Hanumangarh


जिले से महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना व बाल विकास अधिकारी प्रवेश कुमार सोलंकी को केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे पोषण अभियान कार्यक्रम में बेहतर कार्य प्रर्दशन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। दिल्ली के अशोका होटल में आयोजित भव्य पोषण सम्मान समारोह में केंद्र सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सोलंकी को अवार्ड से सम्मानित किया। पोषण अभियान पूरे देश मे चलाया जा रहा है तथा हर साल बेहतरध्नवाचार कार्य करने वाले कार्मिकध्अधिकारी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाता है। सोलंकी ने बताया कि हनुमानगढ़ परियोजना द्वारा पोषण को लेकर विशेष प्रदर्शन जैसे- कुपोषित बच्चो के साथ-साथ गर्भवती व धात्री महिलाओ के पोषण स्तर में सुधार हेतु विशेष ध्यान दिया गया। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर गोद भराई, वजन दिवस, पोषण दिवस व अन्नप्राशन जैसे गतिविधियों में महिलाओं व किशोरियों के साथ उनके परिवारजनों को भी पोषण के महत्व बताकर उनके कार्य व्यवहार में परिवर्तन लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि पोषण अभियान में बेहतर कार्य पूरी टीम सहयोग हो रहा है तथा अवार्ड के हकदार भी पूरी टीम है।
खाद्य एवं नागरिक अपूर्ति मंत्री श्री रमेश चन्द्र मीना हनुमानगढ़ में करेंगे जनसुनवाई
क्लिनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट: 31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर चिकित्सा संस्थानों पर लगेगा जुर्माना
मातृ वन्दना एवं प्रतिभा सम्मान समारोह स्थगित
सम्मान आपके द्वारा श्रृंखला में किया वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती आशादेवी शर्मा को सम्मानित

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नई दिल्ली 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया गया है। बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड 'अंधाधुन' को दिया गया है। आयुष्मान खुराना और तब्बू स्टारर इस फिल्म का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है। इसके अलावा फिल्म 'पद्मावत' को बेस्ट कोरियाॅग्रफी और संजय लीला भंसाली को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड भी मिला है। बेस्ट एंटरटेनमेंट फिल्म का अवॉर्ड 'बधाई हो' को दिया गया है। साथ ही 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक को बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का अवॉर्ड मिला है। बेस्‍ट ऐक्‍टर अवॉर्ड: आयुष्‍मान खुराना (बधाई हो), विकी कौशल (उरी: द सर्जिकल स्‍ट्राइक) बेस्‍ट ऐक्‍ट्रेस अवॉर्ड: कीर्ति सुरेश (महानती) स्पेशल मेंशन अवॉर्ड (नॉन फीचर) महान हुतात्मा- सागर पुराणिक ग्लो वॉर्म इन ए जंगल- रमण दुंपाल लड्डू- समीर साधवानी और किशोर साधवानी बेस्ट नरेशन मधुबनी- द स्टेशन ऑफ कलर आवाज- दीपक अग्निहोत्री, उर्विजा उपाध्याय बेस्ट म्यूजिक फिल्म- ज्योति- डायरेक्टर केदार दिवेकर बेस्ट ऑडियोग्रफी- चिल्ड्रेन ऑफ द सॉइल- बिश्वदीप चटर्जी बेस्ट लोकेशन साउंड- द सीक्रेट लाइफ ऑफ फ्रॉग्स- अजय बेदी बेस्ट सिनमैटॉग्रफी- द सिक्रेट लाइफ ऑफ फ्रॉग्स - अजय बेदी और विजय बेदी बेस्ट बीट डायरेक्शन- अई शपथ- गौतम वजे बेस्ट फिल्म ऑन फैमिली वैल्यु- चलो जीते हैं- मंगेश हडावले बेस्ट शॉट फिक्शन फिल्म- कासव- आदित्य सुभाष जंभाले सोशल जस्टिस फिल्म- व्हाइ मी- हरीश शाह सोशल जस्टिस फिल्म- एकांत- नीरज सिंह बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव फिल्म- अमोली- जैसमिन कौर और अविनाश रॉय बेस्ट स्पोर्ट्स फिल्म- स्विमिंग थ्रू द डार्कनेस- सुप्रियो सेन बेस्ट एजुकेशनल फिल्म- सरला विरला- एरेगोड़ा बेस्ट फिल्म ऑन सोशल इशू- ताला ते कूंजी- शिल्पी गुलाटी बेस्ट एनवायरन्मेंटल फिल्म- द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर- सुबिया नालामुथु बेस्ट प्रमोशनल फिल्म- रीडिस्कवरिंग जाजम- अविशान मौर्य और कृति गुप्ता बेस्ट साइंसेज ऐंड टेक्नॉलजी फिल्म- जीडी नायडू: द एडिसिन ऑफ इंडिया- रंजीत कुमार बेस्ट आर्ट्स ऐंड कल्चरल फिल्म- बुनकर: द लास्ट ऑफ द वाराणसी वीवर्स- सत्यप्रकाश उपाध्याय बेस्ट डेब्यू नॉन-फीचर फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर- फलूदा- साग्निक चटर्जी बेस्ट नॉन-फीचर फलिम (शेयर्ड)- सन राइज - विभा बख्शी बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म- द सिक्रेट लाइफ ऑफ फ्रॉग्स - अजय बेदी ऐंड विजय बेदी बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर- पद्मावत- संजय लीला भंसाली स्पेशल मेंशन (फीचर) नथिकचरामी (कन्नड़)- श्रुति हरिहरण कड़क(हिंदी)- चंद्रचूड़ राय (ऐक्टर) जोसफ (मलयालम)- जोजू जॉर्ज (ऐक्टर) सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया (मलयालम)- सावित्री (ऐक्ट्रेस) बेस्ट राजस्थानी फिल्म- टर्टल- दिनेश एस यादव बेस्ट पंचिंगा फिल्म- इन द लैंड ऑफ पॉइजन विमिन- मंजू बोरा बेस्ट शेरडूकपन फिल्म- मिशिंग- बॉबी शर्मा बरुआ बेस्ट गारो फिल्म- मामा- डॉमिनिक संगमा बेस्ट मराठी फिल्म- भोंगा- शिवाजी लोटन पाटिल बेस्ट तमिल फिल्म- बारम- प्रिया कृष्णस्वामी बेस्ट हिंदी फिल्म- अंधाधुन- श्रीराम राघवन बेस्ट उर्दू फिल्म- हामिद- ऐजाज खान बेस्ट बंगाली फिल्म- एक जे छिलो राजा- सृजीत मुखर्जी बेस्ट मलयालम फिल्म- सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया- जकारिया बेस्ट तेलुगू फिल्म- महानति- नाग अश्विन बेस्ट कन्नड़ फिल्म- नाथीचरामी- मंजुनाथ एस (मंसूरे) बेस्ट कोंकणी फिल्म- अमोरी- दिनेश पी भोगले बेस्ट असामी फिल्मी- बुलबुल कैन सिंग- रीमा दास बेस्ट पंजाबी फिल्म- हरजीता- विजय कुमार अरोड़ा बेस्ट गुजराती फिल्म- रेवा- राहुल सुरेंद्रभाई भोले, विनीत कुमार अंबुभाई कनोजिया बेस्ट ऐक्शन डायरेक्टर अवॉर्ड- कन्नड़ फिल्म केजीएफ- विक्रम मोरे और अंबु आरिव बेस्ट काेरियॉग्रफी- पद्मावत- क्रुति महेश माड्या और ज्योति तोमर- गाना- घूमर-घूमर बेस्ट स्पेशल इफेक्ट- तेलुगु फिल्म ऑ- श्रुति क्रिएटिव स्टूडियो बेस्ट स्पेशल इफेक्ट- कन्नड़ फिल्म केजीएफ- यूनिफाइ मीडिया बेस्ट लिरिक्स- कन्नड़ फिल्म नाथिचरामी- संगीतकार- मंजुनाथ एस (मंसूर)- गाना - मायावी मानवे बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक- उड़ी: द सर्जिकल स्ट्राइक- शाश्वत सचदेव बेस्ट नॉन-फीचर फलिम (शेयर्ड)- सन राइज - विभा बख्शी बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म- द सिक्रेट लाइफ ऑफ फ्रॉग्स - अजय बेदी ऐंड विजय बेदी बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर- पद्मावत- संजय लीला भंसाली स्पेशल मेंशन (फीचर) नथिकचरामी (कन्नड़)- श्रुति हरिहरण कड़क(हिंदी)- चंद्रचूड़ राय (ऐक्टर) जोसफ (मलयालम)- जोजू जॉर्ज (ऐक्टर) सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया (मलयालम)- सावित्री (ऐक्ट्रेस) बेस्ट राजस्थानी फिल्म- टर्टल- दिनेश एस यादव बेस्ट पंचिंगा फिल्म- इन द लैंड ऑफ पॉइजन विमिन- मंजू बोरा बेस्ट शेरडूकपन फिल्म- मिशिंग- बॉबी शर्मा बरुआ बेस्ट गारो फिल्म- मामा- डॉमिनिक संगमा बेस्ट मराठी फिल्म- भोंगा- शिवाजी लोटन पाटिल बेस्ट तमिल फिल्म- बारम- प्रिया कृष्णस्वामी बेस्ट हिंदी फिल्म- अंधाधुन- श्रीराम राघवन बेस्ट उर्दू फिल्म- हामिद- ऐजाज खान बेस्ट बंगाली फिल्म- एक जे छिलो राजा- सृजीत मुखर्जी बेस्ट मलयालम फिल्म- सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया- जकारिया बेस्ट तेलुगू फिल्म- महानति- नाग अश्विन बेस्ट कन्नड़ फिल्म- नाथीचरामी- मंजुनाथ एस (मंसूरे) बेस्ट कोंकणी फिल्म- अमोरी- दिनेश पी भोगले बेस्ट असामी फिल्मी- बुलबुल कैन सिंग- रीमा दास बेस्ट पंजाबी फिल्म- हरजीता- विजय कुमार अरोड़ा बेस्ट गुजराती फिल्म- रेवा- राहुल सुरेंद्रभाई भोले, विनीत कुमार अंबुभाई कनोजिया बेस्ट ऐक्शन डायरेक्टर अवॉर्ड- कन्नड़ फिल्म केजीएफ- विक्रम मोरे और अंबु आरिव बेस्ट काेरियॉग्रफी- पद्मावत- क्रुति महेश माड्या और ज्योति तोमर- गाना- घूमर-घूमर बेस्ट स्पेशल इफेक्ट- तेलुगु फिल्म ऑ- श्रुति क्रिएटिव स्टूडियो बेस्ट स्पेशल इफेक्ट- कन्नड़ फिल्म केजीएफ- यूनिफाइ मीडिया बेस्ट लिरिक्स- कन्नड़ फिल्म नाथिचरामी- संगीतकार- मंजुनाथ एस (मंसूर)- गाना - मायावी मानवे बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक- उड़ी: द सर्जिकल स्ट्राइक- शाश्वत सचदेव
विवादित वीडियो मामला: मुश्किल में एजाज खान, कोर्ट ने 1 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा
आर्टिकल 15 रिलीज, लोग बोले- आयुष्मान खुराना की एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म
जल्द इंड‍िया लौट रहे हैं ऋषि कपूर, इस फिल्म में जूही चावला संग करेंगे काम
काशी में बदलाव देख रणबीर कपूर हैरान

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सीकर लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए राजस्थान के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने यहां एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। राजस्थान के सीकर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैं यहां के लोगों का अभिनंदन करता हूं। अब मैंने जब यहां के लोगों का अभिनंदन किया है तो कांग्रेस से लोग इसकी शिकायत चुनाव आयोग के पास लेकर जाएंगे और कहेंगे कि मोदी ने चुनावी भाषण में अभिनंदन का नाम लिया और इसके बाद उनका एक चेला सुप्रीम कोर्ट चला जाएगा।' पीएम ने कहा कि इस चेले की याचिका पर कोर्ट एक हफ्ते में निर्णय के लिए कहेगी और फिर चुनाव आयोग कहेगा कि मोदी ने तो जनता के अभिवादन के लिए अभिनंदन शब्द का इस्तेमाल किया था और फिर केस खत्म हो जाएगा। पीएम ने सर्जिकल स्ट्राइक पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि अब जब देश की जनता सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हमारे साथ आ गई तो कांग्रेस कह रही है कि हमने 6 स्ट्राइक की और सर्जिकल स्ट्राइक पर अब 'मी टू-मी टू' कहा जा रहा है। पीएम ने कहा कि सीकर की महान धरती पर हम राष्ट्र को जोड़ने की बात करते हैं और कांग्रेस देश की रक्षा करने वालों का हर मौके पर अपमान करती है। पीएम ने कहा, कांग्रेस के एक नेता सेना प्रमुख को गली का गुंडा कहते हैं और कांग्रेस के अन्य नेता वायुसेना के अध्यक्ष को झूठा कहते हैं। इसके अलावा हमारे जवान आतंकियों को घर में घुसकर मारते हैं तो कांग्रेस पूछती है कि आतंकियों की लाशें कहां है। क्या इन आतंकियों को दफ्न करने के लिए कांग्रेस की ओर से चादर भेजी जानी है?' बालाकोट में सेना की स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान पूरी दुनिया में जाकर रो रहा है कि मोदी ने मारा- लेकिन कांग्रेस का यह भी मानने का इरादा नहीं है। एयर स्ट्राइक के हर सबूत के लिए कांग्रेस आंखों पर पट्टी बांधकर बैठ गई है और कांग्रेस का हाल ऐसा है कि इन दिनों उन्हें दिल्ली में पीएम की कुर्सी के अलावा कुछ नहीं दिखता। कांग्रेस को वीर सपूतों का पराक्रम नहीं दिखता। कांग्रेस के इस बर्ताव पर देश पहले चार चरणों में जो मतदान हुआ, उसमें देश की जनता ने कांग्रेस और महामिलावटी लोगों को सबक सिखा दिया है। 29 अप्रैल को जब राजस्थान में वोट पड़े तो कांग्रेस को लोगों ने कांग्रेस को पानी पी-पीकर सजा दी। सर्जिकल स्ट्राइक के बहाने कांग्रेस पर वार नरेंद्र मोदी ने कहा,'कल कांग्रेस के नामदारों ने अपना रिमोट कंट्रोल ऑन किया और उसके कुछ देर बाद कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने एक बयान दिया कि हमारे समय भी कई बार सर्जिकल स्ट्राइक की गई। यह बयान सामने आते ही कांग्रेस के तमाम नेता उछलने लगे। अब कांग्रेस यह साबित करने में लगी है कि हमने भी सर्जिकल स्ट्राइक की थी। यही नहीं कांग्रेस ने 6 तारीखों का भी जिक्र किया, जिनपर स्ट्राइक हुई थी।' यह कैसी स्ट्राइक है जिसके बारे में ना सेना, ना पब्लिक और ना पाकिस्तान को पता चला। पहले हमारे द्वारा की गई स्ट्राइक का उन्होंने मजाक उड़ाया और जब जनता हमारे साथ आ गई तो उन्होंने विरोध किया और जब फिर बात ना बनी तो कहां कि हमने भी स्ट्राइक की। कांग्रेस अब स्ट्राइक पर मी टू-मी टू कर रही है। 'जब कागज पर स्ट्राइक करनी है तो क्या फर्क पड़ता है' 'मैंने कुछ दिन पहले पढ़ा था कि कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया था कि यूपीए ने तीन सर्जिकल स्ट्राइक की थी। लेकिन चुनाव के चार चरण बीतते ही आंकड़ा तीन से 6 हो गया। आप देखिएगा कि 23 मई को जब नतीजे आएंगे तो कांग्रेस कहेगी कि हमने 600 बार स्ट्राइक की थी। क्योंकि जब कागज पर ही स्ट्राइक करनी है तो झूठे लोगों को क्या फर्क पड़ता है। कांग्रेस को देश की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।' एचडी कुमारस्वामी के एक बयान का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक में सरकार चला रही है और उस सरकार के सीएम ने एक बयान दिया कि सेना में वही लोग जाते हैं जिनके पास दो वक्त का खाना नहीं है और भूखे मरते हैं। आप मुझे बताइए कि राजस्थान के सपूत पेट भरने के लिए सेना में हैं। यह हमारी वीर माताओं का अपमान है कि नहीं। कांग्रेस के हर छोटे-बड़े नेता का मौन इस बयान का समर्थन करता है। कांग्रेस के लोग क्या बात करते हैं कि जो देश के लिए सीने में गोली खाने के लिए तैयार हो , क्या वह सेना में सिर्फ खाने के लिए जाता है। 'कांग्रेस ने नहीं बनवाया नैशनल वॉर मेमोरियल' पीएम ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'सेना और शहीदों के प्रति कांग्रेस का ऐसा ही व्यवहार रहा है। इन्होंने नैशनल वॉर मेमोरियल नहीं बनवाया और कहा कि इससे इंडिया गेट की शोभा कम होगी। आजादी के सात दशक बाद नैशनल वॉर मेमोरियल बनाने का सौभाग्य मुझे मिला। वहीं महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में बेतहाशा महंगाई बढ़ती थी, लेकिन पांच साल में हमने महंगाई दर को नियंत्रित किया है। इसके अलावा विकास की दर भी बढ़ी है। हमने पांच लाख तक की इनकम को टैक्स स्लैब से बाहर किया है जिससे परिवारों को मदद मिल रही है। साथ-साथ मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए तमाम मदद दी जा रही है।' कांग्रेस ने समाज का वोटबैंक की तरह किया इस्तेमाल: पीएम कांग्रेस सरकार ने समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। यही कारण है कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलना कांग्रेस की फितरत नहीं रही। लेकिन बीजेपी के लिए समाज का हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है। विकास हर व्यक्ति, हर क्षेत्र तक पहुंचे इसके लिए हम प्रयासरत हैं।' मोदी ने कहा, '23 मई को जब फिर एक बार मोदी सरकार बनेगी तो जो पानी आज पाकिस्तान जा रहा है वह पानी हिंदुस्तान के खेतों में जाएगा।' पीएम ने कहा कि कांग्रेस का पंजा हमेशा मलाई के चक्कर में रहता है। जहां मलाई नहीं, वहां कांग्रेस कभी गई नहीं। ये भी एक वजह है कि कांग्रेस के आते ही महंगाई आसमान छूने लगती है, यानी कांग्रेस आई, महंगाई लाई।
मसूद अजहर पर बोले पीएम मोदी- अभी तो शुरुआत है, आगे-आगे देखिए क्या होता है

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नई दिल्ली, 05 मई 2019,पश्चिम बंगाल के चंद्रकोण में सीएम ममता बनर्जी के काफिले के सामने बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की तो दीदी उन पर बरस पड़ीं. चंद्रकोण में ममता बनर्जी एक रैली में जा रही थीं. इस दौरान 'जय श्री राम' का नारा लगा रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं को देखकर ममता ने अपना काफिला रोक दिया और कार से उतर गईं. ममता बनर्जी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर गाली देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी पुरुषों को गलत व्यवहार करने के लिए भेजकर उनकी छवि खराब कर रही है. बता दें कि पश्चिम मिदनापुर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यहां से शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के मंत्री जबकि उनके पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिब्येंदु अधिकारी सांसद रह चुके हैं. इस इलाके से ममता जब गुजरीं तब उनके काफिले के सामने बीजेपी कार्यकर्ता नारे लगाने लगे. इसके बाद ममता ने तुरंत अपने काफिले को रुकवाया और गाड़ी से बाहर निकल गईं. ममता को देखकर कुछ बीजेपी करता वहां से भागने लगे तभी ममता कहा कि जो लोग इस तरह से नारेबाजी कर रहे हैं, उन्हें 23 मई को चुनाव का नतीजा आने के बाद अंजाम भुगतना पड़ेगा. ममता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव के बाद भी उन्हें यहीं रहना है. बता दें कि चक्रवाती तूफान फानी को देखते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2 दिन के लिए अपने सभी चुनावी कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था. बीजेपी बांटने की राजनीति कर रही है ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल में बीजेपी बांटने की राजनीति कर रही है. लोगों को दंगों के लिए उकसा रही है. ममता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बीजेपी की ऐसी राजनीति को नाकाम करते हुए सभी 42 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस जिताएं. इससे पहले टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में 42 में से 42 सीट जीतने का दावा कर चुकी हैं. ममता केंद्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाना चाहती हैं. वहीं, बीजेपी भी बंगाल में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है. बीजेपी ने 42 में से 23 सीट जीतने का दावा किया है.
यौन उत्पीड़न केस: जांच कमेटी से SC के जजों की आपत्ति, कहा- CJI केस में पीड़िता बिना सुनवाई ठीक नहीं
आम्रपाली के बायर्स में जगी उम्मीद, 11 हजार करोड़ जुटाकर पूरे हो सकते हैं सभी अधूरे प्रॉजेक्ट्स
पाकिस्तान पर गुस्साए श्याम रंगीला ने कहा-मजाक भले उड़ाओ पर आएंगे तो मोदी जी ही
सुप्रीम कोर्ट के नाम से चौकीदार चोर है बोलने पर माफी मांगी, BJP से नहीं: राहुल गांधी

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नई दिल्ली राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा राफेल डील के लिए जो प्रक्रिया चल रही थी उसे पीएमओ द्वारा मॉनिटर करना पैरलल निगोशियेशन (सामान्तर बातचीत) या दखल नहीं कहा जा सकता है। केंद्र सरकार ने कहा कि अधूरे आंतरिम नोट्स और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राफेल डील के मामले को दोबारा ओपन नहीं किया जा सकता। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 दिसंबर को जो आदेश पारित किया था, उसका नतीजा सही था। सरकार ने कहा कि इस मामले में दाखिल रिव्यू पिटिशन में लगाए गए आरोप थोथे और गलत तथ्यों वाला है, जो विचारनीय नहीं है, ऐसे में उसे खारिज किया जाना चाहिए। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन दाखिल किया है। सरकार ने हलफनामे में कहा है कि याचिकार्ता ने बेतुके मुद्दे उठाए हैं, ताकि विवाद पैदा हो सके। केंद्र सरकार ने फिर दोहराया कि इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने में उसका कोई रोल नहीं है। 'तरीका गलत था' डिफेंस मिनिस्ट्री के अधिकारी ने हलफनामा दायर कर कहा है कि पड़ोसी देशों की स्थिति और भारत की सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए राफेल डील की प्रक्रिया का खुलासा करने से नैशनल सिक्यॉरिटी पर गंभीर असर होगा। साथ ही केंद्र ने कहा कि डिफेंस डील के कुछ गोपनीय दस्तावेज को गलत तरीके से हासिल कर रिव्यू में लगाया गया है, जो देश की सुरक्षा से जुड़ा है। इन दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन की सुनवाई नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि पिछले साल 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले की जांच की याचिका खारिज करते हुए सही निष्कर्ष दिया था कि किसी व्यक्ति का पुर्वानुमान जांच का आधार नहीं हो सकता, जिसमें आरोप थोथे और निराधार हों। अब याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज दिए हैं, जिसके बारे में कहा गया है कि मीडिया के जरिये सामने आया है, लेकिन यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। जो दस्तावेज दिए गए हैं वह कुछ प्रेस रिपोर्ट्स के आधार पर है और कुछ आंतरिम फाइल नोटिंग है, जो अवैध और गैर कानूनी तरीके से हासिल किया गया है। इस आधार पर पूरे मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकता, क्योंकि रिव्यू पिटिशन का स्कोप सीमित है। 'हर पहलू देखा गया' पिछले साल के 14 दिसंबर के राफेल मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। आरोप लगाया है कि राफेल डील में हुई अनियमतिता की जांच होनी चाहिए। इस मामले में विनित ढांढा और आप नेता संजय सिंह की ओर से भी रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। केंद्र सरकार के डिफेंस मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसंबर के आदेश में तमाम पहलुओं- फैसले की प्रक्रिया, कीमत और इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने की प्रक्रिया को देखा था और कोर्ट ने निष्कर्ष के साथ अर्जी खारिज की थी। केंद्र सरकार ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का आधार नहीं हो सकता। फाइल नोटिंग और विचारों का आदान-प्रदान और मतों को संबंधित अथॉरिटी देखती है और फिर आखिरी फैसला लिया जाता है। इस पर सवाल नहीं हो सकता। अधूरी फाइल नोटिंग और मीडिया रिपोर्ट रिव्यू पिटिशन का आधार नहीं हो सकता। केंद्र सरकार ने इस दौरान लीक गोपनीय दस्तावेज को पिटिशन के साथ पेश किए जाने पर भी ऐतराज जताया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को उसे खारिज कर दिया था। क्या है मामला - राफेल खरीद प्रक्रिया और इंडियन ऑफसेट पार्टनर के चुनाव में सरकार द्वारा भारतीय कंपनी को फेवर किए जाने के आरोपों की जांच की गुहार लगाने वाली तमाम याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को खारिज कर दिया था। - अदालत ने कहा था कि किसी व्यक्ति की अनुभूति जांच का आधार नहीं हो सकता। जहां तक इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुने जाने का मामला है कोर्ट के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं रखा गया, जिससे पता चले कि भारत सरकार ने कमर्शल फेवरिज्म किया है और किसी भी पार्टी को सरकार ने फायदा पहुंचाया है, क्योंकि इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने का अधिकार भारत सरकार का नहीं है। - 2 जनवरी 2019 को राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और एडवोकेट प्रशांत भूषण की ओर से 14 दिसंबर के फैसले के रिव्यू के लिए अर्जी दाखिल की गई। अर्जी में मीडिया में डिफेंस मिनिस्ट्री से जुड़े कुछ नोटिंग की खबरों को भी रिव्यू को आधार बनाया गया। - 10 अप्रैल 2019 को कोर्ट ने कहा कि वह लीक दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन सुनेगा।
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EXCLUSIVE: यूपीए राज में राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर को मिला डिफेंस का ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट!
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