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नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच बैठक में जिस एक बात पर सबकी नजरें लगी हुई थीं, वह था रक्षा सौदा। आखिरकार लंबी बातचीत और मोल-भाव के बाद ट्रंप ने आज दोनों देशों के बीच 3 अरब डॉलर के रक्षा डील की घोषणा कर दी। इन सबके बीच ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती से चलने वाले आतंकवाद पर लगाम लगाने की जरूरत है। ट्रंप और मोदी ने दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि वह भारत का यह दौरा कभी नहीं भूलेंगे। 3 अरब डॉलर का रक्षा समझौता इन सौदे में अमेरिका से 24 MH60 रोमियो हेलिकॉप्टर की 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीद शामिल है। एक अन्य डील छह AH 64Eअपाचे हेलिकॉप्टर को लेकर है जिसकी कीमत 80 करोड़ डॉलर होगी। ट्रंप ने इसकी जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 3 अरब डॉलर से ज्यादा के डिफेंस डील से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे। पीएम मोदी बोले- अमेरिका से भारत की साझेदारी अहम उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'हमने भारत-अमेरिका पार्टनरशिप के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की, वह चाहे रक्षा हो या सुरक्षा। हमने एनर्जी स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप, ट्रेड और पिपल-टु-पिपल के बीच संबंधों पर भी चर्चा की। रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका के बीच मजबूत होता रिश्ता हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण पक्ष है।' आतंकवाद पर पाकिस्तान को ट्रंप की खरी-खरी ट्रंप ने आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा, 'पीएम मोदी और मैं अपने नागरिकों को कट्टर इस्लामी आतंकवाद से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका पाकिस्तान की धरती से चल रहे आतंकवाद को रोकने के लिए कदम उठा रहा है।' सोमवार को ही ट्रंप ने कर दिया था ऐलान ट्रंप ने अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में आयोजित 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम में सोमवार को ही इस डील का ऐलान कर दिया था। उन्होंने बताया था कि तीन अरब डॉलर कीमत के अत्याधुनिक सैन्य हेलिकॉप्टर और अन्य उपकरणों के लिए मंगलवार को समझौते किए जाएंगे। ट्रंप ने कहा था, 'हम अब तक के कुछ श्रेष्ठ उपकरण बनाते हैं: विमान, मिसाइलें, रॉकेट, पोत। हम अब भारत के साथ सौदा कर रहे हैं। इसमें उन्नत वायु रक्षा प्रणाली और सशस्त्र तथा बिना शस्त्र वाले एरियल वीइकल शामिल हैं।' भारत में ट्रंप का दूसरा दिन ट्रंप के साथ उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप, पुत्री इवांका, दामाद जेरेड कुशनर और उनके प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक संबंधों के बारे में कहा था कि अमेरिका भारत को दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ और कुछ शानदार सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने को लेकर उत्सुक है। राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया का राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति के तौर पर भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए ट्रंप को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाद में ट्रंप ने अपनी पत्नी के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर पुष्पांजलि अर्पित की।
अहमदाबाद, 24 फरवरी 2020,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अहमदाबाद में इस्लामिक आतंकवाद और पाकिस्तान का मुद्दा उठाया. मोटेरा स्टेडियम में 'नमस्ते ट्रंप' इवेंट के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमारे देश इस्लामिक आतंकवाद का शिकार रहे हैं, जिसके खिलाफ हमने लड़ाई लड़ी है. अमेरिका ने अपने एक्शन में आईएसआईए को खत्म किया और अल बगदादी का खात्मा किया. पाकिस्तान का जिक्र करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम आतंक के खिलाफ कड़े एक्शन ले रहे हैं, पाकिस्तान पर भी अमेरिका ने दबाव बनाया है. पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लेना होगा, हर देश को अपने सुरक्षित करने का अधिकार है. अमेरिका और भारत आतंकवादियों को रोकने और उनकी विचारधारा से लड़ने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कार्यभार संभालने के बाद पाकिस्तान सीमा पर संचालित होने वाले आतंकी संगठन और आतंकवादियों पर शिकंजा कसने के लिए पाकिस्तान पर हमने दबाव बनाया है. इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. पाकिस्तान की तारीफ भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. इन प्रयासों के लिए धन्यवाद. हम पाकिस्तान के साथ बड़ी प्रगति के संकेत देखने लगे हैं और हम तनाव कम करने, स्थिरता लाने और दक्षिण एशिया के सभी देशों के बीच सद्भाव के भविष्य के लिए आशान्वित हैं. PM मोदी को बताया सच्चा दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं हिंदुस्तान के बड़े चैंपियन को हृदय से आभार जताते हुए शुरुआत करता हूं, जो दिन रात अपने देश के लिए काम करने में जुटे रहते हैं. पीएम मोदी को सच्चा दोस्त बताते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं.
नई दिल्ली, 24 फरवरी 2020, भारत के दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की एकता की तारीफ की. उन्होंने अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में आयोजित 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम में कहा कि भारत की एकता विश्व के लिए प्रेरणादायी है. इसके साथ ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन को याद करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं. अपने 26 मिनट के भाषण में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत शब्द का बार-बार जिक्र किया और 50 बार यह नाम दोहराया. राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने 26 मिनट के भाषण में अमेरिका शब्द 23 बार, मोदी 12, दुनिया 11, आतंकवाद 7, पाकिस्तान 4, मिलिटरी 7, लोकतंत्र 5, दोस्ती 5, अर्थव्यवस्था 5, व्यापार 4, कल्चर 3, बॉर्डर 2, सुरक्षा 3, पड़ोसी 2, गुजरात, गांधी और मोटेरा 2 बार और गरीबी शब्द 2 बार दोहराया. जबकि उनके भाषण में साइंस, टेक्नोलॉजी, बॉलीवुड, चायवाला, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, सरदार पटेल, विवेकानंद और ताजमहल का भी जिक्र हुआ. क्रिकेट का भी जिक्र डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत आज अपने लोगों में विश्वास जताता है, जो कि अमेरिका और हिंदुस्तान को एक जैसा बनाता है. अमेरिका और भारत में कई समानताएं हैं, जिसमें हर व्यक्ति को एक समान माना गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दौरान स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी का भी जिक्र किया. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में क्रिकेट का भी जिक्र किया. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने दुनिया को सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी दिए हैं जो दुनिया के लिए हीरो हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत हर साल 2000 से अधिक फिल्में बनाता है. बॉलीवुड का पूरी दुनिया में स्वागत किया जाता है. लोग भांगड़ा-म्यूज़िक का जिक्र करते हैं, लोगों को DDLJ-शोले भी काफी पसंद है. बॉलीवुड को किया याद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी स्पीच में कहा कि भारतीय सिनेमा का आकार बहुत बड़ा है. यहां हर साल लगभग दो हजार फिल्में बनती हैं. यहां की फिल्मों में भांगड़ा और म्यूजिक बेहतरीन होता है. उन्होंने शाहरुख खान और काजोल की फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और शोले की भी तारीफ की. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने दुनिया को सचिन, विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी दिए. बता दें पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने आयुष्मान खुराना की फिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान की भी सराहना की थी. दरअसल ब्रिटिश एक्टिविस्ट पीटर गैरी टैचेल ने शुभ मंगल ज्यादा सावधान से जुड़ा एक ट्वीट शेयर किया था. पीटर के इस ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए ट्रंप ने फिल्म को शानदार कहा था. पीएम मोदी की तारीफ डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की. ट्रंप ने कहा कि भारत आना एक गर्व की बात है, नरेंद्र मोदी एक चैम्पियन हैं जो भारत को विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं और फर्स्ट लेडी 8000 मील का दौरा कर यहां पहुंचे हैं. अमेरिका हिंदुस्तान का दोस्त है, अमेरिका हिंदुस्तान का सम्मान करता है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि 5 महीने पहले अमेरिका ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया था, आज हिंदुस्तान हमारा स्वागत कर रहा है जो हमारे लिए खुशी की बात है. आज हम दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारा स्वागत किया, आज से भारत हमारे लिए सबसे अहम दोस्त होगा. मोटेरा स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका भारत को सबसे प्रगतिशील हथियारों की आपूर्ति करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही ट्रंप ने भारतीय अमेरिकियों को अमेरिका में योगदान के लिए धन्यवाद भी दिया.
नई दिल्ली, 24 फरवरी 2020,अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में एक लाख से ज्यादा लोगों को संबोध‍ित करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल में भारत ने काफी कमाल किया है और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने जबरदस्त सफलताएं हासिल की हैं. उन्होंने उज्ज्वला से लेकर स्वच्छ भारत अभ‍ियान तक पीएम मोदी की योजनाओं की काफी सराहना की. उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी मेरे सच्चे दोस्त हैं जिसने भारत को एक किया है. अमेरिका भारत को प्यार करता है और भारत का सम्मान करता है. दोनों देशों में काफी कुछ साझा हैं. साझे अवसर, साझी चुनौतियां, साझी उम्मीदें और साझी आकांक्षाएं. मोदी की इन योजनाओं की जमकर तारीफ राष्ट्रपंति ट्रंप ने कहा, 'भारतीय कुछ भी ठान लें तो कर गुजरते हैं. 70 साल में भारत एक आर्थ‍िक महाशक्ति बन चुका है. पीएम मोदी ने इस महान देश में असीमित वायदे पूरे किए हैं. पिछले 10 साल में भारत में 27 करोड़ लोगों को गरीबी के दायरे से बाहर लगाया गया है.' सबको गैस, सबको बिजली ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी के नेृतत्व में हर गांव में बिजली पहुंची है. 32 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़ चुके हैं. 7 करोड़ परिवारों को कुकिंग गैस, 60 करोड़ लोगों को शौचालय की सुविधा प्रदान की गई है. आज भारत में हर मिनट में 12 गरीब व्यक्ति गरीबी के दायरे से बाहर जा रहे हैं. अगले दस साल में पूरे देश से गरीबी खत्म हो जाएगी.' इस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के उज्ज्वला, ग्राम ज्योति, स्वच्छ भारत अभ‍ियान जैसी योजनाओं से हासिल उपलब्ध‍ियों की जमकर सराहना की है. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने देश के सभी गांवों को बिजली से जोड़ देने का दावा किया है. पीएम मोदी के कार्यकाल में ही दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 20 नवंबर 2014 को प्रारंभ की गई थी. इसी प्रकार उत्तर प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के सभी गांव में बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से सौभाग्य (SAUBHAGYA) योजना की शुरुआत 25 सितम्बर 2017 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर की गयी थी. ट्रंप ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि भारत ने यह सब उपलब्ध‍ियां एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण देश के रूप में हासिल की हैं. उज्ज्वला योजना की हर तरफ चर्चा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं वाले चूल्हे से मुक्ति दिलाना उद्देश्य है. यह योजना केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई. इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलते हैं. इसी तरह, 2 अक्टूबर, 2014 से स्वच्छ भारत मिशन को राष्ट्रीय आन्दोलन के रूप में देशभर में शुरू किया गया था. स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार का सबसे महत्त्वपूर्ण स्वच्छता अभियान है. इस योजना के तहत गरीबों के लिए मुफ्त शौचालय बनाए जा रहे हैं और गांवों को खुले में शौच से मुक्त किया जा रहा है. मोदी सरकार ने देश में इंटरनेट सुविधा को बढ़ाने की दिशा में भी कई प्रयास किए हैं. ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी आप न सिर्फ गुजरात का गौरव हो, बल्कि कठोर मेहनत और समर्पण के सजीव प्रमाण हैं. आज भारतीय जो कुछ भी चाहें हासिल कर सकते हैं.
नई दिल्‍ली, 22 फरवरी 2020,भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गया है. रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 14 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 3.091 अरब डॉलर बढ़कर 476.092 अरब डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह सुस्‍त पड़ी भारतीय इकोनॉमी के लिए राहत की खबर है. आरबीआई के मुताबिक मुद्रा भंडार में तेजी का सबसे बड़ा कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का बढ़ना है. इस सप्‍ताह में मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 2.763 अरब डॉलर बढ़कर 4419.49 अरब डॉलर हो गईं. बता दें कि 7 फरवरी को समाप्‍त सप्‍ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.701 अरब डॉलर बढ़कर 473 अरब डॉलर हो गया था. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 14 फरवरी को समाप्‍त सप्‍ताह में स्वर्ण भंडार 34.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 29.123 अरब डॉलर हो गया है. विदेशी मुद्रा भंडार संतोषजनक स्थिति में बीते 31 जनवरी को पेश आर्थिक सर्वे में बताया गया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार संतोषजनक स्थिति में है. आर्थिक सर्वे के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार जनवरी-2020 तक 461.2 बिलियन डॉलर रहा, जो बीते साल के मुकाबले बढ़ा है. साल 2018-19 में 412.9 बिलियन डॉलर रहा था. साल 2017-18 में विदेशी मुद्रा भंडार 424 बिलियन डॉलर था जो 2018-19 में 412.9 बिलियन डॉलर रह गया. विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के मायने इसका सबसे बड़ा फायदा देश की इकोनॉमी को होगा. दरअसल, विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सके. यह भंडार एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखे जाते हैं. आमतौर पर भंडार डॉलर या यूरो में रखा जाता है. विदेशी मुद्रा भंडार पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है.
नई दिल्ली/वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर आशंका के बादल मंडरा गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील पर आशंका जाहिर की है। ट्रंप ने कहा कि वह भारत के साथ एक बहुत बड़ी ट्रेड डील करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि यह अमेरिकी चुनाव से पहले हो पाएगाी या फिर नहीं। हालांकि ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर कहा कि वह उन्हें बहुत पसंद करते हैं। भारत और अमेरिकी के व्यापारिक रिश्ते पर ट्रंप ने कहा कि भारत ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया है। लेकिन उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भारत दौरे से काफी उम्मीदें हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 24 फरवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं। माना जा रहा था कि अमेरिका और भारत के बीच इस दौरान एक बड़े द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप से जब इस बात को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हम भारत के साथ एक बहुत बड़ी ट्रेड डील करना चाहते हैं। हम यह करेंगे। मुझे नहीं पता कि क्या यह अमेरिकी चुनाव से पहले संभव हो पाएगी। लेकिन हम भारत के साथ एक बड़ी ट्रेड डील करने जा रहे हैं।' सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ भारतीय दौरे पर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया है। मुझे मोदी पसंद हैं, लेकिन...' भारत के साथ ट्रेड संबंधों से असंतोष जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, 'भारत ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया है।' हालांकि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की और बताया कि वह भारतीय दौरे के लिए उत्सुक हैं। ट्रंप ने कहा, 'मैं पीएम मोदी को बहुत पसंद करता हूं। उन्होंने मुझे बताया कि एयरपोर्ट और कार्यक्रम स्थल के बीच 70 लाख लोग होंगे। स्टेडियम, मुझे पता है कि यह सेमी अंडर कंस्ट्रक्शन है, लेकिन यह दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम होगा। इसलिए यह बहुत दिलचस्प होगा।....मुझे आशा है आप इसे पसंद करेंगे।'
लंदन भारत ने ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सांसद डेबी अब्राहम्स का ई-वीजा कैंसल करते हुए उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई डिपोर्ट कर दिया था। डेबी कश्मीर पर एक ब्रिटिश पार्ल्यामेंट्री ग्रुप का संचालन करती हैं जिसके ज्यादातर सदस्य पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) मूल के हैं और ये सभी भारत विरोधी हैं। ऑल पार्टी पार्ल्यामेंट्री कश्मीर ग्रुप (APPKG) कश्मीर को लेकर भारत की लगातार आलोचना करता रहा है। कश्मीर पर बने ग्रुप की चेयरमैन हैं डेबी यह ग्रुप 'बातचीत के जरिए कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को समर्थन देने' और 'कश्मीर में मानवाधिकार हनन की घटनाओं को उजागर करने के साथ-साथ लोगों को न्याय दिलाने की मुहिम छेड़ने' का दावा करता है। बड़ी बात है कि इस ग्रुप का एक भी सदस्य भारतीय मूल का नहीं है। डेबी अब्राहम्स इस ग्रुप की चेयरमैन हैं और यूके की संसद में ऑल्डम ईस्ट ऐंड सैडलवर्थ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं जहां पाकिस्तानी मीरपुरी समुदाय के लोगों की बड़ी तादाद है। पाकिस्तानी, पीओके मूल के लोगों से भरा पड़ा है ग्रुप नवंबर 2019 में ग्रुप मेंबरशिप रजिस्टर को अपडेट किया गया था जिसके मुताबिक इस ग्रुप के सीनियर वाइस-चेयर लेबर सांसद इमरान हुसैन हैं। ब्रैडफोर्ड से सांसद इमरान पाकिस्तान मूल के हैं जो सालों से भारत के खिलाफ आग उगल रहे हैं। उन्होंने पिछले साल सितंबर महीने में पीओके और नियंत्रण रेखा (एलओसी) का दौरा किया था और पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को ब्रीफ करने का दावा किया था। उन्होंने ब्रिटेन के एक स्थानीय अखबार से कहा था कि कश्मीर में जो हो रहा है, वह एक 'वॉर क्राइम (युद्ध अपराध)' है। पीओके के मीरपुर में जन्मे लॉर्ड नजीर अहमद इस पार्ल्यामेंट्री ग्रुप के ऑनरेरी प्रेजिडेंट हैं। ये 15 अगस्त, 2019 को लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने हुए ब्रिटिश पाकिस्तानियों के विरोध प्रदर्शन के मुख्य वक्ताओं में शामिल थे। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित भारत विरोधियों का यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था जिसमें उच्चायोग की बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा था। APPKG के ऑनरेरी वाइस-प्रेजिडेंट अफजल खान भी पाकिस्तान में पैदा हुए हैं। वो मैनचस्टर गॉर्टन से लेबर पार्टी के सांसद चुने गए हैं। अफजल खान ने 5 अगस्त, 2019 को पत्र लिखकर यूके के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन से मांग की थी कि वो 'भारत सरकार की कार्रवाइयों और कश्मीर के अधिग्रहण के लिए आर्टिकल 370 को अवैध एवं असंवैधानिक तरीके से निष्प्रभावी बनाने के फैसले की कड़ी आलोचना करें।' इस ग्रुप के सेक्रटरी पीओके के कोटली में पैदा हुए लॉर्ड हुसैन हैं। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हुसैन जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत की अक्सर निंदा करते रहते हैं। वहीं, सीनियर वाइस-चेयर जैक ब्रेर्टन स्टोक-ऑन-ट्रेंट से कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद हैं। 8 अगस्त, 2019 को ब्रेर्टन ने ब्रिटेने के विदेश मंत्री डोमिनिक राब को पत्र लिखकर कहा था कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी बनाने से 'खतरनाक परिस्थिति पैदा हो गई है और इससे तनाव बढ़ेगा।' ग्रुप के सदस्यों से हैरानी नहीं: भारतीय सूत्र लंदन में भारतीय कूटनीतिक सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, 'APPKG जिस तरह के समारोह आयोजित करता रहत है, इन आयोजनों में पाकिस्तान के जिन अराजक तत्वों को न्योता देता है और जिस तरह के मुद्दों का यह समर्थन करता है, उससे हमें इसकी ऐसी सदस्यता पर कोई हैरानी नहीं होती है।
नई दिल्ली, 17 फरवरी 2020,जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद दुनिया के कई देशों ने सवाल खड़े किए हैं. भारत के बुलावे पर यूरोपियन यूनियन के कुछ सांसदों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा भी किया. लेकिन सोमवार को ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सांसद डेबी अब्राहम को भारत आने से रोकने का फैसला करते हुए दिल्ली एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया. इस मसले पर ब्रिटिश सांसद ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं. डेबी अब्राहम ब्रिटिश सांसद हैं और ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑफ कश्मीर की अध्यक्ष हैं. सोमवार सुबह करीब 8.50 पर जब डेबी अब्राहम दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि उनका वीज़ा कैंसिल कर दिया गया है. हालांकि, ये वीज़ा अक्टूबर 2020 तक मान्य था. भारत में एंट्री रद्द होने के मसले पर ब्रिटिश सांसद ने कहा, ‘हर किसी की तरह मैंने भी ई-वीज़ा के साथ डॉक्यूमेंट दिखाए, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मना कर दिया. मुझे बताया गया कि मेरा वीजा कैंसिल हो गया है और वो मेरा पासपोर्ट लेकर कुछ देर के लिए चले गए.’ इस विवाद पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि ब्रिटिश सांसद का ई-वीज़ा पहले ही कैंसिल कर दिया गया था और उन्हें इस बारे में सूचना भी दी गई थी. जब वह इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर आईं तो उनके पास वीज़ा नहीं था. इतना ही नहीं उन्होंने ट्विटर पर भी अपनी शिकायत दर्ज की. अपने ट्वीट में लिखा, ‘मैं अपनी भारतीय रिश्तेदारों से मिलने जा रही थी, मेरे साथ हिंदुस्तानी स्टाफ मेंबर भी थे. मैंने राजनीतिक आवाज सिर्फ ह्यूमन राइट्स के लिए उठाई. मैं अपनी सरकार के खिलाफ इस मसले पर सवाल उठाती रहूंगी.’ बता दें कि डेबी अब्राहम की गिनती भारत के द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर किए गए फैसले की आलोचना करने वालों में होती है. पांच अगस्त के बाद उन्होंने कई ऐसे ट्वीट किए हैं जो मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर सवाल उठाते हैं. गौरतलब है कि अभी तक दो दौरे पर यूरोपियन यूनियन के कई सांसद जम्मू-कश्मीर का दौरा कर चुके हैं. इस मसले पर भारत में भी कई बार विवाद हो चुका है. भारत की राजनीतिक पार्टियों ने EU सांसदों के दौरे पर सवाल खड़े किए थे और आरोप लगाया था कि स्थानीय सांसदों की बजाय विदेशी लोगों को कश्मीर भेजा जा रहा है.
ै पेइचिंग चीन में फैले कोरोना के खौफ ने दुनियाभर में लोगों को हिला दिया है। हर दिन नॉवल कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन अभी भी बड़ा सवाल है कि आखिर इस खतरनाक वायरस की शुरुआत कहां से हुई। चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान को इस बीमारी का केंद्र माना गया है। लेकिन अब चीनी वैज्ञानिकों का मानना है कि हो सकता है कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान के फिश मार्केट से कुछ दूर स्थित एक सरकारी रिसर्च लैब से हुई हो। चीन की सरकारी लैब से फैला कोरोना चीन की सरकारी साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी के मुताबिक, हुबेई प्रांत में वुहान सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (WHDC) ने रोग फैलाने वाली इस बीमारी के वायरस को जन्म दिया हो। स्कॉलर बोताओ शाओ और ली शाओ का दावा है कि WHCDC ने लैब में ऐसे जानवरों को रखा जिनसे बीमारियां फैल सकती हैं, इनमें 605 चमगादड़ भी शामिल थे। उनके मुताबिक, 'हो सकता है कि 2019-CoV कोरोना वायरस की शुरुआत यहीं से हुई हो।' इसके अलावा इनके रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस के लिए जिम्मेदार चमगादड़ों ने एक बार एक रिसर्चर पर हमला कर दिया और चमगादड़ का खून उसकी स्किन में मिल गया। रिपोर्ट में कहा गया है, 'रोगियों में मिले जीनोम सीक्वेंस 96 या 89 फीसदी थे जो बैट CoC ZC45 कोरोना वायरस के समान हैं लेकिन ये मूल रूप से राइनोफस एफिनिस में पाए जाते हैं।' रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां मौजूद देसी चमगादड़ वुहान के सीफूड मार्केट से करीब 600 मील दूर पाए जाते हैं। और यूनन व झेजियांग प्रांत से उड़कर आए चमगादड़ों की संख्या शायद बहुत कम रही होगी। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को चमगादड़ खाने की सलाह बहुत कम दी जाती है। 31 निवासियों और 28 विजिटर्स ने इस बारे में गवाही भी दी है। फिश मार्केट से कुछ ही दूर थी लैब इसके अलावा इन वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि यह रिसर्च WHCDC की सिर्फ कुछ गज बड़ी एक लैब में की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, WHCDC में एक रिसर्चर ने बताया था कि एक चमगादड़ का खून स्किन में आने के बाद उसने खुद को दो हफ्तों तक अलग रखा था। इसी व्यक्ति ने एक चमगादड़ द्वारा पेशाब किए जाने के बाद भी खुद को अलग रखा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि WHCDC को पास के यूनियन हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया था जहां डॉक्टर्स का पहला ग्रुप कोरोना वायरस से संक्रमित था। यह मुमकिन है कि वायरस आसपास फैल गया और इनमें से कुछ ने इस खतरनाक बीमारी के शुरुआती मरीजों को अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने वायरस लीक किया हो। इससे पहले भी इस तरह की खबरें सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस लैब ने ही यह बताया था कि चीनी हॉर्सशू चमगादड़ ही 2002-2003 में फैले सीवियर अक्यूट रेस्पायरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस (SARS-CoV) के लिए जिम्मेदार थे।' इस रिपोर्ट के आखिर में कहा गया है कि हो सकता है जानलेवा कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान की एक लैब से हुई हो। गौर करने वाली बात है कि दुनियाभर में अब तक 69,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं चीन में 1,665 लोगों की कोरोना से जान जा चुकी है। अधिकतर मौतें हुबेई प्रांत में हुई हैं जो इस बीमारी का केंद्र है।
इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के दुश्मन को सबक सिखाना चाहते हैं। अटपटा लग सकता है। लेकिन सच है। इमरान खान ने पाकिस्तान संसद नेशनल असेंबली में कहा कि जमीयत उलेमा ए इस्लाम के चीफ मौलाना फजलुर रहमान पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। हालांकि इस मांग का भारत से कोई लेना-देना है नहीं। दरअसल ये इमरान का खुद का डर है। इमरान खान ने कहा कि फजलुर रहमान ने उनकी सरकार गिराने का षडयंत्र रचा है। इमरान खान पाकिस्तान - तहरीके इंसाफ यानी पीटीआई के नेता हैं। उनकी फजलुर रहमान से पटती नहीं है। इमरान खान की मांग का नेशनल असेंबली में जम कर विरोध हुआ है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि अगर मौलाना फजलुर रहमान और ख्वाजा आसिफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलता है तो ये बेहद गलत होगा। वो कहते हैं, यहां मोस्ट वांटेंड आतंकवादी एहसानुल्ला एहसान चकमा देकर भाग जाता है तो कुछ नहीं होता लेकिन राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। बिलावल भुट्टो ने कहा कि इमरान खान ये तो बताएं कि आखिर किन कारणों से फजल के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा ठोका जा रहा है। उधर ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें इमरान खान से देशभक्ति का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। ख्वाजा आसिफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग - नवाज (पीएमएल-एन) के नेता हैं। पार्टी के सर्वोच्च नेता नवाज शरीफ आजकल लंदन में इलाज करा रहे हैं। ख्वाजा ने इमरान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। वो कहते हैं, कराची का पूर्व पुलिस कप्तान तहरीके तालिबान पाकिस्तान के आतंकी एहसानुल्ला एहसान के साथ खुलेआम घूमता है। तब कुछ नहीं होता। लेकिन नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ये खतरनाक साबित होगा। ख्वाजा ने कहा कि पाकिस्तान कंगाली के कगार पर है। जरूरी सामानों के दाम आसमान पर हैं। इन सच्चाइयों से मुंह छिपाने के लिए ही इमरान खान इस तरह की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालत इतने खराब हैं कि खुद इमरान की पार्टी पीटीआई के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान टीवी के दफ्तर पर हमला कर दिया। संसद के भीतर मौलाना फजलुर रहमान के बेटे मौलाना असद महमूद मौजूद थे। उन्होंने इमरान को चेतावनदी दी। असद ने कहा कि संविधान की धारा 6 का इस्तेमाल उनके पिता के खिलाफ नहीं हो सकता। इस पर संसदीय कार्य मंत्री अली मोहम्मद खान ने कहा कि सरकार का मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं है। पर वो ये कहने से नहीं चूके कि फजलुर को बताएं कि किसके कहने पर उन्होंने इमरान की सत्ता उखाड़ फेंकने की बात कही थी। कौन है फजलुर रहमान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में फजलुर रहमान का गढ़ है। उनकी पार्टी जमीयत उलेमा ए इस्लाम को कट्टर धार्मिक पार्टी कहा जाता है। मौलाना भारत के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं और कश्मीर के मसले पर कई बार हाफिज मोहम्मद सईद के साथ खड़े नज़र आए हैं। फजलुर रहमान ने कई बार भारत के खिलाफ जेहाद का एलान किया है। उन्होंने बेनजरी भुट्टो का विरोध इसलिए किया था क्योंकि उनकी नजर में औरत का इस पद पर होना ठीक नहीं है। अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने जनरल परवेज मुशर्रफ की नाक में भी दम कर दिया था। वो नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं।
नई दिल्ली कोरोना का असर अब ट्रेड पर भी दिखने लगा है। इसके कारण भारत का 28 फीसदी आयात प्रभावित हो सका है। भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मकैनिकल अप्लायंस, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक और सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट के लिए बहुत हद तक चीन पर निर्भर है। भारत के आयात में इनका योगदान 28 फीसदी के करीब है और ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण भारत के आयात का प्रभावित होना निश्चित है। आयात प्रभावित होने से ये सामान महंगे हो सकते हैं। 40 फीसदी केमिकल्स का आयात चीन से भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मकैनिकल अप्लायंस, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक और सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट के लिए बहुत हद तक चीन पर निर्भर है। भारत के आयात में इनका योगदान 28 फीसदी के करीब है और ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण भारत के आयात का प्रभावित होना निश्चित है। भारत 40 फीसदी ऑर्गेनिक केमिकल्स चीन से आयात करता है और इलेक्ट्रिकल मशीनरी में भी चीन का इतना ही योगदान है। इन प्रॉडक्ट्स के आयात प्रभावित होने पर ऑटो, केमिकल और फार्मासूटिकल सेक्टर पर नकारात्मक असर दिखाई देंगे। भारत के निर्यात पर क्या होगा असर? कोरोना का भारत के निर्यात पर बहुत ज्यादा असर नहीं होने वाला है। भारत कुल निर्यात का केवल 5 फीसदी चीन को निर्यात करता है। हालांकि ऑर्गेनिक केमिकल और कॉटन के निर्यात पर असर दिखाई देंगे। भारत चीन से कितना आयात करता है? साल 2018 में भारत का कुल आयात 507 अरब डॉलर का रहा था। इसमें चीन का योगदान 73 अरब डॉलर, करीब 14 फीसदी था। वर्तमान हालात को देखकर कहा जा रहा है कि चीन में फैक्ट्री और इंडस्ट्रियल हब 17 फरवरी के बाद भी बंद रहेंगे। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते हैं, तब तक चीन में प्रॉडक्शन काफी कम रहेगा और इसका नुकसान भी विश्व के तमाम देशों को उठाना पड़ेगा, क्योंकि चीन उनके लिए सबसे बड़ा निर्यातक है।
दुबई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यहां इसकी नींव को पहली बार कंकरीट से भरने का काम पूरा कर लिया गया। मंदिर निर्माण में ईको-फ्रेंडली तरीके पर जोर दिया जा रहा है। आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2018 में दुबई के दौरे पर वहां के ओपेरा हाउस से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्‍तम स्वामीनारायण संस्‍था (बीएपीएस) मंदिर की आधारशिला रखी थी। ें निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे जहां समारोह की शुरुआत प्रार्थनाओं के साथ हुई और इसके बाद मंदिर की नींव में फ्लाई ऐश कंकरीट भरने का काम पूरा हुआ। मंदिर की नींव में एक ही बार में 3,000 घन मीटर कंकरीट का मिश्रण भरा गया जो 55 प्रतिशत फ्लाई ऐश से बना हुआ था। इस दौरान यूएई में भारत के राजदूत पवन कपूर और दुबई में भारत के कॉन्सुलर जनरल विपुल, सामुदायिक विकास प्राधिकरण के सीईओ उमर अल मुथन्ना और शापूरजी पलोंजी के सीईओ मोहनदास सैनी की मौजूद थे। समारोह के दौरान पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा, 'आज हमने मंदिर की अनोखी नींव भरने का कार्य शुरू किया जिसका निर्माण पुरानी तकनीक के साथ आधुनिक उपकरणों से किया गया है।' उन्होंने कहा, 'यह ईश्वर की कृपा, समुदाय के पूर्ण समर्थन और यहां मौजूद हर व्यक्ति के प्रेम के बिना संभव नहीं था।' राजदूत कपूर ने कहा, 'मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मुझे इसका श्रेय मेरे पूर्ववर्ती को देना होगा जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया और यूएई की सरकार को इस बड़े व उदार फैसले को लेने के लिए मनाया जिसने न सिर्फ जमीन दान में दी बल्कि मंदिर के लिए पहला लाइसेंस भी दिया।' उल्लेखनीय है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य इसी साल पूरा होगा। इसके कुछ महत्वपूर्ण हिस्से को इसी साल श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा, लेकिन बाकी सभी हिस्सों पर लोगों की एंट्री 2022 तक ही हो पाएगी।
दिल्ली तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोगान ने कश्मीर मुद्दे पर टांग अड़ाई है। पाकिस्तानी संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया है जिससे भारत के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं। एर्दोगान ने कहा कि कश्मीर में जुल्म हो रहा है और वो चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को बेशर्त समर्थन देने का वादा कर डाला। एर्दोगान का पूरा भाषण इस्लाम और मुसलमान के इर्द गिर्द घूमता रहा। मुस्तफा कमाल पाशा ऊर्फ अतातुर्क की धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक विरासत के उलट एर्दोगान मानो दुनिया भर के मुसलमानों के रहनुमा बनने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई जमीन पर खींची हुई सीमा इस्लाम मानने वालों को बांट नहीं सकती। एर्दोगान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी लपेटा। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में अमेरिका का पीस प्लान दरअसल आक्रमणकारी नीयत है। उन्होंने कहा कि जहां भी मुसलमान मारे जा रहे हैं वहां मुस्लिम देशों को एकजुट होने की जरूरत है। यही नहीं आतंकवाद के जनक पाकिस्तान को उन्होंने इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी बता दिया। इमरान खान और बाकी सांसदों की तालियों के बीच एर्दोगान ने कहा कि वो फाइनेन्सियल एक्शन टास्क फोर्स ( FATF ) की बैठक में भी बिना शर्त पाकिस्तान का समर्थन करेंगे। एर्दोगान ने पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताकर इमरान को खुश कर दिया। एर्दोगान ने कहा, आपका दर्द मेरा दर्द है। हमारी दोस्ती प्यार और सम्मान पर आधारित है। पाकिस्तान तरक्की की तरफ है और ये कुछ दिनों में नहीं हो सकता। इसमें वक्त लगेगा और तुर्की इसमें सहयोग करता रहेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि वो पाक संसद में आकर अपनो के धन्य पा रहे हैं। इससे पहले 2016 में भी वो पाकिस्तानी संसद को संबोधित कर चुके हैं। इससे पहले इमरान खान ने खुद एर्दोगान की गाड़ी ड्राइव की और उन्हें राष्ट्रपति भवन तक ले गए।
नई दिल्ली जापान के तट पर खड़े जहाज 'डायमंड प्रिंसेस' में फंसे भारतीयों को लेकर सरकार ऐक्टिव हो गई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वह जहाज में मौजूद चालक दल और यात्रियों के लगातार संपर्क में है। जापानी अधिकारियों की मदद से उन तक हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है। विदेश मंत्री ने कहा, 'जापान में हमारा दूतावास योकोहामा के पास खड़े डायमंड प्रिंसेस के क्रू मेंबर्स और यात्रियों के लगातार संपर्क में है। यात्रिओं और क्रू मेंबर्स को जापानी अधिकारियों के द्वारा अलग रखा गया है।' इस जहाज में क्रू मेंबर समेत 138 भारतीय फंसे हैं। बुधवार को चालक दल के भारतीय सदस्यों में से दो के नमूने जांच में करॉना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। जापान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को यह जानकारी दी थी। जापानी अधिकारियों के मुताबिक जहाज में सवार 174 लोग करॉना वायरस से संक्रमित हैं। क्रूज पर 3,711 लोग सवार हैं। यह पिछले सप्ताह की शुरुआत में जापान के तट पर पहुंचा था। जहाज से हॉन्ग कॉन्ग में उतरने वाले एक यात्री के करॉना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि के बाद जापान ने क्रूज को तट पर ही रोक दिया है। जहाज पर कुल 138 भारतीय मौजूद हैं, जिनमें यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल हैं। दूतावास ने एक बयान में कहा है, 'करॉना वायरस संक्रमण के संदेह में जापानी अधिकारियों ने जहाज को 19 फरवरी, 2020 से ही अलग रखा हुआ है। अभी तक चालक दल के दो भारतीय सदस्यों सहित 174 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।’ करॉना से चीन हुबेई में एक दिन में रिकॉर्ड 242 लोगों की मौत चीन के हुबेई प्रांत में बुधवार को करॉना वायरस से एक ही दिन में रेकॉर्ड 242 लोगों की मौत हो गई और इसके करीब 15,000 नए मामले सामने आए। चीन के स्वास्थ्य आयोग के अनुसार बुधवार को हुबेई प्रांत में कोरोना वायरस के 14,840 नए मामले सामने आए हैं। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार प्रांत में बुधवार को इससे रेकॉर्ड 242 लोगों की जान चली गई। प्रांत में इसके 48,206 मामलों की पुष्टि होने से इसके तेजी से फैलने को लेकर चिंता बढ़ गई है। चीन को देश भर में इससे जुड़े मामलों के आंकड़े गुरुवार को जारी करने हैं। चीन में बुधवार तक घातक करॉना वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,115 हो गई और इसके अभी तक 44,763 मामले सामने आए थे।
श्रीनगर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के ज्यादातर प्रावधान समाप्त किए जा चुके हैं। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद बहुत कुछ बदल गया। ऐसे में कश्मीर के हालात देखने के लिए विदेशी प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर पहुंचा है। भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि यह प्रतिनिधिमंडल 12 और 13 फरवरी को मीडिया, स्थानीय लोगों, व्यापारियों और नेताओं से भी मुलाकात करेगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का दौरा कर चुका है। भारत सरकार के आउटरीच प्रोग्राम के तहत यह दौरा आयोजित किया गया है। दो दिवसीय इस दौरे में कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। यह प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर के बारामुला, श्रीनगर और जम्मू जैसे इलाकों में जाएगा। यह प्रतिनिधिमंडल वहां की सिविल सोसायटी के लोगों, युवाओं, धार्मिक, सांस्कृतिक और कई अन्य समुदायों के लोगों से मुलाकात करेगा। नेता, मीडिया, व्यापारी, अधिकारी, सबसे होगी प्रतिनिधियों की मुलाकात विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी बताया गया है कि स्थानीय व्यापारी, राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और मेनस्ट्रीम मीडिया के लोग भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इन दौरों से सरकार का प्रयास है कि वैश्विक स्तर पर संदेश दिया जाए कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हैं। आपको यह भी बताते चलें कि लगभग पांच महीने के बाद हाल ही में जम्मू-कश्मीर में 2जी इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। इससे पहले जनवरी में 15 देशों के राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंचा था। इस दौरे में भी प्रतिनिधिमंडल ने सिविल सोसायटी, स्थानीय नेताओं और मीडिया से मुलाकात की थी। दरअसल, पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर लगातार यह बताने की कोशिश कर रहा है कि कश्मीर में रक्तपात जारी है। पाकिस्तान के इसी दावे की पोल खोलने के लिए भारत सरकार ने जनवरी में भी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को सच्चाई जानने का न्यौता दिया था।
लाहौर मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने बुधवार को दो मामलों में साढ़े पांच-साढे़ पांच साल कैद की सजा सुनाई। प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा सरगना को टेरर फंडिंग के दो मामलों में लाहौर की आतंकवाद रोधी अदालत ने सजा सुनाई है। दोनों ही मामलों में साढ़े पांच-साढे़ पांच साल कैद की सजा सुनाई गई है जो साथ-साथ चलेगी। उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हाफिज के खिलाफ आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कब्जे के कुल 29 मामले दर्ज हैं। हाफिज पर यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर FATF की काली सूची में शामिल होने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है जो पिछले 11 सालों से ज्यादा वक्त से हाफिज को कानून के कठघरे में खड़ा करने की लड़ाई लड़ रहा है। इधर, आतंकवाद के जनक के तौर पर दुनिया में बदनाम पाकिस्तान को डर इस बात का है कि अगर उसे एफएटीएफ की काली सूची में शामिल किया जाता है तो उसकी डूब रही अर्थव्यवस्था को उबारना और भी मुश्किल हो जाएगा। भारत को मिला अमेरिका का साथ भारत ने संयुक्त राष्ट्र में समय-समय पर पाक में पल रहे आतंक की बातें जोर-शोर से उठाई है। इसमें अमेरिका का भी पूरा साथ मिलता रहा है जिसने हाल ही में जमात-उद-दावा चीफ हाफिज के खिलाफ मुकदमा तेज करने की अपील की थी। दिसंबर में हाफिज और उसके तीन करीबी सहयोगियों- हाफिज अब्दुल सलाम बिन मुहम्मद, मुहम्मद अशरफ और जफर इकबाल के खिलाफ आरोप तय किए गए थे जिसका अमेरिका ने स्वागत किया था। तब अमेरिका की दक्षिण और मध्य एशिया की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स ने कहा था, 'हम पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वह आतंकवाद के वित्त पोषण को बंद करने और 26/11 जैसे आतंकवादी हमलों के दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार पूर्ण रूप से मुकदमा चलाए और तेजी से सुनवाई करें।' FATF से डरा पाक गौरतलब है कि आतंकवाद को मुहैया कराए जाने वाले धन की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में डाल दिया है और उसपर काली सूची में जाने का खतरा मंडरा रहा था। उसे चेतावनी दी गई थी कि यदि फरवरी तक आतंकवाद के वित्तपोषण पर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। उसके बाद से ही पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने हाफिज की नकेल कसने शुरू की थी। हालांकि, हाल ही में एफएटीएप ने पाक को बड़ी राहत देते हुए आतंकी समूहों पर कार्रवाई के लिए उसकी ओर से किए गए प्रयासों पर संतोष जताया है। ऐसे में संभावना है कि पाकिस्तान अगले महीने ग्रे लिस्ट से बाहर आ सकता है। हाफिज के खिलाफ आज आया कोर्ट का फैसला उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर 2008 को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में लश्कर के 10 आतंकियों ने हमला था जिसमें 160 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 300 लोग घायल हो गए थे। उस दिन मुंबई के सीएसटी रेलवे स्टेशन, मुंबई के आलीशान ताज महल और ट्राइडेंड होटल सहित कई इलाके को निशाना बनाया गया था। मरने वालों में विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इस घटना के बाद अमेरिका ने हाफिज को ब्लैक लिस्ट कर दिया था और उसपर इनाम घोषित किया था।
नई दिल्‍ली हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद अहम भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह से मात्र 1000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कंबोडिया का कोह कोंग बीचसाइड रेजॉर्ट दुनिया की नजर में छुट्टियां मनाने के लिए बेहतरीन जगह है। कोह कांग प्रांत में स्थित इस रेजॉर्ट के पास दारा सकोर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा भी है लेकिन हकीकत में यह हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पहुंच का एक और उदाहरण है। इस हवाई अड्डे के आसपास भारत का धु‍र विरोधी चीन अरबों डॉलर खर्च करके विशाल नौसैनिक अड्डा बना रहा है जहां जंगी नौसैनिक जहाज, फाइटर जेट और सबमरीन तैनात की जा सकेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक नेवी और एयरफोर्स के लिए बनाए जा रहे इस ठिकाने से चीन की हिंद महासागर में पहुंच और आसान हो जाएगी। चीनी अड्डे के लिए खत्‍म किया नैशनल पार्क आस्‍ट्रेलियाई समाचार वेबसाइट न्‍यूज डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक इस नौसेना और एयरफोर्स के लिए बनाए जा रहे चीनी सैन्‍य अड्डे को बनाने के लिए 45 हेक्‍टेयर के नैशनल पार्क को खत्‍म कर दिया गया है। इसके अलावा समुद्र के अंदर सफाई की गई है और गहराई बढ़ाई गई है ताकि बड़े जंगी जहाज आसानी से आ जा सकें। मजेदार बात यह है कि कोह कोंग बीचसाइड रेजॉर्ट में कई कैसीनो बनाए गए हैं लेकिन वहां पर कोई पर्यटक नहीं आता है। ताजा सैटलाइट तस्‍वीरों के मुताबिक यहां पर 3.8 अरब डॉलर की मदद से किया जा रहा पर्यटन का विकास रोक दिया गया है लेकिन विशाल हवाई पट्टी का निर्माण जारी है। बताया जा रहा है कि इस साल के आखिर तक यह सैन्‍य अड्डा बनकर तैयार हो सकता है। संदेह में घिरी कंबोडियाई हवाई पट्टी दारा सकोर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर बनी 3400 लंबी हवाई पट्टी दुनियाभर के विश्‍लेषकों के संदेह के घेरे में आ गई है। इस हवाई अड्डे पर विमानों को घुमाने के लिए बनाई गई जगह इतनी छोटी है कि उस पर केवल सैन्‍य विमान ही घूम सकते हैं। यह हवाई अड्डा सबसे बड़े सिविल एयरक्राफ्ट की जरूरत से ज्‍यादा जगह यहां पर है। मजेदार बात यह है कि इस हवाई अड्डे के पास बहुत कम कंबोडियाई नागरिक रहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस एयरपोर्ट के विकास का काम कैसीनो के विकास के नाम पर शुरू किया था। बता दें कि कंबोडिया ने 99 साल की लीज पर यह जमीन चीनी कंपनी को दे दी है। हिंद महासागर में बढ़ जाएगी चीन की पहुंच सैन्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक चीन अपने इस सैन्‍य अड्डे की मदद से हिंद महासागर पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। इस क्षेत्र में समुद्री आधिपत्‍य को लेकर चीन का इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपीन्‍स समेत कई देशों के साथ विवाद चल रहा है। हाल ही में चीन ने इंडोनेशिया के एक्‍सक्‍लूसिव समुद्री सीमा में अपने मछली पकड़ने वाले दस्‍ते को भेज दिया था। इसके विरोध में इंडोनेशिया ने इस इलाके में लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। कंबोडिया में बन रहे सैन्‍य ठिकाने के पूरा हो जाने के बाद चीन अपनी दादागिरी को और बढ़ाएगा। चीन ऐसा पहले साउथ चाइना सी में कर चुका है। दक्षिण पूर्व एशिया में बदल जाएगा खेल चीन का दावा है कि पूरा दक्षिण चीन सागर उसका है। अमेरिकी अखबार न्‍यूयार्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक दारा सकोर हवाई अड्डे से चीन की नौसेना और एयरफोर्स दोनों ही आसानी से वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया के समुद्री इलाके में घुस सकेंगे। यही नहीं दुनिया के सबसे व्‍यस्‍ततम समुद्री व्‍यापार मार्गों में से एक मलक्‍का स्‍ट्रेट पर चीन की पकड़ मजबूत हो जाएगी। इस सैन्‍य अड्डे से चीन अपनी हवाई क्षमता का पूरे इलाके में प्रदर्शन कर सकेगा और दक्षिण पूर्व एशिया का पूरा राजनीतिक खेल बदल सकता है। चीन ने कंबोडिया के नौसैनिक अड्डों तक अपनी पहुंच के लिए 30 साल के एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है। भारत के लिए गंभीर खतरे की घंटी विशेषज्ञों के मुताबिक चीन का यह सैन्‍य न केवल दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के लिए बल्कि भारत के लिए गंभीर खतरा है। चीन थाइलैंड के अंदर से एक नहर बनाने की योजना पर काम कर रहा है जिससे दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर के बीच सीधे संपर्क हो जाएगा। इससे चीन को मलक्‍का स्‍ट्रेट से नहीं जाना पड़ेगा जहां अमेरिका के सहयोगी देशों का आधिपत्‍य है। दारा सकोर नौसैनिक अड्डा और थाइलैंड में बनाई जा रही नहर भारत के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। चीन की नौसेना के जंगी जहाज दारा सकोर नौसैनिक अड्डे से आसानी से अंडमान सागर में घुस सकेंगे। यही नहीं चीन के बमवर्षक विमान कंबोडिया से उड़ान भरकर अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारतीय सैन्‍य ठिकाने पर हमला कर सकने में सक्षम हो जाएंगे। भारत कर रहा है सैन्‍य तैयारी इसी ख‍तरे को देखते हुए भारत लगातार अंडमान सागर में अपनी सैन्‍य उपस्थिति बढ़ा रहा है। हाल ही में इंडियन नेवी ने अंडमान में अपने समुद्री क्षेत्र में घुसने पर चीन के जहाज को भगाया था। पिछले दिनों रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भारतीय नौसेना ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में आईएनएस कोहासा, नया एयरबेस शुरू किया था। हिंद महासागर में अपनी संचालन मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश के तहत भारत ने यह कदम उठाया है। दरअसल, क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। क्षेत्र में चीन के अपने जंगी जहाज और पनडुब्बी लगातार भेजने के मद्देनजर भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।
नई दिल्ली पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किए जाने पर भारत को घेरने की कोशिश में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में बार-बार बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है। वह इसे मुसलमानों का मुद्दा बनाकर पेश करने की कोशिश में बार-बार मुंह की खा रहा है। यहां तक कि दुनिया के 57 मुस्लिम देशों के संगठन OIC ने भी पाकिस्तान के रुख को तवज्जो नहीं दी है और अब संगठन पर सबसे मजबूत पकड़ रखने वाले देश सऊदी अरब ने भी उसे खरी-खरी सुना दी है। पाकिस्तान को सऊदी अरब की खरी-खरी दरअसल, पाकिस्तान ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के काउंसिल ऑफ फॉरन मिनिस्टर्स (CFM) की आपातकालीन बैठक बुलाने का निवेदन किया था। पाक के इस निवेदन को सऊदी अरब ने स्वीकार नहीं करते हुए कड़ा रुख दिखाया है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान की इस जिद पर खरी-खरी सुनाई है। गुरुवार को पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह खबर दी। इस्लामाबाद में OIC के काउंसिल ऑफ फॉरन मिनिस्टर्स से सपॉर्ट हासिल करने में नाकामयाब रहने के चलते बेचैनी बढ़ी है। कश्मीर पर मुस्लिम देशों के 57 सदस्यों ने चुप्पी साध रखी है। पाक पीएम इमरान खान ने मलयेशिया में अपने हालिया दौरे पर इसके खिलाफ अपनी भड़ास निकाली थी। इस्लामिक देशों की चुप्पी पर बिफरे इमरान इमरान ने कहा था, 'कश्मीर पर चुप्पी के कारण हमारी आवाज में ताकत नहीं है और हम पूरी तरह से बंटे हुए हैं। हम कश्मीर पर OIC मीटिंग कर साथ तक नहीं आ सकते।' पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान OIC विदेश मंत्रियों से बैठक पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएफएम मीटिंग की जरूरत बताते हुए कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर इस्लामिक देशों द्वारा एक स्पष्ट संदेश दिया जाना जरूरी था। OIC में रियाद की गहरी पैठ OIC से कोई भी फैसले के लिए रियाद का सपॉर्ट मिलना बेहद जरूरी है। OIC में सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों का प्रभुत्व है। हाल ही में सऊदी अरब ने सीएफएम को नजरअंदाज करने के लिए पाकिस्तान को कई प्रस्ताव दिए। इनमें संसदीय फोरम या मुस्लिम देशों के प्रवक्ताओं के लिए कॉन्फ्रेंस, फिलिस्तीन एवं कश्मीर मुद्दे पर जॉइंट मीटिंग शामिल थी, लेकिन इस्लामाबाद सीएफएम मीटिंग के अपने प्रपोजल पर अड़ा रहा है। कुआलालंपुर समिट में पाकिस्तान के शामिल होने से इनकार के बाद रियाद ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर थोड़ी ढील दिखाई। मलयेशिया में हुए इवेंट में पाकिस्तान द्वारा दूरी बनाने पर सऊदी अरब ने अपने विदेश मंत्री को शुक्रिया कहने के लिए भेजा। हालांकि, यह लचीलापन कुछ समय के लिए ही था और जल्द ही रियाद कश्मीर पर CFM पर अपने स्टैंड पर लौट आया।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में 2012 में मलाला यूसुफजई पर हमले और 2014 में पेशावर में सैन्य स्कूल में जानलेवा हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान तालिबान का प्रवक्ता पूर्व एहसान-उल्ला-एहसान जेल से भाग गया है। एहसान ने खुद ऑडियो क्लिप जारी कर यह जानकारी दी। सोशल मीडिया पर गुरुवार को साझा ऑडियो क्लिप में एहसान ने कहा कि वह 11 जनवरी को पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की जेल से भाग गया है। उसने दावा किया पाकिस्तानी सेना 2017 में आत्मसमर्पण के दौरान उससे किए गए वादे निभाने में नाकाम रही। क्लिप में वह ये कहता सुनाई दे रहा है, 'अल्लाह की मदद से, मैं 1 जनवरी 2020 को सुरक्षा बलों की जेल से भागने में कामयाब रहा।' अगर यह क्लिप विश्वसनीय निकली तो यह तालिबान के खात्मे के लिए अभियान चला रहे पाकिस्तान के लिये बड़ा झटका साबित होगा। एहसान ने अपना मौजूदा ठिकाना बताए बिना कहा कि वह आने वाले दिनों में जेल में बीते अपने दिनों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताएगा। गौरतलब है कि सबसे युवा नोबेल शांति पुस्कार विजेता मलाला को 2012 में महिला शिक्षा के लिए अभियान के दौरान पाकिस्तान की स्वात घाटी में एक बंदूकधारी ने गोली मार दी थी। वहीं 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी स्कूल पर हुए हमले में 132 छात्रों समेत 149 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले में भी एहसान शामिल था।
नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने करॉना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित चीन के शहर वुहान से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के अभियान को जटिल बताते हुए चीन सरकार की तरफ से मिले सहयोग के लिए उसकी तारीफ की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत ने 2 उड़ानों के जरिए चीन से 640 भारतीयों और मालदीव के 7 नागरिकों को सुरक्षित निकाला। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि चीन में फंसे कुछ पाकिस्तानी भारत सरकार से मदद की अपील की है तो क्या इस पर कोई चर्चा हुई है तो कुमार ने कहा कि पाकिस्तान ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है। अगर ऐसी सिचुएशन बनती है तो इस पर जरूर विचार किया जाएगा। विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने चीन के वुहान शहर में फंसे लोगों को लेकर पूछा, 'वहां पर जो पाकिस्तानी स्टूडेंट फंसे हुए हैं, विडियो देख रहे थे उसमें उन्होंने बोला कि मोदी है तो मुमकिन है, मोदी जिंदाबाद...और उन्होंने बोला कि अगर पाकिस्तान गवर्नमेंट हमें नहीं ले जा रही है तो भारत सरकार हमारी मदद करे तो क्या आप लोगों ने क्या इस पर चर्चा की है, कोई विचार?' इस सवाल के जवाब में रवीश कुमार ने कहा, 'फिलहाल तो पाकिस्तान सरकार की तरफ से ऐसा कोई हमारे पास रिक्वेस्ट आया नहीं है लेकिन अगर ऐसी सिचुएशन बनती है और अगर हमारे पास रिसोर्सेज हैं तो हम इस पर जरूर विचार करेंगे।' जब सवाल के दौरान पत्रकार ने यह कहा कि वुहान में फंसे पाकिस्तानी छात्र 'मोदी है तो मुमकिन है', मोदी जिंदाबाद बोल रहे हैं, तब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता भी मुस्कुराने से खुद को नहीं रोक पाए। वीजा संबंधी पाबंदियां सिर्फ चाइनीज मेनलैंड के लिए: MEA करॉना वायरस की वजह से चीन से आने वाले लोगों के लिए ई-वीजा पर अस्थायी तौर पर रोक के बारे में कुमार ने कहा कि वीजा संबंधी पाबंदियां सिर्फ चाइनीज मेनलैंड के लिए हैं। उन्होंने कहा, 'चीन के लोगों को दिए गए सभी मौजूदा ई-वीजा अब वैध नहीं हैं। इसी तरह जो नॉर्मल वीजा इश्यू हुए हैं वे भी अब वैलिड नहीं हैं। अगर ऐसा व्यक्ति जिसके पास भारत आना बहुत ही ज्यादा जरूरी है तो वह हमारे दूतावास या नजदीकी कॉन्सुलेट से संपर्क कर वीजा के लिए अप्लाइ कर सकता है।' इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच कमर्शल फ्लाइटों पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिबंध नहीं लगा है। उन्होंने साथ में कहा कि एयरलाइन कंपनियां जमीनी स्थिति का आकलन करते हुए इस बारे में खुद से फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है।
नई दिल्ली करॉना वायरस को लेकर अपने 'सदाबहार मित्र' चीन की तरफदारी करना पाकिस्‍तान सरकार को महंगा पड़ता जा रहा है। करॉना प्रभावित चीन से ज्‍यादातर भारतीय छात्रों के एयरलिफ्ट किए जाने के बाद वुहान में फंसे पाकिस्‍तानी छात्रों को गुस्‍सा और बढ़ गया है और वे लगातार विडियो जारी करके भारत सरकार के फैसले की तारीफ कर रहे हैं, वहीं 'रियासत-ए- मदीना' के वजीर-ए-आजम इमरान खान को कोस रहे हैं। पीएम इमरान खान से मदद की आस खो चुके छात्र अब पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उधर, पाकिस्‍तानी छात्रों के गुस्‍से के बाद भी इमरान सरकार अपने चीनी 'आकाओं' को खुश करने और अपनी बदहाल स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की कलई खुलने के डर से छात्रों को वुहान से निकाल नहीं रही है। चीन में फंसे पाकिस्‍तानी छात्र जहां करॉना वायरस के गढ़ में जिंदगी और मौत का सामना कर रहे हैं और इमरान सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं, वहीं पेशे से डॉक्टर पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति हदीस का उदाहरण देकर अपनी फजीहत करा रहे हैं। पाक राष्ट्रपति अल्वी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, 'किसी महामारी के फैलने के संबंध में प्रोफेट मोहम्मद के दिशा-निर्देश आज भी बढ़िया मार्गदर्शक हैं, अगर आप किसी जगह पर प्लेग फैलने के बारे में सुनते हैं, तो वहां जाएं नहीं, लेकिन अगर प्लेग किसी ऐसी जगह फैलता है जहां आप पहले से मौजूद हैं तो उस जगह से कहीं ना जाएं (बुखारी और मुस्लिम) वहां फंसे हुए लोगों की हमें मदद करने दें।' असहाय महसूस कर रहे पाकिस्तानी पाकिस्‍तान सरकार के इस रवैये से खुद को असहाय महसूस कर रहे पाकिस्तानी छात्रों का एक और विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में चीन में फंसे पाकिस्तानी छात्र भारत सरकार की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इमरान खान सरकार को कोस रहे हैं। ये पाकिस्तानी छात्र चीन के वुहान शहर में फंसे हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि जो लोग अपने देश वापस जा रहे हैं, वे बहुत भाग्‍यशाली हैं कि उनकी सरकार मदद कर रही है। छात्रों ने कहा क‍ि पाकिस्‍तान सरकार हमारी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्‍होंने अब सेना से प्रमुख से अपील की है कि वह उनकी मदद करें। इन छात्रों ने इमरान खान सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई और कहा कि यहां से भारत, बांग्लादेश, अमेरिका, जॉर्डन, जापान, टर्की, कोरिया जैसे देश के नागरिक वहां की सरकारों द्वारा सुरक्षित निकाले जा चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान की सरकार अभी तक सोई हुई है। पूरे विश्व की मीडिया इस विडियो को दिखा रहा है, जिसमें ये छात्र इमरान खान से अपील कर रहे हैं कि हमारा संपर्क अब एंबेसी से टूट चुका है। चार पाकिस्तानी नागरिक भी इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। कुछ देशों की हम नहीं करेंगे नकल: स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री इस बीच पाकिस्‍तान के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जफर मिर्जा ने बताया है कि सोमवार को 57 पाकिस्‍तानी इस्‍लामाबाद पहुंचे हैं। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तानी छात्रों के बारे में कहा कि कम से कम 100 देशों के नागरिक वुहान और चीन के अन्‍य हिस्‍सों में रह रहे हैं। हम नागरिकों को एयरलिफ्ट करने के लिए कुछ देशों की नकल नहीं करेंगे। उन्‍होंने कहा कि करॉना वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल रहा है। मिर्जा ने कहा कि इसका मतलब है कि यह वायरस के एक मरीज से दूसरे मरीज में जाने का सोर्स हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि एक जिम्‍मेदार देश के नाते पाकिस्‍तान बहुसंख्‍यक देशों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए कदम उठा रहा है। उधर, पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति ने कहा है कि हम करॉना वायरस से निपटने में चीन सरकार के प्रयास का समर्थन करते हैं। भारत ने चीन से छात्रों को बाहर निकाला बता दें कि भारत ने चीन से आने वाले विदेशियों के लिए ई-वीजा से‌वाएं फिलहाल सस्पेंड कर दी हैं। सरकार ने बताया कि वुहान से भारतीयों को लाने का सिलसिला रविवार को पूरा हो गया। रविवार को एयर इंडिया का विमान 330 और लोगों को दिल्ली लाया था। इनमें 323 भारतीय और मालदीव के 7 नागरिक हैं। शनिवार को भी 324 भारतीय दिल्ली लाए गए थे। इन सभी को दिल्ली के छावला और हरियाणा के मानेसर में विशेष रूप से बने कैंपों में रखा गया है। वहीं, चीन से बाहर कोरोना वायरस से पहली मौत फिलिपींस में हुई है। चीन में अब तक 361 लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं।
नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में होनेवाले विधानसभा चुनाव की चर्चा देश के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी है। अब वहां से नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी को हराने की मांग उठी है। यह मांग वहां के किसी आम नागरिक नहीं बल्कि मंत्री द्वारा उठाई गई है। नाम है चौधरी फवाद हुसैन। यह नाम आपने पहले भी सुना होगा क्योंकि फवाद पहले भी अपने विवादित बोलों के लिए चर्चा में रहे हैं। फवाद पाकिस्तान में साइंस ऐंड टेक्नॉलजी मंत्री हैं। फवाद ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि भारत में मोदी को हारना चाहिए। उन्होंने लिखा, 'भारत के लोगों को मोदी को हराना चाहिए। वह इस वक्त अन्य राज्य के चुनाव (दिल्ली) हारने के प्रेशर में उल्टे सीधे दावे कर रहे हैं, लोगों को डरा रहे हैं। कश्मीर, नागरिकता संसोधन कानून और गिरती अर्थव्यवस्था पर देश-दुनिया से मिली प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।' फवाद ने यह ट्वीट मोदी के एक भाषण पर किया। भाषण में मोदी ने कहा था कि भारत की सेना पाकिस्तान को 7 से 10 दिन में हरा सकती है। मोदी ने वह भाषण एनसीसी के एक कार्यक्रम में दिया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में हुआ था। बता दें कि दिल्ली में 8 फरवरी को वोटिंग होनी है। 11 फरवरी को चुनाव के नतीजे आएंगे। फवाद पहले भी पीएम मोदी को निशाने पर लेते रहे हैं। मोदी के बर्थडे पर उन्होंने शर्मनाक ट्वीट किया था। फवाद हुसैन ने #मोदीबर्थडे के साथ लिखा था, 'आज का दिन हमें गर्भनिरोधकों का महत्व समझाता है।
नई दिल्ली यूरोपीय संसद में सीएए विरोधी प्रस्ताव पर वोटिंग फिलहाल के लिए मार्च तक टल गई है। भारत के लिए यह बड़ी कूटनीतिक सफलता बताई जा रही है। भारत के लिए राहत की बात जरूर है कि यूरोपीय संसद में बुधवार को होनेवाली प्रस्तावित वोटिंग टल गई है। आज संसद में नागरिकता कानून के विरोध में चर्चा जरूर होगी। वोटिंग अब मार्च के महीने में होगी। यूरोपीय संसद में यह प्रस्ताव संयुक्त तौर पर पांच प्रभावशाली राजनीतिक समूहों की ओर से पेश किया गया। 483 में से 271 ने वोटिंग तिथि बढ़ाने के लिए किया वोट 751 सदस्यों के समूह में सेंटर-राइट से लेकर अति वामपंथी विचारधारा के 500 से अधिक सदस्य थे। जिस वक्त यह प्रस्ताव आया उस वक्त कुल 483 प्रतिनिधि मौजूद थे। मतदान के वक्त 13 सदस्य अनुपस्थि रहे और 483 सदस्यों में से 271 ने वोटिंग बढ़ाने के लिए मतदान किया जबकि 199 ने इसके विरोध में मतदान किया। भारत के लिए बता रहे कूटनीतिक जीत एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से भारत ने कूटनीतिक तौर पर ब्रसल्ज में अपनी सक्रियता बढ़ाई थी। ब्रसल्ज के साथ ही यूरोपियन राजदूतों के साथ भारत की सक्रियता के कारण ही यह कूटनीतिक जीत दर्ज हो सकी। वोटिंग तिथि आगे बढ़ाने को भारत की वैश्विक कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। दुनियाभर में भारत का कूटनीतिक मिशन नागरिकता कानून को लागू करने को लेकर तरह-तरह के भ्रम को दूर कर रही है। वोटिंग टलने से भारत के पास तैयारी के लिए वक्त वोटिंग पोस्टपोन करने का प्रस्ताव मिशल गैहलर के द्वारा लाया गया। सेंटर-राइट यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के सदस्य हैं। यूरोपियन संसद में इस वक्त 182 सदस्यों के साथ यही सबसे बड़ी पार्टी है। अब जब वोटिंग तिथि आगे टल गई है तो भारत के पास मौका है कि वह कूटनीतिक स्तर पर सीएए को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके। भारत ने इसके साथ ही पाकिस्तान में पैदा हुए यूरोपियन संसद के सदस्य शफाक मोहम्मद को प्रस्ताव के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2020, भारत में नागरिकता संशोधन कानून लागू हो गया है. जबकि देश के कई हिस्सों में नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध भी हो रहे हैं. विपक्ष भी इस कानून को लेकर सरकार पर लगातार हमला बोल रहा है. उधर, भारत के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ यूरोपीय संसद के कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान होना है. ऐसे में सीएए कानून पर इजरायल ने भारत का साथ दिया है. यूरोपीय संसद में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया है. अब इस पर बहस और मतदान होना है. इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इजराइल ने सीएए पर भारत का समर्थन किया है. इजराइल के साउथ एशिया की कॉन्सुल जनरल दाना कुर्श ने मंगलवार को कहा कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है. ऐसे में भारत को पूरी आजादी है कि वह अपने नागरिकों को लेकर कोई भी फैसला कर सकता है. यूरोपियन यूनियन की संसद में सीएए के प्रस्ताव पर पूछे गए सवाल के जवाब में दाना कुर्श ने कहा, ''हर देश को अपने आंतरिक मामलों पर फैसला लेने का अधिकार है और ऐसे में भारत अपने नागरिकों को लेकर कोई भी फैसला लेने का हकदार है. इसमें किसी दूसरे देश को दखल नहीं देना चाहिए." उन्होंने कहा कि भारत ने इजराइल को इस तरह के संकट में हमेशा साथ दिया है. इसलिए हम भी उसके साथ हैं. दाना कुश ने तमिलनाडु के एक कॉलेज में भारत-इजराइल ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ये बात कही.
गुवाहाटी पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों से उग्रवाद के खात्‍मे का वादा करके सत्‍ता में आई केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस दिशा में सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो उग्रवादियों के प्रतिनिधियों ने असम समझौता 2020 पर हस्‍ताक्षर किए। इस समझौते के साथ ही करीब 50 साल से चला रहा बोडोलैंड विवाद समाप्‍त हो गया, जिसमें अब तक 2823 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले 27 साल में यह तीसरा 'असम समझौता' है। सूत्रों के मुताबिक इस विवाद के जल्‍द समाधान के लिए मोदी सरकार लंबे समय से प्रयासरत थी और अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद इसमें काफी तेजी आई। लिखें इस मौके पर गृह मंत्री ने ऐलान किया कि उग्रवादी गुट नैशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के 1550 कैडर 30 जनवरी को अपने 130 हथियार सौंप देंगे और आत्‍मसमर्पण कर देंगे। शाह ने कहा कि इस समझौते के बाद अब असम और बोडो के लोगों का स्‍वर्णिम भविष्‍य सुनिश्चित होगा। उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि केंद्र सरकार बोडो लोगों से किए गए अपने सभी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगी। उन्‍होंने कहा कि इस समझौते के बाद अब कोई अलग राज्‍य नहीं बनाया जाएगा। पीएम ने कहा, आज का दिन भारत के लिए खास पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि बोडो समझौते के बाद अब शांति, सद्भाव और एकजुटता का नया सवेरा आएगा। समझौते से बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम सामने आएंगे, यह प्रमुख संबंधित पक्षों को एक प्रारूप के अंतर्गत साथ लेकर आया है। यह समझौता बोडो लोगों की अनोखी संस्कृति की रक्षा करेगा और उसे लोकप्रिय बनाएगा तथा उन्हें विकासोन्मुखी पहल तक पहुंच मिलेगी। आइए जानते हैं कि क्‍या है बोडो विवाद और केंद्र सरकार ने क्‍या किया है वादा..... क्‍या है बोडो विवाद करीब करीब 50 साल पहले असम के बोडो बहुल इलाकों में अलग राज्‍य बनाए जाने को लेकर हिंसात्‍मक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्‍व एनडीएफबी ने किया। यह विरोध इतना बढ़ गया कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 के तहत एनडीएफबी को गैरकानूनी घोषित कर दिया। बोडो उग्रवादियों पर हिंसा, जबरन उगाही और हत्‍या का आरोप है। 2823 लोग इस हिंसा की भेंट चढ़ चुके हैं। आपको बता दें कि बोडो असम का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है, जो राज्‍य की कुल जनसंख्‍या का 5 से 6 प्रतिशत है। यही नहीं, लंबे समय तक असम के बड़े हिस्‍से पर बोडो आदिवासियों का न‍ियंत्रण रहा है। असम के चार जिलों कोकराझार, बाक्‍सा, उदालगुरी और चिरांग को मिलाकर बोडो टेरिटोरिअल एरिया डिस्ट्रिक का गठन किया गया है। इन जिलों में कई अन्‍य जातीय समूह भी रहते हैं। बोडो लोगों ने वर्ष 1966-67 में राजनीतिक समूह प्‍लेन्‍स ट्राइबल काउंसिल ऑफ असम के बैनर तले अलग राज्‍य बोडोलैंड बनाए जाने की मांग की। साल 1987 में ऑल बोडो स्‍टूडेंट यूनियन ने एक बार फिर से बोडोलैंड बनाए जाने की मांग की। यूनियन के नेता उपेंद्र नाथ ब्रह्मा ने उस समय असम को 50-50 में बांटने की मांग की। दरअसल, यह विवाद असम आंदोलन (1979-85) का परिणाम था जो असम समझौते के बाद शुरू हुआ। असम समझौते में असम के लोगों के हितों के संरक्षण की बात कही गई थी। इसके फलस्‍वरूप बोडो लोगों ने अपनी पहचान बचाने के लिए एक आंदोलन शुरू कर दिया। दिसंबर 2014 में अलगाववादियों ने कोकराझार और सोनितपुर में 30 लोगों की हत्‍या कर दी। इससे पहले वर्ष 2012 में बोडो-मुस्लिम दंगों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और 5 लाख लोग विस्‍थापित हो गए थे। कौन है एनडीएफबी राजनीतिक आंदोलनों के साथ-साथ हथियारबंद समूहों ने अलग बोडो राज्‍य बनाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया। अक्‍टूबर 1986 में रंजन दाइमारी ने उग्रवादी गुट बोडो सिक्‍यॉरिटी फोर्स का गठन किया। बाद में इस समूह ने अपना नाम नैशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) कर लिया। एनडीएफबी ने राज्‍य में कई हत्‍याओं, हमलों और उगाही की घटनाओं को अंजाम दिया। वर्ष 1990 के दशक में सुरक्षा बलों ने एनडीएफबी के खिलाफ व्‍यापक अभियान शुरू किया। अभियान को देखते हुए ये उग्रवादी पड़ोसी देश भूटान भाग गए। वहां से एनडीएफबी के लोगों ने अपना अभियान जारी रखा। वर्ष 2000 के आसपास भूटान की शाही सेना ने भारतीय सेना के साथ मिलकर आतंकवाद निरोधक अभियान चलाया जिसमें इस गुट की कमर टूट गई। एनडीएफबी ने 90 लोगों को मारा, बाद में फूट अक्‍टूबर 2008 में एनडीएफबी ने असम के कई हिस्‍सों में बम हमले किए गए जिसमें 90 लोगों की मौत हो गई। उसी साल एनडीएफबी के संस्‍थापक रंजन दिमारी को हमलों के लिए दोषी ठहराया गया। इन विस्‍फोटों के बाद एनडीएफबी दो भागों में बंट गई। एनडीएफबी (P) का नेतृत्‍व गोविंदा बासुमतारी और एनडीएफबी (R) रंजन ने किया। वर्ष 2009 में एनडीएफबी (P)ने केंद्र सरकार के साथ बाचतीत शुरू की। वर्ष 2010 में रंजन द‍िमारी को बांग्‍लादेश ने अरेस्‍ट करके भारत को सौंप दिया। वर्ष 2013 में रंजन को जमानत मिल गई। अब दोनों ही गुटों ने केंद्र के साथ बातचीत शुरू कर दी। वर्ष 2012 में इंगती कठार सोंगबिजित ने एनडीएफबी (R) से खुद को अलग कर लिया और एनडीएफबी (S) बनाया। माना जाता है कि इंगती के गुट ने ही दिसंबर 2014 में 66 आदिवासियों की हत्‍या की। यह गुट बातचीत के खिलाफ था। वर्ष 2015 में इंगती की जगह पर बी साओरैग्‍वारा ने गुट की कमान संभाली। बाद में इंगती ने एनडीएफबी (S) से अलग होकर अपना अलग गुट बना लिया। इस तरह पूरा गुट 4 भागों में बंट गया। केंद्र सरकार ने सोमवार को इन चारों ही गुटों के साथ समझौता किया है। इस समझौते को अंजाम देने के लिए दाईमारी को दो दिन पहले असम की एक जेल से रिहा किया गया था। जानें, क्‍या है समझौते के अंदर समझौते के बारे में जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समझौता असम में रहने वाले बोडो आदिवासियों को कुछ राजनीतिक अधिकार और समुदाय के लिए कुछ आर्थिक पैकेज मुहैया कराएगा। उन्‍होंने स्पष्ट किया कि असम की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रखी जाएगी तथा एनडीएफबी की अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख मांग नहीं मांगी गई है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि समझौता राज्य के विभाजन के बिना संविधान की रूपरेखा के अंदर किया गया है। अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्री समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने को लेकर उत्सुक थे ताकि असम में बोडो उग्रवाद समाप्त किया जा सके और राज्य के बोडो बहुल क्षेत्रों में दीर्घकालिक शांति लौटे। समझौते के बाद विरोध प्रदर्शन विभिन्न बोडो पक्षकारों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर के केंद्र के कदम के विरोध में गैर बोडो संगठनों द्वारा सोमवार को आहूत 12 घंटे के बंद के कारण असम में बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के तहत आने वाले चार जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोकराझार, बक्सा, चिरांग और उदलगुड़ी जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन बंद का असर राज्य के अन्य हिस्सों पर नहीं पड़ा है। कोकराझार जिले के कुछ हिस्सों में टायर जलाए गए, लेकिन अब तक किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है। सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहे। हालांकि, कॉलेजों में पूर्व निर्धारित कुछ परीक्षाएं हुईं। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नजर नहीं आई और सभी दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद हैं।
दावोस आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि जब भारत के साथ उनके देश का रिश्ता सामान्य हो जाएगा तब दुनिया को पाक के सही आर्थिक क्षमता का अहसास होगा। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) में पाकिस्तान के पीएम ने यह भी कहा कि शांति और स्थिरता के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है। इमरान खान ने कहा, 'दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के साथ हमारे संबंध अच्छे नहीं हैं, लेकिन जब ये सामान्य होंगे तो दुनिया को पाकिस्तान की रणनीतिक आर्थिक क्षमता के बारे में पता चलेगा' WEF में विशेष संबोधन में इमरान खान ने कहा कि वह पाकिस्तान को एक कल्याणकारी राज्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक शांति और स्थिरता नहीं होगी आर्थिक विकास संभव नहीं है। खान ने कहा कि पाकिस्तान ने दूसरे देशों के साथ सिर्फ शांति के लिए पार्टनरशिप की है और उन्होंने इसका उदाहरण अमेरिका के साथ रिश्ते का दिया। इमरान खान ने कहा, 'मेरी उम्र पाकिस्तान के बराबर है। पाकिस्तान मेरे पैदा होने से सिर्फ 5 साल पहले बना। मैं इस देश के साथ बड़ा हुआ हूं। हमारे संस्थापक पाकिस्तान को एक इस्लामिक कल्याणकारी राज्य बनाना चाहते थे। एक किशोर के रूप में मैं नहीं जानता था कि कल्याणकारी राज्य का क्या मतलब है। इंग्लैंड जाने के बाद ही मुझे यह पता चला। तब मैंने फैसला किया कि यदि मुझे कभी मौका मिला तो मैं पाकिस्तान को कल्याणकारी राज्य बनाऊंगा। यह मेरा विजन है।'
वॉशिंगटन कश्मीर को लेकर पाकिस्तान लाख हाथ-पैर पटक ले, लेकिन दुनिया में कोई उसे गंभीरता से नहीं लेता है। एक अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के फैसले का जवाब देने के लिए पाकिस्तान के पास विकल्प बेहद सीमित हैं। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों ने कहा है कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान की साख खराब है, क्योंकि वह आतंकी समूहों का साथ देता रहा है। कश्मीर पर छह महीने से कम समय में अपनी दूसरी रिपोर्ट में CRS ने कहा कि सैन्य ऐक्शन से यथा-स्थिति बदलने के लिए पाकिस्तान की क्षमता हाल के सालों में कम हुई है। इसका मतलब है कि वह कूटनीतिक रास्ते से ही जवाब देगा। 13 जनवरी की इस रिपोर्ट में CRS ने कहा कि 5 अगस्त के बाद पाकिस्तान 'कूटनीतिक रूप से अकेला दिखा' है, एकमात्र देश तुर्की ने उसका साथ देने की बात कही। नई दिल्ली द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद खराब हो गए। पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत ने साफ किया है कि यह पूरी तरह आंतरिक मामला है। UNSC में चर्चा हुई पर बयान नहीं 25 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने चीन की मदद से UNSC में एक सत्र बुलवाया। 5 दशक में पहली बार कश्मीर पर चर्चा के लिए 16 अगस्त को काउंसिल की बैठक हुई। बैठक बंद दरवाजों में हुई और इसका कोई आधिकारिक बयान भी नहीं जारी किया गया। 'पाक नेतृत्व के पास विकल्प सीमित' इसमें कहा गया है, 'अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि कश्मीर पर इस्लामाबाद की साख बहुत कम है, क्योंकि उसका इतिहास वहां आतंकी समूहों को चोरी-छुपे मदद पहुंचाने का है। पाकिस्तान के नेतृत्व के पास भारत के ऐक्शन का जवाब देने के लिए विकल्प बहुत कम हैं और कश्मीर में आतंकवाद को पाकिस्तान का समर्थन वैश्विक रूप से महंगा पड़ेगा।' रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान और इसके दोस्त चीन की साख मानवाधिकार के मामले में भी कम है। 'भारत संग रिश्ता मजबूत, पाक पर भरोसा नहीं' CRS के मुताबिक, कश्मीर पर अमेरिका का स्टैंड लंबे समय से यह रहा है कि इसका समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी बातचीत से हो, जिसमें कश्मीरी लोगों की राय को शामिल किया जाए। CRS ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ दशकों में वॉशिंगटन की भारत के साथ नजदीकी बढ़ी है, जबकि पाकिस्तान को अविश्वास की नजर से देखा जा रहा है।
बॉन (जर्मनी) कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को स्वीकारा कि इस मुद्दे पर उन्हें वैश्विक समुदाय का साथ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही है। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले में गैरजरूरी हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है और उसने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाया, जहां से उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई। इमरान ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, पश्चिमी देशों के लिए व्यावसायिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ा बाजार है और कश्मीर में 80 लाख लोगों के साथ क्या हो रहा है, उस पर धीमी प्रतिक्रिया की यही वजह है।' जर्मनी के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान ने यहां तक कह डाला कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत उससे बातचीत नहीं करना चाहता। बता दें कि भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान अपने देश में प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती। आरएसएस की तुलना नाजी से आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान में बढ़े तनाव के बार में पूछने पर इमरान ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा, 'मैं पहला नेता था जिसने दुनिया को चेताया कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में कट्टरपंथी विचारधारा-हिंदुत्व का नियंत्रण स्थापित हो रहा है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा है।' इमरान ने कहा, 'राजनीतिक संगठन आरएसएस का गठन 1925 में हुआ था जो कि जर्मनी के नाजियों से प्रेरित है और उसके संस्थापक नस्लभेद में यकीन रखते थे वैसे जैसे कि नाजी विचारधारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पर बनी थी, आरएसएस की विचारधारा मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से नफरत पर आधारित है।' भारत से वार्ता के प्रयास का दावा दुनियाभर को पता है कि भारत पाक द्वारा फैलाए आतंकवाद के कारण उससे वार्ता क्यों नहीं कर रहा है, लेकिन झूठे दावे करते हुए इमरान ने कहा, 'पीएम बनने के बाद, मैंने भारत सरकार और पीएम मोदी से बातचीत के प्रयास किए। बतौर पीएम मेरे पहले भाषण में मैंने कहा कि अगर भारत एक कदम आगे बढ़ता है तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे और मतभेद को दूर करेंगे। लेकिन मुझे बहुत जल्दी पता चल गया कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत ने मुझे जवाब नहीं दिया।' इमरान ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए अनौपचारिक बैठक की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया था कि यूएनएससी में बहुमत का विश्वास है कि कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है। रवीश कुमार ने कहा, 'पाकिस्तान की तरफ से यूएनएससी के एक सदस्य के साथ मिलकर इस मंच का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। यूएनएससी में बहुमत का मानना है कि यह इस तरह के मुद्दे पर चर्चा के लिए उचित मंच नहीं है और इसपर भारत और पाकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता होनी चाहिए।'
नई दिल्ली केंद्र सरकार के आर्टिकल 370 समाप्त किए जाने के फैसले पर भारत को कई देशों से भरपूर समर्थन मिल रहा है। अब रूस के राजदूत ने भारत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि हमें कभी इस पर शक नहीं था। रूस के राजदूत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और यह भारत के संविधान के अंतर्गत आता है। कश्मीर पर फैसला भारत का आंतरिक मामला भारत में रूस के राजदूत निकोल कुदशेव ने विदेशी राजदूतों के कश्मीर दौरे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता है कि कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिए मुझे वहां जाने की जरूरत है। जहां तक जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार का फैसला है यह आपका (भारत) आंतरिक मामला है। यह भारत के संविधान के तहत आता है और उसी आधार पर इसका फैसला होना चाहिए।' कश्मीर को लेकर रूस को भारत पर शक नहीं कुछ दिन पहले ही विदेशी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा किया था। इस पर पूछे सवाल पर कुशदेव ने कहा, 'जिन्हें कश्मीर के हालात की चिंता है और जिन्हें कश्मीर की परिस्थितियों को लेकर शक है, वह वहां जाकर खुद देख सकते हैं। अगर वह कश्मीर जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं। वो लोग वहां जाकर खुद हालात का जायजा ले सकते हैं। हमने कभी ऐसा (कश्मीर) कोई संदेह जाहिर नहीं किया है।
नई दिल्ली राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया केस के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है। मुकेश ने 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति दया की गुहार लगाई थी। दिल्ली की पटियालाा हाउस कोर्ट ने मुकेश समेत चार दोषियों को फांसी देने के लिए 22 जनवरी का डेथ वॉरंट जारी किया था। हालांकि, मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित होने के कारण गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती है। पटियाला हाउस कोर्ट ने ही 7 जनवरी को चारों दोषियों, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी करते हुए फांसी देने की तारीख 22 जनवरी तय की थी। हालांकि, दोषियों के पास राष्ट्रपति से दया याचिका दायर करने का आखिरी विकल्प बचा था। ऐसे में मुकेश ने क्षमा दान याचिका दी जिसे आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खारिज कर दी। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि मुकेश की मर्सी पिटिशन खारिज होने की सूचना मंत्रालय को मिल चुकी है। हालांकि, अभी तीन और दोषियों के पास राष्ट्रपति से क्षमादान मांगने का विकल्प बचा हुआ है। 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुई इस खौफनाक घटना के एक अन्य दोषी विनय शर्मा की माफी याचिका भी राष्ट्रपति के पास पहुंची थी, लेकिन उसने बाद में यह कहते हुए अर्जी वापस ले ली थी कि इसके लिए उसकी राय नहीं ली गई थी। जेल नियमों के तहत अगर किसी एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा मिली हो तो जब तक सभी आरोपियों के सारे कानूनी उपचार के विकल्प खत्म नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी फांसी नहीं दी जा सकती है। गौरतलब है कि निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के दोषियों की फांसी की तारीख टलने से नाराज निर्भया के माता-पिता ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों की खींचतान में निर्भया को न्याय नहीं मिल रहा है। निर्भया के पिता ने हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ से कहा कि दिल्ली सरकार तब तक सोई रही, जब तक हम लोग नहीं आगे बढ़े। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने के लिए निर्भया केस का इस्तेमाल किया। वहीं, निर्भया की मां आशा देवी ने 'अब बहुत नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार' का हवाला देकर केंद्र सरकार भी निशाना साधा। उन्होंने दोनों सरकारों से कहा कि वे अपने-अपने फायदे के लिए इस गंभीर मामले का मजाक नहीं बनाएं।
नई दिल्ली, 16 जनवरी 2020, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है. बुधवार को UNSC में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन समर्थन जुटाने में विफल रहे. इस बैठक में रूस समेत कई सदस्यों ने UNSC की बैठक में कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है. रूस ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि मतभेद को 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणा के आधार पर द्विपक्षीय प्रयासों के माध्यम से सुलझाया जाएगा.' दरअसल, चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एओबी (एनी अदर बिजनेस) के तहत कश्मीर मसले पर क्लोज डोर मीटिंग का प्रस्ताव रखा. चीन ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान की अपील पर रखा था, जिसके लिए 24 दिसंबर, 2019 की तारीख तय की गई थी, लेकिन तब मीटिंग नहीं हो पाई थी. चीन ने कश्मीर मामला यूएनएससी की मीटिंग के दौरान उठाया, जिसका स्थायी सदस्यों फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस के साथ 10 सदस्यों ने विरोध किया और कहा कि यह मामला यहां उठाने की जरूरत नहीं है. रूस की तरफ से द्विपक्षीय स्तर पर मामला सुझलाने का सुझाव दमित्री पोलिंस्की ने दिया है. पोलिंस्की UNSC में रूस के पहले स्थायी प्रतिनिधि हैं. चीन के अनुरोध के बावजूद फ्रांस ने इस मुद्दे पर अपनी पहले की स्थिति को दोहराया, जिसमें उसका कहना है कि यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान की ओर से द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाना चाहिए. इससे पहले विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा था कि वे यूएनएससी के घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और अगर चीन, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा चलाता है तो इससे निपटने के लिए वे तैयार हैं.
नई दिल्ली कश्मीर मुद्दे पर पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'बंद कमरे में बैठक' की कोशिश नाकाम होने के बाद चीन ने बुधवार को इसके लिए एक बार फिर पहल की है। हालांकि, उसके मंसूबे नाकाम होते दिख रहे हैं क्योंकि सुरक्षा परिषद के बाकी सभी सदस्य इसका विरोध कर सकते हैं। पिछले साल भी चीन की पहल पर कश्मीर मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की 'बंद कमरे में बैठक' हुई थी जिसमें वह अलग-थलग पड़ गया था। 'बंद कमरे में बैठक' पूरी तरह अनौपचारिक होती है, जिसका कोई रिकॉर्ड तक मैंटेन नहीं किया जाता। एक अफ्रीकी देश के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है बैठक फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने बताया कि फ्रांस को यूएनएससी के एक सदस्य की तरफ से एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाने का अनुरोध मिला है और पिछली बार की तरह इस बार भी वह इसका विरोध करेगा। दरअसल, यूएनएससी ने एक अफ्रीकन देश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए बंद कमरे में बैठक बुलाई है। इसके बाद चीन 'अन्य विषय' के अजेंडा के तहत कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा के लिए गुजारिश की है। पिछले महीने में चीन ने की थी ऐसी ही कोशिश, मगर नाकाम रहा सूत्रों ने बताया कि फ्रांस के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और वह पूरी तरह स्पष्ट है- कश्मीर मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत से हल होना चाहिए। सूत्रों ने आगे बताया कि फ्रांस तमाम मौकों पर अपने इस रुख को स्पष्ट कर चुका है और वह सुरक्षा परिषद में भी इस रुख को बार-बार दोहराएगा। पिछले महीने भी फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए 'बंद कमरे में बैठक' की चीन की कोशिशों को नाकाम किया था। चीन जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का विरोध कर रहा है।
नई दिल्ली आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे कश्मीर को मुख्य धारा में शामिल होने का मौका मिलेगा। आर्मी चीफ ने पाकिस्तान का बिना नाम लिए बिना कहा कि सेना आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है और इसका जवाब देने के लिए भारतीय सेना के पास कई विकल्प हैं। साथ ही उन्होंने सेना के भविष्य के प्लान्स भी साझा किए। लिखें 72वें सेना दिवस के मौके पर नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना ने प्रॉक्सी वॉर में पूरी सक्रियता और मजबूती के साथ देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति शांतिपूर्ण है। जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए नरवणे ने कहा कि आर्टिकल 370 का हटना ऐतिहासिक कदम है इससे कश्मीर को मुख्य धारा में शामिल होने का मौका मिलेगा। 'आतंक का जवाब देने के अनेक विकल्प' आर्मी चीफ ने आगे कहा कि उनके पास आतंक का जवाब देने के अनेक विकल्प मौजूद हैं। पाकिस्तान का नाम लिए बिना नरवणे बोले कि आतंक के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। वह बोले कि आतंक के खिलाफ जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं, जिनका इस्तेमाल करने में हम नहीं हिचकिचाएंगे। भविष्य की तैयारियों में जुटी सेना नरवणे ने बताया कि आर्मी को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वह बोले कि उनकी नजर भविष्य में होने वाले युद्ध के स्वरूप पर है। इसके लिए इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप्स का निर्माण हो रहा है। स्पेस, साइबर, स्पेशल ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर काम चल रहा है। नरवणे ने बताया कि सेना को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए वह टेक्निलकल क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 72वें सेना दिवस के मौके पर नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना ने प्रॉक्सी वॉर में पूरी सक्रियता और मजबूती के साथ देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति शांतिपूर्ण है। जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए नरवणे ने कहा कि आर्टिकल 370 का हटना ऐतिहासिक कदम है इससे कश्मीर को मुख्य धारा में शामिल होने का मौका मिलेगा। 'आतंक का जवाब देने के अनेक विकल्प' आर्मी चीफ ने आगे कहा कि उनके पास आतंक का जवाब देने के अनेक विकल्प मौजूद हैं। पाकिस्तान का नाम लिए बिना नरवणे बोले कि आतंक के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। वह बोले कि आतंक के खिलाफ जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं, जिनका इस्तेमाल करने में हम नहीं हिचकिचाएंगे। भविष्य की तैयारियों में जुटी सेना नरवणे ने बताया कि आर्मी को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वह बोले कि उनकी नजर भविष्य में होने वाले युद्ध के स्वरूप पर है। इसके लिए इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप्स का निर्माण हो रहा है। स्पेस, साइबर, स्पेशल ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर काम चल रहा है। नरवणे ने बताया कि सेना को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए वह टेक्निलकल क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
नई दिल्ली, 12 जनवरी 2020,नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) संसद से पारित होने के बाद पूरे देश में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार लगातार CAA के समर्थन में जागरुकता के लिए काम कर रही है. यही नहीं केंद्र सरकार शुक्रवार को गजट नोटिफिकेशन (राजपत्र में प्रकाशन) जारी कर दिया था. इसके साथ ही यह कानून पूरे देश में लागू हो गया. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को अहमदाबाद के निवासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पांच लाख पोस्टकार्ड का अनावरण किया और उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए धन्यवाद दिया. विशालतम जागरुकता अभियान अहमदाबाद में आयोजित बीजेपी के सीएए के समर्थन में पार्टी के विशालतम जागरुकता अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संशोधित नागरिकता कानून पर लिखे गए 5.5 लाख पत्रों का अमित शाह ने प्रदर्शित किया. इन पत्रों को 'CAA (सीएए)' शब्दों का आकार देते हुए रखा गया. बीजेपी ने सीएए के समर्थन में विशालतम जागरुकता अभियान रखा था. प्रदेश बीजेपी का दावा है कि यह सीएए के समर्थन में पार्टी का विशालतम जागरुकता अभियान है. इसे लिम्का बुक्स ऑफ रिकार्ड्स और वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ इंडिया में स्थान मिला है. CAA लागू करने पहला राज्य? बता दें उत्तर प्रदेश CAA को लेकर विरोध प्रदर्शन से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा वहीं अब नोटिफिकेशन जारी होने के बाद योगी सरकार ने ऐलान किया है कि यूपी सरकार CAA को सूबे में सबसे पहले इस कानून को लागू करेगी. दूसरी ओर रविवार को बीजेपी की ओर से सीएए के समर्थन में देशव्यापी जन जागरण अभियान चलाए जा रहे हैं. जिसको लेकर गृह मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं. यहां जबलपुर में गृह मंत्री नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में आयोजित की गई बड़ी रैली को संबोधित करेंगे.
देश के अनेक विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने कैंपस में वामपंथियों की हिंसा के खिलाफ पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने कहा कि इन लोगों की वजह से कैंपस का माहौल खराब हो रहा है. नई दिल्ली: देश के अनेक यूनिवर्सिटी के कुलपतियों समेत 208 शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने वामपंथी संगठनों पर कैंपस में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया है. चिट्ठी में लिखा गया है कि लेफ्ट विंग एक्टिविस्ट्स की गतिविधियों की वजह से कैंपस में पढ़ाई-लिखाई का काम बाधित होता है और इससे विश्वविद्यालयों का माहौल खराब हो रहा है. इन शिक्षाविदों ने आरोप लगाया है कि इन ग्रुप्स द्वारा कम उम्र के छात्रों को वैचारिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है जिससे नए छात्र पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. पीएम मोदी को ये पत्र शनिवार को लिखा गया है. पत्र लिखने वालों में कई यूनिवर्सिटीज के VC भी शामिल इस पत्र को लिखने वालों में हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी के कुलपति आरपी तिवारी, साउथ बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति एचसीएस राठौर और सरदार पटेल यूनिवर्सिटी के वीसी शिरीष कुलकर्णी शामिल हैं। 'शिक्षण संस्थानों में लेफ्ट विंग की अराजकता के खिलाफ बयान' शीर्षक से लिखे गए पत्र में कुल 208 अकादमिक विद्वानों के हस्ताक्षर हैं। पीएम मोदी को लिखे इस पत्र में शिक्षाविदों ने कहा, "हम शिक्षाविदों का समूह शिक्षण संस्थानों में बन रहे माहौल पर अपनी चिंताएं बताना चाहते हैं. हमने यह महसूस किया है कि शिक्षण संस्थानों में शिक्षा सत्र के रोकने और बाधा डालने की कोशिश छात्र राजनीति के नाम पर वामपंथ एक एजेंडे के तहत कर रहा है. हाल ही में जेएनयू से लेकर जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से लेकर जाधवपुर विश्वविद्यालय के माहौल में जिस तरह की गिरावट आई है वह वामपंथियों और लेफ्ट विंग एक्टिविस्ट के एक छोटे समूह की वजह से हुआ है. इन शिक्षाविदों ने कहा, ''इन संस्थानों में वामपंथियों की वजह से पढ़ाई-लिखाई के कामों में बाधा पहुंची है. छोटी उम्र में ही छात्रों को रेडिकलाइज करने की कोशिश ना केवल उनके सोचने की क्षमता बल्कि उनकी कौशल को भी प्रभावित कर रही है. इसकी वजह से छात्र ज्ञान और जानकारी की नई सीमाओं को लांघने और खोजने की बजाय छोटी राजनीति में उलझ रहे हैं. विचारधारा के नाम पर अनैतिक राजनीति करके समाज और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ असहिष्णुता बढ़ाई जा रही है. इस तरह के प्रयासों से बहस को सीमित करके विश्वविद्यालयों और संस्थानों को दुनिया की नजरों से दूर करने की कोशिश की जा रही है.'' शिक्षाविदों ने कहा, ''विद्यार्थियों के विभिन्न समूह और वर्गों के बीच असहिष्णुता जन्म ले रही है बल्कि अध्यापकों और बुद्धिजीवियों के बीच भी खराब माहौल बन रहा है. सार्वजनिक स्थानों पर अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने में बेहद मुश्किल हो रही है और ऐसे कार्यक्रम करना भी कठिन होता जा रहा है क्योंकि लेफ्ट विंग राजनीति सेंसरशिप थोप रही है. धरना प्रदर्शन हड़ताल और बंद वामपंथियों के प्रभाव वाले इलाके में आम हो गए हैं. वामपंथी विचारधारा से सहमत नहीं होने पर व्यक्तिगत रूप से निशाना साधना और सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना, तंग करना ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है.'' उन्होंने कहा, ''लेफ्ट विंग की राजनीति की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब छात्रों और मित्र समुदाय से आने वाले छात्रों को हुआ है. लेफ्ट विंग की वजह से वे पढ़ने-सीखने और बेहतर भविष्य बनाने के अवसरों से चूक रहें. वैकल्पिक राजनीति करने और अपने स्वतंत्र विचारों को रखने के मौके भी उनसे छीने जा रहे हैं. वह अपने आप को वामपंथियों की राजनीति से घिरा हुआ पाते हैं. हम सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की ओर से अपील करते हैं कि वह एक साथ आएं और शिक्षा की स्वतंत्रता, भाषण की आजादी और बहु विचार के साथ खड़े हों.''
तेहरान यूक्रेन के विमान हादसे की जिम्मेदारी लेने के बाद खामनेई के खिलाफ ईरान की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि वह स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और अब दूसरा 'नरसंहार' नहीं होना चाहिए। ईरान ने स्वीकार किया था कि उसने गलती से यूक्रेन के विमान को गिरा दिया जिसमें 176 लोगों की मौत हो गई। लगे नारे, खामनेई छोड़ें देश ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी दूतावास के बाहर हजारों लोग प्रदर्शन करने के लिए जुटे। वहीं अमीर काबिर यूनिवर्सिटी के बाहर भी ईरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। लोग हाथों में पोस्टर्स लेकर यहां इकट्ठा हुए थे और खामनेई से इस्तीफे की मांग कर रहे थे। शनिवार को ईरान में छात्रों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया और मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। गौरतलब है कि सुलेमानी की मौत के बाद लाखों लोग ईरान की सड़कों पर उतरे थे और अमेरिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों की मौत पर ईरान में आक्रोश ईरान ने जिस विमान को गिराया उसमें सबसे ज्यादा ईरान के ही नागरिक मौजूद थे। इस हादसे में ईरान के 82 और कनाडा के 63 नागरिक थे। 8 जनवरी को यह विमान यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहा था। इसमें ईरान और कनाडा के अलावा यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के चार जबकि जर्मनी और ब्रिटेन के तीन-तीन नागरिक सवार थे। राष्ट्रपति ने घटना को अक्षम्य बताया ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा था कि मानवीय भूल की वजह से गलत दिशा में मिसाइल चलाया गया और इस वजह से विमान हादसे का शिकार हो गया। उन्होंने इसे 'अक्षम्य भूल भी बताया।' ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ट्वीट किया, 'दुखी करनेवाला दिन। आर्मी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अमेरिका के हमले के वक्त मानवीय भूल की वजह से हादसा हुआ। इसपर हम पछतावा और खेद व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिवारों से माफी मांगते हैं।' ब्रिटेन के राजदूत को हिरासत में ले फिर छोड़ा ईरान ने ब्रिटेन के राजदूत को भी हिरासत में ले लिया, हालांकि थोड़ी देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया। ब्रिटेन और कनाडा ने सबसे पहले आशंका जताई थी कि ईरान ने ही विमान को गिराया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने हादसे के बाद बयान जारी कर कहा था कि खुफिया सूचनाएं बताती हैं कि यूक्रेन का विमान ईरान की मिसाइल से गिरा है। दबाव बढ़ने के बाद ईरान ने बोइंग और विमान में सवार देशों के नागरिकों की सरकारों को जांच के लिए आमंत्रित भी किया था। ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरान कुछ समय तक इनकार करता रहा कि उसी की गलती से विमान गिरा है। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव में उसे यह स्वीकार करना पड़ा। ईरान ने ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के दावे के बीच शुक्रवार को कहा था कि यूक्रेन का विमान उसकी मिसाइल का शिकार नहीं हुआ है। बता दें कि कमांडर कासिम सुलेमानी के एयर स्ट्राइक में मारे जाने के बाद बदले की कार्रवाई करते हुए ईरान ने इराक में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागी थीं। उसी दौरान यूक्रेन का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
नई दिल्ली जेएनयू हिंसा की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने 37 लोगों की पहचान की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 60 लोगों के एक वॉट्सऐप ग्रुप से इन लोगों की पहचान की गई है। 'यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट' नाम के इस वॉट्सऐप ग्रुप में शामिल इन लोगों का भी हिंसा में हाथ माना जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को प्रेस क़ॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के मामले में 9 लोगों के नाम बताए थे। दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिन 9 लोगों के नाम लिए थे, उनमें विश्वविद्यालय छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशी घोष भी शामिल हैं। इस पर आइशी घोष ने विरोध जताते हुए पुलिस पर पूर्वाग्रह से काम करने का आरोप लगाया है। यही नहीं उन्होंने कहा कि हमारे पास सबूत हैं कि कैसे हम पर अटैक किया गया। 5 जनवरी को जेएनयू में हुई हिंसा में आइशी घोष भी घायल हो गई थीं। आइशी के अलावा विपक्षी दल कांग्रेस ने भी दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि शुरुआती जांच अधूरी लगती है और ऐसा लगता है कि इसमें किसी का दखल था। कांग्रेस ने भी उठाए दिल्ली पुलिस पर सवाल दिल्ली पुलिस के खुलासों को लेकर कांग्रेस ने भी हमला बोलते हुए कहा था कि उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, 'दिल्ली पुलिस ने उस दिन 3.30 बजे की घटना का उल्लेख करके नौ नाम निकाले। लेकिन शाम से रात तक जिन लोगों ने वहां हिंसा की उनके बारे में कुछ नहीं कहा। तस्वीर में दिल्ली पुलिस जिस एक युवक को विकास पटेल बता रही है, हकीकत में उसका नाम शिव मंडल है। इससे पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।'
तेहरान यूक्रेन के विमान हादसे में ईरान ने अपनी गलती मान ली है। ईरानी सरकार का कहना है कि उनकी ही मिसाइलों ने गलती से यात्री विमान को निशाना बना लिया था। ईरान की आर्मी का कहना है कि विमान उनके मिलिटरी एरिया की तरफ बढ़ रहा था, जिसकी वजह से गलती हुई। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स ऐसी हैं जो ईरान के दावे से उलट हैं, उनसे लगता है कि ईरान अभी भी कुछ छिपा रहा है। इस बीच यूक्रेन ने ईरान की ओर से गलती माने जाने के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूक्रेन ने कहा, 'अब सच बाहर आ गया है। ईरान मृतकों के शव हमें सौंपे और घटना पर हर्जाना दे।' दरअसल, तेहरान से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद यूक्रेन का विमान क्रैश हो गया था। अब ईरान ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए माना कि ईरानी मिसाइलों ने ही विमान को गलती से निशाना बनाया था। अपनी गलती के पीछे ईरान ने अमेरिका पर दोष मढ़ने की कोशिश भी की है। ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा था कि अमेरिका के कारण बनी खराब परिस्थितियों में यह मानवीय भूल हुई। इस विमान हादसे में 176 लोगों की मौत हो गई जिनमें ईरान के 82 और कनाडा के 63 नागरिक थे। 8 जनवरी को यह विमान यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहा था। इसमें ईरान और कनाडा के अलावा यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के चार जबकि जर्मनी और ब्रिटेन के तीन-तीन नागरिक सवार थे। ईरानी आर्मी ने बताया चूक ईरानी मीडिया में चल रहे आर्मी के बयानों के मुताबिक, उन्होंने प्लेन को दुश्मन का विमान समझा था। ऐसी गलती कैसे हुई? इस पर अधिकारी ने कहा कि गंभीर हालातों के बीच (अमेरिका द्वारा हुए हमले) बोइंग फ्लाइट 752 मिलिटरी एरिया की तरफ मुड़ा था। उसकी ऊंचाई और ऐंगल देखकर उसे दुश्मन का विमान समझ लिया गया। अधिकारी ने इसे मानवीय भूल बताया जिसमें अनजाने में विमान को गिरा दिया गया। ईरान के इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारी के दावा किया है कि इस मामले में दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कड़ी सजा होगी। फ्लाइट के रास्ते में नहीं था कोई मिलिटरी बेस ईरानी का दावा है कि फ्लाइट मिलिटरी साइट के पास से गुजर रहा था, लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि फ्लाइट के रास्ते में ऐसा कुछ था ही नहीं। ब्लूमबर्ग ने गूगल के हवाले से रिपोर्ट दी है कि सैटलाइट फोटोज में विमान के रास्ते के आसपास कोई मिलिटरी बेस नहीं दिख रहा। जहां विमान से संपर्क टूटा वहां एक पॉवर प्लांट और इंडस्ट्रियल पार्क है। इसके अलावा काफी इलाका खाली पड़ा हुआ है। फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विस फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, प्लेन अपने तय रास्ते पर बढ़ रहा था। तीन साल पुराना यह बोइंग विमान ईरानी हमलों की शुरुआत के बाद क्रैश हुआ था। ईरान यह हमले इराक में स्थित अमेरिका के सैन्य अड्डों पर कर रहा था। ये हमले ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी पर अमेरिकी हमले के बाद हुए थे।
तेहरान तेहरान से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट में क्रैश हुए यूक्रेन के विमान को मार गिराने की जिम्मेदारी ईरान ने ली है। ईरान सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईरानी मिसाइलों ने ही विमान को गलती से निशाना बनाया था। ईरान के विदेश मंत्री ने इसकी पुष्टि करते हुए खेद जताया है। इस विमान हादसे में 176 लोगों की मौत हो गई जिनमें ईरान के 82 और कनाडा के 63 नागरिक थे। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देश पहले से ही गलती से विमान को निशाना बनाए जाने की बात कर रहे थे। 8 जनवरी को यह विमान यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहा था। इसमें ईरान और कनाडा के अलावा यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के चार जबकि जर्मनी और ब्रिटेन के तीन-तीन नागरिक सवार थे। ईरान ने बयान जारी कर बताया मानवीय भूल बता दें कि ईरान की नागरिक उड्डयन विभाग के साथ बैठक के बाद पहले से ही इसकी उम्मीद जताई जा रही थी। अब ईरान प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि यूक्रेन का विमान मानवीय भूल के कारण निशाने पर आ गया। इस हादसे में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन इंटरनैशनल के विमान बोइंग 737-800 टेक ऑफ के कुछ मिनट बाद भी क्रैश हो गया। शुरुआत में विमान हादसे का कारण ईरान ने तकनीकी खामी बताया था। ईरान के विदेश मंत्री ने किया ट्वीट ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ट्वीट किया, 'दुखी करनेवाला दिन। आर्मी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अमेरिका के हमले के वक्त मानवीय भूल की वजह से हादसा हुआ। इसपर हम पछतावा और खेद व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिवारों से माफी मांगते हैं।' लगातार इनकार के बाद ईरान ने कबूला सच ईरान ने ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के दावे के बीच शुक्रवार को कहा था कि यूक्रेन का विमान उसकी मिसाइल का शिकार नहीं हुआ है। बता दें कि कमांडर कासिम सुलेमानी के एयर स्ट्राइक में मारे जाने के बाद बदले की कार्रवाई करते हुए ईरान ने इराक में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागी थीं। उसी दौरान यूक्रेन का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अब ईरान ने स्वीकार किया है कि यह विमान मानवीय चूक के कारण ईरान की मिसाइल से ही गिरा। ब्रिटेन और कनाडा ने पहले ही की थी पुष्टि ब्रिटेन और कनाडा के प्रधानमंत्री ने हादसे के बाद बयान जारी कर कहा था कि खुफिया सूचनाएं बताती हैं कि यूक्रेन का विमान ईरान की मिसाइल से गिरा है। दबाव बढ़ने के बाद ईरान ने बोइंग और विमान में सवार देशों के नागरिकों की सरकारों को जांच के लिए आमंत्रित भी किया था। मलबे में तब्दील हुआ विमान
नई दिल्ली जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को अबतक अपने हाथ लगे अहम सुरागों की जानकारी दी। जांच कर रही एसआईटी के हेड जॉय तिर्की ने बताया कि हिंसा में शामिल 9 छात्रों की पहचान कर ली गई है। इसमें जेएनयूएसयू प्रेजिडेंट आइशी घोष भी शामिल हैं। चिह्नित छात्रों को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है। उन्हें नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि विवाद के केंद्र में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन था जिसका लेफ्ट से जुड़े छात्र विरोध कर रहे थे। पुलिस ने 1 जनवरी से 5 जनवरी के बीच रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए सर्वर को नुकसान पहुंचाने से लेकर पेरियार और साबरमती हॉस्टल में हुई हिंसा तक की घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा भी दिया। बवाल में लेफ्ट के 4 छात्र संगठनों का नाम आया दिल्ली पुलिस ने बताया कि 3 जनवरी को स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के मेंबर्स सेंट्रलाइज रजिस्ट्रेशन सिस्टम को रोकने के लिए जबरदस्ती सर्वर रूम में घुसे और कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद सर्वर को बंद कर दिया। इसके बाद सर्वर को किसी तरह ठीक किया गया। 4 जनवरी को फिर उन्होंने सर्वर ठप करने की कोशिश की। दोपहर में पीछे शीशे के दरवाजे से कुछ अंदर घुसे और उन्होंने सर्वर को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। इससे पूरा रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस रुक गया। इन दोनों मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। एसआईटी हेड ने बताया कि 5 जनवरी को कैंपस में हिंसक घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि दोपहर में पेरियार हॉस्टल में नकाबपोश हमलावरों ने चुन-चुनकर छात्रों को मारा। हमलावरों की भीड़ में जेएनयूएसयू प्रेसिडेंट आइशी घोष भी थीं। इसके बाद शाम को साबरमती हॉस्टल में नकाबपोश हमलावरों ने तोड़फोड़ और हिंसा की। इसमें भी कुछ छात्रों की पहचान हुई है। हिंसा में शामिल 9 छात्र, जिनकी पहचान हुई 1- चुनचुन कुमार, पूर्व छात्र, कैंपस में रहते हैं 2- पंकज मिश्रा, माही-मांडवी हॉस्टल 3- आइशी घोष 4- वास्कर विजय 5- सुजेता तालुकदार 6- प्रिया रंजन, बीए थर्ड इयर 7- डोलन सावंत 8- योगेंद्र भारद्वाज, पीएचडी, संस्कृत (वॉट्सऐप ग्रुप यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट का ऐडमिन) 9- विकास पटेल कैसे हुई पहचान पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज सबसे अच्छा स्रोत हो सकता था लेकिन 3 और 4 नजवरी की घटना में वाईफाई सर्वर धव्स्त हो चुका था। इस वजह से सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला। वायरल विडियो और तस्वीरों की मदद से पहचाने जा रहे हैं हमलावर। एसआईटी हेड जॉय तिर्की ने दिया सिलसिलेवार ब्यौरा हिंसा तो 5 जनवरी को हुई लेकिन उससे पहले भी कई चीजें हुईं। पुलिस ने बताया कि पूरे विवाद के केंद्र में रजिस्ट्रेशन था। दरअसल, 1 से 5 जनवरी के बीच जेएनयू प्रशासन ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फैसला किया जो साल में 2 बार होता है। 1 से 2 जनवरी को क्या हुआ - लेफ्ट से जुड़े 4 छात्र संगठनों (स्टूडेंट फ्रंट फ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन) रजिस्ट्रेशन के विरोध में थे - ज्यादातर छात्र रजिस्ट्रेशन कराने के पक्ष में थे - जांच में पता चला कि रजिस्ट्रेशन की कोशिश करने वाले छात्रों को डराया-धमकाया गया, धक्कामुक्की की गई 3-4 जनवरी, लेफ्ट छात्रों ने जबरन बंद कराया सर्वर -3 जनवरी को दोपहर वामपंथी छात्र संगठनों ने स्टाफ से धक्कामुक्की की और सर्वर को जबरन बंद करा दिया - इसके बारे में शिकायत दी गई और 8 लोगों के नाम दिए -जेएनयू प्रशासन ने किसी तरह सर्वर रीस्टोर किया -चारों छात्र संगठनों ने 4 तारीख को फिर रजिस्ट्रेशन को बाधित करने की कोशिश की, स्टाफ से धक्कामुक्की की -दरवाजे को तोड़कर शरारती तत्व घुसे और सर्वर को नुकसान पहुंचाया - इस मामले में भी एफआईआर हुई, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज हुआ 5 जनवरी को हिंसा, पहले पेरियार फिर साबरमती हॉस्टल पर हमला - साढ़े 11 बजे 4 स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन के लिए परेशान थे, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सामने बेंच पर बैठे हुए थे, तभी एक समूह आया और उन छात्रों को पीटने लगा। बीचबचाव के लिए गए गार्डों को भी पीटा गया। -इन्हीं 4 संगठनों के लोगों ने पेरियार हॉस्टल में छात्रों पर हमला किया। इसमें जेएनयूएसयू प्रेजिडेंट भी शामिल थीं। हमलावर मुंह ढंके हुए थे। हमने कुछ को चिह्नित किया है। - पेरियार हॉस्टल में कुछ खास कमरों को टारगेट किया गया। चुन-चुनकर छात्रों को निशाना बनाया गया। - 5 जनवरी को शाम को साबरमती हॉस्टल में पीस मीटिंग हो रही थी शाम को, तभी अचानक नकाबपोश लोगों का एक समूह आया और साबरमती हॉस्टल में हिंसा की। इस समूह में भी कुछ छात्र थे, उन्हें चिह्नित किया गया है। - थोड़ी बहुत हिंसा नर्मदा हॉस्टल में भी हुई। इसका भी केस दर्ज हुआ है। कैंपस से अच्छी तरह परिचित थे हमलावर दिल्ली पुलिस ने बताया कि नकाबपोश हमलावर कैंपस से अच्छी तरह परिचित थे। अगर कोई बाहर होता तो वह इतनी आसानी से एक हॉस्टल से दूसरे हॉस्टल नहीं जा पाता। सभी रास्तों से परिचित नहीं होता। कुछ वॉट्सऐप ग्रुप का हिंसा में हाथ - कुछ वॉट्सऐप ग्रुप मिले हैं। उसी वक्त बने थे कुछ। यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट ऐसा ही एक वॉट्सऐप ग्रुप।
10 जनवरी 2020, भारत सरकार ने देश की सीमाओं को दुश्मनों से सुरक्षित रखने के लिए पुराने तारों के बाड़ को हटाने और उनकी जगह लोहे की दीवार जैसी मजबूत नई फेंसिंग लगाने की तैयारी में है. बीएसएफ के सूत्रों ने बताया कि सरकार भारत-पाकिस्तान सीमा सहित अपने सभी सीमाओं पर अधिक प्रभावी नई एंटी-कट फेंसिंग लगाने की प्रक्रिया में है. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने कई जगह पुरानी बाड़ को एंटी-कट फेंसिंग से रिप्लेस भी कर दिया है.
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त के बाद हालात तेजी से सामान्य हुए हैं। 15 देशों के राजनयिकों का एक दल वहां के हालात का जायजा लेने के लिए गुरुवार से 2 दिन के दौरे पर है। पहले दिन विदेशी राजनयिकों ने सिविल सोसाइटी, स्थानीय मीडिया और नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान स्थानीय लोगों ने जम्मू-कश्मीर में रक्तपात के पाकिस्तानी दुष्प्रचार को सिरे से खारिज किया। विदेशी राजनयिकों से बातचीत में स्थानीय लोगों ने 5 अगस्त के बाद बिना किसी खूनखराबे के हालात को संभालने के लिए सरकार की खुलकर तारीफ की। स्थानीय लोगों ने पाक के 'आतंकी खेल' की खोली पोल विदेशी राजनयिकों का दौरा शुक्रवार को भी जारी रहेगा। इस दौरान स्थानीय लोगों ने इतना जरूर माना कि कुछ दिक्कतें हैं लेकिन व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। स्थानीय लोगों ने विदेशी राजनयिकों से साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग पाकिस्तान को एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने और लोगों की जान लेने का आरोप लगाया। स्थानीय लोगों ने विदेशी राजनयिकों से गुजारिश की कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि वह जम्मू-कश्मीर में दखल न दे। विदेशी राजनयिक आज पाकिस्तानी दुष्प्रचार के उलट घाटी में सामान्य हालात के गवाह बने। श्रीनगर में दुकानें खुली हुई थीं, सड़कों पर गाड़ियां सामान्य रूप से आ-जा रही थीं और बाजार लोगों से गुलजार थे। राजनयिक खुद हालात देखें, यही दौरे का मकसद: MEA विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सरकार के सहयोग से 15 देशों के राजदूतों/उच्चायुक्तों के जम्मू-कश्मीर दौरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने खुद देखा कि हालात सामान्य है। उन्होंने कहा कि विदेशी राजनयिकों ने यह भी देखा कि स्थानीय प्रशासन हालात सामान्य होने के लिए किस हद तक कोशिश कर रहा है। सिविल सोसाइटी, स्थानीय मीडिया और नेताओं से भी मिले राजनयिक रवीश कुमार ने कहा कि राजनयिकों की पहली बैठक वहां के सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई जिसमें सुरक्षा के हालात और आतंकवाद के खतरे के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद राजनयिकों ने सिविल सोसाइटी के सदस्यों से बातचीत की जो पूरे जम्मू-कश्मीर से आए थे, हर क्षेत्र से थे। कुमार ने बताया कि इसके बाद राजनयिकों ने स्थानीय मीडिया और नेताओं से मुलाकात की। किन-किन प्रमुख नेताओं से मुलाकात हुई? इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दौरा अभी जारी है, शुक्रवार को दौरा पूरा होने के बाद पूरा विवरण दी जाएगी। ईयू के प्रतिनिधिमंडल के जम्मू-कश्मीर नहीं जाने पर कुमार ने बताया कि ईयू के राजनयिक एक समूह में कश्मीर जाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में ईयू राजनयिक भी कश्मीर का इस तरह दौरा कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर दौरे पर हैं इन 15 देशों के राजनयिक जिन 15 देशों के राजदूत/उच्चायुक्त जम्मू-कश्मीर के 2 दिवसीय दौरे पर हैं, वे हैं- अमेरिका, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, बांग्लादेश, मालदीव, मोरक्को, फिजी, नॉर्वे, फिलिपिंस, अर्जेंटिना, पेरू, नाइजर, नाइजीरिया, टोगो और गयाना।
श्रीनगर: अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद लैटिन अमेरिकी और अफ्रीकी देशों के 16 प्रतिनिधि गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे. इस डेलिगेशन ने सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात की. राज्य के अधिकारियों के मुताबिक राजनयिकों ने केंद्र शासित प्रदेश का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था के हालात का जायजा लिया. इस समूह में मुख्य तौर पर लैटिन अमेरिकी और अफ्रीकी देशों के सांसद शामिल थे. विदेशी प्रतिनिधिमंडल में वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ब्राज़िल, उज़्बेकिस्तान, नाइजर, नाइजीरिया, मोरक्को, गुआना, अर्जेंटीना, फिलीपींस, नॉर्वे, मालदीव, फ़िजी, टोगो, बांग्लादेश और पेरू के प्रतिनिधि शामिल थे. कश्मीर घाटी का जायजा लेने के बाद विदेशी प्रतिनिधियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें पड़ोसी मुल्क द्वारा कहा जा रहा था कि घाटी में रक्तपात हो रहा है. लोगों ने जम्मू-कश्मीर में हत्याओं के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया और दूतों को पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कहा ताकि पड़ोसी मुल्क हस्तक्षेप नहीं कर सके. उन्होंने बताया गया कि जम्मू-कश्मीर के लोग पाकिस्तान को एक इंच भी दखल नहीं देने देंगे. 5 अगस्त 2018 यानी अनुच्छेद 370 के हटने की तारीख के बाद राज्य में किसी तरह का खून-खराबा नहीं हुआ. इसको लेकर केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल के सामने केंद्र सरकार की काफी प्रशंसा की. प्रतिनिधमंडल से स्थानीय लोगों ने कहा कि इस मामले में सहमत होने में कुछ कठिनाइयां थीं, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक था. वहीं, उन्होंने आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान की हताशा और अनथक प्रयासों को भी उजागर किया. कश्मीर दौरे पर पहुंचे दूतों ने श्रीनगर की सड़कों पर खुली दुकानें और सड़कों यातायात और लोगों को सामान्य माहौल में घूमते देखा. सूत्रों के मुताबिक, इन विदेशी प्रतिनिधियों ने 9-10 जनवरी को वहां जाने की अनुमति मांगी थी. सूत्रों का यह भी कहना है कि इनकी तरफ से कश्‍मीर के हालात का जायजा लेने की गुजारिश आई थी
नई दिल्ली, 09 जनवरी 2020, जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आज से 17 देशों के विदेशी राजनयिक कश्मीर दौरे पर हैं. इस पहले अक्टूबर में यूरोपीय संसद के 23 सदस्यों ने कश्मीर का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया था. इस दौरे को लेकर काफी राजनीति हुई थी क्योंकि विपक्ष का आरोप था कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों के नेताओं के कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी जबकि इन नेताओं को घाटी के दौरे की इजाजत दी गई थी. पिछली बार जब यूरोपीय संघ के 23 सांसद कश्मीर के दौरे पर गए थे तब उन्होंने अपना निजी दौरा बताया था जिसे लेकर सियासी घमासान मच गया था. लेकिन इस बार केंद्र सरकार की अनुमति से 17 राजनयिकों का दल घाटी जा रहा है जिसमें लैटिन अमेरिकी और अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं. केंद्र सरकार ने इन देशों के आग्रह के बाद उनसे राजनयिकों की लिस्ट मांगी थी जिन्हें वह कश्मीर दौरे पर भेजना चाहते हैं. यह दल घाटी में उप राज्यपाल समेत सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात कर वहां के जमीनी हालात का आकलन करेगा. कैसे अलग है दौरा पिछली बार EU के जो सांसद कश्मीर के दौरे पर गए थे वह भी दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े हुए थे. इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने तब अपनी रिसर्च में पाया कि EU प्रतिनिधिमंडल के 17 नेता सोशल मीडिया पर भी अपनी दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं. साथ ही इस प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राष्ट्रवादी, अप्रवासी विरोधी कट्टर इस्लामिक विचारों के प्रखर आलोचक थे. पिछले दौरे पर गए दल के चार सदस्य फ्रांस की रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखते हैं. इस बार के केंद्र सरकार की ओर से 17 देशों के राजनयिकों को आधिकारिक तौर पर इजाजत दी गई है. साथ ही इस दौरे के लिए सभी जरूरी इंतजाम केंद्र सरकार की ओर से किए गए हैं. इसमें पुख्ता सुरक्षा इंतजाम से लेकर घाटी के विशिष्ट नेताओं से इन विदेशी नेताओं की मुलाकात शामिल है. ईयू के सदस्य अलग से कश्मीर का दौरा कर हिरासत में बंद वहां के पूर्व मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करना चाहते थे जिसको केंद्र सरकार ने फिलहाल इजाजत नहीं दी है. इसके लिए अलग सुरक्षा इंतजाम के बंदोबस्त करने होंगे. छोटे देशों को भी जगह इसके अलावा पिछली बार जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों के सांसद कश्मीर दौरे पर गए थे. लेकिन इस बार जिन 17 देशों के राजनयिक कश्मीर जा रहे हैं उनमें अमेरिका, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, उज्बेकिस्तान, नाइजर, नाइजीरिया, मोरक्को, गुयाना, अर्जेंटीना, फिलीपींस, नॉर्वे, मालदीव, फिजी, टोगो, पेरू जैसे अफ्रीकी देशों को भी जगह मिली है. इसके अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश के राजनयिक भी इस दौरे का हिस्सा होंगे.
09 जनवरी 2020,अब विश्व बैंक ने भारत के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि इस वित्त वर्ष यानी 2019-2020 में भारत की जीडीपी में बढ़त दर सिर्फ 5 फीसदी रह सकती है. इसके बाद अगले वित्त वर्ष में भी भारत के जीडीपी में सिर्फ 5.8 फीसदी बढ़त का वर्ल्ड बैंक ने अनुमान लगाया है. यह वर्ल्ड बैंक के अनुमान में बड़ी कटौती है. इसके पहले अक्टूबर, 2019 में विश्व बैंक ने कहा था कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत के जीडीपी में 6 फीसदी की ग्रोथ हो सकती है. बांग्लादेश में भारत से तेज होगी बढ़त विश्व बैंक ने कहा है कि भारत से तेज बढ़त दर बांग्लादेश की होगी जहां इस वित्त वर्ष में जीडीपी में 7 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है. दूसरी तरफ, खस्ताहाल चल रहे पाकिस्तान की जीडीपी में इस वित्त वर्ष में महज 3 फीसदी की बढ़त हो सकती है. वर्ल्ड बैंक के ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का कर्ज वितरण कमजोर बना हुआ है. इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान है. इसके अगले वित्त वर्ष में इसमें थोड़ा सुधार होगा और यह 5.8 फीसदी तक हो सकता है.' सरकार ने भी माना 5 फीसदी होगी बढ़त इसके पहले भारत सरकार के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा जारी पूर्वानुमान में भी कहा गया है कि इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी में महज 5 फीसदी की बढ़त होगी. मंगलवार को सरकार की ओर से जीडीपी के पूर्वानुमान के आंकड़े पेश किए गए हैं. इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 5 फीसदी रह सकती है. इससे पहले 2018-19 में वास्तविक ग्रोथ 6.8% रही थी. वहीं वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी थी. इसके पहले वित्त वर्ष 2008-09 यानी 2008 की वैश्विक मंदी वाले दौर में देश की जीडीपी 5 फीसदी से नीचे सिर्फ 3.1 फीसदी थी.
बगदाद ईरान ने अपने कमांडर की मौत का बदला लेने के लिए बीती रात इराक में अमेरिकी बेसों पर ताबड़तोड़ कई मिसाइलें दागीं। उसने दावा भी किया है कि इस हमले में अमेरिका के 80 सैनिक मारे गए हैं। हालांकि अमेरिका ने इसे खारिज करते हुए किसी भी सैनिक के मारे जाने की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में यह जानना काफी दिलचस्प है कि क्या ईरान ने गलत टारगेट चुने या अमेरिकी सैनिकों को पहले से ही हमले की भनक मिल गई थी? इराक को पहले ही बता दियाथा ईरान ने हमले के कुछ घंटे बाद अब इराकी पीएम ने बताया है कि ईरान ने बीती रात हुए हमले के बारे में उन्हें जानकारी पहले ही दे दी थी। इराकी पीएम के प्रवक्ता ने बताया कि पीएम अब्देल को तेहरान से एक फोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया कि अपने टॉप जनरल की हत्या का बदला लेने के लिए जवाबी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि क्या इराकी पीएम ने अमेरिका को यह जानकारी लीक कर दी। इराकी पीएम का कहना है कि उन्हें यह जरूर बताया गया था कि अमेरिकी फोर्सेज की लोकेशन को ही टारगेट किया जाएगा लेकिन किस जगह पर हमला होगा, यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया गया था। खबर यह भी है कि रात में अपने बेसों पर हमले होने के बाद अमेरिका से इराकी पीएम को फोन आया था और हालात की जानकारी ली गई थी। मेरीलैंड से इराक में सैनिकों को किया गया अलर्ट अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो उनके आधुनिक डिटेक्शन सिस्टम की बदौलत सैनिकों को पहले ही मिसाइल हमले की चेतावनी मिल गई थी, जिससे वे अपने बंकर में जाकर छिप गए। एक अधिकारी ने बताया है कि अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के जरिए इराक में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को खतरे को लेकर अलर्ट कर दिया गया था। दरअसल, अमेरिका के मेरीलैंड स्थित फोर्ट मेड बेस पर मिसाइलों की लॉन्चिंग को लेकर रियल टाइम में सूचनाएं इकट्ठा की जाती हैं। 600 मील थी मिसाइलें तभी... डेली मेली की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सूत्रों ने बताया कि जब मिसाइलें 600 मील दूर थीं, तभी सैनिकों को वॉर्निंग मिल गई थी और वे अपने-अपने बंकरों में जा छिपे। ईरान ने स्थानीय समयानुसार बुधवार तड़के ऐन अल-असद और एरबिल बेस पर दर्जनभर मिसाइलें दागीं। राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप ने न सिर्फ अमेर‍िकी सैन‍िकों के हताहत होने की खबर का खंडन किया है बल्कि सैन्य अधिकारी ने बताया है कि पेंटागन के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने सैनिकों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट कर दिया था। कैसे सूचनाएं जुटाता है अमेरिका मेरीलैंड में नैशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी का एक बेस मौजूद है, जो ऐसी जानकारियां इकट्ठा करता है। डिफेंस स्पेशल मिसाइल ऐंड एरोस्पेस सेंटर ने अलग-अलग रेंज के सैटलाइट्स, रेडार और हीट डिटेक्शन का इस्तेमाल करते हुए बीती रात ईरान के मिसाइल हमले की खुफिया सूचनाएं जुटाई थीं। आपको बता दें कि अमेरिकी एयर बेस पर हमले के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश को संबोधित किया और कमांडर सुलेमानी को याद किया। उन्होंने कहा कि हमला सफल रहा और हमने पिछली रात अमेरिका के घमंड पर तमाचा जड़ दिया है। खामेनेई ने यह भी कहा कि जनरल सुलेमानी की शहादत को ईरान कभी नहीं भूलेगा। कैसे काम करता है यह सेंटर - मेरीलैंड के NSA मुख्यालय में स्थित डिफेंस स्पेशल मिसाइल ऐंड एस्ट्रोनॉटिक्स सेंटर 1964 से पेंटागन के तहत काम करता है। - यह दिन के 24 घंटे और साल के 365 दिन ऐक्टिव रहता है। - 1970 के दशक में इस सेंटर से सोवियत मिसाइलों और स्पेस लॉन्च के बारे में जानकारी जुटाई जाती थी। - बाद में यह ग्लोबल डिटेक्शन सिस्टम के तौर पर काम करने लगा। - 1991 में गल्फ वॉर के समय यह सेंटर काफी चर्चा में रहा था।
े तेहरान अमेरिकी बेस पर ईरान के मिसाइल दागने की घटनाओं ने हवाई परिवहन को प्रभावित किया है। इस बीच कई विमानों ने सुरक्षा को देखते हुए अपना रूट डायवर्ट किया है। मलयेशिया, एशियन एयरलाइंस और सिंगापुर एयरलाइंस ने अपने विमानों का मार्ग बदला है। भारत ने भी अपने विमानों को ईरान, खाड़ी देशों और इराक के एयरस्पेस का प्रयोग नहीं करने के लिए अडवाइजरी जारी की है। ईरान के तेहरान में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। 180 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को लेकर जा रहा यूक्रेन के विमान के क्रैश होने की खबर है। इसके साथ ही न्यूक्लियर प्लांट वाले क्षेत्र बुशहर में भूकंप के झटके की भी सूचना है। इन सब कारणों से कई देशों की विमानन कंपनियों ने यह फैसला लिया है। कई विमानों ने डायवर्ट किया अपना मार्ग सिंगापुर एयरलाइंस ने सूचना जारी कर कहा कि तेहरान एयरस्पेस से गुजरनेवाले विमानों को डायवर्ट किया जा रहा है। ईरान द्वारा यूएस एयरबेस पर हमले के बाद यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर हमने यह कदम उठाया है। ताईवान की चाइना और ईवा एयरलाइंस ने भी अपना मार्ग बदला है। मलयेशिया की एयरलाइन कंपनियों ने भी विमान का रूट बदलने की पुष्टि की है। भारत सरकार ने जारी की अडवाइजरी इराक में मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारतीयों को अगले आदेश तक इराक की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में इराक में रह रहे भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और वहां यात्रा न करने की सलाह दी गई है। बगदाद में हमारे हाई कमीशन और इरबिल स्थित काउंसुलेट सामान्य कामकाज जारी रखेंगे और इराक में रह रहे भारतीयों को सभी प्रकार की सेवाएं जारी रखेंगे। दुर्घटनाग्रस्त विमान में सवार के 180 यात्री हादसे का शिकार विमान यूक्रेन का बोइंग 737 बताया जा रहा है। ईरान के आपात विभाग के प्रवक्ता मोत्जबा खलिदी ने बताया कि विमान में 180 यात्री सवार थे। ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस हादसे में किसी के भी बचने की उम्मीद न के बराबर भर है। 2 अमेरिकी बेस पर ईरान ने आज किया हमला ईरान द्वारा इराक में दो अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले के बाद क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गया है। अमेरिका ने कहा है कि वह इस हमले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इस बीच राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ट्वीट कर कहा है कि सबकुछ ठीक है। इधर, अमेरिका ने ईरान और गल्फ में अपने असैन्य उड़ानों पर रोक लगा दी है।
हैं तेहरान ईरान के तेहरान में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। यूक्रेन का एक विमान बुधवार को तेहरान के पास क्रैश हो गया, जिसमें 170 यात्री सवार थे। इरान के आपातकालीन सेवा से जुड़े अधिकारी ने सरकारी टेलिविजन को बताया कि प्लेन में सवार सभी लोगों की मौत हो गई है। शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खामी की बात आई है। उड़ान भरने के तुरंत बाद ही विमान क्रैश हो गया। इस बीच, ईरान में पिछले दो घंटे में दो भूकंप के झटके भी आने की खबर है। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 और 4.9 मापी गई है। खबर के अनुसार विमान ने इमाम खमनेई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। कोई विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा गया कि तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना होने की आशंका है। नागरिक उड्डयन के प्रवक्ता रजा जफरजादेह ने बताया कि तेहरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में जांच दल मौजूद है। वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24’ के अनुसार यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की यूक्रेन 737-800 ने बुधवार सुबह उड़ान भरी थी और उसके तुरंत बाद क्रैश होने की सूचना आई। ईरान के इराक में अमेरिकी बलों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के कुछ घंटों बाद यह हादसा हुआ है। ईरान ने उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने के बाद यह कार्रवाई की हैं।
तेहरान अपने सबसे ताकतवर जनरल की हत्‍या से गुस्‍साए ईरान ने बुधवार अल सुबह इराक में अमेरिकी सैन्‍य ठिकानों पर 22 मिसाइल दागे। ईरान ने दावा किया है कि उसकी 17 मिसाइलों ने अमेरिका के अइन अल-असाद एयरबेस को निशाना बनाया है। ईरान का दावा किया है कि इस हमले में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। उधर, ईरानी दावे का अमेरिका ने खंडन किया है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ने कहा है कि इन हमलों में कोई भी अमेर‍िकी सैन‍िक हताहत नहीं हुआ है। ईरानी टीवी चैनल प्रेस टीवी ने ट्वीट कर कहा, 'रिपोर्ट्स: ईराक में अमेरिकी बेसेस पर ईरान के मिसाइल हमलों में 80 मारे गए।' ईरान सरकार की ओर से जारी बयान में गया है कि उसकी दो मिसाइलें हेइतान में गिरीं लेकिन उनमें विस्‍फोट नहीं हुआ। इसके अलावा 5 मिसाइलों ने इरबिल में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया है। इस हमले में इराक की सेना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि मिसाइल हमलों के बाद सब ठीक-ठाक है। खुद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, 'ऑल इज वेल! इराक में अमेरिका के दो सैन्य ठिकानों पर ईरान की तरफ से मिसाइलें दागी गईं। जान-माल के नुकसान के आकलन किया जा रहा है। अब तक सब ठीक है।' ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, 'हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर और सुसज्जित सेना है। मैं कल सुबह बयान दूंगा। दरअसल, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर 3 जनवरी को इराक के बगदाद में ईरान के दूसरे बड़े ताकतवर शख्स जनरल कासिम सुलेमानी को मार दिया। सुलेमानी ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड के कुद्स फोर्स के कमांडर थे। उनकी हैसियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अल खामेनी को रिपोर्ट किया करते थे। उनकी हत्या के बाद ईरान में अमेरिका के प्रति काफी रोष है और खामेनी, राष्ट्रपति हसन रुहानी समेत तमाम बड़े नेता और जनरल सुलेमानी की जगह लेने जा रहे नए जनरल इस्माइल बानी तक ने अमेरिका से बदले की बात कह रहे हैं।
तेहरान अमेरिका के हमले में ईरान के शीर्ष कमांडन जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ईरान में भारी गम और गुस्से का माहौल है। इस बीच देश की संसद ने अमेरिकी सेना और पेंटागन को आतंकी संगठन घोषित करने के समर्थन में मतदान किया। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, सांसदों ने सुलेमानी की हत्या के विरोध में यह प्रस्ताव पास किया। अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेता एक-दूसरे के खिलाफ इस वक्त बहुत सख्त बयानबाजी कर रहे हैं। संसद में गूंजे अमेरिका-इजरायल विरोधी नारे ईरान की मीडिया के अनुसार, बिल पास करने से पहले अमेरिका और इजरायल की निंदा की गई। सांसदों ने सुलेमानी की हत्या का बदला लेने और अमेरिका-इजरायल को सबक सिखाने का संकल्प लिया। इससे पहले पांच जनवरी को संसद में सांसदों ने अमेरिका की मौत के नारे लगाए थे। इससे पहले सोमवार को भी सुलेमानी की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों का हुजूम तेहरान की सड़कों पर उतरा। हाथों में प्लेकार्ड लेकर पहुंचे लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुलेमानी की आखिरी विदाई में भावुक हुए ईरान के शीर्ष नेता तेहरान यूनिवर्सिटी में सुलेमानी के आखिरी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सोमवार को पहुंचे। स्थानीय निवासी अपने कमांडर के पोस्टर लेकर आए थे और जोर-जोर से नारे भी लगा रहे थे। अपने कमांडर को आखिरी विदाई देते हुए देश के सर्वोच्च नेता खामनेई बहुत भावुक हो गए और रोने लगे। नमाज़ के दौरान भी उनकी आवाज कई बार रुंध गई। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव पहुंचा चरम पर बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शुक्रवार को अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी की मौत हो गई। हमला ईरान के लिए बहुत बड़ा झटका है और इसने पश्चिम एशिया में नए सिरे से युद्ध की आशंकाओं बढ़ा दिया है। ईरान ने 2015 परमाणु समझौते से अलग होने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी कई बार दोहरा चुके हैं कि ईरान अमेरिकी प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाता है तो उसे सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनावों से पहले आपके चैनल ABP न्यूज़ ने सी-वोटर के साथ मिलकर एक सर्वे किया है. इस सर्वे में लोगों से कई सवाल पूछे गए. इनमें से एक सवाल था कि अगर देश में आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी पहसी पसंद कौन होगा. सर्वे में दिल्ली की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अपनी राय रखी. सर्वे में क्या सामने आया? सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी ही लोगों की पहली पसंद हैं. इस सर्वे में 62 फीसदी लोगों ने पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी को चुना. 12 फीसदी लोगों की पसंद अरविंद केजरीवाल थे. वहीं, आठ फीसदी लोगों ने राहुल गांधी को पीएम पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया. दिल्ली में सीएम पद की पहली पसंद कौन? ABP न्यूज़-सीवोटर के सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की सरकार बन सकती है. सर्वे में 69.50 फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री पद के लिए अरविंद केजरीवाल पर भरोसा जताया है. दूसरे नंबर पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय स्वास्थ मंत्री डॉ हर्षवर्धन हैं. 10.7 फीसदी लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद किया है. सर्वे में कांग्रेस के अजय माकन तीसरे नंबर पर हैं. उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए 7.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया है. आप के मनीष सिसोदिया को 2.2 फीसदी, बीजेपी के विजय गोयल को 1.1 फीसदी और एक फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री पद के लिए मनोज तिवारी पर भरोसा जताया है. कैसे हुआ सर्वे? ABP न्यूज़ ने सी-वोटर के साथ मिलकर ये सर्वे किया है और इसके लिए 13,076 लोगों से बात की गई है. इसके तहत 1 जनवरी 2020 से 6 जनवरी 2020 के बीच लोगों से बात की गई है.
इस्लामाबाद पाकिस्तान में सिखों के पवित्र स्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर कट्टरपंथियों की भीड़ के हमले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है। दूसरी तरफ पेशावर में रविवार को एक सिख युवक की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। रविंदर सिंह नाम का सिख युवक मलयेशिया से हाल ही में शादी के लिए पाकिस्तान लौटा था। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की है। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि रविंदर सिंह खैबर पख्तूनख्वां प्रांत के शांगला जिले के रहने वाले थे और पेशावर में वह अपनी शादी के लिए खरीदारी के लिए आए थे। अगले ही हफ्ते उनकी शादी होने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि रविंदर सिंह खैबर पख्तूनख्वां प्रांत के शांगला जिले के रहने वाले थे और पेशावर में वह अपनी शादी के लिए खरीदारी के लिए आए थे। अगले ही हफ्ते उनकी शादी होने वाली थी। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने पेशावर में मारे गए सिख युवक के भाई के बयान वाला विडियो ट्वीट करते हुए सरकार से मांग की है कि वह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए।
गुवाहाटी नागरिकता संशोधन कानून पास होने और असम में एनआरसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीजेपी ने शनिवार को गुवाहाटी में एक बड़ी रैली का आयोजन किया। बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की इस रैली में बीजेपी के 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। असम में हुए प्रदर्शनों के बाद बीजेपी के इस सम्मेलन को एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। गुवाहाटी नागरिकता संशोधन कानून पास होने और असम में एनआरसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीजेपी ने शनिवार को गुवाहाटी में एक बड़ी रैली का आयोजन किया। बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की इस रैली में बीजेपी के 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। असम में हुए प्रदर्शनों के बाद बीजेपी के इस सम्मेलन को एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय दलों में भी सभी पार्टियां पारिवारिक दल बन गई हैं, लेकिन बीजेपी ऐसी पार्टी है जो अब भी सिद्धांतों पर काम कर रही है। विचारों से मां भारती की तस्वीर बदलने का काम बीजेपी कर रही है। नड्डा ने अपने भाषण में नागरिकता संशोधन कानून और दूसरे देशों में पीड़ित अल्पसंख्यकों के हालातों का जिक्र किया। पीएम के दौरे के विरोध का ऐलान बता दें कि नड्डा की यह रैली उस वक्त हुई है, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी भी खुद 10 जनवरी को असम के दौरे पर जाने वाले हैं। एआरसी और सीएए के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अशांत रहे असम में पीएम के इस दौरे का विरोध करने का ऐलान किया गया है। असम के प्रमुख राजनीतिक दल ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि अगर पीएम खेलो इंडिया के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए असम आते हैं तो उनके दौरे का व्यापक विरोध किया जाएगा। बता दें कि पीएम मोदी 10 जनवरी को असम में खेलो इंडिया गेम्स का उद्घाटन करने के लिए जाने वाले हैं।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में स्थित सिखों के पवित्र स्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर शुक्रवार को हमले के बाद पाकिस्तान का एक और झूठ सामने आया है। अकसर उल्टे-सीधे बयान देने के लिए चर्चित पाकिस्तान के विज्ञान एवं टेक्नॉलजी मंत्री फवाद चौधरी के ट्वीट के बाद सवाल उठ रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के ट्वीट का जवाब देते हुए पाक मंत्री ने एक बार फिर झूठ बोला। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान का हवाला देते हुए चौधरी ने ट्वीट किया, जिसके बाद वह घिर गए। कैप्टन अमरिंदर का इमरान खान को ट्वीट ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हुई पत्थरबाजी और सिखों को धमकी देने के मामले में भारत में काफी नाराजगी है। इस बीच पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान की इमरान खान सरकार से सिख श्रद्धालुओं को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग करते हुए ट्वीट किया, 'मैं इमरान खान से तुरंत दखल देने की अपील करता हूं। वह ननकाना साहिब गुरुद्वारे में फंसे श्रद्धालुओं का रेस्क्यू करवाते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराएं। गुस्साई भीड़ से घिरे ऐतिहासिक गुरुद्वारे को बचाया जाए।' ट्वीट के जवाब में फवाद ने फेक न्यूज का किया जिक्र पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने इस ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, 'राष्ट्रपति बराक ओबामा ने काफी पहले 2013 में भविष्यवाणी की थी कि भविष्य की सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि फेक न्यूज और आधी सच्चाई पर आधारित जानकारी के प्रसार से कैसे निपटा जाए, उनको भविष्य की जानकारी थी। ननकाना साहिब गुरुद्वारा शांति, सद्भाव और आशीर्वाद का प्रतीक है और रहेगा।' ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला पाकिस्तान के ननकाना साहिब में शुक्रवार को सैकड़ों की भीड़ ने सिखों के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर पत्थरबाजी की। दोपहर से ही भीड़ ने गुरुद्वारे को घेर लिया। बढ़ते दबाव के बाद पाकिस्‍तान की पुलिस ने देर रात सिख लड़की जगजीत कौर के अपहरण के आरोपी एहसान को छोड़ दिया। आरोपी के छोड़े जाने के बाद भीड़ गुरुद्वारे से हट गई। घटना से जुड़े विडियो में एक कट्टरपंथी सिखों को ननकाना साहिब से भगाने और इस पवित्र शहर का नाम बदलकर गुलाम अली मुस्तफा करने की धमकी देते दिख रहा है। पाक ने कहा- गुरुद्वारा बिल्कुल सुरक्षित पाकिस्तान ने शुक्रवार को उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि गुरुद्वारा ननकाना साहिब को खास समूह के लोगों ने अपवित्र किया। गुरुद्वारा जन्म स्थान के नाम से मशहूर गुरुद्वारा ननकाना साहिब सिख धर्म के लोगों के लिए बेहद पवित्र स्थल है क्योंकि यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने मध्यरात्रि में एक बयान में कहा कि पंजाब प्रांत के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है कि वहां दो मुस्लिम समूहों के बीच किसी छोटी घटना को लेकर झड़प हुई थी, जिसमें तत्काल दखल देते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुद्वारा बिल्कुल सुरक्षित है और इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। बयान में कहा गया कि पाकिस्तान सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और खास तौर पर अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। चंद्रयान-2 पर भी ट्वीट कर घिरे थे चौधरी इससे पहले भारत के चंद्रयान-2 मिशन के लैंडर विक्रम के चांद की सतह के करीब आकर खो जाने पर फवाद चौधरी ने तंज भरे कई ट्वीट किए थे। फवाद के इन ट्वीट पर उन्‍हें भारत ही नहीं पाकिस्‍तान से भी करारा जवाब मिला था। एक ट्वीट में फवाद चौधरी ने लिखा, 'जो काम आता नहीं, पंगा नहीं लेते ना....डियर इंडिया।' फवाद चौधरी ने एक भारतीय ट्वीट पर रिप्‍लाई करते हुए लिखा, 'सो जा भाई चंद्रमा की बजाय मुंबई में उतर गया खिलौना।' पाकिस्‍तानी मंत्री फवाद चौधरी के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर कॉमेंट की बाढ़ सी आ गई थी।
लॉस एंजिलिस इराक में ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नई दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश रची थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा, ‘सुलेमानी ने अपने पागलपन में निर्दोष लोगों की हत्या की, नई दिल्ली और लंदन में आतंकी हमलों की साजिश रची।’ सुलेमानी को मारने के लिए मिसाइल हमले का आदेश देने के संबंध में उन्होंने कहा, ‘आज हम सुलेमानी के अत्याचारों के शिकार हुए लोगों को याद करते हैं और सम्मानित करते हैं और हमें यह जानकर सुकून मिलता है कि उनका आतंकराज अब खत्म हो गया है।’ हालांकि भारत में किस आतंकी साजिश का वह जिक्र कर रहे थे, इसके बारे में उन्होंने नहीं बताया। माना जा रहा है कि वह 2012 में भारत में इजरायली राजनयिक की पत्नी की कार पर हुए बम हमले का उल्लेख कर रहे थे। 13 फरवरी, 2012 को कार में चुंबक के सहारे बम लगाकर किए गए हमले में ताल येहोशुआ कोरेन घायल हो गई थीं और उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी। इसके अलावा उनका चालक तथा पास खड़े दो और लोग भी घायल हो गए थे। नेतन्याहू ने जताई थी ईरान का हाथ होने की आशंका इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि हमले के पीछे ईरान का हाथ था और इसी तकनीक का उपयोग कर जॉर्जिया में भी हमले की कोशिश की गई थी। बता दें कि अब तक यह मामला सुलझ नहीं सका है और भारत की ओर से इस मामले में ईरान का हाथ होने की बात नहीं कही गई है। दिल्ली में हमले की साजिश पर पत्रकार को किया था अरेस्ट 2012 की खबरों के मुताबिक ईरान ने वह हमला तेहरान में उसके परमाणु वैज्ञानिक मुस्तफा अहमदी रोशन की हत्या के जवाब में किया था। परमाणु वैज्ञानिक की हत्या कथित रूप से इजरायल ने की थी। भारत के एक पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी को उसी साल छह मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उस पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। उसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत रखा गया। उसे उसी साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने विदेश नहीं जाने की शर्त पर जमानत दे दी थी।
नई दिल्ली, 03 जनवरी 2020, अमेरिका के द्वारा एयरस्ट्राइक में ईरान के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराए जाने के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका ने इराक-ईरान बॉर्डर के पास बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ये हमला किया था. अब बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने सभी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने के लिए कह दिया है. दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने ट्वीट कर अमेरिका को चेतावनी दी है. तुरंत इराक छोड़ दें अमेरिकी नागरिक: दूतावास बगदाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने बिगड़ते हालात को देखते हुए शुक्रवार दोपहर को एक प्रेस रिलीज़ जारी की. इसमें यहां आसपास मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों से वापस अमेरिका लौटने की सलाह दी है. प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि सभी नागरिक तुरंत यहां से निकलें, फिर चाहे वो अमेरिका लौटना हो या किसी और देश जाना हो. अमेरिका ने जो एयरस्ट्राइक की है, वह बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुई है. जहां पर जनरल कासिम सुलेमानी और उनके साथी गाड़ी से जा रहे थे, तभी ड्रोन से गाड़ियों को उड़ा दिया गया. हालांकि, एयरपोर्ट पर अभी भी फ्लाइट की सुविधा शुरू ही है. अमेरिकी दूतावास द्वारा सभी नागरिकों को तीन बातों का ध्यान रखने में कहा है... - इराक ट्रैवल ना करें. - अमेरिकी दूतावास के पास ना जाएं. - हर छोटी-बड़ी खबरों पर ध्यान जरूर रखें. ईरान अमेरिका के इस अपराध का बदला लेगा: रुहानी अमेरिका की इस एयरस्ट्राइक के बाद ईरान गुस्सा में है और लगातार अमेरिका से बदला लेने की बात कह रहा है. ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने ट्वीट कर लिखा है कि जनरल कासिम सुलेमानी ने उग्रवाद के खिलाफ जो लड़ाई का झंडा उठाया था, उसे बुलंद ही रखा जाएगा. अमेरिका के द्वारा जो ज्यादतियां की जा रही हैं, उसका बदला जरूर लिया जाएगा. आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी फोर्स ने बगदाद एयरपोर्ट पर हमला किया. इस हमले में ईरान की फोर्स के बड़े कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी समेत कुछ अन्य अफसरों की मौत हो गई. तभी से मिडिल ईस्ट के हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. आमने-सामने आए ईरान और अमेरिका अपने कमांडर की मौत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयोतुल्लाह खमनेई ने सुलेमानी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों से बदला लेने का ऐलान कर दिया है. दूसरी ओर US के रक्षा विभाग पेंटागन ने बयान में कहा कि ये हमला विदेशों में रह रहे अमेरिका नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों को रोकने के लिए किया गया है.
बगदाद अमेरिका ने एक अप्रत्‍याशित घटनाक्रम में गुरुवार देर रात इराक की राजधानी बगदाद में हवाई हमला करके ईरान के अत्‍यंत प्रशिक्षित कुद्स फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को मार डाला है। बताया जा रहा है कि सुलेमानी का काफिला बगदाद एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था, इसी दौरान अमेरिका ने हवाई हमला कर दिया। इस हमले में ईरान समर्थित पॉप्‍युलर मोबलाइजेशन फोर्स के डेप्‍युटी कमांडर अबू मेहदी अल मुहांदिस के भी मारे जाने की खबर है। ईरान ने सुलेमानी के मौत की पुष्टि की ईरान के सरकारी टीवी ने सुलेमानी के मारे जाने की पुष्टि की है। बता दें कि सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। सुलेमानी पर सीरिया में अपनी जड़ें जमाने और इजरायल में रॉकेट अटैक कराने का आरोप था। अमेरिका को लंबे समय से सुलेमानी की तलाश थी। पेंटागन ने भी की मौत की पुष्टि पेंटागन ने भी सुलेमानी की मौत की पुष्टि कर दी है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सीनियर कमांडर सुलेमानी को मार डाला है। ट्रंप का बिना टेक्स्ट का ट्वीट इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सुलेमानी के मारे जाने के ठीक बाद अमेरिका का झंडा ट्वीट किया है। समझा जा रहा है कि ट्रंप ने इसके जरिए संदेश देने की कोशिश की है। बिना टेक्स्ट के किए गए इस ट्वीट में अमेरिका का झंडा दिख रहा है। पिछले साल से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने ईरान पर कई पाबंदियां लगा रखी हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका इस अमेरिकी हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है। अमेरिका ने यह हमला ऐसे समय पर किया है जब ईरान समर्थित मिलिशिया ने बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दिया था। पिछले दिनों अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि विदेशी अभियानों के लिए जिम्मेदार ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की एक ईकाई 'कुद्स फोर्स' ने कच्चे तेल के माध्यम से असद और उनके लेबनानी सहयोगी हिजबुल्ला का समर्थन किया था। एयरपोर्ट पर ही मारे गए सुलेमानी सुलेमानी ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी सेना की एक ताकतवर विंग 'कदस फोर्स' के मुखिया थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि अल मुहांदिस एक काफिले के साथ सुलेमानी को रिसीव करने पहुंचे थे। बताया जाता है कि सुलेमानी का विमान सीरिया या लेबनान से यहां पहुंचा था। जैसे ही सुलेमानी विमान से उतरे और मुहानदिस उनसे मिल ही रहे थे कि अमेरिका ने मिसाइल हमला कर दिया और ये सभी मारे गए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुलेमानी का शव उनकी अंगूठी से पहचाना जा सका। कई बार मरने की फैली थी अफवाह बता दें कि सुलेमानी के कई बार मरने की अफवाह फैली थी। 2006 में उत्तरपश्चिमी ईरान में एक विमान दुर्घटना में उनके मारे जाने की अफवाह आई। इसके बाद 2012 में दमिश्क में एक हवाई हमले में सुलेमानी की मरने की अफवाह फैली थी। हाल में नवंबर 2015 में सीरिया में युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल होने या फिर मारे जाने की अफवाह फैली थी। सुलेमानी ने दी थी ट्रंप को चेतावनी सुलेमानी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का विरोधी माना जाता था। उन्होंने कई मौकों पर अमेरिका को चेतावनी दी थी। बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले के बाद ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी। नए साल के पहले दिन ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि ईरान को नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप की इस धमकी के बाद अमेरिका ने यह कार्रवाई की है। इस घटना के बाद पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में और तल्खी आनी तय मानी जा रही है।
जोधपुर केन्द्रीय गृहमंत्री एवं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को राजस्थान के जोधपुर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया। रैली के दौरान शाह ने कहा कि सीएए पर कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए दुष्प्रचार किया, इसलिए बीजेपी को कानून के समर्थन में जनजागरण अभियान की शुरुआत करनी पड़ी। राहुल गांधी पर हमला करते हुए शाह ने कहा कि अगर वह CAA पर चर्चा करना चाहते हैं तो कहीं भी आ जाएं और अगर इस कानून को नहीं पढ़ा है तो वह इटैलियन में अनुवाद कराकर भेज देंगे। गृह मंत्री ने कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत को लेकर भी कांग्रेस और सीएम गहलोत पर हमला बोला। रैली में शाह ने लोगों से बीजेपी के द्वारा सीएए का समर्थन जताने के लिए जारी किए गए टोल-फ्री नंबर पर मिस्ट कॉल भी कराई। इस दौरान शाह ने कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत को लेकर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत पर भी निशाना साधा। साथ ही शाह ने कांग्रेस पर सावरकर के अपमान का आरोप भी लगाया। 'कोटा में बच्चे रोज मर रहे हैं चिंता कीजिए' शाह ने कहा, 'गहलोत साहब, हमने तो आपके घोषणा पत्र से एक पॉइंट उठाकर उसपर अमल कर लिया, और आप उसका विरोध कर रहे हैं। ये सब बाद में करिएगा, कोटा में जो बच्चे हर रोज मर रहे हैं उसकी चिंता कर लीजिए, माताओं की हाय लग रही है।' कांग्रेस ने सावरकर का किया अपमान' शाह ने रैली के दौरान कांग्रेस पर स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के अपमान का आरोप लगाते हुए हमला बोला। शाह ने कहा, 'वीर सावरकर जैसे इस देश के महान सपूत और बलिदानी का भी कांग्रेस पार्टी विरोध कर रही है। कांग्रेसियों शर्म करो-शर्म करो। वोट बैंक के लालच की भी हद होती है। वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने वीर सावरकर जैसे महापुरुष का अपमान किया है।' नागरिकता देने का कानून है सीएए शाह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि आज कांग्रेस, ममता दीदी, एसपी, बीएसपी, केजरीवाल और कम्युनिस्ट सारे लोग सीएए का विरोध कर रहे हैं। मैं इन सारी पार्टियों को चुनौती देता हूं कि कहीं पर भी इस कानून पर चर्चा करने के लिए आ जाओ। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध, ईसाई लोग, जो धर्म के आधार पर प्रताड़ित होकर आए हैं, उन्हें नागरिकता देने का कानून है। विपक्षी इसके खिलाफ एकजुट हो जाएं, लेकिन बीजेपी इस फैसले पर एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। शाह ने पूछा- क्या नेहरू थे सांप्रदायिक? शाह ने कहा, 'शरणार्थियों पर जो प्रताड़ना हुई है, इससे बड़ा मानवाधिकार का उल्लंघन कभी नहीं हुआ। वहां ये शरणार्थी भाई करोड़पति थे और आज उनके पास रहने की जगह नहीं है। हम इस कानून के द्वारा उन्हें राहत दे रहे हैं। जो शरणार्थी अत्याचार झेलकर भारत आए हैं, जिनकी संपत्ति, रोजगार छीन लिया गया। जिसका परिवार छिन गया, और उनके लिए विपक्षी कहते हैं कि इन्हें नागरिकता नहीं दी जाए। उन देशों से जो शरणार्थी आए हैं वो भारत के ही हैं।' उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को अपनाने का वादा महात्मा गांधीजी का भी था, क्या वह सांप्रदायिक थे? जवाहरलाल नेहरू ने भी संसद में कहा था कि जो हिन्दू या सिख आए हैं , हम उन्हें नागरिकता देंगे, क्या वह सांप्रदायिक थे? सरदार पटेल, मौलाना आजाद, राजेंद्र प्रसाद जैसे लोगों ने भी यही बात कही थी। टोल फ्री नंबर पर मिस्ट कॉल की अपील रैली के दौरान अमित शाह ने लोगों से मोबाइल निकालकर बीजेपी के द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन जताने के लिए जारी किए गए टोल-फ्री नंबर 8866288662 पर मिस कॉल करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि राहुल बाबा, ममता दीदी, केजरीवाल की टोली को जवाब देने के लिए अपने मोबाइल से 88662-88662 पर मिस्ट कॉल करके नरेन्द्र मोदी को नागरिकता संशोधन कानून के लिए अपना समर्थन दीजिए। शाह ने आगे कहा कि ये नरेन्द्र मोदी का शासन है, किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। बेशुमार अत्याचार के बाद जो यहां आए हैं, मोदी सरकार आप सभी को नागरिकता देकर भारतीय होने का गौरव प्रदान करने जा रही है। धर्म के आधार पर कानून नहीं करता भेदभाव: शाह शाह ने कहा कि विपक्ष के लोग देश को गुमराह कर रहे हैं कि इससे भारत के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी, लेकिन मैं आप सबको आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये क़ानून नागरिकता देने का है, किसी की नागरिकता छीनने का नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गुमराह कर रही है कि ये कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करेगा। हमने किसी भी धर्म को बाकी नहीं रखा है, इन 3 देशों जो अल्पसंख्यक हैं, चाहे वे हिन्दू हों, सिख हों, जैन, बौद्ध, पारसी या ईसाई हों इन सभी को हम नागरिकता दे रहे हैं।
नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता (Ministry of External Affairs Spokesman) रवीश कुमार ने गुरुवार को CAA-NRC, कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान-सऊदी अरब (Pakistan-Saudi Arab) समझौते की रिपोर्ट्स और भारत-जापान समिट (India-Japan summit) सहित कई मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने कश्मीर (Kashmir) का मामला इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में उठाने की रिपोर्ट्स को पूरी तरह से कयासों पर आधारित बताया. साथ ही उन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) को मुद्दों पर दुनिया के विभिन्न देशों को भारतीय पक्ष के बारे में जानकारी देने की बात भी कही. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की जापान के साथ समिट की तारीख निश्चित करने के लिए लगातार बातचीत जारी है और उन्हें आशा है कि वे जल्द ही समिट की तारीख पर फैसला कर लेंगे. 'भारत-जापान समिट की तारीख जल्द ही कर लेंगे निश्चित' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भारत-जापान समिट (India-Japan summit) के बारे में कहा है कि हम जापानी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं, हम आशा करते हैं कि बहुत जल्द ही हम उनके साथ इसकी तारीख निश्चित कर लेंगे. दूतावासों से मेजबान देशों को हमारे विचार पहुंचाने को कहा' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने CAA-NRC के मुद्दे पर कहा, "हम दुनिया के सभी भौगोलिक हिस्सों में देशों तक पहुंचे हैं. हमने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) के बारे में अपने दूतावासों को लिखा है और उनके मेजबान देशों से इस होने वाली प्रक्रिया के बारे में हमारे विचार साझा करने को कहा है." MEA प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कानून संविधान के आधारभूत ढांचे से कोई छेड़छाड़ नहीं करता है. उन्होंने कहा देशों से यह भी कहा गया है कि CAA किसी समुदाय के लोगों के लिए भारत में नागरिकता पाने के अवसर नहीं कम करेगा और न ही किसी की नागरिकता छीनेगा.'कश्मीर पर सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते की बात कयासों पर आधारित' सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच समझौते की रिपोर्टों के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ये रिपोर्ट्स पूरी तरह से अटकलों पर आधारित हैं. इनके बारे में रवीश कुमार ने कहा कि भारत से संबंधित मामलों पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की किसी भी बैठक के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है. दरअसल पहले आई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation- OIC) में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने का समझौता हुआ है.
हैं तुमकुर पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के तुमकुर में गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कांग्रेस और विपक्ष के आंदोलन को लेकर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और उसके साथी दल देश की संसद के खिलाफ ही मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही हमारी संसद ने नागरिकता संशोधन कानून को मंजूरी देने का ऐतिहासिक काम किया है। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दल देश में संसद के खिलाफ आंदोलन करने में जुटे हैं। पीएम मोदी ने कहा, 'ये लोग पाकिस्तान से आए दलितों, पिछड़ों और प्रताड़ितों के खिलाफ ही आंदोलन कर रहे हैं। पाकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ था और तब से ही दूसरे धर्मों के लोगों के साथ अत्याचार शुरू हो गया था। समय के साथ पाकिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाइयों पर लगातार अत्याचार बढ़ता रहा है।' पीएम मोदी ने कहा कि लाखों लोगों को अपने घर छोड़कर भारत आना पड़ा है। पाकिस्तान ने इन लोगों पर जुल्म किया, लेकिन कांग्रेस और बाकी विपक्षी दल पाक के खिलाफ नहीं, बल्कि पीड़ितों के खिलाफ ही आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'शरण लेने आए लोगों के खिलाफ जुलूस निकाले जा रहे हैं, लेकिन जिस पाकिस्तान ने वहां के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए उसे लेकर आखिर मुंह पर ताले क्यों लगे हुए हैं।' पीएम मोदी ने कहा, 'हमारा यह फर्ज बनता है कि पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की मदद करें। हमारा फर्ज है कि पाक से आए हिंदुओं और उनमें भी ज्यादातर दलित लोगों को हम उनके नसीब पर नहीं छोड़ सकते।' हमारा फर्ज है कि पीड़ितों की मदद करें पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान से आए सिख, जैन और ईसाई परिवारों की मदद करें। उन्होंने कहा कि जो लोग आज संसद के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, उनसे कहना चाहता हूं कि आज पाक को बेनकाब करने की जरूरत है। आंदोलन करना ही है तो आपको पाकिस्तान के पिछले 70 सालों के कारनामों के खिलाफ करना चाहिए। सिद्ध गंगा मठ के संत शिवकुमार को दी श्रद्धांजलि इससे पहले मोदी ने श्री सिद्धगंगा मठ में आयोजित कार्यक्रम में संत शिवकुमार स्वामी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि संतों के दिखाए मार्ग के कारण ही हमने 21वीं सदी के तीसरे दशक में हमने उम्मीद और उत्साह के साथ कदम रखे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को मालूम है कि बीते दशक की शुरुआत किस तरह के माहौल में हुई थी और अब क्या स्थिति है।
नई दिल्ली नए सेना प्रमुख बने जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने कहा है कि तीनों सेनाएं देश की रक्षा में हर वक्त तैयार हैं और दामन पर कभी आंच नहीं आने देंगे। मंगलवार को ही नए सेना प्रमुख का कार्यभार संभालने वाले जनरल नरवाणे ने नैशनल वॉर मेमोरियल पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए यह बात कही। देशवासियों को नए साल की बधाई देते हुए नए आर्मी चीफ ने कहा कि मुझे यह जिम्मेदारी संभालने पर गर्व है। उन्होंने कहा, 'यह कितना अहम प्रभार है, इसका भी मुझे अहसास है। मैं वाहेगुरु से कामना करता हूं कि इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए मुझे साहस, शक्ति और बुद्धिमत्ता दे।' जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने कहा कि आज से नए दशक की शुरुआत हो रही है और उम्मीद है कि यह भारत की तरक्की का दशक होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की तरक्की के लिए सीमाओं की सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैं देशवासियों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हमारी तीनों सेनाएं हर वक्त किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं और देश को महफूज रखने का भरोसा है। उन्होंने कहा कि थल सेना का हर जवान चौबीसों घंटे देश की सेवा में तत्पर है। अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता हर वक्त किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना है। चीन की चुनौतियों पर भी बोले नए आर्मी चीफ उन्होंने कहा कि देश के उत्तर और उत्तर पूर्व इलाके में सुरक्षा को पुख्ता करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा मानवाधिकार के मसले पर भी पूरा ध्यान है। सेना के सामने चुनौतियों और पीओके को हासिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हर खतरे पर नजर रखते हैं। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ सीमा के विवाद को सुलझाने की जरूरत है। हम सीमाओं पर शांति और सुरक्षा को कायम रखने में सफल रहे हैं।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों को सोशल मीडिया पर नए साल के मौके पर शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर पीएम मोदी ने एक समर्थक के ट्वीट को रीट्वीट भी किया जिसमें 2019 में पीएम मोदी और देश की उपलब्धियों को लेकर एक विडियो बनाया गया था। पीएम मोदी ने समर्थक के विडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा कि अगले साल में देश नई उपलब्धियों को छूएगा। विडियो को पीएम मोदी ने भी किया रीट्वीट NaMo 2.0 अकाउंट से साल 2019 में पीएम मोदी और भारत के लिए जो महत्वपूर्ण पल रहे, उन्हें जोड़कर एक विडियो बनाया गया। इस अकाउंट के करीब 6 हजार फॉलोअर्स हैं। इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, 'बहुत सुंदर समायोजन! 2019 में हमने जितनी प्रगति की उनमें से काफी कुछ कवर किया गया है। उम्मीद करता हूं कि 2020 में भी जनता की शक्ति और प्रयासों से हम भारत को बदलेंगे और 130 करोड़ देशवासियों को और समृद्ध बना सकेंगे।' देश के लिए समृद्धि की कामना, नए साल की बधाई पीएम मोदी ने एक और ट्वीट भी किया जिसमें उन्होंने देशवासियों को नए साल की बधाई दी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर बधाई देने के साथ ही देश के लिए सौभाग्य और समृद्धि की कामना की। पीएम मोदी के साथ ही कैबिनेट के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों, विपक्षी दलों के नेताओं ने भी देशवासियों को नए साल की बधाई दी है।
की नई दिल्ली देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद जनरल बिपिन रावत ने कहा कि हमारा फोकस तीनों सेनाओं को मिलाकर तीन नहीं बल्कि 5 या फिर 7 करने पर होगा। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाएं 1+1+1 मिलकर 3 नहीं बल्कि 5 या 7 होंगी। पीओके को लेकर सवाल पूछे जाने पर जनरल रावत ने कहा कि जो भी प्लान बनाए जाते हैं, वह कभी पब्लिक में साझा नहीं किए जाते। राजनीतिक झुकाव के आरोप पर जवाब देते हुए जनरल रावत ने कहा कि सेना सरकार के आदेशों पर काम करती है। पने काम को लेकर उन्होंने कहा कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच समन्वय स्थापित करना है। ये तीनों ही फोर्स टीम वर्क के तहत काम करेंगी और उस पर नजर रखने का काम सीडीएस करेगा। उन्होंने कहा कि हमें तीनों सेनाओं के जोड़ को तीन नहीं बनाना है बल्कि 5 या 7 करना है। इससे पहले जनरल बिपिन रावत ने गार्ड ऑफ ऑनर लेने के बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों से भी मुलाकात की। शहीदों को नमन के बाद अधिकारियों से मिले रावत जनरल बिपिन रावत ने अपने कार्यकाल के पहले दिन की शुरुआत दिल्ली स्थित नैशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ की। उन्होंने आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवाणे, नेवी चीफ कर्मबीर सिंह और एयर चीफ मार्शल राकेश सिंह भदौरिया समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। सीडीएस ने रक्षा मंत्री से की मुलाकात देश के पहले सीडीएस का कार्यभार संभालने के बाद जनरल बिपिन रावत ने रक्ष मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। बता दें कि जनरल रावत 31 दिसंबर को आर्मी चीफ से रिटायर हुए थे। विपक्ष के विरोध पर बोले, हम राजनीति से दूर रहते हैं उन्होंने कहा कि हमारा फोकस सेनाओं के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, साझा सैन्य अभ्यास पर रहेगा। अपनी नियुक्ति पर राजनीतिक विरोध को लेकर रावत ने कहा कि हम राजनीति से दूर रहते हैं। विपक्षी दलों की ओर से राजनीतिक झुकाव के आरोपों को लेकर रावत ने कहा, 'जो भी सरकार होती है, हम उसके आदेशों पर काम करते हैं।'
नई दिल्ली देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के तौर पर कार्यभार संभालने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जनरल बिपिन रावत को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि सीडीएस पर देश की तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी। पीएम मोदी ने कहा कि सीडीएस पर भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण का जिम्मा होगा। उन पर 1.3 अरब भारतीयों की उम्मीदों का बोझ है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, '15 अगस्त, 2019 को लाल किले के प्राचीर से मैंने देश में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का ऐलान किया था। इस संस्थान पर सेनाओं के आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी होगी।' पीएम मोदी ने लिखा, 'नए साल और नए दशक की शुरुआत के मौके पर भारत को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिला है। मैं जनरल बिपिन रावत को शुभकामनाएं देता हूं। वह पूरे जज्बे के साथ काम करने वाले एक बेहतरीन अधिकारी रहे हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि पहले सीडीएस का कार्यभार संभालने के मौके पर मैं देश के लिए शहीद हुए सैनिकों को नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि यह करगिल के शहीदों को नमन करने का मौका है। इस युद्ध के बाद ही उस बदलाव की नींव पड़ी थी, जो आज अमल में लाया गया है। पीएम मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति की अहमियत बताते हुए कहा कि इससे नई चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। उन्होंने कहा, 'यह एक बड़ा सुधार है। इससे भारत को युद्ध क्षेत्र में सामने आ रही नई चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।'
नई दिल्ली नए आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने पद संभालते ही पड़ोसी देश पाकिस्तान को साफ-साफ कह दिया है कि यदि वह राज्य प्रायोजित आतंकवाद को नहीं रोकता है तो हमारे पास ऐहतियातन आतंकी अड्डों पर हमला करने का अधिकार है। मंगलवार को जनरल बिपिन रावत के उत्तराधिकारी के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान के उकसावे या उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के किसी भी कृत्य का जवाब देने के लिए कई सारे विकल्प हैं। पाकिस्तान आतंकवाद के जरिए अधिक समय तक छद्म युद्ध नहीं चला सकता है। सेना प्रमुख ने कहा, 'हमने प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्पित दंडात्मक जवाब की रणनीति बनाई है। पाकिस्तानी सेना की राज्य प्रायोजित आतंकवाद से ध्यान हटाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। आतंकवादियों के सफाए और आतंकी नेटवर्क की तबाही के कारण पाकिस्तानी सेना के छद्म युद्ध की मंशा को झटका लगा है। ना की ऑपरेशनल तैयारियों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मुख्य फोकस आर्मी को किसी क्षण किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार करना होगा। 37 वर्षों की सेवा में जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में अत्यधिक सक्रिय आतंकवाद-रोधी वातावरण में काम कर चुके आर्मी चीफ ने कहा, 'जहां तक हमारे पड़ोसी की बात है, वह आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी के रूप में इस्तेमाल करते हुए हमारे खिलाफ छद्म युद्ध चला रहा है। फिर इससे इनकार करता है। हालांकि, यह अधिक दिनों तक नहीं चल सकता। आप सभी लोगों को हर समय मूर्ख नहीं बना सकते हैं।' आतंकवाद वैश्विक समस्या जनरल मुकुंद नरवणे ने कहा, 'आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है। भारत सालों से आतंकवाद प्रभावित रहा है। अब पूरी दुनिया और कई देश आतंकवाद से पीड़ित हैं और उन्हें इस खतरे का अहसास हो रहा है।' 'घुसपैठ के लिए सीजफायर, हम तैयार' सेना प्रमुख ने सीजफायर उल्लंघन को लेकर कहा, 'सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। हमें पता है कि दूसरी तरफ लॉन्च पैड्स पर आतंकवादी हैं, जो सीमा पार करने की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन हम उनसे निपटने को पूरी तरह तैयार हैं।' 'ऑपरेशनल तैयारी पर जोर' आर्मी चीफ ने ऑपरेशनल तैयारी का स्तर ऊंचा बनाए रखने को अपना लक्ष्य बताते हुए कहा, 'खासतौर से पिछले कुछ वर्षों में मेरे अनुभव के कारण मेरा ऐसा विचार बना है कि ट्रेनिंग के साथ-साथ ऑपरेशनल पार्ट भी महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि ऑपरेशनल तैयारियों के उच्च मानकों को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।' चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा 'हम समूचे सैन्य तंत्र में जो महत्वपूर्ण सुधार लाना चाहते हैं, सीडीएस निस्संदेह उन बदलावों की राह तैयार करेंगे।' उत्तरी सीमा पर ध्यान' हमने प्राथमिकताओं को फिर से संतुलित करने के तहत पश्चिमी सीमा से उत्तरी सीमा पर ध्यान केंद्रित किया है। हम उत्तरी सीमा के पास क्षमता निर्माण में सुधार करना जारी रखेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर हम तैयार रहें। 'अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने का फायदा' मुकुंद नरवणे ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किए जाने को लेकर कहा, 'अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद जमीन पर स्थिति में निश्चित सुधार है। हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। यह जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए अच्छा है। यह क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए एक कदम आगे बढ़ना है।'
नई दिल्ली: टेरर फंडिंग (Terror Funding) के खिलाफ भारत (India) की सुरक्षा एजेंसियों लगातार कार्रवाई कर रही हैं. टेरर फंडिंग से जुड़े कई मामलों में लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया है. इन सबके बीच खुफियों एजेंसी के सूत्रों से खबर मिल रही है कि केरल के कुछ जेहादी गुटों को टर्की और दुबई से फंडिंग हो रही है. बताया जा रहा है कि जेहादी संगठन से जुड़े एक शख्स ने टेरर फंडिंग कुछ महीने पहले ही दुबई का दौरा किया था. इस दौरान उस शख्स को 40 लाख रुपये की मदद की पेशकश की गई थी. बताया जा रहा है कि बीते एक अक्टूबर के दिन एक और जेहादी संगठन ने कतर में टर्की देश के कुछ लोगों से मुलाकात की थी. जिसमें केरल के जेहादी गुटों को पैसे की मदद का वादा किया गया था. वहीं, टेरर फंडिंग के इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद गल्फ देशों से भारत के जेहादी गुटों को हो रही फंडिंग पर गृह मंत्रालय ने खुफिया एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने पूछा है कि पिछले कुछ महीनों में किन-किन देशों से अब तक कितनी फंडिंग की गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए. सूत्रों की मानें तो, जिन जेहादी गुटों को फंडिंग हुई है, उनमें से कुछ नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी शामिल रहे हैं.
नई दिल्ली सेनाध्यक्ष बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) होंगे। केंद्र सरकार ने रविवार को ही CDS पोस्ट के लिए उम्र की सीमा बढ़ाई थी। बता दें कि रावत 31 दिसंबर को सेनाध्यक्ष पद से रिटायर हो रहे हैं। रावत की जगह मनोज मुकुंद नरवणे नए आर्मी चीफ होंगे। बता दें कि सीडीएस का पद ‘फोर स्टार’ जनरल के समकक्ष होगा और सभी सेनाओं के प्रमुखों में सबसे ऊपर होगा। नियमों में किया गया था संशोधन गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने सेना नियमों, 1954 में कार्यकाल और सेवा के नियमों में संशोधन किया है। मंत्रालय ने 28 दिसंबर की अपनी अधिसूचना में कहा है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) या ट्राई-सर्विसेज प्रमुख 65 साल की आयु तक सेवा दे सकेंगे। इसमें कहा गया, ‘बशर्ते की केंद्र सरकार अगर जरूरी समझे तो जनहित में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की सेवा को विस्तार दे सकती है।’ जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख पद से 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होंगे। मौजूदा नियमों के अनुसार, तीन सेवाओं के प्रमुख 62 साल की आयु तक या तीन साल तक सेवा दे सकते हैं। कैबिनेट की बैठक में पद और चार्टर को मिली थी मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 दिसंबर को CDS पोस्ट और इसके चार्टर एवं ड्यूटीज को मंजूरी दे दी थी। खास बात यह है कि सीडीएस, पद छोड़ने के बाद किसी भी सरकारी पद को ग्रहण करने के पात्र नहीं होंगे। करगिल युद्ध के बाद दिया गया था सुझाव CDS थलसेना, वायुसेना और नौसेना के एकीकृत सैन्य सलाहकार होगा। 1999 में गठित की गई करगिल सुरक्षा समिति ने इस संबंध में सुझाव दिया था। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का मकसद भारत के सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को ऐतिहासिक सैन्य सुधार की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत की तीनों सेना के लिए एक प्रमुख होगा, जिसे CDS कहा जाएगा। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया जो CDS की नियुक्ति के तौर-तरीकों और उसकी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने का काम किया।
नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2019,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में ट्विटर कैंपेन की शुरुआत की है. #IndiaSupportsCAA हैशटैग से पीएम मोदी ने कैंपेन की शुरुआत करते हुए लिखा, 'भारत सीएए का समर्थन करता है, क्योंकि सीएए सताए गए शरणार्थियों को नागरिकता देने के बारे में है. यह किसी की नागरिकता लेने के बारे में नहीं है. नमो ऐप पर सीएए से जुड़े कई दस्तावेज, वीडियो और कंटेंट हैं. आप इसके समर्थन में अभियान चलाएं' प्रधानमंत्री ने सदगुरु का एक वीडियो भी शेयर किया और लिखा कि आप सदगुरु से CAA से जुड़े विभिन्न पहलुओं को बारे में विस्तार से सुनें. पीएम मोदी ने कहा कि सदगुरु ने इसमें ऐतिहासिक संदर्भों, भाईचारे की हमारी संस्कृति पर शानदार ढंग से प्रकाश डालता है. उन्होंने निहित स्वार्थी समूहों द्वारा गलत सूचना फैलाए जाने के बारे में भी बताया है. हिंसा करने वालों का रास्ता कितना सही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ हिंसा करने वालों से कह चुके हैं कि ऐसे लोगों को खुद से सवाल पूछना चाहिए कि क्या उनका रास्ता सही है. 25 दिसंबर को लखनऊ में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, "सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शन में जिस सार्वजनिक संपत्ति को उन्होंने तोड़ा, क्या वह उनके परिवार के काम नहीं आती? इस तरह अफवाहों पर हिंसा करने से उनका खुद का ही नुकसान है. जो इस प्रकार की हिंसा कर रहे हैं, उनको खुद से पूछना चाहिए कि क्या उनका रास्ता सही है." मोदी ने कहा, "ऐसे लोग जो लंबे समय से नागरिकता न मिलने के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे थे. उन्हें नए कानून (सीएए) के तहत नागरिकता प्रदान की है. हम 2014 से ही चुनौतियों को चुनौती दे रहे हैं. मुश्किलें आती हैं, लेकिन हम चुनौतियों को चुनौती दे रहे हैं." उन्होंने कहा था कि देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं पाने का हक है, लेकिन उनका संरक्षण करना भी उनकी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भविष्य में हमारा मूल्यांकन दो बातों से होगा. एक है कि विरासत में मिली समस्याओं को हमने कैसे सुलझाया और दूसरा राष्ट्र के विकास के लिए हमने अपने प्रयासों से कितनी मजबूत नींव रखी है. हमें विरासत में अनुच्छेद 370 मिला. उसे हमने हटाया और बहुत आसानी से ऐसा कर दिखाया."
नई दिल्ली पीएम मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि देश का युवा अराजकता पसंद नहीं करता है। उन्होंने कहा कि अव्यवस्था और अस्थिरता के प्रति देश के युवा के मन में चिढ़ है। पिछले दिनों सीएए को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में छात्रों का जिक्र आने के बाद पीएम का यह संबोधन उस संदर्भ में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, 'आने वाले दशक को गति देने में वे लोग ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगे जो जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है। जो इस सदी के महत्वपूर्ण मुद्दों को समझते हुए बड़े हुए हैं। ऐसे युवाओं को आज बहुत सारे नामों से पहचाना जाता है। कुछ लोग इन्हें मिलेनियल कहते हैं तो कुछ जेन जेड या जनरेशन जेड के नाम से जानते हैं। एक बात तो लोगों के दिमाग में फिट हो गई है कि ये सोशल मीडिया जनरेशन है। हम सब अनुभव करते हैं कि हमारी यह पीढ़ी बहुत प्रतिभाशाली है। कुछ अलग करने का उसका ख्वाब रहता है।' पीएम ने कहा, 'इस पीढ़ी की अपनी सोच भी होती है। सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि इन दिनों युवा सिस्टम को पसंद करते हैं। वे सिस्टम को फॉलो करना भी पसंद करते हैं, लेकिन अगर सिस्टम कहीं ठीक ढंग से रेस्पॉन्ड न करे तो वे बेचैन भी हो जाते हैं और हिम्मत के साथ सिस्टम को सवाल भी करते हैं। मैं इसे बेहद अच्छा मानता हूं। एक बात तो तय है कि हमारे देश के युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत है। अव्यवस्था और अस्थिरता के प्रति उनके मन में चिढ़ है। वे परिवारवाद, जातिवाद, अपना-पराया, स्त्री-पुरूष जैसे भेदभाव को पसंद नहीं करते हैं।' पीएम ने कहा, 'ऐसा कई बार देखा गया है कि एयरपोर्ट पर या सिनेमा हॉल में कोई कतार तोड़ने की कोशिश करता है तो सबसे पहले युवा ही इसका विरोध करते हैं। यह एक नई प्रकार की व्यवस्था, नए प्रकार का युग है। आज भारत को इस पीढ़ी से बहुत उम्मीद है। स्वामी विवेकानंद ने भी युवाओं में ही विश्वास जताया था। इन्हीं मे से मेरे कार्यकर्ता निकलेंगे।' बता दें कि पिछले दिनों नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को लेकर देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने काफी उग्र प्रदर्शन किया था।
नई दिल्ली/श्रीनगर साल 2019 में अपनी आखिरी मन की बात में पीएम मोदी ने देश के युवाओं के जज्बे की सराहना करते हुए उनकी कोशिशों की तारीफ की। एक ओर जहां पीएम ने बिहार के भैरोगंज में एक हाई स्कूल के बच्चों द्वारा लगाए गए फ्री हेल्थ कैंप को सराहा। वहीं जम्मू-कश्मीर में युवाओं के हित में चलाए जा रहे हिमायत प्रॉजेक्ट की भी तारीफ की। पीएम ने बिहार के भैरोगंज में पूर्व छात्रों द्वारा आयोजित की गई एक एल्युमिनाई मीट का जिक्र करते हुए पूर्व छात्रों के जज्बे को सराहा। पीएम मोदी ने मन की बात के दौरान कहा कि बिहार के पश्चिम चंपारण भैरवगंज हेल्थ सेंटर में एक स्कूल के पूर्व छात्रों ने हेल्थ कैंप लगाया था। 1995 के इन छात्रों ने हेल्थ कैंप लगाया तो यहां सैकड़ों लोग इलाज कराने के लिए चले आए। पीएम ने सराहना करते हुए कहा कि यह एक बेहद अच्छा कदम है। हिमायत प्रॉजेक्ट ने युवाओं को बनाया आत्मनिर्भर बिहार के अलावा पीएम ने जम्मू-कश्मीर में चल रहे हिमायत कार्यक्रम की सराहना भी की। पीएम ने कहा कि हिमायत कार्यक्रम के दौरान करगिल में रहने वाली परवीन फातिमा आज आत्मनिर्भर बन सकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर के डोडा के फियाज अहमद जो कि कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, वह भी अब हिमायत प्रॉजेक्ट की मदद से नौकरी पाकर अपने परिवार की मदद कर पा रहे हैं। तमिलनाडु के तिरुपुर में नौकरी करती हैं परवीन करगिल की रहने वाली परवीन फातिमा तमिलनाडु के तिरुपुर स्थित एक गार्मेंट यूनिट में सुपरवाइजर की नौकरी करती हैं। करगिल के एख छोटे से गांव में रहने वाली परवीन को हिमायत प्रॉजेक्ट के तहत स्किल डिवलपमेंट की ट्रेनिंग दी गई थी। इसके बाद उन्हें तिरुपुर में नौकरी मिली जहां वह प्रमोशन के बाद अब सुपरवाइजर बनी हैं। परवीन की तरह लेह-लद्दाख के कई अन्य युवाओं को भी हिमायत प्रॉजेक्ट से ट्रेनिंग के बाद नौकरी मिली है। स्किल डिवलपमेंट प्रोग्राम है 'हिमायत' पीएम नरेंद्र मोदी ने हिमायत प्रॉजेक्ट को युवाओं की जिंदगी बदलने में बेहद कारगर बताते हुए इसकी सराहना की। हिमायत प्रॉजेक्ट जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से चलाया जा रहा एक स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम है। इस कार्यक्रम की मदद से युवाओं को ना सिर्फ नई तकनीकी की ट्रेनिंग मिल रही है, बल्कि इससे हजारों लोगों को रोजगार भी मिल सका है।
कराची पाकिस्तान के प्रतिबंधित टेस्ट लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने शुक्रवार को कहा कि जब वह खेला करते थे तब कुछ खिलाड़ी थे जो हिन्दू होने के कारण उन्हें निशाना बनाते थे लेकिन उन्होंने कभी धर्म बदलने की जरूरत या दबाव महसूस नहीं किया। स्पॉट फिक्सिंग के लिए आजीवन प्रतिबंध झेल रहा यह लेग स्पिनर शोएब अख्तर के उस बयान के बाद चर्चा में आया है जिसमें इस तेज गेंदबाज ने आरोप लगाया था कि कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ी धर्म के कारण कनेरिया के साथ भोजन करने से भी इन्कार कर देते थे। भेदभाव हुआ, पर मुद्दा नहीं बनाया कनेरिया ने शुक्रवार को ‘समां’ चैनल से कहा कि कुछ खिलाड़ी पीठ पीछे उनको लेकर टिप्पणियां करते थे। उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। मैंने केवल उन्हें नजरअंदाज किया क्योंकि मैं क्रिकेट पर और पाकिस्तान को जीत दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था।’ कनेरिया ने कहा, ‘मुझे हिन्दू और पाकिस्तानी होने पर गर्व है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि पाकिस्तान में हमारे क्रिकेट समुदाय को नकारात्मक तरीके से पेश करने की कोशिश न करें क्योंकि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने मेरा पक्ष लिया और मेरे धर्म के बावजूद मेरा समर्थन किया।’ दबाव में यूसुफ ने धर्म परिवर्तन किया? कनेरिया से जब पूर्व बल्लेबाज यूसुफ योहाना (बाद में मोहम्मद यूसुफ) के बारे में पूछा गया जो ईसाई थे लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था, उन्होंने कहा कि वह किसी की निजी पसंद पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘मोहम्मद यूसुफ ने जो किया यह उनका निजी फैसला था, मुझे कभी धर्म परिवर्तन की जरूरत महसूस नहीं हुई क्योंकि मेरी इसमें आस्था है और कभी मुझ पर दबाव भी नहीं बनाया गया।’ शोएब की बात सही है कनेरिया ने अख्तर की टिप्पणी आने के बाद भेदभाव की बात स्वीकार की थी और कहा था कि वह नामों का खुलासा करेंगे, लेकिन अब उन्होंने नरम रवैया अपनाया। उन्होंने कहा, ‘शोएब भाई ने जो कहा, उन्होंने उसे सुना होगा या किसी ने उन्हें बताया होगा लेकिन मैंने शीर्ष स्तर पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया है और मुझे उस पर गर्व है। जब मैं क्रिकेट में आया तो मैं शुरू से ही शीर्ष स्तर पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करना चाहता था और मैंने ऐसा किया।’ इंजमाम ने हमेशा समर्थन किया पने करियर में 61 टेस्ट खेलने वाले इस लेग स्पिनर ने स्पष्ट किया कि पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक ने हमेशा उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘इंजमाम ने मुझे मैच विजेता कहा था। मैं कह सकता हूं कि कई संस्थानों ने मेरे करियर को संवारने में मेरी मदद की। मैंने इंजमाम को सही साबित करने के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सच्चाई यह है कि मुझे पाकिस्तानी होने पर गर्व है। नाम का खुलासा अपने यूट्यूब चैनल पर कनेरिया से जब उन खिलाड़ियों के नाम बताने के लिए कहा गया जिन्होंने उन्हें निशाना बनाया, तो उन्होंने कहा कि वह अपने यूट्यूब चैनल पर बाद में इन नामों का खुलासा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह उसके लिए सही वक्त नहीं है। मैं अपने चैनल पर इस संबंध में बात करूंगा।’ कनेरिया से जब उस घटना के बारे में बताने के लिए कहा गया जब खिलाड़ियों ने उनके साथ खाने से इन्कार कर दिया था, उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान मेरी जन्मभूमि है और कुछ खिलाड़ियों के व्यवहार के कारण किसी को इस मसले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। मैं सभी से आग्रह करूंगा कि इसे गलत दिशा नहीं दें।’
नई दिल्ली सोशल मीडिया पर इन दिनों अक्सर चर्चित शख्सियतों की हाजिरजवाबी देखने को मिलती है। इस बार पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी हाजिरजवाबी से लोगों के दिल जीत लिए। ट्विटर पर एक यूजर ने उनकी सूर्यग्रहण देखती तस्वीरों को शेयर करते हुए कहा कि इन पर मीम बन सकते हैं। पीएम मोदी ने इस पर हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब भी दिया। मीम्स पर पीएम बोले, 'मजे लें आप' पीएम मोदी ने आज लगे सूर्यग्रहण को देखने की तस्वीर शेयर की थी। उस तस्वीर को शेयर करते हुए एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा, 'यह मीम बन गया।' इसके जवाब में पीएम ने यूजर के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, 'आपका स्वागत है, आनंद लें।' बता दें कि सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों और कई बार आलोचकों को भी मशहूर हस्तियां जवाब देती हैं। मफलर पर अरविंद केजरीवाल ने भी दिया था जवाब ऐसा पहली बार नहीं है जब महत्वपूर्ण पद पर बैठे किसी शख्सियत ने ऐसा जवाब दिया हो। अरविंद केजरीवाल पर भी मजे लेते हुए एक यूजर ने ट्वीट किया था कि अब तक आपका मफलर नहीं निकला। इसका जवाब देते हुए केजरीवाल ने लिखा था कि मफलर बहुत पहले निकल गया है। ठंड बहुत ज्यादा है और आप सब अपना ख्याल रखें।
नई दिल्ली नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर को अपडेट करने को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कुछ विपक्षी दल इसे गुप्त रूप से एनआरसी लागू करने की कवायद ठहरा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह इसका खंडन कर चुके हैं कि दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं हैं। एनपीआर और एनआरसी को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। डिटेंशन सेंटरों को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में एनआरसी और एनपीआर की पूरी कहानी को समझना जरूरी है। अफवाहों से बचने के लिए भी जरूरी है कि यह समझा जाए कि एनआरसी को लेकर कब क्या हुआ, क्या एनआरसी और एनपीआर का आपस में रिश्ता है। सबसे पहले बात करते हैं एनआरसी को लेकर जताई जा रही आशंकाओं की। NRC को लेकर जताई जा रही आशंका सरकार संसद से लेकर उससे बाहर तक बार-बार जोर देकर कहती रही कि संशोधित नागरिकता कानून से कोई भी भारतीय प्रभावित नहीं होगा क्योंकि यह भारतीय नागरिकों के लिए है ही नहीं। इसके बाद भी देशभर में इस नए कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन हुए या जारी हैं जिसके पीछे बड़ी वजह इसे एनआरसी से जोड़कर देखा जाना है। CAA को मजहब के आधार पर भेदभाव वाला कानून बताकर विरोध हो रहा है। यह कहा जा रहा है कि जब देशभर में एनआरसी लागू होगी तो उस वक्त नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज मुहैया नहीं करा पाने वाले गैर-मुस्लिम तो CAA की वजह से नागरिक बन जाएंगे लेकिन मुस्लिम अवैध घुसपैठिया करार दे दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर रही है और लोगों को ऐसी अफवाहों से बचने की सलाह दे रही है। NPR से जुड़ी अधिसूचना कब जारी हुई? एनपीआर से जुड़ी अधिसूचना को इसी साल 31 जुलाई 2019 को जारी किया गया था। इसे 2003 के सिटिजनशिप रूल्स (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिजंस ऐंड इश्यू ऑफ नैशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) के तहत नोटिफाई किया गया है। NPR क्या है? नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर भारत में रहने वाले सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। गौर करने वाली बात यह है कि यह भारतीय नागरिकों का नहीं बल्कि यहां रहने वाले लोगों (निवासियों) का रजिस्टर है। इसे ग्राम पंचायत, तहसील, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। नागरिकता कानून, 1955 और सिटिजनशिप रूल्स, 2003 के प्रावधानों के तहत यह रजिस्टर तैयार होता है। NPR को समय-समय पर अपडेट करना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य देश में रह रहे लोगों का अपडेटेड डेटाबेस तैयार करना है ताकि उसके आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकें। क्या NPR के बाद NRC की तैयारी है? सरकार का कहना है कि एनपीआर और एनआरसी का आपस में कोई संबंध नहीं है। दूसरी तरफ विपक्ष खासकर कांग्रेस ने एनपीआर को एनआरसी की दिशा में पहला कदम बताते हुए सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। हालांकि, जिन नियमों के तहत एनपीआर की प्रक्रिया नोटिफाई की गई है, उसके मुताबिक यह एनआरसी से जुड़ी है। अगर सरकार एनपीआर को एनआरसी से अलग करती है तो उसे नियमों में बदलाव करना पड़ेगा। सरकारी दस्तावेजों में जिक्र- एनआरसी की दिशा में NPR पहला कदम सरकारी दस्तावेजों में ही इस बात का जिक्र है कि नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर एनआरसी की दिशा में पहला कदम है। सरकारी वेबसाइट censusindia.gov.in पर भी इसका जिक्र है। वेबसाइट में यूपीए सरकार के दौरान 2011 की जनगणना के संबंध में 'अक्सर पूछे जाने वाले सवाल' (FAQ) में इसका जिक्र है। NPR को लेकर FAQ में एक सवाल है कि क्या एनपीआर के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है? इसके जवाब में लिखा गया है 'नागरिकता कानून में 2004 में हुए संशोधन के मुताबिक सेक्शन 14 के तहत किसी भी नागरिक के लिए एनपीआर में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। नैशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है और एनपीआर इस दिशा में पहला कदम है। गृह मंत्रालय की 2008-09 की सालाना रिपोर्ट में भी जिक्र सेंसस इंडिया की वेबसाइट के अलावा यूपीए सरकार के ही दौरान गृह मंत्रालय की 2008-09 की रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है, 'एनपीआर तैयार हो जाने के बाद स्वतंत्र रूप से नैशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस (NRIC) को एनपीआर के सबसेट के तौर पर बनाना मुमकिन होगा।'इसके अलावा 2012 में गृह मंत्रालय की तरफ से संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भी यही कहा गया था कि नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर एनआरसी तैयार करने की दिशा में पहला कदम है। क्या हैं डिटेंशन सेंटर? सबसे पहले तो डिटेंशन सेंटर क्या है इसे समझना जरूरी है। डिटेंशन सेंटर में अवैध अप्रवासियों को रखा जाता है, जिन्हें ट्राइब्यूनल/अदालतें विदेशी घोषित कर देती हैं। या ऐसे विदेशियों को रखा जाता है, जिन्होंने किसी जुर्म में सजा काट ली हो और अपने देश डिपोर्ट किए जाने का इंतजार कर रहे हों। विदेश कानून, 1946 के सेक्शन 3(2)(सी) में केंद्र सरकार के पास भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को उनके देश भेजने का अधिकार है। राज्य भी डिटेंशन सेंटर स्थापित कर सकते हैं। डिटेंशन सेंटरों का एनआरसी से क्या लेना देना है? असम में एनआरसी निवासियों की एक सूची है जिससे ये पहचान की जा सकती है कि कौन यहां का मूल निवासी है और अवैध शरणार्थी का पता लगाया जा सकता है। 2013 में, तमाम रिट याचिकाओं के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल को ये निर्देश दिया कि इस साल 31 अगस्त तक एनआरसी की अपडेट लिस्ट जारी करें। ये प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी और बीती 31 अगस्त को ये लिस्ट जारी कर दी गई। इसमें जगह बना पाने में 19.07 लाख आवेदक विफल रहे। असम की एनआरसी लिस्ट में जगह न बना पाने वाले लोगों के पास फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल और उसके बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है। अगर उनका मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वे वहां भी अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए तो वे अवैध घुसपैठिया ठहराए जाएंगे और ऐसे लोगों को डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा। डिटेंशन सेंटरों पर यूपीए सरकार ने संसद में दिया था यह जवाब 13 दिसंबर 2011 को तत्कालीन गृह राज्यमंत्री एम. रामचंद्रन ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया था कि सरकार ने असम में 3 डिटेंशन सेंटरों (गोलपारा, कोकराझार और सिलचर में) को स्थापित किया है। मंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया था कि नवंबर 2011 तक विदेशी/अवैध प्रवासी घोषित किए गए 362 लोगों को इन तीनों डिटेंशन सेंटरों में भेजा गया था। असम में 6 और कर्नाटक में है 1 डिटेंशन सेंटर असम में पहली बार 2005 में तरुण गोगोई की कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर बनाए थे। 2009, 2012, 2014 और 2018 में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को डिटेंशन सेंटर खोलने के आदेश दिए जा चुके हैं ताकि अवैध रूप से देश में रहनेवाले विदेशी नागरिकों की गतिविधि पर रोक लग सके और डिपोर्टेशन के आदेश के दौरान उनकी मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके। असम में जिन जगहों पर डिटेंशन सेंटर बने हैं, वे हैं- गोलपाड़ा, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, सिलचर और कोकराझार। इन्हें जिला जेलों के अंदर ही बनाया गया है, जहां 988 लोगों को रखा जा सकता है। इसके अलावा असम के मतिया में सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है, जहां एक साथ 3000 लोग रखे जा सकते हैं। कर्नाटक में एक सेंटर है। मुंबई में भी एक डिटेंशन सेंटर खोलने की योजना है। इस साल के शुरू में बंगाल सरकार ने भी न्यू टाउन और बोनगांव में डिटेंशन सेंटर खोलने की रजामंदी दे रखी है। गोवा और दिल्ली में भी एक-एक सेंटर हैं।
लखनऊ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर भारी विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि सरकार आगे भी बड़े और कड़े फैसले लेती रहेगी। लखनऊ में बुधवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखते हुए पीएम ने CAA, राम मंदिर और अनुच्छेद 370 का जिक्र किया और कहा कि हमने विरासत में मिली समस्याओं को चुनौती दी है। उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम चुनौतियों को चुनौती देने का स्वभाव लेकर निकले हैं। पीएम ने CAA के विरोध के नाम पर हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को नसीहत दी और अधिकार के साथ कर्तव्य भी याद दिलाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपी में जिस तरह कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा की। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। वे अपने घरों में बैठकर खुद से सवाल पूछें कि क्या उनका यह रास्ता सही था? उनकी प्रवृत्ति योग्य थी? पीएम मोदी ने कहा, 'जो कुछ जलाया गया, बर्बाद किया गया क्या वह उनके बच्चों के काम आने वाला नहीं था?' संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने कहा, 'लखनऊ के सांसद ने मेरा स्वागत किया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मेरा स्वागत किया तो काशी का सांसद धन्यवाद कहता है।' हक और दायित्व को साथ याद रखना जरूरी' पीएम ने कहा, 'इस प्रदर्शन में, हिंसा में जिन लोगों की मृत्यु हुई, जो सामान्य नागरिक जख्मी हुए, जो पुलिसवाले जख्मी हुए, उनके और उनके परिवारवालों के प्रति सोचें कि क्या बीतती होगी। इसीलिए मैं आग्रह करूंगा कि झूठी अफवाहों में आकर हिंसा करने वालों को, सरकारी संपत्ति तोड़ने वालों को मैं कहना चाहूंगा कि बेहतर सड़क, बेहतर ट्रांसपोर्ट, उत्तम सीवर लाइन नागरिकों का हक है, इसको सुरक्षित रखना, साफ-सुथरा रखना भी नागरिकों का ही दायित्व है। हक और दायित्व को हमें साथ-साथ याद रखना है।' कठिन समस्याओं को सुलझाने का प्रयास' प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विकास में योगदान के लिए पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा दिए गए मापदंड़ों का जिक्र करते हुए कि उनकी सरकार विरासत में मिली समस्याओं को सुलझा रही है। उन्होंने कहा, 'आर्टिकल 370 कितनी पुरानी बीमारी थी। कितनी कठिन लगती थी लेकिन हमें विरासत में मिली थी। हमारा दायित्व था कि कठिन से कठिन चीजों को सुलझाने का भरसक प्रयास करें। सबकुछ बहुत आराम से हुआ। सबकी धारणाएं चूर-चूर हो गईं। राम जन्मभूमि का इतना पुराना मामला, शांतिपूर्ण समाधान। भारत आजाद हुआ, विभाजन हुआ तबसे लेकर लाखों गरीब उसमें भी ज्यादा दलित हैं, वंचित हैं, शोषित हैं, अपना धर्म बचाने के लिए, अपनी बेटियों की इज्जत बचाने के लिए जो लोग पाकिस्तान से, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से भारत की शरण लेने के लिए मजबूर हो गए ऐसे शरणार्थियों को नागिरकता की गरिमा देने का रास्ता, ऐसी अनेक समस्याओं का हल इस देश के 130 करोड़ भारतीयों ने निकाला है।' '...अभी जो बाकी है, उनके समाधान के लिए' मोदी ने कहा, 'आत्मविश्वास से भरा हुआ हिंदुस्तान 2020 में प्रवेश कर रहा है। अभी भी जो बाकी है, उनके समाधान के लिए भी पूरे सामर्थ्य के लिए हर भारतवासी प्रयास कर रहा है। हम चुनौतियों को चुनौती देने के स्वभाव के साथ निकले हैं।' उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार के लिए सुशासन का अर्थ है- सुनवाई, सबकी हो। सुविधा, हर नागरिक तक पहुंचे। सुअवसर, हर भारतीय को मिले। सुरक्षा, हर देशवासी अनुभव करे और सुलभता, सरकार के हर तंत्र की सुनिश्चित हो।' अटल टनल और अटल जल योजना का जिक्र मोदी ने कहा, 'यहां आने से पूर्व मैं दिल्ली में अटल जल योजना का शुभारंभ कर रहा था। छह हजार करोड़ की इस योजना में उत्तर प्रदेश समेत देश के सात राज्यों में भूजल के स्तर को सुधारने के लिए काम किया जाएगा। इसके साथ ही आज हिमाचल को लद्दाख से जोड़ने वाली रोहतांग सुरंग का नाम अटल टनल के नाम पर किया गया है। यह भी संयोग है कि आज सुशासन दिवस के रूप में जब मना रहे हैं तब यूपी का शासन जिस भवन से चलता है वहां अटल जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया है। उनकी यह भव्य प्रतिमा लोक भवन में कार्य करने वाले लोगों को सुशासन की, लोक सेवा की निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।' 'अब लखनऊ को संवार रहे हैं राजनाथ सिंह' प्रधानमंत्री ने कहा, 'इसके अलावा अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया है, जो लखनऊ वर्षों तक अटल जी की कर्मभूमि रहा, संसदीय सीट रहा, वहां शिक्षा से जुड़े, स्वास्थ्य से जुड़े संस्थान का शिलान्यास करना, जिसको भी यह अवसर मिलेगा, उसे अपना सौभाग्य मानेगा। जब अटल जी यहां से सांसद थे तो उन्होंने यहां विकास की अनेक परियोजनाओं पर काम शुरू कराया था। रिंग रोड का काम हो, पुराने लखनऊ के ड्रेनेज सिस्टम का काम हो, बायोटेक पार्क हो, लखनऊ को नई पहचान देने वाले सैकड़ों काम अटल जी ने किए थे। अब सांसद के तौर पर राजनाथ सिंह जी इस विरासत को संभाल रहे हैं और संवार भी रहे हैं।' योगी सरकार की तरीफ' मोदी ने कहा, 'अटल जी कहते थे कि जीवन को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता है। उसको समग्रता में देखना, यह बात सरकार के लिए भी उतनी ही सत्य है और गुड गवर्नेंस के लिए भी यही उपयुक्त मानदंड है। सुशासन भी तभी तक संभव नहीं है जब तक हम समस्याओं को संपूर्णता में, समग्रता में न सोचेंगे, न उसे सुलझाने का प्रयास करेंगे। मुझे संतोष है कि योगी जी की सरकार भी समग्रता की इस सोच को साकार करने का भरसक प्रयास कर रही है। अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी इसी सोच को परिलक्षित करती है।'
नई दिल्ली नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नागरिकता रजिस्टर (एनसीआर) को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को देशभर में निवासियों का डेटाबेस (NPR) अपडेट करने की मंजूरी दे दी। सीएए और एनआरसी पर विवाद के बाद अब राजनीतिक हलकों में एनपीआर के फैसले की टाइमिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसपर केंद्र सरकार ने साफ किया है कि एनपीआर में कुछ भी नया नहीं है। सफाई देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर से किसी की नागरिकता नहीं जाने वाली है। इसका और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) का आपस में कोई नाता नहीं है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में एनपीआर के लिए 3,941.35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्र का कहना है कि यह UPA सरकार के समय (2010) से चला आ रहा है और 2015 में यह रजिस्टर अपडेट भी हो चुका है। अब 2021 में जनगणना से पहले एनपीआर को एकबार फिर अपडेट किया जाना है। इसका काम अगले साल अप्रैल से सितंबर के बीच पूरा किया जाना है और जनगणना 2021 में होगी। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि रजिस्टर के सभी आंकड़े मोबाइल ऐप पर लिए जाएंगे। जावडेकर ने कहा कि साल 2010 की तरह इसमें व्यक्ति से नाम, वर्तमान और स्थायी पता, शिक्षा, पेशा, जैसी सूचनाएं ली जाएंगी। इसका नागरिकता से लेना-देना नहीं है। लेकिन सीपीएम ने इसके विरोध में कहा कि इसमें 21 अन्य ऐसी डिटेल देनी होंगी, जो साल 2010 में नहीं थीं। हम एनसीआर के साथ एनपीआर का भी विरोध करेंगे। कांग्रेस के अलावा AIMIM सांसद ओवैसी भी इसका विरोध करते हुए कहा कि सरकार एनपीआर के जरिए एनसीआर लागू कर रही है। गृह मंत्रालय सूत्रों ने साफ किया कि एनपीआर के आधार पर समूचे देश में एनसीआर तैयार करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार द्वारा एनपीआर के लिए धनराशि आवंटित किए जाने के बाद कहा कि इससे राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के पीछे छिपे मकसदों का भंडाफोड़ हो गया है। अखिलेश ने ट्वीट कर दावा किया, ‘जब सरकार ने ख़ुद ही राज्यसभा में कहा है कि एनपीआर ही एनआरसी का आधार होगा तो ये भाजपाई और कितना झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करेंगे। इनके ‘छिपे उद्देश्यों’ का अब भंडाफोड़ हो चुका है।’ यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता को खण्डित करने वालों की चला-चली की बेला आ गयी है। देश एक था, एक है, एक रहेगा। एनपीआर को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सफाई देते हुए कहा कि नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर से किसी की नागरिकता नहीं जाने वाली है। इसका और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस का आपस में कोई नाता नहीं है। दोनों अलग-अलग चीजें हैं। एनपीआर में किसी के कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा, जबकि एनआरसी में नागरिकता का सबूत मांगा जाता है। शाह ने कहा, 'ये अफवाहें हैं कि एनपीआर के डेटा का इस्तेमाल एनसीआर के लिए होगा। मुस्लिम भाई किसी भ्रम में न आएं।' नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर को विपक्ष जिस तरह अवैध नागरिकों की पहचान से जुड़े नागरिकता रजिस्टर से जोड़ रहा है, उस पर अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखा। शाह ने कहा कि एनपीआर में कुछ चीजें नई हैं लेकिन इनके आधार पर योजनाओं का खाका बनता है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो वह गरीबों का विरोध कर रहा है। बंगाल और केरल के मुख्यमंत्रियों से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एनपीआर का विरोध न करें। अमित शाह (फाइल फोटो)
नई दिल्ली, 24 दिसंबर 2019,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना 2021 की प्रक्रिया शुरू करने और राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंजूरी दे दी है. जनगणना प्रक्रिया पर 8754.23 करोड़ रुपए और एनपीआर के अपडेट पर 3941.35 करोड़ रूपए का खर्च आएगा. देश की पूरी आबादी जनगणना प्रक्रिया के दायरे में आएगी जबकि एनपीआर के अपडेट में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा. 2021 में होने वाली जनसंख्‍या गणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण के तहत अप्रैल-सितंबर 2020 तक प्रत्‍येक घर और उसमें रहने वाले व्‍यक्तियों की सूची बनाई जाएगी. असम को छोड़कर देश के अन्‍य हिस्‍सों में एनपीआर रजिस्‍टर के अपडेट का काम भी इसके साथ किया जाएगा. जबकि दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख्‍या की गणना का काम होगा. राष्‍ट्रीय महत्‍व के इस बड़े काम को पूरा करने के लिए 30 लाख कर्मियों को देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में भेजा जाएगा. जनगणना 2011 के दौरान ऐसी कर्मियों की संख्‍या 28 लाख थी. डेटा संकलन के लिए मोबाइल ऐप और निगरानी के लिए केन्‍द्रीय पोर्टल का इस्‍तेमाल और जनसंख्‍या गणना का काम गुणवत्‍ता के साथ जल्‍दी पूरा करना सुनिश्चित करेगा. एक बटन दबाते ही डेटा प्रेषण का काम ज्‍यादा बेहतर तरीके से होगा और साथ ही यह इस्‍तेमाल में भी आसान होगा ताकि नीति निर्धारण के लिए तय मानकों के अनुरूप सभी जरूरी जानकारियां तुरंत उपलब्‍ध कराईं जा सकें. मंत्रालयों के अनुरोध पर जनसंख्‍या से जुड़ी जानकारियां उन्‍हें सही, मशीन में पढ़े जाने लायक और कार्रवाई योग्‍य प्रारूप में उपलब्‍ध कराई जाएगी. क्या होंगे प्रभाव? > जनगणना केवल एक सांख्‍यकी प्रक्रिया भर नहीं है. इसके नतीजे आम जनता को इस तरह उपलब्‍ध कराए जाएंगे ताकि उन्‍हें इन्‍हें समझने में आसानी हो. > जनसंख्‍या से जुड़े सभी आंकड़े मंत्रालयों, विभागों, राज्‍य सरकारों, अनुसंधान संगठनों सहित सभी हितधारकों और उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्‍ध कराए जाएंगे. > जनसंख्‍या से जुड़े आंकड़ों को गांवों और वार्ड जैसी प्रशासनिक स्‍तर की आखिरी इकाइयों के साथ भी साझा किया जाएगा. > जनसंख्‍या से जुड़े ब्‍लॉक स्‍तर के आंकड़े परिसीमन आयोग को भी मुहैया कराए जाएंगे ताकि लोकसभा और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में इनका इस्‍तेमाल हो सके. > सर्वेक्षणों और अन्‍य प्रशासनिक कार्यों से संबंधित आंकड़ों को यदि जनंसख्‍या के आंकड़ों के साथ लिया जाए तो यह जननीतियों के निर्धारण का एक सशक्‍त माध्‍यम बनते हैं. 48 हजार लोग 2900 दिनों तक करेंगे काम इस बड़े महत्व के काम का एक सबसे बड़ा नतीजा दूरदराज के क्षेत्रों से लेकर पूरे देश में प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार का सृजन होना है. यह जनगणना और एनपीआर के काम में लगाए गए कर्मियों को दिए जाने वाले मानदेय के अतिरिक्‍त है जनगणना और एनपीआर के काम में स्‍थानीय स्‍तर पर 2900 दिनों के लिए करीब-करीब 48 हजार लोगों को लगाया जाएगा. दूसरे शब्‍दों में इससे करीब 2.40 लाख मानवदिवस के रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. आंकड़ों के संकलन के लिए डिजिटल प्रक्रिया और समन्‍वय की नीति अपनाए जाने से जिलों और राज्‍य स्‍तर पर तकनीकी दक्षता वाले मानव संसाधनों के क्षमता विकास में भी मदद मिलेगी. आगे ऐसे लोगों के लिए इससे रोजगार पाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. कैसे होगी जनगणना? > जनगणना की प्रक्रिया में प्रत्‍येक परिवारों से मिलना, प्रत्‍येक घर तथा उसमें रहने वाले लोगों की सूची तैयार करना तथा सबको मिलाकर जनसंख्‍या गणना के लिए अलग-अलग प्रश्‍नावली तैयार करना शामिल है. > जनगणना करने वाले आमतौर पर राज्‍य सरकारों द्वारा नियुक्‍त कर्मचारी और सरकारी शिक्षक होते हैं. इन्‍हें अपनी नियमित ड्यूटी के अति‍रिक्‍त जनगणना के साथ ही एनपीआर का काम भी करना होता है. > इन लोगों के अलावा जनगणना के काम के लिए जिला, उप जिला और राज्‍य स्‍तर पर राज्‍यों और जिला प्रशासन द्वारा अन्‍य कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाती है. जनगणना 2021 के लिए की गई नई पहल, जिसमें... > पहली बार आंकड़ों के संकलन के लिए मोबाइल एप का इस्‍तेमाल होगा. > जनगणना के काम में लगाए गए अधिकारियों और पदाधिकारियों को विभिन्‍न भाषाओं में जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए जनगणना निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्‍यवस्‍था की जाएगी. > आम लोगों को अपनी ओर से जनसांख्‍यिकी आंकड़े उपलब्‍ध कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा देना और कोड डायरेक्‍टरी की व्‍यवस्‍था करना ताकि विस्‍तार से दी गई जानकारियों को कूटबद्ध कर आंकड़ों के प्रसंस्‍करण के काम में समय की बचत की जा सके. > जनगणना और एनपीआर के काम में लगे लोगों को दी जानेवाली मानदेय राशि सार्वजनिक वित्‍तीय प्रबंधन प्रणाली ( पीएफएमएस) तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण ( डीबीटी) के माध्‍यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की व्‍यवस्‍था है. यह जनसंख्‍या गणना और एनपीआर पर होने वाले कुल खर्च का 60 फीसदी हिस्‍सा होगा. > जनगणना के काम के लिए जमीनी स्‍तर पर काम करने वाले 30 लाख कर्मियों को गुणवत्‍ता परक प्रशिक्षण देना और इसके लिए राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तर पर प्रशिक्षक तैयार करने के लिए राष्‍ट्रीय तथा राज्‍य स्‍तर की प्रशिक्षण संस्‍थाओं की सेवाएं लेना. देश में हर 10 साल बाद जनगणना का काम 1872 से किया जा रहा है. जनगणना 2021 देश की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी. जनसंख्‍या गणना आवासीय स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों, जनसंख्‍या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति , भाषा, साक्षरता और शिक्षा ,आर्थिक गतिविधियों , विस्‍थापन और प्रजनन क्षमता जैसे विभिन्‍न मानकों पर गांवों, शहरों और वार्ड स्‍तर पर लोगों की संख्‍या के सूक्ष्‍म से सूक्ष्‍म आंकड़े उपलब्‍ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है. जनगणना कानून 1948 और जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्‍ध कराता है. नागरिकता कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के तहत राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था. आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसका अपडेट किया गया था.
CAA, NRC, NPR: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- इनमें दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं नई दिल्ली केंद्र सरकार नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (NPR) और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) के बीच संबंध जोड़कर किसी तरह की अफवाह न फैलाई जाए, इसकी आशंका खारिज करने के लिए सक्रिय हो गई है। इसी क्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि दोनों के बीच दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, 'दोनों में मूलभूत अंतर है। एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग योजनाओं के आकार बनते हैं। लेकिन, एनआरसी में हर व्यक्ति से प्रूफ मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारत के नागरिक हैं।' अमित शाह ने और क्या-क्या कहा, NPR सिर्फ योजनाओं का आकार तय करने के लिए' शाह ने कहा कि नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) और नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (NPR) के बीच कोई संबंध नहीं है। मैं आज स्पष्ट तौर पर बता रहा हूं। देशव्यापी एनआरसी पर बहस की कोई जरूरत ही नहीं है क्योंकि अभी इस पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही है। इस पर न कोई कैबिनेट में चर्चा हुई और न ही संसद में। दोनों प्रक्रिया का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है और न दोनों प्रक्रिया का एक-दूसरे के सर्वे में उपयोग हो सकता है। एनपीआर के लिए अभी जो प्रक्रिया चलेगी, उसका उपयोग कभी भी एनआरसी के लिए नहीं हो सकता है। दोनों कानून भी अलग हैं। उन्होंने कहा कि एनपीआर की जरूरत इसलिए है कि हर 10 साल में अंतरराज्यीय स्तर पर जनगणना में जबर्दस्त उथल-पुथल होती है। एक राज्य के लोग दूसरे राज्य में जाकर बस जाते हैं। जो लोग दूसरे राज्य में बसे हैं, उनकी जरूरतों के मुताबिक योजनाओं का आधार एनपीआर होगा। NPR में कोई प्रूफ देने की जरूरत नहीं' ये प्रक्रिया बीजेपी सरकार ने शुरू नहीं की। यूपीए सरकार ने 2004 में एक कानून बनाया और 2010 की जनगणना के साथ एनपीआर सर्वे हुआ। इस बार फिर जनगणना के साथ एनपीआर की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। इसके अंदर देश में रहने वाला हर कोई भी व्यक्ति एक ऐप में अपनी जानकारी देगा। दी गई जानकारी के सपॉर्ट में कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। अगर आपके पास कुछ जानकारी नहीं है तो आप उसे कोष्ठक को खाली छोड़ सकते हैं। इस बार घर का क्षेत्रफल कितना है, आपके घर में पशुधन कितना है? ऐसी जानकारी इस बार नहीं मांगी जा रही है। इसमें एक भी सवाल ऐसा नहीं है कि क्या आप भारत के नागरिक हैं? इमसें यह पूछा जा रहा है कि आप यहां कब से रह रहे हैं? पॉलिटिक्स और कम्यूनिकेशन में अंतर होता है' पॉलिटिक्स और कम्यूनिकेशन में अंतर होता है। हमने नोटिफिकेशन निकाला 31 जुलाई, 2019 को। सारे राज्य भी नोटिफिकेशन निकाल चुके हैं। यह कम्यूनिकेशन है। पॉलिटिक्स यह है कि सीएए के कारण बवाल खड़ा हुआ, अब यह बवाल थमता जा रहा है क्योंकि सबलोग इसे समझने लगे हैं तो अब एनपीआर का बवाल खड़ा करो। 31 जुलाई, 2019 को नोटिफिकेशन आ गया था। तब सीएए आया ही नहीं था। अब तक कई राज्यों ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। हमारा प. बंगाल और केरल के मुख्यमंत्रियों से आग्रह है कि वे अपने राज्यों की गरीब आबादी को सरकारी योजनाओं से दूर नहीं रखें। इन दोनों राज्यों ने एनपीआर की प्रक्रिया रोक दी है। जब उनसे पूछा कहा गया कि अगर गैर बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों ने एनपीआर लागू करने से इनकार कर दिया, तो आप क्या करेंगे, तो अमित शाह ने कहा कि एनपीआर से किसी को कोई दिक्कत नहीं है. इसको लेकर मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों को समझाने की पूरी कोशिश करूंगा. NPR की प्रक्रिया कांग्रेस ने शुरू की, ये BJP के घोषणापत्र में भी नहीं कांग्रेस ने साल 2010 में एनपीआर की प्रक्रिया शुरू की थी. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एनपीआर में आधार नंबर देने में कोई हर्ज नहीं हैं. एनपीआर न हमारे घोषणापत्र में शामिल है. जब उनसे पूछा गया कि अगर एनपीआर में किसी का नाम शामिल होने से रह जाता है, तो क्या उसकी नागरिकता चली जाएगी, तो अमित शाह ने कहा कि मैं यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि एनपीआर में किसी का नाम शामिल नहीं होने से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी. यह एनआरसी से अलग है. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन सियासी है. इसको लेकर विरोध प्रदर्शन उन राज्यों में नहीं हुए, जहां सबसे ज्यादा घुसपैठिए रहते हैं. डिटेंशन सेंटर को लेकर क्या-क्या बोले अमित शाह? डिटेंशन सेंटर को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर कोई दूसरे देश से गैर कानूनी तरीके से आ जाता है, तो उसको जेल में नहीं रखा जाता है, उसको डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है. डिटेंशन सेंटर का एनआरसी से कोई लेना देना नहीं हैं. अमित शाह ने कहा कि असम में सिर्फ एक डिटेंशन सेंटर है. हालांकि इसको लेकर मैं कंफर्म नहीं हूं, लेकिन इतना साफ कर देता हूं कि जो भी डिटेंशन सेंटर हैं, वो मोदी सरकार में नहीं बनाए गए हैं. इतना ही नहीं, जो डिटेंशन सेंटर बने भी हैं, वो संचालित नहीं हैं. CAA और NRC पर फैले अफवाह का डर दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के बीच संबंध होने की अफवाह फैलने से पूरा देश जल उठा। हर राज्य में सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन हुए और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी, आगजनी, तोड़फोड़ के जरिए भारी तबाही मचाई। सरकार को डर है कि अगर एनपीआर और एनआरसी में भी संबंध जोड़ दिया गया तो देश फिर से उबल सकता है। यही वजह है कि सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया।
नई दिल्ली नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने को मंजूरी दे दी है। इसके तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। इसका इस्तेमाल सरकार अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए करती है। कैबिनेट ने इस पूरी कवायद के लिए 8,700 करोड़ रुपये के बजट आवंटन पर भी मुहर लगा दी है। 2021 की जनगणना से पहले 2020 में एनपीआर अपडेट किया जाएगा, इससे पहले 2011 की जनगणना से पहले 2010 में भी जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट किया गया था। असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अप्रैल, 2020 से सितंबर, 2020 तक एनपीआर को अपडेट करने का काम किया जाएगा। क्या है NPR? नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (NPR) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना NPR का मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी। इसमें व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होंगी। NPR में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होगी और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। क्या है NPR? नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (NPR) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना NPR का मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी। इसमें व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होंगी। NPR में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होगी और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। कैसे अलग है NRC से? NPR और NRC में अंतर है। NRC के पीछे जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छिपा है। वहीं, छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को NPR में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है। बाहरी की भी हाजिरी बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी NPR में दर्ज होना है। NPR के जरिए लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है। UPA सरकार की थी योजना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में 2010 में NPR बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब फिर 2021 में जनगणना होनी है। ऐसे में NPR पर भी काम शुरू हो रहा है।
नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2019,नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 बुधवार को राज्यसभा में पारित हो गया. यह विधेयक लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका था. गुरुवार देर रात राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून में बदल गया.राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े. इससे पहले विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया. इस कानून के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध तरीके से रहने वाले अप्रवासियों के लिए अपने निवास का कोई प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद नागरिकता हासिल करना आसान हो जाएगा. भारत की नागरिकता के लिए पात्र होने की समय सीमा 31 दिसंबर 2014 होगी. मतलब इस तारीख के पहले या इस तारीख तक भारत में प्रवेश करने वाले नागरिकता के लिए आवेदन करने के योग्य होंगे. नागरिकता पिछली तारीख से लागू होगी. कानून बनने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में सोमवार को ही पारित हो गया था. नागरिकता कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शन विधेयक पारित होने के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुए. असम में विरोध प्रदर्शन में आगजनी और तोड़-फोड़ की गई, जिसके बाद वहां कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर नॉर्थ ईस्ट में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. पूर्वोत्त के असम, मेघालय और त्रिपुरा राज्य में हिंसक प्रदर्शन जारी है. हालात स्थिर करने के लिए लगातार सुरक्षा बलों का फ्लैग मार्च कराया जा रहा है. मेघालय में मोबाइल इंटरनेट और मैसेजिंग सेवा पर पाबंदी लगा दी गई है. मेघालय में 48 घंटों के लिए मोबाइल, इंटरनेट और मैसेजिंग सेवा को बंद किया गया है. वहीं, गुवाहाटी के बाद शिलॉन्ग में गुरुवार रात 10 से कर्फ्यू लगा दिया गया है. भारत आए अल्पसंख्यकों को मिलेगी सुविधा: शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल पेश करने के बाद कहा था, इस सदन के सामने एक ऐतिहासिक बिल लेकर आया हूं , इस बिल के जो प्रावधान हैं उससे लाखों-करोड़ों लोगों को फायदा होगा. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यक रहते थे, उनके अधिकारों की सुरक्षा नहीं होती थी उन्हें वहां पर समानता का अधिकार नहीं मिला था. जो अल्पसंख्यक धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में आए, उन्हें यहां पर सुविधा नहीं मिली. पाकिस्तान में पहले 20 फीसदी अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज 3 फीसदी ही बचे हैं. इस बिल के जरिए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को रियातत मिलेगी.' वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर देश का विभाजन न हुआ होता और धर्म के आधार पर न हुआ होता तो आज यह बिल लेकर आने की जरूरत नहीं पड़ती.
वॉशिंगटन मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर भारत की तुलना दूसरे देशों के साथ करने से इनकार करते हुए अमेरिका ने कहा कि भारत एक सक्षम लोकतंत्र है। अमेरिका ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और वहां धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार जैसे विषयों पर चिंताओं के समाधान के लिए संस्थाएं हैं। भारत में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने यह टिप्पणी की। प्रदर्शनकारी धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणाथिर्यों को भारत की नागरिकता देने से जुड़े इस कानून को 'असंवैधानिक और विभाजनकारी' बता रहे हैं क्योंकि यह मुसलमानों को शामिल नहीं करता। टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय वार्ता के समापन के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं के एक समूह से कहा कि मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता ट्रंप प्रशासन के लिए और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियों के लिए मुख्य मुद्दे हैं। अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह रेखांकित किया है कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है। सीएए के विरोध में भारत में प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा, 'इस कानून के बारे में भारत में बहस चल रही है। इसकी समीक्षा अदालतें करेंगी। राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, मीडिया में इस पर चर्चा चल रही है। लोकतांत्रिक भारत में ये संस्थाएं हैं इसलिए हम उस प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।' अधिकारी ने कहा, 'मेरा खयाल है कि (अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी राजदूत सैमुएल) ब्राउनबैक इस पर पहले ही टिप्पणी कर चुके हैं। धार्मिक आधार को लेकर हमें चिंताएं हैं लेकिन अब यह एक कानून का हिस्सा है जिसकी भारतीय व्यवस्था में लगातार समीक्षा हो रही है।' एक संवाददाता ने अधिकारी से पूछा कि कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल करने के बारे में कोई विशेष आश्वासन मांगा गया है या कोई समय सीमा तय की गई है। इस पर उन्होंने कहा, 'यह ऐसा संबंध नहीं है जहां अल्टिमेटम दिया जाता हो। यह एक ऐसा देश, ऐसा लोकतंत्र है जहां इन नीतियों पर मतदान होता है, बहस होती है, न्यायपालिका समीक्षा करती है। इसलिए मैं इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करूंगा।'
नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2019,नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहा है. ऐसे में जब गृह मंत्री अमित शाह देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के दूसरे दिन मंच पर पहुंचे तो कई सवालों से उनका सामना हुआ. उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने जो भी फैसले लिए हैं वो संविधान के दायरे में रहकर लिया. अमित शाह ने इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्या कहा? 'जवाहर लाल नेहरू- हमें राजनीतिक सीमाओं के कारण हमसे दूर हो चुके अपने भाईयों-बहनों जो देख रहे हैं और इस समय स्वतंत्रता सामरोह में शामिल नहीं हो सकते हैं. उनकी भी चिंता है. चाहे कुछ भी हो जाए वो हमारे हैं और हमेशा हमारे ही रहेंगे. उनके सुख-दुख में हम समान रूप से सहभागी होंगे और वो जब भी आना चाहेंगे हम उन्हें स्वीकार करेंगे.' 'राजेंद्र प्रसाद ने अपने शपथग्रहण के वक्त कहा- हम उन विस्थापित व्यक्तियों को पुनर्स्थापित करने के लिए व्यग्र हैं, जो काफी कठिनाई और असुविधा झेल रहे हैं. वो कभी भी यहां आएं उनका स्वागत है. 'कांग्रेस पार्टी का प्रस्ताव- 25 नवंबर 1947, कांग्रेस कार्यकारिणी ने निम्नलिखित संकल्प अंगीकार किया. कांग्रेस पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए बाध्य है. जो उनके जीवन और सम्मान की रक्षा करने के लिए जो सीमा पार कर के भारत आए हैं या आने वाले हैं. महात्मा गांधी- 7 जुलाई 1947- पाकिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख, यदि वहां नहीं रहना चाहते, तो नि:संदेह भारत आ सकते हैं. इस मामले में उनको रोजगार देना, नागरिकता देना और सम्मानपूर्वक सुखकर जीवन देना भारत सरकार का प्रथम कर्तव्य है.' 'मनमोहन सिंह- 18 दिसंबर 2003 को कहा- अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश जैसे देशों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. अगर हालात इन लोगों को मजबूर करती है तो हमारा नैतिक दायित्व इन अभागे लोगों को नागरिकता प्रदान करना है. इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए.
नई दिल्ली नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली 59 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। केंद्र को जनवरी के दूसरे हफ्ते तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अभी यह लागू ही नहीं है तो रोक का सवाल ही नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी। याचिका में नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से पक्ष रख रहे कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कानून पर रोक लगाने की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देखना होगा कि कानून पर रोक लगाई जा सकती है या नहीं। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत तीन पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके तहत तीनों देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध और क्रिश्चन समुदाय के ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे।
नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2019, गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता कानून पर हो रहे प्रदर्शन, नागरिकता कानून के अलग-अलग आयामों, एनआरसी, अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, महाराष्ट्र के नतीजों और झारखंड चुनाव पर विस्तार से बात की है. देश के नंबर वन हिन्दी न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण में टीवी टुडे नेटवर्क के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ उन्होंने 90 मिनट तक लंबी बातचीत में नागरिकता कानून पर हो रहे विरोध प्रदर्शन का जवाब दिया. 1. सिर्फ 4 विश्वविद्यालयों में गंभीर प्रदर्शन गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में लगभग 224 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 22 विश्वविद्यालय में प्रदर्शन हो रहा है. इनमें से 4 ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जहां गंभीर विरोध प्रदर्शन हुआ है. गृह मंत्री ने कहा कि बाकि विश्वविद्यालयों में मामूली प्रदर्शन हुआ है. 2. CAA से नागरिकता मिलती है, जाती नहीं गृह मंत्री ने कहा कि नागरिकता कानून के जरिए किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं जाने वाली है, चाहे वो किसी भी धर्म का हो. उन्होंने कहा, "मैं देश के सभी अल्पसंख्यक भाइयों-बहनों से कहना चाहता हूं कि इस एक्ट से आपको रत्ती भर भी नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि एक एक्ट से किसी की नागरिकता नहीं जाती है. एक्ट से सिर्फ नागरिकता देने का अधिकार है और जब किसी को नागरिकता देने का कानून है तो देश के मुस्लिम हों या हिंदू किसी को नागरिकता को लेकर डरने की जरूरत ही नहीं है.' 3. CAA लागू करने से मना करने का अधिकार नहीं अमित शाह ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री को नागरिकता संशोधन कानून के लिए मना करने का कोई अधिकार नहीं है. जब संसद ने कानून बना दिया तो यह पूरे देश में लागू होगा. उन्होंने कहा कि नागरिकता केंद्र की सूची में है. गृह मंत्री ने कहा कि जब इसे संसद के दोनों सदनों ने पास कर दिया है तो यह पूरे देश में लागू हो गया है. किसी भी राज्य को मना करने का अधिकार नहीं है. कानून बन चुका है और यह पूरे देश के लिए लागू हो गया है. 4. एकजुट होकर विपक्ष CAA पर अफवाह फैला रहा एंजेडा आजतक में अमित शाह ने कहा कि देशभर में हो रहे प्रदर्शन के लिए विपक्ष जिम्मेदार है. उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर बरसते हुए कहा पूरा विपक्ष एकजुट होकर नागरिकता संशोधन कानून पर अफवाह फैला रहा है. 5. जो नागरिक नहीं, वो भारत से बाहर होगा गृह मंत्री ने एनआरसी पर चल रहे विवादों पर भी अपनी राय रखी. अमित शाह ने कहा कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि NRC सिर्फ मुस्लिमों के लिए नहीं है. 6. धर्म के आधार पर बंटवारे की बात कांग्रेस ने क्यों मानी अमित शाह ने आगे कहा कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए था मगर कांग्रेस ने बंटवारे की डिमांड पर सरेंडर किया और इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ. उन्होंने कहा कि अगर धर्म के आधार पर देश का बंटवारा नहीं होता तो इस बिल की नौबत ही नहीं आती. 7. हिंसा को रोकना पुलिस का फर्ज भी और धर्म भी जामिया में हुई हिंसा पर गृह मंत्री ने कहा कि जब हिंसा फैलाई जा रही हो, तो उसे रोकना पुलिस का फर्ज भी है और धर्म भी. गृहमंत्री ने कहा कि यदि पुलिस हिंसा रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाती, तो हमारी नजर में वह अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं कर रही है. उन्होंने कहा है कि जामिया मिलिया के अंदर से पथराव होता है, लोग बाहर से आते हैं और तोड़-फोड़ करते हैं. उन्होंने कहा कि दंगाई दंगा करते रहें और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, यह कैसे हो सकता है 8. CAA का विरोध करने से पहले इसे पढ़ें गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी तक इस कानून को विरोध कर रहे बच्चों ने उस कानून को ठीक से पढ़ा नहीं है. पहले वे इसे ढंग से पढ़ लें, उनकी शंकाए दूर हो जाएंगी. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि इसके बाद कोई समस्या-समाधान होगा, तो उसको लेकर जरूर सरकार बातचीत करेगी. 9. क्या शोकेस में रखने के लिए बनाया NRC देश के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि NRC का आइडिया कांग्रेस का है. क्या कांग्रेस इस कानून को शोकेस में रखने के लिए लेकर आई थी. अमित शाह ने कहा कि राजीव गांधी के समय में ही असम समझौता किया था. 10. जो 1950 में तय हुआ वो 70 साल में नहीं हुआ गृह मंत्री ने इस कार्यक्रम में कहा कि जब नेहरू-लियाकत अली समझौते का पाकिस्तान में पालन नहीं हुआ तब यह हमारी जिम्मेदारी थी कि हम वहां के अल्पसंख्यकों को यहां शरण दें. कांग्रेस ने 70 साल तक इन लोगों को नर्क की जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया. अपनी वोट बैंक के लिए उन्हें कई चीजें भुगतनी पड़ी. 11. युगांडा से आए तो हिंदुओं को नागरिकता क्यों गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान कांग्रेस से बड़ा सवाल भी पूछा. उन्होंने कहा कि आज वे कांग्रेस के नेताओं से सवाल पूछना चाहते हैं कि युगांडा से सारे हिंदू आए तो कांग्रेस ने उन हिंदुओं को नागरिकता क्यों दी? 12. कांग्रेस ने शेख अब्दुल्ला को 11 सालों तक तमिलनाडु में रखा गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने तो फारुक अब्दुल्ला को अच्छे से कश्मीर में रखा है. वहां दो कांस्टेबल ही हैं. कांग्रेस ने तो शेख अब्दुल्ला को कश्मीर नहीं बल्कि तमिलनाडु में 11 साल तक नजरबंद रखा था. गुलाम नबी आजाद को इस मुद्दे पर सवाल पूछने का हक नहीं है. 13. फ्रांस सारे हिंदुओं को निकाल दे तो वो कहां जाएंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला और सवाल उठाया कि अगर कल को सत्ता परिवर्तन के बाद फ्रांस अपने यहां से सारे हिंदुओं को निकाल दे तो वो कहां जाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू प्रताड़िता होंगे तो यहीं आएंगे. 14. कांग्रेस गैर मुस्लिमों को सुरक्षा देने को बाध्य गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 25 नवंबर 1947 को अपनी कार्यकारिणी ने संकल्प अंगीकार किया और कहा कि वह पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए बाध्य है. जो उनके जीवन और सम्मान की रक्षा करने के लिए जो सीमा पार कर के भारत आए हैं या आने वाले हैं. 15. 5 साल में 600 मुसलमानों को दी नागरिकता गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार ने पांच साल में अफगानिस्तान, पाकिस्तान समेत दूसरे देश से आए 600 प्रताड़ित मुसलमानों को नागरिकता दी है. दुनिया के किसी भी देश में हिंदू निकाला जाएगा तो कहां जाएगा, यहीं आएगा. 1971 में इंदिरा गांधी ने सामूहिक नागरिकता दी थी. 16. नेहरू जी ने कहा था 370 घिस जाएगा, हमने घिस दिया गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत की संविधान पीठ में ज्यादातर लोग कांग्रेसी थे. 370 हटाने का रास्ता कांग्रेस ने ही दिया था. नेहरू जी ने तभी संसद में कहा था कि 370 घिसते-घिसते घिस जाएगा. हमने घिस दिया. 17. PoK भारत का है, भारत में ही रहना चाहिए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ये मानती है कि पाक अधिकृत कश्मीर (POK) भारत का है, भारत में सम्मिलित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये मंच नहीं है कि एडवांस में इसकी घोषणा की जाए. 18. अयोध्या एक्ट कांग्रेस लेकर आई, अब ऐतराज क्यों अमित शाह ने कहा कि वर्ष 1994 में कांग्रेस अयोध्या एक्ट लेकर आई. उसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट अगर फैसला हिंदू के पक्ष में करेगी तो जमीन हिंदुओं को दी जाएगी. मुसलमानों के पक्ष में फैसला आएगा तो जमीन उन्हें दी जाएगी. अब सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं के पक्ष में फैसला सुना दिया तो कांग्रेस उसपर आवाज उठा रही है. 19. PAK-बांग्लादेश के अल्पसंख्यक कहां गए? गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विभाजन के बाद बहुत से मुसलमान यहां रह गए. तब पाकिस्तान में 23% हिंदू थे, अब महज 3% रह गए. जबकि बांग्लादेश में 30% हिंदू थे, जिसमें से महज 7% रह गए. ये सारे अल्पसंख्यक कहां गए. इनका धर्म परिवर्तन करा दिया गया. या फिर ये प्रताड़ित होकर भारत आए. 20. घुसपैठिए दीमक होते हैं गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सभी धर्मों का देश है. लेकिन जब कोई बाहर से आता है तो वह हिंदू-मुसलमान सबके लिए खतरा बनता है. वे उनकी रोजी-रोटी खाते हैं. ये घुसपैठिए दीमक होते हैं. हमें कभी भी नागरिकता को हल्के में नहीं लेना चाहिए. किसी भी देश की सीमाएं खुली नहीं होती है. 21. तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हमने लागू किया आजतक के कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट का फैसला था. हमने तो सिर्फ लागू किया. लेकिन आरोप लगता है कि इसे हम जबरदस्ती लेकर आए. 22. दिल्ली-बंगाल-झारखंड में आएगी भाजपा की सरकार गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल और झारखंड में बीजेपी दोबारा सरकार बनाएगी. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी. 23. जल्दबाजी नहीं है, 70 साल का इंतजार कम है क्या गृह मंत्री से जब पूछा गया कि उनकी सरकार फैसले लेने में जल्दबाजी कर रही है, तो उन्होंने कहा कि हम जल्दी में कहां हैं, 70 साल हो गया. अभी कोई चुनाव भी नहीं है, हम चुनाव के लिए यह नहीं कर रहे. हम सरकार चलाने के लिए नहीं देश की समस्याओं का समाधान करने आए हैं. हम राजनीति नहीं करना चाहते, देश को अच्छा बनाना चाहते हैं. 24. नहीं मानते कि भारत हिंदू राष्ट्र बने कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह से जब ये सवाल पूछा गया कि क्या उनका सपना भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का है, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी ऐसी कोई सोच नहीं है, उन्होंने कहा कि उनका और इस सरकार का एक ही धर्म है और वो है संविधान की किताब. 25. निर्मला सीतारमण अच्छा काम रही हैं जीडीपी के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मौजूदा समय में भले की जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी पर पहुंच गई है. लेकिन यह स्थिति आगे नहीं रहने वाली है. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए आठ बड़े कदम उठाए हैं जिसका सकारात्मक असर दिखेगा और अर्थव्यवस्था में फिर रौनक लौटेगी. 26. 2 क्वार्टर, 5 साल नहीं होते इकोनॉमी पर गृह मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष के दो क्वार्टर 5 साल नहीं होते हैं, उन्होंने कहा क देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही फिर तेजी में लौटेगी. 27. महाराष्ट्र में फेल नहीं हुए गृह मंत्री ने कहा कि बीजेपी महाराष्ट्र में फेल नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि हमारे गठबंधन को 160 सीटें मिली थी, जो बहुमत से 20 सीटें ज्यादा हैं. गृह मंत्री ने कहा कि शिवसेना ने चुनाव से पहले कभी मुख्यमंत्री पद की मांग नहीं की थी. 28. महाराष्ट्र में हमारा साथी भाग गया अमित शाह ने कहा कि अगर महाराष्ट्र में बीजेपी का साथी भागता नहीं तो, वहां पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा ही नहीं होती. उन्होंने कहा कि हमने सरकार बनाने के प्रयास किए थे लेकिन नहीं बना पाए क्योंकि हमारा साथी भाग गया था. उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना चुनाव से पहले हमसे कोई समझौता करती तो हम दो कदम जरूर आगे जाते. 29. मैं पीएम की रेस में नहीं एजेंडा आजतक में अमित शाह ने साफ कहा कि वे पीएम पद की रेस में नहीं हैं. अमित शाह ने कहा, 'आप पीएम की ओर संकेत कर रहे हैं तो मैं कहूं कि मैं बहुत जूनियर हूं, हमसे बहुत वरिष्ठ कई नेता हैं, आगे हैं. ढेर सारे नेता हैं. हमारी पार्टी में फैसले पार्टी करती हैं. मैं इस दौड़ में नहीं हूं, हम सबका अभी यही सपना है कि मोदी जी सफल हों और नया भारत ऐसे मुकाम पर पहुंचे जिसका सपना हमारे आजादी के सेनानियों ने देखा था.' 30. जाति नहीं, मेरिट के आधार पर बनाते हैं नेता केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उनकी पार्टी की सोच यह है कि जाति नहीं, मेरिट के आधार पर नेता तय किए जाएं, भले ही इसमें तात्कालिक रूप से पार्टी को नुकसान होता हो. उन्होंने कहा कि नेता को लोकतंत्र में जातिवाद, ब्लॉक के आधार पर नहीं बल्कि प्रदर्शन के आधार पर चयन करने की शुरुआत करनी थी तो यह मोदी जी ने किया. हो सकता है कि इसका अस्थायी नुकसान हमे भुगतना पड़े. 31. प्रज्ञा ठाकुर को कड़ा संदेश गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के महात्मा गांधी पर दिए गए विवादित बयानों पर कहा कि बीजेपी ने इस बार कठोर संदेश उन्हें दिया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रज्ञा ठाकुर के बयानों का और न ही उनकी भावनाओं का किसी प्रकार से समर्थन करती है. 32. विशेष परिस्थितियों में प्रज्ञा को टिकट गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को पार्टी ने लोकसभा चुनाव में विशेष परिस्थितियों और अनुमान के आधार पर दिया गया था. अमित शाह ने कहा कि इस बार प्रज्ञा ठाकुर को सख्त मैसेज दिया गया है. 33. बलात्कार के दोषियों को जल्द दंड मिलना चाहिए गृह मंत्री ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के मामलों में जल्दी फैसले आने चाहिए, इस पर सबकी सहमति है. दोषियों को दंड जल्दी मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने ही इसके लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया. इसे कानूनी जामा पहनाया. 34. हैदराबाद एनकाउंटर पर अमित शाह ने क्या कहा गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हैदराबाद एनकाउंटर पर लोगों द्वारा खुशी जाहिर करना, न्याय मिलने में हो रही देरी को प्रकट करता है. गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द इंसाफ मिलना चाहिए. 35. सेंगर पर कार्रवाई में वक्त क्यों गृह मंत्री अमित शाह से जब पूछा गया कि बीजेपी रेप के दोषी सेंगर पर कार्रवाई करने में इतना देर क्यों लगा दी, तो उन्होंने कहा कि जब भी कोई मामला मीडिया में आता है तो सच्चाई जाने बिना एक्शन लेना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने दोनों नेताओं के खिलाफ तत्काल एक्शन लिया और दोनों को सस्पेंड किया.
नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2019,एजेंडा आजतक-2019' के मंच से देश के गृहमंत्री अमित शाह ने NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) और नागरिकता कानून पर खुलकर बातचीत की. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सभी धर्मों का देश है, लेकिन जब कोई बाहर से आता है तो वह हिंदू-मुसलमान सबके लिए खतरा बनता है. ये घुसपैठिए दीमक होते हैं. ऐसे में हमें कभी भी नागरिकता को हल्के में नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि घुसपैठिए हिंदू और मुसलमान दोनों के रोजगार के लिए खतरा है. एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा 'शाह है तो संभव है' सत्र में आजतक और इंडिया टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है. जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा. एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. 600 प्रताड़ित मुसलमानों को नागरिकता दी गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार ने पांच साल में 600 प्रताड़ित मुसलमानों को नागरिकता दी. दुनिया के किसी भी देश में हिंदू निकाला जाएगा तो कहां जाएगा, यहीं आएगा. 1971 में इंदिरा गांधी ने सामूहिक नागरिकता दी थी. देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था नागरिकता कानून को एनआरसी से जोड़कर देखने के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था. कांग्रेस ने बंटवारे के वक्त सरेंडर किया और धर्म के आधार बंटवारा हुआ. इसमें बहुत सारे लोग मारे गए. यहां से लाखों शरणार्थी वहां गए और वहां से लाखों यहां आए. इस दौरान बहुत मुसलमान रह गए. खैर उन्हें यहां कोई खतरा नहीं है, लेकिन बहुत सारे हिंदू, सिख, जैन वहां रह गए, लेकिन उनकी चिंता सबको है.
नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2019,एजेंडा आजतक-2019' के मंच से देश के गृहमंत्री अमित शाह ने NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) को लेकर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है. जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा. एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. अमित शाह ने कहा कि एनआरसी सिर्फ मुस्लिमों के लिए नहीं है. शो केस में रखने के लिए कानून बनाया था? 'शाह है तो संभव है' सत्र में आजतक और टीवी टुडे नेटवर्क के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल से बातचीत के दौरान अमित शाह ने सवाल उठाते हुए कहा कि एनआरसी लेकर कौन आया? आज लोग विरोध कर रहे हैं, मैं कांग्रेस अध्यक्ष और गुलाम नबी आजाद से पूछना चाहता हूं, जब 1985 में असम समझौता हुआ तो पहली बार एनआरसी की बात स्वीकार की गई थी. हमारे 1955 सिटीजनशिप एक्ट के क्लॉज 14 में 3 दिसंबर 2004 को इसे जोड़ा गया. फिर 9 नवंबर 2009 को रूल-4 जोड़ा गया, जो एनआरसी बनाने की ताकत देता है. इस दौरान कांग्रेस की ही सरकार थी. अब अपने द्वारा बनाए गए कानून पर ही हमसे सवाल कर रहे हैं. क्या कांग्रेस ने शो केस में रखने के लिए ये कानून बनाया था? 70 साल तक अल्पसंख्यकों पर ध्यान नहीं दिया नागरिकता कानून को एनआरसी से जोड़कर देखने के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था. कांग्रेस ने बंटवारे के वक्त सरेंडर किया और धर्म के आधार पर बंटवारा हुआ. इसमें बहुत सारे लोग मारे गए. यहां से लाखों शरणार्थी वहां गए और वहां से लाखों यहां आए. इस दौरान बहुत से मुसलमान यहां रह गए. खैर उन्हें यहां कोई खतरा नहीं है, लेकिन बहुत सारे हिंदू, सिख, जैन वहां रह गए, लेकिन उनकी चिंता सबको है. शाह ने कहा कि दिल्ली में 1950 में नेहरू और लियाकत अली खान में समझौता हुआ कि दोनों देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करेंगे. तब से लेकर अब तक के आंकड़ों को देखिए, पाकिस्तान में 3 प्रतिशत हिंदू रह गए हैं. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या कम हो गई है. जब नेहरू-लियाकत समझौते पर अमल नहीं हुआ तब ये करने की जरूरत पड़ी. कांग्रेस ने 70 साल तक अल्पसंख्यकों पर ध्यान नहीं दिया. अल्पसंख्यकों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं अमित शाह ने नागरिकता कानून पर कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं होने वाला है. क्योंकि इस कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी बल्कि यह कानून तीन देशों से धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का कानून है. अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को यह कानून नागरिकता देगा.
मुंबई/नई दिल्ली नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई इलाकों में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच होम मिनिस्टर अमित शाह ने विपक्षी दलों पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को साफ कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) में कुछ भी गलत नहीं है और कानून को वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। मुंबई में एक कार्यक्रम में शाह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनकी पार्टी और सरकार चट्टान की तरह इस कानून के पीछे खड़े हैं। शाह ने दो टूक कहा कि आपको (विपक्षी दलों को) जो राजनीतिक विरोध करना है करो, बीजेपी की मोदी सरकार दृढ़ है। सभी शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी, वे भारत के नागरिक बनेंगे और सम्मान के साथ रहेंगे। शाह ने कहा कि पूरा विपक्ष ही लोगों के बीच भ्रम फैलाने में जुटा है। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर से समझाने की कोशिश की है कि नागरिकता कानून का मतलब अल्पसंख्यक वर्ग के किसी भी व्यक्ति से सिटिजनशिप वापस लेना नहीं है। बिल में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है। इस बीच, दिल्ली में जामिया यूनिवर्सिटी के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शनों की आग सीलमपुर इलाके तक जा पहुंची है। शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था, जिसका एक हिस्सा एक-दूसरे देश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करना था। इस पर बीते 70 सालों से काम नहीं किया गया क्योंकि आप (कांग्रेस) वोट बैंक बनाना चाहते थे। हमारी सरकार ने इस पैक्ट को सही ढंग से लागू किया है और लाखों लोगों को नागरिकता देने का फैसला किया है, जो बीते कई सालों से इंतजार में थे। नए कानून को पढ़ें छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर अमित शाह ने छात्रों से कहा कि वह इस बिल का अभ्यास करें, आपके पास जो सूचना है वह ठीक नहीं है. गृह मंत्री ने कहा कि छात्रों को कानून पढ़ना चाहिए. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छात्र किसी के बहकावे में न आएं. शाह ने कहा कि ये कानून किसी की भी नागरिकता लेने के लिए कोई भी प्रावधान रखता ही नहीं है, खासकर अल्पसंख्यकों की. उन्होंने कहा कि जो भारत में रहते हैं उन मुस्लिम भाइयों-बहनों की नागरिकता कहीं नहीं जाने वाली है. शाह ने कहा कि मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि साइट पर पूरा एक्ट पड़ा हुआ है जिसे वे पढ़ सकते हैं यदि इसमें किसी प्रावधान के अंदर किसी को अन्याय होने वाला दिखाई दे तो हमें बताएं. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात को स्पष्ट किया है. शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समूचा विपक्ष देश को गुमराह करने पर लगा हुआ है शाह ने दिल्ली की जनता से की ये अपील अमित शाह ने आगे कहा- 'मैं आज दिल्ली की जनता को कहना चाहता हूं कि विपक्ष, केजरीवाल एंड कंपनी और कांग्रेस पार्टी जो गुमराह करके दिल्ली की शांति को भंग करने का काम कर रहे हैं उनको पहचानने की जरूरत है. गृह मंत्रालय ने भी एक बार फिर से कहा कि है कि इस ऐक्ट का किसी भी विदेशी को बाहर भेजने से लेना-देना नहीं है। उन्हें बाहर भेजने के लिए पहले से मौजूद प्रक्रिया का ही पालन किया जाएगा। इसके अलावा यह ऐक्ट किसी भारतीय नागरिक पर भी किसी तरह से लागू नहीं होता है। राजनाथ सिंह बोले, नफरत नहीं सिखाती भारतीय संस्कृति गृह मंत्री के अलावा अमेरिका में एक कार्यक्रम में मौजूद डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर भ्रम दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि यह ऐक्ट मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। राजनाथ सिंह ने कहा, 'हमारी संस्कृति किसी से नफरत करना नहीं सिखाती।' नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता का प्रावधान है। 31 दिसंबर, 2014 तक आए लोगों को मिलेगी नागरिकता धार्मिक उत्पीड़न के चलते 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए ऐसे लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। मंत्री स्तरीय वार्ता के लिए अमेरिका पहुंचे राजनाथ सिंह ने भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में यह बात कही। (
17 दिसंबर 2019,गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि बाहर से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को हमारी सरकार नागरिता जरूर देगी. दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि आपको जो रानजीतिक विरोध करना है वो करो, भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार अडिग है. शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी. वे भारत के नागरिक बनेंगे और सम्मान के साथ दुनिया में रहेंगे.
रांची नागरिकता कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला किया है। झारखंड के बरहेट में चुनावी जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैं कांग्रेस सहित उन तमाम दलों को इस वीरों की धरती से आज चुनौती देता हूं कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे खुलकर घोषणा करें कि वे पाकिस्तान के हर नागरिक को भारत की नागरिकता देने के लिए तैयार हैं। देश उनका हिसाब चुकता करेगा। कांग्रेस में हिम्मत है तो वे ये भी घोषणा करें कि वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में फिर से आर्टिकल 370 लागू करेंगे। कांग्रेस में या उसके साथियों में हिम्मत है तो वे ये घोषणा करें कि तीन तलाक के खिलाफ जो कानून बना है, उसको वे रद्द कर देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस और उसके साथी इस मुद्दे पर मुसलमानों को भड़काने का, डराने का, भयभीत करने का प्रयास करके अपनी राजनीतिक खिचड़ी पकाना चाहते हैं। कांग्रेस की बांटो और राज करो, इसी नीति के चलते देश का एक बार बंटवारा हो चुका है। मां भारती के टुकड़े पहले हो चुके हैं। यही कांग्रेस है जिसने अवैध तरीके से लाखों घुसपैठियों को भारत में घुसने दिया। यहां उनको वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया।' लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करें' झारखंड में मोदी ने कहा, 'मैं फिर से स्पष्ट कर दूं कि भारत सरकार का एक ही ग्रंथ है बाबा साहब आंबेडकर का दिया हुआ संविधान। हमारे लिए एक ही मंत्र सर्वोपरि है और एक ही मंत्र हमारी प्रेरणा है, भारत माता की जय।' उन्होंने कहा, 'मेरा देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के युवा साथियों से भी आग्रह है कि आप अपने महत्व को समझें, जहां आप पढ़ रहे हैं उन संस्थानों के महत्व को समझें। सरकार के फैसलों और नीतियों को लेकर चर्चा करें, डिबेट करें। अगर आपको कुछ गलत लगता है तो लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करें, सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं। ये सरकार आपकी हर बात, हर भावना को सुनती, समझती है।' 'कथित अर्बन नक्सल की साजिश तो नहीं...' मोदी ने कहा, 'आपको ये भी समझना होगा कि कहीं कुछ दल, कथित अर्बन नक्सल और अपने आपको बुद्धिजीवी कहने वाले लोग आपके कंधे पर बंदूक रखकर अपना राजनीतिक उल्लू तो सीधा नहीं कर रहे हैं। आपकी बर्बादी के पीछे इनका ये षडयंत्र तो नहीं है।' उन्होंने कहा, 'यह देश 20 साल से देख रहा है कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ मोदी से नफरत है। देशहित से जुड़ा कोई भी मुद्दा हो, वे मोदी के प्रति जो उनकी नफरत है उससे आगे ही नहीं देख पाते हैं। मुसलमानों को डरा रही है कांग्रेस' झारखंड में मोदी ने कहा, 'घुसपैठियों के कारण जो समस्याएं पैदा हुई हैं उसके लिए भी कांग्रेस और उसके साथी दल, जो इतने सालों तक सत्ता भोगते रहे वही जिम्मेदार हैं। उन्होंने नागरिकता कानून को लेकर कहा कि कांग्रेस और उसके साथी देश में झूठ फैला रहे हैं। कांग्रेस तो मुसलमानों को डरा रही है। रही बात नागरिकता कानून की तो देश के एक भी नागरिक पर इसका असर नहीं पड़ेगा। यह कानून भारत में आने वाले लोगों के लिए है। 'विपक्ष को नहीं पच रहा आपका आशीर्वाद' पीएम मोदी ने यह भी कहा, 'दूर-दूर से इतनी बड़ी तादाद में आप मुझे यहां आशीर्वाद देने आए हैं। आपका यही स्नेह, आशीर्वाद तो जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी और देशभर के वामपंथियों को परेशान करता है। उनकी नींद हराम कर देता है। मोदी को, बीजेपी को मिल रहा देश का प्यार इनको पच नहीं रहा है।'
नई दिल्ली नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कोशिशें शुरू कर दी हैं। एक तरफ गृह मंत्रालय ने हिंसा को रोकने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अडवाइजरी जारी की है तो दूसरी तरफ नागरिकता ऐक्ट पर कुछ भ्रमों को भी दूर करने की कोशिश की है। गृह मंत्रालय के एक सीनियर अफसर ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी शरणार्थियों को स्वत: भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाएगी। उन्हें जरूरी मानदंड पूरा करने के बाद ही भारतीय नागरिक बनने का अधिकार होगा। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन के बीच होम मिनिस्ट्री ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। अधिकारी ने कहा, ‘नए कानून का यह मतलब नहीं है कि सभी शरणार्थियों या अवैध प्रवासियों को खुद ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा, जिस पर सक्षम अधिकारी विचार करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘संबंधित आवेदक को जरूरी मानदंडों को पूरा करने के बाद ही भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। ऐक्ट को अमल में लाने के लिए बनेगा नियम केंद्र सरकार नागरिकता ऐक्ट के प्रावधानों को अमल में लाने के लिए नियम बनाएगी। अधिकारी के मुताबिक, ‘इन समुदायों का कोई भी शरणार्थी अपने आप ही भारतीय नागरिक नहीं बन जाएगा। उसे ऑनलाइन आवेदन करना होगा और सक्षम अधिकारी देखेंगे कि वह भारतीय नागरिक के तौर पर पंजीकरण की सभी पात्रताएं पूरी करता है या नहीं।’ इन 6 समुदायों के लिए ऐक्ट में नागरिकता का प्रावधान बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से यहां आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन समुदाय के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। गृह मंत्रालय की अडवाइजरी, अफवाहों से बचें, हिंसा रोकें इससे पहले अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय ने लिखा है कि राज्यों को कानून-व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्यों को इस ऐक्ट के संबंध में फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर तैर रही अफवाहों से भी निपटने के लिए कहा गया है। केंद्र सरकार ने इस ऐक्ट के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के लिए सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
रांची/नई दिल्ली: नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया है कि यह सब कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मिलकर करवा रही है. अमित शाह ने कहा है, 'नागरिकता कानून किसी की नागरिकता छिनने का काम नहीं कर रहा है, बल्कि यह गरीब, दुखियारे को नागरिकता देने काम करेगा.' उन्होंने कहा, 'मैं विद्यार्थियों से भी अपील करता हूं कि आप नागरिकता कानून का अभ्यास कीजिए, तब आप समझ पाएंगे कि इसमें नागरिकता छिनने को कोई प्रावधान नहीं है. ये कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस आपको गुमराह कर रहे हैं. ये लोग देश के अंदर हिंसा का वातावरण पैदा कर रहे हैं. मैं कांग्रेस, आप और टीएमएसी से भी कहना चाहता हूं कृपया आप भी इस रास्ते से वापस आ जाइए इससे किसी का भी भला नहीं हो सका है. साथ ही युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप अभ्यास कीजिए तब समझ पाएंगे कि इसमें नागरिकता छिनने का कोई प्रावधान नहीं है.' राहुल इतालवी चश्मा पहन रहे हैं : अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी 'इतालवी चश्मा' पहन रहे हैं. अमित शाह ने झारखंड के पाकुड़ में एक रैली में कहा, 'राहुल बाबा और हेमंत (सोरेन) का कहना है कि अनुच्छेद 370 और कश्मीर के बारे में क्यों बात करते हैं. राहुल बाबा, आप समझ नहीं रहे क्योंकि आप इतालवी चश्मा पहन रहे हैं. झारखंड के हजारों युवा सीआरपीएफ, बीएसएफ और सेना में कश्मीर के लिए अपना जीवन कुर्बान कर रहे हैं.' गृहमंत्री ने कहा, 'पूरा देश चाहता है कि कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा बने.' उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने के बाद कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. कश्मीर अब भारत का ताज है. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस व जेएमएम का कहना है कि झारखंड को देश की सुरक्षा से क्या करना है. मुझे बताएं कि क्या झारखंड के लोगों को देश की सुरक्षा की चिंता है या नहीं?' उन्होंने कहा, 'संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के 10 साल के शासन में पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ होती थी और सेना के जवानों के सिर काटे जाते थे. जब मोदी प्रधानमंत्री हुए उन्होंने (पाकिस्तान) उरी व पुलवामा में ऐसा किया. वे भूल गए कि यह मौनी बाबा की सरकार नहीं है, बल्कि 56 इंच की मोदी सरकार है. भारत ने एक सर्जिकल एयर स्ट्राइक किया और आतंकवादियों को तबाह कर दिया.' शाह ने कहा, 'मुझे बताएं राहुल व हेमंत की सरकार क्या देश की सुरक्षा कर सकती है. भारत मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है. मोदी के हाथों को मजबूत करने के लिए भाजपा को वोट करें.' उन्होंने राम जन्मभूमि के मुद्दे को लंबित रखने के लिए कांग्रेस की निंदा की.
नई दिल्ली नागरिकता कानून के विरोध में असम से लेकर दिल्ली तक देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शनों के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने अडवाइजरी जारी की है। होम मिनिस्ट्री ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अडवाइजरी जारी कर कहा है कि हिंसक प्रदर्शनों पर लगाम कसी जाए। होम मिनिस्ट्री ने सभी राज्यों से कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा और उनके जीवन की रक्षा अहम है। अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय ने लिखा है कि राज्यों को कानून-व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्यों को इस ऐक्ट के संबंध में फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर तैर रही अफवाहों से भी निपटने के लिए कहा गया है। केंद्र सरकार ने इस ऐक्ट के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के लिए सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को भी जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी ने हिंसा के लिए कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार इससे पहले बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जामिया समेत देश भर में ऐक्ट के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के लिए कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपने हित साध रही है।
नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को बांग्लादेश को पूर्वोत्तर में हो रही अवैध घुसपैठ पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। भारत-बांग्लादेश के गृह मंत्री स्तर की वार्ता की 7वीं बैठक में बांग्लादेश के गृह मंत्री असद-उज-जमां खान के समक्ष इस मुद्दे को रखा गया। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शाह ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में इस समस्या का समाधान खोजने के मद्देनजर सीमा पार से लोगों की अवैध घुसपैठ के बारे में भारत की चिंता को साझा किया। यह बैठक 31 अगस्त को असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले हुई है। बयान में कहा गया है कि दोनों गृह मंत्रियों ने सीमा पार अपराधों के खतरे को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया और इसलिए 'एक सुरक्षित सीमा का हमारा उद्देश्य' हासिल करने के लिए अधिक से अधिक सहयोग की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने सीमाओं पर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से संबंधित लंबित मुद्दों की भी समीक्षा की और मामलों को तेजी से हल करने के लिए कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की। वार्ता के बाद, शाह ने एक ट्वीट में कहा, 'उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की।' बैठक के दौरान, मंत्रियों ने संतोष व्यक्त किया कि दोनों देश सुरक्षा और सीमा प्रबंधन सहित हर क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक करीब से काम कर रहे हैं।
ढाका बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमेन ने कहा कि उनके देश ने भारत से अनुरोध किया कि अगर उसके पास वहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि भारत सूची मुहैया कराता है तो उन नागरिकों को लौटने की मंजूरी दी जाएगी। भारत की राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) पर एक सवाल के जवाब में मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश-भारत के संबंध सामान्य और काफी अच्छे हैं और इन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए पिछले सप्ताह भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी थी। उन्होंने कहा कि भारत ने एनआरसी प्रक्रिया को अपना आंतरिक मामला बताया है और ढाका को आश्वस्त किया कि इससे बांग्लादेश पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुछ भारतीय नागरिक आर्थिक वजहों से बिचौलिए के जरिए अवैध रूप से बांग्लादेश में घुस रहे हैं। मोमेन ने यहां मीडिया से कहा, ‘अगर हमारे नागरिकों के अलावा कोई बांग्लादेश में घुसता है तो हम उसे वापस भेज देंगे।’ उनसे उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था कि कुछ लोग भारत के साथ लगती सीमा के जरिए अवैध रूप से देश में घुस रहे हैं। भारत में रह रहे अवैध नागरिकों को देंगे जगह' मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश ने नई दिल्ली से अनुरोध किया है कि अगर उसके पास भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की कोई सूची है तो उन्हें मुहैया कराए। उन्होंने कहा, ‘हम बांग्लादेशी नागरिकों को वापस आने की अनुमति देंगे क्योंकि उनके पास अपने देश में प्रवेश करने का अधिकार है।’यह पूछे जाने पर कि उन्होंने भारत की यात्रा रद्द क्यों कर दी, इस पर मोमेन ने कहा कि व्यस्त कार्यक्रम और विदेश मामलों के राज्य मंत्री शहरयार आलम और देश में मंत्रालय के सचिव की अनुपस्थिति के कारण उन्होंने यात्रा रद्द कर दी। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने रद्द की थी भारत यात्रा नई दिल्ली में राजनयिक सूत्रों ने बताया कि मोमेन और गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने संसद में विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पारित होने के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी। मोमेन ने अपनी यात्रा रद्द करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को गलत बताया था कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया गया। भारत में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि मोमेन ने अपनी यात्रा रद्द करने के बारे में भारत को बता दिया है और कहा कि शाह ने सैन्य शासन के दौरान बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का हवाला दिया था, न कि मौजूदा सरकार के शासन में।
दुमका नागरिकता कानून को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और उनके सहयोगियों पर तीखा हमला बोला है। पीएम ने कहा कि कल तक जो काम पाकिस्तान करता रहा, आज वह काम कांग्रेस कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर देश में अराजकता फैलाने की आरोप लगाया और कहा कि जिस तरह से देश में आग लगाने की कोशिश की गई है, उससे साफ हो गया है कि नागरिकता कानून का हमारा फैसला हजार फीसदी सच्चा है। देशहित में है। आग लगाने वालों के कपड़ों से हो रही पहचान: पीएम झारखंड के दुमका में आयोजित चुनावी रैली में कांंग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पीएम ने कहा, 'कांग्रेस और उसके साथी तूफान खड़ा कर रहे हैं। उनकी बात चलती नहीं है तो आगजनी फैला रहे हैं। ये जो आग लगा रहे हैं, ये कौन हैं, उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है। देश का भला करने की, देश के लोगों का भला करने की इन लोगों से उम्मीद नहीं बची है। ये सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार के बारे में सोचते हैं।' विदेशों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पीएम का हमला प्रधानमंत्री ने शनिवार को दुनिया के आठ देशों में भारतीय दूतावासों के बाहर ओवरसीज कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा, 'आप हैरान हो जाएंगे, लंदन में भारत का दूतावास है। 130 करोड़ देशवासियों का प्रतिनिधित्व करता है। जब रामजन्मभूमि का निर्णय हुआ, पाकिस्तान वालों ने जाकर लंदन में भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शन किया। अनुच्छेद 370 का निर्णय हुआ तो पाकिस्तान के लोगों ने उच्चायोग के सामने जाकर प्रदर्शन किया, हिंसक वारदातें भी कीं। पाक की तरह कांग्रेस भी देश को बदनाम करने लगी' मोदी ने कहा कि कांग्रेस का यह काम पाकिस्तान जैसा है। पाकिस्तान भारत को दुनिया में बदनाम करना चाहता है और कांग्रेस ने भी कल यही प्रयास किया। उन्होंने कहा, 'आप हैरान हो जाएंगे कि जो काम लंदन में हमेशा पाकिस्तान करता रहता है, पाक के पैसों से कुछ बिकाऊ लोग करते रहते हैं, पहली बार वही काम कांग्रेस वालों ने किया है। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है? क्या दुनिया के देशों में भारत के ही दूतावास के सामने भारत का ही व्यक्ति प्रदर्शन करता है क्या? अगर गिला-शिकवा तो बात करता है। वह कागज होता है, वह दूतावास भारत सरकार को पहुंचा देती है। दुनिया में भारत को बदनाम करने का काम हो रहा है।' पता हो कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक दिन पहले ही दिल्ली में हुई भारत बचाओ रैली के समय दुनिया के कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों के बाहर प्रदर्शन किया था। 'नागरिकता कानून बनाकर देश को बचा लिया' पीएम ने कहा, 'कांग्रेस और उनके साथी समझ लें... आप ये जो आग लगानेवालों को मूक समर्थन दे रहे हैं, हिंसा पर अपनी आंखें बंद कर ले रहे हैं, वह सब देश देख रहा है। इसे देखकर देश का विश्वास और पक्का हो गया है कि संसद ने नागरिकता का कानून बनाकर देश को बचा लिया है।' कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप पीएम ने कहा, 'हमारे देश की संसद ने नागरिकता कानून से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए हम यह कानून लाए हैं। इन लोगों ने वहां काफी जुल्म सहे हैं। इनका वहां जीना मुश्किल हो गया था। इन देशों से हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन, बौद्ध को शरणार्थी का जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे लोगों को जब हम नागरिकता देने जा रहे हैं, तब भी कांग्रेस को दिक्कत हो रही है।' कांग्रेस के पास कोई रोडमैप नहीं' पीएम ने कहा कि कांग्रेस और जेएमएम के पास झारखंड के विकास का कोई रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा, 'ना तो कांग्रेस और उनके सहयोगियों के पास कोई रोडमैप है और ना ही उन्होंने इस प्रदेश के विकास के लिए कभी कुछ किया है। उन्होंने सिर्फ अपने लिए काम किया है। अपने परिवार के बारे में सोचा है। 'हमारा संकल्प, हर गरीब के पास हो घर' पीएम मोदी ने आगे कहा, '2014 से पहले यहां जो मुख्यमंत्री थे, वह 30-35 हजार घरों के निर्माण का दावा करते थे और उसको ही बहुत बड़ी उपलब्धि बताते थे। अब हम इस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि देश के हर गरीब के पास अपना पक्का घर हो। आपको बेहतर जिंदगी देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। प्रदेश के विकास के लिए हम हमेशा ही समर्पित हैं।'
नई दिल्ली पाक द्वारा नागरिक संशोधन बिल को लेकर की गई टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाक पीएम के हर बयान पर हमें प्रतिक्रिया देने की कोई जरूरत नहीं है। रवीश कुमार ने कहा कि पाक पीएम इमरान खान द्वारा दिए गए ज्यादातर बयान अनुचित होते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री ऐके अब्दुल मोमेन द्वारा अपना भारत दौरा रद्द करने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'पाक पीएम इमरान खान को बेतुके बयान देने की जगह अपने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा भारत के आंतरिक मामलों पर बयानबाजी करने से भी बचना चाहिए।' उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री द्वारा भारत दौरा रद्द करने पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्होंने अपना भारत दौरा रद्द करने के पीछे के कारणों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश से हमारे संबंध मजबूत हैं। जैसा कि दोनों देशों के नेताओं ने कहा था कि यह दोनों देशों के संबंधों का स्वर्णिम काल है।' बांग्लदेश के विदेश मंत्री के बयान पर रवीश कुमार ने कहा, 'यहां कुछ असमंजस की स्थिति है। हम बता चुके हैं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में धार्मिक उत्पीड़न नहीं हो रहा है। जो लोग भारत में रिफ्युजी की तरह रह रहे हैं, उन्होंने धार्मिक आधार पर उत्पीड़न सहा है। यह सब सैन्य शासन और बांग्लादेश की पूर्व के सरकारों के कार्यकाल में हुआ। हम यह बात जानते हैं कि बांग्लादेश की वर्तमान सरकार ने अल्पसंख्यकों की चिंताओं पर खास ध्यान दिया है।' बता दें कि लोकसभा के बाद बुधवार को राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो गया है। इसे लेकर कुछ लोग बेहद खुश हैं तो कुछ लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है। स्थिति यह है कि उत्तर-पूर्व के कुछ इलाकों में काफी तनाव है। गुवाहाटी में उड़ाने रोक दी गई हैं और अगरतला में कर्फ्यू लगा दिया गया है। सरकार ने एहतियातन कई जगहों पर इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया है।
धनबाद नागरिकता संशोधन बिल को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष पर हमला बोला है। झारखंड में आयोजित एक चुनावी रैली में पीएम ने दो टूक कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ही शरणार्थियों का हमेशा इस्तेमाल किया और अब वह इस विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर में आग लगा रही है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस और उनके साथ भ्रम फैला रहे हैं। पूर्वोत्तर के लोगों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि उन्हें किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। हम उनकी संस्कृति, भाषा, मान, सम्मान को और समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नागरिक संशोधन बिल के बहाने पीएम मोदी ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा, कांग्रेस की नीति हमेशा रही है लूटो और लटकाओ। इनके नेता हर चुनाव के पहले बयान देते रहे हैं कि वे बाहर से आने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देंगे। पर, क्या हुआ...अब वे फिर पलट गए। आखिर शोषित लोगों को अधिकार मिलना चाहिए कि नहीं? पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार हुआ...लाखों अल्पसंख्यक सदियों तक शोषित रहे हैं। हम मानवीय दृष्टि से उन्हें नागरिकता देना चाहते हैं तो कांग्रेस को इसमें भी विरोध करना है। भ्रम फैला रही कांग्रेस' पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस और उसके साथी पूर्वोत्तर में भी आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहां भ्रम फैलाया जा रहा है कि बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग आ जाएंगे। जबकि ये कानून पहले से ही भारत आ चुके शरणार्थियों की नागरिकता के लिए है। 31 दिसंबर 2014 तक जो भारत आए उन शरणार्थियों के लिए ही ये व्यवस्था है। इतना ही नहीं पूर्वोत्तर के करीब-करीब सभी राज्य इस कानून के दायरे से बाहर हैं। हम पर विश्वास कीजिए, बहकावे में न आइए' असम के लोगों से शांति की अपील करते हुए पीएम ने कहा, 'खासकर मैं असम के मेरे भाई -बहनों को विश्वास दिलाता हूं कि कोई भी उनके अधिकारों को नहीं छीन सकता। उनकी राजनीतिक विरासत, भाषा और संस्कृति को हमेशा ही संरक्षित करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हम काम करते रहेंगे। वहां के नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भारत सरकार पूरी ताकत से कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी। मैं अपील करता हूं कि कांग्रेस और उनके साथियों के बहकावे में न आएं।' कांग्रेस की डिक्शनरी में जनहित नहीं' चुनावी रैली में कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए पीएम ने कहा, 'कांग्रेस और उसके साथियों की डिक्शनरी में कभी जनहित नहीं रहा। उन्होंने हमेशा स्वहित के लिए, परिवार हित के लिए काम किया। यही कारण है कि काले सोने पर बैठा ये धनबाद और ये पूरा इलाका संपदा से जितना समृद्ध है, उतनी ही अधिक गरीबी यहां बनी रही।' राम मंदिर के बहाने भी कांग्रेस पर वार राम मंदिर का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'राम जन्मभूमि को लेकर जो विवाद सदियों से चल रहा था, उसे कांग्रेस ने जानबूझ कर उलझाया। हमने कहा था, हमारे संकल्प पत्र में लिखा था कि राम जन्मभूमि विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएंगे। हमने अपना वादा निभाया और इसको शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया। इसी तरह हमने तीन तलाक के खिलाफ कानून लाकर लाखों-करोड़ों मुस्लिम महिलाओं का जीवन सुरक्षित किया है।
नई दिल्ली नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में जमकर बवाल हो रहा है। राज्यसभा से भी बिल पास हो चुका है, लेकिन प्रदर्शनों का दौर जारी है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर असम के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि नागरिकता बिल से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। पीएम मोदी ने असम की स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में ट्वीट किया। पीएम का आश्वासान, CAB से डरने की जरूरत नहीं पीएम मोदी ने असम के हितों की रक्षा की बात करते हुए ट्वीट किया, 'मैं असम के अपने भाई-बहनों से अपील करना चाहता हूं कैब (नागरिकता संशोधन विधेयक) से किसी को भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है। मैं आप सभी लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी आपके अधिकारों, विशिष्ट पहचान और सुंदर संस्कृति को आपसे छीन नहीं सकता है। यह सब कुछ पहले की तरह गतिमान रहेगा और विकसित होता रहेगा।' असम के लोगों को पीएम ने दिया भरोसा पीएम मोदी ने इसके साथ ही पूर्वोत्तर के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि केंद्र सरकार उनके हितों के साथ हमेशा खड़ी है। पीएम ने एक और ट्वीट में लिखा, 'केंद्र सरकार और मैं आपके संवैधानिक, राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और असम भूमि के नागरिकों के क्लॉज 6 के तहत सभी अधिकारों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' असम और त्रिपुरा में भारी हिंसा की घटनाएं नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शन के बीच बिगड़ती कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए असम के गुवाहाटी में कर्फ्यू की मियाद को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। हालात पर नियंत्रण के लिए यहां सेना की दो टुकड़ियां तैनात की गई हैं। असम के 10 जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। त्रिपुरा में भी इंटरनेट पर बैन त्रिपुरा में भी विरोधी प्रदर्शनों के बीच असम राइफल्स को तैनात कर दिया गया है। असम राइफल्स की एक-एक टुकड़ी को त्रिपुरा के कंचनपुर और मनु में तैनात किया गया है। उधर, विरोध प्रदर्शन को देखते हुए असम में कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं। PM ने की असम के नागरिकों से अपील
अहमदाबाद गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों की जांच के लिए बने नानावती आयोग ने बुधवार को अपनी 2,500 पन्‍नों की रिपोर्ट दे दी। इस रिपोर्ट में आयोग ने लंबे समय से गोधरा दंगों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे गुजरात के तत्‍कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्‍लीन चिट दी गई है। नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के कुछ धड़ों के बीच पनपी नफरत की गहरी जड़ों की वजह से गुजरात में दंगे हुए। आयोग ने मोदी पर दंगे भड़काने के आरोप को खारिज कर दिया और कहा कि ये आरोप मोदी की छवि को खराब करने के लिए लगाए गए थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'गोधरा की घटना की वजह से बड़ी संख्‍या में हिंदू समुदाय का एक बड़ा वर्ग गुस्‍सा हो गया और उन्‍होंने मुस्लिमों तथा उनकी संपत्तियों पर हमला किया। इस बात के कोई साक्ष्‍य नहीं हैं कि इन दंगों को राज्‍य के किसी मंत्री या धार्मिक या राजनीतिक दल या संगठन ने प्रेरित किया या भड़काया या सहयोग दिया।' आयोग ने अपनी र‍िपोर्ट का दूसरा हिस्‍सा सौंपा है। इसका पहला हिस्‍सा वर्ष 2008 में आया था। इस र‍िपोर्ट में आयोग ने मोदी पर अपने विभिन्‍न फैसलों, जैसे जली हुई बोगियों का दौरा करने, रेलवे यार्ड में शव के पोस्‍टमॉर्टम की जांच करने, पुलिस जांच की दिशा बदलने आदि के जरिए सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा, 'ये अनुमान सही नहीं हैं और इसे मुख्‍यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए।' नानावती आयोग ने स्‍पष्‍ट किया कि लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए कारसेवकों के जली हुई लाशों को अहमदाबाद की सड़कों पर प्रदर्शित नहीं कराया गया था जैसा कि आरोप लगाया गया था। आईपीएस अधिकारियों के बयान खारिज नानावती-मेहता आयोग ने तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों के बयानों और साक्ष्यों को खारिज कर दिया और साथ ही उनके खिलाफ सख्त टिप्पणियां कीं। तीन वरिष्ठ पूर्व आईपीएस अधिकारी- संजीव भट्ट, आर बी श्रीकुमार और राहुल शर्मा- ने फरवरी-मार्च 2002 में हुए दंगों को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा था। इन दंगों में कुल 1,025 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे। बड़े पैमाने पर हुए ये दंगे 27 फरवरी, 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बे जलाने के बाद भड़के थे जिसमें 59 लोग मारे गए थे। इनमें से ज्यादातर कारसेवक थे। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीटी नानावती की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय समिति ने कहा कि राज्य खुफिया विभाग के तत्कालीन उपायुक्त संजीव भट्ट की सरकार और उच्च अधिकारियों के खिलाफ निजी रंजिश थी। गुजरात उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अक्षय मेहता न्यायिक आयोग के अन्य सदस्य थे। आयोग ने कहा कि तत्कालीन एडीजीपी श्रीकुमार ने गुजरात सरकार की छवि धूमिल करने के लिए उसके खिलाफ झूठे आरोप लगाए क्योंकि वह एक असंतुष्ट अधिकारी थे। 'सच नहीं बता रहे थे आईपीएस राहुल शर्मा' अहमदाबाद नियंत्रण कक्ष में तैनात तत्कालीन पुलिस उपायुक्त शर्मा के संबंध में समिति ने पाया कि वह सच नहीं बता रहे थे और सीडी के रूप में उनके साक्ष्य को भरोसे लायक और सही नहीं माना जा सकता। इन सीडी में दंगों के शुरुआती दिनों के दौरान की कॉल डिटेल्स थीं। संजीव भट्ट ने दावा किया था कि वह 27 फरवरी, 2002 को मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में शामिल थे जहां उन्होंने मोदी को पुलिस एवं राज्य प्रशासन को बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों को अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देते हुए सुना था। आयोग ने कहा कि बैठक में संजीव भट्ट को बुलाने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि यह सरकार के शीर्ष स्तर के अधिकारियों की बैठक थी। भट्ट कोई उच्च रैंक वाले अधिकारी नहीं थे कि उन्हें उस बैठक में शामिल होने के लिए कहा जाता। आयोग ने कहा कि भट्ट द्वारा किया गया दावा कि वह बैठक में मौजूद थे, गलत लगता है। समिति ने ये सारी बातें अपनी रिपोर्ट में कहीं जो बुधवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई थी। 'भट्ट ने सीएम की छवि खराब करने की कोशिश की' इसके अलावा आयोग ने एक फैक्स संदेश को भी सही दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया जिसके बारे में कहा गया कि भट्ट ने 27 फरवरी, 2002 को वह भेजा था ताकि वह अपना दावा साबित कर सकें कि वह बैठक में शामिल हुए थे। आयोग ने पाया कि भट्ट ने सरकार और उच्च अधिकारियों के खिलाफ निजी रंजिश की वजह से 27 फरवरी की बैठक के संबंध में अपने ही एक संस्करण के साथ सामने आए ताकि वह मुख्यमंत्री और सरकार की छवि धूमिल कर सकें। साथ ही आयोग ने श्रीकुमार के एक हलफनामे को भी खारिज कर दिया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौखिक तौर पर कई अवैध निर्देश दिए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दंगों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े सबूतों पर विचार करने के बाद आयोग ने पाया कि पुलिस की अनुपस्थिति या उनकी अपर्याप्त संख्या की वजह से हिंसा पर उतारू भीड़ बेकाबू हो गई। आयोग ने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल की मजबूती को सुनिश्चित करने के लिए तुरंत खाली पड़े पदों को भरे। आयोग ने पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस थानों में पर्याप्त अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की तैनाती हो और वे संचार, वाहन और हथियारों से पूरी तरह लैस हों। 'वीएचपी, बजरंग दल के कुछ सदस्‍यों ने भड़काई हिंसा' आयोग ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को बचाने का मोदी पर लगाया गया आरोप आधारहीन है। नानावती आयोग ने पाया कि वीएचपी और बजरंग दल के कुछ स्‍थानीय सदस्‍य हिंसा के लिए जिम्‍मेदार थे। आयोग ने कहा कि तीन से चार जिलों में कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी हिंसा में हिस्‍सा लिया। हालांकि आयोग ने शांति के लिए आगे आने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं की प्रशंसा भी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएचआरसी द्वारा गुजरात सरकार की शुरू में की गई आलोचना अधूरी सूचना पर आधारित थी। आयोग ने कहा कि राज्य सरकार ने एनएचआरसी की सिफारिशों को लागू करने में कोई लापरवाही नहीं बरती।
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2019,केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना झेल कर यहां आने वाले और नागरिकता प्राप्त नहीं कर पाने वाले अल्पसंख्यकों के लिए उम्मीद की किरण है. अमित शाह ने कहा कि इस बिल की वजह से कई धर्म के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी लेकिन विपक्ष का ध्यान सिर्फ इस बात पर कि मुस्लिम को क्यों नहीं लेकर आ रहे हैं. आपकी पंथनिरपेक्षता सिर्फ मुस्लिमों पर आधारित होगी लेकिन हमारी पंथ निरपेक्षता किसी एक धर्म पर आधारित नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, इस बिल में उनके लिए व्यवस्था की गई है जो पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जा रहे हैं, जिनके लिए वहां अपनी जान बचाना, अपनी माताओं-बहनों की इज्जत बचाना मुश्किल है. ऐसे लोगों को यहां की नागरिकता देकर हम उनकी समस्या को दूर करने के प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लिए प्रताड़ित लोग प्राथमिकता हैं जबकि विपक्ष के लिए प्रताड़ित लोग प्राथमिकता नहीं हैं. ऐसे में देश कैसे चलेगा? अमित शाह ने कहा, "आप क्या चाहते हैं? क्या हमें पाकिस्तान से आने वाले मुस्लिमों को नागरिकता देनी चाहिए. ऐसे में देश कैसे चलेगा?" शाह ने कहा, "पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, जैन, पारसी, सिख धर्म को मानने वालों को प्रताड़ित किया गया है. यह विधेयक इन लोगों की गरिमा और जिंदगी की रक्षा करेगा." एनडीए सरकार ने मुस्लिमों को इस विधेयक से बाहर रखने के पीछे का कारण बताते हुए स्पष्ट किया है कि मुस्लिम इन तीन देशों में बहुसंख्यक हैं. सरकार का कहना है कि इन देशों में मुस्लिमों का धार्मिक आधार पर उत्पीड़न नहीं हो सकता, क्योंकि इन देशों में ये बहुसंख्यक हैं. अल्पसंख्यकों के अधिकार छीन लिए अमित शाह ने कहा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों के अधिकार को छीन लिया गया. जब बांग्लादेश का गठन हुआ था, पहले अल्पसंख्यकों के अधिकारों का ख्याल रखा गया, लेकिन इन देशों में अल्पसंख्यक समुदायों के 20 फीसदी आबादी को समाप्त कर दिया गया. या तो उनका धर्मांतरण कर दिया गया या उन्हें मार दिया गया. मंत्री ने कहा कि धार्मिक प्रताड़ना की वजह से कई अल्पसंख्यक भारत आ गए. यहां भी उनका ख्याल नहीं रखा गया. भारत में भी वे मूल अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. यह विधेयक उन लोगों को राहत देगा, जिन्होंने धार्मिक प्रताड़ना झेली है. शाह ने स्पष्ट किया कि 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने एक घोषणा पत्र जारी किया था और लोगों के साथ इसे साझा किया था. गृहमंत्री ने कहा, संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली में, घोषणा पत्र उन नीतियों का आईना होती है, जिसे एक पार्टी को लागू करना होता है. बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में बताया था कि धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. अमित शाह ने कहा कि नेहरू-लियाकत समझौते के तहत दोनों पक्षों ने स्वीकृति दी कि अल्पसंख्यक समाज के लोगों को बहुसंख्यकों की तरह समानता दी जाएगी, उनके व्यवसाय, अभिव्यक्ति और पूजा करने की आजादी भी सुनिश्चित की जाएगी, ये वादा अल्पसंख्यकों के साथ किया गया. लेकिन वहां लोगों को चुनाव लड़ने से भी रोका गया, उनकी संख्या लगातार कम होती रही. यहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, चीफ जस्टिस जैसे कई उच्च पदों पर अल्पसंख्यक रहे. यहां अल्पसंख्यकों का संरक्षण हुआ.
नई दिल्ली नागरिकता संशोधन विधेयक को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। उच्च सदन में इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि 105 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। बिल पर वोटिंग से पहले इसे सेलेक्ट कमिटी को भेजने के लिए भी मतदान हुआ, लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया। सेलेक्ट कमिटी में भेजने के पक्ष में महज 99 वोट ही पड़े, जबकि 124 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया। इसके अलावा संशोधन के 14 प्रस्तावों को भी सदन ने बहुमत से नामंजूर कर दिया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल ऐक्ट में तब्दील हो जाएगा। इस बिल को सोमवार रात को लोकसभा से मंजूरी मिली थी। शिवसेना, बीएसपी ने किया सदन से वॉकआउट दिलचस्प बात यह रही कि लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना के तीन सांसदनों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। बता दें कि लोकसभा में बिल का समर्थन करने को लेकर महाराष्ट्र में उसके साथ सरकार चला रही कांग्रेस ने शिवसेना से ऐतराज जताया था। इसके अलावा बीएसपी के दो सांसदों ने भी वोटिंग का बहिष्कार किया। सोनिया ने बताया काला दिन, शिवसेना बोली- न मिले वोटिंग का हक नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह भारत के इतिहास में काला दिन है। इसके अलावा बिल पर वोटिंग का बायकॉट करने वाली शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा कि शरणार्थियों को नागरिकता दी जानी चाहिए, लेकिन उन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। विपक्ष ने भेदभाव करने वाला बिल बताया गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विधेयक को राज्यसभा में पेश किया और जिसके बाद सदन में काफी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने वाला बताया। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने पूछा कि इस बिल में केवल तीन देशों का और सिलेक्टिव धर्मों का ही चुनाव क्यों किया गया है। आजाद ने कहा कि भूटान, श्री लंका और म्यांमार में भी हिंदू रहते हैं और अफगानिस्तान के मुसलमानों के साथ भी अन्याय हुआ लेकिन उनको विधेयक के प्रावधान में शामिल नहीं किया गया है। 'धर्म के आधार पर न बंटता देश तो न आता बिल' गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि देश का धार्मिक आधार पर बंटवारा न होता तो यह बिल न लाना पड़ता। अमित शाह ने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा कि आखिर जिन लोगों ने शरणार्थियों को जख्म दिए हैं, वही अब जख्मों का हाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यदि कोई सरकार पहले ही इस समस्या का समाधान निकाल लेती तब भी यह बिल न लाना पड़ता।' जानें, किन शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को इस बिल में नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इस बिल में इन तीनों देशों से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का प्रस्ताव है।

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