taaja khabar...सावधान! चीन से आ रहे हैं खतरनाक सीड पार्सल, केंद्र ने राज्यों और इंडस्ट्री को किया सतर्क....लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हवाई हमले की ताकत जुटा रहा चीन, सैटलाइट तस्‍वीर से खुलासा..स्वतंत्रता दिवस से पहले गड़बड़ी की बड़ी साजिश, दिल्ली में भी विदेश से आए 'जहरीले' कॉल....सुशांत सिंहः बीजेपी ने कहा, राउत और आदित्य का CBI करे नार्को, राहुल और प्रियंका गांधी तोड़ें चुप्पी..विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत और चीन पर दुनिया का बहुत कुछ निर्भर करता है...चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी, गडकरी ने बताया क्या है प्लान...कोरोना पर खुशखबरी, देश में 70% के पास पहुंचा कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट...सुशांत के पिता पर टिप्पणी कर फंसे शिवसेना नेता संजय राउत, परिवार करेगा मानहानि का केस...राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट, घर वापसी कराने की कोशिशें तेज ...पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कोरोना पॉजिटिव हुए, अस्पताल में भर्ती ...कोरोना पॉजिटिव पाए गए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, AIIMS में भर्ती ...दिल्ली हिंसा: आरोपी गुलफिशा ने किए चौंकाने वाले खुलासे, 'सरकार की छवि खराब करना था मकसद' ...

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नई दिल्‍ली भारतीय राफेल लड़ाकू विमानों ने जंग की तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल वे हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियों में रात के वक्‍त अभ्‍यास कर रहे हैं। पहाड़ों के बीच कठिन रास्‍तों में उनका यह अभ्‍यास पूर्वी लद्दाख में चीन और कश्‍मीर में पाकिस्‍तान से लड़ाई के हालात में बेहद काम आएगा। यहां हिमालय की चोटियों की टेरेन वहां से काफी हद तक मिलती-जुलती है। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर लद्दाख सेक्‍टर में चीन से लगी सीमा पर हालात बिगड़ते हैं तो राफेल अपनी Meteor और SCALP मिसाइलों के साथ हमला करने को एकदम तैयार रहेंगे। ये राफेल भारतीय वायुसेना की गोल्‍डन एरोज स्‍क्‍वाड्रन को मिले हैं। अपनी सिग्‍नेचर फ्रीक्‍वेंसी बदल सकते हैं ये राफेल हिमाचल प्रदेश में उड़ान भरते हुए राफेल विमान फिलहाल एलएसी से दूरी बनाकर चल रहे हैं। ऐसा इसलिए ताकि अक्‍साई चिन में तैनात पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के रडार इनके फ्रीक्‍वेंसी सिग्‍नेचर्स की पहचान न कर लें। सबसे खराब स्थिति में चीन इन सिग्‍नेचर्स का यूज कर जेट्स को जैम कर सकता है। हालांकि मिलिट्री एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, लद्दाख में भी ट्रेनिंग के लिए राफेल यूज किया जा सकता है क्‍यों‍कि इसमें ऐसे सिग्‍नल प्रोसेसर्स लगे हैं कि जो जरूरत पड़ने पर सिग्‍नल फ्रीक्‍वेंसी बदल सकते हैं। घातक हथियारों से लैस हैं ये राफेल भारत में जो राफेल आए हैं, उनके साथ Meteor बियांड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, MICA मल्‍टी मिशन एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP डीप-स्‍ट्राइक क्रूज मिसाइल्‍स लगी हैं। इससे भारतीय वायुसेना के जांबाजों को हवा और जमीन पर टारगेट्स को उड़ाने की जबर्दस्‍त क्षमता हासिल हो चुकी है। Meteor मिसाइलें नो-एस्‍केप जोन के साथ आती हैं यानी इनसे बचा नहीं जा सकता। यह फिलहाल मौजूद मीडियम रेंज की एयर-टू-एयर मिसाइलों से तीन गुना ज्‍यादा ताकतवर हैं। इस मिसाइल सिस्‍टम के साथ एक खास रॉकेट मोटर लगा है जो इसे 120 किलोमीटर की रेंज देता है। चीन के साथ बातचीत जारी लेकिन तनाव बरकरार भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध दूर करने के लिए कूटनीतिक और सैन्‍य बातचीत चल रही है। फिलहाल तीनों सेनाओं का फोकस न सिर्फ LAC के वेस्‍टर्न सेक्‍टर, बल्कि बाकी हिस्‍सों पर भी है। भारत ने साफ कर दिया है कि चीन को देपसांग और पैंगोंग त्‍सो से पीछे जाना ही होगा, उसके बिना शांति बहाल नहीं हो सकेगी। पिछले हफ्ते सेना प्रमुख ने सेंट्रल और ईस्‍टर्न आर्मी कमांडर्स से हाईएस्‍ट अलर्ट पर रहने को कहा था। नेवी भी अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पेइचिंग भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी सैन्‍य तनाव कई दौर की वार्ता के बाद भी खत्‍म होने के नाम ले रहा है। एक तरफ चीन पैंगोंग सो झील और देपसांग से हटने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं दूसरी ओर ड्रैगन उत्‍तर भारत से सटे अपने इलाकों में हवाई ताकत को लगातार मजबूत करने में जुट गया है। चीन ने अपने भारत से लगे हवाई ठिकानों पर परमाणु बम गिराने में सक्षम विमानों से लेकर हमलावर ड्रोन विमान तक तैनात कर दिए हैं। यही नहीं चीन नए एयरबेस भी बना रहा है। लिखें ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनॉलिस्ट Detresfa की ओर से जारी सैटलाइट तस्‍वीर में साफ नजर आ रहा है कि चीन भारत से सटे अपने 13 एयरबेस को लगातार अपग्रेड करने में जुटा हुआ है। चीन के ये एयरबेस भारत के लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के भारतीय इलाकों से सटे हुए हैं। चीन ने लद्दाख से सटे अपने काशी एयरबेस पर जे 11,जेएच7 और ड्रोन विमानों को तैनात कर रखा है। वहीं होटान एयरबेस पर चीन ने जे11, जे 7, अवाक्‍स और ड्रोन विमानों को तैनात किया है। नागरी बेस पर चीन के जे11 और ड्रोन विमान तैनात हैं। तशकुर्गान और केरिया में दो और एयरबेस बना रहा चीन इसके अलावा चीन तशकुर्गान और केरिया में दो और एयरबेस बना रहा है। इसी तरह से चीन भारत के पूर्वोत्‍तर से सटे अपने इलाके में स्थित हवाई ठिकानों को न केवल लगातार अपग्रेड कर रहा है, बल्कि नए एयरबेस भी बनाने में लगा हुआ है। चीन ने सिक्कित और अरुणाचल की सीमा के पास स्थित श‍िगत्‍से हवाई अड्डे पर जेएच 7 बमवर्षक विमान और जे11/10, अवाक्‍स और ड्रोन विमान तैनात किए हैं। इसी तरह से गोनग्‍गर और गोलमुड हवाई ठिकानों पर लड़ाकू विमान तैनात कर रखे हैं। इसके अलावा चीन कम से कम एक नया बेस बना रहा है और तीन एयरबेस को मॉर्डन सुविधाओं से लैस कर रहा है। बता दें कि अत्याधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण चीन इस इलाके में हवाई शक्ति के मामले में भारत से कमजोर है। जबकि भारतीय एयरबेस निचले क्षेत्र में हैं जहां से वे अपनी पूरी क्षमता के साथ चीन के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। बेलफर सेंटर के मार्च में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, भारत के पास लगभग 270 लड़ाकू विमान और 68 ग्राउंड अटैक फाइटर जेट हैं। वहीं, भारत ने पिछले कुछ दशकों में चीन से लगी सीमा पर कई हवाई पट्टियों का निर्माण किया है जहां से ये फाइटर जेट आसानी से उड़ान भर सकते हैं। चीन-पाक की नापाक दोस्‍ती, भारत करे तैयारी: विशेषज्ञ विशेषज्ञों का कहना है कि कश्‍मीर और लेह के आसपास चीन की बढ़ती हवाई हमले की तैयारी यह बताती है कि ड्रैगन पूरे नॉर्थ इंडिया पर अपना हवाई प्रभुत्‍व स्‍थापित करना चाहता है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि चीन और पाकिस्‍तान की एयरफोर्स में भारत के खिलाफ गठजोड़ हो गया है। उन्‍होंने कहा कि चीन अब पूर्वोत्‍तर भारत में ड्रोन ठिकाने तैयार कर रहा है। इसके जवाब में भारत को सैन्‍य ठिकानों को और ज्‍यादा मजबूत करना होगा ताकि चीन की चुनौती का जवाब दिया जा सके। दरअसल, यहां पाकिस्‍तान के नहीं होने की वजह से चीन अपना खुद का नेटवर्क तैयार कर रहा है। कितना ताकतवर है चीन का जे-11 फाइटर प्लेन शेनयांग जे 11 फाइटर प्लेन की रेंज 3530 किलोमीटर है। जो 2500 किमी प्रतिं घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है। वर्तमान समय में चीन के पास इस प्लेन के 250 से ज्यादा यूनिट मौजूद हैं। यह प्लेन रूस की एसयू 27 एसके का लाइसेंस वर्जन है। यह प्लेन हवाई क्षेत्र की रक्षा और जमीन पर हमला करने के मामले में सक्षम है। इस प्लेन में 30 मिलीमीटर की एक कैनन भी लगी हुई है। जबकि इसके 10 हार्ड प्वॉइंट पर कई तरह की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।
नई दिल्ली सीमा पर आंखें दिखा रहे चीन (China) को सबक सिखाने के लिए भारत सरकार सैन्य मोर्चे के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी बेहद सक्रिय है। चीन से आने वाले कई तरह के सामान को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है और अब कई चीजों पर आयात शुल्क (import duty) बढ़ाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने शनिवार को कहा कि खासकर स्मॉल इंडस्ट्रीज में घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारत को उन सेक्टरों में आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार करना होगा जिनमें हमारी आयात पर अत्यधिक निर्भरता है। गडकरी ने सीआईआई के कार्यक्रम में कहा, 'शायद आपको यह अच्छा नहीं लगे, लेकिन कुछ मामलों में हमें आयात शुल्क बढ़ाना ही होगा। जब तक हम चीन की तरह उत्पादन नहीं बढाएंगे तब तक हमारी लागत कम नहीं होगी। इसलिए हमें ड्यूटी बढ़ानी होगी और भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देना होगा। जब ज्यादा मात्रा में उत्पादन होता है तो स्वाभाविक रूप से हम इसे प्रतिस्पर्द्धी बना सकते हैं।' आयातित उत्पादों की पहचान करे इंडस्ट्री केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंडियन इंडस्ट्री को उन उत्पादों की पहचान करनी चाहिए जिनका आयात किया जा रहा है और उन सेक्टरों में ईज ऑफ डूइंग बिजनस में सुधार के लिए बाधाओं की पहचान करनी होगी। दूसरे देशों खासकर चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मई में आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू किया था। उन्होंने देश को विश्व शक्ति बनाने के लिये आयात होने वाले सामानों का स्वदेशी विकल्प तलाशने का भी आह्वान किया। तीन साल के निर्यात और आयात के आंकड़ों के आधार पर किए जा रहे एक अध्ययन के अनुसार पता चलता है कि चीन का 70 प्रतिशत निर्यात 10 क्षेत्रों से संबंधित है। इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रिकल मशीन व उपकरण भी शामिल है, जो चीन के कुल निर्यात में 671 अरब डॉलर यानी 26.09 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके अलावा कंप्यूटर समेत मशीनरी का निर्यात में 10.70 प्रतिशत यानी 417 अरब डॉलर का योगदान है। पूरे देश में हो उद्योगों का नेटवर्क गडकरी ने उद्योग से आग्रह किया कि वे महानगरों और विकसित शहरों से परे ग्रामीण, दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों में उद्यमों का एक नेटवर्क बिछाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा, ‘मुझे इससे दुख होता है कि उद्योग निकायों का 90 प्रतिशत ध्यान बड़े शहरों और महानगरों में प्रमुख उद्योगों पर है। ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों पर शायद ही कोई ध्यान केंद्रित करता है। इसे बदलने की आवश्यकता है। भारत को एक महाशक्ति बनाने के लिये अग्रिम क्षेत्र के हिसाब से नियोजन समय की जरूरत है।
नई दिल्ली केंद्र ने राज्यों, इंडस्ट्री और अनुसंधान संस्थानों को संदिग्ध सीड पार्सल्स (suspicious/unsolicited seed parcels) के बारे में सतर्क रहने को कहा है। इनमें इस तरह के बीज हो सकते हैं जो देश की जैव विविधता (biodiversity) के लिए खतरा हो सकते हैं। कृषि मंत्रालय ने इस बारे में जारी निर्देश में कहा है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान दुनिया के कई देशों में इस तरह के संदिग्ध बीजों के हजारों पार्सल भेजे गए हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, जापान और कुछ यूरोपीय देशों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। ये पार्सल अज्ञात स्रोतों से भेजे जा रहे हैं और इनमें भ्रामक लेबल लगाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का कृषि विभाग (USDA) ने इन्हें brushing scam और एग्रीकल्चल स्मगलिंग बताया है। उसका भी कहना है कि संदिग्ध सीड पार्सल्स में ऐसे बीज या पैथोजन हो सकते हैं जो पर्यावरण, खेती और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इस तरह के सीड पार्सल देश की जैव विविधता के लिए खतरा हो सकते हैं। इसलिए सभी राज्यों के कृषि विभागों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, सीड एसोसिएशनों, स्टेट सीड सर्टिफिकेशन एजेंसियों, सीड कॉरपोरेशनों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उसके संस्थानों को ऐसे संदिग्ध पार्सलों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'हम पहले ही चीन से पैदा हुई कोविड-19 महामारी से जूझ रहे हैं। अब अगर बीजों के जरिए कोई महामारी आती है तो फिर इसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। हमें अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।' कृषि मंत्रालय के निर्देश पर टिप्पणी करते हुए फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री इन इंडिया के डायरेक्टर जनरल राम कौदिन्य ने कहा कि अभी यह केवल अलर्ट है कि बीजों के जरिए प्लांट डिसीजेज को फैलाया जा सकता है। इसे सीड टेरोरिज्म कहना ठीक नहीं हैं क्योंकि बीज के जरिए बीमारी फैलाने की सीमाएं हैं। लेकिन फिर भी खतरा तो है। उन्होंने कहा कि ऐसे पार्सल्स के जरिए आने वाले बीज खरपतवार हो सकते हैं जो भारत के मूल पेड़-पौधों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
नई दिल्ली भारत और चीन के बीच रिश्ते अभी तनावपूर्ण बने हुए हुए हैं। ऐसे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने भारत और चीन के बीच संबंधों (India China Realtion) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आकार और प्रभाव को देखते हुए दोनों पड़ोसी देशों पर दुनिया का काफी कुछ निर्भर करता है। दोनों देशों के बीच संबंधों का भविष्य किसी तरह के संतुलन या समझ पर पहुंचने से ही निर्भर करता है। सीआईआई (CII) शिखर सम्मेलन में ऑनलाइन कार्यक्रम (Virtual India@75 Summit) के दौरान जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच समस्याएं हैं जो अच्छी तरह परिभाषित हैं। क्या भारत-चीन दोस्त बन सकते हैं, ये बोले जयशंकर क्या भारत और चीन अगले दस-बीस साल में दोस्त बन सकते हैं जैसे फ्रांस और जर्मनी ने अपने अतीत को छोड़कर नए संबंध स्थापित किए। इस सवाल का जयशंकर ने सीधा जवाब नहीं दिया, उन्होंने संबंधों के ऐतिहासिक पहलु की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'हम चीन के पड़ोसी हैं। चीन दुनिया में पहले से ही दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हम एक दिन तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। आप तर्क कर सकते हैं कि कब बनेंगे। हम जनसंख्या की दृष्टि से काफी अनूठे देश हैं। हम केवल दो देश हैं जहां की आबादी एक अरब से अधिक है।' उन्होंने कहा, 'हमारी समस्याएं भी लगभग उसी समय शुरू हुईं जब यूरोपीय समस्याएं शुरू हुई थीं।' 'दोनों देशों के मजबूती से उभरने में भी ज्यादा अंतर नहीं' विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोनों देशों के काफी मजबूत तरीके से उभरने के समय में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। हम दोनों देशों के समानांतर लेकिन अलग-अलग उदय को देख रहे हैं। लेकिन ये सब हो रहा है जब हम पड़ोसी हैं। मेरे हिसाब से दोनों देशों के बीच किसी तरह की समानता या समझ तक पहुंचना बहुत जरूरी है।' उन्होंने कहा, 'यह न केवल हमारे फायदे में है बल्कि बराबर रूप से उनके हित में भी है और इसे कैसे करें यह हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है...।' केंद्रीय मंत्री ने की खास अपील भारत और चीन के बीच वर्तमान में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गतिरोध जारी है। जयशंकर ने कहा, 'मैं अपील करता हूं कि हमारे आकार और प्रभाव को देखते हुए दुनिया का काफी कुछ हम पर निर्भर करता है। इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। समस्याएं हैं, समस्याएं तय हैं लेकिन निश्चित रूप से मैं समझता हूं कि यह हमारी विदेश नीति के आकलन का केंद्र है।' क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी, मुक्त व्यापार समझौते पर जयशंकर ने कहा कि आर्थिक समझौते से राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि का उद्देश्य पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते करने के लिए यह भारत की मुख्य शर्त होगी। भारत-चीन के उभरने से क्या होगा असर विदेश मंत्री ने कहा, 'आर्थिक समझौते आर्थिक गुण-दोष पर आधारित होने चाहिए।' पिछले 20 वर्षों में जो आर्थिक समझौते हुए हैं उनके विश्लेषण से पता चलता है कि उनमें से कई देश के लिए मददगार नहीं हो सकते हैं। उभरते भू- राजनैतिक परिदृश्यों का हवाला देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि किस तरह भारत और चीन जैसे देशों के उभरने से वैश्विक शक्तियों के पुन: संतुलन में पश्चिमी प्रभुत्व का जमाना खत्म होता जा रहा है। 'बुद्ध-गांधी के संदेशों को अब भी पूरी दुनिया में मिलती है मान्यता' भारत की विदेश नीति के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि देश उचित और समानता वाली दुनिया के लिए प्रयास करेगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों की वकालत नहीं करने से 'जंगल राज' हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर हम कानून और मानकों पर आधारित विश्व की वकालत नहीं करेंगे तो 'निश्चित रूप से जंगल का कानून होगा।' विदेश मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी के संदेशों को अब भी पूरी दुनिया में मान्यता मिलती है। पहले भले ही सैन्य और आर्थिक ताकत वैश्विक शक्ति का प्रतीक होते थे लेकिन अब प्रौद्योगिकी, संपर्क शक्ति, प्रभाव के नए मानक बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'प्रौद्योगिकी कभी भी राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं रहा।' बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को नई हकीकत से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
नई दिल्ली भारत और चीन के बीच रिश्ते अभी तनावपूर्ण बने हुए हुए हैं। ऐसे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने भारत और चीन के बीच संबंधों (India China Realtion) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आकार और प्रभाव को देखते हुए दोनों पड़ोसी देशों पर दुनिया का काफी कुछ निर्भर करता है। दोनों देशों के बीच संबंधों का भविष्य किसी तरह के संतुलन या समझ पर पहुंचने से ही निर्भर करता है। सीआईआई (CII) शिखर सम्मेलन में ऑनलाइन कार्यक्रम (Virtual India@75 Summit) के दौरान जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच समस्याएं हैं जो अच्छी तरह परिभाषित हैं। क्या भारत-चीन दोस्त बन सकते हैं, ये बोले जयशंकर क्या भारत और चीन अगले दस-बीस साल में दोस्त बन सकते हैं जैसे फ्रांस और जर्मनी ने अपने अतीत को छोड़कर नए संबंध स्थापित किए। इस सवाल का जयशंकर ने सीधा जवाब नहीं दिया, उन्होंने संबंधों के ऐतिहासिक पहलु की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'हम चीन के पड़ोसी हैं। चीन दुनिया में पहले से ही दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हम एक दिन तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। आप तर्क कर सकते हैं कि कब बनेंगे। हम जनसंख्या की दृष्टि से काफी अनूठे देश हैं। हम केवल दो देश हैं जहां की आबादी एक अरब से अधिक है।' उन्होंने कहा, 'हमारी समस्याएं भी लगभग उसी समय शुरू हुईं जब यूरोपीय समस्याएं शुरू हुई थीं।' 'दोनों देशों के मजबूती से उभरने में भी ज्यादा अंतर नहीं' विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोनों देशों के काफी मजबूत तरीके से उभरने के समय में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। हम दोनों देशों के समानांतर लेकिन अलग-अलग उदय को देख रहे हैं। लेकिन ये सब हो रहा है जब हम पड़ोसी हैं। मेरे हिसाब से दोनों देशों के बीच किसी तरह की समानता या समझ तक पहुंचना बहुत जरूरी है।' उन्होंने कहा, 'यह न केवल हमारे फायदे में है बल्कि बराबर रूप से उनके हित में भी है और इसे कैसे करें यह हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है...।' केंद्रीय मंत्री ने की खास अपील भारत और चीन के बीच वर्तमान में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गतिरोध जारी है। जयशंकर ने कहा, 'मैं अपील करता हूं कि हमारे आकार और प्रभाव को देखते हुए दुनिया का काफी कुछ हम पर निर्भर करता है। इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। समस्याएं हैं, समस्याएं तय हैं लेकिन निश्चित रूप से मैं समझता हूं कि यह हमारी विदेश नीति के आकलन का केंद्र है।' क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी, मुक्त व्यापार समझौते पर जयशंकर ने कहा कि आर्थिक समझौते से राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि का उद्देश्य पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते करने के लिए यह भारत की मुख्य शर्त होगी। भारत-चीन के उभरने से क्या होगा असर विदेश मंत्री ने कहा, 'आर्थिक समझौते आर्थिक गुण-दोष पर आधारित होने चाहिए।' पिछले 20 वर्षों में जो आर्थिक समझौते हुए हैं उनके विश्लेषण से पता चलता है कि उनमें से कई देश के लिए मददगार नहीं हो सकते हैं। उभरते भू- राजनैतिक परिदृश्यों का हवाला देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि किस तरह भारत और चीन जैसे देशों के उभरने से वैश्विक शक्तियों के पुन: संतुलन में पश्चिमी प्रभुत्व का जमाना खत्म होता जा रहा है। 'बुद्ध-गांधी के संदेशों को अब भी पूरी दुनिया में मिलती है मान्यता' भारत की विदेश नीति के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि देश उचित और समानता वाली दुनिया के लिए प्रयास करेगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों की वकालत नहीं करने से 'जंगल राज' हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर हम कानून और मानकों पर आधारित विश्व की वकालत नहीं करेंगे तो 'निश्चित रूप से जंगल का कानून होगा।' विदेश मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी के संदेशों को अब भी पूरी दुनिया में मान्यता मिलती है। पहले भले ही सैन्य और आर्थिक ताकत वैश्विक शक्ति का प्रतीक होते थे लेकिन अब प्रौद्योगिकी, संपर्क शक्ति, प्रभाव के नए मानक बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'प्रौद्योगिकी कभी भी राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं रहा।' बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को नई हकीकत से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) से ठीक पहल गड़बड़ी की बड़ी साजिश सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के मोबाइल पर कॉल कर भड़काऊ बातें करने वाले अज्ञात शख्स के खिलाफ देशद्रोह का मामला (Sedition Case) दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस से पहले एक व्यक्ति पर कई लोगों के मोबाइल पर कॉल करने और फिर भड़काऊ बातें करने के आरोप लगे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में आए कॉल पुलिस अधिकारियों ने रविवार को इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और आसपास के राज्यों में स्थित कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि कोई उन्हें मोबाइल पर कॉल कर भड़काऊ बातें करता है। मोबाइल यूजर्स ने कॉल का कथित ऑडियो पुलिस के साथ साझा किया। मोबाइल यूजर्स ने पुलिस को उपलब्ध कराए ऑडियो पुलिस ने बताया कि कॉल करने वाला व्यक्ति भारत सरकार पर 'हिंदू राष्ट्र' बनाने का आरोप लगाता है। वह अल्पसंख्यक समुदाय से आग्रह करता है कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने दिया जाए। कथित ऑडियो में कॉल करने वाला शख्स अलग देश की मांग भी करता है। आरोपी का पता लगाने में जुटी पुलिस एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए और दूसरे प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉल करने वाले व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
नई दिल्ली, 05 अगस्त 2020, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को एक साल पूरा हो चुका है. इस बीच चीन ने कहा है कि वो कश्मीर क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. साथ ही चीन का कहना है कि इस मुद्दे का संबंधित पक्षों को शांतिपूर्वक तरीके से सुलझाना चाहिए. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग ने कहा, 'चीन कश्मीर क्षेत्र के हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है. कश्मीर मुद्दे पर चीन की स्थिति स्पष्ट और सुसंगत है. यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और पाकिस्तान-भारत के बीच द्विपक्षीय समझौतों द्वारा निर्धारित एक उद्देश्यपूर्ण तथ्य है.' वांग ने कहा कि यथास्थिति में कोई भी एकतरफा बदलाव अवैध और अमान्य है. इस मुद्दे को संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और परामर्श के माध्यम से शांतिपूर्वक तरीक से हल किया जाना चाहिए. यह मुद्दा पाकिस्तान और भारत के बीच इतिहास से जुड़ा विवाद है. एक साल पूरा बता दें कि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला संविधान का अनुच्छेद 370 साल 2019 में पांच अगस्त को हटाया गया था. साल 2019 में पांच अगस्त को ही गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पेश किया था. इसे अब एक साल हो चुका है.
अयोध्या, 05 अगस्त 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन करने के बाद मंदिर की आधारशिला रखी. सत्तर साल के इतिहास में नरेंद्र मोदी देश के पहले पीएम हैं, जिन्होंने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन किए हैं. इससे पहले के प्रधानमंत्री अयोध्या तो जाते थे, लेकिन इन सभी ने रामजन्मभूमि से दूरी बनाए रखी थी. इंदिरा गांधी देश की आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर इंदिरा गांधी ने 1966 में अयोध्या का दौरा किया था. अयोध्या में नया घाट पर बने सरयू पुल का लोकार्पण करने इंदिरा गांधी अयोध्या पहुंची थीं. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वो वापस लौट आईं थीं. इसके बाद दूसरी बार 1979 में इंदिरा गांधी का अयोध्या दौरा हुआ था, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का दर्शन, पूजा अर्चना की थी. इसके बाद तीसरी बार इंदिरा गांधी 1975 में अयोध्या में आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने गई थीं. उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लिया और वापस दिल्ली लौट आई थी. इन तीनों दौरे में इंदिरा गांधी ने रामलला के जन्मभूमि से दूरी बनाए रखी थी. राजीव गांधी राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते दो बार और पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में एक बार अयोध्या का दौरा किया. राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते 1986 में बाबरी मस्जिद का ताला खुला और 1989 में राम मंदिर का शिलान्यास किया गया. 1984 में राजीव गांधी ने अयोध्या में चुनावी जनसभा को संबोधित किया था. इसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी ने अयोध्या से अपने चुनावी अभियान का आगाज किया था. माना जाता है कि अयोध्या से चुनाव प्रचार शुरू करने और रामराज्य की घोषणा के पीछे राजीव गांधी की मंशा राजनीतिक लाभ लेने की थी. इसके बाद विपक्ष में रहते हुए राजीव गांधी 1990 में सद्भावना यात्रा के दौरान अयोध्या आए, लेकिन रामलला का दर्शन-पूजन नहीं किया था. हालांकि साल 2016 में राहुल गांधी और 2019 प्रियंका वाड्रा ने यहां आने पर हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का दर्शन पूजन किया था. अटल बिहारी वाजपेयी अटल बिहारी वाजपेयी भी जीते जी रामलला और बजरंगबली का दर्शन-पूजन अयोध्या में नहीं कर सके. साल 2003 में मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे रामचंद्रदास परमहंस के निधन पर वह अयोध्या आए थे. सरयू के तट पर उन्होंने परमहंस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि राममंदिर का सपना अवश्य पूरा होगा. 2003 में वो अयोध्या से गोरखपुर और पूर्वांचल को जोड़ने के लिए सरयू पर बने रेलवे पुल और रेल लाइन का उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे. सरयू पर दूसरे पुल और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से अयोध्या को जोड़ने का काम भी अटल विहारी वाजपेयी ने किया. 2004 में उन्होंने फैजाबाद हवाई अड्डे पर बतौर प्रधानमंत्री एक बार चुनावी सभा को भी संबोधित किया. इन सभी दौरे के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने रामजन्मभूमि स्थल से दूर बनाए रखी थी.
इस्लामाबाद एक साल पहले आज ही के दिन भारत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर उसे केंद्र-शासित प्रदेश घोषित कर दिया था। इसके साथ ही उसे दिए गए विशेष अधिकार भी वापस ले लिए गए थे। उसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। यहां तक कि एक दिन पहले ही पाकिस्तान ने अपना नया नक्शा जारी करते हुए कश्मीर के विवादित क्षेत्रों को अपना बता डाला है। इसके बाद बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि भारत का पिछले साल उठाया गया कदम एक बड़ी भूल थी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब फंस गए हैं हिंदूवादी वोटबैंक को खुश करने के लिए उठाया कदम खान ने बुधवार को कहा है कि कश्मीर को भारत से जल्द आजाद करा लिया जाएगा। खान ने कहा कि पीएम मोदी ने पिछले साल 5 अगस्त को एक बड़ी गलती की। उन्होंने कहा, 'भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले आर्टिल 370 हटाने में डर लग रहा था लेकिन चुनाव जीतने के बाद हिंदूवादी वोटबैंक को खुश करने के लिए इतना गलत कदम उठा लिया।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार को लगा था कि कश्मीर में 'RSS के ठगों' को आतंकवाद के लिए छोड़ दिया जाएगा जिससे कश्मीर हार मान लेगा। भारत को लगा चुप रहेगा पाकिस्तान खान ने कहा कि मोदी को लगा कि पाकिस्तान चुप रहेगा क्योंकि वह दोस्ती करने की कोशिश कर रहा है। खान ने कहा, 'हमारी सरकार आने से पहले जब भारत कश्मीर में पेलेट गन इस्तेमाल कर रहा था तब उसकी कोई बात नहीं कर रहा था। पाकिस्तान भी कुछ नहीं कर रहा था और संयुक्त राष्ट्र भी नहीं।' उन्होंने कहा कि भारत ने अहंकार में 5 अगस्त को कदम उठाया। पीएम मोदी को लगा कि दुनिया भारत का साथ देगी क्योंकि पश्चिम चीन के खिलाफ भारत का इस्तेमाल करना चाहता है। नए नक्शे में जूनागढ़. सर क्रीक पर भी दावा इससे एक दिन पहले मंगलवार को पाकिस्तान सरकार ने देश का नया नक्शा पेश किया है जिसमें न सिर्फ उसने कश्मीर के विवादित क्षेत्रों को अपना बताया है बल्कि गुजरात के जूनागढ़, मनवादर और कच्छ के रण में सर क्रीक पर भी अपना दावा ठोंका है। कश्मीर में जहां उसने सियाटिन को अपना बताया है वहीं, ऐसे इलाके जहां चीन की सीमा है, उन्हें 'अनडिफाइंड फ्रंटियर करार दिया है।
नई दिल्ली अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अयोध्या गए और पूजन में हिस्सा लिया। पीएम मोदी के हाथों ही मंदिर की आधारशिला रखी गई। इसी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेताओं और कई मुख्यमंत्रियों ने खुशी जाहिर की। कई नेताओं ने इस घटना को ऐतिहासिक बताया। शिवराज सिंह चौहान ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 500 वर्षों का सबसे बड़ा नेता घोषित किया। वहीं, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर से अयोध्या ही नहीं पूरे भारत की महानता का प्रदर्शन होगा। अमित शाह ने लिखा- देश की आत्मा में बसते हैं श्रीराम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके कहा, 'प्रभु श्रीराम जी के आदर्श और विचार भारतवर्ष की आत्मा में बसते हैं। उनका चरित्र एवं जीवन दर्शन भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। राम मंदिर निर्माण से यह पुण्यभूमि अयोध्याजी पुनः विश्व में अपने पूर्ण वैभव के साथ जग उठेगी। धर्म और विकास के समन्वय से रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस भव्य प्रभु श्री राम मंदिर का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व को दर्शाता है। इस अविस्मरणीय दिन पर सभी भारतवासियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मोदी सरकार भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों की रक्षा व संरक्षण के लिए हमेशा कटिबद्ध रहेगी।' राष्ट्रपति बोले- आधुनिक भारत का प्रतीक बनेगा राम मंदिर राम मंदिर निर्माण के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, 'राम-मंदिर निर्माण के शुभारंभ पर सभी को बधाई! मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के मंदिर का निर्माण न्यायप्रक्रिया के अनुरूप तथा जनसाधारण के उत्साह व सामाजिक सौहार्द के संबल से हो रहा है। मुझे विश्वास है कि मंदिर परिसर, रामराज्य के आदर्शों पर आधारित आधुनिक भारत का प्रतीक बनेगा।' उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस मौके पर खुशी जताते हुए कहा, 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा स्थापित मर्यादाएं भारत की मौलिक चेतना का अभिन्न अंग है, जो क्षेत्र या जाति की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर, आज भी सभी के लिए प्रासंगिक है। राम मंदिर का पुनर्निर्माण सत्य, नैतिकता जैसे मानवीय मूल्यों और श्रीराम द्वारा स्थापित मर्यादाओं की पुनर्स्थापना है। अयोध्या के राजा के रूप में उन्होंने सदाचरण के सर्वोच्च प्रतिमान स्थापित किए जो सभी के लिए अनुकरणीय थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि आज वह 500 साल के इंतजार के बाद आए इस मौके पर मौजूद रहे। पीएम मोदी के द्वारा तैयार किए गए प्लान को हमें लागू करना है। यह मंदिर ना सिर्फ भगवान राम की महानता का प्रतीक होगा बल्कि यह भारत की महानता को भी दर्शाएगा। शिवराज बोले- 500 वर्षों के सबसे बड़े नेता बन गए नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘देश में कई बड़े नेता हुए जिन्होंने देश का प्रभावी नेतृत्व किया। देश ने एक दशक के नेता देखे और एक शताब्दी के नेता भी देखे लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पांच शताब्दियों (500 साल) के सबसे बड़े नेता बने हैं। जय श्रीराम। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने कुशल नेतृत्व से न केवल 500 वर्षों का (अयोध्या राम जन्म भूमि) विवाद समाप्त किया, बल्कि भगवान श्रीराम लला के भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया। यह मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और श्रीराम की कृपा से ही संभव हुआ। वह (मोदी) 500 साल के भारत के सबसे बड़े नेता हैं आज।' बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बुधवार को कहा कि यह पल सभी को आनंदित और गौरवान्वित करने वाला है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्याजी में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन एवं शिलान्यास के मंगल अवसर पर सभी पूज्य संतों के चरणों में नमन करता हूं और समस्त देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। यह ऐतिहासिक पल सभी को आनंदित व गौरवान्वित करने वाला है।’नड्डा ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया गया और यह गर्व का विषय है कि समाज के सभी वर्गों ने इस निर्णय को सहर्ष स्वीकारा। मायावती बोलीं- सब स्वीकार कर लें बहुजन समाज पार्टी की चीफ मायावती ने कहा, 'जैसाकि सर्वविदित है कि अयोध्या विभिन्न धर्मों की पवित्र नगरी व स्थली है लेकिन दुःख की बात यह है कि यह स्थल राम-मन्दिर और बाबरी-मस्जिद जमीन विवाद को लेकर काफी वर्षों तक विवादों में भी रहा है। लेकिन इसका माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अन्त किया। साथ ही, इसकी आड़ में राजनीति कर रही पार्टियों पर भी काफी कुछ विराम लगाया। माननीय कोर्ट के फैसले के तहत ही आज यहां राम-मंदिर निर्माण की नींव रखी जा रही है, जिसका काफी कुछ श्रेय माननीय सुप्रीम कोर्ट को ही जाता है जबकि इस मामले में बीएसपी का शुरू से ही यह कहना रहा है कि इस प्रकरण को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट, जो भी फैसला देगा, उसे हमारी पार्टी स्वीकार करेगी। जिसे अब सभी को भी स्वीकार कर लेना चाहिए, बीएसपी की यही सलाह है।' हेमा मालिनी ने लिखा- सदियों के संघर्ष के बाद बन रहा राम मंदिर अभिनेत्री और बीजेपी सांसद हेमामालिनी एक ऑडियो क्लिप साझा किया। जय श्रीराम के उद्घोष के साथ इसमें हेमा ने कहा, ‘आज का दिन समस्त भारतवासियों के लिए बहुत ही गर्व का दिन है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतवासियों की आस्था के महानायक हैं। सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का शुभारम्भ होने जा रहा है और जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है। इससे देश में हर्ष और उल्लास का वातावरण है। ऐसे में मैं देश-विदेश में रहने वाले समस्त रामभक्तों को बहुत-बहुत बधाई एवं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देती हूं।’ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पता और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए आधारशिला रखे जाने के अवसर पर लोगों को बुधवार को शुभकामनाएं दीं। कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद एक निजी अस्पताल में उपचार करा रहे येदियुरप्पा ने ट्वीट किया, ‘सदियों बाद अयोध्या में भगवान राम का अभिषेक होगा।' उन्होंने कहा कि कई साधुओं, संतों और श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण का सपना साकार करने के लिए कुर्बानी दी और यह सपना जल्द ही पूरा होगा। जग्गी वासुदेव बोले- तकलीफ दे रहा घाव खत्म हुआ धर्म गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा, 'राम मंदिर के शांतिपूर्ण समाधान ने लंबे समय से तकलीफ दे रहे घाव को खत्म कर दिया है। बहुत सारे दिल और दिमाग अब शांत हो गए हैं। पूरा देश इसका स्वागत करे।'
अयोध्या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भावुक हो गए। शिलान्यास कार्यक्रम के बाद भाषण के दौरान सीएम योगी ने कहा कि पीएम नरेंद्री मोदी की वजह से ही भूमि पूजन का कार्यक्रम हो सका। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने भारत समेत समूचे विश्व को बताया कि किसी भी समस्या का समाधान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाता है। योगी ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के सपने को देखते हुए हमारी कई पीढ़ियां गुजर गईं। हम संघर्ष करते रहे। पीएम मोदी की सूझबूझ और दूरगामी सोच के चलते यह संभव हो पाया। 5 शताब्दियों का संकल्प आज लोकतांत्रिक तरीके से हो पाया। इस संघर्ष में कई लोगों ने अपना सबकुछ बलिदान कर दिया। भावुक हुए योगी यूपी सीएम ने कहा कि अवधपुरी की धरती समृद्धशाली बनेगी। हम सबके लिए यह दिन उमंग, उत्साह और भावनात्मक भरा दिन है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज गौरवान्वित होने का अवसर मिला। राम मंदिर का सपना सच हो रहा है। भाषण के दौरान वह भावुक भी हो गए। पीएम मोदी को किया राम-राम मुख्यमंत्री योगी ने भूमि पूजन से पहले अपने आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट किया, 'राम-राम मोदी जी' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामचरित मानस की चौपाई लिखते हुए ट्वीट किया, 'प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा।। श्री अवधपुरी में दशरथ नंदन श्रीरामलला के भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण की बहुप्रतीक्षित अभिलाषा को पूर्ण करने हेतु उत्तर प्रदेश की पावन धरा पर पधार रहे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समस्त राम भक्तों की ओर से राम-राम! सबको दी बधाई इसके अलावा उन्होंने दूसरा ट्वीट किया, 'जासु बिरहं सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पांती॥ रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।। प्रिय राम भक्तों, आपका अभिनंदन, आपको बधाई जय श्री राम!
मास्‍को रूस ने कहा है कि उसकी कोरोना वायरस वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल में 100 फीसदी सफल रही है। इस वैक्‍सीन को रूस रक्षा मंत्रालय और गमलेया नैशनल सेंटर फॉर र‍िसर्च ने तैयार किया है। रूस ने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल में जिन लोगों को यह कोरोना वैक्‍सीन लगाई गई, उन सभी में SARS-CoV-2 के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई गई। यह ट्रायल 42 दिन पहले शुरू हुआ था। उस समय वॉल‍ंट‍ियर्स (वैज्ञानिक शोधकर्ता) को मास्‍को के बुरदेंको सैन्‍य अस्‍पताल में कोरोना वैक्‍सीन लगाई गई थी। ये लोग सोमवार को दोबारा अस्‍पताल आए और उनकी सघन जांच की गई। इस दौरान पाया गया कि सभी लोगों में कोरोना वायरस के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा हुई है। इस जांच परिणाम के बाद सरकार ने रूसी वैक्‍सीन की तारीफ की है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा, 'समीक्षा के पर‍िणामों से यह स्‍पष्‍ट रूप से सामने आया है कि वैक्‍सीन लगने की वजह से लोगों के अंदर मजबूत रोग प्रतिरोधक प्रतिक्रिया विकसित हुई है।' रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि किसी भी वॉलटिंअर के अंदर कोई भी नकारात्‍मक साइड इफेक्‍ट या परेशानी नहीं आई। यह प्रयोगशाला अब बड़े पैमाने पर जनता में इस्‍तेमाल से पहले सरकार की स्‍वीकृति लेने जा रही है। रूस ने दावा किया है कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई में कोविड-19 वैक्‍सीन विकसित करने में वह दूसरों से कई महीने आगे चल रहा है। बताया जा रहा है कि क्लिन‍िकल ट्रायल में सफलता के बाद अब रूस वैक्‍सीन की प्रभावी क्षमता को परखने के लिए तीन व्‍यापक परीक्षण करने जा रहा है। रूस का इरादा है कि इस साल सितंबर तक कोरोना वैक्‍सीन को विकसित कर लिया जाए। साथ ही अक्‍टूबर महीने से देशभर में टीकाकरण शुरू कर दिया जाए।
इस्लामाबाद भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद होने के बाद जिस तरह नेपाल सरकार ने बिना बातचीत के अपने देश का नक्शा जारी कर विवादित क्षेत्रों को अपना बता डाला, पाकिस्तान ने भी अब उससे सीखना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को एक बैठक के दौरान देश का नया नक्शा (Pakistan New Map) जारी कर डाला है और इसमें लद्दाख , जम्मू-कश्मीर के सियाचिन समेत गुजरात के जूनागढ़ तक पर दावा ठोका गया है। पाकिस्तान यह कदम 5 अगस्त से पहले उठाया है जब जम्मू-कश्मीर से भारत सरकार के आर्टिकल 370 हटाए जाने को एक साल पूरा होने वाला है। सियाचिन-सर क्रीक को अपना बताया इमरान खान ने कैबिनेट की बैठक के बाद देश का नया पॉलिटिकल मैप जारी किया है। इस मैप में सियाचिन को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यह ऐलान करते हुए दावा किया है कि भारत ने यहां अवैध तरीके से निर्माण करा रखा है। यही नहीं, यह मानते हुए कि सर क्रीक में भारत के साथ उसका विवाद है, पाकिस्तान ने साफ कह दिया है कि उसने इस इलाके को अपने नक्शे में शामिल कर लिया है। जूनागढ़ पर भी ठोक दिया दावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पाकिस्तान पहले भी दावा ठोकता रहा है। खास बात यह है कि इस बार उसने गुजरात के जूनागढ़ को भी अपने हिस्से में शामिल कर लिया है। पाकिस्तान ने नए मैप में जहां भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा ठोका है, वहीं जिन हिस्सों को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद चल रहा है, उन्हें 'अनडिफाइंड फ्रंटियर' करार दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब पाकिस्तान यह नक्शा संयुक्त राष्ट्र के सामने पेश करने की तैयारी में है। गौर करने वाली बात है कि एक दिन पहले ही नियंत्रण रेखा पर शाह और देश के रक्षामंत्री पहुंचे थे और उन्होंने कहा था कि कश्मीर के लोगों को आजादी का हक देने के समर्थन में हैं। इसके एक दिन बाद ही सरकार ने खुद ही पूरे-के-पूरे कश्मीर पर ही अपना दावा ठोक दिया है। नेपाल के नक्शे-कदम पर पाकिस्तान गौरतलब है कि भारत के साथ सीमा विवाद के बाद नेपाल ने भी ऐसा ही किया था। लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना बताते हुए नेपाल सरकार ने अपने देश का नया नक्शा जारी कर दिया। इसके बाद इस नक्शे को संसद में पारित करा लिया। खास बात यह है कि हाल ही में नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने कहा कि देश का चीन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है, भारत के साथ है।
इस्लामाबाद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने मंगलवार को देश का नया नक्शा लाकर भारत के साथ विवादित क्षेत्रों पर दावा ठोक दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अपना असली चेहरा भी दिखा दिया है। खुद को कश्मीर के लोगों का शुभचिंतक बताने वाले पाकिस्तान ने खुद ही उन पर अपना हक जमा डाला है। न सिर्फ कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताने के अपने रुख से हट गया है बल्कि कश्मीरियों को उनका अधिकार देने के वादे से भी पलट गया है। इसके साथ ही उसने साफ कर दिया है कि कश्मीर के लोगों के साथ उसक व्यवहार सिर्फ छलावा है। किसके लिए जारी किया नया नक्शा? दरअसल, नक्शा जारी करने के बाद इमरान खान ने कहा कि जो शुरू से पाकिस्तानियों के मन में था, कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा होना चाहिए, यह मैप उसकी दिशा में पहला कदम है। पाकिस्तान अब तक कश्मीर से जुड़े हिस्सों को विवादित क्षेत्र बताता रहा है और कश्मीर के लोगों की आजादी के लिए उनके संघर्ष में साथ देने का वादा करता रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान सरकार ने नक्शा देश की अवाम को खुश करने के लिए जारी किया है और ऐसा करके उसने कश्मीर को आजादी की लड़ाई में समर्थन आखिर कैसे दिया है? कुरैशी ने किया था कश्मीर से झूठा वादा? खास बात यह है कि यह नक्शा जारी करने से एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी जब नियंत्रण रेखा के दौरे पर गए थे, तो उन्होंने पिछले साल आर्टिकल 370 हटाए जाने का एक साल पूरा होने पर कश्मीरियों के साथ 'समर्थन' जताया था। कुरैशी ने भारत सरकार के इस कदम को अवैध बताते हुए कहा था कि पाकिस्तान के लोग कश्मीरियों आवाजों के हक में आवाज उठाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा था कि यह जंग तब तक चलेगी जब तक UNSC के रेजलूशन के मुताबिक कश्मीरियों को आजादी का अधिकार नहीं मिल जाएगा। चीन से लगे हिस्से पर चुप्पी हालांकि, जाहिर है कि पाकिस्तान ने कश्मीर की आजादी को समर्थन देने के नाम पर खुद ही उन क्षेत्रों को हथियाने की चाल चल डाली। दिलचस्प बात यह भी है कि जहां ऐसे क्षेत्रों की बात आई जिन्हें लेकर चीन और भारत के बीच सीमा विवाद है, उन पर पाकिस्तान ने चुप्पी साध ली है। इन जगहों को नए मैप में 'अनडिफाइंड फ्रंटियार' करार दिया गया है। कश्मीर, लद्दाख, जूनागढ़ पर दावा पाकिस्तान ने जो नया नक्शा जारी किया है, उसमें न सिर्फ लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के सियाचिन जैसे हिस्सों और सर क्रीक पर विवाद की जगह सीधे-सीधे अपना दावा ठोक दिया है बल्कि गुजरात के जूनागढ़ तक को अपना हिस्सा बताया है। इससे पहले नेपाल ने इसी तरह लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर भारत के साथ विवाद होने पर सीधे नया नक्शा जारी कर विवादित क्षेत्रों को अपना बता डाला था।
पेइचिंग लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच चीन ने भारतीय सीमा से सटकर बड़े पैमाने पर अपनी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें DF 26/21 तैनात कर दी हैं। सैटलाइट से मिली तस्‍वीरों से पता चला है कि चीन ने अपने श‍िनजियांग प्रांत के कोर्ला सैन्‍य ठिकाने पर DF-26/21 मिसाइलें तैनात की हैं। तस्‍वीरों में ये मिसाइलें बिल्‍कुल साफ नजर आ रही हैं। इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 4 हजार किलोमीटर तक है और इसकी जद में भारत के ज्‍यादातर शहर आते हैं। लिखें ओपन इंटेलिजेंस सोर्स Detresfa की ओर से जारी ये सैटलाइट तस्‍वीरें इस साल जून महीने में ली गई हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकी साइंटिस्‍ट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कुर्ला बेस पर पहली मिसाइल अप्रैल 2019 और दूसरी मिसाइल अगस्‍त 2019 में तैनात की गई थी। चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक DF-26 मिसाइलों से लैस चीनी सेना की 646 वीं ब्रिगेड को पहली बार अप्रैल 2018 में तैनात करने का ऐलान किया गया था। इसके बाद जनवरी 2019 में चीनी मीडिया ने घोषणा की थी कि DF-26 मिसाइलों के साथ चीन के पश्चिमोत्‍तर पठारी इलाके (भारत से सटे) में युद्धाभ्‍यास किया गया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत के मुकाबले चीन के परमाणु हथियारों की संख्‍या काफी अधिक है। चीन जल्‍द ही फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे अधिक परमाणु हथियारों वाला देश बन जाएगा। चीन के परमाणु हथियारों संख्‍या पिछले 15 साल में दोगुनी हो गई है। चीन अगले एक दशक में इन परमाणु हथियारों की संख्‍या को काफी बढ़ाने जा रहा है। उन्‍होंने कहा क‍ि चीन के बढ़ते परमाणु हथियारों से उसके पड़ोसी देशों की बेचैनी बढ़ गई है। परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था सिप्री की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने ही पिछले साल अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में इजाफा किया है। सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 150 और चीन के पास 320 परमाणु हथियार हैं। चीन ने पिछले एक साल में 30 परमाणु हथियार बढ़ाए हैं, वहीं भारत ने 10 एटम बम। परमाणु और परंपरागत हथियार ले जाने में सक्षम है DF-26 चीन की DF-26/21 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 4 हजार किलोमीटर तक है और इसकी जद में भारत के ज्‍यादातर शहर आते हैं। चीन ने इसे लद्दाख से मात्र 500 किलोमीटर की दूरी पर तैनात किया है। यह मिसाइल अपनी दोहरी क्षमता के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है। DF-26 परमाणु और परंपरागत दोनों ही तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। इसकी इसी क्षमता के कारण दुश्‍मन को यह समझना मुश्किल होगा कि कौन सी मिसाइल परमाणु हथियार लेकर आ रही है। DF-26/21 की इसी मारक क्षमता के कारण इसे चीन की 'गुआम किलर' मिसाइल कहा जाता है। गुआम जापान के पास अमेरिका का नेवल बेस है। चीन ने वर्ष 2015 अपनी सैन्‍य परेड में पहली बार इस मिसाइल को दुनिया के सामने पेश किया था। इस मिसाइल का जिम्‍मा अब चीनी सेना के रॉकेट फोर्स के पास है। भारत के पास इसके टक्‍कर की अग्नि-4 और अग्नि-5 मिसाइले हैं। ताजा रिपोर्ट के मुता‍बिक चीन के पास करीब 80 DF-26 मिसाइल लॉन्‍चर हैं जिनमें कुल 80 से 160 मिसाइलें हैं। चीन ने तैनात किए लंबी रेंज के परमाणु बॉम्बर, क्रूज मिसाइल एक ओर जहां चीनी विदेश मंत्रालय लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के साथ शांति और स्थिरता कायम करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पीपल्स लिबरेशन आर्मी और एयरफोर्स लगातार अपनी तैयारी बढ़ा रहे हैं। मिसाइलों के साथ-साथ चीन की एयरफोर्स ने काशगर एयरपोर्ट पर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लंबी दूरी के बमवर्षक विमान H-6 को तैनात किया है। ओपन इंटेलिजेंस सोर्स Detresfa की सैटलाइट इमेज में दिखाई दिया है कि एयरबेस पर रणनीतिक बॉम्बर और दूसरे असेट भी तैनात हैं। लद्दाख से यहां की दूरी को देखकर आशंका जताई गई है कि भारत से तनाव के चलते तैनाती की गई है। सैटलाइट तस्वीरों में दिखाया गया है कि इस बेस पर 6 शियान H-6 बॉम्बर हैं जिनमें से दो 2 पेलोड के साथ हैं। इनके अलावा 12 शियान Jh-7 फाइटर बॉम्बर हैं जिनमें से दो पर पेलोड हैं। वहीं, 4 शेनयान्ग J11/16 फाइटर प्लेन भी हैं जिनकी रेंज 3530 किलोमीटर है। इसके साथ ही चीन ने KD-63 लैंड अटैक क्रूज मिसाइल को भी यहां तैनात किया है। H-6 बॉम्‍बर से दागे जाने वाली इन मिसाइलों की रेंज करीब 200 किलोमीटर है।
हम हर दिन आपको कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तैयार की जा रही वैक्सीन से जुड़ी अपडेट्स देते हैं। लेकिन आज हम आपके लिए एक ऐसी खबर लेकर आए हैं, जिसे जानने के बाद आप राहत की सांस लेंगे। कोरोना संक्रमण को रोकने में सादा पानी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। बस जरूरी है कि आप इसे इस तरीके से पिएं कि यह वायरस को खत्म करने का काम करे। रूस के वैक्टर ऐंड रिसर्च बायोटेक्नॉलजी सेंटर ने कोरोना वायरस के इलाज के साथ ही इस बात पर स्टडी करनी शुरू की कि आखिर इस वायरस की कमजोरियां क्या हैं। इस स्टडी के दौरान किए गए अलग-अलग परीक्षणों के आधार पर शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस का प्रवेश हो जाता है और वह व्यक्ति लगातार सामान्य तापमान पर रखे गए पानी का सेवन करता रहता है तो कोरोना को उसके शरीर में पनपने और अपनी कॉपीज बनाने का अवसर नहीं मिल पाता है। -रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य तापमान यानी रूम टेम्प्रेचर पर रखे गए पानी का सेवन करने और शरीर में पानी की कमी ना होने देने की स्थिति में कोरोना संक्रमण को शरीर में बढ़ने से रोका जा सकता है। इस शोध में यह भी सामने आया कि कोरोना वायरस के शरीर में प्रवेश के 24 घंटे के अंदर यदि सामान्य तापमान पर रखे गए पानी का उचित मात्रा में सेवन किया जाए तो वायरस करीब 90 प्रतिशत तक खत्म हो जाता है। -वहीं, 72 घंटे के दौरान अपनी दिनचर्या और पानी का सही मात्रा में सेवन करने पर 99.9 फीसदी वायरस का खात्मा हो जाता है। यानी अगर आप हर दिन सही मात्रा में स्वच्छ और सादे पानी का सेवन करते हैं तो कोरोना संक्रमण से बचे रह सकते हैं। -वहीं, 72 घंटे के दौरान अपनी दिनचर्या और पानी का सही मात्रा में सेवन करने पर 99.9 फीसदी वायरस का खात्मा हो जाता है। यानी अगर आप हर दिन सही मात्रा में स्वच्छ और सादे पानी का सेवन करते हैं तो कोरोना संक्रमण से बचे रह सकते हैं। -खास बात यह है कि आप जिस पानी का सेवन कर रहे हैं यदि वह पानी उबला हुआ है तो आपको अधिक लाभ होगा। शोधकर्ता टीम के अनुसार उबला हुआ पानी कोरोना वायरस को शरीर के अंदर उसकी कॉपीज तैयार करने से रोकता है। -दरअसल, कोरोना जब हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है तो यह बहुत तेजी के साथ अपनी डुप्लिकेट कॉपीज बनाने लगता है। ताकि तेजी से हमारे पूरे शरीर पर अपना नियंत्रण कर सके। लेकिन जो लोग लगातार उबले हुए पानी का उपयोग कर रहे हैं, उनका शरीर यदि पूरी तरह स्वस्थ भी है तो यह वायरस उनके शरीर में पनप नहीं पाता है।
नई दिल्ली, 03 अगस्त 2020, चीन एक ओर पाकिस्तान को पूरी तरीके से मदद करने में जुटा हुआ है तो दूसरी तरफ नेपाल को भी उकसाने में लगा हुआ है. सूत्रों ने आजतक को जानकारी दी है कि नेपाल ने चीन के उकसावे में आकर कई जगह भारत-नेपाल बॉर्डर पर अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है. नेपाल ने पूरे बॉर्डर पर अपनी तरफ 200 से ज्यादा नई बॉर्डर आउट पोस्ट बनाने का काम तेज कर दिया है, ये काम नेपाल पहले नहीं कर रहा था. आजतक को गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नेपाल ने अबतक अपने इलाके खलंगा, छांगरु और झूलाघाट के बाद पंचेश्वर के रोलघाट में भी बीओपी बनाकर वहां सशस्त्र प्रहरी फोर्स के जवानों की तैनाती कर दी है. यही नहीं नेपाल लिपुलेख के पास भी नई बीओपी बना रहा है. जानकारी ये है कि पूरे भारत-नेपाल बॉर्डर पर हमारे देश की बॉर्डर गार्डिंग फोर्स (एसएसबी) तैनात है जिसकी 500 बीपीओ हैं. नेपाल भी भारत की बराबरी करने में जुटा है और उसने भी 400 से 500 बीओपी अपने एरिया में बनाना शुरू कर दिया है. सुरक्षा महकमे के सूत्रों में बताया कि अभी पूरे बॉर्डर पर नेपाल की सिर्फ 130 बीओपी है. इन दिनों नेपाल जिस तरीके से इतनी भारी संख्या में अपनी तरफ बीओपी बना रहा है ये खतरनाक संकेत की ओर इशारा करते हैं. सूत्रों के मुताबिक, लॉकडाउन और सीमा विवाद के बीच नेपाल ने अपनी सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है. नेपाल के झूलाघाट स्थित सीमा पुल पर अस्थाई चौकी खोलकर जवानों की तैनाती भी कर दी है. सूत्रों ने बताया है कि झूलाघाट में बीओपी पर एपीएफ के दो दर्जन से ज्यादा जवान तैनात हो चुके हैं. पुल के पास सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) का अस्थाई बंकर बन रहा है. आजतक को सूत्रों ने बताया कि बीते दिनों लिपुलेख के पास नेपाल गरबाधार और झांगरू में दो हेलीपैड्स बना लिए हैं. जिसमें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कई हेलीकॉप्टर की सॉरटीज़ देखी हैं. इसके अलावा भारत-नेपाल बॉर्डर के उस पार कई हेलीपैड की जगह देखी गई है और कई जगह पर निर्माण कार्य भी चल रहा है. सुरक्षा एजेंसियों ने जानकारी दी है कि नेपाल 'सुस्ता' में भी एक हेलीपैड बना रहा है. ये एरिया बिहार के पूर्वी चंपारण के नजदीक पड़ता है. ये एरिया बाढ़ प्रभावित एरिया है, डिस्प्यूटेड लैंड है. नेपाल यहां भी चालाकी से हेलीपैड बना रहा है. सूत्रों के मुताबिक, नेपाल एक और हेलीपैड त्रिवेणी में आर्मी कैंप के पास बना रहा है. साथ ही उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सामने नवलपरासी में भी हेलीपैड बना रहा है जो सीमा से तकरीबन 10 किमी की दूरी पर है
नई दिल्ली पड़ोसी मुल्क चीन (India China Faceoff) अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बैठकें चल रही हैं इसी बीच चीन लगातार सरहद के पास सेना की बढ़ोत्तरी करता जा रहा है। इसके जवाब में भारत ने भी नॉर्दन लद्दाख इलाके में सेना की तैनाती बढ़ा दी है। भारतीय सेना से तैनात किए हैवी टैंक सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, 'हमने डीबीओ और डेपसांग मैदानी क्षेत्र में टी -90 रेजमेंट सहित सेना और टैंकों की बहुत भारी तैनाती की है।' सूत्रों के मुताबिक काराकोरम दर्रे (PP-3) के पास डेपसांग मैदानों के पास पैट्रोलिंग पॉइंट 1 से तैनाती की गई है। बख़्तरबंद तैनाती ऐसी है कि चीनी को वहां काम करना मुश्किल होगा। विस्तारवाद नीति से बाज नहीं आ रहा चीन सरकारी सूत्र ने बताया कि टैंकों की मौजूदगी के चलते चीन के सैनिक कोई भी हिमाकत करने से बचेंगे। उनके लिए इस स्थिति में ऑपरेट करना मुश्किल होगा। डीओबी और देपसान्ग प्लेन्स के दूसरी तरफ के इलाके में चीन ने जब अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना शुरू किया था, तब यहां भारतीय सेना की माउंटेन ब्रिगेड और आर्मर्ड ब्रिगेड ही निगरानी करती थी। अब इस इलाके में 15 हजार से ज्यादा जवान और कुछ टैंक रेजीमेंट भी तैनात कर दी गई हैं। सड़क मार्ग को जोड़ना चाहता है चीन इस क्षेत्र में चीनियों के प्रमुख इरादों में से एक अपने TWD बटालियन मुख्यालय से DBO सेक्टर के सामने काराकोरम पास क्षेत्र तक एक सड़क का निर्माण करना और वहां की बटालियन को जोड़ना है। सूत्रों ने कहा कि कनेक्टिविटी योजना को पहले भी नाकाम कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि एक छोटा पुल पीपी -7 और पीपी -8 के पास एक नाला पड़ता है जोकि भारतीय क्षेत्र के अंदर आता है वहां पर भी चीन ने पुल का निर्माण किया था, लेकिन इसे कुछ साल पहले भारतीय सैनिकों द्वारा तोड़ दिया गया था। शीर्ष कमांडरों के बीच 5वें चरण की बातचीत हुई पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के मध्य जारी तनाव के बीच रविवार को दोनों देशों के शीर्ष कमांडरों के बीच 5वें चरण की बातचीत हुई। सैन्य कमांडर स्तर की यह बातचीत करीब 11 घंटे तक चली। इस दौरान भारत ने LAC पर टकराव वाले सभी स्थानों से चीन को अपने सैनिकों को पीछे करने के लिए कहा है। तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर बातचीत की जा रही है। रविवार को हुई थी बैठक अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक एलएसी पर चीन की तरफ मोलदो में पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू हुई और रात 10 बजे तक जारी रही। दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य वार्ता में लगे हुए हैं। हालांकि, भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख के सभी प्रमुख क्षेत्रों में कड़ाके की सर्दियों के महीनों में सीमा रेखा पर अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखने के लिए पर्याप्त तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने जल्द से जल्द चीनी सैनिकों को पूरी तरह हटाने पर जोर दिया और पूर्वी लद्दाख के सभी क्षेत्रों में 5 मई से पहले वाली स्थिति की तत्काल बहाली की बात कही, जब पैंगोंग सो में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के कारण सीमा पर तनाव उत्पन्न हो गया था।
नई दिल्ली कोरोना वायरस के वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोरोना के वैक्सीन के तीसरे चरण के मानव परीक्षण के लिए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को मंजूरी दे दी है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एसआईआई को यह मंजूरी औषधि महानियंत्रक डॉ. वीजी सोमानी ने रविवार देर रात दी। लिखें अधिकारी ने बताया कि इससे पहले उन्होंने कोविड-19 के विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की अनुशंसाओं पर गहन विचार-विमर्श किया था। उन्होंने कहा कि कंपनी को तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल से पहले सुरक्षा संबंधी वह डेटा केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पास जमा करना होगा जिसका मूल्यांकन डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड (डीएसएमबी) ने किया हो। तीसरे चरण के परीक्षण को मंजूरी अधिकारी ने जानकारी दी, 'इस शोध की रूपरेखा के मुताबिक, शोध में शामिल हर व्यक्ति को चार हफ्ते के अंतर पर दो डोज दिए जाएंगे (अर्थात पहले डोज के 29वें दिन दूसरा डोज दिया जाएगा)। इसके बाद तय अंतराल पर सुरक्षा और प्रतिरक्षाजनत्व का आकलन होगा।' अधिकारियों ने बताया कि सीडीएससीओ के विशेषज्ञ पैनल ने पहले और दूसरे चरण के परीक्षण से मिले डेटा पर गहन विचार विमर्श करने के बाद 'कोविशिल्ड' के भारत में स्वस्थ वयस्कों पर दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी दी। ब्रिटेन में चल रहा परीक्षण ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित इस टीके के दूसरे एवं तीसरे चरण का परीक्षण अभी ब्रिटेन में चल रहा है। तीसरे चरण का परीक्षण ब्राजील में और पहले तथा दूसरे चरण का परीक्षण दक्षिण अफ्रीका में चल रहा है। अब आगे क्या? दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण के लिए एसआईआई के आवेदन पर विचार करने के बाद एसईसी ने 28 जुलाई को इस संबंध में कुछ और जानकारी मांगी थी तथा प्रोटोकॉल में संशोधन करने को कहा था। एसआईआई ने संशोधित प्रस्ताव बुधवार को जमा करवा दिया। पैनल ने यह भी सुझाव दिया है कि क्लिनिकल ट्रायल के लिए स्थलों का चुनाव पूरे देशभर से किया जाए। ह्यूमन ट्रायल सफल होने के बाद कोरोना की वैक्सीन के जल्द बाजार में आने का रास्ता साफ हो जाएगा।
पेइचिंग भारत और नेपाल के बीच जारी तनातनी के बीच चीन अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के साथ राजनयिक संबंधों की 65वीं वर्षगांठ के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्होंने इस हिमालयी देश को हमेशा से बराबरी का दर्जा दिया है। चीन ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान किया है। चीनी राष्ट्रपति का यह बयान नेपाल में जारी राजनीतिक तनाव के बीच अहम मानी जा रही है। लिखें नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंध बढ़ाएगा चीन इस अवसर पर नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को शुभकामना संदेश देते हुए जिनपिंग ने कहा कि वह दोनों पड़ोसी देशों के लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए काम करने को तैयार हैं। चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन-नेपाल संबंधों को वह काफी महत्व देते हैं और अपनी नेपाली समकक्ष भंडारी के साथ काम करने के लिए इच्छुक हैं, ताकि द्विपक्षीय संबंध लगातार आगे बढ़ते रहें। जिनपिंग बोले- हमने एक दूसरे का सम्मान किया सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन (सीपीसी) महासचिव शी ने कहा कि राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे का सम्मान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और नेपाल ने एक-दूसरे को बराबर माना है, परस्पर राजनीतिक विश्वास को बढ़ाया है और परस्पर सहयोग को और मजबूत किया है। माना जा रहा है कि चीन समर्थक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्ता पर पकड़ को मजबूत करने के लिए जिनपिंग ने ये बयान दिए हैं। ओली और चीनी प्रधानमंत्री के बीच भी शुभकामनाओं का दौर शिन्हुआ ने राष्ट्रपति के हवाले से बताया कि उन्होंने और भंडारी ने पिछले वर्ष एक-दूसरे देश का दौरा किया था और द्विपक्षीय संबंधों को विकास और समृद्धि की दोस्ती में तब्दील किया। शी ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एकजुट रहे हैं और चीन तथा नेपाल के बीच दोस्ती का नया अध्याय लिखा। चीन के प्रधानमंत्री ली किकियांग और नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने भी एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। नेपाल ने चीन की वन चाइना पॉलिसी का किया समर्थन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि सदियों से सौहार्दपूर्ण दोस्ती पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि नेपाल ने एक चीन नीति (One China Policy) को हमेशा माना है और चीन ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान किया है। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने चीन के विददेश मंत्री वांग यी को दिए संदेश में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने में वांग की भूमिका की प्रशंसा की। वांग ने भी संचार और सहयोग को मजबूत करने के लिए ग्यावली के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। चीन की जाल में फंसा नेपाल नेपाल और चीन के बीच एक अगस्त 1955 को राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। हाल के वर्षों में नेपाल में चीन की राजनीतिक दखल बढ़ी है, जिसके लिए बीजिंग ने बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसके अलावा काठमांडू में चीन की राजदूत हाऊ यांकी ने ओली के लिए समर्थन जुटाने का खुलेआम प्रयास किया है, जिन्हें पार्टी के अंदर बगावत का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में हाऊ ने प्रचंड एवं अन्य नेताओं से मुलाकात कर ओली का समर्थन करने का आग्रह किया था, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
पेइचिंग भारत और नेपाल के बीच जारी तनातनी के बीच चीन अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के साथ राजनयिक संबंधों की 65वीं वर्षगांठ के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्होंने इस हिमालयी देश को हमेशा से बराबरी का दर्जा दिया है। चीन ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान किया है। चीनी राष्ट्रपति का यह बयान नेपाल में जारी राजनीतिक तनाव के बीच अहम मानी जा रही है। लिखें नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंध बढ़ाएगा चीन इस अवसर पर नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को शुभकामना संदेश देते हुए जिनपिंग ने कहा कि वह दोनों पड़ोसी देशों के लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए काम करने को तैयार हैं। चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन-नेपाल संबंधों को वह काफी महत्व देते हैं और अपनी नेपाली समकक्ष भंडारी के साथ काम करने के लिए इच्छुक हैं, ताकि द्विपक्षीय संबंध लगातार आगे बढ़ते रहें। जिनपिंग बोले- हमने एक दूसरे का सम्मान किया सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन (सीपीसी) महासचिव शी ने कहा कि राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे का सम्मान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और नेपाल ने एक-दूसरे को बराबर माना है, परस्पर राजनीतिक विश्वास को बढ़ाया है और परस्पर सहयोग को और मजबूत किया है। माना जा रहा है कि चीन समर्थक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्ता पर पकड़ को मजबूत करने के लिए जिनपिंग ने ये बयान दिए हैं। ओली और चीनी प्रधानमंत्री के बीच भी शुभकामनाओं का दौर शिन्हुआ ने राष्ट्रपति के हवाले से बताया कि उन्होंने और भंडारी ने पिछले वर्ष एक-दूसरे देश का दौरा किया था और द्विपक्षीय संबंधों को विकास और समृद्धि की दोस्ती में तब्दील किया। शी ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एकजुट रहे हैं और चीन तथा नेपाल के बीच दोस्ती का नया अध्याय लिखा। चीन के प्रधानमंत्री ली किकियांग और नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने भी एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। नेपाल ने चीन की वन चाइना पॉलिसी का किया समर्थन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि सदियों से सौहार्दपूर्ण दोस्ती पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि नेपाल ने एक चीन नीति (One China Policy) को हमेशा माना है और चीन ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान किया है। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने चीन के विददेश मंत्री वांग यी को दिए संदेश में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने में वांग की भूमिका की प्रशंसा की। वांग ने भी संचार और सहयोग को मजबूत करने के लिए ग्यावली के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। चीन की जाल में फंसा नेपाल नेपाल और चीन के बीच एक अगस्त 1955 को राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। हाल के वर्षों में नेपाल में चीन की राजनीतिक दखल बढ़ी है, जिसके लिए बीजिंग ने बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसके अलावा काठमांडू में चीन की राजदूत हाऊ यांकी ने ओली के लिए समर्थन जुटाने का खुलेआम प्रयास किया है, जिन्हें पार्टी के अंदर बगावत का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में हाऊ ने प्रचंड एवं अन्य नेताओं से मुलाकात कर ओली का समर्थन करने का आग्रह किया था, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
नई दिल्ली, 02 अगस्त 2020,आज पूरी दुनिया फ्रेंडशिप डे मना रही है. इस दिन लोग अपने दोस्तों-मित्रों को याद कर रहे हैं. इस मौके पर दुनिया में भारत के खास दोस्तों में से एक इजरायल ने इंडिया के लिए एक खाना पेश किया है. इस गाने के बोल हैं, "तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना." भारत में इजरायल के दूतावास ने ये म्यूजिकल गाना पेश करते हुए लिखा, "हैप्पी फ्रेंडशिप डे 2020 इंडिया, हमारी दोस्ती और बढ़ती साझेदारी भविष्य में और भी मजबूत हो." ये फिल्म याराना का गाना है बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की दोस्ती खास रही है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी पीएम मोदी रिश्ते गर्मजोशी भरे रहे हैं. इजरायल में दिखे थे पीएम मोदी के पोस्टर साल 2017 में जब बेंजामिन नेतन्याहू भारत आए थे तो पीएम मोदी ने उनकी जोरदार खातिरदारी की थी. पीएम मोदी भी जब इजरायल गए तो नेतन्याहू प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत करने पहुंचे. 2019 में जब बेंजामिन नेतन्याहू आम चुनाव में उतरे थे तो उनके देश में पीएम मोदी के बड़े-बड़े पोस्टर दिखा करते थे. अमेरिकी दूतावास ने भी दी बधाई भारत में अमेरिकी दूतावास ने भी मित्रता दिवस पर भारत को बधाई दी है. दूतावास ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि हैप्पी फ्रेंडशिप डे, यूस इंडिया दोस्ती.
नई दिल्ली, 02 अगस्त 2020,भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर गतिरोध जारी है. व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो चीन पैंगॉन्ग झील को लेकर बातचीत से कन्नी काट रहा है. बातचीत इसी प्वाइंट को लेकर होनी है, लेकिन चीन ने इसे खारिज किया है. इंडिया टुडे को पता चला है कि 14-15 जून को हुई चौथे दौर की वार्ता के दौरान यह बात उभर कर सामने आई थी कि चीन पैंगॉन्ग त्सो पर बातचीत करने को लेकर इच्छुक नहीं है. फिलहाल पैंगॉन्ग त्सो विवाद का केंद्र बना हुआ है. पैंगॉन्ग त्सो पर चीन के रुख से लगा था कि चीनी सेना ने गलवान घाटी के दक्षिण में हॉट स्प्रिंग्स सेक्टर में पेट्रोल प्वाइंट 14 और पेट्रोल प्वाइंट 15 पर डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को माना है. गोगरा पोस्ट को छोड़कर पेट्रोल प्वाइंट 17ए पर उनकी तैनाती कम हुई है. लेकिन पैंगॉन्ग पर चीनी सेना की तैनाती भारत के लिए अब तक चिंता का सबब बना हुआ है. वार्ता के दौरान चीन की जिद मई पूर्व की स्थिति पर उसकी मंशा को जाहिर करती है. बताते चलें कि पिछले सप्ताह दो घटनाक्रम देखने को मिले. पहला चीनी राजदूत ने कहा कि डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी हो गई है और चीन पैंगॉन्ग फिंगर कॉम्पलेक्स पर अपनी लाइन पर है. इसका सीधा संकेत था कि चीन इस मसले पर अब तनाव को और बढ़ाना नहीं चाहता है. जैसा कि इंडिया टुडे पहले ही बता चुका है कि चीन ने मई की शुरुआत में ही विवादित फिंगर 4-8 पर भारी तैनाती की थी. हालांकि इस स्थिति में बहुत मामूली बदलाव दिख रहे हैं. दूसरा, इंडिया टुडे ने यह भी बताया था कि चीन ने पिछले तीन हफ्तों में पैंगॉन्ग के निचले इलाकों में निर्माण करने के साथ साथ अक्साई चिन में कई आपूर्ति ठिकानों को सक्रिय किया है ताकि संक्षेप सूचना पर उसके जवान एक्शन में आ जाएं. लिहाजा भारतीय सेना पैंगॉन्ग मसले पर बातचीत करने को लेकर चीन की अनिच्छा को हल्के में नहीं ले रही है, और साफ तौर से बता दिया है कि इस पर विस्तार से चर्चा के बिना आगे नहीं बढ़ा जाएगा. भारतीय सेना के लेह कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्दर सिंह और उनके चीनी समकक्ष मेजर जनरल लिन लियू के बीच रविवार की पांचवें दौर की वार्ता को लेकर शनिवार देर शाम चीनी पक्ष ने पुष्टि की. भारत-चीन सेना में कड़वाहट बता दें कि पिछले तीन महीनों में भारत-चीन के सैन्य संबंधों में कड़वाहट आई है. शनिवार 1 अगस्त, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) दिवस था. लिहाजा, चुशुल में पीएलए दिवस पर होने वाली पारंपरिक औपचारिक भारत-चीन सीमाकर्मियों की बैठक (बीपीएम) शनिवार को नहीं हुई. पूर्वी कमान के तहत इधर से शुभकामनाएं दी गईं, लेकिन कोरोना प्रोटोकॉल के चलते किसी उपहार का लेनदेन नहीं हुआ. चीनी सैनिकों के जमावड़े की खबरें झूठी वहीं सेना के सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया कि लिपुलेख और उत्तराखंड से सटी सीमा पार केंद्रीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों के जमावड़े की खबरें झूठी और असत्य हैं. हालांकि वहां भी किसी भी घटना से निपटने के लिए तैनाती की जा रही है. डेपसांग का मुद्दा पैंगॉन्ग गतिरोध के अलावा, आज की वार्ता में चर्चा का अन्य प्रमुख विषय डेपसांग का मुद्दा है. जून के अंत में, इंडिया टुडे ने बताया था कि कैसे चीन उत्तरी लद्दाख के डेपसांग-डीबीओ सेक्टरों में एक नया मोर्चा खोलने की फिराक में है. हालांकि डेपसांग का विवाद लंबे समय से चल रहा है, लेकिन लद्दाख में जून में हुई घटना से उसका सीधा कुछ लेना देना नहीं है. लेकिन घटनाक्रम जिस तरीके से सामने आए हैं उससे जरूरी हो गया है कि इस मसले को भी वार्ता के केंद्र में लाया जाए. डेपसांग में भारत से लगी सीमा पर चीन ने पहले के मुकाबले अपने जवानों की तैनाती ज्यादा बढ़ा दी है. चीनी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है. हालांकि यह वर्षों से होता रहा है. भारतीय सैनिक आमतौर पर उन्हें भगाते रहे हैं. लेकिन इस साल उनकी (चीनी सेना) संख्या में वृद्धि हुई है और उनके वाहनों की आवाजाही बढ़ी है. पिछली बार की वार्ता में भारत ने जब डेपसांग का मसला उठाया तो चीन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम उसकी सीमा में पहुंच गई थी. सरल भाषा में कहें तो इस साल डेपसांग में विवाद की आंच बढ़ने वाली है.
02 अगस्त 2020 बैंकिंग सेक्टर को घाटे से उबारने के लिए मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं. सरकार का कहना है कि जितने कम सरकारी बैंक होंगे, उतने बेहतर तरीके से काम-काज होगा और बैंकों की आर्थिक सेहत भी सुधरेगी. इसी कड़ी में अब नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि वह तीन सरकारी बैंकों का निजीकरण कर दे. नीति आयोग का कहना है कि सरकार पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र प्राइवेट के हाथों में सौंप दे. CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा नीति आयोग ने सभी ग्रामीण बैंकों के मर्जर का भी सुझाव दिया है. दरअसल सरकार की योजना है कि देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 5 कर दी जाए. इससे पहले सरकार ने अप्रैल में 10 बैंकों का विलय करके 4 बैंक कर दिए. यही नहीं, नीति आयोग ने सरकार से NBFC को अधिक छूट देने की भी सिफारिश की है. अगर सरकार नीति आयोग की सिफारिश को मानती है तो फिर उसे पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के निजीकरण के लिए बैंकिंग कंपनीज (एक्वीजिशन एंड ट्रांसफर) एक्ट 170 में संशोधन करना होगा. क्योंकि इन बैंकों के निजीकरण के बाद इनका मालिकाना हक निजी हाथों में चला जाएगा. लगातार हो रहा घाटा सबसे बड़ी वजह दरअसल इन बैंकों से सरकार को लगातार नुकसान हो रहा है, क्योंकि ये बैंक लगातार घाटे में चल रहे हैं. ऐसे में नीति आयोग ने इससे निपटने का रास्ता निकालते हुए इनके निजीकरण का सुझाव दिया है. सरकार का मानना है कि जितने अधिक बैंक होते हैं, फर्जीवाड़े के मामले उतने अधिक सामने आते हैं. यही नहीं, पिछले दिनों ये भी खबर थी कि सरकार नुकसान में चल रही इंडिया पोस्ट को ग्रामीण बैंकों के साथ विलय कर सकती है. जिसके बाद एक नया पब्लिक सेक्टर बैंक बनेगा, जो इसे घाटे से उबारने का काम करेगा. भारत सरकार अपने आधे से भी अधिक पब्लिक सेक्टर बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है, जिसकी शुुरुआत बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक के अपने शेयर्स बेचने से हो सकती है. गौरतलब है कि 29 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकों और एनबीएफसी के प्रमुखों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में बैंकिंग सेक्टर को फिर से पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा हुई थी. बैंकों से कहा गया कि आप लोन देने में हिचके नहीं, सरकार आपके साथ है.
वैक्‍सीन मुंबई टीबी के लिए इस्‍तेमाल होने वाली बीसीजी वैक्‍सीन कोरोना वायरस के खिलाफ भी असर कर रही है। अमेरिकन रिसर्च पेपर ने दावा किया है कि बीसीजी किसी कम्‍युनिटी में कम से कम पहले 30 दिन इन्‍फेक्‍शन का प्रसार धीमा कर देती है। साइंस ऐडवांसेज नाम के जर्नल में छपी रिसर्च में अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस की तरफ से कहा गया है कि जिन देशों में बीसीजी का टीका लगना अनिवार्य है, वहां कोविड-19 आउटब्रेक के पहले 30 दिनों में 'कम इन्‍फेक्‍शन और डेथ रेट' दर्ज किया गया है। रिसर्चर्स ने अनुमान लगाया कि अमेरिका ने अगर दशकों पहले बीसीजी वैक्‍सीन को अनिवार्य कर दिया होता तो वहां 29 मार्च तक कोविड-19 से सिर्फ 468 मौतें होतीं। जो कि उस तारीख तक असल में हुईं 2,467 मौतों का 19% है। कई संक्रामक बीमारियों से बचाता है बीसीजी टीका भारत और चीन जैसे देश, जहां के राष्‍ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में बीसीजी शामिल है, वहां डेथ रेट कम रहा है। डॉक्‍टर्स का एक धड़ मानता है कि कोविड से जुड़ी परेशानियों से बीसीजी वैक्‍सीन बचा रही है। टीबी से बचाने के लिए जन्‍म से 15 दिन के भीतर बच्‍चे को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। यह टीका कई और संक्रामक बीमारियों से भी बच्‍चे को बचाता है। आठ महीने पहले जब कोरोना वायरस का प्रचार शुरू हुआ, तबसे लेकर अबतक उसपर बीसीजी टीके के असर को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है। अमेरिकन स्‍टडी में 134 देशों के डेटा का एनालिसिस किया गया। आउटब्रेक शुरू होने के पहले 30 दिन में डेली कन्‍फर्म मामलों में बढ़त चेक की गई। रिसर्चर्स ने कहा, "अनिवार्य बीसीजी टीके और कोविड-19 संक्रमण कर्व के फ्लैट होने में कनेक्‍शन देखा गया।" हालांकि रिसर्चर्स ने कहा कि बीसीजी कोई 'मैजिक बुलेट' नहीं है। डॉक्‍टर्स की राय बंटी पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. अनंत भान ने कहा कि यह कहना कि बीसीजी वैक्‍सीन कोविड-19 से रक्षा करती है, ज्‍यादा साइंटिफिक नहीं लगता। उन्‍होंने कहा, "फिलहाल यह एक कयास लगता है क्योंकि भारत और ब्राजील, जहां बीसीजी टीके लगाए जाते हैं, इस वक्‍त भारी संख्‍या में केसेज आ रहे हैं।" इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस के डीन डॉ शशांक जोशी ने कहा, "बीसीजी इम्‍युनिटी बनाने में महत्‍वपूर्ण है और कोविड रोकने में रोल है, ऐसा माना जा रहा है। उन्‍होंने पुर्तगाल का उदाहरण दिया जहां बीसीजी टीके लगते हैं, वहीं पड़ोसी स्‍पेन में कोरोना के कई गुना ज्‍यादा मामले देखे गए। महाराष्‍ट्र सरकार कोविड-19 मरीजों पर बीसीजी वैक्‍सीन का असर देखने के लिए क्लिनिकल ट्रायल कर रही है। 18 मेडिकल कॉलेजों में 250 मरीजों पर यह ट्रायल हो रहा है। अगले दो से तीन महीनों में इसके नतीजे आ सकते हैं।
इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रमुख टीवी समाचार चैनल डॉन पर अचानक तिरंगा लहराने से लोग अचंभित हो गए। बाद में पता चला कि इस न्यूज चैनल पर हैकर्स ने हमला किया था। इस घटना का फोटो और विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। रविवार दोपहर चैनल पर फहराया तिरंगा रविवार दोपहर 3.30 के आस पास पाकिस्तान के डॉन न्यूज चैनल पर विज्ञापन का प्रसारण हो रहा था। उसी दौरान टेलिविजन की स्क्रीन पर अचानक तिरंगा लहराने लगा। जिसपर हैप्पी इंडिपेंडेंस डे का मैसेज भी लिखा हुआ था। डॉन न्यूज ने यह कहा डॉन न्यूज ने बयान जारी कर कहा कि रविवार को डॉन न्यूज हमेशा की तरह प्रसारित हो रहा था। अचानक भारतीय ध्वज और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट स्क्रीन पर चल रहे वाणिज्यिक पर दिखाई दिया जो कुछ समय के लिए रहा और फिर गायब हो गया। हम इसकी जांच कर रहे हैं डॉन ने दिया जांच का आदेश अभी तक यह नहीं बताया गया है कि चैनल पर यह विडियो कितने समय तक प्रसारित होता रहा। इस बीच डॉन न्यूज ने ऊर्दू में ट्वीट कर रहा है कि डॉन प्रशासन ने मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। डॉन ने लिखा कि डॉन न्यूज अपनी स्क्रीन पर भारतीय झंडे और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट के अचानक प्रसारण की जांच कर रहा है। एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचते ही अपने दर्शकों को सूचित करेगी।
नई दिल्ली इस वर्ष के राखी त्यौहार ने चीन को 4 हजार करोड़ रुपये के राखी व्यापार का बड़ा झटका देकर इस मिथक को तोड़ दिया है कि भारत में चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं हो सकता। साथ ही चीनी वस्तुओं के बहिष्कार अभियान को और अधिक तेजी से देश भर में चलाये जाने के मजबूत संकेत दे दिए। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा गत 10 जून से शुरू किये गए चीनी सामान के बहिष्कार के अंतर्गत कैट ने इस वर्ष राखी के पर्व को हिंदुस्तानी राखी के रूप में मनाने का आव्हान किया था जो पूर्ण रूप से सफल रहा। इस बार एक भी राखी या राखी बनाये जाने के सामान का आयात चीन से बिल्कुल नहीं हुआ और इस अभियान का लाभ यह हुआ की देश भर में कैट के सहयोग से भारतीय सामान से लगभग 1 करोड़ राखियां निम्न वर्ग एवं घरों में काम करने तथा आंगनवाड़ी में काम करने वाली महिलाओं सहित अन्य लोगों ने अपने हाथों से अनेक प्रकार के नए-नए डिज़ाइन की राखियां बनाई। वहीं भारतीय राखी निर्माताओं ने भी भारतीय सामान से राखियां बनाई जिन्हे देश भर में खूब सराहा गया। हर साल होता है 50 करोड़ राखियों का व्यापार कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की एक अनुमान के अनुसार देश में प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ राखियों का व्यापार होता है जिसकी कीमत लगभग 6 हजार करोड़ रुपये है जिसमें से गत अनेक वर्षों से चीन से प्रतिवर्ष राखी या राखी का सामान लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का आता था , जो इस वर्ष नहीं आया। कोरोना के डर के कारण बड़ी मात्रा में लोग बाज़ारों में नहीं गए हैं एवं न ही ऑनलाइन से राखियों की खरीददारी की है जिसको देखते हुए कैट ने देश भर के लोगों से कहा की अपने ही घरों में घास, केसर, चन्दन, चावल तथा सरसों के दाने एक रेशम के कपडे में मौली या कलावा के साथ बाँध ले जिससे यह वैदिक राखी बन जाए और यह राखी भाई को बाँधी जाए अथवा अपने ही घर से कलावा या मौली को ही भाई के हाथ में बांध दे, इसे रक्षा सूत्र कहा जाता है। यही राखी सबसे शुद्ध एवं पवित्र होती है और पुराने समय में इसी प्रकार की राखी इस्तेमाल की जाती थी। चीन भारत छोड़ो का शंखनाद श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अगले कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि आगामी 9 अगस्त, भारत छोड़ो आंदोलन के दिन को देश भर के व्यापारी इस दिन को "चीन भारत छोड़ो" अभियान शुरू करेंगे और इस दिन देश भर में 800 से ज्यादा स्थानों पर व्यापारी संगठन शहर के किसी प्रमुख स्थान पर एकत्र होकर चीन भारत छोड़ो के शंखनाद करेंगे। वहीं दूसरी ओर 500 वर्षों के लम्बे इंतज़ार के बाद आगामी 5 अगस्त को भारत के स्वाभिमान और गौरव के प्रतिक श्री राम मंदिर के निर्माण के प्रारम्भ होने के अवसर पर 4 अगस्त को देश भर में व्यापारी अपने घरों और बाज़ारों में सुंदरकांड का पाठ करेंगे वहीं 5 अगस्त को व्यापारी सारे देश में अपनी दुकानों और घरों में दीप जलाकर शंख, नाद, घंटे-घड़ियाल आदि बजायेंगे।
पुणे पूरी दुनिया के लिए किसी बुरे सपने की तरह बन चुके कोरोना वायरस (Corona Vaccine) संक्रमण के लिए वैक्सीन की रेस में कई कंपनियां लगी हैं। ट्रायल्स भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे में पुणे में स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के चीफ एग्जिक्यूटिव अदार पूनावाला ने सबसे पहले और बड़ी तादाद में वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के चीफ एग्जिक्यूटिव अदार पूनावाला ने कहा, 'बहुत कम लोग ही इतनी कम कीमत पर कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर कर सकते हैं। वह भी इतनी तेजी के साथ। कोरोना वैक्सीन की पहली खेप के लिए मेरे पास देश-विदेश से कई नेताओं के फोन आ रहे हैं। मुझे समझाना पड़ता है कि मैं ऐसे ही आपको वैक्सीन नहीं दे सकता हूं।' प्रति मिनट के हिसाब से 500 वैक्सीन बना लेने का दावा ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन को तैयार करने के काम में लगी सीरम इंस्टिट्यूट ने अप्रैल में ही वैक्सीन तैयार करने का खुलकर दावा किया था। अब कंपनी में प्रति मिनट के हिसाब से 500 डोज़ तैयार हो रहा है। हालांकि कितनी मात्रा में वैक्सीन तैयार होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। खुद इतनी बड़ी आबादी वाले भारत में वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में पूनावाला भारत और बाकी दुनिया में 50-50 के हिसाब से बंटवारा कर सकते हैं। एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से विकसित की जा रही कोरोना वैक्सीन के परीक्षण के बेहद उत्साहपूर्ण नतीजे आ रहे हैं। बड़ी बात यह है कि एस्ट्राजेनेका को यह वैक्सीन विकसित करने में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया का भी साथ मिल रहा है। कंपनी के सीईओ अदार पूनावाल ने कहा कि उन्हें क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए लाइसेंस जल्द मिलने की उम्मीद है। जिसके बाद 3 फेज का ह्यूमन ट्रायल शुरू किया जाएगा। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी है। यह अब हर साल 1.5 अरब वैक्सीन डोज तैयार करती है, जिनमें पोलियो से लेकर मीजल्स तक के टीके शामिल हैं। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने इसी भारतीय कंपनी को अपनी कोविड-19 वैक्सीन बनाने के लिए चुना है। पूणे की इस कंपनी ने पहले कहा था कि वह आखिरी आदेश मिलने से पहले ही वैक्सीन बनाना शुरू कर देगी ताकि जब तक सभी अनुमतियां मिलें तब तक अच्छी-खासी मात्रा में वैक्सीन रेडी हो सके। अनुमति मिलते ही शुरू होगा परीक्षण सीईओ अदार पूनावाला ने कहा, 'भारतीय रेग्युलेटर से अनुमति मिलते ही हम भारत में वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर देंगे। इसके साथ ही, हम तुरंत बड़ी मात्रा में वैक्सीन बनाना भी शुरू कर देंगे।' इसी महीने पूनावाला ने कहा था कि उनकी कंपनी इस वर्ष के आखिर तक कोविड-19 वैक्सीन बनाने की उम्मीद रखती है। उन्होंने कहा कि कंपनी का इरादा जल्दबाजी करने की जगह गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित टीका बनाने का है। 1966 में हुई थी सीरम इंस्टिट्यूट की स्थापना सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना अदार पूनावाला के पिता साइरस पूनावाला ने वर्ष 1966 में की थी। कंपनी ने तीन महत्वपूर्ण वैक्सीन कैंडिडेट्स बनाने के लिए अमेरिकी बायोटेक फर्म कोडाजेनिक्स, इसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी नोवावैक्स और ऑस्ट्रिया की थेमिस के साथ साझेदारी कर रखी है। पूनावाला ने कहा कि एसआईआई शुरू-शुरू में हर महीने 40 से 50 लाख वैक्सीन डोज बनाने पर ध्यान देगी, जिसे बढ़ाकर सालाना 35 से 40 करोड़ सालाना तक किया जाएगा। मानव परीक्षण में उत्साहजनक नतीजे बहरहाल, एस्ट्राजेनेका ने बयान जारी कर कहा कि ऑक्सफर्ड यूनिवरिस्टी की अगुवाई में जारी पहले और दूसरे चरण के परीक्षण में वैक्सीन ने SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ ताकतवर रोग प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन किया। वैज्ञानिकों ने सोमवार को कहा कि ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोरोना वायरस वैक्सीन सुरक्षित जान पड़ता है। इसने शरीर में ताकतवर रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा की है।
काठमांडू नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल के बीच जारी सियासी गतिरोध एक फिर तेज हो गया है। प्रचंड ने पीएम ओली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में एकता बनाए रखने के नाम पर नेताओं के गलत इरादों और विचारों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पार्टी में टूट को उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी की है। हमने जनता की मांग के कारण पार्टी विभाजित होने से रोका काठमांडू में आयोजित 23 वें तुलसीलाल अमात्य स्मृति दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रचंड ने कहा कि पार्टी में चल रहे गलत रवैये को रोके जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेतृत्व ने लोगों की इच्छा को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि पार्टी को विभाजित नहीं होना चाहिए। इसके लिए हमें सभी प्रकार के विचारों, तथ्यों और दृष्टिकोण को स्वीकार करने की जरुरत है। पर्दे के पीछे जारी खेल पर प्रचंड का हमला उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता के नाम पर जारी किसी भी गलत विचारधारा को पर्दे के पीछे जारी नहीं रखना चाहिए। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विचारधारा की राजनीति करती है और हमारे पहले के नेताओं ने इसी के लिए अपना बलिदान भी दिया है। हमें आपसी एकता को बनाए रखना होगा। संसद को भंग कर चुनाव करा सकते हैं ओली चीन के बल पर सत्‍ता बचाने की कोशिशों में जुटे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब संसद को भंग करने और मध्‍यावधि चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक केपी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्‍प कमल दहल 'प्रचंड' दोनों ही शह और मात के लिए अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ओली प्रचंड के बीच सुलह के आसार कम ओली की तैयारी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के बीच सहमति बनने के आसार कम होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ओली दो विकल्‍पों पर विचार रहे हैं। पहला-पार्टी के बंटवारे पर अध्‍यादेश लाया जाए ताकि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का चुनाव चिन्‍ह उनके पास ही रहे। दूसरा-संसद को भंग करके मध्‍यावधि चुनाव कराए जाएं। हालांकि यह दोनों ही रणनीति ओली के लिए आसान नहीं होने जा रही है।
काठमांडू भारत के साथ सीमा विवाद मुद्दे पर बातचीत करने का राग अलाप रहा नेपाल अपने विवादित नक्शे को विश्व बिरादरी में भेजने की तैयारी कर रहा है। नेपाल के भूमि प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार, देश के नए नक्शे को अंग्रेजी में प्रकाशित करने के बाद इसे संयुक्त राष्ट्र और गूगल को भेजा जाएगा। नए नक्शे में भारत के लगभग 335 किलोमीटर के भू-भाग को नेपाल में दिखाया गया है। नेपाली नक्शे का इंग्लिश में हो रहा अनुवाद नेपाली मीडिया माय रिपब्लिका की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाली भूमि प्रबंधन विभाग की मंत्री पद्मा आर्यल ने कहा कि हम जल्द ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को देश का संशोधित नक्शा सौपेंगे, जिसमें कालापानी, लिपु लेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। इसके लिए हम नक्शे में प्रयोग किए गए शब्दों को इंगलिश में बदलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम अगस्त के मध्य तक अंतरराष्ट्रीय जगत को नया नक्शा सौंप सकते हैं। 13 जून को नेपाली संसद से पास हुआ था विवादित नक्शा बता दें कि भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल ने चाल चलते हुए 20 मई को कैबिनेट में नए नक्शे को पेश किया था। जिसे नेपाली संसद की प्रतिनिधि सभा ने 13 जून को अपनी मंजूरी दे दी थी। इसमें भारत के कालापानी, लिपु लेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। वहीं भारत ने इसका विरोध करने के लिए नेपाल को एक डिप्लोमेटिक नोट भी सौंपा था। इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल के नए नक्शे को एतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ भी करार दिया था। नेपाली भाषा में नक्शे की 25000 कॉपी प्रिंट नेपाली मापन विभाग के सूचना अधिकारी दामोदर ढकाल ने कहा कि नेपाल के नए नक्शे की 4000 कॉपी को अंग्रेजी में प्रकाशित करने के किए काम जारी है। इसके लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया है। इस विभाग ने नेपाली में नक्शे की करीब 25000 प्रतियां पहले ही प्रिंट कर ली हैं। इन्हें देश के भीतर वितरित किए जाने की योजना है। नेपाल बोला- हमको छोड़ सबसे बात कर रहा भारत नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञावली ने मीडिया ब्रीफिंग में आरोप लगाया कि कोरोना काल में भारत अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और चीन समेत कई देशों से बातचीत कर रहा है, लेकिन हम से नहीं। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण हमारे पास देश का नक्शा प्रकाशित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। नेपाली विदेश मंत्री का भारत पर निशाना उन्होंने दावा किया कि जब भारत ने नवंबर 2019 में अपने राजनीतिक मानचित्र के 8 वें संस्करण को प्रकाशित किया, तो इसमें नेपाल का कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा का क्षेत्र शामिल था। निश्चित रूप से नेपाल ने राजनीतिक बयानों और राजनयिक नोटों के माध्यम से इसका विरोध किया। उस समय हमने अपने भारतीय दोस्तों को औपचारिक रूप से इन समस्याओं को सुलझाने के लिए कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के लिए कहा। हमने संभावित तारीखों का भी प्रस्ताव रखा लेकिन हमारे प्रस्ताव का समय पर जवाब नहीं दिया गया। नेपाल में सत्‍ता में वामपंथी, चीन से बढ़ाई नजदीकी नेपाल में इन दिनों राजनीति में वामपंथियों का दबदबा है। वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा भी वामपंथी हैं और नेपाल में संविधान को अपनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में पहले प्रधानमंत्री बने थे। उन्‍हें नेपाल के वामपंथी दलों का समर्थन हासिल था। केपी शर्मा अपनी भारत विरोधी भावनाओं के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2015 में भारत के नाकेबंदी के बाद भी उन्‍होंने नेपाली संविधान में बदलाव नहीं किया और भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए केपी शर्मा चीन की गोद में चले गए। नेपाल सरकार चीन के साथ एक डील कर ली। इसके तहत चीन ने अपने पोर्ट को इस्तेमाल करने की इजाज़त नेपाल को दे दी।
काठमांडू चीन और पाकिस्‍तान के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहे नेपाल की सेना भी अब पाकिस्‍तानी सेना की राह पर बढ़ती दिखाई पड़ रही है। नेपाल की सेना पाकिस्‍तान की सेना की तरह से बिजनस करना चाहती है। दरअसल, नेपाली सेना ऐसे बिजनस में निवेश करना चाहती है जिसमें उसको जमकर कमाई हो। नेपाली सेना के 'कारपोरेट आर्मी' बनने का देश के अंदर ही भारी विरोध शुरू हो गया है। काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक द नैशनल डिफेंस फोर्स ने एक ड्राफ्ट बिल पेश किया है ताकि नेपाली आर्मी एक्‍ट को बदला जा सके। नेपाली सेना ने अपने कल्‍याणकारी फंड को विभिन्‍न बिजनस के अंदर 'प्रमोटर के रूप में' निवेश करने के लिए कानूनी सलाह मांगी है। इसके लिए पिछले कई साल से नेपाली सेना अपना पूरा जोर लगाए हुए है। नेपाली सेना के कानूनी मामलों के प्रभारी रंत प्रकाश थापा ने कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद है कि उनके ड्राफ्ट बिल को संसद से स्‍वीकृति मिलने से पहले सरकार अपनी सहमति दे देगी। नेपाल के वर्तमान कानूनों के मुताबिक सेना को उद्योगों, कंपनियों और पनबिजली पर‍ियोजना जैसे आधारभूत ढांचे के प्रॉजेक्‍ट में निवेश करने पर पाबंदी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाली सेना राष्‍ट्रीय सुरक्षा, खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करने जैसे कामों की बजाय बिजनस करने में कुछ ज्‍यादा ही रुचि दिखा रही है।
माले कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही मालदीव सरकार के सामने एक बड़ा संकट आ गया है। चीन के एक्‍सपोर्ट-इम्‍पोर्ट (एक्जिम) बैंक ने राष्‍ट्रपति इब्राहिम सोलिह की सरकार से कहा है कि वह 10 मिलियन डॉलर की रकम चुकाए। ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के एन साहित्‍य मूर्ति के अनुसार, शायद यह रकम सन ग्रुप को दिए गए 127 मिलियन डॉलर के कर्ज की किश्‍त है जो 'संप्रभु गांरटी' के तहत दिया गया था। मालदीव की आर्थिक स्थिति पहले से खस्‍ता है। अगर वह कर्ज चुकाने से मना करता है तो उसकी साख पर बट्टा लगेगा। अगर चुकाता है तो उससे करेंसी की वैल्‍यू गिरेगी और फॉरेन ट्रेड पर असर पड़ेगा। चीन के जाल में फंस गया मालदीव आमतौर पर 'संप्रभु गारंटी' सरकारों और सरकारी उपक्रमों को ही मिलती है। चीन ने 'संप्रभु गांरटी' के तहत कुल 9 बिलियन डॉलर के कर्ज बांट रखे हैं, उनमें से सन ग्रुप को छोड़कर बाकी सब सरकारी उपक्रम हैं। 'संप्रभु गारंटी' के तहत डिफॉल्‍ट पर राज्‍य/देश को कर्ज चुकता करना पड़ता है। अगर सोलिह की सरकार कर्ज चुकाने से मना करती है तो इससे ग्‍लोबल क्रेडिट मार्केट्स में मालदीव की साख पर असर पड़ सकता है। टैक्‍स कलेक्‍शन बेहद कम, कहां से चुकाएगा कर्ज चीन की तरफ से मालदीव को कुल कितना कर्ज दिया गया है, उसका कोई ऑफिशियल डेटा नहीं है। नवंबर 2018 में मालदीव के पूर्व राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद नशीद ने कहा था कि 'मेरे पास जितनी जानकारी है, अकेले चीन का कर्ज 3 बिलियन डॉलर है।" मालदीव साल में 1 बिलियन डॉलर से भी कम टैक्‍स कलेक्‍ट करता है। इसी साल वर्ल्‍ड बैंक की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि चीन ने मालदीव के लिए कर्ज की किश्‍त कम कर दी है। मालदीव पर टोटल कर्ज का करीब 45 फीसदी चीन का ही है। कर्ज के जाल में गरीब देशों को फंसाता है चीन वर्ल्‍ड बैंक की जून में आई रिपोर्ट के अनुसार, कम आय वाले 68 में से 49 देशों को सबसे ज्‍यादा कर्ज चीन ने दे रखा है। 2018 के आंकड़ों तक उनकी चीन के प्रति कुल 102 बिलियन डॉलर की देनदारी थी। वर्ल्‍ड बैंक ने कहा था कि 68 में से 27 देश ऐसे हैं जो कर्ज की वजह से बेहद परेशानी हैं। आधे से ज्‍यादा देशों में तनाव की वजह चीन था।
किए नई दिल्ली भारत के खिलाफ बयानबाजी के बीच क्या नेपाल पड़ोसी देश चीन के साथ मिलकर कोई चाल भी चल रहा है? यह सवाल लिपुलेख के पास चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियों के बाद उठ रहा है। पता चला है कि लद्दाख में चीन भले सैनिकों को पीछे हटाने की बात कर रहा है लेकिन उसने लिपुलेख इलाके में LAC के पार अपने एक हजार सैनिक तैनात किए हैं। लिपुलेख इलाका भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं को मिलानेवाली जगह है जो पिछले दिनों से काफी चर्चा में है। तैनात किए 1 हजार जवान मिली जानकारी के मुताबिक, चीन लद्दाख के बाद अब लिपुलेख में अपनी सेना तैनात कर रहा है। उसने सैनिकों की एक बटालियन मतलब करीब 1 हजार से ज्यादा जवान लिपुलेख के पास तैनात कर दिए हैं। हालांकि, भारत ने भी उतने ही जवान अपने क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं। भारत और चीन के बीच करीब तीन महीने से लद्दाख में तनाव चल रहा है। करीब 45 साल बाद वहां 15 जून को बॉर्डर पर हिंसा हुई, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए वहीं चीन के भी 40 जवान मारे जाने की खबर थी। अब जब लद्दाख में बातचीत के बाद दोनों देशों की सेनाएं धीरे-धीरे पीछे हो रही हैं तो चीन ने लिपुलेख में चाल चली है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, चीन सेना यानी पीएलए के सैनिक LAC के पार लिपुलेख इलाके में देखे गए हैं। नेपाल ने किया था लिपुलेख पर दावा लिपुलेख पास वही इलाका है जहां से भारत ने मानसरोवर यात्रा के लिए नया रूट बनाया है। यह पिछले दिनों तब चर्चा में आया था जब नेपाल ने यहां भारत की बनाई 80 किलोमीटर की सड़क पर एतराज जताया था। फिर नेपाल ने अपने यहां नया नक्शा पास कर विवाद बढ़ा दिया था। इसमें कालापानी, जिसमें लिपुलेख भी शामिल था उसे अपना हिस्सा बताया था। फिलहाल भारत चीन के जितने सैनिकों की तैनाती करने के साथ-साथ नेपाल पर भी पूरी नजर रखे हुए है। पूर्वी लद्दाख में भारतीय जमीन पर कब्‍जा करने की फ‍िराक में जुटा चीन पैंगोंग त्सो झील के फिंगर 4 से 8 के बीच हटने को तैयार नहीं हो रहा है। चीन ने लद्दाख के कुछ इलाकों से भले ही सेना हटा ली हो लेकिन लंबे समय तक टकराव के लिए एलएसी से कुछ ही दूरी पर स्थित अक्‍साई चिन के इलाके में बड़ी सैन्‍य तैयारी करने में जुट गया है। सैटलाइट से मिली ताजा तस्‍वीरों में पता चला है कि चीन अपने सैतुला सैन्‍य ठिकाने को आधुनिक बना रहा है और वहां घातक हथियार तैनात कर रखा है।
नई दिल्ली, नई शिक्षा नीति श‍िक्षा जगत में नये बदलावों की मंशा के साथ आई है. इस श‍िक्षा नीति में तकनीक से लेकर कौशल तक सब शामिल किया गया है. साथ ही सभी स्कूलों में समान श‍िक्षा और समान नियम भी शामिल होंगे. इसके लिए राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण बनेगा जिसमें सभी सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे. ऐसा पहली बार होगा जब सरकारी और निजी स्कूलों में एक जैसे नियम लागू होंगे. जब एक जैसे नियम लागू होंगे तो निजी स्कूलों की हर साल बढ़ती फीस पर अंकुश भी लग सकेगा. बता दें कि भारत में 34 साल बाद पहली बार नई शिक्षा नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. इसमें सरकार ने हायर एजुकेशन और स्कूली शिक्षा को लेकर कई अहम बदलाव किए हैं. सरकार अब न्यू नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार करेगी. इसमें ईसीई, स्कूल, टीचर्स और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा. बोर्ड एग्जाम को भाग में बांटा जाएगा. अब दो बोर्ड परीक्षाओं के तनाव को कम करने के लिए बोर्ड तीन बार भी परीक्षा करा सकता है. इसके अलावा अब बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में लाइफ स्किल्स को जोड़ा जाएगा. जैसे कि आपने अगर स्कूल में कुछ रोजगारपरक सीखा है तो इसे आपके रिपोर्ट कार्ड में जगह मिलेगी. जिससे बच्चों में लाइफ स्किल्स का भी विकास हो सकेगा. अभी तक रिपोर्ट कार्ड में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाए. इसके लिए एनरोलमेंट को 100 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है. इसके अलावा स्कूली शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास लाइफ स्किल भी होगी. जिससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहे, तो वो आसानी से कर सकता है. प्राथमिक स्तर पर शिक्षा में बहुभाषिकता को प्राथमिकता के साथ शामिल करने और ऐसे भाषा के शिक्षकों की उपलब्धता को महत्व दिया दिया गया है जो बच्चों के घर की भाषा समझते हों. यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों में दिखाई देती है. इसलिए पहली से पांचवीं तक जहां तक संभव हो मातृभाषा का इस्तेमाल शिक्षण के माध्यम के रूप में किया जाए. जहां घर और स्कूल की भाषा अलग-अलग है, वहां दो भाषाओं के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है.
अयोध्या, 31 जुलाई 2020, अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन की भव्य तैयारी जारी है. इस बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रह हैं. 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते अयोध्या को चारों तरफ से सील करने की तैयारी है. अयोध्या समेत फैजाबाद शहर में प्रवेश के सभी मार्गों पर पूर्व में किए इंतजामों की मॉनिटरिंग की जा रही है. भूमिपूजन के मुख्य कार्यक्रम की पूर्व संध्या से किसी को भी अयोध्या में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. लखनऊ के रास्ते सड़क से आने वाले वीवीआईपी को सहादतगंज से अयोध्या में प्रवेश देने की योजना बनाई जा रही है. अयोध्या के पड़ोसी जिले बस्ती, गोंडा, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुलतानपुर, अमेठी आदि में पहले ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है. नोडल अधिकारियों के नेतृत्व में इन जनपदों की पुलिस बार्डर पर कड़ी निगरानी रखेगी. जल मार्गों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए पीएसी, जल पुलिस की तैनाती की जा रही है. हाईवे समेत अयोध्या के सभी छोटे-बड़े प्रवेश मार्गों पर बैरियर लगाए जाने की तैयारी है. यह सभी व्यवस्थायें तीन अगस्त से कार्य करना शुरू कर देंगी. 4 अगस्त की शाम से अयोध्या में प्रवेश प्रतिबंधित किया जा सकता है. इसके लिए सभी मार्गों पर पूर्व में किए इंतजामों की दोबारा मॉनिटरिंग की जा रही है. आज आला अधिकारियों की बैठक होगी. लखनऊ से कई वरिष्ठ अधिकारी हालात और इंतजामों का जायजा लेने के लिए आज अयोध्या पहुंच रहे हैं. अयोध्या में प्रवेश के मेन रास्ते जालपा देवी चौराहा, मोहबरा बाईपास, बूथ नंबर चार, रामघाट, साकेत पेट्रोल पंप, बंधा तिराहा, हनुमान गुफा समेत अन्य छोटे रास्तों को बैरीकेडिंग लगाकर सील करने की तैयारी है. इसके अलावा हाइवे पर भी पूर्व में लगे बैरीकेडिंग पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात कर आने-जाने वाले लोगों की सघन तलाशी ली जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर कुल सात जोन बनाए गए हैं, इसमें हनुमानगढ़ी और सरयू तट जोन भी शामिल है. साकेत महाविद्यालय से लेकर नयाघाट तक के मुख्य मार्ग को सुपर सिक्योरिटी जोन में रखा गया है. प्रधानमंत्री का काफिला जिस सड़क से गुजरेगा, वहां कई बैरियर बंद कर दिए गए हैं. अयोध्या मुख्य मार्ग से राम जन्मभूमि की तरफ जाने वाले सभी रास्ते सील किए जाने की तैयारी है. वहीं संभावना है कि पीएम नरेंद्र मोदी हनुमानगढ़ी में दर्शन और पूजन भी कर सकते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए जरूरत के हिसाब से मुख्य मार्ग पर यातायात बंद किया जा सकता है. पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर अयोध्या के पड़ोसी जिलों को भी अलर्ट पर रखा गया है. इन जनपदों में पूर्व में ही नोडल पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई थी. सरयू नदी पार पड़ोसी जनपद बस्ती व गोंडा की पुलिस द्वारा अयोध्या बार्डर पर लगातार चेकिंग की जा रही, इसके साथ पुलिस टीम द्वारा जल पुलिस के सहयोग से नदी में गश्त किया जा रहा है.
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2020,भारत और नेपाल के बीच बीते दिनों रिश्तों में खटास सामने आई थी. नेपाल लगातार भारत के खिलाफ आवाज उठा रहा था, जिसमें चीनी चाल की बात कही जा रही थी. अब नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी ने इन सभी सवालों पर जवाब दिया है. होऊ का कहना है कि भारत-नेपाल के रिश्तों में खटास के लिए चीन को निशाने पर लिया गया. नेपाली मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में होऊ यांकी ने कहा कि नेपाल और भारत के रिश्तों में जो खटास आई, उनमें जानबूझकर चीन का नाम बदनाम किया गया. जबकि चीन का इससे कोई लेना-देना नहीं है. दरअसल, नेपाल के राष्ट्रपति केपी ओली के खिलाफ उनकी पार्टी में ही सवाल खड़े होने लगे थे. जबकि लगातार उनके फैसलों के कारण उन्हें पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद से हटाने की बात चल रही थी. इसी बीच नेपाली राजनीति में चीनी राजदूत होऊ यांकी की गतिविधियों पर हर किसी की नज़र गई. होऊ यांकी की ओर से केपी ओली और प्रचंड गुट को साथ लाने की कोशिशें की गईं, जबकि दोनों से मुद्दा सुलझाने को कहा गया. इसी के बाद यह आरोप लगने लगा कि चीन के कारण ही नेपाल भारत से अपने संबंध बिगाड़ रहा है. क्योंकि तब चीन और भारत के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे थे. नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें उत्तराखंड के तीन गांवों को शामिल किया था. भारत ने इस नक्शे को खारिज कर दिया था और नेपाल पर गलत दिशा में जाने की बात कही थी. हालांकि, अभी भी नेपाल में राजनीतिक संकट टला नहीं है और कई मोर्चों पर ओली-प्रचंड गुट आमने-सामने हैं.
नई दिल्ली पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) ने जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने की पहली सालगिरह 5 अगस्त, अयोध्या में राम मंदिर (Ram Mandir) और स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से पहले भारत में हमले करने के लिए अफगानिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के करीब 20 आतंकवादियों (Terrorist) को प्रशिक्षण दिया है। गैरपरंपरागत युद्ध (सीमा-पार आतंकवाद) में निपुण पाकिस्तानी सेना के एक विशेष बल, एसएसजी ने चार से पांच आतंकवादियों के दस्तों को प्रशिक्षित किया है, जिन्हें जम्मू एवं कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पार भारत में भेजने की कोशिश की जा रही है। एक शीर्ष आधिकारिक सूत्र ने बताया,‘हमलावरों में अफगानिस्तान में प्रशिक्षित जैश या लश्कर के आंतकवादी हो सकते हैं।’ सूत्रों ने कहा कि पूरे जम्मू सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ अग्रिम लांचिंग पैड्स के पास लश्कर और जैश के प्रशिक्षित आतंकवादियों का जमावड़ा है। जम्मू एवं कश्मीर के खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जम्मू क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा और पंजाब के पास की सीमा से बड़ी संख्या में आतंकवादी घुसपैठ करने की कोशिश करेंगे। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि पांच अगस्त से पहले लश्कर और जैश के आतंकवादियों की गतिविधि बढ़ सकती है। पिछले वर्ष पांच अगस्त को ही जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय युवाओं समेत तीन आतंकवादियों का एक समूह कश्मीर में बीएसएफ कैंप पर हमला करने की योजना बना रहा है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि एलओसी के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। अभी हाल ही में कुपवाड़ा जिले में घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम भी किया गया है। हाल ही में, कश्मीर केंद्रित प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुदीन ने अपने नवीनतम ऑडियो टेप में कश्मीर के लोगों को इस्लाम के नाम पर उकसाने और भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की अपील की थी। वहीं जैश-ए-मुहम्मद इन दिनों अफगानिस्तान में सक्रिय है। बीते हफ्ते अफगानिस्तान के खोगयानी जिले के मिर्जा खेल में अफगान बलों के द्वारा 31 आतंकवादी मारे गए थे, जिसमें जैश के 13 आतंकवादी शामिल थे।
नई दिल्ली कोविड-19 के रेकॉर्ड केसेज के बीच एक अच्‍छी खबर है। अबतक दो-तिहाई कोरोना मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। ग्रुप ऑफ मिनिस्‍टर्स (GoM) की मीटिंग में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हषवर्धन ने यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि 'पिछले 24 घंटों में कोविड-19 से रिकवर हो चुके मरीजों का आंकड़ा 10 लाख पार कर गया है। आज की तारीख में 10,57,805 लोग कोरोना मुक्‍त हो चुके हैं। देश में कुल 16,38,870 मामले हैं।' हषवर्धन के मुताबिक, भारत का रिकवरी रेट बेहतर होकर 64.54 प्रतिशत हो गया है। फैटलिटी रेट में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बीमारी से मृत्यु दर घटकर 2.18 प्रतिशत हो गई है। 1. रिकवरी रेट सुधरा भारत का रिकवरी रेट लगातार बेहतर हो रहा है। जुलाई के आखिरी हफ्ते में रेकॉर्ड संख्‍या में रिकवरी दर्ज की जा रही हैं। फिलहाल भारत में 5,45,318 ऐक्टिव केस हैं जो रिकवर्ड केसेज का लगभग आधा हैं। 2. 10 लाख लोग हो चुके ठीक कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीतने वाले लोगों की संख्‍या 10 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। पिछले 24 घंटों में 37 हजार से ज्‍यादा लोग ठीक होकर अपने घर लौटे हैं। 3. क्रिटिकल केसेज की संख्‍या कम देश में 0.27 प्रतिशत मरीज ऐसे हें जो वेंटिलेटर पर थे, 1.58 प्रतिशत आईसीयू में एडमिट हैं। 2.28 फीसदी मरीजों को किसी तरह के ऑक्सिजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है। 4. डबलिंग रेट भी बढ़ा हषवर्धन ने कहा कि भारत में कोरोना के मामले 21 दिन में डबल हो रहे हैं। जून के महीने में डबलिंग रेट 10-12 दिन के बीच था। 5. अब रोज हो रहे लाखों टेस्‍ट केंद्रीय स्वास्‍थ्‍य मंत्री ने टेस्टिंग इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में सुधार की बात करते हुए कहा कि पिछले 24 घंटों में 6.42 लाख से ज्‍यादा सैंपल्‍स टेस्‍ट किए गए हैं। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने दावा किया कि पिछले एक महीने में देशभर में करीब एक करोड़ टेस्‍ट हुए हैं। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री की अध्‍यक्षता में हुई बैठक निर्माण भवन में हुई। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हुए। पिछले 24 घंटों में आए रेकॉर्ड नए केस देशभर में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के सर्वाधिक 55,078 मामले सामने आए हैं। महज दो दिन पहले देश में कोरोना के 15 लाख मामले थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 779 और लोगों की मौत होने के बाद मृतक संख्या 35,747 हो गई है। यह लगातार दूसरा दिन है जब 50,000 से अधिक कोविड-19 के मामले सामने आए हैं। देश में अब भी 5,45,318 लोग संक्रमण की चपेट में हैं। अन्‍य गंभीर बीमारियों के चलते अधिकतर मौतें संक्रमण से अब तक हुई 35,747 मौत में, महाराष्ट्र में सबसे अधिक 14,728 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद दिल्ली में 3,936 लोगों की मौत हुई है। तमिलनाडु में 3,838, गुजरात में 2,418, कर्नाटक में 2,230, उत्तर प्रदेश में 1,587, पश्चिम बंगाल में 1,536, आंध्र प्रदेश में 1,281 और मध्य प्रदेश में 857 लोगों ने दम तोड़ा है। राजस्थान में कोविड-19 से अब तक 663 लोगों की, तेलंगाना में 505, हरियाणा में 417, पंजाब में 370, जम्मू-कश्मीर में 365, बिहार में 282, ओडिशा में 169, झारखंड में 103, असम में 94, उत्तराखंड में 76 और केरल में 70 लोगों की मौत हुई है। छत्तीसगढ़ में 51, पुडुचेरी में 48, गोवा में 42, त्रिपुरा में 21, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में 14-14, लद्दाख में सात, मेघालय और नगालैंड में पांच-पांच, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह और मणिपुर में चार-चार, अरुणाचल प्रदेश में तीन-तीन, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में दो और सिक्किम में एक व्यक्ति की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 70 प्रतिशत से अधिक लोगों की मौत अन्य गंभीर बीमारियों के चलते हुई है।
कुपवाड़ा देश को मिली आजादी के बाद पहली बार LoC के पास भारत के अंतिम गांव के लोग 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण लाइव देख सकेंगे। यहां पहली बार बिजली की व्यवस्था पहुंच रही है। पाकिस्तान की सीमा के पास कुपवाड़ा के केरन गांव में 12 हजार परिवारों को पिछले 73 साल से शाम में केवल 3 घंटे बिजली नसीब होती थी। वह भी डीजल जनरेटर सेट के जरिये। ऐसा पहली बार होगा कि स्वतंत्रता दिवस पर सुबह के वक्त पीएम के संबोधन को ग्रामीण लाइव सुन सकेंगे। गांव में पॉवर ग्रिड से ना केवल बिजली पहुंच गई है बल्कि जेनरेटर की वजह से होने वाले शोर और प्रदूषण से भी राहत मिलेगा। जिला कलेक्टर अंशुल गर्ग ने बताया, 'इस बॉर्डर इलाके में बिजलीकरण का काम पिछले एक साल से मिशन मोड पर चालू था। अब हमें सफलता मिल गई है।' किशन गंगा नदी के किनारे बसा केरन सर्दी की वजह से साल के 6 महीनों तक जम्मू और कुपवाड़ा जिले से कटा रहता है। गर्ग ने बताया कि बिजली के बाद सड़क निर्माण का कार्य भी किया जा रहा है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को टास्क दिया गया है।
नई दिल्ली लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control) पर जारी तनाव के बीच भारत ने भी चीन की किसी भी हिमाकत का तत्काल मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनातनी के लंबा खींचने के संकेतों के बीच भारत चीन से लगी सीमा पर 35,000 अतिरिक्त जवानों (Additional deployment at LAC) की तैनाती करने जा रहा है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। लिखें अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत के नियमों का हवाला देते हुए पहचान न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि इस कदम से 3,488 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर यथास्थिति बदल जाएगी। 15 जून को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था जिसे कम करने के लिए कई दौर की सैन्य बातचीत हो चुकी है। खूनी संघर्ष में भारत के 19 जवान और अफसर शहीद हुए थे जबकि चीन के कम से कम 45 सैनिक मारे गए। पेइचिंग ने अपने सैनिकों के मारे जाने की बात तो कबूल की थी लेकिन कभी भी आधिकारिक तौर पर उनकी संख्या नहीं बताई थी। गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद भारत ने भी सीमा पर अतिरिक्त सैनिकों, तोप और टैंकों की तैनाती की है। अधिकारियों ने बताया कि हालात की मांग है कि वहां और भी ज्यादा सैनिकों की तैनाती की जाएगी। भारत अब तक पाकिस्तान से लगी सीमा पर ही सैन्य तैनाती पर खास ध्यान देता रहा है क्योंकि सीमा पार से आतंकी घुसपैठ और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की नापाक साजिशें चलती रहती हैं। अब भारत ने एलएसी पर भी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है और पूर्वी लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमा पर चीन की हर हरकत पर करीबी नजर रख रहा है। भारत अपनी सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला तीसरा देश है और भारतीय सेना भी दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में है। मिलिटरी पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला तीसरा देश होने के बावजूद भारत की सेनाओं के आधुनिकीकरण की बहुत जरूरत है। रक्षा बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सैलरी और पेंशन के मद में चला जाता है। बजट का बाकी हिस्सा पुरानी खरीदारियों पर खर्च हो जाता है। एलएसी पर बड़े पैमाने पर अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य बजट पर भार पड़ेगा। दिल्ली बेस्ड थिंक-टैंक मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीजऔर ऐनालिसेज के सीनियर रिसर्च फेलो लक्ष्मण कुमार बेहरा कहते हैं, 'पाक सीमा से इतर लद्दाख में अतिरिक्त कमिटमेंट से रेवेन्यू कॉस्ट बढ़ेगा लिहाजा सर्विस, रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट और पूंजीगत खर्च पर और ज्यादा दबाव बढ़ेगा। अगर रक्षा बजट को नहीं बढ़ाया गया तो यह तकलीफदेह होगा।'
इस्‍लामाबाद राफेल फाइटर जेट के भारतीय वायुसेना में शामिल होते ही पाकिस्‍तान दहशत में आ गया है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि भारत अपनी वास्‍तविक रक्षा जरूरतों से ज्‍यादा हथियार जमा कर रहा है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने विश्‍व समुदाय से गुहार लगाई है कि वह भारत को हथियार जमा करने से रोके। पाकिस्‍तान ने कहा कि इससे दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों की संख्‍या और गुणवत्‍ता दोनों को ही बढ़ा रहा है। पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय ने कहा क‍ि यह परेशान करने वाला है कि भारत लगातार अपनी जरूरत से ज्‍यादा सैन्‍य क्षमता इकट्ठा कर रहा है। भारत अब दूसरा सबसे बड़ा हथियारों का आयातक देश बन गया है। यह दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। 'भारत परमाणु हथियारों की संख्‍या बढ़ा रहा' बता दें कि करीब 7000 किलोमीटर का सफर करते हुए पाकिस्‍तान के एयरस्‍पेस से सटकर गुजरात के रास्‍ते अंबाला एयर बेस पहुंचे इन राफेल फाइटर जेट ने पाकिस्‍तानी वायुसेना की बेचैनी बढ़ा दी है। राफेल के खौफ आलम यह है कि इन विमानों के आने से ठीक पहले पाकिस्‍तान के एयरफोर्स चीफ को आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से आपात बैठक करनी पड़ी है। दरअसल, पाकिस्‍तान की यह बेचैनी वाजिब भी है। राफेल के आने से अब पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक करने वाली भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ गई है। इराक और लीबिया में अपने युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन करने वाले राफेल लड़ाकू विमानों की सीधी टक्‍कर पाकिस्‍तान के अमेरिका निर्मित एफ-16 फाइटर जेट से होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, राफेल जंग में 'गेमचेंजर' साबित होगा और इसके आने पर पाकिस्‍तानी एयरफोर्स पर दबाव काफी बढ़ जाएगा। एक राफेल जेट को रोकने क‍ि लिए दो एफ-16 की जरूरत यही नहीं पाकिस्‍तानी एयरफोर्स को अब एक राफेल फाइटर जेट को रोकने क‍ि लिए अपने दो एफ-16 लड़ाकू विमान लगाने पड़ेंगे। अभी तक स्थिति यह है कि भारत को एक एफ-16 रोकने के लिए दो सुखोई-30एमकेआई विमान तैनात करने पड़ते हैं। इंडियन एयरफोर्स के पूर्व चीफ एवाई टिपणिस का मानना है कि यदि एयरफोर्स के पास फरवरी में बालाकोट हमले के दौरान राफेल होता तो भारत पाकिस्‍तान के कम से कम 12 एफ-16 विमानों को मार गिराता। यही नहीं भारत को बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक करने के लिए पाकिस्‍तानी हवाई क्षेत्र में नहीं घुसना पड़ता।
नई दिल्ली भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक मणिपुर में तलाशी अभियान के दौरान उग्रवादी गुट पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के घात लगाकर किए गए हमले में असम रायफल्स के 3 जवान शहीद हो गए जबकि 4 जवान घायल हैं। हथियारबंद PLA के उग्रवादियों ने अचानक 4 असम रायफल्स यूनिट (4 Assam Rifles unit near Myanmar) के जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। मणिपुर में PLA के उग्रवादियों ने आज सुबह जवानों पर यह हमला किया। सूत्रों ने बताया कि आतंकियों ने पहले IED विस्फोट किया और जवानों पर फायरिंग झोंक दी। इंफाल से 100 किलोमीटर दूर इस इलाके के लिए बडी संख्या में जवानों को भेजा गया है। माना जाता है कि PLA को चीन की तरफ से वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक चीन की मदद के बूते यह उग्रवादी संगठन भारतीय जवानों पर हमला करते हैं। इस उग्रवादी संगठन की स्थापना 1978 में एन विशेश्वर सिंह ने की थी।
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है. बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसपर फैसला लिया गया. कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने बताया कि 34 साल बाद भारत की नई शिक्षा नीति आई है. स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. 34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षा नीति को लेकर 2 समितियां बनाई थीं. एक टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और दूसरी डॉ. के कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के लिए बड़े स्तर पर सलाह ली गई. 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई. सरकार की ओर से बताया गया कि नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर कर सकता है. सरकार की ओर से बताया गया कि नई नीति को लेकर एक व्यापक चर्चा की गई है. 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई.
नई दिल्ली/अंबाला, 29 जुलाई 2020,भारतीय वायुसेना की शक्ति में आज बढ़ोतरी हुई है. फ्रांस से उड़ान भरने के बाद पांच राफेल लड़ाकू विमान भारतीय जमीन पर पहुंच गए हैं. हरियाणा के अंबाला एयरबेस में बुधवार को राफेल विमान लैंड हुए, जहां उनका स्वागत वाटर सैल्यूट के साथ किया गया. इस दौरान वायुसेना चीफ RKS भदौरिया भी मौजूद रहे. फ्रांस से मिलने वाली राफेल विमानों की ये पहले खेप है. इन विमानों ने मंगलवार को फ्रांस से उड़ान भरी थी, जिसके बाद ये UAE में रुके और बुधवार दोपहर को अंबाला पहुंचे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से ट्वीट कर वायुसेना को बधाई दी गई. राजनाथ सिंह ने कहा कि राफेल का मिलना वायुसेना के इतिहास में क्रांतिकारी बदलाव होगा और दुश्मन नज़र डालने से पहले कई बार सोचेगा. बता दें कि ये राफेल विमान को अभी आधिकारिक रूप से वायुसेना में शामिल नहीं किया गया है, इंडक्शन के लिए अलग से पूरी सेरेमनी होगी. UAE से उड़ान भरने के बाद दोपहर 3.00 बजे के करीब अंबाला के एयरबेस पर विमान लैंड हुए 03.25 PM: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया राफेल का टचडाउन का वीडियो. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन विमानों के मिलने के बाद भारत की चीन और पाकिस्तान बड़ी बढ़त हासिल हो गई है। एकसाथ कई तरह के अचूक काम को अंजाम देने वाले राफेल लेह में तैनात किया जाएगा। - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंबाला में राफेल फाइटर जेट की लैंडिग का वीडियो भी ट्वीट किया है। राजनाथ सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 'मैं भारतीय वायुसेना को बधाई देता हूं। मुझे यकीन है कि 17 स्क्वॉड्रन, गोल्डन एरो अपने मिशन पर काम करता रहेगा। मुझे बेहद खुशी है कि IAF की युद्धक क्षमता में समय पर बढ़ोतरी हुई है।' आपको बता दें कि भारत में राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप ऐसे समय में पहुंची है, जब पूर्वी लद्दाख में करीब तीन महीने से चीन के सैनिकों के साथ तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। - 5 राफेल लड़ाकू विमानों की अंबाला में लैंडिंग पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर बुरी नजर रखने की चाहत वालों को इससे चिंता होनी चाहिए। - रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, 'राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद सिर्फ इसलिए हो पाई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के साथ अंतरसरकारी समझौते के तहत इन विमानों को खरीदने का सही फैसला किया। इनकी खरीद का मामला काफी लंबे वक्त से लंबित था और इसमें प्रगति नहीं हो पाई थी। मैं उन्हें इस साहस और निर्णय क्षमता के लिए धन्यवाद देता हूं।' राजनाथ ने राफेल की खूबियों के बारे में ट्वीट करते हुए लिखा, 'इस लड़ाकू विमान की फ्लाइंग परफॉर्मेंस बहुत ही अच्छी है और इसके हथियार, रेडार और दूसरे सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं इसे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ की कतार में खड़ी करती हैं। भारत में इसका आगमन हमारे देश पर किसी भी आने वाले खतरे को नाकाम करने के लिए इंडियन एयर फोर्स को और ज्यादा ताकतवर बनाएगा।' राफेल को चीन और पाकिस्तान दोनों पर बड़ी बढ़त बताया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल इस टक्कर का कोई विमान नहीं है। मल्टी रोल फाइटर जेट राफेल एकसाथ कई लक्ष्यों पर निशाना लागने में माहिर है। -विशेषज्ञों के अनुसार, राफेल पाकिस्तान के F-16 और चीन के J-20 के मुकाबले काफी क्षमतावान है। भारतीय वायुसेना को इस विमान के कारण बड़ी ताकत मिलेगी।
काठमांडू नेपाल की सत्‍तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच दरार अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। मंगलवार को प्रचंड ने ओली के आधिकारिक आवास पर उनकी अनुपस्थिति में पार्टी की शक्तिशाली स्थायी समिति की एकतरफा बैठक बुलाई जिसके बाद देश में राजनीतिक संकट और ज्‍यादा गहरा गया है। इस बैठक में प्रचंड समर्थक स्‍थायी समिति के कुल 45 में से 31 सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। ओली ने स्‍थायी समिति की बैठक को एकतरफा फैसला लेते हुए रद्द कर दिया। पीएम के इस कदम से भड़के प्रचंड गुट ने इसे पार्टी के संविधान के खिलाफ कदम करार दिया है। ओली और प्रचंड के नेतृव वाले असंतुष्ट गुट के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए एनसीपी की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की अहम बैठक पूर्वाह्न 11 बजे होने वाली थी। इस बैठक को अचानक से नौंवी बार स्थगित कर दिया गया। बैठक स्थगित होने की सूचना देते हुए स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा था कि ओली और प्रचंड को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए और समय चाहिए। ओली को मनाने के लिए कई नेता उनके पास गए प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने भी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि दोनों नेताओं को बातचीत के लिए थोड़ा और समय चाहिए, इसलिए मंगलवार को बैठक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा था कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद अगली बैठक की तारीख पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ओली ने बिना प्रचंड से पूछे बैठक स्थगित कर दी। प्रचंड के नेतृत्व वाला गुट बलुवातार स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पहुंच गया पूर्वाह्न 11 बजे पहुंच गया था और बैठक शुरू करने के लिए ओली का इंतजार किया जा रहा था। पार्टी के नेताओं ने कहा कि ओली के करीबी स्थायी समिति के सदस्यों ने दोपहर में प्रचंड की ओर से बुलाई गई एकतरफा बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बैठक अपराह्न तीन बजे शुरू हुई और एक घंटे तक चली। इस दौरान ओली को मनाने के लिए कई नेता उनके पास गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक बैठक में स्थायी समिति के लगभग 31 सदस्य शामिल थे। गत सप्ताह बुधवार को प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास में स्थायी समिति की एक संक्षिप्त बैठक हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री उसमें शामिल नहीं हुए थे। एनसीपी उपाध्यक्ष ने ‘बीच का रास्ता’ बताया इसके बाद पार्टी गतिविधियों की समीक्षा, सरकार का प्रदर्शन, पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच काम के बंटवारे और अन्य संबंधित कामकाज पर चर्चा करने के लिए एक सप्ताह बाद 28 जुलाई को बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया था। पार्टी में बढ़ती दरार के बीच एनसीपी उपाध्यक्ष बामदेव गौतम ने प्रधानमंत्री ओली और प्रचंड के बीच सुलह कराने के लिए एक ‘बीच का रास्ता’ बताया है। गौतम ने प्रस्ताव दिया है कि ओली को प्रतिनिधि सभा के बचे हुए कार्यकाल के लिए ढाई साल तक प्रधानमंत्री पद पर रहने दिया जाए और उन्हें दिसंबर मध्य तक पार्टी अध्यक्ष रहने दिया जाए जब तक कि ओली की ओर से प्रस्तावित आम सभा की बैठक नहीं हो जाती। इसी प्रकार प्रचंड को पार्टी अध्यक्ष के रूप में तब तक जिम्मेदारी संभालने दी जाए जब तक आम सभा की बैठक नहीं हो जाती। गौतम ने प्रस्ताव दिया है कि ओली को स्वतंत्र रूप से सरकार चलाने की अनुमति दी जाए और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर निर्णय लेने से पहले उन्हें पार्टी में सलाह लेनी होगी। संसद को भंग कर चुनाव करा सकते हैं ओली चीन के बल पर सत्‍ता बचाने की कोशिशों में जुटे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब संसद को भंग करने और मध्‍यावधि चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक केपी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्‍प कमल दहल 'प्रचंड' दोनों ही शह और मात के लिए अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ओली की तैयारी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के बीच सहमति बनने के आसार कम होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ओली दो विकल्‍पों पर विचार रहे हैं। पहला-पार्टी के बंटवारे पर अध्‍यादेश लाया जाए ताकि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का चुनाव चिन्‍ह उनके पास ही रहे। दूसरा-संसद को भंग करके मध्‍यावधि चुनाव कराए जाएं। हालांकि यह दोनों ही रणनीति ओली के लिए आसान नहीं होने जा रही है।
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,भारतीय वायुसेना के अंबाला एयरबेस पर तीन घंटे बाद पांच राफेल फाइटर जेट लैंड करने वाले हैं. राफेल को लेकर पूरा देश उत्साहित है. वायुसेना के पूर्व अधिकारियों की माने तो राफेल के आने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ जाएगी, जिसका फायदा जल, थल और नभ सेना को मिलेगा. आजतक से बात करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल वीके भाटिया ने कहा कि राफेल की सबसे बड़ी खूबी है कि यह ओमनीरोल एयरक्राफ्ट है. ओमनीरोल का मतलब है कि यह एक ही उड़ान में एक से ज्यादा मिशन को पूरा कर सकता है. राफेल में 14 हॉट प्वाइंट है. इसमें एयर सुपयोरिटक वेपन, एयर टू ग्राउंड वेपन समेत कई वेपन (मिसाइल) ले जाया जा सकता है. पूर्व वायुसेना चीफ पीवी नाईक ने कहा कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में उच्च टेक्नोलॉजी का विमान शामिल होना अच्छी बात है. राफेल की टेक्नोलॉजी काफी उच्च है. अभी 36 आ रहे हैं, बाद में और भी 36 आएंगे. 2007 से राफेल विमान की खरीद प्रक्रिया शुरु हुई थी. राफेल के कारण वायुसेना की ताकत बहुत बढ़ेगी. आजतक से बात करते हुए पूर्व वायुसेना चीफ पीवी नाईक ने कहा कि राफेल एंटी-टेरर ऑपरेशन में भी काफी काम आएगा. राफेल का रडार सिस्टम बहुत मजबूत है, जिससे ग्राउंड टारगेट पर सटीक हमला किया जा सकता है. भारत वायुसेना के लिए जो चीजें जरूरी हैं, वह इस एयरक्राफ्ट में हैं. एंटी-टेरर ऑपरेशन में राफेल के इस्तेमाल पर पूर्व वायुसेना चीफ पीवी नाईक ने कहा कि राफेल का इस्तेमाल एंटी-टेरर ऑपरेशन में किया जा सकता है, लेकिन यह लंबी रेस का घोड़ा है. इसका इस्तेमाल सिर्फ एंटी-टेरर ऑपरेशन में नहीं करना होगा. कई और चीजें हैं, जिसमें राफेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल वीवी मलिक ने कहा कि राफेल के लिए वायुसेना को बधाई. 30 साल के बाद मल्टीरोल एयरक्राफ्ट की मांग पूरी होने वाली है. आजकल की लड़ाई में तीनों सेनाएं जुड़कर काम करती हैं. बहुत अच्छा तालमेल होता है. बेहतर तालमेल से ही सफलता मिलती है. करगिल के बाद समन्वय काफी बढ़ा है.
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,राफेल लड़ाकू विमान आज भारत पहुंच रहा है. इस विमान के भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के क्या मायने हैं, इसपर आजतक पर कई एक्सपर्ट ने अपनी राय रखी. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस विमान से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, साथ ही अपनी ज़मीन में रहकर हम दुश्मन को वार कर सकेंगे. पूर्व बॉम्बर नेविगेटर प्रशांत दीक्षित के मुताबिक, एयरक्राफ्ट में नई जेनरेशन का मतलब अलग-अलग तरीकों से होता है. राफेल को 4.5 जेनरेशन कहा जा रहा है, लेकिन इसका युद्ध में कोई खास फर्क नहीं पड़ता है. राफेल अपने दम पर बिना देखे हुए भी वार कर सकता है, इसमें हैमर मिसाइल आ रही है जो इसकी ताकत बढ़ा देगा. प्रशांत दीक्षित ने कहा कि फ्रांस से हमारा पुराना रिश्ता है, हमने पहले भी उनके जहाज उड़ाए हैं. इसके अलावा फ्रांस के साथ स्पेस प्रोग्राम में शामिल रहे हैं. आज हम चीन के साथ तनाव में जूझ रहे हैं, लेकिन राफेल आने से हम दूर से ही दुश्मन को मार सकते हैं. उन्होंने कहा कि बालाकोट में हमने ऐसा ही किया था जहां पर मिराज का इस्तेमाल करने के साथ ही दुश्मन को तबाह कर दिया गया था. आज राफेल आया है, जिससे और ताकत मिलेगी. प्रशांत दीक्षित के मुताबिक, वाटर सैल्यूट देना एयरफोर्स की पुरानी प्रक्रिया है, जिसे लगातार जारी रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें उपयोग में लाया जाएगा, फ्रांस एयरफोर्स कई बार इनका इस्तेमाल कर चुकी हैं. प्रशांत दीक्षित के मुताबिक, 1971 की लड़ाई में तीनों सेनाओं ने अपना योगदान दिया, लेकिन जब वायुसेना ने मिग चलाया और जनरल के घर में हमला किया तब पाकिस्तान की हालत खराब हो गई थी. घर में रहकर वार करेगा राफेल रिटायर्ड एयर मार्शल वीके भाटिया ने कहा कि हम आठ साल से इसका इंतजार कर रहे हैं, आज का दिन एक गोल्डन डे है. राफेल की क्षमता काफी अधिक है, कई तकनीकी मामले में ये अलग-अलग लड़ाकू विमानों से अलग हैं. वीके भाटिया के मुताबिक, राफेल विमान अपनी सरहद के अंदर रहकर भी दुश्मन पर निशाना लगा सकता है. यानी बालाकोट जैसी घटनाओं से भी आगे बढ़कर ये राफेल विमान काम करेगा. वीके भाटिया ने कहा कि हमारे फाइटर पायलट को इस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है कि वो किसी भी तरह का विमान उड़ाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने बताया कि कारगिल में हमने मिराज के ऊपर मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद टाइगर हिल पर फतह पाई थी. रिटायर्ड एयर मार्शल वीके भाटिया ने बताया कि 1971 की लड़ाई के वक्त हमें खुद ही नेविगेशन करना होता था, लेकिन आज कई तरह की सुविधाएं आ गई हैं. लेकिन राफेल के साथ ऐसी दिक्कतें नहीं हैं, क्योंकि इसमें आधुनिक सुविधाएं हैं.
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. यह फैसला मोदी कैबिनेट की बैठक के दौरान लिया गया है. इस बैठक के दौरान मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है. इसके बारे में विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से शाम 4 बजे होने वाली कैबिनेट ब्रीफिंग में दी जाएगी. गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया था कि मंत्रालय का मौजूदा नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया जाए. इस प्रस्ताव पर मोदी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है. इसके साथ ही नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी गई. अब पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी ताकि शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को खत्म किया जा सके. शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी 'नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी (एनएचईआरए) या हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया' तय किया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण 1986 में किया गया था और 1992 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे. तीन दशक बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. केंद्र सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है ताकि भारत दुनिया में ज्ञान का सुपरपावर बन सके. इसके लिए सभी को अच्छी क्वालिटी की शिक्षा दिए जाने की जरूरत है ताकि एक प्रगतिशील और गतिमान समाज बनाया जा सके. शिक्षा मंत्रालय का प्राथमिक स्तर पर दी जाने वाली शिक्षा की क्वालिटी सुधारने के लिए एक नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का फ्रेमवर्क तैयार करने पर जोर है. इस फ्रेमवर्क में अलग-अलग भाषाओं के ज्ञान, 21वीं सदी के कौशल, कोर्स में खेल, कला और वातारण से जुड़े मुद्दे भी शामिल किए जाएंगे.
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2020,एक तरफ खबरें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर ‘भूमि पूजन’ में शामिल होने जा रहे हैं. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक तस्वीर वायरल हो रही है. ब्लैक एंड वॉइट इस तस्वीर में राजीव गांधी के साथ कुछ लोग धार्मिक वेषभूषा में दिख रहे हैं. इस तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर राम मंदिर के 'उस भूमि पूजन की हैं जो 9 नवंबर, 1989 को हो चुका है.' पोस्ट में तस्वीर के साथ हिंदी में लिखा गया है, 'ये तस्वीरें हैं उस भूमिपूजन की जो 9 नवम्बर 1989 को हो चुका है. याने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को, जिसे हम देवउठनी एकादशी कहते हैं. कोंग्रेस की सरकार ने भी उस समय तिथि का खयाल रखा था. तब के पण्डे आज की तरह ढोंगी नहीं थे. उन्हें सब बातों का खयाल था. माफ कीजिये सरकार, आप सिर्फ हिन्दुत्व का ढोंग करते हैं, सनातन वैदिक धर्म व उसकी परम्परा का चुटकी भर ज्ञान नहीं आपको.' इंडिया टुडे के एंटी फे​क न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल हो रही तस्वीर किसी ‘भूमि पूजन’ के दौरान की नहीं है. ये तस्वीर उस समय की है ​जब 1989 में, नई दिल्ली में भूतपूर्व पीएम राजीव गांधी इस्कॉन के सोवियत सदस्यों से रूसी भाषा में भगवद्गीता की प्रति प्राप्त कर रहे थे. पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. यह पोस्ट फेसबुक पर खूब वायरल है. सैकड़ों यूजर्स ने इस तस्वीर को इसी कैप्शन के साथ ​शेयर किया है. रिवर्स सर्च की मदद से हमने पाया कि ये तस्वीर कई वेबसाइट्स के अलावा 'Wikimedia Commons ' पर भी उपलब्ध है. यहां फोटो के विवरण में लिखा गया है, 'भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी सोवियत के हरे कृष्णा सदस्यों से भगवद्गीता की प्रति प्राप्त करते हुए जो कि रूसी भाषा में है. नई दिल्ली 1989.' इस फोटो का कॉपीराइट रूसी इस्कॉन के पास बताया गया है. ये तस्वीर इस्कॉन की ओर प्रकाशित एक किताब की कवर पर मौजूद कोलाज में भी है. इस किताब का नाम है, 'द कृष्णा कॉन्शसनेस मूवमेंट इन द USSR: ए हिस्टोरिकल आउटलाइन फ्रॉम 1971-89'. यह सच है कि राजीव गांधी सरकार ने विवादित राम मंदिर स्थल के पास 9 नवंबर, 1989 को "शिलान्यास" की अनुमति दी थी. लेकिन खबरों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले हुए इस शिलान्यास समारोह से राजीव गांधी ने दूरी बनाकर रखी थी. जाहिर है कि राजीव गांधी की जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, वह अयोध्या में राम मंदिर के ‘भूमि पूजन’ की नहीं है. तस्वीर में राजीव गांधी इस्कॉन के सोवियत सदस्यों से मुलाकात कर रहे थे. दावा ये तस्वीर भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की है, जिसमें वे 9 नवंबर, 1989 को अयोध्या में राम मंदिर के ‘भूमि पूजन’ के दौरान पुजारियों के साथ मौजूद हैं.निष्कर्षये तस्वीर उस समय की है ​जब 1989 में, नई दिल्ली में पूर्व पीएम राजीव गांधी इस्कॉन के सोवियत सदस्यों से रूसी भाषा में भगवद्गीता की प्रति प्राप्त कर रहे थे.aaj tak
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायसेना इंडियन एयरफोर्स के हथियारों के जखीरे में कुछ ही घंटे बाद एक और 'ब्रह्मास्‍त्र' शामिल होने जा रहा है। इस हथियार का नाम है राफेल फाइटर जेट। राफेल का हिंदी में मतलब है 'आग का गोला'। राफेल तबाही का दूसरा नाम है। राफेल फाइटर जेट अपने नाम के अनुसार ही हवा के तेज झोके की तरह से आते हैं और आग के गोले की तरह से दुश्‍मन को बर्बाद कर देते हैं। Meteor मिसाइल से 'अदृश्‍य' दुश्‍मन भी तबाह राफेल फाइटर जेट को दुनिया की सबसे घातक हवा से हवा में मार करने वाली Meteor मिसाइलों से लैस किया गया है। आलम यह है कि दुनिया में इस समय जितनी भी मध्‍यम दूरी की एयर टू एयर मिसाइलें हैं, उनसे तीन गुना ज्‍यादा दूरी तक Meteor मिसाइल दुश्‍मन के फाइटर जेट को तबाह कर सकती है। यह मिसाइल आंखों से नजर न आने वाले दुश्‍मन के फाइटर जेट को 100 किमी दूरी से मार गिरा सकती है। इस फ्रांसीसी यूरोपीय मिसाइल के सामने पाकिस्‍तान की अमेरिका निर्मित AMRAAM मिसाइल कहीं नहीं ठहरती है। इसकी स्‍पीड 4 मैक से भी ज्‍यादा है। Meteor को स्‍टील्‍थ मिसाइल कहा जाता है जो किसी भी मौसम में एक के बाद एक टारगेट को निशाना बनाने में सक्षम है। इस घातक मिसाइल में दोतरफा डेटालिंक है। इससे यह रास्‍ते में ही अपना लक्ष्‍य बदल सकती है और सीकर की मदद से नए लक्ष्‍य पर निशाना साध सकती है। इस मिसाइल में रैमजेट इंजन लगा होता है जो उसे लगातार उसे 4 मैक से ज्‍यादा की गति बनाए रखने में मदद करता है। मीका एयर-टू-एयर मिसाइल, दागो और भूल जाओ राफेल फाइटर जेट कम और मध्‍यम दूरी तक मार करने वाली मीका (MICA) मिसाइल से लैस है। मीका मिसाइल किसी भी मौसम में दुश्‍मन के ड्रोन और फाइटर जेट को बर्बाद करने में सक्षम है। मीका मिसाइल 'दागो और भूल जाओ' के सिद्धांत पर काम करती है। इसे फाइटर जेट और जंगी जहाजों से भी छोड़ा जा सकता है। इस मिसाइल का मिराज-2000 फाइटर जेट में भी इस्‍तेमाल किया जाता है। इसका वजन करीब 112 किलोग्राम होता है। इसकी रेंज 500 मीटर से लेकर 80 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल 4 मैक की स्‍पीड से दुश्‍मन पर हमला करती है। स्‍कल्‍प क्रूज मिसाइल, दुश्‍मन के घर में घुसकर वार राफेल फाइटर जेट की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्‍कल्‍प क्रूज मिसाइलें हैं जो दुश्‍मन के घर में घुसकर तबाही मचाने में सक्षम हैं। स्‍कल्‍प के आ जाने से अब भारत के फाइटर जेट को बालाकोट की तरह से पाकिस्‍तानी एयरस्‍पेस में नहीं घुसना पड़ेगा। स्‍कल्‍प क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर है और इसीलिए इसे 'गेम चेंजिंज' मिसाइल कहा जाता है। इसे मिसाइल के जरिए दुश्‍मन के किसी भी बड़े और अतिसुरक्षित ठिकाने को आसानी से बर्बाद किया जा सकता है। फ्रांस की सेना इन मिसाइलों का सफलतापूर्वक इस्‍तेमाल कर चुकी है। इस घातक मिसाइल का वजन 1300 किलोग्राम है। एक स्‍कल्‍प मिसाइल की कीमत करीब साढ़े सात करोड़ रुपये है। यह मिसाइल करीब 1 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हमला करती है। स्‍कल्‍प मिसाइल में जीपीएस लगा होता है जो इसे सटीक न‍िशाना लगाने में मदद करता है। हैमर के वार से एक झटके में बर्बाद होंगे चीनी बंकर चीन के लद्दाख से सटे पहाड़ी सैन्‍य ठिकानों को बर्बाद करने के लिए भारत ने फ्रांस से हैमर मिसाइलों को खरीदने का फैसला किया है। यह मिसाइल किसी भी प्रकार के बंकर या सख्त सतह को पल में मटियामेट करने की ताकत रखती है। यह किसी भी स्थिति में बेहद उपयोगी है। बेहद कठिन पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में इसकी मारक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है। हैमर मिसाइल 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर की दूरी तक अचूक निशाना लगाने में माहिर है। हैमर को दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्‍टम भी पकड़ नहीं पाता है। HAMMER एक अत्याधुनिक हथियार है। इसे कई तरह से संचालित किया जा सकता है। इसे सैटेलाइट के जरिए, इंफ्रा रेड सीकर के जरिए या फिर लेजर के जरिए गाइड किया जा सकता है। यह हवा में कम ऊंचाई से लेकर पहाड़ी इलाको में समान क्षमता के साथ करती है। राफेल एकसाथ 250 किलोग्राम के 6 हैमर मिसाइल को ले जा सकता है। यह एकसाथ 6 टारगेट को निशाना लगा सकता है।
काठमांडू नेपाल में सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के अंदर घमासान मचा हुआ है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड के गुट के बीच स्‍टैंडिंग कमिटी की बैठक को लेकर जमकर ड्रामा हो रहा है। ओली के गुट का दावा है कि आज होने वाली पार्टी की स्‍टैंडिंग कमिटी की बैठक को टाल दिया गया है, वहीं प्रचंड और उनके समर्थक प्रधानमंत्री के आवास पहुंच गए हैं। कुल 45 में से 25 सदस्‍य ओली के आवास पर मौजूद हैं। उधर, ओली को बैठक में आने के लिए प्रचंड बुलाने गए हैं। प्रचंड समर्थकों का कहना है कि बैठक स्‍थगित नहीं हुई है और यह होगी। काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री ओली के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने कहा कि बैठक को स्‍थगित कर दिया गया है क्‍योंकि अभी ओली और प्रचंड की ओर से प्रस्‍ताव को तैयार नहीं किया गया है। उधर, स्‍टैंडिंग कमिटी की सदस्‍य मैत्रिका यादव ने कहा कि यदि ओली शामिल होने से मना करते हैं तब भी बैठक होगी। उन्‍होंने कहा, 'हम पहले से ही मीटिंग हॉल में मौजूद हैं और अन्‍य सदस्‍यों के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।' बता दें क‍ि ओली और प्रचंड के बीच 2 जून से वार्तालाप जारी है लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका है। अब ओली और प्रचंड दोनों ही गुटों ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। प्रचंड का गुट ओली के इस्‍तीफे की मांग कर रहा है, वहीं पीएम ओली ने धमकी दी है कि अगर उन्‍हें पद छोड़ने के लिए बाध्‍य किया गया तो वह कड़े कदम उठाएंगे। बताया जा रहा है कि चीन के बल पर सत्‍ता बचाने की कोशिशों में जुटे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब संसद को भंग करने और मध्‍यावधि चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। ओली और 'प्रचंड' दोनों अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे नेपाली अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक केपी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्‍प कमल दहल 'प्रचंड' दोनों ही शह और मात के लिए अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ओली की तैयारी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के बीच सहमति बनने के आसार कम होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ओली दो विकल्‍पों पर विचार रहे हैं। पहला-पार्टी के बंटवारे पर अध्‍यादेश लाया जाए ताकि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का चुनाव चिन्‍ह उनके पास ही रहे। दूसरा-संसद को भंग करके मध्‍यावधि चुनाव कराए जाएं। हालांकि यह दोनों ही रणनीति ओली के लिए आसान नहीं होने जा रही है। सूत्रों ने बताया कि ओली ने संसद को भंग करने और मध्‍यावधि चुनाव कराने के कारणों को बताने के लिए अपना भाषण तक तैयार कर लिया है। इससे पहले नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के को-चेयर प्रचंड ने साफ कह दिया था कि अभी पार्टी टूटने की आशंका खत्म नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पीएम ओली क कहने पर कुछ लोगों ने देश के निर्वाचन आयोग के पास CPN-UMN नाम की पार्टी रजिस्टर कराई है। 'NCP में संकट की वजह पीएम ओली का बर्ताव' कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के बीच पैदा हुए राजनीतिक संकट को खत्म करने के लिए नेपाल में चीन की राजदूत ने ताबड़तोड़ बैठकें की थीं जिससे अटकलें लगाई जा रही थीं कि शायद कुछ सुलह हो भी सकती है। हालांकि इसकी उम्‍मीद अब धूमिल होती जा रही है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्थाई समिति की बैठक में प्रधानमंत्री ओली के धड़े और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड के खेमे के बीच के मतभेदों को दूर नहीं किया जा सका। इसी बैठक के कुछ दिन बाद ही प्रचंड ने यह बयान दिया था।
नई दिल्ली लद्दाख के करीब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमे चीनी सैनिकों को न केवल भारत से तगड़ी टक्कर मिल रही है बल्कि आने वाले कुछ समय में मौसम भी कड़ा इम्तिहान लेने वाला है। दरअसल, सितंबर में लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाके में भयंकर ठंड होती है और चीनी सेना इसकी अभ्यस्त नहीं जबकि भारतीय सैनिक इन मौसमों के अभ्यस्त होते हैं। एक सैन्य कमांडर ने कहा कि भारतीय जवानों को बेहद दुर्गम सियाचिन या सिक्किम या फिर थांग ला दर्रे में पैदल चलने और पेट्रोलिंग करने का अनुभव होता है। ऐसे में भारत से सामरिक और कूटनीतिक मोर्चे पर घिरे चीन के लिए काफी मुश्किल होने वाली है। चीनी सैनिक सुकमार, सह नहीं पाएंगे ठंड! कमांडर के अनुसार, अक्साई चिन इलाके में पीएलए में जबरन भर्ती सैनिकों को भेजा जाता है। इन्हें तिब्बत और शिनजियांग में तीन महीने के समर एक्सरसाइज के लिए भेजा जाता है और फिर वे आगे की पढ़ाई करने लग जाते हैं। 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सैनिक इन इलाकों में बख्तरबंद गाड़ियों में घूमने के आदि होते हैं जबकि भारतीय जवान इन दुर्गम इलाकों में पैदल भी पेट्रोलिंग करते हैं। भारतीय जवानों के ठंड से जूझने का अनुभव भारतीय सैनिक 1984 से सियाचिन, कश्मीर जैसे इलाकों में लड़ रही है। सियाचिन ग्लेशियर, सिक्किम के फिंगर इलाके, डोकलाम और अरुणाचल के पहाड़ी इलाकों में भारतीय सेना आराम से डटी हुई है। भारतीय सेना ऊंचाई वाले इलाके में लड़ने की बेहतरीन ट्रेनिंग से लैस होती है। करगिल युद्ध के दौरान भारतीय जवानों के पराक्रम ने यह साबित भी कर दिया था। -25 डिग्री में नहीं टिक पाएगा ड्रैगन विशेषज्ञों ने बताया कि अक्साइ चिन इलाके में अभी भारत और चीन दोनों के सैनिक तैनात हैं। अभी यहां से सैनिक पीछे नहीं हटे हैं। लेकिन ड्रैगन को यहा यथास्थिति बहाल करने या फिर तिब्बत के पठार में में शून्य से 25 डिग्री नीचे तापमान में रहने का फैसला करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार भयंकर ठंड के कारण केवल जान का ही नुकसान नहीं होता बल्कि सैन्य साजो-सामान भी खराब होते हैं। भारत ने चीन को चौतरफा घेरा यही नहीं, चीन को यह भी ख्याल रखना होगा कि भारतीय सेना चीन से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर तैनात है जबकि चीनी सैनिक केवल कुछ जगहों पर ही तैनात हैं। चीन सैनिक सिक्किम के करीब है लेकिन भारतीय सेना इस इलाके को तीन तरफ से घेरे हुई है।
नई दिल्ली चीन के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए सरकार वहां से निर्यात किए जाने वाले घटिया क्वॉलिटी के सामानों पर लगाम कसने का फैसला किया है। इसको लेकर चीन समेत दूसरे देशों से आयात होने वाले 371 आइटम्स की डीटेल लिस्ट तैयार की गई है, जिनकी क्वॉलिटी चेक की जाएगी। मतलब इन सामानों को इंडियन स्टैंडर्ड के अतंर्गत लाया जाएगा। इसे मार्च 2021 तक लागू किया जाएगा। इन सामानों की लिस्ट में खिलौना, स्टील बार, स्टील ट्यूब, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलिकॉम आइटम, हेवी मशिनरी, पेपर, रबर आर्टिकल, ग्लास मटीरियल जैसे सामान शामिल हैं। इन सामानों का चीन से बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। सरकार के इस फैसले से चीन से निर्यात किए जाने वाले घटिया क्वॉलिटी के सामानों पर कंट्रोल लग पाएगा। ऐसा करने से आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी। भारत और चीन का ट्रेड डेफिसिट बहुत ज्यादा है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि धीरे-धीरे चीन से आयात कम किया जाए।
श्रीनगर, 27 जुलाई 2020, पाकिस्तान की तरफ से लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन हो रहा है. इसके जवाब में भारतीय सेना ने सोमवार को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की है. भारतीय सेना ने इस कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना का एक जवान मार गिराया है, जबकि आठ अन्य पाकिस्तानी जवान इस कार्रवाई में घायल हुए हैं. भारतीय सेना की तरफ से पुंछ और हाजी पीर सेक्टर में पाकिस्तानी फौजी ठिकानों को निशाना बनाते हुए यह कार्रवाई की गई थी. बता दें, पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी सेना की तरफ से बिना किसी उकसावे के नियंत्रण रेखा पर भारतीय इलाकों में लगातार गोलीबारी हो रही है. इस गोलीबारी में तीन नागरिकों की जान चली गई है. जबकि सात अन्य लोग घायल हुए हैं. पिछले हफ्ते एक बच्चा सहित तीन नागरिकों की हुई थी मौत पिछले हफ्ते भी जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की गोलीबारी में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर भारत ने कड़ा विरोध जताया था. भारत ने पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी को समन कर जम्मू-कश्मीर के कृष्णाघाटी सेक्टर में पाकिस्तानी के संघर्ष विराम उल्लंघन में एक बच्चे सहित तीन निर्दोष नागरिकों की मौत मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया था. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि 17 जुलाई की रात पाकिस्तान की करतूतों को लेकर भारत ने कड़ी निंदा की है जिसमें बच्चे सहित तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी. विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान की गोलीबारी का शिकार हुए सभी लोग एक ही परिवार के थे.
नई दिल्ली राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमान सोमवार को फ्रांस से भारत के लिए रवाना हो गए हैं। ये पांचों विमान ने सोमवार की यात्रा पूरी कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल दफ्रा एयरबेस (Al Dhafra airbase) पर लैंडिंग की है। राफेल को फ्रांस से यूएई पहुंचने में सात घंटों का वक्त लगा। ये विमान अल दफ्रा एयरबेस से उड़ान भरेंगे तो सीधे भारत ही पहुंचेंगे। फ्रांस से सात घंटों की उड़ान में पहुंचे UAE फ्रांस के बंदरगाह शहर बोर्डेऑस्क में वायुसेना अड्डे से रवाना हुए ये विमान लगभग सात हजार किलोमीटर का सफर तय करके बुधवार को अंबाला वासुसेना अड्डे पर पहुंचेंगे। वायुसेना के बेड़े में राफेल के शामिल होने से उसकी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत को यह लड़ाकू विमान ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब उसका पूर्वी लद्दाख में सीमा के मुद्दे पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है। 2021 के आखिर तक आएंगे 36 राफेल एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 10 विमानों की आपूर्ति समय पर पूरी हो गई है और इनमें से पांच विमान प्रशिक्षण मिशन के लिए फ्रांस में ही रुकेंगे। बयान में कहा गया है कि सभी 36 विमानों की आपूर्ति 2021 के अंत तक पूरी हो जाएगी। वायुसेना को पहला राफेल विमान पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा के दौरान सौंपा गया था। फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने विमानों के फ्रांस से उड़ान भरने से पहले भारतीय वायुसेना के पायलटों से बातचीत की। बुधवार को ही वायुसेना में हो जाएंगे शामिल इन पांच राफेल लड़ाकू विमानों को बुधवार दोपहर वायुसेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, वायुसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन्हें एयरफोर्स में शामिल करने को लेकर औपचारिक समारोह का आयोजन अगस्त के मध्य में किया जाएगा। भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल विमान खरीदने के लिए चार साल पहले फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। हैमर मिसाइलों से लैस होंगे राफेल चूंकि राफेल के साथ इजरायल के स्पाइस 2000 बम के कन्सॉलिडेशन और टेस्टिंग में लंबा समय लग रहा है, इसलिए इनमें हैमर मिसाइलों को फिट करने का फैसला किया गया है। यह भारतीय वायुसेना को बिना किसी देरी के राफेल विमानों का संचालन करने में सक्षम बनाएगा। सूत्रों ने कहा कि उभरती हुई आपात स्थिति में भारत के पास हैमर मिसाइलों के इस्तेमाल के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है, जो पहले से ही राफेल जेट में के अनुकूल है। इस प्रकार अब लड़ाकू विमानों में स्पाइस 2000 बमों को लगाने को नजरअंदाज किया जा रहा है।
नेपाल-चीन BRI प्रॉजेक्ट: मिलेगी 'सपनों' की रेल या ड्रैगन का कर्ज-जाल?एक ओर जहां चीन और नेपाल दोनों ने भारत को लेकर तल्ख रवैया अपना रखा है, इन दोनों पड़ोसी देशों के आपस में संबंध गहरे होते जा रहे हैं। चीन नेपाल में भारत की सीमा के करीब रेलवे प्रॉजेक्ट का प्लान बना रहा है। बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के तहत 72 किमी रेलवे लाइन तिब्बत से काठमांडू होकर लुंबिनी तक जाएगी जो लुंबिनी भारतीय सीमा के करीब है। माना जा रहा है कि चीन नेपाल में भारत सीमा के करीब इसीलिए रेल लाइन बना रहे है ताकि भविष्य में भारत के साथ व्यापार में उसे आसानी से किया जा सके। इस प्रॉजेक्ट के चीन के सेक्शन पर काम कर रहे अधिकारियों के फोटो शेयर किए गए हैं। ​​भारत की जगह दूसरे विकल्पों का वादा नेपाल सेक्शन पर स्थिति का जायजा लेने का काम जारी है। ये अधिकारी सर्वे कर रहे हैं और डिजाइन तैयार कर रह हैं। वहीं, दूसरी ओर स्थानीय लोग इस प्रॉजेक्ट को 'कागतको रेल' (पेपर रेल) और 'सपनको रेल' (सपनों की रेल) कह रहे हैं। अभी तक नेपाल व्यापार और ट्रांजिट रूट्स के लिए भारत पर निर्भर था। नेपाल का इकलौता रेल लिंक 35 किमी का ट्रैक है जिसे भारत ने बनाया है। ऐसे में चीन ने वादा किया है कि वह उसे वैकल्पिक रास्ते देगा ताकि भारत पर निर्भरता कम हो। ​​'चीन के कर्ज से सावधान रहे नेपाल' इसे लेकर देश के अंदर अलग-अलग तरह के विचार भी हैं। कुछ एक्सपर्ट्स इसे नेपाल के लिए अच्छा मौका देख रहे हैं जिससे वह चीन और भारत के बीच में ट्रांजिट हब बन सकेगा। वहीं, दूसरे एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेपाल को चीन से मिलने वाले कर्ज को लेकर सावधान रहना चाहिए। छोटी अर्थव्यवस्था होने के चलते नेपाल में इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या ये कर्ज वापस किए जा सकेंगे? ​चीन की रिपोर्ट में कई रुकावटों​ का जिक्र चीन ने नेपाल से कनेक्टिविटी का वादा तो किया है लेकिन जिस रास्ते पर यह रेलवे प्रॉजेक्ट बनाया जाना है, वह इतना ऊबड़-खाबड़ है कि यह अपने आप में एक चुनौती है। चीन ने 2018 में एक टेक्निकल स्टडी में कई रुकावटों का जिक्र किया था। किरियॉन्ग के पास पाइकू झील जाने वाली उत्तरी और दक्षिणी ढलानों पर रैंप का निर्माण जरूरी हो गया। इसके बिना काठमांडू सेक्शन को ट्रैक से जोड़ा जाना मुश्किल था क्योंकि हिमालय के दोनों ओर ऊंचाई में काफी फर्क है। चीन कर रहा सर्वे-
मास्‍को पूर्वी लद्दाख में भारत से चल रहे तनाव के बीच रूस ने चीन को बड़ा झटका दिया है। रूस ने अपने ब्रह्मास्‍त्र कहे जाने वाले S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम की मिसाइलों की डिलीवरी को रोक दिया है। चीन के समाचार पत्र सोहू के हवाले से आ रही खबरों में कहा गया है कि रूस ने सतह से हवा में मार करने वाली इन मिसाइलों की डिलीवरी पर रोक लगाने की घोषणा की है। सोहू ने लिखा, 'इस बार रूस ने चीन के S-400 मिसाइलों की डिलीवरी को सस्‍पेंड कर दिया है। कुछ हद तक हम कह सकते हैं कि यह चीन के हित के लिए किया गया है। हथियार पाने के बाद इनवाइस पर हस्‍ताक्षर करना बंदूक लेने के समान आसान नहीं है।' चीनी अखबार ने कहा, 'वे (रूसी) कहते हैं कि इन हथियारों को देने के लिए काम करना बहुत जटिल है। चूंकि चीन ने अपने सैनिकों को रूस में ट्रेनिंग के लिए भेजना होगा, वहीं रूस को भी कई तकनीकी विशेषज्ञों को भेजना होगा ताकि यह हथियार काम कर सके।' उधर, रूस की इस घोषणा के बाद चीन ने कथित रूप से कहा है कि मास्‍को को यह फैसला लेने के लिए बाध्‍य किया गया है क्‍योंकि S-400 की डिलेवरी से महामारी के खिलाफ पीपल्‍स लिबरेशन आर्मी की कार्रवाई प्रभावित होगी। रूस चीन के लिए संकट नहीं पैदा करना चाहता है। रूसी एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में चीन को S-400 मिसाइलों का पहला जत्‍था मिला था। S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को दुनिया का सबसे आधुनिक रक्षा कवच माना जाता है। यह 400 किमी की दूरी तक दुश्‍मन के फाइटर जेट से लेकर ड्रोन विमानों को मार गिराने में सक्षम है। रूस ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब उसने चीन पर जासूसी करने का आरोप लगाया था। वह भी तब जब चीन और रूस के बीच बहुत घनिष्‍ठ संबंध हैं। रूस ने हाल ही में अपने एक वैज्ञानिक को चीन को गोपनीय सूचनाएं देने के आरोप में अरेस्‍ट कर लिया था।
अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अब चांदी सोने की ईंटें आदि का दान स्वीकार नहीं करेगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने सभी दानदाताओं से अपील की है कि वे सोने, चांदी व अन्य धातुओं की ईंटें दान के लिए लेकर न आएं। इसकी जगह कैश ट्रस्ट के खाते में जमा करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन करने अयोध्‍या आ रहे हैं। लिखें उन्होंने कहा कि जनवरी में लोगों ने चांदी की ईंटें दान की तो इसे सामान्य दान माना गया। लेकिन अब सूचना मिली है कई दानकर्ता चांदी व सोने की सामग्री दान के लिए ला रहे हैं जिसका मूल्यांकन करना ट्रस्ट के लिए मुश्किल है। अब तक 1 क्विंटल से ज्‍यादा बहुमूल्‍य ईंटें दान इसके अलावा, इनको रखने के लिए बैंक में लॉकर नहीं हैं। उन्होंने सभी दान दाताओं से अपील की है कि वे दान को ऑनलाइन अथवा कैश में ट्रस्ट के खाते में जमा करें। चंपत राय ने बताया कि अब तक लगभग 1 क्विंटल से ज्यादा चांदी व अन्य धातुओं की ईंट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान की गई हैं। 5 अगस्‍त को मोदी आ रहे हैं अयोध्‍या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या के राम मंदिर का भूमि पूजन करने के साथ इसके निर्माण का शुभारंभ करेंगे। पीएम का कार्यक्रम तय हो गया है। वह दिन में साढ़े 11 बजे यहां पहुंचेंगे तथा लोगों को संबोधित भी करेंगे। पीएम मोदी अयोध्‍या पहुंचने के बाद साकेत विश्वविद्यालय से रामजन्मभूमि की ओर जाएंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री हनुमानगढ़ी भी जाएंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में 200 गेस्ट शामिल होंगे। इसमें विशिष्ट अतिथियों के साथ ही साधु-संत और अधिकारियों के भी शामिल रहने की जानकारी है। 32 सेकंड में मोदी रखेंगे आधारशिलाा प्रस्‍तावित कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में राम मंदिर प्रवास के दौरान भाषण भी देंगे। उनका कार्यक्रम दो घंटे का होगा। भूमि पूजन का समय 12 बजकर 15 मिनट पर 32 सेकेंड का रहेगा। इसी दौरान पीएम राम मंदिर की आधारशिला भी रखेंगे। 200 फीट नीचे डाला जाएगा टाइम कैप्‍सूल राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य रामेश्वर चौपाल ने कहा है कि रामजन्मभूमि के इतिहास को सिद्ध करने के लिए जितनी लंबी लड़ाई कोर्ट में लड़नी पड़ी है, उससे यह बात सामने आई है कि अब जो मंदिर बनवाएंगे, उसमें एक 'टाइम कैप्सूल' बनाकर के 200 फीट नीचे डाला जाएगा। भविष्य में जब कोई भी इतिहास देखना चाहेगा तो रामजन्मभूमि के संघर्ष के इतिहास के साथ तथ्य भी निकल कर आएगा ताकि कोई भी विवाद यहां उत्पन्न न हो सके।
ढाका बांग्लादेश के एक अखबार ने दावा किया है कि पिछले चार महीने में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारतीय उच्चायुक्त की कई दरखास्तों के बावजूद मुलाकात नहीं की है। भोरेर कागोज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2019 में शेख हसीना के दोबारा पीएम बनने के बाद सभी भारतीय प्रॉजेक्ट धीमे हो गए हैं जबकि ढाका चीन के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स को ज्यादा तवज्जों दे रहा है। भारतीय उच्चायुक्त से नहीं मिलीं हसीना अखबार के संपादक श्यामल दत्ता ने पाकिस्तान और चीन की ओर झुकते बांग्लादेश पर लिखे आर्टिकल में कहा है, 'भारत की चिंता के बावजूद बांग्लादेश ने सिलहट में एयरपोर्ट टर्मिनल का ठेका चीनी कंपनी को दे दिया। भारतीय उच्चायुक्त रीवा गांगुली चार महीने से बांग्लादेश की पीएम से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेने की कोशिश कर रही हैं लेकिन मिल नहीं सकती हैं। बांग्लादेश ने कोराना वायरस की महामारी से निपटने में मदद करने के लिए भारत को धन्यवाद भी नहीं बोला है।' चीनी कंपनी को दिया ठेका सिलहट भारत के उत्तरपूर्व की सीमा से सटा है और संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां MAG ओस्मानिया एयरपोर्ट बनाने का ठेका बांग्लादेश ने पेइचिंग अर्बन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। द हिंदू ने एक राजनियक सूत्र के हवाले से बताया है कि भारत में बांग्लादेश उच्चायोग ने इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय राजदूत ने हसीना के साथ मिलने के लिए समय मांगा था लेकिन अभी अपॉइंटमेंट मिल नहीं सका है। इमरान ने की थी हसीना से बात यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से बात की थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 15 मिनट तक टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान खान ने बांग्लादेशी नेतृत्व द्वारा संक्रमण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। चीन से बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश की नजदीकी भारत के लिए चिंता की बात बन सकती है। भारत के साथ संबंधों में खटास भारत के बांग्लादेश के साथ संबंध तब बिगड़ने लगे थे जब राष्ट्रीय नागिरक रजिस्टर और नागरिकता संशोधन कानून लागू किए गए थे जिनके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता का प्रावधान है। इस पर बांग्लादेश ने यह कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है लेकिन बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की खबरों के बाद से स्थिति में खटास आने लगी। वहीं, ढाका मीडिया ने भी भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ के हाथों लगों के मारे जाने की घटनाएं बढ़ने का दावा किया है।
पेइचिंग चीन के सरकारी परमाणु संस्थान द इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी सेफ्टी टेक्नोलॉजी (आईनेस्ट) में काम करने वाले 90 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद घबराई सरकार ने इसे ब्रेन ड्रेन मानते हुए जांच के आदेश दिया है। इतनी बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफे के पास इस संस्थान को चलाने के लिए बहुत कम साइंटिस्ट ही बचे हैं। इस्तीफा देने के कई कारण मीडिया रिपोट्स के अनुसार, वैज्ञानिकों के इस्तीफा देने की कई वजहें हैं। जिसमें से उनके वेतनमान में गड़बड़ी और सरकारी सुविधाओं की कमी भी प्रमुख मुद्दा है। वहीं, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इस संस्थान पर अपना पूरा अधिकार जमाए हुए है। कहा जा रहा है कि पार्टी के बड़े नेता जबरदस्ती वैज्ञानिकों से काम करवाना चाहती है। कैसे शुरू हुआ विवाद चीन का द इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी सेफ्टी टेक्नोलॉजी (आईनेस्ट) संस्थान हेफी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस (चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस) के अंतर्गत काम करता है। आईनेस्ट की पैरेंटिंग संस्था चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के शीर्ष पदों पर कम्युनिस्ट पार्टी के नेता काबिज हैं, जो अपनी मनमानी चला रहे हैं। यहां तक कि वैज्ञानिकों को उनके प्रोजक्ट के लिए पर्याप्त फंड तक नहीं दिया जा रहा है। 80 प्रतिशत शोधकर्ताओं के पास पीएचडी की डिग्री संस्थान की वेबसाइट के अनुसार, मध्य चीन के अनहुई प्रांत की राजधानी हेफेई में स्थित आईनेस्ट चीन के वैज्ञानिकों का एक केंद्र है। इस संस्थाान में लगभग 600 सदस्य हैं और 80 प्रतिशत शोधकर्ताओं के पास पीएचडी की डिग्री है। यहां के कई वैज्ञानिक चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। जिनकी औसत आयु 31 साल के आस पास है। इस समय 100 वैज्ञानिक ही कर रहे काम एक चीनी अधिकारी के अनुसार, कभी इस संस्थान में 500 वैज्ञानिक काम करते थे। पिछले कई सालों में यहां से बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है। हालात यह हैं कि इस संस्थान में वर्तमान में केवल 100 वैज्ञानिक ही बचे हैं। इन वैज्ञानिकों का वेतन लगभग 10,000 युआन ($ 1,430) प्रति माह है।
इस्लामाबाद भारत के खिलाफ अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूती देने के लिए पाकिस्तान ने स्कर्दू एयरबेस पर जेएफ-17 फाइटर जेट को तैनात किया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने एलओसी के पास स्थित अपने चार एयरबेसों को भी हाईअलर्ट पर रखा है। लद्दाख के बेहद नजदीक इस एयरबेस का उपयोग पाकिस्तान के साथ चीनी एयरफोर्स भी करती है। ऐसे में भारत के लिए चीन के साथ ही पाकिस्तान के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ गई है। लिखें पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ पहुंचे स्कर्दू शनिवार को पाकिस्तानी मीडिया में एक विडियो जारी किया गया है, जिसमें पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ मुजाहिद अनवर खान इस एयरबेस का दौरा कर ऑपरेशन तैयारियों का जायजा लेते दिखाई दे रहे हैं। ऐसी भी रिपोर्ट है कि पाकिस्तान इस इलाके में हाई एल्टीट्यूड एयर कॉम्बेट एक्सरसाइज कर रहा है। ऐसे में उसने बड़ी संख्या में फाइटर जेट और एयरफोर्स कर्मचारियों को यहां तैनात किया है। रणनीतिक रूप से अहम है स्कर्दू एयरपोर्ट रणनीतिक रूप से पीओके के स्कर्दू में स्थित पाकिस्तानी वायुसेना के इस एयरपोर्ट का बड़ा महत्व है। यहां से श्रीनगर और लेह की दूरी मात्र 200 किलोमीटर है। यहां से उड़ान भरने के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मुश्किल से 5 मिनट में भारतीय वायुसीमा में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि सीमा पर तैनात भारतीय एयर डिफेंस को वे भेद नहीं सकते। फ्यूल स्टेशन और हथियार डिपो भी बनाया स्कर्दू के इस नए एयरपोर्ट पर अंडरग्राउंड फ्यूल स्टेशन और हथियार डिपो का भी निर्माण किया गया है। पाकिस्तान यहां से चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर की भी निगरानी करना चाहता है। बता दें कि स्कार्दू में पाकिस्तान का सिविल एयरपोर्ट पहले से ही मौजूद है। चीनी विमानों के तैनाती की आशंका यह भी आशंका जताई जा रही है कि सीपीईसी की सुरक्षा के लिए पीओके में स्थित इस एयरबेस का इस्तेमाल चीनी वायुसेना भी कर सकती है। इससे भारत की सुरक्षा संबंधी चिंता भी बढ़ेगी। हालांकि, पाक की हर एक चाल पर भारतीय खुफिया एजेंसिया कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
तेहरान भारत से लद्दाख में सीमा विवाद और अमेरिका से कोरोना वायरस से लेकर दक्षिण चीन सागर तक कई मुद्दों पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा करने वाले चीन के साथ ईरान की नजदीकियां बढ़ती जा रही हैं। दूसरी ओर भारत की अमेरिका से करीबी उसे रास नहीं आ रही है। इस बीच भले ही उसने चाबहार-जहेदान रेलवे प्रॉजेक्ट से भारत को हटाने की खबरों का खंडन किया हो लेकिन माना जा रहा कि इसके पीछे भी एक रणनीति रही है। दरअसल, तेहरान यह झटका देकर अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों पर भारत को मिलने वाली छूट का फायदा उठाना चाह रहा था। चीन से नजदीकी, भारत से तल्खी? ईरान चीन के साथ 400 अरब डॉलर की डील कर रहा है जबकि वह इस बात से नाराज है कि भारत ने अमेरिका के प्रतिबंधों का पालन करते हुए ईरान से ऊर्जा आयात रोक दिया। उसका यह भी कहना है कि चाबहार में भारत दिलचस्पी नहीं ले रहा। हालांकि, ईरान ने इन खबरों को अफवाह बताया है और चीन से अपनी नजदीकी के बावजूद वह साफतौर पर भारत से तल्खी नहीं जाहिर कर रहा। इस बात की संभावना पहले ही जताई जा रही थी कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच 2026 में 10 साल का चाबहार समझौता पूरा होने के बाद चीन इसे अपने बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के तहत ले लेगा। देश के अंदर मिले-जुले विचार ऐसे में सवाल यह है कि ईरान एक साथ चीन और भारत के साथ संतुलन कैसे बनाएगा। भारत के उसके विरोधियों, अमेरिका और इजरायल के साथ बेहतर संबंध हैं जबकि चीन से संबंधों में शांतिपूर्ण तनाव फिलहाल बना है। ईरान में एक बड़ा तबका ऐसा है जिसका मानना है कि वह एक सेफ पैसेज के जरिए चीन और भारत से एक-साथ व्यापार कर सकता है। हालांकि, देश में कुछ संगठन ऐसे भी हैं जो भारत सरकार के साथ संबंधों के पक्ष में नहीं हैं। भारत का समर्पण जांच रहा ईरान तेहरान के एक पॉलिटिकल साइंस प्रफेसर का कहना है कि ईरान चाबहार के बहाने यह देखना चाहता था कि भारत ईरान की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है। जब चाबहार से भारत को बाहर करने की बात आई तो भारत के राजदूत गद्दाम धर्मेंद्र ईरान की संसद के स्पीकर और सड़क और रेल मंत्रालय के डेप्युटी मिनिस्टर से मिले। माना जा रहा है कि ईरान यह देखना चाहता था कि भारत ईरान के विरोधियों के प्रति अपनी नीति से परे होकर ईरान के साथ कैसे व्यवहार करता है। उसका मानना है कि अब भारत इस प्रॉजेक्ट में और ज्यादा दिलचस्पी लेगा। भारत से संबंध तोड़ने से होगा नुकसान दूसरी ओर, भारत के चाबहार प्रॉजेक्ट से जुड़े होने की वजह से अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट दे रखी है। कोरोना वायरस महामारी के बीच ईरान के लिए यह निवेश का एक मौका है जिससे उसे राहत मिली है। ऐसे में ईरान यह नहीं चाहेगा कि भारत इस प्रॉजेक्ट से बाहर हो क्योंकि इससे प्रतिबंधों में छूट भी हाथ से जा सकती है। हालांकि, ईरान में एक धड़ा है जो मानता है कि अगर भारत से ईरान को फायदा नहीं हो रहा है तो दोनों के बीच संबंधों का मतलब नहीं है। रहे हैं ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृति संबंध रहे हैं जिनकी वजह से दोनों के बीच संबंध बेहतर होने की उम्मीद कायम है। जनवरी में अमेरिकी हमले में मारे गए ईरान के कमांडर कासिम सुलेमान भारत से मजबूत रिश्तों के पक्षधर थे और माना जाता है कि उनकी नीतियों का रेवलूशनरी गार्ड्स में अभी भी पालन किया जाता है। ईरान के लिए भारत सैन्य उपकरणों का संभावित स्रोत भी है। वहीं, चीन के साथ मजबूत होते संबंधों के बीच भारत से भी रिश्ते कायम रखने से ईरान यह भी साबित कर सकेगा कि वह चीन के हाथों में मोहरा नहीं है
काठमांडू कुछ दिन पहले तक लग रहा था कि शायद नेपाल की राजनीति में उठा तूफान शांत हो सकता है। हालांकि, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के को-चेयर और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के प्रमुख विरोधी नेता पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने साफ कह दिया है कि अभी पार्टी टूटने की आशंका खत्म नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पीएम ओली क कहने पर कुछ लोगों ने देश के निर्वाचन आयोग के पास CPN-UMN नाम की पार्टी रजिस्टर कराई है। इससे पहले पार्टी के बीच पैदा हुए संकट को खत्म करने के लिए चीनी राजदूत ने ताबड़तोड़ बैठकें की थीं जिससे अटकलें लगाई जा रही थीं कि शायद कुछ सुलह हो भी सकती है। कट की वजह ओली का बर्ताव' नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्थाई समिति की बैठक में प्रधानमंत्री ओली के धड़े और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड के खेमे के बीच के मतभेदों को दूर नहीं किया जा सका। इसी बैठक के कुछ दिन बाद प्रचंड ने यह बयान दिया है। myrepublica की रिपोर्ट के मुताबिक पुष्प लाल श्रेष्ठ और नर बहादुर कर्मचार्य के स्मृति दिवस पर काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चेयरमैन दहल ने संकेत दिए किए NCP में संकट की वजह पीएम ओली का बर्ताव है। संकट में है पार्टी: दहल दहल ने कहा, 'बातचीत के बावजूद पार्टी के दूसरे चेयरमैन के कहने पर निर्वाचन आयोग में CPN-UML नाम की पार्टी रजिस्टर कराई गई जिससे हमारी पार्टी संकट में है।' EC में CPN-UML नाम की पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए 1 जुलाई को आवेदन दिया गया था। यह आवेदन संध्या तिवारी के नाम से दिया गया था। पीएम ओली पर पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए दहल ने कहा कि उन्होंने (ओली) अपने पक्ष में छात्रों और पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन कराए। उन्होंने कहा, 'हम पार्टी के अंदर चर्चा कर रहे हैं लेकिन देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं।' दहल और ओली में सीक्रेट डील? दहल और पार्टी के सीनियर नेता माधव कुमार नेपाल के ओली का इस्तीफा मांगने के बाद से देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं जबकि बातचीत के बाद पार्टी के अंदर मतभेद पटते नजर आने लगे थे। कहा जा रहा था कि पीएम ओली और प्रचंड के बीच एक सीक्रेट डील हुई है जिसके तहत आने वाले कुछ दिनों में नेपाली कैबिनेट में फेरबदल किया जाएगा। इस दौरान प्रचंड गुट के कई नेताओं को कैबिनेट में मलाईदार पद मिलने की संभावना है। 28 जुलाई को होने वाली पार्टी की स्थायी समिति की बैठक के बाद इस फेरबदल की संभावना है। चीनी राजदूत ने कीं ताबड़तोड़ बैठकें नेपाल की राजनीति में पैदा हुए संकट के बाद चीन की राजदूत हाओ यान्की ने देश के सभी बड़े नेताओं के साथ खूब बैठकें कीं। यान्की को पीएम केपी ओली का करीबी तो माना ही जाता है, इस बीच उन्होंने माधव नेपाल से लेकर राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से भी मुलाकात कर डाली। यहां तक कि उनसे मिलने से बचते रहे दहल भी आखिरकार बैठक के लिए राजी हो गए। इसे लेकर देश में सवाल भी उठे कि आखिर चीनी राजदूत का नेपाल की राजनीति में इतना दखल क्यों है लेकिन चीन के दूतावास ने उनकी बैठकों का समर्थन किया और कहा कि चीन चाहता है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर मतभेद सुलझ जाएं।
बीजिंग/वॉशिंगटन चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत और पश्चिमी देशों के खिलाफ बायोलॉजिकल वॉरफेयर यानी जैविक युद्ध की साजिश रच रहे हैं। दोनों देशों ने इसके लिए तीन साल की सीक्रेट डील की है। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है। इसमें कहा गया है कि साजिश के तहत एंथ्रेक्स जैसे खतरनाक वायरस पर काम किया जाना है। इस बारे में खुफिया जानकारी मिल चुकी है। रिपोर्ट में किए गए दावे मजबूत नजर आते हैं। दरअसल, कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि कोरोनावायरस चीन की वुहान लैब से निकला। और अमेरिका के पास इसके सबूत मौजूद हैं। किसका दावा रिपोर्ट में यह दावा क्लाजोन नाम की यूनिट ने खुफिया सूत्रों के हवाले से किया है। सिक्योरिटी एक्सपर्ट एंथोनी क्लान ने इस पर आर्टिकल लिखा। न्यूज एजेंसी ने इसे पब्लिश किया। रिपोर्ट में क्या है इसके मुताबिक, वुहान की जिस लैब से कोरोनावायरस के निकलने का दावा अमेरिका कर रहा है, उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर जैविक युद्ध की तैयारी की साजिश रचना शुरू कर दिया है। निशाने पर भारत के अलावा पश्चिमी देश जैसे अमेरिका हैं। इन देशों को संक्रामक बीमारियों का निशाना बनाया जाएगा। रिसर्च पर होने वाला खर्च चीन की वुहान लैब ही उठाएगी। जैविक हथियारों की साजिश रिपोर्ट में एक इंटेलिजेंस सोर्स के हवाले से कहा गया- एंथ्रेक्स जैसे वायरस का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाने का खतरा है। इस पर पाकिस्तान और चीन तीन साल की सीक्रेट डील कर चुके हैं। जैविक हथियार तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जरूरी मिट्टी से संबंधित टेस्ट (सॉइल सैम्पलिंग टेस्ट) किए जा चुके हैं। चीन ने पाकिस्तान के वैज्ञानिकों को इस बारे में डाटा और दूसरी जरूरी जानकारियां उपलब्ध करा दी हैं। पाकिस्तान के कंधे पर चीन की बंदूक खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने की साजिश रची है। खास बात ये है कि भारत और पश्चिमी देशों की इंटेलिजेंस एजेंसीज को इस बारे में जानकारी मिल चुकी है। चीन अपने यहां इन साजिशों को अंजाम नहीं देना चाहता। लिहाजा, उसने ये साजिशों से जुड़े टेस्ट्स पाकिस्तान की धरती पर करने का प्लान बनाया। खतरनाक बात यह है कि पाकिस्तान की लैब में वायरस आउटब्रेक यानी इनके बाहर निकलने पर रोकने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
मसूरी, 24 जुलाई 2020,चालबाज़ चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पिछले दिनों में जो चालबाजियां की हैं उसको अब उसी की तर्ज़ पर जवाब देने के लिए हमारे सुरक्षा बलों ने तैयारी कर ली हैं. चीन लद्दाख में जब भी भारतीय सुरक्षा बलों के सामने आता है तो बातचीत की बजाए पत्थरबाज़ी करने लगता है. चीन की ओर से इस पत्थरबाजी से किसी भी तरीके का नुकसान न हो, इसके लिए सरकार ITBP के जवानों के लिए फुल बॉडी गियर मंगा रही है. कश्मीर में आतंक परस्त पत्थरबाजों की तरह अब अगर चीनी बॉर्डर पर भी पत्थरबाजी की घटना हुई है तो उससे निपटने के लिए तरीका भी कश्मीर वाला ही निकाला गया है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी (LAC) पर तैनात होने वाले ITBP के जवानों को अब फुल बॉडी प्रोटेक्टर दिए जाएंगे, ये ठीक वैसे होंगे जैसे जवान कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी से बचने के लिए अर्द्धसैनिक बलों के जवान पहनते हैं. आजतक को सूत्रों ने बताया कि सरकार ने यह फैसला लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के धोखे से हुए हमले के बाद लिया है. LAC पर चीन के सैनिकों ने 15 जून की रात भारतीय जवानों पर पत्थरों और नुकीले तारों वाले डंडों से हमला किया था, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए थे. फिर न घटे ऐसी घटना सूत्रों ने बताया है कि ITBP सर्दियों में भी सभी जगह भारत चीन सरहद पर डटी रहती है जिसमें इस दौरान कोई घटना पेट्रोलिंग के समय वैसी न हो इसके लिए सुरक्षा कवच से ढके होंगे जवान. ITBP की एक कंपनी में लगभग 100 से ज्यादा जवान होते है जिसमें से 10 प्रतिशत जवानों को फुल बॉडी प्रोटेक्टर दिया जाएगा. इनका इस्तेमाल बदल-बदलकर वे जवान करेंगे जो LAC पर लॉंग रेंज पेट्रोलिंग और शॉर्ट रेंज पेट्रोलिंग करने के लिए उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में बॉर्डर तक जाते हैं. आजतक को ITBP के सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि ITBP कुछ महीने पहले 5-6 हजार के आस-पास फूल बॉडी प्रोटेक्टर खरीदे थे लेकिन वर्तमान में गलवान और पैंगोंग लेक के पास चीनी सैनिकों के रवैये को देखते हुए चीन बॉर्डर से जुड़े राज्यों जहां बॉर्डर पर ITBP की तैनाती है, उन 50 से 60 कंपनियों के करीब 10 प्रतिशत जवानों के लिए और फूल बॉडी प्रोटेक्टर खरीदे जाएंगे. फूल बॉडी प्रोटेक्टर खरीदे जाने का सीधा मकसद यही है कि हमारे जवान चीन के साथ होने वाले किसी भी खूनी झड़प में घायल और चोटिल न हों.
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2020,कोरोना संकट काल के कारण सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल के बिजनेस पर भी काफी फर्क पड़ा है. भारत ने बीते दिनों रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर रोक लगाई थी, जिसके बाद से ही नेपाल का बिजनेस पूरी तरह से ठप हो चुका है. नेपाल की कई रिफाइनरी कंपनी ऐसी हैं, जिन्होंने अब कच्चा माल लेना बंद कर दिया है क्योंकि भारत ने उनका माल खरीदना ही बंद कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, भारत सरकार ने बीते दिनों 39 ऑयल इम्पोर्ट लाइसेंस को रद्द कर दिया था, जिसके कारण पड़ोसी देशों से आने वाला ड्यूटी फ्री शिपमेंट पूरी तरह से रुक गया. इसका असर नेपाल पर सबसे अधिक पड़ा, क्योंकि वहां की रिफाइनरी मार्केट पूरी तरह से भारतीय ग्राहकों पर निर्भर रही है. नेपाल की पशुपति ऑयल इंडस्ट्री के अमित सारदा के मुताबिक, अब रिफाइनर यहां क्रूड पाम ऑयल नहीं मंगवा रहे हैं, क्योंकि खपत नहीं है. बस जितना ऑर्डर पहले दिया है, उसे ही रिसीव कर रहे हैं. नेपाल में ये स्टॉक अब 70 हजार टन तक पहुंच गया है, अगर इसे खत्म करना है तो लोकल डिमांड ही बढ़ानी होगी. इसी वजह से अब नेपाल ने क्रूड पाम ऑयल मंगाना कम कर दिया है, जिसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले नेपाल हर महीने 21 हजार टन तक का कच्चा माल मंगाता था, जो अब 7000 टन पर आ गया है. दरअसल, भारत नेपाल से करीब दो तिहाई तक रिफाइंड पाम ऑयल लेता है. एक तो इम्पोर्ट पर लगी रोक और दूसरा नेपाल के साथ जारी तीखे संबंधों के कारण नेपाल को बड़ा नुकसान हुआ है. भारत बड़ी मात्रा में नेपाल से ये ऑयल लेता था, इसलिए नेपाल की इंडस्ट्री ने इस ओर काफी इन्वेस्ट किया था. इसमें 30 बिलियन नेपाली रुपये इन्वेस्ट किए गए, भारत ने करीब 45 हजार टन 2018-19 में और 189078 टन 2019-20 में इम्पोर्ट किया था.
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2020,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज एयर फोर्स कमांडर्स की कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए हैं. यहां रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में वायु सेना के रोल की खुलकर तारीफ की और कहा कि हमें सतर्क रहने की जरूरत है. अगर भारत-चीन के बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो वायुसेना को शार्ट नोटिस पर ही सभी तैयारी कर लेनी है. गौरतलब है कि मई में भारत और चीन के बीच तनाव की शुरुआत हुई थी. इसके बाद ही भारतीय वायुसेना ने अपने फाइटर जेट्स और अटैकिंग हेलिकॉप्टर जैसे अपाचे की तैनाती एलएसी पर कर दी थी. इसके साथ ही वायुसेना ने जवानों और जरूरी हथियारों को एयर लिफ्ट किया था. वायुसेना के इसी रोल की रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तारीफ की. वह एयरफोर्स कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे. रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना की तत्परता और सीमाओं की सुरक्षा के लिए वायुसेना की ओर से उठाए जा रहे कदमों की तारीफ की. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना के कमांडरों से कहा कि सशस्त्र बलों को शॉर्ट नोटिस पर जवाब देने के लिए तैयार रहने के साथ-साथ लंबे समय में किसी भी हमले को रोकने के लिए सैन्य क्षमताओं को बनाए रखने की जरूरत है. वायुसेना कमांडर कॉन्फ्रेंस में भारत-चीन फेस ऑफ के बीच तैनाती पर ध्यान दिया जाएगा. लद्दाख सीमा पर चीन के साथ तनाव के समय वायुसेना ने अहम रोल अदा किया है. कॉन्फ्रेंस के दौरान अगले दशक में भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी. 29 जुलाई को राफेल फाइटर जेट के आगमन से पहले राफेल की तैनाती पर चर्चा हुई, जिसका उपयोग लद्दाख में परिचालन के लिए किया जा सकता है. पांच राफेल जेट की पहली खेप 29 जुलाई को भारत आ रही है, जिसे अम्बाला वायु सेना स्टेशन पर तैनात किया जाएगा. भारतीय वायु सेना ने कहा कि विमान को 29 जुलाई से अंबाला एयरबेस पर तैनात किया गया जाएगा. दो साल के अंदर 36 राफेल विमान भारत को मिल जाएंगे.
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2020, भारत और चीन के बीच लद्दाख बॉर्डर पर हालात अभी पूरी तरह से सुधरे नहीं हैं. जुलाई की शुरुआत में सैनिकों को पीछे हटाने की जिस बात पर सहमति बनी थी, वो कुछ हदतक ही सफल हो पाई है. अभी भी पैंगोंग लेक और हॉट स्प्रिंग ऐसे इलाके हैं, जहां पर दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं. ऐसे में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना पूरी तरह से सतर्क है. मई के महीने से शुरू हुए तनाव को खत्म करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं ने बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश की. जिसमें तय हुआ कि सभी विवादित स्थल से सेनाएं पीछे हटेंगी. 14 जुलाई को आखिरी बार बात हुई थी, लेकिन तब से अबतक सिर्फ कुछ मीटर ही सेनाएं पीछे हटी हैं. यानी बातचीत के बाद शुरुआत में जो बदलाव हुआ था, अभी तक उतना ही बदलाव है. और दोनों ओर से बड़ी संख्या में सैनिक बॉर्डर पर जमे हुए हैं. इनमें पैंगोंग लेक, हॉट स्प्रिंग इलाके में स्थिति तनावपूर्ण है. यहां चीनी सेना फिंगर 4 से फिंगर 5 तक पहुंच गई है, लेकिन अभी भी पहाड़ी की चोटियों पर अपने पैर जमाए हुए है. दूसरी ओर झील के किनारों पर भारतीय सेना फिंगर 2 और फिंगर तीन पर मौजूदगी बनाई हुई है. सूत्रों की मानें, तो फिंगर 8 से फिंगर 4 के बीच चीन ने जो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है वो अभी हटाने के मूड में नहीं है. झील के पास भले ही दोनों सेनाओं की बीच की दूरी 4-5 किमी. हो, लेकिन पहाड़ी इलाके में ये सिर्फ एक किमी. की बात है ऐसे में साफ दिख रहा है कि पिछले एक हफ्ते से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. काफी लंबे वक्त पहले चीनी सेना फिंगर चार तक आ गई थी, जबकि भारत का दावा फिंगर 8 तक है. करीब 600-800 मीटर की दूरी पर अभी भी 40-50 जवान करीबी से नजर बनाए हुए हैं. इससे पहले समझौते के आधार पर 15 जून को जहां झड़प हुई थी, उस इलाके से चीन 1.5 किमी. तक पीछे हट गया था. जिसके बाद दोनों देशों के बीच की सेनाओं की दूरी तीन किमी. तक हो गई थी. ऐसी स्थिति में भारतीय सेना लंबी तैयारी कर रही है और पूरी तरह से मुस्तैद है.
आगरा आगरा का जूता कारोबार देश भर में प्रसिद्ध है। ऑनलाअन बिक्री के जरिए विदेशों में भी यहां के जूते की काफी डिमांड रहती है। इन जूतों को बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला रॉ मटीरियल अब तक चीन से आता था, लेकिन भारत-चीन संबंध खराब होने के बाद इसे वियतनाम से मंगवाया जा रहा है। ें एफमैक अध्यक्ष पूरन डावर बताते हैं कि चीन से संबंध खराब होने के बाद से ही आगरा के जूता उद्योग से चीन को समाप्त करने का मन बना लिया था। जूता मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए रॉ मैटेरियल भी अपने देश से परचेज कर रहे हैं। जिससे अच्छी क्वालिटी के जूते तैयार किए जा सकें। डावर ने बताया कि जूता बनाने की मशीन अभी तक चीन से आया करती थी। चीन की मशीन के जरिए जूते तैयार कर देश विदेश में भेजे जाते थे लेकिन अब इसका विकल्प वियतनाम के रूप में खोज लिया गया है। वियतनाम से अब हम जूता इंडस्ट्री के लिए मशीन परचेज कर रहे हैं। चीन के बराबर ही रेट में हमें मशीनें मिल रही हैं। ऐसे में अब हम धीरे—धीरे जूता उद्योग से चीन को समाप्त कर देंगे। चीन से नाता तोड़ रहीं कंपनियां उन्होंने बताया कि चीन की हठधर्मिता को लेकर वहां पर लगीं यूरोपियन कंपनियां अपना बिजनेस समेट रही हैं। इसका लाभ हमें अपने उद्योग को आगे बढ़ाने में मिलेगा। विदेशी मार्केट में हम आगे हैं लेकिन सिंथेटिक लेदर बनाने में अभी भी 80 प्रतिशत चाइना का माल सप्लाई हो रहा है। इसके खात्मे के लिए सरकार से बात की जा रही है। गोपाल गुप्ता बताते हैं कि जूता उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों को यहां लाने के लिए इंसेटिव देना होगा। चाइना के मुकाबले हम भी अपने यहां बेहतर प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेच सकेंगे। आगरा में एनुअल करीब 7.5 हजार करोड़ रुपए का टर्न ओवर है। इस उद्योग से करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि रॉ मैटेरियल बनाने के लिए कम ब्याज पर ऋण उापलब्ध होना चाहिए। रिसर्च और डेवलपमेंट पर इंसेटिव सरकार को देना चाहिए। नए प्रोजेक्ट पर इनकम टैक्स कम होना चाहिए। एक नजर 150 निर्यात इकाइयां, 4500 करोड़ का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निर्यात 5000 घरेलू कारखाने, 3000 करोड़ का टर्नओवर. आगरा से 65 प्रतिशत घरेलू मार्केट में होती है जूते की आपूर्ति औसतन 10 करोड़ रुपये का कच्चा माल हर महीने लग जाता है
लद्दाख से लेकर दक्षिण चीन सागर तक चीन के साथ चल रहे जबर्दस्‍त तनाव के बीच अमेरिका, भारत, ऑ‍स्‍ट्रेलिया और जापान ड्रैगन को उसके घर में ही घेरने में जुट गए हैं। तीनों देशों ने 12 फाइटर जेट और 9 जंगी जहाजों के साथ फ‍िलीपीन्‍स सागर में जोरदार युद्धाभ्‍यास शुरू किया है। इसी समुद्री क्षेत्र के अधिकतर हिस्‍से पर चीन अपना दावा करता है। भारत के साथ अंडमान निकोबार में युद्धाभ्‍यास के बाद अब अमेरिका ने जापान और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ इस अभ्‍यास के जरिए ड्रैगन को संदेश दिया है कि 'क्‍वाड' अब बस एक कदम ही दूर है। यूएसएस निमित्‍ज समेत 9 युद्धपोत ले रहे हिस्‍सा फ‍िलीपीन्‍स सागर में हुए इस युद्धाभ्‍यास में अमेरिका का परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनॉल्‍ड रीगन समेत जापान और ऑस्‍ट्रेलिया के कुल 9 युद्धपोत शामिल हुए। यूएसएस रोनाल्‍ड रीगन कैरियर स्‍ट्राइक ग्रुप एक अन्‍य अमेरिकी व‍िमानवाहक पोत यूएसएस निमित्‍ज के साथ दक्षिण चीन सागर और फ‍िलीपीन्‍स सागर में पिछले कई दिनों से अभ्‍यास कर रहा है। इस पूरे अभ्‍यास में कहीं भी चीन का नाम नहीं लिया गया है। अमेरिका ने इस अभ्‍यास के जरिए स्‍पष्‍ट संकेत दिया है कि हिंद महासागर में भारत और प्रशांत महासागर में जापान और ऑस्‍ट्रेलिया उसके अहम सहयोगी होंगे। जापान, अमेरिका के साथ अभ्‍यास अनमोल: ऑस्‍ट्रेलिया यूएसएस रोनाल्‍ड रीगन ने अब जापानी डेस्‍ट्रायर और ऑस्‍ट्रेलिया टॉस्‍क फोर्स के साथ युद्धाभ्‍यास शुरू किया है। अभ्‍यास में हिस्‍सा ले रहे ऑस्‍ट्रेलिया की नौसेना के कोमोडोर माइकल हैरिस ने कहा, 'अमेरिका और जापान के साथ काम करने का अवसर अनमोल है।' उन्‍होंने कहा कि समुद्र के अंदर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि नौसेनाओं के बीच भरपूर सहयोग हो। इस अभ्‍यास ने तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच उच्‍च स्‍तर की क्षमता को प्रदर्शित किया है। बारुदी सुरंगों का पता लगाने का अभ्‍यास कर रहे तीनों देश जापान के कैप्‍टन सकानो यूसूके ने कहा कि अमेरिका और जापान की नौसेना के साथ संबंधों को मजबूत करने को मैं अपने देश के लिए बेहद अहम मानता हूं। यह इंडो-पैसफिक इलाके की स्‍वतंत्रता में मदद करेगा। यह युद्धाभ्‍यास 19 जुलाई को शुरू हुआ है। इस दौरान सभी तरह के माहौल में युद्ध कला का अभ्‍यास किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि युद्धाभ्‍यास के दौरान समुद्र के अंदर बिछाई गई बारुदी सुरंगों के पता लगाने और सूचनाओं को साझा करने का अभ्‍यास किया जाएगा। 'QUAD' के जरिए साथ आए भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया लद्दाख में चीन की नापाक हरकत के बाद अब भारत ही नहीं दुनियाभर में ऐसी मांगे उठने लगी हैं कि चीन ने भारत को घेरने के लिए 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल' बनाया है और भारत को भी 'क्‍वॉड' को मजबूत कर इसे 'एशियाई नाटो' का रूप देना चाहिए। द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्‍य दादागिरी पर लगाम लगाने के लिए इस समूह का गठन हुआ है। इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। अमेरिका से मुकाबले के लिए चीन ने तैनात किए फाइटर जेट बता दें कि दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। साउथ चाइना सी के विवादित क्षेत्र में चीन के 70 दिनों तक चलने वाले युद्धाभ्‍यास के जवाब में अमेरिका ने अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर और बड़ी संख्‍या में लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। अमेरिका की इस कार्रवाई से टेंशन में आए चीन ने भी अब अपने कृत्रिम द्वीपों पर फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं। सैटलाइट से मिली तस्‍वीरों से पता चला है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में विवादित वूडी द्वीप समूह पर बनाए गए हवाई ठिकाने पर 8 फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनमें से 4 जे-11Bs हैं और बाकी बमवर्षक विमान तथा अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने में सक्षम फाइटर जेट हैं।
तीन स्‍टेप और कोरोना साफ, ऐसे काम करती है ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीनऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल के अगले दौर में पहुंच चुकी है। अगर बड़े पैमाने पर होने वाले ट्रायल में भी यह उतनी ही असरदार रही तो मेडिकल जगत में यह एक तरह का अजूबा ही होगा। आज तक कोई भी वैक्‍सीन बीमारी सामने आने के सालभर में डेवलप नहीं हो सकी है। ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन आम सर्दी-जुकाम वाले वायरस (Adenovirus) का एक कमजोर रूप है। इसे जेनेटिकली इंजीनियर किया गया है ताकि इंसानों में यह अपनी कॉपीज न बनाए। जब इसे कोरोना के स्‍पाइक प्रोटीन के साथ किसी को दिया जाता है, तो यह स्‍पाइक प्रोटीन्‍स का एक बिल्‍ड-अप तैयार करती है। शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम इसे पहचान लेता है और फ‍िर ऐंटीबॉडीज बनाना शुरू कर देता है। फेल 1-2 ट्रायल के मुताबिक, वैक्‍सीन के सिंगल डोज से 95% वालंटिअर्स में महीने भर के भीतर ऐंटीबॉडीज 4 गुना बढ़ गईं। आइए जानते हैं कि ये वैक्‍सीन कैसे बनती है और काम करती है। स्‍टेप 1: लगाते हैं स्‍पाइक प्रोटीन का पता वैक्‍सीन बनाने के लिए सबसे पहले कोरोना वायरस स्‍पाइक प्रोटीन के जेनेटिक कोड का पता लगाया गया। इसके लिए जीन सीक्‍वेंसिंग की मदद ली गई। स्‍टेप 2: कमजोर वायरस से बनी वैक्‍सीन वैक्‍सीन के भीतर मौजूद adenovirus कमजोर और जेनेटिकली मॉडिफाइड हैं ताकि उससे इंसानों को इन्‍फेक्‍शन न हो। इससे वैक्‍सीन स्‍पाइक प्रोटीन तैयार करती है। स्‍टेप 3: वैक्‍सीन शरीर पर कुछ यूं करती है असर वैक्‍सीन देने के बाद शरीर में स्‍पाइक प्रोटीन्‍स बनते हैं जिसकी वजह से इम्‍यून सिस्‍टम उनके खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनाने लगता है। एक बार इम्‍यून सिस्‍टम स्‍पाइक प्रोटीन्‍स को पहचान ले तो वह कोरोना वायरस इन्फेक्‍शन का मुकाबला कर सकता है। रेस में सबसे आगे हैं जेनेटिकली मॉडिफाइड वैक्‍सीन्‍स कोविड-19 के लिए कई तरह की वैक्‍सीन पर काम चल रहा है। लेकिन रेस में सबसे आगे जो वैक्‍सीन हैं, वे जेनेटिकली इंजीनियर्ड वैक्‍सीन्‍स ही हैं। जैसे चीन की CanSino Biologics भी ऐडवांस्‍ड ट्रायल स्‍टेज में है। इनका मेन मकसद ऐंटीबॉडीज बनाना है ताकि वायरस जब हमें इन्‍फेक्‍ट करने की कोशिश करे तो वें उसका खात्‍मा कर सकें। हालांकि आज तक कोई भी adenovirus वैक्‍सीन इंसानों पर यूज के लिए अप्रूव नहीं हुई है। कब तक आ जाएगी यह वैक्‍सीन? रेगुलेटरी और लाइसेंसिंग अप्रूवल के लिए वैक्‍सीन को ऐडवांस्‍ड फेज 2 और 3 ट्रायल्‍स से गुजरना होगा। यूके में 10,000 लोगों पर ट्रायल चल रहा है। ब्राजील और साउथ अफ्रीका में भी इंसानों पर ट्रायल हो रहे हैं। अमेरिका में 30 हजार लोगों पर एक बड़ी स्‍टडी होने वाली है। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सबकुछ ठीक रहता है तो इस साल के आखिर तक वैक्‍सीन मिल सकती है। अस्‍त्राजेनेका ने कहा है कि वह 2 बिलियन से ज्‍यादा डोज सरकारों और एजेंसियों को सप्‍लाई करेगी।
वॉशिंगटन अमेरिका ने एक अप्रत्‍याशित कदम उठाते हुए चीन को अपने ह्यूस्‍टन स्थित महावाणिज्‍य दूतावास को 72 घंटे के अंदर बंद करने का आदेश दिया है। इस अमेरिकी आदेश के बाद चीनी दूतावास के कर्मचारी गोपनीय दस्‍तावेजों को जलाते हुए देखे गए हैं। उधर, अमेर‍िका के इस कदम के बाद चीन भड़क उठा है और उसने आवश्‍यक जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने चीन के साथ जारी गंभीर तनाव को देखते हुए ह्यूस्‍टन के महावाणिज्‍य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिए अमेरिका ने चीन को 72 घंटे का समय दिया है। इतने कम समय में महावाणिज्‍य दूतावास को खाली करने के आदेश से चीन के विदेश मंत्रालय में हड़कंप मच गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है और कहा कि अमेरिका ने इस गलत आदेश को वापस नहीं लिया तो वह 'एक न्‍यायोचित और आवश्‍यक जवाबी कार्रवाई' करेगा। उधर, अमेरिका के आदेश के बाद चीनी दूतावास के अंदर अफरातफरी का माहौल देखा गया। यही नहीं चीनी कर्मी बड़ी संख्‍या में गोपनीय दस्‍तावेजों को जलाते देखे गए हैं। हालत यहां तक हो गई कि आग को देखकर ह्यूस्‍टन के फायर डिपार्टमेंट की गाड़‍ियां मौके पर पहुंच गईं लेकिन वे दूतावास के अंदर नहीं गईं। चीन के दूतावास से निकल रही आग की लपटों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अमेरिका के इस कदम से अब चीन के साथ उसके संबंधों के और ज्‍यादा तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है।
काठमांडू नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व पीएम पुष्‍प कमल दहल के बीच विवाद खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम डील हुई थी और कहा गया था कि पार्टी की आम सभा की बैठक नवंबर/दिसंबर में बुलाई जाएगी। इस डील से अब और ज्‍यादा विवाद बढ़ गया है। नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के वरिष्‍ठ नेता माधव कुमार नेपाल ने पर्दे के पीछे से हुए इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई है। काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को ओली और प्रचंड के बीच राष्‍ट्रपति विद्या देवी भंडारी की मौजूदगी में समझौते पर सहमति बनी थी। उधर, रविवार को प्रचंड विरोधी माधव कुमार नेपाल खेमे को मनाने में जुटे रहे। माधव कुमार के खेमे का मानना है कि ओली के इस्‍तीफे की मांग छोड़कर प्रचंड ने उन्‍हें एक बार फिर से धोखा दिया है। प्रचंड ने ओली के इस्‍तीफे के मुद्दे को नहीं उठाया कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नेताओं के मुताबिक प्रचंड ने शनिवार को हुई बैठक में ओली के इस्‍तीफे के मुद्दे को ही नहीं उठाया। रव‍िवार को माधव कुमार नेपाल और झालानाथ खनल समेत पार्टी के कई वरिष्‍ठ नेता प्रचंड के घर पहुंचे और उन्‍होंने ओली के साथ हुए समझौते पर कई तीखे सवाल उठाए। इसके बाद दबाव में आए प्रचंड ने पार्टी नेताओं से कहा कि नवंबर में आम सभा की बैठक को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। यह केवल एक प्रस्‍ताव था। एनसीपी के प्रवक्‍ता नारायण काजी श्रेष्‍ठ ने कहा, 'लेकिन प्रचंड ने कहा कि आम सभा की बैठक के प्रस्‍ताव को लेकर भ्रम है।' कुछ सप्‍ताह पहले तक प्रचंड का खेमा माधव कुमार नेपाल और खनल की मदद से ओली के प्रधानमंत्री और पार्टी अध्‍यक्ष के पद से इस्‍तीफे की मांग के लिए दिन-रात एक किए हुए था। स्‍टैडिंग कमिटी के 44 में से 30 सदस्‍य ओली के खिलाफ थे। बताया जा रहा है कि ओली ने प्रचंड को वादा किया है कि वे जल्‍दी ही उन्‍हें पार्टी अध्‍यक्ष बनाए जाने का समर्थन करेंगे। माधव कुमार नेपाल ने प्रचंड को धमकी दी ऐसी भी खबरें हैं कि ओली और प्रचंड के बीच राष्‍ट्रपति की मौजूदगी में इस संबंध में एक लिखित समझौता भी हुआ है। इससे माधव कुमार नेपाल के खेमे का तनाव बढ़ गया है। हालात यहां तक खराब हो गए कि शनिवार को माधव कुमार नेपाल ने धमकी दी कि वे पार्टी नेतृत्‍व के खिलाफ जाएंगे और ओली तथा प्रचंड की सर्वाधिकारवादी नीतियों का खुलासा कर देंगे। इससे पहले प्रचंड और माधव दोनों ने मिलकर ओली के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया था लेकिन अब माधव खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे डरे प्रचंड ने अब माधव कुमार और उनके समर्थकों को मनान शुरू कर दिया है। साथ ही वह यह भी कह रहे हैं कि उनके और ओली के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है। लेकिन प्रचंड के इस दावे से पार्टी के कई दिग्‍गज नेता सहमत नहीं हैं। स्‍टैंडिंग कमिटी के सदस्‍य तोप बहादुर रयामजी ने कहा, 'मैं कह सकता हूं कि दोनों के बीच समझौता हुआ है लेकिन जब प्रचंड के इस दांव का बुरी तरह से खुलासा हो गया तो वह अब पलट गए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब प्रचंड बैकफुट पर चले गए हैं।
वॉशिंटगन अमेरिका ने भारत के खिलाफ चीन की आक्रामकता की आलोचना करते हुए संवैधानिक संशोधन एकमत से पास कर दिया है। अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में नैशनल डिफेंस ऑथराइजेशन ऐक्ट (NDAA) में संशोधन पास कर दिया गया है। पिछले महीने लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका चीन पर हमलावर है। इसमें चीन के रवैये पर चिंता जताई गई है और आरोप लगाया गया है कि चीन कोरोना का महामारी के बहाने से भारत के क्षेत्र पर कब्जा करना चाहता था। गलवान, साउथ चाइना सी पर जताई चिंता NDAA संशोधन भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा और कांग्रेसमेन स्टी शैबट सोमवार को लेकर आए थे। इसके मुताबिक भारत और चीन को वास्तविक नियंत्रण पर तनाव कम करने के लिए काम करना चाहिए।संशोधन में कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर, LAC और सेंकाकू टापू विवादित क्षेत्रों के आसपास चीन का विस्तारवाद और आक्रामकता चिंता का विषय है। अमेरिका की संसद कांग्रेस ने भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में चीन की आक्रामकता का विरोध किया है और चीन के बढ़ते क्षेत्रीय रवैये पर चिंता जताई है। इसमें कहा गया है कि चीन ने कोरोना वायरस को बहाना बनाकर भारत के क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश की है और दक्षिण चीन सागर में भी दावा ठोका है। '15 जून तक चीन ने तैनात किए 5 हजार सैनिक' संसद में स्टीव ने बयान दिया है कि भारत इंडो-पैसिफिक में एक अहम लोकतांत्रिक पार्टनर है। उन्होंने कहा, 'मैं भारत का समर्थन करता हूं और अपने द्विपक्षीय संबंध का समर्थन करता हूं। साथ ही उन क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ भी खड़ा हूं जो चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं।' संशोधन में कहा गया है कि 15 जून तक चीन ने LAC पर 5 हजार सैनिक तैनात किए और 1962 के बाद भारत की जमीन घोषित किए गए क्षेत्र पर विवाद होने के बाद उसमें कदम रखा। भारत और अमेरिका ने किया है संयुक्त युद्धाभ्यास अमेरिका में यह संशोधन ऐसे वक्त में लागू किया गया है जब सोमवार को ही अमेरिका और भारत की नौसेनाओं ने संयुक्त युद्धाभ्यास किया। इससे न सिर्फ चीन को भारत-अमेरिकी सहयोग को लेकर संदेश दिया गया बल्कि अमेरिका के रक्षमंत्री मार्क एस्पर ने सीधे तौर पर चीन पर निशाना भी साधा है। उन्होंने भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को '21वीं सदी के सबसे अहम संबंधों में से एक' बताया है और चीन की सेना को क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का जिम्मेदार बताया है।
नई दिल्ली चीन से तनाव के मद्देनजर पूर्वी लद्दाख में भारतीय नौसेना के P-8I निगरानी विमान लगातार मंडरा रहे हैं और अब समुद्री युद्धक विमान MiG-29K को भी अभियानों पर लगाने की तैयारी चल रही है। नौसेना के इस युद्धक विमानों को वायुसेना के अलग-अलग बेस पर तैनाती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की सोच के अनुकूल है। तीनों सेनाओं की एकजुट कार्रवाई प्रधानमंत्री ने सेना के तीनों अंगों- आर्मी, नेवी और एयरफोर्स - में आपसी समन्वय कायम करने का निर्देश दिया। वहीं सीडीएस ने देश की उत्तरी या पश्चिमी सीमाओं पर एयरफोर्स के साथ-साथ नौसेना के युद्धक विमानों को भी तैनात रखने का विजन दिया है। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'मिग-29के फाइटर एयरक्राफ्ट को नॉदर्न सेक्टर में एयरफोर्स बेस पर तैनात किए जाने की योजना बन रही है। उनका इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अभियानगत उड़ानों (ऑपरेशनल फ्लाइंग) के लिए किया जा सकता है।' LAC पर निगरानी में नौसेना की बड़ी भूमिका भारतीय नौसेना चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी विवाद के बीच एलएसी पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सीमा के आसपास चीनी गतिविधियों पर नजर रखने में नौसेना के विमानों की मदद ली जा रही है। 2017 में डोकलाम में हुए विवाद के वक्त भी नौसेना के निगरानी विमानों का जमकर इस्तेमाल किया गया था। भारतीय नौसेना के पास 40 से ज्यादा मिग-29के युद्धक विमानों का एक बेड़ा है जो विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात हैं। ये गोवा में नौसेना का फाइटर बेस आईएनएस हंस से नियमति उड़ान भरते हैं। भारतीय नौसेना ने एक दशक पहले ये विमान रूस से खरीदे थे। चीनी नौसेना पर मलक्का में नजर भारतीय नौसेना मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Straits) के करीब भी युद्धाभ्यास कर रही है जहां से चीनी नौसेना हिंद महासागर में प्रवेश करती है। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'नौसेना के पश्चिमी बेड़े के युद्धपोत और समुद्री जहाज अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह क्षेत्र में युद्धाभ्यास कर रहे हैं।' सूत्रों के मुताबिक, आईएनएस चक्र और आईएनएस अरिहंत समेत नौसेना के दूसरे परमाणु पनडुब्बियां भी सक्रिय हैं। समुद्र में INS विक्रमादित्य की दहाड़ विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य अपने कैरियर बैटल ग्रुप के साथ समुद्र में दहाड़ रहा है। भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की गतिविधियों पर निरंतर कड़ी नजर रख रही है। नौसेना ने इसके लिए विमानों के उतरने के लिए डॉक्स और लंबी दूरी तय करने में सक्षम पोत समेत तमाम युद्धपोतों को तैनात कर रखा है। भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने अमेरिकन एयरक्राफ्ट करियर यूएसए निमित्ज के साथ भी युद्धाभ्यास (PASSEX) किया।
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020,राजस्थान में जारी सियासी नूरा कुश्ती में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत एक अहम हिस्सा बनते हुए दिख रहे हैं. कांग्रेस की ओर से उनपर सरकार गिराने का आरोप लगाया गया, कथित ऑडियो कांड को लेकर राजस्थान की सरकार उनका वॉयस सैंपल भी लेना चाहती है. अब गजेंद्र सिंह शेखावत ने अशोक गहलोत सरकार पर तीखा हमला बोला है. मंगलवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा, ‘ये वक्त कोरोना वायरस से लड़ने का था और आप अंताक्षरी खेलने लगे. ये गरीब को भोजन देने का वक्त था, आप इटालियन बनाना सीखने लगे. राजस्थान सतर्क है, सब देख रहा है!! #RajasthanPoliticalCrisis’ आपको बता दें कि गजेंद्र सिंह शेखावत लगातार सोशल मीडिया के जरिए गहलोत सरकार पर पलटवार कर रहे हैं. इससे पहले जब कांग्रेस विधायकों की फिल्में देखते हुए तस्वीरें सामने आई थीं, तब भी उन्होंने ट्विटर के जरिए निशाना साधा था. दरअसल, बीते दिनों राजस्थान की सरकार गिराने को लेकर जो कथित ऑडियो सामने आया. उसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गजेंद्र सिंह शेखावत की आवाज है, जो कि भंवरलाल शर्मा के साथ मिलकर पैसों के लेनदेन की बात कर रहे हैं. इसी को लेकर राजस्थान की SOG टीम गजेंद्र सिंह का वॉयस सैंपल लेने पहुंची थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. केंद्रीय मंत्री की ओर से कहा गया था कि पहले राजस्थान सरकार को बताना चाहिए कि इस ऑडियो का सोर्स क्या है, इस मामले में अब गृह मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से रिपोर्ट भी मांगी है. ऐसे में अब नजरें हैं कि राजस्थान सरकार क्या जवाब देती है. दूसरी ओर राजस्थान में हाईकोर्ट के फैसले पर हर किसी की नजर है. क्योंकि उसके बाद अशोक गहलोत सरकार फ्लोर टेस्ट का दांव खेल सकती है. ऐसे में देखना होगा कि क्या बीजेपी और सचिन पायलट खुलकर एक साथ आते हैं.
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020, कोरोना वायरस महामारी से बचाव में सबसे बड़ी उम्मीद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन बनकर आई है. इस वैक्सीन पर ह्यूमन ट्रायल चल रहा है और ट्रायल में बेहतर रिजल्ट सामने आए हैं. भारत में भी ऑक्सफोर्ड यूनिर्सिटी की इस वैक्सीन का प्रोडक्शन किया जाएगा. ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर टीवी टुडे नेटवर्क के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के डायरेक्टर एंड्रयू जे पोलार्ड और पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला से बात की. एंड्रयू पोलार्ड ने बताया कि एंटीबॉडी रेस्पॉन्स से पता चलता है कि ये वैक्सीन काफी कारगर है. उन्होंने कहा ट्रायल में सफलता नजर आने के बावजूद अब हमें इसके प्रूफ की जरूरत है कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस से बचा सकती है. पोलार्ड ने बताया अब इस वैक्सीन का ट्रायल अलग-अलग लोगों पर किया जाएगा और आकलन किया जाएगा दूसरे लोगों पर इसका कैसा असर दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन बनाना और इसे पूरी दुनिया को सप्लाई करना एक बड़ी चुनौती होगी. इस सवाल के जवाब में कि क्या अमेरिका और चीन में भी इस पर काम चल रहा है, ऐसे में क्या उनसे प्रतिस्पर्धा है. इस पर उन्होंने कहा कि हम इसे प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं बल्कि एक सामूहिक प्रयास के रूप में देखते हैं. हम अपने अनुभव दुनिया के दूसरे देशों में कोविड पर रिसर्च में लगे लोगों से भी शेयर करते हैं. वहीं, भारत में इस वैक्सीन का प्रोडक्शन करने जा रहे पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने बताया कि हम बड़े पैमाने पर इस वैक्सीन का प्रोडक्शन करने जा रहे हैं और इस हफ्ते वैक्सीन के लिए परमिशन लेने जा रहे हैं. पूनावाला ने बताया कि दिसंबर तक ऑक्सफोर्ड वैक्सीन की 300-400 मिलियन डोस बनाने में हम सफल हो जाएंगे. उन्होंने वैक्सीन की कीमत पर बात करते हुए कहा कि चूकि इस समय पूरी दुनिया कोविड से जूझ रही है, इसलिए हम इसकी कीमत कम से कम रखेंगे. इस पर शुरुआत में प्रॉफिट नहीं लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत में इसकी कीमत 1000 रुपये के आसपास या इससे कम हो सकती है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना संकट का सामना कर रही है. इसलिए वैक्सीन की मांग बहुत ज्यादा होगी. ऐसे में हमें उसके उत्पादन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सरकारी मशीनरी की जरूरत होगी.
नई दिल्ली जापान की तरफ से एक खास पहल की गई है, ताकि लोकल सप्लाई चेन पर कभी कोई असर ना पड़े और चीन पर उनकी निर्भरता भी कम हो सके। जापान की सरकार ने चीन से जापानी कंपनियों का वापस निकालने और फिर से जापान में लाने के लिए पैसे देने का फैसला किया है। जापान अपनी 57 कंपनियों को चीन से वापस आकर देश में ही मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए 53.6 करोड़ डॉलर खर्च कर रहा है। अन्य देशों से भी कंपनियों को वापस बुला रहा जापान इतना ही नहीं, अन्य 30 कंपनियों को वियतनाम, म्यांमार, थाइलैंड औरर दक्षिण पूर्व एशियन देशों से अपनी यूनिट वापस जापान लाने के लिए भी पैसे दिए जा रहे हैं। निक्केई अखबार की रिपोर्ट के अनुसार सरकार इसके लिए कुल मिलाकर करीब 70 अरब येन खर्च करेगी। ताइवान भी कर चुका है ऐसा चीन के खिलाफ खड़े होने वाले देशों का एक और उदाहरण है, क्योंकि चीन का तरीका सही नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर ब्लैकमेल करने से लेकर दूसरे देश की सीमा का सम्मान नहीं करना किसी भी देश को अच्छा नहीं लग रहा है। ताइवान की सरकार ने भी 2019 में कुछ ऐसी ही पॉलिसी बनाई थी, जैसी जापान ने बनाई है। अमेरिका भी निकाल रहा है अपनी कंपनियां वहीं अमेरिका पहले ही चीन से अपनी कंपनियां निकालने की फिराक में है। एप्पल ने तो भारत में अपने प्लांट्स बढ़ाने का फैसला भी कर लिया है। चीन से बहुत सारी कंपनियां निकल कर बाहर आना चाहती हैं। भारत ने भी पहले ऐप बैन किए और अब चीनी कंपनियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हो सकता है आने वाले वक्त में चीनी कंपनियों को भारत से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।
श्रीनगर कश्मीर से लद्दाख को जोड़ने वाले रास्ते में बहुप्रतीक्षित सोनमर्ग और गगनगिर के बीच 6.5 किलोमीटर लंबी जेड मोड़ सुरंग (Z-Morh Tunnel) का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। जो कि जून 2021 तक पूरा हो जाएगा। इससे लद्दाख का कश्मीर घाटी से पूरे साल संपर्क बना रहेगा, जो कि सर्दियां आने के बाद बंद हो जाता था। दरअसल यह सुरंग ऐसे इलाके में बन रही है, जहां बर्फबारी के चलते 6 महीने तक रास्ता बर्फ से ढका रहता है। प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में जेड-मोड़ के काम की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। मुख्य सचिव ने जम्मू-कश्मीर में चल रही विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम (NHIDCL) के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। प्रवक्ता ने बताया कि कश्मीर के संबंध में बैठक में बताया गया कि जेड-मोड़ सुरंग और ज़ोजी-ला सुरंग समेत बड़ी परियोजनाओं पर काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इसमें जेड-मोड़ सुरंग परियोजना में 6.5 किलोमीटर की सुरंग, छह किलोमीटर की एक सड़क, दो बड़े पुल और एक छोटा पुल शामिल है। इस परियोजना की लागत 2,379 करोड़ रुपये है और इसके 30 जून 2021 तक पूरे होने की उम्मीद है। यह सोनमर्ग तक पूरे साल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। " ज़ोजी-ला परियोजना पर भी काम साथ-साथ किया जा रहा है। परियोजना की लागत 4,430 करोड़ रुपये प्रवक्ता ने बताया कि इस परियोजना में 14.15 किलोमीटर की सुरंग, जेड-मोड़ और ज़ोजी-ला सुरंग के बीच 18 किलोमीटर की एक सड़क और चार बड़े पुल और अन्य चीजे हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना की लागत 4,430 करोड़ रुपये है और उम्मीद है कि यह जून 2026 तक चालू हो जाए जिससे लद्दाख तक पूरे साल की कनेक्टिविटी मिलेगी। मुख्य सचिव ने बारामूला-गुलमर्ग, वैलू-खानाबल, बैलू-डोनीपावा, डोनापावा-आशजीपुरा सड़क परियोजानाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।
इंडियन एयरफोर्स के मुताबिक राफेल विमान की पहली खेप जोकि पांच विमानों की होगी, जुलाई के आखिरी दिनों में भारत पहुंच सकती है। 29 जून को इन विमानों को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखा जाएगा। इसके बाद आगे तय होगा कि इन विमानों को कहां तैनात करना है। फिलहाल 22 जुलाई से एयरफोर्स कमांडर्स की बैठक भी होने वाली है। मौसम चाहे कोई हो...राफेल का निशाना अचूक है भारत को हवा का 'ब्रह्मास्‍त्र' हासिल होने जा रहा है। फ्रांस के घातक लड़ाकू विमान राफेल की पहली खेप इस हफ्ते भारत पहुंच रही है। खबर है कि चीन से तनातनी को देखते हुए राफेल को लद्दाख सेक्‍टर में तैनात किया जा सकता है। पहले चार विमान ही आने वाले थे मगर एयरफोर्स की रिक्‍वेस्‍ट पर फ्रांस ने पांच राफेल आखिरी जुलाई तक देने को कहा है। लद्दाख में भारत दिन हो या रात, सर्दी हो या बारिश, हर मौसम में हर वक्‍त हमला करने की क्षमता डेवलप कर रहा है। राफेल इसमें उसका बड़ा हथियार साबित होगा। हवा से हवा में मार करने वाली बियांड विजुअल रेंज मिसाइल से लैस भारत को मिलने वाला राफेल विमान हवा से हवा में मार करने वाली बियांड विजुअल रेंज मिसाइल से लैस होगा। यह मिसाइल दुश्मन के प्लेन को बिना देखे सीधे फायर किया जा सकता है। इसमें एक्टिव रडार सीकर लगा होता है जिससे मिसाइल को किसी भी मौसम में फायर किया जा सकता है। वहीं, स्कैल्प मिसाइल या स्ट्रॉम शैडो किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 560 किमी होती है। दुश्मन का खात्मा मिनटों में...धोखा दिया तो होगा उल्टा वार राफेल में बहुत ऊंचाई वाले एयरबेस से भी उड़ान भरने की क्षमता है। चीन और पाकिस्‍तान से लगी सीमा पर ठंडे मौसम में भी विमान तेजी से काम कर सकता है। मिसाइल अटैक का सामना करने के लिए विमान में खास तकनीक का प्रयोग किया गया है। राफेल एक साथ जमीन पर से दुश्मन के हमलों को ध्वस्त करने और आसमान में आक्रमण करने में सक्षम है। जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है। हवा से बात करता है राफेल...कोई नहीं है टक्कर में राफेल की अधितकम स्पीड 2222 किमी प्रति घंटा है। भारत आने वाल 6 राफेल विमान पूर्ण रूप से कॉम्बेट रेडी पोजिशन में होंगे। जिन्हें कुछ दिनों के अंदर ही किसी भी ऑपरेशन में लगाया जा सकेगा। विमानों की पहले खेप को हरियाणा के अंबाला में तैनात किया जाएगा। राफेल को भारतीय वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से बदला गया है। इसमें कोल्‍ड इंजन स्‍टार्ट की क्षमता है यानी ठंड का इंजन पर कोई असर नहीं होगा। बफीर्ले पहाड़ों के बीच मौजूद बेस से यह जेट आसानी से ठंड के सीजन में भी उड़ान भर सकता है। पहले अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखें जाएंगे पांचों विमान इंडियन एयरफोर्स के मुताबिक राफेल विमान की पहली खेप जोकि पांच विमानों की होगी, जुलाई के आखिरी दिनों में भारत पहुंच सकती है। 29 जून को इन विमानों को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखा जाएगा। इसके बाद आगे तय होगा कि इन विमानों को कहां तैनात करना है। फिलहाल 22 जुलाई से एयरफोर्स कमांडर्स की बैठक भी होने वाली है। चीनी विमान इसके आगे कुछ नहीं... राफेल और J-20, दोनों ही सिंगल सीटर, ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट्स हैं। जहां चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइटर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है। चीन J-20 का यूज दुश्‍मन पर नजर रखने के लिए करता है। राफेल को निगरानी के अलावा सोर्टीज और अटैक में भी आसानी से यूज किया जा सकता है। राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है जो इसे चीनी J-20 पर थोड़ी बढ़त देता है।
कोरोना वायरस के खिलाफ सफल ऑक्सफर्ड की वैक्सीन, सुरक्षित भी, अब अगले फेज में पहुंचीकोरोना वायरस वैक्सीन की रेस में चल रही ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के इंसानों पर किए पहले ट्रायल के नतीजे सोमवार को The Lancet पत्रिका में छापे गए। रिसर्च पेपर में बताया गया है कि वायरल वेक्टर से बनी कोरोना वायरस वैक्सीन ChAdOx1 nCoV-19 दिए जाने पर वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पाई गई। साथ ही इसे सुरक्षित भी बताया गया है। इसके साथ ही अब इसे अगले चरण के ट्रायल के लिए भी ओके कर दिया गया है। बता दें ऑक्सफर्ड की वैक्सीन को दूसरी वैक्सीन से पहले ही आगे माना जा रहा था क्योंकि यह वायरस से 'दोहरी सुरक्षा' देती है। गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं रिसर्च पेपर में बताया गया कि वैक्सीन में जो वायरल वेक्टर इस्तेमाल किया गया है, उसमें SARS-CoV-2 का स्पाइक प्रोटीन है। दूसरे फेज 1/2 में 5 जगहों पर 18-55 साल की उम्र के लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया। कुल 56 दिन तक चले ट्रायल में 23 अप्रैल से 21 मई के बीच जिन लोगों को वैक्सीन दी गई थी उनमें सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द जैसी शिकायतें पैरासिटमॉल से ठीक हो गईं। ज्यादा गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं हुए। ऐंटीबॉडी और T-cell मिले पेपर में आगे बताया गया है कि 14 दिन बाद स्पाइक प्रोटीन को पहचानने वाले T-cell देखे गए। 28 दिन पर इन प्रोटीन से लड़ने के लिए ऐंटीबॉडी (IgG) भी देखी गई जो दूसरी डोज दिए जाने पर बढ़ गई। 90% लोगों में वायरस पर ऐक्शन करने वाली ऐंटीबॉडी पहली डोज के बाद पाई गईं। दूसरी डोज देने पर सभी वॉलंटिअर्स में न्यूट्रिलाइज करने वाली ऐंटीबॉडी की ऐक्टिविटी देखी गई। ये दोनों साथ मिलकर शरीर को सुरक्षा देते हैं। दरअसल, पहले की स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ऐंटीबॉडी कुछ महीनों में खत्म भी हो सकती हैं लेकिन T-cells सालों तक शरीर में रहते हैं। अगले चरण के लिए सुरक्षित इसके साथ ही यह कहा गया है कि ChAdOx1 nCoV-19 के नतीजे सुरक्षा मानकों के अनुसार हैं और ऐंटीबॉडी रिस्पॉन्स भी पैदा कर रहे हैं। ये नतीजे ह्यूमरल और सेल्युलर रिस्पॉन्स के साथ मिलकर इस वैक्सीन को बड़े स्तर पर तीसरे फेज के ट्रायल के लिए कैंडिडेट होने का सपॉर्ट करते हैं। ऑक्सफर्ड की टीम इस वैक्सीन पर ब्रिटेन की फार्मासूटिकल कंपनी AstraZeneca के साथ मिलकर काम कर रही है। Astrazeneca वैक्सीन के लिए एक इंटरनैशनल सप्लाई चेन तैयार कर रही है। कोरोना के लिए 'रामबाण' बनेगी ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन, रेस में सबसे आगे Moderna के नतीजे भी सफल इससे पहले अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की कोरोना वायरस वैक्‍सीन (Moderna Coronavirus Vaccine) अपने पहले ट्रायल में पूरी तरह से सफल रही। न्‍यू इंग्‍लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपे अध्‍ययन में कहा गया है कि 45 स्‍वस्‍थ लोगों पर इस वैक्‍सीन के पहले टेस्‍ट के परिणाम बहुत अच्‍छे रहे हैं। इस वैक्‍सीन ने प्रत्‍येक व्‍यक्ति के अंदर कोरोना से जंग के लिए ऐंटीबॉडी विकसित किया। इस पहले टेस्‍ट में 45 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो स्‍वस्‍थ थे और उनकी उम्र 18 से 55 साल के बीच थी। भारत में भी 7 कंपनियां जुटीं भारत में भी कम-से-कम सात कंपनियां वैक्सीन बनाने के काम में जुटी हैं। घरेलू फार्मा कंपनियों की बात की जाए तो भारत बायोटेक (Bharat Biotech), सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute), जायडस कैडिला (Zydus Cadila), पैनेशिया बायोटेक (Panacea Biotec), इंडियन इम्यूनोलॉजिकस (Indian Immunologicals), मायनवैक्स (Mynvax) और बायोलॉजिकल ई (Biological E) कोविड-19 का टीका तैयार करने का प्रयास कर रही हैं।
नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अलग-अलग मुद्दों पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते रहे हैं। जवाब में अब बीजेपी ने गांधी परिवार पर बड़ा हमला बोला है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि देश में एक खानदान ऐसा है जो वर्षों से मोदी को बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि वो तथ्यों में कमजोर, लेकिन कीचड़ उछालने में माहिर हैं। नड्डा का यह बयान तब आया है जब राहुल गांधी पूर्वी लद्दाख में चीन की हरकतों पर वीडियो जारी कर सीधे पीएम को निशाना बना रहे हैं। मोदी का देशवासियों से गहरा लगाव: नड्डा बीजेपी अध्यक्ष ने ट्वीट कर रहा, 'एक खानदान वर्षों से पीएम मोदी को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। उनके लिए दुखद बात यह है कि पीएम मोदी का सीधे 130 करोड़ भारतीयों के साथ लगाव बहुत गहरा है। वो उनके लिए जीते और काम करते हैं। जो उन्हें (मोदी को) बर्बाद करना चाहते हैं, वो अपनी पार्टी को तबाह करके ही दम लेंगे।' इससे पहले राहुल गांधी ने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध की पृष्ठभूमि में दावा किया कि यह सीमा विवाद से जुड़ा एक साधारण मामला भर नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री की '56 इंच वाली छवि' पर हमले की चीन की साजिश है। सेना की नहीं सुनते, चीन की मानते हैं राहुल: नड्डा बीजेपी अध्यक्ष ने एक और ट्वीट में कहा, 'चाहे वह डोकलाम का मामला हो या अभी का, हाल के वर्षों में राहुलजी भारतीय सशस्त्र बलों पर विश्वास करने की बजाय चीन की ओर से दी गई जानकारी में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। क्यों एक परिवार भारत को कमजोर और चीन को मजबूत देखना चाहता है? कांग्रेस में भी कई नेता एक वंश के इस छल को नापसंद करते हैं।' गांधी की ओर से सोमवार को लद्दाख गतिरोध पर जारी ताजा वीडियो को खुद को दोबारा स्थापित करने का उनका असफल प्रयास करार देते हुए नड्डा ने कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी वे तथ्यों के मामले में 'कमजोर' और 'कीचड़ उछालने' के अपने प्रयास में मजबूत दिखे। चीन ने 1950 से ही गांधी परिवार में किया निवेश? नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, 'रक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों के राजनीतिकरण का प्रयास एक खानदान की 1962 में उनके द्वारा किए गए पूर्व के पापों से हाथ धोने और भारत को कमजोर करने की हताशा को दर्शाता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि 1950 के दशक से ही चीन ने 'एक खानदान में रणनीतिक निवेश किया है जिसका उसे बड़ा लाभांश भी मिला है।' बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप चीन ने कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में जमीन पर कब्जा किया। ...तब मोदी ने कहा था- मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, बर्बाद कर देंगे ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि कई ताकतें उन्हें बर्बाद करने में लगी हैं। मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान करने के 4 दिन बाद गोवा की एक रैली में कहा था, 'मैं जानता हूं मैंने कैसी-कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ली है। उनका 70 साल का लूट रहा हूं। वो मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। वो मुझे बर्बाद कर देंगे, पर मैं तैयार हूं।'
20 जुलाई 2020 कोरोना वायरस की वैक्सीन और दवा के लिए दुनियाभर में खोज जारी है. तमाम देशों के वैज्ञानिक दवा और वैक्सीन के लिए काम कर रहे हैं जिसकी वजह से लगातार नई जानकारी सामने आ रही है. अब दो वैज्ञानिकों ने स्टडी के बाद कहा है कि कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा से कोरोना मरीजों का इलाज हो सकता है. यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर याकोव नहमियास और न्यूयॉर्क इकाहन स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. बेंजामिन टेनओवर पिछले तीन महीने से कोरोना की दवा को लेकर स्टडी कर रहे थे. लैब में की गई स्टडी के दौरान, कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा Fenofibrate (Tricor) से काफी सकारात्मक नतीजे मिले. प्रोफेसर नहमियास और डॉ. टेनओवर ने स्टडी के दौरान अपना ध्यान इस चीज पर केंद्रित किया था कि कैसे कोरोना वायरस मरीज के फेफड़ों को प्रभावित करते हैं. वैज्ञानिकों को पता चला कि वायरस कार्बोहाइड्रेट के रुटीन बर्निंग को रोक देते हैं. इसकी वजह से काफी अधिक फैट फेफड़ों के सेल में जमा हो जाता है. डेली मेल और medicalxpress.com में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्टडी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि क्यों हाई ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल वाले कोरोना मरीज हाई रिस्क कैटेगरी में चले जाते हैं. स्टडी के मुताबिक, Fenofibrate दवा के इस्तेमाल से फेफड़ों के सेल्स अधिक फैट बर्न करते हैं और इसकी वजह से कोरोना वायरस कमजोर पड़ जाता है और खुद को रिप्रोड्यूस नहीं कर पाता. लैब स्टडी के दौरान, सिर्फ 5 दिन के ट्रीटमेंट के बाद वायरस खत्म हो गए.
20 जुलाई 2020 ब्रिटेन और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने रविवार को संकेत दिए हैं कि ब्रिटेन हॉन्ग कॉन्ग के साथ प्रत्यर्पण संधि को खत्म कर सकता है. ब्रिटेन हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लाने का विरोध कर रहा है. ब्रिटेन का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जरिए चीन हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता खत्म करना चाहता है. ब्रिटेन और चीन दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लगातार बयान जारी कर रहे हैं. ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने रविवार को बीजिंग पर शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुसलमानों के खिलाफ गंभीर रूप से मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया. जवाब में, ब्रिटेन के चीनी राजदूत ने कहा कि अगर ब्रिटेन कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर उसके अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाता है तो वह भी इसका मुंहतोड़ जवाब देगा. चीनी राजदूत ने ये भी कहा कि ब्रिटेन को अमेरिका के इशारे पर नहीं चलना चाहिए. ब्रिटेन और चीन हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर पहले से ही आमने-सामने हैं. हॉन्ग कॉन्ग ब्रिटेन का उपनिवेश रह चुका है. ब्रिटेन ने 1997 में हॉन्ग कॉन्ग को स्वायत्तता की शर्त के साथ चीन को सौंपा था. हालांकि, नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर ब्रिटेन ने कहा है कि इससे 1997 में हुए समझौते का उल्लंघन हो रहा है. हॉन्ग कॉन्ग और उइगुर मुसलमानों के मुद्दे पर चीन की आलोचना के अलावा, ब्रिटेन ने 5जी मोबाइल नेटवर्क से चीनी कंपनी हुवावे को भी बैन कर दिया है जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ गया है. राब ने कहा कि ब्रिटेन चीन के साथ अच्छे संबंध चाहता है लेकिन शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुसलमानों की नसबंदी करके और प्रशिक्षण कैंप में रखकर उन्हें टारगेट किए जाने की खबरों को लेकर खामोश नहीं रह सकता है. उन्होंने बीबीसी से कहा, ये स्पष्ट है कि शिनजियांग प्रांत में बहुत बुरी तरह मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. हम अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर इस पर काम करेंगे. ये बहुत ही परेशान करने वाला है. चीनी राजदूत लियु शियामिंग ने शिनजियांग प्रांत में निगरानी कैंप होने की खबरों को खारिज किया है. चीनी राजदूत से जब उस ड्रोन फुटेज के बारे में पूछा गया जिसमें उइगुर मुसलमानों की आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें ट्रेन में ले जाया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि चीन के खिलाफ तमाम फर्जी आरोप लगाए जा रहे हैं. लियु शियामिंग ने बीबीसी के एक शो में कहा, अगर ब्रिटेन की सरकार चीन के किसी भी शख्स पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर देती है तो चीन भी निश्चित तौर पर इसका जवाब देगा. उन्होंने कहा, आपने देखा है कि अमेरिका में क्या हुआ, वे चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हैं और हम उनके सांसदों और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हैं. मैं नहीं चाहता है कि चीन-ब्रिटेन के संबंधों में भी बदले की कार्रवाई देखने को मिले. चीनी राजदूत ने ये भी कहा कि ब्रिटेन की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति होनी चाहिए ना कि उसे अमेरिकियों की धुन पर नाचना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीनी कंपनी हुवावे के मामले में भी यही हुआ. दरअसल, अमेरिका ब्रिटेन पर चीनी कंपनी पर बैन लगाने के लिए लंबे वक्त से दबाव बना रहा था. इसी सप्ताह चीन की सरकार की प्रवक्ता ने भी ब्रिटेन पर अमेरिका के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि चीनी कंपनी हुवावे को नुकसान पहुंचाने और चीनी कंपनियों के साथ भेदभाव और उन्हें बाहर निकालने के लिए दोनों देश साथ काम कर रहे हैं.
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020, 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में राममंदिर का भूमि पूजन कर सकते हैं. ये पूजा अभिजीत मुहूर्त में 'सर्वार्थ सिद्धि योग' में की जाएगी. पीएम मोदी इस दिन 40 किलो चांदी की श्रीराम शिला का पूजन करेंगे और इसे स्थापित करेंगे. क्या होता है अभिजीत मुहूर्त? अभिजीत मुहूर्त प्रत्येक दिन मध्यान्ह से करीब 24 मिनट पहले प्रारम्भ होकर मध्यान्ह के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है. अभिजीत मुहूर्त का वास्तविक समय सूर्योदय के अनुसार परिवर्तित होता रहता है. इस मुहूर्त में किए जाने वाले सभी कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति को विजय प्राप्त होती है. इस मुहूर्त को आठवां मुहूर्त भी कहा जाता है. अभिजीत मुहूर्त का राम मंदिर से संबंध माना जाता है कि भगवान श्री राम का जन्म अभिजीत मुहूर्त में ही हुआ था. इसीलिए राममंदिर के भूमिपूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त चुना गया है. पांच अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास लगभग 40 किलो चांदी की ईंट श्रीराम शिला को समर्पित करेंगे. पीएम नरेन्द्र मोदी इस शिला का पूजन कर इसे स्थापित करेंगे. महंत नृत्य गोपाल दास के मुताबिक, पांच अगस्त को 3.30 फिट गहरी भूमि में पांच चांदी की शिलाएं रखी जाएंगी, जो 5 नक्षत्रों का प्रतीक होगा. अभिजीत मुहूर्त में किये जाने वाले कार्य सभी सभी शुभ कार्य जैसे पहली बार किसी कार्य से यात्रा प्रारम्भ करना, किसी नए कार्य को प्रारम्भ करना, व्यापार प्रारम्भ करना, धन संग्रह करना या पूजा का प्रारम्भ करना जैसे शुभ कार्य अभिजीत मुहूर्त में किए जाते हैं.
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020,भारतीय रेलवे (Indian Railways) यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के साथ नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इंडियन रेलवे विकास के क्षेत्र में रेल नेटवर्क को बढ़ाने की भी कोशिश कर रहा है. इसी कड़ी में रेलवे बोर्ड अब उत्तर-पूर्व (North-East) राज्यों की सभी राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है. Indian Railways के मुताबिक तीन साल बाद यानी 2023 तक उत्तर-पूर्वी राज्यों की सभी राजधानियां रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगी. रेलवे बोर्ड के मुताबिक इंडियन रेलवे में पिछले 5 साल में काफी विकास देखने को मिला है. रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए रेलवे पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की राजधानियों को आपस में रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी में है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा कि इस समय उत्तर-पूर्व में असम, त्रिपुरा और अरुणाचल की राजधानियां पहले से ही रेल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं. अब मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम की राजधानियों की रेल कनेक्टिविटी की तैयारी है. रेलवे ने इसके लिए प्लान भी तैयार कर लिया है. रेलवे अगले तीन सालों में यानी 2023 तक इस काम को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के मुताबिक मणिपुर और मेघालय मार्च 2022 तक, मिजोरम और नगालैंड मार्च 2023 तक और सिक्किम दिसंबर 2023 तक कनेक्ट करने की योजना है. बता दें कि इंडियन रेलवे का जम्मू-कश्मीर में भी रेल नेटवर्क के विस्तार पर पूरा फोकस है. कटरा से बनिहाल सेक्शन का काम 2022 के दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. कश्मीर में इंडियन रेलवे भारत का पहला केबल रेल ब्रिज बना रहा है. कटरा-बनिहाल रेलवे ट्रैक पर देश का पहला केबल रेल पुल बन रहा है. जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटरा और रियासी के बीच अंजी ब्रिज बनाया जा रहा है.
नई दिल्ली, राजस्थान में सियासी खींचतान के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फोन टेपिंग मामले में राज्य के प्रमुख सचिव से रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों ने बताया कि मामले में गृह मंत्रालय ने राजस्थान के प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे प्राइवेसी का हनन बताया था. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि गृह मंत्रालय ने कथित फोन टेपिंग मामले के संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है. बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय कथित रूप से लीक हुई ऑडियो बातचीत मामले पर कड़ी नजर रख रहा है, जिसकी राजस्थान पुलिस जांच कर रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ऑडियो राजस्थान में गहलोत सरकार को गिराने के लिए संजय जैन के साथ भंवर लाल शर्मा की बातचीत की है. कथित बातचीत लगभग 30 विधायकों को लेकर है जिसमें भंवर लाल शर्मा और संजय जैन एक दूसरे से बात कर रहे हैं. इस ऑडियो क्लिप की जांच के लिए एसओजी की टीम मानेसर स्थित होटल पहुंची थी लेकिन वहां भंवरलाल शर्मा नहीं मिले. बीजेपी ने बताया था प्राइवेसी का हनन बता दें कि जिस टेप को लेकर कांग्रेस बीजेपी का पर्दाफाश करने का दावा कर रही थी, बीजेपी ने उस पर ही सवाल खड़े किए थे. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि राजस्थान सरकार सबकी प्राइवेसी का हनन कर रही है. जब राज्य में लोग कोरोना काल में वेंटिलेटर के लिए तरस रहे हैं तो कांग्रेस विधायक स्विमिंग पूल में स्विमिंग कर रहे हैं. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बताएं संजय जैन कौन है? हम इसे मैन्युफैक्चर्ड झूठ मानते हैं. संबित पात्रा ने कहा कि क्या बीजेपी ही सबकुछ कंट्रोल कर रही है? बिल्कुल नहीं, ये उनके पाप हैं. कांग्रेस घर में ही साजिश रची गई. हम लगातार कह रहे हैं कि ऑडियो टेप फर्जी है. संबित पात्रा ने फोन टेपिंग मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी. उन्होंने कहा कि फोन टेपिंग मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए कि मानक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं.
नयी दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार के दौरान अमेरिका, यूरोप सहित प्रमुख ताकतों के साथ हमारा महत्वपूर्ण गठजोड़ मजबूत हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कद बढ़ा है। लिखें राहुल को जयशंकर का जवाब उन्होंने कहा कि चीन के साथ हम राजनीतिक रूप से अधिक बराबरी के स्तर पर बात करते हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी पर विदेश मंत्री ने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ (जिसे आपने छोड़ दिया) निश्चित तौर पर एक तरफ बालाकोट और उरी तो दूसरी तरफ शर्म अल शेख, हवाना और 26/11 के बीच अंतर है। इस बारे में स्वयं से पूछें।’ राहुल गांधी ने वीडियो के जरिए साधा था निशाना राहुल गांधी के वीडियो संदेश को लेकर जयशंकर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पर जोरदार निशाना साधा और उनके वीडियो को टैग करते हुए अपने सिलसिलेवार ट्वीट के जरिये बिन्दुवार उनके आरोपों का जवाब दिया। राहुल ने अपने वीडियो संदेश में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि पिछले छह वर्षो में भारत विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के संबंध में परेशान और बाधित रहा। चीन आक्रामक हो गया है- राहुल गांधी गांधी ने वीडियो में अपने विचार रखे कि क्यों चीन आक्रामक हो गया है और आरोप लगाया कि मोदी सरकार के दौरान देश कमजोर हुआ है। विदेश मंत्री ने ट्वीट में कहा, ‘राहुल गांधी ने विदेश नीति पर सवाल पूछे हैं। यहां पर कुछ उत्तर हैं। हमारा महत्वपूर्ण गठजोड़ मजबूत हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कद बढ़ा है। अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान के साथ शिखर वार्ता और अनौपचारिक बैठकें होती रहती हैं। अब हम खुले तौर पर करते हैं चर्चा चीन के साथ हम राजनीतिक रूप से अधिक बराबरी के स्तर पर बात करते हैं । विश्लेषकों से पूछें ।’ उन्होंने कहा कि भारत अब अधिक खुले मन से चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपेक), चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, दक्षिण चीन सागर और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों के बारे में बातें करता है। इस बारे में मीडिया से पूछें । विदेश मंत्री ने कहा, ‘कुछ तथ्य हमारे पड़ोसियों के बारे में भी। श्रीलंका और चीन के बीच 2008 में हब्बनटोटा बंदरगाह को लेकर समझौता हुआ था। उनसे पूछें जो इससे निपट रहे थे। मालदीव के साथ कठिन संबंध.. जब 2012 में भारत राष्ट्रपति नाशीद की सरकार को गिरता देख रहा था ....और चीजें बदली हैं । हमारे कारोबारियों से पूछें । ’ बांग्लादेश के बारे में जवाब- जयशंकर बांग्लादेश के बारे में जयशंकर ने कहा कि 2015 में भू सीमा मुद्दा सुलझने के बाद अधिक विकास और पारगमन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। ‘अब वहां आतंकवादियों के लिये पनाहगाह नहीं है। हमारे सुरक्षा बलों से पूछें । ’ पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘नेपाल में 17 वर्षो के बाद प्रधानमंत्री की यात्रा होती है। ऊर्जा, ईधन, अस्पताल, सड़क सहित अनेक विकास परियोजना बढ़ती हैं। उनके नागरिकों से पूछें । ’ पड़ोसियों के बारे में जवाब उन्होंने कहा कि भूटान अब भारत को एक मजबूत सुरक्षा और विकास भागीदार पाता है। अब वे 2013 के विपरीत अपनी रसोई गैस के बारे में चिंता नहीं करते। भूटान के परिवारों से पूछें। विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में सलमा बांध और संसद जैसी परियोजनाएं पूरी होती हैं, प्रशिक्षण कार्य और कनेक्टिविटी बढ़ती है। अफगानिस्तान से पूछें। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कहा है कि आज हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंध मतलब परस्ती के हो गए है। अमेरिका से भी वर्तमान संबंध लेन-देन पर आधारित है। रूस से भी हमारा संबंध संकटग्रस्त हुआ है। यूरोपीय राष्ट्रों से भी हमारे संबंध मतलब परस्ती के हो गए हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा था।
वॉशिंगटन चीन के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने साउथ चाइना सी से लेकर हिंद महासागर तक अपनी गश्त बढ़ा दी है। चीन के नजदीक साउथ चाइना सी में युद्धाभ्यास खत्म करने के बाद अमेरिकी नेवी के सातवें बेड़े में शामिल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज अब अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास पहुंच गया है। इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना पहले से ही युद्धाभ्यास कर रही है। एशिया में अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स को इस इलाके में तैनात किया है। वर्तमान में इनमें से एक यूएसएस रोनाल्ड रीगन साउथ चाइना सी में जबकि यूएएसएस थियोडोर रुजवेल्ट फिलीपीन सागर के आस पास गश्त लगा रहा है। वहीं अमेरिका के आक्रामक गतिविधियों से बौखलाया चीन बार-बार युद्ध की धमकी दे रहा है। कितना शक्तिशाली है यूएसएस निमित्ज अमेरिका के सुपरकैरियर्स में यूएसएस निमित्ज को बहुत ताकतवर माना जाता है। परमाणु शक्ति से चलने वाले इस एयरक्राफ्ट कैरियर को अमेरिकी नौसेना में 3 मई 1975 को कमीशन किया गया था। यह कैरियर स्टाइक ग्रुप 11 का अंग जो अकेले अपने दम पर कई देशों को बर्बाद करने की ताकत रखता है। 332 मीटर लंबे इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर्स के अलावा 3000 के आसपास नौसैनिक तैनात होते हैं। कभी भारत के खिलाफ जंग को पहुंचा था अमेरिका का 7वां बेड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएएस निमित्स अमेरिका के सातवें बेड़े में शामिल है। यह बेड़ा 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) के दौरान बंगाल की खाड़ी के नजदीक पहुंच गया था। इसका मकसद बांग्लादेश में (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) मात खा रहे पाकिस्तानी सेना का सहायता करना था। लेकिन उस समय भारत के साथ रूस मजबूती के साथ खड़ा हो गया। जिसके कारण अमेरिका का सातवां बेड़ा वापस लौट गया। हिंद महासागर में चीन को घेरने से ये फायदा भारत के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर में चीन को घेरने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर अब ड्रैगन ने कोई भी हिमाकत की तो उसका अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा। चीन के व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर के जरिए ही खाड़ी और अफ्रीकी देशों में जाता है। जबकि, चीन अपने ऊर्जा जरुरतों का बड़ा आयात इसी रास्ते करता है। अगर भारतीय नौसेना ने इस रूट को ब्लाक कर दिया तो चीन को तेल समेत कई चीजों के लिए किल्लत झेलनी होगी। अभी चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर भी पूरा नहीं हुआ है ऐसे में चीन इस रास्ते भी कोई आयात-निर्यात नहीं कर सकता। अंडमान में भारत भी कर रहा युद्धाभ्यास चीन से जारी तनाव के बीच भारत भी अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास युद्धाभ्यास कर रहा है। इसमें विध्वंसक युद्धपोट, पेट्रोल एयरक्राफ्ट और पनडुब्बी शामिल हैं। इनके अलावा सबमरीन ढूंढनेवाला एयरक्राफ्ट Poseidon-8I, जिसमें घातक हारपून ब्लॉक मिसाइल लगी हैं, MK-54 लाइटवेट टोरपीडोज आदि भी इस ड्रिल का हिस्सा हैं। इससे पहले मल्लका में ही भारत और जापान ने भी पिछले ही महीने ड्रिल की थी। लेकिन वह सीमित स्तर की थी।
कभी-कभी कुछ आंकड़े चौंकाने और हैरान करनेवाले होते हैं। फिलहाल हमारे देश में ऐसी ही स्थिति कोरोना वायरस (Corona virus) के कारण बनी हुई है। एक तरफ तो हमारे देश में यह बीमारी इतनी तेजी से फैल रही है कि हम लोग दुनिया के तीसरे सबसे अधिक कोरोना ग्रसित देश बन गए हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन देशों में कोविड-19 (Covid-19) के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं उन देशों में भी हम अग्रणी हैं। यहां जानिए, कोरोना को लेकर सेहत संबंधी किस तरह की तकनीक और मुहिम काम आ रही हैं... कोरोना की जांच और इसके परीक्षण को लेकर हमारी सरकार ने शुरुआत से ही गंभीरता दिखाई है। जब हमारे देश में कोरोना का एक भी मामला नहीं आया था, तब भी दूसरे देश से भारत में आनेवाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही थी। साथ ही लोगों को उसी समय से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करने की सलाह दी जाने लगी थी। यह एक बड़ी वजह है कि घनी और इतनी अधिक आबादी वाला देश होने के बाद भी भारत में कोरोना महामारी (Corona Pandemic)आज भी उस विकराल रूप में नहीं आ पाई है, जिसमें आ सकती थी। क्या कहते हैं देश के पीएम? -कोरोन संक्रमण के शुरुआती दौर से लेकर अब तक पीएम मोदी ने हर किसी साथ लाने और देश को सकारात्मक बनाए रखने के जिस तरह से कदम उठाए हैं, वे सराहनीय हैं। हाल ही यूनाइटेड स्टेट सिक्यॉरिटी काउंसिल में अपने भाषण में मोदी ने कहा कि 'कोरोना एक ऐसी महामारी है जिसने बहुत ही गंभीरता के साथ हर देश के लचीले रवैये को परखा है।' -एक वाक्य में खत्म होनेवाले इस वक्तव्य का सार बहुत ही गहरा है। कोई देश खुद को कितना भी विकसित और शक्तिशाली क्यों ना मान रहा हो, उस देश में जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर क्या है, कोरोना महामारी ने इस बात की पोल खोलकर रख दी है। -लेकिन विकासशील देशों में शामिल भारत ने अपने सीमित संसाधनों के दम पर ही इस बीमारी को काफी हद तक रोककर रखा है। हालांकि अब भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है लेकिन कम पढ़े-लिखे लोगों और बिना संसाधनों के जीवन जी रहे लोगों के बीच तक इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के काम में जनसहयोग और जनआंदोलनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत में कोरोना की धीमी गति के कारण -जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि हमारी सरकार कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर उस समय से जागरूकता दिखा रही थी, जब खुद चीन में इस बीमारी को लेकर बहुत लापरवाही दिखाई दी। इससे हमारे देश में कोरोना के मामले धीमी गति से बढ़े। -मास्क, सेनिटाइजर का उचित उपयोग और शुरुआती स्तर पर ही लॉकडाउन ने इस बीमारी को फैलने से बहुत अच्छी तरह रोका है। लॉकडाउन कितना सफल रहा इस बात का अंदाजा हम ऐसे लगा सकते हैं कि अनलॉक 0.1 के दौरान ही कोरोना के मरीज बहुत तेजी से बढ़ने लगे। -यदि इससे पहले लॉकडाउन ना लगाया गया होता तो यह स्थिति शुरुआत में ही बहुत अधिक खराब हो जाती। क्योंकि उस समय तो हमारी स्वास्थ्य संस्थाएं इस बीमारी इलाज और मरीजों को भर्ती करने संबंधी जरूरी सुविधाओं को लेकर तैयार ही नहीं थीं। लॉकडाउन के दौरान सभी जरूरी तैयारियों को पूरा किया गया। सोशल डिस्टेंसिंग का असर -हाल में एक बार फिर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) की ओर से पूरे विश्व के लोगों से इस बात की अपील की गई है कि वे सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। क्योंकि कोरोना से बचने के लिए यह एक प्रभावी तरीका है। -दुनियाभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात को साफ कर चुके हैं कि एक बार कोरोना का संक्रमण हो जाने के बाद व्यक्ति के शरीर में और कितनी तरह की समस्याएं देखने को मिलेंगी, इस बारे में अभी साफतौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिए बेहतर यही है कि मास्क, सेनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। -साथ ही आयुष मंत्रालय द्वारा बताए गए काढ़े, हल्दी वाले दूध और विटमिन-डी तथा विटमिन-सी युक्त फलों का उपयोग अवश्य करें। ताकि आपकी हाइजीन बनी रहे और सेहत भी दुरुस्त रहे।
अयोध्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 5 अगस्त को अयोध्या के राम मंदिर (PM Modi to Visit Ayodhya) का भूमि पूजन करने के साथ इसके निर्माण का शुभारंभ करेंगे। ट्रस्ट की अयोध्या बैठक में शनिवार को राम मंदिर (Ram Mandir) के शुभारंभ के लिए पीएम को 3 और 5 अगस्त की तिथियां प्रस्तावित की गई थी, जिसमें से 5 अगस्त की तिथि पर पीएमओ की मुहर लग गई है। इसकी पुष्टि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कर दी है। इस खबर के आने के बाद अयोध्या के संतों ने खुशी जाहिर की है। वहीं बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। लिखें महंत कमल नयन दास ने बताया की प्रधानमंत्री का कार्यक्रम फाइनल हो गया है। वह 5 तारीख को 12 बजे दिन में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। इसके पहले 3 अगस्त से ही मंदिर स्थल पूजन और अनुष्ठान के कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। वैसे तो मंदिर स्थल पर अनुष्ठान तथा पूजन के कार्यक्रम 75 दिनों में समय समय पर हो रहे हैं लेकिन यह तीन दिवसीय विशिष्ट पूजन और अनुष्ठान के कार्यक्रम होंगे। इसके लिए काशी के विद्वान पंडितों की टीम को बुलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के आने के बाद मंदिर निर्माण तेजी से चलेगा। कमल नयन दास ने बताया कि मंदिर निर्माण की तैयारी लगभग पूरी है क्योंकि प्रधानमंत्री को भूमि पूजन का अनुष्ठान करना है। कार्यक्रम भी अब तय हो गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में 3 अगस्त और 5 अगस्त की तारीख दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री को इनमें जो सुविधाजनक हो उसको खुद तय कर देंगे। ऐसे में 5 तारीख को प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तय हुआ है। उन्होंने बताया कि कोरोना संकट के कारण इस कार्यक्रम में ज्यादा भीड़ नहीं रहेगी। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य प्रमुख संत महंत और सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि ही इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। राम की नगरी में खुशी का माहौल पीएम मोदी के अयोध्या दौरे की खबर से राम की नगरी में खुशी का माहौल है। संत-महंतों ने पीएम मोदी के प्रति आभार जताया है। रामलला के प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि वर्षों से रामलला की टाट के मंदिर में पूजा की। अब भव्य मंदिर में विराजमान देखने की इच्छा पूरी होगी। महंत कमल नयन दास ने कहा कि पीएम मोदी के कर-कमलों से राम मंदिर का शुभारंभ होने की खबर से अयोध्या सहित सारे देश में खुशी का माहौल है। अब तीन साल में भव्य राम मंदिर बनकर खड़ा हो जाएगा। मोदी का इस्तकबाल करना चाहते हैं बाबरी के मुद्दई वहीं, बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे मोहम्मद इकबाल अंसारी ने पीएम नरेंद्र मोदी के आने की खबर पर खुशी जताई है। उन्होंने स्वागत करने की इच्छा जताते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण में मैं अयोध्या की जनता और संतों के साथ हूं। अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने कहा, 'मंदिर के लिए 500 साल के संघर्ष का अंत सुप्रीम कोर्ट ने किया। अब संतों की इच्छा को पूरा करने के लिए पीएम मोदी 5 अगस्त को आ रहे हैं। पीएम बधाई के पात्र हैं। वे राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ करेंगे। सारा देश इससे आह्लादित है।'
ताइवान और चीन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बरकरार है। एक्सपर्ट्स की इस पर नजर भी बनी हुई है। भले ही चीन ताइवान से कहीं ज्यादा ताकतवर हो, ताइवान अगर सटीक रणनीति के साथ काम करे तो पासा पलट भी सकता है। Forbes के लिए डेविड ऐक्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर ताइवान चीन के हमले को पेंगू टपू पर रोक दे और उसे अमेरिका के दो-तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स का सहारा मिल जाए, तो न सिर्फ ताइवान अपनी जमीन बचा लेगा बल्कि चीन पर हमला भी कर सकेगा। यहां तक कि अगर ताइवान चाहे तो अपनी लंबी दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसालों से पेइचिंग तक को निशाना बना सकता है। ताइवान और चीन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बरकरार है। एक्सपर्ट्स की इस पर नजर भी बनी हुई है। भले ही चीन ताइवान से कहीं ज्यादा ताकतवर हो, ताइवान अगर सटीक रणनीति के साथ काम करे तो पासा पलट भी सकता है। Forbes के लिए डेविड ऐक्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर ताइवान चीन के हमले को पेंगू टपू पर रोक दे और उसे अमेरिका के दो-तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स का सहारा मिल जाए, तो न सिर्फ ताइवान अपनी जमीन बचा लेगा बल्कि चीन पर हमला भी कर सकेगा। यहां तक कि अगर ताइवान चाहे तो अपनी लंबी दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसालों से पेइचिंग तक को निशाना बना सकता है। वॉशिंगटन के न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव (Nuclear Threat Initiative के मुताबिक कभी चीन से ज्यादा और बेहतर हथियार रखने वाला ताइवान आज अपनी जंग की रणनीति को बदल चुका है। वह PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) से बराबरी नहीं कर रहा बल्कि ताइवान की मिलिट्री चीनी टुकड़ियों को नजदीक लाकर फिर हजारों मिसाइलों से उन पर हमला करने की रणनीति रखती है। थिंक टैंक का कहना है कि ताइवान किसी भी तरह की चढ़ाई को रोकने की कोशिश में है। ताइवान की मिसाइलों के जखीरे में Stinger, Chaparral, Patriot, Tien Chien और Tien Kung जैसी जमीन से हवा में मारने वाली मिसाइल, ऐंटी-टैंक मिसाइल Javelin, TOW और Hellfire और ऐंटी-शिप Harpoon और Hsiung Feng मिसाइलें हैं। छोटी दूरी की मिसाइलें रक्षा के लिए होती हैं। चीन के लिए बड़ा खतरा है Yun Feng चीन पर हमला करने के लिए ताइवान के पास Wan Chien एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल और Yun Feng ग्राउंड-लॉन्च क्रूज मिसाइल है। Yun Feng को ताइवान के ही नैशनल चुंग शान इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी में बनाया गया है और यह चीन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। Yun Feng अपने कंबाइन्ड साइकल प्रोपल्शन की वजह से सुपरसोनिक है। इसमें एक सॉलिड रॉकेट बूस्टर है जो मिसाइल को उसकी क्रूज स्पीड पर पहुंचाता है। इसके बाद हवा से चलने वाला ramjet इंजन इसे चलाता है। Yun Feng इतनी ताकतवर है कि ताइवान से चलाए जाने पर यह शंघाई और पेइचिंग में PLA बेस को उड़ा सकती है। चीन को चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत डीसी के अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टिट्यूट के मुताबिक मॉडर्न क्रूज मिसाइलों के जरिए ताइपेई चीन को यह संदेश देना चाहता है कि अगर जंग हुई तो वह सिर्फ ताइवान और आसपास के समुद्र तक सीमित नहीं रहेगी। क्रूज मिसाइलों से ताइपेई न सिर्फ PLA बेस बल्कि चीन के लोगों को निशाना बनाकर चीन को एक बड़ी कीमत चुकाने के लिए मजबूर कर सकता है। PLA कोशिश कर सकती है कि जमीन से हवा में मारने वाली मिसाइल बैट्री से खुद को बचाया जा सके लेकिन मिसाइल-डिफेंस का कम ही फायदा होता है। ताइवान के पास कितनी Yun Feng हैं यह साफ नहीं है लेकिन वह जितनी भी पेइचिंग पर चला सकेगा, चीन के लिए ताइवान पर कब्जा करने का सपना उतना ही दूर हो जाएगा।
काठमांडू अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए कुख्यात चीन गरीब देशों के भ्रष्ट नेताओं का इस्तेमाल कर उस देश में पैठ बना रहा है। ग्लोबल वॉच एनलिसिस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल इसका एक उदाहरण है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नेपाल पीएम केपी शर्मा ओली की संपत्ति में भी पिछले कुछ साल में तेजी से इजाफा हुआ है। इस दौरान उन्होंने विदेशों में भी अपनी संपत्ति बनाई है। ओली का स्विस बैंक में अकाउंट, अरबों रुपये जमा इस रिपोर्ट के लेखक रोलांड जैक्कार्ड ने दावा किया है कि ओली का स्विट्जरलैंड के मिराबॉड बैंक की जिनेवा ब्रांच में एक अकाउंट है। इसमें 5.5 मिलियन डॉलर (करीब 41.34 करोड़ रु.) डिपॉजिट हैं। ओली और पत्नी राधिका शाक्य को सालाना करीब आधा मिलियन डॉलर मिलता है। चीन के सहयोग से ओली ने जमा की संपत्ति! रिपोर्ट में ओली के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि उन्होंने चीन के सहयोग से व्यापारिक सौदों में लाभ कमाया। 2015-16 में नेपाल के प्रधान मंत्री के रूप में ओली के पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंबोडिया में दूरसंचार क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। इस डील में उस समय नेपाल में चीन के राजदूत रहे वी चुन्टई ने ओली की मदद की थी। इतना ही नहीं, इस डील को नेपाली बिजनेसमैन और ओली के करीबी अंग शेरिंग शेरपा ने अंतिम रूप दिया था। जिसमें ओली की मदद कंबोडिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री हूं सेन और चीनी राजनयिक फेनम पेन्ह और बो जियांगेओ ने की थी। ओली ने चीन के लिए सरकारी नियमों को ताक पर रखा दूसरे कार्यकाल में भी ओली पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ओली ने चीनी कंपनियों को परियोजनाएं देने के लिए सरकार के नियमों को दरकिनार कर दिया। दिसंबर 2018 में डिजिटल एक्शन रूम बनाने के लिए बिना किसी टेंडर के चीनी कंपनी Huawei को ठेका दिया गया। जबकि सरकार की स्वामित्व वाली नेपाल दूरसंचार भी इस फैसेलिटी को विकसित करने में समर्थ थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बाद में की गई जांच से पता चला कि प्रधानमंत्री ओली के राजनीतिक सलाहकार बिष्णु रिमल के बेटे ने वित्तीय लाभ के लिए इस सौदे को अमलीजामा पहनाया था। बिना टेंडर चीनी कंपनियों को दिया ठेका इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मई 2019 में बिना किसी टेंडर के चीनी कंपनियों के साथ दो डील की गई। जिसमें नेपाल टेलिकम्यूनिकेश ने रेडियो एक्सेस नेटवर्क विकसित करने के लिए चीन कंपनी हांगकांग स्थित चाइना कम्यूनिकेशन सर्विस के साथ करार किया। इसी साल नेपाल टेलिकम्यूनिकेशन के बीच कोर 4 जी नेटवर्क स्थापित करने के लिए चीन की टेलिकॉम इक्यूपमेंट निर्माता कंपनी जेडटीई के साथ एक अन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह प्रोजक्ट 1106 करोड़ रुपए की लागत का था। कोरोना उपकरणों की खरीद में भी घोटाले का आरोप जून 2020 में ओली ने कोरोना वायरस से जूझ रहे नेपाल को बचाने के लिए 73 मिलियन यूरो की लागत से चीन से प्रोटेक्टिव उपकरणों की खरीद की थी। जिसमें से ज्यादातर खराब थे और उनकी कीमत भी मार्केट रेट से ज्यादा थी। इस डील को लेकर नेपाल में छात्रों ने ओली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस मामले में नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री और ओली के वरिष्ठ सलाहकारों के खिलाफ जांच भी जारी है।
कोलकाता सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद (india china standoff) का नतीजा ये हुआ है कि इससे चीन की कंपनियों को नुकसान होना शुरू हो गया है। कुछ समय पहले ही भारत ने भी सख्त रुख अपनाते हुए 59 चीनी ऐप बैन किए थे। यूसी वेब, यूसी न्यूज और वीमेट ने तो अपना कारोबार भी समेटना शुरू कर दिया है। ये सब देखते हुए चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली शाओमी, वीवो, हायर, ओपो और वनप्लस जैसी कंपनियों ने अपनी मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव किया है। बल्कि यूं कहिए कि चीन ने एक तरह से भारत के सामने घुटने टेक दिए हैं और मान लिया है कि उसकी इन कंपनियों का वजूद भारत में बचाए रखने के लिए उसे भारत का गुणगान करना ही होगा। एक बड़ी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने ऑफ रिकॉर्ड बोलते हुए कहा कि वह भी प्रोडक्ट लॉन्च करने की स्ट्रेटेजी में बदलाव करेंगे। फेस्टिव सीजन की प्लानिंग और निवेश की प्लानिंग में भी बदलाव किया जाएगा। अभी सब कुछ करीब 1 महीने के लिए रोक दिया गया है, जब से चीनी सैनिकों ने भारत के जवानों पर हमला किया, जिसमें करीब 20 जवान शहीद हुए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीवो, रीयलमी, शाओमी और वन प्लस फिर से अपना लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने और मेक इन इंडिया को अपने विज्ञापनों में वरीयता देने पर विचार कर रही हैं। कंपनियां प्रोडक्ट की पैकेजिंग में भी मेक इन इंडिया लिखना चाह रही हैं। बता दें कि कुछ समय पहले ही चीनी शाओमी ने अपने स्टोर पर लगे चीनी होर्डिंग ढक दिए थे और उन पर मेक इन इंडिया लिखना शुरू कर दिया था। वीवो, शाओमी, ओपो, रीयलमी और वनप्लस ने नए मॉडल भी लॉन्च करना शुरू कर दिया है और नई कैटेगरी में घुसना भी शुरू कर दिया है। वीवो के नए मॉडल्स के लिए इसके विज्ञापन अखबारों, टीवी और बाकी जगहों पर जल्द ही आना शुरू होंगे। हायर कंपनी ने भी नए मार्केटिंग प्लान शुरू किए हैं। हालांकि, जब वीवी, शाओमी, ओपो, रीयल मी और वनप्सल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी नहीं की। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन कंपनियां कुल मिलाकर अपने प्रोडक्ट्स के प्रमोशन पर सालाना करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च करती हैं। जानकार बताते हैं कि अप्रैल-जून तिमाही में चीनी कंपनियों ने अपने प्रतिद्वंद्वी सैमसंग से कुछ मार्केट का हिस्सा जरूर खोया है। बता दें कि चीनी स्मार्टफोन भारत का करीब 80 फीसदी हिस्सा कवर करते थे, 40 फीसदी तक टेलीविजन का कारोबार भी चीनी कंपनियों के ही पास है और 6-7 फीसदी होम अप्लायंस भी चीन की कंपनियां बनाती हैं।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में ग्वादर के रास्ते भारत को घेरने का ख्वाब पाल रहे चीन को जबरदस्त झटका लगा है। चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में पहले ही अरबों डॉलर लगा चुके ड्रैगन की चिंताएं प्रोजक्ट की सुरक्षा और बढ़ती लागत ने बढ़ा दिया है। कोरोना वायरस के कारण परियोजना का काम एक तरफ जहां बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान में उग्रवादियों के हमले भी तेज हो गए हैं। मंगलवार को बलूचिस्तान में पाक सेना के काफिले पर हमला मंगलवार को ही बलूच उग्रवादियों ने पंजगुर जिले में सेना के एक काफिले को निशाना बनाया। जिसमें तीन सैनिक मारे गए, जबकि सेना के एक कर्नल सहित 8 अन्य जख्मी हो गए। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर मई के बाद यह तीसरा हमला था। ये उग्रवादी अब अपने हमलों का विस्तार कराची सहित पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी कर रहे हैं। स्पेशल फोर्स बनाने के बावजूद नहीं रुके हमले 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर के लागत वाले इस परियोजना की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने एक स्पेशल फोर्स का गठन किया है, जिसमें 13700 स्पेशल कमांडो शामिल हैं। इसके बावजूद इस परियोजना में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जून में कराची के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिग्रेड ने ली थी। 2018 में बलूच संगठन के किए कई हमले बलूच लिबरेशन आर्मी के उग्रवादियों ने अगस्त 2018 में ग्वादर से बस के जरिए डालबाडिन जा रहे चीनी इंजिनियरों के एक समूह पर हमला किया था जिसमें 3 लोग मारे गए थे जबकि पांच अन्य जख्मी हो गए थे। इसके अलावा नवंबर 2018 में कराची के चीनी वाणिज्यिक दूतावास पर भी इस ग्रुप ने हमला किया था। सीपीईसी का इसलिए विरोध, किए कई हमले बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमेशा से चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का विरोध किया है। कई बार इस संगठन के ऊपर पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगे हैं। 2018 में इस संगठन पर कराची में चीन के वाणिज्यिक दूतावास पर हमले के आरोप भी लगे थे। आरोप हैं कि पाकिस्तान ने बलूच नेताओं से बिना राय मशविरा किए बगैर सीपीईसी से जुड़ा फैसला ले लिया। बलूचिस्तान रणनीतिक रूप से पाक के लिए अहम पाकिस्तान में बलूचिस्तान की रणनीतिक स्थिति है। पाक से सबसे बड़े प्रांत में शुमार बलूचिस्तान की सीमाएं अफगानिस्तान और ईरान से मिलती है। वहीं कराची भी इन लोगों की जद में है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा इस प्रांत से होकर गुजरता है। ग्वादर बंदरगाह पर भी बलूचों का भी नियंत्रण था जिसे पाकिस्तान ने अब चीन को सौंप दिया है। ग्वादर का रणनीतिक इस्तेमाल करने की तैयारी अरब सागर के किनारे पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन ग्वादर पोर्ट का निर्माण चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के तहत कर रहा है और इसे पेइचिंग की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट, वन रोड (ओबीओआर) तथा मेरिटाइम सिल्क रोड प्रॉजेक्ट्स के बीच एक कड़ी माना जा रहा है। ग्वादर पोर्ट के जरिए चीन के सामान आसानी से अरब सागर तक पहुंच जाएंगे। लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में पेइचिंग इसका इस्तेमाल भारत और अमेरिका के खिलाफ सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी कर सकता है। चीन ने ग्वादर में किया 80 करोड़ डॉलर का निवेश चीन ने BRI के तहत पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को 80 करोड़ डॉलर की आनुमानित लागत से विकास कर रहा है। चीन के अधिकारी भले ही बार-बार यह कहते रहे हैं कि ग्वादर बंदरगाह और CPEC का उद्देश्य पूरी तरह से आर्थिक और व्यावसायिक हैं, लेकिन इसके पीछे चीन की असल मंशा सैन्य प्रभुत्व बढ़ाना है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ग्वादर का इस्तेमाल अपने नौसेना बेस के तौर पर कर सकता है।
इस्‍लामाबाद/पेइचिंग लद्दाख, पूर्वोत्‍तर के बाद अब भारत और चीन के बीच विवाद विवाद का एक और केंद्र बिन्‍दू पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर बन सकता है। दरअसल, पीओके के गिलगिट -बाल्टिस्‍तान इलाके में चीन ने अपने सदाबहार मित्र पाकिस्‍तान के लिए दियामेर भाषा बांध बनाना शुरू किया है। भारत के कड़े विरोध के बाद भी चीन ने इस बांध का निर्माण शुरू किया है। पाकिस्‍तान पिछले 50 साल से इस बांध को बनाना चाहता था लेकिन वह इसे पूरा नहीं कर पा रहा था। अब चीन इसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम करने जा रहा है। यह बांध वर्ष 2028 तक पूरा होगा और इस पर करीब 8 अरब डॉलर की लागत आएगी। बताया जा रहा है कि बांध के बनने पर 4500 मेगावॉट बिजली का निर्माण होगा। चीन यह बांध चाइना पाकिस्‍तान इकनॉमिक कॉरिडोर के तहत बना रहा है। गिलगिट-बॉल्टिस्‍तान इलाके से होकर ही चीन के लिए रास्‍ता जाता है। प्रॉजेक्‍ट का 70 % खर्चा भी चीन की सरकारी कंपनी कर रही इस पूरे प्रॉजेक्‍ट का 70 % खर्चा भी चीन की सरकारी कंपनी चाइना पावर कर रही है। वहीं 30 फीसदी खर्च पाकिस्‍तानी सेना की व्‍यवसायिक इकाई फ्रंटियर वर्क्‍स ऑर्गनाइजेशन करेगी। चीन ने पिछले दो महीने में पाकिस्‍तान के साथ दो समझौतों पर हस्‍ताक्षर किया है। इसके तहत वह सीधे तौर पर पीओके में 4 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसके जरिए चीन पीओके के अंदर 1800 मेगावॉट की पनब‍िजली परियोजनाओं को विकसित करेगा। चीन के इस कदम पर अमेरिका के विल्‍सन सेंटर के एशिया मामलों के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर माइकल कुगलमैन कहते हैं कि यह भारत के बड़ा झटका है। उन्‍होंने कहा, 'इस कदम से पहले से ही बेहद तनावपूर्ण चल रहे भारत और चीन के रिश्‍ते और ज्‍यादा खराब हो जाएंगे।' उन्‍होंने कहा कि इसे हम इस तरह से भी कह सकते हैं कि पीओके को लेकर भारत की मौखिक धमकी के बाद अब चीन और पाकिस्‍तान ने मिलकर खुली चुनौती दी है। भारत सरकार ने पीओके में बांध बनाने पर कड़ा ऐतराज जताया भारत सरकार ने पीओके में चीन के बांध बनाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। भारत का कहना है कि यह इलाका उसके केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर का हिस्‍सा है। पीओके में चीनी बांध बनाने का स्‍थानीय लोग जोरदार विरोध कर रहे हैं लेकिन इमरान सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। पाकिस्तान की सरकार ने कश्मीर के सुधानोटी जिले में झेलम नदी पर आजाद पट्टान हाइड्रो प्रॉजेक्ट का ऐलान किया है। यह बांध चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का हिस्सा है। इस प्रॉजेक्ट को कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी ने डिवेलप किया है जो चीन की तीन गॉर्गेज कॉर्पोरेशन की इकाई है। समझौते पर दस्तखत के समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी और चीन के राजदूत याओ जिंग शामिल थे।
संयुक्त राष्ट्र/इस्‍लामाबाद संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रमुख नूर वली महसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। संरा सुरक्षा परिषद की 1267 आईएसआईएल और अलकायदा प्रतिबंध समिति ने 42 वर्षीय महसूद को गुरुवार को प्रतिबंध सूची में डाला। अब इस पाकिस्तानी नागरिक की संपत्तियां कुर्क की जा सकेंगी, उस पर यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है और हथियार रखने पर रोक लगाई जा सकेगी। \ प्रतिबंध समिति ने कहा कि महसूद को ‘अलकायदा से संबंधित समूहों का समर्थन करने, उनकी आतंकवादी गतिविधियों का वित्तपोषण करने, योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के कारण इस सूची में डाला गया है।’ महसूद जून 2018 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख मौलाना फजलुल्लाह की मौत के बाद इस आतंकवादी संगठन का प्रमुख बना था। इस संगठन को अलकायदा से संबंध रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 29 जुलाई, 2011 को काली सूची में डाला था। प्रतिबंध समिति ने कहा, ‘नूर वली के नेतृत्व में टीटीपी ने जुलाई 2019 में उत्तर वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले समेत पूरे पाकिस्तान में कई भयावह आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया। अगस्त 2019 में खैबर पख्तूनख्वाह में पाकिस्तानी सैनिकों पर हुए बम हमले में भी उसी का हाथ था।’ समिति ने कहा कि समूह ने एक मई, 2010 को टाइम्स स्क्वेयर पर हुए बम हमले की जिम्मेदारी ली थी। उसने अप्रैल 2010 में पेशावर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था जिसमें कम से कम छह पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे और 20 अन्य घायल हुए थे। अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के ब्यूरो ने एक ट्वीट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा महसूद को आईएसआईएल एवं अलकायदा प्रतिबंध सूची में शामिल करने का वह स्वागत करता है। सुरक्षा परिषद द्वारा किसी व्यक्ति अथवा संगठन को काली सूची में डाला जाता है तो देशों को बिना किसी विलंब के उसके आर्थिक स्रोतों, अन्य वित्तीय संपत्तियों एवं आर्थिक संसाधनों पर रोक लगानी होती है।
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2020,सीमा पर तनाव कम हो जाने के बाद भी सरकार ने चीन को आर्थिक चोट पहुुंचाने का प्रयास जारी रखा है. अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से दो चीनी कंपनियों की बोली रद्द कर दी गई है. यह ठेका करीब 800 करोड़ रुपये का था. इन कं​पनियों को अधिकारियों ने लेटर ऑफ अवॉर्ड देने से इंकार कर दिया है और अब यह ठेका दूसरे सबसे कम रेट पर बिड करने वाली फर्म को दिया जाएगा. यह ठेका दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दो खंड के लिए था. अब दूसरी कंपनियों को मिलेगा ठेका दोनों कंपनियां चीन जिगांक्सी कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्रालय ने करीब 800 करोड़ रुपये के इन ठेकों को रद्द कर दिया है. दोनों कंपनियां बिड करने में सफल हुई थीं, इसके बावजूद उन्हें लेटर ऑफ अवॉर्ड नहीं दिया गया. यह ठेका अब दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को दिया जाएगा. नितिन गडकरी ने किया था ऐलान गौरतलब है कि हाल में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया था कि चीनी कंपनियों को राजमार्ग परियोजनाओं से बाहर कर दिया जाएगा. नितिन गडकरी ने कहा था कि चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर (JV) के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा. इसके पहले भारतीय रेलवे ने एक चीनी कंपनी को दिया गया 471 करोड़ रुपये का सिगनलिंग का ठेका कैंसिल कर दिया था. यह ठेका पहले बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च ऐंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ऐंड टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क को दिया गया था. यह कंपनी कानपुर से दीनदयाल उपाध्याय नगर खंड के बीच 417 किमी लंबे खंड पर काम कर रही थी. कंपनी ने करीब 20 फीसदी काम कर भी लिया था. चीन विरोधी माहौल गौरतलब है कि पिछले महीने भारत-चीन नियंत्रण रेखा पर हुई एक हिंसक झड़प में हमारे देश के 20 वीर सैनिक शहीद हो गए थे. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. चीन का आर्थिक झटका देने की कोशिश के तहत ही देश में चीनी माल के बहिष्कार का अ​भियान चल पड़ा और सरकार भी लगातार चीनी आयात पर अंकुश और चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों से बाहर करने के प्रयासों से चीन को झटका देने में लगी है
चीन की नाक के नीचे बम बरसा रहे ताइवान के फाइटर जेट, चुपचाप देखने को मजबूर ड्रैगन दरअसल, ताइवान ने तामसुई के तट पर किसी भी चीनी हमले का जवाब देने के लिए वार्षिक युद्धाभ्‍यास शुरू किया है। Han Kuang ड्रिल नाम दिया गया है। इसका मंदारिन में अर्थ होता है- खोया हुआ क्षेत्र वापस हासिल करना। ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंगवेन ने इस अभ्‍यास पर कहा, 'हम चाहते हैं कि दुनिया हमारी प्रतिबद्धता और अपने देश की रक्षा के प्रयासों को देखे।' यह पांच दिनों तक चलने वाली सैन्‍य ड्रिल शुक्रवार को खत्‍म होने जा रही है। इस दौरान ताइवान चीन के किसी भी हमले का किस तरह बचाव करना है, उसकी प्रैक्टिस कर रही है। संकट में अपने पुल को भी उड़ाने को तैयार है ताइवान बताया जा रहा है कि ताइवान के गुवांडू एरिया कमांड ने मंगलवार दोपहर को तामसुई नदी से दुश्मन के घुसने की स्थिति में कैसे निपटना है, सैन्य उपकरणों के साथ इसका युद्धाभ्यास किया। इसी कमांड के पास तामसुई नदी की सिक्यॉरिटी का जिम्‍मा है। साथ ही ताइवान के राजनीतिक और आर्थिक केंद्र ताइपेई की सुरक्षा संभालता है। सेना के मुताबिक हमले की स्थिति में सेना तामसुई से 9 किमी दूर स्थित गुवांडू पुल को उड़ाया जा सकता है और उसके मलबे से दुश्मन को दाखिल होने से रोका जा सकता है। मिलिट्री न्यूज एजेंसी के मुताबिक ताइवान के गुवांडू एरिया कमांड ने नदी से दुश्मन के दाखिल होने की स्थिति से निपटने के लिए युद्धाभ्यास किया। टैंक से लेकर फाइटर जेट तक ले रहे हैं हिस्‍सा ताइवान के इस सैन्‍य ड्रिल में टैंक, तोपें, मिसाइल लॉन्‍चर, पनडुब्‍बी और फाइटर जेट तक हिस्‍सा ले रहे हैं। अभ्‍यास के दौरान एरिया कमांड ने हमले की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस और सिविल डिफेंस टीमों के साथ मिलकर दुश्मन को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसके लिए रास्ते में रुकावटें बनाई गईं और दुश्मन बल पर गोलीबारी के इस्तेमाल की प्रैक्टिस की गई। इस दौरान पानी और हवा, दोनों से दुश्मन पर नजर रखी गई। दुश्मन के फायरिंग रेंज में दाखिल होते ही पहली पंक्ति के सुरक्षाबल ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इसी दौरान CM-11 टैंकों और दूसरे वीइकल्स ने दुश्मन को आगे बढ़ने से रोका। ताइवान के राष्ट्रपति के अपहरण तक की रिहर्सल हॉन्‍ग कॉन्‍ग में चीन के क्रूर कार्रवाई के बाद अब ताइवान ड्रैगन के खिलाफ हर तरह की स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है। ताइवान की सेना के अभ्‍यास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह देश की राष्ट्रपति को PLA के हाथों किडनैप होने की स्थिति से निपटने की प्रैक्टिस भी करेगा। इसके अलावा 10 साल में पहली बार लाइव टॉर्पीडो टेस्ट भी किया जाएगा। अमेरिका से मिले F-16V फाइटर जेट समुद्र और ताइवान के एयरस्‍पेस में पट्रोल करेंगे। यही नहीं, एक ऐसी बटालियन भी युद्धाभ्यास का हिस्सा होगी जिसमें स्नाइपर और सैनिक होंगे जो मानवरहित एयरियल वीइकल्स और पोर्टबल मिसाइल लॉन्चर्स को ऑपरेट करेंगे। ताइवान के अभ्‍यास को चुपचाप देखने को मजबूर चीन ताइवान पर जबरन कब्‍जे का सपना देख रही चीनी सेना इस युद्धाभ्‍यास के खिलाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है। चीनी सेना का एक जहाज इस इलाके में तैनात है लेकिन वह केवल ताइवान की गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्‍सा मानता रहा है। 2 करोड़ 40 लाख की आबादी वाला ताइवान चीन की मुख्‍य भूमि से मात्र 160 किमी की दूरी पर स्थित है। दोनों के बीच ताइवान स्‍ट्रेट है जो उन्‍हें अलग करता है। चीन ताइवान पर कब्‍जा तो करना चाहता है लेकिन दक्षिण चीन सागर में इन दिनों दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर तैनात हैं। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ये अमेरिकी विमानवाहक पोत चीन के हमले की सूरत में उसे तबाह करने की क्षमता रखते हैं। इसी डर चीन चाहकर भी ताइवान के खिलाफ कोई एक्‍शन नहीं ले पा रहा है। अमेरिका ने इस अभ्‍यास को देखते हुए अपना जासूसी विमान भी लगातार इस इलाके में तैनात कर रखा है।

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