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नई दिल्ली, 25 फरवरी 2020, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली में साझा प्रेस वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने ऐलान किया कि भारत-अमेरिका के बीच 3 बिलियन डॉलर की डिफेंस डील होगी. इसी के साथ भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात आगे बढ़ेगी. वहीं, अमेरिकी दूतावास में भारतीय CEO से ट्रंप ने मुलाकात की. इस दौरान अमेरिका में आगामी चुनाव को लेकर भी बातचीत हुई. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया कि हमारी तरफ से H-1B वीजा का मुद्दा उठाया गया था. इस दौरान ये भी बताया गया कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च तकनीक क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. श्रृंगला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्यापार के बढ़ावे को लेकर विस्तार बातचीत की. वहीं, ट्रंप ने कहा कि हम बहुत अधिक नियमों में बदलाव करने जा रहे हैं. इसके लिए कुछ को वैधानिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. दोनों दिग्गज नेताओं के बीच CAA को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई, लेकिन कश्मीर का जिक्र जरूर हुआ. इस दौरान कश्मीर को लेकर उठाए गए कदम की भी जानकारी ट्रंप को दी गई. दोनों नेताओं ने कहा कि धर्म की हर एक को आजादी है. भारतीय सीईओ से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत में स्वागत देखकर हैरान हूं. नवंबर में अमेरिका में होने वाले चुनाव पर ट्रंप ने कहा कि मैं दोबारा चुनाव जीतकर आऊंगा. मेरे दोबारा चुनाव जीतने से शेयर बाजार में जबर्दस्त बढ़ोतरी होगी. इस दौरान उद्योगपति मुकेश अंबानी ने भी ट्रंप से सवाल किए. अमेरिकी दूतावास में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारतीय CEO के साथ बैठक हुई. इस दौरान ट्रंप ने उनसे अमेरिका में निवेश करने की अपील की. भारतीय सीईओ से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि सभी देश मिलकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ेंगे. भारत-अमेरिका में समान लोकतंत्र और समानताएं हैं. साझा बयान में पीएम ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच संबंध दो सरकार नहीं बल्कि लोगों के बीच हैं. ये संबंध 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने का काम करेंगे. दोनों देशों के संबंध को आगे बढ़ाने में डोनाल्ड ट्रंप का शानदार प्रयास रहा है. पीएम मोदी बोले कि हम दोनों आज डिफेंस, सुरक्षा, एनर्जी, टेक्नोलॉजी, ट्रेड जैसे सभी मसलों पर चर्चा की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह भारत आने के न्योते के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं, मेलानिया और मैं भारत के स्वागत से अभिभूत हैं. मैंने और मेलानिया ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और ताजमहल को भी देखा. ट्रंप ने कहा कि मेरा ये दौरा काफी शानदार रहा और दोनों देश डिफेंस डील करने पर सहमत हुए हैं.
अहमदाबाद, 24 फरवरी 2020,अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम से दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ऐतिसाहिक साझेदारी का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने अपने संबोधन में भारत को आर्थिक महाशक्ति बताया और कहा कि हमें भारत पर बहुत गर्व है, भारत एक आर्थिक महाशक्ति है. भारत की क्षमता अविश्वसनीय है. उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही भारत को सबसे खतरनाक मिसाइल और हथियार देगा. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-भारत दोनों एक साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे, इस्लामिक आतंकवाद से भारत भी पीड़ित है और इसके खिलाफ अमेरिका पहले से ही लड़ाई लड़ रहा है. ट्रंप ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब तारीफ की. इस दौरान एक ऐसा समय आया, जब पीएम मोदी ट्रंप के भाषण से इतने प्रभावित हुए कि वो बीच में ही अपनी कुर्सी से उठ़ पड़े और ट्रंप का आभार जताया. असीमित संभावनाओं का देश भारत-ट्रंप भारत में मौजूद असीम संभावनाओं की चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि आज से हमारे दिल में भारत की यात्रा एक खास जगह रखेगी. ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी की जिंदगी इस महान देश को समर्पित है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिंदगी इस बात को बताती है कि इस देश में कितनी असीमित संभावनाएं मौजूद हैं. ट्रंप ने कहा, "उन्होंने अपने पिता के साथ चाय बेचते हुए एक चाय वाले के रूप में शुरूआत की. जब वे नौजवान थे तो उन्होंने इस शहर में एक कैफेटेरिया में भी काम किया." तारीफ पर पीएम ने जताया आभार ट्रंप के इस बयान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी अपने सीट से उठ खड़े हुए और भाषण दे रहे राष्ट्रपति ट्रंप से हाथ मिलाकर उनके प्रति आभार व्यक्त किया. बहुत सख्त हैं मोदी- ट्रंप इसके बाद भी ट्रंप ने अपना भाषण जारी रखा. ट्रंप ने पीएम की तारीफ की साथ ही उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि सब कोई पीएम मोदी से बेहद प्यार करते हैं, पर मैं आपको बता दूं कि वे बहुत सख्त हैं. अपनी बात खत्म करने के बाद ट्रंप मंच से ही मुस्कुराये. ट्रंप ने कहा कि पांच महीने पहले हमने टेक्सॉस में एक विशाल फुटबॉल स्टेडियम में पीएम नरेंद्र मोदी का स्वागत किया, आज उन्होंने दुनिया सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में हमारा स्वागत किया है.
नई दिल्ली, 23 फरवरी 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के साथ मन की बात की. यह मन की बात कार्यक्रम का 62वां अंक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में हुनर हाट, अंतरिक्ष और कॉप कन्वेंशन का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हुनर हाट में भाग लेने वाले कारीगरों में पचास प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो देश फिट है, वही हिट रहेगा. बता दें कि हाल ही में पीएम मोदी दिल्ली के हुनर हाट में गए थे और वहां लिट्टी चोखा का आनंद लिया था. पीएम ने कहा कि हुनर हाट में समूचे भारत की कला और संस्कृति की झलक वाकई अनोखी थी, शिल्पकारों की साधना और हुनर के प्रति प्रेम की कहानियां भी प्रेरणादायी होती है. पीएम ने कहा कि भारत को जानने के लिए जब भी मौका मिले इस तरह के आयोजनों में जरुर जाना चाहिए, आप ना सिर्फ देश की कला और संस्कृति से जुड़ेंगे, बल्कि आप देश के मेहनती कारीगरों की विशेषकर महिलाओं की समृद्धि में भी अपना योगदान दे सकेंगे. पिछले तीन वर्षों में हुनर हाट के माध्यम से तीन लाख कारीगरों, शिल्पकारों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं. हुनर हाट कला के प्रदर्शन के लिए बेहतरीन मंच है, साथ ही साथ लोगों के सपनों को भी पंख दे रहा है. यहां देश की विविधता को अनदेखा करना असंभव है. शिल्पकला तो है ही, साथ ही हमारे खाने-पीने की विविधता भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि बेटियां अब बंदिशों को तोड़ रही हैं. युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आने वाले महीने तो एडवेंटर स्पोर्ट्स के लिए बहुत उपयुक्त हैं. भारत का भौगोलिक परिवेश ऐसा है, जो हमारे देश में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए ढेरों अवसर प्रदान करता है. एक तरफ जहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं तो दूसरी तरफ दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान है जिंदगी में होना चाहिए एडवेंचर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जहां घने जंगलों का बसेरा है, वहीं समुद्र का असीम विस्तार है. इसलिए मेरा आप सबसे विशेष आग्रह है कि आप भी अपनी पसंदीदा जगह, अपनी रुचि की एक्टिविटी चुनें, अपने जीवन को एडवेंचर के साथ जरूर जोड़ें, जिंदगी में एडवेंचर तो होना ही चाहिए न. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की जैविक विविधता और सर्दियों में हिन्दुस्तान आने वाले प्रवासी पक्षियों का जिक्र किया. पीएम ने कहा कि भारत के वातावरण का आतिथ्य लेने के लिए दुनिया भर से अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी भी हर साल यहां आते हैं, गर्व की बात है कि 3 सालों तक भारत COP convention की अध्यक्षता करेगा , इस अवसर को कैसे उपयोगी बनायें, इसके लिये आप अपने सुझाव जरुर भेजें. काम्या और सलमान की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में काम्या, मुरादाबाद के हमीरपुर गांव के सलमान का जिक्र किया. काम्या ने सिर्फ 12 साल की उम्र में माउंट Aconcagua फतह किया. ये दक्षिण अमेरिका में Andes पवर्त की सबसे ऊंची चोटी है, जो लगभग 7000 मीटर ऊंची है. पीएम ने कहा कि काम्या सभी महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने में जुटी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरादाबाद के हमीरपुर गांव में रहने वाले दिव्यांग सलमान की कहानी भी साझा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हाल ही में मैने मीडिया में एक ऐसी कहानी पढ़ी जिसे में आपसे जरूर साझा करना चाहता हूं. ये कहानी मुरादाबाद के हमीरपुर गांव में रहने वाले सलमान की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सलमान जन्म से ही दिव्यांग हैं. उनके पैर, उनका साथ नहीं देते हैं. इस कठिनाई के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी, खुद ही अपना काम शुरू करने का फैसला किया. साथ ही ये भी निश्चय किया कि अब वो अपने जैसे दिव्यांग साथियों की मदद करेंगे. फिर क्या था, सलमान ने अपने गांव में चप्पल और डिटर्जेंट बनाने का काम शुरू कर दिया. प्रधानममंत्री मोदी ने कहा कि देखते ही देखते उनके साथ 30 दिव्यांग साथी जुड़ गए. आप भी ये गौर करिए कि सलमान खुद से चलने में दिक्कत थी लेकिन उन्होंने दूसरों का चलना आसान करने वाली चप्पल बना दी. सलमान ने सभी दिव्यांगों को ट्रेनिंग दी. सलमान ने 100 और दिव्यांगों को रोजगार देने का संकल्प लिया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हाल ही में जीवविज्ञानियों ने मछली की एक ऐसी नई प्रजाति की खोज की है जो केवल मेघालय में गुफाओं के अन्दर पाई जाती है, यह मछली ऐसी गहरी और अंधेरी भूमिगत गुफाओं में रहती है जहां रोशनी भी शायद ही पहुंच पाती है, यह भारत की जैव-विविधता को एक नया आयाम देने वाला है. पीएम ने कहा कि ये एक सुखद बात है कि हमारा भारत और विशेष तौर पर मेघालय एक दुर्लभ प्रजाति का घर है, हमारे आस-पास ऐसे बहुत सारे अजूबे हैं जो अब भी अंजान हैं, इन अजूबों का पता लगाने के लिए खोजी जुनून जरुरी होता है. New India की लड़कियां पुराने ढर्रे पर चलने को तैयार नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा नया भारत अब पुराने ढर्रे के साथ चलने को तैयार नहीं है. खासौतर पर न्यू इंडिया की हमारी बहनें और माताएं तो आगे बढ़कर उन चुनौतियों को अपने हाथों में ले रही है, जिनसे पूरे समाज में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. साइंस के प्रति युवाओं में बढ़ी रूचि पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन दिनों हमारे देश के बच्चों में, युवाओं में साइंस और तकनीक के प्रति रूचि लगाचार बढ़ रही है. युवाओं को साइंस से जोड़ने के लिए इसरो ने युविका कार्यक्रम शुरू किया है. युविका का मतलब है युवा विज्ञानी कार्यक्रम. इस कार्यक्रम के तहत परीक्षा के बाद बच्चे छुट्टियों में इसरो के अलग अलग सेंटर जाकर स्पेस तकनीके के बारे में सीखते हैं.
नई दिल्ली, 22 फरवरी 2020, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये कॉन्फ्रेंस 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रही है. ये दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का है. ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र में होंगे. ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए. ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए. अदालत के फैसले को सहमति से स्वीकार किया पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर भारतीय की न्यायपालिका पर बहुत आस्था है. अयोध्या पर फैसले की ओर इशारा करते हुए पीएम ने कहा कि हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी. फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं. लेकिन हुआ क्या? सभी 130 करोड़ लोगों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया. कानून का राज सामाजिक संस्कारों का आधार पीएम ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों स्तंम्भों ने उचित रास्ता ढूंढा है. हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है. बीते 5 वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है. पीएम ने कहा कि भारत में रुल ऑफ लॉ सामाजिक संस्कारों का आधार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस कॉन्फ्रेंस में ‘Gender Just World’ के विषय को भी रखा गया है. पीएम ने कहा कि दुनिया का कोई भी देश, कोई भी समाज लैंगिक न्याय (Gender justice) के बिना पूर्ण विकास नहीं कर सकता और ना ही न्यायप्रियता का दावा कर सकता है. डाटा सुरक्षा और साइबर क्राइम नई चुनौती पीएम ने कहा कि वे भारत की न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि डाटा सुरक्षा, साइबर क्राइम न्यायपालिका के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इनसे निपटने में मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा कि लोगों को शीघ्र न्याय देने में तकनीक एक हद तक रोल अदा कर सकता है. पीएम ने कहा कि सरकार का भी प्रयास है कि देश के हर कोर्ट को e-court Integrated Mission Mode Project से जोड़ा जाए. National Judicial Data Grid की स्थापना से भी कोर्ट की प्रक्रियाएं आसान बनेंगी. गांधीजी ने कर्तव्यों को धुरी में रखा कार्यक्रम में चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा है कि दुनिया के किसी भी कोने मे कहीं भी बदलाव हो तकनीक की वजह से उसका असर दूसरे कोने तक जाता है. उन्होंने कहा कि हमारे यहां समय-समय पर दुनिया के कई हिस्सों से लोग आए उनके साथ-साथ संस्कृति, परम्पराएं और नियम कायदे आए. चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों के मुताबिक स्वतंत्रता और कर्तव्यों की अनिवार्यता के बीच तालमेल का पूरा ध्यान रखा. गांधीजी ने भी कर्तव्य को धुरी में रखा. सभी लोग अपने कर्तव्य को निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगे तो देश सुचारू रूप से चलेगा. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आतंकियों और भ्रष्ट लोगों पर निजता का अधिकार नहीं लागू होता है और ऐसे लोगों के द्वारा सिस्टम का गलत इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गवर्नेंस का काम चुने हुए जनप्रतिनिधियों के जिम्मे होना चाहिए जबकि न्याय देने का काम जजों का होना चाहिए.
नई दिल्ली, 22 फरवरी 2020, भारत दौरे से पहले ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ भारत बातचीत के लिए तैयार हो, इसलिए जरूरी है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र में मौजूद आतंकी शक्तियों के खिलाफ सॉलिड एक्शन ले. बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में कम करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप के दौरे से ठीक पहले व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सफल वार्ता तभी संभव हो सकती है, जब पाकिस्तान अपनी जमीन पर मौजूद आतंकवादियों और चरमपंथियों के खिलाफ शिकंजा कसेगा. क्या कश्मीर पर मध्यस्थता करेंगे ट्रंप ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब पूछा गया है कि क्या ट्रंप कश्मीर समस्या सुलझाने के लिए भारत पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से मध्यस्थता की पहल करेंगे तो उन्होंने कहा, " मैं समझता हूं कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को लेकर आप राष्ट्रपति ट्रंप से जो सुनेंगे वो बेहद उत्साहवर्धक होगा, ट्रंप दोनों देशों के आपसी विवाद को खत्म करने के लिए दोनों देशों को बातचीत करने पर प्रोत्साहित कर रहे हैं. अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों के खिलाफ काम करे पाक बता दें कि ट्रंप और उनकी पत्नी मेलीनिया 12 सदस्यों के साथ 24 फरवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं. ट्रंप भारत के अहमदाबाद, आगरा और नई दिल्ली का दौरा करेंगे. ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत होने के लिए मुख्य बुनियाद ये है कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों और चरमपंथियों के खिलाफ लगातार काम करता रहे, हम इसी की उम्मीद कर रहे हैं. LoC पर शांति रखें दोनों देश समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक व्हाइट हाउस ने कहा कि हमें लगता है कि राष्ट्रपति दोनों देशों से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने और ऐसे कदमों या बयानों से परहेज करने का आग्रह करेंगे, जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है. अफगान शांति समझौते पर अमेरिका ने कहा कि यूएस भारत को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वो अफगान में शांति बहाली की कोशिश में जैसे भी संभव हो शामिल हो.
नई दिल्ली, 20 फरवरी 2020,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में पहुंचे. गृह मंत्री के इस दौरे से पड़ोसी मुल्क चीन को दिक्कत हुई है और चीन ने इसका विरोध किया है. चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जताता रहा है लेकिन भारत ने हर बार उसके दावे को नकारा है. गुरुवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमित शाह की इस यात्रा पर बयान दिया और कहा कि वह इसका विरोध करते हैं. चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है और ऐसे में जबतक इसका हल नहीं निकल जाता, तो राजनीतिक यात्राओं से बचना चाहिए. बता दें कि आज अरुणाचल प्रदेश का पूर्ण राज्य दिवस है, 20 फरवरी को ही अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिला था. इसी अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ईटानगर पहुंचे हैं और यहां पर जश्न में शामिल हुए. अमित शाह से पहले भी कई नेताओं की यात्रा पर चीन की ओर से सवाल खड़े किए जा चुके हैं. प्रवक्ता ने कहा कि चीनी सरकार ने कभी भी इसे ‘अरुणाचल प्रदेश’ नहीं माना है. भारतीय नेताओं को उस स्थान पर जाने से बचना चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय बोला कि ऐसी यात्राओं का असर दोनों देशों के संबंध पर पड़ सकता है. गौरतलब है कि ना सिर्फ अरुणाचल प्रदेश बल्कि चीन से सटे कई अन्य इलाकों में भी वहां की सेना घुसपैठ करती आई है. जिस वजह से भारत और चीनी सेना कई बार आमने-सामने आ चुकी हैं. अरुणाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और लद्दाख में कई बार दोनों सेनाओं का आमना-सामना हुआ है. भारत और चीन की करीब 3488 किमी. सीमा एक दूसरे से सटती है, जिसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल कहा जाता है.
मोदी नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को अचानक इंडिया गेट के लॉन पर चल रहे हुनर हाट देखने पहुंचे। पीएम मोदी को अपने बीच पाकर कारीगरों व आम लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि वह बिना पूर्व सूचना के वहां पहुंचे थे। इस दौरान पीएम मोदी ने कई स्टॉल का दौरा किया और कारीगरों, शिल्पकारों व खानसामों से बात कर उनका उत्साह बढ़ाया। ें पीएम मोदी ने लंच में कुल्हड़ वाली चाय और लिट्टी चोखा का आनंद लिया।उन्होंने इससे जुड़ी तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, 'हुनर हाट में लंच में स्वादिस्ट लिट्टी चोखा के साथ गर्म चाय का आनंद लिया।' वहां मौजूद लोगों ने बताया कि पीएम मोदी ने लिट्टी चोखा और चाय के पैसे खुद दिए। लिट्टी चोखा बिहार का मुख्य व्यंजन है। पीएम मोदी की लिट्टी चोखा खाती तस्वीर देखकर बिहारियों में खासा उत्साह है। उन्होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। बिहार की पृष्ठभूमि के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी पीएम मोदी की तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, 'आज पीएम मोदी जी ने हुनर हाट में भ्रमण के दौरान बिहार के मशहूर व्यंजन लिट्टी चोखा का आनंद लिया और इसके स्वाद की मुक्त कंठ से सराहना की।' बिहार निवासी अंकुर सिंह नाम के ट्विटर यूजर ने पीएम मोदी को न्योता देते लिखा, 'सर, लिट्टी चोखा खाने का मजा बिहारी के साथ है। कभी हमारे साथ खाइए। आशुतोष सिंह लिखते हैं, 'बहुत बढ़िया यह तो बिहार का प्रसिद्ध व्यंजन है बहुत बहुत धन्यवाद। कभी बिहार आकर इसका स्वाद चखें मोदी जी।' हुनर हाट की शुरुआत 13 फरवरी को हुई थी और समापन 23 फरवरी को होगा। 'कौशल को काम' थीम पर आधारित इस हाट में देश भर से दस्तकार, शिल्पकार और खानसामे हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक महिला दस्तकार शामिल हैं। यहां 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पिछले तीन सालों में हुनर हाट के माध्यम से लगभग 3 लाख दस्तकारों, शिल्पकारों व खानसामों को रोजगार उपलब्ध करवाए गए हैं।
अयोध्या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण एवं उसकी देखरेख के लिए बुधवार को दिल्ली में होने वाले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक से पहले बड़ी खबर सामने आ रही है। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक महंत नृत्य गोपाल दास और वीएचपी नेता चंपत राय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल कर लिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास को राम मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाया जा सकता है। महंत नृत्यगोपाल दास राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले लोगों में से एक हैं। वे लगातार मंदिर निर्माण के लिए होने वाले कार्यों में अगुवा की भूमिका निभाते रहे हैं। इनकी अगुवाई में लंबे समय से राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा भी एकत्र किया जाता रहा है। नृत्य गोपाल दास बाबरी विध्वंस के आरोपी हैं और लखनऊ के सीबीआई कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। नाराज हो गए थे नृत्य गोपाल दास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ट्रस्ट की घोषणा की थी तब इसमें ट्रस्टियों की सूची में महंत नृत्यगोपाल दास का नाम नहीं होना चौंकाने वाला था। ट्रस्ट में शामिल नहीं किए जाने से नृत्यगोपाल दास नाराज हो गए थे, जिसके बाद बीजेपी के नेताओं को उन्हें मनाने के लिए अध्योध्या जाना पड़ा था। वहीं दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय भी राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। फिलहाल राय अयोध्या में ही रह रहे हैं और वीएचपी के काम को विस्तार दे रहे हैं। हाल ही में चंपत राय ने दावा किया था कि राम मंदिर का निर्माण वीएचपी के ही मॉडल पर होगा। अयोध्या के मास्टर प्लान पर होगी चर्चा गौरतलब है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक बुधवार को दिल्ली में ग्रेटर कैलाश-1 स्थित कार्यालय में बुलाई गई है। इस दौरान आम जनता से धन का सहयोग लेने जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो। ट्रस्ट इस पर भी विचार करेगा कि निर्माण कार्य के दौरान रामलला की मूर्ति कहां रखी जाए। बैठक में अयोध्या के मास्टर प्लान पर भी चर्चा होगी।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंच गए हैं। दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार वाराणसी पहुंचे नरेंद्र मोदी शैव समुदाय से जुड़े जंगमवाड़ी मठ पहुंचे। इसके बाद मोदी ने चंदौली के पड़ाव में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की 63 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी ने वाराणसी में लगभग 1200 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने काशी से महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को जोड़ने वाली काशी-महाकाल एक्सप्रेस को भी झंडी दिखाई। लिखें जंगमवाड़ी मठ में नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से आए लोगों और संतों को संबोधित करते हुए तमिल, मराठी, कन्नड़ और हिंदी मेंं अपनी बात रखी। उन्होंने लोगों से संकल्प लेने को कहा कि वे अपने आचरण और विचार से राष्ट्र निर्माण का काम करेंगे। पीएम मोदी ने शैव समुदाय और संतों की भी जमकर तारीफ की। अपने इस दौरे में पीएम नरेंद्र मोदी कई विकास योजनाओं, अस्पतालों और पर्यटन से जुड़ी योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। देश की तीसरी कॉर्पोरेट ट्रेन महाकाल एक्सप्रेस को झंडी दिखाने के साथ ही नरेंद्र मोदी लगभग 1200 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। आपको बता दें कि पिछले छह सालों में यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 22वां वाराणसी दौरा है। 6 साल में काशी में 22वीं बार PM मोदी, इस बार क्या खास? चंदौली के दीन दयाल उपवन में पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन:- 'हर-हर महादेव' के नारे से साथ पीएम मोदी ने की संबोधन की शुरुआत। पीएम मोदी ने होली, एकादशी और महाशिवरात्रि की बधाई अवधी में दी। महाकाल के आशीर्वाद से हम वे फैसले लेने में सक्षम हुए, जो लंबे समय से रुके हुए थे। आर्टिकल 370 हो या सीएए हो, हमने तमाम दबावों के बाद भी ऐसे फैसले लिए। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि महाकाल के आशीर्वाद से लिए गए इन फैसलों पर आगे भी कायम रहेंगे। आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी पंडित दीन दयाल की यह प्रतिमा। यहां बनाया गया उपवन भी लोगों के लिए प्रेरणा स्थली के रूप में है। उनकी आत्मा हमें निरंतर आशीर्वाद देती है क्योंकि हम समाज दे दलित, पीड़ित, शोषित वर्ग के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने हमें अंत्योदय का मार्ग दिखाया था। यानी समाज के आखिरी पंक्ति के व्यक्ति का उदय। जो आखिरी पायदान पर है, उसे पहले पायदान पर लाने के लिए काम हो रहा है। हर क्षेत्र में विकास के अभूतपूर्व काम हो रहे हैं। 25 हजार करोड़ की योजनाओं पर काम जारी शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति से जुड़े इन कार्यों के लिए मैं वाराणसी और पूर्वांचल के लोगों को बधाई देता हूं। पिछले कुछ सालों में वाराणसी में लगभग 25 हजार करोड़ की योजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं, या काम जारी है। यह सब महादेव की इच्छा है, बाबा भोले का ही आशीर्वाद है। बाबा ने हमें इसकी जिम्मेदारी दी है। चौकाघाटा-लहरतारा फ्लाइओवर बन जान से जाम की समस्या खत्म होगी। 16 सड़कें बनाई गईं, उनका भी लोकार्पण हुआ है। इनसे यात्रियों को बहुत लाभ होगा। कनेक्टिविटी के ये काम आपके आराम के साथ-साथ रोजगार को भी जन्म देंगी। पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा। आस्था से जुड़े स्थलों पर लगातार काम कर रहे हैं काशी विश्ननाथ कॉरिडोर के अन्नक्षेत्र का लोकार्पण किया गया है। अब भक्तों के भोजन में कमी नहीं आएगी। जल्द ही विश्वनाथ धाम नए रूप में दिखाई देगी। इसी तरह से अयोध्या में राम मंदिर पर जल्द ही काम शुरू होगा। देशभर में आस्था से जुड़े स्थलों के विकास के लिए काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज बाबा विश्वनाथ को ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर से जोड़ने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई। शिक्षा के अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है वाराणसी। उन बीमारियों का इलाज भी यहां हो रहा है, जिसके लिए बहुत दूर जाना पड़ता था। सिर्फ 21 महीने में 430 बेड का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनकर तैयार हो गया है। मेडिकल कॉलेज के लिए मैं योगी जी और उनकी टीम को बहुच-बहुत बधाई देना चाहता हूं। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से ज्यादा हिस्सा छोटे-छोटे शहरों के खाते में जाएगा। पूर्वांचल समेत कई जगहों पर कई फैक्ट्रियां यूपी में पिछले कुछ सालों में लगी हैं। नरेंद्र मोदी ने काशी-महाकाल एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी काशी, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने वाली काशी-महाकाल एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई हरी झंडी। वाराणसी से चलने वाली ट्रेन को पीएम मोदी ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिखाई हरी झंडी। 20 तारीख से चलेगी काशी-महाकाल एक्सप्रेस। 1: 50 बजे: पीएम मोदी ने स्वावलंबन योजना के लाभार्थियों को सर्टिफिकेट प्रदान किया। दिव्यांगों को इस योजना के तहत मिला है रोजगार। फिटर, टेलिकॉलर, रिक्रूटर जैसी नौकरियां दी गईं। 1:45 बजे: पीएम नरेंद्र मोदी ने 1250 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 50 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। 1: 20 बजे: प्रधानमंत्री मोदी ने किया किया पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण। 1:10 बजे: पीएम नरेंद्र मोदी चन्दौली जिले के पड़ाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे। दोपहर 1 बजे: समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश फौजी के लड़के अजय यादव ने पीएम मोदी को दिखाया काला झंडा। पुलिस ने अजय यादव को किया गिरफ्तार। अजय ने काला जैकेट निकालकर दिखाया तो एसपीजी ने उसको उठाकर बैरीकेडिंग के बाहर फेंक दिया। जंगमवाड़ी मठ में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की बड़ी बातें:- आइए हम संकल्प लें कि देश के निर्माण में हर संभव प्रयास करेंगे। कन्नड़, मराठी, हिंदी और तेलुगू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी अपनी बात। राम मंदिर का विषय दशकों से अदालतों में उलझा हुआ था। अब मंदिर निर्माण का रास्ता हो चुका है। सरकार ने ट्रस्ट के निर्माण की घोषणा की है, जो मंदिर निर्माण का कार्य देखेगा। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है। 67 एकड़ अदिग्रहीत जमीन भी ट्रस्ट को ही ट्रांसफर कर दी जाएगी। स्वदेशी खरीदने के लिए पीएम मोदी ने किया आह्वान नमामि गंगे के तहत 7000 करोड़ की लागत से काम पूरा हुआ है। 21 हजार करोड़ की लागत से चल रहे प्रॉजेक्ट्स का काम प्रगति पर है। इसमें जनभागीदारी का बहुत बड़ा सहयोग रहा है। भारत में बने सामान को सम्मान देना हमारा लक्ष्य है। मैंने लालकिले से कहा था कि स्वदेशी खरीदेंगे और आसपास के लोगों को भी प्रेरित करेंगे। भारत में वैश्विक स्तर के उत्पाद बन रहे हैं। हमें 'इंपोर्टेड श्रेष्ठ है' की सोच को बदलना है। जनभागीदारी पर पीएम मोदी ने दिया जोर हमें पानी की बचत पर ध्यान देते हुए भारत को 'सूखा मुक्त और जलयुक्त' बनाने के लिए हर भारतीय को योगदान देना है। सिर्फ सरकारों के माध्यम से यह नहीं हो सकता है। जनभागीदारी आवश्यक है। नागरिकों के संस्कार से बनता है। कर्तव्यभावना नागरिक को श्रेष्ठ बनाती है। हमारा आचरण ही नए भारत की दिशा को तय करेगा। वीर शैव संतों ने तो सदियों से धर्म की शिक्षा कर्तव्य से ही दी है। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत के मार्गदर्शक हैं धाम' भक्ति से मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले संदेश को युवाओं तक पहुंचाना चाहिए। यह नया ऐप युवा पीढ़ी को जोड़कर प्रेरणा देगा। मेरा मानना है कि हर साल ग्रंथ के विषय में क्विज कंपटीशन होना चाहिए। हर साल हर राज्य के तीन विजेताओं को पुरस्कार भी देना चाहिए। इसीलिए इसका अनुवाद 19 भाषाओं में किया गया है। मानवता का महान संदेश वीर शैव समुदाय से जुड़ा हुआ है। सामाजिक प्रगति में इस परंपरा का प्रखर नेतृत्व रहा है। सारे धाम, ज्योतिर्लिंग और शैप पीठ आस्था और आध्यात्म के केंद्र होने के साथ-साथ 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के मार्गदर्शक हैं। 11:20 बजे: सीएम योगी और कर्नाटक के सीएम बी एस येदियुरप्पा के साथ जंगमवाड़ी मठ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। पीएम मोदी ने किया शैव समुदाय और संतों का स्वागत 'सर्वेषाम स्वागतम' बोलकर प्रधानमंत्री मोदी ने किया सबका स्वागत। 'कथमस्ति भवन' बोलकर पीएम मोदी ने वाराणसी में शैव संतों और समुदाय के लोगों का स्वागत किया। 10:25 बजे: वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। सीएम योगी आदित्यनाथ और गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने किया नरेंद्र मोदी का स्वागत।
वाराणसी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर मचे सियासी बवाल और शाहीन बाग सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि वह इस फैसले पर पूरी तरह कायम रहेंगे। दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दूसरे दौरे पर 1200 करोड़ रुपये की सौगात देने के बाद पीएम ने कहा कि ये फैसले (सीएए, आर्टिकल 370) जरूरी थे, फिर भी तमाम दबावों के बावजूद हमने ये फैसले लिए। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हम इन फैसलों पर आगे भी कायम रहेंगे। सीएए का जिक्र करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, 'महाकाल के आशीर्वाद से हम वे फैसले लेने में सक्षम हुए, जो लंबे समय से रुके हुए थे। आर्टिकल 370 हो या सीएए हो, हमने तमाम दबावों के बाद भी ऐसे फैसले लिए। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि महाकाल के आशीर्वाद से लिए गए इन फैसलों पर आगे भी कायम रहेंगे।' बता दें कि तमाम विरोध प्रदर्शनों के बावजूद गृहमंत्री अमित शाह भी बार-बार कह चुके हैं कि सरकार सीएए के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। सीएए और एनआरसी के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग की तरह ही देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन चल रहे हैं। राम मंदिर पर भी बोले नरेंद्र मोदी राम मंदिर का जिक्र करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, 'राम मंदिर का विषय दशकों से अदालतों में उलझा हुआ था। अब मंदिर निर्माण का रास्ता हो चुका है। सरकार ने ट्रस्ट के निर्माण की घोषणा की है, जो मंदिर निर्माण का कार्य देखेगा। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है। 67 एकड़ अदिग्रहीत जमीन भी ट्रस्ट को ही ट्रांसफर कर दी जाएगी। जल्द ही अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर तैयार होगा।' महाकाल एक्सप्रेस को नरेंद्र मोदी ने दिखाई हरी झंडी दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार वाराणसी पहुंचे नरेंद्र मोदी शैव समुदाय से जुड़े जंगमवाड़ी मठ पहुंचे। इसके बाद उन्होंने चंदौली के पड़ाव में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की 63 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी ने वाराणसी में लगभग 1200 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने काशी से महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को जोड़ने वाली काशी-महाकाल एक्सप्रेस को भी झंडी दिखाई। 25 हजार करोड़ की योजनाओं पर काम जारी पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, 'शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति से जुड़े इन कार्यों के लिए मैं वाराणसी और पूर्वांचल के लोगों को बधाई देता हूं। पिछले कुछ सालों में वाराणसी में लगभग 25 हजार करोड़ की योजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं, या काम जारी है। यह सब महादेव की इच्छा है, बाबा भोले का ही आशीर्वाद है। बाबा ने हमें इसकी जिम्मेदारी दी है। चौकाघाटा-लहरतारा फ्लाइओवर बन जान से जाम की समस्या खत्म होगी। 16 सड़कें बनाई गईं, उनका भी लोकार्पण हुआ है। इनसे यात्रियों को बहुत लाभ होगा। कनेक्टिविटी के ये काम आपके आराम के साथ-साथ रोजगार को भी जन्म देंगी। पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा।'
नई दिल्ली संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ धरने पर बैठीं शाहीन बाग की महिलाओं ने गृहमंत्री अमित शाह की ओर से बातचती के लिए रखे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को गृहमंत्री से मुलाकात करेगा। हालांकि, इसको लेकर अभी मतभेद भी है। गौरतलब है कि गृहमंत्री अमित शाह ने टाइम्स नाउ समिट में कहा था कि अगले तीन दिन में सीएए को लेकर कोई भी उनसे आकर मुलाकात कर सकता है। शाह ने कहा कि जिस किसी को भी सीएए को लेकर आपत्ति है, वह उनसे बात करने के लिए तैयार हैं। शाहीन बाग में दिसंबर से ही धरने पर बैठी महिलाएं सीएए के साथ ही एनआरसी और एनपीआर का भी विरोध कर रही हैं। महिलाओं ने अब गृहमंत्री से मिलकर अपनी बात रखने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि रविवार को 2 बजे अमित शाह से मुलाकात होगी। हालांकि प्रदर्शनरकरियों के बीच इसे लेकर मतभेद है और एक गुट मीटिंग करने के पक्ष में और दूसरा विरोध में है। आज यह तय कर लिया जाएगा कि कौन-कौन इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगा।
नई दिल्ली, 14 फरवरी 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 फरवरी को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी करीब 30 से ज्यादा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे. वहीं प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में 430 बेड का सुपर स्पेशिएलिटी सरकारी अस्पताल की भी सौगात देंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईआरसीटीसी की महाकाल एक्सप्रेस को वीडियो लिंक के माध्यम से हरी झंडी दिखाएंगे. रातभर चलने वाली यह ट्रेन 3 तीर्थ केंद्रों वाराणसी, उज्जैन और ओंकारेश्वर को जोड़ेगी. इसके साथ ही पीएम मोदी पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल सेंटर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की 63 फीट ऊंची प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे. तीन कॉर्पोरेट ट्रेन शुरू इसी के साथ भारतीय रेलवे का पीएसयू आईआरसीटीसी आम जनता के लिए तीसरी कॉर्पोरेट ट्रेन शुरू करने के लिए तैयार है. यह ट्रेन वाराणसी और इंदौर के बीच चलेगी और इसे काशी महाकाल एक्सप्रेस नाम दिया गया है. ट्रेन का उद्घाटन 20 फरवरी 2020 को वाराणसी से किया जाएगा और उसके बाद नियमित रूप से इसके फेरे शुरू कर दिए जाएंगे. यह ट्रेन आईआरसीटीसी के द्वारा चलाई जाने वाली लखनऊ- नई दिल्ली- तेजस और अहमदाबाद-मुंबई तेजस के अतिरिक्त है. अब ये तीनों ट्रेनें कॉर्पोरेट श्रेणी में आ जाएंगी. तीन ज्योतिर्लिंग के होंगे दर्शन यह रात भर चलने वाली सुपरफास्ट वातानुकूलित ट्रेन होगी जिसमें बर्थ भी मौजूद हैं. यह ट्रेन तीन ज्योतिर्लिंग - ओंकारेश्वर (इंदौर के पास), महाकालेश्वर (उज्जैन) और काशी विश्वनाथ (वाराणसी) के अलावा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र इंदौर से जोड़ेगी. ट्रेन सप्ताह में तीन बार वाराणसी और इंदौर के बीच उज्जैन, संत हीरानगर (भोपाल), बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ / प्रयागराज और सुल्तानपुर के बीच संचालित होगी. काशी महाकाल एक्सप्रेस आईआरसीटीसी द्वारा संचालित की जा रही तीसरी कॉर्पोरेट यात्री ट्रेन है, जो देश में इस तरह की और कॉरपोरेट ट्रेनों के संचालन के लिए रेल मंत्रालय की पहल है.
नई दिल्ली अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को इतने लंबे समय तक नजरबंद किए जाने के सवाल पर शाह ने कहा कि यह स्थानीय प्रशासन का निर्णय है, इसमें भारत सरकार का कोई रोल नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर पूरी तरह नॉर्मल है, वहां परिवार के साथ जाया जा सकता है। जो चाहें वो जा सकते हैं। यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी वहां से होकर आए हैं। कश्मीरी पंडितों को दोबारा जम्मू कश्मीर में बसाने के सवाल पर शाह ने कहा कि 4 लाख लोगों को अपने ही देश में निर्वासित होना पड़ा क्या मीडिया कभी उनके दर्द को दिखाएगा। काल्पनिक भय को इतना कवरेज दिखाया जाता है, लेकिन इनके लिए कोई आवाज नहीं उठाता। टाइम्स नाउ से बात करते हुए एनपीआर को लेकर कांग्रेस गलत प्रचार कर रही है। इसमें कागजात दिखाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। सीएए के समर्थन में विरोध करने वालों से 20 गुणा से ज्यादा लोग हैं। सीएए के समर्थन में देशभर में दो-दो लाख लोग एकत्र हुए हैं। सीएए में ऐंटी मुस्लिम प्रावधान क्या है कोई इसे साबित करके दिखाए। इससे पहले शाह ने कहा सीएए के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर शाह ने कहा कि इसमें यह भी देखना जरूरी है कि ये प्रदर्शन किनके द्वारा और किस स्तर पर हो रहा है। मुझे आज तक कोई ऐसा इंसान नहीं मिला जो समझा सके कि सीएए के किस प्रावधान के तहत उन्हें यह एंट्री मुस्लिम लगता है। यह विरोध केवल बीजेपी के नाम पर विरोध हो रहा है। शाह ने कहा कि अंदेशा के नाम पर आंदोलन नहीं होता है, जब एनआरसी आएगा तब इन्हें विरोध करना चाहिए था। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि पिछली कांग्रेस और जनता पार्टी की सरकारों ने हिंदूओं और सिखों को लांग टर्म वीजा दे चुकी है। इसकी शुरुआत 30 मार्च 1964 से ही शुरू हो चुकी थी, तब बीजेपी सत्ता में नहीं थी। यही काम कांग्रेस करती है तो वह सेक्युलर और बीजेपी कानून बनाती है तो गलत हो जाती है। सीएए आने के बाद पाकिस्तान से आए 74 अल्पंख्यकों को राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर के कलेक्टर ने नागरिकता दी है। वहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। शाह ने कहा कि हमारा मन शुद्ध है, हमने कभी भी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया। सीएए में कोई ऐसा प्रोविजन नहीं है जो मुस्लिमों की नागरिकता ले ले। इस देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी ने धर्म के आधार पर किया। शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने 12 जुलाई 1947 को कहा था कि जिन लोगों को पाकिस्तान से भगाया गया उन्हें पता होना चाहिए की वे पूर्ण भारत के नागरिक हैं। उन्हें ये महसूस करना चाहिए कि वह भारत की सेवा करने के लिए पैदा हुए थे, इसलिए भारत उन्हें स्वीकारने के लिए तैयार है।
नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि जिस किसी को भी नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर आपत्ति है, वह उससे बात करने के लिए तैयार हैं। शाह ने कहा कि आने वाले लोगों को तीन दिन के भीतर समय दिया जाएगा। सीएए के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर शाह ने कहा कि इसमें यह भी देखना जरूरी है कि ये प्रदर्शन किनके द्वारा और किस स्तर पर हो रहा है। मुझे आज तक कोई ऐसा इंसान नहीं मिला जो समझा सके कि सीएए के किस प्रावधान के तहत उन्हें यह ऐंटी मुस्लिम लगता है। यह विरोध केवल बीजेपी के नाम पर विरोध हो रहा है। शाह ने कहा कि अंदेशा के नाम पर आंदोलन नहीं होता है, जब एनआरसी आएगा तब इन्हें विरोध करना चाहिए था। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि पिछली कांग्रेस और जनता पार्टी की सरकारों ने हिंदूओं और सिखों को लॉन्ग टर्म वीजा दे चुकी है। इसकी शुरुआत 30 मार्च 1964 से ही शुरू हो चुकी थी, तब बीजेपी सत्ता में नहीं थी। यही काम कांग्रेस करती है तो वह सेक्युलर और बीजेपी कानून बनाती है तो गलत हो जाती है। सीएए आने के बाद पाकिस्तान से आए 74 अल्पंख्यकों को राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर के कलेक्टर ने नागरिकता दी है। वहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। शाह ने कहा कि हमारा मन शुद्ध है, हमने कभी भी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया। सीएए में कोई ऐसा प्रोविजन नहीं है जो मुस्लिमों की नागरिकता ले ले। इस देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी ने धर्म के आधार पर किया। शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने 12 जुलाई 1947 को कहा था कि जिन लोगों को पाकिस्तान से भगाया गया उन्हें पता होना चाहिए की वे पूर्ण भारत के नागरिक हैं। उन्हें ये महसूस करना चाहिए कि वह भारत की सेवा करने के लिए पैदा हुए थे, इसलिए भारत उन्हें स्वीकारने के लिए तैयार है। अमित शाह ने कहा कि सीएए को लेकर जिसे भी आपत्ति है वह हमारे पास आएं, हम तीन दिनों के भीतर समय देंगे। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का सबको अधिकार है। उन्हें मेरा समर्थन है। जामिया इलाके में पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जो बस जला रहे थे, लोगों की स्कूटी आग के हवाले कर रहे थे। जेएनयू में अलग हालात थे, वहां फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन था, इसलिए दिल्ली पुलिस वहां से दूर रही। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वह लोकसभा में कह चुके हैं कि अभी एनआरसी पर कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि एक कमिटी के अध्यक्ष प्रणब मुखर्जी थे, इसमें कपिल सिब्बल, मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी और लालू प्रसाद यादव सदस्य थे। इस संसदीय समिति की 107वीं रिपोर्ट में कहा गया था, 'इस रिपोर्ट में समिति ने भारत के प्रत्येक नागरिकों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण करेगी और उन्हें पहचान पत्र जारी करने का मान्यता देगी और उनका रजिस्टर बनाएगी।' जब हम एनआरसी पर निर्णय लेंगे तब सबको पता चल जाएगा। सीएए पर सवाल उठाने वालों से मैं पूछना चाहता हूं कि जिस पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की 30 फीसदी आबादी घटकर तीन फीसदी कैसे हो गई, ये लोग कहां चले गए। ये लोग या तो मार दिए गए, या धर्म परिवर्तन करा दिया गया या तो वे भारत की सरण में आ गए। जबकि हमारे यहां अल्पसंख्यकों की जनसंख्या घटी नहीं वृद्धि हुई है। जब हमअल्पसंख्यक की बात करते हैं तो हमें यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश घोषित मुस्लिम देश हैं, ऐसे में वहां अल्पसंख्यक में मुसलमान कैसे हो सकता है।
नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को स्वीकार किया कि बीजेपी नेताओं के विवादित बयानों से दिल्ली चुनाव में पार्टी को नुकसान हुआ। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि दिल्ली चुनाव के नतीजों को सीएए और एनआरसी पर जनादेश नहीं माना जा सकता। टाइम्स नाउ समिट में शाह ने कहा कि बीजेपी के नेताओं को 'देश के गद्दारों को' और 'भारत-पाक मैच' जैसे बयान नहीं देने चाहिए थे। विवादित बयानों ने किया नुकसान चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेता व वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने 'देश के गद्दारों...' बयान देकर विवाद पैदा कर दिया था। शाह ने 'टाइम्स नाउ समिट' में इससे जुड़े सवाल पर कहा, 'देश के गद्दारों...' जैसा बयान नहीं दिया जाना चाहिए था। पार्टी ऐसे बयानों से संभवतः नुकसान पहुंचा है।' हालांकि, उन्होंने आगे पीएम मोदी पर राहुल गांधी के 'डंडा' बयान का भी जिक्र किया और कहा कि बीजेपी नेताओं के बयानों को जिस तरह से जोर-शोर से दिखाया गया, उस तरह से राहुल गांधी के बयान को नहीं दिखाया गया। पहले ही हारे हुए थे दिल्ली गृह मंत्री शाह ने दिल्ली चुनाव में कई रैलियां और रोड शो किए थे। उन्होंने पार्टी की हार स्वीकारते हुए कहा, 'मोदी जी अभी कुछ ही समय पहले सबसे बड़े बहुमत के साथ विजयी रहे। अब सही बात है कि कुछ राज्यों में सफलता नहीं मिली लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीजेपी से लोगों का विश्वास उठा है। महाराष्ट्र में हम चुनाव जीते हैं। हरियाणा में केवल 6 सीटें कम हुईं। झारखंड में हम चुनाव हारे और दिल्ली में पहले से हारे हुए थे बावजूद इसके सीट और वोट पर्सेंट बढ़ा है।' शाह ने समिट में केंद्र सरकार के अहम फैसलों और उस पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आर्टिकल 370, नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर सरकार का पक्ष रखा। बता दें कि 7वीं विधानसभा के लिए कराए गए चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने अपनी जीत दोहराते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया। इसे 5 सीटों का नुकसान भले झेलना पड़ा हो, लेकिन प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 70 सदस्यीय विधानसभा की 62 सीटें अपने नाम की। वहीं, कांग्रेस जहां खाता तक नहीं खोल पाई और 63 उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी को 8 सीटों पर संतोष करना पड़ा। 2015 में चुनाव की तुलना में इसे 5 सीटों का फायदा हुआ है।
नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। रिजल्ट का शोर थम चुका है। आम आदमी पार्टी (आप) ने 62 सीटों पर जीत के साथ लगातार तीसरी बार वापसी की है। बीजेपी का दिल्ली में वनवास और बढ़ चुका है। हालांकि, परिणामों में हार के बाद भी बीजेपी के लिए खुशखबरी भी छिपी है। क्योंकि कांग्रेस का जहां दिल्ली में पत्ता साफ हो चुका है वहीं, भगवा दल के वोट शेयर में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। बीजेपी के 63 सीटों पर वोट शेयर बढ़े दिल्ली के नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि बीजेपी भले ही बुरी तरह चुनाव हार गई हो लेकिन उसे ज्यादातर विधानसभा सीटों पर अच्छी बढ़त बनाई और उसका वोट शेयर बढ़ा है। दिल्ली के 70 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने इस बार 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा बीजेपी का 63 सीटों पर वोट शेयर बढ़ा है। 20 सीटों पर बीजेपी ने 2015 चुनाव की तुलना में 10 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर बढ़ाया है। बीजेपी ने सबसे ज्यादा वोट शेयर नजफगढ़ सीट पर बढ़ाया है। यहां पिछली चुनाव की तुलना में उसका वोट शेयर 21.5 फीसदी बढ़ा है। आप का वोट शेयर घटा, बढ़ा आप ने इन चुनावों में बंपर जीत हासिल की है। पर जहां तक वोट शेयर की बात करें तो 38 सीटों पर आप का वोट शेयर घटा है। हालांकि पिछले चुनाव की तुलना में 5 सीटें ऐसी हैं जहां आप ने 10 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर बढ़ाया है। आप ने मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 23 फीसदी वोट शेयर बढ़ाया है। इसके अलावा 32 सीटें ऐसी हैं जहां आप का वोट शेयर बढ़ा भी है। मुस्लिम आबादी वाली सीटों जैसे, मुस्तफाबाद, मटिया महल, चांदनी चौक, बल्लीमरान और सीलमपुर जैसे सीटों पर आप के वोटों में जोरदार बढ़त देखने को मिली। इसके अलावा 27 ऐसे विधानसभा सीटें रहीं जहां और आप और बीजेपी दोनों का वोट शेयर बढ़ा है। करावल नगर सीट पर आप के वोट शेयर सबसे ज्यादा घटे। पिछले चुनाव की तुलना में आप को यहां 13.5 प्रतिशत कम वोट मिले। कांग्रेस का सूपड़ा साफ कांग्रेस लगातार दूसरी बार दिल्ली में अपना खाता खोल पाने में असलफ रही है। पार्टी के 63 उम्मीदवार अपनी जमानत गंवा बैठे। कांग्रेस ने 63 सीटों पर अपने वोट शेयर गंवाए हैं। दिल्ली में अपने सबसे बुरे प्रदर्शन से गुजर रही कांग्रेस के लिए अच्छी खबर कस्तूरबा नगर से आई, जहां उसने अपना वोट शेयर 2015 की तुलना में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया है। मुस्तफाबाद में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा वोट शेयर गंवाया और यहां का उसका वोट सीधे आप के पास गया। मुस्तफाबाद में कांग्रेस को 2015 चुनाव की तुलना में 28.8 प्रतिशत कम वोट मिले। दिल्ली के लोगों ने आप को जमकर समर्थन दिया है। उसे कुल पड़े मत में 49,74,522 लोगों का समर्थन मिला है। बीजेपी को 35,75,430 एवं कांग्रेस को 3,95,924 लोगों का समर्थन मिला है। गौरतलब है कि 16 फरवरी को अरविंद केजरीवाल रामलीला मैदान में पूरी कैबिनेट के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
नई दिल्ली, 09 फरवरी 2020,चीन में कोरोना वायरस के कारण हाहाकार मचा हुआ है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों से एकजुटता व्यक्त की है. पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भारत की ओर से सहायता की पेशकश की है. इसके साथ ही पीएम मोदी ने जानमाल के नुकसान के चलते शोक भी व्यक्त किया है. वहीं पीएम मोदी ने हुबेई प्रांत से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए चीन सरकार की ओर से प्रदान की गई सुविधा के लिए भी सराहना की है. 811 लोगों की मौत, 37 हजार संक्रमित चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 811 हो गई है, जबकि कन्फर्म मामलों की संख्या भी बढ़कर 37,000 से पार हो गई है. चीनी प्रशासन ने रविवार को यह जानकारी दी. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि उन्हें 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों और शिंजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स से शनिवार को कोरोनवायरस संक्रमण के कन्फर्म 2,656 नए मामलों और 89 मौतों की जानकारी मिली है. सिन्हुआ ने चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के हवाले से बताया कि इन मौतों में 81 हुबेई प्रांत में, हेनान में दो, हेबेई, हीलोंगजियांग, अनहुई, शानडोंग, हुनान और गुआंग्झी ऑटोनोमस रीजन में एक-एक मौत हुई है. आयोग ने कहा कि शनिवार को 3,916 नए संदिग्ध मामले सामने आए. शनिवार को ही 87 मरीज गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और 600 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. चीन में कोरोनावायरस के पुष्ट हुए मामलों की संख्या शनिवार के अंत तक 37,198 तक पहुंच गई। आयोग ने कहा कि इस बीमारी से कुल 811 लोगों की मौत हो चुकी है. आयोग ने कहा कि 6,188 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और 28,942 लोगों के वायरस से संक्रमित होने का संदेह है. ठीक होने के बाद कुल 2,649 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है. आयोग ने कहा कि 3,71,905 लोगों के कोरोनावायरस पीड़ितों से करीबी संपर्क में होने का पता चला है, उनमें से 31,124 को शनिवार को चिकित्सा निगरानी से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 1,88,183 अन्य अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं. शनिवार के अंत तक, हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (एसएआर) में एक की मौत सहित 26 मामलों की पुष्टि हुई, जबकि 10 मकाउ एसएआर में और ताइवान में 17 मामलों की पुष्टि हुई है. मकाऊ और ताईवान में एक-एक मरीज को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.
कोकराझार बोडो शांति समझौते के बाद पहली बार असम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी पर जमकर पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि कुछ नेता उन्‍हें डंडे मारने की बात करते हैं लेकिन देश की माताओं और बहनों के आशीर्वाद से मैं बच जाऊंगा। पीएम ने कहा कि जिस मोदी को इतनी बड़ी तादाद में माताओं-बहनों की सुरक्षा हो, उसे कोई डंडा नहीं मार सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग एनआरसी, सीएए को लेकर भ्रम फैला रहे हैं लेकिन नॉर्थ-ईस्‍ट के लोगों से कहना चाहता हूं कि वे देश विरोधी ताकतों पर भरोसा न करें। उन्‍होंने कहा कि असम शांति समझौता नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के लिए 21वीं सदी में एक नई शुरुआत है। कोकराझार में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'आज जो उत्साह, जो उमंग मैं आपके चेहरे पर देख रहा हूं, वो यहां के आरोनाई और डोखोना के रंगारंग माहौल से भी अधिक संतोष देने वाला है। आजादी के बाद यह सबसे बड़ी राजनीतिक रैली है। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसी रैली नहीं देखी।' पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन उन हज़ारों शहीदों को याद करने का है, जिन्होंने देश के लिए अपने कर्तव्य पथ पर जीवन बलिदान किया। असम में अब कोई हिंसा नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज का दिन असम सहित पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लिए 21वीं सदी में एक नई शुरुआत, एक नए सवेरे का, नई प्रेरणा को वेलकम करने का है। अब असम में अनेक साथियों ने शांति और अहिंसा का मार्ग स्वीकार करने के साथ ही, लोकतंत्र को स्वीकार किया है, भारत के संविधान को स्वीकार किया है। मैं बोडो लैंड मूवमेंट का हिस्सा रहे सभी लोगों का राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने पर स्वागत करता हूं। पांच दशक बाद पूरे सौहार्द के साथ बोडो लैंड मूवमेंट से जुड़े हर साथी की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को सम्मान मिला है। पीएम मोदी ने कहा, 'अब केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो आंदोलन से जुड़े संगठनों ने जिस ऐतिहासिक अकॉर्डपर सहमति जताई है, जिस पर साइन किया है, उसके बाद अब कोई मांग नहीं बची है और अब विकास ही पहली प्राथमिकता है और आखिरी भी। इस अकॉर्ड का लाभ बोडो जनजाति के साथियों के साथ ही दूसरे समाज के लोगों को भी होगा। क्योंकि इस समझौते के तहत बोडो टैरिटोरियल काउंसिल के अधिकारों का दायरा बढ़ाया गया है, अधिक सशक्त किया गया है। 'असम अकॉर्ड की धारा-6 को भी जल्द लागू किया जाएगा' उन्‍होंने कहा, 'अकॉर्ड के तहत BTAD में आने वाले क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए कमीशन भी बनाया जाएगा। इस क्षेत्र को 1500 करोड़ रुपए का स्पेशल डिवलपमेंट पैकेज मिलेगा, जिसका बहुत बड़ा लाभ कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदालगुड़ि जैसे जिलों को मिलेगा। अब सरकार का प्रयास है कि असम अकॉर्ड की धारा-6 को भी जल्द से जल्द लागू किया जाए। मैं असम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि इस मामले से जुड़ी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार और त्वरित गति से कार्रवाई करेगी।' पीएम मोदी ने कहा, 'जिस नॉर्थ-ईस्ट में हिंसा की वजह से हजारों लोग अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए थे, अब यहां उन लोगों को पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ बसने की नई सुविधाएं दी जा रही हैं। हमने नॉर्थ-ईस्ट के अलग-अलग क्षेत्रों के भावनात्मक पहलू को समझा, उनकी उम्मीदों को समझा, यहां रह रहे लोगों से बहुत अपनत्व के साथ, उन्हें अपना मानते हुए संवाद कायम किया। पहले नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को दिल्ली से बहुत दूर समझा जाता था, आज दिल्ली आपके दरवाजे पर आई है।' 'सीएए को लेकर भ्रम फैला रहे हैं लोग' प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं आज असम के हर साथी को ये आश्वस्त करने आया हूं, कि असम विरोधी, देश विरोधी हर मानसिकता को, इसके समर्थकों को, देश न बर्दाश्त करेगा, न माफ करेगा। यही ताकतें हैं जो पूरी ताकत से असम और नॉर्थ-ईस्ट में भी अफवाहें फैला रही हैं कि सीएए से यहां, बाहर के लोग आ जाएंगे, बाहर से लोग आकर बस जाएंगे। मैं असम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि ऐसा भी कुछ नहीं होगा।'
नई दिल्ली अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब पीएम नरेंद्र मोदी को संशोधित नागरिकात कानून (सीएए) को लेकर भड़के आक्रोश की वजह से असम में जापानी पीएम शिंजो आबे के साथ शिखर सम्मेलन को रद्द करना पड़ा था, लेकिन केंद्र सरकार के एक अन्य फैसले ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।कोकराझार में लोगों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए गुरुवार को सड़कों और गलियों में मिट्टी के दीए जलाए। ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन (एबीएसयू) ने कोकराझार में बाइक रैली भी निकाली। पीएम के स्वागत की जोरदार तैयारियां की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम में कोकराझार का दौरा करेंगे जहां वह बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। पिछले दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन शुरू होने के बाद से यह प्रधानमंत्री का पहला पूर्वोत्तर दौरा होगा। प्रदर्शनों में तीन व्यक्ति मारे गए थे। पीएम ने गुरुवार को ट्वीट किया, 'मैं असम में दौरे को लेकर उत्सुक हूं। मैं एक जनसभा को संबोधित करने के लिए कोकराझार में रहूंगा। हम बोडो समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए जाने का जश्न मनाएंगे जिससे दशकों की समस्या का अंत होगा। यह शांति और प्रगति के नये युग की शुरूआत का प्रतीक होगा।'बोडो समझौते पर हस्ताक्षर 27 जनवरी को सरकार द्वारा नैशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के चार धड़ों, आल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन और एक नागरिक समाज समूह के साथ किया गया था। इसका उद्देश्य असम के बोडो बहुल क्षेत्रों में दीर्घकालिक शांति लाना है। प्रधानमंत्री ने हाल के एक ट्वीट में हस्ताक्षर वाले दिन को 'भारत का एक बहुत खास दिन बताया था' और कहा था कि यह बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम लाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिनों में एनडीएफबी के विभिन्न धड़ों के 1615 से अधिक सदस्यों ने अपने हथियार सौंप दिये थे और मुख्यधारा में शामिल हो गए थे। मोदी ने 26 जनवरी को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपील की थी कि जो भी हिंसा के मार्ग पर हैं वे मुख्यधारा में लौट आयें और अपने हथियार डाल दें। मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच एक शिखर बैठक पिछले साल दिसंबर में गुवाहाटी में होनी थी लेकिन सीएए विरोधी प्रदर्शनों के चलते उसे रद्द कर दिया गया था। मोदी को हाल में गुवाहाटी में सम्पन्न 'खेलो इंडिया' खेलों के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुए।
06 फरवरी 2020, लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के कामों को गिनाया और कांग्रेस पर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा कि देश के चुनौतियों को नजरअंदाज भी किया गया. अगर आज हम चुनौतियों को चुनौती नहीं देते तो शायद देश को अनेक समस्याओं से लंबा लड़ना पड़ता. अगर कांग्रेस के रास्ते चलते शत्रु सम्पति कानून, बेनामी कानून, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नहीं बना पाते. संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद अब देश लंबा इंतजार करने को तैयार नहीं, इसलिए अब स्पीड और स्केल बढ़ाने का काम किया है. उसी तेजी से गति की वजह से दुबारा सेवा का मौका ना मिलता. अगर तेज गति ना होती तो 37 करोड़ एकाउंट, 13 करोड़ गैस, 2 करोड़ घर, दिल्ली में 1700 कॉलोनी में घर रेगुलराइज नहीं होता. हम भी आप लोगों के रास्ते पर चलते, तो शायद 70 साल के बाद भी इस देश से अनुच्छेद 370 नहीं हटता, आपके ही तौर तरीके से चलते, तो मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की तलवार आज भी डराती. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आपकी ही सोच के साथ चलते तो राम जन्मभूमि आज भी विवादों में रहती. आपकी ही सोच अगर होती, तो करतापुर साहिब कोरिडोर कभी नहीं बन पाता. आपके ही के तरीके होते, आपका ही रास्ता होता, तो भारत-बांग्लादेश विवाद कभी नहीं सुलझता. अगर कांग्रेस के रास्ते हम चलते, तो 50 साल बाद भी शत्रु संपत्ति कानून का इंतजार देश को करते रहना पड़ता. 35 साल बाद भी नेक्स्ट जनरेशन लड़ाकू विमान का इंतजार देश को करते रहना पड़ता.'
नई दिल्ली संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया। नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बताया कि आर्टिकल 370 के खात्मे के बाद जम्मू-कश्मीर में आरक्षण लागू हुआ, रियल एस्टेट ऐक्ट लागू हुआ और ऐंटी करप्शन ब्यूरो भी बनाया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को जवाब देते हुए कहा कि यह झूठ है कि जम्मू-कश्मीर पर फैसले से पहले चर्चा नहीं हुई। इस विषय पर चर्चा हुई, पूरे देश ने देखा और ज्यादातर सांसदों ने इसके समर्थन में वोट भी किया। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो मुझे कुछ लोगों के बयान ने बहुत निराश किया। कुछ लोगों ने ठहराव को ही अपनी खासियत बना लिया है। वे उसी पुराने तरीके रुके हुए थे, उन्हीं पुरानी चीजों के बारे में बात कर रहे थे। गुलाम नबी आजाद जी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर बिना किसी चर्चा के फैसला लिया गया। यह झूठ है। पूरे देश ने देखा कि इस विषय पर चर्चा हुई। सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया।' लोग भूले नहीं तेलंगाना बनाने के समय क्या हुआ था' अपनी बात आगे बढ़ाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'लोग चीजों को आसानी से भूलते नहीं हैं। मैं राज्यसभा में विपक्ष के नेता को याद दिलाना चाहता हूं कि इसी सदन में तेलंगाना बनाए जाने की कार्यवाही के दौरान क्या हुआ था। दरवाजे बंद कर दिए गए थे और लाइव टेलिकास्ट भी रोक दिया गया था। गिनाए आर्टिकल 370 हटाने के फायदे - 1. पहली बार जम्मू-कश्मीर को आरक्षण का फायदा मिला। 2. वहां ब्लॉक डिवेलपमेंट काउंसिल के चुनाव हुए। 3. रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) ऐक्ट लागू हुआ। 4. जम्मू-कश्मीर में ऐंटी करप्शन ब्यूरो का भी गठन हुआ। 5. जम्मू कश्मीर में 18 महीनों में 3.30 लाख घरों को बिजली के कनेक्शन मिले। 6. साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को आयुष्मान योजना के तहत गोल्ड कार्ड मिले। 7. डेढ़ लाख बुजुर्गों, दिव्यांगों को पेंशन मिली। 8.अब जम्मू-कश्मीर में पीएम पैकेज समेत अन्य कई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। 9. पहली बार जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस और सेना मिलकर निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं। 10. जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मी अब कन्याकुमारी या अंडमान निकोबार घूमने जा सकते हैं। 11. पहली बार महिलाओं को ये अधिकार मिला कि अगर वे जम्मू-कश्मीर से बाहर शादी करती हैं तो उनकी संपत्ति छीनी नहीं जाएगी। 12. जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को सीमापार से हो रही फंडिंग पर नियंत्रण पाया गया।
नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वाले विपक्ष का जोरदार हमला बोला। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और समझौते का जिक्र किया और कहा कि उनकी सरकार देश के राष्ट्र निर्माताओं की भावनाओं के अनुसार का काम कर रही है। पीएम ने देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू और लियाकत समझौते का जिक्र करते कहा कि नेहरू ने भी इस समझौते में पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों का जिक्र करते हुए ही समझौता किया था। उन्होंने कहा कि लोग हमपर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा रहे हैं, तो क्या पंडित नेहरू सांप्रदायिक थे? कांग्रेस ने तो गांधी को ही छोड़ दिया' पीएम ने कहा कि विपक्ष हमपर गांधी जी के कथन के हवाले से आरोप लगा रही है कि CAA पर सरकार जो कर रही है वह गांधी की भावना नहीं थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तो गांधी को छोड़ दिया है और देश आपसे कोई अपेक्षा नहीं करता है। नेहरू-लियाकत समझौते का किया जिक्र पीएम ने कहा कि 1950 में नेहरू लियाकत समझौता हुआ। इस समझौते का आधार था पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव नहीं होगा। नेहरू जैसे महान विचारक और आपके लिए सबकुछ। उन्होंने उस समय वहां की अल्पसंख्यकों के बजाए सारे नागरिक शब्द का प्रयोग क्यों नहीं किया? नेहरू जी समझौते में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शब्द पर कैसे मान गए? जो हम बता रहे हैं, वही बात नेहरू जी ने उस समय बताई थी। नेहरू ने अल्पसंख्यक शब्द क्यों प्रयोग किया उसका जवाब देकर वह खुद देकर गए। नेहरू -लियाकत साइन होने के एक साल पहले नहेरू ने असम के सीएम गोपीनाथ को एक पत्र लिखा था, आपको हिंदू शरणार्थियों और मुस्लिम प्रवासी के बीच फर्क करना ही होगा और देश को इन शरणार्थियों की जिम्मेदारी लेनी ही पड़ेगी। नेहरू-लियाकत समझौते के कुछ महीने के भीतर ही नहेरू 5 नवंबर 1950 को एक बयान दिया था। नेहरू ने कहा था कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो प्रभावित लोग भारत में सेटल होने के लिए आए हैं वे नागरिकता मिलने के हकदार है और अगर इसके लिए कानून अनुकूल नहीं है तो इसके लिए कानून में बदलाव करने की जरूरत है। 1963 में लोकसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देने के लिए विदेश राज्य मंत्री दिनेश सिंह बोल रहे थे तो आखिर में नेहरू ने टोकते हुए कहा था कि पूर्वी पाकिस्तान (अभी बांग्लादेश) में वहां की अथॉरिटी हिंदुओं पर जबरदस्त दबाव बना रही है। पाकिस्तान के हालात को देखते हुए गांधी जी ही नहीं नेहरू की भी भावना रही थी। तो क्या पंडित नेहरू सांप्रदायिक थे? इस समझौते का जिक्र कर पीएम ने पूछा क्या पंडित नेहरू सांप्रदायिक थे। क्या पंडित नहेरू हिंदू राष्ट्र बनाने चाहते थे, जो उन्होंने बातें कहीं? आज हमारी सरकार अपने राष्ट्र निर्माताओं की भावना के अनुसार चल रही है। इस देश के 130 करोड़ नगारिकों को कहना चाहता हूं कि CAA से हिंदुस्तान के किसी भी नागरिक पर किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं होने वाला है। चाहे हिंदू हो, मुस्लिम, सिख और ईसाई को कोई नुकसान होने वाला नहीं है।
नई दिल्ली राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि करीब 45 माननीय सदस्यों ने अभिभाषण पर अपने विचार प्रकट किए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये सदन इस बात के लिए गर्व कर सकता है कि पिछला सत्र काफी उपयोगी रहा, इसके लिए सभी सदस्य धन्यवाद के पात्र हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि ये अनुभवी और महानुभावों का सदन है, इससे देश को काफी अपेक्षा थी। ट्रेजरी बैंक पर बैठे लोगों को भी काफी अपेक्षा थी और मेरी स्वंय की तो काफी अपेक्षा थी कि आपके पास से बहुत अच्छी काम की बातें मिलेंगी। अच्छा मार्गदर्शन मुझ जैसे नए लोगों को मिलेगा। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि नए दशक की नए कलेवर की जो अपेक्षा थी, उसमें मुझे निराशा हाथ लगी है। ऐसा लग रहा है जहां आप ठहर गए हैं वहां से आगे बढने का नाम नहीं ले रहे हैं। कभी-कभी तो लगता है कि आप पीछे की तरफ जा रहे हैं। पीएम ने कहा कि अच्छा होता कि हताशा और निराशा का माहौल छोडकर नया उमंग, नए विचार, नई ऊर्जा के साथ देश को नई दिशा मिलती, देश को मार्गदर्शन मिलती। लेकिन शायद ठहराव को ही आपने अपना वर्चयू बना लिया है। इसलिए मुझे काका हाथरसी का एक व्यंग्य काव्य याद आता है- प्रकृति बदलती छण-छण देखो,बदल रहे हम कण-कण देखो,तुम निष्क्रिय से पड़े होभाग्यवाद पर अड़े हुए होछोड़ो मित्र! पुरानी डफली,जीवन में परिवर्तन लाओ।परंपरा से ऊंचे उठ कर,कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ। जम्मू कश्मीर को लेकर पीएम मोदी को सुनाई खरी-खरी पीएम मोदी ने कहा कि गुलाम नबी आजाद ने गलत कहा कि जम्मू कश्मीर पर बिना चर्चा के फैसला लिया गया। पूरे देश ने देखा कि इस विषय पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि गुलाम साहब याद कीजिए जब तेलंगाना बना तब दरवाजा बंद कर दिया गया, टीवी बंद कर दिया गया, चर्चा का तो कोई स्थान ही नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि अटल जी की सरकार ने उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ बनाया, ये तीनों राज्य विकास कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर पर सरकार ने जो भी फैसले लिए पूरी चर्चा के बाद लिए गए। पीएम मोदी ने कहा कि 20 जून 2018 के बाद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा। इसके बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के लोगों को आरक्षण का लाभ मिला, स्वतंत्रता के बाद पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट के चुनाव हुए। पहली बार जम्मू कश्मीर में ट्रेड और स्टॉर्टअप पॉलिसी बनी। पहली बार जम्मू कश्मीर में एंटीकरप्शन ब्यूरो की स्थापना हुई। पहली बार जम्मू कश्मीर में अलगाववाद पर कमी आई। इसके बाद पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर में हुए विकास कार्यों से भी सदन को अवगत कराया
नई दिल्ली: राज्यसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि सदन में बार-बार बताने की कोशिश की गई कि जो हिंसा हुई वही प्रदर्शन है। यहां बार-बार बताने की कोशिश की गई कि प्रदर्शन के नाम पर जो अराजकता फैलाई गई, जो हिंसा हुई, उसी को आंदोलन का अधिकार मान लिया गया। बार-बार संविधान की दुहाई, उसी के नाम पर गैर संवैधानिक गतिविधि को ढकने का काम किया गया। पीएम ने कहा कि मैं कांग्रेस की मजबूरी समझता हूं, लेकिन केरल के लेफ्ट फ्रंट के साथियों को समझना चाहिए कि वहां के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि केरल में जो प्रदर्शन हो रहे हैं उसमें अलगाववादी ताकतें शामिल हैं। यही नहीं उन्होंने सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ऐसे में मैं पूछना चाहता हूं कि जिस अराजकता से आप केरल में परेशान हैं, उसका समर्थन आप दिल्ली या देश के बाकी हिस्सों में कैसे कर सकते हैं। पीएम ने कहा कि सीएए को लेकर जो कुछ भी कहा जा रहा है, वह जो प्रचारित किया जा रहा है, उसको लेकर सभी साथियों को खुद से सवाल पूछना चाहिए। क्या देश को गलत सूचना देना, गलत राह दिखाने की प्रवृति को हमें रोकना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि ये कैसा दोहरा चरित्र है, आप 24 घंटे अल्पसंख्यकों की दुहाई देते हैं, लेकिन अतीत की गलतियों के चलते पड़ोस में अल्पसंख्यक जो बन गए, उनके साथ जो कुछ हो रहा है उनका दर्द आपको क्यों नहीं हो रही। देश की अपेक्षा है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर डराने के बजाय सही जानकारी दी जाए। हैरानी बात ये है कि विपक्ष के साथी इन दिनों काफी संवेदनशील हैं। जो लोग साइलंट थे, वे इन दिनों वाइलंट हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री के दो पुराने बयान को कहा-: पहला बयान-: This house is of opinion that in view of the insecurity of the life, property and honour of the minority communities living in the Estern wing of Pakistan and genral denial of all human rights to them in that part of pakistan, the government of india should in addition to relaxing restricions in migration of people belonging to the minority communities from east pakistan to indian union also consider steps for enlisting the world opinion। दूसरा बयान-: जहां तक ईस्ट पाकिस्तान का तालुल्लक है, उसका ये फैसला मालूम होता है कि वहां से गैर मुस्लिम,जीतने हैं सब निकाल दिए जाएं, वह एक इस्लामिक स्टेट है, एक इस्लामिक स्टेट के नाते, वह यह सोचता है कि यहां केवल इस्लाम को मानने वाले ही रह सकते हैं। गैर इस्लामिक लोग नहीं रह सकते, लिहाजा हिंदू निकाले जा रहे हैं, ईसाई निकाले जा रहे, मैं समझता हूं कि गरीब 37 हजार से ऊपर ईसाई आज वहां से भारत आ गए हैं। बौद्ध धर्म मानने वाले भी वहां से निकाले जा रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये बयान पूर्व पीएम शास्त्री ने 3 अप्रैल1964 को दिया था। पंडित नेहरु तब प्रधानमंत्री थे। इसके बाद पीएम मोदी ने राम मनोहर लोहिया की कही बात को दोहराया, जो इस प्रकार है-: हिन्दुस्तान का मुस्लमान जीए और पाकिस्तान का हिंदू भी जीए, मैं इस बात का बिल्कुल ठुकराता हूं कि पाकिस्तान के हिंदू पाकिस्तान के नागरिक हैं इसलिए हमें उनकी परवाह नहीं करनी है। पाकिस्तान का हिंदू चाहे कहां का नागरिक हो लेकिन उसकी रक्षा करना हमारा उतना ही र्कत्वय है जितना भारत के हिंदूओं का। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे समाजवादी साथी हमें माने या ना मानें लेकिन लोहिया जी को नहीं नकारें। इसके बाद उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री की ओर से शराणर्थियों पर राज्य सरकार की भूमिका पर दिया गया बयान याद किया जिसमें उन्होंने कहा कि 1964 में तब की सभी राज्यों ने रिफ्यूजी को अपने यहां शरण देने की बात कही थी।
नई दिल्ली. सीएए (CAA), एनआरसी और एनपीआर (NPR) के मुद्दे पर देश में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने संसद में बड़ा बयान दिया है. केंद्रीय गृहमंत्रालय (Home Ministry) ने कहा, एनपीआर में किसी नागरिक को कोई भी दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी. संसद के बजट सत्र (Budget Session) में विपक्ष सीएए, एनआरसी (NRC) और एनपीआर को लेकर सरकार पर लगातार हमला कर रहा है. हालांकि सरकार की ओर से पहले ही साफ किया जा चुका है कि वह सीएए के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी. इससे पहले गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा, अब तक सरकार ने देश में एनआरसी लागू करने की कोई योजना नहीं है. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के अपडेशन के दौरान हर परिवार और व्यक्ति की जानकारी ली जाएगी. इस प्रक्रिया के दौरान कागजों की मांग पर राज्य सरकारें सवाल खड़े कर रही हैं. इस पर सरकार ने कहा है कि वह राज्य सरकारों से बात करेगी. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जवाब दिया. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, ‘NPR के अपडेशन के दौरान किसी भी कागजात की जरूरत नहीं है.’ साथ ही ऐसा कोई वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा, जिससे नागरिकता पर सवाल खड़े हों.
नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रचार अभियान को धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जनसभा को संबोधित करने के लिए दिल्ली के शहादरा पहुंचे. यह जनसभा शाहदरा क्षेत्र में कड़कड़डूमा के सीबीसी ग्राउंड में हुई. पीएम मोदी ने इस रैली में दिल्ली के विकास समेत कई मुद्दों को लेकर केजरीवाल सरकार को घेरा. पीएम मोदी ने कहा दिल्ली के लोगों ने देश बदलने में बहुत मेहनत की अब ये दिल्ली को बदलेंगे. पीएम मोदी ने कहा दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं हैं, बल्कि ये हमारे हिंदुस्तान की धरोहर है. ये भारत के भिन्न भिन्न रंगो को एक जगह समेटे हुए एक जीवित परंपरा है. ये दिल्ली सबका स्वागत करती है, सत्कार करती है. बंटवारे के बाद जो लोग दिल्ली आए उन्होंने दिल्ली को बदला, जो यहां बस गए उन्होंने दिल्ली के विकास में बहुत मदद की. दिल्ली की मिट्टी में यहां के लोगों का पसीना है. 'विकास की ऊंचाइयों को छुएगी दिल्ली' पीएम मोदी ने कहा 8 फरवरी को पड़ने वाला सिर्फ सरकार बनाने के लिए बल्कि इस दशक में दिल्ली के विकास को ऊंचाइयों को पहुंचाने वाला होगा. ये काम भारतीय जनता पार्टी करेगी, जो यदि कुछ कहती है तो वही करती है, वो भारतीय जनता पार्टी जिसके लिए देश और उसके लोगों का भविष्य सबसे पहले है, जो निगेटिविटी नहीं बल्कि पॉज़िटिविटी में यकीन करती है. पीएम मोदी ने कहा हमारे लिए देश का हित सबसे बड़ा है, देश के लिए किए गए संकल्प सबसे बड़े हैं. इन संकल्पों को पूरा करने के लिए हम दिन-रात एक कर रहे हैं. उन्होंने कहा देश के सामने जो दशकों पुरानी चुनौतियां थीं, उसे सुलझा रहे हैं, दूर कर रहे हैं. 'अवैध कॉलोनियों की समस्या का हुआ निराकरण' पीएम मोदी ने कहा यहां दिल्ली में ही एक बहुत बड़ी समस्या थी, अवैध कॉलोनियों की. आज़ादी के बाद से ही, किसी ना किसी रूप से ये मामला लटका हुआ था. वोट के लिए वादे किए जाते थे, तारीख दी जाती थी, लेकिन समस्या को सुलझाता कोई नहीं था.पीएम मोदी ने कहा दिल्ली के 40 लाख से ज्यादा लोगों, जिसमें बड़ी संख्या में यहां पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोग हैं, उन्हें उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता से हमारी सरकार ने मुक्त किया है. उन्होंने कहा जिन लोगों ने सोचा नहीं था कि वो अपने जीवन में कभी अपने घर की रजिस्ट्री करा सकेंगे, अब वो अपने घर का सपना सच होते हुए देख रहे हैं. 'झुग्गी में रहने वालों को मिलेगा पक्का घर' पीएम मोदी ने कहा दिल्ली बीजेपी ने संकल्प लिया है, अपने घोषणापत्र में कहा है कि, इन कॉलोनियों के तेज विकास के लिए कॉलोनीज़ डेवलपमेंट बोर्ड बनाया जाएगा. यही नहीं, “जहां झुग्गी वहां पक्का घर” भी बनेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि झुग्गी में रहने वाले परिवारों को पक्का घर देने के लिए तेज़ी से काम किया जाएगा. पीएम मोदी ने कहा 21वीं सदी का भारत, नफरत की राजनीति से नहीं, विकास की राष्ट्रनीति से चलेगा. विकास की यही राष्ट्रनीति देश को गति भी देती और देश को नई ऊंचाई पर भी ले जाती है. 'सालों बाद देश में हुए ये बदलाव' पीएम मोदी ने कहा आर्टिकल 370 से मुक्ति कितने साल बाद मिली?--70 साल बाद, रामजन्मभूमि पर फैसला स्वतंत्रता के कितने साल बाद आया?--70 साल बाद, करतारपुर साहब कॉरिडोर कितने साल बाद बना?--70 साल बाद, भारत बांग्लादेश सीमा विवाद कितने साल बाद हल हुआ?--70 साल बाद, CAA से हिंदुओं-सिखों-ईसाइयों को नागरिकता का अधिकार कितने साल बाद मिला?--70 साल बाद, शहीद जवानों के लिए देश में नेशनल वॉर मेमोरियल कितने साल बाद बना?—50-60 साल बाद, शहीद पुलिसकर्मियों के लिए नेशनल पुलिस मेमोरियल कितने साल बाद बना?- 50-60 साल बाद, शत्रु संपत्ति कानून कितने साल बाद लागू हुआ?--50 साल बाद, बोडो आंदोलन का समाधान करने वाला समझौता कितने साल बाद हुआ?--50 साल बाद, पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ कितने साल बाद मिला?--40 साल बाद, 84 के सिख नरसंहार में दोषियों को सज़ा कितने साल बाद मिली?--34 साल बाद, वायुसेना को नेक्स्ट जनरेशन लड़ाकू विमान कितने साल बाद मिला?--35 साल बाद, बेनामी संपत्ति कानून कितने साल बाद लागू हुआ?--28 साल बाद, त्रिपुरा में ब्रू शरणार्थियों के समझौता कितने साल बाद हुआ?--23 साल बाद, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का गठन कितने साल बाद हुआ?--20 साल बाद, देश में GST कितने साल बाद लागू हुआ?--17 साल बाद. पीएम मोदी ने कहा ये फैसले पहले भी लिए जा सकते थे, ये समस्याएं पहले भी सुलझाई जा सकती थीं, लेकिन जब स्वार्थ नीति ही राजनीति का आधार हो, तो फैसले टलते भी हैं और अटकते भी हैं. पीएम मोदी ने कहा आज देश इस पहचान से आगे बढ़ चला है. आज देश में अटके और लटके विवादों और विषयों का समाधान तो हो ही रहा है, कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जो पहली बार हुए हैं. 'पहली बार देश की जनता को मिली ये सुविधाएं' प्रधानमंत्री ने कहा पहली बार, लाल बत्ती के रौब से भारतीयों को मुक्ति मिली. पहली बार, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का अधिकार मिला. पहली बार, 5 लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स ज़ीरो हुआ. पहली बार, काले धन की हेरा-फेरी करने वाली साढ़े 3 लाख संदिग्ध कंपनियों को ताला लगा. पहली बार, उद्यमियों को बिजनेस से सम्मानजनक एग्जिट का मार्ग देने वाला आईबीसी कानून बना. पहली बार, देश के हर किसान परिवार के बैंक खाते में सीधी मदद मिली. पहली बार, किसानों, मज़दूरों, छोटे व्यापारियों को पेंशन की सुविधा मिली. पहली बार, 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली. पहली बार, 10 करोड़ गरीब परिवारों तक टॉयलेट की सुविधा पहुंची. पहली बार, 8 करोड़ गरीब बहनों की रसोई में गैस का मुफ्त कनेक्शन पहुंचा. पहली बार ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों के घर में बिजली कनेक्शन पहुंचा. पहली बार, नाबालिगों से रेप के केस में फांसी की सज़ा का प्रावधान हुआ. पहली बार, मुस्लिम बेटियों-बहनों को तीन तलाक से, जुल्म और ज्यादती से मुक्ति मिली. पहली बार, देश को लोकपाल भी मिला. वैसे देश के लोगों को तो लोकपाल मिल गया लेकिन दिल्ली के लोग आज भी इंतजार कर रहे हैं. इतना बड़ा आंदोलन, इतनी बड़ी-बड़ी बातें, उन सबका क्या हुआ. पीएम मोदी ने कहा शनिवार को जो बजट आया है, वो इस साल के लिए ही नहीं बल्कि इस पूरे दशक को दिशा देने वाला है. पीएम ने कहा इस बजट का लाभ दिल्ली के नौजवानों, दिल्ली के व्यापारियों, यहां के मध्यम वर्ग, गरीब और यहां की महिलाओं, सभी को होगा. 'बजट में लोगों को दी गईं ये राहत' प्रधानमंत्री ने कहा बजट में, युवाओं के रोज़गार से जुड़े एक बड़े रिफॉर्म का ऐलान किया गया है. ये रिफॉर्म है- नॉन गजेटेड सरकारी नौकरियों में अलग-अलग एग्ज़ाम की परेशानी से युवाओं को मुक्ति दिलाना. केंद्र सरकार की भर्तियों में इंटरव्यू खत्म करने से करप्शन पर चोट हुई, अब इस नए कदम से युवाओं की बहुत बड़ी टेंशन समाप्त होगी. उन्होंने कहा अब एक ही कॉमन ऑनलाइन एग्ज़ाम से एक ही परीक्षा ली जाएगी और उसके आधार पर ही, अलग-अलग सेवाओं में जाने का रास्ता खुलेगा. इस व्यवस्था की देखरेख के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन किया जा रहा है. दिल्ली के कारोबारियों से भाजपा का करीबी रिश्ता' पीएम ने कहा दिल्ली के व्यापारियों के साथ, यहां के कारोबारियों के साथ भाजपा का बहुत करीबी रिश्ता रहा है. भाजपा का हमेशा से प्रयास रहा है कि व्यापारियों की दिक्कतें कम हों, उनकी परेशानी कम हो और वो खुलकर अपना काम कर पाएं. यहां के व्यापारियों को आसानी से लोन मिले, तेज गति से लोन मिले, कैश फ्लो में दिक्कत न हो, इसके लिए बीते वर्षों में हमने अनेक कदम उठाए हैं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा अभी तक एक करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले लघु उद्योगों को, व्यापारियों को ऑडिट कराना पड़ता था. अब इस सीमा को 5 करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया है. ये सरकार का देश के उद्यमियों पर, दिल्ली के लाखों व्यापारियों-कारोबारियों पर विश्वास का ही उदाहरण है. 'बजट में पूरी की कारोबारियों की मांग' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा दिल्ली समेत देश के व्यापारियों की एक पुरानी शिकायत रही है कि उन्हें टैक्स अथॉरिटीज के बहुत दबाव का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए हमने पिछले साल इंडायरेक्ट टैक्स सेटेलमेंट स्कीम शुरू की थी. इस स्कीम ने अनेकों व्यापारियों को कानूनी केसों से बचाया था. इसके बाद से ये मांग हो रही थी कि ऐसी ही कोई स्कीम प्रत्यक्ष करों के लिए शुरू की जाए. इस बजट में हमने व्यापारियों की, कारोबारियों की ये मांग भी पूरी कर दी है पीएम ने कहा दिल्ली-एनसीआर, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स, आईसीटी और दूसरी नेक्स्ट जेनरेशन से जुड़ी टेक्नॉलॉजी की मैन्यूफेक्चरिंग का भी हब है. भारत इस सेक्टर में दुनिया में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. इसको विस्तार देते हुए बजट में अनेक प्रावधान किए गए हैं. पीएम मोदी ने कहा GST की वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के जरूरत की लगभग 99% चीजों पर पहले ही टैक्स कम हो गया है. पहले औसत GST रेट 14.4% था. अब इसे और कम करते हुए 11.8% पर ले आया गया है. GST ने व्यापारियों को भी अनेक तरह के टैक्सों के जाल से बचाया है. GST ने अनेकों चुंगियां-चेकपोस्ट खत्म कर दिए हैं. अब हरियाणा या यूपी सामान भेजना हो, या मंगवाना हो, दिल्ली के व्यापारियों की दिक्कतें कम हुई हैं. 'सुरक्षाबलों की सतर्कता से रुके हमले' पीएम मोदी ने कहा एक समय था जब दिल्ली में आए दिन आतंकी हमलों की वजह से, बम धमाकों में निर्दोष लोग मारे जाते थे. देश के सुरक्षाबलों और दिल्ली के लोगों की सतर्कता से अब ये हमले होने रुक गए हैं. लेकिन याद करिए, जब इन्हीं हमलों के गुनहगारों को दिल्ली पुलिस ने बाटला हाउस में मार गिराया, तो उसे फर्जी एनकाउंटर कहा गया. यही वो लोग हैं जिन्होंने बाटला हाउस में आतंकियों को मारने पर दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. प्रधानमंत्री ने कहा यही वो लोग हैं जो भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की इच्छा रखने वालों को आज तक बचा रहे हैं.क्या दिल्ली के लोग ये भूल सकते हैं? इसकी वजह क्या थी? वोटबैंक की राजनीति, तुष्टिकरण की राजनीति. प्रधानमंत्री ने कहा सीलमपुर हो, जामिया हो या फिर शाहीन बाग, बीते कई दिनों से सिजिटनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर प्रदर्शन हुए. क्या ये प्रदर्शन सिर्फ एक संयोग है, नहीं. ये एक प्रयोग है, इसके पीछे राजनीति का एक ऐसा डिजाइन है, जो राष्ट्र के सौहार्द को खंडित करने वाला है. 'ये सिर्फ कानून का विरोध नहीं' प्रधानमंत्री ने कहा ये सिर्फ एक कानून का विरोध होता, तो सरकार के तमाम आश्वासनों के बाद समाप्त हो जाता. लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस नागरिकों को भड़का रहे हैं. संविधान और तिरंगे को सामने रखते हुए ज्ञान बांटा जा रहा है और असली साजिश से ध्यान हटाया जा रहा है. पीएम ने कहा हमारा संविधान ही देश की न्यायपालिका, हमारी अदालतों का आधार है. संविधान की भावना के अनुरूप ही न्यायालय चलते हैं, लोगों को इंसाफ देते हैं. उन्होंने कहा समय-समय पर, अलग-अलग केसों में अदालतों की, हमारे देश की सर्वोच्च अदालत की भावना यही रही है कि विरोध प्रदर्शनों से सामान्य मानवी को दिक्कत न हो. प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा-तोड़फोड़-आगजनी पर हमेशा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट्स ने अपनी नाराजगी जताई है. लेकिन ये लोग अदालतों की परवाह नहीं करते हैं. ये कोर्ट की बात नहीं मानते और बातें करते हैं संविधान की.
नई दिल्‍ली, 31 जनवरी 2020, वर्ष 2019-2020 का इकोनॉमिक सर्वे या आर्थ‍िक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया गया है. इस सर्वे रिपोर्ट में देश की अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर कई अहम आंकड़े पेश किए गए हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में GDP ग्रोथ रेट 6-6.5 फीसदी के बीच रहेगी. जीडीपी ग्रोथ रेट को लेकर सरकार का ये अनुमान चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 0.5 से 1 फीसदी तक अधिक है. बता दें कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 5 फीसदी पर रखा है.आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान है. - क्रूड की कीमतों में राहत से चालू खाता घाटा कम हुआ. वर्ष 2019-20 की प्रथम छमाही में आयात में कमी आई जो निर्यात में कमी से कहीं अधिक है. - मुद्रास्फीति की दर अप्रैल 2019 में 3.2 फीसदी से तेजी से गिरकर दिसंबर, 2019 में 2.6 फीसदी पर आ गई. - आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास की गति तेज होने में 10 क्षेत्रों का प्रमुख योगदान रहा है. -सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि FY 2020-2025 के बीच सरकार इंफ्रा सेक्‍टर में 102 लाख करोड़ का निवेश करेगी. - सर्वे रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि अगले तीन साल में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी 100 लाख करोड़ के निवेश की जरुरत है ताकि इकोनॉमी की ग्रोथ में यह बाधा न बने. - साल 2014 से ही महंगाई निरंतर घटती जा रही है.2014-19 के दौरान अधिकतर आवश्‍यक खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव में उल्‍लेखनीय कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की विशाल अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के लिए एक कुशल बैंकिंग क्षेत्र की आवश्यकता है. - आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए व्यापार अनुकूल नीति को प्रोत्साहन देना अहम है. इसके साथ ही ‘एसेम्बल इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ को ‘मेक इन इंडिया’ से जोड़ने का सुझाव दिया गया है. इससे भारत के निर्यात बाजार का हिस्सा 2025 तक लगभग 3.5 प्रतिशत तथा 2030 तक 6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. - सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि औद्योगिक क्षेत्र का प्रदर्शन वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2018-19 में सुधरा है. हालांकि, राष्‍ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) द्वारा अनुमानित सकल घरेलू उत्‍पाद के अनुसार वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में 8.2 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2019-20 की पहली छमाही (एच1) (अप्रैल-सितम्‍बर) में औद्योगिक क्षेत्र का सकल मूल्‍यवर्धन 1.6 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया. - औद्योगिक क्षेत्र में कम वृद्धि की मुख्‍य वजह विनिर्माण क्षेत्र है, जिसमें वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 0.2 प्रतिशत की नकारात्‍मक वृद्धि दर्ज की गई. यहां बता दें कि सकल मूल्‍यवर्धन अर्थशास्त्र में, किसी भी क्षेत्र, उद्योग, अर्थव्यवस्था या व्यावसायिक क्षेत्र में उत्पादित माल व सेवाओं के मूल्य की माप है. - औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष 2017-18 में 4.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018-19 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. मौजूदा वर्ष 2019-20 (अप्रैल-नवम्‍बर) के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि में 5 फीसदी की तुलना में आईआईपी में महज 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई. - साल 2018-19 के दौरान भारतीय रेलवे ने 120 करोड़ टन माल ढुलाई की और यह चौथा सबसे बड़ा माल वाहक बना.इसी तरह रेलवे 840 करोड़ यात्रियों की बदौलत दुनिया का सबसे बड़ा यात्री वाहक बना है. बहरहाल, मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार (CEA) कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम दोपहर करीब 1.45 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आर्थिक सर्वे के बारे में विस्तार से बताएंगे. 2019 की सर्वे रिपोर्ट में क्‍या था? - बीते साल सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि जीडीपी की वृद्धि दर वर्ष 2017-18 में 7.2 फीसदी की जगह वर्ष 2018-19 में 6.8 फीसदी रही. वहीं अच्छी विनिर्माण और निर्माण गतिविधि के कारण 2018-19 में औद्योगिक वृद्धि में भी तेजी आई थी. साल 2017-18 में ये दर 5.9 फीसदी था जो 2018-19 में 6.9 फीसदी बताया गया था. राजकोषीय घाटा 2017-18 में जीडीपी के 3.5 फीसदी से घटकर 2018-19 में 3.4 फीसदी रह गया. - साल 2019 के सर्वे रिपोर्ट की मुताबिक भारतीय मुद्रा के संदर्भ में रुपये के अवमूल्यन के कारण जहां 2018-19 के दौरान निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई, वहीं आयात में कमी आई. हालांकि, एक साल पहले के मुकाबले विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है. साल 2017-18 में विदेशी मुद्रा भंडार 424 बिलियन डॉलर था जो 2018-19 में 412.9 बिलियन डॉलर रह गया.
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2020, मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट पेश होने से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया. अपने भाषण में राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, नागरिकता कानून लागू करने को बड़ा फैसला बताया. संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने विरोध के नाम पर हिंसा करने की आलोचना की. राष्ट्रपति के भाषण में कैसे मोदी सरकार के फ्यूचर प्लान की झलक दिखी, बड़ी बातों में जानें... 1. विभाजन के समय भारत के लोगों को काफी परेशानी हुई. महात्मा गांधी ने कहा था कि जो हिंदू पाकिस्तान में नहीं रहना चाहते वो भारत आ सकते हैं, मेरी सरकार ने नागरिकता कानून लागू कर बापू की इच्छा पूरी की. 2. राष्ट्रपति ने जैसे ही अपने भाषण में CAA का जिक्र किया तो विपक्षी नेताओं ने संसद में हंगामा किया और नारेबाजी की. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस दौरान पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे हमले की निंदा की और ननकाना साहिब की घटना का जिक्र किया. 3. सरकार यह पुन: स्पष्ट करती है कि भारत में आस्था रखने वाले और भारत की नागरिकता लेने के इच्छुक दुनिया के सभी पंथों के व्यक्तियों के लिए जो प्रक्रियाएं पहले थीं, वे आज भी वैसी ही हैं. किसी भी पंथ का व्यक्ति इन प्रक्रियाओं को पूरा करके, भारत का नागरिक बन सकता है. शरणार्थियों को नागरिकता देने से किसी क्षेत्र और विशेषकर नॉर्थ ईस्ट पर कोई सांस्कृतिक प्रभाव न पड़े, इसके लिए भी सरकार ने कई प्रावधान किए हैं. 4. हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी भी विचारधारा के नेता या समर्थक होने से पहले हम देश के नागरिक हैं. हमारे देश की प्रतिष्ठा हमारी दलीय प्रतिबद्धताओं से कहीं बढ़कर है. 5. सरकार ने आतंकवाद फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी हुई है. सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. 6. Neighbourhood First की नीति हमारी प्राथमिकता है. अपने पड़ोसियों के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों के साथ हमारे संबंध मजबूत हुए हैं. यही कारण है कि अनेक देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान भारत को दिया है. आसियान और अफ्रीकी देशों के साथ अपने सहयोग को हम नए स्तर पर ले जा रहे हैं. 7. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का लक्ष्य, सदैव मानवता की सेवा रहा है. देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम के कारण चंद्रयान-2 ने देश के युवाओं में टेक्नोलॉजी के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया है. मेरी सरकार द्वारा चंद्रयान-3 को स्वीकृति दी जा चुकी है. ISRO द्वारा मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम- गगनयान तथा आदित्य-एक मिशन पर भी तेजी से कार्य हो रहा है. 8. सरकार द्वारा शुरू किए गए नमामि गंगे मिशन के सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं. इस मिशन के तहत 7 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम पूरा हो चुका है और 21 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर कार्य प्रगति पर है. 9. सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि पर फैसले के बाद देशवासियों द्वारा जिस तरह परिपक्वता से व्यवहार किया गया, वह भी प्रशंसनीय है. 10. पारस्परिक चर्चा-परिचर्चा तथा वाद-विवाद लोकतंत्र को और सशक्त बनाते हैं. वहीं विरोध के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा, समाज और देश को कमजोर करती है. 11. संसद के दोनों सदनों द्वारा दो तिहाई बहुमत से संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को हटाया जाना, न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि इससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के समान विकास का भी मार्ग प्रशस्त हुआ है. 12. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का तेज विकास, वहां की संस्कृति और परंपराओं की रक्षा, पारदर्शी व ईमानदार प्रशासन और लोकतंत्र का सशक्तीकरण, मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में हैं. 13. सरकार ने रिकॉर्ड समय में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण करके, गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर इसे राष्ट्र को समर्पित किया. 14. देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाले 40 लाख से ज्यादा लोग, बरसों से इस अपेक्षा में जी रहे थे कि एक दिन उन्हें अपने घर का मालिकाना हक और गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार मिलेगा. दिल्ली की 1,700 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की इस अपेक्षा को भी सरकार ने पूरा किया है. 15. आज भी देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 15 करोड़ घर ऐसे हैं, जहां पाइप से पानी की सप्लाई नहीं होती है. देश के गांवों में, हर घर तक पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेय जल पहुंचे, इसके लिए सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया है. 16. सरकार के प्रयासों की वजह से वर्ष 2022 तक सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड की राजधानियां रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगी. 17. पांच दशकों से चली आ रही बोडो समस्या को समाप्त करने के लिए केंद्र और असम सरकार ने हाल ही में बोडो संगठनों के साथ ऐतिहासिक समझौता किया है. इस समझौते से, ऐसी जटिल समस्या, जिसमें 4 हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई, उसका समाधान निकला है. 18. सरकार के विशेष आग्रह पर सउदी अरब ने हज कोटा में अभूतपूर्व वृद्धि की थी जिस वजह से इस बार रिकार्ड 2 लाख भारतीय मुस्लिमों ने हज में इबादत की. भारत पहला ऐसा देश है जिसमें हज की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और ऑनलाइन की जा चुकी है. 19. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 8 करोड़ से ज्यादा किसान-परिवारों के बैंक खाते में 43 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई जा चुकी है. 20. देश के 50 करोड़ से अधिक पशुधन को स्वस्थ रखने का एक बहुत बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. नेशनल एनीमल डिज़ीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत पशुओं के Foot and Mouth Disease से बचाव के लिए उनके टीकाकरण व अन्य उपायों पर 13 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं. 21. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत औसतन प्रतिवर्ष साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा किसान बहुत कम प्रीमियम पर अपनी फसलों का बीमा करा रहे हैं. इस योजना के तहत बीते तीन वर्षों में किसानों को लगभग 57 हजार करोड़ रुपए की क्लेम राशि का भुगतान किया गया है. 22. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 75 लाख गरीब अपना मुफ्त इलाज करा चुके हैं. इसी वर्ष देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिससे देश में मेडिकल की लगभग 16 हज़ार MBBS और 4 हज़ार से अधिक PG सीटों की बढ़ोतरी होगी. 23. भारतनेट योजना के तहत अब तक सवा लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ा जा चुका है. 2014 में देश के ग्रामीण इलाकों में 60 हजार कॉमन सर्विस सेंटर्स थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 3 लाख 65 हजार से ज्यादा हो गई है. 24. मेरी सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करके अर्थव्यवस्था में हर स्तर पर काम किया जा रहा है. दुनियाभर से आने वाली चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है. हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 450 बिलियन डॉलर से भी ऊपर के ऐतिहासिक स्तर पर है. 25. पूज्य बापू का ग्राम स्वराज का सपना हो, नेहरू जी का आधुनिक भारत बनाने का सपना हो या फिर दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय का सपना हो. भारत का संविधान सपनों को पूरा करने में हमारा मार्गदर्शक है. हमारा संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें उनके कर्तव्यों के बारे में बताता है.
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2020,बजट सत्र (Budget session 2020) की आज शुक्रवार से शुरुआत हो रही है और आर्थिक सर्वेक्षण आज पेश किया जाएगा. बजट सत्र में हिस्सा लेने के लिए संसद भवन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस सत्र में अधिकतम आर्थिक विषयों पर चर्चा होगी. वैश्विक-आर्थिक स्थितियों में भारत कैसे फायदा उठा सकता है. इस पर भी बहस की जाएगी. बजट सत्र में हिस्सा लेने के लिए संसद भवन में पीएम मोदी ने कहा कि इस सत्र में अधिकतम आर्थिक विषयों पर चर्चा होगी. वैश्विक-आर्थिक स्थितियों में भारत कैसे फायदा उठा सकता है. इस पर चर्चा होगी. पीएम नरेंद्र मोदी ने बजट को लेकर कहा कि 2020 का यह पहला सत्र है. इस दशक का भी यह पहला सत्र है. हम सबका प्रयास रहना चाहिए कि इस सत्र में दशक के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जाए. कल बजट पेश किया जाएगा. विपक्ष से अपील करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैश्विक परिवेश का अधिकतम लाभ भारत को मिले. हमारी सरकार की पहचान दलित, पीड़ित, वंचित, शोषित, महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश की है. उन्होंने आगे कहा कि इस दशक में हमारा इन पर ही बल रहेगा. दोनों सदन में आर्थिक विषयों पर, लोगों को सशक्त करने पर बहुत व्यापक चर्चा हो. अधिक अच्छी चर्चा हो. हम यही चाहते हैं.
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2020,नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश को कमजोर करने का प्रयास करार दिया. बजट सत्र के शुभारंभ के मौके पर शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि विरोध के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा, समाज और देश को कमजोर करती है. मोदी सरकार के फ्यूचर प्लान के बारे में बताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मेरी सरकार का स्पष्ट मत है कि पारस्परिक चर्चा-परिचर्चा तथा वाद-विवाद लोकतंत्र को और सशक्त बनाते हैं. विरोध के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा, समाज और देश को कमजोर करती है. महात्मा गांधी की इच्छा को पूरा किया' नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, 'मुझे प्रसन्नता है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून बनाकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इच्छा को पूरा किया गया है. मैं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की निंदा करता हूं और विश्व समुदाय से इसका संज्ञान लेने और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का भी आग्रह करता हूं.' महात्मा गांधी को याद करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि विभाजन के बाद बने माहौल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान के हिंदू और सिख, जो वहां नहीं रहना चाहते, वे भारत आ सकते हैं. उन्हें सामान्य जीवन मुहैया कराना भारत सरकार का कर्तव्य है. बापू के विचार को आगे बढ़ायाः राष्ट्रपति उन्होंने आगे कहा कि बापू के इस विचार का समर्थन करते हुए, समय-समय पर अनेक राष्ट्रीय नेताओं और राजनीतिक दलों ने भी इसे आगे बढ़ाया. हमारे राष्ट्र निर्माताओं की उस इच्छा का सम्मान करना, हमारा दायित्व है. सीएए पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मेरी सरकार यह फिर स्पष्ट करती है कि भारत में आस्था रखने वाले और भारत की नागरिकता लेने के इच्छुक दुनिया के सभी पंथों के व्यक्तियों के लिए जो प्रक्रियाएं पहले थीं, वे आज भी वैसी ही हैं. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी पंथ का व्यक्ति इन प्रक्रियाओं को पूरा करके, भारत का नागरिक बन सकता है. शरणार्थियों को नागरिकता देने से किसी क्षेत्र और विशेषकर नॉर्थ ईस्ट पर कोई सांस्कृतिक प्रभाव न पड़े, इसके लिए भी सरकार ने कई प्रावधान किए हैं.
31 जनवरी 2020, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के कदम को ऐतिहासिक करार दिया है. बजट सत्र के शुभारंभ के दौरान दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि संसद के दोनों सदनों द्वारा दो तिहाई बहुमत से संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को हटाया जाना, न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि इससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास होगा. मोदी सरकार के फ्यूचर प्लान को बताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का तेज विकास, वहां की संस्कृति और परंपराओं की रक्षा, पारदर्शी व ईमानदार प्रशासन और लोकतंत्र का सशक्तीकरण, मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में हैं.
नई दिल्ली संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण देने के लिए गिरफ्तार जेएनयू छात्र शरजील इमाम भारत को इस्लामिक देश बनाने का मंसूबा रखता है। यह बड़ी जानकारी दिल्ली पुलिस की पूछताछ में सामने आई है। बता दें कि शरजील फिलहाल दिल्ली पुलिस की रिमांड पर है। पुलिस सूत्रों ने बताया है कि शरजील कट्टरपंथ से बहुत ज्यादा प्रभावित है और उसे गिरफ्तारी का कोई मलाल नहीं है। भारत को इस्लामिक देश बनाने का है मंसूबा पुलिस ने शरजील को बिहार के जहानाबाद से मंगलवार को गिरफ्तार किया था। उसने असम को देश के बाकी हिस्से के काटनेवाला भड़काऊ भाषण दिया था जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अब पुलिस सूत्रों से उससे पूछताछ के दौरान की कुछ बातें सामने आई हैं। सूत्र बताते हैं कि शरजील इमाम कट्टरपंथी है और मानता है कि भारत को इस्लामिक देश होने चाहिए। सूत्रों के अनुसार उसने यह भी मान लिया है कि उसकी विडियोज से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। फिलहाल उसके भाषण वाली विडियोज को फरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। शरजील ने पूछताछ में यह भी कहा है कि उसे अपनी गिरफ्तारी का कोई मलाल नहीं है। अब पुलिस यह देख रही है कि उसका इस्लामिक यूथ फेडरेशन ऐंड पॉप्यूलर फ्रंट ऑफ इंडिया से कोई संबंध है या नहीं। बता दें कि सीएए के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों में इस्लामिक यूथ फेडरेशन ऐंड पॉप्यूलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( पीएफआई) का नाम आया था। पीएफआई एक उग्र इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन है। इसपर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, ‘शरजील के पास मटीरियल (संदिग्ध जानकारी) बहुत है। अब तक उससे हुई बातचीत से पता चला है कि शरजील के पीछे कुछ हद तक पीएफआई का भी हाथ है। लेकिन इसकी पुष्टि के लिए अभी और वक्त चाहिए।’ शरजील को लगातार शिफ्ट कर रही पुलिस मिली जानकारी के मुताबिक, पूछताछ में लगी टीमें शरजील को कुछ देर एक स्थान पर पूछताछ करके दूसरी जगह शिफ्ट कर दे रही हैं, ताकि वो मानसिक दबाब में रहे। साथ ही पुलिस को बिना किसी ज्यादा जद्दोजहद के शरजील इमाम से ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल हो सके। दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के एक सूत्र के मुताबिक, ‘पुलिस से बचने के लिए इधर-उधर छिपता फिर रहा शरजील तीन-चार दिन से ठीक से सो नहीं पाया था। मंगलवार को गिरफ्तार होने के बाद से भी वो लगातार चल ही रहा है। या फिर उससे पुलिस टीमें पूछताछ कर रही हैं।’ नींद की खुमारी में शरजील, पुलिस करती रही पूछताछ बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया। उसके बाद आधी रात से भी ज्यादा वक्त तक उससे दिल्ली पुलिस की तमाम टीमों पूछताछ करती रहीं। इस दौरान नींद की खुमारी और पुलिस का भय उसकी आंखों और चेहरे पर साफ-साफ झलक रहा था। वो सोना चाह रहा था, लेकिन पुलिस उसे जगाकर कम समय में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां लेने को बेताब थी। पुलिस का मानना है कि थकान की आड़ लेकर आरोपी सिर्फ रिमांड का वक्त किसी तरह से गुजार देना चाहता है।
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2020, भारतीय सेना ने पिछले दो सालों में गोला बारूद आदि हथियारों की कमी पूरी कर ली है और अब वह हथियार खरीद की होड़ में है. सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने इंडिया टुडे को बताया कि हथियारों की कमी अब बीते दिनों की बात है. उन्होंने कई अ​हम मुद्दों पर एक विशेष बातचीत में कहा, 'हमारे भंडार अभी भरे हुए हैं और स्टॉक का लेवल काफी ऊंचा है. पहले जो कमी सामने आई थी, उसे पूरा कर लिया गया है.' सेना की मारक क्षमता में वृद्धि हुई पिछले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ से अधिक की हथियार खरीद ने सुनिश्चित किया है कि कमी पूरी की गई और सेना की मारक क्षमता में वृद्धि हुई है. 2016 में उड़ी हमले के बाद सेना को गंभीर रूप से गोला बारूद की कमी और आंतरिक समीक्षा का सामना करना पड़ा था. सरकार के लिए यह खतरे की घंटी थी. उड़ी हमले के बाद सेना ने आंतरिक समीक्षाओं की सूचना को सरकार से साझा किया था, जिससे पता चला कि सेना के पास गोला-बारूद का भंडार मात्र इतना ही है कि अगर 10 दिनों तक ढंग से युद्ध हो तो वह खत्म हो जाएगा. लेकिन पिछले कुछ साल में यह स्थिति बदल गई है. उसके बाद से टैंक और तोपखाने के लिए हथियार गोला बारूद बढ़ाए गए और जो गंभीर स्थिति बनी थी, उससे निजात पा ली गई. जनरल नरवणे ने कहा, 'सरकार ने अच्छी पहल की और सेना के उप-प्रमुखों को गोला बारूद की खरीद के लिए आपातकालीन अधिकार दिए. इसका परिणाम यह हुआ कि हथियार संबंधी तमाम मसलों को सुलझा लिया गया क्योंकि खरीद में तेजी लाई गई.' सेना ने पिछले तीन वर्षों में ​हथियार खरीद पर विशेष गौर किया और विशेष रूप से टैंक और आर्टिलरी गन के लिए नए गोला बारूद खरीदने पर ध्यान केंद्रित किया गया. बजट की चिंता नहीं सेना की उम्मीदों के बारे में बात करते हुए सेना प्रमुख ने बजट को प्राथमिकता दी. सेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आगामी आवंटन में सेना की आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा. सेना प्रमुख नरवणे ने कहा, 'आवंटन के बावजूद, पिछले कुछ वर्षों में हमने सेना में उच्च तकनीक प्लेटफार्मों को शामिल किया है. चिंतित होने की कोई बात नहीं है, हम हमेशा सभी आपरेशनों और जरूरतों के लिए तैयार हैं.' उन्होंने कहा कि सेना ने अपनी आवश्यकताओं के बारे में सरकार को बता दिया है और आशा है कि बजट में मौजूदा जरूरतों के अनुसार आवंटन किया जाएगा. पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद सेना प्रमुख ने कहा कि कश्मीर में हिंसा में कमी आने के बावजूद, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी कैंप और आतंकी बुनियादी ढांचे का अस्तित्व बना हुआ है. उन्होंने कहा, 'अभी भी 20-25 आतंकी शिविर हैं जिनमें 250-300 आतंकवादी सीमा पार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि सेना के पास एक मजबूत काउंटर टेरर ग्रिड है और खुफिया सूचनाओं के अनुसार रणनीतियों की समीक्षा की जाती है. कश्मीर की स्थिति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के समाप्त होने से पहले कश्मीर घाटी में हिंसा बहुत ज्यादा थी. उन्होंने कहा, 'अगस्त में अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले घाटी में पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियां बहुत ज्यादा हो रही थीं. एक असुरक्षा का माहौल था. लेकिन अब हिंसा में काफी कमी आई है और भविष्य में हालात और बेहतर होंगे.
नई दिल्ली, 28 जनवरी 2020, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जब पाकिस्तान के 90 हजार सैनिक हमारे कब्जे में थे भारत ने उनके एवज में करतारपुर साहिब को वापस क्यों नहीं लिया. दिल्ली में एनसीसी की सालाना रैली को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश का बंटवारा किन परिस्थितियों में हुआ वे इस पर नहीं जाना चाहते हैं. पीएम ने कहा कि किनके स्वार्थों की वजह से बंटवारा हुआ इस पर जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन बंटवारे के वक्त कागज पर एक लकीर खींच दी गई है और इस लकीर ने करतारपुर गुरुद्वारे को पाकिस्तान में कर दिया. कांग्रेस की सरकार से पीएम का सवाल पीएम ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकरों से सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर ऐसा होने क्यों दिया गया. दशकों तक सिख श्रद्धालु वहां जाने के लिए इंतजार करते रहे. लेकिन उनकी सरकार ने सालों पुरानी समस्या का समाधान कर सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरिडोर का रास्ता खोला. वापस ले सकते थे करपारपुर प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को हमारी सेना ने बंदी बनाया था, वो हमारी सेना के कब्जे में थे, देश उन्हें छोड़ने के लिए कुछ भी शर्तें तय करता, जो चाहे वो निकलवा सकता था. जब 90 हजार पाकिस्तानी सैनिक हमारे कब्जे में थे तो हम करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे, लकीर बदल सकते थे. लेकिन ये भी नहीं किया गया. भारत के पुराने वायदे को पूरा करने के लिए CAA प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से आजाद भारत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों से ये वादा किया था कि अगर उनको जरूरत होगी तो वो भारत आ सकते हैं. पीएम ने कहा कि यही इच्छा महात्मा गांधी की भी थी और इसी मुद्दे को लेकर 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता भी हुआ था. पीएम ने कहा कि ऐसे लोगों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को रोकने के लिए भारत के पुराने वादे को पूरा करने के लिए आज बीजेपी सरकार CAA लेकर आई है.
नई दिल्ली नई दिल्ली में एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान का बिना नाम लिए कड़ी चेतावनी दी। पीएम मोदी ने कहा कि पड़ोसी देश जानता है कि वह भारत से तीन-तीन युद्ध हार चुका है। भारतीय सेना चाहे तो उसे हफ्ते 10 दिन में हरा धूल चटा सकती है। उन्होंने यहां कांग्रेस, बीएसपी समेत विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। पीएम ने कहा कि पहले की सरकारों ने दशकों तक संसद में नागरिकता संशोधन कानून बिल, एनिमी प्रॉपर्टी बिल लटकाए रखे और अपनी वोट बैंक की राजनीति करते रहे। एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, 'हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमारे खिलाफ 3-3 युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को 10 से 12 का वक्त लगेगा उन्हें धूल चटाने में। अब वह दशकों से भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर कर रहा है। इसमें कई नागरिकों की जान जा रही है, हमारे जवान शहीद हो रहे हैं।' 'मोदी के लिए देश की प्रतिष्ठा सबकुछ है' सीएए-एनआरसी पर पीएम ने कहा, 'अफवाहें फैलाने वाले यह समझ लें मोदी अपनी प्रतिष्ठा के लिए पैदा नहीं हुआ है। मोदी के लिए देश की प्रतिष्ठा ही सबकुछ है। दशकों पुरानी समस्याओं की सुलझा रही हमारी सरकार के फैसले पर जो लोग सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा रहे हैं, उनका असली चेहरा भी देश देख चुका है और देख रहा है। मैं फिर कहूंगा- देश देख रहा है, समझ रहा है। चुप है, लेकिन सब समझ रहा है।' 'आज घर में घुसकर सबक सिखाया जाता है' इसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा, 'पहले की सरकारें सोचती थीं कि आतंकवाद, बम धमाके यह सब कुछ लॉ ऐंड ऑर्डर की दिक्कत है। भारत मां लहूलुहान होती गई। बातें बहुत हुईं, भाषण बहुत हुए लेकिन जब हमारी सेना ऐक्शन के लिए कहती तो उन्हें मना कर दिया जाता।' पीएम मोदी ने आगे कहा, 'आज युवा सोच है, युवा मन के साथ देश आगे बढ़ रहा है, इसलिए वो सर्जिकल स्ट्राइक करता है, एयर स्ट्राइक करता है और आतंक के सरपरस्तों को उनके घर में जाकर सबक सिखाता है।' सीएए को लेकर मायावती पर निशाना सीएए पर बीएसपी और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों पर जुर्म होता रहा है। इन देशों के अल्पसंख्यकों के लिए भारत का दायित्व था कि उनको शरण दें लेकिन उससे मुंह फेर लिया गया। भारत के पुराने वादों को पूरा करने के लिए हमारी सरकार सीएए लेकर आई, ऐसे लोगों को नागरिकता दे रही है तो कुछ दल अपने वोट बैंक की राजनीति करने में लगे हैं। आखिर किसके लोगों के हित में काम कर रहे हैं।' पाकिस्तान में दलितों पर अत्याचार' पीएम मोदी ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा, 'कुछ लोग खुद को दलितों का हितैषी बताते हैं। उन लोगों को पाकिस्तान में दलितों का अत्याचार दिखाई नहीं होता। ये भूल जाते हैं किजो पाकिस्तान में अत्याचारों से भागकर आएं है, उनमें से ज्यादातर दलित भाई हैं। वहां की सेना ने एक विज्ञापन छपवाया था। यह विज्ञापन सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए था। उसमें क्या लिखा था, उसमें लिखा कि सफाई कर्मचारी के लिए वही अप्लाइ कर सकते हैं जो मुस्लिम नहीं है। यानी इसका सीधा मतलब है कि हमारे इन्हीं दलित भाई-बहनों के लिए ये विज्ञापन था। इसी काम के लिए हिंदुस्तान के लोगों का उपयोग हो रहा है और हम चुप बैठे रहे।' बोडो समझौते पर बोले पीएम मोदी बोडो समझौते का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं, पूरे देश में शांति होती जा रही है। पहले नॉर्थ ईस्ट के साथ जिस तरह की नीति अपनाई गई, आप जानते हैं। दशकों तक वहां के लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया गया। वहां की समस्या और चुनौतियों को अपने हाल में छोड़ दिया। 5-6 साल दशक तक वहां कई क्षेत्रों में उग्रवाद की समस्या बनी रही। कई संगठन बनते गए जो हिंसा में विश्वास करते हैं लोकतंत्र में नहीं, इसमें कई सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए।' 'खुले मन से स्टेकहोल्डर से बात की' पीएम मोदी ने आगे कहा, 'हम उन्हें ऐसे ही छोड़ देते यह हमारी कार्यसंस्कृति नहीं है। आपने देखा होगा अपने मोहाइल पर, मीडिया या अखबारों में पढ़ा होगा कि बोडो समस्या को लेकर बहुत बड़ा ऐतिहासिक समझौता हुआ है। हमने एक तरफ नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए अभूतपूर्व योजनाओं की शुरुआत की और दूसरी तरफ बहुत ही खुले मन और खुले दिल के साथ सभी स्टेकहोल्डर के साथ बातचीत शुरू की। बोडो समझौता आज इसी का परिणाम है।' 370 पर यह बोले पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर पीएम मोदी कहा, 'आर्टिकल 370 तो अस्थायी था, फिर पिछली सरकार ने उसे हटाने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई? हमें कश्मीर की फिक्र थी इसलिए हमने आर्टिकल 370 को हटा दिया। कश्मीर को आतंकवाद ने तबाह कर दिया। कश्मीरी पंडितों को बेघर कर दिया गया। क्या हम कश्मीर को ऐसे ही छोड़ देते क्या?'
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार 'ऐतिहासिक अन्याय' को दुरुस्त करने और पड़ोसी देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों से किए गए भारत के 'पुराने वादे' को पूरा करने के लिए संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लेकर आई है। मोदी राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की सालाना रैली को संबोधित कर रहे थे। कुछ परिवारों और पार्टियों ने 370 को जीवित रखा था' इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त किए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता के समय से ही समस्या थी। कुछ परिवारों और राजनीतिक दलों ने इसे 'जीवित' रखा जिसके परिणामस्वरूप वहां आतंकवाद पनपा। उन्होंने एनसीसी कैडैटों से कहा कि उनकी सरकार देश को परेशान कर रहीं दशकों पुरानी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास कर रही है। 'CAA के विरोध के पीछे वोट बैंक पॉलिटिक्स' पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार 'ऐतिहासिक अन्याय' को दुरुस्त करने और पड़ोसी देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों से किए गए भारत के 'पुराने वादे' को पूरा करने के लिए सीएए लेकर आई है। प्रधानमंत्री ने सीएए के विरोध के संबंध में कहा कि कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक पर कब्जा करने की रेस में लगे हैं। उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक अन्याय को दुरुस्त करने के वास्ते भारत के पुराने वादे को पूरा करने के लिए आज जब हमारी सरकार सीएए लेकर आई है तो कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की खातिर इसका विरोध कर रहे हैं। गांधीजी की इच्छा और नेहरू-लियाकत समझौते के अनुरूप CAA' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दशकों पुरानी समस्याएं सुलझा रही उनकी सरकार के फैसले पर जो लोग सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा रहे हैं, उनका असली चेहरा देश देख भी रहा है और समझ भी रहा है। मोदी ने कहा कि सीएए का विरोध ऐसे लोग कर रहे हैं जिन्होंने शत्रु सम्पत्ति कानून का भी विरोध किया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों से वादा किया था कि जरूरत महसूस होने पर वे भारत आ सकते हैं। यही इच्छा गांधीजी की थी और यही भावना 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते की भी थी। पाक को चेतावनी, हराने में नहीं लगेंगे हफ्ते-दस दिन से ज्यादा प्रधानमंत्री मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, 'हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमसे तीन-तीन युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को उसे धूल चटाने में हफ्ते-दस दिन से ज्यादा समय नहीं लगता।' केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों की 'निष्क्रियता' की निन्दा करते हुए उन्होंने कहा, 'सेनाएं जब कार्रवाई के लिए कहती थीं, वे तब भी आगे नहीं जा पाती थीं।' 'न्यू इंडिया आतंक के आकाओं को घर में जाकर सबक सिखाता है' सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा 'आज युवा सोच है। युवा मन के साथ देश आगे बढ़ रहा है और इसलिए वह सर्जिकल स्ट्राइक करता है, एयर स्ट्राइक करता है और आतंक के सरपरस्तों को उनके घर में जाकर सबक सिखाता है। इसका परिणाम आप भी देख रहे हैं।' 'हमारी सरकार के फैसले का लाभ सभी समुदायों को' दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के संबंध में सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि यह युवा भारत की सोच है, न्यू इंडिया की सोच है जिसने दिल्ली के 40 लाख लोगों के जीवन से, उनकी सबसे बड़ी चिंता को दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के फैसले का लाभ हिंदुओं, मुस्लिमों, सिखों, ईसाइयों सभी को होगा। उन्होंने अपनी सरकार की ‘तीन तलाक’ खत्म करने और बोडो समझौते जैसी उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
नई दिल्ली, 27 जनवरी 2020, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है. शुरुआत में इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी. इस हिंसा के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े मिले हैं. इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही है. ईडी के सूत्रों के मुताबिक, पीएफाई ने करोड़ों रूपये देश के वकीलों को दिए गए थे. इन वकीलों में इंदिरा जयसिंह और कपिल सिब्बल शामिल थे. हालांकि, इस बारे मे पूछे जाने पर वकील इंदिरा जयसिंह ने कैमरे पर कुछ बोलने से मना कर दिया. हालांकि, उन्होंने कहा कि क्या बकवास है. पीएफआई की गतिविधियों की जांच कर रही ईडी को पीएफआई और उससे जुड़े करीब 73 बैंक एकाउंट की जानकारी मिली है. इस मामले में रेहाब इंडिया फाउंडेशन का भी जिक्र ईडी ने किया है. ईडी के सूत्रों का कहना है कि करीब 134 करोड़ रुपये का फंड सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए प्रयोग में लाया गया. साथ ही शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए कई बैंक अकाउंट भी खोले गए.
नई दिल्ली उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोध का पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के साथ सीधा संपर्क था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट में पता चला है कि जिन इलाकों में CAA के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी, वहां PFI के हाथ होने के तार जुड़े हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 73 बैंक खातों में 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा की गई थी। इन पैसों का इस्तेमाल प्रदर्शन के लिए हुआ था। पश्चिमी यूपी के कई बैंकों में जमा किए गए पैसे टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की जांच में पाया गया कि दिसंबर में संसद से CAA पास होने के बाद पश्चिम यूपी के हिंसाग्रस्त इलाकों बिजनौर, हापुड़, बहराइच, शामली और डासना के कई बैंक अकाउंट में पैसे भेजे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, 73 बैंक अकाउंट में करीब 120 करोड़ रुपये भेजे गए थे। इन पैसों का इस्तेमाल विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग के लिए किया गया था। PFI के कश्मीर यूनिट को भी मिले पैसे रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि PFI की कश्मीर यूनिट को भी 1.65 करोड़ रुपये मिले थे। ईडी ने गृह मंत्रालय को इन पैसों के लेनदेन के बारे में आगाह किया था। यह रिपोर्ट यूपी हिंसा के आरोप में अरेस्ट किए गए PFI अध्यक्ष वसीम अहमद को पिछले सप्ताह जमानत मिलने के कुछ दिन बाद आई है। यूपी पुलिस वसीम के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाने में असफल रही थी, हालांकि उसने वसीम को इस हिंसा का मास्टरमाइंड बताया था। बीजेपी ने कहा- मामले की हो जांच इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद बीजेपी ने कहा है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर कोई खास दिन इस तरह का वित्तीय लेनदेन हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने जा रहे कलाकारों और स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा है कि भारत की श्रेष्ठता की एक और शक्ति इसकी भौगोलिक और सामाजिक विविधता में ही है। हमारा ये देश एक प्रकार से फूलों की माला है, जहां रंग-बिरंगे फूल भारतीयता के धागे से पिरोए गए हैं। पीएम ने कहा, 'परेड में आप एक प्रकार से मिनी इंडिया-न्यू इंडिया को शोकेस करने वाले हैं। भारत असल में क्या है, ये हमारा देश और पूरी दुनिया आपके माध्यम से समझती है।' उन्होंने कहा, 'जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो हमें ये भी याद रखना है कि भारत असल में है क्या। भारत क्या सिर्फ सरहदों के भीतर 130 करोड़ लोगों का घर भर ही है? नहीं, भारत एक राष्ट्र के साथ-साथ एक जीवंत परंपरा है, एक विचार है, एक संस्कार है, एक विस्तार है। राजपथ पर दिखती है भारत की शक्ति' 'एट होम' इवेंट में पीएम ने कहा, 'राजपथ पर आपके प्रदर्शन से पूरी दुनिया भारत की इस शक्ति के भी दर्शन करती है। इसका असर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के प्रचार-प्रसार में भी होता है और भारत के टूरिज्म सेक्टर को भी इससे मजबूती मिलती है। अपने कर्तव्यों पर करें चर्चा-अमल' पीएम ने परेड में शामिल होने जा रहे युवाओं से कहा, 'यहां जितने भी युवा साथी आए हैं, मेरा आपसे आग्रह रहेगा कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की ज्यादा से ज्यादा चर्चा करें। चर्चा ही नहीं, बल्कि खुद अमल करके, उदाहरण पेश करें। हमारे ऐसे ही प्रयास न्यू इंडिया का निर्माण करेंगे ' 'भारत का कोई व्यक्ति ना रहे पीछे' परेड के उद्देश्य को लेकर पीएम ने कहा, 'हम जिस न्यू इंडिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, वहां यही आकांक्षाएं, यही सपने हमें पूरे करने हैं। भारत का कोई भी व्यक्ति, कोई भी क्षेत्र पीछे ना रह जाए, ये हमें सुनिश्चित करना है। गणतंत्र दिवस की परेड के पीछे भी यही ध्येय है।' पीएम ने कहा कि NCC और NSS के माध्यम से अनुशासन और सेवा की एक समृद्ध परंपरा जब राजपथ पर दिखती है, तो देश के करोड़ों युवा प्रेरित और प्रोत्साहित होते हैं।
नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को उन फैसलों के बारे में जानकारी दी, जिन्हें केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है। इनमें नैशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नॉलजी (NITs) के स्थाई कैंपसों के लिए दोबारा बढ़ाई गई राशि और जीएसटी, वैट और एक्साइज ड्यूटी से जुड़े कानूनों में संशोधन जैसे जरूरी फैसले शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा, 'एनआईटी की स्थापना 2009 में हुई थी और 2010-11 में शैक्षणिक तौर पर इन संस्थानों का संचालन अस्थाई कैंपस में बहुत कम जगह और इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ शुरू हुआ था। अब 31 मार्च 2022 से ये संस्थान अपने अस्थाई कैंपस में पूरी तरह से काम करेंगे। नैशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नॉलजी के लिए 2021-2022 तक के लिए कुल 4371.90 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी गई है।' जावड़ेकर ने आगे कहा, 'दादरा व नागर हवेली और दमन व दीव के विलय को ध्यान में रखते हुए गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स, वैल्यू ऐडेड टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में संशोधन/विस्तार किया जाएगा।' इसके अलावा दादरा व नगर हवेली और दमन व दीव केंद्र शासित प्रदेश के लिए दमन को मुख्यालय की मंजूरी भी दी गई है। इसके अलावा जावड़ेकर ने जानकारी दी कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने डिपार्टमेंट ऑफ कैमिकल्स ऐंड पेट्रोकैमिकल्स के तहत आने वाले सेंट्रल पब्लिक सेटर ऐंटरप्राइज, हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स लिमिटेड को बंद करने की भी मंजूरी दे दी है।
लखनऊ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखऊ में एक जनसभा की। यहां पर उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'भारत माता की जय' के नारों से करते हुए समाजवादी पार्टी (एसपी), कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को नागरिकता कानून को लेकर हो रही हिंसा का जिम्मेदार ठहराया। अमित शाह ने कहा, 'नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इसकी वजह से इस देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। ममता दीदी, राहुल बाबा, अखिलेश यादव चर्चा करने के लिए सार्वजनिक मंच तलाश लो, हमारा स्वतंत्र देव चर्चा करने के लिए तैयार है। सीएए की कोई भी धारा, मुसलमान छोड़ दीजिए, अल्पसंख्यक छोड़ दीजिए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकती है तो वह मुझे दिखा दीजिए।' जेएनयू के मुद्दे पर भी बोले शाह अमित शाह ने कहा, 'नेहरू जी ने कहा था कि केंद्रीय राहत कोष का उपयोग शरणार्थियों को राहत देने के लिए करना चाहिए। इनको नागरिकता देने के लिए जो करना चाहिए वह करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया।' उन्होंने कहा, 'दो साल पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के अंदर देश विरोधी नारे लगे। मैं जनता से पूछने आया हूं कि जो भारत माता के एक हजार टुकड़े करने की बात करें, उसको जेल में डालना चाहिए या नहीं। मोदी जी ने उनको जेल में डाला और ये राहुल ऐंड कंपनी कह रही है कि यह बोलने की स्वतंत्रता का अधिकार है।' गांधी जयंती के दिन हुए बलात्कार' अमित शाह ने कहा, 'पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान...जहां भारत के विभाजन के बाद करोड़ों हिंदू वहां रह गए, सिख वहां रह गए, ईसाई, जैन, बौध, पारसी वहां रह गए। मैंने उनके दर्द को सुना है। महात्मा गांधी की जयंती के दिन एक हजार माताओं-बहनों से बलात्कार किया जाता है, उनको जबरन निकाह पढ़ाया जाता है। हजारों की संख्या में मंदिर-गुरुद्वारे तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान के अंदर आसमान को छूने वाली मूर्ति को तोप के गोले से जीर्णशीर्ण कर दिया गया।' नागरिकता कानून नहीं होगा वापस' अमित शाह ने कहा, 'मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूं कि जिसको विरोध करना है करे, CAA वापस नहीं होने वाला है।' उन्होंने कहा, 'मैं वोट बैंक के लोभी नेताओं को कहना चाहता हूं, आप इनके कैंप में जाइए, कलतक जो सौ-सौ हेक्टेयर के मालिक थे, वे आज एक छोटी सी झोपड़ी में परिवार के साथ भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं।' 'कांग्रेस की वजह से देश के दो टुकड़े हुए' केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा, 'कांग्रेस के पाप के कारण धर्म के आधार पर भारत के दो टुकड़े हुए। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या कम होती रही। आखिर कहां गए ये लोग। कुछ लोग मार दिए गए, कुछ का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। तब से शरणार्थियों के आने का सिलसिला चल रहा है। नरेंद्र मोदी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को उनके जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है।' एसपी-बीएसपी-कांग्रेस, टीएमसी पर वार गृहमंत्री ने कहा, 'देश में भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं, आगजनी फैलाई जा रही है, यह धरना प्रदर्शन, यह विरोध, यह भ्रांति एसपी-बीएसपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस फैला रही है। इसमें किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है। इस बिल के अंदर नागरिकता देने का प्रावधान है।' अयोध्या के राम मंदिर पर भी बोले शाह अयोध्या में राम मंदिर को लेकर अमित शाह ने कहा, 'कांग्रेस जब तक सत्ता में थी, तबतक अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर नहीं बनने दिया। कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े होकर केस में अड़ंगा लगाते थे। मोदी सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केस तेजी से चला और अब अयोध्या में आसमान छूने वाला श्रीराम का मंदिर बनने वाला है।'
नई दिल्ली बीजेपी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के स्वागत में पार्टी मुख्यालय में हुए समारोह में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा नकारे जा चुके लोग अब झूठ और भ्रम को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। सीएए को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों की तरफ इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'नकारे गए लोग भ्रम फैला रहे हैं, लेकिन लोगों का भरोसा डिगा नहीं है। उनका झूठ चलता रहेगा और हम भी चलते रहेंगे।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत भाषण में नड्डा को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता ने नकार दिया है और अब उन्होंने झूठ और भ्रम को हथियार बना लिया है। उन्होंने कहा, 'हमारे लिए और सक्रियता की आवश्यकता है, जन-जन तक पहुंचने की आवश्यकता है।' पीएम ने आगे कहा, ‘बीजेपी ने इतने कम समय में अपना विस्तार किया है और लोगों की आशा और आकांक्षाओं के साथ जोड़ा है। यह सिर्फ संख्या बल के आधार पर नहीं, बल्कि जन सामान्य के दिल में जगह बनाई है।' उन्होंने कहा, ‘हम टेंपररी नहीं, लंबे समय तक मां भारती की सेवा करने आए हैं। हम सदियों तक सेवा करने वाले हैं।’ भ्रम फैला रहे नकारे जा चुके लोग: मोदी पीएम मोदी ने कहा, 'चुनावी राजनीति में जनता ने जिन्हें नकार दिया, उनके पास अब बहुत कम शस्त्र बचे हैं। इनमें है झूठ फैलाना, बार-बार झूठ फैलाना। यह हम लगातार देख रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'जनता ही हमारी ताकत है। उसी शक्ति ने पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिया और दोबारा उससे भी मजबूत बहुमत देकर चुना।' नड्डा पर हिमाचल से ज्यादा बिहार के लोगों का हक: पीएम मोदी प्रधानमंत्री ने कहा, 'हिमाचल के लोगों को लगता होगा कि हिमाचल का एक बेटा आज बीजेपी का अध्यक्ष बना है लेकिन नड्डा जी पर जितना हक हिमाचल का है, उतना ही बिहार का भी है। नड्डाजी की पढ़ाई-लिखाई बिहार से हुई है। उन पर बिहार ज्यादा गर्व कर रहा होगा। हिमाचल तो गर्व कर सकता है कि अटलजी भी उन्हीं के थे। मेरे जीवन का सबसे ऊर्जा भरे दिन हिमाचल के ही थे।' लंबे वक्त तक नड्डा के साथ काम करने का मौका मिला: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें जेपी नड्डा के साथ लंबे वक्त तक काम करने का अनुभव है। उन्होंने कहा, 'मुझे लंबे वक्त तक हिमाचल में काम करने का मौका मिला। मैं पार्टी का जब संगठन देखता था तो नड्डा युवा मोर्चा का काम देखते थे।' पीएम मोदी ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी की विशेषता रही है कि पार्टी चले लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार को मजबूती मिलती रहे। हम सदियों तक मां भारती की सेवा करने के लिए आए हैं। जिन आशाओं और आकांक्षाओं के साथ इस दल का जन्म हुआ है, उनको पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठना है।' पीएम ने शाह की खुलकर की तारीफ बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पार्टी को बहुत मजबूती दी। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक दल के लिए सत्ता में रहते हुए संघर्ष करना मुश्किल होता है लेकिन बीजेपी के सत्ता में रहते हुए अमित शाह ने पार्टी का विस्तार किया है जो बहुत बड़ी बात है।' सरकार और दल के बीच की लकीर को खत्म नहीं होने देंगे पीएम मोदी ने कहा, 'हम किसी भी हालत में सरकार और दल के बीच की जो लकीर है उसे कभी भी खत्म नहीं होने देंगे। जो आवश्यक मर्यादाएं हैं, उनका पूरी तरह पालन करेंगे।' उन्होंने कहा, 'राजनीतिक दलों के लिए चुनाव अब लगातार चलने वाली प्रक्रिया हो गई है। आम तौर पर हमारी पार्टी का विस्तार संघर्ष और संगठन इन दो पटरियों पर हुआ है। देशहित की समस्याओं को लेकर संघर्ष करना और संगठन को बढ़ाते रहना यही कार्यकर्ताओं का मंत्र रहा है।' प्रधानमंत्री ने कहा, 'राजनीति में जिन आदर्शों और मूल्यों को साथ लेकर हम चले थे, जिनके लिए 4-4,5-5 पीढ़ी खप गई थी, आज उन्हीं आदर्शों और मूल्यों को लेकर बीजेपी राष्ट्र की आशा और आकांक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालेगी और विस्तार करेगी।' नड्डा ने पैर छूकर लिया आडवाणी, जोशी का आशीर्वाद बीजेपी का निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर जगत प्रकाश नड्डा का दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में स्वागत किया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत तमाम दिग्गज मौजूद रहे। नड्डा ने पैर छूकर आडवाणी और जोशी का आशीर्वाद लिया। नड्डा ने भारत माता की जय के नारे के साथ अपने भाषण की शुरुआत की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम के नारे भी लगाए। नवनिर्वाचित नड्डा के भाषण की मुख्य बातें - अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने ऊंचाई को छुआ। मुझमें जितनी भी सामर्थ्य है, उन सबको लगाकर बीजेपी को उत्कर्ष की तरफ ले जाएंगे। - मैं प्रदेश की इकाइयों को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे निर्विरोध चुना। मुझे आडवाणीजी और जोशीजी का आशीर्वाद मिला, मैं उनको भी धन्यवाद देता हूं। यहां बैठे संसदीय दल के सभी सदस्यों के साथ मुझे काम करने का लंबा मौका मिला। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को संभालने की जिम्मेदारी देने के लिए मुझ पर विश्वास किया- जेपी नड्डा अमित शाह के भाषण की मुख्य बातें बीजेपी के निवर्तमान अध्यक्ष अमित शाह ने जेपी नड्डा को पार्टी अध्यक्ष बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, 'आज हम सबके लिए गर्व का मौका है कि एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करने वाले नड्डा आज राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।' -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी अपने चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में दृढ़ता से कदम उठा रही है। चाहे आर्टिकल 370 की बात हो, राम मंदिर की बात या फिर सीएए का, चुनावी वादों को पूरा किया जा रहा है- अमित शाह -मैं गर्व से कह सकता हूं कि मोदीजी से लेकर पार्टी के हर कार्यकर्ता ने मुझे सहयोग किया। मैं अपने कार्यकाल में समर्थन के लिए सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को धन्यवाद देता हूं- अमित शाह -साढ़े 5 सालों बीजेपी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी, कई राज्यों में जीत हासिल की और मोदीजी के नेतृत्व में और बड़ी जीत हासिल की- अमित शाह - बीजेपी इकलौती पार्टी है जो परिवारवाद पर नहीं चलती, नड्डाजी को बीजेपी के करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से बधाई और शुभकामनाएं: अमित शाह राजनाथ सिंह ने दी नड्डा को शुभकामनाएं रक्षा मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नड्डा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पार्टी देश के हर कोने में शानदार प्रदर्शन करेगी और जीत का परचम लहराएगी। उन्होंने कहा, 'अटल, आडवाणी, ठाकरे, जोशीजी जैसे नेता हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। प्रारंभ से ही बीजेपी का कार्यकर्ता यह स्वप्न देख रहा था कि कब केंद्र में हमारी सरकार बनेगी। 1996 में अटलजी के नेतृत्व में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी और कुछ दिनों की सरकार बनी। 1998 में अटलजी फिर प्रधानमंत्री बने और बीजेपी की अगुआई में बीजेपी की सरकार 6 सालों तक चली।' राजनाथ सिंह ने कहा, '2013 में देश का जनमानस अगर किसी को पीएम के रूप में देखना चाहता था तो वह नरेंद्र मोदी को देखना चाहता था। जनता के नब्ज को पहचानते हुए बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बताया।...नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसके बाद अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। शाह के कार्यकाल में पार्टी ने जिस ऊंचाई को छुआ वह अविस्मरणीय रहा। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने और बड़ी जीत हासिल कर 303 सीटों पर जीत हासिल की।' उन्होंने कहा कि आगे इससे भी बड़ी जीत हासिल करने में नड्डा की बड़ी भूमिका रहेगी। नड्डा ने अमित शाह की जगह ली, जिनके नेतृत्व में बीजेपी ने कई शानदार सफलताएं हासिल की। इससे पहले नड्डा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष थे। वह पीएम मोदी के पिछले कार्यकाल में उनके कैबिनेट में शामिल थे। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष जेपी नड्डा को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके कार्यकाल में पार्टी और मजबूत होगी।
नई दिल्ली जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) बीजेपी के नए अध्यक्ष निर्वाचित कर लिए गए हैं। उनका कार्यकाल 2022 तक होगा। पार्टी के संगठन चुनाव प्रभारी राधामोहन सिंह ने उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा करते हुए कहा, 'भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की सारी संवैधानिक प्रक्रियाएं को पूरी कर ली गई हैं। जगत प्रकाश नड्डा 2019 से 2022 के लिए सर्वानुमति से अध्यक्ष चुन लिए गए हैं।' राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर निवर्तमान अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के तमाम नेताओं ने नड्डा को बधाई दी। इससे पहले, बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने जेपी नड्डा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव संगठन चुनाव प्रभारी राधामोहन सिंह को सौंपा था। नड्डा का निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुनाजाना पहले से ही तय माना जा रहा था। अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद से ही बीजेपी के वर्किंग प्रेजिडेंट के तौर पर काम संभाल रहे जेपी नड्डा अब पूर्ण अध्यक्ष हो चुके हैं। लो-प्रोफाइल रहने वाले और बड़ेबोले बयानों से दूर रहने वाले जेपी नड्डा भले ही करिश्माई नेता न माने जाते हों, लेकिन संगठन पर उनकी पकड़ हमेशा रही। आइए जानते हैं, कैसा रहा जेपी नड्डा का सियासी सफऱ... मूल रूप से हिमाचली और बिहार में जन्मे जेपी नड्डा लंबे समय से बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा हैं। पहली बार 1993 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पहुंचने वाले जेपी नड्डा का जन्म 2 दिसंबर, 1960 को पटना में हुआ था। पटना में ही स्कूलिंग से लेकर बीए तक की पढ़ाई की पढ़ाई की। यहीं वह आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी से जुड़े थे। इसके बाद वह अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश लौटे और एलएलबी किया। पटना से शिमला तक छात्र राजनीति का अनुभव हिमाचल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में ऐक्टिव रहे और फिर बीजेपी में एंट्री ली। वह तीन बार बीजेपी के टिकट पर हिमाचल विधानसभा पहुंचे। 1993-98, 1998 से 2003 और फिर 2007 से 2012 तक वह विधायक रहे। यही नहीं 1994 से 1998 तक वह प्रदेश की विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के नेता भी रहे। कभी धूमल के मंत्री थे, आज शीर्ष नेता पहली बार अहम जिम्मेदारी उन्हें 2008 में मिली, जब प्रेम कुमार धूमल सरकार में वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बने। उस वक्त वह भले ही धूमल के मंत्री थे, लेकिन अगले कुछ सालों में उनका कद ऐसा बढ़ा कि आज वह बीजेपी के अध्यक्ष हैं और पार्टी के सीनियर नेताओं में से एक हैं। 1991 से ही हैं पीएम मोदी के करीबी जेपी नड्डा को पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी लोगों में से एक माना जाता है। इसकी वजह शायद यह भी है कि 1991 में जिस दौर में जेपी नड्डा युवा मोर्चा की कमान संभाल रहे थे, तब पीएम मोदी पार्टी के महासचिव थे। माना जाता है कि दोनों नेताओं के बीच तभी से करीबी है। फिर जब पीएम नरेंद्र मोदी का कद राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ा तो जेपी नड्डा ने भी उनके साथ लगातार ऊंचाई हासिल की। पहली बार 2010 में राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री हिमाचल में विधायक और मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाल चुके जेपी नड्डा पहली बार 2010 में दिल्ली की राजनीति में आए, जब नितिन गडकरी ने उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। संगठन के आदमी के तौर पर चर्चित नड्डा को पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद कैबिनेट में शामिल किया। अमित शाह को गुजरात से लाकर अध्यक्ष बनाया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय छोड़ बने कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र मोदी सरकार 2019 में दोबारा वापस आई और शाह को कैबिनेट में गृह मंत्री का ओहदा दिया गया। लेकिन सवाल यह था कि आखिर पार्टी कौन संभालेगा। एक बार फिर से पीएम मोदी ने नड्डा पर भरोसा जताया और वह जुलाई, 2019 में स्वास्थ्य मंत्रालय छोड़ संगठन में कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर आ गए। यूपी में कमाल के बाद और बढ़ा नड्डा का कद जेपी नड्डा के कद में तब अप्रत्याशित इजाफा हुआ, जब उन्होंने 2019 में राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण राज्य यूपी में 62 लोकसभा सीटें पार्टी को दिलाईं। वह सूबे में चुनावी रणनीति का जिम्मा संभाल रहे थे, जहां 2014 में बीजेपी को अकेले दम पर 71 सीटें मिली थीं। SP-बीएसपी गठबंधन के बाद भी दिलाई बड़ी जीत एसपी और बीएसपी में गठबंधन के चलते पिछले प्रदर्शन को दोहराना चुनौती था, लेकिन पार्टी को 62 सीटें मिलीं। यह प्रदर्शन जेपी नड्डा के कद को राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ाने वाला साबित हुआ। यही वजह थी कि जब शाह को गृह मंत्रालय मिला तो कार्यकारी अध्यक्ष के नाते उन्हें लाया गया।
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों के सवालों को जवाब दिया. दिल्ली से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के बच्चों ने पीएम से सवाल पूछा. इस दौरान अंत में जब पीएम बच्चों से अलविदा ले रहे थे तो वो भावुक हुए और बच्चों से मन की बात कही. पीएम ने कहा कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो आप ही देश की अगुवाई कर रहे होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां छात्रों से कहा, ‘भारत जब आजादी के सौ साल पूरे करेगा, यानी आज से 30-40 साल बाद जब आप सफलता की ऊंचाईयों को चूम रहे होंगे और मैं जीवित रहा. मैं आपसे कभी मिला तो जरूर कहूंगा कि जो आज देश की अगुवाई कर रहे हैं उनसे कभी मैंने 2020 भी बात की थी. मैंने भी उनके दर्शन किए थे.’ गौरतलब है कि पिछले तीन साल से पीएम मोदी से छात्रों से इस प्रकार संवाद कर रहे हैं. सोमवार को हुए इस कार्यक्रम में छात्रों ने पीएम मोदी से परीक्षा को लेकर सवाल किया, टेक्नोलॉजी को लेकर बातें की. पीएम मोदी ने इस दौरान बताया कि छात्रों को परीक्षा की टेंशन नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि सिर्फ पेपर ही कुछ नहीं होता है. परीक्षा में मार्क्स से अलग भी एक जीवन है जो आपको जीना है. अभिभावकों को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि जब बच्चा छोटा होता था तब मां-बाप उसको उत्साहित करते थे, लेकिन अब भी ऐसा ही होना चाहिए. किसी भी बच्चे पर प्रेशर नहीं बनाना चाहिए, जिनके साथ बच्चा कम्फर्ट होता है उसे बात करना जरूरी है. पीएम ने कहा कि भारत का हर बच्चा सुपर पॉलिटिशयन होता है, उसे पता है कि घर में किससे क्या काम करवाना है.
नई दिल्ली, 14 जनवरी 2020,जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से गिरफ्तार किए गए डीएसपी देवेंद्र सिंह के आतंकी कनेक्शन पर देश में राजनीति गर्म हो गई है. कांग्रेस की तरफ से पहले देवेंद्र सिंह के बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए गए. अब भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है और कहा है कि कांग्रेस पार्टी हिंदुओं को आतंकी घोषित करना चाहती है. आतंक के मुद्दे पर धर्म लाकर राजनीति करना चाहती है. इसी के साथ ही संबित पात्रा ने कांग्रेस पर पाकिस्तान का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार दोपहर को इस मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. संबित पात्रा ने कहा, ‘इसी देश की पुलिस ने देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है, कानून अपना काम रहा है. कांग्रेस ने वही किया जिसमें वह सक्षम है, कांग्रेस ने एक बार फिर भारत पर हमला किया है और पाकिस्तान का पक्ष लिया है. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले में धर्म को घुसाया, हिंदू आतंकवाद का शब्द भी कांग्रेस ने ही इजात किया था.’ बीजेपी प्रवक्ता बोले, ‘कांग्रेस लंबे समय से ‘हिंदू पाकिस्तान’ की बात करती रही है. कांग्रेस हिंदुओं को आतंकवादी सिद्ध करने का प्रयास कर रही है और भारत को हिंदुओं से खतरा बता रही है. बटला हाउस एनकाउंटर को लेकर कांग्रेस के रवैये पर सवाल खड़े होते रहे हैं.’
नई दिल्ली अमेरिका में कई रिपब्लिकन सांसदों ने खुले तौर पर कश्मीर से आर्टिकल 370 समाप्त किए जाने का समर्थन किया है। कई मध्यमार्गी डेमोक्रैट्स ने भी भारत सरकार से इस फैसले पर सहमति जताई है। केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों का कहना है कि डेमोक्रैटिक पार्टी के अल्ट्रा लेफ्ट लिबरल विचारधारा को ध्यान में रखकर डेमोक्रैट्स प्रतिनिधि खुलकर अपनी राय जाहिर करने से कतरा रहे हैं। डेमोक्रैट्स प्रतिनिधियों ने भी सरकार से जताई सहमति सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी तक अमेरिकी कांग्रेस के 6 सदस्यों ने भारत सरकार का खुले तौर पर समर्थन किया है। हालांकि, ये सभी कांग्रेस सदस्य रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'मध्यमार्गी डेमोक्रैटिक पार्टी के कुछ प्रतिनिधियों ने भी निजी तौर पर सहमति जताई है। इन प्रतिनिधियों ने न सिर्फ आर्टिकल 370 समाप्त किए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार का पक्ष अच्छी तरह से समझा है। इसके साथ ही इन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया है कि अब राज्य के पास आर्थिक और सामाजिक विकास के अवसर पहले से अधिक होंगे। इन प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान की ओर से होनेवाली क्रॉस बॉर्डर फायरिंग और आतंक को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है।' डेमोक्रैटिक पार्टी के बड़े नेताओं ने जताई असहमति डेमोक्रैटिक पार्टी के बड़े नेता जिन्हें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है ने सार्वजनिक तौर पर भारत के फैसले की आलोचना की है। ऐलिजाबेथ वॉरेन और बर्नी सैंडर्स ने सार्वजनिक मंचों से भारत सरकार के फैसले की आलोचना की है। सैंडर्स ने जहां से स्वीकार नहीं करने योग्य फैसला करार दिया है तो वॉरेन ने भारत सरकार से कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है। कई और कांग्रेस सदस्य भारत के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भारत की ओर से लगातार कोशिशें हो रही हैं। अमेरिका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने कई अन्य कांग्रेस सदस्यों से मुलाकात की है। सरकार को उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में कई और कांग्रेस सदस्य भारत के समर्थन में बयान जारी कर सकते हैं। श्रृंगला इसी सप्ताह विदेश सचिव का पद संभालने के लिए वतन वापस लौट रहे हैं।
कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ कोलकाता पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के बहाने राज्‍य सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि इन दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण का सपना देखा था लेकिन यहां की सरकारों ने इससे मुंह मोड़ लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता पोर्ट का नाम डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट करने का ऐलान किया। उन्‍होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा कि कटमनी नहीं होने, सिंडिकेट के नहीं चलने की वजह से केंद्र की योजनाओं को राज्‍य सरकार लागू नहीं कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे ही पश्चिम बंगाल राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना, पीएम किसान सम्मान निधि के लिए स्वीकृति देगी, यहां के लोगों को इन योजनाओं का भी लाभ मिलने लगेगा। उन्‍होंने कहा, 'मैं नहीं जानता हूं कि आयुष्‍मान भारत और पीएम किसान निधि योजनाओं को राज्‍य सरकार स्‍वीकृति दे देगी या नहीं। लेकिन अगर दे देगी तो यहां के लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। मैं आपको बता दूं कि आयुष्‍मान भारत योजना से 75 लाख मरीजों को गंभीर बीमारी की स्थिति में मुफ्त इलाज मिल चुका है। कोई बिचौलिया नहीं, कोई कट नहीं, सिंडिकेट का चलता नहीं तो इन योजनाओं को कौन लागू करेगा? 'बंगाल के नीति निर्धारकों को सद्बुद्धि दे ईश्वर' उन्‍होंने कहा, 'मेरे दिल में हमेशा दर्द रहेगा और मैं चाहूंगा, ईश्वर से प्रार्थना करूंगा की बंगाल के नीति निर्धारकों को सद्बुद्धि दें। गरीबों की मदद के लिए आयुष्मान योजना और किसानों की जिंदगी में पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मेरे बंगाल के गरीबों और किसानों को मिले।' बता दें कि कटमनी को लेकर पिछले दिनों टीएमसी बीजेपी के निशाने पर रही है। पीएम मोदी ने कटमनी का उल्‍लेख कर एक बार फिर ममता सरकार पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कोलकाता पोर्ट के 150 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम, भारत के औद्योगीकरण के प्रणेता, पश्चिम बंगाल के विकास का सपना लेकर जीने वाले और एक देश, एक विधान के लिए बलिदान देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की घोषणा करता हूं। आज के इस अवसर पर मैं बाबा साहब आंबेडकर को याद करता हूं। दोनों ने स्‍वतंत्रता के बाद के भारत के लिए नई नीतियां दी थीं। बाबा साहब ने देश की पहली जल संसाधन नीति दी थी। देश में नदी घाटी परियोजनाओं और पोर्ट के विकास श्रेय इन दोनों लोगों को जाता है। 'डॉक्टर मुखर्जी ने देश में औद्योगीकरण की नींव रखी' प्रधानमंत्री ने कहा, 'बंगाल के सपूत, डॉक्टर मुखर्जी ने देश में औद्योगीकरण की नींव रखी थी। चितरंजन लोकोमोटिव फैक्ट्री, हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री, सिंदरी फर्टिलाइज़र कारखाना और दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, ऐसे अनेक बड़ी परियोजनाओं के विकास में डॉक्टर मुखर्जी का बहुत योगदान रहा है। डॉक्टर मुखर्जी और बाबा साहेब, दोनों ने स्वतंत्रता के बाद के भारत के लिए नई नीतियां दी थीं, नया विजन दिया था।' उन्‍होंने कहा, 'लेकिन ये देश का दुर्भाग्य रहा कि डॉक्टर मुखर्जी और बाबा साहेब के सरकार से हटने के बाद, उनके सुझावों पर वैसा अमल नहीं किया गया, जैसा किया जाना चाहिए था।' प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से हर संभव कोशिश की जा रही है। विशेष तौर पर गरीबों, दलितों, वंचितों, शोषितों और पिछड़ों के विकास के लिए समर्पित भाव से प्रयास किए जा रहे हैं। नागरिकता कानून पर युवाओं को गुमराह किया जा रहा है: नरेंद्र मोदी
कोलकाता नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पश्चिम बंगाल में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के बेलूर मठ से इस कानून को लेकर केंद्र सरकार का रुख स्‍पष्‍ट किया और बिना नाम लिए ममता बनर्जी सहित विपक्षी नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है, न कि लेने के लिए। इस कानून को रातों-रात नहीं बल्कि सोच विचार कर बनाया गया है, लेकिन कुछ राजनी‍तिक दल इसे जानबूझकर समझना नहीं चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि इस कानून के बन जाने के बाद अब पाकिस्‍तान को जवाब देना होगा कि उसने अल्‍पसंख्‍यकों पर जुर्म क्‍यों किया। बेलूर मठ को अपना 'घर' बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'नागरिकता संशोधन कानून को लेकर युवाओं में बड़ी चर्चा है। बहुत से सवाल युवाओं के मन में भर दिए गए हैं। बहुत से युवा अफवाहों के शिकार हुए हैं। ऐसे युवाओं को समझाना और संतुष्‍ट करना हम सबकी जिम्‍मेदारी है। राष्‍ट्रीय युवा दिवस पर देश और पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्‍ट के युवाओं से इस पवित्र भूमि से कहना चाहता हूं कि नागरिकता देने के ल‍िए हमने कोई रातों-रात कानून नहीं बनाया है।' 'दूसरे देश का कोई भी नागरिक नागरिकता ले सकता है' उन्‍होंने कहा, 'हमें यह पता होना चाहिए कि दूसरे देश का कोई भी नागरिक भारत की नागरिकता ले सकता है। यह कानून नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। नागरिकता संशोधन कानून केवल पहले से मौजूद कानून में केवल एक संशोधन है। इसमें बंटवारे की वजह से जिन लोगों को संकटों का सामना करना पड़ा, उन्‍हें पूज्‍य महात्‍मा गांधी से लेकर तब के दिग्‍गज नेताओं का यही कहना था कि भारत को ऐसे लोगों को नागरिकता देनी चाहिए जिन पर धर्म की वजह से अत्‍याचार किया जा रहा है।' पीएम मोदी ने कहा कि हमने वही पालन किया है जो गांधी जी कहकर गए थे। उन्‍होंने कहा, 'नागरिकता संशोधन कानून में हम नागरिकता दे रहे हैं, किसी की नागरिकता छीन नहीं रहे हैं। इसके अलावा आज भी किसी भी धर्म का व्‍यक्ति, नास्तिक भी जो व्‍यक्ति भारत के संविधान को मानता है, वह तय प्रक्रियाओं के तहत भारत की नागरिकता ले सकता है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति का खेल खेलने वाले इसे समझने के लिए इसे तैयार नहीं है। वे इसे समझना नहीं चाहते हैं। नॉर्थ ईस्‍ट की संस्‍कृति, जनसंख्‍या पर असर नहीं पड़ेगा' प्रधानमंत्री ने कहा, 'नॉर्थ ईस्‍ट हमारा गर्व है, वहां की संस्‍कृति, रीति-रिवाज, जनसंख्‍या पर इस कानून का कोई विपरीत प्रभाव न पड़े, इसका प्रभाव केंद्र सरकार ने किया है। इतनी स्‍पष्‍टता के बावजूद कुछ लोग अपने राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं। आज के युवा ही ऐसे लोगों का भ्रम दूर कर रहा है। और तो और पाकिस्‍तान में जिस तरह से दूसरे धर्म के लोगों के साथ अत्‍यचार हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज युवा ही उठा रहा है। अगर यह विवाद नहीं उठता तो पता नहीं चलता कि किस तरह से पाकिस्‍तान में दूसरे धर्म के लोगों के साथ अत्‍याचार हुआ। अब पाकिस्‍तान को जवाब देना पड़ेगा कि उन्‍होंने अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ जुर्म क्‍यों किया।'
कोलकाता दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल की संस्कृति और इतिहास के जरिए 'राष्ट्रवादी अभियान' की शुरुआत की। पीएम ने स्वामी विवेकानंद, रविन्द्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, राजा राममोहन राय का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि भारत की कला, संस्कृति अपने हैरिटेज को 21वीं सदी के अनुसार संरक्षित करने और उन्हें रीब्रैंड, रेनोवेट और रीहाउस करने का आज राष्ट्रवादी अभियान पश्चिम बंगाल की मिट्टी से शुरू हो रहा है। पीएम मोदी ने शनिवार को कोलकाता में बिताए पुराने समय को याद करते हुए कहा, 'संस्कृति और साहित्य की तरंग और उमंग से भरे कोलकाता के इस वातावरण में आकर मन और मस्तिष्क आनंद से भर जाता है। यह एक प्रकार से मेरे लिए खुद को तरोताजा करने का और बंगाल की वैभवशाली कला और सांस्कृतिक पहचान को नमन करने का अवसर है। केंद्र सरकार का यह प्रयास है कि भारत के सांस्कृतिक सामर्थ्य को दुनिया के सामने नए रंग-रूप में रखे, ताकि भारत दुनिया में हैरिटेज टूरिज्म का बड़ा सेंटर बनकर उभरे।' मोदी ने कहा, 'आज भारत की कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में एक बहुत अहम दिवस है। भारत की कला, संस्कृति अपने हैरिटेज को 21वीं सदी के अनुसार संरक्षित करने और उन्हें रिब्रांड, रेनोवेट और रिहाउस करने का आज राष्ट्रवादी अभियान पश्चिम बंगाल की मिट्टी से शुरू हो रहा है। अभी जब प्रदर्शनी देखी तो ऐसा लगा था जैसे मैं उन पलों को स्वयं जी रहा हूं जो उन महान चित्रकारों, कलाकारों, रंगकारों ने रचे हैं, जिए हैं। बांग्लाभूमि की, बंगाल की मिट्टी की इस अद्भुत शक्ति, मोहित करने वाली महक को मैं नमन करता हूं।' इस कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने ऐतिहासिक हावड़ा ब्रिज पर लाइट ऐंड साउंड शो का शुभारंभ किया। इस दौरान वहां रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीएम मोदी यहां से नाव के जरिए बेलूर मठ गए। पीएम ने कहा, 'अभी हम सभी ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी की 200वीं जयंती मना रहे हैं। इसी तरह 2022 में जब भारत की आजादी के 75 वर्ष होंगे, तब एक और सुखद संयोग बन रहा है। साल 2022 में महान समाज सुधारक और शिक्षाविद राजा राममोहन राय की 250वीं जयंती आने वाली है। भारत को आदि शंकराचार्य, थिरुनावुक्कारासार जैसे कवि संतों का आशीर्वाद मिला। अंदाल, अक्का महादेवी, भगवान बशवेश्वर, गुरु नानक देव जी द्वारा दिखाया गया मार्ग, आज भी हमें प्रेरणा देता है।' लाल किले, अंडमान-निकोबार से किया नेताजी का सम्मान' नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद करते हुए मोदी ने कहा, 'स्वतंत्रता के बाद के दशकों में जो हुआ, नेताजी से जुड़ी जो भावनाएं जो देश के मन में थीं, वो हम सभी भली भांति जानते हैं। नेताजी के नाम पर लाल किले में म्यूजियम बनाया गया। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में एक द्वीप का नामकरण नेताजी के नाम पर किया गया। जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष पूरे हुए तो लाल किले में ध्वजारोहण का सौभाग्य मुझे खुद मिला। नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग भी बरसों से हो रही थी, जो अब पूरी हो चुकी है।' 'स्वामी विवेकानंद ने कहा था- 21वीं सदी भारत की होगी' स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण को याद करते हुए कहा, 'हम सभी को स्वामी विवेकानंद की वह बात हमेशा याद रखनी है, जो उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी में कुछ लोगों से संवाद के दौरान कही थी। स्वामी विवेकानंद ने कहा था- 'अभी वर्तमान सदी भले ही आपकी है, लेकिन 21वीं सदी भारत की होगी'।' 'तूफान से ज्यादा अहम है कि संकट का सामना कैसे किया' रविंद्रनाथ टैगोर के जरिए भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, 'गुरुदेव ने अपने एक लेख में एक बहुत महत्वपूर्ण उदाहरण भी दिया था- आंधी और तूफान का। उन्होंने लिखा था कि चाहे जितना भी तूफान आए, उससे भी ज्यादा अहम होता है कि संकट के उस समय में, वहां के लोगों ने उस तूफान का सामना कैसे किया। गुरुदेव टैगोर ने 1903 के अपने लेख में लिखा था कि 'भारत का इतिहास वो नहीं है जो हम परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं, कुछ लोग बाहर से आए, पिता बेटे की हत्या करता रहा, भाई-भाई को मारता रहा, सिंहासन के लिए संघर्ष होता रहा, ये भारत का इतिहास नहीं है'।' इतिहास का महत्‍व और उससे हुई छेड़छाड़ का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद भी देश का जो इतिहास लिखा गया, उसमें इतिहास के कुछ अहम पक्षों को नजरअंदाज कर दिया गया। राजनीतिक और सैन्य शक्ति तो अस्थाई होती है, लेकिन कला और संस्कृति के जरिए जो जनभावनाएं अभिव्यक्त होती हैं, वो स्थायी होती हैं और इसलिए, अपने समृद्ध इतिहास को, अपनी धरोहर को संजोकर रखना, उनका संवर्धन करना भारत के लिए, हर भारतवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।' 'देश के पांच आइकॉनिक म्‍यूजियम को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर का बनाएंगे' उन्होंने देश में पांच म्यूजियम को इंटरनैशनल स्टैंडर्ड का बनाए जाने की बात करते हुए कहा, 'बिप्लॉबी भारत नाम से म्यूजियम बने, जिसमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस, अरबिंदो घोष, रास बिहारी बोस, खुदी राम बोस, देशबंधु, बाघा जतिन, बिनॉय, बादल, दिनेश, ऐसे हर महान सेनानी को यहां जगह मिलनी चाहिए। यह भी तय किया गया है कि देश के 5 आइकॉनिक म्यूजियम को इंटरनैशनल स्टैंडर्ड का बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत विश्व के सबसे पुराने म्यूजियम में से एक, इंडियन म्यूजियम कोलकाता से की जा रही है।' ममता ने कहा- स्वामीजी के नाम पर खुद को चमकाने दिल्ली से चले आते हैं इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे। कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे मुलाकात की। राजभवन में हुई दोनों नेताओं की यह मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली। पीएम से मुलाकात के बाद ममता ने कहा कि उन्होंने कुछ वित्तीय मांगों के साथ पीएम से मुलाकात की। उन्होंने राज्य के हिस्से के 28 हजार करोड़ रुपये मांगे। इसके अलावा पीएम के साथ सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर बात हुई और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा, 'कल स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन है। कुछ लोग उनके नाम पर खुद को चमकाने के लिए दिल्ली से उड़कर चले आते हैं, जबकि हम पूरे साल स्वामीजी की विचारधारा पर काम करते हैं।' टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट संगठन पीएम मोदी के बंगाल दौरे का विरोध कर रहे हैं। विरोधी दलों ने कोलकाता में जगह-जगह 'गो बैक मोदी' के पोस्टर लगाए हैं। ट्विटर पर भी इसे ट्रेंड करा रहे हैं। खास बात यह है कि पीएम मोदी से मुलाकात के ठीक बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी के छात्र संगठन की ओर से सीएए के खिलाफ आयोजित धरने में हिस्सा लिया।
कोलकाता, 11 जनवरी 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल की दो दिन की यात्रा पर शनिवार को कोलकाता पहुंचे. इस दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की. मुलाकात के दौरान सीएम ममता ने पीएम मोदी से नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के मुद्दे पर बात की और कहा कि हम इसके विरोध में हैं. बंगाल सीएए और एनआरसी को स्वीकार नहीं कर रहा है. यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी देश से न निकाला जाए. सरकार को सीएए और एनआरसी पर विचार करना चाहिए. हालांकि इस मुद्दे पर पीएम मोदी ने ममता बनर्जी को जवाब देते हुए कहा कि वो यहां किसी अन्य कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं. इस मुद्दे पर दिल्ली में बात होगी. इसके साथ ही पीएम मोदी ने सीएम ममता को दिल्ली आने के लिए भी कहा है. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि यह मेरा संवैधानिक कर्तव्य है कि हम देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का स्वागत करें. यह शिष्टाचार मुलाकात थी. बंगाल के मंत्री फ़िरहाद हाकिम ने प्रधानमंत्री की एयरपोर्ट पर अगवानी की. मैंने बैठक में अपनी दो मांगों को रखा. ममता बनर्जी ने कहा, 'पहला हमने 28,000 करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठाया जो कि 54,000 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद भी बाकी रह गया है. इसके अतिरिक्त 700 करोड़ रुपये का बकाया है जो चक्रवाती तूफान बुलबुल से निपटने के लिए मिलना था. यह राज्य का पैसा है. यह राज्य का अधिकार है कि उसे मिलना चाहिए. उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि इस बार वह कुछ पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के साथ यहां आए, लेकिन यदि संभव हुआ तो वह दिल्ली में इस पर जरूर सोचेंगे.' दूसरे, वह मेरे मेहमान हैं, इसलिए मुझे नहीं पता कि यह सवाल उठाना मेरे लिए सही था या नहीं, लेकिन मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि हम, बंगाल के लोग, सीएए, एनपीआर और एनआरसी की निंदा करते हैं. विरोध करते हैं. हम देश के किसी भी दो व्यक्तियों के बीच कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं चाहते हैं और उन्हें अपनी मातृभूमि से दूर नहीं भेजना चाहेंगे. मैंने उनसे (प्रधानमंत्री) दृढ़ता से कहा है कि इस पर (सीएए) फिर से विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए. दो दिवसीय दौर पर पीएम बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के दो दिन के दौरे पर शनिवार को कोलकाता पहुंचे. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और कोलकाता के मेयर और बंगाल के शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के मंत्री फिरहाद खान ने पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया. इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजभवन में पीएम मोदी से मुलाकात की.
कोलकता: पश्चिम बंगाल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) शनिवार शाम कोलकता पहुंचे. इस बीच राजभवन में प्रधानमंत्री ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की और शहर की ओल्ड करेंसी बिल्डिंग में एक मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान आयोजित समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि देश के इतिहास में कई अहम पक्षों को नजरअंदाज कर दिया गया. इतिहास को सत्ता, हिंसा और उत्तराधिकारी की लड़ाई तक सीमित कर दिया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम आज से भारत की संस्कृति, परंपराओं और विरासत सहेजने के लिए फिर से नया करने और संरक्षित करने के लिए कोलकाता से एक राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत के हैरिटेज को 21वीं सदी के अनुसार संरक्षित करने और उन्हें रिब्रांड, रेनोवेट और रिहाउस करने का आज राष्ट्रवादी अभियान पश्चिम बंगाल की मिट्टी से शुरू हो रहा है. पीएम मोदी के भाषण की खास बातें:- - कोलकाता भारत के सर्वोच्च सांस्कृतिक केंद्रों में से एक रहा है. आपकी भावनाओं के अनुसार अब कोलकाता की समृद्ध पहचान को नए रंग रूप में दुनिया के सामने लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. यहां की 4 आइकोनिक इमारतों के नवीनीकरण का काम पूरा हो चुका है. - आजादी के बाद के दशकों में जो हुआ, नेताजी से जुड़ी जो भावनाएं जो देश के मन में थीं, वो हम सभी भली भांति जानते हैं. नेताजी के नाम पर लाल किले में म्यूजियम बनाया गया. अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक द्वीप का नामकरण नेताजी के नाम पर किया गया. - जब आज़ाद हिंद सरकार के 75 वर्ष पूरे हुए तो लाल किले में ध्वजारोहण का सौभाग्य मुझे खुद मिला. नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग भी बरसों से हो रही थी, जो अब पूरी हो चुकी है. - ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद भी देश का जो इतिहास लिखा गया, उसमें इतिहास के कुछ अहम पक्षों को नजरअंदाज कर दिया गया. - गुरुदेव टैगोर ने 1903 के अपने लेख में लिखा था कि 'भारत का इतिहास वो नहीं है जो हम परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं, कुछ लोग बाहर से आए, पिता बेटे की हत्या करता रहा, भाई-भाई को मरता रहा, सिंहासन के लिए संघर्ष होता रहा, ये भारत का इतिहास नहीं है'. - गुरुदेव ने अपने एक लेख में एक बहुत महत्वपूर्ण उदाहरण भी दिया था आंधी और तूफान का. उन्होंने लिखा था कि “चाहे जितना भी तूफान आए, उससे भी ज्यादा अहम होता है कि संकट के उस समय में, वहां के लोगों ने उस तूफान का सामना कैसे किया". - भारत के इतिहास की बहुत सी बातें पीछे छूट गईं. हमारे देश के इतिहास और उसकी विरासत पर दृष्टि डालें तो उसे कुछ लोगों ने सत्ता के संघर्ष, हिंसा, उत्तराधिकारी की लड़ाई तक सीमित कर दिया था. लेकिन जो बात गुरुदेव ने भी कही थी, उसकी चर्चा भी जरूरी है.
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2020, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 आज से पूरे देश में लागू हो चुका है. इसको लेकर सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. देश में कई जगहों पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. वहीं नागरिकता कानून पर देश के कई इलाकों में हिंसा भी देखने को मिली है. हालांकि अब सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके साथ ही 10 जनवरी 2020 से ही नागरिकता संशोधन कानून पूरे देश में लागू हो चुका है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में लिखा है, 'केंद्रीय सरकार, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, 10 जनवरी 2020 को उस तारीख के रूप में नियत करती है जिसको उक्त अधिनियम के उपबंध प्रवृत होंगे.' क्या है नागरिकता संशोधन कानून? नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई. बिल को संसद में पास करवाया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन गया. अब सरकार ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. इसके साथ ही अब पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी. अभी तक उन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था. किन शरणार्थियों को होगा फायदा? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में अपने भाषण में दावा किया था कि लाखों-करोड़ों ऐसे लोग हैं जिन्हें इस कानून से फायदा मिलेगा. नया कानून सभी शरणार्थियों पर लागू होगा. वहीं सरकार की ओर से एक कटऑफ तारीख भी तय की गई है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी. कहां लागू नहीं होगा सीएए? नागरिकता संशोधन कानून का पूर्वोत्तर में जबरदस्त विरोध देखा गया. असम, मेघालय समेत कई राज्यों में लोग सड़कों पर उतर आए. हालांकि सरकार ने कानून लागू करते वक्त ऐलान किया कि मेघालय, असम, अरुणाचल, मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा. केंद्र सरकार ने यहां इनर लाइन परमिट जारी किया है. इसकी वजह से ये नियम यहां लागू नहीं होंगे. इनर लाइन परमिट एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे भारत सरकार अपने नागरिकों के लिए जारी करती है, ताकि वो किसी संरक्षित क्षेत्र में निर्धारित वक्त के लिए यात्रा कर सकें.
नई दिल्ली, 09 जनवरी 2020,सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) को संवैधानिक करार देने के लिए एक याचिका दायर की गई. इस दौरान चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने कड़ी टिप्पणी की. चीफ जस्टिस ने कहा कि अभी देश काफी मुश्किल वक्त से गुजर रहा है, ऐसे में इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने से कुछ फायदा नहीं होगा. गुरुवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, ‘देश अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है. ऐसे में इस वक्त हर किसी का लक्ष्य शांति स्थापित करना होना चाहिए. इस तरह की याचिकाओं से कोई मदद नहीं मिलेगी. इस कानून के संवैधानिक होने पर अभी अनुमान लगाया जा रहा है’. चीफ जस्टिस ने इस दौरान ये भी कहा कि हम कैसे घोषित कर सकते हैं कि संसद द्वारा अधिनियम संवैधानिक है? हमेशा संवैधानिकता का अनुमान ही लगाया जा सकता है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के खिलाफ जो भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, उनकी सुनवाई तभी शुरू होगी जब हिंसा पूरी तरह से रुक जाएगी. वकील विनीत ढांडा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि CAA को संवैधानिक घोषित किया जाए. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की. बता दें कि इससे पहले नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं लेकिन अभी किसी पर भी सुनवाई नहीं हुई है. केंद्र को पहले ही भेजा जा चुका है नोटिस बता दें कि मोदी सरकार के द्वारा लाए गए इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहले ही दर्जनों याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई नेताओं, संगठनों ने सर्वोच्च अदालत में CAA को गैर-संवैधानिक करार देने की अपील की थी. इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा था और सरकार का पक्ष मांगा था. सर्वोच्च अदालत की ओर से केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था. कानून के खिलाफ लगातार हो रहा है विरोध नागरिकता संशोधन एक्ट के मुताबिक, बांग्लादेश-पाकिस्तान-अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. विपक्ष समेत कई संगठन इस कानून को संविधान विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी बता रहे हैं. इस कानून के खिलाफ पिछले कई दिनों से देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहा है, इस दौरान हुई हिंसा में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.
नई दिल्ली बजट पेश करने में मात्र तीन सप्ताह का समय रह गया है। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। केंद्रीय बजट की तैयारी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर जनता से उनकी राय मांगी है। 5 जनवरी को MyGov हैंडल से बजट को लेकर ट्वीट कर किसान की हालत और शिक्षा में सुधार के संबंध में सुझाव मांगे गए थे। पीएम ने आज इसे रिट्वीट किया है। पीएम मोदी ने जनता से मांगी उनकी राय आज सुबह किए गए इस रिट्वीट में उन्होंने लिखा है कि बजट देश की 130 करोड़ आबादी की आकांक्षा होती है और यह देश को विकास को ओर ले जाना वाला होता है। मैं देश की जनता को आमंत्रित करता हूं कि वे बजट के लिए अपने सुझाव MyGov पर दें। सुबह 11 बजे तक इस ट्वीट को 17.4 हजार लाइक्स और 3.9 हजार रिट्वीट किया जा चुका है। उद्योगपतियों से मिले पीएम मोदी पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 11 बड़े उद्योगपतियों के साथ मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान 5 ट्रिल्यन डॉलर इकॉनमी का लक्ष्य, बेरोजगारी की समस्या को दूर करना, आर्थिक सुस्ती में तेजी लाना और निवेश को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई थी। मुलाकात में कहा गया कि सरकार उद्योगपतियों के खिलाफ नहीं है। कॉर्पोरेट टैक्स की दर अपने निचले स्तर पर है। गलत काम करने वाले उद्योगपतियों के खिलाफ कार्रवाई का यह मतलब नहीं है कि सरकार उद्योगपतियों के खिलाफ है। 5 फीसदी रह सकती है विकास दर मंगलवार को जारी एक सरकारी डेटा के मुताबिक, जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 5% रह सकती है जो पिछले 11 साल में सबसे कम होगी। 2009 में आर्थिक सुस्ती के बाद यह विकास की सबसे कम दर होगी। दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट घटकर 4.5 फीसदी तक पहुंच गया था। सीएसओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी छमाही में जारी सुस्ती में मामूली सुधार होगा या नहीं भी हो सकता है।
नई दिल्ली कालेधन के खिलाफ सरकार की मुहिम को एक बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने वर्ष 2014-15 में 1,038 करोड़ रुपये का कालाधन हॉन्ग कॉन्ग भेजने के आरोप में 51 इकाइयों को नामजद किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। आरोप है कि इन 51 इकाइयों ने तीन सरकारी बैंकों- बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नैशनल बैंक के अज्ञात अधिकारियों की मिलीभगत से 1,038 करोड़ रुपये का बेहिसाबी कालाधन हॉन्गकॉन्ग भेजा। अधिकतर कंपनियों के मालिक चेन्नै के इन इकाइयों में से अधिकतर के मालिक चेन्नै निवासी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सूचना मिली थी कि 51 इकाइयों में से 48 के चालू खाते 1,038.34 करोड़ रुपये की राशि बाहर भेजने के लिए ही इन बैंकों की चार शाखाओं में खोले गए थे। विदेश यात्रा, आयात के नाम पर पैसे भेजे सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 24 खातों का इस्तेमाल वस्तुओं के आयात के अग्रिम भुगतान के रूप में विदेशों में पैसा भेजने के लिए किया गया है, जिसके तहत 488.39 करोड़ रुपये की राशि डॉलर में भेजी गई। वहीं, 27 खातों का इस्तेमाल भारतीय पर्यटकों की विदेशी यात्राओं के लिए 549.95 करोड़ रुपये की राशि भेजने के लिए किया गया।
ी नई दिल्ली हाल में झारखंड की सत्ता छिनने के बाद बीजेपी डैमेज कंट्रोल की नीति के तहत दिल्ली की गद्दी हासिल करने की जीतोड़ कोशिश में जुट गई है। इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए इंदिरा गांधी स्टेडियम में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान वह दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) पर जमकर बरसे। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के मुद्दे पर कांग्रेस को भी घेरा। शाह ने कहा कि राहुल और प्रियंका गांधी ने सीएए पर जनता को गुमराह किया। राहुल बाबा और प्रियंका वाड्रा ने दंगे करवाए' शाह ने सीएए के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान फैली हिंसा के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, 'सीएए को लेकर जनता को गुमराह करने का काम किया गया। कांग्रेस पार्टी के राहुल बाबा और प्रियंका वाड्रा ने सीएए पर जनता को गुमराह कर दंगे कराने का काम किया है। 1984 में सिखों का नरसंहार हुआ। कई सिख भाई-बहनों का कत्लेआम कर दिया। कांग्रेस की सरकारें उनके घावों पर मरहम नहीं लगाती थी। मोदी सरकार ने हर पीड़ित को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दिया और जो दोषी थे उन्हें जेल की सलाखों के पीछे डाला।' ननकाना साहिब हमले और राम मंदिर पर विपक्ष को सुनाई खरी-खरी गृहमंत्री ने पाकिस्तान के ननकाना साहिब में गुरुद्वारे पर हुए हमले के बहाने भी विपक्षी दलों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'केजरीवाल, राहुल और सोनिया गांधी आंख खोलकर देख लें। पाकिस्तान ने ननकाना साहिब जैसे पवित्र स्थल पर हमला करके सिख भाइयों को आतंकित कर दिया है।' राम जन्मभूमि को लेकर भी शाह ने विपक्षियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राम जन्मभूमि के मामले को बहुत वर्षों से रोककर रखा थी। वह कोर्ट में इसका विरोध करती थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब फैसला दिया है कि राम जन्मभूमि पर मंदिर बनना चाहिए जो देश के करोड़ लोगों की इच्छा थी। शाह का तंज, चश्मा चढ़ाकर भी काम नहीं दिख रहा बीजेपी अध्यक्ष ने दिल्ली सरकार पर भी जमकर जुबानी तीर चलाए। उन्होंने कहा, 'केजरीवाल जी ने दिल्ली के लिए क्या किया जरा बताइए। आपने कहा था कि 20 कॉलेज बनाएंगे, ये कॉलेज कहां गए पता नहीं। पांच हजार से ज्यादा स्कूल बनाने का वादा किया था, मैं चश्मा चढ़ाके देख रहा हूं कि कहां स्कूल बने, पर कहीं नहीं दिखता।' केजरीवाल सरकार पर बरसे अमित शाह शाह ने दिल्ली में कच्ची बस्तियों को पक्का करने को लेकर जारी राजनीतिक घमासान पर कहा, 'अभी तक सभी राजनीतिक दल अनाधिकृत कॉलोनियों के साथ राजनीति करते रहे, बहानेबाजी किया करते थे। नरेन्द्र मोदीजी ने एक ही झटके में सारी अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कर दिया। केजरीवालजी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत काम नहीं होने दिया, आयुष्मान भारत योजना भी लागू नहीं करने दिया।' कार्यकर्ताओं को घर-घर तक पहुंचने का दिया संदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से मोहल्ला सभा करने और घर-घर पहुंचने की अपील की। शाह ने कहा, 'आज का यह दृश्य बता रहा है कि फरवरी के अंत में दिल्ली में किसकी सरकार बनने वाली है। मैं मीडिया के मित्रों से कहना चाहता हूं कि ये जनता नहीं है, इतनी बड़ी संख्या में बूथ के चुनिंदा कार्यकर्ता हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं के पास मौका है कि दिल्ली के घर-घर में जाकर हमारी नीतियां जनता तक पहुंचाएं। बीजेपी को चुनाव सभाओं से नहीं लड़ना है, बल्कि घर-घर जाकर लड़ना है। मोहल्ला मीटिंग करके लड़ना है। इस मोहल्ला मीटिंग की शुरुआत मैं ही करने जा रहा हूं।'
लाहौर पाकिस्तान के ननकाना साहिब में शुक्रवार को सैकड़ों की भीड़ ने सिखों के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर पत्थरबाजी की। दोपहर से ही भीड़ ने गुरुद्वारे को घेर लिया है। अब मौके पर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात है, मगर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना से जुड़े विडियो में एक कट्टरपंथी सिखों को ननकाना साहिब से भगाने और इस पवित्र शहर का नाम बदलकर गुलाम अली मुस्तफा करने की धमकी देते दिख रहा है। पहली बार ननकाना साहिब में रद्द हुआ भजन-कीर्तन कट्टरपंथियों की भीड़ ने गुरुद्वारे को घेर रखा है। इस वजह से पहली बार गुरुद्वारा जन्म स्थान ननकाना साहिब में भजन-कीर्तन को रद्द करना पड़ा है। गुरु गोविंद सिंह जी के गुरुपरब के मौके पर अखंड पाठ शुरू होने वाला था। सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे के अंदर फंसे हुए हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। खौफ की वजह से सिख समुदाय के कई लोग घरों में भी छिपे हुए हैं। सिख लड़की का जबरन धर्मांतरण करने वाले कर रहे हैं भीड़ का नेतृत्व भीड़ का नेतृत्व पिछले साल ननकाना साहिब की एक सिख लड़की जगजीत कौर को अगवा करने और जबरन धर्मांतरण कर निकाह करने के आरोपी मोहम्मद हसन का परिवार कर रहा है। उनका आरोप है कि 'अपनी मर्जी से इस्लाम कबूलने' और 'शादी करने वाली' लड़कियों को लेकर सिख समुदाय बेवजह हंगामा खड़ा करता है। बता दें कि पिछले साल जिस जगजीत कौर का जबरन धर्मांतरण हुआ था, वह ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ही ग्रंथी की बेटी हैं। अकाली दल ने गुरुद्वारे पर हमले की निंदा की अकाली दल ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर भीड़ के हमले की निंदा की है। दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विटर पर हमले का विडियो शेयर करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से तत्काल ऐक्शन लेने की मांग की है। सिरसा ने एक अन्य ट्वीट में कहा है कि गुरुद्वारे पर हमले के बाद पूरे पाकिस्तान में सिख समुदाय के बीच दहशत का माहौल है और कई पाकिस्तानी सिख उन्हें फोन कर अपना डर जता रहे हैं। दिल्ली में पाक दूतावास के बाहर शनिवार को प्रदर्शन करेंगे सिख पाकिस्तान में गुरुद्वारा जन्म स्थान ननकाना साहिब पर हमले के विरोध में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और अकाली दल ने शनिवार को दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन का ऐलान किया है। DSGMC और अकाली दल शनिवार 4 जनवरी को पाकिस्तानी दूतावास के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की पोल खोल रहा विडियो पाकिस्तान के ननकाना साहिब में यह वाकया ऐसे वक्त हुआ है जब भारत में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। संशोधित कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक आधार पर प्रताड़ना का शिकार हो भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।
इस्लामाबाद पाकिस्तान ने भारत के नए आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के उस बयान को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पाक को आतंक फैलाने की हरकत न रोकने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसने साथ ही दावा किया बालाकोट स्ट्राइक के बाद इसने भारतीय सेना को कड़ी चुनौती थी। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को पनाह देने वाले पाक ने आगे यहां तक दावा किया कि उसका देश शांति की दिशा में काम कर रहा है। बता दें कि नरवणे ने पदभार ग्रहण करने के बाद कहा था कि अगर पाक अपनी जमीन से प्रायोजित होने वाले आतंकवाद को नहीं रोकता है तो भारत के पास एहतियातन आतंकी अड्डों पर हमले करने का अधिकार है। उधर, जनरल नरवणे के बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि हम पीओके में एलओसी की तरफ से भारत के एहतियातन कदम उठाने के भारत के नए आर्मी चीफ के बयान को खारिज करते हैं। पाक विदेश मंत्रालय यहीं नहीं रुका और गीदड़भभकी देते हुए कहा, 'भारत के किसी भी आक्रामक कदम को नाकाम करने के लिए पाकिस्तान के संकल्प और तत्परता को लेकर कोई संदेह नहीं रहना चाहिए।' बालाकोट स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए पाक विदेश मंत्रालय ने कहा, 'भारत के बालाकोट के दुस्साहस का पाकिस्तान की तरफ से दिए गए जवाब को किसी को नहीं भूलना चाहिए।' उल्लेखनीय है कि पिछले साल फरवरी में पुलवामा अटैक के बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी को पीओके और पाकिस्तान के खैबरपख्तूनख्वा में मौजूद आतंकी शिविरों पर हमला किया था। पुलवामा अटैक में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। भारत की कार्रवाई के अगले दिन 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायु सेना के जेट ने कश्मीर में भारतीय सीमा के अंदर घुसने का प्रयास किया, जिसे भारतीय वायु सेना ने खदेड़ कर भगा दिया था। दरअसल, नरवणे ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'अगर पाकिस्तान अपनी जमीन से प्रायोजित होने वाले आतंकवाद पर रोक नहीं लगाता, हम आतंकी खतरे के स्रोत पर एहतियातन हमला करने का अधिकार रखते हैं और हमने यह सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट ऑपरेशन से यह जाहिर कर दिया है।' पूरी दुनिया को यह बात पता है कि 26/11 मुंबई हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद पाकिस्तान में है, लेकिन बावजूद इसके पाकिस्तान शांति का दावा करता है। पाक ने एकबार फिर इसे दोहराते हुए कहा कि हम क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपना प्रयास जारी रखेंगे। इसने एकबार फिर भारत के मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद से पाकिस्तान भारत के खिलाफ भड़काऊ बातें कर रहा है। भारत ने दुनियाभर के हर मंच पर इस बात को पूरे जोर से दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और किसी भी देश को हमारे आंतरिक मामले में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।
नई दिल्ली कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मीटिंग बुलाने के प्रयास में चीन और पाकिस्तान को क्यों मुंह की खानी पड़ी, इसके बहुत दिलचस्प तथ्य सामने आने लगे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने 12 दिसंबर को सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को इस मांग का पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कश्मीर में भय का वातावरण होने और दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने की बात कही। उसी दिन यूएन ने अंतरधार्मिक बातचीत और शांति पर एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यूएन ने इस प्रस्ताव में करतारपुर कॉरिडोर खोलने के फैसले का स्वागत किया और इसे अंतरधार्मिक भावनाओं का सम्मान और पड़ोस में शांति कायम रखने की दिशा में एक पहल बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि यह सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के बीच चर्चा का केंद्रबिंदु बन गया क्योंकि यह प्रस्ताव किसी और ने नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान ने ही तीन अन्य देशों के साथ मिलकर पेश किया था। प्रस्ताव की भाषा पाकिस्तान के पत्र से अलग! ज्यादातर देशों ने करतारपुर कॉरिडोर की पहल के संदर्भ और प्रस्ताव की भाषा को कुरैशी के पत्र से अलग पाया। उन देशों को लगा कि पाकिस्तान और चीन जिस मुद्दे को उठा रहा है, उसे द्विपक्षीय स्तर पर ही बेहतर तरीके से निपटाया जाना चाहिए। प्रस्ताव का शीर्षक था 'अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक बातचीत को बढ़ावा, शांति के लिए सहयोग की समझ' था। इस प्रस्ताव में करतापुर साहिब कॉरिडोर खोलने के फैसले का स्वागत करते हुए भारत-पाकिस्तान की सरकारों के बीच हुए समझौते की सराहना की गई थी। फ्रांस और रूस ने इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताया चीन ने पाकिस्तान की तरफ से 17 दिसंबर को सुरक्षा परिषद की मीटिंग की मांग की थी ताकि कश्मीर के हालात पर चर्चा हो सके, लेकिन परिषद के शेष चार देशों के समर्थन के अभाव में यह संभव नहीं हो सका। एक फ्रेंच राजनयिक सूत्र ने तब कहा था कि कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाना चाहिए। दूसरे पश्चिमी देशों और रूसी राजनयिकों का भी यही नजरिया था। पाकिस्तान को झटके पर झटका पाकिस्तान ने प्रस्ताव पेश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के जिन राजनयिकों से संपर्क साधा था, उनमें कम-से-कम दो ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पाकिस्तान जिस तरह से सुरक्षा परिषद में कश्मीर के हालात पर तुरंत चर्चा की दरकार का नैरेटिव पेश कर रहा था, उसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव से बड़ा झटका लगा है। दिलचस्प बात यह है कि यह प्रस्ताव भी पाकिस्तान ने ही पेश किया था।
नई दिल्ली पाकिस्तान में हिंदू क्रिकेटरों के उत्पीड़न की बातें सामने आने के बाद पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने अपना एक और विडियो शेयर किया। कनेरिया इस विडियो में आरोप लगा रहे हैं कि पाकिस्तान ने उन क्रिकेटरों का स्वागत किया, जिन्होंने मुल्क तक बेच दिया। यूट्यूब पर पोस्ट इस विडियो की शुरुआत में कनेरिया कहते हैं, 'नमस्कार, सलाम, जय श्री राम। आपने जो प्यार और सपॉर्ट पिछले दिनों मुझे दिया, मैं उसको बयां नहीं कर सकता हूं।' सस्ती शोहरत के लिए नहीं विडियो उन्होंने कहा, 'जो लोग ये कह रहे हैं कि मैं सस्ती शोहरत, यूट्यूब विडियो के लिए ये बातें कर रहा हूं तो उन्हें याद दिला दूं कि मैंने नहीं बल्कि शोएब अख्तर ने की थीं। मैंने जिस तरीके से उन सब चीजों को झेला, कभी किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलते हुए उसे क्रिकेट के आगे नहीं आने दिया। हमेशा अपने खेल पर ही फोकस रखा।' हाथ-पैर काट दिए' कनेरिया ने कहा, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने अपना यूट्यूब चैनल बनाया, आप लोग क्या चाह रहे हो। आपने तो मेरे हाथ-पैर काट दिए, क्रिकेट तो दूर की बात, मुझे चैनल पर काम देना बंद कर दिया। जिस चैनल पर मैंने काम किया, उसके लिए पैसे अभी तक नहीं मिले।' 'मुल्क को नहीं बेचा' कनेरिया आगे कहते हैं, 'फिक्सिंग को लेकर मेरे बारे में बातें करते हैं लेकिन पहले जान तो लें कि मुझ पर दूसरे साथी क्रिकेटरों को उकसाने के आरोप लगे थे। कम से कम मैंने मुल्क को तो नहीं बेचा। यहां तो ऐसे लोग हैं जिन्होंने मुल्क को बेचा, जेल गए और फिर आकर टीम में क्रिकेट खेलने लगे। उनका सम्मान किया गया। मैंने तो कोई पैसे नहीं खाए, अपनी गलती भी स्वीकार की।' बयान से अब पलटे अख्तर बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व पेसर शोएब अख्तर ने कहा था कि पूर्व लेग स्पिनर कनेरिया को उनके हिंदू धर्म से संबंध रखने के चलते कई लोग उन्हें टीम में नहीं देखना चाहते थे। हालांकि इस पर उन्होंने अब सफाई दी और कहा कि उनके इस बयान को पूरी तरह गलत समझा गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना उनकी टीम का कल्चर नहीं है। ईसीबी ने लगाया था बैन कनेरिया को 2012 में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। पीसीबी ने 2012 में आईसीसी के भ्रष्टाचार रोधी प्रोटोकोल का अनुकरण करते हुए कनेरिया पर आजीवन प्रतिबंध को पुष्ट किया। कनेरिया इंग्लिश काउंटी मैचों में स्पॉट फिक्सिंग और अन्य खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्स करने के दोषी पाए गए थे।
नई दिल्ली ऐसे समय में जब पाकिस्तान में हिंदू क्रिकेटरों के उत्पीड़न की खबरें चर्चा में हैं, तब पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी का एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अफरीदी की बातें अकसर विवाद खड़ा करती हैं और उनका जो विडियो वायरल हो रहा है, उसमें वह भारतीय रीति-रिवाजों और पूजा करने के तरीके का मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल के विडियो में जब होस्ट निदा 44 वर्षीय इस पूर्व क्रिकेटर का इंटरव्यू ले रही थीं, जब अफरीदी ने हिंदुओं के आरती करने के तरीकों का मजाक उड़ाया। हालांकि यह विडियो थोड़ा पुराना है, लेकिन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अफरीदी विडियो में बताते हैं कि उन्होंने एक बार अपने घर का टीवी तोड़ा, लेकिन 'बेगम' की वजह से ऐसा किया। अफरीदी कहते हैं, 'पहले हमारे घरों में टीवी चैनलों के ड्रामे चला करते थे, मैं बेगम को मना करता था कि आप अकेले में टीवी देखा करो, बच्चों को ना दिखाया करो।' वह आगे कहते हैं, 'मैं एक दफा घर आया, जब कमरे से बाहर निकला तो देखा कि बेटी टीवी चैनल के सामने पता नहीं, क्या करते हैं थाली लेके यूं यूं..' वह इस दौरान हाथ में थाली पकड़ने का इशारा करते हैं, तब ही ऐंकर उन्हें बताती हैं कि इसे 'आरती' करना कहते हैं। करियर में 398 वनडे इंटरनैशनल मैच खेल चुके अफरीदी ने आगे कहा कि उन्हें अपनी बेटी को ऐसा करते देखकर काफी गुस्सा आया और उन्होंने अपना हाथ मारकर टीवी को तोड़ दिया।' इस पर वहां मौजूद दर्शक तालियां बजाते हैं। हाल में पाकिस्तान में हिंदू क्रिकेटरों के उत्पीड़न की बातें उनके टीम साथी रहे शोएब अख्तर ने कही थीं। अख्तर ने पहले दावा किया था कि दानिश कनेरिया के हिंदू होने के चलते उनके साथ पाकिस्तान के टीम साथी खाना खाने से भी परहेज करते थे। हालांकि बाद में उन्होंने कहा था कि उनकी बात को गलत समझा गया।
पेइचिंग भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए पड़ोसी देश चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। चीन का कहना है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए और सीमा पर बने हालात से चिंतित है। बता दें कि 2003 के सीजफायर समझौते का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तानी सैनिक बार-बार भारतीय सीमा में गोलीबारी कर रहे हैं। हाल के समय में तनाव की स्थिति तब उत्पन्न हुई जब बुधवार को पाक की फायरिंग में एक जेसीओ शहीद हो गए थे और एक महिला की मौत हो गई थी। भारत ने पाकिस्तान की हिमाकत का करार जवाब देते हुए मोर्टार दागे और गोलीबारी की जिससे सीमा के दूसरी तरफ भारी नुकसान हुआ है। चीन रख रहा स्थिति पर नजर उधर, चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, 'हमें संबंधित रिपोर्ट मिली है और हम मौजूदा स्थित से चिंतित हैं। भारत और पाकिस्तान पड़ोसी होने के नाते संयम बरतें। चीन दोनों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए मतभेद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील करता है। संयुक्त रूप से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखें।' रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान पीओके के अंदर गांवों में तोप और मोर्टार तैनात कर भारत में आबादी को निशाना बना रहा है। पाकिस्तान की सेना ने गुरुवार को को दावा किया कि नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों द्वारा बिना 'उकसावे के की गई गोलीबारी' में उसके दो सैनिक मारे गए। भारत ने दिया हिमाकत का जवाब रामपुर सेक्टर (उरी के करीब) में बुधवार को पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया था जिसमें सूबेदार वीराश कुरहाठी शहीद हो गए थे। बारामुला जिले के कई सेक्टरों में नागरिक और रक्षा ठिकानों को भी निशाना बनाया था। गोलीबारी से ग्रामीणों में खौफ का माहौल है। वहीं, भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्टार दागे और तोप से गोलाबारी की। सैन्य सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 3 से 4 सैनिक ढेर हुए हैं।
पेइचिंग चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने गुरुवार को कहा कि भारतीय सेना के साथ उनके संबंध बेहतर हो रहे हैं। पीएलए ने कहा कि रणनीतिक बातचीत और व्यवहारिक सहयोग के कारण ऐसा हो पाया है। पीएलए ने इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को धन्यवाद दिया है। चीन की सेना के प्रवक्ता कर्नल वु किआन ने कहा कि अभी भारत और चीन ने संयुक्त सैन्य अभ्यास खत्म किया और दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई करने को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने कहा, 'भारत और चीन के संबंधों में सैन्य संबंध सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।' उन्होंने कहा, 'इसके लिए दोनों देशों के नेताओं का धन्यवाद। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ रहा है, रणनीतिक बातचीत बेहतर हो रही है और व्यवहारिक सहयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।' बता दें कि 2018 में वुहान और इस साल चेन्नै में दोनों देशों के प्रमुखों के बीच इन्फॉर्मल समिट हुई थी। 2017 में डोकलाम में हुए गतिरोध के बाद इन मुलाकातों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। चेन्नै समिट के बाद शी ने कहा था, 'एक दूसरे के हितों से जुड़े मुद्दों को हमें ध्यानपूर्वक बढ़ाने की जरूरत है। हमें समस्याओं को ठीक ढंग और धैर्य से सुलझाना होगा।' उस दौरान शी ने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने की भी वकालत की थी।
न्यू यॉर्क कश्मीर की स्थिति पर चीन ने यूनाइटेड नेशंस सिक्यॉरिटी काउंसिल (यूएनएससी) में बंद कमरे में चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा था। सिक्यॉरिटी काउंसिल के सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के विरोध के बाद चीन ने अपने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया है। हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, दिसंबर में यूएनएससी के अध्यक्ष बने अमेरिका ने चीन के समर्थन वाला प्रस्ताव रोकने की अगुवाई की। वहीं, फ्रांस ने कहा कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। भारत ने इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। आधिकारिक सूत्रों ने कहा, 'भारत सिक्यॉरिटी काउंसिल का समदस्य नहीं है, इसलिए वह चर्चा में शामिल नहीं है।' फ्रांस के एक डिप्लोमैटिक सूत्र ने बताया, 'हमारी पोजिशन बिल्कुल साफ है। कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय रूप से ही देखना होगा। हमने हाल में न्यू यॉर्क सहित कई अवसरों पर यह बात कही है। भारत के समर्थन में आया ब्रिटेन यूएनएससी में इस मुद्दे पर ब्रिटेन ने पहली बार भारत का साथ खुले तौर पर दिया है, वहीं यूएनएससी के एक अन्य स्थायी सदस्य रूस ने कहा कि फोरम में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। रूस का कहना था कि अजेंडा में दूसरे अहम वैश्विक मुद्दे होने चाहिए। 15 सदस्यों वाली यूएनएससी में शामिल इंडोनेशिया ने इस बात पर ऐतराज जताया कि लाइन ऑफ कंट्रोल के भारतीय क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों के जमावड़े को चर्चा का आधार क्यों बनाया जा रहा है। इंडोनेशिया ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। एक सूत्र ने बताया कि सीमा के मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आने वाले हैं और चीन ने इससे पहले दबाव बनाने के लिए कश्मीर का प्रस्ताव बढ़ाया। जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत सरकार के निर्णय के बाद जारी किए गए मानचित्र को देखते हुए चीन चर्चा कराना चाहता था। भारत पर दबाव बनाना चाहता था चीन घटनाक्रम से वाकिफ एक शख्स ने बताया, 'अवकाश के कारण सुरक्षा परिषद में कामकाज बंद रहने वाला है। साथ ही, भारत की अमेरिका से 2+2 वार्ता बुधवार से शुरू होने वाली है और विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के लिए 21 दिसंबर को वांग यी भारत आने वाले हैं। ऐसे में यूएनएससी में बंद कमरे में चर्चा पर जोर देने का मकसद केवल यह था कि सीमा मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव बनाया जाए।' एक अन्य सूत्र ने कहा कि चीन यह दिखाकर भारत पर दबाव बनाना चाहता था कि सिक्योरिटी काउंसिल में भारत-पाकिस्तान अजेंडा और भारत-चीन सीमा मुद्दा है। 21 दिसंबर को विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत मोदी सरकार के दोबारा बनने के बाद से दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर है। मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत बढ़ाने का निर्णय किया गया था ताकि लाइन ऑफ कंट्रोल पर स्थिति साफ की जा सके। रिपब्लिकन सांसद ने कश्मीर पर भारत किया भारत का समर्थन अमेरिकी कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कश्मीर पर भारत के कदमों का समर्थन किया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद फ्रांसिस रूनी ने कहा कि 'भारत अमेरिका का अहम सहयोगी है। हमें कश्मीर पर उसके रुख का समर्थन करना चाहिए।' रूनी ने सोमवार को एक ब्लॉग में लिखा, 'कश्मीर में तीन दावेदारों के बीच भारत का दावा सबसे विश्वसनीय है। ब्रिटिश शासन खत्म होने पर 1950 के दशक में जम्मू कश्मीर के करीब दो तिहाई हिस्से ने भारत के साथ रहने का निर्णय किया था। इस राज्य को विशेष प्रशासनिक दर्जा दियागया था और आंतरिक प्रशासनिक निर्णयों में स्वायत्तता दी गई थी। बाद के वर्षों में जम्मू एवं कश्मीर की राज्य सरकार का भारत की केंद्रीय सरकार के साथ संबंध मजबूत होता
इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान की विशेष अदालत ने पूर्व सैन्य शासक को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ मामले की सुनवाई पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ के नेतृत्व वाली विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने की है। मुशर्रफ पर आपातकाल लगाने के लिए देशद्रोह साबित मुशर्रफ पर तीन नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने के लिए देशद्रोह का मामला चल रहा है। पाकिस्तान की पूर्व मुस्लिम लीग नवाज सरकार ने यह मामला दर्ज कराया था और 2013 से यह लंबित चल रहा था। दिसंबर 2013 में उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 31 मार्च 2014 को मुशर्रफ आरोपी करार दिए गए और उसी साल सितंबर में अभियोजन ने सारे साक्ष्य विशेष अदालत के सामने रखे। अपीलीय मंचों पर याचिकाओं के कारण पूर्व सैन्य शासक के मुकदमे में देरी हुई और वह शीर्ष अदालतों और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद मार्च 2016 में पाकिस्तान से बाहर चले गए। 28 नवंबर को फैसला सुनाने पर लगी थी रोक इससे पहले तीन जजों की बेंच ने बयान जारी कर कहा था कि देशद्रोह मामले में 17 दिसंबर को फैसला सुनाया जाएगा। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने दुबई में रह रहे मुशर्रफ और पाकिस्तान सरकार की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विशेष अदालत को 28 नवंबर को फैसला सुनाने से रोक दिया था। कुछ दिन पहले अस्पताल से विडियो जारी किया था पिछले सप्ताह विशेष अदालत ने 76 वर्षीय मुशर्रफ को देशद्रोह मामले में पांच दिसंबर को बयान रेकॉर्ड कराने के लिए कहा था। उसके बाद दुबई में रह रहे मुशर्रफ ने समर्थकों के लिए संदेश जारी करते हुए कहा था कि वह काफी बीमार हैं और देश आकर बयान नहीं दर्ज कर सकते। पाकिस्तानी मीडिया की खबरों में बताया गया था कि मुशर्रफ एक दुर्लभ किस्म की बीमारी अमिलॉइडोसिस से पीड़ित हैं। इस बीमारी के कारण बची हुई प्रोटीन शरीर के अंगों में जमा होने लगती है। फिलहाल मुशर्रफ इलाज करा रहे हैं। विडियो संदेश जारी कर दी थी अपनी सफाई देशद्रोह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व सैन्य तानाशाह ने कुछ दिन पहले विडियो जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा मुल्क की खिदमत की है। विडियो संदेश में कहा, 'मुझ पर गद्दारी के जो आरोप लगाए गए हैं, मेरी समझ में पूरी तरह से गलत हैं। मैंने 10 साल तक मुल्क की खिदमत की। मैंने जंग लड़ी हैं। मेरे ख्याल से मुझ पर मुल्क से गद्दारी का कोई केस नहीं बनता है।'
इस्लामाबाद पुलवामा में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविरों पर भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक पर बनने वाली फिल्म से पाकिस्तानी सेना बेचैन हो उठी है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने ट्वीट के जरिए भारतीय फिल्मकारों के प्रति अपनी चिढ़ जाहिर की है। बता दें कि बॉलीवुड फिल्मकार संजय लीला भंसाली और भूषण कुमार ने बीते फरवरी महीने में पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविरों पर भारतीय वायुसेना के हवाई हमलों पर फिल्म बनाने का ऐलान किया है। भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक में बड़ी संख्या में आतंकी ढेर हुए थे। भारतीय फिल्मकारों ने फिल्म का ऐलान करते हुए लिखा था कि ‘आइए, देश की धरती के सपूतों के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म 2019 बालाकोट स्ट्राइक पर आधारित है। एक कहानी जो भारतीय वायुसेना की उपलब्धियों की गाथा सुनाती है। यह बात पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर को पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म से जुड़े एक लिंक के साथ ट्वीट किया, ‘बतौर सैनिक, अभिनंदन के पूरे सम्मान के साथ कहना चाहूंगा कि भारत अपने अरमान बॉलीवुड फिल्मों के जरिए ही पूरा कर सकता है।’ गौरतलब है कि भारतीय अभिनेता विवेक ओबरॉय ने भी विंग कमांडर अभिनंदन पर आधारित फिल्म ‘बालाकोट-द ट्रू स्टोरी’ बनाने का ऐलान किया है। CAA के विरोध प्रदर्शनों से खुश पाक पाकिस्तान सेना के अधिकारी ने भारत में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को ही 'सर्जिकल स्ट्राइक' कहकर खुश होने का तरीका निकाल लिया। आसिफ गफूर ने कहा, 'मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक अब भारत में ही हो गई है।' गफूर ने हिंसक प्रदर्शनों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि भारत ने जो उसके साथ किया था, वह खुद झेल रहा है। दरअसल 1971 में पाकिस्तान की हार उसे आज भी याद आती है तो पाक खीझ उठता है। 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मनाया गया।
लंदन ब्रिटेन के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी ने शानदार जीत हासिल करते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। दूसरी तरफ, भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है। कंजर्वेटिव और लेबर पार्टी दोनों से करीब एक दर्जन भारतीय मूल के सांसदों ने अपनी सीट बरकरार रखी है, जबकि कुछ नए चेहरों ने भी जीत हासिल की है। पिछली संसद के सदस्य रहे सभी भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने इस बार भी अपनी-अपनी सीटों पर जीत हासिल की है। पहली बार जीत हासिल करने वाले भारतीय मूल के उम्मीदवारों में कंजर्वेटिव पार्टी के गगन मोहिंद्रा और क्लेयर कोर्टिन्हो और लेबर पार्टी से नवेंद्रु मिश्रा शामिल हैं। गोवा मूल की कोर्टिन्हो ने जीत के बाद कहा कि यह वक्त ब्रेग्जिट को अंजाम तक पहुंचाने का है। उन्होंने सरे ईस्ट सीट से जीत हासिल की है। मोहिंद्रा ने भी हर्टफोर्डशर साउथ वेस्ट सीट से जीच हासिल की है। इनके अलावा पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने भी विटहेम से आसान जीत हासिल की है। इस बार भी वह जॉनसन की टॉप टीम का हिस्सा रहेंगी। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद ऋषि सुनक ने भी जीत हासिल की है। इसके अलावा पूर्व मंत्री आलोक शर्मा ने भी रीडिंग वेस्ट सीट से जीत हासिल की है। नॉर्थ वेस्ट कैंब्रिजशर सीट से शैलेश वारा ने भी जीत हासिल किया है। गोवा मूल की सुएला ब्रेवरमैन ने फेयरहम सीट से जीत हासिल की है। विपक्षी लेबर पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है लेकिन उसके भारतीय मूल के सभी सांसदों ने इस बार भी जीत हासिल किया है। पिछली बार जीत हासिल कर ब्रिटेन की पहली महिला सिख सांसद बनने का गौरव हासिल करने वाली प्रीत कौर गिल ने इस बार भी जीत हासिल की है। इसके अलावा ब्रिटेन के पहले पगड़ीधारी सिख सांसद तनमनजीत सिंह धेसी भी एजबेस्टन से दोबारा चुने गए हैं। उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी के कंवर तूर गिल को शिकस्त दी है। लेबर पार्टी से नवेंद्रु मिश्रा ने स्टॉकपोर्ट सीट से जीत हासिल की है और वह पहली बार संसद में पहुंचे हैं। इसके अलावा वीरेंद्र शर्मा, लीसा नैंडी, सीमा मल्होत्रा, कीथ वाज की बहन वलेरी वाज ने भी जीत हासिल की है।
नई दिल्ली देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की निर्मला सीतारमण की कोशिशें भले ही अब तक रंग नहीं लाई हो, लेकिन उनके काम की चर्चा वैश्विक स्तर पर जरूर हो रही है। फोर्ब्स ने निर्मला सीतारमण को विश्व की 100 सबसे पावरफुल महिला की लिस्ट में शामिल किया है। इस लिस्ट में HCL कॉर्पोरेशन की सीईओ रोशनी नडार मल्होत्रा, बायोकॉन की फाउंडर किरण मजूमदार शॉ का भी नाम है। निर्मला सीतारमण लिस्ट में 34वें पायदान पर हैं भारत की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस लिस्ट में 34वें पायदान पर, रोशनी नडार मल्होत्रा 54वें पायदान पर और किरण मजूमदार शॉ 65वें पायदान पर हैं। निर्मला सीतारमण देश के पहली महिला वित्त मंत्री हैं। हालांकि इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए अपने पास कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रखी थी। इससे पहले वह देश की पहली महिला रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। पिछले 9 सालों से एंगेला मर्केल टॉप पर जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल को इस लिस्ट में टॉप पर हैं। वह पिछले 9 सालों से नंबर वन पर काबिज हैं। दूसरे नंबर पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रेसिडेंट क्रिस्टिन लेगार्ड हैं। अमेरिकी सांसद और स्पीकर नैंसी पलोसी इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। पड़ोसी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीन लिस्ट में 29वें पायदान पर हैं। डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका 42 वें पायदान पर इनके अलावा इस लिस्ट में मिलिंडा गेट्स छठे पायदान पर, आईबीएम की सीईओ गिनी रोमेटी नौवें पायदान पर, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एंड्रेन 38वें पायदान पर, डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप 42 वें पायदान पर, सिंगर रिहाना 61वें पायदान पर, बियोंस 66वें पायदान पर, टेलर स्विफ्ट 71वें पायदान पर, टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स 81वें पायदान पर और क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट ग्रेट थनबर्ग 100वें पायदान पर हैं।
लाहौर अस्पताल में तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में पाकिस्तान के 250 वकीलों पर केस दर्ज किया गया है। डॉक्टरों से बदला लेने के लिए वकीलों ने लाहौर के पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियॉलजी पर हमला कर दिया था और इस घटना में गंभीर रूप से घायल पांच मरीजों की बुधवार को मौत हो गई। वकीलों का कहना था कि उन्होंने दो हफ्ते पहले एक साथी वकील पर चिकित्सकों द्वारा किए गए हमले का बदला लेने के लिए ऐसा किया। पत्रकारों के भी तोड़े कैमरे अधिकारियों ने बताया कि वकील जैसे ही अस्पताल में घुसे, वहां मौजूद चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मी मरीजों को छोड़कर भागने लगे। जो चिकित्सक ऑपरेशन कर रहे थे वे भी बीच में ही इलाज छोड़कर भाग गए। वकीलों ने भाग रहे कुछ डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों को पीटा और घटना कवर कर रहे पत्रकारों को भी उन्होंने नहीं बख्शा। वकीलों ने पुलिस की एक गाड़ी में आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अस्पताल में तैनात पुलिसकर्मी भी वहां से भागने लगे। उन्होंने कहा कि वकीलों ने दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं, अस्पताल में खड़ी कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कुछ पत्रकारों के कैमरे तोड़ दिए। इलाज के लिए मोहताज मरीज घटना के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति में गंभीर मरीजों की हालत और खराब होती जा रही है। इलाज न मिलने की वजह से दो महिलाओं की मौत हो गई। दर्ज एफआईआर के मुताबिक पहले 250 के करीब महिला वकील अस्पताल पहुंचीं। इसके बाद हजारों वकील वहां पहुंच गए जिनमें से कुछ के हाथ में डंडे या अन्य औजार थे। देखते-देखते वे अस्पताल में घुस गए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक वकीलों पर पाकिस्तान में कई धाराओं के साथ ऐंटी टेररिजम ऐक्ट भी लगाया गया है। करीब 4 हजार वकीलों ने किया हमला' पंजाब के सूचना मंत्री फैयलाजुल हसन चौहान ने संवाददाताओं से कहा कि अस्पताल में करीब चार हजार वकीलों के हमले के करण गंभीर रूप से बीमार पांच मरीजों की मौत हो गई। मंत्री से भी दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, ‘युद्ध के समय में भी अस्पतालों को बख्श दिया जाता है लेकिन उपद्रवी वकीलों ने आज सारी सीमाएं लांघ दीं और एक अस्पताल पर हमला कर दिया, जिससे पांच मरीजों की मौत हो गई और डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मी घायल हो गए।’ बाद में रेंजर्स और दंगा पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण किया।
नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2019,पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर भारत की लोकसभा में पास हुए नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है. पाकिस्तान पहले ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का विरोध कर रहा था, अब एक और फैसले के विरोध में उतर गया है. इमरान खान ने ट्वीट कर मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा. इमरान ने आरोप लगाया कि ये बिल दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर लिखा, ‘भारत की लोकसभा द्वारा जो नागरिकता बिल पास किया गया है, उसका हम विरोध करते हैं. ये कानून पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समझौते और मानवाधिकार कानून का उल्लंघन करता है. ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है जिसे अब मोदी सरकार लागू कर रही है.’ बता दें कि इससे पहले भी पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी कर इस बिल का विरोध किया गया था. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ये बिल दोनों देशों के बीच तमाम द्विपक्षीय समझौतों का पूरी तरह से उल्लंघन है और खासतौर पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए चिंताजनक है. भारत सरकार जो नागरिकता संशोधन बिल लाई है, उसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख, ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के कानून में वह इस्लामिक देश हैं, इसलिए वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं. इसलिए उन्हें इस बिल में शामिल नहीं किया गया है. अनुच्छेद 370 का भी किया था विरोध ऐसा पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की ओर से भारत के किसी फैसले पर इस प्रकार की आपत्ति हुई है. नागरिकता संशोधन बिल से पहले भारत की संसद ने अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला किया था, तब भी पाकिस्तान को आपत्ति हुई थी. पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 के मसले को अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र तक उठाया था हालांकि कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को हर जगह मात मिली थी.
वॉशिंगटन अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर गठित एक अमेरिकी कमिशन ने लोकसभा से पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक को गलत दिशा में खतरनाक कदम बताया है। विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास होने पर कमिशन ने भारत के गृहमंत्री अमित शाह पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कमिशन ने NRC पर भी चिंता जाहिर की है। विधेयक के मुताबिक, तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। शाह ने इसे सोमवार को लोकसभा में पेश किया। सात घंटे से अधिक समय तक बहस के बाद इसे पास किया गया। विधेयक के पक्ष में 311 सदस्यों ने वोट किया, जबकि 80 विरोध में रहे। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। बिल पेश करते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसी धर्म से जुड़े लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि यह बिल तीन पड़ोसी देशों के उन अल्पसंख्यकों को राहत देगा जिन्होंने वहां कष्ट झेला है। अमित शाह और दूसरे नेताओं पर लगे प्रतिबंध सोमवार को जारी एक बयान में यूएस कमिशन फॉर इंटरनैशनल रिलिजस फ्रीडम (USCIRF) ने कहा, 'यदि CAB को भारतीय संसद के दोनों सदनों से पास हो जाता है तो अमेरिकी सरकार गृहमंत्री अमित शाह और दूसरे प्रमुख नेताओं पर प्रतिबंध का विचार करे।' इसमें आगे गया है, 'अमित शाह द्वारा पेश किए गए धार्मिक मानदंड वाले इस विधेयक के लोकसभा में पारित होने से USCIRF बेहद चिंतित है ।' 'धर्म के आधार पर कानून' USCIRF ने आरोप लगाया कि CAB आप्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है हालांकि इसमें मुस्लिम समुदाय का जिक्र नहीं है। इस तरह यह विधेयक नागरिकता के लिए धर्म के आधार पर कानूनी मानदंड निर्धारित करता है। उसने कहा, 'कैब गलत दिशा में बढ़ाया गया एक खतरनाक कदम है। यह भारत के धर्मनिरपेक्ष बहुलवाद के समृद्ध इतिहास और भारतीय संविधान का विरोधाभासी है जो धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है।' NRC पर भी चिंतित कमिशन ने असम में चल रही राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) की प्रक्रिया और गृह मंत्री शाह द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी के बारे में कहा, 'USCIRF को यह डर है कि भारत सरकार भारतीय नागरिकता के लिए धार्मिक परीक्षण के हालात पैदा कर रही है जिससे लाखों मुस्लिमों की नागरिकता पर संकट पैदा हो सकता है।' 'हमें नजरअंदाज कर रहा है भारत' उसने यह भी कहा कि भारत सरकार करीब एक दशक से अधिक समय से USCIRF के वक्तव्यों और वार्षिक रिपोर्टों को नजरअंदाज कर रही है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) शासन के दिनों से ही भारत लगातार कहता आ रहा है कि वह अपने आतंरिक मामलों में किसी तीसरे देश के विचारों या रिपोर्ट को मान्यता नहीं देता है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में आग लगने की घटना पर दुख जताते हुए उसे बेहद भयानक बताया है. सेंट्रल दिल्ली के फिल्मिस्तान इलाके में आग लगने से 43 लोगों की मौत हुई है. बताया जा रहा है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ भी सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा, ''दिल्ली की रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी में लगी आग बेहद भीषण है. मेरी संवेदना उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना. अधिकारी त्रासदी स्थल पर हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं.'' बता दें कि आग पर काबू पा लिया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन भी पूरा हो गया है लेकिन हादसे में कई लोग घायल हो गए हैं. गंभीर रूप से झुलसे लोगों को एलएनजेपी, लेडी हार्डिंग और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के भाई को हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी. फायर सर्विस के अधिकारी ने कहा कि 59 लोगों को पहले ही बाहर निकाल लिया गया था. लोगों की मौत झुलसने और दम घुटने से हुई है. उनका कहना है कि इलाके की गलियां बहुत सकरी हैं इसलिए ज्यादा गाड़ियां अंदर नहीं जा पा रही थी. राहत और बचाव कार्य पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में आग लगने की ये सबसे बड़ी घटना है.
इस्लामाबाद/नई दिल्ली अपने आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार दिए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से फजीहत करवा चुकी पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को आर्मी के अंदर से भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान आर्मी के 7 जनरल आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा के सेवा विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट के रोक का समर्थन किया है। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार प्रस्ताव किया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने रोक लगाते हुए फिलहाल महज 6 महीने तक के सेवा विस्तार की अनुमति दी है। इकनॉमिक टाइम्स को पता चला है कि इन सातों जनरलों ने बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाने का विरोध किया है क्योंकि इससे आर्मी चीफ बनने के उनके सपने पर पानी फिर जाएगा। विरोध करने वाले इन सात जनरलों में एक दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में डिफेंस अताशे भी रह चुके हैं। चीफ जस्टिस के साथ खड़े जनरलों की इस लिस्ट में मुल्तान के कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति के लिए वरीयता सूची में सबसे ऊपर हैं। उनके अलावा, लेफ्टिनेंट जनरल नदीम राजा, लेफ्टिनेंट जनरल हुमायूं अजीज, लेफ्टिनेंट जनरल नईम असरफ, लेफ्टिनेंट जनरल शेर अफगान और लेफ्टिनेंट जनरल काजी इकराम ने भी बाजवा के सेवा विस्तार के प्रस्ताव का विरोध किया है। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल बिलाल अकबर वरीयता क्रम में सातवें नंबर पर हैं। इनमें सभी ने सार्वजनिक तौर पर बाजवा का विरोध नहीं किया है, लेकिन टॉप के कुछ जनरलों ने आर्मी चीफ बने रहने के लिए सिस्टम से छेड़छाड़ के बाजवा के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। कहा जा रहा है कि वो इमरान खान सरकार के संबंधित प्रस्ताव पर रोक लगाने के फैसले के साथ मजबूती से खड़े हो गए हैं। बाजवा के बाद सीनियरिटी लिस्ट में टॉप पर मौजूद लेफ्टिनेंट जनरल सत्तार ने नियम के उल्लंघन से नाराज होकर कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है। कहा जा रहा है कि उनकी कुछ हफ्ते पहले बाजवा के साथ बहस भी हो गई थी। उन्होंने बाजवा पर पाकिस्तान आर्मी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था। नियम के मुताबिक, 29 नवंबर को ही बाजवा को आर्मी चीफ के पद से रिटायर हो जाना चाहिए था। ऐसा होता तो उनकी जगह अभी सत्तार पाकिस्तान के आर्मी चीफ होते। सत्तार मिलिटरी इंटेलिजेंस चीफ, इन्फेंट्री स्यालकोट कमांडिंग ऑफिसर और भारत में डिफेंस अताशे की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि जनरल (रिटायर्ड) राहिल शरीफ ने आर्मी चीफ के पद से रिटायरमेंट के पहले उनकी जगह लेने वालों में सत्तार का भी विकल्प दिया था। शरीफ को लगता था कि सत्तार उनकी नीतियों को आगे बढ़ाएंगे।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की तहरीके लब्बैक पार्टी के नेता खादिम हुसैन रिजवी ने करतारपुर कॉरिडोर (kartarpur corridor) को लेकर भड़काऊ बयान दिया है. रिजवी ने कहा है कि जिन्हें सिखों से इतनी मोहब्बत है वे लोग सीमा पार करके अमृतसर चले जाएं. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और आर्मी चीफ कमर जनरल बाजवा का नाम लिए बिना रिजवी ने कहा, सिखों की यूनिवर्सिटी खोलने के लिए पाकिस्तान नहीं बना. यह देश दीन का तख्त पर बैठाने के लिए बना है. सिखों को खुश करने के लिए पाकिस्तान नहीं बना. जिसको सिखों से बहुत ही प्यार है, वह अमृतसर चला जाए.'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का उद्घाटन किया. यह सात दशक में भारत व पाकिस्तान के बीच पहला धार्मिक संपर्क है. दरबार साहिब गुरुद्वारा को करतारपुर साहिब के नाम से भी जानते हैं. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के अंतिम समय यहीं पर गुजारे थे, जो अब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में है.zee news
लंदन ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के निकट शुक्रवार को हुई चाकूबाजी में शामिल संदिग्ध उस्मान खान का रिश्ता पाकिस्तान से जुड़ गया है। वह 10 साल पहले अपने तीन जिहादी साथियों के साथ पाकिस्तान गया भी था। उसकी योजना पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक टेररिस्ट ट्रेनिंग कैंप स्थापित करने की थी। ब्रिटिश कोर्ट ने उस्मान को 2012 में भी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तत होने का दोषी पाया था। ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के निकट शुक्रवार को हुई चाकूबाजी की घटना में दो लोग मारे गए थे। वहीं स्कॉटलैंड यार्ड ने फर्जी विस्फोटक जैकेट पहने एक पुरुष संदिग्ध को घटनास्थल पर मार गिराने की पुष्टि की थी।लंदन ब्रिज उन इलाकों में से एक है जहां जून 2017 में आईएसआईएस के आतंकी हमले में 11 लोगों की जान गई थी। अल-कायदा की आइडियॉलजी से प्रभावित था उस्मान उस्मान आतंकवादी संगठन अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित था। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के मुताबिक, उस्मान खान को साल 2010 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था और फरवरी 2012 में वुलविच क्राउन कोर्ट ने उसे आठ साल की जेल की सजा सुनाई थी। उस्मान स्टोक-ऑन-ट्रेंट, कार्डिफ और लंदन के 9 कट्टरपंथी समूह का एक सदस्य था। उस्मान ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अपनी पुश्तैनी जमीन पर 'आतंकवादियों के लिए ट्रेनिंग कैंप' स्थापित करने की योजना बनाई थी। 2010 में वह कट्टरपंथी समूह के सभी 9 सदस्यों में सबसे कम उम्र (19 वर्ष) का था। सजा देने वाले जज ने दी थी गंभीर चेतावनी तब वुलविच क्राउन कोर्ट के जस्टिस विल्की ने उस्मान के लिए सजा तय करते वक्त कहा था कि वह और उसके दो और साथी ग्रुप के बाकी छह सदस्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा कट्टर हैं और तीनों के अंदर जिहाद का भूत सवार है। जज ने उस्मान खान को तब तक जेल से रिहा नहीं करने का फैसला दिया था जब तक कि यह महसूस न किया जाए कि वह अब किसी के लिए खतरा नहीं है। हालांकि, बाद में उसकी रिहाई की यह शर्त वापस ले ली गई और उसे दिसंबर 2018 में रिहा कर दिया गया था। पीओके में टेरर कैंप बनाने की थी योजना जस्टिस विल्की ने कहा था कि उस्मान अपने दो साथियों नजम हुसैन और मोहम्मद शाहजहां के साथ फंड जुटाकर आतंकवादी प्रशिक्षण कैंप स्थापित करने की योजना बना रहे थे। योजना के मुताबिक, उस्मान और हुसैन को पाकिस्तान में आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए 2011 जनवरी में ब्रिटेन से निकलना था। वहीं, आतंकवाद पर नजर रखने वाले एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने जुलाई 2013 की एक रिपोर्ट में लिखा था कि उस्मान स्टोक के उन तीन जिहादियों में एक है जिन्होंने पाकिस्तान के केंद्रशासित प्रदेश फाटा जाकर फंड जुटाने, पीओके में टेररिस्ट ट्रेनिंग कैंप बनाकर वहां ट्रेनिंग में हिस्सा लेने की योजना बनाई थी। उनके पास से अंग्रेजी भाषा में अल-कायदा की पत्रिका इंस्पायर मिली थी। इस आतंकी समूह ने डाकखानों में लेटर बॉम्ब रखने पर भी विचार किया था। 2010 में रची थी इतनी बड़ी साजिश वुलविच कोर्ट में सुनवाई के वक्त बताया गया था कि इन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज और स्टोक के पबों के शौचालयों में पाइप बम लगाने की भी प्लानिंग की थी। इन आतंकियों के पास से अपने संभावित शिकारों की हस्तलिखित सूची भी मिली थी जिसमें लंदन के तत्कालीन मेयर बॉरिस जॉन्सन, सेंट पॉल कैथेडरल के डीन, लंदन स्थिति दो अमेरिकी दूतावासों और स्टॉक एक्सचेंज का जिक्र था। नौ जिहादियों के गैंग में थे दो बांग्लादेशी जस्टिस विल्की ने कहा था कि नौ आतंकवादियों का यह गैंग आतंकवादी गतिविधियों को सलीके से अंजाम देने के लिए लंबी अवधि की योजना बना रखी थी जिसे सफलता मिली होती तो ब्रिटेन में भी हाहाकार मच सकता था। उन्होंने अपने नोट में कहा, 'इस गैंग ने पाकिस्तान से प्रशिक्षित और अनुभवी आतंकवादी बनकर ब्रिटेन को आतंकवादी हमलों से दहला देने का सपना देखा था।' इस आतंकी समूह के सात सदस्य ब्रिटिश नागरिक थे जबकि दो बांग्लादेशी थे।
इस्लामाबाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ पाक सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के सेवा विस्तार को मंजूरी दे दी। पाकिस्तान की शीर्ष अदालत द्वारा गुरुवार को सुनाए गए इस फैसले को इमरान खान सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 3 सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की थी। चीफ जस्टिस आसिफ साईद खान खोसा के अलावा इस बेंच में जस्टिस मजहर आलम खान मियांखेल और जस्टिस मंसूर अली शाह भी थे। पाकिस्तान सरकार ने बाजवा का कार्यकाल 3 साल के बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी लेकिन कोर्ट इसे सिर्फ 6 महीने की मंजूरी दी है। बेंच ने अपने इस निर्णय में बाजवा के कार्यकाल को 6 महीने बढ़ाने की बात कही है और सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में जल्दी ही जरूरी कानून लेकर आए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा के कार्यकाल के विस्तार से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई थी। पुराने नियम के मुताबिक बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे थे। लेकिन अदालत के आज के आदेश के बाद अब वह अगले 6 महीने तक इस पद पर बने रह सकते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जब बाजवा के सेवा विस्तार से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगाई थी तो इस पर पीएम इमरान खान ने अपनी कैबिनेट के कानून मंत्री को फटकार लगाई थी। इसके बाद कानून मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि 19 अगस्त को इमरान खान सरकार ने बाजवा को 3 साल का एक्सटेंशन दिया था। अपने फैसले में पाकिस्तान सरकार ने 'क्षेत्रीय सुरक्षा के वातावरण' का हवाला देते हुए बाजवा के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। हालांकि सरकार ने अपना यह आदेश कोर्ट के दखल देने के बाद वापस ले लिया था और इस संबंध में अन्य एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसे बुधवार को भी निरस्त कर दिया गया।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के सेवा विस्तार से जुड़ी अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद पीएम इमरान खान ने मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। मंगलवार को दूसरी बार बुलाई गई मीटिंग में बाजवा के सेवा विस्तार को लेकर कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी। उधर, खबर है कि कैबिनेट की पहली बैठक में इमरान ने कानून मंत्री को जमकर लताड़ लगाई। उल्लेखनीय है कि बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। कानून मंत्री पर बरसे इमरान उधर, बाजवा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कानून मंत्री को इमरान की नाराजगी झेलनी पड़ी है। मंगलवार को कैबिनेट की पहली बैठक में इमरान अपने कानून मंत्री पर जमकर बरसे। जियो न्यूज के मुताबिक, इमरान इस बात से नाराज थे कि आखिर इस मामले में कानून मंत्रालय कर क्या रहा था, उसने पहले से सभी औपचारिकताएं पूरी क्यों नहीं कीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैबिनेट की बैठक का जो अजेंडा था, उस पर बात होने के बजाए बाजवा के सेवा विस्तार को सर्वोच्च अदालत द्वारा रोके जाने का मुद्दा छा गया। सूत्रों ने कहा कि बाजवा के सेवा विस्तार की अधिसूचना को रोके जाने पर प्रधानमंत्री खान बेहद गुस्से में दिखे और वह कानून मंत्री फरोग नसीम पर बरस पड़े। सूत्रों ने कहा कि इमरान ने कहा कि जब सेवा विस्तार का मामला तय हो चुका था तो फिर तमाम औपचारिकताएं पूरी क्यों नहीं की गईं, कानून मंत्रालय ने कोताही क्यों बरती और तमाम कानूनी पहलुओं पर काम क्यों नहीं किया गया। सूत्रों ने बताया कि इमरान के बरसने पर कैबिनेट की बैठक में सन्नाटा छा गया। नतीजा यह रहा कि बैठक के मूल अजेंडे को कुछ देर तक विचार के लिए नहीं उठाया गया। इमरान को नहीं मंजूरी का अधिकार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिसूचना पर रोक लगाते हुए चीफ जस्टिस खोसा ने इमरान सरकार की जमकर खिंचाई की। चीफ जस्टिस ने खोसा ने कहा, 'पीएम को आर्मी चीफ के सेवा विस्तार की मंजूरी देने का अधिकार नहीं है। आर्मी चीफ के सेवा विस्तार की मंजूरी राष्ट्रपति देते हैं। अगर राष्ट्रपति ने 19 अगस्त की समरी को मंजूरी दे दी थी, तब पीएम ने फिर 21 अगस्त को समरी को मंजूरी क्यों दी?' अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया, 'पीएम ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद समरी पर हस्तक्षर किया था।' इस पर कोर्ट ने पूछा, ' क्या पीएम और कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति ने फिर मंजूरी दी थी। शुरुआती मंजूरी राष्ट्रपति की तरफ से आती है। कैबिनेट मीटिंग से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी कानून के मुताबिक नहीं है।' जब अटॉर्नी ने कहा कि हम राष्ट्रपति की मंजूरी लेने की कोशिश करेंगे तो कोर्ट ने कहा, 'कैबिनेट के सिर्फ 11 सदस्यों ने मंजूरी दी थी, हम यह नहीं कह सकते कि इसको बहुमत की मंजूरी थी।
शिनजियांग खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संघ (इंटरनैशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स यानी ICIJ) के हाथ लगे और गार्डियन एवं अन्य अखबारों में प्रकाशित चीन के सरकारी दस्तावेज से उइगर मुसलमानों पर चीन के अत्याचार के हैरतअंगेज खुलासे हो रहे हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन शिनजियांग स्थित तथाकथित 'व्यावसायिक प्रशीक्षण केंद्रों' में उइगरों की ब्रेनवॉशिंग के लिए किस तरह के दांव-पेच का इस्तेमाल करता है। उइगर तुर्क भाषा बोलने वाला जानजातीय समूह है जिसमें ज्यादातर मुस्लिम हैं। वे चीन के उत्तर पश्चिमी इलाके शिनजियांग में रहते हैं। संयुक्तर राष्ट्र का कहना है कि चीन ने करीब 5 लाख उइगरों को डिटेंशन कैंपों में डाल रखा है। लिक्ड डॉक्युमेंट्स में 2017 का वह आदेश या 'टेलीग्राम' भी है जिस पर शिनजियांग के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और कम्यूनिस्ट पार्टी प्रमुख के दस्तखत हैं। इसमें बताया गया है कि डिटेंशन कैंप्स का निर्माण और संचालन किस तरह से किया जाए। इसमें जो निर्देश दिए गए हैं, वे हैं- 1. हिरासत में लिए गए उइगरों, जिसे चीन 'विद्यार्थी' कहता है, को अपने परिवार को हफ्ते में एक फोन कॉल और महीने में एक विडियो कॉल करने की इजाजत दी जाए। अधिकारी चाहें तो इन पर भी रोक लग सकती है। 2. हिरासत केंद्रों से कोई किसी भी तरह भाग नहीं सके, यह सुनिश्चित करना शीर्ष प्राथमिकता है। उइगरों पर चौबीसों घंटे कैमरे से निगरानी रखी जाए। ऐसा कोई कोना नहीं हो जहां कैमरे नहीं लगे हों। 3. चीन की भाषा मैंडरिन सीखना अनिवार्य है। निर्देशों में कहा गया है कि कट्टरता से दूर हटाने के लिए दैनिक जीवन में मैंडरीन का इस्तेमाल शीर्ष प्राथमिकता हो। 4. हिरासत में लिए गए उइगरों को कैंप में कम-से-कम एक वर्ष जरूर रखा जाए। एक वर्ष बाद उनकी रिहाई कब होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्होंने कितने नंबर लाए हैं और विचारधारा के स्तर पर उनमें कितना बदलाव आया है। रिहाई के बाद उन्हें कौशल आधारित प्रशीक्षण दिया जाए। ताजा लीक्ड डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि चीन हिरासत में लिए गए उइगरों के रिश्तेदारों और खासकर उनके बच्चों को किस तरह प्रताड़ित करता है। न्यू यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित पहले के दस्तावेजों के मुताबिक, चीन के अधिकारी हिरासत में लिए गए उइगरों के रिश्तेदारों को बताते हैं कि वो 'स्कूल में' हैं और वो स्कूल में कितने दिन तक रहेंगे यह अपने घरों में रह रहे परिजनों, रिश्तेदारों के व्यवहार पर भी निर्भर करता है। बहरहाल, हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक समूह ने 452 में 347 सीटें जीत ली हैं। उनका 18 में से 17 जिला परिषदों पर नियंत्रण है। ये सभी परिषदें पहले सरकार समर्थकों के नियंत्रण में थीं।
नई दिल्ली, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि विश्व मंच पर उस दौर में भारत की स्थिति काफी अच्छी थी लेकिन चीन के साथ 1962 के जंग ने देश की स्थिति को काफी नुकसान पहुंचाया. दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 1972 के शिमला समझौते के कारण जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के कारण एक विद्रोही समस्या पैदा हुई. विदेश मंत्री ने कई मामलों पर बात करते हुए हाल के दशक में भारत की मजबूत स्थिति का हवाला दिया. विदेश मंत्री ने कहा, आज की दुनिया अगर बदली हुई है तो हमें उसी हिसाब से बात करने और एक दूसरे से जुड़ने की जरूरत है. अलग थलग पड़ने से शायद ही कोई मदद मिलने वाली है. आज के दौर में भारत आतंकवाद से कैसे निपट रहा है, इसके बारे में उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले के वक्त क्या हुआ और दूसरी तरफ उरी व पुलवामा हमले के खिलाफ कैसी कार्रवाई की गई, इसे समझने की जरूरत है. विदेश मंत्री ने मुंबई हमले के बाद 'प्रतिक्रिया में कमी' की बात उठाई. विदेश मंत्री का इशारा उरी और पुलवामा हमले के बाद भारत की सर्जिकल स्ट्राइक की तरफ था. क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में भारत के न जुड़ने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि कोई बुरा समझौता करने से अच्छा है कोई समझौता न किया जाए.
इस्लामाबाद पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के लिए नई उम्मीद की खबर आ रही है। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के आधार पर जाधव को सिविल कोर्ट में अपील का मौका दिया जाएगा। जाधव यह अपील कर सकें इसके लिए सैन्य कानूनों में बदलाव भी किया जा रहा है। सिविल कोर्ट में अपील कर सकेंगे कुलभूषण पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, पाक जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सिविल कोर्ट में अपील का मौका मिल सकता है। इसके लिए सैन्य कानूनों में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद पाक सरकार ने यह कदम उठाया है। पाकिस्तानी सैन्य कानूनों में ऐसे अपील का प्रावधान नहीं पाकिस्तान में ऐसे केस जो सैन्य अदालतों में सैन्य कानूनों के तहत चलाए जाते हैं, उनमें सिविल कोर्ट में अपील की गुंजाइश नहीं होती है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को सिविल कोर्ट में अपील का अधिकार नहीं है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद कुलभूषण जाधव को यह छूट मिल सके, इसके लिए कानूनों में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। लिखें अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद जाधव से भारतीय राजनयिक की मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद इसी साल सितंबर में कुलभूषण जाधव से भारतीय राजनयिकों की मुलाकात हुई थी। हालांकि, पहली मुलाकात के बाद पाकिस्तान ने कह दिया था कि दूसरी बार जाधव को राजनयिक पहुंच नहीं दी जाएगी। जुलाई में आईसीजे ने अपने फैसले में बिना देरी के जाधव को राजनयिक पहुंच देने का आदेश दिया था। जाधव को सितंबर में राजनयिक पहुंच दी गई, लेकिन पाकिस्तान ने इस दौरान भी सामान्य शिष्टाचार का ख्याल नहीं रखा। मुलाकात की जगह ऐन मौके पर बदल दी गई और किसी अज्ञात जगह पर मुलाकात की गई।
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान की बेचैनी साफ नजर आ रही है। पाकिस्तानी सेना लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास की भारी तोपवाली रेजिमेंट्स की तैनाती बढ़ा रहा है। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाने की कोशिश की, लेकिन उसे कुछ खास सफलता नहीं मिली। एलओसी पर पाकिस्तान बढ़ा रहा सैन्य बल सूत्रों का कहना है कि, एलओसी के पास पाकिस्तान ने सेना को बढ़ाने की प्रक्रिया 5 अगस्त के बाद ही शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर प्रदेश को 2 केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के भारत सरकार के फैसले के बाद से पाकिस्तान ने बॉर्डर पर अपनी सेना बढ़ा दी है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एलओसी के पास पाकिस्तान ने भारी क्षमतावाले शस्त्रों की तैनाती की है। अधिकारी के अनुसार, 'सीमा पर तनाव को देखते हुए वर्तमान में पाकिस्तान ने एलओसी पर 16 तोपवाले रेजिमेंट्स जिनमें मध्यम और उच्च क्षमता दोनों शामिल हैं के साथ करीब 6 हजार सैनिकों की भर्ती की है।' एसएसजी स्थानीय आतंकियों के साथ कर रहा भारत के खिलाफ साजिश पाकिस्तान ने एलओसी के पास अपनी क्षमता संपन्न सैन्य टुकड़ी, स्पेशल सर्विस ग्रुप को भी तैनात किया है। सूत्रों के अनुसार, इस वक्त कम से कम 2 एसएसजी बटालियन एलओसी पर मौजूद हैं। एक एसएसजी में करीबन 700 सैनिक होते हैं। वरिष्ठ अधिकारी नेटाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि एसएसजी और स्थानीय आंतकी मिलकर बॉर्डर ऐक्शन टीम (बीएटी) के तौर पर भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं। बुधवार को पाकिस्तान की एसएसजी की एक टुकड़ी एलओसी पारकर कृष्णा घाटी सेक्टर में पहुंच गई। यहां पाकिस्तानी टुकड़ी ने एक भारतीय पोस्ट को निशाना बनाया, जिसमें एक भारतीय सैनिक शहीद हो गए। एलओसी पर मोर्टार दागने की रही है पाक की आदत एलओसी पर सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में पाकिस्तान आम तौर पर दूर तक मार कर सकने में सक्षम मोर्टार और आर्टिलरी बंदूकों का प्रयोग करता रहा है। पाकिस्तान के निशाने पर भारतीय सेना के पोस्ट के साथ नागरिक क्षेत्र भी होते हैं। भारी क्षमता वाले तोपों के जरिए पाकिस्तान भारतीय क्षेत्र में अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता रहा है। पाक की नापाक हरकतों का भारतीय सेना देती है करारा जवाब पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन का भारतीय सेना भी जोरदार तरीके से जवाब देती रही है। इस साल अब तक पाक की ओर से 2,472 सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले 2 सालों में यह आंकड़ा सबसे अधिक रहा है।
नई दिल्ली पिछले 10 दिनों से जहां राज्य सरकारों से कहा गया है कि वह उच्चतम न्यायालय के अयोध्या भूमि विवाद को लेकर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम करें। वहीं डार्क वेब से पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संभावित आतंकी हमलों के संदेश मिल रहे हैं। कई खुफिया एजेंसियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जैश कई आतंकी हमलों को अंजाम दे सकता है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। मिलिट्री इंटेलिजेंस, द रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने सरकार को संभावित आतंकी हमलों को लेकर चेताया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह खतरे की गंभीरता को दिखाता है।' उन्होंने कहा, 'इनमें से प्रत्येक एजेंसी व्यक्तिगत रूप से एक ही निष्कर्ष पर पहुंची है।' अयोध्या पर शीर्ष अदालत का फैसला आ चुका है जिससे पाकिस्तान के आतंकी समूहों द्वारा आतंकी हमलों की संभावना बहुत ज्यादा है। दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'आतंकी सांप्रदायिक सौहार्द को खराब करना चाहते हैं।' आतंकियों के डार्क वेब में कोडेड संचार को जब अन्य एजेंसियों से मिलाया गया तो सुरक्षा एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची कि संभावित हमलों से निपटने के लिए किस तरह की तैयारी की जाए। आतंकी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को टारगेट कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों पांच अगस्त से ही हाई अलर्ट पर हैं। इस तारीख को भारतीय संसद ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया था। अधिकारी ने कहा, 'आतंकियों के हमले को अंजाम देने की कोशिश पहले से अलग और पक्की लग रही है।'
नई दिल्ली वर्षों पुराने अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले से जुड़ी खबरें दुनियाभर के मीडिया में प्रमुखता से ऑनलाइन संस्करणों में प्रकाशित हुई हैं। अधिकतर अखबारों ने फैसले की तारीफ की है। मंदिर के लिए रास्ता निकला : द न्यूयॉर्क टाइम्स भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने देश की सबसे पुरानी धार्मिक साइट पर चल रहे कानूनी विवाद में हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए एक रास्ता निकाल लिया है। सबसे अच्छा यह हुआ है कि बहुसंख्यक बहुमत वाली सरकार के बजाय अदालत ने इस मसले पर अपना तटस्थ रुख सामने रखा। अदालत ने मुस्लिम समुदाय को भी वैकल्पिक जमीन मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों ही पक्षों की दलीलों को सुनने और एएसआई द्वारा रखे गए तथ्यों के आधार पर यह फैसला हुआ है। इस फैसले को लेकर मुस्लिमों को डर था कि वे देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाएंगे लेकिन फैसला तटस्थ रहा। वर्षों की लड़ाई के बाद फैसला : वाशिंगटन पोस्ट एक दिन पहले ही अपने ओप-एड में राणा अय्यूब की अयोध्या मामले पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अखबार ने सुप्रीम फैसले की रिपोर्ट जस की तस अपनी वेबसाइट पर दी है। अखबार ने लिखा, अदालत ने फैसला दिया है कि ध्वस्त मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बन सकता है। वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों ने स्वीकार करने की बात कही थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जाएगा क्योंकि हाल ही में मई माह में उन्हें जो जनादेश मिला है उसमें यह भी एक मुद्दा शामिल था। हिंदुओं को सौंपा विवादित स्थल विवादित स्थल को भारत की शीर्ष अदालत ने हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने ट्रस्ट बनाने और मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने को भी कहा है। यह फैसला कुछ लोगों के लिए अच्छा या कुछ के लिए बुरा हो सकता है लेकिन यह एक ऐतिहासिक दिन रहा और इस फैसले का सभी ने सम्मान किया। इस फैसले को सभी ने स्वागत योग्य बताया। राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को दिशा देगा अमेरिकी मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि इससे भारत के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को नई दिशा मिलेगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत ज्यादातर अमेरिकी मीडिया ने सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले को प्रमुखता दी। कानून-व्यवस्था की पर्याप्त व्यवस्था की भी अमेरिकी मीडिया ने सराहना की। सामुदायिक संघर्ष पैदा हो सकता है : डॉन शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद का गिराया जाना कानून और व्यवस्था का पूरी तरह से उल्लंघन था। फैसले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने असंतोष जताया है। कड़ी सुरक्षा में आया फैसला : येरुशलम पोस्ट भारतीय शीर्ष अदालत ने आखिरकार वही फैसला दिया जो ऐतिहासिक तथ्यों ने साबित किया। उसने विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया। इससे पहले देश और उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो। इस फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने सम्मान किया है। गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को : बीबीसी अयोध्या पर भारत में एक बड़ा फैसला आया है। बाबरी मस्जिद के गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने सौंप दी है। इस तरह एक बड़े विवाद का 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद पटाक्षेप हो गया है लेकिन आने वाला वक्त बताएगा कि दोनों समुदायों में किस तरह से सौहार्द का वातावरण बनाया जाता है। दाइचे वेले ने लिखा, करतारपुर और राम मंदिर दोनों ही ऐतिहासिक : भारत और पाकिस्तान के बीच जहां करतारपुर कॉरिडोर खोलने की खुशी है वहीं भारत में राम मंदिर का रास्ता साफ होने से खुशी का माहौल है।
इस्लामाबाद, 05 नवंबर 2019, एक अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा गया है कि वह 'लश्कर-ए-तैयबा' और 'जैश-ए-मोहम्मद' जैसे आतंकी संगठनों को धन उगाहने और नई भर्ती करने से रोक पाने में असफल रहा है. अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार और इसकी सेना ने लगातार पूरे देश में आतंकवादियों के ठिकानों को सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई की. पाकिस्तानी सरकार ने कुछ खास आतंकी समूहों को और व्यक्तियों को खुलकर आतंक का कारोबार चलाने से रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. पाकिस्तान ने जताई निराशा पाकिस्तान ने मंगलवार को इस अमेरिकी रिपोर्ट पर निराशा जताई. पाकिस्तान का कहना है कि इस रिपोर्ट में हमारी सरकार के प्रयासों और जमीनी ह​कीकत की पूरी तरह अनदेखी की गई है. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की 'कंट्री रिपोर्ट ऑन टेरेरिज्म 2018' में शुक्रवार को कहा गया कि पाकिस्तान सरकार ने तालिबान और हक्कानी नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाया जो पाकिस्तान आधारित सुरक्षित सैरगाह से संचालित होते हैं और अमेरिकी एवं अफगान फौजों के लिए खतरा बने हुए हैं. रिपोर्ट में क्या है पाकिस्तान की आलोचना करने वाली इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान 'लश्कर-ए-तैयबा' और 'जैश-ए-मोहम्मद' जैसे आतंकी संगठनों को धन उगाहने और नई ​भर्तियां करने से 'रोक पाने पाने में विफल' रहा है. कई आतंकी समूह हैं जो पाकिस्तानी जमीन से चलते हैं और 2018 से ही पाकिस्तान से बाहर आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का खात्मा करने के लिए नेशनल एक्शन प्लान के ​तहत ठोस कार्रवाई करने के लिए प्रति​बद्ध है. पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा ​है कि इस अमेरिकी रिपोर्ट से पाकिस्तान निराश है. ​इस रिपोर्ट में आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के संघर्षों, पाकिस्तान द्वारा पिछले वर्षों में दी गई कुर्बानी, पाकिस्तान के अहम प्रयासों और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया है. पाकिस्तान ने अपने बयान में दावा किया है, "हमारे प्रयासों से न केवल अल-कायदा का खात्मा हुआ, बल्कि हमारे प्रयासों ने दुनिया को एक सुरक्षित स्थान भी बनाया है." पाकिस्तान ने गिनाए उठाए कदम बयान में पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदम गिनाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रावधानों के तहत व्यापक कानूनी और प्रशासनिक उपाय किए हैं. इसके लिए नामित सभी संस्थाओं और व्यक्तियों को धन और आर्थिक संसाधनों से वंचित ​करने के प्रयास किए गए हैं. हमारे नेशनल एक्शन प्लान के तहत यह कार्रवाई जारी है और इसकी मियाद फरवरी तक बढ़ा दी गई है. पाकिस्तान का कहना है कि अमेरिकी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं है कि ये आतंकी समूह सीमा पार से पाकिस्तान के खिलाफ भी आतंकी कार्रवाई करते हैं. पाकिस्तान ने अफगान में शांति स्थापित करने और सुलह प्रक्रिया के संदर्भ में अमेरिका और तालिबान की सीधी बातचीत की सुविधा मुहैया कराई. पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी आक्षेप अनुचित है और यह द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगा.
नई दिल्ली, 06 नवंबर 2019, भारत में रह रहे यहूदियों और उनके ठिकानों पर आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, अलकायदा और आइएसआइएस (आईएसआईएस) जैसे आतंकी गुट हमला कर सकते हैं. इनके ऑनलाइन मैसेजिंग से साजिश का खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, केरल के एक जेहादी ग्रुप ने यहूदियों के ठिकाने की रेकी भी की है. केरल के कोच्ची में स्थित फ्रीमसन टेम्पल (Freemason Temple), सर्वोथामोम मेसोनिक टेम्पल (Sarvothamam Masonic Temple) और कोडर हाल (Koder Hall) पर जेहादी गुटों की नजर है. इसके साथ ही खुफिया एजेंसियों ने इजराइली टूरिस्ट के अपहरण की आशंका जताई है. अलर्ट पर एजेंसी आतंकियों के हर गतिविधि पर खुफिया एजेंसियों की नजर है. पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां आंतकियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुई हैं. नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के इलाके में सात आतंकवादियों के दाखिल होने की खुफिया जानकारी के बाद में प्रदेश हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है . समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आने से कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में सात आतंकवादियों की घुसपैठ की जानकारी मिली है. इस खुफिया जानकारी ने पुलिस-प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है. अयोध्या में भी अलर्ट सूत्रों का यह भी कहना है कि ये आतंकी अयोध्या में भगवा कपड़े पहन कर घुस सकते हैं , जिससे असली भक्तों के साथ घुलने-मिलने में इन्हें आसानी हो. इस खुफिया सूचना के बाद पुलिस ने होटल, धर्मशाला, बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों पर कड़ी चौकसी कर दी है. होटल मालिकों को आगंतुकों को कमरा देने से पहले पूरी पड़ताल करने को कहा गया है. बता दें कि अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी हो गई है और इस केस में अब फैसला आने वाला है.
वॉशिंगटन खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के सरगना अबु बकर अल-बगदादी के मारे जाने के बाद भी खतरा अभी टला नहीं है। दरअसल, यह आतंकी संगठन दुनियाभर में अपने पांव पसार चुका है। अमेरिका का कहना है कि इस समय दुनिया में IS की 20 शाखाएं खुल चुकी हैं। चिंता की बात यह है कि एक शाखा दक्षिण एशिया में भी ऐक्टिव है और इसने पिछले साल भारत में आत्मघाती हमले की कोशिश की थी। एक टॉप अमेरिकी अधिकारी ने अपने सांसदों को यह जानकारी दी है। भारत में आत्मघाती हमले की कोशिश की' अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकनिरोधक सेंटर के कार्यकारी निदेशक रशेल ट्रैवर्स ने US सांसदों को बताया, 'ISIS के खुरासान ग्रुप यानी ISIS-K ने पिछले साल भारत में आत्मघाती हमले की कोशिश की थी। आईएस के सभी गुटों में से ISIS-K अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात है। यह आतंकी गुट प्रॉपेगैंडा फैला रहा है और IS के नए सरगना से अपना कनेक्शन भी जाहिर कर चुका है।' अमेरिकी सेनेटर मैगी हसन के सवाल के जवाब में ट्रैवर्स ने यह जानकारी दी। क्षेत्र में आतंकी हमले करने की ISIS-K की ताकत के बारे में पूछे जाने पर ट्रैवर्स ने बताया, 'उन्होंने निश्चित तौर पर अफगानिस्तान के बाहर हमले करने की कोशिश की है। उन्होंने पिछले साल भारत में भी आत्मघाती हमले करने की साजिश रची थी लेकिन वे नाकाम रहे।' हसन पिछले महीने पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी गई थीं। इस दौरान उन्हें अमेरिकी सेना से ISIS-K की तरफ से बढ़ते खतरे को लेकर जानकारी मिली। IS आतंकियों के पास ड्रोन उड़ाने की क्षमता हसन ने कहा, 'मैंने स्पष्ट तौर पर सुना कि ISIS-K अफगानिस्तान में न केवल अमेरिकी फोर्सेज के लिए खतरा बन चुका है बल्कि यह अमेरिका की सरजमीं पर भी हमले कर सकता है।' ट्रैवर्स ने पिछले हफ्ते कहा था कि दुनिया में 20 शाखाएं IS की हो चुकी हैं और कुछ तो आधुनिक तकनीक से भी लैस हैं, जिनमें ड्रोन का ऑपरेशन करने की भी क्षमता है। हसन ने कहा है कि इराक और सीरिया में आईएस के खिलाफ अमेरिका को मिली बड़ी कामयाबी के बाद भी यह आतंकी संगठन हमारे लिए खतरा बना हुआ है। ट्रैवर्स ने बताया कि ISIS-K ने कुछ साल पहले न्यू यॉर्क में हमले की कोशिश की थी लेकिन FBI ने उसे नाकाम कर दिया। इसके बाद 2017 में स्टॉकहोम में 2017 में हमला हुआ, जिसमें 5 लोगों की जान चली गई। खुरासान क्या है दरअसल, भारत और आसपास के मुल्कों ईरान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान जैसे देशों के लिए आईएस आतंकियों ने इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान गुट बनाया है। खुरासान शब्द का अर्थ होता है, जहां से सूरज उगता है। प्राचीन खुरासान या खोरासान मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र था जिसमें आज का अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पूर्वी ईरान का हिस्सा शामिल था। इस समय ईरान के एक प्रांत का नाम भी खुरासान है।
इस्‍लामाबाद करतारपुर आनेवाले तीर्थयात्रियों से शुल्क वसूलने के फैसले को लेकर पाकिस्तान सरकार की आलोचना के बाद अब पीएम इमरान खान ने एक दिन के लिए छूट देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि उद्घाटन के दिन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। पाकिस्तान यात्रियों से 20 डॉलर (करीब 1400 रुपये) सेवा शुल्क वसूलने पर अड़ा हुआ है। करतारपुर गलियारे से पाकिस्तान को हर महीने करीब 30 लाख डॉलर तक की कमाई हो सकती है। इसके अलावा पाकिस्तान सरकार ने भारत से करतारपुर की तीर्थयात्रा के लिए आने वाले सिखों के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी है। पाक पीएम ने कहा है कि पासपोर्ट जरूरी नहीं, सिर्फ एक वैध आईडी से काम चल जाएगा। साथ ही तीर्थयात्रियों को अब 10 दिन पहले पंजीकरण भी नहीं कराना होगा। आपको बता दें कि 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया जाएगा। पाकिस्‍तान ने इसके लिए कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू को भी निमंत्रण भेजा है, जिसे उन्‍होंने स्‍वीकार कर लिया है। 12 नवंबर को गुरु नानक का 550वां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। गौरतलब है कि सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव ने करतारपुर साहिब में अपने जीवन के 18 साल बिताए। श्री करतापुर साहिब गुरुद्वारे को पहला गुरुद्वारा माना जाता है जिसकी नींव गुरु नानक देव ने रखी थी। हालांकि बाद में रावी नदी में बाढ़ के कारण यह बह गया था। इसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाया था।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एक प्रभावशाली धर्मगुरु एक विशाल रैली के लिए शुक्रवार को यहां पहुंचे। प्रदर्शनकारी इमरान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दक्षिणपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने 27 अक्टूबर को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ दक्षिणी सिंध प्रांत से आजादी मार्च की शुरुआत की है। ये लोग खान पर 2018 के आम चुनावों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इमरान खान पर लगाया चुनाव में धांधली का आरोप उन्होंने प्रधानमंत्री पर अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन, अक्षमता और कुप्रशासन का आरोप भी लगाया जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ गईं। जमीयत नेताओं ने कहा कि रहमान का 31 अक्टूबर को इस्लामाबाद पहुंचने का कार्यक्रम था, लेकिन काफिले में सैकड़ों की संख्या में वाहनों के होने की वजह से रफ्तार धीमी हो गई इससे देर हुई। मौलाना ने सुक्कूर, मुल्तान, लाहौर और गुजरांवाला के रास्ते अपना सफर तय किया और शुक्रवार को तड़के इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने रास्ते में अपने समर्थकों को बताया, 'वह (प्रधानमंत्री खान) चुनावों में धांधली कर सत्ता में आए हैं। उन्हें स्पष्ट संकेत देखने चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए वर्ना हम उन्हें बाहर कर देंगे।' प्रदर्शन मार्च में पीपीपी के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया आज टीवी को दिए एक साक्षात्कार में रहमान ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो देश में अव्यवस्था फैलेगी। सुरक्षा संस्थाओं के मुताबिक आजादी मार्च में हजारों लोग हिस्सा ले रहे हैं। इस्लामाबाद में यह आंकड़ा और बढ़ गया क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत विपक्षी दलों के समर्थक भी सरकार विरोधी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए। यह प्रदर्शनकारी पेशावर मोड के निकट एक विशाल मैदान में रुके हुए हैं जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को ठहराने के लिये तंबू लगा रखे हैं।
नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के सऊदी अरब दौरे के लिए विमान को अपने एयरस्पेस से उड़ने की मंजूरी न देने पर भारत ने वैश्विक संस्था में पाकिस्तान की शिकायत की है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने इंटरनैशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन से पाकिस्तान की इस हरकत की शिकायत की है। सूत्रों के मुताबिक किसी भी देश के ऊपर से उड़ान भरने के लिए उससे मंजूरी मांगनी होती है और वह नियमों के मुताबिक क्लियरेंस देता है। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'इंटरनैशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के नियमों के मुताबिक एक देश मंजूरी मांगता है और दूसरा देश इसकी अनुमति देता है। हम ओवरफ्लाइट क्लियरेंस मांगते रहेंगे और पाकिस्तान यदि इनकार करता है तो ऐसे मामलों को वैश्विक संस्था के समक्ष उठाएंगे।' यह दूसरा मौका है, जब पाकिस्तान ने पीएम नरेंद्र मोदी के विमान को अपने एयरस्पेस से उड़ने की अनुमति नही दी है। इससे पहले सितंबर में उनके अमेरिका दौरे के वक्त भी पाकिस्तान ने ऐसा ही किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इंटरनैशनल प्रैक्टिस का पालन करना चाहिए। उसकी पुरानी आदत है कि वह बेजा कारणों का हवाला देकर मंजूरी से इनकार करता रहा है। सूत्रों ने कहा, 'पाकिस्तान सकार ने एक बार फिर से वीवीआईपी स्पेशल फ्लाइट के क्लियरेंस को मंजूरी नहीं दी है, अन्य कोई भी देश ऐसा नहीं करता।' गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को सऊदी अरब के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। सऊदी अरब के दो दिनों के दौरे में पीएम नरेंद्र मोदी तेल और ऊर्जा से संबंधित कई समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।
दमिश्क इस्लामिक स्टेट के सरगना अबू बकर-अल बगदादी के मारे जाने के बाद इस खूंखार आतंकी संगठन की कमान अब अब्दुल्लाह कार्दश के पास आ गई है। अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक कार्दश ने पूर्व इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के मातहत सेना में काम किया था। न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक कार्दश ने पहले से ही इस्लामिक स्टेट के कई मामलों को संभालना शुरू कर दिया था। न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक बगदादी किसी भी ऑपरेशन का हिस्सा नहीं होता था। वह सिर्फ मंजूरी देता था और लड़कों का ब्रेनवॉश करता था। लेकिन किसी भी तरह के आतंकी हमले को अंजाम देने में पूर्व सैन्य अधिकारी कार्दश की अहम भूमिका होती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी साल अगस्त में एक हवाई हमले में बगदादी घायल हो गया था। इसके बाद से ही उसने आतंकी संगठन की कमान अब्दुल्लाह कार्दश को सौंप दी थी। आतंकी सरगना डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से भी पीड़ित था। ट्रंप ने कहा, बगदादी के उत्तराधिकारियों पर भी नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बगदादी के मारे जाने का ऐलान करते हुए कहा, ‘हम उसके उत्तराधिकारियों के बारे में जानते हैं और उन पर हमारी नजर है।’ उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, इस साल के शुरुआत में अमेरिकी सैनिकों ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन को मार गिराया था। हमजा लादेन को मारने से यह बड़ी कामयाबी' ट्रंप ने कहा, ‘हमजा बिन लादेन को मार गिराना बड़ी उपलब्धि थी लेकिन यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। ओसामा बिन लादेन बहुत बड़ा आतंकवादी था लेकिन लादेन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले से बड़ा आतंकवादी बना था। वहीं इस व्यक्ति ने पूरे क्षेत्र पर कब्जा करके एक देश बना लिया था जिसे वह ‘खिलाफत’ कहता था और वह यह दोबारा करने का प्रयास कर रहा था।’ ट्रंप बोले, खौफनाक मौत मरा बगदादी उन्होंने कहा, ‘मैंने बगदादी की सेहत के बारे में बहुत नहीं सुना था। मैंने सुना था कि उसकी सेहत ठीक नहीं थी लेकिन वह बहुत खौफनाक मौत मरा, यह मैं आपसे कह सकता हूं।
इस्लामाबाद कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से बौखलाए पाकिस्तान ने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए अपना एयरस्पेस खोलने से इनकार कर दिया है। पीएम मोदी के सऊदी अरब दौरे के लिए भारत ने पाकिस्तान से एयरस्पेस इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते आग्रह को अस्वीकार कर दिया है। पाकिस्तान रेडियो ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के हवाले से यह खबर दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर में 'मानवाधिकार उल्लंघन' और 'काला दिवस' के मद्देनजर लिया गया है। पाकिस्तान कथित तौर पर कश्मीरियों के समर्थन में रविवार को काला दिवस मना रहा है। कुरैशी ने कहा कि भारतीय उच्चाआयोग को इस फैसले की जानकारी लिखित में दी जा रही है। मोदी सोमवार को सऊदी अरब जाएंगे, जहां वह इंटरनैशनल बिजनस फोरम में हिस्सा लेंगे और सऊदी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे। इससे पहले पाकिस्तान ने सितंबर में भी पीएम मोदी को एयरस्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी थी, जब वह अमेरिकी दौरे पर जा रहे थे। इसके अलावा राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के लिए भी एयरस्पेस खोलने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तान ने फरवरी में भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिवरों पर एयरस्ट्राइक के बाद अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। पाकिस्तान ने 27 मार्च को अपना एयरस्पेस नई दिल्ली, बैंकॉक और कुआलालाम्पुर को छोड़कर अन्य फ्लाइट्स के लिए खोल दिया था। इसने सभी नागिरक विमानों के लिए अपना एयरस्पेस 16 जुलाई को खोल दिया था।
वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि बीती रात सीरिया में अमेरिकी सेना के एक बड़े ऑपरेशन में इस्लामिक स्टेट (आईएस) का सरगना अबु बकर अल-बगदादी मारा गया है। उसके साथ उसके तीन बच्चे और कई सहयोगी भी मारे गए हैं। ट्रंप ने बताया कि बगदादी एक सुरंग में छिपा हुआ था। उन्होंने कहा कि घिर जाने के बाद बगदादी ने खुद को बच्चों सहित उड़ा लिया। वह कायर था और कुत्ते की मौत मारा गया। ट्रंप ने कहा, 'पिछली रात अमेरिका दुनिया के नंबर एक आतंकी को इंसाफ के दायरे में ले लाया। अबु बकर अल-बगदादी मारा गया। वह दुनिया के सबसे खूंखार और हिंसक संगठन का संस्थापक और सरगना था।' ट्रंप ने आईएस के खिलाफ लड़ाई में सहयोग खासकर बगदादी के खिलाफ ऑपरेशन में सहयोग के लिए रूस, सीरिया और तुर्की को भी शुक्रिया कहा। ट्रंप ने कहा कि वह ऑपरेशन को देख रहे थे। बगदादी को पकड़ना या मारना मेरी प्राथमिकता में था: ट्रंप उन्होंने कहा, 'अमेरिका कई वर्षों से बगदादी की तलाश कर रहा था। बगदादी को पकड़ना या मारना मेरे प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।' दुनिया की सबसे अच्छी खुफिया एजेंसियों द्वारा खोजे जाने और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उसके बारे में सूचना देने के लिए ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखने के बावजूद बगदादी हाथ नहीं आया था।' इस्लामिक स्टेट का सरगना अबू बकर अल बगदादी शनिवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अमेरिका के विशेष बलों के हमले में मारा गया। डीएनए टेस्ट से हुई पुष्टि: ट्रंप डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को टीवी पर अपने संबोधन में कहा कि डीएनए टेस्ट से इस बात की पुष्टि हुई कि बगदादी मर चुका है। ट्रंप ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बगदादी सुरंग में छिप गया। इस दौरान उसने अपने आत्मघाती जैकिट में विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि इस ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा है। बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित कर रखा था बगदादी पूरी दुनिया में आतंक का सबसे खौफनाक चेहरा था। उसने खुद को खलीफा भी घोषित कर रखा था और वह सार्वजनिक तौर पर सिर्फ एक बार जुलाई 2014 में मोसुल के अल-नूरी मस्जिद में नजर आया था। उसने इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के जन्म की घोषणा की थी। इस मस्जिद पर इराकी सुरक्षाबलों ने 2017 में कब्जा कर लिया था। इस साल अप्रैल में वह 5 साल में पहली बार जिहादी संगठन द्वारा जारी किए गए एक विडियो में नजर आया था।
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2019,अपनी अजीबो-गरीब हरकतों से भारत को डराने का ड्रामा करने वाली पाकिस्तानी पॉप सिंगर रबी पीरजादा एक बार फिर से नये ड्रामे के साथ ट्विटर पर आई हैं. रबी पीरजादा ने इस बार कथित रूप से विस्फोटकों से भरी जैकेट पहन रखी है. रबी पीरजादा विस्फोटकों से भरी जैकेट पहनकर तस्वीर के लिए पोज दे रही हैं. इस तस्वीर में वो एक फिदायीन जैसी नजर नजर आ रही हैं. इस तस्वीर को अपने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ धमकी भरी बातें लिखी हैं. रबी पीरजादा अपनी इस तस्वीर के लिए भारत में मजाक बन गई हैं . ट्विटर पर लोग रबी पीरजादा की ड्रेस पर चुटकियां ले रहे हैं. भारत के एक यूजर ने लिखा है कि रबी खुद को कराची फैशन वीक के लिए तैयार कर रही है. एक यूजर ने लिखा है कि रबी कहीं दिवाली के मौके पर फट न जाए. सांपों से दे चुकी हैं भारत पर हमले की धमकी रबी पीरजादा गानों से ज्यादा अपनी करतूतों और हरकतों के लिए चर्चा में रहती हैं. इससे पहले रबी पीरजादा ने 50 सेकेंड का एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया था. इस वीडियो में वो भारत और पीएम नरेंद्र मोदी पर सांपों और मगरमच्छों से हमले की धमकी दे रही हैं. हालांकि, जब इन वीडियो को गौर से देखा गया तो पता चला कि ये सांप और मगरमच्छ खिलौने की दुकानों से खरीदे गए थे. रबी पीरजादा ने इस वीडियो के साथ लिखा था कि वो एक कश्मीरी लड़की को भारत के खिलाफ जंग के लिए तैयार कर रही है. अनुच्छेद 370 हटाने का ऐसा बदला! खास बात ये है कि रबी पीरजादा का कहना है कि वो जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का भारत सरकार से बदला लेगी. इसी वजह से वो कश्मीरी लड़कियों को तैयार कर रही है. रबी पीरजादा पॉप सिंगिग के अलावा कई टीवी शोज भी होस्ट कर चुकी हैं. कश्मीर पर अपने विवादित बयानों को लेकर वह चर्चा में रह चुकी हैं. रबी का नाम साल 2017 में सुर्खियों में तब आया था जब उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री और सलमान खान का विरोध किया था.
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2019,दिवाली के त्योहार से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर तनातनी का माहौल है. पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया, जिसके जवाब में भारतीय सेना ने एक्शन लिया. इसी गर्मागर्मी के बीच हर साल की तरह दिवाली पर जो बॉर्डर पर मिठाई एक्सचेंज होती है, वह इस बार नहीं हुई है. सूत्रों की मानें तो प्रोटोकोल के तहत हर साल इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय हाई कमिशन दिवाली पर सभी अहम दफ्तरों में मिठाई भेजता है. पाकिस्तान की ISI ने पहले प्रोटोकोल का स्वागत करते हुए मिठाई को स्वीकारा लेकिन बाद में उन्हें वापस कर दिया. बता दें कि ISI पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी है और पाकिस्तान की सत्ता-रणनीति में उसका दबदबा है. ना सिर्फ इस्लामाबाद में ISI या अन्य अधिकारी बल्कि बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने भी इस बार भारत के द्वारा दी गई मिठाई नहीं स्वीकारी है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को पंगु किए जाने के बाद से ही दोनों देशों के बीच हालात ठीक नहीं हैं और पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ भड़काऊ काम कर रहा है. PAK की हरकत का भारत ने दिया जवाब इसी हफ्ते पाकिस्तान की तरफ से जम्मू-कश्मीर के तंगधार इलाके में सीजफायर का उल्लंघन किया गया, जिसमें जवान और स्थानीय निवासियों को निशाना बनाया गया था. पाकिस्तान की इन्हीं हरकतों का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी कैंपों पर हमला किया था. भारतीय सेना की इस कार्रवाई में कई आतंकी और पाकिस्तानी सेना के जवान मारे गए थे. पाकिस्तानी सेना ने विदेशी पत्रकारों को कराया दौरा भारत के इस एक्शन पर पाकिस्तान लगातार दावे को गलत बताता रहा है. पाकिस्तानी सेना मंगलवार को कुछ विदेशी पत्रकारों और अधिकारियों को नीलम वैली में भी ले गई थी, जहां उन इलाकों का दौरा कराया गया. इस दौरे के लिए पाकिस्तानी सेना से भारतीय सेना से अपील की थी कि वह इस दौरान बॉर्डर पर कोई कार्रवाई ना करे, जिसे भारतीय सेना ने स्वीकार कर लिया था. हालांकि, मंगलवार दोपहर को पाकिस्तान ने खुद अपने वादे को तोड़ा और सीज़फायर उल्लंघन किया.
नई दिल्ली अंकारा तथा पाकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ती नजदीकियों और कश्मीर पर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले देश तुर्की को भारत रक्षा संबंधी निर्यात में कटौती कर रहा है। तुर्की को भारत सैन्य साजो-सामान तथा ड्यूअल यूज आइटम्स जैसे एक्सप्लोसिव्स तथा डेटोनेटर्स के निर्यात में इसलिए कटौती कर रहा है, क्योंकि उसे आशंका है कि वह इसका इस्तेमाल भारतीय हितों के खिलाफ कर सकता है। इस बीच, तुर्की के राष्ट्रपति की पाकिस्तान की निर्धारित यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। तुर्की पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव सीरिया में कुर्दो के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अंकारा पर भारत सहित कई अन्य देशों का दबाव बढ़ रहा है। भारत ने पूर्वोत्तर सीरिया में 'एकतरफा सैन्य कार्रवाई' पर चिंता जताई है और इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी कार्रवाई का मकसद क्षेत्र में शांति बनाए रखना और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होना चाहिए। संवेदनशील उपकरणों का निर्यात बंद सूत्रों ने इकॉनमिक्स टाइम्स को बताया है कि तुर्की के राष्ट्रपति रिजेब तैय्यप अर्दोआन द्वारा कश्मीर पर बार-बार दिए जा रहे बयानों और अंकारा द्वारा इस्लामाबाद को हथियारों की आपूर्ति में बढ़ोतरी को देखते हुए तुर्की को संवेदनशील उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा दी गई है और इसे जल्द बहाल करने की भी कोई संभावना नहीं है। भारत से तुर्की को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कम है, लेकिन ड्यूअल यूज आइटम्स जैसे डेटोनेटिंग कॉर्ड, सेफ्टी फ्यूज तथा कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल में आने वाले एक्सप्लोसिव्स की व्यापार में हिस्सेदारी ज्यादा है। ISIS ने किया भारतीय उपकरणों का इस्तेमाल सीरिया में आईएसआईएस द्वारा हथियारों के किए गए इस्तेमाल पर कॉनफ्लिक्ट अर्मानेंट रिसर्च (CAR) द्वारा 2017 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, आतंकवादियों द्वारा ज्यादातर आईईडी अटैक के लिए इस्तेमाल में लाए गए उपकरण भारतीय थे और उन्हें तुर्की सहित कई अन्य देशों को निर्यात किया गया था, जिसके बाद वे कॉनफ्लिक्ट जोन में पहुंच गए। खटाई में 2.3 अरब डॉलर की डील ईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि तुर्की शिपयार्ड के सहयोग से नौसेना के लिए फ्लीट सपोर्ट वेसेल्स के निर्माण की 2.3 अरब डॉलर की डील पर सुरक्षा संबंधित चिंताओं के मद्देनजर सवालिया निशान लग गया है और इसे रद्द किया जा सकता है।
वॉशिंगटन तुर्की के परमाणु हथियार बनाने की इच्छा जाहिर करने के बाद परमाणु प्रसार के लिए बदनाम रहा पाकिस्तान एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 15 साल पहले पाकिस्तान के परमाणु तस्कर अब्दुल कादिर खान ने स्वीकार किया था कि उसने कुछ देशों को परमाणु तकनीक बेची थी और उसका अवैध निर्यात किया था। अब डेढ़ दशक बाद यह मुद्दा फिर से गरम हुआ है क्योंकि तुर्की के राष्ट्रपति रिजेब तैय्यप अर्दोआन ने हाल ही में अपनी पार्टी की एक बैठक में कथित तौर पर तुर्की को न्यूक्लियर पावर बनाने की इच्छा जाहिर की है। तुर्की ने जताई न्यूक्लियर पावर बनने की इच्छा अर्दोआन ने अपनी पार्टी के एक करीबी नेता से हाल ही में कहा था, 'कुछ देशों के पास परमाणु क्षमता से लैस मिसाइलें हैं.... (लेकिन वेस्ट का जोर है) हमारे पास वह नहीं हो सकता। इसे मैं मंजूर नहीं कर सकता।' अर्दोआन के बयान से वॉशिंगटन में हलचल तेज अर्दोआन के इस बयान के बाद अमेरिका में हलचल तेज हो गई है। न्यू यॉर्क टाइम्स ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया, 'अगर अमेरिका इस तुर्किश नेता को अपने कुर्द सहयोगियों को बर्बाद करने से नहीं रोक सका तो वह उन्हें परमाणु हथियार बनाने या ईरान की तरह ऐसा करने के लिए परमाणु तकनीक इकट्ठा करने से कैसे रोक सकता है?' तुर्की का पाकिस्तान के कादिर से लिंक रिपोर्ट में आगे लिखा गया है, 'तुर्की पहले ही बम बनाने के प्रोग्राम पर काम कर रहा है, यूरेनियम का भंडार जमा किया हुआ है और रिएक्टरों से जुड़े रिसर्च कर रहा है। तुर्की का दुनिया के कुख्यात कालाबाजारी पाकिस्तान के अब्दुल कादिर खान के साथ रहस्यमय समझौता है।' अब्दुल कादिर खान तुर्की की कंपनियों के जरिए मंगवाता है परमाणु सामग्री लंदन के थिंक टैंक इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्ट्रेटिजिक स्टडीज ने कुख्यात परमाणु तस्कर अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क पर 'न्यूक्लियर ब्लैक मार्केट' नाम से स्टडी की थी। स्टडी के मुताबिक तुर्की की कंपनियों ने अब्दुल कादिर खान को यूरोप से परमाणु सामग्रियों को आयात करने में मदद की है। परमाणु तस्कर ने उत्तर कोरिया, ईरान, लीबिया को बेची तकनीक पाकिस्तान के इस परमाणु वैज्ञानिक पर उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को परमाणु तकनीक बेचने का आरोप है। अब ऐसी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि तुर्की उसका चौथा कस्टमर है। खुफिया रिपोर्ट्स भी इस तरफ इशारा कर रही हैं। खान का न्यूक्लियर नेटवर्क मलयेशिया तक फैला हुआ है। खान ने टीवी पर कबूली थी परमाणु कालाबाजारी की बात पाकिस्तान द्वारा परमाणु तकनीक बेचे जाने का मामला 2004-2005 में सामने आया। उस वक्त अमेरिका के बुश प्रशासन को अफगानिस्तान में पाकिस्तान की जरूरत थी। उसी दौरान अब्दुल कादिर खान ने परमाणु तस्करी की बात को टीवी पर स्वीकार किया था। हालांकि, खान ने दावा किया था कि परमाणु तकनीक बेचने का काम उसने अपनी मर्जी से किया था, इसमें पाकिस्तानी सरकार की कोई भूमिका या उसकी मंजूरी नहीं थी। पाक सरकार की शह पर खान ने की परमाणु तस्करी वैसे, यह स्पष्ट था कि खान ने सरकारी मशीनरी और उसकी सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए परमाणु तकनीक बेची थी। यह तथ्य ही उसके इस झूठ की हवा निकालने के लिए काफी था कि इसके पीछे निजी तौर पर वह जिम्मेदार था न कि पाकिस्तान। दिखावे के लिए खान एक तरह से घर में नजरबंद परमाणु प्रसार के लिए दोषी और गैरजिम्मेदार मुल्क की छवि से पीछा छुड़ाने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने डैमेज कंट्रोल के तहत अब्दुल कादिर खान के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा किया। खान को एक तरह से घर में नजरबंद कर दिया गया। यह सब इसलिए किया गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कहीं पाकिस्तान पर सख्त प्रतिबंध न लगा दे। अब्दुल कादिर खान हाल ही में सार्वजनिक तौर पर दिखा था। कराची यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में उसने तुर्की और मलयेशिया को उन देशों में बताया जिन्हें पाकिस्तान को बढ़ावा देना चाहिए। आतंकवाद को प्रायोजित करने, समर्थन देने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़े पाकिस्तान ने हाल ही में तुर्की और मलयेशिया के साथ मिलकर इस्लामी गठबंधन बनाने की कवायद की है। चीन के अलावा यही दो ऐसे देश हैं जो हाल के हफ्तों में खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े हुए। आतंकवाद को समर्थन को लेकर पाक को FATF से मिली वॉर्निंग दूसरी तरफ, पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त चीन को न चाहकर भी आतंकवाद के मसले पर इस्लामाबाद को चेतावनी देनी पड़ी। टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी करने वाली अतंरराष्ट्रीय संस्था फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अध्यक्षता अभी चीन के पास है। इसके बाद भी पैरिस में हुई FATF की हालिया बैठक में पाकिस्तान को न सिर्फ ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा गया, बल्कि उसे अगले 4 महीनों में आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की सख्त हिदायत भी दी गई।
मुजफ्फराबाद सीजफायर उल्लंघन कर अपनी खस्ता हालत को छिपाने वाले पाकिस्तान की अब पोल खुल गई है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में मंगलवार को ऑल इंडिपेंडेंट पार्टीज अलायंस (एआईपीए) के बैनर तले कई राजनीतिक दलों ने एक जनसभा का आयोजन किया था। इसी दौरान वहां प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग जख्मी हो गए। घटना से जुड़े विडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के बाद रैली स्थल पर भगदड़ मच गई। लोग अपन जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। वहीं कुछ लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर राजनीतिक दलों का विरोध करने में जुटे हैं। कार्यकाल नहीं पूरा कर पाएंगे इमरान' इससे पहले पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने रविवार को जिन्ना स्नातकोत्तर चिकित्सा केंद्र (जेपीएमसी) के अपने दौरे के समय कहा कि संघीय सरकार देश को सही दिशा में चलाने के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पाकिस्तान में हर कोई न कोई सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहा था। बिलावल ने कहा, ‘हर कोई इस कठपुतली सरकार से तंग आ गया है।’ मीडिया रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, ‘प्रत्येक राजनीतिक दल और व्यापारी, शिक्षक, डॉक्टर तथा मजदूर सहित सभी तबकों के लोग, सरकार की नीतियों से नाखुश हैं। इससे मुझे लगता है कि इमरान खान अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे।’
वॉशिंगटन, 22 अक्टूबर 2019,जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए हुए दो महीने से अधिक हो गया है. पाकिस्तान के द्वारा इस मसले को लगातार दुनिया के कई मंचों पर उठाया गया है, लेकिन वह इस मसले को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने में नाकाम रहा है. अब अमेरिका ने एक बार फिर अनुच्छेद 370 पर भारत का समर्थन किया है, ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया है कि भारत के द्वारा जम्मू-कश्मीर पर जो फैसला किया गया है, वह उसका समर्थन करते हैं. हालांकि, अमेरिका की ओर से जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों पर चिंता जताई गई है. अमेरिका के विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशिया डिपार्टमेंट की असिस्टेंट सेक्रेटरी एलिस वेल्स की ओर से कहा गया है कि भारत ने इसके पीछे तर्क दिया है कि इससे जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार बढ़ेगी, साथ ही कई कानूनों को लागू किया जा सकेगा. एलिस वेल्स ने कहा, ‘हम भारत के तर्कों का सम्मान करते हैं और फैसले का समर्थन करते हैं. अमेरिका इन हालातों पर नज़र बनाए हुए है, हालांकि हमारी ये भी उम्मीद है कि अभी जो पाबंदियां लगी हुई हैं वह जल्द ही खत्म होंगी’. उन्होंने कहा कि भारत को सभी फैसले मानवाधिकार के आधार पर लेने चाहिए, जल्द ही इंटरनेट और फोन सुविधा को जल्द शुरू करना चाहिए. आपको बता दें कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को पंगु करने का काम किया था, साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. इसी के बाद से ही इस विषय की दुनियाभर में चर्चा है. मोदी सरकार की ओर से जबसे ये फैसला लिया गया है, तो पाकिस्तान को काफी दिक्कत हुई है. पाकिस्तान लगातार इस मसले को दुनिया के सामने उठा रहा है, लेकिन अधिकतर देशों ने इस मसले पर भारत के फैसले का समर्थन किया है और इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है. पाकिस्तान की ओर से कश्मीर के मसले पर अपने देश में कई तरह के प्रदर्शन भी किए गए थे.
ई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2019,पाकिस्तानी सेना और ISI की नई साजिश का खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, ये ड्रोन की मदद से भारतीय सीमा में आतंकियों की घुसपैठ कराने की साजिश रच रहे हैं. इसके लिए ड्रोन में लगे हाईटेक कैमरों से घुसपैठ के लिए नए-नए रास्ते देखे जा रहे हैं. साथ ही आतंकियों को हाईटेक GPS और नेविगेशन करने वाले गैजेट्स से लैस किया जा रहा है. ISI ने कश्मीर में मौजूद ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) को आतंकी घुसपैठ के नए रूट प्लान तैयार करने का फरमान दिया है. सर्दियों में बर्फबारी के दौरान घुसपैठ के लिए गाइडों को रेकी करने के भी हुक्म दिए गए हैं ताकि आतंकी घुसपैठ के नए रूट तलाशे जा सकें. आतंकी घुसपैठ के लिए गाइडों का ही सहारा लेते हैं. सूत्रों का कहना है कि गुरेज सेक्टर के सेना की फॉरवर्ड लोकेशन और उस तक पहुंचने के लिए रास्तों की जानकारी और उसके नक्शे बनाने का काम सौंपा है. भारतीय सेना के कैंप और उस इलाके में मौजूद नदी नालों की जीपीएस लोकेशन भी तैयार करने में आतंकी जुटे हैं. ये सभी गाइड आतंकी तंजीम जैश और लश्कर से ताल्लुक रखते हैं. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के OGW और गाइडों पर नजर रख रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, ISI ने बाकायदा भारतीय इलाकों में उनके ओवर ग्राउंड वर्कर, वो लोग जो कि घुसपैठ के बाद उन्हें रिसीव करेंगे और एलओसी के पास के गांव में जो लोग उन्हें ठिकाना देंगे उसकी भी जानकारी आतंकियों को दी है. ताकि घुसपैठ के नए रूट प्लान साझा कर सकें. खुफिया रिपोर्ट में ये भी साफ हुआ की गुरेज सेक्टर के दूसरी ओर पीओके में पाकिस्तान सेना की कुछ अतिरिक्त सेना का मूवमेंट भी हुआ है. मिनिमार्ग, कामरी, डोमेल और गुल्टारी जैसे इलाकों में पाकिस्तान की सेना के पोस्ट और आतंकी कैंप दोनों है. कुछ हथियार और गोला-बारूद गिलगित और चिलम चौकी इलाके से भेजे गए हैं.
इस्लामाबाद, 22 अक्टूबर 2019,बॉर्डर पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहे पाकिस्तान को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है. जम्मू-कश्मीर पर फैसले के बाद से ही पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ कुछ ना कुछ करने में जुटा है, पहले कूटनीतिक हार मिली और अब बॉर्डर पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम रही है. भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी अड्डों को तहस-नहस कर दिया, लेकिन पाकिस्तान में इससे हड़कंप है. दिखावे के लिए पाकिस्तान विदेशी अधिकारियों को उस जगह ले जा रहा है, जहां पर एक्शन हुआ है. पाकिस्तानी अखबार DAWN के अनुसार, मंगलवार को पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कुछ विदेशी अधिकारियों को ले गई और उन्हें ये बताया गया कि भारत जो दावा कर रहा है वो गलत है और उस जगह पर किसी तरह के आतंकी कैंप नहीं हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल की ओर से भी यही दावा किया गया. पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया जा रहा है, इन विदेशी अधिकारियों को लाइन ऑफ कंट्रोल से जुड़े उन इलाकों में भी ले जाया गया है जहां पर बीते कुछ दिनों से गोलीबारी चल रही है. जिसमें नौशेरी, शहकोट और जूरा सेक्टर शामिल हैं. आपको बता दें कि पाकिस्तान की ओर से पिछले हफ्ते से ही बॉर्डर इलाकों में गोलीबारी की जा रही है. सीजफायर का उल्लंघन कर रहा पाकिस्तान भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहा है, इसी का जवाब भारतीय सेना ने बीते दिनों दिया. तंगधार सेक्टर के सामने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी अड्डों को भारतीय सेना ने तबाह कर दिया. भारत की कार्रवाई में 3 से अधिक आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई आतंकी मारे गए. इसी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के जवान भी मारे गए. पहले भी ये पैंतरा अपना चुका है पाकिस्तान गौरतलब है कि पाकिस्तान की ओर से इस तरह का पैंतरा पहले भी अपनाया जा चुका है. फिर चाहे वो सर्जिकल स्ट्राइक का वक्त हो या फिर बालाकोट एयरस्ट्राइक का. तब भी पाकिस्तान की तरफ से कुछ दिनों की पाबंदियों के बाद विदेशी मीडिया को ले जाने का ड्रामा किया गया था, लेकिन उससे कुछ हासिल नहीं हो पाया था. भारतीय सेना के एक्शन के बाद से ही पाकिस्तान लगातार कुछ ऐसा कर रहा है, जिससे कि वह अपनी इज्जत बचा सके. पाकिस्तानी सेना और मीडिया लगातार अपने जवानों के बचाव में जुटी और दावा कर रही है कि PoK में किसी तरह के आतंकी कैंप नहीं हैं.

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