taaja khabar..भारत में बड़ा आतंकी हमला करने की फिराक में है इस्लामिक स्टेट, रूस ने साजिश रच रहे आत्मघाती हमलावर को हिरासत में लिया..भाजपा का सिसोदिया पर पलटवार, कहा- केजरीवाल जिसे देते हैं ईमानदारी का सर्टिफिकेट वो जरूर जाता है जेल..शहनवाज हुसैन को सर्वोच्च न्यायालय से मिली बड़ी राहत, हाई कोर्ट के आदेश पर लगी रोक..आबकारी घोटाले में 'टूलकिट माड्यूल' की जांच, स्टैंडअप कामेडियन और हैदराबाद से जुड़े शराब के व्यापारी भी रडार पर..प्रधानमंत्री 24 अगस्त को हरियाणा और पंजाब में अस्पतालों का उद्घाटन करेंगे..आबकारी नीति मामला: भाजपा की दिल्ली इकाई का केजरीवाल के आवास के बाहर प्रदर्शन..

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नयी दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के खिलाफ यहां सिविल लाइंस इलाके में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के पास सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा की दिल्ली की इकाई के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अपने मंत्रिमंडल से निष्कासित करना चाहिए, क्योंकि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले में उन्हें ‘‘आरोपी नंबर एक’’ बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ केजरीवाल इस पूरे घोटाले के सरगना हैं, जिसमें शराब माफिया को सरकारी खजाने को लूटने की इजाज़त दी गई।’’ गुप्ता ने कहा कि दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ता केजरीवाल सरकार द्वारा किए गए ‘‘भ्रष्टाचार और आबकारी घोटाले’’ के बारे में लोगों को बताने के लिए शहर में घर-घर जाएंगे। गौरतलब है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) दिल्ली सरकार की आबकारी नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है। सीबीआई ने इस संबंध में दर्ज एक प्राथमिकी में दो कंपनी और 13 लोगों को नामजद किया है। केजरीवाल सरकार में आबकारी विभाग का कार्यभार संभालने वाले मनीष सिसोदिया के आवास पर शुक्रवार को सीबीआई ने छापा मारा था। सिसोदिया ने कहा कि ‘आप’ सरकार जांच के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह भाजपा नीत केंद्र सरकार द्वारा केजरीवाल को निशाना बनाए जाने के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि नीति में कोई घोटाला नहीं है और इसे पारदर्शी तरीके से लागू किया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने आबकारी नीति 2021-22 के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद केजरीवाल सरकार ने इस नीति को वापस ले लिया था। केजरीवाल सरकार या ‘आप’ ने इसके वापस लेने को लेकर कोई कारण नहीं बताया है।
नई दिल्ली : दिल्ली में जब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया था तो उस समय भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का उसे अपार समर्थन मिला था। अन्ना हजारे के आंदोलन के समय उसके नेतृत्व करने वालों ने निर्वाचित संस्थाओं के नकारेपन से पैदा हुए शून्य को भरने के लिए सिविल सोसायटी को विकल्प माना था। अन्ना के आंदोलन को असली ताकत जनता से ही मिली थी। देश के युवाओं, हजारों कार्यकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और यहां तक कि पुलिसकर्मियों ने अन्ना के आंदोलन को सही माना था। यह सही भी है कि इस तरह के आंदोलन से किसी भी सिविल सोसायटी को ताकत भी मिलती है। जब सिविल सोसायटी अपना धैर्य खो देती है तो वह सड़कों पर उतर आती है। अब 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस का फोकस इसी सिविल सोसायटी की ताकत के जरिये बीजेपी की धार को कुंद करना है। 12 राज्य, 3500 किलोमीटर का सफर भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक होगी। इस दौरान यात्रा में 3500 किलोमीटर का सफर होगा और लगभग 12 राज्यों से होकर गुजरेगी। इस दौरान कांग्रेस पदयात्रा और रैलियां करेगी। माना जा रहा है कि इस भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस 2024 के लोकसभा की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 1991 में हुई अपने पिता राजीव गांधी की हत्या के स्थान ‘श्रीपेरंबदूर स्मारक’ पर सात सितंबर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कुछ देर 'ध्यान' लगाएंगे और फिर कन्याकुमारी में 'भारत जोड़ो यात्रा' की शुरुआत करेंगे। यात्रा तमिलनाडु में सात से 10 सितंबर तक चार दिन चलेगी। इसके बाद 11 सितंबर से यात्रा पड़ोसी केरल में जारी रहेगी। कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगी भारत जोड़ो यात्रा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की तरफ से यह प्रयास तो अच्छा है लेकिन इसके परिणाम कैसे होंगे यह यात्रा के खत्म होने के बाद ही पता लगेगा। विश्लेषकों के अनुसार यात्रा को सिविल सोसायटी का कितना समर्थन हासिल होता है यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है। सोमवार को हुई बैठक में योगेंद्र यादव भी मौजूद थे। ऐसे में स्वराज इंडिया का साथ कांग्रेस को मिलना तय है। इसके अलावा पार्टी कई अन्य संगठनों से भी विस्तृत विचार विमर्श कर रही है। 2024 चुनाव भले ही दूर हो लेकिन देखना होगा कि कांग्रेस की यह भारत जोड़ो यात्रा पार्टी के संजीवनी बन पाती है या नहीं?
नई दिल्ली: नई आबकारी नीति के जरिए घोटाला करने का आरोप का सामाना कर रहे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अब भी अपने फैसलों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आबकारी नीति में जो भी बदलाव किए हैं, उनमें किसी नियम-कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है और न ही नई नीति में कोई खामी है। सिसोदिया ने द टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शराब ठेके का लाइसेंस लेने वालों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए आबकारी नीति में बदलाव करने का आरोप बिल्कुल निराधार है। नई नीति से लाइसेंसधारकों का नहीं, सरकार का फायदा होता। उन्होंने बीजेपी पर मामले के काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का भी आरोप लगाया। सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी पहले कह रही थी कि 8 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और आखिर में 30 करोड़ रुपये तक आ गई। आइए जानते हैं कि आखिर मनीष सिसोदिया पर किन-किन नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं... नए एलजी ने लिया संज्ञान, चीफ सेक्रेटरी ने सौंपी रिपोर्ट दिल्ली के मौजूदा उप-राज्यपाल (LG) वीके सक्सेना ने चीफ सेक्रेटरी को नई शराब नीति को लेकर रिपोर्ट पेश करने को कहा था। चीफ सेक्रेटरी को आदेश था कि वो नई शराब नीति से संबंधित फैसले लेने में किन-किन अधिकारियों की संलिप्तता है, यह बताएं। चीफ सेक्रेटरी ने जुलाई में अपनी रिपोर्ट पेश करी दी जिसके आधार पर एलजी ने तत्कालीन एक्साइज कमिश्नर आरव गोपी कृष्णा और डैनिक्स आनंद कुमार तिवारी समेत 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच सीबीआई सीबीआई से करवाने की सिफारिश कर दी। दरअसल, चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट में नीचे दिए गए चार नियम-कानूनों के प्रथम दृष्टया उल्लंघन की बात कही गई हैं... ➤ दिल्ली चीफ सेक्रेट्री की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया जीएनसीटीडी एक्ट, 1991 ➤ ट्रांजैक्शंस ऑफ बिजनल रूल्स, 1993 ➤ दिल्ली एक्साइज एक्ट, 2009 ➤ दिल्ली एक्साइज रूल्स, 2010 नियमों की अनदेखी का आरोप रिपोर्ट में कहा गया कि आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया ने कई वैधानिक प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए फैसले लिए। इसमें कहा गया है कि नई शराब नीति बनाते हुए जानबूझकर प्रक्रियाओं की भारी अनदेखी की गई। इसके मुताबिक, सिसोदिया ने एलजी की अनुमति लिए बिना ही आबकारी नीति में बदलाव कर दिया जो नियमों का सरासर उल्लंघन है। शराब लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ देने का आरोप रिपोर्ट कहती है कि आबकारी विभाग ने 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी जो दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियम 11बी की धारा 48 का उल्लंघन है। दिल्ली चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के बहाने लाइसेंसधारकों को टेंडर देने के बाद उनसे ली जाने वाली लाइसेंस फी माफ कर दी गई। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और ऐसा लगता है कि आबकारी नीति में बदलाव लाइसेंसधारकों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। विदेशी बीअर से आयात शुल्क हटाया रिपोर्ट में कहा गया है कि आबकारी विभाग ने बिना अप्रूवल के विदेशी शराब की दरों के आकलन का फॉर्म्युला ही बदल दिया। इसके मुताबिक, सिसोदिया ने विदेशी शराब की दरों को बदलकर और बीअर के हर केस पर लागू 50 रुपये का आयात शुल्क हटाकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। इससे विदेशी शराब और बीअर की खुदरा दरें कम हो गईं, लेकिन सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। 8 हजार करोड़ का घोटाला कहा गया, अब 1 करोड़ पर आ गया: सिसोदिया मनीष सिसोदिया ने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) को दिए इंटरव्यू में कहा कि बीजेपी राई को पहाड़ बनाने में जुटी है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने पहले कहा कि 8 हजार करोड़ का घोटाला हुआ। फिर कहा कि 1,100 करोड़ का घोटाला है और फिर 144 करोड़ और आखिर में 30 करोड़ पर आ गए। हालांकि, एफआईआर में 1 करोड़ के घोटाले का आरोप है।' उन्होंने कहा कि जांच से कौन डरता है। सिसोदिया बोले, 'मैं जांच का स्वागत करता हूं। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं हैं। मैं गारंटी दे सकता हूं कि सभी आरोप आखिर में फर्जी निकलेंगे।' सिसोदिया का आरोप- तत्कालीन एलजी के यू-टर्न से हुई गड़बड़ी सिसोदिया का कहना है कि सारी गड़बड़ी तत्कालीन उप-राज्यपाल (LG) अनिल बैजल के अचानक पलटी मारने से हुआ। उन्होंने आबकारी नीति पर यू-टर्न लेते हुए प्रावधान कर दिया कि शराब के लाइसेंसधारकों को नई जगहों ठेका खोलने के लिए एमसीडी और डीडीए से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने पिछले महीने सीबीआई को भी चिट्ठी लिखकर इसकी शिकायत की और कहा कि अनिल बैजल के अचानक फैसला बदलने के पीछे की मंशा की भी जांच होनी चाहिए। उधर, आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि 31 जगहों पर एकसाथ छापेमारी में लगे सीबीआई के 900 अधिकारियों को 14 घंटे की तलाश में भी कुछ हाथ नहीं लगा। उन्होंने कहा, 'वो नकद रुपयों, जूलरी या बेनामी संपत्ति के दस्तावेज आदि ढूंढ रहे थे, लेकिन खाली हाथ रह गए।' उन्होंने अपने इस दावे का आधार बताया कि अगर सीबीआई को कुछ हाथ लगता तो वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सारे एक-एक चीज बताती कि उसने-क्या-क्या जब्त किया है। नई नीति में क्या बदलाव, कब हुआ लागू, कब हुई वापसी ध्यान रहे कि दिल्ली में 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति लागू हो गई थी। इस नीति में 100% शराब ठेके प्राइवेट प्लेयर्स के हाथों दे गईं। इससे पहले, 40% दुकानें खोलने की अनुमति ही ही प्राइवेट ठेकेदारों दी गई थीं, 60% शराब ठेके सरकारी थे। 2 मई 2022 को दिल्ली सरकार के मंत्री समूह (GoM) से पारित नई नीति में शराब की होम डिलिवरी, रात के 3 बजे तक शराब के ठेके खुले रखने, लाइसेंसधारकों को शराब पर अनलिमिटेड डिस्काउंट देने की छूट जैसे प्रस्ताव किए गए थे। दिल्ली में नई शराब नीति से सरकारी खजाने को हुए संभावित घाटे की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शुरू की। इस बीच एलजी ने चीफ सेक्रेटरी को मामले की जांच करके रिपोर्ट सौंपने का आदेश दे दिया। तभी सिसोदिया ने 30 जुलाई 2022 को घोषणा कर दी कि 1 अगस्त से दिल्ली सरकार की नई शराब नीति पूरी तरह हटा ली जाएगी और पहले की तरह सिर्फ सरकारी ठेकों पर ही शराब बेचने की अनुमति होगी।
अहमदाबाद: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा है कि उनकी भी गिरफ्तारी हो सकती है। गुजरात के दो दिन के दौरे पर आए केजरीवाल ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Elections) की वजह से मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई की जा रही है। बताते चलें कि दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के सिलसिले में सीबीआई ने डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के घर पर छापे मारे थे। उनके घर करीब 14 घंटे पूछताछ चली थी। इसके बाद सिसोदिया ने आज कहा कि बीजेपी ने उन्हें आम आदमी पार्टी छोड़ने पर मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया। लेकिन मैंने जवाब दिया कि मैं महाराणा प्रताप के सिसोदिया वंश (Sisodia Clan) से आता हूं और सर भी कट जाए तो झुकूंगा नहीं। क्या पता मुझे भी गिरफ्तार कर लें: केजरीवाल दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया साबरकांठा और भावनगर जिलों के दौरे पर हैं। अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया और अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कहा, 'मनीष सिसोदिया गिरफ्तार किए जा सकते हैं और क्या पता मुझे भी गिरफ्तार किया जा सकता है। यह सब कुछ इसलिए हो रहा है, क्योंकि गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं।' केजरीवाल ने साथ ही कहा कि गुजरात के लोग दुखी हैं क्योंकि वे राज्य में बीजेपी के घमंडी शासन को 27 साल से झेल रहे हैं। बस चालकों और कंडक्टरों से की ये अपील केजरीवाल ने कहा, न्यूयॉर्क टाइम्स ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की सराहना की है, हम गुजरात के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में मदद करेंगे।' इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने गुजरात में बस चालकों और कंडक्टरों से कहा कि वे विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए यात्रियों से अपील करें। हम स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती और सुलभ बनाएंगे। गुजरात में BJP को टक्कर देने की तैयारी में AAP आम आदमी पार्टी गुजरात चुनाव में दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के मॉडल को लेकर उतर रही है। गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। आम आदमी पार्टी बीजेपी के खिलाफ राज्य में खुद को एक प्रमुख दावेदार के रूप में पेश कर रही है। शनिवार को, केजरीवाल ने एक ट्वीट में अपनी गुजरात यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने की घोषणा करते हुए कहा था कि वह और सिसोदिया लोगों को गारंटी देंगे कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आती है तो वे दिल्ली में प्रदान की गई अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे। ट्वीट में केजरीवाल ने कहा, 'दिल्ली की तरह हम गुजरात में भी अच्छे स्कूल और मोहल्ला क्लीनिक बनाएंगे। सभी को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुफ्त में मिलेंगी।' दिल्ली के सीएम ने साथ ही कहा कि वह युवाओं से भी बातचीत करेंगे।
नई दिल्ली: नई शराब नीति जबसे जांच के घेरे में आई है भारतीय जनता पार्टी केजरीवाल सरकार पर अटैकिंग पोजिशन पर है। मनीष सिसोदिया पर सीबीआई जांच के बाद वह और मुखर है। इस बीच मनीष सिसोदिया के सोमवार को किए ट्वीट ने दिल्ली की राजनीति में हड़कंप मचा दिया। सिसोदिया ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुझसे बीजेपी ने कहा है कि आप को तोड़कर मेरे साथ आ जाओ तुम्हारे खिलाफ ED-CBI के सारे केस बंद कर देंगे। सिसोदिया के इस आरोप पर बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब दिया। बीजेपी की तरफ से गौरव भाटिया ने सिसोदिया के दावे का जवाब देते हुए कहा कि जिसकी नीयत में खोट है उसे कौन तोड़ पाएगा। उन्होंने कहा कि आजकल केजरीवाल जिसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं वह जेल जरूर जाता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सीएम केजरीवाल के घर का घेराव भी किया। मनीष सिसोदिया का दावा और बीजेपी का जवाब मनीष सिसोदिया के बीजेपी से ऑफर वाली बात पर बीजेपी की ओर से प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका जवाब दिया। भाटिया ने कहा कि जिनकी नीयत में खोट है उसे भला कौन तोड़ पाएगा। गौरव भाटिया ने आगे कहा कि मनीष सिसोदिया जी कहते हैं, मैं झुकुंगा नहीं। अरविंद केजरीवाल जी सिसोदिया जी को कट्टर ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं। आजकल जिसको कट्टर ईमानदारी का सर्टिफिकेट केजरीवाल जी देते हैं, तो वो जेल जरूर जाता है। विवेचना के बाद आप कानून के सामने झुकेंगे भी और आपका भ्रष्टाचार रुकेगा भी। 'केजरीवाल और सिसोदिया के पास कोई जवाब नहीं है' गौरव भाटिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार और कट्टर बेईमानी को भाजपा पुरजोर तरीके से उजागर कर रही है। ये स्पष्ट हो गया है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के पास जनता के प्रश्नों के कोई उत्तर नहीं है। अरविंद केजरीवाल जी अगर आप ईमानदार हो तो जो जनता प्रश्न पूछ रही है उसका उत्तर आप दे दीजिए। 24 घंटे बाद उत्तर में आया एक ट्वीट और उसमें भी वही अनर्गल बातें।उनका सीधा निशाना दिल्ली की नई शराब नीति को लेकर था। मनीष सिसोदिया ने कौन से ऑफर की बात कही थी डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने गुजरात दौरै पर निकलने के पहले एक ट्वीट किया। सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि मेरे पास भाजपा का संदेश आया है - 'आप' छोड़ कर भाजपा में आ जाओ, आपके खिलाफ सीबीआई और ईडी के सारे मामले बंद करवा देंगे।’ उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘भाजपा को मेरा जवाब है - मैं महाराणा प्रताप का वंशज हूं और राजपूत हूं। सिर कटा लूंगा लेकिन भ्रष्टाचारियों, षडयंत्रकारियों के सामने नहीं झुकूंगा। मेरे खिलाफ सारे मामले झूठे हैं। जो करना है कर लो।’ आपको बता दें कि सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में कथित भ्रष्टाचार को लेकर शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के नेता सिसोदिया के घर पर छापा मारा था।
नई दिल्ली,दिल्ली शराब लाइसेंस घोटाले की प्रारंभिक जांच ज्यादातर 'टूलकिट माड्यूल' पर केंद्रित है। जांच के दायरे में एक दर्जन से अधिक स्टैंडअप कामेडियन, हैदराबाद से जुड़े शराब के थोक और खुदरा व्यापारियों का एक समूह और मुंबई के एकसमान पते वाली कारपोरेट संस्थाएं भी हैं। साथ ही वैश्विक और घरेलू शराब निर्माताओं के कुछ सेवारत और पूर्व अधिकारी, इंटरनेट मीडिया को प्रभावित करने वाले लोग, घुड़दौड़, सट्टेबाजी और आनलाइन गेमिंग में लगे व्यक्ति और कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। सीबीआइ ने दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी लेने के बाद 13 व्यक्तियों, दो कंपनियों और अन्य अज्ञात लोकसेवकों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी की है। शराब नीति के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया तंत्र बनाने का खेल कारपोरेट मामलों का मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां किसी भी संभावित गलत काम की पड़ताल करने के लिए सीबीआइ द्वारा नामित कंपनियों के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी कंपनियों के नेटवर्क से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही हैं। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच ज्यादातर 'टूलकिट माड्यूल' पर केंद्रित है, जिसका उपयोग दिल्ली में उदार शराब बिक्री नीति के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया तंत्र बनाने के लिए किया जा सकता था। विभिन्न सरकारी विभागों और प्रवर्तन एजेंसियों में कार्यरत ये अधिकारी चल रही जांच में सीधे तौर पर शामिल हैं। नियमों के उल्लंघन के पहली नजर में पर्याप्त सुबूत भले ही जांच राजनीति से प्रेरित कही जा रही है, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि कुछ नियमों के उल्लंघन के प्रथमदृष्टया पर्याप्त सुबूत हैं, जिनमें वित्तीय गड़बड़ी, कंपनी अधिनियम के तहत आवश्यक जानकारी को उजागर नहीं करना और सूचना प्रौद्योगिकी व अन्य अधिनियमों के दायरे में आने वाली गलत सूचना के प्रसार जैसी चीजें शामिल हैं। शेयर एवं क्रिप्टो करेंसी में लेन-देन भी दायरे में जांच में एक अन्य पहलू पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें शेयर और क्रिप्टोकरेंसी में वित्तीय लेन-देन शामिल है। आनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म से जुड़े लोग जांच के दायरे में हैं। 50 लोगों की विदेश यात्राओं और विदेश में पैसे भेजने की जांच कामेडियन, कारोबारी, इंटरनेट मीडिया को प्रभावित करने वाले और मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों सहित कम से कम 50 व्यक्तियों की विदेश यात्राओं और विदेश में पैसे भेजने की भी जांच की जा रही है। इस सूची में हैदराबाद से संबद्ध विभिन्न व्यक्ति और कंपनियां भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली में शराब बिक्री के लिए लाइसेंस जारी किया गया था। जांच में एक प्रमुख नाम जो सामने आया है, वह है विजय नायर और उनसे जुड़ी कंपनियों का एक तंत्र। इनमें ओनली मच लाउडर, बैबलफिश और मदर्सवियर शामिल हैं। नायर से जुड़े जो अन्य नाम सामने आए हैं, उनमें आनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और कामेडी शोज से जुड़ी कंपनियां वीयर्डएस कामेडी, मोटरमाउथ राइटर्स और रिबेलियन मैनेजमेंट शामिल हैं।
नई दिल्ली, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के कथित दुष्कर्म मामले में शाहनवाज हुसैन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई दी है। साथ ही हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली शहनवाज की याचिका पर नोटिस भी जारी किया गया है। बता दें कि दिल्‍ली हाइकोर्ट (Delhi High court) ने कुछ दिनों पहले शाहनवाज हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। साल 2018 में उन पर लगे दुष्‍कर्म के आरोप के सिलसिले में यह आदेश दिया गया, जिसे चुनौती देते हुए उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रूख किया। शाहनवाज हुसैन ने आरोप को निराधार बताया है। दिल्‍ली की महिला ने लगाया है आरोप बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन पर दिल्‍ली की एक महिला ने दुष्‍कर्म का आरोप लगाया है। घटना करीब चार साल पुरानी है। महिला ने आरोप लगाया है कि 12 अप्रैल 2018 को छतरपुर के एक फार्म हाउस में नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्‍कर्म किया गया। हाईकोर्ट की जस्टिस आशा मेनन की पीठ ने इस मामले में कार्रवाई का आदेश दिया है। बताया जाता है कि दिल्‍ली की साकेत कोर्ट ने सात जुलाई 2018 को इस मामले में दुष्‍कर्म की प्राथमिकी का आदेश दिया था। राजद ने भाजपा पर बोला जोरदार हमला बता दें कि शाहनवाज हुसैन पर एफआइआर के आदेश के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है। राजद की ओर से भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला किया गया। कुछ दिनों पहले प्रवक्‍ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अब भाजपा की आवाज क्‍यों नहीं निकल रही। हमारे दाग, दाग और उनके दाग अनुराग।
नई दिल्ली, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मनीष सिसोदिया पर निशाना साधते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार और कट्टर बेईमानी को भाजपा पुरजोर तरीके से उजागर कर रही है। उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के पास जनता के प्रश्नों के कोई उत्तर नहीं है। भ्रष्टाचार का कीर्तिमान बना रही AAP- गौरव भाटिया भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आगे कहा कि अरविंद केजरीवाल अगर आप ईमानदार हैं तो जो जनता प्रश्न पूछ रही है उसका उत्तर आप दे दीजिए। 24 घंटे बाद उत्तर में आया एक ट्वीट और उसमें भी वही अनर्गल बातें। इसलिए हमने सोचा कि जनता के जो सवाल हैं, वो पुन: आपके समक्ष रखें और ये दिखाऐ कि आप छोटे भ्रष्टाचारी नहीं हैं, ये भ्रष्टाचार का कीर्तिमान बना रहे हैं। अरविंद केजरीवाल जी अगर आप ईमानदार हो तो जो जनता प्रश्न पूछ रही है उसका उत्तर आप दे दीजिए। 24 घंटे बाद उत्तर में आया एक ट्वीट और उसमें भी वही अनर्गल बातें। जिसे केजरीवाल देते हैं ईमानदारी का सर्टिफिकेट वो जरूर जाता है जेल' गौरव भाटिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मनीष सिसोदिया कहते हैं, मैं झुकुंगा नहीं। अरविंद केजरीवाल खुद ही सिसोदिया को कट्टर ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं। आजकल जिसको कट्टर ईमानदारी का सर्टिफिकेट केजरीवाल दे देते हैं, वो जेल जरूर जाता है। विवेचना के बाद आप कानून के सामने झुकेंगे भी और आपका भ्रष्टाचार भी रुकेगा। मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर लगाया आरोप इससे पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि भाजपा ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि इसके बदले में सभी सीबीआई, ईडी मामलों को बंद कर देंगे। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि भाजपा ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने लिखा, "सभी सीबीआई, ईडी मामलों को बंद कर देंगे
नई दिल्ली: दिल्ली की नई आबकारी नीति पर (Delhi Excise Policy)पर सीबीआई एक्शन में है। आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में जोरदार तकरार चल रही है। मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia News) के खिलाफ कार्रवाई के बीच सभी राजनीतिक दल अपना नफा-नुकसान आंकने में जुटे हैं। दिल्ली की नई शराब नीति का बीजेपी शुरू से विरोध करती रही है। इधर, AAP का कहना है कि उसने इस नीति में कुछ भी गलत नहीं क्या। इन सबके बीच कभी दिल्ली में लगातार 15 साल तक सरकार चला चुकी कांग्रेस पार्टी की 'चुप्पी' भी चौंका रही है। कांग्रेस AAP का विरोध तो कर रही है लेकिन उसके कार्यकर्ता सड़कों पर नहीं है जबकि बीजेपी के वर्कर्स सड़क पर अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के खिलाफ मोर्चा खोल रखे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2025 में राज्य विधानसभा के होने वाले चुनाव में बीजेपी आप सरकार को हिला देगी? आइए समझते हैं सारे समीकरण। आप को हिला देगी बीजेपी? नई आबकारी नीति को लेकर बीजेपी आप पर लगातार हमलावार है। पार्टी इस मुद्दे पर केजरीवाल को घेर रही है। तो क्या पिछली तीन बार से आप के हाथों पराजित हो रही बीजेपी 2025 में राज्य में कोई करिश्मा कर पाएगी? फिलहाल अभी इसपर कोई टिप्पणी करनी जल्दबाजी होगी। लेकिन एक हकीकत ये भी है इस साल हुए राजेंद्रनगर उपचुनाव में आप को बीजेपी के खिलाफ बड़ी जीत मिली थी। पर क्या जब राज्य के चुनावों में बीजेपी पूरी तरह उतरेगी तो नतीजे बदलेंगे? विश्लेषक इसपर बंटे हुए हैं। लेकिन बीजेपी राज्य में आप को हिलाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। विवाद के बाद और मजबूत हुई AAP कांग्रेस की 'चुप्पी' का क्या मतलब इस बीच कांग्रेस के नेता नई आबकारी नीति के विरोध में ट्वीट तो कर रहे हैं लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता खुलकर सड़कों पर उतर नहीं है। दरअसल, कांग्रेस की चुप्पी के भी मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, अगर आप को दिल्ली में थोड़ा भी नुकसान होता है तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कांग्रेस की दूर से मुस्कुराहट की वजह भी यही है। बीजेपी के विरोध के दम पर कांग्रेस को फायदा हो सकता है।
नयी दिल्ली, कांग्रेस की दिल्ली इकाई के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली आबकारी नीति के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के इस्तीफे की मांग करते हुए शनिवार को यहां आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डीडीयू मार्ग पर दिल्ली कांग्रेस के कार्यालय से ‘आप’ के मुख्यालय तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा सिसोदिया के खिालफ नारे लगाए। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष परवेज आलम ने कहा कि कांग्रेस ने मांग की है कि केजरीवाल अपने मंत्रिमंडल से सिसोदिया को बर्खास्त करें, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आबकारी नीति ‘घोटाले’ में दर्ज प्राथमिकी में उन्हें नामजद किया है। गौरतलब है कि सीबीआई ने शुक्रवार को आबकारी नीति 2021-22 के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के संबंध में कई घंटों तक सिसोदिया के आवास की तलाशी ली थी। जांच एजेंसी ने एक प्राथमिकी में उन्हें 15 अन्य लोगों के साथ नामजद किया है।
नई दिल्ली : एक्साइज घोटाले में अपने घर पर छापे के एक दिन बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने खुद के गिरफ्तार होने की आशंका जाहिर की है। सिसोदिया ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हो सकता है कि अगते तीन से चार दिन के भीतर सीबीआई, ईडी मुझे गिरफ्तार कर ले। सिसोदिया ने कहा कि कल सीबीआई के अधिकारी मेरे घर आए। सचिवालय में भी रेड किए। सारे अधिकारियों ने अच्छे से व्यवहार किया। सिसोदिया ने कहा कि उन्हें ऊपर से ऑर्डर है। घोटाला कितने करोड़ का है? उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बड़े अच्छे से परिवार के साथ व्यवहार किया। घर को जांच किया। अच्छे लोग थे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि जिस एक्साइज पॉलिसी के बारे में विवाद खड़ा किया जा रहा है, बड़ी ईमानदारी से पॉलिसी तैयार की है। अगर एलजी ने 48 घंटे पहले पॉलिसी चेंज नहीं की होती, तो 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता। सिसोदिया ने कहा कि मनोज तिवारी कह रहे हैं कि 8 हजार करोड़ का घोटाला किया है। बीजेपी के दूसरे नेता ने कहा कि 1100 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। फिर मैं सोच रहा था कि एलजी साहब ने प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें लिखा था कि 144 करोड़ रुपये का घोटाला किया। पूरी पॉलिसी में कोई घोटाला नहीं सिसोदिया ने कहा कि पूरी पॉलिसी में कोई घोटाला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो कुछ बोल रहे हैं कि इन्हें कुछ पढ़ा नहीं है। इस पूरे शोर शराबे के पीछे असली कहानी है कि मुद्दा शराब का घोटाला नहीं है। सिसोदिया ने कहा कि इन्हें घोटाले की चिंता नहीं है। यदि इन्हें शराब के घोटाले की चिंता होती, तो गुजरात में हर साल 10 हजार करोड़ रुपये के एक्साइज की चोरी होती. यदि इसकी चिंता होती, तो पूरा हेड क्वार्टर गुजरात में शिफ्ट करवा देते. इन्हें घोटाले की चिंता नहीं है. वहां सीबीआई नहीं भेजते. वहां ईडी का मुख्यालय शिफ्ट हो जाता। दिल्ली के एजुकेशन मॉडल की तारीफ सिसोदिया ने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स में दिल्ली के एजुकेशन मॉडल को पहले पेज में छपा था। उन्होंने कहा कि भारत के एजुकेशन मॉडल में दुनिया के सबसे बड़े अखबारों को ऐसा दिख रहा है कि जिसे दुनिया को बताया जा सके। सिसोदिया ने कहा कि डेढ़ साल बाद इस अखबार में कोडिड 19 के दौरान गंगा किनारे जलती लाशों को दिखाया गया। उस समय भारतीय होने के नाते अपने पर शर्म आई थी। यहां ऐसे कोविड हैंडल हो रहा है। कल जब शिक्षा मॉडल पर खबर लगी, तो गर्व महसूस हुआ कि पेज 1 पर लीड खबर में फोटो छपी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये खबर मेरी वजह से नहीं छपी। ये दिल्ली के टीचर्स की तारीफ है। डेप्युटी सीएम ने कहा कि न्यू यार्क टाइम्स के पहले पेज पर शिक्षा की खबर छप रही है, तो वो बधाई के पात्र है। उनका काम सारी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है। ये हमारे और टीचर्स के लिए गर्व की बात है।
नई दिल्‍ली: सीबीआई ने उप मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर छापेमारी के लिए चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की जांच को आधार बनाया। कुमार ने जुलाई में जांच के बाद पाया था कि आबकारी नीति 2021-22 को लागू करने में बड़े पैमाने पर 'गड़बड़‍ियां' हुईं। शराब लाइसेंसियों को 'फायदा' पहुंचाने के लिए प्रक्रिया को ताक पर रख दिया गया। हमारे सहयोगी 'टाइम्‍स ऑफ इंडिया' को सूत्रों ने बताया कि इस बात के तगड़े सबूत थे कि टॉप पॉलिटिकल लेवल पर 'एक हाथ दे, दूसरे हाथ ले' वाला हाल था। सूत्रों के मुताबिक, सिसोदिया ने 'खुद नियमों को ताक पर रखकर बड़े-बड़े फैसले लिए और करवाए।' कुमार ने अपनी जांच में जो आरोप लगाए थे, उनमें से कुछ सीबीआई की एफआईआर में भी हैं। लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्‍सेना के आदेश पर हुई एक और जांच में पता चला कि 'आबकारी विभाग के अधिकारियों ने मंत्री के कहने पर अवैध आदेश जारी किए।' 8 जुलाई, 2022 को कुमार ने जो पहली रिपोर्ट सौंपी, उसमें आबकारी नीति लागू करने में हुई सात 'प्रक्रियागत खामियों' का जिक्र था। यह सात 'खामियां' ही सीबीआई के लिए सिसोदिया पर छापेमारी का आधार बनीं। चीफ सेक्रेटरी को जांच में मिली सात 'खामियां' 1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया। 2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ। 3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था। 4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था। 5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी। 6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है। 7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कम रेवेन्यू मिला। आरोपों पर दिल्ली सरकार का तर्क नई एक्साइज पॉलिसी का मकसद शराब के वितरण की व्यवस्था में अनियमितताओं को खत्म करके एक समान वितरण व्यवस्था लागू करने का था। अवैध शराब माफिया और भ्रष्टाचार को खत्म करके नई एक्साइज पॉलिसी के माध्यम से एक साल के अंदर डेढ़ गुना ज्यादा एक्साइज रेवेन्यू हासिल करने का मकसद था। बीजेपी ने सीबीआई, ईडी व अन्य एजेंसियों का डर दिखाकर दिल्ली में वैध तरीके से खोली जा रही शराब की दुकानों को बंद करवाने का प्रयास किया, ताकि गुजरात की तरह दिल्ली में भी नकली शराब की बिक्री का धंधा जारी रहे। बीजेपी दुकानदारों को डरा-धमकाकर उन पर अपने लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दबाव बना रही है, जिसके चलते शराब की दुकानों की संख्या कम हो गई। अधिकारियों को भी इतना डरा दिया गया है कि वो खाली हुई दुकानों की जगह नई दुकानें खुलवाने के लिए टेंडर करने में डर रहे हैं। नई पॉलिसी में शराब की एक भी दुकान बढ़ाई नहीं गई थी। पहले की तरह 849 दुकानें ही खोली जा रही थीं, लेकिन दुकानों के वितरण की व्यवस्था को ठीक किया गया था, ताकि ऐसा ना हो कि कहीं पर तो कई सारी दुकानें खुल जाएं और कहीं पर एक भी दुकान ना हो। पुरानी पॉलिसी से सरकार को सालाना 6 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता था, नई पॉलिसी से एक साल में रेवेन्यू डेढ़ गुना बढ़ जाता और सरकार को सालाना 9500 करोड़ रुपये मिलते। कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पूर्व उप-राज्यपाल ने नई पॉलिसी के तहत शराब की नई दुकानें खुलने से 48 घंटे पहले नीति बदल दी, जिससे कई सारी दुकानें नहीं खुल पाईं और सरकार को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ। पुरानी पॉलिसी के तहत भी एलजी की मंजूरी से अनधिकृत क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोली जाती रही हैं। उसी को देखते हुए नई पॉलिसी में भी इन इलाकों में दुकानें खोलने का प्रावधान किया गया था, लेकिन ऐन मौके पर एलजी ने यूटर्न ले लिया। दिल्‍ली शराब घोटाला: FIR में किनके नाम? सीबीआई ने आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के प्रावधानों से संबंधित आईपीसी की धाराओं में सिसोदिया सहित 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सिसोदिया के अलावा आरोपियों के रूप में तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण, तत्कालीन उप आबकारी आयुक्त आनंद कुमार तिवारी, सहायक आबकारी आयुक्त पंकज भटनागर व 9 व्यवसायी विजय नैयर, मनोज राय, अमरदीप ढल, समीर महेन्द्रू, अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा, सन्नी मारवाह, अरूण रामचंद्र पिल्लै, अर्जुन पांडेय व एमएस महादेव लिकर्स, बड्डी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का नाम दर्ज है। शराब घोटाला: 31 जगहों पर सीबीआई की रेड सीबीआई की एफआईआर में आरोप है कि सिसोदिया के एक सहयोगी द्वारा संचालित कंपनी को एक शराब कारोबारी ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये का भुगतान किया। सीबीआई ने शुक्रवार को सिसोदिया के सरकारी आवास, ऑफिस और 7 राज्यों के 31 स्थानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान सीबीआई को आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल रेकॉर्ड मिले हैं। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सिसोदिया और अन्य आरोपी अधिकारी ने टेंडर के बाद लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने के इरादे से सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना आबकारी नीति 2021-22 से संबंधित सिफारिश की और निर्णय लिया। आरोपों पर क्‍या बोले मनीष सिसोदिया? मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा, ‘सीबीआई आई है, उनका स्वागत है। हम कट्टर ईमानदार हैं। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जो अच्छा काम करता है, उसे इसी तरह परेशान किया जाता है। इसीलिए हमारा देश अभी तक नंबर-1 नहीं बन पाया।’ अन्‍य ट्वीट्स में सिसोदिया ने कहा कि 'हम सीबीआई का स्वागत करते हैं। जांच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके। अभी तक मुझ पर कई केस किए लेकिन कुछ नहीं निकला। इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा। देश में अच्छी शिक्षा के लिए मेरा काम रोका नहीं जा सकता। ये लोग दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य के शानदार काम से परेशान हैं। इसीलिए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री को पकड़ा है ताकि शिक्षा स्वास्थ्य के अच्छे काम रोके जा सकें। हम दोनों के ऊपर झूँठे आरोप हैं। कोर्ट में सच सामने आ जाएगा।' केजरीवाल ने कहा, कुछ नहीं निकलेगा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम पूरा सहयोग करेंगे। पहले भी कई जांच और रेड हुईं, कुछ नहीं निकला। अब भी कुछ नहीं निकलेगा। डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम ने कहा कि अमेरिका के सबसे बड़े अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर दिल्ली के 'शिक्षा मॉडल' की तारीफ और मनीष सिसोदिया की तस्वीर छपी है। यह भारत के लिए गर्व की बात है, लेकिन उसी दिन केंद्र ने मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई भेज दी। ये इसे रोकना चाहते हैं इसीलिए रेड और गिरफ्तारी की कार्रवाई हो रही है। केजरीवाल ने कहा, ‘सीबीआई को हम अपना काम करने दें। सीबीआई को ऊपर से आदेश है कि इनको तंग करना है। आदेश है कि अड़चनें अड़ाओ। अड़चनें आएंगी, पर काम नहीं रुकेगा।’ शिक्षा नहीं, शराब नीति का मामला: BJP बीजेपी ने सीबीआई की छापेमारी पर दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘जांच के डर से दिल्ली के सीएम को शिक्षा के बारे में बोलना पड़ा। यह शिक्षा की बात नहीं है, यह आबकारी नीति का मामला है।’ उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई को जांच सौंपे जाने के दिन आबकारी नीति को पलट दिया। यह कदम क्यों उठाया गया, क्योंकि शराब के कारोबार के लाइसेंस जारी करने में भ्रष्टाचार किया गया है। लोगों को मूर्ख मत समझिए। ठाकुर ने कहा कि लोगों को जवाब चाहिए। छापे में पेंसिल, कॉपी ही मिलेगी: राघव चड्ढा सीबीआई के छापों पर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि मनीष सिसोदिया के आवास पर केवल चार पेंसिल, कुछ नोटबुक और एक ज्योमेट्री बॉक्स मिलेगा। राघव चड्ढा ने कहा कि सीबीआई ने पहले सीएम अरविंद केजरीवाल के आवास पर छापा मारा था और उसे सिर्फ चार मफलर मिले थे। राघव ने कहा कि सिसोदिया अपने ऊपर लगे आरोपों के बावजूद बेदाग रहेंगे, क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।
नई दिल्‍ली: सचिवालय में 21 अप्रैल 2022 को थोड़ी ज्‍यादा चहल-पहल थी। नए मुख्‍य सचिव के रूप में नरेश कुमार आईएएस पदभार संभालने आ रहे थे। केंद्र सरकार ने उन्‍हें दो दिन के भीतर ही चार्ज ले लेने को कहा था। दिल्‍ली सरकार के कई वरिष्‍ठ अफसर उनके स्‍वागत में खड़े थे। काम संभालते ही कुमार ऐक्‍शन में आ गए। उस वक्‍त दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति खूब चर्चाओं में थी। कुमार ने वहीं से शुरुआत की। आबकारी विभाग की फाइलें पलटते-पलटते उन्‍हें समझ आने लगा कि कुछ 'खेल' हुआ है। वह डॉजियर तैयार करने में लग गए। करीब ढाई महीने बाद नई आबकारी नीति को लागू करने में हुई 'गड़बड़‍ियों' की जांच रिपोर्ट उप राज्‍यपाल वीके सक्‍सेना की मेज पर पहुंच गई। सक्‍सेना ने चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। आंच बढ़ने पर दिल्‍ली सरकार ने नई नीति को वापस लेने का फैसला किया। सीबीआई ने नरेश कुमार की जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज करके छापेमारी शुरू कर दी है। डेप्‍युटी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 15 के खिलाफ छापेमारी की। यह सारा ऐक्‍शन हुआ नरेश कुमार की जांच के आधार पर। कुमार की वह जांच रिपोर्ट इस वक्‍त दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के लिए परेशानी का सबसे बड़ा सबब बनी हुई है। दिल्‍ली के मुख्‍य सचिव नरेश कुमार कौन हैं? नरेश कुमार की गिनती देश के वरिष्‍ठ आईएएस अधिकारियों में होती है। वह 1987 बैच के आईएएस हैं। उनका कैडर AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों) है। AGMUT उत्‍तर प्रदेश (489 पद) के बाद सिविल ऑफिसर्स का दूसरा सबसे बड़ा कैडर (457 स्‍वीकृत पद) है। इंजिनियरिंग बैकग्राउंड से आने वाले नरेश कुमार ने एमबीए भी कर रखा है। दिल्‍ली का मुख्‍य सचिव बनाए जाने से पहले नरेश कुमार करीब ढाई साल तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्‍य सचिव रहे। वह एनडीएमसी के चेयरमैन और डीटीसी के सीएमडी समेत दिल्ली सरकार में कई अन्य अहम पदों पर अपने सेवाएं दे चुके हैं। नरेश कुमार 2000-03 और 2012-15 के बीच केंद्र सरकार में डेप्‍युटेशन पर भी रहे हैं। AAP सरकार की मुश्किलें अभी और बढ़ाएंगे कुमार? एलजी वीके सक्‍सेना ने दिल्‍ली के मुख्‍य सचिव को एक और काम सौंप रखा है। सक्‍सेना ने 24 जुलाई को कुमार से कहा था कि वे दिल्‍ली में 'कार्टेलाइजेशन, मोनोपॉली और ब्‍लैकलिस्‍टेड फर्मों को फायदा पहुंचाने' के आरोपों की जांच करें। एलजी ऑफिस को एक शिकायत मिली थी जिसमें कहा गया था कि 2021-22 में आबकारी लाइसेंस देने में 'बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।' एलजी ने कुमार से 15 दिन में खुद को मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रिपोर्ट सौंपने को कहा था। हालांकि, हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट अबतक एलजी सचिवालय नहीं पहुंची है। चीफ सेक्रेटरी ने एलजी को पहले जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें शराब के कारोबार में कार्टेलाइजेशन या मोनोपॉली की बात नहीं थी।
नई दिल्ली: भाजपा के सांसद प्रवेश वर्मा ने गुरुवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में आबकारी नीति 2021-22 के दौरान थोक लाइसेंस धारकों के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ। दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 30 जुलाई को आबकारी नीति 2021-22 को वापस ले लिया था। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा इसके कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद दिल्ली सरकार ने यह कदम उठाया था। वर्मा ने आरोप लगाया कि दक्षिण दिल्ली में पब चलाने वाला एक व्यक्ति थोक (एल -1) लाइसेंस धारकों से दलाली की 6 प्रतिशत राशि एकत्र करता था जो उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का करीबी है। वर्मा के आरोपों पर सिसोदिया या सत्तारूढ़ ‘आप’ की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि पब मालिक ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया के साथ सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी तस्वीरों को हटा दिया और उपराज्यपाल द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद देश छोड़ दिया। वर्मा ने कहा, ‘पब मालिक दिनेश अरोड़ा को सिसोदिया का दाहिना हाथ बताया जाता है जो अक्सर रात में उसके पब में जाते थे। मैं सिसोदिया से पूछना चाहता हूं कि वह रात में पब क्यों गये और उसके (दिनेश) साथ वाली उनकी तस्वीरें को सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद क्यों हटा दिया गया।’ भाजपा सांसद ने दावा किया कि नई आबकारी नीति 2021-22 के तहत एल-1 लाइसेंस धारकों का कमीशन 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया था। वर्मा ने आरोप लगाया, ‘पब मालिक एल-1 लाइसेंस धारकों से दलाली की छह प्रतिशत राशि एकत्र करता था। इस तरह, लगभग 540 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। साथ ही, तीन थोक लाइसेंसधारियों से 200 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे, जिनके पास बाजार की 60-70 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।’ पूर्व विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया, ‘लाइसेंसधारियों से एकत्र किए गए पैसे का इस्तेमाल इस साल की शुरुआत में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रचार के लिए किया गया था।’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह पैसा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी प्रचार के लिए खर्च किया जा रहा है, जहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।’आबकारी विभाग का प्रभार संभालने वाले सिसोदिया ने हाल में नयी आबकारी नीति का बचाव करते हुए कहा था कि भाजपा नेता भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं क्योंकि पुरानी नीति के तहत शराब माफिया द्वारा चुराए गए 3,500 करोड़ रुपये में से काफी रकम उनकी जेबों में गई थी।
नई दिल्ली: दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी पर बवाल लगातार जारी है। आज सुबह-सुबह दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) समेत देशभर में 20 ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी हुई है। पिछले कुछ वक्त से नई शराब नीति पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (Vijay Kumar Saxena) और दिल्ली सरकार में तलवारें खिची हुई हैं। उपराज्यपाल इस मामले की सीबीआई जांच को मंजूरी दे चुके हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में एक्शन में आ चुकी है। आइए जानते हैं कि दिल्ली आबकारी नीति क्या है और किस मुद्दों पर मचा है इतना बवाल। दिल्‍ली की आबकारी नीति 2021-22 क्‍या है? नई आबकारी नीति के जरिए दिल्‍ली सरकार शराब खरीदने का अनुभव बदलना चाहती थी। नई पॉलिसी में होटलों के बार, क्‍लब्‍स और रेस्‍टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई है। वे छत समेत किसी भी जगह शराब परोस सकेंगे। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने पर रोक थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम क‍िया जा सकता है। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्‍फ लाइफ पर कोई पाबंदी नहीं होगी। इस नीति के लागू होने के बाद दिल्ली के कुल 32 जोन में कुल 850 में से 650 दुकानें खुल गई हैं। दिल्ली सरकार का दावा है कि इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा। दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति में अलग-अलग बातों को शामिल किया गया था। इस नीति के तहत दुकान पर यह देखना होगा कि कम उम्र के व्‍यक्ति को शराब न बेची जाएगी। आईडी चेक क‍िया जाएगा। इसके अलावा शराब की दुकान के बाहर स्‍नैक्‍स या खाने-पीने की दुकान नहीं खुल सकेगी ताकि खुले में शराब पीना कम हो। नीति के अनुसार, सरकार किसी भी शराब की दुकान की मालिक नहीं होगी। पॉलिसी में प्राथमिकता कंज्‍यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्‍धता पर देनी है; स्‍मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना है। नीति में दिल्‍ली में शराब की दुकानें इस तरह हों कि कोई इलाका छूट न जाए और कहीं ज्‍यादा दुकानें न हो जाएं। ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस होगा। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद एक्शन चीफ सेक्रेटरी द्वारा दिल्ली के एलजी को भेजी गई रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि पहली नजर में यह जाहिर होता है कि नई एक्साइज पॉलिसी को लागू करने में जीएनसीटी एक्ट-1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 का उल्लंघन किया गया है। साथ ही टेंडर जारी होने के बाद 2021-22 में लाइसेंस हासिल करने वालों को कई तरह के गैरवाजिब लाभ पहुंचाने के लिए भी जानबूझकर बड़े पैमाने पर तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। एलजी ऑफिस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993 के रूल नंबर 57 के तहत चीफ सेक्रेटरी ने यह रिपोर्ट एलजी को भेजी थी। यह रूल कहता है कि पूर्व निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में कोई भी कमी पाए जाने पर चीफ सेक्रेटरी तुरंत उस पर संज्ञान लेकर उसकी जानकारी एलजी और सीएम को दे सकते हैं। यह रिपोर्ट भी इन दोनों को भेजी गई थी। दावा है कि शराब बेचने का लाइसेंस हासिल करने वालों को टेंडर जारी होने के बाद भी बड़े पैमाने पर गैरवाजिब लाभ पहुंचाने का काम किया गया, जिससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में एक्साइज विभाग के शराब विक्रेताओं की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।रिपोर्ट में एक्साइज विभाग के शराब विक्रेताओं की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। केजरीवाल सरकार पर क्‍या आरोप है? आरोप है कि कैबिनेट को भरोसे में लिए बिना तमाम नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर तमाम निर्णय लिए। यहां तक कि कैबिनेट से यह निर्णय भी पास करवा लिया गया कि अगर पॉलिसी को लागू करने के दौरान उसके मूलभूत ढांचे में कुछ बदलाव करने की जरूरत हो तो आबकारी मंत्री ही वो बदलाव कर सकें। हालांकि, तत्कालीन एलजी ने कैबिनेट के इस फैसले पर सवाल उठाए, जिसके बाद 21 मई को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह निर्णय वापस ले लिया गया, लेकिन इसके बावजूद एक्साइज विभाग मनमाने तरीके से लिए गए फैसलों को लागू करता रहा। बाद में जब लगा कि जांच में ये गड़बियां सामने आ जाएंगी और चीफ सेक्रेटरी ने भी अपने नोट में इनका जिक्र किया, तो आनन-फानन में इन गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने के लिए 14 जुलाई को दोपहर 2 बजे कैबिनेट की एक अर्जेंट बैठक बुलाई गई, जिसका नोटिस खुद चीफ सेक्रेटरी को उसी दिन सुबह 9:32 बजे भेजा गया। कैबिनेट में किन मुद्दों पर चर्चा होने वाली है, उसके संबंध में कोई कैबिनेट नोट भी सर्कुलेट नहीं किया गया, जो कि अपने आप में नियमों का उल्लंघन था। मीटिंग खत्म होने और निर्णय लेने के बाद शाम 5 बजे एलजी सचिवालय को एजेंडा और कैबिनेट नोट प्राप्त हुआ। नई आबकारी नीति पर क्‍या आपत्तियां हैं? दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती है, उसके मुताबिक बाजार में केवल 16 खिलाड़ियों को इजाजत दी जा सकती है और यह एकाधिकार को बढ़ावा देगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि नई आबकारी नीति के जरिए केजरीवाल सरकार ने भ्रष्‍टाचार किया। दिल्‍ली में शराब के कई छोटे वेंडर्स दुकानें बंद कर चुके हैं। उनका कहना है कि कुछ बड़े प्‍लेयर्स अपने यहां स्‍टोर्स पर भारी डिस्‍काउंट से लेकर ऑफर्स दे रहे हैं, इससे उनके लिए बिजनेस कर पाना नामुमकिन हो गया है। अदालतों में वकीलों ने कहा कि उन्हें थोक कीमत के बारे में पता है, लेकिन यह साफ नहीं है कि उन्हें किस दाम पर शराब की बिक्री करनी होगी। दिल्‍ली सरकार का क्‍या तर्क था? हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा था कि उसकी नई आबकारी नीति 2021-22 का मकसद भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा का अवसर मुहैया कराना है। सरकार ने कहा था कि नीति के खिलाफ सभी आशंकाएं काल्पनिक हैं। इस नीति को लाने के पक्ष में दिल्ली सरकार ने कई तर्क दिए थे। राज्य सरकार कहना था कि इससे दिल्ली में शराब माफिया और कालाबाजारी समाप्त होगी। दिल्ली सरकार का राजस्व बढ़ेगा। शराब खरीदने वालों की शिकायत भी दूर होगी। इसके अलावा हर वार्ड में शराब की दुकानें एकसमान होंगी। दिल्ली में कब से लागू होगी पुरानी आबकारी नीति? अधिकारियों ने कहा कि आबकारी विभाग अब भी आबकारी नीति 2022-23 पर काम कर रहा है जिसमें शराब घर तक पहुंचाने एवं कई अन्य सिफारिशें हैं। उनके अनुसार इस मसौदा नीति को अभी उपराज्यपाल वी के सक्सेना के पास नहीं भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि आबकारी विभाग का प्रभार संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विभाग को ‘नयी नीति के आने तक छह महीने के लिए आबकारी की पुरानी व्यवस्था पर ‘लौटने’ का निर्देश दिया। 1 सितंबर से राज्य में पुरानी आबकारी नीति लागू हो जाएगी।
नई दिल्ली: केजरीवाल सरकार के लिए उसी की ओर से लाई गई नई एक्साइज पॉलिसी गले की फांस बन गई है। उपराज्यपाल ने इस नई नीति के खिलाफ जांच के आदेश दिए तो दिल्ली सरकार ने इसे वापस ले लिया। लेकिन इसके बाद भी राहत नहीं मिली। शुक्रवार सुबह सीबीआई डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर पहुंच गई। इसके बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई। सीबीआई के इस एक्शन से जहां आम आदमी पार्टी केंद्र और बीजेपी पर राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही है वहीं बीजेपी का सवाल है कि आखिर नई शराब नीति में गड़बड़ नहीं है तो वापस क्यों लेनी पड़ी है। केजरीवाल ने इन सबके बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मनीष सिसोदिया को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री घोषित कर दिया। वहीं दूसरी ओर आप और बीजेपी में बयानबाजियों का दौर जारी है। न्यूयार्क टाइम्स के फ्रंट पेज पर दिल्ली मॉडल की तारीफ- केजरीवाल नई शराब नीति के खिलाफ सीबीआई के छापे के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने अपनी शुरुआत में मनीष सिसोदिया की तारीफ की। उन्होंने कहा कि न्यूयार्क टाइम्स के फ्रंट पेज पर दिल्ली के शिक्षा मॉडल की तारीफ छपी है। उसमें मनीष सिसोदिया की भी तस्वीर छपी है। यह देश के लिए गर्व की बात है। न्यूयार्क टाइम्स के फ्रंट पेज पर सकारात्मक खबर शायद ही इन सालों में छपी हो। मनीष सिसोदिया जी सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री हैं। उन्होंने केंद्र और बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग हैं जो दिल्ली के मॉडल को सफल बनाने में रोड़ा बन रहे हैं। मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहाल कि उनपर यह पहली रेड नहीं है। पहले भी रेड डाली गई है। मुझपर भी कार्रवाई हुई, सत्येंद्र जैन पर भी कार्रवाई हुई, मुझपर भी एक्शन लिया गया। लेकिन हमें भारत को दुनिया का न.1 देश बनाना है। सत्येंद्र जैन भी जेल में हैं...सिसोदिया भी जाएंगे- अमित मालवीय इसी कड़ी में भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी दिल्ली सरकार को निशाने पर लिया है। मालवीय ने कहा कि दिल्ली सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी मनमाने ढंग से लाई गई थी जिसके चलते रेवेन्यू में घाटा हुआ। यह पॉलिसी जांच के आदेश के बाद वापस क्यों ले ली गई? उन्होंने आगे कहा कि सीएम केजरीवाल ने तो सत्येंद्र जैन को भी ईमानदार कहा था और वह जेल में हैं। मनीष सिसोदिया भी जेल जाएंगे। पिछले 7-8 साल में जो हो रहा था... आश्चर्य है अबतक रेड क्यों नहीं पड़ी? - कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी सीबीआई की कार्रवाई के बाद आर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार में पिछले 7-8 साल से जो हो रहा था, इसमें आश्चर्य ये है कि अब तक रेड क्यों नहीं पड़ी? आबकारी नीति, स्कूल बनाने में धांधली, शिक्षक भर्ती घोटाला, सिविल डिफेंस भर्ती घोटाला जिसमें भी आप देखेंगे तो उसमे 1 नहीं 10-10 छापे पड़ने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुझे विश्वास है कि अगर इसमें निष्ठा के साथ रेड पड़ती है और मामला चलता है तो आम आदमी पार्टी का कैबिनेट, उसका मुख्यमंत्री, उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई भी शायद ऐसा नहीं होगा जो जेल जाने से बच पाएगा। शराब नीति में भ्रष्टाचार नहीं था तो वापस क्यों लिया? अनुराग ठाकुर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी नई शराब नीति के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर आप से सवाल किया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचारी जितना मर्जी ईमानदारी का चोला पहनले वह भ्रष्टाचारी ही रहता है। जिस दिन CBI को जांच दी उसी दिन शराब नीति वापस ली। अगर शराब नीति में कोई घोटाला नहीं था तो उसको वापस क्यों लिया? यह शिक्षा नहीं शराब की बात हो रही है। जनता को मूर्ख न समझें। ठाकुर वने आगे कहा कि सत्येंद्र जैन जब भ्रष्टाचार में जेल गए आपने तब भी उनको बर्ख़ास्त नहीं किया। वह कहते हैं उनकी याददाश्त चली गई। एक्साईज मंत्री एक्सक्यूज मंत्री तो बन गए हैं लेकिन मैं आशा करता हूं कि कहीं उनकी भी याददाश्त न चली जाए।
नयी दिल्ली,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के नेता उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन को बर्खास्त करने की मांग को लेकर यहां मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर सोमवार को धरने पर बैठ गए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने सिसोदिया और जैन को कैबिनेट से हटाने की मांग को लेकर केजरीवाल से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिसमें पार्टी नेता और विधायक शामिल थे। बहरहाल, वे मुख्यमंत्री से मिल न सके, क्योंकि केजरीवाल गुजरात में हैं, जहां वह राजकोट में एक रैली को संबोधित करेंगे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि आबकारी नीति 2021-2022 में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और वे आबकारी विभाग का ज़िम्मा संभालने वाले सिसोदिया को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है। जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। वह केजरीवाल सरकार में बिना विभाग के मंत्री हैं। उनके पास स्वास्थ्य, गृह, बिजली, शहरी विकास, समेत कई अहम विभागों का ज़िम्मा था, जो अब सिसोदिया के पास है।
नयी दिल्ली, कांग्रेस ने देश में महंगाई को लेकर नरेंद्र मोदी नीत भाजपा सरकार पर निशाना साधा और पिछले आठ साल में आर्थिक कुप्रबंधन होने का दावा किया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि कोरोना के संकट के बाद भी देश खुश है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नियम 193 के अधीन ‘मूल्यवृद्धि’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर कर और जीएसटी से सरकार ने अपना बजट तो पूरा कर लिया होगा और अपना खजाना भी भर लिया होगा लेकिन देश में करोड़ों परिवारों का बजट बिगाड़ दिया और कमरतोड़ महंगाई से गरीबी बढ़ती जा रही है। चर्चा में भाग लेते हुए दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जिन हालात में देश की बागडोर संभाली थी और आज कोविड के बाद दुनिया की जो स्थिति है, उसके बाद भी गरीबों को ‘‘दो वक्त की रोटी’’ मिल रही है जिसके लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया जाना चाहिए। तिवारी ने एक आंकड़े के हवाले से दावा किया कि देश में 2008 से 2014 तक, जब संप्रग सरकार थी, 27 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया गया, लेकिन 2021 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक 23 करोड़ लोग दोबारा गरीबी रेखा से नीचे चले गये हैं। VDO.AI तिवारी ने कहा कि देश में 77 प्रतिशत धन एक प्रतिशत लोगों के पास है और अरबपति 100 से बढ़कर 142 हो गये हैं जबकि गरीबों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि देश में सबसे अमीर 92 लोगों के पास 55 करोड़ भारतीयों के धन के बराबर संपत्ति है। तिवारी ने कहा, ‘‘ इसकी शुरुआत 8 नवंबर 2016 को हुई थी जब सरकार ने बिना सोचे-समझे नोटबंदी लागू की थी। सरकार ने आज तक सदन को नहीं बताया कि यह फैसला क्यों लिया गया और देश पर इसका क्या असर पड़ा।’’ उन्होंने कहा कि नोटबंदी से जीडीपी वृद्धिदर घटते-घटते 2021-22 में कम हो गयी। तिवारी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा लेकिन इसका एकमात्र कारण कोविड नहीं है और अर्थव्यवस्था निरंतर गिरती जा रही थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी का असर रोजगार पर भी पड़ा और 2017 से बेरोजगारी दर बढ़ते-बढ़ते जून 2022 में 7.8 प्रतिशत पहुंच गयी। उन्होंने कहा सरकार के पास बेरोजगारी को कम करने के लिए कोई रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आज जो हो रहा है उसका कारण पिछले आठ साल का आर्थिक कुप्रबंधन है।’’ तिवारी ने कहा कि सरकार ने पेट्रोलियम पर कर से 27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा अर्जित किये हैं। तिवारी ने कहा, ‘‘सरकार अपना खजाना तो भरती रही, लेकिन लोगों की जेब खाली करती रही। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपना बजट तो ठीक कर लिया होगा लेकिन 25 करोड़ परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया। भाजपा सांसद दुबे ने मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज़) को लेकर विपक्ष शासित राज्य सरकारों पर निशाना साधा और सरकारों पर बढ़ते कर्ज तथा मुद्रास्फीति बढ़ने के पीछे इसे एक वजह बताया। दुबे ने कहा कि कोविड के बाद अनेक देशों की हालत खराब है, सभी जगह रोजगार छिन रहे हैं और मुद्रास्फीति बढ़ रही है, उस स्थिति में भी यह देश बदल रहा है, खुश है और यहां गांव, गरीब, आदिवासी किसान को सम्मान मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस सरकार के आने से पहले सदन में किसानों की आत्महत्या के विषय पर कई बार बात होती थी लेकिन पिछले आठ साल में किसानों की आत्महत्या का विषय सदन में एक भी बार नहीं उठा क्योंकि इस सरकार ने किसानों को ताकत दी है और वे आत्महत्या करने को मजबूर नहीं हो रहे हैं। दुबे ने विपक्ष पर और खासतौर पर कांग्रेस पर, ‘मोदीफोबिया’ से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी दल की न कोई वैचारिक प्रतिबद्धता है और न जनता के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी। उन्होंने एक खबर के हवाले से दावा किया कि 2011 से लेकर 2014 तक भी बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 1,000 से अधिक थी। दुबे ने कहा कि आज जब रूस-यूक्रेन युद्ध तथा अन्य कारणों से पूरी दुनिया में गेहूं का उत्पादन एक प्रतिशत कम हो गया है, धान का उत्पादन 0.5 प्रतिशत कम हो गया और चीनी का उत्पादन भी गिर गया है, तब भी भारत एक ऐसा देश है जो इन सभी चीजों का निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि सब्जियों के दाम मार्च महीने से जुलाई में घट गये हैं, इसके लिए सरकार को बधाई दी जानी चाहिए। दुबे ने पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे कई विपक्ष शासित राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि कर्ज लेकर मुफ्त की चीजें (फ्रीबीज) बांटने के कारण आज अर्थव्यवस्था की ऐसी हालत है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक इन राज्यों को पैसा देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा मुफ्त चीजों की बात नहीं करती क्योंकि ‘‘हम चुनाव जीतने के लिए नहीं सोचते। हम देश के लिए सोचते हैं।’’ उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस विषय पर श्वेतपत्र जारी करने का अनुरोध किया कि किस तरह कर्ज लेकर मुफ्त की योजना चलाई जाती हैं।
नयी दिल्ली,भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजय अरोड़ा ने सोमवार को दिल्ली पुलिस के आयुक्त पद का कार्यभार संभाला। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अरोड़ा के यहां जय सिंह मार्ग स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर पुलिस बल ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। दिल्ली के पुलिस प्रमुख के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले ट्वीट में अरोड़ा ने कहा कि बल पुलिस व्यवस्था में नए मानक स्थापित करेगा। उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त के आधिकारिक ट्विटर हैंडल (अकाउंट) से ट्वीट किया, “आज, मैंने दिल्ली के पुलिस आयुक्त का पदभार संभाला। दिल्ली पुलिस की समृद्ध विरासत राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च नागरिक सेवाओं और बलिदानों से परिपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि साथ मिलकर हम इस भावना को आगे बढ़ाएंगे और पुलिसिंग (पुलिस व्यवस्था) के नए मानक स्थापित करेंगे।” 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की सेवानिवृत्ति होने के बाद केंद्र सरकार ने 57 वर्षीय अरोड़ा को रविवार को दिल्ली पुलिस का आयुक्त नियुक्त किया था। दिल्ली पुलिस के आयुक्त के तौर पर अरोड़ा की नियुक्ति केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उनके तमिलनाडु से एजीएमयूटी में अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति को मंजूरी देने के बाद की गई। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है और उसके अधिकारी अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित क्षेत्र (एजीएमयूटी) कैडर के होते हैं। अरोड़ा ने तमिलनाडु पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के पुलिस अधीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी हैं, जिसका गठन चंदन तस्कर वीरप्पन को पकड़ने के लिए किया गया था और इस कार्यकाल के दौरान उन्हें बहादुरी के लिए मुख्यमंत्री के वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2002 और 2004 के बीच कोयंबटूर के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य किया। अरोड़ा को पिछले साल अगस्त में आईटीबीपी का महानिदेशक (डीजी) नियुक्त किया गया था। उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में भी अपनी सेवाएं दीं। अधिकारियों ने कहा कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के उदय के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अरोड़ा ने विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लिट्टे ने श्रीलंका में तीन दशकों तक एक तमिल राष्ट्र के लिए अलगाववादी युद्ध का नेतृत्व किया था।
नयी दिल्ली,राज्यसभा में विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को भी गतिरोध कायम रहा और दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बजकर 21 मिनट पर बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। हालांकि हंगामे के बीच ही सदन में संक्षिप्त चर्चा के बाद दो विधेयक पारित किए गए। उच्च सदन में नेता सदन पीयूष गोयल ने हंगामे के बीच ही सरकार की ओर से यह घोषणा की कि कल मूल्यवृद्धि के मुद्दे पर सदन में चर्चा करायी जाएगी। मूल्यवृद्धि उन मुद्दों में शामिल है जिन पर चर्चा के लिए विपक्षी सदस्य पिछले कई दिनों से हंगामा कर रहे हैं। इससे पहले, पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्य आसन के निकट आकर हंगामा और नारेबाजी करने लगे। नायडू ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह जिस मामले को लेकर हंगामा ओर नारेबाजी कर रहे हैं, उसका सदन से कोई लेना देना नहीं है। शिवसेना सदस्य अपने सहयोगी संजय राउत की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। सभापति ने शिवसेना सदस्य अनिल देसाई का नाम ले कर कहा कि वह हंगामा न करें और सदन की कार्यवाही चलने दें। उन्होंने कहा, ‘‘आप सदन के बाहर अपना राजनीतिक हिसाब किताब करें।’’ हालांकि, इसके बावजूद सदस्यों का हंगामा जारी रही जिसे देखते हुए सभापति ने कार्यवाही पांच मिनट के भीतर ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई की एक चॉल के पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन के मामले में शिवसेना सदस्य संजय राउत को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर कई विपक्षी सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। विपक्षी सदस्य महंगाई पर चर्चा की मांग के साथ शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत की गिरफ्तारी का भी विरोध कर रहे थे। हंगामे के बीच ही पीठासीन उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया। सदन में शोरगुल के बीच ही सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों के कामकाज में सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती और वे अपना काम रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग महंगाई के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे और आज लोकसभा में इस पर चर्चा होनी है जबकि यहां मंगलवार को चर्चा होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महंगाई पर चर्चा कराने की जरूरत पर बल देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष की निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य कई मुद्दे उठाना चाहते हैं, उनमें गुजरात में 100 लोगों से अधिक की मौत का मुद्दा भी शामिल है। सदन में शोरगुल जारी रहने के कारण कालिता ने 12 बजकर करीब 40 मिनट पर कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर सदन में वही नजारा देखने को मिला। पीठासीन उपाध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही पहले ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरूद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशोधन विधेयक, 2022’ और फिर ‘भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022’ को संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित करवाया। सदन ने इन विधेयकों पर विपक्षी सदस्यों द्वारा लाये गये संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एवं निर्मला सीतारमण द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बारे में 28 जुलाई को की गयी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से निकाला जाना चाहिए और सत्ता पक्ष के इन दोनों मंत्रियों को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। खड़गे ने यह मांग गोयल एवं सीतारमण द्वारा 28 जुलाई को की गई उस टिप्पणी के बारे में की जिसमें दोनों मंत्रियों ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति के बारे में दिये गये विवादास्पद बयान को लेकर विपक्षी दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का उल्लेख किया था। नेता प्रतिपक्ष ने यह प्रसंग उठाते हुए कहा कि वह ‘‘प्रक्रियागत अनियिमतता’’ से जुड़े एक गंभीर मामले को उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 29 जुलाई को राज्यसभा के सभापति को एक पत्र भेजा था। उन्होंने कहा कि इस पत्र में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण एवं पीयूष गोयल ने 28 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का जो उल्लेख किया था, उसका सदंर्भ दिया गया है। खड़गे ने कहा, ‘‘ वह (सोनिया गांधी) अन्य सदन की सदस्य हैं और उनके नाम का उल्लेख किया जाना काफी समय से चली आ रही संसदीय परिपाटी का घोर उल्लंघन है। मैंने उपरोक्त उल्लेख में श्रीमती निर्मला सीतारमण और श्री गोयल द्वारा प्रयुक्त किए गए उन शब्दों को निकालने और दोनों से माफी की मांग की है। ’’ इस पर पीठसीन उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सभापति एम वेंकैया नायडू निर्णय करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वह यह जानना चाहते हैं कि सभापति निर्णय करने में कितना समय लगाएंगे क्योंकि उन्होंने 29 जुलाई को ही पत्र दिया था। उन्होंने कहा कि यह सदन की पुरानी परिपाटी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला है। पीठासीन उपाध्यक्ष कालिता ने उनसे कहा कि यह काम सभापति पर छोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि यह उनके समक्ष विचाराधीन है। इस मुद्दे पर सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेता प्रतिपक्ष आसन पर आक्षेप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसन निष्पक्ष हैं और यह आरोप लगाना गलत है कि सदन में व्यवस्था नहीं होने के बावजूद विधेयकों को पारित करवाया गया। गोयल ने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य शांत बैठे हैं और विपक्ष के कुछ सदस्य सदन में व्यवस्था नहीं बनने दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के सदस्य यह सब महंगाई के मुद्दे पर चर्चा से बचने के लिए कर रहे हैं तथा वे इस चर्चा से भागना चाहते हैं। सदन के नेता ने दावा किया कि विपक्षी सदस्य इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि सरकार ने महंगाई को रोकने के लिए बहुत प्रभावी एवं ठोस कदम उठाये हैं। इससे पहले खड़गे ने सदन में विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के विरोध की ओर इशारा करते हुए पीठासीन उपाध्यक्ष से कहा था कि इस तरफ (विपक्ष) के सदस्यों की बात नहीं सुनी जा रही जबकि उस तरफ (सत्ता पक्ष) के सदस्यों की बात सुनी जा रही है। उनका संकेत इस बात की ओर था कि सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच दो विधेयकों पर चर्चा करवायी गयी। सदन में आज हंगामे के बीच कुछ विपक्षी सदस्यों ने जब व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहा तो पीठासीन अध्यक्ष ने उनसे कहा कि जब सदन में व्यवस्था ही नहीं है तो वे व्यवस्था का प्रश्न कैसे उठा सकते हैं। कालिता ने कहा कि नियमों के अनुसार आसन के समक्ष आए सदस्य अपने नियत स्थानों पर जाकर ही इस तरह का प्रश्न उठा सकते हैं।
नयी दिल्ली,राज्यसभा ने सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनसे जुड़ी प्रणालियों के प्रसार के वित्त पोषण को रोकने के प्रावधान वाले विधेयक को सोमवार को मंजूरी दे दी। यह विधेयक लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर पीठासीन उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके तत्काल बाद विपक्षी दलों के सदस्यों ने महंगाई और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर हंगामा आरंभ कर दिया। हंगामे के बीच ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरूद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशोधन विधेयक, 2022’ पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस कानून में कुछ खामियां थी और उनका समाधान निकालने के लिए यह संशोधन आवश्यक था। उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक देश की सुरक्षा और देश की प्रतिष्ठा के लिए बहुत बढ़िया है।’’ जयशंकर ने कहा कि जितने भी सदस्यों ने इस विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लिया, सभी ने यह माना है कि आतंकवाद एक गंभीर खतरा और उतना ही गंभीर खतरा सामूहिक संहार के हथियार हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून के दायरे में सिर्फ सामूहिक संहार के हथियारों का व्यापार आता है और इसमें उनका वित्त पोषण नहीं शामिल है। उन्होंने कहा कि इस खाई को पाटने की जरूरत है क्योंकि वित्तीय कार्रवाई कार्य दल की सिफारिशों के अनुसार भारत सहित सभी देशों को सुनिश्चित करना है कि सामूहिक संहार के हथियारों से संबंधित गतिविधियां प्रतिबंधित हों। वर्ष 2005 में पारित सामूहिक संहार के आयुध ओर उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरुद्ध क्रियाकलापों) संशेधन विधेयक कानून में सिर्फ सामूहिक संहार के हथियार का निर्माण प्रतिबंधित था। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही यह विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनकी परिदान (डिलीवरी) प्रणालियों के प्रसार से संबंधित विनियमों का विस्तार किया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लक्षित वित्तीय प्रतिबंध एवं वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की सिफारिशों को सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनकी परिदान प्रणालियों के प्रसार के खिलाफ लागू किया गया है। इसमें कहा गया है कि उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए मूल अधिनियम को संशोधित करने की जरूरत है ताकि सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनकी परिदान प्रणालियों के प्रसार को वित्त पोषित करने के विरूद्ध उपबंध किया जा सके और हम अपनी अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं को पूरा कर सकें। विधेयक में सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनकी परिदान प्रणालियों के संबंध में किसी भी क्रियाकलाप के वित्त पोषण को निषेध किया गया है। इसमें केंद्र सरकार को ऐसे वित्त पोषण का निवारण करने के लिये निधियों एवं अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों या आर्थिक संसाधनों पर रोक, अधिग्रहण या कुर्की करने का अधिकार दिया गया है।
प्रयागराज/लखनऊ: इन दिनों पूरा देश आजादी का 75वां साल मना रहा है। हर तरफ आजादी के अमृत महोत्‍सव को लेकर तरह-तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। आजादी की लड़ाई में अहम योगदान देने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन (Purushottam Das Tandon Birthday) का आज जन्‍मदिन है। 1 अगस्त, 1882 को इलाहाबाद में जन्मे पुरुषोत्तम दास टंडन पढ़ाई के दौरान ही कांग्रेस से जुड़ गए। विदेशी हुकूमत के विरोध के कारण उन्‍हें म्योर कॉलेज से निकाल दिया गया। 1906 में सर तेज बहादुर सप्रू के अंडर में उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत शुरू की। 1921 में महात्‍मा गांधी के आह्वान पर वकालत छोड़ कर खुद को देश-समाज के लिए समर्पित कर दिया। अनेक जेल यात्राएं की। किसानों-मजदूरों को संगठित करने की कोशिशें कीं। पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। वे बेहतरीन वक्ता थे। कांग्रेस पार्टी के लम्बे इतिहास में अध्यक्ष पद के दो यादगार चुनाव हुए। एक 1939 में, जब गांधी जी के न चाहने के बाद भी सुभाष चन्द्र बोस अध्यक्ष चुन लिए गए। दूसरी बार 1950 में जब पंडित नेहरू के खुले विरोध के बाद भी राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जीत गए। दोनों चुनावों में एक दिलचस्प समानता और रही। सुभाष चंद्र बोस को जीतकर भी इस्तीफा देना पड़ा। टंडन जी के साथ भी यही हुआ। 1948 में अध्‍यक्ष पद का चुनाव हार चुके थे टंडन पंडित नेहरू और सरदार पटेल इस चुनाव के पूर्व किसी एक नाम पर सहमति बनाने के लिए साथ बैठे थे। टंडन उस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का इससे पहले 1948 का चुनाव वह हारे थे। समर्थक उन पर फिर से चुनाव लड़ने के लिए दबाव बनाए हुए थे। निजी तौर पर उनके प्रति आदर-लगाव रखने के बाद भी पंडित नेहरू उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में नही थे। टंडन की दाढ़ी, विभाजन का प्रबल विरोध और हिंदी के प्रति उत्कट प्रेम के चलते नेहरू की नजर में उनकी छवि एक पुरातनपंथी और साम्प्रदायिक नेता की थी। टंडन के स्वतंत्र व्यक्तित्व और शरणार्थियों के एक सम्मेलन की अध्यक्षता ने भी पंडित नेहरू को उनसे दूर किया था। एक दूसरा नाम शंकर राव देव का था। देव भाषायी आधार पर वह बृहत्तर महाराष्ट्र के तगड़े पैरोकार थे। इसमें वे सेंट्रल प्रॉविन्स और हैदराबाद के कई जिले शामिल कराना चाहते थे। इसके चलते सरदार पटेल से उनकी दूरियां बढ़ी हुई थीं। एचसी मुखर्जी और एसके पाटिल का भी नाम चला पर बात नही बनी। दोहरी जिम्‍मेदारी नहीं निभाना चाहते थे नेहरू पंडित नेहरू और सरदार पटेल दोनों ही शुरुआती दौर में एक राय के थे कि जेबी कृपलानी को उम्मीदवार नहीं बनाना है। कृपलानी 1946-47 में अध्यक्ष रहे थे। नेहरू-पटेल का उनसे तालमेल नहीं बन सका था। अध्यक्ष के तौर पर अपनी उपेक्षा की कृपलानी की भी शिकायतें थीं। इस बीच सीआर राजगोपालाचारी ने अध्यक्ष पद के लिए सरदार पटेल का नाम सुझाया। नेहरू खामोश रहे। लगा कि शायद नेहरू प्रधानमंत्री के साथ अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी संभालना चाहेंगे। सरदार पटेल सहमत थे। नेहरू 2 अगस्त को पटेल के घर पहुंचे और सीआर राजगोपालाचारी को अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया। सरदार पटेल इस प्रस्ताव पर भी राजी थे, लेकिन सीआर ने इनकार कर दिया। ये भी साफ हुआ कि पंडित नेहरू दोहरी जिम्मेदारी नहीं चाहते, पर टंडन को हराना उनकी प्राथमिकता है। टंडन को नेहरू ने सीधे पत्र लिख जताया विरोध नेहरू ने पटेल के रोकने के बाद भी मौलाना आजाद के घर वर्किंग कमेटी के दिल्ली में मौजूद सदस्यों की बैठक बुलाई। दो टूक कहा कि अध्यक्ष के पद पर टंडन उन्हें स्वीकार्य नही हैं। 8 अगस्त, 1950 को पंडित नेहरू ने टंडन को सीधे पत्र लिखकर उनका विरोध किया। पत्र में लिखा- 'आपके चुने जाने से उन ताकतों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा, जिन्हें मैं देश के लिए नुकसानदेह मानता हूं।' टंडन ने 12 अगस्त को नेहरू को उत्तर दिया- 'हम बहुत से सवालों पर एकमत रहे हैं। अनेक बड़ी समस्याओं पर साथ काम किया है पर कुछ ऐसे विषय हैं, जिस पर हमारा दृष्टिकोण एक नहीं है। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाना और देश का विभाजन इसमें सबसे प्रमुख है। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि मेरे प्रति आपकी कटुतम अभिव्यक्ति भी मुझे कटु नहीं बना पाएगी और न ही आपके प्रति मेरे प्रेम में अवरोध कर सकेगी। मैंने सालों से अपने छोटे भाई की तरह विनम्रता के साथ आपसे प्रेम किया है।' किदवई थे चुनाव में नेहरू के सलाहकार पर पंडित नेहरू मन बना चुके थे। टंडन के पत्र के एक दिन पहले ही 11 अगस्त को उनका नाम लिए बिना नेहरू ने एक बयान जारी किया- 'जब तक वह (नेहरू) प्रधानमंत्री हैं, उन्हें (टंडन) अध्यक्ष स्वीकार करना उचित नहीं होगा। उम्मीद जताई कि राजनीतिक, साम्प्रादायिक और अन्य समस्याओं के बारे में फैसले कांग्रेस की पुरानी सोच के मुताबिक ही लिए जाएंगे। इस बयान के जरिये नेहरू ने टंडन को लेकर अपना रुख सार्वजनिक कर दिया। रफी अहमद किदवई इस चुनाव में पंडित नेहरू के मुख्य सलाहकार थे। किदवई को अहसास था कि टंडन के सभी विचारों से सहमत न होने के बाद भी निष्ठा और ईमानदार छवि के कारण खासतौर पर हिंदी पट्टी के राज्यों में कांग्रेसजन के बहुमत का उन्हें समर्थन प्राप्त है। शंकर राव देव के उनके मुकाबले टिकने की उम्मीद नही थी। किदवई ने नेहरू को समझाने का किया प्रयास किदवई ने नेहरू का मन बदलने की कोशिशें शुरू कीं। वह उन्हें समझाने में सफल रहे कि गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश में अर्से से सक्रिय रहे कृपलानी ही टंडन का मुकाबला कर सकते हैं। सरदार पटेल के लिए ये खबर चौंकाने वाली थी। किसी भी दशा में कृपलानी को स्वीकार न करने की नेहरू के साथ देहरादून में 5 जुलाई को हुई बातचीत उन्होंने याद की। सीआर से कहा, 'मैं भीतर तक हिल गया हूं। मुझे आश्रम चले जाना चाहिए।' सीआर को भी कृपलानी को उम्मीदवार बनाए जाने पर नेहरू से शिकायत थी। दोनों ने नेहरू को समझाने की कोशिश की कि हिन्दू-मुस्लिम और शरणार्थियों के सवाल पर कृपलानी ने नेहरू की टंडन के मुकाबले अधिक कड़ी आलोचना की हैं। पर नेहरु फैसला बदलने को तैयार नहीं थे। सरदार पटेल को लुभा रही थी टंडन की लोकप्रियता सरदार पटेल का टंडन के पक्ष में झुकाव शुरू हुआ। सरकार के भीतर भी खींचतान थी। सरदार को लग रहा था कि उन्हें किनारे किया जा रहा। कैबिनेट की वैदेशिक मामलों की कमेटी का सदस्य होने के बाद भी विदेशी मामलों में उनसे सलाह-मशविरा नही किया जा रहा था। खुद उनके गृह और राज्य मंत्रालय मामलों में नेहरू की आलोचनात्मक दखल बढ़ रही थी। कांग्रेसियों के बीच टंडन की लोकप्रियता सरदार को लुभा रही थी। 25 अगस्त को किदवई की पहल पर नेहरू और कृपलानी की बैठक हुई। बैठक के बाद कृपलानी ने पत्रकारों से नेहरू के रुख पर अपना आभार व्यक्त किया। कांग्रेस के वोटरों के बीच साफ संदेश पहुंच चुका था कि यह कृपलानी-टंडन नहीं नेहरू-पटेल के बीच का भी मुकाबला है। पटेल ने नेहरू से कहा- 'आपको कभी समझ नहीं पाया' 25 अगस्त को ही नेहरू ने पटेल को लिखा, 'टंडन का चुना जाना वह अपने लिए पार्टी का अविश्वास मानेंगे। अगर टंडन जीतते हैं तो वह न तो वर्किंग कमेटी में रहेंगे और न ही प्रधानमंत्री रहेंगे।' पटेल ने सीआर से कहा कि वह जानते हैं कि नेहरू ऐसा कुछ नहीं करेंगे। 27 अगस्त को पटेल ने नेहरू से कहा, 'आपको 30 वर्षों से जानता हूं पर आज तक नही जान पाया कि आपके दिल में क्या है?' पटेल ने एक संयुक्‍त बयान का प्रस्ताव किया कि उम्मीदवारों को लेकर असहमति के बाद भी बुनियादी सवालों पर हम एक हैं। अध्यक्ष जो भी चुना जाए, उसे कांग्रेस की नीतियों पर चलना होगा। नेहरू का जवाब था, 'बयान का समय बीत चुका है।' यूपी में टंडन को मिले वोट ही वोट 29 अगस्त को 24 स्थानों पर मतदान हुआ। 1 सितम्बर को गिनती हुई। टंडन 1306 वोट पाकर जीत गए। कृपलानी को 1092 और देव को 202 वोट मिले। उत्तर प्रदेश जो नेहरू और टंडन दोनों का गृह प्रदेश था, वहां टंडन को अच्छी बढ़त मिली। सरदार पटेल के गृह राज्य गुजरात के सभी वोट टंडन को मिले। नतीजों के बाद पटेल ने सीआर से पूछा, 'क्या नेहरू का इस्तीफा लाए हैं?' पटेल की उम्मीद के मुताबिक, नेहरू इरादा बदल चुके थे। 13 सितम्बर 1950 को नेहरू ने एक बयान में कहा, 'टंडन की जीत पर साम्प्रदायिक और प्रतिक्रियावादी तत्वों ने खुलकर खुशी का इजहार किया है।' अब किदवई के नाम को लेकर अड़े नेहरू सितम्बर के तीसरे हफ़्ते में कांग्रेस के नासिक सम्मेलन में टंडन ने अध्यक्षीय भाषण में हिन्दू सरकार की अवधारणा को खारिज किया। सम्मेलन ने नेहरु-लियाकत समझौते, साम्प्रदायिकता और वैदेशिक मामलों में भी सरकार के स्‍टैंड का समर्थन किया। टंडन वर्किंग कमेटी के चयन में नेहरू की इच्छाओं का सम्मान करने को तैयार थे सिवाय रफी अहमद किदवई के नाम को लेकर। नेहरू ने शर्त लगा दी कि वह बिना किदवई के कमेटी में शामिल नहीं होंगे। टंडन को समझाने की कोशिशें शुरू हुईं। मौलाना आजाद आगे आए। इनकार में टंडन ने कहा कि वे उनकी तुलना में किदवई को कहीं ज्यादा जानते हैं। किदवई ने कहा था कि टंडन के जीतने पर अगर नेहरू इस्तीफा नहीं देते तो मैं बयान जारी करूंगा कि वह ( नेहरू) अवसरवादी हैं। नतीजों के बाद किदवई ने खामोशी साध ली। मौलाना और सीआर ने पटेल से सिफारिश की। पटेल ने कहा कि टंडन से किदवई को कमेटी में लेने के लिए कहने की जगह वह सरकार छोड़ना पसंद, नेहरू से पूछिए, वह सिर्फ इशारा करें। मैं सरकार से निकलने को तैयार हूं। सीआर ने कहा, मैं ऐसा कैसे कह सकता हूँ ? इससे देश का नुकसान होगा। दो दिन बाद नेहरू बिना किदवई के वर्किंग कमेटी में शामिल होने को तैयार हो गए। टंडन के साथ नेहरू, पटेल और मौलाना आजाद, पटेल के घर पर बैठे, जहां अन्य नामों पर सहमति बन गई। आखिरकार पार्टी अध्‍यक्ष चुन लिए गए नेहरू पर आगे की राह टंडन के लिए आसान नहीं थी। 15 दिसम्बर 1950 को सरदार पटेल के निधन के बाद पार्टी के भीतरी समीकरणों में भारी फेर-बदल हुआ। अनेक समाजवादी पहले ही कांग्रेस से अलग हुए थे। जून 1951 में आचार्य कृपलानी ने कांग्रेस छोड़ी। कृपलानी के इस फैसले के कारणों में टंडन की अगुवाई में पार्टी के पुरातनपंथी बन जाने का आरोप शामिल था। अध्यक्ष के तौर पर टंडन को नेहरू कभी स्वीकार नहीं कर पाए। सितम्बर 1951 में वर्किंग कमेटी से इस्तीफा देकर नेहरू ने नए सिरे से दबाव बनाना शुरू किया। उनका यह कदम इसी महीने बंगलौर में एआईसीसी की बैठक में शक्ति परीक्षण की तैयारी का हिस्सा था। पहला आम चुनाव पास था। पार्टी की कलह चरम पर थी। टंडन ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर प्रधानमंत्री नेहरू की राह आसान कर दी। बंगलौर में नेहरू अध्यक्ष चुन लिए गए। अब पार्टी और सरकार दोनों नेहरू के हाथ में थी। यही वह मुकाम था, जब सत्ता में दल के संगठन की दखल खत्म हो गई। आने वाले दिनों में कांग्रेस के इस फार्मूले को उसकी विरोधी पार्टियों ने भी सिर-माथे लिया । हिन्‍दी के प्रति टंडन का अनूठा प्रेम, हर जगह उठाई आवाज आजादी की लड़ाई की अगली कतार के नेताओं में टंडन की गिनती थी। भारत की सभ्यता-संस्कृति और विरासत को लेकर उन्हें गर्व था। हिन्दी भाषा के प्रति उनका समर्पण अनूठा था। 1910 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा के प्रांगण में उन्होंने हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की। 1918 में हिन्दी विद्यापीठ और 1947 में हिन्दी रक्षक दल का गठन किया। हिन्दी की मान-प्रतिष्ठा, प्रचार-प्रसार का संघर्ष उन्होनें अंग्रेजों के दौर में शुरू किया। आजादी के बाद भी यह जारी रहा। उन्‍होंने संविधान सभा में हिन्दी का सवाल जोर-शोर से उठाया। 1937 से 1950 के 13 वर्षों की अवधि में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में भी वह हिन्दी के पक्ष में काम करते रहे। विभाजन के चलते आजादी के जश्‍न से रहे दूर 1952 में लोकसभा में प्रवेश के बाद सदन में हिन्दी के लिए उनकी आवाज गूंजती रही। 1956 में वह राज्यसभा सदस्य चुने गए। वहां भी वह हिन्दी को उसका उचित स्थान न मिलने की शिकायत करते रहे। टंडन का हिन्दी के लिए संघर्ष सड़क से सदन तक जीवनपर्यन्त जारी रहा। वह जिस भी मंच पर पहुंचे, वहां उन्होंने हिन्दी के लिए आवाज उठाई। विभाजन के वह प्रबल विरोधी थे। देश के दो टुकड़े होने की पीड़ा के चलते वह आजादी के जश्न से दूर रहे। शरणार्थियों के कष्टों ने उन्हें बेचैन किया। उनके आंसू पोंछने की कोशिशों ने उनके अपनों की निगाहें तिरछी कर दीं। अपनी इन कोशिशों की उन्होंने बड़ी राजनीतिक कीमत चुकाई। पर वह अपने या परिवार के लिए कुछ हासिल करने के लिए राजनीति और सार्वजनिक जीवन में नही आए थे। सुमित्रानंदन पंत्र को लेकर जब कही बड़ी बात संसद सदस्य के नाते तब चार सौ रुपया महीना मिलता था। किसी अवसर पर भुगतान करने वाले लोकसभा स्टॉफ से उन्होंने पूछा कि क्या यह राशि सीधे सरकारी सहायता कोष में नही जा सकती? बगल में खड़े एक सांसद ने उनसे कहा, 'सिर्फ चार सौ रुपये मिलते हैं। उन्हें भी आप दान कर देना चाहते हैं।' टंडन का उत्तर था, 'मेरे लड़के कमाते हैं। सब मिलकर सात सौ रुपये देते हैं। तीन-चार सौ ही खर्च है। बचे रुपये भी दूसरों के काम आते हैं।' स्वास्थ्य कारणों से टंडन ने 1961 में राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। 23 अप्रैल 1961 को उन्हें भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया। इसी वर्ष कविवर सुमित्रानंदन पन्त को पद्मभूषण सम्मान घोषित किया गया। टंडन ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार वियोगी हरि को इस विषय में जो लिखा, वह उनके महान व्यक्तित्व की एक झलक दिखाता है। उन्‍होंने लिखा- 'मुझे भारत रत्न और सुमित्रानंदन पन्त को पद्मभूषण? यह ठीक है कि उम्र में मैं बड़ा हूं। मैंने भी काम किए हैं। पर आगे चलकर लोग पुरुषोत्तम दास टंडन को भूल जाएंगे। लेकिन पन्त जी की कविताएं तो हमेशा अमर रहेंगी। उनकी कविताएं लोगों की जुबान पर जिंदा रहेंगी। उनका काम मुझसे ज्यादा स्थायी है। इसलिए सुमित्रानंदन पन्त को भारत रत्न मिलना चाहिए।'
आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' रिलीज़ से पहले ही ट्विटर पर ट्रेंड हो रहा है और वजह नेगेटिव है। दरअसल इस फिल्म को लेकर ट्विटर पर कई फैन्स इसे बॉयकॉट करने की मांग करने लगे हैं और #BoycottLaalSinghChaddha वायरल हो रहा है। अब आमिर खान ने इस ट्विटर ट्रेंड पर रिऐक्ट भी किया है। दरअसल सोशल मीडिया पर उनकी इस फिल्म को बॉयकॉट करने वाले यूजर्स का अब भी मानना है कि उन्हें भारत में रहना नहीं पसंद। हालांकि, अब आमिर खान ने अपना सुर बदलते हुए कहा है कि उन्हें इस देश से प्यार है और फैन्स उनकी फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' को बॉयकॉट न करें। आमिर खान के पुराने बयान को लेकर लोगों ने उखाड़े हैं गड़े मुर्दे याद दिला दें कि एक बार फिर आमिर खान का वो पुराना इंटरव्यू चर्चा में छाया है जिसमें उन्होंने इनटॉलरेंस (असहिष्णुता) वाले मुद्दे पर कुछ बातें कही थीं। आमिर खान ने भारत में असहनशीलता बढ़ने की वजह से डर लगने जैसी बातें कही थी। दरअसल साल 2015 में Aamir Khan ने एक इंटरव्यू में बातों-बातों में असहिष्णुता पर अपने विचार रखे थे और उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ समय से देश में यह माहौल खराब हुआ है। उन्होंने कहा था कि उनकी वाइफ ने उनसे देश को छोड़ने की बात कही, जिसपर काफी लोगों ने गुस्सा फूट पड़ा था। अब आमिर खान ने अपने उन्हीं फैन्स को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उन्हें अपने देश से प्यार है। उन्होंने कहा- प्लीज़ मेरी इस फिल्म Laal Singh Chaddha को बॉयकॉट न करें, मुझे अपने देश से प्यार है। आमिर ने कहा- मुझे देश से प्यार है हाल ही में एक प्रेस इवेंट में उनसे पूछा गया कि क्या हेट या फिर बेफिजूल की ट्रोलिंग उन्हें परेशान करती है? इसपर एक्टर ने कहा- जी हां, मुझे दुख होता है जब कुछ लोग ऐसा कहते हैं। वे मानते हैं कि मैं उनमें से हूं जिन्हें इंडिया नहीं पसंद। वे दिल से ऐसा मानते हैं लेकिन ये सच नहीं है। यह वाकई दुखद है कि कुछ लोग ऐसा सोचते हैं। ऐसी बात है ही नहीं, प्लीज मेरी फिल्म को बॉयकॉट मत कीजिए, प्लीज मेरी फिल्म जरूर देखें।' 11 अगस्त को रिलीज़ हो रही है फिल्म इस फिल्म में आमिर खान के अलावा करीना कपूर, नागा चैतन्य, मोना सिंह जैसे स्टार्स लीड रोल में हैं। अद्वैत चंदन की बनाई यह फिल्म 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है। यह फिल्म 1994 में आई हॉलीवुड फिल्म 'फॉरेस्ट गम्प' की ऑफिशल हिन्दी रीमेक है। आमिर खान ने कही थी ये बातें बता दें कि आमिर खान ने असहिष्णुता वाले मुद्दे पर तब कहा था, 'देश में असुरक्षा और डर की भावना समाज में बढ़ी है। यहां तक कि मेरा परिवार भी ऐसा ही महसूस कर रहा है। मैं और मेरी वाइफ किरण ने पूरी जिंदगी भारत में जी है, लेकिन पहली बार उन्‍होंने मुझसे देश छोड़ने की बात कही। उन्‍हें अपने बच्‍चे के लिए डर लगता है। उन्‍हें इस बात का भी डर है कि आने वाले समय में हमारे आसपास का माहौल कैसा होगा। वह जब अखबार खोलती हैं तो उन्‍हें डर लगता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अशांति बढ़ रही है।' आमिर खान के इसी बयान के बाद से उनकी और उनकी वाइफ किरण राव की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई। काफी लोगों ने उन्हें देश से बाहर पाकिस्तान जाकर रहने की सलाह दे डाली।
मुंबई: श‍िवसेना के राज्‍यसभा सांसद संजय राउत 4 अगस्‍त तक ईडी की ह‍िरासत में रहेंगे। पात्रा चॉल जमीन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में 9 घंटे तक छापेमारी के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत को रविवार को ईडी ने हिरासत में लिया था। राउत पर जांच में सहयोग न करने का आरोप है। ईडी की टीम ने 1,000 करोड़ से ज्यादा के पात्रा चॉल जमीन घोटाला मामले में उनसे घंटों पूछताछ की। ईडी ने रातभर संजय राउत को हिरासत में रखा। सोमवार को उन्हें PMLA कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान ईडी ने संजय राउत के ल‍िए 8 द‍िन की र‍िमांड मांगी थी। ED की रिमांड की मांग के खिलाफ संजय राउत के वकील कोर्ट में दलील पेश की। लेकिन उससे बात बनी नहीं। इससे पहले ईडी संजय राउत को मेडिकल के लिए जेजे अस्पताल लेकर पहुंची थी। इससे पहले कोर्ट में सुनवाई के दौरान संजय राउत के वकील एडवोकेट अशोक मुंदरगी ने कोर्ट से कहा- संजय राउत की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है. वह दिल से जुड़ी बीमारी के मरीज हैं। उनकी सर्जरी भी हुई थी। इससे जुड़े कागजात कोर्ट के सामने पेश किए गए हैं। इस पर ईडी के वकील हितेन वेनेगांवकर ने अदालत को बताया कि जांच से पता चला है कि उस पैसे (1.6 करोड़ रुपए) में से अलीबाग के किहिम बीच पर एक जमीन खरीदा गया था। एक प्लॉट सपना पाटकर के नाम पर लिया गया था। जांच में यह भी पता चला कि प्रवीण राउत संजय राउत का फ्रंट मैन था। संजय राउत के भाई सुनील राउत ने बताया क‍ि संजय राउत को देर रात गिरफ्तार किया गया था। आज उनका मेडिकल चेकअप किया गया और उन्हें कोर्ट ले जाया गया। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है, हमें विश्वास है कि वह जल्द ही रिहा हो जाएंगे। ईडी ने 8 दिन की हिरासत मांगी। लेकिन उसे 4 ही मिलीं। उद्धव बोले- जब हमारा वक्‍त आएगा तो सोच‍िएगा क्‍या होगा? शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संजय राउत के पर‍िवार से मुलाकात कर प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्‍होंने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उद्धव ठाकरे ने ईडी की कार्रवाई को लेकर कहा क‍ि जब हमारा वक्‍त आएगा तो सोच‍िएगा क्‍या होगा? उद्धव ठाकरे ने क‍हा क‍ि वक्‍ता हमेशा बदलता रहता है। जो झुकने वाले थे वो श‍िवसेना से चले गए। झुकनेवाला कभी श‍िवसैन‍िक नहीं हो सकता है। उद्धव ठाकरे ने कहा क‍ि संजय राउत की गिरफ्तारी गलत है। बीजेपी के ख‍िलाफ बोलने वालों को जेल भेजा जा रहा है। उद्धव ने कहा क‍ि देश में संव‍िधान के साथ खिलवाड़ क‍िया जा रहा है। महाराष्ट्र में विश्वासघात बर्दाश्त नहीं किया जाता, गिर जाएगी शिंदे की सरकार: आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और युवा सेना के प्रमुख आदित्य ठाकरे ने सोमवार को कहा कि राज्य में विश्वासघात को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाता, इसलिए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार निश्चित रूप से गिर जाएगी। कोंकण क्षेत्र की चार दिवसीय यात्रा के दौरान शिवसेना के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिंदे सरकार का ध्यान गंदी राजनीति पर है, जनता के कल्याण पर नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने शिंदे सरकार पर हमला बोलते हुए कहा क‍ि एक-डेढ़ महीने तक यह पूरा राजनीतिक नाटक चलेगा। सरकार निश्चित रूप से गिर जाएगी। महाराष्ट्र विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं करता। संजय राउत के घर वालों से म‍िले उद्धव ठाकरे, 3 बजे करेंगे प्रेस कॉफ्रेंस शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को उपनगरीय मुंबई में पार्टी नेता संजय राउत के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। ठाकरे कार में उपनगरीय भांडुप स्थित राउत के घर पहुंचे। ठाकरे और राउत को काफी करीबी माना जाता है। मुलाकात के बाद श‍िवसेना की ओर से कहा गया क‍ि उद्धव ठाकरे 3 बजे मातोश्री में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। संजय राउत के घर पहुंचे उद्धव ठाकरे महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री और श‍िवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सोमवार दोपहर पार्टी सांसद संजय राउत के घर पहुंचे। उद्धव ठाकरे ने संजय राउत के पर‍िवार से मुलाकात की। दरअसल पात्रा चॉल जमीन मामले में ईडी ने संजय राउत को अरेस्‍ट कर ल‍िया है। ईडी संजय राउत को कोर्ट में पेश करने वाली है, जहां वह राउत की र‍िमांड मांग सकती है। संजय राउत को जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया ईडी के अधिकारी सोमवार को शिवसेना के सांसद संजय राउत को जांच के लिए अस्पताल ले गए। इसके बाद उन्हें यहां एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। जहां ईडी कोर्ट से कम से कम 14 द‍िन की कस्‍टडी की मांग कर सकती है। दरअसल मनी लॉड्र‍िंग के मामले में गिरफ्तारी के बाद दक्षिण मुंबई में ईडी के कार्यालय में रात गुजारने वाले राउत (60) को दोपहर साढ़े 12 बजे के बाद अस्पताल ले जाया गया। वह एजेंसी के कार्यालय के बाहर जमा मीडिया कर्मियों का अभिवादन करते हुए देखे गए। अधिकारियों ने बताया कि ईडी ने रविवार को राउत के घर पर नौ घंटे तक छापेमारी करने के बाद मुंबई की पात्रा चॉल में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने कहा कि छापेमारी के दौरान मिली 11.5 लाख रुपये की नकदी को जब्त कर लिया गया है। राउत से दक्षिण मुंबई के बलार्ड एस्टेट में स्थित ईडी के स्थानीय कार्यालय में छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई और आधी रात के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। रिमांड के ल‍िए ED ने तैयार किए तीन मुद्दे सूत्रों की मानें तो ईडी ने तीन मुद्दे तैयार किए हैं, जिन पर ईडी संजय राउत की रिमांड मांगेगी। ईडी का दावा है कि रुपयों के लेनलेन को लेकर संजय राउत को फायदा हुआ है। उनकी पत्नी के अकाउंट में रुपयों के ट्रांसफर होने की बात कही जा रही है। प्रवीण राउत से संजय राउत तक रकम पहुंचने का दावा भी ईडी ने किया है। कहा जा रहा है कि ईडी के पास इसके दस्तावेज मौजूद हैं। वहीं तीसरा मुद्दा यह है कि संजय राउत जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संजय राउत पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि एक भोंपू तो अंदर गया। रोज सुबह आठ बजे बजने वाला भोंपू बंद हो गया। एकनाथ शिंदे ने एक दिन पहले भी तंज कसते हुए कहा था कि संजय राउत डर क्यों रहे हैं? 'आवाज दबाने की साजिश' संजय राउत की पीएमएलए कोर्ट में पेशी से पहले उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का बयान सामने आया है। आदित्य ने कहा कि शिवसेना को खत्म करने, महाराष्ट्र की आवाज दबाने की यह साजिश है..ये सभी के सामने है और ये जगजाहिर है। राज्यसभा का कामकाज स्थगित करने का नोटिस इधर शिवसेना सांसद प्रियंक चतुर्वेदी ने राज्यसभा में कामकाज स्थगित करने के लिए नोटिस दिया है। वहीं निर्दलीय विधायक रवि राणा ने आरोप लगाया है कि MVA की सरकार बनाने के लिए संजय राउत को कांग्रेस और NCP ने बड़ी रकम दी थी। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए। वहीं ईडी संजय राउत के मेडिकल के लिए उन्हें अस्पताल लेकर पहुंची हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत को रविवार सुबह उस वक्त झटका लगा, जब ईडी के अधिकारियों ने उनके घर में दस्तक दी। सूत्र बताते हैं कि सुबह सात बजे से ईडी के 20 से अधिक अधिकारी राउत से गोरेगांव पात्रा चाल घोटाले में सवाल करने लगे। लेकिन, राउत ने ईडी के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। आरोप है कि म्हाडा, संजय राउत के रिश्तेदार प्रवीण राउत की गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी और हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) की मिली भगत से यह घोटाला हुआ है। प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में दिया नोटिस शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी संजय राउत पर ईडी की कार्रवाई पर निशाना साधा है। उन्होंने राज्यसभा में कामकाज स्थगित करने के लिए नोटिस (Suspension of business notice in Rajya Sabha) दिया है। उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई और आईटी जैसी प्रमुख जांच एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों के माध्यम से विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्हें चुप कराया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक अजेंडा करार दिया है।
नई दिल्ली: लोकसभा में अभी तक आक्रामक तेवरों में नजर आने वाले कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) भी अलग अंदाज में नजर आए। कुछ दिन पहले राष्ट्रपत्नी बयान के बाद सत्तारूढ़ पक्ष के निशाने पर आए चौधरी ने आज लोकसभा अध्यक्ष से पर्याप्त मौके की मांग की। गौरतलब है कि संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे और शोर-गुल के कारण पिछले दो सप्ताह तक कार्यवाही काफी प्रभावित रही। आज लोकसभा में कांग्रेस के चार सांसदों के निलंबन की कार्यवाही वापस लेने के बाद महंगाई पर चर्चा शुरू हुई। गत मंगलवार को कांग्रेस के चार सदस्यों-मणिकम टैगोर, टी एन प्रतापन, जोतिमणि और राम्या हरिदास को आसन ने पूरे सत्र के लिए निलंबित करने का फैसला किया था। अधीर रंजन बोले, इतनों दिनों से जमा हुआ है.. बोलने दीजिए अधीर रंजन ने लोकसभा में कहा, 'हम सबको आम लोगों के नुमांइदें होने के कारण इस सदन में चर्चा करने का मौका मिलता है। हम गांव, कस्बे, शहरों से चुनकर यहां आते हैं तो सिर्फ इसलिए कि आम लोगों की बात रख सकें और सरकार का ध्यान उस ओर दिलाया जा सके। यही हमारा फर्ज बनता है। आपने सत्र के पहले दिन सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उसमें बताया था कि सदन की उत्पादकता कम हुई है।' इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब उन्हें अपने विषय पर बोलने को कहा तो अधीर रंजन ने बिरला से उन्हें थोड़ा और बोलने देने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, -आज बोलने दीजिए सर, इतनों दिन से जमा हुआ है। पीएम मोदी अपने मन की बात कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं कर सकता हूं। लोकसभा अध्यक्ष की नसीहत-तख्तियां न लहराएं इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों को सदन में तख्तियां नहीं लहराने की नसीहत दी। लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों का निलंबन वापस लिए जाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की सहमति से वह यह व्यवस्था दे रहे हैं कि अब कोई भी सदस्य आसन के निकट और आसन के सामने तख्तियां लेकर नहीं आएगा। इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि उसके सदस्य सदन में तख्तियां लेकर नहीं आएंगे और आसन के सामने तख्तियां नहीं लहराएंगे। ओम बिरला ने कहा कि पिछले दिनों सदन में हुई घटनाओं ने हम सबको आहत किया है। मुझे भी आहत किया है और देश की जनता को भी पीड़ा पहुंची है। कांग्रेस के सदस्यों का निलंबन वापस, लोकसभा में हंगामा खत्म लोकसभा में शोर-शराबे के बाद सोमवार दोपहर दो बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। न विपक्षी दलों की तरफ से कोई तख्तियां थीं, न ही शोर-शराबा। सभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ध्यान से सुन रहे थे। अभी तक लगातार सांसदों को शोर-शराबा न करने की हिदायत देने वाले बिरला भी संसद की परंपराओं की याद दिला रहे थे। दरअसल संसद में कामकाज सामान्य रूप से चलने की उम्मीद अब जग गई है। लोकसभा से निलंबित कांग्रेस के चारों सांसदों का निलंबन वापस ले लिया गया है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन का कार्यवाही चलाने को लेकर सहमति बन गई।
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को कलमा (Kanpur Kalama Row) पढ़ाए जाने पर विवाद शुरू हो गया है। बच्चे घर पर कलमा का पाठ कर रहे थे, इसके बारे में जब उनसे पूछा गया तो पूरी बात सामने आई। बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल में यह प्रार्थना सिखाई जाती है। इस पर हंगामा मच गया है। एक अभिभावक ने बताया कि घर पर उनका बच्चा इस्लाम से जुड़ी प्रार्थना कर रहा था। उसने बीजेपी और हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोगों के साथ आपत्ति दर्ज कराई। पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया है। वहीं, स्कूल प्रशासन ने खंडन करते हुए कहा है कि यह प्रार्थना है। स्कूल में हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी धर्मों की प्रार्थनाएं कराई जाती हैं। आपत्ति जताने वाले गार्जियन ने बताया, 'मेरी पत्नी ने बताया कि बच्चा स्कूल से आने के बाद घर पर इस्लामिक प्रार्थना बोल रहा था। इस बारे में पूछे जाने पर उसने कहा कि स्कूल में ऐसा बताया गया था। मैं स्कूल में गया लेकिन प्रशासन ने प्रार्थना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद मैंने वॉट्सऐप पर ग्रुप बनाया और कुछ अभिभावकों के साथ ही बीजेपी से जुड़े लोगों को भी इस बारे में सूचित किया, जिन्होंने स्कूल प्रशासन पर सवाल उठाया।' स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया, 'हमारे स्कूल में हिंदू धर्म के साथ ही इस्लाम, सिख, क्रिश्चन सभी धर्मों की प्रार्थनाएं की जाती हैं। अब पैरेंट्स की तरफ से इस्लामिक प्रार्थना पर आपत्ति के बाद से हमने इसपर रोक लगा दी है। अभी केवल राष्ट्रगान ही गाया जा रहा है।' उन्होंने डायरी में प्रार्थनाओं में गायत्री मंत्र, सांची वाणी, दुआ, प्रतिज्ञा, The Pledge वाला पेज खोलकर भी दिखा दिया। इसमें सभी धर्मों की प्रार्थनाएं लिखी हुई थी। कानपुर के ACP निशांक शर्मा ने बताया, 'एक मामला प्रकाश में आया है, जहां स्टूडेंट्स को स्कूल में इस्लाम धर्म से जुड़ी लाइन्स बुलवाई गई। हमने स्कूल प्रशासन से इस बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि स्कूल में सभी धर्मों से जुड़ी प्रार्थनाएं की जाती हैं। आपत्ति किये जाने के बाद से स्कूल ने ऐसी प्रार्थना बंद करा दी है।'
जबलपुरः जबलपुर स्थित न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भीषण आग लग गई। इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि कम-से-कम तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। बताया जा रहा है कि दमोह नाका शिवनगर स्थित इस अस्पताल में लगी आग की चपेट में आकर कई और लोग आकर जख्मी हुए हैं। बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। आग लगने के बाद अस्पताल से धुएं का गुबार उठने लगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना पर दुख जताते हुए मृतक के परिजनों और घायलों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। धमाके के साथ लगी आग, अस्पताल में अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो धमाके के साथ लगी आग इतनी भयावह थी कि धीरे-धीरे उसने पूरे अस्पताल को अपनी आगोश में ले लिया। धमाके की आवाज सुनकर अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। घबराए स्टाफ और मरीज के परिजन जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इससे पहले कि किसी को कुछ समझ में आता, कई लोग लोग आग की उठती लपटों में फंस गए। स्थानीय लोगों और दमकल विभाग की टीम लगातार लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। घायलों को दूसरे अस्पताल में भेजा गया घायलों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पांच से ज्यादा शव और आधा दर्जन से अधिक घायलों को उपचार के लिए अन्य अस्पताल रवाना किया गया है। अस्पताल में करीब 100 लोगों का स्टाफ है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। दमकल विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे हैं और आग बुझाने के प्रयास में लगे हैं। सहायता राशि का ऐलान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों और घायलों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने घायलों को इलाज के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया। सीएम ने ट्वीट कर कहा है कि वे स्थानीय प्रशासन और कलेक्टर से निरंतर संपर्क में हैं। मुख्य सचिव को संपूर्ण मामले पर नजर बनाये रखने के लिए निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव के लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।
नई दिल्ली: बीजेपी ने शुक्रवार को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम आदमी पार्टी (AAP) को भ्रष्टाचार के तीन चेहरे करार दिया है। साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि आखिर वह किस मजबूरी में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी अपने मंत्री सत्येंद्र जैन को बर्खास्त नहीं कर रहे हैं। 'टीवी पर भ्रष्टाचार के ‘थ्री मस्केटियर्स’ दिखाई दे रहे हैं' बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘जब मैं छोटा था तो ‘थ्री मस्केटियर्स’ की कहानी काफी पढ़ता था लेकिन आज टेलीविजन चैनलों पर भ्रष्टाचार के ‘थ्री मस्केटियर्स’ दिखाई दे रहे हैं। सबसे पुरानी तो कांग्रेस है। ईडी के सामने इनके नेता चुप होते हैं और ये सत्याग्रह के नाम पर सड़कों पर उग्र होते हैं।’ उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्टाचार का दूसरा चेहरा बताया और कहा कि उसने पश्चिम बंगाल में एक नया मॉडल दिखाया है, जो टीएमसी यानी ‘टू मच करप्शन’ मॉडल है। उन्होंने कहा कि हर रोज वहां कैश का एक पहाड़ मिलता है। 'मीडिया और बीजेपी के दबाव में ममता ने अपने मंत्री को हटाया' पूनावाला ने कहा कि जब एक के बाद एक सबूत सामने आते गए तब जाकर मीडिया और बीजेपी के दबाव में ममता बनर्जी ने अपनी सरकार में नंबर दो का स्थान रखने वाले पार्थ चटर्जी को हटाने का काम किया। उन्होंने कहा, ‘आज, मैं आपसे भ्रष्टाचार के तीसरे ‘मस्केटियर्स’ यानी आम आदमी पार्टी की कहानी बताता हूं। कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के नेता टेलीविजन स्क्रीन पर आए थे और उन्होंने कहा कि मैंने सत्येंद जैन की सारी फाइलें देखी हैं, वो कट्टर ईमानदार हैं जबकि उनके कट्टर भ्रष्टाचार और आपराधिक पृष्ठभूमि पर मुहर लगाने का काम दिल्ली उच्च न्यायालय ने किया है।’ दिल्ली के सीएम केजरीवाल पर भी बोला हमला भाजपा प्रवक्ता ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी कौन सी ऐसी मजबूरी है या फिर जैन के पास उनकी कौन सी ‘फाइल’ है जो वह अपने ‘नंबर दो’ का इस्तीफा नहीं ले पा रहे हैं। जैन पर धन शोधन कानून के तहत मामला चल रहा है और वह लोकनायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में भर्ती हैं। गौरतलब है कि जैन को 30 मई को धनशोधन निवारण कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। पहले उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा गया था और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
नई दिल्ली: भारत में 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। आम जनता के लिए तो अभी काफी वक्त है, मगर राजनीतिक पार्टियों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी के लिए कहा जाता है कि ये पार्टी ऐसी है जो साल के सभी 365 दिन चुनावी मोड में रहती है। 2024 के आम चुनाव में पीएम मोदी के मुकाबले विपक्ष का कोई चेहरा फिलहाल अभी तक तो नजर नहीं आ रहा। अगर ऐसा ही रहा तो बीजेपी के लिए फिल से बहुत ज्यादा मुश्किलें नहीं होंगी। बीजेपी दक्षिण भारत के चार राज्यों में दो राज्यों में तो अच्छा प्रदर्शन कर रही है, मगर केरल और तमिलनाडु में पार्टी का खाता भी नहीं खुलता नजर आ रहा है। बीजेपी के लिए दक्षिण भारत सबसे खास बना हुआ है। साउथ इंडिया में भाजपा पसार रही पैर आपको याद होगा कुछ दिनों पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की थी। इस बैठक से बीजेपी ने इशारा दिया था कि अब उनका अगला निशाना दक्षिण भारत ही होगा। बीजेपी तेलंगाना और कर्नाटक में अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है। इसके कई कारण है। बीजेपी लगातार दक्षिण के राज्यों में ग्राउंड के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को Y श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। के अन्नामलाई के बारे में विरोधी भले ही उनको जोकर कहते हों मगर तमिलनाडु के अंदर इस नेता ने कमाल की जमीन तैयार की है। अन्नामलाई संघर्ष करते हैं, राज्य सरकारों की नीतियों का बहिष्कार करते हैं, आंदोलन करते हैं। सड़कों पर हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम इकट्ठा करने का वो माद्दा रखते हैं। आदिवासी वोट बैंकों में बीजेपी ने लगा दी सेंध भाजपा के वोट बैंक में इस बार सात से आठ प्रतिशत सीधे-सीधे वोटबैंक बढ़ने का अनुमान है। आप सोच रहें होंगे कि वो कैसे। कुछ दिनों पहले ही देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। एनडीए की ओर से उम्मीदवार थीं द्रौपदी मुर्मू। द्रौपदी मुर्मू को बीजेपी शासित राज्यों के अलावा अन्य राज्यों ने भी खूब वोट दिया। देश में पूरी आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत आदिवासी वोटर है। आदिवासी मुख्य रूप से भारतीय राज्यों उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि में बहुसंख्यक व गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक है जबकि भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों में यह बहुसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम। इन राज्यों का ज्यादातर आदिवासी वोट इस बार बीजेपी को जाना तय है। तेलंगाना और कर्नाटक में तो बीजेपी छाई एक टीवी न्यूज चैनल ने सर्वे किया। सर्वे में सवाल था कि अगर आज चुनाव हो जाएं तो देश में किसकी सरकार बनेगी। हम सबसे पहले साउथ से ही शुरूआत करते हैं। तेलंगाना की बात करें तो यहां पर केसीआर को नुकसान हो रहा है। केसीआर को 2019 में 42 फीसदी वोट मिला था, अगर अभी चुनाव हो जाएं तो 34 फीसदी वोट ही उनको मिल रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी को 2019 में सिर्फ 20 फीसदी वोट मिले थे मगर अब 39 फीसदी वोट मिलते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस को यहां भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस को 2019 में 30 फीसदी वोट मिले थे तो वहीं अब 14 फीसदी मिल रहे हैं। यानी की 16 फीसदी वोट कम हुआ है। तेलंगाना में कुल 17 सीटें हैं। जिसमें से केसीआर को 8 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी को यहां पर 6 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को दो सीटें मिल रही हैं। ओवैसी की पार्टी को यहां पर एक सीट जोकि खुद ओवैसी की है। वो मिलती हुई नजर आ रही है। आंध्र तमिल में नहीं खुल रहा खाता आंध्र प्रदेश में बीजेपी का खाता खुलता नहीं दिखाई दे रहा है। यहां पर लोकसभा की 25 सीटें हैं। बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिल रही है। यहां पर जगन मोहन रेड्डी को 19 सीटें मिलती हुईं नजर आ रही है। टीडीपी यानी चंद्र बाबू नायडू के खाते में 6 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। कर्नाटक में कुल 28 सीटें हैं। यहां पर बीजेपी कुल 23 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। यहां पर कांग्रेस को चार सीटें मिलती हुईं नजर आ रही है। एसडी कुमारस्वामी की बात करें तो उन्हें सिर्फ एक सीट ही मिल रही है। तमिलनाडु में कुल 39 लोकसभा सीटें हैं। यहां पर यूपीए के खाते में 38 सीटें जाती हुईं नजर आ रही हैं। यहां पर एनडीए के खाते में सिर्फ एक सीट जाती हुई दिख रही है। तमिलनाडु में डीएमके की 25 सीटें, कांग्रेस की 7, सीपीआई की 2, सीपीएम की 2, वीसीके की एक, समेत कई पार्टियों का गठबंधन है। ये पार्टियां यूपीए में आती हैं। इसीलिए यहां पर आपको 38 सीटें जाती हुई दिख रही हैं। केरल में कुल 20 लोकसभा सीटे हैं। यहां पर भी बीजेपी का खाता नहीं खुल रहा है। केरल की 20 सीटें कांग्रेस के खाते में जाती हुई दिख रही हैं। एकनाथ शिंदे और बीजेपी को फायदा महाराष्ट्र में अगर आज चुनाव हो जाएं तो यहां भी पीएम मोदी का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो बीजेपी को 28 फीसदी वोट मिले थे। अगर आज चुनाव होते हैं यहां पर बीजेपी को 36 फीसदी वोट मिलेगा। यानी की बीजेपी का वोट बैंक यहां पर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। वहीं अगर एकनाथ शिंदे गुट की बात करें तो 2019 में उनके साथ सात फीसदी वोट थे मगर अब एकनाथ शिंदे गुट को 17 फीसदी वोट मिलेंगे। महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं। अगर आज चुनाव होंगे तो यहां पर 26 सीटें बीजेपी को मिल सकती हैं। तीन सीटें उद्धव ठाकरे गुट को मिलती हुई दिख रही है। एकनाथ शिंदे को 11 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। एनसीपी को 2019 में 16 फीसदी वोट मिले थे, अब उनको एक फीसदी वोट का लाभ मिल रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है उद्धव ठाकरे को। उनका वोट बैंक तीन फीसदी तक सिमट गया है। उत्तर भारत में भाजपा की लहर अब हम आते हैं उत्तर भारत की ओर। यहां पर बीजेपी को बंपर वोट मिलते हुए नजर आ रहे हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां पर 80 लोकसभा सीटों में से 76 जीत सकती है। आखिरकार इसके पीछे की वजह क्या है। इसका सबसे बड़ा कारण है योगी आदित्यनाथ का सुशासन। यूपी में कानून व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। इसके अलावा विधानसभा चुनावों में जिस तरह से जनता ने योगी आदित्यानथ को अपनाया था उसी तरह आम चुनावों में लोगों की पसंद पीएम मोदी बने हुए हैं। यहां पर कई फैक्टर है। हिंदुत्व भी यहां पर एक बड़ा फैक्टर है। फ्री अनाज योजना और किसानों को मिलने वाली सम्मान निधि ने गांवों में बीजेपी को मजबूत किया है। महिला सुरक्षा के नाम पर महिलाएं आज सबसे ज्यादा बीजेपी को वोट दे रही हैं। राजस्थान में बीजेपी राजस्थान में बीजेपी को 25 की 25 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को यहां पर एक भी सीट नहीं मिल रही है। हालांकि 2019 में बीजेपी को 25 की 25 सीटें जीती थीं। इस बार भी बीजेपी वही दोहरा रही है। राजस्थान के 56 फीसदी लोगों ने कहा है कि अगर केंद्र और राज्य में एक सरकार होती है तो फायदा होता है। डबल इंजन सरकार को लोगों ने पसंद किया है। लेकिन इस बार कांग्रेस के पास मौका था कि वो लोकसभा चुनावों में कुछ कमाल कर सकती है। मगर जोधपुर, भरतपुर जैसे कांडों ने यहां पर कांग्रेस का बहुत नुकसान किया है। यहां के वरिष्ठ पत्रकार संजीव श्रीवास्तव बता रहे हैं कि यहां पर जो हाल में कांड हुए हैं उसकी वजह से ध्रुवीकरण हुआ है वो बीजेपी के फेवर में है। लेकिन बीजेपी के सामने ये समस्या है कि उसके अंदर सीएम के बहुत सारे कैंडिडेट हैं इस वजह से पार्टी के अंदर अंतर्कलह भी है। मगर बीजेपी इसको संभाल लेगी। बंगाल में फेल हो गई रणनीति बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल भी अहम राज्य है मगर यहां पर बीजेपी की चाल कामयाब नहीं हो पा रही है। हालांकि वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि टीएमसी के नेताओं का भ्रष्टाचार में लिप्त होना ये ममता के लिए तगड़ा झटका है। टीएमसी के पार्थ चटर्जी के घर नोटों का अंबार मिलने के बाद यहां के हालात बदल सकते हैं। बीजेपी ने यहां पर विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था मगर उसके आधे से ज्यादा नेता पार्टी छोड़ गए। इसके पीछे का कारण ये बताया गया कि पार्टी अपने नेताओं के साथ नहीं खड़ी हुई। बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ता अकेले टीएमसी से मोर्चा लिए रहे मगर विधानसभा चुनाव के बाद उनको शीर्ष नेतृत्व का कम ही साथ मिला। इसका घाटा बीजेपी को आगामी चुनावों में उठाना पड़ सकता है। ओपिनियम पोल में अगर आज चुनाव होते हैं तो पश्चिम बंगाल में 42 सीटें में से 14 सीटें मिल सकती है। टीएमसी को 26 सीटें मिल रही है। 2019 में दीदी को 22 सीटें मिलीं थीं। आज अगर चुनाव होते हैं तो चार सीटों का फायदा हो रहा है। 2019 में बीजेपी को 18 सीटें मिलीं थीं. वहीं कांग्रेस को 2019 में दो सीटें मिलीं थीं और अगर आज चुनाव होते हैं तो बंगाल में दो सीटें कांग्रेस को फिर से मिल सकती हैं। मध्य प्रदेश में मामा को घाटा, मगर पीएम मोदी को फुल सपोर्ट मध्य प्रदेश में अगर आज चुनाव होते हैं तो बीजेपी को 29 सीटों में से 28 सीटें बीजेपी जीत सकती है। कांग्रेस को एक सीट में जीत मिलती हुई नजर आ रही है। 2019 में बीजेपी को 28 सीटें मिलीं थीं। 2019 में कांग्रेस को एक सीट ही मिली थी। मध्य प्रदेश में बीजेपी के काम से 43 फीसदी लोग संतुष्ट है। एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहर के अलावा गांव में लोगों का अपार प्यार मिल रहा है। चौहान ने कहा कि कांग्रेस की बौखलाहट ये बताती है कि अब उनको खुद का अस्तित्व बचाने की चुनौती है। बिहार में बीजेपी को 2019 से ज्यादा वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं। यहां पर बीजेपी को 21 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। वहीं जेडीयू को 14 और राजद को 4 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। यानी की यहां पर बीजेपी को बढ़त हासिल होती दिखाई दे रही है। यहां पर कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक सीट जाती हुई नजर आ रही है। यानी कांग्रेस हर राज्य से सिमटती हुई नजर आ रही है। बीजेपी को प्रचंड बहुमत लोकसभा की 512 सीटों का ओपिनियन पोल आ चुका है। अगर आज चुनाव हो जाता है तो बीजेपी 326 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। अगर एनडीए की सीटें जोड़ दी जाएं तो ये आंकड़ा 350 के आस पास पहुंच जाएगा। 2014 में बीजेपी की 292 सीटें आईं थीं, 2019 में 303 सीटें और अगर आज चुनाव हो जाएं तो बीजेपी सभी का रेकॉर्ड तोड़ सकती है। दक्षिण भारत के राज्यों में बीजेपी खास करिश्मा नहीं कर पा रही है। वहीं उत्तर के राज्यों में बीजेपी का जादू बरकरार है। कई राज्यों में बीजेपी 2019 से भी अच्छा प्रदर्शन करती हुई नजर आ रही है। साउथ के राज्यों में तेलंगाना और कर्नाटक में बीजेपी बढ़त हासिल किए हुए है। बाकी पूरे भारत के हर राज्य में बीजेपी को फायदा मिलता हुआ नजर आ रहा है। यूपीए की 97 सीटों में राहुल गांधी को 39 सीटें मिलती हुई नजर आ रही हैं।
नयी दिल्ली,दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कमरे के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितता की एक शिकायत पर लोकायुक्त ने शुक्रवार को मुख्य सचिव को जांच के बाद संबद्ध विभाग का जवाब सौंपने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता एवं उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी अपनी शिकायत पर सुनवाई के दौरान लोकायुक्त अदालत में पश्चिमी दिल्ली के सांसद परवेश वर्मा के साथ उपस्थित थे। तिवारी ने बताया, ‘‘लोकायुक्त ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव से जांच करने और अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। तिवारी ने 2019 में लोकायुक्त के पास एक शिकायत दायर की थी, जिसमें शहर के विभिन्न हिस्सों में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के स्कूलों में अतिरिक्त कमरे के निर्माण में वित्तीय अनियमितता होने का आरोप लगाया था।
नयी दिल्ली,दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के आरोपपत्र में दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ "प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत" हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास कृषि भूमि खरीदने के लिए हवाला धन का "उपयोग" किया था। संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपपत्र या अभियोजन शिकायत यहां 27 जुलाई को विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में दायर की गई और अदालत ने शुक्रवार को इसका संज्ञान लिया। ईडी ने आरोप पत्र में सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और सहयोगियों अजीत प्रसाद जैन, सुनील कुमार जैन, वैभव जैन व अंकुश जैन और कंपनियों अकिंचन डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड, प्रयास इंफोसॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मंगलायतन डेवलपर्स प्राइवेट और जे.जे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को नामजद किया है। जैन को ईडी ने 30 मई को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले जैन के पास स्वास्थ्य, ऊर्जा और कुछ अन्य विभाग थे। ईडी ने वैभव जैन और अंकुश जैन को भी गिरफ्तार किया था और वे भी मंत्री के साथ न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया, ''2015-16 के दौरान, सत्येंद्र जैन एक लोक सेवक थे और (उनके स्वामित्व वाली और उनके द्वारा नियंत्रित) उपरोक्त चार कंपनियों को कोलकाता स्थित एंट्री ऑपरेटर्स को नकदी हस्तांतरित करने के बदले मुखौटा कंपनियों की ओर से 4.81 करोड़ रुपये की हवाला राशि प्राप्त हुई थी। एजेंसी ने आरोप लगाया, ''इन धनराशियों का इस्तेमाल दिल्ली और उसके आसपास कृषि भूमि की प्रत्यक्ष खरीद या खरीदी जा चुकी कृषि भूमि से संबंधित ऋण की अदायगी के लिए किया गया था।'' एजेंसी मंत्री के परिवार और सहयोगियों के खिलाफ कम से कम दो बार छापेमारी कर चुकी है। ईडी ने 6 जून को पहले दौर की छापेमारी के बाद 2.85 करोड़ रुपये की ''बेहिसाब'' नकदी और 133 सोने के सिक्के जब्त करने का दावा किया था। अप्रैल में, ईडी ने जांच के तहत 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति और उनके स्वामित्व व नियंत्रण वाली कंपनियों को कुर्क किया था। मंत्री के खिलाफ धनशोधन का मामला अगस्त 2017 में सीबीआई द्वारा उनके और अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। सीबीआई ने दिसंबर 2018 में एक आरोप पत्र दायर किया गया था जिसमें कहा गया था कि कथित आय से अधिक संपत्ति 1.47 करोड़ रुपये थी, जो 2015-17 के दौरान उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 217 प्रतिशत अधिक थी।
नयी दिल्ली,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महेंद्र भट्ट को उत्तराखंड का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। चमोली जिले के नंदप्रयाग के पूर्व विधायक भट्ट ने भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रमुख के रूप में हरिद्वार के विधायक महेश कौशिक का स्थान लिया है। हालांकि, भट्ट इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में हार गए थे। गढ़वाल क्षेत्र से ब्राह्मण नेता भट्ट को अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही भाजपा ने राज्य में जाति और क्षेत्र के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुमाऊं क्षेत्र के ठाकुर हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भाजपा की युवा शाखा में काम करने के बाद भट्ट का कद ऊंचा हुआ है। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि के हैं।
पणजी: केंद्रीय मंत्री स्‍मृति इरानी, उनकी बेटी और गोवा के बार से जुड़े विवाद में नया मोड़ आया है। असागाव के जिस सिली सोल्‍स कैफे एंड बार को लेकर कांग्रेस ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे, उसका मालिकाना हक एक स्‍थानीय परिवार के पास होने की बात सामने आई है। शुक्रवार को गोवा के एक्‍साइज कमिश्‍नर के सामने इस परिवार ने कहा कि प्रॉपर्टी पर उसका 'एकाधिकार' है। दरअसल, एक्‍साइज कमिश्‍नर नारायण एम. ने प्रॉपर्टी के मालिकों- मर्लिन एंथनी डी'गामा और उनके बेटे डीन डी'गामा को कारण बताओ नोटिस भेजा था। जवाब में उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने गोवा एक्‍साइज ड्यूटी एक्‍ट 1964 के नियमों का कोई उल्‍लंघन नहीं किया है। वकील आयरेज रॉड्रिगेज की शिकायत पर यह नोटिस जारी किया गया था। शिकायत में आरोप था कि बार का लाइसेंस जून में किसी एंथनी डी'गामा के नाम पर रीन्‍यू किया गया जिनकी मई 2021 में मौत हो चुकी थी। बीएमसी की तरफ से जारी डेथ सर्टिफिकेट भी शिकायत के साथ नत्‍थी था। कांग्रेस ने इसी को आधार बनाकर इरानी के इस्‍तीफे की मांग की थी। आरोपों को बताया गलत अपने लिखित जवाब में, जिसमें बताया गया था कि एंथनी डी'गामा मेरलिन के पति थे, मां और बेटे ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। जवाब में कहा गया, 'यह स्पष्ट है कि स्वामित्व के हस्तांतरण की आवश्यकता होने का प्रश्न इस तथ्य के मद्देनजर उत्पन्न नहीं होता है कि प्रतिवादी संख्या 1 (मेरलिन) उक्त घर और संपत्ति का संयुक्त मालिक है और प्रतिवादी संख्या 2 (डीन) प्रतिवादी संख्या का वैध वकील है। 'सिली सोल्स कैफे एंड बार' पिछले सप्ताह उस समय विवादों में घिर गया था, जब कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की बेटी का इस संपत्ति से संबंध है। इरानी की बेटी ने इन आरोपों से इनकार किया है। इरानी की बेटी के वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल न तो इस रेस्तरां की मालिक हैं और न ही वह इसका संचालन करती हैं। 29 जुलाई को हुई सुनवाई आबकारी आयुक्त नारायण गैड ने एक नोटिस में कहा था कि वह 29 जुलाई (शुक्रवार) को पूर्वाह्न 11 बजे अल्टिन्हो स्थित गोवा राज कर भवन में शिकायत की सुनवाई करेंगे। आबकारी आयुक्त ने रॉड्रिग्स की दायर शिकायत पर 21 जुलाई को रेस्तरां को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। रॉड्रिग्स ने अपनी शिकायत में कहा कि गोवा में आबकारी नियम के तहत केवल मौजूदा रेस्तरां को बार लाइसेंस जारी किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में नियमों का उल्लंघन किया गया है। वकील ने लगाए ये आरोप यह भी आरोप लगया कि एंथनी डीगामा के नाम पर लाइसेंस को मंजूरी दी गई, जबकि उसके आधार कार्ड के आधार पर वह मुंबई का निवासी है। रॉड्रिग्स ने यह भी आरोप लगाया कि जून में मापुसा में स्थानीय आबकारी कार्यालय ने कानून का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए 'डीगामा के नाम पर लाइसेंस का नवीनीकरण किया, जबकि मुंबई नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार, उसकी 17 मई, 2021 को मौत हो चुकी है।' 'विभाग को किया था ट्रांसफर का आवेदन' 20 अगस्त, 2021 से परिवार की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी रखने वाले मर्लिन और डीन ने शराब लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 22 जून को आवेदन किया था। उन्होंने एंथनी का मृत्यु प्रमाणपत्र भी दिया था। इसमें कहा गया है कि डीन को एक अंडरटेकिंग देने के लिए कहा गया था कि लाइसेंस छह महीने के भीतर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। पुर्तगाली नागरिक संहिता नियम लागू परिवार के वकील बेनी नाजरेथ ने कहा, 'हम पुर्तगाली नागरिक संहिता के तहत शासित हैं। संहिता के तहत, संपत्ति का स्वामित्व संयुक्त रूप से पति और पत्नी के नाम पर अनुच्छेद 1117 (पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 के) के अनुसार है। कानून की दृष्टि से प्रशासन हमेशा पति के नाम पर होता है। लेकिन जब किसी पति या पत्नी की मृत्यु हो जाती है तो प्रशासन स्वत: ही उसके जीवनसाथी को चला जाता है। तो, यहां पति या पत्नी स्वतः ही संपत्ति के प्रशासक बन जाते हैं। इसमें कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या रेस्तरां का इरानी या उनके परिवार के सदस्यों से कोई संबंध है, नासरत ने कहा, 'नहीं, बिल्कुल कुछ नहीं, मालिक डी'गामा हैं।' आबकारी आयुक्त ने निर्धारण के लिए दो मुद्दे तैयार किए, क्या आबकारी लाइसेंस झूठे और अपर्याप्त दस्तावेज जमा करके और तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके प्राप्त किया गया था, और क्या आबकारी अधिकारियों की ओर से प्रक्रियात्मक अनियमितताएं थीं? फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी। क्या है पूरा मामला 23 जुलाई को, कांग्रेस नेताओं ने इरानी की बेटी के कथित रूप से चलाए जा रहे अवैध रेस्तरां और बार को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की थी। बाद में उन्होंने एक कथित शो के एक वीडियो क्लिप का हवाला दिया जिसमें इरानी की बेटी का युवा उद्यमी के रूप में साक्षात्कार किया गया था, और सिली सोल्स कैफे एंड बार को उनके रेस्तरां के रूप में पेश किया गया था। इरानी ने पलटवार करते हुए कहा था कि उनकी 18 साल की बेटी एक छात्रा है और उसे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उसकी मां ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो बार हराया था।
नई दिल्ली : दिल्ली की आबकारी नीति से संबंधित हालिया विवाद पर केजरीवाल सरकार बैकफुट पर आ गई है। केजरीवाल सरकार ने शहर में खुदरा शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था को वापस करने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया है कि नई आबकारी नीति आने तक छह महीने की अवधि के लिए उत्पाद नीति की पुरानी व्यवस्था को फिर से शुरू की जा रही है। दिल्ली सरकार की तरफ से यह फैसला उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने नई आबकारी नीति के कार्यान्वयन की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई एक्साइज पॉलिसी में नियमों की अनदेखी कर टेंडर दिए गए। सरकारी दुकानों के जरिये बिकेगी शराब मनीष सिसोदिया ने कहा कि 2021-22 की पॉलिसी 31 जुलाई को खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि अब नई पॉलिसी बंद करके, सरकारी दुकान खोलने के आदेश दिए है। सरकारी दुकानों के जरिए कानूनी तौर पर शराब बेचने का ऑर्डर दिया है। मुख्य सचिव को ऑर्डर दिया है कि सरकारी दुकानों के जरिए भ्रष्टाचार नहीं हो। दिल्ली में अवैध दुकान न खुले। इससे पहले आबकारी नीति 2021-22 को 31 मार्च के बाद दो बार दो-दो महीने की अवधि के लिए बढ़ाया गया था। साल भर में 9.30 हजार करोड़ रेवेन्यू मनीष सिसोदिया ने कहा कि नई पॉलिसी में तय किया कि 850 दुकानों से ज्यादा नहीं खोली जाएंगी। पहले सरकार को करीब 6 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। जब पारदर्शी ढंग से नीलामी हुई, तो पूरे साल में 850 दुकान से 9.30 हजार करोड़ का रेवेन्यू आना था। एक साल में सरकार की नई पॉलिसी से आय डेढ़ गुना बढ़ जाती। नई पॉलिसी से भ्रष्टाचार रुक जाता है। तब नई पॉलिसी को फेल करने का प्लान बनाया। चल रही सिर्फ 468 दुकानें, तो शराब की किल्लत हो जाएगी? मनीष सिसोदिया ने कहा कि नए दुकान वालों को ईडी और सीबीआई की धमकी दी। प्राइवेट दुकान चलाने वालों को धमकी दी। बहुत से शराब वालों ने दुकान छोड़ दी। आज दिल्ली में नई पॉलिसी में सिर्फ 468 दुकानें चल रही हैं। सिसोदिया ने कहा कि 1 अगस्त से कई अन्य दुकान वाले भी काम बंद कर रहे हैं। इनका मकसद है कि दिल्ली में शराब की किल्लत पैदा करो। कानूनी ढंग से बिकने वाली शराब को कम किया जाए। पिछले साल आई थी नई एक्साइज पॉलिसी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में पिछले साल नई एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लेकर आई। उससे पहले ज्यादातर सरकारी दुकान थी। खूब भ्रष्टाचार होता था। खुद रेड करते भ्रष्टाचार पकड़ा था। सिसोदिया ने कहा कि उस पॉलिसी को खत्म करके नई पॉलिसी बनाई। पहले कुछ प्राइवेट दुकानें थीं, जिनके लाइसेंस अपने दोस्तों को दी। लाइसेंस फीस भी कम थी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नेताओं के ड्राइवर और नौकरों के नाम थे। इसे खत्म करके पारदर्शी ढंग से शराब की दुकानों की नीलामी शुरू की। उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली में 850 दुकानें होती थीं। नई पॉलिसी में तय किया कि 850 दुकानों से ज्यादा नहीं खोली जाएंगी। सीबीआई जांच के डर से पीछे हटे भाजपा ने अब आम आदमी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा इसे जानता की जीत बता रही है। भाजपा नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह जनता की जीत है, केजरीवाल अपने पूंजीपतियों को दिल्ली के शराब के ठेकों का काम दिया था, जिसमें करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। सीबीआई की जांच शुरू होने से सभी डरकर पीछे हटे और सरकार पुरानी नीति अपनाने को मजबूर हुई ।
नई दिल्‍ली: देश की राजधानी में शराब के शौकीनों का मूड बिगड़ने वाला है। सोमवार (01 अगस्‍त) से दिल्‍ली में पुरानी आबकारी नीति लागू हो जाएगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में यह ऐलान किया। सिसोदिया ने कहा कि सरकारी दुकानों के जरिए कानूनी तौर पर शराब बेची जाएगी। डेप्‍युटी सीएम ने कहा कि मुख्य सचिव को ऑर्डर दिया है कि 'सरकारी दुकानों के जरिए भ्रष्टाचार नहीं हो। दिल्ली में अवैध दुकान न खुले।' दिल्‍ली में पुरानी आबकारी नीति लागू होने का मतलब है कि 16 नवंबर 2021 से पहले वाली व्‍यवस्‍था बहाल होगी। उस वक्‍त दिल्‍ली में शराब की 389 सरकारी दुकानें थीं। इसके अलावा साल में 21 दिन ड्राई डे हुआ करता था। नई एक्‍साइज पॉलिसी लागू होने के बाद प्राइवेट रिटेलर्स MRP पर डिस्‍काउंट दे पा रहे थे, पुरानी पॉलिसी में ऐसी कोई व्‍यवस्‍था नहीं थी। इसका मतलब यह है कि दिल्‍ली में शराब अब MRP पर बिकेगी मतलब पीने वालों की जेब फिर से ढीली होना तय है। दिल्‍ली में शराब: 1 अगस्‍त से क्‍या-क्‍या बदल जाएगा? एक्‍साइज पॉलिसी 2021-22 प्रभावी नहीं रहेगी। शराब की 468 प्राइवेट दुकानें बंद हो जाएंगी। पुरानी आबकारी नीति लागू हो जाएगी। शराब सिर्फ सरकारी ठेकों के जरिए बेची जाएगी। शराब MRP पर बिकने लगेगी। दिल्‍ली में शराब की किल्‍लत हो सकती है। सिसोदिया ने भी दिए किल्‍लत के संकेत दिल्‍ली सरकार की तरफ से सिसोदिया ने नई एक्‍साइज पॉलिसी का बचाव किया। उन्‍होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह दिल्‍ली में शराब की किल्‍लत पैदा करना चाहती है। सिसोदिया ने कहा क‍ि 'पहले दिल्ली में 850 दुकानें होती थीं। नई पॉलिसी में तय किया कि 850 दुकानों से ज्यादा नहीं खोली जाएंगी। पहले सरकार को करीब 6 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। जब पारदर्शी ढंग से नीलामी हुई, तो पूरे साल में 850 दुकान से साढ़े 9 हजार करोड़ का रेवेन्यू आना था। एक साल में सरकार की नई पॉलिसी से आय डेढ़ गुना बढ़ जाती। नई पॉलिसी से भ्रष्टाचार रुक जाता है। तब इन्होंने नई पॉलिसी को फेल करने का प्लान बनाया। नई दुकान वालों को ईडी और सीबीआई की धमकी दी। प्राइवेट दुकान चलाने वालों को धमकी दी। बहुत से शराब वालों ने दुकान छोड़ दी।' सिसोदिया ने कहा कि यदि दिल्ली में लाइसेंसशुदा दुकानों की कमी होती है, तो नकली शराब का कारोबार होता है। अब जो दुकानें खाली हो रही हैं, उनका लाइसेंस भरने को कोई तैयार नहीं है। अफसरों को भी डरा दिया है। उनकी नीलामी भी नहीं हो रही है। 2021-22 की पॉलिसी 31 जुलाई को खत्म हो रही है। सीबीआई और ईडी की धमकी दे रखी है। दुकानवालों और अफसरों को डरा दिया है। 1 अगस्त से दिल्ली में एक्साइज ड्यूटी देने वाली दुकानें कम होने लगें। सरकार कोई निर्णय नहीं लेगी, तो कोई पॉलिसी नहीं होगी। दिल्ली में वैध शराब की पूर्ति कम हो गई, तो गुजरात की तरह नकली शराब बेचना चाहते हैं। नकली और जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत होगी। दिल्ली में भी होने लगेगी। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
दरभंगा: रेलवे भर्ती घोटाले में सीबीआई के शिकंजे में फंसे लालू प्रसाद के 'हनुमान' भोला यादव के घर से छापेमारी में कई अहम सुराग मिले हैं। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के ओएसडी और बहादुरपुर के विधायक रहे भोला यादव को सीबीआई ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उनके दरभंगा स्थित दो घरों पर सीबीआई ने रेड की है। बहादुरपुर थाना क्षेत्र के उनके आवास और सदर प्रखंड के कपछाही गांव स्थित पैतृक घर से सीबीआई ने रेड के दौरान एक डायरी समेत कुछ अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। वह इन साक्ष्यों को अपने साथ ले गई है। भोला यादव के छपकाही गांव स्थित पैतृक आवास के कमरों में सामान अभी भी इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। छपकाही गांव स्थित घर पर छापेमारी जानकारी के अनुसार, सीबीआई की 5 सदस्यीय टीम छपकाही गांव स्थित उनके घर पहुंची थी। टीम ने भोला यादव की भांजी शीला कुमारी से घर का ताला खुलवाया और पूरे घर की सघन तलाशी ली। इस दौरान उनके पलंग, बिस्तर, आलमारी समेत कई जगहों का खंगाला गया। सूत्रों के अनुसार सीबीआई को कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लगे हैं। डायरी लेकर गई सीबीआई की टीम भोला यादव की भांजी शीला कुमारी ने बताया कि 5 सदस्यीय टीम घर पर आई थी और उससे घर की चाभी मांग कर ताला खोला। उसके बाद हर कमरे में तलाशी ली। उसने बताया कि सीबीआई की टीम एक डायरी और कुछ कागज जब्त कर ले गई, जो दिख रहा था। इसके अलावा और क्या कुछ ले गई, ये पता नहीं चल सका है। लालू यादव के खास हैं भोला यादव बता दें कि इस मामले में सीबीआई तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ जांच कर रही है। अब भोला यादव की गिरफ्तारी के बाद इस केस में कई खुलासे सामने आ सकते हैं। भोला यादव को लालू और उनके परिवार का सबसे करीबी और खास माना जाता है।
नई दिल्ली: केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के पद पर रहे सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस समय ईडी की गिरफ्त में हैं। उनसे इसी मामले में लगातार पूछताछ का दौर जारी है। इस केस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई। अदालत ने मंत्रिमंडल से निलंबित करने के अनुरोध संबंधी याचिका बुधवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह मुख्यमंत्री को विचार करना है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को मंत्री के रूप में बनाये रखना चाहिए या नहीं। उच्च न्यायालय ने कहा कि शपथ भंग करने वाले व्यक्ति को हटाने के लिए राज्यपाल या मुख्यमंत्री को निर्देश देना अदालत का काम नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत का यह कर्तव्य है कि वह इन प्रमुख कर्तव्य धारकों को संविधान के सिद्धांतों को बनाए रखने, संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए उनकी भूमिका के बारे में याद दिलाए। न्यायालय ने कहा कि मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के सदस्यों को चुनने और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति से संबंधित नीति तैयार करने में अपने विवेक का प्रयोग करते हैं। 'सीएम तय करें ऐसे आपराधिक व्यक्ति को पद पर रहने का हक या नहीं' मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, ‘भारत के संविधान की अखंडता को बनाए रखने के लिए मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस बात पर मुख्यमंत्री को विचार करना है कि क्या कोई व्यक्ति जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि है या उन पर नैतिक पतन से जुड़े अपराधों का आरोप लगाया गया है, उन्हें नियुक्त किया जाना चाहिए और उन्हें मंत्री के रूप में बने रहने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।’ संविधान के निर्माता बी आर अंबेडकर के बयान का हवाला पीठ ने भारतीय संविधान के जनक डॉ. बी. आर. आंबेडकर के एक बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘सुशासन केवल अच्छे लोगों के हाथ में होता है। भले ही अदालत अच्छे या बुरे के फैसले में नहीं पड़ सकती, लेकिन यह निश्चित रूप से संवैधानिक पदाधिकारियों को हमारे संविधान के लोकाचार को संरक्षित करने और बढ़ावा देने की याद दिला सकती है। ऐसी धारणा है कि मुख्यमंत्री को ऐसे संवैधानिक सिद्धांतों से अच्छी सलाह और मार्गदर्शन मिलेगा।’ पीठ ने कहा, ‘यह अदालत पूरी तरह से डॉ. बी. आर. आंबेडकर की टिप्पणियों से सहमत है और उम्मीद करती है कि मुख्यमंत्री लोगों का नेतृत्व करने के लिए व्यक्तियों की नियुक्ति करते समय लोकतंत्र की नींव रखने वाले विश्वास को कायम रखते हैं।’ अदालत का यह फैसला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग की उस याचिका को खारिज करते हुए आया है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद 30 मई से हिरासत में चल रहे दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को निलंबित करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता ने पहले कहा था कि जैन को कोलकाता की एक कंपनी के साथ 2015-2016 में हवाला लेनदेन में कथित संलिप्तता के लिए धनशोधन के मामले में गिरफ्तार किया गया, जो कानून के प्रतिकूल है, क्योंकि वह एक सार्वजनिक सेवक हैं, जिन्होंने जनहित में कानून का राज बनाए रखने की संवैधानिक शपथ ली है। याचिका में दावा किया गया है कि ऐसा परिदृश्य सार्वजनिक सेवक पर लागू कानून के प्रावधान के विपरीत है, जिन्हें केंद्रीय सिविल सेवा नियमावली, 1965 के नियम 10 के अनुसार 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद तत्काल निलंबित माना जाना चाहिए।
नयी दिल्ली,कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कई प्रावधानों को बरकरार रखने संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले ने ‘‘विभिन्न वर्गों’’ द्वारा उठाए गए सभी संदेहों को दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ‘‘किसी भी मामले को निर्धारित करने में कोई भूमिका नहीं है।’’ रीजीजू ने कहा कि फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि एजेंसियां ऐसा कुछ भी नहीं करती हैं जो अवैध और असंवैधानिक हो। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई सही मायने में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और भ्रष्टाचारियों को दंडित करने की सरकार की मंशा के अनुरूप है। उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों, ईडी द्वारा की गई कार्रवाई बहुत हद तक कानून के अनुसार और मामलों के गुणदोष के आधार पर है। किसी भी मामले को निर्धारित करने में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है, और प्रत्येक मामले को गुणदोष के आधार पर देखा जाता है। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि एजेंसियां ऐसा कुछ भी नहीं करती हैं जो अवैध और असंवैधानिक हो।’’ विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए, जिन्होंने सरकार पर उन्हें निशाना बनाने के लिए कानून का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि फैसले ने ‘‘विभिन्न वर्गों’’ द्वारा उठाए गए सभी संदेहों को दूर कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बुधवार को पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी, संपत्ति की कुर्की और जब्ती से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारों को बरकरार रखा। कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पी. चिदंबरम, उनके बेटे एवं सांसद कार्ति चिदंबरम, शिवसेना के नेता संजय राउत, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन सहित कई शीर्ष विपक्षी नेता कथित धनशोधन के लिए ईडी के निशाने पर हैं।
नई दिल्ली: नेशनल हेरल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ तो फिलहाल खत्म हो गई है। अब माना जा रहा है कि इस मामले में जांच एजेंसी जल्द ही मुकदमा शुरू करेगी। गौरतलब है कि सोनिया और राहुल गांधी इस मामले में आरोपी हैं। दोनों नेताओं पर सेक्शन 120 (B)(आपराधिक षडयंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज हैं और अभी जमानत पर हैं। तीन दिन की पूछताछ में ईडी ने सोनिया से 100 से ज्यादा सवाल पूछे। अभी जमानत पर सोनिया, राहुल सोनिया और राहुल अपने ऊपर खतरे का हवाला दिया था जिसे मानते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। अब माना जा रहा है कि पूछताछ पूरी होने के बाद ईडी कोर्ट में मुकदमा शुरू कर सकती है। फिलहाल ईडी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कैसे यंग इंडियन ने एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड (AJL)और उसकी संपत्तियों का अधिग्रहण किया। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसकी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल और चंडीगढ़ की कई संपत्तियों को रियायती दर पर बेचने की इजाजत दे दी थी। सोनिया को मर्जी से हाजिरी की छूट तीसरे दिन की पूछताछ में ईडी ने सोनिया से एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड (AJL) के लेनदेन को लेकर ही सवाल-जवाब किया गया। खराब स्वास्थ्य के कारण ईडी ने सोनिया गांधी को अपने समय के अनुसार पूछताछ में शामिल होने की छूट दी थी। सोनिया ने ईडी के सवाल-जवाब में बताया कि AJL से जुड़े सभी ट्रांजैक्शन के लिए दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा जिम्मेदार थे और इस बारे में केवल उन्हें ही जानकारी थी। 100 से ज्यादा सवाल ईडी ने सोनिया गांधी से करीब 11 घंटे की पूछताछ के दौरान से 100 से ज्यादा सवाल पूछे। ज्यादातर सवाल AJL के ट्रांजैक्शन से जुड़े रहे। सोनिया ने ट्रांजैक्शन से जुड़े सवाल के जवाब में मोतीलाल वोरा का नाम लिया। सोनिया से पूछताछ के दौरान उनकी बेटी प्रियंका गांधी भी एजेंसी के दफ्तर के बाहर रहती थीं। सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ में एक बार फिर कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा का नाम उछला। नेशनल हेरल्‍ड न्‍यूजपेपर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के दूसरे दिन ईडी के कुछ सवालों के जवाब में सोनिया गांधी ने 'नहीं मालूम' में उत्‍तर दिया था। ईडी के सूत्र बताते हैं कि सोनिया ने पूछताछ में मोतीलाल वोरा का नाम लिया। AJL और यंग इंडियन के बीच हुए सौदे को लेकर ये सवाल थे। इस सौदे के तहत एजेएल की 800 करोड़ रुपये की संपत्तियों को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किया गया था। इस कंपनी में सोनिया और राहुल प्रमोटर हैं। इनकी कंपनी में 38-38 फीसदी हिस्‍सेदारी है। तीसरे दिन की पूछताछ के बाद ईडी ने सोनिया गांधी को आगे सवाल-जवाब के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईडी अब इस मामले को अदालत में आगे बढ़ाएगी। नेशनल हेरल्ड केस में एजेंसी अब अदालत में मुकदमा शुरू करने की तैयारी में लगी हुई है।
नयी दिल्ली,राज्यसभा में बृहस्पतिवार को तीन सदस्यों को सदन में अशोभनीय आचरण के कारण मौजूदा सप्ताह के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सदस्यों में सुशील कुमार गुप्ता और संदीप कुमार पाठक (दोनों आम आदमी पार्टी) तथा अजीत कुमार भुइयां (निर्दलीय) शामिल हैं। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने नियम 256 के तहत सुशील कुमार गुप्ता, संदीप पाठक तथा अजीत कुमार भुइयां को सदन में अशोभनीय आचरण के लिए मौजूदा सप्ताह के शेष समय के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव किया। सदन ने उनके इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। विपक्षी सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर मत-विभाजन कराने की मांग की। इस पर हरिवंश ने कहा कि पहले हंगामा कर रहे सदस्य अपनी सीट पर जाएं, फिर वह मत-विभाजन की अनुमति देंगे। लेकिन आसन के समीप आए सदस्य अपनी सीट पर नहीं गए और हरिवंश ने ध्वनिमत के जरिए प्रस्ताव को मंजूरी दिलवाई। इसके बाद बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को 19 और बुधवार को एक सदस्य को राज्यसभा की कार्यवाही में बाधा डालने और व्यवधान उत्पन्न करने के लिए इस सप्ताह की शेष बैठकों के लिए निलंबित कर दिया गया था।
नयी दिल्ली,राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बारे में एक टिप्पणी को लेकर बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर निशाना साधा और कहा कि उनके बयान से पूरा देश चिंतित है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी की टिप्पणी को लेकर दोनों सदनों में हंगामे के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता गोयल ने कहा, ‘‘...कांग्रेस ने राष्ट्रपति का अपमान किया, इस देश की हर महिला का अपमान किया, देश के आदिवासियों का अपमान किया, इस सदन का अपमान किया।’’ एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर गोयल ने कहा, ‘‘...कांग्रेस नेता की टिप्पणी को लेकर आज देश गंभीरता से चिंतित है। राष्ट्रपति का अपमान यह देश नहीं सहेगा।’’ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से इस विषय पर माफी मांगने की मांग की और सवाल किया, ‘‘ क्या कांग्रेस राष्ट्रपति पद को जाति-पांति के दायरे में बांधना चाहती है।’’ उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इसे मामूली विषय बता रही है। इससे पहले उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी यह मुद्दा उठाया और टिप्पणी को लैंगिक भेदभावपूर्ण बताया तथा कांग्रेस से देश व राष्ट्रपति से माफी मांगने की मांग की। राज्यसभा में शून्काल के दौरान विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सीतारमण ने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह शब्द गलती से कांग्रेस नेता के मुंह से निकल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने जानबूझकर ऐसा किया है। सीतारमण ने कहा कि सभी को पता है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को राष्ट्रपति कहकर संबोधित किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं समझती ही कि उनके मुंह से गलती से यह शब्द नहीं निकला है। यह जानबूझकर किया गया अपमान है। वह आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं। देश के एक पिछड़े इलाके से ताल्लुक रखती हैं। विधायक, और मंत्री के रूप में उन्होंने सफलतापूर्वक काम किया है ओर वह एक बहत ही अच्छी राज्यपाल भी रही हैं। अब राष्ट्रपति के रूप में उनके चयन पर पूरा देश जश्न मना रहा है। ऐसे समय में लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने उन्हें राष्ट्रपति कहकर देश की राष्ट्रपति का अपमान किया है। यह अस्वीकार्य है।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अध्यक्ष स्वयं एक महिला हैं और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। ज्ञात हो कि चौधरी ने बुधवार को एक निजी चैनल से बातचीत में राष्ट्रपति मुर्मू को ‘‘राष्ट्रपत्नी’’ कहकर संबोधित किया था।
नयी दिल्ली,दिल्ली उच्च न्यायालय बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को राज्य सरकार द्वारा संचालित लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल की बजाय एम्स, आरएमएल या सफदरजंग जैसे केंद्र सरकार के किसी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराने का अनुरोध किया गया है। जैन को ईडी ने गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह एलएनजेपी में भर्ती हैं। याचिका को न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ईडी ने याचिका में अनुरोध किया है कि जैन को एलएनजेपी से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल या सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया जाए। इसके साथ ही एजेंसी ने कहा है कि जैन के स्वास्थ्य की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए, क्योंकि गिरफ्तारी से पहले वह दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे। आम आदमी पार्टी के नेता को धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इससे पहले ईडी ने जैन के परिवार और उनकी कंपनियों के 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली थी।
नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के प्रावधानों पर मुहर लगाते हुए बड़े-बड़े वकीलों की दलीलों को खारिज किया। प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों का विरोध करने कपिल सिब्‍बल, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी जैसे नामी वकील उतरे थे। 240 से ज्‍यादा याचिकाकर्ताओं की तरफ से बड़े-बड़े वकीलों की फौज थी। सुप्रीम कोर्ट के आगे इन सबकी दलीलें बेकार गईं। SC ने PMLA के तहत अरेस्‍ट, कुर्की और जब्‍ती से जुड़ी ED के अधिकारों को बरकरार रखने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि PMLA की धारा 19 के प्रावधानों में कुछ भी 'मनमानी के दायरे में नहीं आता।' अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का देशों की संप्रभुता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि देश के 'आर्थिक ढांचे' को नुकसान पहुंचाने से बचाने की खातिर राज्‍य के लिए ऐसे कानून बनाना जरूरी हो जाता है। अदालत ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक‍ और राजनीतिक न्‍याय देना राज्‍य का कर्तव्‍य है। 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' की बात भारतीय संविधान की प्रस्‍तावना में कही गई है। PMLA के खिलाफ कौन-कौन से वकील उतरे थे? PMLA के प्रावधानों की वैधता को चुनौती देती 241 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्‍वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच के सामने नामी वकील पेश हुए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्‍बल, सिद्धार्थ लूथरा, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, अमित देसाई, मेनका गुरुस्‍वामी, एस निरंजन रेड्डी, आबाद पांडा, सिद्धार्थ अग्रवाल, महेश जेठमलानी, विक्रम चौधरी जैसे वरिष्‍ठ वकीलों ने जिरह की। इसके अलावा अभिमन्‍यु भंडारी, एन हरिहरन और अक्षय नागराजन जैसे एडवोकेट्स भी कुछ याचिकाकर्ताओं के लिए पेश हुए। वहीं, भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और पैनल काउंसल कनु अग्रवाल पेश हुए। 545 पन्‍नों के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की अह‍म टिप्‍पणियां धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 द्वारा परिकल्पित विशेष तंत्र के मद्देनजर सीआरपीसी के तहत किसी ईसीआईआर को एफआईआर से नहीं जोड़ा जा सकता है। पीएमएलए की धारा-45 संज्ञेय तथा गैर-जमानती अपराधों से संबंधित है और यह उचित है और मनमानीपूर्ण नहीं है। 2002 अधिनियम की धारा 19 की संवैधानिक वैधता को दी गई चुनौती भी खारिज की जाती है। धारा 19 में कड़े सुरक्षा उपाय दिए गए हैं। प्रावधान में कुछ भी मनमानी के दायरे में नहीं आता। अधिनियम की धारा-5 के तहत धनशोधन में संलिप्त लोगों की संपति कुर्क करना संवैधानिक रूप से वैध है। पीएमएलए की धारा 24 का अधिनियम द्वारा हासिल किए जाने वाले उद्देश्यों के साथ उचित संबंध है और इसे असंवैधानिक नहीं माना जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 162 में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति पुलिस अधिकारी द्वारा पूछे गए सभी सवालों का सच्चाई से जवाब देने के लिए बाध्य है। 2002 के अधिनियम के तहत अधिकारियों द्वारा दर्ज किए गए बयान संविधान के अनुच्छेद 20 (3) या अनुच्छेद 21 से प्रभावित नहीं हैं। अनुच्छेद 20 (3) के अनुसार किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। PMLA, 2002 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण में रिक्तियों के संबंध में कार्यपालिका को सुधारात्मक उपाय करने की जरूरत है। अधिनियम की धारा 63, जो झूठी सूचना या सूचना देने में विफलता के संबंध में सजा से संबंधित है, किसी भी तरह से मनमानीपूर्ण नहीं है। धारा 44 को चुनौती देने में कोई आधार नहीं दिखता है, जो विशेष अदालतों द्वारा विचारणीय अपराधों से संबंधित है, जो मनमाना या असंवैधानिक है। पीएमएलए की अहमियत प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) में कई ऐसे प्रावधान हैं जो इसे सख्त ऐक्ट बनाता है। मसलन, एफआईआर दर्ज हुए बगैर भी सर्च का अधिकार दे दिया गया है। जैसे ही ईसीआईआर (इन्फॉर्समेंट केस इनफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज होती है, आरोपी की जो भी संपत्ति है, उसे जब्त करने का अधिकार मिल जाता है। संपत्ति तब तक जब्त रहती है, जब तक आरोपी बरी न हो जाए। आरोपी को पता नहीं चल पाता कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी के लिए एजेंसी के पास क्या आधार है। ईडी अधिकारी समन की कार्रवाई के दौरान भी आरोपी को हिरासत में ले सकते हैं। सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 4,700 केसों में छानबीन हुई है और 338 केस दर्ज हुए हैं। साथ ही 313 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। एफआईआर और चार्जशीट से पहले जो भी संपत्ति अटैच की जाती है, उसके लिए पर्याप्त सेफगार्ड हैं। अगर संपत्ति अटैच की जाती है तो ईडी अधिकारी उसकी जरूरत और आधार बताते हैं। फिलहाल किन नेताओं के खिलाफ सक्रिय है ईडी? कांग्रेस पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पी चिदंबरम, उनके बेटे एवं सांसद कार्ति चिदंबरम, शिवसेना के नेता संजय राउत, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन सहित कई शीर्ष विपक्षी नेता कथित मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर ईडी जांच का सामना कर रहे हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक में भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य प्रवीण नेतारू (Praveen Nettaru) की हत्या मामले में अब पीएफआई लिंक की जांच होगी। हालिया हिजाब विरोध प्रदर्शनों में शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) जिला बीजेपी युवा मोर्चा समिति के सदस्य नेत्तारू की मंगलवार की रात बेल्लारे में उनकी ब्रायलर की दुकान के सामने अज्ञात बाइक सवारों ने हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या के मामले में जाकिर और शफीक को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि दक्षिण कन्नड़ जिले में भाजपा के युवा नेता प्रवीण नेत्तर की हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाए। कर्नाटक के गृहमंत्री अरगा अरगा ज्ञानेंद्र ने भी आरोप लगाया कि हिंदू कार्यकर्ता प्रवीण की हत्या के पीछे हाल ही में हिजाब को लेकर विरोध करने वाले संगठनों का हाथ है। मंत्री ने कहा कि चूंकि अपराध सीमावर्ती इलाके में हुआ है, इसलिए संभव है कि हमलावरों ने इस कृत्य को अंजाम दिया हो और केरल भाग गए हों। उन्‍होंने कहा हम केरल सरकार के साथ संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। बहुत जल्द दोषियों को पकड़ लिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता प्रह्लाद जोशी ने भी हत्या में पीएफआई और एसडीपीआई के शामिल होने की आशंका जताई थी। उन्‍होंने कहा शुरुआती रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्ट एसडीपीआई और पीएफआई लिंक का संकेत देती हैं। उन्हें केरल में प्रोत्साहित किया जा रहा है। कर्नाटक में कांग्रेस उन्हें प्रोत्साहित कर रही है. कर्नाटक में हमारी सरकार कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा देगी। हत्या की निंदा करते हुए लोकसभा में उडुपी-चिक्कमगलुरु संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले करंदलाजे ने हत्या के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों और पीएफआई, एसडीपीआई और इसी तरह के समूहों जैसे संगठनों को दोषी ठहराया और दक्षिण कन्नड़ जिले के कट्टरपंथ को जारी रखा। उन्होंने कहा कि हत्या के पीछे जिले में सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे कट्टरपंथी संगठन हैं। करंदलाजे ने नेत्तारू पर हमला करने के लिए केरल पंजीकरण संख्या वाली मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किए जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह पता लगाने के लिए व्यापक जांच की जरूरत है कि क्या हमलावर केरल के कट्टरपंथी समूहों से थे।
नई दिल्ली: संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से सदन का नजारा अलग था। विपक्ष के महंगाई और जीएसटी के मुद्दे पर सरकार जहां बैकफुट थी वहीं, आज दोनों सदनों में नजारा एकदम बदल गया था। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) का राष्ट्रपति को लेकर दिए बयान को बीजेपी ने लपक लिया और लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी को जमकर घेरा। दोनों सदन में अधीर के बयान पर जमकर हंगामा हुआ। आमतौर पर सौम्यता से बात करने वाली बीजेपी नेता स्मृति इरानी (Smriti Irani) का आज अलग ही रूप दिखा। इरानी का चेहरा आज तमतमा रहा था। उन्होंने सीधे कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी पर हमला बोला। गुस्से से सुर्ख नजर आ रहीं इरानी ने अपने भाषण में लगातार कांग्रेस पर शब्दों के तीखे बाण चलाए। इरानी ने आज लोकसभा में अधीर रंजन के बयान पर कांग्रेस को जमकर घेरा और अपने एक ही बयान से सारा हिसाब बराबर कर दिया। इरानी ने तो सीधे-सीधे सोनिया गांधी पर निशाना साधा और उन्हें देश से माफी मांगने की मांग की। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कांग्रेस पार्टी इरानी के 18 साल की बेटी जोइश इरानी पर गोवा में अवैध रूप से बार चलाने का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस और इरानी में जमकर बयानबाजी हुई थी। इरानी का रौद्र रूप पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और इरानी के बीच जमकर वाकयुद्ध चल रहा था। आज इरानी ने महिला राष्ट्रपति के अपमान के मुद्दे को उठाया। अधीर रंजन ने बुधवार को देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्र की पत्नी बता दिया था। बीजेपी ने इस बयान को लपकते हुए अधीर रंजन समेत पूरे कांग्रेस को घेर लिया। इरानी तो लोकसभा में आज बेहद सख्त नजर आ रही थीं। गुस्साए हुए तेवर में के जरिए इरानी ने अधीर रंजन का नाम लेकर पूरी कांग्रेस पार्टी को घेर लिया। लाल आंख, सख्त आवाज.. इरानी का कांग्रेस का हमला लोकसभा में आज बेहद सख्त तेवर में नजर आ रहीं इरानी ने आज एक-एक वार का बदला लिया। उन्होंने देश के राष्ट्रपति के अपमान के लिए सोनिया गांधी को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को ये हजम नहीं हो पा रहा है कि कोई गरीब आदिवासी देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच गई है। इरानी ने कांग्रेस को महिला विरोधी और आदिवासी विरोधी बताते हुए कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी लगातार मुर्मू का अपमान कर रही है। स्मृति ने कांग्रेस से चुन-चुनकर किया अटैक इरानी ने लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने पुरानी नई बातों को याद दिलाकर देश की सबसे पुरानी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक ऐसा नेता विराजमान हैं, जिन्होंने राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजित द्रौपदी मुर्मू का सदन के नेता होने के नाते सड़क पर जाकर अपमान किया। इस राष्ट्र का ये गौरव है कि नरेंद्र मोदी ने 75 साल की आजादी में पहली बार एक गरीब आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। राष्ट्रपति पद का उम्मदीवार बनते ही मुर्मू कांग्रेस पार्टी के घृणा का केंद्र बन गईं। कांग्रेस नेताओं ने मुर्मू को कठपुतली कहा। कांग्रेस के घृणित कार्य करने वाले पुरुष नेताओं ने द्रौपदी को अमंगल का प्रतीक कहा। कल कांग्रेस के नेता सदन ने देश की राष्ट्रपति को राष्ट्रपत्नी संबोधित करकर उनका अपमान किया। कांग्रेस पार्टी आदिवासी महिला का ये सम्मान पचा नहीं पा रही है। कांग्रेस पार्टी गरीब परिवार की बेटी राष्ट्रपति बने इसको पचा नहीं पा रही है। सोनिया गांधी ने मुर्मू के अपमान की इजाजत दी इरानी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के उस नेता को अपने उस कृत्य पर एक पत्रकार ने टोकते हुए कहा कि आप देश की महामहिम राष्ट्रपति का अपमान कर रहे हैं। लेकिन तब भी अधीर रंजन ने महामहिम का अपमान वापस नहीं लिया। आदिवासी विरोधी कांग्रेस, महिला विरोधी कांग्रेस। गरीब विरोधी कांग्रेस। अब सुप्रीम कामंडर ऑफ आर्म्ड फोर्सेस का भी अपमान करती है। मैं आज इस सदन में कांग्रेस की मुखिया विराजमान हैं, मैं उनसे कहना चाहती हूं आपने द्रौपदी मुर्मू के अपमान की इजाजत दी, सोनिया गांधी ने एक महिला के अपमान करने की इजाजत दी। सोनिया गांधी ने एक गरीब महिला का अपमान करने दिया। कांग्रेस इस देश से माफी मांगे। सोनिया गांधी इस देश से माफी मांगे। शर्म करो। जिस औरत ने पंचायत से लेकर संसद तक सम्मान के साथ देश की सेवा की, तुम्हारे पुरुष नेता सड़क पर उसका अपमान करते हैं। माफी मांगो सोनिया गांधी इस देश से। आदिवासी, गरीबों और औरतों सो माफी मांगो। देश के राष्ट्रपति को नेता सदन द्वारा अपमान मूल्यविहीन और संस्कारविहीन राजनीति का प्रतीक है।
नई दिल्ली: क्या आप अधीर रंजन चौधरी को माफी मांगने के लिए कहेंगी? कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से जब ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने रिपोर्टर को तमतमाए चेहरे से कहा, He Has Already Apologised (उन्होंने पहले ही माफी मांग ली है)। दरअसल, सोनिया के चेहरे पर इतना गुस्सा काफी दिनों बाद दिखा है। गौरतलब है कि नेशनल हेरल्ड केस में सोनिया गांधी से ईडी ने तीन दिनों तक पूछताछ की थी। अब उनकी पार्टी के एक नेता ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्मृति इरानी ने जिस तरीके से लोकसभा में सोनिया गांधी पर सीधा हमला बोला जाहिर तौर वो बोल सोनिया को गहरे चुभे हैं। सवाल पर तमतमाया सोनिया का चेहरा दरअसल, इस विवाद को लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने जन्म दिया है। कल सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर प्रदर्शन कर रहे अधीर रंजन ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपत्नी बोल दिया। फिर क्या था, बीजेपी ने इस मामले को लपकते हुए संसद में जमकर हंगामा किया। स्मृति इरानी ने तो सीधे-सीधे इस बयान के लिए सोनिया को जिम्मेदार ठहरा दिया। जाहिर तौर पर कांग्रेस इन सबके लिए तैयार नहीं थी। वहीं, जब सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई तो जब सोनिया बाहर निकलीं तो पत्रकार ने उनसे अधीर रंजन चौधरी से माफी मांगने कहने को लेकर सवाल पूछ लिया। पहली बार में तो उन्होंने इसका जवाब भी नहीं दिया। लेकिन दूसरी बार जब उनसे यही सवाल पूछा तो उनका चेहरा तमतमाया दिखा और उन्हेंने सख्त आंखों से केवल चार शब्द बोले। उन्होंने माफी मांग ली है। गुस्से में दिखीं सोनिया दरअसल, सोनिया पर जिस तरीके से बीजेपी ने हमला बोला, वह उनको चुभ गया। बात चूंकि एक महिला के सम्मान की है तो यहां कांग्रेस के अकेले पड़ने का खतरा है। ऐसे में सोनिया का गुस्सा लाजिमी है। इस बीच, सोनिया ने बवाल के बाद वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुला ही है। बैठक में अधीर रंजन चौधरी, मल्लिकार्जुन खड़गे को भी बुलाया गया है। माना जा रहा है कि बीजेपी के हमले निपटने के लिए अब कांग्रेस इसमें आगे की रणनीति बनाएगी। सोनिया पर इरानी का हमला लोकसभा में आज बेहद सख्त तेवर में नजर आ रहीं इरानी ने आज एक-एक वार का बदला लिया। उन्होंने देश के राष्ट्रपति के अपमान के लिए सोनिया गांधी को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को ये हजम नहीं हो पा रहा है कि कोई गरीब आदिवासी देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच गई है। इरानी ने कांग्रेस को महिला विरोधी और आदिवासी विरोधी बताते हुए कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी लगातार मुर्मू का अपमान कर रही है। इरानी ने सीधे-सीधे सोनिया पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि मैं आज इस सदन में कांग्रेस की मुखिया विराजमान हैं, मैं उनसे कहना चाहती हूं आपने द्रौपदी मुर्मू के अपमान की इजाजत दी, सोनिया गांधी ने एक महिला के अपमान करने की इजाजत दी। सोनिया गांधी ने एक गरीब महिला का अपमान करने दिया। कांग्रेस इस देश से माफी मांगे। सोनिया गांधी इस देश से माफी मांगे। शर्म करो।nbt
नई दिल्ली: संसद के अंदर सोनिया और स्मृति इरानी में हुई क्या बहस? यह पूरा वाकया लोकसभा में स्मृति इरानी के तीखे भाषण के बाद का है। इसमें स्मृति ने अधीर रंजन के बयान को लेकर सीधे सोनिया गांधी को निशाने पर लिया था। हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हुई। उस दौरान सदन में सोनिया गांधी भी मौजूद थी। बताया जा रहा है कि सोनिया और स्मृति इरानी के बीच इस दौरान बहस हुई। कांग्रेस और बीजेपी के इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं। गौरतलब है कि अधीर रंजन चौधरी के द्रौपदी मुर्मू पर राष्ट्रपत्नी वाले बयान के बाद बीजेपी ने आज लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया। इरानी ने सोनिया गांधी से इस मामले पर सीधे-सीधे माफी मांगने की मांग की। उधर, अपने बयान पर बवाल बढ़ते देख चौधरी रक्षात्मक रुख में पहुंच गए और कहने लगे हैं कि क्या करूं अगर जबान से निकल गया तो.. चूक हो गई है। बीजेपी क्या बोल रही अधीर मामले पर सोनिया गांधी बीजेपी की सांसद रमा देवी के साथ बातचीत कर रही थीं। बताया जा रहा है कि सोनिया ने रमा देवी से शिकायत की कि इस मामले में उनका नाम नहीं लिया जाना चाहिए था। इसी दौरान स्मृति इरानी वहां पहुंचीं और उन्होंने कहा कि उन्होंने उनका नाम लिया है। स्मृति ने सोनिया से कहा कि चूंकि यह एक महिला से जुड़ा मुद्दा है और वह भी सदन में मौजूद थीं, इसलिए उन्होंने उनका नाम लिया। बताया जा रहा है कि इसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जो करीब दो मिनट तक चली। बीजेपी और कांग्रेस इसको लेकर अलग-अलग दावे कर रही है। बीजेपी सोनिया पर सांसदों को धमकाने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि सदन की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ दुर्व्यवहार किया गया है। कांग्रेस का पक्ष उधर कांग्रेस का दावा है कि संसद के अंदर वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। कांग्रेस का दावा है कि सोनिया गांधी बीजेपी सांसदों से मिलने गई थीं। बीजेपी के महिला और पुरुष सांसद उनके ऊपर हावी हो गए और उनके साथ बदसलूकी की गई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा कि आज लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार किया! लेकिन क्या स्पीकर इसकी निंदा करेंगे? क्या नियम सिर्फ विपक्ष के लिए होते हैं? इरानी से सोनिया ने कहा, डॉन्ट टॉक टू मी बात इतनी बढ़ी कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी के बीच नोकझोंक की खबरें भी सामने आईं। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बहस के बाद सोनिया ने इरानी से कहा कि आप मुझसे बात करो। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी सांसदों के साथ सही तरीके से बात नहीं की। उधर, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सोनिया के गुस्से की इनसाइड स्टोरी दरअसल, जब सोनिया गांधी से पत्रकारों ने जब यह पूछा कि क्या वह अधीर रंजन को माफी मांगने के लिए कहेंगी तो उन्होंने तमतमाए चेहरे के साथ कहा कि वह पहले ही माफी मांग चुके हैं। आमतौर सोनिया कभी इसते गुस्से में नहीं दिखती हैं लेकिन उनके इस जवाब के पीछे की वजह शायद उनका बीजेपी सांसदों से हुई नोकझोंक रही हो।
नयी दिल्ली,कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने दिल्ली में 800 से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं को बर्खास्त किए जाने को लेकर सोमवार को दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए इस कदम को अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि मेहनत के बदले अच्छा मानदेय मांगना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि इन आंगनबाड़ी कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘ दिल्ली सरकार ने कुछ दिनों पहले ही विधायकों के मानदेय में बढ़ोतरी की थी। लेकिन एक अन्यायपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने सम्मानजनक मानदेय की मांग करने वाली 800 से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं को बर्खास्त कर दिया। मेहनत के बदले अच्छा मानदेय मांगना अपराध नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन आंगनबाड़ी सेविकाओं को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।’’ गौरतलब है कि मानदेय बढ़ाने और काम के सम्मानजनक घंटों की मांग करते हुए एक महीने से अधिक समय से हड़ताल करने को लेकर दिल्ली की 884 आंगनबाड़ी सेविकाओं को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इन कर्मियों को उनके 39-दिवसीय प्रदर्शन के खिलाफ 14 मार्च को बर्खास्तगी नोटिस जारी किये गये थे।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में सैकड़ों साल पुरानी तीन पीर बाबाओं की मजार पर दो मुस्लिम सगे भाइयों ने निशाना बनाते हुए माहौल की फिजा में जहर घोलने की कोशिश की. उन्होंने हिंदू धर्म की पोशाक पहनकर मजार में जमकर तोड़फोड़ की. इतना ही नहीं मजार पर चढ़ाई जाने वाली चादरों को आग के हवाले कर दिया. डीएम-एसपी की सूझबूझ के चलते शहर में माहौल खराब न हो इसी मकसद से आनन-फानन में दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के अफसर उनसे पूछताछ कर रहे हैं. पकड़े गए दोनों भाई बिजनौर के शेरकोट इलाके के ही रहने वाले हैं. ये है पूरा मामला ये पूरा मामला बिजनौर के शेरकोट इलाके का है, जहां रविवार शाम दो सगे भाई आदिल और कमाल ने हिंदू धर्म का लिबास पहनकर सैकड़ों साल पुरानी दरगाह भूरे शाह बाबा और जलालशाह बाबा, तीसरी क़ुतुब शाह की मज़ार को टार्गेट बनाते हुए तहस नहस कर दिया. दोनों शातिर भाइयों ने मजार पर चढ़ी सभी चादरों को आग के हवाले कर दिया. फिलहाल शुरुआती तौर पर यही अंदाज़ लगाया जा रहा है कि माहौल को बिगाड़ने की इरादे से दोनों सगे भइयो ने भगवा रंग का चोला पहनकर वारदात को अंजाम दिया. कुछ राहगीरों ने उन्हें मजार पर तोड़-फोड़ करते हुए देख लिया था, जिसकी वजह से आनन-फानन में डीएम-एसपी ने मौका ए वारदात पर पहुंचकर स्थिति को कंट्रोल में करते हुए तीनों मज़ारों पर मरम्मत का काम शुरू करा दिया. साथ ही पुलिस ने दोनों आरोपी सगे भइयों को गिरफ्तार कर लिया, जिनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है. यूपी के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि बिजनौर के अंतर्गत थाना शेरकोट में पुलिस को शाम 5 बजे सूचना मिली कि 2 लोगों ने जलाल शाह की मज़ार पर तोड़फोड़ की है तथा कुछ चादर जलाईं हैं. पुलिस वहां पहुंची तभी सूचना मिली कि उसी थाना क्षेत्र में भूरे शाह की मज़ार पर भी आगजनी और तोड़फोड़ हुई है.
कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी को लेकर नए खुलासे क‍िए हैं। पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से ईडी ने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बरामद की है। ऐसे में अब ईडी पार्थ चटर्जी की भी कुंडली खंगालने में जुट गई है। ईडी को डायमंड सिटी में पार्थ चटर्जी का एक हैरान करने वाला लग्जरी फ्लैट म‍िला है। इस फ्लैट में पार्थ चटर्जी ने अपने पालतू कुत्‍तों को रख रखा था। दरअसल पार्थ चटर्जी को कुत्‍तों से खास लगाव है। श‍िक्षामंत्री रहते पार्थ चटर्जी ने कहा था क‍ि वह अपनी पत्नी की याद को जिंदा रखने के लिए कुत्तों का अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू की है। उनका कहना था है कि डॉग लवर पत्नी की याद में इससे बेहतर और कोई काम नहीं। दरअसल ईडी के छापे में पार्थ चटर्जी के तीन और बंगले मिले हैं, जो क‍ि पूरी तरह से एयर कंडीशन थे। इसी में से एक में पार्थ चटर्जी के पालतू कुत्ते रहा करते थे। ईडी की जांच में पता चला है कि पार्थ चटर्जी के पास अथाह पैसा था और वह फ्लैट नंबर 18/D, 19/D और 20/D के अकेले मालिक थे। ये सभी फ्लैट डायमंड सिटी में ही थे। ईडी ने बताया क‍ि इन्हीं में से एक फ्लैट में अर्पिता मुखर्जी रहा करती थीं। जो क‍ि पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी रही हैं। पार्थ चटर्जी की करीबी के घर म‍िले थे 21 करोड़ रुपये कैश ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के घर से 21 करोड़ रुपये कैश और लाखों का सोना बरामद क‍िया था। इसके बाद पार्थ चटर्जी की गिरफ्तार हुई। ED के मुताब‍िक, पार्थ चटर्जी के पास तीनों के अलावा भी औकई फ्लैट हैं। इसके अलावा उनके कुछ बंगलों में करीबी रह रहे हैं। ऐसे में ईडी अब नए करीब‍ियों के ख‍िलाफ भी छापेमारी की तैयारी कर रही है। 26 घंटे की पूछताछ के बाद अरेस्‍ट हुए थे पार्थ चटर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते शन‍िवार को 26 घंटे की पूछताछ के बाद शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के संबंध में शनिवार को गिरफ्तार क‍िया था। 69 साल के चटर्जी, वर्तमान में ममता बनर्जी सरकार में उद्योग और संसदीय मामलों के विभाग को संभाल रहे हैं। वह वर्ष 2014 से 2021 तक शिक्षा मंत्री थे। उनके शिक्षा मंत्री रहने के दौरान शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताएं हुईं। साठ के दशक के उत्तरार्ध में राजनीति में आए चटर्जी चटर्जी ने साठ के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस की छात्र शाखा-छात्र परिषद के नेता के रूप में राजनीति में कदम रखा।तब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। वह तत्कालीन तेजतर्रार युवा नेताओं सुब्रत मुखर्जी और प्रिय रंजन दासमुंशी से प्रेरित थे। सत्तर के दशक के मध्य में एक हाई-प्रोफाइल कारपोरेट नौकरी करने का फैसला करने के बाद उनका राजनीतिक करियर रुक गया। ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने और एक जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस का गठन करने के बाद चटर्जी ने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया। पांच बार बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए चटर्जी वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2001 से लगातार पांच बार बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। चटर्जी का सियासी सफर वर्ष 2006 में तब शिखर पर पहुंचा, जब विधानसभा में वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता बने और बाद में नेता प्रतिपक्ष बने। जब ममता बनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम में कथित जबरन भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर बंगाल की सड़कों पर शक्तिशाली वाम मोर्चा शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तो चटर्जी विधानसभा में विपक्ष की आवाज बन गए।
नई दिल्ली: 25 जुलाई 2017 और 25 जुलाई 2022। फ्रेम एक। तस्वीर अलग। दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति भवन को अलविदा कहने की तस्वीर है ये। वो हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन कर रहे हैं। वहां मौजूद लोगों को कर जोड़ विदा ले रहे हैं। 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद कोविंद दूसरे निवास में शिफ्ट हो गए। जैसी आगवानी, वैसी ही विदाई पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने 25 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति भवन में अपना कार्यकाल शुरू किया था। अब 25 जुलाई 2022 को उनका कार्यकाल खत्म हो गया। जब कोविंद राष्ट्रपति भवन में आए थे तो उनका स्वागत भी ठीक वैसे ही हुआ था जैसे मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का हुआ था। कोविंद की विदाई भी राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड ने वैसे ही दी, जैसे उन्होंने आगवानी की थी। ड्राइवर ने हाथ जोड़े पिछले 5 साल में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद के वाहन के चालक रहे शख्स ने उनका हाथ जोड़कर अभिवादन किया और उन्हें उनके आवास तक छोड़कर जाने के लिए गाड़ी में बैठे। क्योंकि इसके बाद वह नए राष्ट्रपति की सेवा में लग जाएंगे। पूर्व राष्ट्रपति को खुद छोड़ने आईं राष्ट्रपति मुर्मू पूर्व राष्ट्रपति इससे पहले वहां मौजूद सभी गणमान्य अतिथियों से मिले। उन्होंने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पीएम नरेंद्र मोदी समेत वहां मौजूद लोगों से मिलकर हाथ मिलाया। अपने गार्ड्स को गुडबॉय बोला और फिर गाड़ी की तरफ बढ़ चले। वह जैसे ही गाड़ी की तरफ बढ़े राष्ट्रपति मुर्मू भी वहां पहुंचीं और पूर्व राष्ट्रपति को उनके आवंटित आवास 12 जनपथ छोड़ने के लिए निकलीं। पूर्व राष्ट्रपति के काफिले को अंगरक्षकों ने भी दी विदाई पूर्व राष्ट्रपति कोविंद राष्ट्रपति गेट से निकलने के लिए जब आगे बढ़े तो राष्ट्रपति के अंगरक्षकों ने देश के पूर्व सुप्रीम कमांडर को छोड़ने के लिए गेट तक आए। फिर गेट के बाहर पूर्व राष्ट्रपति की गाड़ी निकल गई और राष्ट्रपति के अंगरक्षक राष्ट्रपति भवन में रह गए। द्रौपदी मुर्मू बनीं देश की 15वीं राष्ट्रपति गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू ने आज देश के 15वें राष्ट्रपति की शपथ ली है। मुर्मू ने विपक्ष के कैंडिडेट यशवंत सिन्हा को मात दी थी। मुर्मू को चीफ जस्टिस एनवी रमना ने उन्हें शपथ दिलाई।nbt
पिछले दिनों बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को जान से मारने की धमकी के बाद अब विक्की कौशल और कटरीना कैफ को जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद विक्की कौशल ने मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। अब खबर है कि मुंबई पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कटरीना को ऑनलाइन धमकी देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। इस आदमी का मनविंदर सिंह बताया जा रहा है। एकतरफा प्यार और स्ट्रगलिंग एक्टर पुलिस ने धमकी देने वाले शख्स मनविंदर को कुछ घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया। वह मुंबई में एक स्ट्रगलिंग एक्टर है और फिल्मों में काम पाने की कोशिश कर रहा है। मनविंदर ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि वह Katrina Kaif से एकतरफा प्यार करता है। वह फेक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर कटरीना को अश्लील और धमकी दिया करता था। मनविंदर लखनऊ का रहने वाला है और उसने अपने मीडिया अकाउंट पर कटरीना को अपनी वाइफ और गर्लफ्रेंड बताया था। मनविंदर ने यहां खुद के साथ कटरीना की मॉर्फ्ड फोटो भी लगा रखी थी। सोशल मीडिया पर दे रहा था धमकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vicky Kaushal ने मुंबई पुलिस में शिकायद दर्ज की थी कि एक व्यक्ति उनकी पत्नी कटरीना कैफ को सोशल मीडिया पर स्टॉक कर रहा है। यहां तक तो सबकुछ ठीक था लेकिन अब यह शख्स एक्ट्रेस और उनके पति को जान से मारने की धमकी देने लगा। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विक्की कौशल ने मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मुंबई पुलिस ने नहीं लिया चांस, दिखाई फुर्ती पिछले दिनों पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों ने सलमान खान को मारने की प्लानिंग बनाई थी। जांच में पता चला कि हत्यारे सलमान खान के काफी नजदीक तक पहुंच चुके थे। इसे ध्यान में रखते हुए मुंबई पुलिस ने फुर्ती दिखाई और कटरीना पर अश्लील कॉमेंट करने वाले और जान से धमकी देने वाले शख्स मनविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। मनविंदर के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 (2) और 354 (डी) के तहत मामला दर्ज किया। इसके अलावा पुलिस ने आईटी एक्ट 67 के तहत भी आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
नयी दिल्ली,कांग्रेस की दिल्ली इकाई ने शुक्रवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें दिल्ली सरकार की आबकारी नीति 2021-22 की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की सिफारिश की गई है। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर ‘‘भ्रष्टाचार में डूबे’’ होने का आरोप लगाया। पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि नई आबकारी नीति के लागू होने के बाद से बहुत भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही है। कुमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जून में दिल्ली के पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को एक लिखित शिकायत देकर ‘‘भ्रष्टाचार’’ के खिलाफ जांच की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘सच को छुपाया नहीं जा सकता और सच यह है कि दिल्ली की आदमी पार्टी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नई आबकारी नीति की सीबीआई जांच की सिफारिश में उपराज्यपाल ने कहा है कि सत्येंद्र जैन, जोकि धनशोधन मामले में पिछले दो महीने से जेल में हैं, अरविंद केजरीवाल के भ्रष्ट सौदों में मुख्य व्यक्ति थे। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत जेल जाने वाले अगले व्यक्ति होंगे।’’ सिसोदिया दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग के प्रमुख हैं। कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन मंत्रियों का ‘‘उपयोग’’ अपने ‘‘धन एकत्र’’ करने वाले व्यक्तियों के रूप में कर रहे हैं।
नयी दिल्ली,उप राज्यपाल वी.के.सक्सेना ने आबकारी नीति-2021-22 में कथित नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर आदमी पार्टी (आप) सरकार के सामने नयी मुश्किल खड़ी कर दी है। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने उप मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया का बचाव करते हुए उन्हें ‘‘ कट्टर ईमानदार’’करार दिया है। उन्होंने साथ ही आशंका जताई है कि कुछ दिनों में भी सिसोदिया को ‘‘ फर्जी’’ मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली के मुख्य सचिव द्वारा इस महीने की शुरुआत में सौंपी गयी रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच की सिफारिश की गयी है। इस रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) अधिनियम, 1991, कार्य आवंटन नियमावली-1993, दिल्ली आबकारी अधिनियम, 2009 और दिल्ली आबकारी नियम, 2010 के उल्लंघनों का पता चलता है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा रिपोर्ट में, अनुबंध के बाद ‘‘शराब ठेकों के लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने’’में ‘‘जानबूझकर और घोर प्रक्रियागत खामियां किये जाने’’ का भी जिक्र है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस इस आबकारी नीति का पुरजोर तरीके से विरोध कर रही थीं। उन्होंने सीबीआई जांच की सिफारिश का स्वागत किया है। केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता मीनाक्षी लेखी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने नियमों व प्रक्रिया का उल्लंघन कर शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘व्यवसायी समूहन’ को बढ़ावा दिया। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने घोषणा की है कि शनिवार को आबकारी नीति के खिलाफ उनकी पार्टी आप सरकार के खिलाफ ‘विशाल’ विरोध प्रदर्शन करेगी। केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ अदालत के समक्ष यह मामला टिक नहीं पाएगा। मनीष कट्टर ईमानदार व्यक्ति हैं और वह पाक साफ साबित होंगे।’’ मुख्यमंत्री शुक्रवार को अपराह्न चार बजे उप राज्यपाल के साथ निर्धारित साप्ताहिक बैठक में भी शामिल नहीं हुए। दिल्ली सरकार ने केजरीवाल के बीमार होने की खबरों का खंडन किया है, लेकिन बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर कोई कारण नहीं बताया है। दिल्ली सरकार के आबकारी मंत्री होने के नाते सिसोदिया की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। उन्होंने भी घटनाक्रम पर जवाब देते हुए कहा कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केजरीवाल से भयभीत हैं।’’ सिसोदिया ने कहा कि आप नेताओं पर और ‘‘फर्जी मुकदमे’’ दर्ज होंगे, क्योंकि पार्टी का प्रभाव पूरे देश में बढ़ रहा है। सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल को ‘‘शीर्ष राजनीतिक स्तर पर वित्तीय लेन-देन’’ के ‘‘ठोस संकेत’’ मिले हैं, जिसमें आबकारी मंत्री ने ‘‘वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर प्रमुख फैसले लिए, उन्हें लागू किया’’ और आबकारी नीति अधिसूचित की, जिसके ‘‘व्यापक वित्तीय असर’’ हैं। सूत्रों ने कहा, ‘‘मंत्री ने निविदाएं दिए जाने के बावजूद शराब ठेकों के लाइसेंसधारियों को अनुचित वित्तीय लाभ दिए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।’’ उन्होंने दावा किया कि आबकारी विभाग ने कोविड-19 महामारी की विशेष स्थिति के तहत 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी। उसने एअरपोर्ट जोन के लाइसेंस के सबसे कम बोली लगाने वाले को 30 करोड़ रुपये की बयाना राशि भी वापस कर दी, क्योंकि वह हवाईअड्डा प्राधिकारियों से ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ हासिल नहीं कर सका। सूत्रों ने बताया , ‘‘यह दिल्ली आबकारी नियमावली-2010 के नियम 48(11)(बी) का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि इसमें स्पष्ट किया गया है कि सफल बोली लगाने वाले को लाइसेंस के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी और ऐसा नहीं किए जाने पर उसके द्वारा जमा जमानत राशि सरकार जब्त कर लेगी।’’ सूत्रों ने दावा किया कि आबकारी विभाग ने आठ नवंबर 2021 को आदेश जारी कर विदेशी शराब के दाम तय करने के फार्मूले को संशोधित कर दिया और ‘‘ बिना अधिकृत प्राधिकार की मंजूरी’’ के बीयर के प्रति केस पर 50 रुपये के लगने वाले आयात शुल्क को हटा दिया। इससे यह शराब खुदरा विक्रेताओं के लिए सस्ती हो गई, लेकिन सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान हुआ। ’’ उन्होंने बताया कि सिसोदिया द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर तत्कालीन उपराज्यपाल ने रोक लगा दी थी, क्योंकि उन्हें दिल्ली मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना लिया गया था। सूत्रों ने दावा किया, ‘‘पूर्व में लिए गए अवैध फैसलों को हाल में 14 जुलाई को मंत्रिमंडल की मुहर लगाकर वैध बनाने का प्रयास किया गया, जो अपने आप में नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।’’ नयी आबकारी नीति 2021-22 पिछले साल 17 नवंबर से लागू की गयी थी, जिसके तहत 32 जोन में विभाजित शहर में 849 ठेकों के लिए बोली लगाने वाली निजी संस्थाओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए। कई शराब की दुकानें खुल नहीं पायीं। ऐसे कई ठेके नगर निगम ने सील कर दिए। यह नीति विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई थी। इसपर सिसोदिया की अध्यक्षता वाली मंत्रियों के समूह ने विचार किया था, जिसका उद्देश्य दिल्ली में शराब के कारोबार में सुधार करना था ताकि कदाचार या कर चोरी पर रोक लग सके। इसके तहत ड्राइ डे के दिनों की संख्या सालाना 21 से घटाकर तीन कर दी गई थी। सरकार शराब की खुदरा बिक्री से बाहर चली आई और होटल, रेस्तरां को पुलिस की अनुमति के साथ रात तीन बजे तक शराब परोसने की अनुमति दी। हालांकि, नयी नीति के तहत कई शराब की दुकानें शहर के अनुपयुक्त स्थानों पर होने की वजह से नहीं खोली जा सकीं। कई दुकानों को नगर निगम ने मास्टर प्लान का कथित उल्लंघन होने की वजह से सील किया। गौरतलब है कि जांच के दायरे में आई आबकारी नीति 2021-22 की अवधि 30 अप्रैल को समाप्त हो गई थी, जिसे सरकार ने 31 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया था। आबकारी विभाग, आबकारी नीति 2022-23 पर काम कर रहा है, जिसमें लोगों को घर पर शराब की आपूर्ति करने का प्रावधान हो सकता है।
नयी दिल्ली, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का मानना है कि कोरोना वायरस महामारी से पूर्व की तुलना में इस बार छात्रों के उत्तीर्ण होने की दर में सुधार का एक कारण 2021-2022 शैक्षणिक सत्र को दो सत्रों (टर्म) में विभाजित किया जाना भी हो सकता है। पिछले शैक्षणिक सत्र में पहली बार दो टर्म विभाजित की गई थी। जहां पहले टर्म की परीक्षा नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित हुई थी, वहीं दूसरे टर्म की परीक्षा मई-जून में आयोजित की गई थी। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) राजेंद्र नगर एक्सटेंशन की प्रधानाध्यापिका पल्लवी उपाध्याय ने कहा कि परीक्षाएं शुरू होने से पहले के तैयारी के लिए छात्रों के पास अपेक्षाकृत अधिक समय और कम पाठ्यक्रम था। उन्होंने कहा, ‘‘इससे स्वाभाविक रूप से विषयों की अधिक और बेहतर समझ पैदा हुई है और उनके उत्तर लेखन में भी सुधार हुआ है। वे अधिक समय होने के कारण अध्यायों को बेहतर ढंग से समझ पाए।’’ डीपीएस इंदिरापुरम की प्रधानाध्यापिका संगीता हजेला के अनुसार, परीक्षाओं का दो टर्म में विभाजन स्वाभाविक रूप से अधिक प्रभावी रहा। हजेला ने कहा, ‘‘चूंकि छात्रों के पास पढ़ने के लिए तुलनात्मक रूप से छोटा पाठ्यक्रम था, उनकी समझ के स्तर, स्मरण क्षमता और पाठ्यक्रम को दोहराने पर केंद्रित अध्ययन में वृद्धि हुई है। टर्मिनल परीक्षाओं के कारण पाठ्यक्रम को बार-बार दोहरा पाना आसान हो गया, जिसे छात्र पहले अधिक पाठ्यक्रम होने के कारण अनदेखा कर देते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विषयों की स्पष्ट समझ उनके उत्तर लेखन में भी दिखी है। उन्होंने लंबे उत्तरों के बजाय बेहतर उत्तर लिखने पर अधिक जोर दिया है।’’ 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए 2022 की परीक्षा के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। कुल 92.7 प्रतिशत छात्रों ने 12वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की और 94.40 प्रतिशत छात्र 10वीं कक्षा की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। 12वीं कक्षा में 1,34,797 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक और 33,432 ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, जबकि 10वीं कक्षा में 64,908 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक और 2,36,993 ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। एमआरजी स्कूल, रोहिणी की प्रधानाध्यापिका अंशु मित्तल ने कहा, ‘‘टर्मिनल परीक्षाओं के कारण अधिक समय और कम पाठ्यक्रम होने से छात्रों ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया। अधिकतर छात्रों ने 90 या 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किया है। पाठ्यक्रम को विभाजित किया गया और इससे छात्रों पर अध्ययन का दबाव कम हो गया और आधी रात को पाठ्यक्रम को दोहराने पर निर्भरता कम हो गई।’’
रांची: सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.वी. रमन्ना ने कहा कि न्यायिक रिक्तियों को न भरना और न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं करना, देश में लंबित मामलों का मुख्य कारण है। चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने न्यायाधीशों की छवि को गलत तरीके से पेश करने पर मीडिया की भूमिका पर अफसोस जताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र को दो कदम पीछे ले जा रहा है। इससे देशभर के न्यायाधीशों के आदेश पर कई सवाल खड़े होने लगे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। सीजेआई ने कहा कि प्रिंट मीडिया की अब भी कुछ हद तक जवाबदेही है, जबकि सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की जवाबदेही शून्य है। उन्होंने आगे कहा कि कई बार मुद्दों पर अनुभवी जजों को भी फैसला करना मुश्किल हो जाता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शनिवार को रांची स्थित ज्यूडिशियल अकादमी में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) की ओर से आयोजित ‘जज का जीवन’ पर आयोजित एक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संयम बरतने की अपील न्यायमूर्ति रमन्ना ने मीडिया खासकर सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को संयम बरतने और ज्यूडिशियरी की स्वतंत्रता पर भी ध्यान देने की अपील की। उन्होंने न्यायमूर्ति एसबी जजों की भूमिका और उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक न्यायाधीश प्रजातंत्र में सामाजिक वास्तविकता और कानून के बीच कड़ी का काम करता है, साथ ही वह देश में संवैधानिक मूल्यों का रक्षक भी होता है। झारखंड हाई कोर्ट ने न्यायधीश ने कही ये बात मौके पर झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन ने कहा कि भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश, अदालतों के मूलभूत संरचनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, साथ ही महिला न्यायाधीशों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी कर देश में न्याय को त्वरित और आसान बना रहे हैं। सरायकेला-खरसावां जिले की न्यायालयों की किया उद्घाटन सीजेआई ने आज रांची में न्यायिक अकादमी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में उप-मंडल न्यायालय और गढ़वा जिले के नगर उंटारी (नगर उंटारी) में उप-मंडल न्यायालय का भी ऑनलाइन उद्घाटन किया। सीजेआई ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के प्रोजेक्ट शिशु के तहत कोविड-19 महामारी में माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों को छात्रवृत्तियां भी वितरित कीं। इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन, न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह, न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद भी उपस्थित थे।
नई दिल्‍ली: उपराज्‍यपाल विनय कुमार सक्‍सेना ने दिल्‍ली सरकार की आबकारी नीति पर जांच बैठा दी है। एलजी ने सीबीआई से नई एक्‍साइज पॉलिसी के तहत टेंडर प्रोसेस की जांच करने को कहा है। दिल्‍ली के चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी। न्‍यूज एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि 'टेंडर में जान-बूझकर प्रक्रियागत खामियां छोड़ी गईं ताकि शराब लाइसेंसियों को अनुचित फायदा पहुंचे।' नई आबकारी नीति के तहत, 32 जोन्‍स में 849 दुकानों के रिटेल लाइसेंस जारी किए गए थे। भाजपा और कांग्रेस, दोनों प्रमुख विपक्षी दलों ने नई आबकारी नीति का कड़ा विरोध किया है। एलजी से भी शिकायत की गई थी। एलजी की ओर से सीबीआई जांच की सिफारिश दिल्‍ली सरकार को 48 घंटों के भीतर दूसरा झटका है। एलजी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिंगापुर दौरे वाली फाइल को वापस कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ने फाइल लौटाते हुए सलाह भी दी कि मुख्यमंत्री को सिंगापुर समिट में नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह मेयरों की कॉन्फ्रेंस है और एक मुख्यमंत्री का उसमें शामिल होना उचित नहीं है। दिल्‍ली की आबकारी नीति 2021-22 क्‍या है? नई आबकारी नीति के जरिए दिल्‍ली सरकार शराब खरीदने का अनुभव बदलना चाहती थी। नई पॉलिसी में होटलों के बार, क्‍लब्‍स और रेस्‍टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई है। वे छत समेत किसी भी जगह शराब परोस सकेंगे। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने पर रोक थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम क‍िया जा सकता है। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्‍फ लाइफ पर कोई पाबंदी नहीं होगी। दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति की खास बातें दुकान पर यह देखना होगा कि कम उम्र के व्‍यक्ति को शराब न बेची जाएगी। आईडी चेक क‍िया जाएगा। शराब की दुकान के बाहर स्‍नैक्‍स या खाने-पीने की दुकान नहीं खुल सकेगी ताकि खुले में शराब पीना कम हो। सरकार किसी भी शराब की दुकान की मालिक नहीं होगी। पॉलिसी में प्राथमिकता कंज्‍यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्‍धता पर देनी है; स्‍मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना है। दिल्‍ली में शराब की दुकानें इस तरह हों कि कोई इलाका छूट न जाए और कहीं ज्‍यादा दुकानें न हो जाएं। ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस होगा। दिल्‍ली में शराब के दीवानों के लिए क्‍या बदल चुका है? हर दुकान पर वॉक-इन जैसा अनुभव। इसी मकसद से दुकान की डिजाइनिंग। ग्राहकों को दुकान के बाहर भीड़ लगाने की इजाजत नहीं। हर ग्राहक दुकान के भीतर आएगा, शराब चुनेगा और दुकान के भीतर ही लेन-देन पूरा होना चाहिए। दुकानों में क्‍लोज्‍ड ग्‍लास डोर होना चाहिए, एयर-कंडीशंड और रोशन की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। हर दुकान में और आसपास सुरक्षा के पर्याप्‍त इंतजाम हों। किन बातों की इजाजत नहीं? दुकान को लेकर आसपास के लोगों की कोई बड़ी शिकायत नहीं आनी चाहिए। दुकान के चलते आसपास रहने वालों को कोई समस्‍या न हो। ग्राहकों को कोई खास ब्रैंड खरीदने के लिए न कहा जाए। दुकान के बाहर किसी तरह की ब्रैंडिंग नहीं होगी। एक वार्ड में शराब की अधिकतम 27 दुकानें नई आबकारी नीति पर क्‍या आपत्तियां हैं? नई नीति जो दिल्ली को 32 जोन में बांटती है, उसके मुताबिक बाजार में केवल 16 खिलाड़ियों को इजाजत दी जा सकती है और यह एकाधिकार को बढ़ावा देगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि नई आबकारी नीति के जरिए केजरीवाल सरकार ने भ्रष्‍टाचार किया। दिल्‍ली में शराब के कई छोटे वेंडर्स दुकानें बंद कर चुके हैं। उनका कहना है कि कुछ बड़े प्‍लेयर्स अपने यहां स्‍टोर्स पर भारी डिस्‍काउंट से लेकर ऑफर्स दे रहे हैं, इससे उनके लिए बिजनेस कर पाना नामुमकिन हो गया है। अदालतों में वकीलों ने कहा कि उन्हें थोक कीमत के बारे में पता है, लेकिन यह साफ नहीं है कि उन्हें किस दाम पर शराब की बिक्री करनी होगी। नई आबकारी नीति को अदालत में भी चुनौती दिल्ली आबकारी नीति को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि यह नीति अवैध, अनुचित, मनमानी है और दिल्ली आबकारी अधिनियम-2009 का उल्लंघन करती है। उन्होंने दिल्ली सरकार के 28 जून के ई-टेंडर नोटिस को भी रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें शराब के खुदरा विक्रेताओं को 32 जोनल लाइसेंस देने के लिए जोन वाइज इलेक्ट्रॉनिक बोलियां मंगाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय की गई है। पिछले हफ्ते नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली एक और याचिका दायर की गई। इसमें कहा गया है कि देसी और विदेशी शराब की बिक्री के लिए 32 संभागीय लाइसेंस की अनुमति देना अवैध और मनमाना है। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच के सामने जब यह याचिका सुनवाई के लिए आई तो उन्होंने कहा कि इसी तरह की याचिका पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने नई आबकारी नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। खुदरा शराब बेचने वाले दुकानदारों के अनुसार नई नीति से साठगांठ को बढ़ावा मिलेगा। खुदरा शराब दुकानदारों का समूह रेडीमेड प्लाजा इंडिया प्राइवेट लि. की याचिका पर अदालत ने दिल्ली सरकार को नोटिस देते हुए मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई नौ अगस्त को होगी। ई-टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्‍ली हाई कोर्ट की बेंच ने सरकार से कहा कि आप सबकुछ अनिश्चित्ता पर नहीं छोड़ सकते। अगर आप किसी व्यक्ति से कॉन्ट्रैक्ट की उम्मीद करते हैं तो उसे पता होना चाहिए कि इसमें उसे क्या मिलेगा। यह पूरी तरह मनमानी कवायद है। आपके मापदंड अधूरे हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए ई-टेंडर के नियम और शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका पर उसे चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। दिल्‍ली सरकार का क्‍या तर्क था? पिछले हफ्ते हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा कि उसकी नई आबकारी नीति 2021-22 का मकसद भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा का अवसर मुहैया कराना है। सरकार ने कहा कि नीति के खिलाफ सभी आशंकाएं काल्पनिक हैं।
नयी दिल्ली, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि भारत सरकार ‘पड़ोस प्रथम’ नीति के अनुरूप श्रीलंका को आर्थिक चुनौतियों से उबरने में उसकी सहायता कर रहा है । लोकसभा में एस रामलिंगम के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह बात कही। सदस्य ने श्रीलंका को वर्तमान आर्थिक संकट से उबरने के लिये वित्तीय सहायता के बारे में जानकारी मांगी थी । ज्ञात हो कि श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण भोजन, ईंधन और दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं के आयात में बाधा आ रही है। जयशंकर ने निचले सदन को बताया कि भारत सरकार ने पिछले 10 वर्ष में रेलवे, बुनियादी ढांचा, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम और उर्वरकों जैसे क्षेत्रों में श्रीलंका को 185.06 करोड़ डालर की आठ ऋण सुविधाएं (एलओसी) प्रदान की है । विदेश मंत्री ने बताया, ‘‘ सरकार की ‘पड़ोस प्रथम’ नीति के तहत अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण और पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंध विकसित करने के लिये प्रतिबद्ध है । इस नीति के अनुरूप भारत-श्रीलंका के आर्थिक विकास के साथ साथ उसकी आर्थिक चुनौतियों को दूर करने में भी उसकी सहायता कर रहा है ।’’ उन्होंने बताया कि जनवरी 2022 में भारत ने दक्षिण एशियाई देशों का क्षेत्रीय संगठन (दक्षेस) ढांचे के तहत श्रीलंका के साथ 40 करोड़ डालर मुद्रा की अदला-बदली की और एशियाई समाशोधन संघ (एसीयू) के उत्तरोत्तर भुगतान को छह जुलाई 2022 तक स्थगित कर दिया । उन्होंने बताया कि श्रीलंका को छह करोड़ रूपये की आवश्यक दवाएं, 15,000 लीटर केरोसीन तेल और यूरिया उर्वरक की खरीद के लिये मानवीय सहायता के रूप में 5.5 करोड़ डालर की ऋण सहायता दी गई थी। जयशंकर ने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने व्यापक भारतीय सहायता प्रयासों के तहत 1.6 करोड़ डालर के चावल, दूध पाउडर और दवाओं का योगदान किया । उन्होंने कहा कि भारत सरकार की भारतीय विकास एवं आर्थिक सहायता योजना (आईडीईएएस) के दिशानिर्देशों के अनुसार ऋण सहायता के तहत विकास सहायता भी प्रदान की जाती है। इन दिशानिर्देशों में ऋृण के संबंध में कम ब्याज दर, मूल राशि की वापसी पर स्थगन, ऋण वापसी की लिये लंबी अवधि एवं आंतरिक लचीलापन शामिल है।
नयी दिल्ली, दिल्ली भाजपा ने बृहस्पतिवार को उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना के उस निर्णय का स्वागत किया जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रस्तावित सिंगापुर यात्रा की फाइल लौटा दी थी । भाजपा ने उनसे इस मुद्दे का “राजनीतिकरण” करने की बजाय राजधानी की समस्याओं पर ध्यान देने का आग्रह किया है। सिंगापुर सरकार ने, केजरीवाल को अगस्त के पहले सप्ताह में सिंगापुर में होने वाले एक सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया है। इसमें केजरीवाल के शामिल होने के अनुरोध को ठुकराते हुए सक्सेना ने कहा कि महापौरों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री के शामिल होने से एक “गलत परिपाटी” का आगाज होगा। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने पूछा, “केजरीवाल को सिंगापुर में महापौरों के सम्मेलन में शामिल होने की इतनी इच्छा क्यों है?” उन्होंने कहा, “जब मुख्यमंत्री को इसमें शामिल होने का न्योता मिला तो उन्हें इसे दिल्ली नगर निगम को भेज देना चाहिए था क्योंकि इसमें केवल महापौर शामिल हो सकते हैं।” बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली में अभी कोई महापौर नहीं है और एक विशेष अधिकारी कामकाज देख रहे हैं इसलिए उन्हें नगर निगम आयुक्त के साथ सिंगापुर के सम्मेलन में जाना चाहिए। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि सिंगापुर में आयोजित होने वाला सम्मेलन दुनियाभर से आए महापौरों के लिए है और वहां केजरीवाल की मौजूदगी का कोई औचित्य नहीं है।
नई दिल्‍ली: कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में दो घंटे तक पूछताछ चली। नैशनल हेराल्‍ड केस के सिलसिले में जांच एजेंसी ने उनसे 28 पॉइंट्स पर सवाल किए। ईडी के सवाल नैशनल हेराल्‍ड और अन्‍य कांग्रेसी साहित्‍य के पब्लिशर, यंग एसोसिएटेड जर्नल्‍स (AJL) लिमिटेड के टेकओवर से जुड़े थे। AJL में सोनिया और उनके बेटे राहुल गांधी की महती हिस्‍सेदारी है। इस मामले में 2015 से सोनिया और राहुल जमानत पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईडी के सवालों का जवाब देने में सोनिया ने खासी तेजी दिखाई। राहुल ने पूछताछ में काफी वक्‍त लेकर ईडी को जवाब दिए थे। ईडी के अधिकारियों ने कहा कि पूछताछ दो घंटे चली। सोनिया के कहने पर इसे खत्म किया गया। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि सोनिया रात 8-9 बजे तक बैठने को तैयार थीं, लेकिन ईडी के अफसरों ने कहा कि उनके पास और सवाल नहीं हैं। वह जा सकती हैं। सोनिया गांधी से क्‍या जानना चाहता है ईडी? 2010 में कांग्रेस ने AJL को 90.21 करोड़ रुपये चुकाए। उस वक्‍त सोनिया गांधी पार्टी की अध्‍यक्ष थीं। ईडी सूत्रों के अनुसार, यह पैसा चेक या कैश में दिया गया, कांग्रेस नेता इस पेमेंट का सबूत नहीं दे सके। ईडी ने AJL के पास 800 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की प्रॉपर्टी होने का अनुमान लगाया है। 2010 में सोनिया गांधी ने यंग इंडियन (YI) लॉन्‍च किया जिसने कुछ कुछ ही महीनों में AJL को 99% टेकओवर कर लिया। यंग इंडियन ने कोलकाता की शेल कंपनी डॉटेक्‍स मर्चेंडाइज से 1 करोड़ रुपये का अनसिक्‍योर्ड लोन लिया। इसमें से 50 लाख रुपये का भुगतान AJL को किया गया ताकि सारे एसेट्स के साथ कंपनी का टेकओवर किया जा सके। डॉटेक्‍स मर्चेंडाइज के दो डायरेक्‍ट्स ने बयान दर्ज कराए जो सोनिया और राहुल समेत अन्‍य से पूछताछ का आधार बना। ईडी को AJL की तरफ से 90.21 करोड़ रुपये के खर्च का कोई सबूत नहीं मिला। राहुल गांधी ने ईडी को बताया कि इन सभी लेन-देन के बारे में केवल मोतीलाल वोरा को पता था। आयकर विभाग ने अपने असेसमेंट ऑर्डर में कहा कि '90.21 करोड़ रुपये की लोन एंट्री फिक्‍स्‍ड थी।' ईडी सूत्रों के अनुसार, पार्टी का अध्‍यक्ष होने के नाते सोनिया को जवाब देना चाहिए कि कांग्रेस ने कैसे AJL को 90.21 करोड़ रुपये दिए। दिल्‍ली की एक अदालत ने सोनिया और राहुल के खिलाफ आरोपों का संज्ञान लेते हुए ट्रायल के आदेश दिए थे। दिल्‍ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के खिलाफ आरोप खारिज करने से इनकार कर दिया। दोनों को स्‍थानीय अदालत से इस आधार पर जमानत मिली हुई है कि उनकी सुरक्षा को खतरा है। सोनिया ने कहा, सोमवार को फिर आऊंगी सूत्रों ने कहा कि ईडी अधिकारियों को बताया गया था कि सोनिया को दवाएं लेने के लिए घर जाना पड़ सकता है। शुरू में अगले दौर की पूछताछ के लिए मंगलवार आने की बात हुई थी मगर सोनिया ने कहा कि उन्‍हें सोमवार भी चलेगा। एजेंसी सूत्रों ने कहा, 'हालिया कोविड रिकवरी को देखते हुए हमने उनसे कहा था कि अपनी सुविधा के हिसाब से मंगलवार को आ जाएं। हालांकि उन्‍होंने सोमवार को आकर बयान दर्ज कराने की पेशकश की। ईडी ने उन्हें 25 जुलाई को बुलाया है। माना जा रहा है कि ईडी की पूछताछ अगले हफ्ते और उससे आगे भी जारी रहेगी। बुधवार शाम को कांग्रेस अध्‍यक्ष के दफ्तर से ईडी अधिकारियों को एक चिट्ठी गई। इसमें कहा गया कि वह अभी कोविड से उबरी हैं और दिन में कई बार दवाओं की जरूरत पड़ती है। ईडी ने सोनिया के साथ उनकी बेटी प्रियंका को आने की इजाजत दे दी। प्रियंका पूछताछ के वक्‍त चैंबर के पास ही बैठी रहीं और छोटे-छोटे ब्रेक्‍स में मां का हाल-चाल लेती रहीं। सोनिया गांधी से एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट क्यों कर रहा पूछताछ? नैशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) कर रहा है। इसी सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछताछ की जा रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से इस मामले में पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। ईडी का कहना था कि इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयान दर्ज किए जाने हैं। नैशनल हेराल्ड का क्या है मामला? 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नैशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना की थी। अखबार का मालिकाना हक असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के पास था। यह दो और अखबार छापा करती थी हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज। कंपनी पर 90 करोड़ का कर्ज हो गया। इस बीच साल 2010 में यंग इंडियन के नाम से एक दूसरी कंपनी बनाई गई। इसका 76 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास और बाकी का शेयर मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास था। लोन चुकाने में असमर्थ एजेएल ने सारा शेयर यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया। इसके बदले में यंग इंडियन ने महज 50 लाख रुपये दिए। किसने दर्ज कराया था केस? 2012 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने केस दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि 50 लाख रुपये में 90 करोड़ वसूलने का उपाय निकाला गया, जो नियमों के खिलाफ है। केस दर्ज होने के दो साल बाद जून 2014 में अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। 2015 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत दूसरे आरोपियों को दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने नियमित जमानत दी। इस मामले में क्या है कांग्रेस का कहना? कांग्रेस ने पूरे मामले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। उसका कहना है कि एजेएल की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कांग्रेस ने उसे बचाने की कोशिश सिर्फ इसलिए की क्योंकि पार्टी विरासत को सहेजना चाहती थी। पूरी संपत्ति को लेकर कोई हस्तांतरण या परिवर्तन नहीं हुआ है। सोनिया से पूछताछ के विरोध में पार्टी का विरोध प्रदर्शन सोनिया गांधी की पेशी को लेकर कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। गुरुवार को सुबह से ही कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में जुटना शुरू हो गए। हालांकि कांग्रेस ऑफिस और ईडी ऑफिस के आसपास सुरक्षा का भारी इंतजाम किया गया। ईडी दफ्तर के आसपास कड़ी सुरक्षा की गई, ताकि वहां कोई विरोध प्रदर्शन न हो सके। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया को कांग्रेस कार्यालय में आने से रोका जा रहा है। किसी भी अन्याय के खिलाफ अहिंसात्मक गांधीवादी ‘सत्याग्रह’ हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन सत्ता के अहंकार में मोदी सरकार यह हक भी हमसे छीनने की कोशिश कर रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने दिल्ली से लेकर देश के तमाम राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस ने ईडी द्वारा की जा रही पूछताछ के खिलाफ नई दिल्ली स्थित शिवाजी ब्रिज पर कई ट्रेनों को रोका। अपने नेता के प्रति एकजुटता दिखाते हुए पार्टी के सांसदों और कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्यों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी। कांग्रेस ऑफिस के बाहर दिल्ली पुलिस ने राजस्थान सीएम सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया, जिनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, अधीर रंजन चौधरी, के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, दिल्ली कांग्रेस के नेता अजय माकन, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बी. श्रीनिवास समेत कई अन्य शामिल हैं। हिरासत में लिए गए कई नेताओं को दिल्ली के किंग्सवे कैंप पुलिस थाने ले लाया गया। विपक्ष मुक्त भारत चाहती है सरकार : गहलोत ईडी की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस की ओर से सीनियर नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ईडी का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन कांग्रेस इसके आगे झुकने वाली नहीं है। उनका कहना था कि आज ईडी विरोधी दलों की सरकारों को गिराने का एक बड़ा हथियार हो गयी है। जांच एजेंसी का दुरुपयोग करके सरकारें गिराई जा रही हैं। इससे घटिया कुछ और नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह देश में विपक्ष चाहते ही नहीं। गहलोत ने कहा कि राजनीति में दुश्मन नहीं होना चाहिए। ये लोग विपक्ष को दुश्मन मानते हैं। पहले ये कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे, अब ये विपक्ष मुक्त भारत चाहते हैं। गहलोत ने इस पूछताछ का विरोध करते हुए कहा कि सोनिया जी को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की वह निंदा करते हैं। बेहतर होता कि उनके आवास पर जाकर उनका बयान लेते। वहीं कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा का कहना था कि जब भी पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की घेराबंदी हो जाती है तो एजेंसियों को आगे कर दिया जाता है। उन्होंने इसे सिपक्ष को चुप कराने और रोकने की साजिश करार दिया। सोनिया को लेकर विपक्ष एकजुट सोनिया गांधी की पेशी की गूंज संसद सत्र पर दिखाई दी। इसे लेकर कांग्रेस की ओर से संसद के दोनों सदनों में कार्यस्थगन के नोटिस दिए गए। लोकसभा में माणिकम टैगोर और गौरव गोगोई ने तो राज्यसभा में के सी वेणुगोपाल ने विरोधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर बहस के लिए चर्चा का प्रस्ताव दिया।सदन का कामकाज शुरू होने से पहले संसद परिसर में विपक्षी दलों की एक मीटिंग हुई, जिसमें कांग्रेस के अलावा एक दर्जन विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया। इन सभी ने सोनिया गांधी के प्रति एकजुटता दिखाते हुए राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर हमला बोला। इस बैठक में कांग्रेस के अलावा, डीएमके, सीपीआई, सीपीएम, टीआरएस, नैशनल कॉन्फ्रेंस, एनसीपी, वीसीके, एमडीएमके, शिवसेना, आरजेडी, एसपी, आरएसपी शामिल हुए, जहां इन्होंने एक सामूहिक बयान भी जारी किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीति विरोधियों से बदला ले रही है। बयान में विपक्ष की ओर से कहा गया कि मोदी सरकार ने जांच एजेंसियों का शरारती दुरुपयोग कर अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों के खिलाफ प्रतिशोध का एक अभियान चला रखा है। कई राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया गया है और अभूतपूर्व तरीके से उत्पीड़न किया गया है। विपक्ष ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि हम हमारे समाज के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने वाली मोदी सरकार की जन-विरोधी, किसान-विरोधी, संविधान-विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी सामूहिक लड़ाई को जारी रखने और तेज करने का संकल्प लेते हैं।
नयी दिल्ली,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोगों से 13 से 15 अगस्त के बीच अपने घरों पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में शामिल होने की अपील की। सरकार ने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान (प्रत्येक घर पर तिरंगा लगाने) की शुरुआत की है। शाह ने सिलसिलेवार ट्वीट कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के मद्देनजर इस अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, ‘‘इस अभियान के तहत देशभर में लगभग 20 करोड़ घरों पर तिरंगे फहराए जाएंगे, जो हर नागरिक विशेषकर युवाओं के मन में देशभक्ति की अखंड ज्योति को और अधिक प्रखर करने का काम करेगा।’’ गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं सभी से अपील करता हूं कि 13 से 15 अगस्त के बीच अपने घरों पर तिरंगा फहराकर इस अभियान से जुड़ें।’’ शाह ने कहा कि इससे हम अपनी युवा पीढ़ी में तिरंगे के प्रति सम्मान और जुड़ाव को और बढ़ा पाएंगे। साथ ही उन्हें आजादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों के त्याग से अवगत करा पाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज न सिर्फ हर देशवासी को एकता के सूत्र में बांधता है, बल्कि हमारे अंदर राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को और प्रबल भी करता है। गृह मंत्री ने कहा कि 22 जुलाई 1947 के दिन तिरंगे के वर्तमान स्वरूप को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने की घोषणा की गई थी।
नयी दिल्ली,केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता मीनाक्षी लेखी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने नियमों व प्रक्रिया का उल्लंघन कर शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘गुटबंदी’ को बढ़ावा दिया। दिल्ली के उप राज्यपाल वी.के.सक्सेना ने आबकारी नीति 2021-22 की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है, जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उप मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया का बचाव किया है। मुख्यमंत्री को आड़े हाथ लेते हुए लेखी ने कहा कि शराब के कारोबार में हुए बड़े ‘‘घोटाले’’ की वजह से राजकोष को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने दिल्ली में शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर ‘गुटबंदी’ को बढ़ावा दिया।’’ लेखी ने दावा किया कि लाइसेंसधारियों को करीब 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी गई जबकि एक कंपनी को पेशगी के तौर पर जमा 30 करोड़ की राशि नियमों और प्रक्रिया का अनुपालन किए बिना लौटा दी गई। उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया गया था कि सिसोदिया पर सीबीआई फर्जी मामला दर्ज करेगी। उन्होंने सिसोदिया का बचाव करते हुए कहा था कि वह ‘‘कट्टर ईमादार’’ व्यक्ति हैं जिन्होंने दिल्ली में विश्व स्तरीय शिक्षा विकसित की है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सिसोदिया को भी उनके अन्य सहयोगी सत्येंद्र जैन की तरह ‘‘ फर्जी’’ मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। जैन इस समय कथित धनशोधन के एक मामले में जेल में बंद हैं। लेखी ने कहा कि वह नहीं जानती कि कौन जेल जाएगा, लेकिन ऐसे दस्तावेज और हस्ताक्षर हैं जो नयी आबकारी नीति को लागू करने का फैसला लेने और अनियमितता करने में उनकी संलिप्तता को साबित करते हैं। गौरतलब है कि सक्सेना ने आप सरकार द्वारा लाई आबकारी नीति 2021-22 में कथित तौर पर नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है।
नई दिल्ली: भारत की निर्वाचित राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह 25 जुलाई को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में होगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शपथ ग्रहण समारोह के कारण कुछ सरकारी ऑफिस को आंशिक रूप से बंद करने का शुक्रवार को निर्देश दिया गया। समारोह के दौरान नए संसद भवन का निर्माण कार्य भी बंद करना होगा। सभी सरकारी विभागों/मंत्रालयों को जारी आदेश में कहा गया है कि भारत की निर्वाचित राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह 25 जुलाई को यहां संसद भवन के सेंट्रल हॉल में होगा। आदेश के अनुसार 25 जुलाई को सुबह छह बजे तक कुल 30 कार्यालयों को खाली कराया जाएगा। ये ऑफिस समारोह के खत्म होने तक बंद रहेंगे। इसमें कहा गया है कि अभी नए संसद भवन का निर्माण कार्य भी चल रहा है और उसे भी समारोह के दौरान रोकने की आवश्यकता होगी। आदेश के अनुसार, जिन इमारतों को जल्दी खाली कराया जाएगा उनमें साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक, रेल भवन, कृषि भवन, शास्त्री भवन, संचार भवन, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) इमारत, सेना भवन, वायु भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन शामिल हैं। ये इमारतें 25 जुलाई को सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक बंद रहेंगी।
नई दिल्ली: दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया पर नई आबकारी नीति को लेकर कुछ आरोप लगाए गए हैं। एलजी ने आबकारी नीति 2021-22 में नियमों के उल्लंघन तथा प्रक्रियागत खामियों की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया है। इस मामले में दिल्ली और केंद्र सरकार फिर से आमने-सामने हैं। आप नेता संजय भारद्वाज ने कहा कि देश और दुनिया में केजरीवाल मॉडल की चर्चा होने लगी है। दिल्ली और पंजाब में जिस तरह से सरकार काम कर रही है वो उदाहरण बन रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार हमसे डर गई है। केजरीवाल से डरते हैं पीएम मोदी- आप नेता आप नेता संजय भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर आरोप लगता हुए कहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल और केंद्रीय एजेंसियों को आप नेताओं के पीछे लगा दिया गया है। उनसे कहा गया है कि नेताओं के ऊपर फर्जी मामले दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि अगर आज पीएम मोदी अगर किसी नेता से डरते हैं तो वो है केजरीवाल। संजय ने कहा कि मुझे तो ऐसा लगता है कि मोदी जी के सपने में केजरीवाल आने लगे हैं। आप नेता ने करप्शन तब होता है जब किसी चीज से कमाया गया पैसा आरोपी अपने पास रख ले, लेकिन यहां नई शराब नीति पास होने के बाद दिल्ली में 2020 के मुकाबले 2021 में 1300 करोड़ का फायदा हुआ है। ये दूध से नहीं शराब से धुले हैं- बीजेपी एक टीवी डिबेट में आप नेता सौरभ भारद्वाज और बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह हिस्सा ले रहे थे। उसी डिबेट में सौरभ ने ये सारी बातें कहीं हैं। आरपी सिंह ने कहा कि सौरभ ने 144 करोड़ घोटाले पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कहा जा रहा था दिल्ली को लंदन बना देंगे। लेकिन दिल्ली में 170 ऐसी जगहें हैं जहां पर पानी का भराव होता है। बीजेपी नेता ने दिल्ली में स्कूल की हालात पर , प्रचार प्रसार पर आप नेता से कई सवाल किए। आरपी सिंह ने आगे कहा कि ये लोग खुद को ऐसे पेश करते हैं जैसे ये लोग दूध के धुले हैं। ये लोग दूध के नहीं शराब के धुले हुए हैं।
लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अभिजात मिश्रा ने मंगलवार को हजरतगंज कोतवाली में मुस्लिम प्रवक्ता तस्लीम रहमानी के खिलाफ तहरीर दी है। उन्होंने भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। बता दें कि तस्लीम रहमानी मुस्लिम प्रवक्ता के साथ एमपीसीआई पार्टी के अध्यक्ष भी हैं। एडीसीपी मध्य राघवेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इस मामले में तहरीर मिली है। जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी। दो संप्रदाय के बीच घृणा फैलाने के लिए कही ये बात -अभिजात अभिजात मिश्रा के मुताबिक, तस्लीम रहमानी बीते सोमवार को यूट्यूब के माध्यम से एक नेशनल इलेक्ट्रॉनिक चैनल की डिबेट में मुस्लिम प्रवक्ता के तौर पर अपना पक्ष रख रहे थे। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। तस्लीम रहमानी के इस अपमानजनक वक्तव्य से पूरे हिन्दू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। यह वक्तव्य तस्लीम रहमानी द्वारा जानबूझ कर दो संप्रदाय के बीच वैमनश्यता एवं घृणा फैलाने के उद्देश्य से दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बयान से समाज में शान्ति भंग की आशंका बनी हुई है। तस्लीम ने नूपुर शर्मा को भड़काया था- पाकिस्तानी मौलाना गौरतलब है कि जिस दिन नूपुर शर्मा ने पैगम्बर मुहम्मद के बारे में कमेंट किया था, वो बयान उन्होंने इसलिए दिया था, क्योंकि उससे ठीक पहले तस्लीम अहमद रहमानी ने शिवलिंग और हिन्दू धर्म के बारे में बड़ी गंदी बात कह दी थी। रहमानी द्वारा शिवलिंग पर गंदा बयान देने से नूपुर शर्मा भड़क गई थीं। इसके बाद कुरान में लिखी उड़ते हुए घोड़ों और पैगम्बर मुहम्मद और आयशा के बारे में कमेंट किया था। वहीं, पकिस्तान के मौलाना इंजीनियर मोहम्मद अली ने तस्लीम रहमानी की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि तस्लीम ने नूपुर शर्मा को भड़काया था, तभी जवाब में उन्होंने पैगंबर के बारे में टिप्‍पणी की थी।
नयी दिल्ली,कांग्रेस ने मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को क्रमश: गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया। पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल की ओर से जारी पार्टी के एक बयान के अनुसार टी एस सिंहदेव और मिलिंद देवड़ा को गुजरात चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है जबकि सचिन पायलट एवं प्रताप सिंह बाजवा को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक होंगे। बयान के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गहलोत को गुजरात चुनाव के लिए और बघेल को हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया। गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। कांग्रेस इन दोनों राज्यों में भाजपा से सत्ता हथियाने की जद्दोजेहद में लगी है। विधानसभा चुनावों के पिछले दौर में कांग्रेस आप के हाथों पंजाब में हार गयी थी जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा एवं मणिपुर में उसका बहुत बुरा प्रदर्शन रहा था। भाजपा चार राज्यों में सत्ता अपने पास बचाये रखने में कामयाब रही।
तिरुवनंतपुरम: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एलएसी पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट के संबंध में भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति के संदर्भ में एक प्रश्न पर विदेश मंत्री की यह प्रतिक्रिया आई। राहुल गांधी ने ट्वीट में दावा किया था कि भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ बढ़ रही है। जयशंकर ने कहा, 'पिछले दो वर्षों में जो हुआ है, हम यह सुनिश्चित करने में बहुत स्पष्ट और बहुत सक्षम रहे हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को एकतरफा ढंग से बदलने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि 1962 में लद्दाख सहित भारत के बड़े हिस्से पर चीन द्वारा कब्जा किए जाने के कारण चीन के साथ सीमा पर समस्याएं एक बड़े हिस्से में हैं और इनमें से कई रणनीतिक क्षेत्र हैं जो भारतीय सीमा बलों के लिए चुनौती पैदा करते हैं। गांधी के ट्वीट के संबंध में जयशंकर ने कहा, 'उनके ट्वीट में मुझे कुछ खास नया नहीं लगा, क्योंकि आप सभी जानते हैं कि सीमा पर हमारी समस्या का एक बड़ा हिस्सा इसलिए है क्योंकि 1962 में चीनियों ने आकर लद्दाख सहित बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था।' उन्होंने कहा, 'इनमें से कई रणनीतिक क्षेत्र हैं जो स्पष्ट रूप से हमारे सीमा बलों के लिए चुनौतियां पैदा करते हैं।'
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार 11 जुलाई को नए संसद भवन की छत पर बने 21 फुट ऊंचे अशोक स्तंभ का अनावरण (Ashok Stambh New Sansad Bhawan) किया है तबसे यह राष्ट्रीय प्रतीक विवादों (Ashok Stambh Controversy) में है। विपक्षी दल अशोक की लाट के मोहक और राजसी शान वाले शेरों की जगह उग्र शेरों का चित्रण कर राष्ट्रीय प्रतीक के स्वरूप को बदलने का आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की एक और 'साजिश' बताकर खारिज कर दिया। नए अशोक स्तंभ पर क्या बोले जयराम रमेश और महुआ मोइत्रा विपक्ष ने मोदी पर संविधान के नियमों को तोड़ने और समारोह में विपक्षी नेताओं को आमंत्रित नहीं करने के लिए निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा, 'सारनाथ स्थित अशोक के स्तंभ पर शेरों के चरित्र और प्रकृति को पूरी तरह से बदल देना भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान है।' वहीं तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने कहा, 'सच कहा जाए, सत्यमेव जयते से संघीमेव जयते की भावना पूरी हुई है।’ इतिहासकर इरफान हबीब और प्रशांत भूषण ने भी उठाए सवाल इतिहासकार एस. इरफान हबीब ने भी नए संसद भवन की छत पर स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक के साथ छेड़छाड़ पूरी तरह अनावश्यक है और इससे बचा जाना चाहिए। हमारे शेर अति क्रूर और बेचैनी से भरे क्यों दिख रहे हैं? ये अशोक की लाट के शेर हैं जिसे 1950 में स्वतंत्र भारत में अपनाया गया था।’ वरिष्ठ वकील और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा, ‘गांधी से गोडसे तक, शान से और शांति से बैठे हमारे शेरों वाले राष्ट्रीय प्रतीक से लेकर सेंट्रल विस्टा में निर्माणाधीन नये संसद भवन की छत पर लगे उग्र तथ दांत दिखाते शेरों वाले नये राष्ट्रीय प्रतीक तक। यह मोदी का नया भारत है।’ 'मोदी जी इसे देखिए और दुरुस्त कीजिए' लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) ने ट्वीट किया, ‘नरेंद्र मोदी जी, कृपया शेर का चेहरा देखिए। क्या यह महान सारनाथ की प्रतिमा को परिलक्षित कर रहा है या गिर के शेर का बिगड़ा हुआ स्वरूप है। कृपया इसे देखिए और जरूरत हो तो इसे दुरुस्त कीजिए।’ तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य जवाहर सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीक के दो अलग-अलग चित्रों को साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘यह हमारे राष्ट्रीय प्रतीक का, अशोक की लाट में चित्रित शानदार शेरों का अपमान है। बांयी ओर मूल चित्र है। मोहक और राजसी शान वाले शेरों का। दांयी तरफ मोदी वाले राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र है जिसे नये संसद भवन की छत पर लगाया गया है। इसमें गुर्राते हुए, अनावश्यक रूप से उग्र और बेडौल शेरों का चित्रण है। शर्मनाक! इसे तत्काल बदलिए।’ विपक्ष को भाजपा का जवाब भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा के सदस्य अनिल बलूनी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के आरोपों की मूल वजह उनकी कुंठा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में, अंग्रेजों द्वारा 150 साल पहले बनाए गए संसद भवन की जगह भारत अपना नया संसद भवन बना रहा है। उन्होंने कहा, ‘विपक्षी दल किसी ना किसी बहाने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाना चाहते हैं। यह लोगों को गुमराह कर वातावरण को दूषित करने का महज एक षड़यंत्र है।’ शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Union Minister Hardeep Puri) ने जोर दिया कि यदि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ाया जाए या नए संसद भवन पर बने प्रतीक के आकार को छोटा किया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा। पुरी ने कहा, 'सारनाथ स्थित मूल प्रतीक 1.6 मीटर ऊंचा है जबकि नए संसद भवन के ऊपर बना प्रतीक विशाल और 6.5 मीटर ऊंचा है।' भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा, ‘कोई बदलाव नहीं है। विपक्ष 2डी तस्वीरों की तुलना भव्य 3डी संरचना से कर रहा है।’
नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने कई राज्यों में जारी तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ अंतरिम निर्देश देने से बुधवार को इनकार करते हुए कहा कि वह अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोकने के लिए सर्वव्यापी आदेश पारित नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की एक पीठ ने सभी पक्षों से मामले से जुड़ी दलीलों को पूरी करने को कहा और फिर तोड़फोड के खिलाफ जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दायर याचिका को 10 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया। पीठ ने कहा, ‘‘ कानून का पालन करना होगा, इसे लेकर कोई विवाद नहीं है। किन्तु क्या हम एक सर्वव्यापी आदेश पारित कर सकते हैं? ऐसा सर्वव्यापी आदेश पारित करने से क्या हम अधिकारियों को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं रोकेंगे।’’ शीर्ष अदालत मुस्लिम निकाय द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि हिंसा के हालिया मामलों में कथित आरोपियों की संपत्तियों में और तोड़-फोड़ न की जाए।
कानपुर : शहर में 3 जून को हुई हिंसा की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कोर्ट में केस डायरी दाखिल की है। पिछले महीने कानपुर में पथराव के बाद हिंसक झड़पें हुई थीं। उस समय एक स्थानीय संगठन ने निलंबित भाजपा नेता नुपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी के विरोध में बंद का आह्वान किया था। केस डायरी पब्लिक प्रोसिक्यूटर दिनेश अग्रवाल ने दायर की है। एसआईटी की जांच के मुताबिक, उपद्रवियों को हिंसा फैलाने के लिए पैसे दिए गए थे। पेट्रोल बम फेंकने वालों को 5000 रुपये केस डायरी में कहा गया है कि पथराव करने वालों को कथित तौर पर 500-1,000 रुपये दिए गए थे। जिन लोगों ने दंगों के दौरान पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया था, उन्हें कथित तौर पर 5,000 रुपये का भुगतान किया गया था। एसआईटी ने बताया कि पकड़े जाने पर बदमाशों को मुफ्त कानूनी मदद का आश्वासन दिया गया। केस डायरी में बताया गया है कि उपद्रवियों को हंगामे के लिए सात से नौ दिन की ट्रेनिंग दी गई थी। 3 जून को हुई कानपुर हिंसा में अब तक 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसा मामले में पुलिस पर भी गिरी थी गाज नूपुर शर्मा के बयान के बाद कानपुर में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के करीब एक महीने के बाद 3 थानेदारों पर कार्रवाई हुई थी। इसमें से 2 थानेदार सस्पेंड हुए थे, जबकि एक को लाइनहाजिर किया गया था। प्रभारी निरीक्षक बेकनगंज नवाब अहमद और प्रभारी निरीक्षक बजरिया संतोष कुमार सिंह निलंबित कर दिए गए थे। वहीं प्रभारी निरीक्षक चमनगंज जैनेन्द्र सिंह लाइन हाजिर हुए थे। मामले में पुलिस ने मास्टर माइंड हयात जफर और उसके साथी जावेद अहमद खान, मो सूफियान और मोहम्मद राहिल को जेल भेजा था। बिल्डर-नेता कनेक्शन पर भी नजर कानपुर में हिंसा मामले में जांच की आंच सफेदपोशों तक भी जाने लगी थी। खबर थी कि मामले की जांच कर रही एटीएस के रडार पर 22 नेता हैं। अधिकारियों ने जांच के दौरान गहन छानबीन के बाद इन सफेदपोशों की एक सूची बनाई थी। बताया जा रहा था कि इसमें एक महिला का नाम भी शामिल है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जुमे की नमाज के तुरंत बाद परेड, नयी सड़क और यतीमखाना समेत कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी।
नई दिल्ली: एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल पर वहीं के पत्रकार नुसरत मिर्जा के खुलासे से भारत में सनसनी मच गई है। यूट्यूबर शकील चौधरी के साथ बातचीत में मिर्जा ने कहा कि उन्हें तत्कालीन उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी और एक अंग्रेजी अखबार मिली गजट के संस्थापक जफरूल इस्लाम खान के न्योते पर भारत आए थे। उन्हें भारत में कई संवेदनशील खुफिया सूचनाएं हासिल हुईं जिन्हें उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को पास किया। मिर्जा के इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा बरप गया है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म ट्विटर पर लोग हामिद अंसारी और जफरूल इस्लाम खान के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को भी कोस रहे हैं जो उस वक्त केंद्र की सत्ता में थी। बात 2011 की है। उस वक्त मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। विस्फोटक है यह खुलासा चर्चित मुद्दों पर मुखर रहने वाली सोनम महाजन ने पाकिस्तानी पत्रकार के खुलासे को विस्फोटक बताया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'पाकिस्तानी स्तंभकार नुसरत मिर्जा कांग्रेस के शासनकाल में कई बार भारत आए और अब कैमरे पर खुलेआम दावा कर रहे हैं कि वो भारत में मिली जानकारियों को आईएसआई को पास किया करते थे। उनका दावा है कि हामिद अंसारी और मिल्ली गजट के जफरूल इस्लाम खान ने उन्हें न्योता दिया था।' हामिद पर एनके सूद ने लगाया था गंभीर आरोप इस मौके पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व अधिकारी एनके सूद के हामिद अंसारी के खिलाफ लगाए आरोपों को याद किया जा रहा है। सूद के तीन साल पुराने उस ट्वीट को अंसारी की संदेहास्पद शख्सियत के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है। गरुड़ प्रकाशन के संस्थापक संक्रान्त सानु ने सूद के ट्वीट को रीट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, 'कांग्रेस ने हामिद अंसारी को उप-राष्ट्रपति बनाया, कोई हैरत की बात नहीं। लेकिन बीजेपी ने यह सब नजरअंदाज कर दिया, यह बहुत दुखद है।' हामिद ने तेहरान में राजदूत होते हुए रॉ को किया था एक्सपोज: सूद दरअसल, पूर्व रॉ ऑफिसर ने ट्वीट में कहा है कि हामिद ईरान की राजधानी तेहरान में राजदूत रहते हुए भारतीय हितों के खिलाफ काम कर रहे थे। उन्होंने लिखा, 'मैं ईरान के तेहरान में था और हामिद अंसारी वहां राजदूत थे। अंसारी ने तेहरान में रॉ के सेट-अप को एक्सपोज करके इसके अफसरों की जान खतरे में डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी व्यक्ति को लगातार दो बार देश का उप-राष्ट्रपति बना दिया गया।' संक्रान्त ने सूद के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया है। 'ऊंचे पद पाकर भारत को नुकसान पहुंचाते हैं ऐसे लोग' विक्रांत कुमार ने लिखा है, '(आप सरकार द्वारा नियुक्त) दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और मिली गजट के संपादक जफरूल इस्लाम खान पर 2021 में राजद्रोह का मुकदमा हुआ है। हामिद अंसारी भारत के पूर्व राजदूत और पूर्व उप-राष्ट्रपति। दोनों आईएसआई को सूचनाएं पास करने के आरोपी हैं। (पाकिस्तानी पत्रकार का) का दौरा अमन की आशा के तहत हुआ होगा।' वहीं, सुभाष कुमार शर्मा लिखते हैं, 'कई लोगों के लिए यह आंखें खोलने वाली हैं। हालांकि कई लोगों को पहले से पता होगा। कांग्रेस, हामिद अंसारी और उनके जैसे लोगों ने ऊंचे पद पाकर भारत का बहुत नुकसान किया है। अब वक्त आ गया है कि उन सबसे हिसाब लिया जाए।' खुलासे के बाद भी कुछ नहीं होगा! ट्विटर यूजर शिवांगिनी का कहना है कि अब हो-हल्ला करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने भारत के सरकारी तंत्र और समाजिक परिस्थितियों पर मायूसी जाहिर की और लिखा, 'चीखने-चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि हामिद अंसारी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। अदालतें तो उनका सम्मान करेंगी। मोदी और शाह को भी किसी चीज में टैग करना बेकार ही है। अपना काम कीजिए, पैसे कमाइए और जितना संभव है टैक्स चुराइए। जिंदगी को खतरे में डालने से बचिए और अपनी प्रगति पर ध्यान दीजिए।'
नई दिल्ली: नई दिल्ली: पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के भारत में मेहमान बनकर आने और जासूसी करने के दावे से पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी फिर से बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अंसारी पर देशविरोधी कार्यों में संलिप्त होने का गंभीर आरोप लगाया और गांधी परिवार से पूछा कि क्या अंसारी ने ये सब उनके निर्देश पर किया था। भाटिया ने कहा कि अंसारी ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तानी पत्रकार को पांच बार न्योता देकर भारत बुलाया और उनके साथ खुफिया जानकारी साझा की। उन्होंने हामिद अंसारी की नीयत के साथ-साथ आतंकवाद पर कांग्रेस की तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने चुप्पी नहीं तोड़ी तो इसका मतलब है कि अंसारी ने सारा खेल उन्हीं के निर्देशों पर खेला था। अंसारी ने संवैधानिक पद पर रहकर गोपनीय जानकारियां साझा कीं?' भाटिया ने आज के प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'नुसरत मिर्जा पाकिस्तानी पत्रकार हैं और उन्होंने ये खुलासा किया है कि भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी उन्हें 2005-2011 के बीच में पांच बार न्योता देकर भारत बुलाते हैं। पत्रकार से अंसारी ने जो जानकारी साझा कि वह गोपनीय है।' उन्होंने कहा, 'उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक होता है और उन्हें कई गोपनीय जानकारी होती है। पांच बार पाकिस्तानी पत्रकार को गोपनीय जानकारी दी गई और उसने फिर इसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया। आईएसआई के साथ जानकारी साझा की गई भारत को कमजोर करने के लिए।' बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'देश की जनता पूछना चाहती है कि आतंकवाद का खात्मा करने की क्या कांग्रेस की क्या यही नीति थी कि खुफिया जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा कर रहे थे। हामिद अंसारी को देश की जनता ने आदर दिया, बदले में उन्होंने क्या दिया? क्या यह कांग्रेस पार्टी को जवाब नहीं देना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ?' आंतकवाद पर कांग्रेस की जहरीली सोच: बीजेपी भाटिया ने कहा कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को हामिद अंसारी ने 2010 में आतंकवाद पर हो रहे सेमिनार में भारत आकर बोलने को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हम कैसे लड़ें। उन्होंने कहा, 'वह व्यक्ति जो आईएसआई से जानकारी साझा करता है, उसे निमंत्रण देकर बुलाते हैं, यह कांग्रेस की जहरीली सोच है। एक तरफ मोदी जी का संकल्प है कि आतंकवाद का खात्मा करेंगे, दूसरी तरफ कांग्रेस की ऐसी सोच है।' उन्होंने कहा की देश के हर राजनीतिक दल को आंतकवाद पर कांग्रेस से यह सवाल पूछना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता ने पूछा- पाकिस्तानी पत्रकार को विशेष सुविधा क्यों? भाटिया ने पाकिस्तानी पत्रकार के एक और दावे के हवाले से कांग्रेस सरकार की नीतिगत खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा, 'पत्रकार ने खुद कहा कि वैसे तो भारत में तीन शहरों में जाने का वीजा मिलता है, पर मुझे सात शहरों का मिला।' उन्होंने मामले में सोनिया और राहुल गांधी से बयान देने की मांग की। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, 'राहुल जी देश में नहीं है पर उम्मीद है कि संज्ञान लेंगे और उत्तर देंगे।' सारी बातें खुलकर बताएं अंसारी: भाटिया भाटिया ने हामिद अंसारी से भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि जब यह बात सार्वजनिक हो गई है कि हामिद अंसारी ने उसे (पाकिस्तानी पत्रकार को) संवेदनशील जानकारी दी तो अब वह सारी यात्राएं देश की जनता से साझा करें। उन्होंने कहा, 'क्या यह सच है कि इस पाकिस्तान पत्रकार को पांच बार निमंत्रण देकर बुलाया गया?' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और हामिद अंसारी ने गोपनीय और संवेदनशील जानकारी इस पत्रकार को ऑफिशियली या अनऑफिशियली दी है, उसे मौजूदा सरकार के साथ साझा करें। ये दिखाएगा कि आप देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। भाटिया ने पूछा कि क्या यह जानकारी थी कि ये पत्रकार सारी जानकारी आईएसआई को दे रहा है? क्या ऐसा था कि वे निर्देश गांधी परिवार से मिल रहे थे? अंसारी ने राजदूत रहकर भी भारत के खिलाफ काम किया: बीजेपी बीजेपी प्रवक्ता ने अंसारी पर भारत का राजदूत रहते भी देशविरोधी काम करने का बहुत गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के एंबेसेडर रहकर भी हामिद अंसारी भारत की सुरक्षा में ही सेंध लगा रहे थे। वहां पर सरकार के कई कार्यक्रम होते हैं जिनसे देश की अखंडता को मजबूती मिलती है। सीक्रेट ऑपरेशन भी होते हैं। भाटिया ने कहा, 'अंसारी ने इस तरह की जानकारी उन्हें दी। सीक्रेट काम करने वालों की पहचान उजागर कर उनकी जान खतरे में डाली। कांग्रेस अपनी ओछी गंदी राजनीति करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। यहां तक कि देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर सकती है।' उन्होंने कहा कि अगर सोनिया-राहुल इन सवालों पर चुप रहते हैं तो साफ होगा कि वे और हामिद अंसारी ने यह पाप किया है। बीजेपी को हाथ लगा बड़ा मौका ध्यान रहे कि पाकिस्तान के एक यूट्यूब चैनल पर वहां के पत्रकार नुसरत मिर्जा ने दावा किया कि वो तत्कालीन उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी और मिल्ली गजट के संपादक जफरुल इस्लाम खान के न्योतों पर कई बार भारत आए और वहां उन्हें खुफिया जानकारियां हाथ लगीं। मिर्जा ने दावा किया कि वो पाकिस्तान लौटकर ये गोपनीय जानकारियां वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई से साझा किया करते थे। जफरूल इस्लाम खान बाद में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष बने। वहीं, पूर्व रॉ ऑफिसर एनके सूद का दावा है कि हामिद अंसारी ने तेहरान में भारत के राजदूत रहते हुए रॉ की गतिविधियों को उजागर कर दिया था जिससे उनकी यूनिट खतरे में आ गई थी। बीजेपी ने इन दोनों मुद्दों पर ना सिर्फ हामिद अंसारी बल्कि कांग्रेस पार्टी को भी घेरा है।
योगी आदित्यनाथ ने माफियाओं पर करारा हमला बोला। 50.10 लाख गन्ना किसानों के बीच शेयर सर्टिफिकेट के वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इसे देश में सहकारिता आंदोलन को पुनर्जीवित करने का अभियान करार दिया। सीएम ने कहा कि अन्नदाता किसान हमारे लिए हमेशा सम्माननीय रहे हैं। किसानों को लेकर पूर्व की सरकारों में केवल घोषणाएं किए जाने पर भी योगी ने करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें अनिर्णय का शिकार थीं। वे एकतरफा फैसले लेती थीं। पिछली सरकारों में जो भी फैसले होते थे, वे न तो चीनी मिल के पक्ष में होते थे और न ही गन्ना किसानों के पक्ष में। उनके फैसले अपने हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अन्नदाता किसानों का एक भी पैसा दबाने का दुस्साहस कोई न कर सके, हम इस दिशा में अपना कार्यक्रम आगे बढ़ा रहे हैं। यूपी सरकार ने ई-पर्ची के माध्यम से हर किसान को राहत दी है। गन्ना माफिया की कमर तोड़ने का कार्य किया है। सीएम योगी ने पराली लगाने की समस्या को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बायोफ्यूल लगाने के नए-नए उद्योग लगाने की कार्रवाई शुरू की गई है। इससे अब किसानों को पराली जलाने की नौबत नहीं आएगी। सीएम योगी ने किसानों को इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पूरे देश में बड़े पैमाने पर बायोफ्यूल के उद्यम लगाने की योजना तैयार की है। जिस प्रकार से चीनी मिल मिल में पहले केवल चीनी का उत्पादन होता था और अन्य सामग्रियों को बहा दिया जाता था। अब वहां गन्ना के हर भाग का उपयोग होता है। चीनी, शीरा और बगास का उत्पादन हो रहा है। इससे चीनी मिलों में आय बढ़ाई गई है। बायो फ्यूल के उद्यम लगने से पराली को खरीदने जब लोग आएंगे तो इसको जलाने की नौबत नहीं आएगी।
लखनऊः विश्व जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर जनसंख्या नियंत्रण कानून को हवा दे दी है। सिर्फ वही नहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाने की मांग की है। ऐसे में एक बार फिर इस मुद्दे पर सुगबुगाहट बढ़ गई है कि क्या बीजेपी सरकार जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए कोई कानून लाने की तैयारी में है?, जिसकी पहले से ही भूमिका बनाई जा रही है। योगी आदित्यनाथ के सोमवार के भाषण ने तो यह भी संकेत कर दिया है कि बीजेपी के जनसंख्या नियंत्रण की चिंताओं में सबसे प्रमुख बिंदु क्या है? क्या कहा योगी ने योगी ने अपने भाषण में जनसंख्या नियंत्रण के कानूनों की सराहना की लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत कर दिया कि इसके लिए सिर्फ 'मूल निवासियों' को ही इन्फोर्समेंट के जरिए जागरूक नहीं किया जाना चाहिए बल्कि धर्म, जाति, मजहब से ऊपर उठकर इन कार्यक्रमों में सहभागिता करनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ की चिंता दरअसल भारतीय जनता पार्टी और इसके समवैचारिक संगठनों की कथित तौर पर अल्पसंख्यकों की बढ़ती आबादी की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है। लखनऊ में जनसंख्या दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसे लेकर योगी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण का कार्यक्रम सफलतापूर्वक बढ़े लेकिन डेमोग्राफी में असंतुलन न हो। ऐसा न हो कि किसी वर्ग की आबादी बढ़ने की स्पीड ज्यादा हो और कुछ लोग जो मूलनिवासी हैं, उन लोगों की आबादी के स्थिरीकरण में हम लोग जागरूकता इन्फोर्समेंट के माध्यम से उनको नियंत्रित करके जनसंख्या संतुलन की स्थिति पैदा करें। योगी ने आगे कहा कि कहा कि यह एक चिंता का विषय है हर उस देश के लिए जहां अंसतुलन की स्थिति पैदा होती है। रिलिजियस डेमोग्राफी पर इसका असर पड़ता है और वहां पर एक समय के बाद अव्यवस्था, अराजकता जन्म लेने लगती है। सिर्फ योगी ही नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार बबलू भी जनसंख्या नियंत्रण पर कानून की मांग कर चुके हैं। बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने तो प्राइवेट मेंबर बिल के तहत जनसंख्या नियंत्रण बिल भी सदन में पेश कर दिया था। बीजेपी सांसद ने पेश किया था बिल हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के बिल पर चर्चा से इनकार के बाद सिन्हा ने अपना बिल वापस ले लिया। इन नेताओं के अलावा भी बीजेपी नेता समय-समय पर जनसंख्या नियंत्रण पर कानून की वकालत करते रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दलों में इसे लेकर कोई खास उत्साह दिखाई नहीं देता। उल्टा बीजेपी नेताओं की मांग पर विपक्षी दलों के नेता बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने लगते हैं। ओवैसी ने कहा, कोई जनसंख्या विस्फोट नहीं ऐसे ही जनसंख्या नियंत्रण पर सोमवार को योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद मजलिस के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया भारत में कोई जनसंख्या विस्फोट नहीं है। चिंता एक स्वस्थ और उत्पादक युवा आबादी को सुनिश्चित करने की है, जिसमें मोदी सरकार बुरी तरह से नाकामयाब है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनसंख्या दिवस पर संघी फेक न्यूज फैलाने में समय बिताएंगे लेकिन सच यह है कि मोदी के शासन में भारत के युवा और बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। भारत के कम से कम आधे युवा बेरोजगार हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चों का घर है। क्या होंगे जनसंख्या कानून के प्रावधान जनसंख्या नियंत्रण कानून बिल, 2021 की सिफारिशों की बात करें तो इसमें कहा गया है कि जिन माता-पिता के दो से ज्यादा बच्चे होंगे, उनसे कई तरह की सुविधाएं वापस ले ली जानी चाहिए। इसमें ऐसे लोगों को किसी भी तरह का चुनाव लड़ने, पार्टी बनाने, किसी दल का पदाधिकारी बनने पर रोक लगा देनी चाहिए। इतना ही नहीं, ऐसे लोग केंद्र सरकार की कैटिगरी ए से लेकर डी तक की नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। सरकारी सुविधाएं मसलन- मुफ्त भोजन, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं के दायरे से भी ऐसे लोग बाहर रहेंगे। यूपी में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कानून के प्रारूप में तो यह भी प्रावधान है कि जो माता-पिता दो बच्चों के मानदंड को अपनाएंगे, उन्हें सरकारी नौकरी में दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि मिलेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत पूरे वेतन और भत्तों के साथ 12 महीने की छुट्टी का भी प्रावधान है।
नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों, एनजीओ प्रतिनिधियों और अन्य के खिलाफ एक आरोपपत्र दायर किया है। इन लोगों को गैर सरकारी संगठनों (NGO) को देश के विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन करते हुए विदेशी चंदों को मंजूरी दिलाने में कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी अधिकारियों ने सोमवार को दी। अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने आरोपपत्र शनिवार को एक विशेष अदालत के समक्ष दायर किया। उन्होंने बताया कि यह आरोप पत्र 11 मई को गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर दायर किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों का यह जुर्म है अधिकारियों ने कहा कि यदि सीबीआई 60 दिन की समयसीमा से चूक जाती तो गिरफ्तार आरोपी एक विशेष अदालत से वैधानिक जमानत के लिए पात्र हो जाते। आरोप लगाया गया था कि कई अधिकारी विदेशी चंदा (विनियमन) कानून (एफसीआरए) नियमों के कथित उल्लंघन में गैर सरकारी संगठनों को विदेशी चंदा की मंजूरी दिलाने में रिश्वतखोरी में शामिल थे। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने आरोपपत्र में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए हैं, क्योंकि जांच अभी जारी है। एजेंसी ने गृह मंत्रालय की एक शिकायत पर 10 मई को 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन लोगों में गृह मंत्रालय के विदेशी चंदा (विनियमन) कानून (FCRA) डिवीजन के सात अधिकारियों के साथ ही एनजीओ के प्रतिनिधि और कुछ बिचौलिए शामिल हैं। अगले दिन, एजेंसी ने देशव्यापी कार्रवाई में 40 स्थानों पर छापेमारी के बाद मंत्रालय के छह सेवारत अधिकारियों सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों को जानिए गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में गृह मंत्रालय के अधिकारी वरिष्ठ लेखाकार प्रमोद कुमार भसीन, लेखा अधिकारी आलोक रंजन, लेखाकार राज कुमार, सहायक निदेशक शाहिद खान, गृह मंत्रालय के अधिकारी मोहम्मद गजनफर अली और तुषार कांति रॉय शामिल हैं। इनमें से कुछ मंत्रालय के एफसीआरए डिवीजन में काम कर रहे थे, जबकि कुछ ने पहले काम किया था। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान एनजीओ के प्रतिनिधियों सहित आठ व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया था। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सीबीआई को लिखा था पत्र केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने 29 मार्च को सीबीआई को भेजे पत्र में कहा था कि कम से कम तीन एफसीआरए मंजूरी नेटवर्क कुछ सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत में काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के साथ संबंध रखने वाले तीन नेटवर्क एफसीआरए मंजूरी में तेजी लाने और नए पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए आवेदन प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए कथित तौर पर "स्पीड मनी" और "समस्या समाधान शुल्क" लेते थे। भल्ला ने सीबीआई निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल को भी कथित धोखाधड़ी की गहन जांच के लिए सरकार की मंजूरी से अवगत कराया था और उनसे आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। गृह मंत्री अमित शाह को घटनाक्रम के बारे में जानकारी दिए जाने के बाद गृह सचिव ने सीबीआई प्रमुख को पत्र भेजा था और उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था।
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कथित चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार की आलोचना के लिए सोमवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि क्या विपक्षी दल को सेना के बयान पर विश्वास नहीं है। कांग्रेस (Congress) ने भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ बढ़ने की बात करते हुए इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है। प्रतिक्रिया में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भी पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) बिपिन रावत की ओर से ऐसे दावों को खारिज किये जाने का जिक्र किया है। त्रिवेदी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा क‍ि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि उसे भारतीय सेना पर भरोसा है या नहीं, उसे भारतीय सेना प्रमुख के जवाब पर भरोसा है या नहीं? या आप उनके बयान पर राजनीति करना चाहते हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि भारतीय क्षेत्र में 'बढ़ती चीनी घुसपैठ' और इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'चुप्पी' देश के लिए 'बहुत नुकसानदायक' हैं। गौरव गोगोई ने चीनी घुसपैठ पर मोदी सरकार के ख‍िलाफ बोला था हमला कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने एक अलग पत्रकार वार्ता में कहा था कि प्रधानमंत्री को भारत में कथित चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर देश को विश्वास में लेना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के विषयों पर ध्यान देने को कहा। सरकार पर निशाना साधने के लिए गोगोई की ओर से एक लोकप्रिय फिल्म के नाम के संक्षिप्त रूप ‘डीडीएलजे’ का इस्तेमाल किये जाने पर प्रतिक्रिया में त्रिवेदी ने एक अन्य प्रसिद्ध फिल्म के संक्षिप्त नाम ‘क्यूएसक्यूटी’ का जिक्र किया और कहा कि यह विपक्षी दल के भीतर के हालात को बिल्कुल सही तरीके से बयां करता है। उन्होंने कहा क‍ि कयामत का हाल है। 'अपने व‍िधायकों के असंतोष से जूझ रही कांग्रेस' त्रिवेदी जाहिर तौर पर कांग्रेस के भीतर उठ रहे विद्रोह के स्वर और विशेष रूप से गोवा के ताजा हालात की ओर इशारा कर रहे थे जहां कांग्रेस अपने विधायकों के असंतोष से जूझ रही है। गोगोई ने कहा था कि चीन के साथ सीमा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति को 'डीडीएलजे' - डिनाई (इनकार करना), डिस्ट्रैक्ट (ध्यान हटाना), लाई (झूठ बोलना), जस्टिफाई (सही ठहराना) से समझा जा सकता है। नेशनल हेराल्ड मनी लॉड्रिंग केस को लेकर कांग्रेस को घेरा त्रिवेदी ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉड्रिंग केस में कांग्रेस नेताओं की कथित संलिप्तता के मुद्दे पर भी विपक्षी दल पर निशाना साधा और कहा कि यह एकमात्र पार्टी होगी जिसकी अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत पर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब 2004 से 2014 तक 10 साल सत्ता में थी तो उसने नेशनल हेराल्ड को छापने वाली और पार्टी से जुड़ी कंपनी एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड की 90 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने में मदद नहीं की, वहीं राजीव गांधी फाउंडेशन को इस अवधि में सरकार के विभागों समेत अनेक स्रोतों से 100 करोड़ रूपये से अधिक चंदा मिला। गांधी पर‍िवार पर बोला हमला उन्होंने कहा क‍ि आपने (गांधी) परिवार से जुड़े एक फाउंडेशन की इतनी मदद की लेकिन कर्ज में डूबी एक कंपनी की मदद नहीं की। ऐसा इसलिए कि आप कर्ज में डूबी कंपनी की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहते थे। त्रिवेदी ने मांग की कि कांग्रेस को इस पर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने इस संबंध में सोनिया और राहुल के खिलाफ मामले दर्ज होने के पीछे बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है।
नयी दिल्ली,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को नये संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के अनावरण पर विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना को राजनीति से प्रेरित करार दिया। कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) जैसे विपक्षी दलों ने मोदी द्वारा अनावरण की आलोचना करते हुए कहा कि यह संविधान का ‘‘उल्लंघन’’ है, जो कार्यपालिका और विधायिका के बीच सत्ता के बंटवारे को सुनिश्चित करता है। मोदी ने नए संसद भवन की छत पर लगे राष्ट्रीय चिह्न का अनावरण किया और वहां एक धार्मिक समारोह में भी शामिल हुए। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी दल एक और निराधार आरोप लगा रहे हैं, जिससे उनके राजनीतिक मकसद की बू आती है।’’ उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भवन को संसद प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘अनावरण समारोह पर सवाल उठा रहे विपक्षी दलों को प्रशासनिक प्रक्रिया को समझना चाहिए। संसद के डिजाइन से लेकर कोष और निर्माण पर्यवेक्षण तक पूरा काम शहरी विकास मंत्रालय के दायरे में आता है।’’ बलूनी ने कहा कि इसका शिलान्यास भी प्रधानमंत्री ने किया था।
नयी दिल्ली,पूर्व न्यायाधीशों और अधिकारियों के एक समूह ने मंगलवार को कहा कि कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों की समाज के एक वर्ग द्वारा की जा रही निंदा ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ है। समूह ने सीतलवाड़ के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने का भी समर्थन किया। इस संबंध में 190 पूर्व न्यायाधीशों और अधिकारियों के समूह ने एक बयान में कहा कि सीतलवाड़ और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया जाना कानून के अनुरूप है तथा आरोपी हमेशा न्यायिक उपचार का सहारा ले सकते हैं। बयान में कहा गया, "राजनीतिक रूप से प्रेरित नागरिक समाज के एक वर्ग ने बड़े पैमाने पर न्यायपालिका की ईमानदारी पर आक्षेप लगाने का प्रयास किया है और इस मामले में, इस वर्ग ने न्यायपालिका पर उन टिप्पणियों को हटाने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया है जो सीतलवाड़ और उन दो दोषी पूर्व-आईपीएस अधिकारियों के विरुद्ध हैं जिन्होंने सबूत गढ़ने का काम किया।" समूह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक ऐसे मामले में कार्रवाई की जो उसके अधिकार क्षेत्र में था और उसकी कार्यवाही में संशोधन के लिए कोई भी कार्रवाई एक नियमित प्रस्ताव के रूप में होनी चाहिए। इसने कहा कि यहां तक कि नागरिक समाज के इस वर्ग का दावा है कि नागरिक पूरी तरह से व्यथित हैं और अदालत के आदेश से निराश हैं। तेरह सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, 90 पूर्व नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के 87 पूर्व अधिकारियों ने अपने बयान में कहा कि कानून का पालन करने वाले नागरिक कानून के शासन को बाधित किए जाने के प्रयास से व्यथित और निराश हैं। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति आर.एस. राठौर, एस.एन. ढींगरा और एम.सी. गर्ग के अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारियों-संजीव त्रिपाठी, सुधीर कुमार, बी. एस. बस्सी और करनल सिंह, पूर्व आईएएस अधिकारियों- जी प्रसन्ना कुमार और पी चंद्रा तथा लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) वी. के. चतुर्वेदी हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल हैं।
मुंबई: आगामी 18 जुलाई को देश के राष्ट्रपति पद (Presidential Election 2022) का चुनाव होना है जिसमें एनडीए (NDA) की तरफ से द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को उम्मीदवार बनाया गया है। जबकि उनके विरोध में विपक्षी दलों द्वारा यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) को उम्मीदवार बनाया गया है। महाराष्ट्र (Maharashtra) में फिलहाल शिवसेना (Shivsena) ऐसे मोड़ पर खड़ी है। जहां एक तरफ खाई है तो दूसरी तरफ कुआं है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) इस वक़्त असमंजस की स्थिति से गुजर रहे हैं। उसके सामने एक तरफ पार्टी को बचाने की जिम्मेदारी है तो दूसरी तरफ अगर वह मुर्मू को समर्थन देते हैं तो महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) से निकलना पड़ सकता है। इस बारे में मंगलवार सुबह शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह इशारा दिया है कि शिवसेना, द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन दे सकती है। दरअसल राउत ने आज सुबह कहा कि मुर्मू को समर्थन देने का मतलब बीजेपी को समर्थन देना नहीं है। आइये समझते हैं कि इस मामले में शिवसेना और उद्धव ठाकरे के पास क्या विकल्प हैं? मुर्मू को समर्थन उद्धव की मजबूरी महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में यह खबर भी आम है कि उद्धव ठाकरे द्वारा द्रौपदी मुर्मू का समर्थन एक राजनीतिक मजबूरी भी है। इस बारे में एनबीटी ऑनलाइन ने संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुरेश माने से बातचीत की। उन्होंने बताया कि फिलहाल इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शिवसेना के तमाम सांसद यह चाहते हैं कि इस बार पार्टी एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन दे। इस बारे में लिखित और मौखिक रूप से सांसदों ने अपनी मांग उद्धव ठाकरे के सामने रखी है। उद्धव ठाकरे यह भी जानते हैं कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो बागी विधायकों की तरह उनके सांसद भी उन्हें धोखा दे सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी का व्हिप लागू नहीं होता। इसका सीधा मतलब यह है कि सांसद अपनी मर्जी के मुताबिक मतदान कर सकते हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे मौजूदा सियासी हालातों में सांसदों पर दबाव भी नहीं बना सकते। लिहाजा उनके लिए सांसदों की बात मानने वाला रास्ता ज्यादा मुफीद रहेगा। महाविकास अघाड़ी से निकलेगी शिवसेना? सुरेश माने ने बताया, माना जा रहा है कि द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के बाद शिवसेना महाविकास अघाड़ी से निकल सकती है। इसके पीछे भी कई वजहें हैं। जिस दिन उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उसके कुछ घंटों पहले ही उन्होंने औरंगाबाद समेत तीन शहरों का नाम बदला था। ठाकरे ने औरंगाबाद को संभाजीनगर का नाम दिया था। इस बात का विरोध एमवीए में शामिल कांग्रेस ने भी किया था। इसके अलावा शरद पवार ने यह कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी आदेश पारित करने के बाद दी गई। औरंगाबाद शहर का नाम बदलना भी एमवीए में मतभेद का एक बड़ा कारण है। दूसरी वजह यह भी है कि इस वक़्त उद्धव ठाकरे के सामने महाविकास अघाड़ी में बने रहने से ज्यादा जरूरी अपनी हर दिन बिखरती हुई पार्टी को बचाना है। सुरेश माने ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी बन सकती है कि एनडीए की बैठक में उद्धव ठाकरे के विरोधी गुट के एकनाथ शिंदे को भी बुलाया गया है। इस बात पर शिवसेना अपना एतराज जता सकती है। इसका मतलब यह भी होता है कि एक तरह से शिवसेना को कम आंकने की कोशिश की जा रही है। जबकि अभी तक इस बात का फैसला नहीं हुआ है कि शिवसेना वाकई में किसकी है। पवार को भी चाहिए शिवसेना का साथ? सुरेश माने के मुताबिक़ मुर्मू को समर्थन देना देने से उद्धव ठाकरे से शरद पवार नाराज भी हो सकते हैं। इस बात की भी संभावना है कि उद्धव ठाकरे आने वाले दिनों में महाविकास अघाड़ी सरकार से निकल भी जाएं। इस बात की भी उतनी ही संभावना है कि दोनों ही पार्टियां फिर से एक-दूसरे के साथ हाथ मिला लें। क्योंकि दोनों ही पार्टियों की अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूरी है। यह भी हो सकता है कि शरद पवार यह मान लें कि केंद्र में शिवसेना जिसको चाहे अपना समर्थन दे सकती है। लेकिन राज्य में वह एनसीपी के साथ रहे। क्योंकि शरद पवार भी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि अकेले दम पर एनसीपी भी सत्ता में वापसी नहीं कर सकती। उन्हें शिवसेना और कांग्रेस का साथ लेना ही पड़ेगा। वहीं शिवसेना भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि मुर्मू को समर्थन देने का मतलब बीजेपी को समर्थन देना बिल्कुल नहीं है। उद्धव पर सांसदों का दबाव महाराष्ट्र के सियासी हालात पर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार सचिन परब से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस समय एनडीए के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर शिवसेना सांसदों का उद्धव ठाकरे पर जबरदस्त दबाव है। ऐसे में न चाहते हुए भी उन्हें इन सांसदों की बात को मानना पड़ेगा और मुर्मू को समर्थन देना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करने के बाद भी शिवसेना के सांसद उनके साथ रहेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेकिन उद्धव ठाकरे तब यह जरूर कह सकेंगे कि हां उन्होंने अपने पदाधिकारियों और नेताओं की बात मानी। वह इस बात का भी उदाहरण दे सकेंगे कि पार्टी ने हमेशा अच्छे और सच्चे लोगों का ही चुनाव में साथ दिया है। वह बीते राष्ट्रपति चुनावों का उदाहरण दे सकते हैं। जिसमें उन्होंने प्रणब मुखर्जी और प्रतिभा पाटील को अपना समर्थन दिया था। परब ने कहा कि उद्धव के इस फैसले से महाविकास अघाड़ी के शरद पवार और कांग्रेस नाराज हो सकते हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे इनको अपनी तरफ से मनाने की पूरी कोशिश करेंगे। क्योंकि मौजूदा सियासी हालात में कांग्रेस और एनसीपी दोनों ही दल उद्धव ठाकरे की मजबूर समझते हैं। वहीं, मुर्मू का समर्थन करके उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों को यह मौका नहीं दिया है कि वह पार्टी पर हिंदुत्व विरोधी होने का आरोप लगाकर अलग हो सकें। बावजूद इसके अभी भी शिवसेना से बगावत का खतरा टला नहीं है। मुर्मू को समर्थन का संकेत आज प्रेस कांफ्रेंस में जिस तरह से संजय राउत ने मुर्मू को समर्थन देने के संदर्भ में बात की है। उससे इस बात का संकेत मिलता है कि शिवसेना राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन दे सकती है। हालांकि इसका औपचारिक ऐलान अभी होना बाकी है। संजय राउत ने यह भी कहा कि शिवसेना इसके पहले भी गठबंधन के उम्मीदवार के विपरीत जाकर मतदान कर चुकी है। इसका उदाहरण प्रतिभा पाटिल और प्रणव मुखर्जी हैं। इन दोनों की उम्मीदवारी के समय शिवसेना ने एनडीए के खिलाफ जाकर मतदान किया था। राउत ने कहा कि शिवसेना किसी के दबाव में फैसला नहीं लेती है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के संगठनात्मक कौशल को एक नई पुस्तक में बखूबी बयां किया गया है। इसमें भाजपा के निर्माण की परंपरागत पद्धतियों में प्रयोग करने से लेकर पार्टी के विस्तार के नवोन्मेषी उपाय जैसे उनके कई कदमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। ‘दि आर्किटेक्ट ऑफ द न्यू बीजेपी: हाऊ नरेंद्र मोदी ट्रांस्फॉर्म्ड द पार्टी’ नामक पुस्तक का विमोचन रविवार को हुआ। इसकी रचना वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह ने की हैं जो वर्तमान में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रेस सचिव के तौर पर सेवा दे रहे हैं। पुस्तक का प्रकाशन पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने किया है। पुस्तक में बयां किया गया है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी के बेजोड़ संगठनात्मक कौशल ने पार्टी में उनके उदय का मार्ग प्रशस्त किया और भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) को आज के दौर में एक के बाद एक चुनाव जीतने वाली पार्टी बना दिया। पुस्तक में मोदी द्वारा 1979 में गुजरात के मच्छू बांध हादसे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तौर पर किये गये राहत कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।
नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर बेंगलुरु की एक अदालत ने एमनेस्टी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है, जिसमें इसके पूर्व सीईओ आकार पटेल भी शामिल हैं। दरअसल, ईडी ने एमनेस्टी इंडिया और आकार पटेल के खिलाफ फेमा के तहत 61.72 करोड़ रुपये के जुर्माने का नोटिस जारी किया है। इसके एक दिन बाद एजेंसी ने कहा कि उसने संगठन और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप पत्र दाखिल किया है। ईडी ने एक बयान में बताया कि अदालत ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है और आरोपियों को समन जारी किया है। 'आलोचकों पर शिकंजा केंद्र सरकार में आम बात' एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने सिलसिलेवार ट्वीट में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि दमनकारी कानूनों के तहत अपने आलोचकों पर शिकंजा कसना मौजूदा केंद्र सरकार में आम बात हो गई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, इंडियंस फॉर एमनेस्टी इंटरनेशनल ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ बेंगलुरु की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी का संज्ञान लेने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। इसके बाद एजेंसी ने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 के कथित उल्लंघन और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया। ईडी ने कहा, ‘2011-12 के दौरान एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट को एमनेस्टी इंटरनेशनल, ब्रिटेन से विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए एफसीआरए, 2010 के तहत अनुमति दी गई थी।’ जांच एजेंसी ने आगे कहा, ‘प्रतिकूल इनपुट के आधार पर इस अनुमति को बाद में रद्द कर दिया गया।’ पूरा मामला समझिए ईडी ने कहा कि इसके बाद एफसीआरए वाले रूट से बचने के लिए 2013-14 और 2012-13 में दो नई संस्थाओं- AIIPL और IAIT का गठन किया गया और इन संस्थाओं को सेवा निर्यात और एफडीआई की आड़ में विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने सफाई देते हुए एक ट्वीट में कहा, ‘हम दोहराते हैं कि वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय जांच एजेंसी ईडी का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था।’ एमनेस्टी इंडिया इंटरनेशनल ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा है, ‘ईडी की दुर्भावनापूर्ण मंशा इस तथ्य से स्पष्ट है कि कानूनी नोटिस एमनेस्टी और आकार पटेल तक पहुंचने से पहले ही उसने कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी की हैं। यह न्याय के स्वाभाविक सिद्धांतों के विपरीत है।’ मानवाधिकार समूह ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘सितंबर 2020 से एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खाते पर रोक रहने से पूर्व कर्मचारियों और कई अदालती मामलों में वकीलों को उनकी सेवाओं के लिए बकाये के भुगतान करने का भी कोई साधन नहीं हैं।’ एमनेस्टी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सदस्य के रूप में भारत को मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और संरक्षण में उच्चतम मानकों को बनाए रखने की जरूरत है। इसके विपरीत, दमनकारी कानूनों के तहत झूठे आरोपों के माध्यम से अपने आलोचकों पर शिकंजा कसना मौजूदा सरकार में आम बात हो गई है।’
चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस से निष्कासित विधायक कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi ) ने रविवार सुबह दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वहीं इस मुलाकात के बाद खुद कुलदीप बिश्नोई ने फोटो भी ट्वीट किए। इसके साथ ही बिश्नोई ने अपने ट्विटर हैंडल से सोनिया गांधी और राहुल गांधी तस्वीरें भी हटा लीं है। इस मुलाकात के बाद यह माना जा रहा है कि कुलदीप बिश्नोई जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। आपको बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुलदीप की क्रॉस वोटिंग की वजह से ही कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कांग्रेस ने कुलदीप को सभी पदों से हटा दिया था। 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव, तैयारी में जुटी बीजेपी दरअसल हरियाणा में साल 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसको लेकर भाजपा अभी से इसकी तैयारी में जुट गई है। पूर्व सीएम भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई फिलहाल अभी आदमपुर सीट से विधायक हैं। कुलदीप का नाम कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार है। ऐसे में कुलदीप को पार्टी में शामिल कराने के बाद बीजेपी कांग्रेस को एक और बड़ी चोट देने में कामयाब रहेगी। शाह और नड्डा से मुलाकात के बाद कुलदीप ने किया ट्वीट अमित शाह से मुलाकात के बाद बिश्नोई ने फोटो ट्वीट कर लिखा कि 'अमित शाह जी से मिलना एक वास्तविक सम्मान और खुशी की बात थी। एक सच्चे राजनेता, मैंने उनके साथ बातचीत में उनकी आभा और करिश्मा को महसूस किया। भारत के लिए उनका दृष्टिकोण विस्मयकारी है। 'अपनी जुबान के लिए सरे-राह हो जाना, बहुत कठिन है, अमित शाह हो जाना...' इसी तरह जेपी नड्ढा से मुलाकात पर लिखा, मैं जेपी नड्ढा जी से मिलकर अति गर्वित हुआ। उनका सहज और विनम्र स्वभाव उन्हें औरों से मिलों अलग दिखाता है। उनकी सक्षम अध्यक्षता में भाजपा ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को देखा है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।
नई दिल्‍ली: शिक्षा व्‍यवस्‍था में बड़े बदलाव की तैयारी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने इसके लिए कमर कस ली है। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के जरिये इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्‍यवस्‍था में आमूलचूल बदलाव की पैरवी की है। वह मानते हैं कि यह भारतीय मूल्‍यों पर आधारित होनी चाहिए। इसमें 'स्‍टूडेंट-फर्स्‍ट' की सोच होनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान का यह आश्‍वासन इतिहास बदलने की बढ़ती बहस के बीच आया है। उनके पूर्ववर्ती रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) और स्‍मृति ईरानी (Smriti Irani) ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए थे। लेकिन, जमीन पर ये महसूस नहीं हुए। धर्मेंद्र प्रधान ने इसका बीड़ा उठाया है। हाल में एनसीईआरटी की किताबों में कई बदलाव हुए हैं। 'आधारहीन' इतिहास पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी पर सवाल भी उठ चुके हैं। वाराणसी में तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम के समापन समारोह पर धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्‍यवस्‍था में बदलाव के संकेत दिए। उन्‍होंने ऐसी शिक्षा व्‍यवस्‍था बनाने पर जोर दिया जो भविष्‍य के लिए संभावनाएं खोलती हो। जो भारतीय मूल्‍यों पर आधारित हो। जो स्‍टूडेंट-फर्स्‍ट के सिद्धांत पर काम करती हो। धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर में शिक्षाविदों से इसमें अपना सहयोग देने की अपील की है। धर्मेंद्र प्रधान की भारत को एक सशक्‍त ज्ञान से लबरेज मुल्‍क के तौर पर देखने की इच्‍छा है। प्रधान ने इस दौरान नई शिक्षा नीति का जिक्र कर आगे का रोडमैप भी पेश किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में ऐसे कई कंपोनेंट हैं जो एजुकेशन सिस्‍टम में मील का पत्‍थर साबित हो सकते हैं। इनमें मल्‍टी-मोडल एजुकेशन, अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स, मल्‍टीपल एंट्री-एग्जिट और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। वह मानते हैं कि नौजवानों को जॉब खोजने वाला नहीं रोजगार पैदा करने वाला बनना होगा। इतिहास पर उठते रहे हैं सवाल धमेंद्र प्रधान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आगे शिक्षा व्‍यवस्‍था में बड़े स्‍तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। शिक्षा मंत्री का यह आवश्‍वासन ऐसे समय में आया है जब देशभर में इतिहास बदलने की बहस ने जोर पकड़ रखा है। यहां तक एनसीईआरटी की किताबों में कई बदलाव भी हुए हैं। यह बदलाव 2014 में एनडीए सरकार के सत्‍ता में आने के बाद से ही शुरू हो गया था। किताबों में आक्रांताओं और मुगलों के इतिहास का बखान करने वाले चैप्‍टरों को रिवाइज किया गया है। हाल में अपने नए सिलेबस में सीबीएसई ने कक्षा 10 की समाज विज्ञान की पुस्तक से पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की शायरी और 11वीं की इतिहास पुस्तक से इस्लाम की स्थापना, उसके उदय और विस्तार की कहानी को हटा दिया। इसी तरह 12वीं की किताब से मुगल साम्राज्य के शासन-प्रशासन पर एक अध्याय में बदलाव किया गया। खुद एनसीईआरटी सवालों के घेरे में चुका है। कुछ समय पहले इतिहासकार विक्रम संपत ने इसे लेकर बड़ा आरोप लगाया था। उन्‍होंने कहा था कि NCERT की किताबों में हिंदुओं के इतिहास को दबाया गया। संपत ने कई खामियां गिनाई थीं। उन्‍होंने इसके लिए 7वीं क्‍लास की हिस्‍ट्री बुक का हवाला दिया था। उन्‍होंने कहा था कि इसमें चोल साम्राज्‍य को 3 पन्‍नों में निपटा दिया गया। दिल्‍ली सल्‍तनत के लिए एक पूरा चैप्‍टर है। चैप्‍टर 4 पूरी तरह से मुगल साम्राज्‍य को समर्पित है। चैप्‍टर 5 में भी मुस्लिम शासकों की बनवाई इमारतों को तरजीह दी गई है। मुगलों के हाथों 1662 में अहोम की हार का जिक्र है। लेकिन, 1671 में हुई सरायघाट की लड़ाई का जिक्र नहीं है। भक्ति और सूफी आंदोलन को लेकर दिए गए ब्‍योरे को भी उन्‍होंने कटघरे में खड़ा किया था। इस बहस ने जल्‍द ही बड़ा रूप ले लिया था। इसके बाद कई इतिहासकारों ने एनसीईआरटी की किताबों के पन्‍ने शेयर करते हुए उनमें कमियां गिनाई थीं। तब बगले झांकने लगा था एनसीईआरटी कुछ समय पहले शिवांक वर्मा ने एनसीईआरटी से आरटीआई के जरिये कुछ जानकारी मांगी थी। यह मुगलशासकों की तरफ से युद्ध के दौरान मंदिरों को ढहाए जाने और बाद में उनकी मरम्मत कराए जाने को लेकर थी। 12वीं की हिस्ट्री की किताब में थीम्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री पार्ट-टू में इसका जिक्र है। सवाल का जवाब देने की बजाय एनसीआरटी ने दो टूक शब्दों में कह दिया था कि विभाग के पास मांगी गई जानकारी के संबंध में फाइल में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। इसके बाद सवाल उठने लगे थे। सवाल ये उठे थे कि क्या एनसीईआरटी की हिस्ट्री बुक्स में आधारहीन इतिहास पढ़ाया जा रहा है। आरटीआई में एक सवाल था कि औरंगजेब और शाहजहां ने कितने मंदिरों की मरम्मत कराई थी। यह मामला मीडिया में भी सुर्खियां बना था। बीजेपी कहां दे रही है जोर? धर्मेंद्र प्रधान से पहले स्मृति ईरानी और रमेश पोखरियाल निशंक भी भारतीय सांस्‍कृतिक मूल्‍यों की रोशनी में इतिहास और शिक्षा व्‍यवस्‍था को बदलने की कोशिश कर चुके हैं। अपने-अपने स्‍तर पर दोनों ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाए। यह और बात है कि इन कदमों का असर जमीनी स्‍तर पर महसूस नहीं हुआ। बीजेपी सरकार इस बात को कहती रही है कि मुगल विदेशी आक्रांता थे। भारतीय वीरों के शौर्य के बजाय किताबों को पढ़ने पर लगता है कि वे आक्रांताओं की गौरवगाथा बता रही हों। वह इसमें उसी के अनुसार बदलाव की पक्षधर रही है।
नई दिल्‍ली: बीजेपी के आतंकवादियों से रिश्‍ते हैं! कांग्रेस ने आतंकवादियों का साथ दिया! राजनीतिक फिजाओं में ये लाइनें बार-बार गूंज रही हैं। देश के दो प्रमुख राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आतंकवाद को शह देने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के 22 नेता शनिवार को अलग-अलग शहरों में मीडिया से मुखातिब हुए। सत्तारूढ़ बीजेपी पर आतंकवादियों के साथ कथित रिश्तों को लेकर हमला बोला। कांग्रेस उदयपुर, जम्मू-कश्मीर और अमरावती मामले में सामने आए आरोपियों के आंतकवादी कनेक्शन और उनसे बीजेपी के कथित रिश्तों को लेकर लगातार BJP से सवाल कर रही है। कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने भी तंजभरे लहजे में पलटवार किया। बीजेपी ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि 'तुष्टिकरण की नीति के चलते जिस प्रकार से कांग्रेस ने आतंकवाद का साथ दिया है, वह कांग्रेस आज इस मसले पर देश भर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है।' दोनों दलों का आतंकवाद को लेकर कैसा रुख रहा है, समझने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस ने क्‍या-क्‍या आरोप लगाए? कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि एक के बाद एक कई आतंकवादियों के तार बीजेपी से जुड़ने के सबूत मिले हैं। बीजेपी का आतंकवादियों से नाता है, यह रिश्ता क्या कहलाता है? कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि राष्ट्रवाद की आड़ में देश को अस्थिर रखने की बीजेपी की साजिश अब बेनकाब हो चुकी है। आम लोग यह समझ चुके हैं कि आतंकवाद को बढ़ावा देकर लोगों के दिलों में नफरत और भय का माहौल बनाकर बीजेपी देश पर शासन करने की रणनीति पर काम कर रही है। निरुपम ने आरोप लगाया कि बीजेपी देश में छद्म राष्ट्रवाद का प्रचार कर उसकी आड़ में देश को राजनीतिक और सांप्रदायिक तौर पर अस्थिर रखने के अजेंडे पर काम कर रही है। उनका कहना था कि अमरावती में हिंदू मुस्लिम भावना भड़काने के लिए हिंदू भाई की हत्यारे हों या अमरनाथ यात्रियों पर हमले में पकड़े गए आतंकियों की जांच हो, सभी बीजेपी के सक्रिय सदस्य निकलें। देश को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंकने के कोशिश ने दोनों संप्रदाय को दुश्मन बना दिया है। बीजेपी ने कैसे पलटवार किया? बीजेपी की ओर से संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस को इस मामले को लेकर मीडिया के सामने जाने के बजाय देश से माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी ने कांग्रेस पर 'कांग्रेस का हाथ आतंकवाद के साथ' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में हुई आतंकी घटनाओं में कांग्रेस ने जिस तरह से आतंकियों का साथ दिया है, वह सूची बहुत लंबी है। पात्रा ने आरोप लगाया कि यासीन मलिक के साथ कांग्रेस के तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने न सिर्फ तस्वीर खिंचवाई, बल्कि यूपीए सरकार के दौरान इस आतंकवादी का महिमामंडन किया गया था। बुरहान वानी को लेकर कांग्रेस ने गलत नैरेटिव फैलाया। हाफिज सईद जैसा आतंकी भी दुनिया में सिर्फ एक राजनीतिक दल कांग्रेस की तारीफ करता है। पात्रा ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों के मन में देश विरोध में धर्म को लेकर एक उन्माद पैदा करने वाले जाकिर नायक के साथ खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खड़ी थीं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के एक मंत्री सलमान खुर्शीद ने खुद दावा किया था कि बाटला हाउस एनकाउंटर में आतंकवादियों की लाश को देखकर सोनिया गांधी फूट-फूट कर रोई थीं। वहीं, राहुल गांधी जेएनयू जाकर अफजल से जुड़े बयानों का समर्थन करते हैं और इन सबके बाद भी कांग्रेस आतंकवाद को लेकर दावे करती है। बीजेपी और कांग्रेस की यह रार पुरानी है! एक-दूसरे पर आतंकवाद को हवा देने के बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के ही आरोप पुराने हैं। यह बात दीगर है कि इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ज्‍यादा हमलावर रही है क्‍योंकि कई बड़े आतंकी हमले कांग्रेस नीत सरकारों के काल में हुए। कांग्रेस के मुकाबले भाजपा के रुख में रक्षा नीति और आतंकवाद को लेकर आक्रामकता नजर आती है। वाजपेयी सरकार PoTA जैसे कानून लेकर आई थी। सैकड़ों लोगों पर PoTA के तहत कार्रवाई हुई तो कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विरोध किया। बाद में कांग्रेस नीत यूपीए ने 2004 में यह कानून रद्द कर दिया। NDA I ने पश्चिम की नाराजगी के बावजूद न्‍यूक्लियर टेस्‍ट किया। फिर करगिल से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए सेना भेज दी। खुफिया नाकामी के लिए तत्‍कालीन एनडीए सरकार की आलोचना जरूर हुई, मगर भारत अपना इलाका वापस लेने में कामयाब रहा। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अमेरिका के 'वॉर ऑन टेरर' का भी समर्थन किया। नतीजा, अमेरिका और भारत के रक्षा संबंध और मजबूत हुए। 2014 में जब एनडीए दोबारा सत्‍ता में आया तो विदेशों में काउंटर-टेररिज्‍म के नाम पर ऑपरेशन शुरू हुए। 2015 में म्‍यांमार हो या 2016 में PoK के भीतर सर्जिकल स्‍ट्राइक या 2019 की बालाकोट एयर स्‍ट्राइक... बीजेपी ने संदेश यही दिया कि आतंकवाद के खिलाफ ऐक्‍शन लेने से वह हिचकेगी नहीं। 2017 के डोकलाम तनाव के दौरान भी मोदी सरकार का रुख अडिग रहा। हालांकि, पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीन के साथ पिछले दो साल से तनाव बरकरार है जिसे सरकार की असफलता और कमजोरी के रूप में देखा जाता रहा है। 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने UAPA में संशोधन किया और आतंकवाद के खिलाफ प्रावधान और कड़े कर दिए। उसी साल जम्‍मू कश्‍मीर का विशेष दर्जा खत्‍म किया गया। घाटी में आतंकवादियों को फंडिंग करने वालों की धरपकड़ तेज हुई। यासीन मलिक जैसे आतंकवादी आज जेल में हैं। हालांकि, NDA II के दौरान, गुरुदासपुर, पठानकोट, उरी, पुलवामा जैसे आतंकवादी हमले भी हुए। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ऐसी पार्टी है जो आतंकवाद या आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई से घबराती है। 26/11 के बाद तत्‍कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने रणनीतिक संयम दिखाया जिसकी आज भी आलोचना होती है। सेना ने तब भी विकल्‍प दिए थे मगर सरकार पीछे हट गए। इसके उलट, जब उरी में आतंकी हमला हुआ तो एनडीए सरकार ने सर्जिकल स्‍ट्राइक कर दी। इशरत जहां केस, बाटला हाउस एनकाउंटर... बीजेपी ने कई ऐसे वाकये गिनाए जब कथित रूप से कांग्रेस आतंकवाद के प्रति नरम रही।
नई दिल्‍ली/श्रीनगर: राष्‍ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्‍मीदवार यशवंत सिन्‍हा समर्थन जुटाने शनिवार को जम्‍मू-कश्‍मीर पहुंचे। सिन्‍हा ने मीडिया के सामने राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्रियों- फारूक अब्‍दुल्‍ला और महबूबा मुफ्ती को 'सबसे बड़ा देशभक्‍त' करार दिया। उन्‍होंने नैशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं की मौजूदगी में कहा, 'यहां जितने भी लोग हैं, चाहे वह फारूक साहब हों, महबूबा जी हों, देश में इनसे बड़ा देशभक्‍त नहीं है। अगर ये लोग देशभक्‍त नहीं हैं तो हम में से किसी को अधिकार नहीं है कि देश के प्रति देशभक्ति का दावा करे।' सिन्‍हा ने अपना कश्‍मीर दौरा रद्द नहीं किया था। इसके उलट, सत्‍ताधारी एनडीए की उम्‍मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल जाना स्‍थगित कर दिया। मुर्मू ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के निधन के बाद भारत में एक दिन के राष्‍ट्रीय शोक को देखते हुए अपनी यात्रा टाल दी। राष्‍ट्रपति बना तो... सिन्‍हा ने बताई प्राथमिकता देश के सबसे बड़े पद पर दावेदारी जता रहे सिन्‍हा ने कहा कि वे राष्‍ट्रपति बने तो कश्‍मीर मुद्दे को प्राथमिकता में रखेंगे। उन्‍होंने कहा, 'अगर निर्वाचित हुआ... तो मेरी प्राथमिकताओं में से एक यह भी होगा कि सरकार से आग्रह करूं कि कश्‍मीर मुद्दे को स्‍थायी रूप से हल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और शांति, न्‍याय, लोकतंत्र, सामान्‍य स्थिति बहाल करे और J&K के के प्रति शत्रुतापूर्ण विकास को खत्‍म करे।' यूपी में क्‍या बोले थे सिन्‍हा? सिन्हा गुरुवार को लखनऊ में थे। सपा कार्यालय पर हुई बैठक में विधायकों से समर्थन मांगा। उनके साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद मुखिया जयंत चौधरी मंच पर थे, लेकिन अखिलेश ने सहयोगी दल सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर को नहीं बुलाया। सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अटल, मुलायम से लेकर अजित सिंह से अपने रिश्तों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह राष्ट्रपति बने तो शपथ लेने के दूसरे दिन ही जांच एजेंसियों का दुरुपयोग बंद कर देंगे। देश में सांप्रदायिक बंटवारे और संविधान के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास करेंगे। आज देश को खामोश नहीं बल्कि विवेक का इस्तेमाल करने वाला राष्ट्रपति चाहिए। सिन्हा ने कहा कि मेरा मोदी से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, मेरी असहमति उनकी कार्यशैली और नीतियों से है। हुकूमत देश में न्याय का गला घोंट रही है। चुनी हुई सरकारों को गिराया जा रहा है।
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) ने शनिवार को पूर्व की कई घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता पाने के लिए आतंकवादियों तक से हाथ मिला सकती है। सत्तारूढ़ पार्टी ने ये आरोप मुख्य विपक्षी पार्टी की ओर से आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए देशभर में आयोजित किए जा रहे संवाददाता सम्मेलन पर पलटवार करते हुए लगाए। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा (Sambit Patra) ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के उस कथित बयान को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली के बाटला हाउस में हुई मुठभेड़ की तस्वीरों को देखकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आंखों में आंसू आ गए थे। कई घटनाओं को लेकर कांग्रेस पर बोला हमला संबित पात्रा ने गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान संदिग्ध आतंकवादी इशरत जहां की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद कांग्रेस की तरफ से गुजरात सरकार पर किए गए हमलों का भी हवाला दिया। कुछ संगठनों ने वर्ष 2008 में बाटला हाउस हुए मुठभेड़ के फर्जी होने का आरोप लगाया था और कुछ कांग्रेस नेताओं ने भी उनके साथ पूरे मामले की जांच की मांग की थी। पात्रा ने रेखांकित किया कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने स्वीकार किया था कि इशरत जहां उससे जुड़ी हुई थी, लेकिन कांग्रेस उसे निर्दोष बता रही थी और मुठभेड़ में इशरत की मौत को लेकर राज्य सरकार को घेर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद तक ने कांग्रेस को अच्छी पार्टी बताकर प्रशंसा की थी। पात्रा ने कहा, 'यह कांग्रेस का इतिहास है और वही पार्टी आतंकवाद के मुद्दे पर 22 स्थानों पर संवाददाता सम्मेलन करने की हिम्मत करती है।’ कांग्रेस ने भी किया बीजेपी पर पलटवार कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका राष्ट्रव्यापी संवाददाता सम्मेलन भाजपा के फर्जी राष्ट्रवाद का मुकाबला करने और यह संदेश जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए है कि सत्तारूढ़ पार्टी का संबंध ऐसे लोगों से है, जो जघन्य अपराधों और आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या में शामिल एक आरोपी रियाज अख्तरी भाजपा का सदस्य है। पार्टी ने राजस्थान में भाजपा नेताओं के साथ उसकी कथित तस्वीर भी साझा की है। हालांकि, भाजपा ने ऐसे तत्वों से किसी तरह के संबध होने से इंकार किया है और दावा किया कि उनमें से कुछ लोगों ने पार्टी में घुसपैठ करने के बाद नेताओं के साथ तस्वीर खिंचवाई है। कांग्रेस ने दावा किया कि श्रीनगर के रियासी शहर में हाल में लोगों द्वारा पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी तालिब हुसैन शाह भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का पदाधिकारी था। हालांकि, केंद्र शासित प्रदेश के भाजपा नेतृत्व ने इन आरोपों को खारिज किया है। तुष्टिकरण कांग्रेस का आधार है- संबिता पात्रा विपक्षी पार्टी के आरोपों पर पलटवार करते हुए पात्रा ने कहा कि तुष्टिकरण कांग्रेस का आधार है, जिसकी वजह से आतंकवाद का प्रसार हुआ। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (NDA) के 10 साल के शासन को पूरे देश में लगातार होने वाले आतंकवादी हमलों के लिए जाना जाता है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने आतंकवाद को नियंत्रित किया है। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकवादी यासिन मलिक को अब आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में दोषी ठहराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के दौरान यासिन मलिक को सम्मानित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की तस्वीर विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के साथ है, जो भारत छोड़कर भाग चुका है और जिसने राजीव गांधी फाउंडेशन को दान दिया था। पात्रा ने कहा कि नाइक ने लोगों में राष्ट्र विरोधी भावना बढ़ाई और सांप्रदायिक विभाजन को उकसाया।
नयी दिल्ली, कांग्रेस ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आतंकवादियों के साथ रिश्ते रखने का आरोप लगाया और दावा किया कि हालिया घटनाओं से भाजपा के फर्जी राष्ट्रवाद का पर्दाफाश हो गया है। भाजपा ने पलटवार किया और पूर्व की कई घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता पाने के लिए आतंकवादियों तक से हाथ मिला सकती है। कांग्रेस ने आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए शनिवार को देश के 23 शहरों में संवाददाता सम्मेलन किया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा का आतंकवादियों से नाता है, यह रिश्ता क्या कहलाता है? आज हमारे 23 नेताओं और प्रवक्ताओं ने देश के विभिन्न शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा के आतंकवादियों के साथ रिश्तों का पर्दाफाश किया।’’ कांग्रेस नेता आलोक शर्मा ने यहां दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज पूरा देश देख रहा रहा है कि किस तरह से एक के बाद एक घटनाओं में आतंकियों तथा अपराधियों के तार भाजपा से जुड़े मिले हैं। पिछले दिनों हुई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकवादियों के साथ भाजपा पदाधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद भाजपा के नकली राष्ट्रवाद का पर्दाफाश हो गया है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक संकट जैसे ज्वलंत मुद्दों को छोड़ भाजपा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए देश में हिंदू मुस्लिम संबधों को मुद्दा बनाकर राष्ट्रवाद के साथ खिलवाड़ कर रही है। शर्मा ने कहा, ‘‘उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या का आरोपी रियाज अख्तरी भाजपा कार्यकर्ता निकला, जिसने बाकायदा भाजपा नेताओं की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के कथित मास्टरमाइंड इरफान खान का निर्दलीय सांसद नवनीत राणा व उनके पति रवि राणा के साथ संबध मीडिया रिपोर्ट के जरिये देश के सामने आया। यह किसी से छिपा नहीं है कि नवनीत राणा और रवि राणा के भाजपा से क्या संबध हैं?’’ उन्होंने यह दावा भी किया, ‘‘जम्मू-कश्मीर में ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों में से एक तालिब हुसैन शाह भाजपा का पदाधिकारी निकला, जिसकी भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें हैं।’’ कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने जयपुर में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रवाद के मुद्दे पर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि वह देश को खोखला करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने ‘‘आतंकवादियों और अपराधियों’’के तार कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े होने की खबरों का शनिवार को जिक्र करते हुए इसे देश के लिए एक चिंता का विषय बताया। उन्होंने अहमदाबाद में संवाददाताओं से कहा कि भाजपा को इस बारे में आत्मविश्लेषण करने की जरूरत है कि कैसे इस तरह के तत्वों को पार्टी में आने का मौका मिल रहा है। उधर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आतंकवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को आड़़े हाथों लिया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के उस कथित बयान को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कुछ वर्ष पहले कहा था कि दिल्ली के बटला हाउस में हुई मुठभेड़ की तस्वीरों को देखकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आंखों में आंसू आ गए थे। उन्होंने गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान संदिग्ध आतंकवादी इशरत जहां की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद कांग्रेस द्वारा गुजरात सरकार पर किए गए हमलों का भी हवाला दिया। पात्रा ने कहा कि यह कांग्रेस का इतिहास है और वही पार्टी आतंकवाद के मुद्दे पर 20 से अधिक स्थानों पर संवाददाता सम्मेलन करने की हिम्मत करती है।
मेक इन इंडिया अभियान के खातिर भारत ने अमेरिकी प्रीडेटर ड्रोन डील को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब केंद्र सरकार लंबी दूरी के स्वदेशी अनमैन्ड एरियल वीइकल को खरीदने पर विचार कर रही है। लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम इस ड्रोन को एक भारतीय कंपनी इजरायल के डिफेंस मैन्यूफैक्चरर के साथ मिलकर बना रही है। अमेरिकन प्रीडेटर ड्रोल डील को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एक लेफ्टिनेंट जनरल की अगुआई में समूची डील की समीक्षा के लिए एक कमिटी बना दी गई है। ये सौदा बहुत ही महंगा पड़ रहा था। 30 ड्रोन की कीमत करीब 4.5 अरब डॉलर यानी करीब 35,680 करोड़ रुपये पड़ रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने टॉप गवर्नमेंट सोर्सेज के हवाले से बताया है, 'चूंकि डील आगे नहीं बढ़ रही है और तकरीबन सभी आयात के मामलों को होल्ड कर दिया गया है, हम एक इंडियन प्राइवेट डिफेंस फर्म की तरफ से इजरायल के डिफेंस मैन्यूफैक्चरर के साथ मिलकर बनाए गए एक हथियारों से लैस यूएवी पर विचार कर रहे हैं।' इस प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनी का योगदान सरकार की तरफ से तय किए गए उन मेक इन इंडिया मानकों के हिसाब से है, जिसके तहत डिफेंस फोर्सेज प्रोडक्ट पर विचार कर सकती हैं। शुरुआती प्लान के मुताबिक भारत अमेरिका से 30 प्रीडेटर ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा था। ये ड्रोन मारक क्षमता से लैस होते। जो मिसाइल समेत दूसरे हथियारों से लैस होते और तीनों सेनाओं में जिसका इस्तेमाल किया जा सकता था। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों सेनाओं ने इन ड्रोन्स की जरूरत बताई थी जिनका इस्तेमाल निगरानी करने के साथ-साथ दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही हमला करने में किया जा सकता हो। हालांकि, मेक इन इंडिया मुहिम को ताकत देने के लिए भारत ने रक्षा आयात को कम करने का फैसला किया है ताकि स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा मिले। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर रक्षा मंत्रालय ने रक्षा से जुड़े सभी आयात आधारित डील को या तो रद्द कर दिया है या फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया है। भारत के पास फिलहाल दो प्रीडेटर ड्रोन हैं जिन्हें एक अमेरिकी कंपनी से लीज पर लिया गया है। इन ड्रोन का इस्तेमाल इंडियन नेवी हिंद महासागर क्षेत्र में हर तरह की गतिविधियों की निगरानी के लिए कर रही है। इसके अलावा भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए अमेरिका के 12 P-81 एंटी-सबमरीन व सर्विलांस प्लेन खरीदे हैं। ऐसे 6 और विमानों को खरीदे जाने की दिशा में काम चल रहा था। हालांकि, इम्पोर्ट प्रोग्राम्स को लेकर पीएमओ के निर्देश के बाद सरकार जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर भी फैसला लेगी
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपना कार्यकाल पूरा करने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन में अगला चुनाव जीतने का शनिवार को भरोसा जताया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र मंत्रिपरिषद के विस्तार के बारे में निर्णय अगले सप्ताह मुंबई में लिया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में हैं। दोनों नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह महाराष्ट्र में शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद उनकी प्रधानमंत्री के साथ पहली बैठक है। शिंदे और फडणवीस ने प्रधानमंत्री से उनके लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास में मुलाकात की और महाराष्ट्र के विकास के लिए उनका ‘आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन’ मांगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।’ एकनाथ शिंदे 30 जून को बने थे महाराष्ट्र के सीएम महाराष्ट्र में सियासी घमासान और शिवसेना में फूट के बाद शिंदे और फडणवीस ने 30 जून को राज्य में सत्ता की कमान संभाली थी। इसके पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। महाराष्ट्र के दोनों नेताओं ने शुक्रवार रात गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उन्होंने भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के बागी गुट के बीच सत्ता साझेदारी के फार्मूले पर चर्चा की। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से भी की मुलाकात शुक्रवार रात राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे शिंदे और फडणवीस ने शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की। इससे पहले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा की, जिसमें सत्ता साझेदारी की व्यापक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। शिंदे ने अपने पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे के मध्यावधि चुनाव कराने के आह्वान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राज्य सरकार मजबूत है और 288 सदस्यीय विधानसभा में उसे 164 विधायकों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के पास सिर्फ 99 विधायक हैं। कॉन्फ्रेंस में जब फडणवीस से उपमुख्यमंत्री पद पर उनकी ‘पदावनति’ को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के नाखुश होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इसके विपरीत पार्टी कार्यकर्ता खुश हैं कि 2019 में उनके साथ हुए अन्याय को सुधारा गया है। फडणवीस ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता खुश हैं क्योंकि स्वाभाविक सहयोगी भाजपा और शिवसेना ने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को हटाकर सरकार बनाई है। फडणवीस ने कहा, ‘यह बिल्कुल स्पष्ट है। मुख्यमंत्री नेता हैं। हम इस सरकार को सफल बनाने की दिशा में काम करेंगे।’
नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑल्‍ट न्‍यूज के मोहम्मद जुबैर को 5 दिन की अंतरिम जमानत दे दी। जुबैर के खिलाफ सीतापुर में दर्ज FIR खारिज करने की याचिका पर अब 12 जुलाई को सुनवाई होगी। शुक्रवार को अदालत में उत्‍तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्‍होंने कहा कि जुबैर के खिलाफ दर्ज मुकदमों में विस्‍तृत जांच की जरूरत है। मेहता ने कहा कि 'केवल ट्वीट्स किए, यह मान लेना ही जांच का अंत नहीं है। उसने (जुबैर) सालों तक एक खास हिस्‍से की धार्मिक भावनाएं भड़काने की नीयत से ट्वीट्स किए हैं। क्‍या वह किसी बड़े षडयंत्र का हिस्‍सा है या उसके पीछे भारत विरोधी ताकतें हैं, इसकी सघन जांच होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को फोन्‍स और अन्‍य डिवाइसेज चाहिए होंगे जिनसे वह अपना एजेंडा चलाता था।' एसजी ने यह भी साफ किया कि दिल्‍ली में दर्ज FIR में जुबैर पहले से जुडिशल कस्‍टडी में है। ऐसे में सीतापुर केस में बेल के बावजूद वह रिहा नहीं हो पाएगा। ...तो जुबैर भी हेटमॉन्‍गर? अदालत में जुबैर के वकील कॉलिन गोंजाल्‍वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने ट्वीट्स में तीन हिंदू नेताओं जिन्‍हें हेट स्‍पीच के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है, 'हेटमॉन्‍गर्स' कहा था। जुबैर की तरफ से दलील दी गई, 'अगर कोई अपनी फोरेंसिक स्किल्‍स का प्रयोग करके सोशल मीडिया पर हेटमॉन्‍गर्स को बेनकाब करता है और उसे ही अरेस्‍ट कर लिया जाए वह भी तब जब असली हेटमॉन्‍गर्स जमानत पर हों तो इस देश में सच और सेक्‍युलरिज्‍म चाहने वालों के लिए कुछ नहीं बचेगा।' जुबैर के वकील तीन धमगुरुओं को FIR के आधार पर 'हेटमॉन्‍गर' करार दे रहे थे जबकि अभी तक उन्‍हें दोषी नहीं ठहराया गया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस लॉजिक से तो जुबैर भी 'हेटमॉन्‍गर' कहे जा सकते हैं क्‍योंकि उनके खिलाफ भी FIRs दर्ज हुई हैं। 'जुबैर ने कोर्ट से तथ्‍य छिपाए' एसजी ने कहा कि 10 जून को जुबैर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई। उसने 15 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तत्‍काल सुनवाई की मांग की। उसे तीन हफ्ते बाद समझ आया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। मेहता ने कहा कि जुबैर ने यह तथ्‍य भी छिपाया कि सीतापुर की अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए पुलिस को कस्‍टडी दी थी। जुबैर को सीतापुर वाले केस में शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है। वह केस से जुड़ा कोई ट्वीट पोस्ट नहीं करेंगे। कहीं और किसी भी सबूत, इलेक्ट्रॉनिक या अन्यथा के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
दिल्‍ली में हिंदू संगठनों ने निकाला 'संविधान संकल्‍प मार्च' विश्‍व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे कई हिंदू संगठनों ने एक साथ आकर उदयपुर और अमरावती हत्‍याकांड के विरोध में मार्च निकाला है। बड़ी संख्‍या में लोग पोस्‍टर्स-बैनर्स के साथ दिल्‍ली की सड़कों पर जमा हुए। भारत संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं' मार्च में शामिल लोग कई पोस्‍टर-बैनर लिए थे। इनपर लिखा था कि 'भारत संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं', 'शरिया और जिहाद के खिलाफ हल्‍ला बोल'। 'सर तन से जुदा' गैंग के खिलाफ हिंदू सड़कों पर मार्च में मौजूद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा, 'संविधान को तोड़ने वाले सड़क पर आ सकते हैं तो संविधान को बचाने वाले भी आ सकते हैं।' उन्‍होंने कहा कि 'सर तन से जुदा गैंग' के खिलाफ हिंदू समाज सड़कों पर उतरा है। दो घटनाओं के विरोध में निकला मार्च? राजस्‍थान के उदयपुर में दर्जी कन्‍हैयालाल की उनकी दुकान में घुसकर हत्‍या कर दी गई थी। हत्‍यारों ने पूरी वारदात का वीडियो बनाया और पीएम नरेंद्र मोदी को भी मारने की धमकी दी। वहीं, महाराष्‍ट्र के अमरावती में भी नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्‍ट करने पर उमेश कोल्‍हे नाम के व्‍यक्ति को बेरहमी से मार दिया गया था।
जम्‍मू: जम्मू-कश्‍मीर में अमरनाथ गुफा के पास शुक्रवार शाम बादल फटने (Amarnath Cloudburst) की वजह से हुए हादसे में अब तक 16 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 45 से ज्‍यादा लोग घायल हैं जबकि 40 से ज्‍यादा लोग अभी भी लापता है। शुक्रवार से लगातार बचाव अभ‍ियान जारी है। मौके पर आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें डटी हैं। देर रात तक राहत और बचाव कार्य चलता रहा। शनिवार सुबह से एक बार फिर ऑपरेशन में तेजी लाई जा रही है। घटना में हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए जम्मू कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने कश्मीर घाटी में तैनात सभी सरकारी मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। 15,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया घटना स्‍थल पर आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें डटी हैं। पूरी रात बवाव कार्य चला है। सुबह शनिवार को अभियान को और तेज किया गया है। बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्‍टर और खोजी कुत्‍तों की भी बदद ली जा रही है। अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 40 से ज्‍यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण पवित्र गुफा क्षेत्र के पास फंसे अधिकांश यात्रियों को पंजतरणी स्थानांतरित कर दिया गया है। ITBP ने लोअर होली गुफा से पंजतरणी तक अपने मार्ग खोलने और सुरक्षा दलों को और बढ़ाया है। अब तक करीब 15,000 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों के साथ वहां मौजूद बीएसएफ के डॉक्टर ने मरीजों को प्राथमिक उपचार और सीपीआर दिया। 9 मरीजों का इलाज किया गया जो गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें कम ऊंचाई वाले नेलग्राथ बेस कैंप में रेस्क्यू किया गया था। मौसम साफ नहीं होने की वजह से श्रद्धालुओं को रोका गया सोनमर्ग के बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा अस्थाई रूप से स्थगित की गई है। एक श्रद्धालु ने कहा है कि हमें आज के लिए यहां टेंट में रहने के लिए कहा गया है। वहां (अमरनाथ गुफा) मौसम साफ नहीं है। हेल्पलाइन नंबर जारी राज्यपाल प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने चार टेलीफोन नंबर जारी किये हैं जिस पर संपर्क कर लोग जानकारी ले सकते हैं। सरकार के जनसंपर्क विभाग और श्राइन बोर्ड ने ट्वीट किया क‍ि अमरनाथ यात्रा के लिए हेल्पलाइन नंबर: एनडीआरएफ: 011-23438252, 011-23438253, कश्मीर डिविजनल हेल्पलाइन: 0194-2496240, श्राइन बोर्ड हेल्पलाइन: 0194-2313149। इसके साथ ही प्रशासन ने कहा कि उसका ध्यान अभी राहत अभियान पर है। बेस अस्पतालों पर चल रहा यात्रियों का इलाज गांदरबल जिले के डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की सीएमओ डॉ अफरोजा शाह ने बताया कि इस घटना में 45 लोगों के घायल होने और 13 के मरने की पुष्टि हुई है। सभी घायलों का बेस अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मरीजों की देखभाल के लिए 28 डॉक्टर, 98 पैरामेडिकल स्टाफ और 16 एंबुलेंस को ड्यूटी पर लगाया गया है।इसके साथ ही SDRF की टीमें भी बचाव अभियान में लगी हुई हैं।
नई दिल्‍ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्‍या (Shinzo Abe assassination) को अग्निपथ स्‍कीम (Agnipath Scheme) से जोड़ा है। इसे लेकर पार्टी के आधिकारिक न्‍यूजपेपर जागो बांग्‍ला (Jago Bangla) में एक लेख छपा है। टीएमसी की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस प्रवक्‍ता सुरेंद्र राजपूत (Surendra Rajput) से मिलती-जुलती है। राजपूत ने शुक्रवार को शिंजो आबे की हत्‍या को अग्निपथ स्‍कीम के साथ जोड़ा था। कांग्रेस प्रवक्‍ता ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि पूर्व पीएम के शूटर तेत्‍सुया यामागामी ने जापान के बिना पेंशन वाले सेल्‍फ डिफेंस फोर्स (SDF) में काम किया था। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसके लिए कांग्रेस की खिंचाई की थी। पार्टी ने कांग्रेस को आबे के दुखद निधन पर क्षुद्र राजनीति करने से बाज आने की नसीहत दी थी। हाल में अग्निपथ स्‍कीम को लेकर देशभर में जमकर हंगामा हुआ था। बिहार, बंगाल, यूपी समेत कई राज्‍यों में उपद्रवियों ने ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया गया था। इस स्‍कीम के तहत चार साल के लिए सेना में अग्निवीरों की भर्ती होगी। स्‍कीम में पेंशन का प्रावधान नहीं है। कांग्रेस के बाद अब टीएमसी ने शिंजो आबे की हत्‍या से अग्निपथ स्‍कीम को जोड़ा है। टीएमसी के मुखपत्र में क्‍या कहा गया है? टीएमसी के मुखपत्र में इसे लेकर एक आर्टिकल प्रकाशित हुआ है। इसमें शिंजो आबे की हत्‍या और अग्निपथ स्‍कीम को जोड़ा गया है। लेख कहता है कि शिंजो आबे की हत्‍या ने दिखाया है कि क्‍यों अग्निपथ स्‍कीम को लेकर लोगों की चिंता थी। आबे का हत्‍यारा तेत्‍सुया यामागामी ने बिना पेंशन के जापानी सेना में सेवा दी थी। बांग्‍ला भाषा में लिखे इस आर्टिकल में आगे कहा गया कि यह समझना महत्‍वपूर्ण है कि केंद्र सरकार भी अग्निपथ स्‍कीम के तहत सैनिकों की भर्ती करने जा रही है। इसके बारे में पूरा देश उत्‍साहित है। अग्निवीरों को सिर्फ साढ़े चार साल के लिए सेना में काम करने का मौका मिलेगा। रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोई पेंशन नहीं मिलेगी। अन्‍य बेनिफिट्स का भी वे लाभ नहीं ले पाएंगे। कांग्रेस प्रवक्‍ता ने आबे की हत्‍या को अग्निपथ से जोड़ा था जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को नारा शहर में तेत्‍सुया ने गोली मारी थी। वह एक कैंपेन में पहुंचे थे। गोली लगने के बाद उन्‍हें स्‍थानीय अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। इसके करीब पांच घंटों के बाद शिंजो आबे की मौत हो गई थी। इस खबर ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया था। भारत में एक दिन के राष्‍ट्रीय शोक का ऐलान किया गया। शुक्रवार को कांग्रेस प्रवक्‍ता सुरेंद्र राजपूत ने केंद्र सरकार की अग्निपथ स्‍कीम का इशारों में जिक्र करते हुए कहा था कि तेत्‍सुया यामागामी ने जापान के एसडीएफ यानी बिना पेंशन के आर्मी में काम किया था। केंद्रीय कैबिनेट ने 14 जून को अग्निपथ स्‍कीम को मंजूरी दी थी। उसने इस साल स्‍कीम के तहत 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती का ऐलान किया था। इसकी मंशा सशस्‍त्र बलों को ज्‍यादा युवा बनाना है। स्‍कीम के विरोध में उग्र प्रदर्शनों के बाद सरकार ने कई कदमों का ऐलान किया था। इनका मकसद प्रदर्शनों को शांत करना था।
चंडीगढ़,पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बृहस्पतिवार को यहां अपने आवास पर एक निजी समारोह में डॉक्टर गुरप्रीत कौर के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। केवल परिवार के सदस्यों और कुछ करीबियों की मौजूदगी में हुई इस शादी से बैंड, बाजा और बारात सभी नदारद थे। टेलीविजन और ट्विटर पर सामने आई तस्वीरों में मान और उनकी दुल्हन को आनंद कारज (सिख विवाह) की रस्म पूरी करते देखा जा सकता है। आप के सांसद राघव चड्ढा ने मान की शादी की तस्वीरें ट्विटर पर साझा कीं, जिसमें दुल्हन लाल जोड़े में और मान पीले रंग की पगड़ी पहने नजर आ रहे हैं। मान (48), पंजाब के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो इस पद पर रहते हुए शादी के बंधन में बंधे हैं। मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पेहोवा की रहने वाली हैं। मान की यह दूसरी शादी है। वह अपनी पहली पत्नी से 2015 में अलग हो गए थे। पहली शादी से मान के दो बच्चे सीरत कौर (21) और दिलशान (17) हैं। सेक्टर-2 स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इससे पहले, गुरप्रीत कौर (30) ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर साझा की और लिखा, ‘‘ दिन शगना दा चढ़ेया ...(शादी का दिन आ गया है)।’’ उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं का बधाई संदेशों के लिए शुक्रिया भी अदा किया। पार्टी के अनुसार, मान की मां और बहन सहित परिवार के सदस्य तथा कुछ ही मेहमान विवाह में शामिल हुए। यह विवाह सिख रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ। दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के साथ समारोह में पहुंचे। केजरीवाल ने हवाई-अड्डे पर पत्रकारों से कहा, ‘‘ आज बहुत खुशी का दिन है कि मेरे छोटे भाई एवं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की शादी हो रही है और वह एक नई शुरुआत कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ ईश्वर से उनके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करता हूं और दोनों हमेशा खुश रहें।’’ वहीं, आप के सांसद राघव चड्ढा ने ट्विटर पर शादी की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘‘ साड्डे वीर दा व्याह, सानू गोडे गोडे चाह।’’ इससे पहले, चड्ढा ने यहां पत्रकारों से कहा था, ‘‘ मुख्यमंत्री भगवंत मान के जीवन का एक नया अध्याय आज से शुरू होने जा रहा है। मैं मान साहब के परिवार, उनकी मां और बहन को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। यह एक छोटा कार्यक्रम होगा। केवल परिवार के सदस्य इसमें शिरकत करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम खुश हैं कि काफी समय बाद मान साहब के परिवार में खुशियां लौटी हैं। एक बार फिर उनका परिवार बसते देखना, उनकी मां का सपना था। आज, वह सपना पूरा होने जा रहा है।’’ गुरप्रीत कौर ने 2018 में हरियाणा के एक निजी विश्वविद्यालय से एमीबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। उनकी दो बड़ी बहनें हैं, जो विदेश में रहती हैं।
बरेली: बरेलवी उलेमा ने राजस्थान के उदयपुर में हिंदू दर्जी की हत्या पर कड़ा रूख अख्तियार करते हुए निंदा की है। उर्दू पत्रिका में प्रकाशित लेख में मुफ्ती सलीम ने लिखा कि आज कुछ खूंखार समझ बैठे हैं कि पैगंबर की शान में गुस्ताखी करने वाले का सिर तन से जुदा करना गुनाह है। अपने हाथ में कानून लेकर किसी की हत्या करना जुर्म है। ऐसा इंसान इस्लाम की नजर में मुजरिम है, जिसे सजा न्यायपालिका देगी। उदयपुर घटना के संदर्भ में आला हज़रत इमाम अहमद रजा बरेलवी साहब के फतवे का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने लिखा कि किसी आम नागरिक द्वारा किसी की हत्या करना खुद जुर्म है। आला हजरत ने यह भी स्पष्ट किया कि हमारे पैगंबर की शान मे गुस्ताखी की सजा उन देशों में कि जहां इस्लामिक कानून है, वहां मौत की सजा है। जैसे हमारे देश भारत में बहुत से जुर्म में मौत की सजा का प्रावधान है। परंतु यह सजा कोई आम आदमी या नागरिक ना देगा बल्कि न्याय पालिका, कोर्ट कचहरी देंगी। उन्होंने आगे लिखा कि कुरान शरीफ में खुदा ने फरमाया है कि 'अपने हाथों अपने आपको हलाकत में मत डालो।' शरीयत की रोशनी में सिर्फ ऐसे गुस्ताख की जुबान से निंदा करना और आम लोगों को उससे मेल-जोल रखने से रोकना और हुकूमत के जिम्मेदारों तक शिकायत पहुंचाना और कोर्ट में मुकदमा करना काफी है, ताकि उस व्यक्ति पर मुकदमा कायम हो सके। अपने आप ही कानून को हाथ में लेकर किसी आम व्यक्ति द्वारा उस मुजरिम और गुस्ताख को सजा देना जायज नहीं है। बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने की वजह से मौत के घाट उतारे गए कन्हैयालाल की घटना का जिक्र करते हुए कहा, 'किसी गुस्ताखे नबी को हुकूमत की इजाजत के बगैर सजा देना या कत्ल करना। या फिर सर तन से जुदा करना आला हजरत के फतवे की रौशनी मे गुनाह और जुर्म है। ऐसा शख्स सजा के लायक और मुजरिम है।'
फिल्ममेकर लीना मणिमेकलाई की 'काली' डॉक्यूमेंट्री के पोस्टर पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल में ही ट्विटर ने उस ट्वीट को भी डिलीट कर दिया था जिसमें उन्होंने विवादित पोस्टर को शेयर किया था। इस पूरे मामले पर भजन सम्राट और बिग बॉस के कंटेस्टेंट रहे अनूप जलोटा ने नवभारत टाइम्स को दिए एक्सक्सूलिव इंटरव्यू में रिएक्ट किया है। लीना मणिमेकलाई को लेकर अनूप जलोटा ने कहा कि ये उनकी सस्ती लोकप्रियता है। उन्हें पागलखाने भेज देना चाहिए। 'लीना सस्ती लोकप्रियता की भूखी हैं' नवभारत टाइम्स के साथ बातचीत में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने 'काली' डॉक्यूमेंट्री पोस्टर विवाद पर कहा कि 'लीना ने पहली बार जो डिजाइन बनाया और पोस्ट कर दिया तो उसे देखकर ऐसा लगा कि उन्हें सस्ती लोकप्रियता की जरूरत है। वह अपनी फिल्म को हिट करने के लिए उल्टी-सीधी हरकतें कर रही हैं। लेकिन जब इसने इस मामले को आगे बढ़ा दिया तो ये देखकर कंफर्म हो गया कि वो पागल है।' Kaali Poster: अनूप जलोटा बोले- Leena Manimekalai को जल्दी पागलखाने भेजो अनूप जलोटा ने आगे कहा, 'जो पागल होते हैं वही ऐसी ही हरकते करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। इसीलिए बेहतर होगा कि उन्हें जल्दी पागलखाने भेजा जाए। वह वहीं रहे वहीं डिजाइन बनाए और पागलखाने में अपनी बिरादरी के बीच अपने डिजाइन बांटती रहे। मेरा आप सभी से निवेदन है कि विचलित न हो क्योंकि पागल ऐसी ही हरकत करते हैं।' कब और कैसे हुआ काली पोस्टर विवाद बता दें कनाडा के टोरंटो में रहने वाली लीना ने ट्विटर पर 2 जुलाई को अपनी डॉक्यूमेंट्री काली का पोस्टर (Kaali Poster Controversy) शेयर किया था जिसमें मां काली को सिगरेट पीते और LGBTQ का प्राइड फ्लैग हाथ में लिए दिखाया गया था। इस पोस्टर पर देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का यूजर्स ने आरोप लगाया। अब तक कई राज्यों में लीना के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जा चुकी है।
मुंबई: उद्धव ठाकरे के हाथ से महाराष्ट्र की सत्ता गई, फिर सामने आई पार्टी बचाने की चुनौती। अब उनके लिए अपना गढ़ भी बचाना नामुमकिन हो गया है। एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के महाराष्ट्र की सत्ता संभालने के दो दिन के अंदर ही ठाणे भी उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के हाथ से निकल गया है। महानगरपालिका (Thane Mahanagar Palika) के 66 पार्षद एकनाथ शिंदे के साथ खुलकर आ गए हैं। इन पार्षदों ने शिंदे से मुलाकात की और इसके बाद ऐलान किया कि वो शिवसेना (Shiv Sena Crisis) के शिंदे खेमे का समर्थन कर रहे हैं। पार्षदों के साथ सीएम शिंदे की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। महानगरपालिका के 67 में से 66 पार्षद शिंदे के साथ ठाणे को एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है। यहीं से उन्होंने आनंद दिघे के संपर्क में रहकर सियासत सीखी और पहली बार 1997 में शिवसेना के पार्षद बने। अब शिवसेना के उद्धव ठाकरे खेमे का ठाणे पर से भी कब्जा छूट गया है। महानगरपालिका में 67 पार्षद हैं। अब 66 के शिंदे कैंप में जाने के बाद सिर्फ एक पार्षद ही उद्धव खेमे में बचा है। बुधवार शाम को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने के बाद ये सभी पार्षद शिंदे कैंप में आ गए हैं। पार्षदों ने शिंदे के साथ बैठक की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। उद्धव को पहले ही शिवसेना के 40 विधायक झटका दे चुके हैं। इन विधायकों ने फ्लोर टेस्ट में एकनाथ शिंदे का साथ दिया था। विधान परिषद नतीजे के बाद शिंदे की बगावत महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के नतीजे 20 जून की रात में आए। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने 21 जून को पार्टी से खुली बगावत की थी। एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के साथ वह सूरत के होटल चले गए थे। यहां से वह गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुंच गए। इसके बाद विधायकों की बगावत का सिलसिला चलता रहा। ये नौबत आ गई कि शिवसेना के 39 विधायकों ने शिंदे को समर्थन दे दिया। अब उनके साथ शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायक हैं। 30 जून को सीएम बने शिंदे, 4 को बहुमत 30 जून को एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के सीएम की शपथ ली। वहीं देवेंद्र फडणवीस ने डेप्युटी सीएम की शपथ ली थी। 4 जुलाई को जब महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो उद्धव खेमे के एक और विधायक संतोष बांगर भी शिंदे के साथ चले गए। विधानसभा में बीजेपी के 106, निर्दलीय और अन्य दलों के 18 विधायकों की मदद से शिंदे ने बहुमत हासिल किया था। शिंदे के समर्थन में 164 विधायकों ने वोटिंग की थी। वहीं 99 ने विपक्ष में वोट दिया था। वोटिंग में कांग्रेस के 11 विधायक गैरहाजिर रहे थे। इस बीच शिवसेना ने भावना गवली की जगह राजन विचारे को लोकसभा में चीफ विप बनाया है
बीजिंग: भारत ने पिछले दिनों ऑटोनमस फ्लाइंग विंग टेक्‍नोलॉजी डेमॉन्‍स्‍ट्रेटर का पहला फ्लाइट टेस्‍ट किया और इसके साथ ही देश ड्रोन टेक्‍नोलॉजी में आत्‍मनिर्भर होने की तरफ बढ़ चुका है। डिफेंस रिसर्च्र एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO India) की तरफ से तैयार ड्रोन पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया है कि इस ड्रोन की पहली उड़ान एक मील का पत्‍थर है और अहम टेक्‍नोलॉजी के विकास की तरफ एक बड़ा कदम है। इस ड्रोन को स्विफ्ट या स्‍टेल्‍थ विंग फ्लाइंग टेस्‍टबेड भी कहा जा रहा है। भारतीय सेनाओं का स्‍वदेशीकरण करने की दिशा में ये ड्रोन एक बड़ा कदम है। ये ड्रोन घातक फाइटर ड्रोन का ही वर्जन है। ड्रोन की मदद से दुश्‍मन पर सटीक निशाना लगाया जा सकेगा। ताकतवर भारत का ड्रोन विशेषज्ञों की मानें तो भारत का ये ड्रोन चीन के HQ-9/P का जवाब है। चीन का ये ड्रोन 100 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्‍मन को जवाब दे सकता है। इसके अलावा क्रूज मिसाइल और एयरक्राफ्ट को एक सिंगल शॉट में ढेर कर सकता है। लेकिन सूत्रों की मानें तो ये रेंज बस एयरक्राफ्ट के खिलाफ ही है। क्रूज मिसाइल और छोटे टारगेट्स के लिए ये रेंज 25 किलोमीटर से भी कम है। भारत का घातक ड्रोन भारत-चीन हिमालय बॉर्डर पर विवाद में चीन के ड्रोन की तरह ही मजबूत रोल अदा कर सकता है। साल 2020 में रिपोर्ट आई थी कि चीन ने जमीन से आसमान तक हमला करने वाली मिसाइल को भारत-चीन-नेपाल ट्राई बॉर्डर इलाके में तैनात कर दिया है। चीन का मकसद इसके जरिए क्षेत्र में एयरडिफेंस नेटवर्क को मजबूत करना था। सेनाएं होंगी और ताकतवर (ड्रोन की खासियत इसके फिक्‍स्‍ड विंग्‍स हैं जो इसे पारंपरिक एयरक्राफ्ट से अलग करते हैं। इसकी डिजाइन अमेरिका के खतरनाक बी-2 बॉम्‍बर जेट से मिलती जुलती है। इस ड्रोन में लगा इंजन बहुत ही ताकतवर है। इसे एडवांस्‍ड ट्रेनर और लाइट अटैक हेलीकॉप्‍टर्स में भी प्रयोग किया जा चुका है। इस इंजन को हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड के HJT-36 सितारा ट्रेनर जेट में भी प्रयोग किया जा चुका है। इसके अलावा घातक यूएवी में भी यही इंजन लगा है। सबसे बड़ी बात है कि इस ड्रोन के सफल होने के बाद भारत अब इसी तरह के ड्रोन तैयार कर सकेगा जिनमें रूस का इंजन लगा होगा। इस ड्रोन के शामिल होने के बाद सेनाओं को नई ताकत मिल सकेगी। ड्रोन में एनपीओ सैटर्न AL-55 इंजान लगा है जिसे एक हाई परफॉर्मेंस वाला टर्बोफैन इंजन कहा जाता है। इस ड्रोन को बेंगलुरु स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्‍टैब्लिशमेंट (ADE) की तरफ से तैयार किया गया है। इस ड्रोन के सफल परीक्षण के बाद अहम और संवेदनशील मिलिट्री सिस्‍टम को शामिल करने का रास्‍ता साफ हो गया है।
नई दिल्ली: जीतने और जीत का डंका बजने में अंतर होता है। उसी तरह हारने और फजीहत होने में बड़ा फर्क है। राष्ट्रपति पद के विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के हार की घोषणा तो 18 जुलाई को होनी तय ही मानी जा रही है, लेकिन उनकी फजीहत अभी ही हो गई है। सिन्हा की फजीहत कोई और नहीं, वही ममता बनर्जी कर रही हैं जिनकी पार्टी टीएमसी की सदस्यता लेकर वो बहुत खुश थे। यशवंत सिन्हा ने कहा है कि वो प. बंगाल में प्रचार नहीं करेंगे। तो क्या ममता ने यशवंत सिन्हा को चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल आने से मना कर दिया है? यह सवाल इसलिए भी बहुत मायने रखता है कि प. बंगाल की मुख्यमंत्री ने इससे पहले यह कहकर सिन्हा को जबर्दस्त झटका दिया था कि अगर बीजेपी पहले बता देती कि वह द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति कैंडिडेट बनाने वाली है तब विपक्ष का समर्थन भी रहता। ममता ने कहा कि चूंकि विपक्ष ने एक साझा प्रत्याशी के तौर पर यशवंत सिन्हा का चयन कर लिया है, इसलिए अब चुनाव में मुर्मू का विरोध और सिन्हा का साथ देना उनकी मजबूरी है। प. बंगाल और झारखंड में प्रचार नहीं करेंगे यशवंत सिन्हा ममता का यह कहना कि वो यशवंत का साथ मजबूरी में देंगी, सिन्हा के लिए बहुत बड़ा झटका है। फिर प. बंगाल आने से ही 'मना कर देने' से तो उनकी फजीहत हो गई। इतना ही नहीं, यशवंत सिन्हा अपने ही गृह प्रदेश झारखंड में भी प्रचार नहीं करेंगे। प. बंगाल के बारे में यशवंत सिन्हा ने खुद कहा है कि वो वहां नहीं जाएंगे क्योंकि ममता बनर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वो सब संभाल लेंगी। झारखंड में प्रचार अभियान नहीं चलाने के पीछे वहां के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान करना है। जब विपक्षी दलों की बैठक में यशवंत सिन्हा के नाम पर चर्चा हुई तब सोरेन का झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने उनकी उम्मीदवारी पर हामी भरी थी, लेकिन एनडीए की तरफ से आदिवासी उम्मीदवार उतारते ही पार्टी ने यू टर्न ले लिया। ममता ने ही कर दी यशवंत सिन्हा की फजीहत यही हाल ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का भी है। ममता और टीएमसी पहले यह क्रेडिट लेने में जुटी थीं कि उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष को एक साझा उम्मीदवार दिलाने में अग्रणी भूमिका अदा की है। लेकिन, केंद्र में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा की तो ममता को अपना आदिवासी वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा। प. बंगाल के जंगल महल और उत्तरी बंगाल के इलाकों में आदिवासियों की अच्छी खासी तादाद है। ममता बनर्जी को लगता है कि अगर यशवंत सिन्हा ने प्रदेश में आकर द्रौपदी मुर्मू का विरोध किया तो टीएमसी को आदिवासी मतदाओं का आक्रोश झेलना पड़ जाएगा। वैसे भी मुर्मू संथाल हैं जो प. बंगाल की कुल आदिवासी आबादी का 80 प्रतिशत हैं। झारखंड में हेमंत सोरेन ने भी दिया बड़ा झटका जहां तक बात झारखंड की है तो वह तो आदिवासी बहुल राज्य ही है। यूं तो झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का अंग है और प्रदेश में यूपीए की सरकार भी है, लेकिन गठबंधन के लिए वोट बैंक को नाराज तो नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का मन बनाया है। ऐसे में यशवंत सिन्हा को अपने ही प्रदेश से मायूसी मिली है। वह बगल के राज्य बिहार में जाना चाहते हैं ताकि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा सके। जेडीयू एनडीए का हिस्सा है और बिहार में उसी की सरकार भी है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीजेपी से तालमेल फिर बिगड़ने की चर्चाओं के बीच सिन्हा को लगता है कि वहां बात बन सकती है। महाराष्ट्र का बदला समीकरण भी सिन्हा की मायूसी का सबब वैसे तो पहले दिन से ही तय था कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को मुंह की खानी होगी, लेकिन इन सभी समीकरणों के साथ ही महाराष्ट्र के क्षेत्रीय दल शिवसेना में बगावत के बाद नई सरकार बनने से मामला और खराब हो गया। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे यशवंत सिन्हा की हार का मार्जिन बढ़ता दिख रहा है। एक महीने बाद अगस्त में ही उप-राष्ट्रपति पद का भी चुनाव होने वाला है। उस चुनाव में भी विपक्ष की मात सुनिश्चित है।
फिल्म 'काली' के पोस्टर पर हुए विवाद के बाद मदुरै में जन्मीं कनाडा बेस्ड फिल्ममेकर लीना मणिमेकलाई सुर्खियों में हैं। काफी विवाद होने के बाद लीना एक बार फिर अपने विरोधियों पर हमलावर हो गई हैं। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर अपने विरोधियों को जवाब दिया है। लीना ने गुरुवार को कई ट्वीट किए हैं और अपना बचाव करते हुए दक्षिणपंथियों की आलोचना की है। 'देश हेट मशीन बन चुका है' लीना ने गुरुवार को लगातार कई ट्वीट्स किए। सबसे पहले लीना ने एक और आपत्तिजनक तस्वीर शेयर की जिसमें शिव और पार्वती का वेश में दिख रहे कलाकार सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर पर लीना को ट्रोल किया जाने लगा। इसके बाद उन्होंने एक विदेशी अखबार की खबर शेयर की जिसमें उन्होंने कहा है, 'ऐसा लगता है कि पूरा देश जो अभी तक सबसे बड़ा लोकतंत्र था अब सबसे बड़ी हेट मशीन बन चुका है और मुझे सेंसर करना चाहता है। मैं खुद को कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूं।' 'मैं डटी रहूंगी' खुद की आलोचना कर रहे सोशल मीडिया यूजर्स पर भड़कते हुए Leena Manimekalai ने ट्वीट में लिखा, 'ये ट्रोल्स में आर्टिस्टिक फ्रीडम के पीछे पड़े हुए हैं। अगर मैंने इन मूर्ख दक्षिणपंथियों के भीड़ माफिया से डरकर अपनी स्वतंत्रता गंवा दी तो मैं सभी की स्वतंत्रता गंवा दूंगी। इसलिए चाहे जो भी मेरे रास्ते में आए मैं डटी रहूंगी।' बीजेपी और संघ परिवार पर बरसीं लीना यहीं नहीं रुकीं बल्कि उन्होंने बीजेपी पर भी हमला बोला है। उन्होंने लिखा, 'बीजेपी के पैसे से चलने वाली ट्रोल आर्मी को इस बात का कोई आइडिया नहीं है कि क्षेत्रीय थिएटर के आर्टिस्ट अपनी परफॉर्मेंस के बाद कैसे आराम करते हैं। यह मेरी फिल्म से नहीं है। यह ग्रामीण भारत में आम है जिसे संघ परिवार के लोग अपनी नफरत और धार्मिक कट्टरता से बर्बाद कर देना चाहते हैं। हिंदुत्व कभी भारत नहीं बन सकता।'

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