taaja khabar...सावधान! चीन से आ रहे हैं खतरनाक सीड पार्सल, केंद्र ने राज्यों और इंडस्ट्री को किया सतर्क....लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हवाई हमले की ताकत जुटा रहा चीन, सैटलाइट तस्‍वीर से खुलासा..स्वतंत्रता दिवस से पहले गड़बड़ी की बड़ी साजिश, दिल्ली में भी विदेश से आए 'जहरीले' कॉल....सुशांत सिंहः बीजेपी ने कहा, राउत और आदित्य का CBI करे नार्को, राहुल और प्रियंका गांधी तोड़ें चुप्पी..विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत और चीन पर दुनिया का बहुत कुछ निर्भर करता है...चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी, गडकरी ने बताया क्या है प्लान...कोरोना पर खुशखबरी, देश में 70% के पास पहुंचा कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट...सुशांत के पिता पर टिप्पणी कर फंसे शिवसेना नेता संजय राउत, परिवार करेगा मानहानि का केस...राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट, घर वापसी कराने की कोशिशें तेज ...पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कोरोना पॉजिटिव हुए, अस्पताल में भर्ती ...कोरोना पॉजिटिव पाए गए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, AIIMS में भर्ती ...दिल्ली हिंसा: आरोपी गुलफिशा ने किए चौंकाने वाले खुलासे, 'सरकार की छवि खराब करना था मकसद' ...

rajasthan

जयपुर, 12 अगस्त 2020, राजस्थान में कांग्रेस का सियासी झगड़ा तो निबट गया है मगर झगड़े की धमक अभी तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नोटिस में दिखाई दे रही है. राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, उनके भाई और पिता के नाम जमीन खरीद के मामले में ईडी का नोटिस आया है. नोटिस में ऐसा आरोप है कि पीएसीएल कंपनी के एजेंट के रूप में प्रताप सिंह खाचरियावास के परिवार की कंपनी बॉर्डर पर जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम करती थी. इसी मामले में पैसे के लेन-देन में ईडी का नोटिस आया है. परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि बीजेपी ने बेहद गंदा खेल खेला है और उनके 80 साल के पिता के नाम नोटिस भेजा है. इसमें कहा गया है कि दिल्ली दफ्तर में आकर अपना बयान दर्ज करवाएं. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि बीजेपी को समझना चाहिए कि उनके पिता लक्ष्मण सिंह शेखावत भैरों सिंह शेखावत के छोटे भाई हैं जो उनके बड़े नेता थे और अपने परिवार के लोगों के खिलाफ इस तरह से साजिश रच रहे हैं कहा जा रहा है कि प्रताप सिंह खाचरियावास को भेजे नोटिस में ईडी ने उनको और उनके पिता को सोमवार को ईडी दफ्तर में दिल्ली आने के लिए कहा था मगर प्रताप सिंह खाचरियावास मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ चार्टर्ड प्लेन में बैठकर जैसलमेर रवाना हो गए थे. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि यह मामला जयपुर ईडी के दफ्तर में बंद हो चुका है मगर जानबूझकर इसे वापस खुलवाया गया है.
नई दिल्ली, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की वापसी हो रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में क्या मिलेगा, क्या करना है, ये पार्टी को तय करना है. सचिन पायलट ने कहा कि मुद्दों पर मतभेद होता है और होना भी चाहिए. मैं सबसे बात करता हूं. मैंने लोगों से बहुत से वादे किए थे, उसे पूरा करना है. 'आजतक' के साथ विशेष बातचीत में सचिन पायलट ने ये बातें कहीं. हालांकि भविष्य में क्या करेंगे इसे लेकर सचिन पायलट ने अपने पत्ते नहीं खोले. आगे की रणनीति क्या होगी? सचिन पायलट ने कहा कि भविष्य में क्या होगा मुझे पता नहीं है. कांग्रेस के मेरे बहुत से साथियों ने बहुत सी बातें कही या बोली गई होंगी, मैं उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. इसका कोई मतलब नहीं है. रात गई सो बात गई. मैं इन सब बातों का जवाब दूं, यह शोभा नहीं देता है. सब मेरे साथी हैं. अगर किसी ने मुझे भला बुरा कहा है तो ये उनकी सोच होगी. राजस्थान की सियासी खींचतान और बीजेपी की भूमिका के सवाल पर पायलट ने कहा कि जो विपक्षी पार्टी है वो मौके का फायदा उठाए, ऐसा सोचना गलत नहीं है. लेकिन हम शुरू से बोल रहे हैं कि हम पार्टी के अंदर रहकर मामले को उठाएंगे. हम कांग्रेसी हैं. विधायकों ने भी कहा वो अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन इस बीच विपक्षी पार्टी ने ऐसे काम किए होंगे कि इसका फायदा कैसे लिया जाए? नोटिस से आहत हुआ अशोक गहलोत से मतभेद पर सचिन पायलट ने कहा कि कुछ लोग पार्टी को दिक्कत में लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो मुझे लगा कि बात करके इसे निपटाना चाहिए. ये मुद्दा पैदा कहां से हुआ. मैं डिप्टी सीएम था. मैं प्रदेश अध्यक्ष था. अगर हमें देशद्रोह की धारा के तहत नोटिस भेजा जाएगा तो अपमानित होने जैसा सा लगता है. मैं भी इंसान हूं. लेकिन इस मुद्दे को हम लोगों ने उठाया. पार्टी फोरम में बात रखी दूसरी पार्टी ज्वॉइन करने के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा कि जब हम अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आए तो हमारे खिलाफ बहुत से एक्शन लिए गए. लगातार मामला बढ़ता गया, सुलह की कोई गुंजाइश दिख नहीं रही थी क्योंकि हमने सैद्धांतिक मुद्दा उठाया और व्यक्तिगत हमले हुए. लेकिन हमने पहले ही दिन ये बात कही थी कि हम किसी दल में नहीं जा रहे हैं. हम अपनी पार्टी में रहकर अपनी बात रखेंगे. सचिन पायलट ने कहा कि लोग आएंगे, जाएंगे, लेकिन मेरे लिए जनता महत्वपूर्ण है. हमने जनता के बीच विश्वास कायम कैसे रहे, इस पर पूरा ध्यान फोकस किया. लोग बहुत सारा विकल्प बताते हैं लेकिन पार्टी में खड़ा हूं. पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है. फिर से डिप्टी सीएम बनने के सवाल पर पायलट ने कहा कि पार्टी ने पिछले 20 सालों में जो भी दायित्व दिया है, उसे मैंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया है. पद हो या न हो, प्रदेश की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करता रहूंगा. उन्होंने कहा कि जो वादे करके हम सत्ता में आएं हैं उसे पूरा करना हम सबकी प्राथमिकता रहेगी. आलाकमान की तरफ से सवालों के समधान किए जाने के प्रश्न पर सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान में मैं पिछले डेढ़ साल से सरकार का हिस्सा रहा, और उपमुख्यमंत्री के रूप में काम भी किया. लेकिन मैंने कभी भी राजनीति को व्यक्तिगत नहीं बनाया. मुख्यमंत्री जी मेरे से बड़े हैं और उनके प्रति सम्मान है, लेकिन अगर वादों के मुताबिक काम नहीं हुआ तो उसकी बात उठाना जरूरी था. इसीलिए दिल्ली आए कि आलाकमान के सामने मुद्दों को रखा जा सके.
जयपुर, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के गांधी परिवार के हाथों वापसी को लेकर राजस्थान सरकार ने पहली प्रतिक्रिया दी है. इसमें कहा है कि विधायकों के मन में इस बात को लेकर गुस्सा है. राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि जिस तरह से सचिन पायलट और उनके साथ गए 18 विधायकों की कांग्रेस में एंट्री हुई है उससे अशोक गहलोत गुट के विधायकों में जबरदस्त गुस्सा है कि हम 1 महीने से होटल में उनकी वजह से रह रहे थे और इस तरह से वह बगावत करके गए थे और पार्टी ने उन्हें शामिल कर लिया है. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि मैं सचिन पायलट का करीबी हूं इसलिए मेरे मन में कोई नाराजगी नहीं है मगर बाकी के विधायकों के मन में है. सचिन पायलट और उनके समर्थकों पर सबसे ज्यादा निशाना साधने वाले प्रताप सिंह खाचरियावास आज बदले-बदले नजर आ रहे थे. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि हमारी पायलट साहब से किसी भी तरीके की दुश्मनी नहीं है बल्कि मैं तो पायलट साहब का करीबी हूं और उनके आने से हमें खुशी हुई है. आज भी हमारे लिए सम्मान की बात है और उनके ऊपर आज भी कोई दिक्कत आएगी तो सबसे पहले प्रताप सिंह खाचरियावास खड़ा हुआ मिलेगा. राजस्थान के परिवहन मंत्री ने आगे कहा कि हमारे ऊपर उनके गुट के एक विधायक ने ऐसी टिप्पणी कर दी थी जिसकी वजह से मुझे गुस्सा आ गया था और मैंने उसके जवाब में कहा था कि सचिन पायलट हमारे बाद में राजनीति में आए हैं. गौरतलब है कि सचिन पायलट के बेहद करीबी रहे प्रताप सिंह खाचरियावास ने कह दिया था कि जब पायलट चड्डी में घूमा करते थे, तब हम राजनीति में थे. प्रताप सिंह खाचरियावास की उदासी बता रही थी कि इन्हें अंदाजा नहीं था सचिन पायलट वापस लौट आएंगे.
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020,राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. पार्टी के अंदर बगावत करने वाले सचिन पायलट ने सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि ये तीनों के बीच हुई ये मुलाकात सकारात्मक रही है, ऐसे में संकेत दिख रहे हैं कि सचिन पायलट को कांग्रेस मनाने में कामयाब रही है. आपको बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र चल रहा था, उससे पहले सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. इससे पहले भी जब सचिन पायलट ने बगावत की थी, तब प्रियंका गांधी वाड्रा से उनकी कई बार फोन पर बात हुई थी और उन्होंने मसला सुलझाने की कोशिश की थी. अशोक गहलोत और सचिन पायलट में खिंची थी तलवारें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ करीब 22 विधायक थे. राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने का आरोप लगाया था और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. जिससे सचिन पायलट खासा नाराज हुए थे, उनकी बगावत के बाद ही कांग्रेस ने सचिन से उपमुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था. सीएम अशोक गहलोत की ओर से आरोप लगाया गया था कि सचिन पायलट भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिशों में जुटे थे, फोन टेपिंग जैसे कई सबूत होने का दावा किया था. हालांकि, एक ओर जहां अशोक गहलोत लगातार सचिन पायलट पर हमलावर थे, दूसरी ओर कांग्रेस का शीर्ष आलाकमान उन्हें पार्टी में लाने की कोशिशों में जुटा था. राहुल-प्रियंका समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने सचिन पायलट से बात करने की कोशिश की, बार-बार खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी सचिन पायलट को वापस आने का न्योता दिया गया.
जैसलमेर/जयपुर राजस्थान में जारी राजनीतिक उठापटक (Rajasthan Political Crisis) के बीच बयानबाजी का दौर भी लगातार जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) अपनी सरकार को बचाने के लिए लगातार कोशिश में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट कर दिया। इस बीच शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से अपील करते हुए कहा कि राजस्थान में चल रहे इस 'तमाशे' को बंद करवाएं। साथ ही गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल समेत कई बड़े नाम हैं, जो कथित तौर पर गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ गुपचुप तरीके से हॉर्स ट्रेडिंग की साजिश में शामिल हैं। शेखावत के साथ धर्मेंद्र प्रधान-पीयूष गोयल पर गहलोत का निशाना अशोक गहलोत ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ भी तमाशा हो रहा है उसे बंद कराएं। इस साजिश में गजेंद्र सिंह शेखावत की भागीदारी अब पता चल चुकी है, ऐसे में उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके साथ-साथ इसमें धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल जैसे कई अन्य लोग गुप्त रूप से शामिल हैं। हम यह जानते हैं लेकिन हम परेशान नहीं हैं। हम तो लोकतंत्र की परवाह कर रहे हैं।' बागियों की वापसी को लेकर गहलोत ने कही ये बड़ी बात बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से बगावती सुर अख्तियार करने वाले सचिन पायलट खेमे को लेकर कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व चाहता है तो वो उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। गहलोत ने ये बातें जैसलमेर से जयपुर रवाना होने से ठीक पहले कही। उन्होंने कहा कि मुझ पर कोई दबाव नहीं है। पार्टी ने मुझ पर भरोसा किया है और मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार एआईसीसी महासचिव, तीन बार पीसीसी प्रमुख और तीन बार मुख्यमंत्री बना। अब मैं और क्या चाहूंगा? 'कांग्रेस हाईकमान जो फैसला करे, मुझे आपत्ति नहीं' सीएम गहलोत ने कहा कि मैं जो कुछ भी कर रहा हूं वह सार्वजनिक सेवा के लिए है। कांग्रेस हाईकमान जो भी फैसला करता है, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह देर से आक्रामक नहीं हुए, गहलोत ने कहा, 'मैं आक्रामक कहां हूं? मैं प्यार और स्नेह से बात करता हूं... मैं मुस्कुराता रहता हूं क्योंकि वह भगवान का उपहार है।' हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है: गहलोत मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों की लड़ाई है... लड़ाई यह नहीं होती कि आप चुनी हुई सरकार को गिरा दें। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है। गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार जनता ने मौका दिया जो बड़ी बात है। उन्हें चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है उसे बंद करवाएं। हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए हैं। जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई, इन्होंने और रेट बढ़ा दिए।
जैसलमेर राजस्थान के सियासी (Rajasthan crisis) घमासान में रोज नई घटनाएं सामने आ रही हैं। गहलोत खेमें के विधायकों को जयपुर से (gehlot camp's mla shift jaipur to jaisalmer) जैसलमेर शिफ्ट किया गया है। वहीं इस दौरान आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो गई है। शनिवार को जैसलमेर पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (ashok gehlot) ने आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी सरकार को गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल खेल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजस्थान में चल रहे इस ‘तमाशे’ को बंद करवाने की अपील की। गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "दुर्भाग्य से इस बार बीजेपी का प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त का खेल बहुत बड़ा है। वह कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश का प्रयोग यहां कर रही है। पूरा गृह मंत्रालय इस काम में लग चुका है।" उन्होंने कहा, "वो कहते हैं, हमें किसी की परवाह नहीं, हमें लोकतंत्र की परवाह है। हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई विचारधारा, नीतियों एवं कार्यक्रमों की लड़ाई है ... लड़ाई यह नहीं होती कि आप चुनी हुई सरकार को गिरा दें। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है।" जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई, हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए: गहलोत सीएम गहलोत ने कहा कि मोदी को प्रधानमंत्री के रूप दूसरी बार जनता ने मौका दिया जो बड़ी बात है। उन्हें चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है उसे बंद करवाएं। उन्होंने कहा, "मोदी जी को प्रधानमंत्री होने के नाते चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ भी तमाशा हो रहा है उसे बंद कराएं, हॉर्स ट्रेडिंग के रेट बढ़ गए हैं। जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई इन्होंने और रेट बढ़ा दिए।" अगर पार्टी आलाकमान माफ करता है तो हम भी बागियों को गले लगा लेंगे: गहलोत केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा सरकार के खिलाफ ट्वीट किए जाने के बारे में गहलोत ने कहा कि सिंह तो अपनी झेंप मिटा रहे हैं जबकि आडियो टेप मामले में उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके नेतृत्व से नाराज होकर अलग होने वाले सचिन पायलट एवं 18 अन्य कांग्रेस विधायकों की वापसी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला पार्टी आलाकमान को करना है और अगर आलाकमान उन्हें माफ करता है तो वे भी बागियों को गले लगा लेंगे।
जयपुर राजस्थान में राजनीतिक घमासान का दौर थमता नहीं दिख रहा है। एक दिन पहले ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने एक बयान में कहा कि प्रदेश में विधायकों की खरीद-फरोख्त के रेट बढ़ गए हैं। जब से राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र को हरी झंडी दी है तब से हॉर्स टेड्रिंग में विधायकों के भाव बढ़ गए हैं। इस बीच गहलोत खेमे के सभी विधायकों को जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट किया जा रहा है। 3.30 PM: तक के सभी बड़े अपडेट्स... 3.30 PM: गहलोत गुट दावों की खुली पोल जयपुर से जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान विधायकों की जो संख्या सामने आई है उसने गहलोत गुट के अब तक के दावों की पोल खोल दी है। कभी 109, कभी 104 तो कभी 101 से ज्यादा विधायकों की बाड़ाबंदी के दावों के उलट शुक्रवार को जैसलमेर शिफ्टिंग दौरान महज 97 विधायक नजर आए। मीडिया रिपोट्‌र्स के अनुसार जयपुर से जैसलमेर के सफर में पहले हवाई जहाज में 54 विधायक चढ़े, दूसरे चार्टर प्लेन में मात्र 6 विधायक तो तीसरे प्लेन में 37 विधायक रवाना हुए। 3.00 PM: जैसलमेर पहुंचे कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक जयपुर के होटल से निकल कर अब जैसलमेर पहुंच गए हैं। चार्टर्ड प्लेन से ये विधायक जैसलमेर पहुंचे हैं। इससे पहले जयपुर के फेयरमोंट होटल से बस के जरिए सभी विधायकों को एयरपोर्ट लाया गया, जहां से अब वो जैसलमेर पहुंचे हैं। 1. 22 PM: अशोक गहलोत का बीजेपी पर निशाना राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी ने तेलगुदेशम पार्टी के 4 सांसदों को राज्यसभा के अंदर रातों रात मर्जर करवा दिया, वो मर्जर तो सही है और राजस्थान में 6 विधायक मर्जर कर गए कांग्रेस में वो मर्जर गलत है, तो फिर BJP का चाल-चरित्र-चेहरा कहां गया? राज्यसभा में मर्जर हो वो सही है और यहां मर्जर हो वो गलत है? 12.55 PM: एयरपोर्ट पहुंचे कांग्रेस विधायक जैसलमेर जाने के लिए कांग्रेस के विधायक जयपुर एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। पहले राउंड में करीब 53 विधायक चार्टर्ड प्लेन से जैसलमेर जाएंगे। बाकी विधायक दूसरे राउंड में जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। 12.20 PM: एयरपोर्ट के लिए निकले विधायक जयपुर के फेयरमोंट होटल से कांग्रेस विधायक बसों में सवार होकर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए हैं। उन्हें जैसलमेर शिफ्ट किया जा रहा है। 14 अगस्त को विधानसभा सत्र के मद्देनजर ये शिफ्टिंग की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, विधायक चार्टर्ड प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगे। 11.30 AM: जयपुर में सियासी हलचल तेज गहलोत खेमे के विधायकों को जयपुर के फेयरमोंट होटल से जैसलमेर शिफ्ट करने की कवायद शुरू हो गई है। विधायक एयरपोर्ट जाने के लिए बसों में सवार हो चुके हैं। इस बीच जयपुर एयरपोर्ट पर चार्टर्ड प्लेन पहुंच चुके हैं, जिनके जरिए विधायक जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। 10.57 AM: चार्टर प्लेन से जा सकते हैं जैसलमेर खबर है कि गहलोत खेमे के विधायकों को दो से तीन चार्टर प्लेन के जरिए विधायकों को जैसलमेर ले जा सकते हैं। इसके लिए विधायकों को बसों के जरिए एयरपोर्ट ले जाएंगे फिर वहां से जैसलमेर ले जाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इसको लेकर जैसलमेर पुलिस को अलर्ट किया गया है। 10.56 AM: जैसलमेर शिफ्ट होंगे गहलोत खेमे के विधायक! राजस्थान में लगातार बदल रहे सियासी परिदृश्य में शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन करने वाले विधायक आज जैसलमेर के लिए रवाना होंगे। कैबिनेट की बैठक के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। राजस्थान में सियासी उठापटक का दौर लगातार जारी मुख्यमंत्री गहलोत ने गुरुवार को विधायकों के रेट वाला बयान देकर अगले 14 दिन तक सियासी उठापटक की आशंका को बल दिया है। सूबे में बदले सियासी हालात में पिछले 20 दिनों से कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी जारी है। अब राज्यपाल ने 14 अगस्त को विधानसभा सत्र का आगाज का फैसला लिया है। जिसके बाद अगले 14 दिन और विधायकों को होटल में ही कैद रहना होगा। यानी बाड़ाबंदी में कांग्रेस विधायकों और अन्य समर्थित विधायकों को 14 अगस्त को विधानसभा सत्र के आगाज तक सरकार कोई ढील नहीं देने वाली है।
जयपुर, 30 जुलाई 2020,राजस्थान की सियासत में बहुजन समाज पार्टी एक बड़े किरदार के रूप में सामने आई है. बसपा के 6 विधायकों ने राजस्थान के चुनाव के बाद कांग्रेस में विलय कर लिया था, लेकिन अब पार्टी की ओर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें सतीश मिश्रा की ओर से दलीलें रखी गईं. अब राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से बसपा के सभी 6 विधायकों (कांग्रेस में विलय कर चुके), विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा सचिव को नोटिस जारी किया गया है. अदालत की ओर से सभी से 11 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया है. सुनवाई के दौरान बसपा ने यहां अदालत में तर्क दिया कि वो एक राष्ट्रीय पार्टी हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते हैं. सतीश मिश्रा इस मामले के लिए लखनऊ से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. यहां अदालत में उन्होंने हरियाणा के कुलदीप विश्नोई मामले का हवाला दिया गया है, साथ ही जगजीत सिंह केस का भी हवाला दिया गया है. बसपा राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है, ऐसे में राज्य स्तर पर फैसला मान्य नहीं होता है. दलील दी गई है कि पूरे दल का विलय राष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है. सुनवाई में बीएसपी की ओर से स्पीकर पर आरोप लगाया गया और कहा गया कि स्पीकर जानबूझकर पूरे मामले को खींच रहे हैं. गौरतलब है कि बसपा के 6 विधायकों ने कांग्रेस पार्टी में अपना विलय कर लिया था. बीते दिनों बसपा की ओर से व्हिप जारी किया गया था कि विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ वोट करें. जिसपर विधायकों का कहना था कि वो अब कांग्रेस में हैं और अशोक गहलोत के साथ हैं, बसपा का व्हिप मान्य नहीं होता है.
जयपुर, 30 जुलाई 2020, राजस्थान की सियासत में पहले ऑडियो टेप ने विवाद पैदा किया और अब एक वीडियो पर नया बवाल छिड़ गया है. विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के बीच बातचीत के वीडियो पर भारतीय जनता पार्टी हमलावर हो गई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि स्पीकर को नैतिकता के आधार पर पद छोड़ देना चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि जिस तरह की बातचीत वीडियो टेप में हमने सुनी है, उससे ऐसा लगता है कि विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी से आते हैं और पार्टी के लिए पक्षपात कर रहे हैं जो कि एक स्पीकर को शोभा नहीं देता है. बीजेपी नेता ने कहा कि स्पीकर संजीदा व्यक्ति हैं और ऐसे व्यक्ति पर जब इस तरह के सवाल उठे तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. बीजेपी नेता सतीश पूनिया बोले कि वह किसी सामान्य व्यक्ति से बात नहीं कर रहे हैं बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे से बात कर रहे हैं. ऐसे में साफ लगता है कि वह कांग्रेस का साथ दे रहे हैं, जबकि संविधान के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष रहना चाहिए. बीजेपी नेता ने कहा कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हैं कि हाई कोर्ट उनके विधायकों के नोटिस देने के मामले में लक्ष्मण रेखा पार कर रहा है और दूसरी तरफ वह खुद ही सारी मर्यादा तोड़ कर इस तरह से 30 विधायकों के उधर चले जाने और सरकार बचा लेने की बातचीत कर रहे हैं. दरअसल, स्पीकर सीपी जोशी और वैभव गहलोत की मुलाकात का एक वीडियो आया है. जिसमें स्पीकर कह रहे हैं कि अभी हालात मुश्किल हैं. अगर 30 आदमी निकल जाते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते, वो सरकार गिरा देते. वीडियो की इस बातचीत पर बवाल... स्पीकर सीपी जोशी- मामला टफ है बहुत अभी वैभव गहलोत- राज्यसभा चुनाव के बाद 10 दिन निकाला फिर वापस रखा. स्पीकर सीपी जोशी- 30 आदमी निकल जाते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते. हल्ला करके रह जाते, वो सरकार गिरा देते. अपने हिसाब से उन्होने कांटैक्ट किया इसलिए हो गया. दूसरे के बस की बात नहीं थी.
जयपुर, 30 जुलाई 2020,राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को भी विधायक दल की बैठक की. होटल फेयरमाउंट में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी विधायकों को संबोधित किया. इस दौरान विधायकों से कहा गया कि आप सभी जन्माष्टमी-रक्षा बंधन होटल में ही मनाएं, परिवार को भी बुला सकते हैं. सीएम ने विधायकों से कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपको 21 दिन यहां पर ही रहना होगा. सीएम ने विधायकों से कहा कि सभी विधायकों को 21 दिन यहां पर रहना होगा, राज्यपाल ने भले ही सत्र 21 दिन बाद बुलाया है मगर यह जीत आप लोगों की है. बैठक में संगठन महासचिव अविनाश पांडे ने कहा कि हमने कांग्रेस संगठन के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. आप विधायक लोगों से पूछकर संगठन के पदाधिकारी बनाए जाएंगे, आप लोग जिला अध्यक्ष और प्रखंड अध्यक्ष के लिए नाम दीजिए गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में कई बार विधायक दल की बैठक हो चुकी है. हालांकि, राज्यपाल की ओर से 14 अगस्त को विधानसभा का सत्र बुलाने के बाद ये पहली बैठक है. ऐसे में कांग्रेस की ओर से विधायकों को एकजुट रखने के लिए ये बैठक बुलाई गई. बता दें कि मुख्यमंत्री की ओर से दो बार पहले भी राज्यपाल को चिट्ठी लिख सत्र बुलाने की अपील की गई थी, लेकिन वो मंजूर नहीं हुई थी. हालांकि, तीसरी चिट्ठी के बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने इसे मंजूरी दी लेकिन 21 दिन का समय भी दिया. गौरतलब है कि करीब पिछले एक महीने से विधायक इसी होटल में रुके हुए हैं, विपक्ष लगातार विधायकों और कांग्रेस सरकार पर निशाना भी साध रहा है. एक तरफ कांग्रेस के विधायक जयपुर के होटल में हैं, तो दूसरी ओर सचिन पायलट गुट के विधायक हरियाणा के रिजॉर्ट में रुके हैं. पायलट गुट की ओर से कहा गया है कि वो विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे. ऐसे में 14 अगस्त के आसपास राजस्थान के सियासी संकट का अंत हो सकता है.
प्रदेश की राजनीति में (Rajasthan news ) राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच का गतिरोध तो खत्म हो गया है, लेकिन अभी भी प्रदेश के सियासत में ऐसे कई मोड बाकी है, जो आगामी दिनों में कई नए अध्याय लिखेंगे। आपको बता दें कि राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार को 14 अगस्त से सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। वहीं इसके साथ ही आरोप- प्रत्यारोप के दौर ने तेजी पकड़ ली है। कांग्रेस- बीजेपी लगातार एक दूसरे पर हमले कर रही है। इसके अलावा बसपा और बीजेपी जहां कांग्रेस को कानूनी लड़ाई के जरिए मात देने में जुटी हुई है। वहीं सचिन पायलट खेमे की मुश्किलें बढ़ाने के लिए स्पीकर सीपी जोशी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। विधायक दल की बैठक में सीएम ने कहा- कि ये हमारी जीत है विधानसभा सत्र को लेकर मिली मंजूरी के बाद अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक दोपहर को होटल फेयरमोंट में हुई, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों को संबोधित किया। इस दौरान जहां सभी को सत्र आहूत होने को लेकर बधाई दी गई। वहीं इस दौरान सीएम गहलोत की ओर से विधायकों से यह कहा गया है कि यह हमारी जीत है। सत्र बुलाने की तैयारी तेज, विधानसभा सचिवालय ने जारी की अधिसूचना राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र को लेकर मंजूरी दिए जाने के अब 14 अगस्त को होने वाले सत्र को लेकर जहां कांग्रेस विधायक दल की ओर से बैठक में तैयारी की जा रही है। वहीं इसके साथ ही इस संबंध में विधानसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की दी गई है। बीएसपी राष्ट्रीय पार्टी , इसका राज्य में विलय नहीं हो सकता : सतीश चंद्र मिश्रा बीएसपी के महासचिव और अधिवक्ता सतीश मिश्रा ने बीएसपी के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपनी दलीले पेश कर रहे हैं। मिश्रा ने दलील दी है कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है , इसका राज्य में विलय नहीं हो सकता है। मिश्रा ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि स्पीकर जान बूझकर इस मामले को लंबा खींच रहे हैं। पायलट समर्थक विधायक भी विधानसभा सत्र में ले सकते हैं हिस्सा - सूत्र राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लेकर दी गई मंजूरी के बाद जहां राज्य सरकार कैबिनेट और विधायक दल की मीटिंग के जरिए जहां नई रणनीति तैयार करने में जुटी है। वहीं इसी बीच सूत्रों की ओर से यह जानकारी मिली है कि इस लेकर अब पायलट खेमे के विधायक भी सक्रिय हो गए हैं, जानकारी के अनुसार पायलट खेमे की विधायक भी विधानसभा सत्र में शामिल हो सकते हैं।
Photo जयपुर. राजस्थान की सियासी ड्रामें में लगातार कुछ ना कुछ नया देखने को मिल रहा है। जहां आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं विधानसभा सत्र को बुलाने को लेकर जुटी कांग्रेस लगातार राज्यपाल पर आरोप लगा रही है । वहीं एक बार फिर यह सूचना सामने आई है कि राज्यपाल की ओर से तीसरी बार भी विधानसभा का प्रस्ताव लौट दिया गया है। प्रस्ताव लौटाने के साथ राज्यपाल ने एक बार फिर सरकार ने वहीं सवाल वापस किए है कि आखिर मंत्रीमंडल को इतनी जल्दी सत्र बुलाने का जरूरत क्या हुई है। राज्यपाल ने अपनी ओर से भेजी गई चिट्ठी में लिखा है कि सरकार का जल्दबाजी करने के पीछे का क्या कोई विशेष कारण है क्या ?। राज्यपाल ने यह भी सवाल किया है कि विधानसभा में कैसे सोशल डिस्टेंसिंग मैटेन की जाएगी। राज्यपाल कलराज मिश्र ने दिया आदेश, 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाएं राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र को मंत्रिमंडल द्वारा भेजे गए 14 अगस्त से आरंभ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल ने राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने के निर्देश मौखिक रूप से दिए हैं। पायलट खेमे की याचिका पर HC के फैसले के खिलाफ सीपी जोशी ने SC में दाखिल की नई याचिका राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पारित किए गए स्टे ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई विशेष अवकाश याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने सीपी जोशी के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा था कि पायलट और उनके समर्थक विधायकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करें। गहलोत ने राज्यपाल को भेजा संशोधित प्रस्ताव, 14 अगस्त से शुरू करना चाहते है सत्र! राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के आवास पर चल रही मंत्रिमंडल की बैठक खत्म हो गई है। सीएम गहलोत ने विधानसभा सत्र के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र के पास संशोधित प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार गहलोत ने राजस्थान विधानसभा सत्र 14 अगस्त से शुरू करने का प्रस्ताव राज्यपाल को दिया है। सीपी जोशी ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बुधवार की शाम राजभवन जाकर राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की।
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. फर्टिलाइजर घोटाले में गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत से आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पूछताछ करेगी. बताया जा रहा है कि दोपहर में खुद अग्रसेन गहलोत नई दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय पहुंचेंगे. बीते दिनों ही पूछताछ के लिए ईडी ने अग्रसेन गहलोत को नोटिस भेजा था. बीते दिनों ही ईडी नेफर्टिलाइजर घोटाले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के घर समेत दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापे मारे थे. हालांकि ईडी की इस कार्रवाई के समय को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे. ईडी की छापेमारी के बाद भड़की कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला था. कांग्रेस ने कहा था कि जब राज्य में कांग्रेस सरकार को गिराने की केंद्र की कोशिश नाकाम हो गई, तब ईडी ने छापेमारी की है, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के परिसर शामिल हैं. क्या है आरोप आरोप है कि अग्रसेन गहलोत के स्वामित्व वाली कंपनी म्युरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) फर्टिलाइजर का निर्यात कर रही थी, जो निर्यात के लिए प्रतिबंधित है. एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा आयात किया जाता है और फिर इसे किसानों के बीच रियायती दरों पर वितरित किया जाता है. आरोप के मुताबिक, अग्रसेन गहलोत आईपीएल के अधिकृत डीलर थे और 2007-09 के बीच उनकी कंपनी ने रियायती दरों पर एमओपी को खरीदा और इसे किसानों को वितरित करने के बजाय कुछ अन्य कंपनियों को बेच दिया. उन्होंने इसे इंडस्ट्रियल सॉल्ट के रूप में मलेशिया और सिंगापुर को निर्यात किया.
जयपुर. राजस्थान की सियासी ड्रामें में लगातार कुछ ना कुछ नया देखने को मिल रहा है। जहां आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं विधानसभा सत्र को बुलाने को लेकर जुटी कांग्रेस लगातार राज्यपाल पर आरोप लगा रही है कि वो केन्द्र के दवाब में आकर विधानसभा सत्र बुलाने की मंजूरी नहीं दे रहे हैं। लेकिन अब इस संबंध में राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से चुप्पी तोड़ी गई है। राज्यपाल ने इकोनोमिक्स टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यू में कांग्रेस के आरोप को निराधार बताते हुए साफ तौर पर कहा कि मैं किसी के दवाब में आकर काम नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ संविधान को ही अपना मालिक मानता हूं और उसी का अनुसरण करता हूं। प्रदेश की सियासी खेल में बुधवार को कैसे रहेगा दिन, जानिए पल-पल की हर अपडेट्स। अपडेट @01.00 PM : बीएसपी विधायकों के मामले की सुनवाई आज, कोर्ट ने की मदन दिलावर की याचिका के साथ बीएसपी की याचिका को अटैच राजस्थान में बीएसपी के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय का मामला लगातार तूल पकडने लगा है जहां बीजेपी के वरिष्ठ नेता मदन दिलावर की ओर से इस संबंध में मंगलावर को याचिका लगाई गई थी। वहीं अब बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) ने भी इस संबंध में राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। कोर्ट ने दोनों .याचिकाओं को एक साथ अटैच कर दिया है, दोपहर बाद आज इस मामले में सुनवाई हो सकती है। अपडेट @12.50 PM : राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे सीएम गहलोत राजस्थान विधानसभा में सत्र बुलाने की मांग को लेकर एक बार फिर सीएम अशोक गहलोत राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे है। जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की ओर से तीसरी बार भी प्रस्ताव की फाइल लौटा दी है। लिहाजा एक बार फिर सीएम गहलोत राज्यपाल से इस संबंध में चर्चा करने के लिए पहुंचे हैं। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय माकन भी वहां मौजूद है। अपडेट @12.30 PM : राज्यपाल से फिर मिलने जाएंंगे सीएम गहलोत विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर गहलोत कैबिनेट लगातार कवायद में जुटी हुई है। इस मामले को लेकर ताजा अपडेट यह है कि अब सीएम गहलोत एक बार फिर राज्यपाल से इस मामले को लेकर मुलाकात करेेगे। आपको बता दें कि यह तीसरा मौका है कि जब सरकार की ओर से राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया हो। अपडेट @12.25 PM :सीएम गहलोत ने कोरोना महामारी को लेकर भी पीसीसी कार्यालय में चर्चा की। गहलोत ने कोरोना पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता महामारी में लोगों की जान बचाना है। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री से कोरोना के समय में पांच बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा हुई, इस दौरान उन्होंने सरकार की कार्यशैली की तारीफ की, लेकिन प्रदेश बीजेपी इस पर सवाल उठा रही है, इसे क्या समझा जाए। अपडेट @12.20 PM :गहलोत अपने संबोधन में कह रहे हैं कि सरकारी एजेंसी का बीजेपी की ओर से दुरूपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जानते है कि ये खेल किसके इशारे पर हो रहे है। गहलोत ने कहा कि हमारे विधायक वॉरियर्स है। संबोधन के दौरान गहलोत ने बीजेपी के साथ राज्यपाल को भी घेरा। गहलोत ने विधायकों से कहा कि 21 दिन हो या 31 दिन जीत हमारी होगी। गहलोत ने कहा कि राज्यपाल क्यों अडंगा डाल रहे हैं, यह समझ नहीं आ रहे हैं। वो अच्छे व्यक्ति है, लेकिन किसके इशारे वो यह काम कर रहे है, ये उनकी आत्मा जानती है। अपडेट @12.15 PM :पीसीसी कार्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा के पदभार ग्रहण समारोह में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन में गहलोत ने कहा कि देशभर में कोरोना महामारी भयंकर रूप से फैल रही है, लेकिन केन्द्र सरकार को सरकारों को गिराने के षडयंत्र के लिए समय मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की ओर से किए जा रहे षडयंत्र में कामयाब नहीं होगा। जीत हमारी होगा। अपडेट @12.12 PM : डोटासरा ने किया पदभार ग्रहण राजस्थान की सियासी संग्राम के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से नए पीसीसी चीफ के तौर पर गोविंद सिंह ड़ोटासरा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। कार्यक्रम में सीएम गहलोत के अलावा अविनाश पांडे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद है।
जयपुर राजस्थान की अशोक गहलोत (ashok gehlot) सरकार सियासी संग्राम में अब निर्णायक जंग चाहती है, इसके लिए 31 जुलाई को विधानसभा सत्र बुला रही है। विधानसभा सत्र आहूत करने का संशोधित प्रस्ताव फिर से राज्यपाल कलराज मिश्र के पास भेजा जा चुका है। सरकार का कहना है कि ये उनका कानूनी अधिकार है। राज्यपाल ने जो सवाल उठाये थे उनका उचित जवाब दिया जा चुका है अब उनकी सलाह सरकार के लिए अनिवार्य नहीं है। गहलोत सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि 'हम 31 जुलाई से सत्र चाहते हैं। जो पहले प्रस्ताव था, वह हमारा अधिकार है, कानूनी अधिकार है। उसी को हम वापस भेज रहे हैं।’उन्होंने कहा, ‘अब अगर आप यदि तानाशही पर आ जाएं, आप अगर तय कर लें कि हम जो संविधान में तय है, उसे मानेंगे ही नहीं तो देश ऐसे चलेगा क्या? नये प्रस्ताव में भी फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं मंगलवार को राज्यपाल को भेज गए नए संशोधित प्रस्ताव में भी सरकार ने फ्लोर टेस्ट की बात का खुलासा नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने अपने संशोधित प्रस्ताव में भी यह उल्लेख नहीं किया है कि वह विधानसभा सत्र में विश्वासमत हासिल करना चाहती है या नहीं। हालांकि, इसमें 31 जुलाई से सत्र आहूत करने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने तीसरी बार यह प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल दो बार वापस लौटा चुके हैं प्रस्ताव मंगलवार को भेजे गए संशोधित प्रस्ताव से पहले राज्यपाल दो बार कुछ बिंदुओं के साथ प्रस्ताव सरकार को लौटा चुका है। हालांकि नए संशोधित प्रस्ताव से पहले राजस्थान मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में विधानसभा सत्र बुलाने के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गई और उचित जबाव तैयार किया गया। पूरी उम्मीद प्रस्ताव को मंजूर करेंगे राज्यपाल परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि ‘हमें पूरी उम्मीद है कि राज्यपाल महोदय देश के संविधान का सम्मान करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव को मंजूर करेंगे।’ उन्होंने कहा,‘हालांकि कानूनन राज्यपाल को सवाल करने का अधिकार नहीं, फिर भी उनका सम्मान रखते हुए उनके बिंदुओं का बहुत अच्छा जवाब दिया गया है। अब राज्यपाल को तय करना है कि वह राजस्थान, हर राजस्थानी की भावना को समझें।’ सरकार राज्यपाल से नहीं चाहती टकराव मंत्री ने कहा, ‘हम राज्यपाल से टकराव नहीं चाहते। हमारी राज्यपाल से कोई नाराजगी नहीं है। न ही हम दोनों में कोई प्रतिस्पर्धा है। राज्यपाल हमारे परिवार के मुखिया हैं।’ उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल महोदय संविधान के अनुसार विधानसभा सत्र आहूत करने की अनुमति दें। यह हमारा अधिकार है। हम कोई टकराव नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि राजस्थान की सरकार सुनिश्चित रहे, आगे बढ़े और जनता का काम करे।’
जयपुर, 28 जुलाई 2020,राजस्थान में राज्यपाल बनाम सरकार के बीच आरपार की लड़ाई जारी है. मंगलवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में कैबिनेट बैठक हुई. जिसमें राज्यपाल को तीसरी बार विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा गया. राज्यपाल से अपील की गई है कि उन्हें कैबिनेट द्वारा दी गई सलाह माननी होती है, वरना राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है. कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद राज्य सरकार में मंत्री प्रताप सिंह, हरीश चौधरी की ओर से बयान दिया गया कि हमें बहुमत साबित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही बहुमत में हैं. मंत्री ने कहा कि राज्यपाल कौन होते हैं पूछने वाले कि सत्र क्यों बुलाया जा रहा है. राज्य सरकार में मंत्री ने कहा कि हमने तीसरी बार विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है, अगर नहीं माना गया तो एक बार फिर कैबिनेट बुलाकर प्रस्ताव भेजेंगे. लेकिन फिर भी नहीं माना जाएगा, तो हम केंद्र सरकार से बोलेंगे कि आप CRPF की टुकड़ी भेजकर हमें जेल में डाल दीजिए, जब राजस्थान में चुनाव होंगे तो हम फिर जीतकर आएंगे. आपको बता दें कि इससे पहले भी दो बार कैबिनेट की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है. राज्यपाल की ओर से कोरोना संकट, विधानसभा में व्यवस्था और कुछ अन्य सवाल उठाए गए हैं. यही कारण है कि राज्यपाल और राज्य सरकार में अनबन की स्थिति है. सरकार की ओर से लगातार सत्र बुलाने की कोशिश है, तो कांग्रेस पार्टी अब इसे राजनीतिक लड़ाई बनाने में जुट गई है. राज्य से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र पर निशाना साध रहा है और उनके फैसले लेने पर सवाल उठा रहा है. बीते दिनों कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने राज्यपाल को चिट्ठी भी लिखी थी. इसके अलावा पी. चिदंबरम, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की ओर से भी राजस्थान के मसले पर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया. पी. चिदंबरम ने कहा है कि राज्यपाल को संविधान का पालन करना चाहिए और सत्र को तुरंत बुलाना चाहिए.
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2020,राजस्थान के राजनीतिक दंगल में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार एक्टिव हैं. मंगलवार को उन्होंने ट्वीट कर भारतीय जनता पार्टी के बहाने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती पर निशाना साधा था. प्रियंका ने बसपा को बीजेपी का प्रवक्ता बताया था, अब बीजेपी की ओर से प्रियंका गांधी को जवाब दिया गया है. राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि आप पहले अपने नाना और दादी का इतिहास पढ़ लें. सतीश पूनिया की ओर से ट्वीट में लिखा गया कि भाई राहुल गांधी की तरह आपकी तन्द्रा भी देर से टूटी. जब इन्हीं प्रवक्ताओं के हाथी की सवारी करके जुगाड़ की सरकार बना रहे थे, तब तो आपने Tweet नहीं किया. आज आपको ये बीजेपी के प्रवक्ता लगने लगे, लोकतंत्र और संविधान की हत्या के आरोप से पहले नाना और दादी का इतिहास भी पढ़ लेते मैडम. बीजेपी नेता ने लिखा कि वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता, हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम. लोकतंत्र और संविधान की हत्या का कलंक आपातकाल के जमाने से आपके उपर ही है, अनुच्छेद 356 का सर्वाधिक दुरुपयोग आपके खाते में ही है. सतीश पूनिया ने लिखा कि अपना घर संभालो प्रियंका जी, अपना झगड़ा हमारे माथे मत मढ़िए. गौरतलब है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया और बसपा पर निशाना साधा. प्रियंका ने लिखा कि बीजेपी के अनौपचारिक प्रवक्ता अब व्हिप जारी कर रहे हैं. व्हिप जारी कर लोकतंत्र के हत्यारों को क्लीन चिट दी जा रही है. बता दें कि प्रियंका गांधी का ये ट्वीट तब आया था जब मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पर उनके विधायक तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार गिरती है तो अशोक गहलोत ही जिम्मेदार होंगे. दरअसल, बसपा के 6 विधायक पाला बदलकर कांग्रेस में आ गए थे, इसी के बाद से ही विवाद जारी है. ये मामला एक बार फिर हाईकोर्ट भी पहुंचा है.
जयपुर, 27 जुलाई 2020, राजस्थान में विधानसभा सत्र बुलाए जाने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच खींचातानी चल रही है. इस बीच राजस्थान हाई कोर्ट में राज्यपाल को हटाने लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है. यह याचिका एडवोकेट शांतनु पारीक की ओर से दायर की गई है, जिसमें राज्यपाल को हटाने की गुहार लगाई गई है. मामला कैबिनेट नोट के बाद भी विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने से जुड़ा है. राज्यपाल पर संवैधानिक सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता ने इसे सुप्रीम कोर्ट के नबाम रेबिया केस फैसले का उल्लंघन बताया है. इस मामले में केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है. बता दें, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार विधानसभा सत्र बुलाने की सिफारिश कर रहे हैं, वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र इसके लिए मंजूरी नहीं दे रहे हैं. राज्यपाल कलराज मिश्र कोरोना संक्रमण के खतरे का हवाला देते हुए विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मंजूरी नहीं दे रहे हैं. राज्यपाल के मुताबिक संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई चीज नहीं है, इसलिए इस मामले में दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार के पास जब बहुमत है ही तो सत्र बुलाने की क्या जरूरत है? संविधान के मुताबिक राज्यपाल दो बार ही मुख्यमंत्री की सिफारिश को टाल सकते हैं. अगर तीसरी बार भी कैबिनेट सत्र बुलाने की मांग करती है तो राज्यपाल बाध्य हो जाएंगे. संविधान लागू होने के बाद यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्यपाल ने कैबिनेट की सलाह न मानकर सत्र बुलाने से इनकार कर दिया हो. क्या है नबम रेबिया केस? नबम रेबिया केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साल 2016 में अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि राज्यपाल सिर्फ मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही काम करेंगे. उस समय रेबिया ही अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर थे. उन्होंने राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि राज्यपाल के पास यह भरोसा करने के कारण है कि मंत्रिपरिषद सदन का विश्वास खो चुकी है तो फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया जा सकता है.
जयपुर। राजस्थान सरकार को पिछले 15 दिनों से नाकों चने चबवाने वाले सचिन पायलट गुट ने सोमवार को फिर अशोक गहलोत खेमे में खलबली मचा दी है। सचिन पायलट गुट की ओर से जारी एक वीडियो में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक हेमाराम चौधरी ने दावा किया है कि गहलोत गुट की बाड़ाबंदी में 10-15 विधायक उनके संपर्क में हैं। इस दावों के बाद सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत का दावा करने वाले अशोक गहलोत खेमे में हलचल पैदा कर दी है। इससे पहले कांग्रेस की प्रार्थना सभा में वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला की ओर से बागी विधायकों में से तीन विधायकों के लौटने का बयान दिया गया था। इस बयान के बाद ही पायलट खेमे की ओर से भी इस संबंध में यह वीडियो जारी किया गया। सचिन पायलट खेमे में शामिल वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी ने कहा कि अशोक गहलोत खेमे के 10-15 विधायक हमारे संपर्क में हैं । वे कह रहे हैं कि आज़ाद होते ही हमारी तरफ आएंगे। चौधरी ने कहा कि अगर गहलोत प्रतिबंध हटाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने विधायक उनके पक्ष में हैं। उधर, राजस्थान सरकार पर मंडरा रहा सियासी संकट सोमवार को भी नहीं टला। शनिवार रात को राजभवन के सवालों के जवाब के रूप में गहलोत सरकार की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भेजे गए संशोधित प्रस्ताव पर भी कोई राज्यपाल ने हामी नहीं भरी। उलट, राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से एक और पत्र सरकार के नाम भेजा गया। इस पत्र में सरकार से राज्यपाल ने विधिक राय के बाद 3 बिंदुओं पर सहमति के बाद ही सत्र आहूत करने की बात कही है।
जयपुर। राजस्थान सरकार पर मंडरा रहा सियासी संकट सोमवार को भी नहीं टला। शनिवार रात को राजभवन के सवालों के जवाब के रूप में गहलोत सरकार की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भेजे गए संशोधित प्रस्ताव पर भी कोई राज्यपाल ने हामी नहीं भरी। उलट, राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से एक और पत्र सरकार के नाम भेजा गया। इस पत्र में सरकार से राज्यपाल ने विधिक राय के बाद 3 बिंदुओं पर सहमति के बाद ही सत्र आहूत करने की बात कही है। दरअसल, गहलोत सरकार की ओर से शनिवार रात को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए फिर से राज्यपाल को एक प्रस्ताव भेजा गया था। इसपर विधिक राय लेने के बाद शनिवार को राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स से तो ये स्पष्ट हो रहा है कि राज्य सराकर विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है लेकिन सत्र बुलाने के प्रस्ताव में इसका कोई उल्लेख नहीं है। राज्यपाल की ओर से यही भी कहा गया कि यदि सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्प अवधि में सत्र बुलाये जाने का युक्तियुक्त आधार बन सकता है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने संविधान के अनुच्छेद 174 के अन्तर्गत उपरोक्त परामर्श देते हुए विधानसभा का सत्र आहूत किये जाने हेतु कार्यवाही किये जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिये हैं। मिश्र ने कहा है कि विधानसभा सत्र न बुलाने की कोई भी मंशा राजभवन की नहीं है। राज्यपाल मिश्र की ओर से संवैधानिक एवं नियमावलियों में विहित प्रक्रिया तथा प्राविधानों के अनुरूप ही कार्य किये जाने का निश्चय दोहराया गया है। इन तीन सवालों के जवाब देगी गहलोत सरकार? 1. विधानसभा का सत्र 21 दिन का क्लीयर नोटिस देकर बुलाया जाये, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत प्राप्त मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अन्तर्गत सभी को समान अवसर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। अत्यंत महत्वपूर्ण समाजिक एवं राजनैतिक प्रकरणों पर स्वस्थ बहस देश की शीर्ष संस्थाओं यथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय आदि की भांति ऑनलाइन प्लेटफार्म पर किये जा सकते है ताकि सामान्य जनता को कोविड-19 के संक्रमण से बचाया जा सके। 2. यदि किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की विधानसभा सत्र में कार्यवाही की जाती है, तब ऐसी परिस्थितियों में जबकि माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विषेश अनुज्ञा याचिका दायर की है। विश्वास मत प्राप्त करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाये तथा सम्पूर्ण कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जावे तथा ऐसा विश्वास मत केवल हां या ना के बटन के माध्यम से ही किया जाये। यह भी सुनिश्चित किया जाये कि ऐसी स्थिति में विश्वास मत का सजीव प्रसारण किया जाये। उपरोक्त कार्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के भारत संघ बनाम हरीष चन्द्र रावत, 2016 के वाल्यूम-16 एसएससी पृष्ठ संख्या 174 एवं प्रताप गौड़ा पाटिल बनाम कर्नाटक राज्य, 2019 के वाल्यूम-7, एस.एस.सी. पृष्ठ संख्या 463 एवं मध्यप्रदेश राज्य के प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पारित आदेशों के अनुरूप ही किया जाए। 3. यह भी स्पष्ट किया जाये कि यदि विधानसभा का सत्र आहूत किया जाता है तो विधानसभा के सत्र के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किस प्रकार किया जाएगा। क्या कोई ऐसी व्यवस्था है जिसमें 200 माननीय विधायकगण और 1000 से अधिक अधिकारी/कर्मचारियों को एकत्रित होने पर उनको संक्रमण का कोई खतरा नहीं हो और यदि उनमें से किसी को संक्रमण हुआ तो उसे अन्य में फैलने से कैसे रोका जायेगा।
जयपुर राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजस्थान इकाई का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार शाम राज्यपाल कलराज मिश्र से मिला। उसने राजस्थान में अराजकता का वातावरण पैदा होने की बात करते हुए राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। बीजेपी ने राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि 'मुख्यमंत्री की राजभवन के घेराव की धमकी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थता व्यक्त करना, आईपीसी की धारा 124 के तहत स्पष्ट उल्लंघन है।' बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां की अगुवाई में यह प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राजभवन के बाहर बीजेपी नेताओं ने राज्य में बीते दो दिन के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि कांग्रेस ने राजभवन को धरने एवं प्रदर्शन का अखाड़ा बना दिया। उन्होंने कांग्रेस द्वारा शनिवार को जिला मुख्यालयों पर किए गए धरने प्रदर्शन के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया। 'अंतरविरोध से घिरी सरकार की लड़ाई सड़क पर आ गई' नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 'जनता द्वारा राजभवन को घेरने' संबंधी बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सीएम द्वारा राजभवन को सुरक्षा प्रदान करने की असमर्थता व्यक्त करने का जो बयान दिया गया, वह सीधा-सीधा जहां राजभवन को आतंकित करने का प्रयास है, वहीं भारतीय दण्ड़ संहिता की धारा 124 का स्पष्ट उल्लंघन है। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अंतरविरोध से घिरी सरकार की लड़ाई सड़क पर आ गई है। पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति: BJP बीजेपी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि सत्ताधारी दल के आंतरिक संघर्ष के कारण पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। लेकिन पिछले दो दिन में जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने खुद जिस प्रकार की भाषा एवं गतिविधियां अपने मंत्रियों एवं विधायकों को साथ लेकर की हैं उससे राज्य में कानून व्यवस्था खत्म होने की स्थिति बनी हुई है। ये है कानून धारा 124 ए के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है, जो देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाते हैं या इस तरह की गतिविधि में लिप्त रहते हैं। दरअसल, यह एक राजद्रोह का कानून है, जो 124 ए के तहत आता है। इस धारा के अंर्तगत कोई व्यक्ति जब देश की एकता और अखंडता को खतरा पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती है।
जयपुर, 25 जुलाई 2020,राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सीएम अशोक गहलोत पर हमला बोला है. सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ये कहना कि अगर राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुलाते हैं तो लोग राजभवन का घेराव करेंगे, एक आपराधिक कृत्य है. बता दें कि शुक्रवार को राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि अगर विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने के लिए राजस्थान की 8 करोड़ जनता राजभवन का घेराव करती है, तो इसके लिए वो जिम्मेदार नहीं होंगे. राज्यपाल ने भी जताई थी आपत्ति राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी सीएम के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी. राज्यपाल ने कहा था कि सीएम को पत्र लिखकर कहा था कि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्य में राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो राज्यपाल की सुरक्षा के लिए उसे किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? CM ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? अब बीजेपी ने कहा है कि सीएम का ये बयान आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है. राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो गृह मंत्री भी हैं, ने कहा कि यदि राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुलाते हैं तो राजस्थान की 8 करोड़ जनता राजभवन का घेराव कर सकती है इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे, उनका ये बयान आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है, एक राज्य का मुख्यमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकता है? विधानसभा सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं गहलोत बता दें कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और उनकी सरकार राज्यपाल से मांग कर रही है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए. अशोक गहलोत विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित कर अपनी कुर्सी सुरक्षित करना चाहते हैं.
जयपुर, 25 जुलाई 2020, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है. बैठक की टाइमिंग दो बार बढ़ाई गई. ये मीटिंग पहले 11.30 बजे होनी थी, इसके बाद इसे 12.30 बजे तक बढ़ा दिया गया. वहीं अशोक गहलोत ने विधायकों से कहा कि आप लोग तैयार रहिए अगर 21 दिन तक बैठना पड़े तो यहां रहेंगे. Rajasthan LIVE updates: 6.02 राज्यपाल से मिलकर राजभवन से बाहर आने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि विधानसभा बुलाना राज्यपाल का हक होता है. राजभवन में आकर कांग्रेस के लोग क्या जबरदस्ती साइन करवाना चाहते थे. आज भी महामारी एक्ट का उल्लंघन कर पूरे राज्य में धरना दिया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान को अराजकता में धकेल रहे हैं. 5.01 PM राजस्थान कैबिनेट की मीटिंग खत्म हुई. विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए मंत्री परिषद ने दोबारा से प्रस्ताव का अनुमोदन किया है जो राज्यपाल को भेजा जा रहा है. गहलोत मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए फिर से कैबिनेट का प्रस्ताव पारित किया, जो राज्यपाल को भेजा जाएगा. 5.00 PM बीजेपी नेता राज्यपाल कलराज मिश्रा से मिलने राजभवन पहुंचे. 3.35PM राजस्थान बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल शाम 5:00 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात करेगा. 3.31 PM जयपुर में विधायकों के साथ मीटिंग में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों से कहा कि आप लोग तैयार रहिए अगर 21 दिन तक बैठना पड़े तो यहां रहेंगे. राष्ट्रपति भवन जाना पड़े तो राष्ट्रपति के पास जाएंगे या फिर प्रधानमंत्री निवास के बाहर दिल्ली में धरना देने जाना पड़े तो प्रधानमंत्री निवास दिल्ली भी जाएंगे. राजस्थान सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक अब शाम चार बजे होगी. इस वक्त जयपुर के एक होटल में कांग्रेस विधायकों की बैठक चल रही है. बैठक होने के बाद लंच का टाइम है. इसके बाद लगभग 4 बजे राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक होगी. आज मंत्रिपरिषद बैठक की टाइम दो बार बदलनी पड़ी. मंत्रिपरिषद की बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, पहले इसे बढ़ाकर 12.30 किया गया. विधानसभा सत्र की मांग इससे पहले शुक्रवार देर रात कैबिनेट की बैठक चली थी. शुक्रवार रात को सवा दस बजे शुरू हुई कैबिनेट की बैठक रात साढ़े बारह बजे तक चली. बता दें कि सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि इस बारे में वे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं और उनसे राय लेने के बाद ही इस बाबत कोई फैसला ले पाएंगे.
जयपुर राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का बड़ा बयान सामने आया है। जयुपर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हुई तो राष्ट्रपति भवन जाएंगे और राष्ट्रपति से मिलेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन भी करेंगे। विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर सीएम गहलोत एक बार फिर से राज्यपाल कलराज मिश्र से आज मुलाकात करेंगे। विधायक दल की बैठक में सीएम गहलोत का बड़ा बयान जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पहले शाम चार बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने का कार्यक्रम था। हालांकि, अब ऐसी खबर है कि सीएम शाम तक में राज्यपाल से मिलेंगे। इस बीच मुख्यमंत्री आवास (सीएमआर) पर कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में विधानसभा सत्र प्रस्ताव पारित हुआ। अब राज्यपाल से मुलाकात कर इसे सौंपा जाएगा। इससे पहले शनिवार को जयपुर के फेयरमोंट होटल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा हुई। जरूरत पड़ी तो पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे' कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने कहा, 'जरूरत पड़ने पर हम राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन जाएंगे। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर हम पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।' गहलोत विधानसभा में बहुमत परीक्षण के जरिए विरोधियों को जवाब देना चाहते हैं। ये बताना चाहते हैं कि सचिन पायलट की बगावत से उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। यही वजह है कि वो लगातार राज्यपाल से विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक राज्यपाल की ओर से इसको लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। सुरजेवाला का ट्वीट- संविधान और लोकतंत्र की रक्षा हम करेंगे राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया है। उन्होंने इसमें बीजेपी पर निशाना साधा है। सुरजेवाला ने लिखा, 'राजस्थान में जनता की निर्वाचित सरकार धरने पर बैठी है, बीजेपी जनमत की हत्या में मगन है, प्रजातंत्र बेड़ियों में है, और देश खतरे में है! संविधान और लोकतंत्र की रक्षा हम करेंगे। संघर्ष की इस आंधी के बाद नया दृष्य आएगा, मूल्यों और नीति का झंडा फिर से लहराएगा।' राज्यपाल से मिलेंगे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दूसरी ओर, बीजेपी के नेता राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने पहुंचे हैं। राज्य में कोरोना और उससे उत्पन्न स्थितियों को लेकर राज्यपाल राजस्थान बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करने पहुंचा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने पहुंचा। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और उससे उत्पन्न स्थितियों के बारे में चर्चा और सुझाव को लेकर मुलाकात करने पहुंचे हैं।
जयपुर राजस्थान में सियासी उठापटक का दौर थमता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। अभी भी विधानसभा सत्र को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री ने एक बार फिर से मंत्री परिषद की बैठक बुलाई है। राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने का समय मांगा है। दूसरी ओर, राजस्थान कांग्रेस का पार्टी के सभी जिला मुख्यालय में प्रदर्शन जारी है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने शुक्रवार को बीजेपी पर 'लोकतंत्र की हत्या की साजिश' का आरोप लगाते हुए सूबे के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन का ऐलान किया था। जयपुर समेत सभी प्रमुख जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजर आए। बीजेपी ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- राज्य में अराजकता का माहौल राज्यपाल से मुलाकात करते हुए बीजेपी ने एक ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में बीजेपी ने कहा है कि सत्ताधारी दल के आंतरिक कलह की वजह से राजस्थान में अराजकता का वातावरण बन गया है।
जयपुर राजस्थान की सियासी रस्साकशी शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट से आगे बढ़कर राजभवन तक पहुंच गई। हाईकोर्ट में जैसे ही पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट को फौरी राहत का ऐलान हुआ, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजभवन की ओर कूच कर दिया। बाड़ाबंदी में कैद विधायकों की तत्काल बैठक बुलाई गई और वहीं से ऐलान कर दिया गया कि राज्यपाल कलराज मिश्र अगल विधानसभा सत्र आहूत करने की अनुमति नहीं देते हैं तो राजभवन के घेराव की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी। ऐसा ही हुआ भी, कुछ समय बाद ही सीएम अपने विधायक दल के साथ राजभवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेकिन इस बीच राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रदेश की जनता तक यही सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर सीएम गहलोत को विधानसभा सत्र बुलाने की इतनी जल्दी क्यों है? गहलोत इसलिए बना रहे है राज्यपाल पर दबाव पिछले 13 दिन से बाड़ाबंदी में रखे विधायकों की परेड करवाने की सीएम अशोक गहलोत की विवशता को पहला बड़ा कारण विधायकों की बगावत का डर है। संभव है कि बाड़ाबंदी में 100 से अधिक विधायकों की मौजूदगी के बाद भी कुछ विधायकों के पायलट गुट में शामिल होने का खतरा उन्होंने भाप लिया हो। और विधायकों की संख्या टूटने के डर से वो जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराना चाहते हैं। अभी फ्लोर टेस्ट तो 6 महीने तक खतरा टला राज्यपाल से सत्र बुलाने की अनुमति मिलने के साथ ही गहलोत खेमे को फ्लोर टेस्ट के जरिए बहुमत साबित करने का मौका मिल जाएगा। इसका मतलब ये है कि सरकार को समर्थन देने वाले कुछ विधायकों की बगावत का खतरा नहीं रहेगा और फ्लोर टेस्ट पास होने के बाद अगले 6 महीने तक सरकार पर मंडरा रहा संकट टल जाएगा। सरकार बचाने के साथ पायलट पर प्रहार सचिन पायलट की याचिका पर भले ही कोर्ट में सुनवाई लंबित है लेकिन कांग्रेस पार्टी में उनकी फिर से एंट्री पर पाबंदी को पुख्ता करने के लिए भी गहलोत यह सत्र जल्द बुलाना चाहेंगे। फ्लोर टेस्ट में के लिए विप जारी होगा और यदि पायलट गुट इसमें शामिल नहीं होता है तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना आसान होगा। कोर्ट के फैसले से पहले सरकार सुरक्षित करना चाहते हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे की निगाहें अब भी कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। राजस्थान हाईकोर्ट की तरह सुप्रीम कोर्ट भी यदि सचिन पायलट गुट के पक्ष में फैसला देता है तो परिस्थितियां बिल्कुल उलट होंगी। ऐसे में गहलोत खेमा चाहता है कि कोर्ट के अगले आदेश से पहले वो सरकार को सुरक्षित करते हुए अपना पक्ष भी मजबूत कर लें।
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट जारी है. विधानसभा सत्र के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस विधायकों ने राजस्थान में राजभवन में धरना दिया. जिसके बाद अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि किसी भी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. राजस्थान सरकार के जरिए विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग की जा रही है. इस पर राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई को रात में विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई. पत्रावली में गुण दोषों के आधार पर राजभवन के जरिए परीक्षण किया गया और कानून विशेषज्ञों से परामर्श लिया गया. बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार के संसदीय कार्य विभाग को राजभवन के जरिए इन बिन्दुओं के आधार पर स्थिति प्रस्तुत करने के लिए पत्रावली भेजी गई है- 1. विधानसभा सत्र को किस तारीख से बुलाया जाना है, इसका उल्लेख कैबिनेट नोट में नहीं है और न ही कैबिनेट के जरिए कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है. 2. अल्प सूचना पर सत्र बुलाए जाने का न तो कोई औचित्य प्रदान किया गया है और न ही कोई एजेंडा प्रस्तावित किया गया है. सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना जरूरी होता है. 3. राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी विधायकों की स्वतंत्रता और उनके स्वतंत्र आवागमन भी सुनिश्चित किया जाए. 4. कुछ विधायकों की अयोग्यता का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. उसका संज्ञान भी लिए जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं. साथ ही कोरोना के राजस्थान राज्य में वर्तमान हालात में तेजी से फैलाव को देखते हुए किस प्रकार से सत्र बुलाया जाएगा, इसका भी विवरण प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं. 5. राजभवन के जरिए स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक कार्य के लिए संवैधानिक मर्यादा और सुसंगत नियमावलियों में विहित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जाए. 6. यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत हासिल करने के लिए सत्र बुलाए जाने का क्या औचित्य है. राजभवन में धरना बता दें कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों का राजभवन में धरना खत्म हो गया है. कांग्रेस विधायक के साथ राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राजभवन में धरने पर बैठे थे. वहीं कांग्रेस का कहना है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व की सरकार को गिराने की साजिश बीजेपी कर रही है.
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020,राजभवन में कांग्रेस विधायकों के धरने पर राज्यपाल कलराज मिश्रा ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखा है. कलराज मिश्रा ने कहा कि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की सुरक्षा भी नहीं कर सकता है क्या. राज्य में कानून- व्यवस्था की स्थिति पर आपका क्या मत है. राज्यपाल ने कहा कि इससे पहले कि मैं विधानसभा सत्र के संबंध में विशेषज्ञों से चर्चा करता, आपने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि राजभवन घेराव होता है तो यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है. कलराज मिश्रा ने कहा कि मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री का ऐसा बयान नहीं सुना. सीएम को लिखे खत में कलराज मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? क्या यह एक गलत प्रवृत्ति की शुरुआत नहीं है, जहां विधायक राजभवन में विरोध प्रदर्शन करते हैं? अपने पत्र में कलराज मिश्रा आगे लिखते हैं कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई की रात को विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई. पत्रावली का एनालिसिस किया गया. कानून विशेषज्ञों से सलाह ली गई. कलराज मिश्रा ने कहा कि शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाए जाने के लिए न तो कोई कारण दिया गया है और न ही कोई अजेंडा प्रस्तावित किया गया. सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना जरूरी होता है. राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार को सभी विधायकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए. राजभवन में गहलोत गुट का धरना बता दें कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर गहलोत गुट के विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में धरना दिया. इस दौरान राज्यपाल कलराज मिश्रा ने विधायकों से बात भी की. उन्होंने कहा कि आपकी मांग हमने सुन ली है. पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. संवैधानिक संस्थाओं का टकराव नहीं होना चाहिए. सीएम अशोक गहलोत ने भी राज्यपाल से मुलाकात की. मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल हमारे संवैधानिक मुखिया हैं. हमने जाकर उनसे रिक्वेस्ट की है. कहने में संकोच नहीं है कि बिना ऊपर के दबाव के वो इस फैसले को नहीं रोक सकते थे ,क्योंकि राज्यपाल कैबिनेट के फैसले में बाउंड होते हैं कि हमें किसी भी रूप में उसे मानना है और विधानसभा का सत्र बुलाना है.
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट बना हुआ है. इस बीच राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान की स्थिति अभूतपूर्व है. इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ऐसे हालात के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. साथ ही गुलाब चंद कटारिया ने राजभवन की सुरक्षा में सीआरपीएफ को तैनात करने की मांग की है. भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि राज्य की ऐसी स्थिति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. लेकिन वह इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रही है. वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने गहलोत के बयान पर राजभवन में सीआरपीएफ तैनात करने की मांग की. राजस्थान सरकार विधानसभा सत्र की मांग कर रही है. इसको लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनता के जरिए राजभवन का घेराव करने की बात कही थी. सीएम अशोक गहलोत के इस बयान पर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राजभवन में सीआरपीएफ की तैनाती की जानी चाहिए. वहीं बीजेपी विधायक मदन दिलावर के जरिए बीएसपी विधायकों के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के सवाल पर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने रात 10 बजे अपना कार्यालय खोला और विधायकों के दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर दिया. हालांकि बीएसपी विधायकों के मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसकी वजह से बीजेपी विधायक को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी.
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020,भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने गहलोत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अमित मालवीय ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि सीएम गहलोत सरकार चला रहे हैं या एक भ्रष्ट व्यवसाय. अमित मालवीय अपने ट्ववीट में लिखते हैं कि शर्म की बात है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर एफआईआर दर्ज करने वाली एसओजी के प्रमुख के सीएम अशोक गहलोत के बेटे के साथ कारोबारी रिश्ते हैं. अधिकारी की पत्नी फेयरमोंट होटल के मालिकों में से एक हैं. क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार चला रहे हैं या भ्रष्ट व्यवसाय. बता दें कि राजस्थान में जो जंग सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच शुरू हुई थी वो अब राजभवन तक पहुंच गई है. गहलोत गुट के विधायकों ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को राजभवन में धरना दिया. अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्रा ने मुलाकात भी की. सीएम गहलोत ने कहा कि यहां उल्टी गंगा बह रही है. हम कह रहे हैं कि बहुमत साबित करने के लिए हम विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं. हमारे कदम को विपक्ष को भी वेलकम करना चाहिए था, यही लोकतंत्र की परंपरा रही है. अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल हमारे संवैधानिक मुखिया हैं. हमने उनसे मांग की कि वे विधानसभा सत्र बुलाएं. मुझे कहते हुए संकोच नहीं है बिना ऊपर के फैसले के वे इसे रोक नहीं सकते हैं, क्योंकि इस तरह के फैसले सरकार और राज्यपाल आपस में बात करके सुलझा लेते हैं. वहीं, दिनभर की गहमागर्मी के बाद सीएम आवास पर कैबिनेट की बैठक हो रही है. बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र को बुलाने को लेकर फिर से प्रस्ताव पारित किया जाएगा.
जयपुर, 25 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है. राजस्थान मंत्रिपरिषद की ये बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 12.30 कर दिया गया है. हालांकि अबतक मंत्रिपरिषद की बैठक शुरू नहीं हो पाई है. राजस्थान सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक अब शाम चार बजे होगी. इस वक्त जयपुर के एक होटल में कांग्रेस विधायकों की बैठक चल रही है. बैठक होने के बाद लंच का टाइम है. इसके बाद लगभग 4 बजे राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक होगी. आज मंत्रिपरिषद बैठक की टाइम दो बार बदलनी पड़ी. मंत्रिपरिषद की बैठक पहले 11.30 बजे होनी थी, पहले इसे बढ़ाकर 12.30 किया गया, अब ये बैठक 4 बजे होगी. राजस्थान मंत्रिपरिषद की बैठक अबतक शुरू नहीं हो पाई है. आज 12.30 बजे ये बैठक शुरू होने को थी. बैठक में विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर चर्चा की जाएगी. इससे पहले शुक्रवार देर रात कैबिनेट की बैठक चली थी. शुक्रवार रात को सवा दस बजे शुरू हुई कैबिनेट की बैठक रात साढ़े बारह बजे तक चली. बता दें कि सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि इस बारे में वे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं और उनसे राय लेने के बाद ही इस बाबत कोई फैसला ले पाएंगे. इस बीच कांग्रेस आज राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस ने बीजेपी पर राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया है.
जयपुर राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के समर्थक विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाये। गहलोत खेमे के ये विधायक मुख्यमंत्री गहलोत की अगुवाई में ही राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने और विधानसभा का सत्र बुलाने का आग्रह करने राजभवन पहुंचे थे। इन विधायकों के साथ कांग्रेस सरकार के समर्थक निर्दलीय और अन्य विधायक भी राजभवन पहुंचे। मुख्यमंत्री गहलोत पहले जब राज्यपाल से मुलाकात कर रहे थे तो बाकी विधायक मंत्री बाहर लॉन में इंतजार कर रहे थे। इस दौरान इन विधायकों ने नारेबाजी की। विधायकों ने 'हर जोर जुल्म की टक्कर में इंसाफ हमारा नारा है', 'इंकलाब जिंदाबाद', ‘अशोक गहलोत संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’, 'अशोक गहलोत जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले गहलोत ने मीडिया से कहा कि सरकार के आग्रह के बावजूद ‘ऊपर से दबाव’ के कारण राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे हैं। कांग्रेस अब इस लड़ाई को सड़क पर ले जाने का मूड बना चुकी है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने ट्वीट कर कहा, 'भाजपा द्वारा राजस्थान में लोकतंत्र की हत्या के षड़यंत्र के खिलाफ कल (शनिवार) सुबह 11 बजे सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन किया जायेगा। राजभवन में अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी राजभवन के मैदान में बैठे कांग्रेस विधायक जिद पर हैं। वे राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को मनवाने के लिए डटे रहने का फैसला लिया है। राजभवन में टेंट मंगवा लिए गए हैं। वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि विधिक से कानूनी राय लेने के बाद ही विधानसभा का सत्र बुलाने की इजाजत दे पाएंगे। उन्होंने सीएम गहलोत से पूछा है कि आखिर वे सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं, इस संदर्भ में उचित जवाब बताएं। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर किसी राज्य की सरकार का मंत्रिमंडल लगातार दो बार राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते हैं तो वे इसका आदेश देने के लिए बाध्य हैं। फिलहाल सीएम अशोक गहलोत पहली बार विधानसभा का सत्र बुलाने का अनुरोध करने पहुंचे हैं। कांग्रेस ने कहा, गलत कर रहे राज्यपाल कांग्रेस ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले और विधानसभा सत्र की मांग को लेकर अपने विधायकों के राज भवन में धरना देने के संबंध में शुक्रवार को आरोप लगाया कि मौजूदा समय में लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है और राज्यपाल प्रजातंत्र के रक्षक होने की भूमिका का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि में दावा किया कि इन दिनों हाई कोर्टों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुसरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘लोकतंत्र की नयी परिभाषा गढ़ी जा रही है। अब राज्यपाल लोकतंत्र के रक्षक नहीं रहे, बल्कि वे केंद्र की सत्ता के रक्षक हैं।’ हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सिब्बल ने कहा, ‘कहना नहीं चाहिए लेकिन कहना पड़ता है कि सुप्रीम कोर्ट जो फैसले करता है उसे हाई कोर्ट किनारे कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले का अनुसरण नहीं किया जा रहा है।’ फैसले पर निराश जताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत निराश हूं। कोई रोशनी नहीं दिखती।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि सचिन पायलट को बताना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि 20-25 विधायकों के साथ वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने कहा, ‘सचिन पायलट को इतनी छोटी उम्र में जो मिला, शायद ही किसी को इतना मिला हो। अब आप (पायलट) क्या चाहते हैं? अगर भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो बताइए। अगर आप अपनी पार्टी बनाना चाहते हैं तो बताइए। यह बताइए कि क्या कोई ‘डील’ हुई है? बिन बोले होटल में बैठकर काम नहीं चलेगा।’ सिब्बल ने कहा, ‘अगर आपकी कोई और चिंता है तो आप बताइए। आप 20-25 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस के पास राजस्थान में 100 से अधिक विधायक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह से सबके सामने तमाशा नहीं बनाना चाहिए। इसमें पार्टी का नुकसान है, आपका नुकसान है, सभी का नुकसान है।'
जयपुर राजस्थान में जारी सियासी संग्राम के बीच दो दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रेसन गहलोत के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हुई थी। इस छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक है। केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से कांग्रेस सरकार से जुड़े लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर ईडी ने किस केस में सीएम गहलोत के भाई के घर पर छापेमारी की है। सीएम के भाई से जुड़े हैं फर्टिलाइजर स्कैम के तार ईडी की अग्रसेन गहलोत के घर और प्रतिष्ठानों पर यह कार्रवाई कई राज्यों में फर्टिलाइजर स्कैम मामले में हो रही छापेमारी का हिस्सा है। राजस्थान के साथ ही ईडी मुम्बई, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी फर्टिलाइजर स्कैम को लेकर एक साथ कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई अग्रसेन गहलोत का फर्टिलाइजर का कारोबार है और जोधपुर में इससे जुड़ी दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान हैं। प्रवर्तन निदेशालय की इस छापे में उनकी दुकानों और घर समेत अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन का फर्टिलाइजर से जुड़ा काम है। बताया जा रहा है कि साल 1980 से पहले की उनकी दुकान है। 'अनुपम कृषि' नाम से इसी प्रतिष्ठान से वो फर्टिलाइजर से जुड़ा काम करते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चुनावी कार्यालय शुरू से यह दुकान ही रहा है। इस दो मंजिला दुकान के ऊपर एक ऑफिस बनाया हुआ है। यहीं से चुनाव के कार्य संपन्न होते रहे हैं। इसी दुकान के बाहर टेंट लगाया जाता है और चुनावी कार्यालय बनाया जाता है। इसके अलावा अशोक गहलोत जब नामांकन पत्र भरने जाते तो इसी दुकान के आगे एक जनसभा को संबोधित करते आए हैं। अग्रसेन गहलोत पर 7 करोड़ रुपए का जुर्माना अग्रसेन गहलोत कथित उर्वरक मामले में सात करोड़ रुपए के सीमा शुल्क जुर्माने का सामना कर रहे हैं। ईडी ने सीमा शुल्क विभाग की शिकायत के आधार पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए)के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है और कथित उर्वरक घोटाला मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में छह, गुजरात में चार, पश्चिम बंगाल में दो और दिल्ली में एक स्थान पर एजेंसी ने छापों की कार्रवाई की है।
नई दिल्ली/जयपुर, 24 जुलाई 2020, राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट गुट को राहत मिलने के बाद अब अशोक गहलोत कैंप में हलचल तेज है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की अपील की गई है, तो राज्यपाल कलराज मिश्र ने अभी कोरोना संकट का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है. इस बीच अशोक गहलोत विधायकों को साथ लेकर राजभवन पहुंचे हैं. इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विधानसभा स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया था यानी पायलट गुट को अभी अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है. राज्यपाल कलराज मिश्रा लॉन में धरने पर बैठे विधायकों से मुलाकात करने पहुंचे हैं. राज्यपाल ने कहा है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. विचार-विमर्श के लिए वक्त चाहिए.
जयपुर, 24 जुलाई 2020, राजस्थान के सियासी दंगल में अब केंद्र सरकार की एंट्री भी आधिकारिक रूप से हो गई है. राजस्थान हाईकोर्ट में जारी पायलट गुट बनाम विधानसभा स्पीकर के मामले में शुक्रवार को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया गया. सचिन पायलट गुट की ओर याचिका में कहा गया कि क्योंकि ये संवैधानिक मामला है ऐसे में केंद्र सरकार भी इसमें पक्षकार होनी चाहिए. हालांकि, स्पीकर गुट की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया था. लेकिन हाईकोर्ट ने पक्षकार बनाने की मंजूरी दी, जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा. केंद्र को पक्षकार बनाने के लिए विधायक पृथ्वीराज मीणा की ओर से याचिका दायर की गई थी. विधायकों पर एक्शन नहीं ले पाएंगे स्पीकर शुक्रवार को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की याचिका स्वीकार करने के साथ ही हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर स्टे लगा दिया. यानी विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने बागी विधायकों को जो नोटिस दिया था, उसपर वो कोई एक्शन नहीं ले पाएंगे. ऐसे में सचिन पायलट गुट पर जो अयोग्य करार दिए जाने का संकट था वो कुछ वक्त के लिए टल गया है. हाईकोर्ट की ओर से सचिन पायलट गुट की याचिका को सही माना गया है. जिसमें पार्टी के अंदर रहकर नेतृत्व के खिलाफ सवाल उठाने का अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी की बात को शामिल किया गया है. अब कब होगी सुनवाई? हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी, लेकिन कब होगी ये तारीख नहीं बताई गई है. दूसरी ओर सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है, ऐसे में सर्वोच्च अदालत के फैसले पर हर किसी की नजरें हैं. क्योंकि सर्वोच्च अदालत की ओर से एक बार फिर स्पीकर और अदालत के अधिकारों को लेकर बात कही जा सकती है.
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. एक तरफ राजस्थान हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है, तो अब बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के विलय का मामला भी अदालत पहुंच गया है. भारतीय जनता पार्टी के विधायक मदन दिलावर ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर सवाल उठाए हैं. अब इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होगी. आपको बता दें कि सितंबर 2019 में बसपा के सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे. विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने तब कहा था कि सभी विधायकों का कांग्रेस में विलय पत्र मिल चुका है. ऐसे में किसी प्रकार की कानूनी अड़चन नहीं है. इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से विधानसभा में पार्टी की संख्या 106 हो गई थी. लेकिन अब जब कांग्रेस के विधायक बागी हुए तो एक बार फिर इन विधायकों का मामला सामने आया. खुद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अशोक गहलोत पर निशाना साधा था. मायावती ने ट्वीट किया था कि राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन व बीएसपी के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया और अब जग-जाहिर तौर पर फोन टैप कराके इन्होंने एक और गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है. गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट में पहले ही ये मामले चल रहे हैं. जिसमें शुक्रवार को अदालत ने विधानसभा स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है, इसके अलावा केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने वाली याचिका भी मंजूर कर ली गई है.
नई दिल्ली/जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट गुट को राहत मिलने के बाद अब अशोक गहलोत कैंप में हलचल तेज है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की अपील की गई है, तो राज्यपाल कलराज मिश्र ने अभी कोरोना संकट का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है. इस बीच अशोक गहलोत विधायकों को साथ लेकर राजभवन पहुंचे हैं. इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विधानसभा स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया था यानी पायलट गुट को अभी अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है. राजस्थान की सियासत में शुक्रवार के सभी अपडेट पढ़ें... 03.12 PM: राजभवन में सभी विधायक धरने पर बैठ गए हैं, नारेबाजी की जा रही है. दूसरी ओर अंदर मुख्यमंत्री गहलोत राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर रहे हैं. यहां विधायक वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगा रहे हैं. 03.00 PM: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दोपहर को राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की. इस दौरान सभी विधायक राजभवन में बाहर डेरा जमाए रहे. सीएम की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की जा रही है. 02.33 PM: राजस्थान सरकार में मंत्री का कहना है कि कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर दिया है, तो राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाना ही होगा. केंद्र सरकार लोकतंत्र का गला घोंटना चाहती है. सभी विधायक अब राजभवन पहुंच गए हैं. कांग्रेस नेताओं की ओर से कहा गया है कि कोई भी विधायक कोरोना पॉजिटिव नहीं है, इससे पहले राज्यसभा चुनाव में कोविड पॉजिटिव विधायकों ने वोट दिया था. 02.19 PM: सभी विधायक बस में बैठकर राजभवन पहुंच गए हैं. यहां राज्यपाल से मुलाकात कर विधानसभा का सत्र बुलाने की अपील की जाएगी. 02.08 PM: अब से कुछ देर में सभी विधायक बस में बैठकर राजभवन के लिए रवाना होंगे. इस बीच विधायकों का कहना है कि सत्र नहीं बुलाया गया तो सभी राजभवन में धरने पर बैठ सकते हैं. 02.00 PM: हाईकोर्ट के द्वारा नोटिस पर स्टे लगाने के बाद विधानसभा स्पीकर शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं. स्पीकर की ओर से फैसले के खिलाफ याचिका दायर की जा सकती है. 01.50 PM: राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच मुलाकात अब दो बजे होगी. इस बीच राजस्थान के मंत्री रघु शर्मा का कहना है कि अगर कोरोना का संकट है तो वो सभी विधायकों को कोरोना टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं. 12.53 PM: अशोक गहलोत ने कहा कि हमने राज्यपाल को चिट्ठी लिखी है कि वो तुरंत विधानसभा सत्र बुलाएं. जिसमें कोरोना संकट, लॉकडाउन पर चर्चा हो सके. लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है, हमने रात को चिट्ठी लिखी थी. हमारा मानना है कि ऊपर से दबाव होने के कारण वो विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश नहीं दे रहे हैं. 12.53 PM: अशोक गहलोत ने कहा कि हमने राज्यपाल को चिट्ठी लिखी है कि वो तुरंत विधानसभा सत्र बुलाएं. जिसमें कोरोना संकट, लॉकडाउन पर चर्चा हो सके. लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है, हमने रात को चिट्ठी लिखी थी. हमारा मानना है कि ऊपर से दबाव होने के कारण वो विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश नहीं दे रहे हैं. सीएम ने कहा कि जब भैरो सिंह शेखावत की सरकार गिराई जा रही थी, तब मैं पीएम से मिलने गया था और ऐसी बातों को रोकने की अपील की थी. हम सभी विधायक राज्यपाल से मिलेंगे और जल्द सेशन बुलाने की अपील करेंगे. विधानसभा में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, सारी बातें देश के सामने आएंगी. 12.50 PM: होटल में अभी कांग्रेस विधायक दल की बैठक चल रही है. इस बीच राजभवन जाने में देरी हो गई है. 12.03 PM: अशोक गहलोत गुट की ओर से राज्यपाल से मिलने का वक्त मांगा गया है. अब से कुछ देर में अशोक गहलोत राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जहां विधायकों की परेड कराई जा सकती है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से राज्यपाल से सोमवार को विधानसभा सत्र बुलाने की अपील की जा सकती है. 11.45 AM: राजस्थान हाईकोर्ट के द्वारा स्पीकर के नोटिस पर लगाए गए स्टे पर सचिन पायलट गुट का पहला रिएक्शन सामने आया है. पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने ट्वीट कर फैसले की तारीफ की. 11.26 AM: राजस्थान हाईकोर्ट से पायलट गुट को एक बार फिर राहत मिली है. हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के उस नोटिस पर स्टे लगा दिया है, जिसमें बागी विधायकों पर अयोग्य करार होने का खतरा बरकरार था. हालांकि, अभी ये अंतिम फैसला नहीं है. 11.20 AM: हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है. सभी पक्ष की ओर से लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ चुके हैं. केंद्र को पक्षकार बनाने वाली याचिका को अदालत ने सही करार दिया है. 11.07 AM: राजस्थान स्पीकर की ओर से याचिका दायर की गई है कि सचिन पायलट गुट ने केंद्र को पक्षकार बनाने की जो अपील की है, वो गलत है. ऐसे में इस अपील को खारिज कर देना चाहिए. 10.46 AM: राजस्थान हाईकोर्ट में सचिन पायलट गुट की याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है. अब केंद्र सरकार भी इसमें पक्षकार है, ऐसे में केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से कानूनी पक्ष रखा जा रहा है. 10.40 AM: राजस्थान हाईकोर्ट ने सचिन पायलट गुट के विधायक पृथ्वीराज मीणा की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की बात कही गई थी. 10.07 AM: अब से कुछ देर में राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होगी. पायलट गुट की याचिका पर हाईकोर्ट को आज अपना फैसला सुनाना है. 09.00 AM: सचिन पायलट गुट की याचिका पर अब से कुछ देर में फैसला सुनाया जाएगा. फैसले पर नजर इसलिए भी हैं क्योंकि पायलट गुट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र को पक्षकार बनाने को कहा है, यानी अगर इसे स्वीकारा जाता है तो तुषार मेहता या वेणुगोपाल अदालत में पेश हो सकते हैं. ऐसे में इस मामले के लंबा खिंचने की भी उम्मीद है. क्या होगा पायलट गुट का भविष्य? पार्टी में ही बागी रुख अपनाने वाले सचिन पायलट और उनके साथियों ने स्पीकर का नोटिस मिलने के बाद अदालत का रुख किया था. विधायक दल की बैठक में शामिल ना होने पर कांग्रेस ने स्पीकर से शिकायत की, फिर स्पीकर ने नोटिस दिया. इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित किया, साथ ही स्पीकर को कोई एक्शन ना लेने को कहा. अब इसी पर आज सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाया जाएगा.
जयपुर, 24 जुलाई 2020,राजस्थान के सियासी संकट में अब राज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री के बीच जंग छिड़ती नजर आ रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से कहा गया है कि उन्होंने विधानसभा सत्र बुलाने की अपील की है, लेकिन राज्यपाल की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है. लेकिन अब खबर है कि राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से अभी कोरोना संकट का हवाला दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल की ओर से कहा गया है कि अभी भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस के विधायक कोरोना वायरस से पीड़ित हैं. ऐसे में विधानसभा का सत्र बुलाना ठीक नहीं होगा. यानी अशोक गहलोत गुट को पहले हाईकोर्ट से झटका लगा और अब राजभवन से भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है. ऐसी स्थिति में अशोक गहलोत सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा सकता है. जिसमें तत्काल विधानसभा का सत्र बुलाने और बहुमत साबित करने की बात की जा सकती है. हालांकि, अभी राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र की ओर से कोई अंतिम निर्णय आना भी बाकी है. साफ है कि अशोक गहलोत के सामने अब लगातार चुनौतियां आ रही हैं. क्योंकि एक तरफ विधायकों की मांग है कि वो जल्द बहुमत साबित करें और होटल से बाहर निकलें. इसके अलावा पायलट गुट को दिए गए नोटिस पर भी स्टे लग गया है, ऐसे में अदालत की कार्यवाही लंबा वक्त ले सकती है. हमलावर हुए अशोक गहलोत अशोक गहलोत का कहना है कि उन्होंने राज्यपाल से कहा है कि अगर वो सत्र नहीं बुलाते हैं तो वह सभी विधायकों को लेकर उनके पास आ रहे हैं और सत्र बुलाने की अपील करेंगे. हालांकि, इसपर भी अभी राज्यपाल की ओर से इजाजत नहीं मिली है. शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल पर केंद्र की ओर से दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन उन्होंने संविधान की शपथ ली है और ऐसे में उन्हें किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए. सीएम ने कहा कि अगर राज्य की जनता आक्रोशित होकर राजभवन का घेराव कर लेती है, तो फिर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. बता दें कि अशोक गहलोत का दावा है कि उनके पास पूर्ण बहुमत है, ऐसे में सत्र बुलाकर राज्य के संकट के साथ साथ इस संकट पर भी चर्चा हो जाएगी और सबकुछ जनता के सामने आ जाएगा. इससे पहले हाईकोर्ट की ओर से गहलोत गुट को झटका लगा था. क्योंकि हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के उस नोटिस पर स्टे लगा दिया है, जिसमें सचिन पायलट गुट को अयोग्य करार करने की बात थी. स्टे के मुताबिक, अब अगले फैसले तक स्पीकर बागी विधायकों पर कोई फैसला नहीं ले पाएंगे.
नई दिल्ली/जयपुर, 22 जुलाई 2020,राजस्थान की सियासी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा विधायकों को लेकर दिए गए निर्देश पर सवाल उठाए गए हैं. दूसरी ओर अभी सचिन पायलट गुट की ओर से भी SC में अपील की गई है कि उनका पक्ष भी जरूर सुना जाए. सर्वोच्च अदालत में ये सुनवाई कब होगी, अभी इसपर रजिस्ट्री को फैसला करना है. बड़े अपडेट्स: 03.00 PM: चीफ जस्टिस की ओर से अभी इस मामले को सुनने के लिए बेंच का गठन किया जाना है. वहीं, रजिस्ट्री जल्द ही सुनवाई की तारीख और वक्त भी बताएगी. 02.43 PM: सचिन पायलट गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी गई है. अदालत में कहा गया है कि कोर्ट बिना उनका पक्ष सुने कोई आदेश जारी ना करें. 01.30 PM: सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी ने फोन टैपिंग मामले में अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को दे दी है. सरकार ने किसी तरह की फोन टैपिंग होने से इनकार किया है. 12.38 PM: सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान स्पीकर की याचिका का मामला उठा है. स्पीकर की ओर से कपिल सिब्बल ने अपील की है कि आज ही इस मामले की सुनवाई की जाए. हालांकि, चीफ जस्टिस ने कहा है कि आप इसे रजिस्ट्रार के सामने मेंशन करें, वो ही बताएंगे. चीफ जस्टिस ने फिलहाल तुरंत सुनवाई से इनकार किया है. कोर्ट ने कहा है कि रजिस्ट्री में जाएं, वहां से ही पता लगेगा कि मामला कब सूचीबद्ध होगा. 11.22 AM: राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल कर दी है. वकील सुनील फर्नाडिंज के जरिए ये याचिका दायर की गई है. 11.04 AM: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर अपने विधायकों के साथ नजर आए. यहां होटल में बुधवार सुबह अशोक गहलोत विधायकों के पास पहुंचे. 11.04 AM: राजस्थान में विधायक खरीद-फरोख्त मामले में बांसवाड़ा भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष मनोहर लाल त्रिवेदी को एसओजी ने पूछताछ के लिए नोटिस दिया है. 10.00 AM: विधानसभा स्पीकर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल दलील रख सकते हैं. 09.18 AM: स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि किसी विधायक को अयोग्य घोषित करने का अधिकार स्पीकर का है, जबतक निर्णय ना हो जाए उस तबतक कोई इसमें दखल नहीं दे सकता है. हम संसदीय लोकतंत्र की पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी विधायक को नोटिस देना स्पीकर का काम है, हम सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का पालन कर रहे हैं. अभी तो सिर्फ नोटिस भेजा है, कोई फैसला नहीं लिया गया है. स्पीकर ने कहा कि अगर हम कोई फैसला करते हैं, तो कोर्ट रिव्यू कर सकता है. हमारी अपील है कि विधानसभा के अध्यक्ष के काम में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. सीपी जोशी ने कहा कि वो हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में SLP देंगे, क्योंकि अदालत स्पीकर के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने कहा है कि जब तक स्पीकर कोई फैसला नहीं ले, कोर्ट कोई डायरेक्शन नहीं देगा. 1992 में संविधानिक बेंच ने यह तय कर दिया है कि दल-बदल कानून पर स्पीकर ही फैसला लेगा, ऐसे में स्पीकर के निर्णय लेने के बाद रिव्यू का अधिकार हाईकोर्ट के पास है. 08.00 AM: राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. हाईकोर्ट ने स्पीकर को विधायकों पर एक्शन लेने से रोक दिया था और 24 जुलाई तक रोक लगाई थी. इस बीच आज स्पीकर मीडिया से बात करेंगे. राजस्थान में जल्द फ्लोर टेस्ट करवाने के मूड में कांग्रेस, ‘निकम्मा’ कमेंट पर गहलोत को नसीहत हाईकोर्ट ने दी पायलट गुट को कुछ राहत कांग्रेस की विधायक दल बैठक में शामिल ना होने के बाद स्पीकर की ओर से सचिन पायलट और उनके साथियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इसी के बाद पायलट गुट ने हाईकोर्ट का रुख किया था, अदालत में दलील दी गई कि स्पीकर सिर्फ विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ही ऐसे व्हिप के बाद नोटिस दे सकता है. जबकि दूसरी ओर से कहा गया कि अभी स्पीकर ने कोई एक्शन नहीं लिया है, ऐसे में अदालत इस मामले में दखल ना दे. शुक्रवार से मंगलवार तक चली इस सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. 24 जुलाई को मामले की फिर सुनवाई होगी, तबतक स्पीकर को विधायकों पर कोई कानूनी एक्शन ना लेने को कहा गया है. फ्लोर टेस्ट की ओर बढ़े कदम एक तरफ राजस्थान में कानूनी दांव पेच जारी है, तो दूसरी ओर अब कांग्रेस की ओर से फ्लोर टेस्ट की तैयारी शुरू हो गई है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि आज नहीं तो कल फ्लोर टेस्ट होना ही है, ऐसे में ये जितना जल्दी हो सके उतना अच्छा है. ताकि कुनबा ना टूट पाए. वहीं, पार्टी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नसीहत भी दे दी है. उन्होंने जिस तरह सचिन पायलट के लिए निकम्मा और नाकारा शब्द का इस्तेमाल किया, उससे हाईकमान खुश नहीं है.
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबियों पर शिकंजा और कसता जा रहा है. फर्टिलाइजर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आज कई जगहों पर छापेमारी कर रही है. ईडी की छापेमारी सीएम गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के यहां भी जारी है. ईडी राजस्थान में जोधपुर समेत 6 जगहों, पश्चिम बंगाल में दो जगहों, गुजरात में चार जगहों और दिल्ली में एक जगह पर छापेमारी कर रही है. अग्रसेन गहलोत की कंपनी अनुपम कृषि पर किसानों के लिए रियायतों दरों में खरीदी उर्वरक को अधिक दामों पर मलेशिया और वियतनाम को बेचने का आरोप है. ईडी के मुताबिक, यह 150 करोड़ का घोटाला है. बीते दिनों ही सीएम अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत का नाम फर्टिलाइजर घोटाले में आया था. आरोप है कि अग्रसेन गहलोत ने 2007 से 2009 के बीच किसानों के लिए ली गई उर्वरक को प्राइवेट कंपनियों को दिया गया. इस दौरान केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी और राज्य में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे. क्या है पूरा मामला दरअसल, म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) निर्यात के लिए प्रतिबंधित है. एमओपी को भारतीय पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा आयात किया जाता है और किसानों को रियायती दरों पर वितरित किया जाता है. आरोप है कि 2007-2009 के बीच अग्रसेन गहलोत, (जो आईपीएल के लिए अधिकृत डीलर थे) ने रियायती दरों पर MoP खरीदा और किसानों को वितरित करने के बजाय उन्होंने इसे कुछ कंपनियों को बेच दिया. राजस्व खुफिया निदेशालय ने 2012-13 में इसका खुलासा किया था. बीजेपी ने लगाए थे ये आरोप भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगया था कि राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई की कंपनी ने कथित रूप से सब्सिडी वाले उर्वरक का निर्यात किया, जो घरेलू उपभोग के लिए था. बीजेपी ने कहा था कि अग्रसेन गहलोत की कंपनी ने देश के किसानों के लिए आयात किए जाने वाले उर्वरक, पोटाश के मूरेट का निर्यात किया था. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था, 'यह सब्सिडी की चोरी का एक स्पष्ट मामला है और यह सब 2007 से 2009 के बीच हुआ, जब कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए केंद्र में सत्ता में थी. उस समय अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे. जिस तरह सस्ती दर पर उर्वरक का निर्यात किया गया था, संदेह उठाता है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है.' गहलोत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें हालांकि, अग्रसेन गहलोत ने उस वक्त सभी आरोपों को खारिज कर दिया था. अब इस मामले की ईडी ने जांच शुरू कर दी है. राजस्थान के सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. इससे पहले आयकर और ईडी ने गहलोत के करीबियों पर छापेमारी की थी.
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से अपने स्वभाव के विपरीत जाकर अपने पूर्व डिप्टी सचिन पायलट के खिलाफ ‘निकम्मा, नाकारा’ जैसी भड़ास निकालना महज पायलट की बगावत के चलते या नापसंदगी की वजह से ही नहीं है. राजस्थान कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक गहलोत ने पार्टी हाईकमान की भी अवहेलना की जहां से उन्हें संयम बरतने की सलाह मिल रही थी. और ये हताशा से ज्यादा डर की वजह से हुआ. राजस्थान में वर्तमान में राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और ऐसे में विधायकों की वफादारी सबसे अहम है. लेकिन लिफाफे के पीछे की जाने वाली फौरी गिनती से पता चलता है कि गहलोत के लिए निश्चित समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या खतरनाक ढंग से नीचे गिरी है. अगर बीजेपी और पायलट कांग्रेस के सहयोगियों और निर्दलियों को तोड़ने में सफल रहते हैं या वो खुद ही मुख्यमंत्री से नाता तोड़ने का फैसला करते हैं तो गहलोत कैंप और बीजेपी समर्थित सचिन पायलट कैंप के बीच का अंतर 2-3 विधायक का ही रह सकता है. राजस्थान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति खरीद-फरोख्त के लिए उपजाऊ नजर आती है. वफादारी इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन बेहतर डील ऑफर करता है. गहलोत विरोधी कैंप के आंकड़े राजस्थान विधानसभा में बीजेपी के पास 72 विधायकों का एक मजबूत ब्लॉक है. इसे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायकों और 1 निर्दलीय का प्रतिबद्ध समर्थन हासिल है. पायलट के वॉकआउट से पहले बीजेपी के साथ कुल 76 विधायक थे. पायलट वॉकआउट से पहले बीजेपी+ - कुल 76 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 सचिन पायलट ग्रुप के पास कांग्रेस के 19 विधायक (स्पीकर ने 19 को नोटिस दिए हैं) हैं. इस तरह बीजेपी+ और पायलट ग्रुप को मिलाकर गहलोत के खिलाफ कुल 95 विधायकों का जोड़ बैठता है. बीजेपी+ और पायलट ग्रुप – कुल 95 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 पायलट ग्रुप -19 पायलट वॉकआउट से पहले बीजेपी+ - कुल 76 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 सचिन पायलट ग्रुप के पास कांग्रेस के 19 विधायक (स्पीकर ने 19 को नोटिस दिए हैं) हैं. इस तरह बीजेपी+ और पायलट ग्रुप को मिलाकर गहलोत के खिलाफ कुल 95 विधायकों का जोड़ बैठता है. बीजेपी+ और पायलट ग्रुप – कुल 95 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 पायलट ग्रुप -19 पायलट वॉकआउट से पहले बीजेपी+ - कुल 76 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 सचिन पायलट ग्रुप के पास कांग्रेस के 19 विधायक (स्पीकर ने 19 को नोटिस दिए हैं) हैं. इस तरह बीजेपी+ और पायलट ग्रुप को मिलाकर गहलोत के खिलाफ कुल 95 विधायकों का जोड़ बैठता है. बीजेपी+ और पायलट ग्रुप – कुल 95 बीजेपी - 72 आरएलपी - 3 निर्दलीय- 1 पायलट ग्रुप -19 गहलोत कैंप के आंकड़े गहलोत कैंप का दावा है कि पायलट ग्रुप के 19 विधायकों के जाने के बाद उसे 107 विधायकों का समर्थन हासिल है. यह संभव नहीं है. क्योंकि अभी बीजेपी+ और पायलट ग्रुप से बाहर सिर्फ 105 विधायक ही हैं. यहां तक ​​कि ये आंकड़ा भी निश्चित आंकड़ा नहीं हो सकता. आइए गणना करते हैं. पायलट की बगावत से पहले गहलोत को 124 विधायकों का समर्थन हासिल था. गहलोत+ कुल 124 कांग्रेस- 107 बीटीपी- 2 सीपीएम -2 आरएलडी - 1 निर्दलीय- 12 पायलट के नेतृत्व में 19 विधायकों का समर्थन बरकरार न रहने से गहलोत कैंप का आंकड़ा 105 तक नीचे आ गया. वहीं बीजेपी+ और पायलट ग्रुप को मिलाकर 95 विधायक हैं. गहलोत कैंप के 105 विधायकों में से राज्य विधानसभा के स्पीकर तब तक वोट नहीं दे सकते जब तक कि वोट या फ्लोर टेस्ट के दौरान टाई न हो. इससे ये आंकड़ा 104 पर आ जाता है. चुरू क्षेत्र के सुजानगढ़ से एक कांग्रेस विधायक मास्टर भंवर लाल, जो कैबिनेट में सामाजिक न्याय मंत्री है, वो गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं और गंभीर मेडिकल स्थिति से जूझ रहे हैं. वो फ्लोर टेस्ट में फिलहाल हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं हैं. इससे गहलोत कैंप की ताकत 103 विधायक तक नीचे आ जाती है. गहलोत के आंकड़ों की कमजोरी यदि यह संख्या 103 (गहलोत कैंप) बनाम 95 (बीजेपी+ और पायलट ग्रुप) है तो गहलोत की नैया पार लग जाएगी भले ही स्पीकर और एक बीमार विधायक फ्लोर टेस्ट में वोट नहीं करें. लेकिन यह वह जगह है जहां गहलोत की संख्या मुश्किल में पड़ सकती है. बीजेपी और सचिन पायलट कैंप की निर्दलीय उम्मीदवारों और गहलोत के सहयोगियों पर नजर है जो गुटबाजी के शिकार हैं. सीपीएम की चिंता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधानसभा में 2 विधायक हैं- बलवंत पूनिया और गिरधारी मेहारिया. पूनिया की वफादारी पर पहले से ही सवालिया निशान है. राज्य में हालिया राज्यसभा चुनावों में पार्टी के निर्देशों की अवज्ञा के लिए 22 जून को सीपीएम की राजस्थान इकाई को पूनिया को एक साल के लिए पार्टी से निलंबित करना पड़ा. राजस्थान में अपनी विधानसभा यूनिट में विभाजन के डर से लेफ्ट पार्टी ने मंगलवार को अपने राज्य सचिव और पूर्व विधायक अमरलाल के जरिए एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि उनकी पार्टी अभी न कांग्रेस के साथ है और न ही बीजेपी के साथ. अगर सीपीएम के 2 विधायकों में से 1 अनुपस्थित या संदिग्ध हो जाता है, तो अशोक गहलोत के आश्वस्त वोट 102 तक कम हो जाएंगे. बीटीपी का रुख दो विधायकों के साथ भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) गहलोत को समर्थन दे रही थी. लेकिन कुछ दिनों पहले इस पार्टी के एक विधायक का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें विधायक ने बताया था कि कैसे राज्य पुलिस ने उसकी चाबियां छीन ली थीं और बंद रहने के लिए मजबूर किया था. पार्टी ने एक बयान भी जारी किया कि वह कांग्रेस और बीजेपी दोनों से समान दूरी बनाए रखना चाहती है. यदि हम संदिग्ध सूची में दो और विधायक जोड़ते हैं, तो गहलोत खेमे के साथ सुनिश्चित वोटों की संख्या 100 रह जाती है. निर्दलीय अगला निर्णायक फैक्टर निर्दलीय हो सकते हैं. विधानसभाओं और संसद में पाला बदलने के लिए सबसे पहले निर्दलियों पर ही अहम दलों की नजर रहती है. पायलट ग्रुप का दावा है कि कुल 13 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 2 और ने इसका समर्थन किया है. जबकि गहलोत कैंप इस दावे को खारिज करता है. यदि 2 निर्दलीय विधायकों को हटा दिया जाए तो गहलोत कैंप की संख्या 98 पर आ जाएगी और बीजेपी+ और पायलट ग्रुप की संख्या बढ़ कर 97 हो जाएगी. और गहलोत 98 बनाम 97 विधायक मुकाबले से बचना चाहेंगे क्योंकि बीजेपी ने इस तरह की क्लोज फाइट को जीतने में पूर्व में ज्यादा महारत दिखाई है. गहलोत की और चिंताएं इस गणना में बहुत सारे किंतु-परंतु शामिल हैं लेकिन यह सिर्फ आंकड़ों की नाजुकता और गहलोत की चिंता के कारणों की ओर इशारा करती है. गहलोत एक बुद्धिमान राजनेता हैं और बीजेपी के लिए निश्चित तौर पर मुश्किलें खड़ी कर देंगे. लेकिन उनकी चिंताओं को यह तथ्य और बढ़ाता है कि उनके साथ 98 विधायकों में 6 पहले बीएसपी में थे और चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे. उनके इस कदम ने बीएसपी सुप्रीमो को बहुत नाराज किया था और उन्होंने सहयोगी के रूप में कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोपने का आरोप लगाया था. दिलचस्प बात यह है कि गहलोत के पास अब मूल कांग्रेस परिवार के केवल 82 लोग ही हैं. इससे गहलोत सरकार की निर्भरता बीटीपी के 2, सीपीएम के 2 और निर्दलीय विधायकों पर और बढ़ जाती है. इस तरह गहलोत की विधानसभा में बढ़त इतनी पतली है कि अगर बीजेपी+ और पायलट कैंप ने कांग्रेस के कुछ और विधायकों को लुभाने या विश्वास मत के मामले में अनुपस्थित रहने के लिए तैयार करने में कामयाबी पाई तो गहलोत वाकई गंभीर परेशानी में होंगे.
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020, राजस्थान में बागी रुख अपना चुके सचिन पायलट गुट की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है. हर किसी की नजरें अदालत पर टिकी हैं, क्योंकि इसी फैसले पर अशोक गहलोत की सरकार का भविष्य तय हो सकता है. लेकिन सोमवार को अदालत की ओर से की गई एक टिप्पणी गहलोत गुट के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि अदालत ने कहा कि पार्टी की बैठक के लिए व्हिप को लागू नहीं किया जा सकता है. दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने लगातार दो बार विधायक दल की बैठक बुलाई और व्हिप जारी किया. इसका पालन ना होने पर ही स्पीकर ने पायलट गुट को नोटिस जारी किया. इसी के खिलाफ सचिन पायलट गुट की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इसी दौरान सोमवार को सुनवाई के बीच अदालत में पक्ष रखे जा रहे थे, तो चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या मीटिंग के लिए कोई पार्टी व्हिप जारी कर सकती है? जिसके बाद उन्होंने खुद कहा कि किसी पार्टी मीटिंग के लिए व्हिप लागू नहीं होता है. बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो नोटिस दिया गया है, उसकी तारीख भी आज ही खत्म हो रही है. ऐसे में अब हर किसी की नजर इस बात पर भी है कि क्या इस मामले का फैसला आज ही आ सकता है या फिर तारीख को आगे बढ़ाया जाएगा. अदालत में विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि अभी स्पीकर ने विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की है, सिर्फ जवाब लेने के लिए नोटिस दिया है. ऐसे में अदालत इस मामले में हस्तक्षेप ना करे. हालांकि, सचिन पायलट गुट की ओर से भी कहा गया कि अभी विधानसभा का सत्र नहीं है, ऐसे में विधानसभा स्पीकर हमें नोटिस नहीं दे सकते हैं. इसके अलावा हमने पार्टी के अंदर रहकर ही अपनी बात रखी है, सरकार गिराने की बात नहीं की है.
जयपुर, 21 जुलाई 2020,राजस्थान की सियासत में टेप कांड से बवाल जारी है. इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की थी. मुख्य सचिव आज केंद्र सरकार को टेलिफोन टैपिंग के मामले में अपना जवाब सौंपेंगे. सूत्रों का कहना है कि इस जवाब में राजस्थान सरकार ने बीजेपी नेता संजय जैन के फोन को टैप करने की बात कबूली है. सरकारी सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार ने कहा है कि वह संजय जैन का टेलीफोन टेप कर रही थी, क्योंकि उसकी गतिविधियां संदिग्ध थी. राजस्थान सरकार ने दावा किया है कि हमने किसी भी राजनीतिक व्यक्ति का टेलीफोन टेप नहीं किया है. यह जवाब आज केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जा रहा है. गौरतलब है कि राजस्थान की सरकार को कथित तौर पर गिराने की साजिश को लेकर दो ऑडियो क्लिप सामने आए थे. इसके बाद राजस्थान सरकार पर नेताओं का फोन टैप करने का आरोप लगा था. इस पर केंद्र सरकार ने 18 जुलाई को राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी. ऑडियो क्लिप पर कांग्रेस का क्या है आरोप कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी और कांग्रेस के कुछ विधायक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश रच रहे थे. कांग्रेस के मुताबिक, ऑडियो क्लिप में कांग्रेस से निलंबित विधायक भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह, बीजेपी नेता संजय जैन और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में बात कर रहे हैं. संजय जैन को किया गया गिरफ्तार ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद पूरे मामले की जांच एसओजी को दी गई थी. एसओजी ने बीजेपी नेता संजय जैन से कई राउंड की पूछताछ की. बाद में इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. फिर मामले को एसीबी को सौंप दिया गया. संजय जैन को गिरफ्तार कर लिया गया है. एसीबी ने शुरू की ऑडियो की जांच राजस्थान एसीबी के महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने कहा कि एजेंसी ने कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है. प्राथमिकी में बागी विधायक भंवरलाल शर्मा की गजेन्द्र सिंह और एक अन्य व्यक्ति संजय जैन के साथ बातचीत का विस्तृत ब्योरा है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भेजा गया नोटिस कांग्रेस का दावा है कि ऑडियो टेप में जिस गजेन्द्र सिंह का नाम आ रहा है वह केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ही हैं. इसके बाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को वॉयस सैंपल टेस्ट के लिए नोटिस भेजा गया है. हालांकि, गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पहले जांच एजेंसी ऑडियो क्लिप का सोर्स बताए.
जयपुर, 21 जुलाई 2020, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबियों पर इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बाद अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का शिकंजा कसता जा रहा है. सीएम गहलोत के ओएसडी देवाराम सैनी आज सीबीआई ने पूछताछ की. करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई. सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी देवाराम सैनी से सीबीआई चूरू के थानाधिकारी विष्णुद्त विश्नोई की मौत के मामले में पूछताछ कर रही है. सीबीआई की जांच पहले से चल रही थी, लेकिन इस केस में सीबीआई अब ज्यादा सक्रियता दिखा रही है. सोमवार को सीबीआई ने कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनियां के घर पर छापेमारी की थी. विधायक कृष्णा पुनियां से आज भी होगी पूछताछ सीबीआई आज फिर विधायक कृष्णा पूनियां से भी पूछताछ करेगी. गौरतलब है कि 23 मई को चूरू के थानाधिकारी विष्णुद्त विश्नोई का शव उनके आवास की छत से लटकता पाया गया था. राजस्थान सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. क्या है पूरा मामला विष्णुद्त विश्नोई के शव के पास से दो सुसाइड नोट मिले थे. इसमें से एक उनके माता-पिता को और दूसरा जिले के पुलिस अधीक्षक को संबोधित था. पुलिस अधीक्षक को लिखे गए सुसाइड नोट में विश्नोई ने कहा था कि वह खुद पर डाले जाने वाले दबाव को बर्दाश्त करने में समर्थ नहीं थे. उन्होंने राजस्थान पुलिस की सेवा का हरसंभव प्रयास किया.
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी जंग अब बगावत के बाद कानूनी रूप ले चुकी है. पिछले कुछ दिनों से हाई कोर्ट में सचिन पायलट गुट की याचिका पर सुनवाई हो रही है और आज इस पर फैसला आ जाएगा. इस बीच कांग्रेस ने अपनी ओर से हर स्थिति की तैयारी कर ली है. सूत्रों की मानें तो अगले कुछ दिनों में ही अशोक गहलोत की सरकार फ्लोर टेस्ट का दांव चल सकती है. भले ही अब हर किसी की नजर हाई कोर्ट के फैसले पर हो, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जल्द ही फ्लोर टेस्ट करवाना चाहती है. ताकि इस मामले को खत्म किया जा सके. एक वरिष्ठ नेता ने ये भी कहा कि अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, वह गैरजरूरी था. इस विषय पर पार्टी हाईकमान की ओर से अशोक गहलोत को संदेश पहुंच भी गया है. साफ कहा गया है कि वह अपने पूर्व डिप्टी सीएम के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. बता दें कि सोमवार को अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को निकम्मा और नाकारा कहा था. सूत्रों की मानें, तो कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि अशोक गहलोत की सरकार बहुमत हासिल करने में सफल होगी. हालांकि, कांग्रेस को डर है कि अगर ये लड़ाई लंबी चली तो वह अपना किला ज्यादा देर तक नहीं संभाल पाएगी. इसलिए अब फ्लोर टेस्ट पर फोकस है. आपको बता दें कि राजस्थान में बहुमत के लिए 101 से अधिक विधायक चाहिए, बीते दिनों अशोक गहलोत ने 102 से अधिक विधायक होने का दावा किया था. हालांकि, गहलोत की कोशिश सचिन पायलट गुट के कुछ विधायकों को अपनी ओर करने की थी. लेकिन अब जब आंकड़ा बहुमत के लगभग बराबर ही है तो कांग्रेस को चिंता है कि कहीं अंतिम वक्त में कोई विधायक दगा ना दे दे.
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2020,माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) आज यानी 21 जुलाई को कक्षा 12वीं आर्ट्स की परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है. इस बार 90.70% फीसदी बच्चे पास हुए हैं. इस वर्ष 580725 छात्रों ने आर्ट्स स्ट्रीम की परीक्षा दी थी, इसमें से 526726 बच्चे पास हो गए हैं. राजस्थान बोर्ड आर्ट्स स्ट्रीम के रिजल्ट में लड़कियों ने बाजी मार ली है. यहां लड़कियों का पास परसेंटेज लड़कों के मुकाबले करीब 5 फीसदी ज्यादा है. Rajasthan Board Class 12 Arts Result में 93.10 परसेंट लड़कियां पास हुई हैं. वहीं लड़कों का पास परसेंटेज 88.45 रहा है. रिजल्ट की घोषणा के साथ ही Rajasthan Board से 12वीं आर्ट्स की परीक्षा देने वाले करीब 5 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार भी खत्म हो गया है. बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rajresults.nic.in पर स्टूडेंट्स अपना रोल नंबर डालकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं. कोरोना महामारी की वजह से इस साल रिजल्ट की घोषणा में देरी हुई है. RBSE मेरिट लिस्ट जारी नहीं करेगा. बता दें कि राजस्थान बोर्ड 12वीं का साइंस स्ट्रीम का रिजल्ट पहले ही जारी किया जा चुका है. आधिकारिक वेबसाइट्स पर आप RBSE 12th Arts Result 2020, Senior Secondary (Arts) 2020 Result चेक कर सकते हैं. Rajasthan Board Class 12 Results: इन वेबसाइटों पर जाकर चेक कर सकते हैं रिजल्ट > rajresults.nic.in > rajejuboard.rajasthan.gov.in > examresults.net rajresults.nic.in: रिजल्ट चेक करने का पूरा तरीका >rajresults.nic.in वेबसाइट पर जाएं.
जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने अशोक गहलोत सरकार से बगावत करने वाले सचिन पायलट गुट की याचिका पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई करते हुए फैसला 24 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांती और न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की अदालत ने सुनवाई करते हुए सचिन पायलट गुट की ओर दायर याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पायलट गुट को फौरी राहत दी है। फैसला सुरक्षित रखने के साथ ही हाईकोर्ट ने 24 जुलाई तक स्पीकर से भी नोटिस मामले में कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया है। पिछले दस दिन से राजस्थान सरकार पर मंडरा रहे सियासी संकट के बादल मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में छंट गए लेकिन अब भी सचिन पायलट गुट को पूरी तरह से राहत नहीं मिली है, अब फैसला 24 जुलाई को होना है। पायलट गुट ने पेश की दलीलें पायलट गुट की ओर से हाईकोर्ट में विधानसभा स्पीकर डॉ. सीपी जोशी की ओर से विधानसभा की सदस्यता खत्म किए जाने के नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की थी। शुक्रवार को सचिन पायलट गुट की ओर से वकील हरीश साल्वे ने लंदन से ऑनलाइन कोर्ट में दलीलें दी। करीब डेढ़ घंटे की पैरवी के दौरान साल्वे ने 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' का हवाला देते हुए सचिन पायलट और अन्य 18 विधायकों को दिए गए नोटिस को खारिज करने की मांग की। उनके बाद गुट की ओर से मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा। गहलोत-पायलट गुटों की विधायकों की बाड़ाबंदी राजस्थान में गहलोत सरकार पर आए सियायी संकट का सोमवार को 10वां दिन है। सरकार से बगावत करने वाला सचिन पायलट गुट सरकार के खिलाफ के बाद से राजस्थान से बाहर बाड़ाबंदी में कैद है। वहीं गहलोत गुट के विधायक जयपुर में एक होटल में ठहरे हुए है। पिछले सात दिन से विधायकों की बाड़ाबंदी की गई है। पायलट और गहलोत दोनों गुटों के विधायकों की बाड़ाबंदी के बीच मामला कोर्ट तक पहुंचा और अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी थी।
जयपुर, 21 जुलाई, राजस्थान कांग्रेस विधायक दल की बैठक मंगलवार दोपहर यहां हुई जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया । पार्टी सूत्रों ने इसकी जानकारी दी । उन्हेांने बताया कि यह बैठक दिल्ली मार्ग पर उसी होटल में हुई जहां विधायक पिछले कुछ दिनों से रुके हुए हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और वरिष्ठ नेता — रणदीप सुरजेवाला, के सी वेणुगोपाल व अजय माकन — भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि यह बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली। उल्लेखनीय है कि राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में अशोक गहलोत सरकार के समर्थक विधायक एक होटल में रुके हुए हैं। बीते लगभग एक सप्ताह में पार्टी के विधायक दल की यह तीसरी बैठक थी। इसमें कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रहे अन्य विधायक भी शामिल हुए।
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने पिछले कुछ दिनों से जारी सियासी उठापटक के बीच सोमवार को बड़ा फैसला लिया। सरकार ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को राज्य में जांच और छापेमारी की दी गई अनुमति वापस ले ली। गहलोत सरकार ने आदेश पारित कर कहा कि अब सीबीआई को राज्य में किसी जांच से पहले उसकी अनुमति लेनी होगी क्योंकि उसने सीबीआई को दिया 'जनरल कंसेंट' वापस ले लिया है। ध्यान रहे कि राजस्थान से पहले तीन राज्य ऐसा कर चुके हैं। आइए जानते हैं, किस राज्य ने किन परिस्थितियों में सीबीआई से जनरल कंसेंट वापस लिया और इसे लेकर कानून क्या कहता है. ​NDA से अलग हो नायडू ने CBI पर लगाया था बैन आंध्र प्रदेश की तत्कालीन चंद्रबाबू नायडू सरकार ने 8 नवंबर, 2018 को सीबीआई को राज्य में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। आंध्र प्रदेश ने महज तीन महीने पहले 3 अगस्त, 2018 को ही एक आदेश पारित करके सीबीआई को राज्य में जांच करने की 'आम सहमति (जनरल कंसेंट)' दी थी। तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नायडू सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था। ध्यान रहे कि चंद्रबाबू नायडू मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में एनडीए का हिस्सा थे, लेकिन मार्च 2018 में उन्होंने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया था। अगले विधानसभा चुनाव में नायडू की सत्ता छिन गई और वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। ​नायडू के रास्ते पर चल पड़ीं ममता सीबीआई को बैन करने के फैसले पर आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम चंद्रबाबू नायडू का समर्थन करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी यही काम किया। हफ्ते भर के अंदर उन्होंने प. बंगाल में सीबीआई को जांच करने की दी गई सहमति वापस ले ली। पश्चिम बंगाल ने 1989 में राज्य में सीबीआई जांच को 'जनरल कंसेंट' दिया था। जब कोलकाता में सीबीआई अफसर पर आई आफत 3 फरवरी, 2019 को शारदी चिटफंड घोटाले के संबंध में राज्य के तत्कालीन पुलिश कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए कोलकाता पहुंची सीबीआई की टीम के साथ जो हुआ, वह इतिहास में दर्ज हो गया। प. बंगाल पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया और उन्हें थाने ले गई। सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम को जबरन वैन में भरकर शेक्‍सपियर सरनी पुलिस स्‍टेशन ले जाया गया। उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। बाद में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की और कोर्ट ने राजीव कुमार गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करना का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को ममता ने लोकतंत्र और संविधान की जीत बताई थी। ​CBI को बैन करने वाला तीसरा राज्य बना छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 10 जनवरी, 2019 को आंध्र प्रदेश और प. बंगाल के नक्शे कदम पर चलते हुए सीबीआई को राज्य में जांच के लिए दिया गया जनरल कंसेंट वापस ले लिया। प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी दी और कहा कि वो सीबीआई के बता दे कि राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना वह यहां जांच करने के लिए नहीं आए। हालांकि, बघेल सरकार ने इस फैसले के पीछे का कोई कारण नहीं बताया। ​पायलट के विद्रोह के बीच गहलोत सरकार का बड़ा कदम राजस्थान सरकार ने सीबीआई से जनरल कंसेंट वापस लेने का ऐलान तब किया जब राज्य में पिछले कुछ दिनों से सियासी गहमागहमी का माहौल कायम है। गहलोत सरकार में उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे युवा नेता सचिन पायलट अपने समर्थकों के साथ बागी हो चुके हैं। उन्हें मनाने की तमाम कवायद फेल होने के बाद कांग्रेस ने उनसे दोनों पद छीन लिए और अब उनकी और उनके समर्थक विधायकों की विधानसभा सदस्यता छीनने की कवायद चल रही है। पायलट खेमे को विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से नोटिस मिला और पायलट इसके खिलाफ हाई कोर्ट चले गए। केंद्र में बीजेपी की सरकार है। ऐसे में राजस्थान की कांग्रेस सरकार को डर लग रहा होगा कि दबाव बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल हो सकता है। ​NIA जैसी नहीं है CBI दरअसल, नैशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की तरह सीबीआई का संचालन अपने निजी कानून से नहीं होता है। एनआईए के लिए एनआईए ऐक्ट है जबकि सीबीआई का संचालन दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिसमेंट (DSPE) ऐक्ट के तहत होता है। इसका सेक्शन 6 सीबीआई को दिल्ली समेत किसी भी केंद्रशासित प्रदेश से बाहर किसी राज्य में जांच करने के लिए संबंधित राज्य सरकार की अनुमति के बिना जांच करने से रोकती है। चूंकि सीबीआई के ज्यूरिस्डिक्शन में सिर्फ केंद्र सरकार के विभाग और कर्मचारी आते हैं, इसलिए उसे राज्य सरकार के विभागों और कर्मचारियों अथवा राज्यों में संगीन अपराधों की जांच के लिए अनुमति की जरूरत पड़ती है। ​जनरल कंसेंट वापस लेने का मतलब सीबीआई को राज्य से दो तरह की अनुमति मिलती है। एक- खास मामले की जांच को लेकर (केस स्पेसिफिक) और दूसरा- सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट)। जनरल कंसेंट के तहत राज्य सीबीआई को अपने यहां बिना किसी रोकटोक के जांच करने की अनुमति देते हैं। करीब-करीब सभी राज्यों ने सीबीआई को जनरल कंसेंट दिया हुआ है। इससे एजेंसी राज्य में कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में आसानी होती है और उसे हर बार राज्य से अनुमति नहीं लेनी पड़ती है। अब तक आंध्र प्रदेश, प. बंगाल, छत्तीसगढ़ और राजस्थान ने सीबीआई से जनरल कंसेंट वापस ले लिया है। इसका मतलब यह है कि अब सीबीआई इन राज्यों में पदस्थापित किसी केंद्रीय कर्मचारी या अन्य व्यक्ति के खिलाफ तब तक नया केस दर्ज और जांच नहीं कर सकती है जब तक उसे राज्य इसकी अनुमति नहीं दे दे। ​...तब राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं सीबीआई ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में डीएसपीई ऐक्ट के सेक्शन 6 को हटाने को लेकर दलील दी थी कि अब तक (2013 तक) सिर्फ 10 राज्यों ने ही जनरल कंसेंट दिया है। इससे अन्य राज्यों में जांच करने में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर संबंधित राज्य का हाई कोर्ट अनुमति दे दे तो राज्य सरकार की अनुमति के बिना भी जांच की जा सकती है। मतलब साफ है कि सीबीआई अपनी मर्जी से और राज्य सरकार की अनुमति के बिना संबंधित राज्य में छापेमारी नहीं कर सकती है। उसे अगर किसी खास मामले में जांच की जरूरत जान पड़ती है और राज्य सरकार से इसकी अनुमति नहीं मिलती है तो उसे उस राज्य के हाई कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020, राजस्थान के सियासी संग्राम में सचिन पायलट शुरू से ही खुद को पीड़ित के तौर पर पेश करते आ रहे थे. वहीं, सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और राजनीतिक दांव-पेंच में उलझा दिया है. गहलोत ने पायलट को बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने के आरोप में खलनायक के तौर पर पेश करने के बाद अब उनकी फंडिग पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतना ही नहीं कॉरपोरेट के साथ लिंक जोड़कर नया सियासी दांव चला है. अशोक गहलोत ने सोमवार को सचिन पायलट पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वो कांग्रेस का अध्यक्ष बनना चाहते थे, बड़े-बड़े कॉरपोरेट उनकी फंडिंग कर रहे हैं. बीजेपी की ओर से फंडिंग की जा रही है, लेकिन हमने सारी साजिश फेल कर दी. गहलोत ने दावा किया कि आज सचिन पायलट के समर्थन में जितने वकील केस लड़ रहे हैं, सभी महंगी फीस वाले हैं तो उनका पैसा कहां से आ रहा है. क्या सचिन पायलट इन सभी वकीलों को पैसा दे रहे हैं? अशोक गहलोत ने कहा कि पायलट साहब गाड़ी चलाकर खुद दिल्ली जाते थे, छुपकर जाते थे. हमने सचिन पायलट की साजिश का पर्दाफाश किया, बीजेपी इसके पीछे खेल रही है. गहलोत ने कहा कि हमने कभी सचिन पायलट पर सवाल नहीं किया, सात साल के अंदर एक राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं की गई. हम जानते थे कि वो निकम्मे और नाकारा थे, लेकिन मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं बल्कि मुख्यमंत्री बनकर आया हूं. हम नहीं चाहते हैं कि उनके खिलाफ कोई कुछ बोले इसीलिए सभी ने उनको सम्मान दिया है. सचिन पायलट ने अपने समर्थकों के साथ मिल कर सत्ता को पलटने की कोशिश की तो गहलोत पूरी तरह तैयार थे. उन्होंने बहुमत के आंकड़े की संख्या, लड़ाई का साजो सामन और उपकरण सब तैयार कर लिए थे. गहलोत एक के बाद एक सियासी दांव चलते जा रहे हैं. गहलोत ने पायलट के बगावत के बाद सबसे पहले अपनी सरकार को सेफ किया. इसके लिए उन्होंने 102 विधायकों के समर्थन का आंकड़ा जुटाया और फिर पायलट पर एक्शन का दांव चला. कांग्रेस ने सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया. इसके बाद अब पायलट अपनी सदस्यता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं, गहलोत ने ऐसा सियासी जाल बिछाया कि गांधी परिवार के बीच भी पायलट की छवि धूमिल हुई है. इतना ही नहीं अब सीएम गहलोत ने ऐसा सियासी दांव चला है कि उनके लिए एक-एक कर सारे सियासी दरवाजे भी बंद होते जा रहे हैं. पायलट अब न तो वापस कांग्रेस में आ पा रहे हैं और न ही बीजेपी उनकी एंट्री के लिए रेड कारपेट बिछा रही है. राजस्थान की राजनीतिक शह-मात के खेल में सचिन पायलट को ही राजनीतिक नुकसान होता नजर आ रहा है. पायलट कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखते थे, लेकिन गहलोत ने उनकी छवि को पूरी तरह से धूमिल कर दिया है. गहलोत ने अपने सियासी दांव से पायलट को विक्टिम से विलेन बना दिया है. 2018 में कांग्रेस के जीत के हीरो पायलट बने थे, लेकिन गहलोत के खिलाफ बगावत करना उन्हें मंहगा पड़ गया है. राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा कहते हैं कि राज्य में एक अच्छी खासी चलती सरकार को अस्थिर करने का आरोप भी सचिन पायलट पर लग रहा है. गहलोत ने जिस तरह से आक्रमक रुख अपनाया है, उससे साफ है कि अब कांग्रेस में उनकी एंट्री के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं. कांग्रेस के ज्यादातर विधायक अभी भी गहलोत के साथ हैं, इसीलिए कांग्रेस नेतृत्व ने पायलट से ज्यादा गहलोत को अहमियत दी है. इसीलिए गहलोत ने अब पायलट की राजनीतिक छवि को पूरी तरह से धूमिल करने की रणनीति बनायी है.
जयपुर, 20 जुलाई 2020,राजस्थान की सियासत किस करवट बदलेगी अभी तक साफ नहीं हो पाया है. सचिव पायलट और अशोक गहलोत ने एक-दूसरे के खिलाफ हर मंच पर मोर्चा खोल दिया है. वहीं, गहलोत के नकारा-निकम्मा बयान पर सचिन पायलट का जवाब आया है. सचिन पायलट ने कहा है कि मेरी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. आरोपों से दुखी हूं, लेकिन हैरान नहीं. आरोप लगाने वाले विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा. पायलट ने कहा कि मुझे यकीन है कि मेरी छवि पर इस तरह के और भी संगीन आरोप लगाए जाएंगे, लेकिन मैं अपने विश्वास में दृढ़ रहूंगा. पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सभी आरोपों को निराधार बताया. इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. गहलोत ने कहा था कि सचिन पायलट ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है, उन्हें काफी कम उम्र में बहुत कुछ मिल गया था. उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि सचिन पायलट नाकारा थे. मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं: गहलोत अशोक गहलोत ने कहा था 'हमने कभी सचिन पायलट पर सवाल नहीं किया. 7 साल के अंदर एक राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं की गई. हम जानते थे कि वो निकम्मे थे, नाकारा थे लेकिन मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं, मुख्यमंत्री बनकर आया हूं. हम नहीं चाहते हैं कि उनके खिलाफ कोई कुछ बोले, सभी ने उनको सम्मान दिया है.
जयपुर राजस्थान के चूरू जिले के सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनियां के घर पर सोमवार को सीबीआई ने छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि सीबीआई की टीम ने पूरे बंगले को घेर लिया था। आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद पता चला कि कृष्णा पूनिया यहां नहीं रहती हैं, जिसके बाद सीबीआई की टीम यहां से रवाना हो गई। जयपुर के गणपति नगर में भी कृष्णा पूनिया का आवास है। माना जा रहा है कि सीबीआई की टीम पूनिया के उस आवास पर भी पहुंची है। फिलहाल पूनिया होटल फेयरमाउंट में कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ मौजूद हैं। छापेमारी के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। SHO सुसाइड केस में हुई छापेमारी बताया जा रहा है कि एसएचओ सुसाइड केस मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई की टीम कृष्णा पूनिया के घर पर पहुंची थी। राजगढ़ थाने में 23 मई को थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई ने सुसाइड कर ली थी, जिसके बाद राज्य सरकार निशाने पर थी। थाने के स्टाफ ने स्थानीय कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया और उनके समर्थकों पर झूठी शिकायतें करने का आरोप लगाया है। इसी मामले में कृष्णा पूनिया से सीबीआई पूछताछ करना चाह रही है। हालांकि छापेमारी की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। यहां आपको बता दें कि राजस्थान में सियासी संकट शुरू होने के बाद से लगातार कांग्रेस और उससे जुड़े नेताओं के ठिकानों पर आयकर विभाग, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी जारी है। कृष्णा पूनियां को जेड श्रेणी की सुरक्षा राजस्थान पुलिस ने चूरू जिले के सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनियां को जीवन के खतरे को देखते हुए जेड श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करवाई है। विधायक के पति को दो सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) की सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के बाद विधायक और उनके पति को सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय पुलिस अधीक्षक सीआईडी (सुरक्षा) की रिपोर्ट पर लिया गया। जो मई में आत्महत्या करने वाले पुलिस निरीक्षक विष्णु दत्त विश्नोई पर दबाव डालने में शामिल होने के आरोपो का सामना कर रही विधायक कृष्णा पूनिया के जान के खतरे की समीक्षा कर रहे थे। बीजेपी और बसपा नेताओं ने विधायक कृष्णा पूनियां पर पुलिस निरीक्षक विष्णु दत्त विश्नोई पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था जिसे पूनियां ने खारिज कर दिया था। पुलिस निरीक्षक के आत्महत्या मामलें की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है। राज्य में जेड श्रेणी की सुरक्षा पाने वाली पूनियां दूसरी विधायक हैं। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
जयपुर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित 102 विधायकों के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है. अदालत में ये शिकायत वकील ओम प्रकाश की ओर से दी गई है. बता दें कि गहलोत गुट के विधायक जयपुर के एक होटल में ठहरे हुए हैं. उनका एक वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है, जिसमें नजर आ रहा है कि विधायक लगान फिल्म देख रहे हैं. ये सभी विधायक तभी से होटल में हैं जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीएम हाउस में मीडिया के सामने 100 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा किया था. बीते कुछ दिनों से राजस्थान में मचे सियासी घमासान में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. कांग्रेस-बीजेपी के नेता अपने-अपने मोर्चे पर पलटवार करने से चूक नहीं रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रदेश के मौजूदा हालात को कोरोना से जोड़ते हुए वैक्सीन तैयार करने की बात कही थी. सिब्बल ने दलबदल करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए संविधान संशोधन कर, कानून सख्त करने की मांग की. इधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फोन टेपिंग मामले में राज्य के प्रमुख सचिव से रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों ने बताया कि मामले में गृह मंत्रालय ने राजस्थान के प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे प्राइवेसी का हनन बताया था. वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने टेप कांड में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने पर सवाल खड़े किए थे.
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020, राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच शह-मात के खेल में बीजेपी भी खुलकर मैदान में आ गई है. गहलोत सरकार ने फोन टैपिंग मामले में जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान में फोन टैपिंग कांड को काफी गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वहीं, बीजेपी ने इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई है. अब कांग्रेस ने बीजेपी के रुख पर ही सवाल खड़े कर दिए. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी की मांग पर केंद्र सरकार राजस्थान को फोन टैपिंग मामले की जांच सीबीआई को सौंप सकती है? दरअसल, राजस्थान की गहलोत सरकार को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश के तथाकथित ऑडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री व बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. वहीं, ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फोन टैपिंग के आरोपों के संबंध में राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है. साथ ही बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने रविवार को राजस्थान के पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठा दी. इस पर कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, 'क्या केंद्र सरकार के और बड़े नेता इसमें शामिल हैं? सीबीआइ जांच करवाकर क्या वो नामों को दबाना चाहते हैं?' साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'हॉर्स ट्रेडिंग और सरकार गिराने के गंभीर आरोप लगे हैं. इसमें विधायकों के साथ केंद्रीय मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं. पुलिस की जांच चल रही है और एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है. इसमें रुकावट डालने के लिए बीजेपी ने अपनी सुविधा के अनुसार सीबीआई जांच की मांग की है. केंद्रीय गृह मंत्रालय भी सामने आ गया है. क्या मामले में क्लीनचिट देने के लिए जांच सीबीआई को दी जाएगी?' सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह ने aajtak.in को बताया कि सीबीआई का मुख्य काम केंद्र से जुड़े हुए भ्रष्टाचार, गंभीर आर्थिक अपराधों और धोखाधड़ी की जांच करना है. साथ ही यह राज्यों में होने वाले बड़े अपराध, एनकाउंटर या फिर भ्रष्टाचार से संबंधित जांच राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार सीबीआई के द्वारा कराती है. इसके पीछे मूल वजह यह रही है कि केंद्र सरकार के पास सीबीआई के सिवा कोई दूसरी जांच एजेंसी नहीं थी. हालांकि, सरकार ने अब एनआईए का गठन किया, जो आतंकवाद जुड़े मामले की जांच करती है. पूर्व निदेशक एपी सिंह कहते हैं कि सीबीआई किसी भी केस को सीधे नहीं लेती है. सीबीआई जांच अपने हाथ में तभी लेती है, जब कोई राज्य सरकार अपने यहां किसी घटना की जांच को सीबीआई से कराने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करती है और वह उसे स्वीकार कर लेती है. इसके बाद ही सीबीआई मामले की जांच लेती है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट किसी भी मामले की जांच के लिए सीबीआई को आदेश देता है तब वो अपने हाथ में जांच की जिम्मेदारी लेती है. राजस्थान के मामले पर एपी सिंह ने कहा कि बीजेपी ने फोन टैपिंग मामले की जांच की मांग उठायी है. कानून का मामला राज्य सरकार के पास होता है. राज्य सरकार अगर इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करती है तो ही यह संभव हो सकेगा. ऐसे में अगर राज्य सरकार इस मामले की सिफारिश नहीं करती है तो केंद्र सरकार इसकी सीबीआई जांच नहीं करा सकती है. हालांकि, गृहमंत्रालय पूरे मामले की रिपोर्ट मांग सकता है यह उसका अधिकार है, लेकिन सीबीआई को जांच नहीं सौंप सकता है.
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर सचिन पायलट पर तीखा हमला किया है. सोमवार को अशोक गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है, उन्हें काफी कम उम्र में बहुत कुछ मिल गया था. अशोक गहलोत ने कहा कि हमने कभी सचिन पायलट पर सवाल नहीं किया, सात साल के अंदर एक राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं की गई. हम जानते थे कि वो निकम्मे थे, नकारा थे लेकिन मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं, मुख्यमंत्री बनकर आया हूं. हम नहीं चाहते हैं कि उनके खिलाफ कोई कुछ बोले, सभी ने उनको सम्मान दिया है. सीएम ने आरोप लगाया कि ये जो खेल अभी हुआ है, वो दस मार्च को होना था. 10 मार्च को मानेसर गाड़ी रवाना हुई थी, लेकिन तब हमने उस मामले को सभी के सामने लाए. अशोक गहलोत ने कहा कि वो कांग्रेस का अध्यक्ष बनना चाहते थे, बड़े बड़े कॉरपोरेट उनकी फंडिंग कर रहे हैं. बीजेपी की ओर से फंडिंग की जा रही है. राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में गुंडागर्दी हो रही है, मनमर्जी के हिसाब से छापे मारे जा रहे हैं. मुझे दो दिन पहले ही पता लग गया था कि मेरे करीबियों के छापे पड़ेंगे. सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि पायलट साहब गाड़ी चलाकर खुद दिल्ली जाते थे, छुपकर जाते थे. हमने सचिन पायलट की साजिश का पर्दाफाश किया, बीजेपी इसके पीछे खेल रही है. जो विधायक हमारे यहां पर रुके हैं, उनको कोई छूट नहीं है. लेकिन मानेसर में विधायकों के मोबाइल छीन लिए गए हैं, विधायक रो रहे हैं.
जयपुर, 19 जुलाई 2020, मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच अशोक गहलोत को अपने विरोधियों के खिलाफ राजद्रोह कानून का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी है. संगठन ने यह सलाह देश में लगातार हो रहे राजद्रोह कानून के दुरुपयोग को देखते हुए दी है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का हवाला देते हुए लिखा है कि वो इस कानून को निंदा योग्य मानते थे. यहां तक कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो (2019) में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (जो राजद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है) का जिक्र करते हुए कहा था कि इसका दुरूपयोग हो रहा है यह पूरी तरह से निरर्थक है, इसलिए इसे खत्म किया जाएगा. पीयूसीएल ने अपना स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से आरोप लग रहे हैं कि राजस्थान में विपक्ष और कांग्रेस पार्टी के अंदर के नेता चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं. यह काफी दुखद है. पूरा देश स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है. लॉकडाउन की वजह से आर्थिक संकट हमारे सामने खड़ा है. ऐसे में सारा ध्यान लोगों के स्वास्थ्य और आर्थिक संकट टालने पर होना चाहिए था. पीयूसीएल, कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी द्वारा स्पेशल पुलिस स्टेशन में तीन FIR दर्ज कराए जाने को लेकर आश्चर्यचकित है. तीनों FIR नंबर इस प्रकार हैं- 047/2020 , FIR 048/2020 और 049/2020. ये सभी FIR 120 (बी) षडयंत्र और 124 (ए) राजद्रोह के तहत कराए गए हैं. समझ नहीं आता कि राजद्रोह कानून क्यों लगाना चाहते हैं. संगठन ने लिखा, हमारी चिंता राजद्रोह कानून के दुरुपयोग से है. पीयूसीएल 2011 से लगातार इस कानून को निरस्त करने को लेकर आवाज उठाता रहा है. इस संबंध में हजारों लोगों द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ आवेदन राष्ट्रपति के पास भेजा गया है. इसके साथ ही एक याचिका राज्य सभा की पिटीशन कमिटी के समक्ष भी रखी गई है. इसके अलावा हमने स्टैंडिंग कमिटी और अन्य कई लॉ कमिशन्स के सामने भी अपनी मांग रखी है. हाल के दिनों में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए का प्रयोग सरकारी नीतियों के विरोध करने वालों के खिलाफ लगाया जाता है. फिर चाहे वो वर्तमान सरकार द्वारा हो या पहले की सरकारों द्वारा. इस कानून का औपनिवेशिक मूल रहा है जो ब्रिटिश काल में स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ प्रयोग करने के लिए बनाया गया था. लेकिन हाल के समय में इस कानून का प्रयोग मानवाधिकारों की रक्षा करने वाले, सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट और हजारों आम नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है. आवाज उठाने वालों को जेल भेजा जा रहा है. कई प्रदेशों ने इस कानून के तहत कई बच्चों को लंबे समय तक बंदी बना कर रखा था. जब तक कि मामला कोर्ट के संज्ञान में नहीं पहुंचा. हमने यह भी देखा है कि एनडीए सरकार के दौरान अलग-अलग श्रेणी में इसका दुरुपयोग हो रहा है. खासकर उन लोगों के खिलाफ जो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग सरकार और उनकी नीतियों के खिलाफ बोलकर कर रहे हैं. यही कारण था कि महात्मा गांधी ने धारा 124ए को नागरिकों के अधिकार को छीनने वाला बताया था. उनके मुताबिक यह कानून 'राजनीतिक वर्गों के राजकुमारों द्वारा आम लोगों की स्वतंत्रता के हनन करने के लिए डिजाइन किया गया था.'
जयपुर, 19 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी पारा गर्मा चुका है. कांग्रेस के जरिए बीजेपी पर गहलोत सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया जा रहा है. इस बीच कांग्रेस विधायक ने दावा किया है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में गिरफ्तार लोग वसुंधरा राजे के करीबी हैं. राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच ऑडियो टेप वायरल हुई हैं. जिसमें विधायकों की खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है. अब विधायक खरीद-फरोख्त मामले में गिरफ्तार हुए तीनों लोग भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी बताए जाते हैं. इस मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने दावा किया है कि विधायकों को खरीदने के मामले में गिरफ्तार तीनों लोग पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबी हैं. राजेंद्र गुढा ने दावा करते हुए कहा, 'गिरफ्तार संजय जैन 6 महीने पहले मुझे वसुंधरा राजे से मिलवाने के लिए आया था.' राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि होटल के अंदर 100 से अधिक विधायक हैं और गहलोत सरकार बहुमत में है. दरअसल, ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले में गहलोत सरकार ने केस दर्ज कराया है. इस मामले में अशोक सिंह, भरत मलानी और संजय जैन की गिरफ्तारी की गई है. वहीं राजस्थान एसीबी ने कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर में भंवर लाल, संजय जैन, गजेंद्र सिंह और अन्य को आरोपी बनाया गया हैं. एसआईटी का गठन बता दें कि राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो टेप वायरल हुए हैं. इसके बाद कांग्रेस ने ऑडियो टेप का हावाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया है. वहीं बीजेपी ने इससे पल्ला झाड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. जिसके बाद राजस्थान सरकार ने एसआईटी का गठन किया है.
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी खींचतान पर कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी के बागी विधायकों को मानसेर में बीजेपी के होटल से निकल जाना चाहिए. हरियाणा सरकार होटल में पुलिस तैनात करके उनकी मदद कर रही है. सचिन पायलट को बीजेपी की आवभगत को त्यागकर पार्टी से बातचीत करनी चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविवार को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सचिन पायलट को बीजेपी का आतिथ्य त्याग देना चाहिए और पार्टी से आकर सभी मसलों पर बात करनी चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक पार्टी के नाराज विधायकों का सवाल है, हम उनसे पहले ही कह चुके हैं कि मीडिया के जरिये वार्तालाप नहीं हो सकता है. आप प्रजातंत्र के अहम अंग हैं. हम इसे स्वीकार करते हैं. लेकिन परिवार का मामला परिवार में बैठकर सुलझेगा. मसला मीडिया में बयान देने से नहीं सुलझ सकता है. सुरजेवाला ने कहा कि दूसरी बात, सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को बीजेपी की मेहमानवाजी अस्वीकार करनी चाहिए. जिस प्रकार हरियाणा की बीजेपी सरकार कांग्रेस विधायकों की खातिरदारी में लगी है वह अप्रत्याशित और चौंकाने वाला है. बीजेपी के समर्थक जिस तरीके से नाराज विधायकों का पक्ष ले रहे हैं, वह कहीं न कहीं साजिश की तरफ इशारा करता है. फ्लोर टेस्ट सीएम का विवेकाधिकार फ्लोर टेस्ट के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि फ्लोर टेस्ट मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट का विवेकाधिकार है. यह सीएलपी की सिफारिश पर होता है. कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी नेतृत्व पार्टी की राज्य ईकाई से बार बार कह रहा है कि वो फ्लोर टेस्ट की मांग न करें. इसका मतलब है कि उनके बास संख्याबल नहीं है. रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस के पास बहुमत है. इस बात को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया भी स्वीकर कर चुके हैं. बीजेपी के नेता इस बात से पीछे हट गए हैं कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति शासन की मांग ही नहीं कर रही थी. बीजेपी के नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि राज्य सरकार को विश्वास मत साबित करने की जरूरत नहीं है. इन दोनों बयानों से बीजेपी के षड्यंत्र का भंडाफोड़ हो जाता है.
नई दिल्ली, 18 जुलाई 2020, राजस्थान में अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम रहे सचिन पायलट के बीच चले सियासी घमासान का कांग्रेस ने पायलट को बाहर का रास्ता दिखा एक तरह से पटाक्षेप कर दिया. अब गहलोत सरकार को बचाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस वायरल हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कथित ऑडियो टेप को आधार बनाकर पूरे संकट के लिए विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर है. कांग्रेस ने भाजपा पर गहलोत सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था. अब भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चुप्पी तोड़ते हुए मोर्चा संभाला है. वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर कहा है कि कांग्रेस, भाजपा और भाजपा नेतृत्व पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है. सरकार के लिए सिर्फ और सिर्फ जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए. उन्होंने तंज करते हुए कहा है कि कभी तो जनता के बारे में सोचिए. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के आंतरिक कलह का नुकसान आज राजस्थान की जनता को उठाना पड़ रहा है." वह इतने पर ही नहीं रुकीं. उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण प्रदेश में 500 से अधिक मौतें हो चुकी हैं. टिड्डी किसानों के खेत पर लगातार हमले कर रही है. महिलाओं के खिलाफ अपराध ने सीमाएं लांघ दी हैं. प्रदेश में बिजली समस्या चरम पर है. ऐसे समय में कांग्रेस भाजपा पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है. गौरतलब है कि वसुंधरा राजे पर भी गहलोत सरकार को बचाने के लिए अप्रत्यक्ष सहयोग के आरोप लग रहे थे. क्षेत्रफल के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चंद रोज गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम और सत्ताधारी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सचिन पायलट के बीच शुरू हुए सत्ता संघर्ष में ऑडियो टेप कांड के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम भी आ गया. ऑडियो टेप के बहाने कांग्रेस सीधे भाजपा पर गहलोत सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा रही है. कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम भी घसीटते हुए उनकी भूमिका की जांच की मांग की थी. बता दें कि सचिन पायलट ने बागी तेवर अपना यह दावा किया था कि अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में आ गई है. कांग्रेस ने पायलट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था. उन्हें मंत्री पद से भी बर्खास्त कर दिया गया था.
जयपुर, 18 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी टकराव जारी है. इस बीच राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप के मामले में आरोपियों ने वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया है. इस मामले में अब कोर्ट के जरिए अपना फैसला सुनाया जाएगा. कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बागी तेवर अपनाने के बाद राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो क्लिप वायरल हुए हैं. इस मामले में अशोक सिंह और भरत मलानी को आरोपी बनाया गया है. हालांकि अदालत के आदेश के बावजूद आरोपियों ने वॉयस सैंपल देने से मना कर दिया है. जिसके बाद इस मामले में अब कोर्ट फैसला सुनाएगी. बता दें कि राजस्थान में ऑडियो टेप लीक होने के बाद से स्पेशल ऑपरेश ग्रुप (एसओजी) भी एक्शन में है. एसओजी ने इस मामले में अशोक सिंह नामक शख्स को हिरासत में लिया गया है. अशोक सिंह पर आरोप है कि उसने भरत मलानी नाम के शख्स के साथ मिलकर लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार के खिलाफ साजिश रची. इस मामले में एसओजी ने अशोक सिंह की बातचीत का टेप एडीजे कोर्ट में पेश किया. इस बीच अशोक सिंह ने जयपुर की एडीजे कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी, जो खारिज हो गई है. कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे जेल भेज दिया. आरोप-प्रत्यारोप तेज बता दें कि राजस्थान में ऑडियो टेप वायरल होने के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी राजस्थान की गहलोत सरकार को अस्थिर कर रही है. जबकि बीजेपी का कहना है कि उसे इस प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है. वहीं ऑडियो टेप मामले में कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने दो शिकायतें दर्ज कराई हैं. ये मामले सेक्शन 124ए (राजद्रोह) और 120बी (साजिश रचने) में दर्ज कराए गए हैं. फिलहाल ऑडियो क्लिप की सत्यता की जांच की जा रही है.
जयपुर राजस्थान में जारी सियासी संकट (Rajasthan Political Crisis) के बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के लोग इस कलह की कीमत चुका रहे हैं।'
नई दिल्ली/जयपुर राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मची खींचतान के बीच सियासी समीकरण लगातार बदल रहे हैं। इस बीच कांग्रेस के बागी युवा नेता सचिन पायलट के नई पार्टी बनाने की संभावनाएं बढ़ती दिख रही हैं। सचिन पायलट की ओर से अपना एक अलग मंच बनाने के विकल्प की चर्चा शुरू से की जा रही थी लेकिन कांग्रेस की ओर से उनको लेकर नरम रुख अपनाने के संकेत सामने आते रहे। अब राजस्थान के इस सियासी संग्राम में सचिन पायलट के कोर्ट जाने से सुलह की संभावनाएं धुंधली हो रही हैं। इसी के साथ सचिन पायलट के अपनी पार्टी बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। कहा जा रहा है कि सचिन पायलट अपनी अलग पार्टी बनाने की लेकर संभावनाएं टटोल रहे हैं। खबर है कि इसके मद्देनजर उन्होंने अपने कुछ ऐसे सहयोगियों से संकर्प करने की कोशिश की है, जाे या कांग्रेस से अलग हो चुके हैं या फिर पार्टी में हाशिए पर खड़े अपनी अनदेखी से दो-चार हो रहे हैं। दूसरी ओर खबर यह भी है कि पी चिदंबरम जैसे सीनियर सहयोगी सचिन पायलट को सलाह दे रहे हैं कि पार्टी में वापस आकर मुद्दों पर बात करें और सुलझाने की कोशिश करें। राहुल गांधी की ही यंग टीम को लेकर पार्टी बनाएंगे सचिन पायलट? कांग्रेस से जुड़े जिन लोगों से संपर्क की चर्चाएं हैं, उनमें मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम से लेकर पूर्व सांसद प्रिया दत्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा और जितिन प्रसाद का नाम लिया जा रहा है। वहीं, कहा जा रहा है कि पायलट ने हरियाणा के विधायक व पूर्व मंत्री कुलदीप विश्नोई से भी संपर्क हो रहा है। दूसरी ओर जिन नामों की चर्चा है उनमें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर और कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता संजय झा भी हैं। हालांकि, ये दोनों ही अब कांग्रेस में नहीं हैं। अशोक तंवर जहां हरियाणा चुनावों से पहले कांग्रेस से निकाला गया। वहीं संजय झा के खिलाफ पार्टी ने हाल ही में सख्त कदम उठाते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है। रोचक है कि नई पार्टी के सिलसिले में जितने भी नाम सामने आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर लोग राहुल गांधी की टीम या किसी जमाने में उनकी गुडबुक का हिस्सा रहे हैं। 'सचिन पायलट भीड़ खींचना जानते हैं' नाम न छापने की शर्त पर हाशिए पर चल रहे पार्टी के एक नेता का कहना था कि बेशक ऐसा हो सकता है। जितने भी लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, वे अपेक्षाकृत युवा हैं और उनके सामने करियर और उम्र दोनों ही पड़ी है। राजनीति में अगर कोई आता है तो काम करने के लिए आता है। जो फिलहाल कांग्रेस में दिखाई नहीं दे रहा। उक्त नेता का कहना था कि आज जरूरत एक क्रेडिबल चेहरे की है, जो पायलट कहीं न कहीं बन सकते हैं। दूसरा, सचिन पायलट ने अपनी पहचान एक जमीनी नेता की बना ली है, वह भीड़ खींचना जानते हैं। ये चीजें उनसे जुड़ने वालों के लिए अहम फैक्टर बन सकते हैं।
गुरुग्राम, 17 जुलाई 2020,राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में जांच पड़ताल जारी है. राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम शुक्रवार शाम मानसेर पहुंची, जहां एक होटल में कांग्रेस के कुछ बागी विधायक ठहरे हुए हैं. मगर एसओजी टीम को होटल के अंदर जाने से रोक दिया गया. करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद टीम को होटल में एंट्री मिल सकी. हालांकि जब कांग्रेस के विधायक भंवरलाल शर्मा नहीं मिले तो टीम खाली हाथ लौट गई. होटल में दाखिल होने के करीब आधे घंटे बाद एसओजी की टीम बाहर निकली है और मीडिया से बगैर रूबरू हुए निकल गई है. सूत्रों ने बताया कि एसओजी टीम को कांग्रेस के बागी विधायक भंवरलाल शर्मा नहीं मिले जिसके बाद टीम खाली हाथ लौट गई. भंवरलाल शर्मा पर गहलोत सरकार को गिराने की कोशिश करने का आरोप है. बता दें कि राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, संजय जैन और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है. बता दें कि कांग्रेस ने वायरल ऑडियो टेप में सीधे गजेंद्र शेखावत का नाम लिया है. डेढ़ घंटे करना पड़ा इंतजार इससे पहले शुक्रवार शाम को राजस्थान एसओजी की टीम मानेसर स्थित आईटीसी ग्रैंड भारत होटल पहुंची, लेकिन हरियाणा पुलिस के जवानों ने उनकी गाड़ी को अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. हरियाणा पुलिस के आग्रह पर करीब डेढ़ घंटे बाद होटल प्रबंधन की तरफ से ही कोई निकल कर आया. जिन्होंने राजस्थान से आई एसओजी टीम से कुछ बातचीत की. करीब डेढ़ घंटे बाद एसओजी की टीम की गाड़ी को होटल के अंदर जाने दिया गया. राजस्थान पुलिस के आईपीएस स्तर के अधिकारी सहित 6 लोग स्कॉर्पियो से आईटीसी ग्रैंड भारत होटल पहुंचे. एसओजी की टीम राजस्थान के विधायक का ऑडियो टेप वायरल होने के बाद बयान दर्ज करने पहुंची. एसओजी की टीम को होटल में एंट्री के लिए करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा मानेसर में होटल में ठहरे हैं विधायक असल में, सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ आईटीसी ग्रैंड भारत होटल में पिछले कई दिनों से ठहरे हुए हैं. इनमें सचिन पायलट सहित 19 कांग्रेस के विधायक. 3 निर्दलीय भी हैं. फिलहाल इन विधायकों से पूछताछ करने के लिए एसओजी टीम शुक्रवार शाम मानेसर पहुंची. हालांकि सचिन पायलट अभी तक अपना सियासी फैसला नहीं ले सके हैं जबकि कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम पद से हटा दिया है. इसके अतिरिक्त उनके दो समर्थक मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी कर दी गई है और विधानसभा अध्यक्ष ने नोटिस देकर दो दिन में जवाब मांगा है.
जयपुर, 17 जुलाई 2020,राजस्थान की राजनीतिक उठापठक के बीच आज बीजेपी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. बीजेपी के गुलाब चंद कटारिया, प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पुनिया और राजेन्द्र राठौड़ ने अपनी पार्टी का बचाव तो किया ही साथ ही साथ गहलोत सरकार से कुछ सवाल भी किए गुलाब चंद कटारिया ने कहा, "एसओजी द्वारा दो लोगों को पकड़ा गया और इनको भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए लोग कहा गया. उनके बारे में पूछताछ भी हो गई, वो जेसी भी हो गए. एसओजी ने उनके बारे में क्या तथ्य इकट्ठा किए, इसके बारे में अगर आप कुछ आगे बढ़ना चाहते हो तो बताओ कि बीजेपी का इन्वॉल्वमेंट कहां है कहां नहीं है." अशोक सिंह के बारे में बात करते हुए कटारिया ने कहा, "मेरे क्षेत्र में अशोक सिंह के बारे में बताते हैं कि वो बांसवाड़ा के रहने वाले हैं. मैं 40 साल से उस जिले की बैठकों में जा रहा हूं. जब 12 लोगों की बैठकें करता तब भी और आज भी. मैंने मेरे जिले की बैठक में अशोक सिंह को कभी नहीं देखा. कोई बड़ा लीडर आ जाता हो और वो मंच पर आकर फोटो खिंचा लेते हों तो मैं नहीं कह सकता, लेकिन उसमें भी बीजेपी का इन्वॉल्वमेंट कहकर बीजेपी को रगड़ने की कोशिश की. जब एसओजी आपके पास है. जांच आप कर रहे हो. पूछताछ के बाद आपने उसको जेसी कर दिया. अगर कोई तथ्य मिले तो बताओ ना." कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कटारिया ने कहा, "वैसे का वैसा सेम ड्रामा अब गजेन्द्र सिंह जी को जोड़कर, बीजेपी को जोड़ने का दुस्साहस किया गया है. यह प्रमाणित है कि यह झगड़ा आपके आपस का है. और वह इस सीमा तक चला गया कि एकदूसरे ने एकदूसरे के खिलाफ तलवारें खींचकर इतने हल्के शब्दों का इस्तेमाल किया. जिनके साथ वर्षों तक काम किया और जिन्होंने संगठन की दुआएं दी थीं, आज वो आदमी इतना निकृष्ट हो गया. तो इतने दिन तक साथ में क्या कर रहे थे. केवल जब स्वार्थ पर चोट पड़ती है तो आवाज उठाते हैं." पीसी के दौरान सवाल उठाते हुए कटारियाने कहा, "मैं कहता हूं कि कोई भी मेरा वीडियो क्लिक कर ले और आप मेरे खिलाफ केस दर्ज करा दें, ऐसा संभव है. पुलिस डिपार्टमेंट के परमिशन के आधार पर कोई टैपिंग नहीं हो सकता. बिना गृह मंत्रालय की स्वीकृत के किसी भी व्यक्ति का फोन टैपिंग नहीं हो सकता. उसके लिए बाकायदा फाइल चलाकर परमिशन लेना होता है. एसीबी भी ऐसे ही स्वीकृति लेने के बाद आगे का काम बढ़ाती है." कटारिया ने आगे कहा, "आजकल जो हालात हैं, मुझे किसी हंसती हुई लड़की के साथ जोड़कर दिखा देंगे कि देखो गुलाब चंद कटारिया का चरित्र कैसा है. क्या यह सही है. इस तरह की टैपिंग का कोई अधिकार है. किस अधिकार से आपने ये टैपिंग की और उस टैपिंग के आधार पर गजेन्द्र सिंह जी को जोड़ने की कोशिश की. आप किसी मेरे पुराने साथी को कुछ सिखा-पढ़ा कर बोलो कि तुम ये बोलना-ये बोलना और मुझसे बात करा दो, लो जु़ड़ गया मैं." प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी नेता डॉ सतीश पुनिया ने कहा कि यह हास्यास्पद है कि कैसे कांग्रेस के प्रवक्ता गजेंद्र सिंह के अलावा अपने ही दल पर आरोप लगा रहे थे. कांग्रेस को वो ऑडियो टेप कहां से मिले. कांग्रेस प्रवक्ता ऐसे बोल रहे थे जैसे कि वह एसओजी के महानिदेशक थे, लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कह रहे थे. ऐसा लगता है कि सीएम के कार्यालय से लोकेश शर्मा नाम के व्यक्ति द्वारा टेप लीक किया गया था. कांग्रेस की कार्रवाई आपातकाल की याद दिलाती है. पुनिया ने अपना हमला जारी रखते हुए आगे कहा, "उन्होंने एफआईआर में एक संजय जैन का नाम लिया है. यह विचित्र है, क्योंकि संजय जैन बीजेपी नेता नहीं हैं. वास्तव में, संजय जैन कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष थे. ये लोग कोरोना युग के दौरान लोगों को परेशान कर रहे हैं. राज्य में 500 से अधिक मौतें हुई हैं. बीजेपी नेता राजेंद्र राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस टेप से पता चलता है कि राजस्थान में वाटरगेट घोटाला हुआ है. यह लोकेश शर्मा कौन है? वह अपना वेतन कहां से पा रहा है? किसने उसे रिकॉर्डिंग करवाने का अधिकार दिया. मैं लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करता हूं. हम आशंकित हैं कि हमारी कॉल रिकॉर्ड की जा रही है और ऐसा लगता है कि यह बात स्पष्ट हो चुकी है.
जयपुर, 17 जुलाई 2020,राजस्थान में चल रहे रहे सियासी संकट के बीच अशोक गहलोत सरकार गिराने को लेकर एक ऑडियो वायरल हो रहा है. ऑडियो वायरल होने के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के सियासी संग्राम से सरगर्म राजस्थान की सियासत में और उबाल आ गया है. मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने जयपुर के होटल व्यावसायी संजय जैन को गिरफ्तार कर लिया है. बीकानेर के लूणकरणसर के मूल निवासी संजय जैन की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मानिक चंद सुराणा ने इसको लेकर सफाई दी है. सुराणा की ओर से सुरेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि पूर्व वित्त मंत्री का संजय जैन से कोई लेना-देना नहीं है. न तो उन्हें इस प्रकरण की पूरी जानकारी है, और ना ही उनके संजय जैन से किसी प्रकार के ताल्लुकात हैं उन्होंने साफ कहा है कि संजय जैन के साथ उनके संबंधों को लेकर चल रही चर्चा अफवाह है. इसका वास्तविकता से कोई वास्ता नहीं है. गौरतलब है कि ऑडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस नेता महेश शर्मा ने संजय जैन ऊर्फ संजय बरड़िया के साथ ही केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई थी. वायरल ऑडियो में संजय और गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा की बातचीत होने का दावा किया जा रहा है. संजय जैन लूणकरणसर का मूल निवासी है. महत्वाकांक्षी बताया जा रहा संजय करीब दो दशक पहले जयपुर की राजनीति में सक्रिय हुआ था. कहने को पार्टनरशिप में होटल का धंधा करने वाले संजय बरड़िया के परिजन हालांकि किसी भी कारोबार से उसके जुड़ाव की जानकारी से इनकार कर रहे हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि होटल व्यवसाय से जुड़े होने के कारण बरड़िया के संपर्क कई नेताओं के साथ ही आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से हो गए. वीरेंद्र बेनीवाल के करीबियों में होती थी गिनती संजय का मार्बल के कारोबार से भी जुड़ाव बताया जा रहा है. शहर के एक बड़े कारोबारी घराने से भी संजय के निकट संबंध बताए जाते हैं. कहा जा रहा है कि वह परिवार बड़े उद्योग-धंधों के संचालन के साथ ही धर्म और राजनीति के क्षेत्र में भी अच्छी दखल रखता है. कभी संजय की गिनती लूणकरणसर के कांग्रेसी दिग्गज वीरेंद्र बेनीवाल के करीबियों में भी होती थी. सभी दलों के नेताओं से हैं नजदीकी संबंध दबी जुबान से इसे किसी रैकेट से जुड़ा हुआ भी कहा जाता रहा है. संजय के सभी दलों के नेताओं से नजदीकी संबंध बताए जाते हैं. संजय को राजनीतिक रसूख वाले लोगों और अधिकारियों से निकट संबंध बनाने में माहिर माना जाता है. संजय की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ उसकी तस्वीर भी सामने आई है बता दें कि गहलोत सरकार गिराने की साजिश के मामले में पूछताछ के लिए एसओजी की नोटिस मिलने के बाद अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में डिप्टी सीएम रहे सचिन पायलट ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिया था. कई दिन तक चली मान-मनौव्वल और बैठकों के दौर के बाद पायलट को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था. पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है.
मुंबई महाराष्ट्र में बीजेपी और कांग्रेस के बीच में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस की कैबिनेट मंत्री बीजेपी के नेताओं को गोबर का कीड़ा बताती हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, 'राजस्थान में सरकार को गिराने के लिए महाराष्ट्र बीजेपी ने 500 करोड़ रुपए की रकम भेजी थी। इस बाबत सचिन सावंत ने गृहमंत्री अनिल देशमुख को शिकायत भी भेजी है। राजस्थान सरकार गिराने के लिए महाराष्ट्र बीजेपी ने दिए 500 करोड़ कांग्रेस की तरफ से बीजेपी पर यह काफी गंभीर आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र से बीजेपी नेताओं ने राजस्थान में सरकार को गिराने के लिए 500 करोड़ रुपए भेजे थे। इसके पहले भी बीजेपी पर राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों को गिराने का आरोप लगता रहा है। कर्नाटक ,मध्य प्रदेश में सरकार गिराने का आरोप भाजपा पर लग चुका है और अब राजस्थान में 500 करोड़ रुपए देने की बात सामने आई है। कर्नाटक में सरकार गिराने के लिए बागी विधायकों को मुंबई के अलग अलग होटलों में ठहराया गया था। उस वक्त राज्य में भाजपा और शिवसेना की सरकार थी। तब यह राजनीतिक ड्रामा काफी समय तक चला था। कांग्रेस की महिला मंत्री ने बीजेपी के नेताओं को गोबर का कीड़ा कहा कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर है। कांग्रेस की नेता और कैबिनेट मंत्री एडवोकेट यशोमती ठाकुर ने भाजपा के नेताओं को गोबर का कीड़ा तक कह दिया। इस पर बीजेपी ने कांग्रेस पर बदजुबानी का आरोप लगाते हुए कहा कि एमवीए की सरकार में कोई आम सहमति नहीं है। तीनों दल आपस में लड़ते रहते हैं और इनको जनता से कोई सरोकार नहीं है। फिलहाल कांग्रेस के इस आरोप पर बीजेपी की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली/ जयपुर राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ सचिन पायलट की बगावत से शुरू हुआ सियासी ड्रामा जारी है। पायलट खेमे के हाई कोर्ट जाने से लेकर ऑडियो टेप तक, हर दिन इस ड्रामे में नाटकीय मोड़ आ रहे हैं। राजस्थान के इस सियासी रण में दोनों खेमों नेताओं के बीच शब्दबाण भी जमकर चल रहे हैं। ऑडियो टेप को लेकर जहां कांग्रेस पायलट खेमे के दो विधायकों को सस्पेंड कर चुकी है, वहीं आज हाई कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई सोमवार सुबह 10 बजे तक के लिए टल गई है। इसी के साथ स्पीकर से मिले नोटिस पर भी मंगलवार शाम तक कोर्ट ने स्टे दे दिया है। बेनीवाल बोले- सत्ता बचाने के लिए SOG का दुरुपयोग कर रही राजस्थान सरकार नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार सत्ता बचाने के लिए SOG का दुरुपयोग कर रही है, जबकि नेताओं पर हमले, धमकियों से जुड़े प्रकरण पुलिस थानों में धूल फांक रहे हैं। जनता के काम हो नहीं रहे हैं और ब्यरोक्रेट्स हावी है और सरकार होटलों में कैद है। मानेसर स्थिति रिसॉर्ट में पहुंची SOG टीम हरियाणा के मानेसर स्थिति रिसॉर्ट में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की टीम पहुंच गई है। इसी रिसॉर्ट में सचिन पायलट गुट के कांग्रेस विधायक ठहरे हैं। वहीं हरियाणा की पुलिस ने एसओजी टीम को रिसॉर्ट में दाखिल होने से रोक लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, एसओजी की टीम ऑडियो टेप मामले में बयान लेने पहुंची है। एसओजी की टीम भंवरलाल शर्मा से पूछताछ करना चाहती है। तीश पूनिया ने कांग्रेस के आरोपों का किया खंडन बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के ऑडियो टेप को लेकर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। कांग्रेस पार्टी, ये सरकार और इसके मुखिया बीजेपी की मानहानि कर रही है। कांग्रेस अपने झगड़े को बीजेपी पर मंड रही है। गजेंद्र सिंह शेखावत ये साफ कर चुके हैं कि इस कथित ऑडिया में उनकी आवाज नहीं है और इसकी किसी भी जांच ऐजेंसी से जांच को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत कुर्सी बचाने के लिए प्रतिशोध की राजनीतक कर रहे हैं। पायलट गुट को बड़ी राहत, सुनवाई टली, मंगलवार शाम तक कार्रवाई पर रोक राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट गुट को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने सुनवाई साेमवार सुबह तक टाल दी है। वहीं विधानसभा स्पीकर को मंगलवार शाम तक इस नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं करने की बात कही है।
जयपुर राजस्थान की सियासत अब और गर्माती जा रही है। हरियाणा के मानेसर स्थिति रिसॉर्ट में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की टीम पहुंच गई है। इसी रिसॉर्ट में सचिन पायलट गुट के कांग्रेस विधायक ठहरे हैं। वहीं हरियाणा की पुलिस ने एसओजी टीम को रिसॉर्ट में दाखिल होने से रोक लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, एसओजी की टीम ऑडियो टेप मामले में बयान लेने पहुंची है। एसओजी की टीम भंवरलाल से पूछताछ करना चाहती है। इस मामले में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल से गहलोत सरकार पर हमला बोला है। बेनीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'राजस्थान सरकार सत्ता बचाने के लिए SOG का दुरुपयोग कर रही है,जबकि नेताओ पर हमले,धमकियों से जुड़े प्रकरण पुलिस थानों में धूल फांक रहे है,जनता के काम हो नही रहे है और ब्यरोक्रेट्स हावी है और सरकार होटलों में कैद है ! बेनीवाल ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा, 'मैं जो कहता हूं वो करता हूं और जनविरोधी अशोक गहलोत सरकार को अपदस्थ करने के लिए श्री सचिन पायलट ने जो बीड़ा उठाया उसमे में पायलट के साथ हूँ !' बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के ऑडियो टेप को लेकर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। कांग्रेस पार्टी, ये सरकार और इसके मुखिया बीजेपी की मानहानि कर रही है। कांग्रेस अपने झगड़े को बीजेपी पर मंड रही है। गजेंद्र सिंह शेखावत ये साफ कर चुके हैं कि इस कथित ऑडिया में उनकी आवाज नहीं है और इसकी किसी भी जांच ऐजेंसी से जांच को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत कुर्सी बचाने के लिए प्रतिशोध की राजनीतक कर रहे हैं।
जयपुर, 17 जुलाई 2020,राजस्थान का सियासी संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट में सचिन पायलट गुट की ओर से डाली गई याचिका पर सुनवाई होनी है. पायलट गुट की ओर से जो याचिका डाली गई है, उसमें कहा गया है कि वह पार्टी के अंदर रहकर ही आवाज उठा रहे हैं. ऐसे में उन्होंने कोई भी पार्टी विरोधी काम नहीं किया है. आपको बता दें कि विधानसभा स्पीकर के द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद सचिन पायलट गुट ने हाईकोर्ट का रुख किया था. इस नोटिस में कहा गया था कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल ना होने का कारण बताएं और उन्हें अयोग्य क्यों ना घोषित किया जाए. इसी के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. जिसमें इस नोटिस को गलत बताया गया, जवाब देने के लिए कम समय का तर्क दिया गया. गुरुवार को इस मामले में कुछ देर ही सुनवाई हो पाई थी, बाकी सुनवाई आज दो जजों की बेंच करेगी. गौरतलब है कि इस नोटिस में सचिन पायलट समेत कुल 19 विधायकों से जवाब मांगा गया था. कोर्ट में सचिन पायलट की ओर से हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी पेश हो रहे हैं, जबकि गहलोत सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हो रहे हैं. आज सुनवाई से पहले ही कांग्रेस पार्टी की ओर से सचिन पायलट गुट के दो विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है. हालांकि, कोर्ट की ओर से विधायिका को लेकर किसी तरह के एक्शन पर रोक लगी थी. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बागी कांग्रेस विधायकों से मिलकर सरकार गिराने की साजिश रच रहे थे.
जयपुर, 17 जुलाई 2020,राजस्थान की राजनीति में आया तूफान अभी शांत नहीं हुआ है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि आज बीजेपी राजस्थान की सरकार गिराने की कोशिश कर रही है, इसके कुछ ऑडियो भी सामने आ रहे हैं. जिसमें राजस्थान के कांग्रेस विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है. कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर गहलोत सरकार गिराने का आरोप लगाया और एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री को राजस्थान पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस पूरी साजिश में शामिल हैं. उनपर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और गिरफ्तारी की जानी चाहिए. जांच में सामने आना चाहिए कि केंद्र सरकार के कौन से व्यक्ति इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं. व्यक्ति बड़ा नहीं होता है बल्कि संविधान बड़ा होता है. ऐसे में एसओजी को अब गजेंद्र सिंह के खिलाफ कदम उठाने में देर नहीं करना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि सचिन पायलट को सामने आकर इस सच्चाई को उजागर करना चाहिए और विधायकों की लिस्ट जारी करनी चाहिए. ऑडियो में बातचीत करने वाले भंवरलाल शर्मा, विश्वेंद्र सिंह को कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया है और नोटिस जारी किया गया है. वहीं, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह ने बताया कि संसद सदस्यों या विधान मंडल सदस्यों को विशेषाधिकार मिला हुआ है, जिसके तहत उनकी गिरफ्तारी से पहले उन्हें सदन के सभापति को सूचित करना और अनुमति लेना होता है. वह कहते हैं कि पुलिस संसद सदस्य के खिलाफ तो एफआईआर दर्ज कर सकती है, लेकिन गिरफ्तार करने के लिए उसे सभापति से अनुमति लेनी होगी. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मामले कांग्रेस ने जो मांग की है. उसके तहत राजस्थान पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर सकती है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं कर सकती है. ऐसे में गिरफ्तारी करने से पहले ठोस तरीके से लोकसभा अध्यक्ष को सूचित करना होगा और अनुमति लेनी होगी. इसी के बाद कहीं जाकर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है. वह कहते हैं किसी भी सदन के सदस्य को सिविल मामले (नॉन-क्रिमिनल मामले, जिन्हें हम दीवानी मामले भी कहते हैं) में सदन की कार्यवाही चलने से 40 दिन पहले और 40 दिन बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. ऐसे ही कोई भी सदस्य अगर सदन की किसी समिति का सदस्य है तो समिति की बैठक के 40 दिन पहले और बाद तक सदस्य की गिरफ्तारी नहीं हो सकती. क्रिमिनल केस के मामले में ऐसी छूट नहीं है. ऐसे ही अगर कभी किसी सदस्य को किसी मामले में गिरफ्तार किया जाएगा तो उसकी सूचना तुरंत ही सदन के सभापति को देनी होगी. गिरफ्तारी को लेकर एक नियम और है. वो ये कि कभी किसी सदस्य को सदन के अंदर से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. पुलिस अगर किसी सदन के सदस्य को गिरफ्तार करती है तो उसका पूरा विवरण सदन के सभापति को देनी होती है, लेकिन पहले अनुमति लेनी होगी. इसी के बाद गिरफ्तार किया जा सकता है. बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी आरोप लगा चुके हैं कि बीजेपी कांग्रेस सरकार को गिराने की साजिश कर रही है. उन्होंने कहा था कि राज्यसभा चुनाव के वक़्त भी खरीद फरोख़्त हो रही थी, आज भी हो रही है, मेरे पास उसका सबूत है. उन्होंने कहा कि सचिन पायलट खुद विधायकों की खरीद फरोख्त में शामिल हैं.
नई दिल्ली/पटना, 17 जुलाई 2020,राजस्थान में गहलोत सरकार गिराने के आरोप पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि ऑडियो क्लिप में मेरी आवाज नहीं है. मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं. इस बीच गजेंद्र सिंह शेखावत से पूछताछ के लिए राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) दिल्ली रवाना हो गई है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि ऑडियो फेक है. मैं मारवाड़ की भाषा बोलता हूं जबकि ऑडियो टेप में झुंझुनू टच है. जिस गजेंद्र का जिक्र किया गया है, उसका कोई पद का जिक्र नहीं है. कोई जगह तक का जिक्र नहीं है. ऑडियो जोड़-तोड़ कर भी तैयार किया जा सकता है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मैं कई संजय जैन को जानता हूं, इसलिए मुझे बताया जाए कि कौन सा संजय जैन है और उन्होंने मेरे किस मोबाइल नंबर पर बात कराई है. इस बीच एसओजी की तरफ से कहा गया है कि महेश जोशी ने शिकायत दर्ज कराई है. एसओजी ने कहा कि इसमें कांग्रेस के निलंबित विधायक भंवरलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और दलाल संजय जैन आपस में विधायक खरीद-फरोख्त की बात कर रहे हैं. इस ऑडियो की जांच कर कार्रवाई की जाए. संजय जैन को कल दिनभर पूछताछ के लिए बुलाया था. आज फिर 10 बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया है. क्या है पूरा मामला कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया. सुरजेवाला ने दोऑडियो का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और बागी कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा के बीच पैसों की लेनदेन को लेकर बात हो रही है. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि आज बीजेपी राजस्थान की सरकार गिराने की कोशिश कर रही है, इसके कुछ ऑडियो भी सामने आ रहे हैं, जिसमें राजस्थान के कांग्रेस विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस पूरी साजिश में शामिल हैं. उनपर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और गिरफ्तारी की जानी चाहिए. कांग्रेस ने दो बागी विधायकों को किया निलंबित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद कांग्रेस ने बागी विधायक भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. कांग्रेस ने सचिन पायलट से भी अपनी स्थिति को साफ करने के लिए कहा है.
जयपुर राजस्थान की राजनीति बड़ी करवट ले रही है। ऐसा हम नहीं, प्रदेश के नागौर लोकसभा सीट से सांसद और बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साझेदार हुनमान बेनीवाल के दावों से स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने राजस्थान बीजेपी की दिग्गज नेता और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। बेनीवाल ने कहा कि वसुंधरा ही अशोक गहलोत की कांग्रेसी सरकार की डूबती नैया की खेवैया बनी हुई हैं। गहलोत के लिए विधायकों को फोन कर मना रहीं वसुंधरा' लिखें बेनीवाल ने इससे पहले की बीजेपी सरकार में सीएम रहीं वसुंधरा राजे पर बेहिचक आरोप लगाए। उन्होंने ट्विटर पर एक के बाद एक कई ट्वीट में साफ कहा कि बीजेपी की दिग्गज नेता राजस्थान की मौजूदा कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए विधायकों को फोन तक कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वसुंधरा का प्रभाव इतना है कि विधायक उनके निर्देश पर रास्ते से लौट जा रहे हैं। 'वसुंधरा राजे और सीएम अशोक गहलोत के बीच गठजोड़' बेनीवाल ने #गहलोत_वसुंधरा_गठजोड़ के हैशटैग के साथ लिखा, 'पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे, अशोक गहलोत की अल्पमत वाली सरकार को बचाने का पुरजोर प्रयास कर रही है,राजे द्वारा कोंग्रेस के कई विधायको को इस बारे में फोन भी किए गए!' नागौर सांसद ने अपने ट्वीट में गृह मंत्री अमित शाह, उनके दफ्तर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीजेपी रास्थान और अपनी पार्टी आरएलपी को टैग भी किया है। एक जाट विधायक को वसुंधरा ने फोन किया' बेनीवाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने दो विधायकों की पहचान का भी खुलासा कर दिया और दावा किया कि इनके पास वसुंधरा का फोन गया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने राजस्थान कांग्रेस में अपने करीबी विधायकों से फोन पर बात करके उन्हें अशोक गहलोत का साथ देने की बात कही। सीकर और नागौर जिले के एक-एक जाट विधायक को राजे ने खुद इस मामले में बात करके सचिन पायलट से दूरी बनाने को कहा जिसके पुख्ता प्रमाण हमारे पास है!' उन्होंने आगे लिखा, 'प्रदेश और देश की जनता वसुंधरा-गहलोत के आंतरिक गठजोड़ की कहानी को समझ चुकी है! राजनीतिक भूचाल ला सकता है बेनीवाल का दावा बेनीवाल के ये दावे न केवल राजस्थान की राजनीति बल्कि बीजेपी के अंदर भूचाल ला सकते हैं। बेनीवाल ने अपने ट्वीट में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह को भी टैग किया है। हालांकि, हनुमान बेनीवाल पिछले कई सालों से यह आरोप लगाते आए हैंं कि वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के बीच गठजोड़ है। अब सचिन पायलट का भी ऐसा ही बयान सामने आ चुका है जिसके बाद बेनीवाल ने फिर से वसुंधरा राजे पर सीएम अशोक गहलोत की मदद करने का आरोप लगाया है।
जयपुर। राजस्थान में जारी सियासी घमासान में लगातार नए अपडेट सामने आ रहे है। ताजा विवाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी की ओर से कांग्रेस के बागी विधायकों को भेजे गए नोटिस को लेकर है, जिसमें सचिन पायलट खेमे की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। पायलट खेमा अब इस मामले को राजस्थान हाईकोर्ट ले (sachin pilot supporter mla plea in rajasthan high court )गया है, जिसमें उन्होंने याचिका के जरिए स्पीकर की ओर से भेजे गए नोटिस पर सवाल किया है। आपको बता दें कि कांग्रेस की ओर से जारी व्हिप (whip by rajasthan congress) और स्पीकर की ओर से भेजे नोटिस (rajasthan vidhan sabha speaker gave notice to mla 's ) को लेकर पायलट खेमा लगातार इसके कानूनी महत्व पर सवाल उठा रहा है। साथ ही इस मामले में यह जानकारी भी मिल रही थी कि नोटिस के कानूनी पहलूओं को जानने के लिए सचिन पायलट और उनके साथी लगातार कानून के जानकारों से संपर्क बना रहे थे। इधर बीजेपी भी कांग्रेस को नोटिस मामले में घेरने की कोशिश कर रही हैं। यह भी जानकारी मिली है कि इस मामले में स्पीकर सी.पी. जोशी की ओर से कांग्रेसी नेता और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी (abhishek manu singhvi) पैरवी करेंगे। वहीं हरिश साल्वे पायलट खेम की ओर से बात रखेंगे।
जयपुर, 15 जुलाई 2020,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सरकार बचाने का ऐसा दबाव आया कि वे कोरोना काल के सबसे अहम हथियार सोशल डिस्टेंसिंग को भूल गए. जयपुर के होटल फेयरमोंट में ठहरे कांग्रेस के विधायक भी सामाजिक दूरी की मर्यादा भूल गए. होटल से आई तस्वीरों में विधायक बिना मास्क के एक साथ बेतकल्लुफ बैठे नजर आ रहे हैं. सीएम अशोक गहलोत के साथ बैठे कांग्रेस नेता और विधायक भी एक छोटे से स्थान पर बैठे नजर आ रहे हैं. यहां कुछ नेता आस-पास बैठे हैं और उन्होंने मास्क लगा नहीं रखे हैं. राजस्थान में 5800 से ज्यादा एक्टिव केस बता दें कि राजस्थान में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. एक जुलाई के बाद यहां हर रोज औसतन 400 से 500 मामले सामने आ रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में अभी कोरोना के 5885 सक्रिय मामले है. यहां 19161 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 525 मरीजों की जान चुकी है. जबकि राज्य में कुल 25 हजार 571 मरीज कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. जयपुर में हालत और भी खराब है. ना सोशल डिस्टेंसिंग, ना मास्क राजस्थान कांग्रेस ने खरीद फरोख्त से बचाने के लिए अपने विधायकों को जयपुर के होटल फेयरमोंट में रखा है. यहां से आई तस्वीरों में सीएम गहलोत गोल घेरे में आठ नेताओं के साथ बैठे नजर आ रहे हैं. एक दूसरी तस्वीर में 11 कांग्रेस नेता एक राउंड टेबल पर बैठे आ रहे हैं, इस दौरान यहां सोशल डिस्टेंसिंग की कोई मर्यादा नहीं है. न ही इन विधायकों ने मास्क लगा रखा है. खुद की एडवाइजरी का खयाल नहीं राजस्थान सरकार ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए एडवाइजरी जारी कर रखी है. सरकार ने लोगों को सलाह दी है वे एक दूसरे से छह फीट की दूरी रखें, भीड़ से बचें, बैठकों का आयोजन वीडियो कांफ्रेंस से करें, अनावश्यक कार्यक्रम आयोजित नहीं करें, और गैर जरूरी यात्राओं से बचें. लेकिन सरकार इन एडवाइजरी का पालन खुद ही नहीं कर रही है. राजस्थान के जनसंपर्क विभाग ने पोस्टर जारी कर लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा है और बिना मास्क पहने घर से बाहर न जाने को कहा है. दो गज दूरी, बेहद जरूरी कोरोना संक्रमण को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देशवासियों से दो गज की दूरी का पालन करने की अपील कर चुके हैं. लेकिन राजस्थान की सरकार पर आए राजनीतिक संकट को टालने के चक्कर में सरकार के मुखिया इस समय के सबसे भयावह संकट- कोरोना को ही नजरअंदाज कर गए.
जयपुर, 15 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है. विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट समेत बागी विधायकों को नोटिस जारी किया गया है. विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी इस नोटिस में 17 जुलाई दोपहर 1 बजे तक विधानसभा भवन में जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है. नोटिस को विधायकों के घर के बाहर चस्पा कर दिया गया है. दरअसल, राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि सचिन पायलट और उनके साथ गए विधायकों ने नियम का उल्लंघन किया है. इसके बाद स्पीकर सीपी जोशी ने सचिन पायलट, भंवर लाल शर्मा, गजेंद्र सिंह शक्तावत समेत कई विधायकों को नोटिस जारी किया है. नोटिस में क्या लिखा है स्पीकर सीपी जोशी की ओर से भेजे गए नोटिस में लिखा है कि मुख्य सचेतक महेश जोशी ने आपकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने की याचिका दी है. इस याचिका को रजिस्टर कर लिया गया है. इस याचिका पर आप अपनी टिप्पणी तीन दिन के अंदर दें. नोटिस के जवाब के आधार पर 17 जुलाई को दोपहर एक बजे के बाद कार्रवाई की जाएगी. किन्हें जारी हुआ नोटिस यह नोटिस उन विधायकों को जारी किया गया है, जो कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नहीं शामिल हुए हैं. सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पी.अर.मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया को नोटिस भेजा गया है. इसके अलावा हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत को नोटिस भेजने की खबरें है. कांग्रेस विधायक दल की बैठक के लिए मुख्य सचेतक महेश जोशी ने व्हिप जारी किया था. इन विधायकों पर व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है.
नई दिल्ली, 15 जुलाई 2020,राजस्थान में बगावती तेवर दिखाने वाले सचिन पायलट को 14 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया. अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलना सचिन पायलट को भारी पड़ा और कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि पायलट ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचा है. इस पूरे सियासी खेल के बाद सचिन पायलट ने अपना पहला इंटरव्यू दिया और इंडिया टुडे मैग्जीन से खुलकर बात की. सचिन ने कहा है कि वो भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में नहीं हैं और ना ही बीजेपी ज्वाइन कर रहे हैं. सवाल: आप मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से खफा क्यों हैं? जवाब: मैं उनसे नाराज नहीं हूं और ना ही किसी तरह की कोई स्पेशल शक्ति मांग रहा हूं. मैं बस इतना चाहता हूं कि कांग्रेस की सरकार राजस्थान में लोगों को किए हुए वादे को पूरा करे जो चुनाव के दौरान किए गए थे. हमने चुनाव में वसुंधरा राजे की सरकार के खिलाफ प्रचार किया, जिसमें अवैध माइनिंग का मसला था लेकिन सत्ता में आने के बाद अशोक गहलोत जी ने कुछ नहीं किया और उसी रास्ते पर चल पड़े. पिछले साल राजस्थान हाई कोर्ट ने एक पुराने फैसले को पलटते हुए वसुंधरा राजे को बंगला खाली करने को कहा, लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने फैसले पर अमल करने की बजाय इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. अशोक गहलोत एक तरफ तो पूर्व मुख्यमंत्री की मदद कर रहे हैं और दूसरी तरफ मुझे और मेरे समर्थकों को राजस्थान के विकास में काम करने की जगह नहीं दे रहे हैं. अफसरों को कहा गया कि मेरे आदेश ना मानें, मुझे फाइलें नहीं भेजी जा रही थीं. महीनों तक विधायक दल या कैबिनेट की बैठक नहीं होती है. ऐसे पद का क्या फायदा अगर मैं लोगों को किया गया वादा ही ना पूरा कर सकूं. सवाल: आपने पार्टी के स्तर पर इन मुद्दों को क्यों नहीं उठाया? जवाब: मैंने कई बार इन मसलों को सभी के सामने रखा है. मैंने प्रभारी अविनाश पांडे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात की, खुद अशोक गहलोत से इस मसले पर बात की है. लेकिन जब मंत्रियों और विधायकों की बैठक ही नहीं होती थी, तो बहस और बातचीत की जगह ही नहीं बची थी. सवाल: अशोक गहलोत के द्वारा जब विधायक दल की बैठक बुलाई गई, आप नहीं गए. वहां पर भी तो मुद्दों को उठाया जा सकता था? जवाब: मेरे आत्मसम्मान को चोट पहुंची है. राज्य की पुलिस ने मुझे राजद्रोह का नोटिस थमा दिया. अगर आपको याद हो तो 2019 के लोकसभा चुनाव में हम लोग ऐसे कानून को ही हटाने की बात कर रहे थे. और यहां कांग्रेस की ही एक सरकार अपने ही मंत्री को इसके तहत नोटिस थमा रही है. मैंने जो कदम उठाया वो अन्याय के खिलाफ था. अगर व्हिप की बात हो तो वो सिर्फ विधानसभा के सदन में काम आता है, मुख्यमंत्री ने ये बैठक अपने घर में बुलाई थी ना कि पार्टी के दफ्तर में. सवाल: अशोक गहलोत का आरोप है कि आप बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिश कर रहे थे? जवाब: इन दावों में कुछ भी सच नहीं है. मैंने राजस्थान में कांग्रेस को जिताने के लिए जीतोड़ मेहनत की है, मैं क्यों पार्टी के खिलाफ काम करूंगा? सवाल: अब जब आपको हटा दिया गया है तो आप कांग्रेस में किस तरह आगे बढ़ेंगे? जवाब: जरा माहौल को शांत होने दीजिए..अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं. मैं अभी भी कांग्रेस कार्यकर्ता हूं. मुझे अपने समर्थकों के साथ अपने कदम पर चर्चा करनी है. सवाल: क्या आप बीजेपी में शामिल होंगे? बीजेपी कह रही है कि आपके लिए दरवाजे खुले हैं. जवाब: मैं पहले ही साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहा हूं. मैं अभी यही कहना चाहता हूं कि मैं अपने लोगों के लिए काम करता रहूंगा. सवाल: क्या आप भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं? क्या आपने ओम माथुर या ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की? जवाब: मैं किसी बीजेपी नेता से नहीं मिला हूं. पिछले 6 महीने से ज्योतिरादित्य सिंधिया से नहीं मिला हूं और ना ही ओम माथुर से मिला हूं. सवाल: आपके लिए मुख्यमंत्री बनना इतना जरूरी क्यों है? आपकी पार्टी का कहना है कि इतनी कम उम्र में आपको काफी पद दिए गए हैं, क्या आप महत्वाकांक्षी हो रहे हैं? जवाब: सिर्फ मुख्यमंत्री बनने की बात नहीं है, मैंने मुख्यमंत्री पद की बात तब की थी जब मैंने 2018 में पार्टी की जीत की अगुवाई की थी. मेरे पास सही तर्क थे. जब मैंने अध्यक्ष पद संभाला तो पार्टी 200 में से 21 सीटों पर आ गई थी. पांच साल के लिए मैंने काम किया और गहलोत जी ने एक शब्द भी नहीं बोला. लेकिन चुनाव में जीत के तुरंत बाद गहलोत जी ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोक दिया. अनुभव के मसले पर, उनका क्या अनुभव है? 2018 से पहले वो दो बार मुख्यमंत्री बने हैं, दो चुनाव में उनकी अगुवाई में पार्टी 56 और 26 पर आ पहुंची. इसके बाद भी उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री बना दिया गया. हां, मैंने राहुल गांधी का फैसला स्वीकारा और वो सीएम बने. राहुल के कहने पर मैं डिप्टी सीएम भी बन गया. राहुल गांधी ने सत्ता का बराबर बंटवारा करने की बात कही थी, लेकिन गहलोत जी ने मुझे साइडलाइन करना शुरू कर दिया. सवाल: क्या राहुल गांधी ने इस मामले में दखल दिया? आपकी उनसे बात हुई? जवाब: राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं हैं. राहुल ने जब से इस्तीफा दिया, गहलोत जी और उनके AICC के दोस्तों ने मेरे खिलाफ मोर्चा खोल लिया. तभी से मेरे लिए आत्मसम्मान मुश्किल हो गया. सवाल: क्या गांधी परिवार ने आपसे बात की? आपने उनसे मिलने की कोशिश की? जवाब: सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मेरी कोई बात नहीं हुई. प्रियंका गांधी ने मुझसे बात की थी, लेकिन वो निजी तौर पर चर्चा थी. उससे कोई हल नहीं निकला. सवाल: आपकी क्या मांग हैं? क्या आप मुख्यमंत्री पद और मंत्रियों के लिए जगह मांग रहे थे? जवाब: मैंने ऐसी कोई मांग नहीं रखी है. मैंने सिर्फ यही चाहा है कि आत्मसम्मान के साथ काम करने की जगह मिल सके, जो मुझसे वादा किया गया था. मैं फिर कहना चाहता हूं कि ये सत्ता की बात नहीं है, ये आत्मसम्मान की बात है.
जयपुर, 15 जुलाई 2020,राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष पद से सचिन पायलट के हटाए जाने के बाद प्रदेश की सभी जिला इकाईयों को भंग कर दिया गया है. राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि सभी जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया गया है. फिर से नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. गौरतलब है कि सचिन पायलट के बगावत करने के बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटसरा को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. अब गोविंद सिंह डोटसरा नए सिरे से कमेटियों का गठन करेंगे. माना जा रहा है कि सचिन पायलट के करीबियों की छुट्टी कर दी जाएगी. इस बीच सचिन पायलट के करीबी इस्तीफा दे रहे हैं. अजमेर में यूथ कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और सचिन पायलट के समर्थन में इस्तीफा दिया. पीसीसी सचिव प्रशांत सहदेव शर्मा और राजेश चौधरी भी इस्तीफा दे चुके हैं. प्रदेश सचिव करण सिंह उच्चियाड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया है. सचिन पायलट के समर्थन में इस्तीफों के बीच कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने प्रदेश कार्यकारिणी, समस्त विभागों, प्रकोष्ठ को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. अविनाश पांडे ने कहा है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही नई कार्यकारिणी, विभागों एवं प्रकोष्ठों का गठन किया जाएगा. वहीं, सीएम अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे डिप्टी सीएम हो या पीसीसी चीफ, उनसे जब खरीद-फरोख्त की जानकारी मांगी गई तो सफाई दे रहे हैं. वह खुद षड्यंत्र में शामिल थे. दिल्ली में बैठे लोगों ने सरकार गिराने की साजिश रची. लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश हो रही है.
जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट को अलग करने के बाद अभी भी सचिन पायलट की स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है। जहां बीजेपी ने सचिन पायलट को पार्टी में शामिल होने का न्यौता दिया है। वहीं दूसरी ओर से राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे ने ट्वीट कर उन्हें दोबारा पार्टी को शामिल करने की मंशा जाहिर की है। खास बात यह है कि अविनाश पांडे के इस ट्ववीट ने सभी को चौंका दिया है। पांडे ने ट्वीट के जरिए कहा- पार्टी के दरवाजे सचिन के लिए खुले आपको बता दें कि अविनाश पांडे ने अपने ट्वीट में लिखा है "पायलट के लिए पार्टी के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं, भगवान उनको सद्बुद्धि दे और उन्हें उनकी गलती समझ आए । मेरी प्रार्थना है भाजपा के मायावी जाल से वो बाहर निकल आए ।" पांडे के ट्वीट से यह जाहिर हो रहा है कि पार्टी अभी भी सचिन को खोना नहीं चाहती आलाकमान भी चाहता है सचिन साथ रहे अविनाश पांडे के इस ट्वीट के बाद अब दोबारा राजनैतिक गलियारों में तूफान मचने लगा है। हालांकि अभी तक सचिन ने अपने राजनैतिक जीवन की स्थिति साफ नहीं की, लेकिन कांग्रेस से बाहर होने के बाद उन्होंने यह जरूर साफ कर दिया है कि वो भाजपा में शामिल नहीं होंगे। वहीं राहुल गांधी के अच्छे मित्रों में शामिल सचिन को लेकर आलाकमान नरम रुख रखे हुए हैं।
जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट और उनके समर्थकों की बगावत को लेकर बुधवार को जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि 20 करोड़ का सौदा किया जा रहा था। उनके पास प्रूफ है। वो षड़यंत्र के पार्ट थे, सचिन पायलट ही लीड कर रहे थे। और पूछ रहे थे नाम बताओं, मोबाइल नंबर दो? उन्होंने कहा कि अच्छी इंग्लिश बोलना, स्माइल देना ये काफी नहीं है। देश में हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है, ये देश का बर्बाद करेंगे? क्या मीडिया को दिखता नहीं है क्या? इस मौके पर उन्होंने कुछ मीडिया के लोगों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा 'सोने की छुरी पेट में खाने के लिए नहीं होती है'। अशोक गहलोत की वो दस बातें... 1.हमारे कुछ साथी बीजेपी के जाल में फंस करे अति महत्वकांक्षी बनकर हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे थे। ऐसे उनके दलाल लोग थे, जिन्होंने ये काम किया, ऑफर कर रहे थे पैसा, हमारे पास प्रूफ है। 2. इस देश का मीडिया क्या सुनना चाहता है, इनको कांग्रेस से और गांधी परिवार से व्यक्तिगत नाराजगी है अपने दिल में रखें वो। जिस देश में डेमोक्रेसी खत्म करने की साजिश की जा रही है, मीडिया चौथा स्तम्भ कहलाता है, क्या उसकी ड्यूटी नहीं है कि आवाज 3. ऐसे-ऐसे मीडियो के लोग बैठे हैं देश में, केंद्र सरकार से बीजेपी से फाइनेंस होते, मिलीभगत करते हैं, नई पीढ़ी के लड़का-लड़की है, उनके चाहिए देश के हित में, डेमोक्रेसी किसी कीमत पर खत्म न हो। यंग पीढ़ी के एंकर तमाम लोग एकतरफा खबरें चला रहे हैं। 4. हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है देश में। लाखों-करोड़ों रुपए बंट रहे हैं। परसों के रोज डीलिंग की जा रही थी जयपुर में। हमारें पास खबर है, हमारे पास प्रूफ है। 20 करोड़ का सौदा किया जा रहा था। 5. एसओजी ने आपको नोटिस दे दिया, मुझे नोटिस दिया है एसओजी ने। हमनें, कांग्रेस ने शिकायत की थी एसओजी से की हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है बीजेपी की तरफ से। 10 दिन तक हमें लोगों को होटल में रखना पड़ा, मुझे अच्छा लगा क्या? 6. अब जो हुआ मानेसर, गुरुग्राम वाला खेल वो उस समय होने वाला था, रात को दो बजे इन्हें रवाना किया जा रहा था। सफाई वो ही लोग दे रहे थे जो षड़यंत्र में शामिल थे। हमारे यहां पीसीसी चीफ, उप मुख्यमंत्री मुझ से डील कर रहे थे, मोबाइल नंबर दीजिए, नाम दीजिए। षड़यंत्र में शामिल थे और वो सफाई दे रहे थे। जो खुद षड़यंत्र में शामिल है वो सफाई दे रहे हैं। क्या ये चौथे स्तम्भ की जिम्मेदारी नहीं है? 7. नई पीढ़ी जो आई है, हम उन्हें प्यार करते हैं। आने वाला कल उनका है। जो ये कहते हैं कि हम पसंद नहीं करते ये गलत है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, अशोक गहलोत पसंद करते हैं। गवाह है, जब हमारी मीटिंग होती है तो मैं यूथ कांग्रेस के लिए एनएसयूआई के लिए लड़ाई लड़ता हूं। 8. अच्छा इंग्लिश-हिंदी बोलना, अच्छी बाइट देना, वो सबकुछ नहीं होता। आपके दिल में क्या है देश कि लिए, आपका कमिटमेंट क्या है? आपकी पार्टी की विचारधारा आपका कमिटमेंट देख जाता है। सोने की छुरी पेट में खाने के लिए नहीं होती है, समझ जाओ। 9. हमारे कुछ साथी हो इससे पहले मंगलवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पार्टी प्रभारी अविनाश पांडे ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी, समस्त विभागों, प्रकोष्ठ को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। इसी के साथ पांडे ने एक बयान में जारी करते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नये अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की नियुक्ति के साथ नई प्रदेश कार्यकारिणी, विभागों और प्रकोष्ठों का फिर से गठन करने का ऐलान किया है। उधर, अशोक गहलोत ने मंगलवार को राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर सचिन पायलट और उनके समर्थित मंत्री, विधायकों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई से अवगत कराया है।
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के भीतर ही सत्ता को लेकर संघर्ष चल रहा है. सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में अपनी ताकत दिखाई, जिसके बाद सभी विधायकों को होटल ले जाया गया. लेकिन अभी भी सरकार पर से संकट टला नहीं है, क्योंकि करीब 22 विधायक होटल में नहीं हैं. कल हुई बैठक के बाद आज एक और बार कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी है. जो विधायक जयपुर के होटल में नहीं हैं, उनके नाम ये हैं... 1. सचिन 2. रमेश मीणा 3. इंद्राज गुर्जर 4. गजराज खटाना 5. राकेश पारीक 6. मुरारी मीणा 7. पी.अर.मीणा 8. सुरेश मोदी 9. भंवर लाल शर्मा 10. वेदप्रकाश सोलंकी 11. मुकेश भाकर 12. रामनिवास गावड़िया 13. हरीश मीणा 14. बृजेन्द्र ओला 15. हेमाराम चौधरी 16. विश्वेन्द्र सिंह 17. अमर सिंह 18. दीपेंद्र सिंह 19. गजेंद्र शक्तावत ये कांग्रेस के विधायक हैं, जबकि तीन अन्य जो हैं वो निर्दलीय हैं. जिनमें सुरेश टांक, ओम प्रकाश और खुशवीर सिंह जोजावर शामिल हैं. यानी कुल मिलाकर 22 विधायक ऐसे हैं, जो कांग्रेस के साथ नहीं हैं. बता दें कि सोमवार को विधायक दल की बैठक में 100 से अधिक विधायक अशोक गहलोत के साथ मौजूद थे. इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि गहलोत सरकार पर जो संकट था वो हट गया है. लेकिन शाम होते-होते सचिन पायलट का भी एक वीडियो सामने आया, जिसमें करीब 15-20 विधायक उनके साथ बैठे दिखाई दिए. साथ ही कई विधायक और मंत्री लगातार सचिन पायलट के समर्थन में ट्वीट भी कर रहे हैं. ऐसे में अभी पूरी तरह से गहलोत सरकार से संकट हटा नहीं है.
नई दिल्ली, 14 जुलाई 2020,मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाच सचिन पायलट की पहली प्रतिक्रिया आ गई है. सचिन पायलट ने ट्वीट करके कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं. इसके साथ ही सचिन पायलट ने अपने ट्विटर बॉयो से डिप्टी सीएम हटा दिया है और कहीं भी कांग्रेस का जिक्र नहीं है. सचिन पायलट के ट्विटर बॉयो में लिखा है- टोंक से विधायक | आईटी, दूरसंचार और कॉर्पोरेट मामलों के पूर्व मंत्री, भारत सरकार | कमीशन अधिकारी, प्रादेशिक सेना. थोड़ी देर पहले ही गहलोत सरकार ने सचिन पायलट को डिप्टी सीएम पद से हटा दिया है. इसके साथ ही कांग्रेस ने राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद से सचिन पायलट की छुट्टी कर दी है. सचिन पायलट के अलावा उनके करीबी मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी हटा दिया गया है. पायलट गुट की क्या है मांग सचिन पायलट गुट के विधायकों का कहना है कि जब तक मान सम्मान की गारंटी नहीं होगी, तब तक वापसी नहीं होगी और मान-सम्मान तब तक वापस नहीं मिलेगा जब तक लीडरशिप चेंज नहीं होगा. सूत्रों के अनुसार पायलट गुट ने आलाकमान के पास संदेश भिजवा दिया है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री के पद से हटाने पर ही समझौता हो पाएगा.
नई दिल्ली/जयपुर, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट में खींचतान के बीच भारतीय ट्राइबल पार्टी के अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने अपनी पार्टी के दोनों विधायकों को वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहने को कहा है. अपने पत्र में भारतीय ट्राइबल पार्टी के अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने कहा कि दोनों विधायक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के समय न कांग्रेस को, न अशोक गहलोत को और न सचिन पायलट को और न ही बीजेपी को वोट करें. महेश भाई वसावा ने अपने दोनों विधायकों को निर्देश दिया हैं कि वोटिंग के दौरान वे अनुपस्थित रहें. महेश वसावा ने कहा कि अगर विधायक पार्टी के आदेशों की अवहेलना करते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. हालांकि बताया जा रहा है कि भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक जयपुर के उसी होटल में ठहरे हुए हैं जहां गहलोत समर्थक विधायक हैं. बता दें कि सरकार पर संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को विधायक दल की बैठक में 100 विधायकों को जुटाकर अपनी ताकत दिखा दी है. हालांकि बागी रुख अपना चुके सचिन पायलट दावा कर रहे हैं कि उनके साथ 25 विधायक हैं. राजस्थान में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में खींचतान के बीच बीजेपी भी फ्लोर टेस्ट की मांग कर चुकी है. विधानसभा में गणित गणित के लिहाज से देखा जाए तो राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं. इनमें कांग्रेस के 107 विधायक हैं. कांग्रेस सरकार को निर्दलीय और कुछ अन्य छोटे दलों के विधायकों का समर्थन हासिल है. यानी कुल मिलाकर यह संख्या 123 तक पहुंचती है. जबकि बीजेपी के 72 विधायक हैं. साथ ही उन्हें 3 अन्य छोटे दलों के विधायकों का समर्थन हासिल है. ऐसे में उनके पास कुल 75 विधायक हैं.
नई दिल्ली, 14 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट गहराता जा रहा है. उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट की अगुवाई वाले गुट ने सोमवार को एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में करीब 16 विधायक एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं. यह वीडियो उस समय आया जब सीएम अशोक गहलोत ने दावा किया था कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 122 में से 106 विधायक शामिल हुए थे. 10 सेकेंड के इस वीडियो को सचिन पायलट के ऑफिशियल व्हाट्स ऐप ग्रुप में शेयर किया गया है. इस वीडियो में करीब 16 विधायक एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, वीडियो में सचिन पायलट नहीं दिखाई दे रहा है. वीडियो में 6 अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पाई है. वीडियो में दिख रहे विधायकों में इंद्रराज गुर्जर, मुकेश भाकर, हरीश मीणा दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को ट्वीट करते हुए पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि फैमिली. वहीं, मुकेश भाकर ने कहा कि कांग्रेस में वफादारी का मतलब अशोक गहलोत की चरण वंदना करना है. यह हमें बर्दाश्त नहीं है. इस बीच सचिन पायलट ने दावा किया है कि उनके पास 30 कांग्रेसी विधायकों का समर्थन है और कुछ निर्दलीय विधायक भी उनके साथ खड़े हैं. पायलट के करीबियों ने सीएम अशोक गहलोत के दावे को खारिज किया है और कहा कि अगर सरकार के पास बहुमत है तो वह फ्लोर पर साबित करे, न कि सीएम हाउस में. सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं. राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के पास 72 विधायक हैं. कांग्रेस का दावा है कि उसे 13 निर्दलीयों, सीपीएम के दो, भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो और राष्ट्रीय लोक दल के एक विधायक का समर्थन है.
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान में एक तरफ जहां उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिंता में डाल दिया है तो वहीं दूसरी तरफ गहलोत के करीबियों पर आयकर विभाग भी शिकंजा कस रहा है. गहलोत के करीबियों पर जयपुर से दिल्ली और मुंबई तक आयकर विभाग ने रेड की है, जिसमें बड़े पैमाने पर काली कमाई का खुलासा हुआ है. 13 जुलाई को जब जयपुर में अशोक गहलोत सीएम आवास में विधायकों का समर्थन जुटा रहे थे और सरकार बचाने की कोशिश में लगे थे, उसी दौरान आयकर विभाग की टीम उनके करीबियों के यहां रेड कर रही थी. जयपुर से लेकर दिल्ली और मुंबई में आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की. जयपुर में 20, कोटा में 6, दिल्ली में 8 और मुंबई में 9 ठिकानों पर छापे मारे गए. CBDT मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, 3 कारोबारी समूहों के 33 ठिकानों पर ये छापेमारी की गई है. इस दौरान टीम को जो जाली दस्तावेज, डायरी और डिजिटल डाटा मिला है, उसमें अहम खुलासे हुए हैं. बड़े पैमाने पर काली कमाई के उजागर होने की जानकारी सामने आई है. प्रापर्टी में निवेश, नकद धन, बुलियन ट्रेडिंग के सबूत मिले हैं. टीम को अवैध निवेश के सबूत भी मिले हैं. बताया जा रहा है कि जिन कारोबारी ग्रुप पर ये रेड की गई है उनका बिजनेस होटल, हाइड्रो पॉवर, मेटल, ऑटो सेक्टर, सिल्वर ज्वेलरी, एंटीक उत्पाद समेत कई अन्य सेक्टर के बिजनेस में है. ब्रिटेन से लेकर अमेरिका समेत कई देशों में इन कंपनियों का कारोबार चल रहा है. आयकर विभाग की टीम को प्रारंभिक जांच में लॉकर, ज्वेलरी और नकदी मिली है. रेड में जब्त किए गए दस्तावेजों व अन्य सबूतों के आधार पर आयकर विभाग की टीम आगे की जांच कर रही है. गौरतलब है कि 13 जुलाई को अशोक गहलोत के करीबी कहे जाने वाले राजीव अरोड़ा धर्मेंद्र राठौड़ के ठिकानों पर की गई है. राजीव अरोड़ा ज्वेलरी फर्म के मालिक हैं. इनके अलावा ओम मेटल्स के एमडी सुनील कोठारी के ठिकानों पर भी रेड की गई है. कोठारी गहलोत के करीबी बताए जाते हैं. वहीं, दूसरी तरफ अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के बिजनेस पार्टनर रविकांत शर्मा के यहां ईडी ने रेड की और उनसे पूछताछ की. कांग्रेस ने रेड के बहाने बीजेपी पर गहलोत सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है तो बीजेपी ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है.
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ गुटबाजी तेज होती जा रही है. अब सचिन पायलट के समर्थक खुलकर मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं. राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह भी अब बागी मूड में दिख रहे हैं और मंगलवार सुबह उन्होंने एक शायरी के जरिए इसका ऐलान भी कर दिया. विश्वेंद्र सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘मैं बोलता हूं तो इल्जाम है बगावत का... मैं चुप रहूं तो बड़ी बेबसी सी होती है ..!’ इसके अलावा भी मंत्री लगातार ऐसे ट्वीट कर रहे हैं, जो सचिन पायलट के समर्थन में हैं. दूसरी ओर सचिन पायलट समर्थक गुट के विधायक भंवरलाल शर्मा ने एक वीडियो जारी किया है. वीडियो में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तंज कसा है, वीडियो में कहा गया है कि जब राहुल गांधी आए थे, तो उन्होंने कुंभाराम लिफ्ट की बात की थी. लेकिन, वो काम अभी तक नहीं हो पाया है. यही कारण है कि हम सभी विकास के मुद्दे पर सचिन पायलट के साथ हैं. भंवरलाल शर्मा ने दावा किया कि उनके पास 22 विधायक हैं, जिनमें कई बड़े विधायक हैं. हम लोग फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे हैं. भंवरलाल शर्मा ने कहा कि अगर अशोक गहलोत को नेता मानते तो हम मीटिंग में होते. सचिन पायलट गुट के नेता ने कहा कि अगर हमारे साथ ही 22 विधायक हैं, तो फिर अशोक गहलोत कैसे 109 का दावा कर रहे हैं. आपको बता दें कि अब सचिन पायलट गुट की ओर से कांग्रेस आलाकमान को बता दिया गया है कि वो चाहते हैं कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाए. पायलट गुट के विधायकों ने कहा कि जब तक मान सम्मान की गारंटी नहीं होगी, तब तक वापसी नहीं होगी और मान-सम्मान तब तक वापस नहीं मिलेगा जब तक लीडरशिप चेंज नहीं होगी. सूत्रों के अनुसार पायलट गुट ने आलाकमान के पास संदेश भिजवा दिया है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री के पद से हटाने पर ही समझोता हो पाएगा. फिलहाल जयपुर आने का कोई कार्यक्रम नहीं है और बीजेपी में जाने का भी कोई कार्यक्रम नहीं है.
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान के सियासी घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की एंट्री तो हो गई है, लेकिन फिलहाल वो हाथ बढ़ाने को तैयार नहीं है. सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच बात बनती नजर नहीं आ रही है. ऐसे में गहलोत सरकार पर भी संकट बरकरार दिखाई दे रहा है. कांग्रेस में चल रहे इस सियासी संग्राम के बीच बीजेपी ने फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं करने के लिए कहा है. गौरतलब है कि सचिन पायलट गुट 22 विधायक होने का दावा कर रहा है. जबकि अशोक गहलोत गुट का कहना है कि उनके पास बहुमत से ज्यादा संख्या है. लेकिन तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है. इस पर राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि हम फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम बस वॉच कर रहे हैं. फ्लोर टेस्ट की मांग न करने के पीछे उन्होंने बताया कि किसके पास कितने विधायक हैं, ये अभी क्लियर नहीं है. ऐसे में जब विधायकों की संख्या पर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती है तब तक फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं की जाएगी. इसके अलावा गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के नियमों को देखते हुए ही बीजेपी आगे की रणनीति बना रही है. कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व पर हालात की समीक्षा करने के कहा है. बता दें कि सचिन पायलट गुट के पास 22 विधायक हैं. इनमें से 10 विधायक ऐसे हैं जो बीजेपी में नहीं जाना चाहते हैं. खासकर जो बुजुर्ग विधायक हैं वो पूरी उम्र कांग्रेस में गुजारने के बाद नहीं चाहते कि आखिरी वक्त में बीजेपी में जाए. इसके अलावा कई विधायक अपने स्थानीय समीकरण देख रहे हैं. बताया ये भी जा रहा है कि गहलोत के पास मौजूद कई विधायक भी ऐसे हैं जो सचिन पायलट के लिए लॉयल हैं, लेकिन बीजेपी के साथ जाने को वो भी राजी नहीं है. बता दें कि पायलट गुट की तरफ से भी बार-बार यही कहा जा रहा है कि वो बीजेपी में नहीं जा रहे हैं. खुद सचिन पायलट ने आजतक से बातचीत में ये कहा था कि वो नहीं जाएंगे. ऐसे में बीजेपी ने भी फ्लोर टेस्ट की मांग वाली बात फिलहाल टाल दी है.
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान में सियासी संकट के बीच सचिन पायलट की मंत्री पद और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से छुट्टी कर दी गई है. सचिन पायलट की जगह शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासारा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा राजस्थान युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को भी हटा दिया गया है. गोविंद सिंह डोटासारा की गिनती प्रदेश के बड़े कांग्रेसी नेताओं में होती है. वह गहलोत कैबिनेट में प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं. लक्ष्मणगढ़ सीट से गोविंद सिंह डोटासारा तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं. पहला चुनाव गोविंद सिंह डोटासारा ने केवल 34 वोटों से जीता था. 55 वर्षीय गोविंद सिंह डोटासारा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2005 में सीकर जिले के समिति ग्राम पंचायत में बतौर प्रधान चुने जाने से की थी. इसके बाद वह 2008 में विधानसभा का चुनाव लड़े और 34 वोटों से जीते थे. 2013 में गोविंद सिंह डोटासारा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और तीन बार सांसद रहे सुभाष महरिया को 10 हजार 723 वोटों से हराया था. 2013 में राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार बनी. इस दौरान गोविंद सिंह डोटासारा ने विधानसभा में कई अहम मुद्दे उठाए. 2018 के चुनाव में गोविंद सिंह डोटासारा ने लगातार तीसरी बार लक्ष्मणगढ़ सीट से जीत दर्ज की. इस बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 22 हजार से अधिक वोटों से हराया.
जयपुर, 14 जुलाई 2020,राजस्थान के सियासी संकट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पलड़ा भारी दिख रहा है. कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों ने अशोक गहलोत को अपना नेता माना और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. इसके बाद राजस्थान मंत्रिमंडल से सचिन पायलट और उनके दो करीबी मंत्रियों को बर्खास्त किया जा रहा है. सचिन पायलट को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने के साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी हटा दिया गया है. उनकी जगह पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. सचिन पायलट के अलावा विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही मंत्री पद से हटाए जाने का ऐलान किया. सुरजेवाल ने कहा कि पायलट के साथ ही विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी मंत्री पद से हटाया जा रहा है. सुरजे वाला ने कहा कि कांग्रेस विधायक पायलट के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
जयपुर, 13 जुलाई 2020,राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पर मंडरा रहा संकट अब हटता हुआ दिख रहा है. सोमवार दोपहर को अशोक गहलोत ने सौ से अधिक विधायकों की परेड मीडिया के सामने करवाई और विक्ट्री साइन दिखाया. साफ है कि अशोक गहलोत ने संदेश दिया है कि उनके पास बहुमत है और सचिन पायलट के सभी दावे गलत साबित होते दिख रहे हैं. ऐसे में अब हर किसी की नजर इसपर है कि सचिन पायलट क्या कदम उठाएंगे. सचिन पायलट लगातार 25 से अधिक विधायक होने का दावा कर रहे थे. बड़े अपडेट: 05.45PM:सचिन पायलट ने कहा है कि हमने कोई भी समझौते की शर्त नहीं रखी है, और किसी आलाकमान से उनकी बातचीत नहीं चल रही है. पायलट गुट का कहना है कि अशोक गहलोत के पास कांग्रेस के मात्र 84 विधायक हैं बाकी हमारे साथ हैं. 04.29:PM: पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट को मैसेज भेजा है कि हमारा आप पर स्नेह है. हम आपका सम्मान करते हैं. हम खुले दिल से आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. प्लीज लौट आएं और बात करें. 03.48PM:राजस्थान के विधायक दल में प्रस्ताव पारित किया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि कोई भी कांग्रेस का पदाधिकारी और कांग्रेस का नेता या विधायक सरकार के खिलाफ षड्यंत्र में पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. कांग्रेस विधायक दल ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी में पूरी आस्था व्यक्त करते हुए अपना नेता सर्वसम्मति से अशोक गहलोत को माना है. कांग्रेस विधायक दल में प्रस्ताव पारित हुआ है कि बीजेपी के षड्यंत्रकारी मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया जाएगा. कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से एकजुट है. 02.05 PM: सचिन पायलट का संदेश लेकर अब एक नेता जयपुर जाएंगे. सूत्रों की मानें तो सचिन पायलट ने वित्त और गृह मंत्रालय मांगा है, साथ ही अपने लिए प्रदेश अध्यक्ष का पद मांगा है. 02.00 PM: बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी खुद इस मामले में एक्टिव हैं और अशोक गहलोत-सचिन पायलट से बात कर रही हैं. ताकि मामले को सुलझाया जा सके. 01.55 PM: जयपुर में एक बार फिर सचिन पायलट के पोस्टरों को लगाया जा रहा है. सुबह जयपुर कांग्रेस के दफ्तर से सचिन पायलट के पोस्टरों को हटाया जा रहा था. अशोक गहलोत का शक्ति प्रदर्शन 01.17 PM: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया को अपने आवास में बुलाया है, जहां पर विधायकों की संख्या का शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है. अशोक गहलोत की ओर से लगातार 100 से अधिक विधायकों के समर्थन की बात कही जा रही थी. इस दौरान अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने विक्ट्री साइन दिखाया. सचिन पायलट का दावा 12.20 PM: राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने दावा किया है कि 25 विधायक उनके साथ हैं. सचिन पायलट ने साफ कहा कि वो जयपुर में बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. दूसरी ओर गहलोत गुट का दावा है कि उनके पास 102 विधायक हैं. कांग्रेस की सचिन पायलट से अपील 11.50 AM: केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जयपुर भेजे गए रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पिछले 48 घंटे में कांग्रेस नेतृत्व ने कई बार सचिन पायलट से बात की है. राजस्थान सरकार जनता की सेवा के लिए काम करेगा. हम सभी विधायकों और नेताओं से अपील करते हैं कि वो विधायक दल की बैठक में शामिल हों, कांग्रेस की सरकार को मजबूत करने का काम करें. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कभी-कभी वैचारिक मतभेद उत्पन्न होता है, लेकिन इससे अपनी ही सरकार को कमजोर करना ठीक नहीं हैं. अगर कोई मतभेद है तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अगुवाई में हम इसका समाधान निकालेंगे. व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा के जरिए सरकार को कमजोर करना ठीक नहीं. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी की ओर से हर बार जांच एजेंसियों को आगे किया जाता है, आज सुबह से ही कांग्रेस के साथियों पर इस तरह से छापेमारी करवाकर डराने की कोशिश की जा रही है.
जयपुर, 13 जुलाई 2020,राजस्थान में जारी सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने दावा किया है कि 25 विधायक उनके साथ हैं. सचिन पायलट ने साफ कहा कि वो जयपुर में बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. सचिन पायलट का ये बयान तब आया है जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने उनसे आखिरी बार सुलह की अपील की है. आजतक से बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि अशोक गहलोत की ओर से जो 102 विधायकों के साथ होने का दावा किया जा रहा है, वो पूरी तरह गलत है. क्योंकि 25 विधायक तो उनके साथ ही बैठे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस की ओर से सोमवार दोपहर को ही अपील की गई है कि सचिन पायलट को जयपुर बैठक में आना चाहिए, फोन उठाकर कांग्रेस नेताओं से बात करनी चाहिए. ताकि मतभेदों को दूर किया जा सके. रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि पिछले 48 घंटे में कई बार सचिन पायलट की कांग्रेस आलाकमान से बात हुई है. हालांकि, सचिन पायलट गुट की ओर से लगातार ये कहा जा रहा है कि उनके पास 30 विधायकों का समर्थन है. इधर जयपुर बैठक में नब्बे से अधिक विधायक पहुंच गए हैं, लेकिन कांग्रेस 102 विधायक साथ होने का दावा किया जा रहा है. कांग्रेस की ओर से पहले से ही व्हिप जारी किया गया था जिसमें कहा गया कि जो विधायक बैठक में शामिल नहीं होगा, उसपर एक्शन लिया जाएगा और पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है. इसी बीच सोमवार को जयपुर कांग्रेस दफ्तर से सचिन पायलट के पोस्टर हटा दिए गए.
जयपुर, 13 जुलाई 2020, राजस्थान में कांग्रेस सरकार का संकट टलता दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने विधायकों की परेड करा दी है. गहलोत खेमे ने 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन दिखाकर सरकार बचाने का दावा कर दिया है. दूसरी तरफ डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी अपने पास दो दर्जन से ज्यादा विधायक होने की बात कर रहे हैं. ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि फिलहाल गहलोत सरकार का संकट टल जरूर गया है, लेकिन शायद खत्म नहीं हुआ है. ये चर्चा इसलिए है क्योंकि राजस्थान विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 200 है. सरकार चलाने के लिए 101 विधायकों की जरूरत होती है. कांग्रेस के 107 और बीजेपी के 72 विधायक हैं. जबकि बाकी अन्य दलों के साथ निर्दलीय विधायक हैं. सचिन पायलट ने दावा किया है कि उनके पास 25 विधायक हैं. जबकि गहलोत खेमे के समर्थक विधायकों की सूची में 102 विधायकों के नाम फिलहाल हैं. यानी एकदम किनारे पर गहलोत सरकार है. सचिन पायलट के प्रति कांग्रेस के नरम रुख की भी यही वजह माना जा रही है. पायलट की बगावत के बावजूद कांग्रेस ने जयपुर में विधायकों के शक्ति प्रदर्शन से पहले मीडिया के जरिए सचिन पायलट को वापस लौटने का न्योता दिया. कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि जो मतभेद हैं वो अलग चीज हैं, लेकिन राजस्थान की भलाई के लिए वापस आ जाएं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि सचिन पायलट के लिए दरवाजे खुले हैं, वो आएं उनकी हर समस्या पर बात की जाएगी. दूसरी तरफ सोमवार सुबह जब अशोक गहलोत के सीएम आवास पर विधायक जुटाए जा रहे थे उसी वक्त जयपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय से सचिन पायलट के पोस्टर हटा दिए गए थे. लेकिन विधायकों के शक्ति प्रदर्शन के बाद ही पोस्टर वापस लगा दिए गए. अब खबर ये आ रही है कि सचिन पायलट समझौता करने के मूड में हैं और इसके लिए वो अपने समर्थक विधायकों के लिए गृह विभाग जैसे महत्वूर्ण पोर्टफोलियो की डिमांड कर रहे हैं. ऐसे में पिक्चर अभी बाकी नजर आ रही है. संख्या के लिहाज से गहलोत सरकार किनारे पर है. अगर सचिन पायलट की शर्तें मानी जाती हैं तो निश्चित ही कांग्रेस सरकार अच्छी स्थिति में आ जाएगी. अगर ऐसा नहीं होता है तो सचिन पायलट की नाराजगी आज नहीं तो कल गहलोत सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
जयपुर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने जयपुर में कहा है कि मैंने, अविनाश पांडेय और अजय माकन ने पिछले 24 घंटे में राजस्थान के कांग्रेस विधायकों से मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर गहन मंत्रणा की है। पिछले 48 घंटे में सचिन पायलट से अनकों बार वार्तालाप और चर्चा की है। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस कार्य समिति के कई वरिष्ठ सदस्य और कांग्रेस नेतृत्व कई बार सचिन पायलट से मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर बातचीत हो चुकी है। एक बार फिर सभी विधायकों से मंत्रणा करने के बाद सचिन पायलट समेत सभी विधायकों से अपील करते हैं कि यह सरकार जनता की सेवा के लिए निर्वाचित हुई है। व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा वाजिब हो सकती है। लेकिन राजस्थान व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा से बड़ा है। रणदीप सुरजेवाला ने अपील की कि कांग्रेस के तमाम विधायक, मंत्री सीएम की ओर से बुलाई गई बैठक में हिस्सा लें। यही राजस्थान की जनता की जनसेवा का परिचय होगा। उन्होंने कहा कि हम सब हर बात में एकत्र हैं। किसी मुद्दे पर मतभेद होना लोकतंत्र का परिचायक है। लेकिन अपनी ही पार्टी को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद फरोख्त का मौका देना अनुचित है। गैर वाजिब है। सचिन पायलट समेत किसी भी विधायक के मन में काई शंका सवाल है तो इन्हें बातचीत से सुलझाने के लिए कांग्रेस आलाकमान के दरवाजे सदैव खुले थे और खुले हैं, सदैव खुले रहेंगे। आइए मिलकर बातचीत करें और सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में इसका समाधान निकाल लेंगे। मैं समस्त विधायक मित्रों से अपील करता हूं कि सारे विधायक पार्टी के फोरम पर अपने विचार रखें। सुरजेवाला ने कहा कि सचिन पायलट की ओर से अभी तक ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि उनके पास कितने विधायक हैं, या वे कुछ विधायकों के साथ कांग्रेस से अलग होना चाहते हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वह अगर बैठक में आना चाहते हैं तो वे अविनाश पांडेय को फोन करें। वे बताएं कि कब तक मीटिंग में आएंगे। पार्टी बैठक में आएं और अपनी बात रखें। सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी के तीन अग्रिम विभाग हैं, आयकर विभाग, इन्फोर्समेंट विभाग (ईडी) और सीबीआई। जब भी लोकतंत्र की हत्या करनी होती है तो ये तीनों आगे आ जाते हैं। राजस्थान में भी ये तीनों कांग्रेस के पदाधिकारियों को परेशान कर रहे हैं। बीजेपी पैसों के दम पर राजस्थान के बहादुर विधायकों को खरीद नहीं पाएगी।
जयपुर राजस्थान में सियासी जंग तेज हो गई है। पूरी रात सरकार बचाने के लिए कांग्रेस खेमे में मंथन जारी है। वहीं, डिप्टी सीएम सचिन पायलट दिल्ली में कैंप किए हुए हैं। सियासी शह-मात के खेल में सीएम अशोक गहलोत के करीबियों के घर आयकर विभाग की छापेमारी चल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि ये कार्रवाई बदले की भावना से हो रही है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने गहलोत के करीबियों को घर छापेमारी पर कहा है कि बीजेपी ने अपने घोड़ों को उतार दिया है। अशोक गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ और राजीव अरोड़ा के घर आयकर विभाग की टीम छापेमारी कर रही है। दोनों के दिल्ली और राजस्थान के ठिकानों पर छापेमारी चल रही है। हालांकि आधिकारिक रूप से आयकर विभाग की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार धर्मेंद्र राठौड़ और राजीव अरोड़ा सीएम अशोकर गहलोत के पॉलिटिक्ल और फंड मैनेजर हैं। दरअसल, यह छापेमारी तब हो रही है, जब अशोक गहलोत ने विधायक दल की जयपुर में बैठक बुलाई है। वहीं, डिप्टी सीएम सचिन पायलट अभी दिल्ली में कैंप किए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गहलोत के दोनों करीबियों के 24 ठिकानों पर छापेमारी चल रही है। इसे लेकर सीएम गहलोत की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। वहीं, आयकर विभाग के इस छापेमारी को लेकर राजस्थान पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि गहलोत के करीबियों घर सीआरपीएफ की मदद से आयकर विभाग छापेमारी कर रही है। इसके साथ ही जयपुर के एक बड़े होटल पर भी छापेमारी चल रही है, जो कि कथित रूप से गहलोत के रिश्तेदारों का बताया जाता है। कहा जाता है कि इस होटल में गहलोत के रिश्तेदारों का निवेश है। जयपुर में छापेमारी फेयरमाउंट होटल पर भी चल रही है। यहां ईडी और आयकर विभाग की छापेमारी कर रही है। बताया जाता है कि होटल संचालक सीएम के बेटे का करीबी है। खबर है कि कांग्रेस के विधायकों को यहीं रखा जाना था। इसके अलावे अम्रपाली ग्रुप के ठिकानों पर भी छापेमारी चल रही है। यहीं नहीं कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले कोटा में कुछ कोचिंग संचालकों के यहां भी आयकर विभाग की छापेमारी चल रही है।
जयपुर,राजस्थान में सियासत सरगर्म है. राज्यसभा चुनाव के दौरान रेगिस्तान का सियासी तापमान बढ़ा देने वाला हॉर्स ट्रेडिंग का जिन्न एक बार फिर से बोतल के बाहर आ गया है. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो नेताओं को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के गिरफ्तार कर लेने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) भी सक्रिय हो गई है. एसीबी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े इस मामले में तीन निर्दलीय विधायकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. जानकारी के मुताबिक दौसा जिले के महवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, अजमेर जिले के किशनगढ़ से निर्दलीय विधायक सुरेश टांक और पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन से विधायक खुशवीर सिंह के खिलाफ एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज की है एसीबी इन विधायकों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुला सकती है. गौरतलब है कि एक दिन पहले ही विधायकों की खरीद-फरोख्त कर प्रदेश की गहलोत सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करने के आरोप में एसओजी ने अभी 10 जुलाई की रात को ही भाजपा के दो नेताओं को गिरफ्तार किया था. एसओजी के मुताबिक भाजपा नेता भरत मलानी की कॉल डिटेल से विधायकों को खरीदने की कोशिश किए जाने की जानकारी मिली थी. एसओजी ने ब्यावर के नेता और राजस्थान भाजपा में विभिन्न पदों पर रह चुके मलानी और अशोक सिंह को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. बाद में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्यसभा चुनाव के समय से ही भाजपा पर अपनी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं. मुख्यमंत्री गहलोत ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि जैसे मंडी में बकरा खरीदा जाता है, वैसे ही विधायकों को खरीदने का प्रयास किया जा रहा है.
जयपुर, 12 जुलाई 2020,राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक बार फिर राज्य की सीमाओं को सील कर दिया गया है. राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने इस संदर्भ में आदेश जारी किए हैं. सरकारी आदेश में कहा गया कि बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए राज्य की सीमाओं को सील करने का फैसला किया गया है. जो कोई भी राजस्थान से बाहर जाना चाहता है, उसके लिए उसे पास लेने की जरूरत होगी. राजस्थान की सीमाओं को सील करने का आदेश ऐसे समय आया है, जब राज्य में कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिशों का मामला सामने आया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राज्य में कांग्रेस की सरकार गिराने की साजिश रच रही है. फिलहाल, राजस्थान की सीमा पर चौकसी बरती जा रही है. विधायकों को राज्य से बाहर जाने से रोकने के लिए राजस्थान की सीमा को नियंत्रित करने के आदेश जारी किए गए हैं. प्रदेश की सीमा पर पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है. साथ ही हाईवे पर विशेष नाकाबंदी चल रही है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सौरभ श्रीवास्तव ने सीमा को नियंत्रित करने का आदेश जारी किया है. बता दें कि इससे पहले भी कांग्रेस के विधायकों को होटल में रखने से पहले राजस्थान पुलिस ने सीमा नियंत्रण के आदेश दिए थे. राज्य में कांग्रेस की सरकार को गिराने की साजिश के आरोप में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बीजेपी के दो नेताओं को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार बीजेपी नेताओं पर कांग्रेस के विधायकों को प्रलोभन देने का आरोप है. साथ ही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने तीन विधायकों के खिलाफ विधायक की खरीद-फरोख्त की शिकायत दर्ज की है. इसमें निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, सुरेश टांक के अलावा कांग्रेस के विधायक सुखबीर सिंह जोजावर का भी नाम शामिल है.
जयपुर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम अशोक गहलोत के सरकार गिराने वाले बयान पर पलटवार किया है। गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत इस फिल्म के अभिनेता, खलनायक और पटकथा लेखक हैं। वह अपनी पार्टी (राज्य) के अध्यक्ष को टक्कर देने के लिए बीजेपी के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। मैं मांग करता हूं कि वह इसे सार्वजनिक करें कि कांग्रेस के कितने विधायक हैं, जो उन्हें बिकाऊ लगते हैं। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमें कोरोनोवायरस से लड़ने पर ध्यान देना चाहिए और यही हम कर रहे हैं लेकिन वे (भाजपा) सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं। वाजपेयी जी के समय में ऐसा नहीं था लेकिन 2014 के बाद धर्म के आधार पर विभाजन हुआ है। एसओजी ने तख्तापलट की साजिश का किया खुलासा राजस्थान की कांग्रेस सरकार के तख्तापलट की साजिश से एसओजी ने पर्दा उठाया है। एसओजी ने इस सियासी साजिश में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें ब्यावर से बीजेपी नेता और व्यवसायी भरत भाई, उदयपुर से राजपूत नेता अशोक चौहान शामिल हैं। एसओजी दोनों से पूछताछ कर रही है और जल्द ही इस पूरे मामले में कोई बड़ा खुलासा और हो सकता है। बीजेपी ने बताया कांग्रेस की साजिश इस पूरे मसले पर राजस्थान बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसके पीछे साजिश बताया है। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि एसओजी में दर्ज मामले की स्क्रिप्ट कांग्रेस सरकार की लिखी हुई है। यह बीजेपी के खिलाफ साजिश है। उन्होंने कहा है कि हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।
नई दिल्ली सीएम और युवा डेप्युटी सीएम के बीच खींचतान की चर्चाएं, युवा नेता का दिल्ली में डेरा डालना, पार्टी के 24 विधायकों का दिल्ली से सटे प्रतिद्वंद्वी पार्टी शासित दूसरे राज्य में होटल में रुकना और कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में नहीं रहना, मुख्यमंत्री का विरोधी दल पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाना...कोरोना संकट के बीच कांग्रेस शासित राजस्थान (Rajasthan Political Crisis) में अचानक सियासी हलचल बहुत तेज हो चुकी है। कमलनाथ जैसे हश्र का डर! सब कुछ करीब-करीब वैसा ही जैसा 4 महीने पहले तब कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में हुआ था और आखिरकार कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ऐसे में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की धड़कनों का बढ़ना लाजिमी है कि कहीं उनका भी हश्र कमलनाथ जैसा न हो। तो क्या राजस्थान में दोहराई जा रही एमपी की कहानी? 4 महीने पहले मध्य प्रदेश में जो कुछ हुआ और आज राजस्थान में जो कुछ हो रहा है, उनमें बहुत समानताएं हैं। तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा कराकर कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। विधायकों को पहले गुड़गांव और बाद में बेंगलुरू के होटल में ठहराया गया था। कमलनाथ के सामने तब युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे तो अब गहलोत के सामने युवा डेप्युटी सीएम सचिन पायलट हैं। पायलट 3 दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस के 24 विधायक शनिवार रात से ही गुड़गांव के ही मानेसर में एक बड़े होटल में रुके हुए हैं। कई विधायकों के मोबाइल फोन स्विच्ड ऑफ हैं। सिंधिया की राह पकड़ेंगे पायलट? 2018 विधानसभा चुनाव के वक्त सिंधिया और पायलट दोनों ही मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार थे। लेकिन बाजी हाथ लगी थी कमलनाथ और गहलोत के नाम। राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा रह चुके सिंधिया और पायलट एक दूसरे के बहुत ही अच्छे दोस्त हैं। जब एमपी में सिंधिया ने पार्टी से बगावत कर कमलनाथ सरकार को गिराया था, तब सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें खूब लगी थीं कि कहीं पायलट भी दोस्त सिंधिया की राह न पकड़ लें। दिल्ली में पायलट, होटल में विधायक पायलट दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। चर्चा तो यह भी है कि वह बीजेपी के संपर्क में हैं। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब शनिवार देर रात गहलोत की बुलाई बैठक में उनके समर्थक कई मंत्री शामिल नहीं हुए। पूरे सियासी घटनाक्रम पर पायलट की तरफ से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है। BJP की साजिश या कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान? मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीजेपी पर विधायकों की खरीदफरोख्त कर अपनी सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं, तो बीजेपी ठीक वैसे ही इसे कांग्रेस की आपसी खींचतान बता रही है, जैसे 4-5 महीने पहले मध्य प्रदेश के सियासी संकट पर बोल रही थी। गहलोत का दावा है कि विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये का लालच दिया जा रहा है। बीजेपी इसे कांग्रेस की आपसी गुटबंदी से ध्यान भटकाने की कवायद करार दे रही है। मौजूदा समीकरण 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें 13 इंडिपेंडेट विधायकों का समर्थन भी हासिल है। आरएलडी के एक विधायक सुभाष गर्ग भी सरकार के साथ हैं जो गहलोत कैबिनेट में मंत्री हैं। इस तरह गहलोत सरकार को 121 विधायकों का समर्थन हासिल है। दूसरी तरफ बीजेपी के 72 विधायक हैं।
जयपुर, 11 जुलाई 2020,राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत की सरकार को कथित रूप से गिराने की कोशिशों के मामले में बीजेपी नेताओं का नाम सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने इस मामले में दो बीजेपी नेताओं को देर रात हिरासत में लिया था. पूछताछ के बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया है. कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर एक्शन रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में विधायकों की खरीद फरोख्त मामले में ब्यावर के दो भाजपा नेताओं का नाम सामने आया है. इन नेताओं के नाम हैं भरत मालानी और अशोक सिंह. इन्हें ब्यावर उदयपुर से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने गिरफ्तार किया है. राजस्थान SOG के मुताबिक मालानी की कॉल रिकॉर्डिंग से पता चला है कि विधायकों को खरीदने की कोशिश जा रही है. बीजेपी नेता भरत मालानी गिरफ्तार इस खुलासे के बाद एसओजी ने भरत मालानी को हिरासत में ले लिया है, बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल जयपुर में उनसे पूछताछ हो रही है. भरत मालानी राजस्थान बीजेपी में कई पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं. बता दें कि राजस्थान में सरकार गिराने की कोशिशों को लेकर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने केस दर्ज किया है. एफआईआर के मुताबिक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को कुछ फोन नंबरों की रिकॉर्डिंग के दौरान पता चला कि अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश चल रही है.बीजेपी पर धन देकर खरीदने का आरोप एफआईआर के अनुसार, ऐसी बात फैलाई जा रही है कि राजस्थान में सीएम और डिप्टी सीएम में झगड़ा चल रहा है. ऐसी स्थिति में कुछ ताकतें निर्दलीय और कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर इस सरकार को गिराना चाहते हैं. एफआईआर में आरोप है कि बीजेपी नेता विधायकों को धन का प्रलोभन देकर अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं. राजस्थान का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप इस मामले की जांच कर रहा है.
कोटा,पुलवामा शहीद की पत्नी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री और विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शहीद की पत्नी ने कहा कांग्रेस के कहने के बावजूद उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी ओम बिड़ला के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, तो अब मुझे परेशान किया जा रहा है. वर्तमान में चीन के साथ सीमा पर तनाव चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चीन से सटे लेह और लद्दाख में सैनिकों का उत्साह बढ़ाने गए थे. ऐसे में राजस्थान के कोटा में सांगोद के पास के गांव विनोद कला के पुलवामा में शहीद हुए हेमराज मीणा की पत्नी मधुबाला मीणा ने कांग्रेस के स्थानीय विधायक भरत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मधुबाला मीणा ने कांग्रेस विधायक भरत सिंह पर शहीद हेमराज मीणा की प्रतिमा और उनके स्मारक के काम में रोड़े अटकाने का आरोप लगाया है. शहीद हेमराज की पत्नी मधुबाला मीणा ने पूर्व सैनिक सेवा परिषद राजस्थान के बैनर तले आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान यह आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ओम बिड़ला ने सांसद विकास निधि से शहीद हेमराज मीणा के पैतृक गांव विनोद कला में शहीद पार्क के विकास के लिए 20 लाख रुपये की राशि की अनुशंसा की थी, जिसके लिए स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा बाउंड्री बनाकर समतलीकरण कार्य और मिट्टी भराई का कार्य पूरा कर दिया गया था. इस धनराशि से शहीद स्मृति पार्क में शहीद हेमराज की प्रतिमा लगाई जानी थी, जिसके लिए जन सहयोग से प्रतिमा भी बनवाई गई है. मधुबाला मीणा का कहना है कि जब स्थानीय कांग्रेस विधायक भरत सिंह को स्मृति पार्क के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने चंबल फर्टिलाइजर के अधिकारियों को बुलाकर दबाव बनाया. साथ ही कहा कि मेरी जानकारी के बिना मेरी विधानसभा में किसी प्रकार का कार्य नहीं होगा. कांग्रेस विधायक बना रहे दबाव इस स्मारक के लिए सांसद निधि से 20 लाख रुपये देने की घोषणा राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने की थी और उनकी अनुशंसा पर चंबल फर्टिलाइजर को इसमें कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था. शहीद की पत्नी का कहना है कि भरत सिंह ने चंबल फर्टिलाइजर पर दबाव बनाया, जिसके बाद चंबल फर्टिलाइजर वाले इस स्मारक को बनाने में रुचि नहीं ले रहे और टालमटोल कर रहे हैं. ओम बिड़ला के नहीं लड़ा था चुनाव शहीद की पत्नी मधुबाला ने आरोप लगाया कि पिछले लोकसभा चुनाव में विधायक भरत सिंह ने ओम बिड़ला के खिलाफ कांग्रेस से मुझे चुनाव लड़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा था, तब मैंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. इस बात से वो नाराज हो गए थे और अब शहीद स्मारक में रोड़ा अटका रहे हैं. कांग्रेस विधायक की आरोपों पर सफाई इसको लेकर जब कांग्रेस विधायक भरत सिंह से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने शहीद का सम्मान किया है. जो भी मदद हो सकती थी हमने की है. शहीद के नाम से एक कॉलेज भी खोला है और वहां पर शीघ्र ही प्रतिमा भी लगवाई जाएगी. ये जिस जगह पर प्रतिमा लगाने की बात कर रहे हैं, उस जगह से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. इस जगह प्रतिमा लगाने के लिए जिन्होंने पैसा दिया है, इसका जवाब भी वही देंगे. वहीं, शहीद हेमराज की पत्नी ने कहा कि विधायक भरत सिंह ने शहीद स्मारक नहीं बनने दे रहे हैं. अदालत चौराहे पर शहीद की मूर्ति के लिए बोला गया थे, वो भी नहीं होने दे रहे हैं. हेमराज की पत्नी ने कहा कि एक बार मैं उनसे एक कार्यक्रम में मिलने गई थी, तब उन्होंने मुझसे काफी कटु वचन कहे थे पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने कहा कि हमने शहीद की पत्नी को पुलवामा के समय चुनाव लड़ने के लिए कहा था. अगर उस समय वो चुनाव लड़तीं, तो उस माहौल में लोग शहीद का सम्मान करते. मैंने तो एक आइडिया दिया था. मैं टिकट बांटने वाला नहीं हूं.
जयपुर, 08 जुलाई 2020,देश में कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. कोरोना वायरस के संकट के कारण राजस्थान में अभी तक स्कूल नहीं खोले गए हैं. इस बीच राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने निजी विद्यालयों को स्कूल नहीं खुलने तक फीस न लेने के आदेश दिए हैं डोटासरा के ट्वीट के बाद सरकारी आदेश की कॉपी जारी की गई, जिसमें यह कहा गया कि गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों/अभिभावकों से 15 मार्च के बाद बकाया कोई भी शुल्क, वर्तमान में लागू फीस और अग्रिम फीस के भुगतान को आगामी 3 माह तक स्थगित किया गया था, इस अवधि को बढ़ाकर राज्य सरकार के आदेशानुसार जब तक विद्यालय न खुले तब तक की अवधि के लिए स्थगित किया जाता है. इस अवधि में शुल्क न जमा कराने की स्थिति में किसी भी विद्यार्थी का नाम न काटा जाए. दरअसल, राजस्थान में सैकड़ों अभिभावकों ने सड़कों पर आकर प्रदर्शन किया था. इनकी मांग थी कि निजी स्कूल, जो कि कोरोना काल में बंद पड़े हैं, वे विद्यालय फीस न लें. अभिभावकों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा था. सरकार के जरिए यह फैसला जयपुर समेत चित्तौड़गढ़, जोधपुर, सवाई माधोपुर और कई अन्य जिलों में अभिभावकों के जरिए किए गए प्रदर्शन के बाद लिया गया है.

Top News