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नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्रों का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत होगा पंजीकरण

हनुमानगढ़। जिले में संचालित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्रों का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत पंजीकरण आवश्यक होगा। इस संबंध में चिकित्सा विभाग ने जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण विभाग के सहयोग से कार्रवाई आरम्भ कर दी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट राज्य में 2013 से प्रभावी है। एक्ट के अन्तर्गत राज्य में संचालित समस्त चिकित्सा नैदानिक जांच केन्द्र एवं नैदानिक संस्थान चाहे किसी भी पद्धति से संचालित है, का पंजीयन क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट के तहत आवश्यक है। जिले में संचालित समस्त निजी नशामुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र में 50-100 तक रोगी भर्ती रहते है। इन भर्ती रोगियों की जांच एवं उपचार भी इन केन्द्रों में कार्यरत डॉक्टर्स द्वारा किया जाता है। इसलिए उक्त केन्द्रों का उचित मापदंडों की पूर्ति उपरान्त ही संचालन हो सकता है। इस संबंध में आज एक पत्र जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण विभाग को प्रेषित कर विभाग के अधीन संचालित समस्त नशामुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र (ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में) को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट के बारे में जानकारी देंकर 15 दिवस में एक्ट के तहत आवश्यक रूप से पंजीयन करवाने के निर्देशित करें। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट में रजिस्टेशन के स्वास्थ्य भवन (सीएमएचओ कार्यालय) डीआरए सेल (कमरा न. 21) से जानकारी लेकर आवश्यक कागजात तैयार करवाकर जमा करवा देवे, ताकि इनका क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन किया जा सके। पंजीयन नहीं करवाने वाले केन्द्रों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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