taaja khabar...जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव का माहौल तैयार करने की कोशिश, 24-25 जून तक सर्वदलीय बैठक कर सकते हैं पीएम मोदी...अगले साल तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो जाएंगे 36 राफेल विमान, बोले एयरफोर्स चीफ RKS भदौरिया...गृह मंत्रालय का राज्यों को सख्त निर्देश, कहा- सावधानी से हटाएं लॉकडाउन की पाबंदियां, अनलॉक को लेकर दी हिदायत...वैक्सीन के ताजा आंकड़ों पर बोला केंद्र- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी मौजूद है 2.87 करोड़ से अधिक डोज...खत्म होने लगा है महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप: 74 दिनों बाद देश में सबसे कम सक्रिय मामले, 24 घंटों में मिले 60,753 नए संक्रमित...केंद्र ने कहा- अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो भारत सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार..विदेश मंत्री जयशंकर ने गुतेरस को दी शुभकामनाएं, दोबारा चुने गए हैं UN में महासचिव...तेजी से सुधरे कोरोना के हालात, यूपी-पंजाब समेत 27 राज्यों में आ रहे हजार से भी कम नए मामले...संसदीय समिति की ट्विटर को दो-टूक, भारत में आपकी नीति नहीं कानून का शासन ही सर्वोच्च...हर्षवर्धन ने कहा- कोरोना के खिलाफ लोगों की जिंदगी बचाने के लिए मास्क सबसे सरल और मजबूत हथियार...नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, कृषि कानूनों को रद करने के अलावा किसी भी प्रावधान पर बात करने को तैयार है सरकार..बदलते हालात: उपराज्यपाल ने कहा- जम्मू-कश्मीर में 90 फीसद लोगों तक पहुंचा केंद्रीय योजनाओं का लाभ...बुजुर्ग से बदसलूकी मामले में एसपी नेता उम्‍मेद पहलवान दिल्‍ली से अरेस्‍ट, फेसबुक लाइव किया था...ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख इब्राहिम रायसी की जीत...

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नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ होने वाली 24 जून को होने वाली सर्वदलीय बैठक पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती किनारा कर सकती हैं। वहीं, दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक से पहले एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व पीएमओ के अधिकारी भी शामिल हुए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद खत्म किए हुए दो साल हो चुके हैं। ऐसे में इस लिहाज से भी यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जम्मू-कश्मीर के 8 राजनीतिक दलों के 14 नेताओं को आमंत्रित किया गया है। महबूबा मुफ्ती ने बैठक से किया किनारा पीएम मोदी की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने किनारा कर सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर है कि महबूबा इस बैठक में शामिल नहीं होंगी। रिपोर्ट के अनुसार महबूबा ने गुपकार अलायंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला को फोन कर बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है। महबूबा के इस फैसले के बाद फारूक अब्दुल्ला के घर पर भी एक बैठक शुरू हो गई है। इसमें आगे की रणनीति पर फैसला होगा। पीडीपी प्रवक्ता सैयद सुहैल बुखारी ने कहा कि दो दिन में पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन की बैठक होगी। इस मामले पर वहां भी चर्चा होगी। बैठक में शामिल होने पर विचार-विमर्श के बाद फैसला इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस और माकपा ने शनिवार को कहा कि वे अपने-अपने दलों के भीतर विचार-विमर्श के बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने के बारे में फैसला करेंगे। जबकि भाजपा ने सभी आमंत्रित सदस्यों के सर्वदलीय बैठक में शामिल होने की उम्मीद जताई। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के वास्ते भविष्य के कदम पर चर्चा होने की उम्मीद है।
इस्‍लामाबाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रशासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर पर 24 जून को एक सर्वदलीय बैठक करने जा रहे हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म किए जाने के दो साल बाद यह अहम बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी के साथ बैठक के बाद राज्‍य में चुनाव कराए जाने का रास्‍ता साफ हो सकता है। उधर, इस बैठक की घोषणा के बाद पाकिस्‍तान घबरा गया है और उसने भारत को चेतावनी दी है। पाकिस्‍तान ने कहा कि वह कश्‍मीर में भारत के जनसंख्‍या को बदलने या कश्‍मीर को बांटने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक बयान जारी करके कहा कि भारत को 5 अगस्‍त 2019 के कदमों के बाद अब कश्‍मीर में 'और ज्‍यादा अवैध कदमों' से परहेज करना चाहिए। कुरैशी ने कहा कि पाकिस्‍तान भारत के 5 अगस्‍त के कदमों का पुरजोर विरोध करता है। 'भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर को बांटने को सहन नहीं करेंगे' पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने कहा कि कश्‍मीर मुद्दे को उन्‍होंने कई अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों में उठाया है। इसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद भी शामिल है। कुरैशी ने कहा कि दक्षिण एशिया में वास्‍तविक शांति तभी आ सकती है जब कश्‍मीर के मुद्दे का समाधान संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रावधानों और कश्‍मीरी लोगों की इच्‍छा के मुताबिक किया जाए। पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर को बांटने या वहां किसी भी जनसांख्यिकीय बदलाव को सहन नहीं करेगा। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान भारत सरकार के जम्‍मू-कश्‍मीर में राजनीतिक महत्‍वाकांक्षाओं का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करने के बाद से ही दोनों ही देशों के बीच संबंध रसातल में चले गए हैं। पाकिस्‍तान भारत से बातचीत के लिए अनुच्‍छेद 370 को फिर से बहाल करने की मांग कर रहा है। हालांकि ऐसा होता नहीं दिख रहा है। जम्मू-कश्मीर के वास्ते भविष्य के कदम पर चर्चा होने की उम्मीद बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जम्मू-कश्मीर के 8 राजनीतिक दलों के 14 नेताओं को आमंत्रित किया गया है। पीएम मोदी की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने किनारा कर सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर है कि महबूबा इस बैठक में शामिल नहीं होंगी। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के वास्ते भविष्य के कदम पर चर्चा होने की उम्मीद है।
पुणे,केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि इंटरनेट मीडिया कंपनियां भारत को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की नसीहत न दें। प्रसाद ने दो टूक तरीके से यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर लाभ कमाने वाली ये कंपनियां भारत में पैसा बनाना चाहती हैं तो उन्हें देश के संविधान और कानून को मानना होगा। प्रसाद ने कहा- इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्मों का दुरुपयोग रुकना चाहिए इंटरनेट मीडिया और सामाजिक सुरक्षा तथा न्याय प्रणाली सुधार : एक अधूरा एजेंडा' विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रसाद ने कहा कि नए आइटी दिशा-निर्देशों का संबंध इंटरनेट मीडिया के उपयोग से नहीं, बल्कि इसके प्लेटफार्मों द्वारा इसके दुरुपयोग और मनमानी रोकने से है। दिशा-निर्देशों का उद्देश्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के कंटेंट को नियम-कायदों के दायरे में लाना फरवरी में घोषित किए गए ये दिशा-निर्देश इंटरनेट मीडिया को लेकर यूजर्स को एक मंच प्रदान करते हैं जिसके जरिये वे अपनी शिकायतों का समाधान कर सकते हैं। इनका उद्देश्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के कंटेंट को नियम-कायदों के दायरे में लाना है। हम फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर को उनके कंटेंट के लिए अधिक जवाबदेह बनाना चाहते हैं। शिकायतों के निपटाने के लिए अधिकारियों को नियुक्त करने को कहा गया, चांद तोड़कर लाने को नहीं प्रसाद ने कहा कि नए नियमों के मुताबित इन कंपनियों को यूजरों की शिकायतों के निपटारे के लिए भारत में तीन अधिकारी-शिकायत निवारण अधिकारी, अनुपालन अधिकारी और नोडल अधिकारी नियुक्त करने हैं, कोई चांद तोड़कर नहीं लाना है। भारतीय कंपनियां भी अमेरिकी नियम मानती हैं प्रसाद ने कहा, 'क्या अमेरिका में काम करने वाली भारतीय कंपनियां वहां के नियमों को नहीं मानतीं? आप यहां अच्छा पैसा बनाते हैं, अच्छा मुनाफा कमाते हैं, क्योंकि भारत एक बड़ा डिजिटल बाजार है, कोई समस्या नहीं है। आप प्रधानमंत्री की आलोचना करते हैं, हमारी आलोचना करते हैं, कड़े सवाल पूछते हैं, लेकिन आप भारतीय नियमों को क्यों नहीं मानेंगे?' संसदीय समिति ने फेसबुक की वर्चुअल बैठक की मांग ठुकराई कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने शनिवार को इंटरनेट मीडिया कंपनी फेसबुक की वर्चुअल बैठक की मांग ठुकरा दी। कंपनी ने कोरोना संबंधी अपनी नीतियों का हवाला देते हुए बैठक के लिए व्यक्तिगत रूप से किसी अधिकारी को भेजने में असमर्थता जताई थी। बैठक की तारीख तय अभी तय नहीं है। संसदीय समिति के चेयरमैन ने फेसबुक से उन अधिकारियों की सूची मांगी है, जिन्हें वह भेजना चाहती है। चेयरमैन ने कहा कि ऐसे अधिकारियों का टीकाकरण कराया जाएगा और उसके सामने पेश होने के लिए उन्हें पर्याप्त समय भी दिया जाएगा। समिति ने यह भी तय किया है कि यूट्यूब, गूगल जैसी अन्य इंटरनेट कंपनियों और वेब प्लेटफार्म को भी बैठक के लिए अपने प्रतिनिधियों को उसके सामने भेजना होगा।
नई दिल्ली, आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का संस्थापक मौलाना मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा का सह-संस्थापक और जमात-उद-दावा सरगना हाफिज मुहम्मद सईद और मुंबई हमलों के गुनहगार जकी-उर-रहमान लखवी भारत की 31 वांछित (मोस्ट वांटेड) आतंकवादियों की सूची में शामिल हैं। इन आतंकियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये भारत सरकार द्वारा विभिन्न देश विरोधी गतिविधियों जैसे बम विस्फोट, हत्या, आंतरिक सुरक्षा से खिलवाड़ करने और अन्य साजिशों में शामिल होने के लिए वांछित आतंकियों की सूची में शामिल हैं। इन आतंकियों के नामों का उल्लेख गृह मंत्रालय की नवीनतम अपडेट सूची में किया गया है। अजहर, सईद और लखवी 31 आतंकियों की सूची में शीर्ष पांच में शामिल हैं, जिनमें दाऊद इब्राहिम कास्कर और प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का प्रमुख नेता वधावा सिंह बब्बर शामिल है। दाऊद के साथ उसके पाकिस्तान में रहने वाले सहयोगी जावेद चिकना उर्फ जावेद दाऊद टेलर, इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मेमन और शेख शकील उर्फ छोटा शकील का नाम भी सूची में है। ये सभी 1993 के मुंबई बम धमाकों में वांछित हैं। इन धमाकों में 250 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। सूची में आतंकी संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का प्रमुख लखबीर सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का रणजीत सिंह उर्फ नीता, खालिस्तान कमांडो फोर्स का परमजीत सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का भूपिंदर सिंह भिंडा, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का एक प्रमुख सदस्य गुरमीत सिंह बग्गा, सिख फार जस्टिस का प्रमुख सदस्य गुरपतवंत सिंह पन्नू, खालिस्तान टाइगर फोर्स का हरदीप सिंह निज्जर का नाम भी शामिल है। इन सभी को गृह मंत्रालय ने पिछले साल नामित आतंकी घोषित किया था। सूची में शामिल अन्य लोगों में साजिद मीर, यूसुफ मुजम्मिल, अब्दुर रहमान मक्की, शाहिद महमूद, फरहतुल्ला गोरी, अब्दुल रऊफ असगर, इब्राहिम अतहर, यूसुफ अजहर, शाहिद लतीफ, गुलाम नबी खान, जफर हुसैन भट, रियाज इस्माइल शाहबंदर, मुहम्मद इकबाल और मुहम्मद अनीस शेख शामिल हैं।
नई दिल्ली,केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश में लगी हुई। इस बीच खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं। केंद्र सरकार यह बैठक 24-25 जून तक बुलाने पर विचार कर रही है। अगस्त 2019 में, केंद्र ने जम्मू - कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू - कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था। इसके बाद से यह केंद्र की जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ पहली सर्वदलीय बैठक होगी। जानकारी के अनुसार इस बैठक में केंद्र सरकार नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत अन्य पार्टियों के नेताओं को बुला सकती है।गौरतलब है कि हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र से बातचीत के संकेत दिए थे और कहा था कि सभी विक्लप खुले हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि था कि कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए अगर केंद्र सरकार बातचीत के लिए बुलाती है तो वे जरूर जाएंगे। महबूबा मुफ्ती को फोन आया पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, ' हां, मुझे एक फोन आया है, लेकिन अभी तक औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। मैं उसी पर चर्चा करने और बैठक में भाग लेने या न लेन पर निर्णय लेने के लिए कल पीएसी की बैठक कर रही हूं।' हमें पीएम के साथ सर्वदलीय बैठक के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है- जम्मू-कश्मीर कांग्रेस इस बीच जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने कहा कि हमें पीएम के साथ सर्वदलीय बैठक के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। अगर हमें बैठक का निमंत्रण मिलता है, तो हम इसकी सूचना राष्ट्रीय नेतृत्व को देंगे। फिर इस पर परामर्श होगा और हम बैठक में भाग लेंगे। हम केंद्र द्वारा बातचीत के इस तरीके की सराहना करते हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के महासचिव रफी अहमद मीर ने भी कहा है कि हमें अभी तक कोई औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। हम आमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं। यदि हम इसे प्राप्त करते हैं, तो मुझे लगता है कि यह लोगों और राजनीतिक दलों के लिए उन मुद्दों को उठाने का एक अच्छा अवसर है, जिनका हम सामना कर रहे हैं। उपराज्यपाल की शाह के साथ बैठक बता दें कि सर्वदलीय बैठक की खबर ऐसे समय पर आई है जब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिल्ली में शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सिन्हा और शाह के बीच बैठक का एजेंडा विकास संबंधी मुद्दे और केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित थी। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गुलाम कश्मीर (PoK) और पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को जल्द से जल्द शरणार्थी पैकेज का लाभ मिले। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को अपने सदस्यों के प्रशिक्षण और उनके सुचारू कामकाज के लिए उचित बैठने की व्यवस्था, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों को सुनिश्चित करके पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय संस्थानों को मजबूत करने का भी निर्देश दिया। किसानों के मुद्दों को लेकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना समेत चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिले।
पेइचिंग चीन के एक नए परमाणु संयंत्र में हादसे के 10 दिन बाद ही शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक झांग झिजिआन को रहस्‍यमय परिस्थितियों में मृत पाया गया है। बताया जा रहा है कि झांग झिजियान एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मारे गए। ऐसी अफवाह है कि चीन परमाणु हादसे को दुनिया से छिपाने का प्रयास कर रहा है। झांग को गुरुवार को सुबह मृत पाया गया था। वह प्रतिष्ठित हार्बिन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर थे। वर्ष 1963 में जन्‍मे झांग दो साल बाद रिटायर होने वाले थे। उनकी मौत से ठीक दो पहले एक अन्‍य परमाणु विशेषज्ञ को हार्बिन यूनिवर्सिटी का नया वाइस चांसलर न‍ियुक्‍त किया गया था। प्रफेस झांग के मौत की खबर यूनिवर्सिटी के वीबो अकाउंट पर की गई। इस बयान में कहा गया है कि पुलिस ने मौका ए वारदात का मुआयना करके इसे हत्‍या मानने से इंकार कर दिया है। चीनी सेना के साथ बहुत करीबी संबंध यूनिवर्सिटी ने और ज्‍यादा विवरण नहीं दिया है। प्रफेसर झांग को इनोवेशन की दुनिया में कई राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुके हैं। हार्बिन टेक्निकल यूनिवर्सिटी देश की उन दो यूनिवर्सिटी में शामिल है जिसका चीनी सेना के साथ बहुत करीबी संबंध है। इस यूनिवर्सिटी ने पिछले साल जून महीने में अमेरिका में बने साफ्टवेयर को बैन कर दिया था। उसने दोनों देशों के बीच चल रहे व्‍यापारिक तनाव को देखते हुए लिया था। इससे पहले चीन के एक परमाणु संयंत्र में हुए लीक के बाद से ही पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया था। एक हफ्ते पहले हुए इस लीक को चीन ने दुनिया से अबतक छिपाकर रखा हुआ था। इस परमाणु संयंत्र के निर्माण में फ्रांसीसी पावर ग्रुप ईडीएफ की लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है। ईडीएफ ने इस लीकेज को लेकर अपनी स्वतंत्र जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक लीक की भयावहता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। पावर प्लांट के आसपास रहने वाले चीन के स्थानीय लोग रूस के चेर्नोबिल में आज से 35 साल पहले की घटना को याद कर डरे हुए हैं। फ्रांसीसी कंपनी ने अमेरिका से मांगी मदद सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक हफ्ते से अमेरिकी सरकार इस लीकेज रिपोर्ट का आंकलन कर रही थी। इस रिपोर्ट में फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के सहायता की गुहार की थी। कंपनी ने इसमें अमेरिका को आसन्न रेडियोलॉजिकल खतरे की साफ साफ चेतावनी दी थी। इसमें बताया गया है कि चीनी सुरक्षा प्राधिकरण ग्वांगडोंग प्रांत में ताईशान परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर विकिरण की सीमा को बढ़ा रहा है। जिसके बाद यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस प्लांट से रेडियोएक्टिव विकिरण हुआ है। रेडियोएक्टिव गैसों के रिसाव से सनसनी फैली इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को ईडीएफ ने डिजाइन किया है। इतना ही नहीं, संचालन के काम में भी चीन इस कंपनी की मदद लेता है। इसी कंपनी ने रेडियोएक्टिव पदार्थ के रिसाव और खतरे की चेतावनी दी है। ईडीएफ ने कहा कि ताइशन संयंत्र के रिएक्टर नंबर 1 के प्राथमिक सर्किट से क्रिप्टन और जिनॉन गैस का रिसाव हुआ था। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह अक्रिय गैसें हैं लेकिन इनमें रेडियोएक्टिव गुण पाए जाते हैं। अगर भविष्य में रिसाव की मात्रा बढ़ती है तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
दुबई ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के कट्टर समर्थक और कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख इब्राहिम रायसी ने शनिवार को बड़े अंतर से जीत हासिल की। ऐसा प्रतीत होता है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में देश के इतिहास में इस बार सबसे कम मतदान हुआ। प्रारंभिक परिणाम के अनुसार, रायसी ने एक करोड़ 78 लाख मत हासिल किए। चुनावी दौड़ में एकमात्र उदारवादी उम्मीदवार अब्दुलनासिर हेम्माती बहुत पीछे रहे गए। बहरहाल, खामेनेई ने रायसी के सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी को अयोग्य करार दे दिया था, जिसके बाद न्यायपालिका प्रमुख ने यह बड़ी जीत हासिल की। रायसी की उम्मीदवारी के कारण ईरान में मतदाता मतदान के प्रति उदासीन नजर आए और पूर्व कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सहित कई लोगों ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया। ईरान के गृह मंत्रालय में चुनाव मुख्यालय के प्रमुख जमाल ओर्फ ने बताया कि प्रारंभिक परिणामों में, पूर्व रेवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसिन रेजाई ने 33 लाख मत हासिल किए और हेम्माती को 24 लाख मत मिले। हेम्माती ने शनिवार तड़के रायसी को बधाई दी अन्य उम्मीदवार आमिरहुसैन गाजीजादा हाशमी को 10 लाख मत मिले। उदारवादी उम्मीदवार एवं ‘सेंट्रल बैंक’ के पूर्व प्रमुख हेम्माती और पूर्व रेवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसिन रेजाई ने रायसी को बधाई दी। हेम्माती ने शनिवार तड़के इंस्टाग्राम के माध्यम से रायसी को बधाई दी और लिखा, ‘मुझे आशा है कि आपका प्रशासन ईरान के इस्लामी गणराज्य को गर्व करने का कारण प्रदान करेगा, महान राष्ट्र ईरान के कल्याण के साथ जीवन और अर्थव्यवस्था में सुधार करेगा।’ रेजाई ने मतदान में हिस्सा लेने के लिए खामेनेई और ईरानी लोगों की ट्वीट करके प्रशंसा की। रेजाई ने लिखा, ‘मेरे आदरणीय भाई आयतुल्ला डॉ. सैयद इब्राहीम रईसी का निर्णायक चयन देश की समस्याओं को हल करने के लिए एक मजबूत और लोकप्रिय सरकार की स्थापना का वादा करता है।’ चुनाव में किसी उम्मीदवार का शुरुआत में ही हार स्वीकार कर लेना ईरान के चुनावों में कोई नई बात नहीं है। यह बात का संकेत देता है कि सावधानी से नियंत्रित किए गए इस मतदान में रायसी ने जीत हासिल की है। कुछ लोगों ने इन चुनावों का बहिष्कार किया है। इस बार मतदान प्रतिशत 2017 के पिछले राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले काफी नीचे लग रहा है। रायसी की जीत से सरकार पर कट्टरपंथियों की पकड़ और मजबूत रायसी की जीत की आधिकारिक घोषणा के बाद वह पहले ईरानी राष्ट्रपति होंगे जिन पर पदभार संभालने से पहले ही अमेरिका प्रतिबंध लगा चुका है। उनपर यह प्रतिबंध 1988 में राजनीतिक कैदियों की सामूहिक हत्या के लिये तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलने वाली ईरानी न्यायपालिका के मुखिया के तौर पर लगाया गया था। रायसी की जीत से ईरान सरकार पर कट्टरपंथियों की पकड़ और मजबूत होगी और यह ऐसे समय में होगा, जब पटरी से उतर चुके परमाणु करार को बचाने की कोशिश के तहत ईरान के साथ विश्व शक्तियों की वियना में वार्ता जारी है। ईरान फिलहाल यूरेनियम का बड़े स्तर पर संवर्धन कर रहा है। इसे लेकर अमेरिका और इजराइल के साथ उसका तनाव काफी बढ़ा हुआ है। माना जाता है कि इन दोनों देशों ने ईरानी परमाणु केंद्रों पर कई हमले किये और दशकों पहले उसके सैन्य परमाणु कार्यक्रम को बनाने वाले वैज्ञानिक की हत्या करवाई।
नई दिल्‍ली,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्‍यक्षता में शुक्रवार को एक हाई लेवल बैठक हुई। इसमें एनएसए अजीत डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार, रॉ प्रमुख सामंत कुमार गोयल, सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने भाग लिया। यह उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई..
नई दिल्ली लोकप्रियता के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा बरकरार है। दुनिया के कई बड़े नेताओं को नरेंद्र मोदी ने लोकप्रियता के मामले में पीछे छोड़ दिया है। दुनियाभर में पसंद किए जाने वाले नेताओं में पीएम मोदी पहले स्थान पर हैं। अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से किए गए सर्वे में यह बात निकलकर सामने आई है। सर्वे में ब्रिटेन, रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस समेत 13 देशों के नेताओं से प्रधानमंत्री मोदी काफी आगे हैं। प्रधानमंत्री की ग्लोबल अप्रूवल रेटिंग 66 फीसदी है। भारत में 2 हजार 126 वयस्क लोगों पर किए गए सर्वेक्षण के साथ मॉर्निंग कंसल्ट ग्लोबल लीडर अप्रूवल रेटिंग ट्रैकर ने पीएम मोदी के लिए 66 फीसदी अप्रूवल दिखाया। Global Leader Approval: Among All Adults Modi: 66% Draghi: 65% López Obrador: 63% Morrison: 54% Merkel: 53% Biden: 53% Trudeau: 48% Johnson: 44% Moon: 37% Sánchez: 36% Bolsonaro: 35% Macron: 35% Suga: 29% मॉर्निंग कंसल्ट' नियमित रूप से विश्व के नेताओं की रेटिंग को ट्रैक करता है। पीएम मोदी के बाद दूसरा स्थान इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी (65%) ने हासिल किया, इसके बाद मैक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर (63%), ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (54%), जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल (53%), अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन (53%), कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (48%), ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (44%) का स्थान है।
नई दिल्ली,केंद्र ने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली सामग्री से संबंधित शिकायतों के निस्तारण को पारदर्शी वैधानिक तंत्र प्रदान करना है, जिसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम-2021 की अधिसूचना जारी की है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने ट्वीट किया, 'सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम-1994 में संशोधन करके टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों के संबंध में लोगों की शिकायतों का निस्तारण करने के लिए वैधानिक तंत्र विकसित किया है। मंत्रालय ने सीटीएन नियमों के तहत टीवी चैनलों की वैधानिक संस्था को भी मान्यता देने का निर्णय लिया है।' वर्तमान में नियमों के तहत कार्यक्रम और विज्ञापनों के लिए संहिताओं के उल्लंघन से संबंधित नागरिकों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक अंतर मंत्रालयी समिति के माध्यम से एक संस्थागत तंत्र है। इसी तरह विभिन्न प्रसारकों ने भी शिकायतों के समाधान के लिए अपने आंतरिक स्व नियामक तंत्र को विकसित किया है। इसके बाद भी शिकायतों के निवारण ढांचे को और सुदृढ़ करने के लिए एक वैधानिक तंत्र बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। कुछ प्रसारकों ने अपने संघों और निकायों को कानूनी मान्यता देने का भी अनुरोध किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले में दिए गए आदेश में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण के मौजूदा तंत्र पर संतोष व्यक्त करते हुए शिकायत निवारण तंत्र को औपचारिक रूप देने के लिए उचित नियम बनाने की सलाह दी थी। उपरोक्त पृष्ठभूमि में इस वैधानिक तंत्र को प्रदान करने के लिए केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों में संशोधन किया गया है, जो पारदर्शी होगा और नागरिकों को लाभान्वित करेगा। वहीं, प्रसारकों के स्व-नियामक निकाय केंद्र सरकार के पास पंजीकृत होंगे। वर्तमान में 900 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं, जिन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई है। सभी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के तहत निर्धारित कार्यक्रम और विज्ञापन कोड का पालन करना आवश्यक है। उपरोक्त अधिसूचना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रसारकों और उनके स्व-नियामक निकायों पर जवाबदेही और जिम्मेदारी रखते हुए शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत संस्थागत प्रणाली का रास्ता आगे बढ़ाती है। ट्राई ने की टीवी चैनल सेलेक्टर वेबसाइट की शुरुआत भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बुधवार को टीवी चैनल सेलेक्टर वेबसाइट की शुरुआत की। यह सुविधा उन उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है जो स्मार्ट फोन के अभाव में मोबाइल एप का उपयोग नहीं कर पा रहे थे। स्मार्ट फोन के लिए टीवी चैनल सेलेक्टर एप पिछले साल 25 जून को लांच किया गया था। इसके जरिये उपभोक्ता अपना सब्सक्रिप्शन देख सकते हैं और उसमें बदलाव भी कर सकते हैं। इसकी शुरुआत दिसंबर 2018 में अधिसूचित एक नियम के तहत की गई थी। यह देखा जा रहा था कि उपभोक्ता अपने आपरेटरों की वेबसाइट और मोबाइल एप पर अपनी पसंद के टीवी चैनल चुनने में परेशानियों का सामना कर रहा था। प्राधिकरण ने अधिसूचना में कहा, 'ट्राई ने अब टीवी सेलेक्टर वेबसाइट भी विकसित की है। इससे उन उपभोक्ताओं को सुविधा होगी जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं हैैं या जो वेबसाइट ब्राउजर का इस्तेमाल करना चाहते हैं। एप व वेबसाइट की खासियत है कि डीटीएच या केबल आपरेटर को भेजने से पहले सब्सक्रिप्शन में बदलाव किया जा सकता है। पोर्टल में एप की सभी विशेषताएं हैं और डाउनलोड की सुविधा भी दी गई है।'
नई दिल्‍ली । कोविड महामारी में जहां वैश्विक स्‍तर के अधिकतर नेताओं की लोकप्रियता हिचकोले खाती दिखाई दी है वहीं, भारत के प्रधानमंत्री की स्थिति जस की तस बनी हुई है। वो आज भी दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय और स्‍वीकार्य नेता हैं। इस बात की पुष्टि अमेरिकी डाटा इंटेलिजेंस फर्म के आंकड़े कह रहे हैं। फर्म के मॉर्निंग कंसल्‍ट सर्वे में ये बात साफतौर पर दिखाई दे रही है। इस सर्वे के मुताबिक, स्‍वीकार्यता के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में अन्‍य नेताओं पर भारी पड़े हैं। सर्वे के मुताबिक, पीएम मोदी की ग्‍लोबल एप्रूवल रेटिंग 66 फीसद है। आंकड़े बता दें कि रहे हैं कि पीएम मोदी, अमेरिका रूस, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, ब्राजील और जर्मनी समेत विश्‍व के अन्‍य 13 नेताओं की तुलना में कहीं आगे हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि इस लिस्‍ट में पीएम मोदी के बाद इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी का नंबर आता है। उनकी रेटिंग 65 फीसद है। इसके बाद तीसरे नंबर पर मैक्सिको के राष्‍ट्रपति लोपेज ओब्रेडोर का आता है। उनकी वैश्विक रेटिंग 63 फीसद है। इसके बाद आस्‍ट्रेलिया के पीएम स्‍कॉट मॉरिसन की रेटिंग 54 फीसद, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की रेटिंग 53 फीसद, अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन की रेटिंग 53 फीसद, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो 48 फीसद, ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन की रेटिंग 44 फीसद, दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे की रेटिंग 37 फीसद, स्‍पेन के राष्‍ट्रपति पेड्रो सांचेज की रेटिंग 36 फीसद, ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर बोल्‍सोनारो की रेटिंग 35 फीसद, फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की रेटिंग 35 फीसद और जापान के पीएम के पीएम योशिहिदे सुगा की रेटिंग 29 फीसद है। इस सर्वे में भारत में 2126 वयस्‍कों का सैंपल साइज लिया गया था। 17 जून को इस ट्रेकर को अपडेट किया गया था। गौरतलब है कि यूए डाटा फर्म मॉर्निंग कंसल्‍ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस ऑस्‍ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, ब्राजील, जर्मनी, भारत, जापान, इटली, मैक्सिको, साउथ कोरिया, ब्रिटेन, स्‍पेन और अमेरिका के नेताओं की एप्रूवल रेटिंग को ट्रैक करती है। इस सप्‍ताह में एक बार अपडेट किया जाता है। इसका सैंपल साइज हर देश में अलग होता है।
नई दिल्ली,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 फ्रंटलाइन वर्करों के लिए क्रैश कोर्स को लॉन्च करने के साथ ही महामारी कोविड-19 को लेकर देश को तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज शुरू किए जा रहे क्रैश कोर्स के जरिए 1 लाख वारियर्स को महामारी का सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने क्रैश कोर्स करने वाले फ्रंटलाइन वर्करों को शुभकामनाएं दी और उम्मीद जताई की वे जल्द ही हेल्थकेयर वर्करों के सहयोग के लिए तैयार होंगे। क्रैश कोर्स करने वालों को दी जाएगी ये सुविधाएं कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए देश में करीब 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह क्रैश कोर्स 2-3 महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे। फ्रंटलाइन वर्करों के इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत, उम्मीदवारों को निःशुल्क ट्रेनिंग, स्किल इंडिया का सर्टिफिकेट, भोजन व आवास सुविधा, काम पर प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड एवं प्रमाणित उम्मीदवारों को 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा प्राप्त होगा। कोविड-19 हेल्‍थकेयर फ्रंटलाइन वर्कर्स का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होने के बाद उम्मीदवार डीएससी/एसएसडीएम की व्यवस्था के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य सुविधाओं व अस्पतालों में काम कर सकेंगे। ट्रेनिंग के लिए 273 करोड़ रुपये का आवंटन इसके तहत 6 भूमिकाओं में दक्षता के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। ये होंगे होम केयर सपोर्ट, बेसिक केयर सपोर्ट, एडवांस केयर सपोर्ट, इमरजेंसी केयर सपोर्ट, सैंपल कलेक्शन सपोर्ट और मेडिकल इक्विपमेंट सपोर्ट। इसकी लागत कुल 273 करोड़ रुपये है। हेल्थ सेक्टर में वर्तमान व भविष्य के लिए मानव संसाधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए नॉन मेडिकल हेल्थकेयर वर्करों का कौशल विकास करना इस प्रोग्राम का मकसद है। 26 राज्यों के 111 केंद्रों में मिलेगी ट्रेनिंग कोविड-19 फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए 'क्रैश कोर्स प्रोग्राम' का शुभारंभ शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 3.0 के तहत इसकी शुरुआत देश भर के 26 राज्यों में स्थित 111 प्रशिक्षण केंद्रों में की जाएगी। इस मौके पर स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप के केंद्रीय मंत्री भी मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, 'इस कोविड-19 महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को बार-बार परखा है। वहीं इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है।' 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स होंगे तैयार प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश में महामारी का सामना करने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी जारी है। इसके मद्देनजर देश में करीब 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा जो 3 महीने में ही तैयार हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'हर सावधानी के साथ, आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में करीब 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स को तैयार करने का महाअभियान शुरू हो रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में हम लोगों ने देखा कि इस वायरस का बार बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और इसके म्यूटेंट होने की संभावना भी बनी हुई है।' उन्होंने आगे कहा, 'इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को बार-बार परखा है। वहीं इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है।' मिली जानकारी के अनुसार, तीन महीने की इस ट्रेनिंग के पूरा होने के बाद लाभार्थियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इन केंद्रों में कोविड प्रोटोकॉल के साथ ट्रेनिंग दी जाएगी। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत तमाम उपकरणों से लेकर इमरजेंसी में एंबुलेंस आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी। कौशल व उद्यमविकास मंत्रालय का मकसद हेल्थ केयर सेंटर में गुणवत्ता पूर्ण सहयोग प्रदान करना है ताकि हमारा देश सशक्त भारत बन सके। महामारी के दौरान देश में मेडिकल उपकरणों, दवाओं, अस्पताल में बिस्तर समेत मानव संसाधन तक की कमी को पूरा करने की दिशा में सरकार पूरी तरह प्रयासरत है। इस क्रम में ही इस प्रोग्राम की शुरुआत की जा रही है ताकि मेडिकल क्षेत्र से बाहर के लोगों को भी आवश्यकता पड़ने पर नियुक्त किया जा सके।
पेइचिंग चीनी ड्रैगन ने दक्षिण चीन सागर में चली गई अपनी चाल को अब भारतीय सीमा पर भी दोहराना शुरू कर दिया है। चीन ने चुपके से बहुत तेज गति से अपनी पश्चिमी सीमा पर हवाई ताकत को बढ़ाने में जुट गया है। चीन ने इन हवाई ठिकानों को ऐसे समय पर मजबूत करना शुरू किया है जब उसका भारत के साथ तनाव अपने चरम पर चल रहा है। चीन घातक मिसाइलों से लेकर परमाणु बॉम्‍बर्स को अब भारतीय सीमा के पास अपने हवाई ठिकानों पर तैनात कर चुका है। अमेरिकी रक्षा वेबसाइट द ड्राइव ने ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों की मदद से बताया कि पूर्वी लद्दाख में गलवान हिंसा के बाद चीन और भारत के रुख में निर्णायक मोड़ आ गया है। खासतौर पर चीन अब बहुत तेजी से अपने हवाई ठिकानों में निवेश कर रहा है। चीन ने भारतीय सीमा पर पिछले एक साल में अपनी हवाई गतिविधियों को अप्रत्‍याशित तरीके से बहुत तेज कर दिया है। इसके अलावा चीन ने जमीन से हवा में भारतीय विमानों को मार गिराने की अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। 'चीन की तैयारी का रणनीतिक असर बहुत खतरनाक' सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन अक्‍साई चिन से लेकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक नए ठिकाने, हेलिपोर्ट और रेल लाइन बना रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की यह तैयारी केवल रक्षात्‍मक नहीं है और उसका रणनीतिक असर बहुत खतरनाक हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि चीन ने अपनी पश्चिमी सीमा पर तिब्‍बत और शिंजियांग प्रांत में सैन्‍य इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को बहुत तेजी से बढ़ाया है। इसमें सबसे ज्‍यादा जोर चीन की हवाई ताकत को बढ़ाने पर दिया गया है। वर्ष 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद पिछले साल खासतौर पर चीन ने कई नए सैन्‍य ठिकानों को तैयार किया है। साथ ही वर्तमान सैन्‍य ठिकानों को तूफानी रफ्तार से अपग्रेड किया है। चीन ने अपने पश्चिमी प्रांतों में कई नए रनवे बनाए हैं और चीनी वायुसेना की पूरी ताकत को बढ़ाने पर जोर दिया है। चीन ने कई ऐसे ढांचे तैयार किए हैं भारत के हवाई हमले में तबाह करना आसान नहीं होगा। चीन ने अब भारतीय सीमा पर अपनी तैयारी को अलर्ट रहने की स्थिति में कर दिया है। 'भारतीय वायुसेना और पड़ोसी नर्वस हो जाएं और घुटने टेक दें' विशेषज्ञों ने कहा कि तिब्‍बत और शिंजियांग में अचानक से आधारभूत ढांचे का विकास सीधे तौर पर भारत और चीन के बीच बढ़ते भूराजनीतिक तनाव के बीच हो रहा है। चीन ने पश्चिमी सीमा पर कितनी ताकत जुटा लिया है, इसका अभी ठीक ठीक अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। हालांकि उसकी तैयारी लंबे समय के लिए लग रही है। इन सैन्‍य ठिकानों पर बहुत तेजी से काम जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान निर्माण चीनी तैयारी का अंत‍ नहीं है, बल्कि उसके मंसूबे अभी और ज्‍यादा करने के हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि ओवरआल चीन की वायुसेना की पूरी तैयारी का मकसद भारतीय सीमा पर खुद को ज्‍यादा मजबूत हवाई ताकत के रूप में दिखाने का है। उसकी कोशिश है कि अगर भारत के साथ वास्‍तविक युद्ध छिड़ता है तो वह लंबे समय तक अपनी हवाई गतिविधियों को चला सके। चीन की मंशा अपने आक्रामक व्‍यवहार के जरिए हवाई क्षेत्र पर कब्‍जा करने की है। चीन की कोशिश है कि अपने हवाई ताकत को इतना मजबूत कर लिया जाए कि भारतीय वायुसेना और अन्‍य पड़ोसी देश नर्वस हो जाएं और बिना लड़े ही घुटने टेक दें।
नई दिल्ली,हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक की कोवैक्सीन (COVAXIN) को जल्द ही की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अप्रूवल मिल सकता है। इसके लिए भारत बायोटेक ती 23 जून को डब्ल्यूएचओ के साथ प्री-सबमिशन बैठक है। इस बैठक में स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। इससे पहले, पिछले महीने भारत बायोटेक ने जानकारी दी थी कि उसने डब्ल्यूएचओ के ईयूएल के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत दस्तावेज जमा कर दिए थे। शेष दस्तावेज इसी माह जमा किए जाने हैं। विदेश मंत्रालय भारत बायोटेक के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि कोविड-19 वैक्सीन के लिए डब्ल्यूएचओ की मान्यता मिल सके। कोवैक्सिन को आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने मिलकर विकसित किया है। कोवैक्सिन फिलहाल डब्ल्यूएचओ की सूची में शामिल नहीं है, इसकी वजह से वैक्सीन लगवाने वाले लोग कुछ देशों की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। भारत में इस वक्त दो वैक्सीन लगाई जा रही हैं, जिनमें से एक स्वदेशी कोवैक्सिन और दूसरी कोविशील्ड है। कोवैक्सीन वर्तमान में भारत में कोरोना महामारी के खिलाफ प्रशासित तीन टीकों में से एक है। भारत ने इस साल 16 जनवरी को चरणबद्ध तरीके से दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया था, जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) को पहले टीका लगाया गया। फ्रंटलाइन वर्कर्स (FLWs) का टीकाकरण 2 फरवरी से शुरू हुआ, 60 वर्ष से ऊपर वालों के लिए 1 मार्च और 1 अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया था। वहीं, 1 मई से टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें 18-44 आयु वर्ग के लाभार्थियों को वैक्सीन लगाने की अनुमति दी गई।
नई दिल्ली, देश में कोरोना की दूसरी लहर लगातार कमजोर पड़ रही है लेकिन अभी भी खतरा बरकरार है। कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन को सबसे कारगर हथियार माना जा रहा है। इसको लेकर देश भर में कोरोना टीकाकरण चलाया जा रहा है। देश में सभी वर्ग के लोग वैक्सीन आसानी से लगवा सकें इसके लिए सरकार ने टीकाकरण के नियमों को और आसान बना दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को सुविधा देते हुए कोविन(CoWin) पर रजिस्‍ट्रेशन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इसका मतलब ये हुआ कि अब कोई भी शख्स अपने नजदीकी टीकाकरण केंद्र(वैक्सीनेशन सेंटर) जाकर केंद्र पर ही रजिस्ट्रेशन करवा सकता है और अपनी वैक्सीन लगवा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि कोरोना वैक्‍सीन देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए हेल्थ वर्कर्स और आशा कार्यकर्ता ग्रामीण इलाके और शहरी स्लम्स इलाकों में जाएंगी और लोगों को ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन के लिए जागरूक करेंगी। बता दें कि देश में बहुत से लोग अभी भी वैक्सीन लगवाने के लिए जरूरी ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन नहीं करा पा रहे हैं। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना टीकाकरण अभियान की रफ्तार काफी कम है। इसको देखते हुए सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के एक आंकड़ों के मुताबिक, 13 जून तक कोविन के जरिए किए गए 28.36 करोड़ रजिस्‍ट्रेशन में से 16.45 करोड़ (58 प्रतिशत) लाभार्थियों ने ऑन-साइट रजिस्‍ट्रेशन कराया है। बता दें कि भारत में कोरोना वैक्‍सीनेशन अभियान की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी। 16 जनवरी से अब तक देश में 26 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना की खुराक दी जा चुकी है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से जानकारी देते हुए कहा गया है कि मंगलवार को 18-44 साल के आयु वर्ग के 13,13,438 लोगों को टीके की पहली खुराक दी गई जबकि 54,375 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई।
हैदराबाद,सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस रोधी टीके कोवैक्‍सीन को लेकर एक पोस्‍ट वायरल हो रही है जिसमें कोवैक्‍सीन में नवजात बछड़े का सीरम होने की अफवाह फैलाई जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऐसी अफवाहों को बेबुनियाद एवं झूठा बताया है। इस मसले पर अब भारत बायोटेक ने भी सफाई दी है। भारत बायोटेक ने बुधवार को कहा कि वायरल वैक्‍सीन के निर्माण के लिए गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन कोवैक्सीन पूरी तरह से शुद्ध वैक्सीन है और इसे सभी अशुद्धियों को हटाकर तैयार किया गया है। भारत बायोटेक ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वायरल टीकों के निर्माण के लिए गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है। इनका इस्तेमाल कोशिकाओं (सेल्स) के विकास के लिए होता है लेकिन (SARS CoV-2) सार्स सीओवी-2 वायरस की ग्रोथ या फाइनल फॉमूला में इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है। भारत बायोटेक ने कहा कि उसकी कोवैक्सीन पूरी तरह से शुद्ध है। कोवैक्‍सीन का निर्माण सभी अशुद्धियों को हटाकर तैयार किया गया है। हैदराबाद स्थित वैक्सीन बनाने वाली स्वदेशी कंपनी ने यह भी कहा कि दशकों से विश्व स्तर पर टीकों के निर्माण में गोजातीय सीरम का व्यापक रूप से इस्‍तेमाल किया जाता है। बीते नौ महीनों से विभिन्न प्रकाशनों में नवजात बछड़े के सीरम के इस्‍तेमाल को पारदर्शी रूप से उल्‍लेखि‍त भी किया गया था। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि कोरोना रोधी टीके कोवैक्‍सीन की कंपोजिशन (संरचना) के संबंध में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इस वायरल पोस्‍ट में कहा जा रहा है कि कोवैक्‍सीन में नवजात बछड़े का सीरम मिलाया गया है। इस पोस्‍ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। भारत के स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन में नवजात बछड़े का सीरम बिल्कुल नहीं है। गोजातीय और अन्य जानवरों से मिले सीरम मानक संवर्धन घटक हैं जिनका इस्‍तेमाल विश्व स्तर पर वेरो सेल के विकास में होता है।
कोविड वैक्सीन सर्टीफिकेट में है गलती, तो कोविन पोर्टल पर जाकर खुद सुधार सकेंगे हनुमानगढ़। कोरोना वैक्सीन लगवा चुके नागरिक अपने कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टीफिकेट में हुई गलतियों को कोविन पोर्टल पर अब खुद ही ठीक कर सकते हैं। सरकार ने एक नए अपडेट की घोषणा की है, जो आवेदक को वैक्सीनेशन सर्टीफिकेट में प्रिंट हुए नाम, जन्मतिथि, लिंग और आईडी नम्बर में अनजाने में हुई गलती को सुधारने की सुविधा देगा। उपयोगकर्ता कोविन वेबसाइट के जरिए यह सुधार कर सकते हैं। आरसीएचओ डॉ. विक्रमसिंह ने बताया कि अगर कोविन वैक्सीनेशन सर्टीफिकेट में अनजाने में आपके नाम, जन्मतिथि, लिंग और आईडी नम्बर में कोई गलती हुई है, तो आप उसे स्वयं ठीक कर सकते हैं। कोविन की वेबसाइट पर जाएं और इस संबंध में अपनी समस्या को दुरुस्त करें। कोविड वैक्सीनेशन सर्टीफिकेट यात्रा के वक्त और कई अन्य परिसरों तक जाने-आने में हमारे काम आते हैं। आप इस लिंक https://selfregistration.cowin.gov.in/ पर जाकर अपना मोबाइल नम्बर एवं ओटीपी से अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। अकाउंट ओपन होते ही 'रेज ऐन इश्यूÓ ऑप्शन को ओपन करें। 'रेज ऐन इश्यूÓ ऑप्शन ओपन होने पर आप नाम, जन्मतिथि, लिंग और आईडी नम्बर में से कोई दो गलतियां सुधार सकते हैं। इसके बाद आप उसमें कोई चेन्ज नहीं कर पाएंगे। यह सुविधा सरकार द्वारा केवल एक बार दी जाएगी। डाटा अपडेट करने के बाद यह बदलाव आपके दूसरे वैक्सीनेशन के बाद डाउनलोड होने वाले सर्टीफिकेट में दिखाई देगा।
नई दिल्ली, सूचना व प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने ट्विटर को समन भेजा है। दरअसल इंटरनेट जगत से जुड़े अधिकारों व सुरक्षा मामलों पर जवाब तलब के लिए ट्विटर को संसद परिसर में बुलाया गया है। इस क्रम में संसदीय स्थायी समिति ने 18 जून को माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट से 18 जून को संसद में पेश होने को कहा है। यह मामला जनता के अधिकारों व सोशल व ऑनलाइन न्यू मीडिया प्लेटफार्म के दुरुपयोग के अलावा डिजिटल स्पेस में महिला सुरक्षा से जुड़ा है। बता दें केंद्र व ट्विटर के बीच नए IT नियमों को लेकर मतभेद है। समिति के पैनल के समक्ष 18 जून शाम 4 बजे ट्विटर की ओर से यह बताया जाएगा कि सोशल मीडिया व ऑनलाइन न्यूज के दुरुपयोग को कैसे रोका जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस साल फरवरी में केंद्र की ओर से ट्विटर को कुछ कंटेंट ब्लॉक करने को कहा गया था। इसके बाद सरकार नए IT नियम के साथ आई। इन्हीं नियमों को लेकर ट्विटर और केंद्र के बीच तकरार है। पैनल सदस्यों के सूत्रों ने बताया कि हम पता लगाने की कोशिश करेंगे कि किस वजह से ट्विटर देश में बनाए गए नए नियमों को मानने से इनकार कर रहा है। इससे पहले भी कई मुद्दों पर संसदीय समिति ने Twitter को समन भेजा है। ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा, ' भारत के लिए ट्विटर प्रतिबद्ध रहा है। हमने भारत सरकार को इस बात को सुनिश्चित कराया है कि नए दिशानिर्देशों पर चलने के लिए हमारी ओर से भरसक प्रयास किया जा रहा है।' हाल में ही केंद्र ने ट्विटर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बार-बार मंत्रालय की ओर से पत्र दिए जाने के बावजूद ट्विटर की ओर से पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) में साइबर कानूनों के ग्रुप कोऑर्डिनेटर राकेश माहेश्वरी (Rakesh Maheshwari) ने ट्विटर को यह पत्र लिखा है।
नई दिल्ली,चीन और पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को लगातार बढ़ा रहा हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी तक चीन के पास 350, पाकिस्तान के पास 165 और भारत के पास 156 परमाणु हथियार हैं। एसआईपीआरआई के आकलन के अनुसार, रूस और अमेरिका के पास अनुमानित 13,080 वैश्विक परमाणु हथियारों में से 90 प्रतिशत से अधिक है। भारत को चीन और पाकिस्तान के परमाणु हथियारोॆं से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। भारतीय अधिकारियों का के अनुसार परमाणु हथियारों कीू संख्या से ज्यादा उसका डिलिवरी सिस्टम मायने रखता है। बता दें कि भारत की सेनाओँ को 5,000 किलो मीटर दूरी तक मार करने वाली अग्नि-V इंटरकंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें मिलने वाली है, जिसकी जद में चीन और पाकिस्तान पूरी तरह से आ जाएंगे। एसआईपीआरआई के अध्ययन में सोमवार को कहा गया कि चीन, पाकिस्तान और भारत अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहे हैं। पिछले साल जनवरी तक चीन के पास 320, पाकिस्तान के पास 160 और भारत के पास 150 परमाणु हथियार थे। दुनिया में कुल नौ देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया के पास ही परमाणु हथियार हैं। अध्ययन में कहा गया है, 'चीन परमाणु हथियार सूची में लगातार विस्तार कर रहा है, जबकि भारत और पाकिस्तान भी अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ा रहा हैं। 5 मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच सैन्य गतिरोध को एक साल से अधिक समय हो गया है। इस दौरान 45 वर्षों में पहली बार दोनों पक्षों की ओर से घातक परिणाम देखने को मिला। भारत और चीन ने पैंगोंग झील क्षेत्र में शांति कायम करने में सीमित प्रगति की है, जबकि अन्य बिंदुओं पर गतिरोध बना हुआ है। वहीं, भारत और पाकिस्तान ने इस साल 25 फरवरी को अपने सैन्य अभियानों के महानिदेशकों के बीच बातचीत के बाद नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घोषणा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया था। एसआईपीआरआई के अध्ययन में उन कच्चे माल के भंडार के बारे में भी बात की गई है जो देशों के पास अपने परमाणु हथियारों के लिए हैं। भारत और इज़राइल ने मुख्य रूप से प्लूटोनियम का उत्पादन किया है और पाकिस्तान ने मुख्य रूप से (अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम) एचईयू का उत्पादन किया है। अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका ने भी अपने परमाणु हथियारों में उपयोग के लिए एचईयू और प्लूटोनियम दोनों का उत्पादन किया है। बयान में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान की सरकारें अपने कुछ मिसाइल परीक्षणों के बारे में बयान देती हैं, लेकिन अपने (परमाणु) शस्त्रागार की स्थिति या आकार के बारे में कोई जानकारी नहीं देती हैं। एसआईपीआरआई इयरबुक 2021 में उल्लिखित अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया के कुल 13,080 वैश्विक परमाणु हथियारों में से लगभग 2,000 को उच्च परिचालन अलर्ट की स्थिति में रखा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब, भारत, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया और चीन 2016 और 2020 के बीच दुनिया में प्रमुख हथियारों के पांच सबसे बड़े आयातक थे। इस अवधि में प्रमुख हथियारों के वैश्विक आयात में सऊदी अरब की 11 प्रतिशत और भारत की 9.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
बीजिंग,चीन के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने पिछले साल गलवन में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के एक साल पूरा होने पर भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर उपजे तनाव को कम करने के लिए 'साहसिक कदम' उठाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि एलएसी पर 'सबसे खतरनाक क्षेत्रों' में बफर जोन बनाए जाएं। ताकि आगे फिर कभी ऐसी तनावपूर्ण स्थिति नहीं पैदा हो। हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट समाचार पत्र में मंगलवार को 'चीन और भारत को सीमा गतिरोध पर आगे बढ़ने के लिए अतीत पर विचार करना चाहिए' शीर्षक वाले आलेख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वरिष्ठ कर्नल (सेवानिवृत्त) झाउ बो ने कहा, 'यह जानलेवा घटना खौफनाक थी जो बल प्रयोग नहीं करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी दशकों पुरानी सहमति को तोड़ने के करीब थी।' यहां सिंगुआ विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजी में सीनियर फेलो बो ने तनाव घटाने के लिए अपने प्रस्तावों वाले आलेख में कहा, 'घातक सीमा झड़प के सदमे के साल भर बाद, अब भी काफी तनाव बना हुआ है क्योंकि असत्यापित एलएसी को लेकर मुद्दों का समाधान करने के तरीकों पर सहमति नहीं बनी है।' बो ने विवाद को टकराव का रूप लेने से रोकने के सवाल पर पूर्वी लद्दाख में शेष इलाकों से सैनिकों की वापसी की भारत की मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'इन समझौतों में दोनों देशों ने एक बार फिर से यह दोहराया कि वे एलएसी पर अपने-अपने सैन्य बलों को घटाएंगे या सीमित कर न्यूनतम संख्या पर ले जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'असल में, दोनों पक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। संकट के मद्देनजर इसमें आश्चर्य करने की कोई बात नहीं है। लेकिन जब माहौल ठंडा हो गया है तब दोनों देशों को इस बारे में सोचना चाहिए कि वे किस तरह से सीमावर्ती इलाकों को शांतिपूर्ण और स्थिर बना सकते हैं।' बो ने कहा कि शायद सर्वाधिक साहसिक कदम एलएसी से लगे इलाके में सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्रों में बफर जोन बनाना हो सकता है। टकराव को रोकने के लिए यह सर्वाधिक प्रभावी तरीका है।' उन्होंने कहा, 'दोनों पक्ष इस पर सहमत हुए हैं कि एलएसी के जिन इलाकों में साझा सहमति नहीं है उन इलाकों में वे गश्त नहीं करेंगे। बफर जोन बनाना इसी दिशा में आगे बढ़ने का एक कदम है। और यह संभव भी है।' उन्होंने कहा कि एक अन्य तरीका संयुक्त कार्यकारी समहू को बहाल करना और कूटनीतिक एवं सैन्य विशेषज्ञों को इसके तहत कार्य करने के लिए कहना है, ताकि विश्वास बहाली सहमतियों में आसान लक्ष्य हासिल किए जा सके। विश्वास बहाली के नए उपायों पर भी काम करना चाहिए।
नई दिल्ली,केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वन नेशन वन कार्ड (One Nation One Ration Card) का लक्ष्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम प्रवासी लाभार्थियों को सशक्त बनाना है। केंद्र ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान खाद्य सुरक्षा की कठिनाई से निपटने के लिए योजनाओं के तहत राज्यों को अत्यधिक रियायती कीमतों पर पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि, पहचान और वितरण की जिम्मेदारी लाभार्थी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। जिसमें कहा गया है कि सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को 20 से 25 मई, 2021 द्वारा योजनाओं के माध्यम से खाद्यान्न की अपनी आवश्यकताओं का लाभ उठाने के लिए उन लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है, जो प्रवासियों सहित एनएफएसए(NFSA)के तहत कवर नहीं होता है। बता दें कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह हलफनामा लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों को होने वाली समस्याओं और असंगठित श्रमिकों की पंजीकरण प्रक्रिया से संबंधित मामले में दायर किया गया था। ताकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले कल्याणकारी लाभों का लाभ उठा सकें।
नई दिल्ली,देश के दुर्गम इलाकों में रहने वालों को भी कोरोना वैक्सीन देने की तैयारी शुरू हो गई है। दुर्गम इलाकों के साथ देश के आखिरी छोर पर रहने वाले नागरिकों के लिए ड्रोन से वैक्सीन पहुंचाई जाएगी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की तरफ से सरकारी कंपनी एचएलएल की सब्सिडियरी एचएलएल इंफ्राटेक ने ड्रोन संचालित करने वाली कंपनियों से करार करने के लिए टेंडर जारी किया है। दूरदराज वाले इलाकों में वैक्सीन और अन्य आवश्यक दवाइयां पहुंचाई जा सकें आगामी 22 जून को टेंडर खोला जाएगा। एचएलएल इंफ्राटेक के मुताबिक इस करार का उद्देश्य मुख्य रूप से ड्रोन के जरिये मेडिकल सप्लाई नेटवर्क को स्थापित करना है ताकि पहुंच से दूरदराज वाले इलाकों में वैक्सीन और अन्य आवश्यक दवाइयां पहुंचाई जा सकें। इससे देश में मेडिकल सप्लाई डिलीवरी मॉडल तैयार होगा। टेंडर की शर्तों के मुताबिक ड्रोन की रेंज कम से कम 35 किलोमीटर तक की होनी चाहिए, ताकि सामान की डिलीवरी के बाद वह अपने स्टेशन पर वापस आ सके। ड्रोन कम से कम चार किलोग्राम वजन वाले सामान को ढोने में सक्षम होना चाहिए। पैराशूट के इस्तेमाल से डिलीवरी की इजाजत नहीं होगी। ड्रोन का वजन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के तय मानक के हिसाब से होना चाहिए। ड्रोन की मदद से दवा पहुंचाने का प्रायोगिक जांच पूरी टेंडर में सफल कंपनी से आरंभ में 90 दिनों के लिए यह करार होगा। वैक्सीन डिलीवरी सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए आइसीएमआर पहले ही आइआइटी कानपुर के साथ मिलकर ड्रोन की मदद से दवा पहुंचाने का प्रायोगिक जांच कर चुकी है। उस जांच के अध्ययन के आधार पर आइसीएमआर ने ड्रोन से वैक्सीन पहुंचाने का मानक तय किए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही ड्रोन से वैक्सीन पहुंचाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। कोरोना के मरीजों में आई कमी उधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के लगभग सभी राज्यों में कोरोना महामारी की दूसरी लहर थम गई है। सक्रिय मामलों में लगातार गिरावट आ रही है और पिछले एक दिन में इसमें 54,531 की और गिरावट आई है। सिर्फ पांच राज्यों यानी महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को छोड़कर शेष सभी राज्यों में पांच हजार से कम नए मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से भी ज्यादातर राज्यों में नए मामलों की संख्या दो हजार से भी कम है।
नई दिल्ली,संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने भारत के आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) की सराहना करते हुए उन देशों में इस प्रकार के कार्यक्रम चलाए जाने की सिफारिश की है, जहां विभिन्न कारणों से विकास के कार्यक्रम में क्षेत्रीय असमानता बाधा बनती है। वर्ष 2018 में सबका साथ-सबका विकास को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में एडीपी को शुरू किया था। यूएनडीपी ने पाया कि भारत के जिन जिलों को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया, वहां दूसरे जिलों के मुकाबले स्वास्थ्य एवं पौष्टिकता, शिक्षा, कृषि, पानी के संसाधन, बुनियादी सुविधाएं एवं कौशल विकास में तेज बढ़ोतरी हुई। यूएनडीपी की रिपोर्ट के मुताबिक आकांक्षी जिले (एडी) के रूप में चयनित जिलों में अन्य जिलों के मुकाबले स्वास्थ्य व पौष्टिकता, शिक्षा जैसे क्षेत्र में एक सीमा तक बढ़ोतरी हुई लेकिन कृषि और जल संसाधन के क्षेत्र में एडी में जबरदस्त तरक्की देखी गई। एडी में अन्य क्षेत्रों में भी तरक्की हुई है, लेकिन अभी उसे और मजबूत करने की गुंजाइश है।यूएनडीपी की रिपोर्ट के मुताबिक एडी के रूप में चयनित जिलों में अन्य जिलों के मुकाबले 5.8 फीसद अधिक एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिला का इलाज किया गया। अन्य जिलों के मुकाबले यहां 4.8 फीसद अधिक बच्चों के डायरिया का इलाज किया गया। वहीं, 9.6 फीसद अधिक बच्चों की डिलीवरी कुशल कर्मचारियों द्वारा की गई। वित्तीय समावेश के मामले में भी एडी अन्य जिलों से आगे दिखे। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत इन जिलों में प्रति एक लाख व्यक्ति पर 1580 अधिक खाते खुलवाए गए। यूएनडीपी ने अपनी रिपोर्ट में बीजापुर और दंतेवाड़ा में चलाए गए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की भी तारीफ की है। जहां मलेरिया में क्रमश: 71 और 54 फीसद की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में काले चावल के उत्पादन को लेकर किए गए प्रयोग की भी तारीफ की गई है। यहां के काले चावल अब आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
तिरुअनंतपुरम,केरल में एक बार फिर से 'लव जिहाद' का मुद्दा उभरकर सामने आ गया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने उन चार आइएस आतंकियों की बीवियों को भारत में वापस लेने से इन्कार कर दिया है जो अफगानिस्तान के इस्लामिक शासन में रहने के लिए अपने पति और बच्चों के साथ वहां गई थीं। सोनिया सबैस्टियन उर्फ आएशा, मेरिन जेकब उर्फ मेरिन, निमिषा नायर उर्फ फातिमा इसा और रफीला वर्ष 2016-18 के बीच इस्लामिक एस्टेट के खुरासन प्रांत में रहने गई थीं। विभिन्न हमलों में उनके पति मारे गए और इन महिलाओं ने वर्ष 2019 में अफगानिस्तान प्रशासन के समक्ष समर्पण कर दिया था। भारत से भागकर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने वाली चार महिलाओं को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। रिपोर्ट है कि मोदी सरकार ने आतंकी संगठन में शामिल होने वाली चारों महिलाओं को भारत नहीं आने देने का फैसला किया है। ये चारों महिलाएं केरल की रहने वाली थीं और अफगानिस्तान के जेल में बंद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये चारों महिलाएं केरल से भागकर अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में अपने पति के साथ गईं थीं और फिर इन्होंने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ज्वाइन कर लिया था। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के बड़े अफसरों समेत कई भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इन पूछताछ के बाद पाया इनके धर्मातरण के बाद इन्हें बेहद घातक किस्म का कट्टरपंथी बनाया गया है। इनका केरल में वापस आना राज्य के लिए बेहद घातक हो सकता है। जबकि बिंदू की मां ने इस मामले में सगाई का कोई हाथ ही नहीं है। केरल की हैं चारों महिलाएं चारों महिलाएं केरल की रहने वाली हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में इस्लाम का शासन स्थापित करने की मकदस से बनाए गय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट को 2016-18 में ज्वाइन किया था। उस वक्त आईएसआईएस ने दुनियाभर के मुस्लिमों से आईएसआईएस ज्वाइन करने की अपील की थी, लेकिन चंद मुस्लिमों का उन्हें समर्थन मिला था। भारत से भी करीब दर्जन भर लोग भागकर अफगानिस्तान और सीरिया पहुंचे थे। इन चारों महिलाओं के पति अलग अलग घटनाओं में मारे जा चुके हैं और ये महिलाएं इस्लामिक स्टेट्स की फाइटर थीं। हालांकि, इन्होंने दिसंबर 2019 में अफगानिस्तान प्रशासन के सामने सरेंडर कर दिया था और फिर इन्हें जेल भेज दिया गया था।
पेइचिंग इंग्लैंड के कार्बिस बे में जारी दुनिया के सात सबसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देशों के शिखर सम्मेलन जी-7 से चीन चिढ़ा हुआ है। इस बैठक को अपने खिलाफ गुटबंदी करार देते हुए चीन ने इसके सदस्य देशों को खुलेआम धमकी दी है। चीन ने ग्रुप ऑफ सेवन कहे जाने वाले इन देशों के नेताओं को स्पष्ट रूप से चेताते हुए कहा कि वे दिन खत्म हो गए जब देशों के छोटे समूह दुनिया के भाग्य का फैसला किया करते थे। जी-7 को धमका रहा चीन लंदन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे दिन जब देशों के एक छोटा समूह वैश्विक फैसले तय किया करता था, वे लंबे समय से खत्म हो गए हैं। हम हमेशा मानते हैं कि बड़े या छोटे, मजबूत या कमजोर, गरीब या अमीर सभी देश बराबर हैं। वैश्विक मुद्दों पर सभी देशों के परामर्श के बाद ही फैसले लिए जाने चाहिए। जिनपिंग की मुखरता को रोकने की तैयारी जी7 के नेता दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड में जारी बैठक के दौरान चीन की काट खोजने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के सबसे अमीर लोकतांत्रिक देशों का मानना है कि पिछले 40 साल में चीन की शानदार आर्थिक और सैन्य वृद्धि के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुखरता बढ़ती जा रही है। इसी पर रोक लगाने के लिए ये सभी देश एक वैश्विक समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। चीन के खिलाफ साझा रणनीति बना रहे जी-7 के देश जी-7 के नेताओं ने चीन के वैश्विक अभियान के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बुनियादी ढांचा योजना का अनावरण किया है। बताया जा रहा है कि फिलहाल इस मुद्दे पर अबतक सहमति नहीं बन पायी है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चीन को किस तरह रोका जाए। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जी-7 शिखर सम्मेलन में लोकतांत्रिक देशों पर बंधुआ मजदूरी प्रथाओं को लेकर चीन के बहिष्कार का दबाव बनाने की योजना तैयार की है। जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्ट के खिलाफ जी-7 की हुंकार जी-7 के सदस्य देशों ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वकांक्षी योजना वन बेल्ट वन रोड (OBOR) के खिलाफ नया बुनियादी ढांचा योजना शुरू करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इससे चीन को हजारों करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है। चीन अपने इसी प्रॉजक्ट के जरिए दुनियाभर के देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। श्रीलंका, पाकिस्तान समेत अफ्रीका के कई देश पहले ही चीन के आर्थिक गुलाम बन चुके हैं।
पेइचिंग इंग्लैंड के कार्बिस बे में जारी दुनिया के सात सबसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देशों के शिखर सम्मेलन जी-7 से चीन चिढ़ा हुआ है। इस बैठक को अपने खिलाफ गुटबंदी करार देते हुए चीन ने इसके सदस्य देशों को खुलेआम धमकी दी है। चीन ने ग्रुप ऑफ सेवन कहे जाने वाले इन देशों के नेताओं को स्पष्ट रूप से चेताते हुए कहा कि वे दिन खत्म हो गए जब देशों के छोटे समूह दुनिया के भाग्य का फैसला किया करते थे। जी-7 को धमका रहा चीन लंदन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे दिन जब देशों के एक छोटा समूह वैश्विक फैसले तय किया करता था, वे लंबे समय से खत्म हो गए हैं। हम हमेशा मानते हैं कि बड़े या छोटे, मजबूत या कमजोर, गरीब या अमीर सभी देश बराबर हैं। वैश्विक मुद्दों पर सभी देशों के परामर्श के बाद ही फैसले लिए जाने चाहिए। जिनपिंग की मुखरता को रोकने की तैयारी जी7 के नेता दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड में जारी बैठक के दौरान चीन की काट खोजने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के सबसे अमीर लोकतांत्रिक देशों का मानना है कि पिछले 40 साल में चीन की शानदार आर्थिक और सैन्य वृद्धि के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुखरता बढ़ती जा रही है। इसी पर रोक लगाने के लिए ये सभी देश एक वैश्विक समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। चीन के खिलाफ साझा रणनीति बना रहे जी-7 के देश जी-7 के नेताओं ने चीन के वैश्विक अभियान के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बुनियादी ढांचा योजना का अनावरण किया है। बताया जा रहा है कि फिलहाल इस मुद्दे पर अबतक सहमति नहीं बन पायी है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चीन को किस तरह रोका जाए। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जी-7 शिखर सम्मेलन में लोकतांत्रिक देशों पर बंधुआ मजदूरी प्रथाओं को लेकर चीन के बहिष्कार का दबाव बनाने की योजना तैयार की है। जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्ट के खिलाफ जी-7 की हुंकार जी-7 के सदस्य देशों ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वकांक्षी योजना वन बेल्ट वन रोड (OBOR) के खिलाफ नया बुनियादी ढांचा योजना शुरू करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इससे चीन को हजारों करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है। चीन अपने इसी प्रॉजक्ट के जरिए दुनियाभर के देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। श्रीलंका, पाकिस्तान समेत अफ्रीका के कई देश पहले ही चीन के आर्थिक गुलाम बन चुके हैं।
नई दिल्ली भारत और चीन के बाद पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनातनी के बीच इंडियन आर्मी ने आखिरकार पैंगोंग त्सो में तैनाती के लिए विशेष नौकाओं की प्रारंभिक डिलीवरी शुरू कर दी है। आर्मी ने छह-सात महीने पहले स्पेशल बोट्स के लिए दो कॉन्ट्रेक्ट किए थे। पहला कॉन्ट्रेक्ट 65 करोड़ रुपये में 12 फास्ट पेट्रोलिंग बोट्स के लिए डिफेंस पीएसयू गोवा शिपयार्ड से हुआ था। इसमें एडवांस सर्विलांस इक्यूपमेंट और अन्य उपकरण लगाए जाने थे। 20 सैनिकों को तेजी से ले जा सकती है दूसरी डील गोवा में एक प्राइवेट शिपयार्ड से हुआ था। इसमें सैनिकों को ले जाने वाली, फ्लैट-बॉटम फाइबरग्लास की 17 बोट की बात हुई थी। ऐसे बोट्स इंडियन नेवी को भी सप्लाई किए जाते हैं। एक सूत्र ने बताया कि ये बोट लगभग 20 सैनिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से ले जा सकती हैं। इनकी प्रारंभिक डिलीवरी शुरू हो गई है। 7-8 साल पहले शामिल हुई थी बोट्स सेना ने सात-आठ साल पहले 13,900 फीट की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग त्सो में गश्त के लिए 17 क्यूआरटी (क्विक-रिएक्शन टीम) नौकाओं को शामिल किया था। लेकिन पिछले साल अप्रैल-मई में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध शुरू होने के बाद भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदली। इंडियन आर्मी ने पीएलए की तरफ से इस्तेमाल की जा रही भारी टाइप -928 बी गश्ती नौकाओं से मुकाबले के लिए अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता महसूस की। भारत पर भारी पड़ता था चीन भारतीय और चीनी दोनों सैनिक गर्मी के महीनों के दौरान पैंगोंग त्सो के अपने क्षेत्रों में पैदल और नावों पर सक्रिय रूप से गश्त करते हैं। सेना को क्यूआरटी नावें मिलने से पहले, यह अपनी पुरानी धीमी गति से चलने वाली नावों से काफी प्रभावित हुआ करती थी। पीएलए अक्सर भारतीय नौकाओं को अपनी भारी नौकाओं से टक्कर मारकर उन्हें दबा देता था। फरवरी में हुआ था पीछे हटने का समझौता इस साल फरवरी में भारत और चीन के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का समझौता हुआ था। इसके बाद दोनों देशों के सैनिक पीछे हट गए थे। पैगॉन्ग त्सो 134 किलोमीटर लंबी झील है जिसका दो-तिहाई हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। यह तिब्बत से भारत तक फैला हुआ है।
नई दिल्‍ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस और एयरोस्‍पेस सेक्‍टर में नई रिसर्च को बढ़ावा देने का फैसला क‍िया है। सिंह ने iDEX (Innovations for Defence Excellence) - DIO (Defence Innovation Organisation) के लिए बजटीय सहायता को मंजूरी दी। iDEX–DIO का मकसद देश के डिफेंस और एयरोस्‍पेस सेक्‍टर को 'आत्‍मनिर्भर' और 'स्‍वदेशी' बनाना है। रक्षा मंत्रालय अगले पांच साल में इस पहल के लिए 498.8 करोड़ रुपये देगा। iDEX-DIO का क्‍या होगा काम? रक्षा उत्पादन विभाग (DPP) ने रक्षा नवाचार संगठन (DIO) का गठन किया है। DIO और iDEX फ्रेमवर्क का मकसद डिफेंस और एयरोस्‍पेस में नई खोजों के लिए एक इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके जरिए MSMEs, स्‍टार्टअप्‍स, इंडिविजुअल इनोवेटर्स, R&D संस्‍थानों और शिक्षा जगत के लोगों से संपर्क साधा जाएगा। अगर भारत की जरूरतों के लिहाज से उनके आइडिया में दम दिखा तो अनुदान/फंडिंग व अन्‍य माध्‍यमों से मदद की जाएगी। इस योजना से करीब 300 स्‍टार्टअप्‍स/MSMEs/इंडिविजुअल इनोवेटर्स व अन्‍य को वित्‍तीय मदद दी जाएगी। इससे लोगों को डिफेंस की जरूरतों का पता भी चलेगा और बदले में सरकार के पास अपनी रक्षा जरूरतों के लिए नए-नए हल मिलते रहेंगे। DIO और उसकी टीम ऐसे चैनल्‍स तैयार करेगी जो भारतीय डिफेंस उत्‍पादन इंडस्‍ट्री के लगातार संपर्क में रहेंगे। इससे एक ऐसी संस्‍कृति पैदा करने की कोशिश होगी जहां रिसर्च और इनावेशन को बढ़ावा मिले। योजना उन नई, स्‍वदेशी और अनूठी तकनीकों के तेज विकास में मदद करेगी जिनको भारत के रक्षा और एयरोस्‍पेस क्षेत्र को जरूरत है। कम वक्‍त में कैसे ये जरूरतें पूरी की जा सकें, इसके लिए नए-नए विचार सामने आ सकें, उसके लिए इकोसिस्टम बनेगा। सेना को रखना होगा हर नई खोज से अपडेट रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि iDEX नेटवर्क तैयार करने और चलाने के लिए DIO को पैसा DDP से मिलेगा। नेटवर्क पार्टनर इनक्‍युबेट्स (PIs) की सूरत में होगा। इनके जिम्‍मे देशी कंपनियों की विकसित तकनीकों और उत्‍पादों का मूल्‍यांकन होगा। इसके बाद सेना के शीर्ष नेतृत्‍व को अपडेट भी रखना होगा। अगर जरूरत पड़ती है तो सफलतापूर्वक टेस्‍ट की जा चुकी तकनीकों पर उत्‍पादन भी तेज करना होगा।
लंदन ब्रिटेन में जारी दुनिया के सात सबसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देशों के सम्मेलन G7 में भी पाकिस्तान अपनी गंदी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। कार्बिस बे में जुटे इन देशों का ध्यान खींचने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को तैनात किया है। इन लोगों के हाथ में कश्मीर को लेकर दुनिया में भ्रम फैलाने वाली बातें लिखी गई हैं। इतना ही नहीं, कई प्रदर्शनकारियों के हाथ में प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्टर भी देखे गए हैं। G7 की बैठक में प्रदर्शन क्यों करवा रहा पाकिस्तान दरअसल, पाकिस्तान अब भी भ्रम पालकर बैठा है कि जी-7 के शक्तिशाली देश कश्मीर पर उसका साथ देंगे। इसके अलावा पाकिस्तान यह मान रहा है कि लिए कश्मीर के मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए जी-7 की बैठक एक स्वर्णिम अवसर भी है। इसे कवर करने के लिए पूरी दुनिया की मीडिया यहां जमा है। पाकिस्तान यह अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसने यहां प्रदर्शन किया तो इसे सभी देशों में दिखाया जाएगा। यही कारण है कि आईएसआई ने अपने लोगों को प्रदर्शन के लिए यहां भेजा है। पीएम मोदी की जी-7 में मौजूदगी से इमरान को जलन इस बार के शिखर सम्मेलन में भारत को भी विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जी-7 की बैठक को संबोधित किया। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री मोदी को इस समिट में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया था। इमरान खान बस इसी बात से चिढ़े हुए हैं। उन्हें लगता है कि इन नेताओं के सामने पीएम मोदी की बुराई करवाकर वे कुछ हासिल कर सकते हैं। शुक्रवार को बोरिस जॉनसन ने की थी शुरुआत शुक्रवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने वैश्विक असमानता से निपटने के प्रस्ताव के साथ इस शिखर सम्मेलन की शुरूआत की। उन्होंने उद्घाटन भाषण में कहा कि दुनिया को 2008 के वित्तीय संकट की गलतियों से सीखने और असमानता के निशान से निपटने की बहुत जरूरत है। शुक्रवार को पहले दिन की बैठक के बाद जी-7 के सभी नेता ब्रिटिश महारानी क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के महल में डिनर के लिए पहुंचे थे। क्या है G-7? जी-7 दुनिया की 7 बड़ी विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी, इटली और कनाडा शामिल हैं। इसकी पहली शिखर बैठक 1975 में हुई थी लेकिन तब इसके सिर्फ 6 सदस्य थे। 1976 में कनाडा भी इसके साथ जुड़ गया जिसके बाद इसे 'ग्रुप ऑफ सेवन' नाम मिला। इस बार से शिखर सम्मेलन के लिए जी-7 के अध्यक्ष के नाते ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित किया है।
नई दिल्ली। सरकार ने 21 जून से शुरू होने जा रहे कोरोना टीकाकरण के चौथे चरण को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सरकारी टीकाकरण केंद्र खोलने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। वहीं 25 फीसद वैक्सीन हासिल करने वाले निजी क्षेत्र की भागीदारी और पहुंच बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार 75 फीसद डोज खरीदकर राज्यों को मुफ्त उपलब्ध कराएगी। करने होंगे ये इंतजाम स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आने वाले दिनों में वैक्सीन की उपलब्धता में गुणात्मक बढ़ोतरी होने जा रही है। इसके चलते पूरे देश में पिछले पांच महीने में वैक्सीन की जितनी डोज लगाई गई हैं, उससे दोगुना से भी ज्यादा अगले 49 दिन में ही लगा दी जाएंगी। जाहिर है उसी के अनुरूप टीकाकरण केंद्रों की संख्या भी बढ़ानी पड़ेगी और साथ ही वैक्सीन को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचाने के कोल्ड चेन से लेकर स्टाफ का भी इंतजाम करना होगा। राज्‍य सरकारों को जारी हुए ये निर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशकों को इसकी तैयारी करने को कहा है। राज्यों को यह भी कहा गया है कि आबादी के साथ-साथ दूर-दराज के इलाकों में वैक्सीन को पहुंचाना सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। 12 करोड़ डोज आपूर्ति करने का वादा आने वाले दिनों में वैक्सीन की उपलब्धता का आंकड़ा पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ने जून में वैक्सीन की 12 करोड़ डोज आपूर्ति करने का वादा किया है। हालांकि, पिछले 11 दिनों में लगभग तीन करोड़ डोज की ही आपूर्ति हुई है। इससे प्रतिदिन औसतन 30 लाख डोज की दर से 3.33 करोड़ डोज लगाई गई हैं। एक करोड़ को पार कर सकता टीकाकरण का आंकड़ा अब जून के बाकी 19 दिनों में नौ करोड़ डोज की सप्लाई होनी है, जिससे औसतन 48 लाख डोज प्रतिदिन दी जा सकती हैं। वहीं, जुलाई में लगभग 20 करोड़ डोज की सप्लाई होगी। इससे प्रतिदिन औसतन 65 लाख टीके लगाए जा सकते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव के मुताबिक जुलाई के दूसरे पखवाड़े से प्रतिदिन टीकाकरण का आंकड़ा एक करोड़ को पार कर सकता है और अगस्त से इसमें और भी इजाफा हो सकता है। अभी 40 हजार सरकारी टीकाकरण केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक अभी लगभग 40 हजार सरकारी और केवल दो हजार निजी टीकाकरण केंद्र हैं। रोजाना एक करोड़ डोज देने के लिए इनकी संख्या भी बढ़ानी होगी। इसके लिए राज्यों से स्कूल, सामुदायिक भवन, पंचायत घर और अन्य भवन को अस्थायी टीकाकरण केंद्र के रूप में विकसित करने को कहा गया है। निजी टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर जोर सबसे अधिक जोर निजी टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने को लेकर है। अभी जो दो हजार निजी टीकाकरण केंद्र हैं वो ज्यादातर बड़े शहरों में ही हैं और बहुत कम लोगों की पहुंच के दायरे में हैं। जाहिर है बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों के छोटे और मझोले शहरों में चल रहे निजी अस्पतालों की भागीदारी सुनिश्चित करने से न सिर्फ निजी टीकाकरण केंद्रों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि यह आम लोगों की पहुंच के दायरे में भी होंगे। स्वास्थ्य बीमा योजना से संबद्ध अस्पताल जोड़े जाएंगे अधिकारी ने कहा कि उपरोक्त राज्यों में आयुष्मान भारत, सीजीएचएस और अन्य स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत संबद्ध निजी अस्पताल बड़ी संख्या में हैं। इन्हें जोड़ने से निजी टीकाकरण केंद्रों की संख्या को आसानी से 25-30 हजार तक किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने ऐसे निजी अस्पतालों को वैक्सीन खरीद में मदद का भरोसा दिलाया है और राज्यों को उनके वैक्सीन की जरूरत का आंकड़ा उपलब्ध कराने को कहा है।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत के आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) का मकसद देश के विभिन्न क्षेत्रों का समावेशी और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। मोदी ने साथ ही इस बात पर प्रसन्नता जताई कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने एडीपी की मुख्य विशेषताओं को रेखांकित किया है।संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) ने इन जिलों में तेजी से विकास के लिए प्रेरक का काम किया है। यूएनडीपी ने कहा, 'स्वास्थ्य देखभाल एवं पोषण, शिक्षा जैसे कुछ क्षेत्रों में और काफी हद तक कृषि और जल संसाधन जैसे क्षेत्रों में कुछ अहम परिवर्तन आए हैं।' उसने कहा कि यह उत्साहजनक है क्योंकि विकास के मूल्यांकन के लिए ये क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।भारत में यूएनडीपी की प्रतिनिधि शोको नोदा ने कहा कि प्रभावी नीतियां गरीबी को समाप्त करने और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने के लिए अहम हैं। उन्होंने कहा, 'एडीपी जीवनस्तर को सुधारने के लिए अहम पहल है और हम बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए नीति आयोग के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।' उनके ट्वीट के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थायी और समावेशी विकास को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास अहम है। जल जीवन मिशन के तहत उत्तर प्रदेश को मिले 10 हजार करोड़ से अधिक केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2021-22 के लिए 10,870 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह किसी राज्य को आवंटित अभी तक की सबसे बड़ी राशि है। जल शक्ति मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। पिछले वर्ष आवंटित राशि से इस साल चार गुना ज्यादा राशि है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे।मंत्रालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने 2024 तक हर ग्रामीण घर को पानी मुहैया कराने का लक्ष्य हासिल करने का आश्वासन दिया है। मंत्रालय ने कहा, 'केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश का केंद्रीय आवंटन बढ़ाकर 10870.50 करोड़ रुपये किया है। 2019-20 में केंद्र ने 1,206 करोड़ रुपये आवंटित किए थे जिसे 2020-21 में बढ़ाकर 2571 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस साल राज्य का केंद्रीय आवंटन चार गुना बढ़ाया गया है।'
नई दिल्ली,भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की इस अपुष्ट दावे के लिए खिंचाई की कि हाल में झारखंड के बोकारो में जब्त सामग्री यूरेनियम थी और कहा कि यह देश की छवि धूमिल करने का प्रयास है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब्त सामग्री यूरेनियम नहीं थी। उसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियंत्रित सामग्रियों के लिए भारत में कड़े कानूनी नियामक हैं, जो इसके परमाणु अप्रसार कार्यों से झलकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, भारत सरकार के नाभिकीय ऊर्जा विभाग ने नमूने की जांच और प्रयोगशाला में विश्लेषण से पाया कि जब्त सामग्री यूरेनियम नहीं है और न ही यह रेडियोधर्मी है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा भारत पर की गई टिप्पणी तथ्यों को जांचे बगैर भारत की छवि धूमिल करने की उनकी हताशा को दर्शाता है। बागची एक संवाददाता सम्मेलन में इस मुद्दे पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जब्त सामग्री को रेडियोधर्मी बताते हुए उसकी जांच की मांग की थी। अफगानिस्तान में विभिन्न हितधारकों के संपर्क में है भारत भारत ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में शांति, विकास और पुननिर्माण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तहत वहां विभिन्न हितधारकों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत अफगानिस्तान में सभी जातीय समूहों के संपर्क में है और वहां शांति की सभी पहलों का समर्थन करता है। विभिन्न देशों के साथ उठा रहे भारतीय छात्रों का मुद्दा अरिंदम बागची ने कहा कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के चलते विदेश यात्रा से असमर्थ भारतीय छात्रों की चुनौतियों से सरकार अवगत है और इस मुद्दे को संबंधित देशों के साथ प्रमुखता से उठा रही है। बागची ने कहा कि सरकार अपनी नीतियों के अनुरूप विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
नई दिल्ली, कोरोना रोधी टीका (Coronavirus Vaccine ) किसको लगना चाहिए, इसको लेकर अभी विशेषज्ञ एकमत नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ का मानना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में छह महीने तक एंटीबॉडी रहती हैं। भारत में भी नई गाइडलाइंस के अनुसार, कोरोना संक्रमण के तीन महीने बाद टीका लगवाने की सलाह दी गई है। इस बीच एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, उनके टीकाकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। अभी इन लोगों को कोरोना वैक्‍सीन देने की जरूरत पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के एक ग्रुप ने सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, उनके टीकाकरण की कोई जरूरत नहीं है। बता दें कि इस समूह में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर कोविड-19 संबंधी राष्ट्रीय कार्यबल के सदस्य भी शामिल हैं। समूह ने सलाह दी है कि अभी हमें उन लोगों को वैक्‍सीन दिए जाने पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए, जो संवेदनशील और जोखिम श्रेणी में शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कैसे बने टीकाकरण की रणनीति इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडमोलॉजिस्ट्स और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के विशेषज्ञों द्धारा तैयार की गई इस साझा रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ये उचित होगा कि सभी आयु वर्ग के लोगों की जगह महामारी संबंधी आंकड़ों को ध्‍यान में रखकर टीकाकरण के लिए रणनीति बनानी चाहिए। बता दें कि ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई है। उल्‍लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्धारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब तक कोविड-19 रोधी टीके की 24.58 करोड़ से ज्यादा खुराक दी जा चुकी हैं। मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को 18 से 44 आयुवर्ग के 1864234 और 77136 लाभार्थियों ने क्रमश: टीके की पहली और दूसरी खुराक लीं।
नई दिल्ली, देश में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार कम हो रहा है। देश में आज लगातार चौथे दिन कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए हैं। हालांकि, इस दौरान मौत का आंकड़ा 3400 से अधिक रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 91,702 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 3403 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई है। इसके साथ ही देश में कोरोना के पॉजिटिविटी रेट में भी गिरावट आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार फिलहाल देश में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 4.49% है। देश में कोरोना वायरस के कम होते के साथ ही वायरस के संक्रमण से ठीक होने वालों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में देश भर में कोरोना से 1 लाख 34 हजार 580 लोग ठीक हुए हैं। इससे कोरोना से ठीक हुए मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 2 करोड़ 77 लाख 90 हजार 73 हो गया है। भारत की कोरोना रिकवरी दर बढ़कर 94.93% हो गई है। इसके अलावा देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 46,281 एक्टिव केस कम हुए हैं। भारत में कोरोना के फिलहाल 11 लाख 21 हजार 671 एक्टिव केस हैं। भारत की एक्टिव कोरोना दर अभी 3.83% है। देश में कोरोना के कुल मामलों की बात करें तो अब तक भारत में 2 करोड़ 92 लाख 74 हजार 823 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं। कोरोना के कारण देश भर में अब तक कुल 3 लाख 63 हजार 79 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। भारत की कोरोना मृत्यु दर फिलहाल 1.24% है। देशभर में गुरुवार 10 जून तक 24 करोड़ 60 लाख 85 हजार 649 कोरोना वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं। बीते एक दिन में 32 लाख 74 हजार 674 टीके लगाए गए। देश में कोरोना की जांच की बात करें तो अबतक 37 करोड़ 42 लाख 42 हजार 384 कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं। बीते दिन करीब 20 लाख 44 हजार 131 कोरोना सैंपल टेस्ट किए गए, जिसका पॉजिटिविटी रेट 4.49 फीसद है।
नई दिल्‍ली । अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की उस घोषणा का स्‍वागत किया है जिसमें वैक्‍सीन और कोविड-19 से लड़ाई में जरूरी चीजों का उत्‍पादन बढ़ाने की बात कही है। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने हाल ही में अपने एक संदेश में ये साफ कर दिया था कि राज्‍यों को मुफ्त में कोरोना वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराने की जिम्‍मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि 18-21 वर्ष की आयुवर्ग के लोगों के लिए कुछ समय के अंदर वैक्‍सीन मुहैया करवा दी जाएगी। आईएमएफ के प्रवक्‍ता गैरी राइस ने पत्रकारों से बात करते हुए ने भारत की उस घोषणा को भी सराहा है जिसमें केंद्र ने वैक्‍सीनेशन के लिए अतिरिक्‍त मदद करेगा। राइस ने कहा कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर जितनी तेजी से बढ़ी थी अब वो लगातार तेजी से नीचे आ रही है। आईएमएफ आने वाले कुछ दिनों में भारत की ग्रोथ फोरकास्‍ट को भी रिवाइज करेगा। उनके मुताबिक भारत की अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था में अहम भूमिका रखती है। इसकी वजह इसका बड़ा आकार है। इसका क्षेत्रीय और वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में भी काफी बड़ा योगदान है। आईएमएफ ने अपने इस बयान में कोरोना से होने वाली मौतों पर चिंता जताई है। आपको बता दें कि भारत में कुछ दिनों से छह हजार से अधिक मौत रिकॉर्ड की जा रही हैं जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबांधन की ही बात करें तो उन्‍होंने कहा था कि भारत ने बेहद कम समय में अपनी अधिक से अधिक आबादी को कोरोना वैक्‍सीन की खुराक देकर महामारी की रोकथाम में सफलता पाई है। सरकार ने ये भी फैसला किया है कि वो राज्‍यों को दी जाने वाली 75 फीसद वैक्‍सीन की खुराकों को खरीदेगी और सप्‍लाई करेगी। वहीं प्राइवेट अस्‍पतालों में लगाई जाने वाली वैक्‍सीन 150 रुपये प्रति खुराक दी जाएगी। आईएमएफ ने कहा है कि भारत ने युद्धस्‍तर पर इस महामारी की रोकथाम के लिए काम किया है। वैक्‍सीन के उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने कमर कस रखी है। भारत कई मोर्चों पर इस महामारी से लड़ रहा है।
कोविड वैक्‍सीन का केरल और बंगाल में हुआ पूरा इस्‍तेमाल, इस राज्‍य में सबसे ज्‍यादा बर्बाद हुए टीके नई दिल्‍ली, देश में टीकाकरण अभियान के बीच सरकार ने टीकों की बर्बादी पर आंकड़े जारी किए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोविड वैक्‍सीन की सबसे ज्यादा बर्बादी (33.95 फीसद) झारखंड में हुई है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक केरल और पश्चिम बंगाल में मई माह में कोविड-19 रोधी वैक्‍सीन की बिल्कुल भी बर्बादी नहीं हुई है। इन दोनों ही राज्यों में कोविड रोधी वैक्‍सीन की क्रमश: 1.10 लाख और 1.61 लाख खुराकें बचाई गई हैं। वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केरल में कोविड रोधी वैक्‍सीन की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक 6.37 फीसद रहा जबकि पश्चिम बंगाल में नकारात्मक 5.48 दर्ज किया गया है। बता दें कि कोविड रोधी वैक्‍सीन की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक होने का मतलब है कि हर शीशी में मौजूद अतिरिक्त खुराक का भी पूरा इस्तेमाल कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ में 15.79 फीसद जबकि मध्य प्रदेश में 7.35 फीसद कोविड रोधी वैक्‍सीन बर्बाद हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में क्रमश: 7.08 फीसद, 3.95 फीसद, 3.91 फीसद, 3.78 फीसद, 3.63 फीसद और 3.59 फीसद टीके बर्बाद हुए हैं। मई महीने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 790.6 लाख वैक्‍सीन की आपूर्ति की गई। इनमें से 610.6 लाख टीके टीकाकरण में इस्‍तेमाल हुए जबकि 658.6 लाख डोज का इस्‍तेमाल हुआ। यही नहीं कोविड वैक्‍सीन की 212.7 लाख खुराकें बच गईं। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल के मुकाबले मई में टीकाकरण कम रहा। भारत में 45 साल से ज्‍यादा 38 फीसद लोगों को सात जून तक टीके की पहली खुराक दी गई। इस बीच सरकार ने कोविड वैक्सीन से जुड़े स्टॉक, स्टोरेज टेंपरेचर से जुड़े ई-विन (इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क) के आंकड़े साझा करने से पहले केंद्र से इजाजत लेने को कहा है। सरकार का कहना है कि चूंकि यह एक संवेदनशील सूचना है इसलिए इसका इस्तेमाल केवल इस कार्यक्रम की बेहतरी के लिए होना चाहिए।
कोलकाता,बंगाल के सीमावर्ती मालदा जिले से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बांग्लादेश से अवैध तरीके से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारत में प्रवेश करते एक संदिग्ध चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि वह मालदा के मानिकचक से सटे भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से गुरुवार सुबह प्रवेश कर रहा था, उसी समय वहां ड्यूटी पर तैनात बीएसएफ की 159वीं बटालियन के जवानों ने उसकी संदिग्ध हरकतों को देखकर उसे हिरासत में ले लिया। उनके पास एक लैपटॉप भी था। वह सुबह अवैध रूप से बांग्लादेश से आया था। बांग्लादेश के वीजा वाले चीनी पासपोर्ट को भी जब्त कर लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद बीएसएफ ने उसे मानिकचक पुलिस स्टेशन को सौंप दिया। पुलिस से मिली सूचना के अनुसार, गिरफ्तार चीनी नागरिक का नाम होन जूं (36) है। वह फिलहाल मानिकचक पुलिस स्टेशन में है और उससे पूछताछ की जा रही है। वह क्यों और किस मकसद से भारत आना चाह रहा था इस बारे में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां भी उससे पूछताछ कर रही है। दरअसल सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि वह खुफिया जानकारी जुटाने के मकसद से तो कहीं भारत नहीं आ रहा था। तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उससे जानकारी जुटाई जा रही है। गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच इस समय सीमा विवाद को लेकर तनाव चल रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की सीमा से चीनी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में पहली बार बांग्लादेश सीमा से किसी चीनी नागरिक को पकड़ा गया है। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, 'पश्चिम बंगाल के मालदा में सीमावर्ती इलाके में बीएसएफ के जवानों ने आज सुबह करीब छह बजे चीनी नागरिक को रोका। जवानों ने उससे पूछताछ की तो उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। तुरंत संबंधित एजेंसियों और स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया, एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।'
नई दिल्ली,भारत के माइक्रोब्लागिंग प्लेटफार्म कू ने गुरुवार को बताया कि नाइजीरिया सरकार ने अपना एक आधिकारिक अकाउंट कू पर बनाया है। उसने कहा कि हमारी नजर अफ्रीकी राष्ट्र में अपने प्रसार पर है। पिछले सप्ताह नाइजीरिया सरकार ने अपने देश में अमेरिकी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया था। ट्विटर के साथ गतिरोध की पृष्ठभूमि में सरकार ने कू में अकाउंट बनाया। कू के सह-संस्थापक और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्ण ने कू पर एक पोस्ट में कहा कि नाइजीरिया सरकार का आधिकारिक हैंडल अब कू पर है। मजेदार बात यह है कि उन्होंने यह जानकारी ट्विटर पर भी दी। उन्होंने ट्वीट किया, कू इंडिया पर नाइजीरिया सरकार के आधिकारिक हैंडल का स्वागत है। अब हम भारत से बाहर भी पंख फैला रहे हैं। इसके पहले कू ने कहा था कि वह नाइजीरिया में उपलब्ध है और उस देश में उपयोगकर्ताओं के लिए स्थानीय भाषाओं को शामिल करने जा रहा है। कू हर उस देश के स्थानीय कानूनों का पालन करेगा जहां वह संचालित होता है। बता दें कि अलगाववादी आंदोलन के बारे में राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के एक विवादास्पद ट्वीट को हटाने को लेकर नाइजीरिया सरकार के साथ ट्विटर का विवाद गहरा गया था जिसके बाद सरकार ने उसकी सेवाओं को अपने देश में निलंबित कर दिया।
नई दिल्ली,पूरी दुनिया में भयावह तबाही का कारण बना कोरोना वायरस चालबाज चीन की कुख्यात वुहान लैब की ही उपज है। यह घातक वायरस न तो वुहान के वेट मार्केट से फैला है और न ही किसी चमगादड़ या पेंगोलिन से ही इंसानों में आया है। यह संभावना और मजबूत होती जा रही है कि प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले कोरोना वायरस को चीन की लैब में घातक बनाकर दुनिया में तबाही मचाने के लिए छोड़ा गया है। लंदन से प्रकाशित समाचार पत्र डेली मेल ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से किए गए एक अध्ययन के हवाले से कहा है कि वर्ष 2019 के आखिर में जब चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस का मामला सामने आया था, तब उससे पहले वहां के वेट मार्केट में चमगादड़ या पेंगोलिन की खरीद-बिक्री ही नहीं हुई थी। 2017 से नवंबर, 2019 तक वुहान के वेट मार्केट में 38 प्रजातियों के 50000 जानवरों की खरीद-बिक्री हुई अध्ययन के मुताबिक 2017 से नवंबर, 2019 के बीच वुहान के वेट मार्केट में 38 प्रजातियों के 50 हजार से अधिक जानवरों की खरीद-बिक्री हुई थी, लेकिन उनमें एक भी चमगादड़ या पेंगोलिन शामिल नहीं थे। इस अध्ययन के नतीजे चीन के उस के दावे को खारिज करते हैं, जिसमें वह शुरू से ही वुहान के वेट मार्केट से चमगादड़ या पेंगोलिन से मनुष्य के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की दलील देता रहा है। इस अध्ययन के नतीजे वुहान की लैब में ही कोरोना वायरस को बनाए जाने की संभावना को और मजबूत करते हैं। बाजार में मनुष्य का चमगादड़ या पेंगोलिन से सीधा संपर्क नहीं हुआ कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अब तक किए गए तमाम अध्ययनों में भी इसके वुहान लैब में बनाए जाने के पक्ष में मजबूत साक्ष्य मिले हैं, न कि इसके प्राकृतिक रूप से सामने आने के। बाजार में मनुष्य का चमगादड़ या पेंगोलिन से सीधा संपर्क नहीं हुआ : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्रिस न्यूमैन ने मेलआनलाइन से कहा कि हमारा डाटा यह निर्धारित नहीं कर सकता है कि मनुष्य कैसे कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ। इतना जरूर है कि इस बाजार में मनुष्य के चमगादड़ों या पेंगोलिन के सीधे संपर्क आने की संभावना कतई नहीं है। इस नए दावे से कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की बढ़ती मांग को भी बल मिलता है।
नई दिल्ली,भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पर डोमिनिका सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। उसे अवैध अप्रवासी घोषित कर दिया गया है। वह और उसका भांजा नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक से 12 हजार करोड़ रुपये का घोटाला करके भारत से फरार हैं। डोमिनिका सरकार द्वारा 25 मई को इसे लेकर आदेश जारी हुआ था। ज्ञात हो कि गत माह एंटीगुआ में रहने वाला यह भगोड़ा डोमिनिका में गिरफ्तार हुआ हुआ था। उसने कोर्ट जमानत याचिका दायर की है। निचली अदालत में मिली विफलता के बाद उसने जमानत पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। उसकी ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी दायर है। बता दें कि चोकसी 23 मई को एंटीगुआ एंड बारबूडा से संदेहास्पद स्थितियों में गायब हो गया था। वह वहां पर नागरिकता लेकर सन 2018 से रह रहा था। इसके बाद उसे पड़ोस के द्वीपीय देश डोमिनिका में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय उसके साथ उसकी प्रेमिका भी थी। जबकि उसके वकीलों का कहना है कि चोकसी को एंटीगुआ के जॉली हार्बर से एंटीगुआ और भारत के पुलिसकर्मी अगवा करके समुद्री मार्ग से डोमिनिका ले गए। क्यूबा में रहने की थी चोकसी की योजना मेहुल चोकसी एंटीगुआ से गुपचुप तरीके से भागकर क्यूबा जा रहा था, जहां उसकी छिपकर रहने की योजना थी। उसने अपनी प्रेमिका बारबरा जबारिका से अगली मुलाकात क्यूबा में होने की बात कही थी। बारबरा ने यह बात समाचार एजेंसी एएनआइ को बताई है। बारबरा ने बताया कि चोकसी ने उससे दो बार क्यूबा की चर्चा की थी और वहां रहने की इच्छा जताई थी। ऐसा इसलिए था कि एंटीगुआ स्थायी रूप से रहने के लिहाज से चोकसी को पसंद नहीं आ रहा था। फिर वहां उसकी मौजूदगी पर भारतीय एजेंसियों की नजर लगातार बनी हुई थी। बारबरा ने यह भी बताया कि उसे चोकसी की आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी नहीं थी। वह यूरोप की रहने वाली है और भारतीय मीडिया की खबरों से उसका वास्ता नहीं है। इसलिए उसे मेहुल चोकसी के घोटालों के बारे में कुछ नहीं पता था। वह एक दोस्त की तरह से उससे मिलती थी।
नई दिल्‍ली,केंद्रीय कैबिनेट में बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने बाजार सत्र 2021-22 के लिए खरीफ की फसलों पर एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी। केंद्र सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पिछले साल के मुकाबले एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी तिल की फसल (452 रुपये प्रति कुंतल) पर की है। इसके बाद तुअर और उड़द (दोनों 300 रुपये प्रति कुंतल) पर एमएसपी बढ़ाई गई हैं। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में खरीफ की फसलों का MSP घोषित करने का निर्णय हुआ है। धान जो सामान्य स्तर का है उसका भाव 1868 रुपये प्रति क्विंटल था, 2021-22 में ये 1940 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। बाजरा जो 2020-21 में 2150 रुपये प्रति क्विंटल था, वो अब 2250 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इन फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि खरीफ सीजन के पहले ही MSP घोषित की है और उसे बढ़ाया भी गया है। रेलवे यातायात ज्यादा सुरक्षित करने के लिए 4G स्पेक्ट्रम का रेलवे को ज्यादा आवंटन किया गया है। अब तक रेलवे 2G स्पेक्ट्रम का उपयोग करती थी। यही नहीं ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन की व्यवस्था अब रेलवे में बहुत ज्यादा मजबूत की जा रही है। दो गाड़ियों का टकराव न हो, इसके लिए जो व्यवस्था बनी है, उसे 4 भारतीय कंपनियों ने बनाया है। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ विपणन मौसम 2021-22 के लिए सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने मंजूरी दी है। सरकार के फैसले का लाभ देश के करोड़ों किसानों को मिलेगा... केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते सात वर्षों में लगातार कृषि के क्षेत्र में एक के बाद एक अनेक ऐसे निर्णय हुए जिससे किसान की आमदनी बढ़े, किसान महँगी फसलों की ओर आकर्षित हो, किसान के घर में खुशहाली आये और खेती फायदे का सौदा बने। सरकार का MSP को उत्पादन लागत के 1.5 गुना (अथवा उत्पादन लागत पर कम से कम 50 फीसद मुनाफा) के स्तर पर निर्धारित करने की दिशा में यह एक क्रन्तिकारी फैसला है। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों को परोक्ष रूप से संदेश देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि MSP है और MSP आगे भी रहेगी। लगातार रबी और खरीफ की एमएसपी घोषित भी की जा रही है। एमएसपी चल रही है, MSP बढ़ रही है और MSP पर खरीद भी बढ़ रही है। कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार के एक और फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि फास्फेटिक उर्वरकों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने इन उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्‍होंने कहा- प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसान हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को डीएपी खाद का एक बैग 2400 रु की जगह 1200 रु में ही मिलेगा।
नई दिल्ली, जापानी ब्रोकरेज Nomura की एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें Nomura ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीकाकरण नीति की समीक्षा 'कायापलट' वाली थी और नवंबर तक खाद्य योजना के विस्तार के साथ इसे जोड़ने से सरकार अपने बजटीय राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक सकती है। नोमुरा ने कहा कि नवंबर तक 80 करोड़ परिवार को मुफ्त राशन के विस्तार के साथ सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण पर 1.05 लाख करोड़ रुपये या सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत तक खर्च होगा। इस वजह से सरकार 6.8 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से फिसल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की घटना देश की सॉवरेन रेटिंग पर भी असर डाल सकती है, जिसकी समीक्षा साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में होनी है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना और विपक्ष की मांगों के बाद पीएम मोदी ने सोमवार को घोषणा की कि केंद्र जून 2021 से 75 प्रतिशत टीके खरीदेगा। रिपोर्ट में कहा गया, COVID ​​-19 की दूसरी लहर कम हो रही, ऐसे में जीवन और आजीविका दोनों से निपटने के लिए मुफ्त टीकों और मुफ्त भोजन का वितरण आवश्यक है। पिछले कुछ महीनों में वैक्सीन खरीद पर विकेन्द्रीकृत रणनीति राज्यों के लिए कारगर नहीं रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि टीकाकरण नीति में सुधार (केंद्रीकृत वैक्सीन खरीद पर वापस लौटने) से राज्यों के लिए टीकों की बेहतर उपलब्धता संभव होगी, जो आने वाले महीनों में रिकवरी को बनाए रखने के लिए जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ टीकाकरण पर अतिरिक्त 14,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसमें केंद्र दो बार के डोज के लिए प्रति व्यक्ति औसतन 725 रुपये खर्च करेगा। मुफ्त भोजन कार्यक्रम के मामले में सरकार ने कहा है कि वह पहले ही अप्रैल और मई में लगभग 26,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, और इसे नवंबर तक बढ़ाने से लागत में 65,000 करोड़ रुपये और जुड़ने की संभावना है।
नई दिल्ली,अगले सप्ताह लोक लेखा समिति यानी पीएसी (Public Accounts Committee, PAC) की बैठक बुलाई गई है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच यह पहली स्थायी समिति की बैठक होगी। 16 जून को होने जा रही इस बैठक में टीकाकरण नीति की समीक्षा किए जाने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से कोविड राहत कार्यो का ब्योरा मांगा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को सांसदों से उनके निर्वाचन क्षेत्र में किए गए कोविड राहत कार्यो का ब्योरा साझा करने का आग्रह किया। सांसदों को भेजे गए पत्र में बिरला ने कहा, 'मुझे विश्वास है कि आप इस प्रतिकूल परिस्थिति में अपना ज्यादा समय लोगों की मदद में बिता रहे होंगे। आपने लोगों को न सिर्फ नैतिक समर्थन दिया होगा, बल्कि उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहे होंगे।' लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, 'यह वक्त की मांग है कि आप अपने स्तर पर चलाए गए राहत कार्यो और अनुभवों को पूरे देश के साथ साझा करें, ताकि ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आदर्श व्यवहार का विकास किया जा सके।' राजस्थान के कोटा से सांसद बिरला ने घोषणा की है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में इंजीनियरिंग या मेडिकल की तैयारी करने वाले उन छात्रों को मुफ्त में कोचिंग और आवासीय सुविधा दी जाएगी, जिन्होंने इस महामारी में माता-पिता या परिवार के कमाने वाले सदस्यों को खो दिया है।
नई दिल्ली,मेहुल चोकसी की गर्लफ्रेंड होने से इनकार करते हुए बारबरा जबैरिकाने बुधवार को 'अपहरण' के मामले से साफ इनकार किया। दरअसल, मेहुल चोकसी ने अपहरण में बारबरा के शामिल होने का आरोप लगाया और दावा किया कि बारबरा ने उसकी मदद की कोशिश भी नहीं की। हालांकि बारबरा का कहना है इस मामले से उसका लेना-देना नहीं है। बता दें कि डोमिनिका हाई कोर्ट में भगोड़े चोकसी की जमानत पर सुनवाई 11 जून तक स्थगित कर दी गई है। बारबरा ने बताया कि पिछले साल चोकसी से मुलाकात हुई और दोस्ती बढ़ाने की कोशिश में उसने हीरे और ब्रेसलेट का उपहार दिया था लेकिन ये गहने नकली थे। बारबरा ने आगे कहा, 'किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया था। अपहरण जैसा कुछ नहीं, मैंने कई इंटरव्यू में कहा है कि जो लोग जॉली हार्बर इलाके से परिचित हैं उन्हें पता है कि यहां से किसी का अपहरण होना असंभव है क्योंकि यह इलाका काफी सुरक्षित है।' बारबरा से पूछा गया था कि मेहुल चोकसी के अलावा किसी और भारतीय ने उससे संपर्क किया था या नहीं। बारबरा ने कहा, 'मैंने यह साफ कर दिया है कि मैं चोकसी की गर्लफ्रेंड नहीं थी। मेरा अपना बिजनेस है। मुझे किसी से कैश, समर्थन, होटल बुकिंग, गहने या कुछ और लेने की जरूरत नहीं।' बारबरा ने बताया, 'मैं यूरोप की हूं, यहीं रहती हूं और भारत की खबरों और घटनाओं को नहीं देखती। अपराधियों, धोखेबाजों की लिस्ट से भी किसी तरह का मतलब नहीं रखती इसलिए मेहुल के वास्तविक नाम से परिचित नहीं थी न ही पिछले सप्ताह तक उसके बैकग्राउंड से अवगत थी। मेरा मानना है कि एंटीगुआ (Antigua) में उसे या उसके बारे में किसी को पता होगा।' बारबरा ने बताया, 'मैंने इन तस्वीरों को देखा कि वह पहले कैसा दिखता था और अब मुझे लगता है कि उसका वजन काफी कम हो गया है और बिल्कुल अलग दिखता है। मुझे नहीं लगता कि छुट्टी मनाने कैरिबिया में आया कोई शख्स उसे पहचान सकेगा कि वह मेहुल चोकसी है।' बारबरा जबैरिका ने पहले बताया था वह मेहुल चोकसी की दोस्त थीं। मेहुल ने फर्जी नाम 'राज' बता बारबरा से दोस्ती किया था। बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले को अंजाम दे देश से फरार मेहुल चोकसी अभी डोमिनिका पुलिस की हिरासत में है। बता दें कि चोकसी ने खुद के अपहरण का आरोप लगाया जिसमें अपनी कथित गर्लफ्रेंड बारबरा जराबिका के शामिल होने की बात कही है।
नई दिल्‍ली । भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक अहम ऑर्गेन आर्थिक और सामाजिक परिषद (इकनॉमिक एंड सोशल कांउसिल) के लिए चुना गया है। ये यूएन प्रमुख छह भागों में से एक है। भारत को वर्ष 2022-2024 के लिए चुना गया है। भारत अब इसके 54 सदस्‍यों में से एक है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के राजदूत टीएस त्रीमूर्ति ने इसमें चयन को लेकर सभी का धन्‍यवाद किया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो उन सभी का धन्‍यवाद अदा करते हैं जिन्‍होंने भारत में पक्ष में वोट दिया। ये परिषद संयुक्‍त राष्‍ट्र के विभिन्‍न लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए एक अहम भूमिका अदा करती है। ये संयुक्‍त राष्‍ट्र का एक ऐसा केंद्र है जहां पर डिबेट के जरिए विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है कि आगे बढ़ने और यूएन के लक्ष्‍य पूरा करने का मार्ग तय किया जाता है। ये संयुक्‍त राष्‍ट्र की बैठकों और सम्‍मेलनों के लिए भी उत्‍तररादयी होती है। सोमवार को हुए चुनाव में भारत को इस परिषद का सदस्‍य एशिया प्रशांत क्षेत्र के तौर पर चुना गया है। इसमें अफगानिस्‍तान, कजाखिस्‍तान और ओमान शामिल थे। अफ्रीकी देशों में से मॉरिशस, ट्यूनेशिया, तंजानिया, एसवाटिनी और कोट डी आईवोरे को, पूर्वी यूरोपीय देशों में से क्राेएशिया, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अमेरिका और केरेबियन देशों से बेल्‍जी, चिली और पेरू को इसके लिए चुना गया है। सोमवार को हुए एक चुनााव में जनवरी से दिसंबर 2022 के लिए ग्रीस, न्‍यूजीलैंड, डेनमार्क ओर इजरायल को 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 22 तक के लिए चुना गया है। आपको बता दें कि भारत फिलहाल में वर्ष 2021-22 के लिए यूएन सुरक्षा परिषद में अस्‍थायी सदस्‍य के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा है। जहां तक इकोसोक की बात है तो आपको बता दें कि इसका गठन 45 में किया गया था। ये यूएन के छह प्रमुख भागों में से एक है। इसके 54 सदस्‍यों को जनरल असेंबली द्वारा तीन वर्ष के लिए चुना जाता है। क्षेत्रिय आधार पर इसमें किसी को सदस्‍यता मिलती है। जैसे अफ्रीकी देशों के लिए 14, एशियाई देशों के लिए 11, यूरोपीय देशों के लिए 6, दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए 10, केरिबियाई और पश्चिमी यूरोप समेत कुछ अन्‍य क्षेत्रों के लिए 13 सीटें हैं।
नई दिल्‍ली । भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक अहम ऑर्गेन आर्थिक और सामाजिक परिषद (इकनॉमिक एंड सोशल कांउसिल) के लिए चुना गया है। ये यूएन प्रमुख छह भागों में से एक है। भारत को वर्ष 2022-2024 के लिए चुना गया है। भारत अब इसके 54 सदस्‍यों में से एक है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के राजदूत टीएस त्रीमूर्ति ने इसमें चयन को लेकर सभी का धन्‍यवाद किया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो उन सभी का धन्‍यवाद अदा करते हैं जिन्‍होंने भारत में पक्ष में वोट दिया। ये परिषद संयुक्‍त राष्‍ट्र के विभिन्‍न लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए एक अहम भूमिका अदा करती है। ये संयुक्‍त राष्‍ट्र का एक ऐसा केंद्र है जहां पर डिबेट के जरिए विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है कि आगे बढ़ने और यूएन के लक्ष्‍य पूरा करने का मार्ग तय किया जाता है। ये संयुक्‍त राष्‍ट्र की बैठकों और सम्‍मेलनों के लिए भी उत्‍तररादयी होती है। सोमवार को हुए चुनाव में भारत को इस परिषद का सदस्‍य एशिया प्रशांत क्षेत्र के तौर पर चुना गया है। इसमें अफगानिस्‍तान, कजाखिस्‍तान और ओमान शामिल थे। अफ्रीकी देशों में से मॉरिशस, ट्यूनेशिया, तंजानिया, एसवाटिनी और कोट डी आईवोरे को, पूर्वी यूरोपीय देशों में से क्राेएशिया, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अमेरिका और केरेबियन देशों से बेल्‍जी, चिली और पेरू को इसके लिए चुना गया है। सोमवार को हुए एक चुनााव में जनवरी से दिसंबर 2022 के लिए ग्रीस, न्‍यूजीलैंड, डेनमार्क ओर इजरायल को 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 22 तक के लिए चुना गया है। आपको बता दें कि भारत फिलहाल में वर्ष 2021-22 के लिए यूएन सुरक्षा परिषद में अस्‍थायी सदस्‍य के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा है। जहां तक इकोसोक की बात है तो आपको बता दें कि इसका गठन 45 में किया गया था। ये यूएन के छह प्रमुख भागों में से एक है। इसके 54 सदस्‍यों को जनरल असेंबली द्वारा तीन वर्ष के लिए चुना जाता है। क्षेत्रिय आधार पर इसमें किसी को सदस्‍यता मिलती है। जैसे अफ्रीकी देशों के लिए 14, एशियाई देशों के लिए 11, यूरोपीय देशों के लिए 6, दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए 10, केरिबियाई और पश्चिमी यूरोप समेत कुछ अन्‍य क्षेत्रों के लिए 13 सीटें हैं।
नई दिल्ली, करीब एक साल से अधिक समय से चीन और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंंध जारी है। इस क्रम में मंगलवार को चीन के कुछ फाइटर जेट पूर्वी लद्दाख के विपरीत दिशा में अभ्यास करते देखे गए। भारत के अनुसार, इनकी संख्या दो दर्जन के करीब होगी। भारत और चीन के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव में कमी नहीं आई है। इस क्रम में अब चीनी वायु सेना (Chinese Air Force) का यह बड़ा अभ्यास पूर्वी लद्दाख के विपरीत में मौजूद बीजिंग के एयरबेस से किया गया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, 'करीब 21-22 चीनी फाइटर जेट में प्रमुखता से J-11 थे जो Su-27 फाइटर जेट की चीनी कॉपी है और कुछ J-16 फाइटर जेट पूर्वी लद्दाख में भारतीय इलाके की विपरीत दिशा में अभ्यास कर रहे थे।' चीन के इन फाइटर जेट की गतिविधियां इसके होतन (Hotan), गर गुनसार (Gar Gunsa) और काशगर एयरफील्ड एयरबेस से की गई। ये सभी हाल में ही अपग्रेउ किए गए ताकि सभी तरह के फाइटर जेट को यहां से सपोर्ट मिल सके। सूत्रों के अनुसार, अभ्यास के दौरान ये सभी चीनी एयरक्राफ्ट अपने ही क्षेत्र के भीतर रहे। बता दें कि पिछले साल से लद्दाख में भारतीय फाइटर जेट गतिविधियां भी लद्दाख में सक्रिय है भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) भी नियमित रूप से लद्दाख के आसमान में अपने राफेल फाइटर जेट का राउंड लगवाती रहती है । सूत्रों ने बताया कि हालांकि चीन ने पैंगोंग झील के इलाके से अपनी सेना की वापसी कर ली है लेकिन अपने एयर डिफेंस सिस्टम को नहीं हटाया है ज िसमें HQ-9 और HQ-16 शामिल है। ये दोनों ही लंबी दूरी तक निशाना साधने की क्षमता रखते हैं। चीन की वायु सेना व उसके होतन, गुरगुनसा, काशघर, हॉपिंग, कोंका जोंग, लिंझी और पंगट एयरबेस पर भारत की पैनी नजर रहती है।
नई दिल्ली, करीब एक साल से अधिक समय से चीन और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंंध जारी है। इस क्रम में मंगलवार को चीन के कुछ फाइटर जेट पूर्वी लद्दाख के विपरीत दिशा में अभ्यास करते देखे गए। भारत के अनुसार, इनकी संख्या दो दर्जन के करीब होगी। भारत और चीन के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव में कमी नहीं आई है। इस क्रम में अब चीनी वायु सेना (Chinese Air Force) का यह बड़ा अभ्यास पूर्वी लद्दाख के विपरीत में मौजूद बीजिंग के एयरबेस से किया गया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, 'करीब 21-22 चीनी फाइटर जेट में प्रमुखता से J-11 थे जो Su-27 फाइटर जेट की चीनी कॉपी है और कुछ J-16 फाइटर जेट पूर्वी लद्दाख में भारतीय इलाके की विपरीत दिशा में अभ्यास कर रहे थे।' चीन के इन फाइटर जेट की गतिविधियां इसके होतन (Hotan), गर गुनसार (Gar Gunsa) और काशगर एयरफील्ड एयरबेस से की गई। ये सभी हाल में ही अपग्रेउ किए गए ताकि सभी तरह के फाइटर जेट को यहां से सपोर्ट मिल सके। सूत्रों के अनुसार, अभ्यास के दौरान ये सभी चीनी एयरक्राफ्ट अपने ही क्षेत्र के भीतर रहे। बता दें कि पिछले साल से लद्दाख में भारतीय फाइटर जेट गतिविधियां भी लद्दाख में सक्रिय है भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) भी नियमित रूप से लद्दाख के आसमान में अपने राफेल फाइटर जेट का राउंड लगवाती रहती है । सूत्रों ने बताया कि हालांकि चीन ने पैंगोंग झील के इलाके से अपनी सेना की वापसी कर ली है लेकिन अपने एयर डिफेंस सिस्टम को नहीं हटाया है ज िसमें HQ-9 और HQ-16 शामिल है। ये दोनों ही लंबी दूरी तक निशाना साधने की क्षमता रखते हैं। चीन की वायु सेना व उसके होतन, गुरगुनसा, काशघर, हॉपिंग, कोंका जोंग, लिंझी और पंगट एयरबेस पर भारत की पैनी नजर रहती है।
नई दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को प्रमुख स्वीडन रक्षा कंपनियों को भारत में विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य उपकरणों और प्लेटफार्मों के उत्पादन के निवेश हेतु भारत एक आकर्षक जगह है। भारत-स्वीडन रक्षा उद्योग सहयोग पर एक सम्मेलन के दौरान संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा उद्योगों को न केवल भारतीय आवश्यकताओं को पूरा करने बल्कि वैश्विक मांगों को पूरा करने में मदद करने के लिए सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। रक्षा मंत्री ने स्वचालित मार्ग से 74 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सरकारी मार्ग से 100 फीसद तक की अनुमति देने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी केंद्रित एफडीआई नीति भारतीय उद्योगों को विशिष्ट और सिद्ध सैन्य प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में स्वीडिश उद्योगों के साथ सहयोग करने में सक्षम बनाएगी। 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' रक्षा मंत्री बोले, 'स्वीडन और भारतीय रक्षा उद्योगों के लिए सह-उत्पादन और सह-विकास की भारी गुंजाइश है। भारतीय उद्योग स्वीडिश उद्योगों को भी कलपुर्जों की आपूर्ति कर सकता है।' उन्होंने कहा कि भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मिशन 'आत्मनिर्भर भारत' लागत प्रभावी गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन के लिए हैं और इसका मूल आदर्श - 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में लाभ के अवसर अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत में विश्व स्तरीय सार्वजनिक और निजी जहाज निर्माण कंपनियों के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ एक मजबूत जहाज निर्माण उद्योग है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड द्वारा निर्मित जहाज वैश्विक मानकों के हैं और अत्यधिक लागत प्रभावी हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इस अवसर पर स्वीडिश फर्मों को उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के समर्पित रक्षा गलियारों में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता हूं, जहां वे राज्य सरकारों द्वारा दिए जा रहे अनूठे प्रोत्साहनों और भारत में अत्यधिक कुशल कार्यबल की उपलब्धता से बहुत लाभ उठा सकते हैं।'
जोहान्सबर्ग,62 लाख रैंड की धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में महात्मा गांधी की परपोती आशीष लता रामगोबिन को डरबन की एक अदालत ने सात साल जेल की सजा सुनाई है। उन पर भारत से एक खेप लाने के लिए इम्पोर्ट और कस्टम ड्यूटी को मैनेज करने के नाम पर व्यावसायी एसआर महाराज से 62 लाख रैंड (करीब 3.23 करोड़ रुपये) हड़पने का आरोप था। इससे होने वाले लाभ को व्यावसायी के साथ बांटने का भी उन्होंने वादा किया था। इला गांधी और दिवंगत मेवा रामगोबिन की बेटी हैं लता रामगोबिन लता रामगोबिन प्रसिद्ध अधिकार कार्यकर्ता इला गांधी और दिवंगत मेवा रामगोबिन की बेटी हैं। डरबन विशेष आर्थिक अपराध अदालत ने उन्हें दोषसिद्धि और सजा दोनों के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जब 2015 में लता रामगोबिन के खिलाफ मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो राष्ट्रीय अभियोजन प्राधिकरण (एनपीए) के ब्रिगेडियर हंगवानी मुलौदजी ने कहा था कि उन्होंने संभावित निवेशकों को यह समझाने के लिए कथित रूप से जाली चालान और दस्तावेज प्रदान किए थे कि भारत से लिनन के तीन कंटेनर भेजे जा रहे हैं। उस समय लता रामगोबिन को 50,000 रैंड की जमानत पर रिहा किया गया था। फुटवियर डिस्ट्रीब्यूटर्स के डायरेक्टर महाराज से अगस्त 2015 में मुलाकात की थी सोमवार को लता रामगोबिन के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवियर डिस्ट्रीब्यूटर्स के डायरेक्टर महाराज से अगस्त 2015 में मुलाकात की थी। महाराज की कंपनी कपड़े, लिनन और जूते का आयात, निर्माण और बिक्री करती है। इसके अलावा वह दूसरी कंपनियों को प्रॉफिट-शेयर के आधार पर फाइनेंस भी करती है। उस मुलाकात के दौरान लता रामगोबिन ने महाराज को बताया था कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी अस्पताल समूह नेटकेयर के लिए लिनन के तीन कंटेनर आयात किए हैं। लता रामगोबिन ने नेटकेयर के बैंक खाते से लेन-देन करने की पुष्टि की एनपीए की प्रवक्ता नताशा कारा ने सुनवाई के दौरान बताया कि लता राम गोबिन ने कहा था कि उन्हें इम्पोर्ट कास्ट और कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने के लिए आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और हार्बर बंदरगाह पर सामान क्लियर कराने के लिए पैसे की आवश्यकता थी। नताशा कारा ने बताया, लता ने महाराज को सलाह दी थी कि सामान को क्लियर करवाने के लिए उन्हें 62 लाख रैंड की जरूरत है। बाद में उन्होंने माल डिलीवर करने और भुगतान के सुबूत के तौर पर नेटकेयर का चालान महाराज को भेज दिया था। कारा ने कहा, लता रामगोबिन ने नेटकेयर के बैंक खाते से लेन-देन करने की पुष्टि की थी। रामगोबिन की पारिवारिक साख और नेटकेयर के दस्तावेज के कारण महाराज ने कर्ज लेने के लिए उनके साथ लिखित समझौता किया था। हालांकि, जब महाराज को दस्तावेज के फर्जी होने का पता चला तो उन्होंने आपराधिक आरोप लगाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्‍होंने कहा है कि देश के सभी नागरिकों को भारत सरकार मुफ्त वैक्‍सीन लगाएगी। 21 जून से इसकी शुरुआत होगी। इसके लिए राज्‍यों को फ्री वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराई जाएगी। सोमवार को देश को संबोधित करते हुए पीएम ने यह घोषणा की। कोरोना की दूसरी लहर के बीच पीएम ने यह संबोधन किया। पीएम ने कहा कि भारत कोरोना की लहर के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। कई लोगों ने अपनों को खोया है। ऐसे परिवारों के प्रति उन्‍होंने संवेदना जताई। पीएम ने बीते 100 सालों में इसे सबसे बड़ी महामारी बताया। उन्‍होंने कहा कि इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने कभी नहीं देखी थी। पिछले सवा साल में नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड से लड़ने के लिए पिछले सवा साल में देश में नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सि‍जन की मांग बढ़ गई थी। इसे पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम हुआ। ऑक्सि‍जन सप्‍लाई को पूरा करने के लिए सरकार के सभी तंत्र काम में लग गए। नेजल वैक्‍सीन पर र‍िसर्च जारी उन्‍होंने बताया कि नेजल वैक्‍सीन पर भी रिसर्च हो रही है। इसके चलते वैक्‍सीन को सिरिंज से न लेकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। अगर टेस्‍ट में कामयाबी मिली तो वैक्सीनेशन की मुह‍िम में और तेजी आएगी। बंद शब्‍दों में कांग्रेस पर हमला मोदी ने बंद शब्‍दों में कांग्रेस की पिछली सरकारों पर भी हमला किया। पीएम बोले कि कोरोना से लड़ाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज अगर हमारे पास वैक्सीन नहीं होती तो भारत जैसे विशाल देश की क्या स्थिति होती? कई दशक पहले भारत को विदेश से वैक्सीन लेने के लिए दशकों लग जाते थे। भारत ने आज एक साल के अंदर 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन लॉन्‍च कर दी। 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज पीएम ने कहा कि देश में अब तक 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। आने वाले दिनों में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बढ़ने वाली है। देश में 7 विभिन्न कंपनियां वैक्सीन का उत्पादन कर रही हैं। अन्य 3 वैक्सीन का ट्रायल भी चल रहा है। बच्चों के लिए भी दो वैक्सीन का ट्रायल जारी है। फ्री वैक्‍सीनेशन करेगी केंद्र सरकार पीएम ने कहा कि सरकार ने फैसला लिया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 फीसदी काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन 2 सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइन के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। 21 जून से देश के हर राज्य में 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों के लिए भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। केंद्र-राज्‍य की रस्‍साकशी खत्‍म पीएम बोले कि वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा भारत सरकार खुद खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब कई राज्‍य अपने-अपने यहां वैक्‍सीन की किल्‍लत की बात कह रहे हैं। इसके लिए वे केंद्र सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। प्राइवेट अस्‍पताल खरीद सकेंगे 25% वैक्‍सीन अभी देश में बन रही वैक्सीन में से 25 फीसदी प्राइवेट हॉस्पिटल सीधे खरीद सकते हैं। यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। ऐसे अस्पताल वैक्सीन की तय कीमत के ऊपर एक डोज पर अधिकतम 150 रुपये ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के पास ही रहेगा। दिवाली तक जारी रहेगी पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना पीएम ने बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। इस स्‍कीम के तहत नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने राशनकार्ड धारकों को मई और जून महीने में प्रति व्यक्ति 5 किलो अतिरिक्त अन्न (चावल/गेहूं) मुफ्त में उपलब्ध कराया। पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान मार्च में लॉकडाउन के वक्‍त इस योजना का ऐलान हुआ था।
दुबई कोरोना वायरस के संक्रमण से इजरायल के सबसे बड़े दुश्मन अली अकबर मोहताशमीपोर की 74 साल की उम्र में मौत हो गई है। लेबनान के आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह का यह संस्थापक इजरायल के खिलाफ हमेशा जहर उगलता रहा है। यही कारण है कि 1984 में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने पुस्तक बम हमले में इसे मारने की भी कोशिश की थी। संयोग से इस हमले में अली अकबर की मौत तो नहीं हुई, लेकिन उसका एक हाथ उड़ गया था। अयातुल्लाह खमनेई के करीबी थे अली अकबर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खमनेई के विश्वस्त सहयोगी रह चुके अली अकबर ने संपूर्ण पश्चिम एशिया में 1970 के दशक में मुस्लिम उग्रवादी समूहों के साथ गठबंधन किया। इस्लामिक क्रांति के बाद उन्होंने ईरान में अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड की स्थापना की और सीरिया में राजदूत के रूप में बल को क्षेत्र तक ले गये जहां हिजबुल्ला की स्थापना में मदद मिली। 1984 में मोसाद ने किया था पुस्तक बम से हमला पत्रकार रोनेन बर्गमैन की पुस्तक राइस एंड किल फर्स्ट के अनुसार, इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने 1984 में वैलेंटाइन डे के रोज उन्हें मारने के लिये एक पुस्तक भेजा थी जिसके अंदर बम रखा था। अली अकबर ने जैसे ही पुस्तक को खोला, उनका दाहिना हाथ और बायें हाथ की दो उंगली धमाके में उड़ गयी थी । हालांकि वह इस विस्फोट में जीवित बच गये। बाद में अली अकबर ईरान के आतंरिक मामलों के मंत्री बने। ईरान की राजनीति में लंबे समय तक रहे सक्रिय बाद में वह इस्लामी गणराज्य के धर्म आधारित शासन को अंदर से बदलने के उम्मीद में धीरे-धीरे सुधारवादियों के साथ हो गये। उन्होंने 2009 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की फिर से हुई विवादित जीत के बाद देश के हरित आंदोलन में विपक्षी नेताओं मीर हुसैन मौसवी और महदी करौबी का समर्थन किया। अली अकबर ने उस समय कहा था कि लोगों की इच्छा के समक्ष कोई भी ताकत खड़ा नहीं रह सकती है। तेहरान के एक अस्पताल में हुआ निधन ईरान की सरकारी संवाद एजेंसी ईरना की खबर में कहा गया कि अली अकबर का उत्तरी तेहरान के एक अस्पताल में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निधन हो गया। ईरान में विवादित चुनाव के बाद पिछले दस साल से अधिक समय से धमगुरु इराक के शिया बहुल आबादी वाले नजफ में रहते आ रहे थे। नजफ शिया मुसलमानों का सबसे पवित्र शहर माना जाता है। वे सिर पर काले रंग का साफा बांधते थे। ईरान के राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार ने जताया दुख न्यायपालिका के कठोर रुख रखने वाली प्रमुख इब्राहिम रईसी ने अली अकबर के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। ईरान में अगले सप्ताह होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में रईसी प्रमुख उम्मीदवार माने जा रहे हैं। अली अकबर का जन्म तेहरान में 1947 में हुआ था। वह निर्वासन में रह रहे मौलवी के रूप में खामेनी से मिले थे। शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने अली अकबर को ईरान से निकाल दिया था और वह नजफ में रह रहे थे।
बुडापेस्ट पाकिस्तान और श्रीलंका को अपने कर्ज के जाल में फांसने वाले चीन के खिलाफ अब दुनिया के कई देश खुलकर सामने आ रहे हैं। यूरोप के सबसे छोटे देशों में शुमार लिथुआनिया ने तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वकांक्षी मिशन सीईईसी को छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इस परियोजना के तहत चीन मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। वहीं, चीन को दूसरा झटका हंगरी में लगा है, जहां राजधानी बुडापेस्ट में बनने वाली चीनी यूनिवर्सिटी के कैंपस के विरोध में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए संसद का घेराव किया। यूरोपीय देशों में चीन के खिलाफ बढ़ सकता है विद्रोह यूरोप में चीन के खिलाफ बढ़ता विद्रोह आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दरअसल, चीन की योजना यूरोप में अमेरिका की खाली की हुई जगह को भरना है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका का यूरोपीय देशों के साथ कई मुद्दों पर विवाद हुआ था। चीन को इसमें अवसर दिखाई दिया और वह बिना देर किए यूरोपीय देशों के बीच पैठ जमाने में जुट गया। पिछले साल के अंत में चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने यूरोपीय देशों का दौरा कर द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की पहल की थी। बुडापेस्ट में हजारों लोगों ने संसद तक किया मार्च इसी शनिवार को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हजारों लोगों ने चीन की फुडान यूनिवर्सिटी की कैंपस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए संसद तक मार्च निकाला था। लोगों का कहना है कि चीन अपनी यूनिवर्सिटी के जरिए उनके देश में कम्युनिस्ट विचारधारा को फैलाने काम करेगा। इतना ही नहीं, इस कैंपस के बनने से हंगरी की उच्च शिक्षा के स्तर में कमी आएगी। हंगरी को भारी मात्रा में कर्ज दे रहा चीन हंगरी की सरकार और चीन के बीच काफी मजबूत संबंध है। इसके बावजूद वहां के लोगों के विरोध के कारण इस यूनिवर्सिटी के निर्माण का काम प्रभावित हुआ है। इस यूनिवर्सिटी के कैंपस को करीब 1.8 अरब डॉलर की लागत से बनाया जा रहा है। यह राशि पिछले साल हंगरी में शिक्षा पर खर्च किए गए कुल बजट से कई गुना ज्यादा है। लेकिन, लोगों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन के कारण हंगरी की सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लिथुआनिया और चीन में क्या है बवाल 28 लाख की आबादी वाला देश लिथुआनिया ने चीन की सीईईसी फोरम को छोड़ दिया है। इस फोरम को 2012 में चीन ने शुरू किया था। इसमें यूरोप के 17 देश शामिल हैं, जबकि 18वां देश खुद चीन है। लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने चीन के सीईईसी फोरम को विभाजनकारी बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप के बाकी देशों को भी चीन के इस फोरम को छोड़ देना चाहिए। यूरोप के इस छोटे से देश के कदम को चीन के लिए चुनौती बताया जा रहा है।
नई दिल्ली,कोरोना काल में एक बार फिर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के लिए दो अहम घोषणाएं की हैं। ये घोषणाएं कोरोना के खिलाफ चल रहे युद्ध के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री ने पहली घोषणा की कि 21 जून से 18 वर्ष से ऊपर की आयु के देश के सभी नागरिकों को वैक्सीन मुफ्त लगेगी। केंद्र सरकार, प्रत्येक राज्य को इसके लिए मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद खरीदेगी और फिर इसे राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। दूसरी महत्पूर्ण घोषणा 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' को अब दीपावली तक आगे बढ़ाने की हुई है। मतलब नवंबर-2021 तक केंद्र सरकार 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध कराएगी। विस्तार से पढ़ें प्रधानमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें - देश के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, कोरेाना की दूसरी लहर की लड़ाई जारी है। अन्य देशों की तरह भारत इस पीड़ा से गुजरा है। कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया है। बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। उन्होंने कहा, आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं। कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? पीएम मोदी ने कहा, हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने 1 साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो मेड इन इंडिया वैक्सीन्स लॉन्च कर दी। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश ने, वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नही है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। उन्होंने कहा पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है। राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं। पीएम मोदी ने कहा, देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए एज ग्रुप क्यों बनाए गए? प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। उन्होंने कहा कि 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में पीएम मोदी ने कहा कि आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है। यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा, जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है।
नई दिल्ली,कोरोना वायरस के चीन के वुहान लैब से बाहर आने की संभावना मजबूत होती जा रही है। दुनिया भर के विज्ञानियों की तरफ से इसके समर्थन में लगातार साक्ष्य और तर्क दिए जा रहे हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के विज्ञानियों ने पिछले साल ही कोरोना वायरस के वुहान लैब से लीक होने की तरफ इशारा किया था, लेकिन उनके दावे को खारिज कर दिया गया था। विलक्षण समानता का जिक्र दिल्ली आइआइटी के कुसुम स्कूल आफ बायोलॉजिकल साइंसेज के जीवविज्ञानियों की एक टीम ने 22 पेज का एक शोध पत्र तैयार किया था। मुद्रण से पहले पिछले साल 31 जनवरी को इसका बायोआरसिव पर प्रकाशन हुआ था। इसके मुताबिक विज्ञानियों ने सार्स-कोव-2 और एचआइवी के विभिन्न पहलुओं के बीच विलक्षण समानता का जिक्र किया था। वायरस की पहचान मुश्किल विज्ञानियों ने नोवेल कोरोना वायरस के ग्लाइकोप्रोटीन में चार ऐसे इंसर्ट पाए थे, जो किसी दूसरे कोरोना वायरस में नहीं देखे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन इंसर्ट के चलते वायरस की पहचान मुश्किल हो जाती है और इंसान की कोशिकाओं में प्रवेश करने के बाद यह तेजी से फैलता है। हालांकि, आलोचना के बाद इस शोध पत्र को साइट से जल्द ही हटा लिया गया था। वुहान लैब से लीक के समर्थन में ठोस साक्ष्य वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित अपने तरह का यह पहला अध्ययन था, जिसमें कोरोना वायरस को कृत्रिम तरीके से बनाने की संभावना व्यक्त की गई थी। अब तक विभिन्न विज्ञानियों और विशेषज्ञों ने दमदार साक्ष्यों के आधार पर कहना शुरू कर दिया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से लीक हुआ है। एक दिन पहले ही पुणे के विज्ञानी दंपती राहुल बाहुलिकर और मोनाली राहलकर ने ऐसी ही संभावना जताई थी। ये दोनों इंटरनेट पर बने ड्रास्टिक समूह के सदस्य हैं, जो कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने की कोशिशों में जुटा है। जीनोम संरचना में छेड़छाड़ के लिए कुख्यात रहा है चीन दरअसल, चीन जानवरों के जीन में बदलाव करने का प्रयोग करने के लिए कुख्यात रहा है। उसने जीन में बदलाव कर बंदरों और खरगोश की नई प्रजातियां तैयार की है। जिस वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की आशंका जताई जा रही है, वहां विज्ञानियों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए जानवरों के जीनोम संरचना में बदलाव कर बंदर और खरगोश समेत एक हजार से अधिक जानवरों की नई नस्लें विकसित की हैं। चीन इस तरह प्रयोग करता है, जिसकी दुनिया के किसी भी देश में अनुमति नहीं है। वैश्विक स्तर पर जैव प्रौद्योगिकी में विकास के बाद से तो चीन इस तरह के प्रयोग में सारी नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है। जीन में बदलाव पर चीन सरकार की नजर जानवरों के जीन में बदलाव के प्रयोग पर चीन की सत्तारूढ़ पीपुल्स पार्टी की कड़ी निगाह रहती है। वह इसके जरिये नए सैनिक और जैविक हथियार बनाने की कोशिश में रहता है, जिससे बचाव का किसी के पास कोई उपाय नहीं हो।
वाशिंगटन,कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अभी भी कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। लेकिन इस बीच अमेरिकी विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर एक बड़ा दावा किया है। इसमें यह सबूत दिया गया है कि Covid-19 के वुहान की लैब से निकलने की थ्योरी के पक्ष में कितना दम है। मीडिया ने सोमवार को बताया कि दो अमेरिकी विशेषज्ञों ने अपने शोध में दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से लीक हुआ है। उन्होंने शोध में बताया है कि कोविड-19 के दुर्लभ जीनोम से पता चलता है कि कोरोना वायरस एक प्रयोगशाला में विकसित किया गया था ये कोई प्राकृतिक वायरस नहीं है। अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि अमेरिका के दो विशेषज्ञों डॉ. स्टीफन क्वे और रिचर्ड मुलर के अनुसार, कोविड -19 में एक आनुवंशिक जीनोम सीक्वेंस है जो किसी प्राकृतिक कोरोना वायरस में कभी नहीं देखा गया है। क्वे और मुलर ने बताया है कि कोविड-19 में जीनोम सीक्वेंस 'सीजीजी-सीजीजी'(CGG-CGG) (जिसे "डबल सीजीजी-Double CGG)" भी कहा जाता है) है, जो 36 अनुक्रमण पैटर्न में से एक है। उन्होंने बताया कि सीजीजी(CGG) का उपयोग शायद ही कभी कोरोना वायरस की श्रेणी में किया जाता है जो कोव-2 के साथ पुन: संयोजन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वास्तव में, कोरोना वायरस के पूरे वर्ग में जिसमें CoV-2 भी शामिल है, CGG-CGG जीनोम सीक्वेंस कभी भी प्राकृतिक रूप से नहीं पाया गया है। इस शोध को लेकर उन्होंने आगे कई बातें कही हैं जो वैज्ञानिक शोध के आधार पर हैं। अंत में उन्होंने कहा है कि सभी वैज्ञानिक साक्ष्य इस निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं कि कोरोना वायरस को एक प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर हाल के हफ्तों में कई विशेषज्ञों ने लैब से वायरस लीक होने की थ्योरी पर जोर दिया है, जिसे पहले साजिश के रूप में खारिज कर दिया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी हाल ही में लैब से वायरस लीक होने की थ्योरी सहित कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई, इसकी जांच करने के लिए दोबारा प्रयास करने का आदेश दिया है। हालांकि, चीन ने वुहान लैब से वायरस लीक होने की थ्योरी को "अत्यंत असंभव" कहकर खारिज कर दिया है और अमेरिका पर राजनीतिक हेरफेर का आरोप लगा रहा है। कुछ समय पहले ही अमेरिकी इंटेलिजेंस की एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि वुहान शहर में लोगों के वायरस से पहली बार संक्रमित होने से ठीक महीने भर पहले ही नवंबर 2019 में वुहान की लैब में काम करने वाले तीन रिसर्चरों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
नई दिल्ली, पूर्वी लद्दख के सामने तैनात चीनी सैनिकों की हालत भीषण ठंड से हालत खराब हो रही है। ठंड से बुरी तरह प्रभावित 90 फीसद सैनिकों को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने वापस बुला लिया है। पिछले साल अप्रैल-मई के बाद से ही चीन ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के करीब 50,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया था। सूत्रों ने एएनआइ को बताया, 'चीन ने पिछले एक साल से वहां मौजूद सैनिकों को बदलने के लिए भीतरी इलाकों से नए सैनिकों को लेकर आया है। उनके लगभग 90 फीसद सैनिकों को रोटेट कर दिया है।' उन्होंने कहा कि इस रोटेशन का कारण यह हो सकता है कि उच्च अक्षांश क्षेत्रों में चरम स्थितियों में तैनात चीनी सैनिक अत्यधिक ठंड और अन्य संबंधित मुद्दों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि पैंगोंग झील क्षेत्र में तैनाती के दौरान भी पीएलए चीनी सैनिकों को ऊंचाई वाले चौकियों पर लगभग दैनिक आधार पर बदल रहा था और उनकी आवाजाही बहुत प्रतिबंधित हो गई थी। वहीं, भारतीय सेना दो सालों के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपने सैनिकों को तैनात करती है और हर साल लगभग 40-50 प्रतिशत सैनिकों को रोटेट किया जाता है। इन परिस्थितियों में आईटीबीपी के जवानों का कार्यकाल कभी-कभी दो साल से भी ज्यादा लंबा होता है। भारत और चीन ने पिछले साल अप्रैल-मई के बाद से ही पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ अन्य क्षेत्रों में एक दूसरे के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैनिकों को तैनात किया था। इस साल की शुरुआत में दोनों देश पैंगोंग झील क्षेत्र में अपनी तैनाती हटाने और वहां गश्त बंद करने पर सहमत हुए थे। हालांकि सैनिक अभी भी पास के इलाकों में बने हुए हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने अक्सर लद्दाख सेक्टर का दौरा करते रहे हैं और स्थिति से निपटने के लिए जमीनी बलों को निर्देश देते रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित चीन अध्ययन समूह भी स्थिति से निपटने के लिए सुझाव देता रहा है और चीन के साथ बातचीत के दौरान दिशा-निर्देश भी देता रहा है।
कराची,पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सिंध के सचिव अजीज धामरा ने चेतावनी दी है कि राज्य के धान उत्पादक इलाके में यदि किसानों को पानी का इंतजाम नहीं हुआ तो फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते पाकिस्तान में अनाज का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। पत्रकारों से बात करते हुए धामरा ने कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार के अधिकारी अपनी जनविरोधी और खराब नीतियों के जरिये हमेशा सिंध को पीछे ले जाने की कोशिश करते हैं। कृत्रिम जल संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अक्षम शासकों के पास कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने और देश भर में कृषक समुदायों को राहत प्रदान करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि सिंध के लोग संघीय सरकार द्वारा बनाए गए कृत्रिम जल संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू करने के लिए तैयार हैं। न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि प्रांत के कई किसानों की आजीविका भी दांव पर है।उन्होंने सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण के अध्यक्ष और इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को ताउनसा लिंक नहर में सिंध का पानी हड़पने के लिए भी दोषी ठहराया। धामरा ने कहा कि देश पर थोपी गई शासकों की आत्मकेंद्रित नीतियों और क्षेत्रों में जल संकट के कारण कृषि क्षेत्र को पहले ही बहुत नुकसान हुआ है, जो कई जिलों में किसानों के लिए विनाश का कारण बनेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो लोग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रहे थे, वे केवल लोगों को धोखा देने, मूल्य वृद्धि और खराब शासन से उनका ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे थे। पत्रकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश पाकिस्तान में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर हमले के खिलाफ पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया है। प्रस्ताव में इन हमलों की आलोचना की गई है। डान अखबार के अनुसार, विधानसभा के स्वतंत्र सदस्य जुगनू मोहसिन ने यह प्रस्ताव रखा। इसके जरिये उन्होंने पत्रकारों की हत्या और उत्पीड़न की तरफ राज्य का ध्यान खींचा। मोहसिन ने असद अली तूर पर हाल में हुए हमले और हामिद मीर के शो पर प्रतिबंध का भी जिक्र किया।
कराची,पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सिंध के सचिव अजीज धामरा ने चेतावनी दी है कि राज्य के धान उत्पादक इलाके में यदि किसानों को पानी का इंतजाम नहीं हुआ तो फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते पाकिस्तान में अनाज का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। पत्रकारों से बात करते हुए धामरा ने कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार के अधिकारी अपनी जनविरोधी और खराब नीतियों के जरिये हमेशा सिंध को पीछे ले जाने की कोशिश करते हैं। कृत्रिम जल संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अक्षम शासकों के पास कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने और देश भर में कृषक समुदायों को राहत प्रदान करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि सिंध के लोग संघीय सरकार द्वारा बनाए गए कृत्रिम जल संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू करने के लिए तैयार हैं। न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि प्रांत के कई किसानों की आजीविका भी दांव पर है।उन्होंने सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण के अध्यक्ष और इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को ताउनसा लिंक नहर में सिंध का पानी हड़पने के लिए भी दोषी ठहराया। धामरा ने कहा कि देश पर थोपी गई शासकों की आत्मकेंद्रित नीतियों और क्षेत्रों में जल संकट के कारण कृषि क्षेत्र को पहले ही बहुत नुकसान हुआ है, जो कई जिलों में किसानों के लिए विनाश का कारण बनेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो लोग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रहे थे, वे केवल लोगों को धोखा देने, मूल्य वृद्धि और खराब शासन से उनका ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे थे। पत्रकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश पाकिस्तान में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर हमले के खिलाफ पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया है। प्रस्ताव में इन हमलों की आलोचना की गई है। डान अखबार के अनुसार, विधानसभा के स्वतंत्र सदस्य जुगनू मोहसिन ने यह प्रस्ताव रखा। इसके जरिये उन्होंने पत्रकारों की हत्या और उत्पीड़न की तरफ राज्य का ध्यान खींचा। मोहसिन ने असद अली तूर पर हाल में हुए हमले और हामिद मीर के शो पर प्रतिबंध का भी जिक्र किया।
नई दिल्ली,कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका के बीच उनके लिए वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस महीने के अंत तक भारत में बच्चों के लिए स्वदेशी वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। जायडस-कैडिला की स्वदेशी वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण पूरा हो चुका है और दो हफ्ते के भीतर कंपनी ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीसीजीआइ) से इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत मांग सकती है। नीति आयोग के सदस्य और वैक्सीन पर गठित उच्चाधिकार समूह के प्रमुख डा. वीके पाल के अनुसार जायडस-कैडिला की वैक्सीन के ट्रायल में बड़ों के साथ-साथ 12 से 18 साल की उम्र के बच्चे भी शामिल रहे। इसलिए इस वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत मिलने पर 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों को भी यह वैक्सीन लगाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि जायडस-कैडिला की वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल का पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि कंपनी दो हफ्ते के भीतर इसके इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन भी कर सकती है। कोरोना संक्रमण पर गठित विषय विशेषज्ञ समिति यानी एसईसी तीसरे चरण के परीक्षण के डाटा का विश्लेषण करेगी। सबकुछ सही पाए जाने पर समिति कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पुतनिक-वी की तरह इसे भी भी इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश कर सकती है। इसके बाद डीसीजीआइ से इसकी इजाजत मिलने में कोई समस्या नहीं रहेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार एक बार कंपनी की ओर से आवेदन करने के बाद पूरी प्रक्रिया में लगभग दो हफ्ते का समय लग सकता है। बच्चों के बीच प्राथमिकता नहीं उन्होंने कहा कि वयस्कों और बुजुर्गो के वर्ग में जिस तरह से प्राथमिकता वाले समूह तय किए गए हैं, उस तरह से बच्चों में कोई प्राथमिकता समूह नहीं बनाई जा सकता। सभी आयु के बच्चों को समान रूप से वैक्सीन उपलब्ध होनी चाहिए। लगभग 30 करोड़ डोज की जरूरत डा. पाल के अनुसार देश में 12-18 साल के बच्चों की आबादी लगभग 14-15 करोड़ के बीच है। इनके टीकाकरण के लिए वैक्सीन की 28-30 करोड़ डोज की जरूरत होगी। अगर फाइजर और अन्य विदेशी कंपनियों से बच्चों की वैक्सीन आयात भी की जाती है तो कोई भी कंपनी इतनी ज्यादा मात्रा में डोज उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं होगी, इसलिए स्वदेशी वैक्सीन के सहारे ही बच्चों के टीकाकरण की रणनीति तैयार करनी होगी। कोवैक्सीन का भी बच्चों पर हो रहा ट्रायल डा. पाल ने बताया कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का भी बच्चों पर ट्रायल शुरू हो चुका है। कोवैक्सीन का दो से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल पूरा होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा क्योंकि इसमें सिर्फ यह देखा जा रहा है कि यह वैक्सीन बच्चों को कोरोना से बचाने में कितनी कारगर साबित हो रही है।
नई दिल्ली,नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक राहत भरी बात कही है। नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था की हालत जून महीने से सुधरने लगेगी और जुलाई से अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार पकड़ लेगी। नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार ने ये बातें समाचार एजेंसी एएनआइ से बातचीत में कही है। उन्होंने कहा है कि मुद्रास्फीति(महंगाई) सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है और मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि सरकार ने मुद्रास्फीति प्रबंधन के लिए आरबीआई को खुली छूट दे दी है। आरबीआई सतर्क है, इसलिए मुझे महंगाई की कोई समस्या नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी, इसका थोड़ा असर होगा। कोविड-19 ने सरकार को अधिक निवेश करने, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च करने के लिए मजबूर किया है लेकिन इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारा जीएसटी संग्रह(कलेक्शन) बढ़ गया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के बारे में केंद्र को कुछ करना चाहिए, लेकिन हमें संतुलन की भी जरूरत है। महंगाई पर नियंत्रण की जिम्मेदारी सरकार की, उम्मीद है कि जिन पर यह जिम्मेदारी होगी वे संतुलन बनाएंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने एएनआइ से कहा- COVID-19 की दूसरी लहर ने लोगों को डरा दिया है। जैसे ही लोगों का टीकाकरण होगा, यह डर दूर हो जाएगा और लोग खर्च करने के लिए बाहर निकलने लगेंगे। उन्होंने कहा कि हम विनिर्माण और निर्यात में प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था के ठीक होने के बाद हम उनके विकास अनुमानों को संशोधित करेंगे। उन्होंने अनुमान जताया कि जून से अर्थव्यवस्था में सुधार शुरू हो जाएगा और जुलाई से ये रफ्तार पकड़ लेगी। उन्होंने साथ ही कहा कि दूसरी लहर के प्रभाव के कारण आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021 के लिए जीडीपी विकास अनुमान को १०.५% से घटाकर ९.५% कर दिया, जो पहली तिमाही में हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला है। पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था उम्मीद से कम सुधरेगी। FY22 में हमारी अर्थव्यवस्था 10%-10.5% की गति से बढ़ेगी।
नई दिल्ली,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय पेट्रोलियम परिवहन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कार्यक्रम में मौजूद रहें। इस दौरान पीएम ने इथेनॉल को 21वीं सदी के बारत की प्रथमिकता बताया। इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय बेहतर पर्यावरण के लिए जैव ईंधन को बढ़ावा देना है। अपने संबोधन से पहले प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग राज्यों के किसानों से इथेनॉल पर भी बात की। इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री भारत में 2020-2025 के दौरान इथेनाल सम्मिश्रण से संबंधित रोडमैप के बारे में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जारी की। इस मौके पर पीएम ने पुणे में तीन स्थानों पर ई 100 के वितरण स्टेशनों की एक पायलट परियोजना का भी शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि 7-8 साल पहले भारत में एथेनॉल पर चर्चा दुर्लभ थी, लेकिन अब एथेनॉल भारत की 21वीं सदी की प्राथमिकताओं से जुड़ गया है। यह पर्यावरण के साथ-साथ किसानों के जीवन की भी मदद कर रहा है।उन्होंने कहा कि हमने 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसद एथेनॉल ब्लेंडिंग को पूरा करने का संकल्प लिया है। 2014 तक औसतन सिर्फ 1-1.5 फीसदी एथेनॉल ब्लेंड किया जा रहा था और आज यह करीब 8.5 फीसदी पर पहुंच गया है। पीएम ने कहा, क्लाइमेट चेंज की वजह से जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, भारत उनके प्रति जागरूक भी है और सक्रियता से काम भी कर रहा है। उन्होंने कहा 6-7 साल में रिन्यूएबल एनर्जी की हमारी क्षमता में 250 फीसद से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इंस्टॉलड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में भारत आज दुनिया के टॉप-5 देशों में है। इसमें भी सौर ऊर्जा की क्षमता को बीते 6 साल में लगभग 15 गुना बढ़ाया है। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के लिए भारत सरकार ई -20 अधिसूचना जारी कर रही है जिसमें तेल कंपनियों को 1 अप्रैल, 2023 से 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया गया है। इन प्रयासों से देश भर में मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराने के लिए समयसीमा प्रदान की जाएगी। यह वर्ष 2025 से पहले इथेनॉल उत्पादक राज्यों और आसपास के क्षेत्रों में इथेनॉल की खपत को बढ़ाने में भी मदद करेगा।
नई दिल्ली, केंद्र सरकार के नए IT नियम न मानने को लेकर सोशल मीडिया दिग्गज ट्विटर से तल्खी खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है। जहां सरकार की तरफ से हर रोज नए IT नियम को लेकर नोटिस भेजे जा रहे थे, वहीं, इस बीच ट्विटर ने कई प्रमुख नेताओं के ब्लू टिक ही गायब कर दिए। सोशल मीडिया दिग्गज द्वारा पहले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के अकाउंट से ब्लू टिक हटा दिया गया, फिर RSS प्रमुख मोहन भागवत के अकाउंट के खिलाफ भी एक्शन लिया गया। हालांकि, केंद्र की तरफ से आखिरी सख्त चेतावनी दिए जाने के बाद ट्विटर लाइन पर आ गया है। नायडू के अकाउंट का ब्लू टिक पहले ही बहाल कर दिया गया था, जहां अब मोहन भागवत के अकाउंट को भी दोबारा वेरिफाइड कर दिया गया है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, 'Twitter ने RSS प्रमुख मोहन भागवत और कृष्ण गोपाल सहित अन्य RSS प्रमुख पदाधिकारियों के ब्लू टिक को दोबारा लौटा दिया है। Twitter ने बताई वजह बता दें कि माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने आज उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू समेत अन्य नेताओं के अकाउंट को अनवेरिफाइड कर दिया। हालांकि, बाद में इसे सुधार लिया गया। ट्विटर ने ऐसा होने के पीछे अपनी पॉलिसी बताई। ट्विटर ने कहा, 'हमारे वेरिफिकेशन पॉलिसी के अनुसार, यदि अकाउंट इनएक्टिव हो जाता है तो ब्लू वेरिफाइड बैच को हटाया जा सकता है।' बताया गया कि सक्रिय तौर पर लॉग इन करना चाहिए। कम से कम 6 महीने में एक बार तो लॉग इन करना होगा। केंद्र की आखिरी चेतावनी केंद्र सरकार ने ट्विटर को नए डिजिटल नियम लागू करने को लेकर अंतिम चेतावनी दी है। सरकार ने कहा कि ट्विटर को नए आईटी नियमों का पालन करने के लिए आखिरी नोटिस दिया जा रहा है। अगर नियमों का पालन नहीं हुआ तो आईटी एक्ट 2000 की धारा 79 के तहत मिली छूट को खत्म कर दिया जाएगा और ट्विटर को आईटी एक्ट और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। मंत्रालय ने कहा कि ये नियम 26 मई, 2021 से प्रभावी हैं, लेकिन सद्भावना के तहत टि्वटर इंक को एक आखिरी नोटिस के जरिये नियमों के अनुपालन का अवसर दिया जाता है।
अबुजा,नाइजीरिया की सरकार (Nigerian government) ने ट्विटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने ट्व‍िटर को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया है। सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि ट्वि‍टर ने पश्चिमी अफ्रीकी देश में अलगाववादियों का समर्थन किया है। सूचना एवं संस्कृति मंत्री लाई मोहम्मद ने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को अनिश्चितकालीन निलंबित करने की घोषणा की। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक लाई मोहम्मद ने नाइजीरिया के कॉपोर्रेट अस्तित्व को कमजोर करने में सक्षम गतिविधियों के लिए ट्विटर के लगातार इस्‍तेमाल का हवाला दिया। इसके साथ सरकार ने राष्ट्रीय प्रसारण आयोग को नाइजीरिया में सभी ओटीटी और सोशल मीडिया संचालन को लाइसेंस देने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया। सरकार ने देश में ट्विटर के संचालन के बारे में संदेह व्‍यक्त किया।
नई दिल्‍ली, रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में खरीदो और बनाओ (भारतीय) श्रेणी के तहत लगभग 6,000 करोड़ रुपये की एयर डिफेंस गन और गोला-बारूद की खरीद के भारतीय सेना (Indian Army) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने लगभग 43 हजार करोड़ रुपये की लागत से भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण को मंजूरी दे दी। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआइ ने शुक्रवार को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इस परियोजना को अनुमति दी गई। जल्‍द ही भारतीय नौसेना के लिए देश में छह पनडुब्बियों के निर्माण के लिए प्रस्ताव का अनुरोध (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी कर दिया जाएगा। उल्‍लेखनीय है कि चीन से तनाव के बीच भारतीय सेना लगातार सुरक्षा ताकत को मजबूत करती जा रही है। इसके तहत ही भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75आई के तहत पनडुब्बियों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए दो भारतीय कंपनियों और पांच विदेशी हथियार निमार्ताओं को शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है। नौसेना के लिए स्वदेशी पनडुब्बियों के निर्माण के लिए मेगा पनडुब्बी परियोजना को मंजूरी दी गई है जिसमें दो भारतीय कंपनियां एक विदेशी निर्माता को साथ लेकर काम कर सकती हैं। इस परियोजना के लिए आरएफपी मझगांव डॉक्स (MDL) और निजी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को जारी किया गया है। इन पनडुब्बियों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इस प्रोजेक्‍ट को साल 1999 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने मंजूरी दी थी। मौजूदा वक्‍त में भारतीय नौसेना के पास 12 पनडुब्बियां हैं। इनके अलावा नौसेना के बेड़े में दो परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्र हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी जहाजों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए भारतीय नौसेना अपने पनडुब्बी संचालन और नौसेना बेड़े को मजबूत करने को शीर्ष प्राथमिकता रही है।
नई दिल्ली, घातक कोरोना वायरस की उत्पत्ति का जवाब तलाशने के लिए जब दुनिया भर के कई देश और खुफिया एजेंसियां हाथ पांव मार रही हैं ऐसे में एक गैरपेशेवर खोजी दल डीआरएएसटीआइसी (ड्रास्टिक) चीन के वुहान शहर में स्थित वुहान इंस्टीट्यूट आफ वाइरोलाजी के काले रहस्यों को उजागर करने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि डिसेंट्रलाइज रेडिकल आटोनामस सर्च टीम (डास्टि्रक) ने खुद के दम पर सार्स-सीओवी-2 की उत्पत्ति का पता लगा लिया है। सीमित संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए इस जांच टीम ने पता किया है कि वुहान की लैब में चमगादड़ों की गुफाओं से कई वर्षों में जुटाए गए कोरोना वायरस का बड़ा भंडार था। जिस वायरस से दुनिया में महामारी फैली उसके जैसे वायरस, चमगादड़ों के निवास वाली एक खदान से जुटाए गए थे। बताते हैं कि 2012 में एक खदान में कोरोना जैसी बीमारी की चपेट में आकर तीन लोगों की मौत हो गई थी।न्यूजवीक ने बुधवार को इस खोजी दल के हवाले से बताया कि हमें पता है कि वुहान लैब में अपर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकाल के बीच इन वायरस पर जोर-शोर से शोध चल रहा था। किन्हीं कारणों से जब इन वायरस से महामारी फैली तब लैब और चीन की सरकार ने इस मामले को दबाने का भरपूर प्रयास किया। रिपोर्ट के अनुसार, हुआनान वेट मार्केट (मांस-मछली का बाजार) में महामारी फैलने से हफ्तों पहले कोरोना के शुरुआती मामले सामने आ गए थे। पहले यही माना जाता था कि हुआनान वेट मार्केट से ही महामारी फैली। ड्रास्टिक ने जो साक्ष्य जुटाए हैं उनसे इस बात की भरपूर गुंजाइश है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि अभी यह स्प्ष्ट नहीं है कि अमेरिका और कुछ अन्य देशों द्वारा वुहान लैब से कोरोना फैलने की अवधारणा की एकमत से जांच हो पाएगी, वह भी चीन के सहयोग के बिना, जो कि असंभव है। उल्लेखनीय है अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पूर्व प्रमुख ने हाल ही में कहा था कि इस बात के बहुत कम प्रमाण हैं कि कोरोना वायरस स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ या किसी जानवर से मनुष्यों में आया। इससे इस तर्क को बल मिलता है कि यह वायरस किसी प्रयोगशाला में उत्पन्न हुआ। हाल ही में एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नवंबर 2019 में चीन के वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी के तीन शोधकर्ता गंभीर रूप से बीमार हो गए थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
नई दिल्ली,जाने-माने दिग्गज धावक मिल्खा सिंह की तबीयत ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पूर्व भारतीय धावक मिल्खा सिंह से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। पीएम ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि वह जल्द ही वापस आएंगे और टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को आशीर्वाद देने के साथ-साथ प्रेरित भी करेंगे। गुरुवार को ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर अस्पताल में किया था भर्ती फ्लाइंग सिख के नाम से लोगों के दिलों में अपनी पहचान बनाने वाले धावक मिल्खा सिंह इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं। दरअसल, घटते ऑक्सीजन स्तर को देखते हुए गुरुवार को चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। अस्पताल द्वारा जारी बयान के मुताबिक, मिल्खा सिंह को दोपहर 3:35 बजे पीजीआईएमईआर के कोविड अस्पताल के आईसीयू में ऑक्सीजन का स्तर गिरने के चलते भर्ती कराया गया था। उन्हें निगरानी में रखा गया है और अब उनकी हालत स्थिर है। 19 मई को हुए थे कोरोना संक्रमित बता दें कि 19 मई कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मिल्खा सिंह को सोमवार (24 मई) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके दो दिनों के बाद उनकी पत्नी को भी कोविड-19 जांच में पॉजिटिव आने के बाद उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दंपति के बेटे और मशहूर गोल्फर जीव मिल्खा सिंह पिछले शनिवार को दुबई से चंडीगढ़ के आ गए थे जबकि अमेरिका में डॉक्टर उनकी बड़ी बहन मोना मिल्खा सिंह भी कुछ दिन पहले यहां पहुंच चुकी है।
नई दिल्ली,जाने-माने दिग्गज धावक मिल्खा सिंह की तबीयत ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पूर्व भारतीय धावक मिल्खा सिंह से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। पीएम ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि वह जल्द ही वापस आएंगे और टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को आशीर्वाद देने के साथ-साथ प्रेरित भी करेंगे। गुरुवार को ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर अस्पताल में किया था भर्ती फ्लाइंग सिख के नाम से लोगों के दिलों में अपनी पहचान बनाने वाले धावक मिल्खा सिंह इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं। दरअसल, घटते ऑक्सीजन स्तर को देखते हुए गुरुवार को चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। अस्पताल द्वारा जारी बयान के मुताबिक, मिल्खा सिंह को दोपहर 3:35 बजे पीजीआईएमईआर के कोविड अस्पताल के आईसीयू में ऑक्सीजन का स्तर गिरने के चलते भर्ती कराया गया था। उन्हें निगरानी में रखा गया है और अब उनकी हालत स्थिर है। 19 मई को हुए थे कोरोना संक्रमित बता दें कि 19 मई कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मिल्खा सिंह को सोमवार (24 मई) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके दो दिनों के बाद उनकी पत्नी को भी कोविड-19 जांच में पॉजिटिव आने के बाद उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दंपति के बेटे और मशहूर गोल्फर जीव मिल्खा सिंह पिछले शनिवार को दुबई से चंडीगढ़ के आ गए थे जबकि अमेरिका में डॉक्टर उनकी बड़ी बहन मोना मिल्खा सिंह भी कुछ दिन पहले यहां पहुंच चुकी है।
नई दिल्ली,देश में कोरोना के कम हो रहे मामलों के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research, CSIR) सोसायटी की एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं। यह बैठक सुबह 11 बजे से शुरू हुई है। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन भी शामिल हैं। इसमें प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, उद्योगपति और वरिष्ठ अधिकारी शिरकत कर रहे हैं। सीएसआईआर सोसायटी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन काम करने वाली वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग का हिस्सा है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक इस सोसाइटी की गतिविधियों को पूरे भारत में फैले 37 प्रयोगशालाओं और 39 आउटरीच केंद्रों के माध्यम से चलाया जाता है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक सोसायटी की बैठक हर साल होती है। एक दिन में 77 हजार घटे सक्रिय मामले कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लगातार कमजोर पड़ने के बीच गुरुवार को 1,31,280 नए मामले सामने आए। इन मामलों के साथ अब तक इस बीमारी की चपेट में आने वालों की संख्या बढ़कर 2,85,72,359 हो गई। नए मामलों की अपेक्षा ठीक होने वालों का आंकड़ा लगातार 21वें दिन भी काफी अधिक रहा। रात साढ़े बजे तक मिले आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 2,05,771 लोग स्वस्थ होकर घर चले गए। इस तरह नए मरीजों के सापेक्ष 74,491 अधिक लोग स्वस्थ हुए। वहीं सक्रिय मामलों में 77,289 की कमी देखी गई। देश में फिलहाल 16,31,427 सक्रिय मामले हैं। इस दौरान 2,705 लोगों की मौत के साथ मरने वालों की संख्या बढ़कर 3,40,719 हो गई। जिन 2,705 लोगों की जान गई उनमें सर्वाधिक 643 लोग महाराष्ट्र के हैं। वहीं तमिलनाडु से 460, कर्नाटक से 514, केरल से 153, बंगाल से 108, उप्र से 108 और दिल्ली से 45 लोगों ने कोरोना से जान गंवा दी।
नई दिल्ली,केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया है कि कोरोना महामारी को देखते हुए आबादी के सबसे कमजोर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राशन कार्ड जारी करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जाए। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। इसमें कहा गया है कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को समाज के कमजोर और सबसे कमजोर वर्गों यानी सड़क पर रहने वाले, कचरा बीनने वालों, फेरीवालों, रिक्शा चालकों तक पहुंचने के उपाय करने चाहिए। इसमें कहा गया है कि एनएफएसए के तहत पात्र व्यक्तियों और परिवारों की पहचान और उन्हें राशन कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की है। एनएफएसए के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों की पहचान और राशन कार्ड प्रदान करने के लिए विशेष ध्यान रखना चाहिए। एडवाइजरी में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कोविड-19 के मौजूदा परिदृश्य के दौरान, मीडिया, समाचार पत्रों, गैर सरकारी संगठनों, व्यक्तियों के माध्यम से कई रिपोर्ट और शिकायतें हैं कि समाज के कमजोर और सबसे कमजोर वर्ग, जिन्हें खाद्यान्न की सख्त जरूरत है, वो राशन की खरीद करने में असमर्थ हैं। इसमें कहा गया है कि कुछ गरीब और जरूरतमंद लोग, जिनके पास पते का प्रमाण भी नहीं है, उन्हें राशन कार्ड प्राप्त करने में मुश्किल हो सकती है। इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
नई दिल्ली, देश में निर्मित एक और कोरोना वैक्सीन अगले कुछ माह में आ जाएगी। इसके लिए केंद्र ने 30 करोड़ खुराकें बुक कराई है और अग्रिम समझौते के तहत 1500 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया है। हैदराबाद की वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल- ई (Biological-E) इस साल के अगस्त- दिसंबर तक वैक्सीन की खुराकें मुहैया करा देंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी दी और बताया कि इसके लिए केंद्र की ओर से 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान बायोलॉजिकल-ई को कर दिया गया है। भारत बायोटेक के कोवैक्सीन (COVAXIN) के बाद यह दूसरा स्वदेशी वैक्सीन है। तीसरा क्लिनिकल ट्रायल जारी बायोलॉजिकल - ई के वैक्सीन का तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल जारी है। पहले और दूसरे ट्रायल के दौरान सकारात्मक नतीजे आए। RBD प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन के तौर पर विकसित यह टीका अगले कुछ महीनों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा। कोविड-19 के लिए वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय विशेषज्ञों के समूह (National Expert Group on Vaccine Administration for COVID-19, NEGVAC) द्वारा बायोलॉजिकल-ई के कोरोना वैक्सीन के प्रस्ताव का गहन परीक्षण के बाद मंजूरी के लिए भेजा गया है। बता दें कि इस वैक्सीन को भारत सरकार की ओर से समर्थन दिया गया है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'यह कदम भारत सरकार की मिशन कोविड सुरक्षा- कोविड-19 वैक्सीन विकसित मिशन के अंतर्गत उठाया गया है । इस मिशन की शुरुआत कोविड 19 वैक्सीन को आगे बढ़ाने के लिए हुई थी जो आत्मनिर्भर भारत 3.0 के तहत लिया गया है।' फिलहाल देश में तीन कोरोना वैक्सीन हैं। इसमें पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और रूस का स्पुतनिक वी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक कोरोना वैक्सीन की कुल 22,10,43,693 खुराक दी जा चुकी है। बता दें कि पिछले 24 घंटों में भारत में COVID-19 के 1,34,154 नए मामले आए और 2,887 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2,84,41,986 है और कुल मौतों की संख्या 3,37,989 हो गई है।
नई दिल्ली,भारत की एली लिली एंड कंपनी (Eli Lilly and Company) ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए कंपनी के एंटीबॉडी दवाओं को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की ओर से आपाताकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इन दवाओं का उपयोग कोरोना संक्रमितों के इलाज में पूर्व से इस्तेमाल की जा रही दवाओं के साथ किया जायेगा। कंपनी ने कहा है कि भारत में हलके और मध्यम लक्षण वाले रोगियों के इलाज के लिए हमारी दवा का इमरजेंसी इस्तेमाल हो सकेगा। बता दें कि एली लिली की दवा कोरोना रोगियों के मध्यम लक्षण में उपयोग की जाने वाली एंटिबॉयटिक दवा है। इसे मोनोक्लोनल एंटीबॉडी बामलानिविमैब 700 एमजी (bamlanivimab 700 mg) और एटेसेविमैब 1400 एमजी (etesevimab 1400 mg) को मिलाकर बनाई गई दवा है। बामलानिविमैब 700 एमजी (Amlanivimab 700 mg) और एटेसेविमैब 1400 एमजी (Etesevimab 1400 mg) को एक साथ इंजेक्शन के माध्यम से कोरोना संक्रमित बड़ों और बच्चों (12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कम से कम 40 किलोग्राम वजन वाले) को दिया जा सकता है। अधिक जानकारी देते हुए लिली की इंडिया सबकॉन्टिनेंट की मैनेजिंग डायरेक्टर लूका विसीनी ने कहा कि हमें खुशी है कि हमारे पास भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक और उपचार विकल्प है। लिली भारत और दुनिया भर में कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम यह आकलन और मूल्यांकन करना जारी रखेंगे कि हमारे मौजूदा पोर्टफोलियो और चल रहे शोध से कोरोना के रोगियों को कैसे फायदा हो सकता है। वहीं, आज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी शुरू कर दी है। एक खुराक की कीमत 59,750 रुपये होगी।
नई दिल्ली,मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) ने मंगलवार को मार्च, 2022 में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर ( India's GDP growth) 9.3 फीसद रहने का अनुमान जताया है। वहीं, रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2023 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.9 फीसद रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी Moody's Investors Service ने कहा, 'देश के कई हिस्सों में लॉकडाउन प्रतिबंधों को फिर से लागू करने से आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ेगी, लेकिन हम महामारी की पहली लहर के समय पड़े गंभीर प्रभाव की उम्मीद दोबारा नहीं कर रहे हैं।' रेटिंग एजेंसी ने आगे कहा, 'हमें अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आने की उम्मीद है। इसके बाद रिकवरी आएगी। इसके परिणामस्वरूप मार्च, 2022 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक, मुद्रास्फीति-समायोजित जीडीपी वृद्धि दर 9.3 फीसद रहने की उम्मीद है। वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी वृद्धि दर 7.9 फीसद रहने की उम्मीद है।' यहां बता दें कि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार को देश के जीडीपी के आंकड़े जारी किए गए। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में देश की विकास दर 1.6 फीसद पर रही। लेकिन वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसद का संकुचन दर्ज किया गया। मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में देश की विकास चार फीसद पर रही थी। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में GDP 38.96 लाख करोड़ रुपये पर रही। वित्त वर्ष 2019-20 की मार्च तिमाही में GDP 38.33 लाख करोड़ रुपये पर रही। यह सालाना आधार पर 1.6 फीसद की वृद्धि को दिखाता है।
नई दिल्ली,देश में कोरोना की स्थिति और टीकाकरण की प्रगति पर प्रेस कांफ्रेंस करते हुए आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि कोविशील्ड खुराक लगाने के शेड्यूल में बिल्कुल कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह केवल दो खुराक होगी। कोविशील्ड की पहली खुराक देने के बाद 12 सप्ताह के बाद दूसरी खुराक दी जाएगी। वही शेड्यूल कोवैक्सिन पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। जुलाई के मध्य या अगस्त तक हमारे पास प्रतिदिन 1 करोड़ लोगों को टीका लगाने के लिए पर्याप्त खुराक होगी। हमें दिसंबर तक पूरी आबादी का टीकाकरण करने का भरोसा है। नीति आयोग के सदस्य डा. बीके पॉल ने कहा कि हमारा ध्यान बच्चों को होने वाली कोविड रोग आकर्षित कर रहा है। बच्चों की बड़ी आबादी आमतौर पर स्पर्शोन्मुख (एसिंपोमैटिक) है। उन्हें अक्सर संक्रमण हो जाता है, लेकिन उनके लक्षण न्यूनतम या शून्य होते हैं। बच्चों में संक्रमण ने गंभीर रूप नहीं लिया। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में 29 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं जहां प्रतिदिन 5000 से कम मामले दर्ज किए जा रहे हैं। 28 अप्रैल से 4 मई के बीच देश में 531 ऐसे ज़िले थे जहां प्रतिदिन 100 से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे। ऐसे जिले अब 295 रह गए हैं। 3 मई को देश में 17.13 फीसद थे अब वह सिर्फ 6.73 फीसद रह गए हैं। सक्रिय मामलों में लगातार गिरावट दर्ज़ की गई है। आज एक दिन में देश में 1.3 लाख सक्रिय मामलों में कमी दर्ज़ की गई है। 16-22 फरवरी के बीच प्रतिदिन देश में 7.7 लाख टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे थे। अब हम लगभग 20 लाख टेस्ट प्रतिदिन कर रहे हैं। अब तक हम देश में कुल 34.67 करोड़ टेस्ट कर चुके हैं। पिछले 24 घंटे में देश में पॉजिटिविटी रेट 6.62 फीसद दर्ज़ की गई है। देश में 34 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां पॉजिटिविटी रेट में लगातार कमी दर्ज़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में 1,27,000 मामले सामने आए हैं। 28 मई के बाद से, देश में 2 लाख से कम मामले सामने आ रहे हैं। देश में संक्रमण में कमी आई है। रिकवर मामले अब दैनिक मामलों की तुलना में अधिक हैं। अब ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 92 फीसद हो गई है। लव अग्रवाल ने कहा कि देश में कुल 21.60 करोड़ वैक्सीन खुराक लगाई जा चुकी है। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों को 1.67 करोड़ खुराक, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को 2.42 करोड़, 45+ आयु वर्ग के लोगों को 15.48 करोड़, जबकि 18-44 आयु वर्ग के लोगों के लिए 2.03 करोड़ खुराक लगाई गई है।
विज्ञान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्यक्ष को भी प्रमाण की आवश्यकता होती है। कोविड-19 वायरस के उद्भव की गुत्थी प्रामाणिक तथ्यों के अभाव में और उलझती जा रही है। दिसंबर, 2019 में रहस्यमयी निमोनिया जैसी बीमारी से आज कोविड-19 की वैश्विक महामारी तक के सफर में इस वायरस की उत्पत्ति पर विज्ञान जगत इसके नेचुरल ओरिजिन की अवधारणा को लेकर एकमत रहा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में आए तथ्यों ने विज्ञान जगत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कोविड-19 वायरस के वुहान लैब से निकलने की थ्योरी को खारिज नहीं किया जा सकता। पिछले सालभर से वायरस के लैब से निकलने की अवधारणा को खारिज कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति के चीफ मेडिकल एडवाइजर और वायरोलॉजिस्ट डॉ. एंथनी फासी ने भी अपने पिछले इंटरव्यू में वायरस के स्रोत की स्वतंत्र जांच की मांग को स्वीकार किया है और माना है कि बिना उचित तथ्यों के हम वायरस के लैब से आने की संभावना को नकार नहीं सकते। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी इंटेलीजेंस ने अपनी जांच में पाया कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में काम करने वाले तीन वैज्ञानिक नवंबर, 2019 में निमोनिया जैसी बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए थे। यह कोविड-19 का पहला मरीज मिलने से एक महीने पहले की घटना है। स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर चीन का नकारात्मक रवैया और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा की गई आधी-अधूरी जांच ने पहले से ही वायरस की उत्पत्ति पर संदेहास्पद स्थिति पैदा कर दी है। इस वायरस के वुहान लैब से निकलने की अवधारणा के दो महत्वपूर्ण बिंदु हैं: पहला, अभी तक हमें इस वायरस का स्ट्रेन किसी भी अन्य जीव की प्रजाति में देखने को नहीं मिला है और दूसरा, इस वायरस का संक्रमण और प्रसार का पैटर्न एक आइडियल इंफेक्टिव वायरस से मिलता है, जो प्राकृतिक रूप से संभव नहीं लगता। जीनोमिक संरचना के मामले में कोविड-19 के वायरस के सबसे करीब जो कोरोना वायरस है, उसमें उतनी ही समानता है, जितनी समानता मनुष्य और ओरांगउटान (वनमानुष) में होती है। जाहिर है कि कोई ओरांगउटांन सीधे मनुष्य नहीं बन सकता है। ऐसे में उस करीबी कोरोना वायरस से कोविड-19 का वायरस बनने के बीच भी प्राकृतिक रूप से कोई कड़ी होनी चाहिए, जो अब तक नहीं मिली है। यह तथ्य अपने आप में वायरस के प्राकृतिक होने की दलील को खारिज करता है। अभी तक कोविड-19 के पहले मरीज का वुहान के वेट मार्केट से कोई संबंध स्थापित न हो पाना भी वायरस के नेचुरल ओरिजिन की थ्योरी को कठघरे में खड़ा करता है। एक विज्ञानी के नजरिये से इस वायरस की उत्पत्ति का पता लगाना हमारे लिए कई कारणों से जरूरी है। अगर हमें वायरस के लैब से निकलने का प्रमाण मिलता है, तो आने वाले समय में इस तरह की रिसर्च फंडिंग और उससे जुड़े सुरक्षा निर्देशों को और सख्त बनाया जा सकता है। अगर यह वायरस वुहान लैब से आया है, तो इस तथ्य को छुपाने के लिए चीन को नैतिक रूप से जिम्मेदारी लेनी होगी और वैश्विक वैक्सीन की मांग को पूरा करने के लिए आगे आना होगा। एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही इस प्रश्न पर पूर्णविराम लगा सकती है।
बीजिंग,चीन (China) में बर्ड फ्लू का H10N3 स्ट्रेन से संक्रमित पहले शख्स का मामला सामने आया है। यह मामला देश के पूर्वी जियांगसु प्रांत में पता चला है। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने मंगलवार को दी। झेंजियांग (Zhenjiang) शहर निवासी 41 वर्षीय शख्स में बर्ड फ्लू का संक्रमण है। फिलहाल शख्स की हालत स्थिर है और उसे जल्द ही डिस्चार्ज किया जाएगा। बर्ड फ्लू के H10N3 स्ट्रेन से पीड़ित शख्स को बुखार व अन्य स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों के कारण 28 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती किया गया। 28 मई को इंफ्लूएंजा वायरस H10N3 से संक्रमित पाया गया। हालांकि अभी इस बारे में किसी तरह का विवरण नहीं दिया गया कि शख्स को यह संक्रमण कैसे लगा। अप्रैल में उत्तरपूर्व चीन के शेनयांग शहर (Shenyang city) में एक जंगली पक्षी में अत्यधिक रोगजनक H5N6 एवियन फ्लू की पहचान हुई थी। अधिक खतरनाक नहीं है H10N3: NHC हालांकि NHC ने H10N3 कम रोगजनक ( pathogenic) बताया है और इस संक्रमण को फैलने का खतरा भी कम बताया है। संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लोगों की मेडिकल जांच की गई लेकिन उनमें इस तरह का कोई मामला नहीं है। एवियन इंफ्लूएंजा के कई स्ट्रेन चीन में मौजूद हैं और पोल्ट्री में काम करने वाले लोग इससे संक्रमण की चपेट में आए हैं। 2016-2017 में H7N9 स्ट्रेन से हुई थी 300 लोगों की मौत 2016-2017 में H7N9 स्ट्रेन से 300 लोगों की मौत के बाद से बर्ड फ्लू का संक्रमण इंसानों में नहीं आया था। अब यह पहला मामला मिला है। दुनिया में इस स्ट्रेन के संक्रमण को कोई दूसरा मामला सामने नहीं आया है। बता दें कि अभी कोविड-19 महामारी के चपेट में पूरी दुनिया है। इसकी शुरुआत भी चीन से ही हुई थी। पहला संक्रमण का मामला 2019 के अंत में चीन के वुहान में आया था। इसके दो-तीन माह बाद ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित कर दिया था।
नई दिल्ली,देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार कमी आ रही है। कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने की वजह से केस कम हुए हैं। देश में 50 दिन बाद कोरोना के सबसे कम मामले सामने आए हैं। देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 1.52 लाख मामले सामने आए तो करीब 3,100 लोगों की कोरोना के कारण मौत हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य़ मंत्राय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के 1,52,734 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 3,128 लोगों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत भी सामने आई है। कोरोना वायरस संक्रमण की बात करें देश में बीते 24 घंटों में कोरोना से 2,38,022 लोग ठीक हुए हैं। इसको मिलाकर देश में अब तक कुल 2,56,92,342 लोग कोरोना से उबर चुके हैं। इससे रिकवरी दर बढ़कर 91.60% हो गई है। इसके साथ ही देश में कोरोना के सक्रिय मामले भी कम हो रहे हैं। बीते 24 घंटों में देश में कोरोना के 88,416 एक्टिव केस कम हुए हैं। फिलहाल कोरोना के 20,26,092 हैं। इससे एक्टिव दर घटकर 7.22% हो गई है। देश में कोरोना के अब तक कुल 2,80,47,534 मामले सामने आ चुके हैं। भारत में कोरोना से अब तक कुल 3,29,100 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में कोरोना से मौतें ही फिलहाल चिंता का विषय हैं। रविवार को 16 लाख से ज्यादा टेस्ट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए रविवार को देश भर में 16,83,135 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक 34,48,66,883 नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। सवा 21 करोड़ के पार पहुंचा टीकाकरण का आंकड़ा इस बीच देश में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण जारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 21,31,54,129 लोगों को टीका लगाया चुका है। इसमें से 10,18,076 टीकाकरण बीते एक दिन में किया गया है।
नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सत्तासीन नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना सेंट्रल विस्टा का काम निरंतर आगे भी जारी रहेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को याचिकाकर्ता आन्या मल्होत्रा की मंशा पर सवाल उठाते हुए सेंट्रल विस्टा का काम रोकने की याचिका खारिज कर दी और इसके साथ 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस तरह सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी तय कर दिया कि सेंट्रल विस्टा का काम आगे भी निरंतर जारी रहेगा। इससे पहले याचिकाकर्ता आन्या मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई कर 17 मई को हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में जोर देकर कहा गया था कि कोरोना वायरस के इस दौर में किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने की मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया था कि एक परियोजना की वजह से कई लोगों की जान खतरे में आ रही है। वहीं, पिछले सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उस याचिका को ही खारिज करने की मांग कर दी थी। केंद्र की ओर से कहा गया था कि इस प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान सभी कोरोना प्रोटोकॉल्स का पालन किया जा रहा है। इसी के साथ याचिकाकर्ता की नीयत पर सवाल उठाते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि जनहित बहुत ही सिलेक्टिव है, उन्हें दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे मजदूरों की कोई परवाह नहीं है, जो शायद इससे 2 किलोमीटर दूरी पर ही चल रहे हैं। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत एक नए संसद भवन और नए आवासीय परिसर का निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास के साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालय के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है। सेंट्रल विस्टा परियोजना की सितंबर 2019 में घोषणा की गई थी। 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना की आधारशिला रखी थी। इस पुनर्विकास परियोजना में एक नए संसद भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसके तहत एक केंद्रीय सचिवालय का भी निर्माण किया जाएगा।
नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने कोरोना के कारण जान गंवाने वालों के आश्रितों को पेंशन दिए जाने सहित कई अन्य सुविधाएं प्रदान किए जाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आश्रितों के लिए पेंशन के अलावा सरकार कोरोना से प्रभावित परिवारों के लिए बढ़ा हुआ उदारीकृत बीमा मुआवजा सुनिश्चित करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन कदमों से वित्तीय संकट का सामना कर रहे परिवारों की परेशानियां कम होंगी। सरकार कोरोना पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़ी है। पीएमओ ने कहा कि ऐसे पीड़ित परिवार सम्मान का जीवन जी सकें इसके लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) की पेंशन योजना को उनके लिए भी विस्तारित किया जा रहा है जिनकी मौत महामारी से हुई है। ऐसे पीडि़तों के परिवार के आश्रित सदस्यों को औसत दैनिक वेतन के 90 प्रतिशत के बराबर पेंशन मिलेगी। यह लाभ पिछले साल 24 मार्च से प्रभावी होगा और इसमें 24 मार्च, 2022 तक के मामले शामिल होंगे। पीएमओ ने कहा कि इम्प्लाईज डिपाजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (ईडीएलआइ) योजना के तहत बीमा फायदों का विस्तार किए जाने से उन कर्मचारियों के परिवारों को लाभ मिलेगा जिन्होंने महामारी की वजह से अपनी जान गंवाई है। बीमा लाभ के तहत मिलने वाली सर्वाधिक राशि को छह लाख रुपये से सात लाख किया गया है, जबकि कम से कम यह राशि 2.5 लाख रुपये होगी। यह योजना 15 फरवरी, 2020 से अगले तीन साल के लिए लागू रहेगी। अनाथ बच्चों को पालेगा पीएम केयर्स फंड कोरोना के रूप में आई अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी में जो बच्चे अनाथ हो गए हैं, उन्हें सरकार का पूरा साथ मिलेगा। यूं तो केंद्र की ओर से राज्यों को ऐसे बच्चों के लिए प्रबंध करने को कहा गया था, लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सरकार की ओर से ऐसे बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा कर दी है। इन घोषणाओं में मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, मासिक वजीफा और 23 साल की उम्र में एकमुश्त 10 लाख की मदद जैसे कदम शामिल हैं।
नई दिल्‍ली, केंद्र सरकार ने कोरोना प्रबंधन को लेकर दस पैनल बनाने के लिए गठित छह अधिकार प्राप्त समूहों का पुनर्गठन किया है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक सरकार ने इन समूहों के कामकाज का दायरा भी बढ़ाया है। इसमें ऑक्सीजन की उपलब्धता, टीकाकरण, आपात प्रतिक्रिया और आर्थिक कल्याण संबंधी मामलों के कामकाज को भी इसमें शामिल किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक संबंधित अधिकार प्राप्त समूह के संयोजक जरूरत पड़ने पर अपने समूह में किसी अन्य अधिकारी को सहयोजित कर सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक एक अधिकार प्राप्त समूह ऑक्सीजन उत्पादन, आयात, पीएसए संयंत्रों की स्थापना के संबंधित मामलों से निपटेगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव इस अधिकार प्राप्त समूह के संयोजक होंगे। इस समूह में 10 सदस्य होंगे। टीकाकरण, टीका खरीद, आयात आदि से संबंधित अधिकार प्राप्त समूह के संयोजक नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल होंगे। इसमें विदेश सचिव समेत नौ अन्य सदस्य होंगे। यही नहीं जांचों से संबंधित अधिकार प्राप्त समूह में आठ अन्य सदस्य होंगे। इस समूह के संयोजक आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव होंगे। आर्थिक एवं कल्याणकारी कदमों से संबंधित समूह में 10 सदस्य होंगे। इसके संयोजक आर्थिक मामलों के सचिव होंगे। सूचना, संचार एवं सार्वजनिक संवाद मामलों से संबंधित समूह में 10 अन्य सदस्य शामिल होंगे। इसके संयोजक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव होंगे। आपात प्रबंधन योजना और रणनीति से संबंधित अधिकार प्राप्‍त समूह के संयोजक नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल होंगे। इसमें 10 अन्य सदस्य भी शामिल होंगे। वहीं आपात प्रतिक्रिया समूह में दस अन्य सदस्य होंगे। इसके संयोजक केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव होंगे। महामारी प्रतिक्रिया एवं समन्वय से संबंधित समूह में 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। इसके संयोजक गृह मंत्रालय के सचिव होंगे। आधिकारिक आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव अजय भल्ला ने कहा है कि देश में कोरोना के हालात की समीक्षा के बाद उक्‍त फैसला लिया गया है।
नई दिल्ली,देश में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। एक तरह जहां राज्य सरकारें कोरोना वैक्सीन की कमी को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रही हैं तो वहीं सरकार टीके की उपलब्धता को लेकर हर दिन सफाई दे रही है। अब केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि जून 2021 यानी अगले महीने में नेशनल कोविड वेक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत करीब 12 करोड़ वैक्सीन की डोज उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी इसकी जानकारी दी है। राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोरोना के 1.82 करो़ड़ से अधिक टीके अभी भी उपलब्ध इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोरोना के 1.82 करो़ड़ से अधिक टीके अभी भी उपलब्ध हैं और उन्हें अगले तीन दिन में 4 लाख से अधिक डोज मिल जाएंगी। केंद्र ने कहा था कि अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 22.77 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज मुफ्त श्रेणी और प्रत्यक्ष राज्य खरीद श्रेणी के माध्यम से मुहैया कराई हैं। इसके साथ ही मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि इनमें बर्बाद हुई और लगाई गई डोज की कुल संख्या 20,80,09,397 है। शुक्रवार तक देश में 20.86 करोड़ लगाए जा चुके हैं टीके बता दें कि देश में टीकाकरण का तीसरा चरण पहली मई से शुरू हो हुआ है। मंत्रालय के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी 1,82,21,403 करोड़ डोज उपलब्ध हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान में देश में शुक्रवार की शाम सात बजे तक कुल 20.86 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं। अभियान के 133वें दिन 2,80,7411 डोज दी गईं, जिसमें 25.99 लाख लाभार्थियों को पहली और 2.07 लाख लाभार्थियों को दी गईं दूसरी डोज शामिल हैं।
नई दिल्ली, देश में जारी कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियों कार्यक्रम मन की बात के जरीए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के 77वें संस्करण में पीएम मोदी ने कोरोना महामारी, चक्रवात ताउते और यास का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा कि देश की जनता इनसे पूरी ताकत के साथ लड़ रही है। उन्‍होंने इन आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवदेना प्रकट की। पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत दूसरे देशों की सोच और उनके दबाव में नहीं, अपने संकल्प से चलता है। - आज 30 मई को हम 'मन की बात' कर रहे हैं और संयोग से ये सरकार के 7 साल पूरे होने का भी समय है। इन वर्षों में देश 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र पर चला है। इन 7 वर्षों में जो कुछ भी उपलब्धि रही है, वो देश की रही है, देशवासियों की रही है। - कोरोना की शुरुआत में देश में सिर्फ एक ही टेस्टिंग लैब थी, लेकिन आज ढाई हजार से ज्यादा लैब काम कर रही हैं। शुरू में कुछ सौ टेस्ट एक दिन में हो पाते थे, अब 20 लाख से ज्यादा जांच एक दिन में हो रही है। अबतक देश में 33 करोड़ से अधिक मनूनों की जांच की जा चुकी है। - इस महामारी में भी हमारे किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है। किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया, तो इस बार देश ने रिकॉर्ड फसल खरीदी भी की है । इस बार कई जगहों पर तो सरसों के लिए किसानों को एमएसपी से भी ज्यादा भाव मिला है। किसान-रेल अब तक करीब -करीब 2 लाख टन उपज का परिवहन कर चुकी है। अब किसान बहुत कम कीमत पर फल, सब्जियां, अनाज, देश के दूसरे सुदूर हिस्सों में भेज पा रहा है। - देश पूरी ताकत के साथ कोरोना से लड़ रहा है, पिछले 100 वर्षों में ये सबसे बड़ी महामारी है। इसी महामारी के बीच भारत ने अनेक प्राकृतिक आपदाओं का भी डटकर मुकाबला किया है। मैं उन सभी लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपने करीबियों को खोया है। हम सभी इस मुश्किल घड़ी में उन लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं जिन्होंने इस आपदा का नुकसान झेला है। - विपदा की इस कठिन और असाधारण परिस्थिति में चक्रवात से प्रभावित हुए सभी राज्यों के लोगों ने जिस प्रकार से साहस का परिचय दिया है। उसके लिए मैं आदरपूर्वक सभी नागरिकों की सराहना करना चाहता हूं। देश और देश की जनता इनसे पूरी ताकत से लड़ी और कम से कम जनहानि सुनिश्चित की। पिछली मन की बात में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत सरकार वर्तमान कोविड की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकारों के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है। मैं आप सभी से कोविड के बारे में विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी लेने की अपील करता हूं। मैं देख रहा हूं कि कई डॉक्टर कोविड पर जानकारी साझा करने के लिए सोशल मीडिया पर गए हैं और परामर्श भी दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मुफ्त वैक्सीन का कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा।
लखनऊ उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस की चपेट में आकर बहुत से पत्रकारों को जान गंवानी पड़ी है। अपार संकट की इस घड़ी में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मानवीय पहल की है। हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सीएम योगी ने दिवंगत पत्रकारों के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि जारी की है। बताते चलें कि सीएम योगी के निर्देश पर सूचना विभाग ने दिवंगत पत्रकारों का ब्यौरा पहले ही जुटा लिया था। अब उनके परिजनों को सहायता राशि जारी की गई है। पत्रकारों के संगठन ने सीएम का जताया आभार बताया जा रहा है कि अभी दो दर्जन से ज्यादा दिवंगत पत्रकारों के परिवार को यह सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी। यूपी के पत्रकारों के संगठन उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। संगठन के अध्यक्ष हेमंत तिवारी और सचिव शिव शरण सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कोरोना के त्रासद काल में दिवंगत हुए पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए आपका अत्यंत आभार। अपर मुख्य सचिव एवं निदेशक सूचना से चर्चा के बाद हमने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त कोरोना काल में दिवंगत हुए पत्रकार साथियों के विवरण विगत सप्ताह शासन को सौंप दिए थे, जिस पर आपने कृपापूर्वक निर्णय लेकर आज हिंदी पत्रकारिता दिवस पर उन सभी परिवारों के लिए10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि संस्तुति की है।' दिवंगत हुए अन्य पत्रकारों के दस्तावेज भी सौंपे जाएंगे उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने खत में आगे लिखा है, 'साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता के क्रम में हमने अवगत कराया है कि इस कालावधि में दिवंगत हुए बहुत से अन्य साथियों के आवश्यक विवरण, जैसे मृत्यु प्रमाणपत्र अभी आने शेष हैं। हम जल्द से जल्द समस्त ऐसे परिवारों से दस्तावेज इकट्ठा कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक शासन को इसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। अपेक्षा है कि आज की भांति उन्हें भी शीघ्र ही यह सहायता उपलब्ध कराने की कृपा करेंगे।' हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सीएम ने दी बधाई सीएम योगी ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर पत्रकारों को शुभकामनाएं दी हैं। सीएम ने ट्वीट करते हुए कहा, 'स्वाधीनता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक सामाजिक जागरण व राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता का अभूतपूर्व योगदान है। हिंदी पत्रकारिता दिवस की सभी पत्रकार जनों को हार्दिक शुभकामनाएं।'
नई दिल्ली,कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और बड़ी घोषणा की है। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी में जो बच्चे अनाथ हो गए हैं उन्हें पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत सहायता दी जाएगी। ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र में मासिक वजीफा और 23 साल की उम्र में पीएम केयर्स से 10 लाख रूपये का फंड दिया जाएगा। ऐसे बच्चों को केंद्र सरकार मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करेगी। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा दी गई है। पीएमओ ने यह भी बताया कि कोरोना की वजह से जिन बच्चों ने अपने माता और पिता को खो दिया है, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए लोन की सहायता दी जाएगी। पीएम केयर्स फंड से इसका ब्याज दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें 18 साल तक 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा भी मिलेगा। इसके प्रीमियम का भुगतान पीएम केयर्स फंड से किया जाएगा। इस खास सहायता का एलान करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे कठिन समय में एक समाज के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों की देखभाल करें और एक उज्ज्वल भविष्य की आशा जगाएं। कोविड-19 के कारण माता-पिता या जीवित माता-पिता या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता और पिता दोनों को खोने वाले सभी बच्चों को 'पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन' योजना के तहत सहायता दी जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से बताया गया कि पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन के सौजन्य से कोरोना प्रभावित बच्चों के समर्थन और उनके सशक्तिकरण के लिए कदम उठाया गया है। सरकार उन बच्चों के साथ खड़ी है, जिन्होंने कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है।
नई दिल्‍ली, भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) दिनोंदिन मजबूत होती जा रही है। वायुसेना के सूत्रों ने बताया कि तीन राफेल लड़ाकू विमानों (Rafale fighter aircraft) का एक बैच गुरुवार को फ्रांस से उड़ान भरने के बाद भारत में उतरा। राफेल युद्धक विमानों की इस छठी खेप के भारत पहुंचने के साथ ही भारतीय वायुसेना के पास कुल राफेल विमानों की संख्‍या 21 हो गई है। मालूम हो कि इससे पहले आए 18 विमानों की पहली स्क्वाड्रन को अंबाला एयरबेस पर तैनात किया गया है जबकि दूसरी स्क्वाड्रन यानी अन्य 18 राफेल विमान पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किए जाने हैं। बता दें कि भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए फ्रांस से 36 राफेल (दो स्क्वाड्रन) युद्धक विमान खरीदने का फैसला सितंबर 2016 में किया था। गौरतलब है कि भारत और फ्रांस दोनों सरकारों के बीच राफेल विमानों का रक्षा सौदा 59 हजार करोड़ रुपये में हुआ था। इस साल के अंत तक सभी 36 विमान भारत को मिल जाने हैं। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी। राफेल दो इंजनों वाला यह युद्धक विमान परमाणु हमले तक में सक्षम है। राफेल लड़ाकू विमान एक साथ 14 स्थानों को निशाना बना सकता है। हाल ही में राफेल विमानों की पांचवीं खेप फ्रांस से भारत पहुंची थी। इस खेप में पांच राफेल लड़ाकू विमान थे जो फ्रांस के मेरिग्नैक एयर बेस (Merignac Air Base) से उड़ान भरकर 8,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए भारत पहुंचे थे।
नई दिल्ली,केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि देश में कोरोना टीकाकरण का काम इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। महामारी के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए जावडेकर ने कहा कि उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया और जिस तरह उन्होंने लोगों को डराने की कोशिश की, उससे पुष्टि होती है कि टूलकिट के पीछे कांग्रेस ही थी। जावडेकर ने कहा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल में दिसंबर तक वैक्सीन की 216 करोड़ डोज के उत्पादन और उन्हें 108 करोड़ लोगों को लगाने का रोडमैप दिया है। उन्होंने राहुल के उस दावे को खारिज कर दिया कि इस कवायद को पूरा करने में तीन साल का समय लग सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी की रोकथाम के काम में जुटे प्रधानमंत्री मोदी के लिए 'नौटंकी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल टूलकिल स्कि्रप्ट का हिस्सा है। बता दें कि भाजपा का दावा है कि इसके पीछे कांग्रेस है। जबकि कांग्रेस ने इससे इन्कार करते हुए उलटा भाजपा पर ही आरोप लगाया है और मामले की पुलिस से जांच की मांग की है। बता दें कि पिछले हफ्ते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा था कि भारत 2021 के अंत तक कम से कम अपनी सभी वयस्क आबादी का टीकाकरण करने की स्थिति में होगा। उन्होंने आगे आश्वासन दिया था कि वर्तमान में देश की स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार किया जा रहा है कि कोरोना वायरस का अगला म्यूटेंट फिर से आ सकता है। भविष्य में यह बच्चों के लिए खतरा बन सकता है। 21 मई को एक कोरोना की समीक्षा बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि अगस्त और दिसंबर 2021 के बीच भारत 216 करोड़ वैक्सीन की खुराक खरीद लेगा। जबकि इस साल जुलाई तक 51 करोड़ खुराक की खरीद की जाएगी। जून महीने में उपलब्ध हो जाएगी रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी गौरतलब है कि कोरोना के खिलाफ जंग में अगले महीने से देश में एक और वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी जून महीने के दूसरे हफ्ते से देश में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी। यह वैक्सीन देश में सबसे पहले अपोलो अस्पताल के जरिए उपलब्ध होगी। अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने इसे लेकर घोषणा की है कि उसके देशभर के अस्पतालों में जून के दूसरे हफ्ते से रूस की स्पूतनिक वी वैक्सीन का टीकाकरण व्यापक पैमाने पर शुरू हो जाएगा।
नई दिल्ली। एक मई से शुरू हुए टीकाकरण के तीसरे चरण की सुस्त रफ्तार ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन शुरुआती दिक्कतों के बाद अब इसमें तेजी आई है और अगले दो महीने में इसकी रफ्तार तिगुनी होने की उम्मीद जताई जा रही है। मई में अभी तक औसतन 15 लाख डोज प्रतिदिन लगाई जा रही है जो एक दिन पहले 29 लाख डोज तक पहुंच गई है। यही नहीं, राज्यों के पास केंद्र की ओर से भेजे जा रहे टीके की पर्याप्त डोज भी मौजूद हैं। 51.6 करोड़ डोज उपलब्ध कराने का वादा वैक्सीन पर उच्चाधिकार समिति के प्रमुख डा. वीके पॉल ने जुलाई तक वैक्सीन की कुल 51.6 करोड़ डोज उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। इससे भी टीकाकरण की मौजूदा रफ्तार के तीन गुना तक बढ़ने की उम्मीद है। अभी तक देश में वैक्सीन की कुल 20.57 करोड़ डोज लगाई गई हैं। यदि पांच फीसद औसत बर्बादी को भी मान लें तो इस हिसाब से 31 जुलाई तक लगभग 30 करोड़ डोज लगनी बाकी है। क्‍या कहते हैं आंकड़े अगले 64 दिनों में 30 करोड़ डोज देने का मतलब है कि प्रतिदिन लगभग 47 लाख डोज लगानी होगी। यह संख्या मई के औसतन 15 लाख डोज प्रतिदिन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। इसके अलावा मई में केवल 1.5 लाख डोज सप्लाई करने वाला रशियन डायरेक्ट इंवेस्टवेंट फंड जून से स्पुतनिक-वी की सप्लाई बढ़ाने का दावा कर रहा है और इसे लोगों को लगाने के लिए डा. रेड्डीज लेबोरेटरीज ने अपोलो अस्पताल के साथ समझौता भी कर लिया है। बढ़ेगी टीकाकरण की रफ्तार स्पुतनिक-वी की बढ़ती सप्लाई को देखते हुए नेशनल टास्क फोर्स ऑन इम्युनाइजेशन (एनटागी) इसे सरकार के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बनाने पर विचार रही है। स्पुतनिक-वी की सप्लाई बढ़ने के अनुरूप टीकाकरण की गति को भी बल मिलेगा। वैक्सीन सप्लाई में वृद्धि का असर दिखा वैक्सीन की सप्लाई में वृद्धि का असर नजर भी आने लगा है। जहां मई में औसतन 15 लाख डोज प्रतिदिन लग रही थी, उसकी तुलना में 27 मई को कुल 29 लाख डोज दी गईं। 28 मई को इस आंकड़े को भी पार कर जाने की उम्मीद है। पॉल ने कहा कि आने वाले दिनों में इसमें लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। राज्यों के पास मौजूद वैक्सीन डोज से इसकी पुष्टि भी होती है। राज्‍यों के पास 2.24 करोड़ डोज शुक्रवार की सुबह के आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार की तरफ से भेजी गई वैक्सीन में से राज्यों के पास अभी कुल 2.24 करोड़ डोज उपलब्ध हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश के पास 30.98 लाख डोज हैं। वहीं राजस्थान के पास 17 लाख, मध्य प्रदेश के पास 14.13 लाख, बिहार के पास 5.42 लाख, पंजाब के पास 2.81 लाख , हरियाणा के पास 3.28 लाख, झारखंड के पास 9.21 लाख और दिल्ली के पास 1.83 लाख डोज उपलब्ध हैं। अगस्त से वैक्सीन उत्पादन में तेजी की उम्मीद स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वैक्सीन की ज्यादा दिक्कत सिर्फ जुलाई तक रहेगी। अगस्त से देश में वैक्सीन का उत्पादन कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। सीरम इंस्टीट्यूट ने मौजूदा 6.5 करोड़ डोज से बढ़ाकर अगस्त से 11 करोड़ डोज प्रति महीने उत्पादन का दावा किया है। इसी तरह से भारत बायोटेक भी मौजूदा दो करोड़ डोज से बढ़ाकर अगस्त में 6.5 करोड़ डोज और सितंबर से 10 करोड़ डोज उत्पादन का दावा कर रही है। स्पुतनिक-वी का भी उत्‍पादन होगा तेज इसके अलावा पैनेसिया बायोटेक ने भी अगस्त से स्पुतनिक-वी का बड़े पैमाने पर उत्पादन का एलान किया है। वहीं दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल में चल रही वैक्सीन को जोड़कर सरकार देश में अगस्त से दिसंबर के बीच 215 करोड़ डोज वैक्सीन उत्पादन का दावा पहले ही कर चुकी है।
नई दिल्लीजम्मू-कश्मीर पर टिप्पणियों के लिए भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर(UN General Assembly Volkan Bozkir) पर निशाना साधा। भारत ने कहा कि उनकी भ्रामक और पूर्वाग्रही टिप्पणियों ने उस कार्यालय का बहुत अहित किया है जिसमें वह विराजमान हैं।वोल्कन ने गुरुवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि यह पाकिस्तान का कर्तव्य है कि वह जम्मू-कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र में और ज्यादा जोरदारी से उठाए। वह कुरैशी के निमंत्रण पर बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे थे। वोल्कन के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि उनकी टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं और भारतीय केंद्र शासित प्रदेश के बारे में उनका संदर्भ अनुचित है। बागची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष का व्यवहार वास्तव में खेदजनक है और वैश्विक मंच पर उनकी स्थिति को निश्चित रूप से कमजोर करता है। क्या बयान दिया था ? संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने गुरुवार को कहा था कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर विवाद के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर और अधिक मजबूती के साथ उठाना चाहिए। यूएनजीए अध्यक्ष ने कश्मीर मुद्दे की फिलिस्तीन से भी तुलना की। उन्होंने कहा कि फलस्तीन मुद्दे की तुलना में कश्मीर विवाद के समाधान के लिए बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यूएनजीए प्रमुख वोल्कन बोजकिर ने यह बात कही। वोल्कन बोजकिर ने कहा कि मुझे लगता है कि यह पाकिस्तान का विशेष रूप से कर्तव्य है कि वह संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इसे (मुद्दे) और अधिक मजबूती से लाए। उन्होंने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि फलस्तीन और कश्मीर मुद्दा एक ही समय के हैं। ,
नई दिल्ली,ग्रामीण इलाकों में टेक्नोलॉजी की कमी पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रमुख आरएस शर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रणाली समावेशी हो, हमने 1075 कॉल सेंटर खोले हैं जहां पर लोग कोरोना वैक्सीनेशन के लिए कॉल करके अपॉइनमेंट बुक करवा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए पंजीकरण या स्लॉट बुक करने के लिए हमारे साथ भागीदारी करने वाले सभी सामान्य सेवा केंद्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिला अधिकारी, जिला कलेक्टर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी ग्रामीणों को टीकाकरण के लिए जागरूक कर रहे हैं। ताकि कोई भी टीकाकरण से वंचित ना रह जाए। उन्होंने आगे कहा कि सच यह है कि 45 से ज्यादा उम्र वाले लोग सेंटर्स पर वॉक-इन पंजीकरण करवा रहे हैं और उनका टीकाकरण हो रहा है। इससे यह साफ पता चलता है कि हमारा सिस्टम समावेशी है। दिक्कत18 से 45 आयुवर्ग के लोगों के टीकाकरण में हो रही है क्योंकि वैक्सीन की सप्लाई कम है और यह समस्या भी अस्थाई है। उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था पारदर्शी है। चाहे कोई वीवीआइपी हो या सामान्य नागरिक, हर किसी को कोविन पर एक ही डाटा देखने को मिल रहा है। इससे यह साफ है कि सिस्टम किसी को कोई प्राथमिकता नहीं दे रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित की गयी कोविड-19 रोधी दवा 2-डीजी (Covid-19 Medicine 2DG) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। (डीआरडीओ) की कोरोना दवा 2-डीजी सरकारी अस्पतालों, केंद्र और राज्य सरकारों को कम कीमत पर मुहैया कराई जाएगी। समाचार एजेंसी एएनआइ ने सरकारी अधिकारी के हवाले से जानकारी दी है कि डॉ रेड्डीज लैब द्वारा विकसित वि DRDO की 2DG एंटी-कोविड 19 दवा की कीमत 990 रुपये प्रति पाउच रखी गई है। सरकारी अस्पतालों, केंद्र और राज्य सरकार को रियायती मूल्य पर दवा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी अस्पतालों, केंद्र और राज्य सरकार को कम दाम पर मिलेगी DRDO की कोरोना की दवा डॉ रेड्डीज लैब द्वारा DRDO की 2DG एंटी-कोविड 19 दवा की कीमत 990 रुपये प्रति पाउच रखी गई है। सरकारी अस्पतालों, केंद्र और राज्य सरकार को दवा के मूल्य पर रियायत मिलेगी। न्यूज एजेंसी एएनआइ ने सरकारी अधिकारी के हवाले से जानकारी देते हुए कहा कि डॉ रेड्डीज लैब द्वारा विकसित DRDO की 2DG एंटी-कोविड 19 दवा की कीमत 990 रुपये प्रति पाउच है। सरकारी अस्पतालों, केंद्र और राज्य सरकार को यह दवा रियायती मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएगी।
भुवनेश्वर/नई दिल्ली ओडिशा में यास चक्रवाती तूफान को लेकर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पहल चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने कोरोना संकट का जिक्र करते हुए राहत पैकेज नहीं मांगा। वहीं डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में ओडिशा सरकार के शानदार काम की पीएम मोदी ने भी तारीफ की है। केंद्र सरकार ने यास तूफान के बाद पुनर्वास काम के लिए ओडिशा को 500 करोड़ की सहायता दी है। 'आपदा प्रबंधन में ओडिशा की प्रशंसनीय प्रगति' पीएम मोदी ने यास पर रिव्यू मीटिंग का जिक्र करते हुए ट्वीट में कहा, 'भुवनेश्वर में आपके साथ काफी अच्छी मीटिंग हुई थी। हम आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए साथ-साथ काम करते रहेंगे। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां ओडिशा ने प्रशंसनीय प्रगति की है।' 500 करोड़ की मदद पर पटनायक ने कहा थैंक्स पीएम मोदी ने ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक के ट्वीट का जवाब देते हुए यह बात कही। पटनायक ने यास के कहर के बाद पुनर्वास के काम में मदद के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया है। ओडिशा के सीएम ने ट्वीट में कहा, 'यास से प्रभावित इलाकों में पुनर्वास कार्य के लिए 500 करोड़ की सहायता देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं। साथ ही आपदा प्रतिरोधी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उठाए गए कदम प्रशंसनीय हैं। हम दीर्घकालिक रणनीति पर काम करेंगे।' तत्काल राहत पैकेज नहीं मांगकर पेश की मिसाल इससे पहले यास को लेकर पीएम के साथ समीक्षा बैठक में पटनायक ने तत्काल राहत पैकेज की मांग नहीं रखी। सीएम नवीन पटनायक ने कहा कि वह महामारी के वक्त केंद्र पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहते। बजाय इसके नवीन पटनायक ने बैठक में राज्य में आपदा प्रतिरोधी पावर सिस्टम की जरूरत को हाइलाइट किया ताकि इस तरह के तूफान के लिए पहले से तैयारी हो सके। ओडिशा सीएम के इस कदम की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। कोविड की वजह से केंद्र पर बोझ नहीं डालेंगे' ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने समीक्षा बैठक के बाद ट्वीट कर बताया, 'देश में कोविड-19 महामारी चरम पर है, ऐसे में हमने केंद्र पर अतिरिक्त बोझ डालते हुए तत्काल आर्थिक मदद की मांग नहीं रखी है। उन्होंने आगे लिखा, 'हम संकट से निपटने के लिए अपने संसाधनों से इसका प्रबंधन करेंगे। आपदा प्रतिरोधी उपायों के लिए मांगी मदद ओडिशा सीएम ने दूसरे ट्वीट में कहा, 'हमने ओडिशा को आपदा प्रतिरोधी बनाने के लिए दीर्घकालिक उपायों की मदद मांगी है क्योंकि हम हर साल इस तरह के जलवायु खतरे का सामना करते हैं। हमने आपदा प्रतिरोधी पावर इंफ्रास्ट्रक्टर और तटीय तूफानों से सुरक्षा के लिए ओडिशा की मांग को मीटिंग में हाइलाइट किया।'
नई दिल्ली,देश और दुनिया में भारी तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस कहां से पैदा हुआ? क्या साल 2019 के आखिर में इसकी उत्पत्ति चीन के वुहान शहर के जानवरों के बाजार से हुई या फिर वहां की प्रयोगशाला से यह वायरस बाहर आया। इसका पता लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा दोबारा जांच की दुनिया भर में बढ़ती मांग का भारत ने भी शुक्रवार को समर्थन किया। इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी अपनी खुफिया एजेंसियों को कोरोना वायरस के मूल का पता लगाकर तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश दे चुके हैं। अमेरिका समेत दुनिया के कई देश शुरू से ही यह शक जताते रहे हैं कि कोरोना वायरस को चीन के वुहान शहर की प्रयोगशाला में तैयार किया गया है। डब्ल्यूएचओ ने वायरस की उत्पत्ति की जांच करने के बाद मार्च में अपनी रिपोर्ट दी थी, लेकिन अमेरिका समेत कई देशों को उसकी रिपोर्ट पर यकीन नहीं हुआ। डब्ल्यूएचओ के जांच दल ने आगे और जांच किए जाने की भी बात कही थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट और इससे जुड़े अध्ययन पर आगे की कार्रवाई और इसमें सभी के सहयोग की जरूरत है। मीडिया के सवालों के जवाब में बागची ने कहा, 'कोविड-19 की उत्पत्ति पर डब्ल्यूएचओ की तरफ से वैश्विक अध्ययन कराया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन को आगे बढ़ाने और एक ठोस नतीजे तक पहुंचने की जरूरत है।' इस साल के शुरू में डब्ल्यूएचओ के विज्ञानी जांच करने के लिए चीन के वुहान शहर गए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आगे और विस्तृत जांच की बात कही थी। चीन के अधिकारियों पर डब्ल्यूएचओ के जांच दल के साथ सहयोग नहीं करने और पूरा डाटा उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लगे थे। अमेरिका समेत कई देशों ने इस पर चिंता भी जताई थी।
नई दिल्ली,कोरोना के खिलाफ जंग में अगले महीने से देश में एक और वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी जून महीने के दूसरे हफ्ते से देश में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी। यह वैक्सीन देश में सबसे पहले अपोलो अस्पताल के जरिए उपलब्ध होगी। अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने इसे लेकर घोषणा की है कि उसके देशभर के अस्पतालों में जून के दूसरे हफ्ते से रूस की स्पूतनिक वी वैक्सीन का टीकाकरण व्यापक पैमाने पर शुरू हो जाएगा। बताया गया है कि अपोलो के हॉस्पिटल नेटवर्क में यह वैक्सीन उपलब्ध होगी, जिसकी अनुमानित कीमत 1,195 रुपये प्रति डोज है। इस बारे में अपोलो ग्रुप की एग्जिक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट शोभना कामीनेनी ने गरुवार को जानकारी दी थी कि अपोलो समूह ने देशभर के 80 स्थानों पर 10 लाख वैक्सीन लगाने का काम पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि जून महीने में हम हर हफ्ते 10 लाख टीका लगाएंगे और जुलाई में इसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया जाएगा। सरकारी की तरफ से दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार फर्स्ट फेज के वैक्सीनेशन में फ्रंटलाइन वर्कर्स, ज्यादा रिस्क वाले लोगों और कॉर्पोरेट जगत के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई है। जून के दूसरे हफ्ते से स्पूतनिक का व्यापक इस्तेमाल शुरू हो जाने से देश में टीकाकरण की रफ्तार में तेजी आएगी। बता दें कि देश में कोविशील्ड और कोवैक्सीन को सबसे पहले मंजूरी मिली थी। मई के अंतिम सप्ताह तक देशभर में कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक वी लोगों को लगाई जा रही है। स्पूतनिक-वी का भारत में उत्पादन शुरू देश में कोरोना की रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी का उत्पादन शुरू हो गया है। इससे तत्काल वैक्सीन आपूर्ति में कोई मदद तो नहीं मिलेगी, लेकिन इस बात के लिए आश्वस्त हुआ जा सकता है कि दो-तीन महीने बाद इसका अच्छा असर दिखाई देगा। बता दें कि रूस के गामालेया वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान ने स्पूतनिक-वी वैक्सीन विकसित की है। रूसी निवेश कोष रशियन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड और पैनेसिया बायोटेक ने इस वैक्सीन का भारत में उत्पादन शुरू करने की घोषणा की।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चक्रवाती तूफान यास के प्रभाव की समीक्षा करने के लिए ओडिशा और पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। चक्रवाती तूफान यास ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जमकर कहर बरसाया है। पीएम मोदी चक्रवात यास से हुए नुकसान का जायजा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर पहुंचकर चक्रवात यास के प्रभाव पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ बैठक की। इसके बाद पीएम बालासोर, भद्रक और पुरबा मेदिनीपुर के प्रभावित इलाकों में हवाई सर्वेक्षण के लिए जाएंगे और बंगाल में समीक्षा बैठक करेंगे। ममता भी होंगी समीक्षा बैठक में शामिल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पीएम मोदी के साथ समीक्षा बैठक में शामिल होंगी। वो कलाईकुंडा वायु सेना स्टेशन में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगी और इस दौरान चक्रवात से हुए नुकसान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने की संभावना है। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में चक्रवात यास के प्रभाव की समीक्षा के लिए एक बैठक की। अधिकारियों ने तैयारियों के विभिन्न पहलुओं, नुकसान के आकलन और संबंधित मामलों पर विस्तार से जानकारी साझा की। बैठक में बताया गया कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 46 टीमों के साथ एनडीआरएफ की लगभग 106 टीमों को तैनात किया गया। इन्होंने एक हजार से ज्यादा व्यक्तियों को बचाया और 2500 से अधिक पेड़ों और पोलों को हटाया, जो सड़कों पर गिरे और बाधित हुए थे। सेना और तटरक्षक बल नाम के रक्षा बलों ने भी फंसे हुए लोगों को बचाया, जबकि नौसेना और वायु सेना अलर्ट पर थी। चक्रवाती तूफान 'यास' बुधवार को देश के पूर्वी तटों से टकराया था। यास के कारण ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में तबाही मची है। तीनों ही राज्यों में 21 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि बंगाल में तकरीबन तीन लाख घरों को यास चक्रवात ने नुकसान पहुंचाया है। आपको बता दें कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान यास कमजोर होकर 'डीप डिप्रेशन' में बदल गया है और अगले 12 घंटों के दौरान इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि अगले 12 घंटों के दौरान चक्रवात के उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। तूफान के चलते अगले 12 घंटों में ओडिशा के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी और उत्तर आंतरिक राज्य में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
अहमदाबाद, भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के कोरोना वैक्सीन (Coronavirus vaccine) के उत्पादन में गुजरात अहम भूमिका निभाएगा। गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (Gujarat Biotechnology Research Center) ने भारत बायोटेक के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत गुजरात वैक्सीन सब्सटेंस का उत्पादन करेगा। गुजरात की यह रिसर्च लैब अब तक 1100 सार्स कोविड जीनोम सिक्वेंस तैयार कर चुकी है। अगस्त 2021 से गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यह उत्पादन शुरू कर देगा जिससे भारत बायोटेक की उत्पादन क्षमता प्रतिमास 20 मिलीयन हो जाएगी। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस एमओयू के बाद कहा कि गुजरात कोरोना टीका के उत्पादन में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। इससे पहले भी गुजरात बायोटेक्नोलॉजी कोविड-19 के उत्पत्ति, उसके म्यूटेशन, कोरोना वैक्सीन के प्रभाव तथा लोगों में कोरोना के प्रतिकूल असर का भी अध्ययन किया। ड्रग सब्सटेंस की अहम भूमिका रुपाणी ने कहा कि वैक्सीन के निर्माण में ड्रग सब्सटेंस की भूमिका अहम होती है तथा गुजरात इसमें अपनी भागीदारी करेगा। वैक्सीन निर्माण एक जटिल तथा लंबी प्रक्रिया है सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगस्त 2021 में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी की ओर से उत्पादित ड्रग सब्सटेंस के चलते भारत बायोटेक की वैक्सीन उत्पादन क्षमता प्रति माह 20 मिलियन हो जाएगी। सब्सटेंस उत्पादन के लिए 3 लैबोरेटरी की स्थापना सब्सटेंस के उत्पादन के लिए गुजरात बायोसेफ्टी लेवल 3 लैबोरेटरी की स्थापना करेगा। अप्रैल 2020 में कोरोना वायरस के 1100 जीनोम सीक्वेंस तैयार करने वाली भारत की यह दूसरी लेब थी। आयुष मंत्रालय की सिफारिश के बाद गुजरात बायोटेक्नोलॉजी ने आयुर्वेद की 200 से अधिक दवाओं का कोरोना पर प्रभाव का अध्ययन किया। गुजरात बायोटेक्नोलॉजी ने कोरोना वायरस का टीका बनाने के लिए तथा उसके डायग्नोस्टिक को तैयार करने के लिए हेस्टर बॉयोसांइस प्राइवेट लिमिटेड, सुप्राटेक लैबोरेट्री तथा वेकरिया हेल्थ केयर के साथ भी एमओयू किया है।
नई दिल्ली। बंगाल और ओडिशा में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवात यास ने झारखंड में भी गुरुवार को जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया। देश के पूर्वी हिस्से, खासकर बंगाल और ओडिशा में चक्रवात के कारण डेढ़ लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। लाखों घरों को नुकसान पहुंचा है। दुकानें टूट गई हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि भारी बारिश के कारण कुछ निचले इलाकों में राहत कार्य प्रभावित हुआ है। चक्रवाती तूफान यास से प्रभावित पश्चिम बंगाल और ओडिशा का पीएम मोदी शुक्रवार को दौरा करेंगे। सबसे पहले वे ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचकर रिव्यू मीटिंग करेंगे। इसके बाद मोदी बालासोर, भद्रक और पूर्वी मेदिनीपुर का हवाई सर्वे करेंगे। इन जिलों में ही तूफान ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इसके बाद वे बंगाल में भी रिव्यू मीटिंग करेंगे। बता दें कि चक्रवात के बुधवार को ओडिशा में तट से टकराने के बाद भारत और बांग्लादेश में कम से कम पांच लोगों की मौत की खबर है। नेपाल तक चक्रवात का असर दिखा जहां भारी बारिश के कारण मैदानी इलाकों में बाढ़ आ गई और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन हुआ। लैंडफॉल (तट से टकराना) के समय 130 से 145 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चलने से ओडिशा और में काफी नुकसान हुआ। पूर्णिमा होने के कारण समुद्र में काफी ऊंची लहरें उठीं जिससे तटीय क्षेत्रों में जलभराव हो गया। नवीन पटनायक ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा किया डिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रभावित क्षेत्रों का गुरुवार को हवाई दौरा किया जबकि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को चक्रवात यास से हुए नुकसान का जायजा लेंगी। पटनायक ने चक्रवात प्रभावित 80 फीसद इलाकों में 24 घंटे में बिजली आपूर्ति बहाल करने का आदेश दिया है। बुधवार रात ओडिशा से झारखंड पहुंचने के बाद यास चक्रवात से निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलकर और कमजोर हो गया है, लेकिन इसके कारण रांची सहित राज्य के कई शहरों में भारी बारिश जारी है। झारखंड में आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पश्चिम सिंहभूम में 201 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। बिहार के दक्षिण, दक्षिण पूर्व व मध्य क्षेत्र के जिले में इसका असर दिख रहा है। 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा के साथ भारी बारिश हो रही है। बंगाल में 15,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान बंगाल के विभिन्न जिलों में तबाही का मंजर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15,000 करोड़ के नुकसान की आशंका जताई है। प्रभावितों के लिए राज्य सरकार द्वारा दुआरे त्रान (दरवाजे पर राहत) योजना शुरू की गई है। पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों के दर्जनों गांव पानी में डूबे हैं। लोग खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। बहुतों के पास खाने-पीने को अन्न का एक दाना तक नहीं है। बारिश ने उनकी मुसीबत बढ़ा दी है। कई जगह अब तक राहत नहीं पहुंच पाई है। कादुपाड़ा गांव में कमर तक भरे पानी में बच्चों को गोद लिए लोग परेशान दिखे। विख्यात पर्यटन दीघा, बकखाली और मंदारमनी तबाह हो चुके हैं। खूबसूरत समुद्री तट वीभत्स नजर आ रहा है। होटलों में समुद्र का पानी भर गया है। कई और तटबंध टूट गए, जिससे गांवों में पानी घुस गया है। कोलकाता के भी नदी किनारे वाले कई इलाके जलमग्न हैं। कालीघाट इलाके में भी पानी जमा हुआ है।बैतरणी नदी खतरे के निशान के पारओडिशा के उत्तरी जिले क्योंझर के जोडा में 268 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। लथीकाटा, बासुदेवपुर, चांदीकोल और देवगर में भी भारी बारिश हुई। बैतरणी नदी खतरे का निशान पार कर बह रही है। बंगाल और ओडिशा में 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बंगाल और ओडिशा में तबाही मचाने के बाद यास तूफान आगे बढ़ गया है, लेकिन ये तूफान अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ गया है। बंगाल और ओडिशा में तूफान की वजह से 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बारिश और घरों के टूटने की वजह से 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें 3 ओडिशा और एक बंगाल से है। बंगाल में 3 लाख लोगों के घर बर्बाद बंगाल में पूर्व मेदिनीपुर जिले के दीघा, शंकरपुर, मंदारमनी दक्षिण 24 परगना जिले के बाद बकखाली, संदेशखाली, सागर, फ्रेजरगंज, सुंदरबन आदि जगहों से लेकर पूरे बंगाल में 3 लाख लोगों के घर इस तूफान से उजड़ गए हैं। 134 बांध टूट गए हैं, जिन्हें ठीक करवाया जा रहा है। यहां बुधवार को 130-145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 28 और 29 मई को हेलिकॉप्टर से तूफान प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगी।
नई दिल्ली । 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड से पहले नवंबर, दिसंबर और जनवरी में उपद्रवियों ने भारी संख्या में ट्रैक्टर खरीदे थे। और इन ट्रैक्टरों का इस्तेमाल ट्रैक्टर परेड के नाम पर हिंसा फैलाना था। दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र में बताया है कि हरियाणा और पंजाब में दिसंबर 2019 और दिसंबर 2020 में खरीदे गए ट्रैक्टर के आंकड़ों को देखा गया तो सामने आया कि दिसंबर 2019 के मुकाबले गत वर्ष दिसंबर में पंजाब में ट्रैक्टर की खरीद 94 फिसद और हरियाणा में 50 फिसद बढ़ गई है। ऐसा ही आंकड़ा नवंबर और जनवरी माह का भी देखा गया। इन आकड़ों को जानने के लिए दिल्ली पुलिस ने पंजाब और हरियाणा राज्य के ट्रैक्टर और मशीनीकरण संघ को पत्र लिखा था। उससे मिली जानकारी से हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने आरोप तत्र में बताया कि है कि नंवबर, दिसंबर और जनवरी में पंजाब और हरियाणा में योजना बनाकर भारी संख्या ट्रैक्टर खरीदा गया था।पुलिस अभी फिलहाल यह पता लगा रही है कि इन ट्रैक्टरों की खरीद में पैसा कहां से आया। बैरिकेड तोड़ने और उत्पात मचाने के लिए खरीदे गए ट्रैक्टर आरोप पत्र में पुलिस ने बताया है कि किसान नेता ट्रैक्टर परेड से पहले कई वीडियो में यह कह रहे हैं कि ट्रैक्टर को पुलिस बैरिकेड तोड़ना है। ऐसे में इन ट्रैक्टर के आगे लोहे के मजबूत बंपर लगाएं। आंकड़े खोल रहे साजिश की परतें पंजाब माह बेचे गए ट्रैक्टर की संख्या माह बेचे गए ट्रैक्टर की संख्या फीसद में बढ़ोतरी नवंबर 2019 1330 नवंबर 2020 1909 43.5 फीसद दिसंबर 2019 790 दिसंबर 2020 1535 94.3 फीसद जनवरी 2020 1534 जनवरी 2021 2840 85.1 फीसद हरियाण माह बेचे गए ट्रैक्टर की संख्या माह बेचे गए ट्रैक्टर की संख्या फीसद में बढ़ोतरी नवंबर 2019 2408 नवंबर 2020 3174 31.5 फीसद दिसंबर 2019 1538 दिसंबर 2020 2312 50.3 फीसद जनवरी 2020 2635 जनवरी 2021 3900 48 फीसद
नई दिल्ली,माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के बयान पर केंद्र सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्वदेशी Koo ऐप पर बयान जारी कर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर पर तीखा हमला बोला है। सरकार ने अपने बयान में तल्ख लहजे में कहा है कि ट्विटर का यह बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश है। अपने कार्यों और जानबूझकर अवहेलना के माध्यम से भारत की कानूनी प्रणाली को ट्विटर कमजोर करना चाहता है। सरकार ने आश्वासन दिया कि ट्विटर सहित सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि भारत में हमेशा सुरक्षित हैं और रहेंगे। उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है। सरकार ने ट्विटर के बयान की निराधार, झूठा और भारत को बदनाम करने की कोशिश के रूप में निंदा की है और इसके जरिए ट्विटर ने अपनी मूर्खता को छुपाया है। ट्विटर को देश के कानूनों का पालन करने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि कानून बनाना और नीतियों को लागू करना पूरी तरह से एक संप्रभु सरकार का काम है और ट्विटर सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। उसका इसमें कोई दखल नहीं होना चाहिए कि आखिर भारत का कानूनी फ्रेमवर्क क्या होना चाहिए। यही नहीं, सरकार ने ट्विटर के दावों पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, 'ट्विटर दावा करता है कि वह भारत के लोगों के साथ है। लेकिन यह विडंबना ही है कि बीते कुछ समय में ट्विटर ऐसा नहीं दिखा है।' मंत्रालय ने कहा कि ट्विटर ने उन रेग्युलेशंस को मानने से इनकार कर दिया है और भारत में किसी आपराधिक गतिविधि के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बनने जैसा काम किया है। यही नहीं ट्विटर को सरकार ने भारत की लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की परंपरा की भी याद दिलाई । सरकार ने कहा कि भारत में सदियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था रही है और अभिव्यक्ति की आजादी रही है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बचाव करने के लिए हमें किसी निजी, मुनाफे के लिए संचालित और विदेशी संस्थान की जरूरत नहीं है। ज्ञात हो कि ट्विटर ने कहा कि वो मौजूदा हालात के मद्देनजर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंतित हैं। माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट Twitter ने गुरुवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) से नये इंटरमीडियरी गाइडलाइंस को लागू करने के लिए तीन माह का अतिरिक्त समय मांगा है। ट्विटर ने दोहराया कि वो नये आईटी एक्ट के अंतर्गत मौजूदा शिकायत निवारण चैनल के जरिए यूजर और लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से मिलने वाली शिकायत को स्वीकार करना जारी रखेगा। टूलकिट मामले की जांच में बाधा डाल रहा ट्विटर : पुलिस उधर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच में ट्विटर की तरफ बाधाएं खड़ी की जा रही हैं और वह जांच व न्यायनिर्णायक प्राधिकारी होने का प्रयास कर रहा है।गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में पुलिस ने कहा कि ट्विटर की तरफ से गलत बयानबाजी की जा रही है कि सरकार के कहने पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि असल में ऐसा नहीं है। सच्चाई यह है कि सरकार ने ही ट्विटर के खिलाफ केस दर्ज करने से मना किया है। टूलकिट मामले में सिर्फ प्राथमिक जांच की जा रही है और कोई केस दर्ज नहीं किया गया है।
नई दिल्‍ली,केंद्र की मोदी सरकार ने ब्लैक फंगस (Black Fungus) या म्यूकॉरमायकोसिस की दवा की कमी से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के बाद महामारी का रूप ले चुक ब्‍लैक फंगस की दवा का इंतजाम करने का जिम्‍मा अपने हाथों में ले लिया है। बता दें कि ब्‍लैक फंगस के इलाज में लिपोसोमल एंफोटेरेसिरिन बी नाम के इंजेक्शन का इस्‍तेमाल होता है। पीएम मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में यह दवा मिले, तो उसे भारत लाया जाए। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पांच और कंपनियों को लिपोसोमल एंफोटेरेसिरिन बी बनाने का लाइसेंस दे दिया है। पीएम मोदी लगातार ब्‍लैक फंगस और लिपोसोमल एंफोटेरेसिरिन बी इंजेक्शन की उपलब्‍धता को लेकर वरिष्‍ठ अधिकारियों से बात कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने अधिकारियों को साफ-साफ शब्‍दों में कह दिया है कि विश्‍व के किसी भी देश में ये दवा मिले, वहां से इसे तुंरत भारत लाया जाए। इसमें दुनियाभर में मौजूदा भारतीय दूतावासों की मदद ली जा रही है। भारतीय दूतावास अपने-अपने देशों में लिपोसोमल एंफोटेरेसिरिन बी की खोज कर रहे हैं। अब पीएम मोदी के इन प्रयासों का फल भी देखने को मिल रहा है। अमेरिका की गलियड साइंसेज नाम की कंपनी से मदद मिली है। बता दें कि ये कंपनी भारत को रेम‍डेसिविर भी उपलब्‍ध करा रही है। अब ये कंपनी एंफोटेरेसिरिन बी भी भारत को उपलब्‍ध करा रही है। अभी तक इसकी 121,000 वायल या शीशियां भारत भेजी जा चुकी हैं. जल्दी ही 85,000 वायल और पहुंचने वाली है। बताया जा रहा है कि गलियड साइंसेज ने मायलन के जरिए भारत में एंफोटेरेसिरिन बी की 10 लाख खुराक भेजने का लक्ष्य रखा है। बता दें कि देशभर में ब्‍लैक फंगस संक्रमण के अब तक 11,717 मामले सामने आ चुके हैं। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा ने बुधवार को ट्वीट कर बताया कि देश भर में उपचाराधीन मरीजों की संख्या के आधार पर यह आवंटन किया गया है जो 11,717 है। इसके उपचार में इस्‍तेमाल होने वाली 'एंफोटेरिसिन-बी दवा की अतिरिक्त 29,250 शीशियां म्यूकोरमायकोसिस के इलाज के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आज आवंटित की गईं।
नई दिल्ली,आज से करीब अठारह महीने पहले चीन ने कोरोना वायरस के पहले मामले की सूचना दुनिया को दी। ये घातक SARS-CoV-2 वायरस दुनिया भर में जंगल की आग की तरह फैल चुका है और इससे अब तक 35 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही कोरोना वायरस 180 से अधिक देशों में 16.8 करोड़ से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है। लेकिन अभी भी कोरोना वायरस से जुड़ा एक मूल सवाल सबके जेहन में घूम रहा है, कोरोना वायरस आखिर कहां से आया ? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई। इसको लेकर अभी तक कोई साफ तस्वीर नहीं बन पाई है। इसको लेकर सिर्फ एक थ्योरी पर शक है कि कोरोना वायरस शायद चीन की वुहान लैब से लीक हुआ है। अमेरिका समेत दुनियाभर में एक बार फिर से चीन की वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की जांच की मांग उठी है। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) एक बार फिर से वुहान लैब से वायरस लीक होने की जांच कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) इस बात का फिर से अध्ययन कर सकता है कि कोरोना (सार्स-कोव-2) वायरस की उत्पत्ति और दुनियाभर में उसका प्रसार संभवत: चीन की वुहान स्थित लैब से हुआ है। डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने भी आगे के अध्ययन की जरूरत पर सहमति व्यक्त की है। दरअसल, कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर स्वतंत्र जांच की मांग अमेरिका की नई रिपोर्ट सामने आने के बाद और तेज हुई है जिसमें कहा गया है कि वुहान लैब के कुछ शोधकर्ता चीन द्वारा 30 दिसंबर 2019 को कोविड-19 के आधिकारिक ऐलान से पहले ही बीमार पड़ गए थे। हालांकि, चीन ने इसको नकारा है। चीन ने साधी चुप्पी वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की खबरों पर बोलते हुए चीन ने एक बार फिर से चुप्पी साध ली है। चीन (China) ने यह प्रश्न टाल दिया कि क्या वह वुहान वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट (WIV) से कोविड-19 के लीक होने के आरोपों की वह स्वतंत्र जांच की अनुमति देगा या नहीं। चीन के शोधार्थियों ने दावा किया है कि यह संक्रमण पैंगोलिन (एक प्रकार की छिपकली) से मनुष्य तक पहुंचा है। यानि चीन कहीं से भी इसमें सहयोग करता नहीं दिख रहा है। जांच की मांग पर सवालों के जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ समूह द्वारा कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर किए गए अध्ययन का हवाला दिया, लेकिन इस सवाल को टाल दिया कि कोविड-19 के वुहान लैब से लीक होने के आरोपों की जांच में चीन सहमत होगा या नहीं। अमेरिका इसकी तक जाएगा अमेरिका, कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच जारी रखना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ये जानना जरूरी है कि आखिर ये वायरस दुनिया में कहां से फैला ? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 90 दिनों के भीतर लैब लीक को लेकर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालने के लिए सुबूत अपर्याप्त हैं कि क्या यह किसी संक्रमित जानवर के साथ मानव संपर्क से उभरा है या लैब में हुई दुर्घटना से उभरा है।
नई दिल्ली,बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा समर्थकों के साथ सीबीआइ दफ्तर पर धरना देने की अभूतपूर्व घटना का हवाला दे टीएमसी नेताओं की हाउस अरेस्ट का विरोध कर रही सीबीआइ से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कानून तोड़ने पर मुख्यमंत्री और कानून मंत्री पर कार्रवाई करने को स्वतंत्र है लेकिन उनके कृत्यों का खामियाजा अभियुक्त नहीं भुगत सकते। कोर्ट ने कहा कि नेताओं के धरने आदि को सराहा नहीं जा सकता। न ही कोर्ट मुख्यमंत्री और कानून मंत्री के कृत्यों का समर्थन करता है। अभियुक्तों की जमानत और नेताओं के कृत्य दोनों अलग अलग मामले हैं। उन्हें मिला कर नहीं देखा जा सकता। पीठ ने कहा, हम सीएम और कानून मंत्री के कृत्यों का समर्थन नहीं करते टीएमसी नेताओं के हाउस अरेस्ट (नजरबंदी) के आदेश में दखल देने की अनिच्छुक दिख रही पीठ का मंतव्य समझते हुए सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल कर नारद घोटाले में गिरफ्तार किए गए टीएमसी नेताओं के हाउस अरेस्ट के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सीबीआइ ने नेताओं की गिरफ्तारी पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थकों के साथ सीबीआइ दफ्तर पर धरना देने और सीबीआइ अधिकारियों के दफ्तर से बाहर न आ सकने की अभूतपूर्व स्थिति को आधार बनाया था। साथ ही राज्य के कानून मंत्री का आदेश जारी होने तक कोर्ट में रहने को भी दबाव के दांवपेच अपनाने की तरह पेश किया था। जस्टिस विनीत सरन और बीआर गवई की पीठ ने सीबीआइ को याचिका वापस लेने की इजाजत देते हुए कहा कि वह मामले की मेरिट पर कोई आदेश नहीं दे रहे हैं। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ कर रही है। याचिकाकर्ता सीबीआइ और अन्य पक्षकार सारी दलीलें हाईकोर्ट के सामने रख सकते हैं। टीएमसी नेताओं के हाउस अरेस्ट आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सीबीआइ ने वापस ली इससे पहले सीबीआइ की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट को इसका संज्ञान लेना चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में हाउस अरेस्ट का आदेश पारित हुआ। मेहता ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। सीबीआइ ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद लोगों की भीड़ ने सीबीआइ का दफ्तर घेर लिया। मुख्यमंत्री भी वहां आ गई और उन्होंने वही धरना देना शुरू कर दिया। भीड़ ने सीबीआइ दफ्तर पर पत्थरबाजी की, जिसके कारण अधिकारी दफ्तर से बाहर नहीं निकल पाए। सीबीआइ के लोक अभियोजक जमानत का विरोध करने के लिए कोर्ट नहीं पहुंच पाए और उन्होंने मोबाइल फोन के जरिये बहस की। दूसरी ओर राज्य के कानून मंत्री आदेश पारित होने तक कोर्ट में बने रहे। मुख्यमंत्री और कानून मंत्री ने सीबीआइ पर दबाव बनाया। मुख्यमंत्री गिरफ्तार लोगों के समर्थन में थीं। इन परिस्थितियों में हुई कोर्ट की सुनवाई पर शीर्ष अदालत को गौर करना चाहिए। मेहता ने कहा कि मामले को राज्य के बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुई। पीठ ने कहा, मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ कर रही है। मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करना हाईकोर्ट को हतोत्साहित करना होगा। पीठ ने कहा की यहां दो मुद्दे हैं। एक राजनेताओं के कृत्य और दूसरा व्यक्ति की आजादी। यहां अभियुक्तों की जमानत पर विचार हो रहा है। कोर्ट दोनों मुद्दों को मिला नहीं देख सकता। मुख्यमंत्री, कानून मंत्री ने जो किया है उसके लिए आप उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन उनके कामों का खामियाजा अभियुक्त नहीं भुगत सकते। कोर्ट पर दबाव की दलील पर पीठ ने कहा कि हम नहीं समझते कि हमारी अदालतें किसी दबाव में आ सकती हैं। जस्टिस गवई ने इस संबंध में अपना एक पुराना संस्मरण भी सुनाया। मामले में नोटिस के बगैर बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील विकास ¨सह मौजूद थे और उन्होंने सीबीआइ की याचिका का विरोध किया।
नई दिल्ली,अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों ने नए साक्ष्यों के आधार पर कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन को एक बार फिर घेरना शुरू कर दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट ने इस बात की आशंका को मजबूत किया है कि चीन के वुहान स्थित वायरोलाजी लैब में ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई थी जिसने धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी जद में ले लिया है। चीन के वुहान स्थित वायरोलाजी लैब में कोरोना उत्पत्ति की बहस पर भारत चुप महामारी पर मशहूर अमेरिकी विशेषज्ञ डाॅ. एंथोनी फासी ने इस वायरस के मानवनिर्मित होने के तथ्य को मजबूत मानते हुए चीन में और ज्यादा खोज-बीन करने की बात कही है। भारत फिलहाल इस पर चुप है और सीधे आरोप से बचना चाहता है। भारत इस बारे में तथ्यपरक जांच का पहले भी समर्थन करता रहा है और अब भी उसकी यही सोच है। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन वैश्विक स्तर पर कठघरे में कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन वैश्विक स्तर पर कठघरे में है। लगातार अलग-अलग साक्ष्यों के जरिए उस पर शक गहराता भी जा रहा है। लेकिन भारत की स्थिति थोड़ी अलग है। जानकारों का कहना है कि भारत चीन के साथ कई मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है। भारत और चीन की सीमाओं पर मई, 2020 से सैन्य जमावड़ा मई, 2020 से ही दोनो देशों की सीमाओं पर सैन्य जमावड़ा है। इसको समाप्त करने के लिए भारत व चीन के बीच उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता का दौर चल रहा है। चीनी सैनिकों के सीमा अतिक्रमण के बाद भारत ने चीन की कंपनियों के खिलाफ कई तरह के कदम उठा रखे हैं। हाल के दिनों में तनाव को कम करने के संकेत हैं। भारत कोरोना वायरस उत्पत्ति के मुद्दे को हवा देने की नहीं कर रहा कोशिश यह एक वजह है कि भारत अभी वायरस उत्पत्ति के मुद्दे को अपनी तरफ से हवा देने की कोई कोशिश नहीं कर रहा। मार्च, 2021 के अंत में जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अपनी स्टडी रिपोर्ट जारी की थी तो उस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। वैसे यह रिपोर्ट ही अपने आप में काफी विवादास्पद रही थी। चीन ने डब्ल्यूएचओ को कोरोना वायरस की उत्पत्ति से जुड़ी सूचनाएं नहीं दी थीं इसमें यह सवाल सामने आया था कि चीन ने डब्ल्यूएचओ की टीम को कोरोना वायरस की उत्पत्ति से जुड़ी सारी सूचनाएं नहीं दी है। इस पर भारत ने भी चिंता जताई थी। भारत ने कहा था कि, 'डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ने यह कहा है कि उन्हें पर्याप्त डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया था। भारत इस बात का समर्थन करता है कि डब्ल्यूएचओ को इस विषय पर अध्ययन के लिए सात संबंधित पक्षों को पूरी सूचनाएं देनी चाहिए, खास तौर पर यह वायरस कैसे उत्पन्न हुआ और कहां से उत्पन्न हुआ है, इससे जुड़ी सूचनाओं को।' कोयंबटूर के मंदिर में घातक वायरस 'कोरोना' की हुई पूजा अर्चना भारत के अलावा कई देशों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच का किया था समर्थन भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहीं भी चीन का नाम नहीं लिया गया था। भारत के अलावा कम से कम एक दर्जन और देशों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए और वृहद जांच का समर्थन किया था। इसमें ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान, कनाडा भी शामिल थे।

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