taaja khabar...कोरोना से तबाही पर बोले पीएम मोदी- जिस दर्द से देशवासी गुजरे हैं, उसे मैं भी महसूस कर रहा हूं....चित्रकूट जेल के अंदर गैंगवॉर, दो गैंगस्टर की हत्या, तीसरा पुलिस कार्रवाई में मारा गया..995.40 रुपये में मिलेगी रूसी कोरोना वैक्सीन की एक डोज, देश में बनने पर हो सकती है सस्‍ती...गुजरात, असम सहित कई राज्यों को भेजी कोवैक्सीन की खेप...जब असम पहुंचे बंगाल के गवर्नर धनखड़ तो पैरों में गिर पड़ी महिलाएं...हमास कर रहा रॉकेट की बारिश, इजरायली 'लौह कवच' आयरन डोम कर रहा तबाह...PM Kisan में 50 लाख नए लोगों को भी मिलेंगे 2000-2000 रुपए, ऐसे कर सकते हैं अपना अकाउंट चेक...केंद्र ने कहा, राज्यों को निशुल्क भेजी जाएगी करीब एक करोड़ 92 लाख कोरोना वैक्सीन...पत्रकारों के लिए मध्यप्रदेश सरकार का अहम ऐलान, कोरोना संक्रमित होने पर इलाज का खर्च देगी राज्य सरकार...दवाओं की कालाबाजारी करने वालों पर भड़के प्रधानमंत्री, राज्य सरकारों को दिया कड़ी कार्रवाई का आदेश...कोरोना के एक दिन में नए मामलों से अधिक ठीक होने वालों का आंकड़ा, इस दौरान 4000 संक्रमितों की मौत..कोरोना महामारी के बीच सांसों के साथ अपनों ने छोड़ा हाथ, संघ निभा रहा मानवता का रिश्ता...

rajasthan

जयपुर देशभर में जहां कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। वहीं इसी बीच देश के कई राज्यों में इसकी रोकथाम के लिए लगातार पाबंदियां बढ़ती जा रही है। राजस्थान में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोकने के लिए 'महामारी रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़ा लागू किया गया है। इसके तहत प्रदेश में जहां बेवजह घूमने वालों को संस्थागत क्वारंटीन करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं अन्य कई जरूरी पाबंदियां भी लगाई गई है। इसी क्रम में अब राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने संपूर्ण लॉकडाउन को लेकर अपना समर्थन जताते हुए देशव्यापी लॉकडाउन की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के देशव्यापी लॉकडाउन का समर्थन करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कहा कि अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए तो कोविड -19 के संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पहले से ही देश में ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य उपकरणों की कमी है और देश को जल्द ही डॉक्टर, चिकित्सा कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। गहलोत के बयान के बाद जानकारों का कहना है कि प्रदेश में आज कल में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा हो जाएगी। इधर सीएम ने ट्वीट करके भी यह साफ संकेत दे दिए हैं कि वो संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की तैयारी में हैं। यह लिखा सीएम गहलोत ने ट्वीट में दरअसल सीएम गहलोत ने एक ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि "मैं राहुल गांधी के दिए नेशनल लॉकडाउन के मत का पूरी तरह से समर्थन करता हूं। गहलोत ने कहा कि अब राष्ट्रीय लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने आगे लिखा है कि हमारे डॉक्टर, मेडिकल कर्मचारी राष्ट्र के लिए लगातार एक साल से अत्यधिक काम के बोझ में जी रहे है। हमने उनमें से कई को खो दिया है। विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि बढ़ती संख्या के बीच अब हमे ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ रहा हैं। जल्द ही मेडिकल स्टाफ की कमी भी होगी। गहलोत ने कहा - होने लगी ऑक्सिजन- दवाईयों की शॉर्टेज कांग्रेस नेता राहुल गांधी के देशव्यापी बंद के आह्वान का समर्थन करते हुए, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कहा कि अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए तो यह कोविद -19 की श्रृंखला को तोड़ने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से ही ऑक्सिजन, दवाओं और अन्य उपकरणों की कमी है और देश को जल्द ही चिकित्सा कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। सीएम ने कहा, सुनियोजित किया गया लॉकडाउन सीएम गहलोत में जहां अपने ट्वीट में चिकित्सकों को लेकर बात की है। वहीं गरीब तपके और मजदूरों को लेकर भी बात रखी है। उन्होंने लिखा है कि प्रवासियों को कष्टों से बचने के लिए लॉकडाउन की योजना ठीक से बनाई जा रही है। यह योजना प्रवासी कामगार मददगार हो सकते हैं। बता दें कि बुधवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग के दौरान सीएम गहलोत ने लॉकडाउन के फैसले को लेकर 5 सदस्यीय मंत्रियों के कमेटी का गठन किया है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों की अधिकारियों से बातचीत के बाद आने वाले सुझावों के बाद अब प्रदेश में संपूर्ण लॉकडाउन लगना तय है।
जयपुर ,राजस्थान में बुधवार को कोराना वायरस संक्रमण के 16,815 नए मामले सामने आए जबकि संक्रमण से 155 और मरीजों की मौत हो गई। राज्य में अभी 1,96,683 कोरोना संक्रमित मरीज उपचाराधीन है। राज्य में इस घातक वायरस से अब तक कुल 5,021 लोगों की जान जा चुकी है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बीते चौबीस घंटे में 16,815 और संक्रमित मिले है। इसमें जयपुर में 3301, उदयपुर में 1452, जोधपुर में 1401, अलवर में 901, गंगानगर में 836, कोटा में 678, बीकानेर में 609, हनुमानगढ में 602, सीकर में 561, चूरू में 529 नए रोगी शामिल है। इसके अनुसार बीते चौबीस घंटे में राज्य में इस दौरान 17,022 और मरीज ठीक हुए है।
जयपुर कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच राजस्थान में आज से 18 से 44 साल के लोगों का टीकाकरण शुरू हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, अभी सूबे के 11 जिलों में ही कोरोना वैक्सीन लगाने का फैसला लिया गया। हालांकि, जैसे-जैसे वैक्सीन की पर्याप्त डोज आ जाएगी तो इसे पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। वहीं, टीकाकरण के तीसरे फेज की शुरुआत के बीच राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ्री कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने की खास अपील की है। अशोक गहलोत ने ट्वीट के जरिए पीएम मोदी से किया निवेदन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को इस संबंध में ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, 'आज से 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगना शुरू हो रहा है। मैं पुन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन करता हूं कि इस आयुवर्ग समेत सभी को फ्री कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवाने की घोषणा करें। जिससे जल्द से जल्द और अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लग सके।' अमेरिका का जिक्र कर पीएम मोदी से की फ्री टीके की अपील सीएम गहलोत ने एक और ट्वीट में कहा, 'अमेरिका जैसे पूंजीपति देश ने भी अमीरों सहित सभी को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवाई है। जिससे टीकाकरण अभियान की सफलता सुनिश्चित हो जाती है। मैं प्रधानमंत्री जी से निवेदन करता हूं कि भारत में भी कोरोना के निशुल्क टीकाकरण करने की घोषणा करें जिससे सभी को टीका लग सके।' मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'हमारे देश में बचपन से लेकर बड़े होने तक BCG, पोलियो (IPV और OPV), हेपिटाइटिस बी, पेंटावेलेंट, रोटावाइरस, मीजल्स, रूबेला, जापानी बुखार, DPT, टिटनेस और न्यूमोकोकल वैक्सीन समेत 12 टीके निशुल्क लगाए जाते हैं। इसी का परिणाम है कि अधिकाधिक बच्चे इन बीमारियों से सुरक्षित हो पाते हैं।' कोरोना संकट के चलते लोगों से की शादी टालने की अपील कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए गहलोत सरकार ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को 17 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया है। इसे 'महामारी रेड अलर्ट-जन अनुशासन पखवाड़ा' नाम दिया गया है। नई गाइडलाइंस जारी होने के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों से भी खास अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'कोरोना की इस भयावह दूसरी वेव के दौरान जिन लोगों की शादियां हैं उनसे अपील है कि फिलहाल अपनी शादी टाल दें। अभी शादी में खुशियों से अधिक कोविड की चिन्ता लगी रहेगी। इस महामारी पर विजय पाने के लिए कोविड संक्रमण की चैन को तोड़ना जरूरी है जो शादी में आने वाली भीड़ से संभव नहीं होगा।'
जयपुर राजस्थान में 3 मई के बाद भी लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लागू रखने पर अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी मुहर लगा दी है। 3 मई के बाद भी कर्फ्यू जारी रहेगा और इस बार पाबंदियों को और बढ़ाया जाएगा। नियमित कोविड समीक्षा बैठक में गहलोत ने गृह विभाग के अफसरों को मौजूदा गाइडलाइन को और सख्त बनाने और इसे आगे भी लागू रखने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के अफसरों से कहा कि जरूरतमंद तबके की आजीविका का ध्यान रखते हुए ऐसी गाइडलाइन तैयार करें, जिससे लोगों का गैर-जरूरी आना-जाना न हो और संक्रमण की रफ्तार पर लगाम लग सके, नहीं तो स्थिति और विकट हो सकती है। 4 मई से नई गाइडलाइन लागू होंगी गहलोत ने कहा कि चिकित्सा मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी तमाम स्थितियों को ध्यान में रखकर गाइडलाइन तैयार करें। हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि संक्रमण की चाल हर हाल में धीमी हो, चाहे इसके लिए और सख्त कदम उठाने पड़ें। बता दें राजस्थान में कर्फ्यू की मौजूदा गाइडलाइन 3 मई तक के लिए है और 4 मई से नई गाइडलाइन लागू होंगी। नई गाइडलाइन बनाने की तैयारी शुरू नई गाइडलाइन बनाने के लिए मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में 3 मई के बाद लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाने के लिए गाइडलाइन पर चर्चा होगी। इसके बाद गृह विभाग ड्राफ्ट तैयार करेगा। आज-कल में ही नई गाइडलाइन को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जारी कर दिया जाएगा। 3 मई के बाद कर्फ्यू कम लॉकडाउन का समय बढ़ाया जाएगा। इस बार पांबदियां ज्यादा सख्त होंगी। वीकेंड कर्फ्यू पर दूध, सब्जी और पेट्रोल पंप को छोड़ सब कुछ बंद रहेगा। एक जिले से दूसरे जिले में निजी वाहनों के जरिए आवाजाही पर रोक को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
जयपुर राजस्थान में कोरोना के बढ़ते संक्रमण और अस्पतालों में ऑक्सिजन की किल्लत से हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संकट की इस घड़ी में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने ट्वीट के जरिए अपनी बात रखी है। सीएम गहलोत ने अपने कहा कि आज राजस्थान में करीब 201 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की कमी है। राज्य में पॉजिटिव केस देश के कुल संक्रमितों का 5 फीसदी है लेकिन ऑक्सिजन आवंटन सिर्फ 1.6 फीसदी है। ऐसे में केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि इमरजेंसी के तौर पर प्रदेश को 201 मीट्रिक टन ऑक्सिजन आज ही आवंटित की जाए। ऑक्सिजन के मुद्दे पर सीएम गहलोत ने किए बैक-टू-बैक ट्वीट अशोक गहलोत ने शुक्रवार को बैक-टू-बैक कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा, 'राजस्थान में लगभग 1 लाख 70 हजार एक्टिव केसेज हैं। मानकों के अनुसार करीब 12 फीसदी मरीजों को ऑक्सिजन की आवश्यकता होती है। यानी राजस्थान में करीब 20,400 मरीजों को आज ऑक्सिजन की आवश्यकता है। एक्टिव केसेज की गणना के आधार पर आज प्रदेश को 466 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की आवश्यकता है लेकिन फिलहाल सिर्फ 265 मीट्रिक टन ऑक्सिजन ही मिल पा रही है।' 'ऑक्सिजन और दवाइयों की कमी बेहद व्यथित करने वाली' अशोक गहलोत ने अगले ट्वीट लिखा, 'हमारा प्रयास है कि केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर कोविड महामारी का मुकाबला करें। ऑक्सिजन और दवाइयों की कमी बेहद व्यथित करने वाली है। हम केन्द्र सरकार से बार-बार निवेदन कर रहे हैं कि अन्य राज्यों और विदेशों से मदद लेकर राजस्थान और अन्य राज्यों की भी सहायता करें।' मुख्यमंत्री ने कहा, 'हो सकता है कि केन्द्र सरकार ने बेहतर प्रबंधन की दृष्टि से ऑक्सिजन और दवाइयों का कंट्रोल अपने हाथ में लिया हो। लेकिन राज्य अगर एक-दूसरे की मदद करना चाहते हैं तो भारत सरकार की देखरेख में उन्हें इसकी छूट दी जाए।' 'राजस्थान को एक हफ्ते के अन्दर 550 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की आवश्यकता' गहलोत ने कहा, 'हम पुन: केन्द्र से निवेदन करते हैं कि राजस्थान की सहायता करें। आज राजस्थान में करीब 201 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की कमी है। राज्य में संक्रमित केस देश के कुल संक्रमितों का 5 फीसदी है लेकिन ऑक्सिजन आवंटन सिर्फ 1.6 फीसदी है। प्रदेश को एक सप्ताह के अन्दर ही कुल 550 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की आवश्यकता होगी। अत: केन्द्र सरकार से पुन: अनुरोध है कि इमरजेंसी के तौर पर प्रदेश को 201 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आज ही आवंटित की जाए।'
जयपुर कोरोना वायरस के बढ़ते कहर (Coronavirus Crisis Rajasthan) के बीच राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot) ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को मुफ्त में कोरोना का टीका लगाने का ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है। अशोक गहलोत ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि राजस्थान सरकार ने प्रदेश के 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को लगभग 3000 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च कर निःशुल्क कोविड वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी, केंद्र से की ये खास अपील सीएम अशोक गहलोत ने इसके साथ ही केंद्र सरकार से भी खास अपील की है। उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा कि 'यह बेहतर होता कि राज्य सरकारों की मांग के अनुसार भारत सरकार 60 वर्ष और 45 वर्ष से अधिक आयुवर्ग की तरह ही 18 वर्ष से 45 वर्ष तक की आयु के युवाओं के वैक्सीनेशन का खर्च भी उठा लेती तो राज्यों का बजट डिस्टर्ब नहीं होता।' राजस्थान में कोरोना का कोहराम जारी राजस्थान में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। शनिवार को प्रदेश में कोरोना के 15355 नए संक्रमित मामले सामने आए। वहीं रिकॉर्ड 74 लोगों ने इस बीमारी से दम तोड़ दिया। इससे एक दिन पहले भी राजस्थान में कोरोना संक्रमण के 15358 नए मामले सामने आए थे। जहां एक ओर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा, वहीं अब मृत्युदर में भी पिछले कुछ समय से बढ़ोतरी नजर आ रही है। सरकार की ओर से लगाई जा रही पाबंदियों का असर भी नहीं दिख रहा है। शनिवार तक प्रदेश में एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 127616 पहुंच गई है। कुल संक्रमितों की संख्या 498628 हो गई। प्रदेश में कुल मौतों का आंकड़ा 3527 हो गया है। हालांकि, शनिवार को 4959 संक्रमित कोरोना को हराकर घर लौटे हैं। भारत ने सबसे तेजी से 14 करोड़ कोविड-19 रोधी टीके लगाए भारत दुनिया में अपने नागरिकों को सबसे तेजी से 14 करोड़ कोविड रोधी टीकों की खुराक लगाने वाला देश बन गया है। महज 99 दिनों में इसे अंजाम दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से रविवार को यह जानकारी दी गई। मंत्रालय ने सुबह सात बजे तक की शुरुआती रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में हुए कुल टीकाकरण में से 58.83 फीसदी टीके आठ राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और केरल में लगाए गए हैं।
जयपुर कोरोना के मामले बढ़ने के बाद राजस्थान सरकार ने 30 अप्रैल तक के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई गाइडलाइन में राजस्थान के सभी शहरों में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। शहरी क्षेत्रों में शाम 5 बजे से बाजार बंद करने होंगे। सरकारी दफ्तर 4 बजे तक ही खुलेंगे। सभी कोचिंग, स्कूल, कॉलेज और लाइब्रेरी सहित शैक्षणिक संस्थान बंद होंगे। गृह विभाग ने नई गाइडलाइन जारी कर कड़ी पाबंदियां लगाई है। नई गाइडलाइन 16 अप्रैल को शाम 6 बजे से लागू होगी। शादी और निजी आयोजनों में 50 से ज्यादा लोग नहीं आ सकेंगे। सभी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों, रैलियों, जुलूसों पर रोक लगा दी गई है। रेस्टोरेंट में 50 फीसदी बैठक क्षमता से ज्यादा लोग नहीं बैठा सकेंगे। सिनेमा हॉल, थियेटर, जिम, मल्टीप्लेक्स बंद रहेंगे। बसों में 50 फीसदी ही यात्री बैठा सकेंगे, खड़े होकर यात्रा नहीं बसों सहित हर सार्वजनिक परिवहन के साधनों में 50 फीसदी सीटों पर ही यात्री बैठा सकेंगे। बसों में खड़े हाेकर यात्रा करने पर रोक रहेगी। निजी वाहनों में तय क्षमता से ज्यादा लोग नहीं बैठ सकेंगे। शादी समारोह और सार्वजनिक आयोजन के लिए ये पाबंदियां शादी सहित हर निजी आयोजन में 50 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकेंगे शादियों में बैंड वालों को 50 लोगों में नहीं गिना जाएगा शादी समारोह के लिए पहले एसडीएम को सूचना देनी होगी अंतिम संस्कार में 20 लोगों से ज्यादा को अनुमति नहीं होगी दिन में वीसी से मंथन, शाम को गाइडलाइन कोरोना के मामले लगातार बढ़ने के साथ सरकार ने लॉकडाउन तो नहीं पर लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाने की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री ने पाबंदियों पर चर्चा के लिए दोपहर को धर्मगुरुओं, सभी दलों के विधायकों, नेताओं और सामाजिक संगठनों के साथ ओपन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लॉकडाउन लगाने से मना कर चुके हैं, लेकिन लॉकडाउन की तरह लोगों से व्यवहार करने की अपील की है। पिछले दिनों विशेषज्ञों ने जो सुझाव दिए थे उन्हीं के आधार पर गाइडलाइन में पाबंदियां लगाई हैं। तीन सीटों पर उपचुनाव का प्रचार बंद होने और गणगौर की सवारी निकलने के बाद लागू होंगी नई गाइडलाइन सरकार ने नई गाइडलाइन जारी तो आज कर दी लेकिन लागू उपचुनाव का प्रचार खत्म होने के अगले दिन यानी वोटिंग से ठीक पहले दिन शाम से लागू होंगी, तब तक कल आखिरी दिन सभाएं, रैलियां हो जाएंगी। नई गाइडलाइन में सभी तरह के सार्वजनिक आयोजनों-राजनीतिक सभाओं, रैलियों, धार्मिक, राजनीतिक जुलूसों, त्योहारों के आयोजनों पर रोक लगाई गई है। नई गाइडलाइन 16 को शाम 6 बजे से लागू हो रही हैं। 15 को तीनों सीटों पर शाम को प्रचार बंद हो जाएगा और गणगौर का त्योहार भी मना लिय जाएगा, गणगौर की सवारी भी निकल जाएगी। उसके बाद सभी तरह के सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लग जाएगी।
जयपुर CBSE की परीक्षाएं रद्द और स्थगित करने फैसले के कुछ घंटे बाद राजस्थान सरकार ने भी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इन परीक्षाओं को कब कराया जाएगा, इस पर फैसला बाद में होगा। बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने के शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने 8वीं, 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों को सीधे अगली कक्षाओं में प्रमोट करने का फैसला किया है। CM गहलोत ने 3 घंटे में परीक्षा टालने को मंजूरी दी शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाएं टालने का प्रस्ताव आज ही मुख्यमंत्री को भेजा था। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने 2 बजे मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा था- CBSE ने भी बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आगे खिसकाने में ही फायदा है। इसके तीन घंटे बाद ही मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने का फैसला कर दिया। 6 मई से शुरू होने थे बोर्ड के एग्जाम राजस्थान में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक की परीक्षा 6 मई से शुरू होने वाली थीं। वहीं, 8वीं बोर्ड पैटर्न परीक्षा भी 5 मई से शुरू हो रही है। ये परीक्षा भी रद्द हो गईं हैं। अब स्कूल बंद करने पर फैसला शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा था कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते अब स्कूलों को भी बंद किया जाए। आगे अगर हालात सामान्य होंगे तो फिर देखा जाएगा। सरकार अब जल्द ही सभी स्कूलों को बंद करने पर फैसला कर सकती है, शहरों में 9वीं तक के स्कूल पहले से बंद हैं। विशेषज्ञों के सुझाव के बाद परीक्षाएं स्थगित मौजूदा हालात में परीक्षाएं कराने पर कोरोना के फैलने का खतरा ज्यादा है। विशेषज्ञों ने भी स्कूल बंद करने और परीक्षाएं टालने का सुझाव दिया था। विशेषज्ञों के सुझावों के बाद ही शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाएं टालने के लिए मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजा, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया है।
जयपुर, देश में कोरोना के बढ़ते मामलों ने चौतरफा चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मामलों में बढ़ोतरी नहीं हो इसके लिए राजस्‍थान सरकार भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक राजस्‍थान की सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों और बाहर यात्रा करके आने वालों के लिए RT-PCR टेस्‍ट अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं पहली से 9वीं तक की कक्षाओं निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी कोविड़ संक्रमण की आंकलन के आधार पर रात्रिकालीन कर्फ्यू के समय के संबंध में निर्णय ले सकेंगे लेकिन रात आठ बजे से पहले और सुबह 6 बजे के बाद कर्फ्यू के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों को कोविड़ जांच रिपोर्ट दिखानी होगी। डिलीवरी सेवाओं को छोड़कर रेस्तरां और रेस्‍टोरेंटों को नाइट कर्फ्यू का पालन करने को कहा गया है। सरकार ने सीमाओं पर सख्‍त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि शादियों में 100 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाएगी। सिनेमा घर, थिएटर और मल्टीप्लेक्स बंद रहेंगे। सूत्रों की मानें तो सरकार नाइट कर्फ्यू अब रात 10 बजे की जगह रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक करने की तैयारी कर रही है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर कोविड टेस्ट रिपोर्ट देखने का प्रबंध किया गया है। राजस्थान में बीते 24 घंटे में कोरोना के 1729 नए संक्रमित मिले हैं जबकि दो लोगों की मौत हो गई है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उच्चाधिकारियों के साथ कोरोना की दूसरी लहर के चलते पैदा हुए हालात की समीक्षा की। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पांच सूत्रीय रणनीति यानी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, उचित कोविड व्यवहार और टीकाकरण को जरूरी बताया। अधिक केस और मृत्युदर वाले राज्यों- महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के लिए तत्काल केंद्रीय टीमें रवाना करने के निर्देश दिए गए हैं। यही नहीं महामारी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली, राजस्थान के अलवर में एक महिला के साथ हुए दुष्कर्म मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) एक्शन में आ गया। मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने फैक्ट जांच के लिए अलवर में 3 सदस्यीय टीम को भेजा है। एनसीडब्ल्यू ने मामले में एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। मामले पर राजस्थान के डीजीपी को एनसीडब्लयू ने लिखा कि दो महीने में जांच पूरी करने के लिए एमएचए के दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण और पुलिस थाने में प्रत्येक रिपोर्ट दर्ज करने का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के अलवर जिले में पुलिसकर्मी द्वारा थाने में अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराने आई महिला से दुष्कर्म किया के मामले ने सभी हिला दिया है। अलवर जिले में खेड़ली पुलिस थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक भरत सिंह ने तीन दिन तक इस महिला के साथ दुष्कर्म किया। रिपोर्ट की माने तो उसने यह दुष्कर्म थाना परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में किया। मामला सामने आने के बाद थाने में पहुंचे जयपुर रेंज के महानिरीक्षक हवा सिंह घुमरिया और पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने आरोपित भरत सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 में दुष्कर्म का मामला दर्ज करने के निर्देश देने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है था। आरोपित की मदद करने वाले थाने में तैनात हेड कांस्टेबल प्रकाश चंद को निलंबित कर दिया गया है। आरोपित तीन दिन से पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर रहा है, लेकिन मामले का खुलासा रविवार देर रात करीब 11 बजे हुआ। रिपोर्ट की मानें तो दो सप्ताह में पुलिसकर्मियों पर महिला के साथ दुष्कर्म का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 2 मार्च को अलवर के अरावली विहार पुलिस थाने में तैनात पुलिसकर्मी रामजीत गुर्जर पर दुष्कर्म का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार 2 मार्च को 26 साल कर महिला खेड़ली पुलिस थाने में अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराने आई थी। महिला का कहना था कि पति उसे तलाक देना चाहता है, लेकिन वह ऐसा नहीं चाहती। इस पर थाने में मौजूद भरत सिंह ने उसे विश्वास दिलाया कि वह पति की कॉउसिलिंग करेगा और उसे ऐसा नहीं करने के लिए तैयार करेगा । बातों ही बातों में वह महिला को सबसे पहले 2 मार्च को ही थाना परिसर में अपने स्टाफ क्वार्टर में ले गया, जहां उस महिला के साथ दुष्कर्म किया ।
धौलपुर प्रदेश में महिला अपराध और बलात्कार की घटनाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही है। रविवार को एक बार फिर प्रदेश के धौलपुर के निहालगंज थाना इलाके में दुष्कर्म की दर्दनाक दास्तां सामने आई है। यहां जिले की 12 बर्षीय का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लड़की को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है। इस संबंध में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है। वहीं मामले की आगे की पूछताछ की जा रही है। पिता ने दर्ज करवाई शिकायत बच्ची के पिता ने तहरीर देते हुए बताया है कि मेरी बच्ची 4 मार्च सब्जी की ठेल से सब्जी लेकर वापिस घर लौट रही थी। तभी रास्ते में दो लड़के उसका अपहरण करके उसे एकांत जगह पर ले गए। इसके बाद उसे कुछ नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। पिता ने बताया कि रात्रि 9 बजे मेरे पास अज्ञात फ़ोन आया , जिन्होंने बताया कि आपकी बेटी यहां पर बेहोश पड़ी हुई है । तभी मैं और मेरी पत्नी मौके पर पहुंचे । यहां पहुंचकर हमने देखा कि बच्ची बेहोश पढ़ी हुई थी,तभी बच्ची को एम्बुलेंस की सहायता से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथ ही पुलिस को भी सूचित किया गया। बच्ची का करवाया मेडिकल पिता ने बताया पुलिस की ओर से बच्ची का मेडिकल कराया जा रहा है। साथ ही पुलिस ने वहीं मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी पुलिस की ओर से आरोपियों की तलाश की जा रही है, फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
भरतपुर प्रदेश बीजेपी में चल रही खींचतान के बीच रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी धार्मिक यात्रा का आगाज किया। आज अपनी देव दर्शन यात्रा के लिए वे भरतपुर पहुंचीं। वसुंधरा यहां पूछरी का लौठा पर हेलीकॉप्टर से पहुंचीं। साथ ही यहां एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान राजे गुट के अनेक भाजपा विधायक, सांसद और अन्य पदाधिकारियों भी मौजूद रहे। राजे बोलीं- मैं विजय राजे सिंधिया की बेटी इस दौरान राजे ने सभा को संबोधित करते हुए भाजपा आलाकमान को इशारों ही इशारों में पार्टी में उनके परिवार का योगदान को जता दिया। राजे ने कहा कि वह आज भी वही हैं, जो पहले थीं। साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि मेरी मां विजय राजे सिंधिया ने कमल के फूल को खिलाने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी और मैं भी उसी मां की बेटी हूं। हालांकि उनके शब्दों के कई मायने निकाले जा सकते हैं, लेकिन राजनीति के जानकारों की मानें, तो अलग- थलग की गईं वसुंधरा राजे का इशारों-इशारों में पार्टी में संदेश था कि उन्हें पार्टी में भुलाया नहीं जा सकता है। मेरी मां ने कमल को कभी मुरझाने नहीं दिया: वसुंधरा राजे ने आगे कहा कि मेरी मां के रोम -रोम में भाजपा और राष्ट्रवाद भरा हुआ था। उन्होंने कभी भी कमल को मुरझाने नहीं दिया था। राजे ने कहा कि मुझे आप सभी को यही याद दिलाना है कि मेरी ब्रज इलाके में बड़ी आस्था है। मैं जब भी कोई बड़ा काम करती हूं, तो उससे पहले भगवान के दर्शन करती हूं, इसलिए सबसे पहले में यहां ब्रज भूमि पर आयी हूं और हम सभी मिलकर भगवान के दर्शन करेंगे। पीएम मोदी ने किया राम मंदिर का सपना: राजे राजे ने अपने संबोधन में राम मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा किया है। सबसे अच्छी बात यह है कि राम मंदिर निर्माण के लिए भगवान कृष्ण की भूमि से पत्थर जा रहा है। गहलोत सरकार पर वसुंधरा राजे ने साधा निशाना सभा को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने प्रदेश सरकार भी जमकर हल्ला बोला। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में प्रदेश के विकास के लिए अनेकों योजनाएं शुरू की गईं थी। मगर आज की सरकार में वे सभी बंद पड़ी हैं इसलिए हम सभी को मिलकर अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को जड़ से उखाड़ने का काम करना है। गिर्राज महाराज का नाम लेकर हम सभी राजस्थान के रुके हुए विकास को फिर से शुरू करने की प्रार्थना करेंगे। वसुंधरा राजे ने गोवर्धन पर्वत की लगाई परिक्रमा मिली जानकारी के अनुसार, राजे ने सभा को सम्बोधित करने के बाद विभिन्न गतिविधियां कीं। इसके बाद राजे ने मथुरा में पड़ने वाले गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाईं। साथ ही मंदिरों के दर्शन किये। आपको बता दें कि राजे आज रात आदि बद्रीनाथ मंदिर में रुकेंगी, यहां वह भजन पूजन और हवन करेंगी। फिर कल सोमवार की सुबह कुछ अन्य मंदिरों के दर्शन करेंगी, जिसके बाद वह धौलपुर के लिए रवाना होंगी।
दौसा प्रदेश के दौसा जिले में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया । यहां जिले में लालसोट थाना क्षेत्र में मंगलवार को स्कूली बस और ट्रक में जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बस में सवार करीब एक दर्जन बालक घायल हो गए। इनमें से 7 बालकों को लालसोट अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा मनोहरपुर कौथुन नेशनल हाईवे 145 पर शिवसिंहपुरा मोड़ के समीप हुआ। जब सुबह सभी बच्चे बस में सवार होकर एक निजी स्कूल में जा रहे थे। जैसे स्कूल बस तलाव गांव की तरफ से नेशनल हाईवे 145 पर चढ़ी तो पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। बस चालक की बताई जा रही है गलती बताया जा रहा है कि बस चालक ने बिना देखे ही हाइवे पर बस को चढ़ा दिया। इसके चलते पीछे से आ रहे ट्रक से बस टकरा गई। हादसे के बाद पुलिस प्रशासन के साथ-साथ एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंची और घायल बालकों को लालसोट अस्पताल में भर्ती कराया गया है । हालांकि घायल बालकों की स्थिति पूरी तरह खतरे से बाहर बताई जा रही है, एक बालक को जयपुर भी रेफर किया गया है। पुलिस हादसे का कारण जानने में जुटी इधर पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है। लालसोट एसडीएम गोपाल जांगिड़ का कहना है कि मामले की जांच में प्रशासन की टीम जुट गई है । वहीं बस में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण कोविड-19 का पालन नहीं होने के कारण भी स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है साथ ही प्रथम दृष्टया चालक की लापरवाही सामने आने के चलते चालक के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी स्कूली बच्चों की उम्र 15- 16 साल मिली जानकारी के अनुसार स्कूल बस हादसे में संदेश, राजकुमार, ओमप्रकाश, भीमराज, पृथ्वीराज राजपूत, सिद्धांत, मनीष नामक स्कूली बच्चे घायल हुए हैं, जिनका जिला अस्पताल में लालसोट अस्पताल में उपचार जारी है। सभी स्कूली बच्चों की उम्र 15- 16 साल की थी। वही ये सभी होदायली, सुमेल, मटलाना, सुमेल, मटलाना आदि गांव के रहने वाले थे।
राजसमंद प्रदेश में जहां लगातार महिला अपराध से जुड़े मामले उजागर हो रहे हैं। वहीं उसी बीच राजसमंद से 7 साल की मासूम बच्ची से दरिंदगी की सारे हदें पार करने का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार राजसमंद के भीम कस्बे के पेलाडोल में एक सात वर्षीय नाबालिग बच्ची से दरिंदगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासन के बीच हड़कंप मचा हुआ है। साथ ही वायरल वीडियो के आधार पर किसी ने चाईल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी है। इसके बाद टीम के सदस्यों ने पंहुचकर बच्ची की तलाश की और उसे भीम थाने पर ले जाकर आरोपी रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। बड़े पापा के घर रहती थी मासूम जानकारी के अनुसार थानेटा की रहने वाली बच्ची पेलाडोल में अपने बडे पापा के पास रह रही थी। पिछले तीन माह से उन लोगों ने इसे बन्दी बनाकर रखा था। साथ ही उससे घर का पूरा काम करवाया जाता था। जानकारी मिली है कि बच्ची की ओर से मना करने पर उसके शरीर पर सिगरेट से दागा जाता था। उसके गुप्तांगों में भी मिर्ची पाउडर डाल दिया गया था। इसके अलावा उसके गाल और कान को दांतो से काटा गया है। इसके शरीर मे कुछ फैक्चर होने की भी संभावना भी जताई जा रही है। इस घटना को सुनने के बाद अब हर कोई हैरान है। हर कोई यही सोच रहा है कि आखिरकार कोई भी व्यक्ति कैसे मासूम बच्ची के साथ इस तरह का हैवानियत भरा बर्ताव कर सकता है। किया रिश्तेदार को गिरफ्तार सूत्रों ने बताया कि बच्ची की हालत खराब होने के बाद अब चाइल्ड हेल्पलाइन ने उसे राजसमंद मुख्यालय लाकर बाल कल्याण समिती के सामने पेश किया है। उनके निर्देश पर प्राथमिक उपचार के लिये नाबालिग को जिला चिकित्सालय भिजवाया है। वहीं भीम पुलिस ने चाईल्ड लाईन की शिकायत पर देर रात आरोपी रिश्तेदार को भी गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व देवगढ़ में भी एक पिता की ओर से तीन बच्चों को लटकाकर छड़ी से बुरी तरह पीटने का वीडियो भी वायरल हुआ था।
दौसा साल के पहले ही महीने में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के सबसे बड़े घूस कांड का पर्दाफाश किया था। इस घूस कांड में दो राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसरों को गिरफ्तार भी किया गया था। 13 जनवरी को की गई इस कार्रवाई के बाद से ही दोनों आर ए एस अधिकारी जेल में बंद हैं । इस घूस कांड में एक आईपीएस मनीष अग्रवाल का नाम भी सामने आया था। लेकिन अभी तक एसीबी ने आईपीएस मनीष अग्रवाल को गिरफ्तार नहीं किया है जबकि एसडीएम पिंकी मीणा और पुष्कर मित्तल दोनों जेल में बंद हैं। आखिर कैसे बिछा घूसखोरों पर जाल दरअसल दौसा होकर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। इसका निर्माण वर्तमान में भी चल रहा है। एक्सप्रेस -वे निर्माण में कोई बाधा नहीं आए ,इसके लिए दौसा के पुलिस व प्रशासन के अधिकारी निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों से रिश्वत का खुला खेल खेलते थे। निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों को बार-बार दबाव देकर रिश्वत की डिमांड की जाती थी। बार-बार रिश्वत देने से परेशान निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों ने आखिरकार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत की। इस शिकायत के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने करीब 1 सप्ताह तक घूसखोर ऊपर नजर रखी और उनके फोन सर्विलांस के लिए। इसके बाद 13 जनवरी को वर्ष 2021 के सबसे बड़े घूस कांड का खुलासा हुआ । साथ ही इस मामले में दौसा एसडीएम पुष्कर मित्तल और बांदीकुई एसडीएम पिंकी मीणा को एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया। कैसे आया आईपीएस मनीष अग्रवाल का नाम सामने आपको बता दें कि दौसा एसडीएम पुष्कर मित्तल 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। वहीं एसडीएम पिंकी मीणा 10 लाख रुपए की रिश्वत की डिमांड करती हुए अरेस्ट हुई थी। दोनों प्रशासनिक अधिकारियों के गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में 13 जनवरी को एक दलाल नीरज मीणा को भी गिरफ्तार किया था। लेकिन यह साफतौर पर बताया कि किस तरह भ्रष्टाचार के इस मामले में आईपीएस मनीष अग्रवाल भी शामिल है। दलाल मीणा का कहना है कि निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों से 4 लाख रुपए प्रति माह की बंधी बांधी गई थी। साथ ही केस रफा-दफा करने की एवज में 10 लाख रूपए की राशि डिमांड की जाती थी। ऐसे में दलाल नीरज मीणा की ओर से कुल 38 लाख रुपए की रिश्वत मांगी जा रही थी। 7 दिन रिमांड पर रहने के बाग अब दलाल मीणा को भी जेल भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक तत्कालीन दौसा एसपी मनीष अग्रवाल पर एसीबी ने शिंकजा नहीं कसा है। एसीबी ने एफआईआर में जोड़ा नाम उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से इस मामले में तत्कालीन दौसा एसपी के नाम से रिश्वत मांगने वाले दलाल नीरज मीणा को गिरफ्तार किया था साथ ही एसीबी ने दर्ज की गई एफआईआर में आईपीएस मनीष अग्रवाल का नाम भी जोड़ा था। एसीबी ने शुरुआती दिन में ही IPS मनीष अग्रवाल के तो मोबाइल जब्त भी कर लिए थे, लेकिन उसके बाद ना तो आईपीएस को पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय बुलाया और ना ही उनको गिरफ्तार किया गया। आखिर क्यों ढीला रहा IPS मनीष पर शिकंजा एसीबी कार्रवाई के बाद एसीबी के डीजी और एडीजी ने बताया था कि उनके पास आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही थी कि मोबाइल जब्त होने के बाद आईपीएस को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा। साथ ही सरकार की ओर से उन्हें एपीओ या सस्पेंड किया जा सकता है। लेकिन भारतीय पुलिस सेवा के अफसर मनीष अग्रवाल पर गंभीर आरोप होने के बावजूद भी ना तो सरकार ने उन्हें एपीओ किया और ना ही एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार किया। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि राजनीतिक दबाव के चलते एसीबी उनके खिलाफ पूरा शिकंजा नहीं कस पा रही है। राजनीतिक दबाव होने की संभावना उस समय अधिक बढ़ गई, जब राज्यसभा सांसद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने स्प्ष्ट शब्दो मे कहा था कि एसीबी राजनीतिक दबाव में ना आए और आईपीएस मनीष अग्रवाल को गिरफ्तार करें। छोटी मछली पकड़ी लेकिन मगरमच्छ मनीष अग्रवाल को पकड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद आईपीएस मनीष अग्रवाल के गिरफ्तारी के लिए को लेकर राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा मांग उठाने में लगे हैं। सांसद किरोडी लाल मीणा ने कहा कि ऐसी भी नहीं छोटी मछलियों को पकड़कर अच्छा कार्य किया है, लेकिन इस घूस कांड के मगरमच्छ आईपीएस मनीष अग्रवाल को एसीबी शीघ्र गिरफ्तार करें । साथ ही उन्होंने यह नसीहत भी दी कि एसीबी भी बिना राजनीतिक दबाव के कार्य करें। आईपीएस मनीष अग्रवाल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सांसद किरोड़ी लाल मीणा ज्ञापन भी दे चुके हैं और दौसा में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। आखिर कौन है IPS मनीष का राजनीतिक आका आईपीएस मनीष अग्रवाल के दलाल नीरज मीणा पर एसीबी की ओर से शिकंजा कसे जाने के बाद जानकारी में सामने आया कि नीरज थानों में मेहमान की तरह रहता था। ऐसे में निश्चित रूप से वह आईपीएस मनीष अग्रवाल के लिए दलाल का काम करता होगा। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में, पुलिस महकमे में व दौसा जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर आईपीएस मनीष अग्रवाल का राजनीतिक आका कौन है। दौसा की जनता यह चर्चा कर रही है कि करीब 8 माह पूर्व आईपीएस मनीष अग्रवाल को दौसा में एसपी लगाने व अब एसीबी से बचाने में किसी बड़े राजनीतिक आका का जरूर हाथ है। ऐसे में कार्रवाई के दिन यानी 13 जनवरी को एसीबी के अफसरों की ओर से मीडिया के सामने यह बयान देना कि उनके पास आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं । उसके बावजूद भी आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ ठोस शिकंजा नहीं कसा जाने पर निश्चित रूप से राजनीतिक संरक्षण की संभावनाओं को पैदा करता है।
दौसा आपने देश में रेप की कई हैवानियत की खबरें सुनी होंगी लेकिन आज दौसा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आपकी रूह कंपा जाएगी। दरअसल दौसा में एक दरिंदे पर एक या दो नहीं , बल्कि 4 रेप के केस दर्ज हुए हैं। बड़ी बात यह है कि चारों रेप पीड़िता अलग अलग घर से नहीं बल्कि एक ही घर से ताल्लुक रखती है। आरोपी ने एक ही घर में हैवानियत का डाका डाला है और एक के बाद एक चार महिलाओं को अपने जाल में फंसा कर दुष्कर्म किया। एक महिला ने की शिकायत, तब हुआ खुलासा मिली जानकारी के अनुसार इन महिलाओं के साथ थाना में बंद में एक ढाबा चलाने वाले विष्णु गुर्जर ने रेप किया है। दरअसल आरोपी विष्णु गुर्जर एक महिला के साथ पिछले 1 साल से दुष्कर्म के धिनौने कृत्य को अंजाम दे रहा था , लेकिन जब महिला को पता चला कि आरोपी अब उसकी छोटी बहनों और बेटी पर भी नजर गलत नजर डाल रहा है तो उसने महिला थाने में केस दर्ज करा दिया। महिला द्वारा मुकदमा दर्ज कराने के बाद उसकी दो छोटी बहन ने और बेटी ने भी अपनी दबी हुई आवाज खुली और दुष्कर्म की बात को बयान कर दिया। 22 जनवरी को हुआ पहला मुकदमा दर्ज पुलिस सूत्रों ने बताया कि 22 जनवरी को महिला ने आरोपी विष्णु गुर्जर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं इसी दिन आरोपी के खिलाफ महिला की एक नाबालिग बहन ने भी रेप का केस दर्ज करा दिया था। 23 जनवरी को महिला की तीसरी बहन ने महिला थाने में एक बार फिर आरोपी विष्णु गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज कराया। वहीं 25जनवरी यानी सोमवार को आज महिला की बेटी ने भी आरोपी विष्णु गुर्जर के खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया। यह जानकारी है कि रेपिस्ट ने पहले महिलाओं के इस घर में अपनी जान पहचान बढ़ाई । उसके बाद घर की सभी महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाता चला गया। अब इस रेप सीरीज के मामले में महिला थाने में चार मुकदमा दर्ज हो चुके हैं । लिहाजा जांच की जा रही है।
जयपुर, 07 जनवरी 2021,लंबे इंतजार के बाद राजस्थान कांग्रेस की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई. सचिन पायलट के हटाए जाने के बाद से पूरे राजस्थान में कांग्रेस की कार्यकारिणी भंग थी. बुधवार को करीब 6 महीने बाद कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद कार्यकारिणी के सदस्यों के नामों का ऐलान किया गया. नई कार्यकारिणी में 7 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 24 सचिव बनाए गए हैं. नई कार्यकारिणी की घोषणा पर सीएम अशोक गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का आभार जताया है. साथ ही नवगठित कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं. वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी ट्वीट करके नए पदाधिकारियों को बधाई दी है. उपाध्याक्ष के रूप में गोविंद राम मेघवाल, हरिमोहन शर्मा, डॉ. जितेंद्र सिंह, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, नसीम अख्तर इंसाफ, राजेंद्र चौधरी और रामपाल जाट के नामों की घोषणा हुई है. वहीं, जीआर खटाना, हाकिम अली, लखन मीणा, मांगीलाल गरासिया, प्रशांत बैरवा, राकेश पारिख, रिटा चौधरी और वैद सोलंकी महासचिव बनाए गए हैं. सचिव पद की जिम्मेदारी भूराराम सीरवी, देशराज मीणा, गजेंद्र सांखला, जसवंत गुर्जर, जियाउर्रहमान, ललित तूनवाल, ललित यादव, महेंद्र खेड़ी, महेंद्र सिंह गुर्जर, मुकेश वर्मा, निंबा राम गरासिया, फूल सिंह ओला, प्रशांत शर्मा, प्रतिष्ठा यादव, पुष्पेंद्र भारद्वाज, राजेंद्र मूंड, राजेंद्र यादव, राखी गौतम, राम सिंह कंस्वा, रवि पटेल, सचिन सरवत, शोभा सोलंकी, श्रवण पटेल, विशाल जांगिड़ सौंपी गई है.
जयपुर प्रदेश में भले ही कोरोनावायरस का खतरा कम होता दिखाई दे रहा हो। लेकिन एक नए खतरे ने प्रदेश के प्रशासन और सरकार की नींद उड़ा रखी है। दरअसल बर्ड फ्लू का असर लगातार प्रदेश में छाया हुआ है । मंगलवार को झालावाड़ के बाद अब जयपुर, कोटा और बारां में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हो गई है । जयपुर में जल महल से भेजे गए सैंपल में भी यह पता चला है कि मृतकों कौवों की मौत का कारण बर्ड फ्लू ही है। आपको बता दें कि 24 घंटे में अब कौवों की 246 नई मौत सामने आई है। इधर दौसा और नागौर में राष्ट्रीय पक्षी मोर के मरने की खबर भी सामने आई है। इससे पहले दौसा में पॉड हैरॉन की मरने की पुष्टि हुई थी। जोधपुर में सैंपल आए नेगेटिव मिली जानकारी के अनुसार कोटा की रामगंजमंडी में 212 मुर्गियों मृत मिली थी। इनकी जांच के लिए 110 सैंपल भोपाल भेजे गए थे । इनमें से 40 की रिपोर्ट आई है , जिनमें 25 पॉजिटिव है । राहत की बात यह है कि जोधपुर से भी जो सैंपल लिए गए थे उनमें 15 सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है । इधर पॉलट्री फार्म्स में अभी तक एक भी केस की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि एहतियात के तौर पर आवाजाही पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही मध्यप्रदेश की सीमा से सटे कोटा -बारां में भी संक्रमण की आंशका को देखते हुए राज्य सरकार पोल्ट्री की आवाजाही पर रोक लगा सकती है। सीएम गहलोत ने दिए निर्देश इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश के विभिन्न राज्यों तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों में एवियन इनफ्लुएंजा से हो रही पक्षियों की मौतों को निगरानी रखने के लिए कहा है। उन्होंने पक्षियों के मरने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सर्तकता रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि घना बर्ड सेंचुरी , विभिन्न अभ्यारण्य, सांभर झील सहित अन्य वेटलैंड्स और तमाम ऐसे स्थान जहां पक्षी अधिक पाए जाते हैं वहां विशेष निगरानी रखी जाए। किसी भी पक्षी की मौत होने पर उसका सैंपल लैब में भेजा जाए और वैज्ञानिक विधि से मृत पक्षियों के निस्तारण सुनिश्चित की जाये बर्ड फ्लू जांच लैब को लेकर मंजूरी इधर सरकार ने केंद्र को बर्ड फ्लू जांच लैब के लिये चिढ्ठी लिखी है। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीना का कहना है कि इस मामले में संयुक्त सचिव से भी बात हो चुकी है। इसके बाद अब मंजूरी भी मिल गई है, अब जल्द ही यहां भी लैब बनेगी। हालांकि लैब को सुचारू करने के लिए चार महीने का वक्त लगेगा। राज्य सरकार जयपुर स्थित वेटेनरी लैब का विस्तार करने की भी योजना बना रही है।
जयपुर राजस्थान कांग्रेस कमेटी की नई टीम का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से इसे लेकर अपना होमवर्क पूरा कर लिया गया है । वहीं हाल ही तीन दिवसीय दौरे पर राजस्थान आए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने खुद भी इस संबंध में कार्यकर्ताओं को जानकारी दी थी। माकन ने दिल्ली लौटने से पहले जयपुर में कहा कि राजनीतिक नियुक्तियों और पीसीसी कार्यकारिणी में मैं युवा कांग्रेस को इतना अच्छा प्रतिनिधित्व दूंगा कि सब खुश हो जाएंगे। अजय माकन के इस वक्तव्य के बाद अब तय हो गया है कि अब प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया गया है। आज दोपहर 12 बजे आ सकते हैं नाम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी को लेकर मंगलवार को घोषणा होना तय है। वहीं यह भी जानकारी मिली है कि कांग्रेस इस संबंध में दोपहर 12 बजे तक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है, जिसमें नए नामों की घोषणा की जाएगी। वहीं कार्यकारिणी गठन के बाद राजनीतिक नियुक्तियां भी जल्द होगी। युवाओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी आपको बता दें कि अजय माकन की ओर से लगातार एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि युवा भागीदारी प्रदेश कांग्रेस में बढ़ाई जाएगी। लिहाजा संभावना यही है कि प्रदेश कांग्रेस में अब युवा नेतृत्व पर बल दिया जाएगा। कई युवा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी राजस्थान कांग्रेस में मिल सकती है। मंत्रिमण्डल विस्तार भी जल्द संभव, कई मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी माना जा रहा है कि प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर फैसला लेने आए अजय माकन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रिमण्डल विस्तार को लेकर भी चर्चा की है। लिहाजा यह संभावना भी है कि प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने के साथ ही अब मंत्रिमण्डल विस्तार भी जल्द होगा। वहीं लगभग 4 से पांच मंत्रियों की मंत्रिमण्डल से छुट्टी होने की सुगबुगाहटें भी तेज है।
अलवर अलवर जिले के शाहजहांपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन से लौटते समय खींवसर विधायक नारायण सिंह बेनीवाल का एक्सीडेंट हो गया। उनकी फॉरच्यूनर कार हाईवे पर पिकअप से टकराई गई। हाईवे ताजपरी होटल के सामने हुए एक्सीडेन्ट में फॉर्चयूनर गाड़ी में सवार विधायक नारायण बेनीवाल और उनके साथी भी घायल हुए हैं। घटना के बाद मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया है। यहां से उन्हें बहरोड़ के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गाड़ी में मौजूद थे बेनीवाल सहित पांच लोग घायल गाड़ी में मौजूद अन्य चार पांच लोग भी भी घायल हुए है जिन्हें मामूली चोट आई है। गनीमत यह रही गाड़ी के एयरबैग खुल गए जिससे विधायक नारायण बेनिवाल और उनके अन्य साथी भी बच गए। एक्सीडेंट में फॉर्चयूनर गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। बताया जा रहा है कि यह हादसा शाहजहांपुर में किसान आंदोलन से लौटते वक्त हुआ। अस्पताल पहुंचे बड़ी संख्या में समर्थक मिली जानकारी के अनुसार इस हादसे की सूचना के बाद बड़ी संख्या में कैलाश अस्पताल के बाहर हनुमान बेनीवाल के समर्थकों का जमावड़ा लग गया है। इधर पुलिस ने एक्सीडेंट के बाद वाहनों को साइड में करवा दिया है। गौरतलब है कि हाईवे पर जाम के कारण विधायक नारायण बेनीवाल वापस लौट रहे थे । कल विधायक हनुमान बेनीवाल के आंदोलन में शामिल होने के लिए आए थे और अब रविवार को आज वापस लौट रहे थे तभी हादसा हुआ। बहरोड़ थाना अधिकारी विनोद सांखला ने बताया कि शाहजहांपुर बॉर्डर से लौटते समय खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल की गाड़ी एक्सीडेंट हो गई थी। इसके बाद घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
नागौर किसानों के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को एक और बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है। पार्टी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने इसकी घोषणा की है। पिछले दिनों बेनीवाल ने किसान आंदोलन के समर्थन में 26 दिसंबर को 2 लाख किसानों को लेकर राजस्थान से दिल्ली कूच करने का ऐलान किया था। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने ऐलान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कृषि बिलों को वापिस न लेने पर अड़ी हुई है। ये तीनों बिल किसानों के खिलाफ हैं, इसलिए मैंने NDA छोड़ दी है। कांग्रेस के साथ जाने के सवाल पर हनुमान बेनीवाल ने कहा कि कांग्रेस के साथ किसी प्रकार का गठबंधन नहीं करूंगा। कांग्रेस से नहीं कर रहे गठबंधन : बेनीवाल एनडीए से अलग होने के ऐलान के बाद हनुमान बेनीवाल ने मीडिया से बात की। नागौर सांसद ने कहा, "मैंने किसानों के समर्थन में एनडीए का साथ छोड़ा है क्योंकि केंद्र सरकार ने जो तीन कृषि कानून बनाए हैं, वो किसान विरोधी हैं। लेकिन मेरे एनडीए छोड़ने का अर्थ यह नहीं कि हमारी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करेगी।" 303 सांसद हैं, इस वजह से कृषि कानून वापस नहीं ले रही केंद्र सरकार: हनुमान बेनीवाल इससे पहले बेनीवाल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के पास 303 सांसद हैं, जिस वजह से वह कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है। 1,200 किलोमीटर दूर राजस्थान के किसान दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं। एनडीए में बने रहने के बारे में उन्होंने कहा कि हरियाणा बॉर्डर के शाहजहांपुर में बैठक के बाद एनडीए में रहने या छोड़ने पर फैसला लिया जाएगा।
अलवर राजस्थान से किसानों की आवाज को पहले से ज्यादा बुलंद करने के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी ऐलान कर दिया है। इसके लिए जिले के शाहजहांपुर बॉर्डर पर हनुमान बेनीवाल का अलग से मंच बनाया जा रहा है। लेकिन इससे किसान आंदोलन की दो फाड़ होती भी नजर आ रही है। पिछले 15 दिन से आंदोलन कर महापड़ाव देकर धरने पर बैठे किसानों और अन्य संगठनो ने एक जगह पर दो मंच बनाये जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। लिहाजा किसान आंदोलन पर दो फाड होती नजर आ रही है। वहीं इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। आपको बता दें कि अलवर जिले के शाहजहांपुर बार्डर ओर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। नेशनल हाइवे -48 हरियाणा बॉर्डर पर किसानों ने जाम किया हुआ है। अब हाइवे पर किसानों कब्जा जमा कर डेरा डाल लिया है। लगातार किसान संगठनों की ओर विरोध प्रदर्शन भी किया जा रहा है। दोपहर में बॉर्डर पर सभा करने बाद करेंगे दिल्ली कूच इधर दूसरी ओर शनिवार को शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान आन्दोलन को लेकर आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनिवाल ने दोपहर बाद सभा कर दिल्ली कूच का ऐलान किया है। बॉर्डर पर हनुमान बेनीवाल के सभा ओर दिल्ली कूच ऐलान के बाद से किसानों के आंदोलन स्थल से कुछ दूरी ओर अलग से मंच बना कर सभा की तैयारियां की जा रही है। हनुमान बेनीवाल की ओर से धरना देने और सभा की तैयार जोरों पर चल रही है । धरने पर बैठने के लिए लोगों के लिए कारपेट के रूप में सड़क पर फर्श बिछाई जा रही है । मौके पर करीब 500 मीटर तक सड़क को कवर किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह अलर्ट मिली जानकारी के अनुसार अलग मंच पर लाउडस्पीकर भी लगाए जा रहे है । हनुमान बेनीवाल के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। नींमराणा DSP लोकेश मीणा जाब्ते सहित मौके पर पहुंचे हैं। साथ ही उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया है। आपको बता दें कि पिछले 15 दिन किसानों की ओर से बॉर्डर पर केंद्र सरकार के कृषि कानून बिल को वापिस लेने की मांग की जा रही है । इधर केंद्र सरकार किसानों से वार्ता के लिए तैयार है। लेकिन किसानों व केंद्र सरकार के बीच सहमति अभी तक नहीं बन पाई है। वहीं दूसरी ओर से बड़ी अपडेट यही है कि हनुमान बेनीवाल के अलग से मंच बनाए जाने के बाद किसानों में भी दो फाड़ होती दिख रही है।
बारां के पूर्व कलेक्टर आईएएस इंद्र सिंह राव को जयपुर की एसीबी टीम ने गुरुवार को कोटा में अदालत में पेश किया था. कोर्ट ने यहां से इंद्र सिंह राव को एक दिन की पीसी रिमांड पर भेजा था. शुक्रवार को पीसी रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद एसीबी के अधिकारी उन्हें कोटा जिला एवं सेशन जज योगेंद्र कुमार पुरोहित के बंगले पहुंचे जहां न्यायाधीश ने इंद्र सिंह को 6 जनवरी तक जेल भेजने के आदेश दिए हैं. इसके बाद एसीबी टीम ने आईएएस इंद्र सिंह राव को कोटा सेंट्रल जेल भेज दिया है. राव का कैदी नम्बर 2446 है और उन्हें बैरक नम्बर 24 में रखा गया है. एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इंटेलिजेंस जयपुर सीपी शर्मा का कहना है कि पूछताछ के बाद पूर्व कलेक्टर आईएएस इंद्र सिंह राव को न्यायाधीश के निवास पर पेश किया गया था जहां से राव को जेल भेजने के आदेश दिए गए हैं. साथ ही बेल एप्लीकेशन को 28 दिसंबर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश भी जज ने दिए हैं. सीपी शर्मा ने कहा कि प्रॉपर्टी के मुद्दे पर हमने जो हस्तक्षेप क‍िया था, उसमें क्लियर किया गया है कि कौन सी प्रॉपर्टी है. अब इसका पूरा अलग रिकॉर्ड बनाया जारहा है. जो भी संपत्ति है उसका मिलान किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जिस फाइल को लेकर अप्रूवल ली गई थी, हमने उसकी डिटेल भी ली है. आईएएस राव ने पूछताछ में बहुत ज्यादा सहयोग नहीं किया. हमने नार्को और वॉइस सैंपल लेने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने इसके लिए इनकार कर दिया है. ऐसे में हम आगे नार्को और वॉयस सैंपल के लिए आवेदन डाल सकते हैं. एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीपी शर्मा का कहना है कि जो चांदी का सिक्का कलेक्टर को गिफ्ट में मिलने की बात कही जा रही थी, वह अभी तक तलाशी में नहीं मिला है. आईएएस इंद्र सिंह राव ने एसीबी को बताया कि वह बारां में हो सकता है. ऐसे में जब भी बारां के बंगले की तलाश होगी तो उस संकेतक को भी तलाशा जाएगा. ऐसे में तब सिक्का वहां पर प्राप्त हो सकता है. बता दें कि बारां में 9 दिसम्बर को पेट्रोल पंप की एनओसी जारी करने के एवज में 1 लाख 40 हजार रिश्वत लेते कोटा एसीबी की टीम ने बारां कलेक्टर इंद्र सिंह राव के पीए महावीर नागर को गिरफ्तार किया था. बातचीत में महावीर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि इतने पैसे छोटा कर्मचारी ले सकता है क्या? उच्चाधिकारी के कहने पर पैसे लिए जाते थे. जो रकम ली गई है वो पूरी ही कलेक्टर को देनी थी. एसीबी की पूछताछ में पीए ने बताया था कि रिश्वत की रकम में कुछ हिस्सा बाबुओं था, बाकी कलेक्टर का हिस्सा था. इसके बाद बुधवार को जयपुर एसीबी की टीम ने इंद्र सिंह राव को पूछताछ के लिए जयपुर ऑफिस बुलाया. वहां उनको गिरफ्तार कर लिया गया था.
जयपुर, 13 दिसंबर 2020,राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के अब तक आए नतीजों के मुताबिक बड़ा उलटफेर नजर आ रहा है. रविवार दोपहर 1:30 बजे तक 50 शहरी निकायों के कुल 1775 वॉर्डों में से 791 वार्डों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. नतीजों के मुताबिक, निर्दलीयों ने कांग्रेस और बीजेपी को दूसरे और तीसरे स्थान पर धकेल दिया है. इनमें से 296 वॉर्डों में निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है, जबकि 268 पर कांग्रेस और 224 पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है. अभी पूरे नतीजे आने बाकी हैं. बता दें कि राजस्थान में आज 12 जिलों के पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के परिणाम भी आ रहे हैं. कांग्रेस और BJP के अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी इन चुनाव परिणामों पर नजर जमाए हुए हैं. इन 12 जिलों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला जोधपुर भी है. इसके अलावा सिरोही को छोड़ दें तो बाकी सभी जिले सचिन पायलट के गढ़ माने जाते हैं. पहले ही 21 जिलों में चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए पक्ष में नहीं आए हैं. ऐसे में अगर इन 12 जिलों में कांग्रेस के लिए अच्छी खबर नहीं मिलती है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है. इन चुनावों में 79.90 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. 50 निकायों के लिए 7249 उम्मीदवार मैदान में थे.
अलवर राजस्थान में किसान आंदोलन भले ही पहले दिन हल्का रहा हो। लेकिन आंदोलन की गति रविवार को देखी जा रही है। ताजा मामला यह है कि रविवार को अब किसानों ने जयपुर- दिल्ली हाइवे पर लगा जाम लगा दिया है। मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान हरियाणा शाहजहांपुर पर किसानो ने जाम लगा दिया है। किसानों की ओर से नेशनल हाइवे को रोकने के बाद अब यहां स्थिति यह है कि एनएच पर लंबा जाम लग गया है। बहरोड़ से किया रूट डायवर्ट आपको बता दें कि शाहजहांपुर मार्ग पर डटे हुए राजस्थान और हरियाणा के किसानों की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग को रोकने के चलते यहां यातायात बाधित हो रहा है। इधर बहरोड़ से वाहनों को डायवर्ट किया जा रहा है। हाइवे पर सुबह से ही किसानों की संख्या बढ़ रही है। अभी आलम यह है कि हाइवे पर भारी संख्या में किसान जमा हो गए हैं, लिहाजा नेशनल हाइवे पर लम्बा जाम लग गया है। मेधा पाटकर और योगेन्द्र यादव ने किया दिल्ली कूच आपको बता दें कि दिल्ली- जयपुर मार्ग को जोड़ने वाले शाहजहांपुर टोल के पास किसान संगठनों के अलावा अन्य सामाजिक संगठन भी एकत्रित हो रहे हैं। सुबह से ही लोगों के आने का सिलसिला जारी है। इधर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर व स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव के नेतृत्व में किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात है। लिहाजा अब जाम और सामाजिक कार्यकर्ता तथा किसानों नेताओ के दिल्ली कूच के साथ ही स्थिति तनावपूर्ण सी होती दिख रही है।
जयपुर , 11 दिसंबर 2020,पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया है. भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. BTP के दो विधायक लगातार गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे थे. इस साल की शुरुआत में जब विधानसभा में गहलोत सरकार ने अपना बहुमत साबित किया था, तब दोनों विधायकों ने अशोक गहलोत का समर्थन किया था. कांग्रेस से खफा थी BTP बीटीपी के दोनों विधायकों राजकुमार रोत और रामप्रसाद ने पार्टी अध्यक्ष और गुजरात के विधायक महेश वसावा से समर्थन वापसी लेने की बात कही थी, जिस पर अमल करते हुए उन्होंने अपना निर्णय ले लिया है. पायलट के बगावत ही नहीं बल्कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन जिला परिषद का चुनाव कांग्रेस से नाता तोड़ने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया. हाल ही में राज्य में हुए पंचायत समिति के चुनाव में कांग्रेस को कई सीटों पर नुकसान हुआ है. BTP के विधायकों ने आरोप लगाया था कि चुनावों में कांग्रेस ने उसका साथ नहीं दिया और धोखा दिया. पंचायत चुनाव में 1833 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत मिली है. इसके अलावा जिला प्रमुख के चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन कांग्रेस से काफी बेहतर था. बता दें कि राजस्थान के आदिवासी डूंगरपुर जनपद में जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में बीटीपी को सबसे ज्यादा सीटें मिली थी, लेकिन कांग्रेस और बीजेपी के हाथ मिलाने के चलते बीटीपी का जिला प्रमुख नहीं बन सका. वहीं, डूंगरपुर में बीजेपी ने अपना जिला प्रमुख बना लिया. हालांकि, दो विधायकों के समर्थन वापस लेने से अशोक गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि अब कांग्रेस के पास राज्य में बहुमत है. लेकिन कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से अभी गहलोत सरकार के पास 118 हैं. हालांकि, इनमें से कई निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं. CM गहलोत ने जताई थी चिंता साथ ही बीते दिनों खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आशंका जताई थी कि राज्य में फिर एक बार सरकार गिराने की हलचल शुरू हो गई है. अशोक गहलोत ने ये दावा पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए किया था. अशोक गहलोत के मुताबिक, बीजेपी फिर राजस्थान और महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है. बता दें कि इस साल की शुरुआत में ही कांग्रेस राजस्थान में दो गुटो में बंट गई थी. सचिन पायलट खफा होकर अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए थे, लंबे वक्त तक चले सियासी ड्रामे के बाद सचिन पायलट माने और वापस आए. लेकिन तब से अबतक सचिन पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है.
बाड़मेर भारत-पाक सीमा से सटे सरहदी बाड़मेर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के अंतिम परिणाम जारी कर लिए गए है। बाड़मेर जिला परिषद में चुनाव के नतीजों के बाद महाघमासान की स्थिति देखने को मिली है। जिला परिषद के इतिहास में पहली बार हुआ है कि बीजेपी ने कांग्रेस को कांटे की टक्कर दी है। यहां 18 पर कांग्रेस और 18 पर बीजेपी आ गई है । साथ ही खास बात यह है कि एक निर्णायक सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का प्रत्याशी चुना गया है। चुनाव नतीजों के बाद दिल की धड़कनें दोनों दलों की बढ़ गई है । साथ ही राजनीति का ज्वार सातवें आसमान पर चढ़ गया है। बेहद रोमांचक रहा है यहां मुकाबला आपको बता दें बाड़मेर में जिला परिषद का ताज अभी तक रोमांच में घिरा हुआ है। बाड़मेर जिले की 21 पंचायत समिति में 15 सीटों पर कांग्रेस तो 6 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। बाड़मेर जिला परिषद के 37 सीटों में बीजेपी-कांग्रेस को 18-18 सीटें मिली है ,जबकि रालोपा के एकमात्र उम्मेदाराम बेनीवाल जीते है। कांग्रेस के 18 और भाजपा के 18 सदस्यों की जीत और रालोपा के 1 सदस्य जितने के बाद किसी भी पार्टी को बहुमत नही मिला सका है। रिकाउंटिंग में भी रहा वहीं परिणाम 18-18 और एक के इस आंकड़े ने बाड़मेर में हलचल मचा दी। नतीजा बाड़मेर जिला निर्वाचन अधिकारी विश्राम मीणा ने 2 वार्डो में रिकाउंटिंग का आदेश दिया था। बाड़मेर के वार्ड 10 और 31 पर मतों की गणना वापस हुई। मतगणना के बाद परिणाम वहीं रहा। वार्ड 10 से बीजेपी की सुआ देवी और 31 मे कांग्रेस की गंगा देवी विजयी रही। अब कुल भाजपा- कांग्रेस 18-18 सीटों पर काबिज है , जबकि एक सीट पर रालोपा के उम्मेदाराम बेनीवाल ने जीत दर्ज की है। शुरुआती रुझानों में थी कांग्रेस की बढ़त आपको बता दें कि शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के बढ़त बनाने के बाद बाड़मेर में कांग्रेस थोड़ी पिछड़ गई थी। लेकिन अब दोनों की बराबरी की स्थिति बनीं हुई है। बाड़मेर में 18 बीजेपी ने तो 18 कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। एक जीत रालोपा के खाते में गई है। रालोपा प्रत्याशी जहां तराजू का पलड़ा इधर-उधर करने की भूमिका में है, तो इधर भितरघात और सेंधमारी की आशकाएं बढ़ गई है। बाड़मेर निर्वाचन अधिकारी विश्राम मीणा के मुताबिक सरहदी बाड़मेर में पंचायत समिति और जिला परिषद की मतगणना प्रक्रिया शान्तिपूर्ण सम्पन्न हुई है। बाड़मेर जिले की 21 पंचायत समितियों के 15 पंचायत समितियों में कांग्रेस का दबदबा कायम रहा है, जबकि 6 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। अब किलेबंदी की तैयारी आपको बता दें कि जिले में आए रोचक आंकड़े के बाद दोनों ही दलों में हलचले तेज है । यहां अब एक - एक प्रत्याशी की किलेबंदी करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है ऐसे में अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस एक बार फिर गढ़ बचा पाती है या फिर भाजपा । वहीं यह भी सवाल उठ रहा है कि आजादी के बाद पहली बार क्या भाजपा यहां अपना बोर्ड बना संभव होगा क्या ?।
जयपुर, 09 दिसंबर 2020,राजस्थान के पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव में जिसकी सरकार, उसके पक्ष में परिणाम की परंपरा टूट गई है और इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार होते हुए भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है. कांग्रेस के सभी दिग्गज नेताओं के विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस हार गई है. 21 जिला प्रमुखों के लिए चुनाव में 14 पर बीजेपी और 5 पर कांग्रेस को जीत मिली है, जबकि एक पर भारतीय ट्राइबल पार्टी ने कब्ज़ा जमाया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल की पार्टी को नागौर में भी तीसरा स्थान मिला है, जबकि बाड़मेर में कांग्रेस और BJP दोनों को बराबर 18-18 सीटें मिली है. वहीं, पंचायत चुनाव में 1833 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत मिली है. 21 जिलों में हुए चुनाव में बीजेपी को पाली ,सीकर, चूरू, झुंझुनू, बूंदी, अजमेर, नागौर, टोंक, उदयपुर, भीलवाड़ा, झालावाड़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और जालोर सहित 13 जिलों में जीत मिली है. वहीं, कांग्रेस को हनुमानगढ़, जैसलमेर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और बीकानेर समेत पांच जिलों में जीत मिली है. हनुमान बेनीवाल का गढ़ माने जाने वाले नागौर में बीजेपी को 20 सीटें मिली है, जबकि कांग्रेस को 18 सीटें मिली है. वहीं हनुमान बेनीवाल की पार्टी को केवल नौ सीटें मिली है. इससे पहले 2003 और 2013 में जब अशोक गहलोत की सरकार बनी थी तो जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में 70 फ़ीसदी सीटों पर कांग्रेस जीती थी, जबकि वसुंधरा सरकार के दौरान 70 फ़ीसदी सीटों पर बीजेपी जीती थी. मगर इस बार सरकार होते हुए भी कांग्रेस को करारी हार मिली है. कांग्रेस के सभी दिग्गजों के इलाक़े में कांग्रेस हार गई. मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के चुनाव क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में भी कांग्रेस हार गई है. पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के टोंक, स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के इलाके अजमेर, खेल मंत्री अशोक चांदना के इलाके बूंदी ,सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के इलाके चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस हार गई.
जयपुर, 09 दिसंबर 2020,राजस्थान के स्थानीय चुनाव में निराशाजनक नतीजों के बीच कांग्रेस में अंदरूनी हलचल भी फिर सतह पर आती दिखाई पड़ रही है. कांग्रेस के प्रदेश नेताओं की तरफ से खुलेआम बीजेपी पर सरकार गिराने की कोशिश के आरोप लगाए जा रहे हैं. इस बीच सूत्रों से ये जानकारी मिली है कि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट से मुलाकात की है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास माने जाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद ने सचिन पायलट से ये मुलाकात जयपुर में उनके आवास पर की है. बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चा हुई है जो इस महीने या नए साल के जनवरी महीने में की जानी हैं. सूत्रों के मुताबिक ये जानकारी मिली है कि दोनों बड़े नेताओं के बीच ये मीटिंग गांधी परिवार की पहल पर हुई है. बताया गया है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राजस्थान के कांग्रेस नेताओं से ये कहा है नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने के लिए सचिन पायलट की रायशुमारी की जाए. गौरतलब है कि इसी साल सचिन पायलट ने बागी रुख अपनाते हुए गहलोत सरकार को मुश्किल में डाल दिया था. बात यहां तक पहुंच गई थी कि अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे और उन्हें डिप्टी सीएम पद से भी हटा दिया गया था. इसके अलावा पायलट के दो सहयोगी मंत्रियों व संगठन के कुछ बड़े चेहरों को भी साइडलाइन कर दिया गया था. लंबे घमासान के बाद गांधी परिवार के दखल से पायलट की वापसी हुई थी. अब जबकि राज्य में स्थानीय चुनाव हो रहे हैं और कांग्रेस में कुछ नियुक्तियां होनी हैं तो एक बार फिर सियासी हलचल पैदा करने वाले सुर उठने लगे हैं. साथ ही कांग्रेस बीजेपी पर सरकार गिराने की साजिश के आरोप भी लगा रही है. ऐसे में पायलट का रुख एक बार फिर गहलोत सरकार के लिए काफी अहम हो गया है.
भारत बंद के दौरान मंगलवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान वहां भाजपा और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं में भिड़त हो गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने पथराव भी कर दिया। इस घटना के विरोध में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला है। उन्होंने इस कृत्य को आश्चर्य जनक व दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गुंडों के जरिए प्रदेश में अशांति और अराजकता का माहौल पैदा करना चाहते हैं। पत्थरबाजी की घटना के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करते हुए पूनिया ने कहा कि पहले तो सरकार का बंद में समर्थन देना आश्चर्यजनक व दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन इस बंद में भी सरकार के इशारे पर अराजकता की हद देखिए, कि कांग्रेस पार्टी के गुंडे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर पथराव करते हैं। क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस तरह के अराजक तत्व और गुंडों के जरिए प्रदेश में अशांति और अराजकता का माहौल पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वैसे तो बार-बार लोकतंत्र और सुशासन की दुहाई देते हैं, लेकिन ये उसी की बानगी है। आज इस तरीके से गुंडों के सहारे विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है, जो मुमकीन नहीं है। उन्होंने कहा कि आज जो हुआ वो राजस्थान के राजनैतिक सद्भावना के खिलाफ एक विद्वेष की अराजक कार्यवाही है, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। आपको बता दें कि आज दोपहर में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने बंद के दौरान भाजपा मुख्यालय का घेराव करने का प्रयास किया। इस बीच वहां भाजपा के संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ता भी पहुंच गए। यहां दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बीच कुछ युवकों ने भाजपा मुख्यालय की तरफ पत्थर भी फेंके।
अजमेर जिले में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य चुनाव की मतगणना का परिणाम आ गया है। जिला परिषद के 32 सदस्यों में 18 पर भाजपा और 14 पर कांग्रेस की जीत हुई है। हालांकि, अभी अधिकृत परिणाम की घोषणा नहीं की गई है। इससे पहले राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में पहले चरण की मतगणना मंगलवार सुबह नौ बजे से शुरू हो गई। मतों की गणना के लिए जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के अनुसार व्यवस्थाएं की गई थी। जिला परिषद में 32 सदस्य के लिए 77 प्रत्याशी और पंचायत समिति सदस्य के लिए 552 प्रत्याशी मैदान में थे। मतों की गणना के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। पोस्टल बैलेट की गणना के बाद ईवीएम की काउंटिंग शुरू हुई। दूसरे चरण की मतगणना दोपहर 12.30 बजे शुरू हुई। जिला प्रमुख व प्रधान 10 को चुनेंगे जिला प्रमुख एवं उप जिला प्रमुख के निर्वाचन की बैठक जिला परिषद सभागार में होगी। जिला प्रमुख के चुनाव गुरुवार 10 दिसंबर तथा उप जिला प्रमुख के चुनाव शुक्रवार 11 दिसम्बर को होंगे। निर्वाचन के संबंध में बैठक निर्धारित दिवस को सुबह 10 बजे शुरू होगी। नाम निर्देशन पत्रों का प्रस्तुतीकरण सुबह 11 बजे तक किया जा सकेगा। नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 11.30 बजे आरम्भ होगी। अभ्यर्थी अपने नाम की वापसी दोपहर एक बजे तक कर सकते हैं। इसके तुरन्त पश्चात् चुनाव प्रतीकों का आवंटन एवं चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जाएगी। आवश्यक होने पर मतदान अपराह्न 3 बजे से सायं 5 बजे तक होगा। मतदान समाप्ति के तुरन्त पश्चात् मतगणना एवं निर्वाचन परिणाम की घोषणा की जाएगी। जिला प्रमुख एवं प्रधान की निर्वाचन प्रक्रिया 10 दिसम्बर तथा उप जिला प्रमुख एवं उप प्रधान की निर्वाचन प्रक्रिया 11 दिसम्बर को होगी।
नई दिल्ली, 06 दिसंबर 2020,नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन 11वें दिन में प्रवेश कर गया है. दिल्ली-हरियाणा पर स्थित सिंधु बॉर्डर पर हजारों किसानों की भीड़ पिछले 10 दिनों से 24 घंटे से दिन रात डटी है. किसानों का प्रदर्शन गाजीपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर पर भी जारी है. इसके अलावा बुराडी ग्राउंड पर भी कुछ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों और सरकार के बीच 5 राउंड की बात हो चुकी है, लेकिन गतिरोध जारी है. अब किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. इसी के साथ सबकी निगाहें अब 9 दिसंबर को सरकार के साथ होने वाली किसानों पर बातचीत पर टिकी है. भारत बंद से मंत्री तिलमिलाए- किसान नेता किसान नेता बलदेव सिंह निहालगढ़ ने कहा कि ये आंदोलन सिर्फ पंजाब का न होकर पूरे देश में बढ़ चुका है. मंत्री तिलमिलाए हुए हैं कि क्यों भारत बंद का आह्वान किया? किसान नेता ने कहा कि 8 दिसंबर को सुबह से शाम तक बंद होगा. चक्का जाम 3 बजे तक होगा. एम्बुलेंस और शादियों के लिए रास्ता खुला रहेगा. शांतिपूर्ण प्रदर्शन रहेगा. चंडीगढ़ सेक्टर 17 के ग्राउंड में 7 तारीख को बड़ा प्रदर्शन करेंगे. ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइडरी किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नई एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने बताया कि किसानों के विरोध के कारण चील्ला बॉर्डर (दोनों कैरिजवे) यातायात के लिए बंद हैं. वहीं एनएच 24 पर दिल्ली से गाजियाबाद जाने के लिए गाजीपुर बॉर्डर बंद है जबकि गाजियाबाद से दिल्ली जाने के लिए इस नेशनल हाइवे पर गाजीपुर बॉर्डर खुला हुआ है. मतलब दिल्ली से गाजियाबाद जा सकते हैं लेकिन गाजियाबद से दिल्ली आने के लिए बॉर्डर बंद है. हर कांग्रेसी किसानों के साथ-अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 8 दिसंबर को देशभर के किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है. अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा है, 'कांग्रेस पार्टी 8 दिसंबर को किसानों के पक्ष में भारत बंद का समर्थन करती है. जैसा कि हम जानते हैं कि राहुल जी अपने हस्ताक्षर अभियान, किसान और ट्रैक्टर रैली के माध्यम से किसानों की आवाज उठाते रहे हैं. वह देश के किसानों के कट्टर समर्थक रहे हैं और देश के हर कोने में किसानों के इस मुद्दे को लेकर हर कांग्रेसी कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा है.' किसानों के सामने सुरक्षा बलों की गांधीगिरी सिंधु बॉर्डर पर आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयारी कर रही है. फोर्स की पहली रणनीति ये है अगर किसानों की भीड़ दिल्ली की तरफ बढ़ती है तो सबसे आगे RAF की टीम होगी जो कि भीड़ के सामने बैठ जाएगी और कहेगी हमारे उपर से जाना हो तो जाइए. RAF के पीछे दिल्ली पुलिस होगी वो भी भीड़ के सामने बैठ जाएगी और वो RAF की तरह ही रणनीति अपनाएगी, दिल्ली पुलिस कहेगी कि अगर आपको हमारे ऊपर से गुजरना तो जाइए, इसके पीछे BSF रहेगी. अगर फिर भी भीड़ नहीं रुकती है तो BSF एक्शन लेगी. इस प्रैक्टिस के लिए आज सुरक्षा बलों ने मॉक ड्रिल की. कल किसान मंडी जाएंगे अखिलेश यादव यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी सोमवार से उत्तर प्रदेश में किसानों के समर्थन में सभाएं करेंगे. उन्होंने कहा कि कल से राज्य के हर जिले में किसान यात्रा निकालेगी, अखिलेश यादव कल खुद कन्नौज की किसान मंडी जाएंगे और किसान यात्रा में शामिल होंगे. ...तो अवॉर्ड वापस कर दूंगा-विजेंदर सिंह बॉक्सर विजेंदर सिंह ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन किया है. किसानों के समर्थन में विजेंदर सिंह सिंधु बाॉर्डर पहुंचे हैं. यहां पर उन्होंने कहा कि यदि किसान की मांग सरकार नहीं मांगती है और खेती से जुड़े काले कानूनों को वापस नहीं लेती है तो वे अपना राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड वापस कर देंगे. बता दें कि राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड देश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार है. शरद पवार ने चेताया एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी केंद्र सरकार को चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर विचार नहीं किया तो ये आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा. पवार ने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर परिपक्वता दिखानी चाहिए. कांग्रेस और TRS ने भारत बंद का समर्थन किया कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने किसानों की मांगों के समर्थन में 8 दिसंबर को बुलाए गए भारत बंद का समर्थन किया है. कांग्रेस ने कहा है कि किसानों के हित में पार्टी इस बंद का पूरा समर्थन करेगी. पवार ने कहा कि अगर किसानों की मांग पर विचार नहीं हुआ तो लोग उन्हें समर्थन करेंगे. पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है किसानों की गर्जना-सिद्धू कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों की गर्जना पूरी दुनिया ने सुनी है. सिद्धू ने ट्वीट कर कहा है कि आज भारत का सही बहुसंख्यक अपनी ताकत दिखा रहा है. किसान आंदोलन अनेकता में एकता की रचना कर रही है. ये असहमति की चिंगारी है जो एक आंदोलन में पूरे देश को एक कर देती है, जिसमें सभी जाति, रंग और नस्ल के लोग एक साथ हो जाते हैं. किसानों की ये हुंकार पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है. जारी रहेगी MSP, लिखकर भी दे सकते हैं- केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने आरोप लगाया है कि विपक्ष किसानों को भड़का रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को समझना चाहिए कैसे इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है, और उन्हें राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रहे लोगों का शिकार नहीं होना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि MSP की व्यवस्था जारी रहेगी. हम इसे लिखकर भी दे सकते हैं. मुझे लगता है कि कांग्रेस की राज्य सरकारें और विपक्ष किसानों को भड़का रही हैं. उन्होंने कहा कि देश का किसान इन कानूनों के पक्ष में है, लेकिन कुछ लोग उन्हें भड़का रहे हैं. मुझे भरोसा है कि देश के किसान कुछ भी ऐसा नहीं करेंगे जिससे कि देश की शांति खतरे में पड़े. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि इन कानूनों ने किसानों को आजादी दी है. दिल्ली पुलिस का ट्रैफिक अपडेट दिल्ली पुलिस ने राजधानी में ट्रैफिक मैनेजमेंट की जानकारी देते हुए कहा है कि कालिंदी कुंज, सूरज कुंड, बदरपुर और आयानगर बॉर्डर दोनों ओर खुला हुआ है. हरियाणा जाने के लिए धंसा, दरौला, कापसेहड़ा, रजोकरी एनएच-8, बिजवासन, पलाम विहार और दुंढेरा बॉर्डर का इस्तेमाल किया जा सकता है. सिंधु बॉर्डर, औचंदी, लामपुर, पियाओ मनियारी, मंगेश बॉर्डर बंद है. एनएच-44 दोनों ओर से बंद कर दिया गया है. पुलिस ने कहा है कि लोग अभी सफीबाद, सबोली, एनएच-8, भोपरा, अप्सरा बॉर्डर, और पेरिफेरल एक्सप्रेस वे का इस्तेमाल करें. नोएडा लिंक रोड पर चिल्ला बॉर्डर को बंद कर दिया गया है. पुलिस के मुताबिक दिल्ली आने के लिए नोएडा लिंक रोड का इस्तेमाल न करें बजाय इसके डीएनडी का इस्तेमाल करें. सिंधु बार्डर पर निहंग सिखों ने मोर्चा संभाला सिंघु बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों की संख्या हर रोज बढ़ रही है तो यहां फोर्स की तैनाती में भी इजाफा हो रहा है. दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर स्क्वाड, स्पेशल सेल के सीनियर अफसर भी अब ड्यूटी में तैनात किए गए हैं. ये अधिकारी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. बॉर्डर पर आईटीबीपी, आरएएफ, सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए है. यहां पर नए सिरे से सीमेंटेड बैरिकेडिंग की जा रही है. सिंघु बॉर्डर पर एक तरफ RAF के जवानों को फ्रंटलाइन पर तैनात किया गया है तो दूसरी ओर किसानों की तरफ से फ्रंट लाइन पर निहंग सरदार तैनात हैं. हांथों में तलवार कृपाण लिए, घोड़े के साथ मौजूद निहंग सरदार वक्त वक्त पर तलवारबाजी दिखा रहे हैं. हरियाणा सरकार लगाएगी मेडिकल कैंप हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग हरियाणा में जहां किसान धरना दे रहे हैं वहां पर मेडिकल हेल्थ कैंप लगा रहा है. इन स्थानों पर डॉक्टर दवाइयां एम्बुलेंस सब मौजूद रहेंगी. ताकि आपात स्थिति में किसानों को चिकित्सा सेवा दी जा सके.
सीकर, 06 दिसंबर 2020,राजस्थान के सीकर में पुलिस ने एक ऐसे गैंग को गिरफ्त में लिया है जो हनीट्रैप में व्यापारियों को फंसाकर ब्लैकमेलिंग के जरिए पैसे वसूलता था. एक कोयला व्यापारी के अपहरण के मामले में जांच के दौरान पुलिस ने इस गैंग का खुलासा किया है. दरअसल, हरियाणा से राजस्थान पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कोयला व्यापारी का अपहरण कर उसे सीकर ज़िले में रखा गया है. इस खबर के बाद पूरे इलाके में खलबली मच गई थी. हरियाणा से हुए इस अपहरण के मामले में सीकर जिले की उद्योग नगर थाना पुलिस ने खुलासा किया कि यह मामला अपहरण का नहीं बल्कि हनी ट्रैप का था. थानाधिकारी पवन कुमार चौबे ने बताया कि 3 दिसंबर को हरियाणा पुलिस से सूचना मिली कि सीकर में किसी व्यापारी को बंधक बना रखा है और 15 लाख रुपये की मांग की जा रही है .इस सूचना पर स्थानीय पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई. पुलिस ने तिरुपति नगर में एक तीन मंजिला फ्लैट के तीसरे माले पर दिनेश कुमार पुत्र रामचंद्र निवासी पंचकूला, जो कि कोयले का व्यापारी और उसके ड्राइवर को मौके से कस्टडी में लिया. दिनेश कुमार ने बताया कि एक साल पहले उनके फोन पर एक महिला का मैसेज आया था जिसने खुद को कोयला व्यापारी की पुत्री बताते हुए उनसे बातें शुरू कीं. दिनेश ने बताया कि महिला ने उनसे दो बार कोयला भी मंगवाया जब कोयले का भुगतान करने की बारी आई तो महिला ने उन्हें मिलने के लिए एक नवंबर को सालासर बुलाया. दिनेश ने कहा कि महिला और उन्होंने रात साथ गुजारी. ऐसे में महिला द्वारा उनकी आपत्तिजनक व अश्लील तस्वीर और वीडियो बना लिए गए. इसके आधार पर महिला ने उन्हें ब्लैकमेल किया और 2 दिसंबर को सीकर बुलाया. यहां उनसे फोटो और वीडियो डिलीट करने के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. दिनेश ने बताया कि उन्होंने आरोपियों से कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं है जिसके बाद बात 15 लाख रुपये पर तय हुई. दिनेश अपने घर सूचना दी. घर वालों ने हरियाणा पुलिस को सूचना दी जिसके बाद हरियाणा पुलिस सीकर आई और दिनेश को कस्टडी में लिया. पुलिस ने बताया कि मामले में अब तक दो आरोपी मनीष सैनी निवासी नवलगढ़ और विक्रम जाट निवासी गुड्डा को गिरफ्तार किया गया है. मुख्य सरगना नवलगढ़ क्षेत्र का ही है जो केएमटीसी नाम से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय चलाता है. चौबे ने बताया कि प्राथमिक जांच में आरोपी महिला का नाम अंजुला पता चल पाया है और यह मामला हनी ट्रैप का है जिसमें महिलाओं द्वारा बड़े व्यापारियों को फंसाकर ब्लैकमेल किया जाता था.
जयपुर, 05 दिसंबर 2020,राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले फिर सियासी खलबली मच गई है. कांग्रेस नेता और सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि फिर से सरकार गिराने का खेल शुरू होने वाला है. अशोक गहलोत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान में सरकार गिराने का फिर से खेल शुरू होने वाला है. महाराष्ट्र में भी सरकार गिराने की चर्चाएं हैं. गहलोत ने कहा कि बीजेपी की तरफ से इससे पहले सरकार गिराने की कोशिश के गवाह कांग्रेस नेता अजय माकन रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन भी इस कार्यक्रम में जुड़े हुए थे. इस घटना के दौरान माकन 34 दिन होटल में हमारे विधायकों के साथ रहे थे. अशोक गहलोत ने देश के गृहमंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि हमारे विधायकों को बैठाकर चाय-नमकीन खिला रहे थे और बता रहे थे कि पांच सरकार गिरा दी है, छठी भी गिराने वाले हैं. धर्मेंद्र प्रधान उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जजों से बातचीत करने की बातें कर रहे थे. गहलोत ने कहा कि अमित शाह ने हमारे विधायकों से एक घंटे मुलाकात की थी और पांच सरकारें गिराने के बाद छठी भी गिरा देने की बात शाह ने कही थी. गहलोत ने कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस नेता अजय माकन, रणदीप सुरजेवाला, अविनाश पांडे यहां आकर बैठ गए. इन्होंने नेताओं को बर्खास्त करने का फैसला किया, तब जाकर सरकार बची. उन्होंंने कहा कि पूरे राजस्थान की जनता चाहती थी कि सरकार गिरनी नहीं चाहिए. प्रदेश के लोग कांग्रेस विधायकों को फोन कर कह रहे थे कि सरकार गिरनी नहीं चाहिए. लोग कह रहे थे कि चाहे दो महीने लग जाए लेकिन सरकार नहीं गिरनी चाहिए. कहा जा रहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी के बहाने पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट पर निशाना साधा है. माना जा रहा है कि राजस्थान में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होना है, ऐसे में बिना नाम लिए सचिन पायलट पर हमले के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस आरोप पर BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी पलटवार किया है. पुनिया ने कहा कि अशोक गहलोत शासन चला पाने में अक्षम हैं इसलिए झूठा और तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस के अंदर घर में अंदरूनी झगड़ा है जिसकी वजह से वह परेशान है ,इसके लिए BJP पर बिना कोई सुबूत के आरोप लगाकर हमला बोल रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष पुनिया ने कहा कि अशोक गहलोत सरकार गिराने को लेकर रोज़ भेड़िया आया- भेड़िया आया की तरह नई- नई कहानियां लेकर आ जाते हैं. इनकी सरकार में इतना झगड़ा है कि यह BJP के नेताओं को दोष दे कर अपना झगड़ा छुपाना चाहते हैं. पुनिया ने कहा कि अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि BJP भारी पैसा ख़र्च करकार्यालय बना रही है और हम तो कह रहे हैं कि इतने साल से सत्ता में रहे कार्यालय बनाने के बजाय के नेताओं ने अपने घर बनाए.
अलवर प्रदेश के लिए रविवार के दिन नई सौगात लेकर आया। यहां अलवर जिले के ढिगावडा से बांदीकुई तक दिल्ली जयपुर रेल मार्ग का विद्युतीकरण लाइन का आज उद्घाटन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि 9 माह बाद पहली बार किसी जन कार्यक्रम में आया हूं। यह कार्यक्रम जरूर छोटा है, लेकिन मोदी सरकार में भारतीय रेल लगातार उन्नति पर बढ़ रही है। सभी के सहयोग से काम को गति मिलती है, तो बड़ी बड़ी उपलब्धि हासिल होती है। राजस्थान में 2014 के पहले कोटा लाइन का विद्युतिकरण किया गया। गोयल ने कहा कि हैरानी की बात है कि 35 साल तक किसी ने भी राजस्थान की में रेलवे के विकास की चिंता नहीं की। इसकी वजह से राजस्थान में रेलवे के विकास का काम ठप रहा। राजस्थान में रेलवे में 2009 से 2014 तक विधुतीकरण के क्षेत्र में जीरो फीसदी काम हुआ था। 2014 के बाद 1433 किलोमीटर हुआ विद्युतीकरण पीयूष गोयल ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद लगातार रेलवे क्षेत्र में काम हो रहा है। 2014 के बाद 1433 किलोमीटर विधुतीकरण का काम हुआ है। प्रत्येक वर्ष 240 किलोमीटर काम हुआ। प्रत्येक व्यक्ति को लाभ मिले, सरकार का यह प्रयास है। 2009 से 2014 के बीच राजस्थान में 682 करोड़ का निवेश होता था। 2014 से 2020 के बीच 2800 करोड़ रुपए निवेश प्रत्येक वर्ष हुआ। 2009 से 2014 के बीच 65 अंडर पास बने, 2014 के बाद 378 अंडर पास व सबवे बने है। 4 रोड ओवर ब्रिज बने, जबकि उसके बाद 30 बने ओवरब्रिज बनाये का चुके है। नई लाइन में 74 प्रतिशत काम हुआ, डबलिंग का काम दोगुना हो गया। गेज करवर्जन का काम भी तेजी से हुआ है। राजस्थान के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर्यावरण के मुद्दे पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि पहले कुल्लड़ में चाय मिलती थी। लेकिन फिर प्लास्टिक के कप में चाय आने लगी। अब 400 जगहों पर कुल्लड़ में चाय हमने दोबारा शुरू कर दी है। रेलवे में आगे कुल्लड़ में चाय ही मिलेगी। गोयल ने कहा कि राजस्थान ने लोकसभा में शत प्रतिशत 25 सीट जीताकर सरकार के साथ अपनी भागीदारी निभाई है। लिहाजा राजस्थान के प्रति हमारी भी कर्तव्य है। डीजल की गाड़ी होगी बंद, होगा देश का फायदा राजस्थान के रेल विकास को लेकर गोयल ने आगे कहा कि आज के इस विद्युतिकरण के बाद अब पूरी तरह से रेवाड़ी से अजमेर तक शत प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। इस रूट पर अब डीजल की गाड़ी बंद होगी। उन्होंने कहा कि डीजल इंजन बन्द होने से विदेश से खरीदे जाने वाला क्रूड ऑयल नहीं खरीदना पड़ेगा। इससे भारत को काफी बचत होगी।
राजस्थान के भरतपुर में 10वीं की छात्रा के साथ पड़ोसी गांव के युवक ने दुष्कर्म किया. घटना के समय लड़की घर में अकेली थी. परिवार के सभी सदस्य शादी समारोह में गये हुए थे. उसी दौरान आरोपी अपने तीन दोस्तों के साथ उसके घर पर आ गया और रेप की घटना को अंजाम दिया. घर में घुसने के बाद उसने लड़की को चाकू दिखाकर दुष्कर्म किया, इस दौरान उसके तीन दोस्त घर के बाहर निगरानी कर रहे थे. आरोपी जैसे ही वहां से भागे, तो लड़की ने शोर मचाना शुरू कर दिया. मौके पर पड़ोसी आ गये, सूचना पर थाना पुलिस भी पहुंच गई. पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. थाना बयाना के एक गांव की रहने वाली 10वीं कक्षा की छात्रा के साथ ये घिनौनी वारदात हुई. बताया गया कि रात में पूरा परिवार शादी समारोह में हिंडौन गया हुआ था. छात्रा घर में अकेली थी. देर रात उसके घर में पड़ोसी गांव का रहने वाला मनीष धाकड़ घुस आया. उसके पास चाकू था. आरोपी ने चाकू दिखाकर किशोरी को धमकाया और उसके साथ रेप किया. इस दौरान मनीष के तीन साथी घर के बाहर निगरानी कर रहे थे. आरोपी जैसे ही लड़की के घर से बाहर निकलने के लिए हुआ, तो लड़की ने शोर मचाना शुरू कर दिया. शोरगुल की आवाज सुनकर पड़ोसी जाग गये. पड़ोसियों द्वारा जब तक आरोपियों को पकड़ा जाता, तब तक आरोपी मनीश धाकड़ छत से कूदकर गली में पहुंच गया. वहां पहले से इंतजार कर रहे अपने तीन साथियों के साथ वह बाइक से फरार हो गया. बताया गया है कि छत से कूदने के दौरान आरोपी के पैर में भी चोट लग गई. वहीं जब घटना के बारे में छात्रा के पिता को जानकारी हुई, तो वे देर रात शादी समारोह से घर वापस आ गये. सूचना पर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने पीड़ित छात्रा के बयान के बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस ने छात्रा का मेडिकल कराया है. बयाना थाना प्रभारी मदन लाल मीणा ने बताया कि पीड़िता छात्रा के बयान के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. आरोपी मनीष पर पॉक्सो एक्ट लगाया गया है. पुलिस आरोपी और उसके साथियों को जल्द गिरफ्तार कर लेगी.
जयपुर, 20 नवंबर 2020,राजस्थान में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच गहलोत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों को 21 नवंबर से धारा-144 लगाने की सलाह दी है. गृह विभाग के ग्रुप-9 ने सभी जिलाधिकारियों को परामर्श जारी कर दिया है. गृह सचिव एन एल मीणा ने आदेश जारी कर सभी जिलों में धारा 144 लागू कराने और इसका सख्ती से पालने कराने की सलाह दी है. गौरतलब है कि किसी जिले में धारा-144 को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है. जिसके बाद उस इलाके में यह धारा प्रभावी हो जाती है. जिस इलाके में धारा-144 लागू होती है वहां 4 या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते. उस क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बलों को छोड़कर किसी के भी हथियार लाने और ले जाने पर पाबंदी होती है. लोगों का घर से बाहर घूमने पर प्रतिबंध होता है तथा यातायात साधनों पर भी रोक होती है. बता दें कि त्योहारों के मौसम के बीच सूबे में कोरोना के मामले लगातार बढ़ने लगे हैं. राजस्थान में बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है. दिवाली पर लोगों की भीड़ और घरों से बाहर आना-जाना और खरीदारी के दौरान कोरोना संक्रमण का प्रसार हुआ है जिसके बाद कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं. इससे पहले गुरुवार को राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने बिना परीक्षा विद्यार्थियों को प्रमोट नहीं करने का निर्णय लिया.राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस एकेडमिक वर्ष में विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रमोट नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही गहलोत सरकार ने 'आओ घर में सीखें' नाम से नई पहल की शुरुआत भी की है जिसके तहत बच्चों से घर पर ही पढ़ने का आह्वान किया गया है.
जयपुर। लव जिहाद को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को भारती जनता पार्टी (बीजेपी) पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि ‘लव-जिहाद’ बीजेपी का देश को बांटने के लिए बनाया गया एक शब्द है। लव जिहाद पर ट्वीट करते हुए गहलोत ने कहा, ‘शादी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और इसे रोकने के लिए एक कानून लाना पूरी तरह से असंवैधानिक है।’ एक के बाद एक तीन ट्वीट करते हुए गहलोत ने ‘लव-जिहाद’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसके पीछे बीजेपी पर निशाना साधा। एक ट्वीट में गहलोत ने लिखा कि ‘लव जिहाद बीजेपी की ओर से देश को विभाजित करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए बनाया गया एक शब्द है। विवाह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है, उस पर अंकुश लगाने के लिए कानून लाना पूरी तरह से असंवैधानिक है और यह कानून किसी भी अदालत में नहीं टिकेगा। प्यार में जिहाद की कोई जगह ही नहीं है। दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘वे देश में एक ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां वयस्क सहमति के लिए राज्य की सत्ता की दया पर निर्भर होंगे। विवाह एक व्यक्तिगत निर्णय है और वे इस पर अंकुश लगा रहे हैं, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनने जैसा है।’ लव-जिहाद’ मुख्यमंत्री पर तीसरे ट्वीट में गहलोत ने कहा, ‘‘यह सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने और सामाजिक संघर्ष को बढ़ावा देने और संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना करने वाला है। राज्य नागरिकों के साथ किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं करता है।’’ बता दें कि उप्र ने ‘लव-जिहाद’ के खिलाफ एक कानून लाने की घोषणा की है और मप्र सरकार भी इसी तर्ज पर एक कानून लाने की योजना बना रही है।
नई दिल्ली | 03 नवंबर 2020, राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगम के हुए चुनाव नतीजे आने लगे हैं. राज्य के छह निगमों के 560 वार्डों के पार्षद सीटों पर 2238 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है. कांग्रेस और बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी निगम का चुनाव साख का सवाल है. जोधपुर नगर निगम दक्षिण में बीजेपी को बहुमत मिल गया है. 80 सदस्यीय नगर निगम में पार्टी को 43 सीटों पर कामयाबी मिली है वहीं कांग्रेस को 23 सीटों पर संतोष करना पड़ा. तीनों नगर निगमों के लिए 1 नवंबर को मतदान हुए थे. जोधपुर उत्तर में कांग्रेस जीती जोधपुर उत्तर में कांग्रेस के पार्षद ज्यादा संख्या में जीते हैं. यहां पर कांग्रेस का मेयर बनना तय है. वहीं, जोधपुर दक्षिण में बीजेपी के पार्षद ज्यादा संख्या में जीते हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने-अपने इलाके बचा लिए हैं. जोधपुर उत्तर में 80 सीटों में से कांग्रेस को 53 सीटें मिली हैं, जबकि जोधपुर दक्षिण में 80 सीटों में से बीजेपी को 43 सीटें मिली हैं.जयपुर हेरिटेज नगर निगम में कांग्रेस को बढ़त मिली है, जबकि जयपुर ग्रेटर निगम में बीजेपी को बढ़त मिली है. कोटा उत्तर नगर निगम में बीजेपी को भारी बढ़त मिली है, मगर कोटा नगर निगम दक्षिण में कांग्रेस और बीजेपी में संघर्ष जारी है
कोविड-19 के बाद जहां कई राज्यों में स्कूल खोले जाने की तैयारी चल रही है, वहीं राजस्थान में निजी स्कूलों ने हड़ताल पर जाने की बात कही है। इसमें सीबीएसई (CBSE), राजस्थान बोर्ड (Rajasthan Board) और मिशनरी स्कूल्स.. सभी शामिल हैं। फोरम ऑफ प्राइवेट स्कूल्स इन राजस्थान ने कहा है कि 5 नवंबर 2020 से राज्य में सभी निजी स्कूल अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसका कारण स्कूल फीस के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी नया निर्देश है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फोरम ने कहा कि 'पिछले सात महीनों से स्कूलों और पैरेंट्स के बीच फीस को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। लेकिन अब यह मामला गंभीर हो गया है। निजी स्कूल गंभीर आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि स्कूल बंद होने की कगार पर आ चुके हैं। फंड की कमी के कारम स्कूल्स अब संचालन का खर्च और अपने कर्मचारियों की सैलरी देने में भी असमर्थ हैं।' सरकार से की ये मांग प्राइवेट स्कूल्स फोरम ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुजारिश की है कि वह इस मुश्किल समय में उनका साथ दें। 9 सितंबर 2020 को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश को अमल कराएं, ताकि पैरेंट्स दिवाली से पहले फीस जमा करने को लेकर स्पष्ट रहें। नहीं तो सरकार स्कूलों को रिलीफ फंड दें। राजस्थान हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को स्कूलों द्वारा 70 फीसदी तक ट्यूशन फीस ले लेने का निर्देश दिया था। लेकिन हाल में राजस्थान सरकार ने सभी निजी व सरकारी स्कूलों में सिलेबस घटाए जाने के कारण 30 से 40 फीसदी फीस कटौती करने का भी निर्देश जारी किया है। इन सब का जिक्र करते हुए फोरम ने कहा कि हाल के ये आदेश काफी उलझनें पैदा कर रहे हैं। फीस कलेक्शन में देरी से प्रदेश के करीब 50 हजार स्कूल और इनमें काम करने वाले करीब 11 लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे। इसलिए अगर ये समस्या और टली या फिर उनकी मांग के विरुद्ध गई तो स्कूलों को 5 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना होगा। प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ऑफ राजस्थान, कैथोलिक स्कूल्स ग्रुप और स्कूल शिक्षा परिवार समेत अन्य संगठनों ने भी फोरम के इस फैसले का समर्थन किया है।nbt
अलवर प्रदेश के अलवर जिले के बड़ौदा मेव थाना क्षेत्र के भयाडी गांव में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि यहां के रहने वाले एक दलित परिवार का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। बताया जा रहा है कि धर्म परिवर्तन के बाद हुए अत्याचारों के बाद वह परिवार अपनी जान बचाकर भागा और अब वापस अपने हिन्दू धर्म में आने के लिए अदालत से गुहार लगाई है। इस मामले में 15 नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीडित युवक ने जनवरी 2018 में धर्म परिवर्तन किया था। हरिय़ाणा में थी रिश्तेदारी , था आना- जाना बड़ौदा मेव थाना क्षेत्र के भयाडी गांव निवासी मेम चंद उर्फ मोहम्मद अन्नस पुत्र काडु जाटव ने बताया कि उनके गांव में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका के इब्राहिम बास गांव में मेव समाज के लोगों की रिश्तेदारी थी। लिहाजा रिश्तेदारी होने के कारण वे आते जाते रहते है। इस दौरान सत्तार , तैयब, शहजाद, महबूब खान, हसन , रसीद शहीद, वहीद और शब्बीर सहित 15 लोगों ने उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया। उसके बाद उसे हरियाणा ले गए ,जहां उनके खतना भी कराया गया। बताया जा रहा है कि पीड़ित को एक प्लाट भी दान में दिया गया है, जिस पर मकान बना लिया। जम्मू-कश्मीर में जमात में ले गए मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने बहला-फुसलाकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। उसके बाद वे उसे जम्मू-कश्मीर में जमात में लेकर गए और बच्चों को मारने की धमकी दी । कहा कि अगर धर्म परिवर्तन नहीं करोगे तो हमारी जान को खतरा हो सकता है । उन्होंने हमारा खतना भी कराया । पीड़ित का कहना है कि लगातार इसी तरह उनके अत्याचार बढ़ते गए। साथ ही धमकियां भी मिलती रही। पत्नी पर रखने लगे गंदी नजर, जबरन संबंध बनाने का दवाब बनाया परिवादी ने आरोप लगाया कि वह धर्म परिवर्तन करने के बाद उसकी बीवी पर गंदी नजर रखने लगे। उससे जबरन सम्बंध बनाने का दबाव बनाया गया । इसके बाद वे जम्मू कश्मीर से भाग निकले। पीड़ित ने बताया कि अब उसने मुस्लिम धर्म से कुछ छोड़कर वापिस हिंदू धर्म ज्वाइन कर लिया है। साथ ही कोर्ट में अर्जी लगाकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में एडवोकेट बनवारी लाल ने बताया कि इस संबंध में परिवाद आया था और अदालत ने कार्यवाही के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों ने उन पर अत्याचार किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कोरोना वायरस महामारी के कारण मार्च से ही देशभर में स्कूल बंद हैं। हालांकि 15 अक्टूबर के बाद से कुछ राज्यों ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए अपने-अपने स्तर पर स्कूल खोले हैं। लेकिन दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में अब भी सभी कक्षाओं के लिए स्कूल पूरी तरह बंद हैं। अब राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य में स्कूल खोने जाने के संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि करीब तीन दिन पहले राजस्थान शिक्षा विभाग ने सीनियर क्लासेस के लिए स्कूल खोले जाने के संबंध में राज्य सरकार के पास प्रस्ताव भेजा है। शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव के जरिए राजस्थान में कम से कम 10वीं से 12वीं कक्षा तक के लिए 2 नवंबर 2020 से स्कूल खोले जाने की अनुमति मांगी है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब इस पर राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है। ऐसा है प्लान गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पहले चरण में सिर्फ सीनियर क्लासेस के लिए स्कूल खोले जाएंगे। इसके लिए विस्तृत एसओपी तैयार किया जा चुका है। नियमानुसार एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम 150 दिन स्कूल व कक्षाओं का संचालन जरूरी है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है। लेकिन इस क्रम में स्टूडेंट्स, टीचर्स व अन्य स्टाफ की स्वास्थ्य सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। इस सत्र को जीरो एकेडेमिक ईयर (Zero Year) घोषित करने की कोई योजना नहीं है।
जयपुर दुख की बात यह है कि विपक्षी दल के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते अब देश का विरोध करने लगे है। विपक्षी दल पाकिस्तान जैसे राष्ट्र की तारीफ करने लग जाता है। कुछ इसी अंदाज में रविवार को भाजपा अध्यक्ष विपक्ष पर बरसे। मौका था, राजस्थान में विभिन्न भाजपा जिला कार्यालयों का उद्घाटन एवं शिलान्यास का। नड्डा ने इस दौरान वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से दिल्ली से राजस्थान में विभिन्न भाजपा जिला कार्यालयों का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इस दौरान बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कांग्रेस पर दिशाहीन होने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता राजस्थान में कमल खिलाने में जुट जाएं इस दौरान नड्डा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधा।उन्होंने कहा कि राजस्थान में अब सरकार नाम की चीज ही नहीं है। गहलोत सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने भाजपा नेताओं से आह्वान किया कि वे अगले चुनाव में राज्य में कमल खिलाने के लिए जुट जाएं। गलवान तक बनवाई सड़क नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पीएम ने सीमा को सुरक्षित करने के लिए कार्य किया है। उन्होंने नभ में, जल में और थल में...भारत को सुरक्षित करने का काम किया है। इसी क्रम में उन्होंने पिछले छह साल में 4700 किलोमीटर की फोर लेन की सड़क अरूणाचल प्रदेश से लेकर गलवान घटी तक बनवाया, ताकि हमारे लोग तुरंत वहां पहुंच सके। लेकिन विपक्ष को इन सब खूबियों में भी कमी दिख रही है। जो घिसा नहीं , वो हमने हटवाया, कांग्रेस पार्टी घिस चुकी है राहुल गांधी पर बोलते हुए नड्डा ने कहा कि राहुल दलील देते हैं कि श्रीनगर के लोगों से अन्याय हुआ। नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी की दलीलों को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, उनकी (राहुल) दलील लेकर इमरान खान यूएन जाते हैं...राहुल गांधी की बात को कहते हैं...ये भारत का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं या पाकिस्तान का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बोलते थे कि अनुच्छेद 370 अस्थायी व्यवस्था है। फिर बाद में जब उनकी हिम्मत नहीं हुई इसे हटाने की तो कहने लगे कि ये घिस-घिस कर घिस जाएगी। उन्होंने कहा कि वो तो घिसा नहीं, उसको तो हम लोगों ने हटाया , लेकिन कांग्रेस पार्टी घिस गई। कृषि सुधार कानूनों क्रांतिकारी नड्डा ने कृषि सुधार कानूनों को क्रांतिकारी बताया और कहा कि ये कानून किसानों को आजादी देते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने किसान को इतना सक्षम कर दिया है कि वो दुनिया के किसी भी बाजार में अपनी उपज बेच सकता है । दुनिया के बाजारों में उपज के दाम जान सकता है।
जयपुर , 24 अक्टूबर 2020,राजस्थान के बाड़मेर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहे एक शख्स को ATS और सीआईडीबीआई की टीम ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार शख्स का नाम रोशन लाल भील है. 35 साल का रोशन लाल लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारत की सामरिक सूचनाएं भेज रहा था. राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में आईएसआई देश की गोपनीय और सामरिक सूचनाएं हासिल करने के लिए अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है और कई प्रकार के हथकंडे अपना रहा है. आईएसआई के निशाने पर वैसे लोग हैं जो अपने रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान जाते हैं, ऐसे लोगों को आईएसआई फंसाती है और फिर उनसे खुफिया सूचनाएं लेती है. एक ऐसे ही मामले में ATS और सीआईडीबीआई पुलिस ने बाड़मेर जिले के बीजराड़ थाना क्षेत्र से एक गोपनीय सूचना के आधार पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में एक जासूस रोशन भील को गिरफ्तार किया है राजस्थान समेत दूसरी खुफिया एजेंसियां उसे गहन पूछताछ के लिए जयपुर लेकर आई हैं. सुरक्षा एजेंसियां अब ये पता लगाने में जुटी हैं कि ये शख्स कितने समय से भारत की खुफिया सूचनाएं भेज रहा था. सुरक्षा एजेंसियां भारत में इसके संपर्कों की भी तलाश कर रही हैं. यह पाक जासूस पिछले काफी समय से सीमा पार सेना की गोपनीय और सामरिक सूचनाएं भेज रहा था. बताया जा रहा है कि इस शख्स की रिश्तेदारी पाकिस्तान में थी और कुछ साल पहले जब ये शख्स पाकिस्तान अपने रिश्तेदारों से मिलने गया था तो उस दौरान आईएसआई ने इसे अपने जाल में फांस लिया था. उस वक्त से ये आईएसआई के लिए काम कर रहा था.
नई दिल्ली 1,72,000 साल पहले राजस्थान के बीकानेर के पास थार रेगिस्तान के बीचोंबीच से गुजरने वाली नदी का प्रमाण मिला है। अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि अब विलुप्त हो चुकी यह नदी उस वक्त इलाके के लोगों की जीवनरेखा होती होगी। जर्नल क्वाटर्नरी साइंस रिव्यूज में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि हजारों साल पहले यह नदी नाल कैरी में बहा करती थी। नदी का पता जर्मनी की द मैक्स प्लांक इंस्टिट्यूट (The Max Planck Institute) ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री, तमिलनाडु की अन्ना यूनिवर्सिटी और कोलकाता की IISER ने मिलकर लगाया। इनका कहना है कि पाषाण युग में इसी नदी के कारण इलाके में मनुष्यों की आबादी बसी होगी। शोध में मिले साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि 1 लाख 72 हजार साल पहले बिकानेर के पास से जो नदी बहती थी, उसका प्रवाह स्थल अभी की नदी से 200 किमी दूर था। शोधकर्ताओं ने कहा कि अति-प्राचीन नदी की प्रमाण मिलने से थार रेगिस्तान में मौजूदा नदियों के उद्गम का पता चलता है। साथ ही, इससे सूख चुकी घग्गर-हकरा नदी के बारे में भी जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले संभवतः बड़ी आबादी ने नदी किनारे पलायन किया होगा। शोधकर्ताओं ने अपने लेख में कहा कि थार डेजर्ट के निवासियों की विलुप्त नदियों के महत्व को नजरअंदाज किया गया। एक शोधकर्ता ने कहा कि ऐतिहासिक काल से पहले से ही थार रेगिस्तान का महत्वपूर्ण इतिहास रहा है। हम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पाषाण युग के लोगों ने किस तरह इस इलाके में जीवन बसर किया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि उपग्रहों से मिली तस्वीरों से थार रेगिस्तान से गुजरने वाली नदियों का घने नेटवर्क का पता चलता है।
करौली, 11 अक्टूबर 2020, राजस्थान के करौली में पुजारी की हत्या मामले में पीड़ित परिवार ने कहा है कि राज्य सरकार ने जो वादा किया है उसे निभा नहीं रही है. पुजारी के भतीजे ललित ने आजतक के साथ बातचीत में कहा कि हमने 50 लाख के मुआवजे की मांग की, लेकिन मात्र 10 लाख देने की बात की है. उन्होंने कहा कि 10 लाख की ये रकम भी प्रशासन ने हमें अब तक नहीं दी है. बता दें कि पुजारी का अंतिम संस्कार न करने पर अड़े उसके परिवार वालों ने प्रशासन से भरोसा मिलने के बाद पुजारी बाबूलाल का अंतिम संस्कार कर दिया था. पुजारी की बेटी ने कहा कि उन्हें अपने पिता के लिए इंसाफ चाहिए. इस बीच कलौली गांव के लोगों का आरोप है कि इस घटना में स्थानीय तहसीलदार भी शामिल है, ये तहसलीदार विधायक का नजदीकी है. गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें गहलोत सरकार पर विश्वास नहीं है और इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए. गांव के लोगों का कहना है कि इस मामले अबतक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं हुई है. ताजा जानकारी के मुताबिक इस मामले में अबतक दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं. पुजारी के परिवार को 25 लाख रुपये देंगे-कपिल मिश्रा इस बीच दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा करौली गांव पहुंच गए हैं. यहां पर मिश्रा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. कपिल मिश्रा ने कहा है कि उन्होंने कुछ लोगों की मदद से 25 लाख रुपये इकट्ठे किए हैं. ये रकम पीड़ित परिवार को दी जाएगी. कपिल मिश्रा ने कहा कि गांधी जी के द्वारा बताए सबसे आखिरी, कमजोर, असहाय, निर्बल व्यक्ति का प्रतीक है पुजारी जी और उनका परिवार.
भरतपुर। करौली में दो दिन पहले जमीन विवाद को लेकर एक मंदिर के पुजारी को पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया। इस वारदात में गंभीर रूप से जख्मी पुजारी को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार रात को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी कैलाश मीणा को करौली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा घटनाक्रम करौली के सपोटरा थाना इलाके की ग्राम पंचायत बुकना का है। यहां मंदिर पर 50 वर्षीय बाबूलाल वैष्णव पूजा करता था और मंदिर माफी की जमीन पर भी उसी का कब्जा था। लेकिन इस जमीन को लेकर गांव के दबंग कैलाश मीणा की नजर थी। इसी जमीन पर कब्जा हथियाने के लिए आरोपी कैलाश मीणा ने पुजारी पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने सीएम से कहा- 'आखिर कब तक अपराधियों के मसीहा बनकर रहोगे? करौली की इस घटना को लेकर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर में ही उनको घेरा है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में अपराध बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने करौली में मंदिर के पुजारी को जिंदा जलाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, 'अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है। प्रदेश की जनता भयभीत है, डरी हुई है, सहमी हुई है, आखिर गहलोत जी आप कब तक अपराधियों के मसीहा बनकर रहोगे?' पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा- जितना दुःख जताया जाए, कम प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी पुजारी की हत्या मामले में गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा है, 'करौली जिले के सपोटरा में मंदिर के पुजारी को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार देने के मामले की जितनी निंदा की जाए, जितना दुःख जताया जाए, कम है।' कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री ने किया ट्वीट कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने इस घटना को लेकर शुक्रवार दोपहर को ट्वीट कर मंदिर के पुजारी बाबूलाल वैष्णव को जिंदा जलाने की घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ऐसी घटनाएं सभ्य समाज के लिए सही नहीं। जिले के पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त करवाई हो। मुख्य आरोपी पकड़ा जा चुका है, शेष आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। ये है पूरा मामला इस घटना को लेकर सपोटरा थाना अधिकारी हरजी लाल यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत बुकना के मंदिर पर 50 वर्षीय बाबूलाल वैष्णव पूजा करते थे जिसे लेकर गांव वालों ने उसे मंदिर माफी की जमीन बता रखी थी। कुछ दिन पूर्व पुजारी ने जमीन के ऊपर रिहाशी घर बनाने के लिए समतल कराई थी। इस जमीन पर दबंगों ने जबरदस्ती छप्पर डालने शुरू कर दिये। इसपर पुजारी ने गांव वालों को से शिकायत की। इसी बात को लेकर दबंगों ने जमीन पर पुजारी के सामना को पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी। बीच बचाव में आये पुजारी पर भी पेट्रोल डाल दिया गया। इस हादसे में पुजारी बाबूलाल बुरी तरह घायल हो गया जिसे सपोटरा अस्पताल लाया गया, जहां से चिकित्सकों ने अधिक घायल होने के कारण करौली रेफर कर दिया। परिजन उसे करौली न ले जाकर जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल लेकर पहुंचे। जयपुर के एसएमएस अस्पताल की बर्न यूनिट में इलाज के दौरान गुरुवार को पुजारी की मौत हो गयी। उधर, जयपुर में फाइट फोर राइट, श्री परशुराम सेना आदि संगठनों के पदाधिकारी पुजारी पर हुए अत्याचार को लेकर अस्पताल पहुंचे। श्री परशुराम सेना के संयोजक अनिल चतुर्वेदी ने करौली एसपी मृदुल कछवाहा से आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही यदि शीघ्र अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
बाड़मेर। प्रदेश का बाड़मेर हाल ही बलात्कार के एक मामले के कारण जहां सुर्खियों में हैं। वहीं इसी बीच एक और भावुक करने वाली तस्वीर यह है कि सरहदी बाड़मेर में मई महीने में बीजराड़ थाना क्षेत्र में एक दलित नाबालिग मासूम अपने साथ हुए बलात्कार के मामले में अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परेशान है। न्याय की गुहार के लिए पीड़िता गुरुवार को राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल से मिली। इस मामले के सामने आने के बाद 5 महीने बीत जाने के बावजूद आरोपी के खुले में घूमने और उसकी गिरफ्तारी नहीं होने पर बेनीवाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग ली है। आयोग की अध्यक्ष पीड़िता से मिली गुरुवार को राजस्थान राज्य बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल जयपुर से सरहदी बाड़मेर बलात्कार के मामले की पीड़िता और उनके परिजनों से मिलने पहुंची। यह मामला तब विकट हो गया जब 5 महीने पहले बलात्कार का शिकार हुई दलित नाबालिग मासूम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया। बताया जा रहा है कि बलात्कार की घटना के बाद बाड़मेर पुलिस अधीक्षक से लेकर,जोधपुर रेंज आईजी नवज्योति गोगाई, संभागीय आयुक्त डॉक्टर समित शर्मा तक से अपने दर्द का इज़हार कर चुकी है। पीड़िता ने बड़ी बेबाकी से बेनीवाल के सामने अपनी बात रखी। छूटा पीड़िता का स्कूल, मिल रही घरवालों को धमकियां पीड़िता के मुताबिक घटना के बाद से उसका स्कूल छूट गया और उसे और उसके घरवालों को धमकियां भी दी जा रही है। लेकिन उसके मामले में अभी तक आरोपी खुले में घूम रहा है। पीड़िता ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट उसके मामले में त्वरित कार्रवाई करने के आदेश बाड़मेर पुलिस को दे चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। इधर संगीता बेनीवाल का कहना है कि मामले पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए सख्त रवैये अपनाया जाना चाहिए।
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2020, हाथरस गैंगरेप कांड (Hathras Case) के बाद महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा एक बार फिर से राष्ट्रीय सुर्खियों में है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश के तकरीबन सभी जिलों में बलात्कार की घटनाएं रिपोर्ट की जा रही हैं. इनमें सबसे ज्यादा घटनाएं राजस्थान से हैं. डीआईयू (इंडिया टुडे की डाटा एनालिसिस टीम) ने बलात्कार की इन घटनाओं की जिलेवार तहकीकात की और यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर वे कौन से जिले हैं जो महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हैं. देश में हर रोज औसतन 88 बलात्कार होते हैं. इनमें से 6 बलात्कार अकेले राजस्थान के 8 जिलों में दर्ज होते हैं. एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट के आधार पर डीआईयू ने जिलेवार बलात्कार मामलों की रिपोर्ट पर एक सूची बनाई. इस सूची में दस सबसे खतरनाक जिलों (जहां बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं) में से आठ जिले राजस्थान के हैं. राजस्थान की राजधानी जयपुर 507 मामलों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है. जयपुर के अलावा बाकी जिले भरतपुर (290), अजमेर (256), गंगानगर (248), अलवर(236), जोधपुर (231), बीकानेर (227)और बांसवाड़ा (223) हैं, जहां बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले पुलिस में दर्ज हुए हैं. राजस्थान के इन जिलों के अलावा मुंबई (मुंबई सिटी और मुंबई-उपनगरों को मिलाकर) और केरल का त्रिवेंद्रम जिला भी महिलाओं के लिए खतरनाक है. मुंबई में 2019 में बलात्कार के 394 मामले दर्ज हुए जबकि त्रिवेंद्र में यह संख्या 282 है. एनसीआरबी की रिपोर्ट में दर्ज बलात्कार के आंकड़ों के आधार पर डीआईयू ने जिलों को मुख्य चार कैटेगरी में बांटा. लाल रंग में उन जिलों को रखा जहां पर सौ से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज किए गए. दूसरी कैटेगरी में 51 से 100 मामलों को रखा और इसे मैप में ऑरेंज कलर से दिखाया गया. तीसरी कैटेगरी नीले रंग की है जिसमें 1 से 50 मामलों को रखा गया. ऐसे जिले जहां कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, उन्हें हल्के नीले रंग में रखा गया. पिछले पांच सालों यानी 2014 से 2019 में जिलेवार बलात्कार की घटनाओं में बड़ा बदलाव हुआ है. 2019 में बलात्कार की सबसे ज्यादा घटनाएं राजस्थान और केरल में रिपोर्ट हुई हैं. अगर हम 2014 के दस सबसे खतरनाक जिलों की बात करें तो मुंबई में सबसे ज्यादा 607 मामले दर्ज किए गए. जबकि मुर्शिदाबाद (474) और जयपुर (416) क्रमश: दूसरे और तीसरे पायदान पर थे. महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कहते हैं कि ये बात सही है कि निर्भया के बाद रिपोर्टिंग ज्यादा हुई है लेकिन अभी भी नब्बे फीसदी मामले रिपोर्ट नहीं होते हैं. पीपुल्स अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया (PARI) की योगिता भयाना का कहना है कि “ निर्भया केस के बाद महिला हिंसा की रिपोर्ट थोड़ी बढ़ी है लेकिन अभी भी सौ में से दस मामले ही एफआईआर (प्राथमिक सूचना रिपोर्ट) तक पहुंच पाते हैं. यह हालत तकरीबन हर जगह की है. कुछ जगह रिपोर्ट ज्यादा हुई है तो भी अपराध तो कम नहीं हुए हैं”. कुछ जगहों पर बलात्कार की रिपोर्ट में गिरावट आई है. खासकर उत्तर प्रदेश में, जो हाथरस की घटना की वजह से चर्चा में है, वहां 2014 के मुकाबले 2019 में बलात्कार के रिपोर्ट होने वाले मामलों में 12 फीसदी की गिरावट आई है. एनसीआरबी के मुताबिक 2019 में प्रदेश में 3,065 बलात्कार दर्ज हुए वहीं 2014 में यह संख्या 3,467 थी. 2019 के आंकड़ों पर आधारित जिलेवार सूची में 50 सबसे ज्यादा असुरक्षित जिलों में यूपी का कोई जिला नहीं है. प्रयागराज जहां 119 मामले दर्ज हुए हैं वह 56 वें पायदान पर है. उसके बाद लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर का नंबर है जहां क्रमश: 100 और 99 मामले दर्ज हुए हैं. एनसीआरबी रिकॉर्ड के मुताबिक हाथरस में 2014 के मुकाबले 2019 में 12 फीसदी कम यानी 36 रिपोर्ट दर्ज हुई हैं. एनसीआरबी देशभर के पुलिस थानों में दर्ज होने वाले रिपोर्ट को संकलित करता है. हाल ही एनसीआरबी ने 2019 की रिपोर्ट जारी की है जिसमें पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में 7.3 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है.
नई दिल्ली, 05 अक्टूबर 2020,हाथरस कांड को लेकर लगातार आक्रामक रुख दिखा रही कांग्रेस के खिलाफ आज बीजेपी ने राजस्थान में मोर्चा खोल दिया. जयपुर समेत राजस्थान के तमाम जिला मुख्यालयों पर बीजेपी ने हल्ला बोल का आयोजन किया. जयपुर में सैंकड़ों की तादाद में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास की तरफ कूच किया लेकिन रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया.
कोटा पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के शक में एक युवक काे आर्मी इंटेलिजेंस ने पकड़ा है, जाे काेटा में कारपेंटर का काम करता है। सेना ने कहा है कि वाे आर्मी एरिया की सूचनाएं पाकिस्तान भेज रहा था। आर्मी के अधिकारियाें ने जब माॅनिटरिंग बढ़ाई, ताे संदिग्ध हरकताें के कारण इस युवक काे हिरासत में लिया गया। आर्मी ने शनिवार काे इस युवक काे भीमगंजमंडी पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में सीआईडी, एटीएस और एसआईबी आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। सेना ने इस युवक पर सेना क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश व सेना की सूचनाएं पाकिस्तान को देने का आरोप लगाया है। भीमगंजमंडी के एसआई चेतन शर्मा ने बताया कि जयपुर से सेना इंटेलीजेंस की सूचना के आधार पर सेना के जवानाें ने उत्तरप्रदेश के बागपत के गांव निवाधा निवासी इमरान (22) को सेना इलाके में संदिग्ध हालत में पकड़ा। पूछताछ करने पर वह संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं दे पाया। सोशल मीडिया के जरिए भेजता था सूचना सूचना के अनुसार आरोपी युवक मोबाइल व सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान को सूचनाएं भेजता था। उसने सेना क्षेत्र के कुछ फोटो व वीडियो भी पाकिस्तान भेजे हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन के भी फोटो व वीडियो पाकिस्तान भेजे हैं। वह पाकिस्तान के दो दर्जन वाट्सएप एप ग्रुप्स से जुड़ा है और उनमें ऑडियो व वीडियो शेयर करता है। बीकानेर आर्मी एरिया में कर चुका है काम इमरान आर्मी में कार्यरत ठेकेदार प्रेम के मार्फत बीकानेर सेना एरिया में भी लकड़ी का काम कर चुका है। अभी वह काेटा में कारपेंटर का काम कर रहा था। इसके अलावा फर्नीचर यार्ड में भी उसने दो माह काम किया था। इस युवक के बीते 2 माह से आर्मी एरिया व स्टेशन सहित काेटा आने-जाने वाले रास्ताें के बारे में सूचनाएं भेजने की बात सामने आ रही है। इस संबंध में इंटेलिजेंस ने उसके नंबर काे ट्रेसिंग पर डाला और उस पर लगातार नजर रखी। शक पुख्ता हाेने पर आर्मी इंटेलिजेंस ने उसे हिरासत में लिया।
जयपुर,राजस्थान में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने रविवार को गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि हे अकर्मी सरकार के मुख्यमंत्री कब तक प्रदेश में कानून व्यस्था की बदइंतज़ामी का मखौल उड़ाते रहोगे? अब तो राजस्थान की जनता के सब्र का इम्तिहान भी टूट चुका है, कम से कम मेरे प्रदेश की बेटियों पर तो रहम कर दीजिए। क्या ये खबरें आपकी अंतरात्मा को छलनी नहीं करती अशोक गहलोत जी ? आप इस राज्य के गृहमंत्री भी हैं, आप एक-एक घटना के लिए जवाबदेह हैं ! बताओ, कब लगेगा अपराधों पर अंकुश ? बताओ, कब बहन-बेटियों के लिये फिर से राजस्थान सुरक्षित प्रदेश कहलायेगा ? उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी गहलोत सरकार पर ट्वीट किए। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि देश में शांतिप्रिय प्रदेश के रूप में प्रसिद्ध राजस्थान आज अपराध का अड्डा बन रहा है। महिलाओं के साथ दुष्कर्म, लूट, डकैती, हत्या, दलित उत्पीड़न और बजरी माफियाओं का आतंक प्रदेश की पहचान बन चुका है। राठौड़ ने लिखा कि रेप मामलों में राजस्थान देश में पहले पायदान पर है। एनसीआरबी के नवीनतम आकंड़ों के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2019 में 5997 बलात्कार के केस दर्ज हुए। जिसमें 1313 मामलों में मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी की गई। प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपराधों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। दुर्भाग्य है कि राज्य में अपराध का बोलबाला है और कानून व्यवस्था दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।
जयपुर हाथरस गैंगरेप मामले को लेकर लोगों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। विपक्ष लगातार प्रदर्शन कर रहा है। वहीं एक दिन पहले हाथरस के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार, वायरल वीडियो में पीड़ित परिवार को एक तरह से धमकी देते दिखाई दिए थे। डीएम के इस रवैये से लोगों में भी नाराजगी है। शुक्रवार को जयपुर स्थित उनके आवास के बाहर लोगों ने विरोध में कचरा फेंक दिया। उत्तर प्रदेश के हाथरस के जिलाधीश प्रवीण कुमार के जयपुर स्थित एक मकान के सामने शुक्रवार को कुछ अज्ञात लोगों ने कचरा डाल दिया। वैशालीनगर के वृत्ताधिकारी राय सिंह बेनीवाल ने बताया कि प्रवीण कुमार के मकान के सामने कुछ अज्ञात लोगों ने कचरा डाल दिया। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जानकारी जुटाई। उन्होंने बताया कि कचरा डालने वालों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। बेनीवाल ने कहा कि इस मकान में किराएदार रहते हैं। वहीं, वैशालीनगर पुलिस थाने के अनुसार उक्त मकान में हाथरस के जिलाधिकारी के माता-पिता रहते हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस बीच भीम आर्मी के ट्विटर हैंडल भीम आर्मी भारत एकता मिशन की ओर से एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में भीम आर्मी के कार्यकर्ता, हाथरस डीएम के आवास पर पर्चे चस्पा करते हुए और कचरा डालते हुए दिखाई दिए। भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि जयपुर के वैशाली नगर में हाथरस डीएम के आवास पर भीम आर्मी की टीम ने जाकर, हाथरस की बेटी के परिवार को बंधक बनाने व उनको धमकाने की गलती पर अपना विरोध जाहिर किया। डीएम हाथरस ये जान ले कि वो न्याय देने के लिए कुर्सी पर हैं पीड़ितो को धमकाने के लिए नहीं।
अजमेर, 01 अक्टूबर 2020,राजस्थान के बारां में दो बहनों के साथ रेप का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि अजमेर में एक महिला के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर इस घटना को गैंगरेप बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने गैंगरेप की बात को नकार दिया. हालांकि इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. घटना अजमेर की है. जहां एक महिला से बलात्कार की घटना सामने आई है. पीड़िता ने पुलिस से मामले की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फौरन मुकदमा दर्ज कर लिया. साथ ही बिना देर किए कार्रवाई शुरू कर दी. महिला का मेडिकल भी कराया गया. आरोपियों की तलाश शुरू की गई. इसी दौरान एक आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया. अजमेर पुलिस ने गुरुवार को धारा 161 के तहत महिला के बयान दर्ज कराए. पुलिस ने पकड़े गए आरोपी युवक से पूछताछ भी की. सूत्रों के अनुसार घटना के पीछे पुराने प्रेम प्रसंग का मामला जुड़ा है. सोशल मीडिया पर इस घटना को गैंगरेप बता कर प्रचारित किया जा रहा है. हालांकि पुलिस ने गैंगरेप की बात को नकार दिया. अजमेर पुलिस का दावा है कि महिला के साथ गैंगरेप नहीं हुआ है. फिलहाल, इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच का जिम्मा अजमेर (साउथ सर्किल) के सीओ मुकेश कुमार को दिया गया है. बारां रेप केस में फिर से हो रही जांच राजस्थान के बारां रेप कांड मामले में फिर से मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िताओं के बयान कराए जाएंगे. लड़कियों ने पुलिस से कहा है कि वे फिर से अपना बयान बदलना चाहती हैं. लड़कियों के बयान पर पुलिस इस केस में धारा 376 लगाएगी. मजिस्ट्रेट से एक बार फिर से उनके बयान कराने की इजाजत ली जाएगी. बुधवार को बारां में दो बहनों ने आरोप लगाया था कि दो लड़कों ने उनके साथ बलात्कार किया था. बीजेपी ने इस मामले को लेकर प्रदर्शन किया. लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर इस मामले को गलत बताया था. जब लड़कियों के परिजनों ने इस बारे में शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज किया था. हालांकि दोनों लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर दिया था. लेकिन अब लड़कियों के पिता ने आरोप लगाया है कि बच्चियों पर दबाव डाला गया था और माता-पिता को मार डालने की धमकी दी गई थी. जिसकी वजह से मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने बयान बदला था. इसके बाद पुलिस ने मजिस्ट्रेट से दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए लिखित आग्रह किया है. पुलिस ने कहा है कि इस केस में अब धारा 376 भी जोड़ी जाएगी. इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे थे. क्योंकि पीड़ित नाबालिग बहनों ने पुलिस के सामने 161 के बयान में बलात्कार की बात कही थी. मगर मजिस्ट्रेट के सामने वे दोनों पलट गई. फिर ये भी सवाल था कि नाबालिग आरोपियों को थाने से क्यों छोड़ा गया. बारां जिले के एसपी डॉ. रवि का कहना है कि बच्चियों के घरवालों से बातचीत की गई है. उन्होंने नई शिकायत दी है. फिर से बयान दर्ज करवाए जा रहे हैं. दोबारा मामले की जांच कराई जा रही है. उधर, बीजेपी मामले को तूल दे रही है. बारां में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की. मामले में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग भी की.
जयपुर, 01 अक्टूबर 2020, उत्तर प्रदेश के हाथरस, बुलंदशहर, बलरामपुर और राजस्थान के अजमेर और बारां में रेप की घटनाओं के बीच जयपुर से भी गैंगरेप की खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक जयपुर के विश्वकर्मा थाने इलाके में एक होटल के कमरे में महिला के साथ कथित गैंगरेप हुआ है. महिला के आरोपों के मुताबिक उसके एक परिचित ने अपने दो दोस्तों के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया है. पीड़ित महिला ने थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया है. सरदार शहर निवासी महिला अपने पति और बच्चों के साथ हरमाड़ा में एक किराए के मकान में रहती है. राज्य की राजधानी के विश्वकर्मा इलाके में स्थित एक होटल में बुधवार रात परिचित युवक के अपने साथियों के साथ मिलकर एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. एसएचओ मांगीलाल विश्नोई ने बताया कि सरदार शहर चुरू निवासी 26 वर्षीय महिला ने मामला दर्ज कराया है कि वह अपने पति और बच्चों के साथ हरमाडा इलाके में किराए पर रहती है. घटनाक्रम के मुताबिक, बुधवार शाम को उसने परिचित विनोद वर्मा को कॉल कर 1000 हजार रुपये की मदद मांगी. बातचीत के बाद आरोपित विनोद वर्मा कार लेकर उसके पास आया और उसको कार में बैठाकर अपने साथ विश्वकर्मा इलाके में स्थित एक होटल में ले गया. आरोप है कि विनोद वर्मा ने पहले महिला को शराब पिलाई. जिसके बाद नशे की हालत में आरोपित विनोद और उसके 2 दोस्तों ने उसके साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है.
बारां, 30 सितंबर 2020, यूपी के हाथरस का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि राजस्थान से दो नाबालिग बहनों के साथ सामूहिक बलात्कार किए जाने की खबर सामने आई है. आरोपी पहले दोनों लड़कियों को बहला फुसला कर अपने साथ ले गए. फिर तीन दिन तक उन्हें अलग-अलग शहरों में ले जाकर उनके साथ रेप किया गया. मामला तब और भी गंभीर हो गया, जब पुलिस पर एक आरोपी को थाने से छोड़ देने का आरोप लगा. लड़की का परिवार अब इंसाफ मांग रहा है और लेकिन पुलिस कुछ और कहानी बता रही है. बारां की रहने वाली दोनों लड़कियों ने आरोप लगाया कि झांसा देकर दो युवक उन्हें अपने साथ पहले कोटा ले गए. फिर जयपुर और उसके बाद अजमेर. उनके साथ लगातार बलात्कार किया गया. जिले के पुलिस अधीक्षक रवि सभरवाल का कहना है कि हमने इन लड़कियों को बरामद कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था. जहां पर मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान में इन्होंने बलात्कार जैसी कोई बात नहीं कही थी और कहा था कि वे अपनी मर्जी से इन लड़कों के साथ गई थीं. क्योंकि उनके घरवाले उनके साथ मारपीट करते थे. दरअसल, बारां में 18 सितंबर की रात दो नाबालिग लड़कियां अपने घर से गायब हो गई थीं. 19 सितंबर को उनके पिता ने पड़ोस में रहने वाले दो परिचित लड़कों पर लड़कियों को भगाने का मुकदमा दर्ज करवाया. इसी दौरान आरोपी लड़कों ने उन लड़कियों के साथ अपने फोटो फेसबुक पर पोस्ट किए. तब पिता पुलिस को साथ लेकर कोटा पहुंचे और 21 सितंबर को लड़कियां बरामद हो गईं. पुलिस ने दोनों लड़कियों को बारां में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. दोनों के 164 के बयान हुए. उन्होंने लड़कों के साथ अपनी मर्जी से जाने का की बात कही. अपने माता-पिता पर मारपीट करने का आरोप लगाया. इसके बाद दोनों लड़कियों को सखी केंद्र भेज दिया गया. 4 दिन बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया. घर आने के बाद दोनों नाबालिग लड़कियों ने आरोप लगाया है कि आरोपी लड़के उन्हें कोटा, जयपुर और फिर अजमेर ले गए. तीन दिन तक उनके साथ गैंगरेप किया गया. उनके साथ गलत काम करने में दो-तीन लड़के और भी शामिल थे. पुलिस के सामने कुछ बोलने पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी थी. उधर, आरोपियों को पुलिस ने थाने से छोड़ दिया. नाबालिग लड़कियों का पिता खुद गाड़ी कर पुलिस के साथ गया था. लड़कियों का पिता अब इंसाफ मांग रहा है. दोनों बहनों की उम्र 13 और 15 वर्ष है. दोनों बहनों का आरोप है कि उन्हें सखी केंद्र में भी धमकाया गया था. पीडित लड़कियों के पिता का कहना है कि उनकी बेटियों के साथ गलत हुआ है. लेकिन पुलिस ने आरोपियों को छोड़ दिया. वह न्याय की मांग कर रहे हैं. बीजेपी ने इस मामले पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के राज में बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं और पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल रहा है. केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस मामले पर कहा कि क्या राजस्थान में गरीबों के लिए कोई कानून नहीं है. 13 और 15 साल की नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई है और उस मामले को दबाने की कोशिश शर्मनाक है. ये लड़कियां अकेली नहीं पूरा राजस्थान इनके साथ है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से मैं कड़ी कार्रवाई की मांग करता हूं. मामला बढ़ता देख, राजस्थान पुलिस ने बारां में 2 नाबालिग लड़कियों के साथ रेप किए जाने के आरोपों का खंडन किया है. पुलिस के अनुसार दोनों बालिकाओं ने अपने 164 के बयानों में साफ कहा कि उनके संग कोई रेप नहीं किया गया. दोनो बालिकाओं की मेडिकल जांच में भी रेप की पुष्टि नहीं हुई है.
जयपुर, 24 सितंबर 2020, राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने अचानक से कार्यकाल के 7 महीने पहले ही वीआरएस मांग कर सबको चौंका दिया है. डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने 20 नवंबर से वीआरएस मांगा है, मगर पूछने पर उन्होंने कोई वजह नहीं बताई और कहा कि नो कमेंट. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल अगस्त में ही भूपेंद्र सिंह को डीजीपी के पद पर 2 साल के लिए नियुक्त किया था. उनका कार्यकाल 30 जून 2021 तक है, मगर उससे पहले ही भूपेंद्र सिंह ने पद छोड़ने की इच्छा जताई है. भूपेंद्र सिंह के इस कदम के बाद नियम के अनुसार राज्य सरकार ने 7 सीनियर आईपीएस से सहमति पत्र और बायोडाटा यूपीएससी को भेजने के लिए मांगा है, जिसमें सिर्फ तीन नाम यूपीएससी की तरफ से राज्य सरकार को भेजा जाएगा और उसमें से एक व्यक्ति को नया डीजीपी बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि जाटों को खुश करने के लिए एमएल लाठर को नया डीजीपी बनाया जा सकता है. उनका कार्यकाल 8 महीने बाद ही मई 2021 में खत्म हो रहा है. हालांकि वरीयता में वह डीजी होमगार्ड राजीव दासोत से नीचे हैं, मगर माना जा रहा है कि जातीय समीकरण को देखते हुए इन्हीं को डीजीपी बनाया जाएगा. तीसरे नंबर पर डीजी जेल बीएल सोनी हैं, जो दिसंबर 2022 में रिटायर होंगे. ऐसे में उनके पास अभी वक्त है, लिहाजा 6 महीने बाद उनको राजस्थान सरकार डीजीपी बना सकती है. तीन और एडीजी का नाम भेजा जाएगा जिसमें भूपेंद्र दक, उमेश मिश्रा और नीना सिंह हैं. कहा जा रहा है कि भूपेंद्र सिंह जिस तरह के व्यक्ति हैं, वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम में वह खुद को सहज नहीं पा रहे थे, क्योंकि इस वक्त राजस्थान पुलिस में राजनीतिक दखलअंदाजी चरम पर है. हालांकि, माना जा रहा है कि उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त बनाया जा सकता है. इसके अलावा उन्हें आरपीएससी चेयरमैन या पुलिस यूनिवर्सिटी का वीसी बनाने की भी सुगबुगाहट है.
जयपुर प्रदेश में जहां एक ओर कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं उसके साथ ही प्रदेश में इसके खतरे भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब राज्य सरकार की गंभीरता भी बढ़ती जा रही है। प्रदेश सरकार लगातार नई रणनीति की घोषणा कर रही है, ताकि राजस्थान में कोरोना के खतरे को कम किया जा सके। हालांकि इधर प्रदेश में कोरोना का आंकड़े लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। हाल ही प्रदेश ही सरकार की ओर से सीएम गहलोत के निर्देशों पर दो बड़े फैसले किए गए हैं। 30 मिनट में कोरोना संक्रमित कों चिकित्सीय सेवा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (cm ashok gehlot) की पहल पर शुरू की गई हेल्पलाइन सेवा 181 कोरोना मरीजों के लिए बड़ी राहत देने की कोशिश की गई है। खास बात यह है कि 24 घंटे संचालित होने वाली इस वॉर रुम में महज 30 मिनट में कोरोना संक्रमितों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने की सुनिश्चितता तय की जा रही है। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के अनुसार इस वॉर रूम और इससे संबंधित जिला स्तरीय वॉर रुम के जरिए अधिकतम 30 मिनट में कोरोना मरीज या उनके परिजनों की समस्त समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहना है कि राज्य स्तरीय वॉर रुम में राज्य के सभी जिला वॉर रुम में तैनात कर्मचारियों व अधिकारियों के नामों की सूची और मोबाइल नंबर उपलब्ध रहेंगे। दिए ऑक्सीजन वाले बेडों की संख्या बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर ऑक्सीजन युक्त, आईसीयू और वेंटिलेटर्स युक्त बैड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर प्रदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने में कोई कमी नहीं रखेगी। गहलोत ने यह फैसला सोमवार रात हुई कोविड-19 समीक्षा बैठक में लिया।
जयपुर प्रदेश में कोरोना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब आलम यह है कि प्रदेश में संक्रमितों की संख्या हर रोज नए रिकॉर्ड बना रही है। सोमवार देर रात तक आए आखिरी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब नए 1892 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इससे एक दिन पहले यह आंकड़ा 1865 था। आपको बता दें कि राजधानी जयपुर की कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ रहा है। प्रदेश में अब सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिवों की संख्या जयपुर की ही है। राजधानी जयपुर में मौंतों का आंकड़ा पहुंचा 300 पार अब तक आए आखिरी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 16 लोगों की मौत की पुष्टि होने के साथ ही कुल मौतों का आंकड़ा 301 पहुंच गया है। ऐसे में अनुमान लगाया जाएं, तो राजधानी जयपुर में मौंतों का आंकड़ा अब ड़राने लगा है। वहीं प्रदेश सरकार के बीच भी राजधानी जयपुर के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। आपको बता दें कि राजधानी जयपुर में अब 17844 केसेज आ चुके हैं, जो सभी जिलों में सर्वाधिक है। वहीं दूसरे पायदान पर जोधपुर है। जहां कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 17320 है। ये है विभिन्न जिलों का कोरोना अपडेट प्रदेश में आए आखिरी आंकड़ों के अनुसार जयपुर में नए कोरोना संक्रमितों की संख्या जयपुर में 389 है। वहीं जोधपुर में 324, पाली में 110, उदयपुर में 105, भीलवाड़ा में 98, अलवर में 92, बीकानेर में 85, अजमेर में 79, जालौर मे 75, कोटा में 70, भरतपुर में 47, नागौर में 42, टोंक में 40, चूरू में 39, चित्तौड़गढ़ में 29, गंगानगर में 28, सीकर और डूंगरपुर में 22-22, सिरोही और राजसमंद में 20-20, जैसलमेर और दौसा में 16-16, झालावाड़ में 15, धौलपुर में 14, बाड़मेर में 13, झुंझुनू और हनुमानगढ़ में 12-12, प्रतापगढ़ में 11, बूंदी और बांसवाड़ा में 10-10, सवाई माधोपुर, करौली और बारां में 9-9 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।
जयपुर प्रदेश में बढ़ता कोरोना संक्रमण अब तेजी से लोगों को अपनी आगोश में ले रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता भी अपनी जद में ले रहा है। मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान के टोंक से विधायक चुकी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का बीती देर रात जयपुर में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निधन हो गया है। उन्होंने जयपुर के आरयूएचएस में अंतिम सांस ली। जाकिया 71 साल की थी। कई पदों पर निभाई जिम्मेदारी आपको बता दें कि टोंक जिले से जकिया तीन बार विधायक चुनी जा चुकी थीं। वे पहली ऐसी महिला विधायक रहीं हैं, जो टोंक से तीन बार चुनीं जा चुकी हो। कांग्रेस से उम्मीदवार के पद पर खड़ी होने वाली जाकिया राजस्थान में चिकित्सा मंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री के पद को संभाल चुकी हैं। साथ ही राजस्थान में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता के तौर पर जानी जाती थी। सीएम गहलोत और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने ट्वीट कर संवेदना व्यक्त की जाकिया इनाम के निधन के बाद प्रदेशभर में शोक व्यक्त करने वालों का सोशल मीडिया पर तांता लग गया है। वहीं टोंक विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन पर सीएम अशोक गहलोत और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी ट्वीट शोक व्यक्त किया है। सीएम गहलोत ने अपने ट्वीट में ईश्वर से शोक संतृप्त परिवार को दुख सहने की हिम्मत मिलने की दुआ मांगी है। सोमवार को हुआ था जमीदारा पार्टी सुप्रीमों बी.डी. अग्रवाल का निधन आपको बता दें कि इससे पहले सोमवार को प्रमुख उद्योगपति और जमीदारा पार्टी के प्रमुख बी.डी. अग्रवाल की भी कोरोना वायरस संक्रमण से मौत की पुष्टि हुई थी। उनका इलाज गुड़गांव के एक अस्पताल में चल रहा था। प्रदेश की नामी हस्तियों के कोरोना से जाने से समझा जा सकता है कि प्रदेश किस कदर अपना कहर बरपा रहा है।
जयपुर राजस्थान में कोरोना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं राजधानी जयपुर में सर्वाधिक मरीजों की संख्या सामने आ रही है। इसी बाक को ध्यान में रखते हुए अब यह फैसला लिया गया है कि सोमवार से रात साढ़े 7 बजे तक बंद किए जाएंगे। रविवार को जयपुर व्यापार महासंघ समेत सभी व्यापारिक संगठनों के साथ हुई प्रशासन की वीडियो कांफ्रेंसिंग में यह फैसला लिया गया कि अब कोई भी व्यापारी प्रतिष्ठान रात 10 बजे तक नहीं खोलें जाएं। भेजा गया प्रशासन को प्रस्ताव बैठक के बाद हुए निर्णय के बाद अब व्यापारिक संगठनों ने यह प्रस्ताव पुलिस कमिश्नर व कलेक्टर को भेज दिया गया है। उल्लेखनीय है कि व्यापारियों की वीसी में करीब 45 बाजारों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, जिन्होंने अपने स्तर पर कोरोना बचाव और संक्रमण रोकथाम के संबंध में प्रशासन को सुझाव भी दिए थे। इसमें मुख्य बाजार परकोटा सहित अन्य बाजारों को लेकर भी निर्णय लिया गया। सांगानेर की दुकानें कल से 7 बजे तक बंद होंगी राजधानी जयपुर की बात की जाएं, तो सबसे ज्यादा कोरोना का खतरा सांगानेर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। प्रदेश में सर्वाधिक कोरोना संक्रमितों की संख्या मालवीय नगर, मानसरोवर और सांगानेर क्षेत्र में पाई जा रही है। लिहाजा व्यापार महासंघ सांगानेर ने भी बढ़ते हुए कोरोना के प्रभाव को देखते हुए अपने बाजार शाम 7 बजे ही बंद करने का निर्णय लिया है। यही नहीं अब सांगानेर में प्रत्येक गुरुवार को पूरी तरह से बाजार बंद रखने का निर्णय लिया गय़ा है।
नई दिल्ली,राजस्थान में बीते दिनों मुख्यमंत्री निवास और कार्यालय में कोरोना के करीब 40 मामले सामने आए थे. लगभग 40 कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा निर्णय लिया है. उन्होंने आगामी एक महीने आमजन सहित अन्य सभी लोगों से मुलाकात नहीं करने का फैसला लिया है. सीएम गहलोत ने कहा कि कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन ही मुख्य उपाय है. खुद का बचाव करके ही इस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है. सीएम ने कहा कि इसी उद्देश्य से चिकित्सकों की सलाह के अनुसार मैंने आगामी एक माह तक आमजन सहित अन्य सभी लोगों से मुलाकात नहीं करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि इस दौरान सिर्फ सुशासन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लेंगे. सीएम की लोगों की अपील सीएम गहलोत ने प्रदेशवासियों से अपील है कि सभी लोग मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग रखें, भीड़ से बचें, सामाजिक मेल-जोल कम से कम रखें, आवश्यकता होने पर ही घर से निकलें और अन्य सभी हैल्थ प्रोटोकॉल की पूरी जिम्मेदारी के साथ पालना करें. सीएम गहलोत ने कहा कि कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करना ही मुख्य उपाय है. खुद का बचाव करके ही इस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है.
जयपुर, 12 सितंबर 2020, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच लगता है कि अभी भी सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है. राजस्थान में अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) की जातियों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं देने और देव नारायण योजना के विभिन्न कार्य ठप होने को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिखी है. उप मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद गुर्जरों के आरक्षण को लेकर सचिन पायलट की लिखी चिट्ठी पर हर तरफ चर्चा है. 2 सितंबर को लिखी चिट्ठी में पायलट ने सीएम गहलोत को लिखा है कि विधानसभा चुनाव 2018 के घोषणा पत्र में एमबीसी के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण देने का वायदा किया गया था. लेकिन मुझे यह बताया गया कि सरकार ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2018, रीट भर्ती 2018, पंचायतीराज एल डीसी भर्ती 2013, टेक्निकल हैल्पर भर्ती 2018, नर्सिंग भर्ती 2013 व 2018, जेल प्रहरी भर्ती 2018, आशा सुपर वाइजर भर्ती 2016, कमर्शियल असिसटेंट भर्ती 2018, द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2018 व अन्य भर्तियों में एमबीसी से जुड़ी जातियों को पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया गया है, जबकि इस आरक्षण को देने के लिए सरकार ने प्रतिनिधियों से समझौता भी किया था. 2 अक्टूबर को अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी राजस्थान सरकार पायलट ने अपने पत्र में देव नारायण बोर्ड और देव नारायण योजना के अंतर्गत आने वाले विकास कार्यों के ठप होने पर भी दु:ख प्रकट किया है. पायलट ने सीएम गहलोत को बताया कि समय-समय पर लोग मुझसे मिलते हैं और इन दोनों योजनाओं को बजट देकर उचित ढंग से क्रियान्विति करने की मांग करते हैं. पायलट ने पत्र में आग्रह किया कि मेरे द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई की जाए. गौरतलब है कि अति पिछड़ा वर्ग में गुर्जर, रेबारी, देवासी, गडरिया, बंजारा सहित अनेक जातियां शामिल हैं. इन जातियों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलने से नुकसान हो रहा है. राजस्थान सरकार ने कहा है कि 2 अक्टूबर को अपने घोषणा पत्र के बारे में वह जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड रखेंगे. इससे पहले गुर्जर आरक्षण को लेकर सचिन पायलट चिट्ठी लिखकर राजस्थान सरकार पर मांगें पूरी करने का दबाव बढ़ा दिया है.
जयपुर राजस्थान विधानसभा में सोमवार को भी सत्र भारी हंगामेदार रहा। वहीं इस दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से बाहर करने का प्रस्ताव पारित किया गया। वहीं इस दौरान भाजपा विधायकों ने वॉक आउट कर प्रश्नकाल-शून्यकाल नहीं होने पर सांकेतिक विरोध भी जताया। आपको बता दें कि विपक्ष के भारी हंगामें के बीच सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। राठौड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाने के बाद सबसे पहले आधे घंटे के लिए कार्यवाही को स्थगित करने का फैसला स्पीकर की ओर से लिया गया। यह था पूरा मामला दरअसल एक विधेयक को लेकर स्पीकर की विपक्षी भाजपा के विधायकों से तीखी नोंक झोंक हुई। विपक्ष के सदस्यों ने स्पीकर के सामने आकर नारेबाजी की। स्पीकर के बार बार कहने पर भी विधायक अपनी सीटों पर नहीं गए । लगातार उपनेता प्रतिपक्ष राठौड़ की विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी से तीखी नोकझोंक जारी रही। इसके बाद संसदीय मंत्री शांति धारीवाल से राठौड़ को सदन से बाहर करने का प्रस्ताव रखा, जिसे स्पीकर ने बिना किसी देरी के स्वीकार कर लिया। इसी तरह आगे विपक्ष के हंगामे के बीच इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया । स्पीकर नरम पड़े, तो दोबारा राठौड़ को निलंबन के लिए प्रस्ताव लाने की कहीं बात सोमवार को जहां बीजेपी ने हंगामा जारी रखा। वहीं राठौड़ को सदन से बाहर किए जाने के बाद एक बार फिर स्पीकर सी.पी. जोशी ने नरमाई दिखाई। उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष व विधायक सतीश पूनियां से कहा कि वे अध्यक्ष की ओर से की गयी व्यवस्था का पालन करते हुए राठौड़ को एक बार बाहर भेजें, इसके बाद वह खुद सत्तापक्ष से कहेंगे कि उनका निलंबन रद्द करने का प्रस्ताव लाया जाए। लेकिन विपक्ष ने उनकी बात एक तरह से अनसुना कर दी। शोरशराबे की बीच पारित हुए विधयक जहां दिन भर सदन में हंगामों का दौर जारी रहा। वहीं इस बीच कई विधेयक पारित किए गए। अध्यक्ष ने लगभग दो बजे विपक्षी सदस्यों से एक बार फिर सदन की व्यवस्था का पालन करने की अपील की। इसके बाद कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले राजस्थान भिखारियों या निर्धन व्यक्तियों का पुनर्वास संशोधन विधेयक 2020 को लेकर भी भारी हंगामा रहा। इसके अलावा जीएसटी के मुद्दे पर भी सत्तापक्ष और विपक्ष आमने- सामने दिखाई दिए
जयपुर कोरोना वायरस के संक्रमित केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अब कोविड-19 को हराकर पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को एम्स प्रशासन ने सोमवार को अस्पताल से डिस्चार्च कर दिया है। उनसे पहले एम्स में भर्ती केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी ठीक होकर घर लौट चुके हैं। बता दें, अर्जुन राम मेघवाल 8 अगस्त को कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना को मात देकर ठीक होने की जानकारी केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ट्वीट कर खुद भी दी। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- "मैं COVID-19 से ठीक होकर आज AIIMS से डिस्चार्ज हो गया हूं। चिकित्सकीय सलाह पर मैं कुछ दिन तक होम आइसोलेशन में रहूंगा। मैं डॉक्टर्स, नर्सेज़ व उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं। आप सभी शुभचिंतकों ने मेरे स्वास्थ्य लाभ हेतु प्रार्थना की, इसके लिए मैं आपका आभारी रहूंगा।" इस बीच राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिन से रोजाना कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 100 के पार जा रहा है। रविवार को जयपुर में 164 कोविड-19 संक्रमित नए मरीज मिले। इनमें से 3 की मौत हुई है। जांच रिपोर्ट मिलते ही सभी को तत्काल अस्पताल भेज दिया।
जयपुर, 12 अगस्त 2020, राजस्थान में कांग्रेस का सियासी झगड़ा तो निबट गया है मगर झगड़े की धमक अभी तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नोटिस में दिखाई दे रही है. राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, उनके भाई और पिता के नाम जमीन खरीद के मामले में ईडी का नोटिस आया है. नोटिस में ऐसा आरोप है कि पीएसीएल कंपनी के एजेंट के रूप में प्रताप सिंह खाचरियावास के परिवार की कंपनी बॉर्डर पर जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम करती थी. इसी मामले में पैसे के लेन-देन में ईडी का नोटिस आया है. परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि बीजेपी ने बेहद गंदा खेल खेला है और उनके 80 साल के पिता के नाम नोटिस भेजा है. इसमें कहा गया है कि दिल्ली दफ्तर में आकर अपना बयान दर्ज करवाएं. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि बीजेपी को समझना चाहिए कि उनके पिता लक्ष्मण सिंह शेखावत भैरों सिंह शेखावत के छोटे भाई हैं जो उनके बड़े नेता थे और अपने परिवार के लोगों के खिलाफ इस तरह से साजिश रच रहे हैं कहा जा रहा है कि प्रताप सिंह खाचरियावास को भेजे नोटिस में ईडी ने उनको और उनके पिता को सोमवार को ईडी दफ्तर में दिल्ली आने के लिए कहा था मगर प्रताप सिंह खाचरियावास मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ चार्टर्ड प्लेन में बैठकर जैसलमेर रवाना हो गए थे. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि यह मामला जयपुर ईडी के दफ्तर में बंद हो चुका है मगर जानबूझकर इसे वापस खुलवाया गया है.
नई दिल्ली, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की वापसी हो रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में क्या मिलेगा, क्या करना है, ये पार्टी को तय करना है. सचिन पायलट ने कहा कि मुद्दों पर मतभेद होता है और होना भी चाहिए. मैं सबसे बात करता हूं. मैंने लोगों से बहुत से वादे किए थे, उसे पूरा करना है. 'आजतक' के साथ विशेष बातचीत में सचिन पायलट ने ये बातें कहीं. हालांकि भविष्य में क्या करेंगे इसे लेकर सचिन पायलट ने अपने पत्ते नहीं खोले. आगे की रणनीति क्या होगी? सचिन पायलट ने कहा कि भविष्य में क्या होगा मुझे पता नहीं है. कांग्रेस के मेरे बहुत से साथियों ने बहुत सी बातें कही या बोली गई होंगी, मैं उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. इसका कोई मतलब नहीं है. रात गई सो बात गई. मैं इन सब बातों का जवाब दूं, यह शोभा नहीं देता है. सब मेरे साथी हैं. अगर किसी ने मुझे भला बुरा कहा है तो ये उनकी सोच होगी. राजस्थान की सियासी खींचतान और बीजेपी की भूमिका के सवाल पर पायलट ने कहा कि जो विपक्षी पार्टी है वो मौके का फायदा उठाए, ऐसा सोचना गलत नहीं है. लेकिन हम शुरू से बोल रहे हैं कि हम पार्टी के अंदर रहकर मामले को उठाएंगे. हम कांग्रेसी हैं. विधायकों ने भी कहा वो अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन इस बीच विपक्षी पार्टी ने ऐसे काम किए होंगे कि इसका फायदा कैसे लिया जाए? नोटिस से आहत हुआ अशोक गहलोत से मतभेद पर सचिन पायलट ने कहा कि कुछ लोग पार्टी को दिक्कत में लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो मुझे लगा कि बात करके इसे निपटाना चाहिए. ये मुद्दा पैदा कहां से हुआ. मैं डिप्टी सीएम था. मैं प्रदेश अध्यक्ष था. अगर हमें देशद्रोह की धारा के तहत नोटिस भेजा जाएगा तो अपमानित होने जैसा सा लगता है. मैं भी इंसान हूं. लेकिन इस मुद्दे को हम लोगों ने उठाया. पार्टी फोरम में बात रखी दूसरी पार्टी ज्वॉइन करने के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा कि जब हम अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आए तो हमारे खिलाफ बहुत से एक्शन लिए गए. लगातार मामला बढ़ता गया, सुलह की कोई गुंजाइश दिख नहीं रही थी क्योंकि हमने सैद्धांतिक मुद्दा उठाया और व्यक्तिगत हमले हुए. लेकिन हमने पहले ही दिन ये बात कही थी कि हम किसी दल में नहीं जा रहे हैं. हम अपनी पार्टी में रहकर अपनी बात रखेंगे. सचिन पायलट ने कहा कि लोग आएंगे, जाएंगे, लेकिन मेरे लिए जनता महत्वपूर्ण है. हमने जनता के बीच विश्वास कायम कैसे रहे, इस पर पूरा ध्यान फोकस किया. लोग बहुत सारा विकल्प बताते हैं लेकिन पार्टी में खड़ा हूं. पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है. फिर से डिप्टी सीएम बनने के सवाल पर पायलट ने कहा कि पार्टी ने पिछले 20 सालों में जो भी दायित्व दिया है, उसे मैंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया है. पद हो या न हो, प्रदेश की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करता रहूंगा. उन्होंने कहा कि जो वादे करके हम सत्ता में आएं हैं उसे पूरा करना हम सबकी प्राथमिकता रहेगी. आलाकमान की तरफ से सवालों के समधान किए जाने के प्रश्न पर सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान में मैं पिछले डेढ़ साल से सरकार का हिस्सा रहा, और उपमुख्यमंत्री के रूप में काम भी किया. लेकिन मैंने कभी भी राजनीति को व्यक्तिगत नहीं बनाया. मुख्यमंत्री जी मेरे से बड़े हैं और उनके प्रति सम्मान है, लेकिन अगर वादों के मुताबिक काम नहीं हुआ तो उसकी बात उठाना जरूरी था. इसीलिए दिल्ली आए कि आलाकमान के सामने मुद्दों को रखा जा सके.
जयपुर, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के गांधी परिवार के हाथों वापसी को लेकर राजस्थान सरकार ने पहली प्रतिक्रिया दी है. इसमें कहा है कि विधायकों के मन में इस बात को लेकर गुस्सा है. राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि जिस तरह से सचिन पायलट और उनके साथ गए 18 विधायकों की कांग्रेस में एंट्री हुई है उससे अशोक गहलोत गुट के विधायकों में जबरदस्त गुस्सा है कि हम 1 महीने से होटल में उनकी वजह से रह रहे थे और इस तरह से वह बगावत करके गए थे और पार्टी ने उन्हें शामिल कर लिया है. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि मैं सचिन पायलट का करीबी हूं इसलिए मेरे मन में कोई नाराजगी नहीं है मगर बाकी के विधायकों के मन में है. सचिन पायलट और उनके समर्थकों पर सबसे ज्यादा निशाना साधने वाले प्रताप सिंह खाचरियावास आज बदले-बदले नजर आ रहे थे. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि हमारी पायलट साहब से किसी भी तरीके की दुश्मनी नहीं है बल्कि मैं तो पायलट साहब का करीबी हूं और उनके आने से हमें खुशी हुई है. आज भी हमारे लिए सम्मान की बात है और उनके ऊपर आज भी कोई दिक्कत आएगी तो सबसे पहले प्रताप सिंह खाचरियावास खड़ा हुआ मिलेगा. राजस्थान के परिवहन मंत्री ने आगे कहा कि हमारे ऊपर उनके गुट के एक विधायक ने ऐसी टिप्पणी कर दी थी जिसकी वजह से मुझे गुस्सा आ गया था और मैंने उसके जवाब में कहा था कि सचिन पायलट हमारे बाद में राजनीति में आए हैं. गौरतलब है कि सचिन पायलट के बेहद करीबी रहे प्रताप सिंह खाचरियावास ने कह दिया था कि जब पायलट चड्डी में घूमा करते थे, तब हम राजनीति में थे. प्रताप सिंह खाचरियावास की उदासी बता रही थी कि इन्हें अंदाजा नहीं था सचिन पायलट वापस लौट आएंगे.
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020,राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. पार्टी के अंदर बगावत करने वाले सचिन पायलट ने सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि ये तीनों के बीच हुई ये मुलाकात सकारात्मक रही है, ऐसे में संकेत दिख रहे हैं कि सचिन पायलट को कांग्रेस मनाने में कामयाब रही है. आपको बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र चल रहा था, उससे पहले सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. इससे पहले भी जब सचिन पायलट ने बगावत की थी, तब प्रियंका गांधी वाड्रा से उनकी कई बार फोन पर बात हुई थी और उन्होंने मसला सुलझाने की कोशिश की थी. अशोक गहलोत और सचिन पायलट में खिंची थी तलवारें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ करीब 22 विधायक थे. राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने का आरोप लगाया था और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. जिससे सचिन पायलट खासा नाराज हुए थे, उनकी बगावत के बाद ही कांग्रेस ने सचिन से उपमुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था. सीएम अशोक गहलोत की ओर से आरोप लगाया गया था कि सचिन पायलट भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिशों में जुटे थे, फोन टेपिंग जैसे कई सबूत होने का दावा किया था. हालांकि, एक ओर जहां अशोक गहलोत लगातार सचिन पायलट पर हमलावर थे, दूसरी ओर कांग्रेस का शीर्ष आलाकमान उन्हें पार्टी में लाने की कोशिशों में जुटा था. राहुल-प्रियंका समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने सचिन पायलट से बात करने की कोशिश की, बार-बार खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी सचिन पायलट को वापस आने का न्योता दिया गया.
जैसलमेर/जयपुर राजस्थान में जारी राजनीतिक उठापटक (Rajasthan Political Crisis) के बीच बयानबाजी का दौर भी लगातार जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) अपनी सरकार को बचाने के लिए लगातार कोशिश में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट कर दिया। इस बीच शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से अपील करते हुए कहा कि राजस्थान में चल रहे इस 'तमाशे' को बंद करवाएं। साथ ही गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल समेत कई बड़े नाम हैं, जो कथित तौर पर गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ गुपचुप तरीके से हॉर्स ट्रेडिंग की साजिश में शामिल हैं। शेखावत के साथ धर्मेंद्र प्रधान-पीयूष गोयल पर गहलोत का निशाना अशोक गहलोत ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ भी तमाशा हो रहा है उसे बंद कराएं। इस साजिश में गजेंद्र सिंह शेखावत की भागीदारी अब पता चल चुकी है, ऐसे में उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके साथ-साथ इसमें धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल जैसे कई अन्य लोग गुप्त रूप से शामिल हैं। हम यह जानते हैं लेकिन हम परेशान नहीं हैं। हम तो लोकतंत्र की परवाह कर रहे हैं।' बागियों की वापसी को लेकर गहलोत ने कही ये बड़ी बात बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से बगावती सुर अख्तियार करने वाले सचिन पायलट खेमे को लेकर कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व चाहता है तो वो उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। गहलोत ने ये बातें जैसलमेर से जयपुर रवाना होने से ठीक पहले कही। उन्होंने कहा कि मुझ पर कोई दबाव नहीं है। पार्टी ने मुझ पर भरोसा किया है और मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार एआईसीसी महासचिव, तीन बार पीसीसी प्रमुख और तीन बार मुख्यमंत्री बना। अब मैं और क्या चाहूंगा? 'कांग्रेस हाईकमान जो फैसला करे, मुझे आपत्ति नहीं' सीएम गहलोत ने कहा कि मैं जो कुछ भी कर रहा हूं वह सार्वजनिक सेवा के लिए है। कांग्रेस हाईकमान जो भी फैसला करता है, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह देर से आक्रामक नहीं हुए, गहलोत ने कहा, 'मैं आक्रामक कहां हूं? मैं प्यार और स्नेह से बात करता हूं... मैं मुस्कुराता रहता हूं क्योंकि वह भगवान का उपहार है।' हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है: गहलोत मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों की लड़ाई है... लड़ाई यह नहीं होती कि आप चुनी हुई सरकार को गिरा दें। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है। गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार जनता ने मौका दिया जो बड़ी बात है। उन्हें चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है उसे बंद करवाएं। हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए हैं। जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई, इन्होंने और रेट बढ़ा दिए।
जैसलमेर राजस्थान के सियासी (Rajasthan crisis) घमासान में रोज नई घटनाएं सामने आ रही हैं। गहलोत खेमें के विधायकों को जयपुर से (gehlot camp's mla shift jaipur to jaisalmer) जैसलमेर शिफ्ट किया गया है। वहीं इस दौरान आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो गई है। शनिवार को जैसलमेर पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (ashok gehlot) ने आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी सरकार को गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल खेल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजस्थान में चल रहे इस ‘तमाशे’ को बंद करवाने की अपील की। गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "दुर्भाग्य से इस बार बीजेपी का प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त का खेल बहुत बड़ा है। वह कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश का प्रयोग यहां कर रही है। पूरा गृह मंत्रालय इस काम में लग चुका है।" उन्होंने कहा, "वो कहते हैं, हमें किसी की परवाह नहीं, हमें लोकतंत्र की परवाह है। हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई विचारधारा, नीतियों एवं कार्यक्रमों की लड़ाई है ... लड़ाई यह नहीं होती कि आप चुनी हुई सरकार को गिरा दें। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है।" जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई, हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए: गहलोत सीएम गहलोत ने कहा कि मोदी को प्रधानमंत्री के रूप दूसरी बार जनता ने मौका दिया जो बड़ी बात है। उन्हें चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है उसे बंद करवाएं। उन्होंने कहा, "मोदी जी को प्रधानमंत्री होने के नाते चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ भी तमाशा हो रहा है उसे बंद कराएं, हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए हैं। जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई इन्होंने और रेट बढ़ा दिए।" अगर पार्टी आलाकमान माफ करता है तो हम भी बागियों को गले लगा लेंगे: गहलोत केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा सरकार के खिलाफ ट्वीट किए जाने के बारे में गहलोत ने कहा कि सिंह तो अपनी झेंप मिटा रहे हैं जबकि आडियो टेप मामले में उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके नेतृत्व से नाराज होकर अलग होने वाले सचिन पायलट एवं 18 अन्य कांग्रेस विधायकों की वापसी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला पार्टी आलाकमान को करना है और अगर आलाकमान उन्हें माफ करता है तो वे भी बागियों को गले लगा लेंगे।
जयपुर राजस्थान में राजनीतिक घमासान का दौर थमता नहीं दिख रहा है। एक दिन पहले ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने एक बयान में कहा कि प्रदेश में विधायकों की खरीद-फरोख्त के रेट बढ़ गए हैं। जब से राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र को हरी झंडी दी है तब से हॉर्स टेड्रिंग में विधायकों के भाव बढ़ गए हैं। इस बीच गहलोत खेमे के सभी विधायकों को जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट किया जा रहा है। 3.30 PM: तक के सभी बड़े अपडेट्स... 3.30 PM: गहलोत गुट दावों की खुली पोल जयपुर से जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान विधायकों की जो संख्या सामने आई है उसने गहलोत गुट के अब तक के दावों की पोल खोल दी है। कभी 109, कभी 104 तो कभी 101 से ज्यादा विधायकों की बाड़ाबंदी के दावों के उलट शुक्रवार को जैसलमेर शिफ्टिंग दौरान महज 97 विधायक नजर आए। मीडिया रिपोट्‌र्स के अनुसार जयपुर से जैसलमेर के सफर में पहले हवाई जहाज में 54 विधायक चढ़े, दूसरे चार्टर प्लेन में मात्र 6 विधायक तो तीसरे प्लेन में 37 विधायक रवाना हुए। 3.00 PM: जैसलमेर पहुंचे कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक जयपुर के होटल से निकल कर अब जैसलमेर पहुंच गए हैं। चार्टर्ड प्लेन से ये विधायक जैसलमेर पहुंचे हैं। इससे पहले जयपुर के फेयरमोंट होटल से बस के जरिए सभी विधायकों को एयरपोर्ट लाया गया, जहां से अब वो जैसलमेर पहुंचे हैं। 1. 22 PM: अशोक गहलोत का बीजेपी पर निशाना राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी ने तेलगुदेशम पार्टी के 4 सांसदों को राज्यसभा के अंदर रातों रात मर्जर करवा दिया, वो मर्जर तो सही है और राजस्थान में 6 विधायक मर्जर कर गए कांग्रेस में वो मर्जर गलत है, तो फिर BJP का चाल-चरित्र-चेहरा कहां गया? राज्यसभा में मर्जर हो वो सही है और यहां मर्जर हो वो गलत है? 12.55 PM: एयरपोर्ट पहुंचे कांग्रेस विधायक जैसलमेर जाने के लिए कांग्रेस के विधायक जयपुर एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। पहले राउंड में करीब 53 विधायक चार्टर्ड प्लेन से जैसलमेर जाएंगे। बाकी विधायक दूसरे राउंड में जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। 12.20 PM: एयरपोर्ट के लिए निकले विधायक जयपुर के फेयरमोंट होटल से कांग्रेस विधायक बसों में सवार होकर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए हैं। उन्हें जैसलमेर शिफ्ट किया जा रहा है। 14 अगस्त को विधानसभा सत्र के मद्देनजर ये शिफ्टिंग की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, विधायक चार्टर्ड प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगे। 11.30 AM: जयपुर में सियासी हलचल तेज गहलोत खेमे के विधायकों को जयपुर के फेयरमोंट होटल से जैसलमेर शिफ्ट करने की कवायद शुरू हो गई है। विधायक एयरपोर्ट जाने के लिए बसों में सवार हो चुके हैं। इस बीच जयपुर एयरपोर्ट पर चार्टर्ड प्लेन पहुंच चुके हैं, जिनके जरिए विधायक जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। 10.57 AM: चार्टर प्लेन से जा सकते हैं जैसलमेर खबर है कि गहलोत खेमे के विधायकों को दो से तीन चार्टर प्लेन के जरिए विधायकों को जैसलमेर ले जा सकते हैं। इसके लिए विधायकों को बसों के जरिए एयरपोर्ट ले जाएंगे फिर वहां से जैसलमेर ले जाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इसको लेकर जैसलमेर पुलिस को अलर्ट किया गया है। 10.56 AM: जैसलमेर शिफ्ट होंगे गहलोत खेमे के विधायक! राजस्थान में लगातार बदल रहे सियासी परिदृश्य में शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन करने वाले विधायक आज जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। कैबिनेट की बैठक के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। राजस्थान में सियासी उठापटक का दौर लगातार जारी मुख्यमंत्री गहलोत ने गुरुवार को विधायकों के रेट वाला बयान देकर अगले 14 दिन तक सियासी उठापटक की आशंका को बल दिया है। सूबे में बदले सियासी हालात में पिछले 20 दिनों से कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी जारी है। अब राज्यपाल ने 14 अगस्त को विधानसभा सत्र का आगाज का फैसला लिया है। जिसके बाद अगले 14 दिन और विधायकों को होटल में ही कैद रहना होगा। यानी बाड़ाबंदी में कांग्रेस विधायकों और अन्य समर्थित विधायकों को 14 अगस्त को विधानसभा सत्र के आगाज तक सरकार कोई ढील नहीं देने वाली है।
जयपुर, 30 जुलाई 2020,राजस्थान की सियासत में बहुजन समाज पार्टी एक बड़े किरदार के रूप में सामने आई है. बसपा के 6 विधायकों ने राजस्थान के चुनाव के बाद कांग्रेस में विलय कर लिया था, लेकिन अब पार्टी की ओर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें सतीश मिश्रा की ओर से दलीलें रखी गईं. अब राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से बसपा के सभी 6 विधायकों (कांग्रेस में विलय कर चुके), विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा सचिव को नोटिस जारी किया गया है. अदालत की ओर से सभी से 11 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया है. सुनवाई के दौरान बसपा ने यहां अदालत में तर्क दिया कि वो एक राष्ट्रीय पार्टी हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते हैं. सतीश मिश्रा इस मामले के लिए लखनऊ से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. यहां अदालत में उन्होंने हरियाणा के कुलदीप विश्नोई मामले का हवाला दिया गया है, साथ ही जगजीत सिंह केस का भी हवाला दिया गया है. बसपा राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है, ऐसे में राज्य स्तर पर फैसला मान्य नहीं होता है. दलील दी गई है कि पूरे दल का विलय राष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है. सुनवाई में बीएसपी की ओर से स्पीकर पर आरोप लगाया गया और कहा गया कि स्पीकर जानबूझकर पूरे मामले को खींच रहे हैं. गौरतलब है कि बसपा के 6 विधायकों ने कांग्रेस पार्टी में अपना विलय कर लिया था. बीते दिनों बसपा की ओर से व्हिप जारी किया गया था कि विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ वोट करें. जिसपर विधायकों का कहना था कि वो अब कांग्रेस में हैं और अशोक गहलोत के साथ हैं, बसपा का व्हिप मान्य नहीं होता है.
जयपुर, 30 जुलाई 2020, राजस्थान की सियासत में पहले ऑडियो टेप ने विवाद पैदा किया और अब एक वीडियो पर नया बवाल छिड़ गया है. विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के बीच बातचीत के वीडियो पर भारतीय जनता पार्टी हमलावर हो गई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि स्पीकर को नैतिकता के आधार पर पद छोड़ देना चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि जिस तरह की बातचीत वीडियो टेप में हमने सुनी है, उससे ऐसा लगता है कि विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी से आते हैं और पार्टी के लिए पक्षपात कर रहे हैं जो कि एक स्पीकर को शोभा नहीं देता है. बीजेपी नेता ने कहा कि स्पीकर संजीदा व्यक्ति हैं और ऐसे व्यक्ति पर जब इस तरह के सवाल उठे तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. बीजेपी नेता सतीश पूनिया बोले कि वह किसी सामान्य व्यक्ति से बात नहीं कर रहे हैं बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे से बात कर रहे हैं. ऐसे में साफ लगता है कि वह कांग्रेस का साथ दे रहे हैं, जबकि संविधान के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष रहना चाहिए. बीजेपी नेता ने कहा कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हैं कि हाई कोर्ट उनके विधायकों के नोटिस देने के मामले में लक्ष्मण रेखा पार कर रहा है और दूसरी तरफ वह खुद ही सारी मर्यादा तोड़ कर इस तरह से 30 विधायकों के उधर चले जाने और सरकार बचा लेने की बातचीत कर रहे हैं. दरअसल, स्पीकर सीपी जोशी और वैभव गहलोत की मुलाकात का एक वीडियो आया है. जिसमें स्पीकर कह रहे हैं कि अभी हालात मुश्किल हैं. अगर 30 आदमी निकल जाते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते, वो सरकार गिरा देते. वीडियो की इस बातचीत पर बवाल... स्पीकर सीपी जोशी- मामला टफ है बहुत अभी वैभव गहलोत- राज्यसभा चुनाव के बाद 10 दिन निकाला फिर वापस रखा. स्पीकर सीपी जोशी- 30 आदमी निकल जाते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते. हल्ला करके रह जाते, वो सरकार गिरा देते. अपने हिसाब से उन्होने कांटैक्ट किया इसलिए हो गया. दूसरे के बस की बात नहीं थी.
जयपुर, 30 जुलाई 2020,राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को भी विधायक दल की बैठक की. होटल फेयरमाउंट में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी विधायकों को संबोधित किया. इस दौरान विधायकों से कहा गया कि आप सभी जन्माष्टमी-रक्षा बंधन होटल में ही मनाएं, परिवार को भी बुला सकते हैं. सीएम ने विधायकों से कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपको 21 दिन यहां पर ही रहना होगा. सीएम ने विधायकों से कहा कि सभी विधायकों को 21 दिन यहां पर रहना होगा, राज्यपाल ने भले ही सत्र 21 दिन बाद बुलाया है मगर यह जीत आप लोगों की है. बैठक में संगठन महासचिव अविनाश पांडे ने कहा कि हमने कांग्रेस संगठन के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. आप विधायक लोगों से पूछकर संगठन के पदाधिकारी बनाए जाएंगे, आप लोग जिला अध्यक्ष और प्रखंड अध्यक्ष के लिए नाम दीजिए गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में कई बार विधायक दल की बैठक हो चुकी है. हालांकि, राज्यपाल की ओर से 14 अगस्त को विधानसभा का सत्र बुलाने के बाद ये पहली बैठक है. ऐसे में कांग्रेस की ओर से विधायकों को एकजुट रखने के लिए ये बैठक बुलाई गई. बता दें कि मुख्यमंत्री की ओर से दो बार पहले भी राज्यपाल को चिट्ठी लिख सत्र बुलाने की अपील की गई थी, लेकिन वो मंजूर नहीं हुई थी. हालांकि, तीसरी चिट्ठी के बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने इसे मंजूरी दी लेकिन 21 दिन का समय भी दिया. गौरतलब है कि करीब पिछले एक महीने से विधायक इसी होटल में रुके हुए हैं, विपक्ष लगातार विधायकों और कांग्रेस सरकार पर निशाना भी साध रहा है. एक तरफ कांग्रेस के विधायक जयपुर के होटल में हैं, तो दूसरी ओर सचिन पायलट गुट के विधायक हरियाणा के रिजॉर्ट में रुके हैं. पायलट गुट की ओर से कहा गया है कि वो विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे. ऐसे में 14 अगस्त के आसपास राजस्थान के सियासी संकट का अंत हो सकता है.
प्रदेश की राजनीति में (Rajasthan news ) राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच का गतिरोध तो खत्म हो गया है, लेकिन अभी भी प्रदेश के सियासत में ऐसे कई मोड बाकी है, जो आगामी दिनों में कई नए अध्याय लिखेंगे। आपको बता दें कि राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार को 14 अगस्त से सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। वहीं इसके साथ ही आरोप- प्रत्यारोप के दौर ने तेजी पकड़ ली है। कांग्रेस- बीजेपी लगातार एक दूसरे पर हमले कर रही है। इसके अलावा बसपा और बीजेपी जहां कांग्रेस को कानूनी लड़ाई के जरिए मात देने में जुटी हुई है। वहीं सचिन पायलट खेमे की मुश्किलें बढ़ाने के लिए स्पीकर सीपी जोशी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। विधायक दल की बैठक में सीएम ने कहा- कि ये हमारी जीत है विधानसभा सत्र को लेकर मिली मंजूरी के बाद अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक दोपहर को होटल फेयरमोंट में हुई, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों को संबोधित किया। इस दौरान जहां सभी को सत्र आहूत होने को लेकर बधाई दी गई। वहीं इस दौरान सीएम गहलोत की ओर से विधायकों से यह कहा गया है कि यह हमारी जीत है। सत्र बुलाने की तैयारी तेज, विधानसभा सचिवालय ने जारी की अधिसूचना राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र को लेकर मंजूरी दिए जाने के अब 14 अगस्त को होने वाले सत्र को लेकर जहां कांग्रेस विधायक दल की ओर से बैठक में तैयारी की जा रही है। वहीं इसके साथ ही इस संबंध में विधानसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की दी गई है। बीएसपी राष्ट्रीय पार्टी , इसका राज्य में विलय नहीं हो सकता : सतीश चंद्र मिश्रा बीएसपी के महासचिव और अधिवक्ता सतीश मिश्रा ने बीएसपी के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपनी दलीले पेश कर रहे हैं। मिश्रा ने दलील दी है कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है , इसका राज्य में विलय नहीं हो सकता है। मिश्रा ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि स्पीकर जान बूझकर इस मामले को लंबा खींच रहे हैं। पायलट समर्थक विधायक भी विधानसभा सत्र में ले सकते हैं हिस्सा - सूत्र राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लेकर दी गई मंजूरी के बाद जहां राज्य सरकार कैबिनेट और विधायक दल की मीटिंग के जरिए जहां नई रणनीति तैयार करने में जुटी है। वहीं इसी बीच सूत्रों की ओर से यह जानकारी मिली है कि इस लेकर अब पायलट खेमे के विधायक भी सक्रिय हो गए हैं, जानकारी के अनुसार पायलट खेमे की विधायक भी विधानसभा सत्र में शामिल हो सकते हैं।
Photo जयपुर. राजस्थान की सियासी ड्रामें में लगातार कुछ ना कुछ नया देखने को मिल रहा है। जहां आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं विधानसभा सत्र को बुलाने को लेकर जुटी कांग्रेस लगातार राज्यपाल पर आरोप लगा रही है । वहीं एक बार फिर यह सूचना सामने आई है कि राज्यपाल की ओर से तीसरी बार भी विधानसभा का प्रस्ताव लौट दिया गया है। प्रस्ताव लौटाने के साथ राज्यपाल ने एक बार फिर सरकार ने वहीं सवाल वापस किए है कि आखिर मंत्रीमंडल को इतनी जल्दी सत्र बुलाने का जरूरत क्या हुई है। राज्यपाल ने अपनी ओर से भेजी गई चिट्ठी में लिखा है कि सरकार का जल्दबाजी करने के पीछे का क्या कोई विशेष कारण है क्या ?। राज्यपाल ने यह भी सवाल किया है कि विधानसभा में कैसे सोशल डिस्टेंसिंग मैटेन की जाएगी। राज्यपाल कलराज मिश्र ने दिया आदेश, 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाएं राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र को मंत्रिमंडल द्वारा भेजे गए 14 अगस्त से आरंभ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल ने राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने के निर्देश मौखिक रूप से दिए हैं। पायलट खेमे की याचिका पर HC के फैसले के खिलाफ सीपी जोशी ने SC में दाखिल की नई याचिका राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पारित किए गए स्टे ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई विशेष अवकाश याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने सीपी जोशी के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा था कि पायलट और उनके समर्थक विधायकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करें। गहलोत ने राज्यपाल को भेजा संशोधित प्रस्ताव, 14 अगस्त से शुरू करना चाहते है सत्र! राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के आवास पर चल रही मंत्रिमंडल की बैठक खत्म हो गई है। सीएम गहलोत ने विधानसभा सत्र के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र के पास संशोधित प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार गहलोत ने राजस्थान विधानसभा सत्र 14 अगस्त से शुरू करने का प्रस्ताव राज्यपाल को दिया है। सीपी जोशी ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बुधवार की शाम राजभवन जाकर राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की।
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. फर्टिलाइजर घोटाले में गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत से आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पूछताछ करेगी. बताया जा रहा है कि दोपहर में खुद अग्रसेन गहलोत नई दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय पहुंचेंगे. बीते दिनों ही पूछताछ के लिए ईडी ने अग्रसेन गहलोत को नोटिस भेजा था. बीते दिनों ही ईडी नेफर्टिलाइजर घोटाले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के घर समेत दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापे मारे थे. हालांकि ईडी की इस कार्रवाई के समय को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे. ईडी की छापेमारी के बाद भड़की कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला था. कांग्रेस ने कहा था कि जब राज्य में कांग्रेस सरकार को गिराने की केंद्र की कोशिश नाकाम हो गई, तब ईडी ने छापेमारी की है, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के परिसर शामिल हैं. क्या है आरोप आरोप है कि अग्रसेन गहलोत के स्वामित्व वाली कंपनी म्युरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) फर्टिलाइजर का निर्यात कर रही थी, जो निर्यात के लिए प्रतिबंधित है. एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा आयात किया जाता है और फिर इसे किसानों के बीच रियायती दरों पर वितरित किया जाता है. आरोप के मुताबिक, अग्रसेन गहलोत आईपीएल के अधिकृत डीलर थे और 2007-09 के बीच उनकी कंपनी ने रियायती दरों पर एमओपी को खरीदा और इसे किसानों को वितरित करने के बजाय कुछ अन्य कंपनियों को बेच दिया. उन्होंने इसे इंडस्ट्रियल सॉल्ट के रूप में मलेशिया और सिंगापुर को निर्यात किया.
जयपुर. राजस्थान की सियासी ड्रामें में लगातार कुछ ना कुछ नया देखने को मिल रहा है। जहां आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं विधानसभा सत्र को बुलाने को लेकर जुटी कांग्रेस लगातार राज्यपाल पर आरोप लगा रही है कि वो केन्द्र के दवाब में आकर विधानसभा सत्र बुलाने की मंजूरी नहीं दे रहे हैं। लेकिन अब इस संबंध में राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से चुप्पी तोड़ी गई है। राज्यपाल ने इकोनोमिक्स टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यू में कांग्रेस के आरोप को निराधार बताते हुए साफ तौर पर कहा कि मैं किसी के दवाब में आकर काम नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ संविधान को ही अपना मालिक मानता हूं और उसी का अनुसरण करता हूं। प्रदेश की सियासी खेल में बुधवार को कैसे रहेगा दिन, जानिए पल-पल की हर अपडेट्स। अपडेट @01.00 PM : बीएसपी विधायकों के मामले की सुनवाई आज, कोर्ट ने की मदन दिलावर की याचिका के साथ बीएसपी की याचिका को अटैच राजस्थान में बीएसपी के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय का मामला लगातार तूल पकडने लगा है जहां बीजेपी के वरिष्ठ नेता मदन दिलावर की ओर से इस संबंध में मंगलावर को याचिका लगाई गई थी। वहीं अब बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) ने भी इस संबंध में राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। कोर्ट ने दोनों .याचिकाओं को एक साथ अटैच कर दिया है, दोपहर बाद आज इस मामले में सुनवाई हो सकती है। अपडेट @12.50 PM : राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे सीएम गहलोत राजस्थान विधानसभा में सत्र बुलाने की मांग को लेकर एक बार फिर सीएम अशोक गहलोत राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे है। जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की ओर से तीसरी बार भी प्रस्ताव की फाइल लौटा दी है। लिहाजा एक बार फिर सीएम गहलोत राज्यपाल से इस संबंध में चर्चा करने के लिए पहुंचे हैं। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय माकन भी वहां मौजूद है। अपडेट @12.30 PM : राज्यपाल से फिर मिलने जाएंंगे सीएम गहलोत विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर गहलोत कैबिनेट लगातार कवायद में जुटी हुई है। इस मामले को लेकर ताजा अपडेट यह है कि अब सीएम गहलोत एक बार फिर राज्यपाल से इस मामले को लेकर मुलाकात करेेगे। आपको बता दें कि यह तीसरा मौका है कि जब सरकार की ओर से राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया हो। अपडेट @12.25 PM :सीएम गहलोत ने कोरोना महामारी को लेकर भी पीसीसी कार्यालय में चर्चा की। गहलोत ने कोरोना पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता महामारी में लोगों की जान बचाना है। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री से कोरोना के समय में पांच बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा हुई, इस दौरान उन्होंने सरकार की कार्यशैली की तारीफ की, लेकिन प्रदेश बीजेपी इस पर सवाल उठा रही है, इसे क्या समझा जाए। अपडेट @12.20 PM :गहलोत अपने संबोधन में कह रहे हैं कि सरकारी एजेंसी का बीजेपी की ओर से दुरूपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जानते है कि ये खेल किसके इशारे पर हो रहे है। गहलोत ने कहा कि हमारे विधायक वॉरियर्स है। संबोधन के दौरान गहलोत ने बीजेपी के साथ राज्यपाल को भी घेरा। गहलोत ने विधायकों से कहा कि 21 दिन हो या 31 दिन जीत हमारी होगी। गहलोत ने कहा कि राज्यपाल क्यों अडंगा डाल रहे हैं, यह समझ नहीं आ रहे हैं। वो अच्छे व्यक्ति है, लेकिन किसके इशारे वो यह काम कर रहे है, ये उनकी आत्मा जानती है। अपडेट @12.15 PM :पीसीसी कार्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा के पदभार ग्रहण समारोह में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन में गहलोत ने कहा कि देशभर में कोरोना महामारी भयंकर रूप से फैल रही है, लेकिन केन्द्र सरकार को सरकारों को गिराने के षडयंत्र के लिए समय मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की ओर से किए जा रहे षडयंत्र में कामयाब नहीं होगा। जीत हमारी होगा। अपडेट @12.12 PM : डोटासरा ने किया पदभार ग्रहण राजस्थान की सियासी संग्राम के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से नए पीसीसी चीफ के तौर पर गोविंद सिंह ड़ोटासरा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। कार्यक्रम में सीएम गहलोत के अलावा अविनाश पांडे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद है।
जयपुर राजस्थान की अशोक गहलोत (ashok gehlot) सरकार सियासी संग्राम में अब निर्णायक जंग चाहती है, इसके लिए 31 जुलाई को विधानसभा सत्र बुला रही है। विधानसभा सत्र आहूत करने का संशोधित प्रस्ताव फिर से राज्यपाल कलराज मिश्र के पास भेजा जा चुका है। सरकार का कहना है कि ये उनका कानूनी अधिकार है। राज्यपाल ने जो सवाल उठाये थे उनका उचित जवाब दिया जा चुका है अब उनकी सलाह सरकार के लिए अनिवार्य नहीं है। गहलोत सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि 'हम 31 जुलाई से सत्र चाहते हैं। जो पहले प्रस्ताव था, वह हमारा अधिकार है, कानूनी अधिकार है। उसी को हम वापस भेज रहे हैं।’उन्होंने कहा, ‘अब अगर आप यदि तानाशही पर आ जाएं, आप अगर तय कर लें कि हम जो संविधान में तय है, उसे मानेंगे ही नहीं तो देश ऐसे चलेगा क्या? नये प्रस्ताव में भी फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं मंगलवार को राज्यपाल को भेज गए नए संशोधित प्रस्ताव में भी सरकार ने फ्लोर टेस्ट की बात का खुलासा नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने अपने संशोधित प्रस्ताव में भी यह उल्लेख नहीं किया है कि वह विधानसभा सत्र में विश्वासमत हासिल करना चाहती है या नहीं। हालांकि, इसमें 31 जुलाई से सत्र आहूत करने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने तीसरी बार यह प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल दो बार वापस लौटा चुके हैं प्रस्ताव मंगलवार को भेजे गए संशोधित प्रस्ताव से पहले राज्यपाल दो बार कुछ बिंदुओं के साथ प्रस्ताव सरकार को लौटा चुका है। हालांकि नए संशोधित प्रस्ताव से पहले राजस्थान मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में विधानसभा सत्र बुलाने के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गई और उचित जबाव तैयार किया गया। पूरी उम्मीद प्रस्ताव को मंजूर करेंगे राज्यपाल परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि ‘हमें पूरी उम्मीद है कि राज्यपाल महोदय देश के संविधान का सम्मान करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव को मंजूर करेंगे।’ उन्होंने कहा,‘हालांकि कानूनन राज्यपाल को सवाल करने का अधिकार नहीं, फिर भी उनका सम्मान रखते हुए उनके बिंदुओं का बहुत अच्छा जवाब दिया गया है। अब राज्यपाल को तय करना है कि वह राजस्थान, हर राजस्थानी की भावना को समझें।’ सरकार राज्यपाल से नहीं चाहती टकराव मंत्री ने कहा, ‘हम राज्यपाल से टकराव नहीं चाहते। हमारी राज्यपाल से कोई नाराजगी नहीं है। न ही हम दोनों में कोई प्रतिस्पर्धा है। राज्यपाल हमारे परिवार के मुखिया हैं।’ उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल महोदय संविधान के अनुसार विधानसभा सत्र आहूत करने की अनुमति दें। यह हमारा अधिकार है। हम कोई टकराव नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि राजस्थान की सरकार सुनिश्चित रहे, आगे बढ़े और जनता का काम करे।’
जयपुर, 28 जुलाई 2020,राजस्थान में राज्यपाल बनाम सरकार के बीच आरपार की लड़ाई जारी है. मंगलवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में कैबिनेट बैठक हुई. जिसमें राज्यपाल को तीसरी बार विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा गया. राज्यपाल से अपील की गई है कि उन्हें कैबिनेट द्वारा दी गई सलाह माननी होती है, वरना राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है. कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद राज्य सरकार में मंत्री प्रताप सिंह, हरीश चौधरी की ओर से बयान दिया गया कि हमें बहुमत साबित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही बहुमत में हैं. मंत्री ने कहा कि राज्यपाल कौन होते हैं पूछने वाले कि सत्र क्यों बुलाया जा रहा है. राज्य सरकार में मंत्री ने कहा कि हमने तीसरी बार विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है, अगर नहीं माना गया तो एक बार फिर कैबिनेट बुलाकर प्रस्ताव भेजेंगे. लेकिन फिर भी नहीं माना जाएगा, तो हम केंद्र सरकार से बोलेंगे कि आप CRPF की टुकड़ी भेजकर हमें जेल में डाल दीजिए, जब राजस्थान में चुनाव होंगे तो हम फिर जीतकर आएंगे. आपको बता दें कि इससे पहले भी दो बार कैबिनेट की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है. राज्यपाल की ओर से कोरोना संकट, विधानसभा में व्यवस्था और कुछ अन्य सवाल उठाए गए हैं. यही कारण है कि राज्यपाल और राज्य सरकार में अनबन की स्थिति है. सरकार की ओर से लगातार सत्र बुलाने की कोशिश है, तो कांग्रेस पार्टी अब इसे राजनीतिक लड़ाई बनाने में जुट गई है. राज्य से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र पर निशाना साध रहा है और उनके फैसले लेने पर सवाल उठा रहा है. बीते दिनों कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने राज्यपाल को चिट्ठी भी लिखी थी. इसके अलावा पी. चिदंबरम, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की ओर से भी राजस्थान के मसले पर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया. पी. चिदंबरम ने कहा है कि राज्यपाल को संविधान का पालन करना चाहिए और सत्र को तुरंत बुलाना चाहिए.
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2020,राजस्थान के राजनीतिक दंगल में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार एक्टिव हैं. मंगलवार को उन्होंने ट्वीट कर भारतीय जनता पार्टी के बहाने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती पर निशाना साधा था. प्रियंका ने बसपा को बीजेपी का प्रवक्ता बताया था, अब बीजेपी की ओर से प्रियंका गांधी को जवाब दिया गया है. राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि आप पहले अपने नाना और दादी का इतिहास पढ़ लें. सतीश पूनिया की ओर से ट्वीट में लिखा गया कि भाई राहुल गांधी की तरह आपकी तन्द्रा भी देर से टूटी. जब इन्हीं प्रवक्ताओं के हाथी की सवारी करके जुगाड़ की सरकार बना रहे थे, तब तो आपने Tweet नहीं किया. आज आपको ये बीजेपी के प्रवक्ता लगने लगे, लोकतंत्र और संविधान की हत्या के आरोप से पहले नाना और दादी का इतिहास भी पढ़ लेते मैडम. बीजेपी नेता ने लिखा कि वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता, हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम. लोकतंत्र और संविधान की हत्या का कलंक आपातकाल के जमाने से आपके उपर ही है, अनुच्छेद 356 का सर्वाधिक दुरुपयोग आपके खाते में ही है. सतीश पूनिया ने लिखा कि अपना घर संभालो प्रियंका जी, अपना झगड़ा हमारे माथे मत मढ़िए. गौरतलब है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया और बसपा पर निशाना साधा. प्रियंका ने लिखा कि बीजेपी के अनौपचारिक प्रवक्ता अब व्हिप जारी कर रहे हैं. व्हिप जारी कर लोकतंत्र के हत्यारों को क्लीन चिट दी जा रही है. बता दें कि प्रियंका गांधी का ये ट्वीट तब आया था जब मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पर उनके विधायक तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार गिरती है तो अशोक गहलोत ही जिम्मेदार होंगे. दरअसल, बसपा के 6 विधायक पाला बदलकर कांग्रेस में आ गए थे, इसी के बाद से ही विवाद जारी है. ये मामला एक बार फिर हाईकोर्ट भी पहुंचा है.
जयपुर, 27 जुलाई 2020, राजस्थान में विधानसभा सत्र बुलाए जाने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच खींचातानी चल रही है. इस बीच राजस्थान हाई कोर्ट में राज्यपाल को हटाने लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है. यह याचिका एडवोकेट शांतनु पारीक की ओर से दायर की गई है, जिसमें राज्यपाल को हटाने की गुहार लगाई गई है. मामला कैबिनेट नोट के बाद भी विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने से जुड़ा है. राज्यपाल पर संवैधानिक सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता ने इसे सुप्रीम कोर्ट के नबाम रेबिया केस फैसले का उल्लंघन बताया है. इस मामले में केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है. बता दें, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार विधानसभा सत्र बुलाने की सिफारिश कर रहे हैं, वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र इसके लिए मंजूरी नहीं दे रहे हैं. राज्यपाल कलराज मिश्र कोरोना संक्रमण के खतरे का हवाला देते हुए विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मंजूरी नहीं दे रहे हैं. राज्यपाल के मुताबिक संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई चीज नहीं है, इसलिए इस मामले में दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार के पास जब बहुमत है ही तो सत्र बुलाने की क्या जरूरत है? संविधान के मुताबिक राज्यपाल दो बार ही मुख्यमंत्री की सिफारिश को टाल सकते हैं. अगर तीसरी बार भी कैबिनेट सत्र बुलाने की मांग करती है तो राज्यपाल बाध्य हो जाएंगे. संविधान लागू होने के बाद यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्यपाल ने कैबिनेट की सलाह न मानकर सत्र बुलाने से इनकार कर दिया हो. क्या है नबम रेबिया केस? नबम रेबिया केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साल 2016 में अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि राज्यपाल सिर्फ मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही काम करेंगे. उस समय रेबिया ही अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर थे. उन्होंने राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि राज्यपाल के पास यह भरोसा करने के कारण है कि मंत्रिपरिषद सदन का विश्वास खो चुकी है तो फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया जा सकता है.
जयपुर। राजस्थान सरकार को पिछले 15 दिनों से नाकों चने चबवाने वाले सचिन पायलट गुट ने सोमवार को फिर अशोक गहलोत खेमे में खलबली मचा दी है। सचिन पायलट गुट की ओर से जारी एक वीडियो में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक हेमाराम चौधरी ने दावा किया है कि गहलोत गुट की बाड़ाबंदी में 10-15 विधायक उनके संपर्क में हैं। इस दावों के बाद सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत का दावा करने वाले अशोक गहलोत खेमे में हलचल पैदा कर दी है। इससे पहले कांग्रेस की प्रार्थना सभा में वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला की ओर से बागी विधायकों में से तीन विधायकों के लौटने का बयान दिया गया था। इस बयान के बाद ही पायलट खेमे की ओर से भी इस संबंध में यह वीडियो जारी किया गया। सचिन पायलट खेमे में शामिल वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी ने कहा कि अशोक गहलोत खेमे के 10-15 विधायक हमारे संपर्क में हैं । वे कह रहे हैं कि आज़ाद होते ही हमारी तरफ आएंगे। चौधरी ने कहा कि अगर गहलोत प्रतिबंध हटाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने विधायक उनके पक्ष में हैं। उधर, राजस्थान सरकार पर मंडरा रहा सियासी संकट सोमवार को भी नहीं टला। शनिवार रात को राजभवन के सवालों के जवाब के रूप में गहलोत सरकार की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भेजे गए संशोधित प्रस्ताव पर भी कोई राज्यपाल ने हामी नहीं भरी। उलट, राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से एक और पत्र सरकार के नाम भेजा गया। इस पत्र में सरकार से राज्यपाल ने विधिक राय के बाद 3 बिंदुओं पर सहमति के बाद ही सत्र आहूत करने की बात कही है।
जयपुर। राजस्थान सरकार पर मंडरा रहा सियासी संकट सोमवार को भी नहीं टला। शनिवार रात को राजभवन के सवालों के जवाब के रूप में गहलोत सरकार की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भेजे गए संशोधित प्रस्ताव पर भी कोई राज्यपाल ने हामी नहीं भरी। उलट, राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से एक और पत्र सरकार के नाम भेजा गया। इस पत्र में सरकार से राज्यपाल ने विधिक राय के बाद 3 बिंदुओं पर सहमति के बाद ही सत्र आहूत करने की बात कही है। दरअसल, गहलोत सरकार की ओर से शनिवार रात को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए फिर से राज्यपाल को एक प्रस्ताव भेजा गया था। इसपर विधिक राय लेने के बाद शनिवार को राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स से तो ये स्पष्ट हो रहा है कि राज्य सराकर विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है लेकिन सत्र बुलाने के प्रस्ताव में इसका कोई उल्लेख नहीं है। राज्यपाल की ओर से यही भी कहा गया कि यदि सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्प अवधि में सत्र बुलाये जाने का युक्तियुक्त आधार बन सकता है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने संविधान के अनुच्छेद 174 के अन्तर्गत उपरोक्त परामर्श देते हुए विधानसभा का सत्र आहूत किये जाने हेतु कार्यवाही किये जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिये हैं। मिश्र ने कहा है कि विधानसभा सत्र न बुलाने की कोई भी मंशा राजभवन की नहीं है। राज्यपाल मिश्र की ओर से संवैधानिक एवं नियमावलियों में विहित प्रक्रिया तथा प्राविधानों के अनुरूप ही कार्य किये जाने का निश्चय दोहराया गया है। इन तीन सवालों के जवाब देगी गहलोत सरकार? 1. विधानसभा का सत्र 21 दिन का क्लीयर नोटिस देकर बुलाया जाये, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत प्राप्त मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अन्तर्गत सभी को समान अवसर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। अत्यंत महत्वपूर्ण समाजिक एवं राजनैतिक प्रकरणों पर स्वस्थ बहस देश की शीर्ष संस्थाओं यथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय आदि की भांति ऑनलाइन प्लेटफार्म पर किये जा सकते है ताकि सामान्य जनता को कोविड-19 के संक्रमण से बचाया जा सके। 2. यदि किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की विधानसभा सत्र में कार्यवाही की जाती है, तब ऐसी परिस्थितियों में जबकि माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विषेश अनुज्ञा याचिका दायर की है। विश्वास मत प्राप्त करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाये तथा सम्पूर्ण कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जावे तथा ऐसा विश्वास मत केवल हां या ना के बटन के माध्यम से ही किया जाये। यह भी सुनिश्चित किया जाये कि ऐसी स्थिति में विश्वास मत का सजीव प्रसारण किया जाये। उपरोक्त कार्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के भारत संघ बनाम हरीष चन्द्र रावत, 2016 के वाल्यूम-16 एसएससी पृष्ठ संख्या 174 एवं प्रताप गौड़ा पाटिल बनाम कर्नाटक राज्य, 2019 के वाल्यूम-7, एस.एस.सी. पृष्ठ संख्या 463 एवं मध्यप्रदेश राज्य के प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पारित आदेशों के अनुरूप ही किया जाए। 3. यह भी स्पष्ट किया जाये कि यदि विधानसभा का सत्र आहूत किया जाता है तो विधानसभा के सत्र के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किस प्रकार किया जाएगा। क्या कोई ऐसी व्यवस्था है जिसमें 200 माननीय विधायकगण और 1000 से अधिक अधिकारी/कर्मचारियों को एकत्रित होने पर उनको संक्रमण का कोई खतरा नहीं हो और यदि उनमें से किसी को संक्रमण हुआ तो उसे अन्य में फैलने से कैसे रोका जायेगा।
जयपुर राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजस्थान इकाई का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार शाम राज्यपाल कलराज मिश्र से मिला। उसने राजस्थान में अराजकता का वातावरण पैदा होने की बात करते हुए राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। बीजेपी ने राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि 'मुख्यमंत्री की राजभवन के घेराव की धमकी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थता व्यक्त करना, आईपीसी की धारा 124 के तहत स्पष्ट उल्लंघन है।' बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां की अगुवाई में यह प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राजभवन के बाहर बीजेपी नेताओं ने राज्य में बीते दो दिन के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि कांग्रेस ने राजभवन को धरने एवं प्रदर्शन का अखाड़ा बना दिया। उन्होंने कांग्रेस द्वारा शनिवार को जिला मुख्यालयों पर किए गए धरने प्रदर्शन के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया। 'अंतरविरोध से घिरी सरकार की लड़ाई सड़क पर आ गई' नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 'जनता द्वारा राजभवन को घेरने' संबंधी बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सीएम द्वारा राजभवन को सुरक्षा प्रदान करने की असमर्थता व्यक्त करने का जो बयान दिया गया, वह सीधा-सीधा जहां राजभवन को आतंकित करने का प्रयास है, वहीं भारतीय दण्ड़ संहिता की धारा 124 का स्पष्ट उल्लंघन है। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अंतरविरोध से घिरी सरकार की लड़ाई सड़क पर आ गई है। पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति: BJP बीजेपी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि सत्ताधारी दल के आंतरिक संघर्ष के कारण पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। लेकिन पिछले दो दिन में जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने खुद जिस प्रकार की भाषा एवं गतिविधियां अपने मंत्रियों एवं विधायकों को साथ लेकर की हैं उससे राज्य में कानून व्यवस्था खत्म होने की स्थिति बनी हुई है। ये है कानून धारा 124 ए के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है, जो देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाते हैं या इस तरह की गतिविधि में लिप्त रहते हैं। दरअसल, यह एक राजद्रोह का कानून है, जो 124 ए के तहत आता है। इस धारा के अंर्तगत कोई व्यक्ति जब देश की एकता और अखंडता को खतरा पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती है।
जयपुर, 25 जुलाई 2020,राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सीएम अशोक गहलोत पर हमला बोला है. सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ये कहना कि अगर राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुलाते हैं तो लोग राजभवन का घेराव करेंगे, एक आपराधिक कृत्य है. बता दें कि शुक्रवार को राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि अगर विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने के लिए राजस्थान की 8 करोड़ जनता राजभवन का घेराव करती है, तो इसके लिए वो जिम्मेदार नहीं होंगे. राज्यपाल ने भी जताई थी आपत्ति राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी सीएम के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी. राज्यपाल ने कहा था कि सीएम को पत्र लिखकर कहा था कि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्य में राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो राज्यपाल की सुरक्षा के लिए उसे किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? CM ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? अब बीजेपी ने कहा है कि सीएम का ये बयान आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है. राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो गृह मंत्री भी हैं, ने कहा कि यदि राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुलाते हैं तो राजस्थान की 8 करोड़ जनता राजभवन का घेराव कर सकती है इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे, उनका ये बयान आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है, एक राज्य का मुख्यमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकता है? विधानसभा सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं गहलोत बता दें कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और उनकी सरकार राज्यपाल से मांग कर रही है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए. अशोक गहलोत विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित कर अपनी कुर्सी सुरक्षित करना चाहते हैं.
जयपुर, 25 जुलाई 2020, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है. बैठक की टाइमिंग दो बार बढ़ाई गई. ये मीटिंग पहले 11.30 बजे होनी थी, इसके बाद इसे 12.30 बजे तक बढ़ा दिया गया. वहीं अशोक गहलोत ने विधायकों से कहा कि आप लोग तैयार रहिए अगर 21 दिन तक बैठना पड़े तो यहां रहेंगे. Rajasthan LIVE updates: 6.02 राज्यपाल से मिलकर राजभवन से बाहर आने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि विधानसभा बुलाना राज्यपाल का हक होता है. राजभवन में आकर कांग्रेस के लोग क्या जबरदस्ती साइन करवाना चाहते थे. आज भी महामारी एक्ट का उल्लंघन कर पूरे राज्य में धरना दिया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान को अराजकता में धकेल रहे हैं. 5.01 PM राजस्थान कैबिनेट की मीटिंग खत्म हुई. विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए मंत्री परिषद ने दोबारा से प्रस्ताव का अनुमोदन किया है जो राज्यपाल को भेजा जा रहा है. गहलोत मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए फिर से कैबिनेट का प्रस्ताव पारित किया, जो राज्यपाल को भेजा जाएगा. 5.00 PM बीजेपी नेता राज्यपाल कलराज मिश्रा से मिलने राजभवन पहुंचे. 3.35PM राजस्थान बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल शाम 5:00 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात करेगा. 3.31 PM जयपुर में विधायकों के साथ मीटिंग में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों से कहा कि आप लोग तैयार रहिए अगर 21 दिन तक बैठना पड़े तो यहां रहेंगे. राष्ट्रपति भवन जाना पड़े तो राष्ट्रपति के पास जाएंगे या फिर प्रधानमंत्री निवास के बाहर दिल्ली में धरना देने जाना पड़े तो प्रधानमंत्री निवास दिल्ली भी जाएंगे. राजस्थान सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक अब शाम चार बजे होगी. इस वक्त जयपुर के एक होटल में कांग्रेस विधायकों की बैठक चल रही है. बैठक होने के बाद लंच का टाइम है. इसके बाद लगभग 4 बजे राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक होगी. आज मंत्रिपरिषद बैठक की टाइम दो बार बदलनी पड़ी. मंत्रिपरिषद की बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, पहले इसे बढ़ाकर 12.30 किया गया. विधानसभा सत्र की मांग इससे पहले शुक्रवार देर रात कैबिनेट की बैठक चली थी. शुक्रवार रात को सवा दस बजे शुरू हुई कैबिनेट की बैठक रात साढ़े बारह बजे तक चली. बता दें कि सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि इस बारे में वे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं और उनसे राय लेने के बाद ही इस बाबत कोई फैसला ले पाएंगे.
जयपुर राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का बड़ा बयान सामने आया है। जयुपर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हुई तो राष्ट्रपति भवन जाएंगे और राष्ट्रपति से मिलेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन भी करेंगे। विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर सीएम गहलोत एक बार फिर से राज्यपाल कलराज मिश्र से आज मुलाकात करेंगे। विधायक दल की बैठक में सीएम गहलोत का बड़ा बयान जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पहले शाम चार बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने का कार्यक्रम था। हालांकि, अब ऐसी खबर है कि सीएम शाम तक में राज्यपाल से मिलेंगे। इस बीच मुख्यमंत्री आवास (सीएमआर) पर कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में विधानसभा सत्र प्रस्ताव पारित हुआ। अब राज्यपाल से मुलाकात कर इसे सौंपा जाएगा। इससे पहले शनिवार को जयपुर के फेयरमोंट होटल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा हुई। जरूरत पड़ी तो पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे' कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने कहा, 'जरूरत पड़ने पर हम राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन जाएंगे। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर हम पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।' गहलोत विधानसभा में बहुमत परीक्षण के जरिए विरोधियों को जवाब देना चाहते हैं। ये बताना चाहते हैं कि सचिन पायलट की बगावत से उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। यही वजह है कि वो लगातार राज्यपाल से विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक राज्यपाल की ओर से इसको लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। सुरजेवाला का ट्वीट- संविधान और लोकतंत्र की रक्षा हम करेंगे राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया है। उन्होंने इसमें बीजेपी पर निशाना साधा है। सुरजेवाला ने लिखा, 'राजस्थान में जनता की निर्वाचित सरकार धरने पर बैठी है, बीजेपी जनमत की हत्या में मगन है, प्रजातंत्र बेड़ियों में है, और देश खतरे में है! संविधान और लोकतंत्र की रक्षा हम करेंगे। संघर्ष की इस आंधी के बाद नया दृष्य आएगा, मूल्यों और नीति का झंडा फिर से लहराएगा।' राज्यपाल से मिलेंगे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दूसरी ओर, बीजेपी के नेता राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने पहुंचे हैं। राज्य में कोरोना और उससे उत्पन्न स्थितियों को लेकर राज्यपाल राजस्थान बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करने पहुंचा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने पहुंचा। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और उससे उत्पन्न स्थितियों के बारे में चर्चा और सुझाव को लेकर मुलाकात करने पहुंचे हैं।
जयपुर राजस्थान में सियासी उठापटक का दौर थमता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। अभी भी विधानसभा सत्र को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री ने एक बार फिर से मंत्री परिषद की बैठक बुलाई है। राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने का समय मांगा है। दूसरी ओर, राजस्थान कांग्रेस का पार्टी के सभी जिला मुख्यालय में प्रदर्शन जारी है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने शुक्रवार को बीजेपी पर 'लोकतंत्र की हत्या की साजिश' का आरोप लगाते हुए सूबे के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन का ऐलान किया था। जयपुर समेत सभी प्रमुख जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजर आए। बीजेपी ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- राज्य में अराजकता का माहौल राज्यपाल से मुलाकात करते हुए बीजेपी ने एक ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में बीजेपी ने कहा है कि सत्ताधारी दल के आंतरिक कलह की वजह से राजस्थान में अराजकता का वातावरण बन गया है।
जयपुर राजस्थान की सियासी रस्साकशी शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट से आगे बढ़कर राजभवन तक पहुंच गई। हाईकोर्ट में जैसे ही पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट को फौरी राहत का ऐलान हुआ, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजभवन की ओर कूच कर दिया। बाड़ाबंदी में कैद विधायकों की तत्काल बैठक बुलाई गई और वहीं से ऐलान कर दिया गया कि राज्यपाल कलराज मिश्र अगल विधानसभा सत्र आहूत करने की अनुमति नहीं देते हैं तो राजभवन के घेराव की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी। ऐसा ही हुआ भी, कुछ समय बाद ही सीएम अपने विधायक दल के साथ राजभवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेकिन इस बीच राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रदेश की जनता तक यही सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर सीएम गहलोत को विधानसभा सत्र बुलाने की इतनी जल्दी क्यों है? गहलोत इसलिए बना रहे है राज्यपाल पर दबाव पिछले 13 दिन से बाड़ाबंदी में रखे विधायकों की परेड करवाने की सीएम अशोक गहलोत की विवशता को पहला बड़ा कारण विधायकों की बगावत का डर है। संभव है कि बाड़ाबंदी में 100 से अधिक विधायकों की मौजूदगी के बाद भी कुछ विधायकों के पायलट गुट में शामिल होने का खतरा उन्होंने भाप लिया हो। और विधायकों की संख्या टूटने के डर से वो जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराना चाहते हैं। अभी फ्लोर टेस्ट तो 6 महीने तक खतरा टला राज्यपाल से सत्र बुलाने की अनुमति मिलने के साथ ही गहलोत खेमे को फ्लोर टेस्ट के जरिए बहुमत साबित करने का मौका मिल जाएगा। इसका मतलब ये है कि सरकार को समर्थन देने वाले कुछ विधायकों की बगावत का खतरा नहीं रहेगा और फ्लोर टेस्ट पास होने के बाद अगले 6 महीने तक सरकार पर मंडरा रहा संकट टल जाएगा। सरकार बचाने के साथ पायलट पर प्रहार सचिन पायलट की याचिका पर भले ही कोर्ट में सुनवाई लंबित है लेकिन कांग्रेस पार्टी में उनकी फिर से एंट्री पर पाबंदी को पुख्ता करने के लिए भी गहलोत यह सत्र जल्द बुलाना चाहेंगे। फ्लोर टेस्ट में के लिए विप जारी होगा और यदि पायलट गुट इसमें शामिल नहीं होता है तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना आसान होगा। कोर्ट के फैसले से पहले सरकार सुरक्षित करना चाहते हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे की निगाहें अब भी कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। राजस्थान हाईकोर्ट की तरह सुप्रीम कोर्ट भी यदि सचिन पायलट गुट के पक्ष में फैसला देता है तो परिस्थितियां बिल्कुल उलट होंगी। ऐसे में गहलोत खेमा चाहता है कि कोर्ट के अगले आदेश से पहले वो सरकार को सुरक्षित करते हुए अपना पक्ष भी मजबूत कर लें।
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट जारी है. विधानसभा सत्र के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस विधायकों ने राजस्थान में राजभवन में धरना दिया. जिसके बाद अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि किसी भी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. राजस्थान सरकार के जरिए विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग की जा रही है. इस पर राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई को रात में विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई. पत्रावली में गुण दोषों के आधार पर राजभवन के जरिए परीक्षण किया गया और कानून विशेषज्ञों से परामर्श लिया गया. बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार के संसदीय कार्य विभाग को राजभवन के जरिए इन बिन्दुओं के आधार पर स्थिति प्रस्तुत करने के लिए पत्रावली भेजी गई है- 1. विधानसभा सत्र को किस तारीख से बुलाया जाना है, इसका उल्लेख कैबिनेट नोट में नहीं है और न ही कैबिनेट के जरिए कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है. 2. अल्प सूचना पर सत्र बुलाए जाने का न तो कोई औचित्य प्रदान किया गया है और न ही कोई एजेंडा प्रस्तावित किया गया है. सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना जरूरी होता है. 3. राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी विधायकों की स्वतंत्रता और उनके स्वतंत्र आवागमन भी सुनिश्चित किया जाए. 4. कुछ विधायकों की अयोग्यता का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. उसका संज्ञान भी लिए जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं. साथ ही कोरोना के राजस्थान राज्य में वर्तमान हालात में तेजी से फैलाव को देखते हुए किस प्रकार से सत्र बुलाया जाएगा, इसका भी विवरण प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं. 5. राजभवन के जरिए स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक कार्य के लिए संवैधानिक मर्यादा और सुसंगत नियमावलियों में विहित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जाए. 6. यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत हासिल करने के लिए सत्र बुलाए जाने का क्या औचित्य है. राजभवन में धरना बता दें कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों का राजभवन में धरना खत्म हो गया है. कांग्रेस विधायक के साथ राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राजभवन में धरने पर बैठे थे. वहीं कांग्रेस का कहना है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व की सरकार को गिराने की साजिश बीजेपी कर रही है.
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020,राजभवन में कांग्रेस विधायकों के धरने पर राज्यपाल कलराज मिश्रा ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखा है. कलराज मिश्रा ने कहा कि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की सुरक्षा भी नहीं कर सकता है क्या. राज्य में कानून- व्यवस्था की स्थिति पर आपका क्या मत है. राज्यपाल ने कहा कि इससे पहले कि मैं विधानसभा सत्र के संबंध में विशेषज्ञों से चर्चा करता, आपने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि राजभवन घेराव होता है तो यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है. कलराज मिश्रा ने कहा कि मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री का ऐसा बयान नहीं सुना. सीएम को लिखे खत में कलराज मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? क्या यह एक गलत प्रवृत्ति की शुरुआत नहीं है, जहां विधायक राजभवन में विरोध प्रदर्शन करते हैं? अपने पत्र में कलराज मिश्रा आगे लिखते हैं कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई की रात को विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई. पत्रावली का एनालिसिस किया गया. कानून विशेषज्ञों से सलाह ली गई. कलराज मिश्रा ने कहा कि शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाए जाने के लिए न तो कोई कारण दिया गया है और न ही कोई अजेंडा प्रस्तावित किया गया. सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना जरूरी होता है. राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार को सभी विधायकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए. राजभवन में गहलोत गुट का धरना बता दें कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर गहलोत गुट के विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में धरना दिया. इस दौरान राज्यपाल कलराज मिश्रा ने विधायकों से बात भी की. उन्होंने कहा कि आपकी मांग हमने सुन ली है. पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. संवैधानिक संस्थाओं का टकराव नहीं होना चाहिए. सीएम अशोक गहलोत ने भी राज्यपाल से मुलाकात की. मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल हमारे संवैधानिक मुखिया हैं. हमने जाकर उनसे रिक्वेस्ट की है. कहने में संकोच नहीं है कि बिना ऊपर के दबाव के वो इस फैसले को नहीं रोक सकते थे ,क्योंकि राज्यपाल कैबिनेट के फैसले में बाउंड होते हैं कि हमें किसी भी रूप में उसे मानना है और विधानसभा का सत्र बुलाना है.
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट बना हुआ है. इस बीच राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान की स्थिति अभूतपूर्व है. इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ऐसे हालात के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. साथ ही गुलाब चंद कटारिया ने राजभवन की सुरक्षा में सीआरपीएफ को तैनात करने की मांग की है. भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि राज्य की ऐसी स्थिति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. लेकिन वह इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रही है. वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने गहलोत के बयान पर राजभवन में सीआरपीएफ तैनात करने की मांग की. राजस्थान सरकार विधानसभा सत्र की मांग कर रही है. इसको लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनता के जरिए राजभवन का घेराव करने की बात कही थी. सीएम अशोक गहलोत के इस बयान पर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राजभवन में सीआरपीएफ की तैनाती की जानी चाहिए. वहीं बीजेपी विधायक मदन दिलावर के जरिए बीएसपी विधायकों के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के सवाल पर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने रात 10 बजे अपना कार्यालय खोला और विधायकों के दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर दिया. हालांकि बीएसपी विधायकों के मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसकी वजह से बीजेपी विधायक को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी.
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020,भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने गहलोत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अमित मालवीय ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि सीएम गहलोत सरकार चला रहे हैं या एक भ्रष्ट व्यवसाय. अमित मालवीय अपने ट्ववीट में लिखते हैं कि शर्म की बात है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर एफआईआर दर्ज करने वाली एसओजी के प्रमुख के सीएम अशोक गहलोत के बेटे के साथ कारोबारी रिश्ते हैं. अधिकारी की पत्नी फेयरमोंट होटल के मालिकों में से एक हैं. क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार चला रहे हैं या भ्रष्ट व्यवसाय. बता दें कि राजस्थान में जो जंग सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच शुरू हुई थी वो अब राजभवन तक पहुंच गई है. गहलोत गुट के विधायकों ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को राजभवन में धरना दिया. अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्रा ने मुलाकात भी की. सीएम गहलोत ने कहा कि यहां उल्टी गंगा बह रही है. हम कह रहे हैं कि बहुमत साबित करने के लिए हम विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं. हमारे कदम को विपक्ष को भी वेलकम करना चाहिए था, यही लोकतंत्र की परंपरा रही है. अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल हमारे संवैधानिक मुखिया हैं. हमने उनसे मांग की कि वे विधानसभा सत्र बुलाएं. मुझे कहते हुए संकोच नहीं है बिना ऊपर के फैसले के वे इसे रोक नहीं सकते हैं, क्योंकि इस तरह के फैसले सरकार और राज्यपाल आपस में बात करके सुलझा लेते हैं. वहीं, दिनभर की गहमागर्मी के बाद सीएम आवास पर कैबिनेट की बैठक हो रही है. बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र को बुलाने को लेकर फिर से प्रस्ताव पारित किया जाएगा.
जयपुर, 25 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है. राजस्थान मंत्रिपरिषद की ये बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 12.30 कर दिया गया है. हालांकि अबतक मंत्रिपरिषद की बैठक शुरू नहीं हो पाई है. राजस्थान सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक अब शाम चार बजे होगी. इस वक्त जयपुर के एक होटल में कांग्रेस विधायकों की बैठक चल रही है. बैठक होने के बाद लंच का टाइम है. इसके बाद लगभग 4 बजे राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक होगी. आज मंत्रिपरिषद बैठक की टाइम दो बार बदलनी पड़ी. मंत्रिपरिषद की बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, पहले इसे बढ़ाकर 12.30 किया गया, अब ये बैठक 4 बजे होगी. राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक अबतक शुरू नहीं हो पाई है. आज 12.30 बजे ये बैठक शुरू होने को थी. बैठक में विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर चर्चा की जाएगी. इससे पहले शुक्रवार देर रात कैबिनेट की बैठक चली थी. शुक्रवार रात को सवा दस बजे शुरू हुई कैबिनेट की बैठक रात साढ़े बारह बजे तक चली. बता दें कि सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि इस बारे में वे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं और उनसे राय लेने के बाद ही इस बाबत कोई फैसला ले पाएंगे. इस बीच कांग्रेस आज राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस ने बीजेपी पर राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया है.
जयपुर राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के समर्थक विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाये। गहलोत खेमे के ये विधायक मुख्यमंत्री गहलोत की अगुवाई में ही राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने और विधानसभा का सत्र बुलाने का आग्रह करने राजभवन पहुंचे थे। इन विधायकों के साथ कांग्रेस सरकार के समर्थक निर्दलीय और अन्य विधायक भी राजभवन पहुंचे। मुख्यमंत्री गहलोत पहले जब राज्यपाल से मुलाकात कर रहे थे तो बाकी विधायक मंत्री बाहर लॉन में इंतजार कर रहे थे। इस दौरान इन विधायकों ने नारेबाजी की। विधायकों ने 'हर जोर जुल्म की टक्कर में इंसाफ हमारा नारा है', 'इंकलाब जिंदाबाद', ‘अशोक गहलोत संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’, 'अशोक गहलोत जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले गहलोत ने मीडिया से कहा कि सरकार के आग्रह के बावजूद ‘ऊपर से दबाव’ के कारण राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे हैं। कांग्रेस अब इस लड़ाई को सड़क पर ले जाने का मूड बना चुकी है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने ट्वीट कर कहा, 'भाजपा द्वारा राजस्थान में लोकतंत्र की हत्या के षड़यंत्र के खिलाफ कल (शनिवार) सुबह 11 बजे सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन किया जायेगा। राजभवन में अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी राजभवन के मैदान में बैठे कांग्रेस विधायक जिद पर हैं। वे राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को मनवाने के लिए डटे रहने का फैसला लिया है। राजभवन में टेंट मंगवा लिए गए हैं। वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि विधिक से कानूनी राय लेने के बाद ही विधानसभा का सत्र बुलाने की इजाजत दे पाएंगे। उन्होंने सीएम गहलोत से पूछा है कि आखिर वे सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं, इस संदर्भ में उचित जवाब बताएं। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर किसी राज्य की सरकार का मंत्रिमंडल लगातार दो बार राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते हैं तो वे इसका आदेश देने के लिए बाध्य हैं। फिलहाल सीएम अशोक गहलोत पहली बार विधानसभा का सत्र बुलाने का अनुरोध करने पहुंचे हैं। कांग्रेस ने कहा, गलत कर रहे राज्यपाल कांग्रेस ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले और विधानसभा सत्र की मांग को लेकर अपने विधायकों के राज भवन में धरना देने के संबंध में शुक्रवार को आरोप लगाया कि मौजूदा समय में लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है और राज्यपाल प्रजातंत्र के रक्षक होने की भूमिका का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि में दावा किया कि इन दिनों हाई कोर्टों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुसरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘लोकतंत्र की नयी परिभाषा गढ़ी जा रही है। अब राज्यपाल लोकतंत्र के रक्षक नहीं रहे, बल्कि वे केंद्र की सत्ता के रक्षक हैं।’ हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सिब्बल ने कहा, ‘कहना नहीं चाहिए लेकिन कहना पड़ता है कि सुप्रीम कोर्ट जो फैसले करता है उसे हाई कोर्ट किनारे कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले का अनुसरण नहीं किया जा रहा है।’ फैसले पर निराश जताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत निराश हूं। कोई रोशनी नहीं दिखती।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि सचिन पायलट को बताना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि 20-25 विधायकों के साथ वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने कहा, ‘सचिन पायलट को इतनी छोटी उम्र में जो मिला, शायद ही किसी को इतना मिला हो। अब आप (पायलट) क्या चाहते हैं? अगर भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो बताइए। अगर आप अपनी पार्टी बनाना चाहते हैं तो बताइए। यह बताइए कि क्या कोई ‘डील’ हुई है? बिन बोले होटल में बैठकर काम नहीं चलेगा।’ सिब्बल ने कहा, ‘अगर आपकी कोई और चिंता है तो आप बताइए। आप 20-25 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस के पास राजस्थान में 100 से अधिक विधायक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह से सबके सामने तमाशा नहीं बनाना चाहिए। इसमें पार्टी का नुकसान है, आपका नुकसान है, सभी का नुकसान है।'
जयपुर राजस्थान में जारी सियासी संग्राम के बीच दो दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रेसन गहलोत के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हुई थी। इस छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक है। केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से कांग्रेस सरकार से जुड़े लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर ईडी ने किस केस में सीएम गहलोत के भाई के घर पर छापेमारी की है। सीएम के भाई से जुड़े हैं फर्टिलाइजर स्कैम के तार ईडी की अग्रसेन गहलोत के घर और प्रतिष्ठानों पर यह कार्रवाई कई राज्यों में फर्टिलाइजर स्कैम मामले में हो रही छापेमारी का हिस्सा है। राजस्थान के साथ ही ईडी मुम्बई, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी फर्टिलाइजर स्कैम को लेकर एक साथ कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई अग्रसेन गहलोत का फर्टिलाइजर का कारोबार है और जोधपुर में इससे जुड़ी दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान हैं। प्रवर्तन निदेशालय की इस छापे में उनकी दुकानों और घर समेत अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन का फर्टिलाइजर से जुड़ा काम है। बताया जा रहा है कि साल 1980 से पहले की उनकी दुकान है। 'अनुपम कृषि' नाम से इसी प्रतिष्ठान से वो फर्टिलाइजर से जुड़ा काम करते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चुनावी कार्यालय शुरू से यह दुकान ही रहा है। इस दो मंजिला दुकान के ऊपर एक ऑफिस बनाया हुआ है। यहीं से चुनाव के कार्य संपन्न होते रहे हैं। इसी दुकान के बाहर टेंट लगाया जाता है और चुनावी कार्यालय बनाया जाता है। इसके अलावा अशोक गहलोत जब नामांकन पत्र भरने जाते तो इसी दुकान के आगे एक जनसभा को संबोधित करते आए हैं। अग्रसेन गहलोत पर 7 करोड़ रुपए का जुर्माना अग्रसेन गहलोत कथित उर्वरक मामले में सात करोड़ रुपए के सीमा शुल्क जुर्माने का सामना कर रहे हैं। ईडी ने सीमा शुल्क विभाग की शिकायत के आधार पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए)के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है और कथित उर्वरक घोटाला मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में छह, गुजरात में चार, पश्चिम बंगाल में दो और दिल्ली में एक स्थान पर एजेंसी ने छापों की कार्रवाई की है।
नई दिल्ली/जयपुर, 24 जुलाई 2020, राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट गुट को राहत मिलने के बाद अब अशोक गहलोत कैंप में हलचल तेज है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की अपील की गई है, तो राज्यपाल कलराज मिश्र ने अभी कोरोना संकट का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है. इस बीच अशोक गहलोत विधायकों को साथ लेकर राजभवन पहुंचे हैं. इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विधानसभा स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया था यानी पायलट गुट को अभी अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है. राज्यपाल कलराज मिश्रा लॉन में धरने पर बैठे विधायकों से मुलाकात करने पहुंचे हैं. राज्यपाल ने कहा है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. विचार-विमर्श के लिए वक्त चाहिए.
जयपुर, 24 जुलाई 2020, राजस्थान के सियासी दंगल में अब केंद्र सरकार की एंट्री भी आधिकारिक रूप से हो गई है. राजस्थान हाईकोर्ट में जारी पायलट गुट बनाम विधानसभा स्पीकर के मामले में शुक्रवार को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया गया. सचिन पायलट गुट की ओर याचिका में कहा गया कि क्योंकि ये संवैधानिक मामला है ऐसे में केंद्र सरकार भी इसमें पक्षकार होनी चाहिए. हालांकि, स्पीकर गुट की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया था. लेकिन हाईकोर्ट ने पक्षकार बनाने की मंजूरी दी, जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा. केंद्र को पक्षकार बनाने के लिए विधायक पृथ्वीराज मीणा की ओर से याचिका दायर की गई थी. विधायकों पर एक्शन नहीं ले पाएंगे स्पीकर शुक्रवार को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की याचिका स्वीकार करने के साथ ही हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर स्टे लगा दिया. यानी विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने बागी विधायकों को जो नोटिस दिया था, उसपर वो कोई एक्शन नहीं ले पाएंगे. ऐसे में सचिन पायलट गुट पर जो अयोग्य करार दिए जाने का संकट था वो कुछ वक्त के लिए टल गया है. हाईकोर्ट की ओर से सचिन पायलट गुट की याचिका को सही माना गया है. जिसमें पार्टी के अंदर रहकर नेतृत्व के खिलाफ सवाल उठाने का अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी की बात को शामिल किया गया है. अब कब होगी सुनवाई? हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी, लेकिन कब होगी ये तारीख नहीं बताई गई है. दूसरी ओर सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है, ऐसे में सर्वोच्च अदालत के फैसले पर हर किसी की नजरें हैं. क्योंकि सर्वोच्च अदालत की ओर से एक बार फिर स्पीकर और अदालत के अधिकारों को लेकर बात कही जा सकती है.

Top News