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नई दिल्ली, 25 नवंबर 2019, नया घर हो या ऑफिस हर इंसान सुख-शांति और लाभ के लिए हर काम वास्तु के हिसाब करना बेहतर समझता है. वास्तु के चमत्कारिक लाभ किसी से छिपे नहीं हैं. हालांकि वास्तु के पीछे छिपे वैज्ञानिक प्रभाव को बहुत से लोग अभी तक नहीं समझ पाए हैं. घर या ऑफिस में निश्चित ही एक स्थान घड़ी लगाने के लिए रिजर्व रखा जाता है. आमतौर पर लोग घर की किसी भी दीवार पर घड़ी टांग देते हैं. लेकिन वास्तु के हिसाब से ऐसा करना गलत है. घर के किसी भी कोने या दीवार पर घड़ी लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. 1. क्या आप जानते हैं दक्षिण दिशा में बनी घर की किसी भी दीवार पर घड़ी टांगना अशुभ होता है. ऐसा करने से हमेशा बचना चाहिए. 2. वास्तु के अनुसार पूर्व, पश्चिम और उत्तर की दिशा में दीवार पर घड़ी लगाना ही उचित है. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. 3. वास्तु के मुताबिक घर या ऑफिस की दीवारों पर पेंडलम क्लॉक यानी घंटे वाली घड़ी लगाना अच्छा होता है. इसमें से निकली आवाज आपको पॉजीटिव एनर्जी देती है. 4. मुख्य द्वार के ऊपर या उसके ठीक सामने वाली दीवार पर भी घड़ी टांगना अच्छा नहीं माना जाता है. इन जगहों पर भूलकर भी घड़ी नहीं लगानी चाहिए. 5. शादी-शुदा जीवन का भरपूर आनंद लेने वालों को भी अपने बेड से दीवर घड़ी दूर ही रखनी चाहिए. 6. वास्तु में दीवार पर टंगी खराब घड़ी को भी अशुभ माना जाता है. घर में लगी किसी भी बंद घड़ी की तुरंत रिपेयर करवाएं और फिर दीवार पर लगाएं. 7. अगर अपने बेडरूम के लिए आपने कोई नई घड़ी खरीदी है तो उसे ऐसे स्थान पर लगाएं जिससे उसका रुख पूर्व दिशा की तरफ हो.
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2019,कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी कि दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस बार 27 अक्टूबर को देश भर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है. मान्यता है कि दिवाली के दिन दीपों की रोशनी में मां लक्ष्मी घर में आती हैं. ये भी मान्यता है कि प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया. अमावस्या की काली रात को रोशन हो गई. इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है. लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 18:42 से 20:11 प्रदोष काल- 17:36 से 20:11 वृषभ काल- 18:42 से 20:37 अमावस्या तिथि आरंभ- 12:23 (27 अक्तूबर) अमावस्या तिथि समाप्त- 09:08 (28 अक्तूबर) कब है धनतेरस? जानें पूजा की सही विधि और शुभ मुहूर्त मां लक्ष्मी को ऐसे करें प्रसन्न मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के तरीके बहुत आसान हैं, लेकिन ज्यादतर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है. मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कई उपाय भी दिए गए हैं, जिन्हें करके आसानी से मां की कृपा पाई जा सकती है. लक्ष्मी कृपा पाने के इन्हीं में से कुछ चुनिंदा उपाय जानिए. -महालक्ष्मी के महामंत्र ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम: का कमलगट्टे की माला से कम से कम 108 बार जाप करेंगे तो आपके ऊपर मां लक्ष्‍मी की कृपा बनी रहेगी. -दिवाली वाले दिन लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए. इससे घर की सारी निगेटिविटी दूर हो जाएगी. -दिवाली पर महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां रखें. इससे धन संबंधी सभी परेशानियां दूर होंगी. -दिवाली वाले दिन शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं. ध्यान रहे सभी चावल पूर्ण होने चाहिए. -लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ जरूरी रखें और पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी में रखें. -इस दिन पीपल के पेड़ में जल जरूर दें. इससे शनि के दोष और कालसर्प दोष खत्म हो जाता है
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2019,अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन अहोई माता (पार्वती) की पूजा की जाती है. इस दिन किए उपाय आपकी हर मुश्किल दूर कर सकते हैं. इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं. जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो उनके लिए ये व्रत विशेष है. इस दिन विशेष उपाय करने से संतान की उन्नति और कल्याण भी होता है. इस बार अहोई अष्टमी 21 अक्टूबर को है. पूजा का शुभ मुहूर्त 21 अक्‍टूबर 2019 को शाम 05 बजकर 42 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक. कुल अवधि: 1 घंटे 17 मिनट अहोई अष्टमी व्रत का महत्व क्या है ? - अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है - इस दिन अहोई माता (पार्वती) की पूजा की जाती है - इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं - जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो उनके लिए ये व्रत विशेष है - जिनकी संतान दीर्घायु न होती हो , या गर्भ में ही नष्ट हो जाती हो , उनके लिए भी ये व्रत शुभकारी होता है - सामान्यतः इस दिन विशेष प्रयोग करने से संतान की उन्नति और कल्याण भी होता है - ये उपवास आयुकारक और सौभाग्यकारक होता है इस बार अहोई अष्टमी का व्रत 21 अक्टूबर को किया जाएगा कैसे रखें इस दिन उपवास ? - प्रातः स्नान करके अहोई की पूजा का संकल्प लें - अहोई माता की आकृति , गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनायें - सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरम्भ करें - पूजा की सामग्री में एक चांदी या सफ़ेद धातु की अहोई ,चांदी की मोती की माला , जल से भरा हुआ कलश , दूध-भात, हलवा और पुष्प , दीप आदि रखें . - पहले अहोई माता की , रोली , पुष्प,दीप से पूजा करें , उन्हें दूध भात अर्पित करें - फिर हाथ में गेंहू के सात दाने और कुछ दक्षिणा (बयाना) लेकर अहोई की कथा सुनें - कथा के बाद माला गले में पहन लें और गेंहू के दाने तथा बयाना सासु माँ को देकर उनका आशीर्वाद लें - अब चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें - चांदी की माला को दीवाली के दिन निकाले और जल के छींटे देकर सुरक्षित रख लेंaajtak
नई दिल्ली, 06 जुलाई 2019, हर ग्रह की अपनी विशेषता होती है. उसके अच्छे और बुरे लक्षण होते हैं, जो व्यक्ति के ऊपर दिखते हैं. इन लक्षणों को समझकर हम उस व्यक्ति के ग्रहों को जान सकते हैं. इसके लिए व्यक्ति के स्वभाव और आदतों पर ध्यान देना होगा. शनि के लक्षण बहुत साफ होते हैं, जिसको पहचानना सरल होता है. कैसे जानें कि हमारा शनि अशुभ है?- - व्यक्ति कठोर वाणी और स्वभाव का होता है. - व्यक्ति के बाल रूखे होते हैं. - व्यक्ति लापरवाह और कामचोर स्वभाव का होता है, काम टालता रहता है. - आम तौर पर जीवन में किसी बड़ी घटना के बाद जीवन में बदलाव आ जाता है. - जीवन में निम्न कर्म तथा गलत कार्य में संलग्न रहता है. - कदम कदम पर संघर्ष का सामना करना पड़ता है - एक स्थिति में जीवन में अकेलापन सा महसूस होता है कैसे जाने कि हमारा शनि हमारे लिए शुभ है?- - व्यक्ति लम्बा और दुबला पतला होता है. - व्यक्ति के बाल घने होते हैं. - व्यक्ति अनुशासित और कर्मठ होता है. खूब परिश्रम से आगे बढ़ जाता है. - आम तौर पर जीवन के मध्य भाग में अध्यात्मिक भी हो जाता है. - कानून,परिवहन या अध्यात्म से सम्बन्ध रखता है. - विलम्ब से ही सही पर खूब धन प्राप्त करता है. कैसे जानें कि वर्तमान में शनि शुभ परिणाम नहीं दे रहा है?- - घरों में सीलन आने लगे - बिना कारण चोट लगने लगे - हड्डियों में दर्द होने लगे - बाल जरूरत से ज्यादा झड़ने लगें अगर शनि अशुभ हो तो क्या उपाय करने चाहिए?- - आचरण और आहार व्यवहार शुद्ध रखना चाहिए - स्वक्छ्ता और धर्म का ठीक तरीके से पालन करना चाहिए . - भगवान शिव की या भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. - देर तक सोने से और देर रात तक जागने से बचना चाहिए. - हल्के नीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग करें. - संध्याकाळ में शनि के मन्त्रों का जप अवश्य करें
नई दिल्ली, 01 मई 2019, अमावस्या तिथि विशेष प्रभाव की तिथि मानी जाती है. इस दिन स्नान, दान और पूजा उपासना का विशेष महत्व होता है. अगर यह अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदायी हो जाती है. शनि अमावस्या पर विशेष प्रयोगों से शनि की कृपा आसानी से मिल सकती है. ख़ास तौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं. इस बार शनि अमावस्या 04 मई को है. अगर आपके साथ बार-बार दुर्घटना घट रही हो- - अगर आपके साथ बार-बार दुर्घटना घट रही हो और आपको चोट पैरों में या हड्डियों में लग रही हो तो ऐसी दशा में आप शनि अमावस्या के दिन शाम के समय एक लोहे का छल्ला बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करें. - इसी दिन सरसों के तेल में देखकर अपनी छाया का दान करें. अगर आपकी नौकरी या रोजगार में समस्या आ रही हो- - आपके तमाम प्रयासों के बावजूद आपकी नौकरी की समस्याएं समाप्त नहीं हो पा रही हों. - आपको नयी नौकरी ही नहीं मिल पा रही हो. - शनि अमावस्या पर पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के नौ दीपक जलाएं. - इसके बाद वृक्ष की नौ परिक्रमा करें और नौकरी की समस्याओं की समाप्ति की प्रार्थना करें अगर आपके साथ बार-बार वाद विवाद हो रहा हो या मुक़दमे आपको परेशान कर रहे हों- - बिना किसी कारण के झगड़ा होने लगे, बार बार विवाद की नौबत आ जाए. - अनावश्यक आप मुक़दमे में फंस जाएं और मुक़दमे आपको परेशान करें. - शनि अमावस्या पर अपने वजन के 10वें हिस्से के बराबर काले तिल या काली उरद की दाल का दान करें. - इस दिन मीठी चीज़ों का सेवन बिल्कुल न करें. अगर धन या संपत्ति की समस्या हो या दरिद्रता का सामना करना पड़ रहा हो- - अगर आपके तमाम प्रयासों के बावजूद आपका धन खर्च बढ़ता ही जा रहा हो, धन नहीं रुक रहा हो. - धन की समस्या बढ़ रही हो और आपको एक-एक पैसे का मोहताज होना पड़ रहा हो. - शनि अमावस्या पर काले वस्त्र में रखकर सिक्कों का दान करें. - इस दिन "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का तीन माला जाप करें. अगर स्वास्थ्य की कोई समस्या हो- - अगर आपका स्वास्थ्य नियमित रूप से ख़राब रहता हो, कुछ न कुछ स्वास्थ्य की समस्या चलती रहती हो. - अगर आप लंबे समय से बीमार हों और उसका कोई समाधान न निकल पा रहा हो. - शनि अमावस्या पर एक काले कपड़े में काला तिल, सरसों का तेल और कुछ सिक्के रखकर अपने सिर पर से नौ बार घुमा लें. - इसको किसी निर्धन व्यक्ति को दान कर दें. अगर शनि की साढ़े-साती या ढैया चल रही हो- - जिसके वजह से आपके सारे बने बने काम बिगड़ रहे हों. कोई भी सफलता नहीं मिल रही हो तो शनि अमावस्या की शाम को शनि मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" की 11 माला का जाप करें. - किसी निर्धन व्यक्ति को भोजन कराएं. ध्यान रखें कि इसमें कोई मीठी वस्तु न हो.
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में आने वाले सनौली में भारतीय पुरातत्व विभाग (आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ) को बड़ी कामयाबी मिली है. यहां जमीन के नीचे 4000 साल पुराने पवित्र कक्ष, शाही ताबूत, दाल-चावल से भरे मटके, तलवारें, औजार, मुकुट और इंसानों के साथ दफनाई गई जानवरों की हड्डियां मिली हैं. एएसआई इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्कियॉलजी के डायरेक्टर डॉ एस. के मंजुल का कहना है कि एएसआई को सनौली में कई प्राचीनतम सभ्यताओं के अवशेष मिले थे. इसके बाद जनवरी 2018 में सनौली में खुदाई शुरू की गई. उस वक्त यहां खुदाई में दो रथ, शाही ताबूत, मुकुट, तलवारें, ढाल मिले थे. जिससे यह साबित हुआ था कि 2 हजार साल पहले योद्धाओं की लंबी फौज यहां रहा करती होगी. डॉ. एस. के मंजुल का कहना है कि इस बार हमें खुदाई में मिले अवशेष हड़प्पन सभ्यता से अलग मिले हैं. इसे देखकर ऐसा लगता है कि हाल ही में मिले अवशेष हड़प्पन सभ्यता के सबसे विकसित समय के हैं. इससे यह समझने में आसानी होगी कि यमुना और गंगा के किनारे कैसी संस्कृति होगी. डॉ. एस. के मंजुल ने आगे बताया कि इस बार की खुदाई में हमें तांबे से बनी तलवारें, मुकुट, ढाल, रथ के अलावा चावल और उड़द दाल से भरे मटके मिले हैं. इसके अलावा जो कब्रें मिली हैं उनके पास जंगली सूअर और नेवले के शव भी मिले हैं. इससे यह समझ में आता है कि जानवरों की बलि दिवंगत आत्माओं को दी गई होगी. एएसआई को खुदाई में जमीन के अंदर कुछ पवित्र कक्ष भी मिले हैं. इनके बारे में डॉ. एस. के मंजुल का कहना है कि उस वक्त मौत के बाद पवित्र कक्षों में शवों को रखकर अनुष्ठान किया जाता होगा. फिलहाल एएसआई खुदाई में मिले अवशेषों का डीएनए, धातु शोधन और बोटानिकल एनालिसिस कर रही है. डॉ. एस. के मंजुल का मानना है कि एएसआई को अब तक मिली साइट्स में सनौली ऐसी जगह मिली है जहां सबसे ज्यादा कब्रें हैं. मालूम हो कि सनौली में मिली कब्रों को महाभारत काल से भी जोड़कर देखा जाता रहा है. क्योंकि महाभारत काल में पांडवों के मांगे 5 गांवों में बागपत भी शामिल था.

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