मदन अरोड़ा.सड़क सुरक्षा जीवित रहने के लिए जरूरी बुनियादी कौशल है. सड़क और परिवहन आज जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं. हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में सड़क उपयोगकर्ता है. वर्तमान परिवहन प्रणाली ने दूरियों को अवश्य कम किया है, लेकिन दूसरी ओर इसने मानव जीवन के जोखिम को भी बढ़ा दिया है.
हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोगों की जान चली जाती है और लाखों लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं. भारत में हर वर्ष करीब दो लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं, जो पूरी दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली कुल मौतों का लगभग 13 प्रतिशत है. अधिकांश दुर्घटनाओं में चालक की भूमिका प्रमुख होती है या फिर सड़क उपयोगकर्ताओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी के कारण हादसे होते हैं.
इसीलिए सड़क सुरक्षा शिक्षा, जीवित रहने के लिए किसी भी अन्य बुनियादी कौशल की तरह ही आवश्यक है. चालकों को यह समझने की जरूरत है कि गाड़ी चलाते समय केवल उनकी ही नहीं, बल्कि दूसरों की जान भी उतनी ही अनमोल होती है.
राज्यसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें औसतन 1 लाख 80 हजार लोगों की जान चली जाती है. इनमें से 66 प्रतिशत मौतें 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की होती हैं.
यदि राजस्थान की बात करें, तो यहाँ हर साल 24 से 25 हजार सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 11 से 12 हजार लोगों की मौत हो जाती है. इनमें जान गंवाने वालों में युवा वर्ग प्रमुख है. हादसों के प्रमुख कारण तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और कुछ हद तक खराब सड़कें हैं. आँकड़ों के अनुसार 83 प्रतिशत हादसे ओवरस्पीड, जबकि 11 प्रतिशत हादसे नशे, खतरनाक और लापरवाह ड्राइविंग के कारण होते हैं.
राजमार्गों पर कई ब्लैक स्पॉट हैं, जहाँ बार-बार दुर्घटनाएँ होती हैं. इन हादसों में पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, जो कुल मृतकों और घायलों का आधे से अधिक हिस्सा हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सड़क हादसों पर चिंता व्यक्त करते हुए वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग को जानलेवा बताया है.उन्होंने तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने को हादसों का मुख्य कारण बताया. वहीं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों को खतरनाक मानते हुए निर्देश दिए हैं कि पैदल यात्री या मवेशी दिखाई देने पर वाहन की गति तुरंत धीमी की जाए.
सरकार के प्रयास और ज़रूरी सुधार
वर्तमान सरकारी पहल
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के माध्यम से सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त कानून बनाए हैं. तेज रफ्तार और नशे में ड्राइविंग के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण रद्द किए जाने का प्रावधान किया गया है. सड़क सुरक्षा जागरूकता रथ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जो हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा और शराब पीकर वाहन न चलाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं.
तकनीकी स्तर पर V2V (Vehicle to Vehicle) तकनीक लाने की योजना है, जिससे वाहन आपस में संवाद कर सकेंगे और कोहरे जैसी परिस्थितियों में दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा.सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत सड़क सुरक्षा परिषद, सड़क सुरक्षा कोष और स्कूल पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा शिक्षा को शामिल किया गया है.
और क्या किया जाना चाहिए
कठोर कानून और प्रभावी प्रवर्तन, शहरी क्षेत्रों में गति सीमा का सख्ती से पालन, आवासीय और स्कूल क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण, जगह-जगह जेब्रा लाइन, बेहतर बुनियादी ढाँचा, पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन बनाई जानी चाहिए. शराब पीकर वाहन चलाने पर रोक के लिए राजमार्गों पर शराब बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाना जरूरी है. समय-समय पर वाहनों का निरीक्षण हो और अधिक चालान होने पर नियमानुसार लाइसेंस व पंजीकरण रद्द किए जाएँ.
पांच दृष्टिकोण : सड़क सुरक्षा पर 5 सशक्त आवाज़ें
*अनिल चिंदा ( यातायात पुलिस निरीक्षक, हनुमानगढ़)-
हनुमानगढ़ के यातायात पुलिस निरीक्षक अनिल चिंदा पूरी शिद्दत और संवेदनशिलता के साथ लोगों को जागरूक करने में लगे हैं. वे चालान भी करते हैं और चालकों को नसीहत भी देते हैं. स्कूलों में जाकर बच्चों को यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी दे,उन्हें अपने परिजनों और अपने आसपास के अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरूक करने के लिए प्रेरित करते हैं. नाबालिग़ किशोरों को सख्त हिदायत देते हैं कि वाहन न चलाएं, क्योंकि यह अपराध है और इससे उन्हें वाहन देने के लिए उनके अभिभावक भी इस अपराध के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे.यातायात पुलिस निरीक्षक चालकों को समझाते हैं कि तेज गति यानी जीवन की क्षति. गाड़ी चलाते समय ध्यान रखें कि आपका और दूसरों का जीवन अनमोल है.दुर्घटना से देर भली. गाड़ी चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करें. शराब पीकर गाड़ी न चलाएं. यातायात नियमों का पालन करें.
अनिल चिंदा दिन भर अपनी टीम के साथ सड़क हादसों से कैसे बचा जाए, इसके लिए लोगों को समझाइस कर अतिक्रमणों को हटवाते हैं. रिडकोर और पी डबल्यू डी वालों से मिल जरूरत के हिसाब से जेब्रा लाइन, स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स बनवाते हैं.
अनिल चिंदा कहते हैं -
दूसरों की जान बचा कर हम अपनी जान को भी बचाएं. जाने वाला चला जाता है लेकिन जो पीछे रह जाता है, उस पर दुखों और तकलीफों का पहाड़ टूट जाता है. इसलिए गाड़ी चलाते समय खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं.ध्यान रहे कि सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं जीवन बचाने वाला व्यवहार है.सड़क सुरक्षा से हादसे कम होते हैं और मानव जीवन सुरक्षित रहता है. इसलिए यातायात नियमों का पालन अवश्य करें.
*एडवोकेट सुरेन्द्र दादरी ( पूर्व जिलाध्यक्ष, जिला कांग्रेस, हनुमानगढ़)-
एडवोकेट सुरेन्द्र दादरी के अनुसार सड़क सुरक्षा, मतलब सड़क पर सुरक्षित रहना. जिसके लिए ट्रैफ़िक नियमों का पालन (सिग्नल, स्पीड लिमिट), हेलमेट/सीट बेल्ट पहनना, गाड़ी चलाते समय फोन से बचना और पैदल चलते समय फुटपाथ/जेब्रा लाईन का उपयोग करना जरूरी है. इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं से बचना और जीवन की रक्षा करना है. क्योंकि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी.. और सड़क सुरक्षा, जीवन की रक्षा. सड़क सुरक्षा एक जिम्मेदारी है, जो हर व्यक्ति को अपनानी चाहिए. ताकि सड़कों पर हर कोई सुरक्षित रह सके.
*वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज डोडा-
अनुज डोडा कहते हैं कि भारत में सड़क सुरक्षा एक बहुत गंभीर सामाजिक मुद्दा है, क्योंकि हर साल सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं या अपनी जान गंवाते हैं। इसीलिए सरकार ने 2019 में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम (Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019) लागू किया, ताकि सड़क सुरक्षा सुधारी जा सके और दुर्घटनाओं को रोका जा सके.सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए हम सभी को कुछ ज़रूरी बातों का पालन करना चाहिए:
मूल सुरक्षित व्यवहार
* अपनी गति सीमा में वाहन चलाएँ – तेज गति दुर्घटना का मुख्य कारण होती है.
* दूसरों को रास्ता दें, खासकर एम्बुलेंस, पुलिस और फायर सर्विस जैसे आपात वाहन को, पैदल चलने वालों और मवेशियों को भी पहले निकलने दें.
* मोबाइल फोन का उपयोग न करें चलते समय यह ध्यान भटकाता है और हादसे का कारण बनता है.
* ट्रैफिक सिग्नल, निशान और संकेतों का पालन करें.
* हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें – यह घायल होने का जोखिम काफी घटाता है और हेलमेट न पहनने व सीट बेल्ट न बाँधने पर जुर्माना लग सकता है.
* शराब या नशे की स्थिति में वाहन न चलाएँ. यह जानलेवा साबित हो सकता है.
* नाबालिग़ द्वारा वाहन चलाना एवं नाबालिग़ को वाहन देना, अपराध है. इससे बचें.
* तेज गति, नशे में वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल, अपराध है. अलग अलग मामलों में 5000 से 10000 रूपये तक जुर्माना और लाइसेंस भी रद्द हो सकता है.
* वैध दस्तावेज साथ रखें, बिना लाइसेंस के ड्राइविंग न करें.अन्यथा भारी जुर्माना देना पड़ सकता है.
इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करना आपकी और दूसरों की जान बचा सकता है.
सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं, जीवन बचाने वाला व्यवहार है.
*वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत बत्रा : तेज रफ्तार, नशा और मोबाइल—जान के दुश्मन
वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत बत्रा का कहना है कि सड़क हादसे आज एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुके हैं. एक सर्जन के रूप में वे रोज़ ऐसे मरीज देखते हैं, जो तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग या वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग का शिकार होते हैं. उनके अनुसार तेज गति में टक्कर होने पर शरीर पर पड़ने वाला आघात इतना तीव्र होता है कि सिर, रीढ़ और अंदरूनी अंगों को अपूरणीय क्षति पहुँचती है. कई मामलों में मरीज को अस्पताल पहुँचाने के बाद भी बचा पाना संभव नहीं हो पाता.
डॉ. बत्रा बताते हैं कि नशे की हालत में वाहन चलाने से चालक की प्रतिक्रिया क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है. ब्रेक लगाने में देरी और दूरी का गलत आकलन हादसे को न्योता देता है. वहीं वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग कुछ सेकंड के लिए भी ध्यान भटकाता है, जो कई जिंदगियों को तबाह कर देता है.अस्पताल में आने वाले कई मरीजों की एक ही गलती होती है—चलती गाड़ी में मोबाइल का इस्तेमाल.
वे स्पष्ट करते हैं कि हेलमेट और सीट बेल्ट का सही उपयोग जीवन और मृत्यु के बीच अंतर तय करता है. डॉ. निशांत बत्रा का संदेश साफ है—तेज रफ्तार समय नहीं बचाती, नशा समझ छीन लेता है और मोबाइल ध्यान भटका देता है। इनसे दूरी ही सुरक्षित जीवन की गारंटी है.
* वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम बंसल -
प्रेम बंसल,राजस्थान में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर चिंतित हैं. उनके अनुसार राजस्थान में लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं. जिसमें सैंकड़ो जाने जा रही हैं. हनुमानगढ़ क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. यहां सड़क हादसों की संख्या अत्याधिक बढ़ गई है जो कि चिंताजनक है. वाहनों की संख्या भी प्रतिदिन बढ़ रही है और उसी तेजी से बढ़ रही है हादसों की संख्या. हमारे चारों ओर लगभग हाईवे जैसी चौड़ी सड़कें हैं. चौड़ी सड़कें आरामदायक और गड्ढा रहित हैं. इस हिसाब से यहां हादसे नहीं होने चाहिए. लेकिन अंधाधुंध गति से चलते वाहनों की वजह से ये सड़कें क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान नहीं, अभिशाप बन गई हैं. हर साल दर्जनों नौजवान काल का ग्रास बन रहे हैं. दर्जनों लोग अपाहिज हो रहे हैं. जो कि चिंतनीय है. वाहनों की गति सीमा पर कोई नियंत्रण नहीं. अधिकांश वाहन अनफिट हैं व अधिकांश लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं है. परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार के कारण लाइसेंस भी आसानी से उपलब्ध हैं. चाहे चालक वाहन भी न चलाना जानता हो. जो कि अत्यंत घातक है. परिवहन विभाग और पुलिस कई बार अवैध नाके लगा लेते हैं. जिससे भी कई हादसे होते हैं. वाहन चालक वाहन रोकते समय आधा सड़क पर ही रोक देते हैं. जिससे तेज गति से आ रहे वाहन भिड़ जाते हैं. यातायात पुलिस केवल ड्राइविंग लाइसेंस ही चैक कर ले तो छोटे वाहनों की बड़ी भीड़ सड़क से हट जाएगी. हमारे यहां यातायात पुलिस इसके लिए काफ़ी प्रयासरत रहती है. शेष क्षेत्रों की पुलिस इनका अनुसरण कर ले तो हादसों में कमी आ सकती है.सड़क सुरक्षा अमूल्य मानव जीवन को बचाने के लिए जरूरी है.
निष्कर्ष
सड़क सुरक्षा कोई औपचारिक नियम नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का संकल्प है. हादसे कम करने के लिए सरकार, प्रशासन और आमजन—तीनों की जिम्मेदारी समान है। याद रखें— सड़क सुरक्षा से ही जीवन सुरक्षित रहता है.