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नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एकबार फिर हमला बोला है। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी कदम बताया है। प्रियंका का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर गए राहुल गांधी सहित विपक्ष के नेताओं को एयरपोर्ट से वापस लौटा दिया गया। प्रियंका ने ट्वीट किया, 'कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने से ज्यादा राजनीतिक और राष्ट्र-विरोधी चीजें कुछ और नहीं हो सकती। यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम इसके खिलाफ आवाज उठाएं। हम ऐसा करना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने यह बात एक विडियो के संदर्भ में लिखी जिसमें प्लेन में एक महिला राहुल गांधी से कश्मीर के हालात पर बात करती है। प्रियंका ने आगे लिखा, 'यह कब तक जारी रहेगा? यह हमारे लाखों लोगों में से हैं जिन्हें चुप कराया जा रहा और 'राष्ट्रवाद' के नाम पर कुचला जा रहा है।' उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 370 हटने के करीब 20 दिनों बाद शनिवार को हालात देखने श्रीनगर पहुंचे विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल को एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के साथ गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन, सीपीआई लीडर डी. राजा के अलावा शरद यादव समेत कई दिग्गज नेता पहुंचे थे।
दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ में 8 लाख के इनामी नक्सली मुचाकी बुदरा ने रविवार को आत्मसमर्पण कर दिया। दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बुदरा मलनगिर इलाके में माओवादी समिति के प्लाटून नंबर 24 में डेप्युटी कमांडर के बतौर सक्रिय था। वह सुकमा जिले के जागरगुंडा इलाके का रहने वाला है। माओवादी विचारधारा के खोखलेपन से निराश होकर किया सरेंडर पुलिस अधीक्षक पल्लव ने बताया कि माओवादी विचारधारा के 'खोखलेपन' से निराश होने का हवाला देते हुए उसने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि बुदरा कई नक्सली हमलों में शामिल था। इसमें साल 2010 में नकुलनार गांव में कांग्रेस नेता अवधेश गौतम के घर पर हुआ नक्सली हमला भी शामिल है। इस हमले में दो नागरिकों की मौत हो गई थी जबकि एक नक्सली को भी मार गिराया गया था। इसके अलावा किरंदुल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसफ) पर हमले में भी वह शामिल था। हथियार रखने पर मिली 10 हजार की सहायता राशि सीआईएसफ पर साल 2012 में नक्सली हमला हुआ था, जिसमें 6 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे जबकि एक नागरिक की मौत हो गई थी। पल्लव ने बताया कि बुदरा ने साल 2007 में सीपीआई (माओवादी) जॉइन किया था और साल 2010 में उसे डेप्युटी कमांडर बनाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि हथियार रखने और आत्मसमर्पण करने पर बुदरा को सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। इसके अलावा सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के अनुसार उसे आगे भी मदद दी जाएगी।
नई दिल्ली पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली राजनीति, वकालत, खेल और सामाजिक जीवन की तमाम यादों को छोड़कर पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। निगमबोध घाट पर दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बेटे रोहन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेता मौजूद थे। मुखाग्नि से ठीक पहले मौसम तेजी से बदला और जोरदार बारिश होने लगी। जेटली के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बीजेपी मुख्यालय से निगम बोध घाट फूलों से सजी तोप गाड़ी में ले जाया जाया गया। पूरा माहौल 'जेटली जी अमर रहें' के नारों से गूंज रहा था। पार्टी कार्यकर्ता और शोकाकुल लोग सुबह से ही बीजेपी मुख्यालय के बाहर जेटली को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कतार में खड़े थे। निगम बोध घाट की ओर से जाने वाली सड़कों पर जेटली को याद करने वाले पोस्टर लगे हुए थे। 66 वर्षीय जेटली का शनिवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उन्हें 9 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को एम्स से दक्षिणी दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित उनके आवास में रखा गया था। सुबह उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्यालय ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन करने के लिए पहुंचे था। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को एम्स से दक्षिणी दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित उनके आवास में रखा गया था। सुबह उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्यालय ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन करने के लिए पहुंचे था।
सिलवासा, 25 अगस्त 2019,केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में तैनात भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी गोपीनाथ कन्नन ने सेवा से इस्तीफा दे दिया है. इसके पीछे केंद्र सरकार की नीतियों से नाराजगी को वजह बताया जा रहा है. गोपीनाथ विद्युत विभाग के सचिव पद पर तैनात थे. कन्नन ने 2018 में केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत सामग्री अपने कंधों पर रखकर लोगों तक पहुंचाई थीं. इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद वह युवाओं के आदर्श बन गए थे. अपने इस्तीफे को लेकर आईएएस गोपीनाथ ने कोई वजह नहीं बताई है लेकिन खबरों के अनुसार वह केंद्र सरकार की नीतियों से नाराज चल रहे थे. कन्नन ने अपना इस्तीफा केंद्र शासित प्रदेश के एडमिनिस्ट्रेटर के सलाहकार के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है. वह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी थे. आती रही हैं प्रशासक से मतभेद की खबरें गौरतलब है कि मौजूदा सरकार और दादरा और नगर हवेली के प्रशासक प्रफुल्ल खोदा पटेल और गोपीनाथ कन्नन के बीच में बार-बार मतभेद की खबरें आती रही हैं. गोपीनाथ कन्नन तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने 2018 में केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत सामग्री अपने कंधों पर रखकर लोगों तक पहुंचाई थी. पूरे देश में उनके इस कार्य को सराहा गया था. वह युवाओं के आदर्श बन गए थे. चुनाव आयोग से की थी बड़े अधिकारियों की शिकायत हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के दौरान गोपीनाथ कन्नन ने चुनाव आयोग से मौजूदा दादरा नगर हवेली के बड़े अधिकारियों की शिकायत की थी. तब वह सिलवासा के जिलाधिकारी पद पर तैनात थे.
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार चुनाव कराने की तैयारी चल रही है. जम्मू-कश्मीर के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (योजना आयोग) रोहित कंसल ने शनिवार बताया कि जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज व्यवस्था को शुरू करने के लिए ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल का चुनाव कराने का अहम फैसला लिया गया है. जम्मू-कश्मीर ग्रामीण विकास विभाग की सचिव ने भी बताया कि जम्मू-कश्मीर के 316 ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव कराने की तैयारी चल रही है. कश्मीर घाटी में आरक्षण प्रक्रिया का पहला चरण पूरा कर लिया गया है और जम्मू में यह आखिरी स्टेज में हैं. सितंबर के आखिरी तक आरक्षण की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा. आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर में जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र की बुनियाद पक्की करने के लिए पंचायत और निकाय चुनाव करवाए गए थे. इस दौरान 35,096 पंच और 4,490 सरपंच चुने थे. हालांकि पंचायत चुनाव के बाद कभी ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के लिए चुनाव नहीं हो पाए थे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू कश्मीर में संविधान का 73वां और 74वां संशोधन लागू हो गया है. लिहाजा यहां पर पंचायत राज को मजूबत करने के लिए चुनाव कराने की तैयारी की जाएगी. जम्मू-कश्मीर में तेजी से सुधर रहे हालात रोहित कंसल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हालात तेजी से सुधर रहे हैं. कश्मीर घाटी के 69 पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इलाकों से दिन में प्रतिबंध हटा लिया गया है. इसके अलावा जम्मू डिवीजन के 81 पुलिस स्टेशन से प्रतिबंध हटाए जा चुके हैं. रोहित कंसल ने बताया कि 17 अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में तेजी से गिरावट और शांति बहाली देखने को मिली है. हालांकि सीमा पार आतंकवाद का खतरा लगातार बना हुआ है. सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार और हाईअलर्ट हैं. रोहित कंसल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में करीब 1500 प्राइमरी स्कूल और एक हजार मिडल स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम बनी हुई है. शिक्षा विभाग सभी प्राइमरी और मिडल स्कूलों का संचालन शुरू करने का प्रयास करेगा.
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2019,जम्मू-कश्मीर में दवाइयों की कमी की खबरों पर प्रशासन ने सफाई दी है. प्रशासन ने कहा कि श्रीनगर में 1666 में से 1165 केमिस्ट की दुकानें खुली हैं. कश्मीर घाटी में 7630 रिटेल और 4331 होलसेल केमिस्ट की दुकानें हैं और करीब 65 प्रतिशत दुकानें खुली हैं. सरकारी और प्राइवेट दुकानों में सभी 376 नोटिफाइड दवाइयां उपलब्ध हैं. 62 जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं की भी कोई कमी नहीं है. बच्चों का खाना और तुरंत दवाइयां भिजवाने के लिए जम्मू और चंडीगढ़ में तीन लोगों को तैनात किया गया है. प्रशासन के मुताबिक, पिछले 20 दिन में 23.81 करोड़ रुपये की दवा केमिस्ट दुकानों तक पहुंचाई गई हैं. पूरे महीने का औसत निकालें तो यह सामान्य से कुछ ज्यादा है. सरकारी और प्राइवेट केमिस्ट दुकानों में सभी 376 नोटिफाइड दवाएं उपलब्ध हैं. 62 जरूरी/जीवन रक्षक दवाएं भी उपलब्ध हैं. दोनों श्रेणी की दवाएं 15-20 दिन के स्टॉक में रिजर्व हैं. प्रदेश में जहां कहीं से ऑर्डर आता है, जम्मू से 14-18 घंटे के बीच दवाओं की डिलिवरी कर दी जाती है. दवाओं के ज्यादातर डिस्ट्रीब्यूटर जम्मू से हैं. घाटी में दो दिन के लिए बेबी फूड की किल्लत थी लेकिन स्टॉक उपलब्ध हो गया है. कम से कम अगले तीन हफ्ते तक बेबी फूड का स्टॉक रिजर्व कर लिया गया है. जम्मू और चंडीगढ़ में दवाओं और बेबी फूड की सप्लाई के लिए 3-3 लोगों को तैनात किया गया है. 72 टेस्ट चेक किए गए जिनमें दवाओं की ज्यादा कीमत वसूली की कोई शिकायत सामने नहीं आई.
श्रीनगर, 25 अगस्त 2019, जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने रविवार को बताया कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ही उन्हें यह पद संभालने की सलाह दी थी. जेटली के सास-ससुर जम्मू से हैं. मलिक ने बताया, जेटली ने मुझे कहा था कि यह ऐतिहासिक होगा. उनके कहने पर ही मैं जम्मू-कश्मीर आया था. अरुण जेटली का शनिवार दोपहर 12.07 बजे लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. वह 66 साल के थे. उनका एम्स में इलाज चल रहा था. जेटली का अंतिम संस्कार आज दोपहर 2.30 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जाएगा. मलिक ने इस दौरान जम्मू-कश्मीर के हालात पर भी बात की. उन्होंने बताया कि पिछले 10 दिनों में घाटी में किसी की मौत नहीं हुई है. अगर कम्युनिकेशन नहीं होने से जान बचती है तो इसमें क्या समस्या है. यह परेशानी भी कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी. मलिक ने कहा, कश्मीर में जरूरी चीजों और दवाइयों की कोई कमी नहीं है. ईद पर हमने लोगों के घरों में सब्जियां, अंडे और मीट पहुंचाया. आपकी राय 10-15 दिनों में बदल जाएगी. मलिक ने आगे कहा, कश्मीर में अतीत में जो भी तनाव हुए हैं, उसमें पहले हफ्ते में 50 लोग मारे जाते थे. हमारी कोशिश है कि एक भी जान न जाए. उन्होंने कहा, '10 दिन टेलीफोन नहीं होंगे, नहीं होंगे. लेकिन हम बहुत जल्दी सब वापस कर देंगे'. गौरतलब है कि शनिवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल को कश्मीर का दौरा करने की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा, इससे संकेत मिलता है कि घाटी में हालात सामान्य नहीं हैं. राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के 12 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरते ही रोक लिया गया. उन्हें वापस दूसरी उड़ान से दिल्ली भेजे जाने तक एयरपोर्ट पर ही इंतजार करना पड़ा. वे शाम 6.45 बजे वापस दिल्ली पहुंचे.
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2019, बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली नहीं रहे. उनका निधन भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती. अरुण जेटली पिछले लगभग दो दशक से बीजेपी से शीर्ष नेताओं में शुमार किए जाते थे. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के तो वे सबसे बड़े संकटमोचक थे. ये बात इसी से साबित हो जाती है कि वे वित्त मंत्री रहे. वैकल्पिक व्यवस्था होने तक रक्षा मंत्री भी रहे और कुछ समय के लिए उनके पास सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो भी रहा. अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार के दो सबसे बड़े कदम नोटबंदी और जीएसटी जेटली के वित्त मंत्री रहते ही उठाए गए. खास बात ये है कि मोदी राज में अर्थव्यवस्था का ये पायलट निजी जिंदगी में कार चलाने से भी परहेज करता था. उनके करीबी बताते हैं कि उन्हें ड्राइविंग करना ज्यादा नहीं आता था. जब तक उन्होंने ड्राइवर नहीं रखा तब तक उनकी पत्नी या दूसरे करीबी ही उनके लिए कार चलाया करते थे. 2014 में बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब बीजेपी सत्ता में आई तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक मोर्चे पर ही थी. 2014 के चुनावों में मनमोहन सरकार की विदाई और कांग्रेस के 50 से कम सीटों पर सिमट जाने की एक बड़ी वजह आर्थिक मोर्चे पर यूपीए-2 सरकार की नाकामी भी थी. यही वजह है कि जब नरेंद्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली तो सबकी निगाहें इस बात पर थीं कि वे वित्त मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार किसे सौंपते हैं. मोदी ने अपने सबसे विश्वस्त साथी अरुण जेटली को ये जिम्मेदारी दी. अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहते मोदी सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए जिन्हें क्रांतिकारी कहा जा सकता है. नोटबंदी और जीएसटी के अलावा, योजना आयोग को खत्म कर उसकी जगह नीति आयोग का गठन, जनधन खाते, रेल बजट खत्म करना, महंगाई दर जो सात फीसदी से ऊपर से उसे तीन फीसदी से नीचे लाना, एनपीए के संकट से बैंकों को उबारने के लिए कदम उठाना जैसे कई कदम थे जिनके लिए जेटली का कार्यकाल याद किया जाएगा. ये अरुण जेटली ही थे जिसके चलते कम से कम आर्थिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट के बाकी सहयोगी निश्चिंत रहा करते थे. जेटली की उपलब्धियां 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए मुद्दा बनीं और नतीजे साफ करते हैं कि जनता ने उन्हें भरपूर सराहा. मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल में मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक उन्हें ही सरकार में नंबर-2 मानते रहे. जेटली भले ही कार चलाना न जानते हों लेकिन सरकार चलाने में उनकी कबिलियत पर किसी को कभी शक नहीं रहा.
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2019, देश के पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली का निधन हो गया है. वो काफी वक्त से बीमार थे और दिल्ली के एम्स में भर्ती थे. अरुण जेटली का परिवार आजादी के बाद हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आया था. साल 1947 से पहले अरुण जेटली का परिवार लाहौर में था. उनके दादाजी विभाजन के बाद भारत आए थे. साल 1947 से पहले उनका परिवार लाहौर में रहता था, लेकिन विभाजन के बाद परिवार दिल्ली कूच कर गया था. अरुण जेटली का परिवार दिल्ली आने के बाद नारायण विहार में रहने लगा. अरुण जेटली के पिता महाराज किशन जेटली भी पेशे से वकील थे. वो भी दिल्ली में वकालत करते थे. अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चलकर अरुण जेटली भी वकील बनें. अरुण जेटली ने नई दिल्ली सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया. डीयू से 1977 में वकालत की डिग्री हासिल की. अरुण जेटली ने अपनी पढ़ाई के दौरान अकादमिक में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए भी जाने जाते रहे. उन्हें कई अवॉर्ड्स से भी नवाजा गया. छात्र जीवन में ही अरुण जेटली का राजनीति में खास रुझान था. दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही अरुण जेटली 1974 में डीयू स्टूडेंट यूनियन (DUSU) अध्यक्ष बन गए थे. वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे. 1974 में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बनें. इसके बाद अरुण जेटली 1980 में भाजपा में शामिल हुए. अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था. अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर भी रहे. वकालत के पेशे का जेटली परिवार पर खास प्रभाव है. अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली और बेटी सोनाली जेटली भी पेशे से वकील हैं.
नई दिल्ली , 24 अगस्त 2019,बीजेपी नेता अरुण जेटली का 24 अगस्त को दोपहर 12.07 बजे निधन हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट (narendramodi.in) पर आज भी अरुण जेटली का 27 सितंबर 2013 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा वह लेटर मौजूद है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर मोदी और अमित शाह को फंसाने की साजिशों को लेकर हमला बोला था. अरुण जेटली का यह पत्र नमो वेबसाइट पर एक अक्टूबर 2013 को पब्लिश हुआ था. इस पत्र में अरुण जेटली सोहराबुद्दीन, इशरत जहां, तुलसी प्रजापति एनकाउंटर को लेकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर झूठे मामले गढ़कर फंसाने की बात कहते हैं. अरुण जेटली ने यह भी आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार अपनी चर्चित मॉडस ऑपरेंडी के तहत आईपीएस संजीव भट्ट का इस्तेमाल कर मोदी-शाह को फंसाने की कोशिश कर रही है. जी हां, बीजेपी में अरुण जेटली ही वह शख्स थे, जो मोदी और शाह के बुरे दिनों में उनके साथ खड़े नजर आए. शायद इसकी वजह रही कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं थे, तब से अरुण जेटली की उनसे दोस्ती रही. गुजरात में 2005 में हुए सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ का मामला जब गरमाया था तो केंद्र में यूपीए सरकार के रहते 2010 में अमित शाह को जेल भी जाना पड़ा था. भले ही अमित शाह की तरफ से मुकदमा जाने माने वकील राम जेठमलानी लड़ रहे थे, मगर बचाव के लिए अहम कानूनी सलाह का बंदोबस्त अरुण जेटली ही कर रहे थे. वह गोधरा दंगों पर घिरे नरेंद्र मोदी और कथित फर्जी एनकाउंटर पर जांच का सामना कर रहे अमित शाह के लिए एक साथ कानूनी तर्कों का ढाल लेकर खड़े रहे साल 2002 के गोधरा दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से बनी एसआइटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिया था. वहीं, सीबीआई की जांच झेल रहे अमित शाह भी सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस से बाद में बरी हो गए. विपक्ष की ओर से बिछाए गए कानूनी चक्रव्यूह को तब अरुण जेटली ने ही तोड़ा था. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने सदन से लेकर मीडिया तक इसे विपक्ष का दमन बताते हुए आवाज बुलंद की थी. ऐसे बढ़ी थीं नजदीकियां यूं तो मोदी और अरुण जेटली की जान-पहचान पुरानी थी, मगर रिश्ते प्रगाढ़ होने शुरू हुए 1998 से. जब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नरेंद्र मोदी दिल्ली आए. उनके आने के कुछ ही समय बाद अरुण जेटली भी राष्ट्रीय प्रवक्ता बने. दोनों नेताओं में एक बात कॉमन थी कि अब तक वे कोई चुनाव नहीं लड़े थे. हालांकि बाद में वाजपेयी सरकार में मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली गुजरात से ही राज्यसभा गए. उसके कुछ ही समय बाद में जब गुजरात में भूकंप से भारी तबाही हुई तो कुप्रबंधन के कारण केशुभाई पटेल के हटने के बाद नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने मुख्यमंत्री बना दिया. गोधरा दंगे के बाद जब 2002 का विधानसभा चुनाव हुआ तो दिल्ली से अरुण जेटली को राज्य का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा गया था. कहा जाता है कि मोदी से अच्छे रिश्ते होने के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें गुजरात भेजा था. ताकि दोनों नेताओं के मिलकर काम करने से पार्टी को विधानसभा चुनाव में लाभ हो. हुआ भी वही, मोदी के नेतृत्व और जेटली के चुनाव प्रबंधन ने 2002 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के लिए सत्ता का बंदोबस्त कर दिया. मोदी पर नहीं होने दिया था एक्शन बताया जाता है कि जब गुजरात मे गोधरा के दंगे हुए तो वाजपेयी नरेंद्र मोदी को हटाने के पक्ष में थे. तब गोवा में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक्शन होना था. मगर यह जेटली ही थे, जिन्होंने आडवाणी के साथ मिलकर मोदी के पक्ष में पार्टी के ज्यादातर नेताओं को खड़ा कर दिया. जब बैठक में वाजपेयी ने देखा कि पार्टी के नेता मोदी के पक्ष में हैं तो उन्हें अपने कदम खींचने पड़े थे. बैठक से एक दिन अरुण जेटली अहमदाबाद जाकर नरेंद्र मोदी से मिले भी थे. यहीं से अरुण जेटली के साथ मोदी के रिश्ते प्रगाढ़ता के चरम बिंदु पर पहुंच चुके थे.
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2019, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. वह 66 वर्ष के थे. अरुण जेटली लंबे समय से बीमार थे, एम्स में 9 अगस्त से उनका इलाज चल रहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी यूएई के दौरे पर हैं. जेटली के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुण जेटली के परिवार से बात की है. रिपोर्ट के मुताबिक पीएम ने अरुण जेटली की पत्नी संगीता और बेटे रोशन से बात की है. रिपोर्ट के मुताबिक जेटली के परिवार ने पीएम से कहा कि उन्हें अपना विदेश दौरा रद्द नहीं करना चाहिए. जानिए जेटली का परिवार पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम महाराज किशन जेटली था, वे कानून के पेशे से जुड़े थे और एक वकील थे. अरुण जेटली की मां का नाम रतन प्रभा जेटली था. अरुण जेटली की पत्नी का नाम संगीता है. जेटली और संगीता की शादी साल 1982 में हुई थी. दोनों के 2 बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. बेटे का नाम रोहन है और बेटी का नाम सोनाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "अरुण जेटली जी का जाना बहुत ही दुखद है. उन्होंने देश की भरपूर सेवा की. अरुण जेटली जी एक राजनीतिक दिग्गज थे, जो बौद्धिक और न्याय जगत की बेमिसाल हस्ती थे. मैंने उनकी पत्नी संगीता जी और बेटे रोहन से बात की और अपनी संवेदना व्यक्त की." ट्वीट कर पीएम ने जताई संवेदना प्रधानमंत्री ने कहा कि जेटली एक जीवंत शख्सियत थे. बुद्धिमता, मोहक व्यक्त्तिव और करिश्मा उनकी पहचान थी. पीएम ने कहा कि जेटली जी को समाज के हर क्षेत्र के लोगों से सम्मान मिला. पीएम ने ट्वीट कर लिखा कि उन्हें संविधान, इतिहास, पब्लिक पॉलिसी, गवर्नेंस और प्रशासन की गहरी समझ थी. बता दें कि लंबे समय से बीमार अरुण जेटली को 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था. यहां पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की एक टीम 15 दिनों से उनका इलाज कर रही था. शनिवार को दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर उनका निधन हुआ था.
नई दिल्ली विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंच गया है। राहुल गांधी समेत 11 नेताओं के प्रतिनिधि मंडल के श्रीनगर पहुंचते ही वहां हंगामा शुरू हो गया। खबरों की मानें तो श्रीनगर में सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए नेताओं को एयरपोर्ट से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई है। राहुल के साथ मौजूद नेताओं में गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन, सीपीआई लीडर डी. राजा के अलावा शरद यादव समेत कई दिग्गज नेता हैं। लिखें गुलाम नबी के आरोप इससे पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर में हालात को लेकर आज एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि हालात ठीक है, लेकिन हमें भी वहां नहीं जाने दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि हमको अपने घर नहीं जाने देते तो इसका मतलब है कि सरकार कुछ छिपा रही है। राज्य के वरिष्ठ नेताओं की नजरबंदी पर भी आजाद ने सवाल उठाए। केंद्र सरकार पर कांग्रेस नेता ने लगाया राजनीति का आरोप विपक्षी नेताओं के दल के श्रीनगर रवाना होने से पहले आजाद ने अपने घर पर मीडिया से बात की। उन्होंने सरकार के कश्मीर पर विपक्षी दलों द्वारा राजनीति करने पर पलटवार करते हुए कहा, 'जिनको राजनीति करनी थी उन्होंने राजनीति कर दी। राज्य के दो टुकड़े कर दिए। हम वहां जाना चाहते हैं ताकि सरकार की मदद कर सकें। विपक्षी नेता भी कानून को समझने और उसका पालन करनेवाले लोग होते हैं।' आजाद का आरोप, सरकार कश्मीर के हालात छुपा रही आजाद ने कश्मीर में नेताओं की नजरबंदी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'जम्मू के बच्चों को कश्मीरी बताकर हालात सामान्य होने की बात कही जा रही है। हालात सामान्य हैं तो मेरा कश्मीर घर है, मैं प्रदेश का पूर्व सीएम हूं, मुझे वहां क्यों नहीं जाने दिया जा रहा? अगर हालात ठीक हैं तो सरकार क्यों उमर अब्दुल्ला के गलियों में घूमने पर रोक लगाए हुए हैं। महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला को घर में बंद किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार कुछ छिपा रही है। सरकार क्या छुपाना चाह रही है, हमें बताए।'
था नई दिल्ली बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज एम्स में आखिरी सांस ली। उनका जीवन विलक्षण उपलब्धियों से भरा रहा। राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष जेटली के तार्किक और अचूक तर्क सत्ता पक्ष के लिए अबूझ चुनौती की तरह रहे। बतौर नेता सदन रहते हुए भी उन्होंने उसी तार्किकता से मोदी सरकार को घेरने के विपक्ष के प्रयासों को बेदम करते रहे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ जेटली का सफर बीजेपी के अग्रणी नेता बनने से लेकर वित्त मंत्री की कुर्सी तक पहुंचकर खत्म हुआ। जेटली का राजनीतिक सफर एक विजेता योद्धा जैसा है जिसमें उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ABVP से शुरू हुआ था राजनीतिक जीवन अरुण जेटली के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई और वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष भी चुने गए। 1977 में जेटली छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और उसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया। 1980 में उन्हें बीजेपी के यूथ विंग का प्रभार भी सौंपा गया। कॉलेज के दिनों से जेटली को करीब से जाननेवालों का कहना है कि बतौर छात्र जेटली अपनी भाषण शैली के कारण बेहद लोकप्रिय थे। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रैजुएट और लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई करनेवाले जेटली की गिनती प्रतिभाशाली छात्रों के तौर पर होती थी। आपातकाल के दौरान जेल जा बने राजनीति के चमकदार चेहरे देश में जब आपातकाल लगाया गया तो जेटली भी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल हो गए। युवा जेटली इस दौरान जेल भी गए और वहीं उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई। जेल से छूटने के बाद भी उनका जनसंघ से संपर्क बना रहा और 1980 में उन्हें बीजेपी की यूथ विंग का प्रभार दिया गया। बीजेपी उस दौर में अटल-आडवाणी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही थी और इसके साथ ही जेटली का कद भी लगातार बढ़ता चला गया। देश के कई सबसे चर्चित केस के वकील रहे जेटली अरुण जेटली की गिनती देश के बेहतरीन वकीलों के तौर पर होती है। 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वी.पी. सिंह की सरकार में उन्हें अडिशनल सलिसिटर जनरल का पद मिला। बोफोर्स घोटाला जिसमें पूर्व पीएम राजीव गांधी का भी नाम था उन्होंने 1989 में उस केस से संबंधित पेपरवर्क किया था। पेप्सीको बनाम कोका कोला केस में जेटली ने पेप्सी की तरफ से केस लड़ा था। बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अरुण जेटली ने ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह के केस और 2002 गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की तरफ से केस लड़ रहे वकीलों का मार्गदर्शन किया था। हालांकि, 2009 में उन्होंने वकालत का पेशा छोड़ दिया। अटल सरकार में बने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी कई पदों पर रहे। जेटली को पहले आडवाणी के खास लोगों में शुमार किया जाता था। साल 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, एक साल के भीतर ही कैबिनेट में जगह दे दी गई। उन्हें कानून मंत्रालय के साथ ही विनिवेश मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा गया। 2009 में बने राज्यसभा में बीजेपी के नेता 2009 में अरुण जेटली को राज्यसभा में नेता विपक्ष बनाया गया। राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष जेटली बहुत तैयारी के साथ सरकार को घेरते थे। सदन के अंदर ही नहीं बाहर मीडिया में जेटली का जलवा था और वह अपने इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपीए की सरकार पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 1952 में दिल्ली में जन्म मोदी के सबसे करीबी सहयोगी बने जेटली बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने के मजबूत समर्थक के तौर पर जेटली उभरे। कहा जाता है कि उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लंबे समय से अच्छे संबंध रहे थे और वह गुजरात से चुनकर राज्यसभा भी पहुंचे थे। मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी नाराज भी हुए। जेटली ऐसे मौके पर भी मजबूती के साथ खड़े रहे और प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी सहयोगी बन गए। 2014 में अमृतसर चुनाव हारे, लेकिन सरकार में कद बढ़ा 2014 में अरुण जेटली ने अपने राजनीतिक करियर में पहली बार लोकसभा का चुनाव अमृतसर से लड़ा। इस चुनाव में उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरा दिया। इस हार से जेटली के कद पर कोई असर नहीं पड़ा और मोदी कैबिनेट में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। वित्त मंत्री के तौर पर पीएम मोदी ने अरुण जेटली का ही चयन किया और राज्यसभा में भी उन्हें ही नेता सदन बनाया गया। हालांकि, 2017 से ही जेटली लगातार स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। 2018 में उनकी किडनी का भी ट्रांसप्लांट किया गया और मोदी सरकार की ओर से 2019 में वह अंतरिम बजट पेश नहीं कर सके। उस दौरान वह इलाज के लिए अमेरिका में थे। 2019 में मोदी सरकार में नहीं हुए शामिल, सोशल मीडिया पर संभाला मोर्चा अरुण जेटली ने 2019 में मोदी सरकार में शामिल नहीं होने का ऐलान ट्विटर पर किया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद जेटली सरकार की तरफ से लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। उन्होंने कई बार विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए लंबे ब्लॉग भी लिखे।
नई दिल्ली देश के पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अरुण जेटली का निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के एम्स में दोपहर 12.07 बजे अंतिम सांस ली है। वह 66 वर्ष के थे। जेटली 9 अगस्त से ही एम्स में भर्ती थे। उन्हें दो सप्ताह पहले सांस लेने में तकलीफ होने के कारण एम्स में भर्ती किया गया था। जेटली के निधन की खबर सुनने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हैदराबाद दौरे को खत्म कर दिया है। जेटली का निधन ऐसे वक्त में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हैं। पीएम ने की जेटली के परिवार से बात प्रधानमंत्री ने यूएई से ही जेटली की पत्नी संगीता और बेटे रोहन से बात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने जेटली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके व्यक्तित्व के शानदार पहलुओं का जिक्र किया। पीएम ने ट्वीट कर कहा, 'जेटली एक करिश्माई व्यक्ति थे जिनका समाज के सभी वर्गों में बहुत सम्मान था। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी।' गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी का अरुण जेटली के साथ लंबे समय से बेहद करीबी रिश्ता रहा था। जेटली ने मोदी को बीजेपी के पीएम पद का उम्मीदवार बनाने का न केवल समर्थन किया, बल्कि सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर वित्त मंत्री मोदी के साथ मजबूती से खड़े रहे। हालांकि, स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कोई पद नहीं लेने की इच्छा से पीएम को अवगत कराया था। जेटली के परिवार के आग्रह पर पीएम के विदेश दौरे में बदलाव नहीं वकील से राजनेता तक का शानदार सफर दिल्ली विश्वविद्यालय से छात्र नेता के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले जेटली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील भी थे। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्रालय संभालने वाले जेटली स्वास्थ्य कारणों से मोदी-2 सरकार में शामिल नहीं हुए थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे थे। उनकी गिनती देश के बेहतरीन वकीलों के तौर पर होती रही। 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वी.पी. सिंह की सरकार में उन्हें अडिशनल सॉलिसिटर जनरल का पद मिला था।
नई दिल्ली जल प्रबंधन के मामले में राज्यों ने अपना प्रदर्शन बेहतर किया है लेकिन भारत के जल संकट से निपटने के लिए जो चाहिए, वहां तक पहुंचने के लिए अभी लंबी दूरी तय करनी बाकी है। नीति आयोग ने शुक्रवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल प्रबंधन तरीकों को लेकर रैंकिंग जारी की। इस रैंकिंग में गुजरात सबसे ऊपर और दिल्ली सबसे नीचे रही जबकि सबसे ज्यादा बेहतरी हरियाणा में देखने को मिली है। साल 2017-18 की कॉम्पजिट वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स (CWMI 2.0) में हरियाणा इस साल 7वें स्थान पर रहा जबकि पिछले साल 16वें स्थान पर था। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने CWMI 2.0 जारी किया। इसके मुताबिक 80% राज्यों ने तीन साल में अपने जल संसाधन स्कोर में इजाफा किया है। ज्यादातर राज्यों का स्कोर 50 के नीचे हालांकि, चिंता की बात यह है कि 27 में से 16 राज्यों का 100 में स्कोर 50 के नीचे है और यह खराब प्रदर्शन की कैटिगरी में आता है। इन राज्यों में 47% आबादी है, 40% कृषि उत्पादन और भारत का 35% आर्थिक उत्पादन होता है। इनमें दिल्ली, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, केरल, राजस्थान और उत्तराखंड शामिल हैं। आयोग ने कहा है कि भारत में गुजरात और मध्य प्रदेश को छोड़कर कोई भी टॉप 10 कृषि उत्पादक 60 से ज्यादा अंक हासिल नहीं कर सका है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने बताया कि इंडेक्स को तय करने के लिए अगली बार कृषि क्षेत्र के ज्यादा मानक होने चाहिए। 9 मानकों के आधार पर तय इंडेक्स आयोग ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य और दिल्ली जैसे राज्य, जो अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं, उनका इंडेक्स काफी कम है। बता दें कि यह इंडेक्स 9 मानकों के आधार पर तय होता है-जल संसाधन को पुनर्जीवित करना, भूमिगत जल के स्रोतों में बढ़ोतरी, सिंचाई के सप्लाइ-साइड का प्रबंधन, वॉटरशेड डिवेलपमेंट, सिंचाई में भागीदारी, खेतों में पानी के इस्तेमाल के सतत तरीके, ग्रामीण इलाकों में पीने का पानी, शहरी इलाकों में पानी की सप्लाइ और सैनिटेशन और नीति और प्रशासन। यूं मिलेगी मदद CWMI की मदद से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। नीति आयोग का कहना है कि इंडेक्स से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अहम जानकारी मिलेगी और केंद्रीय मंत्रालयों को भी बेहतर प्रबंधन के लिए नीतियां बनाने और लागू करने में मदद होगी। वहीं, CWMI 2.0 से यह भी पता लगा है कि कैसे बड़े कृषि उत्पादक जल संसाधनों के प्रबंधन में संघर्ष कर रहे हैं। इससे खाद्य सुरक्षा पर खतरा है।
नई दिल्ली, 23 अगस्त 2019,आंध्र प्रदेश के तिरुपति से तिरुमाला जाने वाली बस की टिकट पर येरुशलम और हज यात्रा के सरकारी विज्ञापन छपने के मामले पर विवाद हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी पर हमला किया है. अब इस पूरे मामले पर आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने बयान दिया है. उन्होंने कहा, जांच से पता चला है कि टिकट के पीछे विज्ञापन देने का टेंडर तृणमूल देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार ने दिया था. उन्होंने कहा कि टीडीपी और बीजेपी के नेता हर छोटे मुद्दे के लिए सीएम पर बेबुनियाद आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं. हम उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो इस तरह का प्रचार कर रहे हैं. वहीं इस मामले पर आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) की ओर से कहा गया कि यह टिकट श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वापस ले लिए गए हैं. दोबारा ऐसी घटनाओं से बचने के लिए इस मामले की जांच करने और इसकी जानकारी प्राप्त करने का आदेश दिया गया है. बता दें कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति में मंदिर के अंदर यरुशलेम की यात्रा पर्ची के साथ आरटीसी टिकट मिला था. जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि हिंदुओं के पवित्र शहर के ईसाईकरण का प्रयास किया जा रहा है. बीजेपी ने मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने (जगन) अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान हिंदू परंपरा के अनुसार दीपक जलाने से इनकार किया था.
नई दिल्ली, 23 अगस्त 2019,कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के शनिवार को श्रीनगर जाने की खबरों के बीच जम्मू कश्मीर प्रशासन का बयान आया है. जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा है कि विपक्षी नेता कश्मीर ना आएं और सहयोग करें. प्रशासन ने ट्वीट करते हुए कहा कि नेताओं के दौरे से असुविधा होगी. हम लोगों को आतंकियों से बचाने में लगे हैं. प्रशासन ने कहा कि नेता उन प्रतिबंधों का भी उल्लंघन कर रहे होंगे, जो अभी भी कई क्षेत्रों में हैं. वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति, व्यवस्था बनाए रखने और नुकसान को रोकने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. दरअसल, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कल शनिवार को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर जाएंगे. राहुल के साथ विपक्षी दल के 9 नेता भी श्रीनगर जाएंगे. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राहुल गांधी पहली बार जम्मू कश्मीर के लिए रवाना होंगे. नेताओं और लोगों से मुलाकात इस दौरान राहुल समेत सभी नेता वहां पर हालात का जायजा लेंगे और स्थानीय नेताओं के अलावा लोगों से मुलाकात करेंगे. कल विपक्षी दल के नेताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, सीपीआई के डी राजा, सीपीआई (एम) के सीताराम येचुरी, डीएम रे टी शिवा, एनसीपी के माजिद मेमन, आरजेडी के मनोज झा शामिल हैं. इससे पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी को कश्मीर आने का न्योता दिया था. जिसके बाद राहुल गांधी कल श्रीनगर जाने वाले हैं. राहुल गांधी ने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के कश्मीर बुलाने के प्रस्ताव पर जवाब दिया था.
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार राहुल गांधी और विपक्ष के 9 नेता शुक्रवार को श्रीनगर कश्मीर जाएंगे। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किए जाने के बाद से विपक्ष घाटी के हालात को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करता रहा है। इसी क्रम में राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उन्हें कश्मीर आकर हालात देखने का न्योता दिया था। जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी के साथ डीएमके, आरजेडी और लेफ्ट पार्टी के नेता जाएंगे। इनमें गुलाम नबी आजाद, डी राजा, मनोज झा और सीताराम येचुरी शामिल होंगे। राज्यपाल ने दिया था निमंत्रण राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की खबरें आ रही हैं। प्रधानमंत्री को शांति और निष्पक्षता के साथ मामले को देखना चाहिए। इस पर सत्यपाल मलिक ने कहा था, 'मैं राहुल गांधी जी को कश्मीर आने का निमंत्रण देता हूं। मैं उनके लिए एयरक्राफ्ट का भी इंतजाम करूंगा ताकि वह यहां आकर जमीनी हकीकत देख सकें।' इसके बाद राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके आमंत्रण को स्वीकार किया था। उन्होंने ट्वीट किया था, 'प्रिय मलिक जी, मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आने के आपके न्योते को स्वीकार करता हूं। हमें एयरक्राफ्ट की जरूरत नहीं है बस वहां के नेताओं और जवानों से मिलने दिया जाए।' रोके गए थे गुलाम नबी आजाद बता दें कि अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले से पहले से ही जम्मू-कश्मीर के कई नेता नजरबंद हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला भी शामिल हैं। पिछले दिनों जब विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद कश्मीर जाने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें जम्मू एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया और दिल्ली वापस भेज दिया गया। इसके बाद अब विपक्ष के नेता जम्मू कश्मीर जाएंगे।
जम्मू, 23 अगस्त 2019,लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर पाकिस्तान की ओर से लगातार फायरिंग की जा रही है. सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तान ने शुक्रवार को सीजफायर का उल्लंघन किया. पाकिस्तान की फायरिंग में एक जवान शहीद हो गया. सेना की ओर से पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया जा रहा है. पाकिस्तान ने बुधवार को भी जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में अकारण मोर्टार दागे जिसका भारत की तरफ से तत्काल जवाब दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में दोपहर करीब 3.45 बजे संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया. पाकिस्तान ने सुंदरबनी सेक्टर में छोटे हथियारों से फायरिंग कर और मोर्टार दागकर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया. भारतीय सेना ने इसका करारा जवाब दिया. पाकिस्तान ने मंगलवार को कृष्णा घाटी सेक्टर में गोलीबारी और गोलाबारी की थी. पाकिस्तान ने सोमवार को भी राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था. सेना के सूत्रों ने कहा कि गोलीबारी व गोलाबारी में बढ़ोतरी पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के प्रयासों का हिस्सा हो सकती है. अगस्त के पहले दो हफ्तों में गिरावट के बाद संघर्ष विराम उल्लंघन में बढ़ोतरी देखी गई है. जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर इस साल जुलाई में सबसे ज्यादा संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ.
23 अगस्त 2019,समाजवादी पार्टी ने अपनी प्रदेश और सभी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है. इसके साथ ही सभी प्रकोष्ठों को भी भंग किया गया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ही अपने पद पर बने रहेंगे. माना जा रहा है कि अब नए सिरे से पूरी कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा. समाजवादी पार्टी ने तत्काल प्रभाव से समाजवादी पार्टी के सभी युवा संगठनों, छात्र सभा, महिला संगठन और सभी प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को भी पद मुक्त कर दिया है. साथ ही पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय, राज्य कार्यकारिणी भी भंग कर दी है. समाजवादी पार्टी ने अभी प्रदेश स्तर पर यह बदलाव किया है. पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर भी यह फैसला ले सकती है. माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में है. पार्टी में लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम के बाद से ही मंथन जारी है. समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय स्तर बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
तिरुवनंतपुरम कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर अच्‍छा काम करते हैं तो उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इससे जब पीएम मोदी गलती करेंगे तो हमारी आलोचना को विश्‍वसनीयता मिलेगी। थरूर का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'खलनायक' की तरह पेश करने को गलत बताया है। थरूर ने एक ट्वीट के जवाब में ट्वीट किया, 'अगर आप जानते हों तो मैं 6 साल पहले से ही यह कहता आ रहा हूं कि जब नरेंद्र मोदी अच्‍छा कहें या अच्‍छा करें तो उनकी प्रशंसा होनी चाहिए। इससे जब पीएम मोदी गलती करेंगे तो हमारी आलोचना को विश्‍वसनीयता मिलेगी। मैं इस बात का स्‍वागत करता हूं कि विपक्ष के अन्‍य नेता भी उसी विचार को मानने लगे हैं जिसे मैंने पहले कहा था।' बता दें कि सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बाद अब अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि पीएम मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है और ऐसा करके विपक्ष एक तरह से उनकी मदद करता है। इससे पहले जयराम रमेश ने कहा था कि पीएम मोदी के काम के महत्व को स्वीकार नहीं करने और हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। 'मुद्दों पर हो काम का मूल्यांकन' सिंघवी ने रमेश के बयान का हवाला देते हुए ट्वीट किया, 'मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करके एक तरह से विपक्ष उनकी मदद करता है।' सिंघवी ने कहा, 'काम हमेशा अच्छा, बुरा या मामूली होता है। काम का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। जैसे उज्ज्वला योजना कुछ अच्छे कामों में एक है।' 'मोदी शासन पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं' बता दें कि जयराम ने बुधवार को कहा था कि यह वक्त है कि मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझे, जिसके कारण वह सत्ता में लौटे। उन्होंने कहा कि शासन का मॉडल 'पूरी तरह नकारात्मक गाथा’ नहीं है। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषक कपिल सतीश कोमीरेड्डी की किताब 'मालेवॉलेंट रिपब्लिक: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द न्यू इंडिया' का विमोचन करते हुए ये टिप्पणियां की थीं।
कोयंबटूर तमिलनाडु में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की घुसपैठ होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद पड़ोसी राज्य केरल ने अलर्ट जारी किया है और पुलिस अधिकारियों को गश्ती और तलाश तेज करने का निर्देश दिया गया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने शुक्रवार को जिला पुलिस प्रमुखों को पूरे राज्य में कड़ी चौकसी करने का निर्देश दिया है। सूचना में कहा गया है कि जहां लोग ज्यादा संख्या में जमा होते हैं जैसे कि बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। पुलिस महानिदेशक ने आम लोगों से भी कहा है कि अगर उन्हें कोई भी संदिग्ध गतिविधि या वस्तु नजर आती है तो वे उसकी सूचना पुलिस को दें। तमिलनाडु में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। तटीय जिलों को भी किया गया अलर्ट पुलिस के अनुसार खुफिया जानकारी इस ओर इशारा करती है कि श्रीलंका से समुद्री रास्ते के जरिए राज्य में लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवादी आए और कोयंबटूर समेत अन्य शहरों में जा चुके हैं। पुलिस ने बताया कि राज्य में हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और पूजा स्थलों समेत कई जगहों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि आगे किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए खासतौर पर तटीय जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। सीमा क्षेत्रों में वाहनों की चेकिंग पुलिस ने बताया कि कोयंबूटर में गहन गश्त हो रही है। शहर में और सीमा क्षेत्रों में वाहनों की जांच तेज कर दी गई है। सूत्रों ने बताया कि घुसपैठियों की पहचान या उनकी राष्ट्रीयता के बारे में अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन उनमें से एक व्यक्ति पाकिस्तान का है।
कोलकाता पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में एक मंदिर के पास भगदड़ से तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घटना जिले के कछुआ के लोकनाथ मंदिर की है, जहां रात में 2 बजे के आस-पास यह दुर्घटना हुई। प्रदेश की सीएम ममता बनर्जी ने हादसे में घायल लोगों से अस्पताल में जाकर मुलाकात की। उन्होंने मृतकों के परिजन को 5-5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान भी किया। सीएम ने जताया दुख गौरतलब है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग बाबा लोकनाथ ब्रह्मचारी का जन्मदिन मनाने के लिए कछुआ लोकनाथ मंदिर में जमा होते हैं। लोकनाथ ब्रह्मचारी बंगाल के 18वीं सदी के संत थे। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में बड़ी संख्या में उनके अनुयायी हैं। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को हादसे में घायल लोगों से राष्ट्रीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में जाकर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हादसे में होने वाली हर मौत दुखद है और वह दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं। ममता ने बताया कि इस साल कछुआ लोकनाथ मंदिर में भारी भीड़ जमा हुई थी। तड़के सुबह बारिश होने लगी, जिस कारण लोग बांस के अस्थायी स्टॉलों में छुपने की कोशिश करने लगे। भारी बारिश के कारण बांस के स्टॉल टूट गए। वहां जगह बहुत ही संकरी है और हड़बड़ी में कुछ लोग मंदिर के पास के तालाब में गिर गए। इससे वहां भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ मंत्रियों को बारासात अस्पताल, आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय और बशीरहाट के एक अस्पताल में भेजा गया है। मुआवजे का ऐलान बनर्जी ने घोषणा की कि जिन लोगों की इस हादसे में मौत हो गई, उनके परिवारों को 5 लाख रूपये मिलेंगे जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों के परिजनों को एक लाख रुपये तथा मामूली तौर पर घायल हुए लोगों को 50 हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, 'कछुआ का हादसा दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। भारी वर्षा के बाद यह घटना हुई। मैं इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों से मिलने के लिए सीएनएमसी और एएकेएम अस्पताल गई थी। हर मौत दुखद है लेकिन हम जो कर सकते हैं, वह है कि दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़े हो सकते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बशीरहाट थाना इलाके के इस मंदिर में पहुंचे कुछ तीर्थयात्री कीचड़ की वजह से फिसल गए। पुलिस ने उन्हें बचाया और उन्हें कछुआ के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया जहां से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। अधिकारी ने कहा कि स्थिति पर तत्काल काबू पा लिया गया। उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से 10 घायलों को बेहतर इलाज के लिए कोलकाता लाया गया, जिसमें तीन ने दम तोड़ दिया। अन्य तीन की नाजुक हालत है। 5 घायल बशीरहाट थानाक्षेत्र के एक अस्पताल में हैं। इस बीच, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने तीर्थयात्रियों की भीड़ को देखते हुए पर्याप्त इंतजाम नहीं करने को लेकर राज्य सरकार की निंदा की।
है पटना इन दिनों बिहार में बाहुबली विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार के खिलाफ नकेल कसने वाली आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह की चर्चा जोरों पर है। 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह को बिहार में लेडी सिंघम के नाम से बुलाया जा रहा है। उन्हें बिहार में महिला पुलिसकर्मी शोभा अहोतकर के बाद सबसे सख्त महिला पुलिस अधिकारी बताया जा रहा है। बता दें कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी अनंत सिंह ने कई दिनों तक फरार रहने के बाद दिल्ली के साकेत कोर्ट में सरेंडर के लिए अर्जी दाखिल की है। लिपि सिंह को पहले सिर्फ जेडीयू के वरिष्ठ नेता, सीएम नीतीश कुमार के बेहद करीबी और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी के रूप में जाना जाता था लेकिन पिछले दिनों उन्होंने विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की है, उससे उनकी लेडी सिंघम की पहचान बन गई है। लिपि और एसपी (ग्रामीण) कौंतेश कुमार मिश्रा ने पुलिस टीम की अगुआई करके अनंत सिंह के पटना जिले के बाढ़ सब डिविजन के अंदर आने वाले लदमा गांव स्थित पैतृक आवास में पिछले शुक्रवार को छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस ने उनके घर से एके 47 सेमी ऑटोमेटिक राइफल, दो हैंड ग्रेनेड और 26 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। अनंत की पत्नी की शिकायत के बाद लिपि का हुआ था तबादला इसी के बाद अनंत सिंह के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान लिपि सिंह का बाढ़ की सब डिविजन पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद उन्हें पद से हटाकर एटीएस में एएसपी बना दिया गया था। लिपि के खिलाफ ऐक्शन अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी की शिकायत पर लिया गया था जो मुंगेर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतरी थीं। दोबारा बनी एसडीपीओ, अनंत पर कसा शिकंजा चुनाव के बाद लिपि दोबारा बाढ़ की एसडीपीओ बनीं। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनंत के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। उन्होंने अनंत के साथियों पर सबसे पहले नकेल कसी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। सूत्रों के अनुसार, लिपि के पिता आरसीपी सिंह के सीएम नीतीश कुमार के करीबी होने की वजह से ही उन्हें बाढ़ में दोबारा एसडीपीओ पद पर तैनात किया गया था। 700 अपराधियों को भेज चुकी हैं सलाखों के पीछे लिपि बाढ़ की एसडीपीओ रहते हुए अब तक 700 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी हैं और कई अवैध हथियार सीज कर चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे किसी भी शख्स के राजनीति से जुड़े होने से कोई लेना देना नहीं है। मैंने सबूतों के आधार पर कार्रवाई की और अनंत इससे बच नहीं सकते थे।'
नई दिल्ली एक के बाद एक कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'खलनायक' की तरह पेश करने को गलत बताया है। सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बाद अब अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि पीएम मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है और ऐसा करके विपक्ष एक तरह से उनकी मदद करता है। इससे पहले जयराम रमेश ने कहा था कि पीएम मोदी के काम के महत्व को स्वीकार नहीं करने और हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मुद्दों पर हो काम का मूल्यांकन' सिंघवी ने रमेश के बयान का हवाला देते हुए ट्वीट किया, 'मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करके एक तरह से विपक्ष उनकी मदद करता है।' सिंघवी ने कहा, 'काम हमेशा अच्छा, बुरा या मामूली होता है। काम का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। जैसे उज्ज्वला योजना कुछ अच्छे कामों में एक है।' 'मोदी शासन पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं' बता दें कि जयराम ने बुधवार को कहा था कि यह वक्त है कि मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझे, जिसके कारण वह सत्ता में लौटे। उन्होंने कहा कि शासन का मॉडल 'पूरी तरह नकारात्मक गाथा’ नहीं है। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषक कपिल सतीश कोमीरेड्डी की किताब 'मालेवॉलेंट रिपब्लिक: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द न्यू इंडिया' का विमोचन करते हुए ये टिप्पणियां की थीं। '...तो नहीं कर पाएंगे मुकाबला' कांग्रेस नेता ने कहा था, 'वह (मोदी) ऐसी भाषा में बात करते हैं जो उन्हें लोगों से जोड़ती है। जब तक हम यह न मान लें कि वह ऐसे काम कर रहे हैं जिन्हें जनता सराह रही है और जो पहले नहीं किए गए, तब तक हम इस व्यक्ति का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।' उन्होंने आगाह किया, 'साथ ही अगर आप हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने जा रहे हैं तो आप उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे।"
नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि राजीव गांधी को विशाल बहुमत मिला था लेकिन उन्होंने इस ताकत का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने के लिए कभी नहीं किया। सोनिया ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा, 'राजीव गांधी विशाल बहुमत से जीत कर आए थे लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल लोगों को डराने धमकाने के लिए नहीं किया।' सोनिया की यह टिप्पणी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में आई है। दरअसल, सीबीआई ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया से संबंधित मामले में बुधवार रात को गिरफ्तार कर लिया। चिदंबरम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को झूठा करार दिया और कहा कि वह आशा करते हैं कि जांच एजेंसियां कानून का सम्मान करेंगी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए सोनिया ने कहा, 'राजीव गांधी मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प रखते थे।' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर देश के कोने कोने तक जाकर यह संदेश दिया कि भारत की विविधता का उत्सव मनाकर ही देश को मजबूत बना सकते हैं।' सोनिया गांधी ने कहा, ' राजीव जी ने खेती में भी विज्ञान और तकनीक का उपयोग करके देश को सशक्त बनाया। उनकी कल्पना का भारत अनेकता और एकता को एक साथ रखने वाला भारत था। 1986 में राजीव गांधी जी ने शिक्षा नीति लाकर देश की शिक्षा को नई दिशा दी। राजीव जी द्वारा स्थापित जवाहर नवोदय विद्यालय आज देश का गौरव हैं, जहाँ असंख्य ग्रामीण बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।'
चिदंबरम नई दिल्ली पी. चिदंबरम को 5 दिनों के लिए सीबीआई की रिमांड में भेजने का फैसला देते हुए कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां भी की हैं। पूर्व वित्त और गृह मंत्री रहे चिदंबरम की रिमांड पर फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनकी गहराई से जांच की जरूरत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री को रिमांड के लिए भेजने का फैसला देते हुए विशेष सीबीआई जज अजय कुमार ने कहा, 'जांच को तार्किक अंत तक पहुंचाना जरूरी होता है और इसके लिए कई बार हिरासत में लेकर पूछताछ करना उपयोगी और फायदेमंद साबित होता है।' कोर्ट ने कहा कि यह मामला मनी ट्रेल का है, जिसके बारे में पूरी जानकारी जुटाना जरूरी है। जज ने कहा कि यह केस पूरी तरह से डॉक्युमेंट्री एविडेंस यानी दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है और उनकी प्रामाणिकता के लिए पूरी पड़ताल होनी चाहिए। यही नहीं कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में हुए करप्शन में पी. चिदंबरम की कथित संलिप्तता को लेकर भी बेहद अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, 'चिदंबरम को 2007-08 और 2008-09 में पेमेंट किए जाने की बात एकदम स्पष्ट और वर्गीकृत है।' यही नहीं कोर्ट ने पी. चिदंबरम पर लगे आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है।हालांकि जज ने पी. चिदंबरम को थोड़ी राहत देते हुए हर दिन 30 मिनट के लिए वकीलों और परिजनों से मुलाकात की भी छूट दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई यह सुनिश्चित करे कि चिदंबरम की व्यक्तिगत गरिमा का किसी भी तरीके से हनन नहीं हो। कोर्ट में बोले चिदंबरम, हर सवाल का दिया जवाब अदालत में सुनवाई के दौरान पी. चिदंबरम के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उन्हें बोलने देने की मांग की। एसजी तुषार मेहता के विरोध के बाद भी उन्हें बोलने का मौका मिला। चिदंबरम ने कहा कि कृपया आप सवालों और जवाबों को देखिए। ऐसा कोई सवाल नहीं है, जिसका मैंने जवाब न दिया हो। आप ट्रांस्क्रिप्ट पढ़िए। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मेरा बाहर कहीं कोई खाता है, मैंने कहा नहीं। उन्होंने पूछा कि क्या मेरे बेटे का विदेश में कोई खाता है, मैंने कहा, हां।
नई दिल्ली आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को सीबीआई ने बुधवार रात उनके घर से हिरासत में ले लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार दोपहर उन्हें दिल्ली के राउज ऐवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। यह पूरा मामला अब आगे किस रास्ते पर बढ़ सकता है और सीबीआई के शिकंजे से निकलना चिदंबरम के लिए कितना मुश्किल है, यहां जानिए. रिमांड पर पहले सुनवाई सीबीआई आज राउज ऐवेन्यू कोर्ट में चिदंबरम को पेश करेगी। यहां एजेंसी द्वारा उनकी अधिकतम 14 दिन की पुलिस रिमांड (सीबीआई रिमांड) मांगी जा सकती है। यदि कोर्ट सीबीआई की मांग मान लेती है तो चिदंबरम की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कानून के जानकार सीनियर वकील नवीन शर्मा का कहना है कि जब तक रिमांड का समय पूरा नहीं होता, तब तक चिदंबरम की जमानत याचिका पर भी सुनवाई नहीं हो सकती है। ईडी भी लाइन में अपने राजनीतिक कार्यकाल में सबसे बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे पी चिदंबरम के पीछे दो एजेंसियां हैं। सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कोर्ट से चिदंबरम की रिमांड की मांग कर सकता है। अब यह पूरी तरह कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह रिमांड की मांग मानती है या नहीं। ... तो होगी जमानत पर सुनवाई सीनियर वकील अमन शरीन का कहना है कि रिमांड का समय पूरा होने या रिमांड की मांग खारिज होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाता है। न्यायिक हिरासत में भेजने के साथ ही आरोपी के वकील जमानत की मांग कर सकते हैं। यदि निचली अदालत में चिदंबरम की जमानत अर्जी खारिज हो जाती है तो वे जमानत के लिए उच्च अदालतों का रुख कर सकते हैं। बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं चिदंबरम यदि कोर्ट से पहले सीबीआई और बाद में ईडी की रिमांड की मांग मान ली जाती है तो यह चिदंबरम के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। हिरासत अवधि के दौरान कानून आरोपी की जमानत पर सुनवाई नहीं हो सकती है। यानी, चिदंबरम को भी रिमांड पीरियड तक जमानत मिलने का कोई सवाल नहीं उठता है। चिदंबरम की याचिका पर SC करेगा सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की गिरफ़्तारी के लिए बचने के लिए दायर अग्रिम ज़मानत की 2 अर्जी मंगलवार को खारिज कर दी थी।इसके बाद चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए 2 अलग-अलग अग्रिम ज़मानत की अर्जी दायर की। सीबीआई के खिलाफ दायर याचिका अब औचित्यहीन हो गई है, लेकिन ईडी के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई होगी। सीबीआई की अर्जी महत्वहीन हो चुकी है क्योंकि चिदंबरम पहले ही अरेस्ट हो चुके हैं। ईडी भी चिदंबरम को गिरफ्तार करेगी, ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व वित्त मंत्री ने अर्जी दी है।
नई दिल्ली पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे राजनीतिक षड्यंत्र और व्यक्तिगत बदले से प्रेरित बताया। कांग्रेस ने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था, नौकरियों का खत्म होना और रुपये का लगातार अवमूल्यन से देश का ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार ने यह खेल रचा। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण पर मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ चैनल सरकार की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने सत्यमेव जयते का नारा देते हुए कहा कि जांच के बाद सच आखिरकार सामने आ जाएगा। राजनीतिक षड्यंत्र है पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा, 'मोदी सरकार बनने के 6 साल बाद 10 साल पुराने केस में दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया जा रहा है। जेल में बंद एक ऐसी महिला के बयान को आधार बनाया गया है जिस पर अपनी पुत्री की हत्या का आरोप है। 40 साल के बेदाग राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक शुचिता को धूमिल करने के लिए मोदी सरकार ने यह दुर्भावनापूर्ण कैंपेन चलाया है। यह प्रजातंत्र की दिन-दहाड़े और कभी-कभी रात को भी हत्या होते देखा गया है।' सीबीआई को बनाया जा रहा है बदला लेने की एजेंसी कांग्रेस ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई केंद्र में मोदी सरकार के नेतृत्व में राजनीतिक बदला लेने की एजेंसी बन चुकी है। सुरजेवाला ने कहा, 'अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सीबीआई के अधिकारी ने रात में दीवार फांदकर कांग्रेस नेता के घर में प्रवेश किया और उन्हें अरेस्ट किया।' देश का ध्यान मंदी से हटाने का आरोप लगात हुए उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में भयानक स्तर पर मंदी है और लाखों की संख्या में रोजगार जा रहा है। हमारा रुपया एशिया का सबसे बुरा प्रदर्शन करनेवाला करंसी बन चुका है। प्रधानमंत्री की आयु को पारकर बहुत आगे निकल चुका है। देश का ध्यान बांटने के लिए विचलित मोदी सरकार ने नया स्वांग और ड्रामा रचा है।' इंद्राणी और जेल अधिकारियों के बीच क्या डील हुई?' कांग्रेस ने इंद्राणी को गवाह बनाने पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा, 'जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी द्वारा यह गवाही देने के बदले क्या डील हुई है, देश यह जानना चाहता है। श्री चिदंबरम और उनके पुत्र का आईएनएक्स मीडिया केस से कोई लेना-देना है, इसका एक सबूत नहीं मिल सका। चार्जशीट में श्री चिदंबरम और उनके पुत्र तथा लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एक पुख्ता सबूत का जिक्र नहीं किया गया है।' गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने दागे सरकार पर कई सवाल कांग्रेस ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कई सवाल पूछे। सुरजेवाला ने कहा, 'बीजेपी की प्रॉपगैंडा मशीन कई प्रकार के मिथ्या प्रचार में जुटी है। देश के समक्ष कुछ 5-6 सवाल रखना चाहता हूं। श्री चिंदबरम और उनके बेटे 20 बार से अधिक ईडी और सीबीआई के सामने पेश हो चुके हैं। आज तक सबूत का एक शब्द भी जनता के समक्ष जांच एजेंसियां पेश नहीं कर सकीं। सब जानते हैं कि यह केस 12 साल पुराना है। इसमें अब गिरफ्तारी का क्या औचित्य है? 6 साल से मोदी सरकार ने पूरा जोर लगा लिया, लेकिन सबूत का एक कतरा भी नहीं ला सके। एक कमाल की बात है कि एफआईबी बोर्ड में कई और सदस्य थे, जिस कंपनी पर आरोप है उसके अधिकारियों को भी नहीं पकड़ा। आपने केवल श्री चिदंबरम को और उनको प्रताड़ित करने के लिए पकड़ा।'
की नई दिल्ली पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी से कांग्रेस नेता काफी आहत है। इस मामले में कांग्रेस नेता सरकार को खरी-खोटी सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता और आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम की पैरवी करने वाले कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने तो सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और मीडिया की मंशा पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। पार्टी के दिग्गज नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इशारों-इशारों में दिल्ली उच्च न्यायालय समेत देश की शीर्ष अदालत के इरादे पर सवाल उठाया और कहा कि जिस तरह ऑर्डर पास किए जा रहे हैं, वह बेहद चिंता की बात है। दिल्ली हाई कोर्ट जज की मंशा पर सिब्बल का सवाल सिब्बल ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के जज के बारे में कहा, 'उन्होंने 25 जनवरी से ही फैसला सुरक्षित रखा था और सात महीने बाद जब रिटायरमेंट के दो दिन बचे तो जजमेंट दे दिया।' सिब्बल यहीं नहीं रुके, उन्होंने फैसले की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '3.25 बजे जजमेंट दिया गया। जजमेंट के बाद हमने अग्रिम जमानत की याचिका पेश की तो इसे शाम चार बजे रिजेक्ट कर दिया गया ताकि हम सुप्रीम कोर्ट भी नहीं जा सकें।' सिब्बल ने कहा कि जिस तरह ऑर्डर पास हो रहे हैं, वह चिंताजनक है। सुप्रीम कोर्ट पर भी बरसे सिब्बल सिब्बल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चली गतिविधियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, मुवक्किल का हक होता है कि वह अपील करे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका के बारे में कहा, 'हमें कहा गया कि सीजेआई इस पर फैसला लेंगे। जबकि सुप्रीम कोर्ट हैंडबुक के मुताबिक, सीजेआई संवैधानिक बेंच में बिजी हैं तो नियम यह है कि दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसकी सुनवाई करें। हमें अपना अधिकार नहीं मिला। रजिस्ट्रार ने बताया कि चीफ जस्टिस शाम 4 बजे इस पर सुनवाई करेंगे। 4 बजे सुनवाई का समय ही नहीं बचता है।' उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम की याचिका पर जानबूझकर तुरंत सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा, कोर्ट सुनवाई ही नहीं करेगी और दो दिन बाद के लिए याचिका लिस्ट करेगी और इस बीच गिरफ्तारी हो जाए तो इसका मतलब है कि पिटिशन इन्फेक्चुअस (निष्प्रभावी) हो गई।' मीडिया को भी बनाया निशाना वहीं, सिब्बल के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मीडिया रिपोर्टों पर नाराजगी प्रकट की। सिब्बल ने कहा, 'आपका मीडिया कह रहा है कि चिदंबरम भाग गए हैं। वह वित्त मंत्री रहे चुके हैं, गृह मंत्री रह चुके हैं।' उन्होंने सवाल किया, 'वह (चिदंबरम) भागने वाले आदमी हैं?' वहीं, सिंघवी ने मीडिया पर बरसते हुए कहा कि मीडिया जिस तरह से चिदंबरम को फरार या भगोड़ा बता रहा है, यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम कहीं नहीं गए थे। उन्होंने कांग्रेस दफ्तर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, फिर भी कहा गया कि भाग गए। यह बहुत दुखद है। 'सिर्फ चिदंबरम का मामला नहीं, सिस्टम की चिंता है' सिब्बल ने चिदंबरम की गिरफ्तारी को सिस्टम में छेड़छाड़ से जोड़ दिया और कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ चिदंबरम का मामला नहीं है। यह सिस्टम से जुड़ा मसला है। कानून को अपना काम करते रहना चाहिए। इसकी कोई चिंता नहीं है। चिंता की बात यह है कि सिस्टम को इस तरह तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।' सिब्बल ने भविष्य में हर क्षेत्र के विरोधियों के सरकार का शिकार होने की आशंका प्रकट की। उन्होंने कहा कि अभी राजनीतिक पार्टी निशाने पर है, कल को मीडिया का शिकार किया जा सकता है।
स्वतंत्र नई दिल्ली आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को दी गवाही में कहा है कि चिदंबरम से उनकी मुलाकात हुई थी। पूर्व वित्त मंत्री ने उनसे अपने बेटे के बिजनस में मदद की बात कही थी।टाइम्स नाउ के पास इंद्राणी के साथ बातचीत का एक्सक्लूसिव विडियो है। विडियो में इंद्राणी कहती दिख रही हैं कि उनकी चिदंबरम से मुलाकात हुई थी। कार्ति से मिलने और मदद की बात भी इंद्राणी ने स्वीकार की। लिखें विडियो में शुरुआत में तो इंद्राणी कहती हैं कि आपको पता चल जाएगा... कल पता चल जाएगा, लेकिन फिर वह मुलाकात की बात स्वीकार भी करती हैं। रिपोर्टर के सवाल और इंद्राणी के जवाब आप यहां सिलसिलेवार पढ़ सकते हैं... रिपोर्टर: सिर्फ जानना चाहती हूं, क्या आप मिस्टर चिदंबरम से 2008 में मिली थीं? इंद्राणी: हां कार्ति से रिपोर्टर: नहीं मिस्टर पी. चिदंबरम से इंद्राणी: हां..हां... 2007 में रिपोर्टर: और उन्होंने (पी. चिदंबरम) क्या कहा था उस वक्त जब आप उनसे नॉर्थ ब्लॉक में मिलीं? इंद्राणी: आपको पता चल जाएगा। मैं नहीं कर सकती हूं प्लीज, ऐसा नहीं कर सकती... आप जानती हैं यह गोपनीय है। इसके बाद कार्ति के झूठ बोलने के आरोपों पर भी इंद्राणी ने जबाव दिया। रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि लेकिन कार्ति कह रहे हैं कि आप लगातार झूठ बोल रही हैं? इंद्राणी: आपको पता चल जाएगा, आपको पता चल जाएगा, यह बात... वो जो भी कहना चाहें कह सकते हैं। रिपोर्टर: क्या मिस्टर चिदंबरम ने वाकई आपसे कहा था कि मेरे बेटे की मदद करना? इंद्राणी: मैं यहां पर कुछ नहीं कह सकती... सब पता चल जाएगा। हां...हां... कहा था उन्होंने... मैं यहां पर कुछ नहीं कह सकती। आपको समझना होगा मैं क्या कह रही हूं... यह गोपनीय है। रिपोर्टर: उन्होंने आपसे शब्दश: क्या कहा था? इंद्राणी: मैं नहीं बता सकती हूं, सीरियसली, यह गोपनीय है। रिपोर्टर: हम सिर्फ समझने के लिए पूछ रहे हैं। मिस्टर चिदंबरम अपने वकीलों से बार-बार कह रहे हैं कि आप झूठ बोल रही हैं। इंद्राणी: मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह अपने वकीलों से क्या कह रहे हैं। यह मेरी प्रॉब्लम नहीं है। मैं एक गवाह हूं इसलिए मुझे कोई परेशानी नहीं है। रिपोर्टर: उन्होंने आपसे क्या कहा? क्या उन्होंने आपसे बेटे की मदद करने कहा था? इंद्राणी: हां, उन्होंने कहा था रिपोर्टर: क्या जब आप कार्ति से मिली थीं तो कार्ति ने सीधे आपसे पैसों की मांग की? इंद्राणी: हां! उन्होंने ऐसा ही किया रिपोर्टर: डिमांड कितनी थी? इंद्राणी: 1 मिलियन डॉलर रिपोर्टर: कार्ति ने स्पष्ट तौर पर अपने मुंह से यह कहा? इंद्राणी: हां उन्होंने कहा था रिपोर्टर: क्या आपने यह सब कोर्ट में कहा है कैमरे के सामने? इंद्राणी: हां! मैंने कहा है। रिपोर्टर: क्या जब आप कार्ति से मिली थीं तो कार्ति ने सीधे आपसे पैसों की मांग की? इंद्राणी: हां! उन्होंने ऐसा ही किया रिपोर्टर: डिमांड कितनी थी? इंद्राणी: 1 मिलियन डॉलर रिपोर्टर: कार्ति ने स्पष्ट तौर पर अपने मुंह से यह कहा? इंद्राणी: हां उन्होंने कहा था रिपोर्टर: क्या आपने यह सब कोर्ट में कहा है कैमरे के सामने? इंद्राणी: हां! मैंने कहा है। रिपोर्टर: पिता और बेटे दोनों का कहना है कि आप ऐसी महिला हैं जिस पर यकीन नहीं किया जा सकता? इंद्राणी: ये उनकी समस्या है और वो दोनों मुझ पर यकीन नहीं करते हैं, इससे मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। रिपोर्टर: क्या पैसा आपने दिया था? इंद्राणी: कोर्ट को मुझ पर यकीन करना है, ये (पैसा देने की बात) आपको पता चल जाएगा। (यह विडियो 2018 का है) nbt
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2019, दिल्ली के तुगलकाबाद में बुधवार रात हुई हिंसा में अबतक 91 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण भी शामिल हैं. गुरुवार सुबह पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया. तुगलकाबाद हिंसा के दौरान बुधवार रात 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और दर्जनों गाड़ियों में तोड़-फोड़ की गई थी. पुलिस ने गिरफ्तार सभी 91 आरोपियों पर दंगा फैलाना, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया है. सभी आरोपियों को आज साकेत कोर्ट में पेश किया गया जाएगा. क्या है पूरा मामला तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ बुधवार शाम दलित समाज के लोगों ने रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में दलित समुदाय के नेता और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर मौजूद थे. इस मौके पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद थे. इस विरोध प्रदर्शन में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से दलित समुदाय के सैकड़ों लोग भी शामिल हुए. इसके बाद कई घंटे तक जमकर बवाल हुआ. रामलीला मैदान में रैली के बाद हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग तुगलकाबाद पहुंचे और पत्थरबाजी शुरू कर दी. हिंसा के दौरान 15 पुलिसकर्मी समेत दर्जनभर लोग जख्मी हो गए. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठियां भांजी और कई राउंड हवाई फायरिंग की. इलाके में अर्धसैनिक बलों को भी तैनात कर दिया गया है. भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया गया. गोविंदपुरी थाने में केस दर्ज किया गया है. कई और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.
मुंबई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) अध्यक्ष राज ठाकरे को प्रवर्तन निदेशालय का नोटिस दिए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में है। ठाकरे गुरुवार को ईडी के सामने पेश होने जाएंगे। ऐसे में एमएनएस कार्यकर्ता किसी तरह का हंगामा न करें, इसे लेकर पुलिस चौकन्नी है। इसके मद्देनजर गुरुवार सुबह एमएनएस नेता संदीप देशपांडे को हिरासत में ले लिया गया है। गौरतलब है कि कोहिनूर सीटीएनएल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी में आईएल ऐंड एफएस द्वारा 450 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश और कर्ज से जुड़ी कथित अनियमियतताओं की जांच के सिलसिले में ईडी ने राज ठाकरे को नोटिस जारी किया है। कार्यकर्ताओं को नोटिस बता दें कि ठाकरे की पेशी के मामले में कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए पुलिस ने धारा 149 के तहत एमएनएस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आगाह किया कि कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी कड़ी में गुरुवार को सुबह एहतियात के तौर पर देशपांडे को हिरासत में ले लिया गया। बढ़ाई गई सुरक्षा महाराष्ट्र पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया है कि ठाणे, नासिक, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़, जहां एमएनएस का दबदबा है, इन इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मरीन ड्राइव, एमआरए मार्ग, दादर और आजाद मैदान पुलिस स्टेशन के इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है। ईडी के मुंबई ऑफिस के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज ने की शांत रहने की अपील ईडी का नोटिस मिलने के बाद राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि इससे पहले भी मुश्किलें आईं हैं लेकिन मुश्किलों से लड़कर उन पर विजय पाई गई है। राज ने अपने समर्थकों से कहा, 'ईडी को मुझसे कुछ सवाल पूछने हैं, मैं उनके सवालों का उचित जवाब दूंगा लेकिन मेरी अपील है कि आप लोग शांत रहें। कोई ईडी कार्यालय के बाहर जमा न हो। एमएनएस कार्यकर्ताओं के किसी भी काम से जनता को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, न ही किसी निजी या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होना चाहिए। इस विषय में सही वक्त आने पर मुझे जो बोलना है मैं बोलूंगा, तब तक आप लोग खुद का और अपने परिवार का ख्याल रखो।' राज के बचाव में उद्धव उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में मीडिया से बात करते हुए राज को मिले नोटिस पर कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि ईडी द्वारा राज ठाकरे से की जाने वाली पूछताछ से कोई नतीजा निकलेगा।’ उद्धव की इस टिप्पणी की राजनीतिक गलियारों में चर्चा होनी शुरू हो गई है। यह टिप्पणी इसलिए महत्व रखती है, क्योंकि राज्य में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
मुंबई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) अध्यक्ष राज ठाकरे को प्रवर्तन निदेशालय का नोटिस दिए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में है। ठाकरे गुरुवार को ईडी के सामने पेश होने जाएंगे। ऐसे में एमएनएस कार्यकर्ता किसी तरह का हंगामा न करें, इसे लेकर पुलिस चौकन्नी है। इसके मद्देनजर गुरुवार सुबह एमएनएस नेता संदीप देशपांडे को हिरासत में ले लिया गया है। गौरतलब है कि कोहिनूर सीटीएनएल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी में आईएल ऐंड एफएस द्वारा 450 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश और कर्ज से जुड़ी कथित अनियमियतताओं की जांच के सिलसिले में ईडी ने राज ठाकरे को नोटिस जारी किया है। कार्यकर्ताओं को नोटिस बता दें कि ठाकरे की पेशी के मामले में कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए पुलिस ने धारा 149 के तहत एमएनएस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आगाह किया कि कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी कड़ी में गुरुवार को सुबह एहतियात के तौर पर देशपांडे को हिरासत में ले लिया गया। बढ़ाई गई सुरक्षा महाराष्ट्र पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया है कि ठाणे, नासिक, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़, जहां एमएनएस का दबदबा है, इन इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मरीन ड्राइव, एमआरए मार्ग, दादर और आजाद मैदान पुलिस स्टेशन के इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है। ईडी के मुंबई ऑफिस के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज ने की शांत रहने की अपील ईडी का नोटिस मिलने के बाद राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि इससे पहले भी मुश्किलें आईं हैं लेकिन मुश्किलों से लड़कर उन पर विजय पाई गई है। राज ने अपने समर्थकों से कहा, 'ईडी को मुझसे कुछ सवाल पूछने हैं, मैं उनके सवालों का उचित जवाब दूंगा लेकिन मेरी अपील है कि आप लोग शांत रहें। कोई ईडी कार्यालय के बाहर जमा न हो। एमएनएस कार्यकर्ताओं के किसी भी काम से जनता को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, न ही किसी निजी या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होना चाहिए। इस विषय में सही वक्त आने पर मुझे जो बोलना है मैं बोलूंगा, तब तक आप लोग खुद का और अपने परिवार का ख्याल रखो।' राज के बचाव में उद्धव उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में मीडिया से बात करते हुए राज को मिले नोटिस पर कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि ईडी द्वारा राज ठाकरे से की जाने वाली पूछताछ से कोई नतीजा निकलेगा।’ उद्धव की इस टिप्पणी की राजनीतिक गलियारों में चर्चा होनी शुरू हो गई है। यह टिप्पणी इसलिए महत्व रखती है, क्योंकि राज्य में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
नई दिल्ली INX मीडिया केस में फरार चल रहे पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को बुधवार रात सीबीआई ने नाटकीय घटनाक्रम के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।दरअसल, रात 8 बजे चिदंबरम अचानक कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे, जहां 10 मिनट का अपना लिखा हुआ बयान पढ़ने के बाद वह घर लौट गए। उनके पीछे-पीछे सीबीआई और ईडी की टीमें कांग्रेस मुख्यालय पहुंचीं, लेकिन तब तक वे घर के लिए निकल चुके थे। इसके बाद सीबीआई और ईडी की टीमों ने भी उनके जोरबाग स्थित आवास की ओर दौड़ लगा दी। चिदंबरम और फिर सीबीआई और ईडी की टीमों के पहुंचने के बाद उनके घर पर हलचल तेज हो गई। अंदर चिदंबरम थे और बाहर कांग्रेस के कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारेबाजी में जुटे थे। घंटेभर चले ड्रामे के बाद सीबीआई की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यहां से चिदंबरम को लेकर सीबीआई की टीम अपने मुख्यालय पहुंची। रातभर चिदंबरम सीबीआई दफ्तर में रखे गए, जहां उनसे कई सवाल पूछे गए। आज उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में अरेस्ट किया गया है। इसी मामले में उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को भी फरवरी, 2018 में 23 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था। दीवार फांदकर सीबीआई की टीम घर में घुसी इससे पहले सीबीआई की टीम ने काफी देर तक पी. चिदंबरम के घर का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने के बाद अफसर दीवार फांदकर अंदर कूदे। पी. चिदंबरम के जोरबाग स्थित आवास पर करीब एक घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। एक तरफ सीबीआई उन्हें गिरफ्तार करने के लिए अंदर जाने की कोशिश में थी तो कांग्रेस के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए सीबीआई का रास्ता रोक रहे थे। सीबीआई के अलावा ईडी की टीम भी पी. चिदंबरम के आवास पर पहुंची थी। सीबीआई के 30 अधिकारियों के अलावा दिल्ली पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। घर में पीछे की तरफ से घुसी सीबीआई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हंगामे को देखते हुए सीबीआई ने दिल्ली पुलिस की मदद मांगी थी। आनन-फानन में दिल्ली पुलिस की टीम भी पहुंची और आगे से रास्ता न दिए जाने पर पीछे के दरवाजे से चिदंबरम के घर में एंट्री की। चिदंबरम के घर के बाहर सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता 'मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी-नहीं चलेगी' के नारे लगा रहे थे। 27 घंटे बाद कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे थे पूर्व केंद्रीय मंत्री इससे पहले 27 घंटे तक लापता रहने के बाद पी. चिदंबरम रात को करीब 8 बजे अचानक कई नेताओं के साथ कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। पार्टी दफ्तर में 10 मिनट तक उन्होंने लिखा हुआ भाषण पढ़ते हुए खुद को बेगुनाह बताया और तुरंत अपने घर के लिए रवाना हो गए। चिदंबरम जिस वक्त अपना बयान पढ़ रहे थे, उस दौरान अहमद पटेल, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, केसी वेणुगोपाल और अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई दिग्गज नेता मंच पर उनके साथ बैठे थे। चिदंबरम के कांग्रेस दफ्तर पहुंचने की खबर पर सीबीआई टीम भी पहुंची, लेकिन तब तक चिदंबरम वहां से रवाना हो चुके थे। इसके बाद सीबीआई भी पीछा करते हुए उनके घर तक पहुंची। सीबीआई ने उनके घर का दरवाजा खटखटाया, लेकिन गेट न खुलने पर दीवार फांदकर ही सीबीआई के अफसर घर के अंदर घुस गए। चिदंबरम बोले, रात भर तैयार किए केस के दस्तावेज चिदंबरम ने अपनी सफाई में कहा, 'मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं कानून का सामना करने से बचते हुए भाग रहा हूं। लेकिन, मैं कानून के साथ हूं और बीते एक दिन से मैं वकीलों के साथ हूं। रातभर मैं वकीलों के साथ दस्तावेज तैयार कर रहा था।' चिदंबरम ने कांग्रेस मुख्यालय में दिग्गज नेताओं के साथ बैठकर मीडिया के सामने लिखा हुआ भाषण पढ़ा और फिर बिना किसी सवाल का जवाब दिए ही उठकर चल दिए।
नई दिल्ली करप्शन के मामले में गिरफ्तारी के संकट का सामना कर रहे पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम बुधवार को 27 घंटे बाद सबके सामने आए। वह रात करीब 8 बजे अचानक कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और मीडिया के सामने अपना लिखित बयान पढ़ा। चिदंबरम ने खुद के फरार होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि मुझे और मेरे बेटे कार्ति चिदंबरम को फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं INX मीडिया केस में आरोपी नहीं हूं। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं और मेरा परिवार किसी केस में आरोपी नहीं है। चिदंबरम ने मीडिया से कहा, 'स्वतंत्रता लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है।' लिखें चिदंबरम ने कहा कि यदि मुझे जिंदगी और आजादी के बीच में से कुछ चुनना हो तो मैं आजादी चुनूंगा। उन्होंने कहा कि मेरे वकीलों ने मुझे सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी और मैंने यही किया। मैं कानून से संरक्षण मांग रहा हूं। चिदंबरम बोले, रात भर तैयार किए केस के दस्तावेज चिदंबरम ने कहा, 'मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं कानून का सामना करने से बचते हुए भाग रहा हूं। लेकिन, मैं कानून के साथ हूं और बीते एक दिन से मैं वकीलों के साथ हूं। रातभर मैं वकीलों के साथ दस्तावेज तैयार कर रहा था।' चिदंबरम ने कांग्रेस मुख्यालय में दिग्गज नेताओं के साथ बैठकर मीडिया के सामने लिखा हुआ भाषण पढ़ा और फिर बिना किसी सवाल का जवाब दिए ही उठकर चल दिए। मीडिया से बात करने के बाद करीब 15 मिनट में ही पी. चिदंबरम अपने जोर बाग स्थित घर पहुंच गए। अंदर चल रही थी प्रेस कॉन्फ्रेंस, बाहर समर्थन में नारे बुधवार रात एक तरफ पी. चिदंबरम कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ मीडिया से बात कर रहे थे तो पार्टी मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं का हुजूम था। कांग्रेस के कार्यकर्ता चिदंबरम के समर्थन में नारे लगा रहे थे। यही नहीं, चिदंबरम के घर के बाहर भी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे हुए थे और नारेबाजी कर रहे थे। दो दिन बाद अग्रिम जमानत पर सुनवाई करेगा SC मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तत्काल उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और शुक्रवार को सुनवाई का फैसला लिया है। फिलहाल उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इस बीच सीबीआई और ईडी ने उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। अब वह देश से बाहर नहीं जा सकते। खुर्शीद बोले, दिल और दिमाग से पूरी तरह साथ इस बीच कांग्रेस के सीनियर नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि हमें उनके योगदान पर गर्व है और हम उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि हम दिल और दिमाग से पूरी तरह उनके साथ हैं।
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2019,हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों द्वारा चीन के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच एक बड़ी कार्रवाई हुई है. हांगकांग में मौजूद यूनाइटेड किंगडम के दूतावास में काम करने वाले एक अधिकारी को चीनी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया. सायमन चेंग नाम का अधिकारी शेनजान की एक ट्रिप से वापस लौट रहा था, जिस वक्त उसे हिरासत में ले लिया गया. अंग्रेजी अखबार द गार्जियन के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि हमारे एक टीम मेंबर को हांगकांग में हिरासत में ले लिया गया है, इस खबर से हम चिंता में हैं. हमने अधिकारी के परिवार को सूचित कर दिया है और आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं. सायमन चेंग को उनकी गर्लफ्रेंड के सामने गिरफ्तार किया गया और काफी दिनों तक संपर्क नहीं करने दिया गया. चेंग को किस जगह रखा गया है इसकी जानकारी किसी को नहीं दी गई है. सायमन चेंग हांगकांग में मौजूद ब्रिटिश दूतावास में बतौर ट्रेड और इन्वेंस्टमेंट ऑफिसर काम करते हैं. चीनी अधिकारियों का आरोप है कि सायमन चेंग पर कई तरह के नियमों के उल्लंघन करने का आरोप है, यही कारण है कि उन्हें हिरासत में लिया गया है. उन्हें पंद्रह दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. गौरतलब है कि हांगकांग में चीन के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान बटोरा है. चीन ने भी हांगकांग शहर के बॉर्डर पर सेना को तैनात कर दिया है, ताकि प्रदर्शनकारियों को रोका जाए. बीते दिनों हांगकांग की सड़कों पर लाखों की संख्या में लोग छाता लिए प्रदर्शन करते नजर आए थे. ये प्रदर्शन एक कानून के खिलाफ हो रहा है, जिसके तहत चीन या आस-पास के देशों में गुनाह करने वाला अगर हांगकांग में आता है तो उसे चीनी पुलिस कभी भी गिरफ्तार कर अपने देश में ले जा सकती है. जिसके खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, इससे पहले भी चीन कई बार ऐसे कानून ला चुका है जिसका हांगकांग के निवासियों ने विरोध किया है.
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2019, नक्सलियों के खात्मे के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे. अमित शाह की ये बैठक नक्सल प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ होगी. सूत्रों के मुताबिक बैठक में नक्सलियों के नए ठिकाने, जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन पर चर्चा होगी. अमित शाह नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे. ये बैठक 26 अगस्त को दिल्ली में होगी. माना जा रहा है कि देश के कुछ हिस्सों में जहां नक्सली गतिविधियां ज्यादा हैं, वहां के लिए बड़ी रणनीति तैयार की जाएगी. नक्सली हमलों में आए दिन पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों की जान जाती हैं. गृह मंत्रालय की इस बैठक में नक्सली घटनाओं को रोकने का खाका तैयार किया जाएगा. इससे पहले जून में गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल मामले में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, आईबी चीफ, केंद्रीय गृह सचिव और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे. इससे पहले मार्च 2018 में गृह मंत्रालय को शेयर की गई खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि नक्‍सली अपना नया गढ़ बनाने में जुटे हैं. नक्‍सली छत्तीसगढ़ के बस्तर और दण्डकारण्य से अलग होकर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के जंगलों में भी नया नक्सली ज़ोन तैयार करने में जुटे हैं. ये ज़ोन मध्यप्रदेश के बालाघाट, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और महाराष्ट्र के गोंदिया में बनाया जा रहा था. फिलहाल सुरक्षाबल और राज्य पुलिस नक्सलियों से निपटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
नई दिल्ली आईएनएक्स मीडिया केस में घूसखोरी के आरोपों में घिरे पी. चिदंबरम के लिए गिरफ्तारी से राहत का इंतजार लंबा होता जा रहा है। उनके वकीलों की तमाम कोशिशों के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अग्रिम जमानत पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अब शीर्ष अदालत ने पूर्व वित्त मंत्री की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज किए जाने के बाद पूर्व वित्त मंत्री के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पूरे दिन SC में चिदंबरम के 11 दिग्गज वकीलों की टीम डटी रही पर फौरी राहत दिलाने में नाकाम रही। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कहां हैं, किसी को खबर नहीं है। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय के बाद अब सीबीआई ने भी पी. चिदंबरम के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया है। बुधवार को दिन में शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद पी. चिदंबरम के 11 वकीलों की टीम ने सीजेआई का रुख किया। अब इस मामले की सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत ने 23 अगस्त की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक रजिस्ट्रार ने चिदंबरम के वकील को जानकारी दी कि मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को सुनवाई तय की है। रजिस्ट्रार से मामले की लिस्टिंग की जानकारी मिलने के बाद सीनियर वकील कपिल सिब्बल के नेतृत्व में उनकी पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने कंसल्टिंग रूम में चर्चा की और फिर निकले। चिदंबरम के वकील चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट में आज ही इस मसले पर सुनवाई हो जाए और उनकी गिरफ्तारी पर स्टे मिल जाए। हालांकि ऐसा नहीं हो सका और जस्टिस रमना की पीठ ने साफ कहा कि यह केस लिस्टिंग में नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने पूर्व वित्त मंत्री की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेरे क्लाइंट कहीं भाग नहीं रहे हैं। हालांकि, इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की याचिका दोषपूर्ण है और इसके त्रुटिरहित होने के बाद ही लिस्टिंग के लिए भेजा जा सकता है। आखिर कहां हैं चिदंबरम? पी. चिदंबरम मंगलवार को हाई कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने के बाद से ही लापता हैं। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होने की बात से स्पष्ट है कि उन पर अब भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। मंगलवार दोपहर को दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद से ही पी. चिदंबरम लापता चल रहे हैं। मंगलवार शाम को सीबीआई और ईडी की टीमें उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची थीं। इस दौरान पी. चिदंबरम घर पर नहीं पाए गए और जांच एजेंसियां उनके स्टाफ से ही पूछताछ कर लौट गईं। अब एजेंसियों को करीब 48 घंटे का समय मिलने पर उनके अरेस्ट होने की संभावना है। राहुल गांधी और प्रियंका ने किया बचाव इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने चिदंबरम का बचाव किया है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ईडी, सीबीआई और कुछ मीडिया समूहों के जरिए चिदंबरम का चरित्र हनन कर रही है। वहीं, प्रियंका ने कहा कि केंद्र की सच्चाई उजागर करने वाले चिदंबरम से सरकार असहज है। चिदंबरम बोले, मुझे मुख्य साजिशकर्ता कहना निराधार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पी. चिदंबरम के वकील ने उनका पक्ष रखते हुए कहा कि हाई कोर्ट का उन्हें 'मुख्य साजिशकर्ता' कहना निराधार है। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश की यह टिप्पणी कि याचिकाकर्ता (चिदंबरम) मामले में मुख्य साजिशकर्ता है, पूरी तरह निराधार है और इसके समर्थन में कोई सामग्री नहीं है।’
नई दिल्ली करप्शन के मामले में अग्रिम जमानत न मिल पाने के चलते लापता चल रहे पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को लेकर राजनीति भी तेज गई है। सीबीआई और ईडी के लुकआउट नोटिस को कांग्रेस ने राजनीतिक साजिश करार दिया है तो बीजेपी ने पूर्व वित्त मंत्री की तुलना विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़ों से की है। बीजेपी ने कहा कि आखिर पी. चिदंबरम केंद्रीय एजेंसियों को जांच में सहयोग देने की बजाय भगोड़े विजय माल्या और नीरव मोदी जैसी हरकत क्यों कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत पर तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद कांग्रेस पर हमला बोला। राव ने कहा, 'गांधी फैमिली ने पी. चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में आगे बढ़ने के लिए फ्री हैंड दिया है। चिदंबरम माल्या और नीरव मोदी जैसी हरकत कर रहे हैं। कोई भी नहीं बचेगा। बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यदि पी. चिदंबरम ने कुछ गलत किया है तो फिर उन्हें अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। जांच एजेंसियों सरकार के कहने से कुछ नहीं करतीं। उनके पास स्वतंत्र रूप से काम करने की ताकत है। बता दें कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने पी. चिदंबरम का बचाव किया है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने कहा कि उन्हें सरकार के खिलाफ बोलने की सजा दी जा रही है। प्रियंका गांधी ने कहा कि पार्टी सच के लिए लड़ती रहेगी। हमें अंजाम की कोई परवाह नहीं है। पी. चिदंबरम को सच बोलने के लिए परेशान किया जा रहा है। प्रियंका के इस ट्वीट पर बीजेपी लीडर अमित मालवीय ने तंज कसा है। मालवीय ने कहा, 'प्रियंका का चिदंबरम को सपॉर्ट करना समझ आता है। उनके पास रॉबर्ट वाड्रा के समर्थन में खड़े रहने का अनुभव भी है। जो खुद कई गंभीर आर्थिक मामलों का सामना कर रहे हैं।' सुप्रीम कोर्ट ने तय की 23 अगस्त को सुनवाई गौरतलब है कि पी. चिदंबरम के वकीलों की तमाम कोशिशों के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अग्रिम जमानत पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अब शीर्ष अदालत ने पूर्व वित्त मंत्री की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज किए जाने के बाद पूर्व वित्त मंत्री के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पूरे दिन SC में चिदंबरम के 11 दिग्गज वकीलों की टीम डटी रही पर फौरी राहत दिलाने में नाकाम रही।
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2019,जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने पाकिस्तान पर घाटी में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया. दिलबाग सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद बारामूला में मंगलवार को आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई. इसे देखते हुए घाटी में एंटी-टेरर ऑपरेशन को फिर से तेजी से चलाया जाएगा. पाकिस्तान घाटी में अस्थिर स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. उधर रविवार को बारामूला में हुए मुठभेड़ में एक आतंकवादी ढेर हो गया जबकि एक एसपीओ भी शहीद हो गया. मुठभेड़ में एक सब-इंस्पेक्टर भी जख्मी है जिसका इलाज चल रहा है. मुठभेड़ मंगलवार देर रात शुरू हुई और बुधवार को समाप्त हुई. सुरक्षा बलों और पुलिस को गेनी-हमाम इलाके में आतंकियों के छिपने की सूचना मिली थी. इसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई. सुरक्षा बल अभी तलाशी ले ही रहे थे कि एक आतंकी ने उनपर फायरिंग शुरू कर दी. सेना ने भी जवाब दिया जो आगे चलकर मुठभेड़ में तब्दील हो गई. आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में एक एसपीओ शहीद हो गया और एक एसआई घायल हो गया. शहीद एसपीओ का नाम बिलाल है जबकि जख्मी एसआई का नाम अमरदीप परिहार है. परिहार को आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है.
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2019,राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता, सियासत में समय का चक्र काफी तेजी से घूमता है. और जब घूमता है तो सबकुछ बदल जाता है. देश की सियासत में एक बार फिर इसी की बानगी देखने को मिल रही है. कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम इस वक्त गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. INX मीडिया मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया और वह सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं. दूसरी ओर ईडी और सीबीआई उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तैयार हैं. करीब 10 साल पहले कुछ ऐसा ही मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुआ था, जब एजेंसियां उनके पीछे पड़ी थीं. लेकिन अब समय बदल गया है और खेल भी बदल गया है. कांग्रेस पार्टी समेत अन्य विपक्ष सरकार पर एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है. अगर इस कहानी के फ्लैशबैक में जाएं और समय के चक्कर को घुमाएं तो कई साल पहले विपक्षी पार्टी के तौर पर बीजेपी भी यूपीए सरकार पर ऐसा ही आरोप लगाती थी और तब गृह मंत्री पी. चिदंबरम हुआ करते थे. यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जब पी. चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे, उस वक्त सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामला चरम पर था और इसी मामले में अमित शाह पर कार्रवाई की गई थी. 25 जुलाई 2010 को सीबीआई ने अमित शाह को गिरफ्तार भी किया था और जेल में डाल दिया था. चिदंबरम 29 नवंबर, 2008 से 31 जुलाई 2012 तक देश के गृह मंत्री रहे थे. अब समय का चक्कर घूमा है और अमित शाह देश के गृह मंत्री और सीबीआई-ईडी पी. चिदंबरम को जेल में डालने के लिए तैयार हैं. ...जब सीबीआई ने अमित शाह को किया था गिरफ्तार 25 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, वो तीन महीने तक सलाखों के पीछे रहे. इसके बाद उन्हें 2 साल तक गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया गया. इसके बाद 29 अक्टूबर, 2010 को गुजरात की हाईकोर्ट ने अमित शाह को बेल दी. अमित शाह की गिरफ्तारी के बाद भाजपा भड़की हुई थी और उन्होंने यूपीए सरकार पर बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था. 2012 तक अमित शाह गुजरात के बाहर ही रहे, 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें राहत मिली और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गुजरात जाने की इजाजत दे दी. हालांकि, सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को गुजरात से बाहर शिफ्ट कर दिया और मुंबई भेज दिया. बाद में इस मामले की सुनवाई मुंबई की अदालत में ही हुई. लंबी सुनवाई के बाद साल 2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया. आपको बता दें कि पी. चिदंबरम पर INX मीडिया मामले में रिश्वत लेने का आरोप है. दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटकी है. चिदंबरम अग्रिम जमानत लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं.
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2019,INX मीडिया केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई का सामना कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम अब सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं. दिल्ली हाईकोर्ट से तो उन्हें अंतरिम जमानत नहीं मिल सकी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी राह आसान नहीं दिख रही है. बुधवार को जब सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने पी. चिदंबरम के मामले को जस्टिस रमन्ना की बेंच के सामने आगे बढ़ाया तो उन्होंने कहा कि इस पर किसी तरह का फैसला नहीं ले सकते हैं. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम की तरफ से अंतरिम जमानत को लेकर याचिका दायर की गई थी, लेकिन उनकी याचिका में खामी निकली. और ये मामला लिस्टिंग के पेच में फंस गया, जस्टिस रमन्ना ने बताया कि लिस्टिंग पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ही अंतिम फैसला लेंगे. लेकिन चीफ जस्टिस गोगोई अभी रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें बीच में नहीं टोका जा सकता है. दोपहर को जब जस्टिस रमन्ना की बेंच के सामने ये मामला सुना गया तो सुप्रीम कोर्ट में पी. चिदंबरम की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी तक ये मामला लिस्ट नहीं हो पाया है. इस पर जस्टिस रमन्ना ने जवाब दिया कि अक्सर किसी भी मामले की फाइल को शाम के वक्त आगे बढ़ाया जाता है, लेकिन इस मामले की फाइल को हमने सुबह ही आगे बढ़ा दिया है. कपिल सिब्बल ने बताया कि हमने याचिका की कमियों को दूर कर दिया है, ऐसे में अब मामले को सुना जाए. कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि चिदंबरम के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, लेकिन वो कहीं भाग थोड़ी रहे हैं. इस पर जस्टिस रमन्ना की तरफ से जवाब दिया गया कि ये बेंच सिर्फ मामले की लिस्टिंग पर सुनवाई कर रही है, ऐसे में वो किसी भी तरह का फैसला नहीं देंगे. फैसला सिर्फ और सिर्फ चीफ जस्टिस ही देंगे. हालांकि, जस्टिस रमन्ना की तरफ से कहा गया कि अगर चीफ जस्टिस उन्हें आदेश देते हैं तो वह इस मामले को सुन सकते हैं लेकिन अभी वह अयोध्या मसले को सुन रहे हैं इसलिए वह कोई आदेश पारित नहीं कर सकते हैं. अब पी. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, विवेक तन्खा सभी अदालत में रुके हुए हैं और चीफ जस्टिस का इंतजार कर रहे हैं.
उत्तरकाशी उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य में लगा एक हेलिकॉप्टर बुधवार को क्रैश हो गया। हेलिकॉप्टर में तीन लोग सवार थे और तीनों (पायलट कैप्टन रजनीश लाल, को-पायलट शैलेष और स्थानीय नागरिक राजपाल) की मौत हो गई। राहत सामग्री बांटकर लौट रहा यह हेलिकॉप्टर बिजली के तारों को बचाने के चक्कर में पहाड़ी से जा टकराया और फिर क्रैश हो गया। सूचना पाकर मौके पर 10 सदस्यों की टीम पहुंची है और क्रैश की जांच में जुट गई है। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हेलिकॉप्टर क्रैश में मारे गए जवानों के परिजनों को पंद्रह लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। उत्तरकाशी इलाके के मोरी ब्लॉक में राहत कार्य के लिए तीन हेलिकॉप्टर लगाए गए थे। इन हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाने का काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि हेलिकॉप्टर से पीने का पानी और खाने के पैकेट्स बाढ़ प्रभावित इलकों में भेजे गए थे। मंगलवार को तीन हेलिकॉपटर्स को इस काम में लगाया गया था। बुधवार को भी तीनों हेलिकॉप्टरों से राहत कार्य जारी रखा गया। सुबह हेलिकॉप्टर राहत सामग्री बांटकर लौट रहा था। इलाके में एरिया पार करने के लिए बिजली के तार पड़े थे जो ट्रॉली के संचालन के लिए फैलाए गए थे। हेलिकॉप्टर इन तारों से बचने लिए किनारे हुआ और एक पहाड़ी से टकराकर क्रैश हो गया। बताया जा रहा है कि क्रैश हुआ हेलिकॉप्टर हैरिटेज ऐविएशन का था और उसमें तीन लोग सवार थे। इस हादसे में तीनों की मौत हो गई। आपको बता दें कि उत्तराखंड में बीते कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है। टेहरी और गढ़वाल जैसे इलाकों में टेहरी धान लेक का जल स्तर 813.65 मीटर पहुंच गया है।
नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट फैकल्टी के गेट पर बिना इजाजत वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगा दी। एबीवीपी के इस कदम की कांग्रेस से संबद्ध नैशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और वामदल समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आईसा) ने आलोचना की। इनका कहना है कि सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के साथ सावरकर को नहीं रखा जा सकता। एबीवीपी नेतृत्व वाले छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति मांगने के लिए संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सिंह ने कहा, 'प्रतिमा स्थापित करने की इजाजत के लिए हमने पिछले साल नवंबर में प्रशासन से संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैंने दोबारा 9 अगस्त को मंजूरी देने का अनुरोध किया लेकिन फिर कोई जवाब नहीं आया। उनकी चुप्पी की वजह से हम यह कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि अगर प्रशासन प्रतिमा हटाने की कोशिश करता है तो हम इसका विरोध करेंगे।' एनएसयूआई की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने एबीवीपी के कदम की आलोचना करते हुए कहा, 'आप सावरकर को भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं रख सकते। अगर प्रतिमाएं 24 घटें के भीतर नहीं हटाई गईं तो हम विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।' आईसा की दिल्ली इकाई की अध्यक्ष कवलप्रीत कौर ने भी लाकरा के बयान का समर्थन किया। कौर ने कहा, ' भगत सिंह और सुभाष चंद्र की आड़ में वो सावरकर के विचारों को वैधता देने का प्रयास कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। जिस स्थान पर उन्होंने मूर्तियां लगाई हैं वह निजी संपत्ति नहीं है बल्कि सार्वजनिक जमीन है।' जिस स्थान पर प्रतिमा लगाई गई है वह उत्तर दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पूरे मामले में फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव अगले महीने होने हैं, तारीखों का ऐलान भी हो गया है। 12 सितंबर को वोट डाले जाएंगे।
लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुआई वाली मंत्रिपरिषद का पहला विस्तार हुआ है। 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। दो साल के बाद हुए इस विस्तार में 18 नए चेहरों को सरकार में जगह मिली है। वहीं, स्वतंत्र प्रभार वाले चार मंत्रियों का कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोशन हुआ है। महेंद्र सिंह, सुरेश राणा, भूपेंद्र सिंह चौधरी और अनिल राजभर को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार से प्रमोट करते हुए कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं, नीलकंठ तिवारी का ओहदा राज्यमंत्री से बढ़ाकर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार किया गया है। एक नजर सीएम योगी की टीम में शामिल नए चेहरों पर: रामनरेश अग्निहोत्री (कैबिनेट मंत्री)-मैनपुरी की भोगांव सीट से विधायक, राजनाथ सिंह के करीबी, यादव परिवार के गढ़ में बीजेपी का खाता खोला। कमला रानी वरुण (कैबिनेट मंत्री)- दलित नेता, कानपुर की घाटमपुर (सुरक्षित) सीट से विधायक, 11वीं और 12वीं लोकसभा का जीता था चुनाव। कपिलदेव अग्रवाल (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)- मुजफ्फरनगर सीट से विधायक, केंद्रीय मंत्री और सांसद संजीव बाल्यान के करीबी माने जाते हैं। सतीश चंद्र द्विवेदी (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)- सिद्धार्थनगर की इटवा सीट से विधायक, चुनाव में पूर्व स्पीकर माता प्रसाद पांडे को दी थी शिकस्त। अशोक कटारिया (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)- बीजेपी प्रदेश महामंत्री और एमएलसी, आरएसएस और एबीवीपी की पृष्ठभूमि, बिजनौर से आने वाले गुर्जर नेता। श्रीराम चौहान(राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)- आरएसएस बैकग्राउंड से आने वाले दलित नेता, बस्ती से सांसद भी रह चुके हैं, धनघटा (सुरक्षित) सीट से विधायक। रविंद्र जायसवाल (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)- वाराणसी उत्तर सीट से लगातार दूसरी बार विधायक, राजनीति में आने से पहले वकालत करते थे। अनिल शर्मा (राज्यमंत्री)- बुलंदशहर जिले की शिकारपुर सीट से विधायक, दो बार खुर्जा से बीएसपी विधायक भी रहे, ग्राम प्रधान से शुरू की राजनीति। महेश चंद्र गुप्ता (राज्यमंत्री)- बदायूं सदर सीट से दूसरी बार विधायक, संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय, इस बार धर्मेंद्र यादव से बदायूं सीट छीनने में योगदान। आनंद स्वरूप शुक्ला (राज्यमंत्री)- बलिया नगर सीट से विधायक, ब्राह्मण समाज से आने वाले आनंद ने पहली बार जीता है चुनाव, बीजेपी सदस्यता अभियान में काफी सक्रिय। विजय कश्यप (राज्यमंत्री)- ओबीसी समुदाय से आने वाले नेता, 17वीं विधानसभा में सहारनपुर की चरथावल सीट से विधायक। डॉ. गिर्राज सिंह धर्मेश (राज्यमंत्री)- आगरा कैंट विधानसभा सीट से एमएलए, समाजसेवी की छवि, डॉक्टर होने के साथ-साथ पेट्रोल पंप के मालिक। लाखन सिंह राजपूत (राज्यमंत्री)- औरैया जिले की दिबियापुर सीट से विधायक, लोध समुदाय से आने वाले नेता, संगठन में सक्रिय। नीलिमा कटियार (राज्यमंत्री)- बीजेपी की प्रदेश महामंत्री, संघ से जुड़ाव, कानपुर की कल्याणपुर सीट से विधायक, मां प्रेमलता कटियार दिग्गज नेता। चौधरी उदयभान सिंह (राज्यमंत्री)- आगरा के फतेहपुर सीकरी से विधायक, जाट समाज से आते हैं, यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर भी रह चुके हैं। चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय (राज्यमंत्री)- बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट से विधायक, बीजेपी के जिलाध्यक्ष होने के अलावा आरएसएस की पृष्ठभूमि। रमाशंकर सिंह पटेल (राज्यमंत्री)- मिर्जापुर के मड़िहान से विधायक, पटेल (कुर्मी) समुदाय से आते हैं, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के करीबी। अजीत सिंह पाल (राज्यमंत्री)- कानपुर देहात की सिकंदरा सीट से पहली बार विधायक, पिता मथुरा पाल भी कई बार एमएलए रहे।
रहेगी नई दिल्ली INX मीडिया केस में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद गिरफ्तारी का सामना कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बचाव में कांग्रेस खुलकर खड़ी हो गई है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने चिदंबरम का समर्थन करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ईडी, सीबीआई और कुछ मीडिया समूहों के जरिए चिदंबरम का चरित्र हनन कर रही है। वहीं, प्रियंका ने कहा कि केंद्र की सच्चाई उजागर करने वाले चिदंबरम से सरकार असहज है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से भूमिगत हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें अभी तक अंतरिम राहत नहीं मिल पाई है। ईडी और सीबीआई के अधिकारी उन्हें लगातार तलाश रहे हैं। चिदंबरम को लेकर लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है, जिससे अब वह विदेश नहीं जा सकेंगे। यह सत्ता का दुरुपयोग हैः राहुल गांधी चिदंबरम पर सीबीआई और ईडी के इस ऐक्शन से खफा कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल ने ट्विटर पर मोदी सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणियां कीं। राहुल ने लिखा, 'मोदी सरकार ईडी, सीबीआई और मीडिया के एक समूह का इस्तेमाल चिदंबरम के चरित्र हनन के लिए कर रही है। मैं सत्ता के इस दुरुपयोग की निंदा करता हूं।' चिदंबरम से असहज हैं कायरः प्रियंका इससे पह प्रियंका ने कहा कि पार्टी चिदंबरम के साथ हर वक्त खड़ी है और नतीजों की परवाह किए वह बिना सचाई के साथ खड़ी रहेगी। प्रियंका ने लिखा, 'योग्य और सम्मानित राज्यसभा सदस्य पी. चिदंबरम ने दशकों तक देश की सेवा की है, जिसमें वित्त मंत्री और गृह मंत्री के रूप में की गई उनकी सेवा भी शामिल है। वह बेहिचक सत्ता की हकीकत बयां करते रहे हैं और इस सरकार की असफलताएं उजागर करते रहते हैं, लेकिन यह सच्चाई कायरों को असहज कर रही है। इसलिए शर्मनाक तरीके से उनका पीछा किया जा रहा है। हम उनके साथ खड़े हैं और सचाई के लिए लड़ते रहेंगे, चाहे नतीजे जो भी हों।' सिंघवी भी उतरे समर्थन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी चिदंबरम का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, 'इसकेस में सनसनी फैलाई जा रही है जिससे एक बड़े राजनीतिक व्यक्ति का चरित्र हनन हो सकता है। कोई ऐसा शख्स भगोड़ा कैसे हो सकता है जो कल शाम 6.30 बजे तक मेरे साथ कानूनी मुद्दों पर चर्चा कर रहा था?' बार-बार चिदंबरम को घर पर तलाशते रहे अधिकारी दिल्ली हाई कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में फंसे चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी थी। चिदंबरम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन उसने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद से केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशलय की टीमें चिदंबरम के जोर बाग स्थित आवास पर बार-बार चक्कर काट रही हैं। चिदंबरम के वकील ने कहा कि लुकआउट नोटिस राजनीतिक बदले के तहत जारी किया गया है क्योंकि पूर्व मंत्री के भागने का खतरा नहीं है। अब नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंदबरम की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर नहीं की तो उनकी गिरफ्तारी तय है।
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019, हिंदुस्तान में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के एजेंट के साथ चार आतंकी भारत में दाखिल हो गए हैं. इसको लेकर राजस्थान और गुजरात बॉर्डर समेत पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. राजस्थान के सिरोही के पुलिस अधीक्षक कल्याणमल मीणा ने बताया कि ये आतंकवादी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई एजेंट के साथ अफगानिस्तानी पासपोर्ट जरिए भारत में दाखिल हुए हैं. इसकी खुफिया रिपोर्ट सामने आने के बाद राजस्थान और गुजरात बॉर्डर समेत पूरे हिंदुस्तान में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. इसकी जानकारी सिरोही के सभी पुलिस थानों को भी दी गई है. इसके बाद से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट हो गई हैं. भीड़-भाड़ वाले इलाके, होटल, ढाबा, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों में सघन चेकिंग की जा रही है. इसके अलावा संदिग्ध वाहनों की आवाजाही नजर रखी जा रही है और उनकी जांच की जा रही है. साथ ही संदिग्ध लोगों पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है. सुरक्षा बलों को पूरी तरह से अलर्ट रहने और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ करने को कहा गया है. आपको बता दें कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वो सीमा पर लगातार गोलीबारी कर रहा है और आतंकियों की घुसपैठ कराने में जुटा हुआ है. पाकिस्तानी आतंकी भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. इससे पहले 9 अगस्त को इंटेलीजेंस ब्यूरो की खुफिया रिपोर्ट में आतंकी हमले को लेकर अलर्ट किया गया था. इसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की ओर से समर्थित जेहादी आतंकी गुट जम्मू कश्मीर और उसके बाहर बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं. इसके बाद गुजरात के डीजीपी शिवानंद झा ने सूबे से जुड़ती राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा को अलर्ट पर रखने का आदेश दिया था. साथ ही सभी सीमाओं पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रखने को कहा था. खुफिया जानकारी के मुताबिक जन्माष्टमी के अवसर पर आतंकवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. दरअसल, गुजरात में जन्माष्टमी पर बॉर्डर पर श्यामलाजी, द्वारिका और सौराष्ट्र में मेले लगते हैं, जिसमें हिस्सा लेने देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव मनाने पहुंचते हैं.
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019,दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में रातोंरात वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की मूर्तियां स्थापित की गईं. आर्ट्स फैकल्टी गेट पर डूसू अध्यक्ष शक्ति सिंह ने सोमवार देर रात इन तीनों मूर्तियों को लगाया. शक्ति सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर उपाध्यक्ष का चुनाव जीते थे लेकिन बाद में अंकित बसोया के इस्तीफे के बाद अध्यक्ष बने थे. वीर सावरकर, भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति लगने के बाद विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि डीयू प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. डूसू अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि मूर्ति लगाने के लिए डीयू प्रशासन से कई बार मांग की थी, लेकिन अनसुनी कर दी गई. इससे पहले डूसू नॉर्थ कैंपस का नाम वीर सावरकर के नाम पर रखे जाने की मांग हुई. डूसू पर एबीवीपी का कब्जा है. अभी हाल में शक्ति सिंह ने नॉर्थ कैंपस का नाम स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के नाम पर करने की मांग उठाई. इसके कुछ ही दिन बाद नॉर्थ कैंपस के गेट पर वीर सावरकर के साथ भगत सिंह और बोस की प्रतिमा लगाई गई है. प्रतिमा लगाने पर विवाद वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमाएं लगाने को लेकर विवाद हो गया है. प्रतिमाएं लगवाने के लिए डूसू अध्यक्ष ने प्रॉक्टर से इजाजत मांगी थी. इजाजत नहीं मिलने पर उन्होंने खुद प्रतिमाएं लगवा दी. दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी के बाहर ये प्रतिमाएं लगाई गई हैं. 2 घंटे के अंदर ही प्रतिमाएं लगवाई गई थीं.
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019, जम्मू-कश्मीर में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं. घाटी में स्कूल खुल रहे हैं, लैंडलाइन सर्विस भी चालू कर दी गई है. अब इस बीच श्रीनगर के मशहूर लाल चौक पर भी बीते 15 दिनों से लगे हुए बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं. सुरक्षा की दृष्टि से लाल चौक पर बैरिकेड्स लगाए गए थे और लोगों को वहां पर जाने से रोका जा रहा था. 6 अगस्त को अनुच्छेद 370 कमजोर होने के बाद से ही घाटी में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात थे. श्रीनगर का लाल चौक काफी मशहूर है और शहर की धड़कन माना जाता है. शहर के व्यापार के हिसाब से भी इस जगह के काफी मायने हैं, क्योंकि मुख्य बाजार यही हैं. अक्सर कई तरह की रैलियां, प्रदर्शन भी यहीं हुआ करते हैं. अब जब यहां से बैरिकेड्स हटाए गए हैं, तो ट्रैफिक में भी ढील दी जाएगी ताकि वाहनों के आने-जाने में किसी तरह की दिक्कत ना आए. बता दें कि सोमवार से ही कश्मीर घाटी में स्कूल खुलना शुरू हुए हैं, बच्चों का भी स्कूल जाना शुरू हो गया है. मंगलवार को ही श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में भीड़भाड़ बढ़ी और वाहनों की आवाजाही भी तेज हुई. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अब धीरे-धीरे लगी पाबंदियों पर छूट दी जा रही है. कश्मीर के कुछ हिस्सों में 2G सर्विस शुरू कर दी गई है, लैंडलाइन सर्विस भी शुरू हो गई है. इसके अलावा स्कूल-बाजार भी खुलने शुरू हो गए हैं. कश्मीर से पहले जम्मू में धारा 144 हटा दी गई थी, हालांकि घाटी में अभी भी धारा 144 लागू है. कश्मीर में स्कूल भले ही खुल गए हों लेकिन बच्चों का जाना अभी भी कम ही है. अभिभावकों को डर है कि बच्चे अगर स्कूल बस में जाएंगे तो रास्ते में पत्थरबाजी की घटना हो सकती है, यही कारण है कि बच्चों को नहीं भेज रही है. हालांकि, प्रशासन की तरफ से लगातार सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं.
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019,पाकिस्तान लगातार सीमा पार से गोलियां बरसा रहा है. अब एक बार फिर से उसकी ओर से फायरिंग की गई है, जिसका भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया है. जम्मू कश्मीर में कृष्णा घाटी, मेंढर सेक्टर में पाकिस्तान ने फायरिंग की. जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की कई चौंकियों को तबाह कर दिया. वहीं कई पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है. इससे पहले पाकिस्तान की गोलीबारी में नायक रवि रंजन कुमार सिंह शहीद हो गए. 36 साल के रवि रंजन कुमार सिंह बिहार के थे.वे गोप बीघा गांव के रहने वाले थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी रीता देवी के अलावा अन्य सदस्य हैं. बता दें कि कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वह सीमा पर लगातार नापाक हरकत कर रहा है. इससे पहले सोमवार को भी पाकिस्तान ने नौशेरा सेक्टर में मोर्टार दागे थे. भारतीय सेना दे रही मुंहतोड़ जवाब बॉर्डर पर पाकिस्तान की नापाक हरकत का भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया. वहीं भारतीय सेना करारा जवाब देते हुए राजौरी सेक्टर में पाक सेना की एक चौकी को उड़ा दिया. सेना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाक की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किए जाने के बाद भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई. इस दौरान भारतीय सेना ने राजौरी में पाक की एक चौकी उड़ा दी. हालांकि नौशेरा में पाक फायरिंग में एक भारतीय जवान शहीद हो गए. पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन बढ़ा दिया है. 15 अगस्त के दिन भी जम्मू-कश्मीर के पूंछ में केजी सेक्टर में पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया. इसके अलावा उरी और राजौरी में भी पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन किया गया, भारतीय सेना ने इसका करारा जवाब देते हुए पाकिस्तान के तीन जवानों को ढेर कर दिया.
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019, बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग कश्यप एक नए विवाद में फंसते नज़र आ रहे हैं. दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने उनकी हालिया सीरीज़ सेक्रेड गेम्स 2 के एक सीन को लेकर शिकायत दर्ज कराई है जिसमें एक सिख युवक का किरदार निभाने वाले सैफ अली खान अपने हाथ से कड़ा निकालकर समुद्र में फेंक देते हैं. बग्गा ने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि 'कड़ा सिख धर्म में एक पवित्र और अभिन्न चीज मानी गई है और इसे पूरे रिस्पेक्ट और विश्वास के साथ पहना जाता है.' बग्गा ने अपनी पुलिस शिकायत में कहा कि इस सीरीज में डायरेक्टर ने कड़े का अपमान किया है. इस शिकायत में ये भी कहा गया है कि आरोपी ने जानबूझकर इस वेबसीरीज़ में सिख समुदाय की भावना को भड़काने के लिए ये सीन डाला गया है ताकि समाज में धार्मिक ग्रुपों के बीच नफरत पैदा हो. बीजेपी लीडर ने अनुराग कश्यप के खिलाफ सेक्शन 295-A, 153, 153-A, 504, 505 के तहत मामला दर्ज कराया है. इससे पहले अकाली दल के एमपी मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी नेटफ्लिक्स को धमकी दी थी कि वे अपनी इस वेबसीरीज़ से इस सीन को हटा लें. गौरतलब है कि डायरेक्टर अनुराग कश्यप पिछले कुछ समय से कई विवादों में रहे है. उन्होंने 10 अगस्त को अपने ट्विटर हैंडल को भी डिलीट कर दिया था. कश्यप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आखिरी पोस्ट में लिखा था- जब तुम्हारे अभिभावकों को फोन पर धमकियां और बेटी को ऑनलाइन धमकियां मिलनी शुरू हो जाएं तो आप जानते हैं कि कोई बात नहीं करना चाहेगा. यहां कारण या तार्किकता के कोई मायने नहीं. ठग राज करेंगे और ठगी जीवन का नया रास्ता होगी. इस नए भारत पर सभी को बधाई. उम्मीद कि आप सब फले फूलेंगे. उनके इस फैसले पर कोलकाता के कुछ रसूखदार लोगों ने ओपन लेटर लिखा है और कहा है कि अनुराग जैसे लोगों की अभिव्यक्ति पर निशाना किसी लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है और लोगों को हेट कल्चर के खिलाफ बोलना चाहिए.
श्रीनगर, 20 अगस्त 2019, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से केंद्र सरकार घाटी में शांति स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने स्थिति को पूर्ण रूप से सामान्य करने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में जम्मू कश्मीर के IAS और कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (KAS) के अधिकारी अनुच्छेद 370 से होने वाले फायदे की जानकारी कम से कम 20- 20 परिवारों तक पहुंचाएंगे. साथ ही 370 के हटने से कैसे विकास होगा, उसका पूरा लेखा-जोखा हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए TV, रेडियो और दूसरे प्रचार माध्यमों का सहारा लिया जाएगा. > इसी क्रम में कश्मीर एडमिनिस्ट्रेशन और IAS अधिकारी हर एक जिलो में जाकर डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे ताकि उनको जल्द दे जल्द पूरा किया जा सके. > जम्मू कश्मीर सरकार और केंद्र के सहयोग से घाटी में इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए 12 से 14 अक्टूबर के बीच इन्वेस्टर समिट का आयोजन होगा. इसमें बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट को आमंत्रित किया गया है. > जम्मू-कश्मीर के गांवों को विकसित करने के लिए Rural Development Department (RDD) ने केन्द्र की कई योजनाओं के साथ विकास करने का प्लान तैयार किया है. > केन्द्र और राज्य के सहयोग से सेब के बागानों को आधुनिक बनाया जाएगा और ज्यादा पैदावार बढ़ाने के लिए हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट नए प्रयोगों के जरिए हर एक बागान मालिक को फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन तक पहुंचाएगा. > कश्मीर के युवाओं को अपना टैलेंट जाहिर करने का मौका मिले इसके लिए कश्मीर गॉट टैलेंट जैसे टीवी शो भी चलाए जा सकते हैं. > गांवों के विकास के लिए Bee keeping को बढ़ावा देने का प्लान है. सूत्रों के मुताबिक मदर डेरी और अमूल से बात करके वहां पर उसके प्लांट लगाने का प्लान है. अभी कश्मीर में दूध, पंजाब और हरियाणा से मंगाना पड़ता है. इसके लिए अब कश्मीर के गांवों में डेयरी और पशुपालन के लिए पैसा दिया जाएगा. > उज्ज्वला/प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन योजना के लिए अधिकारियों को कहा गया है, हर एक गांवों तक जाकर ये जानकारी हासिल करें कि किसके पास योजना पहुंची, किसके पास नहीं पहुंची. > जम्मू-कश्मीर में गांवों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 3700 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. > जम्मू-कश्मीर राज्य के 40 हजार सरपंच इस पैसे से सीधे गांवों का विकास करेंगे. प्लान ये है कि पंचायतों से अब लीडरशिप आगे आए जो राज्य का नेतृत्व कर सकें.
श्रीनगर , 20 अगस्त 2019, जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है. पुलिस के मुताबिक इलाके को घेर लिया गया है. कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद ये पहला एनकाउंटर है. यानी कि कश्मीर में 16 दिन बाद गोलियां चलीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एनकाउंटर की खबर कश्मीर के बारामूला से आई है. सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया लिया है और आतंकियों को जवाब दे रही है. 5 अगस्त को भारत सरकार ने जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया तो लगभग 16 दिनों तक घाटी में शांति रही. लंबे समय के बाद आतंकियों ने मंगलवार को अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है.
लखनऊ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाने को लेकर हो रहे विरोध के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर सफाई दी है। प्रदेश सरकार ने कहा है कि पिछले साल अक्टूबर में तेल पर वैट की दरों में ढाई रुपये की कटौती किए जाने से सरकार को अब तक 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, लिहाजा सरकार को पुरानी दरें लागू करनी पड़ी हैं। संयुक्त निदेशक (वाणिज्य कर) मनोज कुमार तिवारी ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश में 4 अक्टूबर 2018 को पेट्रोल की कीमत 83.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 75.64 रुपये प्रति लीटर हो जाने पर वैट में ढाई रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी। उसी दिन केन्द्र सरकार ने भी आबकारी कर में डेढ़ रुपये प्रति लीटर और तेल कम्पनियों ने एक रुपये प्रति लीटर की कमी की थी। इससे प्रदेश के उपभोक्ताओं को कुल पांच रुपये प्रति लीटर की राहत मिली थी। 'हर महीने हो रहा था 250 करोड़ का नुकसान' उन्होंने बताया कि वैट राशि कम करने से प्रदेश सरकार को प्रति माह औसतन 250 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। इस कमी से अब तक 3000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। लिहाजा, प्रदेश सरकार ने 20 अगस्त से पूर्ववर्ती कर की दरों को बहाल कर दिया है। तिवारी ने बताया कि इस वृद्धि के बावजूद वर्तमान में पेट्रोल के दाम चार अक्टूबर, 2018 के मूल्य के मुकाबले 9.71 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 10.38 प्रति लीटर कम हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने से पेट्रोल और डीजल के आधार मूल्य में भी कमी के कारण राजस्व वृद्धि के लिए केन्द्र सरकार ने बीती 6 जुलाई को पेट्रोल और डीजल पर दो-दो रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। जुलाई में ही कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा उत्तराखण्ड में भी वैट की दरों में पहले की दरों के हिसाब से बढ़ोतरी की गई है।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की फोन पर बातचीत के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच एक बार फिर बातचीत हुई है। इस बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्क एस्पर से बात की। टेलिफोन पर हुई इस बातचीत के दौरान एस्पर ने माना कि जम्मू-कश्मीर को लेकर किया गया फैसला भारत का आंतरिक मामला है। राजनाथ ने बातचीत में सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने में भारत की कोशिश में अमेरिकी सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने एस्पर से ऐसे समय में बात की है जब जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाए जाने के फैसले से पाक चिढ़ा हुआ है और नई दिल्ली व इस्लामाबाद के संबंध दशक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। राजनाथ ने कहा कि आर्टिकल 370 से जुड़ा फैसला भारत का आंतरिक मामला है और इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों का विकास, लोकतंत्र और समृद्धि लाना है। वहीं, मार्क एस्पर ने भारत के इस रुख की सराहना की और कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर मसले का समाधान द्विपक्षीय तरीके से सुलझा लेंगे। आपको बता दें कि इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को आधे घंटे तक बात हुई थी। इस दौरान पीएम मोदी ने पाक से संबंधों को लेकर बिना उसका नाम लिए ट्रंप से कहा कि कुछ नेताओं का भारत के खिलाफ हिंसा का रवैया शांति की प्रक्रिया में बाधक है। उनका इशारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तरफ था, जिन्होंने हाल में भारत विरोधी कई बयान दिए हैं। ट्रंप ने पीएम मोदी से बात करने के बाद इमरान खान से भी बात की थी और उन्हें कश्मीर के मुद्दे पर संयम बरतने की नसीहत दी। ट्रंप ने इमरान से तनाव बढ़ाने से रोकने और ऐसी स्थिति से बचने की सलाह दी।
नई दिल्ली वायुसेना के विंग कमांडर को हिरासत में लेने वाले पाकिस्तानी सेना के कमांडो को भारतीय सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की ओर से सीजफायर उल्लंघन का भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया था, जिसमें पाक कमांडो की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाक सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप में शामिल सूबेदार अहमद खान ने अभिनंदन को हिरासत में लेने के बाद उन्हें प्रताड़ित भी किया था। बता दें कि इसी साल फरवरी में पुलवामा में अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इसके बाद पाक के विमानों ने भारतीय सीमा में घुसने की हिमाकत थी, जिन्हें खदेड़ते हुए अभिनंदन अपने विमान से गिरकर पीओके में पहुंच गए थे। इसी दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। खबरों के मुताबिक सूबेदार अहमद खान की एलओसी के नकियाल सेक्टर में 17 अगस्त को फायरिंग में मौत हो गई। अहमद खान भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश में था, जिस दौरान भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। बता दें कि 27 फरवरी को जब अभिनंदन के पकड़े जाने की तस्वीरों को पाकिस्तान ने जारी किया था, उसमें दाढ़ीवाले सैनिक खान को भारतीय पायलट के पीछे खड़ा देखा जा सकता है। भारतीय वायुसेना ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट पर हवाई कार्रवाई की थी। अगले ही दिन पाकिस्तानी बलों ने अभिनंदन को उस वक्त पकड़ा था, जब उनका मिग 21 विमान पाकिस्तानी विमान का पीछा करते समय क्रैश हो गया था। ऐसी जानकारी है कि अहमद खान नौशेरा, सुंदरबनी और पल्लन वाला सेक्टरों में घुसपैठ करवाता था। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को भारतीय सीमा में प्रवेश करा कर खान और उसके साथी कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने का प्रयास करते थे।
पणजी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान के आरोपों के जवाब में गोवा कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि भारत की स्वतंत्रता में देरी की असली वजह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) है। शिवराज सिंह चौहान ने बयान दिया था कि पुर्तगाली शासन से गोवा की मुक्ति में देरी की वजह दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू रहे थे। गोवा राज्य कांग्रेस इकाई के प्रमुख गिरीश चोडनकर ने यहां कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत की आजादी के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होता तो हमें ब्रिटिश हुकुमत से जल्दी ही स्वतंत्रता मिल जाती। चोडनकर ने कहा कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान औपनिवेशिक अंग्रेजों के साथ गठबंधन किया था और उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। चोडनकर ने कहा,‘वह इतिहास को चुनौती देने की कोशिशें कर रहे हैं। अगर आरएसएस ने स्वतंत्रता के आंदोलन में साथ दिया होता है तो भारत बहुत पहले ही स्वतंत्र हो गया होता। लेकिन आरएसएस ब्रिटिश लोगों के साथ खड़ा रहा।’ 1961 में गोवा को भारतीय संघ में शामिल करने में देरी को उचित ठहराते हुए चोडनकर ने कहा, ‘अज्ञानी बीजेपी नेता बार-बार पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू पर निशाना साध रहे हैं और ऐसा करके वह उन्हें पुन: मारने की कोशिशे कर रहे हैं। नेहरू जी ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ सेना का इस्तेमाल उस वक्त किया, जब शांति के साथ वर्ता के सभी रास्ते बंद हो चुके थे।’ मध्य प्रदेश के 3 बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को रविवार के दिन संबोधित करते हुए कहा था कि नेहरु की गलत नीतियों के कारण गोवा के भारतीय संघ में शामिल होने में देरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देकर उन्होंने कश्मीर को समस्या का विषय बना दिया।
जम्मू कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद को मंगलवार को जम्मू एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। उन्हें ना तो उनके घर जाने दिया गया और ना ही जम्म प्रदेश कांग्रेस कमिटी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए जाने दिया गया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को वापस दिल्ली भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक, गुलाम नबी आजाद दिल्ली से फ्लाइट लेकर जम्मू पहुंचे थे। दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर वर्तमान प्रशासन के आदेश पर उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया। बता दें कि वह जम्मू में कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे थे। हालांकि, उन्हें एयरपोर्ट से निकलने नहीं दिया गया। आजाद बोले- लोकतंत्र के लिए सही नहीं है एयरपोर्ट पर रोके जाने पर गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'लोकतंत्र के लिए यह सही नहीं है। अगर मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां भी दौरा नहीं करेंगी तो कौन करेगा? जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व सीएम पहले से नजरबंद हैं और एक पूर्व सीएम को राज्य में घुसने नहीं दिया जा रहा है। यह असहिष्णुता का संकेत है।' आपको बता दें कि 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के कई उपबंधों को हटाने और जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद से कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी नजरबंद हैं। 5 अगस्त को गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में मौजूद थे और उन्होंने चर्चा में भी हिस्सा लिया। 8 अगस्त को जब वह श्रीनगर पहुंचे तो उन्हें वहीं से वापस दिल्ली भेज दिया गया था।
कुआलालंपुर मलयेशिया सरकार की सख्ती के आगे विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक की अकड़ ढीली हो गई है। हिंदुओं और चीनियों को लेकर दी गई भड़काऊ टिप्पणी पर उसने माफी मांग ली है। आपको बता दें कि मलयेशिया पुलिस ने उसकी हरकत को देखते हुए सार्वजनिक रूप से उसके उपदेश देने पर रोक लगा दी है। दरअसल, मलयेशिया में व्यापक स्तर पर मांग उठने लगी थी कि जाकिर को भारत भेज देना चाहिए, जहां से 2016 में भागकर उसने वहां स्थायी निवास का दर्जा ले रखा है। दरअसल, जाकिर नाइक भारत में कट्टरपंथ को भड़काने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वांछित है। भारत ने पिछले साल मलयेशिया से उसे प्रत्यर्पित करने के लिए कहा था लेकिन इस आग्रह को खारिज कर दिया गया था। वहीं, जाकिर अब खुद मलयेशिया के लिए सिरदर्द बन गया है। उसने एक प्रोग्राम में कहा कि मलयेशिया में हिंदुओं को भारत के अल्पसंख्यक मुस्लिमों की तुलना में 100 गुना ज्यादा अधिकार हासिल हैं। साथ ही उसने यह तक कह डाला कि उसे निष्कासित करने से पहले चीनी मूल के मलयेशियाई लोगों को निकाला जाना चाहिए, क्योंकि वे 'ओल्ड गेस्ट' हैं। उसकी इस टिप्पणी के बाद उसे मलयेशिया से निकाले जाने की मांग तेज हो गई। पुलिस ने सोमवार को उससे 10 घंटे तक पूछताछ की कि क्या वह जानबूझकर इस तरह की भड़काऊ बातें करता है ताकि शांति भंग की जा सके। नाइक ने मंगलवार को कहा कि उसके विरोधियों ने उसके बयान को संदर्भ से परे लिया है। उसने कहा, 'मेरा इरादा कभी किसी व्यक्ति या समुदाय को आहत करना नहीं था। यह इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इस गलतफहमी के लिए मैं दिल से माफी मांगता हूं।' आपको बता दें कि भारत में अपने विवादित उपदेशों के लिए भी वह इसी तरह की बातें कहता था। सरकारी समाचार एजेंसी बेरनामा ने खबर दी है कि प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि नाइक ने हदें लांघ दीं और कैबिनेट के कई मंत्रियों ने उसे निकाले जाने की अपील की। साथ ही पुलिस ने उसे मलयेशिया में कहीं भी सार्वजनिक भाषण देने से रोक दिया है। गौरतलब है कि मलयेशिया की तीन करोड़ 20 लाख की आबादी में करीब 60 फीसदी निवासी मुस्लिम हैं और यहां काफी संख्या में भारतीय और चीनी समुदाय के लोग भी रहते हैं।
है नई दिल्ली INX मीडिया घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को करारा झटका लगा है। पूर्व वित्त मंत्री की अग्रिम जमानत की अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस सुनील गौर ने चिदंबरम की याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने 25 जनवरी को इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। याचिका खारिज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी लीग टीम आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कपिल सिब्बल से चिदंबरम की याचिका को बुधवार को सीनियर जजों के सामले पेश करने को कहा है। इसके बाद जज तय करेंगे कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए या नहीं। आनन-फानन में चिदंबरम के वकील हाई कोर्ट के फैसले के बाद सीनियर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने वकीलों की एक टीम के साथ उन संभावनाओं पर चर्चा की, जिसके तहत हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल ने चिदंबरम के साथ भी चर्चा की। इसके बाद सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों से चिदंबरम की याचिका को रजिस्ट्रार के सामने पेश करने को कहा। इस बीच कांग्रेस के एक अन्य नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और चिदंबरम के वकीलों के साथ विचार-विमर्श में शामिल हुए। टीम में चर्चा करने वाले वकीलों में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट से बाहर आने के बाद सिब्बल ने कहा, 'हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद हमले जज से कहा कि हमें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का समय मिले, इसके लिए जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश नहीं होता तब तक इस फैसले पर रोक लगा दी जाए। लेकिन जज ने शाम 4 बजे फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अब हमने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से बात की है। सीजेआई ने कल (बुधवार) मामले को सीनियर जजों के सामने याचिका पेश करने को कहा है। इसके बाद सीनियर जज तय करेंगे कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए या नहीं।' सीबीआई और ईडी ने अग्रिम जमानत का किया था विरोध जिरह के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दोनों ने ही चिदंबरम की अर्जी का इस आधार पर विरोध किया था कि उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है क्योंकि वह सवालों से बच रहे हैं। दोनों जांच एजेंसियों ने दलील दी थी कि चिदंबरम के वित्त मंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान मीडिया समूह को 2007 में विदेश से 305 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी प्रदान की गई थी। ईडी ने रखी थी जोरदार दलील ईडी ने दलील दी कि जिन कंपनियों में राशि हस्तांतरित की गई वे सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम के पुत्र कार्ति द्वारा नियंत्रित हैं और उनके पास यह मानने का एक कारण है कि INX मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी उनके पुत्र के हस्तक्षेप पर प्रदान की गई। हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2018 को चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था जिसे समय समय पर बढ़ाया गया। क्या है मामला UPA-1 सरकार में वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान एफआईपीबी ने दो उपक्रमों को मंजूरी दी थी। INX मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुईं। इसके बाद ईडी ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
जाएगा नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम को ही इस मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी माना है। दिल्ली हाई कोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत को खारिज करते हुए कहा, 'तथ्य इस तरफ इशारा करते हैं कि इस मामले में चिदंबरम ही किंगपिन हैं।' इस फैसले के बाद चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। ईडी और सीबीआई ने चिदंबरम को अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध किया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद चिदंबरम के वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां सीजेआई ने बुधवार को सीनियर जजों के सामने याचिका पेश करने को कहा है। अब कल इस पर फैसला होगा कि चिदंबरम की याचिका पर जल्द सुनवाई होगी या नहीं। हिरासत में पूछताछ करना जरूरी' अपने फैसले में हाई कोर्ट ने साफ कहा कि पहली नजर में देखने से हाई कोर्ट को यह लगता है कि इस मामले में एक असरदार जांच के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है। हाई कोर्ट के इस फैसले को चिदंबरम के साथ पूरी कांग्रेस पार्टी के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। 'मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक उदाहरण' यही नहीं, हाई कोर्ट ने बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक उदाहरण है। ऐसे केस में यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो इससे समाज में बेहद खराब संदेश जाएगा। सीबीआई और ईडी ने किया विरोध जिरह के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दोनों ने ही चिदंबरम की अर्जी का इस आधार पर विरोध किया था कि उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है क्योंकि वह सवालों से बच रहे हैं। दोनों जांच एजेंसियों ने दलील दी थी कि चिदंबरम के वित्त मंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान मीडिया समूह को 2007 में विदेश से 305 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी प्रदान की गई थी। ईडी ने रखी थी जोरदार दलील ईडी ने दलील दी कि जिन कंपनियों में राशि हस्तांतरित की गई वे सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम के पुत्र कार्ति द्वारा नियंत्रित हैं और उनके पास यह मानने का एक कारण है कि INX मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी उनके पुत्र के हस्तक्षेप पर प्रदान की गई। हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2018 को चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया। फैसले पर रोक से इनकार हाई कोर्ट के फैसले के बाद चिदंबरम के वकीलों की टीम ने हाई कोर्ट से फैसले पर तब तक रोक लगाने की मांग की जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करने को लेकर कोई फैसला नहीं देता। हाई कोर्ट ने चिदंबरम की इस मांग को भी मानने से इनकार कर दिया। यह है मामला UPA-1 सरकार में वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान एफआईपीबी ने दो उपक्रमों को मंजूरी दी थी। INX मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुईं। इसके बाद ईडी ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2019, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अपने तीन अफसरों की भ्रष्टाचार मामले में जांच कर रही है. इन तीन अफसरों में एक सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) रैंक का अधिकारी भी शामिल है. आरोप है कि इन तीनों अफसरों ने दिल्ली के एक बिजनेसमैन का नाम टेरर फंडिंग मामले में नहीं लेने के एवज में 2 करोड़ रुपये मांगे. एनआईए ने इन तीनों अफसरों का तबादला कर दिया है. आरोपी एसपी समझौता और अजमेर शरीफ आतंकी मामले की जांच में भी शामिल रहा है. बाकी दो में एक एएसआई और एक फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट है. ये तीनों अफसर फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) की जांच कर रहे थे, जिसे मुंबई हमले का मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद चलाता है. बिजनेसमैन ने एक महीने पहले एनआईए से एसपी और दो जूनियर अफसरों की शिकायत की थी. इन आरोपों की जांच एनआईए ने डीआईजी रैंक के अधिकारी को सौंपी. इस बीच तीनों अफसरों का तबादला कर दिया गया, ताकि जांच पर कोई असर न पड़े. एक अधिकारी ने कहा कि एनआईए ने इन आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे रफा-दफा करने की कोशिश बिल्कुल नहीं की जाएगी. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और जैसे ही जांच खत्म होगी गृह मंत्रालय फैसला लेगा कि इन अफसरों पर क्या एक्शन लिया जाएगा.
ई दिल्ली, 20 अगस्त 2019,जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस नेता सलमान निजामी ने शेहला रशीद को जवाब दिया है. सलमान निजामी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'कुछ पत्थरबाजों और अलगाववादियों को गिरफ्तार किया गया है. कश्मीर में जब भी हिंसा होती है, तब यह आम बात होती है. सेना ने किसी को डराया या युवाओं पर अत्याचार नहीं किया है. मैंने इसकी स्थानीय लोगों और पत्रकारों से पुष्टि की है. राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी खबर न फैलाएं.' उधर सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सोमवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को एक पत्र लिख कर जेएनयू की पीएचडी छात्रा और जम्मू कश्मीर की राजनेता शेहला रशीद के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने को लेकर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने पत्र में लिखा कि शेहला हिंसा भड़काने और सेना की छवि खराब करने के इरादे से फेक न्यूज फैला रही हैं. वकील की ओर से शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए पुलिस ने कहा कि वह रशीद के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पहले मसले की तहकीकात कर रही है. शेहला 2015-16 के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रसंघ की उपाध्यक्ष रही हैं और वह जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नामक राजनीतिक दल से जुड़ी हैं. वकील ने अपने पत्र में शेहला के ट्विटर हैंडल पर रविवार को पोस्ट किए गए कुछ ट्वीट का जिक्र किया जिसमें उन्होंने लिखा, "सशस्त्र बलों के जवान रात में घर में घुस कर लड़कों को पकड़ रहे हैं, घरों में तोड़फोड़ मचा रहे हैं और जानबूझकर अनाज फर्श पर बिखेर रहे हैं और चावल में तेल मिला रहे हैं." शेहला ने यह भी दावा किया कि उसे यह जानकारी कश्मीर के लोगों से मिली.
गुवाहाटी असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) जारी किए जाने में केवल 11 दिन बचे हैं और हजारों लोगों का भविष्य इस बात को लेकर अनिश्चित है कि उनका नाम लिस्ट में शामिल होगा या नहीं। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों ने अंतिम लिस्ट प्रकाशित होने से पहले गुवाहाटी में मुहिम छेड़ दी है। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मांग की है कि अच्छी तरह जांचने-परखने और त्रुटिहीन होने के बाद ही नागरिकता रजिस्टर को प्रकाशित किया जाए। लिखें एबीवीपी-हिंदू जागरण मंच का प्रदर्शन सोमवार को एबीपीवी के कार्यकर्ताओं ने एनआरसी कोऑर्डिनेटर के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान मांग की कि अंतिम लिस्ट जारी किए जाने से पहले हर आवेदन को दोबारा वेरिफाइ (सत्यापित) किया जाए। उधर बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोगों का नाम भी एनआरसी में शामिल न किए जाने की आशंका के बाद हिंदू जागरण मंच ने दो दिन पहले असम के 30 में से 22 जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए थे। संगठन ने अंतिम एनआरसी को प्रकाशित करने पर रोक लगाने की मांग की है, जिससे कोई अवैध प्रवासी इसमें शामिल न हो सके। सोनोवाल सरकार भी प्रक्रिया के खिलाफ हिंदू जागरण मंच के अध्यक्ष मृणाल कुमार लस्कर ने कहा, 'जो एनआरसी हमें 31 अगस्त को मिलने वाला है, उसमें कई वास्तविक भारतीय नागरिकों को जगह नहीं मिलेगी। अगर यह अपने वर्तमान स्वरूप में प्रकाशित होता है तो हम इसके खिलाफ अभियान छेड़ेंगे। चूंकि डेटा के दुरुपयोग के मामले भी हैं लिहाजा दोबारा सत्यापन जरूरी है।' सर्बानंद सोनोवाल की अगुआई वाली बीजेपी सरकार भी एनआरसी को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया की आलोचना करती रही है। राज्य सरकार की दलील है कि नागरिकता के दावों को अच्छी तरह दोबारा सत्यापित किए बगैर फुलप्रूफ एनआरसी का प्रकाशन नहीं हो सकता। 'हम दूसरा जम्मू-कश्मीर नहीं चाहते' बीजेपी विधायक शिलादित्य देव का कहना है, 'बंटवारे के शिकार बहुत से हिंदू परिवार और उनके वंशज एनआरसी में जगह नहीं बना सके हैं। अगर फाइनल एनआरसी में उन्हें नहीं शामिल किया जाता है तो इससे असम की पहचान और संस्कृति पर गंभीर असर पड़ेगा। हम दूसरा जम्मू-कश्मीर नहीं चाहते, इसलिए हम दोबारा सत्यापन की मांग कर रहे हैं।' पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लिस्ट सार्वजनिक होने से पहले एनआरसी आवेदनों को दोबारा वेरिफाइ कराने की मांग वाली राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। 2010 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सर्वोच्च अदालत की निगरानी में एनआरसी को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। एनआरसी प्रकाशित करने के पक्ष में AASU ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (AASU) ने 70 के दशक में विदेशी नागरिकों के खिलाफ मुहिम की अगुआई की थी, जिसकी परिणति असम समझौते (असम अकॉर्ड) के रूप में हुई थी। हिंदूवादी संगठनों के उलट आसू तय समय पर ही अंतिम एनआरसी प्रकाशित किए जाने के पक्ष में है। आसू के महासचिव लुरिन्ज्योति गोगोई का कहना है, 'सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दोबारा सत्यापन की मांग खारिज कर दी है। जो लोग एनआरसी की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने देना चाहते हैं, उनकी इसके पीछे राजनीतिक मंशा है। वर्तमान विरोध प्रदर्शन एनआरसी को अपडेट करने से रोकने की कोशिश है। अगर एनआरसी में विदेशी शामिल होते हैं तो सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि इस प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी उसी से संबंधित हैं।'
नई दिल्ली सीआरपीएफ की ओर से कश्मीर में आम जनता की सहायता के लिए मददगार हेल्पलाइन लॉन्च की गई। यह हेल्पलाइन भी पाकिस्तान के लिए भड़ास निकालने की जगह बन गई है। हेल्पलाइन पर 7,071 कॉल्स 11 अगस्त से 16 अगस्त के बीच आईं और उनमें से 171 भारत के बाहर से थीं। लोग हेल्पलाइन पर फोन कर अपने परिवार और रिश्तेदारों की खैरियत मालूम कर रहे थे। पाकिस्तान से फोन कर कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों को ही जमकर अपशब्द कहे और भड़ास निकाली। मददगार हेल्पलाइन पर 2,700 फोन कॉल्स सुरक्षा बलों के परिवार की ओर से, 2448 कॉल्स कश्मीर से बाहर रह रहे लोगों ने अपने परिवार के लिए फोन किया। 1752 कॉल्स गैर-कश्मीरी लोगों ने कश्मीर के लोगों का हाल जानने के लिए फोन किया। प्रदेश से बाहर रहनेवाले लोगों ने हेल्पलाइन के जरिए अपने परिवार की खैरियत मालूम की। विदेशों से भी काफी फोन कॉल्स आए टोल फ्री नंबर 14411 पर सऊदी अरब से 45 कॉल आए। कुल 22 देशों से कश्मीर में अपनों का हाल जानने के लिए फोन आए। इनमें से 39 यूएई से, 12 कुवैत से, आठ, इउजरायल, मलयेशिया से और 7 यूके, सिंगापुर और बांग्लादेश से फोन कॉल्स आए। 3 फोन कॉल्स कनाडा, बहरीन, जर्मनी, फिलीपींस और थाइलैंड से फोन कॉल्स आए और 2 ओमान, फ्रांस और बेल्जियम से। एक फोन कॉल चीन से और एक कतर से आया। पाकिस्तान से भी आ रहे फोन कॉल्स जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पाकिस्तानी नंबर से उनके पास भी कुछ फोन कॉल्स आए हैं। उन्होंने कहा कि उनमें से कुछ वाकई रिश्तेदारों की खैरियत मालूम करने के लिए फोन कॉल थे, लेकिन कुछ ऐसे भी पाकिस्तानी हैं जो दूसरी तरफ से सिर्फ अपना गुस्सा जाहिर करने और अपशब्द कहने के लिए फोन करते हैं। सुरक्षा बलों के परिवारों के लिए भी मददगार बना हेल्पलाइन प्रदेश में तैनात सुरक्षा बलों के परिवारों के लिए भी मददगार हेल्पलाइन खैरियत जानने का साधन बन गया। 1,882 कॉल्स सीआरपीएफ के जवानों के लिए, जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए 174, 215 सेना के जवानों के लिए, 112 आईटीबीपी, 99 सीमा सुरक्षा बल, 32 सीआईएसएफ, 20 आरपीएफ और 8 एयरफोर्स के जवानों के लिए मददगार हेल्पलाइन पर कॉल्स आए। जब भी किसी स्थानीय परिवार के लिए फोन आता है तो सीआरपीएफ के जवान उनके घर जाकर परिवार की खैरियत मालूम कर फोन करनेवाले को जानकारी देते हैं।
मुंबई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की योजना अगर सफल होती है तो जल्द ही हर जगह दिखने वाले प्लास्टिक डेबिट कार्ड अतीत की बात होंगे। देश का सबसे बड़ा बैंक इसकी जगह पर अधिक डिजिटल भुगतान प्रणाली लाने की दिशा में काम कर रहा है। स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, '..हमारी योजना डेबिट कार्ड को प्रचलन से बाहर करने की है। हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हमें उन्हें समाप्त कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि देश में 90 करोड़ डेबिट कार्ड और तीन करोड़ क्रेडिट कार्ड हैं। कुमार ने कहा कि डिजिटल समाधान पेश करने वाले उसके 'योनो' प्लैटफॉर्म की डेबिट कार्ड मुक्त देश बनाने में अहम भूमिका होगी। कुमार ने कहा कि योनो के जरिए एटीएम मशीनों से नकदी की निकासी या दुकानों से सामान की खरीदी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बैंक पहले ही 68,000 'योनो कैशपॉइंट' की स्थापना कर चुका है और अगले 18 माह में इसे 10 लाख करने की योजना है। गौरतलब है कि स्टेट बैंक ने इसी साल मार्च में 'योनो कैश' सेवा शुरू की है, जो ग्राहकों को बिना डेबिट कार्ड पैसे निकालने की सुविधा देता है। यह बेहद आसान होने के साथ ही सुरक्षित भी है। शुरुआत में यह सुविधा 16,500 एटीएम में उपलब्ध थी, बैंक अपने सभी एटीएम को इस सुविधा के लिए अपग्रेड कर रहा है।
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के कई प्रावधानों को हटाया गया, जिससे पहले सेना ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए चप्पे-चप्पे पर मोर्चा संभाल लिया। दिन बीतने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने लगे हैं। जेएनयू छात्रा और पूर्व छात्र संघ लीडर शहला राशिद की ओर से रविवार को दावा किया गया कि कश्मीर के हालात बहुत चिंताजनक हैं। इस पर सेना के बाद अब जम्मू-कश्मीर की इन्फर्मेशन ऐंड पब्लिक रिलेशंस की डायरेक्टर सईद सेहरिश असगर का भी बयान आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घाटी में कानून व्यवस्था से संबंधित कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। जम्मू-कश्मीर में इन्फर्मेशन ऐंड पब्लिक रिलेशंस की डायरेक्टर सईद सेहरिश असगर ने बताया, 'घाटी में कानून व्यवस्था को लेकर कोई बड़ी घटना नहीं घटित हुई है। जीवन सामान्य हो रहा है। जनता काफी सहयोग कर रही है।' उन्होंने कहा, 'कुछ तत्वों की ओर से कल (रविवार) अफवाह फैलाई गई, जिसके बाद सरकार ने लोगों से अनुरोध किया कि वे इस तरह की किसी भी तरह की अफवाह पर यकीन न करें।' सईद सेहरिश असगर ने कहा, 'जम्मू में भी कानून व्यवस्था से जुड़ी किसी तरह की घटना नहीं हुई।' 'कुछ हिस्सों में छिटपुट पत्थरबाजी' मध्य कश्मीर के डीआईजी वीके बिरडी ने कहा, 'उन सभी क्षेत्रों में जहां पर ढिलाई की अवधि बढ़ाई गई थी, वहां पर भी शांतिपूर्ण माहौल है। कुछ हिस्सों में पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाएं हुईं लेकिन कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की गई और उपद्रवियों को मौके से खदेड़ दिया गया।' शहला ने लगाया था गंभीर आरोप शहला राशिद खुद भी कश्मीरी हैं और मूल रूप से श्रीनगर की रहनेवाली हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही वह ट्विटर पर सरकार के खिलाफ लगातार सक्रिय हैं। रविवार को शहला ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर फर्जी दावा किया कि कश्मीर में हालात चिंताजनक है। सेना और पुलिस के लोग आम नागरिकों के घर घुस रहे हैं और उन्हें सताया जा रहा है। उन्होंने शोपियां में सुरक्षाबलों द्वारा कुछ लोगों को जबरन हिरासत में लेने और उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। जेएनयू छात्रा के नाम पर शिकायत दर्ज उधर, शहला राशिद के ट्वीट्स को सेना ने भी निराधार बताया है। यही नहीं, शहला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट को दी गई गई अपनी शिकायत में झूठ फैलाने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए शहला की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। शहला ने कश्मीर में हालात बेहद खराब होने का दावा करते हुए रविवार को कई ट्वीट किए थे।
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होने की सरकार की बात पर सीनियर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि यदि सब सामान्य है तो फिर इतनी पाबंदिया क्यों हैं? चिदंबरम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जो माहौल चल रहा है, अब वही सामान्य हो गया लगता है। पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात अब वहां सामान्य बात हो गई है। उन्होंने तंज करते हुए ट्वीट किया, ‘जम्मू-कश्मीर में सब कुछ सामान्य है। स्कूल खुले हुए हैं, लेकिन छात्र नहीं है। राज्य में सब कुछ सामान्य है। इंटरनेट फिर से बंद है। महबूबा मुफ्ती की बेटी नजरबंद है। वह पूछती है क्यों? कोई जवाब नहीं है।’ चिदंबरम ने कहा, ‘अगर आपको हैरानी हो रही है कि यह सब क्या चल रहा है तो कृपया समझ लीजिए कि यह अब सामान्य बात हो गई है।’ हाल ही में सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का कदम उठाया था। इसके बाद से ही राज्य के कई इलाकों में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सूबे की राजनीति के अहम चेहरे रहे उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद रखा गया है। इसके अलावा अन्य तमाम अलगाववादी नेता भी निगरानी में हैं। सरकार का कहना है कि धीरे-धीरे ढील दी जाएगी।
नई दिल्ली, 19 अगस्त 2019, जम्मू-कश्मीर में धारा 144 लगाने और इंटरनेट बैन करने के बावजूद अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के ट्वीट करने के मामले में दो बीएसएनएल अधिकारियों पर एक्शन लिया गया है. गिलानी को संचार सेवा पर रोक के बावजूद इंटरनेट एक्सेस देने के मामले में दो बीएसएनएल अधिकारी घेरे में आए हैं. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मद्देनजर सरकार ने एहतियात के तौर पर घाटी में इंटरनेट और फोन सेवा बंद पर पाबंदी लगा दी थी. इस सुविधा पर 4 अगस्त से रोक लगाई गई थी. लेकिन अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पास 8 दिनों तक लैंडलाइन और इंटरनेट सेवा चालू थी. सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को यह भी पता नहीं चल सका कि गिलानी कश्मीर में इंटरनेट एक्सेस कर रहे हैं या नहीं, उन्होंने अपने अकाउंट से ट्वीट किया था. इस बाबत जांच शुरू की गई थी कि गिलानी कैसे इंटरनेट और लैंडलाइन सुविधा पाने में सक्षम थे. बीएसएनएल ने इस संबंध में दो अधिकारियों पर एक्शन लिया है. अधिकारियों के लूप होल्स के बारे में पता चलने के बाद से गिलानी की सर्विस बंद कर दी गई थी. गौरतलब है कि गिलानी अपने अकाउंट से लगातार भारत विरोधी पोस्ट करते रहे हैं. कई यूजर्स तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से गिलानी को पाकिस्तान भेजने तक की मांग कर चुके हैं. पिछले महीने (जुलाई में) उनके प्रवक्ता गुलजार अहमद गुलजार को भी जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल घाटी में फोन सेवाएं धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं. यहां पर स्कूलों को खोला गया है और धारा 144 में ढील दी गई है. श्रीनगर में आज से स्कूल, लैंडलाइन खुलेंगे. करीब 14 दिन बाद घाटी में स्कूल-कॉलेज खुलने जा रहे हैं, ऐसे में एक बार फिर सुरक्षाबलों के लिए शांत माहौल बनाने की चुनौती है. अनुच्छेद 370 कमजोर होने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही कश्मीर में धारा 144 लागू थी. वहीं, जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग की तरफ से सोमवार सुबह एक बयान जारी किया गया है. पुलिस द्वारा बताया गया कि एक अफवाह फैलाई जा रही है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के हथियार जब्त किए जा रहे हैं, लेकिन ये अफवाह गलत हैं. गृह विभाग की तरफ से अपील की गई है कि इस तरह की किसी खबर पर विश्वास ना करें.
कोलकाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई के पुराने होम लोन ग्राहकों की ईएमआई जल्द कम हो सकती है। बैंक अपने मौजूदा होम लोन ग्राहकों को भी आरबीआई द्वारा रीपो रेट में की गई कटौती का फायदा पहुंचाने पर विचार कर रहा है। वह पुराने ग्राहकों को भी रीपो लिंक्ड लेंडिंग रेट पर कर्ज दे सकता है। बैंक को उम्मीद है कि सरकार अगर सुस्त इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए राहत का इंतजाम करती है तो दूसरी तिमाही में कन्ज्यूमर डिमांड बढ़ेगी। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने जुलाई में होम लोन के लिए रीपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट की शुरुआत की थी, जिसका फायदा सिर्फ नए ग्राहकों को दिया जाना था। ऐसे में सिर्फ बैंक के नए ग्राहकों को नीतिगत दरों में कटौती का फायदा मिल रहा था। बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'मौजूदा ग्राहकों को नीतिगत दरों में कटौती का फायदा पहुंचाने की संभावना पर हम विचार कर रहे हैं।' 2014 में जब बैंकों ने जब एमसीएलआर(मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट) की शुरुआत की थी तब ग्राहकों को बेस रेट आधारित और मार्जिनल कॉस्ट आधारित रेट के बीच स्विच करने का विकल्प भी दिया था। एसबीआई का रीपो लिंक्ड लेंडिंग रेट(RLLR) रीपो रेट से 2.25% ऊपर है, यानी 7.65% है। फिलहाल रीपो रेट 5.40% है। SBI के RLLR के ऊपर 40 बेसिस पॉइंट्स और 55 बीपीएस का स्प्रेड लगता है। ऐसे में नए लोनधारकों को 8.05% से 8.20% की दर पर होम लोन ले सकते हैं। (1bps 1 पर्सेंट का सौवां हिस्सा होता है।) फिलहाल बैंक 75 लाख रुपये तक का र MCLR लिंक्ड होम लोन 8.35% से 8.90% की ब्याज दर मुहैया करता है। फरवरी से अबतक बैंक MCLR को 30 बीपीएस से घटा चुका है, जबकि RBI रीपो रेट में 110 बीपीएस की कटौती कर चुका है। रजनीश कुमार ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक कर्ज की मांग काफी कम रही लेकिन अच्छे मॉनसून के असर से दूसरी तिमाही में मांग बढ़ने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति के लिहाज से कोई बाधा नहीं है, बैंकों के पास काफी पूंजी है और ब्याज दरें भी नियंत्रित हैं। उन्होंने कहा कि इकॉनमी को स्टिमुलस पैकेज की जरूरत है और उसपर विचार जारी है। बैंक को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में वह 12 फीसदी की लोन ग्रोथ दर्ज करेगा।
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के करीब 14 दिन बाद स्कूल दोबारा खोल दिए गए हैं। श्रीनगर के 190 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल खुल गए हैं। इन स्कूलों में खासी चहल-पहल देखने को मिली। हालांकि, पहले दिन उम्मीद से थोड़ी कम संख्या में ही बच्चे स्कूल पहुंचे। बच्चों को उनके पैरंट्स स्कूल तक छोड़ने आए। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति में सुधार होगा और स्कूलों में बच्चों की संख्या भी बढ़ेगी। प्राइमरी के बाद सेकेंडरी स्कूल भी खोले जाएंगे। कश्मीर में सोमवार को प्रतिबंधों में और ढील दिए जाने पर कई स्कूलों में शिक्षक तो पढ़ाने पहुंचे लेकिन वहां ज्यादा छात्र नहीं दिखे। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने श्रीनगर में 190 प्राथमिक स्कूलों को खोलने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए हैं, जबकि घाटी के अधिकतर हिस्सों में सुरक्षा बल अब भी तैनात हैं। सभी निजी स्कूल सोमवार को लगातार 15वें दिन भी बंद रहे, क्योंकि पिछले दो दिन से यहां हुए हिंसक प्रदर्शनों के मद्देनजर अभिभावक सुरक्षा स्थिति को लेकर आशंकित हैं। अभिभावकों के मन में सवाल केवल बेमिना स्थित पुलिस पब्लिक स्कूल और कुछेक केन्द्रीय विद्यालयों में ही थोड़े बहुत छात्र पहुंचे। एक अभिभावक फारूक अहमद डार ने कहा, ‘स्थिति इतनी ज्यादा अनिश्चित है कि अभी बच्चों को स्कूल भेजने का सवाल ही नहीं उठता।’ बारामुला जिले के अधिकारियों ने बताया कि पांच शहरों में स्कूल बंद रहे। बाकी जिले में स्कूल खुले हैं। सिविल लाइंस इलाकों में स्कूल बंद रहे अधिकारी ने कहा, ‘पट्टन, पल्हालन, सिंहपूरा, बारामुला और सोपोर में प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई है। जिले में बाकी जगह प्राथमिक स्कूल खुले थे। कितने छात्र स्कूल पहुंचे इस संबंध में हम जानकारी हासिल कर रहे हैं।’श्रीनगर जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उपनगर में कुछ स्कूल खुले रहे लेकिन पिछले दो दिन में हुई हिंसा के कारण पुराने शहर और सिविल लाइन्स इलाकों में स्कूल बंद रहे। निजी वाहनों की आवाजाही बढ़ी अधिकारियों ने सोमवार से प्राथमिक स्तर तक के स्कूल खोलने और सभी सरकारी कार्यालयों में काम शुरू करने की योजना बनाई थी। केन्द्र सरकार के पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के बाद से श्रीनगर के जिन इलाकों में शांति कायम रही वहां से पुलिस ने अवरोधक हटा दिए हैं। घाटी में बाजार बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन भी सड़कों से गायब रहे। प्रतिबंधों में ढील के बाद से शहर में निजी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। जिन क्षेत्रों में विद्यालय खोले गए उनमें लासजान, सांगरी, पंथचौक, नौगाम, राजबाग, जवाहर नगर, गगरीबाल, धारा, थीड, बाटमालू और शाल्टेंग शामिल हैं। स्थिति सामान्‍य होते ही धीरे-धीरे अन्‍य क्षेत्रों के स्‍कूलों में भी पढ़ाई शुरू हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, हाई स्कूल, हाइयर सेकेंडरी स्कूल और डिग्री कॉलेज पर फैसला अगले 2 से 3 दिन में लिया जाएगा। कश्मीर में लैंडलाइन के बाद मोबाइल सेवा को बहाल करने का फैसला इस हफ्ते के आखिर में होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, घाटी के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लैंडलाइन टेलिफोन एक्सचेंज के प्रभाव का आंकलन करने के बाद ही कश्मीर में मोबाइल सर्विस को बहाल करने का फैसला लिया जाएगा। सिर्फ इनकमिंग कॉल की मिलेगी सुविधा सूत्रों ने कहा कि शुरुआत में केवल इनकमिंग कॉल की सुविधा दी जाएगी। इससे यहां के स्थानीय लोग जम्मू-कश्मीर से बाहर अन्य राज्यों से कॉल अटेंड कर सकेंगे और आईएसडी कॉल की सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगे। जबकि मोबाइल इंटरनेट अभी कुछ समय तक बंद ही रहेगा। उधर अफवाहों को रोकने के लिए जम्मू क्षेत्र के सभी जिलों में 2जी इंटरनेट सेवाएं एक बार फिर बंद कर दी गई हैं। केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह ने बताया कि आर्टिकल 370 और 35ए को हटाए जाने के बाद से वॉट्सऐप के जरिए फैलाई जा रही अफवाहों को रोकना वर्तमान चुनौती है। वॉट्सऐप के जरिए अफवाह फैलाई जा रही है कि अब कश्मीर में बाहरी लोग आकर यहां की जमीन और नौकरियों पर कब्जा कर लेंगे। 10 और टेलिफोन एक्सचेंजों ने काम करना शुरू किया जीतेंद्र सिंह ने कहा, 'जबकि सच्चाई यह है कि जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित राज्य बनने के बाद लाखों सरकारी कर्मचारियों को योजनाओं के लाभ मिल सकेंगे। रही बात भूमि अधिकार की तो क्या हिमाचल पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है क्या? नहीं न, जम्मू-कश्मीर के युवा अब दूसरे राज्यों में भी नौकरी के लिए आजाद हैं।' डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि श्रीनगर में पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर रविवार को घाटी में स्थिति शांतिपूर्ण रही। इससे पहले घाटी में रविवार को 10 और टेलिफोन एक्सचेंजों ने काम करना फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, पहले बहाल 17 एक्सचेंज में से एक पर सेवाएं रोक दी गई है।अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन को लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियान में करने की जानकारी मिलने के बाद एक एक्सचेंज पर सेवाएं फिर से रोकी गई हैं। घाटी में मौजूद 50,000 टेलिफोन फिक्स्ड लाइन में 28,000 को चालू कर दिया गया है। श्रीनगर के डेप्युटी कमिश्नर शाहिद इकबाल चौधरी ने शनिवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विद्यालयों के प्रमुखों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में जिले में विद्यालयों को खोलने को लेकर गहन चर्चा हुई। विद्यार्थियों की सुरक्षा जिला प्रशासन की मुख्य चिंता है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
लखनऊ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा उठाया है। भागवत ने रविवार को कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं उन लोगों के बीच इस पर सद्भावपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए। उधर, इस बयान को लेकर विपक्ष ने आरएसएस के साथ बीजेपी पर भी तीखा हमला बोला है। एक तरफ जहां कांग्रेस ने इसे दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म करने का अजेंडा बताया, वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि आरक्षण मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ अनुचित और अन्याय है। मायावती ने दो टूक कहा कि आरएसएस को अपनी आरक्षण विरोधी मानसिकता त्याग देनी चाहिए। दरअसल, भागवत ने एक कार्यक्रम में आरक्षण के इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस पर बात की थी लेकिन इससे काफी हंगामा मचा और पूरी चर्चा वास्तविक मुद्दे से भटक गई। उन्होंने कहा, 'आरक्षण का पक्ष लेने वालों को उन लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए जो इसके खिलाफ हैं। इसी तरह से इसका विरोध करने वालों को इसका समर्थन करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए।' भागवत बोले- हर बार चर्चा तीखी हो जाती है उन्होंने कहा कि आरक्षण पर चर्चा हर बार तीखी हो जाती है जबकि इस दृष्टिकोण पर समाज के विभिन्न वर्गों में सामंजस्य जरूरी है। इससे पहले, आरएसएस प्रमुख ने आरक्षण नीति की समीक्षा करने की वकालत की थी, जिस पर कई दलों और जाति समूहों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी। अब एक बार फिर इस बयान को लेकर आरएसएस को विपक्ष ने निशाने पर लिया है। मायावती ने कहा, मानसिकता बदलें आरएसएस पर निशाना साधते हुए मायावती ने ट्वीट में लिखा, 'आरएसएस का एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण के सम्बंध में यह कहना कि इसपर खुले दिल से बहस होनी चाहिए, संदेह की घातक स्थिति पैदा करता है, जिसकी कोई जरूरत नहीं है। आरक्षण मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ अनुचित व अन्याय है। संघ अपनी आरक्षण-विरोधी मानसिकता त्याग दे तो बेहतर है।' कांग्रेस ने भी बोला हमला उधर, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'गरीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार को ले लेना, यही बीजेपी का अजेंडा है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस बयान से आरएसएस और बीजेपी का दलित-पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हुआ है। सुरजेवाला ने कहा कि इससे गरीबों के आरक्षण को ख़त्म करने का षड्यंत्र और संविधान बदलने की उनकी अगली नीति बेनकाब हुई है।
नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (66) की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। पिछले कई दिनों से पूर्व केंद्रीय मंत्री का हाल जानने के लिए केंद्रीय मंत्री और नेता एम्स पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आज बीजेपी के वयोवृद्ध नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत भी जेटली का हाल जानने एम्स पहुंचे। जेटली को सांस लेने में परेशानी होने और बेचैनी महसूस होने के बाद उन्हें 9 अगस्त को अस्पताल में भर्ती किया गया था। बताया जा रहा है कि जेटली की हालत बेहद नाजुक है और AIIMS के सूत्रों के मुताबिक, वह कार्डियो-न्यूरो सेंटर में एक्सट्रॉकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) सपॉर्ट पर हैं। बता दें कि ECMO पर मरीज को तब रखा जाता है जब दिल, फेफड़े ठीक से काम नहीं करते हैं और वेंटिलेटर का भी फायदा नहीं होता है। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है। राष्ट्रपति, पीएम भी पहुंचे थे एम्स राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, हेल्थ मिनिस्टर हर्षवर्धन, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी समेत कई नेताओं ने एम्स में जेटली का हाल जाना है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने भी जेटली का हाल जाना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जेटली के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए शुक्रवार को एम्स पहुंचे थे। नहीं लड़ा था 2019 का चुनाव पेशे से वकील जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उनकी कैबिनेट का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। उनके पास वित्त और रक्षा मंत्रालय का प्रभार था और सरकार के लिए वह संकटमोचक की भूमिका में रहे। खराब स्वास्थ्य के कारण जेटली ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। पिछले साल 14 मई को एम्स में उनके गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ था। उस समय रेल मंत्री पीयूष गोयल को उनके वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। पिछले साल अप्रैल की शुरुआत से ही वह कार्यालय नहीं आ रहे थे और वापस 23 अगस्त 2018 को वित्त मंत्रालय आए। लंबे समय तक मधुमेह रहने से वजन बढ़ने के कारण सितंबर 2014 में उन्होंने बैरिएट्रिक सर्जरी कराई थी।
जम्मू जलस्तर बढ़ने से जम्मू के तवी नदी में दो घंटे तक फंसे मछुआरों को वायुसेना के गरुड़ कमांडो ने हेलिकॉप्टर एमआई 17 के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन कर बचा लिया। इस लाइव ऑपरेशन को देखकर सभी की सांसें अटकी हुई थीं क्योंकि जरा सी भी चूक बड़े हादसे को न्योता देने के लिए तैयार थी। मछुआरों के सफल ऑपरेशन के बाद हर कोई वायुसेना के जवानों को सलाम कर रहा है जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 4 जिंदगियां बचा लीं। इस डेयरडेविल रेस्क्यू ऑपरेशन का जिम्मा वायुसेना के 4 जवानों के कंधे पर था। ग्रुप कैप्टन संदीप सिंह मिशन की अगुआई कर रहे थे। उन्होंने बताया, 'मैं अपनी पूरी टीम को इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद कहूंगा। हमें दोपहर 12 बजे के करीब जानकारी मिली कि तवी नदी में जलस्तर बढ़ने से कुछ लोग फंस गए थे। जब हम वहां पहुंचे तो हमने पाया कि फंसे हुए लोग सीढ़ी की सहायता से चढ़कर आने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में हमने गरुड़ कमांडो की मदद ली जिन्हें रैपलिंग रोप (रैपलिंग रस्सी) की सहायता से नीचे भेजा गया और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित हेलिकॉप्टर तक लाया गया। गरुड़ कमांडो बेस्ट ट्रेंड कमांडो होते हैं।' खुद की जान रिस्क में डालकर लोगों को बचाना ही हमारी ड्यूटी' संदीप ने कहा, 'यह पूरी तरह डेयरडेविल ऑपरेशन था। हमारा मिशन उन जिंदगियों को बचाना था। मेरी पूरी टीम इसे सफल बनाने में भागीदार है। विंग कमांडर खरे हेलिकॉप्टर उड़ा रहे थे जबकि गरुड़ कमांडो खारवाड़ ने लोगों को रेस्क्यू किया।' उन्होंने कहा कि उन्हें संतुष्टि महसूस हो रही है कि यह ऑपरेशन सफल रहा। संदीप ने कहा, 'यह हमारी ड्यूटी होती है कि हमें खुद को रिस्क में डालकर लोगों को बचाना होता है।' गरुड़ कमांडो ने मछुआरों को किया रेस्क्यू मछुआरों को रस्सियों से बांधकर सुरक्षित बचाने वाले गरुड़ कमांडो खारवाड़ ने बताया, 'मेरी प्राथमिकता उन्हें बचाना थी। पायलट को शुक्रिया, उनके समर्पण के बिना यह असंभव था। यह ऑपरेशन दिखने में मुश्किल था लेकिन उतना नहीं क्योंकि मेरी पूरी टीम पायलट समेत सबने मुझे सपॉर्ट किया। खारवाड़ ने बताया, 'मुझे अपनी कोई चिंता नहीं थी। मैं पूरी तरह अपने कैप्टन और पायलट पर निर्भर था। हमारे लिए सबसे पहले फंसे हुए लोग हैं। उन्हीं की मदद के लिए हमें रखा गया है।' देवदूत बनकर आए वायुसेना के जवान सुरक्षित बचाकर लाए गए मछुआरे बिहार के सीवान से थे। उन्होंने एयरफोर्स के जवानों को धन्यवाद दिया। बता दें कि तवी नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने से प्रलयकारी लहरों में 4 मछुआरे फंस गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वह मछुआरे एक निर्माणधीन पुल के नीचे फंसे थे। फंसे हुए मछुआरों के लिए भारतीय सेना के जवान देवदूत बनकर आए और हेलिकॉप्टर की मदद से रस्सी द्वारा खींचकर उन्हें बचा लिया।
नई दिल्ली अनुच्छेद 370 हटाने के बाद घाटी में लोगों को आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एक मल्टिनैशनल कंपनी ने नुकसान के चलते अपने 70 कर्मचारियों को नोटिस दे दिया। इन लोगों पर नौकरी जाने की तलवार लटकती देख शुक्रवार को कश्मीर प्रशासन मदद के लिए आगे आया। ऐजिस नाम की मल्टिनैशनल कंपनी, जो कस्टमर एक्सपीरियंस मैनेजमेंट मुहैया कराने वाली बिजनस सर्विस प्रोवाइडर है, ने अपना श्रीनगर स्थित बीपीओ बंद करने का फैसला लिया। इसके साथ ही 70 कर्मचारियों को भी नोटिस जारी कर दिया गया। घाटी में ज्यादातर बिजनस तब 5 अगस्त के बाद बंद हुए हैं, जब जम्मू-कश्मीर राज्य को पुनर्गठित कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। पाकिस्तान की तरफ से आतंकी खतरों को देखते हुए सरकार ने कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए, इसमें लोगों के आने-जाने पर भी पाबंदी शामिल है। साथ ही मोबाइल फोन और इंटरनेट भी बंद कर दिया गया। नतीजे के तौर पर ऐजिस के एकमात्र क्लाइंट वोडाफोन के कॉल 1 लाख से घटकर 10 हजार पर आ गए। शुक्रवार को ऐजिस ने अपने 70 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर नौकरी खत्म करने का ऐलान किया। इस खबर के बाद कश्मीर प्रशासन, डीसी श्रीनगर डॉक्टर शाहिद इकबाल चौधरी ने मामले में हस्तक्षेप किया। शनिवार को वह ऐजिस के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिले और उन्हें तीन महीने का बेलआउट देने का प्रस्ताव दिया।
हैं नई दिल्ली जेएनयू छात्रा और पूर्व छात्र संघ लीडर शहला राशिद कश्मीर पर किए गए विवादित ट्वीट के बाद लगातार घिरती नजर आ रही हैं। सेना ने शहला के आरोपों को खारिज करते हुए इसे तथ्यहीन बताया और अब उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सर्वोच्च न्यायाल को दी गई गई अपनी शिकायत में झूठ फैलाने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए शहला की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। शहला ने कश्मीर में हालात बेहद खराब होने का दावा करते हुए रविवार को कई ट्वीट किए थे। IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग शहला के ट्वीट्स को वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अपनी शिकायत में आधार बनाया है और शहला के खिलाफ IPC की 124 A, 153, 153 A, 504, 505 और IT एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि शहला ने अपने ट्वीट्स के जरिए भारतीय सेना पर निराधार आरोप लगाए है,उसके खिलाफ देशद्रोह और समुदाय के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप में FIR दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। शहला बोलीं, ध्यान भटकाने की कोशिश सुप्रीम कोर्ट में अपराधिक शिकायत दर्ज होने के बाद शहला ने कहा कि यह कश्मीर से मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है। सत्तारूढ़ पार्टी के राजनीतिक अजेंडा को पूरा करने के लिए मानवाधिकार उल्लंघन किया जा रहा है। ट्विटर पर कश्मीर मुद्दे को लेकर बहुत सक्रिय हैं शहला शहला राशिद खुद भी कश्मीरी हैं और मूल रूप से श्रीनगर की रहनेवाली हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही वह ट्विटर पर सरकार के खिलाफ लगातार सक्रिय हैं। रविवार को शहला ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर फर्जी दावा किया कि कश्मीर में हालात चिंताजनक है। सेना और पुलिस के लोग आम नागरिकों के घर घुस रहे हैं और उन्हें सताया जा रहा है। उन्होंने शोपियां में सुरक्षाबलों द्वारा कुछ लोगों को जबरन हिरासत में लेने और उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। SC में आपराधिक शिकायत, गिरफ्तारी की मांग अब सुप्रीम कोर्ट में वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने याचिका दाखिल कर शहला की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शहला कश्मीर के हालात को लेकर झूठ फैला रही हैं। वह नफरत फैलाने की साजिश में शामिल हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी जरूरी है। सेना ने छात्र नेता के आरोपों को किया खारिज सुरक्षाबलों पर लगाए आरोप के साथ ही कश्मीर की स्थिति को लेकर किए उनके ट्वीट पर सेना की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। सेना ने शहला के सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये बेबुनियाद और तथ्यहीन दावे हैं, जिनमें कोई सचाई नहीं है। सैन्य बलों और प्रशासन का कहना है कि कश्मीर में स्थिति शांतिपूर्ण हैं और हालात नियंत्रण में है। श्रीनगर में आज से स्कूल भी खुल गए हैं और सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज हो रहा है। शहला ने आज भी बीजेपी पर साधा निशाना शहला लगातार केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी पर भी हमलावर रही हैं। उन्होंने आज भी बीजेपी के खिलाफ कई ट्वीट किए। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि बीजेपी के अनुसार उमर अब्दुल्ला, शहला राशिद, कपिल काक, रामचंद्र गुहा, कविता कृष्णन जैसे लोग पाकिस्तान प्रायोजित हैं।
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान दुनिया भर में अपने प्रॉपेगैंडा को फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का सहारा ले रहा है। इन दिनों पाक तमाम फर्जी विडियो और तस्वीरों के जरिए दुनिया को बरगलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत ने हर बार उसका पर्दाफाश कर करारा जवाब दिया है। पाकिस्तान के नापाक प्रॉपेगैंडे को करारा जवाब देने में जम्मू-कश्मीर के दो अफसर भी आगे रहे हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर में पाकिस्‍तानी आतंकवादियों का लगातार सफाया करने वाले श्रीनगर में तैनात आईपीएस अधिकारी इम्तियाज हुसैन सबूतों और तर्कों के साथ सोशल मीडिया पर पाकिस्‍तानी दुष्‍प्रचार की हवा निकाल रहे हैं। ट्विटर पर बेहद सक्रिय रहने वाले इम्तियाज हुसैन पाकिस्‍तानी ट्रोल को अपने तीखे पलटवार से चित भी कर दे रहे हैं। रविवार को एसएसपी इम्तियाज ने एक पाकिस्‍तानी डाकू के कश्‍मीर में भारत के खिलाफ लड़ने के ऐलान पर करारा जवाब दिया। एसएसपी इम्तियाज हुसैन ने लिखा, 'पाकिस्‍तान के सिंध का एक डाकू कश्‍मीर में लड़ाई लड़ना चाहता है। जैसे कि अब तक जो लोग कश्‍मीर में लड़ने के लिए आए थे, वे कमजोर डाकू थे। पाकिस्‍तानी सेना हमेशा से ही अपना काम ऐसे डाकुओं को आउट सोर्स करती रही है। उसका काम भी डाकू जैसा ही है। इस डाकू का भी वही हश्र होगा जो पहले के डाकुओं का हुआ है।' इमरान की चुटकी ली, शाह फैसल को दिया जवाब इम्तियाज हुसैन ने भारत के स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और वहां की सरकार के काला दिवस मनाने पर भी चुटकी ली। उन्‍होंने लिखा, 'सभी तरह की आक्रामकता, आतंकवाद और भड़काने के बाद भी वे कश्‍मीर को छीन नहीं सकते हैं। अब उन्‍हें ट्विटर पर ऐसा करने का प्रयास करने दीजिए।' एसएसपी इम्तियाज ने आईएएस अधिकारी से नेता बने शाह फैसल के कश्‍मीर को लेकर दिए बयान पर भी पलटवार किया। एसएसपी ने लिखा, 'मैं शाह फैसल की वास्‍तविक प्रतिभा और स्‍पष्‍टता के लिए उनका मुरीद रहा हूं। एक नेता के रूप में शाह फैसल निराशा को नहीं बेच सकते हैं। इतिहास का केवल एक संस्‍करण कभी नहीं होता है। उन्‍हें नई वास्‍तविकताओं को स्‍वीकार करना होगा। साथ ही कश्‍मीर की इस पीढ़ी के सपनों को समझना होगा जिसका वादा हमारे देश ने किया है।' 'संकटमोचक' बने श्रीनगर के डीसी दूसरे अफसर हैं आईएएस शाहिद चौधरी। पाकिस्‍तान की ओर से जब पूरी दुनिया में यह फेक न्‍यूज फैलाया जा रहा है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में हालात सामान्‍य नहीं हैं और लोगों की हत्‍या की जा रही है, ऐसे में चौधरी तथ्‍यों और विजुअल के माध्‍यम से कश्‍मीर में अमन की खबर दुनिया को बता रहे हैं। शाहिद चौधरी श्रीनगर के डेप्‍युटी कमिश्‍नर हैं। शाहिद लगतार ट्वीट कर श्रीनगर के हालात की ताजा जानकारी दे रहे हैं। साथ मुश्किल में फंसे लोगों की मदद भी कर रहे हैं। एक विदेशी एजेंसी के पत्रकार ने ट्वीट कर कश्‍मीर में अस्‍पतालों के अंदर फोन के काम नहीं करने की बात कही तो शाहिद ने उन्‍हें अफवाह फैलाने से परहेज करने की सलाह दी। शाहिद ने लिखा, 'मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल और अन्‍य चिकित्‍सा सुविधाओं के प्रमुखों के टेलिफोन नंबर पूरे दिन काम कर रहे हैं। कृपया तथ्‍यों का सम्‍मान करें। आपके पास अटकलों के आधार पर ट्वीट करने के लिए और भी बहुत कुछ है।'
पटना लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए बॉलिवुड स्‍टार शत्रुघ्‍न सिन्‍हा स्‍वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के मुरीद हो गए हैं। अब तक पीएम मोदी पर तीखे कॉमेंट करने वाले 'शॉटगन' के सुर बदल गए हैं। उन्‍होंने कहा कि 15 अगस्‍त को लाल किले की प्राचीर से दिया गया प्रधानमंत्री का भाषण बेहद साहसिक, तथ्‍यपरक और विचारोत्‍तेजक था। सिन्‍हा ने ट्वीट कर कहा, 'चूंकि मैं अपने कॉमेंट को लेकर प्रसिद्ध या कुख्‍यात रहा हूं, मैं यहां पर एक बात स्‍वीकार करना चाहता हूं कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपका लाल किले से 15 अगस्‍त को दिया गया भाषण बहुत सा‍हसिक, तथ्‍यपरक और विचारोत्‍तेजक था। इसमें देश के समक्ष मौजूद सभी समस्‍याओं का बेहद अच्‍छे से जिक्र था।' कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव लड़ने वाले बॉलिवुड स्‍टार ने कहा कि देश के समक्ष समस्‍याओं के निदान के अच्‍छा रोडमैप भी बताया। उन्‍होंने कहा, 'अगर आपके समय हो और नदियों को जोड़ने की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को पूरा करने की इच्‍छा हो तो मैं आपसे बात कर सकता हूं। यह देश में बाढ़ को रोकने में बेहद मददगार साबित होगा।' बता दें कि शत्रुघ्‍न सिन्‍हा दूसरे ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्‍होंने पीएम मोदी के स्‍पीच की प्रशंसा की है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा था, 'हम सभी प्रधानमंत्री की तीन घोषणाओं का स्‍वागत करते हैं।' इससे पहले अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था क‍ि देश इस समय तीन प्रमुख चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्‍होंने कहा कि देश जनसंख्‍या विस्‍फोट, प्‍लास्टिक पलूशन और वेल्‍थ क्रिएटर को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
हैदराबाद मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर के वंशज याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की इच्छा जताई है। तुसी ने कहा है कि अगर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो हमारा परिवार उसकी पहली ईंट रखेगा और हम मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला दान करेंगे। हाल ही में तुसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस का पक्षकार बनाने की भी मांग की थी। हालांकि तुसी की इस याचिका को कोर्ट ने अब तक स्वीकार नहीं किया। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में तुसी ने कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है, उसके मालिकाना हक के कागज किसी और के पास नहीं हैं ऐसे में मुझे यह अधिकार है कि मैं मुगल वंश का वंशज होने की हैसियत से अदालत में अपनी बात कर सकूं। तुसी ने कहा कि मैं इस मामले में पर अपना विचार रखना चाहता हूं कि विवादित जमीन का मालिकाना हक किसे मिले और मेरी मांग है कि एक बार ही सही मुझे सुना जाना चाहिए। तुसी ने कहा कि 1529 में प्रथम मुगल शासक बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी के लिए नहीं। मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि मस्जिद से पहले यहां क्या था, लेकिन अगर हिंदू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानकर उसमें आस्था रखते हैं तो एक सच्चे मुस्लिम की तरह मैं उनकी भावना का सम्मान करूंगा।' मंदिर के लिए जमीन करेंगे दान इस सवाल पर कि क्या उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े कोई दस्तावेज हैं, तुसी ने कहा कि उनके पास भले ही कोई कागज ना हो, लेकिन मुगल वंश के उत्तराधिकारी की हैसियत से वह इस जमीन के मालिकाना हक के अधिकारी कहे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह जमीन मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे। 2.77 एकड़ जमीन का विवाद बता दें कि सुप्रीम कोर्ट बीते कई दिनों से नियमित रूप से अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहा है। अयोध्या का यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन को लेकर है और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं।
भोपाल/गाजियाबाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने के भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। सीमा पर घुसपैठ कराने के लिए वह पिछले कई दिनों से लगातार फायरिंग कर रहा है। उधर, पाकिस्तान के नेता जंग की गीदड़भभकी दे रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ग्वालियर स्थित महाराजपुर इंडियन एयरफोर्स स्टेशन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरफोर्स स्टेशन को भी शुक्रवार से हाई अलर्ट पर रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि ग्वालियर स्थित IAF स्टेशन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस ने इलाके के आसपास गश्त बढ़ा दी है। आपको बता दें कि यह वही बेस है जहां से पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारतीय लड़ाकू विमानों मिराज-2000 ने 26 फरवरी को बालाकोट के आतंकी कैंपों को ध्वस्त करने के लिए उड़ानें भरी थीं। IAF बेस स्कूल और एयरबेस के आसपास स्थित दो केंद्रीय स्कूल शुक्रवार और शनिवार को बंद रहे। हालांकि अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि क्या यह बढ़ाई गई सुरक्षा का हिस्सा था। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो वज्र वाहन और 20 अतिरिक्त सशस्त्र पुलिवालों को IAF बेस की सुरक्षा में 24X7 निगरानी के लिए तैनात किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बेस की तरफ आनेवाली सभी गाड़ियों की तलाशी ली जा रही है। गौरतलब है कि ग्वालियर एयरबेस पर मिराज-2000 की दो स्क्वॉड्रन, गाइडेड मिसाइल की तीन स्क्वॉड्रन और टैक्टिक्स ऐंड एयर कॉम्बैट डिवेलपमेंट स्टैबलिशमेंट (TACDE) तैनात हैं। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से कोई नापाक हरकत किए जाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। उधर, हिंडन एयरफोर्स बेस परिसर के स्कूलों में शनिवार को अवकाश घोषित किया गया। शुक्रवार शाम से एयरफोर्स स्टेशन के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि पैरंट्स मीटिंग भी रद्द कर दी गई है। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को लेकर बड़े फैसले के बाद से ही सेना और तमाम एजेंसियां अलर्ट हैं।
चंडीगढ़ जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 और 35A के खात्‍मे के बाद सिख श्रद्धालुओं के लिए बनाए जा रहे करतारपुर कॉरिडोर को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पाकिस्‍तान ने जहां भारत के साथ व्‍यापार पर रोक लगा दी है, राजदूत को वापस बुलाया है वहीं अब करतारपुर कॉरिडोर पर भी पिछले 6 दिनों से काम को रोक दिया है। इस कॉरिडोर के बन जाने पर ही करीब 5 हजार सिख श्रद्धालु अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्‍तान के करतारपुर जा सकेंगे। भारत की तरफ इस कॉरिडोर के लिए काम बहुत तेजी से चल रहा है। 177 करोड़ रुपये की लागत से एक पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग बनाया जा रहा है। इसके अलावा बस और कार पार्किंग, फूड कोर्ट आदि बनाए जा रहे हैं ताकि 12 नवंबर को गुरु नानक की 550वीं जयंती पर करतारपुर गुरुद्वारे तक जाने वाले सिख श्रद्धालुओं को सहूलियत हो। आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद दोनों मुल्कों में तनाव आर्टिकल 370 के खात्‍मे के बाद जहां पाकिस्‍तान ने बस और रेल सेवा को रोक दिया था लेकिन करतारपुर कॉरिडोर पर काम जारी रखा था। हालांकि पिछले 6 दिनों से पाकिस्‍तान ने अपने इलाके में कॉरिडोर के निर्माण का काम भी रोक दिया है। हालांकि पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पिछले हफ्ते कहा था कि यह परियोजना जारी रहेगी। पाकिस्‍तान के काम रोक देने के बाद अब इस परियोजना के नवंबर के पहले सप्‍ताह तक पूरा होने पर संदेह के बादल मंडराने लगे हैं। करतारपुर कॉरिडोर पर पाकिस्‍तान फिर से काम करना शुरू करेगा या नहीं, यह अभी स्‍पष्‍ट नहीं है। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि विदेशों में बसे पंजाबी लोगों ने पाकिस्‍तान की ओर किए जाने वाले निवेश को भी रोक दिया है। पाकिस्‍तान ने हाल ही में भारत की ओर से तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक के लिए भेजे गए रिमाइंडर का भी कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने आशा जताई है कि पाकिस्‍तान सिख समुदाय की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए इसे समय पर पूरा करेगा। उधर, एक सूत्र ने बताया कि पाकिस्‍तान ने पिछले 6 दिनों से इस कॉरिडोर पर कोई काम नहीं किया है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया की टीम ने सीमा पर कॉरिडोर स्‍थल का निरीक्षण किया, जहां निर्माण कार्य बंद मिला। इससे अब पाकिस्‍तान की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
कश्मीर को लेकर मीडिया के दो बेहद अलग-अलग नैरेटिव सामने आ रहे हैं और दोनों ही सही नहीं हैं। पहला नैरेटिव कश्मीर में कुछ भी सही नहीं बताता। यह नैरेटिव उन पत्रकारों का है, जो राज्य में पुराने राजनीतिक घरानों के करीब रहे हैं और अब दिल्ली की ओर से तय नई व्यवस्था में खुद को परेशान महसूस कर रहे हैं। ये पत्रकार गुपकर रोड के पुराने लोग हैं, जो कश्मीर में सत्ता का पुराना केंद्र रहा है और यहीं से राजनीति और सुरक्षा के अहम मसले तय होते रहे हैं। जो अकसर कहते थे, 'फारूक क्या हम ब्रेकफास्ट पर मिल सकते हैं?' अब वे यह नहीं जानते कि इस बात को कैसे स्वीकार किया जाए कि फारूक अब्दुल्ला के घर में इंटरनेट नहीं चल रहा। ये पत्रकार जब अपने संक्षिप्त दौरे के बाद लौटे तो इन्होंने घाटी में सख्त प्रशासन और सड़कों पर शांति की अतिवादी तस्वीर पेश की, जो कि अपने आप में आधा सच है। कश्मीर में स्थितियां सामान्य नहीं हैं। कॉम्युनिकेशन की बात करें तो पूरी तरह से ब्लैकआउट है और इसके चलते आम लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन, इससे अलग ऐसी कोई सख्ती नहीं है, जैसा कि कुछ पत्रकार पेश कर रहे हैं। यदि किसी शख्स के पास कार है तो वह कुछ हाई सिक्यॉरिटी वाले वीआईपी रास्तों को छोड़कर कहीं भी आजादी से आ जा सकता है। मैंने श्रीनगर में 10 दिन गुजारे और शहर के कई इलाकों में गया। लोकल नंबर की एक छोटी से कार से मैं दक्षिण कश्मीर में भी घूमा, जहां आतंकी कमांडर बुरहान वानी को 2016 में ढेर किए जाने के बाद से काफी हिंसा का माहौल रहा है। मेरे पास कर्फ्यू पास नहीं था। सड़कों पर कई जगहों पर बैरीकेड्स थे, लेकिन सुरक्षा बलों से आगे बढ़ने के लिए परमिशन ली जा सकती थी, हमने कई बार ऐसा किया। सुरक्षाकर्मियों को सरकार से स्पष्ट निर्देश था कि वे लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें। यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से आया था। हालांकि सिर्फ सड़कों पर वाहनों की आवाजाही से ही स्थिति सामान्य होने की बात नहीं कही जा सकती। दूसरी समस्या स्थानीय टीवी पत्रकारों की ओर से थी, जो अपने ओबी वैन के पास ही बने रहे और कहीं अन्य जगह पर मूव करके रिपोर्टिंग नहीं की। दूसरी तरफ दिल्ली के दफ्तरों में बैठे उनके सहकर्मी ट्वीट करते रहे कि उनकी टीम कहीं जा नहीं पा रही। यह कुछ नहीं था बल्कि पत्रकार के तौर पर ईमानदारी वाली बात नहीं थी। श्रीनगर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्थानीय पत्रकारों को 161 पास जारी किए गए। हम श्रीनगर में ऐसे ही एक पत्रकार से सरोवर होटल में मिले जो अपने दोस्तों केसाथ बैठे सैंडविच खा रहे थे। उन्होंने दिल्ली से आए अपने एक दोस्त को कहा कि वह जहां चाहे जा सकते हैं और डरने की कोई बात नहीं है। इस बीच उस मित्र ने कहा कि वह डर नहीं रहे हैं और अपनी ही कार से कहीं भी जा पा रहे हैं। हम लोगों में से कुछ इसलिए परेशान हैं क्योंकि इंटरनेट एक्सेस नहीं है। ईद के मौके पर सरकार 60 पत्रकारों को चॉपर से श्रीनगर ले गई। यह वह दिन था, जब सरकार ने कुछ प्रतिबंधों को वापस लिया था और सड़कों पर स्थिति सामान्य दिख रही थी। वाहनों पर रोक थी, लेकिन कोई भी पैदल आ जा सकता था। इसके बाद भी बहुत से लोग अपने पास की मस्जिदों में पहुंचे और नमाज पढ़ी। हम में से कई लोगों ने इसके बारे में ट्वीट किया। लेकिन, हम एक बार फिर से दिल्ली में बैठे अपने ही साथियों के निशाने पर आ गए, जो ट्वीट कर कह रहे थे कि कुछ लोगों को ही इंटरनेट एक्सेस और चॉपर राइ़ड दी गई। वे पूछ रहे थे, 'आपको इंटरनेट एक्सेस कहां से मिल रहा है, जब कश्मीरियों के पास यह सुविधा नहीं है?' आखिर कोई भी पत्रकार इस बात का खुलासा क्यों करे, जबकि उसका सूत्र खुद ही परेशानी में फंस सकता है। यदि सरकार बिना किसी शर्त के चॉपर राइड ऑफर की है तो क्या पत्रकार को यह नहीं लेना चाहिए? ईद के मौके पर दोपहर दो बजे तक प्रतिबंधों में काफी ढील दी गई, लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि शांति थी, लेकिन यह सहज नहीं थी। लोग गुस्से में थे। यह गुस्सा सड़कों पर भड़क सकता था, हालांकि सुरक्षा अधिकारियों की मानें तो कोई बड़ी झड़प होना मुश्किल है। कुछ दिन पहले एक प्रयोग के तौर पर श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके से 4 बजे से शाम 7 बजे के बीच सुरक्षा को पूरी तरह से हटा लिया गया था। इस दौरान कुछ लड़के बाहर आए और दीवारों पर उन्होंने कुछ चित्र बनाए और कुछ लिखा, लेकिन वे किसी झड़प में शामिल नहीं हुए। लेकिन, इस बात को बताने की बजाय दिल्ली के ज्यादातर पत्रकार अपने सहकर्मियों को नजरअंदाज करने में अपनी ताकत झोंकते रहे। यह स्थिति 2014 के बाद से ही है। वे नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ता नहीं देख सकते। ज्यादातर लोग अपना समय यह देखने में गुजारते हैं कि दूसरे पत्रकार क्या कह रहे हैं और यदि वे उनके नैरेटिव के अनुसार बात नहीं करते तो उन्हें टारगेट किया जाता है। इस बात को समझने के कोई प्रयास नहीं किए जाते कि आखिर बड़े पैमाने पर लोग किसी एक शख्स को वोट क्यों दे रहे हैं। आखिर दलित 'बीफ फेस्टिवल' से परे चीजें क्यों देख रहे हैं। आरएसएस क्या सोचता है और लेफ्ट के नेता कुछ करने की बजाय ट्विटर पर ही क्यों योद्धा बने हुए और इस स्थिति को लेकर लेफ्च का कैडर क्या समझता है। यह कुछ नहीं बल्कि आलस्य की पत्रकारिता है। आर्टिकल लिखना और मनमाने ट्वीट करना आसान है। लेकिन, कश्मीरियों के अलग-अलग वर्गों से बात करना, पुलिसकर्मियों के परिवारों से बात करना, शिया समुदाय और अन्य समुदायों से बात करने के लिए कोशिश करने की जरूरत है। इसके अलावा एक वर्ग ऐसा भी है, जो खुल कर यह नहीं कह सकता कि वे 370 हटाने को लेकर खुश हैं क्योंकि उनकी हत्या भी की जा सकती है। अब तक ऐसे पत्रकारों ने इन कहानियों को देश तक पहुंचाने की कोशिश नहीं की है। राहुल पंडिता ,nbt
दिया नई दिल्ली दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (66) की हालत में अबतक कोई सुधार नहीं है। जेटली को 9 अगस्त को एम्स में भर्ती करवाया गया था और वह अब भी वही हैं। इस बीच एम्स में उनसे मिलने आ रहे वीआईपी लोगों का सिलसिला जारी है। रविवार सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत उनकी सेहत जानने पहुंचे थे। -आज करीब 9.30 पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक प्रमुख मोहन भागवत एम्स पहुंचे। वहां उन्होंने अरुण जेटली का हाल जाना। -शनिवार को बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, बिहार सीएम नीतीश कुमार भी एम्स पहुंचे थे। शनिवार को ही केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह,पीयूष गोयल, हर्ष वर्धन और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई दिग्गज नेता जेटली का हालचाल जानने एम्स गए। -इससे पहले शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तो शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अरुण जेटली से मिलने एम्स पहुंचे थे। जेटली जिस दिन भर्ती हुई थे उस दिन पीएम एम्स पहुंचे थे। लंबे समय से बीमार हैं जेटली जेटली को सॉफ्ट टिशू सरकोमा है, जो एक प्रकार का कैंसर होता है। जेटली पहले से डायबिटीज के मरीज हैं। उनका किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है। सॉफ्ट टिशू कैंसर की भी बीमारी का पता चलने के बाद वह इलाज के लिए अमेरिका भी गए थे। उन्होंने मोटापे से छुटकारा पाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी भी करा रखी है।
चंडीगढ़, 17 अगस्त 2019, पंजाब पुलिस ने खालिस्तान समर्थक और 'रेफरेंडम 2020' को पैसा मुहैया कराने की आरोपी कुलबीर कौर को गिरफ्तार कर लिया है. कुलबीर को गुरुवार रात राजधानी दिल्ली में गिरफ्तार किया गया. उसकी गिरफ्तारी मलेशिया की फ्लाइट से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरते ही की गई. पंजाब पुलिस ने पहले से ही कुलबीर कौर के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर रखा था. कुलबीर को शुक्रवार की देर शाम अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया. कुलबीर मलेशिया की नागरिक बताई जाती है. बटाला पुलिस ने उम्मीद जताई है कि कुलबीर कौर से पूछताछ में देश-विदेश में बैठकर खालिस्तानी आतंकवादियों की फंडिंग में संलिप्त कई नामों के खुलासे हो सकते हैं. कुछ और लोगों की गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं. कुलबीर कौर पर आरोप है कि वह विदेशों में रह रहे खालिस्तानी आतंकियों के साथ मिलकर पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, उकसाने का प्रयास कर रही थी. कुलबीर कौर 31 मई 2018 को बटाला के रंगढ़ नंगल में आतंकवाद निरोधक धाराओं के तहत दर्ज एक मामले में भी आरोपी है. आरोपों के अनुसार कुलबीर 'रेफरेंडम 2020' चला रहे गुरपतवंत सिंह पन्नू, मानसिंह और परमजीत सिंह पम्मा नाम के आतंकवादियों के साथ मिलकर पंजाब के युवकों को पैसे देकर बरगला रही थी. दरअसल 31 मई 2018 को बटाला पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने बटाला के श्री हरगोविंदपुर रोड पर बसे गांव पंजगराइयां और हरपुरा धंधोई में कुछ दुकानों को आग लगा दी थी. इसमें शराब के ठेके भी शामिल थे. गिरफ्तार तीन युवकों ने पुलिस को बताया था कि वह दुकानों में आग लगाकर लोगों को आतंकित करना चाहते थे. युवकों ने कहा था कि ऐसा कुलबीर कौर, गुरपतवंत सिंह पन्नू, परमजीत सिंह पम्मा और मान सिंह के कहने पर किया गया था.
नई दिल्ली शनिवार को खेल पुरस्कारों की घोषणा की गई। पैराओलिंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ऐथलीट दीपा मलिक और एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहलवान बजरंग पूनिया को देश में खेल के सबसे बड़े पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा। शनिवार को अवॉर्ड समिति द्वारा इसके घोषणा की गई। दीपा मलिक ने 2016 में रियो डी जनीरो पैराओलिंपिक में शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीता था। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) मुकुंदकम शर्मा की अगुआई वाली समिति ने विश्व में 65 किग्रा में नंबर एक पूनिया को शुक्रवार को ही खेल रत्न के लिए चुन लिया था। छह बार की विश्व चैंपियन और ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट एमसी मेरीकोम ने हितों के टकराव से बचने के लिये बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उनके निजी कोच छोटेलाल यादव द्रोणाचार्य पुरस्कार की दौड़ में शामिल थे। वहीं बजरंग पूनिया ने बीते साल यह अवॉर्ड नहीं मिलने पर अदालत जाने की धमकी दी थी। बजरंग ने पिछले साल जकार्ता एशियाई खेलों में 65 किग्रा स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में भी इसी वजन वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। वह विश्व चैंपियनशिप में दो बार के पदकधारी हैं और अगले साल तोक्यो ओलिंपिक में भारत के लिए प्रबल दावेदारों में शामिल हैं। बजरंग ने 2013 विश्व चैंपियनशिप की 60 किग्रा स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और इस प्रदर्शन में सुधार करते हुए पिछले साल 65 किग्रा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। अर्जुन पुरस्कारों की बात करें तो क्रिकेटर रविंद्र जडेजा और पूनम यादव समेत 19 अन्य खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही बैडमिंटन कोच विमल कुमार, टेबल टेनिस कोच संदीप गुप्ता और ऐथलेटिक्स कोच मोहिंदर सिंह ढिल्लों को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हॉकी के मेजबान पटेल, रामबीर सिंह खोखर (कबड्डी) और क्रिकेट के संजय भारद्वाज को लाइफ टाइम कैटेगिरी में सम्मानित किया गया। राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड बजरंग पूनिया- कुश्ती दीपा मलिक- पैरा ऐथलीट द्रोणाचार्य अवॉर्ड- रेगुलर कैटिगरी विमल कुमार- बैडमिंटन संदीप गुप्ता- टेबल टेनिस मोहिंदर सिंह ढिल्लों- ऐथलेटिक्स लाइफ टाइम कैटिगरी कोच का नाम मेजबान पटेल- हॉकी रामबीर सिंह खोखर- कबड्डी संजय भारद्वाज- क्रिकेट अर्जुन अवॉर्ड खिलाड़ियों के नाम तेजिंदरपाल सिंह तूर- ऐथलेटिक्स मोहम्मद अनस याहिया- ऐथलेटिक्स एस. भास्करन- बॉडी बिल्डिंग सोनिया लाथर- बॉक्सिंग रविंद्र जडेजा- क्रिकेट चिंगलेनसाना सिंह कंगुजम- हॉकी अजय ठाकुर- कबड्डी गौरव सिंह गिल- मोटर स्पोर्ट्स प्रमोद भगत पैरा स्पोर्ट्स (बैडमिंटन) अंजुम मोद्गिल- शूटिंग हरमीत राजुल देसाई- टेबल टेनिस पूजा ढांढा- रेसलिंग फवाद मिर्जा- फुटबॉल पूनम यादव- क्रिकेट स्वप्ना बर्मन- ऐथलेटिक्स सुंदर सिंह गुर्जर- पैरा स्पोर्ट्स (ऐथलेटिक्स) भामिदिपति साई प्रणीत- बैडमिंटन सिमरन सिंह शेरगिल- पोलो ध्यानचंद अवॉर्ड मैनुअल फैडरिक्स- हॉकी अरूप बसक- टेबल टेनिस मनोज कुमार- कुश्ती नितन किर्रताने- टेनिस लालरेमसानगा- तीरंदाजी
बेंगलुरु जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद से पाक प्रायोजित आतंकवादी हमले की आशंका को देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं वहीं इस बीच कर्नाटक में संभावित आतंकी हमले की खुफिया सूचना मिली है जिसके बाद वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने शनिवार को बताया किराज्य के प्रमुख स्थानों पर चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ सघन जांच भी की जा रही है। सूत्रों ने कहा संभावित आतंकवादी हमले की खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुक्रवार रात अलर्ट जारी किया गया जिसके तहत सभी पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने और हर जगह पुलिस की तैनाती का निर्देश दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि खुफिया जानकारी मिली थी कि आतंकवादियों का एक समूह देश में आतंक फैलाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण स्थानों और सार्वजनिक जगहों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, मंदिरों, बाजारों, मॉल और सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा बंदोबस्त पुख्ता कर दिए गए हैं। बेंगलुरू के अलावा हुबली-धारवाड़, कलबुर्गी, रायचूर, चित्रदुर्ग, मंगलुरू, दावणगेरे, उडुपी, मैसूरू, तुमकुर में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिसकर्मियों को शनिवार को रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर यात्रियों की तलाशी लेते हुए देखा गया। राज्य के महत्वपूर्ण मंदिरों में बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था देखी गई। पुलिस ने कहा कि कड़ी सुरक्षा ने मंगलुरु में आठ सदस्यीय गिरोह को पकड़ने में उनकी मदद की, जो शुक्रवार की रात वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। गिरोह के सदस्य एसयूवी वाहन में घूम रहे थे और मंगलुरु में एक होटल में रुके हुए थे। पुलिस ने उनके पास से दो पिस्तौल और आठ कारतूस बरामद की है। बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने शुक्रवार रात प्रत्येक महत्वपूर्ण स्थान की कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे।
नई दिल्ली दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भीषण आग लग गई है। आग इमर्जेंसी वॉर्ड के पास टीचिंग ब्लॉक की पहली और दूसरी मंजिल पर लगी है। जबकि धुएं का गुब्बार पांचवीं मंजिल पर भी देखा जा सकता है। दमकल की 34 गाड़ियां मौके पर आग बुझाने की कोशिश कर रही हैं। एहतियात के तौर पर इमर्जेंसी वार्ड को बंद कर दिया गया है। यहां से मरीजों को शिफ्ट कर दिया गया है। कुछ अन्य ब्लॉक से भी मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। टीवी रिपोर्ट के मुताबिक, आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है। आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। हर तरफ धुआं फैल गया है। बताया जा रहा है कि आग टीचिंग ब्लॉक में लगी और यह शाम के समय यह खाली था। यहां कई लैब्स और प्रफेसर्स के केबिन हैं। फायर टेंडर्स शीशे को तोड़कर अंदर दाखिल हुए। टीचिंग ब्लॉक एक नॉन-पेशेंट ब्लॉक है यानी वहां मरीज नहीं रहते। ब्लॉक में रिसर्च लैब, डॉक्टर्स रूम आदि है। हालांकि, यह AIIMS के इमर्जेंसी वॉर्ड से सटा हुआ है। इसी वजह से इमर्जेंसी वॉर्ड को खाली करा दिया गया है और वहां से मरीजों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया है। आग से प्रभावित होने वाले हिस्सों में इमर्जेंसी लैब, बी ब्लॉक, वॉर्ड एबी1 और सुपरस्पेशलिटी ओपीडी एरिया शामिल हैं। एक घंटे से आग पर काबू पाने प्रयास आग शाम करीब 5 बजे लगी। एक घंटे से आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। दमकल की करीब 3 दर्जन गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हुई हैं। एम्स के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुट गए हैं। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली कार्डियो न्यूरो केंद्र के आईसीयू में भर्ती हैं जो परिसर की एक अलग इमारत में स्थित है।
नई दिल्ली पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार पीएम मोदी की ओर से उठाए गए जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर शुरू से स्पष्ट और मुखर तरीके से इसके समर्थन में रहेगी। दूसरे विपक्षी दलों की भी मंशा है कि इसे मुद्दा नहीं बनने दिया जाए, जिससे इसका सियासी उपयोग नहीं हो सके। मालूम हो कि लाल किले से पीएम मोदी ने जनसंख्या विस्फोट को चिंताजनक ट्रेंड बताते हुए छाेटे परिवार की परिकल्पना को देशभक्ति से जोड़ा था। उसके अगले दिन जब कांग्रेस के सीनियर नेता पी. चिदंबरम और बाद में कांग्रेस ने पार्टी के स्तर पर भी पीएम मोदी की बात का समर्थन किया तो उसके पीछे यही रणनीति थी। ें एनबीटी ने कांग्रेस सहित विपक्ष के सीनियर नेताओं से बात की तो उन सभी का कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण हमेशा सभी सरकारों और राजनीतिक दलों की प्राथमिकता रही है। जाहिर है वे इस दिशा में उठाए गए कदम पर अनावश्क विवाद पैदा नहीं करेंगे। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने कहा कि उनके शासनकाल में इस दिशा में कई कदम भी उठाए गए और 2011 जनगणना का ट्रेंड भी इस दिशा में संकेत था कि कुछ हद तक स्थिति में काबू आ रही है। करुणाकरण कमिटी की रिपोर्ट पहले से मौजूद दरअसल, पिछले तीन दशक से जनसंख्या नियंत्रण के लिए क्या-क्या प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर बहस जारी है। 1991 में सीनियर कांग्रेस नेता के. करुणाकरण के नेतृत्व वाली कमिटी ने जनसंख्यानियंत्रण की दिशा में जो सुझाव दिए थे, उसमें जनप्रतिनिधियों के लिए यह शर्त अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया था कि उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हो। लेकिन वह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका। हालांकि, टुकड़ों-टुकड़ों में कुछ राज्यों ने पंचायत स्तर पर इसकी कोशिश जरूर की। उसी रिपोर्ट से इनपुट लेते हुए मोदी सरकार ने भी कानून मंत्रालय को इस दिशा में बेहतर कानून के विकल्व तलाशने को कहा है। जाहिर है कि कानून का प्रस्ताव सामने आने से पहले विपक्ष इस बार पूरी तैयारी कर लेना चाहता है। पिछली हार से सबक लेगा विपक्ष दरअसल मोदी-शाह की राजनीति में विपक्ष कई बार अलग-अलग मुद्दों पर परास्त होता रहा है। साथ ही कई बार मोदी सरकार इस तरह चौंकाती है कि विपक्ष को तैयारी का मौका तक नहीं मिलता है। मसलन बीजेपी की ओर से धारा 370 पर बिल सामने कर देने से विपक्षी दलों के नेताओं ने माना कि उन्हें बुरी तरह स्टंप कर दिया और कुछ भी सोचने का मौका नहीं मिला। अब इस एपिसोड से सीख लेते हुए विपक्षी दल के नेता अपने शीर्ष नेतृत्व से मांग कर रहे हैं कि राम मंदिर सहित तमाम बड़े मुद्दों पर पार्टी को पहले ही आपस में बात कर एक स्टैंड साफ कर लेना चाहिए ताकि ऐन मौके पर इस तरह की फजीहत न हो। जनसंख्या नियंत्रण पर आगे बढ़कर समर्थन करना और किसी पहल के साथ रहने की बात करना उसी डैमेज कंट्रोल राजनीति का हिस्सा है।
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2019,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर शनिवार को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक हुई. इस बैठक में भाग लेने के लिए गृह मंत्री अमित शाह भी पहुचे. ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद प्रक्रिया(डीपीपी) 2016 और रक्षा खरीद नियमावली(डीपीएम) 2009 की समीक्षा के लिए महानिदेशक(अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक समिति के गठन को मंजूरी दी. समिति को अपनी सिफारिशें पेश करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. हालांकि बैठक की शुरुआत में किसी तरह का एजेंडा सार्वजनिक न किए जाने से माना जा रहा है कि इसमें जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के कई प्रावधानों के हटने के बाद से उपजे हालात पर चर्चा होगी. मगर इस बैठक में रक्षा खरीद के नियमों की समीक्षा को लेकर चर्चा हुई.
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2019,कश्मीर में मोदी सरकार द्वारा धारा 370 पर उठाए गए कदम से पाकिस्तान की बौखलाहट कम नहीं हो रही. पाकिस्तान इसके बाद से लगातार भारत को परेशान करने के लिए कोई न कदम उठा रहा है. अब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन किया है. पाकिस्तानी सेना ने शनिवार सुबह साढ़े छह बजे नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की और मोर्टार से गोले भी दागे, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा जवाब दिया. हालांकि इस घटना में भारतीय सेना के एक जवान शहीद हो गए हैं. शहीद हुए जवान लांस नायक संदीप थापा 35 साल के थे और पिछले 15 साल से नौकरी कर रहे थे. देहरादून के रहने वाले संदीप पाकिस्तानी गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. सीजफायर का उल्लंघन बढ़ा पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन बढ़ा दिया है. 15 अगस्त के दिन भी जम्मू-कश्मीर के पूंछ में केजी सेक्टर में पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया. इसके अलावा उरी और राजौरी में भी पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन किया गया जिसमें तीन पाकिस्तानी जवान मारे गए. इससे पहले भी वह सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है. इसके द्वारा संभवत: पाकिस्तान दुनिया का ध्यान कश्मीर की तरफ आकर्ष‍ित करना चाहता है. संयुक्त राष्ट्र में मुंह की खाने के बाद अब पाकिस्तान विक्टिम कार्ड खेलना चाहता है और कोशिश कर रहा है कि कम से कम सीमा पर हलचल से ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्ष‍ित किया जा सके. गौरतलब है कि मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर पर फैसले के बाद पाकिस्तान बेचैन है. जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा हटाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से लेकर आर्मी चीफ और तमाम नेता अब युद्ध की बात कर रहे हैं. कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान हर तरह से भारत पर दबाव बनाने कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल में कहा कि यदि भारत के साथ युद्ध होता है तो हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसी के चलते पाकिस्तान ने अपनी पूर्वी सीमा पर फौज बढ़ा दी है. वहीं, पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठन मोदी सरकार के जम्मू कश्मीर पर लिए गए फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. पेशावर, लाहौर, कराची समेत पाकिस्तान के कई शहरों में मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ रैलियां निकाली गई. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 में बदलाव का संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बिल को संसद की मंजूरी दी गई. इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बन गए जो 31 अक्टूबर को अस्तित्व में आ जाएंगे.
श्रीनगर आर्टिकल 370 हटाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में जारी पाबंदियों में धीरे-धीरे ढील दी जा रही हैं। जम्मू में तो स्कूल-कॉलेज पहले ही खुल गए थे अब, वहां मोबाइल और इंटरनेट सेवा को शुरू कर दिया गया है। जम्मू में 2जी स्पीड के साथ नेट सेवा को बहाल किया गया है। कश्मीर में भी लैंडलाइन सेवा को बहाल कर दिया गया है। राज्य के मुख्य सचिव बी. आर. सुब्रमण्यम ने राज्य में जारी पाबंदियों में ढील देने के संकेत शुक्रवार को ही दिए थे। कश्मीर में 17 लैंडलाइन एक्सचेंज चालू कश्मीर घाटी के 17 एक्सचेंज में लैंडलाइन सेवाएं शनिवार को बहाल कर दी गईं। अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक टेलीफोन एक्सचेंज में से 17 को बहाल कर दिया गया। ये एक्सचेंज अधिकतर सिविल लाइन्स क्षेत्र, छावनी क्षेत्र, श्रीनगर जिले के हवाई अड्डे के पास है। मध्य कश्मीर में बडगाम, सोनमर्ग और मनिगम में लैंडलाइन सेवाएं बहाल की गई हैं। उत्तर कश्मीर में गुरेज, तंगमार्ग, उरी केरन करनाह और तंगधार इलाकों में सेवाएं बहाल हुई हैं। वहीं दक्षिण कश्मीर में काजीगुंड और पहलगाम इलाकों में सेवाएं बहाल की गई हैं। केन्द्र सरकार के जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधान हटाने के बाद पांच अगस्त से ही यहां मोबाइल फोन और लैंडलाइन सेवाओं सहित टेलीफोन सेवाएं स्थगित कर दी गई थीं। सोमवार से खुलेंगे प्राइमरी स्कूल: प्रधान सचिव प्रधान सचिव ने शनिवार सुबह मीडिया से बात करते हुए कहा कि सोमवार से घाटी के प्राइमरी स्कूल खुलेंगे, लेकिन सीनियर क्लासेज के स्कूल कुछ वक्त बाद खोले जाएंगे। कश्मीर में हालात पूरी तरह से सामान्य हैं और वाहनों की आवाजाही भी सामान्य रूप से हो रही है। रोहित कंसल ने कहा कि कश्मीर घाटी में 96 में से 17 टेलिफोन एक्सचेंज को चालू कर दिया गया है। कल तक अन्य एक्सचेंज की सेवाएं भी शुरू हो जाएंगी। इसके अलावा फिलहाल 35 थाना क्षेत्रों में लगे कर्फ्यू में ढील दी गई है। उन्होंने कहा कि एजेंसियों के अधिकारी हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हालातों की समीक्षा की जा रही है। कश्मीर के 5 जिलों में अब भी पाबंदी कश्मीर में सुरक्षा के मद्देनजर 5 जिलों में अब भी पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके अलावा सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के जवानों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य सचिव सुब्रमण्यम ने कहा कि कश्मीर घाटी में शनिवार को टेलिकॉम सेवाओं को बहाल कर दिया जाएगा। इसके अलावा सोमवार से कश्मीर के स्कूल-कॉलेज भी खोल दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 22 में से 12 जिलों में हालात पूरी तरह से सामान्य हैं। इसके अलावा पांच जिलों में एहतियात के तौर पर आंशिक रूप से पाबंदी लगाई गई है। उधमपुर से लेकर जम्मू तक इंटरनेट शुरू शनिवार को मिली सूचना के अनुसार जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, रियासी, कठुआ, सांबा और जम्मू शहरों में 2जी इंटरनेट सेवा शुरू की गई है। इसके साथ-साथ इन इलाकों में किसी प्रकार की पाबंदियां भी नहीं लगाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने का फैसला कानून व्यवस्था की स्थितियों की समीक्षा के बाद किया जाएगा। इसके अलावा हिरासत में लिए गए लोगों को भी हालात के अनुसार ही रिहा कराने पर विचार होगा। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं: मुख्य सचिव शुक्रवार को भी मुख्य सचिव ने कहा था कि कश्मीर और जम्मू दोनों ही संभागों में हालात सामान्य हैं और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटनाओं की सूचना नहीं मिली है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अब तक किसी भी स्थानीय नागरिक को कोई नुकसान होने की खबर नहीं है। गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में बीते दिनों जवानों की अतिरिक्त तैनाती के बाद से ही पाबंदियां लगाई गई थीं, जिनमें समय-समय पर ढील भी दी गई। इसके अलावा पाकिस्तान की ओर से किसी आतंकी हमले की आशंका के कारण जवानों को भी पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
नई दिल्ली अगर 100 मीटर फर्राटा धावक की बात की जाए तो आपके जेहन में जमैका के उसेन बोल्ट का ही नाम ही आएगा। कम-से-कम भारत के किसी धावक का नाम तो आपके दिमाग में नहीं ही आएगा। लेकिन रुकिए, भारत में भी बोल्ट है और यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल विडियो में दिख भी रहा है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी के युवा धावक रामेश्वर की 100 मीटर फर्राटा दौड़ का विडियो खूब वायरल हो रहा है। दावा है कि रामेश्वर 11 सेकंड में 100 मीटर दौड़ जाता है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जब इस विडियो को शेयर किया तब केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने इस धावक को अपने पास भेजने का आग्रह किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने टि्वटर के जरिए खेल मंत्री से मांगा सपॉर्ट शिवराज सिंह ने युवा रामेश्वर का एक विडियो अपने टि्वटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा, 'भारत ऐसी व्यक्तिगत प्रतिभा का धनी है। अगर इन्हें सही अवसर और सही प्लेटफॉर्म मिले तो ये लोग निश्चित तौर पर नया इतिहास रचते हुए दिखाई देंगे।' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस विडियो को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगे बढ़ाया तो केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू भी इस धावक को समर्थन देने से खुद को नहीं रोक पाए। शिवराज ने विडियो के लिए पत्रकार को बोला-थैंक्स शिवराज ने लिखा, 'मैं भारत के खेल मंत्री किरण रिजिजू से अपील करता हूं कि इस अभिलाषी ऐथलीट को उनकी प्रतिभा निखारने में मदद दें।' इस ट्वीट के साथ शिवराज सिंह चौहान ने उस पत्रकार को भी धन्यवाद दिया है, जिसकी बदौलत उन तक यह विडियो पहुंचा है। इस विडियो में दावा किया जा रहा है कि रामेश्वरम 100 मीटर फर्राटा दौड़ को मात्र 11 सेकंड में पूरा कर रहे हैं। हमारे देश में अक्सर यह कहा जाता है कि देश में खेल के क्षेत्र में प्रतिभा चाहिए तो गांवों की ओर कूच कीजिए। यहां मिलने वाले टैलंट को अगर सही ढंग से तराशा जाए तो इंटरनैशनल लेवल पर देश को कई मेडल मिल सकते हैं। नंगे पांव दौड़ रहा 11 सेकंड में 100 मीटर इस विडियो में यह युवा ऐथलीट सड़क पर नंगे पांव दौड़ता दिख रहा है। चूने से 100 मीटर तक की मार्किंग इस विडियो में नजर आ रही है और मात्र 11 सेकंड के इस विडियो यह फर्राटा धावक अपने स्टार्टिंग पॉइंट से 100 मीटर दौड़ की फिनिशिंग लाइन को आराम से पार करता दिख रहा है। खेल मंत्री ने किया समर्थन का वादा खेल मंत्री किरण रिजिजू ने भी शिवराज सिंह चौहान के इस ट्वीट पर रिप्लाई करने में देर नहीं लगाई। कुछ ही मिनटों में उन्होंने इस ऐथलीट की प्रतिभा का लोहा मानते हुए उन्हें खेल मंत्रालय की ओर से समर्थन का वादा कर दिया। रिजिजू ने अपने ट्वीट में लिखा, 'शिवराज सिंह जी किसी को कहिए कि इस (रामेश्वर) ऐथलीट को मेरे पास लेकर आए। मैं उन्हें ऐथलेटिक अकैडमी में रखने के लिए पूरा इंतजाम करूंगा।' सोशल मीडिया पर इस ऐथलीट को पूर्व मुख्यमंत्री की पहल पर खेल मंत्री द्वारा मिल रहे समर्थन को खूब पसंद किया जा रहा है।
नई दिल्ली, 16 अगस्त 2019, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ बिजली, पानी और मेडिकल सुविधाएं बहाल हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए हम कई कदम उठा रहे हैं. अभी तक राज्य में किसी की मौत नहीं हुई और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पाबंदियों में ढील दी जा रही है. सोमवार से श्रीनगर में सभी दफ्तर खुलेंगे. इसके साथ ही स्कूल भी खुल जाएंगे. टेलीफोन लाइन धीरे-धीरे खोली जाएंगीं. रविवार को कुछ इलाकों में टेलीफोन खुल जाएंगे. हालांकि, इंटरनेट सेवा को अभी बहाल करने पर फैसला नहीं हुआ है. मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि टेलीकॉम सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए. सभी राजनीतिज्ञों की हिरासत भी खत्म की जाएगी. हालांकि इस पर कश्मीर में दिन प्रतिदिन सुधरते हालात के बाद ही फैसला लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू प्रतिबंधों के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है. मुख्य सचिव ने कहा कि हमारी कोशिश इस बात की है कि किस तरह जल्द से जल्द घाटी में हालात सामान्य हों. मुख्य सचिव ने कहा कि घाटी में हिज्बुल, लश्कर और कुछ अलग-अलग संगठन आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं. हमें ऐसी खुफिया जानकारी मिली है कि ये आतंकवादी संगठन आतंकवादी हमले की तैयारी में है. मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार की तरफ से समय-समय पर लोगों को छूट भी दी गई थी. ईद के वक्त भी लोगों को खुली छूट दी गई थी, इसके अलावा जो लोग हज से वापस लौट रहे हैं उन्हें भी पूरी सुविधा दी जा रही है. सुब्रमण्यम ने कहा कि पाकिस्तान लगातार कश्मीर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया है. इस दौरान उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल जैसे आतंकी संगठनों का नाम भी लिया. उन्होंने साथ ही कहा कि घाटी में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं और हम भी पाबंदियां हटा रहे हैं. अभी सरकारी दफ्तरों को खोल दिया गया है, साथ ही सरकारी स्कूल को भी धीरे-धीरे खोला जाएगा. और उसके बाद हालात का जायजा लेकर आगे का फैसला लिया जाएगा.
नई दिल्ली, 16 अगस्त 2019,रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई आज भी जारी है. 6 अगस्त को इस मसले पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी, जिसके तहत हफ्ते में पांच दिन ये मामला सुना जा रहा है. अभी तक निर्मोही अखाड़ा के वकील, रामलला विराजमान के वकील अपने तर्क रख चुके हैं. शुक्रवार को भी रामलला विराजमान के वकील सीएस. वैद्यनाथन अपने तर्कों को आगे बढ़ा रहे हैं. 03.33 PM: रामलला के वकील ने अदालत में कहा कि खुदाई से मिले अवशेष से साफ है कि यहां एक ढांचा नहीं बल्कि कई स्तम्भों वाला विशाल मंदिर था, जहां पर कई बड़े-बड़े कक्ष थे. ये कक्ष घरों की संरचना से बिल्कुल अलग थे. उन्होंने कहा कि वहां पर नए स्ट्रक्चर की कोई नई नींव नही है, वहां 15 खंभों वाला स्ट्रक्चर भी था. रामलला के वकील की तरफ से कहा गया कि ASI की इस रिपोर्ट में इतने पुख्ता सबूत हैं जिनसे साबित होता है कि मस्जिद का निर्माण धार्मिक मकसद से नहीं बल्कि बदनियत से दूसरे धर्म को कुचलने के लिए किया गया था. 02.54 PM: रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि विवादित स्थल की खुदाई से मिले पुरातात्विक अवशेषों से ये साफ पता चलता है कि ये किसी पत्थर भारतीय मंदिरों के स्थापत्य शैली वाले ही है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ये भी कहती है कि वहां से मिले अवशेष सिर्फ एक ढांचा ही नहीं बल्कि अनेक स्तंभों वाले विशाल मंदिर के हैं. इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि वहां पर तो एक कब्र भी मिली है, उसका क्या मतलब है? जवाब में रामलला के वकील ने कहा कि वो बहुत बाद की है. 02.50 PM: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने रामलला के वकील सीएस. वैद्यनाथन से पूछा कि क्या आप साबित कर सकते हैं कि बाबरी मस्जिद, मंदिर या किसी धार्मिक इमारत के ऊपर बनी है? 12.42 PM: सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त कार्बन डेटिंग के मसले पर बहस चल रही है. रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि मूर्ति को छोड़ दूसरे मेटेरियल का कार्बन डेटिंग हुआ था. इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हमने दूसरे मेटेरियल नहीं, बल्कि मूर्ति की कार्बन डेटिंग के बारे में पूछा है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि ईटों की कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती है. कार्बन डेटिंग तभी हो सकती है जब उसमें कार्बन की मात्रा हो. रामलला के वकील की तरफ से भी कहा गया कि देवता की कार्बन डेटिंग नहीं हुई है. दरअसल, लकड़ी की वस्तु में मौजूद कार्बन की मात्रा से इस बात का अंदाजा लगता है कि वह कितना पुराना है. इसी बात को लेकर अदालत में बहस हुई, क्योंकि मूर्ति पत्थर की बताई गई. 12.13 PM: सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान की तरफ से 1990 में ली गई तस्वीरों के हवाले से कहा गया कि इन तस्वीरों में दिखाए गए स्तंभों में शेर और कमल उकेरे गए हैं. इस तरह के चित्र कभी भी इस्लामिक परंपरा का हिस्सा नहीं रहे हैं. इस पर जस्टिस भूषण ने कहा कि 1950 में कमीशन द्वारा लिए गए फोटो जो जगह के बारे में बताते हैं वो 1990 में ली गई तस्वीरों के मुकाबले ज्यादा साफ, स्पष्ट और समुचित लगते हैं. 11.40 AM: रामलला के वकील ने इस दौरान ASI की रिपोर्ट की एल्बम की तस्वीरें भी दिखाई. उन्होंने कहा कि मस्जिद में मानवीय या जीव जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकती हैं, अगर हैं तो वह मस्जिद नहीं हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस्लाम मे नमाज़/प्रार्थना तो कहीं भी हो सकती है. मस्जिदें तो सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए ही होती हैं. इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई और कहा कि कहीं पर भी नमाज़ अदा करने की बात गलत है, ये इस्लाम की सही व्याख्या नहीं है. जिस पर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि गलियों और सड़कों पर भी तो नमाज़ होती है. 11.20 AM: रामलला के वकील ने कहा कि अप्रैल 1950 में विवादित क्षेत्र का निरीक्षण हुआ तो कई पक्के साक्ष्य मिले. जिसमें नक्शे, मूर्तियां, रास्ते और इमारतें शामिल हैं. परिक्रमा मार्ग पर पक्का और कच्चा रास्ता बना था, आसपास साधुओं की कुटियाएं थी. इसके अलावा उन्होंने बताया कि सुमित्रा भवन में शेषनाग की मूर्ति भी मिली थी. रामलला के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने कहा कि पुरातत्व विभाग की जनवरी 1990 की जांच और रिपोर्ट में भी कई तस्वीरें और उनका साक्ष्य दर्ज हैं. 11 रंगीन तस्वीरें उस रिपोर्ट के एल्बम में हैं जिनमें स्तंभों की नक्काशी का डिटेल चित्रण और वर्णन है. 11.10 AM: अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू हो गई है. रामलला विराजमान के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने अदालत में नक्शा और रिपोर्ट दिखाकर कहा कि जन्मभूमि पर खुदाई के दौरान स्तम्भ पर शिव तांडव, हनुमान और देवी देवताओं की मूर्तियां मिली थीं. इसके अलावा पक्का निर्माण में जहां तीन गुम्बद थे, वहां बाल रूप में भगवान राम की मूर्ति थी. बुधवार को अदालत में चले थे तर्कों के तीर शुक्रवार को इस सुनवाई का छठा दिन है, गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस की वजह से अदालत की छुट्टी थी. बुधवार को आखिरी सुनवाई में अदालत ने रामलला के वकील से कई सवालों के जवाब मांगे. सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान पूछा कि मंदिर तोड़ने के लिए आदेश बाबर या उसके सेनापति ने ही दिए थे, इसके क्या सबूत हैं? इसके अलावा अदालत की ओर से रामजन्मभूमि का दावा करने वाले सबूतों का भी हवाला मांगा था. रामलला के वकील ने दिया पुराणों का हवाला रामलला विराजमान के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने अपने तर्कों में पुराण, ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया. इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि रामजन्मभूमि और मंदिर के साथ करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी है. वहीं रामलला के वकील ने इस बात को भी अदालत में उठाया कि मुस्लिम पक्ष की ओर से पहले भी ये माना जा चुका है कि रामजन्मभूमि पर मंदिर था. आपको बता दें कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है. इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.
जींद हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने पूरी तरह कमर कस ली है और इसका शंखनाथ खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जींद में 'आस्था' महारैली में किया। इस दौरान अमित शाह ने आर्टिकल 370 हटाए जाने को ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी आर्टिकल 370 इसीलिए हटा पाए, क्योंकि उनके मन में वोटबैंक का लालच नहीं था, जबकि पिछली सरकारें वोट बैंक के लालच में यह फैसला नहीं ले पाईं। शाह ने कहा कि जो सरकारें पांच साल में काम नहीं कर पाती हैं, वह 75 दिनों में हमने कर दिया। सरदार पटेल का अखंड भारत का सपना मोदीजी ने पूरा किया। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम हमेशा मानते थे, लेकिन 370 बताती थी कि अभी भी कुछ अधूरा है। कांग्रेस की सरकारें वोट बैंक की लालच में नहीं कर पाईं। मोदी सरकार ने 75 दिनों में कर दिखाया। आर्टिकल 370 और 35 ए हटना देश की अखंडता के लिए जरूरी था। आज मां भारती आनंदित हैं। अब इतिहास का हिस्सा बना अनुच्छेद 370 गृह मंत्री ने कहा कि आर्टिकल 370 हटाने का काम वही कर सकता है, जिसके मन में वोट बैंक की लालच न हो, जिसके मन में स्पष्टता हो। मोदी कभी वोट बैंक के लालच में मोदी नहीं पड़े। उन्होंने हमेशा देश के अच्छे के लिए फैसले लिए। 75 दिन के अंदर ही मोदी के पराक्रम के कारण ही 370 इतिहास का हिस्सा बन चुकी है। दुश्मन के दांत अब होंगे खट्टे शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से चीफ ऑफ डिफेंस की घोषणा की है। कई वर्षों से इसकी सिफारिश होती रही, लेकिन इसकी घोषणा नहीं हो सकी। अब मोदी से इस फैसले से युद्ध के समय सेनाओं के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन होगा और सेनाएं वज्र के समान दुश्मन का सामना करेंगी। अब तीनों सेनाएं मिलकर दुश्मन के दांत खट्टे करें, इसलिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिलेगा। इससे रक्षा क्षमता अनेक गुना बढ़ जाएगी। बनेगा देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हिसार में एयरपोर्ट बनाए जाने का काम शुरू होगा। यह एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा बिल्डरों का अड्डा बन गया था। नौकरियों में भ्रष्टाचार फैल गया था, सब खत्म कर दिया गया है। 22 हजार करोड़ से बढ़ाकर बजट किया 58 हजार करोड़ गृह मंत्री ने कहा कि हरियाणा में जो भी पिछली सरकारें थीं, उन्होंने हरियाणा के साथ कुछ नहीं किया। चौटाला ऐंड कंपनी से पूछता हूं कि कितने रुपये मिलते थे? हुड्डा की कांग्रेस सरकार राज्य में थी और केंद्र में भी उनकी सरकार थी। 13वें वित्त आयोग में हरियाणा को कांग्रेस ने22 हजार करोड़ रुपये दिए। वहीं 14वें वित्त आयोग में मोदी ने 22 हजार करोड़ रुपये से बजट बढ़ाकर 58 हजार करोड़ रुपये कर दिया। 'मोदी को आशीर्वाद दे रही होगी अटल की आत्मा' अमित शाह ने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है। आर्टिकल 370 हटने के बाद अटलजी की आत्मा बहुत खुश होगी। उनकी आत्मा जहां भी होगी, मोदी जी को खूब आशीर्वाद दे रही होगी।
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में राज्य के पुनर्गठन और प्रदेश को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों (अनुच्छेद 370) को हटाए जाने के बाद से असामान्य बने जनजीवन की बहाली का रास्ता खुलने लगा है। खबर के मुताबिक राज्य प्रशासन ने प्रदेश के सभी स्कूलों-कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों को सोमवार से खोलने का निर्देश जारी कर दिया है। वहीं, सूत्रों के अनुसार सरकारी कार्यालय और सचिवालय शुक्रवार से कामकाज शुरू कर देंगे। इस बीच आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बिना जानकारी की पुष्टि किए, कुछ सूचनाओं के आधार पर याचिका दायर कर दी गई है। सार्वजनिक प्रतिबंधों में भी जल्द मिलेगी ढील राजभवन के एक सूत्र ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला जुमे की नमाज के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। गौरतलब है कि प्रदेश में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध है। अनुमान है कि जल्द ही इन प्रतिबंधों को भी हटा लिया जाएगा। माना जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस के दौरान प्रदेश की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया है। 'सरकार को कुछ और वक्त मिलना चाहिए' इस बीच जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बिना जानकारी की पुष्टि किए, कुछ सूचनाओं के आधार पर याचिका दायर कर दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज नहीं की और कहा कि इस मामले में कई और याचिकाएं आई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया पर बैन हटाने संबंधी याचिका पर एक बार फिर कहा कि प्रदेश के हालात स्थिर करने के लिए सरकार को कुछ और वक्त मिलना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुरक्षा एजेंसियां हर दिन हालात बेहतर करने की कोशिश में हैं। बता दें कि 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने संबंधी केंद्र सरकार के फैसले के बाद एहतियातन स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर सहित कई संस्थान बंद कर दिए गए थे। कड़ी सुरक्षा के बीच इंटरनेट और फोन सेवाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। अब धीरे-धीरे इसमें ढील दी जा रही है। पहले 10 अगस्त को जम्मू इलाके के 5 जिलों से धारा 144 हटाते हुए स्कूल-कॉलेजों को खोलने का निर्देश जारी किया गया था। प्रशासन के निर्देश पर जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और रियासी जिलों में सभी तरह के प्रतिबंध हटा लिए गए थे। वहीं, पुंछ, राजौरी और रामबन जिलों में प्रतिबंध जारी रखा गया था। अब कश्मीर के स्कूल-कॉलेज को लेकर प्रशासन का ताजा निर्देश आया है।
इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में उस वक्त बेहद मार्मिक नजारा देखने को मिला, जब एक शहीद की पत्नी ने गांव के युवाओं की हथेली पर पैर रखते हुए अपने नए घर में प्रवेश किया। यहां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांव के युवाओं ने मिसाल कायम की है। बेटमा गांव के युवकों ने एक शहीद जवान की पत्नी को नया घर गिफ्ट किया है। 1992 में बीएसएफ जवान मोहन सिंह शहीद हो गए थे। गांव के युवकों ने 11 लाख रुपये इकट्ठा कर शहीद की पत्नी को सिर के नीचे छत दिलाने में मदद की है। शहीद का परिवार एक टूटे-फूटे घर में रहता था। घर की छत भी टूट चुकी थी। यहां तक कि सरकार की ओर से भी परिजनों को कोई सहायता नहीं मिली। परिवार की हालत देखने के बाद गांव के युवाओं ने घर मुहैया कराने के लिए 'एक चेक एक दस्तखत' अभियान चलाया। अभियान से जुड़े विशाल राठी कहते हैं, 'हमने शहीद की विधवा के लिए 11 लाख रुपये इकट्ठा किए। रक्षा बंधन और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हमने मकान की चाबी उन्हें सौंप दी।' शहीद की पत्नी ने सभी को राखी बांधी राठी ने बताया कि शहीद की पत्नी ने उन सभी को राखी बांधी। जल्द ही परिवार नए घर में शिफ्ट हो जाएगा। जब मोहन सिंह शहीद हुए थे तो उनका बेटा तीन साल का था। उस वक्त उनकी पत्नी गर्भवती थीं। शहादत के बाद शहीद की पत्नी ने किसी तरह बच्चों को पालन-पोषण किया। राठी कहते हैं कि मकान पर 10 लाख रुपये की लागत आई है, जबकि एक लाख रुपये मोहन सिंह का स्टैचू (प्रतिमा) बनाने के लिए रखे गए हैं। राठी ने बताया, 'स्टैचू भी तकरीबन तैयार है। इसके साथ ही जिस सरकारी स्कूल में मोहन सिंह पढ़ते थे, उसका नाम भी उन्हीं के नाम पर किए जाने की कोशिश चल रही है।'
कोलकाता भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई हस्तियों ने 'सदैव अटल' जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर भी कई नेताओं ने उन्हें याद किया। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्विटर के जरिए अटलजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज उनकी कही बातों को एक बार फिर याद करने की जरूरत है। अटलजी की कही बातों के बहाने ममता ने कश्मीर के मुद्दे पर एक तरह से केंद्र को नसीहत भी देने की कोशिश की। लिखें ट्विटर पर अटलजी को श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने लिखा, 'आइए, उनके शब्दों को आज हम फिर याद करते हैं। बंदूक के दम पर किसी समस्या को हल नहीं किया जा सकता है। मुद्दों को इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत के तीन सिद्धांतों से ही हल किया जा सकता है।' बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री की कश्मीर नीति इन तीन सिद्धांतों पर ही आधारित थी। वाजपेयी का पिछले साल आज ही के दिन 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। 'सदैव अटल' पहुंचकर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि इससे पहले नई दिल्ली स्थित राजघाट के पास स्थित समाधि स्थल 'सदैव अटल' पहुंचकर सभी ने अटलजी को श्रदांजलि दी। यहां उनकी कविताओं की चर्चित पंक्तियां भी गुदी हैं। पत्थर पर ऐसी ही एक लाइन गुदी है- आदमी की पहचान उसके धन या आसन से नहीं होती, उसके मन से होती है। मन की फकीरी पर कुबेर की सम्पदा भी रोती है। शुक्रवार को श्रद्धांजलि सभा के दौरान अटल के ये प्रेरक शब्द उनकी स्मृतियों को जीवंत कर गए। श्रद्धांजलि देने दत्तक पुत्री नमिता भी पहुंचीं पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य भी अपने परिवार के साथ पहुंची। बता दें कि वाजपेयी का अंतिम संस्कार भी उनकी दत्तक पुत्री ने ही किया था। पूर्व पीएम वाजपेयी के लिए आयोजित स्मृति सभा में कलाकारों के एक ग्रुप ने उनके पसंदीदा भजन भी गाए। बीजेपी के आधिकारिक अकाउंट से भी पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी गई।
स्वतंत्रता दिवस: जनसंख्या पर पीएम मोदी की सलाह, असदुद्दीन ओवैसी का हमलाहैदराबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने संबोधन में देश की युवा शक्ति और बढ़ती आबादी का जिक्र किया था। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम के इस बयान पर निशाना साधा है। ओवैसी ने ट्वीट के जरिए पीएम मोदी पर हमला बोला है। गुरुवार को पीएम मोदी ने कहा था कि देश की ज्यादातर आबादी युवा और प्रडक्टिव है लेकिन इसका हमें 2040 तक ही फायदा मिलेगा। पीएम ने इस दौरान जनसंख्या बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई थी। एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'प्रधानमंत्री को यह नहीं पता कि इस फायदे (युवा आबादी) का कैसे इस्तेमाल किया जाए, इसलिए वह सरकार के खारिज और अनुचित रूप से दखल देने वाले विचारों के साथ आ रहे हैं। इस तरह वह अपनी जिम्मेदारी से जी चुराते हैं।' पीएम ने लाल किले से बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा था कि हमें इस मसले पर आने वाली पीढ़ी के लिए सोचना होगा। सीमित परिवार से खुद के साथ-साथ देश का भी भला होने वाला है। पीएम ने इस दौरान कहा कि जो लोग सीमित परिवार के फायदे के बारे में जनता को समझा रहे हैं, उन्हें सम्मानित करने की जरूरत है। छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं। पीएम ने लाल किले से बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा था कि हमें इस मसले पर आने वाली पीढ़ी के लिए सोचना होगा। सीमित परिवार से खुद के साथ-साथ देश का भी भला होने वाला है। पीएम ने इस दौरान कहा कि जो लोग सीमित परिवार के फायदे के बारे में जनता को समझा रहे हैं, उन्हें सम्मानित करने की जरूरत है। छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं।

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