगीत तबला 7 मई अंग्रेजी 10 मई विज्ञान 11 मई इलेक्टिव विषय 12 मई संगीत गायन गृह विज्ञान 13 मई एनएसक्यूएस 15 मई हिंदी 17 मई सामाजिक विज्ञान 18 मई कंप्यूटर साइंस 19 मई शारिरिक शिक्षा 20 मई पंजाबी बी 21 मई स्वागत जिंदगी 24 मई गणित लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले बता दें कि पंजाब में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इससे मौतों की संख्‍या भी बढ़ रही है। इसके साथ ही कोरोना के नए स्‍ट्रेन का मामला मिलने के बाद पंजाब सरकार की टेंशन बढ़ गई है। इससे पहले पंजाब सरकार ने शुक्रवार को राज्‍य में 12वीं तक के स्‍कूल बंद करने की घोषणा कर दी थी। राज्‍य में 22 मार्च से बोर्ड की परीक्षाएं शुुरू होनी थी, लेकिन इससे पहले ही सोमवार शाम पंजाब सरकार ने परीक्षाओं को स्‍थगति करने का फैसला किया। राज्‍य में 1600 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की रविवार को पुष्टि हुई थी और 20 काेरोना वायरस के मरीजों की मौत हो गई थी। कोरोना के कारण पिछले साल भी स्‍कूल कई महीने तक बंद रहे थे और इस साल स्‍कूली शिक्षा फिर पटरी पर लौटने लगी थी। इसकी कारण स्‍कूलों में परीक्षाएं भी आयोजित करने के कार्यक्रम जारी हुई। लेकिन, राज्‍य में कोरोना वायरस (CoronaVirus) के संक्रमण में तेजी आने से स्‍कूली शिक्षा के फिर प्रभावित होने की आशंका है।
अमृतसर पंजाब के अमृतसर में कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब साढ़े पांच महीनों से रेल की पटरियों पर बैठे किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है। किसानों ने गेहूं की फसल की कटाई के सीजन के मद्देनजर अपने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला किया है। यहां बैठे किसान 169 दिनों के बाद धरने से उठे हैं। डेप्युटी कमिश्नर गुरप्रीत खेड़ा ने कहा, 'अमृतसर के जंडियाला गुरु रेलवे स्टेशन पर धरना खत्म हो गया है। पैसेंजर ट्रेन अब यहां चलने लगी हैं।' प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रेनों के रद्द होने से किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा था। किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर रेल विभाग की तरफ से कुछ ही गाड़ियां चलाई जा रही थीं। जंडियाला स्टेशन से किसानों का धरना स्थगित होने के बाद से अब दिल्ली से अमृतसर के बीच सीधी यातायात सेवा शुरू हो गई है। रूट खुलने से यात्रियों के साथ ही कुलियों को भी राहत मिली है। कुलियों के अनुसार बीते लंबे समय से उनका कामकाज ठप पड़ा था। किसानों ने अमृतसर में रेलवे ट्रैक भले ही खाली कर दिया हो लेकिन अभी भी वे दिल्ली की सीमाओं पर जमे हुए हैं। पिछले साल नवंबर के अंतिम सप्ताह से सिंघू, टिकरी, गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन अभी जारी है।
सोनीपत,कृषि कानून विरोधी आंदोलन को कुंडली बॉर्डर पर 105 दिन बीत चुके हैं। कड़ाके की ठंड के बाद अब यहां बैठे आंदोलनकारियों को गर्मी सताने लगी है। इसे देखते हुए आंदोलनकारियों ने धरनास्थल पर पक्के निर्माण शुरू कर दिए हैं। प्लास्टिक व कपड़ों की तिरपाल से बने तंबू में बढ़ती गर्मी और धूप से होने वाली परेशानी को देखते हुए रहने के लिए ईंटों से निर्माण कार्य शुरू किया गया है। इसके लिए पंजाब से ट्रैक्टर-ट्रालियों में ईंटें भरकर लाईं गईं हैं। कुंडली बॉर्डर पर जीटी रोड का जाम करके धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने गर्मी से बचने के लिए तरह-तरह के उपाय शुरू कर दिए हैं। एसी ट्राली व एसी तंबुओं के अलावा अब रोड पर ही पक्का निर्माण भी शुरू किया गया है। कुंडली में जीटी रोड पर पानीपत-दिल्ली लेन पर मुख्य मंच से थोड़ा आगे ईंट व सीमेंट से कमरों का निर्माण शुरू किया गया है। अभी कमरों की नींव बनाने का काम शुरू हुआ है। इन कमरों के ऊपर सरकंडे व पराली से छत बनाई जाएगी, ताकि अंदर ठंडक रहे। ईंट से कमरों का निर्माण करने वालों ने बताया कि यहां पर आंदोलनकारियों के लिए रैन बसेरे की तर्ज पर कमरे बनाए जा रहे हैं। चारों ओर से ईंट और सीमेंट की मोटी दीवार और ऊपर पराली की छत होने से गर्मी से बचाव होगा। इसके अलावा इन कमरों में लगाने के लिए कूलरों की भी व्यवस्था की जा रही है। पंजाब के किसान जत्थेबंदी के नेता मनजीत राय ने कहा कि जो किसान मोर्चा के सेवादार हैं, उन्होंने एलान कर दिया है कि आप पक्के मकान बनाओ, एसी-कूलर हम भिजवा देंगे। उनकी जत्थेबंदी मकान का निर्माण करवा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी में हिम्मत है तो इसे रोक कर दिखाए। 'यहीं कब्जा करेंगे, प्लाट भी काटेंगे' मुख्य मंच से आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए मनजीत ने कहा कि इस कानून से जितना हमारा नुकसान होगा, उसकी भरपाई यहीं से करके जाएंगे। हमारा जितना नुकसान होगा, उतना हम यहां कब्जा करके बैठ जाएंगे और प्लाट भी काटेंगे। पुलिस ने काम रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर एलान कर दिया कि उनके निर्माण कार्य को रुकवाने का प्रयास न किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस वाले पूछते हैं कि पक्के निर्माण, ट्यूबवेल लगवाने की मंजूरी किस से ली है। इसका जवाब है कि ये तीनों कृषि कानून बनाने के लिए किससे मंजूरी ली गई है। यदि इसका जवाब सरकार देगी तो हम भी जवाब दे देंगे। जैसे सरकार ने इस कानून की मंजूरी नहीं ली, वैसे ही हम भी यहां रहने के लिए मंजूरी नहीं लेंगे और जैसे हमारा दिल करेगा, वैसे ही रहेंगे।
सोनीपत ,कृषि कानून विरोधी आंदोलन की आगामी रणनीति बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक 11 मार्च को होगी। पहले यह बैठक मंगलवार को प्रस्तावित थी। मोर्चा के नेता सुरजीत सिंह फूल ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से यह जानकारी सांझा की। उन्हाेंने बताया कि हरियाणा सरकार के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव के बाद मोर्चा आंदोलन की आगामी रणनीति तय करेगा। मोर्चा के नेता सुरजीत फूल ने ऑनलाइन आकर दी जानकारी कृषि कानूनों के विरोध में कुंडली बार्डर पर साढ़े तीन माह से आंदोलनकारी जीटी रोड को जाम करके बैठे हैं। 22 जनवरी को मोर्चा के नेताओं और सरकार के बीच बातचीत हुई थी। सरकार कानूनों को लंबित रखने और इसमें संशोधन का प्रस्ताव दे चुकी है, लेकिन मोर्चा के नेता इसे पूरी तरह से रद कराने पर अड़े हैं। इसके कारण बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से मोर्चा के नेता सुरजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रसताव लाया गया है, जिस पर 10 मार्च को वोटिंग होगी। सरकार पर बैठक के लिए बनाएंगे दबाव हरियाणा की भाजपा सरकार ने आंदोलन स्थल पर दंगे कराने की कोशिश करने के अलावा कई तरह के हथकंडे अपनाकर आंदोलन को दबाने की कोशिश की है। इसलिए सरकार के खिलाफ वोटिंग के लिए विधायकों पर दबाव बनाया जा रहा है। यदि इसमें हमें सफलता मिलती है तो यह मोर्चा की बड़ी जीत होगी और इससे केंद्र सरकार पर दबाव बनेगा और फिर इसी के अनुरूप आंदाेलन की आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी। आंदोलन को तेज करने पर निर्णय इसलिए मोर्चा की बैठक 11 मार्च को रखी गई है। उन्होंने कहा कि बैठक में आंदोलन को तेज करने के लिए मानव शृंखला, कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे को स्थायी तौर पर जाम करने व संसद भवन कूच करने का भी निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे सरकार के लिए समस्या खड़ी करेंगे, तभी सरकार उनके साथ बैठक करेगी। मोर्चा की बैठक में इन्हीं सब बातों पर विचार कर कोई एक्शन प्रोग्राम तय किया जाएगा।
जगराओं,खेतों में महिलाओं को ट्रैक्टर चलाते देख लोग पहले हैरान होते थे, लेकिन लुधियाना जिले की एक महिला ने न सिर्फ आधुनिक खेती की, बल्कि उसने ड्रैगन फ्रूट की पैदावार कर अनोखी मिसाल भी कायम की है। इतना ही नहीं, जैविक खेती के साथ वह अपने उत्पादों की सेल्फ मार्केटिंग भी करती हैं। गांव गदोवाल की हरप्रीत काैर अपनी छह एकड़ की जमीन में कृषि विभिन्नता व सूबे के गिरते भूजल स्तर को ध्यान में रख खेती करती हैं और एक एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती करती हैं। वह जैविक तरीके से खेती करती हैं। जब फलों व सब्जियों की खेती शुरू की तो उन्होंने ठान लिया था कि हम खुद के अलावा दूसरों को भी जहर मुक्त चीजें खाने के लिए देंगे। फार्म पर हर प्रकार के फलों सेब, एप्पल बेर, नींबू, आड़ू, अनार, किन्नू, अमरूद, पपीता की खेती करते हैं। इसके अलावा सब्जियों में गाजर, शलगम, मूली, कद्दू, करेला, रामतोरी, चप्पनकद्दू, पेठा, भिंडी व शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा, ककड़ी, मटर की खेती करते हैं। हरप्रीत कौर ने बताया कि फलों व सब्जियों की खेती में खेत तैयार करने से लेकर बिजाई, तोड़ाई व मार्केटिंग तक का खुद दंपती काम करता है। उन्होंने बताया कि आजकल विवाह-शादियों में विदेशी फलों के प्रचलन के बाद सोचा कि आखिर क्यों न हम विदेशी फलों यानि ड्रैगन फ्रूट की खेती करें। क्योंकि हम दोनों ग्रेजुएट है इसलिए हम दोनों ने दो वर्ष पहले इंटरनेट के जरिये विदेशी फलों की खेती के बारे में जानकारी एकत्रित करनी शुरू कर दी। इसके लिए ड्रैगन फ्रूट के बारे में जब इंटरनेट के जरिये जानकारी एकत्रित कर ली। ड्रैगन फ्रूट की कलमें कोलकाता से खरीद कर लाए। इसके लिए एक एकड़ में 500 सीमेंट के पिलर खेत में ही तैयार किए। प्रत्येक पौधा पिलर से जोड़ दिया गया है जोकि ऊपर जाकर गोलाकार आकार में आएगा और फल लगेंगे। एक पौधे से 20 किलो के करीब फल उतरता है। इसलिए अब रात-दिन ड्रैगन फ्रूट का पूरा ध्यान रख रही हैं। विदेशी फ्रूट की खेती करने वाली अकेली महिला किसान अभी तक वह अकेली महिला किसान हैं जिसने अपने खेतों में विदेशी यानि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। हरप्रीत ने बताया कि तीन बच्चों दो बेटे व एक बेटी कनाडा में हैं और सभी कनाडा गए थे लेकिन लौट आए। दूसरों के खेतों में फसल तोड़ने से अच्छा अपने खेत में अपने तरीके से खेती कर जिंदगी जी जाए।
नई दिल्ली, जी -23 की कांग्रेस गाथा जारी रहेगी क्योंकि समूह हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में एक दूसरे कार्यक्रम की योजना बना रहा है। जबकि नेता पार्टी के फैसलों पर दूर होते नजर आ रहे हैं और पार्टी आलाकमान स्थिति का आकलन कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान हालात से सावधानी से निपट रहा है ताकि पार्टी कैडर को कोई गलत संदेश न जाए। शीर्ष नेतृत्व उन वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के मूड में नहीं है, जो जम्मू में गांधी ग्लोबल फैमिली के कार्यक्रम में एकत्र हुए थे और उनकी टिप्पणी के लिए उनसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया। यह समझना आसान है कि शीर्ष नेतृत्व किसी भी तरह की सार्वजनिक शर्मिंदगी से बच रहा है। कुरुक्षेत्र जिले में एक रैली की योजना चल रही है। हालांकि यह अभी तक तय नहीं किया गया है कि यह किस बैनर के तहत होगा। जी -23 के नेता जम्मू में मोर्चा खोलने के बाद तनाव की स्थिति को सामान्य करने के मूड में नहीं हैं, जिसमें आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, राज बब्बर, भूपिंदर सिंह हुड्डा जैसे नेताओं ने कहा कि पार्टी कमजोर हो रही है जो कि विपक्ष को भी कमजोर कर रही है। सिब्बल ने आजाद की वकालत करते हुए कहा था, 'हम नहीं जानते कि पार्टी गुलाम आज़ाद के अनुभव का उपयोग क्यों नहीं कर रही है।' जवाब में, पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मंच से कहा, 'यह बेहतर होता अगर वे पांच चुनावों में कांग्रेस की मदद करते। ये सम्मानित नेता हैं और हम उनका सम्मान करते हैं।' नेता ने कहा, जिसने इस्तेमाल शब्द का इस्तेमाल किया है, वह पार्टी की विरासत को नहीं जानता है। जिस आदमी के बारे में इस शब्द का इस्तेमाल किया गया है, वह सात बार कांग्रेस का सांसद रहा है। उन्होंने कहा कि सोनिया जी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इंदिराजी ने केंद्र सरकार में कैबिनेट में जगह दी। वह पार्टी में महासचिव रह चुके हैं और उन्होंने पूरे देश में 20 से अधिक राज्यों में पर्यवेक्षण किया है। समूह के एक वरिष्ठ नेता, जिन्होंने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा और जम्मू में गांधी ग्लोबल फैमिली फंक्शन में उपस्थित थे, ने एएनआई को बताया कि कार्यक्रम के बाद एआईसीसी से किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया और हमें कांग्रेस के लिए काम करने की सलाह दी जा रही है। चुनाव हैं लेकिन हमें पार्टी द्वारा स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया है। अगर हम चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं, तो यह एक उम्मीदवार के खर्च में शामिल होगा और हमसे संपर्क नहीं किया गया है और किसी भी कार्य को सौंपा नहीं गया है, लेकिन हम पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे और हम अन्य राज्यों में भी जाएंगे।
फरीदाबाद । हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला मंगलवार को फरीदाबाद में जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। भूपेंद्र हुड्डा पर तंज कसते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि वह हमारी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव क्या लाएंगे, हुड्डा अपनी ही पार्टी कांग्रेस में विश्वास खो चुके हैं। अब तो हुड्डा सोनिया गांधी के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। किसान आंदोलन पर दुष्यंत चौटाला ने कहा, सभी 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधि एक मंच पर आकर सरकार से वार्ता करें और कृषि सुधार कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन‌ का हल निकालें। पांच मार्च से शुरू हो रहा है हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र दरअसल, हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र पांच मार्च से शुरू हो रहा है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने पहले ही एलान किया है कि वह भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। पिछले दिनों कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह फैसला किया गया था कि केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य सरकार को घेरेगी। भूपेंद्र सिंह हु़ड्डा का कहना था कि पार्टी विधानसभा के अंदर और बाहर किसानों के मुद्दे पर हरियाणा सरकार पर दबाव बनाएगी। पार्टी किसानों के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार का सड़क से लेकर विधानसभा तक विरोध करेगी। विधानसभा में भूपेंद्र हुड्डा नेता प्रतिपक्ष हैं। अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को कोई खतरा नहीं बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 40, जननायक जनता पार्टी (Jannayak Janata Party) यानी जजपा को दस और कांग्रेस को 31 सीटें मिली थी। जबकि अन्य के खाते में 9 सीटें गई थी। प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार है। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम बनाया गया था। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से भाजपा-जजपा सरकार को बहुमत हासिल है। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को कोई खतरा नही है।
चंडीगढ़ 2017 में कांग्रेस पार्टी को पंजाब चुनाव में जीत दिलाने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फर कैप्टन अमरिंदर सिंह का हाथ थाम लिया है। प्रशांत किशोर एक बार फिर कैप्टन के चुनावी अभियान के लिए काम करने वाले हैं और इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार नियुक्त किया गया है। प्रशांत किशोर अब अगले कुछ वक्त तक पंजाब सरकार के साथ काम करेंगे और इसके बाद पंजाब के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चुनावी अभियान का जिम्मा संभालेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार बने प्रशांत फिलहाल पश्चिम बंगाल के चुनाव के लिए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का चुनावी अभियान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार से लेकर जगन मोहन रेड्डी तक का दिया साथ पूर्व में वह 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सीएम नीतीश कुमार के साथ जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि कुछ साल के बाद प्रशांत ने जेडीयू से इस्तीफा देकर बिहार में आरजेडी का हाथ थाम लिया था। प्रशांत इन पार्टियों के अलावा महाराष्ट्र में शिवसेना और आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस का भी प्रचार कर चुके हैं। 2017 में 'ब्रांड कैप्टन' बनाने पर किया काम पंजाब में 2017 में हुए चुनाव के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ प्रशांत किशोर ने एक बड़ा प्रचार अभियान चलाया था। 10 साल तक सत्ता से बाहर रही कांग्रेस पार्टी ने उस वक्त प्रशांत किशोर की पार्टी से हाथ मिलाया था और प्रशांत ने कैप्टन के लिए जमकर प्रचार भी किया था। इस चुनाव में प्रशांत ने कॉफी विद कैप्टन और अन्य कई कैंपेन के जरिए कांग्रेस को एक मजबूत पार्टी के रूप में प्रशस्त करने की कोशिश की थी। इसके असर से ही कैप्टन चुनाव में जीत हासिल करने में सफल हुए और फिर पंजाब के सीएम भी बने।
चंडीगढ़ केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान यूनियनों ने शनिवार को राष्ट्रव्यापी 'चक्का जाम' किया। इस दौरान पंजाब के लुधियाना शहर से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पर हो रहे किसानों के चक्का जाम के दौरान एक ट्रैक्टर में लगे झंडे में भिंडरावाले जैसे शख्स की तस्वीर दिखी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में चक्का जाम में भी खालिस्तानी तत्व घुसपैठ करने में कामयाब रहे? दरअसल शनिवार को एएनआई न्यूज एजेंसी की ओर से लुधियाना में किसानों के चक्का जाम का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में एक ट्रैक्टर पर झंडा लगा है, जिसमें जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसे शख्स की तस्वीर नजर आ रही है। पंजाब और हरियाणा में किसानों ने जाम की सड़कें पंजाब और हरियाणा में किसान निकायों से जुड़े प्रदर्शनकारी किसानों ने शनिवार को अलग-अलग स्थानों पर स्टेट और नेशनल हाइवे पर चक्का जाम किया। इसके कारण यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। भारती किसान यूनियन (एकता उग्रहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरिकलां ने कहा कि वे पंजाब के संगरूर, बरनाला और बठिंडा समेत 15 जिलों के 33 स्थानों पर सड़कें जाम कर रहे हैं। किसानों ने दी थी चेतावनी किसान यूनियनों ने सोमवार को घोषणा की थी कि प्रदर्शन स्थलों के आसपास के इलाकों में इंटरनेट पर पाबंदी लगाने, अधिकारियों की ओर से कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने और अन्य मुद्दों को लेकर वह छह फरवरी दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक देशव्यापी चक्का जाम के दौरान विरोधस्वरूप स्टेट और नेशनल हाइवे जाम करेंगे।
फाजिल्‍का, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्‍यक्ष सुखबीर सिंह बादल की गाड़ी पर जलालाबाद में कुछ लोगों ने हमला किया है। अकाली-कांग्रेसी वर्करों में जबरदस्त झड़प और फायरिंग हुई। घटना के बाद तनाव है। हमले में शिअद की एक गाड़ी और कांग्रेस नेताओं के काफिले की दो गाडिय़ों को नुकसान हुआ है। कई लोगों के घायल होने की सूचना भी है। झड़प नगर परिषद चुनाव के लिए नामांकन के दौरान हुई। इस घटना के कारण नामांकन का कार्य रूक गया था और अब इसे दोबारा शुरू कर दिया गया है। सुखबीर बादल पूरी तरह सुरक्षित हैं और कोर्ट परिसर के अंदर ही मौजूद हैं। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी है। सुखबीर बादल ने कहा कि हमला कांग्रेसियों ने किया। शिअद के तीन कार्यकर्ता गोली लगने से घायल हुए हैं1 वह इस तरह के हमले से नहीं डरते हैं। उधर तरनतारन के भिखीविंड में भी स्‍थानीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन के दौरान शिअद व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हो गया। सुखबीर बोले- हमले से नहीं डरता, जब तक नामांकन पत्र नहीं भरे जाते यहीं रहूंगा झड़प के बाद सुखबीर बादल ने वहां मौजूद वर्करों को संबोधित किया। उन्‍होंने कहा कि उन पर कांग्रेसियों द्वारा हमला किया गया। इस दौरान वहां तैनात पुलिस ने भी बीच-बचाव को लेकर कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसे हमलों से नहीं डरते हैं।वह पार्टी के उम्‍मीदवारों के साथ नामांकन पत्र भरने के लिए जा रहे रहे थे कि दरवाजा बंद कर दिया गया और उसके बाद झड़प शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस झड़प में उनके तीन समर्थकों को गोली लगी है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट परिसर में उनके वर्कर पहुंच चुके हैं और वह नामांकन पत्र भरे जाने तक यहीं रहेंगे, कहीं नहीं जाएंगे। उधर मौके पर मौजूद एसएसपी हरजीत सिंह ने कहा कि कोर्ट कांप्लेक्स में फाजिल्का के एसपी सहित तीन गजटेड अफसर तैनात किए गए थे। यहां कुछ कहासुनी को लेकर झड़प की वारदात हुई है। इसकी पुलिस जांच कर रही है। वह अभी यहां आए हैं और सभी तरह की जानकारी लेने के बाद बनती कार्रवाई की जाएगी। प्रत्याशियों के नामांकन पत्र दाखिल करने मौके एसडीएम कार्यालय में पहुंचे थे बादल विवाद उस समय हुआ जब नगर परिषद चुनाव के लिए जलालाबाद हलके में शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार नामांकन पत्र भरने जा रहे थे। नामांकन में मौजूद रहने के लिए पहुंचे पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि अकाली वर्करों व कांग्रेसी वर्करों के बीच भिड़ेत हो गई और इसी दौरान कुछ लोगों ने सुखबीर बादल की गाड़ी पर हमला कर दिया। फिलहाल पुलिस माहौल को शांतकरने के लिए जुटी हुई है। किसी को भी न तो कोर्ट परिसर के भीतर जाने दिया जा रहा है और न ही बाहर आने की दिया जा रहा है। इस झड़प के दौरान कुछ लोगों ने सुखबीर सिंह बादल की गाड़ी की तोड़ फोड़ की। वहीं फायरिंग होने की भी सूचना है। लेकिन, अभी पुलिस प्रशासन इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रहा। शिअद के नेता व वर्कर कांग्रेसियों पर हमला करने के आरोप लगा रहे हैं। इस समय स्थिति तनावपूर्ण है।
चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने करनाल जिले के कैमला गांव में 'किसान महापंचायत' के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की कड़े शब्दों में निंदा की है। सीएम खट्टर ने इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ होने का आरोप लगाया है। खट्टर ने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ लेकर कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी अपनी खोई जमीन हासिल करने की कोशिश में लगी हैं। इसके साथ ही उन्होंने बीकेयू नेता गुरनाम सिंह चरूनी पर भी निशाना साधा। हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर रविवार शाम करनाल जिले के कैमला गांव में प्रदर्शनकारी किसानों की ओर से 'किसान महापंचायत' के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ किए जाने के बाद चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित किया।। सीएम खट्टर ने कहा कि प्रशासन ने शनिवार को (विरोध करने वाले किसानों) लोगों से बात की थी। इस पर वे सांकेतिक विरोध करने के लिए सहमत हो गए थे। प्रशासन ने उन पर भरोसा करते हुए पूरी तैयारी की थी। आज इस कार्यक्रम में 5000 से अधिक लोग उपस्थित थे। लेकिन कुछ युवा अपना वादा निभाने में असफल रहे। कांग्रेस पर बोला हमला हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कोई भी बोलना चाहता है, उसमें बाधा डालना सही नहीं है। मुझे नहीं लगता कि लोग डॉ बीआर अंबेडकर की ओर से दिए गए प्रावधानों के उल्लंघन को बर्दाश्त करेंगे। कांग्रेस ने 1975 में लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया था। उस समय लोगों ने उनके घृणित कार्य की पहचान की और उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। किसानों को तीन कृषि कानूनों के 'फायदे' बताने वाले थे खट्टर दरअसल हरियाणा में करनाल जिले के कैमला गांव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर लोगों को केंद्र के तीन कृषि कानूनों के 'फायदे' बताने वाले थे। इससे पहले पुलिस ने कैमला गांव की ओर किसानों के मार्च को रोकने लिए उन पर पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े। बहरहाल, प्रदर्शनकारी कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए और 'किसान महापंचायत' कार्यक्रम को बाधित किया। उन्होंने मंच को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुर्सियां, मेज और गमले तोड़ दिए। किसानों ने अस्थायी हेलीपेड का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया जहां मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरना था। गुरनाम सिंह चरूनी के कहने पर किसानों ने किया हुड़दंगी व्यवहार बीजेपी नेता रमण मल्लिक ने बताया कि बीकेयू नेता गुरनाम सिंह चरूनी के कहने पर किसानों के हुड़दंगी व्यवहार के कारण कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। पुलिस ने गांव में मुख्यमंत्री की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इस गांव में खट्टर लोगों को केंद्र के तीन कृषि कानूनों के 'फायदे' बताएंगे। भारतीय किसान यूनियन (चरूनी) के तत्वावधान में किसानों ने पहले घोषणा की थी कि वे 'किसान महापंचायत' का विरोध करेंगे। वे तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसान काले झंडे लिए हुए थे और बीजेपी नीत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कैमला गांव की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। किसानों ने मंच पर किया कब्जा पुलिस ने गांव के प्रवेश स्थानों पर बैरीकेड लगा दिए ताकि वे कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच पाएं। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसान इस बात पर अड़ गए कि वे मुख्यमंत्री को कार्यक्रम नहीं करने देंगे। पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारी किसानों को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दिए लेकिन वे मंच पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ गए। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि हम सरकार को यह कार्यक्रम नहीं करने देंगे।
नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2020,केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए तीन कृषि कानून निरस्त करने की मांग को लेकर अन्नदाता सड़कों पर आंदोलन कर रहा है, वहीं सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी कांग्रेस के बीच भी इस मुद्दे को लेकर तलवारें खिंचती दिख रही हैं. विपक्षी दलों पर किसान आंदोलन को गुमराह करने और हाईजैक करने के आरोप लगाती रही बीजेपी के एक नेता ने अब कांग्रेस सांसद के खिलाफ शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. दिल्ली बीजेपी के नेता नवीन कुमार ने नई दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (डीसीपी) को शिकायत देकर पंजाब के लुधियाना से कांग्रेस के सांसद रवनीत सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. डीसीपी को दी गई शिकायत में नवीन ने रवनीत सिंह के एक बयान का जिक्र किया है जिसमें उन्होंने कथित रूप से किसानों को संबोधित करते हुए यह कहा था कि अब ये सोच रहे हैं कि यहां बैठे-बैठे हम थक जाएंगे. नवीन कुमार की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक रवनीत ने आगे कहा था कि नहीं हम लाशों के भी ढ़ेर लगाएंगे, अपना खून भी. इसके लिए कहीं भी किसी हद तक भी जा सकते हैं. एक तारीख के बाद हम नई प्लानिंग के साथ आएंगे. नवीन कुमार ने साक्ष्य के तौर पर नई दिल्ली के डीसीपी को लुधियाना के कांग्रेस सांसद के बयान की सीडी भी दी है. दिल्ली बीजेपी के नेता ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के लोकसभा सांसद अपने इस बयान से किसान आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने डीसीपी से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 503, 505 और 511 के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है. दिल्ली पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि फिलहाल रवनीत के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
चंडीगढ़ ऐसा लगता है कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह की किसानों से मोबाइल टावर जैसी दूरसंचार क्षेत्र की ढांचागत सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील का कोई असर नहीं पड़ा है। उनके आग्रह के बावजूद एक रात में ही 150 से अधिक दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाया गया। दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाने के पीछे यह कहानी कही जा रही है कि नए कृषि कानूनों से मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे उद्योगपतियों को लाभ होगा। इस आधार पर पंजाब में विभिन्न स्थानों पर रिलायंस जियो के टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे दूरसंचार संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा। हालांकि, यह अलग बात है कि अंबानी और अडाणी से जुड़ी कंपनियां किसानों से अनाज नहीं खरीदती हैं। मामले से जुड़े दो सूत्रों ने कहा कि शनिवार से अब तक 151 दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचा है। इससे अब तक कुल 1,338 दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। ज्यादातर जियो के टावरों को पहुंचाया गया नुकसान एक सूत्र ने बताया कि पंजाब के विभिन्न स्थानों से दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना है। जिन दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है, उनमें से ज्यादातर जियो और दूरसंचार उद्योग के साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं से जुड़े हैं। सूत्रों ने कहा कि हमलों का असर दूरसंचार सेवाओं पर पड़ा है और परिचालकों को पुलिस की तरफ से कार्रवाई नहीं होने के कारण सेवाओं को बहाल करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सीएम अमरिंदर सिंह ने की थी अपील पंजाब के मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारी किसानों से इस प्रकार के कार्यों से आम लोगों को असुविधा नहीं पहुंचाने की अपील की। उन्होंने किसानों से कहा कि जिस संयम के साथ वे आंदोलन करते आए हैं, उसे बरकरार रखें। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में कहा था, 'मुख्यमंत्री ने कोविड महामारी के बीच दूरसंचार संपर्क व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया और किसानों से आंदोलन के दौरान उसी तरह का अनुशासन और जिम्मेदारी दिखाने को कहा जिसे वह दिल्ली सीमा पर और पूर्व के विरोध-प्रदर्शन में दिखाते आए हैं।' किसान आंदोलन को एक महीना बता दें कि किसानों के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को एक महीना पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री की यह अपील टावर ऐंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स असोसिएशन (टीएआईपीए) के आग्रह पर आई है। दूरसंचार बुनियादी ढांचा प्रदाताओं के इस पंजीकृत संघ ने राज्य सरकार से किसानों को अपनी न्याय की लड़ाई में किसी भी गैरकानूनी गतिविधि का सहारा नहीं लेने को लेकर अनुरोध करने का आग्रह किया था।
नई दिल्ली, 24 दिसंबर 2020,हरियाणा के जींद जिले के उचाना में किसानों ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आने से पहले बनाए गए हेलीपैड को फावड़े से खोद डाला. इतना ही नहीं किसानों ने दुष्यंत चौटाला गो बैक के नारे भी लगाए. दरअसल दुष्यंत चौटाला के हेलिकॉप्टर को आज इस हेलीपेड पर लैंड करना था. किसानों के विरोध को देखते हुए दुष्यंत चौटाला का दौरा रद्द कर दिया गया. किसानों का कहना है कि जब तक दुष्यंत चौटाला किसानों का समर्थन नहीं करते तब तक उन्हें इस क्षेत्र में घुसने नहीं देंगे. किसानों का कहना था कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला इस्तीफा देकर किसानों के बीच में आएं. उन्होंने कहा कि यहां जो भी नेता आएगा उसका इसी तरह विरोध किया जायगा. हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर को दिखाए थे काले झंडे किसानों ने एक दिन पहले ही केंद्र सरकार के नए कृषि कानून का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के काफिले को रोक कर काले झंडे दिखाए थे और लाठियां भी चलाई थीं. इस मामले में हरियाणा पुलिस ने 13 किसानों के खिलाफ हत्या और दंगे के प्रयास का मामला दर्ज किया है. किसानों के खिलाफ अंबाला में ही मामला दर्ज किया गया है. जहां मंगलवार को प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह ने मुख्यमंत्री खट्टर को उस वक्त काले झंडे दिखाए थे, जब उनका काफिला अंबाला शहर से गुजर रहा था. खट्टर आगामी निकाय चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने के लिए शहर में आए थे. ठीक उसी वक्त अग्रसेन चौक पर किसानों ने मुख्यमंत्री के काफिले को देखकर काले झंडे लहराए थे. उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी. पुलिस ने बुधवार को कहा कि कुछ किसानों ने काफिले की ओर बढ़ने की कोशिश की और कुछ समय के लिए रास्ता अवरुद्ध कर दिया था. पुलिस के मुताबिक उनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों पर लाठियां भी बरसाईं.
दिल्ली, 09 दिसंबर 2020,पंजाब में आतंकवादियों से लोहा लेने वाले शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह संधु की हत्या ने पूरे देश को दहला के रख दिया था. बीती 16 अक्टूबर को तरनतारन में हुए इस कत्ल की वारदात ने लोगों को खौफजदा कर दिया था. इसकी दो वजहें थीं. जिस तरह से कातिलों ने घर में घुस कर सुबह-सवेरे वहां रहने वाले बलविंदर का कत्ल किया, वैसा कम ही देखने को मिलता है. और दूसरा ये कि मृतक की इन दिनों किसी से कोई खास दुश्मनी नहीं थी. मगर बलविंदर सिंह संधु की एक खास पहचान ये थी कि आतंकवाद के जमाने में उन्होंने खालिस्तानी आतंकियों से जमकर लोहा लिया था और बदले में सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र देकर सम्मानित भी किया था. ऐसे में कत्ल के दिन से ही सवाल ये था कि कहीं इस कत्ल के पीछे आतंकवादियों का हाथ तो नहीं. अब आइए, पंजाब के तरनतारन के बाद सीधे देश की राजधानी दिल्ली की बात करते हैं. दिल्ली का शकरपुर इलाका. सोमवार का दिन और तारीख 7 दिसंबर. सुबह के 6 बजे थे. तभी वहां कुछ आतंकियों के साथ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की मुठभेड़ हो गई. दोनों ओर से जबरदस्त फायरिंग हुई. इसके बाद पुलिस ने वहां से एक साथ पांच बदमाशों को धरदबोचा है. इन पांच में से तीन तो आईएसआई से जुड़े हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी हैं, जबकि दो पंजाब के गैंगस्टर बताए जाते हैं. यहां तक तो सबकुछ ठीक है, लेकिन जैसे ही दिल्ली पुलिस ने इन तीन आतंकियों के साथ पंजाब के दो गैंगस्टरों की पहचान उजागर की, तो मामले की सुई सीधे तरनतारन में हुए शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह के कत्ल की तरफ घूम गई. जी हां, वही बलविंदर सिंह, जिसे 16 अक्टूबर को उनके घर में घुस कर बदमाशों ने गोलियों ने भून डाला था. असल में तीन आतंकियों के साथ दिल्ली पुलिस ने वहां से जिन दो गैंगस्टरों को धरदबोचा है, उनमें एक का नाम गुरजीत सिंह बाह है जबकि दूसरे का नाम सुखजीत सिंह भूरा. यही वो दो शूटर हैं, कत्ल के बाद जिनकी तलाश में तरनतारन की पुलिस सूबे का चप्पा-चप्पा छान रही थी. यानी बलविंदर सिंह के कत्ल के दो मुख्य आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में थे. लेकिन इस एनकाउंटर और गिरफ्तारी की सबसे खास बात ये थी कि पंजाब के ये गैंगस्टर दिल्ली में कोई अकेले अपनी फरारी काटते हुए गिरफ्तार नहीं हुए, बल्कि वो तो आईएसआई की पनाह में पलने वाले आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों के साथ दिल्ली में किसी साजिश को अंजाम देने पहुंचे थे, लेकिन इससे पहले कि वो अपने इरादे पर अमल कर पाते पुलिस ने उन्हें धरदबोचा. अब सवाल ये है कि आखिर पंजाब के गैंगस्टरों के साथ हिज्बुल मुजाहिदीन का क्या कनेक्शन है? क्या शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह के कत्ल में आतंकवादियों का हाथ है? आखिर क्यों और किसके इशारे पर बलविंदर सिंह का कत्ल किया गया? आखिर क्या है हिज्बुल के साथ पंजाबी गैंगस्टरों के कनेक्शन के मायने? कहीं ये आईएसआई और खालिस्तान समर्थकों का गठजोड़ तो नहीं? तो जब दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार आतंकियों और गैंगस्टरों से इन सवालों को लेकर पूछताछ की, तो जो खुलासा हुआ. वो वाकई चौंकाने वाला था. शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह के कत्ल के पीछे दरअसल कुछ आतंकियों का ही हाथ था, जिन्होंने आईएसआई और हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ मिलकर पंजाबी गैंगस्टरों की मदद से उनका कत्ल करवाया था. लेकिन पंजाब में आतंकवाद इतने साल बाद आखिर ये कत्ल क्यों हुआ? और इस कत्ल का असली मास्टरमाइंड कौन है? आखिर कौन है वो शख्स, जिसने गिरफ्तार गुरजीत सिंह बाह और सुखजीत सिंह भूरा को इस कत्ल की सुपारी दी थी, तो जब वो चेहरा और उसका पूरा नेटवर्क सामने आया, तो खुद पुलिस भी कुछ देर के लिए हैरान रह गई. ये असल में आईएसआई की वो नापाक कोशिश थी, जिसके जरिए वो खालिस्तानी आतंकियों के साथ गठजोड़ कर हिंदुस्तान की फिजा फिर से खराब करना चाहते थे
गुरुग्राम, 08 दिसंबर 2020, राजस्थान के टपूकड़ा इलाके में गुरुग्राम पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो बदमाश गोली लगने से घायल हो गए. दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ये बदमाश हरियाणा के गुरुग्राम से एक कार लूट कर भाग रहे थे. उनका पीछा करते हुए पुलिस राजस्थान में जा घुसी और बदमाशों का एनकाउंटर कर दिया. दरअसल, गुरुग्राम के मानेसर में चार बदमाशों ने गन प्वाइंट पर मेवात में तैनात एक डॉक्टर की इटियोज गाड़ी लूट ली और वहां से भाग निकले. पीड़ित ने फौरन इस बात की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने नाकेबंदी कर दी. इधर क्राइम ब्रांच की टीम बदमाशों का पीछा करने लगी. बदमाश पुलिस को चकमा देकर भागने की फिराक में थे. लिहाजा, बदमाश चोरी की कार लेकर राजस्थान की सीमा में दाखिल हो गए. वे राजस्थान के टपूकड़ा में दाखिल हो गए. गुरुग्राम पुलिस उनके ठीक पीछे जा पहुंची. पुलिस को देखते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. दोनों तरफ से हुई फायरिंग में 2 बदमाशों को गोली लग गई. एक बदमाश के सिर में और एक के पैर में गोली लगी. इस तरह से गुरुग्राम के सेक्टर 31 की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के रहने वाले चार बदमाशों को एनकाउंटर में पकड़ लिया. इनमें से 2 शातिर लुटेरों को गंभीर हालात में रोहतक के पीजीआई मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है. बदमाशों की पहचान गोविंद, रोहित, मामन और रोहित के रूप में हुई है. गुरुग्राम पुलिस काफी वक्त से इनकी तलाश कर रही थी.
चंडीगढ़ कोरोना की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए वालंटियर बनने वाले हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें शनिवार को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। विज ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वह कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं और अंबाला कैंट के एक सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके संपर्क में आए थे, वे अपना कोरोना टेस्ट करा लें। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विज के संक्रमित होने पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'गृहमंत्री जी, आपके कोरोना संक्रमित होने का समाचार मिला। मुझे विश्वास है कि आप अपनी दृढ़शक्ति से इस बीमारी को जल्द मात देंगे। ईश्वर से आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।' विज को लगा था वैक्सीन का टीका बता दें कि बीते 20 नवंबर को विज को कोरोना की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए पहला टीका लगाया गया था। विज ने खुद ही कोरोना वैक्सीन के परीक्षण के लिए वालंटियर बनने की इच्छा जताई थी। 20 नवंबर को हरियाणा में कोवाक्सिन का तीसरे चरण का ट्रायल शुरू किया गया था। इस दौरान अनिल विज को पहला टीका लगाया गया था। विज के साथ 200 वालंटियर्स को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी। बताया गया कि 28 दिन बाद वैक्सीन का दूसरा डोज दिया जाएगा। बता दें कि भारत बायोटेक कंपनी आईसीएमआर के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन कोवाक्सिन का निर्माण कर रही है। पीजीआई रोहतक देश के उन तीन सेंटर्स में से है जहां तीसरे चरण के ट्रायल का टीका लगाया गया। कंपनी का दावा है कि उनकी वैक्सीन 90 प्रतिशत कारगर होगी।
नई दिल्ली, 03 दिसंबर 2020,कृषि कानूनों के खिलाफ देश में किसानों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है. इसी के साथ अवॉर्ड वापसी का सिलसिला भी शुरू हो गया है. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने कृषि कानूनों के विरोध में अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस कर दिया है. उनके अलावा अकाली दल के नेता रहे सुखदेव सिंह ढींढसा अभी अपना पद्म भूषण सम्मान लौटाने की बात कही है. प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को करीब तीन पन्ने की चिट्ठी लिखते हुए कृषि कानूनों का विरोध किया, किसानों पर एक्शन की निंदा की और इसी के साथ अपना सम्मान वापस दिया. अपना पद्म विभूषण लौटाते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने लिखा, ‘मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं है, मैं जो भी हूं किसानों की वजह से हूं. ऐसे में अगर किसानों को अपमान हो रहा है, तो किसी तरह का सम्मान रखने का कोई फायदा नहीं है’ प्रकाश सिंह बादल ने लिखा कि किसानों के साथ जिस तरह का धोखा किया गया है, उससे उन्हें काफी दुख पहुंचा है. किसानों के आंदोलन को जिस तरह से गलत नजरिये से पेश किया जा रहा है, वो दर्दनाक है. हरसिमरत कौर बादल भी दे चुकी हैं इस्तीफा आपको बता दें कि इससे पहले भी बादल परिवार की ओर से कृषि कानूनों का बड़ा विरोध किया गया था. हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और केंद्र के नए कानूनों को किसानों के साथ बड़ा धोखा बताया था. सिर्फ इतना ही नहीं सुखबीर बादल ने अकाली दल के NDA से अलग होने का ऐलान करते हुए पंजाब के चुनावों में अकेला लड़ने की बात कही थी. गौरतलब है कि अकाली दल पंजाब में लगातार कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है. हालांकि, कैप्टन अमरिंदर सिंह भी अकाली दल पर हमलावर हैं और अकाली दल को घेरते आए हैं. अमरिंदर ने आरोप लगाया था कि जब अकाली दल केंद्र सरकार में शामिल थी, तब ये कानून तैयार हुए थे ऐसे में तब विरोध क्यों नहीं किया गया था. सरकार और किसानों में नहीं बन रही बात केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कानूनों का विरोध सबसे अधिक पंजाब में ही हो रहा है. पिछले दो महीनों से पंजाब के किसान सड़कों पर हैं, लेकिन अब एक हफ्ते से दिल्ली कूच कर चुके हैं. दिल्ली-एनसीआर के इलाकों को किसानों ने पूरी तरह से घेरा हुआ है और यहीं डेरा जमा लिया है. किसानों को मनाने के लिए सरकार की ओर से लगातार बातचीत की जा रही है. अबतक चार दौर की चर्चा हो चुकी है, लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हैं. किसानों का कहना है कि सरकार को तीनों कानून वापस लेने होंगे, साथ ही MSP पर गारंटी देनी होगी. सरकार की ओर से लगातार किसानों को भरोसा दिया जा रहा है कि MSP बनी रहेगी, खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं. लेकिन किसान लिखित में गारंटी लेने पर अड़ गए हैं. पिछले एक हफ्ते से दिल्ली की सीमाओं पर किसान मौजूद हैं और उनका कहना है कि वो चार महीने तक का राशन साथ लाए हैं.
नई दिल्ली किसान आंदोलन को लेकर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच भी जुबानी जंग चल रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर लगातार पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर किसानों को भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने 3 बार कैप्टन को फोन किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। पंजाब के सीएम ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें कोई फोन ही नहीं आया। दूसरी तरफ, खट्टर के निजी सचिव 'सबूतों' के साथ कह रहे हैं कि हरियाणा के सीएम ने कैप्टन को डायल किया लेकिन लगता है कि पंजाब सीएम के पर्सनल स्टाफ फोन कॉल्स के बारे में उन्हें ब्रीफ ही नहीं कर रहे। खट्टर कौन होते हैं किसानों को रोकने वाले: कैप्टन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शनिवार को अलग-अलग न्यूज चैनलों के साथ बातचीत में हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर पर जमकर बरसे। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब किसानों को हम नहीं रोक रहे और दिल्ली भी उन्हें रोक रही तब तुम कौन होते हो उन्हें रोकने वाले। कैप्टन ने कहा, 'पंजाब अपने किसानों को नहीं रोक रहा क्योंकि विरोध करना उनका हक है। तुम क्यों उन्हें रोक रहे हो? वॉटर कैनन का इस्तेमाल क्यों कर रहे हो और उन पर आंसू गैस क्यों छोड़ रहे हो? जब हम उन्हें नहीं रोक रहे, दिल्ली उन्हें नहीं रोक रही तब तुम कौन होते हो उन्हें रोकने वाले? जिस तरह का बर्ताव हुआ है, अब अगर वह मुझे 10 बार भी फोन करें तो मैं नहीं उठाऊंगा।' खट्टर जब तक माफी नहीं मांगते, फोन नहीं करूंगा: कैप्टन पंजाब के किसानों के साथ हरियाणा में गलत बर्ताव का आरोप लगाते हुए कैप्टन ने ट्वीट किया कि अब अगर खट्टर फोन भी करते हैं तो वह नहीं उठाएंगे, जब तक कि वह किसानों के अपमान पर माफी नहीं मांगते। पंजाब के सीएम ने उन आरोपों को खारिज किया है कि खट्टर ने उन्हें 3 बार फोन किया था लेकिन उन्होंने फोन कॉल्स का जवाब नहीं दिया। खट्टर के निजी सचिव ने 'सबूतों' के साथ खोली कैप्टन की 'पोल' दूसरी तरफ, मनोहर लाल खट्टर के निजी सचिव अभिमन्यु सिंह ने कैप्टन को ट्विटर पर जवाब देते हुए इस बात के सबूत पेश किए कि उन्हें फोन किए गए थे। सिंह ने कथित कॉल रेकॉर्ड डेटा का सबूत पेश करते हुए दावा किया है कि 23 नवंबर को शाम 6:23 बजे पंजाब सीएम को पहला फोन गया था। जिस पर कहा गया कि उनसे सिसवा फार्म के नंबर पर संपर्क किया जाए। एक मिनट बाद दोबारा फोन मिलाया गया तो जवाब मिला कि सीएम अभी नहीं हैं। 24 नवंबर को उनके कॉल बैक का इंतजार किया गया लेकिन फोन नहीं आया। जिसके बाद उस दिन दोपहर से लेकर रात तक 11 बार फोन मिलाया गया लेकिन कैप्टन ने बात नहीं की।
चंडीगढ़, 28 नवंबर 2020,केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे हैं. किसानों के आंदोलन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर आमने-सामने हैं. दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही है. अमरिंदर सिंह ने शनिवार को एक बार फिर मनोहर लाल खट्टर पर निशाना साधा है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि मेरे किसानों पर जो निर्दयता दिखाई गई, उस पर मनोहर लाल खट्टर माफी मांगें. जब तक वो माफी नहीं मांगते हैं, तब तक मैं उनसे बात नहीं करूंगा. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मनोहर लाल खट्टर पर झूठ बोलने के भी आरोप लगाए. पंजाब के सीएम ने कहा कि मनोहर लाल खट्टर ने झूठ बोला कि उन्होंने पहले मुझे फोन करने की कोशिश की और मैंने जवाब नहीं दिया. लेकिन अब, जो भी उन्होंने मेरे किसानों के साथ किया है, उसके बाद 10 बार भी वो मुझे फोन करेंगे तब भी मैं नहीं बात करूंगा. सीएम खट्टर से बेहद नाराज दिख रहे कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उन्होंने (मनोहर लाल खट्टर) पंजाब के किसानों के साथ गलत किया है. वो इस चीज को स्वीकार करें. मैं उन्हें माफ नहीं करूंगा. सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि जिस तरह से मेरे किसानों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई किसान घायल हुए, ऐसे हालात में मनोहर लाल खट्टर से बात करने को कोई मतलब नहीं. किसानों को दिल्ली नहीं जाने देने पर सीएम अमरिंदर ने मनोहर लाल खट्टर पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों से बात करने के लिए तैयार है, दिल्ली सरकार को भी कोई दिक्कत नहीं थी, तो ऐसे में मनोहर लाल खट्टर बीच में आने वाले कौन होते हैं. सीएम अमरिंदर का मनोहर लाल खट्टर पर हमला यहीं नहीं रुका. उन्होंने कहा कि मनोहर लाल ने मेरे ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए. उन्होंने मुझपर आरोप लगााए थे कि मैं किसानों को प्रदर्शन के लिए भड़का रहा हूं. सीएम अमरिंदर ने कहा कि मैं राष्ट्रवादी हूं. सीमा से लगे एक राज्य का मैं मुख्यमंत्री हूं.
चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर (Manoharlal Khattar) ने कृषि विधेयकों के खिलाफ जारी किसानों के प्रदर्शन (Farmers Protest) में खालिस्तानी (Khalistan) एंगल की बात को दोहराया है। खट्टर ने शनिवार को खुफिया इनपुट के हवाले से प्रदर्शन में खालिस्तानियों के शामिल होने की बात की। CM खट्टर ने कहा, 'हमारे पास इनपुट है कि कुछ अवांछित तत्व इस भीड़ के अंदर आए हुए हैं। हमारे पास इसकी रिपोर्ट्स है। अभी इसका खुलासा करना ठीक नहीं है। उन्होंने सीधे नारे लगाए हैं। जो ऑडियो और वीडियो सामने आए हैं, उनमें इंदिरा गांधी को लेकर साफ नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि जब इंदिरा के साथ ये कर दिया तो मोदी क्या चीज है।' दरअसल पंजाब में किसानों के आंदोलन के बीच से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में एक सिख किसान ने न्यूज चैनल के रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'हमने तो इंदिरा ठोक दी फिर ये मोदी की छाती में...।' इसके साथ ही बरनाला में कुछ प्रदर्शनकारी किसान जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर के साथ भी नजर आए। गौरतलब है कि किसानों के इस मुद्दे को लेकर पंजाब और हरियाणा की सरकारें आमने-सामने आ गई हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। कैप्टन ने बीजेपी की सरकार पर किसानों के खिलाफ हथियार उठाने और उन्हें भड़काने का आरोप लगाया। खट्टर ने इसका जवाब देते हुए कहा कि कैप्टन कोरोना काल में किसानों को भड़का रहे हैं और उनका जीवन खतरे में डाल रहे। इसपर कैप्टन ने फिर ट्वीट करते हुए कहा कि बीजेपी की सरकार ही कोरोना काल में कृषि विधेयक को लागू कराने आई थी। मनोहर लाल खट्टर के जवाब के बाद कैप्टन अमरिंदर ने फिर उनपर कटाक्ष किया। कैप्टन ने कहा- खट्टर जी, मैं आपके जवाब को सुनकर अचंभित हूं। आप मुझे नहीं, बल्कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर विश्वास में लीजिए। आपको उनके दिल्ली चलो मार्च से पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी। अगर आपको लगता है कि किसानों को मैं भड़का रहा हूं तो हरियाणा के किसान भी इस प्रदर्शन में क्यों शामिल हो रहे हैं।
एक ढाबे में चल रहे देह व्‍यापार से जुड़े केस में पुलिस ने रेड मारी तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ. ढाबे के मालिक को पुलिस ने गनमैन दे रखा था. यह मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले का है. डीएसपी दीनानगर ने पुलिस पार्टी के साथ ढाबे पर रेड मारी. पिछले लंबे समय से ढाबे में जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा था. पुलिस ने छापेमारी कर एक प्रेमी जोड़े समेत होटल के मालिक को गिरफ्तार किया है और लड़की सप्लाई करने वाली एक महिला अभी फरार है. दीनानगर के थाना प्रभारी कुलविंदर सिंह ने बताया कि यहां के डीएसपी को सूचना मिली थी कि दीनानगर के बस अड्डा के नजदीक छिंदा ढाबा में देह व्‍यापार का धंधा चलता है. सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की तो मौके से एक लड़के और एक लड़की को आपत्‍त‍िजनक हालत में अरेस्‍ट किया गया. मौके पर होटल मालिक को भी गिरफ्तार किया गया है. होटल में लड़कियां सप्लाई करने वाली एक महिला अभी फ़रार है. फिलहाल पुलिस ने चार लोगों पर केस दर्ज करते हुए आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है और फरार महिला की तलाश शुरू कर दी है. सूत्रों के हवाले से पता चला कि ढाबे का मालिक शिवसेना का पंजाब उपाध्‍यक्ष है और पुलिस ने उसको सुरक्षा भी दे रखी थी लेकिन इस बारे में पुलिस कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुई और जांच की बात कहती दिखाई दी. वहीं शिवसेना के दूसरे नेताओं ने टालमटोल करते हुए दबी आवाज में कैमरे के सामने माना कि ढाबा मालिक के पास शिव सेना में पंजाब उपाध्‍यक्ष का ओहदा था और पुलिस ने उसको गनमैन भी दे रखा था लेकिन कुछ दिन पहले ही इसे ओहदे से हटा दिया गया था.
चंडीगढ़, 28 नवंबर 2020, दिल्ली में सिंधु बॉर्डर पर बैठे आंदोलित किसानों की आगे की रणनीति क्या होगी, ये अब तक साफ नहीं, लेकिन ज्यादातर का कहना है वो यहां से तभी हटेंगे, जब उनकी मांगें मानी जाएंगी. किसानों का कहना था कि वो पंजाब से तकरीबन 6 महीने का राशन लेकर निकले हैं. किसानों ने कहा कि हम बुराड़ी नहीं जा रहे हैं, जो किसान बुराड़ी गए हैं सरकार उन्हें उलझा रही है. इस बीच, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में दिल्ली कूच करने वाले किसानों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. ट्यूकर बॉर्डर पर बैरिकेड तोड़ने पर पंजाब के किसानों के खिलाफ कुरुक्षेत्र पेहवा के साथ-साथ शाहाबाद में भी डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस से उलझने, बैरिकेड तोड़ने और हत्या के प्रयास में 11 किसान नेता नामजद किए गए हैं. वहीं पेहवा में 6 किसान नेता नामजद किए गए हैं. नेशनल हाइवे पर त्योडा के पास बैरिकेडिंग तोड़ने, अधिकारियों पर गाड़ी चढ़ाने और रास्ता रोकने के आरोप में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी और प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस समेत पांच नेता नामजद किए गए हैं. पंजाब के बलबीर सिंह राजू समेत हजारों किसानों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. भारतीय दंड संहिता की धारा 114, 147, 148, 149,186, 158, 332, 375, 307, 283 120 बी और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51बी और पीडीपी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है. किसानों का दिल्ली कूच करना जारी इस बीच, पंजाब से हरियाणा होते हुए किसानों का दिल्ली कूच करना अब भी जारी है. पंजाब की किसान यूनियन उग्राहा के हज़ारों ट्रैक्टर अभी भी रोहतक होते हुए बहादुरगढ़ की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं.
चंडीगढ़, 25 नवंबर 2020,दिल्ली-एनसीआर में कोरोना की गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को राज्य में नए प्रतिबंधों का ऐलान किया. सभी शहरों और कस्बों में फिर से नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है. साथ ही 1 दिसंबर से मास्क न पहनने या सामाजिक दूरी का पालन न करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया जाएगा. पंजाब के सभी होटल, रेस्त्रां और मैरिज पैलेसों रात 9.30 बजे बंद हो जाएंगे. रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक से नाइट कर्फ्यू लागू रहेगा. पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन न करने पर अब 500 रुपये की जगह 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. नाइट कर्फ्यू की 15 दिसंबर को समीक्षा की जाएगी. पंजाब में दिल्ली के मरीज की आमद को देखते हुए राज्य के निजी अस्पतालों में बेड उपलब्धता की समीक्षा और अनुकूलन करने का भी निर्णय लिया गया है. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव विनी महाजन को संबंधित विभागों के साथ काम करने के लिए कहा है ताकिकोरोना के लिए अधिक निजी अस्पतालों की मदद ली जा सके. ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की उपलब्धता को और मजबूत करने के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एल II और एल III को मजबूत करने का आदेश दिया है. साथ ही उन जिलों की निरंतर निगरानी का आदेश दिया गया, जहां एल III सुविधाएं नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों को विशेषज्ञों, सुपर-विशेषज्ञों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की आपातकालीन नियुक्तियां करने का भी निर्देश दिया है. 249 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 407 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती होगी. विभागों से यह भी कहा गया है कि भविष्य में आवश्यक होने पर 4 वें और 5 वें वर्ष के एमबीबीएस छात्रों की भी मदद ली जाए.
चंडीगढ़, 21 नवंबर 2020,जम्मू-कश्मीर में पिछले दिनों नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के बाद पंजाब पुलिस सतर्क हो गई है. राज्य से सटे सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इस बीच भारत-पाक सीमा के साथ लगते बामियाल सेक्टर में भी पुलिस द्वारा लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस बामियाल सेक्टर पर लगातार चौकस है और सर्च अभियान चला रही है. जिले के सभी सार्वजनिक स्थानों पर भी सर्च ऑपरेशन किए जा रहे हैं. पुलिस ने बस स्टैंड पर बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों से भी पूछताछ की है. 26/11 की बरसी पर आतंकियों के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए देश में हर जगह सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इस बीच भारत ने आज शनिवार को जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में आतंकी हमले की साजिश को नाकाम किए जाने के बाद पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया. नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी को तलब कर विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पड़ोसी मुल्क अपनी जमीन पर आतंक को पनाह देना बंद करे. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में 19 नवंबर 2020 को एक बड़े आतंकी हमले के मंसूबे को नाकाम कर दिया. शुरुआती रिपोर्ट्स में पता चला है कि नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. भारत सरकार ने जैश के लगातार आतंकी हमलों को लेकर चिंता जाहिर की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि अतीत में भी जैश भारत के खिलाफ आतंकी हमलों को अंजाम देता रहा है. पिछले साल फरवरी में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में भी जैश का हाथ था. एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद हथियार और बारूद इसकी तस्दीक करते हैं कि आतंकी जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा को भंग करना चाहते थे. खासकर आतंकी केंद्र शासित प्रदेश में होने वाली जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव को बाधित करना चाहते थे.
चंडीगढ़, 21 नवंबर 2020,लंबे समय से किसान आंदोलन से त्रस्त पंजाब को आज शनिवार को उस समय बड़ी राहत मिली जब राज्य के कई किसान संगठनों के साथ हुई बैठक में संगठनों ने रेलवे ट्रैक खाली करने पर हामी भरते हुए कहा कि अगले 15 दिनों के लिए रेलवे ट्रैकों को तमाम पैसेंजर और कार्गो ट्रेनों के लिए खाली कर दिया जाएगा. किसान संगठनों का यह फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. हालांकि किसान संगठनों की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर 15 दिनों में केंद्र सरकार के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ती और कोई सकारात्मक रिस्पॉन्स केंद्र सरकार की ओर से नहीं आता तो 15 दिन बाद किसान संगठन एक बार फिर से अपने आंदोलन को शुरू करेंगे और उनकी ओर से रेलवे ट्रैकों को जाम कर दिया जाएगा. सोमवार से पंजाब के तमाम रेलवे ट्रैकों को किसान संगठन पैसेंजर और कार्गो ट्रेनों के लिए खाली करने पर राजी हो गए हैं. इस बीच किसान संगठनों की ओर से फैसले के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा, 'किसान संगठनों के साथ उपयोगी बैठक हुई. यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि 23 नवंबर की रात से किसान संगठनों ने अगले 15 दिनों के लिए रेल ट्रैकों को खाली करने का निर्णय लिया है. मैं इस कदम का स्वागत करता हूं क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए सामान्य स्थिति को बहाल करेगा. मैं केंद्रीय सरकार से पंजाब के लिए रेल सेवाओं को फिर से शुरू करने का अनुरोध करता हूं.' कृषि कानूनों के खिलाफ 50 दिन से भी ज्यादा समय से पंजाब में किसान आंदोलनरत हैं. किसान आंदोलन के कारण राज्य में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित है क्योंकि आंदोलनकारी किसान रेल परिसर, प्लेटफॉर्म और रेलवे ट्रैक समेत कई जगहों पर डटे हुए हैं. जिसकी वजह से ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा था. पंजाब में किसानों के विरोध-प्रदर्शन के कारण रेलवे को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. पिछले महीने 1 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच रेलवे को मालगाड़ियां रद्द होने के चलते करोड़ों का नुकसान हुआ है. भारतीय रेलवे को रोजाना 36 करोड़ रुपये मालभाड़े के नुकसान होने का अनुमान है. सूत्रों के अनुसार पंजाब के पांच बिजली घरों को 520 रैक कोयले की आपूर्ति नहीं की जा सकी जिसके चलते भारतीय रेल को 550 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब में तमाम रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों और मालगाड़ियों का संचालन बाधित है. ऐसे में राज्य के कई तमाम थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है जिससे बिजली सप्लाई बाधित होने का डर है.
स्‍वदेशी कोरोना वायरस वैक्‍सीन Covaxin का इंसानों पर आखिरी दौर का ट्रायल शुरू हो गया है। देशभर में 26 हजार लोगों पर वैक्‍सीन का डबल ब्‍लाइंड, रैंडमाइज्‍ड ट्रायल होगा। हरियाणा में गृह मंत्री अनिल विज ने पहली डोज लेकर फेज 3 ट्रायल की शुरुआत की। विज ने खुद को पहला वालंटियर बनाने की पेशकश की थी। उन्‍हें अंबाला के एक अस्‍पताल में Covaxin का पहला इंजेक्‍शन दिया गया। 14 दिन बाद उन्‍हें वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी जाएगी। इस वैक्‍सीन का कोडनेम BBV152 है। ट्रायल में सफल होने पर इस वैक्‍सीन के अगले साल की पहली तिमाही के बाद उपलब्‍ध होने की संभावना जताई जा रही है। Covaxin को हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वॉयरलॉजी (NIV) के साथ मिलकर तैयार किया है। इसका फेज 1 ट्रायल 15 जुलाई से शुरू हुआ था। कैसे तैयार की गई? किस तरह करती है असर? Covaxin एक 'इनऐक्टिवेटेड' वैक्‍सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्‍स से बनी है जिन्‍हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्‍ट न कर पाएं। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं। ये ऐंटीबॉडीज शरीर को कोरोना इन्‍फेक्‍शन से बचाती हैं। Covaxin की कीमत क्‍या होगी? भारत बायोटेक के एमडी डॉ कृष्‍णा एल्‍ला ने कहा था कि वैक्‍सीन की कीमत एक पानी की बोतल के दाम से भी कम होगी। यानी इसका मतलब है कि वैक्‍सीन की एक डोज 20 रुपये से ज्‍यादा की नहीं होनी चाहिए।
शिमला, 14 नवंबर 2020,हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हरियाणा के सीएम खट्टर फिलहाल हिमाचल प्रदेश के दौरे पर हैं. वो शुक्रवार शाम हिमाचल प्रदेश पहुंचे थे. शनिवार को उनके प्रदेश वापस लौटने का प्रोग्राम था. लेकिन उन्होंने सांस संबंधी दिक्कत होने की शिकायत की. जिसके बाद उन्हें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. यहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है. अस्पताल से बाहर आकर सीएम खट्टर ने बताया कि वो अब ठीक हैं. इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को दिवाली के मौके पर राज्यपाल से भी मुलाकात की थी. सीएम खट्टर इससे पहले अगस्त महीने में कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. हालांकि दो सप्ताह तक क्वारनटीन रहने के बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कोरोना संक्रमण के चलते गुरुग्राम के मेदांता में भर्ता करवाया गया था. उनकी उम्र को देखते हुए उनको 25 अगस्त की सुबह 2.30 बजे मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वो डायबिटीज के भी मरीज हैं. 24 अगस्त को खट्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे.
चंडीगढ़/नई दिल्ली पंजाब में केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध की आंच नई दिल्‍ली तक पहुंचने लगी है। बुधवार सुबह पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह के क्रमिक धरने के आह्वान पर दिल्‍ली पहुंचे कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू को पुलिस ने बॉर्डर पर रोक लिया। काफी गरमागरमी के बाद सिद्धू को दिल्‍ली में प्रवेश मिला। कृषि कानूनों के विरोध के चलते पंजाब में कोयला लाने वाली ट्रेनों पर रोक है जिससे राज्‍य में बिजली कटौती करनी पड़ रही है। इन्‍हीं मुद्दों पर अमरिंदर सिंह ने जंतर-मंतर पर क्रमिक धरने की अपील की है। खुद अमरिंदर भी बुधवार को धरना देंगे। नवजोत सिंह सिद्धू जब पंजाब से दिल्‍ली बॉर्डर पर पहुंचे तो उन्‍हें दिल्‍ली पुलिस ने रोक लिया। उनके साथ और कांग्रेस नेता थे। सिद्धू ने पुलिस से कहा कि वे लोग दस लाख लोगों के प्रतिनिधि हैं। यह प्रजातंत्र है, वे लोग (केंद्र सरकार) नहीं जानते हमें जितना दबाया जाएगा हम उतने जोर से पलटवार करेंगे।' इस बीच पंजाब के पटियाला में किसान राजपुरा थर्मल पावर प्‍लांट के पास रेल की पटरियों पर जमे हैं और केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब विधानसभा में पारित विधेयकों को मंजूरी दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था। राज्य सरकार ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रपति भवन ने मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन, केंद्र द्वारा मालगाड़ियों का परिचालन स्थगित किए जाने की वजह से राज्य में उत्पन्न हालात को रेखांकित करेगा। पंजाब के विपक्षी दलों ने अमरिंदर सिंह के दिल्ली में धरने का नेतृत्व करने के कदम को ‘ड्रामा’ करार दिया है। इसलिए रोकी गईं ट्रेन रेलवे ने पंजाब में ट्रेनों का परिचालन यह कहकर रोक दिया है कि कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान अब भी कुछ पटरियों पर जमे हैं। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि पटरियों पर से अवरोधक हटा लिए गए हैं और मालगाड़ियों को परिचालन की अनुमति दी जा रही है। चार-चार विधायक देंगे धरना पंजाब सरकार ने कहा कि कोयले की कमी की वजह से राज्य के ताप विद्युत संयंत्र बंद हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में चूंकि धारा 144 लागू है और लोगों के जमा पर होने पर रोक है, इसलिए विधायक चार-चार के समूह में पंजाब भवन से महात्मा गांधी की समाधि राजघाट जाकर क्रमिक धरना देंगे। सिंह ने कहा कि पहला समूह सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर राजघाट पहुंचेगा। उन्होंने राज्य के कांग्रेस विधायकों के अलावा पंजाब के अन्य पार्टियों के विधायकों से भी धरना में शामिल होने का आह्वान किया।
फरीदाबाद बल्लभगढ़ के निकिता हत्याकांड में एसआईटी का गठन कर दिया गया है। एसआईटी की टीम ने परिवार को आश्वासन दिलाया कि जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस पीआरओ एसीपी आदर्शदीप सिंह ने बताया कि पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन एसीपी क्राइम अनील कुमार के नेतृत्व में किया गया है। उधर पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि तौसीफ शुरुआत में निकिता से राहुल राजपूत बनकर मिलता था। असलियत सामने आने पर निकिता ने उससे दूरी बना ली थी। राहुल राजपूत बनकर मिलता था तौसीफ पीड़ित परिवार ने बताया कि शुरुआत में निकिता से राहुल राजपूत बनकर मिलता था। इस दौरान उसने 2018 में दोस्ती करने की कोशिश भी की थी, मगर तभी उसका असली नाम उजागर हो गया था। इसके बाद से निकिता से उससे और भी दूरी बना ली थी। किडनैप करके साथ ले जाना चाहता था आरोपी निकिता हत्याकांड का मुख्य आरोपी तौसीफ उसका अपहरण कर अपने साथ ले जाना चाहता था। उसने जब मना किया और भागने लगी तो उसने उसे गोली मार दी। यह खुलासा आरोपी ने पुलिस की पूछताछ में किया है। उसने यह भी बताया कि अगर वह रास्ते में उनके हाथ नहीं आता तो पुलिस उसे कभी ढूंढ़ नहीं पाती। पुलिस दो दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर रही है। तौसीफ का मामा है कुख्यात बदमाश पुलिस ने बताया कि तौसीफ का मामा कुख्यात बदमाश है जो इस वक्त जेल में सजा काट रहा है। तौसीफ ने अपने मामा के गैंग के गुर्गे से ही देसी तमंचा इस वारदात को अंजाम देने के लिए लिया था। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल तमंचा, कार व दोनों आरोपितों के मोबाइल बरामद कर लिए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि तौसीफ पॉलिटिकल व क्रिमिनल बैकग्राउंड से आता है। उसका मामा इस्लामुद्दीन हरियाणा और दिल्ली का कुख्यात बदमाश रहा है। उसने कई हत्याएं, लूट व किडनैपिंग की वारदातों को अंजाम दिया था। गुड़गांव में उसके मामा ने एक इंस्पेक्टर सुरेंद्र को किडनैप किया था। इस मामले में बाद में इंस्पेक्टर को छुड़वा लिया गया था। इस्लामुद्दीन कई मामलों में इस वक्त सजा काट रहा है।
फरीदाबाद फरीदाबाद में निकिता हत्याकांड का मुख्य आरोपी तौसीफ राजनीतिक और आपराधिक बैकग्राउंड से आता है। उसका मामा इस्लामुद्दीन हरियाणा और दिल्ली का मोस्ट वॉंटेड बदमाश है, जिसने एक बार इंस्पेक्टर को ही किडनैप कर लिया था। तौसीफ ने अपने मामा के गैंग के गुर्गे से ही देसी तमंचा इस वारदात को अंजाम देने के लिए लिया था। पुलिस ने बताया कि तौसीफ का मामा कुख्यात बदमाश है, जो इस वक्त जेल में सजा काट रहा है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल तमंचा, कार और दोनों आरोपियों के मोबाइल बरामद कर लिए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि तौसीफ पॉलिटिकल और क्रिमिनल बैकग्राउंड से आता है। उसका मामा इस्लामुद्दीन हरियाणा और दिल्ली का कुख्यात बदमाश रहा है। उसने कई हत्याएं, लूट और किडनैपिंग की वारदातों को अंजाम दिया था। गुड़गांव में उसके मामा ने एक इंस्पेक्टर सुरेन्द्र को किडनैप किया था। इस मामले में बाद में इंस्पेक्टर को छुड़वा लिया गया था। इस्लामुद्दीन कई मामलों में इस वक्त सजा काट रहा है। पूछताछ में तौसीफ ने बताया कि वह निकिता का अपहरण कर अपने साथ ले जाना चाहता था। उसने जब मना किया और भागने लगी तो उसने उसे गोली मार दी। यह खुलासा आरोपी ने पुलिस की पूछताछ में किया है। आरोपी ने यह भी बताया कि अगर वो रास्ते में हाथ नहीं आता तो पुलिस उसे कभी ढूंढ़ नहीं पाती। पुलिस दो दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर रही है। पिता के दोस्त से ली गाड़ी चला रहा था पुलिस ने बताया कि आरोपी से जो कार बरामद हुई है, वो उसके पिता के दोस्त की है। कार उसने दिल्ली से खरीदी थी मगर पेपर ट्रांसफर नहीं कराए थे। ऐसे में पुलिस कार मालिक से भी पूछताछ कर सकती है। फॅरेंसिक के लिए भेजे जाएंगे फोन और हथियार बरामद हथियार और दोनों के मोबाइल फोन फॅरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे। इसके साथ ही आरोपी से जुड़े डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस जुटाने में लगी हुई है। गृहमंत्री ने 2018 से केस की जांच के दिए आदेश हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने छात्रा की हत्या के मामले की जांच कर रही एसआईटी को आदेश दिए हैं कि वह 2018 से इस केस की जांच करे। अनिल विज ने कहा कि प्रदेश में बेटियों को ऐसे सिसक-सिसक के मरने नहीं दिया जाएगा। गृहमंत्री ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में दोषियों के साथ-साथ बेटी के परिवार को दबाने वालों को भी बख्शने के मूड में नहीं है। इसलिए अब इस हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है और ये आदेश दे दिए हैं कि मामले में न सिर्फ इस हत्याकांड, बल्कि 2018 से इस मामले की जांच की जाए जब बेटी के परिवार ने अपहरण की शिकायत देकर वापस ले ली थी। विज ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच लव जिहाद के एंगल से भी करने की बात कही है। उन्होंने इस बात का अंदेशा भी जताया कि 2018 में भी कांग्रेसियों ने दबाव बनाकर ही परिवार से शिकायत वापस लेने का एफिडेविट दिलवाया होगा।
फरीदाबाद, 28 अक्टूबर 2020, फरीदाबाद के निकिता मर्डर केस में क्राइम ब्रांच की जांच जारी है. पुलिस को अभी तक आरोपी तौसीफ का मोबाइल फोन नहीं मिला है. पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के बाद तौसीफ ने अपना फोन तोड़कर कहीं फेक दिया है. अब एसआईटी की टीम तौसीफ को लेकर उस जगह पर गई है, जहां उसने फोन को फेंकने का दावा किया है. इसके अलावा पुलिस का कहना है कि निकिता के मोबाइल को भी परिवार से लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. सूत्रों की माने तो तौसीफ का कहना है कि वो निकिता को बहुत प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था. तौसीफ ने बताया कि निकिता ने शादी के लिए इनकार कर दिया था इसलिए उसकी हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक, तौसीफ ने पूछताछ में बताया कि वो निकिता को जबर्दस्ती अपने साथ ले जाना चाहता था और उसके मना करने पर गोली मार दी. हरियाणा पुलिस इस केस के लिए स्पेशल PP नियुक्त किया है और 30 दिन के अंदर पुलिस इस मामले की चार्जशीट दायर करेगी. इस पूरे मामले पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि घटना में कांग्रेस के नेताओं का दबाव है. मैं प्रदेश की लड़कियों को सिसक-सिसक के मरने नहीं दूंगा. एसआईटी का गठन हुआ , जो 2018 से मामले की जांच करेगी. लव जिहाद, अपहरण जैसे सभी मामले पुर्नजीवित हो सकते हैं. किसी भी हालत में किसी को बख्शेंगे नहीं.
चंडीगढ़ पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने होशियारपुर (Hoshiyarpur Rape) में मासूम बच्ची से हैवानियत के मामले को लेकर बीजेपी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। अमरिंदर ने कहा कि होशियारपुर जाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा है कि हाथरस की घटना के उलट पंजाब पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है। सीएम अमरिंदर ने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हमें होशियारपुर में रेप पीड़ित के घर जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वहां पर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ऐक्शन में है। आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन हाथरस में तो पुलिस की जांच नहीं हुई थी।' बता दें कि सीतारमण ने राहुल और प्रियंका गांधी के हाथरस ना जाने को लेकर निशाना साधा था। 'हाथरस और होशियारपुर की कोई तुलना नहीं' अमरिंदर सिंह ने कहा कि बीजेपी के नेता जो कुछ दावा कर रहे हैं, उसके उलट होशियारपुर घटना और हाथरस मामले के बीच कोई तुलना नहीं है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि हाथरस मामले में, उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस न सिर्फ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रही, बल्कि अगड़ी जाति के आरोपियों को बचाने की कोशिश करते हुए भी नजर आई। उन्होंने कहा कि जबकि इसके ठीक उलट पंजाब पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को फौरन गिरफ्तार कर लिया तथा अब एक हफ्ते में चालान दाखिल करने की तैयारी कर रही है। 'हाथरस पर बोलने को मजबूर हो गई थी कांग्रेस' मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी हाथरस मामले में बोलने के लिए और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो गई थी क्योंकि राज्य सरकार वहां दलित लड़की को न्याय दिला पाने में नाकाम रही थी। सिंह ने कहा कि सीतारमण ने राहुल और प्रियंका के खिलाफ जो चुनिंदा तरीके से राजनीति और टिप्पणी की है, वह बीजेपी के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के किसी भी नेता ने हाथरस घटना के विरोध में एक शब्द भी नहीं बोला, जब पूरे देश में रोष छाया हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी होशियारपुर घटना पर राजनीति से प्रेरित होकर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही है। 'होशियारपुर की घटना पर भाई-बहन की आत्मा नहीं डोली' केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मसले को लेकर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। सीतारमण ने कहा, 'बिहार के दलित प्रवासी मजदूर की एक 6 वर्षीय बेटी के साथ रेप किया गया। उसकी हत्या कर दी गई। होशियारपुर में उसके शव को आधा जला दिया गया। लेकिन इन सबके बावजूद भाई-बहन (राहुल गांधी-प्रियंका गांधी) की आत्मा जरा भी नहीं डोली। ये वही भाई-बहन हैं जो हर उस स्थान पर पहुंचते हैं, जहां से इन्हें राजनीतिक लाभ होता है।'
लखनऊ पंजाब के रोपड़ जिला जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश लाया जाना था। इसके लिए यूपी पुलिस की पचास सदस्यीय टीम पंजाब गई थी लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा। पंजाब के मेडिकल बोर्ड ने मुख्तार का स्वास्थ्य खराब बताया है और उन्हें तीन महीने का कंप्लीट बेड रेस्ट करने को कहा गया है। बसपा विधायक मुख्तार की मेडिकल रिपोर्ट यूपी सरकार को भेजी गई है। इसमें लिखा है कि मुख्तार अंसारी डायबिटीज, स्लिप डिस्क और डिप्रेशन समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है इसलिए उन्हें तीन महीने के बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। इस मेडिकल रिपोर्ट के बाद मुख्तार का लाया जाना टल गया है। अब यूपी पुलिस उच्चाधिकारियों और विधि विभाग के संपर्क में है ताकि इस मामले में सलाह लेकर आगे कुछ कार्रवाई की जा सके। इधर सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि मुख्तार अंसारी को यूपी पुलिस की गाड़ी पलटने का डर था इसलिए बेड रेस्ट ले लिया। पंजाब गई थी यूपी पुलिस की टीम गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में बाहुबली मुख्तार अंसारी के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। इन मामलों में मुख्तार को प्रयागराज की एमपी-एमलएलए कोर्ट में 21 अक्टूबर को पेश किया जाना था। यूपी पुलिस की एक टीम प्रॉडक्शन वारंट लेकर रोपड़ गई थी लेकिन वहां से टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। यह है पूरा मामला मुख्तार अंसारी के ऊपर फर्जी दस्तावेज के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी करवाने का केस है। उनके बेटे और पत्नी पर भी कई मुकदमें दर्ज किए जा चुके हैं। मुख्तार की पत्नी और बेटा फरार हैं। इधर योगी सरकार मुख्तार और उनके गैंग के गुर्गों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। कई गुर्गे गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मुख्तार और उनके गुर्गों के अवैध आशियाने भी यूपी सरकार गिरा चुकी है। पंजाब जेल में बंद है मुख्तार मुख्तार अंसारी लगभग 22 महीने से जेल में हैं। उन्हें पहले यूपी की जेल में रखा गया था लेकिन यहां से जनवरी 2019 से पंजाब की जेल में शिफ्ट किया गया। मुख्तार पर, उनके करीबी सहयोगी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर हत्या करवाने का आरोप लगा था। यह हत्या 9 जुलाई, 2018 को बागपत जेल के अंदर हुई थी।
चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में केंद्र सरकार के कृषि बिलों के खिलाफ विधेयक पेश किए। अमरिंदर ने विधेयकों को पेश करते हुए भावुक भाषण भी दिया। उन्होंने विपक्षी अकाली दल को निशाने पर भी लिया। अमरिंदर ने कहा कि उनकी सरकार अगर गिरती है तो गिर जाए। उन्हें इसका डर नहीं है लेकिन वह किसानों के साथ हैं। अमरिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र का कृषि बिल किसानों और भूमिहीन श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने इस दौरान तीन विधेयक, किसानों को उत्पादन सुविधा अधिनियम में संशोधन, आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन, किसानों के समझौते और कृषि सेवा अधिनियम में संशोधन बिल विधानसभा में पेश किए। मुख्यमंत्री बोले, पहले भी दिया था इस्तीफा विधेयक पेश करने के दौरान अमरिंदर सिंह ने कहा, 'मुझे अपनी सरकार के गिरने का डर नहीं है। मैं इस्तीफा भी देने के लिए तैयार हूं। पहले भी पंजाब के लिए इस्तीफा दिया था। हम किसानों के साथ पूरी तरह से खड़े हैं। बिल पेश करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि कृषी संसोधन बिल और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी बिल दोनों ही किसान, मजदूर और वर्कर्स के लिए घातक हैं। राज्य के वित्त मंत्री ने पेश किया एक बिल राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने भी विशेष विधानसभा सत्र के दौरान सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया। इसके बाद, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कृषि अध्यादेशों और बिजली अधिनियम में संशोधन के खिलाफ एक प्रस्ताव रखा। आपको बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि बिलों को लेकर पंजाब में किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी राज्य में किसानों का समर्थन करने पहुंचे थे और ट्रैक्टर यात्रा की थी।
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2020, देश में कोरोना वायरस संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. मंगलवार को हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला भी कोरोना वायरस से पीड़ित हो गए. राज्य में इससे पहले भी कई मंत्री और नेता कोरोना की चपेट में आ चुके हैं और अब इनमें दुष्यंत का नाम भी जुड़ गया है. दुष्यंत चौटाला ने खुद ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं, लेकिन जो भी उनके संपर्क में आए हैं वो खुद का टेस्ट करा लें. हरियाणा में इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता समेत कई मंत्री और करीब आधा दर्जन विधायक कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. पिछले महीने जब राज्य में विधानसभा सत्र हुआ था, उस वक्त बड़ी संख्या में विधायक कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. आपको बता दें कि देश में कोरोना संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और हर रोज औसतन 80 हजार नए केस, एक हजार के करीब मौतें दर्ज हो रही हैं. भारत में अबतक कुल कोरोना केस की संख्या 66 लाख के पार चली गई है, जबकि मरने वालों का आंकड़ा एक लाख से अधिक है. अगर सिर्फ हरियाणा की बात करें तो राज्य में अबतक करीब 1.34 लाख केस सामने आ चुके हैं. हालांकि, अब सिर्फ 12 हजार के करीब केस एक्टिव हैं और 1.21 लाख लोग ठीक हो चुके हैं. राज्य में कोरोना संकट के चलते अबतक 1500 के करीब लोगों की जान जा चुकी है.

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