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नई दिल्ली राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा राफेल डील के लिए जो प्रक्रिया चल रही थी उसे पीएमओ द्वारा मॉनिटर करना पैरलल निगोशियेशन (सामान्तर बातचीत) या दखल नहीं कहा जा सकता है। केंद्र सरकार ने कहा कि अधूरे आंतरिम नोट्स और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राफेल डील के मामले को दोबारा ओपन नहीं किया जा सकता। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 दिसंबर को जो आदेश पारित किया था, उसका नतीजा सही था। सरकार ने कहा कि इस मामले में दाखिल रिव्यू पिटिशन में लगाए गए आरोप थोथे और गलत तथ्यों वाला है, जो विचारनीय नहीं है, ऐसे में उसे खारिज किया जाना चाहिए। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन दाखिल किया है। सरकार ने हलफनामे में कहा है कि याचिकार्ता ने बेतुके मुद्दे उठाए हैं, ताकि विवाद पैदा हो सके। केंद्र सरकार ने फिर दोहराया कि इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने में उसका कोई रोल नहीं है। 'तरीका गलत था' डिफेंस मिनिस्ट्री के अधिकारी ने हलफनामा दायर कर कहा है कि पड़ोसी देशों की स्थिति और भारत की सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए राफेल डील की प्रक्रिया का खुलासा करने से नैशनल सिक्यॉरिटी पर गंभीर असर होगा। साथ ही केंद्र ने कहा कि डिफेंस डील के कुछ गोपनीय दस्तावेज को गलत तरीके से हासिल कर रिव्यू में लगाया गया है, जो देश की सुरक्षा से जुड़ा है। इन दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन की सुनवाई नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि पिछले साल 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले की जांच की याचिका खारिज करते हुए सही निष्कर्ष दिया था कि किसी व्यक्ति का पुर्वानुमान जांच का आधार नहीं हो सकता, जिसमें आरोप थोथे और निराधार हों। अब याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज दिए हैं, जिसके बारे में कहा गया है कि मीडिया के जरिये सामने आया है, लेकिन यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। जो दस्तावेज दिए गए हैं वह कुछ प्रेस रिपोर्ट्स के आधार पर है और कुछ आंतरिम फाइल नोटिंग है, जो अवैध और गैर कानूनी तरीके से हासिल किया गया है। इस आधार पर पूरे मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकता, क्योंकि रिव्यू पिटिशन का स्कोप सीमित है। 'हर पहलू देखा गया' पिछले साल के 14 दिसंबर के राफेल मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। आरोप लगाया है कि राफेल डील में हुई अनियमतिता की जांच होनी चाहिए। इस मामले में विनित ढांढा और आप नेता संजय सिंह की ओर से भी रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। केंद्र सरकार के डिफेंस मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसंबर के आदेश में तमाम पहलुओं- फैसले की प्रक्रिया, कीमत और इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने की प्रक्रिया को देखा था और कोर्ट ने निष्कर्ष के साथ अर्जी खारिज की थी। केंद्र सरकार ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का आधार नहीं हो सकता। फाइल नोटिंग और विचारों का आदान-प्रदान और मतों को संबंधित अथॉरिटी देखती है और फिर आखिरी फैसला लिया जाता है। इस पर सवाल नहीं हो सकता। अधूरी फाइल नोटिंग और मीडिया रिपोर्ट रिव्यू पिटिशन का आधार नहीं हो सकता। केंद्र सरकार ने इस दौरान लीक गोपनीय दस्तावेज को पिटिशन के साथ पेश किए जाने पर भी ऐतराज जताया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को उसे खारिज कर दिया था। क्या है मामला - राफेल खरीद प्रक्रिया और इंडियन ऑफसेट पार्टनर के चुनाव में सरकार द्वारा भारतीय कंपनी को फेवर किए जाने के आरोपों की जांच की गुहार लगाने वाली तमाम याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को खारिज कर दिया था। - अदालत ने कहा था कि किसी व्यक्ति की अनुभूति जांच का आधार नहीं हो सकता। जहां तक इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुने जाने का मामला है कोर्ट के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं रखा गया, जिससे पता चले कि भारत सरकार ने कमर्शल फेवरिज्म किया है और किसी भी पार्टी को सरकार ने फायदा पहुंचाया है, क्योंकि इंडियन ऑफसेट पार्टनर चुनने का अधिकार भारत सरकार का नहीं है। - 2 जनवरी 2019 को राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और एडवोकेट प्रशांत भूषण की ओर से 14 दिसंबर के फैसले के रिव्यू के लिए अर्जी दाखिल की गई। अर्जी में मीडिया में डिफेंस मिनिस्ट्री से जुड़े कुछ नोटिंग की खबरों को भी रिव्यू को आधार बनाया गया। - 10 अप्रैल 2019 को कोर्ट ने कहा कि वह लीक दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन सुनेगा।
चेन्नै एक हफ्ते पहले मौसम वैज्ञानिकों ने दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दबाव की स्थिति की पहचान की थी। 5 भारतीय सैटलाइटों ने उस दबाव क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी जो फोनी चक्रवाती तूफान का रूप ले रहा था। 5 सैटलाइट हर 15 मिनट पर भेज रहे थे डेटा फोनी 'अत्यंत भीषण चक्रवात' का रूप लेता जा रहा था, उधर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) द्वारा भेजे गए सैटलाइट हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन पर डेटा भेज रहे थे। इस डेटा से फोनी को ट्रैक करने, उसके मूवमेंट के बारे में सटीक पूर्वानुमान लगाने और इस तरह सैकड़ों जिंदगियों को बचाने में मदद मिली। फोनी के केंद्र के 1,000 किमी के दायरे में थे बादल भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, फोनी की तीव्रता, लोकेशन और उसके आस-पास बादलों के अध्ययन के लिए Insat-3D, Insat-3DR, Scatsat-1, Oceansat-2 और मेघा ट्रॉपिक्स सैटलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा का इस्तेमाल किया गया। फोनी के केंद्र के 1,000 किलोमीटर के दायरे में बादल छाए हुए थे, लेकिन बारिश वाले बादल सिर्फ 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में थे। बाकी बादल करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर थे। तूफान के दौरान पूर्वानुमान में सैटलाइटों की अहम भूमिका IMD के डायरेक्टर जनरल के. जे. रमेश ने बताया कि सैटलाइटों का पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका है, खासकर तूफान के दौरान। इनके द्वारा भेजे गए डेटा से हमें सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिलती है। समय रहते सुरक्षित जगह भेजे गए लाखों लोग सैटलाइटों के डेटा के हिसाब में IMD ने इस बात का सटीक पूर्वानुमान लगाया कि फोनी किस जगह पर लैंडफॉल करेगा। इस वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने 11.5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया। Scatsat-1 से भेजे गए डेटा से चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गई, वहीं Oceansat-2 समुद्री सतह, हवा की गति और दिशा के बारे में डेटा भेज रहा था।
नई दिल्ली, 04 मई 2019,कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बिजनेस पार्टनर रहे यूलरिक मैकनाइट को यूपीए सरकार के दौरान ऑफसेट्स डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाए जाने का मामला सामने आया है. यूलरिक मैकनाइट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश कंपनी बैकोप्स यूके के को-प्रमोटर (Co-promoter) थे. इसमें यूलरिक मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी, जबकि राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी थी. बैकोप्स यूके कंपनी साल 2003 में शुरू हुई थी, जिसके बाद 2009 इसे खत्म (dissolved) कर दिया गया. साल 2011 में यूलरिक मैकनाइट ने फ्रांस की रक्षा सामानों की आपूर्ति करने वाली कंपनी नेवल ग्रुप से स्कॉर्पियन सबमरीन को लेकर ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया. आजतक के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक यूपीए सरकार के दौरान राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनियों को फ्रांस की नेवल ग्रुप कंपनी के ऑफसेट पार्टनर के रूप में रक्षा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ. यह मामला तब सामने आया है, जब राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच घमासान छिड़ा हुआ है. राहुल गांधी ने दिया जवाब इस बीच बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी यह मुद्दा उठाया है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा है कि राहुल गांधी के मिडास टच (जादुई शक्त) के सामने कुछ मुश्किल नहीं है. वहीं, राहुल गांधी ने खुद भी इन दावों पर जवाब दिया है. राहुल ने कहा है कि सबकुछ सार्वजनिक है और मैंने कुछ गलत नहीं किया है. राहुल ने कहा कि आप जो चाहे जांच कर लो, कोई कार्रवाई कर लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मुझे पता है मैंने कुछ गलत नहीं किया है. हालांकि, राहुल ने इसके आगे ये भी जोड़ दिया कि राफेल की जांच भी होनी चाहिेए. अब तक दोनों पार्टियों द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से यह बात तो साफ है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में बैकोप्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी. इसमें यूलरिक मैकनाइट नाम के शख्स को पार्टनर बनाया गया था. बैकोप्स यूके की ओर से फाइल किए गए दस्तावेजों के मुताबिक राहुल गांधी और मैकनाइट दोनों ही कंपनी के संस्थापक डायरेक्टर थे. जून 2005 तक इस कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी और मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने चुनावी हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बैकोप्स यूरोप की चल संपत्ति का जिक्र किया था. इस चल संपत्ति में बैकोप्स यूरोप के तीन बैंक अकाउंट में जमा धनराशि भी शामिल थी. इसके बाद यह कंपनी फरवरी 2009 में बंद कर दी गई थी. इसके अलावा राहुल गांधी बैकोप्स कंपनी के नाम की दूसरी कंपनी यानी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़े रहे. इस कंपनी में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सह-निदेशक के पद पर रहीं. राहुल गांधी ने अपने साल 2004 के चुनावी हलफनामे में घोषित किया था कि भारतीय कंपनी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 83 फीसदी हिस्सेदारी है. राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में यह भी बताया था कि उन्होंने इस कंपनी में दो लाख 50 हजार रुपये का निवेश किया है. यह कंपनी साल 2002 में बनाई गई थी, लेकिन बाद में इसको भी बंद कर दिया गया. इस कंपनी ने अपना अंतिम रिटर्न जून 2010 में दाखिल किया. क्या है पूरा मामला आरोप है कि राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर और उनकी बाद में बनाई गई कंपनियों को फ्रांस की रक्षा कंपनी द्वारा दिए गए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाया गया. साल 2011 में ऑफसेट दायित्व के तहत फ्रांस की नेवल ग्रुप (पहले इसको डीसीएनएस के नाम से जाना जाता था) ने विशाखापत्तनम स्थित कंपनी फ्लैश फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक डील साइन की. यह डील स्कॉर्पीन सबमरीन के अहम कलपुर्जों की सप्लाई करने के लिए की गई थी. इन स्कॉर्पीन सबमरीन का निर्माण मुंबई के मजगों डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में किया जा रहा था. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप को एमडीएल के साथ मिलकर 6 स्कॉर्पीन सबमरीन बनाने की डील मिली थी. यह डील करीब 20 हजार करोड़ रुपये की थी. साल 2011 में भारतीय कंपनी फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का अधिग्रहण किया. इसके बाद अगले साल नंबर 2012 में फ्लैश फोर्ज कंपनी के दो डायरेक्टरों को ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड में डायरेक्टरशिप दे दी गई थी. 8 नवंबर 2012 को इन दोनों ने डायरेक्टरशिप का भार संभाल लिया. इसके साथ ही यूलरिक मैकनाइट को भी ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का डायरेक्टर बना दिया गया. इतना ही नहीं, साल 2014 में ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड द्वारा दाखिल रिटर्न के मुताबिक कंपनी ने यूलरिक मैकनाइट को 4.9 फीसदी शेयर भी अलॉट कर दिया था. इसके बाद साल 2013 में फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की एक दूसरी कंपनी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद यूलरिक मैकनाइट को इस दूसरी कंपनी का भी डायरेक्टर बना दिया गया. मैकनाइट के साथ फ्लैश फोर्ज लिमिटेड के दो डायरेक्टर को भी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का डायरेक्टर बनाया गया. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप की वेबसाइट्स ने फ्लैश फोर्ज और सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड को भारतीय पार्टनर बताया है. सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड फ्लैश फोर्ज और फ्रांसीसी कंपनी कोयार्ड का ज्वाइंट वेंचर है. वहीं, अभी तक इस संबंध में मैकनाइट से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया है. इसके अलावा फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा फ्लैश फोर्ज से कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले राहुल गांधी की भारतीय और यूरोपीय कंपनियां बंद कर दी गई थीं. हालांकि इन सबके बीच राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को यूरोपीय कंपनियों के जरिए फायदा पहुंचाया गया.
नई दिल्ली, 04 मई 2019,कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बिजनेस पार्टनर रहे यूलरिक मैकनाइट को यूपीए सरकार के दौरान ऑफसेट्स डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाए जाने का मामला सामने आया है. यूलरिक मैकनाइट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश कंपनी बैकोप्स यूके के को-प्रमोटर (Co-promoter) थे. इसमें यूलरिक मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी, जबकि राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी थी. बैकोप्स यूके कंपनी साल 2003 में शुरू हुई थी, जिसके बाद 2009 इसे खत्म (dissolved) कर दिया गया. साल 2011 में यूलरिक मैकनाइट ने फ्रांस की रक्षा सामानों की आपूर्ति करने वाली कंपनी नेवल ग्रुप से स्कॉर्पियन सबमरीन को लेकर ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया. आजतक के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक यूपीए सरकार के दौरान राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनियों को फ्रांस की नेवल ग्रुप कंपनी के ऑफसेट पार्टनर के रूप में रक्षा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ. यह मामला तब सामने आया है, जब राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच घमासान छिड़ा हुआ है. राहुल गांधी ने दिया जवाब इस बीच बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी यह मुद्दा उठाया है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा है कि राहुल गांधी के मिडास टच (जादुई शक्त) के सामने कुछ मुश्किल नहीं है. वहीं, राहुल गांधी ने खुद भी इन दावों पर जवाब दिया है. राहुल ने कहा है कि सबकुछ सार्वजनिक है और मैंने कुछ गलत नहीं किया है. राहुल ने कहा कि आप जो चाहे जांच कर लो, कोई कार्रवाई कर लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मुझे पता है मैंने कुछ गलत नहीं किया है. हालांकि, राहुल ने इसके आगे ये भी जोड़ दिया कि राफेल की जांच भी होनी चाहिेए. अब तक दोनों पार्टियों द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से यह बात तो साफ है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में बैकोप्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी. इसमें यूलरिक मैकनाइट नाम के शख्स को पार्टनर बनाया गया था. बैकोप्स यूके की ओर से फाइल किए गए दस्तावेजों के मुताबिक राहुल गांधी और मैकनाइट दोनों ही कंपनी के संस्थापक डायरेक्टर थे. जून 2005 तक इस कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी और मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने चुनावी हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बैकोप्स यूरोप की चल संपत्ति का जिक्र किया था. इस चल संपत्ति में बैकोप्स यूरोप के तीन बैंक अकाउंट में जमा धनराशि भी शामिल थी. इसके बाद यह कंपनी फरवरी 2009 में बंद कर दी गई थी. इसके अलावा राहुल गांधी बैकोप्स कंपनी के नाम की दूसरी कंपनी यानी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़े रहे. इस कंपनी में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सह-निदेशक के पद पर रहीं. राहुल गांधी ने अपने साल 2004 के चुनावी हलफनामे में घोषित किया था कि भारतीय कंपनी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 83 फीसदी हिस्सेदारी है. राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में यह भी बताया था कि उन्होंने इस कंपनी में दो लाख 50 हजार रुपये का निवेश किया है. यह कंपनी साल 2002 में बनाई गई थी, लेकिन बाद में इसको भी बंद कर दिया गया. इस कंपनी ने अपना अंतिम रिटर्न जून 2010 में दाखिल किया. क्या है पूरा मामला आरोप है कि राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर और उनकी बाद में बनाई गई कंपनियों को फ्रांस की रक्षा कंपनी द्वारा दिए गए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाया गया. साल 2011 में ऑफसेट दायित्व के तहत फ्रांस की नेवल ग्रुप (पहले इसको डीसीएनएस के नाम से जाना जाता था) ने विशाखापत्तनम स्थित कंपनी फ्लैश फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक डील साइन की. यह डील स्कॉर्पीन सबमरीन के अहम कलपुर्जों की सप्लाई करने के लिए की गई थी. इन स्कॉर्पीन सबमरीन का निर्माण मुंबई के मजगों डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में किया जा रहा था. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप को एमडीएल के साथ मिलकर 6 स्कॉर्पीन सबमरीन बनाने की डील मिली थी. यह डील करीब 20 हजार करोड़ रुपये की थी. साल 2011 में भारतीय कंपनी फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का अधिग्रहण किया. इसके बाद अगले साल नंबर 2012 में फ्लैश फोर्ज कंपनी के दो डायरेक्टरों को ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड में डायरेक्टरशिप दे दी गई थी. 8 नवंबर 2012 को इन दोनों ने डायरेक्टरशिप का भार संभाल लिया. इसके साथ ही यूलरिक मैकनाइट को भी ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का डायरेक्टर बना दिया गया. इतना ही नहीं, साल 2014 में ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड द्वारा दाखिल रिटर्न के मुताबिक कंपनी ने यूलरिक मैकनाइट को 4.9 फीसदी शेयर भी अलॉट कर दिया था. इसके बाद साल 2013 में फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की एक दूसरी कंपनी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद यूलरिक मैकनाइट को इस दूसरी कंपनी का भी डायरेक्टर बना दिया गया. मैकनाइट के साथ फ्लैश फोर्ज लिमिटेड के दो डायरेक्टर को भी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का डायरेक्टर बनाया गया. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप की वेबसाइट्स ने फ्लैश फोर्ज और सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड को भारतीय पार्टनर बताया है. सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड फ्लैश फोर्ज और फ्रांसीसी कंपनी कोयार्ड का ज्वाइंट वेंचर है. वहीं, अभी तक इस संबंध में मैकनाइट से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया है. इसके अलावा फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा फ्लैश फोर्ज से कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले राहुल गांधी की भारतीय और यूरोपीय कंपनियां बंद कर दी गई थीं. हालांकि इन सबके बीच राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को यूरोपीय कंपनियों के जरिए फायदा पहुंचाया गया.
नई दिल्ली, 04 मई 2019,महाभारत और रामायण को लेकर दिए गए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के बयान की योग गुरु स्वामी रामदेव ने निंदा की है. बाबा रामदेव ने येचुरी से पूछा कि कम्युनिस्टों, ईसाइयों व मुगलों के शासन में जो निर्दोष लोगों के कत्ल किए गए, उसे हिंसा व अत्याचार कहने का साहस येचुरी कर पाएंगे. सीताराम येचुरी ने बयान दिया था कि रामायण और महाभारत भी लड़ाई और हिंसा से भरी हुई थीं, लेकिन एक प्रचारक के तौर आप सिर्फ महाकाव्य के तौर पर उसे बताते हैं, उसके बाद भी दावा करते हैं कि हिंदू हिंसक नहीं है. येचुरी ने रामायण और महाभारत का हवाला देते हुए कहा था कि फिर किसी एक धर्म को हिंसा से जोड़ने का क्या तर्क है. येचुरी के इसी बयान पर उनकी आलोचना हो रही है. अब योग गुरु बाबा रामदेव ने भी येचुरी के खिलाफ खुलकर बोला है. बाबा रामदेव ने ट्वीट कर लिखा है कि कम्युनिस्टों, ईसाइयों व मुगलों ने अपने राज्य विस्तार के लिए न्याय व कानून के नाम पर 50 करोड़ निर्दोष लोगों का कत्ल किया, क्या सीताराम येचुरी इसको अत्याचार व हिंसा कहने का साहस कर पाएंगे? चुनावों के दौरान एक बार फिर हिंसा करने वालों के धर्म को बहस छिड़ गई है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि हजारों साल के इतिहास में हिंदू आतंकवाद की कोई घटना नहीं है. यहां तक कि अंग्रेज इतिहासकारों ने भी ऐसा नहीं लिखा है, लेकिन कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद का दाग लगाने का काम किया है. इसी कड़ी में सीताराम येचुरी ने कहा है कि रामायण और महाभारत की लड़ाई हिंसा से भरी हुई थी. ऐसे में किसी एक धर्म को हिंसा से जोड़ने का क्या तर्क है. येचुरी के इसी बयान पर अब बाबा रामदेव ने पलटवार किया है और उन्हें कम्यूनिस्टों व मुगल काल के कत्ल-ए आम की याद दिलाई है.
नई दिल्ली, 04 मई 2019,कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बिजनेस पार्टनर रहे यूलरिक मैकनाइट को यूपीए सरकार के दौरान ऑफसेट्स डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाए जाने का मामला सामने आया है. यूलरिक मैकनाइट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश कंपनी बैकोप्स यूके के को-प्रमोटर (Co-promoter) थे. इसमें यूलरिक मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी, जबकि राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी थी. बैकोप्स यूके कंपनी साल 2003 में शुरू हुई थी, जिसके बाद 2009 इसे खत्म (dissolved) कर दिया गया. साल 2011 में यूलरिक मैकनाइट ने फ्रांस की रक्षा सामानों की आपूर्ति करने वाली कंपनी नेवल ग्रुप से स्कॉर्पियन सबमरीन को लेकर ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया. आजतक के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक यूपीए सरकार के दौरान राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनियों को फ्रांस की नेवल ग्रुप कंपनी के ऑफसेट पार्टनर के रूप में रक्षा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ. यह मामला तब सामने आया है, जब राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच घमासान छिड़ा हुआ है. राहुल गांधी ने दिया जवाब इस बीच बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी यह मुद्दा उठाया है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा है कि राहुल गांधी के मिडास टच (जादुई शक्त) के सामने कुछ मुश्किल नहीं है. वहीं, राहुल गांधी ने खुद भी इन दावों पर जवाब दिया है. राहुल ने कहा है कि सबकुछ सार्वजनिक है और मैंने कुछ गलत नहीं किया है. राहुल ने कहा कि आप जो चाहे जांच कर लो, कोई कार्रवाई कर लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मुझे पता है मैंने कुछ गलत नहीं किया है. हालांकि, राहुल ने इसके आगे ये भी जोड़ दिया कि राफेल की जांच भी होनी चाहिेए. अब तक दोनों पार्टियों द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से यह बात तो साफ है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में बैकोप्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी. इसमें यूलरिक मैकनाइट नाम के शख्स को पार्टनर बनाया गया था. बैकोप्स यूके की ओर से फाइल किए गए दस्तावेजों के मुताबिक राहुल गांधी और मैकनाइट दोनों ही कंपनी के संस्थापक डायरेक्टर थे. जून 2005 तक इस कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी और मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने चुनावी हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बैकोप्स यूरोप की चल संपत्ति का जिक्र किया था. इस चल संपत्ति में बैकोप्स यूरोप के तीन बैंक अकाउंट में जमा धनराशि भी शामिल थी. इसके बाद यह कंपनी फरवरी 2009 में बंद कर दी गई थी. इसके अलावा राहुल गांधी बैकोप्स कंपनी के नाम की दूसरी कंपनी यानी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़े रहे. इस कंपनी में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सह-निदेशक के पद पर रहीं. राहुल गांधी ने अपने साल 2004 के चुनावी हलफनामे में घोषित किया था कि भारतीय कंपनी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 83 फीसदी हिस्सेदारी है. राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में यह भी बताया था कि उन्होंने इस कंपनी में दो लाख 50 हजार रुपये का निवेश किया है. यह कंपनी साल 2002 में बनाई गई थी, लेकिन बाद में इसको भी बंद कर दिया गया. इस कंपनी ने अपना अंतिम रिटर्न जून 2010 में दाखिल किया. क्या है पूरा मामला आरोप है कि राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर और उनकी बाद में बनाई गई कंपनियों को फ्रांस की रक्षा कंपनी द्वारा दिए गए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए फायदा पहुंचाया गया. साल 2011 में ऑफसेट दायित्व के तहत फ्रांस की नेवल ग्रुप (पहले इसको डीसीएनएस के नाम से जाना जाता था) ने विशाखापत्तनम स्थित कंपनी फ्लैश फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक डील साइन की. यह डील स्कॉर्पीन सबमरीन के अहम कलपुर्जों की सप्लाई करने के लिए की गई थी. इन स्कॉर्पीन सबमरीन का निर्माण मुंबई के मजगों डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में किया जा रहा था. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप को एमडीएल के साथ मिलकर 6 स्कॉर्पीन सबमरीन बनाने की डील मिली थी. यह डील करीब 20 हजार करोड़ रुपये की थी. साल 2011 में भारतीय कंपनी फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का अधिग्रहण किया. इसके बाद अगले साल नंबर 2012 में फ्लैश फोर्ज कंपनी के दो डायरेक्टरों को ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड में डायरेक्टरशिप दे दी गई थी. 8 नवंबर 2012 को इन दोनों ने डायरेक्टरशिप का भार संभाल लिया. इसके साथ ही यूलरिक मैकनाइट को भी ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का डायरेक्टर बना दिया गया. इतना ही नहीं, साल 2014 में ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड द्वारा दाखिल रिटर्न के मुताबिक कंपनी ने यूलरिक मैकनाइट को 4.9 फीसदी शेयर भी अलॉट कर दिया था. इसके बाद साल 2013 में फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की एक दूसरी कंपनी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद यूलरिक मैकनाइट को इस दूसरी कंपनी का भी डायरेक्टर बना दिया गया. मैकनाइट के साथ फ्लैश फोर्ज लिमिटेड के दो डायरेक्टर को भी 'कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड' का डायरेक्टर बनाया गया. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप की वेबसाइट्स ने फ्लैश फोर्ज और सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड को भारतीय पार्टनर बताया है. सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड फ्लैश फोर्ज और फ्रांसीसी कंपनी कोयार्ड का ज्वाइंट वेंचर है. वहीं, अभी तक इस संबंध में मैकनाइट से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया है. इसके अलावा फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा फ्लैश फोर्ज से कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले राहुल गांधी की भारतीय और यूरोपीय कंपनियां बंद कर दी गई थीं. हालांकि इन सबके बीच राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को यूरोपीय कंपनियों के जरिए फायदा पहुंचाया गया.
प्रतापगढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने विपक्षी पार्टियों के गठबंधन और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी पहले चरण के चुनाव से पहले खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान रही थी, वह अब खुद को वोट कटवा पार्टी मानने लगी है। यह कांग्रेस के पतन का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को पता है कि मोदी को हराना है तो उसे नीचे गिराना होगा, इसलिए रोज झूठे आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा, 'वोट काटना, देश बांटना और कैबिनेट का अध्यादेश फाड़ना ही कांग्रेस की पहचान है। चौथे चरण के बाद कुछ बातें निकलकर आई हैं, जो गौर करने लायक हैं। नामदार कह रहे थे कि वे मोदी के आभामंडल से डरते हैं। अब वे कह रहे हैं कि मोदी से तब तक जीत नहीं सकते जब तक उसकी मेहनत, ईमानदारी और देशभक्ति पर दाग ना लगा दें।' 'कांग्रेस का पूरा ध्यान मोदी की छवि खराब करने पर' मोदी ने कहा, 'रोज मोदी पर कीचड़ उछाला जाता है, रोज झूठ बोला जाता है। राफेल का शिगूफा ले आए और झूठ बोला। अपने पूरे इकोसिस्टम को उन्होंने इस झूठ के प्रचार में लगा दिया। कांग्रेस का एक ही काम है मोदी की छवि खराब करना। जब ये लोग मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाए, तो मेरी छवि को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।' 'मोदी ने 50 साल की है तपस्या, ऐसे नहीं गिरा पाओगे' पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'नामदार कान खोलकर सुन लो, मोदी सोने का चम्मच लेकर नहीं पैदा हुआ है। मोदी राजपरिवार में भी नहीं पैदा हुआ। मोदी भारत की धूल फांककर बना है। मोदी पिछले 50 साल बिना थके, बिना रुके जिया है और उसके लिए तपस्या की है। 5 या 50 इंटरव्यू देकर मोदी की 50 साल की छवि को नहीं मिटा पाओगे।' उन्होंने कहा, 'आपके दरबारियों ने आपके पिता की भी मिस्टर क्लीन की छवि बनाई थी, मगर उनकी सबसे बड़े भ्रष्टाचारी की छवि बन गई। यह देश सब बर्दाश्त कर लेगा, लेकिन धोखा कभी नहीं बर्दाश्त करेगा।' शेर पढ़कर किया कांग्रेस पर हमला प्रधानमंत्री मोदी ने एक शेर पढ़कर कहा, 'ना मैं गिरा ना मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे, पर कुछ लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे।' उन्होंने कहा, 'ये लोग मुझे गिराकर और मेरी छवि गिराकर देश में अस्थिर सरकार बनवाना चाहते हैं। अरे महामिलावटियों, देश के चौकीदार के प्रचार के लिए देश और उत्तर प्रदेश की जनता सड़क पर निकल पड़ी है। जिसके साथ देश की माताएं-बहनें, युवा और बुजुर्ग हों, उसे गिराने का सपना छोड़ दीजिए।' मोदी ने कहा, 'जब-जब ये महामिलावटी पंजा सत्ता में आता है, देश को उसका भयंकर नुकसान उठाना पड़ता है। कांग्रेस के नामदार किसानों की जमीन को ट्रस्ट के नाम पर लेते हैं और उसे हड़प लेते हैं। आज सुबह ही मैं उठ पढ़ रहा था कि नामदार के डूब रहे साथी को कैसे रक्षा सौदों में शामिल किया गया। सरकार भी अपनी, दोस्त भी अपना, रक्षा सौदा भी बड़ा, यानी नामदार की मलाई का पूरा इंतजार था। इन लोगों ने देश को कैसे लूटा, इसका खुलासा करती है यह रिपोर्ट।' 'भ्रष्टाचार की जांचों को लटकाते हैं' मोदी ने आगे कहा कि ये लोग (विपक्षी पार्टियों के नेता) भ्रष्टाचार के किसी सवाल पर हमेशा कहते हैं कि जांच कर लो। मैं आपको बताता हूं कि इनको 20-20 नोटिस अलग-अलग विभागों ने भेजे हैं, ना ये आते हैं और ना ही इनके वकील आते हैं। इनका मकसद होता है कि अगली सरकार आने तक इस मुद्दे को लटकाए रहो, फिर हम निपट लेंगे। मीडिया के सामने झूठ बोलते हैं कि हम जांच के लिए तैयार हैं। 'ताज महल और टोंटी भी नहीं थे सुरक्षित' उत्तर प्रदेश में बीएसपी और एसपी के शासनकाल पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, 'बीएसपी के शासनकाल में ना ऐंबुलेंस सुरक्षित थी और ना ही ताज महल। बीएसपी में ताज महल के सौदे होते थे। एसपी के शासनकाल में तो बालू-बजरी के साथ घरों की टोंटी भी नहीं छोड़ी। महामिलावटी सत्ता में आएंगे, तो यही खतरे होंगे।' 'कहां बिजली आए, यह भी जाति देखकर तय होता था' मोदी ने कहा, 'आखिरी बार जब थर्ड फ्रंट की सरकार बनी थी तो 2 साल भी नहीं चल पाई थी। इस अवधि में दो बार प्रधानमंत्री बदले गए थे। आखिरी बार जब एसपी-बीएसपी साथ आए थे, तो दो साल भी सरकार नहीं चला पाए थे। याद करिए किस इलाके में बिजली आए और कहां नहीं, यह भी जाति देखकर तय होता था। क्या ऐसे लोगों को वोट देना चाहिए?' भाषण के बीच भीड़ को समझाते दिखे मोदी रैली में भारी भीड़ के बीच लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे। भाषण के बीच मोदी रैली के दौरान लोगों को समझाते-बुझाते दिखे। उन्होंने प्रतापगढ़, अमेठी और सुल्तानपुर के उम्मीदवारों के लिए वोट अपील करते हुए कहा कि आप वोट इन उम्मीदवारों को देंगे, लेकिन आपका एक-एक वोट मोदी को ताकत देगा। भाषण खत्म करने से पहले मोदी ने भीड़ वाली जगह पर खड़े लोगों से पूछा कि आपको कोई समस्या तो नहीं हुई ना।
नई दिल्ली,भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसे रोबोट पर काम कर रहे हैं जो हर तरह के इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता है. इस तरह के रोबोट का एक प्रोटोटाइप दिसंबर तक तैयार हो सकता है. डिफेंस क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस तरह के रोबोट के विकास पर काम कर रही है. कंपनी को इसके विकास के बाद सेना से अच्छे ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. बेल के इस रोबोट में ऐसे सेंसर और प्रोग्राम होंगे, जो कंट्रोल सेंटर को तत्काल कोई जानकारी भेज सकेंगे. यह रोबोट श्रीलंका में हाल में हुई आतंकवादी घटनाओं जैसे हालात को रोकने के लिए भी कारगर हो सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक, सीमा पर गश्ती के लिए ऐसे रोबोट तैनात करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सीमा पर हमारे जांबाज सैनिकों की शहादत या उनके घायल होने की घटनाएं कम होंगी. छोटे ऑर्डर के लिए इन रोबोट की अनुमानित लागत 70 से 80 लाख रुपये की होगी. लेकिन ज्यादा संख्या में ऑर्डर मिलने पर इस रोबोट की लागत और कम हो जाएगी. फिलहाल बेल की बेंगलुरु और गाजियाबाद स्थ‍ित सेंट्रल रिसर्च लाइब्रेरी और बेंगलुरु के बेल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी सेंटर (BSTC) के 80 वैज्ञानिक और इंजीनियर निगरानी रोबोट तैयार करने में लगे हुए हैं. इस टीम ने एक बेसिक रोबोट तैयार भी कर लिया है, लेकिन निगरानी के लिए जिस रोबोट का विकास किया जा रहा है, वह अगली पीढ़ी का आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस होगा. ऐेसे रोबोट के विकास के लिए काफी रॉ डेटा की जरूरत होती है, लेकिन डेटा मिलने के बाद उनका इस्तेमाल इस तरह से किया जा सकता है कि रोबोट हर तरह का काम कर सके. खबर के अनुसार, बेल की योजना दिसंबर के पहले हफ्ते में तैयार हो जाने वाले पहले प्रोटोटाइप रोबोट की आंतरिक समीक्षा करने की है. इसके लिए यूजर ट्रायल फरवरी 2020 तक शुरू हो सकता है. बेल इस साल के अंत तक कई और एआई क्षमता वाले उत्पाद तैयार करेगा. हालांकि ऐसे उत्पादों के लिए उसे सेना से कोई मांग नहीं मिली है, लेकिन वह खुद ही ऐसे उत्पाद कर रही है जो कि सेना के लिए उपयोगी हो सके. करीब सवा तीन हज़ार किमी का बॉर्डर भारत को पाकिस्तान से अलग करता है. इसमें से ज़्यादातर एरिया को भारत ने फेंसिंग लगाकर महफूज़ कर रखा है. मगर 146 किमी का बॉर्डर एरिया अभी भी ऐसा है जहां तारबंदी कर पाना मुमकिन नहीं है. और यही वो जगह हैं जहां से घुसकर आतंकी भारत में अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देते हैं. हाल में ही सरहद की निगरानी के लिए स्मार्ट फेंसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. इसका नाम है कॉप्रीहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम यानी CIBMS. इस सिस्टम में एक अदृश्य लेज़र वॉल रहेगी, जो सरहद की निगरानी करेगी. इस दौरान एक साथ कई सिस्टम काम कर रहे होंगे, जो हवा, जमीन और पानी में देश की सीमा की रक्षा करेंगे.
ी नई दिल्ली : राफेल डील (Rafale Deal) को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है. हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के आस्तित्व पर खतरा है. सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे (Rafale Deal) के गोपनीय दस्तावजों रे परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है. हलफनामे में सरकार ने कहा कि राफेल (Rafale Deal) पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती- फिरती जांच की कोशिश की गई. मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला. ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं. केंद्र ने कहा कि ये सिर्फ अधिकारियों के विचार हैं जिनके आधार पर सरकार कोई फैसला कर सके. सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी. CAG ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और कहा है कि यह 2.86% कम है. केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट जो भी मांगेगा सरकार राफाल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है. राफेल (Rafale Deal) पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए. आपको बता दें कि दिसंबर के अपने फैसले में अदालत ने कहा था कि वर्तमान जैसे मामलों में मूल्य निर्धारण विवरण की तुलना करना इस अदालत का काम नहीं है. अब कोर्ट इस मामले में 6 मई को सुनवाई करेगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि वो द हिंदू में छपे रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों पर भरोसा कर उनके आधार पर सुनवाई करेगा. बता दें कि ये याचिकाएं यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी और प्रशांत भूषण के अलावा मनोहर लाल शर्मा, विनीत ढांडा और आप सासंद संजय सिंह ने दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति को खारिज कर दिया था कि ये दस्तावेज विशेषाधिकार प्राप्त हैं और कोर्ट इन्हें नहीं देख सकती.
नई दिल्ली, 04 मई 2019,रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 कामोव-31 हेलीकॉप्टर खरीदने की डील को मंजूरी दे दी है. दोनों देशों के बीच इन 10 हेलिकॉप्टर्स का सौदा करीब 3,600 करोड़ रुपए में हुआ है. भारतीय नौसेना ने अपने जहाजों को हवाई खतरों से बचाने के लिए इन हेलिकॉप्‍टरों की खरीद का प्रस्‍ताव रखा था. इस मंजूरी के बाद से अब भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी. ये हेलिकॉप्‍टर बाकी चॉपरों के मुकाबले बेहद हल्‍के और नियंत्रित करने में आसान होते हैं. साथ ही पनडुब्बी रोधी युद्ध में कारगर हैं. इन हेलिकॉप्‍टरों को नौसेना के विमान वाहक और युद्धपोतों पर तैनात किया जाएगा, जिसमें आईएनएस विक्रांत और ग्रेगोइविच क्लास फ्रिगेट शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत-रूस के बीच हुए सैन्य समझौते के तहत 10 कामोव-31 चॉपर की डील फाइनल हुई है. करीब 3600 करोड़ रुपए में ये चॉपर खरीदे जाएंगे. फिलहाल कामोव-31 का इस्तेमाल रूस और चीन कर रहे हैं. इसके बाद अब यह भारत की नौसेना में शामिल होंगे. भारतीय नौसेना के बेड़े में पहले से ही 12 कामोव-31 हेलीकॉप्‍टर मौजूद हैं, जो समुद्र में लड़ाकू विमान वाहक जहाजों की रक्षा करते हैं. दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस के दौरे के समय दोनों सरकारों के बीच कामोव-31 हेलिकॉप्टरों की खरीद को लेकर करार हुआ था. नौसेना को मजबूती देने के लिए भारत ने हाल ही में 16 एंटी-सबमरीन का सौदा भी किया है. गौरतलब है कि चुनावी सरगर्मी के बावजूद केंद्र सरकार ने सेना के आधुनिकीकरण योजनाओं को प्रभावित नहीं किया है. सेनाओं के लिए रक्षा अधिग्रहण के सिलसिले में डिफेंस एक्विजीशन काउंसिल और सुरक्ष को लेकर कैबिनेट कमेटी की मीटिंग लगातार हो रही हैं.
नई दिल्ली पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया मौलाना मसूद अजहर अपने आतंकी संगठन को एक 'पारिवारिक कारोबार' की तरह चलाता है। मसूद संगठन के ऑपरेशन और वित्त पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा करता है। यह जानकारी उस खुफिया डोजियर के हवाले से सामने आ रही है, जिसे भारत ने चीन समेत कई देशों को सौंपा है। डोजियर के मुताबिक, अजहर के परिवार के कम से कम 16 सदस्य इस संगठन का हिस्सा हैं, जिसे उसके बेटे अब्दुल्ला और वलीउल्लाह उर्फ वली भी शामिल हैं। इनका अफगानिस्तान में तालिबान से भी मेलजोल है। मसूद के तीन भतीजे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के बाद मारे जा चुके हैं। डोजियर के मुताबिक, जब पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान ने मसूद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो भारत ने जवाब में भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर उसके आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इसके बाद दबाव में मसूद को 'बहावलपुर में नजरबंद बनाया गया'। डोजियर में कहा गया है कि मसूद को हाल ही में इस्लामाबाद के सेफ हाउस में शिफ्ट किया गया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। मसूद पर प्रतिबंध लगने के बाद उसपर कई तरह की वैश्विक पाबंदी लग गई है। भारत कई सालों से मसूद को संयुक्त राष्ट्र से वैश्विक आतंकी घोषित कराने की कोशिश कर रहा था। डोजियर में कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद संगठनात्मक संरचना देखकर साफ पता चलता है कि इसमें टॉप के पदों पर मसूद के परिवार के लोगों का ही नियंत्रण है, जिनके कहने पर संगठन के लोग अपने ऑपरेशन करते हैं। इसमें कहा गया है, 'मसूद की दूसरी पीढ़ी भी इस संगठन में काफी आगे तक सक्रिय है, इन लोगों की पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में काफी प्रॉपर्टी है, इसमें मरकज सुभानअल्लाह, एक मदरसा, ट्रेनिंग कैंप, जैसी प्रॉपर्टियां शामिल हैं।' भाई और बहनोई अहम पदों पर मसूद के साथ संगठन के अहम फैसले उसके भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ, इब्राहिम अजहर और बहनोई युसूफ अजहर शामिल हैं। इन तीनों ने ही पाकिस्तानी आरोपियों के साथ मिलकर दिसंबर 1999 में भारत के विमान को अगवा किया था। प्लेन में अगवा किए गए लोगों को 7 दिन तक बंदी बनाकर रखा गया था। अपहरणकर्ताओं की शर्त थी कि मसूद और दो अन्य आतंकियों को छोड़ने पर ही वे प्लेन को छोड़ेंगे। इसके बाद ही मसूद अजहर ने अलकायदा के ओसामा बिन लादेन, तालिबान के पूर्व संस्थापक मुल्ला उमर की मदद से जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। डोजियर के मुताबिक, अब्दुल रऊफ जैश का पूरा कामकाज देखता है, इब्राहिम जैश का ऑपरेशनल कमांडर है और अफगानिस्तान ऑपरेशन की देखरेख करता है। इसके अलावा युसूफ जैश के बालाकोट (जिसे भारत ने तबाह किया) और मर्कज सैयद अहमद शहीद ट्र्रेनिंग कैंप का काम देखता है। मसूद का बड़ा भाई भी इसमें शामिल अहजर का बड़ा भाई मोहम्मद ताहिर जैश का सीनियर नेता माना जाता है। चार अन्य संबंधी इसी संगठन के बहावलपुर स्थित ट्रेनिंग कैंप मर्कज उस्मान अली का हिस्सा हैं। अजहर का एक और बहनोई अब्दुल रशीद मर्कज उस्मान अली का प्रशासनिक और ट्रेनिंग का काम देखता है। तीसरा बहनोई मोहम्मद अनस, स्टोर इंचार्ज है, चौथा बहनाई मंसूद अहमद जैश की डिफेंस विंग का प्रमुख है। एक भाई मुखपत्र का संपादक इसके अलावा एक अन्य भाई जैश की छात्र ईकाई अल मुराबितून का प्रमुख और जैश के मुखपत्र का चीफ एडिटर है। एक और भाई मोहम्मद अम्मार अल-कलम साप्ताहिक का सुपरवाइजर है। एक अन्य बहनोई हाफिज जमील मर्कज सुभानअल्लाह में प्रशासनिक काम देखता है। दूसरी पीढ़ी के लोग सक्रिय दूसरी पीढ़ी की बात करें तो अजहर का बेटा अब्दुल्ला कश्मीर और अफगानिस्तान में कई ऑपरेशन में शामिल रह चुका है, वलीउल्लाह अभी 'जिहाद की ट्रेनिंग' ले रहा है। भतीजे हुजैफा ने मर्कज उसमान में ट्रेनिंग ली और ओसामा मर्कज उस्मान का कामकाज देखता है और अफगानिस्तान ऑपरेशन में शामिल रहता है। एक अन्य भतीजा अताउल्लाह काशिफ जिहाद के लिए उपदेश का काम करता है। मसूद के तीन भतीजे उस्मान हैदर, मुहम्मद उमर और ताल्हा रशीद कश्मीर में एक एनकाउंटर में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए थे। बड़े ऑपरेशन के फैसले लेता है मसूद डोजियर में कहा गया है कि अजहर अवने भाई और ऑपरेशनल कमांडर रऊफ के साथ आतंकियों को तैनात करने के फैसले लेता है। उनके निर्देश पर ही बड़े आतंकी हमले होते हैं और कई बड़े आतंकी भारत में घुसपैठ करते हैं। अजहर समुद्र में आतंकी गतिविधियों के लिए भी 'समुद्र जिहाद' नाम से कोर्स चलाता है, इस कोर्स को 2018 में ही मर्कज सुभानअल्लाह में शुरू किया गया था।
कोलकाता चक्रवाती तूफान फोनी शुक्रवार को ओडिशा में उत्पात मचाने के बाद आधी रात को 115 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से पश्चिम बंगाल के दीघा तट पर पहुंचा गया। माना जा रहा था कि कोलकाता में तूफान 70-80 किमी की रफ्तार से शनिवार सुबह पहुंचेगा और इसके कारण भारी बारिश होगी। हालांकि, मौसम विभाग की ताजा जानकारी के मुताबिक फोनी की तीव्रता शनिवार की सुबह धीमी पड़ गई है और यह दोपहर तक बांग्लादेश पहुंचेगा। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि शनिवार दोपहर को बांग्लादेश में दाखिल होने से पहले कई घंटों तक नदिया और मुर्शीदाबाद के रास्ते में अपना असर दिखाएगा। चक्रवात ने पूर्वी मिदिनापुर में 80-90 किमी की रफ्तार से उत्पात मचाया और कई घरों को नुकसान पहुंचाया। कई जगहों पर पेड़ जड़ से उखड़ गए। भारी बारिश के बाद तूफान पश्चिम की ओर से खड़गपुर से होते हुए कोलकाता पहुंचा। बंगाल सरकार, कोलकाता महानगर पालिका और कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार से ही प्रतिकूल हालातों के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। मॉल्स को बंद रखने और लोगों से असुरक्षित इमारतें खाली कर देने के लिए कहा गया था। शहर के कई दफ्तरों को भी जल्दी बंद कर दिया गया ताकि लोग अपने घरों को पहुंच सकें। एयरपोर्ट पर परेशानी हालांकि, एयरपोर्ट पर फोनी का काफी तांडव दिखाई दिया। इंटरनैशनल और डमेस्टिक एयरपोर्ट पर कैब्स न मिलने के कारण हजारों लोग फंसे रहे। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बसों की मदद से लोगों को शहर पहुंचाया। दोपहर 3 बजे फ्लाइट्स ऑपरेशन बंद कर दिया गया जिससे कई यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर संचालन स्थिति में सुधार होने पर दोबारा शुरू किया जाना है। इंडिगो और एयर इंडिया की फ्लाइट्स शनिवार को रद्द कर दी गई हैं। स्थिति से निपटने की तैयारी नगर पालिका और पुलिस ने स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी है। आपदा प्रबंधन की 9 टीमें लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों से बचाने, मेडिकल सेवाएं पहुंचाने और एक स्पेशल ट्री सेल शहर की मुख्य जगहों पर से पेड़ हटाने के लिए तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी आपात स्थिति के लिए बेड और स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार रखे हैं।
नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को कहा कि 2014 में और उसके बाद से देश के बाहर सोना नहीं भेजा गया। आरबीआई का यह बयान कुछ प्रिंट और सोशल मीडिया में छपी उन रिपोर्ट्स के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि 2014 में केंद्रीय बैंक ने अपनी गोल्ड होल्डिंग्स का एक हिस्सा विदेश में शिफ्ट किया। आरबीआई के बयान के मुताबिक, 'दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने गोल्ड को दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास सुरक्षित कस्टडी के लिए रखना एक आम बात है।' बयान में कहा गया, 'बता दें कि 2014 में या इसके बाद भारत से आरबीआई द्वारा दूसरे देशों में कोई गोल्ड शिफ्ट नहीं किया गया है। इस बारे में जो भी मीडिया रिपोर्ट्स चल रही हैं वे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।' बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने 2014 में स्विट्ज़रलैंड में आरबीआई के 200 टन गोल्ड को शिफ्ट करने के बारे में एक रिपोर्ट ट्वीट की थी। पार्टी ने रिपोर्ट टैग करने के साथ ट्वीट किया था, 'क्या मोदी सरकार ने 2014 में गुपचुप तरीके से आरबीआई के 200 टन सोने को स्विट्जरलैंड भेज दिया?'
पुरी/भुवनेश्वर ओडिशा में आए चक्रवाती तूफान 'फोनी' ने काफी तबाही मचाई है। पुरी में पुरानी इमारतों, कच्चे घरों, अस्थायी दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। यहां अभी तक किसी के भी मौत होने की पुष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है और करीब 160 लोग घायल हैं। बिजली और टेलिकॉम सेवा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। वहीं भुवनेश्वर में एयरपोर्ट तथा एम्स में काफी नुकसान हुआ है। तूफान के कारण एम्स भुवनेश्वर में एक इमारत की छत का एक हिस्सा टूट गया, लेकिन सभी छात्र, स्टॉफ और मरीज सुरक्षित बताए गए हैं। 'फोनी' के कारण भुवनेश्वर में एम्स पीजी 2019 परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थिति सामान्य होने पर परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। यह परीक्षा 5 मई रविवार को होनी थी। एनडीआरएफ और प्रदेश का सुरक्षाबल आपदा राहत और सड़कों को साफ करने के काम में लगा हुआ है। वहीं बीजू पटनायक इंटरनैशनल एयरपोर्ट को भी तूफान की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है। बता दें कि चक्रवाती तूफान 'फोनी' ने शुक्रवार की सुबह भारी बारिश और करीब 225 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की प्रचंड हवाओं के साथ ओडिशा तट पर दस्तक दी। भयंकर तूफान के कारण इसके प्रभाव वाले इलाकों में कई जगह पेड़ उखड़ गए हैं, झोपड़ियां तबाह हो गई हैं और पुरी के कई इलाके पानी में डूबे हुए हैं। इसके साथ ही तकरीबन 12 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। नुकसान का सही आकलन अब तक नहीं हो पाया है। हालांकि, अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। सुबह करीब 8 बजे पुरी पहुंचा फोनी अत्यधिक प्रचंड चक्रवाती तूफान फोनी आज सुबह करीब आठ बजे पुरी पहुंचा। इसकी शुरुआत 175 किमी प्रतिघंटे की हवाओं से हुई। हवा की रफ्तार 245 किमी प्रतिघंटे तक पहुंची। चक्रवात के पहुंचने की प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन घंटे का समय लगा। विमान से गिराने के लिए भोजन के 1 लाख से अधिक पैकेट तैयार संवेदनशील इलाकों से करीब 12 लाख लोगों को शिफ्ट किया जा चुका है। वहीं, 11 लाख लोगों को गुरुवार को ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था। करीब 10,000 गांवों और 52 शहरी इलाकों से हटाए गए। 11 लाख लोग 4,000 शिविरों में ठहरे हुए हैं जिनमें से विशेष रूप से चक्रवात के लिए बनाए गए 880 केंद्र शामिल हैं। ओडिशा के स्पेशल रिलीफ कमिश्नर बिष्णुपाद सेठी ने बताया कि विमान से गिराने के लिए एक लाख से अधिक भोजन के पैकेट तैयार किए गए हैं। इसके लिए दो हेलिकॉप्टर भेजने का अनुरोध किया गया है। तमाम जगहों पर सड़कों पर गिरे पेड़ उन्होंने बताया कि राजधानी भुवनेश्वर में भी करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक हवा चली। भुवनेश्वर में कई जगहों पर सड़कों पर पेड़ टूटने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय पुलिस पेड़ हटाकर सड़कों को साफ करने की कोशिश कर रही है। तूफान से अबतक 3 मौतें ओडिशा के स्पेशल रिलीफ कमिश्नर बिष्णुपाद सेठी ने कहा कि वह दो मौतों की पुष्टि कर सकते हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत शेल्टर में दिल के दौरे से हुई। जबकि एक अन्य व्यक्ति तूफान के दौरान अपने घर से बाहर निकला और उसके सिर पर पेड़ गिरने से उसकी मौत हो गई। अब तक कुल तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आ रही है। नुकसान के आकलन के लिए नेवी का अभियान भारतीय नेवी के P-8I और डॉर्नियर को दोपहर में फोनी के असर और उसके कारण हुए नुकसान का आकलन करने के लिए लॉन्च किया जाएगा। कोस्ट गार्ड इंस्पेक्टर जनरल केआर सुरेश का कहना है कि तूफान की वजह से समुद्र में किसी की मौत होने की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। ओडिशा, बंगाल में अबाध तेल सप्लाइ के लिए IOC का उपाय देश के सबसे बड़े फ्यूल रिटेलर इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (IOC) ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमानों के ईंधन की अबाध सप्लाइ जारी रखने के लिए विशेष बंदोवस्त का ऐलान किया। ओडिशा में कमजोर पड़ा फोनी, बंगाल में बढ़ रहा असर जहां एक तरफ ओडिशा में फोनी का असर कम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में इसका असर बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल के दीघा और आसपास के इलाकों में 125 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चल रही है। कोलकाता एयरपोर्ट से आने-जाने वाली फ्लाइट्स आज दोपहर 3 बजे से लेकर शनिवार सुबह 8 बजे तक के लिए रद्द कर दी गई हैं। रैलियां रद्द कर तटीय इलाके में ममता ने डाला डेरा फोनी का असर राजनीतिक पार्टियों पर भी पड़ रहा है। जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रैलियां रद्द कर तटीय इलाकों के पास डेरा जमा लिया है। वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी झारखंड में होने वाली तीन रैलियां रद्द करनी पड़ी। केंद्र ने प्रभावित राज्यों को जारी किया 1000 करोड़: पीएम पीएम मोदी ने राजस्थान में रैली के दौरान कहा कि कल ही हम इस चक्रवात से जूझ रहे राज्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी कर चुके हैं। NDRF, कोस्टगार्ड, भारतीय नौसेना और थल सेना पूरी मुस्तैदी के साथ प्रशासन के साथ जुटी हुई हैं। ओडिशा में 11 जिलों से हटी चुनाव आचार संहिता चुनाव आयोग ने बचाव और राहत कार्यों की सुविधा के लिए 11 जिलों से आदर्श आचार संहिता हटा ली है। इसके अलावा आयोग ने गजपति और जगतसिंहपुर जिलों के चार विधानसभा क्षेत्रों के ईवीएम को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने को भी मंजूरी दे दी है। अगले कुछ घंटों में कमजोर पड़ेगा फोनी: मौसम विभाग मौसम विभाग का कहना है कि अगले 3 घंटे में फोनी कमजोर पड़ने वाला है और इसकी गति 150-160 किमी रह जाएगी। इसके बाद यह उत्तरपूर्व की ओर बढ़ेगा और शाम को तीव्र चक्रवाती तूफान के रूप में यह उत्तर ओडिशा के ऊपर पहुंचेगा। फोनी आंध्र प्रदेश से दूर चला गया है, इसलिए डी-वॉर्निंग जारी की गई है। राज्य के तीन जिले भारी बारिश से प्रभावित थे।
भुवनेश्वर/कोलकाता खतरनाक 'फोनी' तूफान के ओडिशा के पुरी तट से टकराने के बाद तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। साइक्लोन से निपटने के लिए सरकार और प्रशासन ने कमर कस ली है। फोनी के मद्देनजर प्रभावित इलाकों से करीब 11 लाख विस्थापित किए जा चुके हैं। फोनी से रेल यातायात के साथ फ्लाइट ऑपरेशन पर भी असर पड़ा है। तूफान के मद्देनजर भुवनेश्वर एयरपोर्ट में 24 घंटे तक फ्लाइट का संचालन रोक दिया गया है। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने भुवनेश्वर और कोलकाता एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए एयरलाइंस/ऑपरेटर को अडवाइजरी जारी की है। इसके तहत भुवनेश्वर में शुक्रवार को पूरे दिन के लिए फ्लाइट रद्द कर दी गई है जबकि कोलकाता में शुक्रवार को रात साढ़े नौ बजे से शनिवार को शाम 6 बजे तक की उड़ानें कैंसल कर दी गई हैं। डीजीसीए ने कहा कि अडवाइजरी में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए एहतियातन कदम उठाया गया है। फ्लाइट का संचालन एयर ट्रैफिक कंट्रोल से पॉजिटिव क्लीयरेंस मिलने के बाद दोबारा शुरू किया जाएगा। अब तक 157 ट्रेनें रद्द रेलवे ने तूफान के मद्देनजर 3 मई को दिल्ली और हरिद्वार से पुरी, भुवनेश्वर और विशाखापत्तनम जाने वाली सात ट्रेनें कैंसल कर दीं। एक ट्रेन 4 मई को कैंसल की गई है और एक-एक ट्रेन 6 और 7 मई को कैंसल की गई है। फोनी तूफान के चलते रेलवे 1 से 3 मई के बीच पहले ही 147 ट्रेनें कैंसल कर चुका है। 3 स्पेशल ट्रेन रेलवे ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों से यात्रियों को लाने के लिए तीन स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। एक विशेष ट्रेन दिन में 12 बजे पुरी से शुरू होगी जो कोलकाता के शालीमार की तरफ जाएगी। इसमें आरक्षित एवं अनारक्षित डिब्बे हैं। ओडिशा सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की 15 मई तक की छुट्टी रद्द कर दी हैं और जो छुट्टी पर चल रहे थे वे बुधवार शाम को ड्यूटी पर लौट आए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाने के लिए 880 साइक्लोन सेंटर भी स्थापित किए हैं।
नई दिल्ली, 02 मई 2019,पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए अपनी तकनीकी रोक हटाने वाले चीन ने बुधवार को कहा कि संशोधित सामग्रियों का अध्ययन करने के बाद अजहर को 'काली सूची' में डालने के प्रस्ताव के संबंध में कोई आपत्ति नहीं मिलने के बाद यह फैसला लिया गया. चीन ने कहा कि संशोधित सामग्रियों का अध्ययन करने के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं हुई. संयुक्त राष्ट्र ने अजहर को बुधवार को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया. भारत के लिए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है. सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत उसे 'काली सूची' में डालने के एक प्रस्ताव पर चीन द्वारा अपनी रोक हटा लेने के बाद यह घटनाक्रम हुआ. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि संरा सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति में सूची प्रक्रियाओं के लिए विस्तृत मानदंड है. चीन का हमेशा से मानना रहा है कि संबंधित कार्य को निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से किया जाना चाहिए और यह सभी पक्षों के बीच ठोस साक्ष्य और सहमति पर आधारित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि काली सूची में डालने के मुद्दे पर, चीन रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से संबंधित पक्षों के साथ संवाद कर रहा है. हाल ही में, संबंधित देशों ने 1267 समिति को प्रस्ताव के लिए सामग्रियों को संशोधित किया और फिर से प्रस्तुत किया. संशोधित सामग्रियों के अध्ययन और संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए चीन को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है. वह 22 अप्रैल को बीजिंग की अपनी यात्रा के दौरान विदेश सचिव विजय गोखले द्वारा चीन को प्रदान किए गए सबूतों का स्पष्ट रूप से उल्लेख कर रहे थे. अपनी यात्रा के दौरान गोखले ने चीनी विदेश मंत्री और स्टेट काउंसिलर वांग यी और अन्य शीर्ष अधिकारियों से वार्ता की थी. अजहर मुद्दे पर चीनी अधिकारियों के साथ गोखले की चर्चा को लेकर पूछे गए मीडिया के एक सवाल के जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'हमने जैश-ए-मोहम्मद और उसके नेता मसूद अजहर की आतंकवादी गतिविधियों के सभी सबूत चीन के साझा किए हैं.' प्रवक्ता ने कहा कि मैं यह कहना चाहूंगा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ने में बहुत योगदान दिया है. चीन आतंकवाद और चरमपंथी ताकतों का मुकाबला करने के पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेगा. यूएन द्वारा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी के तौर पर सूचीबद्ध करने का ब्रिटेन ने स्वागत किया. ब्रिटिश सरकार ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के तौर पर सूचीबद्ध करने के लंबे समय से अपेक्षित कदम का स्वागत किया है. ब्रिटेन के विदेश एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय (एफसीओ) ने कहा कि सुरक्षा परिषद का अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करना दक्षिण एशिया क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम है. एफसीओ के एक प्रवक्ता ने कहा कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को सूचीबद्ध किया जाना बेहद स्वागतयोग्य और लंबे समय से अपेक्षित कदम था. प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन लगातार यह कदम उठाए जाने की मांग कर रहा था और सही नतीजे सुनिश्चित करने के लिए हम अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे. यह दक्षिण एशिया क्षेत्र की सुरक्षा और स्थायित्व के लिए एक सकारात्मक कदम है. पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि वह जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर लगाए गए प्रतिबंधों को तत्काल लागू करेगा. पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह अजहर पर प्रतिबंध के प्रस्ताव पर तब राजी हुआ जब पुलवामा हमले के साथ अजहर को जोड़ने की कोशिश समेत सभी राजनीतिक संदर्भों को इस प्रस्ताव से हटा दिया गया. अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस फरवरी में अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति में एक प्रस्ताव लाया था. उससे महज कुछ ही दिन पहले जैश ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भीषण आतंकवादी हमला किया था. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाकिस्तान अजहर पर लगाए गए प्रतिबंधों को तत्काल लागू करेगा. उन्होंने कहा कि तीन बिंदुओं- यात्रा पाबंदी, हथियार पाबंदी और संपत्ति पर प्रतिबंध पर औपचारिक कार्रवाई की जाएगी, यह अनिवार्यता है. साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार देश है और हम उपयुक्त कार्रवाई करेंगे. प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने अजहर को आतंकवादी घोषित करने के पिछले प्रस्तावों को खारिज कर दिया था, क्योंकि उन प्रयासों में राजनीतिक एजेंडा था और उनका लक्ष्य पाकिस्तान को बदनाम करना था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मानता है कि आतंकवाद दुनिया के लिए सिरदर्द है. फ्रांस ने बुधवार को पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह उसके प्रयासों की सफलता को दर्शाता है. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा फरवरी में किए गए भयानक आतंकवादी हमले के कुछ दिन बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति में एक प्रस्ताव पेश किया था. फ्रांस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक बयान के अनुसार, हम यूएनएससी 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की आईएसआईएल (दाएश) और अलकायदा प्रतिबंध सूची में डालने के कदम का स्वागत करते हैं. अमेरिका ने जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को बुधवार को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र के कदम का स्वागत करते हुए आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान से सतत कार्रवाई करने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाते रहने की मांग की है. गौरतलब है कि अजहर को काली सूची में डालने के अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के एक प्रस्ताव पर से चीन द्वारा अपनी रोक हटाने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह घोषणा की. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका मसूद अजहर को संरा 1264 आईएसआईएल एवं अलकायदा प्रतिबंध सूची से जोड़े जाने का स्वागत करता है, जो संरा के सभी सदस्य देशों द्वारा संपत्ति कुर्क करना, यात्रा प्रतिबंध लगाना और हथियार संबंधी प्रतिबंध लगाने को जरूरी बनाता है. प्रवक्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सभी देश इन दायित्वों का पालन करेंगे. उन्होंने कहा कि जैश संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी संगठन है और इसका संस्थापक एवं सरगना होने के नाते अजहर संरा द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के सभी मानकों को स्पष्ट रूप से पूरा करता है. उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान के खुद के भविष्य के लिए उसके प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा जताई गई इस प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं कि वह अपनी सरजमीं से किसी आतंकवादी या आतंकी संगठन को संचालित नहीं होने देंगे.
02 मई 2019,अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN) में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तानी आर्मी को लेकर नसीहत देने वाली टिप्पणी की है. अमेरिका ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सही बातें कर रहे हैं. वह देश में कुछ बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके सैन्य नेतृत्व को भी सही निर्णय लेने और सही कदम उठाने की जरूरत है. अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से बुधवार को बताया कि अमेरिका आतंकवादी समूहों को सहयोग देने की पाकिस्तान की नीति को बदलने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 महीने पहले पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता में कटौती करने का आदेश दिया था. अधिकारी ने उल्लेख किया कि अमेरिका पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के आईएसआई से संबंध को जानता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका देश की आंतरिक राजनीति में शामिल नहीं होना चाहता और उम्मीद करता है कि पाकिस्तानी सेना हालात में सुधार करेगी. अधिकारी ने कहा, हम असैन्य सरकार का समर्थन करते हैं. हम वहां शुरू हो रही लोकतांत्रिक प्रणाली का समर्थन करते हैं. हम इस तथ्य का समर्थन करते हैं कि (पाकिस्तान के) प्रधानमंत्री (इमरान) खान सही बातें कहते हैं और पाकिस्तान में कुछ बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह समय ही बताएगा कि वह इसमें सफल होंगे या नहीं. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को भी सही निर्णय लेने और सही कदम उठाने की आवश्यकता है. अधिकारी ने कहा, प्रधानमंत्री खान जिस दिशा में जाते दिख रहे हैं, सेना अभी तक उस ओर समर्थन देते दिख रही है. उन्होंने कहा, हम सराहना करते हैं कि पाकिस्तान सही बातें कह रहा है, उसने वे शुरुआती कदम उठाए हैं, जो हम चाहते हैं लेकिन हम अभी कुछ नहीं कहना चाहते क्योंकि हमने उन्हें पहले भी पलटते देखा है. अमेरिकी अफसर ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का जिक्र करते हुए कहा, मुझे लगता है कि उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना महत्वपूर्ण था ताकि पाकिस्तान को यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति सील करने और अन्य कदमों जैसी उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके. उन्होंने कहा कि अब वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए जवाबदेह हैं. यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा या नहीं लेकिन हम आशावादी बने हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने में भी अपनी कूटनीतिक जीत देख रहे पाकिस्तान को यूएस ने आईना दिखा दिया है. यूएस ने कहा है कि मसूद अजहर पर बैन लगना 'पाकिस्तान से आतंकवाद उखाड़ फेंकने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता' का एक उदाहरण है. संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को बैन करने के प्रयासों की अगुवाई करने के बाद यूएस इसके क्रियान्वयन के लिए भी पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है. बैन के बाद आतंकी मसूद अजहर की यात्रा पर रोक और उसकी संपत्ति जब्त करने समेत तमाम कदम शामिल हैं. मसूद अजहर के वैश्विक आतंकी करार दिए जाने के बाद यूएस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता गैरेट मार्किस ने अपने पहले आधिकारिक बयान में कहा, "अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करना दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान से आतंकवाद खत्म करने और दक्षिण एशिया की स्थिरता-सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है." मार्किस ने मसूद अजहर को सीधे तौर पर 14 फरवरी के पुलवामा हमले से भी जोड़ा. शायद यह पाकिस्तान को साफ इशारा था जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर पर जारी आधिकारिक बयान में पुलवामा हमले, कश्मीर या पाकिस्तान का जिक्र ना होने पर इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा था. उन्होंने कहा, 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए यूएस, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 कमिटी की सराहना करता है. सूत्रों का कहना है कि पुलवामा, कश्मीर या पाकिस्तान को आधिकारिक बयान से हटा दिया गया था ताकि यूएन की 1267 कमिटी मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए चीन को राजी कर सके. हालांकि, इसकी पुष्टि अब तक किसी पक्ष ने नहीं की है क्योंकि 1267 कमिटी की कार्यवाही बहुत ही गोपनीय होती है. चीन अपने दोस्त पाकिस्तान को खुश करने के लिए मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से लंबे समय से बचाता रहा है. रिपोर्टर्स के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर एक वरिष्ठ यूएस प्रशासनिक अधिकारी ने चीन के मसूद अजहर का बचाव करने और अपने घर में बढ़ रहे आतंकवाद-चरमपंथ में साफ तौर पर विरोधाभास का भी जिक्र किया. यूएस अधिकारी ने कहा, "मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी का दर्जा देने पर अपना अड़ंगा हटाकर चीन ने पिछले 10 सालों में पहली बार कोई सही काम किया है. मुझे लगता है कि आखिरकार चीन को यह समझ में आ गया कि आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी कथनी और करनी में समानता दिखाना जरूरी है." जब अधिकारी से यह सवाल पूछा गया कि क्या चीन से समर्थन लेने के लिए पुलवामा और पाकिस्तान जैसे शब्दों को छोड़ दिया गया? अमेरिकी अधिकारी ने इसके जवाब में कहा, "मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाना एक ऐसी जीत है जिसका हमें आज जश्न मनाना चाहिए, ना कि इस चक्कर में पड़ना चाहिए कि कूटनीतिज्ञों के बीच क्या समझौता हुआ... शब्दों के जाल पर ध्यान ना देते हुए यह देखना चाहिए कि आखिरकार मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने में सफलता मिली. कौन से शब्द इस्तेमाल किए गए और कौन से नहीं, इससे वैश्विक आतंकी का दर्जा छोटा नहीं हो जाता." अजहर पर यूएस की इस टिप्पणी से पाकिस्तान और चीन दोनों ही झल्लाहट महसूस कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मंच से यूएस का यह बयान पाकिस्तान की मजूद पर झूठी खुशी खत्म करने के लिए काफी है. इसे 'पहला अच्छा कदम' बताते हुए यूएस ने यह भी उम्मीद जाहिर की कि अब इस मौके का इस्तेमाल करते हुए इमरान खान आतंकवाद खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता निभाने के लिए काम करेंगे.
वाराणसी पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए देशभर से 102 उम्मीदवारों ने नामांकन किया। इनमें से 71 का परचा जांच के बाद खारिज कर दिया गया। इसके बाद पीएम मोदी के खिलाफ मैदान में 30 उम्मीदवार बचे। अब इनमें से भी 5 उम्मीदवारों ने गुरुवार को अपना नाम वापस ले लिया है। ऐसे में अब पीएम मोदी के सामने चुनावी अखाड़े में 25 प्रत्याशी बचे हैं। सातवें चरण में 19 मई को होने वाले चुनाव के लिए गुरुवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन श्याम नन्दन (जनता पार्टी), अर्जुन राम शंकर (जन संघर्ष विराट पार्टी), राजेन्द्र गांधी (निर्दल), राजकुमार सोनी (निर्दल) और संजय विश्वकर्मा (कांशीराम बहुजन दल) ने अपना-अपना पर्चा वापस ले लिया। इस प्रकार अब वाराणसी लोकसभा सीट पर पीएम मोदी को लेकर 26 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाएंगे। बता दें कि कांग्रेस नेता और राज्यसभा के उपसभापति रहे श्यामलाल यादव की बहू शालिनी यादव को समाजवादी पार्टी ने यहां पीएम के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया था। पर, पार्टी के एक धड़े के विरोध के चलते अंतिम समय में एसपी ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को प्रत्याशी बनाकर परचा भरा दिया था। पर, अब तेज बहादुर का पर्चा चुनाव आयोग की तरफ से खारिज होने के बाद शालिनी स्वत: ही गठबंधन की उम्मीदवार बन गई हैं।
नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने के बाद भारत अब पाकिस्तान को घेरने के लिए नए प्लान पर काम कर रहा है। गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग ऐंड टेरर फाइनैंस वॉचडॉग से पाकिस्तान को उन ब्लैकलिस्ट देशों की सूची में डालने के लिए कहेगा, जो वित्तीय अपराध रोकने में अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं। आपको बता दें कि फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पहले ही पाकिस्तान को अपनी 'ग्रे लिस्ट' में रखा है। इस लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं। भारत के प्लान के बारे में पाकिस्तान को भी आभास हो चुका है, यही वजह है कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले महीने कहा था, 'लेकिन भारत चाहता है कि पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जाए, जिसके बाद प्रतिबंध लग सकते हैं।' जेटली ने पत्रकारों से कहा, 'हम चाहते हैं कि पाकिस्तान FATF लिस्ट में नीचे हो।' उन्होंने आगे बताया कि पैरिस स्थित FATF की बैठक अगले कुछ दिनों बाद होनी है और भारत तब इसको लेकर अनुरोध करेगा। जेटली की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली और पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने ब्लैकलिस्ट कर दिया। आपको बता दें कि मसूद के आतंकी संगठन ने ही फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देश जंग के मुहाने पर पहुंच गए थे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2001 में ही जैश-ए-मोहम्मद को ब्लैकलिस्ट कर दिया था लेकिन पाकिस्तान के सहयोगी चीन के लगातार विरोध के कारण अजहर को प्रतिबंधित नहीं किया जा सका था। पाकिस्तान में अजहर को मिली खुली छूट के कारण वह दुनियाभर में आतंकवाद के जनक के तौर पर बदनाम हो चुका है। भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति के अजेंडे के तौर पर आतंकियों को संरक्षण देता है। आतंकियों के मुद्दे पर पश्चिमी देश भी पाकिस्तान से नाराज हैं। जेटली ने गुरुवार को कहा, 'प्रमुख मुद्दा यह है कि उसे (मसूद अजहर) एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया है। उसे और उसके देश को अब इसके नतीजे भुगतने होंगे।'
नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को UN द्वारा 'वैश्विक आतंकी' करना कश्मीर घाटी में कुख्यात पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI (इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस) के नापाक मंसूबों के लिए भी तगड़ा झटका है। ISI जम्मू-कश्मीर में मुख्य तौर पर जैश की आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता आया है और एक रणनीति के तहत लश्कर-ए-तैयबा को पृष्ठभूमि में रखा था क्योंकि लश्कर और उसके सरगना हाफिज मोहम्मद सईद को लेकर उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ सकता था। अब जैश सरगना के भी वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद ISI के लिए कश्मीर घाटी में जैश को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। कश्मीर में अभी जैश के 60-70 आतंकी सक्रिय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के फिलहाल 60 से 70 गुर्गे और काडर मौजूद हैं, जिनमें से करीब 2 तिहाई विदेशी आतंकी हैं। इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा के भी इतने ही आतंकी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं जिनमें से करीब आधे विदेशी और करीब आधे स्थानीय हैं। एक इंटेलिजेंस ऑफिसर ने बताया, 'जैश ने कश्मीर में सबसे ज्यादा फिदायीन हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें भारी नुकसान हुआ है। इस वजह से स्थानीय कश्मीरी युवकों में इस आतंकी संगठन का प्रभाव बढ़ चुका है। आत्मघाती हमलों के इस दौर में घाटी के गुमराह युवा जैश के तरफ ज्यादा आकर्षित दिखते हैं।' जैश की गतिविधियां होंगी प्रभावित, फंडिंग पर पड़ेगा असर एजेंसियां मसूद अजहर के कथित तौर पर बीमार होने और उसकी किडनी फेल होने की रिपोर्ट्स से जैश के भीतर उसके असर और दबदबे पर कोई प्रभाव पड़ने से इनकार कर चुकी हैं। अधिकारी ने बताया, 'पहले वह वाकई अस्पताल में भर्ती था लेकिन आतंकी संगठन का चार्ज तब भी पूरी तरह से उसी के पास था। 14 फरवरी के पुलवामा आत्मघाती हमले समेत जम्मू-कश्मीर में सभी बड़े हमलों को लेकर उसी ने फैसले लिए थे।' हालांकि, सूत्रों ने बताया कि मसूद अजहर के 'वैश्विक आतंकी' घोषित होने से जैश की गतिविधियां प्रभावित होंगी, खासकर उसकी फंडिंग प्रभावित होगी क्योंकि उसके अकाउंट या कोई भी फंड ट्रांसफर जो जैश से जुड़ा पाया गया, वह निगरानी में रहेगा और फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकेगी। घाटी में हाल के महीनों में मारे गए जैश के 2 दर्जन से ज्यादा आतंकी एक अन्य इंटेलिजेंस ऑफिसर ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'भारतीय सुरक्षाबल कश्मीर में जैश के खिलाफ आक्रामकता के साथ काउंटर-टेरर ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं और इनमें हाल के महीनों में उसके 2 दर्जन से ज्यादा आतंकी और काडर मारे जा चुके हैं। इन सबका भी जैश की स्थिति और क्षमता पर असर पड़ा है।' 1999 में भारत द्वारा छोड़े जाने के 3 महीने में ही बनाया जैश 1999 में कांधार विमान अपहरण कांड के बाद इंडियन एयरलाइंस के 150 यात्रियों की रिहाई के बदले में छोड़े जाने के बमुश्किल 3 महीने बाद ही मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापनी की। भारत द्वारा छोड़े जाने के बाद अजहर का कांधार में कथित तौर पर मुल्ला मंसूर और मुल्ला उमर जैसे बड़े तालिबानी आतंकियों ने स्वागत किया था। उसी रात ओसामा बिन लादेन ने भी मसूद अजहर के लिए दावत रखी थी। लादेन और मसूद दोनों 1993 में भी साथ काम कर चुके थे। अप्रैल 2000 में जैश ने किया पहला आत्मघाती हमला जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने पहली बार अप्रैल 2000 में आतंकी हमले को अंजाम दिया था जब अजहर ने पहली बार श्रीनगर में आत्मघाती हमला कराया था, जिसमें बदामी बाग छावनी स्थित सेना के मुख्यालय को निशाना बनाया गया था। आत्मघाती हमलावर आसिफ सादिक को मसूद ने ही भर्ती किया था और वह बर्मिंघम का स्टूडेंट था। उस वक्त अजहर ने अल-कायदा के भी कई आतंकियों को अपने तंजीम में भर्ती करना शुरू कर दिया। इसके बाद साल 2001 में अमेरिका पर 9/11 का हमला हो गया, जिसके बाद ओसामा बिन लादेन की तलाश तेज हो गई। वह तोरा बोरा की गुफाओं तक सीमित होकर रह गया और पाकिस्तानी सेना इस विशाल गुफा के एक हिस्से को खाली कराने के लिए मजबूर हो गई। लादेन की मदद के लिए 9/11 के बाद भारत पर कराए 2 बड़े हमले ओसामा को बचाने में मदद के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में 2 बड़े हमलों को अंजाम दिया। 9/11 के 3 हफ्ते बाद 1 अक्टूबर 2001 को जैश ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला किया जिसमें 35 लोग मारे गए। कुछ हफ्ते बाद 13 दिसंबर 2001 को उसने नई दिल्ली में संसद पर हमला किया, जिसमें 9 लोग मारे गए। इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, संसद पर हमले के बाद युद्ध जैसे हालात हो गए। इससे पाकिस्तानी सेना को अपने पश्चिमी बॉर्डर से फोर्सेज को हटाने का बहाना मिल गया जो तोरा-बोरा की गुफाओं के पास तैनात थीं। जनवरी 2016 में जैश ने पठानकोट में इंडियन एयर फोर्स स्टेशन को निशाना बनाया जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और एक आम नागरिक की भी मौत हुई। उसी साल, 18 सितंबर को जैश के 4 आतंकियों के समूह ने उरी में आर्मी के ब्रिगेड हेडक्वॉर्टर पर हमला किया, जिसमें 17 सैनिक शहीद हुए थे।
नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध की टाइमिंग बीजेपी के लिहाज से इससे बेहतर नहीं हो सकती थी। लोकसभा चुनावों के 3 महत्वपूर्ण और बीजेपी के लिहाज से निर्णायक चरण अभी बाकी हैं। यह कूटनीतिक जीत राष्ट्रवाद और पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व को प्रमुख मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही बीजेपी के चुनाव अभियान को मजबूती देगी। मसूद अजहर पर चीन के रुख का बेसब्री से इंतजार कर रही बीजेपी ने संयुक्त राष्ट्र के फैसले के बाद इस उपलब्धि को अपने खाते में भुनाने में देरी नहीं की। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी बताते हुए इसे महज एक शुरुआत भर कहा, जबकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संयुक्त राष्ट्र के फैसले का श्रेय मोदी के नेतृत्व को दिया। शाह ने ट्वीट किया, 'यही वजह है कि भारत को मजबूत और निर्णायक नेता की जरूरत है। पीएम नरेंद्र मोदी और उनके कूटनीतिक प्रयासों के प्रति आभारी हूं....' वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत के रुख सही साबित हुआ है। उन्होंने कहा, 'मसूद अजहर अब वैश्विक आतंकी है। भारत सुरक्षित हाथों में है।' गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट किया, 'इस कूटनीतिक सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कारगर कदमों को जाता है।' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का फैसला ऐसे वक्त आया है जब लोकसभा चुनाव निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। 5 साल पहले बीजेपी ने यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और हरियाणा में शानदार कामयाबी हासिल की थी। आगे के चरणों में इन राज्यों की तमाम सीटें हैं और बीजेपी को 2014 के जादू को कायम रखना जरूरी है। इसी तरह पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बीजेपी को पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। राजनीतिक वर्ग में इस पर कोई संदेह नहीं है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक का बीजेपी को चुनाव में फायदा मिलेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पाकिस्तान और उसके टेरर प्रॉक्सी मसूद अजहर के खिलाफ ऐक्शन से चुनाव के आखिरी चरणों में बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है।
नई दिल्ली चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया को भारत में लोकसभा चुनावों के खत्म होने के बाद पूरी करना चाहता था। चीन की कोशिश थी कि किसी तरह से 15 मई के बाद ही यह प्रक्रिया हो। हालांकि, चीन की यह चालाकी काम नहीं आई और अमेरिका ने 30 अप्रैल की डेडलाइन तय कर दी। डेडलाइन को आगे बढ़ाने में नाकाम होने के कारण चीन को यह कदम उठाना पड़ा। इकनॉमिक टाइम्स को विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि फ्रांस, रूस और इंग्लैंड आपसी सहमति से चीन की डेडलाइन बढ़ाने पर सहमत हो गए थे। हालांकि, डेडलाइन बढ़ाने पर सहमति के बाद भी चीन जिस तिथि तक डेडलाइन को ले जाना चाह रहा था, उस पर सहमति नहीं बनी थी। हालांकि, अमेरिका की तरफ से अप्रैल में ही इस डेडलाइन को तय कर चीन की तरफ से लिखित आश्वासन के लिए दबाव बनाया गया था। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि भारत ने अमेरिका को यह संकेत दे दिए थे कि चीन की तरफ से वीटो इस्तेमाल के स्थान पर भारत कुछ समझौतों के साथ ही सही, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी करना चाहता है। भारत चीन के फिर से वीटो प्रयोग करने के कारण अभीतक के सभी प्रयासों को खारिज करने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद अमेरिका ने अप्रैल के आखिरी सप्ताह से आगे इंतजार नहीं करने की बात दोहराई। चीन ने संशोधित तिथि 6 मई की दी। हालांकि, अमेरिका ने इस पर सहमति नहीं जताई और आखिरकार 1 मई की डेडलाइन तय कर दी गई। इसी दिन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पिछले सप्ताह ही चीन ने लिखित स्वीकृति दे दी थी। सूत्रों का कहना है कि चीन के साथ समझौता इस आधार पर हो सका क्योंकि चीन इसे यूएनएससी में वोट के लिए नहीं ले जाना चाहता था।
कौशांबी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों पर लगातार हमला कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने 2017 में एसपी-कांग्रेस की 'दोस्ती' पर तंज कसते हुए कहा कि अभी कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में जो दो काली जैकेट पहनकर चारों तरफ घूम रहे थे, वे आज एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने जनसभा में कुंभ का जिक्र करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू के सहारे कांग्रेस पर भी हमला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस घटना का जिक्र किया, वह 1954 को प्रयागराज में घटित हुई थी। मोदी ने कहा, 'कर्नाटक के जब नतीजे आए तो परिणाम उनके पक्ष में नहीं थे लेकिन वहां जाकर सबने हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाई। उनके राग दरबारियों ने हवा बनाई कि बहुत बड़ा गठबंधन हो गया, सबने हाथ मिला लिए, एक-दूसरे को गले लगा लिया, अब मोदी बच नहीं सकता है। बेंगलुरु से निकलकर दिल्ली पहुंचते-पहुंचते ये एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए। आपने चुनाव प्रचार देखा होगा, अभी कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में जो दो काली जैकेट पहनकर चारों तरफ घूम रहे थे, वे आज एक-दूसरे के दुश्मन बन गए। पिछले चुनाव में एसपी-बीएसपी, जो दुश्मन थे आज बचने के लिए तुम मुझे बचाओ, मैं तुम्हें बचाऊं, ये बचने का खेल खेल रहे हैं।' 1954 की घटना का किया जिक्र पीएम मोदी ने जनसभा में कहा, 'मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे कई बार अर्ध कुंभ और पूर्ण कुंभ में आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला। एकबार जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री थे तो कुंभ के मेले में आए थे। मैं जो आज बात बता रहा हूं, उस बात को पांच-छह दशक से दबा दिया गया है, छिपाया गया है। इतना ही नहीं, असंवेदनशीलता सीमा पार कर चुकी है। पंडित नेहरू आए थे तब तो मेला इतना बड़ा नहीं होता था। उस दौरान कांग्रेस की सरकार यहां थी, दिल्ली में थी, पंचायत से पार्ल्यामेंट तक कांग्रेस वाले थे। कुंभ में अव्यवस्था के कारण भगदड़ मच गई थी। हजारों लोग मारे गए थे, कुचलकर मारे गए लेकिन सरकार की इज्जत बचाने के लिए, पंडित नेहरू पर कोई दोष न मढ़ जाए, दाग न लग जाए, उस समय के मीडिया ने भी ये चीजें दिखाने की बहादुरी नहीं दिखाई।' 'कांग्रेस को चुनाव लड़ाने के लिए लोग नहीं मिल रहे' कौशांबी में आयोजित जनसभा में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, '55 साल तक एक परिवार ने जो तबाह किया है, उसे मुझे 55 महीनों में ठीक करना है, इसी भाव को लेकर मैं लगातार काम कर रहा हूं। इस चुनाव की कई विशेषताएं हैं। एक तो चुनाव की विशेषता यह है कि कांग्रेस पार्टी, जिसने देश में सालों तक राज किया, इतने सारे लोग उनके पास हैं, इनके पास पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों का ढेर, पूर्व मंत्रियों का ढेर, न जाने क्या-क्या इनके पास है। इसके बावजूद भी देश ने उनकी हालत ऐसी करके रखी है कि कांग्रेस इस चुनाव में सबसे कम सीटों पर लड़ी है। यानी जगह नहीं बच रही है, लोग नहीं मिल रहे हैं।' '55 वर्षों का काम 55 महीनों में किया' जनसभा में मोदी ने कहा, 'जो काम पचपन साल में नहीं हुआ वह काम 55 महीने में इस चौकीदार ने करके दिखाया है। ये महामिलावटी लोग जातिवाद को बल देने वाले, वंशवाद को बल देने वाले हैं। इनके लोग या तो जेल में हैं या बेल में हैं। क्या ऐसे लोगों के भरोसे उत्तर प्रदेश और देश का भला होगा?' 8 सीटें लड़ने वाले भी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं' कौशांबी में मोदी ने कहा, 'जो आठ सीटें लड़ते हैं वह भी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, जो 20 सीटें लड़ते हैं, वह भी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। इनको मालूम है क्या कि विपक्ष का नेता बनने के लिए भी 50 से ज्यादा सीटों की जरूरत होती है। जो समाजवादी पार्टीवाले गांव के गुंडे को नहीं मार सकते, वह आतंकवादियों को ठीक कर सकते हैं क्या? जो बीएसपी वाले गांव के गुंडे को सही नहीं कर सकते, वह आतंकवादियों को ठीक कर सकते हैं क्या?' 'हमारी सेना ने क्या किया...ऊपर से गए' मोदी ने कहा, 'हमारे जवानों की बहादुरी के कारण, मोदी ने सेना के जवानों को खुली छूट दे दी है। इसने पहले किया सर्जिकल स्ट्राइक, फिर एयर स्ट्राइक। पाकिस्तान सोच रहा था कि मोदी ने पहली बार सीमा पर से आकर हमारे कैंप तोड़े थे, इस बार भी मोदी वहां से आएगा, सारी फौजें खड़ी कर दीं, टैंक खड़े कर दिए। हमारी सेना ने क्या किया- ऊपर से गए...बजरंगबली की जय। गोली का जवाब, गोले से दे दिया। आज हिंदुस्तान बदल गया है, घर में घुसकर मारता है।
अयोध्या पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या की रैली में राम, रामायण से लेकर आतंकवाद का जिक्र किया। पीएम ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए अपनी सरकार द्वारा आतंक के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों को सामने रखा। पीएम मोदी लंका में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि अभी जो कोलंबो में हुआ है कुछ यही स्थिति 2014 के पहले भारत में भी थी। उन्होंने कहा, पिछले 5 सालों में इस तरह के धमाके की खबर आनी बंद हो गई है। फैजाबाद में कैसे-कैसे बम धमाके हुए हम यह कैसे भूल सकते हैं। पीएम ने कहा कि यह नया हिंदुस्तान घर में घुसकर मारेगा। नया भारत छेड़ता नहीं है, लेकिन अगर छेड़ा तो छोड़ता भी नहीं है। एसपी-बीएसपी गठबंधन पर निशाने साधते हुए पीएम ने कहा कि महामिलावटी एकबार फिर मजबूर सरकार बनाने की ताक में हैं और आपको सतर्क रहना होगा। आतंक की फैक्ट्री पड़ोस में चल रही है: मोदी पीएम मोदी ने अयोध्या के गौरीगंज के मया बाजार में हुई रैली में आतंकवाद के मुद्दे पर कहा, 'श्रीलंका में अभी जो हुआ, कुछ यही स्थिति 2014 से पहले भारत में भी थी। अयोध्या में फैजाबाद में कैसे कैसे बम धमाके हुए हम कैसे भूल सकते हैं, जब देश में आए दिन कहीं न कहीं आतंकी हमला होता था।' उन्होंने कहा, 'बीते 5 साल में इस तरह की धमाके की खबर आनी बंद हो गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि आतंकी खत्म हो गए हैं। आतंकियों की फैक्ट्री तो हमारे पड़ोस में अभी भी चल रही हैं।' 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' पीएम मोदी ने कहा, 'आतंकी देश में एक कमजोर सरकार चाहते हैं। ये मौके की ताक में बैठे हैं इसलिए जैसे सड़कों पर लिखा रहता है कि सावधानी हटी, दुर्घटना हटी..., आतंकवाद का खेल भी ऐसा ही है।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और एसपी-बीएसपी गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा, 'यह बात इसलिए भी अहम है कि क्योंकि एसपी, बीएसपी और कांग्रेस इनका आतंक पर नरमी का पुराना रेकॉर्ड है। हमारी सरकारी मशीनरी आतंकी को पकड़ती थी और ये वोट के लिए उन्हें छोड़ देते थे। आज ये महामिलावटी फिर से मजबूर सरकार बनाने की फिराक में है। आपको चौकन्ना रहना है।' 'नए भारत का निर्माण कर रहे हैंं' देश के विकास का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, 'हम एक नया भारत बना रहे हैं, जो छेड़ता नहीं है लेकिन कोई छेड़ेगा तो छोड़ता भी नहीं है। खतरा सीमा के भीतर या फिर सीमा पार यह नया हिंदुस्तान घर में घुसकर मारेगा। जब आप कमल के फूल पर बटन दबाएंगे इसका मतलब आप अपने सपने बोएंगे जो साकार होंगे। मतलब आपके भीतर एक ऐसा देशभक्त उभरकर आएगा जो देश के लिए जिएगा, आपके अंदर सैनिक की आत्मा जग जाएगी जो देश के लिए जिएगा और देश के लिए मरेगा।' 'लोहिया और बाबासाहेब के आदर्शों को मिट्टी में मिलाया' पीएम मोदी ने एसपी-बीएसपी पर हमला बोलते हुए कहा, 'बहन जी ने बाबासाहेब के नाम का उपयोग किया, लेकिन उनको आदर्शों के विपरीत सब काम किया। एसपी ने डगर-डगर पर लोहिया जी का नाम लिया लेकिन अपने आचरण से न सिर्फ यूपी की कानून-व्यवस्था को तहस-नहस किया बल्कि लोहिया के आदर्शों को मिट्टी में मिला दिया। लोहिया की बात करने वालों ने कभी गरीबों और श्रमिकों को चिंता नहीं की।' कांग्रेस पर भी साधा निशाना उन्होंने कहा, 'पिछले 70 साल से हर चुनाव में गरीबी हटाओ का वादा करने वाली कांग्रेस ने भी श्रमिकों की चिंता नहीं की। हमारे देश में 40 करोड़ से ज्यादा श्रमिकों की इन पार्टियों ने कभी परवाह नहीं की। उन्होंने श्रमिकों, गरीबों को वोट बैंक में बांटकर सिर्फ और सिर्फ अपना और परिवार का फायदा कराया।' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'कोई गरीब अपने बच्चे को गरीब नहीं देखना चाहता, कोई चायवाला ये नहीं सोचता कि उसका बच्चा बड़ा होकर चायवाला बने। हर गरीब आगे बढ़ना चाहता है, मजदूर आगे बढ़ना चाहता है। उसे जरूरत होती है एक संबल की, पहली बार देश में किसी सरकार ने गरीबों और श्रमिकों के बारे में सोचा है। हमने उनकी परवाह की है, उनका जीवन आसान बनाने के लिए काम किया है।' 'एसपी-बीएसपी वालों का बीपी बढ़ जाता है' पीएम मोदी के भाषण के दौरान समर्थकों ने जमकर 'मोदी-मोदी' के नारे लगाए। इसपर उन्होंने गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, 'आप इतना प्यार दिखाते है और उधर एसपी-बीएसपी वालों का बीपी बढ़ जाता है और फिर चिल्लाएंगे कि मोदी का डॉक्टर नहीं आया।' 'देश में कुल 15 सर्किट बनाए जा रहे हैं' उन्होंने कहा, 'देश में अभी देश दर्शन के नाम से बहुत व्यापक काम चल रहा है। इसके तहत रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट सहित कुल 15 सर्किट का काम चल रहा है। अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक जहां-जहां राम के निशान हैं उसे विकसित किया जा रहा है।' योग हमारी संस्कृति का हिस्सा बरसों से है, लेकिन 21 जून को सब योग दिवस मनाए ये काम मैंने किया। कुंभ भी सालों से हो रहा है लेकिन जो दिव्यता और अद्भुत झलक इस बार दिखी वो पहली बार दिखी। जब कोरिया की फर्स्ट लेडी अयोध्या में मुख्य अतिथि बनकर आती है तो उसकी चर्चा पूरे देश में होती है। जब नेपाल के जनकपुरी से अयोध्या के लिए बस की हरी झड़ी दिखाई जाती है तो उसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। पीएम मोदी ने रैली में कहा, 'अयोध्या में दीप तो हजारों वर्षों से जलते आए हैं, लेकिन अब जो दीपावली मनाई जाती है, वो दुनियाभर में चर्चा का विषय बनती है।'
पेइचिंग आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव को लेकर चीन ने अब नरमी के संकेत दिए हैं। इस मसले पर अपने पहले के रुख के उलट चीन ने कहा है कि इस मसले को 'सही तरीके' से हल करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि चीन ने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के चीन दौरे के ठीक एक दिन बाद भारत के पड़ोसी देश की यह राय अहम है। इससे पहले चीन ने कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल कर अड़ंगा लगा दिया था। चीन ने मार्च में चौथी बार इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले में जैश का नाम सामने आने के बाद फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने यह प्रस्ताव दिया था। हालांकि अब इस मसले पर एक तरह से झुकते हुए चीन ने कहा कि इसका सही हल निकाला जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, 'मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मेरा विश्वास है कि इसका सही ढंग से समाधान निकाला जाएगा।' फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव पर अपने विरोध को वापस लेने की खबरों से जुड़े सवाल को लेकर चीन ने यह बात कही। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत यह प्रस्ताव लाया गया था। इस बार चीन के अड़ंगे के बाद अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने उस पर दवाब बनाया है औ इस मसले पर अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात कही थी। चीन ने कहा, बातचीत से निकालना है हल चीन ने इसे लेकर अब नरमी दिखाते हुए कहा है, 'हम इस मसले पर कई बार अपनी पोजिशन बता चुके हैं।' चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गेंग शुआंग ने कहा, 'मैं सिर्फ दो बिंदुओं पर जोर देना चाहता हूं। पहला यह कि इस पर अधिकतम सदस्यों की सहमति और संवाद के साथ ही आगे बढ़ा जा सकता है।' दूसरा, इस मसले को लेकर बातचीत चल रही है और कुछ प्रगति हुई है। हमें विश्वास है कि सभी पक्षों की सहमति से इस पर आगे बढ़ा जा सकता है।
तोक्यो बिजनसमैन और किंग्स इलेवन पंजाब के को-ओनर नेस वाडिया को ड्रग्स रखने के अपराध में जापान की एक अदालत ने 2 साल की सजा सुनाई है। वाडिया पर इसी साल मार्च में जापान यात्रा के दौरान 25 ग्राम ड्रग्स रखने के कारण हिरासत में लिया गया था। हालांकि, वाडिया जापान से लौटने के बाद फिलहाल भारत में हैं। फाइनैंशल टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, 'नेस वाडिया ने जापान में कुछ दिन हिरासत में भी बिताए थे। यह अवधि कितनी थी, यह फिलहाल पता नहीं चल सका है। जापान के सपोरो जिले की कोर्ट ने वाडिया को यह सजा सुनाई। हालांकि, यह सजा 5 साल तक के लिए स्थगित है।' फिलहाल नेस वाडिया की तरफ से इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। डिटेंशन के बाद वाडिया भारत लौट आए और तब से अब तक वह जापान नहीं गए हैं। कारोबार की दुनिया में वाडिया ग्रुप का बड़ा नाम है। बॉम्बे डाइंग, बॉम्बे बर्मन ट्रेडिंग, बिस्कुट की ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज समेत गो एयरवेज भी इसी समूह का है। ग्रुप की कंपनियों की कुल संपत्ति 13.1 अरब डॉलर के करीब है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वाडिया मार्च में जापान के होक्काइदो आईलैंड के एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किए गए थे। उनके पास 25 ग्राम ड्रग्स मिली थी। नेस छुट्टियां बिताने जापान गए थे। इससे पहले 2014 में नेस वाडिया पर प्रीति जिंटा ने दुर्व्यवहार करने और अपशब्द कहने का आरोप लगाया था। नेस और प्रीति लंबे समय तक रिलेशनशिप में रह चुके हैं।
नई दिल्ली लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 31 दिन में 87 जनसभाओं को संबोधित किया है और 3 रोड शो किए हैं। अब तक 4 फेज की वोटिंग हो चुकी है और पीएम मोदी के चुनाव प्रचार के पैटर्न को बारीकी से समझा जा सकता है। जनता के नाम उनका संदेश और फोकस इस बार मुख्य रूप से राष्ट्रवाद और गठबंधन सरकार को 'महामिलवाट' सरकार के तौर पर पेश कर रहे हैं। यूपी-बिहार और बंगाल पर पीएम मोदी का जोर चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रवाद के मुद्दे को बार-बार उठाते हैं। इसके साथ ही गठबंधन सरकार की कोशिशों पर तंज कसते हुए भी वह 'महामिलवाट' की सरकार को देश के विकास में बाधक बताते हुए सत्ता में अपनी वापसी का आत्मविश्वास भी दिखाते हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि अब तक हुई प्रधानमंत्री की 50 फीसदी रैली और रोडशो सिर्फ 5 प्रदेशों में ही हुई हैं। अभी तक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र , ओडिशा और गुजरात में प्रधानमंत्री ने अपनी आधी से अधिक रैलियां और रोडशो किए हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल में सातों फेज में चुनाव हैं और पीएम मोदी इन राज्यों में अपनी मौजूदगी प्रमुखता से दर्ज कर रहे हैं। मोदी के भाषण में राष्ट्रवाद, 'महामिलावट' और फिर मोदी सरकार की हुंकार पीएम मोदी के भाषणों का आधार मुख्य तौर पर राष्ट्रवाद और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र रहता है। सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने के लिए पीएम मोदी विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साध रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल के साथ एसपी-बीएसपी और टीएमसी पर भी इस बहाने करारा जुबानी वार कर रहे हैं। श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए हमलों का जिक्र करते हुए भी प्रधानमंत्री बार-बार जोर दे रहे हैं कि देश को आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए उनकी मजबूत नेतृत्व वाली सरकार की जरूरत है। विपक्ष के तानों पर पलटवार करने में माहिर हैं मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों के आरोपों पर भी करारा पलटवार करने से नहीं चूक रहे हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने जब प्रधानमंत्री मोदी को 'फर्जी पिछड़ा' करार दिया तो पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि सबसे पिछड़ी जाति से आने का उन्हें गर्व है। अपने कुछ भाषणों में पीएम मोदी ने राहुल गांधी के अल्पसंख्यक बहुल वायनाड की सीट से चुनाव लड़ने का भी जिक्र किया है। विपक्षी दलों के हिंदू आतंकवाद के मुद्दे को भी उन्होंने उठाया है। यूपी और बंगाल में पीएम मोदी लगा रहे पूरा जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों को देखें तो उनका फोकस प्रमुख तौर पर उत्तर प्रदेश और बंगाल पर है। अब तक की उनकी 90 सार्वजनिक उपस्थिति में से 20 इन्हीं 2 राज्यों में हुई है। 4 फेज के चुनावों के बाद भी इन दोनों राज्यों में अभी आधी सीटों पर चुनाव होने ही हैं। बीजेपी की रणनीति भी इससे स्पष्ट दिख रही है कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर बीजेपी का पूरा फोकस है। यूपी में 2014 में बीजेपी ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं। बंगाल में बीजेपी ने 42 में से सिर्फ 2 ही सीटें जीतीं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने पुष्टि करते हुए कहा कि यूपी में अभी पीएम 30 से अधिक रैलियां करेंगे। पश्चिम बंगाल में भी प्रधानमंत्री के 15 और रैलियां करने की पुष्टि वरिष्ठ नेता ने की।
मुजफ्फरपुर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक जनसभा की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस समेत राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी), जीतनराम मांझी की 'हम' समेत समूचे विपक्षी दलों पर जमकर हमला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और आरजेडी पर तंज कसते हुए कहा कि अभी कोई लोगों को जेल पहुंचाया है, बेल लेने के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़े हैं, अब उन्हें जेल भिजवाने की पूरी तैयारी है। अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'जितनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां आए हैं, वह कई लोगों के मुंह में कड़वाहट पैदा करने वाला है। चार चरणों के चुनाव के बाद ये लोग चारों खाने चित हो चुके हैं। अगले चरण में तय होना है कि इनकी हार कितनी बड़ी होगी और एनडीए की जीत कितनी भव्य होगी।' जेल भिजवाने की पूरी तैयारी' एनडीए की संयुक्त रैली में मोदी ने कांग्रेस, आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा, 'जो जेल में हैं, जो जेल के दरवाजे पर हैं, जो बेल पर हैं, जो बेल के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं, वे सब केंद्र में मजबूत सरकार को एक मिनट भी बर्दाश्त नहीं करना चाहते हैं। ये चाहे जितनी कोशिश कर लें, कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जो हमने अभियान चलाया है, उसकी रफ्तार धीमी नहीं पड़ेगी। जो बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और फार्म हाउस खड़े किए हैं, उसका भी हिसाब देना पड़ेगा। जिस तरह से मिशेल मामा को उठाकर लाए हैं, इनके बाकी चाचाओं को भारत आना ही पड़ेगा। बीते पांच वर्ष में इन लोगों को बेल लेने के लिए मजबूर किया है, बेल तक पहुंचाया है, अब जेल भी भिजवाने की पूरी तैयारी है।' मोदी बोले, उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है... पीएम मोदी ने कहा, 'नीतीश कुमारजी, रामविलास पासवानजी, सुशील मोदीजी...एनडीए के इन तमाम नेताओं के प्रयत्न के बाद बिहार ने अपने पुराने दौर को पीछे छोड़ा है। जिन लोगों ने इस महान भूमि की पहचान बदल दी है, वे लोग केंद्र सरकार बनाने के लिए नहीं लड़ रहे हैं, वे छटपटा रहे हैं किसी भी तरह से अपने मेंबर की संख्या बढ़ाने के लिए, इसलिए मैं बिहार के लोगों को सावधान कर रहा हूं। उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है बिहार में फिर से लूटपाट के दिन, उस दौर को वापस लाना। उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है बेटियों का अपहरण, गुंडागर्दी, हत्याएं, हर योजना में भ्रष्टाचार। उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है सूरज ढ़लने के बाद अपने ही घर में कैद हो जाना, घुट-घुट के जीना, पलायन के लिए मजबूर होना।' 'मनमानी के लिए बनाना चाहते हैं ढीली सरकार' मुजफ्फरपुर में पीएम मोदी ने कहा, 'बिहार को इन लोगों (विपक्ष) ने यही दिया है। आज फिर से ये लोग गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं बिहार पर। ये बिहार को जाति में बांटकर, समाज को बांटकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं। वह अपने भ्रष्टाचार को, अपने काले कारनामों को छिपाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है किसी भी तरह से दिल्ली में एक कमजोर, ढीली-ढाली, मजबूर सरकार बने ताकि वे मनमानी कर सकें।' 'विपक्ष के नेता नहीं बन सकते, प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब' मोदी ने कहा, 'ध्यान दें तो ये सब महामिलावटी दल है, उनमें ज्यादातर तो इतनी सीटों पर भी नहीं लड़ रहे हैं कि नेता विपक्ष का पद भी हासिल कर पाएं। यानी नियम के मुताबिक 10 प्रतिशत सीटें जीतनी जरूरी हैं। 2014 में देश की जनता ने कांग्रेस को भी नेता विपक्ष बन सके इतनी सीटें नहीं दी थीं। इन दिनों अब इनके बीच में लड़ाई चल रही है। कांग्रेस वाले सोचते हैं हम तो पांच साल विपक्ष के नेता नहीं बन पाए और कोई भी नहीं बनना चाहिए। तभी महामिलावट वाले एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। जिनके नसीब में विपक्ष के नेता का पद नहीं है, वे प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं।' 'भारत ही नहीं दुनिया से भी नहीं टला आतंकी खतरा' मुजफ्फरपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'बम धमाके के उस दौर में कांग्रेस और उसके साथी कैसे कमजोरों की तरह बर्ताव करते थे। साथियों जब आतंकवाद फलता-फूलता है तो कोई बचता नहीं है। किसी भी जाति का हो, किसी भी पंथ का हो, कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं रहता। बीते पांच वर्षों में बहुत मेहनत से हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने इन गलत इरादेवालों को रोककर रखा है लेकिन उनके इरादे तो वैसे ही हैं। वे मौके की तलाश में हैं। मौका मिलेगा तो वह फिर हमला करने के प्लान करते ही रहते हैं, हम उनके प्लान खत्म करने में लगे रहते हैं। आज सिर्फ भारत नहीं बल्कि दुनिया से भी आतंकवादी खतरा टला नहीं है। इसलिए देश में एक ऐसी सरकार चाहिए, जो आतंकवाद को देश में हिंसा फैलाने वाली हर ताकत को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हो।' 'राष्ट्र रक्षा की बात करने से कतरा रहा है विपक्ष' विपक्ष पर हमला करते हुए मोदी ने कहा, 'सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर इनको एलर्जी होती है और उनकी नींद हराम हो जाती है। उनको चिंता है कि यह मोदी ने कैसे कर दिया, यह सवाल उनको सोने नहीं देता है इसलिए ये राष्ट्र रक्षा की बात करने से भी कतरा रहे हैं। इनकी जमीन इसलिए भी खिसक रही है क्योंकि सबका साथ-सबका विकास की परंपरा को हमने जमीन पर उतारा है, हर गांव, हर गरीब तक ले गए हैं। सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं को 10 प्रतिशत आरक्षण सामाजिक सद्भाव का एक बहुत बड़ा प्रयास है क्योंकि इसमें किसी दूसरे वर्ग का हक नहीं छीना गया। हमने महामिलावट के तमाम विरोध के बावजूद ओबीसी कमिशन को संवैधानिक दर्जा दे दिया है।'
कोलंबो श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने सोमवार को सार्वजनिक स्थानों में चेहरा छुपानेवाले परिधानों के पहनने पर बैन लगा दिया है। ईस्टर के दिन हुए धमाके के बाद श्रीलंका की सरकार ने यह फैसला लिया है। इस हमले की जिम्मेदारी आईएस के साथ देस के 2 अन्य इस्लामिक आतंकी संगठनों ने ली है। श्रीलंका के इस्लामिक विद्वानों का कहना है कि थोड़े समय के लिए इसे समर्थन कर रहे हैं, लेकिन बुर्का के खिलाफ किसी तरह के कानूनी आदेश का विरोध करेंगे। मानवाधिकार से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने श्रीलंका सरकार के इस कदम की आलोचना की है। बुर्का बैन विश्व में हो रहा है लोकप्रिय बुर्का बैन कुछ वक्त पहले तक घोर दक्षिणपंथी लोगों के बीच लोकप्रिय था, लेकिन पिछले कुछ वक्त में वैश्विक स्तर पर यह प्रचलन बढ़ा है। नीदरलैंड्स से लेकर ऑस्ट्रिया तक और कनाडा के कुछ हिस्सों में बुर्का बैन लागू किया गया है। पिछले कुछ वक्त में कई देशों में प्रशासन ने चेहरा ढंकने वाले परिधानों के प्रयोग पर बैन का कानून बनाया है। यहां तक कि मुस्लिम मुल्क इजिप्ट में भी इसे लागू किया गया है। मुस्लिम भाईचारे को परे रखकर इजिप्ट में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों पर कार्रवाई के तौर पर फैसला लिया है। अफ्रीका और फ्रांस के कई देशों में बुर्के पर बैन अफ्रीका के गैबन, चाड और कॉन्गो के साथ यूरोप में बेल्जियम और फ्रांस ने भी चेहरा ढंकने वाले परिधानों के प्रयोग पर पाबंदी लगाई है। फ्रांस ने बुर्के पर बैन लगाने से पहले सार्वजनिक स्कूलों में किसी भी धार्मिक पहचान के चिह्न के पहनने जैसे सिर पर स्कार्फ, नेकलेस आदि पर भी बैन लगाया था। फ्रेंच बोलनेवाले कुछ दूसरे देशों में भी बैन आंशिक तौर पर लगाया गया है जैसे नीदरलैंड्स में चेहार ढंकने वाले परिधान के प्रयोग पर बैन लगाया है। बुर्का बैन से महिलाओं पर घरेलू पाबंदी हो सकती है और सख्त बुर्का बैन पर दक्षिणपंथी मानवाधिकार संगठन भी कई बार आपत्ति जताते हैं। इस तरह के बैन के विरोध के पीछे प्रमुख तर्क है कि ऐसे परिधानों पर बैन लगाने का दुष्प्रभाव महिलाओं पर ही नजर आता है। इन प्रतिबंधों का नतीजा यह हो सकता है कि ऐसे परिवारों में महिलाओं के सार्वजनिक स्थलों पर जाने और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को पूरी तरह से रोक लगा दिया जाए। एमनेस्टी इंटरनैशनल भी बुर्का बैन के विरोध में है और इस संगठन का तर्क है कि महिलाओं के सशक्तिकरण का उद्देश्य उनके लिए मौजूदा विकल्पों को बढ़ाना है न कि मौजूद विकल्पों को भी और सीमित कर देना। डेनमॉर्क में बुर्के के विरोध में काफी प्रदर्शन भी हुए थे। इस प्रदर्शन में कई महिलाएं फैसले के विरोध में सिर और चेहरा ढंकनेवाले परिधान में सार्वजनिक स्थलों पर निकली थीं।
कोच्चि केरल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि पकड़ा गया शख्स श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हुए सीरियल ब्लास्ट की तरह किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहा था। सोमवार को एनआईए ने कासरगोड इलाके से रियाज अबु बकर नाम के संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। कोच्चि की एनआईए कोर्ट में आज उसकी पेशी होनी है। जुलाई 2016 में कासरगोड से 15 युवाओं के लापता होने के बाद केस दर्ज किया गया था। तफ्तीश में पता चला था कि लापता युवक अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएस के संपर्क में हैं। इससे पहले केरल के कासरगोड और पलक्कड़ में एनआईए ने तीन संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ की थी। कासरगोड IS मॉड्यूल केस में छापेमारी कासरगोड IS मॉड्यूल केस के सिलसिले में संदिग्धों के घरों में छापेमारी के दौरान धार्मिक उपदेशों से जुड़ी डीवीडी और सीडी कैसेट्स के अलावा विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के भाषणों की कैसेटें भी मिली थीं। इसके अलावा मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड्स, पेन ड्राइव्स, अरबी और मलयाली में हाथ से मिले नोट्स भी बरामद हुए थे। क्या है कासरगोड मॉड्यूल केस कासरगोड आईएस मॉड्यूल केस पहली बार पिछले साल सामने आया था, जब एनआईए ने एक 25 साल के युवक हबीब रहमान को अरेस्ट किया था। इस जांच में खुलासा हुआ था कि 14 लोगों ने इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के लिए जुलाई, 2016 में भारत और मध्य-पूर्व एशियाई देशों में स्थित अपने दफ्तरों को छोड़ दिया था। श्रीलंका ब्लास्ट से कनेक्शन तो नहीं? भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि कहीं केरल में मौजूद इस्लामिक स्टेट (IS) के मॉड्यूल्स का ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में कोई हाथ तो नहीं था। एजेंसियों ने IS से सहानुभूति रखने वाले कई लोगों को पहले हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया था। बाद में उनसे हमलों को लेकर पूछताछ की गई। केरल में IS काडरों ने श्रीलंकाई आतंकवादी आदिल के पोस्ट शेयर किए थे। आदिल एक फेसबुक अकाउंट चलाता था जिसका नाम था 'डिड यू नो'। उस पर वह इस्लाम के इतिहास से जुड़े पोस्ट शेयर करता था। इनका इस्तेमाल IS अपनी हरकतों को जस्टिफाइ करने के लिए करता था। केरल में IS के काडर इन पोस्ट्स को बढ़-चढ़कर शेयर करते थे। एक एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलंबो सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड जाहरान हाशिम केरल और तमिलनाडु के IS काडरों से पिछले तीन साल से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में था। NIA ने मोहम्मद आशिक, इस्माइल, शम्सुद्दीन, जफर सादिक अली और शाहुल हमीद को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट के मुताबिक वे हाशिम और उसके लोगों से संपर्क में थे। ईस्टर पर कोलंबो में सीरियल ब्लास्ट 21 अप्रैल को ईसाइयों के पवित्र त्योहार ईस्टर पर श्रीलंका में सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। राजधानी कोलंबो समेत कई जगहों पर 8 सीरियल ब्लास्ट में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पहले मृतकों की तादाद 300 के पार बताई जा रही थी लेकिन पोस्‍टमॉर्टम और डीएनए रिपोर्ट का मिलान करने पर पता चला है कि कुछ शवों की दो बार गिनती हो गई थी। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, कुछ शव इतनी बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे कि उनकी दो बार गिनती कर दी गई थी। नैशनल तौहीद जमात का नाम आया सामने मौलवी जाहरान हाशिम को श्रीलंका में हुए आतंकी हमले का मास्टमाइंड माना जा रहा है। इस्लामिक स्टेट ने पिछले मंगलवार को एक विडियो जारी किया था जिसमें हाशिम मुख्य रूप से नजर आ रहा है। फुटेज में गोल चेहरे वाला व्यक्ति हाशिम ही लग रहा है- आठ हमलावरों में से सिर्फ उसी का चेहरा ढका हुआ नहीं था। काले ट्यूनिक हेडक्राफ्ट पहने और हाथ में राइफल लिए हाशिम आईएस चीफ अबु बकर अल-बगदादी के प्रति वफादारी का संकल्प लेते हुए सात हमलावरों का नेतृत्व कर रहा था। अन्य सात हमलावरों ने भी काले रंग का ट्यूनिक पहना था लेकिन चेहरे ढंके हुए थे। श्रीलंका सरकार ने भी अप्रत्यक्ष रूप से हाशिम का नाम लिया है। श्रीलंकाई सरकार ने हमले के लिए स्थानीय संगठन नैशनल तौहीद जमात को जिम्मेदार ठहराया है, हाशिम जिसका नेतृत्व करता था।

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