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हनुमानगढ़।टाउन श्रीअरोड़वंश सभा के चुनाव जल्द करवाये जाएंगे। चुनावी प्रक्रिया सम्पन्न करवाने के लिए एडवोकेट मोहन मुंजाल को चुनाव अधिकारी बनाया गया है।श्री अरोड़वंश सभा की रविवार को अरोड़वंश धर्मशाला में आम सभा की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। सभा की अध्यक्षता चाचा चरणदास ने की। सभा की कार्यवाई की शुरूवात करते हुए सभा अध्यक्ष सतीश कटारिया ने अपने कार्यकाल के दौरान किये गये कार्यों का लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में २५ लाख के लागत से विकास कार्य करवाये गये। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों की मदद की गई। कोषाध्यक्ष कश्मीरीलाल मिढ़ा ने आय-व्यय का ब्योरा पेश किया। चाचा चरण दास ने कार्यकारिणी के प्रयासों की सराहना करते हुए एक कार्यकाल का विस्तार दिये जाने की सभा से अपील की लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने इसका विरोध किया और सर्व सम्मती नहीं बनने पर चुनाव करवाये जाने की घोषणा की गई। इस बीच भुवनेश ग्रोवर और बलदेव कुक्कड़ ने सतीश कटारिया के विकासोन्मुखी कार्यों की प्रशंसा करते हुए एक मौका दिये जाने का समर्थन किया। इस पर सवाल उठाया गया कि क्या पूर्ववर्ती टीमों ने अच्छा कार्य नहीं किया। राजकुमार सोढ़ा और चम्पतराय चलाना के कार्यकाल में अपना घर निर्माण केसाथ ही सभा भवन में भी उल्लेखनीय कार्य हुए। अशोक चन्नी के कार्यकाल में भी विकास कार्य करवाये गये उन्हें एक और अवसर क्यों नहीं दिया गया। रमेश छाबड़ा, ओमप्रकाश जुनेजा, मुरारीलाल सचदेवा ने मौजूदा कार्यकारिणी की प्रशंसा करते हुए नये लोगों को अवसर दिये जाने का सुझाव दिया।कामरेड श्याम लाल ने आमसभा की बैठक पुन: बुला उसमें निर्णय लिये जाने पर बल दिया। मनोज विनोचा, एडवोकेट संदीप टक्कर एवं राजेश छाबड़ा , इन्द्रजीत चराया ने भी कार्यकारिणी के विस्तार पर अपना विरोध जताया। मनोच विनोचा ने कहा कि आम सभा की पुन: बैठक बुला उसमें निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि परिषद चुनाव में अरोड़ा बाहुल्य वार्ड में बीजीपी की टिकट के बावजूद संदीप छाबड़ा चुनाव कैसे हार गये। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में समाज के लोग रहते हैं। बिना हमारी मदद के कोई चुनाव नहीं जीत सकता लेकिन एकजुटता के अभाव में समाज की अनदेखी हो रही है। हमे सभी दलों को अपनी ताकत का अहसास कराना होगा तभी हमें हर दल में उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। विनोचा ने कार्यकारिणी विस्तार का विरोध करते हुए नये लोगों को मौका दिये जाने की बात कही। पत्रकार मदन अरोड़ा ने कार्यकारिणी के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए युवा अरोड़वंश की टीम को मौका दिये जाने की अपील करते हुए कहा कि इस टीम की वजह से आज पूरे इलाके में समाज का नाम उनके सामाजिक प्रकल्पों की वजह से सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने समाज के कार्यक्रमों में चुनिदा लोगों को ही बुलाये जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मंच पर केवल तीन पूर्व अध्यक्ष विराजमान हैं शेष को क्यों बुलाया नहीं गया। उन्होंने सभी पूर्व अध्यक्षों को सरंक्षक बना ठेकेदारी प्रथा बंद किये जाने की मांग की। अरोड़ा ने समाज की आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाओं को शिक्षा के लिए शिक्षा समिति और जरूरतमंद कमजोर सदस्यों की म दद के लिए सहायता समितियों के गठन का सुझाव दिया। आरक्षण की मांग पर उन्होंने कहा कि अरोड़ा समाज अल्पसंख्यक समाज की श्रेणी में आता है और इसके प्रमाणपत्र बनाये भी जा रहे हैं। इस दिशा में और प्रयास की जरूरत है। उन्होंने अरोड़ा समाज के स्कूल प्रबंधकों से १०-१० बच्चे गोद लिए जाने की अपील की। प्राचार्य जितेन्द्र बठला ने सरकारी सेवाओं में समाज की कम भागीदारी पर चिंता जताते हुए प्रतिभाओं को सरकारी सेवाओं के प्रति प्रेरित किये जाने की बात की। उन्होंने कहा कि आरक्षण के चलते समाज की प्रतिभाओं को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। समाज को इस दिशा में काम करना चाहिए। भामाशाह खैरातीलाल मदान ने भी नये लोगों को आगे लाने की वकालत करते हुए कार्यकारिणी के विस्तार का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वे समाज के हर कार्य के लिए समाज के लोगों के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े रहेंगे। युवा संघ के अध्यक्ष विकास डोडा, दीपक कटारिया और अनिल धूडिय़ा ने संघ के लावारिश लाशों के संस्कार, रक्तदान शिविर और जरूरतमंद लोगोंको दी जा रही मदद के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चुनाव अधिकारी एडवोकेट मोहन मुंजाल ने सभी लोगों से बातचीत कर शीघ्र ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कियेजाने की बात कही। मंच संचालन अश्वनी डूमरा और नरेन्द्रसिंह मिढ़ा ने किया। मंच पर चाचा चरणदास, सतीश कटारिया,राजेन्द्र डोडा, अशोक चन्नी, केवल बतरा, जसू छाबड़ा,राजेश कुमार,कश्मीरीलाल मिढ़ा मंचासीन रहे।
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नई दिल्ली अगर आपके पास अब भी 1,000 और 500 रुपये के पुराने नोट बचे हैं तो इसे कम-से-कम जुलाई के आखिर तक सुरक्षित रखिए। सुप्रीम कोर्ट जुलाई में यह तय करेगा कि जो लोग उचित कारणों से या 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते वक्त प्रधानमंत्री के वादे पर ऐतबार कर 30 दिसंबर 2016 तक पुराने नोट बंद नहीं कर सके, क्या उनके लिए सरकार को एक और मौका दिए जाने को कहा जाना चाहिए या नहीं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर के भाषण में चलन से बाहर किए गए नोट 30 दिसंबर के बाद भी जमा कराने का मौका दिए जाने की बात कही थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी पर लाए गए अध्यादेश में मियाद बढ़ाकर नागरिकों को नोट जमा कराने का एक और मौका दिए जाने की कोई बाध्यता नहीं है। अध्यादेश में चलन से बाहर हुए नोटों को रखना अपराध माना गया है। दर्जनभर से ज्यादा याचिकाकर्ताओं ने 30 दिसंबर से पहले नोट जमा नहीं करा पाने की विभिन्न वजहों का हवाला दिया। उनके वकीलों ने कोर्ट में शिकायत की कि केंद्र सरकार ने इन मामलों के बिल्कुल जुदा कारणों पर प्रतिक्रिया दिए बिना एक सामान्य सा शपथ पत्र दायर कर दिया। रोहतगी ने कहा कि सरकार की राय में अब बंद हो चुके नोटों को जमा कराने का कोई दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा। केंद्र के शपथ पत्र में एक मामले का जिक्र है जिसमें याचिकाकर्ता ने 66.80 लाख रुपये मूल्य के पुराने नोट जमा कराने की मांग की है और कहा कि वह इसलिए नोट जमा नहीं करा सका क्योंकि उसका बैंक अकाउंट केवाइसी से जुड़ा नहीं था। मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल ने पुराने नोटों को रद्दी होते देखने की पीड़ा से राहत पाने के व्यक्तिगत प्रयासों में दिलचस्पी लेने से इनकार कर दिया। इन्होंने कहा, 'हम यह फैसला करेंगे कि क्या एक और मौका मिलेगा या नहीं। अगर हां, तो सभी को फायदा होगा।' रोहतगी ने कहा, 'अगर सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नोट बदलवाने का सीमित मौका देने का फैसला करेगा तो भी यह सरकार ही तय करेगी कि 30 दिसंबर तक नोट जमा नहीं करवा पाने का किसका कारण उचित है और किसका अनुचित।'
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