taaja khabar...देश में कोरोना से मौत के गलत आंकड़े जारी करने के दावों को सरकार ने किया खारिज, बताया बेबुनियाद...केरल की जेलों में बंद अधिकांश कैदियों को लगी कोरोना वैक्‍सीन, राज्‍य सरकार ने हाईकोर्ट को दी जानकारी..देश में 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 41 हजार से ज्यादा मामले दर्ज, 507 की गई जान..एनएसओ ग्रुप के खिलाफ जांच का अध्ययन कर रहा इजरायली रक्षा मंत्रालय..मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ रंगदारी का मामला, 6 पुलिसकर्मी समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR..लखनऊ से इंदौर तक...मीडिया के दफ्तरों पर छापेमारी! कई पत्रकारों के घर पहुंची IT की टीम..

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नई दिल्ली संसद के उच्च सदन राज्यसभा में तब भारी हंगामा मच गया जब तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने आईटी मिनिस्टर अश्विणी वैष्णव के हाथ से पेपर छीन लिए और उसे सदन में ही फाड़ डाला। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही लगातार तीसरे दिन बाधित रही। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर कांग्रेस एवं अन्य दलों ने लोकसभा में हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। अब सदन शाम चार बजे फिर बैठेगी, लेकिन विपक्ष के तेवर से कार्यवाही होने की संभावना कम ही दिखती है। उधर, राज्यसभा में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सिजन की कमी से मौतों के लेकर हंगामा होता रहा जिस कारण सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। अब उच्च सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे दोबारा बहाल होगी। आईटी मिनिस्टर से छीने पेपर राज्यसभा में आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव जैसे ही कथित पेगासस जासूसी केस पर अपना बयान देने उठे, विपक्षी दलों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। इसी बीच प. बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद ने उनके हाथ से बयान की कॉपी छीन ली और उसे सदन में ही फाड़ दिया। कहा जा रहा है कि पार्टी सांसद शांतनु सेन ने प्रमुख भूमिका निभाई। सदन में बीजेपी के सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने टीएमसी सांसदों के रवैये को बेहद निराशाजनक बताया। टीएमसी सांसदों पर बरसे बीजेपी सांसद उन्होंने कहा कि विपक्ष को सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन चर्चा के बजाय हमें सदन के अंदर इस तरह का हो-हंगामा देखने को मिला। यह नियमों के बिल्कुल खिलाफ है और मुझे लगता है कि इसकी भरपूर भर्त्सना होनी चाहिए। वहीं, एक और बीजेपी सांसद महेश पोद्दार ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि टीएमसी तो प. बंगाल में विपक्षियों की हत्या और महिलाओं से दुर्व्यवहार तक करती है, इसलिए उससे संसद सदस्य कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'आज उन्होंने पेपर छीनकर फाड़ दिए, कोई आश्चर्य नहीं कि वो कल कपड़े फाड़ दें।' हालांकि, सदन के बाहर टीएमसी सांसद शुभेंदु शेखर रॉय ने मीडिया के सवालों पर कुछ भी जवाब नहीं दिया। यूं चली लोकसभा की कार्यवाही उधर, कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने नए कृषि कानूनों के मुद्दे पर लोकसभा में हंगामा किया जिस कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। फिर 12 बजे भी कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा हो गया जिस कारण लोकसभा अध्यक्ष को शाम 4 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होने के साथ ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के निकट पहुंच गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में हंगामे के बीच प्रश्नकाल शुरू करवाया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने जलशक्ति मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछे और जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उत्तर दिए। कांग्रेस के सदस्यों ने 'काले कानून वापस लो' के नारे लगाए। उन्होंने तख्तियां हाथ में ले रखी थीं। इनमें से एक तख्ती पर ‘अन्नदाता का अपमान बंद करो, तीनों कृषि कानून रद्द करो’ लिखा था। सदन में नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और सदन चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, 'यह सदन चर्चा और संवाद के लिए है। आपको जनता ने तख्तियां दिखाने और नारेबाजी करने के लिए नहीं भेजा है। आप मुद्दे उठाएं, चर्चा करें और जनता की समस्याओं के समाधान का प्रयास करें। आपको चर्चा करने का पूरा समय मिलेगा।' बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा, 'तख्तियां दिखाना और नारेबाजी करना है तो आप सदन से बाहर चले जाएं। यह उचित नहीं है।' सदन में हंगामा नहीं थमने पर बिरला ने सुबह करीब 11.10 बजे लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी। राज्यसभा अब शुक्रवार तक के लिए स्थगित इधर, राज्यसभा में अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं चल सके। इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई उपसभापति हरिवंश ने प्रश्नकाल के लिए सदस्य का नाम पुकारा, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उपसभापति ने कहा, 'प्रश्नकाल सदस्यों के सवाल के लिए है... सवाल जवाब सदस्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है... आप सदन नहीं चलाना चाहते... आप अपने-अपने स्थान पर जाए।' इसके बाद भी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। सदन में हंगामा थमते न देख, सदन की कार्यवाही पहले दो बजे और फिर दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसी दौरान कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह ने मीडिया समूह दैनिक भास्कर के विभिन्न परिसरों पर आयकर विभाग के छापों का मुद्दा उठाने का प्रयास किया वहीं, तृणमूल कांग्रेस सदस्यों ने कथित जासूसी से जुड़ा मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और कहा कि किसी भी मुद्दे को उठाने के लिए आसन की अनुमति की जरूरत होती है। इस बीच, अन्य सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। कुछ सदस्य अपने स्थान से आगे भी आ गए। नायडू ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ सदस्य नहीं चाहते कि सदन में लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए। सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने बैठक शुरू होने के महज दो मिनट के भीतर ही कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। हालांकि, 12 बजे भी हंगामा हुआ तो पहले 2 बजे और फिर दिनभर के लिए कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
लखनऊ/इंदौर उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक न्यूज चैनल भारत समाचार के दफ्तर पर आयकर विभाग की टीम ने गुरुवार सुबह छापेमारी की है। भारत समाचार चैनल के हजरतगंज स्थित कार्यालय पर इनकम टैक्स की टीम ने रेड मारी है। इसके अलावा चैनल के एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्रा के विपुल खंड स्थित आवास पर भी इनकम टैक्स टीम की छापेमारी हुई है। लखनऊ के अलावा प्रदेश के बस्ती और जौनपुर जिलों में चैनल के बोर्ड से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। सूचना के मुताबिक, चैनल के दफ्तर पर हुई छापेमारी में 7-8 अफसर और पुलिस के अधिकारी शामिल हुए हैं। इसके अलावा विपुल खंड इलाके में रहने वाले एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्रा के घर पर भी तलाशी ली जा रही है। लखनऊ के अलावा बस्ती में विधायक अजय सिंह के घर पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम पहुंची है। वहीं जौनपुर में बीजेपी विधायक ओमप्रकाश जायसवाल के घर पर भी छापेमारी हुई है। कहा जा रहा है कि इनके संबंध में चैनल के प्रबंधन से हैं। 'दैनिक भास्कर' के ऑफिस पर भी छापा लखनऊ में टीवी चैनल के ऑफिस पर हुई छापेमारी की घटना पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ हिस्सों में हिंदी अखबार दैनिक भास्कर के ऑफिसों और प्रबंधन से जुड़े लोगों के घर पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है। दैनिक भास्कर के भोपाल, इंदौर समेत कुछ अन्य जिलों के दफ्तरों पर छापेमारी की गई है।
मुंबई, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के खिलाफ मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में रंगदारी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता एक व्यवसायी है। मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के अनुसार दर्ज करवायी गई एफआइआर में कुल आठ लोगों के नाम हैं, जिनमें से छह पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने अब तक दो नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि भ्रष्‍टाचार के आरोपों में घिरे परमबीर सिंह के खिलाफ एक और मामले में भी कार्रवाई हो सकती है। परमबीर सिंह पर ठाणे में पुलिस प्रमुख रहते समय मालाबारी हिल्‍स इलाके में आधिकारिक अपार्टमेंट में रहने पर उसका किराया न चुकाने का भी आरोप है। ये राशि अब लाखों में पहुंच गई है। मिली जानकारी के अनुसार परमबीर सिंह 18 मार्च 2015 को ठाणे का पुलिस आयुक्‍त नियुक्‍त किया गया था। इससे पूर्व वह मुंबई में स्‍पेशल रिजर्व पुलिस फोर्स के एडिशनल डीजीपी थे। परमबीर सिंह को मालाबार हिल्‍स के नीलिमा अपार्टमेंट में आवास उपलब्‍ध करवाया गया था। लेकिन ठाणे में पोस्टिंग होने के बाद भी उन्‍होंने अपार्टमेंट खाली नहीं किया। 17 मार्च, 2015 से 29 जुलाई 2018 तक किराये और पेनाल्‍टी को जोड़कर उनके ऊपर 54.10 लाख रुपये बकाया था। इसमें परमबीर सिंह 29.43 लाख रुपये अदा कर चुके हैं। 24.66 लाख रुपये अभी भी उन पर बकाया है। बता दें कि पोस्टिंग अवधि समाप्‍त होने के बाद 15 दिन के भीतर सरकारी आवास में रहने की छूट दी जाती है इस दौरान सरकार लाइसेंस फीस वसूलती है। लेकिन समय पर आवास न खाली करने पर किराये के साथ पेनल्‍टी भी देनी होती है। परमबीर सिंह और महाराष्‍ट्र के तत्‍कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख के बीच विवाद होने से पहले परमबीर सिंह ने अपनी बकाया माफ करने की अपील की थी। दरअसल उनके परिवार को मुंबई में रहने के लिए जगह चाहिए थी।
नई दिल्ली, देश में कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के दैनिक मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पिछले दो दिनों में कोरोना संक्रमण के 40 हजार से ज्यादा दैनिक मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि कल की तुलना में आज नए मामलों में मामूली कमी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) के मुताबिक, बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 41 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं जबकि इससे एक दिन पहले 42 हजार से ज्यादा केस दर्ज किए गए थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 41,383 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, इस दौरान 507 लोगों की मौत हो गई है और इन 24 घंटों में 38,652 मरीज कोरोना से ठीक हुए हैं। ताजा आंकड़ों के बाद, भारत में अभी तक कोरोना संक्रमण के 3,12,57,720 मामले सामने आ चुके हैं और देश में फिलहाल 4,09,394 सक्रिय मामले हैं। ताजा रिकवरी के बाद कुल आंकड़ा 3,04,29,339 हो गया है। वहीं, कोरोना के कारण मरने वालों की कुल संख्या 4,18,987 हो गई है।
नई दिल्ली,देश में कोरोना से होने वाली मौत के गलत आंकड़े जारी करने के किए जा रहे मीडिया दावों पर आज सरकार ने सफाई दी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसा संभव नहीं है। सरकार की ओर से उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया गया जिसमें कथित तौर पर कोरोना से होने वाली मौतों को कम बताने की बात कही गई थी। सरकार ने गुरुवार को कहा कि ऐसी मीडिया रिपोर्ट मानती है कि सभी मृत्यु दर के आंकड़े कोविड की मौतें हैं जो तथ्यों पर आधारित नहीं है और पूरी तरह से गलत हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में मजबूत और क़ानून-आधारित मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को देखते हुए जबकि कुछ मामलों में संक्रामक रोग और इसके प्रबंधन के सिद्धांतों के अनुसार पता नहीं चल पाता है मौतों की संख्या को गायब कर पाना संभव नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान भारत में मरने वालों की संख्या लाखों में हो सकती है। लेकिन आधिकारिक COVID-19 की मौत को काफी कम बताया गया है। इन समाचार रिपोर्टों में हाल के कुछ अध्ययनों के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, अमेरिका और यूरोपीय देशों की आयु-विशिष्ट संक्रमण मृत्यु दर का उपयोग भारत में सीरो-पॉज़िटिविटी के आधार पर अधिक मौतों की गणना के लिए किया गया है। मंत्रालय की ओर से कहा गय़ा है कि मौतों का एक्सट्रपलेशन एक दुस्साहसिक धारणा पर किया गया है कि किसी भी संक्रमित व्यक्ति के मरने की संभावना पूरे देश में समान है, विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कारकों जैसे कि नस्ल, जातीयता, जनसंख्या के जीनोमिक संविधान, पिछले जोखिम के बीच परस्पर क्रिया को मंत्रालय ने खारिज किया है। इसके अलावा, सीरो-प्रचलन अध्ययनों का उपयोग न केवल कमजोर आबादी में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए रणनीति और उपायों का मार्गदर्शन करने के लिए किया जाता है, बल्कि मौतों को अतिरिक्त आधार के रूप में भी उपयोग किया जाता है। सरकार ने संसद में दिया जवाब इससे पहले विपक्षी नेताओं की ओर से केंद्र सरकार पर लगाए गए कोरोना से मौत के गलत आंकड़े जारी करने के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि बिना जानकारी के टिप्पणी करना बुरा है लेकिन जब जानबूझकर एक झूठी कहानी तैयार करने की कोशिश की जाती है तो यह और भी गंभीर मसला हो जाता है। किसी भी भारतीय नागरिक की मृत्यु खेद का विषय है, फिर चाहे उसकी मौत कोविड से हुई हो या किसी और कारण से। वहीं, राज्य मंत्री स्वास्थ्य भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा को बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को छिपाने की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा, 'हांलांकि, कुछ राज्यों ने मृत्यु दर के आंकड़ों के मिलान के आधार पर अपने आंकड़ों को संशोधित जरूर किया है।' इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में सवाल उठाया था कि सरकार डाटा क्यों छिपा रही है? उन्होंने कहा था, 'बताइए, कितने लोगों की जान गई है (कोविड-19 के चलते)। कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि कोरोना से मरने वाले लोगों की असल संख्या सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है।'
कोच्चि,केरल सरकार कोरोना टीकाकरण अभियान में सभी को टीके लगा रही है। आज सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि केरल की जेलों में बंद अधिकांश कैदियों को टीके की पहली खुराक दे दी गई है। टीकाकरण अभियान के तहत जेल में बंद सभी उम्र के कैदियों को टीके लगाए गए हैं। राज्य की जेलों में कैदियों के टीकाकरण की स्थिति के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसकी आज मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति अनु शिवरामन की पीठ ने सुनवाई की। जहां राज्य सरकार अपनी सफाई पेश करते हुए कैदियों के लिए टीकाकरण अभियान में उठाएं गए कदम के बारे में बताया। सरकार ने पीठ को बताया कि केरल की जेलों में केवल 4,808 कैदी हैं और उनमें से अधिकांश को टीके की पहली खुराक दी गई है। सरकार ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि सभी उम्र के कैदियों को टीके लगाने के लिए विशेष पहल की गई है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि उनके द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण के संबंध में सभी दस्तावेजों के साथ एक बयान या एक हलफनामा दाखिल करें। तिहाड़ जेल में कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत लगभग 50 फीसदी कैदियों को टीके लगाए जा चुके है। जेल में कुछ दिन पहले ही एक कैदी कोरोना पॉजिटिव पाया गया था, जिसके बाद उस बैरक और वॉर्ड के सभी कैदियों का कोरोना टेस्ट करवाया गया है। कोरोना को देखते हुए जेल से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आपकों बता दें कि कैदियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पिछले साल कोरोना की पहली लहर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाई पावर कमेटी ने कुल 68 हज़ार कैदियों को रिहा करने के लिए कहा था। कोर्ट में 3 अगस्त को राज्यों से कैदियों की रिहाई के आधार और मानक पर सुनवाई होनी है। सरकार नियम तो बना रहीं है, मगर क्या जेलों में कैद कैदी उन नियमों का पालन कर पाएगे? या सरकार द्वारा बनाए गए नियम जेल के अंदर दम तोड़ देंगे।
नई दिल्ली,देश में बुधवार सुबह राजस्थान, मेघालय और लेह-लद्दाख में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटकों से यहां के लोग दहशत में हैं। राजस्थान के बीकानेर में भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई है। वहीं, मेघालय और लेह-लद्दाख में तीव्रता क्रमश 4.1 और 3.6 दर्ज की गई है। हालांकि तीनों ही इलाकों में भूंकप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन धरती हिलने से लोग डरे हुए जरूर हैं। बीकानेर में तड़के 5 बजकर 24 मिनट पर आया भूकंप नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, आज सुबह पांच बजकर 24 मिनट पर राजस्थान के बीकानेर में भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.3 मापी गई है। भूकंप की तीव्रता यहां ज्यादा थी लेकिन यह काफी सुबह आया इसलिए ज्यादातर लोग सोए हुए थे जिस वजह से उन्हें पता नहीं चल सका। वहीं, कई लोग दहशत के कारण घरों से बाहर निकल आए। मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में भी हिली धरती मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में रात दो बजकर 10 मिनट पर भूकंप आया है। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 बताई जा रही है। हालांकि इलाके में किसी तरह के जानामल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। लेह-लद्दाख में महसूस किए गए 3.6 तीव्रता के भूकंप झटके समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, आज तड़के चार बजकर 57 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इसकी तीव्रता 3.6 थी लेकिन ज्यादातर लोग सुबह में सो रहे थे, जिस वजह से उन्हें इसका पता नहीं चला। वहीं, कई लोग दहशत के कारण घरों से बाहर निकल आए।
नई दिल्ली,भारत में कोरोना संक्रमण के आंकड़े आज एक बार फिर बढ़े नजर आ रहे हैं। मात्र एक दिन में भारत में संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 3,998 पर पहुंच गया जिसमें महाराष्ट्र की अहम भूमिका है। दरअसल यहां पुरानी मौतों के आंकड़ों को अपडेट किया गया है जिससे देश में कोरोना संक्रमण के कारण अब तक कुल 4,18,480 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज सुबह यह आंकड़ा जारी किया है। देश का हाल स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 42,015 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 3,998 मौतें दर्ज की गई हैं।बता दें कि देश भर में 24 घंटों के दौरान 36,857 लोग रिकवर हुए। देश में सक्रिय मामलों का आंकड़ा 4,07,170 है जो कुल संक्रमण का 1.30 फीसद है वहीं देश में कोविड-19 रिकवरी रेट 97.36 फीसद रिकॉर्ड किया गया है। बीते 24 घंटों में देश भर में 1,040 सक्रिय मामले दर्ज किए गए।मंत्रालय ने बताया कि अभी हर दिन आने वालेे संक्रमितों की दर 3 फीसद से कम बनी हुई है जो पिछले 30 दिनों से बरकरार है। अभी देश में 4,07,170 सक्रिय मामले हैं और अब तक कुल मरने वाले संक्रमितों का आंकड़ा 4,18,480 है। इस घातक संक्रमण से बचाव के लिए अब तक देश भर में 41,54,72,455 वैक्सीनेशन की जा चुकी है । मौत का ग्राफ बढ़ाने में महाराष्ट्र का है रोल देश में 24 घंटों के दौरान 42,015 नए मामले मिले हैं जिसके बाद देश में अब तक कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 3,12,16,337 हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र (Maharashtra) ने कोविड आंकड़ों को अपडेट किया जिसके बाद राज्य में पॉजिटिव मामले 2,479 बढ़ गए और मृत्यु की संख्या 3,509 और बढ़ गई। इसी तरह बीते माह 9 जून को बिहार में भी पुरानी मौतों को जोड़ा गया था जिसके बाद देश में हुई मौतों का आंकड़ा 6,139 तक पहुंच गया था। महाराष्ट्र में बीते 24 घंटों में 9,389 नए संक्रमित मिले हैं और 7,510 लोग संक्रमण से ठीक हुए हैं। वहीं 3,656 संक्रमितों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 62.29 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 60 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.30 लाख लोगों की मौत हुई है। अभी यहां 94,593 लाख सक्रिय मामले हैं।
नई दिल्ली,भारत में कोरोना संक्रमण के आंकड़े आज एक बार फिर बढ़े नजर आ रहे हैं। मात्र एक दिन में भारत में संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 3,998 पर पहुंच गया जिसमें महाराष्ट्र की अहम भूमिका है। दरअसल यहां पुरानी मौतों के आंकड़ों को अपडेट किया गया है जिससे देश में कोरोना संक्रमण के कारण अब तक कुल 4,18,480 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज सुबह यह आंकड़ा जारी किया है। देश का हाल स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 42,015 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 3,998 मौतें दर्ज की गई हैं।बता दें कि देश भर में 24 घंटों के दौरान 36,857 लोग रिकवर हुए। देश में सक्रिय मामलों का आंकड़ा 4,07,170 है जो कुल संक्रमण का 1.30 फीसद है वहीं देश में कोविड-19 रिकवरी रेट 97.36 फीसद रिकॉर्ड किया गया है। बीते 24 घंटों में देश भर में 1,040 सक्रिय मामले दर्ज किए गए।मंत्रालय ने बताया कि अभी हर दिन आने वालेे संक्रमितों की दर 3 फीसद से कम बनी हुई है जो पिछले 30 दिनों से बरकरार है। अभी देश में 4,07,170 सक्रिय मामले हैं और अब तक कुल मरने वाले संक्रमितों का आंकड़ा 4,18,480 है। इस घातक संक्रमण से बचाव के लिए अब तक देश भर में 41,54,72,455 वैक्सीनेशन की जा चुकी है । मौत का ग्राफ बढ़ाने में महाराष्ट्र का है रोल देश में 24 घंटों के दौरान 42,015 नए मामले मिले हैं जिसके बाद देश में अब तक कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 3,12,16,337 हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र (Maharashtra) ने कोविड आंकड़ों को अपडेट किया जिसके बाद राज्य में पॉजिटिव मामले 2,479 बढ़ गए और मृत्यु की संख्या 3,509 और बढ़ गई। इसी तरह बीते माह 9 जून को बिहार में भी पुरानी मौतों को जोड़ा गया था जिसके बाद देश में हुई मौतों का आंकड़ा 6,139 तक पहुंच गया था। महाराष्ट्र में बीते 24 घंटों में 9,389 नए संक्रमित मिले हैं और 7,510 लोग संक्रमण से ठीक हुए हैं। वहीं 3,656 संक्रमितों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 62.29 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 60 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.30 लाख लोगों की मौत हुई है। अभी यहां 94,593 लाख सक्रिय मामले हैं।
नई दिल्ली,भारत में कोरोना संक्रमण के आंकड़े आज एक बार फिर बढ़े नजर आ रहे हैं। मात्र एक दिन में भारत में संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 3,998 पर पहुंच गया जिसमें महाराष्ट्र की अहम भूमिका है। दरअसल यहां पुरानी मौतों के आंकड़ों को अपडेट किया गया है जिससे देश में कोरोना संक्रमण के कारण अब तक कुल 4,18,480 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज सुबह यह आंकड़ा जारी किया है। देश का हाल स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 42,015 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 3,998 मौतें दर्ज की गई हैं।बता दें कि देश भर में 24 घंटों के दौरान 36,857 लोग रिकवर हुए। देश में सक्रिय मामलों का आंकड़ा 4,07,170 है जो कुल संक्रमण का 1.30 फीसद है वहीं देश में कोविड-19 रिकवरी रेट 97.36 फीसद रिकॉर्ड किया गया है। बीते 24 घंटों में देश भर में 1,040 सक्रिय मामले दर्ज किए गए।मंत्रालय ने बताया कि अभी हर दिन आने वालेे संक्रमितों की दर 3 फीसद से कम बनी हुई है जो पिछले 30 दिनों से बरकरार है। अभी देश में 4,07,170 सक्रिय मामले हैं और अब तक कुल मरने वाले संक्रमितों का आंकड़ा 4,18,480 है। इस घातक संक्रमण से बचाव के लिए अब तक देश भर में 41,54,72,455 वैक्सीनेशन की जा चुकी है । मौत का ग्राफ बढ़ाने में महाराष्ट्र का है रोल देश में 24 घंटों के दौरान 42,015 नए मामले मिले हैं जिसके बाद देश में अब तक कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 3,12,16,337 हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र (Maharashtra) ने कोविड आंकड़ों को अपडेट किया जिसके बाद राज्य में पॉजिटिव मामले 2,479 बढ़ गए और मृत्यु की संख्या 3,509 और बढ़ गई। इसी तरह बीते माह 9 जून को बिहार में भी पुरानी मौतों को जोड़ा गया था जिसके बाद देश में हुई मौतों का आंकड़ा 6,139 तक पहुंच गया था। महाराष्ट्र में बीते 24 घंटों में 9,389 नए संक्रमित मिले हैं और 7,510 लोग संक्रमण से ठीक हुए हैं। वहीं 3,656 संक्रमितों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 62.29 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 60 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.30 लाख लोगों की मौत हुई है। अभी यहां 94,593 लाख सक्रिय मामले हैं।
अहमदाबाद,पेगासस जासूसी मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने विपक्ष की मानसिकता को देश विरोधी बताया है। रुपाणी ने कहा कि विकास विरोधी टुकड़े-टुकड़े गैंग के अर्बन नक्सली दुनिया में भारत की छवि को खराब करना चाहते हैं। रूपाणी का कहना है कि कांग्रेस देश विरोधी ताकतों के हाथों में खेल रही है। देश में विपक्ष समेत कई नामी-गिरामी लोगों की जासूसी कराने के मामले पर देश में मच रहे हो हल्ले के बीच मुख्यमंत्री ने कहा है कि विपक्ष की मानसिकता ही देश विरोधी है वह देश विरोधी ताकतों के हाथों में खेल रही है। संसद के सत्र से ठीक पहले जासूसी के मामले को उछाला जाना महज संयोग नहीं है। सत्ता से बेदखल हुई कांग्रेस सत्ता प्राप्ति के लिए तड़प रही है। देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाने के बदले कांग्रेस देश के विकास में बाधक बनने का काम कर रही है। संसदीय परंपरा में विघ्न कांग्रेस चाहे तो विपक्ष के रूप में रचनात्मक भूमिका निभा सकती है लेकिन इसके बदले वह व्यर्थ के विरोध में उतरी हुई है। राफेल डील मामला हो किसानों के हित में लाए गए कृषि दिल की बात हो अथवा देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सेना की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक हो, हर मामले में कांग्रेस ने नकारात्मक व देश विरोधी भूमिका अदा की है। कांग्रेस को विरोध की राजनीति व अप प्रचार करने के बदले देश की जनता ने नकार दिया। सत्ता से विमुख हुई कांग्रेस फिर से सत्ता हासिल करने के लिए बुरी तरह तड़प रही है। संसद का सत्र शुरू हो उससे पहले ही पेगासस जासूसी का मामला उछाल कर देश को दुनिया में बदनाम करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने कई दशकों तक सत्ता का सुख होगा है इसलिए अब वह सत्ता के बिना तड़प रही है जैसे पानी के बिना मछली तड़पती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल के नए मंत्रियों का परिचय संसद के सदस्यों से करा रहे थे उस संसदीय परंपरा में विघ्न डालते हुए कांग्रेस ने संसद की कार्यवाही को ठप कर दिया। 45 देश कर रह हैं पेगासस का इस्तेमाल मुख्यमंत्री रुपाणी यहीं पर नहीं ठहरे उन्होंने कहा कि 2013 में यूपीए सरकार ने 9000 फोन वह 500 ईमेल की जासूसी कराने की बात स्वीकार की थी। राजस्थान की कांग्रेस सरकार अपने ही मंत्रियों व विधायकों के फोन टेप कराती है इसके सबूत खुद सरकार ने जांच एजेंसी के समक्ष पेश किए हैं। भारत में पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं हुआ है आरोप लगाने वालों ने इसके कोई सबूत नहीं दिए इसके बावजूद कांग्रेस तथा देश विरोधी ताकतें बेवजह देश को बदनाम करने पर तुले हुए हैं। रुपाणी ने यह भी बताया कि दुनिया के 45 देश एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि भारत में इसको उपयोग में नहीं लिया जा रहा है संसद में सरकार ने ऐसी किसी भी तरह की घटना को नकार दिया इसके बावजूद बेवजह कुप्रचार किया जा रहा है। अर्बन नक्सल गैंग, अफजल गुरु की सजा को लेकर उच्चतम न्यायालय को हत्यारा बताने वाले लोग, सेना की एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाले लोग, किसान हित में लाए गए कृषि बिलों को बदनाम करने वाले लोग, राफेल के मामले में झूठा प्रचार करने वाले लोग तथा जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग दुनिया में भारत की छवि को खराब करना चाहते हैं।
लखनऊ मशहूर शायर मुनव्वर राना के एक बयान के बाद योगी सरकार के मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा है कि जो भी लोग भारतीयों के खिलाफ खड़े होंगे, उन्हें एनकाउंटर्स में मार गिराया जाएगा। मुनव्वर राना ने कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा यूपी के सीएम बनेंगे तो वह प्रदेश छोड़ देंगे। आनंद स्वरूप शुक्ला ने मुनव्वर राना के इस बयान का जवाब देते हुए कहा कि कुछ लोग 1947 में भारत के बंटवारे के बाद देश को फिर से बांटने की साजिश से यहां रुक गए थे, मुनव्वर राना उनमें से एक हैं। कहा- 'जो मुसलमान साजिश के तहत रुके, राना उनमें से एक' आनंद स्वरूप शुक्ला ने कहा, '1947 में जो मुसलमान साजिश के तहत भारत में रुके थे कि वो भारत के टुकड़े करेंगे, मुनव्वर राना उनमें से एक हैं। वो सारे लोग जो भारतीयों के खिलाफ खड़े होंगे, एनकाउंटर में मार दिए जाएंगे। जो लोग ये बात कह रहे हैं कि वो यूपी छोड़ देंगे, वो समझ लें कि इसका वक्त आ चुका है। योगी सरकार के खिलाफ राना ने दिए बयान बता दें कि बीते कई दिनों से मुनव्वर राना प्रदेश में कानून व्यवस्था समेत तमाम मुद्दों पर योगी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। हाल ही में मुनव्वर राना के बेटे तबरेज राना पर प्लान्ड तरीके से खुद पर हमले की झूठी साजिश रचने और अपने रिश्तेदारों को फंसाने की कोशिश का आरोप लगा है। इस मामले में बीते दिनों राना के घर पुलिस भी पहुंची थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। राना ने तमाम घटनाक्रमों के बीच कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा यूपी के सीएम बनेंगे तो वह प्रदेश छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा होने पर वो मान लेंगे कि यूपी अब मुसलमानों के रहने लायक प्रदेश नहीं रहा।
अमृतसर पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद नवजोत सिंह सिद्धू लगातार कांग्रेस विधायकों और नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। पिछले दो दिन में वह अधिकतर पार्टी विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। इसी के साथ अमृतसर जाने के रास्ते जिस तरह से पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं ने उनपर प्यार लुटाया, उससे जाहिर है कि नवनियुक्त पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कैडर के बीच अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। इसी सिलसिले में पंजाब कांग्रेस के करीब 62 विधायकों ने सिद्धू ने अपने अमृतसर स्थित आवास में बुलाया। सिद्धू ने विधायकों को अपने आवास पर सुबह के नाश्ते के लिए बुलाया था। सिद्धू के घर पर इकट्ठा हुए विधायक और मंत्रियों की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। एक ओर सीएम अमरिंदर सिंह अभी भी सिद्धू को लेकर अपने रुख पर कायम हैं और उनसे माफी की मांग कर रहे हैं, वहीं सिद्धू इन तस्वीरों के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। सिद्धू के आवास ब्रेक फास्ट के लिए पहुंचे पार्टी विधायक परगट सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'सिद्धू को माफी क्यों मांगनी चाहिए? यह कोई जनता का मुद्दा नहीं है। सीएम ने कई मुद्दे नहीं सुलझाए हैं। उलटा उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए।' कुछ पार्टी पदाधिकारियों का दावा है कि पार्टी काडर भी ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं क्योंकि जनवरी 2020 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पंजाब कांग्रेस प्रदेश कमिटी और जिला कमिटियों को भंग करने के बाद से संगठनात्मक कामकाज ठप था और पीपीसीसी समन्वय समिति की बैठक भी तबसे नहीं हुई थी। खटकड़ कलां में सिद्धू के स्वागत के लिए काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। ऐसा ही नजारा फगवाड़ा और जालंधर में भी देखने को मिला। यह स्पष्ट है कि पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी समय से हतोत्साहित महसूस कर रहे हैं, न सिर्फ संगठन में जड़ता, अंदरूनी कलह और नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता के चलते बल्कि इस फैक्ट के चलते भी कि अकाली दल के कार्यकर्ता पंजाब में सक्रिय होने लगे थे। दरअसल बीजेपी से तीन कृषि कानूनों को लेकर गठबंधन से अलग होने से पहले ही अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपने कार्यकर्ताओं को जमीन पर उतार दिया था। इसके बाद बीएसपी के साथ गठबंधन से भी विपक्षी दल को मदद मिलने की संभावना है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आम आदमी पार्टी के भी प्रदेश में तेजी से उभरने के चलते चिंता सताने लगी थी। कांग्रेस के आरटीआई सेल के वाइस चेयरमैन रह चुके जालंधर से संजय सहगल बताते हैं,' कार्यकर्ताओं को छिटकने से रोकने के लिए सिद्धू की नियुक्ति हुी। बड़ा मुद्दा पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना था और अब पार्टी काडर में नया जोश दिखाई दे रहा है।' सिद्धू के अमृतसर दौरे के साथ ही जहां उन्होंने स्टेट यूनिट के कायाकल्प के लिए लगातार कांग्रेस कार्यकर्ता और पंजाब मॉडल की बात की, अब उनके और सीएम अमरिंदर सिंह के बीच की लड़ाई दो स्तर पर आ गई है- एक विधायक और दूसरा जमीन पर पार्टी काडर के स्तर पर। एक कांग्रेस विधायक ने कहा, पार्टी की जीत के लिए उसके कार्यकर्ताओं में आत्म विश्वास होना चाहिए और उन्हें आक्रामक होना चाहिए। सिद्धू के लोगों की बीच पहले दौरे से इसकी शुरुआत हो रही है।
नई दिल्ली कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सिजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई है। राज्यों की ओर से इसकी सूचना नहीं दी गई है, संसद में सरकार की ओर से आए इस जवाब के बाद सियासी घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने सरकार के ऊपर कई आरोप लगाए हैं। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों पर पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि किसी राज्य ने नहीं कहा कि ऑक्सिजन की कमी से मौत हुई है। संबित पात्रा ने बुधवार कहा कि केंद्र कह रहा है कि किसी भी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश ने ऑक्सिजन की कमी से मौत हुई हो इस पर आंकड़ा नहीं भेजा। किसी ने भी नहीं कहा कि उनके राज्य में ऑक्सिजन की कमी से कोई मौत हुई है। इसलिए इसके आंकड़े नहीं हैं। संबित पात्रा ने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या ये डेटा केंद्र ने बनाया नहीं, राज्यों ने नहीं भेजा कोई आंकड़ा। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बताएं कि क्या आपकी सरकार ने केंद्र को जो आंकड़े दिए हैं उसमें से एक भी मरीज की मौत ऑक्सिजन की कमी के कारण हुई है ऐसा लिखकर दिया है क्या। बीजेपी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए संबित पात्रा ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, संजय राउत समेत दूसरे नेताओं पर कई आरोप जड़ दिए। संबित पात्रा ने कहा कि वैक्सीन हो या महामारी हर विषय में झूठ और भ्रम फैलाना इनकी आदत है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली और देश के कई जगहों पर ऑक्सिजन की कमी से मौतें हुईं।ऑक्सिजन की कमी से जो मौतें हुई हैं उन्हें 5 लाख मुआवजा देने के लिए हमने कमेटी बनाई थी जिसे उपराज्यपाल ने भंग कर दिया। कांग्रेस ने मंगलवार को स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार पर यह 'गलत सूचना' देकर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया कि कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सिजन की कमी के कारण किसी की मौत नहीं हुई। कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल ने कहा कि वह मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाएंगे क्योंकि उन्होंने सदन को 'गुमराह' किया है। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि मैं यह सुनकर अवाक हूं। ऑक्सिजन की कमी से जिन्होंने अपने लोगों को खोया है यह बयान सुनकर उनपर क्या बीत रही होगी। सरकार के खिलाफ मुकदमा होना चाहिए क्योंकि झूठ बोला गया है। एक सवाल के जवाब में सरकार ने राज्यसभा में कहा कि कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सिजन की कमी से किसी के मरने की कोई सूचना किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से नहीं है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब में कहा कि स्वास्थ्य राज्यों का विषय है और उनकी ओर से कोविड से हुई मौत की सूचना दी जाती है लेकिन इसमें भी ऑक्सिजन की कमी से किसी मौत की सूचना नहीं है।
नई दिल्ली। तालिबान को लेकर भारत की आशंका सच साबित हो रही है। अफगानिस्तान से जो सूचनाएं आ रही हैं उससे यह बात पता चली है कि तालिबान के साथ वहां अफगानी सेना और जनता पर हमला करने वालों में पाकिस्तान में पनाह पाए 21 आतंकी संगठनों के सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना शुरू कर दिया है। इन सूचनाओं से भारत की चिंता भी बढ़ी है क्योंकि जिन आतंकी संगठनों के तालिबान के साथ शामिल होने की बात हो रही है वे सभी भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। इन संगठनों का तालिबान के साथ युद्धरत होना, कश्मीर को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को भी बढ़ा रहा है। भारत में अफगानी राजदूत फरीद मामुंदजई ने आपसी संपर्को के बारे में दी जानकारी अफगानिस्तान के भारत में राजदूत फरीद मामुंदजई ने 'दैनिक जागरण' को एक साक्षात्कार में तालिबान और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के आपसी संपर्क के बारे में विस्तार से बताया। मामुंदजई के मुताबिक तालिबान का पाकिस्तानी संपर्क किसी से छिपा नहीं है। ये संगठन पिछले दो दशक से पाकिस्तान में फलफूल रहे थे और पाकिस्तानी सेना उन्हें पूरी शरण दे रही थी। अब हमें पता चला है कि अफगानिस्तान में तालिबान के साथ 21 आतंकी संगठन भी शामिल हैं। ये सारे संगठन अभी तक पाकिस्तान में सक्रिय रहे हैं। इनमें जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा भी शामिल हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी ताशकंद में कनेक्टिविटी पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था कि पाकिस्तान से 10 हजार आतंकियों ने अफगानिस्तान में तालिबान की मदद के लिए घुसपैठ की है। अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने ट्वीट किया है कि तालिबान के गिरोह में अलकायदा, इस्लामिक संगठन और लश्कर के आतंकी पूरी तरह से शामिल हैं। जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय आतंकी शामिल पाकिस्तान की तरफ से पोषित लश्कर-ए-जांघवी, तहरीक-ए-तालिबान के सदस्यों के भी तालिबान के साथ लड़ाई में शामिल होने की सूचना भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिली है। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने दो वर्षो से इन आतंकी संगठनों को चुप्पी साधने को कहा था क्योंकि उसे मालूम था कि देर-सबेर अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान के साथ इन आतंकियों की अफगानिस्तान में घुसपैठ करवाई जाएगी। आतंकी संगठनों के साथ उसकी साठगांठ को लेकर रूस और चीन भी सतर्क सूत्रों ने बताया है कि पिछले सात दिनों से अफगानिस्तान को लेकर जितनी भी शांति वार्ताएं हुई हैं उसमें गनी सरकार ने तालिबान के साथ अंतरराष्ट्रीय तौर पर घोषित आतंकी संगठनों के शामिल होने का मुद्दा उठाया है। तालिबान के आक्रामक रवैये और आतंकी संगठनों के साथ उसकी साठगांठ को लेकर रूस और चीन भी सतर्क हैं। लेकिन संभवत: अपनी कूटनीतिक वजहों से ये देश खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पहले शंघाई सहयोग संगठन और उसके बाद ताशकंद के कनेक्टिविटी सम्मेलन में तालिबान के आतंकी स्वरूप और इससे अफगानिस्तान में आतंकवाद की समस्या गंभीर होने की बात कही थी।
मुंबई,अभिनेता शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को अश्‍लील फिल्‍म बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस ने जानकारी दी कि उसकी क्राइम ब्रांच की संपत्ति प्रकोष्ठ ने अब तक राज कुंद्रा सहित कुल 11 लोगों को अश्‍लील फिल्‍म बनाने से संबंधित एक मामले में गिरफ्तार किया है। बता दें कि व्यावसायी राज कुंद्रा मंगलवार को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष पेश हुए, जहां उन्हें 'अश्लील फिल्में बनाने और कुछ ऐप्स के माध्यम से प्रकाशित करने' से संबंधित एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा द्वारा मंगलवार तड़के राज कुंद्रा को जेजे अस्पताल में चिकित्सा परीक्षण के लिए लाया गया। बाद में उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त के कार्यालय ले जाया गया। मुंबई पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले ने बताया, 'वह मुख्य साजिशकर्ता प्रतीत होता है। हमारे पास इस संबंध में पर्याप्त सबूत हैं।' बता दें कि फरवरी 2021 में क्राइम ब्रांच मुंबई में अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें कुछ ऐप के जरिए प्रकाशित करने का मामला दर्ज किया गया था। नागराले ने एक बयान में कहा, 'हमने इस मामले में 19 जुलाई, 2021 को राज कुंद्रा को गिरफ्तार किया है, क्योंकि वह इसके प्रमुख साजिशकर्ता प्रतीत होते हैं। हमारे पास इस संबंध में पर्याप्त सबूत हैं। कृपया जांच जारी है।' गौरतलब है कि राज कुंद्रा का विवादों से पुराना नाता रहा है। मॉडल और अभिनेत्री पूनम पांडे ने भी राज कुंद्रा और उनके सहयोगी पर उनकी तस्‍वीरों का गलत इस्‍तेमाल करने का आरोप लगाया था। हालांकि, राज कुंद्रा ने तब आरोपों को खारिज कर दिया था। लेकिन इस बार मामला गंभीर नजर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि उनके पास राज कुंद्रा के खिलाफ पुख्‍ता सबूत हैं। अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी इस मामले में हो चुकी है। शिल्‍पा शेट्टी का अभी तक इस मामले में कोई बयान सामने नहीं आया है।
नई दिल्ली,कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बकरीद के अवसर पर लाकडाउन से संबंधित प्रतिबंधों में ढील दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह चौंकाने वाली स्थिति है कि केरल सरकार ने लॉकडाउन मानदंडों में ढील देने में व्यापारियों की मांग को मान लिया है। केरल सरकार ने बकरीद के मद्देनजर लॉकडाउन प्रतिबंधों में तीन दिनों के लिए छूट देने का ऐलान किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को आदेश दिया कि वह उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मामले में दिए गए कोर्ट के आदेश का पालन करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी प्रेशर ग्रुप या धार्मिक समूह को लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। केरल सरकार ने आगामी बकरीद त्योहार को ध्यान में रखते हुए 18, 19 और 20 जुलाई को लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा की है। कांवड़ यात्रा पर उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहलेसे लिए गए स्वत: संज्ञान मामले में दिल्ली निवासी पीकेडी नांबियार ने हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है। इसमें कहा गया है कि कोरोना काल में यात्रा पर शीर्ष अदालत द्वारा जताए गए असंतोष के बावजूद, केरल सरकार कोविड-19 के मानदंडों में ढील देकर लापरवाही बरत रही है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह शीर्ष अदालत में पेश होंगे। नांबियार ने तर्क दिया कि केरल में कोविड मामलों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में त्योहार के लिए मंजूरी देना खतरनाक हो सकता है। याचिका में कहा गया है, 'यह चौंकाने वाला है कि एक चिकित्सा आपात स्थिति में राज्य सरकार इस तरह के उपायों के माध्यम से नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार का यह कदम इस अदालत द्वारा पारित 16 जुलाई के आदेश का पूरी तरह से उल्लंघन है।' 16 जुलाई को शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर कांवड़ यात्रा पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था।
नई दिल्ली, भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए, 'प्रोजेक्ट-75 इंडिया' के तहत रक्षा मंत्रालय ने भारत में प्रोजेक्ट -75 इंडिया के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। यह निविदा (टेंडर) मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो को जारी किया गया है। भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट -75 भारतीय नौसेना और मेक इन इंडिया की ताकत को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को प्रोजेक्ट-75 के तहत छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया। रक्षा सूत्रों ने एएनआइ को बताया, 'देश के भीतर छह पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए आज टेंडर जारी किया गया है। टेंडर मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो को जारी किया गया है।' साथ ही उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदार के रूप में पहचाने जाने वाली दो भारतीय कंपनियां अब फ्रांस, जर्मनी, रूस, दक्षिण कोरिया और स्पेन की फर्मों सहित पांच वैश्विक मूल उपकरण निर्माताओं में से प्रत्येक में एक भागीदार का चयन करेंगी। आपको बता दें कि प्रोजेक्ट 75 के तहत 4 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में निविदा जारी करने या प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) को मंजूरी दी गई थी। पनडुब्बियों होंगी भारी-भरकम मारक क्षमता से लैस केंद्रन सरकार ने हमेशा से भारतीय सुरक्षा पर बल दिया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना को जल्द ही पारंपरिक पनडुब्बियों (सबमरींस) मिलने वाली है। प्रोजेक्ट 75-इंडिया के तहत, नौसेना छह पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण करेगी जो मुंबई में मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड में निर्माणाधीन स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियों से बड़ी होंगी। पनडुब्बियों को भारी-भरकम मारक क्षमता से लैस किया जाएगा ताकि नावों में कम से कम 12 लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LACM) के साथ-साथ एंटी-शिप क्रूज मिसाइल (ASCM) हों। इन पनडुब्बियों से यह तो तय है कि भारतीय नौसेना की ताकत को बल मिलेगा और समंदर के रास्ते कड़ी सुरक्षा से लैस रहेंगे। प्रोजेक्ट 75 पास किया गया टेंडर देश की सुरक्षा और भारत के रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
लखनऊ,इजरायल के एक साफ्टवेयर पेगासस के जरिये जासूसी के ताजा विवाद पर विपक्षी दलों के बवाल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको विपक्ष का खराब आचरण बताया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में मीडिया को संबोधित किया और कहा कि इस तथाकथित जासूसी कांड पर हंगामा कर विपक्ष ने विश्व पटल पर देश की छवि को खराब करने का काम किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर हमला बोला है। योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत को अस्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया। लोकभवन में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में योगी ने कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति के जरिये देश और नेतृत्व को दुनिया में बदनाम करना चाहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्ष विश्व पटल पर देश की छवि को खराब कर रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण काल के दौरान भी विपक्ष की नकारात्मक रवैये से देश की छवि खराब हुई, लेकिन भारत की बाद में सभी देशों ने जमकर सराहना की थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष पूरी तरह नकारात्मक भूमिका में है। इसी दौर में विपक्ष अब तो जाने-अनजाने उन अंतरराष्ट्रीय साजिशों का शिकार हो रहा है जो किसी न किसी रूप में भारत को अस्थिर और अस्त-व्यस्त करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना कालखंड के अंदर विपक्ष के इस नकारात्मक रवैये के कारण भारत की छवि पहले ही काफी आहत हुई। तथ्यहीन और झूठे आरोप लगाकर देश के यशस्वी नेतृत्व को बदनाम करना, देश की छवि को लगातार धूमिल करना विपक्ष के एजेंडे का हिस्सा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने और भारत को अस्थिर करने के लिए जिन मंसूबों के साथ विपक्ष काम कर रहा है वो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही हुए हंगामे को लेकर विपक्ष की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संसद अपनी बात रखने का मंच है, लेकिन विपक्ष मनगढ़ंत और झूठे आरोप लगाकर सदन न चलने देने की साजिश रच रहा है।
नयी दिल्ली, सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि अवैध रोहिंग्या प्रवासी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इस तरह की खबरें हैं कि उनमें से कुछ गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्य रितेश पांडेय के प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ‘‘अवैध प्रवासी (रोहिंग्या समेत) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। कुछ रोहिंग्या प्रवासियों के गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहने की खबरें हैं।’ राय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल कर अनुरोध किया गया है कि रोहिंग्या लोगों को भारत से निर्वासित नहीं किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि अदालत ने रोहिंग्या के निर्वासन पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया है।’’
नयी दिल्ली,सरकार ने मंगलवार को कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत केंद्र एवं राज्यों की एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अनाज की खरीद की जा रही है तथा किसान संगठनों को तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर जोर देने की बजाय कृषि अधिनियमों के हिस्सों पर उनकी चिंताओं को लेकर चर्चा करनी चाहिए ताकि उनका समाधान निकाला जा सके । लोकसभा में मनीष तिवारी तथा बेन्नी बेहनन के प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह बात कही । सदस्यों ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए पूछा था कि क्या किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किन्हीं विशिष्ट प्रस्तावों पर विचार विमर्श किया जा रहा है ? इस पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए सरकार और आंदोलनकारी किसानों संगठनों के बीच अभी तक 11 दौर की वार्ता हुई है । उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार मुद्दों के समाधान के लिए आंदोलनकारी किसान संगठनों के साथ गंभीरता, संवेदनशीलता और सक्रिय रूप से चर्चा करती है । ’’ तोमर ने कहा कि चर्चा के विभिन्न दौर के दौरान सरकार ने किसान संगठनों से कृषि कानूनों के प्रावधानों के संबंध में चर्चा करने का निरंतर आग्रह किया ताकि अगर उन्हें किसी प्रावधान को लेकर कोई आपत्ति हो तो उसका निराकरण किया जा सके । उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन किसान संगठनों द्वारा केवल कृषि कानूनों को निरस्त करने पर बल दिया गया । कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष दोनों फसल मौसमों में उचित औसत गुणवत्ता वाली 22 प्रमुख वस्तुओं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है । उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत केंद्र एवं राज्यों की एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की जा रही है । तोमर ने कहा कि किसान संगठनों को स्पष्ट किया गया है कि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर जोर देने की बजाए कृषि अधिनियमों के खंडों पर उनकी चिंताओं पर चर्चा करनी चाहिए ताकि उनका समाधान निकाला जाए ।
नई दिल्ली जम्मू- कश्मीर में परिसीमन आयोग की इस महीने की शुरुआत में चर्चा के दौरान कश्मीरी पंडित संगठनों ने एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत - एक या अधिक निर्वाचन क्षेत्र को केवल जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी पंडित प्रवासियों के चुनाव और मतदान के लिए आरक्षित हो। इस प्रस्ताव में एकमात्र ऐसे 'फ्लोटिंग' निर्वाचन क्षेत्र सांघा का हवाला दिया गया है जो सिक्किम में है। यह देश का एकमात्र निर्वाचन क्षेत्र है जिसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है और जिसके लिए राज्य के भीतर 51 मठों के साथ पंजीकृत बौद्ध भिक्षु ही चुनाव लड़ सकते हैं और मतदान कर सकते हैं। इकोनॉमिक्स टाइम्स के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि भेजे गए प्रस्ताव में आरक्षण के लिए सांघा मॉडल का जिक्र किया गया है। भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ कश्मीर पंडित नेता अश्विनी कुमार चुरंगू ने इकोनॉमिक्स टाइम्स से पुष्टि करते हुए कहा कि आयोग को ऐसा प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि भारत में धार्मिक आधार पर किसी भी आरक्षण की अनुमति नहीं है, इसलिए हमने सिक्किम के मामले का हवाला दिया जहां लामा संघों के लिए उनकी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र अलग रखा गया था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा। हम कश्मीरी पंडित प्रवासियों के लिए एक समान मॉडल का अनुरोध कर रहे हैं क्योंकि यह हम पर भी लागू होता है। परिसीमन आयोग अपने सीमित संदर्भ की शर्तों और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 से बाध्य है, जो केवल एक श्रेणी- अनुसूचित जनजाति के लिए नई आरक्षित सीटें बनाने का प्रावधान करता है। सिक्किम में विधानसभा संख्या 32 सांघा मठ संघों के अनुरोध पर सिक्किम राज्य परिषद के लिए 1958 में बनाया गया था। 1975 के बाद भी सिक्किम के भारत के राज्य बनने के बाद भी इसे अपने विशेष चरित्र के साथ बनाए रखा गया। भारत के संविधान का अनुच्छेद 371 (एफ) सिक्किम के विशेष चरित्र और तत्कालीन राज्य के विभिन्न कानूनों की रक्षा करता है। 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा था। शीर्ष अदालत ने माना कि सांघा सांस्कृतिक रूप से पिछले 300 वर्षों से सिक्किम की परिषद के निर्णय लेने का हिस्सा थे और राज्य के चोग्याल राजाओं के समय से थे और इसलिए फैसला सुनाया कि यह आरक्षण था विशुद्ध रूप से धर्म आधारित नहीं है और इसलिए असंवैधानिक नहीं है। चुरंगू और अन्य कश्मीरी पंडित संगठनों ने इसका हवाला दिया है। उन्होंने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि सांघामॉडल को सुगम नहीं बनाया जा सकता है, तो पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश के समान एक मॉडल पर विचार किया जाना चाहिए। जहां केंद्र तीन सीटों के लिए सदस्यों को नामित करता है और इस प्रक्रिया को हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। हमने अब इसे परिसीमन आयोग से लेकर चुनाव आयोग, पीएमओ और गृह मंत्रालय तक सभी अधिकारियों के साथ उठाया है। कुछ तो करना ही होगा।
इस्‍लामाबाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को लेकर दिए बयान पर पाकिस्‍तान को तीखी मिर्ची लगी है। पाकिस्‍तान ने जयशंकर के बयान की निंदा करते हुए कहा कि इसने भारत का असली रंग दिखा दिया है। साथ ही कहा कि इस बयान से पाकिस्‍तान का वह दावा भी सही साबित होता है कि भारत एफएटीएफ में नकारात्‍मक भूमिका निभाता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि यह मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि पाकिस्तान FATF की ग्रे सूची में बना हुआ है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता जाहिद हाफ‍िज ने कहा कि उनका देश लगातार अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को यह बताता रहता है कि भारत एफटीएफ का राजनीतिकरण कर रहा है। साथ ही वैश्विक संस्‍था की प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है। उन्‍होंने दावा किया कि पाकिस्‍तान एफटीएफ के एक्‍शन प्‍लान को पूरा करने के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रहा है लेकिन भारत निंदनीय तरीके से हमारे प्रयासों पर संदेह जता रहा है। 'पाकिस्‍तान एफएटीएफ तक ले जाएगा बयान' जाहिद ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री के बयान को पाकिस्‍तान एफएटीएफ तक ले जाएगा। इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि पाकिस्तान को FATF की ग्रे सूची में डाल दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से नामित आतंकवादियों के खिलाफ एक्शन न लेने की वजह से FATF की नजर में अब भी पाकिस्तान है और निगरानी सूची में है। विदेश मंत्री ने साथ ही कहा कि मोदी सरकार ने दुनिया को बता दिया है कि भारत चीन के किसी दबाव में नहीं आएगा। भाजपा नेताओं के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने रविवार कहा कि भारत ने एलएसी पर उल्लंघन के लिए चीन को 'उचित जवाब' दिया था। उन्होंने कहा कि लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को भारत के प्रयासों के कारण संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगाया गया है। जयशंकर ने कहा, 'FATF आतंकवाद के लिए फंडिंग पर नजर रखता है और आतंकवाद का समर्थन करने वाले काले धन से निपटता है। हमारी वजह से पाकिस्तान FATF की नजरों में है और उसे ग्रे लिस्ट में रखा गया है। हम पाकिस्तान पर दबाव बनाने में सफल रहे हैं और तथ्य यह है कि पाकिस्तान का व्यवहार बदल गया है क्योंकि भारत की ओर से कई प्रकार से दबाव डाला गया है।'
नई दिल्ली मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में मोदी कैबिनेट में शामिल किए गए पश्चिम बंगाल के एक सांसद को सोमवार को कथित तौर पर 'बांग्लादेशी' बताया। इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण की भी मांग की गई। इस मुद्दे पर हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दो बार के स्थगन के बाद दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद के जिन सहयोगियों की सूची आज सदन के पटल पर रखी है उनमें एक राज्यमंत्री कथित तौर पर बांग्लादेशी हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में एक नोटिस दिया है। खड़गे ने कहा वह बांग्लादेशी हैं या नहीं, यह जानने को मुझे पूरा अधिकार है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया। सदन के नेता पीयूष गोयल ने विपक्षी सदस्यों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया और इसमें सच्चाई नहीं होने का दावा करते हुए उपसभापति हरिवंश से इसे सदन की कार्यवाही से बाहर निकालने का आग्रह किया। उन्होंने कहा जिस प्रकार की बेबुनियाद बातें सदन में रखने की कोशिश की जा रही है, उसकी हम घोर निंदा करते हैं। इसमें सत्यता नहीं है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों पर समाज के एक वर्ग विशेष को अपमानित करने का आरोप लगाया और उपसभापति से विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए विषय को कार्यवाही में शामिल नहीं करने का अनुरोध किया। इसके जवाब में उपसभापति हरिवंश ने कहा इसका परीक्षण किया जाएगा। वहीं संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में भी जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिपरिषद के नये सदस्यों का परिचय नहीं करा सके। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्यों की नारेबाजी जारी रहने के कारण सदन की बैठक को एक बार के स्थगन के बाद 3:30 बजे तक के लिए दोबारा स्थगित कर दिया गया।
नई दिल्ली,देश में कोरोना के नए मामलों की संख्या लगभग स्थिर है। बीते 24 घंटों में देश भर में कोरोना संक्रमण के 38 हजार नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 500 से कम मौतें हुई हैं। देश में कोरोना के नए मरीज और ठीक होने वालों की संख्या लगभग स्थिर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटे में 38,164 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इस दौरान 499 मरीजों की कोरोना से मौत हुई है। राहत की बात है कि लगातार पांचवें दिन मौत का आंकड़ा 600 से कम रहा है। इससे पहले 13 जुलाई को 625 लोगों ने इस महामारी से जान गंवाई थी। देश में कोरोना से ठीक हुए मरीजों के आंकड़ों की बात करें तो बीते 24 घंटे में देश में 38,660 मरीज ठीक हुए हैं। इसको मिलाकर कुल ठीक हुए मरीजों की संख्या 3.03 करोड़ पहुंच गई है। इसके अलावा कोरोना के सक्रिय मामले 24 घंटे में 995 कम हुए हैं। देश में अभी 4.21 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक कुल 3.11 करोड़ केस आए हैं जिसमें से 3.03 करोड़ ठीक हो चुके हैं। देश में कोरोना की स्थिति बीते 24 घंटे में कुल नए केस आए: 38,164 बीते 24 घंटे में कुल ठीक हुए: 38,660 बीते 24 घंटे में कुल मौतें: 499 अब तक कुल संक्रमित हो चुके: 3,11,44,229 अब तक ठीक हुए: 3,03,08,456 अब तक कुल मौतें: 4,14,108 अभी इलाज करा रहे मरीजों की कुल संख्या: 4,21,665 8 राज्यों में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लगे देश के 8 राज्यों में पूर्ण लॉकडाउन जैसी पाबंदियां हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, मिजोरम, गोवा और पुडुचेरी शामिल हैं। यहां पिछले लॉकडाउन जैसे ही कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक लॉकडाउन देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक लॉकडाउन है। यहां पाबंदियों के साथ छूट भी है। इनमें छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, नगालैंड, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।
नई दिल्ली,देश में ग्रामीण सर्किटों के विकास के लिए केरल और बिहार में कई परियोजनाओं को पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी (G Kishan Reddy) ने मंजूरी दी है। पर्यटन मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी संसद में दी। उन्होंने बताया कि इसके लिए निर्धारित नियमों के आधार पर मंत्रालय ने बिहार और केरल में ग्रामीण सेक्टर के विकास के लिए मंत्रालय ने परियोजनाओं का आवंटन किया है। 2017-18 में बिहार में प्रोजेक्ट गांधी सर्किट: भितिहरवा चंद्रहिया-तुरकौलिया के विकास के लिए 44.65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। केरल में मालानाड मालाबार क्रूज टूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए 80.37 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था ।
नई दिल्ली,भारत ने कोरोना टीकाकरण (Covid-19 Vaccination) के मोर्चे पर नया रिकॉर्ड बनाया है। भारत में अब तक कोरोना वैक्सीन की 40 करोड़ से अधिक डोज़ लग चुकी है। कोरोना टीकाकरण के मामले में चीन के बाद दूसरे नंबर पर भारत है। चीन के अलावा किसी भी देश में अब तक इतनी बड़ी संख्या में वैक्सीन नहीं लगी है। स्वास्थ मंत्रालय के आंकड़ों के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक देश भर में 40.49 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लग चुकी है। बीते एक दिन में 51 लाख से अधिक वैक्सीन डोज लगी है। भारत में टीकाकरण अभियान इस साल 16 जनवरी से शुरू हुआ था। फिलहाल देश में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। देश की एक तिहाई से ज्यादा आबादी को लगी वैक्सीन डोज आंकड़ों पर नज़र डालें तो अब तक देशभर में एक तिहाई से ज्यादा जनसंख्या को वैक्सीन की डोज लग चुकी है। ये उन लोगों के आंकड़े हैं जो वैक्सीन लगाने के योग्य है.। यानी जिनकी उम्र 18 साल से ज्यादा है। अब तक 25.2 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग गई है जबकि 8.7 फीसद लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है। भारत को वैक्सीन के मोर्चे पर अभी भी लंबी जंग लड़नी है। दो तिहाई लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ लगनी बाक़ी है। जम्मू और कश्मीर में दो पंचायतों में 100 फीसद टीकाकरण शनिवार को जम्मू और कश्मीर में दो पंचायतों ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए 100% टीकाकरण पूरा किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'मैं आशा [कार्यकर्ताओं] और जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में दो पंचायतों के लोगों को 100% टीकाकरण के लिए बधाई देना चाहता हूं। जिस तरह से वे टीकाकरण अभियान को सबसे दुर्गम स्थानों पर ले गए हैं, वह सराहनीय है।
नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने न्यूज वेबसाइट न्यूज क्लिक पर देश को बदनाम करने और देश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है। पात्रा ने कहा कि देश में एक ऐसा सरगना है जो देश को ही नीचे दिखाने के लिए काम कर रहा है, ये एक तरह की अंतरराष्ट्रीय साजिश है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि न्यूज क्लिक का एक ही मकसद है कि हिंदुस्तान की सरकार को फेल बताना और विदेश की कुछ ताकतों का एजेंडा चलाना। न्यूज क्लिक में बाहरी ताकतें फंड भेजती थीं। ये पीपीके नाम की कंपनी के अंतर्गत आती है। इन्होंने 9.59 करोड़ रुपये के एफडीआई को स्वीकार किया। इसमें मुख्य रूप से विदेश के 3 लोग सम्मिलित थे। इसके अलावा करीब 30 करोड़ रुपये इन्होंने विदेशों की अलग-अलग एजेंसियों से प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जो न्यूज क्लिक के बारे में तथ्य सामने आया है, इससे एक बात स्पष्ट है कि टूलकिट केवल हिंदुस्तान के कुछ राजनीतिक दल चला रहे हैं, ऐसा नहीं है। बल्कि भारत के बाहर भी एक ऐसी साजिश हो रही है, जो इस टूलकिट का हिस्सा है। पात्रा ने कहा, 'मीडिया की चादर ओढ़कर पोर्टल चलाने वाले कुछ एक्टिविस्ट हैं, जिनके साथ कुछ विदेशी ताकतें हैं और भारत के कुछ मेन स्ट्रीम के राजनेता भी हैं। इनका एक ग्रुप बना है। पूरे सामंजस्य के साथ ये काम करते हैं, इनका मकसद होता है देश में भ्रम, अराजकता फैलाना। पात्रा ने आगे कहा कि पूरे विश्व में हमारी वैक्सीन नीति को लेकर सराहना की गई, वैक्सीन मैत्री को लेकर सराहना की गई। हमारे देश और हमारी वैक्सीन नीति को बदनाम किया जाए, यह कुचेष्टा कुछ लोगों ने, कुछ संस्थाओं ने और कुछ पोर्टल्स ने की है। ये विदेशी फंडिंग के माध्यम से हो रहा था।
नई दिल्ली, केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत और नरेश टिकैत के बोल बिगड़ते जा रहे हैं। ये दोनों नेता अब सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इन दोनों किसान नेताओं के बीते कुछ दिनों के बयान जानने के बाद ऐसा लग रहा है कि अब ये केंद्र सरकार से आमने-सामने की लड़ाई लड़ने जैसा मन बना चुके हैं, इसी वजह से ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं। एक निजी टीवी चैनल से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत तो यहां तक बोल गए कि लगता है अब देश में युद्ध होगा। उधर किसान नेता और भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इंटरनेट मीडिया पर कुछ समाचार पत्रों की कटिंग को शेयर करते हुए लिखा कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करे अन्यथा नतीज़े भुगतने के लिए तैयार रहे। इससे पहले राकेश टिकैत ने 22 जुलाई को संसद भवन पर प्रदर्शन के लिए पोस्टर जारी करके एक बार फिर से दिल्ली पुलिस और सरकार को सुरक्षा के लिए तैयारी पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। किसान संसद भवन तक न पहुंचे इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। तमाम अटकलों को विराम देते हुए शनिवार देर शाम भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने घोषणा कर दी कि सूबे में आगामी विधानसभा चुनाव में भाकियू भी अपने प्रत्याशी उतारेगी। चौधरी नरेश टिकैत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाकियू केवल किसानों को ही प्रत्याशी बनाएगी। उन्होंने एलान किया कि हम ऐसे जनप्रतिनिधि बनाएंगे, जिनसे गलती होने पर भरी पंचायत में इस्तीफा लिया जाएगा। भाकियू के प्रभाव वाली सीटों पर ही पार्टी अपने प्रत्याशी खड़ा करेगी अथवा पूरे सूबे में, अकेले चुनाव लड़ेगी अथवा किसी दल के साथ गठबंधन कर, आदि विषयों पर निर्णय पांच सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में लिया जाएगा। आज किसान वर्ग पूर्ण रूप से खतरें में हैं, पांच सितंबर की महापंचायत मुजफ्फरनगर की धरती पर ऐतिहासिक होगी, हमें अपनी एक निगाह खेती पर और दूसरी आन्दोलन पर रखनी है । मुजफ्फरनगर की धरती एक क्रांति की धरती है:- चौधरी नरेश टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन शनिवार को सिसौली में आयोजित पंचायत में चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को देख लिया। जब इनकी सरकार आती है तो ये किसानों की नहीं सुनते इसीलिए आगामी विधानसभा चुनाव में भाकियू अपने उम्मीदवार उतारेगी। पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कालेज मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर महापंचायत होगी, आगे के निर्णय वहीं लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के जुल्म के खिलाफ किसानों को संगठित रहना होगा। यह आखिरी लड़ाई हम नहीं लड़ पाए तो किसान खत्म हो जाएंगे। भाजपा वाले हम पर हावी होने की कोशिश में हैं। सपा सरकार के दौरान शामली में जब हुकुम सिंह और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, हमने शामली जाकर उनकी मदद की थी।पंचायत में मौजूद देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह, लाटियान खाप के वीरेंद्र सिंह, कालखंडे के संजय कालखंडे और बत्तीसा खाप से शोकेंद्र सिंह ने पांच सितंबर की महापंचायत का समर्थन किया। गाजीपुर बार्डर से पंजाब के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल भी पंचायत में पहुंचा था।
नई दिल्‍ली,भारत संवैधानिक रूप से एक पंथनिरपेक्ष देश है, लेकिन यह आश्चर्य ही है कि यहां कुछ कानून धर्म और समुदाय के आधार पर बंटे हुए हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ और हिंदू कोड बिल इसका ही उदाहरण हैं। कानून के स्तर पर इस विभाजन को खत्म करना समय की जरूरत है। इसका एकमात्र समाधान है समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)। यूसीसी एक देश, एक कानून की अवधारणा का ही मूर्तरूप है। विगत शुक्रवार को तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने यूसीसी को वक्त की जरूरत बताते हुए इस विषय पर चल रही चर्चा को नई ताकत दी है। कुछ साल पहले तत्काल तीन तलाक के मामले में कानून बनने के बाद से यूसीसी को लेकर उम्मीद बढ़ी है। देश को असल मायने में पंथनिरपेक्ष यानी सेक्युलर बनाने की दिशा में यूसीसी अहम कड़ी है। आश्चर्य की बात है कि खुद को सेक्युलर कहने वाले राजनीतिक दल यूसीसी का पुरजोर विरोध करते हैं और हमेशा से इसकी पैरवी करती रही भाजपा को सांप्रदायिक माना जाता है। असल में यह केवल वोट की राजनीति है, जहां कुछ दल मुस्लिम वर्ग को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं और उस समुदाय में किसी भी सुधार में उनकी कोई रुचि नहीं है। तत्काल तीन तलाक के मामले में भी ऐसा ही विरोध देखने को मिला था। यूसीसी का विरोध करने वाला कोई पक्ष यह नहीं बताता है कि आखिर देश के हर नागरिक के लिए समान कानून होने से किसी वर्ग विशेष का नुकसान कैसे हो सकता है। सवाल यह भी है कि यहां इस मसले पर बखेड़ा खड़ा करने वाले यह भी नहीं बताते कि अमेरिका या अन्य देशों में जाकर वहां के कानून का पालन करने से जब किसी पंथनिरपेक्षता पर संकट नहीं आता है, तो भारत में सबके लिए समान कानून होना सांप्रदायिक मसला कैसे है? इस दिशा में हुए प्रयासों की पड़ताल आज बड़ा मुद्दा है। पुराना इतिहास अंग्रेजों की व्यवस्था: 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स ने उत्तराधिकार, शादी-विवाह और अन्य धार्मिक मामलों में दिए आदेश में कहा कि मुस्लिमों से संबंधित कुरान के कानून और हिंदुओं के लिए शास्त्र से जुड़े नियम-कानूनों का पालन किया जाए। निष्प्रभावी हुआ फतवा: 1817 में ब्रिटिश जजों ने फतवों की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया। एक प्रस्ताव पारित कर उन फतवों की बाध्यकारी प्रकृति को खत्म किया गया। मौजूद नियम-कानून: शादी-तलाक को लेकर विभिन्न धर्मो के लोगों के लिए अब तक कई कानून बनाए जा चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं- -द कनवर्ट्स मैरिज डिसोल्युशन एक्ट, 1866 -द इंडियन डिवोर्स एक्ट, 1869 -द इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 -द काजी एक्ट, 1880 -द आनंद मैरिज एक्ट, 1909 -द इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 -द चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट, 1929 -द पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936 -द डिसोल्युशन ऑफ मुस्लिम मैरिज एक्ट, 1939 -द स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 -द हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 -द फॉरेन मैरिज एक्ट, 1969 -द मुस्लिम वीमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट, 1986 मुस्लिम पर्सनल लॉ 1937 के शरई कानून के तहत मुस्लिमों के लिए कुछ पर्सनल कानून बनाए गए लेकिन अंग्रेजों ने मुस्लिमों पर इन कानूनों को थोपा नहीं। इसके सेक्शन तीन के अनुसार यह उन्हीं मुस्लिम पर लागू होता था जिन्होंने लिखित में इसके दायरे में आने की बात मानी थी। स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 अलग-अलग धर्मों के लोग इसके तहत अपनी शादी को पंजीकृत करवा सकते हैं। इसमें यह भी प्रावधान है कि किसी अन्य रूप में की गई शादी को भी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पंजीकृत किया जा सकता है (अगर यह इस कानून की जरूरतों को पूरा कर रहा हो)। आजाद भारत में पहल आजादी के बाद संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के पहले कानून मंत्री डॉ बीआर आंबेडकर ने समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश की तो इस प्रयास को संविधान सभा में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उस समय हिंदू कोड बिल तक ही इस सुधारवादी कदम को सीमित रखा। यह बिल हिंदुओं, सिखों, जैनियों और बौद्धों पर लागू होता है। इससे द्विपत्नी और बहुपत्नी प्रथा को समाप्त किया गया। महिलाओं को तलाक और उत्तराधिकार का अधिकार मिला। शादी के लिए जाति को अप्रासंगिक बनाया गया।
नई दिल्‍ली । बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरना काफी आम बात मानी जाती है। लेकिन ये आम सी बात अक्‍सर लोगों की जान ले लेती है। रविवार को राजस्‍थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्‍तर प्रदेश समेत कुछ अन्‍य राज्‍यों में भी इसकी वजह से गई लोगों की जान चली गई। राजस्‍थान में राज्य में 23 लोगों की मौत हो गई । वहीं 28 घायल हो गए । पीएम नरेंद्र मोदी समेत राज्यपाल कलराज मिश्र ने मृतकों के प्रति संवेदना जताई है। बिजली गिरने से जयपुर में ही करीब 16 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 11 की मौत जयपुर के आमेर किले पर बने वॉच टावर पर उस वक्‍त हुई जब ये लोग यहां पर सेल्‍फी ले रहे थे। हादसे पर पीएम मोदी की संवेदना हादसे के वक्‍त यहां पर करीब 35 लोग मौजूद थे। बिजली गिरने की वजह से कई लोग उछल कर नीचे पहाड़ी में जा गिरे। सरकार ने यहां पर रेस्‍क्‍यू मिशन चलाया हुआ है। घायलों को विभिन्‍न अस्‍पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ ही हालत नाजुक बताई जा रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इन घटनाओं में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्‍यक्‍त की है। अपने एक ट्वीट में उन्‍होंने लिखा है कि 'राजस्थान के कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इससे अत्यंत दुख हुआ है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।' क्‍यों चमकती है बिजली इस तरह की घटनाएं धरती पर लगभग हर जगह दिखाई देती हैं। इसलिए ये जानना जरूरी है कि आखिर ऐसा होता क्‍यों है। आपको बता दें कि बारिश के दिनों में अक्‍सर आसमान में बादल उमड़ते घुमड़ते दिखाई देते हैं। जब ये बादल विपरीत दिशा से आ रहे बादलों से टकराते हैं तो इससे इनमें मौजूद पानी की बूंदे चार्ज हो जाती हैं और एनर्जी जनरेट होती है जो सीधे धरती की तरफ आती है। इसकी ही वजह से कई बार हमें बिजली तड़तड़ाने की तेज आवाज सुनाई देती है। बिजली चमकने के बाद क्‍यों सुनाई देती है आवाज हालांकि ये आवाज बिजली चमकने के कुछ देर बाद सुनाई देती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि बिजली की रफ्तार आवाज की रफ्तार से काफी तेज होती है। इसलिए इसमें इतना अंतर दिखाई देता है। धरती से टकराने के लिए इसको एक कंडक्‍टर की जरूरत होती है। इसका ये काम आसान बनाते हैं धरती पर लगे बिजली के खंभे। ऐसे में यदि कोई इनकी चपेट में आता है तो उसकी जान भी जा सकती है। सॉफ्ट टिश्‍यूज को होता है नुकसान इंसान के शरीर पर इसका असर दूसरों की तुलना में कहीं अधिक होता है। इसकी चपेट में आने से डीपबर्न जैसी परेशानी आती है जिसमें हमारे टिश्‍यूज डैमेज हो जाते हैं। इसका असर हमारे नर्वस सिस्‍टम पर भी पड़ता है। इसकी चपेट में आकर व्‍यक्ति अपंग भी हो सकता है। 15 हजार डिग्री फारेनहाइट तक होता है तापमान वैज्ञानिकों के मुताबिक बिजली गिरना और बिजली चमकना दोनों ही अलग-अलग घटनाएं हैं आपको हैरानी होगी कि धरती पर बिजली गिरने की घटनाएं लगभग हर मिनट ही होती है। जब बिजली गिरती है तो वहां के आसमान का तापमान करीब 15 हजार डिग्री फारेनहाइट तक होता है। इस तरह से आई एनर्जी सूरज की गर्मी से बहुत अधिक गर्म होती है। बिजली गिरने की घटना कब और कहां होगी इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। एनडीआरएफ ने किया जागरुक आकाशीय बिजली से कैसे बचा जाए इसकी जानकारी देने के‍ लिए एनडीआरएफ ने कई ट्वीट किए हैं। इसमें इसको लेकर हर तरह की जानकारी दी गई है। आपको बता दें कि इसको लेकर कुछ मिथ्‍या भी हैं जिनके बारे में हमें जानना बेहद जरूरी है। बचाव के उपाय इससे बचने के उपाय की यदि बात करें तो यदि आप घर में हैं तो आंधी या बारिश के समय अपने टीवी, रेडियो, फ्रिज या अन्‍य दूसरी बिजली की चीजों के प्‍लग निकाल दें और इन्‍हें ऑफ कर दें। बारिश के दौरान मोबाइल का उपयोग करने से भी बचें। नंगे पांव फर्श पर न खड़ें हों। इलेक्ट्रिक एपलाइंस से दूरी बनाकर रखें। साथ ही ऐसी चीजों से भी दूर रहे जो बिजली गिरने पर इसके कंडक्‍टर की भूमिका में आ सकते हैं। जैसे लोहे के पाइप आदि। पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जानें से बचें और खुद को किसी इमारत के नीचे छिपकर बचाने की कोशिश करें।आपको बता दें कि किसी भी तरह की मजबूत चाहरदिवारी इंसान की जान बचा सकती है।
लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से रविवार को दो अलकायदा संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। इन गिरफ्तारियों के बाद अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस और बीजेपी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है। अखिलेश के बाद अब मायावती ने इन गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए हैं। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी पर कहा कि इसकी आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दावा सही है तो यह गंभीर मामला है और कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। आड़ में न हो राजनीति' मायावती ने ट्वीट किया, 'यूपी पुलिस का लखनऊ में आतंकी साजिश का भंडाफोड़ करने व इस मामले में गिरफ्तार दो लोगों के तार अलकायदा से जुड़े होने का दावा अगर सही है तो यह गंभीर मामला है। इस पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए वरना इसकी आड़ में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही है। 'इतने दिनों तक क्यों रहे बेखबर?' बीएसपी चीफ ने दूसरा ट्वीट किया और लिखा, 'यूपी विधानसभा आमचुनाव के करीब आने पर ही इस प्रकार की कार्रवाई लोगों के मन में संदेह पैदा करती है। अगर इस कार्रवाई के पीछे सच्चाई है तो पुलिस इतने दिनों तक क्यों बेखबर रही? यह वह सवाल है जो लोग पूछ रहे हैं। अतः सरकार ऐसी कोई कार्रवाई न करे जिससे जनता में बेचैनी और बढ़े।'
नई दिल्ली अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव है और सभी राजनीतिक दल इसकी तैयारियों में जुटे हैं। नए- नए वादे और नारों की शुरुआत हो चुकी है। लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर चुनावी वादों के पोस्टर लगे हैं जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इस पोस्टर में सपा की अगली सरकार प्रदेश में बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली का वादा किया गया है। अब तक इस प्रकार का वादा आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल करते आ रहे हैं। सपा इस चुनावी वादे के साथ जाती है तो बड़ा सवाल होगा कि आम आदमी पार्टी जो पहली बार बड़े पैमाने पर यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है वो इसका काट कैसे खोजेगी। केजरीवाल की राह पर समाजवादी पार्टी फ्री बिजली वो प्रमुख मुद्दा है जिसको हथियार बनाकर आम आदमी पार्टी भारी बहुमत के साथ दिल्ली में सत्ता में है। इस चुनावी वादे का तोड़ राज्य में बीजेपी भी नहीं खोज पाई थी। दिल्ली के इस फॉर्मूले को आम आदमी पार्टी AAP मुखिया अरविंद केजरीवाल दूसरे राज्यों में भी अपनाना चाहते हैं। पंजाब जहां पिछली बार सत्ता में आने से आम आदमी पार्टी रह गई वहां अगले साल चुनाव है। इस राज्य के लिए अरविंद केजरीवाल ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वादा किया है। केजरीवाल और उनकी पार्टी ने ऐसा ही वादा उत्तराखंड के लिए भी किया है। क्या होगा सपा के साथ गठबंधन पिछले दिनों आप सांसद संजय सिंह की सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात हुई। इस मुलाकात की चर्चा भी खूब हुई साथ ही यह भी अटकलें लगनी शुरू हो गई कि क्या अगला चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ेगी आम आदमी पार्टी। लखनऊ सपा कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में फ्री बिजली का वादा किया गया है और तय माना जा रहा है कि इस वादे को पार्टी चुनावों में प्रमुखता से उठाएगी। आम आदमी पार्टी यदि प्रदेश में अकेले चुनाव में जाती है और यह वादा सपा की ओर से भी किया गया तो आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल होगी। चुनाव में फ्री बिजली प्रमुख वादा प्रदेश में अभी पार्टी का जनाधार वैसा नहीं है। हालांकि पिछले कुछ समय से लगातार आम आदमी पार्टी यूपी में पार्टी को विस्तार देने में लगी है। आप सांसद संजय सिंह इसको लेकर काफी सक्रिय भी हैं। सस्ती बिजली का मुद्दा पार्टी प्रमुखता से उठाती है। अब सपा भी उसी राह पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। इसका मतलब यह तो तय है कि अगले चुनाव में यह मुद्दा अहम होने जा रहा है।
लखनऊ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की ओर से यूपी के जनसंख्या नियंत्रण बिल को लेकर विवादित बयान दिया गया है। खुर्शीद की ओर से बयान देने के बाद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद इसका जवाब दिया है। सलमान खुर्शीद के बयान पर सीएम योगी ने टाइम्स नाउ से बात करते हुए कहा कि जिसकी जैसी भावना और नीयत होती है वो वैसी ही बात करता है। सलमान खुर्शीद ने कहा था कि यूपी में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने से पहले योगी सरकार के मंत्रियों को ये बताना चाहिए कि उनके कितने बच्चे हैं। इसके साथ ही उन्हें ये भी बताना चाहिए कि कितने बच्चे जायज हैं और कितने बच्चे नाजायज हैं। जिसके जैसे कृत्य वो वैसे ही सोचता है: योगी फर्रुखाबाद में मीडिया से बात करते हुए सलमान खुर्शीद ने यह बयान दिया था। इससे जुड़े एक सवाल के जवाब में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी...जिनके भाव और जिनके कृत्य जैसे रहे हैं, वो वैसी ही बात करते हैं। जो इस धरती पर आया है, वो सब जायज है और हमारे लिए कुछ भी नाजायज नहीं है। पूर्व कानून मंत्री ने ऐसे शब्द का इस्तेमाल करने से पहले संकोच किया? योगी ने कहा कि ये कांग्रेस की सोच है और कांग्रेस ने इसी के अनुसार काम किया है। मुझे लगता है कि पूर्व कानून मंत्री को ही इसके बारे में सोचना चाहिए कि वो मानवता का अपमान कर रहे हैं या नहीं। क्या पूर्व कानून मंत्री के रूप में उन्हें ऐसे शब्द का प्रयोग करने में कोई संकोच आया या नहीं। जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट तैयार कांग्रेस नेता का बयान ऐसे वक्त में आया है, जबकि यूपी में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की तैयारी की जा रही है। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकारी योजनाओं का भी लाभ न दिए जाने का जिक्र है। आयोग ने ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट http://upslc.upsdc.gov.in/ पर अपलोड कर दिया है। 19 जुलाई तक जनता से राय मांगी गई है।
नई दिल्ली, एएनआइ। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से देश अब उबरने की राह पर है लेकिन केरल, महाराष्ट्र व पूर्वोत्तर राज्यों में अब भी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ये नई चिंताएं R फैक्टर के कारण शुरू हुई हैं जो बताता है कि कोरोना से संक्रमित एक व्यक्ति द्वारा दूसरे कितने व्यक्तियों को संक्रमित करने की संभावना है। संक्रामकता दर जो जून के अंतिम सप्ताह में कम हो रही थी वह अचानक 20 जून से 7 जुलाई के बीच की अवधि में बढ़ गई। इस अवधि के दौरान देश के जिन 10 राज्यों में कोरोना मामले के कारण चिंताएं बढ़ी उनमें से सात पूर्वोत्तर राज्य हैं। इनमें सिक्किम में सबसे अधिक कोरोना मामले आए। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले अधिक है वहां जमीनी स्तर पर केंद्र सरकार की टीम काम कर रही है। साथ ही कहा गया है कि कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है। महाराष्ट्र और केरल में कोविड-19 के बढ़े मामलों पर स्वास्थ्य मंत्रालय की डॉ भारती परवीन पवार (Dr Bharati Pravin Pawar) ने कहा, केंद्र सरकार की टीम जमीनी स्तर पर काम कर रही है। हम लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं, नियमित तौर पर राज्य सरकारों से फीडबैक ले रहे हैं। अभी कोविड-19 खत्म नहीं हुआ है।' केरल में 1 लाख से अधिक हैं सक्रिय मामले केरल में रविवार को कोविड-19 के 12,220 नए मामले और 97 संक्रमितों की मौत दर्ज की गई । इसके बाद अब तक राज्य में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 30,65,336 हो गया और अब तक मरनेवालों की संख्या बढ़कर 14,586 हो गई। वहीं 24 घंटों में 12,502 लोग स्वस्थ हुए और अब तक कुल स्वस्थ हुए लोगों की संख्या बढ़कर 29,35,423 हो गई। अभी केरल में 1,14,844 सक्रिय मामले हैं। यहां के संक्रमित जिलों में सबसे अधिक मलप्पुरम (1,861), कोझिकोड (1,428), त्रिशूर (1,307), अर्नाकुलम (1,128), कोल्लम (1,012), तिरुअनंतपुरम (1,009) और पलक्कड़ (990) में हैं। महाराष्ट्र में कम नहीं रहे मामले रविवार को महाराष्ट्र में 8,535 नए संक्रमित मिले। वहीं 6,013 लोगों ने संक्रमण को मात दिया और 350 लोगों की मौत हो गई। यहां अब तक 61.57 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 59.12 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.25 लाख लोगों की मौत हुई है। अभी राज्य में 1.16 लाख एक्टिव मामले हैं। त्रिपुरा में नहीं है डेल्टा प्लस का एक भी मामला भारत सरकार की ओर से बयान जारी कर बताया गया कि त्रिपुरा में डेल्टा प्लस का एक भी मामला नहीं है। इसमें बताया गया, 'त्रिपुरा में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले बढ़ने की खबर मिली। अप्रैल और मई 2021 के बीच 152 सैंपल के नतीजे पॉजिटिव आए और इन्हें जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए NIBMG कल्याणी भेजा गया था। इसमें डेल्टा प्लस के मामले नहीं थे। इसमें 3 सैंपल B.1.1.7 से संक्रमित पाए गए वहीं 11 सैंपल B.1.617.1 (कप्पा) और 138 B.1.617.2 (डेल्टा) से संक्रमित थे।' यहां संक्रमण के मामलों में कमी न देखते हुए अगरतला, रानीरबाजार, जिरानिया नगर, उदयपुर, कैलाशहर, धर्मनगर, खोवाई, बेलोनिया, कुमारघाट, तेलियामुरा, सोनमुरा नगर, अमरपुर नगर और सबरूम नगर में 17 जुलाई तक कोविड कर्फ्यू जारी रहने का ऐलान किया गया है। असम और मणिपुर का हाल असम (Assam) में 1,579 नए संक्रमित मिले, 2,793 लोग संक्रमण की चपेट से बाहर आए और 16 नई मौतें दर्ज की गई वहीं मणिपुर (Manipur) में 911 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 14 संक्रमितों की मौत हो गई। यहां 570 लोग संक्रमण से स्वस्थ हुए। यहां रिकवरी रेट 89.05 फीसद हो गई है।
नई दिल्ली, एएनआइ। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से देश अब उबरने की राह पर है लेकिन केरल, महाराष्ट्र व पूर्वोत्तर राज्यों में अब भी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ये नई चिंताएं R फैक्टर के कारण शुरू हुई हैं जो बताता है कि कोरोना से संक्रमित एक व्यक्ति द्वारा दूसरे कितने व्यक्तियों को संक्रमित करने की संभावना है। संक्रामकता दर जो जून के अंतिम सप्ताह में कम हो रही थी वह अचानक 20 जून से 7 जुलाई के बीच की अवधि में बढ़ गई। इस अवधि के दौरान देश के जिन 10 राज्यों में कोरोना मामले के कारण चिंताएं बढ़ी उनमें से सात पूर्वोत्तर राज्य हैं। इनमें सिक्किम में सबसे अधिक कोरोना मामले आए। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले अधिक है वहां जमीनी स्तर पर केंद्र सरकार की टीम काम कर रही है। साथ ही कहा गया है कि कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है। महाराष्ट्र और केरल में कोविड-19 के बढ़े मामलों पर स्वास्थ्य मंत्रालय की डॉ भारती परवीन पवार (Dr Bharati Pravin Pawar) ने कहा, केंद्र सरकार की टीम जमीनी स्तर पर काम कर रही है। हम लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं, नियमित तौर पर राज्य सरकारों से फीडबैक ले रहे हैं। अभी कोविड-19 खत्म नहीं हुआ है।' केरल में 1 लाख से अधिक हैं सक्रिय मामले केरल में रविवार को कोविड-19 के 12,220 नए मामले और 97 संक्रमितों की मौत दर्ज की गई । इसके बाद अब तक राज्य में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 30,65,336 हो गया और अब तक मरनेवालों की संख्या बढ़कर 14,586 हो गई। वहीं 24 घंटों में 12,502 लोग स्वस्थ हुए और अब तक कुल स्वस्थ हुए लोगों की संख्या बढ़कर 29,35,423 हो गई। अभी केरल में 1,14,844 सक्रिय मामले हैं। यहां के संक्रमित जिलों में सबसे अधिक मलप्पुरम (1,861), कोझिकोड (1,428), त्रिशूर (1,307), अर्नाकुलम (1,128), कोल्लम (1,012), तिरुअनंतपुरम (1,009) और पलक्कड़ (990) में हैं। महाराष्ट्र में कम नहीं रहे मामले रविवार को महाराष्ट्र में 8,535 नए संक्रमित मिले। वहीं 6,013 लोगों ने संक्रमण को मात दिया और 350 लोगों की मौत हो गई। यहां अब तक 61.57 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 59.12 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.25 लाख लोगों की मौत हुई है। अभी राज्य में 1.16 लाख एक्टिव मामले हैं। त्रिपुरा में नहीं है डेल्टा प्लस का एक भी मामला भारत सरकार की ओर से बयान जारी कर बताया गया कि त्रिपुरा में डेल्टा प्लस का एक भी मामला नहीं है। इसमें बताया गया, 'त्रिपुरा में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले बढ़ने की खबर मिली। अप्रैल और मई 2021 के बीच 152 सैंपल के नतीजे पॉजिटिव आए और इन्हें जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए NIBMG कल्याणी भेजा गया था। इसमें डेल्टा प्लस के मामले नहीं थे। इसमें 3 सैंपल B.1.1.7 से संक्रमित पाए गए वहीं 11 सैंपल B.1.617.1 (कप्पा) और 138 B.1.617.2 (डेल्टा) से संक्रमित थे।' यहां संक्रमण के मामलों में कमी न देखते हुए अगरतला, रानीरबाजार, जिरानिया नगर, उदयपुर, कैलाशहर, धर्मनगर, खोवाई, बेलोनिया, कुमारघाट, तेलियामुरा, सोनमुरा नगर, अमरपुर नगर और सबरूम नगर में 17 जुलाई तक कोविड कर्फ्यू जारी रहने का ऐलान किया गया है। असम और मणिपुर का हाल असम (Assam) में 1,579 नए संक्रमित मिले, 2,793 लोग संक्रमण की चपेट से बाहर आए और 16 नई मौतें दर्ज की गई वहीं मणिपुर (Manipur) में 911 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 14 संक्रमितों की मौत हो गई। यहां 570 लोग संक्रमण से स्वस्थ हुए। यहां रिकवरी रेट 89.05 फीसद हो गई है।
हिसार। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन में दिल्ली सीमा पर जो धरने दिए जा रहे हैं, उनमें हरियाणा का जाट समुदाय बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहा था, लेकिन पंजाब के एक किसान संगठन के नेता ने बुजुर्ग ओमप्रकाश चौटाला को आंदोलन में मंच देने के सवाल पर नाराज कर दिया है। उगराहां ने इस प्रश्न पर तिरस्कार भरे अंदाज में कौन चौटाला? ऐसा नहीं कि उगराहां को पता नहीं है कि ओमप्रकाश चौटाल कौन है? उन्हें पता है कि ओमप्रकाश चौटाला कौन हैं और उनका जितना जनाधार है, उसके सामने उगराहां क्या पंजाब के जितने भी कथित किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं, सब मिलकर ओमप्रकाश चौटाला के जनाधार की, देश भर के किसानों के बीच उनकी लोकप्रियता की बराबरी नहीं कर सकते। रही बात आदोलन के मंच पर बुजुर्ग चौटाला को शिरकत न करने देने की तो इसे सलीके से भी कहा जा सकता था, लेकिन उगराहां ने जिस भाषा का उपयोग किया, वह आपत्तिजनक थी। उन्होंने ऐसा क्यों किया? इस समझने के लिए कोई बहुत शोध या अध्ययन की आवश्यकता नहीं है। बस केवल इतना करना होगा कि जब से आंदोलन आरंभ हुआ है, तब से उगराहां की यूनियन के समर्थकों के बयानों और भाषणों पर एक नजर डलाने की आवश्यकता भर है। यह उगराहां की ही यूनियन थी, जिसने टीकरी बार्डर पर गंभीर मुकदमों में जेल में बंद खालिद उमर, शरजील उस्मानी जैसे दर्जनों अलगाववादियों की रिहाई की मांग के पोस्टर से लगाए थे, जबकि उनकी इस मांग का कृषि कानूनों और किसानों से कोई लेना-देना नहीं था। इसके अतिरिक्त खालिस्तान समर्थकों का आंदोलनस्थलों पर जमावड़ा आम बात है। यहां तक कि पंजाब के कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू तक यह कह चुके हैं कि आंदोलन पर आतंकी तत्त्व हावी हैं। इसका विरोध जाट समुदाय से आने वाले चर्चित नेता राकेश टिकैत ने खुलेआम विरोध भले न किया हो, लेकिन वह इन तत्त्वों से दूरी बनाए रखते हैं, जबकि उनके बड़े भाई नरेश टिकैत यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी यूनियन (भारतीय किसान यूनियन, टिकैत) का अलगाववादी तत्त्वों को कोई समर्थन नहीं है और न ही वह ऐसी किसी मांग का समर्थन करती है। स्पष्ट है कि चौटाला के मंच पर आने से अलगाववादी तत्त्वों के समर्थक हतोत्साहित होंगे। इसलिए उगराहां यह कतई नहीं चाहेंगे कि कोई भी जाट नेता चाहे चौटाला हों यी भूपेंद्र सिंह हुड्डा आंदोलन के मंच पर आएं। उगराहां को पता है कि चौटाला या हुड्डा मंच पर आ जाएंगे तो उनकी बहुत मेहनत से सजाई गई महफिल वे लूट ले जाएंगे और उनके इरादों पर पानी फिर जाएगा। वे तो राकेश टिकैत के खिलाफ भी मजबूरी में नहीं बोल पाते, क्योंकि आंदोलन की उजड़ चुकी महफिल दोबारा जमी है तो राकेश टिकैत के ही कारण। इसीलिए धरनास्थलों से जितने भी प्रेस नोट जारी होते हैं, उनमें कहीं भी राकेश टिकैत का नाम नहीं होता। इसीलिए राकेश टिकैत सिंघु बार्डर या टीकरी बार्डर पर जाने से भी कतराते हैं, क्योंकि वहां अब जाट समुदाय के लोगों की भागीदारी नाममात्र रह गई है। हालांकि मध्य हरियाणा में कई टोल नाकों अब भी जो धरने चल रहे हैं, वे केवल जाट समुदाय के समर्थन से ही चल रहे हैं और राकेश टिकैत वहां समय-समय पर पहुंचते रहते हैं। सेना के पराक्रम पर सवाल उठाने से गुस्सा और भड़का: उगराहां की यूनियन अलगाववादी तत्त्वों का समर्थन तो कर ही रही है, पंजाब की किसान सभा के एक नेता अमरीक सिंह ने पुलवामा हमले पर सवाल उठाते हुए सर्जिकल स्ट्राइक को भी फर्जी बता दिया, इससे जाट समुदाय की नाराजगी और बढ़ गई है, कारण यह कि जाट युवा अपनी देशभक्ति के जज्बे के कारण ही सेना में भर्ती होते हैं। हरियाणा की आबादी भले ही देश की आबादी का ढाई फीसद हो लेकिन सेना में उनकी भागीदारी दस फीसद है। यहां हर गांव में ऐसे परिवार मिल जाएंगे जिनके यहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग सेना में जाते रहे हैं।जगदीश त्रिपाठी jagran
नई दिल्ली,सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि जम्मू में भारतीय वायुसेना के स्टेशन पर ड्रोन के जरिए गिराए गए बमों में प्रेशर फ्यूज का इस्तेमाल किया गया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि एयर फोर्स स्‍टेशन पर किए गए हमले में पाकिस्तानी सेना या आईएसआई के तत्वों ने लश्कर-ए-तैयबा की मदद की थी। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि जम्मू में वायुसेना की इमारत पर गिराए गए आईईडी में आरडीएक्स और अन्य रसायनों का मिश्रण था। वहीं जमीन पर गिराए गए दूसरे बम में एक किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक था जिसमें कुछ बॉल बियरिंग मिलाए गए थे। सूत्रों का कहना है कि 27 जून को एयरफोर्स स्टेशन पर किए गए हमले में निश्चित ही पाकिस्तानी फौज की ट्रेनिंग काम में लाई गई थी। सूत्रों ने बताया कि इन बमों में जिस तरह के प्रेशर फ्यूज प्रयोग में लाए गए थे वैसे प्रेशर फ्यूज का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना करती आई है। सूत्रों का कहना है कि इन बमों को आईईडी और प्रेशर फ्यूज को इस तरह से लगाया गया था ताकि जमीन पर गिरने के बाद धमाका हो जाए। इस तरह के प्रेशर फ्यूज तोप के अधिकतर गोलों और मोर्टार बमों में होते हैं। यही वजह है कि गोले हवा में नहीं फटते हैं। इनमें विस्‍फोट जमीन पर गिरने के बाद दबाव की वजह से होता है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना था कि इन हमलों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित आतंकियों का हाथ हो सकता है... प्रेशर फ्यूज का इस्तेमाल आम तौर पर बारूदी सुरंगों और टैंक रोधी सुरंगों में किया जाता है। प्रेशर फ्यूज के चलते ही विस्फोटक उपकरण दबाव पड़ने पर सक्रिय हो जाता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि पाकिस्तानी फौज चीन और तुर्की से ड्रोन खरीद रही है। ये ड्रोन तीन घंटे तक उड़ान भर सकते हैं। यही नहीं इन्‍हें जीपीएस के जरिए संचालित किया जा सकता है। हाल ही में वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा था कि जम्मू में वायु सेना के अड्डे पर हुआ ड्रोन हमला एक आतंकी कार्रवाई थी।
नई दिल्ली, इंटरनेट मीडिया से जुड़े नए आइटी नियमों के पालन में आनाकानी कर रही ट्विटर ने लगभग सभी प्रमुख नियमों का पालन शुरू कर दिया है। अपनी अकड़ ढीली करते हुए माइक्रोब्लागिंग साइट ने स्थानीय ग्रीवांस अफीसर की नियुक्ति के साथ भारत में अपने पते को भी सार्वजनिक कर दिया है। वहीं, पिछले एक महीने में नियमों के पालन की रिपोर्ट भी प्रकाशित की गई है। ट्विटर ने अपनी वेबसाइट पर ये सभी जानकारी दी है। विनय प्रकाश को भारत में शिकायत अधिकारी नियुक्त ट्विटर ने विनय प्रकाश को भारत में अपने स्थानीय ग्रीवांस अफीसर (शिकायत अधिकारी) के रूप में नियुक्त किया है। ट्विटर वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक यूजर्स किसी तरह की शिकायत के लिए विनय प्रकाश से ई-मेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं। ट्विटर ने भारत में अपने संपर्क का पता भी जाहिर कर दिया है जो बेंगलुरु में स्थित है। ट्विटर ने शुरू किया आईटी नियमों का पालन कंपनी ने गत 26 मई से लेकर गत 25 जून के दौरान की कंप्लायंस रिपोर्ट भी प्रकाशित की है। इस प्रकार, गत 26 मई को लागू होने वाले नए आईटी नियम से जुड़े तीन प्रमुख निर्देशों का पालन ट्विटर ने शुरू कर दिया है। ट्विटर की तरफ से इन नियमों के पालन नहीं करने से ट्विटर ने इंटरमीडिएरी का दर्जा खो दिया था।नए आइटी नियमों के मामले में अदालत ने भी पाया कि ट्विटर ने सरकार के निर्देशों की अवहेलना की है। अदालत ने कहा था कि सरकार ट्विटर के खिलाफ अपने हिसाब से कार्रवाई कर सकती है। आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर को दिया साफ संदेश दो दिन पहले नए आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर को साफ संदेश देते हुए कहा था देश का कानून सर्वोपरि हैं। देश में रहने वाले किसी भी व्यक्ति या कंपनी को उन्हें मानना ही होगा।दूसरी तरफ, रविवार को वैष्णव ने नए आइटी नियमों की समीक्षा की। देसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म कू को ज्वाइन करते हुए वैष्णव ने कहा कि नए आइटी नियम यूजर्स के सशक्तिकरण के साथ उन्हें सुरक्षा प्रदान करने वाले हैं और इन नियमों से भारत में एक जिम्मेदार इंटरनेट मीडियाका माहौल तैयार होगा।
नई दिल्ली गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ कुछ समूहों के विरोध के बावजूद बीजेपी उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा की गई और यह निर्णय लिया गया कि सावंत विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि गोवा में सावंत के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार अच्छा काम कर रही है और उनके नेतृत्व में सत्ता में वापसी करेगी। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘गोवा चुनाव मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और केंद्रीय नेतृत्व को उनके नेतृत्व में सत्ता में वापसी का भरोसा है और उन्होंने राज्य इकाई से विशेष योजना तैयार करने को कहा है।’ बताते चलें कि गोवा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, हालांकि, सावंत के नेतृत्व में चुनाव लड़ना इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अगर बीजेपी सत्ता में लौटी तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। एक अन्य नेता ने कहा, 'आपने देखा कि असम में क्या हुआ था। चुनाव मुख्यमंत्री सबार्नंद सोनोवाल के नेतृत्व में लड़ा गया था, लेकिन परिणाम के बाद पार्टी ने हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाया।' पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक निर्णय है जो केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड द्वारा लिया जाता है और यह इस समय चर्चा का मुद्दा नहीं है।’ बीजेपी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि हाल ही में सावंत और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के बीच कोविड -19 प्रबंधन को लेकर चल रही खींचतान से पार्टी चिंतित है। उन्होंने कहा , 'केंद्रीय नेताओं ने गोवा का दौरा किया था और हाल ही में अंदरूनी कलह के मुद्दे पर गोवा के पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के साथ बैठक की थी। उन्होंने राज्य इकाई से इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने के लिए कहा था।’ पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि राणे काफी महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें लगता है कि वह भी एक मौके के हकदार हैं। उन्होंने कहा, ‘विश्वजीत राणे एक पूर्व मुख्यमंत्री (प्रताप सिंह रावजी राणे) के बेटे हैं और उन्हें लगता है कि उनमें क्षमताएं हैं। लेकिन अभी तक पार्टी केवल सावंत को ऐसे व्यक्ति के रूप में देख रही है जो पार्टी को जीत दिला सके।’ पार्टी ने पांच नगरपालिका परिषदों में से तीन में जीत हासिल की है, जहां सावंत सरकार के तहत राज्य विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय में चुनाव हुए थे। नेता ने कहा, ‘शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा, जहां हमने पणजी सहित सात स्थानीय निकायों में से छह में जीत हासिल की। यह पार्टी की जमीनी उपस्थिति को दर्शाता है। हमें गति को जारी रखना है।’
इंदौर, मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है, जिसमें एक मौलाना व दो महिलाएं मिलकर लोगों को शादी के नाम पर ठगते थे। ये विवाह करने के इच्छुक जरूरतमंद व्यक्ति को जाल में फंसाते और मौलाना उनमें से किसी एक लड़की की शादी उस व्यक्ति से करवा देता। फिर दुल्हन कुछ ही दिन बाद घर से गहने, सामान, नकदी लूटकर फरार हो जाती। पुलिस ने गिरोह को उन्हीं के अंदाज में पकड़ा। एक पुलिस आरक्षक (कांस्टेबल) दूल्हा बनकर विवाह के लिए तीन लाख रुपये देने को राजी हुआ और जाल बिछाकर मौलाना सहित दोनों लुटेरी दुल्हनों को पकड़ लिया गया। तीनों को गिरफ्तार कर मंदसौर जिले के नारायणगढ़ न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। बताया जाता है कि आरोपित मौलाना मूलरूप से मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है क्या है पूरा मामला मामला पुलिस के पास कुछ दिन पहले तब पहुंचा था, जब मंदसौर के पिपलियामंडी निवासी युवक से शादी रचाकर लुटेरी दुल्हन फरार हो गई थी। थानाप्रभारी शिवकुमार यादव ने बताया कि 30 वर्षीय जीवन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 36 वर्षीय मौलाना मोहम्मद रिजवान ने दो लाख रुपये में शादी कराने के लिए चार अप्रैल 2021 को 30 वर्षीय पूनम व 29 वर्षीय रेखा से मिलवाया था। तीनों ने उसी दिन शादी करने के बदले दो लाख पांच हजार रुपये ले लिए और रेखा शिंदे को जीवन की पत्नी बनाकर साथ भेज दिया। शादी के अगले दिन से ही रेखा जीवन से लड़ाई-झगड़ा करने लगी और विवाह के नौ दिन बाद ही 13 अप्रैल को घर से कीमती सामान लेकर फरार हो गई। रेखा के साथ मंदसौर निवासी मौलाना व पूनम भी गायब हो गए। जीवन ने इसकी शिकायत पुलिस से की, तब पुलिस ने जाल बिछाया। इस तरह जाल बिछाकर पुलिस ने पकड़ा पिपलिया मंडी चौकी प्रभारी कपिल सौराष्ट्रीय ने बताया कि पुलिस टीम ने आरक्षक कमल पाल को दूल्हा बनाकर पहले तो मौलाना रिजवान के पास भेजा, फिर उससे शादी की बात चलाई। इस पर रिजवान ने लुटेरी दुल्हन रेखा शिंदे व उसकी सहयोगी पूनम से मिलवाया। शादी के लिए आरक्षक तीन लाख रुपये देने को तैयार भी हो गया। इसके बाद शादी की तारीख पक्की कर मौलाना दूल्हा बने आरक्षक को लेकर रेखा व पूनम के पास पहुंचा। जैसे ही तीनों मिले, वैसे ही इन पर छुपकर नजर रख रही पुलिस टीम ने तीनों को पकड़ लिया।
गुवाहाटी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि अगर एक हिंदू लड़का एक हिंदू लड़की से झूठ बोल रहा है, तो यह भी जिहाद है। कैबिनेट इसके खिलाफ भी जल्द कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व 5,000 साल पुराना है और जीवन का तरीका है। अधिकांश धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के वंशज हैं। हिंदुत्व को हटाया नहीं जा सकता, क्योंकि इसका मतलब होगा अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना। लव जिहाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस शब्द को लेकर आपत्ति है। लेकिन किसी को भी महिला को धोखा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, सरकार किसी भी महिला को किसी के द्वारा धोखा दिए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगी-चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। हमारी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ, असम में करोना वायरस के डेल्टा प्लस संस्करण का एक भी मामला सामने नहीं आने का आश्वासन देते हुए सरमा ने कहा, 'अभी तक, असम में कोविड-19 का कोई डेल्टा प्लस संस्करण नहीं है। हम राज्य में जीनोमिक अनुक्रमण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर राज्यों में टीकाकरण की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को सुबह 11 बजे बैठक करेंगे। पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा तनाव पर सरमा ने कहा, असम-नागालैंड और असम-मिजोरम दोनों सीमाओं पर कुछ तनाव चल रहा है। हमारी संवैधानिक सीमा की रक्षा के लिए असम पुलिस को तैनात किया गया है। पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार होने के नाते, हम हमेशा चर्चा के लिए तैयार रहते हैं लेकिन अपनी जमीन पर अतिक्रमण मंजूर नहीं है। इससे पहले शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल किया। सरमा ने कहा कि राज्य में स्वदेशी आस्था और संस्कृति का एक नया स्वतंत्र विभाग होगा।
नई दिल्ली, अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए कंधार में भारतीय दूतावास के कुछ कर्मचारियों को वापस लाया गया है। राजनयिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। इस बीच, वाणिज्य दूतावास की आपातकालीन सेवाएं चालू हैं। राजनयिक सूत्रों ने यह भी कहा है कि कंधार में भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद होने की खबरें गलत हैं और मिशन में काम हों रहा है। भारत ने पहले ही संकेत दिया था कि अगर सुरक्षा की स्थिति बिगड़ती है, तो वह अपने नागरिकों और अधिकारियों को अफगानिस्तान से वापस लाएगा। देश में आतंकी समूह तालिबान काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई प्रांतों पर कब्जा कर चुका है। सूत्रों ने पहले समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया था कि अफगानिस्ताम में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के साथ, हमारे नागरिकों और उस देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद अधिकारियों को वापस लाने की योजनाओं पर चर्चा की गई है। कई एजेंसियां ​​इस उद्देश्य के लिए चर्चा में शामिल हैं। कंधार और मजार में वाणिज्य दूतावासों के साथ काबुल में भारत का दूतावास है, जहां इसके 500 से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। हेरात और जलालाबाद में दो वाणिज्य दूतावासों ने पहले ही वहां काम करना बंद कर दिया था। 2001 में अमेरिकी आक्रमण और तालिबान के पतन के बाद अफगानिस्तान में भारत की काफी उपस्थिति रही है। वह वहां लगातार सरकारों की मदद करता रहा है। इसमें उत्तरी गठबंधन के सदस्य भी शामिल हैं, जो लंबे समय से भारत के साथ मित्र रहे हैं। भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्विकास के लिए बहुत काम किया है और युद्धग्रस्त देश के महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाली कई सड़कों के साथ-साथ संसद भवन के निर्माण में मदद की है। अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति को अस्थिर और बिगड़ा हुआ बताते हुए भारत में अफगान दूत फरीद ममुंडजे ने कहा है कि तालिबान को हिंसा बंद करने की जरूरत है और रक्तपात का अंत होना चाहिए। अगस्त में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी के मद्देनजर तालिबान काफी तेजी से नए जिलों और क्षेत्रों पर कब्जा कर रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के नवागढ़ गांव के प्रगतिशील किसान किशोर राजपूत की जड़ी-बूटियों की खेती की खुशबू दिल्ली और कोलकाता की मंडियों में बढ़ती जा रही है। छह साल पहले मात्र दो एकड़ पुश्तैनी जमीन पर 300 रुपये के तुलसी के बीज से शुरू हुई उन्नति गाथा अब 70 एकड़ में फैल चुकी है। मात्र 12वीं पास 35 वर्षीय किशोर की प्रेरणा से आसपास के गावों के 100 से अधिक किसान औषधीय खेती से जुड़ चुके हैं। हिम्मत और जज्बे से दूसरों के लिए उत्प्रेरक बने किशोर का वार्षिक शुद्ध मुनाफा 10 से 12 लाख रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे शुरू हुई उन्नति यात्रा किशोर की पुश्तैनी दो एकड़ जमीन से परिवार का पालन नहीं हो पा रहा था। आर्थिक तंगी थी। चिंता रहती थी कि दो एकड़ जमीन में वर्ष में एक बार धान उत्पादन से क्या होगा। माता-पिता, पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी कैसे पूरी होगी। इन्हीं चिंताओं के बीच किशोर ने रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में औषधीय खेती की प्रशिक्षण कार्यशाला में हिस्सा लिया। संभावनाएं जगीं। खुद के प्रति भरोसा पैदा हुआ। इसी के साथ शुरू हो गई उन्नति की यात्रा। दोस्त की मदद से लीज पर ली जमीन किशोर का गांव छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने अपने दोस्त राकेश साहू की मदद से गांव से 30 किमी दूर 70 एकड़ जमीन लीज पर ली है। इनमें 25 एकड़ में तुलसी, अश्वगंधा, कालमेघ (चिरैता), गिलोय, पाषाणभेद, केवाच, काली हल्दी, सर्पगंधा, सतावर, नींबूघास, स्टीविया आदि की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा 35 एकड़ में काला धान (ब्लैक राइस), पांच एकड़ में सामान्य धान, पांच एकड़ में गन्ने की खेती कर रहे हैं। दो साल से करीब 30 क्विंटल औषधीय उत्पाद दिल्ली, गुजरात और बंगाल की कंपनियों को बेच रहे हैं। अपनी कंपनी, औषधीय खेती शोध संस्थान में वह गांव के 30 युवकों व महिलाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। इस साल 100 एकड़ तक लक्ष्य किशोर राजपूत बताते हैं कि कोरोना काल में औषधीय खेती की मांग बढ़ गई है। साल 2021-22 में एक करोड़ रुपये के टर्न ओवर का लक्ष्य रखा है। इस बार कंपनियों ने खस, पामारोज, जीरेनियम, विष्णुकांता, वच, पिपली की खेती करने के लिए आग्रह किया है। ऐसे में खेता का रकबा बढ़ाकर 100 एकड़ करने की तैयारी कर रहे हैं। सुबह पांच बजे से शुरू हो जाता है काम किशोर ने किसानी के साथ अपनी दिनचर्या बदल ली है। सुबह पांच बजे से उठकर नित्यकर्म करने के बाद आठ बजे तक खेत पहुंच जाते हैं। उनके साथ अन्य सहयोगी भी समय से खेत पहुंचते हैं। 70 एकड़ के रकबे में प्रतिदिन निगरानी संभव नहीं है, इसलिए कार्यक्रम तय करके कुछ जगह मोटरसाइकिल से तो कुछ जगह पैदल जाते हैं और शाम पांच बजे घर लौटते हैं। 100 किसान परिवार भी जुड़े किशोर राजपूत से करीब 100 किसान परिवार जुड़ चुके हैं। किसान अपनी उपज को बेचने और तकनीकी मदद के लिए उनके पास पहुंचते हैं। औषधीय खेती करने वाले किसानों से किशोर का बेहतर संपर्क कायम हो चुका है। खासकर तुलसी का उत्पादन करने वाले किसान इनसे सीधे जुड़े हैं। राज्य में ही कुछ कंपनियां तुलसी का अर्क बनाती हैं। इसके लिए सीधे किशोर से संपर्क करती हैं। महिला किसान ने शुरू की औषधिय खेती राजनांदगांव की पदुमतरा निवासी आयुर्वेदिक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता इंदू महोबिया ने नौकरी से इस्तीफा देकर औषधिय खेती शुरू की है। इंदू ने बताया कि किशेार से मुलाकात हुई थी। उनसे नींबूघास के बारे में जानकारी ली। प्रेरित होकर उन्हीं से नींबूघास का बीज भी लिया और एक एकड़ में खेती शुरू की है। उन्नति देखकर शुरू की तुलसी की खेती गांव नेउर नवागढ़ के किसान देवी प्रसाद वर्मा ने बताया कि किशोर की मेहनत और उन्नति देखकर उन्हाेंने भी आधा एकड़ के खेत में तुलसी की खेती शुरू की है। इसमें आमदनी 20 फीसद तक बढ़ी है। अभी इसके रकबे को और बढ़ाना है। खेतीबाड़ी में काम आई यारी किशोर के मित्र राकेश साहू बताते हैं कि किशोर के भीतर कुछ करने का जुनून था। जमीन दो एकड़ ही थी, इसलिए मैंने उन्हें लीज पर जमीन दिलवाने में मदद की। खेती के लिए उपकरण भी दिए। उन्नति की फसल लहलहाने से दिल को सुकून मिल रहा है। परिवर्तन देखने को मिलेगा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसके पाटिल गर्व के साथ कहते हैं कि ऐसे मेहनती युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर समाज में बदलाव के अग्रदूत बन रहे हैं। आने वाले समय में खेती के क्षेत्र में आमूलचूक परिवर्तन देखने को मिलेगा। औषधीय खेती में मुनाफा भी ज्यादा परंपरागत खेती में मौसम की मार झेलनी पड़ती थी। कभी पानी की कमी तो कभी बाढ़ से नुकसान हो जाता था। पशु भी नुकसान पहुंचाते थे। औषधीय खेती में मुनाफा भी ज्यादा है और परेशानियां कम हैैं, - किशोर राजपूत, प्रगतिशील किसान
इंदौर, मध्य प्रदेश पुलिस ने इंदौर में एक महिला के साथ मारपीट के मामले में एक स्थानीय कोर्ट के फर्जी आदेशों से प्रमोशन लेने के आरोप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि इनमें से एक फर्जी आदेश की मदद से आरोपी कथित तौर पर राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस कैडर में पदोन्नत हुआ था। वहीं दूसरा फर्जी आदेश महिला के साथ मारपीट के आरोप में बरी होने को लेकर था। शहर के पुलिस अधीक्षक हरीश मोटवानी ने बताया कि भोपाल में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा को शनिवार देर रात पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिला अदालत के एक विशेष न्यायाधीश ने इस साल 26 जून को इंदौर के एमजी रोड थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर, पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (जालसाजी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेजों का वास्तविक के रूप मेंउपयोग ) के तहत मामला दर्ज किया था। अधिकारियों के अनुसार, 6 अक्टूबर, 2020 के दो जाली आदेश कथित तौर पर स्थानीय अदालत के विशेष न्यायाधीश के नाम पर तैयार किए गए थे। इनमें से एक आदेश में वर्मा को एक महिला को गाली देने, मारपीट करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप से बरी कर दिया गया था। दूसरे फैसले में कहा गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। अधिकारियों ने कहा कि अपनी शिकायत में, विशेष न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने 6 अक्टूबर, 2020 को कोई आदेश पारित नहीं किया। वह उस दिन अपनी पत्नी की जांच के लिए आकस्मिक अवकाश पर थे, जो एक कैंसर रोगी है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हमले के मामले में वर्मा को बरी करने के फर्जी आदेश को कथित तौर पर राज्य सरकार के सामने मूल रूप में पेश किया गया था, जिसके बाद उसे आइएएस कैडर में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
मुजफ्फरपुर, कोविड-19 के खतरे से यदि अपने बच्‍चों को बचाना है तो घर के बड़े लोगों को सतर्क और सुरक्षित रहना होगा। 18 वर्ष से ऊपर के सभी लोग जल्‍द से जल्‍द वैक्‍सीन लगवाएं, ताकि कोविड का संक्रमण बच्‍चों तक न पहुंच सके। वैक्‍सीन के साथ ही शारीरिक दूरी और मास्‍क की कोविड से बचाव में अहम भूमिका है। इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह कहना है शहर के वरिष्‍ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्‍टर अरुण शाह का। डॉक्‍टर शाह शुक्रवार को जागरण न्यू मीडिया की फैक्ट चेकिंग वेबसाइट विश्वास न्यूज द्वारा आयोजित 'सच के साथी, वैक्‍सीन के लिए हां' मीडिया साक्षरता कार्यक्रम में प्रतिभागियों से रूबरू हो रहे थे। उन्‍होंने विश्‍वास न्‍यूज के वेबिनार में बताया कि कोरोना कब तक खत्म होगा, ये कहना तो मुश्किल है। लेकिन खुद को और परिवार को बचाना है तो ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को टीके के दोनों डोज लगवा लेने चाहिए। सावधानी से ही बचाव संभव है। कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर बचाव के तरीकों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल टीका ही एकमात्र और अंतिम बचाव है। वेबिनार में डीएमसी की साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉक्‍टर नरेंद्र सैनी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हर वायरस खुद को समय के हिसाब से बदलता है। कोरोना वायरस अन्‍य वायरस की तुलना में ज्‍यादा म्‍यूटेट कर रहा है, यानी तेजी से अपना स्वरुप बदल रहा है। जिन्‍हें अभी एक ही डोज लगी है, वे खुद को सुरक्षित मानने का भ्रम न पालें और निर्धारित समयावधि के भीतर दूसरी डोज जरूर लें और टीका लेने के बाद भी कोविड-19 से बचाव के दिशानिर्देशों का जरूर पालन करें। उन्होंने कहा कि मास्क पहनने को अनिवार्य नियम बनाना चाहिए। वैक्‍सीन, शारीरिक दूरी और मास्‍क ही कोरोना से हमें बचा सकता है। गौरतलब है कि देशभर में वैक्‍सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए विश्‍वास न्‍यूज एक खास मीडिया साक्षरता अभियान चला रहा है। इसी के तहत शुक्रवार को मुजफ्फरपुर के नागरिकों के लिए एक वेबिनार का आयोजन किया गया। वैक्‍सीन से जुड़े भ्रम को दूर करने और वैक्‍सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए मीडिया साक्षरता कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा के विशेषज्ञों के साथ विश्वास न्यूज के फैक्ट चेकर्स ने लोगों को महामारी के दौरान गलत सूचनाओं की पहचान और उससे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही फेक न्यूज की पहचान के तरीकों और ऑनलाइन टूल्स के बारे में जानकारी बताया। कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर के उप विकास आयुक्‍त डॉक्‍टर सुनील कुमार झा भी मौजूद रहे। आईएफसीएन वैक्सीन ग्रांट प्रोग्राम के तहत विश्‍वास न्‍यूज देश के 12 बड़े शहरों के लिए 'सच के साथी, वैक्‍सीन के लिए हां' ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, पटना, मुजफ्फरपुर, रांची, जमशेदपुर, इंदौर और भोपाल के नागरिकों के लिए भी ऐसे ही वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है।
नई दिल्ली,देश में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार अब धीमी हो रही है। हालांकि, कोरोना संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव अभी भी जारी है। देश में आज कोरोना के 41 हजार से अधिक कोरोना के मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 41,506 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 895 लोगों की मौत हुई है। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव अभी भी जारी है। शनिवार को कोरोना से होने वाली मौतों ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। देश में शनिवार को 24 घंटे में 42,766 नए मरीज मिले थे और 1206 की मौत हुई थी। इससे एक दिन पहले 43,393 नए मरीज मिले थे और 911 लोगों की मौत हुई थी। देश में बीते 24 घंटों में कोरोना से 41,526 लोग ठीक हुए। शनिवार को एक्टिव केस यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 915 की कमी आई है। देश में कोरोना की स्थिति 24 घंटे में नए मामले 41,506 कुल मामले 3.08 करोड़ कुल सक्रिय मामले 4,54,118 कुल मौतें 4,08,040 24 घंटे में ठीक हुए 41,526 कुल ठीक हुए 2,99,75,064
राजपुरा,पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले किसानाें ने नेताओं का विराोध तेज कर दिया है। कृषि सुधार कानूनाें (Agricultural reform laws) के विराेध में किसानाें का विराेध कम नहीं हाे रहा है। रविवार काे नई अनाज मंडी के पीछे भारत विकास परिषद भवन में भाजपा की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक का आयोजन भाजपा नेता भूपेश अग्रवाल व जिला प्रधान विकास शर्मा की अगुआई में किया गया थाI बैठक की भनक लगते ही किसान जत्थेबंदिया वहां पहुंच गई और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दियाI पुलिस ने जैसे ही भाजपा नेताओं को बाहर निकालने की कोशिश की तो किसान नेता उग्र हो गए व धक्कामुकी शुरू कर दी। इस दाैरान दो भाजपा नेताओं को लात घूसें मारने के साथ ही पार्षद शांति सपरा के कपड़े तक फाड़ दिए। डीएसपी घनौर जसविंदर सिंह ਟੀवाना भारी पुलिस बल सहित माैके पर पहुंचे। घटनास्थल पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
देहरादून। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर भाजपा को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कोई मुख्यमंत्री नहीं है। तभी अब तक तीन मुख्यमंत्री बनाए जा चुके हैं। उन्होंने उत्तराखंड के विद्युत मंत्री की सौ यूनिट फ्री बिजली की घोषणा को चुनावी जुमला करार दिया। साथ ही कहा कि बिजली को लेकर चार बातों की गारंटी दी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उत्तराखंड के एक दिवसीय दौरे पर शनिवार को देहरादून पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले राजपुर रोड स्थित एक होटल में आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। रहे हैं। कुछ देर बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की, जिसमें उन्होंने भाजपा को आड़े हाथ लिया। इस दौरान उन्होंने बिजली के क्षेत्र में चार बातों की गारंटी भी। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद पहली कलम से इस घोषणा को अमलीजामा पहनाया जाएगा। केजरीवाल ने दी इन चार बातों की गारंटी -जैसे दिल्ली में करके दिखाया, वैसे ही उत्तराखंड में भी करके दिखाया जाएगा। सरकार बनते ही यहां हर परिवार को 300 यूनिट फ्री दी जाएगी। -पुराने बिल माफ किए जाएंगे, नए सिरे से बिल शुरू किए जाएंगे। -कोई पावर कट नहीं लगेगा, उत्तराखंड में 24 घंटे बिजली देंगे। -उत्तराखंड के किसानों को मुफ्त बिजली दी जाएगी। खेती की बिजली मुफ्त की जाएगी।
कोलकाता। यशवंत सिन्हा की राह पर चलते हुए अब शत्रुघ्न सिन्हा भी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों की मानें तो आगामी 21 जुलाई को होने वाली तृणमूल की वर्चुअल शहीद दिवस रैली के दिन बिहारी बाबू ममता की पार्टी का झंडा थाम सकते हैं। बंगाल के राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि शत्रुघ्न सिन्हा को तृणमूल के टिकट पर राज्यसभा भेजा जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल भाजपा के घोर विरोधी नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। यह उसी का हिस्सा बताया जा रहा है। शत्रुघ्न सिन्हा के बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ बेहद अच्छे संबंध हैं। ममता के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर शत्रुघ्न सिन्हा ने उन्हें शुभकामनाएं भी दी थीं। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश त्रिवेदी के तृणमूल छोड़ने व राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने एवं मानस भुइयां के मंत्री बनने के कारण राज्यसभा की सीट से हटने की वजह से संसद के ऊपरी सदन में तृणमूल की दो सीटें रिक्त हुई हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इनमें से एक सीट पर टीम इंडिया के पूर्व कप्तान व बीसीसीआइ के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली को बैठाना चाहती हैं। पिछले दिनों सौरव के 49वें जन्मदिन पर ममता खुद कोलकाता के बेहला इलाके में स्थित उनके निवास स्थल गई थीं। उस दौरान ममता ने सौरव से इसे लेकर बातचीत भी की थी, हालांकि ममता और सौरव, दोनों ने ही अब तक इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। ममता राज्यसभा की दूसरी सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा को बिठा सकती हैं। शत्रुघ्न सिन्हा पिछले कई वर्षों से भाजपा के खिलाफ मुखर हैं।भाजपा के पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई तृणमूल की रैली में भी शामिल हुए थे और सार्वजनिक तौर पर ममता बनर्जी की प्रशंसा की थी। शत्रुघ्न सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।ममता उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को अपनी पार्टी के काम में लगाना चाहती हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल हो गए थे और पटना साहिब से भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनकी पत्नी पूनम सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें भी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा ने भी कांग्रेस के टिकट पर बिहार की बांकीपुर सीट से पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था और वे भी हार गए थे।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की लगातार आतंकियों के साथ आतंकी गतिविधियों की जद में रहती है। रविवार को उत्तर प्रदेश एटीएस ने आतंकी छुपे होने की सूचना पर लखनऊ की मैगों बेल्ट काकोरी के एक मकान को घेरा । एटीएस ने इस मकान से अलकायदा से जुड़े दो आतंकियों को पकड़ा है। दोनों ही ट्रेंड आतंकी हैं। इनकी योजना तीन दिन में लखनऊ में एक सांसद के साथ अन्य भाजपा नेताओं को बम विस्फोट में उड़ाने की थी। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक मिला है। इस मकान से एटीएस को दो प्रेशर कुकर बम तथा एक अर्धनिर्मित टाइम बम मिला है। बम को निष्क्रिय करने के लिए बम डिस्पोजल स्क्वॉड मौके पर पहुंचा है। प्रेशर कुकर बम को निष्क्रिय करने की तैयारी के बीच में पता चला है कि यहां पर मौजूद लोगों की योजना तीन के अंदर भाजपा के सांसद व अन्य नेताओं को बम से उड़ाने की थी। लखनऊ के काकोरी में रिंग रोड पर बने इस मकान को उत्तर प्रदेश एटीएस की तीन टीमों ने घेरा । एटीएस टीम को इस मकान मे आतंकवादी होने की सूचना मिली थी। एटीएस ने मकान के पास का क्षेत्र खाली करा लिया है। टीम के कई सदस्य छापा मारने के अपने अभियान में लगे। एटीएस के एक दर्जन से अधिक कमांडो इस ऑपरेशन में सक्रिय हो गए । एटीएस के आइजी डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि एटीएस के इस ऑपरेशन में बम और असलहे भी मिले हैं। आतंकियों से पूछताछ हो रह है और हमारी टीम पास के कुछ घरों में भी पड़ताल कर रही है। उन्होंने कहा कि आशंका है कि पास के घरों में इनके साथियों ने भी ठिकाना बनाया है। मकान मलिहाबाद के शाहिद का है। जो कि बीते 15 वर्ष से यहां पर रह रहा है। फिलहाल वसीम मकान में अंदर है। पड़ताल के दौरान इस मकान से एटीएस को दो प्रेशर कुकर बम तथा एक अर्धनिर्मित टाइम बम मिला है। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में बारूद और सात-आठ किलो बम बनाने की सामग्री भी मिली है। मकान में संदिग्ध लोगों के छुपे होने की आशंका पर उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम ने छापा मारा । काकोरी थाना क्षेत्र के दुबग्गा में एटीएस के साथ पुलिस की टीम भी है। \घर के अंदर मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। इससे पहले भी लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र से तीन वर्ष पहले उत्तर प्रदेश एटीएस ने तीन अतंकियों को ढेर किया था। इसके साथ ही चंद रोज पहले ही काकोरी में मतांतरण के मामले में उमर गौतम के ठिकानों पर छापा मारा गया था।
लखनऊ,उत्तर प्रदेश में गांव तथा जिला की सरकार के बाद ब्लाक प्रमुख चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत को सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सबका साथ सबका विकास का ही नतीजा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने साथ मीडिया को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जीत का श्रेय केंद्र व प्रदेश सरकार की नीति और संगठन की रणनीति को दिया है। उन्होंने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से योजनाएं हर तबके तक बिना भेदभाव के पहुंचीं। उसी का जीवंत उदाहरण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के यह परिणाम हैं। मुख्यमंत्री ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशन में प्रदेश सरकार और संगठन ने जनहितकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाया। उसी की वजह से जनता का रुझान पंचायत चुनावों में भाजपा के पक्ष में रहा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा ने 735 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे। हमने 14 सीटें अपना दल को दीं और 76 सीटों पर पार्टी के ही कार्यकर्ता आमने-सामने थे, जिन्हें स्वतंत्र छोड़ दिया गया। पार्टी और सहयोगी दल के मिलाकर 648 प्रत्याशी ब्लाक प्रमुख का चुनाव जीत चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पंचायत चुनाव में कुल 8,70,463 जनप्रतिनिधि चुने गए हैं। इसे दुनिया के सबसे बड़े चुनाव के रूप में देख सकते हैं, जो कि शांतिपूर्ण ढंग से कराना चुनौतीपूर्ण था। पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से निपटने का दावा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में अराजकता-गुंडागर्दी से लोकतंत्र को गिरवीं रख दिया जाता था। हम पीएम नरेंद्र मोदी के सात वर्ष पहले के सूत्र सबका साथ, सबका विकास पर चले। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा चुनाव था और इसमें हमको पीएम मोदी का हर स्तर पर मार्गदर्शन मिला है। इसी कारण हमको हर जगह पर बड़ी सफलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमारे काम का असर जिला पंचायत तथा ब्लॉक चुनाव में असर दिखा है। उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी की नीति सबका साथ सबका विकास का ही परिणाम है। इसी नीति पर काम करने का परिणाम सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली यह जीत केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश संगठन तथा प्रदेश सरकार के प्रयास का परिणाम है। हमने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव में ग्राम प्रधान के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष तथा ब्लाक प्रमुख के चुनाव जीते, यह मिले जुले प्रयास का ज्वलंत उदाहरण है। हम लोग पीएम नरेद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के सभी नेता, पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता को जीत की बधाई दी। एक-दूसरे को खिलाई मिठाई, दी बधाई पंचायत चुनाव के परिणामों का उत्साह पार्टी प्रदेश मुख्यालय में साफ नजर आया। सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल, उपमुख्यमंत्री डा.दिनेश शर्मा, पंचायत चुनाव प्रभारी जेपीएस राठौर और प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए जीत के लिए बधाई दी। मोदी-योगी की नीति व कार्यकर्ताओं का परिश्रम : स्वतंत्र देव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की लोकप्रियता व जनकल्याणकारी नीतियों के साथ ही कार्यकर्ताओं के कठिन परिश्रम से यह जीत मिली है। अब तो उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त हुई। प्रदेश भय और भ्रष्टाचार से मुक्त हुआ है। किसी गुंडे को अब माफी नहीं है। गांव, गरीब, वंचित, शोषित, आदिवासी वर्ग के कल्याण की योजनाओं की वजह से यह बंपर जीत मिली है।हमने अभी तक सभी कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाया है। बिना भेदभाव के हजर जगह पर योजनाएं लागू की गईं हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने इस अवसर पर कहा कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव में प्रचंड जीत पर सभी जीते प्रत्याशियों को बधाई और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद । उन्होंने कहा कि कहा कि यह नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकार की कल्याणकारी नीतियों की जीत है। इस अवसर पर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा तथा भाजपा उत्तर प्रदेश के महामंत्री संगठन सुनील बंसल भी मौजूद थे।
लखनऊ,सर्वाधिक जनसंख्या के मामले में विश्व के पांच देशों से पीछे और भारतीय के सभी राज्यों में सबसे आगे उत्तर प्रदेश की आबादी पर अब लगाम लगाने की तैयारी के क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार यानी 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सूबे में नई जनसंख्या नीति 2021-30 जारी की। नई जनसंख्या नीति के तहत सरकार ने जन्मदर कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि बढ़ती आबादी विकास में बाधा है। हमको प्रजनन दर पर नियंत्रण लगाने की जरूरत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में नई जनसंख्या नीति का ऐलान कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर जाति, धर्म, समुदाय के लोगों को बढ़ी हुई आबादी पर नियंत्रण का ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा, मैं बेहद खुश हूं कि इस नयी नीति का ऐलान विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय-समय पर इस पर चिंता जताई गई कि बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक हो सकती है। पिछले चार दशकों से इसकी कई बार चर्चा हुई। इसी बीच जिन देशों या हमारे राज्यों ने इसके लिए प्रयास किए वहां सकारात्मक नतीजे देखने को मिले। इस पर चिंता जताई गई कि बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक हो सकती है। पिछले चार दशकों से इसकी कई बार चर्चा हुई। इसी बीच जिन देशों या हमारे राज्यों ने इसके लिए प्रयास किए वहां सकारात्मक नतीजे देखने को मिले। जनसंख्या नियंत्रण के लिए और कोशिश जरूरी है। इस मामले में जागरूकता की भूमिका काफी अहम है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नीति का संबंध हर नागरिक से है। बढ़ती जनसंख्या गरीबी का कारण है। उन्होंने कहा कि दो बच्चों के बीच भी गैप होना चाहिए। अगर दो बच्चों के बीच एक अच्छा अंतराल नहीं होगा तो उनके पोषण पर भी असर पड़ेगा। गरीबी और बढ़ती आबादी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज के विभिन्न तबकों को ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार इस जनसंख्या नीति को लागू करने का काम कर रही है। जनसंख्या नीति का संबंध केवल जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ ही नहीं है बल्कि हर एक नागरिक के ​जीवन में खुशहाली और समृद्धि का रास्ता उसके द्वार तक पहुंचाना भी है। यूपी में और प्रयास की जरूरत है। हम बढ़ती आबादी को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। स्कूलों में और अन्य जगहों पर इसके बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई जनसंख्या नीति में सरकार ने आबादी को नियंत्रित करने के लिए अपनाई जा रहीं विभिन्न रणनीतियों को और प्रभावी बनाने के लिए नया कानून बनाने का इरादा भी जताया है। राज्य विधि आयोग ने इस कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इस पर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। मुख्यमंत्री ने जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए प्रभावी प्रयास करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा की जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयास करते हुए हमें यह ध्यान भी रखना होगा कि इससे देश का जनसांख्यिकीय संतुलन न प्रभावित हो। जनसंख्या नीति को कारगर बनाने के लिए उन्होंने विभिन्न तबकों के बीच जागरूकता फैलाने के साथ विभागों के बीच समन्वय पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में नसंख्या स्थिरता पखवाड़े का भी उद्घाटन किया गया। इसमें योगी आदित्यनाथ ने इस समारोह में कोरोना संक्रमण से लडऩे के लिए राज्य की नीतियों का भी जिक्र किया और खुशी जतायी कि अयोध्या में 11 आरटी-पीसीआर लैब खोले गये हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 11 जिलों में बीएसएल-2 आरटीपीसीआर लैब का उद्घाटन भी किया। इन जिलों में कुशीनगर, मऊ, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, अमेठी, औरैया, बुलंदशहर, कासगंज, महोबा, सोनभद्र और देवरिया शामिल है। लाकर अब तक प्रदेश के 44 जिलों में कोरोना जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाकी 30 जिलों में प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए कार्यवाही जारी है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से विकसित किए गए 'उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्र' नामक मोबाइल एप को भी इस अवसर पर लांच किया। इस मोबाइल एप के जरिए प्रदेश के सभी जिलों में जिला अस्पतालों, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की जानकारी हासिल की जा सकेगी। उनमें उपलब्ध बेड, डाक्टरों की संख्या और दवाओं के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक हेल्थ एटीएम को पहुंचाना होगा क्योंकि तमाम प्रयासों के बावजूद अभी सीएचसी, पीएचसी में वांछित मैनपावर उपलब्ध नहीं है। हेल्थ एटीएम के जरिए चिकित्सीय जांच की सुविधा तो मिलेगी ही टेलीकंसल्टेशन के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सीय परामर्श भी दिया जा सकेगा। उन्होंने इस मौके पर दो दंपतियों को परिवार नियोजन के प्रोत्साहन के लिए शगुन किट भी वितरित किए। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि 1975 में एक सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कार्रवाई की थी लेकिन 1977 के बाद कोई सरकार इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाई। कई बार आबादी नियंत्रण को धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता ह। इसलिए समस्या के समाधान के लिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रस्तावित नए कानून में यदि दंडात्मक प्राविधानों की बजाय प्रोत्साहनो पर ज्यादा जोर दिया जाए तो यह ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष से मिलकर उन्हें अपने सुझाव देंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि यदि प्रदेश की नई जनसंख्या नीति को ठीक से लागू किया गया तो वर्ष 2052 तक उत्तर प्रदेश जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश सरकार अब परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत सरकार गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को बढ़ाएगी और सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था देने का प्रयास भी करेगी। उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से नवजात जन्म दर, मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर को कम करने तथा नपुंसकता/बांझपन की समस्या के सुलभ समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास भी होगा। नई नीति में वर्ष 2026 तक जन्मदर को प्रति हजार आबादी पर 2.1 तक तथा वर्ष 2030 तक 1.9 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। 11 से 19 वर्ष के किशोरों के पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था भी की जाएगी। नई नीति में आबादी स्थिरीकरण के लिए स्कूलों में हेल्थ क्लब बनाये जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ मिशन की भावनाओं के अनुरूप प्रदेश में अब नवजातों, किशोरों व बुजुर्गों की डिजिटल ट्रैकिंग भी कराने की योजना है। दो से अधिक बच्चे वाले नहीं लड़ सकेंगे स्थानीय निकाय चुनाव उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जल्द एक ठोस कानून शक्ल लेगा। अहम बात यह है कि कानून में आम लोगों के अलावा सरकारी अधिकारियों व कर्मियों से लेकर जनप्रतिनिधियों पर भी बड़े अंकुश लगाने की कोशिश है। आयोग ने दो से अधिक बच्चे वालों को स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निकाय से लेकर पंचायत चुनाव तक) से वंचित रखे जाने की अहम सिफारिश राज्य विधि आयोग ने की है। आयोग नए कानून में सख्त प्रविधान लाने के पक्ष में है। आयोग ने कानून लागू होने के एक साल के भीतर सभी स्थानीय निकायों में चयनित प्रतिनिधियों से इस नीति के पालन का शपथपत्र लिए जाने तथा नियम तोडऩे पर उनका निर्वाचन रद किए जाने की सिफारिश की है। कहा है कि उन्हें फिर चुनाव भी न लडऩे दिया जाए। आयोग ने उप्र जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 का जो मसौदा तैयार किया है, उसमें लोगों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही राज्य सरकार के दायित्व भी तय किए गए हैं। आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण बिल का प्रारूप अपनी बेवसाइट पर अपलोड कर 19 जलाई तक सुझाव मांगे हैं। प्रारूप को कई न्यायाधीशों को भेजकर उनके सुझाव भी लिए जा रहे हैं, जिसके बाद प्रारूप को अंतिम रूप देकर उसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद तथा नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत) से पहले इस नए कानून को लागू किया जा सकता है। राजस्थान व मध्य प्रदेश की तरह सूबे में भी दो से अधिक बच्चे वालों को सरकार नौकरी से दूर रखे जाने की सिफारिश शामिल है। ऐसे अभिभावक राज्य सरकार की किसी भर्ती में आवेदन नहीं कर सकेंगे। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रखा जाएगा। आयोग ने बहुविवाह का भी ध्यान रखा है। धार्मिक या पर्सनल ला के तहत एक से अधिक विवाह करने वाले दंपती भी कानून के दायरे में होंगे। एक से अधिक विवाह करने वाले व्यक्ति के सभी पत्नियों से यदि दो से अधिक बच्चे हैं तो उसे सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि हर पत्नी उसके दो बच्चे होने पर सुविधाओं का लाभ ले सकेगी। ऐसे ही किसी महिला के एक से अधिक विवाह करने पर उसके अलग-अलग पतियों से दो से अधिक बच्चे होने पर उसे भी सुविधाओं से वंचित होना होगा। सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मियों से सीमित परिवार का शपथपत्र लेने तथा नियम तोडऩे पर उनकी पदोन्नति रोके जाने व सेवा से बर्खास्त किए जाने तक की सिफारिश की गई है। मातृत्व व पितृत्व के लिए पूरे वेतन व भत्तों के साथ 12 माह का अवकाश प्रदान किए जाने की भी सिफारिश है। यह भी अहम सुझाव - जिन सरकारी कार्मिकों का परिवार सीमित रहेगा और वह मर्जी से नसबंदी कराते हैं तो उन्हें दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट, पदोन्नति, आवास योजनाओं में छूट, पीएफ में कर्मी का कंट्रीब्यूशन बढ़ाने व ऐसे अन्य लाभ दिए जाने की सिफारिशें हैं। - जो दंपती सरकारी नौकरी में नहीं है, उन्हें सीमित परिवार रखने पर पानी, बिजली, गृह व अन्य करों में छूट मिलेगी। - एक संतान पर मर्जी से नसबंदी कराने वाले अभिभावकों की संतान को 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा व बीमा के साथ नौकरियों में वरीयता दिए जाने की तैयारी है। - एक संतान वाले दंपती को सरकारी नौकरी में चार इंक्रीमेंट तक मिल सकते हैं। गरीबी रेखा के नीचे निवास करने वाले ऐसे दंपती को बेटे के लिए 80 हजार रुपये व बेटी के लिए एक लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। यह लाभ भी मिलेगा - यदि दूसरी प्रेग्नेंसी में किसी के दो या उससे अधिक बच्चे होते हैं, तो उन्हें एक ही माना जाएगा। - पहला, दूसरा या दोनों ही बच्चे नि:शक्त हैं तो वह तीसरी संतान पर सुविधाओं से वंचित नहीं होगा। - तीसरे बच्चे को गोद लेने की होगी छूट। - किसी बच्चे की असमय मृत्यु पर तीसरा बच्चा कानून के दायरे से होगा बाहर। - सरकार को कानून लागू कराने के लिए राज्य जनसंख्या कोष बनाना होगा। - हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में देनी होगी प्रसव की सुविधा। - स्कूल के पाठ्यक्रम में जनसंख्या नियंत्रण का भी अध्याय होगा। - महिला व पुरुष नसबंदी के असफल होने पर अनचाहे गर्भ में छूट मिलेगी। - नसबंदी आपरेशन के विफल होने से हुआ तीसरा बच्चा कानून के दायरे से बाहर होगा। - नसबंदी आपरेशन की विफलता साबित होने पर देना होगा 50 हजार रुपये मुआवजा।
श्रीनगर कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों ने शनिवार को तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। मारे गए आतंकियों के शवों को बरामद कर लिया गया है। उनकी पहचान स्‍थानीय लश्‍कर आतंकवादियों के तौर पर हुई है। इससे पहले आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना पर पूरे इलाके को घेर कर ऑपरेशन चलाया गया था। ऑपरेशन पूरा होने के बाद कश्‍मीर के आईजी विजय कुमार ने बताया कि सभी तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया। ये तीनों स्‍थानीय लश्‍कर तैयबा के आतंकवादी थे। पुलिस के ललकारने पर इन्‍होंने फायरिंग शुरू कर दी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि अनंतनाग जिले के रानीपोरा के क्वारीगाम इलाके में आतंकियों का एक दल छिपा हुआ है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सेना की 19 आरआर को साथ लेकर पूरे इलाके में ऑपरेशन शुरू कर दिया। ऑपरेशन के दौरान आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा गया। लेकिन आतंकियों ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके बाद दोनों तरफ से मुठभेड़ हुई और पहले दो फिर तीसरे आतंकी को भी मार गिराया गया। उनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं।
नई दिल्ली/गाजियाबाद। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर यूपी बॉर्डर पर जारी धरना प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता एक बार फिर विवादित बयान देकर चर्चा में आ गए हैं। अपने अजब-गजब बयानों के लिए चर्चित राकेश टिकैत ने पहले तो 26 जनवरी की घटना को संयुक्त राष्ट्र ले जाने की बात कही और विवाद बढ़ने पर अब उस पर अपनी सफाई भी पेश कर डाली। कहा कि हमने कब कहा कि हम मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाएंगे। पिछले दिनों 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के मुद्दे पर भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा था कि क्या कोई एजेंसी है जो निष्पक्ष जांच कर सकती है। यदि नहीं तो हमें इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना चाहिए। वहीं, अब राकेश टिकैत संयुक्त राष्ट्र जाने की बात से पलट गए हैं। राकेश टिकैत ने समाचार एजेंसी एएनआइ से बातचीत में कहा कि उन्होंने कृषि कानूनों को लेकर ऐसा नहीं कहा। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के मुताबिक, हमने कहा था कि 26 जनवरी की घटना की निष्पक्ष जांच हो जाए। अगर यहां की एजेंसी जांच नहीं कर रही है तो क्या हम यूएन में जाएं?। उन्होंने आगे का कि भारत सरकार बातचीत करना चाहती है तो हम तैयार हैं। आखिर क्यों हुआ विवाद दरअसल, पिछले दिनों राकेश टिकैत ने कहा था कि गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी के दिन दिल्ली में हुई घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस दौरान कटाक्ष के अंदाज में यह कहा दिया कि अगर यहां की एजेंसी जांच नहीं कर रही है तो क्या हम संयुक्त राष्ट्र में जाएं?। इस दौरान राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि कि केंद्र सरकार बातचीत करना चाहती है तो हम तैयार हैं। यह है राकेश टिकैत का पूरा बयान 'हम संयुक्त राष्ट्र में कृषि बिलों का मुद्दा उठाएंगे। हमने 26 जनवरी की घटना पर एक प्रश्न का उत्तर दिया था कि, क्या यहां ऐसी कोई एजेंसी है जो निष्पक्ष जांच कर सकती है? नहीं तो क्या हम इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाएं।' संसद भवन के पास होगा किसान का धरना किसान नेता राकेश ​टिकैत ने बताया कि कृषि कानूनों को पूरी तरह से निरस्त करवाने तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 22 जुलाई से 200 लोग संसद भवन के पास धरना देंगे। 22 तारीख से हमारा दिल्ली जाने का कार्यक्रम रहेगा। 22 जुलाई से संसद सत्र शुरू होगा। इसी दौरान हमारे 200 लोग संसद के पास धरना देने जाएंगे। उधर, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिले बातचीत के प्रस्ताव पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों पर अगले दौर की बातचीत सितंबर में ही हो पाएगी, चूंकि केंद्र सरकार ऐसा नहीं चाहती।
दिसपुर,असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दो बच्चों वाले परिवारों को स्पेशल योजना व नसबंदी व जनसंख्या नियंत्रण पर बड़ा बयान दिया है। सीएम बोले, 'बजट सत्र में कुछ बुनियादी योजनाओं की घोषणा की जाएंगी जिसके लाभार्थी राज्य के सभी नागरिक होंगे, लेकिन कुछ विशेष पैकेज की भी घोषणा होंगी जो केवल दो बच्चों वाले परिवारों को दी जाएंगी। स्वैच्छिक नसबंदी और जनसंख्या नियंत्रण उपायों के संबंध में भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।' वहीं, उन्होंने बताया कि राज्य में स्वदेशी आस्था और संस्कृति का एक नया स्वतंत्र विभाग होने जा रहा है। असम में कोरोना की स्थिति सीएम सरमा ने बताया कि अभी तक, असम में COVID19 का कोई डेल्टा प्लस वैरिंयट का मामला नहीं मिला है। हम राज्य में जीनोमिक सीक्वेंसिंग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे पूर्वोत्तर राज्यों में टीकाकरण की स्थिति का जायजा लेने के लिए बैठक करेंगे। असम-नागालैंड और असम-मिजोरम दोनों सीमाओं पर तनाव राज्य के सीएम ने बातचीत में बताया कि असम-नागालैंड और असम-मिजोरम दोनों सीमाओं पर कुछ तनाव जारी है। हमारी संवैधानिक सीमा की सुरक्षा के लिए असम पुलिस तैनात है। उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार होने के नाते, हम हमेशा चर्चा के लिए तैयार रहते हैं लेकिन अपनी जमीन पर अतिक्रमण नहीं करने दे सकते। असम मुख्यमंत्री ने किए राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल सरमा ने राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल किया है। मंत्री उरखाओ गवरा ब्रह्मा और मंत्री रानुज को कई विभागों के प्रभार सौंपे गए। ब्रह्मा को हथकरघा और कपड़ा, मृदा संरक्षण और बोडोलैंड के कल्याण का प्रभार दिया गया। वहीं, पेगू शिक्षा, मैदानी जनजातियों के कल्याण और पिछड़ा वर्ग विभागों को संभालेगा।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में गांव तथा जिला की सरकार के बाद ब्लाक प्रमुख चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत को सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सबका साथ सबका विकास का ही नतीजा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने साथ मीडिया को संबोधित किया। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में सीमए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भी भाजपा का दबदबा है। 825 सीटों में से अब अब तक के आए नतीजों में भाजपा ने 635 सीटों पर जीत दर्ज कराई है। यह संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हमने प्रदेश में बिना किसी भेदभाव के काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर विकास की योजना को जन-जन तक पहुंचाया है। हमने समाज के हर तबके का विकास किया है। हम पीएम नरेंद्र मोदी के सात वर्ष पहले के सूत्र सबका साथ, सबका विकास पर चले। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा चुनाव था और इसमें हमको पीएम मोदी का हर स्तर पर मार्गदर्शन मिला है। इसी कारण हमको हर जगह पर बड़ी सफलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमारे काम का असर जिला पंचायत तथा ब्लॉक चुनाव में असर दिखा है। उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी की नीति सबका साथ सबका विकास का ही परिणाम है। इसी नीति पर काम करने का परिणाम सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली यह जीत केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश संगठन तथा प्रदेश सरकार के प्रयास का परिणाम है। हमने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव में ग्राम प्रधान के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष तथा ब्लाक प्रमुख के चुनाव जीते, यह मिले जुले प्रयास का ज्वलंत उदाहरण है। हमने अभी तक सभी कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाया है। बिना भेदभाव के हजर जगह पर योजनाएं लागू की गईं हैं। हम लोग पीएम नरेद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के सभी नेता, पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता को जीत की बधाई दी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने इस अवसर पर कहा कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव में प्रचंड जीत पर सभी जीते प्रत्याशियों को बधाई और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद । उन्होंने कहा कि कहा कि यह नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकार की कल्याणकारी नीतियों की जीत है। इस अवसर पर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा तथा भाजपा उत्तर प्रदेश के महामंत्री संगठन सुनील बंसल भी मौजूद थे।
नई दिल्ली। नए सहकारिता मंत्रालय के गठन के पीछे संघ-भाजपा के छिपे राजनीतिक एजेंडे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के आरोप ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। इस नए मंत्रालय के जरिये केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक की सहकारी संस्थाओं में भाजपा का प्रभाव बढ़ाने की तैयारी की चेन्निथला की आशंका को पार्टी नजरअंदाज नहीं कर रही है। कांग्रेस जल्द ही दूसरे विपक्षी दलों से करेगी चर्चा संकेत हैं कि कांग्रेस जल्द ही इसको लेकर विपक्षी खेमे के दूसरे दलों से चर्चा करेगी। उनसे मशविरे की यह प्रक्रिया मानसून सत्र से पहले पूरी की जाएगी ताकि इस नए मंत्रालय के गठन के पीछे की सियासत को संसद में उठाया जा सके। सहकारिता मंत्रालय के गठन पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर किए सवाल खड़े कांग्रेस के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने इस बारे में पार्टी हाईकमान को चेन्निथला के भेजे पत्र की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी चिंता को इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सबसे भरोसेमंद राजनीतिक साथी गृह मंत्री अमित शाह को इस मंत्रालय का जिम्मा सौंपा है। उन्होंने कहा कि पार्टी मंत्रालय गठन से जुड़े राजनीतिक पहलुओं का इस चिंता के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करने के बाद ही अन्य विपक्षी पार्टियों से बातचीत करेगी। मगर इसमें संदेह नहीं कि राजनीति के अनुभवी चेन्निथला ने इस मंत्रालय के गठन पर न केवल राजनीतिक बहस का रास्ता खोल दिया है बल्कि केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया है। चेन्निथला ने कहा- सहकारी संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने की भाजपा की साजिश मालूम हो कि चेन्निथला ने कहा है कि भाजपा का यह कदम वित्तीय दृष्टिकोण से मजबूत सहकारी संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने की उसकी साजिश का हिस्सा है। केरल और महाराष्ट्र में वित्तीय रूप से मजबूत सहकारी संस्थाओं का बहुत बड़ा नेटवर्क है। महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं पर जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मजबूत पकड़ है, वहीं केरल में माकपा और कांग्रेस का अपना-अपना प्रभाव है। नए मंत्रालय के गठन के पीछे छिपी सियासत पर जवाबी वार करने की जरूरत चेन्निथला के अनुसार भाजपा केरल और महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं की राजनीति में अपनी पैठ बनाने में नाकाम रही है और इसके मद्देनजर ही चेन्निथला ने कांग्रेस हाईकमान को तत्काल नए मंत्रालय के गठन के पीछे छिपी सियासत पर जवाबी वार करने की जरूरत बताई है। धर्मनिरपेक्ष सहकारी संस्थाओं में बढ़ेगी संघ-भाजपा की सियासी पैठ केरल की पिछली विधानसभा में नेता विपक्ष रहे चेन्निथला के मुताबिक अमित शाह को यह मंत्रालय सौंपे जाने से स्पष्ट है कि भाजपा के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है। उनका यह भी मानना है कि केरल-महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, बंगाल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सहकारी समितियां व्यापक जनआंदोलन का हिस्सा बनकर उभरी हैं और इनके ढांचे का स्वरूप भी धर्मनिरपेक्ष है। संसद और विधानसभाओं में संघ-भाजपा के इस एजेंडे के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए इसलिए संघ-भाजपा इन सहकारी संस्थाओं में अभी तक अपनी जगह नहीं बना सके हैं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि केंद्र का यह कदम भगवा राजनीति के एजेंडे के लिए इसमें राह बनाने पर केंद्रित है। चेन्निथला का कहना है कि केंद्र के इस मकसद को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व को अपने संगठनात्मक राजनीतिक प्लेटफार्म के साथ-साथ संसद और विधानसभाओं में संघ-भाजपा के इस एजेंडे के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजमार्गो के किनारे स्मार्ट सिटी, टाउनशिप, लॉजिस्टिक पार्क और इंडस्टि्रयल क्लस्टर स्थापित करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी में है। इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को यह बात कही। गडकरी ने कहा कि उनका लक्ष्य विश्व-स्तरीय हाइवे नेटवर्क स्थापित करना है। मंत्रालय मौजूदा राजमार्ग परियोजनाओं से पूंजी जुटाने के लिए योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय 2.5 लाख करोड़ रुपये लागत की सुरंग भी बना रहा है। स्टील और सीमेंट की बढ़ती कीमतों को देखते हुए गडकरी ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना इनोवेशन एवं शोध के जरिये सड़क निर्माण में इनका इस्तेमाल कम करने पर भी जोर दिया। साथ ही सड़क निर्माण की मशीनों में सीएनजी, एलएनजी और एथनॉल के प्रयोग की बात भी कही। उन्होंने कहा कि करीब 63 लाख किलोमीटर के साथ भारत रोड नेटवर्क के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं, नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा था कि उनके मंत्रालय ने वर्ष 2025 से पहले देश में सड़क हादसों व उनमें होने वाली मौतों को 50 फीसद कम करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तमिलनाडु की तारीफ भी की। एक शैक्षणिक संस्थान की ओर से आयोजित वेबिनार में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा, 'हम वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या को शून्य तक ला सकते हैं।' मंत्री ने कहा था कि पिछले साल उनके मंत्रालय ने स्वीडन में एक सम्मेलन में प्रतिभाग किया था। वहीं से वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मृतकों की संख्या शून्य करने का विचार लिया गया है।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजमार्गो के किनारे स्मार्ट सिटी, टाउनशिप, लॉजिस्टिक पार्क और इंडस्टि्रयल क्लस्टर स्थापित करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी में है। इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को यह बात कही। गडकरी ने कहा कि उनका लक्ष्य विश्व-स्तरीय हाइवे नेटवर्क स्थापित करना है। मंत्रालय मौजूदा राजमार्ग परियोजनाओं से पूंजी जुटाने के लिए योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय 2.5 लाख करोड़ रुपये लागत की सुरंग भी बना रहा है। स्टील और सीमेंट की बढ़ती कीमतों को देखते हुए गडकरी ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना इनोवेशन एवं शोध के जरिये सड़क निर्माण में इनका इस्तेमाल कम करने पर भी जोर दिया। साथ ही सड़क निर्माण की मशीनों में सीएनजी, एलएनजी और एथनॉल के प्रयोग की बात भी कही। उन्होंने कहा कि करीब 63 लाख किलोमीटर के साथ भारत रोड नेटवर्क के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं, नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा था कि उनके मंत्रालय ने वर्ष 2025 से पहले देश में सड़क हादसों व उनमें होने वाली मौतों को 50 फीसद कम करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तमिलनाडु की तारीफ भी की। एक शैक्षणिक संस्थान की ओर से आयोजित वेबिनार में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा, 'हम वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या को शून्य तक ला सकते हैं।' मंत्री ने कहा था कि पिछले साल उनके मंत्रालय ने स्वीडन में एक सम्मेलन में प्रतिभाग किया था। वहीं से वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मृतकों की संख्या शून्य करने का विचार लिया गया है।
नई दिल्ली । विभिन्न मंचों पर वर्षों से उठ रही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने की मांग की वकालत करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने को कहा है। तलाक की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह की पीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय समाज समरूप हो रहा है, धर्मों के बीच की पारंपरिक दूरियां धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं। यूसीसी का समर्थन करते हुए पीठ ने कहा कि विभिन्न समुदायों, जनजातियों, जातियों या धर्मों से संबंधित भारत के युवाओं को विवाह और तलाक के संबंध में विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में टकराव के कारण पैदा होने वाले मुद्दों से जूझने के लिए मजबूर होने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उक्त टिप्प्णी करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए। पति की याचिका स्वीकार, पत्नी की दलील खारिज याचिकाकर्ता सतप्रकाश मीना ने अलका मीना से 24 जून 2012 में हिंदू रीति-रिवजों के अनुसार शादी की थी। याचिकाकर्ता ने पत्नी से तलाक लेने के लिए पारिवारिक न्यायालय अधिनियम के तहत तलाक की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। वहीं, पत्नी ने तलाक की याचिका को खारिज करने के लिए आवेदन दायर करते कर दलील दी कि उनपर हिंदू विवाह अधिनियम के प्रविधान लागू नहीं होते, क्योंकि वे राजस्थान के एक अधिसूचित जनजाति मीणा के सदस्य हैं। हालांकि, पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए पत्नी की दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सभी के लिए समान संहिता की जरूरत है, जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि जैसे पहलुओं के संबंध में समान सिद्धांतों को लागू करने में सक्षम हो। पीठ ने कहा कि दस्तावेजों से साफ है कि दोनों पक्षों की शादी हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी और वे इसका पालन करते हैं। पीठ ने कहा कि हालांकि हिंदू की कोई परिभाषा नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर जनजातियों के सदस्यों का हिंदूकरण किया जाता है तो उनपर हिंदू विवाह अधिनियम लागू होगा। इतना ही नहीं, अदालत के समक्ष ऐसा कोई साक्ष्य नहीं रखा गया, जो दर्शाता हो कि मीणा समुदाय के पास इन मुद्दों से निपटने के लिए उचित प्रक्रियाओं के साथ एक विशेष न्यायालय है। पीठ ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम-1955 के 13-1 (ए) के तहत योग्यता के आधार पर छह सप्ताह के मामले में फैसला देने को कहा। महज उम्मीद बनकर न रह जाए यूसीसी की जरूरत वर्ष 1985 के ऐतिहासिक शाहबानो सहित सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों को जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने भी समय-समय पर अनुच्छेद-44 के तहत परिकल्पित यूसीसी की जरूरत को दोहराया है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद-44 में राज्य द्वारा अपने नागरिकों के लिए यूसीसी की सुरक्षा का प्रविधान सिर्फ एक उम्मीद बनकर नहीं रहना चाहिए। पीठ ने निराशा जताई कि तीन दशक बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है। क्या था शाहबानो प्रकरण शाहबानो मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि एक समान नागरिक संहिता परस्पर विरोधी विचारधारा वाले कानूनों के प्रति असमान निष्ठा को हटाकर राष्ट्रीय एकता के उद्देश्य की पूर्ति करने में मदद करेगी। यह भी देखा गया था कि राज्य पर देश के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता को सुरक्षित रखने का कर्तव्य है। क्या है संविधान का अनुच्छेद-44 संविधान के भाग चार में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत का वर्णन है। इसमें अनुच्छेद-44 राज्य को उचित समय आने पर सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का निर्देश देता है। कुल मिलाकर अनुच्छेद-44 का उद्देश्य कमजोर वर्गों से भेदभाव की समस्या को खत्म करके देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच तालमेल बढ़ाना है।
नई दिल्‍ली तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्‍म होता नहीं दिख रहा है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रस्‍ताव को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने एक तरह से खारिज कर दिया है। उन्‍होंने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने शर्त के साथ बातचीत का प्रस्‍ताव दिया है। यह मंजूरी नहीं है। बात करनी है तो बिना कंडीशन के हो। केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों की घोषणा करते हुए तोमर ने गुरुवार को कहा था कि सरकार कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। वह कानून के हर पहलू पर बात करने को राजी है। लेकिन, इन्‍हें वापस लेने का सवाल पैदा नहीं होता है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए शुक्रवार को टिकैत ने कहा कि सरकार के प्रस्‍ताव में शर्त है। यह किसी तरह स्‍वीकार्य नहीं है। टीवी चैनल आज तक के साथ बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि दोनों (सरकार और किसान) अपने-अपने रुख पर अड़े रहे तो आगे रास्‍ता कैसे निकलेगा? इस सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि सरकार के मंत्रियों के पास पावर नहीं है। उनसे सिर्फ बयान दिलाए जाते हैं। ये (मंत्री) कागज झोले में रखते हैं। जो इनसे कहा जाता है वो ये बोल देते हैं। जब इन्‍हें पावर मिल जाएगी तो बातचीत हो जाएगी। बिना दबाव सरकार नहीं मानेगी टिकैत ने कहा कि सरकार दबाव के बिना नहीं मानेगी। इसके लिए उन्‍होंने गन्‍ने से सरकार की तुलना की। उन्‍होंने कहा कि गन्‍ने को कई टुकड़ों में कर दिया जाए तो रस नहीं निकलता है, पर जब उसे कोल्‍हू में पेरा जाता है तो रस निकल आता है। सरकार भी ऐसी ही है। टिकैत ने कहा कि 22 जुलाई को हमारे 200 लोग संसद तक जाएंगे। वो पैदल के बजाय गाड़ी से जाएंगे। लगातार जारी है गतिरोध तीन कृषि कानूनों को लेकर करीब आठ महीनों से किसानों और सरकार के बीच तनातनी है। आंदोलन कर रहे किसान तीनों कृषि कानूनों की वापसी चाहते हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि वह कानूनों को वापस नहीं लेगी। हां, कानूनों में किसी भी बिंदु पर कोई भी आपत्ति दूर करने के लिए वह किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है।
नई दिल्ली ऐसे समय में जब नए आईटी नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर में ठनी हुई है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देसी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू जॉइन किया है। कू को ट्विटर का देसी विकल्प बताया जाता है। इससे पहले केंद्र के कई मंत्री और मंत्रालय भी कू जॉइन कर चुके हैं। ट्विटर के साथ जारी लड़ाई के बीच सत्ताधारी बीजेपी के मातृ संगठन संघ का कू जॉइन करना काफी अहम है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुआ कू तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और उन लोगों को पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है जिनका किसी कारण से ट्विटर से मोहभंग हो रहा है। आरएसएस ने कू पर अपने पहले पोस्ट में अपने संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को उद्धृत किया है। पोस्ट में लिखा है, 'भारत सिर्फ भू-भाग नहीं है बल्कि वास्तविक सजीव मां है। यह वात्सल्यमयी, मंगलकारी, पुण्यभूमि, हिंदूभूमि है। हम अपनी प्रार्थनाओं में यही कहते हैं।' हेडगेवार ने ही 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। वह पहले सरसंघचालक थे। कू ने एक बयान में कहा है कि उसके प्लेटफार्म से जुड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजनीति, खेल और मनोरंजन से बड़ी संख्या में हस्तियों ने सोशल मीडिया मंच पर अपना खाता खोला हैं। उसने कहा, ‘कू के साथ जुड़ने वाला नया प्रसिद्ध संगठन आरएसएस हैं। संघ ने कू पर लोगों के साथ जुड़ने के लिए बुधवार को अपना खाता खोला। आरएसएस का कू पर @आरएसएसडॉटओआरजी नाम से खाता है।’ आरएसएस अब कू पर हिंदी में अपने फैसलों और विचारों के बारे में पोस्ट करेगा। बुधवार को उसने चित्रकूट के अपने 5 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के बारे में जानकारी दी। एमपी के चित्रकूट में 8 जुलाई से शुरू हुआ संघ का यह कार्यक्रम 5 दिनों तक चलना है। ट्विटर बनाम सरकार की 'जंग' इस साल जनवरी के आखिर में शुरू हुई। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसानों की 'ट्रैक्टर रैली' हिंसक हो गई। उस दौरान ट्विटर पर कथित तौर पर कई फेक न्यूज और भड़काऊ कंटेंट शेयर किए जा रहे थे। 31 जनवरी को सरकार ने ट्विटर से कुछ अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन को कहा। ट्विटर ने अनमने ढंग से कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक तो किया लेकिन कुछ देर बाद अनब्लॉक भी कर दिया। इससे सरकार की भृकुटी तन गई। इस बीच 25 फरवरी को सरकार ने नए आईटी नियम जारी किए। इसके तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करना अनिवार्य कर दिया गया। 25 मई को नए आईटी नियम लागू भी हो गए लेकिन ट्विटर ने अबतक उसका पालन नहीं किया है। इस बीच 'ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट' केस, लद्दाख के गलत नक्शे, कुछ बीजेपी प्रवक्ताओं के पोस्ट्स पर 'मैनिपुलेटेड मीडिया' टैग, उपराष्ट्रपति और संघ के कुछ नेताओं के हैंडल से ब्लू टिक हटाए जाने और रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को कुछ देर के लिए ब्लॉक करने से सरकार और ट्विटर का तनाव बढ़ता ही जा रहा है।
लखनऊ उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की कड़ी में शुक्रवार को राज्‍य में 349 क्षेत्र पंचायत प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि 476 पदों के लिए शनिवार को मतदान होगा। उत्तर प्रदेश के राज्‍य निर्वाचन आयुक्‍त मनोज कुमार ने यह जानकारी दी। उधर, बीजेपी का दावा है कि प्रदेश भर में उसके प्रत्याशियों की बड़े पैमाने पर निर्विरोध जीत तय हो गई है। वहीं चुनाव में कम से कम 292 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। बीजेपी की सहयोगी अपना दल को मिला लें तो यह आंकड़ा 295 पर पहुंच जाएगा। राज्‍य में 825 क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया गुरुवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ शुरू हुई। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी तय थी। शनिवार को मतदान होना है। निर्वाचन आयुक्‍त मनोज कुमार ने बताया कि 825 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों के लिए कुल 1,718 नामांकन प्राप्त हुए। इनमें 68 नामांकन रद्द हो गए। जबक‍ि 187 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले ल‍िया। इसके बाद कुल 1,710 वैध उम्मीदवार पाए गए हैं। 476 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों पर होगा चुनाव कुमार ने बताया कि शनिवार को 476 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक मतदान होगा। इसके बाद दोपहर तीन बजे से मतगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गोंडा जिले के मुजेहना क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल पूर्ण न होने के कारण वहां चुनाव नहीं कराया जा रहा है। बीजेपी ने इन सीटों पर किया है जीत का दावा बीजेपी ने लखनऊ क्षेत्र में 61, बरेली क्षेत्र में 30, बनारस क्षेत्र में 27, गोरखपुर क्षेत्र में 44, मेरठ क्षेत्र में 29, प्रयागराज क्षेत्र में तीन, बुंदेलखंड में 19, कानपुर क्षेत्र में 30, गाजियाबाद में एक, गौतमबुद्धनगर में दो, अलीगढ़ क्षेत्र में सात, आगरा क्षेत्र में 31 और मुरादाबाद क्षेत्र में आठ सीटों पर जीत का दावा किया है।
लखनऊ उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की कड़ी में शुक्रवार को राज्‍य में 349 क्षेत्र पंचायत प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि 476 पदों के लिए शनिवार को मतदान होगा। उत्तर प्रदेश के राज्‍य निर्वाचन आयुक्‍त मनोज कुमार ने यह जानकारी दी। उधर, बीजेपी का दावा है कि प्रदेश भर में उसके प्रत्याशियों की बड़े पैमाने पर निर्विरोध जीत तय हो गई है। वहीं चुनाव में कम से कम 292 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। बीजेपी की सहयोगी अपना दल को मिला लें तो यह आंकड़ा 295 पर पहुंच जाएगा। राज्‍य में 825 क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया गुरुवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ शुरू हुई। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी तय थी। शनिवार को मतदान होना है। निर्वाचन आयुक्‍त मनोज कुमार ने बताया कि 825 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों के लिए कुल 1,718 नामांकन प्राप्त हुए। इनमें 68 नामांकन रद्द हो गए। जबक‍ि 187 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले ल‍िया। इसके बाद कुल 1,710 वैध उम्मीदवार पाए गए हैं। 476 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों पर होगा चुनाव कुमार ने बताया कि शनिवार को 476 प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पदों के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक मतदान होगा। इसके बाद दोपहर तीन बजे से मतगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गोंडा जिले के मुजेहना क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल पूर्ण न होने के कारण वहां चुनाव नहीं कराया जा रहा है। बीजेपी ने इन सीटों पर किया है जीत का दावा बीजेपी ने लखनऊ क्षेत्र में 61, बरेली क्षेत्र में 30, बनारस क्षेत्र में 27, गोरखपुर क्षेत्र में 44, मेरठ क्षेत्र में 29, प्रयागराज क्षेत्र में तीन, बुंदेलखंड में 19, कानपुर क्षेत्र में 30, गाजियाबाद में एक, गौतमबुद्धनगर में दो, अलीगढ़ क्षेत्र में सात, आगरा क्षेत्र में 31 और मुरादाबाद क्षेत्र में आठ सीटों पर जीत का दावा किया है।
लखनऊ योगी सरकार 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रदेश की नई जनसंख्या नीति जारी करेगी। इसमें जनसंख्या बढ़ोतरी नियंत्रित करने के लिए समुदाय आधारित अभियान और कार्यक्रम चलाए जाएंगे। गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने इसका प्रजेंटेशन हुआ। सीएम योगी ने कहा कि आबादी विस्तार के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारक है। कुछ समुदायों में भी जनसंख्या को लेकर जागरूकता का अभाव है। ऐसे में समुदाय केंद्रित जागरूकता के प्रयास की जरूरत है। आइए जानते हैं कि योगी सरकार का बढ़ती आबादी को रोकने के लिए क्या प्लान है... यूपी में आखिरी बार जनसंख्या नीति साल 2000 में आई थी, जो 2016 तक के लक्ष्यों के आधार पर तय की गई थी। अब नई जनसंख्या नीति लाई जा जा रही है, जो 2030 तक प्रभावी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में सभी समुदायों में जनसांख्यकीय संतुलन बनाए रखने के पर केंद्रित प्रयासों पर जोर दिया जाए। जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ सभी जरूरी प्रयास किए जाएं। स्कूलों में 'हेल्थ क्लब' बनाए जाएं। साथ ही, डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत योजनाओं से लाभान्वित होने वाले नवजातों, किशोरों और बुजर्गों की डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था भी करें। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सहज उपलब्धता, समुचित पोषण के जरिए मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाने का प्रयास होना चाहिए। जन्म दर 2% से नीचे लाने का लक्ष्य प्रस्तावित जन्म दर को प्रदेश में 2026 तक 2.1% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार यूपी की जन्म दर अभी 2.7% है, जो राष्ट्रीय औसत से 2.2% से अधिक है। इसे 2030 तक 1.9% तक लाने का लक्ष्य है। इसके लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भ निरोधक उपायों की पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने पर जोर रहेगा। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से बाल मृत्यु दर व और मातृ मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी। इससे नियोजन को बढ़ावा मिल सकेगा। खास बात यह है कि नई नीति में किशोरों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अभी तक एनीमिया और कुपोषण अभियानों में किशोरी स्वास्थ्य पर ही अधिक ध्यान रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों के देखभाल व बेहतर सुविधाओं पर भी जोर रहेगा। जनसंख्या नियंत्रण कानून की ओर कदम! सूत्रों के अनुसार जनसंख्या की वृद्धि दर संतुलित करने के लिए कानूनी उपायों का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। राज्य विधि आयोग जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून का मसौदा तैयार कर रहा है। इसमें सरकारी योजनाओं, नौकरियों व अन्य सुविधाओं को भी जनसंख्या से लिंक करने की तैयारी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि सभी नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से जनसंख्या को नियंत्रित करना आवश्यक है। ऐसे में नई जनसंख्या नीति में इस दिशा में बढ़ाए जाने वाले कदमों की झलक मिल सकती है। यूपी की अभी इतनी आबादी अनुमान है कि अभी यूपी की आबादी तकरीबन 23 करोड़ है। 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश की कुल जनसंख्या 19 करोड़ 98 लाख 12 हजार 341 थी। जो कि भारत की कुल आबादी का 16.5 फीसदी थी। वहीं यूपी का प्रयागराज 59 लाख 54 हजार 391 की आबादी के साथ प्रदेश में पहले नंबर पर था।दूसरी ओर 8 लाख 75 हजार 958 की जनसंख्या के साथ महोबा प्रदेश का सबसे कम आबादी वाला जिला था।
अलवर अलवर शहर के अरावली विहार थाने में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।जुबेर खान पर कॉलोनी के रास्ते पर कब्जा करने और विरोध करने पर वकील राजेश कुमार को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। जिसके चलते अरावली विहार थाने में मामला दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। शहर के अरावली विहार थाना क्षेत्र स्थित भाखेड़ा निवासी एडवोकेट राजेश कुमार ने रामगढ़ के पूर्व विधायक और वर्तमान ने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान और उनके चौकीदार के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने देर रात मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अपनी शिकायत में राजेश गुप्ता ने कही ये बातें एडवोकेट राजेश कुमार गुप्ता ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि उनके घर के रास्ते पर रामगढ़ के पूर्व विधायक जुबेर खाने ने 30 फीट जमीन पर कब्जा किया हुआ है। बुधवार रात वह अपने घर स्थित ऑफिस में बैठकर काम कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व विधायक जुबेर खान का चौकीदार नूरा उसके घर आया और गाली गलौज करने लगा। नूरा ने उसके कहा कि उसे पूर्व विधायक जुबेर खान ने बुलाया है। जब वह जुबेर खान के घर पहुंचे तो पूर्व विधायक जुबेर खान और उनके दोनों पुत्र मौजूद थे। कुछ अन्य व्यक्ति भी वहां पर मौजूद थे। उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी और रास्ते के विवाद को लेकर कोर्ट में चल रहे मामले को वापस लेने की बात कही। 1999 में खरीदी थी जमीन, खातेदारी भी मेरे नाम: जुबेर खान वहीं इस मामले पर कांग्रेस नेता जुबेर खान ने बताया कि उन्होंने 1999 में जमीन खरीदी थी। जिसकी खातेदारी उनके नाम है, लेकिन राजेश उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। राजेश ने वहां सीसीटीवी कैमरा लगाया है और आए दिन वह नाटक करता रहता है। बेवजह के आरोप लगाकर हमें बदनाम कर रहा है। उसे पुलिस से पाबंद भी कराया है लेकिन वह खुद झगड़ा करने की नौबत पैदा करता है। FIR में ऐसे लोगों के नाम जो यहां मौजूद भी नहीं, मामले की जांच हो रही: एसपी पुलिस अधीक्षक अलवर तेजस्वनी गौतम ने बताया कि एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज भी जांच रही है। एफआईआर में कई ऐसे लोगों के नाम भी लिखाए हैं, जो यहां मौजूद भी नहीं हैं।
नई दिल्ली, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने गुरुवार को भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए आकाश मिसाइलों के निर्माण और आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ लगभग 499 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नई दिल्ली में भारतीय वायुसेना की ओर से एयर कमोडोर, गाइडेड वेपंस मेंटेनेंस अजय सिंघल और बीडीएल के कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग) कमोडोर टीएन कौल (सेवानिवृत्त) के बीच इस अनुबंध पर हस्ताक्षर हुआ। इस दौरान बीडीएल के निदेशक (उत्पादन) पी राधाकृष्ण की मौजूद रहे। बीडीएल के सीएमडी कमोडोर सिद्धार्थ मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बीडीएल भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना को आकाश मिसाइलों की आपूर्ति कर रहा है। निर्यात के लिए आकाश वेपन सिस्टम की मंजूरी के संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल की घोषणा के साथ कंपनी विदेशों में निर्यात के लिए आकाश की पेशकश करने पर विचार कर रही है। बीडीएल को मिसाइल की खरीद में रुचि व्यक्त करने वाले कुछ देशों से पहले ही निर्यात लीड प्राप्त हो चुकी है। इनके ऑर्डर और डिलिवरी को पूरा करने के लिए कंपनी के पास एक अच्छी तरह से स्थापित बुनियादी ढांचा और विशेषज्ञता है।बीडीएल भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत परियोजनाओं के लिए प्रमुख उत्पादन एजेंसी है। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना दोनों के लिए आकाश आइजीएमडीपी के तहत बीडीएल द्वारा निर्मित मिसाइलों में से एक है। इस मिसाइल का कई मौकों पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसे अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ मिसाइलों में से एक माना जाता है। भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कल्याण सिंह से जुड़ी बातों को किया याद, जानें क्या कहा कंपनी टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हवा से सतह पर मार करने वाला हथियार, लॉन्चर, परीक्षण उपकरण, अंडर वाटर वेपन और काउंटर मेजर सिस्टम भी बनाती है। कंपनी को वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान लगभग 2803 करोड़ रुपये (कर सहित) के नए ऑर्डर मिले हैं। इसमें लगभग 1820 करोड़ रुपये के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के ऑर्डर और लगभग 793 करोड़ रुपये के सरफेस टू एयर मिसाइल ऑर्डर शामिल हैं। भारतीय वायु सेना को आकाश की आपूर्ति के लिए हस्ताक्षरित वर्तमान अनुबंध के साथ, ऑर्डर बुक की स्थिति अब लगभग 8683 करोड़ रुपये है।
तिरुअनंतपुरम, केरल में कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच जीका वायरस ने दस्तक दे दी है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जार्ज ने गुरुवार को बताया कि राज्य में जीका वायरस के मामले सामने आए हैं। यह पहला मौका है जब केरल में जीका वायरस के मामले सामने आए हैं। राज्य की राजधानी के एक अस्पताल में पिछले महीने एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला को बुखार, सिरदर्द और चकत्ते के साथ भर्ती किया गया था। जांच के शुरुआती परिणामों में जीका वायरस के हल्के असर के संकेत मिले थे। बाद में 19 नमूनों की जांच की गई जिनमें 13 में जीका पाजिटिव की रिपोर्ट आई। अब इन सभी नमूनों को एनआइवी पुणे भेजा गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और जिला अधिकारियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए एडीज प्रजाति के मच्छरों के नमूने एकत्र करवाने का काम शुरू कर दिया है। सभी जिलों को इस बारे में सतर्क कर एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है। क्या होते हैं जीका वायरस के लक्षण ? जीका वायरस के लक्षण डेंगू के जैसे होते हैं, इसमें बुखार, त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते और जोड़ों का दर्द और आंखों का लाल होना शामिल होता है। जीका वायरस के कारण संक्रमित व्यक्ति 7 से 8 दिनों तक प्रभावित रहता है। यह वायरस गर्भवती महिला को ज्यादा प्रभावित करता है। इसके कारण जन्म लेने वाला बच्चा अविकसित दिमाग के साथ पैदा होता है। ब्राजील में 2015 में जीका वायरस बड़े पैमाने पर फैल गया था, जिससे 1600 से अधिक बच्चे विकृति के साथ पैदा हुए थे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी(एनआइवी), पुणे ने पहली बार नवंबर 2018 में जीका वायरस को अलग करने में सफलता पाई थी। भारत में पहली बार जनवरी 2017 में जीका वायरस का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद जुलाई 2017 में तमिलनाडु में भी इसके मामले सामने आए थे।
नई दिल्ली,देश में कोरोना के मामले एक बार फिर तेज होते नजर आ रहे हैं। अगले महीने यानी अगस्त में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई गई है लेकिन उससे पहले ही देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते तीन दिनों में कोरोना के नए केस में करीब 34 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। देश में कोरोना वायरस के मामलों में पिछले महीने से ही गिरावट दर्ज की जा रही थी। ये गिरावट तेजी से हो रही थी लेकिन अब एक बार फिर देश में बढ़ते हुए मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। देश में 55 दिनों के बाद कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या ठीक हुए मरीजों की संख्या से ज्यादा हुई है। इसके साथ ही कोरोना के सक्रिय मामलों में भी इजाफा देखने को मिला है। प्रधानमंत्री की चेतावनी इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कहा है कि देश में कोरोना खत्म नहीं हुआ है। देश में लोग कोरोना का प्रकोप कम होते ही मनाली समेत दूसरे पर्यटक स्थलों और वहां के बाजारों में भीड़ में घूमते नजर आ रहे हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने सभी को अलर्ट करते हुए कहा है कि अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है, इसलिए सावधानी जरूरी है। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र और केरल में संक्रमण की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। हालांकि, देश में अभी संख्या कम है और अगर लोग मास्क लगाते रहें, वैक्सीन लगवाएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें तो हालात बेकाबू होने से पहले ही संभल सकते हैं। लेकिन बहुत सारे लोग हैं जो ऐसा नहीं कर रहे हैं और आगे भी शायद करने के लिए राजी नहीं हैं। पहाड़ों पर पर्यटकों की भीड़ और लापरवाही के ऐसे कई वीडियो आप सोशल मीडिया पर देख चुके होंगे लेकिन उसी सोशल मीडिया पर वायरल एक और वीडियो हैं। जो मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को तिलांजलि दे चुके लोगों को जरूर देखना चाहिए। इस वीडियो में एक छोटा सा बच्चा लापरवाह लोगों को मास्क की अहमियत और जरूरत समझाता दिख रहा है।
बेंगलुरु,भारत की एक फर्माक्यूटिकल कंपनी हेटेरो लैब्स (Hetero Labs) ने शुक्रवार को कोविड की एक नई दवा को लेकर दावा किया है कि यह कोरोना संक्रमितों पर कारगर है और इससे अस्पताल में भर्ती होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। कोविड-19 ड्रग मोलनुपिराविर (molnupiravir) के अंतिम चरण के ट्रायल में सकारात्मक नतीजे मिले हैं। इसके अनुसार यह कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी हद तक कम कर देती है साथ ही कम संक्रमण वाले मामलों में तेजी से रिकवरी के भी नतीजे आए हैं। मोलनुपिराविर के लिए ट्रायल भारत के विभिन्न कोरोना अस्पतालों में किया गया। शुक्रवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में महामारी कोविड-19 के आंकड़ों को जारी किया। इसके अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान 43,393 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 911 संक्रमितों की मौत दर्ज की गई। वहीं इस अवधि में 44,459 रिकवरी भी दर्ज की गई। अभी देश में 4,58,727 सक्रिय मामले हैं।
नई दिल्‍ली, एजेंसियां। पीएम मोदी की अध्‍यक्षता में गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई जिसमें कृषि के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए गए। इन फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बीते सात वर्षों में लगातार किसानों के हित में कई फैसले लिए हैं... कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार नारियल की खेती को बढ़ाने के लिए नारियल बोर्ड अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। नारियल बोर्ड का अध्यक्ष एक गैर-सरकारी व्यक्ति होगा। यह व्‍यक्ति किसान वर्ग से होगा जो खेत के काम को जानते और समझते हैं... तोमर ने कहा- हमारे देश में एक बड़े क्षेत्र में नारियल की खेती होती है। इसका उत्पादन बढ़े और किसानों को सहूलियत दिया जा सके इसके लिए 1981 में नारियल बोर्ड एक्ट लाया गया था इसमें हम संशोधन करने जा रहे हैं। बोर्ड का अध्यक्ष गैर शासकीय व्यक्ति होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री कहा कि यह किसानों के बीच से ही होगा जो खेती किसानी के कामों को जानते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- बजट में कहा गया था कि मंडियां समाप्त नहीं होगी बल्कि मंडियों को और मज़बूत किया जाएगा। मंडियों को और संसाधन मिले इस दृष्टि से प्रयास किया जाएगा। कृषि अवसंरचना फंड को आत्मनिर्भर भारत के तहत एक लाख करोड़ रुपये प्रवर्धित किया गया है उस फंड का उपयोग APMC कर सकेंगी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि एपीएमसी (Agricultural Produce Market Committee, APMC) को खत्म नहीं किया जाएगा। कृषि कानूनों के लागू होने के बाद एपीएमसी को केंद्र के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से करोड़ों रुपये मिलेंगे जो उसे मजबूत करेगा। इससे ज्‍यादा किसानों को फायदा पहुंचेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि व्यक्ति एक से अधिक परियोजना (अधिकतम सीमा 25 और ये परियोजना अलग-अलग स्थान पर करना होगा) करेगा तो हर परियोजना पर अलग-अलग 2 करोड़ रुपये तक ब्याज पर छूट और गारंटी की पात्रता रहेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों पर ये लागू नहीं होगा वो 25 से अधिक परियोजना बना सकते हैं। मंडी के मामले में ये भी निर्णय लिया गया है कि कृषि उपज मंडी में एक से अधिक परियोजनाएं किसानों के लिए बनाई जाएंगी तो उन्हें भी ये पात्रता मिलेगी। इस निर्णय से काफी लोग लाभान्वित होंगे। तोमर ने कहा कि बजट में भारत सरकार ने घोषणा किया था कि 1 लाख करोड़ रुपए के इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में APMC भी पात्र होगी। आज मंत्रीपरिषद बैठक में ये निर्णय लिया गया कि मंडी समिति भी 1 लाख करोड़ रुपए इन्फ्रास्ट्रक्चर के पात्र होगी। वहीं इस योजना का लाभ ब्याज में छूट और लोन के लिए ले सकती हैं। नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों ने नए कृषि कानूनों के विरोध में जारी आंदोलन को खत्‍म करने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि किसान संगठनों से मैंने एक बार नहीं कई बार कहा है कि तीन कानूनों को रद करने के अतिरिक्त वो कोई भी प्रस्ताव लेकर हमारे पास आएं हम उस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। कृषि मंडियां समाप्त नहीं होंगी बल्कि उन्‍हें और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध है। कृषि मंत्री ने कहा- मैं नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संघों से धरना प्रदर्शन खत्‍म करने और बातचीत करने की अपील करना चाहता हूं। सरकार चर्चा के लिए तैयार है। सरकार कृषि मंडियों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्‍ली । पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश के प्रतिष्ठित करीब 100 तकनीकी संस्‍थानों के प्रमुखों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। इस दौरान उन्‍होंने कोरेाना काल में दिए गए उनके योगदान और जरूरत के वक्‍त उपलब्‍ध कराई गई तकनीक की जमकर प्रशंसा की। उन्‍होंने शोधकर्ताओं के किए कामों को भी जमकर सराहा। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने के लिए ये जरूरी है कि हायर एजूकेशन और तकनीकी शिक्षा में बदलते दौर के साथ बदलाव लाया जाए। उन्‍होंने कहा कि ये भी जरूरी है कि हम लगातार शोध के जरिए खुद को परखते रहे और भविष्‍य में आगे बढ़ने की राह तलाशते रहे। हम भविष्‍य की जरूरत के हिसाब से देश को और अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए नई खोज करें। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि आईआईएससी बेंगलुरू की टीम ने रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रमुख अनुसंधान एवं विकास पहलों, गणित/विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षित करने, COVID-19 कार्य जैसे शिक्षा के प्रयासों पर एक दिलचस्प प्रस्तुति साझा की। इसमें उन्होंने आत्मानिर्भर भारत की राह में स्वास्थ्य को महत्व देने की आवश्यकता पर बल दिया है। अपने एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने कहा है कि इस दौरान देश के प्रतिष्ठित आईआईटी और आईआईएससी बेंगलुरू के डायरेक्‍टर से बेहद लाभदायक बातचीत हुई। इस दौरान उन्‍होंने अपने कई मुद्दों पर विचार प्रस्‍तुत किए। इसमें भारत को कैसे रिसर्च एंड डेवलेपमेंट का हब बनाया जा सकता है और विज्ञान में कैसे हम आगे बढ़ते हुए लगातार शोध कर सकते हैं, पर अपने विचार सामने रखे।
नई दिल्ली,कैबिनेट विस्तार के साथ ही मोदी सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। कोरोना संकट के बीच मोदी सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर 23,123 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज की जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए भारत सरकार 23,123 करोड़ रुपये की लागत से एक आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी पैकेज फेज 2 को मंजूरी दी है। आपातकालीन पैकेज का एलान करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि 2020 में कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने पहला पैकेज 15 हजार करोड़ रुपए का दिया गया था। इसकी मदद से कोविड डेडिकेटेड अस्पताल 163 से 4,389 हो गए हैं। पहले कोविड हेल्थ सेंटर नहीं थो, जो कि अब 8,338 हो चुके हैं। कोविड केयर सेंटरों की संख्या 10 हजार हो गई है। ऑक्सीजन बेड 4 लाख से ज्यादा हो गए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में जो दिक्कतें हमारे सामने आईं हैं। उसे देखते हुए सरकार 23 हजार करोड़ का नया पैकेज लेकर आई है। इस आपातकालीन पैकेज के तहत केंद्र 15 हजार करोड़ खर्च करेगा और राज्य सरकारों को 8 हजार करोड़ दिए जाएंगे। कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि हमें सामूहिक रूप से इस महामारी के खिलाफ लड़ना है। सीमा अवधि अधिकतम 9 महीने की है। हमें इसे जल्दी पूरा करना होगा और राज्य सरकारों को इसे जल्दी करना होगा। राज्य की हर संभव मदद करना हमारा कर्तव्य है। 736 जिलों में बाल चिकित्सा देखभाल केंद्र बनाए जाएंगे, कोरोना राहत कोष के तहत 20,000 आईसीयू बेड बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार 23,000 करोड़ रुपए के इस पैकेज की सारे प्रावधानों को अगले 9 महीनों में अमल में लाया जाएगा। माना जा रहा है कि सितंबर-अक्टूबर के बीच भारत में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। सरकार इसी को देखते हुए हर तरह की तैयारी करने में लगी हुई है।
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत योगी सरकार ने 'एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज' की योजना बनाई है। 75 में से 59 जिलों में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं, जिनमें से नौ का लोकार्पण जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा बचे 16 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बनाए जाएंगे। इसके लिए नीति और प्रस्ताव बनाने का निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोकभवन में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीरजापुर, गाजीपुर, देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर और जौनपुर में बनाए गए मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण करेंगे। इसे देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए कृतसंकल्पित है। 59 जिलों में कम से कम एक कॉलेज बनाया जा चुका है। अब जो 16 जिले बचे हैं, वहां पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए नीति और कार्य योजना तैयार की जाए। मां विंध्यवासिनी के नाम पर मीरजापुर का कॉलेज : मीरजापुर में मेडिकल कॉलेज का नामकरण मां विंध्यवासिनी के नाम पर होगा। गाजीपुर के संस्थान को महर्षि विश्वामित्र के नाम से जाना जाएगा। देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर और जौनपुर के कॉलेजों का नामकरण भी इसी तरह किया जाएगा। इन संस्थानों में 450 से अधिक संकाय सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने चयन प्रक्रिया में शुचिता और पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि मेरिट के आधार पर अच्छे शिक्षकों का चयन किया जाए। महापुरुषों के स्मारकों के रखरखाव का चलेगा अभियान : हर शहर-कस्बे में महापुरुषों के स्मारक, स्मृति स्थल आदि हैं। अक्सर इनकी बदहाली की तस्वीरें भी सामने आती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथा ने कहा है कि विभिन्न जिलों में महापुरुषों के स्मारकों व स्मृति स्थलों का व्यवस्थित रख-रखाव किया जाए। इन स्थलों की बेहतर साफ-सफाई और प्रबंधन के लिए प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाए।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में गांव तथा जिले की सरकार चुने जाने के बाद अब ब्लाक की सरकार के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश में गुरुवार को 11 बजे से तीन बजे तक नामांकन के बाद नामांकन पत्रों की जांच की गई। इसी बीच कई जगह पर हिंसा की वारदात के बीच पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। हरदोई में 19 में से भाजपा के आठ निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुने गए हैं। कई जगह पर बवाल के बीच दस जुलाई को 825 सीटों के लिए होने वाले चुनाव का नामांकन हो गया। प्रदेश के गोंडा के मुजेहना ब्लाक को छोड़कर अन्य सभी 825 ब्लाक पर 75845 बीडीसी मतदान करेंगे। यूपी में ब्लाक प्रमुख चुनाव के लिए नामांकन के दौरान कई स्थानों से हिंसा की घटनाओं को शासन ने गंभीरता से लिया है। एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा है कि जहां भी हिंसा हुई है वहां एफआइआर दर्ज किया जाएगा। कई स्थानों पर नामांकन पत्र छीनने और मारपीट की घटना सामने आई हैं। गड़बड़ी करने वालों चिन्हित किया जा रहा है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई होगी। उत्तर प्रदेश में ब्लाक प्रमुख चुनाव के लिए गुरुवार को नामांकन के दौरान कन्रौज, सीतापुर, बुलंदशहर, पीलीभीत, झांसी, उन्नाव, अयोध्या, बस्ती, गोरखपुर, सम्भल, चित्रकूट, जालौन, फतेहपुर, एटा, अंबेडकरनगर, महराजगंज में खुलेआम फायरिंग व मारपीट हुई। हिंसा के बीच नामांकन प्रक्रिया सम्पन्न हो गई। प्रदेश के सीतापुर में बमबाजी व फायरिंग में एक व्यक्ति घायल है, जबकि कन्नौज में भी पथराव के साथ फायरिंग की गई। दर्जन भर से अधिक जगहों में नामांकन करने जा रहे लोगों से मतपत्र भी छीनने का प्रयास किया गया। फर्रुखाबाद के बढरपुर ब्लॉक में निर्दलीय महिला प्रत्याशी को पर्चा नहीं भरने दिया गया। उसको धक्का देकर पर्चा छीनने का प्रयास किया गया। बुलंदशहर के सियाना में ब्लॉक प्रमुख पद के नामांकन के दौरान दो गुटों में हाथापाई हो गई। दो पक्ष एकसाथ नामांकन के लिए आए। उनके समर्थकों के बीच कहासुनी हो गई। मामले को शांत करवा दिया गया। दोनों पक्षों के बीच किसी मुद्दे को लेकर टकराव नहीं था। सीतापुर के कमसमंडा में फायरिंग के साथ बमबाजी सीतापुर में नामांकन के दौरान नेशनल हाईवे पर कमसंडा ब्लाक पर मौजूद लोगों में जमकर कई राउंड फायरिंग हुई। देशी बम भी फेंके गए। यह घटना दोपहर को कमलापुर थाने के पड़ोस में ही हुई है। आरोप है कि सत्ता पक्ष के लोग निर्दलीय प्रत्याशी मुन्नी देवी को नामांकन करने से रोक रहे थे। झगड़े में कई राउंड गोलियां चलाईं। देशी बम भी फेंके जाने लगे। भगदड़ मच गई। भाग रहे लोगों पर पुलिस ने मौका देखकर लाठियां भांजना शुरू कर दिया। उपद्रव के दौरान हाईवे पर उठा धुआं देख आसपास के दुकानदार शटर गिराकर अंदर छिप गए। फुटपाथ के दुकानदार भाग खड़े हुए। बताया जा रहा है कि हथियारों से लैस दबंगों ने निर्दलीय प्रत्याशी मुन्नी देवी के समर्थकों पर ताबड़तोड़ कई राउंड गोलियां दागी। हमले में मुन्नी देवी के पक्ष से अखंड प्रताप सिंह जख्मी हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशी मुन्नी देवी के समर्थक अभिषेक ठाकुर खाली खोखे हाथ में लेकर दिखाते हुए पूरे मामले की जानकारी दे रहे थे। मुन्नी देवी व उनके समर्थक हमले के संबंध में सीधा आरोप भाजपा नेताओं और कमलापुर पुलिस लगा रहे हैं। कसमंडा में नामांकन के दौरान एक पक्ष की ओर से हमले के संबंध में खबर पर डीएम विशाल भारद्वाज और एसपी आरपी सिंह कसमंडा ब्लाक मुख्यालय पहुंचे। कन्नौज में पथराव व फायरिंग कन्नौज में ब्लॉक प्रमुख के नामांकन के दौरान जमकर बवाल हुआ। सदर ब्लॉक में सपा और भाजपा कार्यकर्ता भिड़ गए। जमकर मारपीट हुई और ईंट-पत्थर चले। इस दौरान पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। सपा समॢथत प्रत्याशी अजय दोहरे नामांकन के लिए सदर ब्लॉक में पंहुचे। इस दौरान उनकी भाजपाइयों से झड़प हो गई। थोड़ी देर में मारपीट होने लगी। मारपीट होते-होते ब्लॉक गेट तक आ गई। इस दौरान रेलवे ओवरब्रिज के नीचे बैठे सपाई भी आ गए। दोनों तरफ से पत्थर बाजी होने लगी। सपाइयों ने भाजपा के मंडल अध्यक्ष रामजीवन राजपूत को पकड़ कर धुन दिया। इतना ही नहीं एआरओ पारसनाथ की टेबल से उठाकर सभी अभिलेख को फाड़ दिया। तालग्राम ब्लाक में दो पक्षों के बीच जमकर पथराव हुआ। चार राउंड हवाई फायरिंग भी हुई। सपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा के लोग उनके प्रत्याशी को नामांकन नहीं करने दे रहे हैं। यहां करीब एक घंटे तक पथराव हुआ। डीएम राकेश मिश्र और एसपी प्रशांत वर्मा पहुंचे। इसके बाद हंगामा शांत हुआ। सौरिख ब्लाक में भी पथराव और फायरिंग हुई। सपा प्रत्याशी को यहां भी नामांकन करने से रोका गया। जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। शाहजहांपुर में ब्लाक प्रमुख नामांकन में पर्चे फाड़े शाहजहांपुर के मदनापुर में ब्लाक प्रमुख पद के लिये भाजपा प्रत्याशी महेश पाल व सपा प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह गुरुवार दोपहर को नामांकन कराने जा रहे थे। ब्लाक कार्यालय के पास दोनों के समर्थक नारेबाजी करते हुए भिड़ गए। प्रत्याशियों में भी हाथापाई हुई और दोनों ने एक दूसरे के पर्चे फाड़ दिए। पुलिस दोनों पक्षों से बात कर रही है। उन्नाव में जमकर चले ईंट-पत्थर उन्नाव के असोहा ब्लाक में प्रमुख पद के लिए होने वाले नामांकन में गुरुवार सुबह से ही अफरा-तफरी रही। ब्लाक मुख्यालय पर सपा एमएलसी सुनील साजन व पूर्व विधायक उदयराज यादव अपने 40-45 समर्थकों के साथ बीतेंद्र यादव का नामांकन कराने पहुंचे। भाजपा प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ वहां मौजूद थे। दोनों पाॢटयों के समर्थकों के आमने-सामने आने से वहां नारेबाजी शुरू हो गई। नारेबाजी के दौरान दोनों के समर्थकों में धक्का-मुक्की हुई इसके बाद ईंट-पत्थर चलने लगे। हंगामा बढ़ता देख मौजूद पुलिस ने लाठियां पटककर भीड़ को खदेड़ा। एसडीएम राजेश चौरसिया व सीओ रघुवीर सिंह ने सपा प्रत्याशी बीतेंद्र यादव का ब्लाक के अंदर ले जाकर नामांकन कराया। गहमा-गहमी के बीच ब्लाक मुख्यालय पहुंचे विधायक अनिल सिंह को देख सपा एमएलसी सुनील साजन के बोल बिगड़ गए और उन्होंने कहा कि भाजपा वाले कब से गुंडा हो गए। इस पर फिर से माहौल बिगड़ गया और जमकर हंगामा हुआ। इस पर सभी को पुलिस ने ब्लाक से बाहर किया। कानपुर देहात में जिला पंचायत सदस्य की पिटाई कानपुर देहात के रसूलाबाद में ब्लाक प्रमुख पद नामांकन के दौरान भाजपा व सपा कार्यकर्ता आमने सामने हो गए और जमकर नारेबाजी हुई। संख्या में अधिक भाजपाइयों ने सपा से जिला पंचायत सदस्य राजकुमार यादव को पीट दिया। हंगामा होने लगा तो एसडीएम व पुलिस ने सभी को खदेड़ा। वहीं ब्लाक में मौजूद भाजपा विधायक निर्मला संखवार को भी एसडीएम ने बाहर किया। रसूलाबाद में भाजपा से राधा दुबे व सपा से मीना शुक्ला प्रत्याशी हैं। गुरुवार को नामांकन के दौरान दोनों प्रत्याशी व समर्थक एक समय पर ही पहुंच गए। दोनों तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ देर में भिड़ गए। भाजपाइयों ने जिला पंचायत सदस्य राजकुमार यादव को पीट दिया। मामला बढ़ता देख एसडीएम अंजू वर्मा ने पुलिस बल संग सभी को खदेड़ा। वहीं ब्लाक में मौजूद भाजपा विधायक निर्मला संखवार को भी बाहर किया गया। किसी तरह से दोनों तरफ के लोग शांत हुए। कानपुर के बिल्हौर में ब्लाक प्रमुख पद की समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी नीरू देवी के पति सूर्यभान ने भाजपा प्रत्याशी मनोरमा पर समर्थकों के साथ ब्लाक परिसर से अपनी पत्नी नीरू का अपहरण करने का आरोप लगाया। हरदोई में 19 में से भाजपा के आठ ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी निर्विरोध हरदोई में ब्लाक प्रमुख चुनाव में 19 विकास खंडों में आठ पर भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुन लिए गए हैं। किसी दूसरे प्रत्याशी के नामांकन न करने से उनका निर्विरोध चुनाव माना जा रहा है। अधिकारिक घोषणा शुक्रवार को की जाएगी। यहां पर अब 11 विकास खंडों में चुनावी घमासान होगा। निर्विरोध निर्वाचन में भाजपा प्रत्याशियों में अहिरोरी से धर्मवीर सिंह पन्ने, कछौना से रामश्री, कोथावां से निर्भय वर्मा, टडिय़ावां से रवी प्रकाश, टोडरपुर से नीतू त्रिवेदी, बावन से शिवा सिंह, शाहाबाद से त्रिपुरेश मिश्र और हरियावां से रामदयाल और भरखनी से अंजू सिंह ने ही नामांकन किया। यहां पर एक-एक प्रत्याशी के नामांकन करने से उनका निर्विरोध निर्वाचन माना जा रहा है। वहीं अब 11 विकास खंडों में ही चुनाव होंगे। प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी बर्मा के बेटे सौरभ वर्मा बहराइच जिले में महिपुरवा ब्लाक के निर्विरोध प्रमुख निर्वाचित हुए हैं।
नई दिल्ली वर्ल्ड नंबर एक दीपिका कुमारी सहित भारत के कुछ शीर्ष तीरंदाजों ने यमुना खेल परिसर को क्रिकेट मैदान में बदलने पर चिंता जताई थी। अब पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और भाजपा सांसद गौतम गंभीर की ओर से सफाई आई है। गंभीर ने स्पष्ट किया कि इस परिसर के तीरंदाजी मैदान को केवल पहले से बेहतर बनाया गया है। दरअसल, पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद ने बुधवार की रात ग्राउंड का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, ‘विज्ञापन इरादे और कड़ी मेहनत की जगह नहीं ले सकते। पूर्वी दिल्ली प्रो क्रिकेट के लिए तैयार है।’ यमुना स्पोटर्स कॉम्पलेक्स ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में तीरंदाजी इवेंट की मेजबानी की थी। दीपिका ने यहां व्यक्तिगत और टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। तोक्यो ओलिंपिक में भाग लेने जा रहीं दीपिका ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ‘मैं 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में इसी ग्राउंड में खेलकर दीपिका बनीं हूं। तीरंदाजी के इस ग्राउंड को कृपया करके क्रिकेट ग्राउंड में नहीं बदलें। यह एशिया का सबसे बेहतरीन तीरंदाजी ग्राउंड में से एक है जहां अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी टूर्नामेंट हो सकते हैं।’ इसके एक घंटे बाद गंभीर ने दीपिका की शंका दूर करते हुए ट्वीट कर कहा, ‘यमुना स्पोटर्स ग्राउंड को तब्दील नहीं किया जा रहा है बल्कि इसे अपग्रेड किया जा रहा है। तीरंदाजी और अन्य स्पोटर्स वैसे ही होंगे जैसे पहले होते थे। एक खिलाड़ी होने के नाते मैं कोई काम ऐसा नहीं करूंगा जिससे किसी खिलाड़ी के विकास में बाधा आए।’ इस पर दीपिक कुमारी और अतनु दास ने ट्वीट करते हुए कहा, हम इस बात के लिए आभारी हैं कि कॉम्पलेक्स पहले की ही तरह तीरंदाजों का घर बना रहेगा।
मोदी मंत्रिपरिषद के नए मंत्री शपथ के अगले दिन गुरुवार को अपना कार्यभार संभाल रहे हैं। उससे पहले, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई। मोदी ने बुधवार को नए मंत्रियों के अपने आवास पर बुलाया था। बताया जाता है कि मोदी ने उन्हें संविधान की शपथ लेने से पहले कुछ और भी संकल्प दिलाए और इशारों में ही यह भी बता दिया कि वो अपनी टीम में शामिल होने वालों से क्या-क्या उम्मीद करते हैं। चूंकि प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों से लेकर सामान्य कर्मचारियों तक को अपने दायित्वों के प्रति काफी संवेदनशील रहने की हिदायत दे रखी है तो उनका पहला दायित्व तो अपनी कोर टीम यानी मंत्रिपरिषद के सदस्यों के लिए भी 'लक्ष्मण रेखा' खींचने का बनता ही है। यही वजह है कि पीएम ने नए मंत्रियों के लिए एक नहीं बल्कि तीन-तीन लक्ष्मण रेखाएं खींच दीं। आइए जानते हैं मोदी ने अपने नए मंत्रियों कौन सी हिदायतें दी हैं... पहली लक्ष्मण रेखा- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में ही 'ना खाएंगे और ना खाने देंगे' का नारा दिया था। दरअसल, मोदी तब प्रधानमंत्री बने थे जब बड़े-बड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण देशवासियों का भरोसा यूपीए दो की सरकार से हिल गया था। वक्त की मांग थी कि मायूस जनता में शासन के प्रति फिर से भरोसा जगाया जाए। मोदी ने तब भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा किया और खुद को देश का प्रधानमंत्री नहीं प्रधानसेवक और चौकीदार बताया। हालांकि विपक्ष ने उन्हें राफेल युद्धक विमान डील पर घेरने की भरपूर कोशिश की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तो 'चौकीदार ही चोर' के नारे लगवाया। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने सारे तथ्यों की पड़ताल के बाद मोदी सरकार को राफेल डील में क्लिन चिट दे दी। लेकिन, अब रूस का एक मीडिया संस्थान के कथित खुलासों के बहाने राहुल अब भी मोदी सरकार और खासकर पीएम मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, मोदी ने बुधवार को अपने नए मंत्रियों को बेहद स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि उनकी सरकार में करप्शन पर जीरो टोलेरेंस की पॉलिसी है। दूसरी लक्ष्मण रेखा- दायित्वों को समझें, लक्ष्य को नजरअंदाज नहीं करें प्रधानमंत्री मोदी इस बात का जनता के बीच खूब प्रचार करते हैं कि पहले की सरकारें योजनाएं की घोषणा कर देती थीं, शिलान्यास भी हो जाता था, लेकिन दशकों तक काम पूरा नहीं होता था। उनका कहना है कि उनकी सरकार में हर योजना के साथ उसे पूरा करने की मियाद भी तय होती है। वो चाहे गरीबों के बीच मुफ्त गैस कनेक्शन का बंटवारा हो या गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य, मोदी सरकार की कई योजनाएं निर्धारित तिथि से पहले ही पूरी कर ली गईं। पीएम मोदी का दावा है कि उनकी सरकार ने न केवल पिछली यूपीए की सरकारों बल्कि और भी पुरानी सरकारों के अधूरे कार्यों को पूरा किया है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सभी नए मंत्रियों को हिदायत दे दी कि वो 15 अगस्त से पहले दिल्ली न छोड़ें। उनसे कहा गया कि वे अपने मंत्रालय के काम के पहले अच्छे से समझ लें ताकि कभी किसी को उंगली उठाने का मौका नहीं मिले और सरकार की किरकिरी होने का मौका ही नहीं पैदा हो। ध्यान रहे कि मोदी मंत्रिपरिषद के विस्तार से पहले कुल 12 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पीएम ने सारे मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड देखने में एक महीने से भी ज्यादा वक्त लगाया और जो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, उनकी छुट्टी कर दी गई, वो चाहे कितने भी बड़े चेहरे क्यों नहीं हों। तीसरी लक्ष्मण रेखा- जश्न न मनाएं, कोरोना प्रॉटोकॉल का पालन करें पीएम मोदी ने तो शपथ ग्रहण से पहले हुई बातचीत में नए मंत्रियों के सामने अपनी इच्छा जाहिर कर ही दी थी, कहा जाता है कि बाद में पीएमओ की ओर से भी गाइडलाइंस जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि मंत्री बनने के जश्न में कोरोना प्रॉटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया जाए। वैसे भी मंत्रियों को 15 अगस्त तक दिल्ली में रहने का निर्देश मिला है तो वो अपने-अपने क्षेत्र फिलहाल जा ही नहीं सकेंगे। 15 अगस्त के बाद जब वो अपने समर्थकों के बीच होंगे तब कोरोना की स्थिति के अनुसार उन्हें जश्न मनाने की छूट मिल सकती है। दरअसल, कोविड-19 की दूसरी लहर के वक्त पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए रैलियां करने को लेकर मोदी सरकार की खूब किरकिरी हुई। कहीं न कहीं यह संदेश गया कि चुनाव के लिए लाखों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया। इसलिए, अब पीएम मोदी कोरोना को लेकर किसी प्रकार का लांछन बर्दाश्त करने के मूड में नहीं दिखते हैं। यही वजह है कि उन्होंने हर्षवर्धन जैसी बड़ी शख्सियत से स्वास्थ्य मंत्रालय वापस ले लिया। मीडिया की लाइमलाइट से बचने की भी हिदायत कई बार नेता गाहे-बगाहे ऐसा बयान दे देते हैं जिससे विपक्ष और आलोचकों को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल जाता है। प्रधानमंत्री इस बात को लेकर भी काफी संवेदनशील रहते हैं। हाल के दिनों में उत्तराखंड के दो-दो मुख्यमंत्रियों की कुर्सी छिने जाने के पीछे भी उनका बड़बोलापन बड़ी वजह बनी। वैसे कोई भी राजनीतिक दल ऐसे बड़बोले नेताओं से खाली नहीं है जो अपने अतार्किक बयानों से खुद की तो फजीहत करवाते ही हैं, अपनी पार्टी और सरकार को भी दलदल में घसीट ले जाते हैं। स्वाभाविक है कि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस का (न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन) नारा देने वाले पीएम मोदी को अपनी सरकार की 'काम कम और बातें ज्यादा' जैसी छवि नहीं बनने देने की चिंता होगी। इसी चिंता में पीएम मोदी ने नए मंत्रियों से दोटूक कहा है कि वो मीडिया के संपर्क में एक हद से ज्यादा नहीं रहें। पीएम ने हिदायत दी कि जरूरत हो तभी मीडिया से बात करें, यूं ही राह चलते मीडिया को बयान देते नहीं फिरें।
नई दिल्‍ली दिल्‍ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार से विज्ञापनों पर खर्च की जानकारी मांगी है। नगर निगम कर्मचारियों के बकाया वेतन और पेंशन के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस बारे में पूछा। दिल्‍ली सरकार ने अदालत में कहा कि उसे केंद्र से 305 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। वहीं, नॉर्थ एमसीडी ने अदालत में माना कि उसने फंड जुटाने के लिए 'टाउन हॉल' को ASI को देने का फैसला किया है। इसके लिए डीजी, एएसआई को लेटर भी लिखा गया है। एक फिक्स कीमत तय की गई है। दिल्‍ली सरकार पर 900 करोड़ बकाया: नॉर्थ MCD नॉर्थ एमसीडी ने माना कि उसने अपने दो बड़े अस्पतालों को लीज पर टेकओवर करने के लिए केंद्र से अनुरोध किया है। नॉर्थ एमसीडी ने अपनी 11 ऐसी संपत्तियों का ब्यौरा दिल्ली हाई कोर्ट के सामने रखा और दावा किया कि इन्हें लीज पर देने के लिए टेंडर फ्लोट किए गए है ताकि फंड जुटाया जा सके। आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के ऊपर 900 करोड़ रूपये का बीटीए बकाया है और इसीलिए उसके पास फंड की अभी भी कमी बनी हुई है। दावा किया कि उसने कुछ कर्मचारियों को अप्रैल तक का तो कुछ को मई महने तक का वेतन दे दिया है। पेंशन अभी भी सिर्फ फरवरी महीने तक की दी गई है। दिल्‍ली सरकार ने क्‍या कहा? दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आपके आंतरिक विवाद से कर्मचारियों का क्या लेना देना। उन्हें महीने के अंत में सैलरी चाहिए ताकि वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। कोर्ट ने कहा कि हमें निगम की प्रॉपर्टी की कुर्की करनी होगी। हम तभी ऐसा नहीं करेंगे अगर निगम हमें आज की तारीख में बताती है कि उसने फंड जुटाने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए। दिल्ली सरकार ने निगम के दावों पर आपत्ति जताई। दलील दी कि समस्या पिछले पांच सालों से जारी है और हर बार एमसीडी की ओर से कोशिश यही रहती है कि वह दिल्ली सरकार में खामी दिखाए। सरकार को राजस्व बनाने वाला संस्थान नहीं है। हमें केंद्र से पिछले पांच साल से 305 करोड़ ही मिल रहे हैं ओर हमारा बजट नहीं बढ़ाया गया है तो क्या हम केंद्र को कटघरे में खड़ा करते रहें। अदालत ने केजरीवाल सरकार से मांगा जवाब दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, हर एक अथॉरिटी पब्लिक ऑफिस या पब्लिक ट्रस्ट को होल्ड करती है इसीलिए उसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह जो भी करें वह जनता के हित में हो। वे उस पद पर अपने आप को प्रमोट करने के लिए नहीं होते। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार से सवाल करते हुए की कि वह पूरी जिम्मेदारी से बताए कि विज्ञापनों पर वह कितना खर्च करती है। दिल्ली सरकार ने निगम पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था। इस पर हाई कोर्ट ने सरकार को टोकते हुए कहा कि उसकी सरकार की भी कोई खास बेहतर नहीं है। दिल्ली सरकार ने दलील दी कि बिल्कुल गंगा ऊपर से बहती है। ऊपर से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा तो नीचे अपने आप सुधार दिखने लगेगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की।
पुणे,केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि उनके मंत्रालय ने वर्ष 2025 से पहले देश में सड़क हादसों व उनमें होने वाली मौतों को 50 फीसद कम करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तमिलनाडु की तारीफ भी की। एक शैक्षणिक संस्थान की ओर से आयोजित वेबिनार में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा, 'हम वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या को शून्य तक ला सकते हैं।' मंत्री ने कहा कि पिछले साल उनके मंत्रालय ने स्वीडन में एक सम्मेलन में प्रतिभाग किया था। वहीं से वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में मृतकों की संख्या शून्य करने का विचार लिया गया है। उन्होंने कहा, 'हमने सड़क हादसों व उनमें होने वाली मौतों को 50 फीसद कम करने का वादा किया है। तमिलनाडु ने इस दिशा में सफलता हासिल की है। उसने सड़क हादसों व उनमें होने वाली मौतों को 53 फीसद कम किया है।' इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित व्यवसायों को आर्थिक सहायता देगी सरकार इससे पहले बीते हफ्ते नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहन खंड को ऋण देने के लिए नए वित्तीय साधनों की सुविधा के लिए एक संस्था स्थापित करने की योजना बना रही है। इंडिया ग्लोबल फोरम 2021 को संबोधित करते हुए, गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार निर्माण उपकरण वाहनों के लिए प्रोत्साहन लाने की योजना बना रही है ताकि उन्हें इलेक्ट्रिक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन वित्तपोषण उद्योग 2030 में 3.7 लाख करोड़ रुपये का होने का अनुमान है, जो वर्तमान खुदरा वाहन वित्त उद्योग का लगभग 80 प्रतिशत होगा। नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) द्वारा तैयार की गई 'मोबिलाइजिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल फाइनेंसिंग इन इंडिया' शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि एंड-यूजर्स को वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे कि उच्च ब्याज दरें, उच्च बीमा दरें और कम ऋण-से- मूल्य अनुपात।
नई दिल्ली,देश में बीते 24 घंटों के दौरान 45,892 नए केस सामने आए और 817 संक्रमितों की मौत हो गई। यह आंकड़ा आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। वहीं इस दौरान देश भर में कोरोना वैक्सीनेशन का आंकड़ा 33,81,671 है। इस साल के जनवरी माह से देशभर में कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान शुरू किया गया जिसके तहत अब तक कुल 36,48,47,549 खुराकें दी जा चुकी हैं। भारत में अब तक कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 3,07,09,557 है और इस महामारी की चपेट में आकर दम तोड़ने वालों की संख्या 4,05,028 है। पिछले दिनों देश ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप झेला और अब इससे उबरने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इस घातक वायरस के नए-नए वैरिएंट आने के साथ ही तीसरी लहर को लेकर संभावनाएं जताई जा रहीं हैं। देश में बीते 24 घंटों के दौरान 45,892 नए केस सामने आए और 817 संक्रमितों की मौत हो गई। यह आंकड़ा आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। वहीं इस दौरान देश भर में कोरोना वैक्सीनेशन का आंकड़ा 33,81,671 है। इस साल के जनवरी माह से देशभर में कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान शुरू किया गया जिसके तहत अब तक कुल 36,48,47,549 खुराकें दी जा चुकी हैं। भारत में अब तक कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 3,07,09,557 है और इस महामारी की चपेट में आकर दम तोड़ने वालों की संख्या 4,05,028 है। पिछले दिनों देश ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप झेला और अब इससे उबरने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इस घातक वायरस के नए-नए वैरिएंट आने के साथ ही तीसरी लहर को लेकर संभावनाएं जताई जा रहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, अभी देश में कोरोना के कुल सक्रिय मामलों का आंकड़ा 4,60,704 है वहीं अब तक स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 2,98,43,825 है। मौजूदा सक्रिय मामले कुल संक्रमण के मामलों का 1.5 फीसद है। वहीं देश में संक्रमण का रिकवरी रेट 97.18 फीसद है। हर दिन आने वाले संक्रमण के दर की बात करें तो मंत्रालय के अनुसार यह 2.42 फीसद है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि 70 फीसद मौतें कोमोरबिडिटीज यानि संक्रमितों में पहले से शुगर ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों के कारण हुई। पिछले साल 7 अगस्त को देश में संक्रमण का आंकड़ा 20 लाख के पार चला गया था। इसके बाद संक्रमण का आंकड़ा 12 अगस्त को 30 लाख के पार, 5 सितंबर को 40 लाख, 16 सितंबर को 50 लाख, 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख और 19 दिसंबर को 1 करोड़ के पार चला गया। इस साल 4 मई को 2 करोड़ और 23 जून को 3 करोड़ के पार हो गया।
चेन्नई।भारतीय रेलवे वैधानिक निकाय रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) चेन्नई में वाणिज्यिक विकास के लिए सात भूमि पार्सल पट्टे के लिए ऑनलाइन बोलियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया में है। चेन्नई शहर पिछले कुछ समय में आईटी क्षेत्र के विकास के साथ एक रियल्टी हब के रूप में उभरा है। भूमि पार्सल के लिए बोलियां आमंत्रित करने के अलावा, एग्मोर रेलवे कॉलोनी के पुनर्विकास के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) भी जल्द ही आमंत्रित किया जाएगा। रेल भूमि विकास प्राधिकरण के अनुसार, सात चिन्हित भूमि पार्सलों में से, तीन पार्सल अयनावरम साइट पर स्थित हैं और उन तीनों के लिए बोली खोलने की तारीख 24 अगस्त, 2021 निर्धारित की गई है। चौथा भूमि पार्सल वाल्टैक्स रोड साइट पर है, जो 1,116.67 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और साइट का आरक्षित मूल्य 45 साल की लीज अवधि के लिए 4.19 करोड़ रुपये रखा गया है। वाल्टैक्स रोड साइट भूमि पार्सल के लिए ई-बोली जमा करने की अंतिम तिथि 12 अगस्त, 2021 निर्धारित की गई है। पांचवां भूमि पार्सल पुलियनथोप साइट पर है जो 2.09 एकड़ में फैला है और जिसके लिए आरक्षित मूल्य 11.60 करोड़ रुपये रखा गया है जिसे 45 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। एक अन्य भूमि पार्सल विक्टोरिया क्रिसेंट साइट पर स्थित है, जो उच्च अंत संस्थागत और आवासीय प्रतिष्ठानों से घिरा हुआ है। यह साइट शहर के सीबीडी क्षेत्र में स्थित है। इस पार्सल का आरक्षित मूल्य 41 करोड़ रुपये रखा गया है और इसे 99 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। इस साइट के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं और 2 सितंबर, 2021 को खोली जाएंगी। एग्मोर रेलवे कॉलोनी साइट खुदरा, वाणिज्यिक, होटल विकास के लिए एक आशाजनक स्थान है क्योंकि यह चेन्नई के केंद्र में स्थित है। साइट का क्षेत्रफल लगभग 3.616 एकड़ है और यह 45 वर्षों के लिए पट्टे पर उपलब्ध होगा।
चंडीगढ़। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के इस बयान कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन में शामिल संगठनों को पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए, क्योंकि इससे बदलाव का मॉडल पेश किया जा सकता है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि वह तो पहले ही कह रहे थे कि यह आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। इन नेताओं को किसानों की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है। उन्हें पंजाब में जरूर चुनाव लड़ना चाहिए। मनोहर लाल ने कहा कि किसान नए कानूनों को अच्छा मानते हैं। हरियाणा विधायक दल की बैठक में भी कृषि कानूनों का मुद्दा उठा, जिसमें सभी ने कहा कि नए कानूनों से किसानों को लाभ होगा। किसान अपनी फसल को कहीं भी बेच सकेंगे। नए कानून में मंडी के बाहर कोई फीस नहीं लगेगी। मनोहर लाल ने कहा कि हम चाहते हैं किसान नए कानून को समझें। इन कानूनों से किसान व व्यापारियों दोनों को लाभ होगा।
चंडीगढ़ ,हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पाकिस्तानी कहकर बुरे फंसे भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। चढूनी के खिलाफ प्रदेश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और उनके पुतले फूंके जा रहे हैं। पंजाबी समुदाय के लोगों तथा जनप्रतिनिधियों ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग की है। हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन व पृथला के निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि चढूनी न केवल देशद्रोही हैं, बल्कि मेहनकश लोगों का अपमान कर उन्होंने अपनी घटिया मानसिकता को उजागर कर दिया है। प्रदेश में हो रहा विरोध, अब विधायक भी करने लगे कार्रवाई की मांग नयनपाल रावत ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि गुरनाम सिंह चढूनी, राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव सरीखे लोगों ने पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल पैदा कर रखा है। ये लोग अपने राजनीतिक दुर्भावनापूर्ण आंदोलन के जरिये साबित करना चाह रहे कि उनसे बड़ा किसानों का कोई हितैषी नहीं है, जबकि कौन-सा ऐसा जनप्रतिनिधि होगा, जो किसानों के हितों की परवाह नहीं करेगा। केंद्र व राज्य सरकार किसानों की सबसे बड़ी हितैषी है। राज्य के करीब 42 लाख किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता व अनुदान राशि प्रदान की जा चुकी है। निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत ने चढूनी के साथ राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव पर भी निशाना साधा रावत ने कहा कि यदि यह तीन कृषि कानून किसानों के हित में नहीं होते तो क्या प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल इन कानूनों को लेकर आते। मतलब साफ है कि आंदोलनकारी कांग्रेस के हाथों में खेल रहे हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पंजाबी कहकर पाकिस्तान से आए लाखों लोगों की भावनाओं पर हमला किया है। उन्‍होंने कहा कि इन लोगों ने यहां आकर मेहनत की और अपने कामों के बूते नई पहचान बनाई। अब चढूनी से कोई पूछे कि क्या मेहनत करके खाना भी कोई अपराध है। चढूनी ने उस मेहनतकश मुख्यमंत्री मनोहर लाल के विरुद्ध अपमानजनक शब्द बोले हैं, जो भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था बनाकर पूरे प्रदेश को उन्नति के रास्ते पर लेकर जा रहे हैं। उन्होंने चढूनी के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने के लिए जल्द ही सीएम से मुलाकात करने की बात कही है। सरसों के गबन की विजिलेंस जांच होगी रोहतक के कलानौर में करीब एक करोड़ 62 लाख रुपये से ज्यादा की सरसों के गबन के मामले में विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। चेयरमैन नयनपाल रातव ने बताया कि एक जिला प्रबंधक और दो मैनेजरों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जा चुका है। पुलिस को शिकायत देकर मामला दर्ज हो चुका है तथा साथ ही विभागीय जांच भी शुरू करा दी गई है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में विजिलेंस इंक्वायरी के साथ-साथ आरोपितों को सलाखों के पीछे भेजने का भी काम किया जाएगा।
नई दिल्ली,केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के एक दिन बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नए मंत्रियों के साथ काम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आइआइटी बॉम्बे, आइआइटी मद्रास, आइआइटी कानपुर और आइआइएससी बैंगलोर जैसे केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों के निदेशकों के साथ बातचीत की। इस बातचीत में नए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए। सूत्रों ने कहा कि यह बातचीत शिक्षण संस्थानों में और सुधार सुनिश्चित करने के लिए पीएम मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल और विस्तार किया। विस्तार में उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित उन राज्यों का अधिक प्रतिनिधित्व देखने को मिला, जहां अगले साल चुनाव होने हैं। सरकार में युवा प्रतिभाओं के अलावा ओबीसी और एससी का भी प्रतिनिधित्व बढ़ा है। कैबिनेट की औसत आयु में कमी आई है। ये बदलाव संसद के मानसून सत्र से कुछ दिन पहले किए गए हैं। कोरोना से संबंधित प्रोटोकॉल के साथ राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में कैबिनेट मंत्रियों के रूप में पदोन्नत किए गए सात सहित 43 मंत्रियों ने पद की शपथ ली। 2019 में सत्ता में लौटने के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल मई 2019 में मोदी सरकार के सत्ता में लौटने के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार हुआ। ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव, सर्बानंद सोनोवाल और पशुपति कुमार पारस ये कुछ वो बड़े नाम हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। सात महिला सांसदों ने मंत्रिपरिषद में केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ ली। इनमें अनुप्रिया पटेल, शोभा करंदलाजे, दर्शन विक्रम जरदोश, मीनाक्षी लेखी, अन्नपूर्णा देवी, प्रतिमा भौमिक और भारती प्रवीण पवार शामिल हैं। इसके अलावा सात राज्य मंत्रियों (MoS) को कैबिनेट मंत्रियों के तौर पर पदोन्नत किया गया है। इनमें जी किशन रेड्डी, किरण रिजिजू, अनुराग ठाकुर, हरदीप पुरी, राज कुमार सिंह, पुरुषोत्तम रूपाला और मनसुख मंडाविया शामिल हैं।
नई दिल्ली,भाजपा के नैनीताल-उधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट ने बुधवार को पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। नए मंत्री ने कार्यालय का कार्यभार संभालने के बाद कहा कि मेरी प्राथमिकताएं वही हैं जो सरकार की हैं। आगे की रणनीति बनाने से पहले मैं जानकारी प्राप्त करूंगा। मेरे पास कई योजनाएं हैं, जिन्हें हम समय के साथ लागू करेंगे। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा को फिर से शुरू करने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि मामला विचाराधीन है और सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करेगी। उत्तराखंड भाजपा के पूर्व प्रमुख रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भी काम करेंगे 40 वर्षीय भाजपा नेता ने पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में कई प्रमुख पदों पर सफलतापूर्वक कार्य किया है। भट्ट पिछले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के नेता और पार्टी प्रमुख थे और उन्हें 2017 में 70 में से 57 सीटों पर उत्तराखंड में भाजपा की भारी जीत का श्रेय दिया जाता है। भट्ट ने पहले उत्तराखंड में अंतरिम नित्यानंद स्वामी सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया है, जब इसे 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग किया गया था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल कुछ अन्य प्रमुख हस्तियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव, सर्बानंद सोनोवाल, अनुराग ठाकुर और पशुपति कुमार पारस शामिल हैं। बुधवार के फेरबदल और पीएम मोदी की मंत्रिपरिषद के विस्तार में कुल 43 राजनीतिक नेताओं ने केंद्रीय मंत्रियों के रूप में शपथ लिया, जबकि कुछ को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया।
नई दिल्ली,मोदी कैबिनेट में शामिल हुए नए मंत्रियों ने अपना पदभार संभालना शुरू कर दिया है। अनुराग ठाकुर अश्विनी वैष्णव और मनसुख मंडाविया समेत कई मंत्रियों ने मंत्री के तौर पर अपना कार्यभार संभाल लिया है। बता दें कि बुधवार को हुए मोदी कैबिनेट की विस्तार में 36 नए मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें से 28 राज्यमंत्री हैं। वहीं सात राज्यमंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट किया गया है। इसके अलावा कैबिनेट में 15 नए चेहरों को शामिल किया गया है। अनुराग ठाकुर ने सूचना और प्रसारण मंत्री और अश्विनी वैष्णव ने रेल मंत्री के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। वहीं मनसुख मंडाविया ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। मंडाविया ने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अपने कार्यालय में पूजा की। किरण रिजिजू ने कानून मंत्री का पद संभाला इसके अलावा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री के तौर पर दर्शन विक्रम जरदोश और दानवे रावसाहेब दादाराव ने आज रेल भवन में पदभार संभाल किया। डॉ. भारती प्रवीण पवार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने भी पदभार संभाल लिया। किरण रिजिजू ने कानून मंत्री और राजीव चंद्रशेखर ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला लिया है। जी किशन रेड्डी ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला वहीं जी किशन रेड्डी ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। पुरुषोत्तम रूपाला ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। मध्य प्रदेश सांसद वीरेंद्र कुमार ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्यभार संभाला। नारायण राणे ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। हरदीप सिंह पुरी ने मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार से भाजपा सांसद जॉन बारला ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का कार्यभार संभाला। धर्मेंद्र प्रधान ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। अजय भट्ट ने रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। भाजपा के राज्यसभा सदस्य भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। जिम्मेदारी को अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी करने की कोशिश करूंगा: अनुराग ठाकुर अनुराग ठाकुर ने सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 7 वर्षों में भारत को आगे ले जाने के लिए बहुत अच्छा काम किया है। आइ एंड बी मंत्रालय में मुझसे पहले लोगों द्वारा किए गए काम और पीएम द्वारा मुझे दी गई जिम्मेदारी को मैं अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी करने की कोशिश करूंगा। वहीं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे पीएम मोदी के विजन का अहम हिस्सा है। रेलवे के लिए उनका दृष्टिकोण लोगों के जीवन को बदलना है, ताकि आम आदमी, किसान, गरीब सभी को रेलवे का लाभ मिले। मैं उस विजन के लिए काम करूंगा। मिनिसट्री तो संभली हुई है: रामचंद्र प्रसाद सिंह इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) ने कहा कि मिनिस्ट्री हम संभाले नहीं हैं, मिनिसट्री तो संभली हुई है। आज यहां मेरा पहला दिन है, यह मेरे लिए खुशी का पल है। मैं खुले दिमाग से काम करता हूं। मुझे अभी कुछ नहीं पता, मैं सब कुछ जांचूंगा, उन्हें समझूंगा और फिर उस पर बोलूंगा। किरण रिजिजू ने कानून मंत्री का पदभार संभालने के बाद कहा कि कानून और न्याय मंत्री के रूप में कार्य करना मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना मेरी प्राथमिकता होगी। हम हमेशा पारदर्शी रहने की कोशिश करेंगे। वहीं मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है। मैं पीएम मोदी की उम्मीदों के मुताबिक काम करूंगा। जीडीपी बढ़ाने और युवाओं को रोजगार दिलाने पर होगा फोकस: नारायण राणे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद नारायण राणे ने कहा कि मंत्रिमंडल में जगह देने के लिए मैं प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं सोचूंगा कि देश की जीडीपी कैसे बढ़े और देश के युवाओं को कैसे रोजगार मिले। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मुझे मंत्री बनने पर बधाई नहीं दी है। उनका दिल इतना बड़ा नहीं है। अनुराग ठाकुर को खेल मंत्रालय भी संभालने की जिम्मेदारी बता दें कि सूचना और प्रसारण के अलावा, अनुराग ठाकुर को खेल मंत्रालय भी संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। वह पूर्व में बीसीसीआई के प्रमुख भी रह चुके हैं। सूचना और प्रसारण विभाग पहले प्रकाश जावड़ेकर के पास था, जो अब कैबिनेट से बाहर हैं। खेल मंत्रालय किरण रिजिजू के पास था, जो अब नए कैबिनेट में कानून मंत्री होंगे। वैष्णव को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी ब्यूरोक्रेट एंटरप्रेन्योर से राजनेता बने अश्विनी वैष्णव 1994-बैच के एक पूर्व आएएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 15 वर्षों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला है और वे विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) ढांचे में योगदान के लिए जाने जाते हैं। इससे उनको रेल के क्षेत्र में कफी मदद मिलेगी। उन्होंने जनरल इलेक्ट्रिक और सीमेंस जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों में नेतृत्वकर्ता की भूमिकाएं भी निभाई हैं। वैष्णव ने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से एमबीए और आइआइटी कानपुर से एमटेक किया है। उनको इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
नई दिल्ली,कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण को गति देने में जुटी केंद्र सरकार जुलाई में केंद्र और केंद्र शासित राज्यों को वैक्सीन की 12 करोड़ डोज उपलब्ध कराएगी। इनमें से अब तक 2.19 करोड़ डोज की आपूर्ति की जा चुकी है। इनको मिलाकर केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक कुल 37.43 करोड़ डोज दिए हैं, जिनमें से 1.67 करोड़ डोज इनके साथ ही निजी अस्पतालों के बची हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि वैक्सीन उत्पादकों के साथ हुई बातचीत के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों बता दिया गया है कि इस महीने उन्हें कुल 12 करोड़ डोज दी जाएंगी मंत्रालय ने कहा, ज्‍यादा डोज की जरूरत है तो जानकारी मंत्रालय ने कहा है कि हर राज्य को पहले ही सूचना दे दी जाती है कि उसे किस महीने में कितनी डोज मिलेंगी। इसके अलावा राज्यों से यह भी अनुरोध किया जाता है कि अगर उन्हें ज्यादा डोज की जरूरत हो तो उसके बारे में जानकारी दे दें। मंत्रालय ने इन खबरों को भी खारिज किया है कि जुलाई के पहले हफ्ते में उसके पहले के हफ्ते की तुलना में टीकाकरण में 32 फीसद की गिरावट आई है। मंत्रालय के मुताबिक राज्यों को बहुत पहले ही बता दिया गया था कि निजी अस्पतालों समेत उन्हें जुलाई में कितनी डोज मिलेंगी, ताकि उसी हिसाब से वो अपनी टीकाकरण की योजना बना सकें। कोवैक्स के जरिये भारत को 30-40 लाख डोज मिलेंगी समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक भारत को कोवैक्स व्यवस्था के जरिये अगस्त तक अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और माडर्ना की 30 से 40 लाख डोज मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि वैश्विक वैक्सीन संगठन गवी के नेतृत्व वाले कोवैक्स के माध्यम से भारत को अनुदान के रूप में ये वैक्सीन मिलेंगी। भारत से वैक्सीन का निर्यात इस तिमाही में शुरू होने की संभावना रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक गवी ने उम्मीद जताई है कि भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआइआइ) इसी तिमाही से एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का निर्यात शुरू कर देगी। कंपनी ने पहले इस साल के आखिर तक निर्यात की संभावना जताई थी। सीरम एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से बनाती और बेचती है।
नई दिल्ली,यात्रियों, खासकर महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलवे व उसके सार्वजनिक उद्यम रेलटेल ने देश के 813 बड़े स्टेशनों पर आइपी आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की है। मार्च 2022 तक देश के 756 और रेलवे स्टेशनों पर यह प्रणाली लगा दी जाएगी। 47 स्टेशनों पर इसकी स्थापना का कार्य शीघ्र पूरा होने जा रहा है। रेलटेल की तरफ से जारी बयान के अनुसार, ए1, ए, बी, सी, डी व ई श्रेणी के सभी रेलवे स्टेशनों पर इंटरनेट प्रोटोकाल (आइपी) आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिनकी संख्या करीब 5,000 है। इस परियोजना के लिए 25 जून, 2020 को एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। रेलवे स्टेशनों और राष्ट्रीय सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से स्थापित की जा रही इस प्रणाली में सीसीटीवी कैमरे आप्टिकल केबल नेटवर्क के जरिये आपस में जुड़े होंगे। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को न सिर्फ संबंधित स्टेशनों के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट पर, बल्कि समानांतर रूप से डिवीजनल और जोनल दफ्तरों के केंद्रीकृत सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष में भी देखा जा सकेगा। इन कैमरों की तीन स्तरों पर निगरानी की जाएगी। इसके लिए रेलटेल की तरफ से 14 जोनल रेलवे में केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जा चुकी है। नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम (एनएमएस) के जरिये अधिकृत व्यक्ति कैमरा, सर्वर, यूपीएस और स्वीच की निगरानी कर सकेगा।
नई दिल्ली। मोदी सरकार-दो मंत्रिमंडल के पहले बड़े फेरबदल में रविशंकर प्रसाद, रमेश पोखरियाल निशंक, हर्षवर्धन और प्रकाश जावडेकर समेत 12 मंत्री मंत्रिमंडल से बाहर हो गए। निशंक और हर्षवर्धन जैसे मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने के पीछे उनके खराब प्रदर्शन को अहम कारण बताया जा रहा है। लेकिन रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावडेकर के इस्तीफे इस पैमाने पर खरे नहीं उतरते हैं। ये दोनों न सिर्फ 2014 से मंत्री थे, बल्कि कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी बखूबी संभाल भी रहे थे। माना जा रहा है कि इन दोनों को संगठन के लिए सरकार से मुक्त किया गया है। हर्षवर्धन की स्थिति मोदी सरकार एक से ही डांवाडोल रही है। पेशे से डाक्टर और पोलियो उन्मूलन अभियान की रूपरेखा तैयार करने में उनके योगदान को देखते हुए 2014 में उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन दो साल में ही उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय से हटाकर अर्थ साइंस मंत्रालय में भेज दिया गया और स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को सौंपी गई। 2019 में उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ विज्ञान व तकनीकी मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंपी गई। कोरोना जैसे वैश्विक संकट के दौर में इन दोनों मंत्रालय की अहम भूमिका थी। लेकिन हर्षवर्धन कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपनी भूमिका तराशने में विफल रहे। इसकी जगह नीति आयोग के सदस्य डाक्टर वीके पाल और भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डाक्टर विजय राघवन ने आगे बढ़कर कमान संभाल ली। प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गई अपनी प्रदर्शन रिपोर्ट में उनके पास बताने के लिए कुछ खास नहीं था। इसीलिए इस बार उन्हें मंत्रिमंडल से पूरी तरह से बाहर कर दिया गया। शिक्षा मंत्री के रूप में कई प्रयोगों के बाद जब रमेश पोखरियाल निशंक को लाया गया, तो उम्मीद की गई कि वे देश की शिक्षा प्रणाली भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप लागू करने में सफल होंगे। कई पुस्तकों के लेखक और भारतीय संस्कृति के जानकार के रूप में उनसे ऐसी अपेक्षा अनुचित भी नहीं थी। लेकिन नई शिक्षा नीति के अंतिम रूप देने के अलावा उनके पास बताने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है। कोरोना के कारण देश की पूरी शिक्षा प्रणाली अस्त-व्यस्त रही। शिक्षा के क्षेत्र में कोई नवाचार लाकर उसे नई दिशा देने की जगह निशंक उससे निपटने के लिए संघर्ष करते दिखे। शिक्षा मंत्रालय की सभी संस्थाओं पर उनकी पकड़ इतनी कमजोर दिखी कि उन विभागों द्वारा वित्त प्रदत्त पत्रिकाओं में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जहर उगला जाता रहा और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला जानकारी में आने के बाद भी वे तत्काल कार्रवाई करने में विफल रहे। शिक्षा मंत्रालय के हालात को लेकर प्रधानमंत्री की नाराजगी को इस बात से समझा जा सकता है कि वहां निशंक के साथ-साथ उनके राज्यमंत्री संजय धोत्रे को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसी तरह रसायन और उर्वरक मंत्री के रूप में सदानंद गौड़ा कोरोना काल में जरूरी दवाओं और उनके लिए जरूरी बल्क ड्रग की सप्लाई सुनिश्चित करने में विफल रहे। इसकी जिम्मेदारी सचिवों की उच्च स्तरीय समिति को निभानी पड़ी। यही स्थिति श्रम मंत्रालय में संतोष गंगवार की भी रही। कोरोना काल में श्रमिकों के बड़े पैमाने पर पलायन और उनकी दुश्वारियों को दूर करने के लिए एक पोर्टल बनाने की घोषणा की गई, लेकिन अभी तक यह बनकर तैयार नहीं हो पाया। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट सरकार की फटकार भी लगा चुकी है। इस्तीफा देने वाले एक अन्य मंत्री थावरचंद गहलोत को सम्मानजनक विदाई दी गई और उन्हें पहले ही कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया। इसके अलावा 2019 में जीत के बाद अपनी सादगी के लिए चर्चा में आने के बाद प्रधानमंत्री ने प्रताप चंद्र षड्ंगी को राज्यमंत्री बनाकर उनपर भरोसा भी जताया, लेकिन बीते दो सालों में उनका योगदान शून्य रहा। यही हाल राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो, रतनलाल कटारिया और देवाश्री चौधरी का भी रहा। इन सभी को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया।
नई दिल्ली,7 जुलाई 2021, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट कैसी होगी, इसका एक खाका सामने आ गया है. मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी की नई कैबिनेट में मुख्यमंत्रियों को जगह मिलने वाली है. कैबिनेट में 13 वकील, छह डॉक्टर, पांच इंजीनियर्स होंगे. कैबिनेट में युवाओं को जगह देने की कोशिश की गई है. 14 मंत्री ऐसे होंगे जिनकी उम्र 50 साल से नीचे होगी. मोदी की नई कैबिनेट में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ 18 पूर्व राज्य मंत्री होंगे. वहीं 39 पूर्व विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी. 23 ऐसे सांसद भी हैं जो तीन या उससे ज्यादा बार जीतकर आए हैं. वकील, डॉक्टर के पेशे से जुड़े हैं मंत्री मोदी की नई कैबिनेट में जिनको जगह मिलेगी उसमें से 13 वकील, 6 डॉक्टर, 5 इंजिनियर, 7 पूर्व सिविल सर्वेंट हैं. साथ ही 46 ऐसे हैं जिनको केंद्र सरकार में काम करने का अनुभव है. कैबिनेट की औसत उम्र अब 58 साल है. 14 मंत्री ऐसे होंगे जिनकी उम्र 50 साल से नीचे होगी. मंत्रिमंडल में 11 महिलाओं को जगह दी जाएगी. इसमें से दो को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा. मोदी के नए मंत्रिमंडल में दिखेगी सोशल इंजीनियरिंग मोदी के नए मंत्रिमंडल में 5 अल्पसंख्यक मंत्री होंगे. इसमें 1 मुस्लिम, 1 सिख, 2 बौद्ध, 1 ईसाई होंगे. मंत्रिमंडल में 27 ओबीसी मंत्री होंगे, जिनमें से 5 को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा. इसके साथ ही 8 अनुसूचित जनजाति के होंगे, जिनमें से 3 को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा. 12 अनुसूचित जाति के होंगे, इनमें से 2 को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा.
तिरुवनंतपुरम केरल में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को बीते 26 दिनों के दौरान किसी एक दिन में सर्वाधिक केस दर्ज किया गया। इधर एक सप्ताह के दौरान केरल में कोविड केस की संख्या बढ़ी है। पिछले हफ्ते नए केस में 7 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। केरल में मंगलवार को कोरोना के 14 हजार 373 नए केस दर्ज किए गए, जो कि पूरे देश के नए केस का एक तिहाई है। पिछले महीने 10 जून को सामने आए 14 हजार 424 नए मामलों की संख्या के बाद केस कम पड़ने लगे थे। लेकिन संख्या बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। 28 जून से 4 जुलाई वाले सप्ताह में प्रदेश में 84 हजार 791 केस सामने आए। पूरे देश में मंगलवार को 43 हजार 994 नए केस दर्ज किए गए, जिसमें से केरल के एक तिहाई केस यानी कि 14 हजार 373 मामले शामिल रहे। भारत में कोविड से मंगलवार को 703 मौत हुई। इसके साथ ही देश में कोरोना से मौत का आधिकारिक आंकड़ा 4 लाख 4 हजार 228 तक पहुंच गया। सबसे अधिक मौत महाराष्ट्र (171), केरल (142), कर्नाटक (92) में हुई। कोरोना की वजह से अभी तक सबसे अधिक मौत महाराष्ट्र में हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यहां एक लाख 23 हजार 531 लोगों की मौत हुई है। उसके बाद कर्नाटक (35,526), तमिलनाडु (33,132) और दिल्ली (25 हजार) का नंबर आता है। उत्तर प्रदेश में 22 हजार 653 लोगों की मौत हुई है।
लखनऊ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अपनी कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में होने वाला यह पहला कैबिनेट विस्तार होगा। केंद्र में होने वाले इस कैबिनेट विस्तार में उत्तर प्रदेश से चार से पांच चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। इस विस्तार में राजनीतिक समीकरण के लिहाज से जातीय और क्षेत्रीय संतुलन होगा। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। यहां की राजनीति में ओबीसी का खासा प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है। मोदी कैबिनेट के विस्तार में उत्तर प्रदेश बड़ा हिस्सा मिल सकता है। दरअसल उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में अगले साल की शुरुआत में ही चुनाव है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश से चार से पांच मंत्री बनाए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में सहयोगी अपना दल से अनुप्रिया पटेल के साथ-साथ भाजपा के कोटे से वरुण गांधी शामिल हो सकते हैं। दोनों युवा भी हैं, शिक्षित भी और जातिगत समीकरण के खांचे में भी फिट हैं। सांसद अनुप्रिया पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में शुमार थीं। उत्तर प्रदेश के हर प्रमुख जाति समूह से केंद्र में कोई न कोई प्रतिनिधि होगा। अन्य में सहयोगी दलों को भी शामिल किया जा सकता है। केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार को उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के नजरिए से अहम माना जा रहा है। विस्तार के माध्यम से भाजपा कुछ खास जाति-वर्ग के मतदाताओं के बीच बड़ा मैसेज देना चाहेगी। अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी के इकलौते सांसद प्रवीण निषाद भी मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनके अलावा सांसद रीता बहुगुणा जोशी या सीमा द्विवेदी में से किसी एक को मंत्री का ओहदा मिलने की चर्चाएं भी तेज हैं। कौशांबी सांसद विनोद सोनकर, महाराजगंज सांसद पंकज चौधरी, लखीमपुर खीरी से सांसद अजय मिश्रा और राज्यसभा सदस्य बीएल वर्मा के नाम भी संभावित सूची में शामिल हैं। केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद के नाम की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश ब्राह्मण वोटबैंक को साधने के लिहाज से उनको कैबिनेट में शामिल करने को लेकर बीजेपी फैसला ले सकती है। वहीं गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला के अलावा रामशंकर कठेरिया और सत्यपाल सिंह केंद्र में मंत्री बनाए जा सकते हैं।
नई दिल्ली, पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार आज शाम को होने वाला है। इससे पहले दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर विस्तार को लेकर अहम बैठक हुई। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई अन्य नेता मौजूद रहे। बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में 43 नेता केंद्रीय मंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बीच श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। सर्बानंद सोनोवाल और ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुप्रिया पटेल की जगह तय मानी जा रही है। - समाचार एजेंसी पीटीआइ ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री देबाश्री चौधरी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। - भाजपा सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति भवन में शाम छह बजे होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए मंत्रियों से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें अपनी उम्मीदों से अवगत कराना चाहेंगे। इस बार मोदी सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। अनुप्रिया पटेल के अलावा दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी, हरियाणा की सांसद सुनीता दुग्गल और कर्नाटक की सांसद शोभा करंदलाजे को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है। - मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे, उत्तर प्रदेश के अपना दल अपना दल प्रमुख अनुप्रिया पटेल प्रधानमंत्री आवास पर पहुंच गए हैं। - दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल से पहले गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मीनाक्षी लेखी, सर्बानंद सोनोवाल, पुरुषोत्तम रूपाला, निसिथ प्रमाणिक, आरसीपी सिंह और पशुपति पारस 7, लोक कल्याण मार्ग पर मौजूद हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद हैं। - दिल्ली: केंद्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल से पहले प्रधानमंत्री मोदी से मिलने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 लोक कल्याण मार्ग पहुंचे। - दिल्ली: असम के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सर्बानंद सोनोवाल अपने आवास से रवाना हुए।
नई दिल्ली,भारत (India) ने पिछले दिनों महामारी कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रकोप बुरी तरह झेला है लेकिन अब रोज आने वाले संक्रमण के नए मामलों में कमी के साथ ही सक्रिय मामलों में आई कमी राहत का संकेत दे रही है। 2019 के अंत में चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश में अब तक 3,06,63,665 लोग पॉजिटिव हुए और मौतों का आंकड़ा 4,04,211 हो गया है। 24 घंटों में 43,733 नए संक्रमित व 930 मौतें दर्ज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार 24 घंटों में देश में 43,733 नए संक्रमितों की पहचान हुई और 930 संक्रमितों की मौत हो गई। देश में अब सक्रिय मामले कम होकर 4,59,920 रह गए हैं और 47,240 लोगों ने कोरोना को हरा दिया। सक्रिय मामलों में आज दर्ज कमी पिछले 102 दिनों में सबसे कम है। देश में मौजूदा सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.5 फीसद है। इसके अलावा अब रिकवरी रेट बढ़कर 97.18 फीसद हो गया। 42,33,32,097 सैंपलों की हुई टेस्टिंग भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की ओर से जानकारी दी गई कि देश में मंगलवार तक कुल 42,33,32,097 सैंपल टेस्ट किए गए जिसमें से 19,07,216 सैंपल की टेस्टिंग केवल कल की गई। 16 जनवरी से देेश में वैक्सीनेेशन की की शुरुआत हुई और अब तक देश भर में कुल 36.13 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं। रोज आने वाले संक्रमितों का दर 2.29 फीसद दर्ज किया गया। यह 16 दिनों की अवधि में तीन फीसद से कम रहा है। मंत्रालय के अनुसार साप्ताहिक संक्रमण दर घटकर 2.39 फीसद हो गया। अब तक देश में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 2,97,99,534 हो गया है जबकि मृत्यु दर 1.32 फीसद हो गया है।
हाल में जम्मू एयरबेस पर ड्रोन यानी यूएवी से हुए आतंकी हमले ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष खतरे की एक नई घंटी बजा दी है। यह अपनी किस्म की पहली ऐसी घटना है जिसमें ड्रोन के जरिये किसी भारतीय सामरिक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया। आतंकियों ने ड्रोन का इस्तेमाल इसलिए किया, क्योंकि इसे रडार की मदद से पकड़ना बेहद मुश्किल है। ड्रोन अपने कैमरे से संवेदनशील गतिविधियों की सूचना भेज सकता है, डाटा चुरा सकता है और जानमाल का नुकसान तक कर सकता है। इसलिए ये ड्रोन अटैक बहुत ही खतरनाक है। इसी खतरे को भांपते हुए अब एंटी ड्रोन सिस्टम की मांग और बढ़ गई है। उसे जल्द से जल्द भारत लाने की बात कही जा रही है। इससे जुड़े सौदे के तहत भारत को जल्द ही इजरायली एंटी ड्रोन सिस्टम मिल सकता है। नौसेना इसकी खरीद की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है। सेना और वायुसेना भी जल्द इस दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। इस बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने ऐसी एंटी ड्रोन तकनीक विकसित की है, जिससे दुश्मन का ड्रोन पलक झपकते ही ढेर हो जाएगा। इस सिस्टम को इंद्रजाल नाम दिया गया है। डीआरडीओ की यह ऐसी एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी है, जो लेजर के माध्यम से हवाई ऑब्जेक्ट को चूर-चूर करने में सक्षम है। इसे डीआरडीओ ने करीब डेढ़ साल पहले विकसित किया है। इस तकनीक का नाम चैस है। ये दुश्मन के ड्रोन को तहस-नहस कर सकती है। इसे जमीन के साथ-साथ गाड़ियों पर भी लगाया जा सकता है। इस डिवाइस में 360 डिग्री तक रोटेट करने वाला एक रडार है, जो चार किलोमीटर की रेंज तक छोटे-छोटे ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है। इसके अलावा इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्टर भी मौजूद है। ड्रोन को हवा में ही जाम करने के लिए जैमर भी इसमें लगे हैं। ये सारी चीजें सॉफ्ट किल का हिस्सा हैं। जहां तक हार्ड किल यानी आतंकी ड्रोन को खत्म करने की बात है तो इसमें खास लेजर सिस्टम लगा है। यह पूरा सिस्टम कमांड पोस्ट के जरिये एकीकृत होता है। ये तीन किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के ड्रोन को लॉक कर सकता है और ढाई किलोमीटर की रेंज में हार्ड किल व सॉफ्ट किल के जरिये उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करने की काबिलियत रखता है। दरअसल यह तीन अलग-अलग तरीके से काम करता है। लेजर के जरिये दुश्मन के यूएवी को लॉक करके तुरंत उसे गिराने की क्षमता इस एंटी ड्रोन तकनीक में है। दूसरा ये उसके सेंसर्स और सिग्नल्स को जाम कर देता है। तीसरा सभी सिग्नल्स को ब्लॉक करके ये यूएवी को दुश्मन से डिस्कनेक्ट कर सकता है, जिससे यूएवी को ऑपरेट करने वाले हैंडलर तक कोई जानकारी या कोई तस्वीर नहीं पहुंच पाएगी। डीआरडीओ के इस एंटी ड्रोन सिस्टम का कई मौकों पर सफल परीक्षण हो चुका है।
नई दिल्ली, नई दिल्ली, जेएनएन। अपनी फिल्मों में अपनी अदकारी से सबको रुलाने वाले ट्रेजिडी किंग के नाम से मशहूर एक्टर दिलीप कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे। दिलीप कुमार का निधन 98 साल की उम्र में बुधवार की सुबह 7.30 बजे मुंबई के खार हिंदुजा अस्पताल में हुई। एक्टर का अंतिम संस्कारआज ही किया जाएगा। * दिलीप कुमार का अंतिम संस्कार आज शाम पांच बजे किया जाएगा। * दिलीप कुमार का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा। * दिलीप कुमार के आखिरी दर्शन के ​लिए एक्टर के घर पर सितारे जुटने लगे हैं। * दिलीप कुमार के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए दिग्गज अदाकारा शबाना आज़मी, विद्या बालन, सिद्धार्थ रॉय कपूर उनके घर पहुंची हैं। * दिलीप कुमार के जाने से बॉलीवुड से लेकर राजनैतिक गलियारों तक शो की लहर दौड़ गई है। * दिलीप कुमार बीते काफी वक्त से दिलीप कुमार बीमार चल रहे थे जिसके कारण उन्हें कई बार मुंबई के हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया था। वहीं दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो समय समय पर पति की हेल्थ अपडेट्स फैंस के साथ शेयर करती रहती थीं। पीएम मोदी, राहुल गांधी सहित अन्य लोगों ने ट्वीट कर शोक जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिलीप कुमार के निधन पर दुख व्यक्त किया। * नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि दिलीप कुमार जी को भारतीय सिनेमा के एक दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्हें अद्वितीय प्रतिभा का आशीर्वाद प्राप्त था, जिसके कारण हर उम्र के लोग उनके फैन रहे। उनका निधन सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है। * अमिताभ ने अपने ट्वीट में लिखा- एक संस्थान चला गया। हिंदी सिनेमा का इतिहास जब कभी लिखा जएगा, यह हमेशा दिलीप कुमार से पहले और दिलीप कुमार के बाद कहलाएगा। उनकी आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने के लिए दुआएं। बहुत दुखी हूं। दूसरे ट्वीट में अमिताभ ने लिखा- एक युग पर पर्दा गिर गया। दोबारा कभी ना होने के लिए। आपको बता दें कि दिलीप कुमार ने फिल्म 'ज्वार भाटा' से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत थी। वहीं उनकी यादगार फिल्मों में 'शहीद', 'मेला', 'बाबुल', 'फुटपाथ', 'देवदास', 'नया दौर', 'मुगल-ए-आजम', 'गंगा-जमुना', 'राम और श्याम', 'कर्मा' जैसी कई फिल्में रहीं हैं। दिलीप कुमार आखिरी बार साल 1998 में फिल्म 'किला' में नजर आए थे। वहीं उन्हें भारत सरकार द्वारा कई अवॉर्ड से नवाज़ा गया था। इन अवॉर्ड में पद्म विभूषण, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड, पद्म भूषण जैसे कई और अवॉर्ड शामिल हैं।
कोलकाता कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी को झटका देते हुए उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नंदीग्राम केस की सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार पाते हुए ममता बनर्जी पर यह जुर्माना लगाया है। जस्टिस चंदा ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। जुर्माने की रकम का इस्तेमाल कोरोना से प्रभावित वकीलों के परिवार के लिए किया जाएगा। दरअसल ममता के वकील ने नंदीग्राम केस की सुनवाई पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए जस्टिस चंदा की पीठ से इसे ट्रांसफर करने की मांग की थी। ममता ने वकील के जरिए दावा किया था कि चंदा को अक्सर बीजेपी नेताओं के साथ देखा गया है। जस्टिस चंदा ने अपने फैसले में क्या कहा जस्टिस चंदा ने इस मामले की खुद सुनवाई करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल के लिए उपस्थित होता है, तो यह असामान्य है लेकिन एक मामले की सुनवाई करते हुए वह अपने पूर्वाग्रह को छोड़ देता है। जस्टिस चंदा ने आगे कहा, 'इसलिए यह सुझाव देना बेतुका है कि एक जज जिसके किसी राजनीतिक दल के साथ संबंध है, वह पक्षपात कर सकता है।' ममता ने सुवेंदु की जीत को दी थी चुनौती ममता बनर्जी ने नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इससे पहले सीएम ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को एक पत्र लिखा था, जिसमें उनसे अपने खिलाफ पूर्वाग्रह से बचने के लिए चुनाव याचिका दूसरी पीठ को सौंपने का आग्रह किया था।
चंडीगढ़ पंजाब पुल‍िस के हाथ बड़ी सफलता लगी है। पुल‍िस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस) के लिए कथित रूप से जासूसी करने के मामले में सेना के दो जवानों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान सिपाही हरप्रीत सिंह (23) और सिपाही गुरभेज सिंह (23) के रूप में की गई है। हरप्रीत जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तैनात था और 19 राष्ट्रीय राइफल्स से जुड़ा था, वहीं गुरभेज करगिल में क्‍लर्क के रूप में कार्यरत था और 18 सिख लाइट इन्फेंट्री से संबंधित था। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिनकर गुप्ता ने कहा कि दोनों आरोपी देश की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित 900 से अधिक गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें सीमापार तस्कर रणवीर सिंह को फरवरी से मई 2021 के बीच चार महीने के अंतराल में साझा कर चुके हैं। रणवीर सिंह उन्हें पाकिस्तान के खुफिया अफसरों को भेज चुका है। गुप्ता ने बताया कि एसएसपी नवीन सिंगला के नेतृत्व में जालंधर ग्रामीण पुलिस ने एनडीपीएस के एक मामले की जांच के दौरान रणवीर सिंह से भारतीय सेना के कामकाज और तैनाती से संबंधित गोपनीय दस्तावेज बरामद किये थे। रणवीर सिंह को 24 मई को 70 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। पैसे का द‍िया था लालच गुप्ता ने कहा कि पूछताछ के दौरान रणवीर सिंह ने खुलासा किया कि उसने हरप्रीत सिंह से ये दस्तावेज प्राप्त किये जो उसका दोस्त हैं। दोनों एक ही गांव के हैं। उन्होंने आरोप लगाया क‍ि रणवीर ने हरप्रीत सिंह को रक्षा से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को साझा करने के लिए पैसे देने का लालच दिया, जिसके बाद हरप्रीत ने अपने दोस्त गुरभेज सिंह को भी ऐसी राष्ट्र विरोधी जासूसी गतिविधियों में शामिल कर लिया। आईएसआई के संपर्क में दो जवान डीजीपी के हवाले से यहां एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि चूंकि गुरभेज करगिल में 121 इन्फेंट्री ब्रिगेड मुख्यालय में क्‍लर्क के रूप में कार्यरत था, इसलिए वह भारतीय सेना से जुड़ी सामरिक जानकारी वाले इन गोपनीय दस्तावेजों को आसानी से हासिल कर सकता था। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि रणवीर सिंह इन गोपनीय दस्तावेजों को पाकिस्तान आईएसआई के ओहदेदारों को सीधे या अमृतसर के दाउके गांव के मादक पदार्थ तस्कर गोपी के माध्यम से भेजता था। गोपी के पाकिस्तान में मादक पदार्थ तस्कर गिरोहों और आईएसआई अफसरों से संपर्क थे। गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान भेजने की बात कबूली रणवीर सिंह के खुलासे के बाद पुलिस ने गोपी को गिरफ्तार कर लिया जिसने गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान के मादक पदार्थ तस्करों को भेजने की बात कबूल की है। इनमें से एक तस्कर की पहचान कोठर के रूप में की गयी है। दूसरा पाकिस्तान आईएसआई का कथित सदस्य सिकंदर है। दस्तावेजों के बदले वे हेरोइन और पैसा देते थे। डीजीपी ने बताया कि गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें कुछ एनक्रिप्टेन (कूट भाषा वाले सुरक्षित) ऐप से भेजी जाती थीं। 2017 में सेना में शाम‍िल हुआ था हरप्रीत डीजीपी ने कहा कि शुरुआती जांच-पड़ताल के अनुसार अमृतसर के चीचा गांव के हरप्रीत सिंह और पंजाब के तरण तारण के पुनियां गांव के रहने वाले गुरभेज को गोपनीय जानकारी साझा करने के बदले में आर्थिक फायदे मिले। उन्होंने कहा कि रणवीर सिंह ने हरप्रीत सिंह को रकम दी जिसने इसे गुरभेज सिंह के खाते में ट्रांसफर किया। हरप्रीत सिंह 2017 में सेना में शामिल हुआ था वहीं गुरभेज सिंह 2015 में सेना में शामिल हुआ था। एसएसपी सिंगला ने बताया कि सेना के अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को जालंधर ग्रामीण पुलिस को सौंप दिया था और अन्य किसी आरोपी के शाम‍िल होने पता लगाने के लिए आगे की जांच की जा रही है।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अक्सर मशहूर राजनीतिक हस्तियों से जुड़े अजीबोगरीब दावे वायरल होते रहते हैं। ऐसा ही एक दावा पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर काफी यूजर्स एक कार्टून शेयर कर रहे हैं। यह कार्टून पीएम मोदी पर आधारित दिखाने की कोशिश की जा रही है। कार्टून के साथ किया जा रहा ये दावा सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कार्टून पर पर लिखा है कि सूचना के अधिकार (RTI) से पता चला है कि पीएम मोदी के खाने पर 7 साल में 100 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह दावा सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ। विश्वास न्यूज को यह दावा अपने वॉट्सऐप फैक्ट चेकिंग चैटबॉट पर फैक्ट चेक के लिए मिला। पड़ताल का नतीजा क्या निकला विश्वास न्यूज ने फैक्ट चेकिंग के जरूरी टूल्स और इंटरनेट पर ओपन सर्च के माध्यम से इस दावे की पड़ताल की। पड़ताल के नतीजें में ये पता चला कि पीएम मोदी के खाने का खर्च सरकारी खजाने से नहीं लिए जाता। पीएम मोदी ये खर्च स्वयं वहन करते हैं।

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