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कलयुग में मीरा बाई का चरित्र है आदर्श : श्रीहित मोहन महाराज

- त्रिदिवसीय मीरा चरित्र भक्तिरस कथा में उमड़े श्रृद्वालू श्रोता- श्रीगंगानगर। कलयुग में हम जैसे साधारण लोगों के लिए मीरा का चरित्र आदर्श चरित्र है। सतयुग, त्रेता और द्वापर युग के भक्तों के साध्य युक्त चरित्रों का अनुकरण करना कठिन है। पर कलयुग में हरिनाम और भक्तवंत मीराबाई जैसी महाभक्तों की भक्तिमय कथा के श्रवण से भगवत कृपा प्राप्त की जा सकती है। ये उद्गार रायसिंहनगर के ब्लिस पैलेस में चल रही मीरा के कृष्ण प्रेम एवं विरह पर भावपूर्ण प्रस्तुति मीरा चरित्र कथा में वृंदावन से आये कथावाचक श्रीहित मोहन महाराज ने कहीं। उन्होंने भक्त मीरा बाई के जीवन की भक्तिमय यात्रा को विस्तार से बताया। उनके बालपन से लेकर जीवन के अंतकाल तक भक्ति के बढ़ते आनंद और भगवत की कृपा का वर्णन किया। बालपन में ही कृष्ण भक्ति की ऐसी लगन लगी कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्ति को समर्पित किया। मीरा ने अपने भक्ति मार्ग में संत रविदास को गुरु माना और वृंदावन के संत गिरिधर गोपाल की प्राप्ता की। वहीं उन्होंने वृंदावन से लेकर द्वारिका तक की यात्रा की और हर यात्रा के साथ ही कृष्ण भक्ति का रंग गहरा होता गया। वहीं कथावाचक श्रीहित मोहन महाराज ने मीरा बाई के चरित्र का बहुत सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि मीरा बाई अपने दादा के साथ श्रीद्वारिका पुरी दर्शन करने आई तो उनके दादा ने उनसे द्वारकाजी में भजन सुनाने को कहा। इस पर मीरा बाई ने नृत्य करते हुए गाया। म्हारो मन हर लीनो रण छोड़, जिसे सुनकर उपस्थिति मंत्रमुग्ध हो गई। वहां से वापस जब मेवाड़ आए तो वहां मीरा बाई भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में लग गई। एक दिन मीरा बाई के घर के आगे से कोई बारात निकल रही थी। मीरा बाई ने अपनी मां से पूछा तो उनकी मां ने बताया कि यह बींद (दूल्हा) है और हाथी पर बैठकर अपनी बींदड़ी (दुल्हन) को लेने आया है और विवाह के बाद बींदड़ी को ले जाएगा। तो मीरा बाई ने अपनी मां से पूछा, मां मेरा बींद कौन है, मां ने पीछा छुड़ाने के लिए कह दिया, तेरे बींद भगवान श्रीकृष्ण है। बस फिर तो मीरा जी का जीवन ही बदल गया और वो भगवान श्रीकृष्ण (द्वारकाधीश) को अपने पतिरूप में देखने लगी। कथा से पूर्व यजमानों ने कथावाचक श्रीहित मोहन महाराज को मालार्पण कर आर्शीवाद लिया। कथा के विराम के बाद भगवान की आरती हुई और प्रसाद सेवा हुई। इसमें विभिन्न प्रकार के भोग प्रसाद अर्पित किए गए।

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