मदन अरोड़ा.राजस्थान की 16वीं विधानसभा के लिए 25 नवंबर 2023 को हुए चुनावों के परिणाम 3 दिसंबर को घोषित हुए. हनुमानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं ने भाजपा के अमित सहू, कांग्रेस के चौ. विनोद कुमार और माकपा के कामरेड रघुवीर वर्मा को नकारते हुए निर्दलीय उम्मीदवार गणेश राज बंसल पर भरोसा जताया. नगर परिषद सभापति रहते हुए शहर को “मिनी चंडीगढ़” बनाने के दावों और गांवों में भी उसी तर्ज पर विकास के सपने दिखाकर वे विधायक बने.
लेकिन यह भी सर्वविदित था कि नगर परिषद के समय जिन विकास कार्यों का श्रेय लिया गया, उनमें बड़ी मात्रा में नगर परिषद की जमीनें बेचकर संसाधन जुटाए गए थे. जबकि एक विधायक के रूप में विकास केवल विधायक निधि या सरकार में प्रभावशाली पहुंच के माध्यम से ही संभव होता है. कोई विधायक गांवों की जमीन बेचकर विकास नहीं कर सकता.
चुनाव जीतने के करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी विधायक गणेश राज बंसल के बड़े-बड़े दावे धरातल पर उतरते नहीं दिख रहे. विकास के बजाय वे लगातार विवादों में घिरे रहे. अधिकारियों और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार, अपशब्दों का प्रयोग और धमकियां देना उनके व्यवहार का स्थायी हिस्सा बन चुका है. एक जनप्रतिनिधि के अनुरूप आचरण की बजाय वे क्षेत्र में आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाते नजर आए.
चुनावों में जाट और मूल ओबीसी समाज के बीच टकराव की राजनीति कर सत्ता हासिल करने के आरोप लगे और आज भी वे जाट समाज पर ओबीसी आरक्षण के अधिकार छीनने के आरोप लगाकर सामाजिक तनाव को हवा दे रहे हैं. उनके इस व्यवहार के खिलाफ सर्व समाज द्वारा प्रदर्शन कर विधायकी से निलंबन की मांग तक की गई.
वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत बत्रा को फोन पर धमकी देने का मामला हो या बिजली अधिकारियों को चप्पलों से पीटने के लिए उकसाने की कथित घटना—ऐसे विवाद लगातार सामने आते रहे. लखुवाली क्षेत्र में जल संसाधन विभाग की भूमि से अवैध कब्जे हटाने के प्रयासों का विरोध करते हुए विभाग के मुख्य अभियंता को अपशब्द कहने और धमकाने से पूरा विभाग सड़क पर उतर आया.
विधायक बनने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने पहले 100 दिनों के एजेंडे में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सड़कों, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं, नहरों में पर्याप्त पानी, स्कूलों के विकास, नशा मुक्ति, खेल मैदान, स्पीनिंग मिल के आधुनिकीकरण जैसे अनेक वादे किए. लेकिन 100 दिन तो दूर, 600 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई बड़ा वादा पूरा होता नहीं दिख रहा.
विरोधियों का आरोप है कि विधायक विकास के नाम पर पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप और भाजपा नेता अमित सहू की अनुशंसा से सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों पर अपनी पट्टी लगाकर श्रेय लेने तक सीमित रह गए हैं. मुख्यमंत्री और सरकार के प्रति आभार जताने वाले बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाना और समर्थकों से अभिनंदन करवाना ही उनकी राजनीति का केंद्र बन गया है.
हालात यह रहे कि 2025-26 का आम बजट पेश होने के दौरान वे विधानसभा में उपस्थित रहने के बजाय हनुमानगढ़ में घूमते नजर आए. सरकार में सुनवाई न होने के कारण अधिकारी भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते—जिसकी झुंझलाहट उनके आक्रामक व्यवहार में झलकती है.
वास्तविकता यह है कि हनुमानगढ़ में बने अधिकांश फ्लाईओवर, अंडरपास और बुनियादी ढांचे के कार्य पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप की देन हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क और नहरों के जीर्णोद्धार में उन्होंने ऐतिहासिक काम किया. उनकी तुलना में मौजूदा विधायक के विकास कार्य नगण्य माने जा रहे हैं.
आलोचकों का यह भी कहना है कि सभापति रहते हुए हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है. आनन-फानन में बनी सड़कों और नालों के गलत लेवल ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था बिगाड़ दी. शहर में भू-माफिया, कॉलोनाइजर, नशाखोरी, सामाजिक विभाजन और असुरक्षा बढ़ी है, जबकि आम आदमी हाशिये पर चला गया है.विधायक गणेश राज बंसल पूर्व विधायकों डॉक्टर रामप्रताप और चौ. विनोदकुमार पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते रहते हैं. पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है.-
डॉ. रामप्रताप : हनुमानगढ़ के संरचनात्मक विकास का आधार
हनुमानगढ़ जिले के विकास इतिहास में पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप का योगदान केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने विकास की एक स्थायी संरचना खड़ी की. जिला मुख्यालय हो या ग्रामीण क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क और सिंचाई, हर क्षेत्र में उन्होंने दीर्घकालिक सोच के साथ काम किया.
डॉ. रामप्रताप के कार्यकाल में हनुमानगढ़ में फ्लाईओवर, अंडरपास, प्रमुख सड़कें और संपर्क मार्ग विकसित हुए, जिनसे न केवल यातायात सुगम हुआ बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिली. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के विस्तार ने गांवों को जिला मुख्यालय और मंडियों से जोड़ा.
जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग का जो कार्य कराया, वह जिले के लिए ऐतिहासिक माना जाता है. इससे टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचा और हजारों किसानों को सिंचाई का स्थायी समाधान मिला. इससे पहले इस स्तर पर नहर सुधार का कार्य कभी नहीं हुआ था.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों का उन्नयन, विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया. शिक्षा में स्कूल और कॉलेज स्तर पर संसाधन बढ़े. बिजली और पेयजल योजनाओं ने शहरी के साथ-साथ ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को बदला.
राजनीतिक दृष्टि से डॉ. रामप्रताप की सबसे बड़ी ताकत सरकार और संगठन में उनकी स्वीकार्यता, प्रशासनिक समझ और नीति निर्माण में उनकी सीधी भागीदारी रही. यही कारण है कि वे केवल मांग उठाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि योजनाओं को स्वीकृति और बजट तक पहुंचाने में सफल रहे. आलोचकों के अनुसार, मौजूदा विधायक की तुलना में डॉ. रामप्रताप के विकास कार्य “नाखून के बराबर नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक असर छोड़ने वाले” रहे हैं.
गणेश राज बंसल के समर्थकों की दलील
विधायक गणेश राज बंसल के समर्थक उनके बचाव में कहते हैं कि विकास केवल कागजों और बड़े प्रोजेक्टों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले कामों से होता है. उनका तर्क है कि नगर परिषद सभापति रहते हुए बंसल ने शहर को एक नई पहचान दी—पार्क, चौक, सौंदर्यीकरण और सड़कें उसी दौर की देन हैं.
समर्थकों का यह भी कहना है कि
“राजनीति में पैसा कौन नहीं कमाता? अगर बंसल ने कमाया भी, तो उन्होंने शहर में काम भी करवाया.”
उनके अनुसार, निर्दलीय विधायक होने के बावजूद बंसल ने विधायक निधि से गांवों में निर्माण कार्य, सड़कों और सामुदायिक सुविधाओं का विकास कराया है. वे कहते हैं कि राजनीतिक विरोध के बावजूद विधायक जनता के मुद्दे उठाते रहे हैं.
समर्थकों का यह भी तर्क है कि अधिकारियों के साथ टकराव को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है. उनके अनुसार, यह टकराव भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ “सख्त रुख” का परिणाम है, न कि व्यक्तिगत दुर्व्यवहार.
रणनीतिकार अमित माहेश्वरी : नैरेटिव मैनेजमेंट की राजनीति
विधायक गणेश राज बंसल की राजनीति में उनके रणनीतिकार अमित माहेश्वरी की भूमिका अहम मानी जाती है. राजनीतिक हलकों में उन्हें एक कुशल “नैरेटिव मैनेजर” के रूप में देखा जाता है, जिनकी रणनीति वास्तविक उपलब्धियों से अधिक धारणा गढ़ने पर आधारित बताई जाती है.
आरोप है कि अमित माहेश्वरी की रणनीति के तहत सरकार और भाजपा नेताओं द्वारा स्वीकृत व क्रियान्वित विकास कार्यों पर विधायक की पट्टी लगाकर उन्हें बंसल की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. बड़े-बड़े होर्डिंग, अभिनंदन समारोह, सोशल मीडिया प्रचार और जनसभाओं के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि क्षेत्र में हो रहा हर विकास विधायक की वजह से संभव हुआ है.
विरोधियों के अनुसार, यह रणनीति अल्पकालिक राजनीतिक लाभ तो दिला सकती है, लेकिन जब जनता ठोस परिणाम देखती है, तब केवल प्रचार से भरोसा कायम नहीं रह पाता.
जनमत क्या कहता है-
प्रेम बंसल (भाजपा वरिष्ठ नेता) की प्रतिक्रिया-
भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम बंसल का कहना है कि गणेश राज बंसल ने चुनाव जीतने के लिए ऐसे वादे कर डाले, जिनका न तो कोई वित्तीय आकलन किया गया और न ही संवैधानिक व प्रशासनिक सीमाओं को समझा गया. उनका कहना है कि नगर परिषद सभापति रहते हुए सरकारी या शहरी जमीनों को बेचकर संसाधन जुटाना संभव हो सकता है, लेकिन एक विधायक के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होता. विधायक केवल सरकार से बजट लाने, योजनाओं को स्वीकृत करवाने और नीति निर्माण में भागीदारी निभाने की भूमिका में होता है.
प्रेम बंसल के अनुसार,
“केवल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पोस्टर लगाने, आभार होर्डिंग लगवाने या सरकार की तारीफ करने से विकास के लिए बजट नहीं मिलता. उसके लिए सरकार और संगठन में विश्वसनीयता, पकड़ और समझ चाहिए—जो पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप के पास थी.”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि हनुमानगढ़ में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वे भाजपा सरकार की नीति और पार्टी नेतृत्व की अनुशंसा से हो रहे हैं, न कि निर्दलीय विधायक के किसी विशेष प्रयास से. उनके अनुसार, जनता को अब यह समझ आ चुका है कि सपनों और नारों से नहीं, बल्कि सरकार में प्रभाव से ही विकास संभव होता है.
प्रदीप ऐरी (भाजपा जिला महामंत्री) की प्रतिक्रिया-
भाजपा जिला महामंत्री प्रदीप ऐरी ने मौजूदा विधायक के विकास योगदान को स्पष्ट शब्दों में “शून्य” बताया. उनका कहना है कि विधायक निधि से होने वाले छोटे-मोटे कार्यों के अलावा कोई भी ऐसा बड़ा विकास कार्य नहीं है, जिसे विधायक गणेश राज बंसल की उपलब्धि कहा जा सके.
प्रदीप ऐरी के अनुसार,
“क्षेत्र में जो सड़कें, पुल, अंडरपास या अन्य बुनियादी ढांचे के कार्य हो रहे हैं, वे भाजपा नेता अमित सहू की अनुशंसा और सरकार की स्वीकृत योजनाओं के तहत हो रहे हैं. विधायक का इनसे कोई लेना-देना नहीं है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक केवल उन कार्यों पर अपनी पट्टी लगाकर श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं, जिनकी योजना, स्वीकृति और क्रियान्वयन सरकार और अमित सहू द्वारा किया गया है. उनका यह भी कहना है कि सरकार आज केवल पार्टी नेतृत्व की सुनवाई कर रही है, किसी निर्दलीय विधायक की नहीं.
कामरेड रघुवीर वर्मा (माकपा जिला महासचिव) की प्रतिक्रिया-
माकपा जिला महासचिव कामरेड रघुवीर वर्मा ने पूरे मामले को व्यवस्था की विफलता से जोड़ते हुए कहा कि जब सरकार ही जनहित में ठोस काम नहीं कर रही, तो एक निर्दलीय विधायक से बड़े बदलाव की उम्मीद करना स्वयं को धोखा देना है.
उनका कहना है कि चुनाव के समय जिन मुद्दों—जैसे स्पीनिंग मिल का पुनः संचालन, नहरों में पर्याप्त पानी, किसानों को पूरा एमएसपी—का वादा किया गया था, उन पर न सरकार गंभीर है और न विधायक.
कामरेड वर्मा के शब्दों में,
“सपने दिखाकर चुनाव जीता जा सकता है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और नीतिगत समर्थन चाहिए—जो यहां दोनों स्तरों पर गायब है.”
उन्होंने कहा कि विधायक निधि से कुछ छोटे निर्माण कार्य हुए हैं, जिनका श्रेय विधायक को दिया जा सकता है, लेकिन उससे आगे कोई ठोस उपलब्धि नहीं है. उनके अनुसार, यदि गणेश राज बंसल को दोबारा विधायक बनना है, तो उन्हें प्रतीकात्मक राजनीति छोड़कर ठोस जनहित कार्य करके दिखाने होंगे.
सुरेन्द्र जालंधरा (भाजपा वरिष्ठ नेता ) की प्रतिक्रिया-
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेन्द्र जालंधरा ने मुद्दे को केवल एक विधायक तक सीमित न रखते हुए लोकतंत्र के व्यापक संकट से जोड़ा. उनका कहना है कि आज लोकतंत्र में धनबल, जातीय ध्रुवीकरण और झूठे वादों का बोलबाला है, और हनुमानगढ़ की जनता लंबे समय से इसका शिकार होती रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विधायक पर जितने भी भ्रष्टाचार या आपराधिक मामलों के आरोप थे, वे विधायक बनने से पहले के हैं. विधायक बनने के बाद यदि कोई नया भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया है, तो यह भी एक विचारणीय तथ्य है.
सुरेन्द्र जालंधरा के अनुसार,
“यह भी आत्ममंथन का विषय है कि क्या मुकदमों में दम नहीं था या कार्यवाही करने वालों की इच्छाशक्ति कमजोर थी.”
उन्होंने सवाल उठाया कि भविष्य में जनता इस तरह की राजनीति से कैसे बचे—इस पर गंभीर चर्चा और जागरूकता आवश्यक है.
डॉ. निशांत बत्रा (वरिष्ठ सर्जन) की प्रतिक्रिया-
वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत बत्रा ने विधायक के सभापति काल और मौजूदा हालात की तुलना करते हुए कहा कि उस समय जो “ब्राइडल मेकअप” शहर का किया गया था, वह अब धीरे-धीरे उतरने लगा है.
उनका कहना है कि आनन-फानन में बनी सड़कों, गलत लेवल की नालियों और अव्यवस्थित सीवरेज कार्यों ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. इसके साथ-साथ शहर में भू-माफिया, कॉलोनाइजर और असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ा है.
डॉ. बत्रा के अनुसार,
“शहर में असली विकास आम आदमी का नहीं, बल्कि समाज के ठेकेदारों, नशेड़ियों और अपराधियों का हुआ है. आम नागरिक हाशिये पर चला गया है और उसके भीतर असुरक्षा और मौन का विकास हुआ है.”
उन्होंने सामाजिक विभाजन, जातिगत खाई और बढ़ती असहिष्णुता को शहर के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया.
निष्कर्ष
डॉ. रामप्रताप ने जहां सरकार और संगठन में अपनी पकड़ के जरिए दीर्घकालिक विकास की नींव रखी, वहीं मौजूदा विधायक गणेश राज बंसल का कार्यकाल अब तक वादों, विवादों और प्रचार तक सीमित दिखता है. समर्थक और रणनीतिकार इसे संघर्ष और साजिश का परिणाम बताते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक अनुभव, समझ और प्रभाव की कमी मानते हैं.
अंततः फैसला जनता के हाथ में है—क्या वह प्रचार से संतुष्ट होगी या जमीन पर दिखने वाले ठोस विकास को कसौटी बनाएगी.