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नीतीश कुमार और अशोक चौधरी का सदन में रहना गलत नहीं, कानून विशेषज्ञ

पटना बिहार विधानसभा में स्पीकर के चुनाव के वक्त विपक्षी नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी दल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्री अशोक चौधरी को सदन से बाहर भेजने की मांग कर रहे थे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि दोनों नेता विधानसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें सदन से बाहर चले जाना चाहिए। उसके बाद वोटिंग प्रक्रिया होनी चाहिए। विपक्ष की मांग गलत है या सही इस पर कानून विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि कानून में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि स्पीकर के लिए वोटिंग के दौरान विधान परिषद का सदस्य विधानसभा में मौजूद नहीं रह सकते। हां ये है कि वे वोटिंग में शामिल नहीं होंगे। प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी अपनी सीट से यही बात दोहराते रहे। उदाहरण के लिए उन्होंने लोककसभा में स्पीकर के चुनाव के वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी होने की बात दोहराई। प्रोटेम स्पीकर की एक नहीं सुना विपक्ष प्रोटेम स्पीकर के बार-बार अनुरोध करने के बाद भी विपक्षी नेता स्पीकर की बेल में आकर हंगामा करते रहे। हंगामा करने वालों में खुद तेजस्वी यादव भी शामिल रहे। इसी हंगामे के बीच प्रोटेम स्पीकर ने हाथ उठाकर वोटिंग प्रक्रिया संपन्न करा लिया गया। हालांकि रिजल्ट जारी करने से पहले प्रोटेम स्पीकर ने सदन को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया। विपक्ष का रहा था गुप्त मतदान की मांग विपक्ष मांग करता रहा कि स्पीकर के चुनाव के लिए गुप्त मतदान हो, लेकिन प्रोटेम स्पीकर ने साफ मना कर दिया। कानून विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि गुप्त मतदान उसी शर्त पर होगी जब सदन के सभी सदस्य इसपर सहमती जताएं।

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