taaja khabar...कोरोना से तबाही पर बोले पीएम मोदी- जिस दर्द से देशवासी गुजरे हैं, उसे मैं भी महसूस कर रहा हूं....चित्रकूट जेल के अंदर गैंगवॉर, दो गैंगस्टर की हत्या, तीसरा पुलिस कार्रवाई में मारा गया..995.40 रुपये में मिलेगी रूसी कोरोना वैक्सीन की एक डोज, देश में बनने पर हो सकती है सस्‍ती...गुजरात, असम सहित कई राज्यों को भेजी कोवैक्सीन की खेप...जब असम पहुंचे बंगाल के गवर्नर धनखड़ तो पैरों में गिर पड़ी महिलाएं...हमास कर रहा रॉकेट की बारिश, इजरायली 'लौह कवच' आयरन डोम कर रहा तबाह...PM Kisan में 50 लाख नए लोगों को भी मिलेंगे 2000-2000 रुपए, ऐसे कर सकते हैं अपना अकाउंट चेक...केंद्र ने कहा, राज्यों को निशुल्क भेजी जाएगी करीब एक करोड़ 92 लाख कोरोना वैक्सीन...पत्रकारों के लिए मध्यप्रदेश सरकार का अहम ऐलान, कोरोना संक्रमित होने पर इलाज का खर्च देगी राज्य सरकार...दवाओं की कालाबाजारी करने वालों पर भड़के प्रधानमंत्री, राज्य सरकारों को दिया कड़ी कार्रवाई का आदेश...कोरोना के एक दिन में नए मामलों से अधिक ठीक होने वालों का आंकड़ा, इस दौरान 4000 संक्रमितों की मौत..कोरोना महामारी के बीच सांसों के साथ अपनों ने छोड़ा हाथ, संघ निभा रहा मानवता का रिश्ता...

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नई दिल्ली, कोरोना मरीजों के इलाज के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की दवा 2 डीआक्सी-डी ग्लूकोज (2-डीजी) की 10 हजार डोज का पहला बैच अगले हफ्ते की शुरुआत में लॉन्‍च किया जाएगा। ये जानकारी डीआरडीओ के अधिकारियों ने दी है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में दवा के इस्तेमाल के लिए उत्पादन में तेजी लाने का काम किया जा रहा है। ये दवा डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की एक टीम ने बनाई है। ऐसा माना जा रहा है कि दवा 2-डीजी कोरोना के इलाज में गेम चेंजर साबित हो सकती है। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए यह दवा किसी संजीवनी से कम नहीं है। 2डीजी के साइड इफेक्ट के बारे में डॉक्‍टर्स बताते हैं कि सामान्य कोशिकाओं का मेटाबालिज्म (भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया) संक्रमित कोशिकाओं से बिल्कुल अलग होती है। दवा की मात्रा सामान्य कोशिकाओं तक कम ही जाती है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। कोविड-19 के हर स्‍ट्रेन पर कारगर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2डीजी कोरोना के हर स्ट्रेन से लड़ने में सक्षम है। इस दवा का मैकेनिज्म वायरस के प्रोटीन के बजाय, मानव कोशिकाओं के ही प्रोटीन में बदलाव कर देता है, जिससे वायरस कोशिका के अंदर पनाह ही नहीं ले पाता है। वहीं बाकी की एंटी वायरल दवाएं वायरस के ही प्रोटीन पर ही वार करतीं हैं और जब वायरस में म्युटेशन हो जाता है तो दवाइयां काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाती हैं। इससे वायरस किसी भी स्ट्रेन का हो वह बेकार है। हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैब द्वारा 2डीजी पर चलाए गए क्लीनिकल ट्रायल के प्रमुख वैज्ञानिक रहे आइएनएमएस के डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. सुधीर चांदना ने देखा है कि तीसरे चरण के ट्रायल में यह दवा कई वैरिएंट्स पर प्रभावी है।
कोलकाता। बंगाल में कोरोना से एक दिन में पांच चिकित्सकों की मौत हो गई। सूबे में अब तक कोरोना की चपेट में आकर 127 चिकित्सकों की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों की मौत पर वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने गहरा शोक जताया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कोलकाता के ढाकुरिया इलाके में स्थित आमरी अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट सुबीर दत्ता (85) की कोरोना से मौत हो गई। तालतल्ला के साइंटिफिक क्लिनिकल रिसर्च लाइब्रेरी के अधिकारी रहे सुबीर दत्ता 1990 से 1995 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के मेडिकल विभाग के डीन पद पर थे। गत 25 अप्रैल को सांस में तकलीफ की समस्या लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसी दिन से वे वेंटीलेटर पर थे। दूसरी तरफ बारासात के बाद वरिष्ठ चिकित्सक उत्पल सेनगुप्ता की कोलकाता के अपोलो अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई। नीलरतन सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पूर्व चिकित्सा सतीश घाटा की भी कोरोना ने जान ले ली। मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के पूर्व चिकित्सक संदीपन मंडल ने भी कोरोना की चपेट में आकर दम तोड़ दिया। वर्तमान में वे मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में मेडिकल ऑफिसर के पद पर थे। ईईडीएफ अस्पताल मैं कोरोना संक्रमित होकर स्त्री रोग विशेषज्ञ दिलिप चक्रवर्ती की मौत हो गई। डॉक्टर्स फोरम के संयोजक डॉक्टर पुण्यब्रत गुन ने कहा कि कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में भी चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कोरोना संक्रमित होने पर डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने की जरूरत है। उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार को लेनी चाहिए।
कोलकाता कोरोना संक्रमण के कहर के बीच पश्चिम बंगाल में 15 दिनों का संपूर्ण लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। राज्य में शुक्रवार को एक दिन में सर्वाधिक 20,846 मामले सामने आए। वहीं 136 लोगों की मौत हो गई। राज्य में ऑक्सिजन और अस्पताल बेड की बढ़ती मांग के बीच राज्य ने कड़ी पाबंदियां लगाने का फैसला लिया। जानिए लॉकडाउन के दौरान क्या खुला रहेगा और क्या बंद- -सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, आंगनबाड़ी केंद्र और दूसरे शिक्षण संस्थान 30 मई तक बंद। -सभी सरकारी ऑफिस और प्राइवेट संस्थान बंद रहेंगे। सिर्फ जरूरी सेवाओं जैसे हेल्थ केयर, पशुचिकित्सक सेवा, कानून-व्यवस्था, न्यायालय, सामाजिक कल्याण गृह, करेक्शनल सर्विस, पावर, पेयजल सप्लाइ, टेलिकॉम, इंटरनेट, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन और सिविल डिफेंस, सैनिटाइजेशन, सीवरेज और अंतिम संस्कार सेवा। -शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल, मार्केट कॉम्प्लेक्स, स्पा, ब्यूटी पार्लर, सिनेमा हॉल, रेस्तरां, बार स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स, जिम, स्विमिंग पूल बंद रहेंगे। -रिटेल शॉप और सप्लाइ, बाजार और सब्जी, फल, ग्रॉसरी मिल्क, ब्रेड, मीट और अंडे की दुकानें सुबह 7 बज से 10 बजे तक दुकानें खुलेंगी। -स्वीटमीट दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगी। -जूलरी और साड़ी की दुकानें दोपहर 12 बजे से 3 बजे खोली जा सकती हैं। -मेडिसिन दुकानें और ऑप्टिकल शॉप सामान्य कामकाजी घंटे के दौरान खुली रहेंगी। -पार्क, चिड़ियाघर, सेंचुरी आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। सिर्फ रखरखाव के लिए खोले जाएंगे। -सभी अंतर्राज्यीय लोकल ट्रेन, मेट्रो रेलवे और अंतर्राज्यीय बस सेवा और अंतर्देशीय जल परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। सिर्फ इमर्जेंसी और जरूरी सेवाओं की अनुमति रहेगी। -प्राइवेट वाहनों, टैक्सी, ऑटो रिक्शा का उपयोग निषेध रहेगा। सिर्फ अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक केंद्र, क्लीनिक, वैक्सिनेशन सेंटर, एयरपोर्ट, टर्मिनल पॉइंट, मीडिया हाउस वगैरह जाने के लिए वाहन ले जाने की अनुमति रहेगी। -सभी प्रशासनिक, अकैडमिक, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिकल, कल्चरल और धार्मिक गतिविधियों पर रोक रहेगी। -सभी इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बंद रहेंगी। सिर्फ मेडिकल सप्लाइ, कोविड प्रोटेक्टिव सप्लाइ, हेल्थ और हाइजीन केयर प्रोडक्ट, ऑक्सिजन और ऑक्सिजन सिलिंडर की इंडस्ट्री खुली रहेंगी। -टी गार्डन का संचालन प्रत्येक शिफ्ट में 50 फीसदी क्षमता के साथ होगा। -जूट मिलों का संचालन प्रत्येक शिफ्ट 30 फीसदी क्षमता के साथ होगा। -ई-कॉमर्स और सभी सामानों की होम डिलिवरी की अनुमति रहेगी।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत 2-2 हजार रुपये की किस्त जारी करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल की तकलीफों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज पूरी मानवता का एक अदृश्य शत्रु से मुकाबला है। उन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ देश में जारी टीकाकरण अभियान का भी जिक्र किया। इस पर कांग्रेस पार्टी लाल हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ट्विटर के जरिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्रियों जयराम रमेश और पी. चिदंबरम ने ट्वीट किए। जयराम के निशाने पर आए पीएम जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य पर कि "हमारा मुकाबला एक अदृश्य दुश्न से है", जयराम रमेश ने कहा, "दुश्मन अदृश्य हो सकता है, लेकिन शासन संचालन में आपकी असफलता बिल्कुल साफ झलक रही है।" पीएम ने आज अपने संबोधन में कहा, "बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियो ने सहा है,अनेकों लोग जिस दर्द से गुजरे हैं, तकलीफ से गुजरे हैं वो मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं।" फिर बरसे राहुल गांधी वहीं, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वैक्सीन पॉलिसी को लेकर केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र ऐसी गलतियां कर रहा है जिसे भारत झेल नहीं पाएगा। उन्होंने वैक्सीन के वितरण की जिम्मेदारी राज्यों को दिए जाने का सुझाव दिया। चिदंबरम ने केंद्र सरकार को घेरा उधर, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम ने वैक्सीन की कीमत सुनिश्चित नहीं करने पर नाराजगी जताई और केंद्र सरकार को गरीब विरोधी करार दे दिया। उन्होंने लिखा, "गरीबों को टीका लगवाने के लिए अनिश्चित इंतजार करना होगा। यह केंद्र सरकार के गरीब विरोधी और कॉर्पोरेट हितैषी होने का एक और प्रमाण है। टीकों की एक कीमत तय करने की उसकी अनिच्छा से इसकी पुष्टि होती है। दो कंपनियां बंपर लाभ कमा रही हैं।" सेंट्रल विस्टा के बहाने तंज उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार कोविड वैक्सीन के उत्पादन में दो भारतीय कंपनियों के एकाधिकार का संरक्षण करना चाहती है। इससे साबित होता है कि सरकार को मांग-आपूर्ति में पैदा हुई खाई की कोई चिंता नहीं है। चिदंबरम ने मुफ्त टीकाकरण पर खर्च की तुलना सेंट्रल विस्टा की लगात से करते हुए पीएम मोदी पर जबर्दस्त कटाक्ष किया है। उन्होंने अपना हमला जारी रखते हुए कोविड वैक्सीन के पेटेंट को लेकर सरकार पर ढुलमुल नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस सरकार के तीन-तीन चेहरे हैं। ध्यान रहे कि कांग्रेस पार्टी कोविड मैनेजमेंट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लगातार कटघरे में खड़ा करती रही है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तो वैक्सीन पर जीएसटी लगाने के फैसले की भी कड़ी आलोचना कर चुके हैं।
नई दिल्ली कोरोना वैक्सीन के संबंध में राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना वाले पोस्टर चिपकाने के मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने शनिवार बताया कि गुरुवार पुलिस को पोस्टर के बारे में सूचना मिली जिसके बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने विभिन्न जिलों में 17 एफआईआर दर्ज की। ये पोस्टर शहर के कई हिस्सों में लगाए गए इन पर लिखा था 'मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी'। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा अभी यह पता लगाने के वास्ते जांच चल रही है कि किसके कहने पर शहर के विभिन्न स्थानों पर ये पोस्टर लगाए गए और इसके अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी तीन एफआईआर उत्तरपूर्वी दिल्ली में दर्ज की गई और वहां से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तीन FIR पश्चिम दिल्ली में और तीन FIR बाहरी दिल्ली में दर्ज की गईं। शहर के मध्य हिस्से में दो प्राथमिकियां दर्ज की गईं और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। दो एफआईआर रोहिणी में दर्ज की गईं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि एक प्राथमिकी पूर्वी दिल्ली में दर्ज की गई और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक प्राथमिकी द्वारका में दर्ज की गई और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि एक प्राथमिकी उत्तरी दिल्ली में दर्ज की गई और एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि इस शख्स ने दावा किया है कि उसे तीन पोस्टर चिपकाने के लिए 500 रुपये दिए गए। एक अन्य मामला शाहदरा में दर्ज किया गया, जहां पुलिस ने घटना की सीसीटीवी फुटेज बरामद की और इस घटना में शामिल लोगों को पकड़ने की कोशिश की।
मुंबई महाराष्‍ट्र के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने सोनिया गांधी को एक खुला खत लिखा है। इसके जरिए उन्‍होंने कांग्रेस को एक रचनात्‍मक विपक्ष की भूमिका निभाने की नसीहत दी है। पत्र का एक बड़ा हिस्‍सा इसी बात पर है कि कांग्रेस के समर्थन से बनी महाराष्‍ट्र सरकार राज्‍य में कोरोना महामारी से निपटने में नाकाम रही है। पेश है फडणवीस का पूरा संदेश: 'आदरणीय, श्रीमती सोनिया गांधी जी महोदया, आशा करते हैं कि आप स्वस्थ एवं कुशल होंगी। आप से पत्राचार का कुछ विशेष कारण है। हाल ही में मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को भेजे आपके कुछ पत्र एवं कांग्रेस नेताओं के बयान पढ़ने में आए। शायद कुछ मुद्दे आपके ध्यान में नहीं लाए गए, ऐसा मुझे प्रतीत हुआ है। बस केवल उन्हीं बातों को आपके सम्मुख रखना इस पत्राचार का औचित्य है। कई महीनों से हम सब कोरोना की महामारी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में कई सवाल देश की स्थिति पर उठाए गए। यह तो आपके संज्ञान में होगा ही कि, समूचे देश की स्थिति का विचार हम इस महामारी के परिपेक्ष्य में करते हैं तब महाराष्ट्र की स्थिति को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दिखाया महाराष्‍ट्र का आंकड़ा अगर हम 13 मई 2021 की बात करें तो देश के कुल कोरोना संक्रमण में 22 प्रतिशत संक्रमण का प्रमाण महाराष्ट्र का ही है (जो कई महीनों तक 30 प्रतिशत से भी अधिक रहा) देश की कुल मौतों में महाराष्ट्र का प्रतिशत आज भी 31 फीसदी के करीब है। अगर सक्रिय रोगी की बात करें तो 14 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र में है। तो यह बात साफ है और हम आशा करते हैं कि, आप भी इस बात से सहमत होंगी कि, यदि महाराष्ट्र के हालात में जल्द सुधार होता है तो देश के उपलब्ध संसाधनों पर दबाव कम होगा और इस संकट का हम पूरी ताकत के साथ मुकाबला कर सकेंगे। 'महाराष्‍ट्र को केंद्र की पूरी मदद' जैसा कि आप जानती हैं कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है, फिर भी केंद्र की मोदी सरकार पूरी ताकत के साथ महाराष्ट्र की जनता के साथ खडी है। देश भर में जो भी राहत और सहायता उपलब्ध कराई गई उसमें महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा मदद मिली है। महाराष्ट्र को 1.80 करोड़ वैक्सीन दी गई, 8 लाख से अधिक रेमडेसिवीर महाराष्ट्र को प्राप्त हुई। अगर ऑक्सिजन की बात करें तो करीब 1750 मीट्रिक टन की आपूर्ति हो रही है। वेंटीलेटर्स, BiPAP, तथा ऑक्सिजन कंसन्‍ट्रेटर भी बड़े पैमाने पर दिये गए हैं। हां यह बात अलग है कि, अपनी नाकामी छुपाने के लिए कई नेता मोदी सरकार पर टिप्पणी करने को ही अपना अंतिम लक्ष्य समझते हैं। 'मौत छिपा रही महाराष्‍ट्र सरकार' प्रदेश सरकार और मीडिया का एक वर्ग मुंबई को ही महाराष्ट्र समझने की भूल करता है, परंतु मुंबई की भी परिस्थिति देखे तो यहां भी टेस्ट की कमी, कम टेस्ट में भी रैपिड एंटीजन टेस्ट का बहुतायत में समावेश करके एक नया मॉडल बनाया जा रहा है। कोरोना के कारण होने वाली मौतों को भी छुपाने का काम किया जा रहा है। 'डेथ ड्यू टू अदर रीजन' इस श्रेणी में भी जहां महाराष्ट्र के अन्य जिलों को मिलाकर 0.8 प्रतिशत मौते दर्ज की गई, वहीं मात्र मुंबई में यह 40 प्रतिशत है। महाराष्‍ट्र मॉडल पर सवाल हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि मौतों को छुपाया जाए। मुंबई में सालाना होने वाली मौतें औसतन 88,000 के आसपास है, लेकिन 2020 में इसमें 20,719 की वृद्धि हुई। इनमें से कोरोना के कारण बताई गयी मौतें 11,116 थी। मात्र, 2020 में 9603 कोरोना मौतें छुपाई गईं। यही क्रम इस वर्ष भी जारी है। क्या इतने बड़े पैमाने पर मौतों को छिपाना ही महाराष्ट्र मॉडल है? आज भी शवों के अंतिम संस्‍कार के लिए वेटिंग पीरियड है। देश में हर रोज 4000 मौतें रिकॉर्ड हो रहीं, तो उसमें 850 केवल महाराष्ट्र से हैं। इसका मतलब 22 फीसदी मौतें केवल महाराष्ट्र में ही रिकॉर्ड हो रही है और सरकार मात्र अपनी वाहवाही करने में व्यस्त है। 'भगवान भरोसे छोड़ा राज्‍य' महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की सरकार ने मानो मराठवाडा, विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र जैसे पिछडे क्षेत्रों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। यहां कोई मदद नहीं दी जा रही। ग्रामीण इलाकों में ना तो अस्पताल के बेड्स उपलब्ध है और ना ही इलाज। रेमडेसिवीर और ऑक्सीजन के लिए भी संघर्ष करना पडता है। उच्च न्यायालयों के विभिन्न खंडपीठ को हस्तक्षेप कर रेमडेसिवीर आपूर्ति के लिए आदेश जारी करने पड रहे हैं। महाराष्ट्र में इससे पहले इतनी भेदभावपूर्ण नीति कभी नहीं देखी। आज ग्रामीण महाराष्ट्र में कोरोना का फैलाव एवं कोरोना से होने वाली मौत का तांडव यह अप्रत्याशित है। रेमडेसिवीर की कालाबाजारी में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर पकडे जाते हैं तो उनका पीसीआर तक नहीं मांगा जाता, यह आज महाराष्ट्र के हालात हैं। 'केवल छवि सुधारने की कोशिश' आज भी सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित केस के कारण महाराष्ट्र में लॉकडाउन की अवधि बढा दी गई है। कई बार संक्रमण कम रहते यह प्रयास भी लाजमी है, परंतु ऐसा करते समय गरीब, किसान तथा उपेक्षित वर्गों को सहायता देना, किसी भी सरकार का कर्तव्य होता है। लेकिन जहां देश के कई छोटे-बड़े राज्य सहायता देते नजर आते हैं, वहीं महाराष्ट्र में अब तक कोई पैकेज किसी भी वर्ग को नही दिया गया। केवल बजट के आंकड़ों की हेराफेरी की गई। यहां तो सोशल मीडिया के जरिए टूटी हुई छवि सुधारने के लिए टेंडर पास किए जा रहे हैं, लेकिन कोई मदद किसी को नहीं हो रही। एक तरफ कोरोना का कहर, दूसरी ओर प्रदेश की सरकार का, जिसमें आप की कांग्रेस पार्टी भी एक हिस्सेदार है, कोई मदद ना करना राज्य की जनता के लिए बेहद पीडादायक अनुभव है। 'सकारात्‍मक विपक्ष बनने की नसीहत' इतना सब होने के बावजूद एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका हम महाराष्ट्र में निभा रहे हैं। हम यह जानते हैं कि इस संकट की घड़ी में सरकार को सुझाव देना तो हमारा कर्तव्य है, लेकिन नकारात्मक माहौल न बने, यह भी हमारे प्रयास होने चाहिए। केवल टीका-टिप्पणी से संकट की इस घड़ी में कोई रास्ता नहीं निकलेगा। केंद्र की सरकार पर टिप्पणी करते वक्त जहां आपकी या आपके समर्थन से चलनेवाली सरकारें जिन राज्यों में है, वहां क्या चल रहा है, इसे भी एक बार स्वयं के विचार सम्मुख रखना दायित्व बनता है। आशा है कि महाराष्ट्र की यह स्थिति आपके सम्मुख आई होगी। यह समय राजनीति करने का बिल्कुल नहीं है बल्कि जनता के साथ एकजुटता के साथ खड़ा होने का है। हमारी अपेक्षा है कि अपनी सरकारों को भी आप उचित नसीहत देंगी। राजनीति में और नकारात्मक भाव पैदा करने से कुछ नहीं होगा। हमारे प्रधानमंत्री मा. नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों को पूरा विश्व आज देख रहा है और सराहना भी कर रहा है। और यही कारण है कि इस महामारी में पूरा विश्व भारत के साथ खड़े होकर भारत को हरसंभव मदद कर रहा है। मुझे इस बात का भी आश्चर्य है कि भारतीय वैक्सीन को सिरे से नकारने वाली आपकी कांग्रेस पार्टी एवं आपके मुख्यमंत्री गण अब वैक्सीन पर राजनीति कर रहे हैं। परंतु भारत सरकार ने वैक्सीन निर्माण में अभूतपूर्व पहल की है। हर महीने निर्माण बढ़ रहा है एवं अगस्त से दिसंबर के बीच 200 करोड़ वैक्सीन निर्मित होगी।
नई दिल्ली देश के पहले आर्मी चीफ कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनको याद करते हुए कांग्रेस पार्टी की ओर से एक ट्वीट किया गया लेकिन फोटो करिअप्पा की जगह मानेकशॉ की लगा दी। सोशल मीडिया पर कांग्रेस की इस गलती के बाद लोगों के अलग- अलग रिएक्शन आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर हालांकि गलती सुधार ली गई लेकिन इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट के जरिए लोग सोशल मीडिया पर अलग - अलग कमेंट कर रहे हैं। राजीव चंद्रशेखर ने ट्वीट करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा साथ ही फोटो गलत होने की बात कही। अनुषा रवि ने लिखा कि जानकारी नहीं होना अलग बात है लेकिन ट्वीट करने वाले को मानेकशॉ का नाम तो पढ़ लेना चाहिए था। फोटो बैज पर नाम साफ- साफ दिख रहा है। एक अन्य यूजर ने लिखा है कि इतने साल के शासन के अनुभव के बाद भी मानेकशॉ और करिअप्पा के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं।
लखनऊ पंजाब के संगरूर जिले में स्थित मुस्लिम बहुल कस्बे मलेरकोटला को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य का नया जिला बनाने की घोषणा की है। इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब के सीएम और कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है। सीएम योगी ने कहा कि मत और मजहब के आधार पर किसी प्रकार का विभेद भारत के संविधान की मूल भावना के विपरीत है। इस समय मलेरकोटला (पंजाब) का गठन किया जाना कांग्रेस की विभाजनकारी नीति का परिचायक है। दरअसल शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने घोषणा की कि मलेरकोटला राज्य का नया जिला होगा। संगरूर जिले में स्थित मलेरकोटला मुस्लिम बहुल कस्बा है। मलेरकोटला के साथ लगे अमरगढ़ और अहमदगढ़ भी पंजाब के इस 23वें जिले का हिस्सा होंगे। संगरूर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित मलेरकोटला को जिले का दर्जा कांग्रेस का चुनावी वादा था। ईद के मौके पर कैप्टन ने किया ऐलान ईद-उल-फितर के मौके पर लोगों को बधाई देने के लिए राज्य स्तर पर ऑनलाइन तरीके से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मलेरकोटला के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज, एक महिला कॉलेज, एक नया बस स्टैंड और एक महिला पुलिस थाना बनाने की भी घोषणा की थी। नए जिले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं जानता हूं कि यह लंबे समय से लंबित मांग रही है। सिंह ने कहा कि मलेरकोटला शहर, अमरगढ़ और अहमदगढ़ भी मलेरकोटला की सीमा में आएंगे। आजादी के समय पंजाब में थे 13 जिले बाद में सीएम अमरिंदर ने एक ट्वीट में उन्होंने कहा, "यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि ईद-उल-फितर के पाक मौके पर मेरी सरकार ने घोषणा की है कि मलेरकोटला राज्य का नवीनतम जिला होगा। 23वें जिले का विशाल ऐतिहासक महत्व है। जिला प्रशासनिक परिसर के लिए उचित स्थान का तत्काल पता लगाने का आदेश दिया है। सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि देश की आजादी के वक्त पंजाब में 13 जिले थे। वर्ष 1947 में बंटवारे के दौरान मलेरकोटला में काफी हद तक शांति रही, जबकि भारत-पाकिस्तान सीमा पर सांप्रदायिक संघर्ष और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ।
लखनऊ पंजाब के संगरूर जिले में स्थित मुस्लिम बहुल कस्बे मलेरकोटला को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य का नया जिला बनाने की घोषणा की है। इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब के सीएम और कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है। सीएम योगी ने कहा कि मत और मजहब के आधार पर किसी प्रकार का विभेद भारत के संविधान की मूल भावना के विपरीत है। इस समय मलेरकोटला (पंजाब) का गठन किया जाना कांग्रेस की विभाजनकारी नीति का परिचायक है। दरअसल शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने घोषणा की कि मलेरकोटला राज्य का नया जिला होगा। संगरूर जिले में स्थित मलेरकोटला मुस्लिम बहुल कस्बा है। मलेरकोटला के साथ लगे अमरगढ़ और अहमदगढ़ भी पंजाब के इस 23वें जिले का हिस्सा होंगे। संगरूर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित मलेरकोटला को जिले का दर्जा कांग्रेस का चुनावी वादा था। ईद के मौके पर कैप्टन ने किया ऐलान ईद-उल-फितर के मौके पर लोगों को बधाई देने के लिए राज्य स्तर पर ऑनलाइन तरीके से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मलेरकोटला के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज, एक महिला कॉलेज, एक नया बस स्टैंड और एक महिला पुलिस थाना बनाने की भी घोषणा की थी। नए जिले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं जानता हूं कि यह लंबे समय से लंबित मांग रही है। सिंह ने कहा कि मलेरकोटला शहर, अमरगढ़ और अहमदगढ़ भी मलेरकोटला की सीमा में आएंगे। आजादी के समय पंजाब में थे 13 जिले बाद में सीएम अमरिंदर ने एक ट्वीट में उन्होंने कहा, "यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि ईद-उल-फितर के पाक मौके पर मेरी सरकार ने घोषणा की है कि मलेरकोटला राज्य का नवीनतम जिला होगा। 23वें जिले का विशाल ऐतिहासक महत्व है। जिला प्रशासनिक परिसर के लिए उचित स्थान का तत्काल पता लगाने का आदेश दिया है। सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि देश की आजादी के वक्त पंजाब में 13 जिले थे। वर्ष 1947 में बंटवारे के दौरान मलेरकोटला में काफी हद तक शांति रही, जबकि भारत-पाकिस्तान सीमा पर सांप्रदायिक संघर्ष और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ।
नई दिल्ली इंडियन यूथ कांग्रेस के चीफ श्रीनिवास बी. वी से दिल्ली पुलिस की पूछताछ पर भड़की कांग्रेस मोदी सरकार पर मुसीबत में लोगों की मदद करने वालों के उत्पीड़न का आरोप लगा रही है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने उसे सामान्य प्रक्रिया के राजनीतिकरण नहीं करने की नसीहत दी है। पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने उनसे भी लिखित में जवाब मांगा था और उन्होंने उसे जवाब दे दिया है, जिसमें सारी डीटेल हैं। कोरोना मरीजों के लिए इलाज में इस्तेमाल होने वाली फैबीफ्लू दवा को मुफ्त में बांटने वाले गौतम गंभीर ने कहा, 'दिल्ली पुलिस ने लिखित में जवाब मांगा और लिखित जवाब दिया गया, जिसमें सारी डीटेल दी गई। किस दिन खरीदा, किससे खरीदा, किस तरह से बांटा। एक व्यक्ति को बिठाया था, जो प्रिस्क्रिप्शन और आधार कार्ड पर दवा दे रहा था। किसी को 5 दिन की दवा चाहिए था, तो उसे 3 दिन का दिया। किसी को 2 दिन की दवा चाहिए था, उसे 1 दिन का दिया। सारे सामान का बिल है।' श्रीनिवास से पूछताछ पर कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद गंभीर ने ट्वीट किया, 'विपक्ष को तय प्रक्रिया के गैरजरूरी राजनीतिकरण में नहीं शामिल होना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने हमसे जवाब मांगा है और हमने जानकारी दी और सभी डीटेल मुहैया करा दिए हैं। मैं दिल्ली और यहां के लोगों की अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतरीन सेवा करता रहूंगा।' बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने भी ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली पुलिस ने उनसे भी सवाल पूछे थे और उन्होंने सभी डीटेल मुहैया करा दिए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को हर चीज का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। गंभीर ने कहा कि वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिल्ली के लोगों की सेवा करना जारी रखेंगे। दरअसल, कोरोना महामारी के वक्त लोगों की जीवनरक्षक दवाओं और उपकरणों के जरिए मदद करने वाले प्रभावशाली लोगों से दिल्ली पुलिस पूछताछ कर रही है। श्रीनिवास से पहले दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता हरीश खुराना और आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडे से भी इसे लेकर पूछताछ की जा चुकी है। दिल्ली पुलिस की पूछताछ के बाद श्रीनिवास ने कहा, ‘पुलिसकर्मी जानना चाहते थे कि लोगों के बीच वितरित करने के लिए मुझे राहत सामग्री कैसे मिली। मैंने कहा कि मैं लोगों की जान बचाने के लिए मदद कर रहा हूं और हमारे साथ भारतीय युवा कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की समूची टीम है जो ऐसी सामग्री का इंतजाम करती है और इसे लोगों को मुहैया कराती है।’ दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 मई को पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी में नेताओं की तरफ से जीवनरक्षण दवाएं हासिल करने और इसे कोरोना मरीजों को वितरित करने के मामलों की पड़ताल करने और अपराध के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कदम उठाने को कहा था। हाई कोर्ट में डॉ. दीपक सिंह ने एक याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि महामारी के पीक पर होने के समय कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए गुहार लगाने वाले लोगों को दवाइयां बांटी थीं। इस मुश्किल घड़ी में जब लोग दवाइयों के लिए तरस रहे थे तो नेताओं के पास ये कैसे उपलब्ध थीं। हाई कोर्ट से इस मामले की जांच कराने की गुहार लगाई गई थी। हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इसकी जांच करने के निर्देश दिए थे। इसी सिलसिले में क्राइम ब्रांच सभी नेताओं से पूछताछ कर रही है।
नई दिल्ली, राज्य सरकारें कोरोना वैक्सीन की कमी की शिकायतें कर रही हैं। कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी की वजह से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के टीकाकरण को स्थगित भी कर दिया है लेकिन मई महीने के आंकड़ें बता रहे हैं कि राज्यों और निजी क्षेत्र को केंद्र की तुलना में ज्यादा वैक्सीन मिलने जा रही है। आइए जानें क्‍या कहते हैं इस बारे में आधिकारिक आंकड़े... केंद्र से मिलेगी एक करोड़ 91 लाख से ज्‍यादा डोज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अगले 15 दिनों में यानी 16-31 मई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोना वैक्सीन की एक करोड़ 91 लाख 99 हजार डोज की सप्लाई की जाएगी। इसमें कोविशील्ड की एक करोड़ 62 लाख 50 हजार और कोवैक्सीन की 29.49 लाख डोज शामिल है। इन्‍हें मिलेगी फ्री वैक्‍सीन इससे पहले पखवाड़े यानी 1-15 मई के दौरान केंद्र की तरफ से राज्यों को 1.70 करोड़ डोज दी गई थीं। इस तरह राज्यों को केंद्र से मई में कुल 3.62 करोड़ डोज की सप्लाई की जाएगी। ये वैक्सीन राज्यों को स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 साल से अधिक उम्र के प्राथमिकता वाले समूह के लोगों को लगाने के लिए केंद्र की ओर मुफ्त में दी जाएगी। राज्‍य और निजी क्षेत्र करेंगे खरीद वहीं, राज्य और निजी क्षेत्र अपने स्तर से इस महीने वैक्सीन की 4.39 करोड़ डोज की खरीद करेंगे, जो केंद्र को सप्लाई की जा रही वैक्सीन से 77 लाख डोज अधिक है। वैक्सीन की कुल उत्पादन का 50 फीसद केंद्र के हिस्से के लिए रिजर्व रखने की शर्त के बावजूद सप्लाई में इस अंतर के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। कोरोना के खिलाफ मिला एक और हथियार इस बीच देश को कोरोना के खिलाफ एक और हथियार मिल गया है। रूस से आयातित वैक्सीन स्पुतनिक-वी की पहली डोज हैदराबाद में लगाई गई। आधिकारिक बयान के मुताबिक इसकी एक डोज की कीमत 995.4 रुपये होगी। कंपनी की ओर से कहा गया है कि वैक्सीन का जब देश में उत्पादन शुरू हो जाएगा तब इसकी कीमत कम होने की संभावना है। स्पुतनिक-वी 91.6 फीसद प्रभावी भारत में स्पुतनिक-वी की पहली डोज डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के ही कस्टम फार्मा सर्विस के ग्लोबल हेड दीप सप्रा को लगाई गई। डॉ. रेडीज लैबेरोटरी ने बताया कि इस वैक्सीन की पहली खेप इस महीने की पहली तारीख को भारत पहुंची थी। हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी ने 13 मई को देश में इस वैक्सीन को लगाने की मंजूरी दी। मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक स्पुतनिक-वी को 91.6 फीसद प्रभावी पाया गया है।
भोपाल। कोरोना महामारी ने मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार कर रखा है। सांसों के साथ छोड़ने के साथ ही अपने भी दूरी बना रहे हैं। शव को अंत्येष्टि का इंतजार है, तो अस्थियों को अपनों के हाथ नदियों में प्रवाहित होने का, लेकिन संक्रमण के भय ने अपनों को भी दूर कर दिया है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक सेवा कार्यों से मानवता की नई इबारत लिख रहे हैं। जिन शवों को अपने छोड़ गए, उनकी अंत्येष्टि से लेकर अस्थि विसर्जन तक की व्यवस्था कर रहे हैं। कोरोना काल में मृतकों की अंत्येष्टि, अस्थि विसर्जन से अपनों ने खींचे हाथ कोरोना में मदद के साथ पूरे प्रदेश में संघ का सेवा कार्य जारी है। भोपाल के सुभाष नगर और संत नगर विश्राम घाट तक कोरोना से मृतकों के शव सीधे अस्पताल से लाए जा रहे हैं, लेकिन उनको मुखाग्नि देने वाला कोई नहीं है। जो परिजन आ भी रहे हैं, वे डरे हुए हैं। ऐसे में स्वयंसेवकों के समूह ने मदद का बीड़ा उठा लिया है। सुभाष नगर मुक्तिधाम में 12 स्वयंसेवकों का दल सुबह ही पहुंच जाता है। वे अस्थि संचयन करते हैं, फिर चितास्थल की सफाई। ट्रक से लकड़ी उतारकर उसे व्यवस्थित करते हैं। किसी शव को मुखाग्नि देने वाला नहीं है, तो उसकी अंत्येष्टि की विधियां पूरी करते हैं। आरएसएस के स्वयंसेवकों ने विश्राम घाट से अस्थि विसर्जन तक संभाला मोर्चा संत नगर स्थित विश्राम घाट पर भी ऐसे सेवा कार्य करने के लिए रोज सुबह नौ बजे से आठ- दस स्वयंसेवकों का दल पहुंच जाता है। दिनभर में करीब 30 स्वयंसेवक यहां क्रम से सेवा करने पहुंचते हैं। यहां अंतिम संस्कार में विधि-विधान संबंधी राशि की मांग अधिक हुई, तो स्वयंसेवकों ने आगे आकर मोर्चा संभाल लिया। जो लोग अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री नहीं ला पाते, स्वयंसेवक उसका भी इंतजाम करते हैं। स्वयंसेवक पीपीई सूट में करते हैं कोरोना पीड़ित शवों के दाह संस्कार ग्वालियर में स्वयंसेवक दाह संस्कार कर रहे हैं। कोरोना पीड़ित शवों के दाह संस्कार के दौरान स्वयंसेवक पीपीई सूट में होते हैं। साथ ही वे लक़़ड़ी के अलावा गोबर के कंडों का उपयोग कर रहे हैं। वे प्रत्येक शनिवार गंगा में अस्थि विसर्जन करने जाते हैं। अब तक आठ मृतकों की अस्थियां विसर्जित की जा चुकी हैं, वहीं जिन स्वजन के पास अस्थियों को रखने की व्यवस्था नहीं है, उनकी मदद के लिए हर विश्राम घाट में लोहे की आलमारियां रखी गई हैं। विदिशा के रंगई करैया पंचायत में 24 अप्रैल से शुरू हुई पहल में अब तक 130 शवों का दाह संस्कार किया जा चुका है। यहां रो रहे एक युवक को अपनी मां की अंत्येष्टि की व्यवस्था करते देख स्वयंसेवकों ने मदद की पहल की थी, जो अभी तक जारी है। प्रदेश में 24 आईसोलेशन केंद्र और पांच कोविड केयर सेंटर का संचालन संघ के मध्यभारत प्रांत सेवा प्रमुख मुकेश तिवारी ने बताया कि मध्यभारत के प्रशासनिक 16 जिलों को संघ की दृष्टि से 31 जिलों में बांटकर अन्य सेवा कार्य भी संचालित हैं। इनमें 24 स्थानों पर 1200 बिस्तर वाले आइसोलेशन केंद्र और 270 बेड वाले पांच कोविड केयर सेंटर संचालित हैं। इनमें से 50 पलंग ऑक्सीजन व्यवस्था से युक्त हैं। लगभग 100 स्थानों पर भोजन के पैकेट जरूरतमंदों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वयंसेवक टीकाकरण के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
इंदौर, मध्य प्रदेश के इंदौर अंचल में स्थित खंडवा जिले ने अभूतपूर्व ढंग से संक्रमण कम कर दिखाया है। यहां एक सप्ताह में ही संक्रमण दर 4.3 से घटकर 2.2 फीसद रह गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस 'खंडवा मॉडल' की प्रशंसा की है। उन्होंने राज्य के अन्य जिलों को भी इस मॉडल के अनुसरण करने के निर्देश दिए हैं। विदित हो कि इससे पहले आक्सीजन की खपत नियंत्रित करने के लिए खंडवा जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी मुख्यमंत्री तारीफ कर चुके हैं। खंडवा ने उठाए ये कदम संदिग्ध और कम लक्षण वाले संक्रमितों के लिए तहसील स्तर पर कोविड केयर सेंटर शुरू किए। संक्रमण को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित करने के लिए किल कोरोना अभियान अंतर्गत मरीजों को कोरोना की दवाई की किट बांटी। बढ़ते संक्रमण से निपटने के लिए स्वैच्छिक लॉकडाउन के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना की सैंपलिंग और रेपिड किट से की जा रही जांच। कोरोना के प्रति जागरूकता के लिए प्रशासनिक टीम के अलावा सेवा भारती और सामाजिक संस्थाओं को जोड़ा। खंडवा के कलेक्टर अनय द्विवेदी ने कहा, 'मास्क के उपयोग व शारीरिक दूरी के पालन करवाने पर शहर से लेकर गांव तक विशेष ध्यान दिया गया। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोगों से बांड भरवाने के साथ ही प्रतिदिन समीक्षा कर नियंत्रण के प्रयास किए गए। शासन की गाइडलाइन और जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर अमल से जिले में संक्रमण की दर घट रही है। तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए जरूरी व्यवस्था की जा रही है।
नई दिल्ली, कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से सामना कर रहे भारत में राहत की खबर यह है कि बीते 24 घंटों में आए नए मामलों से अधिक संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या हैं लेकिन मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बीते 24 घंटों में देश में 3,43,144 नए कोरोना संक्रमितों की पहचान हुई और 4000 लोगों की मौत हो गई। वहीं 3,44,776 लोगों ने कोरोना से जीत हासिल की और अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए। मंत्रालय ने यह आंकड़ा शुक्रवार सुबह जारी किया है। उल्लेखनीय है कि पिछले शुक्रवार को देश भर में संक्रमण के नए मामलों का आंकड़ा सबसे अधिक 4,14,188 सामने आया था। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में गुरुवार तक कोरोना वायरस के लिए कुल 31,13,24,100 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 18,75,515 सैंपल कल टेस्ट किए गए। अब तक देश में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2,40,46,809 हो गया और मृतकों की संख्या 2,62,317 हो गई है। वर्तमान में देश भर में 37,04,893 सक्रिय मरीज हैं जिनका इलाज जारी है। बता दें कि देश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 16 जनवरी से शुरू वैक्सीनेशन अभियान अभी जारी है। इसके तहत अब तक कुल 17,92,98,584 वैक्सीनेशन की जा चुकी है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस की 20,27,162 वैक्सीन लगाई गईं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुधवार तक वैक्सीन की कुल 17 करोड़ 70 लाख 85 हजार से ज्यादा डोज लगाई गई। इनमें से 34.66 लाख डोज 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 18-44 आयुवर्ग के लोगों को पहली डोज के रूप में दी गई। मंत्रालय ने बताया कि लाभार्थियों में 95.98 लाख स्वास्थ्यकर्मी (पहली डोज), 65.68 लाख स्वास्थ्यकर्मी (दूसरी डोज), 1.42 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स (पहली डोज) और 80.42 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स (दूसरी डोज) शामिल हैं। इसके अलावा 60 साल से अधिक उम्र के 5.40 करोड़ लोगों को पहली और 1.67 करोड़ लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज भी अब तक दी जा चुकी है। वहीं, 45-60 आयुवर्ग के 5.62 करोड़ लोगों को पहली और 81.31 लाख लोगों को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है।
नई दिल्ली,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश में जारी कोरोना संकट पर चिंता व्यक्त की और दवाईयों व जरूरी सामानों की कालाबाजारी करने वालों को आड़े हाथों लिया। प्रधानमंत्री ने कहा, ' इस संकट के समय में दवाईयां और जरुरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारियों में भी कुछ लोग अपने निहित स्वार्थ में लगे हुए हैं। मैं राज्य सरकार से यह आग्रह करुंगा कि इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '100 साल के बाद आई इस तरह की भीषण महामारी कदम-कदम पर परीक्षा ले रही है। हम अपने करीबियों को खो चुके हैं। बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियो ने सहा है, अनेकों लोग जिस दर्द से गुजरे है, तकलीफ से गुजरे है उसे मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं।' आज प्रधानमंत्री मोदी ने PM Kisan Yojna की आठवीं किस्त जारी की और देश के 9.5 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 19000 करोड़ अधिक राशि ट्रांसफर किया।
भोपाल,कोरोना महामारी की दूसरी लहर के संकट को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने शुक्रवार को राज्य के तमाम मीडियाकर्मियों व उनके परिवारों के लिए कोविड संक्रमण इलाज के खर्च को उठाने का जिम्मा लिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के कोविड-19 संक्रमण के इलाज का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, 'मीडिया के पत्रकारों व उनके परिवार के कोविड-19 इलाज संबंधित तमाम खर्च का वहन राज्य सरकार करेगी।' मुख्यमंत्री ने यह जानकारी अपने आधिकारिक ट्वविटर हैंडल पर वीडियो मैसेज के जरिए दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया के पत्रकार साथी दिन रात अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रहे हैं। राज्य में पत्रकार बीमा योजना के तहत अधिमान्य व गैर अधिमान्य पत्रकारों के इलाज की सुविधा है। अब यदि पत्रकार या उनके परिवार का कोई सदस्य संक्रमित होता है तो उनके इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए भी पेंशन का ऐलान किया था।साथ ही इन बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने का जिम्मा लेते हुए अनाथ हुए परिवारों को हर महीने मुफ्त राशन देने का भी वादा किया है। उन्होंने कहा था, 'महामारी ने कई परिवारों को तोड़कर रख दिया। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके बुढ़ापे का सहारा छिन गया और कुछ ऐसे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। वे बच्चे, जिनके पिता, अभिभावक का साया उठ गया और कोई कमाने वाला नहीं है, इन परिवारों को रु.5000 प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी।' मध्य प्रदेश में गुरुवार तक मिली जानकारी के अनुसार, नए कोरोना मरीजों की संख्या में अब तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले दिनों के मुकाबले 11 मई को 784 और 12 मई को 551 नए मरीज कम हुए। पांच मई को प्रदेश में 12,421 नए कोरोना मरीज मिले थे और संक्रमण दर 18.2 फीसद थी। इसके बाद से इसकी संख्या और संक्रमण दर दोनों में लगातार कमी आई है। राज्य के विभिन्न जिलों में गुरुवार को कुल मिलाकर 74 मरीजों की कोरोना के चलते मौत हुई है। इसके साथ ही अब तक मरने वालों की संख्या 6753 हो गई है। गुरुवार को 10,157 मरीज स्वस्थ हुए। हालांकि, सक्रिय मरीजों की संख्या अब भी 1,08,116 है। प्रतिदिन 65 हजार से अधिक सैंपल की जांच हो रही है। रैपिड किट से जांच की संख्या बढ़ने के बाद अब जांच के लिए लंबित सैंपलों की संख्या दो से तीन हजार के बीच ही रहती है।
नई दिल्‍ली, PM Kisan Samman nidhi Yojana के तहत 9.5 करोड़ किसानों के खातों में 19,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों से बातचीत भी करेंगे। PM Kisan Samman nidhi Yojana के तहत किसान परिवार को हर साल मोदी सरकार 6000 रुपये देती है। उनका प्रोग्राम pmindiawebcast.nic.in पर देखा जा सकता है। एग्रीकल्‍चर मिनिस्‍ट्री के मुताबिक PM Kisan की 8वीं किस्‍त (PM Kisan 8th installment) की तारीख तय है। PM Modi 14 मई को सुबह 11 बजे किसानों से बातचीत करेंगे। इसके बाद PM Kisan Yojana की अगली किस्‍त जारी करेंगे। बता दें कि पिछली बार 25 दिसंबर 2020 को 9 करोड़ किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। इस बार 50 लाख किसान ऐसे हैं, जिन्‍हें यह सौगात मिलेगी। राज्य सरकारों ने Rft (Request For Transfer) Sign कर दिया है और केंद्र सरकार Fto (Fund Transfer Order) जनरेट कर चुकी है। किसानों के खाते में Rft Signed by State For 8th Installment स्‍टेट्स लिखा आ रहा है। PMkisan.gov.in पर आप अपने खाते में Login कर डिटेल चेक कर सकते हैं। Kisan ऐसे चेक करें अपना नाम PMkisan.gov.in पर लॉग इन कीजिए। 'Farmers Corner' मिलेगा। 'Farmers Corner' में 'Beneficiary List' का ऑप्‍शन मिलेगा। 'Beneficiary List' के विकल्प पर Click कीजिए। इस पेज पर राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक को ड्रॉप डाउन लिस्ट में से चुनिए। गांव चुनिए। अब 'Get Report' पर Click कीजिए। अब इस योजना के लाभार्थियों की पूरी लिस्ट आ जाएगी। यह लिस्ट अल्फाबेटिक्‍ल ऑर्डर में होती है। यह लिस्ट कई पेज की होती है। इसमें नीचे से पेज बदलकर आप अपना नाम देख सकते हैं। क्‍या है PM Kisan Yojana मोदी सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए साल में 6000 रुपये की मदद के लिए योजना बनाई है। किसानों को यह मदद 2000 रुपये की 3 किस्तों में दी जाती है। DBT के तहत यह रकम सीधे खाते में ट्रांसफर होती है। PM Kisan के तहत 2000 रुपये की पहली किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई, दूसरी किस्त एक अगस्त से 30 नवंबर और तीसरी किस्त एक दिसंबर से 31 मार्च के बीच जारी हो जाती है. इसका अपडेट PM Kisan वेबसाइट पर दिया गया है। दिसंबर में आई थी किस्‍त pmkisan.gov.in पर दिए आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2020 को 9 करोड़ किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। किसान 155261 / 011-24300606, 011-23381092 हेल्‍प लाइन नंबर पर ताजा अपडेट ले सकते हैं।
गुवाहाटी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रणपगली में कैंप का दौरा किया और लोगों से मुलाकात की। चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की वजह से यहां कुछ लोगों ने शरण ली है। धनखड़ ने यहां लोगों से मुलाकात कर उनके दुख-दर्द को सुना। लोग अपना दर्द बयां करते-करते इतने भावुक हो गए कि उन्होंने धनखड़ के पैर पकड़ लिए। एक बुजुर्ग महिला तो धनखड़ से लिपट कर रोने लगीं। हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं गवर्नर जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को भी चुनाव के नतीजों के बाद हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने हिंसा से प्रभावित लोगों से मुलाकात भी की थी। उन्होंने कहा था कि 'मैं किसी भी हालत में बिना किसी रूकावट के अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाऊंगा। देश कोविड की चुनौती से जूझ रहा है। पश्चिम बंगाल को महामारी और चुनाव बाद हुई हिंसा की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।' उन्होंने कहा कि यह हिंसा केवल इस आधार पर हो रही है कि कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से वोट डालने का फैसला लिया। धनखड़ को दिखाए थे काले झंडे राज्यपाल जगदीप धनखड़ को बृहस्पतिवार को सीतलकूची में उस समय काले झंडे दिखाए गए जब वह चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने गए थे। इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी। धनखड़ के कूचबिहार दौरे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निंदा की थी। राज्यपाल को कुछ लोगों ने गोलोकगंज में उस समय काले झंडे दिखाए जब उनका काफिला मथभंगा से सीतलकूची जा रहा था। हालांकि, पुलिस ने सड़क के दोनों ओर मानवश्रृंखला बना रखी थी ताकि कोई प्रदर्शनकारी सड़क पर नहीं आ सके। अफसरों को सीधे आदेश देने का लगा आरोप सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि गवर्नर जगदीप धनखड़ राज्य के अधिकारियों से सीधे आदेश देकर अपने अधिकारों के बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इसे लेकर गवर्नर को चिट्ठी भी लिखी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि धनखड़ राज्य सरकार के अधिकारियों से सीधे बात कर रहे हैं और उन्हें आदेश दे रहे हैं, जबकि उन्होंने पहले भी उनसे ऐसा न करने की अपील की थी।
लखनऊ कोरोना वायरस ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। चारों तरफ हाहाकार मचा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में युवा सर्जन डॉ. नीरज कुमार मिश्रा भी ऐसे लोगों में हैं जो कोरोना की चपेट में आए। डॉ. नीरज को छह महीने में कोरोना ने दो बार चपेट में ले लिया। दूसरी बार उन्हें कोरोना हुआ तो यह पहले से ज्यादा गंभीर था। उनकी हालत देखकर उनके साथी डॉक्टर भी हिम्मत हार चुके थे। डॉक्टर नीरज और उनके परिवार के लिए बहुत भारी समय था, क्योंकि सिर्फ नीरज ही नहीं उनके पिता और मां भी कोरोना की चपेट में थे। उनके बड़े भाई ने कोरोना से दम तोड़ दिया। उनके परिवार के लिए 10 दिनों बहुत ही बुरे बीते। नीरज के फेफड़ों में भारी संक्रमण हो गया, वह वेंटिलेटर पर थे। डॉ. नीरज मिश्रा आईसीयू से बाहर आ गए हैं, लेकिन अब भी ऑक्सिजन सपॉर्ट (90 लीटर प्रति मिनट) पर हैं। नीरज के भाई की मौत के बाद वह अकेले उनका अंतिम संस्कार करने पहुंचे थे। भाई का दाह संस्कार होने के बाद वह जब अस्थियां लेकर घाट से आए और बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल लाया गया और हालत बिगड़ती गई। भाई की अस्थियां अभी भी उनकी कार में रखी हैं। सरकार को दिए सुझाव डॉ. नीरज जिस अस्पताल में भर्ती हैं, उसी में उनके माता-पिता भी भर्ती हैं लेकिन वे कोरोना प्रोटोकॉल के चलते एक दूसरे से नहीं मिल सकते हैं। डॉ. नीरज ने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि बतौर डॉक्टर इलाज करना और मरीज को तौर पर इलाज करवाना बहुत अंतर होता है। उन्होंने इस वीडियो के जरिए सरकार को इलाज में कुछ और बातें शामिल करने की गुजारिश की है। मरीजों को इसलिए हो रहा पैनिक डिसऑर्डर डॉक्टर नीरज ने कहा कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने पाया कि कोरोना बीमारी में सबसे ज्यादा मरीजों को अकेलापन मार रहा है। मरीजों के पास कोई नहीं होता। उन्हें सिर्फ चारों तरफ मशीनें, उनके आवाजें और कुछ बीमार लोग ही नजर आते हैं। लंबे समय तक वे इन चीजों से घिरे रहते हैं और जिसके कारण उन्हें पैनिक डिसऑर्डर हो जाता है। कई मरीजों की हार्ट बीट इस कारण बढ़ जाती है तो कई आत्महत्या कर रहे हैं। इसलिए मरीजों के दिमाग में आते हैं निगेटिव थॉट्स डॉ. नीरज ने कहा, 'मैं एक साइंस स्टूडेंट रहा हूं लेकिन बीमारी के दौरान मैंने पाया कि कोरोना के इलाज में मानसिक और भावात्मक सपॉर्ट की बहुत जरूरत होती है। मरीज इतना मानसिक रूप से कमजोर हो रहा है कि उसे पैनिक डिसऑर्डर हो रहा है। आप रात-रातभर जागते हो। आत्महत्या करने तक की बातें दिमाग में आती हैं। पांच मिनट के लिए ऐसा लगता है कि सब छोड़छाड़ दें... यह निगेटिव थॉट्स आते हैं। मरीज जो 20-25 दिनों तक बिना किसी से मिले सिर्फ मशीनों को सुनते हैं और निगेटिव थॉट्स ही दिमाग में आते हैं।' 'आध्यात्म से मेनटेन हुए सर्चुरेशन' सर्जन ने कहा, 'मैंने इस दौरान फील किया कि जब भी कोई पॉजिटिव बात हो रही होती है या डायवर्जन होता है तो उस समय सर्चुरेशन मेनटेन हो जाता है।' डॉक्टर ने बताया कि इस दौरान मैंने पाया कि मुझे तीन-चार चीजों ने पॉजिटिविटी दी। एक है आध्यत्मिक जुड़ाव, जब भी कानों में महामृत्युंजय जाप, हनुमान चालीसा वगैरह सुनीं तो एक पॉजिटिविटी आई। इसलिए सरकार को ऐसा कुछ अरेंजमेंट करना चाहिए कि मरीज के धर्म के अनुसार ऐसी पॉजिटिव चीजें उनके कानों में जाएं। 'इलाज में शामिल करें यह टीम और मरीजों को घरवालों से मिलवाएं' डॉक्टर ने कहा, 'साइकलॉजिस्ट, मेंटर केयर और मोटीवेशनल लोगों को जोड़कर एक टीम बनानी चाहिए और उन्हें इस इलाज में शामिल करना चाहिए। मरीज के घरवालों को भले ही पांच मिनट के लिए मिलवाएं लेकिन मिलवाएं जरूर। इस दौरान प्रोटोकॉल का पालन और और मेडिकल टीम प्रभावित न हो इसका ख्याल रखें। मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि इलाज में इन बातों को शामिल करें।' ताकि मरीज को अकेलापन नहीं होगा।
नई दिल्ली कोरोना वायरस रोधी टीका बनाने वाली देश की कंपनी भारत बायोटेक ने शुक्रवार को कहा कि उसने दिल्ली, गुजरात, असम, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों को ‘कोवैक्सीन’ की आपूर्ति की है। हैदराबाद स्थित इस कंपनी को टीके की आपूर्ति से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली सरकार की आलोचना भी सहनी पड़ी है। कंपनी ने कहा कि उसने केरल और उत्तराखंड को भी कोवैक्सीन की खेप भेजी है। कर्मचारियों रमजान के महीने में किया लगातार काम भारत बायोटेक की सह- संस्थापक और संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा ईला ने ट्वीट कर कहा, ‘‘कोवैक्सीन को गांधीनगर, गुवाहटी, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलूरू और भुवनेश्वर भेजा गया। इसके लिये हमारे उन सभी कर्मचारियों को धन्यवाद जिन्होंने रमजान के पवित्र महीने के दौरान लगातार काम किया।’’ इससे पहले बृहस्पतिवार को देर रात किये गये ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी कि केरल और उत्तराखंड को टीके की आपूर्ति कर दी गई है। हालांकि, उन्होंने टीके की मात्रा के बारे में नहीं बताया। वैक्सीन सप्लाई को लेकर दिल्ली के रुख पर कर जताया था दुख दिल्ली के उप- मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 12 मई को कहा कि भारत बायोटेक ने सूचित किया है कि वह राज्य सरकार को कोवैक्सीन की अतिरिक्त खेप उपलब्ध नहीं करा सकता है। इस पर इला ने ट्वीट कर कहा कि यह दुखद है कि कुछ राज्य टीके की आपूर्ति के मामले में कंपनी की मंशा को लेकर शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी इससे पहले 10 मई को 18 राज्यों को कोवैक्सीन की आपूर्ति कर चुकी है।
नई दिल्ली रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी की कीमत का खुलासा हो गया है। भारत में इसकी मार्केटिंग करने वाली कंपनी डॉ. रेड्डी के मुताबिक, स्पूतनिक वी की एक डोज करीब 1,000 रुपये में मिलेगी। यानी, अगर आप प्राइवेट में स्पूतनिक वैक्सीन लगवाते हैं तो आपको दो डोज के लिए करीब 2,000 रुपये (एडमिनिस्‍ट्रेशन चार्ज अलग से) खर्च करने होंगे। डॉ. रेड्डी ने आज एक बयान जारी कर कहा है कि स्पूतनिक वी की प्रति डोज की कीमत 948 रुपये होगी और उसपर अलग से 5% जीएसटी देना होगा। 948 रुपये का 5% जीएसटी 47.40 रुपये होता है। इस तरह दोनों को मिलाकर एक डोज स्पूतनिक वी की कुल कीमत 995.40 रुपये होगी। हालांकि, डॉ. रेड्डी का कहना है कि जब वो खुद अपनी फैक्ट्रियों में यह वैक्सीन बनाने लगेगा तो कीमत घट सकती है। ध्यान रहे कि अभी इस वैक्सीन का उत्पादन रूस में ही हो रहा है और वहीं से 1 मई को वैक्सीन की पहली खेप भारत पहुंची है। Sputnik V की पहली डोज लगी भारत में स्‍पूनिक वी की पहली डोज लगा दी गई है। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज में कस्‍टम फार्मा सविर्सिज के ग्‍लोबल हेड दीपक सापरा को हैदराबाद में वैक्‍सीन की पहली डोज दी गई है। उन्‍हें 21 दिन बाद वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी जाएगी। भारत में उपलब्‍ध तीसरी वैक्‍सीन है स्‍पूतनिक वी मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में छपे डेटा के अनुसार, यह वैक्‍सीन कोविड-19 के गंभीर इन्‍फेक्‍शन से पूरी सुरक्षा देती है। 'स्‍पूतनिक वी' डिवेलपर्स के मुताबिक, वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6 प्रतिशत है। यह वैक्‍सीन 0.5 ml-0.5 ml की दो डोज में लगाई जाती है। दोनों डोज के बीच 21 दिनों का गैप रखते हैं। भारत में उपलब्‍ध होने वाली यह तीसरी ऐंटी-कोविड वैक्‍सीन होगी। इससे पहले, भारत बायोटेक की Covaxin और ऑक्‍सफर्ड-अस्‍त्राजेनेका की Covishield को इमर्जेंसी यूज अप्रूवल दिया जा चुका है। नीति आयोग के सदस्‍य (स्‍वास्‍थ्‍य) डॉ वीके पॉल के अनुसार, यह वैक्‍सीन अगले हफ्ते तक बाजार में आ जाएगी। उन्‍होंने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा, "स्‍पूतनिक वी वैक्‍सीन भारत में आ चुकी है। मुझे यह कहते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमें उम्‍मीद है कि यह अगले हफ्ते तक बाजार में उपलब्ध होगी।"
नई दिल्ली रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी की कीमत का खुलासा हो गया है। भारत में इसकी मार्केटिंग करने वाली कंपनी डॉ. रेड्डी के मुताबिक, स्पूतनिक वी की एक डोज करीब 1,000 रुपये में मिलेगी। यानी, अगर आप प्राइवेट में स्पूतनिक वैक्सीन लगवाते हैं तो आपको दो डोज के लिए करीब 2,000 रुपये (एडमिनिस्‍ट्रेशन चार्ज अलग से) खर्च करने होंगे। डॉ. रेड्डी ने आज एक बयान जारी कर कहा है कि स्पूतनिक वी की प्रति डोज की कीमत 948 रुपये होगी और उसपर अलग से 5% जीएसटी देना होगा। 948 रुपये का 5% जीएसटी 47.40 रुपये होता है। इस तरह दोनों को मिलाकर एक डोज स्पूतनिक वी की कुल कीमत 995.40 रुपये होगी। हालांकि, डॉ. रेड्डी का कहना है कि जब वो खुद अपनी फैक्ट्रियों में यह वैक्सीन बनाने लगेगा तो कीमत घट सकती है। ध्यान रहे कि अभी इस वैक्सीन का उत्पादन रूस में ही हो रहा है और वहीं से 1 मई को वैक्सीन की पहली खेप भारत पहुंची है। Sputnik V की पहली डोज लगी भारत में स्‍पूनिक वी की पहली डोज लगा दी गई है। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज में कस्‍टम फार्मा सविर्सिज के ग्‍लोबल हेड दीपक सापरा को हैदराबाद में वैक्‍सीन की पहली डोज दी गई है। उन्‍हें 21 दिन बाद वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी जाएगी। भारत में उपलब्‍ध तीसरी वैक्‍सीन है स्‍पूतनिक वी मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में छपे डेटा के अनुसार, यह वैक्‍सीन कोविड-19 के गंभीर इन्‍फेक्‍शन से पूरी सुरक्षा देती है। 'स्‍पूतनिक वी' डिवेलपर्स के मुताबिक, वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6 प्रतिशत है। यह वैक्‍सीन 0.5 ml-0.5 ml की दो डोज में लगाई जाती है। दोनों डोज के बीच 21 दिनों का गैप रखते हैं। भारत में उपलब्‍ध होने वाली यह तीसरी ऐंटी-कोविड वैक्‍सीन होगी। इससे पहले, भारत बायोटेक की Covaxin और ऑक्‍सफर्ड-अस्‍त्राजेनेका की Covishield को इमर्जेंसी यूज अप्रूवल दिया जा चुका है। नीति आयोग के सदस्‍य (स्‍वास्‍थ्‍य) डॉ वीके पॉल के अनुसार, यह वैक्‍सीन अगले हफ्ते तक बाजार में आ जाएगी। उन्‍होंने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा, "स्‍पूतनिक वी वैक्‍सीन भारत में आ चुकी है। मुझे यह कहते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमें उम्‍मीद है कि यह अगले हफ्ते तक बाजार में उपलब्ध होगी।"
चित्रकूट उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में जेल के अंदर शुक्रवार को गैंगवॉर हुआ। इस दौरान दो गैंगस्टर के बीच जमकर गोलियां चलीं। इस दौरान मुकीम उर्फ काला और मेराज अली की गोली लगने से मौत हो गई। वहीं गोली मारने वाला गैंगस्टर अंशुल दीक्षित भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया। जेल में गोलियां चलने की आवाज सुनकर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इधर जिले के अधिकारियों को सूचना दी गई। मौके पर भारी पुलिस फोर्स मौजूद है। कहा जा रहा है कि जेल के अंदर असलहा और गोलियां मिलने से जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। दोनों ने एक दूसरे पर किए दर्जनों फायर चित्रकूट जेल में वेस्ट यूपी का गैंस्टर मुकीम काला बंद था। वहीं एक दूसरा गैंगस्टर अंशुल दीक्षित भी इसी जेल में बंद था। शुक्रवार को दोनों के बीच किसी बात को लेकर ठन गई। दोनों एक दूसरे पर गोलियां बरसाने लगे। ताबड़तोड़ गोलियां चलने से जेल के अंदर हड़कंप मच गया। एसपी, डीएम के सामने भी बरसाता रहा गोलियां मौके पर अधिकारी पहुंचे तब तक मुकीम काला की मौत हो चुकी थी। एक अन्य अपराधी मेराज की भी गोली लगने से मौत हो गई। सूचना पर चित्रकूट डीएम और एसपी भी मौके पर पहुंचे। अंशुल लगातार गोलियां बरसाता रहा। उसे रोकने के लिए अधिकारियों ने चेतावनी दी। जवाबी कार्रवाई में मारा गया अंशुल अंशुल छिपकर गोलियां चलाने लगा। जेल प्रशासन का कहना है कि अंशुल ने अन्य कैदियों को भी मारने की धमकी दी। तमाम प्रयास के बाद भी वह काबू में नहीं आया तो पुलिस को मजबूरन उसके ऊपर भी गोलियां चलानी पड़ीं और इस दौरान कार्रवाई में वह मारा गया। चल रहा तलाशी अभियान जेल सूत्रों का कहना है कि जेल के अंदर ताबड़तोड़ कई दर्जन फायर किए गए। इतनी ही नहीं यहां भारी संख्या में असलहा, गोलियां और अन्य अवैध सामान बरामद हुआ है। पुलिस तलाशी अभियान चला रही है। बताया जा रहा है कि मुकीम पश्चिम यूपी का बड़ा बदमाश था। खासकर कैराना में पलायन के मामले में भी काला सुर्खियों में आया था। कुछ दिनों पहले ही ट्रांसफर होकर आए थे तीनों बताया जा रहा है कि अंशुल दीक्षित पुत्र जगदीश सुलतानपुर की जेल से, मुकीम बनारस जिला जेल से और मेराज अली को कुछ दिन पहले ही चित्रकूट की जेल में ट्रांसफर किया गया था।
लखनऊ/चित्रकूट वेस्ट यूपी में आतंक का पर्याय रहे कुख्यात मुकीम काला की शुक्रवार को चित्रकूट जेल के अंदर हुई गैंगवॉर में मौत हो गई। जेल में मारा गया मुकीम काला वही अपराधी है, जिसने NIA ऑफिसर तंजील अहमद को दिन दहाड़े मौत के घाट उतार दिया था। कहा जाता है कि मुकीम काला ने तंजील अहमद को मारने से पहले प्रैक्टिस के तौर पर लखनऊ में निर्दोष होटल मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वेस्‍ट यूपी के कैराना समेत आसपास के इलाकों में मुकीम काला आतंक का पर्याय रहा था। कैराना में पलायन के पीछे मुख्य आरोपी मुकीम काला ही था। काला कैराना क्षेत्र के गांव जहानपुरा का रहने वाला था। बीते साल मुकीम काला की मां मीना ने इलाहबाद हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि काला का एनकाउंटर हो सकता है। आइए जानते हैं मुकीम काला कैसे आतंक का पर्याय बना। अपराध की दुनिया में ऐसे आया मुकीम काला जानकारी के मुताबिक, मुकीम काला 20 साल पहले अन्य मजदूरों के साथ मकान निर्माण में चि‍नाई मिस्त्री के साथ मजदूरी करता था। पानीपत में हुई डकैती से उसके जुर्म की शुरुआत हुई। मुकीम काला ने पहली वारदात हरियाणा के पानीपत में एक मकान में डकैती डालकर की। इस मामले में मुकीम काला जेल गया था। उसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपने कदम आगे बढ़ा दिए। वेस्ट यूपी और हरियाणा-उत्तराखंड में भी काला का आतंक मुकीम काला का खौफ वेस्ट यूपी के अलावा हरियाणा के पानीपत और उत्तराखंड के देहरादून जिलों तक फैला था। कहा जाता है कि जेल से बाहर आने के बाद मुकीम काला ने दादागिरी के साथ चोरी और राहजनी भी शुरू कर दी थी। जेल में ही उसकी मुलाकात सहारनपुर जिले के बाढ़ी माजरा थाना गंगोह के मुस्तफा उर्फ कग्गा से हुई। तब काला ने कग्गा से गैंग में शामिल होने की बात कही थी। इसके बाद मुस्तफा उर्फ कग्गा ने उसे अपने गैंग में शामिल कर लिया था। काला के आने के बाद कग्गा का गैंग और अधिक मजबूत हो गया था। ऐसे बना गिरोह का सरदार पुलिस के मुताबिक, दिसबंर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मुस्तफा उर्फ कग्गा मारा गया। मुस्तफा के मारे जाने के बाद मुस्तकीम काला ने कग्गा गैंग की कमान अपने हाथ में ले ली और वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। मुकीम काला के गैंग में डेढ़ दर्जन से अधिक बदमाश शामिल थे और दो सालों में उसने हत्या, लूट, रंगदारी समेत कई जघन्य वारदातों को अंजाम दिया था। 2015 में पकड़ा गया काला मुकीम काला को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई बार प्लान बनाया, लेकिन हर बार वह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो जाता था। अक्तूबर 2015 में पुलिस ने मुकीम काला को उसके साथी साबिर के साथ गिरफ्तार किया था। काला को गिरफ्तार करने के बाद सहारनपुर जेल में रखा गया था लेकिन बाद में उसे महाराजगंज जिला जेल में शिफ्ट किया गया था। जेल से गैंग चलाता रहा मुकीम काला कहा जाता है कि पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी मुकीम काला का नेटवर्क जारी रहा। काला लगातार जेल के अंदर से ही अपने गैंग को आदेश दिया करता था। बताया जाता है कि काला भले ही जेल में हो लेकिन उसके साथी लगातार वसूली करते थे। काला पर दर्ज थे 30 से अधिक मुकदमें पुलिस के अनुसार, मुकीम काला के ऊपर करीब अलग-अलग थानों में 30 से अधिक अपराधिक मुकदमें दर्ज थे। इसमें लूट, हत्या, डकैती और जबरन रंगदारी वसूलना है। सहारनपुर में ज्वैलर्स के यहां हुई डकैती में भी मुकीम काला का नाम सामने आया था।
लखनऊ,वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के सेंकेंड स्ट्रेन के चरम पर आने के दौरान उत्तर प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू का बेहद ही कारगर असर रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इसके साथ ही रोज टीम-9 के साथ कोरोना की समीक्षा बैठक और स्थलीय निरीक्षण के कारण सरकारी मशीनरी भी मिशन मोड पर आ गई और अब प्रदेश में रिकवरी रेट 86 प्रतिशत बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटे की जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार बीते 24 घंटे में 17775 नए संक्रमित केस मिले हैं। इस दौरान 286 की मौत भी हो गई है। प्रदेश में इस दौरान 19425 लोग कोरोना संक्रमण की गिरफ्त से बाहर भी आए हैं। अब प्रदेश में कुल एक्टिव केस दो लाख 4658 हैं। इससे पता चलता है कि प्रदेश में रिकवरी रेट अब बढ़कर 86 प्रतिशत हो गया है। प्रदेश में बीते दो दिन से नए संक्रमितों की संख्या में भले ही कुछ कमी आ रही है, लेकिन मृतकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। बीते 24 घंटों में 281 लोगों ने कोरोना वायरस के संक्रमण से दम तोड़ा है, जबकि अब तक कुल 16,646 मौतें हुई हैं। नए संक्रमित केस में कमी, मौतों की संख्या में बढ़ोतरी: कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर बेहद ही घातक है। इसमें मृतकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। राजधानी लखनऊ में भले ही नए संक्रमित मिलने के मामले में 900 की कमी आ गई है, लेकिन बीते 24 घंटे में 35 लोगों ने दम तोड़ा है। लखनऊ में अब एक्टिव केस 16117 हैं जबकि कुल 2194 की मौत हो चुनी है। लखनऊ में आज 856 नए संक्रमित मिले हैं। प्रदेश में बीते 24 घंटे में सर्वाधिक नए संक्रमित 1070 मेरठ में मिले हैं। यहां पर 15 लोगों की मौत हुई है। कानपुर नगर में 288 नए केस मिले जबकि 16 ने दम तोड़ा। गौतमबुद्धनगर में 747 केस मिले और 11 की मृत्यु हो गई। झांसी में 354 नए संक्रमित मिले तो दस की मौत हो गई। मुरादाबाद में 504 नए केस मिले हैं तो यहां छह का निधन हो गया। गोरखपुर में 775 और वाराणसी में 772 नए संक्रमित मिले हैं। गोरखपुर में नौ और वाराणसी में छह की मौत हुई है। प्रयागराज में 240 नए संक्रमित मिले हैं, यहां पर पांच लोगों ने दम तोड़ा है। महोबा में तो मामला बेहद ही विचित्र है। यहां पर आठ नए संक्रमित मिले हैं तो दस लोगों ने जान गंवा दी है। इसी तरह से बहराइच में 109 नए संक्रमित मिले हैं, जबकि 12 लोगों का निधन हो गया है। गाजीपुर में दस लोगों ने दम तोड़ा है जबकि यहां पर 364 नए संक्रमित केस मिले हैं।
नई दिल्ली,कोरोना की वैक्सीन को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बीच जमकर शब्दों के तीर चले। भाजपा नेता पुरी ने जहां आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता टीका लगवाने को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर रहे हैं वहीं थरूर ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार विपक्ष पर उंगली उठाने के बजाए नीति की विफलता की जिम्मेदारी कब लेगी। दोनों नेताओं के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग में, पुरी ने बुधवार को सिलसिलेवार ट्वीट किए थे। उन्होंने कहा था कि शशि थरूर जैसे कांग्रेस के नेता भारत की टीकाकरण नीति के संबंध में अपनी गलती स्वीकार करने को लेकर बच्चों जैसा हठ कर रहे हैं। पुरी ने कहा कि टीके को लेकर कांग्रेस पार्टी का रुख दिनों-दिन और अजीबो-गरीब होता जा रहा है। नागर विमानन, हाउसिंग और शहरी मामलों के मंत्री पुरी ने आरोप लगाया कि (कांग्रेस नेताओं के) पूरे समूह ने बयानों और ट्वीट के जरिए लोगों के बीच टीका लगवाने को लेकर संदेह पैदा किया है। उन्होंने कहा कि वे खुलकर टीके के प्रभावी होने, उत्पादकों के चयन और टीकाकरण पर संदेह जताकर लोगों के मन में शक पैदा करते हैं। पुरी ने कहा कि थरूर के 2021 में किए गए अंतर्विरोधी ट्वीट पर किताब छापी जा सकती है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा टीके के प्रभावी होने पर लगातार संदेह जताने के बाद उन्होंने 28 अप्रैल, 2021 को अपना रुख बदला, लेकिन उन्होंने यह नहीं माना कि वे गलत थे। उन्होंने सवाल किया कि उस स्थिति की कल्पना करे, अगर भारत सरकार ने उनकी सलाह सुनी होती और टीके का उत्पादन शुरू करने के लिए और दो सप्ताह का इंतजार किया होता। पुरी ने कहा कि अब जबकि देश कोविड संकट से जूझ रहा है, ये नेता अगर कोरोना से जंग में हाथ नहीं बटा सकते तो अवसरवाद की राजनीति छोड़कर कम से कम अपने ही अंतíवरोधी बयानों और ट्वीट का अध्ययन कर लें। पुरी के एक ट्वीट को टैग करते हुए थरूर ने गुरुवार को कहा कि सरल तरीके से बताता हूं, क्या कांग्रेस के ट्वीट के कारण टीके की कमी हुई है, क्या भारत सरकार मेरे ट्वीट के कारण पर्याप्त मात्रा में टीके का ऑर्डर देने में असफल रही, क्या मई में कीमतों में असमानता तीन जनवरी को मेरे बयान से जुड़ी है कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण पूरा नहीं हुआ है। कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में चल रहे दांव-पेच के बीच पार्टी का असंतुष्ट जी-23 खेमा कांग्रेस नेता ने लिखा है, संक्षेप में कहूं तो भारत सरकार अपने खराब प्रदर्शन से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष पर उंगली उठा रही है। आखिर अपनी नीति और प्रबंधन की असफलता की जिम्मेदारी वह कब लेगी।
नई दिल्ली,कोरोना की वैक्सीन को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बीच जमकर शब्दों के तीर चले। भाजपा नेता पुरी ने जहां आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता टीका लगवाने को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर रहे हैं वहीं थरूर ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार विपक्ष पर उंगली उठाने के बजाए नीति की विफलता की जिम्मेदारी कब लेगी। दोनों नेताओं के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग में, पुरी ने बुधवार को सिलसिलेवार ट्वीट किए थे। उन्होंने कहा था कि शशि थरूर जैसे कांग्रेस के नेता भारत की टीकाकरण नीति के संबंध में अपनी गलती स्वीकार करने को लेकर बच्चों जैसा हठ कर रहे हैं। पुरी ने कहा कि टीके को लेकर कांग्रेस पार्टी का रुख दिनों-दिन और अजीबो-गरीब होता जा रहा है। नागर विमानन, हाउसिंग और शहरी मामलों के मंत्री पुरी ने आरोप लगाया कि (कांग्रेस नेताओं के) पूरे समूह ने बयानों और ट्वीट के जरिए लोगों के बीच टीका लगवाने को लेकर संदेह पैदा किया है। उन्होंने कहा कि वे खुलकर टीके के प्रभावी होने, उत्पादकों के चयन और टीकाकरण पर संदेह जताकर लोगों के मन में शक पैदा करते हैं। पुरी ने कहा कि थरूर के 2021 में किए गए अंतर्विरोधी ट्वीट पर किताब छापी जा सकती है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा टीके के प्रभावी होने पर लगातार संदेह जताने के बाद उन्होंने 28 अप्रैल, 2021 को अपना रुख बदला, लेकिन उन्होंने यह नहीं माना कि वे गलत थे। उन्होंने सवाल किया कि उस स्थिति की कल्पना करे, अगर भारत सरकार ने उनकी सलाह सुनी होती और टीके का उत्पादन शुरू करने के लिए और दो सप्ताह का इंतजार किया होता। पुरी ने कहा कि अब जबकि देश कोविड संकट से जूझ रहा है, ये नेता अगर कोरोना से जंग में हाथ नहीं बटा सकते तो अवसरवाद की राजनीति छोड़कर कम से कम अपने ही अंतíवरोधी बयानों और ट्वीट का अध्ययन कर लें। पुरी के एक ट्वीट को टैग करते हुए थरूर ने गुरुवार को कहा कि सरल तरीके से बताता हूं, क्या कांग्रेस के ट्वीट के कारण टीके की कमी हुई है, क्या भारत सरकार मेरे ट्वीट के कारण पर्याप्त मात्रा में टीके का ऑर्डर देने में असफल रही, क्या मई में कीमतों में असमानता तीन जनवरी को मेरे बयान से जुड़ी है कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण पूरा नहीं हुआ है। कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में चल रहे दांव-पेच के बीच पार्टी का असंतुष्ट जी-23 खेमा कांग्रेस नेता ने लिखा है, संक्षेप में कहूं तो भारत सरकार अपने खराब प्रदर्शन से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष पर उंगली उठा रही है। आखिर अपनी नीति और प्रबंधन की असफलता की जिम्मेदारी वह कब लेगी।
जबलपुर,ह्यूमन इम्युनोडिफिशियंसी वायरस (एचआइवी) से संक्रमित एड्स के मरीजों के उपचार में उपयोगी नाइटाजोक्सानाइड दवा कोरोना के वायरस को भी खत्म करने में उपयोगी पाई गई है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज से संबंद्ध अस्पताल में कोरोना संक्रमित 200 मरीजों पर इस दवा का प्रयोग किया जा चुका है। सभी मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचे बिना कोरोना को मात देकर घर जा चुके हैं। जबलपुर के मेडिकल कालेज में 200 मरीजों को दी गई नाइटाजोक्सानाइड दवा खास बात यह भी है कि नाइटाजोक्सानाइड टेबलेट का सेवन करने वाले किसी भी कोरोना मरीज की मृत्यु नहीं हुई। दवा के असर को देखते हुए कोरोना के सभी मरीजों पर इसके इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है। नाइटाजोक्सानाइड एचआइवी मरीजों को क्रिप्टोस्पोरोडियम के संक्रमण के नियंत्रण के लिए दी जाती है। इसके कारण मरीज को दस्त की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। कोरोना की दूसरी लहर में बीमारी के अन्य लक्षणों में दस्त की समस्या भी सामने आई, जिसे देखते हुए प्रयोग के तौर पर ऐसे लक्षण वाले कोरोना के मरीजों को नाइटाजोक्सानाइड दी गई और इसके अच्छे परिणाम सामने आए। फिर अन्य लक्षण वाले मरीजों पर इसे आजमाया गया। सभी कोरोना मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे, किसी की नहीं बिगड़ी स्थिति अस्पताल के कोविड प्रभारी डा. संजय भारती का कहना है कि कोरोना मरीजों के उपचार में शामिल डाक्टरों की टीम ने सर्वसम्मति से नाइटाजोक्सानाइड के उपयोग की योजना बनाई थी। दवा के प्रयोग के बेहतर परिणाम सामने आने के बाद कोरोना के गंभीर मरीजों पर इसके प्रयोग को लेकर चर्चा की जा रही है। यहां भर्ती उन मरीजों पर नाइटाजोक्सानाइड का प्रयोग किया गया जो गंभीर हालत में नहीं थे। दवा के असर के चलते वे गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचे। वहीं सामान्य लक्षण वाले कोरोना के वे मरीज जिन्हें नाइटाजोक्सानाइड नहीं दी गई थी, उनमें से कुछ गंभीर हालत में पहुंच गए। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में देश में सबसे पहले आइवरमेक्टिन दवा का प्रयोग इसी अस्पताल के कोरोना मरीजों पर किया गया था। संतुष्ट हैं मरीज कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों का कहना है कि अस्पताल में जो दवाएं दी गई हैं, उनसे वे संतुष्ट हैं। कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए वे पहले घबरा रहे थे, लेकिन यहां जो इलाज दिया गया उसके बाद वे जल्द स्वस्थ हो गए। वे गंभीर हालत में भी नहीं पहुंचे।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आक्सीजन और दवाओं की उपलब्धता व आपूर्ति पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। पीएमओ ने बताया कि कोरोना की पहली लहर के चरम पर देश में आक्सीजन की आपूर्ति के मुकाबले इस समय देश में आक्सीजन की आपूर्ति तीन गुना है। वहीं पिछले कुछ हफ्तों में रेमडेसिविर समेत सभी दवाइयों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बैठक में बताया गया कि राज्यों को अच्छी मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और केंद्र उनके उत्पादन में वृद्धि और सभी तरह की मदद उपलब्ध कराने के लिए लगातार उत्पादकों के संपर्क में है। केंद्र सरकार कोरोना के साथ-साथ म्यूकोर्माइकोसिस के प्रबंधन में इस्तेमाल की जा रही दवाओं की सक्रियता से निगरानी कर रही है। मोदी ने कहा कि भारत में बेहद वाइब्रेंट दवा उद्योग है और सकार सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उसके साथ करीबी समन्वय से काम कर रही है। बैठक में प्रधानमंत्री को रेलवे और वायुसेना द्वारा आक्सीजन की ढुलाई, आक्सीजन कंसंट्रेटर्स व सिलेंडरों की खरीद और देश में लगाए जा रहे संयंत्रों के बारे में जानकारी भी दी गई। राज्यों से विमर्श और फैसले के लिए प्रधानमंत्री ने गठित किए हैं 11 सशक्त समूह ज्ञात हो कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई को अंजाम देने में जुटे केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सशक्त समूह बनाए हैं, जो अलग-अलग विषयों पर राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर तत्काल फैसला ले रहे हैं। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि जरूरत के अनुसार देश-विदेश से कोविड के खिलाफ जरूरी वस्तुओं की खरीद को किसी भी कानूनी बंधन या औपचारिकताओं से दूर रखा जाए। यह देखा जाए कि बाजार में कहां वह वस्तु उपलब्ध है और कौन जल्द से जल्द उसकी डिलीवरी दे सकता है। वस्तु का सिर्फ आर्डर ही नहीं दिया जाए बल्कि एडवांस भी दिया जाए। कोविड के लिए जरूरी वस्तुओं की खरीद में नियम की बाधा नहीं अधिकारी का कहना है कि पिछले दिनों विदेश से खरीदे जा रहे टैंकर, आक्सीजन प्लांट, कंसंट्रेटर्स, अन्य उपकरण और दवा जैसे हर मामले में सरकार ने तत्काल फैसला लिया। इसके लिए वित्त मंत्रालय तक जाने की जरूरत नहीं। प्रंबधन से जुड़े एक अन्य अधिकारी के अनुसार विदेश में भारतीय राजदूतों को लेटर आफ क्रेडिट दे दिया गया है और उन्हें कहा गया है कि व्यक्तिगत स्तर पर यह देखें कि जरूरी सामान जल्द भारत पहुंचे और भारत में बैठे अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि राज्यों तक सामान पहुंचे। प्रधानमंत्री के स्तर से सभी वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों को निर्देश है कि संवेदनशील रहते हुए तत्काल फैसला लें और क्रियान्वयन भी सुनिश्चित कराएं।
नई दिल्ली, देश में कोरेाना के बढ़ते मामलों और टीकाकरण की स्थिति को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की, जिसमें टीकाकरण अभियान की प्रगति की समीक्षा की और इसे तेज करने के लिए कदम उठाने पर जोर दिया। ये राज्य कोरोना वैक्सीनेशन के मामले में पिछड़ रहे हैं। राज्यों को केंद्र से मिलने वाली 70 फीसद वैक्सीन दूसरी डोज में इस्तेमाल करने की सलाह टीकाकरण में पीछे छूट रहे आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि मई में देश में कुल आठ करोड़ टीके उपलब्ध हो पाएंगे, जो जून में बढ़कर नौ करोड़ हो जाएंगे। इनमें 50 फीसद केंद्र को और 50 फीसद राज्य सरकारों व निजी क्षेत्र को सप्लाई किए जाएंगे। वैक्सीन की किल्लत को देखते हुए हर्षवर्धन ने राज्यों को केंद्र से मिलने वाली 70 फीसद वैक्सीन दूसरी डोज में इस्तेमाल करने की सलाह दी। उनका कहना था कि प्राथमिकता समूह वाले हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स पर अत्यधिक खतरे और 45 साल से अधिक उम्र के लोगों में अत्याधिक मृत्युदर को देखते हुए यह करना जरूरी है। बैठक में जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना के प्रतिनिधि शामिल थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब कुमार दास, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय बैठक में मौजूद थे। गौरतलब है कि देश में 18 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए भी वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी तक यह शुरू नहीं की जा सकी है। वहीं, मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से आग्रह किया कि जो लोग पहली डोज ले चुके हैं उन्हें दूसरी डोज के लिए प्रथमिकता दी जाए। मंत्रालय ने इसके लिए राज्यों से केंद्र से दी जा रही सप्लाई का 70 फीसद रिजर्व में रखने के लिए कहा। इसके अलावा केंद्र ने राज्यों से वैक्सीन की वेस्टेज से बचने का भी आग्रह किया है और लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने के लिए जागरूक करने के लिए भी कहा है।
नई दिल्ली, कोरोना संक्रमण से राष्ट्रीय राजधनी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कुछ राज्यों और प्रमुख शहरों को थोड़ी राहत मिलती नजर आ रही है, तो दक्षिण भारत में इसका प्रकोप बढ़ते जा रहा है। केरल में हालात दिन पर दिन गंभीर होते जा रहे हैं। बुधवार को यहां रिकॉर्ड नए मामले पाए गए और मरने वालों की संख्या भी सौ के करीब पहुंच गई। मुंबई में फिर नए मामले दो हजार को पार कर गए हैं। केरल में एक दिन में 43,529 नए संक्रमित पाए गए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिली सूचनाओं के मुताबिक केरल में बीते 24 घंटे के दौरान 43,529 नए संक्रमित पाए गए हैं और 95 लोगों की मौत हुई है। सोमवार को 30 हजार से कम नए मरीज मिले थे, हालांकि मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 37 हजार हो गई थी। दोनों दिन मौतें भी कम हुई थीं। तमिलनाडु और कर्नाटक में कोरोना मामलों में कमी नहीं तमिलनाडु और कर्नाटक में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। दोनों राज्यों में मामले कम नहीं हो रहे हैं। कर्नाटक में एक दिन बाद फर मरने वालों का आंक़़डा पांच सौ को पार कर गया है। यहां 39,998 नए संक्रमित मिले हैं और 516 लोगों की मौत हुई है। तमिलनाडु में 30 हजार से ज्यादा मामले मिले हैं और 293 लोगों की जान गई है। आंध्र प्रदेश में भी मामले घट नहीं रहे हैं और मरने वालों का आंकड़ा भी कम नहीं हो रहा। तेलंगाना में दो दिनों से पांच हजार से नीचे नए केस मिल रहे हैं। दो दिन कम होने के बाद मुंबई में फिर बढ़े कोरोना के नए मामले मुंबई में दो दिन बाद नए मरीजों की संख्या दो हजार (2,104) को पार कर गई है। मंगलवार को 1,717 और सोमवार को 1,782 नए मरीज मिले थे। महाराष्ट्र में भी मामले बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले नए मामले 40 हजार से नीचे आ गए थे, उसके बाद लगातार दो दिनों से 40 हजार से ज्यादा केस मिल रहे हैं। दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत को कोरोना महामारी से अधिक राहत दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत को कोरोना महामारी से कुछ राहत मिलती नजर आ रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नए मामले 15 हजार से नीचे बने हुए हैं, हालांकि दैनिक मौतों का आंकड़ा तीन सौ या उसके आसपास बना हुआ है। बुधवार को भी तीन सौ लोगों की जान गई। राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात और ओडिशा में मामले कम नहीं हो रहे हैं तो बढ़ भी नहीं रहे हैं। लगभग स्थिरता आती दिख रही है। कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए दैनिक जांच में तेजी कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए नमूनों की जांच बढ़ रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक मंगलवार को 19,83,804 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक कुल 30 करोड़ 75 लाख 83 हजार से ज्यादा नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।
नई दिल्ली। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने इस महामारी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तकरीबन अधिकांश वैक्सीन और जरूरी दवाइयों के कच्चे माल की कमी पैदा कर दी है। कुछ दिन पहले भारत को वैक्सीन के लिए कच्चा माल देने का वादा करके अमेरिका ने भी अब चुप्पी साध ली है। दूसरी तरफ भारत में रेमडेसिविर जैसी दवाइयों की मांग में कई गुना वृद्धि होने से इसे बनाने वाली कंपनी के लिए भी कच्चे माल की समस्या पैदा हो गई है। भारत की स्थिति देख तमाम देश ऐसे हालात के लिए एकत्रित कर रहे चिकित्सा सामग्री जिन देशों में कोरोना में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का निर्माण होता है वहां की सरकारें भी भारत में कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए अब ज्यादा सतर्क हो गई हैं। तमाम देश इस तरह के हालात के लिए चिकित्सा सामग्रियों को एकत्रित कर रहे हैं। वैसे तो भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति में मदद के लिए रात-दिन लगे हैं, लेकिन इसकी किल्लत फिलहाल दूर होती नजर नहीं आ रही। भारत की मांग बढ़ी, रेमडेसिविर की भी किल्लत सूत्रों का कहना है कि भारत की मांग अप्रत्याशित तौर पर बढ़ी है, जिससे समूचे फार्मा उद्योग के लिए आपूर्ति करना मुश्किल पड़ रहा है। रेमडेसिविर जैसी दवा का घरेलू उत्पादन एक महीने में 10 हजार से बढ़कर तकरीबन 3.50 लाख डोज रोजाना हो चुका है फिर भी घरेलू मांग पूरी नहीं हो पा रही है। इसकी निर्माता कंपनी गिलीड साइंसेस ने पहले कहा था कि वह 4.50 लाख डोज भारत को देगी। उसकी तरफ से अभी तक 1.75 लाख डोज आ पाई हैं। रेमडेसिविर व टुस्लीजुमाब के कच्चे माल की किल्लत जून के मध्य तक रहेगी भारत अभी गिलीड साइंसेस के मिस्त्र, यूएई, बांग्लादेश स्थित प्लांट से ज्यादा मात्रा में रेमडेसिविर खरीदने की बात कर रहा है, लेकिन कच्चे माल की कमी यहां भी है। सूत्रों के मुताबिक, रेमडेसिविर और टुस्लीजुमाब जैसी दवाइयां बहुत कम बनती हैं। इसलिए अचानक मांग बढ़ने के बावजूद उनका उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता। जून के मध्य तक इन दवाइयों की निर्माता कंपनियों के पास कच्चे माल की आपूर्ति संभव दिख रही है। भारत को कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर अमेरिका फैसला नहीं कर पा रहा उधर, भारत को कच्चे माल की आपूर्ति करने को लेकर अमेरिकी सरकार भी तेजी से फैसला नहीं कर पा रही है। भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जिन चीजों की जरूरत है उसकी लिस्ट अमेरिका को सौंपी है। इसमें वैक्सीन के लिए जरूरी कच्चे माल से जुड़े सारे सामान हैं। 25 अप्रैल को बाइडन प्रशासन ने कहा था कि वह भारत को कच्चा माल देगा। इसके बाद दो करोड़ वैक्सीन (कोविशील्ड) के लिए कच्चा माल भेजा गया, लेकिन यह भारत की जरूरत को देखते हुए बहुत कम है। नई दिल्ली में अमेरिका के उपराजदूत डैन स्मिथ ने कहा, भारत की सूची पर विचार किया जा रहा है कि अमेरिका कैसे और कितनी जल्द मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल में हुए हालिया विधानसभा चुनावों के बाद बने नए मंत्रिमंडल में 28 फीसद मंत्रियों पर आपराधिक मामले हैं। वहीं अब तक बने मंत्रियों की औसतन संपत्ति 4.29 करोड़ रुपये है। इसके अलावा मंत्रिमंडल में 43 में से 9 महिला मंत्री हैं। यह बात एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में मुख्यमंत्री सहित 44 में से 43 मंत्रियों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। एक मंत्री के डाटा की अनुपलब्धता के कारण उनका विश्लेषण नहीं किया गया है। अमित मित्रा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में चुनाव नहीं लड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार 43 में से 12 मंत्रियों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। 7 मंत्रियों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। 43 में से 32 मंत्री करोड़पति हैं। 43 मंत्रियों की औसतन संपत्ति 4.29 करोड़ रुपये हैं। अधिकतम संपत्ति घोषित करने वाले मंत्रियों में निर्वाचन क्षेत्र कस्बा से अहमद जावेद खान ने सबसे अधिक संपत्ति 32.33 करोड़ रुपये घोषित की है। सबसे कम संपत्ति झाड़ग्राम से बिरबाहा हांसदा ने घोषित की है। उन्होंने 3.06 लाख रुपये घोषित की है। कुल 24 मंत्रियों ने अपनी देनदारी घोषित की है, जिसमें से निर्वाचन क्षेत्र कस्बा से अहमद जावेद खान ने 41.51 करोड़ रुपये के साथ साथ सबसे अधिक देनदारी घोषित की है। शैक्षिक योग्यता और आयु 10 मंत्रियों ने अपनी शैक्षिक योग्यता 8वीं और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 32 मंत्रियों ने अपनी शैक्षिक योग्यता स्नातक और उससे अधिक घोषित की है। एक मंत्री ने अपनी शैक्षिक योग्यता डिप्लोमा धारक घोषित की है। सात मंत्रियों ने अपनी आयु 30 से 50 वर्ष के बीच घोषित की है, जबकि 36 मंत्रियों ने अपनी आयु 51 से 80 साल के बीच घोषित की है।
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गुरुवार को कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर में आर्थिक संकट झेल रहे प्रवासी मजदूरों के मामले पर सुनवाई की गई। कोरोना महामारी के कारण देश के विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन के ऐलान के बाद प्रवासी मजदूरों के हालात पर चिंता जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि इनके लिए खाद्य सुरक्षा और सस्ते ट्रांसपोर्ट विकल्प को सुनिश्चित कराने के लिए आदेश जारी करेगा। जस्टिस अशोक भूषण व एमआर शाह की बेंच ने मामले की सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश से जानकारी मांगी है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों से इनके लिए भोजन व राशन का इंतजाम करने को कहा और अपने घर लौट रहे लोगों के लिए सुविधा मुहैया कराई जाए ताकि वे आराम से घर जा सकें। कोर्ट ने देश में प्रवासी मजदूरों के हालात पर चिंता जताई और उनके लिए शुरू की गई योजनाओं पर राज्य सरकारों से एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रवासी मजदूरों को लेकर सवाल किया कि कोरोना महामारी के कारण बंद और लॉकडाउन ने इन्हें बेबस कर दिया है, इनके पास न रोजगार है और न पैसे। इनके पास खाने के लिए कमाई का कोई जरिया तो होना चाहिए।
नई दिल्‍ली (एएनआई)। भारत में Sputnik V वैक्‍सीन की दूसरी खेप शुक्रवार को भारत पहुंच जाएगी। मास्‍को में मौजूद भारतीय राजदूत बाला वैंकटेश वर्मा के मुताबिक रूस द्वारा विकसित की गई इस वैक्‍सीन की करीब डेढ़ से दो लाख खुराक की खेप कल भारत को मिल जाएंगी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस वैक्‍सीन को इंपोर्ट करने के लिए डॉक्‍टर रेडडी लैब को मंजूरी दी है। भारत ने इसको इमरजेंसी के तौर पर इस्‍तेमाल की इजाजत पहले ही दे दी है। माना जा रहा है कि रूस की ये वैक्‍सीन भारत में चल रहे टीकाकरण के तीसरे फेज में काफी मदद करेगी। माना ये भी जा रहा है कि इससे कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिल सकेगी। आपको यहां पर ये भी बता दें कि Sputnik V भारत सरकार के द्वारा तीसरी ऐसी वैक्‍सीन है जिसको इस्‍तेमाल की इजाजत दी गई है। इससे पहले सरकार ने कोविशील्‍ड और कोवैक्‍सीन को इस्‍तेमाल की इजाजत दी थी। भारत बायोटेक की कोविशील्‍ड को सीरम इंस्टिट्यूट में तैयार किया गया है। गौरतलब है कि Sputnik V वैक्‍सीन की पहली खेप को इस माह की शुरुआत में रूस से भेजा गया था। रशियन सोवरन वैल्‍थ फंड के प्रमुख ने उम्‍मीद जताई थी कि वैक्‍सीन से भारत में चल रहे टीकाकरण को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्‍होंने ये भी उम्‍मीद जताई थी कि ये भारत में बढ़ रही संक्रमण की रफ्तार पर रोक लगाने में कारगर साबित होगी। आपको बता दें कि भारत फरवरी से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। पिछले सप्‍ताह लगातार चार दिनों तक देश में 4 लाख से अधिक मामले सामने आए थे। इसके बाद लगातार दो दिनों तक मामलों में गिरावट देखी गई और ये 4 लाख से कम रहे थे। इस आधार पर डॉक्‍टर मान रहे हैं कि देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सर्वोच्‍च स्‍तर अब जा चुका है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अब देश में कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट आएगी, हालांकि ऐसा होने की रफ्तार कम होगी।
नई दिल्ली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोविड के टीकों के लिए राज्यों के, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक-दूसरे से झगड़ने और प्रतियोगिता करने से भारत की छवि खराब होती है। उन्होंने दिल्ली और कई अन्य राज्यो में वैक्सीन की कमी को लेकर कहा कि केंद्र को राज्यों की तरफ से टीकों की खरीद करनी चाहिए। केजरीवाल ने कहा- देश की छवि खराब होगी आम आदमी पार्टी (AAP) अध्यक्ष ने एक ट्वीट में कहा, "भारतीय राज्यों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक-दूसरे से प्रतियोगिता करने/लड़ने के लिए छोड़ दिया गया है। उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र से, महाराष्ट्र ओडिशा से, ओडिशा दिल्ली से लड़ रहा है। भारत कहां है? भारत की कितनी खराब छवि बनती है। भारत को एक देश के तौर पर सभी भारतीय राज्यों की तरफ से टीकों की खरीद करनी चाहिए।" एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की जगह भारत सरकार अगर टीका उत्पादन कर रहे देशों से डील करे तो बेहतर सौदेबाजी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास ऐसे देशों के साथ मोल-भाव करने के लिए अधिक कूटनीतिक संभावना है। तब उप-मुख्यमंत्री ने कही थी यह बात उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इससे पहले कहा था कि दिल्ली टीकों के लिए वैश्विक निविदा (Global Tender) निकालेगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्यों को ऐसा करने पर मजबूर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बुधवार को दावा किया था कि कोवैक्सीन का भंडार खत्म होने के बाद दिल्ली में करीब 100 टीकाकरण केंद्रों को बंद कर दिया गया है। बीजेपी का वार उधर, बीजेपी ने वैक्सीन खरीद में हीला-हवाली को लेकर दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। पार्ट के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा, "वैक्सीन खरीद मामले में मुख्यमंत्री की निष्क्रियता की पोल खुल चुकी है। जनता जानती है कि केजरीवाल सरकार ने समय रहते वैक्सीन का ऑर्डर नहीं दिया और जब 7 मई को बायोटेक को पत्र लिखा तो उसमें भी ऑर्डर नहीं दिया बल्कि वैक्सीन खरीद में रूची दिखा कर रेटों की जानकारी मांगी।"
नई दिल्‍ली कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान से जुड़े नियमों में बदलाव किया जा सकता है। वैक्‍सीन की पर्याप्‍त डोज उपलब्‍ध न होने की रिपोर्ट्स के बीच, सरकारी पैनल ने कई बदलावों की सिफारिश की है। टीकाकरण पर बने राष्‍ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने कोविशील्‍ड वैक्‍सीन के डोज इंटरवल को बढ़ाने से लेकर कोविड मरीजों को टीका लगाने में देरी करने जैसे सुझाव दिए हैं। अगर सरकार इन सुझावों को मान लेती है तो लोगों को वैक्‍सीन के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि वैक्‍सीनेशन में क्‍या-क्‍या बदलाव हो सकते हैं। कोविड पॉजिटिव मरीजों को वैक्‍सीन कब? सरकारी पैनल की सिफारिश है कि जिनको लैब टेस्‍ट (RT-PCR, RAT) में कोविड होने की पुष्टि हो चुकी है, उन्‍हें रिकवरी के छह महीने तक वैक्‍सीन न दी जाए। फिलहाल एक्‍सपर्ट्स रिकवरी के महीने भर बाद वैक्‍सीन लगवाने की सलाह देते हैं। बाकी देशों में रिकवर हो चुके लोगों को कब वैक्‍सीन लगाते हैं? अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, पॉजिटिव टेस्‍ट होने के कम से कम 90 दिन बाद वैक्‍सीन दी जानी चाहिए। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने कोविड मरीजों में 6 महीने तक नैचनल इम्‍युनिटी रहने की बात कही है। WHO के मुताबिक, अगर पहली डोज के बाद पॉजिटिव टेस्‍ट होते हैं तो दूसरी डोज उसके 8 हफ्ते बाद दी जानी चाहिए। भारत में कोविशील्‍ड की दूसरी डोज कब लगेगी? सरकारी पैनल की सिफारिश है कि कोविशील्‍ड की दूसरी डोज 12-16 हफ्ते बाद लगाई जाए। यानी अगर आपको पहली डोज मार्च में लगी हो तो दूसरी डोज जुलाई या अगस्‍त में लगे। अभी कोविशील्‍ड की दूसरी डोज कब लगती है? मार्च में, केंद्र सरकार ने कोविशील्‍ड की दो डोज के बीच 4-8 हफ्तों का वक्‍त रखने को कहा था। उससे पहले यह समयसीमा 4-6 हफ्ते थी। विदेशों में कोविशील्‍ड की दो डोज के बीच कितना गैप रखते हैं? द लैंसेट में छपी स्‍टडी के अनुसार, 12 हफ्तों के अंतराल पर कोविशील्‍ड की डोज देने पर उसका असर बढ़ जाता है। यूनाइटेड किंगडम और कनाडा में वैक्‍सीन की दूसरी डोज चार महीने बाद दी जा रही है। कोवैक्‍सीन की दूसरी डोज का समय भी बदला है क्‍या? नहीं, कोवैक्‍सीन के डोज इंटरवल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गर्भवती महिलाओं के लिए वैक्‍सीन कब? पैनल ने कहा है कि गर्भवती महिलाओं को कोई भी वैक्‍सीन लेने की छूट दी जानी चाहिए। यह भी कहा गया कि स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को डिलिवरी के बाद किसी भी वक्‍त टीका लगा दिया जाना चाहिए। इन सिफारिशों का अब क्‍या होगा? NTAGI की ये सिफारिशें अब कोविड-19 वैक्‍सीन के लिए बने नैशनल एक्‍सपर्ट ग्रुप को भेजी जाएंगी। इसके बाद केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय अंतिम फैसला करेगा। इम्‍युनिटी रहने तक न दी जाए वैक्‍सीन' NTAGI का मानना है कि कोविड से उबर चुके लोगों को तुरंत टीका लगाने की जरूरत नहीं है। एक्‍सपर्ट पैनल के अनुसार, ऐसे लोगों के शरीर में कोविड-19 के खिलाफ ऐंटीबॉडीज मौजूद होती हैं जो उन्‍हें वायरस से सुरक्षा देती है। इम्‍युनिटी पीरियड के दौरान उन्‍हें वैक्‍सीन देना उसकी बर्बादी होगा। देश पहले से ही कोविड वैक्‍सीन की किल्‍लत से जूझ रहा है। खासतौर से 18 साल से ऊपर वालों के लिए वैक्‍सीन का रास्‍ता खोलने के बाद पर्याप्‍त डोज उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में कोविड से रिकवर कर चुके मरीजों को बेहद कम खतरा देखते हुए पैनल ने उनके लिए टीकाकरण टालने का सुझाव दिया है।
नई दिल्ली दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा है कि उसके पास अतिरिक्त ऑक्सिजन है और इसे दूसरे राज्यों को भी दिया जा सकता है। उन्होंने कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के कारण परेशानी में फंसे दिल्ली के लोगों की मदद के वास्ते आगे आने के लिए केंद्र और दिल्ली उच्च न्यायालय का भी आभार जताया। 'ऑक्सिजन ऑडिट से डर गई दिल्ली सरकार' दिल्ली में सिसौदिया के 'सरप्लस' ऑक्सिजन के बयान पर बीजेपी ने दिल्ली सरकार पर हमला बोला है। बीजेपी ने इस पर अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'ऑक्सिजन ऑडिट की बात आई तो अब बोल रहे हैं कि ऑक्सिजन पर्याप्त मात्रा में है। केंद्र सरकार लगातार दिल्ली को ऑक्सिजन की सप्लाई देती रही, और AAP रोज अपनी नाकामी छुपाने के लिए झूठ बोलते रहे। AAP का झूठ अब जनता के सामने आ चुका है।' दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी इसको लेकर केजरीवाल सरकार पर शायराना अंदाज में तंज कसा। ऑक्सिजन ऑडिट से इनकार के बाद अब दिल्ली सरकार की डिमांड खुद ब खुद कम हो गई है। सिसौदिया बोले- दिल्ली में इसलिए सरप्लस हो गई ऑक्सिजन सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में 24 घंटों में कोविड-19 के 10,400 नए मामले आए और संक्रमण दर 14 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जब संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे तो राष्ट्रीय राजधानी को 700 मीट्रिक टन की ऑक्सिजन की आवश्यकता थी, लेकिन अब मामलों में गिरावट आने लग गई है जिससे ऑक्सिजन आवश्यकता घटकर 582 मीट्रिक टन रह गई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमने अतिरिक्त ऑक्सिजन दूसरे राज्यों को देने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है। हमारी एक जिम्मेदार सरकार है।’
अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बीते 3 हफ्तों में एक के बाद एक कुल 17 प्रोफेसर्स की मौत के मामले को प्रदेश सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। दो दिन पहले एएमयू के वीसी तारिक मंसूर से बातचीत करने के बाद सीएम योगी गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे। सीएम ने यहां वीसी समेत तमाम अधिकारियों से बातचीत की और संक्रमित कर्मचारियों के बारे में जानकारी ली। सीएम योगी पहली बार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के परिसर में पहुंचे हैं। सीएम गुरुवार को अलीगढ़, मथुरा और आगरा के दौरे पर हैं और अलीगढ़ में उन्होंने कोविड कमान सेंटर का भी दौरा किया है। सीएम ने एएमयू में कोरोना से संक्रमित लोगों के समुचित इलाज और हर संभव मदद के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं। वीसी ने सीएम योगी से की थी बातचीत बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कोरोना की स्थितियों के बीच 3 हफ्ते में 17 फैकल्टी मेंबर्स की जान चली गई है। इसके अलावा 10 से अधिक पूर्व शिक्षकों की भी मौत हुई है। मौत के इन आंकड़ों को देखते हुए वीसी तारिक मंसूर ने दो दिन पहले सीएम योगी से फोन पर बात की थी।सीएम ने प्रशासनिक अफसरों के माध्यम से वीसी को हर संभव मदद का भरोसा दिया। ICMR कर रहा है सैंपल्स की जांच दूसरी ओर वीसी तारिक मंसूर ने आईसीएमआर को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कोरोना सैंपल के जीनोम सीक्वेंस की जांच कराई जाए। वीसी ने यह आशंका जाहिर की है कि जिस कोरोना वायरस के सीक्वेंस के कारण AMU के प्रोफेसर्स की मौत हुई है, उसका स्ट्रेन अलग है। आईसीएमआर के अधिकारी AMU के सैंपल्स की जांच कर रहे हैं और इसकी जानकारी वीसी को भी दी गई है।
भोपाल, कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में कोहराम मचाया हुआ है। हर दिन संक्रमण के तीन लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं। कई ऐसे परिवार हैं जो इस महामारी के कारण काफी मुश्किल भरी स्थिति से गुजर रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने राहत भरी घोषणा की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिन बच्चों ने कोरोना की वजह से अपने माता-पिता/अभिभावकों को खोया है उन्हें हर महीने पांच हजार रुपये पेंशन दी जाएगी। इसके अलावा उनके लिए मुफ्त शिक्षा और ऐसे परिवारों के लिए मुफ्त राशन की भी व्यवस्था की जाएगी।
बीते कुछ वक्त से कंगना रनौत (Kangana Ranaut) अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनके कारण वह कई बार निशाने पर आ चुकी हैं। कथित तौर पर अपनी आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण ट्विटर (Kangana Ranaut banned on Twitter) पर बैन किए जाने के बाद अब कंगना इंस्टाग्राम पर अपनी गुस्सा निकाल रही हैं। कंगना रनौत ने अब इजरायल और फलस्तीन के बीच जारी जंग पर रिऐक्ट किया है। ऐक्ट्रेस ने कहा है कि इस जंग में भारत, इजरायल के साथ खड़ा है। कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ इस जंग में भारत इजरायल के साथ खड़ा है।' कंगना ने आगे लिखा, 'अपने देश और लोगों को इस कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद से बचाना हर राष्ट्र का मौलिक अधिकार है और इसमें भारत, इजरायल के साथ खड़ा है। जो लोग यह सोचते हैं कि आतंकवाद को धरना और कड़ी निंदा के जरिए जवाब देना चाहिए, उन्हें इजरायल से सीखना चाहिए।' कंगना रनौत को लोगों ने किया ट्रोल, की इंस्टाग्राम बैन करने की मांग कंगना के इस बयान के बाद लोग ऐक्ट्रेस को ट्रोल कर रहे हैं और कुछ सपॉर्ट भी कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने तो अब कंगना के इंस्टाग्राम अकाउंट को भी सस्पेंड किए जाने की मांग कर दी है। दरअसल यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में फलीस्तीनियों और इजरायली सुरक्षा बलों के बीच सोमवार को झड़प हो गई थी, जिसमें कुछ फलीस्तीनियों के साथ-साथ बच्चे और सैकड़ों लोग मारे गए। इसके जवाब में हमास के चरमपंथी गुटों ने यरुशलम पर रॉकेट से हमला कर दिया, जिसमें करीब 20 लोगों की मौत की खबर है। वहीं बता दें कि बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ममता बनर्जी पर आपत्तिजनक ट्वीट करने के कारण कंगना रनौत के ट्विटर अकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया था। ट्वीट में कंगना ने ममता बनर्जी के लिए एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।
नई दिल्ली कोविड-19 महामारी में एक-एक इंसान से लेकर छोटे-बड़े देशों तक का असली चरित्र सामने आ रहा है। भारत ने इस वैश्विक आपदा में दुनियाभर के देशों और खासकर अपने पड़ोसियों को जल्दी से जल्दी वैक्सीन पहुंचाई तो हमारा प्रतिस्पर्धी चीन इस आपदा को अवसर में बदलने जुटा है। भारत में कोविड की दूसरी लहर के मद्देनजर टीकाकरण अभियान को तेज करने की दरकार हुई तो 'वैक्सीन मैत्री' अभियान पर ब्रेक लगाने की मजबूरी आन पड़ी। चीन अब इसका फायदा उठाने लगा है। मजबूरियों का फायदा उठाने लगा चीन ज्यादातर पड़ोसी देशों ने भारत से मिल रही कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield Vaccine) के दम पर चीनी कंपनी साइनोफार्म की वैक्सीन (Sinopharm Vaccine) को अपने यहां प्रतिबंधित कर रखा था। साइनोफार्म की वैक्सीन को पड़ोसी देशों ही नहीं, पाकिस्तान को छोड़कर दुनिया में शायद ही कहीं इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका जैसे हमारे पड़ोसियों को जब कोविशील्ड की सप्लाई नहीं हो पा रही है तो उन्हें अपने यहां चाइनीज वैक्सीन को अनुमति देनी पड़ी है। भारत से मनमानी कीमत वसूल रहीं चीनी कंपनियां पड़ोसियों की इसी मजबूरी को भांपकर चीन दोहरी चाल चलने लगा है। एक तरफ वो पड़ोसी देशों को कुछ-कुछ मात्रा में वैक्सीन उपहार के रूप में दे रहा है तो दूसरी तरफ भारत से कच्चे माल की मनमानी कीमतें वसूल रहा है। चीनी कंपनियां भारत से कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में उपयोगी उपकरणों और उनके निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतें कई गुना बढ़ा दी हैं। मसलन, 10 लीटर का ऑक्सिजन कंसंट्रेटर औसतन 220 डॉलर में मिल जाया करते हैं, लेकिन अब 1,000 से 1,200 डॉलर तक वसूली की जा रही है। ध्यान रहे कि भारत में ऑक्सिजन कंसंट्रेटर, सिलिंडर और टैंकर आदि की जरूरत बढ़ गई है। पड़ोसी देशों की 'भलाई', भारत से वसूली यही वजह है कि चीनी कंपनियां भारत से ज्यादा पैसे लेकर पड़ोसियों को मुफ्त में वैक्सीन देकर दरियादिली का नाटक कर रही हैं। हकीकत में तो पड़ोसियों को दी जा रही मुफ्त वैक्सीन की कीमत पिछले दरवाजे से भारत से वसूली जा रही है। भारत ने इसका विरोध भी किया। हॉन्गकॉन्ग में भारतीय कौंसल जनरल प्रियंका चौहान ने वहां के अखबार द चाइना मॉर्निंग पोस्ट में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि चीन कोविड-19 की मौजूदा लहर के खिलाफ लड़ाई में जरूरी उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित करेगा। हैरत की बात तो यह है कि चीन ने अपनी सरकारी सिचुआन एयरलाइंस (Sichuan Airlines) की भारतीय उड़ानें रोक दी हैं। इससे वहां से कच्चा माल मंगाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। चीन पर निर्भरता की मजबूरी अब बात पड़ोसी देशों की। बांग्लादेश को चीन ने बुधवार को 5 लाख वैक्सीन डोज मुफ्त में दी जबकि बांग्लादेश को उससे 4 से 5 करोड़ डोज खरीदनी होगी। श्रीलंका ने तो चीनी वैक्सीन को अपने यहां प्रतिबंधित कर रखा था, लेकिन भारत से कोविशील्ड की आपूर्ति अभी संभव नहीं होता देख वह भी चीन की ओर देखने को मजबूर हो गया। श्रीलंका में साइनोफार्म की वैक्सीन लगाई जाने लगी है। नेपाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उसे भी चीन से मिली वीरो सेल (Vero Cell) वैक्सीन पर ही निर्भर होना पड़ गया है।
नई दिल्ली देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बढ़ते मामलों के बीच स्टेरॉयड्स के यूज को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर के दौरान महामारी के इलाज में स्टेरॉयड्स एक प्रभावी विकल्प बन कर उभरा था। कई केसेज में यह लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हुआ था। अब महामारी के दूसरी लहर के दौरान डॉक्टर स्टेरॉयड्स का यूज स्पेसिफिक केस में कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को कहा जा रहा है कि वह बिना लोकल फिजिशियन की सलाह के स्टेरॉयड्स का प्रयोग ना करें। इस बारे में मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डायरेक्टर और हेड ऑफ पल्मोनोलॉजी डॉ. विवेक नांगिया और इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर ने स्टेरॉयड्स को लेकर बातचीत की। गंभीर मामलों में इन्फलेशन को कम करता है दोनों डॉक्टर ने बताया कि किस सिचुएशन में स्टेरॉयड्स का यूज करना है और यह पेशेंट्स पर किस तरह से काम करता है। स्टेरॉयड्स के प्रयोग के सवाल पर इन्होंने बताया कि कोरटिकोस्टेरॉयड्स (Corticosteroids) या स्टेरॉयड्स वो दवा है जो कोर्टिसोल के समान है। ये एक ऐसा हार्मोन है जो हमारे एडर्नल ग्लैंड से बनता है। ये पावरफुल एंटी इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स है जो कोरोना संक्रमण के गंभीर मामलों में इन्फ्लेशन को कम करता है। ऑक्सिजन सपोर्ट वाले पेशेंट्स के लिए मददगार यदि समय पर जांच नहीं हो तो ऐसा इन्फ्लेमेशन फेफड़े जैसे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। कोरोना की पहली लहर में यूके में रिकवरी ट्रायल के बाद महामारी के गंभीर मामलों में स्टेरॉयड्स का यूज काफी कॉमन हो गया। ट्रायल में सामने आया कि यह ऑक्सिजन सपोर्ट या वेटिंलेटर वाले संक्रमित पेशेंट्स की मृत्यु दर को कम करता है। स्टेरॉयड्स के यूज से गंभीर हो सकता है संक्रमण कोविड में पहले सप्ताह के दौरान मुख्य रूप से वायरस के कारण होना वाला संक्रमण होता है। दूसरे सप्ताह में बॉडी में इम्यून रिस्पॉन्स होना शुरू होता है, यह वो समय है जब स्टेरॉयड्स अपना असर दिखाना शुरू करता है। यदि पहले सप्ताह में ही पेशेंट को स्टेरॉयड्स दिया जाएगा तो संक्रमण और गंभीर हो सकता है या फिर सेकेंडरी इन्फेक्शन हो सकता है। होम आइसोलेशन में हल्के लक्षण वालों के लिए स्टेरॉयड्स की जरूरत नहीं हल्के लक्षण वाले जो पेशेंट होम आइसोलेशन में है, जिनका ऑक्सिजन सैचुरेशन 94 परसेंट हैं और उनमें न्यूमोनिया का कोई लक्षण नहीं है। ऐसे लोगों को स्टेरॉयड्स दिए जाने की कोई जरूरत नहीं है। तेज बुखार, खांसी के कारण हालत खराब होने पर स्ट्रिक्ट मेडिकल सुपरविजन में 3-5 दिन का एक छोटा कोर्स चलाया जा सकता है। स्टेरॉयड्स यूज के क्या-क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं? चूंकि इसका ट्रीटमेंट पीरियड छोटा है, ऐसे में कोर्टिकोस्टेरॉयड्स का हाईडोज से भी कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। हालांकि, स्टेरॉयड्स के शॉर्ट कोर्स से हाई ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, नींद नहीं आना, साइक्लोजिकल इफेक्ट्स, भूख लगना, वजन बढ़ना और सेकेंडरी इन्फ्लेमेशन हो सकते हैं। दो सप्ताह से अधिक समय तक स्टेरॉयड्स का यूज करने पर ग्लूकोमा, कैटारैक्ट, फ्लूइड रिटेंशन, हाईपरटेंशन, याददाश्त संबंधी समस्या, इंफेक्शन का खतरा और ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। स्टेरॉयड्स का प्रेगनेंट या स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर क्या असर हो सकता है? बीटामेथासोन और डेक्सामेथासोन जैसे स्टेरॉयड्स प्रेगनेंट महिलाओं के साथ ही स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दिया जा सकता है। संभावित फायदों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रेगनेंट महिलाओं जो वेटिंलेटर या ऑक्सिजन सपोर्ट पर हैं, के लिए डेक्सामेथासोन की सलाह दी जाती है। हालांकि, कोरोना संक्रमित बच्चों पर स्टेरॉयड्स की सेफ्टी और प्रभावी होने को लेकर अभी तक पूरी तरह से कोई बात सिद्ध नहीं हुई है। इनका यूज केस के आधार पर अलग-अलग किया जाता है। स्टेरॉयड्स का ब्लैक फंगस से क्या संबंध है? बिना जरूरत के स्टेरॉयड्स का हाई डोज या एंटीबायोटिक का प्रयोग घातक फंगल इन्फेक्शन का कारण हो सकता है। आज कल चर्चा में आया म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस बहुत रेयर फंगल इन्फेक्शन है। ब्लैक फंगस कैंसर की तरह मरीजों की हड्डियां तक गला रहा है। यह अपने आसपास की कोशिकाएं भी नष्ट कर सकता है। यह अब कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियाों में सामने आ रहा है।
लखनऊ पाकिस्तान की तारीफ में कसीदे गढ़ने वाले यूपी के एक प्रधान पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। बुधवार को सीतापुर पुलिस ने जिले के बेलौता गांव के नवनिर्वाचित प्रधान और उसके चार सहयोगियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया। 8 मई को इस प्रधान को गिरफ्तार किया गया था। यह प्रधान भारत विरोधी नारा लगाते हुए पाकिस्तान की तारीफ में कसीदे गढ़ रहा था। प्रधान असलम खान के परिवार वालों का कहना है कि विरोधियों ने प्रधान को झूठे केस में फंसाया है। पुलिस को मिले थे सबूत सीतापुर के एसपी आरपी सिंह ने बताया कि खान के खिलाफ शुरुआती जांच बिठा दी गई थी और वीडियो और आडियो फुटेज की जांच की गई थी। उन्होंने बताया कि फुटेज में प्रधान साफ-साफ पाकिस्तान के पक्ष में नारा लगाते नजर आ रहा है। ठोस सबूतों के आधार पर प्रधान पर देशद्रोह का मुकदमा लगाया गया है। परिवार वालों ने लगाया विपक्षियों पर आरोप टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में प्रधान के बड़े भाई शकील खान ने आरोप लगाया कि विरोधियों ने भीड़ में कुछ युवाओं को शामिल कर पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी की थी। विपक्षी पार्टी के प्रधान पद के उम्मीदवार ने इस वीडियो फुटेज का इस्तेमाल कर मेरे भाई के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया है।
मुंबई एक तरफ जहां कोरोना महामारी से महाराष्ट्र त्राहिमाम कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ पैसों की भी भारी किल्लत के चलते राज्य सरकार की तिजोरी भी खाली हो चुकी है। आलम यह है कि महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री कई बार कह चुके हैं कि उन्हें अपने विभाग के कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी कर लेने की नौबत आ चुकी है। ऐसी सूरत में महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा और अजीबोगरीब फैसला लिया है। महाराष्ट्र सरकार अब उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के सोशल मीडिया अकाउंट के लिए 6 करोड रुपए खर्च करने जा रही हैं। अजित पवार के पास फाइनेंस एंड प्लानिंग विभाग भी है। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले की जमकर आलोचना हो रही है। विपक्ष का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल कोरोना महामारी से निपटने के खिलाफ किया जाना चाहिए था। राज्य की जनता पैसों के अभाव में उचित इलाज नहीं करवा पा रही है। अस्पतालों में दवाइयां, बेड और ऑक्सीजन नहीं है। इनको दुरुस्त करने की जगह उपमुख्यमंत्री के सोशल मीडिया एकाउंट्स को दुरुस्त किया जा रहा है। सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को ऑर्डर निकाल कर एक निजी एजेंसी को पवार के सोशल मीडिया अकाउंट की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है, ताकि पवार द्वारा जनता के हित में लिए गए फैसले उन तक पहुंच सके। आदेश के मुताबिक यह एजेंसी अजित पवार के ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉगर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया एकाउंट्स देखेगी। महाराष्ट्र सरकार की डीजीआईपीआर (DGIPR) के पास सोशल मीडिया अकाउंट को हैंडल करने वाले पेशेवर लोगों की कमी है जिसकी वजह से बाहरी एजेंसी को यह काम सौंपा गया है। हालांकि सरकार के इस फैसले पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी एतराज है जिनका कहना है कि यह फैसला सिर्फ अजीत पवार की इमेज बिल्डिंग के लिए लिया गया है। जबकि डीजीआईपीआर के पास 1200 लोगों का स्टॉफ है और जिनका सालाना बजट तकरीबन डेढ़ सौ करोड़ रुपए का है। ऐसी सूरत में हमें किसी बाहरी एजेंसी की उप मुख्यमंत्री के प्रमोशन के लिए क्या जरूरत है? बीजेपी ने साधा निशाना महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले पर बीजेपी विधायक और प्रवक्ता राम कदम ने कहा है कि महा विकास अघाड़ी सरकार उपमुख्यमंत्री की पीठ थपथपाने के लिए यह पैसा खर्च करने जा रही है। हालांकि जब राज्य की जनता की बात आती है तब यह सरकार कहती है कि उनके पास पैसे नहीं है। यह सरकार खुद की वाहवाही के लिए पैसा खर्च करने में जरा भी नहीं हिचकिचाती। अगर एक उपमुख्यमंत्री के लिए इतना पैसा खर्च किया जा रहा है तब अन्य मंत्रियों के लिए कितना खर्च होगा? महाराष्ट्र सरकार ने इसके पहले महंगी गाड़ियां कोरोना काल में अपने मंत्रियों के लिए खरीदी फिर करोड़ों रुपए खर्च कर उनके बंगलों का रिनोवेशन करवाया। यह जनता के पैसों का सीधा दुरुपयोग है।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना आपदा बस्तर के नक्सल मोर्चे पर फोर्स के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। कोरोना की दूसरी लहर जंगल में छिपे नक्सलियों पर कहर बनकर टूट रही है। संक्रमण के बाद बिना उपचार के वे मारे जा रहे हैं। संगठन बिखर रहा है। इस बात की प्रबल संभावना है कि अगर वह कोरोना से निपटने का इंतजाम करने में विफल रहे तो उनका किला ढह जाएगा। दर्जनों नक्सली कोरोना की चपेट में बीते तीन दिनों से जंगल से छन-छनकर खबरें आ रही थीं कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सभी छह डिवीजनों में बड़े नक्सली नेताओं समेत दर्जनों नक्सली कोरोना की चपेट में हैं। ये खतरनाक आंध्र वैरिएंट की जद में आ गए हैं। खबर तो यह भी है कि टेकलगुड़ा मुठभेड़ की साजिश रचने वाली सेंट्रल कमेटी की सदस्य 25 लाख की इनामी सुजाता की कोरोना से मौत हो चुकी है। पुलिस के हाथ लगे पत्र में सात नक्सलियों के मरने और सौ से ज्यादा के संक्रमित होने का उल्लेख मंगलवार को पुलिस ने बीजापुर के गंगालूर थाना क्षेत्र के पालनार इलाके में नक्सलियों के एक कैंप पर धावा बोला। नक्सली तो भाग गए पर मौके से अन्य सामान के साथ गोंडी भाषा में लिखा एक पत्र पुलिस ने बरामद किया है। यह किसी नक्सली ने अपने सीनियर महिला कमांडर को लिखा है। पत्र में सात नक्सलियों की कोरोना से मौत और कई नक्सलियों के बीमार होने और कुछ के संगठन छोड़कर भाग जाने का उल्लेख है। नक्सलियों ने कोरोना की गंभीरता को किया नजरअंदाज पत्र में इस बात से नाराजगी भी जताई गई है कि कोरोना की गंभीरता को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। निचले कैडर को सही जानकारी नहीं दी गई। आइजी पुलिस ने कहा- नक्सली सरेंडर करें तो कराएंगे इलाज बस्तर आइजी सुंदरराज पी कह चुके हैं कि नक्सलियों की मदद तभी हो पाएगी जब वे आत्मसमर्पण करेंगे। जंगल में उनके लिए डाॅक्टर नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि वे सरकार से लड़ रहे हैं। अगर उन्हें जान बचाना है तो पुलिस के सामने हथियार डालना पड़ेगा। इससे बस्तर में शांति की उम्मीद बलवती हो उठी है। नक्सली पत्र में अपनों को खोने का दर्द हस्तलिखित पत्र किसी कामरेड दीदी को संबोधित करते हुए लिखा गया है। इसमें लिखा है कि मैं और मेरे साथी ठीक हैं। मंगू दादा के पैर में तकलीफ थी, जिसका जड़ी-बूटी से इलाज किया गया। संगठन का काम आगे बढ़ाने के लिए हम जनता से मिलने का प्रयास कर रहे हैं, पर इलाके में फोर्स के तीन नए कैंप खुल गए हैं। हमारे 14 लोगों को पुलिस ने जेल में डाल दिया है। संगठन का सदस्य माड़ा घर जाने के नाम पर निकला था, अब गायब है। दक्षिण बस्तर, दरभा व पश्चिम बस्तर डिवीजन के कई साथी बीमारी से लड़ रहे हैं। दक्षिण बस्तर के रूपी, दरभा डिवीजन के सीएनएम कमांडर हुंगा, बटालियन के देवे, गंगा, सुदरू, मुन्नी, रीना की मौत हो गई है। डीवीसी राजेश दादा, सुरेश व मनोज की हालत गंभीर है। जितना सुना हूं, यह बीमारी बहुत जल्दी फैलती है। आपको याद होगा, इस मुद्दे पर मेरी विकास दादा से तीखी बहस भी हुई थी। जोनल कमेटी के सदस्य निचले स्तर तक सही जानकारी नहीं पहुंचाते। हम जिंदा रहेंगे तभी तो क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ा सकते हैं। पत्र में लिखा: कोरोना तोड़ रहा नक्सलियों की कमर पत्र में आगे लिखा है, बीमारी के डर से बटालियन के सेक्शन कमांडर बुधराम और विमला भाग गए हैं। सीआरसी कंपनी से भी दो लोग भाग गए हैं। गंगालूर एरिया कमेटी में सभी बीमार होने से रितेश व जोगा भाग गए हैं। दरभा डिवीजन से भी नागेश, सुमित्रा, अनिता पार्टी छोड़ दिए हैं। कोंटा प्लाटून से रूपेश अचानक घर भाग गया है। हमारे पास उपलब्ध दवा का इस बीमारी में कोई असर नहीं हो रहा है। राशन आपूर्ति में भी समस्या है। डेढ़ साल से स्थाई नेतृत्व न होने से महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिए जा पा रहे हैं। दीदी, आपकी बात सभी सुनते हैं। आप इस विषय पर जल्द निर्णय लें नहीं तो जान बचाने के लिए सभी कैडर्स गांव, परिवार की ओर भाग जाएंगे। आप भी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
नई दिल्ली,केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार सुबह जारी देश भर में कोविड-19 के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटों में आए नए मामलों का आंकड़ा कल की तुलना में अधिक है वहीं इस अवधि में मौतों के आंकड़ों का तो रिकॉर्ड ही टूट गया। हालांकि राहत की बात यह है कि 24 घंटों में स्वस्थ होने वाले लोगों का आंकड़ा काफी अच्छा है। बीते 24 घंटों में 3,48,421 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 4205 लोगों की मौत हो गई वहीं 3,56,082 लोगों ने कोरोना को मात दे दिया और अस्पताल से घर लौटे। देश के सर्वाधिक संक्रमित राज्य महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 40,956 नए COVID-19 मामले आए और 793 मौतें दर्ज की गई। यहां भी नए संक्रमितों की तुलना में और स्वस्थ होने वालों का आंकड़ा 71,966 दर्ज किया गया। मंगलवार को 19,83,804 सैंपल की हुई टेस्टिंग भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में मंगलवार तक कोरोना वायरस के लिए कुल 30,75,83,991 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 19,83,804 सैंपल कल टेस्ट किए गए। इसके बाद देश में अब तक कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2,33,40,938 हो गया और कुल मृतक संक्रमितों की संख्या 2,54,197 है। इसके अलावा देश में अभी सक्रिय मामलों का आंकड़ा 37,04,099 है और अब तक कोरोना को मात दे चुके लोगों की संख्या 1,93,82,642 हो गई है। 16 जनवरी से शुरू किए गए वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत अब तक देश में कुल 17,52,35,991 वैक्सीन दी जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत 18 राज्यों में संक्रमण के नए मामलों रफ्तार धीमी हो रही है लेकिन पंजाब, बंगाल, कर्नाटक और केरल समेत 16 राज्यों में मामलों में तेजी आई है जो चिंता का कारण बन गए हैं। युवावर्ग पर कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में युवा ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। इसकी वजह यह हो सकती है कि काम के लिए उन्हें घरों से बाहर निकलना पड़ता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पहली और दूसरी लहर में संक्रमित होने वालों में उम्र के हिसाब से ज्यादा अंतर नहीं है। डॉ. भार्गव ने कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्यादा है। कोरोना वायरस से कुछ ऐसे वैरिएंट हैं जो युवाओं को ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण का पता लगाने के लिए रोजाना 18.20 लाख टेस्ट किए जा रहे हैं।
नई दिल्‍ली । भारत में कोहराम मचा रही कोरोना महामारी की दूसरी लहर में वायरस के जिस प्रकार B.1.617 को भारतीय वेरिएंट का नाम दिया जा रहा है वो दरअसल, भारतीय वेरिएंट है ही नहीं। इसको लेकर केंद्र सरकार ने एक बयान जारी कर कहा है कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने ये स्‍पष्‍ट तौर पर कहीं नहीं कहा है कि B.1.617 जानलेवा वायरस का एक भारतीय प्रकार है। हालांकि संगठन ने ये जरूर कहा है कि इससे पूरी दुनिया को खतरा है और इससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने बयान में स्‍पष्‍ट किया है कि मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार कोरोना वायरस के B.1.617 प्रकार को भारतीय वेरिएंट बताया जा रहा है जो कि सही नहीं है। इस तरह की बातें पूरी तरह से आधारहीन है और बेबुनियाद हैं। बयान में ये भी स्‍पष्‍ट किया गया है कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की 32 पेज की रिपोर्ट में कहीं भी भारतीय शब्‍द तक का भी इस्‍तेमाल नहीं किया गया है। आपको बता दें कि सोमवार देर रात विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने माना था कि वायरस का B.1.617 वेरिएंट पहली बार भारत में पाया गया था, जिसको लेकर संगठन ने विश्‍व स्‍तर पर चिंता जाहिर की थी। संगठन की विशेषज्ञ डॉक्‍टर मारिया के मुताबिक इसको वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्‍ट की श्रेणी में रखा गया है। संगठन के मुताबिक 11 मई तक कोरोना वायरस के करीब 4500 सिक्‍वेंस GISAID को अपलोड किया जा चुका है। संगठन को इसके बाबत सभी छह क्षेत्रों और अन्‍य पांच देशों से भी रिपोर्ट हासिल हुई हैं। कोरोना के B.1.617 वेरिएंट को लेकर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी स्थिति पूरी तरह से स्‍पष्‍ट कर दी है। संगठन की तरफ से किए गए एक ट्वीट में कहा गया है कि संगठन किसी भी वायरस के वेरिएंट को किसी अमुक देश से जोड़कर नाम नहीं देता है। वो केवल इस बात का ध्‍यान रखता है कि वो अमुक वेरिएंट पहली बार कहां पर देखा गया है। इसके बाद इस वेरिएंट को एक नाम देने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
कोहिमा,नगालैंड की भाजपा यूनिट ने राज्य में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए एक नए अभियान की शुरुआत करने का फैसला लिया है। इसके तहत कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों को एक समय का खाना पार्टी की ओर से दिया जाएगा। नगालैंड की BJP ST मोर्चा द्वारा यह इंतजाम किया जाएगा। प्लान के अनुसार, पहले कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए यह सुविधा होगी बाद में राज्य के अन्य हिस्सों के लिए योजना में विस्तार किया जाएगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वानफोंग कोनयाक (Wanphong Konyak) ने बताया कि कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए एक समय का भोजन की सुविधा 15 मई से शुरू की जाएगी जो लॉकडाउन के समाप्त होने तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया 'राज्य में बढ़ते संक्रमण के मामलों के बीच नगालैंड सरकार ने 14 से 21 मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है। इस प्रोग्राम की शुरुआत कोहिमा की ट्रैफिक पुलिस के साथ की जाएगी। इसके तहत यहां के सफाईकर्मियों व हेल्थवर्करों को शामिल किया जाएगा।' कोनयाक ने जोर दिया कि कोविड मामलों में बढ़ोतरी के कारण फ्रंटलाइन वर्करों की ड्यूटी बढ़ गई है और इस चुनौतीपूर्ण समय में वे पूरे साहस व लगन के साथ इसे निभा रहे हैं। नगालैंड की भाजपा यूनिट ने अपने वर्करों को सभी संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है ताकि राज्य की जनता को मदद मिल सके। इस बीच BJP ST मोर्चा ने फ्रंटलाइन वर्करों के बीच भोजन का वितरण शुरू कर दिया है। वहीं यूथ विंग की ओर से रक्त दान व प्लाज्मा देने की गतिविधि शुरू है। साथ ही महिला विंग फेस मास्क का वितरण कर रही है।
नई दिल्ली,उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत देश के कम से कम 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए लाकडाउन, कफ्यू और लॉकडाउन जैसी सख्त पाबंदियां लगाई भी हैं। इस तरह देश की 90 फीसद से ज्यादा आबादी किसी न किसी तरह की पाबंदियों के दायरे में है।आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पहले वीकेंड लाकडाउन लगाया और फिर उसे 10 मई तक के लिए कोरोना कर्फ्यू में बदल दिया गया। अब राज्य सरकार ने कोरोना कफ्यू की अवधि को 17 मई तक बढ़ाने का एलान किया है। वहीं दिल्ली में भी लाकडाउन सोमवार, 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। वहीं हरियाणा सरकार ने राज्य में लॉकडाउन को लेकर लगाई गई पाबंदियां 17 मई तक बढ़ा दी है। राजस्थान में सोमवार सुबह पांच बजे (10 मई) से 24 मई तक सख्त लॉकडाउन रहेगा। उप्र में 16 अप्रैल को सिर्फ रविवार की साप्ताहिक बंदी का फैसला किया गया। फिर मामले बढ़ते-घटते गए और सरकार बंदी को विस्तार देती चली गई। रविवार को उप्र के सीएम आदित्यनाथ योगी ने कहा कि 24 घंटे में 23,333 नए मामले मिले हैं। स्वस्थ होने के बाद 34,636 व्यक्तियों को डिस्चार्ज किया गया है। योगी ने माना कि आंशिक कोरोना कर्फ्यू के बेहतर नतीजे मिल रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी कहा कि लाकडाउन के बाद कोरोना की चेन टूटनी शुरू हो गई है। 26 अप्रैल को संक्रमण दर 35 फीसद थी, जो अब घटकर 23 फीसद पर आ गई है। अभी ढील नहीं दी जा सकती है, नहीं तो जो हमने हासिल किया है, वह भी हाथ से निकल जाएगा। किन- किन राज्यों में की गई सख्ती - कर्नाटक में 10-24 मई तक लाकडाउन जैसी पाबंदियां - महाराष्ट्र में पांच अप्रैल से 15 मई तक सख्त पाबंदियां - गोवा में नौ मई से 15 दिनों का कर्फ्यू - केरल में आठ से 16 मई तक संपूर्ण लाकडाउन - आंध्र प्रदेश में छह मई से दो हफ्ते के लिए दोपहर 12 बजे से शाम छह बजे तक आंशिक लॉकडाउन - तेलंगाना में 15 मई तक रात का कर्फ्यू - मिजोरम में 10-17 मई तक पूर्ण लाकडाउन - मणिपुर के सात जिलों में आठ से 17 मई तक कर्फ्यू - हिमाचल प्रदेश में सात से 16 मई तक लाकडाउन - बिहार में चार मई से 15 मई तक लाकडाउन लागू- ओडिशा में पांच मई से 14 दिनों का लाकडाउन - झारखंड में 13 मई तक लाकडाउन जैसी पाबंदियां - छत्तीसगढ़ ने 15 मई तक वीकेंड लाकडाउन - पंजाब में 15 मई तक वीकेंड लाकडाउन और रात का कर्फ्यू - मध्य प्रदेश में 15 मई तक जनता क‌र्फ्यू -गुजरात के 36 शहरों में 12 मई तक रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू यूपी में ऐसे बढ़े पाबंदियों के कदम 16 अप्रैल : शनिवार रात आठ से सोमवार सुबह सात बजे तक यानी रविवार की साप्ताहिक बंदी 20 अप्रैल : शुक्रवार रात आठ से सोमवार सुबह सात बजे तक यानी शनिवार और रविवार की साप्ताहिक बंदी 29 अप्रैल : शुक्रवार रात आठ से मंगलवार सुबह सात बजे तक यानी शनिवार, रविवार और सोमवार की साप्ताहिक बंदी 03 मई : कोरोना कर्फ्यू को छह मई तक बढ़ाया 05 मई : कोरोना कफ्र्यू को 10 मई तक के लिए विस्तर 09 मई : कोरोना कफ्र्यू को अब 17 मई तक के लिए बढ़ाया गया। उप्र में ऐसी रही संक्रमण की स्थिति तारीख- नए केस- कुल सक्रिय मरीज- 24 घंटे में मौत 16 अप्रैल- 27426- 150676- 103 20 अप्रैल- 29754- 223544- 163 29 अप्रैल- 35156- 309237- 298 03 मई- 29192- 285832- 288 05 मई- 31165- 262474- 357 09 मई- 23333- 233981- 296 दिल्ली में और सख्त हुआ लाकडाउन दिल्ली में जारी कोरोना के कहर के चलते 20 अप्रैल से चल रहा लॉकडाउन एक सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया गया है। फिलहाल यह 10 मई सुबह पांच बजे समाप्त होना था, लेकिन अब यह 17 मई सुबह पांच बजे तक जारी रहेगा। लाकडाउन बढ़ाने की घोषणा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की। सोमवार से मेट्रो का परिचालन बंद रहेगा। सार्वजनिक स्थल, मैरिज होम, बैंक्वेट हाल या होटल आदि में शादी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शादी सिर्फ घर या कोर्ट में शादी हो सकेगी। जिसमें मात्र 20 लोग शामिल हो सकेंगे। जिन होटल, मैरिज होम, बैंक्वेट हाल को शादी के लिए बुक किया गया है, उन्हें पैसे लौटाने होंगे। दवाइयां, सब्जी और किराना दुकानों पर खरीदारी के दौरान मास्क लगाना अनिवार्य होगा। लाकडाउन के दौरान ई-पास धारक व्यक्ति दिन या रात के समय आवश्यक सामान की डिलीवरी कर सकेंगे। राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान रहेगी सख्ती राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान रोडवेज व प्राइवेट बसों का संचालन बंद रहेगा। एक से दूसरे जिले में आवाजाही भी बंद रहेगी। किराना और दूध की दुकान सुबह छह से 11 बजे तक खुलेगी। सरकारी और प्राइवेट ऑफिस भी बंद रहेंगे। राजस्थान में 10 से 24 मई तक सख्त लॉकडाउन रहेगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। नई गाइडलाइन के अनुसार प्रदेश के बाहर से आने वालों को 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट दिखानी होगी। सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में विवाह समारोह में प्रतिभोज व बारात निकासी की अनुमति 31 मई तक नहीं दी जाएगी। केवल घर में ही 11 लोग विवाह समारोह आयोजित कर सकेंगे। मैरिज गार्डन व होटल विवाह समारोह के लिए बंद रहेंगे। जम्मू-कश्मीर में भी बढ़ा कोरोना कर्फ्यू जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भी प्रदेश के सभी 20 जिलों में कोरोना कफ्र्यू को 17 मई यानी सोमवार सुबह सात बजे तक बढ़ा दिया है। इसके साथ शादी समारोह में अधिकतम मेहमानों की संख्या भी 25 कर दी गई है। आवश्यक सेवाओं को कोरोना कफ्र्यू से मुक्त रखने के साथ ही ईद उल फितर के मद्देनजर सोमवार को खाद्य आपूíत विभाग ने अपने सभी बिक्री केंद्र खुला रखने का फैसला किया है।
भोपाल, मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) अब महामारी कोविड-19 की तीसरी लहर से जूझने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पूरे राज्य में बच्चों के लिए 360 आइसीयू बेड के इंतजाम की तैयारी चल रही है। इस बात की जानकारी मंत्री विश्वास कैलाश सारंग (Vishwas Kailash Sarang) ने सोमवार को दी। हाल में ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी दी जो बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है। रविवार को राज्य के मेडिकल एजुकेशन मंत्री कैलाश सारंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सुपरिटेंडेंट व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की और तीसरी लहर के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री ने अधिकारियों से तुरंत आवश्यक उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों को जल्द ही फंड दे दिए जाएंगे। सारंग ने बताया, 'कोविड-19 महामारी की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए हम तैयारी कर रहे हैं क्योंकि यह बच्चों को प्रभावित कर सकता है। राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में हम 360 बेड का इंतजाम करेंगे।' उन्होंने अधिकारियों को दवाओं, इंजेक्शन व अन्य जरूरी चीजों का पर्याप्त स्टॉक रखने को लेकर भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराने की भी बात कही है। मीटिंग के दौरान यह निर्णय लिया गया कि 1,267 बेड का इंतजाम किया जाएगा जिसमें 767 ICU/HDU (high dependency units) बेड होंगे। रविवार को राज्य में 11,051 नए मामले सामने आए और 86 संक्रमितों की मौत हो गई। इसके बाद राज्य में अब तक कुल संक्रमितों का आंकड़ा 6,71,763 हो गया और कुल मरने वालों की संख्या 6,420 है। सोमवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में देश भर में आने वाले संक्रमण के मामलों का आंकड़ा 3,66,161 है और मरने वालों का आंकड़ा 3,754 है। इसके साथ ही देश में अब तक संक्रमितों का कुल आंकड़ा 2,26,62,575 हो गया।
कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद भी राजनीतिक घमासान लगातार जारी है। बीजेपी के नेता और सांसद डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है। डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं को धमकाने के लिए ममता बनर्जी सरकार ने नया तरीका अपनाया है। ममता मोदी सरकार की ओर से मंजूर किए गए मुफ्त राशन योजना से बीजेपी कार्यकर्ताओं को वंचित करने का काम कर रही हैं। डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने ट्वीट करके कहा, 'पश्चिम बंगाल में BJP कार्यकर्ताओं को धमकाने का एक नया रूप मोदी सरकार की ओर से मंजूर किए गए मुफ्त राशन से वंचित करना है। राशन की दुकानों पर ऐसे लोगों की सूची दी जा रही है, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस के सामने 'आत्मसमर्पण' करने तक उनके भोजन की पात्रता तक पहुंचने की अनुमति नहीं होगी।' नतीजों के बाद बीजेपी वर्करों पर हो रहे हमले दरअसल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए कुछ अच्छा नहीं हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ओर से बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। वहीं कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता असम की ओर पलायन भी कर गए हैं। बंगाल से असम पहुंचे कुछ बीजेपी कार्यकर्ता बीते दिनों असम के बीजेपी नेता हिमंत बिस्व सरमा ने ट्वीट करके कहा था, 'बंगाल से बीजेपी के लोग बड़ी संख्या में असम पहुंच रहे हैं। क्योंकि बंगाल में उनको मार-पीटा जा रहा है और उनके घरों तक को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इन सब के पीछे ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया था।
कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सीतलकुची में सीआईएसएफ जवानों की ओर से कथित तौर पर फायरिंग के दौरान टीएमसी समर्थकों की हुई मौत को लेकर ममता सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। पश्चिम बंगाल सीआईडी ने CRPC की धारा 160 के अंतर्गत 4 सीआईएसएफ, 1 सीआईएसएफ इंस्पेक्टर और 1 सीआईएसएफ डिप्टी कमांडेंट को मंगलवार (11 मई) को सीआईडी हेडक्वार्टर में पेश होने को कहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा-ममता के आदेश पर काम कर रही CID इस मामले को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और ममता बनर्जी को नंदीग्राम से पटखनी देने वाले सुवेन्दु अधिकारी ने कहा कि बंगाल CID को अधिकार नहीं है वह CRPF और CISF को समन भेज सके। ये दोनों बल गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता हैं। सीआईडी ममता बनर्जी और टीएमसी के निर्देश पर काम कर रही है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कहा कि अच्छे कार्यों में पार्टी TMC को सहयोग करेगी लेकिन बंगाल हिंसा के मुद्दे पर सवाल दागने से पीछे नहीं हटने वाली है। कैलाश विजयवर्गीय ने भी TMC को घेरा वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सीआईएसएफ जवानों को समन भेजने को लेकर ममता सरकार पर निशाना बोला। उन्होंने कहा- जैसे राज्य में जिस तरह से CPM का सफाया हो गया है उसी तरह से TMC भी बंगाल में खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सीआईडी राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही है। सीआईडी को सीआईएसएफ के लोगों को समन करने का कोई अधिकार नहीं है। पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष बने सुवेन्दु अधिकारी पश्चिम बंगाल में चुनाव में मुख्य विपक्षी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं की सोमवार को हुई बैठक हुई में , जिसमें नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को मात देने वाले सुवेंदु अधिकारी को सोमवार को ही विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया है। विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले सुवेंदु को एक समय ममता बनर्जी का खास सिपहसलार माना जाता था। उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा और इस हाई प्रोफाइल सीट पर हुए नजदीकी मुकाबले में जीत दर्ज की। अब वे प्रदेश की विधानसभा में बीजेपी दल की अगुवाई करेंगे।
भोपाल रविवार को बीजेपी ने असम के लिए नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर कई निशाने साध लिए। सर्वानंद सोनोवाल की जगह हिमंत बिस्वा सरमा को यह पद देकर बीजेपी ने केवल उनकी पुरानी इच्छा पूरी नहीं की, बल्कि कई अन्य नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को भी हवा दे दी। खासकर उन नेताओं को जो कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए हैं या ऐसी इच्छा रखते हैं, लेकिन कैडर आधारित पार्टी में अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं। इनमें राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हैं जो मार्च, 2020 में बीजेपी में आने के बाद से पार्टी की ओर से कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की प्रतीक्षा में हैं। करीब सवा साल पहले जब सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा था तो उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने की चर्चा जोर-शोर से चली थी। यह भी कहा गया था कि उनके समर्थकों को पार्टी संगठन में एडजस्ट किया जाएगा। सिंधिया अपने साथ करीब 25 विधायकों को लेकर आए थे जिसके चलते मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई और बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिल गया। शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तो सिंधिया समर्थकों को मंत्री पद मिला, लेकिन खुद महाराज अब भी प्रतीक्षा में हैं। कैडर-आधारित होने के चलते बीजेपी के बारे में यह आम धारणा है कि पार्टी में नए आए लोगों को संदेह की नजरों से देखा जाता है। बीजेपी की रीति-नीति में रचे-बसे लोगों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं। सुब्रमण्यम स्वामी से लेकर सतपाल महाराज तक इसके कई उदाहरण भी हैं। लेकिन सरमा को मुख्यमंत्री की कुर्सी देकर बीजेपी ने एक झटके में इस धारणा को तोड़ने की कोशिश की है। पार्टी ने यह संदेश दे दिया है कि अपनी उपयोगिता साबित करने वाले लोगों को महत्वपूर्ण पद देने से उसे गुरेज नहीं है। 2001 से लगातार विधायक चुने जा रहे सरमा ने कांग्रेस तब छोड़ी थी, जब वे राहुल गांधी से मिलने गए, लेकिन राहुल उनसे मिलने की बजाय अपने कुत्ते से खेलते रहे। सरमा बीजेपी में आए, 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हराने में अहम भूमिका निभाई और फिर सर्बानंद सोनोवाल की कैबिनेट में मंत्री बने, लेकिन उनकी इच्छा मुख्यमंत्री बनने की थी। बीजेपी ने 2016 के बाद से सरमा को कई जिम्मेदारियां दी। खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में अपने विस्तार के लिए पार्टी ने उनका इस्तेमाल किया और सरमा पार्टी की उम्मीदों पर हर बार खरे उतरे। हाल में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी लगातार दूसरी बार सत्ता में आई तो पार्टी ने सरमा को मुख्यमंत्री का पद दे दिया। इस फैसले में सिंधिया के लिए स्पष्ट संदेश है कि बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी के लिए उन्हें धैर्य रखने के साथ अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति में सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं, लेकिन नवंबर में हुए विधानसभा के उपचुनावों में चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में बीजेपी को वह कामयाबी नहीं दिला पाए जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी। सिंधिया के समर्थक गाहे-बगाहे उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन सरमा का फैसला यह संकेत है कि इसके लिए उन्हें पहले परफॉर्म करना होगा। यह संदेश सिंधिया के साथ उनके मित्र और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के लिए है। राज्य की सत्ता में कांग्रेस की वापसी कराने वाले पायलट मुख्यमंत्री का पद नहीं मिलने से असंतुष्ट हैं और कई बार इसे खुले तौर पर जता भी चुके हैं। बीच-बीच में उनके कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने की चर्चाएं भी जोर पकड़ती रहती हैं। वे शायद बीजेपी में जाकर भी अपनी महत्वाकांक्षा पूरी होने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। सरमा को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने पायलट और उन जैसे दूसरे नेताओं को भी संदेश दे दिया है। संदेश स्पष्ट है- बीजेपी में आइए, परफॉर्म कीजिए और पद लेकर जाइए।
गुड़गांव दिल्ली के पास स्थित हरियाणा-एनसीआर के 4 जिलों में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 50 फीसदी से ज्यादा है जबकि तीन जिले ऐसे हैं जहां पॉजिटिविटी रेट 40 फीसदी से ज्यादा है। इन आंकड़ों ने राष्ट्रीय राजधानी के आसपास कोरोना के मामले बढ़ने की डर पैदा कर दिया है जो पहले से ही कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। सबसे चिंताजनक आंकड़ें नूंह जिले से आए हैं जहां पॉजिटिविटी रेट सबसे ज्यादा 64.3 फीसदी है। तीन जिलों में 40 फीसदी से ज्यादा है पॉजिटिविटी दिल्ली के दूसरे पड़ोसी जिले सोनीपत में भी हालात खराब हैं। यहां कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 57.6 फीसदी है। दिल्ली के करीब में स्थित दो अन्य जिलों भिवानी और पानीपत में पॉजिटिविटी रेट क्रमशः 54.1 और 51.5 फीसदी है। फरीदाबाद, रेवाड़ी और रोहतक के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। यहां पॉजिटिविटी रेट क्रमशः 44.5, 42.6 और 42 फीसदी है। 40 लाख से अधिक परिवारों की स्क्रीनिंग का प्लान हरियाणा के इन जिलों में कोरोना के बढ़ते पॉजिटिविटी रेट ने सीएम मनोहर लाल खट्टर की पेशानी पर बल ला दिए हैं। सीएम खट्टर की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सरकार ने यह तय किया है कि 7500 से अधिक गांवों में 40 लाख से अधिक परिवारों की स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। इन घरों की स्क्रीनिंग करने के लिए सीएम खट्टर ने हेल्थ अथॉरिटी को निर्देश दिया कि 8000 टीमों का गठन किया जाए। प्रत्येक टीम में एक हेल्थ वर्कर, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक MBBS या BAMS का लास्ट ईयर स्टूडेंट शामिल होना चाहिए। प्रत्येक टीम को 500 घरों की स्क्रीनिंग करनी होगी। गांवों में हर आदमी की हो स्क्रीनिंग बैठक के बाद सीएम खट्टर ने कहा, हमें ग्रामीण इलाकों को इस घातक संक्रमण से हर हाल में बचाना होगा। प्रत्येक अधिकारी को हर गांव पर स्पेशल विजिलेंस रखना चाहिए। एक व्यापक कोविड-19 स्क्रीनिंग अभियान सभी गांवों में चलाया जाना चाहिए और ग्रामीण इलाकों में हर आदमी की स्क्रीनिंग होनी चाहिए। कम टेस्टिंग के बाद भी ज्यादा आंकड़ें इनमें से ज्यादातर जिलों में टेस्टिंग के आंकड़े बेहद कम हैं। जहां नूंह में एक दिन में सिर्फ 1200 टेस्ट हो पा रहे हैं तो वहीं, पानीपत में एक दिन में 1500 टेस्ट हो रहे हैं। यहां तक कि फरीदाबाद जो दिल्ली अरबन ग्रिड का खास हिस्सा है, में भी एक दिन में सिर्फ 3300 टेस्ट हो पा रहे हैं। सिर्फ गुड़गांव में सबसे ज्यादा टेस्टिंग हो रही है। यहां औसतन रोजाना 12,000 टेस्ट हो रहे हैं बावजूद इसके मई के पहले हफ्ते में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 36 फीसदी रहा। हरियाणा के महेंद्रगढ़, यमुनानगर, करनाल, जींद, हिसार, अंबाला, पंचकुला, चरखी दादरी और झज्जर में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 30 से 40 फीसदी के बीच है। मरीजों को तीन श्रेणी में बांटा जाएगा गांवों में स्क्रीनिंग के लिए जाने वाली हेल्थ टीम को कहा गया है कि मरीजों को तीन श्रेणी हल्के, मध्यम और गंभीर श्रेणी में रखा जाए। जिनकों माइल्ड यानी हल्के लक्षण होंगे उनको गांव के ही धर्मशाला, आंगनवाड़ी सेंटर या स्कूल में बनाए गए आइसोलेशन होम में शिफ्ट किया जाएगा। मॉडरेट यानी मध्यम लक्षण वाले मरीजों को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स या फिर उनकी देखरेख में चल रहे मेक शिफ्ट हॉस्पिटल में रखा जाएगा। वहीं, गंभीर लक्षण वाले मरीजों को तुरंत ही जिला अस्पतालों या फिर कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट किए जाने की जरूरत होगी। लोगों के बीच चलाया जाए जागरूकता अभियान सीएम मनोहर लाल खट्टर ने चंडीगढ़ में अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि गांव के लोगों की काउंसिलिंग करने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा कि वे आशा वर्कर्स और पूर्व व वर्तमान जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर लोगों को टेस्टिंग के लिए प्रोत्साहित करें। टेस्टिंग के लिए गांवों में कैंप्स लगाए जाएंगे।
कोलकाता, बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हिंसा का दौर बदस्तूर जारी है। बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि घटना दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत मुक्तिनगर गांव में उस समय हुई जब भाजपा के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने शुक्रवार रात गांव वालों के घरों में घुसने की कोशिश की। अधिकारी ने कहा कि पास में मौजूद तृणमूल कांग्रेस सदस्य उन्हें बचाने आए और भाजपा कार्यकर्ताओं से उनकी झड़प हो गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। घायलों का सूरी में अस्पताल में इलाज चल रहा है। इससे पहले गुरुवार को प्रदेश भाजपा ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे के दौरान उसके दो और कार्यकर्ताओं की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा राज्य के विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं व उनके घरों पर हमले का भी दावा किया है। प्रदेश भाजपा की ओर से एक बयान में कहा गया कि पूर्व बर्द्धमान जिले के केतुग्राम में 22 वर्षीय बलराम माजी पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गुंडों ने बेरहमी से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के शक्ति केंद्र के प्रमुख विश्वजीत महेश की तृणमूल के गुंडों ने हत्या कर दी। इसके अलावा कोलकाता के जादवपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार रिंकू नस्कर के घर पर भी हमला किया गया है। इसके अलावा पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि उत्तर 24 परगना के मिनाखां व बामनपुकुर क्षेत्र में लगभग 500 भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों पर हमले कर भारी नुकसान पहुंचाया गया है। जान बचाने के लिए यहां कई गांवों के भाजपा समर्थक घर छोड़कर भाग गए हैं। दो दिन पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा किया था कि रविवार को चुनाव परिणाम आने के बाद से हुई हिंसा में कम से कम 14 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है जबकि एक लाख के करीब लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। वहीं, दो और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसेे बंगाल को बदनाम करने की भाजपा की साजिश करते देते हुए कहा कि हिंसा में जितने लोग मरे हैं उनमें से आधे तृणमूल के हैं।
नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की चपेट में ग्रामीण इलाकों के आने के मद्देनजर छोटे और मझोले शहरों में स्वास्थ्य ढांचे को तत्काल तैयार करने की जरूरत है। कोरोना पर गठित मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक सुजीत कुमार सिंह ने इसके लिए आगाह किया। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि देश के नौ लाख मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट और 1.7 लाख मरीज वेंटिलेटर पर हैं। एनसीडीसी निदेशक ने कोरोना पर गठित मंत्रिमंडलीय समूह को किया आगाह मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक में एनसीडीसी के निदेशक ने विदेशों के साथ-साथ भारत में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि किस तरह भारत में कोरोना की दूसरी लहर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों को अपनी चपेट में ले रही है। ऐसे इलाकों में टे¨स्टग के साथ-साथ इलाज की सुविधाओं के अभाव के कारण स्थिति खराब हो सकती है। उन्होंने हालात से निपटने के लिए छोटे और मझोले शहरों में तत्काल टे¨स्टग की सुविधा बढ़ाने के साथ ही अस्पताल बनाने की जरूरत बताई। आधारभूत संरचना का निर्माण ध्यान देने की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन पहले ही केंद्र सरकार के सभी विभागों को कोरोना के इलाज के लिए स्वास्थ्य ढांचे के निर्माण में राज्यों की मदद का निर्देश दिया था। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने विस्तार से बताया कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश में किस तरह से आधारभूत संरचना का निर्माण किया जा रहा है। हर्षवर्धन ने कहा, देश में नौ लाख मरीज आक्सीजन सपोर्ट और 1.7 लाख वेंटिलेटर पर बैठक में हर्षवर्धन ने बताया कि मौजूदा समय में 3.70 फीसद यानी 9,02,291 मरीज आक्सीजन सपोर्ट, 0.39 फीसद यानी 1,70,841 लाख मरीज वेंटिलेटर और 1.34 फीसद यानी 4,88,861 मरीज आइसीयू में हैं। दूसरी डोज जरूर लेने की अपील हर्षवर्धन ने मंत्रिमंडल समूह को देश में चल रहे टीकाकरण अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने लोगों से कोरोना से पूरी तरह बचाव के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज जरूर लेने की अपील की। साथ ही राज्यों से केंद्र से मिलने वाले 70 फीसद वैक्सीन का इस्तेमाल दूसरे डोज देने में करने को कहा। आक्सीजन का दैनिक उत्पादन बढ़कर 9,400 टन हुआ बैठक में आक्सीजन समेत अन्य जरूरी दवाओं की उपलब्धता और सप्लाई पर भी चर्चा हुई और संबंधित मंत्रालयों को इसके लिए सभी उचित कदम उठाने की सलाह दी गई। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में सचिव गिरिधर अरमाने ने मंत्रिमंडलीय समूह को बताया कि आक्सीजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर आक्सीजन का अधिकतम उत्पादन करने की कोशिश की जा रही है। लिक्विड मेडिकल आक्सीजन (एलएमओ) का दैनिक उत्पादन बढ़कर 9,400 टन हो गया है। बैठक में कौन-कौन हुए शामिल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मांडविया, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी मौजूद रहे।
नई दिल्ली, देश में कोरोना महामारी का कहर तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू होती जा रही है। भारत में लगातार चौथे दिन कोरोना के एक दिन में चार लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। इस दौरान 4 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 4 लाख 3 हजार 738 मामले सामने आए हैं। इस दौरान 4,092 लोगों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हुई है। बीते 24 घंटों में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। बीते एक दिन में देश भर में 3 लाख 86 हजार 444 लोग कोरोना से ठीक हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना के अब तक कुल 2 करोड़ 22 लाख 96 हजार 414 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से 1 करोड़ 83 लाख 17 हजार 404 लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। लेकिन भारत की चिंता का विषय सक्रिय मामले हैं। देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 13,202 सक्रिय केस बढ़े हैं जिससे भारत के एक्टिव केस बढ़कर 37 लाख 36 हजार 648 हो गए हैं। भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2लाख 42 हजार 362 पहुंच गई है। भारत में कोरोना वायरस की दर कैसी है ? देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दर पर अगर नजर डालें तो फिलहाल देश में सक्रिय केस(Active Case) की दर 16.76% है। इ़समें पिछले कुछ दिनों में तेजी से कमी आ रही है। इसके अलावा देश में कोरोना की रिकवरी दर 82.15% है। देश में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा कोरोना की मृत्यु दर जरूर बढ़कर 1.09% हो गई हौ। शनिवार को देशभर में 18.65 लाख कोरोना टेस्ट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषषद ([आइसीएमआर)] के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए शनिवार को देश भर में 18,65,428 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक कुल 30 करोड़ 22 लाख 75 हजार,471 नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। 17 करोड़ के पास पहुंचा टीकाकरण का आंकड़ा इस बीच देश में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण जारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 16 करोड़ 94 लाख 39 हजार 663 लोगों को टीका लगाया चुका है। इसमें से 20,23,532 टीकाकरण बीते एक दिन में किया गया है।
नई दिल्ली, रेलवे ने कहा है कि कोरोना के सामान्य मरीजों के उपचार के वास्ते देश के सात राज्यों के 17 स्टेशनों पर आइसोलेशन डिब्बों को तैनात किया गया है। उसने कहा कि फिलहाल विभिन्न राज्यों को 298 डिब्बे सौंपे गये हैं और उनमें 4700 से अधिक बेड हैं।रेलवे के अनुसार महाराष्ट्र में कुल 60 डिब्बे तैनात किए गए हैं और नंदुरबार में 116 मरीज भर्ती किये गये एवं ठीक होने पर राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन्हें छुट्टी दे दी। फिलहाल 23 मरीज उनका उपयोग कर रहे हैं।रेलवे ने यह भी कहा कि उसने 11 कोविड केयर डिब्बे राज्य के इनलैंड कंटेनर डिपो में तैनात किये हैं और उन्हें नागपुर नगर निगम को सौंपा गया हं। वहां नौ मरीज भर्ती किये गये और आइसोलेशन के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गयी। फिलहाल पालघर में 24 डिब्बे प्रदान किये गये और उन्हें उपयोग मे लाया जा रहा है।इसी तरह मध्यप्रदेश में 42 ऐसे डिब्बे तैनात किये गये हैं। पश्चिम रेलवे के रतलाम संभाग ने इंदौर के पास तिही स्टेशन पर 22 डिब्बे तैनात किए हैं जिनमें 320 बिस्तर हैं। वहां 21 मरीज भर्ती किये गये और सात को अब तक छुट्टी दी गई। भोपाल में 20 ऐसे डिब्बे तैनात किये गये हैं जिनमें 29 मरीज भर्ती किये गये और 11 को बाद में छुट्टी दे दी गयी।रेलवे ने बताया कि उसने असम के गुवाहाटी में 21 और सिलचर के समीप बदरपुर में 20 ऐसे डिब्बे तैनात किये। दिल्ली में उसने 75 ऐसे डिब्बे प्रदान किये जिनमें 1200 बेड हैं। रेलवे ने एक दिन में पहुंचाईसर्वाधिक 718 टन आक्सीजन रेलवे ने शनिवार को कहा कि उसने 19 अप्रैल से अब तक विभिन्न राज्यों में 220 टैंकरों के माध्यम से करीब 3400 टन तरल चिकित्सकीय आक्सीजन पहुंचाई है। शनिवार को रेलवे ने 718 टन आक्सीजन पहुंचाई जो अब तक एक दिन में सबसे अधिक मात्रा है। रेलवे की ओर से बताया गया कि अब तक 54 आक्सीजन ट्रेनों ने अपना सफर तय किया है। दिल्ली में 1427 टन, महाराष्ट्र में 230 टन, उत्तर प्रदेश में 968 टन, मध्य प्रदेश में 249 टन, तेलंगाना में 123 टन और राजस्थान में 40 टन तरल आक्सीजन पहुंचाई गई। फिलहाल 26 टैंकर 417 टन तरल लेकर दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जा रहे हैं।रेलवे ने कहा कि नई आक्सीजन एक्सप्रेस (ट्रेनें) चलाना बहुत तत्परता का काम है। हर वक्त आंकड़ों को अद्यतन किया जाता है। रात के समय में अधिक आक्सीजन एक्सप्रेस चलने की संभावना है। रेलवे ने पिछले महीने आक्सीजन की ढुलाई शुरू की थी।
नई दिल्ली,कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए और भी कई राज्यों ने संपूर्ण लाकडाउन और सख्त पाबंदियां लगाने जैसे कदम उठाए हैं। तमिलनाडु, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने 10 मई यानी सोमवार से संपूर्ण लाकडाउन का एलान किया है जो 24 मई तक लागू रहेगा। कर्नाटक में शुक्रवार शाम से और केरल में शनिवार सुबह से लाकडाउन प्रभावी हो गया है। वहीं दिल्ली और यूपी में लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बयान जारी कर कहा कि संक्रमण को रोकने के लिए लाकडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। शुक्रवार को जिलाधिकारियों के साथ कोरोना के हालात की समीक्षा करने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लाकडाउन लागू करने का फैसला किया गया। आवश्यक सामान और सेवाओं को छोड़कर सभी दुकानें और निजी एवं सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। सरकारी शराब की दुकानें, बार, स्पा, जिम, ब्यूटी पार्लर, सैलून, सिनेमा हाल, क्लब, पार्क, बीच भी इस दौरान बंद रहेंगे। विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और पीएमके ने संपूर्ण लाकडाउन का स्वागत किया है। इनका कहना है कि इससे कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी। परंतु, इन दोनों दलों की सहयोगी भाजपा ने लाकडाउन के फैसले को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया है। प्रदेश भाजपा का कहना कि इसमें दैनिक कामगारों और कमजोर वर्ग को मदद पहुंचाने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। लाकडाउन के दौरान टीकाकरण अभियान कैसे चलेगा इसको लेकर भी कुछ नहीं कहा गया है। राजस्थान सरकार ने भी 10 से 24 मई तक के लिए राज्य में लाकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद रहेगा। किराना, दूध, सब्जी, फल और अन्य आवश्यक सामान की दुकानें कुछ समय के लिए खोलने की छूट दी गई है। कर्नाटक में शुक्रवार शाम और केरल में शनिवार सुबह से लाकडाउन प्रभावी हो गया है। केरल में 16 मई तक पाबंदियां जारी रहेंगी। इन दोनों ही राज्यों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बेंगलुरु तीन लाख से ज्यादा सक्रिय मामलों वाला देश का पहला महानगर बन गया है। गोवा में भी रविवार से 15 दिनों के लिए कफ्र्यू लगाया जा रहा है। इस दौरान शराब की दुकानों के साथ ही किराना और दूध-सब्जी की दुकानें सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक खुली रहेंगी। यूपी में 17 मई तक बढ़ाया गया कोरोना कर्फ्यू उत्तर प्रदेश में पूर्व से जारी कोरोना कर्फ्यू को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। अब सारी पाबंदियां 17 मई तक पूर्व की भांति जारी रहेंगी। इस अवधि में ईद का त्योहार भी है, हालांकि उस दिन में सारे प्रतिबंध लागू होंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सरकार ने प्रदेश में पाबंदियों के साथ कर्फ्यू लगाने का फैसला किया था। पूर्व में कर्फ्यू को 10 मई तक बढ़ाया गया था, जिसे अब 7 दिन और बढ़ाया गया है। सीएम से बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सारे प्रतिबंधों को 17 मई की सुबह 7 बजे तक जारी रखा जाएगा। इस दौरान आवश्यक सेवाओं के लिए ही लोगों को मूवमेंट की इजाजत दी जाएगी। यूपी में 30 अप्रैल से ही कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है और लगातार सरकार इसकी मियाद को बढ़ा रही है। दिल्ली में एक हफ्ते के लिए बढ़ा लॉकडाउन दिल्ली में एक बार फिर लॉकडाउन 7 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार इसकी घोषणा करते हुए कहा कि लॉकडाउन से दिल्ली में कोरोना के संक्रमण में कमी आई है। केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों, महिलाओं और दूसरे लोगों से बात हुई सबने कहा कि केस कम हुए हैं लेकिन कड़ाई बरकरार रखने की जरूरत है। इस बार मेट्रो भी नहीं चलेगी। दिल्ली सीएम केजरीवाल ने कहा- '20 अप्रैल को मजबूरी में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। 26 अप्रैल को पॉजिटिव रेट 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था, उसके बाद से केस कम होना शुरू हुए, पिछले 2-3 दिनों में पॉजिटिविटी रेट घटकर 23 फीसदी पर आ गया है। आपने साथ दिया, लॉकडाउन के पीरियड में हेल्थ संसाधन को बेहतर किया। हिमाचल में कल से चार जिलों में लॉकडाउन हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चार जिलों में सोमवार से लाकडाउन लगाने का फैसला किया है। ये जिले हैं- कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर। इसके अलावा सरकार दूसरे क्षेत्रों में कोरोना कफ्र्यू के तहत नए प्रतिबंध भी लागू करेगी। पुणे में वीकेंड लाकडाउन को लेकर पुलिस सख्त पुणे में भी पुलिस ने वीकेंड लाकडाउन को लेकर सख्ती की है। पुलिस ने शहर में संपूर्ण वीकेंड लाकडाउन को लागू किया है। बिना वजह सड़क पर निकलने वालों से पुलिस सख्ती से पेश आ रही है। वीकेंड लाकडाउन में सिर्फ दवा की दुकानों को ही खोलने की अनुमति दी गी है। मेघालय-मणिपुर में भी सख्ती पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और मणिपुर में भी सख्ती शुरू हो गई है। मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स और मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिलों भी शनिवार से 17 मई तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं, कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए लोगों को घर से बाहर निकलने की छूट दी गई है।
नई दिल्ली,कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए और भी कई राज्यों ने संपूर्ण लाकडाउन और सख्त पाबंदियां लगाने जैसे कदम उठाए हैं। तमिलनाडु, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने 10 मई यानी सोमवार से संपूर्ण लाकडाउन का एलान किया है जो 24 मई तक लागू रहेगा। कर्नाटक में शुक्रवार शाम से और केरल में शनिवार सुबह से लाकडाउन प्रभावी हो गया है। वहीं दिल्ली और यूपी में लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बयान जारी कर कहा कि संक्रमण को रोकने के लिए लाकडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। शुक्रवार को जिलाधिकारियों के साथ कोरोना के हालात की समीक्षा करने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लाकडाउन लागू करने का फैसला किया गया। आवश्यक सामान और सेवाओं को छोड़कर सभी दुकानें और निजी एवं सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। सरकारी शराब की दुकानें, बार, स्पा, जिम, ब्यूटी पार्लर, सैलून, सिनेमा हाल, क्लब, पार्क, बीच भी इस दौरान बंद रहेंगे। विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और पीएमके ने संपूर्ण लाकडाउन का स्वागत किया है। इनका कहना है कि इससे कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी। परंतु, इन दोनों दलों की सहयोगी भाजपा ने लाकडाउन के फैसले को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया है। प्रदेश भाजपा का कहना कि इसमें दैनिक कामगारों और कमजोर वर्ग को मदद पहुंचाने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। लाकडाउन के दौरान टीकाकरण अभियान कैसे चलेगा इसको लेकर भी कुछ नहीं कहा गया है। राजस्थान सरकार ने भी 10 से 24 मई तक के लिए राज्य में लाकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद रहेगा। किराना, दूध, सब्जी, फल और अन्य आवश्यक सामान की दुकानें कुछ समय के लिए खोलने की छूट दी गई है। कर्नाटक में शुक्रवार शाम और केरल में शनिवार सुबह से लाकडाउन प्रभावी हो गया है। केरल में 16 मई तक पाबंदियां जारी रहेंगी। इन दोनों ही राज्यों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बेंगलुरु तीन लाख से ज्यादा सक्रिय मामलों वाला देश का पहला महानगर बन गया है। गोवा में भी रविवार से 15 दिनों के लिए कफ्र्यू लगाया जा रहा है। इस दौरान शराब की दुकानों के साथ ही किराना और दूध-सब्जी की दुकानें सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक खुली रहेंगी। यूपी में 17 मई तक बढ़ाया गया कोरोना कर्फ्यू उत्तर प्रदेश में पूर्व से जारी कोरोना कर्फ्यू को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। अब सारी पाबंदियां 17 मई तक पूर्व की भांति जारी रहेंगी। इस अवधि में ईद का त्योहार भी है, हालांकि उस दिन में सारे प्रतिबंध लागू होंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सरकार ने प्रदेश में पाबंदियों के साथ कर्फ्यू लगाने का फैसला किया था। पूर्व में कर्फ्यू को 10 मई तक बढ़ाया गया था, जिसे अब 7 दिन और बढ़ाया गया है। सीएम से बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सारे प्रतिबंधों को 17 मई की सुबह 7 बजे तक जारी रखा जाएगा। इस दौरान आवश्यक सेवाओं के लिए ही लोगों को मूवमेंट की इजाजत दी जाएगी। यूपी में 30 अप्रैल से ही कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है और लगातार सरकार इसकी मियाद को बढ़ा रही है। दिल्ली में एक हफ्ते के लिए बढ़ा लॉकडाउन दिल्ली में एक बार फिर लॉकडाउन 7 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार इसकी घोषणा करते हुए कहा कि लॉकडाउन से दिल्ली में कोरोना के संक्रमण में कमी आई है। केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों, महिलाओं और दूसरे लोगों से बात हुई सबने कहा कि केस कम हुए हैं लेकिन कड़ाई बरकरार रखने की जरूरत है। इस बार मेट्रो भी नहीं चलेगी। दिल्ली सीएम केजरीवाल ने कहा- '20 अप्रैल को मजबूरी में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। 26 अप्रैल को पॉजिटिव रेट 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था, उसके बाद से केस कम होना शुरू हुए, पिछले 2-3 दिनों में पॉजिटिविटी रेट घटकर 23 फीसदी पर आ गया है। आपने साथ दिया, लॉकडाउन के पीरियड में हेल्थ संसाधन को बेहतर किया। हिमाचल में कल से चार जिलों में लॉकडाउन हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चार जिलों में सोमवार से लाकडाउन लगाने का फैसला किया है। ये जिले हैं- कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर। इसके अलावा सरकार दूसरे क्षेत्रों में कोरोना कफ्र्यू के तहत नए प्रतिबंध भी लागू करेगी। पुणे में वीकेंड लाकडाउन को लेकर पुलिस सख्त पुणे में भी पुलिस ने वीकेंड लाकडाउन को लेकर सख्ती की है। पुलिस ने शहर में संपूर्ण वीकेंड लाकडाउन को लागू किया है। बिना वजह सड़क पर निकलने वालों से पुलिस सख्ती से पेश आ रही है। वीकेंड लाकडाउन में सिर्फ दवा की दुकानों को ही खोलने की अनुमति दी गी है। मेघालय-मणिपुर में भी सख्ती पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और मणिपुर में भी सख्ती शुरू हो गई है। मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स और मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिलों भी शनिवार से 17 मई तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं, कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए लोगों को घर से बाहर निकलने की छूट दी गई है।
गुवाहाटी, असम में मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस खत्म हो गया है। हिमंत बिस्वा सरमा को असम में भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया है। वह असम के अगले मुख्यमंत्री होंगे। हिमंत बिस्वा सरमा का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को आयोजित किया जाएगा। इससे पहले हिमंत बिस्वा सरमा को असम में भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी जानकारी दी है। इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यपाल जगदीश मुखी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। असम में भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले ही सर्बानंद सोनोवाल ने अपना इस्तीफा दिया। मुख्यमंत्री पद की रेस में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्व सरमा को पहले से ही आगे बताया जा रहा था। कल हुई थी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात सर्बानंद सोनोवाल और हेमंत बिस्वा को भाजपा आलाकमान ने मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाया था। दोनों नेताओं की कल दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई थी, जहां असम के नए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर लंबी वार्ता चली। शनिवार को दोनों नेताओं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भाजपा महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के बीच चार घंटे से अधिक समय तक तीन दौर की बातचीत हुई। नड्डा के आवास पर हुईं इन बैठकों में पहले दो दौर में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सोनोवाल और सरमा से अलग-अलग मुलाकात की। नरेंद्र सिंह तोमर और अरुण सिंह बने केंद्रीय पर्यवेक्षक असम में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा ने केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी महासचिव अरुण सिंह को नामित किया था। इसके अलावा पार्टी के संसदीय बोर्ड ने तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जबकि बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की दूसरी बार जीत होने के बाद से ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की परेशानी बढ़ गई थी। विवाद मुख्यमंत्री के पद को लेकर था, जिस पर इस बार सर्वानंद सोनोवाल के अलावा हिमंत बिस्व सरमा भी दावा कर रहे थे। बीजेपी में लगातार जारी बैठकों के दौर के बाद रविवार को तय हो गया कि हिमंत बिस्व सरमा को ही असम का नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। माना जाता है कि असम में बीजेपी की पहली बार और फिर दूसरी बार भी सरकार बनाने में सरमा की रणनीतिक सूझ-बूझ की बड़ी भूमिका रही है। आइए, जानते हैं कि असम के होने वाले सीएम हिमंत बिस्व सरमा कौन हैं? कौन हैं हिमंत बिस्व सरमा? साल 2001 की 15 मई को अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले हिमंत बिस्व सरमा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में लॉ की प्रैक्टिस की है। वह साल 1996 से लेकर 2005 तक यहां रहे। 1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में साहित्यकार कैलाशनाथ सरमा के घर उनका जन्म हुआ। सरमा की मां भी असम साहित्य की संस्थाओं से जुड़ी हैं। सरमा ने कामरूप में अकादमी स्कूल से अपनी पढ़ाई की शुरुआत की और बाद में कॉटन कॉलेज गुवाहाटी चले गए। उन्होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्होंने राजनीति में रहते हुए ही पीएचडी की डिग्री भी हासिल की। राजनीतिक विज्ञान के छात्र थे तो स्टूडेंट पॉलिटिक्स में भी उनकी रूचि रही और कॉटन कॉलेज में साल 1991-92 के आसपास हिमंत बिस्व सरमा जनरल सेक्रेट्री के पद पर रहे। ग्रेजुएशन और पीजी के बाद सरमा ने लॉ की पढ़ाई भी की और गुवाहाटी हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। राजनीतिक करियर की शुरुआत बताया जाता है कि हिमंत बिस्व सरमा को राजनीति में लाने का काम असम के पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया ने किया था। हालांकि, उनकी पूरी राजनीतिक समझ पूर्व सीएम तरुण गोगोई की छत्रछाया में विकसित हुई। साल 1996 में सरमा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें असम आंदोलन के नेता भृगु फुकन ने हरा दिया। इसके बाद वह 15 मई 2001 को फिर जालुकबरी से विधानसभा चुनाव लड़े और फुकन को 10 हजार मतों के अंतर से परास्त कर दिया। इसके बाद वह लगातार तीन बार इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए। गोगोई सरकार में ही उनकी किस्मत का सितारा बुलंद हुआ। वह राज्य सरकार में मंत्री बने और फिर धीरे-धीरे प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार होने लगे। बाद में अपने 'राजनैतिक गुरू' और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से उनके मतभेद हो गए, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। साल 2014 में कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ने के बाद उन्होंने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर बीजेपी का हाथ थाम लिया। साल 2016 में असम में चुनाव होने वाले थे, तो उन्हें पार्टी का संयोजक बनाकर मैदान में उतारा गया। बीजेपी ने चुनाव जीत लिया लेकिन हिमंत सीएम नहीं बने। तब केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया गया। लगातार चौथी बार जालुकबरी से जीतने वाले सरमा इस सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। फिर मिल ही गई मुख्यमंत्री की कुर्सी साल 2016 में असम में पहली बार कमल खिलाने के बाद इस बार भी हिमंत के ऊपर ही सत्ता में वापसी की जिम्मेदारी थी। प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने जनहित में कई सारे अच्छे काम किए थे। माना जाता है कि यह हिमंत बिस्व सरमा का ही जादू है कि राज्य के लोगों ने लगातार दूसरी बार बीजेपी को सत्ता सौंप दी। ऐसे में मुख्यमंत्री पद पर उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत हुई। हालांकि, यह बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के लिए परेशानी बढ़ाने वाली बात थी। चुनाव जीतने के बाद बीजेपी में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने के कयास तेज हो गए थे। सरमा से भी जब इस बारे में पूछा जाता था तो वह ये सवाल टाल जाते थे। इस खींचतान के बीच सीएम के मुद्दे को लेकर बीजेपी के नेताओं की कई दौर की बैठके हुईं। अंत में रविवार को असम के नए मुख्यमंत्री के लिए हिमंत बिस्व सरमा के नाम पर मुहर लगाई गई।
नई दिल्ली,देश की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए दायर जनहित याचिका में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को प्रतिपक्ष बनाने की सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है। याचिका में नागरिकों के लिए अधिकतम दो बच्चे पैदा करने का नियम बनाए जाने की मांग की गई है। जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने इस बाबत शुक्रवार को निर्देश जारी किया है। जनहित याचिका (पीआइएल) अधिवक्ता व भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। इसमें गृह मंत्रालय की जगह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को प्रतिपक्ष बनाए जाने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख पांच जुलाई तय की गई है। उपाध्याय ने यह याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की है जिसमें दो बच्चों की अनिवार्यता तय करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था देश की तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए दो बच्चे पैदा करने की अनिवार्यता लागू की जाए। केंद्र सरकार मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कह चुकी है कि वह बलपूर्वक परिवार नियोजन वाली कोई व्यवस्था लागू किए जाने के खिलाफ है। इस तरह की कोई व्यवस्था लागू किए जाने से भविष्य में जन सांख्यिकी को लेकर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में केंद्र सरकार ने कहा है कि देश का परिवार नियोजन कार्यक्रम ऐच्छिक आधार पर है। इसमें दंपती को अपने परिवार का आकार तय करने का अधिकार दिया गया है। इसमें छोटे परिवार के फायदे भी बताए गए हैं। इसमें परिवार नियोजन के उपाय भी बताए गए हैं और सरकार की ओर से उसमें सहयोग की व्यवस्था भी है। लेकिन इसमें कुछ भी बाध्यकारी नहीं है।
भोपाल,कोरोना के इलाज के लिए महत्वपूर्ण रेमडेसिविर इंजेक्शन और आक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। ऐसे 21 लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें से 20 रेमडेसिविर तो एक आक्सीजन की कालाबाजारी करता पकड़ा गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रेमडेसिविर की कालाबाजारी पर इंदौर जिले में नौ, उज्जैन जिले में आठ, जबलपुर जिले में दो और ग्वालियर जिले में एक के खिलाफ रासुका के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी पर सतना के एक व्यक्ति पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है। 61 अस्पतालों पर कार्रवाई चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि निजी अस्पतालों द्वारा मनमाना शुल्क लेने की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। प्रदेश में ऐसे 61 अस्पतालों पर कार्रवाई कर सात लाख 34 हजार रुपये मरीजों के स्वजन को दिलवाए गए हैं। यह वह राशि है, जो अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर अधिक वसूली थी। इनमें 33 अस्पतालों को नोटिस दिया गया है। दो अस्पतालों का लाइसेंस निलंबित किया गया और 22 अस्पतालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है।
नई दिल्ली,केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ( Union Health Minister Harsh Vardhan) ने शनिवार को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की 25वीं बैठक में देश में कोविड-19 से जुड़े हालात की जानकारी दी। उन्होंने संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों पर चिता जताई लेकिन इस बात पर संतोष जताया कि रिकवर होने वाले लोगों की संख्या भी अच्छी है। साथ ही उन्होंने वैसे जिले भी बताए जहां पिछले कुछ दिनों से संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, 'अभी हमारे देश में एक दिन की टेस्टिंग क्षमता 25 लाख है और पिछले 24 घंटे में हमने 18,08,344 लोगों का कोविड टेस्ट किया।' उन्होंने बताया,' अंतिम सात दिनों से देश के 180 जिलों में कोविड-19 का एक भी नया मामला सामने नहीं आया। 18 जिले में पिछले 14 दिनों से संक्रमण के मामले नहीं आए। वहीं पिछले 21 दिनों में 54 जिलों में कोरोना संक्रमण का नया मामला सामने नहीं आया।' उन्होंने आगे बताया कि देश में लगातार तीन दिन से रोज 4 लाख से ज़्यादा मामले आ रहे हैं और पिछले 24 घंटे में फिर 4,01,078 मामले आए। हालांकि यह संतोषजनक बात है​ कि पिछले 24 घंटे में 3,18,609 मरीज़ ठीक हुए हैं। 12 राज्यों में एक लाख से ज्यादा सक्रिय केस केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 12 राज्यों में एक लाख से ज्यादा सक्रिय मामले हैं। जबकि, सात राज्यों में 50 हजार से एक लाख के बीच सक्रिय मामले हैं। वैसे पूरे देश की बात करें तो सक्रिय मामलों का आंकड़ा 37 लाख को पार कर गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में घटे मामले पिछले कुछ दिनों की तुलना में बीते 24 घंटे के दौरान महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में नए मामलों में कुछ कमी आई है। महाराष्ट्र में 54 हजार, उत्तर प्रदेश में 27 और दिल्ली में 19 हजार से ज्यादा नए मामले मिले हैं। इससे पहले महाराष्ट्र में 62 हजार, उत्तर प्रदेश में 31 हजार और दिल्ली में 20 हजार से ज्यादा नए केस पाए गए थे। अभी भी देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में ही मरीज पाए जा रहे हैं। रोजाना सबसे ज्यादा मौतें भी महाराष्ट्र में ही हो रही हैं। शुक्रवार को 898 लोगों की जान गई। कर्नाटक में रिकॉर्ड 592 लोगों की मौत हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश में 372, दिल्ली में 341, छत्तीसगढ़ में 208 और राजस्थान में 164 और लोगों की मौत हुई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री ने अपने अमेरिकी समकक्ष जेवियर बेसेरा ( Xavier Becerra) के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने देश में महामारी से बिगड़े हालात पर चर्चा की। अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री बेसेरा ने भारत के लिए इस संकट की घड़ी में मदद का आश्वासन दिया।
नई दिल्ली, एयर वाइस मार्शल एम राणाडे ने शनिवार को जानकारी दी कि कोविड राहत कार्यों के लिए IAF ने 42 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं जिसमें 12 हेवी लिफ्ट, 830 मीडियम लिफ्ट वाले हैं। उन्होंने बताया,'इसका उपयोग राहत सामग्रियों व अन्य संसाधनों को दूसरे देशों से लाने के लिए किया जाएगा। अब तक हमने ऑक्सीजन के 75 कंटेनर का ट्रांसपोर्ट किया है और यह प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया,'हमारे क्रू बिना किसी रुकावट अपना काम जारी रखें इसके लिए हम बायो बबल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे बाहरी कोई भी एक्सपोजर नुकसान न पहुंचाए।' एयर वाइस मार्शल मकरंद राणाडे ने बताया, 'अब तक जो भी काम वायुसेना को सौंपा गया है उसे काफी प्रोफेशनल तरीके के साथ पूरा किया गया है।' ऑक्सीजन की किल्लत को खत्म करने के लिए वायुसेना के विमान कई घंटे उड़ान भर रहे हैं। देश में खाली कंटेनरों को डिपो तक पहुंचाना हो या विदेशों से क्रायोजेनिक टैंकरों को भारत लाना हो। वायुसेना के जवान इसमें भिड़े हुए हैं। वहीं नौसेना भी सप्लाई को सुदृढ़ बनाने के लिए समंदर में मीलों का सफर तय कर रही है। सेना के अस्पतालों को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। महामारी की दूसरी लहर से संघर्ष कर रहे हमारे देश में मोर्चे पर सेनाएं भी जुटी हैं। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि जल, थल और नभ हमारे सशस्त्र बलों ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ब्लॉग पोस्ट पर ट्वीट किया था। रक्षा मंत्री ने अपने ब्लॉग में भारतीय सेना , नेवी और एयरफोर्स की सराहना करतेे हुए बताया है कि किस तरह से महामारी के खिलाफ जंग में ये अपना योगदान दे रहे हैं।
नई दिल्ली,केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी कोरोना रोधी वैक्सीन की 84 लाख डोज उपलब्ध हैं। अगले तीन दिनों में इन्हें वैक्सीन की 53 लाख और डोज उपलब्ध करा दी जाएंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की 17.49 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं। इनमें से 16.7 करोड़ डोज का इस्तेमाल किया जा चुका है। मंत्रालय ने कहा कि उपलब्ध कराई गई वैक्सीन की डोज में से बर्बाद गई डोज को मिलाकर कुल 16 करोड़ 65 लाख 49 हजार 583 डोज का इस्तेमाल किया जा चुका है (शनिवार सुबह आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक)। 84 लाख से ज्यादा (84,08,187) डोज अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास हैं।'बयान में यह भी कहा गया है कि अगले तीन दिनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की 53,25,000 डोज उपलब्ध करा दी जाएंगी। दिल्ली को अब तक 40.22 डोज मिले मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली को वैक्सीन की अब तक 40.22 लाख डोज दी गई हैं, जिसमें से 36.09 लाख डोज का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह राष्ट्रीय राजधानी के पास अभी 4.12 लाख डोज उपलब्ध हैं। अगले तीन दिनों में दिल्ली को एक लाख और डोज मिलने की उम्मीद है। दिल्ली की अनुमानित आबादी दो करोड़ से कुछ ज्यादा है। गुजरात को मिलेगी सबसे ज्यादा डोज मंत्रालय ने बताया कि अगले तीन दिनों में वितरित किए जाने वाले 53.25 लाख डोज में से सबसे ज्यादा गुजरात को 8.98 लाख डोज दी जाएंगी। गुजरात को अब तक 1.39 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं, जिनमें से उसने 1.35 डोज का इस्तेमाल किया है। गुजरात के बाद सबसे ज्यादा महाराष्ट्र को 6.03 लाख, राजस्थान को 4.50 लाख और उत्तर प्रदेश को चार लाख डोज मिलेगी। वहीं, बंगाल को 3.95 लाख, बिहार को 3.64 लाख और छत्तीसगढ़ को तीन लाख डोज दी जाएंगी। लक्षद्वीप में वैक्सीन की सबसे ज्यादा बर्बादी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक लक्षद्वीप में कोरोना रोधी वैक्सीन की सबसे ज्यादा 22.7 फीसद बर्बादी हुई है। हरियाणा में यह आंकड़ा 6.65 फीसद, असम में 6.07 फीसद, राजस्थान में 5.50 फीसद, पंजाब में 5.05 फीसद, बिहार में 4.96 फीसद, तमिलनाडु में 3.94 फीसद और मणिपुर में 3.56 फीसद है।
नई दिल्ली,सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश भर में वैज्ञानिक, तर्कसंगत और न्यायसंगत आधार पर चिकित्सा ऑक्सीजन की उपलब्धता और वितरण को लेकर 12-सदस्यीय नेशन टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स देश में ऑक्सीजन के आवंटन सहित जरूरी दवाओं की उपलब्धता और कोविड से निपटने की भविष्य की तैयारियों पर भी सुझाव देगा। बता दें कि शीर्ष अदालत द्वारा शुक्रवार को टास्क फोर्स का गठन करने का आदेश दिया गया था, जब ऑक्सीजन को लेकर केंद्र के आवंटन के कार्यों में बेहतरी की आवाज उठाई गई थी। अदालत ने कहा कि केंद्र एंबुलेंस, निचले स्तर के कोविड केयर सुविधाओं और होम क्वारंटाइन में रोगियों पर ध्यान देने में विफल रहा है। टास्क फोर्स के गठन के पीछे एक मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट को ऑक्सीजन की जरूरत और डिस्ट्रीब्यूशन और कितने मरीजों को ऑक्सीजन रिकमंड की जा रही है, ऐसे कुछ सवालों पर सटीक रिपोर्ट भी चाहिए। बता दें कि देश में कोरोना की दूसरी लहर से हाहाकार मचा हुआ है। मरीज ऑक्सीजन, दवाएं व अस्पतालों में प्रवेश के लिए दरबदर भटक रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, टास्क फोर्स में दस प्रसिद्ध डॉक्टर समेत कैबिनेट सेक्रेट्री या उनकी तरफ से मनोनीत अधिकारी संयोजक भी शामिल होंगे। साथ ही स्वास्थ्य सचिव भी इसके एक सदस्य होंगे। टास्क फोर्स का नेतृत्व पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ भबतोष विश्वास द्वारा किया जाएगा। इसमें डॉ नरेश त्रेहन (गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर) और दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल, वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु के नारायण हेल्थकेयर और मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल के प्रमुख डॉक्टर शामिल होंगे। बता दें कि बीते दिन सुप्रीम कोर्ट में कुछ राज्यों की तरफ से दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर सुनवाई की गई, जिसमें केंद्र से मांग की जा रही थी कि जल्द से जल्द ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए। इसमें केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे हालात न पैदा करे कि हमें सख्त रुख अपनाना पड़े।
नई दिल्ली, कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कोहराम के बीच कुछ राहत की खबर मिली है। देश के 180 जिलों में पिछले सात दिनों से और 18 जिलों में पिछले 14 दिनों से कोरोना संक्रमण का कोई नया मामला नहीं मिला है। हालांकि, पूरे देश की बात करें तो लगातार तीसरे दिन शनिवार को चार लाख से ज्यादा नए मामले पाए गए और चार हजार से ज्यादा लोगों की जान भी चली गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि देश के 54 जिले ऐसे भी हैं जहां पिछले 21 दिनों यानी तीन हफ्ते से कोरोना संक्रमण का कोई नया केस नहीं पाया गया है। मंत्रालय की तरफ से सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे के दौरान देश भर में 4,01,078 नए संक्रमित सामने आए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 54,022, कर्नाटक में 48,781 और केरल में 38,460 मामले शामिल हैं। इस दौरान 4,187 और मरीजों की जान भी चली गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देश में पहली बार चार हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, हालांकि राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर कुछ समाचार एजेंसियों ने शुक्रवार देर रात तक ही कोरोना महामारी से चार हजार से अधिक मौतों की जानकारी दे दी थी। मंत्रालय के मुताबिक कुल संक्रमितों का आंकड़ा दो करोड़ 18 लाख 92 हजार को पार कर गया है। इनमें से अब तक एक करोड़ 79 लाख 30 हजार से ज्यादा मरीज पूरी तरह से संक्रमण मुक्त भी हो चुके हैं, जिनमें पिछले 24 घंटे के दौरान स्वस्थ्य घोषित किए गए 3,18,609 लोग भी शामिल हैं। महामारी की वजह से 2,38,270 लोगों की जान भी जा चुकी है। मरीजों के उबरने की दर 81.90 फीसद और मृत्युदर 1.09 फीसद है। सक्रिय मामले बढ़कर 37,23,446 हो गए हैं, जो कुल संक्रमितों का 17.01 फीसद है। 12 राज्यों में 80 फीसद से ज्यादा सक्रिय मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश के 12 जिलों में ही कुल सक्रिय मामलों के 80.68 फीसद मामले हैं। इनमें से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 6.57 लाख एक्टिव केस हैं। जबकि, कर्नाटक में 5.36 लाख, केरल में 4.02 लाख, उत्तर प्रदेश में 2.54 लाख और राजस्थान में 1.99 लाख सक्रिय मामले हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, बंगाल, हरियाणा और बिहार में भी ज्यादा संख्या में सक्रिय मामले हैं। अब तक 30 करोड़ से टेस्ट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए शुक्रवार को पूरे देश में 18,08,344 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक कुल 30 करोड़ चार लाख से ज्यादा नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। सख्ती के बावजूद महाराष्ट्र में दैनिक मामले 50 हजार से ज्यादा महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने और उसकी चेन तोड़ने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पिछले एक महीने से सख्त पाबंदियां लगाई हैं, इसके बावजूद रोजाना 50 हजार से ज्यादा नए संक्रमित मिल रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इसे बहुत ही गंभीर चिंता का कारण बताया है। टोपे ने कहा कि राज्य के 36 में से 12 जिलों में संक्रमण के मामलों में कमी आई है, लेकिन कुछ दूसरे जिलों में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 14 अप्रैल से ही राज्य में लाकडाउन जैसी पाबंदियों को लागू कर दिया था।
नई दिल्ली, देश में कोरोना के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि पर संज्ञान लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को जेलों में भीड़ कम करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन कैदियों को पिछले साल महामारी के मद्देनजर जमानत या पैरोल दी गई थी, उन सभी को फिर वह सुविधा दी जाए। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूति एल नागेश्वर राव और सूर्य कांत की पीठ ने कहा कि देशभर की जेलों में लगभग चार लाख कैदी हैं। उनका जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार महामारी के चलते खतरे में है। पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर बनाई गई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा पिछले साल मार्च में जिन कैदियों को जमानत की मंजूरी दी गई थी, उन सभी को समितियों द्वारा पुनíवचार के बगैर पुन: वह राहत दी जाए, जिससे विलंब से बचा जा सके। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर शनिवार को अपलोड हुए आदेश में कहा गया, इसके अलावा हम निर्देश देते हैं कि जिन कैदियों को हमारे पूर्व के आदेशों पर पैरोल दी गई थी, उन्हें भी महामारी पर लगाम लगाने की कोशिश के तहत फिर से 90 दिनों की अवधि के लिए पैरोल दी जाए। एक फैसले का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से कहा कि उन मामलों में गिरफ्तारी से बचें, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष की अवधि की है। पीठ ने उच्चाधिकार प्राप्त समितियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को अपनाते हुए नए कैदियों की रिहाई पर विचार करें।
नई दिल्ली, कोरोना के मरीजों को अस्पताल में दाखिले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब तक अस्पतालों में एडमिट होने के लिए कोविड पॉजिटीव रिपोर्ट अनिवार्य होती थी। नए बदलाव के तहत अब रिपोर्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी गर्इ है। इस कारण कई बार मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस कारण कई मरीजों की मौत हो जाती थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है। जिसके अनुसार 3 दिनों के भीतर नई नीति को अमल में लाएं। इस नीति के तहत ऐसे संदिग्ध मरीजों को सस्पेक्टेड वार्ड में दाखिला मिल सकेगा। इसमें कोविड केयर सेंटर, पूर्ण समर्पित कोविड केयर सेंटर और कोविड अस्पताल शामिल हैं। साथ ही नई पॉलिसी में यह भी साफ किया गया है कि मरीजों को इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता को वह किस राज्य से हैं। किसी भी मरीज को कहीं भी दाखिला मुमकिन होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई पहचान पत्र न रखने वाले लोगों का भी टीकाकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक ऐसे लोगों को कोविन ऐप में पंजीकृत किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देश में कहा गया है कि होम आइसोलेशन में 10 दिनों तक रहने और लगातार तीन दिनों तक बुखार न आने की स्थिति में मरीज होम आइसोलेशन से बाहर आ सकते हैं और उस समय टेस्टिंग की जरूरत नहीं है। दिशानिर्देशों के मुताबिक स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मरीज की स्थिति को हल्का या बिना लक्षण वाला केस तय किया जाना चाहिए। ऐसे मामले में मरीज के सेल्फ आइसोलेशन की उनके घर पर व्यवस्था होनी चाहिए। ऐसे मरीज जिस कमरे में रहते हों उसका आक्सीजन सैचुरेशन भी 94 फीसद से ज्यादा होना चाहिए और उसमें वेंटिलेशन की भी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी के दौरान देश भर में ऑक्सिजन की किल्लत को देखते हुए नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स में 12 सदस्य होंगे। ये टास्क फोर्स देश में ऑक्सिजन की जरूरत पर नजर रखेगी और डिस्ट्रीब्यूशन पर सिफारिश करेगी। शनिवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला किया। इस टास्क फोर्स में केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव कन्वेनर की भूमिका निभाएंगे। टास्क फोर्स में शामिल हैं ये सदस्य सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित टास्क फोर्स में वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज कोलकाता के पूर्व वीसी डॉ. भबतोष बिश्वास, सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली के चेयरमैन डॉ. देवेंदर सिंह राणा, नारायणा हेल्थ केयर बेंगलुरू के चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर की प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग, तमिलनाडु में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के ही डायरेक्टर डॉ. जेवी पीटर शामिल हैं। इनके अलावा मेदांता हॉस्पिटल के चेयरपर्सन और एमडी डॉ. नरेश त्रेहन, फोर्टिस अस्पताल में क्रिटिकल केयर मेडिसीन के डायरेक्टर डॉ. राहुल पंडित, सर गंगाराम अस्पताल की डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट की डायरेक्टर डॉ. सौमित्र रावत, आईएलबीएस के सीनियर प्रोफेसर डॉ. शिव कुमार सरीन और हिंदुजा हॉस्पिटल के डॉ. जरीर एफ उडवाडिया शामिल हैं। केंद्र ने कहा - देश में ऑक्सिजन की कमी नहीं इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भारत एक ऑक्सिजन सरप्लस वाला देश है। भारत की क्षमता 7 हजार मीट्रिक टन की है लेकिन अभी भारत में 10 हजार मीट्रिक टन ऑक्सिजन का उत्पादन हो रहा है।
पटना कोरोना महामारी के इस दौर में भी बिहार के सबसे बडे अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुछ और 'खेल' चल रहा है। PMCH में जितने ऑक्सिजन की खपत हो रही है, उससे कई गुणा ज्यादा खपत का हिसाब दिया जा रहा है। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी जांच कमेटी ने इसे पकड़ा है। PMCH में ऑक्सिजन घोटाला? पटना हाईकोर्ट में पीएमसीएच में ऑक्सिजन खपत की रिपोर्ट पेश की गई। कोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट मित्र अधिवक्ता मृगांक मौली ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि पीएमसीएच में 21 अप्रैल से दो मई के बीच 150 सिलेंडर की जरूरत थी, जबकि वहां 348 ऑक्सिजन सिलेंडर की खपत हुई। कोर्ट मित्र ने हाईकोर्ट से सिफारिश की है कि पीएमसीएच में ऑक्सिजन ऑडिटिंग एक स्वतंत्र निकाय से कराने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हाईकोर्ट के आदेश का सही अनुपालन नहीं हो पाएगा। 127 मरीजों पर खर्च किए गए 348 सिलेंडर रिपोर्ट में पीएमसीएच के डॉक्टरों से आंकड़े इकट्ठे कर कोर्ट मित्र ने कुछ सनसनीखेज खुलासा किए हैं। एक दिन के चार्ट के अनुसार वहां कोविड मरीजों की संख्या 127 थी। उनमें नॉर्मल रेस्पिरेटरी वाले 125 मरीज ( रोजाना 1 सिलेंडर ) और 2 मरीज गम्भीर रेस्पिरेटरी ( रोजाना 3-4 सिलेंडर वाले) थे। यानि 24 घंटे में उन 127 मरीजों को ज्यादा से ज्यादा 150 सिलेंडर की ही जरूरत थी लेकिन चार्ट के मुताबिक उनपर 348 सिलेंडर की खपत की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि किस मरीज पर कितने ऑक्सिजन सिलेंडर की खपत की गई, इसका कोई रिकॉर्ड जांच दल के सामने पेश नहीं किया गया। दरअसल, न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने इस मामले में कोर्ट का सहयोग करने के लिए कोर्ट मित्र को दायित्व सौंपा था। इससे पहले कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में साफ कहा है कि एनएमसीएच में कोविड के मरीजों की संख्या ज्यादा है लेकिन कोविड मरीजों के लिए ऑक्सिजन की आपूर्ति और खपत पीएमसीएच में ज्यादा कैसे है? PMCH में ऑक्सिजन सिलेंडर की कालाबाजारी का शक ऑक्सिजन सिलेंडर की कालाबाजारी की आशंका जताते हुए कोर्ट ने डॉ उमेश भदानी की तीन सदस्यीय एक्पर्ट कमेटी और इस मामले में नियुक्त हुए कोर्ट मित्र मृगांक मौली से आग्रह किया था कि वे पीएमसीएच का दौरा कर कोर्ट को सही जानकारी दें। कोर्ट मित्र ने विशेषज्ञ कमेटी के साथ पीएमसीएच का दौरा 1 मई को किया। वहां तीन बातें स्पष्ट हुईं। पीएमसीएच में मुख्यत: डी टाइप ऑक्सिजन सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, जिसमें प्रति सिलेंडर 7 हजार क्यूबिक लीटर (7 एमटी ) गैस रहती है। अस्पताल के विभिन्न वार्ड में कोविड सहित अन्य मरीजों जिन्हें ऑक्सिजन की जरूरत थी, उनमें 99 फीसदी नॉर्मल रेस्पिरेशन वाले मरीज थे, जिन्हें खून में नॉर्मल ऑक्सिजन की सेचुरेशन स्तर पाने के लिए 5 लीटर/मिनट की दर से रोजाना लगभग एक सिलेंडर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वो भी तब जबकि लगातार ऑक्सिजन सिलेंडर से ही सांस लेते रहें। एक फीसदी मरीज ही कोविड के गंभीर मरीज ऐसे मिले, जिन्हें अपने खून में नार्मल ऑक्सिजन लाने के लिए 15 लीटर/मिनट ऑक्सीजन की दर से रोजाना 3 सिलेंडर की जरूरत होती है। प्रसूति वार्ड में 3 मरीजों पर 32 सिलेंडर खर्च वहीं पीएमसीएच के क्रिटिकल वार्ड में 30 अप्रैल को नार्मल रेस्पिरेशन वाले (5 लीटर/ मिनट ) मात्र 13 मरीजों को जहां ऑक्सिजन सिलेंडर लगा हुआ था और उनसे बीच-बीच में ऑक्सिजन मास्क हटा भी लिया जाता था। इसलिए अमूमन उन पर एक दिन में जहां 13 सिलेंडर खर्च होने चाहिए थे, वहां 120 सिलेंडरों की खपत दिखाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात डॉक्टरों की शिकायत थी कि अधिकांश सिलेंडरों में स्टैंडर्ड प्रेशर (150 केजी/स्क्वायर सेंटीमीटर) से कम ( 120-130 यूनिट) ही पाया गया था। प्रसूति रोग वार्ड में मात्र तीन मरीज को ही ऑक्सिजन दिया गया था और उन तीनों की खपत एक दिन में 32 ऑक्सिजन सिलेंडर दिखाया गया था। ईएनटी विभाग में 23 मरीजों पर 63 ऑक्सिजन सिलेंडर की खपत दिखाया गया। टाटा वार्ड में 48 मरीजों के लिए जहां अधिकतम 50 सिलेंडरों की जरूरत थी, वहां एक दिन में 143 सिलेंडर खर्च हो गए। ऑक्सिजन आपूर्ति करने वाले ठेकेदार कम्पनियों की कोई सुचारु व्यवस्था नहीं है। अस्पताल प्रशासन उन ठेकेदारों के मुंशी पर ऑक्सिजन सिलेंडर के लिए निर्भर रहता है। यहां तक कि प्रेशर स्विच एब्सॉर्बशन प्रणाली से गैस उत्पादन के लिए ऑक्सिजन प्लांट को बंद पाया गया। 2 मई तक उस प्लांट से ऑक्सिजन उत्पादन शुरू नहीं हुआ था। 'कोर्ट नहीं खड़ा होगा तो भगवान भी माफ नहीं करेंगे' सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आज नहीं खड़ा होगा तो भगवान भी माफ नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी को सही मान आगे कोर्ट बढ़ते चला गया लेकिन हकीकत कुछ और ही निकला। राज्य सरकार ने गत वर्ष 26 नवंबर को कोर्ट को बताया था कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए सारी व्यवस्था कर ली गई है। लेकिन आज पता चल रहा है कि सरकारी तैयारी क्या है? कोर्ट ने कहा कि ऑक्सिजन आपूर्ति में दिक्कत क्यों हो रही है?
नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने वैक्सीन से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालते हुए कहा कि एक समान टीकाकरण नीति होनी चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे देश में कोविड वैक्सिन मुफ्त में लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पश्चिमी देशों में कोविड वैक्सिन फ्री लगायी जा रही है तो हमारे देश में क्यों नहीं? बंगाल सरकार का कहना है कि टीका उपलब्ध कराने के लिए केंद्र को तत्काल कदम उठाने चाहिए और राज्यों को मुफ्त में दिए जाने चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट टीकाकरण की नीति से जुड़े इस मामले में सोमवार को सुनवाई करेगा।
नई दिल्ली,देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर के कारण स्थिति काफी गंभीर है। ऐसे में सरकार लगातार लोगों से एहतियात बरतने की अपील कर रही है। वहीं, लोग अपने स्तर पर भी इस बीमारी से बचने के लिए हर तरह की सावधानी बरत रहे हैं। अब पूर्व सैन्य डॉक्टरों ने लोगों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मेडिकल केयर संबंधी परामर्श देने का फैसला किया है। डॉक्टर्स इ-संजीवनी ओपीडी पर नागरिकों को परामर्श प्रदान करेंगे। अनुभवी लोगों ने चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता वाले लोगों की सहायता के लिए अपनी सेवाओं की पेशकश की है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नागरिक https://esanjeevaniopd.in वेबसाइट पर जाकर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
नई दिल्ली,देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर के कारण स्थिति काफी गंभीर है। ऐसे में सरकार लगातार लोगों से एहतियात बरतने की अपील कर रही है। वहीं, लोग अपने स्तर पर भी इस बीमारी से बचने के लिए हर तरह की सावधानी बरत रहे हैं। अब पूर्व सैन्य डॉक्टरों ने लोगों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मेडिकल केयर संबंधी परामर्श देने का फैसला किया है। डॉक्टर्स इ-संजीवनी ओपीडी पर नागरिकों को परामर्श प्रदान करेंगे। अनुभवी लोगों ने चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता वाले लोगों की सहायता के लिए अपनी सेवाओं की पेशकश की है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नागरिक https://esanjeevaniopd.in वेबसाइट पर जाकर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
लखनऊ,उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के टीकाकरण अभियान को सभी वर्ग के लिए अब चरणबद्ध तरीके से विस्तार मिलेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान को अब सात शहरों से भी आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने इसको सात से बढ़ाकर 11 जिलों तक करने का निर्देश दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ प्रदेश में चल रहे कोरोना वायरस रोधी टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के प्रयास में हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद से 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के अब टीकाकरण के इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से विस्तार मिलेगा। प्रदेश में अभी नौ हजार एक्टिव केस वाले जिलों लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर व बरेली में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ अब इसको प्रदेश के 11 और जिलों तक बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अभियान को सोमवार से अच्छे ढंग से आगे बढ़ाया जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अगले सप्ताह से 11 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में 18 से अधिक उम्र वाले लोगों का टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के हर जिले में 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को कोरोना वायरस वैक्सीन की डोज दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अब सभी 17 नगर निगमों और गौतमबुद्ध नगर में बड़े स्तर पर कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू करने के निर्देश को दिए हैं। अब दस जिलों में होने वाले टीकाकरण में शामिल होने वाले युवाओं को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान युवाओं को टीकाकरण के लिए मनपसंद स्लॉट व अस्पताल चुनने का विकल्प भी दिया जाएगा। 18 से 44 वर्ष के टीका लगवाने वालों के लिए अस्पतालों में अलग बूथ बनाए गए है। अब प्रदेश में करीब 7000 बूथों पर टीकाकरण किया जा रहा है। इसके बाद 17 नगर निगमों में कोविड टीकाकरण शुरू होने के बाद बूथों की संख्या भी काफी बढ़ जाएगी। युवाओं के उसाह से कम पड़ गया वैक्सीन वेस्टेज: प्रदेश में अब तक एक करोड़ 32 लाख 55 हजार 955 को वैक्सीन की डोज दी गई है। इससे वैक्सीन वेस्टेज में भी काफी कमी आई है। छह दिन में 18-44 वर्ष के 68536 लोगों को अब तक वैक्सीन की डोज दी गई है। अब 45 वर्ष से अधिक वर्ग के लोगों का ऑन स्पॉट पंजीकरण बंद, कराना होना ऑनलाइन आवेदन: प्रदेश के सात शहरों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण की प्रक्रिया तेज होने के बाद से 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का लिए ऑन स्पॉट पंजीकरण करके कोरोना टीकाकरण की सुविधा को स्वास्थ्य विभाग ने बंद कर दिया है। सोमवार से 45 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों को वैक्सीन की पहली डोज ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही दी जाएगी। वॉक इन माध्यम से ऑन द स्पॉट पंजीकरण की व्यवस्था को सोमवार से बंद कर दिया जाएगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने इसका आदेश जारी कर दिया है। इनके टीके की दूसरी डोज का कार्य पहले की तरह ही चलेगा। प्रदेश में अभी तक 45 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को टीकाकरण केंद्र पर जाकर सीधे पंजीकरण कराने और टीका लगवाने की सुविधा दी गई थी। एक मई से 18 वर्ष से अधिक आयु वालों के टीकाकरण में पंजीकरण के बाद अब लोगों को टाइम स्लॉट दिया जा रहा है। लाभार्थियों की संख्या बढऩे से टीकाकरण में दिक्कतें आ रही थीं। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने ऑन स्पॉट पंजीकरण की सुविधा को बंद कर दिया है।
नई दिल्ली, केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा कि अगर सावधानी बरती जाए तो हम महामारी कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सभी सावधानी बरतें और गाइडलाइंस को फॉलो करें तो शायद कुछ ही जगहों पर कोरोना की तीसरी लहर आएगी या फिर कहीं भी नहीं आएगी। राघवन ने कहा कि यदि जरूरी उपायों को अपनाया गया तो देश के हर हिस्से में कोरोना की तीसरी लहर नहीं आएगी। इससे पहले उन्होंने गुरुवार को कहा था कि देश में कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी। उनकी इस टिप्पणी के बाद देश में कोरोना का खतरा और बढ़ने की आशंकाएं जताई जाने लगी थीं। इस पर सफाई देते हुए राघवन ने शुक्रवार को कहा कि यदि सावधानी बरती गई तो यह हर जगह नहीं आएगी। महामारी के देश के तमाम हिस्सों में अलग-अलग पीक देखने को मिले हैं। कोरोना की तीसरी लहर को रोकना मुश्किल नहीं राघवन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आएगी या नहीं यह इस पर निर्भर करता है कि हम सब किस तरह गाइडलाइंस का पालन करते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर, लोकल स्तर पर, राज्य स्तर पर और सभी जगह अगर सावधानी बरतें और गाइडलाइन को पालन करें तो कोरोना की तीसरी लहर को आने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनने और बोलने में मुश्किल लगता है लेकिन यह मुमकिन है। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतने को लेकर, सर्विलांस को लेकर, कंटेनमेंट, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट को लेकर गाइडलाइंस को फॉलो करने पर कोरोना को रोकना मुश्किल नहीं है। संक्रमण तब बढ़ता है जब कोरोना वायरस को मौका मिलता राघवन ने कहा कि दुनिया भर में और भारत में अलग अलग जगह अलग अलग वक्त में पीक आया है और यह समझना जरूरी है कि कब और क्यों संक्रमण बढ़ता है। उन्होंने कहा कि संक्रमण तब बढ़ता है जब कोरोना वायरस को मौका मिलता है। अगर उसे मौका नहीं मिलेगा तो वह संक्रमित भी नहीं कर पाएगा। अगर वायरस को नए मौके मिलेंगे तो केस भी बढ़ेंगे उन्होंने कहा- जिन लोगों ने वैक्सीन ली है, मास्क पहनते हैं, पूरी सावधानी बरतते हैं वह सुरक्षित हैं। लेकिन अगर वायरस को नए मौके मिलेंगे तो केस भी बढ़ेंगे। ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो पहले सावधानी बरतते थे लेकिन बाद में लापरवाह हो गए। ऐसे में केस बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के फैलने के साइज को कम करना और इसकी फ्रिक्वेंसी को कम करना हमारे हाथ में है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो संक्रमित हैं पर बिना लक्षण के हैं, वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं इसलिए ज्यादा सावधानी की जरूर है।
नई दिल्ली, केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा कि अगर सावधानी बरती जाए तो हम महामारी कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सभी सावधानी बरतें और गाइडलाइंस को फॉलो करें तो शायद कुछ ही जगहों पर कोरोना की तीसरी लहर आएगी या फिर कहीं भी नहीं आएगी। राघवन ने कहा कि यदि जरूरी उपायों को अपनाया गया तो देश के हर हिस्से में कोरोना की तीसरी लहर नहीं आएगी। इससे पहले उन्होंने गुरुवार को कहा था कि देश में कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी। उनकी इस टिप्पणी के बाद देश में कोरोना का खतरा और बढ़ने की आशंकाएं जताई जाने लगी थीं। इस पर सफाई देते हुए राघवन ने शुक्रवार को कहा कि यदि सावधानी बरती गई तो यह हर जगह नहीं आएगी। महामारी के देश के तमाम हिस्सों में अलग-अलग पीक देखने को मिले हैं। कोरोना की तीसरी लहर को रोकना मुश्किल नहीं राघवन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आएगी या नहीं यह इस पर निर्भर करता है कि हम सब किस तरह गाइडलाइंस का पालन करते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर, लोकल स्तर पर, राज्य स्तर पर और सभी जगह अगर सावधानी बरतें और गाइडलाइन को पालन करें तो कोरोना की तीसरी लहर को आने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनने और बोलने में मुश्किल लगता है लेकिन यह मुमकिन है। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतने को लेकर, सर्विलांस को लेकर, कंटेनमेंट, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट को लेकर गाइडलाइंस को फॉलो करने पर कोरोना को रोकना मुश्किल नहीं है। संक्रमण तब बढ़ता है जब कोरोना वायरस को मौका मिलता राघवन ने कहा कि दुनिया भर में और भारत में अलग अलग जगह अलग अलग वक्त में पीक आया है और यह समझना जरूरी है कि कब और क्यों संक्रमण बढ़ता है। उन्होंने कहा कि संक्रमण तब बढ़ता है जब कोरोना वायरस को मौका मिलता है। अगर उसे मौका नहीं मिलेगा तो वह संक्रमित भी नहीं कर पाएगा। अगर वायरस को नए मौके मिलेंगे तो केस भी बढ़ेंगे उन्होंने कहा- जिन लोगों ने वैक्सीन ली है, मास्क पहनते हैं, पूरी सावधानी बरतते हैं वह सुरक्षित हैं। लेकिन अगर वायरस को नए मौके मिलेंगे तो केस भी बढ़ेंगे। ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो पहले सावधानी बरतते थे लेकिन बाद में लापरवाह हो गए। ऐसे में केस बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के फैलने के साइज को कम करना और इसकी फ्रिक्वेंसी को कम करना हमारे हाथ में है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो संक्रमित हैं पर बिना लक्षण के हैं, वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं इसलिए ज्यादा सावधानी की जरूर है।
जबलपुर। कोरोना मरीजों की उखड़ती सांसों को अब रेलवे अपना ऑक्सीजन प्लांट लगाकर प्राणवायु देगा। इसके लिए देशभर के 17 रेलवे जोन में बने केंद्रीय अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों को प्लांट लगवाने को कहा है। काम में तेजी के लिए प्लांट लगवाने से जुड़े अधिकार भी उन्हें सौंप दिए गए हैं। अभी तक ये अधिकार रेलवे बोर्ड के पास थे। प्रत्येक रेल जोन में न्यूनतम दो ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट जल्दी शुरू करने के लिए जोन महाप्रबंधकों को इस मद में खर्च की सीमा को भी 50 लाख रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दिया गया है। प्लांट लगाने के बाद इसका संचालन निजी संस्थाओं को भी दिया जा सकता है। प्लांट से रेलवे पहले अपने अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति करेगा। उपलब्ध होने पर अन्य अस्पतालों को भी ऑक्सीजन दी जा सकेगी। जबलपुर के रेलवे के केंद्रीय अस्पताल में ही 80 से 90 लाख रुपये की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगेगा। इसकी मदद से एक मिनट में 440 किलो लिक्विड ऑक्सीजन बनाई जाएगी। रेल अधिकारियों ने अस्पताल परिसर में स्थान तय कर प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनका अनुमान है कि मई के अंत तक प्लांट तैयार हो जाएगा और अस्पताल को सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। जबलपुर रेल मंडल के डीआरएम संजय विश्वास ने बताया कि केंद्रीय अस्पताल जबलपुर में खुद का ऑक्सीजन प्लांट लगाने जा रहे हैं। इस प्लांट से एक मिनट में लगभग 440 किलो लिक्विड ऑक्सीजन बनाएंगे। इसके बाद दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
जबलपुर। कोरोना मरीजों की उखड़ती सांसों को अब रेलवे अपना ऑक्सीजन प्लांट लगाकर प्राणवायु देगा। इसके लिए देशभर के 17 रेलवे जोन में बने केंद्रीय अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों को प्लांट लगवाने को कहा है। काम में तेजी के लिए प्लांट लगवाने से जुड़े अधिकार भी उन्हें सौंप दिए गए हैं। अभी तक ये अधिकार रेलवे बोर्ड के पास थे। प्रत्येक रेल जोन में न्यूनतम दो ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट जल्दी शुरू करने के लिए जोन महाप्रबंधकों को इस मद में खर्च की सीमा को भी 50 लाख रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दिया गया है। प्लांट लगाने के बाद इसका संचालन निजी संस्थाओं को भी दिया जा सकता है। प्लांट से रेलवे पहले अपने अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति करेगा। उपलब्ध होने पर अन्य अस्पतालों को भी ऑक्सीजन दी जा सकेगी। जबलपुर के रेलवे के केंद्रीय अस्पताल में ही 80 से 90 लाख रुपये की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगेगा। इसकी मदद से एक मिनट में 440 किलो लिक्विड ऑक्सीजन बनाई जाएगी। रेल अधिकारियों ने अस्पताल परिसर में स्थान तय कर प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनका अनुमान है कि मई के अंत तक प्लांट तैयार हो जाएगा और अस्पताल को सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। जबलपुर रेल मंडल के डीआरएम संजय विश्वास ने बताया कि केंद्रीय अस्पताल जबलपुर में खुद का ऑक्सीजन प्लांट लगाने जा रहे हैं। इस प्लांट से एक मिनट में लगभग 440 किलो लिक्विड ऑक्सीजन बनाएंगे। इसके बाद दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
नई दिल्ली, देश में बढ़ते कोरोना के नए मामलों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यवार कोरोना की स्थिति बताई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती आहूजा ने बताया कि देश में 12 राज्य ऐसे हैं जहां एक लाख से भी ज्यादा सक्रिय मामले हैं। 7 राज्यों में 50,000 से 1 लाख के बीच सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है। 17 राज्य ऐसे हैं जहां 50,000 से भी कम कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार में कोरोना के सबसे ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव ने बताया कि देश में 24 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां 15 फीसद से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट है। 5 से 15 फीसद पॉजिटिविटी रेट 9 राज्यों में है। 5 फीसद से कम पॉजिटिविटी रेट 3 राज्यों में है। 18 से 44 वर्ष के आयु के बीच 11.81 लाख लोगों को लगाई गई वैक्सीन की पहली डोज कोरोना के टीकाकरण की जानकारी देते हुए मंत्रालय ने कहा कि 18 से 44 वर्ष के आयु के बीच 11.81 लाख लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है। अब तक सभी श्रेणियों में कुल 16.50 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं। इन राज्यों में कम हो रहे कोरोना के नए मामले इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड और केंद्रशासित प्रदेश हैं जहाँ पहले मामले बढ़ रहे थे, लेकिन अब धीरे-धीरे कोरोना के नए मामले कम हो रहे हैं। केंद्रीय अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव के अनुसार कोरोना के रोजाना बढ़ते नए मामलों वाले राज्य पंजाब, जम्मू और कश्मीर, असम, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड हैं। देश के इन राज्यों में कोरोना के नए मामलों में हो रही बढ़ोतरी कोरोना के बढ़ते नए मामलों वाले राज्यों के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा, ओडिशा और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं जहां पर कोरोना के नए मामलों में रोजोना बढ़ोतरी देखी जा रही है।
नई दिल्ली, देश में बढ़ते कोरोना के नए मामलों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यवार कोरोना की स्थिति बताई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती आहूजा ने बताया कि देश में 12 राज्य ऐसे हैं जहां एक लाख से भी ज्यादा सक्रिय मामले हैं। 7 राज्यों में 50,000 से 1 लाख के बीच सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है। 17 राज्य ऐसे हैं जहां 50,000 से भी कम कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार में कोरोना के सबसे ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव ने बताया कि देश में 24 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां 15 फीसद से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट है। 5 से 15 फीसद पॉजिटिविटी रेट 9 राज्यों में है। 5 फीसद से कम पॉजिटिविटी रेट 3 राज्यों में है। 18 से 44 वर्ष के आयु के बीच 11.81 लाख लोगों को लगाई गई वैक्सीन की पहली डोज कोरोना के टीकाकरण की जानकारी देते हुए मंत्रालय ने कहा कि 18 से 44 वर्ष के आयु के बीच 11.81 लाख लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है। अब तक सभी श्रेणियों में कुल 16.50 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं। इन राज्यों में कम हो रहे कोरोना के नए मामले इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड और केंद्रशासित प्रदेश हैं जहाँ पहले मामले बढ़ रहे थे, लेकिन अब धीरे-धीरे कोरोना के नए मामले कम हो रहे हैं। केंद्रीय अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव के अनुसार कोरोना के रोजाना बढ़ते नए मामलों वाले राज्य पंजाब, जम्मू और कश्मीर, असम, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड हैं। देश के इन राज्यों में कोरोना के नए मामलों में हो रही बढ़ोतरी कोरोना के बढ़ते नए मामलों वाले राज्यों के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा, ओडिशा और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं जहां पर कोरोना के नए मामलों में रोजोना बढ़ोतरी देखी जा रही है।
नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष शुक्रवार को एक याचिका सुनवाई के लिए आई जिसमें नेताओं पर ऑक्सीजन की जमाखोरी करने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने कोविड-19 मरीजों के लिए जनता को ऑक्सीजन वितरित करने के दावे पर आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक इमरान हुसैन से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार और कैबिनेट मंत्री हुसैन को नोटिस जारी किये हैं। हुसैन को शनिवार को सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि यह देखना होगा अदालत ने कहा कि यह देखना होगा कि विधायक को ऑक्सीजन कहां से मिल रही थी क्योंकि गुरुद्वारे भी ऑक्सीजन वितरित कर रहे हैं। अदालत ने कहा, “उन्हें संभवत: फरीदाबाद से यह मिल रही है, आपको कई समस्या नहीं होनी चाहिए अगर वह आवंटित स्रोत में से इसे नहीं ले रहे हैं और अपने सिलेंडरों की व्यवस्था खुद कर रहे हैं।” याचिकाकर्ता के वकील ने हुसैन द्वारा ऑक्सीजन वितरण से संबंधित एक फेसबुक पोस्ट दिखाया और दलील दी कि इसकी जमाखोरी की जा रही है। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि भले ही भाजपा नेता गौतम गंभीर हों या आप विधायक इमरान हुसैन, अगर किसी तरह के उल्लंघन की जानकारी मिलती है तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। गंभीर ने इससे पहले ट्वीट किया था कि कोविड-19 मरीजों के लिए अहम मानी जाने वाली कुछ दवाइयां उनके कार्यालय में उपलब्ध हैं और जिन्हें जरूरत है, वे वहां से ले सकते हैं। उन्होंने यह भी ट्वीट किया था कि उन्होंने ऑक्सीजन सांद्रकों का प्रबंध किया है और जिन्हें जरूरत हो वे इन्हें ले सकते हैं।
रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस ट्वीट पर 'ट्वीटयुद्ध' शुरू हो गया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टेलीफोन बातचीत के दौरान केवल 'मन की बात' करने का आरोप लगाया था। कई राज्यों के नेताओं ने हेमंत सोरेन की घेराबंदी की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री को कोरोना के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि 'हेमंत सोरेन जी, शायद अपने पद की गरिमा को भूल गए हैं। कोरोना से उत्पन्न स्थिति को लेकर देश के PM पर कोई बयान देते समय उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस महामारी का अंत सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। अपनी नाकामी छिपाने के लिए अपने मन की भड़ास PM पर निकालना निंदनीय है।' उन्होंने आगे कहा कि 'केंद्र सरकार ने कोरोना संकट काल में जहां गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खजाने खोल दिए हैं, वहीं झारखंड सरकार ने अपने खजाने का मुंह बंद कर रखा है। हेमंत सोरेन जी चाहते हैं कि हर काम केंद्र सरकार करे। कोरोना से लड़िए, PM से नहीं!' वहीं, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 'वैश्विक महामारी के बीच माननीय मुख्यमंत्री जी अपने दायित्वों से बचने के लिए झारखंड की जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी के झारखंड के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और प्रयासों को झुठलाने के आपके इस ओछे हरकत पर आज झारखंडी शर्मिंदा हैं। आपके इस बचकाना एवं गैर जिम्मेदाराना, निरंकुश ट्वीट की देश ही नहीं दुनिया में थू-थू हो रही है। झारखंड की संस्कृति में झूठ, फरेब की कोई जगह नहीं है, ईश्वर आपको सद्बुद्धि दें, संयमित रखें और जिम्मेदार बनाएं।' केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि 'नरेंद्र मोदी जी ने तो आपको फोन किया कि कोरोना से कैसे लड़ा जाए और भारत सरकार सबके साथ है। आपने आभार व्यक्त करने की बजाय उनकी आलोचना की। प्रधानमंत्री जी ने अपना बड़प्पन दिखाया, लेकिन आपने अपनी और मुख्यमंत्री पद की गरिमा गिरा दी। आप इस बात का ध्यान रखें कि झारखंड के साढ़े तीन करोड़ लोग इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। अपने राज्य की देखभाल करने की बजाय इस तरह की आलोचना करने से बचकर, सामूहिक कार्य कर, इस लड़ाई को कैसे जीतें, यह सुनिश्चित करना चाहिए।' झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 'ये है झारखंड की सच्चाई। हेमंत जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। जिस शिद्दत से झारखंड सरकार अपनी नाकामी का ठिकरा केंद्र पर फोड़ने की कोशिश कर रही है, यह प्रयास स्वास्थ्य सेवा की बेहतरी के लिए किया होता तो राज्य में मौत का आंकड़ा छिपाना नहीं पड़ता। हेमंत जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर की गई टिप्पणी अमर्यादित है। वे लगातार अपनी अक्षमता प्रदर्शित करते रहे हैं। उनसे राज्य नहीं संभल रहा हो और केंद्र की मदद के बिना एक काम भी नहीं कर सकते हैं, तो उन्हें सत्ता केंद्र सरकार को ही सौंप देनी चाहिए।' झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि 'देश ने शायद ही कभी ऐसा स्तरविहीन मुख्यमंत्री देखा होगा। प्रधानमंत्री जी ने बड़ा हृदय दिखाते हुए मुख्यमंत्री को फोन किया लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान की निंदा आज झारखण्ड का प्रत्येक नागरिक कर रहा है। काश सुनसान सड़कों पर घूमने के बजाए अस्पतालों में जाकर देखते की स्थिति क्या है?' असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल ने सोरेन के ट्वीट को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और कहा कि 'हेमत सोरेन का ट्वीट दुर्भाग्यपूर्ण है। वह केवल इस मामले पर राजनीति करना चाह रहे हैं। पीएम मोदी का हर प्रयास और कार्य केवल जनता और राष्ट्र के लिए है।' गुरुवार रात पीएम मोदी ने हेमंत सोरेन से राज्य की कोविड-19 स्थिति के बारे में बात की। बातचीत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि 'आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने फोन किया। उन्होंने सिर्फ अपने मन की बात की। बेहतर होता यदि वो काम की बात करते और काम की बात सुनते।'
नई दिल्ली,कोरोना की दूसरी लहर के प्रचंड कहर से मुकाबले में सरकार की तमाम एजेंसियों के साथ तीनों सेनाओं ने अपने संसाधनों और रक्षा मंत्रालय के त्वरित फैसलों के जरिये मरीजों को आपात सहायता की गति बढ़ा दी है। बीते दो-तीन हफ्तों में रक्षा मंत्रालय के तेजी से लिए फैसलों के अनुरूप थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने आक्सीजन सप्लाई बढ़ाने, विशेष कोरोना अस्पताल बनाने, सैन्य चिकित्साकर्मियों को मैदान में उतारने से लेकर विदेश से आक्सीजन टैंकर लाने के लिए अपने विमानों और नौसैनिक पोतों को तैनात करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में रक्षा मंत्रालय के इन त्वरित रिस्पांस की चर्चा करते हुए कहा कि सेना के तीनों अंग पूरी ताकत और संसाधनों से कोरोना के कहर से मुकाबले में जुटे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि महामारी के खिलाफ सेनाओं की क्षमता और भरोसे को देखते हुए ही उन्होंने तत्काल आपात वित्तीय अधिकार देने का आदेश दिया ताकि थलसेना, नौसेना और वायुसेना के स्थानीय कमान स्तर को कोरोना चिकित्सा से जुड़े उपकरणों और संसाधनों के साथ प्रबंधन के लिए वित्तीय दिक्कतों का सामना न करना पड़े। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या और अस्पतालों में बेड की कमी को देखते हुए सेना की मेडिकल कोर और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सरकारी उपक्रमों की मदद से दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और बेंगलुरु में विशेष कोरोना अस्पताल बनाए हैं। इसी तरह सैन्य अस्पतालों में 750 बेड आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। जबकि आ‌र्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विस (एएफएमएस) ने देशभर के अपने 19 अस्पतालों में 4,000 बेड व 585 आइसीयू यूनिट उपलब्ध कराए हैं। दिल्ली में सेना के बेस अस्पताल को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है जहां बेड की तादाद 400 से बढ़ाकर 1,000 कर दी गई है। रक्षा मंत्री के अनुसार, लखनऊ और दिल्ली के डीआरडीओ के कोरोना अस्पताल में 500 बेड हैं वहीं अहमदाबाद में बनाए गए अस्पताल में 900 बेड हैं। पटना के ईएसआइसी अस्पताल को 500 बेड के कोरोना अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है। राजनाथ ने कहा कि मुजफ्फरपुर और वाराणसी में डीआरडीओ कोरोना अस्पतालों का तेजी से निर्माण कर रहा है। वहीं, एएफएमएस ने चिकित्साकर्मियों और डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए अपने अस्पतालों में इनकी अतिरिक्त तैनाती की है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना के सेवानिवृत्त चिकित्साकर्मियों को नियुक्त करने का फैसला लिया था। एएफएमएस ने अपने अस्पतालों में 238 अतिरिक्त डाक्टरों की इस साल दिसंबर तक के लिए संख्या बढ़ा दी है। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश आदि राज्यों के सैन्य अस्पतालों में कोरोना संक्रमित आम नागरिकों को सैन्य अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी जा रही है। सेना ने आपातस्थिति में आक्सीजन टैंकरों को पहुंचाने के लिए 200 ड्राइवरों को पटियाला में स्टैंडबाई पर रखा है। वहीं, वायुसेना के विमान बुधवार तक विदेश से 50 उड़ानों के जरिये 61 क्रायोजनिक आक्सीजन टैंकर ला चुके हैं तो देश में 344 उड़ानों के जरिये 230 आक्सीजन कंटेनर और 4,527 मीट्रिक टन आक्सीजन जरूरत की जगहों पर पहुंचा चुके हैं। नौसेना के सात पोत विदेश से आक्सीजन ढुलाई में जुटे हैं। डीआरडीओ पीएम-केयर्स से लगाए जा रहे 500 आक्सीजन प्लांट लगवाने के काम में जुट गया है।
नई दिल्ली, देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच इन दिनों मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत और जरूरत की ही बातें हो रही हैं। ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की जान जा चुकी है। ऐसे में इसकी बेसिक जानकारी हर किसी के लिए बेहद जरूरी हो गई है, ताकि आप मेडिकल ऑक्सीजन और इसके स्रोतों की अहमियत और इस्तेमाल के बारे में समझ सकें। मेडिकल ऑक्सीजन के मुख्य रूप से चार स्रोत होते हैं-सिलेंडर, कॉन्सेंट्रेटर, प्लांट और लिक्विड ऑक्सीजन टैंक। इनमें से सिलिंडर और कॉन्सेंट्रेटर बेहद कम संसाधन में उपलब्ध हो सकते हैं। पहले जानते हैं सिलिंडर के बारे में- ऑक्सीजन सिलेंडर कंप्रेस्ड गैस को ऑक्सीजन सिलेंडर में स्टोर किया जा सकता है। गैस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ऑक्सीजन गैस इन सिलेंडर में भरी जाती है। यह प्रक्रिया क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन या प्रेसर स्विंग एब्जारशन (पीएसए) के जरिए होती है। ये सिलिंडर अस्पतालों में मशीन के जरिए या फिर किसी मरीज को सीधे लगाए जा सकते हैं। इन सिलिंडर को बार-बार भरवाना एक चुनौती होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए कई अस्पताल अपने कैंपस में पीएसए ऑक्सीजन प्लांट लगवा लेते हैं। वहीं, इसकी बिजली पर निर्भरता नहीं होती है। इसलिए जिन इलाकों में बिजली की समस्या हो, ये बेहद कारगर हैं। वहीं दूसरे ऑक्सीजन सिस्टम के साथ ये बैकअप का भी काम करते हैं। हालांकि, इसके साथ कई उपकरणों की जरूरत पड़ती है। दूसरे स्रोत की तुलना में ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत कम पड़ती है, लेकिन इसका मेंटनेंस, रिफिलिंग और ट्रांसपोर्टेशन महंगा पड़ता है। एबुलेंस और मरीजों को ले जाने वाले दूसरे वाहनों में भी इनका इस्तेमाल होता है। ऑक्सीजन प्लांट ऑक्सीजन प्लांट ऑक्सीजन का केंद्रीय स्रोत होता है। इसके जरिए पाइप से ऑक्सीजन सीधे मरीजों तक पहुंचाई जा सकती है। ये प्लांट ऑक्सीजन बनाने में क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन या प्रेशर स्विंग एब्जार्सन (पीएसए) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की तरह ही ऑक्सीजन प्लांट भी बिजली पर निर्भर होते हैं। इसमें से ऑक्सीजन बेहद तेज प्रेसर के साथ निकलती है, जिससे वेंटिलेटर जैसी मशीनों में ऑक्सीजन सप्लाई में इसका इस्तेमाल होता है। जबकि ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर से इन मशीनों में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा सकती है। जैसा हमने ऊपर भी जिक्र किया है कि ऑक्सीजन प्लांट का इस्तेमाल सिलिंडर को रिफिल करने में भी किया जाता है। ऑक्सीजन प्लांट लग जाने के बाद मेडिकल फेसिलिटी में ऑक्सीजन की आपूर्ति आसान हो जाती है। फिर ट्रांसपोर्टेशन की समस्या नहीं होती है। लिक्विड ऑक्सीजन टैंक अस्पतालों में ऑक्सीजन का एक और स्रोत लिक्विड ऑक्सीजन टैंक स्थापित करना होता है। इन विशाल टैंक को समय-समय पर सप्लायर द्वारा भरा जाता है। इन टैंक से हेल्थ केयर फैसिलिटी की सेंटर पाइप सिस्टम में ऑक्सीजन सप्लाई की जा सकती है। हालांकि, इन टैंक को स्थापित करने के लिए काफी जगह की जरूरत होती है। यह सेल्फ वेपराइजेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह बिजली पर निर्भर नहीं होते हैं। इन मेडिकल ऑक्सीजन स्रोत के अलावा मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए फ्लो मीटर, रेगुलेटर, ह्यूमिडिफायर्स और वेंटिलेटर जैसी मशीनों की जरूरत पड़ती है।
नई दिल्ली, दिमागी बीमारियों के इलाज में सबसे प्रमुख बात होती है समय से उपचार होना। अकसर इसी वजह से कई मामले बिगड़ जाते हैं। परंतु आने वाले समय में ऐसा नहीं होगा। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक का अविष्कार किया है जिसके द्वारा दिमागी बीमारियों का समय रहते इलाज किया जा सकेगा। यही नहीं इसके द्वारा इसकी पहचान समय रहते भी हो सकेगी। इस तकनीक के द्वारा नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन किया जा सकेगा। इस नई खोज से दिमाग में हुई क्षति और न्यूरो बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं का कहना है कि नर्व्स की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) और रक्त वाहिकाओं (वॉस्कुलर) जिसे न्यूरोवॉस्कुलर कपलिंग (एनवीसी) कहा जाता है, उनके बीच परस्पर प्रतिक्रियाएं होती हैं। इससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह नियंत्रित होता है। इस्केमिक स्ट्रोक जैसी बीमारियों का एनवीसी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एनवीसी का समय से पता लगने से ऐसी बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार होता है। सर्वे के अनुसार भारत में करीब 30 मिलियन लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित है। इनमें मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसंस डिजीज, मस्तिष्क आघात और तंत्रिका संक्रमण शामिल है। इस शोध को आईआईटी मंडी के कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. शुभजीत रॉय चौधरी के नेतृत्व में किया गया है। शोध के परिणाम आईईईई जनरल ऑफ ट्रांसलेशन इंजीनियरिंग इन हेल्थ एंड मेडिसिन में प्रकाशित में किया गया है। इसे हाल में अमेरिका का पेटेंट मिल गया है। डॉ. चौधरी ने बताया कि हमारी विधि में मल्टी मॉडल ब्रेन स्टिमुलेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है ताकि न्यूरोवास्कुलर यूनिट (एनवीयू) के विभिन्न कंपोनेंट को अलग-अलग स्टिमुलेट करना है। सीधे और सरल शब्दों में कहें तो इलेक्ट्रोड के जरिए मस्तिष्क में गैरहानिकारक विद्युत प्रवाह किया जाता है और नर्व्स की प्रतिक्रिया और रक्त प्रवाह के संदर्भ में मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं को एक साथ इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (ईईजी) और नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरएस) की मदद से मापा जाता है। हालांकि ईईजी और एनआईआरएस का पहले से ही अलग-अलग उपयोग हो रहा है लेकिन आईआईटी मंडी के इनोवेटर्स ने विकसित प्रोटोटाइप को जोड़ दिया है। इससे एनवीसी की बेहतर तस्वीर मिल सकेगी। इससे प्राप्त आंकड़ों को गणितीय मॉडल में डालकर एनवीसी की समस्याओं का पता लगाना आसान होता है। इससे न्यरोलॉजिकल समस्याओं का स्पष्ट संकेत मिलता है। डॉ. चौधरी का कहना है कि नर्व्स के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन करने से स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप के मामलों में तुरंत उपचार में उपयोगी होगी। यह डिवाइस पार्किंसंस जैसी बीमारियों के बढ़ने की गति समझने में भी मदद करेगा और वस्तुत: लक्षण प्रकट होने से पहले इन बीमारियों के पूर्वानुमान में भी मदद मिल सकती है। ये हो सकते हैं लाभ -नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन करने से स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप के मामलों में तुरंत उपचार का निर्णय लेना आसान होगा। -यह डिवाइस पार्किंसंस जैसी बीमारियों के बढ़ने की गति समझने में भी मदद करेगा और लक्षण प्रकट होने से पहले इन बीमारियों के होने का पूर्वानुमान भी दे सकता है।
नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के कहर का सामना कर रहे देशवासियों के लिए कुछ राहत की खबर है। देश की जानी मानी वायरोलॉजिस्ट और चिकित्सा विज्ञानी गगनदीप कांग के मुताबिक इस महीने के मध्य से लेकर आखिर तक संक्रमण के मामलों में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी। अभी कोरोना संक्रमण चरम पर है। इस महीने दूसरी बार चार लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं और करीब चार हजार लोगों की मौत भी हुई है। संक्रमण में बढ़ोतरी का आलम यह है कि एक हफ्ते के दौरान ही 25 लाख से ज्यादा मामले बढ़ गए हैं। गगनदीप कांग के मुताबिक अभी कोरोना संक्रमण की एक या दो लहर और आ सकती है यानी नए मामलों में वृद्धि हो सकती है, लेकिन हालात मौजूदा दौर की तरह खराब नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि इस समय कोरोना संक्रमण ऐसे क्षेत्रों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है, जो पहले बचे हुए थे। मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालांकि, लंबे समय तक इन क्षेत्रों में इसका प्रसार बने रहने की संभावना कम है। मरीजों की वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा कांग ने एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस की घटती जांच पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जांच में संक्रमण के जितने मामले सामने आ रहे हैं वास्तविकता में इनकी संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादा होगी। कोरोना वायरस की अभी एक या दो और लहर की आशंका जताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यह कब होगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बारे में हमें बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है और न ही इसके बारे में ही पता है कि वह आगे क्या रूप लेगा। इसलिए हमें सचेत रहना होगा। बुरा फ्लू वायरस जैसा हो जाएगा कोरोना कोरोना वायरस की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बुरा फ्लू वायरस जैसा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मौसमी वायरस बन जाएगा, जैसा कि कोई खराब फ्लू वायरस होता है। बार-बार संक्रमित होने और टीकाकरण के चलते लोगों में इसके खिलाफ प्रतिरक्षा पैदा हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस बार-बार रूप बदल रहा है और हो सकता है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मात दे दे। इससे बचने के लिए हमें बूस्टर डोज की जरूरत होगी। हालांकि, उन्हें पक्का यकीन है कि अभी हमें जिस मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, आगे इस वायरस के चलते ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सक्रिय मामले 35 लाख से ज्यादा अभी देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। इसमें तेजी से नए मामले बढ़ रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में ही 27 लाख से ज्यादा संक्रमित बढ़े हैं और 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 35.66 लाख हो गई है, जो कुल संक्रमितों का 16.92 फीसद है। बीते 24 घंटे के दौरान ही रिकॉर्ड 4,12,262 नए मामले मिले हैं और 3,980 लोगों की जान चली गई है। इस महामारी के चलते इससे पहले एक दिन में न तो इतने नए मामले मिले थे और न ही इतने लोगों की मौत हुई थी। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2.10 करोड़ से ज्यादा हो गया है। इनमें से 1.72 करोड़ लोग पूरी तरह से संक्रमण मुक्त भी हो चुके हैं और 2,30,168 लोगों की जान जा चुकी है।
नई दिल्ली, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान देश में दैनिक संक्रमितों की संख्या 4.12 लाख तक पहुंच चुकी है। मौतों का आंकड़ा भी कई गुना हो गया है। अभी हर्ड इम्युनिटी की बात बेमानी है, क्योंकि एक तरफ जहां कोरोना वायरस में बदलाव हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टीकाकरण की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी है। दुनिया के कई देशों में दूसरी लहर आकर गुजर चुकी है, लेकिन इतनी तेज कहीं नहीं रही। आइए जानते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर किस प्रकार तेज हुई और कैसे खत्म हो सकती है.. तोड़नी होगी संक्रमण की शृंखला: मार्च के मध्य में देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में तेजी आई। दैनिक मामलों को सितंबर में आए सर्वाधिक (करीब 97 हजार) के रिकॉर्ड को पार करने में एक महीने से भी कम का समय लगा। पिछली लहर के सर्वाधिक मौतों का रिकॉर्ड भी करीब डेढ़ महीने के भीतर टूट गया। महामारी में घातक तेजी और गिरावट के सिद्धांतों के अनुसार, जितनी तेजी से मामलों में इजाफा हुआ है, उतनी ही तेजी से इसमें गिरावट भी आएगी। लेकिन, यह तभी संभव होगा जब संक्रमण की शृंखला को तोड़ा जाए, टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जाए व सतर्कता बरती जाए। संक्रमण का सबसे खतरनाक दौर: कोरोना की लहरों का अध्ययन टुकड़ों में किया जाता है। जब कुछ ही दिनों में मामले दोगुने होने लगें तो उसे घातक दौर कहा जाता है। जब मामले तेजी से कम होने लगते हैं तो उसे तीव्र गिरावट कहा जाता है। इसके बाद संक्रमण लंबे समय तक छोटे स्तर पर बना रहता है। पिछले अक्टूबर में अमेरिका में दूसरी घातक लहर आई। जब वहां टीकाकरण अभियान तेज हुआ तब मामलों में तेजी से गिरावट आने लगी। भारत में घातक साबित हुई लापरवाही: पहली लहर के बाद जब मामले कम होने लगे तो प्रतिबंधों में ढील दी जाने लगी। तब लोग लापरवाह हो गए और मास्क लगाना व शारीरिक दूरी जैसे नियमों को ताक पर रख दिया। यहां तक कि जब पिछले साल नए वैरिएंट आए और दूसरे देशों में कहर बरपाने लगे तब भी लोग सचेत नहीं हुए। टीकाकरण की गति तेज किए बिना हर्ड इम्युनिटी हासिल करना अथवा सामान्य स्थिति में लौटना सपने की तरह है। इजरायल में प्रभावी रहा कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान: इजरायल दुनिया के उन चंद देशों में शुमार है, जिन्होंने कोरोना की लहर को चरम पर पहुंचने से पहले ही उस पर काबू पा लिया। वहां अप्रैल मध्य से दैनिक मामले 200 से भी कम हो गए हैं। यह उसके तेज टीकाकरण अभियान का नतीजा है। इजरायल में 58.5 फीसद आबादी को दोनों खुराक दी जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 अभी पूरी तरह खत्म नहीं होने जा रही है, लेकिन महामारी के अंत में इसमें तेज गिरावट आएगी और महज कुछ मामले ही रोजाना आया करेंगे। संभले नहीं तो बढ़ सकते हैं मामले: अब भी अगर लोगों ने सतर्कता नहीं बरती तो दैनिक मामलों से लेकर मौतों तक में और इजाफा हो सकता है। अमेरिका स्थित मिशिगन यूनिवर्सिटी का आकलन है कि भारत में दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा 8-10 लाख तक जा सकता है। हालांकि, उसने यह नहीं बताया है कि ऐसा कब हो सकता है। एसबीआइ की स्टडी रिपोर्ट बताती है कि दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा मई के तीसरे सप्ताह में 6-8 लाख हो सकता है।
नई दिल्ली, कोरोना महामारी के गहराते संकट के बीच कई राज्यों ने और सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। लाकडाउन की घोषणा करने वाले राज्यों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र, बिहार और ओडिशा समेत कुछ राज्यों में पहले से ही लाकडाउन लगा दिया गया है, अब केरल और राजस्थान ने भी पूर्ण लाकडाउन का एलान किया है। केरल में बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने राज्य में आठ मई की सुबह से नौ दिनों के लिए पूर्ण लाकडाउन का एलान किया है। मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा कि लाकडाउन आठ मई की सुबह छह बजे से 16 मई तक लागू रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। राजस्थान में 10 से पूर्ण लॉकडाउन राजस्थान सरकार ने भी राज्य में सख्त लाकडाउन की घोषणा की है। राज्य में महामारी की दूसरी लहर को रोकने के लिए 10 से 24 मई तक लाकडाउन लगाया जा जा रहा है। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सबकुछ बंद रहेगा। बढ़ते मामलों को देखते हुए तमिलनाडु में गुरुवार सुबह चार बजे से ही सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं, जो 20 मई तक प्रभावी रहेंगी। इसके तहत उपनगरीय ट्रेनों में सिर्फ इमरजेंसी सेवा से जुड़े फ्रंटलाइन वर्कर्स को ही यात्रा करने की अनुमति दी गई है। सरकारी दफ्तरों में 50 फीसद स्टाफ के साथ काम करने को कहा गया है। मेट्रो समेत सार्वजनिक वाहन भी 50 फीसद क्षमता के साथ चलेंगें। किराना और सब्जी की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें बंद रहेंगी। हालांकि, शॉपिंग कांप्लेक्स में इन्हें भी खोलने की अनुमति नहीं होगी। कर्नाटक में भी सख्त उपायों पर विचार कर्नाटक सरकार भी महामारी को रोकने के लिए राज्य में सख्त उपायों को लागू करने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें राज्य में लाकडाउन लगाने समेत अन्य उपायों पर विचार किया जाएगा। तेलंगाना में लॉकडाउन नहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार लॉकडाउन लगाने पर विचार नहीं कर रही है, क्योंकि इससे आम लोगों को परेशानी होगी साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले के अनुभव बताते हैं कि लाकडाउन कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में प्रभावी नहीं है।
नई दिल्ली, कर्नाटक को 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई के हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। वहीं कोर्ट ने दिल्ली को प्रत्येक दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने का आदेश दिया और कहा कि केंद्र ऐसे हालात न पैदा करे कि हमें सख्त रुख अपनाना पड़े। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को ऑक्सीजन सप्लाई मामले पर केंद्र द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की गई। दरअसल अपनी याचिका में केंद्र ने कर्नाटक को 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट कारण बताते हुए आदेश दिया है। राज्य द्वारा 1700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मांगे जाने के अनुरोध को न मानने पर केंद्र को यह आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र राज्य सरकार से बात कर मामले का समाधान करे। इससे पहले गुरुवार को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कर्नाटक हाइकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसमें दखल देने की बात कही थी।
नई दिल्ली, भारत में आज तीसरे दिन नए मामलों का आंकड़ा 4 लाख से अधिक दर्ज किया गया और बीते 24 घंटों में होने वाली मौतों की संख्या ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। तमाम उपायों के बावजूद कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों से अब ऐसा लगने लगा है कि यह घातक वायरस हमारे नियंत्रण से बाहर हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते 24 घंटों में देश में 4,14,188 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 3,915 संक्रमितों की मौतें दर्ज की गई जो पुराने सभी आंकड़ों की तुलना में अधिक है। इसके बाद देश में अब तक संक्रमितों का कुल आंकड़ा 2,14,91,598 हो गया है और कुल मौतों की संख्या 2,34,083 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 36,45,164 है और डिस्चार्ज हुए मामलों की कुल संख्या 1,76,12,351 है। कोरोना से बचाव के लिए देश भर में 16 जनवरी से चलाए गए वैक्सीनेशन के अभियान के तहत पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस की 23,70,298 वैक्सीन लगाई गईं, जिसके बाद कुल वैक्सीनेशन का आंकड़ा 16,49,73,058 हुआ। वहीं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार गुरुवार तक भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए कुल 29,86,01,699 सैंपल टेस्ट किए गए। वहीं केवल कल 18,26,490 सैंपल का टेस्टिंग हुआ। इन राज्यों का बीते 24 घंटों का हाल- - महाराष्ट्र- 62,194 नए मामले और 853 मौतें - कर्नाटक- 49,058 नए मामले और 328 मौतें - केरल- 42,464 नए मामले और 63 मौतें - तमिलनाडु- 24,898 नए मामले और 195 मौतें - हरियाणा- 14,840 नए मामले और 177 मौतें - छत्तीसगढ़- 13,846 नए मामले और 212 मौतें - गुजरात- 12,545 नए मामले और 123 मौतें - पंजाब- 8,874 नए मामले, 154 मौतें - असम- 4,936 नए मामले और 46 मौतें - मिज़ोरम- 184 नए मामले और 17 मौतें बता दें कि 1 मई को नए कोरोना मामलों का ग्राफ 4 लाख से अधिक हो गया था। उस दिन COVID-19 के 4,01,993 नए मामले दर्ज हुए थे और 3,523 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले 21 अप्रैल को संक्रमण का आंकड़ा 3 लाख के पार चला गया था यानि मात्र दस दिनों के भीतर 1 लाख मामले बढ़ गए।
नई दिल्ली,कोरोना महामारी के दौरान बिगड़ते हालातों के बीच मदद के लिए भारतीय सेना हमेशा सबसे आगे रही है। अब सेना ने नागरिक प्रशासन की सहायता के समन्वय के लिए COVID-19 प्रबंधन सेल की स्थापना की है, जिसका प्रमुख महानिदेशक स्तर के अधिकारी को बनाया गया है। वो सीधे उप सेना प्रमुख को रिपोर्ट करेंगे। कोविड प्रबंधन सेल के द्वारा महामारी से निपटने के लिए नागरिक प्रशासन को सेना के स्टाफ और लॉजिस्टिक्स की सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
लखनऊ । कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या के मुकाबले मानव संसाधन आधे से भी कम है। इन हालात में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोविड ड्यूटी के लिए कोरोना योद्धाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त मानदेय का फैसला किया है। डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और सफाई कर्मी ही नहीं, बल्कि लैब में कार्यरत कार्मिक और चिकित्सा छात्र-छात्राओं को भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन स्वीकृति दे दी गई। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 2155 डॉक्टर, 3090 स्टाफ नर्स, 1540 वार्ड ब्वॉय और 1540 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है, जबकि इससे कम मानव संसाधन ही उपलब्ध है। यही नहीं, कार्यरत सभी कर्मचारी भी विभिन्न कारणों से उपलब्ध नहीं हो पाते। ऐसे में सरकार ने कार्यरत डॉक्टर और कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय देने का फैसला किया है, ताकि अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना योद्धाओं के सेवाभाव की सराहना करते हुए अतिरिक्त मानदेय की व्यवस्था का निर्देश दिया था। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कोविड अस्पतालों में कार्यरत डाक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और सफाईकर्मियों (नियमित अथवा आउटसोर्सिंग) को वर्तमान में दिए जा रहे मूल वेतन और नियत मानदेय पर 25 फीसद अतिरिक्त प्रोत्साहन धनराशि का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा एमबीबीएस इन्टर्न को 500 रुपये, एमएससी नर्सिंग छात्र-छात्राओं को 400 रुपये, बीएससी नर्सिंग छात्र-छात्राओं को 300 रुपये, एमबीबीएस अंतिम वर्ष और जीएनएम छात्र-छात्राओं को 300 रुपये प्रतिदिन दैनिक मानदेय पर तैनात किया जाएगा। वहीं, सैंपल की जांच के लिए लैब और उनसे संबंधित क्षेत्रों में तैनात किए जाने वाले मालिक्यूलर माइक्रोबायोलाजिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री आपरेटर, लैब अटेंडेंट को इनके मूल वेतन या मानदेय की राशि पर दस फीसद अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि यह प्रोत्साहन धनराशि चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले राजकीय चिकित्सालयों में ही लागू होगी। साथ ही यह पैसा कोविड वार्ड या लैब में ड्यूटी दिवसों के आधार पर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि एक्टिव क्वारंटाइन की अवधि को भी ड्यूटी दिवसों में ही जोड़ा जाएगा। फिलहाल यह योजना एक मई से 31 जुलाई तक के लिए है। फिर मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर परिस्थितियों के अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के कहर का सामना कर रहे देशवासियों के लिए कुछ राहत की खबर है। देश की जानी मानी वायरोलॉजिस्ट और चिकित्सा विज्ञानी गगनदीप कांग के मुताबिक इस महीने के मध्य से लेकर आखिर तक संक्रमण के मामलों में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी। अभी कोरोना संक्रमण चरम पर है। इस महीने दूसरी बार चार लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं और करीब चार हजार लोगों की मौत भी हुई है। संक्रमण में बढ़ोतरी का आलम यह है कि एक हफ्ते के दौरान ही 25 लाख से ज्यादा मामले बढ़ गए हैं। गगनदीप कांग के मुताबिक अभी कोरोना संक्रमण की एक या दो लहर और आ सकती है यानी नए मामलों में वृद्धि हो सकती है, लेकिन हालात मौजूदा दौर की तरह खराब नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि इस समय कोरोना संक्रमण ऐसे क्षेत्रों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है, जो पहले बचे हुए थे। मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालांकि, लंबे समय तक इन क्षेत्रों में इसका प्रसार बने रहने की संभावना कम है। की वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा कांग ने एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस की घटती जांच पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जांच में संक्रमण के जितने मामले सामने आ रहे हैं वास्तविकता में इनकी संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादा होगी। कोरोना वायरस की अभी एक या दो और लहर की आशंका जताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यह कब होगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बारे में हमें बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है और न ही इसके बारे में ही पता है कि वह आगे क्या रूप लेगा। इसलिए हमें सचेत रहना होगा। बुरा फ्लू वायरस जैसा हो जाएगा कोरोना कोरोना वायरस की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बुरा फ्लू वायरस जैसा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मौसमी वायरस बन जाएगा, जैसा कि कोई खराब फ्लू वायरस होता है। बार-बार संक्रमित होने और टीकाकरण के चलते लोगों में इसके खिलाफ प्रतिरक्षा पैदा हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस बार-बार रूप बदल रहा है और हो सकता है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मात दे दे। इससे बचने के लिए हमें बूस्टर डोज की जरूरत होगी। हालांकि, उन्हें पक्का यकीन है कि अभी हमें जिस मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, आगे इस वायरस के चलते ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो । सक्रिय मामले 35 लाख से ज्यादा अभी देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। इसमें तेजी से नए मामले बढ़ रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में ही 27 लाख से ज्यादा संक्रमित बढ़े हैं और 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 35.66 लाख हो गई है, जो कुल संक्रमितों का 16.92 फीसद है। बीते 24 घंटे के दौरान ही रिकॉर्ड 4,12,262 नए मामले मिले हैं और 3,980 लोगों की जान चली गई है। इस महामारी के चलते इससे पहले एक दिन में न तो इतने नए मामले मिले थे और न ही इतने लोगों की मौत हुई थी। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2.10 करोड़ से ज्यादा हो गया है। इनमें से 1.72 करोड़ लोग पूरी तरह से संक्रमण मुक्त भी हो चुके हैं और 2,30,168 लोगों की जान जा चुकी है। बुधवार को 19.23 लाख टेस्ट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए बुधवार को देश भर में 19,23,131 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक 29 करोड़ 67 लाख 75 हजार से ज्यादा नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।
कोलकाता कोरोना वायरस का संक्रमण पश्चिम बंगाल में बेकाबू तरीके से बढ़ रहा है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके लिए इशारों-इशारों में बीजेपी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया है। ममता ने कहा कि एक टीम (BJP) आई थी और वापस गई। कोरोना के बढ़ते संक्रमण में अब अगर मंत्री आते हैं, तो उन्हें विशेष उड़ानों के लिए भी आरटी-पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लानी पड़ेगी। क्योंकि कोरोना संबंधी नियम सभी के लिए एक समान होना चाहिए। बीजेपी नेताओं पर हमला बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं के बार-बार आने के कारण की राज्य में कोरोना की रफ्तार इतनी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अब कोरोना गाइडलाइंस के पालन में किसी तरह की हीलाहवाली नहीं की जाएगी। बिना आरटी-पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट वाले नेता को राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र की कोविड नीति पर उठाए सवाल उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की कोविड नीति को लेकर भी सवाल उठाए। ममता ने कहा कि कोरोना पर केंद्र सरकार की ओर से कोई पारदर्शी नीति नहीं है। मैंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे और सरल बनाने की अपील की है। इसके अलावा उन्होंने बंगाल में कम वैक्सीन मिलने को लेकर भी हमला बोला। 'टीम आई, चाय पिया और चली गई' ममता ने कहा, 'एक टीम आई थी। उन्होंने चाय पी और वापस चले गए जबकि कोविड चालू है। अब अगर मंत्री आते हैं तो उन्हें स्पेशल फ्लाइट्स के लिए भी आरटी-पीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट लाना पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होना चाहिए। बीजेपी नेताओं के बार-बार यहां आने के कारण प्रदेश में COVID बढ़ रहा है। बीजेपी पर जनादेश न स्वीकारने का आरोप ममता ने कहा कहा कि वे (बीजेपी) दरअसल जनादेश को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। मैं उनके आग्रह करती हूं कि वे जनादेश को स्वीकार करें। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिखा था और राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। केंद्र ने कहा था कि राज्य सरकार द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजने की सूरत में इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
चंडीगढ़ हरियाणा में बेकाबू होते कोरोना वायरस (Corona Virus in Haryana) को रोकने के लिए सरकार ने कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों को अपने साथ जोड़ा फैसला किया है। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को रोजाना 10,000 रुपये का वेतन दिया जाएगा। इस तरह के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को प्रति घंटे के हिसाब से 1200 रुपये का भुगतान मिलेगा। इसके अलावा सरकार कुछ महामारी विशेषज्ञों को भारी भरकम वेतन पर अपने साथ जोड़ने जा रही है ताकि मौजूदा कोरोना संक्रमण को काबू में किया जा सके। राज्य सरकार ने की हैं 852 भर्तियां राज्य सरकार नैशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत इन विशेषज्ञों को भर्ती करेगी। इस बारे में राज्य सरकार ने हाल ही में फैसला लिया था ताकि मौजूदा कोविड संकट से राज्य को बचाया जा सके। राज्य सरकार ने NHM के तहत 852 भर्तियां की हैं। प्रदेश सरकार का यह फैसला राज्य सरकार के उस फैसले से अलग है जिसके तहत राज्य में हरियाणा मेडिकल सर्विसेज (HCMS) कैडर के रिटायर्ड चिकित्सा अधिकारियों को जोड़ा गया था। महामारी को काबू में करने के लिए उठाए जा रहे कदम इस तरह के HCMS डॉक्टर की उम्र 70 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इन डॉक्टरों को राज्य सरकार ने एक साल के लिए अपनी सेवाएं देने के लिए शामिल किया है ताकि महामारी पर काबू पाया जा सके। राज्य के हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से मुख्य सचिव विजय वर्धन ने हाईकोर्ट को सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट में इस बारे में विस्तृत जानकारी दी है। सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद नहीं थम रही कोरोना की रफ्तार रिपोर्ट में वर्धन ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा डॉक्टरों को शामिल करने से कोरोना के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। हरियाणा सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद कोरोना संक्रमण काबू नहीं हो रहा है। राज्य में लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण के नए केसों की संख्या घटने के बजाय बढ़ रही है। संक्रमण दर 7.17 प्रतिशत पहुंच गई है और रिकवरी दर 79.10 पर ठहरी है। राज्य में मृत्यु दर 0.88 प्रतिशत है।
इडुक्की (केरल) कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच केरल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। केरल में इडुक्की जिले के मन्नार में पिछले महीने एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ और उसमें बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। इस दौरान 100 पादरी बीमार पड़ गए, जबकि दो की मौत हो गई। इसको लेकर पुलिस ने चर्च ऑफ साउथ इंडिया (सीएसआई) के 480 पादरियों पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तहसीलदार के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया। इससे पहले मीडिया में यह खबर आई थी कि यह कार्यक्रम संक्रमण फैलाने वाला कार्यक्रम साबित हुआ क्योंकि 100 पादरी बीमार पड़ गए और दो अन्य की मौत हो गई। पादरियों के एक वर्ग और आम लोगों ने हाल में सरकार के पास इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में महामारी प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया पर चर्च की आलोचना यह कार्यक्रम 13 अप्रैल को शुरू हुआ था। उनमें से कुछ ने इस कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्च की आलोचना भी की। इसके बाद यह विवादास्पद कार्यक्रम मीडिया में सामने आया। इस मामले की जांच कर रहे मन्नार के इंस्पेक्टर के आर मनोज ने बताया कि पुलिस कार्यक्रम का ब्योरा जुटा रही है और उसके बाद ही पुलिस कुछ कहेगी। 480 पादरियों और चर्च मैनेजमेंट के खिलाफ केस इंस्पेक्टर ने कहा कि हमने तहसीलदार के बयान के आधार पर 480 पादरियों और चर्च मैनेजमेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच चल रही है और हम इस घटना के बारे में तस्वीरें और वीडियो जुटाकर ब्योरा इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे हैं।

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