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सिद्धू को ज्यादा अहमियत देने से नाराज हैं पंजाब कांग्रेस के नेता? प्रताप सिंह बाजवा ने हाई कमान को इशारों में दिया मेसेज

चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही महीनों का वक्त बचा है लेकिन सत्ताधारी दल कांग्रेस की अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही। उल्टे सिद्धू के बाद पंजाब में प्रताप सिंह बाजवा के रूप में एक और गुट तैयार हो रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने वैसे तो इससे इनकार किया है लेकिन इशारों-इशारों में कांग्रेस हाई कमान को संदेश दे दिया है। दरअसल पंजाब में ट्विटर वॉर के बाद अब पंजाब में पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है। हाल ही में पंजाब के कुछ हिस्सों में अमरिंदर सिंह के होर्डिंग्स के बाद गुरुवार को अमृतसर में नवजोत सिंह सिद्धू और फरीदकोट में राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के पोस्टर देखे गए। इससे वहां अमरिंदर के खिलाफ दो गुटों की चर्चा तेज होने लगी। फरीदकोट में पास-पास लगे तीनों की होर्डिंग्स फरीदकोट में एक चौराहे में तीनों की होर्डिंग्स पास-पास लगाई गई हैं। अमृतसर में सिद्धू के समर्थन वाले पोस्टरों में लिखा, 'सारा पंजाब सिद्धू नाल 2022'। वहीं बाजवा के पोस्टर फरीदकोट जिले के जैतो और कोटकपुरा में लगाए गए हैं। 'मैंने हस्तक्षेप किया तब पार्टी में आए सिद्धू' जब इस बारे में प्रताप सिंह बाजवा से पूछा गया तो उन्होंने कहा,'जब नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में आए थे तो पंजाब लीडरशिप ने समस्याएं पैदा की थीं, वे नहीं चाहते थे कि सिद्धू आएं। मैंने हस्तक्षेप किया और सिफारिश कि वह (सिद्धू) पार्टी के लिए खजाना साबित होंगे। तब जाकर उन्हें पार्टी में लिया गया। वह मेरे भाई की तरह हैं।' 'टॉप पोजिशन में पहुंचने में समय लगता है' बाजवा ने आगे कहा, 'हाई कमान, कार्यकर्ता और मैं चाहता हूं कि उन्हें महत्वपूर्ण पद मिले लेकिन टॉप पोजिशन पर पहुंचने के लिए समय लगता है। तीन सदस्यीय कमिटी के सामने इसे स्पष्ट किया गया। उन्हें रोल दिया जाना चाहिए लेकिन पार्टी के वफादार जो यहां 40 से 45 साल से हैं उनका भी ध्यान रखना चाहिए।' 'कोई रातोंरात कर्नल से जनरल नहीं बन जाता' बाजवा ने आगे कहा, 'कोई भी कर्नल रातोंरात जनरल नहीं बन जाता। सबसे योग्य कर्नल को भी कुछ समय तक इंतजार करना पड़ता है। हमने इसे पार्टी हाई कमान पर छोड़ दिया है, हमें उनका फैसला स्वीकार्य होगा। मैंने यह भी साफ कर दिया है कि मैं किसी पोस्ट का उम्मीदवार नही हूं।' सिद्धू को ऑफर हुआ था डेप्युटी सीएम का पद दरअसल पंजाब विवाद के निपटारे के लिए कांग्रेस की तीन सदस्यीय कमिटी ने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश में डेप्युटी सीएम बनाने का फार्म्युला दिया जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया है। इस बीच पार्टी ने उन्हें संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर पद दिए जाने का भी प्रस्ताव दिया है लेकिन उसे भी सिद्धू ने नकार दिया है। सिद्धू का कहना है कि वह पंजाब की राजनीति में ही दिलचस्पी रखते हैं। अब सिद्धू क्या करवट लेंगे, इसे लेकर अब भी संशय है। पार्टी हाईकमान से मीटिंग के बाद से वह सामने नहीं आए हैं और न ही कोई ट्वीट किया है।

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