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ै अयोध्या पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में बहुप्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण की नींव रखी। मंत्रोच्चार के बीच पीएम मोदी ने चांदी की ईंट रखने के बाद पीएम ने कहा कि आज करोड़ों भारतीयों की अभिलाषा, आशा पूरी हुई। आज के इस पवित्र अवसर पर सभी को कोटि-कोटि बधाई। उन्होंने कहा कि आज के दिन की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। पीएम ने कहा कि राम की शक्ति देखिए इमारतें टूटीं पर उनका अस्तित्व नहीं टूटा। आज सदियों का सपना पूरा हुआ। जय सियाराम के साथ संबोधन पीएम ने भगवान राम और सीता का जयकार के साथ अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रामभक्तों को आज इस पवित्र अवसर पर कोटि-कोटि बधाई। आज इसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। पीएम ने कहा कि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि आना बड़ा स्वाभाविक था। क्योंकि राम का काम किए बिना मुझे कहां चैन मिलने वाला था। सरयू के तट पर रचा स्वर्णिम अध्याय, लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा होगा पीएम ने कहा कि भारत आज सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक आज अयोध्या इतिहास रच रहा है। आज पूरा भारत राममय है। पूरा देश रोमांचित है। हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा होगा कि वो अपने जीते जी इस पावन दिन को देख रहा है। राम काज किनु बिनु मोहि कहां.. वर्षों से टाट और टेंट के नीचे रहे हमारे रामलला के लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर से खड़ा हो जाना सदियों से इस गति क्रम से राम जन्मभूमि आज मुक्त हुई है। मेरे साथ एक बार फिर बोलिए जय सियाराम। जय सियाराम। राम मंदिर को आजादी की लड़ाई से जोड़ा पीएम ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सबकुछ समर्पित कर दिया था। आजादी के लिए आंदोलन न चला हो ऐसा उस कालखंड में कभी नहीं रहा। 15 अगस्त का दिन उस अथाह तप के लाखों बलिदान का प्रतीक है। ठीक उसी तरह राम मंदिर के लिए कई-कई सदियों तक, कई-कई पीढ़ियों ने अखंड अविरल एक निष्ट प्रयास किया है। आज का ये दिन उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। इमारतें नष्ट हुईं लेकिन राम का अस्तित्व नहीं मिटा उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था तर्पण भी था। संघर्ष था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये सफल हो रहा है, मैं उन सब लोगों को 120 करोड़ देशवासियों की तरफ से सिर झुकाकर नमन करता हूं। गंगा वंदन करता हूं। संपूर्ण सृष्टि की शक्तियां राम जन्मभूमि के पवित्र आंदोलन से जुड़ा हर व्यक्ति पर जो जहां हैं, इस आयोजन को देख रहा है। वो भावविभोर है। सभी को आशीर्वाद दे रहा है। साथियो राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं। हमारे भीतर घुलमिल गए हैं। कोई काम करना हो तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। आप भगवान राम की अदभुत शक्ति देखिए। इमारते नष्ट हो गईं, क्या कुछ नहीं हुआ अस्तित्व मिटाने का हर कोई प्रयास हुआ। बहुत हुआ। लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हुए हैं। हमारी संस्कृति के आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। इसी आलोक में अयोध्या मे राम जन्मभूमि पर श्रीराम के इस भव्य, दिव्य मंदिर के लिए आज भूमि पूजन हुआ है। मंदिर निर्माण से अयोध्या का बदलेगा अर्थतंत्र पीएम ने कहा यहां आने से पहले मैंने हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। राम के सब काम हनुमान ही तो करते हैं। राम के आदर्शों की कलयुग में रक्षा की जिम्मेदारी हनुमान की है। उन्हीं के आशीर्वाद से राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ। राम मंदिर आधुनिक समय का प्रतीक बनेगा। हमारी शाश्वस्त आस्था का प्रतीक बनेगा। हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा। ये मंदिर करोड़ों लोगोंं की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। ये मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आस्था, श्रद्धा और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की भव्यता ही नहीं बढ़ेगी बल्कि इश क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र बदल जाएगा। हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आजतक हमने पेश की मर्यादा पीएम ने कहा कि राम मंदिर की निर्णाण की प्रक्रिया राष्ट्र को जोड़ने का महोत्सव है। यह नर को नारायण से जोड़ने का उपक्रम है। आज का यह ऐतिहासिक पल युगो-युगों तक भारत की कीर्ति पताका फहराते रहेंगे। आज का यह दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यतता का प्रमाण है। यह न्यायप्रिय भारत की एक अनुपम भेट है।कोरोना से बनी स्थितियों के कारण भूमि पूजन का ये कार्यक्रम अनेक मर्यादाओं के बीच हो रहा है। श्रीराम के काम में जैसा मर्यादा पेश किया जाना चाहिए देश ने वैसा ही उदाहरण पेश किया है। इसी मर्यादा का अनुभव हमने तब भी किया जब सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। उस समय भी देशवासियों ने शांति के साथ सभी की भावनाओं का ख्याल करते हुए व्यवहार किया था। आज भी हम हर तरफ हम वही मर्यादा देख रहे हैं। वाकई, ये न भूतो, न भविष्यति उन्होंने कहा साथियो इस मंदिर के साथ सिर्फ नया इतिहास ही नहीं रचा जा रहा है बल्कि इतिहास भी खुद को दोहरा रहा है। आज देश भर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का यह पुण्य कार्य शुरू हुआ है। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर राम सेतु बनाया गया था। वैसे ही घर-घर, गांव-गांव से श्रद्धापूर्क पूजी शिलाएं यहां ऊर्जा का श्रोत बन गई है। देशभर के धामों, मंदिरों से लाई गई मिट्टी, नदियों का जल वहां के लोगों की भवानाएं यहां की अमोघ शक्ति बन गई है। वाकई ये न भूतो, न भविष्यति। भारत की आस्था, भारत के लोगों की सामूहिकता और इसकी अमोघ शक्ति पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का विषय है। मोदी ने राम का यशगान किया पीएम ने कहा कि श्रीराम को तेज में सूर्य के सामान, क्षमा में पृथ्वी के तुल्य, बुद्धि में बृहस्तपति के तुल्य, और यश में इंद्र के समान माना गया है। वह सत्य पर अडिग रहने वाले थे। श्रीराम संपूर्ण हैं। वह हजारों वर्षों से भारत के लिए प्रकाश स्तंभ बने हुए हैं। श्रीराम ने सामाजिक समरसता को शासन को आधारशिला बनाया। उन्होंने प्रजा से विश्वास प्राप्त किया। हर युग में राम, भारत की आस्था में राम मोदी ने कहा कि जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं है जहां हमारे राम प्रेरणा नहीं देते हों। भारत की आस्था में राम, आदर्शों में राम, दिव्यता में राम, दर्शन में राम हैं। जो राम मध्य युग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे। वही राम बापू के समय में अहिंसा के रूप में थे। भगवान बुद्ध भी राम से जुड़े हैं। सदियों से अयोध्या नगरी जैन धर्म की आस्था का केंद्र रहा है। राम सब जगह हैं। राम सबके हैं। चीन से ईरान तक राम का प्रसंग, कई देशों में रामायण पीएम ने कहा कि दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं। वहां के नागरिक खुद को राम से जुड़ा मानते हैं। विश्व की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया में है। वहां स्वर्णदीप रामायण, योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायण हैं। राम आज भी वहां पूजनीय हैं। कंबोडिया, लाओ मलेशिया जैसे देशों में भी कई तरह के रामायण है। ईरान और चीन में राम के प्रसंग तथा राम कथाओं का विवरण मिलेगा। श्रीलंका में रामायण की कथा जानकी हरण के नाम से सुनाई जाती है। नेपाल का राम से आत्मीय संबंधा माता जानकी से जुड़ा है। ऐसा ही दुनिया के न जाने कितने देश और कितने छोर हैं, जहां की आत्मा और अतीत में राम किसी न किसी रूप में रचे से हैं। थाईलैंड में भी रामायण है। राम मंदिर अनंतकाल तक मानवता की प्ररेणा देगा उन्होंने कहा कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही है। राम सबके है, राम सबमें हैं। राम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा। यहां निर्मित होने वाला राम मंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा। राम मंदिर का संदेश कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुंचे, कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन दृष्टि से विश्व परिचित हो। ये हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की विशेष जिम्मेदारी है। जहां भी राम चरण पड़े, वहां राम सर्किट का निर्माण किया जा रहा है। अयोध्या तो भगवान राम की अपनी नगरी है। अयोध्या की महिला तो खुद श्रीराम ने कही है।प्रभु राम ने कहा था मेरी जन्मभूमि अलौकिक शोभा की नगरी है। राम की शिक्षा, देश जितना ताकतवर उतनी ही शांति पीएम ने कहा कि हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि यानी कि पूरी पृथ्वी पर श्रीराम के जैसा नीतिवान शासक कभी हुआ ही नहीं है। कोई भी दुखी न हो यह उनकी शिक्षा है। सामाजिक संदेश है, नर, नारी सभी समान रूप से सुखी हो। भेदभाव नहीं। श्रीराम का निर्देश है, किसान, पशुपालक सभी हमेशा खुश रहें। श्रीराम का आदेश है, बुजुर्गों की बच्चों की, चिकित्सकों की सदैव रक्षा होनी चाहिए। जो शरण में आए उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। श्रीराम का संदेश है, अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। ये भी श्रीराम की नीति है, यानी भय के बिना प्यार नहीं हो सकता है। इसलिए हमारा देश जितना ताकतवार होगा उसती ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी। राम की यही रीति सदियों से भारत का मार्गदर्शन करती रही है। इसीलिए बापू ने देखा था रामराज्य का सपना पीएम ने कहा कि बापू ने भी इसी कारण रामराज्य का सपना देखा था। श्रीराम ने कहा था कि राम समय, स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से बोलते हैं, सोचते हैं और करते हैं। राम हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, समय के साथ चलना सिखाते हैं। राम परिवर्तन के पक्षधर हैं, राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। उनकी इन्हीं आदर्शों के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है। श्रीराम ने हमें कर्तव्यपालन की सीख दी है। विरोध से निकलकर बोध और शोध का मार्ग दिखाया है। हमें आपसी प्रेम और भाईचारे के जोड़ से राम मंदिर की इन शिलाओं को जोड़ना है। हमें ध्यान रखना है जब-जब मानवता ने राम को माना है विकास हुआ है। जब-जब हम भटके हैं विनाश के रास्ते खुले हैं। हमें सभी की भावनाओं का ध्यान रखना है। हमें सबके साथ से, सबके विश्वास से सबका विकास करना है। हमें आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। कोरोना में राम की मर्यादा का करना चाहिए पालन पीएम ने कहा कि कोरोना के कारण अभी जो हालात है उसमें श्रीराम की मर्यादा का पालन करना चाहिए। दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी। देश के लोगों को प्रभु राम, माता जानकी सबको सुखी रखे यही शुभकामना है। मेरे साथ पूरे भक्ति भाव से बोले, सियापति रामचंद्र की जय!
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2020 के ग्रैंड फिनाले (Grand Finale of Smart India Hackathon 2020) के प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए (PM Narendra Modi at Smart India Hackathon 2020) उन्होंने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान की सदी है और तेजी से बदली दुनिया में भारत को भी तेजी से बदलना होगा। उन्होंने नई शिक्षा नीति की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें पहले की कमियों को दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति नौकरी खोजने वालों के बजाय नौकरी देने वालों को बनाने पर जोर देती है। नई शिक्षा नीति में पहले की कमियों को दूर किया गया: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान की सदी है और इस दौरान सीखने पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती हुई दुनिया में भारत को अपनी वही प्रभावी भूमिका निभाने के लिए उतनी ही तेजी से बदलना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में पहले की कमियों को दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि अब अगर कोई मैथ और म्यूजिक की एक साथ पढ़ाई चाहता है तो वह ऐसा कर पाएगा। नई शिक्षा नीति से भारत की भाषाएं बढ़ेंगी: पीएम प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति से न सिर्फ भारत की भाषाएं बढ़ेंगी बल्कि दुनिया भी भारत की समृद्ध भाषाओं से परिचित होगी। उन्होंने कहा, 'अब एजुकेशन पॉलिसी में जो बदलाव लाए गए हैं, उससे भारत की भाषाएं आगे बढ़ेंगी, उनका और विकास होगा। ये भारत के ज्ञान को तो बढ़ाएंगी ही, भारत की एकता को भी बढ़ाएंगी। इससे विश्व का भी भारत की समृद्ध भाषाओं से परिचय होगा। और एक बहुत बड़ा लाभ ये होगा की विद्यार्थियों को अपने शुरुआती वर्षों में अपनी ही भाषा में सीखने को मिलेगा।' स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के प्रतिभागियों से रूबरू हुए पीएम मोदी संवाद के दौरान प्रतिभागी छात्रों ने अपने-अपने इनोवेटिव आइडियाज और तकनीकी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शेयर किया। पीएम ने भी प्रतिभागियों की हौसलाअफजाई की। प्रधानमंत्री से रूबरू होने पर स्टूडेंट भी काफी खुश दिखे। पहला स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2017 में शुरू किया गया था। इसे एचआरडी मिनिस्टिरी और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद संयुक्त रूप से आयोजित करती हैं। जब पीएम मोदी ने स्टूडेंट से पूछा- क्या कभी पुलिस से पड़ा है पाला इस दौरान पीएचडी कॉलेज ऑफ कोयंबटूर की टीम 'माइंड बेंडर्स' के एक प्रतिभागी कुंदन ने मशीन लर्निंग के इस्तेमाल वाली एक ऐसी तकनीक के बारे में पीएम मोदी को बताया जिससे पुलिसिंग में सुधार हो सकती है। प्रतिभागी ने बताया कि उनकी टीम एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रही है जिससे पुलिस को लोगों की समस्याओं को सही से समझने में आसानी होगी। पुलिस और लोगों के बीच का गैप पटेगा। लोगों में पुलिस का जो डर है बह खत्म होगा। इस दौरान बहुत रोचक संवाद भी हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंदन नाम के उस स्टूडेंट से पूछा कि क्या आपको पुलिस के पास कभी जाना पड़ा है तो स्टूडेंट ने जवाब दिया कि हां, एक बार मोबाइल खोने के सिलसिले में उसे पुलिस के पास जाना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिसिंग में ह्यूमन टच बहुत जरूरी है। इसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का बहुत बड़ा रोल हो सकता है। उन्होंने स्टूडेंट को इससे जुड़े इनोवेशन को सफल बनाने के लिए शुभकामना भी दी। हेल्थ केयर में डेटा ड्रिवेन सलूशन से हो रहा बड़ा बदलाव: पीएम मोदी गोविंद नाम के एक प्रतिभागी ने हेल्थ केयर से जुड़े अपने नवाचार के बारे में पीएम को बताया। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि हेल्थ केयर में डेटा ड्रिवेन सलूशन से बहुत बड़ा बदलाव हो रहा है। इस वजह से गरीब से गरीब तक, दूर-दूर के गांवों तक एक किफायती और विश्वस्तरीय सेवा पहुंचा सकते हैं। हमारे लिए यही एक सबसे बड़ा माध्यम है। आयुष्मान भारत की तरह यह प्रयास भी बहुत सफल होगा। गांव के हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटरों को बड़े अस्पतालों से जोड़ने का भारत में काम चल रहा है। आप जैसे इनोवेटर जिस दिशा में काम कर रहे हैं, आप इसे बहुत गति दे सकते हैं। प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों को बच्‍चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी तरह के अलर्ट सिस्‍टम के बनाए जाने को लेकर प्रेरित किया। उन्होंने पूछा कि क्‍या यह स्‍कूल बस, ऑटो, कैब को पुलिस कंट्रोल रूम के साथ रियल टाइम कनेक्‍ट हो सकता है।
लखनऊ, 31 जुलाई 2020,अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से हो रही है. कार्यक्रम से पहले अयोध्या को सजाने का कार्य जारी है. भूमिपूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचेंगे. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी 11 बजकर 15 मिनट पर अयोध्या पहुंचेंगे. वह दो घंटे से ज्यादा समय यहां पर रहेंगे. पीएम मोदी दोपहर 2 बजे अयोध्या से रवाना हो जाएंगे. अयोध्या पहुंचने पर पीएम मोदी सबसे पहले हनुमानगढ़ी जाएंगे और वहां पर दर्शन करेंगे. इसके बाद पीएम रामलला का दर्शन करेंगे, जिसके बाद भूमिपूजन का कार्यक्रम होगा. अयोध्या में मंच की व्यवस्था भी फाइनल कर दी गई है. सिर्फ 5 लोग ही मंच पर रहेंगे. प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, और मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास मंच पर मौजूद रहेंगे. ये सभी फैसले शुक्रवार को अयोध्या के मानस मंदिर में हुई अधिकारियों की मीटिंग में लिए गए. बैठक में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया. मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा और मंदिर के कार्यक्रम की व्यवस्था का जायजा भी लिया. भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने वाले 200 मेहमानों को न्योता भेजा गया है. इसकी लिस्ट ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी है. कोरोना के कारण भूमिपूजन कार्यक्रम के लिए अधिक लोगों को न्योता नहीं भेजा गया है. सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है. भेंट की जाएगी कोदंड राम की प्रतिमा अयोध्या यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लकड़ी की बनी दुर्लभ डेढ़ फुट की कोदंड राम और एक फुट की लव-कुश की प्रतिमा भेंट की जाएगी. दरअसल, भगवान श्रीराम के धनुष को कोदंड के रूप में जाना जाता है. जब वह सीताजी की खोज में दक्षिण भारत पहुंचे थे तो उनके हाथ में उस वक्त कोदंड धनुष था. 3 अगस्त से शुरू हो जाएगा उत्सव राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन 5 अगस्त को होना है, लेकिन इसके दो दिन पहले यानी 3 अगस्त से ही अयोध्या में उत्सव शुरू हो जाएगा. प्रशासन की ओर से शहर में लाखों दीए जलाए जाएंगे. साथ ही आम लोगों से अपील की जाएगी कि वो अपने घरों के बाहर दीए जलाएं.
नई दिल्ली 30 जुलाई 2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवि‍न्‍द जुगनाथ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक बिल्डिंग का उद्घाटन किया. इस वर्चुअल कार्यक्रम में पीएम मोदी ने मॉरीशस के साथ साझेदारी की अहमियत को जाहिर करते हुए पड़ोसी देशों को आगाह भी किया. पीएम मोदी ने इसके बाद बिना किसी देश का नाम लिए कहा, "अगर विकास की खोज में गलत रणनीतियां या गलत पार्टनर चुने जाते हैं तो वैश्विक महाशक्तियों का ब्लॉक बन जाएगा. इतिहास ने हमें सिखाया है कि विकास के नाम पर हुई साझेदारियों ने कई देशों को निर्भर होने पर मजबूर कर दिया. इससे औपनिवेशिक और साम्राज्यवादी शासन को उभार मिला. विश्व में कई देशों का दबदबा बन गया." पीएम मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ दूसरे देशों के विकास में उनकी मदद करना चाहता है. भारत का विकास मानवता केंद्रित है. भारत विकास कार्यों के लिए जिन देशों के साथ साझेदारी कर रहा है, वो सम्मान, विविधता, भविष्य की चिंता और सतत विकास के मूल्यों पर आधारित है. भारत के मूल सिद्धांतों में से एक है कि वह अपने पार्टनर का सम्मान करता है. हमारा सहयोग किसी शर्त के साथ नहीं आता है और ना ही किसी राजनीतिक और आर्थिक हित से प्रेरित होता है. पीएम मोदी का ये संदेश नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को चीन को लेकर आगाह करने के तौर पर देखा जा रहा है. श्रीलंका और नेपाल विकास परियोजनाओं के नाम पर चीन से भारी-भरकम कर्ज ले रहे हैं. पिछले कुछ वक्त में नेपाल का भी चीन के प्रति झुकाव बढ़ा है जबकि भारत से सीमा विवाद को लेकर मनमुटाव बढ़ रहा है. भारत से चल रहे सीमा तनाव के बीच चीन ने नेपाल में 30 करोड़ डॉलर की रेल परियोजना पर काम तेज कर दिया है. रणनीतिक रूप से अहम ये रेलवे लाइन ल्हासा से काठमांडू तक जाएगी और फिर भारत-नेपाल सीमा के नजदीक लुम्बिनी से भी इसे जोड़ा जाएगा. हालांकि, अभी से इस परियोजना की लागत को चिंता जताई जा रही है. चीन के कर्ज को लेकर हमेशा से विश्लेषक आशंका जाहिर करते रहे हैं कि वह आर्थिक मदद के जरिए कई देशों की रणनीतिक पूंजियों पर कब्जा जमा लेता है. दिसंबर 2017 में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने चीन के कर्ज के जाल में फंसकर हंबनटोटा बंदरगाह और इसके आस-पास की 15000 एकड़ जमीन 99 सालों के लिए चीन को सौंप दी थी. उस वक्त श्रीलंका की सरकार ने अपने इस कदम का यह कहकर बचाव किया था कि वह बंदरगाह को बनाने के दौरान लिए गए चीनी कर्ज को चुका नहीं सकी इसलिए उसके पास कोई और रास्ता नहीं बचा था. इसके बावजूद, वह श्रीलंका से कर्ज लेना नहीं छोड़ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 13 मई को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे की बीच बातचीत हुई थी. चीन श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज देने के लिए तैयार है ताकि वो अपनी माली हालत सुधार सके. श्रीलंका भारत से कर्ज अदायगी की मोहलत बढ़ाने के लिए अपील कर रहा है हालांकि, अभी तक इसे लेकर कोई फैसला नहीं किया जा सका है. हाल ही में, चीन ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल के साथ एक वर्चुअल बैठक की और कहा कि वे कोरोना महामारी में साझी लड़ाई के अलावा चीन की बेल्ट ऐंड रोड परियोजना पर भी सहयोग बढ़ाएं. चीन ने अपनी और पाकिस्तान की आर्थिक साझेदारी की मिसाल देते हुए अफगानिस्तान और नेपाल को भी इसी रास्ते पर चलने की सलाह दी थी. इस बैठक को दक्षिण एशिया में चीन की सक्रिय भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है. जाहिर है कि इससे भारत की चिंताएं बढ़ेंगी. इन चुनौतियों को समझते हुए भारत केवल मॉरीशस ही नहीं बल्कि मालदीव्स और श्रीलंका के साथ भी आर्थिक सहयोग को नए आयाम देने की कोशिश कर रहा है. मालदीव्स के साथ पुलिस, न्याय, पुलिस, कस्टम और स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में 18 समझौते हुए हैं. दिसंबर 2018 में मालदीव्स के राष्ट्रपति सोली ने जब भारत की यात्रा की थी तो 1.4 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया था, उसे तेजी से पूरा किया जा रहा है. पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अफगानिस्तान, मालदीव्स, नेपाल और श्रीलंका में किए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा कि हमने नेपाल में आपातकालीन और ट्रामा हॉस्पिटल निर्माण के जरिए वहां की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने में मदद की है. वहीं, श्रीलंका को नौ प्रांतों में आपातकालीन एंबुलेंस सर्विस उपलब्ध कराई. पीएम मोदी ने नेपाल में ऑयल पाइपलाइन प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया और कहा कि इससे नेपाल में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता सुलभ होगी. भारत नेपाल में कई रेलवे लाइन बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है.
1990 के शुरुआती दिनों में जब लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने पद यात्रा का प्रस्ताव रखा तो पार्टी के तत्कालीन महासचिव प्रमोद महाजन (Pramod Mahajan) ने उन्हें पद यात्रा की जगह रथ यात्रा करने का सुझाव दिया। फिर 12 सितंबर, 2019 को बीजेपी महासचिवों की मीटिंग के बाद आडवाणी ने तब दिल्ली के 11 अशोक रोड पर स्थित बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और 12 दिन बाद यानी 25 सितंबर से गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक 10 हजार किमी लंबी रथ यात्रा (Somnath to Ayodhya Rath Yatra) की घोषणा कर दी। 25 सितंबर, 1990 से जुड़ा मोदी और अयोध्या का कनेक्शन 25 सितंबर, 1990 को आडवाणी सोमनाथ पहुंचते, उससे पहले एक टोयोटा ट्रक को भगवा रंग के एक रथ में तब्दील किया जा चुका था। 25 सितंबर को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद आडवाणी ने यात्रा शुरू कर दी। उस दिन ईद का त्योहार होने के कारण छुट्टी थी। इस मौके पर इतनी भीड़ जुटी कि पूरे वातावरण में उनके नारे ही गूंजने लगे। रथ यात्रा में आडवाणी के साथ मोदी महिलाएं अपने हाथों से सोने के कंगन उतार कर दान में देनें लगीं। पुरुष आडवाणी को तलवार, छड़ी के साथ तरह-तरह के सामान भेंट करने लगे। रथ आगे बढ़ा तो आडवाणी के अगल-बगल जो दो लोग तैनात दिखे, उनमें एक थे प्रमोद महाजन (Pramod Mahajan) और दूसरे गुजरात बीजेपी के तत्कालीन सांगठनिक सचिव नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)। मोदी के लिए बड़ा दिन 5 अगस्त, 2020 तब से करीब-करीब 29 साल 11 महीने बाद नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री राम मंदिर भूमि पूजन (Ram Mandhir Bhoomi Pujan) करने वाले हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण (Ram Temple in Ayodhya) 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। स्वाभाविक है कि इसका उद्घाटन भी प्रधानमंत्री ही करेंगे। संभव है कि 2024 के लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha Election) से ठीक पहले राम मंदिर उद्घाटन (Ram Temple Inauguration) का भव्य समारोह आयोजित किया जाए। 2009 में भी फैजाबाद पहुंचे थे मोदी 2009 में मोदी ने अयोध्या से सटे फैजाबाद में चुना प्रचार करने गए थे। तब लोकसभा चुनाव में आडवाणी बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे। मोदी मतदाताओं को रिझाने में सफल नहीं हो पाए थे और अयोध्या/फैजाबाद की सीट कांग्रेस ने जीत ली थी। राम राज्य की बात, राम मंदिर की नहीं 2014 में फैजाबाद में चुनाव प्रचार (Modi Rally in Faizabad) के दौरान मोदी के पीछे तीर-धनुष लिए भगवान राम की विशाल तस्वीर लगी हुई थी। मोदी ने अपने भाषण में राम राज्य (Ram Rajya) की बात की, राम मंदिर (Ram Mandir) पर कुछ नहीं बोले। 2019 में अयोध्या के पास की थी रैली 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी फिर फैजाबाद पहुंचे। उन्होंने अयोध्या में एक भी रैली नहीं की। प्रधानमंत्री के तौर पर अयोध्या इलाके में उनकी पहली सभा मई 2019 में अयोध्या-आंबेडकर नगर सीमा पर स्थित छोटे से शहर रामपुर माया में हुई थी। अयोध्या में रामजन्मभूमि से मुश्किल से 25 किमी दूर। 29 साल पहले मोदी ने कहा था- मैं वापस आऊंगा आज से ठीक 29 साल पहले राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1991 में उन्होंने एक फोटोग्राफर से बात करते हुए कहा था कि जिस दिन राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा, वह वापस आएंगे। सोशल मीडिया पर 1991 की मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की वायरल हो रही तस्वीर (Viarl Pic of Narendra Modi and Murli Manohar Joshi) को खींचने वाले फोटोग्राफर महेंद्र त्रिपाठी ने यह खुलासा किया। त्रिपाठी उस दिन को याद करते हुए बताते हैं, ' मोदी बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ अप्रैल 1991 में अयोध्या आए थे और उन्होंने विवादित क्षेत्र का दौरा किया था।' 5 अगस्त ही वह दिन है जब मोदी अयोध्या वापस आने का वादा पूरा करने वाले हैं। वो दिन निकट है...
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में से एक राफेल की लैंडिंग भारत में हो गई है. सोमवार को फ्रांस से उड़ान भरने के बाद 5 राफेल विमानों ने बुधवार को अंबाला एयरबेस पर लैंडिंग की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर राफेल विमानों का स्वागत किया. खास बात ये है कि पीएम मोदी ने राफेल विमानों का स्वागत संस्कृत श्लोक से किया. पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, '' राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्,राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। नभः स्पृशं दीप्तम्...स्वागतम्'' इसका मतलब है कि राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं, राष्ट्र रक्षा के समान कोई व्रत नहीं, राष्ट्र रक्षा के समान कोई यज्ञ नहीं. बता दें कि नभः स्पृशं दीप्तम् भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है. ‘नभ:स्‍पृशं दीप्‍तमनेकवर्ण व्‍यात्ताननं दीप्‍तविशालनेत्रम्। दृष्‍ट्वा हि त्‍वां प्रव्‍यथ‍ितान्‍तरात्‍मा धृतिं न विन्‍दामि शमं च विष्‍णो।।’ इसका मतलब है कि ‘हे विष्णो, आकाश को स्पर्श करने वाले, देदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाए हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अन्तःकरण वाला मैं धीरज और शांति नहीं पाता हूं.’ पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में जो बातें कही हैं इसका जिक्र उन्होंने एक भाषण में भी किया था. प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र रक्षा समं पुण्यं, राष्ट्र रक्षा समं व्रतम, राष्ट्र रक्षा समं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। जिसका मतलब है कि मैं राष्ट्र रक्षा जैसा न तो कोई पुण्य देखता हूं, ना ही राष्ट्र रक्षा जैसा कोई व्रत, ना ही राष्ट्र रक्षा जैसा कोई यज्ञ देखता हूं. रक्षा मंत्री ने भी किया स्वागत इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राफेल विमानों का स्वागित किया. राजनाथ सिंह ने लिखा कि नई चिड़िया अंबाला में लैंड कर गई हैं. राफेल विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों को हर तरह से पूरा करते हैं.उन्होंने कहा कि इन विमानों को लेकर जो आरोप लगाए गए थे, उनका पहले ही जवाब दे दिया गया है. राफेल लड़ाकू विमान एक नए युग की शुरुआत हैं.
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,पिछले छह साल से ज्यादा समय से केंद्र की सत्ता पर आसीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पिछले छह महीने अच्छे नहीं रहे. चीन के साथ बॉर्डर पर तनातनी जारी है जिसमें हमने अपने कुछ जांबाज भी खो दिए हैं. कोरोना के आंकड़े हर रोज 50 हजार की रफ्तार से बढ़ रहे हैं और अर्थव्यवस्था तबाही के मुहाने पर है. विपक्ष हमलावर है, खासकर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक के बाद एक ट्वीट के जरिए सरकार का सिरदर्द बढ़ा रहे हैं. आपदा के इन हालात में ये हफ्ता मोदी के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. ऐसा अवसर जब वो शक्तिशाली और गौरवशाली भारत के लिए हुंकार भरते दिखेंगे और विपक्ष की आवाज नक्कारखाने की तूती साबित होगी. शक्तिशाली भारत अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर फ्रांस से खरीदे गए फाइटर प्लेन राफेल का पांच विमानों का बेड़ा आज लैंड कर गया है. सालों से चल रही लंबी खरीद प्रक्रिया जब फाइलों में फंसती दिख रही थी तब पीएम मोदी ने खुद पहल की और डील को फाइनल कराकर राफेल की जल्द डिलीवरी सुनिश्चित कराई. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर पीएम को घेरता आ रहा है लेकिन रक्षा के जानकार जानते हैं कि राफेल का भारत में आना भारतीय वायुसेना की ताकत को किस कदर बढ़ाएगा और दुश्मन देशों पर भारतीय सेना को कैसे बढ़त दिलाएगा. ये मोदी के उस शक्तिशाली भारत की तस्वीर है जिसका सपना वो 2014 के चुनाव से पहले से देश की जनता को दिखा रहे हैं. बताया जाता है कि पीएम मोदी खुद इन विमानों के सेना में शामिल होने के औपचारिक समारोह में शामिल हो सकते हैं. तारीखें तय की जा रही हैं. गौरवशाली भारत दूसरी ओर अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए पांच अगस्त को भूमि पूजन किया जाना है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे. भव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना बीजेपी तीन दशकों से दिखा रही है लेकिन लोगों को इसे लेकर सबसे ज्यादा भरोसा उस समय जगा जब मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने. राम मंदिर का रास्ता भले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हुआ हो लेकिन बीजेपी समर्थक इसके श्रेय के सवाल पर ‘मोदी है तो मुमकिन है’ ही कहते आ रहे हैं. 5 अगस्त की दोपहर जब प्रधानमंत्री मंदिर का भूमि पूजन करेंगे तो ये सिर्फ मंदिर निर्माण की ही शुरुआत नहीं होगी बल्कि गौरवशाली भारत की उस इमारत की नींव भी रखी जाएगी जिसका सपना मोदी दिखाते आए हैं. ये दोनों ही मुद्दे ऐसे रहे हैं जिनमें मोदी सरकार विपक्ष को पस्त कर चुकी है. राफेल पर चौकीदार चोर है का कांग्रेसी नारा आम चुनाव में टांय-टांस फुस्स हो गया. राम मंदिर आंदोलन को लेकर बीजेपी पर तमाम आरोप लगे लेकिन अब मंदिर निर्माण से पार्टी ने साबित कर दिया है कि उसकी राजनीति सही दिशा में थी. नतीजा ये है कि न तो राफेल और न राम मंदिर पर विपक्ष कुछ बोलने की स्थिति में है. देश को शक्तिशाली बनाने के लिए शिक्षा, रोजगार चाहिए वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर कहते हैं कि मौजूदा समय में मोदी सरकार अर्थव्यवस्था से लेकर चीन तक के मुद्दे पर घिरी हुई है. पिछले 6 साल में जब-जब सरकार घिरी है तब-तब मोदी ने भावनात्मक मुद्दों को ढाल बनाकर जबर्दस्त वापसी की है. राफेल और भूमि पूजन के जरिए निश्चित तौर पर पीएम मोदी विपक्ष के सवालों को फिलहाल बेअसर कर देंगे, लेकिन ये बहुत दिन तक नहीं चलेगा, क्योंकि विपक्ष के मुद्दे वास्तविक और लोगों से जुड़े हुए मुद्दे हैं. शकील अख्तर कहते हैं कि पिछले एक साल में मोदी ने 370, तीन तलाक, सीएए और राममंदिर जैसे अहम मुद्दे को हल करने का काम किया है. मोदी अपनी राजनीति के शिखर पर हैं, लेकिन अगले चार साल में उन्हें देश को वास्तविक रूप से शक्तिशाली और गौरवशाली बनाने की दिशा में काम करना होगा. प्रतीकात्मक राजनीति से सियासी फायदा तो मिलेगा लेकिन देश को शक्तिशाली बनाने के लिए शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती देनी होगी. विपक्ष सोचे उसके मुद्दों को क्यों नहीं मिल रही अहमियत? वहीं, वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश कहते हैं कि राफेल की डिलीवरी पहले से तय थी और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राम मंदिर का निर्माण भी होना ही था. यह इत्तेफाक है कि राफेल और भूमि पूजन की तारीख एक सप्ताह के अंदर पड़ गई. केजी सुरेश इंदिरा गांधी की याद दिलाते हुए कहते हैं कि 1982 में देश में एशियाई खेल होने थे. इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. पत्रकारों ने इंदिरा गांधी ने पूछा था कि देश में गरीबी और अशिक्षा के बीच एशियाड कराना कितना ठीक है? इस पर इंदिरा गांधी ने जवाब देते हुए कहा था कि क्या खेलकूद बंद कर देना चाहिए. जीवन धारा प्रवाह चलता रहता है. के जी सुरेश कहते हैं कि देश की सीमा पर आज दोनों ओर से खतरे हैं और ऐसे में राफेल डिलीवरी राष्ट्र के लिए गौरव की बात है. कोर्ट का फैसला आने के बाद राममंदिर का निर्माण शुरू होना देश के लिए गौरव की बात है. इसका राजनीतिक फायदा कितना और किसे होगा ये बात मायने नहीं रखती. विपक्ष की जहां तक बात है यह उसे समझना होगा कि जिन मुद्दों को वह उठा रहा है उसे क्यों अहमियत नहीं मिल रही है.
नई दिल्ली बरसों से जिस ताकतवर लड़ाकू विमान राफेल का इंतजार हो रहा था, आज दोपहर बाद पांच फाइटर जेट ने अंबाला के एयरबेस पर गरजते हुए लैंडिंग की। इसके फौरन बाद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को जानकारी दी कि फाइटर्स अंबाला में सुरक्षित तरीके से लैंड कर चुके हैं। उन्होंने ट्वीट किया, 'भारत में राफेल लड़ाकू विमानों का पहुंचना हमारे सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है। यह मल्टीरोल एयरक्राफ्ट निश्चित ही हमारी वायुसेना की ताकत को बढ़ाएंगे।' राजनाथ ने दो टूक कहा कि अब किसी को अगर भारतीय वायुसेना की ताकत को लेकर चिंता करना चाहिए तो उन्हें जो हमारी क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालना चाहते हैं। राजनाथ सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 'मैं भारतीय वायुसेना को बधाई देता हूं। मुझे यकीन है कि 17 स्क्वॉड्रन, गोल्डन एरो अपने मिशन पर काम करता रहेगा। मुझे बेहद खुशी है कि IAF की युद्धक क्षमता में समय पर बढ़ोतरी हुई है।' आपको बता दें कि भारत में राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप ऐसे समय में पहुंची है, जब पूर्वी लद्दाख में करीब तीन महीने से चीन के सैनिकों के साथ तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। पीएम के बड़े फैसले के लिए दिया धन्यवाद रक्षा मंत्री ने राफेल के अंबाला में लैंडिंग का वीडियो भी शेयर किया है। राजनाथ ने कहा कि राफेल जेट खरीदे गए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के साथ सरकारी समझौता के माध्यम से इन विमानों को हासिल करने का सही फैसला लिया। इससे पहले लंबे समय से खरीद प्रक्रिया अटकी हुई थी। रक्षा मंत्री ने लिखा, 'मैं उन्हें (पीएम मोदी) साहसिक फैसले के लिए धन्यवाद देता हूं' उन्होंने आगे कहा कि कोरोना महामारी के चलते पैदा हुई तमाम बाधाओं के बावजूद मैं एयरक्राफ्ट और उसके हथियारों की समय पर डिलिवरी के लिए फ्रेंच सरकार, दसॉ एविएशन और अन्य फ्रेंच कंपनियों को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने कहा कि इस एयरक्राफ्ट का प्रदर्शन बहुत ही शानदार है और इसके हथियार, रेडार और अन्य सेंसर तथा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर संबंधित क्षमताएं दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक हैं। भारत में इनके आने से IAF और ताकतवर होगी और हमारे देश के सामने मौजूद किसी भी चुनौती से निपटने में ज्यादा सक्षम बनेगी। राजनाथ का विपक्ष पर भी अटैक उन्होंने आगे यह भी कहा कि राफेल जेट को खरीदा गया क्योंकि वे IAF की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर पा रहे थे। खरीद के खिलाफ लगाए गए आधारहीन आरोपों का पहले ही जवाब दिया जा चुका है। आपको बता दें कि राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाए थे।
राम मंदिर भूमि पूजन: चांदी की 22.6 किलो की ईंट, जिससे मंदिर की नींव रखेंगे पीएम मोदीराम मंदिर के भूमिपूजन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, हलचल बढ़ती जा रही है। देशभर मे मंदिर निर्माण में सहयोग देने की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। भूमि पूजन के लिए पवित्र नदियों का जल और तीर्थ स्थलों की पवित्र मिट्टी लाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास करेंगे। आइए आपको बताते हैं कि मंदिर निर्माण के लिए क्या-क्या तैयारियां की जा रही हैं- चांदी की ईंट से होगा शिलान्यास 5 अगस्त को भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी चांदी की ईंट से मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास करेंगे। यह चांदी की ईंट अयोध्या पहुंच गई है। यह शुद्ध चांदी की 22.6 किलोग्राम वजनी ईंट है। जन्मभूमि के नीचे नहीं रखा जाएगा टाइम कैप्सूलः ट्रस्ट राम मंदिर निर्माण की नींव में टाइम कैप्सूल रखने की बात को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खारिज किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया, 'राम मंदिर निर्माण स्थल पर जमीन के नीचे टाइम कैप्सूल रखे जाने की रिपोर्ट गलत है। इस तरह की अफवाह पर यकीन न करें।' टाइम कैप्सूल को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय ने दी सफाई रत्नजड़ित पोशाक पहनेंगे भगवान राम भगवान राम, उनके भाई-लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न 5 अगस्त को राम मंदिर के ‘भूमिपूजन’ के अवसर पर रत्नजड़ित पोशाक पहनेंगे। रामदल सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्की राम ने भगवान की मूर्तियों पर ये पोशाक पहनाएंगे। इन पोशाकों पर नौ तरह के रत्न लगाए गए हैं। भगवान के लिए वस्त्र सिलने का काम करने वाले भगवत प्रसाद ने कहा कि भगवान राम हरे रंग की पोशाक पहनेंगे। भूमिपूजन बुधवार को होना है और इस दिन का रंग हरा होता है। अयोध्या भेजा रहा मिट्टी और जल पूरे देश के राम भक्तों को कार्यक्रम से जोड़ने के लिए उनके इलाके के मठ-मंदिरों की मिट्टी व नदियों, धार्मिक महत्व कुंडों का पवित्र जल अयोध्या पहुंचाया जा रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के मुताबिक, कोरोना संकट के कारण श्रद्धालु खुद तो नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन स्पीड पोस्ट के जरिए नदियों का जल और पवित्र स्थलों की मिट्टी के पैकेट अयोध्या ट्रस्ट को भेजे जा रहे हैं। प्रभु राम की ससुराल में मंदिर निर्माण का उत्साह बिहार से 500 पैकेट आए हैं। बिहार के लोग प्रभु राम को अपना जमाई मानते हैं इसलिए वे मंदिर निर्माण के लिए विशेष तौर पर उत्साहित हैं। छत्तीसगढ़ के वनवासी समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में अपने मंदिरों की मिट्टी और नदियों का जल अयोध्या पहुंचा रहे हैं। ट्रस्ट की बैठक में देशभर की नदियों का जल और मिट्टी मंगवाकर मंदिर की नींव डालने के कार्यक्रम में मुहर लगी थी। बदरीनाथ की मिट्टी और अलकनंदा का जल उत्तराखंड के बदरीनाथ से मिट्टी और अलकनंदा नदी से जल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भेजा गया। यहां से विश्व हिंदू परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल मिट्टी और जल लेकर अयोध्या के लिए सोमवार को रवाना हुआ। सिर्फ पत्थरों से होगा मंदिर का निर्माण अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण सिर्फ पत्थरों से किया जाएगा। राम मंदिर निर्माण के लिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर की वर्कशॉप के सुपरवाइजर अनुभाई सोमपुरा का कहना है कि मंदिर के निर्माण में अनोखी तकनीक और मशीनों का प्रयोग होगा। मंदिर निर्माण का उत्सव शुरू, सरयू तट पर जलाए गए 'दीप' भूमि पूजन से पहले ही अयोध्या में जश्न का माहौल है। सीएम योगी आदित्यनाथ के 4 और 5 को भव्य दीपावली मनाने की तैयारी पूरी है ,लेकिन श्रद्धालु आराध्य के मंदिर निर्माण की खुशी रोक नहीं पा रहे हैं। बीती देर शाम को राजस्थान के बीकानेर से आए लोगों ने सरयू तट पर आंजनेय सेवा संस्थान के नित्य सरयू आरती स्थल पर सैकड़ों की संख्या में दीप जलाए। दल के मुखिया श्याम सिंह के मुताबिक मंदिर निर्माण की खुशी में दर्जनों की संख्या में वे लोग आएं हैं। उन्होंने बताया उनकी कोशिश रहेगी कि इसी तरह प्रतिदिन 5 अगस्त तक दीप जलाकर खुशी मनाएं। मोरारी बापू दान करेंगे 5 करोड़ रुपये प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू ने मंदिर निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का दान करने का ऐलान किया है। भावनगर के तलगाजरडा में डिजिटल माध्यम से मोरारी बापू ने अपनी व्यासपीठ से राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये के दान की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले राम जन्मभूमि के लिए 5 करोड़ रुपये यहां से भेजे जाएंगे, जो प्रभु श्री राम के चरण में एक तुलसीपत्र के रूप में भेंट होगी।' 487 करोड़ रुपये की योजनाओं का होगा शिलान्यास-लोकार्पण अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के आगाज के साथ ही कायाकल्प की भी तैयारी है। योगी सरकार ने अयोध्या के आधारभूत ढांचे, स्वरूप व विकास की तस्वीर बदलने की कार्ययोजना बनाई है। इसमें करीब 487 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। पीएम नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर भूमिपूजन के ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे। एलईडी स्क्रीन से देख सकेंगे लाइव टेलिकास्ट अयोध्या में भूमि पूजन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, 50 तरह के ब्लॉक बनाए जाएंगे। एक ब्लॉक कारसेवकों के लिए होगा, एक ब्लॉक ऐडवोकेट के लिए, एक ब्लॉक बिजनसमैन के लिए तो एक ब्लॉक मंत्रियों और आरएसएस के लोगों के लिए होगा। प्रमुख इमारतों और मंदिरों में लाइट और दीये जलाए जाएंगे। जगह-जगह बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी जिसमें लोग कार्यक्रम का लाइव टेलिकास्ट देख सकेंगे।
नई दिल्ली उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध और अपराधियों पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। एक अपराधी जिसपर 8 आपराधिक मामले दर्ज थे उसको सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि तुम खतरनाक आदमी हो, तुम्हें जमानत नहीं मिल सकती। सुप्रीम कोर्ट ने विकास दुबे का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधियों को मिल रही जमानत पर यूपी सरकार अभी भी परेशान है। आगे कहा कि विकास दुबे जो जमानत पर ही बाहर था उसने क्या किया वह सबने देखा। तुम खतरनाक आदमी हो सुप्रीम कोर्ट में एक अपराधी जिसपर 8 मामले दर्ज थे उसने जमानत की अर्जी लगाई। उसे कोर्ट ने जमानत नहीं दी और कहा कि तुम एक खतरनाक आदमी हो तुम्हें जमानत नही दी जा सकती। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा ऐसे व्यक्ति को रिहा करने में खतरे है जिनके खिलाफ कई आपराधिक मामले हैं। आया विकास दुबे का जिक्र इसके बाद कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध का जिक्र किया। कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों को मिल रही जमानत से राज्य सरकार भी तंग है। फिर विकास दुबे का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि 64 आपराधिक मामलों वाले एक अपराधी ( विकास दुबे) को जमानत पर रिहा किया गया था जिससे सबने देखा क्या हुआ।
नई दिल्‍ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार शाम देश के तीन प्रमुख शहरों में वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए कोरोना हाईटेक टेस्टिंग सेंटरों का उद्घाटन किया। पीएम मोदी का कहना था कि नोएडा, मुंबई और कोलकाता में बनी ये हाईटेक लैब न केवल कोरोना से बल्कि दूसरी बीमारियों के खिलाफ जंग में भी मददगार साबित होंगी। पीएम ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक कोरोना की असरदार वैक्‍सीन बनाने पर तेजी से काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, 'दिल्‍ली-एनसीआर, मुंबई और कोलकाता आर्थिक गतिविधियों के सेंटर हैं। यहां देश के लाखों युवा अपने करियर, अपने सपनों को पूरा करने आते हैं। अब तीनों जगह टेस्‍ट की उपलब्‍ध क्षमता में 10 हजार टेस्‍ट की क्षमता और जुड़ने जा ही है।'दूसरी बीमारियों के इलाज में भी मददगार इन क्षेत्रों में हाईटेक लैब की स्‍थापना पर मोदी ने कहा, 'अब इन शहरों में टेस्‍ट ओर ज्‍यादा हो सकेंगे। ये हाईटैक लैब सिर्फ कोरोना तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और डेंगू सहित दूसरी बीमारियों के लिए भी यहां सुविधा उपलब्‍ध होगी।आज जिन कोरोना की हाइटेक टेस्टिंग लैब का उद्घाटन हुआ है उससे यूपी, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल को काफी फायदा होगा।' 'सही समय पर सही फैसले के नतीजे बेहतर' इन सेंटरों की स्‍थापना पर आईसीएमआर और दूसरी संस्‍थाओं के विशेषज्ञों केा बधाई देते हुए मोदी ने कहा, 'देश में जिस तरह सही समय पर सही फैसले लिए गए आज उसी का परिणाम है कि भारत अन्‍य देशों के मुकाबले काफी बेहतर हालत में। देश में कोरोना से होने वाली मौतें काफी काम हैं। वहीं रिकवरी रेट अन्‍य देशों के मुकाबले बहुत ज्‍यादा है और दिनोंदिन उसमें सुधार हो रहा है। भारतमें कोरोना से स्‍वस्‍थ होने वाले मरीजों की संख्‍या करीब 10 लाख पहुंचने वाली है।' देश में 11 लाख से ज्‍यादा आइसोलेशन बेड' मोदी का कहना था कि कोरोना के खिलाफ इस बड़ी और लंबी लड़ाई के लिए जरूरी था देश में तेजी के साथ कोरोना से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं तैयार हों। इसलिए केंद्र ने शुरू में ही 15 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था। इसी के कारण चाहे आइसोलेशन सेंटर हो, कोविड स्पेशल हॉस्पिटल हो, टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रैकिंग से जुड़ा नेटवर्क हो, भारत ने बहुत ही तेज़ गति से अपनी क्षमताओं का विस्तार किया। आज भारत में 11 हजार से ज्यादा कोविड फसिलिटिज हैं, 11 लाख से ज्यादा आइसोलेशन बेड हैं।' कोरोना महामारी के खिलाफ देश की उपलब्धियों को जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'जनवरी में हमारे पास कोरोना के टेस्ट के लिए जहां मात्र एक सेंटर था, आज करीब 1300 लैब्स पूरे देश में काम कर रही हैं। आज भारत में 5 लाख से ज्यादा टेस्ट हर रोज हो रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इसको 10 लाख प्रतिदिन करने की कोशिश हो रही है।' कोरोना के खिलाफ भारत की सक्‍सेस स्‍टोरी उन्‍होंने आगे कहा, 'कोरोना महामारी के दौरान हर कोई सिर्फ एक ही संकल्प के साथ जुटा है कि एक-एक भारतीय को बचाना है। इस संकल्प ने भारत को हैरतअंगेज परिणाम दिए हैं। विशेषकर पीपीई, मास्क और टेस्ट किट्स को लेकर भारत ने जो किया, वो एक बड़ी सक्‍सेस स्‍टोरी है।' 'सिर्फ 6 महीना पहले देश में एक भी पीपीई किट निर्माता नहीं था। आज 1200 से ज्यादा निर्माता हर रोज 5 लाख से ज्यादा पीपीई किट बना रहे हैं। एक समय भारत N-95 मास्क भी बाहर से ही मंगवाता था। आज भारत में 3 लाख से ज्यादा N-95 मास्क हर रोज बन रहे हैं।' तैयार हुआ देश में विशाल मानव संसाधन' एक और बड़ा चैलेंज था, कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए देश में मानव संसाधन को तैयार करना। जितने कम समय में हमारे पैरामेडिक्स, आशावर्कर्स, एएनएम, आंगनबाड़ी और दूसरे हेल्‍थ और नागरिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया, वह भी अभूतपूर्व है। संक्रमण के खिलाफ जनता को किया अलर्ट आने वाले त्‍यौहारों को लेकर मोदी बोले, 'आने वाले समय में बहुत से त्यौहार आने वाले हैं। हमारे ये उत्सव, उल्लास का कारण बनें, लोगों में संक्रमण न फैले इसके लिए हमें हर सावधानी रखनी है। हमें ये भी देखते रहना होगा कि उत्सव के इस समय में गरीब परिवारों को परेशानी ना हो।' 'जब तक वैक्‍सीन नहीं सोशल डिस्‍टेंसिंग जरूरी' उन्‍होंने आगे कहा, 'हमारे देश के Talented वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं। लेकिन जब तक कोई प्रभावी दवा या वेक्सीन नहीं बनती, तब तक मास्क, 2 गज़ की दूरी, Hand Sanitization ही हमारा विकल्प है।' मुख्‍यमंत्रियों ने जताया आभार यूपी, महाराष्‍ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्रियों ने इन हाईटेक कोरोना टेस्‍ट सेंटरों के खोले जाने पर पीएम मोदी को धन्‍यवाद दिया। यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने कोरोना के खिलाफ प्रधानमंत्री की लगतार कोशिशों के लिए कृतज्ञता जताते हुए कहा कि इन लैबों के बन जाने से कोरोना की जांच में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। महाराष्‍ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने मुश्किल समय में प्रधानमंत्री के सुदृढ़ नेतृत्‍व की तारीफ करते की। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने राज्‍यों के प्रति प्रधानमंत्री के सहयोगी रवैये की तारीफ की।
नई दिल्ली भारत अतीत की गलतियों के कारण विदेश नीति के क्षेत्र में अपना वो प्रभाव कायम करने में असफल रहा जिसका यह देश हकदार था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीन बड़ी गलतियों का हवाला देते हुए कहा कि अब भारत को विदेश नीति में धाक जमाने के लिए पराक्रम के साथ कड़ा संघर्ष करना पड़ा जो पहले आसानी से हो सकता था। जयशंकर ने बंटवारा, आर्थिक सुधार में देरी और परमाणु विकल्प संबंधी लंबी कवायद को विदेश नीति पर अतीत के तीन बड़े बोझ के रूप में पेश किया। 7 सितंबर को बाजार में आ जाएगी किताब पूर्व राजनयिक एवं विदेश मंत्री ने यह टिप्पणी अपनी नई पुस्तक 'द इंडिया वे : स्ट्रैटजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड' में की है। इस पुस्तक का विमोचन 7 सितंबर को होना है। जयशंकर ने इसमें भारत को पेश आने वाली चुनौतियों और संभावित नीतिगत प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि 2008 में वैश्विक आर्थिक संकट से लेकर 2020 की कोरोना वायरस महामारी की अवधि में विश्व व्यवस्था में वास्तविक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि विश्व व्यवस्था में भारत ऊपर जा रहा है, ऐसे में उसे अपने हितों को न सिर्फ स्पष्टता से देखना चाहिए बल्कि प्रभावी ढंग से संवाद भी करना चाहिए। जयशंकर ने गिनाए विदेश नीति पर अतीत के ये तीन बोझ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति अतीत के तीन बोझ ढो रही है। उन्होंने कहा, 'इसमें से एक 1947 का विभाजन है जिसने देश को जनसंख्या और राजनीतिक, दोनों के लिहाज से छोटा कर दिया। अनायास ही चीन को एशिया में अधिक सामरिक जगह दी गई। दूसरा, आर्थिक सुधार में देरी रही जो चीन के डेढ़ दशक बाद शुरू हुआ । यह 15 वर्षो का अंतर भारत को बड़ी प्रतिकूल स्थिति में रखे हुए हैं।' जयशंकर ने कहा कि तीसरा, परमाणु विकल्प संबंधी कवायद का लंबा होना रहा। 'इसके परिणामस्वरूप भारत को इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने के लिए पराक्रम के साथ संघर्ष करना पड़ा जो पूर्व में आसानी से किया जा सकता था।' विदेश नीति को लेकर उदासीन था अतीत का भारत? जयशंकर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिकतर दूसरे देशों के बारे में होते हैं लेकिन अनभिज्ञता या उदासीनता इसके प्रभावों को कम नहीं करती है। उन्होंने कहा, 'और इसलिए घटनाओं को अपने पर आने देने की बजाय इसका आकलन और विश्लेषण बेहतर है।' उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा कि विभिन्न स्तरों पर वर्षो तक अपने नेतृत्व के साथ संवाद करना इतना महत्वपूर्ण है कि इसे शब्दों में पिरोना कठिन है। इसमें बड़ी बातों में सामरिक लक्ष्यों को परिभाषित करने के महत्व, अधिकतम परिणाम को मान्यता देना और राजनीति एवं नीति की परस्पर क्रिया को सराहना शामिल है। जयशंकर ने अपनी पुस्तक को भारतीय के बीच एक ईमानदार संवाद को प्रोत्साहित करने वाली पहल बताया। प्रकाशक ने बताई पुस्तक की खासियत एक बयान में प्रकाशक हार्पर कॉलिंस इंडिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रकृति और नियम बदल रहे हैं और भारत के लिए इसका अर्थ अपने लक्ष्यों की बेहतरी के लिए सभी महत्वपूर्ण ताकतों के साथ अधिकतम संबंध बनाना है। इसमें कहा गया है कि 'जयशंकर ने इन चुनौतियों का विश्लेषण किया है और इसकी संभावित नीतिगत प्रतिक्रिया के बारे में बताया है। ऐसा करते हुए वे अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के साथ भारत के राष्ट्रीय हितों का संतुलन बनाने को काफी सचेत रहे।' इसमें कहा गया है कि जयशंकर ने पुस्तक में विचारों को इतिहास और पंरपराओं के परिप्रेक्ष्य में रखा जो फिर से उपयुक्त सभ्यतागत शक्ति के रूप में विश्व मंच पर स्थान हासिल करना चाहता है। प्रकाशक कृष्ण चोपड़ा ने कहा कि यह पुस्तक जटिल परदृश्य को स्पष्ट करती है और आगे की राह दिखाती है। इन पदों पर रह चुके हैं जयशंकर ध्यान रहे कि जयशंकर 2015-18 तक विदेश सचिव, 2013-15 तक अमेरिका में भारत के राजदूत, 2009-13 तक चीन में राजदूत, 2007-09 के दौरान सिंगापुर में उच्चायुक्त और 2000-04 के दौरान चेक गणराज्य में राजदूत रह चुके हैं। उन्होंने मॉस्को, वॉशिंगटन डीसी, कोलंबो, बुडापेस्ट और तोक्यो में भी राजनियक भूमिकाएं निभाईं। जयशंकर विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय में भी पदस्थापित थे। दो दिन पहले ही आनंद शर्मा ने साधा था निशाना याद रहे कि दो दिन पहले ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर दिशाहीन विदेश मंत्री करार देते हुए कई नसीहतें दे डाली थीं। शर्मा ने रविवार को जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा था कि बयानबाजी और ट्वीट्स से जमीनी हकीकत नहीं बदलते। विदेश नीति में गहराई होनी चाहिए। रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध गंभीरता की मांग करती है और इसे इवेंट मैनेजमेंट से संभाला नहीं जा सकता।
नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण की कोशिशों के बाद चीन पर रहा-सहा भरोसा भी खत्म हो चुका है। यही कारण है कि अब भारत चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के साधन दुरुस्त कर रहा है। इसी क्रम में देश में ही विकसित बेहद ताकतवर ड्रोन सेना को सौंपे जा रहे हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (DRDO) में निर्मित ड्रोन का नाम 'भारत' दिया गया है जो ऊंचाई वाले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों की निगरानी में अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन करता है। यही वजह है कि भारत ड्रोन को पूर्वी लद्दाख के पास एलएसी पर ही निगरानी के लिए रखा जा रहा है। रेडार की पकड़ से बाहर रक्षा सूत्रों ने कहा, 'पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच भारतीय सेना को सटीक निगरानी के लिए ड्रोनों की जरूरत है। इसे पूरा करने के लिए डीआरडीओ ने सेना को भारत ड्रोन्स दिए हैं।' यह ड्रोन इस तरकीब से बनाया गया है कि इसे रेडार की पकड़ में लाना असंभव है। दुनिया के सबसे चालाक ड्रोनों में एक भारत ड्रोन डीआरडीओ के चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला में विकसित किए गए हैं। अब इस इन ड्रोनों को लिस्ट करवाने की योजना है। डीआरडीओ के सूत्रों ने कहा, 'भारत सीरीज के ड्रोनों को दुनिया के सबसे चालाक, मुस्तैद, फुर्तीला और हल्के सर्विलांस ड्रोन के रूप में लिस्ट करवाया जा सकता है। इसे डीआरडीओ ने तैयार किया है।' दोस्त और दुश्मन में कर लेता है अंतर सूत्रों ने कहा कि यह एक छोटा लेकिन बेहद ताकतवर ड्रोन है जो किसी भी स्थान की निगरानी करते वक्त बेहद सटीक जानकारी देता है। अडवांस रिलीज टेक्नॉलजी के साथ इसकी यूनिबॉडी बायोमिमेटिक डिजाइन से सर्वोच्च स्तर की निगरानी होती है। आर्टिलफिशियल इंटिलिजेंस से लैस भारत ड्रोन दोस्तों और दुश्मनों में आसानी से अंतर कर लेता है और इसी के अनुकूल ऐक्शन भी लेता है। अडवांस AI और कैमरे की ताकत ड्रोन की क्षमता अत्यंत ठंडे मौसम और रात के घुप अंधेरे में भी निगरानी करने की है। इसे मौसम के और अधिक कठिन हालात के लिहाज से डिवेलप किया जा रहा है। यह पूरे मिशन का रियल-टाइम वीडियो भेजता है। इसमें लगा रात के अंधेरे में भी देखने की क्षमता वाला बेहद उच्चतम श्रेणी का कैमरा घने जंगलों में छिपे लोगों को भी तलाश लेता है। सूत्रों ने बताया कि भारत ड्रोन झुंड में भी ऑपरेशन करता है, इस कारण इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2020,चीन से बढ़ते तनाव के बीच एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया टॉप एयरफोर्स कमांडरों के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं. दो दिनों की इस अहम बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा हालात का जायजा लिया जाएगा. राफेल पर अहम फैसला लेगी वायुसेना इसके अलावा इस बैठक में जुलाई अंत तक देश आ रहे राफेल विमानों को वायुसेना में ऑपरेशनल स्तर पर लाने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जाएगा. अबतक के आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक राफेल के एयरफोर्स में शामिल होने से भारतीय वायुसेना को पड़ोसी देशों के मुकाबले बढ़त मिलेगी. इसके अलावा इस तैनाती का दक्षिण एशिया में मनोवैज्ञानिक असर भी होगा. सुखोई-30 और मिराज- 2000 के साथ राफेल की तैनाती पर भी विचार राफेल दुश्मनों पर हमला करने के आधुनिक सिस्टम से लैस है. वायु सेना देश के उत्तरी बॉर्डर पर सुखोई-30 और मिराज- 2000 के साथ राफेल को भी तैनात करने पर विचार कर रही है. राफेल के सेना में शामिल होने से भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में इजाफा होगा. चीनी गतिविधियों की भी समीक्षा वायुसेना की इस बैठक में भारत के साथ लगती चीन की सीमा पर चीनी गतिविधियों की भी समीक्षा की जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक दो दिनों की ये बैठक 22 जुलाई से प्रस्तावित है. बता दें कि एयरफोर्स ने आधुनिक लड़ाकू विमानों के पूरे बेड़े को फॉरवर्ड बेस पर तैनात कर दिया है. यहां से लड़ाकू विमान दिन और रात में ऑपरेशन कर रहे हैं. पूर्वी लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर अपाचे हेलिकॉप्टर को भी तैनात किया गया है, यहां से ये विमान उड़ान भर रहे हैं
बायॉकोन (Biocon) कंपनी की चेयरपर्सन और एमडी किरण मजूमदार शॉ (Kiran Mazumdar Shaw) की तरफ से हाल ही यह जानकारी दी गई है कि सोरायसिस (Psoriasis) रोग की दवाई कोरोना के मरीजों पर शानदार रूप से सकारात्मक परिणाम दे रही है। यही वजह है कि कंपनी के यूएस बेस्ड बिजनस पार्टनर्स इस दवाई के अगले चरण के परीक्षण और परिणाम को लेकर बहुत अधिक उत्साहित हैं। इस स्थिति में आपके मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सोरायसिस जैसी स्किन डिजीज की दवाई कोविड-19 जैसी वायरस जनित बीमारी में कैसे अच्छे परिणाम दे रही है। आइए, इस उत्सुकता और इससे संबंधित सवालों के जवाब यहां जानते हैं... कोरोना नहीं मारता इंसान को! -सबसे पहले आपको यह बात समझनी होगी कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की मौत कोरोना के कारण नहीं हो रही है। बल्कि इस वायरस की चपेट में आने के बाद, जिस तरह का रिऐक्शन हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता देती है, उससे व्यक्ति के शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और मरीज की मृत्यु हो जाती है। क्या प्रतिक्रिया देता है शरीर? -जब कोरोना वायरस किसी मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है तो उस व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी ऐक्टिव हो जाती है। इस स्थिति में शरीर की जो टी-सेल्स होती हैं, उनका बहुत तेजी से निर्माण होने लगता है। टी-सेल्स शरीर की उन कोशिकाओं को कहते हैं, जो शरीर में पहुंचे किसी भी वायरस को पहचानकर उसे मारने का काम करती हैं। हो जाता है ऑटोइम्यून डिसऑर्डर -जब इम्यून सेल्स और टी-सेल्स का निर्माण शरीर में बहुत तेजी से होने लगता है तो इन कोशिकाओं का एक तूफान शरीर के अंदर पैदा हो जाता है। इस वजह से शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है। खासतौर पर सांस की नलियों और फेफड़ों में। इससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। शरीर को ऑक्सीजन की जरूरी मात्रा नहीं मिल पाती और अचानक से शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। अपना ही दुश्मन बन जाता है शरीर -जब शरीर में इम्यून सेल्स का तूफान आता है (Cytokines Release Strom), उस स्थिति में कई सेल्स संक्रमित होकर वायरस को मारने की जगह अपने शरीर की ही अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। यह स्थिति ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कहलाती है। जब अपने शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता अपने शरीर के ही खिलाफ काम करने लगती है। बिगड़ने लगती है हालत -ऑटोइम्यून डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति के शरीर की हालत तेजी से गिरने लगती है। इस स्थिति में शरीर के कई ऑर्गन एक साथ या कोई एक ऑर्गन फेल हो जाता है, जो कोरोना संक्रमित मरीज की मृत्यु की वजह बन जाता है। ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disease) के दौरान जिस तरह की स्थितियां पैदा होती हैं, उसी तरह की कुछ स्थितियां सोरायसिस और दमा के दौरान भी कुछ मरीजों में देखने को मिलती हैं। ऐसे जगी उम्मीद -कोरोना के काम करने के तरीके का पूरी तरह पता चलने के बाद सोरायसिस की दवा पर काम करनेवाले एक्सपर्ट्स ने इस दवाई को कोरोना के लक्षणों पर प्रभावी दवाई के रूप में देखा और अप्रूवल मिलने के बाद आगे का काम शुरू किया। इस दवाई का नाम टोसीलिज़ुमाब (Tocilizumab) है। इसे एटिज़ुमैब (Atlizumab)नाम से भी जाना जाता है। -खास बात यह है कि यह दवाई भारत में एक अप्रूव्ड ड्रग है, जिसका उपयोग डॉक्टर्स कर रहे हैं। यह ऐंटिबॉडीज पर बहुत अच्छा रिजल्ट दे रही है। अब अगर यह दवाई अपने चौथे परीक्षण में भी पास हो जाती है तो उम्मीद कर सकते हैं कि भारतीयों द्वारा तैयार की गई एक बेहतरीन कोरोना वैक्सीन इस साल के अंत तक बाजार में आ जाएगी।
लेह, 17 जुलाई 2020,लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) का जायजा लेने के लिए लेह पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की एक इंच जमीन को कोई ले नहीं सकता है. भारतीय सेना के ऊपर हमें नाज़ है. मैं जवानों के बीच आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं. हमारे जवानों ने शहादत दी है. इसका गम 130 करोड़ भारतवासियों को भी है. लेह के लुकुंग चौकी पर पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जो कुछ भी अब तक बातचीत की प्रगति हुई है, उससे मामला हल होना चाहिए. कहां तक हल होगा इसकी गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन इतना यकीन मैं जरूर दिलाना चाहता हूं कि भारत की एक इंच जमीन भी दुनिया की कोई ताकत छू नहीं सकती, उस पर कोई कब्ज़ा नहीं कर सकता. जवानों को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का इकलौता देश है जिसने सारे विश्व को शांति का संदेश दिया है. हमने किसी भी देश पर कभी आक्रमण नहीं किया है और न ही किसी देश की जमीन पर हमने कब्जा किया है. भारत ने वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दिया है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम अशांति नहीं चाहते हम शांति चाहते हैं. हमारा चरित्र रहा है कि हमने किसी भी देश के स्वाभिमान पर चोट मारने की कभी कोशिश नहीं की है. भारत के स्वाभिमान पर यदि चोट पहुंचाने की कोशिश की गई तो हम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे और मुंहतोड़ जवाब देंगे. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना के ऊपर हमें नाज़ है. मैं जवानों के बीच आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं, हमारे जवानों ने शहादत दी है. इसका ग़म 130 करोड़ भारतवासियों को भी है. भारत का नेतृत्व सशक्त है. हमें नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिला है. फ़ैसला लेने वाला प्रधानमंत्री मिला है.
है नई दिल्ली कोरोना से प्रभावित देश की अर्थव्यवस्था को संकट से कैसे उबारा जाए, इसकी रणनीति तय करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि वो दोनों मंत्रालयों के टॉप 50 अधिकारियों से अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर भविष्य की रणनीति पर राय मांग रहे हैं। इकॉनमी की चिंता, पीएम की मीटिंग पर मीटिंग इसके लिए पीएम ने अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डेढ़ घंटे तक बातचीत की। इस दौरान अधिकारियों ने प्रजेंटेशन के जरिए पीएम के साथ अपना-अपना आइडिया शेयर किया। इससे पहले, पीएम ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ-साथ वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के मुख्य एवं प्रधान आर्थिक सलाहकारों से भी अलग-अलग मीटिंग की थी। 20.97 लाख करोड़ का कोरोना पैकेज सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान कोविड-19 महामारी के कारण उपभोक्ता मांग में आई तेज गिरावट से औंधे मुंह गिरी इकॉनमी में जान फूंकने पर है। इसी कारण सरकार ने मई महीने में 20.97 लाख करोड़ रुपये का कोरोना पैकेज घोषित किया था जो महामारी से निपटने के लिए दुनियाभर की सरकारों द्वारा घोषित बड़े पैकेज में एक है। आगे भी ऐलान की संभावना केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर का आकलन कर रही है। उन्होंने पैकेज की विस्तृत जानकारी देते वक्त कहा था कि जरूरत पड़ी तो आगे और भी कदम उठाए जाएंगे। मोदी ने संभाली बागडोर दरअसल, पहले से ही हिचकोले खा रही भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना ने जोरदार झटका दिया है जिससे ये पूरी तरह बेपटरी हो गई है। अब इसे पटरी पर लाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था उद्धार अभियान की बागडोर अपने हाथ में ले रखी है।
कोरोना काल में इंडियन रेलवे बदलाव के दौर से गुजर रहा है, रेल मंत्रालय लगातार नई चीजों को लेकर एक्सपेरिमेंट कर रहा है. हाल के दिनों में रेलवे को बेहतर से बेहतर बनाने की प्रक्रिया में काफी नई चीजें देखने को मिली हैं, फिर चाहे वो बैट्री से ट्रेन दौड़ाने की बात हो या फिर 2.8 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी को सफलता पूर्वक चलाने की बात हो. अब रेलवे ने एक बड़ी घोषणा की है जिसके पूरा होते ही रेलवे में अभी तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारतीय रेलवे अगले 3.5 वर्ष में पूरी तरह बिजली से चलने वाला रेल नेटवर्क बन जाएगा. गुरुवार को सीआईआई के एक कार्यक्रम में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 2024 तक रेलवे 100 फीसदी बिजली से चलने वाला रेल नेटवर्क होगा. इसी के साथ इंडियन रेलवे दुनिया का पहला इतना बड़ा रेल नेटवर्क होगा जो पूरी तरह बिजली से संचालित होगा. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल तेजी से अपने नेटवर्क को बिजली से जोड़ने यानी विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है. पीयूष गोयल के मुताबिक वर्तमान में 55 फीसदी रेल का नेटवर्क बिजली से चलता है, जिस पर अगले 3.5 सालों में 100 फीसदी ट्रेनें बिजली से दौड़ने लगेंगी. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे के 100 फीसदी विद्युतीकरण की योजना को मंजूरी दी है. केंद्र से मिली मंजूरी के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत 100% इलेक्ट्रीफाइड रेल नेटवर्क बनाने की राह पर चल पड़ा है. इसके तहत 120,000 किलोमीटर के ट्रैक पर काम होगा. गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' को बढ़ावा दिया है. हम इस पर काम कर रहे हैं. पीयूष गोयल ने कहा, 2030 तक हम उम्मीद करते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन रेलवे होगा. दरअसल, रेलवे ने 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को जीरो करने और नेटवर्क को पूरी तरह हरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके लिए रेलवे विद्युतीकरण के क्षेत्र में और सोलर प्लांट से बिजली प्राप्त करने के क्षेत्र में काम कर रहा है. रेलवे ने पूरा नेटवर्क दिसंबर 2023 तक बिजली पर आधारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. रेलवे ने 40,000 से ज्यादा रूट किलोमीटर (आरकेएम) का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है जो ब्रॉड गेज मार्गों का 63 प्रतिशत है. इसमें कहा गया कि 2014-20 की अवधि के दौरान 18,605 किलोमीटर मार्ग का बिजलीकरण किया गया जबकि 2009-14 की अवधि के दौरान महज 3,835 किलोमीटर मार्ग को बिजली से जोड़ा जा सका था.
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2020,मई महीने की बात है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन और कोरोना से डूब रही अर्थव्यवस्था के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था. इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत अभियान मुहिम की भी शुरुआत की गई. इस मुहिम के बीच जून महीने में देश को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. दरअसल, जून महीने में ट्रेड सरप्लस की स्थिति रही. 18 साल में ये पहला मौका है जब भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है. ट्रेड सरप्लस का मतलब ये हुआ कि भारत ने जून महीने में दूसरे देशों को निर्यात ज्यादा किया है और आयात में रिकॉर्ड कमी आई है. आपको बता दें कि जून में देश अनलॉक मोड में आ गया था और आर्थिक​ गतिविधियां भी सामान्य होने लगी थीं. किसी भी देश के लिए ट्रेड सरप्लस अच्छी बात होती है. इससे अनुमान लगाया जाता है कि कोई देश कितना निर्भर है. अगर भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में हैं तो इसका सीधा मतलब यही है कि जून में भारत की विदेशों से निर्भरता कम हुई है. हालांकि, ट्रेड सरप्लस आगे कितने समय तक बना रहता है, ये देखना अहम है. निर्यात के ज़रिए विदेशी मुद्रा अर्जित होती है जबकि आयात से देश की मुद्रा बाहर जाती है. मतलब ये कि आयात बढ़ने पर व्यापार घाटा भी बढ़ जाता है. इससे देश के अंदर विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आती है. आपको बता दें कि अप्रैल और मई में आयात में कमी की मुख्य वजह सख्त लॉकडाउन था. इस दौरान कच्चे तेल से लेकर हर मोर्चे पर डिमांड में कमी रही थी, लेकिन जून से स्थिति सामान्य होने लगी है आयात कम करने पर जोर- वहीं, बीते मई से जून के बीच कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिससे आयात कम करने पर जोर दिया गया है. इसमें चीन के खिलाफ मुहिम का भी असर पड़ा है. भारत के विदेशी व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा चीन से आयात होता रहा है. लेकिन जून में तनाव के बाद कई चीजों पर आयात शुल्क बढ़ाने से लेकर बहिष्कार पर जोर दिया गया. इस वजह से भी आयात में कमी आई है. क्या कहते हैं जून के आंकड़े- ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून में आयात में 47.59 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह लगातार चौथा महीना है जब आयात कम हुआ है. करंसी के हिसाब से देखें तो जून में भारत ने 21.11 अरब डॉलर का आयात किया है. हालांकि आयात में गिरावट से ये भी संकेत मिलते हैं कि देश में प्रोडक्शन कम हो रहा है और इस वजह से बाहरी देशों से सामान कम मंगाया जाता है. निर्यात संगठनों का महासंघ (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा, ‘‘ हमें आयात का विश्लेषण करना होगा. आयात में इतनी बड़ी गिरावट से औद्योगिक पुनरूद्धार आने वाले महीनों में प्रभावित हो सकता है.
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2020,करीब दो महीने के सख्त लॉकडाउन के बाद 1 जून से देश अनलॉक मोड में है. इस अनलॉक के दौरान देश की इकोनॉमी पटरी पर लौटती दिख रही है. हाल ही में जून के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़ों ने इसके संकेत दिए थे. वहीं, अब आयात और निर्यात के आंकड़े भी जारी कर दिए गए हैं. जून में निर्यात का आंकड़ा सुधरा है, क्योंकि अप्रैल में इसमें 60.28 प्रतिशत और मई में 36.47 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. क्या कहते हैं जून के आंकड़े वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़े के अनुसार कोविड-19 के कारण कमजोर वैश्विक मांग से जून में निर्यात 12.41 प्रतिशत घटकर 21.91 अरब डॉलर रहा. आंकड़ों के मुताबिक आयात भी लगातार चौथे महीने घटा. इस माह में आयात 47.59 प्रतिशत घटकर 21.11 अरब डॉलर रहा. यह लगातार चौथा महीना है जब आयात और निर्यात, दोनों ही घटा है. निर्यात में कहां कमी और कहां सुधार मुख्य रूप से पेट्रोलियम, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण के निर्यात में गिरावट से कुल निर्यात कम हुआ है. निर्यात वाले जिन क्षेत्रों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गयी है, उसमें रत्न एवं आभूषण (-50 प्रतिशत), चमड़ा (-40.5 प्रतिशत), पेट्रोलियम उत्पाद (-31.65 प्रतिशत), इंजीनियरिंग सामान (-7.5 प्रतिशत), सभी प्रकार के कपड़ों सिले-सिलाये परिधान (-34.84 प्रतिशत), काजू (-27 प्रतिशत) शामिल हैं. हालांकि तिलहन, कॉफी, चावल, तंबाकू, मसाला, औषधि और रसायन के निर्यात में जून में वृद्धि दर्ज की गयी. क्या कहते हैं एक्सपर्ट भारतीय दलहन एवं उपज निर्यात संवर्धन परिषद (आईओपीईपीसी) के चेयरमैन खुशवंत जैन ने कहा कि अच्छा उत्पादन होने और निर्यात बढ़ाने के सरकार के उपायों से तिलहन निर्यात बढ़ा है. जैन ने कहा, ‘‘आने वाले महीनों में भी वृद्धि बने रहने की उम्मीद है. वाणिज्य मंत्रालय हमारे सभी मसलों का समाधान कर रहा है.’’ भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (टीपीसीआई) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे सुधर रही हैं. कई कामगार अब कामों खासकर विनिर्माण क्षेत्रों में लौटने लगे हैं. इससे विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां सामान्य हो रही है और उद्योग वैश्विक मांग को पूरा करने के लिये तैयार हो रहा है.
पेइचिंग/लंदन/नई दिल्‍ली दुनियाभर में जासूसी के आरोपों को लेकर घ‍िरी चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी हुवावे के लिए भारत से बेहद बुरी खबर है। भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी जियो ने घरेलू तकनीक से 5जी (Jio5G) सॉल्यूशन विकसित कर लिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज इसका ऐलान किया। उन्‍होंने कहा कि Jio5G सॉल्‍यूशन को दूसरे देशों को निर्यात किया जाएगा। रिलायंस की 43वीं एजीएम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए अंबानी ने कहा कि जैसे ही सरकार 5जी सेवाओं के लिए स्‍पेक्‍ट्रम का ऐलान कर देगी, जिओ 5जी सेवाओं को ट्रायल के लिए शुरू कर दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि जियो 5जी का फील्‍ड डिप्‍लायमेंट अगले साल से शुरू हो जाएगा। मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो का 5जी सॉल्‍यूशन अन्‍य टेलिकॉम ऑपरेटरों के लिए भी उपलब्‍ध होगा। मुकेश अंबानी ने यह ऐलान ऐसे समय पर किया है जब पूरी दुनिया में हुवावे के खिलाफ आवाज उठनी तेज हो गई है। पिछले दिनों अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जिओ की तारीफ की थी। उन्‍होंने कहा था कि जिओ साफ सुथरी दूरसंचार कंपनी है और हुवावे से मुक्‍त है। अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने चीनी कंपनी हुवावे को 5जी नेटवर्क बनाने को लेकर बैन कर दिया है। ब्रिटिश सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया है कि वे 2027 तक 5जी नेटवर्क से हुवावे के सभी उपकरणों को हटा दें। इससे पहले अमेरिका ने भी हुवावे के सभी उपकरणों को प्रतिबंधित किया था। नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग में फैसला ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की अध्यक्षता में हुई नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग के बाद फैसला लिया गया कि देश में 5जी नेटवर्क के निर्माण में चीनी कंपनी की भागीदारी को खत्म किया जाएगा। ब्रिटिश सरकार ने यह फैसला नेशनल साइबर सिक्योरिटी काउंसिल के रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद लिया। चीनी कंपनी हुवावे पर डेटा चोरी और गुप्त सूचनाओं को लीक करने का आरोप है। देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है हुवावे ब्रिटेन के संस्कृति सचिव ओलिवर डाउडेन ने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका के प्रतिबंध के बाद हुवावे के सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 5जी नेटवर्क में हुवावे की उपस्थिति देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन को भरोसा नहीं है कि हुवावे अपने उपकरणों की सुरक्षा को लेकर कोई गांरटी दे पाएगा। हुवावे को लेकर ब्रिटेन पर दबाव बना रहा था चीन! अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जून महीने के शुरुआत में दावा किया था कि चीन लंदन स्थित एचएसबीसी बैंक के जरि ब्रिटेन पर अपनी परियोजनाओं के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। पोम्पियो ने कहा था कि चीन ने ब्रिटेन के बैंक द हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एचएसबीसी) को कथित तौर पर दंडित करने की धमकी दी है। उसने कहा है कि अगर ब्रिटेन हुवेई को उसका 5जी नेटवर्क बनाने की अनुमति नहीं देगा तो वह भी ब्रिटेन में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण का अपना वादा तोड़ देगा।
पठानकोट, 13 जुलाई 2020,चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और थल सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने सोमवार को जम्मू-पठानकोट रीजन का दौरा किया. जनरल नरवणे ने राइजिंग स्टार कॉर्प्स के अग्रिम इलाकों में तैनात सैनिकों, सुरक्षा इंतजामात और ऑपरेशन की तैयारियों के संबंध में जानकारी ली. सेना प्रमुख ने गुर्ज डिवीजन के अग्रिम इलाकों का भी दौरा किया. जीओसी गुर्ज डिवीजन मेजर जनरल वाईपी खंडूरी ने सेना प्रमुख को सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशनल तैयारियों के संबंध में जानकारी दी. जनरल नरवणे ने सैन्य अधिकारियों से साफ कर दिया कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे संघर्ष विराम के उल्लंघन और आतंकियों की घुसपैठ को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है. उन्होंने कहा कि सेना और सरकार की सभी एजेंसियां लगातार मिलकर काम कर रही हैं जनरल नरवणे ने साफ कर दिया कि हम विरोधियों की ओर से छेड़े जा रहे छद्म युद्ध के नापाक मंसूबे को नाकाम करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे. अपने जम्मू-पठानकोट रीजन के दौरे के दौरान सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिमी कमान की सभी रैंक्स को संबोधित किया और सैनिकों का मनोबल बढ़ाया. सेना प्रमुख ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सेना दुश्मनों के किसी भी दुस्साहस को विफल बनाने और हालात संभालने में सक्षम है. उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में पश्चिमी कमान के प्रयासों और ऑपरेशन नमस्ते की सराहना की. इससे पहले, राइजिंग स्टार कॉर्प्स के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख को ऑपरेशनल तैयारियों, सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किए जाने और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मसलों पर जानकारियां दीं. जम्मू पहुंचे सेना प्रमुख का लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी के साथ ही मेजर जनरल वीबी नायर और एएस पठानिया ने स्वागत किया.
नई दिल्ली, 13 जुलाई 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की. इसकी जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमने कई विषयों पर बात की, विशेष रूप से भारत के किसानों, युवाओं और उद्यमियों के जीवन को बदलने के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का लाभ देने के मसले पर अच्छी चर्चा हुई. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'सुंदर पिचाई से बातचीत के दौरान मैंने नई कार्य संस्कृति के बारे में बात की जो कोरोना के समय में उभर रही है. हमने उन चुनौतियों पर चर्चा की जो वैश्विक महामारी ने खेल जैसे क्षेत्रों में ला दी है. हमने डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के महत्व के बारे में भी बात की. आगे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे गूगल की ओर से कई सेक्टर में किए जा रहे कामों के बारे में पता चला. खासतौर पर एजुकेशन, लर्निंग, डिजिटल इंडिया, डिजिटल पेमेंट समेत अन्य क्षेत्रों में. पीएम मोदी ने सुंदर पिचाई के साथ गूगल समेत भारत में टेक्नोलॉजी क्षेत्र में संभावनाओं पर भी बात की. पीएम मोदी ने दिया है आत्मनिर्भर भारत का नारा पिछले दिनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है. अगर भारत का युवा चाहे तो हर सेक्टर में अपनी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया में मनवा सकता है. इसी आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पीएम मोदी कई सेक्टर से जुड़े लोगों से चर्चा कर रहे हैं.
वॉशिंगटन प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ हिंद महासागर में परेशानी का सबब बने चीन को रोकने के लिए चार बड़ी शक्तियां पहली बार मालाबार में साथ आने को तैयार हैं। इस साल के मालाबार नौसैनिक युद्धाभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया को जल्द ही भारत का न्योता मिल सकता है। इसके साथ ही पहली बार अनौपचारिक रूप से बने क्वॉड ग्रुप (Quad group) को सैन्य मंच पर देखा जाएगा। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ जापान और अमेरिका शामिल हैं। अभी तक भारत ने ऑस्ट्रेलिया को इससे अलग रखा था लेकिन लद्दाख में सीमा पर चीन की हरकत को देखते हुए उसे भी बुलाने का प्लान है। अभी तक सीमित था Quad ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले हफ्ते तक ऑस्ट्रेलिया को औपचारिक रूप से निमंत्रण के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। मालाबार पहले एक सीमित नौसैनिक युद्धाभ्यास हुआ करता था लेकिन अब इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके तहत हिंद महासागर में चीन के बढ़ते कदमों को रोकना एक बड़ा लक्ष्य है। जापान इससे 2015 में जुड़ा था। चीन को जाएगा कड़ा संदेश भारत ने 2017 में ऑस्ट्रेलिया को इसमें शामिल करने से यह सोचते हुए रोक दिया था कि पेइचिंग इसे Quad के सैन्य विस्तार के तौर पर देख सकता है लेकिन सीमा पर बढ़ी तनातनी और चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए आखिरकार भारत ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। रिपोर्ट में वॉशिंगटन आधारित RAND कॉर्पोरेशन के डेरेक ग्रॉसमेन के हवाले से कहा गया है, 'इससे चीन को एक अहम संदेश जाएगा कि Quad वास्तव में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहा है। भले ही इसे Quad के इवेंट के तौर पर तकनीकी रूप से आयोजित न किया जा रहा हो।' भारत के लिए जरूरी क्षेत्रीय-वैश्विक ताकतों का साथ लद्दाख में हिंसा से पहले भारत ने अपने सबसे बड़े ट्रेड-पार्टनर चीन के साथ अपने संबंध संतुलित रखने की कोशिश की और दूसरी ओर अमेरिका जैसे देशों के साथ भी संबंध मजबूत किए। रिपोर्ट में पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके जी. पार्थसार्थी ने कहा है, 'चीन पर हमारे द्विपक्षीय आर्थिक प्रतिबंध जरूरी हैं लेकिन हमें याद रखना होगा कि चीन पर असर तभी डाला जा सकता है जब हम क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतों के सहयोग से काम करें।' Quad को मजबूत करना है अहम पूर्व विदेश सचिव और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो श्याम सरन के मुताबिक Quad को मजबूत न करने से चीन को ही फायदा होगा। उन्होंने कहा है कि जब तक चीन को अलग-अलग पक्षों से आए निर्देश का पालन करने के लिए राजी किया जाता है, तब तक इंडो-पैसिफिक रणनीति को पेइचिंग की ताकत के जवाब में इस्तेमाल करना होगा और Quad इसके केंद्र में होगा। उनका कहना है कि भारत को इस बारे में साफ समझना होगा कि उसका हित कहां है।
नई दिल्‍ली चीन से लगी सीमा पर तनाव के बीच बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने छह महत्‍वपूर्ण पुल बना लिए हैं। रणनीतिक रूप से बेहद अहम ये पुल जम्मू और कश्‍मीर में स्थित हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इनका वर्चुअल उद्घाटन किया। करीब 43 हजार करोड़ की लागत से बने इन छह पुलों में से चार अखनूर सेक्‍टर में हैं, बाकी जम्‍मू में। इन पुलों के शुरू होने के बाद से बॉर्डर एरियाज तक कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। यानी जरूरत पड़ने पर सेना को बाई रोड भी आसानी से मूव कराया जा सकता है। फिलहाल भारत-चीन बॉर्डर पर थोड़ी शांति है और दोनों सेनाएं पीछे हटी हैं मगर चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। तनावपूर्ण हालात के बीच इन पुलों का शुरू होना भारत के डिफेंस इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को और बेहतर करेगा। ये हैं छह नए पुल तारनाह में 160 मीटर का पुल तारनाह में 300 मीटर का दूसरा पुल पलवान में 91 मीटर का पुल घोड़ावाला में 151 मीटर का पुल पहाड़ीवाला में 61 मीटर का पुल पनयाली में 31 मीटर का पुल लेह के पास बने हैं तीन नए पुल BRO की तरफ से बॉर्डर एरियाज में इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को और बेहतर किया जा रहा है। ये सारे पुल 30 मीटर से 300 मीटर लंबाई वाले हैं। वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए इन पुलों का उद्घाटन किया गया है। उद्घाटन के वक्‍त सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद रहे। BRO ने लेह के पास तीन पुल बनाए हैं। ये पुल सामरिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि इनके जरिए सेना के टैंक चीन से विवाद के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक आसानी से पहुंच सकेंगे। BRO बनाता है सीमाई इलाकों में सड़कें BRO भारत सरकार की वह एजेंसी है जो अपने देश के साथ-साथ पड़ोसी मित्र देशों के सीमाई इलाकों में रोड नेटवर्क तैयार करती है। NH1 पर बनाए गए तीनों पुलों को सिर्फ तीन महीने में ही तैयार किया गया है। ये पुल भारी से भारी वजन उठा सकते हैं। भारतीय सेना और नागरिकों को अब आवाजाही में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। सालभर पहले बनी सड़क ने बढ़ाई चीन की परेशानी लद्दाख में निर्मित दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड मैदानी इलाका देपसांग और गलवान घाटी तक पहुंचता है। इसे सीमा सड़क संगठन (BRO) ने बनाया था। इसी संगठन ने ठीक एक वर्ष पहले दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड का काम पूरा कर दिया।
नई दिल्ली, 08 जुलाई 2020, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई. कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. 5 महीने मुफ्त अनाज, प्रवासी मजदूरों को किराए पर घर, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में 12 हजार 750 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर बैठक में फैसले लिए गए. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पिछले 3 महीने में 81 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति हर महीने 5 किलो अनाज मुफ्त मिला है. जो अनाज 2 रुपये और 3 रुपये में मिलता है वो मिलता रहा. लेकिन ये अनाज मुफ्त मिला है. इसका मतलब है कि पिछले 3 महीने में प्रति व्यक्ति को 15 किलो अनाज मिला. प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने इसे विस्तार करने की घोषणा की. आज मंत्रिमंडल ने उसको लागू किया है. जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर तक ये योजना लागू रहेगी, जिसमें एक व्यक्ति को 5 किलो मुफ्त अनाज मिलेगा. उन्होंने कहा कि पहले तीन महीने में 1 करोड़ 20 लाख टन अनाज दिया गया और आने वाले 5 महीने में 2 करोड़ 3 लाख टन अनाज मुफ्त दिया जाएगा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना का खर्च 1 लाख 49 हजार करोड़ रुपये है. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि 8 महीने 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने एक और योजना का विस्तार किया है. जो छोटे व्यवसाय हैं, जहां 100 से भी कम कर्मचारी हैं और उनमें से 90 फीसदी लोग 15 हजार से कम सैलरी वाले हैं, ऐसे कर्मचारियों का हर महीने 12 प्रतिशत पीएफ जाता है उसे सरकार ने भरा. 3 लाख 66 हजार उद्दोगों को इसका फायदा मिला. प्रवासी मजदूरों को किराए पर घर एक अन्य फैसले के बारे में जानकारी देते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 107 शहरों में 1 लाख 8 हजार छोटे मकान बनकर तैयार हैं. इन मकानों को प्रवासी मजदूरों को किराए पर देने का सरकार ने फैसला लिया है. मजदूरों को किराए पर सस्ता मकान नहीं मिलता था, लेकिन अब सरकार ने उनके लिए ये फैसला लिया है. प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार के एक और फैसले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देश में तीन जनरल इंश्योरेंस कंपनियां हैं. सरकार इसमें 12 हजार 750 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.
नई दिल्ली, 08 जुलाई 2020,राजीव गांधी फाउंडेशन में फंडिंग को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला किया है. गृह मंत्रालय की ओर से एक कमेटी बनाई गई है, जो कि इन फाउंडेशन की फंडिंग, इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी. इस कमेटी की अगुवाई सिमांचल दास, स्पेशल डायरेक्टर (प्रवर्तन निदेशालय) करेंगे. केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से बुधवार को इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी गई. ट्वीट में कहा गया, ‘केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी. इस जांच में PMLA एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट, FCRA एक्ट के नियमों के उल्लंघन की जांच की जाएगी. कमेटी की अगुवाई ईडी के स्पेशल डायरेक्टर करेंगे. क्या है पूरा विवाद? दरअसल, भारत और चीन के बीच जारी विवाद के बीच जब कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला शुरू किया गया तो भारतीय जनता पार्टी ने उल्टा कांग्रेस को घेर लिया. भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से आरोप लगाया गया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मिलती थी. इसके अलावा देश के लिए जो प्रधानमंत्री राहत कोष बनाया गया था, उससे भी यूपीए सरकार ने पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दिया था. बीजेपी का आरोप था कि 2005-08 तक PMNRF की ओर से राजीव गांधी फाउंडेशन को ये राशि मिली थी. हालांकि, जवाब में कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को नकार दिया था और कहा था कि राजीव गांधी फाउंडेशन देश का फाउंडेशन है और इसका काम सेवा के लिए किया जाता है. कांग्रेस ने कहा था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को साल 2005-06 में PMNRF से 20 लाख रुपये की मामूली धनराशि मिली थी, जिसका इस्तेमाल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में राहत कार्यों में खर्च किया गया था.
नई दिल्ली, 07 जुलाई 2020, भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर तनाव को कम किया जा रहा है. इस बीच भारत की ओर से हर परिस्थिति के लिए तैयारी की जा रही है. कुछ वक्त बाद ही तापमान में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी, ऐसे में लद्दाख के पास ITBP के लिए इंटीग्रेटेड बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) तैयार की जा रही है. इसकी मदद से अगर तापमान बहुत अधिक गिर जाता है, तो जवानों को सामान्य तापमान मिल पाएगा. लद्दाख के पास पैंगोंग झील वाले इलाके में सामान्य तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है. इसी को देखते हुए लद्दाख के लुकुंग इलाके में इंटीग्रेटेड BOP बनाई जा रही है. ITBP और NPCC इस प्रोजेक्ट को मिलकर पूरा कर रहे हैं. जिसके बाद इन आउटपोस्ट के अंदर जवानों को 22-28 डिग्री सेल्सियस तक तापमान मिल पाएगा, जिससे रुकने में कोई परेशानी ना हो. इस प्रोजेक्ट को लेकर ITBP ने बताया कि BOP के निर्माण का काम पूरा हो चुका है. तापमान नियंत्रण करने की व्यवस्था को ठीक की जा रहा है. ITBP सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लुकुंग चौकी के भीतर 22-23 डिग्री तापमान बनाए रखना है जबकि यहां अभी 11-12 डिग्री तक तापमान करने में कामयाबी मिली है. जिसको इस साल तक पूरा कर लिया जाएगा. इस BOP के बनने से ITBP के जवान हर मौसम में लद्दाख के अलग-अलग जगहों पर रह सकेंगे. आपको बता दें कि चीन के साथ जिस जगह पर तनाव की स्थिति बनी हुई है, वहां सितंबर के बाद से ही ठंड पड़नी शुरू हो जाएगी. और नवंबर-दिसंबर तक सामान्य तापमान भी माइनस में चला जाएगा. ऐसे में सर्दी के मौसम में भी बॉर्डर पर सख्ती बरती जा सके और चीन की हर चाल पर नजर हो, इसके लिए जवानों की सुविधा को दुरुस्त किया जा रहा है. इन BOP के निर्माण के अलावा अन्य सड़क निर्माण, पुल निर्माण और सेना की जरूरतों से जुड़े निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है.
नई दिल्ली, 06 जुलाई 2020,भारत-चीन के बीच कई हफ्ते से जारी तनातनी में कुछ नरमी के संकेत दिखे हैं. चीनी सेना अब गलवान घाटी से 1-2 किमी. पीछे हट गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच ये सहमति बनी है. भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है. इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों की ओर से प्रतिनिधि तय किए गए हैं. भारत की ओर से अजित डोभाल ही स्थाई प्रतिनिधि हैं, जिनकी बात चीनी विदेश मंत्री से हुई है. चीनी सेना अगर पीछे हटी है तो इसके पीछे भारत के कई रणनीतिक-राजनीतिक और राजनयिक कदम जिम्मेदार हैं जो पिछले कई दिनों से निरंतर आगे बढ़ाए जा रहे थे. सिलसिलेवार देखें तो इसमें कई अहम फैक्टर शामिल हैं, मसलन भारत ने कैसे बॉर्डर पर फौज बढ़ाई, फाइटर प्लेन तैयार किए, चीन के खिलाफ दुनिया भर में माहौल बना, अमेरिका सहित कई देशों के बयान आए, खुद प्रधानमंत्री लद्दाख गए. पहले आर्मी चीफ गए दूसरी तरफ वार्ता जारी रही. भरपूर उकसावे के बावजूद प्रधानमंत्री ने चीन का सीधा नाम नहीं लिया. इससे बातचीत की खिड़की खुली रही. कई ऐप बैन कर और चीनी कंपनियों के टेंडर निरस्त कर बताया कि भारत इस मामले में झुकेगा नहीं, नतीजा यह हुआ कि चीन को मामला आगे बढ़ाने में कोई फायदा नहीं दिखा. पीएम का लद्दाख दौरा अभी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक सुबह में लद्दाख पहुंचे और सेना की हौसलाअफजाई की थी. लद्दाख से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि जमाना विस्तारवादी नहीं, विकासवादी नीति का है. प्रधानमंत्री ने बिना चीन का नाम लिए निशाना साधा. उन्होंने कहा था, हम कृष्ण की बांसुरी और सुदर्शन चक्र दोनों को आदर्श मानते हैं. पीएम मोदी ने लद्दाख में घायल जवानों का भी हाल लिया था. पीएम ने जवानों का हौसला बढ़ाया था. उन्होंने कहा था कि आपके शौर्य और साहस को पूरी दुनिया ने देखा है. इसके साथ ही लेह में पीएम मोदी ने LAC के हालातों पर जानकारी ली थी. प्रधानमंत्री मोदी CDS जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के साथ लेह से आगे 11 हजार फीट की ऊंचाई वाले निमू तक गए. पीएम मोदी के दौरे का जो सार है वो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की उन पंक्तियों में देखा गया जिन्हें खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सुनाया. चीन पर ऐप्स की बड़ी मार चीन के साथ बिगड़े रिश्ते के मद्देनजर भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया है. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि इससे चीनी ऐप्स को संचालित करने वाली कंपनियों और खुद चीन को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. एक अंदाजे के मुताबिक अकेले टिकटॉक के बैन होने से ही कंपनी को 100 करोड़ रुपये की चपत लग सकती है. क्योंकि भारत में सिर्फ मार्च से मई 2020 के बीच 10 में से पांच सबसे ज़्यादा डाउनलोड होने वाली मोबाइल ऐप्स चीनी कंपनियों के ही हैं. इनमें टिकटॉक, जूम, Helo, Uvideo और यूसी ब्राउजर वो ऐप्स हैं, जिन्हें लाखों करोड़ों भारतीयों ने अपना रखा है. हालांकि इनमें से कुछ ऐप्स अभी भी इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं. आर्थिक मोर्चे पर झटका चीन को भारत आर्थिक मोर्चे पर लगातार झटके दे रहा है. अब भारत सभी हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों को बैन करने की तैयारी कर रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी है. चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर (JV) के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा. गौरतलब है कि इसके पहले रेलवे के कई ठेकों से चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया गया था. गौरतलब है कि फिलहाल देश के कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियां साझेदार के रूप में काम कर रही हैं. गडकरी ने कहा है कि नया निर्णय मौजूदा और भविष्य के सभी प्रोजेक्ट्स के लिए लागू होगा. लद्दाख में सेना की मौजूदगी बढ़ी चीन से तनातनी के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख में अपनी मौजूदगी दोगुना बढ़ाई है. भारत को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि चीन की सेना इस इलाके में वास्तविक स्थिति को बदलने की फिराक में है. सुरक्षा एजेंसियों की अलग-अलग समीक्षाओं में यह बात सामने आ चुकी है. सेना ने पूरे लद्दाख इलाके में 40 से 45 हजार जवानों की तैनाती की है. पहले यह तादाद 20 से 24 हजार हुआ करती थी. इसके अलावा भारतीय जमीन की सुरक्षा में भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों की भी मौजूदगी बढ़ाई गई है. एक अधिकारी ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि चीनी सैनिकों की संख्या भारत से कम है और यह तादाद तकरीबन 30-35 हजार के आसपास है. बॉर्डर पर फाइटर जेट्स चीन की सरहद से सटे वायुसेना के फॉरवर्ड एयर बेस पर जबरदस्त हलचल है और वायुसेना के लड़ाकू विमान लगातार यहां गश्त लगा रहे हैं. विमानों से सैनिकों और सामान को लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में भेजा जा रहा है. बालाकोट एयर स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाने वाले मिग 29 विमान, अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर भी यहां तैनात किए गए हैं. वायुसेना के इस फॉरवर्ड एयर बेस से चीन पर नजर रखने के लिए मल्टी रोल कॉम्बैट, मिराज-2000, सुखोई-30 और जगुआर की भी तैनाती की गई है. ये सभी लड़ाकू विमान हथियारों से लैस होकर इलाके की निगरानी कर रहे हैं. अमेरिका की दोस्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अमेरिका के 244वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की जनता को बधाई दी. पीएम मोदी के इस बधाई संदेश पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिप्लाई में कहा कि शुक्रिया मेरे दोस्त... अमेरिका, भारत से प्यार करता है. दोनों नेताओं के इस संवाद से चीन की बेचैनी बढ़ सकती है. भारत के खिलाफ चीन की विस्तारवादी नीतियों की अमेरिकी सीनेटर कड़े शब्दों में आलोचना कर रहे हैं. अमेरिका के एक सीनेटर ने कहा कि चीन कभी भी अंतरराष्ट्रीय समझौतों में यकीन नहीं करता है. दूसरी ओर, रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि अमेरिका, चीन के खिलाफ भारत का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि चीन को लगता है कि वो तभी पावरफुल हो सकता है जब अमेरिका और भारत कमजोर होंगे. ये ऐसे कई फैक्टर हैं, जिसका असर भारत-चीन सीमा पर जारी तनावों को कम करने में देखा गया. प्रधानमंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि गलवान घाटी हमारी है. इसलिए चीन को यह स्पष्ट संकेत है कि उसके पास पीछे जाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है. दूसरी ओर सेना ने थल, जल और नभ तक में चीन पर अपनी पैनी निगाह लगाकर संकेत दे दिया कि वे अपनी मातृभूमि के एक-एक इंच की हिफाजत करेंगे, चाहे इसके लिए जितनी भी कुर्बानी देनी पड़े.
नई दिल्ली दिल्ली में कोरोना वायरस (Coronavirus Cases in Delh) के बढ़ते मामलों पर लगाम के लिए केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से लगातार जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (RajNath Singh) ने दिल्ली कैंट में डीआरडीओ की ओर से बनाए गए सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड-19 अस्पताल (DRDO Built Covid19 Hospital) का दौरा किया। उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद हैं। डीआरडीओ के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी भी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे। अस्पताल में 250 से अधिक ICU यूनिट्स: राजनाथ सिंह राजनाथ सिंह ने बताया कि केवल 12 दिनों में कोरोना मरीजों के लिए 1000 बेड वाले इस अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया गया। WHO की गाइडलाइंस के साथ यहां 250 से अधिक ICU यूनिट्स उपलब्ध कराए गए हैं। राजनाथ ने कहा- 12 दिनों हुआ अस्पताल का निर्माण राजनाथ सिंह ने बताया कि केवल 12 दिनों में कोरोना मरीजों के लिए 1000 बेड वाले इस अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया गया। WHO की गाइडलाइंस के साथ यहां 250 से अधिक ICU यूनिट्स उपलब्ध कराए गए हैं। राजनाथ ने कहा- 12 दिनों हुआ अस्पताल का निर्माण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि डीआरडीओ, गृह मंत्रालय, टाटा संस इंडस्ट्रीज और कई अन्य संगठनों के सहयोग से इस अस्पताल का निर्माण कराया गया है। केजरीवाल ने कहा- अस्पतालों में बेड की कमी नहीं इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी अस्पतालों में बेड की कोई कमी नहीं है, हमारे पास 15,000 से अधिक बेड हैं। जिनमें से सिर्फ 5300 ही इस्तेमाल में है। हालांकि, आईसीयू बेड की कमी है, लेकिन अगर कोरोना मामले बढ़ते हैं तो ये ICU बेड हमारे लिए काफी अहम साबित होंगे। डीआरडीओ के अस्पताल का दौरा करते शाह और राजनाथ डीआरडीओ की ओर से बनाए गए सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड-19 अस्पताल का दौरा करते हुए केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह। उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से भी बात की। अधिकारियों ने बताया कि सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड-19 अस्पताल में क्या-क्या सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
नई दिल्‍ली चीन के साथ लगी सीमा पर तनाव के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। ANI के मुताबिक, करीब आधे घंटे की इस मुलाकात में दोनों के बीच राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय महत्‍व के कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दूसरी तरफ, उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी अहम ट्वीट किया है। उन्‍होंने लिखा, "भारत इतिहास के बेहद नाजुक मोड़ से गुजर रहा है। हम एक साथ कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन हमें जो चुनौतियां दी जा रही हैं, उसका सामना करने का हमारा निश्‍चय दृढ़ रहना चाहिए।" लेह जाकर सैनिकों का जोश बढ़ा चुके हैं पीएम पीएम मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंच गए थे। नीमू में प्रधानमंत्री ने सेना, एयरफोर्स और ITBP के जवानों से मुलाकात की। उनका हालचाल जाना, उनका उत्‍साह बढ़ाया। ऐसा कर पीएम मोदी ने चीन को साफ संदेश दिया। पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) को बता दिया गया है कि भारत सरकार पूरी तरह अपने सैनिकों के साथ खड़ी है। पीएम मोदी को पहले सेना ने ताजा हालात के बारे में ब्रीफ किया, जिसके बाद उन्‍होंने फ्रंटलाइन पर तैनात जवानों से खुद बात की। इस दौरान पीएम जहां बंकरनुमा एक चैंबर में बैठे थे, वहीं जवान उनके सामने सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हुए कुर्सियों पर थे। विस्‍तारवाद के बहाने चीन पर निशाना लेह में पीएम मोदी ने चीन की 'विस्‍तारवादी' नीति पर हमला बोला था। उन्‍होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि 'विस्‍तारवाद का युग समाप्‍त हो चुका है और अब विकासवाद का वक्‍त है।' पीएम मोदी ने चीन को साफ शब्‍दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 'किसी पर विस्तारवाद की जिद सवार हो तो वह हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट जाती हैं।' नाम नहीं लिया फिर भी बौखलाया चीन पीएम मोदी के लेह दौरे से सबसे बड़ा संदेश चीन को गया है। मोदी के नीमू दौरे से चीन को मिर्ची तो लगी है। तभी तो उनके विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा कि 'किसी को भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे तनाव और बढ़े।' चीन ने सीमा पर जैसी आक्रामक मोर्चाबंदी की है, उसे पीएम मोदी के इस दौरे से पता लग गया होता कि भारत पीछे हटने वाला नहीं। लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) की रक्षा के लिए भारत की सेना और राजनीतिक ताकतें भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चीन को यह भी संदेश गया होगा कि धीमे-धीमे कब्‍जा करने वाली उसकी रणनीति को भारत सहन नहीं करेगा। जिस तरह से सैनिकों के साथ पीएम मोदी ने बातचीत की, उससे साफ है कि भारत ने चीन के साथ बातचीत का रास्‍ता खुला छोड़ा है मगर किसी भी आक्रामक कार्रवाई का करारा जवाब देने को तैयार है। 'हम बांसुरी वाले कृष्‍ण के उपासक, सुदर्शन चक्रधारी के भी' सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "यह भूमि उनके बलिदानों को याद रखेगी। आपने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।" मोदी ने कहा, "लद्दाख से लेकर कारगिल तक आपके साहस को सभी ने देखा है। लद्दाख भारत का ताज है और यह भूमि हमारे लिए पवित्र है। हम देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार हैं। दुनिया भारत की ताकत को जानती है, हमारे दुश्मनों के कपटपूर्ण मंसूबे सफल नहीं होंगे।" उन्होंने यह संदेश भी दिया कि भारत के संयम को अन्यथा नहीं देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा, "हम वो लोग हैं, जो बांसुरी बजाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, लेकिन हम वो लोग भी हैं जो भगवान कृष्ण को मानते हैं, जिन्होंने सुदर्शन चक्र धारण किया था।"
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को गुरु पूर्णिमा पर्व की बधाई दी है। उन्होंने गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने वाले दिवस पर नमन किया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरु पूर्मिमा पर संदेश के जरिए अप्रत्यक्ष तौर से पीएम पर तंज भी कसा। पीएम ने ट्विट कर शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की ढेरों शुभकामनाएं। जीवन को सार्थक बनाने वाले गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का आज विशेष दिन है। इस अवसर पर सभी गुरुजनों को मेरा सादर नमन।' वहीं वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरु पूर्णिमा पर अपने बधाई संदेश के जरिए केंद्र सरकार पर तंज कसा है। उन्‍होंने गौतम बुद्ध का एक कथन साझा किया, जिसमें एक बात ऐसी थी जिसे लेकर राहुल सवाल करते रहे हैं। राहुल ने लिखा, 'तीन चीज़ें जो देर तक छिप नहीं सकतीं- सूर्य, चंद्रमा और सत्य।' इसमें से 'सत्‍य' वह चीज है जिसकी मांग राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से करते आए हैं। उन्‍होंने ट्विटर और मीडिया के जरिए बार-बार चीनी घुसपैठ को लेकर जानकारी छिपाने का आरोप केंद्र पर लगाया है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का विशेष पर्व मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है। इस साल गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई यानी कि रविवार को मनाया जा रहा है।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 'सेवा ही संगठन' कार्यक्रम के तहत बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की सहायता के लिए उठाये गये कदमों की सराहना की। पार्टी की 7 राज्य इकाइयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण प्रधानमंत्री के समक्ष दिया। इस दौरान मोदी ने कहा- साथियों हमारे लिए हमारा संगठन चुनाव जीतने की मशीन नहीं है, हमारे लिए संगठन का मतलब है सेवा। मैं आग्रह करता हूं कि हम हर मंडल की एक डिजिटल बुकलेट इस पूरे काम को समेटते हुए बनाएं। इसके बाद पूरे जिले और फिर राज्य और फिर देश की एक डिजिटल बुक बने। पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने साथ- Seven 'S' की शक्ति को लेकर आगे बढ़ना चाहिए। जिसमें सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, सद्भावना और संवाद शामिल है। राजस्थान के कार्यकर्ताओं की तारीफ की ‘सेवा ही संगठन’ की बैठक में भाजपा की बिहार इकाई के राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को लगता था कि पूर्वी भारत में अधिक गरीबी के कारण कोविड-19 ज्यादा फैलेगा, लेकिन लोग गलत साबित हुए। लॉकडाउन के दौरान भाजपा की राजस्थान इकाई के कार्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि कोई पार्टी संकट के दौरान सकारात्मक भूमिका कैसे निभा सकती है, चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में। राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में है। मराठी और भोजपुरी भाषा में किया उत्साहवर्द्धन मोदी ने महाराष्ट्र और बिहार इकाइयों के कामकाज की तारीफ मराठी और भोजपुरी भाषाओं में करके कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्द्धन किया। बैठक की अध्यक्षता करने से पहले मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में देश भर में पार्टी कार्यकर्ता अथक काम कर रहे हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए देश की सेवा सबसे पहले है।’’ भाजपा की प्रदेश इकाइयों ने लॉकडाउन के दौरान जनसेवा कार्यों और संपर्क कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री के समक्ष एक रिपोर्ट कार्ड पेश किया। नड्डा ने कार्यकर्ताओं के कार्यों का विवरण पेश किया बैठक की शुरुआत में भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने संकट के इस समय में बेहतर नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की और कहा कि महामारी से निपटने में उनके फैसलों की दुनियाभर में सराहना हुई है। नड्डा ने लॉकडाउन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा किये गये संपूर्ण राहत कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया और कहा कि करीब चार लाख कार्यकर्ताओं ने बुजुर्गों और बीमारों की मदद की। डिजिटल बैठक में यहां दिल्ली मुख्यालय से केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और गिरिराज सिंह ने भी भाग लिया, वहीं मोदी अपने आवास से वीडियो लिंक के माध्यम से इसमें जुड़े।
पटना 'सेवा ही संगठन' को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि बिहार के बीजेपी कार्यकर्ता (BJP Workers) और साथी अभिनंद के पात्र हैं। बाकी लोग कहते थे कि पूर्वी भारत में ज्यादा गरीबी है, वहां कोरोना ज्यादा फैलेगा, लेकिन आपलोगों ने सबको गलत साबित कर दिया। पीएम मोदी ने बिहार बीजेपी के कार्यकर्ताओं से कहा कि मैं देख रहा हूं कि यूपी और बिहार जैसे राज्यों के लिए काफी चुनौती है। आपलोगों ने वापस आए श्रमिकों के कल्याण करने का बीड़ा उठाया है। संकट की घड़ी में आगे भी ऐसे ही जी-जान से लगे रहें। 'सेवा ही संगठन है' को PM मोदी ने किया संबोधित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बीजेपी के तमाम कार्यकर्ताओं के साथ डिजिटल समीक्षा बैठक कर रहे हैं। यह समीक्षा बैठक कोरोना काल में बीजेपी वर्कर द्वारा किए गए कार्यों के साथ आने वाले समय में किस तरह कोरोना की लड़ाई लड़नी है, इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दिए। पीएम मोदी ने कहा कि आगे भी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें। बिहार प्रदेश बीजेपी कार्यालय में प्रधानमंत्री की डिजिटल समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल, बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव समेत बीजेपी के कई नेता मौजूद हैं। बिहार BJP की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष ने पीएम के समक्ष दिया प्रेजेंटेशन डॉक्टर संजय जायसवाल ने प्रधानमंत्री को बताया कि किस तरह से बिहार के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोरोना संक्रमण काल में काम किया है। बिहार की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में बिहार के सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप लोग प्रवासी मजदूरों को कोई दिक्कत नहीं होने देंगे और कोरोना संक्रमण काल में आप लोग जनता की भरपूर सेवा करेंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार सरकार अपने हर स्तर पर कोरोना संक्रमण की लड़ाई लड़ रही है। जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं के काम की दी जानकारी इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अभी तक चार हजार डिजिटल माध्यम से कार्यकर्ताओं से बातचीत की है। जिसमें ढाई लाख कार्यकर्ताओं पर हम लोग पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के 20 लाखों के पैकेज की वर्ल्ड बैंक ने भी तारीख की है। जेपी नड्डा ने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं ने 5 करोड़ फेस मास्क बनाकर जनता तक पहुंचाने का काम किया। 22 करोड़ लोगों तक भोजन पहुंचाने का काम किया जेपी नड्डा ने कहा कि कोरोना काल में बीजेपी के करोड़ों कार्यकर्ताओं ने कार्य किया है। 22 करोड़ लोगों तक भोजन पहुंचाने का काम किया। मोदी राशन की भी पहुंचाने का काम किया गया, जिसमें 15 दिन 20 दिन और 1 महीने का राशन था, ऐसे 5 करोड़ पैकेट बांटे गए। पीएम केयर्स फंड में 58 लाख कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया गया। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने नॉर्थ ईस्ट के बच्चों की की भी काफी मदद की। जेपी नड्डा ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के कार्यकर्ताओं को फोन किया। उसके बाद यहां के कार्यकर्ताओं ने ना सिर्फ नॉर्थ ईस्ट के बच्चों के लिए रहने का इंतजाम किया बल्कि उनके खाने का भी इंतजाम किया।
नयी दिल्ली, चार जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की सहायता करने को लेकर शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं की यह कहते हुए सराहना की कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए राष्ट्र सर्वप्रथम है। ‘सेवा ही संगठन’ की आज शाम होने वाली बैठक की अध्यक्षता करने से पहले मोदी ने कहा कि इन चुनौतीपूर्ण समय में देश भर में पार्टी कार्यकर्ता अनथक काम कर रहे हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए देश की सेवा सबसे पहले है।’’ भाजपा की प्रदेश इकाइयां लॉकडाउन के दौरान जनसेवा कार्यों और संपर्क कार्यक्रम को लेकन शनिवार शाम को मोदी को अपना रिपोर्ट कार्ड सौंपेंगी।(यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है।
बयान नई दिल्‍ली "आज हम अपने चारों तरफ वही देख रहे हैं जो 18वीं सदी में हुआ था... विस्‍तारवाद नजर आ रहा है। किसी देश में अतिक्रमण करना, कहीं समंदर में घुस जाना, कभी किसी देश के अंदर जा कर कब्‍जा करना... इन चीजों की प्रवृत्ति चल रही है। यह विस्‍तारवाद 21वीं सदी में मानवता के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता।" विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। और यह न भूलें इतिहास गवाह है ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने को मजबूर हो गई है। विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकासवाद की स्पर्धा का स्वागत कर रहा है।" चीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी के इन बयानों का अंतराल छह साल का है। पहला बयान तब का है जब मोदी 2014 में पहली बार पीएम बने थे और जापान दौरे पर थे। दूसरा बयान गलवान में 20 सैनिकों की शहादत के करीब 20 दिन बाद लेह में दिया गया। इन दोनों बयानों में कोई खास फर्क नहीं। प्रधानमंत्री जो 2014 में चीन को लेकर सोचते थे, चीन ने अपनी हरकतों से उसे सच साबित किया है। मोदी को था अंदाजा, भरोसे के लायक नहीं चीन पिछले साल अक्‍टूबर में जब चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए तो प्रधानमंत्री ने उम्‍मीद जताई थी कि भारत और चीन के रिश्‍ते और मजबूत होंगे। शुक्रवार को जब वह लेह में सैनिकों को संबोधित कर रहे थे, तो उन्‍होंने साफ तौर पर चीन के 'विस्‍तारवादी' रवैये का विरोध किया। 2019 में जिनपिंग से हाथ मिलाते समय पीएम मोदी को इस बात का भान था कि चीन भरोसे के लायक नहीं हैं। लद्दाख में भी विस्‍तार vs विकास की बात लद्दाख के नीमू में सैनिकों के सामने प्रधानमंत्री मोदी ने 6 साल पुरानी वही बात दोहराई। उन्‍होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि 'विस्‍तारवाद का युग समाप्‍त हो चुका है और अब विकासवाद का वक्‍त है।' पीएम मोदी ने चीन को साफ शब्‍दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 'किसी पर विस्तारवाद की जिद सवार हो तो वह हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट जाती हैं।' चीन को साफ संदेश, हम भूले नहीं हैं... चीन ने भारतीय इलाके में घुसकर हिंसक झड़प को जन्‍म दिया जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। चीन ने अब पूरी गलवान घाटी पर दावा ठोका है। लद्दाख में भारतीय सैनिकों से बात करते हुए पीएम मोदी ने चीन का नाम एक बार भी नहीं लिया है मगर गलवान घाटी में शहीदों का दो बार जिक्र किया। वह लेह के मिलिट्री अस्‍पताल भी गए जहां गलवान झड़प में घायल हुए कुछ सैनिक इलाज करा रहे हैं। पीएम मोदी ने चीन को साफ संदेश दिया कि हम अपने जवानों की शहादत भूले नहीं हैं, न ही हम चीन की तरह जवानों की शहादत छिपाने में यकीन रखते हैं। चीन ने गलवान घाटी में हुए संघर्ष में अपनी ओर के हताहतों पर कोई जानकारी नहीं दी है। चीन की चाल अब नहीं होगी कामयाब भारत और चीन के बीच की सीमा तय नहीं है। इसी वजह से कई इलाकों में अक्‍सर दोनों तरफ के सैनिक टकरा जाते हैं। चीन ने लंबे वक्‍त तक बेहतर व्‍यापार संबंधों का हवाला देकर सीमा निर्धारण को टाले रखा। 1993 में जो समझौते हुए, उसमें क्लेम लाइन्‍स तक पैट्रोलिंग की बात पर रजामंदी हुई। बीच-बीच में चीन ने जिस तरह से घुसपैठ कर भारतीय जमीन कब्‍जानी चाही, उससे उसकी नीयत का पता चलता है। मगर अब पीएम मोदी ने लेह में जो कहा है, उससे पता चलता है कि भारत का रुख बदल गया है। अब द्विपक्षीय रिश्‍ते व्‍यापार पर नहीं, सीमा के सम्‍मान और उसके हल पर आधरित होगा। nbt
नई दिल्ली, 02 जुलाई 2020,चीन से जारी तनाव के बीच भारत ने लद्दाख में स्पेशल फोर्सेज की तैनाती की है. सूत्रों के मुताबिक, देश के अलग-अलग स्थानों से पैरा स्पेशल फोर्स की यूनिट को लद्दाख में ले जाया गया है, जहां वे अभ्यास कर रहे हैं. स्पेशल फोर्सेज ने 2017 में पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई थी. सूत्रों ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनका इस्तेमाल चीन के खिलाफ भी किया जा सकता है. स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ियों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया है. उन्हें उनकी भूमिकाओं के बारे में पूरी तरह से अवगत कराया गया है, जिसे चीन के साथ दुश्मनी बढ़ने पर अंजाम देना पड़ सकता है. भारत में 12 से अधिक स्पेशल फोर्सेज की रेजिमेंट हैं जो अलग-अलग इलाकों में ट्रेनिंग लेती हैं. जम्मू और कश्मीर में तैनात स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ियां लेह में और उसके आस-पास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नियमित रूप से वारगेम्स का अभ्यास करती हैं. बता दें कि भारत और चीन के बीच मई के शुरुआती दिनों से ही तनाव बना हुआ है. ये तनाव 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़क के बाद और बढ़ गया. इस झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे, जबकि चीन ने अपने सैनिकों के मारे जाने की कोई जानकारी नहीं दी. दोनों देश बातचीत के जरिए LAC पर जारी तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों में कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है. चीन एक ओर बातचीत का दिखावा करता है तो वहीं वो धोखे से भारत के सैनिकों पर वार भी कर चुका है. वहीं, भारत अपने सैनिकों की शहादत का बदला चीन से लेना शुरू कर चुका है. सरकार चीन को आर्थिक मोर्चे पर चोट पहुंचा रही है. मोदी सरकार ने चीन के 59 ऐप्स को बैन करके उसे बड़ा झटका दिया. इसके अलावा चीन की कंपनियों से करार भी रद्द किए जा रहे हैं. चीन से तनाव के बीच मोदी सरकार कई बड़े फैसले भी ले रही है. गुरुवार को ही रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 21 मिग-29 और 12 सुखोई (एसयू-30 एमकेआई) लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई. इसके साथ ही 59 मिग-29 लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन की भी मंजूरी दी गई है. मिग-29 लड़ाकू विमानों की खरीद रूस से की जाएगी. साथ ही मौजूदा मिग-21 लड़ाकू विमानों का अपग्रेडेशन भी से कराया जाएगा.
02 जुलाई 2020भारत ने अब सैन्य और आर्थिक मोर्चे के अलावा चीन को कूटनीतिक मोर्चे पर भी घेरना शुरू कर दिया है. भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हॉन्ग कॉन्ग में चीन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद से पहली बार इस मुद्दे पर बयान दिया है. बता दें कि हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए सुरक्षा कानून को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन हो रहे हैं. इस कानून के जरिए चीन हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता खत्म करने की फिराक में है. दुनिया भर में हॉन्ग कॉन्ग में चीन के इस कदम की आलोचना हो रही है. अब भारत ने अपने बयान में कहा है कि सभी संबंधित पक्षों को मुद्दे को उचित, गंभीर और वस्तुगत तरीके से सुलझाना चाहिए. भारत के इस बयान को चीन के खिलाफ कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. कुछ दिन पहले ही भारत ने 59 चीनी मोबाइल ऐप बैन करके उसे आर्थिक झटका दिया था. 1997 तक ब्रिटिश उपनिवेश रहा हॉन्ग कॉन्ग 'एक देश, दो व्यवस्थाएं' (वन नेशन, टू सिस्टम) के तहत चीन को सौंप दिया गया था लेकिन हॉन्ग कॉन्ग को राजनीतिक और कानूनी स्वायत्तता हासिल है. हालांकि, अब चीन हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता खत्म कर उस पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहता है. इसे लेकर हॉन्ग-कॉन्ग में खूब विरोध-प्रदर्शन हुए और दुनिया के तमाम देशों ने इसे लेकर चीन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया. हालांकि, भारत अब तक खामोश था. भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजीव कुमार चंदर ने जेनेवा में आयोजित हुए मानवाधिकार परिषद के 44वें सत्र में बयान दिया. बयान में कहा गया है, "हॉन्ग कॉन्ग में भारतीय समुदाय की एक बड़ी आबादी बसती है जिसे देखते हुए भारत हालिया घटनाक्रमों पर करीब से नजर बनाए हुए है. हमने इन घटनाक्रमों को लेकर चिंता जाहिर करने वाले कई बयानों के बारे में सुना है. हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित तरीके से इस मुद्दे को सुलझाएंगे." दुनिया भर में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा के दौरान भारत की तरफ से ये बयान जारी किया गया है. ये पहली बार है जब भारत ने हॉन्ग कॉन्ग मुद्दे पर कोई बयान जारी किया है. चीन से चल रहे सैन्य तनाव के बीच इसे भारत का चीन को कूटनीतिक जवाब भी माना जा रहा है. इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत के चीनी ऐप्स बैन करने के कदम का समर्थन किया था और कहा था कि भारत की क्लीन ऐप वाले कदम से उसकी संप्रभुता और एकता सुरक्षित रहेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका भी चाहता था कि भारत हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर आवाज उठाए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 27 देशों ने चीन से हॉन्ग कॉन्ग में लाए गए नए सुरक्षा कानून पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है. ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका-जापान-भारत के गठजोड़ में भारत ही इकलौता ऐसा देश था जिसने अभी तक हॉन्ग कॉन्ग मुद्दे पर बयान नहीं दिया था. अमेरिका, यूके, कनाडा के साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के नए कानून को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. हॉन्ग कॉन्ग के अलावा, मोदी सरकार ने ताइवान पर भी चीन की सरकार को घेरने के संकेत दे दिए हैं. ताइवान भी हॉन्ग कॉन्ग की ही तरह चीन के 'वन नेशन, टू सिस्टम' का हिस्सा है और चीन जरूरत पड़ने पर ताइवान के बलपूर्वक विलय की बात भी करता रहा है. भारत हमेशा से ताइवान को लेकर बीजिंग की 'वन चाइना पॉलिसी' को मानता रहा है और इसी वजह से ताइवान के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक संबंध स्थापित नहीं किए लेकिन अब ताइवान को लेकर भारत की रणनीति में भी बदलाव के संकेत मिलते दिख रहे हैं. पिछले दिनों, ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन के शपथ ग्रहण समारोह में दो बीजेपी सांसदों ने अनाधिकारिक तौर पर हिस्सा लिया. साई इंग-वेन का चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख रहा है और उन्होंने कहा था कि वह वन नेशन टू सिस्टम की दलील के नाम पर कभी भी चीन का आधिपत्य स्वीकार नहीं करेंगी. बीजेपी सांसदों ने ताइवान की राष्ट्रपति को एक बधाई संदेश भी भेजा था. इसके बाद खबर आई कि चीनी दूतावास ने दोनों बीजेपी सांसदों से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण भी मांगा. इसके अलावा, भारत चीन में उइगुर मुसलमानों और तिब्बत को लेकर भी चीन को टेंशन दे सकता है. कई विश्लेषकों का कहना है कि भारत चीन से जुड़े मुद्दों पर अब तक इसलिए खामोश रहता था क्योंकि वह सीमा पर चीन के साथ टकराव नहीं बढ़ाना चाहता है. लेकिन 15 जून को गलवान घाटी में चीन से हुए संघर्ष और उसके विस्तारवादी रुख को देखते हुए भारत ने भी अब चीन की दुखती रगों पर हाथ रखना शुरू कर दिया है.
नई दिल्ली लद्दाख में चीन से तनातनी के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और रूस के राष्ट्रपति पुतिन (President Putin) की फोन पर बातचीत हुई। इसके कुछ देर बाद ही दोनों देशों के बीच एक बड़े रक्षा सौदे की जानकारी दी गई है। इसमें रक्षा मंत्रालय ने रूस से 33 फाइटर जेट खरीदने का एलान किया है। इसके लिए कुल बजट 18 हजार 148 करोड़ रखा गया है। इसमें भारत अपने दोस्त रूस से सुखोई-30 और मिग-29 विमान खरीदेगा। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच सामरिक सबंध और मजबूत होंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने रूस से 33 नए फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दी है। इसमें 12 सुखोई-30 लड़ाकू विमान और 21 मिग-29 भी शामिल हैं। इसके साथ ही पहले से मौजूद 59 मिग-29 को अपग्रेड भी करवाया जाएगा। इस पूरे पॉजेक्ट की कुल लागत 18,148 करोड़ रुपये बताई गई है। रक्षा मंत्रालय ने 248 एस्ट्रा एयर मिसाइल की खरीदी की भी इजाजत दी। यह भारतीय एयर फोर्स और नेवी दोनों के काम आ सकेगी। इसके साथ ही DRDO द्वारा बनाई गई एक हजार किलोमीटर रेंज वाली क्रूज मिसाइल के डिजाइन को भी मंजूरी मिल गई है। आत्मनिर्भर भारत पर जोर रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुल 38,900 करोड़ के प्रपोजल्स को मंजूरी दी है। इसमें 31 हजार करोड़ भारतीय इंडस्ट्री से होंगे। इन पैसों से पिनाका रॉकेट लॉन्चर का गोला-बारूद खरीदा जाएगा, लड़ाकू वाहनों की अप्रेडिंग आदि होगी। जुलाई में राफेल भी आ रहा चीन से तनाव के बीच 27 जुलाई को 6 राफेल विमानों की पहली खेप भारत पहुंच जाएगी। दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों और सेमी स्‍टील्‍थ तकनीक से लैस इन विमानों के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से देश की सामरिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। भारत आने वाले राफेल फाइटर जेट्स में दुनिया की सबसे आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मीटियर मिसाइल भी लगी होगी। 6 राफेल जेट फ्रांस के बोर्डोक्स से भारत उड़कर ही आएंगे। पीएम मोदी और पुतिन ने की फोन पर बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही व्लादिमीर पुतिन से बात की थी। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 75वीं वर्षगांठ पर रूस को बधाई दी। इसके साथ ही रूस को 2036 तक के लिए राष्ट्रपति चुने जाने की बधाई भी दी। ऐसा संविधान में संसोधन के बाद हुआ है। रूस में पिछले दिनों इसके लिए वोटिंग हुई थी, जिसके नतीजे अब आ गए हैं। रूस ने कहा कि भारत और रूस के बीच सामरिक सबंध और मजबूत होंगे। चीन से गतिरोध के बीच पुतिन का यह बयान अहम है। जीत के बाद पुतिन को फोन मिलानेवाले मोदी पहले ग्लोबल लीडर थे। बता दें, अमेरिका का लड़ाकू विमान F-35 स्‍टील्‍थ को दुनिया में सबसे शक्तिशादी 'हवाई योद्धा' माना जाता है। पिछले साल ही अमेरिकी F-35 स्‍टील्‍थ की टक्कर का विमान रूस ने मैदान में उतार दिया था। रूस ने पांचवीं पीढ़ी के अत्‍याधुनिक सुखोई लड़ाकू विमान Su-57E को दुनिया के सामने पेश किया था। यह विमान रेडार की पकड़ में आए बिना सुपरसोनिक स्‍पीड से उड़ान भरकर दुश्‍मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है।
नई दिल्ली लद्दाख में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीनी सेना के बीच बातचीत का दौर जारी है। लेकिन चीन ने अभी तक अपनी पैंतरेबाजी नहीं छोड़ी है। वह मीटिंग में तो बातें मानता है लेकिन जमीनी स्तर पर वैसा कुछ नहीं करता। दूसरी तरफ भारत ने चीन को दो टूक कह दिया है कि उसे 22 जून को तय हुए प्लान के हिसाब से अपने जवानों को पीछे लेकर जाना ही होगा। इस बीच भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप बैन करके उसपर प्रेशर बनाना शुरू कर भी दिया है। 11 घंटे चली बातचीत भारत और चीन के बीच मंगलवार को भी बातचीत हुई। यह बातचीत का तीसरा दौर था। जिसमें 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल हरिंदर सिंह और चीन की तरफ से मेजर जनरल लुई लिन शामिल थे। दोनों के बीच ऐसी बातचीत 6 और फिर 22 जून को हुई थी। मंगलवार की मीटिंग चुशूल-माल्डो बॉर्डर पर भारत की तरफ हुई थी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होकर देर रात तक चली। बाज नहीं आ रहा चीन टाइम्स ऑफ इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, बातचीत में सैनिकों को पीछे हटाने की बात हुई है, बावजूद इसके चीन ने 3,488 किलोमीटर में फैली LAC के अलग-अलग हिस्सों पर सैनिक बढ़ाए हैं। ऐसा लद्दाख के अलावा सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी किया गया है। इसे देखते हुए भारत ने भी अपनी तरफ से तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी है। भारत ने कहा- 22 जून का प्लान माने चीन भारत की तरफ से कहा गया है कि 22 जून की मीटिंग में जो कुछ तय हुआ था उस हिसाब से चीन को पीछे जाना चाहिए। इसमें दोनों तरफ से सैनिकों में कम से कम 3 किलोमीटर की दूरी पर बात हुई थी। मंगलवार की मीटिंग में भारत ने कहा कि पीएलए पैंगोंग झील और गलवान घाटी से अपने जवानों को पीछे करे जिससे फिर 15 जून जैसा कुछ न हो। सूत्र का कहना है कि अभी चीन की तरफ से ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा। पीछे हटने की जगह चीन सैनिक बढ़ा रहा है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
नई दिल्ली लद्दाख मसले पर केंद्र सरकार को घेर रहे राहुल गांधी पर गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया है। अमित शाह ने कहा कि वह चर्चा से नहीं डरते। राहुल गांधी कभी भी संसद में भारत-चीन पर बात कर सकते हैं। लेकिन जब जवान चीन का सामना कर रहे हैं, उस वक्त ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जिससे पाकिस्तान और चीन को खुशी हो। इस इंटरव्यू में अमित शाह से लद्दाख के ताजा हालात पर सवाल भी किया गया था। इसका शाह ने जवाब नहीं दिया कहा कि अभी इसपर बात करने का सही वक्त नहीं है। अमित शाह से राहुल गांधी के सरेंडर मोदी वाले बयान पर सवाल पूछा गया था। इसपर शाह बोले कि, 'संसद होनी है। चर्चा करनी है आइए, करेंगे। कोई नहीं डरता चर्चा से। 1962 से अबतक की स्थिति पर दो-दो हाथ हो जाए। मगर जब देश के जवान संघर्ष कर रहे हैं, सरकार स्टैंड लेकर ठोस कदम उठा रही है उस वक्त ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जिससे पाकिस्तान या चीन को खुशी हो।' राहुल पर लगाया ओछी राजनीति का आरोप अमित शाह ने आगे कहा कि सरकार भारत विरोधी प्रोपगेंडा से लड़ने में सक्षम है लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इतनी बड़ी पार्टी का पूर्व अध्यक्ष ऐसी 'ओछी' राजनीति करता है। सरेंडर मोदी वाले ट्वीट का आगे जिक्र करते हुए शाह बोले कि कांग्रेस और राहुल को खुद इस बारे में सोचना चाहिए। उनकी इस बात को पाकिस्तान औ चीन में लोग हैशटैग बनाकर इस्तेमाल कर रहे थे। कांग्रेस को इसके बारे में सोचना चाहिए कि उनकी पार्टी के नेता का हैशटैग चीन-पाकिस्तान को बढ़ावा देता है। वह भी ऐसे संकट के वक्त में। दरअसल, LAC विवाद पर राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी वास्तव में ‘सरेंडर मोदी’ हैं। इससे पहले और बाद में भी राहुल गांधी लद्दाख मामले पर सरकार से लगातार सवाल कर रहे हैं। आज मन की बात कार्यक्रम से पहले भी राहुल गांधी ने कहा था कि राष्ट्र सुरक्षा पर बात कब होगी। हालांकि, मन की बात में ही पीएम मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया। मोदी ने कहा कि भारत दोस्ती और ‘दुश्मनी’ दोनों निभाना जानता है। मोदी बोले, 'लद्दाख में भारत की भूमि पर, आंख उठाकर देखने वालों को, करारा जवाब मिला है। भारत, मित्रता निभाना जानता है, तो, आंख-में-आंख डालकर देखना और सही जवाब देना भी जानता है।'
मुंबई पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ को लेकर राहुल ने शुक्रवार को भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बारे में सच बोलें और अपनी जमीन वापस लेने के लिए कार्रवाई करें तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होगा। हालांकि अब इस पर उन्हीं के सहयोगी दल एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने उनको आईना दिखाया है। चीन को लेकर लगातार दिए जा रहे राहुल के बयानों पर शरद पवार ने कहा, 'हम नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था। चीन ने हमारी 45 हजार स्क्वेयर किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था। वर्तमान में मुझे नहीं पता कि चीन ने जमीन ली है या नहीं, मगर इस पर बात करते वक्त हमें इतिहास याद रखना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए।' पवार ने कहा, युद्ध की कोई आशंका नहीं दिखती पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान रक्षा मंत्री रहे शरद पवार ने कहा, 'मुझे अभी युद्ध की कोई आशंका नहीं दिखती है। हालांकि चीन ने जाहिर तौर पर हिमाकत तो की है। गलवान में भारतीय सेना ने जो भी निर्माण कार्य किया है वह अपनी सीमा में किया है।' राहुल का दावा, चीन ने तीन जगह हमारी जमीन छीनी इससे पहले मोदी सरकार पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘एक जरूरी सवाल उठता है। कुछ दिन पहले हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान की एक इंच जमीन किसी ने नहीं ली, कोई हिंदुस्तान के भीतर नहीं आया। उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चल रहा है, लद्दाख के लोग कह रहे हैं और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कह रहे हैं कि चीन ने तीन जगह हमारी जमीन छीनी है।’ 'घबराने की जरूरत नहीं है, सच बताएं प्रधानमंत्री' राहुल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, आपको सच बोलना ही पड़ेगा, देश को बताना पड़ेगा। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आप कहेंगे कि जमीन नहीं गई है, लेकिन जमीन गई होगी तो चीन को इससे फायदा होगा। हमें मिलकर इनसे लड़ना है। इन्हें उठाकर वापस फेंकना है, निकालना है। आप बोलिए कि चीन ने हमारी जमीन ली है और हम कार्रवाई करने जा रहे हैं। पूरा देश आपके साथ खड़ा है।’ उन्होंने फिर से यह सवाल दोहराया कि हमारे जवानों को हिंसक झड़प वाली रात बिना हथियार के किसने भेजा और क्यों भेजा?
नई दिल्ली, 27 जून 2020,भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. भारत में चीन के खिलाफ काफी आक्रोश भी देखा जा रहा है. वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर हमलवार हैं. इस बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए. राहुल गांधी की ओर से चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को लगातार घेरा जा रहा है. जिसके बाद अब एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आईना दिखा दिया है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि 1962 में क्या हुआ था इसको भूल नहीं सकते हैं. चीन ने हमारी 45000 वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वर्तमान में चीन ने जमीन ली है या नहीं. हालांकि इस मुद्दे पर बात करते वक्त हमें इतिहास को याद रखना चाहिए. साथ ही शरद पवार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए. इसके साथ ही शरद पवार ने चीन के साथ युद्ध की संभावना से इनकार किया. शरद पवार ने कहा कि चीन के साथ अभी युद्ध की कोई आशंका नहीं है. लेकिन चीन ने निश्चित रूप से दुस्साहस किया है. गलवान में हम जिस मार्ग का निर्माण कर रहे हैं, वह हमारी सीमा पर है. राहुल गांधी ने साधा निशाना बता दें कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन विवाद को लेकर लगातार निशाना साध रहे हैं. लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए, तभी से हालात तनावपूर्ण हैं. वहीं राहुल गांधी ने पीएम मोदी से कहा कि पीएम बिना डरे, बिना घबराए सच बताएं कि चीन ने जमीन ली है और हम कार्रवाई करने जा रहे हैं. इस स्थिति में पूरा देश आपके साथ खड़ा है. राहुल गांधी ने कहा कि पूरा देश एक होकर सेना और सरकार के साथ खड़ा है. लेकिन एक जरूरी सवाल उठा है, कुछ दिन पहले हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोई हिंदुस्तान में नहीं आया, किसी ने हमारी जमीन नहीं ली है. राहुल गांधी ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीर में दिख रहा है, सेना के पूर्व जनरल कह रहे हैं और लद्दाख के लोग कह रहे हैं कि चीन ने हमारी जमीन एक नहीं बल्कि तीन जगह छीनी है.
गया नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधा निशाना हमला किया। साथ ही नड्डा ने देश की जनता का हवाला देते हुए सोनिया गांधी से 10 प्रश्न पूछे। उन्होंने कहा मैं सोनिया जी को ये कहना चाहता हूं कि कोरोना के कारण या चीन की स्थिति के कारण मूल प्रश्नों से बचने का प्रयास न करें। भारत की फौज देश की और हमारी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित है। कांग्रेस ने सत्ता में रहकर क्या काम किए? लिखें उन्होंने कहा कि 130 करोड़ देशवासी जानना चाहते हैं कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए क्या-क्या काम किया और किस तरह से आपने देश के विश्वास के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने चीन और कांग्रेस के संबंधों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि चीन की तरफ से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा क्यों दिया गया? नियमों की अवहेलना करके फंड क्यों लिया? उन्होंने कहा मैंने कुछ दिन पहले ट्वीट करके राजीव गांधी फाउंडेशन पर प्रश्न उठाए थे, आज पी. चिदंबरम कहते हैं कि फाउंडेशन पैसे लौटा देगा। देश के पूर्व वित्त मंत्री जो खुद बेल पर हों, उसके द्वारा ये स्वीकारना होगा कि देश के अहित में फाउंडेशन ने नियम की अवहेलना करते हुए फंड क्यों लिया। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच क्या है रिलेशन जेपी नड्डा ने कहा कि RCEP भारतीय किसानों, MSME क्षेत्र और कृषि के हित में नहीं है, जिसके चलते पीएम मोदी इसमें शामिल नहीं हुए। बीजेपी अध्यक्ष ने कांग्रेस से सवाल किया कि RCEP का हिस्सा बनने की क्या जरूरत थी? चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 1.1 बिलियन अमेरीकी डॉलर से बढ़कर 36.2 बिलियन अमेरीकी डॉलर कैसे हो गया? उन्होंने पूछा कि INC और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच क्या संबंध है? देश जानना चाहता है। पीएम राहत कोष का फंड RGF में क्यों डाला गया बीजेपी अध्यक्ष ने पूछा कि देश यह जानना चाहेगा कि 2005-2008 के बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) पैसा क्यों डायवर्ट किया गया? यूपीए शासन में कई केंद्रीय मंत्रालयों, सेल, गेल, एसबीआई, अन्य पर राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा देने के लिए दबाव बनाया गया। देश की जनता इसका कारण जानना चाहती है। मेहुल चौकसी ने क्यों दिया फंड मेरा कांग्रेस से सवाल है कि मेहुल चौकसी से राजीव गांधी फाउंडेशन में पैसा क्यों लिया गया? मेहुल चौकसी को लोन देने में मदद क्यों की गई? उन्होंने कहा कि ये सभी प्रश्नों के जवाब देशवासी कांग्रेसे से पूछना चाहते हैं।
लखनऊ, 26 जून 2020, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान' की शुरुआत कर दी है. इसका मकसद प्रवासी कामगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा. पीएम मोदी ने एक साथ सवा करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया. इस अभियान को लॉन्च करने के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कई लाभार्थियों के साथ संवाद किया. पीएम मोदी ने गोंडा की विनिता से बात की. इस दौरान विनिता ने बताया कि उन्होंने कई महिलाओं के साथ मिलकर एक समूह बनाया है. हमें प्रशासन की ओर से सूचना मिली थी, जिसके बाद हमने ये काम शुरू किया. इसके बाद नर्सरी शुरू की और अब एक साल में 6 लाख रुपये की बचत होती है. इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी ने बहराइच के तिलकराम से बात की, जो खेती करते हैं. पीएम ने कहा कि पीछे बहुत बड़ा मकान बन रहा है, इसके बाद किसान ने कहा कि ये आपका ही है. ये आवास योजना से हमें फायदा मिला. तिलकराम ने बताया कि पहले झोपड़ी में थे लेकिन अब मकान बन रहा है तो परिवार काफी खुश हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपको मकान मिला है, लेकिन मुझे क्या दोगे. जवाब में किसान ने कहा कि हम दुआ करते हैं कि आप पूरी जिंदगी पीएम रहें. इस पर पीएम मोदी हंसने लगे. उन्होंने कहा कि मुझे क्या दोगे. फिर पीएम मोदी ने कहा कि आप अपने बच्चों का खूब पढ़ाओ. आप हर साल मुझे चिट्ठी लिखें और बच्चों की पढ़ाई के बारे में बताएं. देश का सबसे बड़ा रोजगार कार्यक्रम देश का यह सबसे बड़ा रोजगार कार्यक्रम है, जिसे दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऑनलाइन माध्यम से लाभार्थियों से मुखातिब हुए. एक दिन में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी और रोजगार देने वाली यह सबसे बड़ी संख्या है, जिसमें प्रवासी और स्थानीय लोग शामिल हैं. इसमें दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑनलाइन माध्यम से उत्तर प्रदेश के 6 जिलों के लाभार्थियों से बात भी कर रहे है. जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से इस कार्यक्रम के जरिये लाभार्थियों से बात कर रहे हैं.
लखनऊ, 25 जून 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जून को देश के सबसे बड़े रोजगार कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करेंगे. इस रोजगार कार्यक्रम से उत्तर प्रदेश के एक करोड़ से ज्यादा नौकरी और रोजगार पाने वाले लोग जुड़ेंगे. इसमें तीन प्रकार के रोजगार के कार्यक्रम जुड़े हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से प्रदेश के एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी और रोजगार मिलेगा. इसमें अन्य राज्यों से घर लौटे प्रवासी श्रमिक और कामगार के साथ-साथ स्थानीय लोग भी लाभान्वित होंगे. पीएम मोदी 'आत्म निर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान' की शुरुआत करेंगे. तीन प्रकार के लाभार्थी देश के सबसे बड़े इस रोजगार कार्यक्रम में तीन प्रकार के रोजगार कार्यक्रम को शामिल किया गया है. पहला भारत सरकार का आत्मनिर्भर भारत रोजगार कार्यक्रम है. इसे भारत सरकार ने शुरू किया है. इसमें वे लोग शामिल हैं, जिन लोगों को इस कार्यक्रम के जरिए रोजगार दिया गया है. जबकि दूसरा एमएसएमई सेक्टर में जिन लोगों को नौकरी मिली है और सरकार ने जिन औद्योगिक संगठनों के साथ एमओयू किया है, ये लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. तीसरा कार्यक्रम स्वतः रोजगार का है. इसमें वे लोग होंगे, जिसमें उनके उद्यम के लिए बैंकों और सरकारी प्रयासों से कर्ज दिलाकर उनके रोजगार और उद्यम को शुरू करवाया गया है. ऐसे लोग भी इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे. देश का सबसे बड़ा रोजगार कार्यक्रम देश का यह सबसे बड़ा रोजगार कार्यक्रम है, जिसमें दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऑनलाइन माध्यम से लाभार्थियों से मुखातिब होंगे. एक दिन में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी और रोजगार देने वाली यह सबसे बड़ी संख्या होगी, जिसमें प्रवासी और स्थानीय लोग शामिल होंगे. इसमें दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑनलाइन माध्यम से उत्तर प्रदेश के 6 जिलों के लाभार्थियों से बात भी करेंगे. जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से इस कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों से बात करेंगे.
लखनऊ केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर बीजेपी (bjp news) अलग-अलग राज्यों में वर्चुअल रैलियों का आयोजन कर रही है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश में पहली वर्चुअल रैली को संबोधित किया। इस दौरान उनके निशाने पर राहुल गांधी (rahul gandhi) भी आए। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस (congress) के साथ तो आजकल भगवान भी नहीं हैं। लिखें गलवान वैली में चीन के साथ भारत की झड़प को लेकर राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। रविवार को ट्वीट कर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'सरेंडर मोदी' करार दिया। हालांकि उनके ट्वीट में स्पेलिंग की गलती होने की वजह से 'सरेंडर' को बीजेपी समर्थक 'सुरेंद्र' के तौर पर ले रहे हैं, जिसका अर्थ होता है सुरों का राजा। राहुल के इस हमले को भी बीजेपी ने अब मौके के तौर पर भुनाना शुरू कर दिया है। 'नरों के ही नहीं देवताओं के भी नेता हैं मोदी' वर्चुअल रैली के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, 'अब तो आपके (कांग्रेस) साथ भगवान भी नहीं हैं। नरेंद्र मोदी इज सुरेंद्र मोदी...। वो नरों के ही नेता नहीं अब सुरों (देवताओं) के भी नेता हैं, ये बात आपकी जुबान से निकलती है इस बात को समझना चाहिए। इसलिए भगवान भी अब शुभ सोच रहा है इस बात को आपको समझना चाहिए।' ट्वीट पर बीजेपी, 'राहुल गांधी मर्यादा तोड़ रहे हैं' दरअसल राहुल गांधी ने रविवार सुबह अपने ट्वीट में पीएम मोदी को 'सरेंडर मोदी' करार दिया। राहुल ने जापान टाइम्‍स में छपे एक ओपिनियन पीस को शेयर करते हुए यह टिप्‍पणी की। बीजेपी ने इस ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता शाहनवाज हुसैन ने एक वीडियो जारी कर कहा कि 'राहुल गांधी मर्यादा तोड़ रहे हैं।' कई बीजेपी नेताओं ने राहुल के इस ट्वीट को शर्मनाक करार दिया।
नई दिल्ली सरकार ने उत्तर प्रदेश में कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इस एयरपोर्ट की वजह से बौद्ध धर्म के अनुयायियों को कुशीनगर आने में आसानी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि ओबीसी कमिशन अब इस बात का भी ध्यान रखेगा कि स्पेलिंग मिस्टेक की वजह से किसी जाति के लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित न होना पड़े। कमिशन इसकी रिपोर्ट जनवरी 2021 तक दे सकता है यानी पहले से निर्धारित समय में 6 महीने का समय और दिया गया है। पशुधन के विकास के लिए 15000 करोड़ रुपये कैबिनेट की बैठक में पशुधन विकास के लिए 15000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूध का उत्पादन भी बढ़ेगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। 1482 शहरी सहकारी बैंकों और 58 बहु-राज्य सहकारी बैंकों समेत सरकारी बैंकों को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सुपरवाइजरी पॉवर्स के तहत लाया जा रहा है। आरबीआई की शक्तियां जैसे कि अनुसूचित बैंकों पर लागू होती हैं, वैसे ही अब सहकारी बैंकों के लिए भी लागू होंगी। यह फैसला भी कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
नई दिल्ली, 24 जून 2020,प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में रहते हुए ऐतिहासिक भूल की हैं, एक परिवार की गलतियों को पूरा देश भुगत रहा है. संबित पात्रा ने इस दौरान संसद में पूछे गए सवालों को सामने रखा, चीन के मसले पर कांग्रेस का रवैया नरम क्यों है? संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संसद में कई बार चीन, पाकिस्तान को लेकर सवाल किया गया है. ये सवाल 2012 में पूछा गया था, तब कांग्रेस की सरकार ने जवाब दिया था कि पाकिस्तान-चीन ने भारत की 78 हजार स्क्वायर किमी. की ज़मीन हड़प ली है, चीन ने भी जम्मू-कश्मीर में कई हजार किमी. की जमीन पर कब्जा किया है. बीजेपी नेता ने कहा कि चीन ने पहले ही भारत की जमीन ली थी, इसके अलावा पाकिस्तान ने भी PoK की जमीन को चीन को सौंप दिया था. संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के मां-बेटे ने देश में भ्रम फैलाया हुआ है. संबित पात्रा ने कहा कि हिंदुस्तान के दो राज्य के बराबर जमीन पाकिस्तान और चीन ने कब्जा ली है, हमारा सवाल है कि कांग्रेस सरकार ने ये जमीन क्यों दी? बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि 1962 के युद्ध में सही वक्त पर जवानों को चेतावनी नहीं दी गई थी. गौरतलब है कि बुधवार को जेपी नड्डा ने कई ट्वीट किए. उन्होंने लिखा कि चीन के साथ विवाद के मसले पर समूचा विपक्ष और देश सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन सिर्फ एक परिवार को दिक्कत हो रही है. जेपी नड्डा ने लिखा था कि कांग्रेस पार्टी एक परिवार को ही देश मानने लगी है.
मॉस्को रूस में विक्ट्री डे (Victory Day Russia) के जश्न के लिए मॉस्को पहुंचे भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defense Minister Rajnath Singh) ने भारतीय दूतावास में महात्मा गांधी की मूति पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और फिर रूस के उपप्रधानमंत्री युरी इवानोविक बोरिसोव से मुलाकात की। बाद में प्रेस को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष सहयोग है और रूस ने भरोसा दिलाया है कि भारत संग किए गए समझौते तेजी से पूरे किए जाएंगे। दोस्ती का सबूत' राजनाथ ने द्वितीय विश्व युद्ध में रूस के लोगों के सर्वोच्च बलिदान देने के लिए श्रद्धांजलि दी और कहा कि भारतीय सैनिक भी सोवियत आर्मी को सहायता पहुंचाने में शहीद हुए थे। सिंह ने कहा कि मॉस्को में कोविड-19 महामारी के बाद किसी भी भारतीय डेलिगेशन का यह पहला दौरा है और यह भारत और रूस की खास दोस्ती का प्रमाण है। सिंह ने कहा, 'महामारी की कठिनाइयों के बाद भी हमारे द्विपक्षीय संबंध बने हुए हैं। मुझे भरोसा दिलाया गया है कि जो समझौते किए जा चुके हैं उन्हें जारी रखा जाएगा। उनको और तेजी से कम समय में पूरा किया जाएगा। किस समझौते पर नजर भारत और रूस के बीच 2018 में दुनिया के सबसे अडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम S-400 की डील 5 अरब डॉलर यानी 40,000 करोड़ रुपये में फाइनल हुई थी। भारत ने इसकी पांच यूनिट्स खरीदने का करार किया है। दरअसल, यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। भारत को इसकी खासी जरूरत इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान के पास अपग्रेडेड एफ-16 से लैस 20 फाइटर स्क्वैड्रन्स हैं। इसके अलावा उसके पास चीन से मिले J-17 भी बड़ी संख्या में हैं जबकि चीन के पास 1,700 फाइटर है, जिनमें 800 4-जेनरेशन फाइटर भी शामिल हैं। 'डिफेंस को लेकर विशेष सहयोग' रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच खासकर डिफेंस को लेकर विशेष सहयोग है। उन्होंने कहा कि उपप्रधानमंत्री युरी से हुई चर्चा से पूरी तरह से संतुष्ट हैं। 9 मई को होने वाले जश्न को कोरोना वायरस के चलते पोस्टपोन कर दिया गया था और अब बुधवार, 24 जून को मनाया जाएगा। इस साल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्यक्रम के लिए न्योता मिला था लेकिन उनकी जगह सिंह पहुंचे हैं। अहम है दौरा भारत की तीनों सेनाएं भी परेड में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगी। राजनाथ सिंह की यात्रा बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है। सिंह अपनी यात्रा के दौरान एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने तथा द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तारित करने के तौर-तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं। वह मंगलवार शाम को मॉस्को पहुंचे हैं। वहीं, डिफेंस सेक्रटरी डॉ. अजय कुमार ने रूस के डेप्युटी डिफेंस मिनिस्टर कर्नल जनरल एवी फॉमिन से मुलाकात की। इससे पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवारोव ने कहा है कि भारत और चीन को किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं और दोनों देश अपने विवाद को खुद ही सुलझा लेंगे। उन्‍होंने आशा जताई कि स्थिति शांतिपूर्ण रहेगी और दोनों ही देश विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। इससे पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक की शुरुआत में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने डॉक्‍टर कोटनिस की याद दिलाकर चीन को संदेश देने की कोशिश की थी।
नई दिल्ली आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। इसमें सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) में अब जो भी सामान मिलेगा उसपर 'कंट्री ऑफ ऑरिजिन' यानी सामान कहां का है यह बताना जरूरी होगा। क्या है सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) यह पोर्टल 2016 में लॉन्च हुआ था। केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभाग इसी से सामान और किसी सर्विस को खरीदते हैं। फिलहाल सरकारी डिपार्टमेंट, मंत्रालय, पब्लिक सेक्टर यूनिट, राज्य सरकारें, सीआरपीएफ को ही इससे सामान खरीदने की इजाजत है। इसमें ऑफिस स्टेशनरी से लेकर वाहनों तक सब मिलता है। होगा मेक इन इंडिया फिल्टर भारत का यह कदम भी चीन को आइना दिखाने जैसा है। दरअसल, इस वक्त चीनी सामान के बहिष्कार की मांग देशभर में तेज हो चुकी है। ऐसे में सरकार ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने की बात कही है। इसी के तहत अब सामान बेचनेवालों को बताना होगा कि उसका उद्गम देश कौन सा है। इसके साथ ही साइट पर अब मेक इन इंडिया का फिल्टर भी लगा दिया है। इससे खरीददार सिर्फ उन सामानों में से चुन सकेंगे जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत सामान भारत का हो।
नई दिल्ली गलवान में हिंसक झड़प के बाद हाईलेवल मीटिंगों का दौर जारी है। सोमवार को दिल्ली में आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे सेना के टॉप कमांडर्स के साथ बैठक की। जनरल नरवणे ने कमांडर्स से देश की सुरक्षा के हालात की जानकारी मांगी है। जानकारी के अनुसार, बैठक कल भी जारी रहेगी। सेना के अधिकारियों के अनुसार, कमांडरों के दूसरे चरण की मीटिंग के लिए सभी कमांडर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैं। उत्तरी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए 22-23 जून को सेना कमांडरों का सम्मेलन आयोजित किया गया है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन लद्दाख की गैलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद सीमा तनाव को कम करने के लिए सैन्य-स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। बता दें कि बीते 15 जून की रात में गलवान घाटी में हुई झड़प में चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर कंटीले तारों से हमला किया था, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए थे। इस हिंसक झड़प में चीन के भी 40 से ज्यादा जवान मारे जाने की सूचना है। हालांकि, चीन ने अभी तक किसी सैनिक के मारे जाने की बात नहीं कही है।
नई दिल्ली लाइन ऑफ ऐक्चुल कंट्रोल (LAC) पर चीन की कोई भी एक गलती अब उसको बहुत भारी पड़ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ ने सेना को फ्री हैंड दे दिया है। सेना को स्थिति के मुताबिक ऐक्शन लेने की छूट पहले भी दी गई थी, लेकिन अब राजनाथ सिंह ने साफ कह दिया है कि सेना चीन की हर हरकत का जवाब देने के लिए तैयार रहे। यह भी जानकारी मिली है कि चीन के साथ लगती सीमा की रक्षा के लिए भारत अब से अलग सामरिक तरीके अपनाएगा। रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख मसले पर मीटिंग की थी। इसमें सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ-साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख (जल, थल और वायु) शामिल थे। चारों से राजनाथ सिंह ने लद्दाख की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। जानकारी के मुताबिक, बैठक में सेना को LAC पर पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई है। कहा गया है कि चीन की हर हरकत का जवाब देने के लिए सेना तैयार रहे। सेना प्रमुखों से चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखने को कहा गया है। राजनाथ सिंह ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पैंगोंग झील पर बढ़ सकता है तनाव गलवान घाटी में मन की नहीं कर पाने के बाद चीन बौखला गया है। अब उसने पैंगोंग झील के 8 किलोमीटर इलाके को ब्लॉक किया है। ऐसे में एक्सपर्ट्स को आशंका है कि अगला विवाद पैंगोंग झील पर ही हो सकता है। यहां 5 और 6 मई को सेनाओं के बीच झड़प हो चुकी है। लेकिन अगर इसबार ऐसा हुआ तो वह धक्कामुक्की, पत्थरबाजी और डंडों तक सीमित रहना मुश्किल है। फिलहाल गलवान घाटी में भारतीय सेना भी पूरी तरह सतर्क है। थल और वायु सेना दोनों हाई-अलर्ट पर हैं। चीन की किसी भी गुस्ताखी का जवाब देने की सेना को मोदी सरकार ने पूरी छूट दी है।
नई दिल्ली लाइन ऑफ ऐक्चुल कंट्रोल (LAC) पर चीन की कोई भी एक गलती अब उसको बहुत भारी पड़ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ ने सेना को फ्री हैंड दे दिया है। सेना को स्थिति के मुताबिक ऐक्शन लेने की छूट पहले भी दी गई थी, लेकिन अब राजनाथ सिंह ने साफ कह दिया है कि सेना चीन की हर हरकत का जवाब देने के लिए तैयार रहे। यह भी जानकारी मिली है कि चीन के साथ लगती सीमा की रक्षा के लिए भारत अब से अलग सामरिक तरीके अपनाएगा। रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख मसले पर मीटिंग की थी। इसमें सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ-साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख (जल, थल और वायु) शामिल थे। चारों से राजनाथ सिंह ने लद्दाख की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। जानकारी के मुताबिक, बैठक में सेना को LAC पर पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई है। कहा गया है कि चीन की हर हरकत का जवाब देने के लिए सेना तैयार रहे। सेना प्रमुखों से चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखने को कहा गया है। राजनाथ सिंह ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पैंगोंग झील पर बढ़ सकता है तनाव गलवान घाटी में मन की नहीं कर पाने के बाद चीन बौखला गया है। अब उसने पैंगोंग झील के 8 किलोमीटर इलाके को ब्लॉक किया है। ऐसे में एक्सपर्ट्स को आशंका है कि अगला विवाद पैंगोंग झील पर ही हो सकता है। यहां 5 और 6 मई को सेनाओं के बीच झड़प हो चुकी है। लेकिन अगर इसबार ऐसा हुआ तो वह धक्कामुक्की, पत्थरबाजी और डंडों तक सीमित रहना मुश्किल है। फिलहाल गलवान घाटी में भारतीय सेना भी पूरी तरह सतर्क है। थल और वायु सेना दोनों हाई-अलर्ट पर हैं। चीन की किसी भी गुस्ताखी का जवाब देने की सेना को मोदी सरकार ने पूरी छूट दी है।
21 जून 2020, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग का साधक कभी संकट में धैर्य नहीं खोता है. योग का अर्थ ही है- समत्वम् योग उच्यते. अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है. गीता में भगवान कृष्ण ने योग की व्याख्या करते हुए कहा है- ‘योगः कर्मसु कौशलम्’अर्थात्, कर्म की कुशलता ही योग है. पीएम मोदी ने कहा कि जब हम योग के माध्यम से समस्याओं के समाधान और दुनिया के कल्याण की बात कर रहे हैं, तो मैं योगेश्वर कृष्ण के कर्मयोग का भी आपको पुनः स्मरण करना चाहता हूं. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां कहा गया है- युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु। युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दु:खहा।। अर्थात्, सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपनी कर्तव्य को सही ढंग से करना ही योग है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां निष्काम कर्म को बिना किसी स्वार्थ के, सभी का उपकार करने की भावना को भी कर्मयोग कहा गया है. कर्मयोग की ये भावना भारत के रग रग में बसी हुई है. एक सजग नागरिक के रूप में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे. हम प्रयास करेंगे कि घर पर योग और परिवार के साथ योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं.हम जरूर सफल और विजयी होंगे. कोरोना से लड़ने में मददगार योग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग कोरोना से लड़ने में मददगार साबित हो रहा है. उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि छठे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का ये दिन एकजुटता का दिन है. ये विश्व बंधुत्व के संदेश का दिन है. बच्चे, बड़े, युवा, परिवार के बुजुर्ग, सभी जब एक साथ योग के माध्यम से जुडते हैं, तो पूरे घर में एक ऊर्जा का संचार होता है. पीएम ने कहा कि इसलिए, इस बार का योग दिवस, भावनात्मक योग का भी दिन है, हमारी बॉन्डिंग को भी बढ़ाने का दिन है. पीएम मोदी ने कहा कि विश्व बंधुत्व का दिन है. जो हमें जोड़े, साथ लाए वहीं तो योग है. जो दूरियों को खत्म करे वही तो योग है. हमारी फैमली बाउंडिंग को बढ़ाने का दिन है. प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना की वजह से दुनिया योग की जरूरत को पहले से ज्यादा महसूस कर रही है. हमारी इम्युनिटी स्ट्रांग हो तो इस बीमारी को हराने में मदद मिलती है. अनेक आसान हैं. वो आसन ऐसे हैं जो मेरे शरीर की ताकत को बढ़ाते हैं. कोरोना हमारे रेस्परटरी सिस्टम पर अटैक करता है. प्राणायम से इस बीमारी से लड़ने में मदद मिलती है. सामान्य तौर पर अनुलोम विलोम प्रणायम सभी करते हैं. लेकिन प्रणायाम कई तरह के होते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि COVID-19 वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र, यानि कि respiratory system पर अटैक करता है. हमारे रेस्परट्री सिस्टम को स्ट्रांग करने में करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है वो है प्राणायाम, यानि कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज.
नई दिल्ली लद्दाख घटना (India China Border Standoff) के बाद चीनी कंपनियों और चाइनीज सामान के बहिष्कार (BoycottChina) की मुहिम तेज हो गई है। सरकार ने फैसला कर लिया है कि भारत चीन पर निर्भरता (Dependancy on china) कम करेगा और आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar bharat) को सपॉर्ट करेगा। इसके लिए केंद्र ने इंडस्ट्री से कहा है कि वह उन सामानों की लिस्ट तैयार करे, जिसे चीन से खरीदा जा रहा है। गैर जरूरी सामानों की लिस्ट होगी तैयार इंडस्ट्री से डीटेल रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार गैर जरूरी सामानों की पहचान करेगी जिसे चीन की बजाए लोकल स्तर पर ही तैयार किया जा सके। इंडस्ट्री अपनी लिस्ट में उन सामानों को विशेष रूप से बताएगी, जिसका आयात बंद करना अभी संभव नहीं है। DPIIT ने किया इंडस्ट्री से संपर्क ईटी की खबर के मुताबिक, DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) ने इस स्ट्रैटिजी को लेकर ट्रेड असोसिएशन से संपर्क किया है और उनसे लिस्ट मांगी गई है। भारत चीन से ऑटोमोबाइल, फॉर्मास्युटिकल, खिलौना, प्लास्टिक, फर्निचर जैसे सामान बड़े पैमाने पर आयात करता है। चीन के बहिष्कार की चारों तरफ मांग गलवान घाटी की घटना में 20 भारतीय जांबाज शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद से सरकार लगातार कह रही है कि हर हाल में चीन पर निर्भरता कम करनी है। यही आवाज पूरे देश, इंडस्ट्री और व्यापार संगठनों से भी आ रही है। तीन टाइमलाइन पर काम करेगी सरकार चीन पर निर्भरता कम करने लिए सरकार तीन टाइमलाइन स्ट्रैटिजी पर काम कर रही है। शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म। इंडस्ट्री जो लिस्ट सरकार को देगी उसके हिसाब से यह तय किया जाएगा कि शॉर्ट टर्म में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इसके साथ-साथ मीडियम और लॉन्ग टर्म का खांका भी अभी तैयार किया जाएगा। सरकार ने बदली अपनी स्ट्रैटिजी रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने अपनी स्ट्रैटिजी बदल दी है। सरकार का फोकस अब प्राइवेट सेक्टर पर है। पिछले दो-चार दिनों में इस तरह की खबर ज्यादा आ रही थी कि चाइनीज कंपनियों को मिले कॉन्ट्रैक्ट कैंसल किए जा रहे हैं। रेलवे, टेलिकॉम, मेट्रो के कई प्रॉजेक्ट हैं जिसका कॉन्ट्रैक्ट चीनी कंपनियों के पास है।
खगड़िया/उन्नाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दूसरे राज्यों से लौट कर आए प्रवासी मजदूरों को उनके घर के आसपास ही रोजगार देने के लिये 50,000 करोड़ रुपये की लागत से गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की। बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के तेलिहार गांव से शुरू की गयी इस योजना का मकसद वापस आए प्रवासी श्रमिकों और गांव के लोगों को सशक्त बनाना, स्थानीय स्तर पर विकास को गति देना और आजीविका के अवसर प्रदान करना है। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि उन्हें गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू करने का आइडिया कहां से आया। पीएम ने जाना श्रमिकों में कितनी है देशभक्ति पीएम ने बताया कि मैंने लॉकडाउन के दौरान मीडिया में एक खबर देखी। यह खबर उत्तर प्रदेश उन्नाव से थी। वहां एक सरकारी स्कूल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। यहां शहरों से आने वाले लोगों को क्वारंटीन किया गया था। उस समय ज्यादात श्रमिक दक्षिण भारत से आए थे। इन श्रमिकों रंगाई-पुताई और पीओपी के काम में मास्टरी थी, लेकिन वे क्वारंटीन थे। वे अपने गांव के लिए कुछ करना चाहते थे, तो उन्होंने सोचा कि ऐसे ही पड़े रहेंगे दो टाइम खाते रहेंगे, उसके बजाय, हम जो जानते हैं हमारे हुनर का प्रयोग कीजिए। हमारे श्रमिक भाइयों ने क्वारंटीन में रहते हुए ही उस स्कूल का कायाकल्प कर दिया। इस खबर से मैंने जाना कि श्रमिक भाइयों मे कितनी देशभक्ति है, मेरे मन को प्रेरणा मिली। वहीं से मुझे आइडिया आया कि ये लोग कुछ करने वाले हैं और वहीं से गरीब कल्याण रोजगार अभियान का आइडिया आया। इस वक्त इतना हुनर गांवों में है, अगर यही हुनर और श्रम गांवों में लगेगा तो कायाकल्प होगा इसके बारे में सोचा सकता है। इस योजना के तहत के 25 कामों का चयन किया गया है। इस योजनता के तहत हर गांव की जरूरतों को गरीब कल्याण योजना के माध्यम से पूरा किया जाएगा। देश के 116 जिलों में शुरू हुई योजना पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि यह छह राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा के 116 जिलों में लागू होगी और इससे प्रवासी मजदूरों को उनके घर के आसपास ही रोजगार मिलेगा। यह योजना ऐसे समय शुरू की गयी है जब कोरोना वायरस महामारी और ‘लॉकडाउन’ के कारण लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूरों को कामकाज से हाथा धोना पड़ा और वे अपने गांवों को लौटने को मजबूर हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस योजना पर कुल 50,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस योजना के जरिये ग्राम पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और जल संरक्षण जैसे विभिन्न प्रकार के 25 कार्यों का क्रियान्वयन होगा, देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘यह हमारा प्रयास है कि श्रमिकों को उनके घर के पास ही काम मिले, अबतक आप शहरों का विकास कर रहे थे, अब आप अपने गांवों की मदद करेंगे।’ मोदी ने कहा कि इस योजना से श्रमिकों के सम्मान की रक्षा होगी और गांवों के विकास को गति मिलेगी। यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा। इससे पहले, उन्होंने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लद्दाख गतिरोध पर कहा कि हर किसी को बिहार रेजीमेंट की वीरता पर गर्व है। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं अन्य संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में ऐसी बात कही जिसे सुनकर हर भारतीय का सीनी गर्व से चौड़ा हो जाएगा। उन्होंने गलवान घाटी में शहीद हुए 20 सैनिकों के शौर्य का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे सैनिक वीरगति प्राप्त करने से पहले भारत माता की तरफ आंखों उठाने वालों को जीवनभर का सबक सिखा गए। पीएम ने कहा, 'लद्दाख में हमारे 20 जांबाज शहीद हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता की तरफ आँख उठाकर देखा था, उन्हें वो सबक सिखाकर गए।' चीन द्वारा एलएसी पर जो किया गया, उससे पूरा देश आहत है, आक्रोशित है। यह भावना हमारी इस चर्चा के माध्यम से भी आपकी तरफ से भी बार-बार प्रकट हुई है। मैं आपको आश्वस्त कर रहा हूं कि हमारी सेना देश की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। डिप्लॉयमेंट हो, ऐक्शन हो, काउंटर ऐक्शन हो- जल, थल, नभ में हमारीसेनाओं को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रही है। आज भारत की सेनाएं हर सेक्टर में एक साथ मूव करने में पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में हमने जहां एक तरफ सेना को अपने स्तर पर उचित कदम उठाने की छूट दी है, वहां दूसरी तरफ राजनयिक माध्यमों से भी चीन को अपनी बात दो-टूक स्पष्ट कर दी है। भारत शांति और दोस्ती चाहता है, लेकिन संप्रुभता की रक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। और आप सबने इसी भाव को प्रकट किया है। साथियों, बीते पांच वर्षों में देश ने अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए बॉर्डर एरिया में इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट को प्राथमिकता दी है। हमारी सेनाओं की दूसरी आवश्यक्ताओं, जैसे फाइटर प्लेन्स, आधुनिक हेलीकॉप्टर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम आदि पर भी हमने बहुत बल दिया है। नए बने इन्फ्रास्ट्रक्चर की वजह से खासकर एलएसी में हमारे पैट्रोलिंग की कपैसिटी भी बढ़ गई है। पैट्रोलिंग बढ़ने की वजह से सतर्कता बढ़ी है और एलएसी पर हो रही गतिविधियों के बारे में भी समय पर पता चल रहा है। जिन क्षेत्रों पर पहले बहुत नजर नहीं रहती थी, अब वहां भ हमारे जवान अच्छी तरह मॉनिट कर पा रहे हैं, रिस्पॉन्ड भी कर पा रहे हैं। अब तक जिनको पूछता नहीं था, कोई रोकता-टोकता नहीं था, अब हमारे जवान डगर-डगर पर उन्हें रोकते हैं, उन्हें टोकते हैं। बेहतर हो रहे इन्फ्रास्टक्चर से एक मदद ये भी मिली है कि हमारे जवान जो उस कठिन परिस्थिति में वहां तैनात रहते हैं, उन्हें साजो-सामान पहुंचाने में आसानी हुई है। साथियों, राष्ट्रहित, देशवासियों का हित, हमेशा हमसभी की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। चाहे ट्रेड हो, कनेक्टिविटी है, काउंटर टेररिजम हो, भारत ने कभी किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कार्य है, जो भी जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है, उसी तरह तेज गति से किया जाता रहेगा। मैं आप सभी को, सभी राजनीतिक दलों को फिर से आश्वस्त करता हूं कि हमारी सेनाएं सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। हमने उन्हें यथोचित कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी हुई है।
नई दिल्ली आगामी 21 जून को अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग दिवस के मद्देनजर गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 के दौर में हमने खुद को मजबूत बनाने के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (preventive healthcare) पर काफी फोकस किया है। यही कारण है कि मुझे विश्वास है कि योग और भी अधिक लोकप्रिय हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले गुरुवार को लोगों से अपील की कि वे कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर इस बार यह दिवस अपने घरों में ही मनाएं। इस वर्ष का विषय 'घर पर योग' और 'परिवार के साथ योग' होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी के कारण इसे घर के अंदर ही मनाया जाना चाहिए। उन्होंने एक विडियो संदेश में कहा कि योग दिवस समारोह बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने का अवसर है लेकिन विशेष स्थिति होने के कारण इस वर्ष लोगों को अपने घरों में ही यह दिवस मनाना चाहिए। योग दिवस 21 जून को मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है, लेकिन उत्साह को नहीं। इस वर्ष रविवार 21 जून को अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वर्चुअल योग महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के नामी योगाचार्य ऑनलाइन योग का प्रदर्शन करेंगे। आयुष मंत्रालय के निर्देशों पर इस बार सभी सरकारी कार्मिकों और आमजन को घर पर ही योग करने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली, 17 जून 2020,लद्दाख में भारत-चीन सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद जल, थल और वायुसेना पूरी तरह से अलर्ट पर हैं. सूत्रों के मुताबिक, चीनी नौसेना को कड़ा संदेश भेजने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना भी अपनी तैनाती बढ़ा रही है. तीनों सेनाओं को अलर्ट पर रहने का फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CDS जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की हुई बैठक में लिया गया. सेना ने पहले ही अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में LAC के साथ अपने सभी प्रमुख फ्रंट-लाइन ठिकानों पर अतिरिक्त जवानों को रवाना कर दिया है. वायु सेना ने पहले से ही अपने सभी फॉरवर्ड लाइन बेस में LAC और बॉर्डर एरिया पर नजर रखने के लिए अलर्ट स्तर बढ़ा दिया है. सूत्रों ने कहा कि चीनी नौसेना को कड़ा संदेश भेजने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना भी अपनी तैनाती बढ़ा रही है. बता दें कि गलवान घाटी में सोमवार रात को हुई हिंसक झड़प के बाद दिल्ली में बैठकों का दौर चल रहा है. मंगलवार को राजनाथ सिंह ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख के साथ बैठक की थी. तो वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पीएम मोदी से मुलाकात की. इसके अलावा सीसीएस की भी बैठक हुई. उधर गृह मंत्रालय में हाई लेवल बैठकों का दौर चल रहा है. बता दें कि सोमवार को हुई झड़प में कर्नल संतोष बाबू समेत भारतीय सेना के 20 सैनिक शहीद हो गए. वहीं, चीन के 43 सैनिकों के भी हताहत होने की खबर है. पीएम मोदी ने क्या कहा उधर, हिंसक झड़प पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत शांति चाहता है लेकिन उकसाए जाने पर जवाब जरूर दिया जाएगा. पीएम ने कहा कि भारत शांतिपूर्ण देश है. मतभेद हुए भी तो कोशिश की है कि विवाद न हो. पीएम मोदी ने कहा कि हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं, लेकिन अपने देश की अखंडता के साथ समझौता भी नहीं करते. इस घटना पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की. एस जयशंकर ने कहा कि गलवान में जो कुछ भी हुआ, उसे चीन ने काफी सोची-समझी और पूर्वनियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया है. इसलिए, भविष्य की घटनाओं की जिम्मेदारी उसी पर होगी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना का द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.
नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है। मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई हमें उकसाएगा, तो वह भ्रम में न रहे। भारत के पास हर हाल में यथोचित जवाब देने की ताकत है। बुधवार को कोरोना वायरस पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले लद्दाख में भारत-चीन विवाद पर बात की। उन्होंने जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत के जवान मारते-मारते शहीद हुए हैं। देश को उनके शौर्य पर गर्व है। उन्होंने साफ किया कि भारत की संप्रभुता और अखंडता से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'वैसे भारत शांति चाहता है, लेकिन किसी के उकसाने पर उचित जवाब देना भी जानता है। मोदी ने कहा कि मैं शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं, जवानों और उनके परिवार को भरोसा दिलाता हूं कि देश आपके साथ है, स्थिति कुछ भी हो देश आपके साथ है। मोदी ने आगे कहा कि भारत अपने स्वाभिमान और हर एक इंच जमीन की रक्षा करेगा। भारत शांति चाहता है, लेकिन उकसावे पर चुप नहीं बैठेगा पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन का नाम लिए बगैर कहा कि भारत उसके साथ सहयोग और दोस्ताना रास्ते पर चला है। उन्होंने कहा कि भारत शांतिपूर्ण देश है। इतिहास भी इस बात का गवाह है कि हमने विश्व में शांति फैलाई। पड़ोसियों के साथ दोस्ताना तरीके से काम किया। मतभेद हुए भी को कोशिश की है कि विवाद न हो। हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं लेकिन अपने देश की अखंडता के साथ समझौता भी नहीं करते। भरोसा देता हूं- बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा' मोदी ने आगे कहा कि देश को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखडता, संप्रभुता की रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। किसी को भ्रम या संदेह नहीं होना चाहिए कि भारत शांति चाहता है लेकिन उकसाने पर उचित जवाब देने में सक्षम है। मारते-मारते मरे हैं हमारे वीर सैनिक: मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में शहीद हुए वीर जवानों को याद करते हुए कहा कि देश को गर्व है कि हमारे सैनिक मारते-मारते मरे हैं। अपनी बात खत्म करके उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन भी रखवाया। आज जिन 15 राज्यों से पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना पर बात की उसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं। ये वे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश हैं जिनमें कोरोना विस्फोट हो चुका है। मतलब कोरोना के मामले यहां लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना वायरस पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन की बैठक बुलाई थी। इसमें पहले दिन की चर्चा मंगलवार को हुई थी। इसमें 21 राज्यों के मुखियाओं से बात की गई थी। ये वे 21 राज्य थे जिनमों कोरोना की स्थिति कंट्रोल में है।
नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गलवान घाटी में पैट्रोलिंग पॉइंट नंबर- 14 पर जब चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों पर हमला किया, उस वक्त पीएलए सैनिकों की तादाद भारतीय सैनिकों के मुकाबले पांच गुना थी। मतलब हमारे सैनिक पीएलए सैनिकों के मुकाबले चार गुना कम थी, बावजूद इसके हमारे वीर जवानों ने चीन के दोगुने सैनिक मार गिराए। छह से सात घंटे तक गलवान नदी के पास चली झड़प के बारे में बात करते हुए भारतीय सेना के एक अधिकारी ने कहा, 'हमारी संख्या कम थी।' 'चीनी सेना का सबसे घातक हमला' दोनों पक्षों के बीच सोमवार रात हुई झड़पों के बारे में सरकार के सूत्रों का कहना है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर बुरी तरह से हमला किया। सूत्रों ने बुधवार को कहा, 'भारतीय सैनिकों के खिलाफ संख्या बढ़ाई गई थी। फिर भी भारतीय पक्ष ने पीएलए से लड़ने का फैसला किया। भारतीय सैनिकों की संख्या चीनी सैनिकों की अपेक्षा 1:5 थी।' यह भी बताया जा रहा है कि चीन ने भारतीय सैनिकों का पता लगाने के लिए थर्मल इमेजिंग ड्रोन का भी इस्तेमाल किया था। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'हमारी याद में यह चीनी सेना द्वारा भारतीय सेना के जवानों पर किया गया सबसे घातक हमला था।' जब दंग रह गए थे कर्नल संतोष बाबू सूत्रों ने बताया कि हमले में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू यह देखने के लिए गए थे कि चीनी सैनिक स्टैंड ऑफ स्थिति से हट गए हैं या नहीं क्योंकि ऐसा करने का उनकी ओर से वादा किया गया था। मगर संतोष बाबू उस स्थान पर पहुंचे तो वे वहां लगा शिविर देखकर आश्चर्यचकित थे, तभी पीएलए के सैनिक उग्र हो उठे। चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर बेरहमी से हमला कर दिया। ध्यान रहे कि चीनी सेना की इस दगाबाजी में हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए जबकि चीन के 43 सैनिकों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। कंटीले तारों और पत्थरों से हमला भारतीय सेना ने कहा कि भारतीय सैनिक उस स्थान पर गए थे, जहां तनाव हुआ था। भारतीय जवान वहां बिना किसी दुश्मनी के चीनी पक्ष के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार के साथ केवल यह जांचने के लिए गए थे कि क्या वे वादे के अनुसार डी-एस्केलेशन समझौते का पालन कर रहे हैं या नहीं। भारतीय सेना के अधिकारी ने बताया, 'लेकिन वे फंस गए और उन पर पूरी तरह बर्बर हमला किया गया। उन्होंने भारतीय सैनिकों पर हमला करने के लिए सभी तरह के कंटीले तारों और पत्थरों का इस्तेमाल किया।' बढ़ सकती है शहीद सैनिकों की संख्या सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के कई जवान गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि शहीद होने वाले भारतीय जवानों की संख्या में और इजाफा हो सकता है क्योंकि गंभीर रूप से घायल सैनिकों की संख्या 10 से अधिक है। हालांकि, भारतीय सेना के अधिकारी ने संख्या बताने से इनकार कर दिया और सिर्फ इतना कहा कि कई जवान घायल हैं। कई सैनिक गंभीर रूप से घायल सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को भारतीय हेलिकॉप्टरों ने गलवान घाटी में हमले के स्थल से जवानों के पार्थिव शरीर और घायल भारतीय जवानों को लाने के लिए करीब 16 बार उड़ान भरी। भारतीय सेना के जवानों के चार शव बुधवार सुबह गलवान घाटी से लेह लाए गए। भारतीय सेना ने मंगलवार को कहा था कि भारतीय सेना के 20 जवान (जिनमें अधिकारी भी शामिल हैं) सोमवार की रात गलवान घाटी में पीएलए के सैनिकों के साथ एक अभूतपूर्व हिंसक झड़प में शहीद हो गए हैं। सेना ने यह भी कहा कि शहीद होने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
नई दिल्ली भारत और चीन में लद्दाख के गलवान घाटी में खूनी संघर्ष के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो चुका है। इस बीच सूत्रों के अनुसार भारत ने सेना को फैसला लेने की पूरी छूट दे दी है। बता दें कि चीनी सेना के साथ संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं। चीन के धोखे के बाद देश में काफी गुस्सा है। सेना को दी गई खुली छूट-सूत्र सूत्रों के अनुसार, सेना को अपने हिसाब से फैसला लेने की छूट दे दी गई है। कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी अफेयर्स की बैठक में इस बारे में फैसला किया गया है। इस बीच अभी रक्षा मंत्री, तीनों सेना के चीफ लगातार बैठक कर रहे हैं। पीएम मोदी की हर घटना पर करीबी नजर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच मंगलवार रात देर तक गलवान में हुई घटना को लेकर बातचीत हुई है। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज फिर तीनों सेना के प्रमुखों और सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ सीमा पर मौजूदा हालात को लेकर बैठक कर रहे हैं। सेना के पास परिस्थिति के अनुसार फैसला लेने की छूट सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सेना को गलवान घाटी में सेना जो भी उचित समझती है, वैसी करने की छूट दी है। बता दें कि लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से तनाव चल रहा है। ये तनाव सोमवार को खूनी संघर्ष में बदल गया। इस संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए जबकि चीन के 43 जवान मारे गए हैं।
नई दिल्ली, 16 जून 2020,LAC पर भारत और चीन की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प पर विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने हमेशा LAC का सम्मान किया और चीन को भी ऐसा करना चाहिए. मंत्रालय ने कहा कि LAC पर कल जो हुआ उससे बचा जा सकता था. दोनों देशों को नुकसान उठाना पड़ा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है. 6 जून को सीनियरों कमांडरों की अच्छी बैठक हुई. इसके बाद ग्राउंड कमांडरों के बीच कई बैठकें हुईं. 'LAC पर जो हुआ उससे बचा सकता था' विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि सबकुछ अच्छे से होगा. चीनी पक्ष गलवान वैली में LAC का सम्मान करते हुए पीछे चला गया, लेकिन चीन के द्वारा स्थिति बदलने की एकतरफा कोशिश करने पर 15 जून को एक हिंसक झड़प हो गई. इसमें दोनों पक्षों के लोगों की मौत हुई है, इससे बचा जा सकता था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा कि सीमा प्रबंधन को लेकर भारत का जिम्मेदार रवैया है. भारत सारे काम LAC में अपनी सीमा के अंदर ही करता है. चीन से भी ऐसी उम्मीद हम रखते हैं. बयान में कहा गया कि भारत सीमा क्षेत्रों में शांति और बातचीत के माध्यम से मतभेदों का समाधान चाहता है. क्या है पूरा मामला बता दें कि भारत और चीन के रिश्तों में एक महीने से ज्यादा समय से तनाव चल रहा है. लद्दाख में LAC के पास मई के शुरुआत से ही दोनों देशों की सेना आमने-सामने हैं. ये तनाव 15 जून को और बढ़ गया. सोमवार रात को दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प में भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए. ये घटना तब हुई जब सोमवार रात को गलवान घाटी के पास दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद सबकुछ सामान्य होने की स्थिति आगे बढ़ रह थी. चीन ने क्या कहा इस घटना के बाद चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आया. बीजिंग ने उलटे भारत पर घुसपैठ करने का आरोप लगाया. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बीजिंग का आरोप है कि भारतीय सैनिकों ने बॉर्डर क्रॉस करके चीनी सैनिकों पर हमला किया था. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत ऐसी स्थिति में एकतरफा कार्रवाई ना करे.
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना के खतरे से निपटने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। मोदी ने कोरोना संकट पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग से बात करते हुए कहा कि हमें इस बात का ध्यान रखना है कि हम कोरोना को जितना रोक पाएंगे, उतनी ही हमारी अर्थव्यवस्था खुलेगी, हमारे दफ्तर खुलेंगे, मार्केट खुलेंगे, ट्रांसपोर्ट के साधन खुलेंगे और उतने ही रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में हजारों लोग विदेशों से भारत लौटे हैं और लाखों प्रवासी मजदूर अपने घर पहुंचे हैं। यातायात के लगभग सभी साधन खुल गए हैं लेकिन भारत में कोविड-19 का असर दूसरे देशों की तुलना में कम है। देश में रिकवरी रेट 50 फीसदी से ऊपर हो गया है। कोरोना से किसी भी मौत दुखद है लेकिन यह भी सच है कि भारत उन देशों में है जहां कोरोना से कम से कम मौतें हुई हैं। मास्क पहनना जरूरी है। साथ ही दो गज की दूरी, हैंड वॉशिंग और सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूरी है। बाजारों के खुलने और लोगों के घर से बाहर निकलने के कारण ये उपाय जरूरी हैं। पटरी पर लौटनी लगी है इकनॉमी मोदी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान किए गए प्रयासों का नतीजा दिखने लगा है और अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के संकेत मिलने लगे हैं। खरीफ की बुआई में पिछले साल के मुकाबले 12-13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिटेल में डिजिटल पेमेंट लॉकडाउन के पहले के स्तर का करीब 70 फीसदी पहुंच गया है जो इस बात का संकेत हैं कि देश में आर्थिक गतिविधियां पटरी पर लौट रही हैं। आत्मनिर्भर भारत पैकेज से फायदा उन्होंने कहा कि अधिकतर राज्यों में कृषि, बागवानी और एमएसएमई का बड़ा हिस्सा है। आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत इन क्षेत्रों के लिए कई उपायों की घोषणा की गई है। इससे इन क्षेत्रों का फायदा होगा। उद्योगों को तेजी से क्रेडिट मिलेगा और वे जल्दी से जल्दी अपना काम कर पाएंगे। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। मोदी ने कहा कि एमएसएमई और ट्रेड इंडस्टी के लिए वैल्यू चेन तैयार करने पर भी काम करने की जरूरत है। राज्यों को स्पैसिफिक इलाकों में 24 घंटे सामान की लोडिंग और अनलोडिंग की अनुमति देनी चाहिए ताकि शहरों के बीच माल ढुलाई में कोई दिक्कत न हो। किसानों के लिए सरकार ने कई उपायों की घोषणा की है जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। उनके पास फसल बेचने के कई विकल्प होंगे। किसानों की आय बढ़ने से मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। एकजुट होकर काम करने की जरूरत उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर और आदिवासी इलाकों में ऑर्गेनिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए जरूरी है कि हर ब्लॉक और जिले में खास उत्पादों की पहचान की जानी चाहिए। मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत जो घोषणाएं की गई हैं उसे एक निश्चित समयसीमा के तहत जमीन पर उतारा जाना चाहिए औरइसके लिए सबको एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह कोरोना से निपटने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मुख्यमंत्रियों के सुझाव जानने के लिए उत्सुक हैं। इससे आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
चर्चा नई दिल्ली वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना (Indian Army in Galwan Valley) और चीनी आर्मी के बीच हुए संघर्ष के बाद दिल्ली में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। दिल्ली में केंद्र सरकार ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं खुद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के हालातों को देखते हुए दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और तीनों सशस्त्र सेनाओं के प्रमुखों के साथ बड़ी बैठक की है। राजनाथ सिंह के आधिकारिक आवास 24, अकबर रोड पर हुई इस बैठक में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, चीफ ऑफ एयर स्टाफ आरकेएस भदौरिया और नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह ने हिस्सा लिया है। इस बैठक में राजनाथ अफसरों से वास्तविक नियंत्रण रेखा के हालातों पर अपडेट ले रहे हैं। माना जा रहा है कि एलएसी के हालात पर जल्द ही दिल्ली में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी की बैठक भी हो सकती है। पीएम मोदी से मिल सकते हैं रक्षामंत्री माना जा रहा है कि चीन की सेना के साथ हुए विवाद पर सेना के अफसर रक्षामंत्री को फीडबैक दे रहे हैं। इसके अलावा विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के अफसर भी पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि एलएसी पर उपजे हालातों को लेकर रक्षामंत्री और पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम एक बैठक कर सकते हैं। सेना के तीन जवान शहीद बता दें मंगलवार दोपहर एलएसी पर भारतीय सेना और चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के बीच हिंसक झड़प की खबर मिली है। इस संघर्ष में भारतीय सेना के एक अफसर समेत कुल 3 जवान शहीद हुए हैं। इसके अलावा चीन को भी इस झड़प में नुकसान पहुंचा है।
नई दिल्ली दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए केंद्र सरकार अब पूरी तरह हरकत में आ गई हैं। इसी सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाहने 4 आईएएस अधिकारियों को तुरंत दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, अवनीश कुमार और मोनिका प्रियदर्शिनी को अंडमान एवं निकोबार से और गौरव सिंह राजावत तथा विक्रम सिंह मलिक को अरुणाचल प्रदेश से दिल्ली बुलाया गया है। दो आधिकारियों को दिल्ली सरकार से जोड़ा ये अधिकारी दिल्ली में कोरोना की स्थिति से निपटने में मदद करेंगे। गृह मंत्री ने साथ ही केंद्र में तैनात तो सीनियर आईएएस अधिकारियों एससीएल दास और एसएस यादव को दिल्ली सरकार के साथ जुड़े रहने का भी आदेश दिया है। दिल्ली में बिगड़े हालात पर केंद्र की नजर दिल्ली में कोरोना की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। राजधानी में पिछले दो दिनों में कोरोना के 2000 से अधिक मामले आए। देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद तीसरे नंबर पर है। दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या 38958 पहुंच चुकी है। इनमें से 14945 लोग इस महामारी से उबर चुके हैं जबकि 1271 लोगों की मौत हो चुकी है। एक्शन में अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश में कोरोना की स्थिति की समीक्षा की थी और खासकर दिल्ली के हालात पर चिंता जताई थी। इसके बाद आज सुबह गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ बैठक की। करीब एक घंटे 20 मिनट चली मुलाकात में फोकस दिल्‍ली में कोरोना को रोकने, टेस्टिंग बेहतर करने, अस्‍पतालों में बेड सुनिश्चित करने और बाकी हेल्‍थ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर मजबूत करने पर रहा। दिल्‍ली को फौरन 500 रेलवे आइसोलेशन कोच दिए जा रहे हैं। इसके अलावा टेस्टिंग बढ़ाने के लिए केंद्र मदद करेगा। मीटिंग में दिल्ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन शामिल हुए। आइए आपको बताते हैं मीटिंग में किन बातों पर चर्चा हुई। मरीजों के लिए बेड की कमी को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को दिए जाएंगे। इससे दिल्‍ली में 8000 बेड बढ़ जाएंगे। यह कोच कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सभी सुविधाओं से लेस होंगे। दिल्ली के कन्टेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट मैपिंग अच्छे से हो पाए इसके लिए घर-घर जाकर हर एक व्यक्ति का व्यापक स्वास्थ्य सर्वे किया जायेगा, जिसकी रिपोर्ट 1 सप्ताह में आ जाएगी। साथ ही अच्छे से मॉनिटरिंग हो, इसके लिए हर व्यक्ति के मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करवाई जाएगी। शाम को गृह मंत्री की एमसीडी के अधिकारियों के साथ बैठक होनी है।
नई दिल्‍ली कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus pandemic) को रोकने के लिए आगे की रणनीति 96 घंटे के भीतर होने वाली 38 बैठकों में बनेगी। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ साथियों संग बैठक कर शुरुआत कर चुके हैं। रविवार को गृह मंत्री अमित शाह दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल अनिल बैजल और मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अहम मुलाकात करेंगे। फिर 16 जून को 21 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ पीएम मोदी की वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग होगी। अगला दिन बाकी बचे 15 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इनपुट लेने और सुझाव देने में जाएगा। 96 घंटों के इस मंथन से अगले दो महीने की रणनीति बाहर आ सकती है। रिव्‍यू मीटिंग में पांच राज्‍य पर फोकस प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को गृह मंत्री, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री समेत वरिष्‍ठ प्रशासनिक और स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों संग समीक्षा बैठक की। पीएमओ ने एक बयान में कहा, "हमने देखा कि कुल मामलों में से दो-तिहाई पांच राज्‍यों में हैं, खासतौर से बड़े शहरों में। डेली केसेज की पीक से निपटने की चुनौतियों को देखते हुए टेस्टिंग बेहतर करने के साथ-साथ बेड्स की संख्‍या और सेवाओं को बेहतर करने पर चर्चा हुई।" शहर और जिले के हिसाब से अस्‍पतालों और आइसोलेशन बेड्स की जरूरत प्रधानमंत्री नोट करते रहे। उन्‍होंने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर इमर्जेंसी प्‍लानिंग के निर्देश दिए हैं। दिल्‍ली में शाह की केजरीवाल संग बैठक गृह मंत्रालय में आज अमित शाह और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात होगी। इसमें स्‍टेट डिजास्‍टर मैनेजमेट अथॉरिटी (SDMA) के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) डायरेक्‍टर डॉ रणदीप गुलेरिया भी मीटिंग का हिस्‍सा होंगे। दिल्‍ली में कोरोना वायरस से हालात काफी खराब हैं। वहां पिछले दो दिन में दो-दो हजार से ज्‍यादा केसेज आए हैं। राजधानी के हालात की चर्चा शनिवार की समीक्षा बैठक में भी हुई। पीएम ने केंद्र, राज्य और एमसीडी प्रशासन के बीच कोऑर्डिनेशन पर जोर देते हुए कहा कि मिलकर लड़ते हुए ही कोरोना को हराया जा सकता है। दो दिन तक राज्‍यों संग माथापच्‍ची करेंगे प्रधानमंत्री अपने साथियों से इनपुट्स लेने के बाद 16-17 जून को प्रधानमंत्री राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मुखातिब होंगे। एक साथ 29 राज्‍यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों को समय दे पाना संभव नहीं, इसलिए उन्‍हें दो ग्रुप्‍स में बांट दिया गया है। पीएम मोदी वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक में राज्‍यों से उनकी तैयारी और आगे की रणनीति पर बात कर सकते हैं। जो 5 राज्‍य चिन्हित किए गए हैं, उनके लिए अलग से प्‍लान तैयार होगा। इस मीटिंग में उनके लिए अलग ब्रीफिंग रखी जा सकती है। अनलॉक 2 या लॉकडाउन 5.0? मीटिंग में अनलॉक 1 की गाइडलाइंस पर राज्‍यों का फीडबैक लिया जाएगा। एक पॉइंट केसेज में उछाल का भी उठ सकता है। लॉकडाउन ह‍टने के बाद से करोनो के केसेज बढ़े हैं। कुछ राज्यों ने सख्‍ती बढ़ा दी है। मीटिंग में बाकी राज्‍य भी केंद्र की तरफ से ऐसे निर्देशों की मांग कर सकते हैं। रेल सेवाएं पूरी तरह बहाल नहीं हुई हैं, इसके अलावा मेट्रो भी बंद है। अगर अनलॉक 2 की ओर बढ़ने का फैसला होता है तो ये सेवाएं शुरू हो सकती हैं।
नई दिल्ली देश और खासकर राजधानी दिल्ली में कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। बैठक की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रटरी, कैबिनेट सेक्रटरी, हेल्थ सेक्रटरी और आईसीएमआर के डीजी भी शामिल हुए। मीटिंग में प्रधानमंत्री को देशभर में कोरोना से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दी गई। पीएम ने यूं तो देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्थिति पर चर्चा की, लेकिन दिल्ली पर उनका खास तवज्जो रहा। दिल्ली पर खास चर्चा बैठक में दिल्ली में कोरोना के बिगड़ते हालात पर भी चर्चा की गई और अगले दो महीने के अनुमानों पर बात हुई। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्र और दिल्ली सरकार तथा एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक करनी चाहिए ताकि राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों से कारगर ढंग से निपटा जा सके। बैठक में कोरोना से कारगर ढंग से निपटने के लिए कई राज्यों, जिलों और शहरों द्वारा किए गए उपायों की सराहना की गई। बैठक में कहा गया कि इससे दूसरे शहरों, जिलों और राज्यों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। रविवार को दिल्ली को लेकर अहम मीटिंग ध्यान रहे कि गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 की स्थिति पर चर्चा के लिये रविवार को दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ बैठक करेंगे।यह बैठक दिल्ली में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर बुलाई गई है। दिल्ली में संक्रमण के 36 हजार मामले सामने आ चुके हैं जबकि अब तक इस महामारी से राजधानी में 1200 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रधानमंत्री को दी गई सारी जानकारी बहरहाल, नीति आयोग के सदस्य और कोरोना पर एम्पावर्ड ग्रुप वन के संयोजक डॉ. विनोद पॉल ने सबको देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति और इसे काबू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया। प्रधानमंत्री को बताया गया कि देश में कोरोना के कुल मामलों में से दो-तिहाई पांच राज्यों में हैं। बड़े शहरों में कोरोना तेजी से फैल रहा है। इसके मद्देनजर बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि टेस्टिंग और बेड्स की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को भी दुरुस्त किया जाए ताकि रोजाना बढ़ रहे मामलों से कारगर ढंग से निपटा जा सके। बेड्स और आइसोलेशन वार्ड बढ़ाने पर जोर प्रधानमंत्री ने एंपॉवर्ड ग्रुप के सुझावों के मुताबिक शहरों और जिलों में जरूरत के मुताबिक अस्पतालों में बेड्स और आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ सलाह मशविरा करके आपात योजना बनाने को कहा। प्रधानमंत्री ने साथ ही मॉनसून के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय को उचित तैयारी करने को कहा। मुख्यमंत्रियों से बात देश में कोरोना के मामले 3 लाख को पार कर चुके हैं। इस मुद्दे पर मोदी 16 और 17 जून को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों से बात करेंगे। प्रधानमंत्री 16 जून को 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों से बात करेंगे। इनमें पंजाब, असम, केरल, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, हिमाचल, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, नगालैंड, लद्दाख, पुडुच्चेरी, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादर नगर हवेली ओर दमन दीव, सिक्किम और लक्षद्वीप शामिल हैं। 17 जून को उनकी 15 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप राज्यपालों से बात होगी। इनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना और ओडिशा शामिल हैं।
मुंबई देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) इतिहास में पहली बार 500 अरब डॉलर के पार हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया कि 5 जून को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.22 अरब डॉलर बढ़ गया और कुल भंडार 501.70 अरब डॉलर का हो गया। उससे पहले 29 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 3.44 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी और तब कुल 493.48 अरब डॉलर का भंडार हो गया था। महिंद्रा ने खुशी जताकर दिलाई देश की 'गरीबी' की याद महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इस खबर पर खुशी जताते हुए सुझाव दिया था कि बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को वृद्धि की राह पर लौटने की दिशा में किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि करीब 30 साल पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग शून्य हो गया था और तब विदेश से आयात के लिए हमें अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। अब 30 साल बाद हमारे पास तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार है। भारत के पास अब दुनिया का तीसरा बड़ा भंडार भारत पहले ही विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस और दक्षिण कोरिया से आगे निकल गया है। अब भारत चीन और जापान के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने एक आर्टिकल का लिंक ट्विटर पर शेयर किया था, जिसके मुताबिक पिछले सप्ताह में रहा 493 अरब डॉलर का भंडार अगले 17 महीने तक की आयात जरूरतों के लिए पर्याप्त है। 463.63 अरब डॉलर के पार पहुंचा FCA ध्यान रहे कि फॉरन करेंसी ऐसेट्स (FCA) विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा घटक होता है और यह 5 जून को समाप्त हुए सप्ताह में 8.42 अरब डॉलर बढ़कर 463.63 अरब डॉलर पर पहुंच गया। डॉलर टर्म में बात की जाए तो विदेशी मुद्रा भंडार में पड़ी गैर-अमेरिकी मुद्रा, मसलन यूरो, पाउंड और येन की कीमतों में उतार-चढ़ाव को एफसीए में शामिल किया जाता है। सोने के भंडार में मामूली गिरावट 5 जून को समाप्त सप्ताह में सोने का भंडार 32.9 करोड़ डॉलर घटकर 32.352 अरब डॉलर रह गया। संबंधित सप्ताह में भारत का अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से विशेष निकासी अधिकार 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर बढ़कर 1.44 अरब डॉलर हो गया। वहीं, आईएमएफ में भारत का रिजर्व पॉजिशन भी 12 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.28 अरब डॉलर हो गया। रेटिंग एजेंसी S&P ने दी चेतावनी ध्यान रहे कि वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने शुक्रवार को ही कहा कि भारत को निर्यात में गिरावट रोक कर भारत वाह्य कारोबार की स्थिति मजबूत रहनी चाहिए। निर्यात में गिरावट से देश के केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आ सकती है जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है। एसऐंडपी ने कहा कि इन कारकों में अगले 12 महीने में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि कोविड-19 से जुड़े विशेषकर देश की आर्थिक वृद्धि दर के जोखिम से देश की ऋण साख को कम करने का दबाव बढ़ सकता है, यदि वृद्धी दर में सुधार उम्मीद से कम रहता है। 5 पैसे टूटकर बंद हुआ रुपया बहरहाल, घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और विदेशी निधियों की सतत निकासी के कारण शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पांच पैसे टूटकर 75.84 पर बंद हुआ। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार बाजार में जोखिम लेने की मात्रा कम हो गई है और लोगों में कोविड-19 महामारी को लेकर चिंता बढ़ रही है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 76.10 पर कमजोर खुला। हालांकि, बाद में यह हानि काफी कम हो गयी और अंत में रुपया पांच पैसे की गिरावट के साथ 75.84 पर बंद हुआ। इससे पहले बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 75.79 प्रति डालर पर बंद हुआ था। साप्ताहिक आधार पर, रुपये में 26 पैसे की गिररावट आई है। पांच जून को यह 75.58 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
नई दिल्ली, 11 जून 2020,भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत के बावजूद तनाव अभी बरकरार है. चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास अपनी फौज बनाए रखी है. इसे देखते हुए भारत ने भी अपनी सेना तैनात कर रखी है. चीनी फौज लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक डटी हुई हैं, लिहाजा भारत ने भी इसके जवाब में बड़ी संख्या में अपनी सेना तैनात की है. सीमा विवाद को देखते हुए भारत ने इस इलाके में रिजर्व फौज भी भेजी है. सरकार के एक अतिविश्वस्त सूत्र ने 'इंडिया टुडे' को बताया कि लद्दाख में चीन ने जो हरकत की है, उसे देखते हुए भरोसा नहीं किया जा सकता. उनकी मंशा क्या है, इसका भी कोई पता नहीं. इन सभी स्थितियों को देखते हुए लद्दाख क्षेत्र में अतिरिक्त फौज लगाई गई है. केवल लद्दाख ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी फौज की पूरी तैयारी है. हिमाचल में तीन डिविजन तैनात सूत्रों ने बताया कि नजदीकी कोर से इन इलाकों में इंफेंट्री के तीन डिविजन और दो अतिरिक्त ब्रिगेड को तनाव वाले इलाकों में भेजा गया है. हिमाचल प्रदेश में भी अतिरिक्त फौज लगाई गई है. अभी हाल में वेस्टर्न आर्मी कमांडर लेफ्ट. जनरल आरपी सिंह ने इस इलाके की अग्रिम चौकियों का दौरा किया था. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने दौरे में हालात का जायजा लिया और आगे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए फौज को तैयार रहने का निर्देश दिया. यही हाल उत्तराखंड के सीमाई इलाकों का है जहां गढ़वाल और कुमाउं सेक्टर में फौज की सक्रियता बढ़ा दी गई है. उत्तराखंड में वायु सेना तैयार सूत्रों के मुताबिक, उत्तराखंड के फॉरवर्ड सेक्टर में आर्मी की मदद के लिए चिन्यालिसौर में वायु सेना भी एक्टिव मोड में है. बता दें, सरहद पर बाराहोती इलाके में चीनी फौज लगातार अपने हेलिकॉप्टर भेज रही है. इससे रह-रह कर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. गढ़वाल सेक्टर में स्थित भारत की अंतिम चौकी से 30 किमी आगे चीन ने अपनी बड़ा सैन्य ठिकाना बना लिया है. सूत्रों ने बताया कि सिक्किम में चीन के साथ लगती सीमा पर भी भारत ने बड़ी संख्या में सेना लगाई है. यहां के नाकुला सेक्टर में भी चीन की हलचल देखी जा रही है. अरुणाचल में लगी माउंटेन कोर भारत की ओर से कुछ ऐसी ही तैयारी अरुणाचल प्रदेश में भी है. यहां के ईस्टर्न सेक्टर में माउंटेन स्ट्राइक कोर को किसी भी हालात से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि अरुणाचल के उस ओर चीन बिना किसी वजह फौज की संख्या बढ़ा रहा है, इसलिए बिना कोई मौका गंवाए भारत भी फौजी गतिविधि में कमी नहीं छोड़ना चाहता.
नई दिल्ली चीन के साथ जारी तनाव को लेकर की गई टिप्पणियों के कारण कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की रक्षा जगत में काफी किरकिरी हो रही है। सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक अन्य समूह ने लद्दाख सीमा विवाद से निपटने को लेकर राहुल द्वारा केंद्र सरकार की आलोचना किए जाने को 'अवांछनीय एवं निंदनीय' करार दिया है। फिर पूर्व आर्मी अफसरों के निशान पर राहुल सेवानिवृत्त अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान पर राहुल गांधी के पूर्व में दिए गए बयानों को पाकिस्तान सरकार एवं सेना ने 'इस्तेमाल किया और उनका समर्थन किया, जिससे राष्ट्र विरोधी ताकतों को बढ़ावा मिला।' इन सेवानिवृत्त अधिकारियों में एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) संजीब बोरदोलोई, एयर कमोडोर (सेवानिवृत्त) पी सी ग्रोवर और ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) दिनकर अदीब शामिल हैं। नौ रिटायर्ड अफसर बना चुके हैं निशाना इससे पहले, नौ रिटायर्ड आर्मी अफसरों ने बयान जारी कर कहा था कि राहुल के बयान बुरी सोच से प्रभावित और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। उस समूह मे लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह और मेजर जनरल एम श्रीवास्तव जैसे रिटायर्ड अफसर शामिल थे। तुच्छ राजनीति कर रहे हैं राहुल' उन्होंने कहा, 'तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए सैन्य महत्ता के मामलों को इस तरह तोड़ना-मरोड़ना अत्यंत निंदनीय है। निस्संदेह, इस प्रकार के बयान हमेशा हमारे उन सशस्त्र बलों का मनोबल और अदम्य साहस कमजोर करते हैं, जिन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पेशेवर बल के रूप में जाना जाता है और जो आजादी के बाद से सक्रिय रहे हैं।' उन्होंने 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध का भी जिक्र किया और रेखांकित किया कि उस समय भारत का नेतृत्व जवाहरलाल नेहरू ने किया था। 1962 के चीन युद्ध की दिलाई याद बयान में कहा गया है, 'हम न केवल बिना तैयारी के मैदान में उतरे बल्कि हमें चीन के हाथों बेहद शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी जबकि हमारे जवान बहादुरी से लड़े थे और चीन के जवान बड़ी संख्या में मारे गए थे।' उन्होंने कहा, 'हम भारतीय और चीनी बलों के बीच लद्दाख में सीमा पर मौजूदा गतिरोध के संबंध में राहुल गांधी के हालिया अवांछनीय ट्वीट तथा बयानों से बहुत चिंतित हैं। हम ऐसे व्यक्ति के अवांछनीय एवं निंदनीय बयानों की निंदा करते हैं जिसे यह अंदाजा नहीं है कि हमारे जवान दुनिया के सबसे दुर्गम एवं प्रतिकूल क्षेत्र में कैसे काम करते हैं।' राहुल ने किया था यह ट्वीट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध को लेकर बुधवार को आरोप लगाया था कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा में दाखिल हो गए लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश हैं और कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, 'लद्दाख में चीनी हमारे क्षेत्र में दाखिल हो गए। इस बीच, प्रधानमंत्री पूरी तरह खामोश हैं और कहीं नजर नहीं आ रहे।
पिथौरागढ़ भारत-चीन की सीमा पर हेलिकॉप्टरों ने भारत-चीन सीमा के पास मिलम से मुनस्यारी तक बनने वाली सड़क का निर्माण तेज कर दिया है। सड़क निर्माण जल्दी पूरा करने के लिए उत्तराखंड के जौहर घाटी के कठिन हिमालयी इलाके में हेलिकॉप्टर से भारी मशीनें उतारी गई हैं। इन मशीनों की मदद से सड़क बनाने के काम में तेजी लाई जाएगी। बीआरओ के मुख्य अभियंता बिमल गोस्वामी ने कहा कि 2019 में कई बार प्रयास के बाद भी उन लोगों को सफलता नहीं मिली थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) इसी महीने हेलिकाप्टरों से भारी सड़क निर्माण उपकरण उतारने में सफल हो गया है और अब सड़क बनाने के काम में तेजी आएगी। उपकरणों की कमी से काम में हो रही थी देरी अभियंता ने बताया कि 65 किलोमीटर की सड़क के संरेखण स्थल के पास लासपा में भारी पत्थर काटने के उपकरणों की कमी थी। उपकरण न होने के कारण पत्थरों को काटने में देरी के चलते निर्माण में भी देरी हो रही थी। पिछले साल कई प्रयास हुए थे असफल राज्य के पिथौरागढ़ जिले में जौहर घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बनने वाली मुनस्यारी-बोगडियार- मिलम सड़क भारत-चीन सीमा पर स्थित अंतिम चौकियों की एक कड़ी होगी। बीआरओ के अधिकारियों ने बताया, 'पिछले साल कई असफल प्रयासों के बाद, हम इस महीने में भारी मशीनों के साथ हेलिकॉप्टर उतारने में सफल रहे। अब हमें उम्मीद है कि यहां पर चुनौतीपूर्ण सड़क निर्माण का काम अब अगले तीन वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा।' सीधा खड़ा 22 किमी का पहाड़ आ रहा था आड़े अधिकारियों ने बताया कि यहां पर 22 किलोमीटर के हिस्से में पहाड़ एकम सीधा है। उसकी कठोर चट्टानों को बिना भारी उपकरणों की सहायता के काटना बहुत चुनौतिपूर्ण था। अब इन चट्टानों को काटना आसान होगा क्योंकि भारी मशीनों को हेलीकॉप्टर से कार्यस्थल तक पहुंचाया जा सकता है। 40 किमी हिस्से पर कटाई का काम पूरा हुआ बीआरओ के मुख्य अभियंता ने कहा, 'सड़क का निर्माण 2010 में 325 करोड़ रुपये की लागत के साथ शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि सड़क का निर्माण दोनों छोर से किया जा रहा है और 22 किलोमीटर के कठिन हिस्से को छोड़कर, सड़क के 40 किमी हिस्से पर कटाई का काम पूरा हो चुका है।
नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 से पूरी दुनिया लड़ रही है और भारत भी इसमें पीछे नहीं है। पर हर देशवासी अब इस आपदा को अवसर में बदलने की इच्छाशक्ति के साथ काम कर रहा है। पीएम मोदी ने देशवासियों और उद्योग जगत से अपील की जिस क्षेत्र में भारत पिछड़ा हुआ है वहां आत्मनिर्भर बनने का यही मौका है। उन्होंने कहा कि आज हमारे मन में एक बड़ा काश बन रहा है। पीएम ने बताया, भारतीयों के मन में हैं कितने काश.... मोदी ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (Indian Chamber of Commerce) कहा कि आज हर भारतीय के जेहन में यह सवाल होगा कि काश हम मेडिकल उपकरण बनाने के क्षेत्र मे आत्मनिर्भर हो जाएं। काश हम कोयला और खनिज सेक्टर में आत्मनिर्भर हो जाएं। काश हम खाने के तेल के उत्पादन में आगे बढ़े। फर्टिलाइजर के उत्पादन में काश भारत आत्मनिर्भर बन जाए। इलेक्ट्रॉनिक मैनिफैक्चर के क्षेत्र में काश भारत आत्मनिर्भर हो जाए। सोलर पैनल, बैट्री और चिप्स के निर्माण में भारत अपना पताका लहराए। उड्यन के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बने। तभी हम आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे कितने काश हमेशा से हर भारतीय को झकझोरते रहे हैं। बहुत बड़ी वजह रही है कि बीते 5-6 वर्षों में भारत की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सर्वोपरि रहा है। कोरोना संकट ने इसकी गति और तेज करने का सबक दिया है। इसी सबक से निकला है आत्मनिर्भर भारत अभियान। मुसीबत की दवाई मजबूती है उन्होंने कहा कि मुसीबत की दवाई मजबूती है। मुश्किल समय ने हर बार भारत की इच्छाशक्ति को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद हमें आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हर भारतीय के मन में इस दिशा में कदम उठाने से पहले एक सवाल उठता होगा कि भारत इन-इन क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भर हो जाए। कोरोना को पछाड़ेंगे पीएम ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम पूरी शिद्द से लगे हुए हैं और इसपर विजय पाकर रहेंगे। हमारे कोरोना योद्धा लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमें इस आपदा को अवसर में बदलना है। यह आपदा हमारे देश के लिए बड़ा टर्निंग पाइंट बना है। हम कोविड-19 को पछाड़कर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। लोकल से वोकल और एक्सपोर्टर बनने का समय पीएम ने कहा, 'परिवार में भी संतान बेटा या बेटी जब 18-20 साल का हो जाता है तो माता-पिता कहते हैं कि अपने पैरों पर खड़ा होना सीखो। यह एक तरह से आत्मनिर्भर भारत का पहला पाठ परिवार से ही सीखते हैं। भारत को भी अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। भारत दूरे देशों पर अपनी निर्भरता कम से कम करे। हर वो चीज जिसे इम्पोर्ट करने के लिए देश मजबूर है वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं प्रोडक्ट का भारत एक्पोर्टर कैसे बने। इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है। लोकल के लिए वोकल होने का समय है। हर देश, जिले और प्रदेश को आत्मनिर्भर करने का समय है।'
नई दिल्ली, 11 जून 2020,भारत और चीन के बीच ताजा सीमा गतिरोध फिलहाल कम हो गया है. लेकिन लद्दाख के बीजेपी सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारत ने चीन को एक इंच भी जमीन नहीं खोई है. आजतक/इंडिया टुडे से एक विशेष इंटरव्यू में नामग्याल ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की ओर से बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने का यह एकमात्र तरीका है. उन्होंने कहा कि सीमा के पास रहने वाले लोग किसी पड़ोसी देश के साथ टकराव नहीं चाहते, लेकिन जैसी जरूरत होगी वो वैसे देश के साथ खड़े होंगे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से इस मुद्दे पर सरकार पर चुप्पी बरतने का आरोप लगाने पर नामग्याल ने कहा, “मैं एक ऐसे नेता के बारे में क्या कह सकता हूं, जो अपनी सरकार के लागू अध्यादेश को फाड़ देता है? भय फैलाना उनके लिए एक राजनीतिक मुद्दा है. मैं केवल यह चाहता हूं कि राहुल गांधी यहां सीमा मुद्दे को समझने का प्रयास करें, मैंने ट्विटर पर उनके साथ एंगेजमेंट किया है, जहां मैंने एक सूची देकर बताया कि यूपीए के कार्यकाल में चीन ने कहां कहां जमीन पर कब्जा किया.” सांसद नामग्याल ने कहा, मैंने इन सभी क्षेत्रों का दौरा किया है और मेरे पास फोटोग्राफिक सबूत है. जब से नरेंद्र मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई है, तब से एक इंच जमीन भी चीन के हाथ नहीं खोई है.” सीमा क्षेत्रों पर बुनियादी ढांचे का विकास लद्दाख के बीजेपी सांसद के मुताबिक अगर भारत अपनी सीमा को मजबूत करना चाहता है, तो सरकार को बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा. उन्होंने कहा, "जब तक नागरिक आबादी को बढ़ावा नहीं दिया जाता है, तब तक हमारी सीमा सुरक्षा को मजबूत नहीं किया जा सकता है." यह पूछे जाने पर कि चीन की सीमा पर इस वक्त आक्रामकता के पीछे क्या मानसिकता हो सकती है जबकि वो महामारी को लेकर चारों तरफ से आलोचना का सामना कर रहा है? इस सवाल के जवाब में नामग्याल ने कहा, 'नेहरू जी (जवाहरलाल नेहरू) की ओर से भारत के लिए लागू की गई फॉरवर्ड पॉलिसी अब सिर्फ एक कागजी पॉलिसी रह गई है. हम (भारत) एक समय में एक कदम पीछे हटते रहे और चीन उस का फायदा उठाता रहा और आगे बढ़ता रहा.' उन्होंने आगे कहा, 'दिल्ली में बैठे नीति निर्माताओं को एक बात समझनी होगी. सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों में रहने वाले सभी नागरिकों को बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्कूलों जैसा मजबूत बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के साथ स्थायी रूप से बसने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए. इससे हमें लैंडमार्क और स्थायी गांव बनाने में मदद मिलेगी. हालांकि हमारे पास अब भी गांव हैं लेकिन वो लोगों के स्थायी रूप से रहने के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि न वहां चिकित्सा सुविधाएं हैं और न ही शैक्षणिक संस्थान या दूरसंचार के साधन.' नामग्याल ने सवाल किया कि जब 21वीं सदी में दुनिया 4G और 5G की ओर बढ़ रही है तो लद्दाख में रहने वाले शिक्षित युवा बिना किसी सुविधा के क्यों रहें?' चरागाह जमीन पर चीन का कब्जा बीजेपी सांसद ने स्थानीय लोगों की चरागाह भूमि पर चीनी सेना के कब्जे के मुद्दे पर कहा, 'हां, 1962 के युद्ध के बाद से दशकों से ऐसा हो रहा है जब चीन ने 37,244 वर्ग किलोमीटर अक्साई चिन पर कब्जा किया, जिसे मैं चीन के कब्जे वाला लद्दाख कहता हूं. चीनी सेना (PLA) ने चीनी बंजारों (खानाबदोशों) की आड़ में चरागाह भूमि पर इंच-इंच कर कब्जा कर लिया है. यह चीन की नीति रही है. न केवल पैंगोंग त्सो झील और चुशुल में बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमण हुआ है. हमारे बंजारे हर क्षेत्र में रहते हैं. उनकी गर्मियों और सर्दियों की चरागाह जमीन अलग-अलग हैं. सर्दियों में वो ऊंचाई से नीचे आ जाते हैं. वे जलवायु के अनुसार चलते हैं. हमने कई चरागाह जमीन खो दी हैं, क्योंकि हमारे लोग अब आगे नहीं बढ़ सकते.' अक्साई चिन को फिर हासिल करना चीनी मीडिया में एक धारणा बन रही है कि जब से भारत ने लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया है, चीन ने इसे उकसावे के रूप में देखा. इस धारणा के मुताबिक मौजूदा सीमा तनाव का प्रमुख कारण यही है और साथ ही गृह मंत्री अमित शाह का अक्साई चिन को भारत का क्षेत्र बताना है. इस मुद्दे पर नामग्याल ने कहा, 'गृह मंत्री ने सही कहा है मैं जोड़ना चाहता हूं कि अक्साई चिन सिर्फ हमारा नहीं है बल्कि CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) जो शक्सगाम घाटी से होकर गुजरता है और जिसे पाकिस्तान चीन को दिया, वो भी हमारा है. हमें सभी को फिर हासिल करना चाहिए.' यह पूछे जाने पर कि क्या इतने लंबे अंतराल के बाद क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करना संभव होगा, नामग्याल ने कहा, 'यह मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं.' क्या लद्दाख में भारत का बुनियादी ढांचा विकास, जैसे दौलत बेग ओल्डी सड़क का निर्माण, चीन को सिरदर्द दे रहा है? इस सवाल पर नामग्याल ने कहा, 'चीन को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह भारत का क्षेत्र है.' स्थानीय लोगों का मनोबल लद्दाख में स्थानीय आबादी के मनोबल के बारे में पूछे जाने पर, नामग्याल ने कहा, 'ऐसे हालात सीमा की आबादी के लिए सामान्य है क्योंकि वे पिछले कई वर्षों से इसे देख रहे हैं. लोग राष्ट्र के साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं. स्थानीय लोगों का मनोबल ऊंचा है. लेकिन उनका साफ तौर पर कहना है कि वे वर्तमान में युद्ध में नहीं जाना चाहते हैं. कोई भी टकराव उनकी विकासात्मक गतिविधियों और उनके जीवन को प्रभावित करता है. वे किसी भी पड़ोसी देश के साथ टकराव नहीं चाहते हैं. सीमावर्ती निवासियों का मनोबल बढ़ाने के लिए हमें उन्हें बुनियादी ढांचा देना चाहिए.' क्या आप सलाह देते हैं कि लद्दाख के लोगों को दूरदराज के गांवों में ले जाया जाए और उनका पुनर्निर्माण किया जाए. क्या चीन का मुकाबला करने के लिए यह एक नागरिक रणनीति हो सकती है? इस सवाल पर नामग्याल ने कहा, 'डेमचोक हमेशा ख़बरों में बना रहता है. मूल डेमचोक भारत के साथ है. इसके करीब, चीन ने अपनी तरफ एक नया डेमचोक गांव बनाया, जिसका पहले कहीं वजूद नहीं था. उन्होंने 13 निर्माण, विकसित सड़कें, दूरसंचार सुविधाएं समेत बुनियादी ढांचा बनाया है. उन्होंने स्थायी रूप से वहां के आसपास के क्षेत्रों से बंजारों को बसाया और सभी सुविधाएं दी जा रही हैं.' उन्होंने आगे, 'हमें समझना चाहिए कि सीमा को मजबूत करने के लिए, चीन स्थायी रूप से अपने लोगों को स्थापित कर रहा है. हमारे जो गांव हैं वहां एक प्राथमिक विद्यालय भी नहीं खोल सके, टेलीकॉम या कोई अन्य सुविधा नहीं दे सके. हमें शहरों से सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं है. सीमा के मूल निवासियों को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए और स्थायी रूप से बसाया जाना चाहिए.' UT बनने के फायदे क्या लद्दाख के यूटी बनने के बाद से बुनियादी ढांचे की उम्मीद पूरी हो गई है? इस पर नामग्याल ने कहा, 'लद्दाख के यूटी बनने के बाद से कई विकास कार्यों में तेजी आई है, चाहे वह सरकारी योजनाएं हों, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाएं हों, कार्यकारी एजेंसियों में मानव संसाधन बढ़ाने की आवश्यकता है. उसके बाद हम अपने बुनियादी ढांचे के काम को रफ्तार दे पाएंगे.' तिब्बत मुद्दे पर बीजेपी सांसद ने कहा, 'भू-राजनीतिक आयाम को देखते हुए, तिब्बत भारत-चीन समस्या का समाधान दे सकता है.
नई दिल्ली, 10 जून 2020, चीन और भारत के बीच तनातनी जारी है. पहले चीन से आए कोरोना वायरस ने देश की परेशानी बढ़ाई, फिर लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीनी सेना ने नापाक हरकत करके उलझन में डाला. हालांकि भारत दोनों ही मोर्चे पर चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है, लेकिन अब बारी चीनी अर्थव्यवस्था से मुकाबले की है और भारतीय सामरिक तैयारियों में लद्दाखी बैक्ट्रियन ऊंट के इस्तेमाल की भी. कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से तमाम देशों की तरह भारत की अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ाई है, लेकिन 1979 में आर्थिक सुधार के बावजूद चीन भी आर्थिक मोर्चे पर औंधे मुंह गिरा है. रहा सवाल LAC पर तनातनी से गिरती अर्थव्यवस्था का, तो भारत के लिए बैक्ट्रियन कैमल गेम चेंजर साबित हो सकते हैं. बैक्ट्रियन कैमल पर कभी सिल्क रूट का पूरा व्यापार निर्भर करता था, लेकिन अब इसे हेरिटेज एनिमल की श्रेणी में शुमार करने की डिमांड रिसर्च इकोनॉमिस्ट शेली शौर्य ने की है. इसे लेकर शेली ने पीएमओ और अन्य मंत्रालय को लेटर लिखा है. क्यों खास है बैक्ट्रियन कैमल? वर्तमान स्थिति में लद्दाख का बैक्ट्रियन कैमल उत्पादकता और सेना दोनों के लिहाज फिट बैठता है. बैक्ट्रियन कैमल में विशेष रूप से नुब्रा घाटी और लद्दाख को समृद्ध बनाने की क्षमता है. वह सेना के लिए ऐसी जगहों पर भी अच्छे ट्रांसपोर्टर के तौर पर काम आ सकता है, जहां वाहनों की आवाजाही संभव नहीं है. इसे अपने बेड़े में शामिल करने पर सेना पहले ही विचार कर चुकी है. दरअसल, पिछले कुछ सालों से चीन की सेना पैंगोंग झील के किनारे सड़कें बना रही है. 1999 में जब पाकिस्तान से करगिल की लड़ाई चल रही थी, उस समय चीन ने मौके का फायदा उठाते हुए भारत की सीमा में झील के किनारे पर 5 किलोमीटर लंबी सड़क बना ली थी. अब भारत की तरफ से भी सड़क निर्माण किया जा रहा है, जिससे चीन बौखलाया हुआ है. पैंगोंग झील के किनारे कुछ रास्ते ऐसे हैं, जहां वाहनों की आवाजाही मुश्किल है. नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल और सेंट्रल सिल्क बोर्ड के कंसल्टेंट शेली शौर्य ने बताया कि बैक्ट्रियन कैमल भारत में सिल्क रूट व्यापार के अंतिम प्रतीक चिह्नों में से एक है. ये एक ऐसा जानवर है, जो खारा पानी पी सकता है और रस्सी, कपड़ा, कांटेदार भोजन तक पचा सकता है. पैंगोंग झील का पानी भी खारा है, ऐसे में बैक्ट्रियन कैमल सेना के लिए और उपयोगी हो जाता है. शेली ने बताया कि दो-कूबड़ वाले बैक्ट्रियन कैमल लंबे समय तक बिना पानी के रह सकते हैं और यह 60-65 लीटर तक पानी जमा कर सकते हैं. यह भोजन को अपने कूबड़ में संग्रहीत करते हैं. दो कूबड़ होने के कारण ये एक कूबड़ वाले से ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं. ये एक वक्त विलुप्त होने की कगार पर थे, लेकिन नुब्रा घाटी के लोगों ने इसे बचाने का महत्त्वपूर्ण काम किया, वो भी खुद के बलबूते. 2003 में इनकी संख्या भारत में मात्र 200 के आसपास थी, लेकिन अब ये 1400 से ज्यादा हो गए हैं. लद्दाखी बैक्ट्रियन कैमल के आनुवांशिक अध्ययन से साबित होता है कि भारत के बैक्ट्रियन कैमल का उत्परिवर्तन बहाव संतुलन में है, इसलिए ये एक नई उप प्रजाति के रूप में लद्दाख और भारत के लिए अनूठा है. इसे लेकर लद्दाख सांसद जामयांग तेशरिंग नमग्याल से भी बातचीत चल रही है. 65 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हैं ये ऊंट उन्होंने बताया कि बैक्ट्रियन ऊंट बहुत अच्छे वॉकर और तेज धावक होते हैं, जो 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक से दौड़ सकते हैं. उनके पास घंटों तक चलने की क्षमता है और प्रति दिन लगभग 50-60 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली एक अच्छी गति बनाए रख सकते हैं. साथ ही 170-240 किलोग्राम के बीच भार ले जा सकते हैं. शेली ने कहा कि लद्दाख के बैक्ट्रियन कैमल्स में नुब्रा घाटी के अर्थशास्त्र को बदलने की दमदार क्षमता है. भयंकर ठंड को आसानी से सहने और बर्फ पर तेजी से चलने वाले इस लद्दाखी कैमल के बालों से शॉल और स्वेटर, अन्य कपड़े बनाए जा सकते हैं. इनकी कीमत पश्मीना की तरह होगी, बल्कि उससे ज्यादा भी जा सकती है. शुगर के मरीजों के लिए दूध है फायदेमंद बैक्ट्रियन कैमल का दूध भी काफी फायदेमंद होता है. शेली शौर्य ने बताया कि बैक्ट्रियन कैमल्स की स्तनपान अवधि बहुत लंबी (लगभग 14 से 16 महीने) है. यदि इसकी अच्छे से देखभाल की जाए तो औसतन 5 से 7 लीटर दूध प्रतिदिन मिलता है. इसके 1 लीटर दूध की कीमत 2500 से 3500 रुपये के बीच आंकी गई है. ऑनलाइन ऊंट के स्किम्ड मिल्क पाउडर के 80 ग्राम के पैकेट की कीमत 710 से 1400 रुपये तक है. शुगर के मरीज के लिए बैक्ट्रियन कैमल का दूध सबसे फायदेमंद होता है. इसके चीज (cheese) का भाव भी 20 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा पहुंच सकता है. विदेशों में इनकी बहुत मांग है. क्यों है बैक्ट्रियन कैमल पर विचार करने की जरूरत ? शेली का मानना है कि सिल्क यानी कपड़ा मंत्रालय को बैक्ट्रियन कैमल को भारतीय राष्ट्रीय सिल्क विरासत पशु घोषित करना चाहिए, क्योंकि एक वक्त सिल्क रूट पर यही बैक्ट्रियन कैमल चलता था और लद्दाख से होकर आगे PoK होते हुए कजाकिस्तान, इजिप्ट व यूरोप तक चला जाता था. ह्वेनसांग और फाह्यान जैसे खोजी चीनी यात्री उस जमाने में सिल्क रूट से बैक्ट्रियन कैमल के ही सहारे भारत पहुंचे थे. वेनिस से इतालवी यात्री मार्कोपोलो भी बैक्ट्रियन कैमल के सहारे भारत आया था. सिल्क रूट पर पड़ने वाले चीन के कुछ शहर काशी, तर्पण, कासघर, डुन्हुअंग या धनु-अंग आज भी हैं. खरोष्ठी और अन्य लिपियां भी मिली हैं. ऐसे में चीन को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी सभ्यता और आर्थिक विकास में भारत का बहुत बड़ा योगदान रहा है. शेली ने कहा कि National Productivity Council , Ministry of Commerce and Industry इसे हेरिटेज एनिमल घोषित करने पर विचार कर सकता है और Ministry of Fisheries, Animal husbandry and Dairing को भी घोषित करना चाहिए. वहीं, इस रिसर्च के बाद से केंद्रीय सिल्क बोर्ड के मेंबर सेक्रेट्री राजित ओखंडियार, ट्राईफेड के एमडी प्रवीर कृष्ण, राष्ट्रीय उत्पादकता काउंसिल के डीजी अरुण झा की ओर से बैक्ट्रियन कैमल को लेकर पहल शुरू कर दी गई है. .
नई दिल्ली चीन की सरकार के मुखपत्र के रूप में मशहूर अखबार ग्लोबल टाइम्स में आज प्रकाशित उस लेख पर देश के छोटे व्यापारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया है कि भारत के पास चीनी उत्पादों के बहिष्कार की हैसियत नहीं है। छोटे कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा है कि चीनी अखबार की चुनौती स्वीकार है और देश के व्यापारी एवं नागरिक मिलकर इस बहिष्कार को सफल कर के दिखाएंगे। भारतीय सामान हमारा अभियान कैट ने कहा है कि चीनी अखबार ने हिंदुस्तान के स्वाभिमान को ललकारा है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीनी अखबार को इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। कैट ने यह भी कहा कि 10 जून से शुरू होने वाले 'भारतीय सामान - हमारा अभियान' को और अधिक तीव्रता के साथ देश भर में चलाया जाएगा। 'भारतीय सामान - हमारा अभियान' कैट का चीनी उत्पादों के बहिष्कार का राष्ट्रीय अभियान है। लोकल पर वोकल कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल पर वोकल' के सशक्त आह्वान को मिल रहे जबरदस्त समर्थन से चीनी बौखला गए हैं। अब उसे भारत का रिटेल बाजार अपने हाथ से निकालता नजर आ रहा है और इसीलिए चीनी अखबार ने इस तरह की उपटपटांग टिप्पणी की है। इसका माकूल जवाब देश के व्यापारी और नागरिक मिल कर देंगे। यह संभव है कैट के मुताबिक, ग्लोबल टाइम्स ने प्रकाशित लेख में यह भी कहा है कि चीनी सामान का इस्तेमाल भारतीयों की आदत में शामिल हो गया है और इसका बहिष्कार करना बिल्कुल संभव नहीं है। ऐसा कहकर चीनी अखबार ने भारत के व्यापारियों की शक्ति को नजरअंदाज किया है। अखबार यह भूल गया है कि हिंदुस्तानी जिसे चढ़ाना जानते हैं उसे उतारना भी उन्हें आता है। अब चीन सहित सारी दुनिया देखेगी कि किस प्रकार भारत में चीनी उत्पादों का बहिष्कार होता है और केवल डेढ़ वर्ष में यानी दिसंबर 2021 तक चीन से 1 लाख करोड़ रुपये का आयात कैसे कम होता है। सभी वर्गों को जोड़ा जाएगा खंडेलवाल ने कहा है कि कैट अपने इस अभियान में भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य समहूों किसान, ट्रांसपोर्ट, लघु उद्योग, उद्योग, हॉकर्स, उपभोक्ता सहित अन्य स्वदेशी संगठनों का साथ लेगा।
ै नई दिल्ली लद्दाख में सीमा पर चीन से जारी तनाव के बीच भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क और तैयार है। चीन पिछले कुछ दिनों से सीमा पर अपने सैनिकों की तैयारी का वीडियो जारी कर रहा है। इस बीच, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने आज लद्दाख में सीमा की सजगता से रक्षा कर रहे भारतीय सेना के वीडियो को ट्वीट किया है। ध्रुव वॉरियर्स नामक इस वीडियो में भारत की पूरी तैयारी दिखाई दे रही है। इस वीडियो में भारतीय सेना की जल, थल और नभ की तैयारी दिखाई दे रही है। सेना के इस वीडियो को चीन को जवाब माना जा रहा है। वीडियो में भारतीय सेना की कड़ी तैयारी केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने अपने ट्विटर हैंडल से जारी इस 2 मिनट 4 सेकेंड के इस वीडियो में सेना के आसामान से लेकर जमीन तक की तैयारियों और प्रशिक्षण को दिखाया गया है। यहां तक कि रात में भी भारतीय सेना किस सजगता से इस दुर्गम इलाके में अपना परचम लहराती है यह भी इस वीडियो में है। टैंक से लेकर पैदल सेना भारत की जबर्दस्त तैयारी वीडियो में भारतीय सेना की लद्दाख में टैंक से लेकर पैदल सेना की तैयारी को दिखाया गया है। यानी भारत के जांबाजों के लिए कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं। हर वक्त सतर्क, हर वक्त निशाने पर दुश्मन वाला यह वीडियो दुश्मनों के लिए चेतावनी है। हर तरह के युद्ध के लिए तैयार वीडियों में जवानों को हर तरह के युद्ध के लिए तैयार रहने वाले प्रशिक्षण को भी दिखाया गया है। कहीं भी कहीं भी सूत्र वाक्य के साथ हेलिकॉप्टर से जवानों की जंपिंग और पैराशूट के जरिए जमीन पर उतरना और दुश्मनों को नेस्तनाबूद करने को भी दिखाया गया है। हवा में भी दिख रही ताकत आकाश में कलाबाजी करते सुखोई विमान और ड्रोन भारतीय जवानों की आंख हैं जो दुश्मनों के नापाक इरादों मिनटों में खाक कर देंगे। हर मुसीबत से आंख में आंख मिलाते हुए भारतीय जवानों की तैयारी वाला यह वीडियो चीन को जवाब माना जा रहा है। वीडियो चीन को है जवाब? माना जा रहा है कि यह वीडियो चीन को जवाब है। चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने चीनी सेना (PLA) के टैकों के साथ युद्धाभ्‍यास का वीडियो जारी किया है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि चीनी पीएलए के सैनिक अपने आमर्ड वीकल की टेस्टिंग कर रहे हैं। पीएलए के इस वीडियो में चीनी सैनिक अपने टैंकों के साथ किसी पहाड़ी इलाके में अभ्‍यास कर रहे हैं।इससे पहले सोमवार को लद्दाख सीमा पर जारी तनाव को लेकर शनिवार को हुई कोर कमांडर लेवल की बातचीत के बाद अपना दोहरा चरित्र दिखा दिया था। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने मध्य चीन के हुबेई प्रांत से चीन और भारत के बीच सीमा पर तनाव के बीच ऊंचाई वाले उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में हजारों पैराट्रूपर्स और बख्तरबंद वाहनों के साथ बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास का आयोजन किया। इसका वीडियो जारी कर‍के ग्‍लोबल टाइम्‍स ने भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की।
नई दिल्ली, 07 जून 2020,केंद्र की मोदी सरकार ने लॉकडाउन के कारण रोजी-रोटी और रोजगार गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए मेगा प्लान तैयार किया है. केंद्र सरकार ने देश के 6 राज्यों के उन 116 जिलों की पहचान की है, जहां लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं. अब सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है. इसके तहत कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों और गांवों को लौटे करोड़ों प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए पूरा खाका तैयार किया गया है. अब सरकार इन 116 जिलों में केंद्र सरकार के सोशल वेलफेयर और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम को तेजी से मिशन मोड में चलाएगी. इसका मकसद है कि घर लौटे प्रवासियों के लिए आजीविका, रोजगार, कौशल विकास और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके. इन जिलों में मनरेगा, स्किल इंडिया, जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम होगा. इसके अलावा, हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बाकी केंद्रीय योजनाओं को भी निश्चित तरीके से लागू किया जाएगा. केंद्र सरकार के मंत्रालयों को भी कहा गया है कि दो हफ्ते में इन जिलों को ध्यान में रखकर योजनाओं का प्रस्ताव तैयार करके पीएमओ भेजें. केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं. उसके बाद यूपी के 31 जिले हैं. मध्य प्रदेश के 24, राजस्थान के 22 जिले, झारखंड के 3 और ओडिशा के 4 जिले हैं. बता दें कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. लॉकडाउन के दौरान काम-धंधा बंद होने के वजह से श्रमिकों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. इसकी वजह से देशभर में श्रमिकों को पलायन शुरू हो गया. गांव घर लौटने के दौरान भी श्रमिकों को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ा. इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने कुछ अहम कदम उठाने जा रही है ताकि घर लौटे श्रमिकों के रोजगार का इंतजाम किया जा सके.
नई दिल्ली, 06 जून 2020,लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास जारी तनाव के बीच शनिवार को भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की बातचीत हुई. बैठक में भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह थे और साथ में ब्रिगेडियर ऑपरेशंस और दो चाइनीज इंटरप्रेटर भी मौजूद थे. चीन की तरफ से साउथ शिनजियांग मिलिट्री कमांड के कमांडर मेजर जनरल लियो लिन मौजूद थे. मोल्डो में 3 घंटे तक चली बैठक में चीन ने भारत से सड़क निर्माण रोकने को कहा. जवाब में भारत ने इस पर आपत्ति जताई. आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. मीटिंग की ब्रीफिंग डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन और भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को दी जाएगी. यही जानकारी विदेश मंत्रालय के साथ NSA अजित डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी. इससे पहले भी सात बार मिलिट्री लेवल बातचीत दोनों देशों के बीच हो चुकी है. चार बार ब्रिगेडियर और तीन बार मेजर जनरल रैंक ऑफिसर के साथ ये बातचीत बेनतीजा निकली. अप्रैल वाली स्थिति कायम करे चीन सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में पैंगोंग सो लेक, फिंगर फोर और फिंगर फाइव में चीन के बढ़ते दबाव और एक्स्ट्रा तैनाती के साथ चीन ने जो टेंट और कैंप के साथ परमानेंट स्ट्रक्चर बनाया है उसके बारे में बातचीत की गई. इसमें साफ तौर पर कहा गया कि अप्रैल 2020 का स्टेटस चीन कायम करे. चीन की तरफ से कहा गया कि भारत कोई भी रोड कंस्ट्रक्शन नहीं कर सकता. हालांकि, ये एलएसी पर भारत की सीमा के अंदर है इसलिए चीन का इस पर कोई भी हस्तक्षेप नहीं बनता. भारत की तरफ से ये बात भी कही गई कि गलवान में चीनी सैनिकों की तैनाती को कम किया जाए और उनको अपनी जगह पर वापस भेजा जाए. इस इलाके में चीन ने अपने सैनिकों की तैनाती भी पिछले दिनों कम की है और पीछे हटा है. भारतीय सेना के औपचारिक बयान के मुताबिक, किसी भी तरह की अटकलें बिलकुल गलत होंगी और दोनों देश मिलिट्री और डिप्लोमेटिक तरीके से विवाद को पूरी तरह से सुलझा सकते हैं. इसके लिए और भी बैठकें की जाएंगी. आज की बैठक पॉजिटिव नोट पर खत्म हुई है. लेकिन अभी भी बातचीत की जाएगी ताकि लद्दाख में एलएसी पर चीन के दबदबे को कम करते हुए तनाव को खत्म किया जा सके.
नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख में महीने भर से भारत-चीन के बीच जारी सीमा पर तनाव के बीच शनिवार को दोनों पक्षों की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सीमा पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच यह पहली बड़ी कोशिश है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने की। सूत्रों ने बताया कि चीन की तरफ से तिब्बत मिलिटरी डिस्ट्रिक्ट के कमांडर ने अगुआई की। दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत पूर्वी लद्दाख में चीन की साइड में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर माल्डो में हुई जहां बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग होती है। इंडियन आर्मी के एक प्रवक्ता ने बातचीत का जिक्र किए बिना बताया, 'भारत-चीन सीमा पर मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत और चीन के अधिकारी तयशुदा सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से जुड़ना जारी रखेंगे।' शनिवार को दोनों देशों की तरफ से हुई लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत से पहले स्थानीय कमांडरों के स्तर पर दोनों सेनाओं के बीच 12 राउंड बातचीत हो चुकी है। इसके अलावा 3 मेजर जनरल स्तर की भी बातचीत हो चुकी है। सूत्रों ने बताया कि कई दौर की बातचीत में कोई हल नहीं निकलने के बाद इतने बड़े स्तर पर बातचीत का फैसला हुआ। एक दिन पहले ही दोनों देशों के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत में दोनों ही पक्ष एक दूसरे की संवेदनशीलताओं और चिंताओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए अपने 'मतभेदों' को खत्म करने पर सहमति जताई थी।
नई दिल्ली भारत की चीन के साथ मौजूदा सीमा विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए पहली बार दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच बातचीत हुई। संयुक्त सचिव स्तर की हुई बातचीत में दोनों देशों ने एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए विवादों के निपटारे पर जोर दिया। खास बात यह है कि पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव का एक महीना होने के बाद दोनों देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर बातचीत हुई है। शनिवार को भारत-चीन के कोर कमांडरों की मीटिंग भी होनी है। शांतिपूर्ण समाधान पर सहमति विदेश मंत्रालय ने जॉइंट सेक्रटरी लेवल पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बातचीत का ब्योरा देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने ताजा हालात समेत विभिन्न द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा की। इस संबंध में भारत-चीन, दोनों ने विवाद की स्थिति में बातचीत की रूपरेखा को लेकर दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति का जिक्र किया। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच शांतिपूर्ण, स्थिर और संतुलित संबंध मौजूदा वैश्विक हालात में स्थिरता को बढ़ावा देगा। मतभेदों को विवाद नहीं बनने देने पर जोर बयान में कहा गया है, 'दोनों पक्षों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि नेतृत्व की तरफ से तय किए गए निर्देशों के आधार पर मतभेदों को शांतिपूर्वक बातचीत से निपटाया जाना चाहिए ताकि एक-दूसरे की संवेदनाओं, चिंताओं और आकांक्षाओं का सम्मान हो और मतभेदों को विवाद न बनने दिया जाए।' इस वर्चुअल मीटिंग में दोनों देशों ने कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई चुनौतियों पर बातचीत हुई। साथ ही, विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। संयुक्त सचिव स्तर पर बातचीत शुक्रवार की बातचीत भारतीय विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव और चीनी विदेश मंत्रालय के महानिदेशक (DG) वु जियांगहो के बीच हुई। वहीं, शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत भारतीय सेना की 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और साउथ शिनजियांग मिलिट्री रीजन के कमांडर मेजर जनरल लियु लिन के बीच होगी। LAC पर 5 मई से ही डटे हैं दोनों पक्ष पूर्वी लद्दाख में 5 मई को भारत और चीन के सैनिक एक-दूसरे से भिड़ गए थे। दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में करीब 250 सैनिक घायल हो गए थे। तब से वहां चार अलग-अलग इलाकों में दोनों देशों की सेना एक-दूसरे की आखों में आंखें डाले डटी हैं। इस बीच जब चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अतिरिक्त सैनिक भेजने लगा तो भारत ने भी जवाब में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। हालांकि, बढ़ते तनावपूर्ण माहौल के बीच दोनों देशों ने कम-से-कम 12 दौर की बातचीत भी की, लेकिन अब तक विवाद खत्म नहीं हो सका है और दोनों सेनाएं पीछे नहीं हटी हैं।
नई दिल्‍ली, 05 जून 2020,कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से देश की इकोनॉमी पस्‍त नजर आ रही है. इस हालात को देखते हुए मोदी सरकार ने उन सभी योजनाओं को बंद कर दिया है, जिसे 2020-21 के आम बजट में ऐलान किया गया था. यह आदेश उन योजनाओं पर भी लागू होगा, जिनके लिए वित्त मंत्रालय के खर्च विभाग ने सैद्धांतिक मंजूरी दे रखी है. ये आदेश मार्च 2021 तक के लिए लागू है. आत्‍मनिर्भर योजना पर नियम लागू नहीं हालांकि, सरकार की आत्‍मनिर्भर योजना पर ये नियम लागू नहीं होगा. आपको बता दें कि सरकार ने करीब 21 लाख करोड़ के आत्‍मनिर्भर योजना का ऐलान किया था. इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना भी शामिल है. जाहिर सी बात है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना भी जारी रहेगी. इन पर कोई रोक नहीं रहेगी. हालांकि, सरकार की ओर से स्‍पष्‍ट तौर पर उन योजनाओं के बारे में नाम नहीं बताया गया है जिन्‍हें बंद किया जाएगा. लेकिन हम आपको बताते हैं कि आम बजट में मुख्‍यतौर पर कौन सी योजनाएं शुरू हुई थीं या फिर किन योजनाओं को मंजूरी दी गई थी. जिन योजनाओं का हुआ था ऐलान आम बजट में रेलवे और नागर विमानन मंत्रालय की ओर से क्रमशः “किसान रेल” और “कृषि उड़ान” की शुरुआत का ऐलान हुआ था. इसके अलावा बजट में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) व्‍यवस्‍था के तहत राज्‍यों के साथ सहयोग से 5 नवीन ‘स्‍मार्ट सिटी’ विकसित करने का प्रस्‍ताव किया गया था. मोबाइल फोन, इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरण और सेमी-कंडक्‍टर पैकेजिंग के निर्माण को प्रोत्‍साहित करने के लिए भी एक योजना की शुरुआत होनी थी. बजट में अधिक निर्यात कर्ज के वितरण के उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए एक नई योजना ‘निर्विक’ शुरू करने का प्रस्‍ताव था. इसके तहत मुख्‍यत: छोटे निर्यातकों को आवश्‍यक सहयोग दिए जाने की बात कही गई थी. इसी तरह एक राष्‍ट्रीय तकनीकी वस्‍त्र मिशन शुरू किए जाने का भी प्रस्‍ताव था. इसका मकसद भारत को तकनीकी वस्‍त्रों के क्षेत्र में वैश्विक स्‍तर पर अग्रणी बनाना है. बजट में कहा गया था कि 20 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े पम्पों को हासिल करने के लिए पीएम कुसुम योजना का विस्तार करना होगा. यहां आपको बता दें कि सरकार ने 21 लाख करोड़ के आत्‍मनिर्भर पैकेज में कृषि, मत्‍सय, कारोबार, रियल एस्‍टेट, एमएसएमई समेत अधिकतर सेक्‍टर के लिए कुछ राहत पैकेज देने का ऐलान किया है. दरअसल, सरकार के पास राजस्व कम आ रहा है. लेखा महानियंत्रक के पास उपलब्ध रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल 2020 के दौरान 27,548 करोड़ रुपये राजस्व मिला, जो बजट अनुमान का 1.2% था. जबकि सरकार ने 3.07 लाख करोड़ खर्च किया, जो बजट अनुमान का 10 फीसदी था. वित्तीय संकट से जूझने की वजह से सरकार कर्ज भी ज्‍यादा ले रही है. बीते दिनों सरकार ने ऐलान किया था कि वह चालू वित्त वर्ष के लिए अपने बाजार से कर्ज लेने का अनुमान 4.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करेगी.
नई दिल्ली, 04 जून 2020,लद्दाख बॉर्डर पर चीन से टकराव के बीच केंद्र सरकार को लद्दाख में चीनी सेना की गतिविधियों की पूरी रिपोर्ट मिली है. सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्र सरकार को चीन की गतिविधियों के संबंध में पूरी रिपोर्ट सौंप दी है. चीन से लद्दाख मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी है. रिपोर्ट में चीन की गतिविधियों के साथ-साथ भारतीय सेना की तैयारियों के बारे में भी विस्तृत सूचना दी गई है. जिन सुरक्षा एजेंसियों की नजर लद्दाख की हालिया गतिविधियों पर है, उन सभी ने रिपोर्ट में सरकार को इस बात की जानकारी दी है कि कैसे पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की तैनाती की गई है. चीन ने पूर्वी लद्दाख सीमा के पास अलग-अलग जगहों पर अपनी सेनाओं को तैनात किया है. सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में हर गतिविधि का जिक्र है. सरकार को सौंपे गए रिपोर्ट में एजेंसियों ने इस बात की भी जानकारी दी है कि कैसे बड़ी संख्या में चीन की सेना लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के नजदीक पहुंची और बड़े सैन्य अभ्यास को अंजाम दे रही है. रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि 5 से 6 मई के बीच चीनी सेना ने भारी वाहनों के साथ नियंत्रण रेखा के पास मार्च किया और पूर्वी लद्दाख सेक्टर में पैंगोंग त्सो झील, फिंगर और गालवान नाला क्षेत्र सहित कई इलाकों में भारी तैनाती की है. लेफ्टिनेंट स्तर की वार्ता प्रस्तावित ऐसे सेक्टर में भी चीनी सेना ने तैनाती की है जहां लंबे समय से चीनी सेना ने कोई तैनाती नहीं की थी. चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाकों में घुसपैठ की. दोनों पक्षों की ओर से कई बार बातचीत भी हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की भी वार्ता भी लद्दाख में प्रस्तावित है. 6 जून को दोनों देशों के मध्य बातचीत होगी. इस दौरान दोनों सेनाओं के अधिकारी वार्ता में मौजूद रहेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की इस बातचीत में दोनों पक्ष अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत करेंगे, जिसकी वजह से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति है. भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह शामिल होंगे. लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह की तैनाती लेह सेक्टर में हुई है, जहां से वे चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर नजर रखते हैं.
नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव (India-China standoff along LAC) जारी है। इसे सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन दोनों सेनाएं अपनी पोजिशन से पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन ने सीमा पर अपने सैनिकों के साथ-साथ हथियारों, टैंकों और आर्टिलरी गनों की भी तैनाती बढ़ाई है। इसके जबाव में भारत ने भी पूरा इंतजाम किया है। ें सूत्रों के मुताबिक भारत ने लद्दाख सीमा पर चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पुख्ता तैयारी कर रखी है। शॉर्ट नोटिस पर टी-72, टी-90 टैंकों और बोफोर्स जैसी आर्टिलरी गनों को लद्दाख सीमा पर तैनात किया जा सकता है। स्वीडन से हासिल बोफोर्स गनों ने करगिल युद्ध के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की थी और पाकिस्तानी घुसपैठियों के छ्क्के छुड़ा दिए थे। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह -3 से लेकर 70 डिग्री के ऊंचे कोण तक फायर कर सकती है। साथ ही वायुसेना के विमान भी लगातार चीन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। एक महीने से विवाद भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख के गलवान और पैंगोंग सो इलाके में 5 मई से ही आमने-सामने डटी हैं। सूत्रों की माने तो चीन की सेना ने पैंगोग सो और फिंगर 5 इलाके में एलएसी से 100 मीटर पीछे अपने टेंट गाड़े हैं। गलवान में चीन की सेना पट्रोलिंग पॉइंट 14, 15 और 16 पर मौजूद है। हालांकि पट्रोलिंग पॉइंट 15 पर कुछ पीछे हटी है। लेकिन जानकारों का कहना है कि चीनी सेना के पीछे हटने का मतलब यह नहीं है कि उसने इस मामले में अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। इस तनाव को खत्म करने के लिए दोनों सेनाओं के बीच अब तक 7 बार बैठक हो चुकी है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और भारतीय सेना के बीच ब्रिगेडियर स्तर पर 4 और मेजर जनरल स्तर की 3 बार बात हो चुकी है लेकिन ये सभी बेनतीजा रहीं। लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत अब सारी नजरें 6 जून को होने वाली लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत पर टिकी है। इसमें सेना की 14वीं कोर के कमांडर और पीएलए के वेस्टर्न थिअटर के इसी रैंक के अधिकारी हिस्सा लेंगे। भारतीय सेना साफ कर चुकी है कि जब तक स्थिति पहले जैसी नहीं हो जाती, वह एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि चीन के साथ सैन्य और कूटनीति दोनों स्तरों पर बातचीत चल रही है। भारत और चीन के बीच यह विवाद लगभग एक महीने पहले शुरू हुआ था। चीनी सेनाहटने को कहा ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। लेकिन चीन ने ऐसा करने के बजाय अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भेज दिए।
नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत खेती-किसानी के लिए हुई घोषणाओं पर आज मुहर लगा दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से कई कृषि उत्पादों को बाहर करने की घोषणा को कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने बताया, 'कैबिनेट मीटिंग में किसानों के लिए तीन बड़े निर्णय हुए। साथ ही, देश में निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय हुए और दो निर्णय अलग से भी हुए हैं। जावड़ेकर ने कहा, 'आवश्यक वस्तु कानून की तलवार ने निवेश को रोका। आज इस अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू- ऐसी वस्तुएं आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर कर दी गईं। अब किसान इनका योजना के अनुसार भंडारण कर सकता है, बिक्री कर सकता है। इससे किसानों को बहुत फायदा होगा।' उन्होंने कहा कि किसानों की ये मांग 50 सालों से थी। आज यह मांग पूरी हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग के दौरान लिए गए सभी फैसलों की बारी-बारी से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने आज छह बड़े निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया... पहला, किसान अपने उत्पाद कहीं भी बेच सकेगा और उसे ज्यादा दाम देने वालों को उत्पाद बेचने की आजादी मिली है। दूसरा, वन नेशन, वन मार्केट की दिशा में भारत आगे बढ़ेगा। इसके लिए कानून बनेगा। तीसरा, ज्यादा कीमतों की गारंटी पर एक निर्णय हुआ। अगर कोई निर्यातक है, कोई प्रोसेसर है, कोई दूसरे पदार्थों का उत्पादक है तो उसको कृषि उपज आपसी समझौते के तहत बेचने की सुविधा दी गई है। इससे सप्लाइ चेन खड़ी होगी। भारत में पहली बार ऐसा कदम उठाया गया है। चौथा निर्णय हुआ है वाणिज्य और उद्योग जगत के लिए। हर मंत्रालय में प्रॉजेक्ट डिवेलपमेंट सेल बनेगी। इससे भारत निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक और अनुकूल देश बनेगा। पाचवां, कोलकाता पोर्ट को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी को इसकी घोषणा की थी। छठा, फार्मोकोपिया कमिशन की स्थापना का निर्णय हुआ है। फार्मोकोपिया कमिशन होम्योपैथी ऐंड इंडियन मेडिसिन होगी। गाजियाबाद में आयुष मंत्रालय के दो लैब्स हैं। इन दोनों लैब्स का भी इसके साथ मर्जर हो रहा है। केंद्रीय कैबिनेट की तीन दिन में दूसरी मीटिंग ध्यान रहे कि केंद्रीय कैबिनेट की इस हफ्ते यह दूसरी मीटिंग हुई। इससे पहले सोमवार को भी मीटिंग हुई थी जो मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष की पहली कैबिनेट मीटिंग थी। उसमें किसानों, एमएसएमई सेक्टर और रेहड़ी-पटरी पर रोजगार से गुजारा करने वालों का जीवन स्तर उठाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।
नई दिल्ली, 03 जून 2020, कोरोना वायरस संकट के बीच आज एक बार फिर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास पर ये बैठक हुई. सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई ये बैठक दो घंटे तक चली, जिसमें वरिष्ठ मंत्रियों ने हिस्सा लिया. केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दो अध्यादेशों को मंजूरी दी गई है. इनमें आवश्यक वस्तु अधिनियम, APAC अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी गई है. अब किसान सीधे अपनी फसलें बेच सकेंगे, अब देश में किसानों के लिए एक देश एक बाजार होगा. इन फैसलों के बारे में शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी दी जाएगी. कैबिनेट के फैसले में इसके अलावा कृषि उत्पादों के भंडारण की सीमा खत्म की गई है, सिर्फ अतिआवश्यक परिस्थिति में ऐसा किया जा सकेगा. बता दें कि 20 लाख करोड़ के पैकेज में इनका ऐलान किया गया था. बता दें कि इस हफ्ते होने वाली ये दूसरी मोदी कैबिनेट की बैठक है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल को हाल ही में एक साल पूरा हुआ है. ऐसे में इसी सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें MSME सेक्टर और किसानों को लेकर कुछ बड़े फैसले लिए गए थे. अब आज एक बैठक हो रही है, बता दें कि अक्सर बुधवार को ही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होती है. देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इस बीच अब अनलॉक 1 के तहत कई तरह की छूट भी दी जा रही हैं. दूसरी ओर आज ही महाराष्ट्र और गुजरात से चक्रवात तूफान निसर्ग भी टकरा रहा है, ऐसे में इस बीच केंद्रीय कैबिनेट की बैठक पर हर किसी की नज़र है. सोमवार की बैठक में हुए थे बड़े फैसले इसी हफ्ते की शुरुआत में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए थे. इनमें केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर की परिभाषा को बदला, साथ ही अब देश के किसान किसी भी मंडी और किसी भी राज्य में अपनी फसल बेच सकेंगे, ऐसा फैसला लिया गया है. बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CII के कार्यक्रम में कहा था कि देश अब लॉकडाउन को भूल कर अनलॉक की ओर बढ़ चला है. पीएम ने कारोबारियों को भरोसा दिलाया था कि सरकार उनके साथ है और एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से रफ्तार दी जाएगी.
काम कर गया मोदी का मास्टर स्ट्रोक, इन पांच राज्यों से इकॉनमिक रिकवरी के संकेत पांच राज्यों में इकॉनमिक रिकवरी शुरू हो गई है। ये हैं- केरल, पंजाब, तमिलनाडु, हरियाणा और कर्नाटक। भारत की कुल जीडीपी (GDP) में इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी 27 परसेंट है। एलारा सेक्युरिटीज के ताजा स्टडी के मुताबिक इन पांचों राज्यों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एलारा ने इन राज्यों में बिजली की खपत, ट्रैफिक, थोक बाजारों में खेतिहर उत्पादों की पहुंच और गूगल के मोबिलिटी डेटा का खंगाला। एलारा की गरिमा कपूर कहती हैं कि सारे संकेतक इकॉनमी के लिए बढ़िया हैं। Punjab_farmer पंजाब में इस बार गेहूं की बम्पर फसल हुई है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसका जिक्र पीएम मोदी के सामने भी किया था। पंजाब के कुछ ही इलाकों में कोरोना वायरस का कहर है। अमरिंदर सिंह ने मोदी से गुजारिश की थी रेड जोन घोषित करने का फैसला राज्यों पर छोड़ दिया जाए। हुआ भी वही। मोदी सरकार ने एक जून से जो गाइडलाइन जारी की है उसमें अधिकतर फैसले राज्यों पर छोड़ दिए गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रवासी मजूदरों (Migrant Labourers) को रोकने की भी बहुत कोशिश की। अब फसल को मार्केट तक पहुंचाने और धान की फसल तैयार करने के लिए मजदूरों की जरूरत होगी। जो मजदूर यूपी-बिहार लौट गए हैं, उन्हें दोबारा बुलाने की कोशिश की जा रही है। इसी तरह लुधियाना और जालंधर में फैक्ट्रियों के ताले खुल गए हैं। सिर्फ इन्हीं दोनों जिलों में राज्य के बाहर के 12 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। फैक्ट्रियां चालू होते ही बाजार फिर गुलजार होंगे। एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट में भी तेजी आएगी। haryana_maruti दिल्ली से सटे हरियाणा में भी इकॉनमिक एक्टिविटी तेज हो गई है। मानेसर और गुरुग्राम का जिक्र करना लाजिमी है। दरअसल हरियाणा के कुल जीडीपी में सर्विस सेक्टर का हिस्सा 51 फीसदी है। सर्विस सेक्टर में आईटी कंपनियां आती हैं जिनके दफ्तर गुरुग्राम में हैं। यहां लॉकडाउन के ताले खुल चुके हैं। सोशल डिस्टेंशिंग के साथ दफ्तर गुलजार हैं। IT और इस पर आधारित सर्विसेज (ITES) का देश की जीडीपी में 8 फीसदी हिस्सा है। 2018-19 में इसका आकार 181 अरब डॉलर का हो गया था। हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहां प्रशिक्षित पेशेवरों के अलावा आम लोगों को भी रोजगार मिलता है। ऑटो पार्ट्स, साइकल, खिलौने बनाने वाली कंपनियां भारी संख्या में रोजगार पैदा करती हैं। एलारा की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में बिजली की खपत तेज हुई है। इससे पता चलता है कि इन कंपनियों में कामकाज परवान चढ़ रहा है। Malls कर्नाटक सरकार ने बेहद सावधानी बरत कोरोना के कहर को रोक लिया। केरल के बाद कर्नाटक मॉल, रेस्तरां खोलने वाला दूसरा राज्य है। बेंगलुरु को भारत का आईटी हब भी कहा जाता है। इसके खुलने से सर्विस सेक्टर रफ्तार पकड़ेगा। एलाना की रिपोर्ट के मुताबिक सैलून सर्विस, एयर कंडिशनर, एयर ट्रैवल, बाइक और वैक्यूम क्लीनर्स की बिक्री में तेजी आई है। कर्नाटक की जीडीपी में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत है। इनफोसिस, विप्रो के दफ्तर खुल गए हैं या वर्क फ्रॉम से काम तेजी पकड़ रहा है। शिमोगा, हुबली, गुलमर्ग, मैसूर में स्थानीय उद्योग धंधे शुरू हो गए हैं। factory तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कोरोना वायरस का कहर जारी है। यहां हर रोज 1000 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। राहत की बात ये है कि चेन्नई के बाहर स्थिति बेहतर है। यहां मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी जीडीपी में 34 प्रतिशत है। Hyundai, Ford Motors समेत कई कार निर्माताओं की मैनुफैक्चरिंग यूनिट यहां है। जैसे - जैसे लॉकडाउन की छूट बढ़ती जाएगी ऑटो इंडस्ट्री में रिकवरी आएगी। ये रोजगार और विकास के लिहाज से अच्छा संकेत है। Beach गोवा के अलावा केरल ऐसा राज्य है जिसने कोरोना वायरस का डट कर मुकाबला किया। हवाई सेवा शुरू होने से पहले यहां कोविड पॉजिटिव मरीजों की संख्या शून्य हो गई थी। हालांकि प्रवासियों की घर वापसी के बाद फिर से पॉजिटिव केस मिले हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। राज्य के सभी घरेलू उद्योग चालू हैं। यहां मल्टीनेशनल कंपनियों के दफ्तर भी खुल गए हैं। हालांकि केरल का टूरिज्म बर्बाद हो गया है। सरकार कोशिश कर रही है कि जल्दी से जल्दी बाहर से लोग यहां आएं।
नई दिल्ली, 02 जून 2020,कोरोना के कारण बिगड़े हालात पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक चल रही है. देश में कोरोना के अब तक करीब दो लाख मामले आ चुके हैं. इस चुनौती भरे हालात से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगातार कोशिशें की जा रही हैं. हालांकि इस बैठक के बाद ही पता चलेगा कोरोना से निपटने के लिए अगला नया प्लान क्या होगा. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक बार फिर देश के सामने 'आत्मनिर्भर भारत' का खाका पेश किया. सीआईआई की 125वीं सालगिरह पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत को फिर से तेज विकास के पथ पर लाने के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 5 चीजें बहुत जरूरी हैं. ये हैं- Intent, Inclusion, Investment, Infrastructure और Innovation. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हाल में जो कड़े फैसले लिए गए हैं, उसमें भी आपको इन सभी की झलक मिल जाएगी. महिलाएं हों, दिव्यांग हों, बुजुर्ग हों, श्रमिक हों, हर किसी को इससे लाभ मिला है. लॉकडाउन के दौरान सरकार ने गरीबों को 8 करोड़ से ज्यादा गैस सिलेंडर डिलिवर किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कोरोना वायरस के इस संकट में इस तरह के ऑनलाइन इवेंट शायद एक न्यू नॉर्मल हैं, लेकिन ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है. आज भी हमें इस वायरस से लड़ना है, तो दूसरी ओर अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखना है. पीएम ने कहा कि हम अपनी अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को बिल्कुल वापस पाएंगे. कोरोना ने हमारी स्पीड भले ही धीमी की हो, लेकिन भारत लॉकडाउन को पीछे छोड़कर अनलॉक फेज में पहुंच चुका है.' जीडीपी में 4 से 6 फीसदी की गिरावट आ सकती है गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश और दुनिया की इकोनॉमी को काफी नुकसान पहुंचा है. तमाम एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी में 4 से 6 फीसदी की गिरावट आ सकती है. हाल में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 मे देश में जीडीपी की ग्रोथ महज 4.2 फीसदी थी.
नई दिल्ली मोदी सरकार 2.0 के एक साल पूरे होने पर किए गए एक सर्वे में करीब 2 तिहाई भारतीय प्रधानमंत्री (Approval rating of PM Naredra Modi) के कामकाज से संतुष्ट हैं। आईएएनएस-सी वोटर 'स्टेट ऑफ द नैशन 2020' सर्वे के मुताबिक 65.69 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संतुष्ट हैं। ऐसे वक्त में जब कोरोना महामारी की वजह से तमाम वर्ल्ड लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग गिरी है, पीएम मोदी की लोकप्रियता पर कोई आंच नहीं आई है। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मोदी के कामकाज से 58.36 प्रतिशत भारतीय 'बहुत ही संतुष्ट' हैं। गैरबीजेपी शासित ओडिशा में मोदी से सबसे ज्यादा लोग संतुष्ट सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से 24.01 प्रतिशत भारतीय कुछ हद तक संतुष्ट और 16.71 प्रतिशत पूरी तरह असंतुष्ट हैं। अगर राज्यों की बात करें तो गैर-बीजेपी शासित ओडिशा में उनकी अप्रूवल रेटिंग सबसे ज्यादा है। ओडिशा में 95.6 प्रतिशत लोग पीएम मोदी से संतुष्ट हैं। इनमें से 84.87 प्रतिशत 'बहुत ही संतुष्ट' हैं। राज्य में सिर्फ 2.2 प्रतिशत ही मोदी के कामकाज से असंतुष्ट हैं। हिमाचल और छत्तीसगढ़ में भी 90% से ज्यादा संतुष्ट सर्वे के मुताबिक ओडिशा के बाद हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। हिमाचल में पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 93.5 प्रतिशत, छत्तीसगढञ में 92.73 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 83.6 प्रतिशत है। खास बात यह है कि ओडिशा की तरह ही इनमें से 2 राज्य- छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश गैर-बीजेपी शासित हैं। झारखंड में भी पीएम की लोकप्रियता बरकरार झारखंड जहां पिछले साल बीजेपी सत्ता से बाहर हुई है, वहां भी पीएम मोदी की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। वहां 64.26 प्रतिशत लोग मोदी से बहुत संतुष्ट हैं जबकि राज्य में पीएम की ओवरऑल अप्रूवल रेटिंग 82.97 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में 71.48% लोग मोदी से संतुष्ट बीजेपी शासित कर्नाटक और मोदी के गृह राज्य गुजरात में उनकी लोकप्रियता का होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। लेकिन शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार वाले महाराष्ट्र में भी पीएम की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। महाराष्ट्र में 71.48 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री के कामकाज से संतुष्ट हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 69.45 प्रतिशत है।
नई दिल्ली, 02 जून 2020, कोरोना का कहर अभी तक सबसे ज्यादा अमेरिका पर ही टूटा था. लेकिन अब भारत में जिस तेजी से कोरोना मरीजों की तादद बढ़ रही है, उसे देखते हुए जानकारों का मानना है कि जुलाई तक कोरोना के मामलों में भारत, अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा. बस कुछ हफ्ते पहले तक कोरोना पॉजिटिव केस के मामलों में भारत की गिनती तीस देशों में थी. मगर अब भारत उन सात देशों में शामिल हो गया है, जहां कोरोना के सबसे ज्यादा केस हैं. अंदेशा ये जताया जा रहा है कि जून-जुलाई भारत के लिए सबसे नाजुक हैं. बस महीने भर पहले तक कोरोना मरीजों के मामले में भारत टॉप तीस देशों में शामिल था. फिर 25 देशों की सूची में भारत का नाम आया. इसके बाद 20, फिर 15, फिर 10 और अब भारत करीब 2 लाख कोरोना मरीजों के साथ इस लिस्ट में 7वें नंबर पर पहुंच गया है. जानकारों का मानना है कि फिलहाल जिस तेजी से कोरोना के मामले देश में बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में भारत एक से डेढ़ हफ्ते में पांचवें नंबर पर पहुंच जाएगा. इतना ही नहीं जानकारों की चिंता इस बात की भी है कि भारत में जुलाई तक कोरोना के 21 लाख तक पहुंच सकते हैं. यानी भारत कोरोना के मरीजों के मामले में तब अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी के मुताबिक भारत में संक्रमण के मामलों का बढ़ना ना तो अभी कम हुआ है. और ना ही फिलहाल कम होने की उम्मीद है. भ्रमर मुखर्जी ने भारत में लॉकडाउन और कोरोना के कंट्रोल पर आधारित 43 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई की शुरुआत तक ये मामले करीब साढ़ 6 लाख से बढ़ कर 21 लाख तक हो सकते हैं. इतना ही नहीं इस मुद्दत में करीब 18 से 20 हज़ार लोगों की जान भी जा सकती हैं. प्रोफेसर मुखर्जी ने इस आंकलन के लिए देश में पिछले कई दिनों के मामलों की पड़ताल की. जिसके मुताबिक भारत में रोज़ाना औसतन 9 हज़ार की तादाद में मामले बढ़ रहे हैं. अगर इसी हिसाब से मामले बढ़े तो जुलाई आते आते भारत में कोरोना के तकरीबन 5 लाख मामले हो जाएंगे. हालांकि औसतन मामलों की तादाद हर हफ्ते बढ़ती ही जा रही है. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक देश में लॉकडाउन को ना बढ़ाना मुश्किल पैदा कर सकता है. तो क्या भारत ने लॉकडाउन ना बढ़ाने का फैसला कर मुसीबत को मोल ले लिया है? हालांकि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों में इस बात की भी बहस छिड़ी है कि भारत में कोरोना का पीक कब आएगा? जानकारों के मुताबिक किसी भी संक्रमण का पीक तब आता है. जब संक्रमण के मामले उच्चतम स्तर पर पहुंच जाते हैं. और इसके बाद संक्रमण की रफ्तार कम होने लगती हैं. जैसा कि चीन, ईरान, इटली, स्पेन और जर्मनी में हुआ. भारत में कोरोना का पीक जुलाई की शुरुआत या मध्य में आ सकता. जबकि डब्लूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि भारत में जुलाई के आखिर में कोरोना वायरस के मामले कम होना शुरु होंगे. घुमा-फिरा कर बात यही है कि जुलाई भारत के लिए कोरोना के मामले में निर्णायक साबित होने वाला है. वैसे खुद WHO की नज़र भी भारत पर है. मगर कोई भी तार्किक तौर पर ये अंदाज़ा नहीं लगा पा रहा है कि भारत में कोरोना अपनी पीक पर कब पहुंचेगा. इसे लेकर कई तरह की थ्योरीज़ सामने आ रही हैं. भारत में पीक की स्थिति को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि अब तक भारत में कोरोना पॉज़िटिव मामलों के जो आंकड़े आ रहे हैं. वो कम टेस्टिंग की वजह से पूरी तरह सही नहीं कहे जा सकते. अगर टेस्टिंग ज्यादा हुई तो आंकड़े बढ़ते जाएंगे. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज के डॉक्टरों के मुताबिक जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में भारत कम्यूनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक संक्रमण के दौर में चला जाएगा. और डराने वाली बात ये है कि ऐसे में इस साल दिसंबर तक भारत की आधी आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुकी होगी. यानी करीब 67 करोड़ भारतीयों को साल के अंत तक कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका होगा. हालांकि अच्छी बात ये होगी कि इनमें से 90 प्रतिशत लोगों को ये पता भी नहीं चलगा कि उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है. क्योंकि ज्यादातर लोगों में इस वायरस के लक्षण दिखाई ही नहीं देते और सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों को ही गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. मगर सवाल ये है कि अगर भारत में 67 करोड़ लोगों में से 5 फीसदी भी कोरोना से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए तो ये आंकड़ा 3 करोड़ 35 लाख होगा. और अगर इन सब लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा. तो क्या भारत की स्वास्थ्य सुविधाएं इसके लिए तैयार हैं? भारत में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए फिलहाल अस्पतालों में 1 लाख तीस हजार बेड्स हैं. लेकिन आने वाले दिनों में जैसे-जैसे गंभीर रूप से बीमार मरीजों की तादाद बढ़ेगी अस्पताल के बिस्तर कम पड़ने लगेंगे और कई राज्यों में तो ऐसा होना शुरू भी हो गया है. छोटे शहरों और गांवों का हाल तो और भी बुरा है. मार्च 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत के ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 16 हज़ार 613 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं. इनमें से सिर्फ 6 हजार 733 स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जिनका संचालन दिन रात यानी 24 घंटे होता है. इनमें से भी सिर्फ 12 हजार 760 स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जहां 4 या उससे ज्यादा बेड्स उपलब्ध हैं. ग्रामीण भारत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत तो और गंभीर है. ग्रामीण भारत में सिर्फ 5 हज़ार 335 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं. मई तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस के कुल मामलों में ग्रामीण जिलों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है. अगर इसी आंकड़े को भविष्य का आधार मान लिया जाए. तो भविष्य में जिन साढ़े तीन करोड़ लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका है. उनमें से करीब 1 करोड़ लोग ग्रामीण भारत से होंगे. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाके कोरोना वायरस का नया हॉट स्पॉट बन सकते हैं. अगर ये महामारी इस हाल तक पहुंच गई तो भारत में इसके नतीजे क्या होंगे. ये बड़ा सवाल भी है और चिंता का सबब भी. तो क्या कहीं भारत ने लॉकडाउन हटाने में जल्दबाज़ी तो नहीं कर दी. ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित पीटर चार्ल्स डोहर्टी के मुताबिक. भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में लॉकडाउन में ढील देना खतरनाक फैसला है. और इस वायरस से निपटना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. क्योंकि संक्रमण के मामले और तेज़ी से बढ़ेंगे. हालांकि डॉ. डोहर्टी ये भी मानते हैं कि ये सिर्फ विज्ञान का मामला नहीं है. लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था भी जुड़ी हुई है. इसलिए इसे खोला जाना तो ज़रूरी है, मगर एक साथ नहीं बल्कि चरणों में. लॉकडाउन खोलने का फैसला ठीक वैसे ही चरण दर चरण होना चाहिए जैसे दुनिया के दूसरे देशों में हुआ. मसलन स्पेन ने अपने यहां 4 चरणों में लॉकडाउन खोलने का फैसला किया और हर फेज़ में यहां धीरे धीरे चीज़ों को खोला गया.
नई दिल्ली, 02 जून 2020,धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा भरोसा जताया है कि देश की अर्थव्यवस्था फिर से तरक्की के पटरी पर लौटेगी. उद्योग चैंबर सीआईआई की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें देश की क्षमता और प्रतिभा पर पूरा भरोसा है. क्यों है पीएम को भरोसा पीएम मोदी ने कहा, 'आप यह सोच सकते हैं कि संकट की इस घड़ी में मैं इतने भरोसे के साथ कैसे बोल सकता हूं. मुझे भारत के इनोवेशन, टैलेंट, किसानों, उद्यमियों पर भरोसा है. मुझे यहां के इंडस्ट्री के लीडर्स पर भरोसा है. इसलिए मैं कह रहा हूं कि हां हम ग्रोथ वापस हासिल करेंगे.' अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम में कहा, 'कोरोना वायरस के इस संकट में इस तरह के ऑनलाइन इवेंट शायद एक न्यू नॉर्मल हैं, लेकिन ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है. आज भी हमें इस वायरस से लड़ना है, तो दूसरी ओर अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखना है. पीएम ने कहा कि हम अपनी अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को बिल्कुल वापस पाएंगे. कोरोना ने हमारी स्पीड भले ही धीमी की हो, लेकिन भारत लॉकडाउन को पीछे छोड़कर अनलॉक फेज में पहुंच चुका है.' इकोनॉमी पटरी से उतरी है गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश और दुनिया की इकोनॉमी को काफी नुकसान पहुंचा है. तमाम एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी में 4 से 6 फीसदी की गिरावट आ सकती है. हाल में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 मे देश में जीडीपी की ग्रोथ महज 4.2 फीसदी थी. पीएम मोदी ने कहा, 'आज दुनिया के तमाम देश पहले की तुलना में एक-दूसरे का साथ और दे रहे हें. इसी के साथ एक चिंतन भी चल रहा है कि पुरानी सोच, पुरानी रीति क्या आज कारगर होगी ऐसे समय में भारत से दुनिया की अपेक्षा बढ़ गई है. दुनिया का भारत पर विश्वसास बढ़ा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया में कोरोना वायरस का कहर था, तब भारत ने बड़े फैसले लिए. वक्त पर लॉकडाउन लागू किया, इस दौरान अपनी सुविधाओं को बढ़ाया यही वजह है कि दुनिया के कई देश के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है पीएम मोदी ने कारोबारियों को भरोसा दिया कि वह उनके साथ खड़े हैं और आप दो कदम आगे बढ़ाएंगे तो सरकार चार कदम आगे बढ़ाएगी. रणनीतिक मामलों में किसी दूसरे पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, आत्मनिर्भर भारत का मतलब रोजगार पैदा करना और विश्वास पैदा करना है. ताकि भारत की हिस्सेदारी ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत हो सके.
नई दिल्ली मोदी सरकार 2.0 के एक साल पूरे होने पर किए गए एक सर्वे में करीब 2 तिहाई भारतीय प्रधानमंत्री (Approval rating of PM Naredra Modi) के कामकाज से संतुष्ट हैं। आईएएनएस-सी वोटर 'स्टेट ऑफ द नैशन 2020' सर्वे के मुताबिक 65.69 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संतुष्ट हैं। ऐसे वक्त में जब कोरोना महामारी की वजह से तमाम वर्ल्ड लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग गिरी है, पीएम मोदी की लोकप्रियता पर कोई आंच नहीं आई है। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मोदी के कामकाज से 58.36 प्रतिशत भारतीय 'बहुत ही संतुष्ट' हैं। गैरबीजेपी शासित ओडिशा में मोदी से सबसे ज्यादा लोग संतुष्ट सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से 24.01 प्रतिशत भारतीय कुछ हद तक संतुष्ट और 16.71 प्रतिशत पूरी तरह असंतुष्ट हैं। अगर राज्यों की बात करें तो गैर-बीजेपी शासित ओडिशा में उनकी अप्रूवल रेटिंग सबसे ज्यादा है। ओडिशा में 95.6 प्रतिशत लोग पीएम मोदी से संतुष्ट हैं। इनमें से 84.87 प्रतिशत 'बहुत ही संतुष्ट' हैं। राज्य में सिर्फ 2.2 प्रतिशत ही मोदी के कामकाज से असंतुष्ट हैं। हिमाचल और छत्तीसगढ़ में भी 90% से ज्यादा संतुष्ट सर्वे के मुताबिक ओडिशा के बाद हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। हिमाचल में पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 93.5 प्रतिशत, छत्तीसगढञ में 92.73 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 83.6 प्रतिशत है। खास बात यह है कि ओडिशा की तरह ही इनमें से 2 राज्य- छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश गैर-बीजेपी शासित हैं। झारखंड में भी पीएम की लोकप्रियता बरकरार झारखंड जहां पिछले साल बीजेपी सत्ता से बाहर हुई है, वहां भी पीएम मोदी की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। वहां 64.26 प्रतिशत लोग मोदी से बहुत संतुष्ट हैं जबकि राज्य में पीएम की ओवरऑल अप्रूवल रेटिंग 82.97 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में 71.48% लोग मोदी से संतुष्ट बीजेपी शासित कर्नाटक और मोदी के गृह राज्य गुजरात में उनकी लोकप्रियता का होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। लेकिन शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार वाले महाराष्ट्र में भी पीएम की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। महाराष्ट्र में 71.48 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री के कामकाज से संतुष्ट हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 69.45 प्रतिशत है।
नई दिल्ली कोरोना महामारी (corona in india) के खिलाफ देश में जंग छिड़ी हुई है। इस जानलेवा वायरस को मात देने के लिए हर राज्य ने बड़ी तैयारी कर रखी है। बेहद संक्रामक होने के कारण इस बीमारी की चपेट में आने वाले लोगों की तादाद तो हर रोज बढ़ रही है लेकिन अच्छी बात ये है कि कोविड-19 से देश में मौतों का आंकड़ा घटा है और इस बीमारी से ठीक होने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। धीरे-धीरे ही सही पर भारत में कोरोना की सांसें फूल रही हैं और यही ट्रेंड रहा तो जल्द ही बीमार होने वालों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या होगी। मौतों की संख्या घटी 45 दिन पहले कोविड-19 से बीमार लोगों की मौतों का प्रतिशत 3.3% था जबकि अब यह घटकर 2.83 फीसदी पहुंच गया है। 18 मई को मृत्युदर 3.15% था जबकि 3 मई को यह 3.25 फीसदी था। भारत में एक दिन में सबसे ज्यादा मौतों सरकारी आंकड़े के अनुसार 230 हैं। देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,394 तक पहुंच चुका है और इससे बीमार लोगों की संख्या 1 लाख 90 हजार से ज्यादा है। डिस्चार्ज होने वालों की संख्या बढ़ी देश में अभी 93,322 एक्टिव केस हैं। 91,818 कोरोना से ठीक होकर घर जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 4,835 लोगों को अस्पतालों से छुट्टी दी गई है। केंद्र सरकार के 8 मई के गाइडलाइंस के मुताबिक, हल्के और मध्यम कोरोना पीड़ित मरीजों में अगर लक्षण नहीं बढ़ते हैं तो उसे 10 दिन बाद तंदरुस्त घोषित कर दिया जा रहा। यानी आने वाले समय में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। रिकवरी रेट में भी सुधार कोविड-19 से रिकवरी रेट भी सुधरा है और यह 48.19% तक पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 18 मई को रिकवरी रेट 38.29% था जबकि 3 मई को यह 26.59 फीसदी रहा था। 15 अप्रैल को रिकवरी रेट महज 11.42% था। रिकवरी रेट से बढ़ने से संकेत मिल रहा है कि देश में इस बीमारी की जल्द पहचान और इलाज किया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में रिकवरी रेट जरूर भिन्न है लेकिन ओवरऑल तस्वीर उत्साहवर्धक है। ..तो इसलिए घटी है मौतों की संख्या स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में मौतों की लगातार घटी संख्या की मुख्य वजह इस बीमारी की समय पर पहचान और उसका तुरंत इलाज के कारण है। अभी बढ़ेंगे केस पर.. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में राज्यों में कोरोना के केस बढ़ेंगे क्योंकि प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे हैं और lockdown में ढील दी गई है। सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा टेस्ट और मरीजों के जल्दी रिकवरी का है। महाराष्ट्र और दिल्ली पर टेंशन महाराष्ट्र और दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों में कोरोना मरीजों की संख्या टेंशन तो दे रही है लेकिन अभी स्थिति बुरी नहीं है। दूसरे देशों से भारत की स्थिति बेहतर जहां तक कोरोना वायरस के मौतों की संख्या की तुलना की बात है तो स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वैश्विक स्तर पर कोविड-19 से मौतों का प्रतिशत 6.19 है। फ्रांस में सबसे ज्यादा 19.35% इसके बाद बेल्जियम 16.25 फीसदी, इटली 14.33 और ब्रिटेन 14.07% है। देश में टेस्टिंग बढ़ी केंद्र सरकार ने बताया कि देश में टेस्टिंग सुविधा बढ़ी है अब 676 लैबों में इसका टेस्ट किया जा रहा है। टेस्ट करने वाले लैबों में 472 सरकारी हैं जबकि 204 निजी हैं। मोटामोटी करीब 38 लाख 37 हजार 207 सैंपल टेस्ट किए गए हैं।
नई दिल्ली महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत का विकास उसके गांव और छोटे उद्योग से है। सरकार भी इस बात को बहुत अच्छे से जानती है कि MSME सेक्टर को मजबूत किए बगैर देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाना संभव नहीं है। यह एक ऐसा सेक्टर है जिसका देश की जीडीपी में योगदान करीब 30 फीसदी, निर्यात में 45 फीसदी और 11-12 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। लोगों को रोजगार मिलेगा तो डिमांड बनी रहेगी। इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए आज प्रधानमंत्री मोदी ने टेक्नॉलजी प्लैटफॉर्म CHAMPIONS (क्रिएशन ऐंड हार्मोनियस ऐप्लिकेशन ऑफ मॉडर्न प्रोसेस फॉर इन्क्रीजिंग द आउटपुट ऐंड नैशनल स्ट्रेंथ) को लॉन्च किया। वन स्टॉप सलूशन इस मौके पर उनके साथ MSME मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। यह पोर्टल अपने नाम की तरह ही एमएसएमई की छोटी-छोटी इकाइयों की हर तरह से मदद कर उन्हें चैंपियन बनाएगा। चैंपियन्स पोर्टल को एमएसएमई का वन स्टॉप सलूशन माना जा रहा है। शिकायत करने पर तुरंत एक्शन चैंपियन्स को यूं ही ये मुकाम हासिल नहीं हुआ है। चैंपियन्स देश का पहला ऐसा पोर्टल है जिसे भारत सरकार की मुख्य केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली यानी सीपी ग्राम्स (Centralized Public Grievance Redressal and Monitoring System) से जोड़ा गया है। यानी अगर किसी ने सीपीग्राम्स पर शिकायत कर दी तो ये सीधे चैंपियन्स पोर्टल पर आ जाएगी। पहले ये शिकायत मंत्रालयों को भेजी जाती थी जिसे मंत्रालय के सिस्टम पर कॉपी किया जाता था। इससे शिकायतों को निपटाने की व्यवस्था तेज होगी। सिस्टम बताएगी क्या है समस्या इसके साथ ही चैंपियन्स पोर्टल आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, डेटा ऐनालिटिक्स और मशीन लर्निंग से लैस किया गया है। इससे कारोबारियों की शिकायत के बिना भी उनकी समस्या निपटाई जा सकेगी। उदाहरण के लिए अगर कोई एक बैंक कारोबारियों के लोन आवेदन को बार-बार रद्द कर रहा है या किसी एक क्षेत्र में एक ही तरह की समस्या ज्यादा हो रही है तो आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस से ये समस्या चैंपियन्स पोर्टल पर दिखने लगेगी जिसे अधिकारी निपटा सकते हैं। प्रशासनिक बाधा होगी दूर यह पोर्टल टेक्नॉलजी पर आधारित मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम है। साथ ही ये पोर्टल सेक्टर की प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर हर चुनौती को अवसर में बदलने का जरिया बन सकता है। 9 दिन में CHAMPIONS बनाकर ट्रायल शुरू आपदा को अवसर बनाने का सबसे पहला उदाहरण इस पोर्टल का कंट्रोल रूम है। ये कंट्रोल रूम कार्यालय के एक ऐसे कमरे में बनाया गया है जो पहले गोदाम था। दो दिन से कम समय गोदाम की में कायापलट कर उसे कंट्रोल रुम में बदल दिया। इसके लिए मंत्रालय के कर्मचारियों, आई टी टीम और मजदूरों ने लगातार 38 घंटे तक लगातार काम किया यानी जिस कमरे में अब तक कार्यालय का कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं जाता था वहीं से अब देश भर की एमएसएमई यूनिट्स की समस्या का समाधान होगा। इस प्रणाली को 9 दिन में बनाकर इसका ट्रायल शुरु भी कर दिया गया है। हर तरह की समस्या होगी दूर चैंपियन्स पोर्टल के जरिए सेक्टर की कई तरह की समस्याओं की शिकायतों का निवारण किया जाएगा। कोरोना के दौरान पूंजी की कमी, श्रमशक्ति की किल्लत, जरुरी अनुमतियों जैसी समस्या निपटाई जा सकेगी। इसके साथ ही नए अवसर जैसे पीपीई किट बनाना, मास्क बनाना और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसे सप्लाई करने में मदद की जाएगी। इसके साथ ही ये पोर्टल उन यूनिट्स की पहचान कर उनकी मदद करेगा जो आज जैसी विषम परिस्थितियों से निकल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन बन सके। राज्यों में स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बने चैंपियंस पोर्टल के कंट्रोल रूम का एक नेटवर्क हब ऐंड स्पोक मॉडल में बनाया गया है।यह हब नई दिल्ली में एमएसएमई सचिव के कार्यालय में स्थित है और राज्यों में मंत्रालय के विभिन्न कार्यालयों को इससे जोडा गया है। अब तक राज्यों में स्थानीय स्तर के नियंत्रण कक्ष बनाए जा चुके हैं जिन्हें इस पोर्टल के सिस्टम से जोड़ दिया गया है। 3 दिन में अधिकारी लेंगे फैसला किसी भी सिस्टम की कामयाबी उसके चलाने वालों की नीयत पर बहुत हद तक निर्भर करती है। ऐसे में इस पोर्टल के लॉन्च होने के साथ ही सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कोई भी फाइल 72 घंटे से ज्यादा समय तक उनके पास ना रहे। उन्हें जो भी फैसला लेना है वो फैसला लें पर ये फाइल 3 दिन से ज्यादा अटकी नहीं रहनी चाहिए। गांधी की राह पर मोदी सरकार गांधी जी मानते थे कि भारत का विकास उनके गांव की स्थिति तय करेंगे। वो विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता से जोड़ने के हामी थे जिसके लिए एमएसएमई सेक्टर एक महत्वपूर्ण कड़ी है। चैंपियन्स पोर्टल अगर इस सेक्टर को चैंपियन बना सका तो ये कई विभागों, मंत्रालयों के लिए नज़ीर बन सकता है।
नई दिल्ली कोरोना काल में थम गई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, आत्मनिर्भर भारत और किसानों के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को कई अहम फैसले लिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन फैसलों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इनसे अन्नदाताओं, मजदूरों और श्रमिकों के जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव आएंगे। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि सरकार के इन फैसलों से किसानों, रेहड़ी-पटरी वालों और MSME को जबरदस्त लाभ पहुंचने वाला है। लिखें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट के फैसलों का जिक्र करते हुए कई सिलसिलेवार ट्वीट्स किए। उन्होंने लिखा, 'जय किसान के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट ने अन्नदाताओं के हक में बड़े फैसले किए हैं। इनमें खरीफ की 14 फसलों के लिए लागत का कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी देना सुनिश्चित किया गया है। साथ ही 3 लाख रुपये तक के शॉर्ट टर्म लोन चुकाने की अवधि भी बढ़ा दी गई है।' रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 'पीएम स्वनिधि योजना' पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा, 'देश में पहली बार सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले पर सामान बेचने वालों के रोजगार के लिए लोन की व्यवस्था की है। पीएम स्वनिधि योजना से 50 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इससे ये लोग कोरोना संकट के समय अपने कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।' MSME सेक्टर के बारे में पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, 'आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए हमने न केवल MSMEs सेक्टर की परिभाषा बदली है, बल्कि इसमें नई जान फूंकने के लिए कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। इससे संकटग्रस्त छोटे और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा, साथ ही रोजगार के अपार अवसर सृजित होंगे।' मोदी सरकार ने किए कई बड़े ऐलान इससे पहले पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की गईं। ये फैसले एमएसएमई, किसान और रेहड़ी पटरी वालों के जीवन पर प्रभाव डालने वाले हैं। एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा गया है, जिसकी संख्या करीब 6 करोड़ है। कोविड की महामारी के बाद पीएम ने एमएसएमई की आत्मनिर्भरता को पहचाना और उसे पैकेज भी दिया गया, ताकि वह संभल सकें। देखा जाए तो मोदी सरकार की घोषणाओं से 66 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जिसमें 55 करोड़ खेती पर निर्भर लोग हैं, जबकि 11 करोड़ ऐसे लोग हैं जो एमएसएमई में काम कर रहे हैं। nbt
हिमालय से भारत में आने का सबसे आसान रास्ता है लिपुलेख दर्रा। 100 से भी ज़्यादा साल से दुनिया की बड़ी ताकतें इस पर नज़रें गड़ाए रहीं, लेकिन हमने उसकी फ़िक्र की ही नहीं। नतीजा है यह सीमा विवाद उत्तर पूर्व में भारत का कोना तिब्बत और नेपाल से मिलता है। यहां 17 हज़ार फीट की ऊंचाई पर लिपुलेख दर्रा एक बार फिर इतिहास का तनाव झेल रहा है। पिछले दिनों जैसे ही भारत ने लिपुलेख को जोड़ने वाली सड़क खोली, चीन बेचैन हो उठा और नेपाल इस पर अपने दावे को लेकर ताल ठोकने लगा। लिपुलेख की कहानी दोस्ती, व्यापार और धर्म से लेकर महाशक्तियों की ख़्वाहिशों तक फैली है। इन्हीं में छुपा है एक सबक। सबक यह कि अगर हमने इतिहास के इस हिस्से को नज़रअंदाज़ नहीं किया होता और लिपुलेख को अपने नक़्शे पर मज़बूती से दर्ज कर लेते तो आज़ादी के सात दशक बाद यह विवाद न खड़ा होता। लिपुलेख, उत्तराखंड का वह इलाक़ा है, जिसे पार कर तिब्बत में प्रवेश किया जा सकता है। इस इलाक़े में रहने वाली भारत की जनजाति सदियों से लिपुलेख दर्रे के जरिये तिब्बत के व्यापारियों के साथ व्यापार करती रही है। लोग मानसरोवर यात्रा पर जाते रहे। लेकिन अब नेपाल इस पर अपना दावा जताने लगा। नेपाल- भारत का विवाद पहले तो यह समझ लें कि भारत और नेपाल के बीच विवाद का सबसे पुराना केंद्र है कालापानी। 17 हज़ार 788 फीट ऊंचाई पर मौजूद कालापानी को भारत काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं, नेपाल का मानना है कि काली नदी का उद्गम लिम्पयाधुरा से निकलने वाली कूटी-यांग्ती नदी से है। उसने 1990 से ही कालापानी पर अपना दावा जताना शुरू कर दिया था। कुछ दिन पहले उसने अपने नक़्शे में कालापानी के साथ ही लिपुलेख और लिम्पयाधुरा को भी दिखाया। नेपाल की कैबिनेट ने इस नए मैप को मंजूरी दे दी। नए नक़्शे को लेकर वहां की संसद में संशोधन किया जाना था, हालांकि उसे आख़िरी वक़्त में टाल दिया गया। लिपुलेख को लेकर नेपाल के रुख़ में अचानक आए बदलाव के कारण हैं। कुछ दिन पहले ही भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वहां एक सड़क का उद्घाटन किया। यह सड़क बीआरओ ने बनाई है। इसके साथ ही पहली बार चीन बॉर्डर के इतने करीब तक गाड़ियों के जाने का रास्ता बना। लिपुलेख दर्रे से पांच किलोमीटर पहले तक सड़क तैयार है। उद्घाटन के बाद से ही नेपाल ने आपत्ति जतानी शुरू की। भारतीय सेना के चीफ जनरल एमएम नरवणे ने बिना चीन का नाम लिए कहा कि हो सकता है नेपाल यह किसी और के इशारे पर कर रहा हो। सड़क आने में देर क्यों लिपुलेख तक सड़क बनाने का काम 12 साल पहले शुरू किया गया था और अब जाकर रोड लगभग वहां तक पहुंची है। इतिहासकार बताते हैं कि लिपुलेख सदियों से सामरिक महत्व का रहा है। अंग्रेज़ों ने भी इसकी अहमियत को बखूबी समझा, लेकिन आज़ाद भारत में इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। 1962 में चीन के साथ हुई जंग के बाद भी रुख़ में ख़ास बदलाव नहीं आया। अब जाकर पिछले कुछ बरसों से चीन बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के काम को तेज़ किया गया है। इतिहासकार और उत्तराखंड के बारे में गहरी समझ रखने वाले अजय रावत कहते हैं कि आज़ादी के बाद लिपुलेख के महत्व को नहीं समझने का नतीजा यह विवाद है। अजय बताते हैं कि यह क्षेत्र शुरू से सामरिक दृष्टि से अहम था। बात 1815 से शुरू होती है। नेपोलियन को अंग्रेज़ों ने हरा दिया। इसी साल वियना की संधि हुई। इसमें रूस एक विश्वशक्ति के तौर पर उभरा। तब तक फ्रांस, पुर्तगाल, इंग्लैड भारत आ चुके थे। अब रूस की रुचि भी इस ओर बढ़ने लगी। वह चाहता था कि उसका महत्व भारत में बढ़े, क्योंकि व्यापार की दृष्टि से भी भारत सबसे अहम था। रूस के पास कोई गरम बंदरगाह नहीं है। नॉर्थ सी और बाल्टिक सागर में उसके बंदरगाह छह महीने के लिए जम जाते। आज की तकनीक अलग है, लेकिन 19वीं शताब्दी में जमे बंदरगाहों से व्यापार नहीं हो सकता था। रूस ने इसलिए काला सागर की तरफ बढ़ना शुरू किया। फिर उसने भूमध्य सागर के माध्यम से भारत आना चाहा। 1854 से लेकर 1856 तक यूरोप में बड़ा निर्णायक युद्ध हुआ, जिसे क्रीमिया का युद्ध कहते हैं। इसमें रूस को हार मिली। जब शांति समझौता हुआ तो रूस पर प्रतिबंध लगा दिए गए कि वह काला सागर और भूमध्य सागर पर किसी तरह का सामरिककरण नहीं करेगा। इसके बाद रूस ने तिब्बत के रास्ते भारत आने की सोची। सबसे सरल दर्रा था लिपुलेख इतिहासकार अजय कहते हैं कि 19वीं शताब्दी में जितने भी पास यानी दर्रे थे, जिनसे भारत आ सकते, वे पश्चिमी तिब्बत में थे। पश्चिमी तिब्बत के रास्ते उत्तराखंड में निकलते। लिपुलेख, नीति, माना, ऊंटाधुरा, लापसा धुरा- ये अहम दर्रे थे और इनमें सबसे सरल था लिपुलेख। इसलिए इसका महत्व बहुत बढ़ गया। अंग्रेज़ों ने इसे समझते हुए क्षेत्र को अलग दर्जा दिया। पूरे भारत में लगभग एक नियम कानून चलता था, लेकिन इलाक़े में अलग। अंग्रेज़ों ने इसे नॉन रेगुलेटिंग प्रोविंस घोषित किया था, जबकि भारत का ज्यादातर क्षेत्र रेगुलेटिंग प्रोविंस थे। तिब्बत के लोगों के साथ यहां से व्यापार तो पहले से ही चल रहा था, लेकिन अंग्रेज़ों के आने के बाद इसका सामरिक महत्व भी बढ़ गया। इंग्लैंड तिब्बत पर अधिकार नहीं करना चाहता था। लेकिन वह यह भी नहीं चाहता था कि वहां रूस का प्रभाव बढ़े क्योंकि फिर उसकी सुरक्षा को खतरा हो जाता। व्यापार का रास्ता अजय ने यह भी बताया कि छठी शताब्दी से उत्तराखंड की भोटिया जनजाति लिपुलेख दर्रे के रास्ते तिब्बतवालों से व्यापार करती रही है। लिपुलेख के पास ही तिब्बत की तकलाकोट नाम की मंडी है। भोटिया जनजाति वहां से सुहागा लेकर आती, जो सोने को पिघलाने के काम आता है। छठी शताब्दी में उत्तराखंड में जूलरी का इतिहास मिलता है। इससे भी यह साबित होता है कि यहां से होने वाला व्यापार कम से कम छठी शताब्दी से तो हो ही रहा है। इस व्यापार के बारे में कई रोचक किस्से लिखे गए हैं। कहते हैं कि छठी शताब्दी में इस व्यापार को सही से कराने का जिम्मा तिब्बत के जिस अधिकारी के पास था, वह बहुत शक्तिशाली था। साथ ही क्रूर भी। उसे जॉन्ग पेन कहते। उसकी इजाज़त के बिना कोई मंडी पहुंचने के बाद भी व्यापार नहीं कर सकता था। अगर किसी ने चोरी की तो उसका मंडी में आना प्रतिबंधित कर दिया जाता। उस वक्त यहां बार्टर सिस्टम से व्यापार होता। भोटिया जनजाति के लोग कपड़ा लेकर जाते और वहां से नमक, सुहागा और ऊन लाते। एक व्यापारी, जिसके साथ व्यापार करता था, उसे मित्र कहा जाता। जॉन्ग पेन दोनों को बुलाकर एक पत्थर का टुकड़ा तोड़ता। दोनों तरफ के व्यापारियों को एक-एक टुकड़ा दे दिया जाता। अगली बार व्यापार करने से पहले पत्थर के दोनों टुकड़ों को मिलाया जाता। मिलान होने पर ही व्यापार कर सकते थे। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि कोई धोखा न दे और विश्वास बना रहे। इसी से जुड़ी कहानी भी है कि किस तरह तिब्बत का एक व्यापारी सामान लेकर भाग गया। फिर उसे ढूंढने ल्हासा तक लोग गए। नेपाल से नहीं मिलता संबंध नेपाल भले ही अब लिपुलेख को लेकर दावा जताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इतिहास में उसका इस दर्रे से कोई संबंध नहीं मिलता। अजय कहते हैं कि जब उत्तराखंड के भोटिया जनजाति के लोग इस दर्रे के जरिए तिब्बत से व्यापार कर रहे थे, तब तो नेपाल का अस्तित्व भी नहीं था। वह तब टुकड़ों में बंटा था, जबकि उत्तराखंड भारत का हिस्सा। उस वक्त भी उत्तराखंड एक पावरफुल किंगडम था, जहां शासन करता था कत्यूरी राजवंश। कुमाऊं, गढ़वाल से लेकर लिपुलेख तक का क्षेत्र उनके पास था। वह लिपुलेख से लगे तिब्बत के कुछ इलाकों में भी लोगों से टैक्स लेते। यानी वह भी उनके राज्य का हिस्सा था। दूसरी तरफ नेपाल का लिपुलेख से कोई मतलब ही नहीं था। उसने कभी तिब्बत से व्यापार नहीं किया और न ही नेपाल से कभी इस रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा का ज़िक्र मिलता है, जबकि छठी शताब्दी से ही हिंदुस्तान से लोग लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाते थे। उस समय माना जाता था कि संपूर्ण परिक्रमा तब होगी, जब नैनीताल से अल्मोड़ा- गंगोलीहाट-पिथौरागढ़ होते हुए कैलाश मानसरोवर को जाएंगे। फिर आते वक्त टनकपुर से वापस निकलते थे। तब संपूर्ण परिक्रमा होती थी और लोग तीन-साढ़े तीन महीने तक उस क्षेत्र में यात्रा करते थे।nbt
नई दिल्ली, 31 मई 2020,लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक प्रभावित समूह अगर कोई है तो वह है प्रवासी मजदूर. पीएम मोदी ने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम के 65वें भाग में मजदूरों की स्थिति पर दुख जाहिर किया. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में भी कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो कठिनाई में न हो, परेशानी में न हो और इस संकट की सबसे बड़ी चोट अगर किसी पर पड़ी है तो वो हैं हमारे गरीब, मजदूर, श्रमिक वर्ग. उनकी तकलीफ, उनका दर्द, उनकी पीड़ा शब्दों में नहीं कही जा सकती. पीएम ने कहा, जो दृश्य आज हम देख रहे हैं, इससे देश के अतीत में जो कुछ हुआ, उसके अवलोकन और भविष्य के लिए सीखने का अवसर भी मिला है. आज, हमारे श्रमिकों की पीड़ा में, देश के पूर्वीं हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं. उस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है. केंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैं, उससे गांवों में रोजगार, स्वरोजगार, लघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं. अगर, हमारे गांव, कस्बे, जिले, राज्य, आत्मनिर्भर होते, तो अनेक समस्याओं ने वो रूप नहीं लिया होता, जिस रूप में वो आज हमारे सामने हैं. जैसे, कहीं श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम हो रहा है, कई स्टार्टअप इस काम में जुटे हैं, कहीं माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है. मुझे पूरा भरोसा है आत्मनिर्भर भारत अभियान, इस दशक में देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगा. हमारे देश में, करोड़ों गरीब, दशकों से एक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं कि अगर बीमार पड़ गए तो क्या होगा? इस तकलीफ को समझते हुए, इस चिंता को दूर करने के लिए ही करीब डेढ़ साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी. कुछ ही दिन पहले, आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ के पार हो गई है. एक करोड़ से ज्यादा मरीज, मतलब, नॉर्वे जैसा देश, सिंगापुर जैसा देश, उसकी जो कुल जनसंख्या है, उससे, दो गुना लोगों को मुफ्त में इलाज दिया गया है. आयुष्मान भारत योजना के 1 करोड़ लाभार्थियों में से करीब 80 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण इलाके के हैं. इसमें से भी करीब 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं-बेटियां हैं. इन लाभार्थियों में ज्यादातर ऐसी बीमारी से पीड़ित थे, जिनका इलाज सामान्य दवाओं से संभव नहीं था. आयुष्मान भारत योजना के साथ एक बड़ी विशेषता पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है. पोर्टेबिलिटी ने देश को, एकता के रंग में रंगने में भी मदद की है. यानी बिहार का कोई गरीब अगर चाहे तो, उसे कर्नाटक में भी वही सुविधा मिलेगी, जो उसे, अपने राज्य में मिलती है. उन्होंने कहा कि देश में सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है. हमारी जनसंख्या ज्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला. पीएम ने आगे कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है. जो नुकसान हुआ है, उसका दु:ख हम सबको है, लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाए हैं, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है. आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अब भी उतनी ही गंभीर है . आपको, आपके परिवार को, कोरोना से अभी भी उतना ही गंभीर खतरा हो सकता है. अगले महीने, फिर एक बार, ‘मन की बात’ अनेक नए विषयों के साथ जरूर करेंगे.
नई दिल्ली कोरोना वायरस के इस दौर में भारत की स्थिति बाकी देशों के मुकाबले काफी ठीक है और कोरोना की वैक्सीन के लिए दुनिया की नजर भारत पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में यह कहा। मोदी बोले कि दुनिया के बड़े नेताओं को ऐसा लगता है कि कोरोना से जंग में आयुर्वेद अहम रोल अदा कर सकता है। लॉकडाउन खत्म होने पर मिल रही छूट (Unlock 1.0) पर भी मोदी बोले, कहा कि फिलहाल सावधानियों को बरतना न छोड़ें क्योंकि कोरोना कहीं नहीं गया है। कोरोना के साथ अम्फान, टिड्डी हमले का जिक्र मोदी बोले कि कोरोना के साथ देश ने अम्फान और टिड्डी दल के हमलों को भी देखा है। मोदी बोले कि पता चला कि छोटा सा जीव कितना नुकसान कर सकता है। मोदी बोले, 'एक तरफ हम महामारी से लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमें हाल में पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक आपदा का भी सामना करना पड़ा है। हालात का जायजा लेने के लिए मैं ओडिशा और पश्चिम बंगाल गया था। संकट की इस घड़ी में देश भी, हर तरह से वहां के लोगों के साथ खड़ा है।' मन की बात की शुरुआत में मोदी ने कहा कि काफी हद लॉकडाउन खुल चुका है। उन्होंने श्रमिक ट्रेन, स्पेशल ट्रेनें, घरेलू उड़ानों का जिक्र किया।मोदी बोले कि भारत की जनसंख्या बाकी देशों से काफी ज्यादा है। बावजूद इसके कोरोना भारत में उतना नहीं फैल पाया जितना बाकी देशों में फैला। मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई का रास्ता लंबा है। अभी कोई इलाज नहीं, इसका कोई अनुभव नहीं। नई चुनौतियां, परेशानियां अनुभव कर रहे। भारत भी इससे अछूता नहीं। कोरोना काल के इन हीरोज की तारीफ मोदी ने कोरोना काल में लोगों की मदद कर रहे लोगों की तारीफ की। मोदी बोले कि तमिलनाडु के सी मोहन मदुरै में सलून चलाते हैं। उन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए 5 लाख रुपये बचाए थे। अब सारा पैसा जरूरतमदों पर खर्च कर दिया। अगरतला के गौतम दास जी अपनी जमापूंजी से लोगों के को दाल-चावल खिला रहे। पठानकोट के दिव्यांग राजू अबतक 3 हजार से ज्यादा मास्क बनवाकर बांट चुके हैं। उन्होंने 100 परिवारों के लिए खाने का राशन जुटाया है। मोदी ने बताया 'सीक्रेट' मोदी ने कहा कि कोरोना के दौर में विश्व के कई नेताओं से उनकी बातचीत हुई। इन दिनों विदेशी नेताओं की दिलचस्पी योग और आयुर्वेद में है। वे जानना चाहते हैं कि इससे कोरोना में क्या मदद मिल सकती है। मोदी बोले, 'कोरोना संकट के दौरान हॉलिवुड से हरिद्वार तक योग पर ध्यान। कितने ही लोग जिन्होंने कभी योग नहीं किया वे योग सीख रहे हैं। योग कम्यूनिटी, यूनिटी, इम्यूनिटी सबके लिए अच्छा है।' श्रमिकों की दिक्कतों और प्रवासी संकट का जिक्र मोदी बोले कि लॉकडाउन में श्रमिक, मजदूर सबसे ज्यादा परेशान हुए। सब उनकी परेशानियों को अनुभव कर पा रहे। रेलवे के लोग दिन-रात लगे हुए हैं। वे भी अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर हैं। लाखों लोगों को उनके घर तक पहुंचाना बड़ी बात। मोदी बोले कि देश के पूर्व हिस्से में ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता। इसका विकास करना है। पूर्व भारत के विकास को हमने प्राथमिकता दी है। बीते सालों में बहुत कुछ हुआ। प्रवासी मजदूरों को देखते हुए नए कदम उठाना जरूरी। यह शुरू किया। माइग्रेशन कमीशन बन रहा। स्टार्टअप इसपर काम कर रहे। मोदी ने आगे बताया कि आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की संख्या 1 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। मतलब नॉर्वे, सिंगापुर जैसा देश उसकी जनसंख्या से दो गुना लोगों को मुफ्त में इलाज दिया गया। वह बोले कि आयुष्मान योजना से गरीबों का इलाज पर खर्च होनेवाले पैसे बचा है। दिखने लगे हैं गायब हुए जीव-जंतु: मोदी मोदी ने कहा कि 5 जून को पर्यावरण दिवस है। इस साल की थीम जैव-विविधता है। कितने ही ऐसे पक्षी ऐसे हैं जो गायब हो गए थे, लॉकडाउन में वे वापस दिखने लगे। कई जानवर सड़कों पर घूमते दिखे। घर से दूर-दूर पहाड़ियां देख पा रहे हैं। कई लोगों को इससे प्रकृति के लिए कुछ करने का मन हुआ होगा। मोदी ने कहा इस पर्यावरण पर पेड़ जरूर लगाएं। कोरोना वायरस लॉकडाउन में पीएम मोदी की यह तीसरी मन की बात थी। मोदी अपनी सरकार बनने के बाद अबतक 65 बार मन की बात कार्यक्रम कर चुके हैं।
पेइचिंग/लद्दाख एक ओर चीन लद्दाख की सीमा पर किसी तनाव की बात से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि स्थिति सामान्य है, तो दूसरी ओर अपनी सीमा में सेना की मौजूदगी और सक्रियता दोनों बढ़ाता जा रहा है। ताजा सैटलाइट तस्वीरों से पता चल रहा है कि गोगरा इलाके में चीन ने अपनी सेना बढ़ा भी दी है और वह ऊपर की ओर भी बढ़ने लगी है। वहीं, भारत भी पूरी तरह से तैयार है और भारतीय सुरक्षाबल चीन के ठीक सामने मुस्तैदी से तैनात हैं। लद्दाख में भारत के कराए निर्माणकार्यों से चीन बौखलाया चल रहा है और सेना की ऐक्टिविटी को बढ़ा रहा है। आमने-सामने खड़ी हैं सेनाएं ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अनैलिस्ट Detresfa ने ताजा सैटलाइट तस्वीरें जारी की हैं। इनके मुताबिक चीन की सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पैंगॉन्ग सो और गोगरा इलाके के ठीक सामने नई पोजिशन ले रखी है। इसे देखते हुए भारत ने यहां अपनी मौजूदा स्थिति के करीब ही और ज्यादा सुरक्षाबल बढ़ा दिया है। वहीं, पैंगॉन्ग सो में बेस एरिया से चीनी यूनिट ऊपर की ओर चढ़ रही है। संभावना है कि यहां टेंट भी लगाए गए हैं। भारत के गोगरा पोस्ट के पास चीन की PLA ने पोजिशन भी ली है यहां बड़े स्तर पर ऐक्टिविटी चल रही है। भारत से 11 किमी दूर बड़ी यूनिट इससे पहले शनिवार को जारी तस्वीरों में Detresfa ने दावा किया था कि PLA भारत के गोगरा बेस से 11 किमी उत्तरपश्चिम की ओर है। उसके मुताबिक यह अब तक की सबसे बड़ी यूनिट है जिसमें कई वीइकल ट्रक्स हैं। उसने साफ किया था कि चीन की सेना भारत की सीमा में दाखिल नहीं हुई है, जैसा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था। भारत ने समय रहते अपनी सेना सीमा पर तैनात कर दी थी जिसके बाद PLA का प्लान फेल हो गया था। अंदर तक आने का था इरादा दरअसल, लद्दाख में पिछले 2-3 सालों में भारत ने डीबीओ इलाके में जो सड़क बनाई है, उसकी वजह से चीन बेचैन हो रहा है। चीन ने एलएसी के पास करीब 5000 सैनिकों की तैनाती की हुई है। भारत ने भी वहां पर भारी मात्रा में सैन्य बल तैनात कर दिया गया है। गालवान नाला एरिया में चीनी सैनिक 114 ब्रिगेड के काफी पास में मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मई के पहले हफ्ते में चीन भारतीय सीमा में ज्यादा अंदर तक घुसने की फिराक में था लेकिन उसकी यह कोशिश बेकार गई।

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