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श्रीनगर, 12 अगस्त 2020,जम्मू-कश्मीर में सेना की पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमला किया गया है. बारामूला जिले के सोपोर के ह्यगाम इलाके में संदिग्ध आतंकियों ने पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमला किया. इस हमले में सेना के एक जवान को चोटें आईं हैं. उसे तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. जानकारी के अनुसार, आतंकवादियों ने सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में टाइम पास होटल के पास कुछ राउंड फायर किया. सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन आतंकवादी मौके से भागने में सफल रहे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकियों की फायरिंग में सेना के एक जवान को चोटें आई हैं और उसका इलाज किया जा रहा है. सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और तलाशी ली जा रही है. आज ही एनकाउंटर में मारा गया एक आतंकी गौरतलब है कि आज ही सुरक्षाबलों ने पुलवामा जिले के कामराजीपोरा में एक आतंकी को मार गिराया है. सुरक्षाबलों को कामराजीपोरा के सेब के बागान में दो आतंकियों के छिपे होने का इनपुट मिला था. इसके बाद चलाए गए ऑपरेशन में एक आतंकी को मार गिराया, जबकि एक जवान भी शहीद हो गया. मारे गए आतंकी की पहचान आजाद अहमद लोन के रूप में हुई है. वह पुलवामा के ही लेलहर का रहने वाला था. इस एनकाउंटर में सेना का एक जवान शहीद हो गया था, जबकि एक जवान घायल हो गया था. आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने घाटी में ऑपरेशन चला रखा है, जिससे दहशतगर्द बौखला गए हैं.
बेंगलुरु, 12 अगस्त 2020,बेंगलुरु में हुई हिंसा के मामले में स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है. पुलिस ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के एक नेता को गिरफ्तार किया गया है. SDPI की ओर से भी इस बात की पुष्टि की गई है. गिरफ्तार किए गए नेता का नाम मुजम्मिल पाशा है. बता दें कि इसी संगठन का नाम हिंसा को भड़काने में आ रहा था. फेसबुक पोस्ट को लेकर बेंगलुरु में मंगलवार की रात को बवाल हुआ, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. भीड़ ने कांग्रेस विधायक के घर पर हमला किया, साथ ही पुलिस स्टेशन को भी आग के हवाले कर दिया. इस हिंसा में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, पुलिस को भीड़ को काबू में लाने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी थी. पुलिस ने अबतक इस हिंसा के आरोप में 145 लोगों को गिरफ्तार किया है. जिस जगह पर ये घटना हुई वहां के ही एक निवासी शरीफ ने बताया कि कल रात जो हुआ वो भीड़ की गलती थी, उन्होंने ही पहले यहां पर हमला किया. इस घटना को लेकर बेंगलुरु पुलिस के कमिश्नर कमल पंत ने कहा है कि तीन लोगों की मौत हुई है, कई लोगों को चोटें पहुंची हैं. पुलिस के वाहनों को तोड़ा गया और आग लगा दी गई. इतना ही नहीं एक ग्रुप बेसमेंट में घुस गया था, जहां पर 250 के करीब वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, इस वक्त हालात काबू में हैं. डीजे हाली-केजी हाली पुलिस स्टेशन क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया गया है, जबकि पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है. सुरक्षा को देखते हुए RAF-CISF-CRPF का सहारा लिया जा रहा है, लोगों से किसी भी तरह की अफवाह में ना आने की अपील है. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने लोगों से शांति बनाने की अपील की है, साथ ही आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की बात कही है. बेंगलुरु पुलिस की एक स्पेशल टीम बुधवार सुबह घटनास्थल पर पहुंची. बुधवार की सुबह का नजारा काफी भयावह रहा जहां हर ओर जले हुए वाहन, टूटे हुए सामान और घरों की खिड़कियां दिख रही थीं.
रेलवे का कहना है कि यात्रा की कठिनाइयों को दूर करने पर लगातार काम हो रहा है। इसी क्रम में करीब 1]500 करोड़ रुपये की लागत से एलएचबी तकनीक वाले सभी एसी डिब्बों (LHB Coaches) में हवाई जहाज की तरह बायो वैक्यूम टॉयलेट (Bio Vacume Toilet) लगाया जाएगा। इसका पायलट परीक्षण किया जा रहा है, जिसे यात्रियों ने काफी सराहा है। अब इसका विस्तार सभी ट्रेनों में किया जाएगा। बदबूदार टॉयलेट से मिलेगा छुटकारा रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि चाहे एसी डिब्बा हो या जनरल डिब्बा, टॉयलेट की बदबू हर जगह परेशानी का सबब है। इससे छुटकारा पाने के लिए इन डिब्बों में बायो वैक्यूम टायलेट लगाने की कवायद चल रही है। इसमें वैक्यूम प्रेसर से गंदगी को टैंक में खींच लिया जाता है। जब कहीं गंदगी का अंश ही नहीं बचेगा तो फिर बदबू के फैलने का कोई डर नहीं। इस प्रक्रिया में पानी की बहुत कम आवश्यकता होती है, इसलिए पानी की भी बचत होगी। शुरूआत में प्रीमियम ट्रेनों में यह सुविधा अधिकारी का कहना है कि शुरूआत में बायो-वैक्यूम टॉयलेट की सुविधा राजधानी, शताब्दी और दुरंतो सहित सभी प्रीमियम ट्रेनों में मिलेगी। तेजस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन में तो यह शुरू से ही है। अब नई दिल्ली और कालका के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में भी लगाई जा चुकी है। अब, एलएचबी तकनीकी वाले सभी एसी डिब्बों में इसे लगाया जाएगा। उसके बाद एलएचबी तकनीक वाले सभी स्लीपर और जनरल डिब्बों में भी यही सिस्टम लगा दिया जाएगा। लॉकडाउन में ही बदले जा रहे हैं उत्तर भारत के तीन जोन, उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे इस दिशा में साथ मिल कर काम कर रहे हैं। इन्होंने लॉकडाउन के दौरान ही एलएचबी तकनीक वाले 600 डिब्बों में से परंपरागत टॉयलेट हटा कर बॉयो वैक्यूम टायलेट फिट कर दिया। इसी के साथ इस समय 714 एसी डिब्बों में भी इसी तरह के टॉयलेट लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके भी शीघ्र ही पूरी होने की संभावना है। एक डिब्बे में 13 लाख का खर्च परंपरागत टॉयलेट को बायो वैक्यूम टायलेट में बदलने में एक टॉयलेट पर करीब सवा तीन लाख रुपये का खर्च आ रहा है। एक डिब्बा में अमूमन 4 टॉयलेट होता है। मतलब कि एक डिब्बे पर करीब 13 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। इस समय देश भर में करीब 15,000 एलएचबी कोच हैं। इसलिए फैसला किया गया है कि एलएचबी तकनीक वाले सभी डिब्बों में क्रमिक रूप से ऐसे टॉयलेट लगाये जाएंगे। शुरूआत एसी डिब्बों से हुई है। आने वाला है 1500 करोड़ रुपये का टेंडर अधिकारी का कहना है कि बायो वैक्यूम टायलेट (Bio Vacuum Toilet ) के लिए के लिए शीघ्र ही 1500 करोड़ रुपये का टेंडर आने वाला है। अभी इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें कहा जाएगा कि चाहे विदेशी ही कंपनी (Foreign Companies) क्यों नहीं हो, उसे टॉयलेट यहीं भारत में ही बनाना होगा। इससे मेक इन इंडिया (Make In India) अभियान को बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दावा किया है कि दिल्ली हिंसा के मामले में जिस महिला गुलफिशा उर्फ गुल को गिरफ्तार किया था उससे पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं. पुलिस का कहना है कि DU के प्रोफेसर भी हिंसा की साजिश में शामिल थे. हिंसा भड़काने के लिए बुर्के वाली महिलाएं तैयार की गई थीं. दिल्ली पुलिस के दावे के मुताबिक डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद भी दिल्ली हिंसा की साजिश का हिस्सा थे. पुलिस का कहना है कि दिल्ली दंगों में UAPA एक्ट में गिरफ्तार आरोपी महिला जाफराबाद की रहने वाली गुलफिशा उर्फ गुल ने पुलिस को दिए बयान में यह खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि गुलफिशा ने उन्हें बताया है, प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि हिंसा की साजिश के लिए तैयार रहो. हिंसा करवाने के बाद प्रोफेसर अपूर्वानंद ने गुलफिशा की तारीफ की थी. गुलफिशा ने बताया, हिंसा के बाद अपूर्वानंद ने उससे कहा था कि तुमने अच्छा काम किया है, लेकिन पुलिस के पकड़े जाने पर मेरा और पिंजड़ा तोड़ की सदस्यों का नाम मत लेना. गुलफिशा के मुताबिक, महिलाओं को Chilly Powder लाने के लिए कहा गया था, ताकि विरोध प्रदर्शन रोकने की कोशिश पर इन्हें पुलिस पर फेंका जाए. गुलफिशा ने हिंसा के लिए 2 वॉट्सऐप ग्रुप बनाए थे, जिनका नाम- औरतों का इंकलाब, वॉरियर था. आरोपी महिला गुलफिशा ने बताया कि साजिश के तहत वो खुद बुर्के वाली महिलाओं और बच्चों को गली-गली जाकर CAA और NRC के खिलाफ इस कदर भड़काती थी कि महिलाएं प्रोटेस्ट में आने के लिए राजी हो जाती थीं. महिलाओं और बच्चों को प्रदर्शन में जोड़ने की वजह ये होती थी कि पुलिस महिलाओं और बच्चों को जबरन नहीं उठाएगी जैसे शाहीन बाग में हो रहा था. दिल्ली में 24, 25 और 26 फरवरी को हिंसा हुई थी आरोपी गुलफिशा के मुताबिक, उसकी दोस्ती डीयू के पिंजड़ा तोड़ ग्रुप की सदस्य देवांगना और परोमा राय से भी हुई थी. आरोपी गुलफिशा ने बताया कि प्रोफेसर अपूर्वानंद ने उसको कहा कि जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी दिल्ली में 20-25 जगह पर आंदोलन शुरू करवा रही है. इन आंदोलन का मकसद भारत सरकार की छवि को खराब दिखाना है. गुलफिशा ने आगे बताया, फ्रूट मंडी सीलमपुर में प्रदर्शन शुरू होने के बाद JCC के सदस्य हमें हर तरह से मदद करते थे और सफूरा और मिरान हैदर हमारे और दूसरे प्रदर्शन को को-ऑर्डिनेट करते थे. उमर खालिद भी हमें पैसों से मदद करते थे और भीड़ को भड़काऊ भाषण देते थे जिससे लोग धरने में जुड़े रहते थे. बकौल गुलफिशा, प्रोफेसर ने हमें हिंसा के लिए मैसेज दे दिया था. जिसके बाद हमने पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियां इकठ्ठा करने के लिए कहा गया था और सभी महिलाओं को सूखी लाल मिर्च रखने के लिए बोला गया था. गुलफिशा ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 22 फरवरी को चक्का जाम करने की साजिश के तहत महिलाओं को इकट्ठा कर कैंडल मार्च के बहाने हम निकले और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे बैठ गए और रोड ब्लॉक कर दिया गया. जिसके बाद 24, 25, 26 फरवरी को जबरदस्त हिंसा हुई थी. गुलफिशा ने अपने बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे का भी जिक्र किया है. गुलफिशा ने कहा, 'ट्रंप दौरे को ध्यान में रखते हुए. चांद बाग रोड का भी 'चक्का जाम' वॉट्सएप पर पोस्ट किया गया. इसको भी प्रोफेसर अपूर्वानंद मॉनिटर कर रहे थे. जिसके बाद ही बीते 4 अगस्त 2020 को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद को पूछताछ के लिए बुलाया था. करीब 5 घंटे तक पूछताछ की थी. पुलिस ने प्रोफेसर का मोबाइल भी जांच के लिए जब्त कर लिया था.'
नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शनिवार शाम कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. जिसके बाद उन्हें AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है. केंद्रीय मंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी कोरोना पॉजिटिव पाए जाने और AIIMS में भर्ती होने की पुष्टि की है. इसके साथ ही उन्होंने अपने संपर्क में आए लोगों को अपना ध्यान रखने को भी कहा है. मेघवाल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'कोरोना के शुरूआती लक्षण आने पर मैंने टेस्ट करवाया व पहली जांच नेगेटिव आने के बाद आज दूसरी जांच पॉजिटिव आई है. मेरी तबीयत ठीक है परन्तु चिकित्सकीय सलाह पर AIIMS में भर्ती हूं. मेरा निवेदन है कि जो लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आयें हैं, कृपया अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें.' मेघवाल वर्तमान में केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री हैं. वे राजस्थान के बीकानेर लोकसभा सीट से सांसद हैं. संसदीय कार्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल पिछले महीने ही 'भाभी जी' पापड़ लॉन्चिंग को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहे थे. दरअसल उनका एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह एक निजी कंपनी के लिए लॉन्चिंग विज्ञापन कर रहे थे. इसमें वो कह रहे थे कि आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत कोरोना वायरस की इस लड़ाई में इम्युनिटी को विकसित करने में यह पापड़ मदद पहुंचाएगा. अमित शाह भी कोरोना पॉजिटिव इसके पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. स्वतंत्र देव सिंह अपने घर में क्वारनटीन हैं, जबकि अन्य सभी नेताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बता दें, गृहमंत्री अमित शाह पिछले रविवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. उन्होंने खुद ही अपने ट्विटर हैंडल पर इस बात की जानकारी दी थी. जिसके बाद उन्हें एहतियातन गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया.
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020,पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं. सोमवार दोपहर को प्रणब मुखर्जी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. प्रणब मुखर्जी ने ट्वीट में लिखा कि इस बार अस्पताल की यात्रा एक अलग प्रक्रिया के लिए, मैं कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया हूं. प्रणब मुखर्जी ने अपने ट्वीट में लिखा कि पिछले एक हफ्ते में जो भी लोग मेरे संपर्क में आए हैं, मैं उनसे अपील करता हूं कि वो सभी टेस्ट करवाएं और आइसोलेट हो जाएं. प्रणब मुखर्जी के कोरोना वायरस के चपेट में आने के बाद उनके लिए दुआओं का दौर भी शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. उनके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर प्रणब मुखर्जी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. उनके अलावा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी ट्वीट किया. आपको बता दें कि प्रणब मुखर्जी की उम्र 84 साल है, ऐसे में बढ़ती उम्र के कारण भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 के बीच देश के राष्ट्रपति रहे हैं. साल 2019 में केंद्र सरकार ने प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया था. कोरोना वायरस का संकट देश में काफी तेजी से फैलता जा रहा है और अभी तक कई वीवीआईपी भी इस महामारी की चपेट में आ गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बीते दिनों कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें मेदांता के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. गृह मंत्री अमित शाह के अलावा अर्जुन मेघवाल और अन्य कुछ केंद्रीय मंत्री कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं. इसके अलावा कई राज्य सरकारों के मंत्री भी इस वायरस से संक्रमित हैं. बीते दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कोरोना संक्रमित पाए गए थे, लंबे वक्त तक अस्पताल में रहने के बाद उन्हें छुट्टी मिली.
मुंबई बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार और महाराष्ट्र के बीच राजनीति तेज हो गई है। सुशांत का परिवार शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा का दर्ज कराएंगे। बता दें कि राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र में लिखे लेख में आरोप लगाया था कि सुशांत के पिता केके सिंह ने दूसरी शादी की थी। सुशांत इस शादी के खिलाफ थे और इस वजह से पिता के साथ उनके संबंध ठीक नहीं थे। हालांकि सुशांत के मामा आर सी सिंह ने दूसरी शादी की बात को सिरे से खारिज किया। अब सुशांत के पिता के के सिंह और चचेरे भाई नीरज सिंह बबलू संजय राउत के इसी बयान और परिवार पर निजी आरोपों को मुकदमा दर्ज कराएंगे। नीरज कुमार बबलू ने संजय राउत से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है। नीरज बबलू ने एक बयान में कहा, 'संजय राउत को अपने बयान के लिए सुशांत सिंह के पिता से माफी मांगनी होगी। यह खबर पूरी तरह से गलत है। अगर संजय राउत सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' सुशांत मुंबई का लड़का है, न्याय की जिम्मेदारी हमारी- संजय राउत वहीं दूसरी संजय राउत ने कहा कि इस मामले से आदित्य ठाकरे का कोई लेना-देना नहीं है और वह सुशांत को न्याय दिलाएंगे। संजय राउत ने कहा, 'सुशांत केस पर राजनीति हो रही है। बिहार चुनाव की वजह से राजनीति हो रही है। आदित्य ठाकरे का इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। सुशांत मुंबई का लड़का है, उसको न्याय दिलाने की जिम्मेदारी हमारी है।' 'शिवसेना संवेदनशीलता दिखाए, न कि टुच्चापन' संजय राउत के बयान कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने भी निशाना साधा है। संजय निरूपम ने ट्वीट किया, 'शिवसेना के सांसद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के बारे में ओछी बातें कर रहे हैं, हर परिवार की कुछ कहानी होती है। शिवसेनावालों की भी बहुत है लेकिन सुशांत की मृत्यु एक संवेदनशील विषय है। शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए,न कि टुच्चापन।' सुशांत के मामा बोले- बिहार के लोग सच जानते हैं बता दें कि संजय राउत के आरोपों पर सुशांत के मामा आर सी सिंह ने एनबीटी से बातचीत में कहा था, 'संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के इशारे पर गलत बयान दिया है। संजय राउत इस तरह की बात बोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बात बोलकर किसी की छवि खराब करना क्या अच्छी बात है।' उन्होंने कहा कि बिहार में जो रहते हैं, वो सभी जानते हैं कि सुशांत के पिता ने एक ही विवाह किया था। 'सामना' में किया था पिता-बेटे को लेकर दावा संजय राउत ने सामना में एक लेख के जरिए आरोप लगाया था कि सुशांत का परिवार मतलब पिता पटना में रहते हैं। उनके पिता से उसके संबंध अच्छे नहीं थे। पिता ने दूसरी शादी कर ली थी जिस सुशांत ने स्वीकार नहीं किया था। पिता से उसका भावनात्मक संबंध शेष नहीं बचा था। उसी पिता को बरगलाकर बिहार में एक एफआईआर दर्ज कराई गई व मुंबई में घटे गुनाह की जांच करने के लिए बिहार की पुलिस मुंबई आई। '...तो आसमान नहीं टूट जाता' संजय राउत ने कहा था कि मुंबई पुलिस पर आरोप लगाकर बिहार सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की मांग की। 24 घंटे के अंदर यह मांग मान भी ली गई। यह राज्य की स्वायत्ता पर सीधा हमला है। सुशांत का मामला कुछ और समय मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो आसमान नहीं टूट जाता लेकिन यह राजनीतिक निवेश और दबाव की राजनीति है। संजय राउत ने कहा कि सुशांत प्रकरण की 'पटकथा' पहले ही लिखी गई थी।
कोविड मरीजों का रिकवरी रेट भारत में 70 प्रतिशत को छूने जा रहा है। अब तक आए कुल कोरोना केस में से 69.33% मरीज ठीक हो चुके हैं। दिल्ली में तो रिकवरी रेट 90% तक पहुंच गया है। यानी, राष्ट्रीय राजधानी में कोविड- 19 महामारी की चपेट में आने वाले हर 100 में 90 व्यक्ति ठीक हो चुका है। घट रही है मृत्यु दर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेश की सरकारों के संयुक्त प्रयासों से देश में कोरोना मरीजों की मौत की दर भी बहुत कम है। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 2% कोरोना मरीजों की ही मौत हुई है। अच्छी बात यह है कि यह दर धीरे-धीरे और घटती ही जा रही है। अब तक देश में 44,386 कोविड मरीज मर चुके हैं। रविवार को पहली बार मौतों का आंकड़ा 1000 को पार कर गया और 1007 मरीजों की मौत हो गई। 10 राज्यों में 80% नए केस एक और खुशखबरी यह है कि कोविड-19 के ज्यादातर मामले देश के 10 राज्यों तक ही सीमित हैं। इन्हीं 10 राज्यों में 80% से ज्यादा नए कोरोना केस सामने आ रहे हैं। इसका मतलब है कि देश के बड़े हिस्सा पर अब तक इस भयावह महामारी का प्रभाव छिटपुट ही है। लगातार घट रहे ऐक्टिव केस रिकवरी की रफ्तार बढ़ने के कारण ऐक्टिव केस यानी इलाजरत मरीजों की तादाद में तेजी से कमी आ रही है। अभी इलाजरत मरीजों की तुलना में ठीक हो चुके मरीजों की तादाद 9 लाख ज्यादा है। देश में अब तक आए कुल कोरोना केस में से सिर्फ 28.66% मरीजों का ही इलाज हो रहा है। सरकार के अनुसार, 6 लाख, 34 हजार, 945 कोरोना मरीजों का देशभर में इलाज चल रहा है। जांच में तेजी देश में 9 अगस्त तक 2 करोड़, 45 लाख, 83 हजार, 558 सैंपलों की जांच हो चुकी है। सिर्फ 9 अगस्त को 4 लाख, 77 हजार, 23 सैंपलों की जांच हुई। जांच के लिए लैब्स की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। 9 अगस्त तक देश में 1,406 प्रयोगशालाओं में कोरोना सैंपल की जांच हो रही है। देश में 23 जनवरी को सिर्फ 1 लैब में जांच होती थी।
कोलकाता/मुंबई देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार को एक्सटेंशन मिल सकता है। उनका कार्यकाल अक्टूबर में खत्म होने जा रहा है और सरकार ने इस पद को भरने के लिए उन्हें इंटरव्यू देने को कहा है। यह इस बात का संकेत है कि उन्हें एक्सटेंशन मिल सकता है। इस पद के लिए एसबीआई के तीन मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश कुमार, अरिजीत बासु और सी एस शेट्टी का भी इंटरव्यू लिया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने ईटी को बताया कि बैंक्स बोर्ड ब्यूरो 18 या 19 अगस्त को डिजिटली इंटरव्यू लेगा। एसबीआई में चौथे एमडी का पद खाली पड़ा है। पुराने अधिकारियों पर दाव संभवतः यह पहला मौका है जब कोई चेयरमैन उस पद के लिए इंटरव्यू देगा जिस पर वह खुद बैठा है। जानकारों का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि जब देश की वित्तीय व्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है तो सरकार अहम पदों पर किसी नए व्यक्ति को बैठाने का जोखिम नहीं लेना चाहती है। सरकार ने हाल में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन अजय त्यागी को भी एक्टेंशन दिया था। साथ ही यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव राजकिरण राय को भी एक्टेंशन दिया गया है। इसमें कोई इंटरव्यू नहीं हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अगर मौजूदा चेयरमैन को बुलाकर उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जाता है तो इससे भी गलत संदेश जाएगा। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स के मुताबिक है। सेबी के पूर्व चीफ एम दामोदरन ने 2008 में इंटरव्यू देने के बजाय इस्तीफा देने मुनासिब समझा था। 7 अक्टूबर को खत्म हो रहा कार्यकाल इस बारे में एसबीआई ने ईटी के मेल का जवाब नहीं दिया। रजनीश कुमार की पूर्ववर्ती अरुंधति भट्टाचार्य को 2016 में एक साल से अधिक का एक्टेंशन मिला था। उस समय एसबीआई में पांच एसोसिएट बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय की प्रक्रिया चल रही थी। यह विलय अप्रैल 2017 में अस्तित्व में आया था। रजनीश कुमार का कार्यकाल 7 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। वह रिटायर होने से तीन महीने पहले 7 अक्टूबर 2017 को एसबीआई के चेयरमैन बने थे। नियमों के मुताबिक कोई व्यक्ति 65 साल की उम्र तक सरकारी बैंक का चेयरमैन या चीफ एग्जीक्यूटिव रह सकता है।
मुंबई सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में राजनीति गरमाती जा रही है। रविवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना के जरिए पार्टी सांसद संजय राउत ने बीजेपी, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट को निशाने पर लिया था। अब इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने शिवसेना और कांग्रेस पर पलटवार किया है। पार्टी के प्रवक्ता निखिल आनंद ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार सुशांत की मौत की सीबीआई जांच से डर क्यों रही है? उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में संजय राउत और सीएम उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट भी कराना चाहिए। बीजेपी नेता ने मांग की है कि सुशांत के मामले में कांग्रेस को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार गंदी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, 'शिवसेना के प्रमुख नेता, एनसीपी और कांग्रेस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सिर्फ आदित्य ही सफाई क्यों दें? राहुल गांधी, प्रियंका गांधी भी इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ें। यह दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र सरकार घटिया राजनीति कर रही है। तथ्यों से छेड़खानी की जा रही है, सबूतों को मिटाया जा रहा है। सीबीआई को इन सब बातों को संज्ञान में लेना चाहिए।' घबराई हुई है शिवसेना निखिल ने कहा, 'शिवसेना सीबीआई जांच से बहुत नर्वस और घबराई हुई है। अगर शिवसेना के लोगों को सबकुछ पता है तो सीबीआई संजय राउत, आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट करा दे ताकि रहस्य से ही परदा खुल जायगा। आदित्य ठाकरे ने डरकर सफाई दे दी, वह ही सफाई क्यों दें अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी चुप्पी तोड़ें।' कांग्रेस नेता ने संजय राउत पर साधा निशाना कांग्रेस के सांसद संजय निरुपम ने इस मामले में संजय राउत पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिवसेना के सांसद सुशांत के परिवार के बारे में ओछी बातें कर रहे हैं। हर परिवार की कुछ कहानी होती है। शिवसेनावालों की भी बहुत है। लेकिन सुशांत की मृत्यु एक संवेदनशील विषय है। शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए,न कि टुच्चापन। दबाव की राजनीति कर रही बीजेपी' आपको बता दें कि सामना में संजय राउत ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा कि बिहार सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की मांग की। 24 घंटे के अंदर यह मांग मान भी ली गई। यह राज्य की स्वायत्ता पर सीधा हमला है। सुशांत का मामला कुछ और समय मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो आसमान नहीं टूट जाता लेकिन यह राजनीतिक निवेश और दबाव की राजनीति है। उन्होंने यहां तक कहा कि सुशांत प्रकरण की 'पटकथा' पहले ही लिखी गई थी। 'सरकार को बदनाम करने का हो रहा प्रयास' संजय राउत ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि सीबीआई स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है। जिनकी सरकार केंद्र में होती है, सीबीआई उनकी ताल पर काम करती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं पर बीते कुछ वर्षों में सवालिया निशान लग चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बीजेपी उद्धव ठाकरे की सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। सरकार नहीं गिरा पा रहे हैं तो बदनाम किया जा रहा है।
नई दिल्ली, 05 अगस्त 2020, हिंदू सेना ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है. शिकायत में कहा गया है कि इन्होंने रामलला के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का काम किया है. दिल्ली पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में हिंदू सेना ने कहा है कि ओवैसी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रामलला, उनकी संपत्ति, हिंदू समुदाय और पूजा स्थल के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. हिंदू सेना ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह स्पष्ट रूप से रामलला के पक्ष में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है. बता दें कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा था कि बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी. हिंदू सेना ने अपनी शिकायत में असदुद्दीन ओवैसी के इसी ट्वीट का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज कराई है. वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी ट्वीट किया था. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्वीट कर कहा था कि बाबरी मस्जिद थी और हमेशा के लिए एक मस्जिद रहेगी. हागिया सोफिया हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है. अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण के आधार पर भूमि का पुनर्निर्धारण निर्णय इसे बदल नहीं सकता है. दिल तोड़ने की जरूरत नहीं है. स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती है.
नई दिल्ली, 05 अगस्त 2020,भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों को राहत दी है. दरअसल, रेलवे ने दिल्ली से त्रिपुरा के लिए पहली व्यापार माला एक्सप्रेस (Vyapar Mala Express) चलाई है. Vyapar Mala Express ने 68 घंटे में 2360 किमी का सफर तय किया है. इस एक्सप्रेस के संचालन से छोटे कारोबारियों को पूर्वोत्तर के राज्यों तक माल पहुंचाने में आसानी होगी. भारतीय रेलवे(Indian Railway) ने ट्वीट के जरिए इस बात की जानकारी दी है. रेलवे ने कहा कि पहली व्यापार माला एक्सप्रेस दिल्ली से त्रिपुरा के लिए चलाई गई है. रेलवे फुल ट्रेन लोड कार्गो से कम सामान के ट्रांसपोर्टेशन के लिए एक्सप्रेस सर्विस मुहैया करा रहा है. यह छोटे कारोबारियों के लिए सुनहरा मौका है. रेलवे के मुताबिक व्यापार माला एक्सप्रेस दिल्ली के किशनगंज से छोटे व्यापारियों के 12 वैगन चावल और दालें लेकर त्रिपुरा पहुंची. बता दें कि सड़क मार्ग से दिल्ली से त्रिपुरा तक सामान भेजने में कई दिन का समय लगता था ऐसे में अब कारोबारियों के लिए समय की बचत होगी. किसान स्पेशल पार्सल ट्रेन भी चलाएगा रेलवे कोरोना महामारी की गंभीर स्थिति में मध्य रेल की किसान स्पेशल पार्सल ट्रेनें वरदान बनकर आई हैं. मध्य रेल ने किसानों की सुविधा के लिए देवलाली (Devlali) और दानापुर (Danapur) के बीच किसान स्पेशल पार्सल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. रेलवे के मुताबिक इन ट्रेनों के जरिए किसान अपनी सब्जियां, फल और अन्य खाद्य सामग्रियों की बुकिंग कर सकते हैं. मध्य रेल की किसान स्पेशल पार्सल ट्रेनें (Kisan Special parcel Trains) 7 अगस्त से 30 अगस्त तक हर शुक्रवार देवलाली से दानापुर की ओर रवाना होंगी. जबकि दानापुर से देवलाली की ओर हर रविवार को चलेंगी
कोलकाता, 05 अगस्त 2020,अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस दौरान राम मंदिर भूमि पूजन कर रहे थे. इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता का एक संदेश साझा किया. ममता बनर्जी ने कहा, 'हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई-भाई. मेरा भारत महान, महान हमारा हिंदुस्तान.' सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी ने लिखा, 'हमारे देश ने हमेशा विविधता में एकता की सदियों पुरानी विरासत को बरकरार रखा है, और हम इसे अपनी अंतिम सांस तक बनाए रखेंगे.' हालांकि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने अयोध्या में हो रहे कार्यक्रम या उसमें पीएम मोदी के जाने पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया. पार्टी के अन्य नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं बोला, जिससे राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया था. ममता बनर्जी के रुख पर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने ट्वीट किया, 'ऐतिहासिक न्यायिक फैसले के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा की. ममता बनर्जी का तुष्टीकरण मौन रुख कई सवाल उठाता है. राम सीता हमारे संविधान में हैं.' पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले के अनुसार राज्य में बुधवार को लॉकडाउन लागू किया गया. कोलकाता में बीजेपी समर्थक पार्टी ऑफिस के बाहर एकत्रित हुए और राम मंदिर भूमि पूजन पर यज्ञ किया गया. कार्यक्रम का आयोजन करने वाले बीजेपी नेता ने कहा, 'हमने आज हवन का आयोजन किया. पुलिस को अपना काम करने दें लेकिन हमें साफ करें कि आज के मंदिर की नींव रखने के कार्यक्रम की घोषणा तो पहले ही कर दी गई थी. हमें नहीं लगता कि बंगाल की मुख्यमंत्री को विश्वास है कि ये राज्य भारत का हिस्सा है. वह हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहती हैं. प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म की रक्षा करने का अधिकार है. वेस्ट मेदिनीपुर जिले में पुलिस लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन और पार्टी ऑफिस के बिल्कुल साथ में पूजा आयोजित करने के आरोप में कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. खड़गपुर में लॉकडाउन नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप में जब पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही थी तो दोनों के बीच झड़प हुई. इसी प्रकार की घटनाएं राज्य के विभिन्न इलाकों में भी हुईं. नॉर्थ 24 परगना जिले के बैरकपुर में बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के घर के करीब से भी बीजेपी समर्थकों को गिरफ्तार किया गया. अर्जुन सिंह ने राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, 'ममता बनर्जी हिंदुओं को अपमानित कर रही हैं. पुलिस इस मौके पर पटाखे जलाने के आरोप में गिरफ्तार कर रही है, हमारे बैनर उतारे जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश में बदलने की साजिश का परिणाम ममता बनर्जी को भुगतना पड़ेगा.' जबकि बैरकपुर से बीजेपी सांसद ने मंदिर में पूजा की, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी अपने घर पर विशेष पूजा का आयोजन किया. दिलीप घोष ने इस पर कहा, 'हमारे कार्यकर्ताओं को मंदिरों से उठाया गया है. लोगों की धार्मिक भावनाओं पर अंकुश लगाने का काम सरकार का नहीं है. ममता राम से इतना डरती क्यों हैं?' इसके अलावा दिलीप घोष ने जोर देते हुए कहा कि अब से 5 अगस्त पर राष्ट्रीय अवकाश होना चाहिए.
अयोध्या, 05 अगस्त 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर की आधारशिला रखी. मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान रहे. उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद रहे. पीएम नरेंद्र मोदी के आधारशिला रखने के बाद पूजन संकल्प के दौरान पुरोहित ने कहा, 'किसी भी यज्ञ में दक्षिणा महत्वपूर्ण होती है. दक्षिणा तो आज इतनी दे दी गई कि आज अरबों आशीर्वाद प्राप्त हो रहे हैं. भारत तो हमारा ही है, उससे उपर और कुछ दें. कुछ समस्याएं हैं, उन समस्याओं को दूर करने का संकल्प तो लिए हुए हैं, 5 अगस्त में कुछ और जुड़ जाए तो भगवान की कृपा होगी.' कोरोना संकट के कारण यजमान यानी पीएम नरेंद्र मोदी और पूजा करा रहे पंडितों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया. इसके साथ ही अन्य अतिथि भी सामान दूरी बनाकर बैठे. श्रीराम जन्मभूमि परिसर में पूजा से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने रामलला का दर्शन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने साष्टांग होकर रामलला से आशीर्वाद लिया. खास बात है कि भूमिपूजन उस जगह पर किया जा गया, जहां रामलला विराजमान थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ शिलाओं को रखकर राम जन्मभूमि मंदिर की आधारशिला रखी. इस ऐतिहासिक पल के गवाह 175 साधु-संत बने. कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज करीब 11 बजे हेलिकॉप्टर के जरिए अयोध्या के साकेत कॉलेज में पहुंचे. इसके बाद उनका काफिला सीधे हनुमानगढ़ी में पहुंचा. पीएम नरेंद्र मोदी ने भगवान हनुमान का दर्शन किया और आशीर्वाद लिया. इस दौरान पीएम मोदी को पगड़ी और मुकुट पहनाया गया.
नई दिल्ली, 05 अगस्त 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन के बाद चांदी की ईंटों से आधारशिला रखी. इस दौरान नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया से लेकर मलेशिया और ईरान जैसे इस्लामिक देश का भी जिक्र किया और बताया कि दुनिया के कितने देशों में और किन-किन रूपों में भगवान राम मौजूद हैं. दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं और वहां के नागरिक खुद को राम से जुड़ा मानते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि विश्व की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया में है. वहां स्वर्णदीप रामायण और योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायण हैं. राम आज भी वहां पूजनीय हैं और वहां के लोग अपने आपको राम से जोड़ते हैं. ऐसे ही कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों में भी कई तरह की रामाणय हैं. ईरान और चीन में राम के प्रसंग तथा राम कथाओं का विवरण मिलेगा. श्रीलंका में रामायण की कथा जानकी हरण के नाम से सुनाई जाती है. नेपाल का राम से आत्मीय संबंधा माता जानकी से जुड़ा है. नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसा ही दुनिया के न जाने कितने देश और कितने छोर हैं, जहां की आत्मा और अतीत में राम किसी न किसी रूप में रचे हैं. थाईलैंड में भी रामायण है. इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही है. राम सबके है, राम सबमें हैं. राम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा. यहां निर्मित होने वाला राम मंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा. पीएम ने कहा कि राम मंदिर का संदेश कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुंचे, कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन दृष्टि से विश्व परिचित हो. ये हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की विशेष जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया ही नहीं बल्कि भारत के मुस्लिमों को राम से जोड़ने की कवायद की है. उन्होंने अंडमान से अजमेर का जिक्र किया. बता दें कि पीएम ने मलेशिया और इंडोनेशिया ही नहीं बल्कि ईरान का भी जिक्र किया है. रामकथा इंडोनेशिया और मलेशिया की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है. बहुत से लोग हैं जिन्हें यह देखकर हैरानी होती है, लेकिन सच यही है कि दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला यह देश रामायण के साथ जुड़ी अपनी इस सांस्कृतिक पहचान के साथ बहुत ही सहज है. जैसे वह समझता हो कि धर्म बस इंसान की कई पहचानों में से एक पहचान है. रामायण को वहां रामायण ककविन (काव्य) कहा जाता है. इसी तरह से ईरान का भी पीएम ने जिक्र किया है. 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया और मलेशिया पर रामायण की गहरी छाप है. हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान फादर कामिल बुल्के ने 1982 में अपने एक लेख में कहा था, '35 साल पहले मेरे एक मित्र ने जावा के किसी गांव में एक मुस्लिम शिक्षक को रामायण पढ़ते देखकर पूछा था कि आप रामायण क्यों पढ़़ते हैं? उत्तर मिला, 'मैं और अच्छा मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ता हूं.'
अयोध्या, 05 अगस्त 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन किया. इस कार्यक्रम के बाद आजतक से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत ही भावुक और गौरवपूर्ण पल था. बतौर सीएम मैंने यूपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली और इस कार्य को मैंने पिछले तीन सालों से बड़े नजदीक से महसूस किया है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के 'राम सबके हैं' के बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम सबके हैं, यह हम बहुत पहले से कहते आए हैं. यह सद्बुद्धि उस वक्त आनी चाहिए थी, जब यहां पर कुल लोगों के पूर्वजों ने रामलला की मूर्तियों को हटाने की कोशिश की थी. आखिर कौन लोग थे, जो अयोध्या में रामलला का मंदिर नहीं चाहते थे. सीएम योगी ने कहा कि वो कौन लोग थे जो कह रहे थे कि हम गर्भगृह से 200 मीटर दूर शिलान्यास करेंगे. वहां पर कुछ नहीं होना है. विवादित ढांचे में कुछ नहीं करना है. हम सभी लोगों को बुलाना चाहते थे. कोरोना के प्रोटोकॉल के कारण सीमित संख्या में लोगों को बुलाना था. साधु-संत इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने चाहते थे. इस पूरे कार्यक्रम में करीब 200 मेहमान आ पाए. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीजेपी का भी कोई पदाधिकारी कार्यक्रम में नहीं आया. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इस कार्यक्रम में आ सकते थे. प्रदेश अध्यक्ष भी आ सकते थे. लेकिन कोई भी इस कार्यक्रम में सहभागी नहीं है. सीमित संख्या में मेहमानों को बुलाकर एक शुभ कार्यक्रम की शुरुआत कर देना, इस उद्देश्य से हम लोग कार्यक्रम को रखे थे. 'सभी को राम के काज में सहयोग करना चाहिए' सीएम योगी ने कहा कि कोरोना के प्रोटोकॉल को भी सख्ती से लागू करना था. लेकिन एक बहुप्रतिक्षित कार्यक्रम को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाना था. इस उद्देश्य से ये कार्यक्रम हम लोगों ने इस रूप में किया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का लाइव प्रसारण था. हमारा मानना है कि राम सबके हैं. सभी लोगों को राम के काज में सहयोग भी करना चाहिए. लेकिन राम के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. यूपी के सीएम ने आगे कहा कि हमने सबको जोड़ने का काम किया. हमने राम के नाम पर राजनीति नहीं की है. भगवान राम के मंदिर के लिए जिस निष्ठा से हम 1984 में जुड़े थे उसी निष्ठा से 2020 में भी जुड़े हुए हैं. लेकिन उन लोगों को सोचना चाहिए. आखिर 1949 में इनकी भावनाएं क्या थी. 1984 में क्या थी और 1992 में क्या थी. उसके बाद क्या थी. समय-समय पर वो सुप्रीम कोर्ट में जाते थे. ये लोग बोलते कुछ हैं और करते कुछ और हैं. हमने जो कहा वो किया.
नई दिल्ली, 05 अगस्त 2020, अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आजतक से खास बातचीत की. सीएम योगी ने राम मंदिर, कोरोना और अयोध्या में मस्जिद निर्माण जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. मस्जिद के शिलान्यास पर सीएम योगी ने कहा कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं, और मैं जाऊंगा भी नहीं. सीएम योगी से सवाल किया गया कि विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमिपूजन में बुलाया और सब आए. लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहां नहीं जाएंगे. इसपर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेरा जो काम है वो काम मैं करूंगा. और मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूं. मैं जानता हूं कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं. इसलिए मैं जाऊंगा भी नहीं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ भूमि दिए जाने का फैसला दिया था. यूपी सरकार ने 5 फरवरी को ही अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धन्नीपुर तहसील सोहावल में थाना रौनाही से लगभग 200 मीटर पीछे 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए आवंटित की थी. यहीं पर मस्जिद का निर्माण होना है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के 'राम सबके हैं' के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राम सभी के हैं, हम पहले से ही कहते रहे हैं. ये सदबुद्धि पहले भी आनी चाहिए थी अयोध्या में विकास कार्य को लेकर सीएम योगी ने कहा कि आज अयोध्या में हर तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं और लोगों को काम दिया जा रहा है. बतौर सीएम मैं कई बार अयोध्या आ चुका हूं. पहले के मुख्यमंत्री यहां पर आने से कतराते थे. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र में जनभावना का सम्मान करना होगा, विकास के मुद्दों पर भी और अन्य मुद्दों पर भी. 'बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी कार्यक्रम में नहीं आए' यूपी सीएम ने कहा कि कोरोना के कारण भूमिपूजन कार्यक्रम को बड़ा नहीं किया गया, इसलिए किसी राजनीतिक दल के व्यक्ति को नहीं बुलाया गया. सीएम ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए. सीएम ने कहा कि आयोजक राम मंदिर का ट्रस्ट ही है, लेकिन सरकार होने के नाते हम सहयोग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हर समुदाय के लोग इस कार्यक्रम में आना चाहते थे, लेकिन कोरोना के कारण कार्यक्रम को सीमित कर दिया गया. योगी ने कहा कि सिर्फ कांग्रेस की बात नहीं है, बीजेपी का भी कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ है. ना ही बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और ना ही प्रदेश अध्यक्ष.
देखा नई दिल्ली अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रख दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम संपन्न किया। इस दूरदर्शन के साथ-साथ प्राइवेट टीवी चैनलों एवं अन्य माध्यमों के जरिए इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देश-दुनिया में हुआ। सुप्रीम कोर्ट में रामलला का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील के. पराशरण ने परिजनों संग पूरा भूमि पूजन कार्यक्रम टीवी पर ही देखा। वो टीवी पर ही कार्यक्रम देखकर बेहद प्रसन्न दिखे। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने घर में टीवी देखते के. परासरण की तस्वीर ट्वीट की। कार्यक्रम पर कोरोना संकट का असरदरअसल, कोरोना संकट के कारण भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता चुनिंदे लोगों को ही दिया गया। न्योता देते वक्त व्यक्ति की उम्र का भी ध्यान रखा गया। चूंकि पराशरण भी 92 वर्ष के हो चुके हैं, इसलिए उन्हें भी निमंत्रण नहीं भेजा गया। साथ ही, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मनोहर जोशी को भी कोरोना संकट के मद्देनजर अयोध्या आने का निमंत्रण नहीं मिला था। हालांकि, इन गणमान्य लोगों समेत आम श्रद्धालुओं तक को भूमि पूजन कार्यक्रम दिखाने के लिए दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण की व्यवस्था की गई। ध्यान रहे कि इस धार्मिक कार्यक्रम का दूरदर्शन पर प्रसारण के निर्णय का विरोध भी हुआ। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने भूमि पूजन कार्यक्रम को दूरदर्शन पर टेलिकास्ट (DD telecast) करने के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा था कि सरकारी चैनल पर यह कार्यक्रम प्रसारित करना ठीक नहीं होगा। सीपीआई की इस आपत्ति पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने वामदल पर धार्मिक कार्यक्रम को तुच्छ राजनीति में घसीटने का आरोप लगाया। देवताओं के वकील' कहा जाते हैंं पराशरण ध्यान रहे कि 'देवताओं के वकील' माने जाने वाले के. पराशरण के ग्रेटर कैलाश स्थित आवास को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट का आधिकारिक कार्यालय बनाया गया है। भारत के अटॉर्नी जनरल रहे के. पराशरण ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद मामले में हिन्दू पक्षों की ओर से पैरवी की थी। तमिलनाडु के श्रीरंगम में 9 अक्टूबर 1927 को जन्मे पराशरण राज्यसभा सदस्य और 1983 से 1989 के बीच भारत के अटॉर्नी जनरल भी रहे। उन्हें वकालत अपने पिता से विरासत में मिली थी। उनके पिता केशव अयंगर अधिवक्ता और वैदिक विद्वान थे, जिन्होंने मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की थी। पराशरण के तीन पुत्र मोहन, सतीश और बालाजी भी अधिवक्ता हैं। पद्मभूषण और पद्मविभूषण से विभूषित पराशरण ने साल 1958 में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी। पद्मभूषण और पद्मविभूषण से नवाजे जा चुके पराशरण को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए ड्राफ्टिंग ऐंड एडिटोरियल कमिटी में शामिल किया था। अयोध्या मामले में वह रामलला विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे थे। वकालत के 'भीष्म पितामह' उम्र के 9 दशक पार करने के बावजूद पूरी ऊर्जा से अयोध्या मामले में अकाट्य दलीलें रखने वाले पराशरण को भारतीय वकालत का 'भीष्म पितामह' भी कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल ने उन्हें 'भारतीय बार का पितामह' करार देते हुए कहा था कि उन्होंने अपने धर्म से समझौता किए बिना कानून में अगाध योगदान दिया। चर्चित सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के वकील रहे पराशरण को भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है। 'अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं' इस मामले में उन्होंने एक आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश नहीं देने की परंपरा की वकालत की थी। अयोध्या मामले में उन्होंने स्कन्ध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर का अस्तित्व साबित करने की कोशिश की थी। राम सेतु मामले में दोनों ही पक्षों ने उन्हें अपनी ओर करने के लिए सारे तरीके आजमाए थे लेकिन धर्म को लेकर संजीदा रहे पराशरण सरकार के खिलाफ गए। ऐसा उन्होंने सेतु समुद्रम प्रॉजेक्ट से रामसेतु को बचाने के लिए किया। उन्होंने कोर्ट में कहा, 'मैं अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं।' ग्रेटर कैलाश स्थित आवास बनेगा ट्रस्ट का कार्यालय 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन हिंदुओं को देने का आदेश दिया था और सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण का काम शुरू करने का निर्देश भी दिया था। बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का ऐलान कर दिया। ट्रस्ट के पते का उल्लेख भी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी अधिसूचना में किया गया है। अधिसूचना में कहा गया, 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र' नाम से एक ट्रस्ट का पंजीकरण इसके पंजीकृत कार्यालय आर-20, ग्रेटर कैलाश, पार्ट-1, नई दिल्ली, 110048 के साथ हुआ है।' उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार यह पराशरण का आवासीय पता है।
नई दिल्ली भव्य राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत आज हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मंदिर की नींव रखी। इस खास और एतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री भगवान राम के लिए अपनी तरफ से एक खास भेंट लेकर भी पहुंचे थे। राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ, गवर्नर आनंदी बेन पटेल और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी अपनी तरफ से मंदिर को कुछ भेंट दी। इसके बारे में भूमि पूजन करवानेवाले आचार्य दुर्गा गौतम ने बताया। चांदी के कुंभ कलश को कार में भूले पीएम राम मंदिर भूमि पूजन करवाने वाले आचार्य दुर्गा गौतम ने एक निजी चैनल से बात करते हुए यह भी बताया कि सीएम योगी, मोहन भागवत, आनंदी बेन पटेल ने एक-एक स्वर्ण सिक्का भूमि पूजन के वक्त वहां छोड़ा था। आचार्य दुर्गा गौतम ने बताया कि पीएम मोदी ने नींव की पूजा के वक्त चांदी का कुंभ कलश दिया था। इससे पहले देखा गया था कि भूमि पूजन की जगह पर प्रवेश करने के बाद पीएम मोदी वापस गेट पर गए थे। फिर किसी को भेजकर कार से कुंभ कलश मंगाया और तब पूजा के लिए बैठे। पीएम मोदी ने बनाए 3 रेकॉर्ड आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 साल बाद अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने एक साथ तीन रेकॉर्ड बना दिए। वह श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री बने। यह देश में पहला मौका था जब प्रधानमंत्री ने अयोध्या की हनुमानगढ़ी के दर्शन किए। इसी के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रतीक किसी मंदिर के शुभारंभ कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागत ने कहा कि यह आनंद का क्षण है क्योंकि जो संकल्प लिया गया था, वह आज पूरा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘एक संकल्प लिया था और मुझे स्मरण है तब कि हमारे सरसंघचालक बाला साहब देवरस जी ने हमको कदम आगे बढ़ाने से पहले यह बात याद दिलाई थी कि बीस-तीस साल लगकर काम करना पड़ेगा और 30वें साल के प्रारंभ में हमको संकल्प पूर्ति का आनंद मिल रहा है।’ उनसे पहले योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन को रामराज्य की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि मंदिर के लिये संघर्ष की इस परिणति ने लोकतांत्रिक पद्धति और संविधान सम्मत तरीके से समस्याओं के समाधान की भारत की ताकत का एहसास कराया है। योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि यह केवल मंदिर निर्माण के कार्यक्रम का शुभारंभ ही नहीं, बल्कि उसे भारत को दुनिया के सामने पेश करने का अवसर भी है जिसे आज से 6 वर्ष पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रामराज्य की अवधारणा को चरितार्थ करने के लिए आगे बढ़ाया था
अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर आंदोलन के अनुपस्थित नेताओं को याद किया। वीएचपी के दिवंगत नेता अशोक सिंघल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह आज यहां होते तो कितना अच्छा होता। उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए कई लोगों ने बलिदान दिया था। आज आडवाणी जी भी अपने घर पर बैठे यह क्षण देख रहे होंगे। उन्होंने कहा कि समय ऐसा चल रहा है कि बहुत से लोग इस अवसर पर नहीं आ सके। भागवत ने कहा कि आज जो यहां जो मौजूद है वह मन से और जो नहीं है वह सूक्ष्म रूप से राम मंदिर निर्माण की शुरुआत का आनंद उठा रहा है। इतने सारे लोगों ने मंदिर के लिए बलिदान दिया था। उनमें से कई लोग शारीरिक रूप से यहां नहीं हो सकते थे। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे हैं जो यहां नहीं आ सकते हैं। कुछ ऐसे हैं जिन्हें आना चाहिए था लेकिन स्थिति के कारण आमंत्रित नहीं किया जा सका। भागवत ने इस दौरान पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी घर में बैठे यह क्षण देख रहे होंगे। इस अवसर पर कई लोग अयोध्या नहीं आ सके क्योंकि समय ही ऐसा चल रहा है। सब राम के और राम सबके, कोई अपवाद नहींः भागवत दिवंगत अशोक सिंघल को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वह आज यहां तो कितना अच्छा होता लेकिन राम की जो इच्छा होती है वही होता है। राम मंदिर के शिलान्यास के बाद भागवत ने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास रखने वाले लोग हैं और यह एक नए भारत की शुरुआत है। पुरुषार्थ का भाव हमारे रग-रग में है और भगवान राम का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सब राम के हैं और सबमें राम हैं। यह सभी भारतवासियों के लिए है। इसमें कोई अपवाद नहीं है। पहले मन मंदिर पूरा होना चाहिए' भागवत ने कहा कि हमारे हृदय में भी राम का बसेरा होना चाहिए इसलिए सभी द्वेष, विकार, भेदों को तिलांजलि देकर संपूर्ण जगत को अपनाने की क्षमता रखने वाला मनुष्य बनना चाहिए। भागवत ने कहा कि अब भव्य राम मंदिर बनेगा और मंदिर के पूर्ण होने से पहले हमारा मन मंदिर पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए समान विचारधारा के संगठनों ने लगभग 30 साल तक संघर्ष किया।
नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन कर नींव रखी। नींव रखने से पहले पीएम ने रामलला विराजमान और हनुमागढ़ी में हनुमान के दर्शन किए। पीएम ने साष्टांग कर राम के दर्शन किए। पीएम की इस तस्वीर के साथ ही उनकी 2014 की भी एक फोटो सबको याद आ गई जब पीएम मोदी संसद भवन की सीढ़ियों पर दंडवत हुए थे। पहली बार सांसद बने और पीएम ने संसद की सीढ़ियों पर मत्था टेका था। तो आज उन्होंने भगवान श्रीराम के चरणों में साष्टांग किया। 29 साल बाद अयोध्या में पीएम पीएम मोदी हर बार कुछ न कुछ यूनिक करने के लिए जाने जाते हैं रहे हैं। वैसे भी आज का मौका तो उनके लिए बेहद खास था। आखिर 29 साल बाद वह अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पहुंच रहे थे। तो उन्होंने इसे प्रकट भी किया। राम मंदिर निर्माण को सदियों की इच्छा पूरी होना बताते हुए पीएम ने पूरी श्रद्धा के साथ राम के सामने शीश नवाया। रामलला के सामने मोदी का साष्टांग राम मंदिर निर्माण की नींव से पहले रामलला के सामने साष्टांग हुए मोदी। पीएम मोदी हनुमानगढ़ी के बाद जैसे ही पूजा कर रामलला विराजमान के पास पहुंचे वह अचानक रामलला की सीढ़ियों के सामने दोनों हाथ जोड़कर लेटकर साष्टांग किया। पीएम मोदी की यह भावना लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई और तुंरत इसकी तस्वीर वायरल हो गई। लोकतंत्र के मंदिर में पीएम ने नवाया था शीश जब पीएम मोदी ने संसद में मत्था टेका था तो कई सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हुई थी। लोगों ने पीएम के इस कदम का जमकर तारीफ की थी। ये अदभुत नजारा था। पीएम मोदी जैसे ही झुककर सिर नवाया वैसे ही मीडियाकर्मियों में उनकी तस्वीर लेने की होड़ सी मच गई थी। लोकतंत्र के मंदिर में पीएम ने अपना आस्था प्रकट की थी। 2014 की ऐतिहासिक तस्वीर 2014 में बीजेपी ने मोदी को पीएम पद का उम्मीद्वार बनाया था। बीजेपी ने मोदी लहर की बदौलत पूर्ण बहुमत हासिल किया था। पहले दिन पीएम जैसे ही संसद की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे उन्होंने संसद भवन की सीढियों पर मत्था टेका।
अयोध्या भगवान रामलला की नगरी अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के साथ ही पूरे देश में राम नाम की गूंज सुनाई दे रही है। उधर, राम मंदिर के भूमि पूजन को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जाहिर की है। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत एक सेक्युलर देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राम मंदिर का भूमि पूजन (Ram Mandir Bhoomi Poojan) कर अपने पद की गरिमा का उल्लंघन किया है। लिखें असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'यह दिन हिंदुत्व की जीत और लोकतंत्र के साथ-साथ सेक्युलरिज्म की हार का भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi in Ayodhya) ने बुधवार को कहा कि वह आज भावुक थे।' यही नहीं, ओवैसी (Asaduddin owaisi Latest News) ने कहा, 'मैं भी उतना ही भावुक था क्योंकि मैं नागरिकों की सहभागिता और समानता में यकीन रखता हूं। मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मैं इस वजह से भावुक हूं क्योंकि वहां 450 वर्षों तक मस्जिद खड़ी थी।' राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले ट्वीट राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने दो तस्वीरों के साथ ट्विटर पर लिखा था, 'बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। इंशाअल्लाह। हैशटैग बाबरी जिंदा है।' असदुद्दीन का यह हैशटैग (#BabriZindaHai) ट्विटर पर काफी ट्रेंड हुआ है। 'मस्जिद की हैसियत खत्म नहीं हो जाती' उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी (Maulana Wali Rehmani) ने बयान जारी कर कहा, 'बाबरी मस्जिद कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। मस्जिद में मूर्तियां रख देने से या फिर पूजा-पाठ शुरू कर देने या एक लंबे अर्से तक नमाज पर प्रतिबंध लगा देने से मस्जिद की हैसियत खत्म नहीं हो जाती।' उन्होंने कहा, 'हमारा हमेशा यह मानना रहा है कि बाबरी मस्जिद किसी भी मंदिर या किसी हिंदू इबादतगाह को तोड़कर नहीं बनाई गई। हालात चाहे जितने खराब हों हमें हौसला नहीं हारना चाहिए। खालिफ हालात में जीने का मिजाज बनाना चाहिए।'
नई दिल्ली, 04 अगस्त 2020, अयोध्या में भूमि पूजन से पहले 'आजतक' मंगलवार को अपने दर्शकों के लिए धर्मसंसद पर एक विशेष आयोजन कर रहा है. इस सत्र में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई लोगों के अलावा प्रशासन और सरकार से जुड़े लोग हिस्सा ले रहे हैं. इसमें संत समाज के लोग भी जुड़े हैं. 'जय श्रीराम' सत्र में प्रसिद्ध धर्म गुरु स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने हिस्सा लिया. राम मंदिर आंदोलन के बारे में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि 1984 में हमलोग पहली बार अयोध्या आए थे. लाखों भक्त यहां आए. आज अयोध्या की शिलाएं भी आह्लादित हैं. अब कल भूमि पूजन होना है तो मन खुश है. प्रधानमंत्री जी का संकल्प और भक्तों की सेवा पूरी होने जा रही है. आज राम अत्यंत जीवंत हैं. आज पूरा संसार अयोध्या के साथ एकीकृत है. कुछ दिन शुभ मुहूर्त को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हुई थीं. इस बारे में उन्होंने कहा, जैसे ही राम का नाम स्मरण करते हैं सब मुहूर्त अपने आप अनुकूल हो जाते हैं. इसलिए जिसके नाम से सभी दोषों की निवृति होती है, जिनके नाम से हनुमान लंका चले गए, उनके लिए शुभ मुहूर्त पर क्या सवाल है. मुहूर्त में काल की बात बहुत न्यून है. राम के कार्य में जुड़ जाएं सभी लोग प्रियंका गांधी ने कहा है कि राम सबके हैं. इस सवाल पर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि इसके लिए वे उनकी (प्रियंका गांधी) तारीफ करना चाहेंगे. उन सभी का स्वागत है जो भगवान राम के लिए कार्य कर रहे हैं, दान दे रहे हैं. इस वक्त किसी भी व्यक्ति के द्वारा दिया गया दान, सेवा, चंदा अत्यंत प्रशंसनीय है. यह स्वागतयोग्य पहल है, हमें लगता है कि इसके लिए सारे लोग खड़े हो जाएं. विवेकानंद स्मारक बना तो सारी संस्थाएं खड़ी हुईं, पूरा देश खड़ा हुआ. सोमनाथ मंदिर बना तो उस वक्त के राष्ट्रपति वहां पहुंचे. राष्ट्र की गौरव गाथा का एक अध्याय यहां लिखा जा रहा है. अगर कुछ राजनैतिक दल भी इसमें सहयोग कर रहे हैं तो वे प्रशंसा के पात्र हैं. जो राम के काम आए, जो राम के काम में जुड़ जाए उससे बड़ी बात क्या होगी. राम के शरण में आने के बाद सब चीजें सिद्ध हो जाती हैं. हमारा देश पंथ निरपेक्ष है प्रधानमंत्री अयोध्या आएंगे इस बात को लेकर भी विवाद हुआ, सेक्युलरिज्म पर सवाल हुए. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, इस देश को सेक्युलरिज्म के एंगल से नहीं देखना चाहिए. संयोग से हमारा देश पंथ निरपेक्ष है, धर्म निरपेक्ष नहीं है. संविधान में जो संशोधन हुआ है वह पंथ निरपेक्षता का है.प्रधानमंत्री किसी एक पार्टी का नहीं होता, पूरे देश का प्रधानमंत्री होता है. इसलिए प्रधानमंत्री को किसी एक राजनैतिक दल या विचारधारा से जोड़ कर नहीं देख सकते. अन्य देशों के प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री होते हैं. प्रधानमंत्री मोदी का जो व्यक्तित्व है, उनकी जो स्वीकार्यता है, प्रत्येक व्यक्ति के अंतः करण में जो मान्यता है, वह किसी एक दल को लेकर नहीं है. विकास पुरुष हैं, पूरे राष्ट्र के विकास की दिशा में उनके पुरुषार्थ हैं. पूरी धरती राममय हुई पूर्व में गौरक्षकों की कुछ घटनाएं हुईं. इस पर प्रधानमंत्री का बयान आया था. बयान के बाद जिनका प्रधानमंत्री के प्रति विशेष मोह था, वे नाराज होने लगे. अब जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा है तो ऐसे लोगों की नाराजगी, कड़वाहट क्या दूर होगी. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री के कहने का उद्देश्य यह था कि धर्म आवेश की चीज नहीं है, उत्तेजना की चीज नहीं है. धर्म में किसी प्रकार की आक्रामकता न हो. प्रधानमंत्री जी के कहने का आशय था कि आक्रामकता, आवेश, उत्तेजना अथवा उन्माद न दिखाई दे. किसी वैसे व्यक्ति में जो स्वयं को संस्कृति का सेवक कहता है, गोभक्त कहता है, राष्ट्रभक्त कहता है. प्रधानमंत्री का संकेत काफी सुंदर था लेकिन राम मंदिर के इस काल में पूरा भारत एक हो गया है, पूरी धरती राममय हो गई है. राम भक्तों का धैर्य देखें जय श्रीराम के नारे पर भी विवाद हुआ. ऐसे वीडियो आए जिसमें दिखा कि लोगों को मार कर जय श्रीराम बोलने को कहा गया. इस सवाल पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि एक दो छिटपुट घटनाएं हुई होंगी, कुछ सिरफिरे हर जगह हैं. ऐसा हुआ होगा लेकिन राम एक मंत्र है. राम की कोई अवमानना करे, तिरस्कार करे, उपहास करे तो राम भक्तों को इस धरती पर मान्य नहीं होगा. लेकिन किसी से विवशता से भगवान राम का नाम बुलवाया जाए तो यह अच्छी बात नहीं है. जितनी भी संस्थाएं हैं जो अपनी संस्कृति के साथ जुड़ी हैं वे बेहद अहिंसक हैं. राम भक्तों का धैर्य भी देखना चाहिए, उनमें अदभुत संयम है. जैसे ही अयोध्या का निर्णय आया, भक्तों में कितना संयम दिखा. वो संयम आज भी देखा जा रहा है. नहीं तो कोरोना काल चल रहा है, यहां घर-घर से शिलाएं आतीं, रामभक्तों का मेला अयोध्या आता, अयोध्या की कोई सड़क खाली न मिलती. इसलिए ये हमारा संयम ही तो है, हम अहिंसक ही तो हैं. भाषा पर नियंत्रण रखें ओवैसी सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हम अपनी औलादों को बताएंगे कि इन लोगों ने मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाया है. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि ऐसी कोई मस्जिद वहां नहीं थी और उनके धर्मग्रंथों में भी लिखा है कि जो झगड़े की जगह है वहां कोई न तो कोई मस्जिद बनती है और न कोई प्रार्थना स्वीकार की जाती है. इसलिए ओवैसी जी से कहना चाहूंगा कि अपने धर्मग्रंथ पढ़ कर देखिए, वहां कोई मस्जिद है ही नहीं. जब वहां मस्जिद का अस्तित्व ही नहीं था, जब नमाज नहीं पढ़ी गई तो क्या कहा जाए. वहां शुरू से रामलला की पूजा होती आई है. अंग्रेजों के काल से वहां रामलला थे. अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने केस में कहा कि राम की जगह राम को दी जा रही है. कोर्ट ने सरकार को कहा कि इसके लिए ट्रस्ट का निर्माण करें. इसलिए ओवैसी जी को समझना चाहिए कि वे अपने उन्माद को शांत रखें. जिस प्रकार की वे भाषा बोलते हैं, जिस प्रकार की उत्तेजना पैदा करते हैं, तो उन्हीं के समाज में बहुत से लोग उनका आदर नहीं करते हैं. उन्हें कम से कम ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, वह भी आज के हमारे उत्सव में. इसलिए वे अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें. अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, देश में हजारों मंदिर टूटे पड़े हैं, अफगानिस्तान में बुद्ध की शांत मूर्तियां तोड़ी गईं. ऐसे में मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी ने काशी कॉरिडोर बनाया है तो अच्छा है. देखने में भी वह काफी सुंदर लग रहा है. अगर ऐसी पूजा स्थली बनती है तो स्वाभाविक रूप से हमें उनके जीर्णोद्धार के लिए तत्पर रहना चाहिए.
नई दिल्ली, 04 अगस्त 2020,अरबों डॉलर के रक्षा बाजार में भारत अपने पांव मजबूती से जमाना चाहता है. भारत चाहता है कि दुनिया के रक्षा बाजार में वह साल 2025 तक 35 हजार करोड़ यानी कि 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात करे. रक्षा उत्पाद निर्यात संवर्धन की इस साल की नीति में सरकार का ये महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने आया है. भारत सरकार चाहती है कि देश में रक्षा बाजार का व्यापक विस्तार हो और घरेलू रक्षा उद्योग को दुनिया में पहचान मिले. सरकार देश के रक्षा बाजार का टर्न ओवर 1 लाख 75 हजार करोड़ करने की मंशा रखती है. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बड़ा प्लान नई नीति के तहत सरकार रक्षा खरीदारी में देशी कंपनियों को आगे बढ़ाना चाहती है और देशी कंपनियों से रक्षा खरीद की मात्रा को दोगुना करना चाहती है. बता दें कि अभी घरेलू कंपनियों से रक्षा क्षेत्र की खरीदारी 70 हजार करोड़ है, सरकार की योजना है कि इसे 2025 तक दोगुना कर 1 लाख 40 हजार करोड़ कर दिया जाए. दूतावासों को भी सक्रिय किया गया रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए दुनिया भर में फैले भारतीय दूतावासों में मौजूद रक्षा अधिकारियों (Defence Attachés) को ज्यादा अधिकार दिया गया है और उन्हें देशी रक्षा उपकरणों के निर्यात पर फोकस करने को कहा गया है. बता दें कि हाल ही भारत के रक्षा निर्यात में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है. साल 2016-17 में भारत का रक्षा निर्यात 1521 करोड़ था साल 2018-19 में ये बढ़कर 10745 करोड़ हो गया है. हालांकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार को अभी कई कदम उठाने होंगे. अभी सरकार ने रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए 460 से ज्यादा लाइसेंस जारी किए हैं. सरकार रक्षा उपकरणों का आयात घटाने के लिए एक टाइमलाइन में हथियारों की एक सूची जारी करेगी जिनके आयात पर प्रतिबंध होगा. इस सूची को लगातार अपडेट किया जाएगा, इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि सेनाओं की जरूरतों पर असर न पड़े. दुनिया की चुनिंदा ताकतों में शामिल होगा भारत इस पॉलिसी दस्तावेज का लक्ष्य ये है कि भारत रक्षा क्षेत्र में दुनिया की चुनिंदा ताकतों में शामिल हो. इसमें एयरोस्पेस और नेवी शिपबिल्डिंग शामिल है. सरकार चाहती है कि इन क्षेत्रों में डिजाइन से लेकर उत्पादन में भारत अव्वल बने. इसके लिए सरकार पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देगी
अयोध्या, 04 अगस्त 2020,राम की नगरी अयोध्या सजकर पूरी तरह तैयार है और बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे. इस ऐतिहासिक मौके पर आज तक ने अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन किया, जिसमें कई साधु-संतों ने अपनी राय रखी. इस दौरान अलग-अलग राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ताओं ने भी अपने विचार प्रकट किए. धर्म संसद के दौरान संतों ने राम मंदिर आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका को लेकर तीखे सवाल उठाए. संतसभा के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, 'अयोध्या की गलियों को आंदोलन के समय खून से लाल करने वाले मुलायम सिंह यादव का साथ कांग्रेस ने दिया है. ये सारा पाप क्या हिन्दू सभा और समाज भूल जाएगा. हमने इस आंदोलन को किसी की कृपा से सफल नहीं बनाया. कांग्रेस की कोई भी युक्ति काम नहीं आई लेकिन वो आज वो इसका क्रेडिट लेना चाहती है.' वहीं राम मंदिर को लेकर विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने कहा कि अगर कांग्रेस चाहती तो आज भक्त मंदिर के भवन में जाकर भगवान श्रीराम की पूजा कर रहे होते. 1949 से लेकर कई मौके आए जब कांग्रेस मंदिर का निर्माण शुरू करवा सकती थी लेकिन कांग्रेस ने हमेशा इस पर राजनीति कर सिर्फ इसे अपने फायदे के लिए टाला. राम मंदिर आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाते हुई हनुमान गढ़ी के महंत राज दास ने कहा कि कांग्रेस ने गिरगिट जैसा रंग बदलना कब से सीख लिया. अभी तक कांग्रेस के लोग कहते थे भगवाधारी आतंकी हैं, राम का कोई अस्तित्व नहीं है. जब कांग्रेस नहीं लड़ पाती है तो बवाली संतों को लेकर बवाल करना शुरू कर देती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी न किसी तरह अब भी इस कार्यक्रम को विवादित बनाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस की ही देन है कि संत आज तक मंदिर के लिए परेशान है. मंदिर खैरात में नहीं मिला हमने लड़कर लिया है. कांग्रेस ने राम भक्तों को मरवाया है और सरकार का साथ दिया था. काशी और मथुरा हिन्दुओं की है, इस पर कांग्रेस का क्या स्टैंड है? इस सवाल के जवाब पर कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा कि काशी शिव की है शिव काशी के हैं उसी तरह मथुरा कृष्ण की है और कृष्ण मथुरा के हैं. इसमें किसी को कोई शक नहीं है.
अयोध्या, 04 अगस्त 2020,राम की नगरी अयोध्या सजकर पूरी तरह तैयार है और बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे. इस ऐतिहासिक मौके पर आज तक ने अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन किया, जिसमें कई साधु-संतों ने अपनी राय रखी. इस दौरान अलग-अलग राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ताओं ने भी अपने विचार प्रकट किए. धर्म संसद के दौरान संतों ने राम मंदिर आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका को लेकर तीखे सवाल उठाए. संतसभा के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, 'अयोध्या की गलियों को आंदोलन के समय खून से लाल करने वाले मुलायम सिंह यादव का साथ कांग्रेस ने दिया है. ये सारा पाप क्या हिन्दू सभा और समाज भूल जाएगा. हमने इस आंदोलन को किसी की कृपा से सफल नहीं बनाया. कांग्रेस की कोई भी युक्ति काम नहीं आई लेकिन वो आज वो इसका क्रेडिट लेना चाहती है.' वहीं राम मंदिर को लेकर विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने कहा कि अगर कांग्रेस चाहती तो आज भक्त मंदिर के भवन में जाकर भगवान श्रीराम की पूजा कर रहे होते. 1949 से लेकर कई मौके आए जब कांग्रेस मंदिर का निर्माण शुरू करवा सकती थी लेकिन कांग्रेस ने हमेशा इस पर राजनीति कर सिर्फ इसे अपने फायदे के लिए टाला. राम मंदिर आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाते हुई हनुमान गढ़ी के महंत राज दास ने कहा कि कांग्रेस ने गिरगिट जैसा रंग बदलना कब से सीख लिया. अभी तक कांग्रेस के लोग कहते थे भगवाधारी आतंकी हैं, राम का कोई अस्तित्व नहीं है. जब कांग्रेस नहीं लड़ पाती है तो बवाली संतों को लेकर बवाल करना शुरू कर देती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी न किसी तरह अब भी इस कार्यक्रम को विवादित बनाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस की ही देन है कि संत आज तक मंदिर के लिए परेशान है. मंदिर खैरात में नहीं मिला हमने लड़कर लिया है. कांग्रेस ने राम भक्तों को मरवाया है और सरकार का साथ दिया था. काशी और मथुरा हिन्दुओं की है, इस पर कांग्रेस का क्या स्टैंड है? इस सवाल के जवाब पर कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा कि काशी शिव की है शिव काशी के हैं उसी तरह मथुरा कृष्ण की है और कृष्ण मथुरा के हैं. इसमें किसी को कोई शक नहीं है.
नई दिल्ली, 04 अगस्त 2020, अयोध्या में बुधवार को होने वाले राम मंदिर के भूमिपूजन से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने वीडियो संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि मेरे दिल का सपना पूरा होने जा रहा है. कल का दिन सभी भारतीयों के लिए ऐतिहासिक है. लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि कभी-कभी किसी के जीवन में महत्वपूर्ण सपने आने में काफी समय लगता है, लेकिन जब उन्हें आखिरकार पता चलता है, तो इंतजार बहुत सार्थक हो जाता है. ऐसा ही एक सपना, मेरे दिल के करीब है जो अब पूरा हो रहा है. अपने संदेश में आडवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रख रहे हैं. यह वास्तव में मेरे लिए ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दिन है. राम मंदिर आंदोलन का अहम हिस्सा रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण भारतीय जनता पार्टी का मिशन रहा है. रथ यात्रा को भी किया याद लालकृष्ण आडवाणी ने अपने संदेश में रथ यात्रा को भी याद किया. उन्होंने कहा कि मैं यह महसूस करता हूं कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान, 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा के रूप में एक मैंने महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाया, जिसने अपने अनगिनत प्रतिभागियों की आकांक्षाओं, ऊर्जाओं और जुनून को मजबूत करने में मदद की. उन्होंने कहा कि मैं राम जन्मभूमि आंदोलन में बहुमूल्य योगदान और बलिदान देने वाले भारत और दुनिया के संतों, नेताओं और लोगों के स्कोर के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं. मुझे इस बात की भी बहुत खुशी है कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक फैसले के कारण राम मंदिर का निर्माण शांति के माहौल में शुरू हो रहा है. यह भारतीयों के बीच के बंधन को मजबूत करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा. बीजेपी के इस सीनियर नेता ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यता की विरासत में एक सम्मानित स्थान पर काबिज हैं और अनुग्रह, गरिमा और अलंकरण के प्रतीक हैं. यह मेरा विश्वास है कि यह मंदिर सभी इंडियनस्टो को उनके गुणों के बारे में बताएगा. लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यह मेरा विश्वास भी है कि राम मंदिर सभी के लिए न्याय के साथ एक मजबूत, समृद्ध, शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण राष्ट्र के रूप में प्रतिनिधित्व करेगा और किसी को भी बाहर नहीं करेगा, ताकि हम वास्तव में रामराज्य में सुशासन के प्रतीक बन सकें.
नई दिल्ली अयोध्य में राम मंदिर का भूमि पूजन (Ayodhya Ram Mandir Bhoomi Pujan) होना है, जिसके लिए भव्य तैयारियां हो रही हैं। राम मंदिर (Ram Mandir) सालों पुराना मुद्दा था जो कि हमेशा से ही भाजपा का प्रमुख मुद्दा रहा। कांग्रेस ने कभी खुलकर न तो राम मंदिर (Congress On Ram Mandir) का समर्थन किया और न विरोध किया। लेकिन अब कांग्रेस ने यू-टर्न लिया है। कांग्रेस अब राम मंदिर निर्माण में पार्टी के योगदान को रेखांकित करने में जुट गई है। कांग्रेस नेता बयान दे रहे हैं, ताकि वे इस ऐतिहासिक समारोह अलग-थलग न दिखें। प्रियंका गांधी का बयान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक होगा। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में अपने निवास पर हनुमान चालीसा का पाठ किया और कहा कि ‘हम मध्य प्रदेश के लोगों की ओर से अयोध्या में 11 चांदी की ईटें भेज रहे हैं। कल (बुधवार) वह ऐतिहासिक दिन है, जिसके लिए पूरा देश इंतजार कर रहा था।' कांग्रेस के प्रवक्ता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भी इस अवसर पर देश के लोगों को बधाई दी। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का कांग्रेस ने पहले ही स्वागत किया है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। श्रेय लेने की कोशिश में कांग्रेस नेता कांग्रेस नेता अब श्रेय लेने कोशिश कर रहे हैं क्योंकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी मंदिर का निर्माण करना चाहते थे। मंदिर ट्रस्ट ने आधिकारिक कार्यक्रम के लिए कांग्रेस को आमंत्रित नहीं किया है, और कांग्रेस इसे लेकर कोई विवाद नहीं चाहती है और पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा कि अतिथि सूची तय करने के लिए ट्रस्ट का विशेषाधिकार है। मंगलवार को पार्टी ने कहा कि यह खुशी की बात है कि आखिरकार राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। जतिन प्रसाद का बयान पार्टी के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने पहले ही राम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया है। यह हर हिंदू के लिए और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए भी आस्था की बात है। मुझे खुशी है कि राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।’ छत्तीसगढ़ में, जहां कांग्रेस सत्ता में है, सरकार ने एक नया पर्यटन सर्किट शुरू किया है, जो उन सभी महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ेगा, जिनके बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने अयोध्या से अपने वनवास के दौरान दौरा किया था। राम मंदिर कांग्रेस की पहल राज्य सरकार ने राम वन गमन पथ के लिए 75 स्थानों की पहचान की है। कांग्रेस दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा मंदिर के मुद्दे पर किए गए कार्यों को बता रही है। पार्टी के नेता कह रहे हैं कि राजीव गांधी पहले शख्स थे जिन्होंने मंदिर के मुद्दे पर गंभीर कदम उठाया था। जब वह प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने राम मंदिर के ताले खोलने की अनुमति दी और फिर 1989 में शिलान्यास सुगम किया। पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान 1992 में विवादित मस्जिद का विध्वंस हुआ और उनकी सरकार में भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
मुंबई देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और रोज करीब 50 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में कोरोना के मरीजों के लिए एक राहत की खबर है। सन फार्मास्‍यूटिकल इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड ने आज घोषणा की कि इसने भारत में 35 रुपये प्रति गोली की रियायती दर पर फ्लुगार्ड® (फैविपिराविर) लॉन्‍च किया है। यह गोली कोविड-19 के हल्‍के से मध्‍यम स्‍तर तक के मामलों में उपचार के लिए है। फ्लुगार्ड® इस हफ्ते से बाजार में उपलब्‍ध होगी। लॉन्‍च के बारे में टिप्‍पणी करते हुए सन फार्मा के इंडिया बिजनेस के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी, कीर्ति गानोरकर ने बताया, 'भारत में रोज़ाना कोविड-19 के 50,000 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। ऐसे में, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पेशेवरों के लिए और अधिक उपचार विकल्‍प उपलब्‍ध कराना सख्‍त आवश्‍यक है। हम फ्लुगार्ड® को रियायती दर पर लॉन्‍च कर रहे हैं, ताकि इसे अधिक से अधिक मरीजों के लिए उपलब्‍ध कराया जा सके और उनके आर्थिक बोझ को कम किया जा सके। यह भारत में महामारी के प्रकोप को रोकने हेतु हमारे द्वारा हमेशा से किये जाने वाले प्रयासों के अनुरूप है।' उन्होंने कहा कि कंपनी सरकार और चिकित्‍सा बिरादरी के साथ मिलकर काम करेगी ताकि देश भर में फ्लुगार्ड® की उपलब्‍धता सुनिश्चित हो सके। फ्लुगार्ड® इस हफ्ते से बाजार में उपलब्‍ध होगी। फ्लुगार्ड® सन फार्मा का पंजीकृत ट्रेडमार्क है।
नई दिल्ली, 04 अगस्त 2020, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए दशकों लंबी लड़ाई लड़ी गई. यह सिर्फ कानूनी तौर पर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से भी कई मायनों में अहम है. राम मंदिर के आंदोलन ने देश की राजनीति की धारा को ही पलट दिया. राम मंदिर आंदोलन से निकली पार्टी बीजेपी आज केंद्र में सत्ताधारी है और मंदिर आंदोलन से निकले कई नेता संसद में बैठकर देश की नीतियां निर्धारित कर रहे हैं. अब जाकर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है और 5 अगस्त को अयोध्या में मंदिर का भूमि पूजन होने जा रहा है. यह संयोग ही है कि भूमि पूजन का कार्यक्रम ऐसे वक्त में हो रहा है जब केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों ही जगह बीजेपी की सरकार है. साथ ही दोनों ही सरकार की अगुवाई करने वाले नेता कट्टर हिदुत्व के समर्थक माने जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि पहली बार बीजेपी के एजेंडे में राम मंदिर कब शामिल हुआ था? आंदोलन के समर्थन का प्रस्ताव यह साल 1989 की बात है. हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में बीजेपी का अधिवेशन हुआ था. तब लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के अध्यक्ष हुआ करते थे. उस दौरान आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी भारतीय राजनीति की अहम कड़ी मानी जाती थी. इसी अधिवेशन में राम मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था. उसके बाद से यह मुद्दा बीजेपी के घोषणापत्र का अहम बिन्दु बन गया. इस साल जून के महीने में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला हुआ कि अब पार्टी राम जन्मभूमि आंदोलन का खुले तौर पर समर्थन करेगी. इससे पहले विश्व हिन्दू परिषद (VHP) इस आंदोलन की अगुवाई कर रही थी. इसी के बाद से 25 सितंबर 1990 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक अपनी रथ यात्रा शुरू की थी. इस यात्रा में लाखों कार सेवक उनके साथ अयोध्या के लिए रवाना हुए थे. आडवाणी की रण यात्रा रथ यात्रा को 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में तत्कालीन लालू यादव की सरकार ने रोका था और तब आडवाणी को हिरासत में भी लिया गया था. उनके अलावा विहिप नेता अशोक सिंघल को भी हिरासत में लिया गया था लेकिन वह पुलिस कस्टडी से छूटकर निकल गए थे. बिहार में लाल कृष्ण आडवाणी को रोके जाने के बावजूद लाखों की संख्या में कार सेवक अयोध्या के लिए कूच कर चुके थे. तब यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी जिसने कार सेवकों की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए थे. हालांकि जुलाई 1991 के यूपी चुनाव में बीजेपी को बड़ी बढ़त हासिल हुई और कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री चुने गए थे. वहीं राजीव गांधी की हत्या के बाद केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी और नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने. 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस इसके बाद 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया और देशभर में दंगे भड़क गए. कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. तब कल्याण सिंह ने अपने एक बयान में कहा था कि उनकी सरकार का मकसद अब पूरा हो गया और राम मंदिर के लिए सरकार की कुर्बानी कोई बड़ी बात नहीं है. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने के साथ ही बीजेपी का राजनीतिक उत्थान होता चला गया. बाबरी विध्वंस के बाद हुए 1996, 1998 और 1999 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. अटल बिहार वाजपेयी पहले 13 दिन फिर 13 माह के लिए प्रधानमंत्री बने. आखिर में वाजपेयी साढ़े चार साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे और 2004 के आम चुनाव में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था.
नई दिल्ली, 04 अगस्त 2020, अयोध्या की विरासत जितनी पुरानी है, उतना ही पेचीदा यहां की जमीन पर उठा विवाद भी रहा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राममंदिर निर्माण का काम शुरू हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे. बीजेपी राज में आज भले ही राममंदिर बनने का सपना साकार हो रहा हो, लेकिन अयोध्या के विवादित स्थल पर मूर्ति रखने, बाबरी का ताला खुलवाने से लेकर राम मंदिर का शिलान्यास और मस्जिद का विध्वंस तक कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए था. इसके बावजूद आखिर क्या वजह है कि राममंदिर का क्रेडिट कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के नाम है. भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में 1528 में मीर बाकी पर मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने का आरोप लगा और बाद में हिंदू-मुस्लिम समुदाय में विवाद का यही कारण बना. 1885 में राममंदिर के निर्माण की मांग उठी और यह मांग करने वाले थे महंत रघुवर दास. 1947 में देश आजाद हुआ और 1948 में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई. इसी के बाद समाजवादियों ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और आचार्य नरेंद्र देव समेत सभी विधायकों ने विधानसभा से त्यागपत्र दे दिया. कांग्रेस नेता उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने 1948 में हुए उपचुनाव में फैजाबाद से आचार्य नरेंद्र देव के खिलाफ एक बड़े हिंदू संत बाबा राघव दास को उम्मीदवार बनाया. गोविंद वल्लभ पंत ने अपने भाषणों में बार-बार कहा था कि आचार्य नरेंद्र देव भगवान राम को नहीं मानते हैं, वे नास्तिक हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी अयोध्या ऐसे व्यक्ति को कैसे स्वीकार कर पाएगी. इसका नतीजा रहा कि नरेंद्र देव चुनाव हार गए. बाबा राघव दास की जीत से राम मंदिर समर्थकों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने जुलाई 1949 में उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर फिर से मंदिर निर्माण की अनुमति मांगी. इसके बाद विवाद बढ़ने लगा तो पुलिस तैनात कर दी गई. तब कांग्रेस का केंद्र से लेकर राज्य तक में राज था. 22-23 दिसंबर 1949 की रात विवादित मस्जिद स्थल के अंदर राम-जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियां रख दीं 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने भगवान राम की पूजा अर्चना के लिए अदालत से विशेष इजाजत मांगी थी. महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदुओं की पूजा जारी रखने के लिए मुकदमा दायर कर दिया. अस्सी के दशक में आस्था और मंदिर के आसपास की राजनीति मुख्य केंद्र में आ गई. कांग्रेस में राजीव गांधी का दौर आ चुका था और वीएचपी राम मंदिर मुद्दे को लेकर माहौल बनाने में जुटी हुई थी. एक फरवरी 1986 को एक स्थानीय अदालत ने विवादित स्थान से मूर्तियां न हटाने और पूजा जारी रखने का आदेश दे दिया. इसके बाद बाबरी का ताला खुला. ये भी पढे़ं: जब अचानक राजीव गांधी का राम मंदिर और हिंदू प्रेम दांव पड़ा था उल्टा वीएचपी ही नहीं बीजेपी ने भी राम मंदिर को अपने एजेंडे में शामिल कर लिया. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बीजेपी को मात देने के लिए राम मंदिर के शिलान्यास की अनुमति दे दी. नारायण दत्त तिवारी उस समय सूबे के मुख्यमंत्री थे. नवंबर 1989 को वीएचपी सहित तमाम साधु-संतों ने राम मंदिर का शिलान्यास किया. 1989 के लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत राजीव गांधी ने आयोध्या से की. इसके बाद राम मंदिर के समर्थन में भीड़ जुटाने केलिए बीजेपी ने अपना अभियान शुरू कर दिया. 25 सितंबर 1990 को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी रथ यात्रा की शुरुआत की थी. इसी यात्रा के दो साल बाद 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी विध्वंस किया और विवादित ढांचे को गिरा दिया. यह वह समय था जब केंद्र में नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी और सूबे में कल्याण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार. तब से कांग्रेस यूपी में आजतक वापसी नहीं कर सकी है. कांग्रेस नेता कमलनाथ कह रहे हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने साल 1985 में मंदिर का ताला खोल दिया था. उन्होंने 1989 में ही शिलान्यास की बात कही थी, लेकिन हम इसे राजनीतिक मंच पर नहीं लाए. राजनीतिक मंच पर धार्मिक भावना नहीं लानी चाहिए. कांग्रेस ने मंदिर पर कोर्ट के फैसले का सम्मान किया. सभी भारतवासी मंदिर चाहते हैं. जब मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो गया, तो बीजेपी इसे क्यों भुनाने में जुटी हुई है? धार्मिक मामले पर बीजेपी को राजनीति बंद करना चाहिए. वहीं, संघ विचारक और राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा कहते हैं दोहरापन कांग्रेस के चरित्र का हिस्सा बन गया है. सत्ता को पाने के लिए अपनी विचाराधारा से भी कांग्रेस समझौता करती जा रही है. विवादित स्थल पर शिलान्यास जरूर कांग्रेस के दौर में हुआ था, लेकिन उस वक्त राजीव गांधी का समर्पण मंदिर के प्रति नहीं था बल्कि राजनीतिक अवसरवादिता थी और सत्ता को पाने के लिए उन्होंने कदम उठाया था. कांग्रेस नेता आज इतिहास याद दिला रहे हैं, यह उनकी सत्ता की लालसा को दर्शाता है. यह बात क्यों नहीं कहते हैं कि राममंदिर की राह में कांग्रेस कितने दिनों तक रोड़ा अटकाने का काम करती रही है. राकेश सिन्हा कहते हैं कि कांग्रेस पिछले दो दशक से अपनी विचाराधारा के संकट से जूझ रही है. विचाराधार में आई गिरावट के चलते ही उसके कार्यकर्ता भी दूर हुए हैं. कांग्रेस का सामाजिक जनाधार भी पूरी तरह से खिसक गया है, आज न तो उसके साथ दलित है और न ही मुस्लिम है. इसीलिए कांग्रेस के छत्रप हिंदूवाद से लेकर अल्पसंख्यकवद को अपना रहे हैं ताकि वो अपने राजनीतिक वजूद को बचाए रख सकें. यह भी कांग्रेस का अवसरवाद ही तो है.
नई दिल्ली राम मंदिर के भूमि पूजन (Ayodhya Ram Mandir Bhumi Pujan ) के मुहूर्त पर चल रहा विवाद कम होने का नाम नहीं हो रहा है। कल पीएम नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे इस बीच भूमि पूजन का मुहूर्त तय करने वाले पुजारी को धमकी मिलने की खबर है। पुजारी ने दावा किया है कि उन्हें फोन पर धमकी मिल रही है। बता दें कि भूमि पूजन की तारीख को लेकर काफी विवाद हो रहा है। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने भूमि पूजन के तय वक्त को शुभ नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह, मंदिरारंभ कार्य निषिद्ध है। उन्होंने इसके लिए विष्णु धर्म शास्त्र और नैवज्ञ बल्लभ ग्रंथ का हवाला दिया। दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने भी मुहूर्त को लेकर सवाल खड़े किए थे। पुजारी को आए कई धमकी भरे कॉल टाइम्स नाउ के मुताबिक कर्नाटक के बेलगावी में रहने वाले पुजारी को धमकी भरे कई फोन आए हैं। पुजारी ने दावा किया कि ये कॉल देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही हैं। स्थानीय पुलिस ने पुजारी की सुरक्षा के लिए एक कांस्टेबल को भेजा है। अभी आधिकारिक शिकायत नहीं हुई दर्ज हालांकि बेलगावी के कमिश्नर ने बताया कि इस बारे में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। चूंकि पुजारी को खतरा है इसलिए वहां पुलिस की तैनाती की गई है काशी के संत भी कर रहे हैं मुहूर्त का विरोध काशी के संतों के साथ ही ज्योतिषी मंदिर शिलान्यास को लेकर तय मुहूर्त पर सवाल खड़े कर रहे हैं। संतों और ज्योतिषियों के अनुसार, मंदिर के शिलान्यास के लिए तय इस तारीख के मुहूर्त से समय को उस दिन का सबसे अशुभ समय बताया जा रहा है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर मंदिर के शिलान्यास की तय तिथि यानि 5 अगस्त को अशु भ बताया है। दिग्विजय ने कसा था तंज मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने मंदिर पूजन के मुहूर्त और गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah News) से लेकर मंदिर के पुजारी के कोरोना संक्रमण को इससे जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू परंपराओं के उल्लंघन का नतीजा है यह। पीएम कल करेंगे मंदिर का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya News) में राम मंदिर का भूमि पूजन (Ram mandir Bhumi Pujan) कार्यक्रम शुरू हो चुका है। सुबह 8 बजे से राम अर्चना के साथ हनुमान गढ़ी में पूजा आरंभ हो गई है। बुधवार 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम है। पीएम मोदी को रामलला के दर्शन भी करेंगे और 'पारिजात' वृक्ष का रोपण भी करेंगे। PM अयोध्या में 3 घंटे तक रहेंगे।
ें पटना: बड़ी खबर राजधानी पटना से आ रही है जहां सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी गई है। सुशांत के पिता केके सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात की और सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को सीबीआई जांच कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दे दिया है। इस बीच बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। सुशांत केस की सीबीआई जांच की सिफारिश पूरे मामले में मंगलवार को जेडीयू नेता संजय सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की सीबीआई से जांच की सिफारिश कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि बिहार पुलिस मामले की जांच में सक्षम थी लेकिन महाराष्ट्र की सरकार और मुंबई पुलिस उन्हें काम नहीं करने दे रही थी। अब सीबीआई की जांच से दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा और सच्चाई सामने आ जाएगी। सीएम नीतीश का डीजीपी को आदेश जानकारी के मुताबिक, इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को निर्देश दिया कि वो सुशांत के केस में CBI जांच से जुड़ी कार्रवाई जल्द शुरू करें ताकि केस को सीबीआई के हवाले किया जा सके। इसी बीच सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय से बात की। सारी प्रक्रिया के बाद बिहार सरकार की तरफ से सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी गई। सुशांत के पिता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की बात सुशांत सिंह राजपूत के पिता के के सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात की है। केके सिंह ने सीएम नीतीश से कहा कि वो सुशांत सिंह राजपूत के मौत के केस की जांच सीबीआई के हवाले करें। जिसके बाद सरकार ने सीबीआई जांच कराने का फैसला लिया। पक्ष-विपक्ष की भी CBI जांच की मांग वहीं सुशांत सिंह राजपूत (sushant singh rajput) की मौत के केस में बिहार का सत्तापक्ष और विपक्ष एक मंच पर आता नजर आया। इसी कड़ी में LJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खत लिखा और सीबीआई जांच (cbi investigation) कराने की मांग की थी। सीएम नीतीश पहले से ही महाराष्ट्र सरकार से नाराज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो सोमवार को ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। IPS विनय तिवारी के मामले में सीएम नीतीश ने साफ कहा कि जो भी हुआ वो ठीक नहीं है।
जम्मू जम्मू जिले की पुलिस तथा एसओजी ने टेरर फंडिंग के एक मामले में गिरफ्तार कुल 6 लोगों से पूछताछ में बड़े खुलासे किए हैं। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक एसपीओ भी गिरफ्तार हुआ था। इन सभी से पूछताछ के आधार पर पुलिस कई अन्य लोगों की तलाश कर रही है। लिखें पूछताछ में पता चला कि पाकिस्तान में बैठे कमांडरों के इशारे पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का एक खेल चल रहा था। गिरफ्तार किए गए 6 सदस्य आतंकियों के कहने पर काम कर रहे थे। ये लोग बड़े पैमाने पर युवाओं की भर्ती कर रहे थे, जिससे कि इन्हें आतंकी घंटनाओं में शामिल किया जा सके। डोडा किश्तवाड़ के जिलों में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए भी तमाम लोगों की भर्ती का प्लान बनाया गया था। इन लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ऐसे तमाम और लोगों की भी पड़ताल करने में जुटी है, जो कि साजिश में शामिल थे। लश्कर के मददगार को किया गया था गिरफ्तार जानकारी के अनुसार, डोडा जिला पुलिस ने 20 जुलाई को सूचना के आधार पर लश्कर संगठन के एक मददगार को पकड़ा था। वह हवाला के पैसे लेने के लिए जम्मू आया हुआ था। ये पैसे लश्कर के कमांडर हारून ने पाकिस्तान से भेजे थे। मददगार के माध्यम से यह पैसे डोडा में पहुंचाए जाने थे, जिससे कि इसे आतंकियों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि पुलिस ने इसी दौरान उस शख्स को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान मुबस्सर बट निवासी डोडा के रूप में हुई। उससे पैसों को भी बरामद किया गया था। पुलिस विभाग का एसपीओ भी हुआ अरेस्ट इस मामले की जांच के दौरान टीम ने एक और मददगार को पकड़ा। उसकी पूछताछ के बाद तीसरे मददगार का पता चला। वह डोडा जिले में बतौर एसपीओ तैनात था। उसकी पहचान आसिफ के रूप में हुई है। वह काफी समय से आतंकियों के साथ जुड़ा हुआ था और पुलिस विभाग में रहकर आतंकियों के लिए काम कर रहा था। बताया जा रहा है कि इस मामले में कई और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इन सभी लोगों पर जम्मू से डोडा तक आतंकी नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप है और पुलिस की टीमें इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही हैं।
जम्मू कोरोना काल में भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाक की तरफ से पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में चौकियों को निशाना बनाकर फायरिंग की गई। भारतीय सेना के जवानों ने भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है। रात भर दोनों तरफ से रूक रूक कर फायरिंग जारी रही। बता दें किपाकिस्तान की तरफ से एलओसी पर चौकियों को निशाना बनाने का काम जारी है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की तरफ से देर रात को पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में चौकियों को निशाना बनाकर फायरिंग शुरु कर दी गई। एलओसी की कई चौकियों को निशाना बनाया गया। जिसमें बडे हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। इस तरफ से भी पाक को फायरिंग का जवाब देना शुरु कर दिया गया। सुबह तडके तक दोनों तरफ से फायरिंग जारी रही। उसके बाद पाक की तरफ से फायरिंग को बंद कर दिया गया। किया गया सर्च ऑपरेशन जिसके बाद सुबह सेना के जवानों ने पूरे इलाके को घेर कर सर्च आपरेशन चलाया। ताकि देखा जा सके कि पाक की तरफ से फायरिंग की आड़ में कोई घुसपैठ का प्रयास तो नहीं हुआ है। लेकिन पाक की तरफ से ऐसे कोई सबूत नहीं मिले है। सुरक्षा को मजबूत किया गया है। ताकि अगर पाक की तरफ से कोई प्रयास किया जाए तो उसका मुंहतोड जवाब दिया जा सके।
श्रीनगर जम्‍मू कश्‍मीर के बारामूला श्रीनगर हाइवे पर आतंकियों ने सेना को बड़ा नुकसान पहुंचाने के इरादे से आईईडी को लगाया हुआ था। इसका मकसद जवानों के काफिले को निशाना बनाने का था।। लेकिन समय रहते इसे नष्ट कर दिया गया। इससे कुछ दूर तक हाइवे पर वाहनों की आवाजाही को भी बंद किया गया था।इस इलाके को घेर कर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि पता किया जा सके कि आतंकियों की तरफ से और आईईडी तो नहीं लगाई गई है। बारामूला जिले के टप्पन इलाके में आईईडी को लगाया हुआ था। पेट्रोल पंप के पास आईईडी फिट की गई थी। इस श्रीनगर बारामूला हाइवे पर सुबह सेना के वाहनों का काफिला गुजरता है। उसे नुकसान पहुंचाने के इरादे से आईईडी को लगाया गया था।लेकिन सेना की आरओपी ने सुबह गश्त के दौरान देख लिया। हाइवे को किया गया बंद आईईडी का पता लगने के बाद हाइवे को बंद कर दिया गया। दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही को बंद किया गया। उसके बाद सेना की टीम ने बम निरोधक दस्ते को बुलाया। काफी मेहनत के बाद आईईडी को नष्ट कर दिया गया। उसका धमाका काफी जोरदार था जोकि काफी दूर तक सुनाई दिया। बाद में पूरे इलाके में सेना ने सर्च आपरेशन चलाया। ताकि देखा जा सके कि कही और तो आईईडी नहीं लगाई गई है। अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसिंयां बता दे कि आतंकियों की तरफ से 15 अगस्त तक हमले करने के इनपुट सुरक्षाबलों के पास आए हुए है। आतंकी कश्मीर में माहौल को खराब करने के लिए हमले करने की फिराक में है। इस बात को देखते हुए सुरक्षाबल पहले से ही अलर्ट पर है।
अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya News) में राम मंदिर का भूमि पूजन (Ram mandir Bhumi Pujan) कार्यक्रम शुरू हो चुका है। सुबह 8 बजे से राम अर्चना के साथ हनुमान गढ़ी में पूजा आरंभ हो गई है। बुधवार 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम है। पीएम मोदी को रामलला के दर्शन भी करेंगे और 'पारिजात' वृक्ष का रोपण भी करेंगे। PM अयोध्या में 3 घंटे तक रहेंगे। RSS प्रमुख मोहन भागवत और बाबा रामदेव भी अयोध्या के लिए रवाना हो चुके हैं। अयोध्या में हो रहे पूजन का सभी अपडेट. ें - नेपाल के जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास अब भूमि पूजन कार्यक्रम में नहीं आ पाएंगे। कोरोना की वजह से उन्हें बॉर्डर क्रॉस नहीं करने दिया गया। - RSS प्रमुख मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे। निराला नगर के सरस्वती कुंज में ठहरे हैं भागवत। यहां से अयोध्या के लिए होंगे रवाना। भूमि पूजन के लिए मेहमानों का आना शुरू। -बाबा रामदेव अयोध्या के लिए रवाना हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर बनने का श्रय रामभक्तों को जाता है। राम जन्मभूमि पर राम अर्चना पूजा शुरू हुई। 5 घंटे तक चलने वाली इस पूजा में सभी प्रमुख देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है । - राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर अयोध्या में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम। - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत आज अयोध्या पहुंच जाएंगे। - राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए आमंत्रित संत गणों में दशनामी सन्यासी परंपरा, रामानंद वैष्णव परंपरा, रामानुज परंपरा, नाथ परंपरा, निम्बार्क, माधवाचार्य, वल्लभाचार्य, रामसनेही, उदासीन, निर्मले संत, कबीर पंथी, चिन्मय मिशन, रामकृष्ण मिशन, लिंगायत, वाल्मीकि संत, रविदासी संत, आर्य समाज, सिख परंपरा, बौद्घ, जैन, संत कैवल्य ज्ञान, संत पंथ, इस्कान, स्वामी नारायण, वारकरी, एकनाथ, बंजारा संत, वनवासी संत, आदिवासी गौड़, गुरू परंपरा, भारत सेवाश्रम संघ, आचार्य समाज, संत समिति, सिंधी संत, अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी समेत नेपाल के विभिन्न इलाकों सहित जनकपुर के भी संत उपस्थित रहेंगे। - अयोध्या के मणिराम दास छावनी में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। -हनुमानगढ़ी मंदिर में पीएम मोदी का दर्शन कार्यक्रम 7 मिनट का होगा। इसमें से 3 मिनट तक पुजारी वैदिक मंत्रोच्चारण करेंगे। हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी महंत राजू दास ने इस बात की जानकारी दी। -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हनुमानगढ़ी मंदिर में जाएंगे। अयोध्या में पीएम के कार्यक्रम का यह पहला पड़ाव होगा। इस दौरान वह हनुमानगढ़ी में प्रार्थना करेंगे। उनके स्वास्थ्य के साथ ही Covid-19 पर नियंत्रण के लिए मंत्रोच्चारण किया जाएगा। -पीएम मोदी 5 अगस्त को दिन में 11 से 11:15 के बीच अयोध्या पहुंचेंगे। वह यहां करीब 3 घंटे रुकेंगे। दोपहर करीब 2 बजे पीएम अयोध्या से रवाना हो जाएंगे। -अयोध्या में आज रात से जनपद की सीमाएं होंगी सील, किया गया रूट डायवर्जन। जनपद में नहीं मिल पाएगा वाहनों को प्रवेश। 5 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक प्रभावी रहेगा रुट डायवर्जन। -चंपत राय ने कहा कि मुख्य समारोह के लिए आमंत्रित किए गए 175 प्रतिष्ठित अतिथियों में से 135 संत हैं, जो विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं और वे सभी उपस्थित रहेंगे। वीएचपी के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के भतीजे सलिल सिंघल कार्यक्रम में 'यजमान' होंगे। साथ ही नेपाल के संतों को भी आमंत्रित किया गया है क्योंकि जनकपुर का बिहार, उत्तर प्रदेश और अयोध्या से भी संबंध है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए 175 प्रतिष्ठित अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि निमंत्रण सूची बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के अलावा वरिष्ठ वकील के. परासरन एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ 'निजी तौर पर चर्चा' करके तैयार की गई है। -18 अप्रैल से गर्भ गृह पर वास्तुपूजा औरर आहुतियां की जा रही हैं। भगवान विष्णु, राम और हनुमान के नाम से 1000 बार आहुति दी गई है। एक बार राम अर्चना भी हुई है। इसमें 6-7 घंटे लगते हैं। गुप्त नवरात्रि पर दुर्गा पूजा हुई। 700 मंत्रों की पूजा भी हुई। -इस कार्यक्रम में काशी, अयोध्या, दिल्ली, प्रयाग के विद्वानों को बुलाया है। अलग-अलग पूजा के अलग-अलग एक्सपर्ट हैं। पूरी टीम 21 ब्राह्मणों की है जो अलग अलग तरीकों से पूजा कराएगी। यह एक वक्त में नहीं होगी बल्कि अलग अलग कालखंड में अलग-अलग ब्राह्मण पूजा कराएंगे। -हनुमान जी महाराज वर्तमान अयोध्या के अधिष्ठता हैं, इसलिए सबसे पहले हनुमान जी की पूजा की जाती है। निशान पूजा में अखाड़ों के निशान की पूजा होती है। उनकी पूजा का भी उतना ही महत्व होता है जितना हनुमान जी के निशान की पूजा का महत्व है। निर्वाणी अखाड़े के ईष्ट देव हनुमान जी है और उनके यह निशान हैं, इसलिए 4 अगस्त को निशान और हनुमान दोनों की पूजा हो रही है।
नई दिल्ली, 03 अगस्त 2020, राममंदिर आंदोलन में उमा भारती की अहम भूमिका रही 1992 में विध्वंस के समय अयोध्या में थीं विजयाराजे सिंधिया राममंदिर आंदोलन का फायरब्रांड चेहरा रहीं साध्वी ऋतम्भरा अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे. तीस साल पहले देश भर में राम मंदिर आंदोलन की अलख जगाने में महिलाओं ने भी बेहद सक्रिय भूमिका अदा की थी. राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा आंदोलन की अगुवा महिला चेहरा थीं. इन तीनों महिला नेत्रियों ने राष्ट्र सेविका समिति, दुर्गा वाहिनी और बीजेपी महिला मोर्चा के जरिए राम मंदिर आंदोलन के लिए महिलाओं को प्रेरित करने का काम किया था. राम मंदिर के लिए जेल भरो आंदोलन के तहत गिरफ्तारी देने की बात हो या फिर कारसेवा करने का काम रहा हो, ये महिलाएं पीछे नहीं रही हैं. राजमाता विजयाराजे सिंधिया एक तरफ मंदिर आंदोलन का संयमित चेहरा मानी जाती थीं तो दूसरी तरफ उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा हिंदुत्व की कट्टर छवि वाली नेता के तौर पर जानी जाती थीं. बाबरी विध्वंस के लिए इन तीनों महिलाओं को आरोपी भी बनाया गया था. राम मंदिर का चेहरा राजमाता विजयाराजे सिंधिया सागर के राणा परिवार में साल 1919 में जन्मीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर राजघराने की बहू बनीं. इंदिरा सरकार के आपातकाल में वह जेल गईं. उसके बाद वह धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद से जुड़ती चली गईं. राजमाता विजयाराजे सिंधिया बीजेपी की संस्थापक सदस्य रही हैं और राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा मानी जाती थीं. 1988 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में मंदिर निर्माण के लिए विजयाराजे सिंधिया प्रस्ताव लाई थी. इसी के बाद राम मंदिर मुद्दा बीजेपी के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो गया. वो शुरू से ही कभी प्रत्यक्ष तो कभी अप्रत्यक्ष रूप से मंदिर के आंदोलन का हिस्सा रहीं. बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1989 में जब सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली तो विजयाराजे सिंधिया ने उन्हें पूरा सहयोग दिया. छह दिसंबर 1992 की कारसेवा के दौरान भी अयोध्या में वे अहम भूमिका में रहीं और एक प्रमुख नेत्री की तरह राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व किया था. अयोध्या के रामकथा कुंज के मंच से विजयाराजे सिंधिया ने भी कारसेवकों को संबोधित किया था. राजमाता सिंधिया को बाबरी विध्वंस मामले का आरोपी बनाया गया था. आंदोलन से मिली उमा भारती को पहचान अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से उमा भारती को देश भर में राजनीतिक पहचान मिली है. 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान वो फायरब्रांड महिला नेता के तौर पर उभरीं. राममंदिर के समर्थन में देश में भ्रमण कर सभाएं कीं और जोश जगाने वाला भाषण दिया. विश्व हिंदू परिषद की लगभग हर सभा में वो जबरदस्त भाषण दिया करतीं. वह भी बाबरी विध्वंस मामले की आरोपी हैं. उन पर कारसेवकों पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा जिससे उन्होंने इनकार किया था. उमा भारती केंद्रीय मंत्री बनीं और मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं तो उसकी वजह केवल राममंदिर आंदोलन ही रहा, जिसने सन्यासी से उमा भारती को देश की सियासत का प्रमुख चेहरा बना दिया. कट्टर हिंदुत्व का चेहरा साध्वी ऋतम्भरा राममंदिर आंदोलन में दुर्गा वाहिनी संगठन की अहम भूमिका रही है, जिसकी कमान उस समय साध्वी ऋतम्भरा के हाथों में रही. साध्वी ऋतम्भरा ने आजतक से कहा था कि अब राम मंदिर का निर्माण का सपना साकार हो रहा है तो इस अनुभव को महसूस किया जा सकता है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. वो 90 के दशक में राममंदिर का हिस्सा बनी थीं और कहा था कि हां, हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है. साध्वी ऋतंभरा एक समय हिंदुत्व की फायरब्रांड नेता थीं. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप हैं. अयोध्या आंदोलन के दौरान उनके उग्र भाषणों के ऑडियो कैसेट पूरे देश में सुनाई दे रहे थे जिसमें वे आंदोलन विरोधियों को 'बाबर की आलौद' कहकर भी ललकारती थीं. इतना ही नहीं, राममंदिर के लिए हर वीएचपी के कार्यक्रम में वो उपस्थित रहा करती थीं.
श्रीनगर, 03 अगस्त 2020,श्रीनगर जिले में तत्काल प्रभाव से कर्फ्यू लगा दिया गया है. यह कर्फ्यू चार और पांच अगस्त को भी जारी रहेगा. दरअसल प्रशासन को रिपोर्ट मिली है कि कुछ अलगाववादी सगठन यहां पर प्रदर्शन कर कानून-व्यवस्था खराब कर सकते हैं. जिसके बाद प्रशासन ने एहतियातन यह फैसला लिया है. जाहिर है पिछले साल पांच अगस्त को ही जम्मू-कश्मीर से 370 हटा कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया था. आदेश में कहा गया है कि उन्हें ऐसी रिपोर्ट मिली है कि कुछ अलगाववादी और पाक समर्थित संगठन पांच अगस्त को जिले में 'ब्लैक डे' मनाने वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक वे लोग इस दौरान हिंसक प्रदर्शन भी कर सकते हैं. जिससे जान-माल को भी खतरा पहुंच सकता है. इसके अलावा कोविड-19 को देखते हुए भी इलाके में भीड़ इकट्ठा होने को लेकर पाबंदी है. ऐसे में किसी तरह के प्रदर्शन से उस आदेश की अवहेलना होगी. दरअसल 5 अगस्त को कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए हुए एक साल पूरे हो जाएंगे. पाकिस्तान इस दिन को लेकर अब प्रोपेगेंडा पर उतर आया है. पाकिस्तान ने इस दिन को ब्लैक डे यानी कि काला दिन के रूप में मनाने का फैसला किया है. इसके साथ ही कश्मीर राजमार्ग का नाम बदल कर श्रीनगर हाईवे कर दिया . पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ऐलान किया है कि 5 अगस्त को कश्मीर पाकिस्तान बन जाएगा. उन्होंने कहा, 'हमने फैसला किया है, हमारी मंजिल कश्मीर है. हमारी नजर श्रीनगर पर है. ये जो कश्मीर हाईवे है उसका नाम हम 5 अगस्त से रख रहे हैं श्रीनगर हाईवे. ये वो इशारा है जो हमें लेकर जाएगी श्रीनगर तक. पाकिस्तान ने 5 अगस्त को दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए कश्मीर के मुद्दे पर व्यापक प्रोपेगेंडा और भारत पर हमले की योजना बनायी है. पाकिस्तानी सेना और ISI का प्लान है कि वो उस दिन अलग अलग तरीकों से भारत पर हमला करेंगे. इसके अलावा 5 अगस्त को इमरान खान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाएंगे और कश्मीर का रोना रोएंगे. पाकिस्तान 4 अगस्त को POK में संयुक्त राष्ट्र की टीम भेजने का प्लान बना रहा है. पाकिस्तान की दूसरे देशों में किराए की भीड़ जुटाकर भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने की भी योजना है. पाकिस्तान इस दिन जम्मू कश्मीर में अपने ट्रेंड किए हुए आतंकियों की घुसपैठ करवाने की फिराक में भी है. आतंकवादियों को 5 अगस्त से जुड़े निर्देश देने के लिए सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है. साथ ही पाकिस्तान ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी को देने का फैसला किया है. बता दें कि बीते साल 5 अगस्त को ही संसद में आर्टिकल 370 की संवैधानिक मान्यता को खत्म कर दिया गया था.
अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन की घड़ी अब नज़दीक आ रही है. 48 घंटे से भी कम का वक्त बचा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे. इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से ट्वीट कर लोगों से अपील की गई है कि वो घर पर बैठकर ही ऐतिहासिक दृश्य का नजारा लें. वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने कहा है कि भूमि पूजन कार्यक्रम में यहां से लेकर नेपाल के संतों तक को बुलाया गया है. कुछ लोग संतों को भी दलित कहते हैं जबकि वो लोग भगवान के लोग हैं. भारत के भूगोल का हर हिस्सा यहां पर रहेगा. संत महात्मा मिलाकर करीब 175 लोग शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद यूनुस को बुलाया गया है. वो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं. वो चाहे जिस धर्म के हों. सुरक्षा बंदोबस्त के बारे में बताते हुए चम्पत राय ने कहा कि निमंत्रण पत्र पर सिक्योरिटी कोड है. ये केवल एक बार ही काम करेगा. जो प्रवेश करेगा, एक बार अंदर जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आ सकता. अंदर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं जा सकता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अयोध्या पहुंचे हैं, यहां पर सीएम तैयारियों का जायजा लिया. और सुरक्षा व्यवस्था को परखा. सीएम योगी यहां मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते, उनसे जानकारी लेते हुए नज़र आए. यूपी सीएम ने इस दौरान भूमि पूजन स्थल के अलावा हनुमानगढ़ी मंदिर का दौरा भी किया. इस बीच उन्होंने ट्वीट किया, ‘अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभा कै खानी’. सीएम ने लिखा कि कई शताब्दियों की प्रतीक्षा अब पूर्ण हो रही है, व्रत फलित हो रहे हैं, संकल्प सिद्ध हो रहा है. सभी श्रद्धालुजन घर पर दीप जलाएं, श्रीरामचरितमानस का पाठ करें. प्रभु श्री राम का आशीष सभी जनों को प्राप्त होगा. गौरतलब है कि पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन से पहले 4 तारीख को ही अयोध्या की सीमाएं सील कर दी जाएंगी. इस बीच आज सीएम सभी तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे हैं. कोरोना वायरस संकट के कारण बड़ी संख्या में लोगों को आने की अनुमति नहीं है, भूमि पूजन के दौरान भी सिर्फ दो सौ से कम मेहमान मौजूद रहेंगे.
नई दिल्ली, 03 अगस्त 2020, राज्यसभा सांसद अमर सिंह का दिल्ली के छतरपुर में अंतिम संस्कार किया गया. अमर सिंह की दोनों बेटियों ने उन्हें मुखाग्नि दी. गौरतलब है कि अमर सिंह का सिंगापुर में 1 अगस्त को निधन हो गया था. रविवार को उनका पार्थिव शरीर सिंगापुर से दिल्ली लाया गया था. कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से उनके अंतिम संस्कार में चुनिंदा लोग ही मौजूद रहे. इस मौके पर पूर्व अभिनेत्री और बीजेपी नेता जयाप्रदा भी मौजूद रहीं. दिल्ली के छतरपुर स्थित श्मशान घाट में आज 11.30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस मौके पर अमर सिंह की पत्नी पंकजा सिंह और दोनों बेटियां मौजूद रहीं. इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली में अमर सिंह के घर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी. राजनाथ सिंह के अलावा बीजेपी के राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी उन्हें उनके छतरपुर स्थित फॉर्म हाउस में श्रद्धांजलि दी. रविवार शाम को एक चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए सिंगापुर से उनका शव दिल्ली लाया गया था. 27 जनवरी 1956 को जन्में 64 साल के अमर सिंह पिछले 6 महीनों से सिंगापुर के एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे. इससे पहले साल 2013 में उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. दिल्ली से लेकर लखनऊ और मुंबई से लेकर सैफई तक में अपना राजनीतिक सिक्का चलाने वाले अमर सिंह की चर्चा सियासी दोस्तों और दुश्मनों में समान रूप से होती थी. अपनी राजनीतिक पकड़ और व्यवहार कुशलता की वजह से अमर सिंह कॉरपोरेट बोर्ड रूम से लेकर राजनीतिक अखाड़ों में बराबर सम्मान पाते थे.
नई दिल्ली, 03 अगस्त 2020,देश में कोरोना की रफ्तार काफी तेज हो गई है. पहले कुछ हजार मामले सामने आ रहे थे लेकिन अब यह आंकड़ा 50 हजार के आसपास पहुंच गया है. एक स्टडी के मुताबिक जुलाई के महीने में हर घंटे 25 लोग कोरोना से अपनी जान गवां रहे हैं. ये आंकड़े बहुत खतरनाक हैं. कोरोना की मार ऐसी है कि कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कोरोना पॉजिटिव होना इसी का सबूत है. एक हफ्ते के आंकड़े देखें तो कई बड़ी हस्तियां कोरोना के संक्रमण का शिकार हो चुकी है. इनमें सबसे नया नाम अमित शाह का है तो तमिलनाडु के राज्यपाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी इसी लिस्ट में शामिल हैं. अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. रविवार को उनके संक्रमण का पता चला. संक्रमण के बारे में अमित शाह ने खुद जानकारी दी. डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनकी तबीयत भी सामान्य है. गृहमंत्री अमित शाह ने अपने एक ट्वीट में लिखा, कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मेरी तबीयत ठीक है, परंतु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूं. मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जांच करवाएं. अमित शाह ने इस ट्वीट के जरिए अपने संपर्क में आए सभी लोगों को कोरोना की जांच कराने की सलाह दी. बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. रविवार को उनकी कोरोना की रिपोर्ट सामने आई जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और कहा कि उनके संपर्क में आने वाले लोग अपना टेस्ट जरूर कराएं. देश में कोरोना की चपेट में कई वीवीआईपी आए हैं जिनमें येदियुरप्पा का भी नाम शामिल है. येदियुरप्पा के बाद उनकी बेटी भी कोरोना पॉजिटिव निकली हैं. उन्हें बेंगलुरु के मणिपाल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. बता दें, येदियुरप्पा खुद को अस्वस्थ महसूस कर रहे थे जिसके बाद उनकी जांच कराई गई जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव निकली. इसके बाद फौरन उन्हें बेंगलुरु के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. अभी उनकी तबीयत स्थिर बताई जा रही है. कमल रानी वरुण उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण की रविवार को कोरोना से मौत हो गई. 18 जुलाई को कोरोना संक्रमण के बाद लखनऊ स्थिति एसजीपीजीआई में भर्ती हुई थीं. लगातार हालात बिगड़ते गए और रविवार सुबह उनका निधन हो गया. इससे पहले वे सांसद भी रह चुकी थीं. कमल रानी वरुण यूपी सरकार में टेक्निकल एजुकेशन मंत्री थीं. पिछले महीने उनका कोरोना टेस्ट कराया गया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. इसके बाद उन्हें लखनऊ पीजीआई में दाखिल कराया गया था. कमल रानी वरुण घाटमपुर, कानपुर नगर से विधायक थीं. इससे पूर्व वे 11वीं व 12वीं लोकसभा की सदस्य थीं. स्वतंत्र देव सिंह यूपी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी रविवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए. खुद स्वतंत्र देव सिंह ने ट्विटर के माध्यम से इसकी पुष्टि की. उन्होंने अपने संपर्क में आए सभी लोगों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी है. संपर्क में आए लोगों को रिपोर्ट आने तक होम क्वारनटीन होने की सलाह भी दी. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'मुझे कोरोना के शुरुआती लक्षण दिख रहे थे जिसके चलते मैंने अपनी कोविड-19 की जांच कराई. जांच में मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मुझसे संपर्क में आने वाले सभी लोगों से मेरा निवेदन है कि वह गाइडलाइन के अनुसार स्वयं को क्वारनटीन कर लें और आवश्यकता अनुसार अपनी जांच करा लें.' डॉक्टर महेंद्र सिंह यूपी सरकार में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. बता दें, योगी सरकार में छह मंत्री कोरोना से संक्रमित पाए जा चुके हैं. बीते महीने खेल मंत्री उपेंद्र तिवारी में कोरोना के संक्रमण का पता चला था. उपेंद्र तिवारी से पहले योगी सरकार के तीन अन्य मंत्री भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. कोरोना संक्रमित मंत्रियों की सूची में राजेंद्र प्रताप सिंह, धर्म सिंह सैनी और चेतन चौहान के नाम भी शामिल हैं. बनवारी लाल पुरोहित तमिलनाडु के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. राज्यपाल बनवारी लाल को राजभवन में ही क्वारनटीन कर दिया गया है. डॉक्टरों की एक टीम उनकी देखभाल के लिए तैनात कर दी गई है. गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित की तबीयत स्थिर बताई जा रही है. संक्रमण हल्का होने के कारण उन्हें घर पर आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है और कावेरी अस्पताल की मेडिकल टीम द्वारा निगरानी की जा रही है. इससे पहले राजभवन के तीन कर्मचारियों में कोरोना की पुष्टि होने के बाद राज्यपाल ने क्वारनटीन में जाने का फैसला किया था. कार्ति चिदंबरम तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. रिपोर्ट आने के बाद वे होम क्वारनटीन हो गए हैं. उन्होंने एक ट्वीट में कोरोना संक्रमण की जानकारी दी. कार्ति ने लिखा, मेरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोरोना के लक्षण हल्के हैं लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर मैं होम क्वारनटीम में हूं. कार्ति ने लिखा, मेरे संपर्क में जितने लोग आए हैं उनसे अपील है कि वे भी अपना टेस्ट कराएं और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करें. शिवराज सिंह चौहान अभी हाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए. शिवराज सिंह चौहान चिरायु अस्पताल में भर्ती हैं. इलाज के दौरान कराए गए टेस्ट से पता चलता है कि उन्हें कोरोना का मामूली संक्रमण है. मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की थी कि जो कोई भी उनके संपर्क में आया है, वह अपना टेस्ट जरूर करा ले. शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना के लक्षण दिखने पर अपना टेस्ट कराया था. टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 25 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो गए थे. अभी उनका इलाज जारी है.
अयोध्या, 03 अगस्त 2020,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के लिए पहुंचेंगे तो बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी पीएम मोदी का स्वागत करेंगे. आजतक के साथ खास बातचीत में इकबाल अंसारी ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण शुरू होने वाला है. प्रधानमंत्री भूमि पूजन करने आ रहे हैं, प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए हमने तैयारी कर रखी है. प्रधानमंत्री को रामचरितमानस और रामनामी चादर भेंट कर उनका स्वागत करेंगे. बता दें कि इकबाल अंसारी को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है. निमंत्रण मिलने के बाद इकबाल अंसारी ने कहा कि मैं कार्यक्रम में जरूर जाऊंगा. उन्होंने कहा कि भगवान राम की मर्जी से हमें न्योता मिला है. अयोध्या में गंगा-जमुनी तहजीब बरकरार है. मैं हमेशा मठ-मंदिरों में जाता रहा हूं. कार्ड मिला है तो जरूर जाऊंगा. आजतक से बातचीत के दौरान न्योता मिलने से इकबाल अंसारी बहुत खुश दिखे. उन्होंने कहा कि अयोध्या में गंगा जमुनी संस्कृति अभी बरकरार है. इकबाल अंसारी ने कहा कि वे हमेशा से मंदिर मठों में जाते रहे हैं और उन्हें जब निमंत्रण मिला है तो भूमि पूजन कार्यक्रम में जरूर शामिल होंगे. बता दें कि इकबाल अंसारी के पिता हातिम अंसारी न सिर्फ बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार थे बल्कि राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रामचंद्र परमहंस के करीबी दोस्त भी थे और दोनों के बीच दोस्ती भी ऐसी की मुकदमा लड़ने भी साथ जाया करते थे. हातिम अंसारी के निधन के बाद इकबाल अंसारी ही अपने पिता की ओर से बाबरी मस्जिद का मुकदमा देख रहे थे.
नई दिल्ली, 03 अगस्त 2020,भारतीय रेलवे (Indian Railways) ट्रेनों की रफ्तार पर खास ध्यान दे रहा है. रेलवे ने तकनीक के जरिए ट्रेनों का सफर आसान बनाने और रफ्तार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है. भोपाल रेल मंडल में थिक वेब स्विच की मदद से ट्रेनों की गति बढ़ाने का प्रयास जारी है. रेल मंडल ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा करने में जुटा है. रेलवे के मुताबिक आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार बढ़ते हुए भोपाल मंडल द्वारा ट्रैक पर थिक वेब स्विच लगाने का काम चालू है. इसके लगने के बाद ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटे की गति से आसानी से पटरियों पर दौड़ सकेंगी. भोपाल मंडल में मौजूदा ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रैक का आधुनिकीकरण किया जा रहा है. थिक वेब स्विच तकनीक से ट्रैक पर 160 किली मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ाई जा सकती हैं भोपाल रेल मंडल से मिली जानकारी के मुताबिक बीना से इटारसी के बीच रेलवे लाइन पर ट्रेनों को अधिक रफ्तार से चलाने के लिए नई तकनीकी थिक वेब स्विच का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही रेलवे ट्रैक की पुरानी पटिरयों को बदल रहा है. थिक वेब स्विच लगाने का काम तेजी से चल रहा है. काम पूरा होने पर ट्रेनों की गति औसतन 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी वहीं, अधिकतम रफ्तार 160 किलो मीटर प्रति घंटा हो सकती है. बता दें कि अभी मंडल में ट्रेनों की गति औसतन प्रति घंटा 70 से 90 किलोमीटर मीटर है. गौरतलब है कि मार्च 2021 तक 10,000 किलोमीटर के रूट पर शामिल ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रतिघंटा करने की तैयारी है. वहीं, अब तक 1,442 रूटों पर चलने वाली ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर 130 किलोमीटर/घंटा कर दी गई है. इस तरह गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल/ डायगोनल्स रूट के 15 प्रतिशत ट्रनों की स्पीड को अपग्रेड कर 130 किलोमीटर प्रति घंटा किया जा चुका है.
भोपाल राम मंदिर को लेकर दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार किया है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि हम अनादि काल से देखते आ रहे हैं कि जब भी कुछ अच्छा होता है तो असुर समस्याएं पैदा करने की कोशिश करते हैं। दिग्विजय सिंह भी ऐसा ही कर रहे हैं। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के मुहूर्त को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि हिंदू प्रथाओं की अनदेखी की वजह से गृह मंत्री अमित शाह कोरोना संक्रमित हो गए हैं। साथ ही दिग्विजय सिंह ने यूपी की मंत्री की मौत को भी इसी से जोड़ा था। इसे लेकर बीजेपी आग बबूला हो गई है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि कमलनाथ जी सुंदरकांड करा रहे हैं, तो दूसरी ओर दिग्विजय सिंह लंकाकांड में व्यस्त हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई धार्मिक कार्य होता है तो आसुरी शक्तियां विध्न बाधाएं डालतीं हैं। कमोवेश ये उसी तरह की राजनीति है, भगवान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। दिग्विजय सिंह का इस तरह से ट्वीट करना ठीक नहीं है। मुहूर्त पर उठाए थे सवाल दिग्विजय सिंह ने बीजेपी नेताओं और राम मंदिर के पुजारियों की कोरोना रिपोर्ट को भूमि पूजन के मुहूर्त से जोड़ा था। दिग्विजय सिंह ने कहा था कि सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नजर अंदाज करने का नतीजा है। राम मंदिर के सभी पुजारी कोरोना पॉजिटिव हैं। यूपी की मंत्री की कोरोना से मौत हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव हैं। कर्नाटक के मुख्य मंत्री कोरोना पॉजिटिव हैं। इसके साथी ही उन्होंने कई और नाम गिनाए थे, जिसके बाद बीजेपी भड़क गई है। पूरी पार्टी को करें क्वारंटीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रुके हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद के बयान का भी समर्थन किया है। आचार्य ने लिखा है कि एक सदस्य को कोरोना होने पर परिवार के सभी लोगों को क्वारंटीन किया जाता है। फिर पूरी पार्टी को क्यों नहीं। उनका यह इशारा दिग्विजय सिंह की तरफ है। वहीं, दिग्विजय सिंह ने इस ट्वीट का समर्थन करते हुए लिखा है कि पूरी पार्टी को ना करें, पर पूरे मंत्री परिषद को तो क्वारंटीन होना चाहिए। न जाने कितने अयोध्यावासियों को यह कोरोना संक्रमित करेंगे। नियम सब के लिए एक होना चाहिए। कमलनाथ करेंगे हनुमान चालीसा का पाठ दरअसल, दिग्विजय सिंह का बयान ऐसे दौर में आया है, जब राम मंदिर भूमि पूजन से एक दिन पहले पूर्व सीएम कमलनाथ अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले हैं। इसके साथ ही कमलनाथ ने कांग्रेस के दूसरे नेताओं से भी हनुमान चालीसा के पाठ के लिए बोला है। ऐसे में दिग्विजय सिंह के इस बयान को आने वाले उपचुनाव में बीजेपी भुनाने की कोशिश करेगी। वहीं दिग्वजय सिंह के इस बयान पर कांग्रेस की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने खुद को क्वारेंटाइन कर लिया है। वो खुद से ही अलग-थलग हो गए हैं। उनके दफ्तर की तरफ से दी जानकारी के मुताबिक उनका स्वास्थ्य बिल्कुल सही है और उनमें कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी लक्षण नहीं है। हालांकि, उन्होंने एहतियातन सेल्फ आइसोलेशन का फैसला किया है क्योंकि रविवार को गृह मंत्री अमित शाह की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। शाह ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए पिछले कुछ दिनों से संपर्क में आए लोगों को कोरोना टेस्ट कराने की अपील की थी। रविशंकर प्रसाद शनिवार की शाम अपने अमित शाह से मिले थे। गृह मंत्री शाह रविवार को ही अस्पताल में भर्ती हो गए। बिहार के पटना साहिब से लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद देश के कानून मंत्री हैं। उनके पास संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय भी है।
श्रीनगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देश भर में बीजेपी समर्थक शाह के ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर में बीजेपी नेता गुफ्तार अहमद ने ऐलान किया है कि वह अमित शाह के ठीक होने तक रोज रोजा रखेंगे। गुफ्तार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए यह ऐलान किया। उन्होंने बताया कि वह मंगलवार से रोजा शुरू करेंगे और यह तब तक जारी रहेगा जब तक अमित शाह की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती। गुफ्तार ने कहा, मंगलवार से जब तक अमित शाह की रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए, मैं रोजेदार रहूंगा।' उन्होंने कहा कि वह अल्लाहताला से दुआ करेंगे कि अमित शाह जल्दी सेहतयाब हो जाएं। उम्मीद है कि जल्दी ही ऊपरवाला उन्हें ठीक कर देगा। अस्पताल में भर्ती हैं अमित शाह बता दें कि रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आई थी। शाह ने ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। वह डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हैं। महामारी की चपेट आए शाह केंद्रीय मंत्रिमंडल के पहले मंत्री हैं। शाह के अलावा बीजेपी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं, कर्नाटक के सीएम येदियुरप्पा में भी कोरोना की पुष्टि हुई है।
बॉलिवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन कोरोना को मात देकर अस्पताल से घर आ चुके हैं। तीन सप्ताह से अधिक समय तक मुंबई के नानावटी अस्पताल में रहने के बाद रविवार को उन्हें छुट्टी मिल गई है। बिग बी के अस्पताल से डिस्चार्ज होने की जानकारी उनके बेटे अभिषेक बच्चन ने ट्वीट कर दी है। वहीं, अमिताभ बच्चन ने भी अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर ट्वीट किया है। अभिषेक बच्चन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'शुक्र है कि मेरे पिताजी का हाल ही में हुआ कोविड-19 टेस्ट निगेटिव आया और वह अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। वह अब घर पर हैं और आराम कर रहे हैं। आप सभी की प्रार्थनाओं और दुआओं के लिए धन्यवाद।' अमिताभ बच्चन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'मेरा कोविड टेस्ट निगेटिव रहा। मैं डिस्चार्ज हो चुका हूं। मैं घर में ही क्वॉरंटीन रहूंगा। भगवान का शुक्र है, मां बाबू जी का आशीर्वाद, मेरे करीबियों, दोस्तों और फैंस की प्रार्थनाएं... साथ ही नानावती अस्पताल के स्टाफ की अच्छी देखभाल से ये दिन देखने को मिला।' बता दें कि अमिताभ बच्चन को बीती 11 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके साथ अभिषेक बच्चन को भी कोरोना पॉजिटिव होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अभिषेक बच्चन को अभी डिस्चार्ज नहीं किया गया है। बताते चलें कि अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन को कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद 12 जुलाई पूरी बच्चन फैमिली और स्टाफ का टेस्ट कराया गया। जिसमें ऐश्वर्या रॉय बच्चन और उनकी बेटी में कोरोना के लक्षण मिले लेकिन उनके होम क्वॉरंटीन कर दिया गया था लेकिन 17 जुलाई को तकलीफ बढ़ने पर दोनों के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 27 जुलाई को ऐश्वर्या और आराध्या को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था। बच्चन फैमिली में सिर्फ जया का कोरोना टेस्ट निगेटिव आया था। वहीं, अमिताभ बच्चन के चार बंगलों को सील कर दिया गया था।
नई दिल्‍ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। उन्‍होंने रविवार शाम को एक ट्वीट में यह जानकारी दी। उनकी तबीयत तो ठीक है लेकिन डॉक्‍टर्स के कहने पर गुरुग्राम के मेदान्‍ता अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। एम्‍स की एक टीम भी शाह की देखरेख करेगी। एम्‍स डायरेक्‍टर डॉ रणदीप गुलेरिया की अगुवाई में डॉक्‍टर्स के एक टीम के मेदान्‍ता जाने की संभावना है। शाह ने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखने पर उन्‍होंने टेस्‍ट कराया था और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्‍होंने लोगों से अनुरोध किया जो भी पिछले कुछ दिनों में उनके संपर्क में आएं हों, वे खुद को आइसोलेट करवा कर अपनी जांच कराएं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मॉनिटर कर रहे हैं शाह देश में कोविड-19 आउटब्रेक की शुरुआत से ही शाह लगातार मॉनिटरिंग में लगे थे। राजधानी दिल्‍ली की स्थिति को उन्‍होंने पर्सनली मॉनिटर किया। उन्‍होंने दिल्‍ली में कई कोविड केयर सेंटर्स और अस्‍पतालों का दौरा किया था। वह गृह और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अधिकारियों संग बैठक कर कोविड-19 की ताजा स्थिति पर अपडेट लेते थे। लॉकडाउन के बाद देश में अनलॉक की प्रक्रिया को लेकर गाइडलाइंस तैयार करवाने में भी शाह की अहम भूमिका रही है। एक दिन पहले कार्यक्रम में लिया था हिस्‍सा शाह एक दिन पहले ही लोकमान्‍य बाल गंगाधर तिलक की 100वीं पुण्‍यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वहां उनके साथ मंच पर और भी लोग मौजूद थे। भारत में 17 लाख से ज्‍यादा कोरोना केस बीते 24 घंटों में 54,735 नए मामले सामने आए हैं। नए मामलों के साथ देश में कोरोना के मामले 17,50,723 हो गए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों से मिली। वहीं 24 घंटे की अवधि में 853 लोगों ने कोरोनावायरस के कारण दम तोड़ दिया। संक्रमण के कुल 17,50,723 मामलों में से, 5,67,730 मामले सक्रिय हैं, वहीं 11,45,629 लोग बीमारी से उबर गए और उन्हें छुट्टी दे दी गई है, जबकि वायरस से लड़ाई में 37,364 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। देश में कोविड का डेथ रेट 2.15% पिछले 24 घंटों में कुल 51,255 लोगों को छुट्टी दे दी गई। इसके साथ ही भारत में कोविड-19 का रिकवरी रेट 64.53 प्रतिशत हो गया है। वहीं देश में मृत्यु दर 2.15 प्रतिशत है। अब तक कुल 1,98,21,831 नमूनों का टेस्ट किया गया है, जिनमें से पिछले 24 घंटों में 4,63,172 टेस्ट हुए। भारत में वर्तमान में कुल 1,344 लैब हैं जो काम कर रही हैं और कोविड-19 टेस्ट करने में सक्षम हैं, इनमें से 913 सरकारी हैं जबकि 431 निजी हैं। ऐक्टिव और रिकवर्ड केसेज में 5.77 लाख का अंतर भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की तुलना में ठीक होने (रिकवरी) के बीच का अंतर महज 52 दिनों में ही 1,573 से बढ़कर 5,77,899 हो गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 10 जून को पहली बार ठीक हुए और सक्रिय रोगियों की कुल संख्या के बीच अंतर 1,573 बताया था। आंकड़ों से पता चलता है कि दो अगस्त को यह अंतर बढ़कर 5,77,899 हो गया है। मंत्रालय ने कहा, "ठीक होने और सक्रिय मामलों के बीच अंतर में लगातार वृद्धि देखी गई है।"
अयोध्या, 02 अगस्त 2020,अयोध्या में 5 अगस्त को श्री राम जन्म भूमि मंदिर का भूमि पूजन ही नहीं होगा बल्कि सौहार्द मंच भी सजेगा. राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूखी, अयोध्या के समाजसेवी पद्म श्री मोहम्मद शरीफ, बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी आमंत्रित लोगों की सूची में शामिल हैं. अयोध्या में 5 अगस्त को श्री राम जन्म भूमि मंदिर का भूमि पूजन ही नहीं होगा बल्कि सौहार्द मंच भी सजेगा. राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूखी, अयोध्या के समाजसेवी पद्म श्री मोहम्मद शरीफ, बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी आमंत्रित लोगों की सूची में शामिल हैं. बता दें कि इकबाल अंसारी के पिता हातिम अंसारी न सिर्फ़ बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार थे बल्कि राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे रामचंद्र परमहंस के करीबी दोस्त भी थे और दोनों के बीच दोस्ती भी ऐसी कि मुकदमा लड़ने भी साथ जाया करते थे. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी हो सकते हैं शामिल वहीं सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तो मस्जिद के पक्ष में शुरुआत से ही था और राम मंदिर के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा था. बावजूद इसके सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूखी को राम मंदिर भूमि पूजन के लिए अतिथियों की सूची में शामिल किया गया है. मोहम्मद शरीफ को भी भेजा गया न्योता वहीं अयोध्या के समाजसेवी और लावारिस लाशों के मसीहा कहे जाने वाले मोहम्मद शरीफ खिड़की अली बेग में रहते हैं. इनको केंद्र सरकार ने 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया था. मोहम्मद शरीफ अब तक 5000 से अधिक लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं. वही सूत्रों की मानें तो श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन में सभी धर्मों, पंथों, सनातन धर्म के शंकराचार्यों के अलावा सूफी संप्रदायों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है. इनमें ईसाई, जैन, सिख, मुस्लिम, बौद्ध धर्म के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है. इन सभी को फोन से न्योता दिया गया है. रामदेव, मां अमृतानंदमयी, प्रणव पांड्या को भी न्योता अब श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन में शामिल मुख्य आमंत्रित अतिथियों पर एक नजर डालें तो इसमें योग गुरु बाबा रामदेव, गायत्री परिवार के प्रणव पांड्या, कबीर पंथ, रामकृष्ण मिशन, केरल की मां अमृतानंदमयी, राम मंदिर आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय जिम्मेदारी निभाने वाले अशोक सिंघल के भतीजे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ अन्य पदाधिकारियों के अलावा विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं को भी बुलाया गया है. कोठारी बंधुओं के रिश्तेदारों को भी निमंत्रण इसके अलावा देशभर के प्रमुख धर्म स्थलों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है. बताया यह भी जाता है कि बाबरी विध्वंस के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी को भूमि पूजन कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है.
लखनऊ, 02 अगस्त 2020,पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अयूब को लखनऊ पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. लखनऊ पुलिस ने डॉक्टर अयूब को गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित आवास पर छापेमारी कर हिरासत में लिया. डॉक्टर अयूब पर संविधान विरोधी पोस्टर छापने का आरोप है. डॉक्टर अयूब को हिरासत में लेकर पुलिस लखनऊ के लिए रवाना हो गई है. जानकारी के मुताबिक लखनऊ के उर्दू अखबारों में पोस्टर छपे थे. इन पोस्टरों को संविधान विरोधी बताया जा रहा है. आरोप है कि पीस पार्टी के मुखिया डॉक्टर अयूब ने ये पोस्टर छपवाए थे. उर्दू अखबारों में छपे संविधान विरोधी पोस्टर के मामले में ही लखनऊ पुलिस ने डॉक्टर अयूब को हिरासत में लिया है. डॉक्टर अयूब को हिरासत में लेने के लिए लखनऊ पुलिस गोरखपुर पहुंची थी. लखनऊ पुलिस ने गोरखपुर पुलिस के सहयोग से डॉक्टर अयूब के बड़हलगंज स्थित आवास पर छापेमारी की, जहां से डॉक्टर अयूब को हिरासत में ले लिया गया. गौरतलब है कि डॉक्टर अयूब की पीस पार्टी ने अभी चंद रोज पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर काशी-मथुरा मामले में खुद को पार्टी बनाए जाने की मांग की थी. गौरतलब है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर से ही ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर अयूब की गिनती उनके धुर विरोधी नेताओं में होती है. डॉक्टर अयूब ने योगी आदित्यनाथ को आतंकवादी बता दिया था. साथ ही बाहरी बताते हुए डीएनए टेस्ट कराने तक की बात कर डाली थी. तब इसे लेकर भाजपा की ओर से पोस्टर भी जारी किया गया था, जिसमें योगी आदित्यनाथ को सिंघम अवतार में दिखाया गया था.
कानपुर, 02 अगस्त 2020,उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस पिछले कई हफ्तों से सुर्खियों में बनी हुई है. विकास दुबे के गोलीकांड से लेकर लैब टेक्नीशियन के अपहरण और हत्याकांड तक कानपुर पुलिस सवालों के घेरे में बनी हुई थी. वहीं अब कानपुर में पुलिसकर्मियों की बेशर्मी देखने को मिली है. जहां पुलिसकर्मी महिला के साथ अश्लील हरकतें करते हुए नजर आए हैं. कानपुर में एक महिला के साथ अभद्रता करते हुए दो पुलिसकर्मियों की सीसीटीवी फुटेज वायरल हुई है. थाना स्वरूप नगर शहर के हाई प्रोफाइल इलाके में बने एक ब्यूटी पार्लर में पुलिसकर्मियों ने इस घटना को अंजाम दिया है. हालांकि ये घटना सामने आने के बाद भी अभी तक पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. वायरल सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक 28 जुलाई की रात 10 बजे दो सिपाही सुनील नागर और अंकित प्रधान सादी वर्दी में पार्लर खुलवाते हैं. जहां पति दरवाजा खोलता है और दोनों सिपाही अंदर घुस जाते हैं. इसके बाद पार्लर में अंकित नाम का सिपाही पार्लर मालिक की पत्नी को लेकर ऑफिस में घुसता है और कुर्सी पर बैठाकर उसके साथ अश्लील हरकतें करता है. पति की पिटाई सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक सिपाही पार्लर मालिक की पत्नी के गाल पर हाथ रखता है. इसके बाद उसके पैरों पर भी हाथ फेरता है. सिपाही की इस अभद्रता का पति और पत्नी दोनों विरोध करते हैं, जिसके बाद पति को दूसरे हॉल में ले जाकर दोनों पुलिसकर्मी पत्नी के सामने ही पीटते हैं.. हालांकि सीसीटीवी फुटेज से ये कहीं नहीं लगता कि महिला के साथ अश्लील हरकतें और पति की पिटाई कर पुलिसकर्मी कोई कानूनी ड्यूटी को निभा रहे हों. जिसके बाद सवाल उठता है कि कानपुर पुलिसकर्मी सादी वर्दी में रात को 10 बजे किसी ब्यूटी पार्लर में क्या करने आए थे? अभी तक कार्रवाई नहीं वहीं इस घटना की रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद भी अब तक पुलिसकर्मियों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इस घटना के बारे में थाने में भी पता है. इस घटना पर जब आजतक के जरिए अधिकारियों की सफाई मांगी गई तो अधिकारी भी वीडियो देखकर शर्मसार हो गए. वहीं वेस्ट कानपुर के एसपी अनिल कुमार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि घटना की जांच कर कार्रवाई की जाएगी. वहीं पुलिस बाद में पार्लर मालिक और उसकी पत्नी का बयान लेने भी पहुंची. इस मामले पर आजतक ने पार्लर के मालिक और उसकी पत्नी से बात करने की कोशिश की लेकिन वे कैमरे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए.
लखनऊ, 02 अगस्त 2020,अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजन की तैयारी शुरू हो गई है. पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचेंगे. सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम के लिए कई हस्तियों को निमंत्रण भेजा जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि बाबा रामदेव भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं. पांच अगस्त को अयोध्या में होने वाले भूमि पूजन के लिए मेहमानों की सूची में कई और नाम सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अलावा भैयाजी जोशी और कृष्ण गोपाल के साथ कुल 11 संघ के बड़े अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. आरएसएस के 11 अधिकारियों के शामिल होने की वजह से अयोध्या के संघ कार्यालय की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है. सूत्रों का कहना है कि मेहमानों की सूची में बाबा रामदेव का नाम भी शामिल है. इसके अलावा इस लिस्ट में पूर्णिमा कोठारी का नाम भी शामिल है. पूर्णिमा कोठारी अयोध्या गोलीकांड में मारे गए कोठारी बंधु की बहन है, जो कि कोलकाता से आ रही हैं. इसके अलावा अयोध्या गोलीकांड में मारे गए सभी कारसेवकों के परिवार से एक-एक सदस्य को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है. इनका भी है नाम वहीं पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख और पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल का नाम भी लिस्ट में शामिल है. इसके अलावा वाराणसी के स्वामी जितेंद्रनंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र गिरी का नाम भी है. इसके साथ ही जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जो कि इस ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं, उन्हें भी आमंत्रित किया गया है लेकिन चतुर्मास चलने के कारण वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे.
लखनऊ, 02 अगस्त 2020,राम जन्मभूमि के कार्यक्रम के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने कुल 208 लोगों की लिस्ट तैयार की है. माना जा रहा है कि लिस्ट में अभी और काट-छांट होगी. आखिरी तौर पर 170 से 180 लोग ही 5 अगस्त को भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे. लिस्ट में आरएसएस के शीर्ष 11 नेता जिनमें मोहन भागवत, भैया जी जोशी, कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होसबोले और लखनऊ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार शामिल हैं. ये सभी लोग इस कार्यक्रम में रहेंगे. इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहेंगे. संतों की इस लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं तो कई नामों को लेकर अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है. मसलन श्री श्री रविशंकर का नाम अभी तक इस लिस्ट में नहीं है. वहीं मुरारी बापू के नाम की चर्चा भी नहीं सुनाई दे रही है. राजनीतिक नामों में कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा के नाम हैं. कार्यक्रम में अकेले अयोध्या से करीब 50 संत शामिल हो सकते हैं. इनमें महंत कमल नयन दास, राम विलास वेदांती, राजू दास, चित्रकूट से महाराज बाल भद्राचार्य, प्रयागराज से आचार्य नरेंद्र गिरी और जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के नाम हैं. लेकिन चतुर्मास चलने के कारण स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे. काशी से जितेंद्रनंद सरस्वती के अलावा तीन और वैदिक विद्वान आ रहे हैं जो उस अनुष्ठान कराने वाले विद्वान ब्राह्मणों की टीम का हिस्सा होंगे. इसमें प्रो. राम चन्द्र पाण्डेय (उपाध्यक्ष श्री काशी विद्वत्परिषद्), प्रो. रामनारायण द्विवेदी (मंत्री श्री काशी विद्वत्परिषद्), प्रो. विनय कुमार पाण्डेय (संगठन मंत्री श्री काशी विद्वत्परिषद्) के नाम हैं. ये तीनों हिन्दू विश्वविद्यालय के धर्म विज्ञान संकाय के आचार्य हैं. इसके अलावा केरल से मां अमृतानंदमई होंगी, जबकि पटना से आचार्य किशोर कुणाल. पटना के तख्त हरमंदिर साहिब से जत्थेदार इकबाल सिंह भी इस लिस्ट में हैं. हरिद्वार से बालकानंद गिरी प्रेम गिरी, हरी गिरी और रविंद्र पुरी के नाम शामिल हैं. इनके अलावा युधिष्ठिर लाल महाराज, विजयकौशल जी महाराज, रामशरण जी महाराज, जत्थेदार हरप्रीत सिंह, अमृतसर से, जत्थेदार लखा सिंह, अमृतसर से, निर्मल दास, जालंधर से, दिगंबर गिरी, जबलपुर से, प्रणव पंड्या, रामानन्दाचार्य, संतोषी माता, हरिहरानंद, अमरकण भाष्कर गिरी, अहमदनगर से और शंभुनाथ महाराज, अहमदाबाद से शामिल होंगे. संतों के अलावा राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में बाबरी मस्जिद की तरफ से पक्षकार रहे इकबाल अंसारी, मंदिर के आर्किटेक्ट सोमपुरा परिवार, कोठारी बंधुओं का परिवार जिसमें कोठारी भाइयों की बहन पूर्णिमा कोठारी कार्यक्रम में शामिल होंगे.
नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) को लेकर एक ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि लोकतंत्र को उस समय ज्यादा नुकसान पहुंचता है जब भारत सरकार गैरकानूनी तरीके से सियासी दलों के नेताओं को हिरासत में लेती है। ये बेहद सही समय है जब महबूबा मुफ्ती को छोड़ा जाए। राहुल गांधी का ये ट्वीट ऐसे समय में आया जब महबूबा मुफ्ती की हिरासत को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। राहुल बोले- महबूबा मुफ्ती की रिहाई का सही समय पिछले साल जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती हिरासत में हैं। हालांकि, लगातार उनके परिवार की ओर से उन्हे रिहा करने की मांग की जा रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने महबूबा मुफ्ती के रिहाई की मांग की है। राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'भारत के लोकतंत्र को तब और नुकसान हुआ जब भारत सरकार गैरकानूनी रूप से राजनीतिक नेताओं को हिरासत में ले रही थी। यह सही समय है जब महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जाए।' ये कोई पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस नेता केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इससे पहले उन्होंने भारत-चीन के बीच तनाव, कोरोना संकट और अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। महबूबा मुफ्ती को लेकर चिदंबरम ने भी किया ट्वीट वहीं महबूबा मुफ्ती की हिरासत बढ़ाए जाने को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी शनिवार को ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि PSA के तहत महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी का विस्तार कानून का दुरुपयोग है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। 61 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री, चौबीस घंटे सुरक्षा गार्ड से संरक्षित व्यक्ति, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है? उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि हमें सामूहिक रूप से अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए और 'महबूबा मुफ़्ती को रिहा करें' की मांग करनी चाहिए।
लखनऊ देशभर में कोरोना वायरस के मामले थम नहीं रहे हैं और कोरोना संक्रमितों की संख्या 17 लाख पार पहुंच गई है। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण की कोरोना से हुई मौत ने हर किसी को चौंका दिया है। यूपी में किसी मंत्री की कोरोना से यह पहली मौत है। वह 18 जुलाई को कोरोना से संक्रमित पाई गई थीं और रविवार को उनका निधन हो गया। कमल रानी का इलाज राजधानी लखनऊ के एसजीपीआई अस्पताल में चल रहा था। कमल रानी वरुण योगी सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री थीं। कमल रानी वरुण की तबीयत खराब होने के बाद उनका सैंपल जांच के लिए सिविल अस्पताल में भेजा गया था। रिपोर्ट आने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। लखनऊ में हुई थीं पैदा, कानपुर में शादी कमल रानी वरुण का जन्म लखनऊ में 3 मई 1958 को हुआ था। उनकी शादी कानपुर के रहने वाले किशन लाल वरुण से हुई। किशन लाल एलआईसी में प्रशासनिक अधिकारी और आरएसएस के प्रतिबद्ध स्वयंसेवक थे। कमल रानी ने 1977 में पहली बार मतदाता पर्ची काटने का काम शुरू करते हुए राजनीति में प्रवेश किया था। मलिन बस्तियों में किया था काम उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत मलिन बस्तियों से की। वह सेवा भारती के सेवा केंद्र में बच्चों को पढ़ाने लगीं और गरीब महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग देने लगीं। ऐसे हुई राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में वह कानपुर के द्वारिकापुरी वॉर्ड से बीजेपी के टिकट पर पार्षद बनीं। 1995 में वह दूसरी बार पार्षद का चुनाव जीतीं। भाजपा ने 1996 में उन्हें उस घाटमपुर (सुरक्षित) संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा। वह 1998 में उसी सीट से दूसरी बार चुनाव जीतीं। हालांकि 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 585 मतों से बीएसपी के प्यारेलाल संखवार से चुनाव हार गई थीं। सांसद रहते हुए कमलरानी ने लेबर ऐंड वेलफेयर, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, राजभाषा और पर्यटन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समितियों में भी काम किया। कमल रानी के निधन से समाज को बड़ी क्षति: योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गंभीर संवेदना व्यक्त की। योगी ने कहा, 'कई दिनों से प्रदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एसजीपीजीआई में उनका उपचार चल रहा था। वह कोरोना वायरस संक्रमित थीं। आज सुबह उनका दु:खद निधन हुआ।' सीएम ने कहा कि कमल रानी वरूण लोकप्रिय जन नेता और वरिष्ठ समाजसेवी थीं। 11वीं और 12वीं लोकसभा की वह सदस्य थीं। 2017 में कानपुर नगर के घाटमपुर से विधायक चुनी गयीं थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कमल रानी वरूण ने मंत्रिमंडल में बड़ी कुशलतापूर्वक काम किया। उनका निधन समाज, सरकार और पार्टी के लिए बड़ी क्षति है। यूपी में कोरोना केस 36,000 के हुए पार उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस (Coronavirus Latest News in Uttar Pradesh) के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश में शनिवार शाम तक 24 घंटे में कोरोना के 3 हजार 840 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, इन 24 घंटों में 47 लोगों की मौत हुई। अब प्रदेश में ऐक्टिव मामलों की संख्या 36 हजार 37 पहुंच गई है। वहीं, अबतक कुल 1 हजार 677 लोगों की इस महामारी की वजह से मौत हुई है।
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2020,नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत भारत में बच्चों को चीनी भाषा सिखाई जाए या नहीं, इसे लेकर शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का विजन स्पष्ट नहीं है. इसकी बानगी तब देखने को मिली जब, शिक्षा मंत्रालय ने जो कि पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता था, ने मीडिया के बीच नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट जारी किया था तो उसमें बच्चों को पढ़ाई जाने वाली भाषा में चीनी भाषा का जिक्र था, जबकि अब शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जो अंतिम रिपोर्ट अपलोड की गई है, उसमें चीनी भाषा की चर्चा नहीं है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक नई शिक्षा नीति की अंतिम रिपोर्ट गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के वेबसाइट पर अपलोड की गई. इससे पहले मीडियाकर्मियों को जब ये रिपोर्ट दी गई थी तो उसमें सेकेंड्री लेवल पर बच्चों को चीनी भाषा सिखाने की बात का जिक्र था. इस रिपोर्ट में लिखा गया था. ''भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में उच्चतर गुणवत्ता वाले कोर्स के अलावा विदेशी भाषाएं, जैसे कोरियाई, चीनी जापानी, थाई, फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, पुर्तगाली और रूसी भी माध्यमिक स्तर पर व्यापक रूप से अध्ययन हेतु उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि विद्यार्थी विश्व-संस्कृतियों के बारे में जानें और अपनी रुचियों और आकांक्षाओं के अनुसार अपने वैश्विक ज्ञान को और दुनिया भर में घूमने-फिरने को सहजता से बढ़ा सके. '' लेकिन शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जब इस रिपोर्ट को अपलोड किया गया तो ऊपर वर्णित पंक्तियां ज्यों की त्यों थी सिर्फ भाषाओं की सूची में से चीनी भाषा को हटा लिया गया था. इस बाबत शिक्षा मंत्रालय की पॉलिसी कमेटी से आधिकारिक जवाब भी मांगा गया है, लेकिन ये जवाब अबतक नहीं आया है.
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2020, पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह का 64 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया. वो पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे थे. उनका सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. कुछ दिनों पहले ही उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. शनिवार दोपहर उनका निधन हो गया. अमर सिंह, समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव रहे हैं साथ ही राज्यसभा सांसद भी रहे हैं. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के वो काफी करीब रहे. अमर सिंह एक समय समाजवादी पार्टी की नंबर दो पोजिशन के नेता भी रहे थे. हालांकि साल 2010 में पार्टी के सभी पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था. बाद में उन्हें पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमर सिंह के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया कि वह काफी ऊर्जावान नेता थे और उन्होंने पिछले कुछ दशकों में देश की राजनीति के अहम उतार-चढ़ाव काफी करीब से देखे थे.वो अपने जीवन में दोस्ती के लिए जाने जाते रहे हैं. उनके निधन की खबर सुनने से दुखी हूं. उनके परिवारजनों और दोस्तों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पूर्व राज्यसभा सांसद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करता हूं. दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों और सहयोगियों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं. ओम शांति. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'अपनी विशिष्ट कार्यशैली से भारतीय राजनीति पर अमिट प्रभाव डालने वाले मृदुभाषी राजनेता, सांसद श्री अमर सिंह जी का निधन दुःखद है. उनके परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें. ऊं शांति.' समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, 'श्री अमर सिंह जी के स्नेह-सान्निध्य से वंचित होने पर भावपूर्ण संवेदना एवं श्रद्धांजलि.' वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, 'ईश्वर श्री अमर सिंह जी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में शरण दें. श्री अमर सिंह जी के परिवार के प्रति मेरी भावपूर्ण संवेदनाएं. मैं इस दुखद क्षण में उनकी शोक संतप्त पत्नी और बेटियों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं.' अमर सिंह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे. आज ही उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी थी. साथ ही लोगों को ईद अल अजहा की बधाई भी दी थी. अमर सिंह का मार्च महीने में एक वीडियो खूब चर्चा में रहा था. जिसमें उन्होंने अपनी मौत की अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा था कि टाइगर अभी जिंदा है और बीमारी से जूझ रहा है. उन्होंने अपने पहले के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि तबीयत पहले भी बिगड़ी थी लेकिन हर बार वो मौत के मुंह से लड़कर वापस आ गए. वीडियो में अमर सिंह कहते हैं, 'सिंगापुर से मैं अमर सिंह बोल रहा हूं. रुग्ण (बीमार) हूं, त्रस्त हूं व्याधि (दिक्कतों) से लेकिन संत्रस्त (डरा) नहीं. हिम्मत बाकी है, जोश बाकी है, होश भी बाकी है. हमारे शुभचिंतक और मित्रों ने ये अफवाह बहुत तेजी से फैलाई है कि यमराज ने मुझे अपने पास बुला लिया है. ऐसा बिल्कुल नहीं है. मेरा इलाज चल रहा है और मां भगवती की कृपा हुई तो अपनी शल्य चिकित्सा के उपरांत शीघ्र-अतिशीघ्र दोगुनी ताकत से वापस आऊंगा.' उन्होंने आगे कहा, 'आप लोगों के बीच सदैव की भांति...जैसा भी हूं, जो भी हूं आपका हूं. बुरा हूं तो अच्छा हूं तो...अपनी चिरपरिचित शैली, प्रथा और परंपरा के अनुकूल जैसे अबतक जीवन जिया है, वैसे ही आगे भी जिऊंगा.' पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने कहा, 'बाकी हमारे मित्र जो हमारी मृत्यु की कामना कर रहे हैं, वह यह कामना छोड़ दें. हरदम मृत्यु हमारे द्वार को खटखटाती है. एकबार हवाई जहाज से गिर गया था तो भी यमराज ने स्वीकार नहीं किया, झांसी में. दस साल पहले भी गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ फिर भी लौटकर आ गया. 12-13 दिन तक मिडिल ईस्ट में वेंटिलेटर में रहकर मौत से लड़कर आ गया. उन तमाम अवसर के मुकाबले अबकी बार तो बिल्कुल स्वस्थ हूं, बिल्कुल सचेतन हूं.'
अयोध्या, 01 अगस्त 2020,अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन कार्यक्रम है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहेंगे. वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अन्य बुजुर्ग नेताओं को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भूमि पूजन का कार्यक्रम दिखाया जाएगा. प्रशासन इन नेताओं को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भूमि पूजन दिखाने की व्यवस्था में जुटा है. सूत्रों ने बताया कि ऐसे 10 बड़े नामों की सूची तैयार है जो अयोध्या तो नहीं आ रहे, लेकिन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भूमि पूजन का अयोध्या का कार्यक्रम देखेंगे और इस से जुड़ेंगे. सूत्रों ने बताया कि भूमि पूजन के दिन मंच पर पीएम मोदी को मिलाकर कुल पांच लोग उपस्थित रहेंगे. मंच पर पीएम मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, नृत्य गोपाल दास उपस्थित रहेंगे. इनके अलावा दो और संत रहेंगे. इनके अलावा कोई नेता या संत मंच पर नहीं रहेगा. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी के अलावा, अवधेशानंद सरस्वती, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामभद्राचार्य, इकबाल अंसारी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह और विनय कटियार को भी भूमि पूजन में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है. भूमि पूजन कार्यक्रम में कोई केंद्रीय मंत्री शामिल नहीं होगा. उम्र, स्वास्थ्य और कोरोना संकट को देखते हुए लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के अयोध्या आने की संभावना पहले से ही नहीं थी.
लखनऊ राम मंदिर आंदोलन के दो प्रमुख स्तंभ रहे बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lalkrishna Advani) और मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) के अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन (Ram Mandir Bhoomi Pujan) कार्यक्रम में शामिल हो पाने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक 5 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम में कोई इंडस्ट्रियलिस्ट या हाई प्रोफाइल एनआरआई गेस्ट भी नहीं सम्मिलित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के लिए गेस्ट सीमित संख्या में बुलाए गए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व एचआरडी मंत्री मुरली मनोहर जोशी का अयोध्या आने का प्रोग्राम नहीं है। 5 अगस्त के कार्यक्रम में जिन्हें शामिल होना है, उनमें पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत, वीएचपी नेता तथा मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, राम जन्मभूमि न्यास के हेड महंत नृत्यगोपाल दास शामिल हैं। भूमि पूजन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन भी होगा। पीएम मोदी वायु सेना के स्पेशल विमान से लखनऊ में लैंड करेंगे। इसके बाद चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से MI-7 चॉपर के जरिये अयोध्या के लिए रवाना होंगे। भूमि पूजनस्थल पर जाने से पहले पीएम के हनुमानगढ़ी मंदिर जाने की भी संभावना है। इसके बाद वह परिजात के पौधे का रोपण कर भूमिपूजन करेंगे। सूत्रों के अनुसार पीएम इसके बाद भगवान राम की जिंदगी पर पोस्टल स्टैंप भी जारी करेंगे। सीएम योगी लखनऊ से ही पीएम के साथ रहेंगे। वह लकड़ी से बनी श्रीराम की मूर्ति भी पीएम को सौंपेंगे। इस कार्यक्रम से पहले पूरे अयोध्या में सुरक्षा के चाक-चौबंद इस्तेमाल कर दिए गए हैं। सजावट का काम भी जारी है। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने खुद व्यवस्था का जायजा लिया।
अयोध्या/लखनऊ राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। अयोध्या सज रही है और तैयारियों का जोर राजधानी लखनऊ से लेकर अयोध्या (Ayodhya) के गर्भगृह तक दिख रहा है। उत्साह और उम्मीदों के बीच एक और चीज है जो आने वाले दशकों में यूपी की सियासत की एक नई तस्वीर लिखने जा रही है। ये चीज है योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की वो भगवा हिंदुत्व आइकन की छवि जिसने प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। एक जमाने में कल्याण सिंह जैसे फायरब्रांड हिंदुत्व वाले चेहरों को केंद्र में रखने वाली यूपी बीजेपी को अब योगी आदित्यनाथ के रूप में हिंदुत्व ब्रांड का बड़ा चेहरा मिल चुका है। सत्ता के शिखर पर बैठे योगी को सख्त प्रशासक के साथ एक ऐसे मास लीडर की पहचान मिलने लगी है, जिसके नाम पर हिंदू वोटों का एक मुश्त ध्रुवीकरण होना संभव कहा जाने लगा है। इस छवि को अब एक और बल का कारक मिला है और वो कारक है अयोध्या का राम मंदिर। भव्य उत्सव और सीएम योगी की सक्रियता अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह को लेकर योगी आदित्यनाथ जिस अंदाज में तैयारियां कर रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। राम नगरी को सजाया जा रहा है,दीपोत्सव की योजनाएं बन गई हैं और देश भर के प्रमुख मेहमानों को आमंत्रण भी भेजा जा रहा है। सीएम खुद इस सारे उत्सव की जिम्मेदारी ले चुके हैं और राम मंदिर का उत्सव एक भव्यतम रूप में दिखे इसके निर्देश भी दिए गए हैं। फिर सियासत के केंद्र में राम और राम मंदिर इन सब के बीच राम मंदिर यूपी की खबरों का केंद्र है। ये वक्त कल्याण सिंह का वही कालखंड याद कराता है, जब विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद सिंह ने सारी जिम्मेदारी खुद पर ले ली थी। चर्चाओं में उस वक्त राम मंदिर की तमाम खबरें थीं और कल्याण सिंह का सीएम कार्यालय सक्रिय भी। इस बार भी ऐसा ही है, सकारात्मक वजहों से मंदिर चर्चा में है तो योगी सारी गतिविधि की मॉनिटरिंग खुद कर रहे हैं। मंदिर का निर्माण कार्य 2020 में शुरू होना है, जिसे 2023 तक पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि 2022 के चुनाव में मंदिर वोट मांगने की वजह बनेगा ये तय है। मंदिर और हिंदुत्व की सियासत में भगवा रंग का वस्त्र पहने योगी की शक्तियां बढ़ेंगी। गोरक्षपीठाधीश्वर की छवि बनी कारगर मंदिर की राजनीति का असर कितना कारगर है, वो उस कालखंड से ही सिद्ध हो जाता है, जब कल्याण सिंह 1992 में सरकार से इस्तीफा देने के बाद 1997 में एक बार फिर उतने ही दम से सरकार में आए थे। कल्याण के दोबारा सियासत में आने के वक्त ढांचा विध्वंस की उस घटना के चर्चे और उसकी जिम्मेदारी लेने का अंदाज याद किया जाता रहा। ऐसा ही योगी के साथ भी है। यूपी के पहले कार्यकाल में सीएम बनने वाले योगी के पीछे गोरक्षपीठ महंत वाली छवि खड़ी रही तो आने वाले चुनाव में उनके पीछे राम मंदिर का भूमि पूजन समारोह भी खड़ा होगा। ऐसे में ये कयास लगते हैं कि महंत योगी आदित्यनाथ का वो ब्रांड फेस यूपी में एक बार फिर वोटों के ध्रुवीकरण का जरिया बनेगा।
लखनऊ लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे समाजवादी पार्टी (एसपी) के पूर्व नेता अमर सिंह का निधन हो गया है। बीमारी के चलते सिंगापुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। एक समय पर उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अमर सिंह समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के करीबियों में शामिल थे। इसी साल फरवरी में उन्होंने अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी थी। अमर सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद थे। 5 जुलाई 2016 को उन्हें उच्च सदस्या के लिए चुना गया था। समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद उनकी सक्रियता कम हो गई थी। हालांकि, बीमार होने से पहले तक उनकी करीबियां भारतीय जनता पार्टी से बढ़ रही थीं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1996 में राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के साथ ही हुई थी। अमिताभ बच्चन के करीबी दोस्तों में थे अमर सिंह इससे पहले वह 2002 और 2008 में भी राज्यसभा के लिए चुने जाते रहे हैं। एसपी नेता मुलायम सिंह यादव के अलावा मेगास्टार अमिताभ बच्चन के परिवार से भी अमर सिंह के बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं। पिछले कुछ सालों में इन रिश्तों में खटास जरूर आई थी। इस साल फरवरी महीने में अमर सिंह ने एक वीडियो जारी करके अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी थी। समाजवादी पार्टी से दूर होते गए अमर एक समय मुलायम सिंह यादव के खास कहे जाने वाले अमर सिंह साल 2017 के पहले ही किनारे लगने लगे थे। समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के झगड़े में अखिलेश ने अमर सिंह को विलन माना। कई बार तो अखिलेश ने खुलेआम अमर सिंह की आलोचना की। बाद में अमर सिंह भी बीजेपी के कार्यक्रमों में नजर आने लगे। उन्होंने आरएसएस से जुड़े संगठन को अपने पूरी संपत्ति दान करने का भी ऐलान किया था।
विशाखापट्टनम आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड में क्रेन हादसा में 11 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। विशाखापट्टनम जिला कलेक्टर विनय चंद ने मामले की पुष्टि की। हादसे का विडियो भी सामने आया है। विडियो में दिख रहा है कि शिपयार्ड में लगा क्रेन अचानक नीचे गिर जाता है। क्रेन के नीचे दबने से लोगों की मौत हो गई। जांच के आदेश दिए जिला कलेक्टर विनय चंद ने बताया, 'नया क्रेन कमीशन किया गया था। इसे फुल स्केल ऑपरेशन में लाने के लिए ट्रायल रन किया जा रहा था। हमने हिंदुस्तान शिपयार्ड के तहत जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रशासन की तरफ से भी एक हाई लेवल कमिटी गठित की जाएगी।' साइट पर मौजूद थे 18 मजदूर वहीं मंत्री अवंति श्रीनिवास ने घटना की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को कारगर कदम उठाने के आदेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारी क्रेन के पास कुल 18 मजदूर काम कर रहे थे। क्रेन से लोडिंग का हो रहा था ट्रायल इस बीच अचानक क्रेन टूटकर नीचे गिर गया। क्रेन की चपेट में आने से 11 मजदूरों की मौत हो गई। एक घायल मजदूर को अस्पताल में भर्ती किया गया है। हादसे के वक्त क्रेन से लोडिंग का ट्रायल किया जा रहा था। क्रेन के चपेट में आए अन्य मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने का काम जारी है।
विशाखापट्टनम आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड में क्रेन हादसा में 11 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। विशाखापट्टनम जिला कलेक्टर विनय चंद ने मामले की पुष्टि की। हादसे का विडियो भी सामने आया है। विडियो में दिख रहा है कि शिपयार्ड में लगा क्रेन अचानक नीचे गिर जाता है। क्रेन के नीचे दबने से लोगों की मौत हो गई। जांच के आदेश दिए जिला कलेक्टर विनय चंद ने बताया, 'नया क्रेन कमीशन किया गया था। इसे फुल स्केल ऑपरेशन में लाने के लिए ट्रायल रन किया जा रहा था। हमने हिंदुस्तान शिपयार्ड के तहत जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रशासन की तरफ से भी एक हाई लेवल कमिटी गठित की जाएगी।' साइट पर मौजूद थे 18 मजदूर वहीं मंत्री अवंति श्रीनिवास ने घटना की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को कारगर कदम उठाने के आदेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारी क्रेन के पास कुल 18 मजदूर काम कर रहे थे। क्रेन से लोडिंग का हो रहा था ट्रायल इस बीच अचानक क्रेन टूटकर नीचे गिर गया। क्रेन की चपेट में आने से 11 मजदूरों की मौत हो गई। एक घायल मजदूर को अस्पताल में भर्ती किया गया है। हादसे के वक्त क्रेन से लोडिंग का ट्रायल किया जा रहा था। क्रेन के चपेट में आए अन्य मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने का काम जारी है।
सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद लगातार अपने बयानों के कारण चर्चा में रहने वाली कंगना रनौत की टीम ने शुक्रवार देर रात पुलिस में शिकायत दर्ज की है कि उनके मनाली स्थिति घर के पास फायरिंग की आवाज सुनी गई है। इसके बाद कुल्लू पुलिस कंगना के घर पहुंच गई है। हालांकि प्राथमिक जांच में पुलिस को कोई भी सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि कंगना का कहना है कि यह उन्हें डराने की कोशिश के तहत किया गया है। इसके बाद पुलिस ने एक टीम कंगना के घर पर सुरक्षा के लिए लगा दी है। क्या बोलीं कंगना रनौत? सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद लगातार अपने बयानों के कारण चर्चा में रहने वाली कंगना रनौत की टीम ने शुक्रवार देर रात पुलिस में शिकायत दर्ज की है कि उनके मनाली स्थिति घर के पास फायरिंग की आवाज सुनी गई है। इसके बाद कुल्लू पुलिस कंगना के घर पहुंच गई है। हालांकि प्राथमिक जांच में पुलिस को कोई भी सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि कंगना का कहना है कि यह उन्हें डराने की कोशिश के तहत किया गया है। इसके बाद पुलिस ने एक टीम कंगना के घर पर सुरक्षा के लिए लगा दी है। क्या बोलीं कंगना रनौत?कंगना ने बताया, 'मैं अपने बेडरूम में थी और रात लगभग 11.30 बजे मुझे पटाखों जैसी अवाज सुनाई दी। पहले मुझे लगा कि किसी ने पटाखा चलाया है लेकिन जब दूसरी बार अवाज आई तो मैं सचेत हो गई क्योंकि यह गोली चलने की आवाज थी। इस समय मनाली में टूरिस्ट भी नहीं आते हैं तो पटाखा भी नहीं चलाएगा। इसलिए मैंने तुरंत सिक्यॉरिटी को बुलाया। मैंने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि हो सकता है कि कुछ बच्चे हों। हो सकता है मेरी सिक्यॉरिटी के आदमी ने कभी गोली चलने की आवाज ही नहीं सुनी हो। हालांकि बाहर कोई नहीं था। हम घर पर 5 लोग हैं। इसके बाद हमने पुलिस को बुला लिया।' पुलिस ने क्या कहा? कंगना ने कहा, 'पुलिस ने कहा कि शायद कोई चमगादड़ को मारने की कोशिश कर रहा हो क्योंकि चमगादड़ सेब की खेती को नुकसान पहुंचाते हैं। शनिवार सुबह हमने सेब के बागीचे के मालिक को बुलाया लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गोली नहीं चलाई। इसलिए हमें लगता है कि यह हमें डराने के लिए किया गया था।' कंगना का यह भी कहना है कि उनके पॉलिटिकल कॉमेंट के कारण यह सब हो रहा है। कंगना ने यह भी दावा किया कि यह किसी विदेशी हथियार से चलाई गई गोली थी। कंगना का यह भी कहना है कि इसके बाद भी वह डरेंगी नहीं। पुलिस ने क्या किया? पुलिस ने अपनी एक टीम वहां लगा दी है और वाहनों की चेकिंग कर रहीहै। कुल्लू के एसपी गौरव सिंह ने बताया कि कंगना के घर एक टीम तुरंत पहुंची थी। पुलिस को लगता है कि किसी फार्म हाउस के मालिक ने ऐसी अवाजा क्रिएट की थी। फरेंसिक एक्सपर्ट की टीम भी पहुंची थी लेकिन उन्हें कोई कारतूस का खाली खोखा या बारूद के निशान नहीं मिले हैं। कंगना के घर के आसपास वालों से भी पूछताछ की गई है। पुलिस ने कंगना के घर के आसपास गश्त बढ़ा दी है और इस मामले की जांच की रिपोर्ट सीएम हाउस भेजी जाएगी।
नई दिल्‍ली एक टीवी चैनल में काम करने वाली ऐंकर प्रिया जुनेजा ने आत्‍महत्‍या कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी यह साफ नहीं है कि उन्‍होंने यह कदम क्‍यों उठाया। हाल में बदली थी नौकरी लिखें प्रिया ने हाल में अपनी नौकरी बदली थी। वह पहले एक नैशनल न्यूज चैनल में काम करती थीं लेकिन हाल में उन्होंने नौकरी बदली थी। वह अपने घर पर कहती थीं कि उसे यहां पर ठीक नहीं लग रहा है और वह किसी बड़े चैनल में काम करना चाहती है। 3 बहनों में सबसे बड़ी थी प्रिया दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट प्रिया की एक दोस्त ने बताया कि वह तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। उनके करीबियों के मुताबिक, वह ज्यादातर हंसते-मुस्कुराते हुए ही नजर आती थी। प्रिया ने हाल में सिंगर कैलाश खेर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान लॉकडाउन में परेशानियों के बारे में शेयर किया था। प्रिया को जानने वालों ने सोशल मीडिया अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। एक साथी ने लिखा है कि 'ऐसा कोई कदम उठाने से पहले आसपास के लोगों से बात करनी चाहिए थी।' उनके एक साथी ने उनकी खुशमिजाजी का जिक्र करते हुए इस तरह का कदम उठाए जाने पर अविश्वास जाहिर किया।
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2020,कांग्रेस पार्टी में राज्यसभा सांसदों की गुरुवार को बैठक हुई. लेकिन इस बैठक में कुछ वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिली. सूत्रों ने बताया कि पार्टी के कुछ सीनियर नेता इस बात से नाराज थे कि तमाम मोर्चों, मसलन कोरोना और चीन के साथ सीमा विवाद जैसे मसलों पर मोदी सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाई. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि सांसदों के एक तबके ने एक बार फिर राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग उठाई. असल में, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल मीटिंग में राज्यसभा के 34 सांसदों ने हिस्सा लिया. इस बैठक को वर्तमान राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श और उस पर आगे की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाया गया था. लेकिन जैसे ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी के भीतर समन्वय की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि पार्टी को कुछ आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, यह बैठक कड़वाहट में बदल गई. यह सवाल एक नवनिर्वाचित सांसद से उठाया और 2014 के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर यूपीए 2 सरकार का हिस्सा रहे वरिष्ठ नेताओं से सवाल किया. इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी उपस्थित थे. एक और वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई मोर्चों पर मोदी सरकार नाकाम है, लेकिन पार्टी लोकप्रियता हासिल करने में सक्षम नहीं है. पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसका काउंटर किया. उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के संकट और ईंधन की कीमतों में वृद्धि को लेकर पार्टी के किए गए कामों को गिनाया. केसी वेणुगोपाल ने चीन के मुद्दे पर पार्टी की तरफ से शुरू किए गए ऑनलाइन कैंपेन की सफलता के बारे में भी बताया. लेकिन बिहार के एक सांसद ने इन अभियानों की सफलता पर सवाल उठाया और कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में पार्टी का संगठन कमजोर था. जमीन पर उतरने की जरूरत पंजाब के एक सांसद ने कोरोना संकट के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अध्यादेश पारित किए जाने के मसले को उठाया. सांसद का आरोप था कि कई अध्यादेश किसान विरोधी हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए जमीन पर लड़ाई लड़े जाने की जरूरत है. ऐसे मामलों में डिजिटल कैंपेन ज्यादा अपील नहीं करते हैं. पंजाब के एक अन्य सांसद ने पैरा ट्रूपिंग संस्कृति का मसला उठाया. उनका कहना था कि शीर्ष नेताओं को थोपने का जमीनी कार्यकर्ताओं में गलत संकेत जाता है. राहुल को फिर कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग वहीं असम के सांसद रिपुन बोरा ने मांग की कि राहुल गांधी को एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. इस मांग का मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ सांसद के साथ-साथ कई अन्य सांसदों ने भी समर्थन किया. हालांकि सोनिया गांधी ने इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की. इस महीने की शुरुआत में पार्टी के लोकसभा सांसदों की हुई बैठक में इसी तरह की मांग उठाई गई थी.
नई दिल्ली, 30 जुलाई 2020,नई श‍िक्षानीति पर मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि अब बच्चे का रिपोर्ट कार्ड नहीं होगा. उसकी जगह उन्हें प्रोग्रेस कार्ड मिलेगा. अब ये छात्रों पर निर्भर करता है कि वो क्या विषय लेना चाहते हैं, अब वो इंजीनियरिंग के साथ संगीत भी ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि नई श‍िक्षानीति से उच्च शिक्षा में बहुत बदलाव होंगे. नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा. हमने उच्च शिक्षा के लिए एक आयोग बनाया है. इसके लिए चार काउंसिल भी बनाई गई हैं. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने मानव संसाधन मंत्रालय का केवल नाम नहीं, नीति भी बदली है. एचआरडी मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति से हम संस्कारयुक्त शिक्षा नीति बनाएंगे. इससे हम विश्व स्तर की शिक्षा नीति की तरफ़ आगे बढ़ेंगे. बता दें कि भारत में 34 साल बाद पहली बार नई शिक्षा नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. इसमें सरकार ने हायर एजुकेशन और स्कूली शिक्षा को लेकर कई अहम बदलाव किए हैं. सरकार अब न्यू नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार करेगी. इसमें ईसीई, स्कूल, टीचर्स और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा. बोर्ड एग्जाम को भाग में बांटा जाएगा. अब दो बोर्ड परीक्षाओं के तनाव को कम करने के लिए बोर्ड तीन बार भी परीक्षा करा सकता है. इसके अलावा अब बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में लाइफ स्किल्स को जोड़ा जाएगा. जैसे कि आपने अगर स्कूल में कुछ रोजगारपरक सीखा है तो इसे आपके रिपोर्ट कार्ड में जगह मिलेगी, जिससे बच्चों में लाइफ स्किल्स का भी विकास हो सकेगा. अभी तक रिपोर्ट कार्ड में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाए. इसके लिए एनरोलमेंट को 100 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है. इसके अलावा स्कूली शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास लाइफ स्किल भी होगी, जिससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहे, तो वो आसानी से कर सकता है. प्राथमिक स्तर पर शिक्षा में बहुभाषिकता को प्राथमिकता के साथ शामिल करने और ऐसे भाषा के शिक्षकों की उपलब्धता को महत्व दिया दिया गया है जो बच्चों के घर की भाषा समझते हों. यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों में दिखाई देती है. इसलिए पहली से पांचवीं तक जहां तक संभव हो मातृभाषा का इस्तेमाल शिक्षण के माध्यम के रूप में किया जाए. जहां घर और स्कूल की भाषा अलग-अलग है, वहां दो भाषाओं के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है.
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2020, बुधवार को केंद्र सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनी मंजूरी दे दी. इसी के साथ शिक्षा नीति को लेकर अलग-अलग किस्म की बहस छिड़ी हुई है. खास तौर पर जाने-माने शिक्षाविदों के बीच ये चर्चा आम है कि आने वाले दिनों में शिक्षा नीति लागू होने के बाद कौन से बदलाव देखने को मिलेंगे. जाहिर सी बात है कि सरकार के इस फैसले को लेकर अब शिक्षा जगत के जानकार भी बंटे हुए हैं. इसी को लेकर आज तक ने दिल्ली में शिक्षा जगत के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हुए विशेषज्ञों की राय जाननी चाही. राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ स्कूली शिक्षा को नहीं बल्कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा यानी हायर एजुकेशन पर भी अपना असर डालेगी. आज तक ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के साथ ही साथ दिल्ली के स्प्रिंगडेल्स स्कूल की प्रिंसिपल अमिता वट्टल और दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा से बातचीत की. प्रोफेसर जगदीश कुमार ने साफ तौर पर कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति ऐतिहासिक है वह इस लिहाज से कि जितना राय मशविरा इसे लाने से पहले किया गया है वह पहले कभी नहीं हुआ. लाखों की तादाद में ग्राम पंचायतों, हजारों की तादाद में ब्लॉक स्तर और सैकड़ों की तादाद में जिला स्तर पर इस पूरे विषय पर चर्चा की गई और तब कहीं जाकर इसे अंतिम रूप दिया गया. अलग-अलग राज्य सरकारों से भी इस पर राय मांगी गई थी और उन्होंने भी अपने राज्य के अनुसार इस नीति में सुझाव दिए. कुमार के मुताबिक इससे ज्यादा समावेशी राष्ट्रीय शिक्षा नीति हो ही नहीं सकती थी. इस सवाल पर कि क्या यह शिक्षा नीति निजीकरण को बढ़ावा देगी और बेहतर यूनिवर्सिटी को और बेहतर और खराब यूनिवर्सिटी को खत्म करने का प्रारूप लाएगी, इस सवाल पर जेएनयू के वीसी ने कहा कि यह नीति प्रतियोगिता को बढ़ावा देगी ताकि छोटी यूनिवर्सिटी या राज्य स्तर के शिक्षण संस्थान बड़े संस्थानों के साथ मुकाबला कर पाएं. उनके मुताबिक निजीकरण की बात कहीं से भी सही नहीं है. हां, विदेशी यूनिवर्सिटी हिंदुस्तान में जरूर आएगी और उससे भारत का शिक्षा स्तर ग्लोबल होगा. दिल्ली के जाने-माने स्कूल स्प्रिंगडेल की प्रिंसिपल अमिता वट्टल भी इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक अच्छी शुरुआत मानती हैं. उनके मुताबिक अब बिल्कुल निचले स्तर पर छात्रों को बुनियादी शिक्षा दी जा सकेगी ताकि वह बेहतर भविष्य के लिए तैयार हो सकें. अमिता वट्टल ने यह भी साफ किया कि अब तक लोग वोकेशनल एजुकेशन पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे जिसकी वजह से हम सिर्फ ग्रेजुएट पैदा कर रहे थे लेकिन अब स्कूली शिक्षा में भी वोकेशनल एजुकेशन को शामिल करने से बेहतर छात्र निकल कर सामने आएंगे. इस पूरी शिक्षा नीति में रीजनल लैंग्वेज को तवज्जो देने पर भी ज्यादा जोर दिया गया है. उस पर हमने जब सवाल पूछा तो अमिता वट्टल ने जवाब दिया कि ऐसा करने से खास तौर पर राज्य स्तर के स्कूल बेहतर कर पाएंगे क्योंकि उन्हें शिक्षा अपनी मातृभाषा में मिलेगी. लेकिन साथ ही बड़े शहरों जैसे मेट्रो शहर यानी दिल्ली और अन्य शहरों के लिए सीबीएसई को नई गाइडलाइन जारी करनी पड़ेगी क्योंकि यहां हर राज्य के छात्र आते हैं और ऐसे में उनके लिए रीजनल लैंग्वेज का कोई मायने नहीं रहता. दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ यानी डूटा के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा इस पूरी नई शिक्षा नीति से कहीं भी सहमत नहीं दिखाई पड़ते हैं. उनका साफ तौर पर कहना है कि नई क्रेडिट पॉलिसी जो कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज को अलग-अलग ग्रेड में पाटेगी वह प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देगी. उनके मुताबिक बेहतर यूनिवर्सिटी को आत्मनिर्भर होने के लिए कहा जाएगा यानी ऐसी तकरीबन 100 यूनिवर्सिटी में छात्रों को खुद अपना खर्च वहन करना पड़ेगा. जो बिल्कुल निचले स्तर की यूनिवर्सिटी है उन्हें बंद कर दिया जाएगा. लेकिन ऐसा करना सही नहीं है क्योंकि आप राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी की प्रतियोगिता किसी छोटे शहर के विश्वविद्यालयों से नहीं कर सकते हैं. आदित्य नारायण मिश्रा का यह भी कहना है कि यह पॉलिसी ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा देगी और आज के डिजिटल गैप में ऐसा करना सही नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो छात्र ऑनलाइन के जरिए निकल कर के आते हैं वह क्लासरूम शिक्षा का कहीं से भी मुकाबला नहीं कर सकते और ऐसे में उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जाता है. सरकार ने यह भी कहा है कि नई शिक्षा पॉलिसी के तहत वह जीडीपी का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च करेगी लेकिन इस पर मिश्रा का कहना है कि यूनिवर्सिटी को ग्रांट मिलना चाहिए जो कि सरकारी हो जीडीपी में प्राइवेट हिस्सेदारी भी आती है और ऐसा करना निजीकरण को और बल देगा.
वाराणसी, 31 जुलाई 2020,मोदी सरकार ने आज से ठीक एक साल पहले तीन तलाक जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए कानून बनाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र की मुस्लिम महिलाएं अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री के इस कदम को कैसे भूल सकती हैं? इसीलिए वाराणसी की मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी को अपना भाई जान मानते हुए उनकी तस्वीर पर राखी बांधकर उनका शुक्रिया अदा किया. वाराणसी के मुस्लिम बाहुल्य दालमंडी इलाके में मुस्लिम महिलाओं ने अपने सांसद और देश के पीएम मोदी को बहुत ही खास अंदाज में याद किया. क्योंकि आज ही के दिन मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के लिए कानून बनाकर तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीति से उन्हें आजादी दिलाई थी. रक्षाबंधन के माहौल में मुस्लिम महिलाओं ने भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना जैसे गीतों को गुनगुनाते हुए पीएम मोदी की तस्वीर पर पहले राखी बांधी और फिर सांकेतिक रूप से मुंह मीठा कराकर उनका शुक्रिया अदा भी किया. अलीमुनीसा बताती हैं कि तीन तलाक पर कानून लाकर पीएम मोदी ने बहुत अच्छा काम किया है. इसीलिए उनको राखी बांधकर बनारस की मुस्लिम बहनें उनको शुक्रिया अदा कर रही हैं. पीएम मोदी उनकी हिफाजत यूं ही करते रहें. वहीं एक अन्य मुस्लिम महिला सीमा बानो ने कहा कि वो पीएम मोदी को अपना भाई मानती हैं. रक्षाबंधन पर राखी बांधकर मिठाई भी खिला रहीं हैं. उन्होंने कहा कि तीन तलाक को लेकर कानून पर हम मुस्लिम बहनें पीएम मोदी का शुक्रगुजार हैं. इस मौके पर बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा वाराणसी के महामंत्री शेख मो. आसिफ ने बताया कि 2014 में मोदी सरकार ने आते ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए तीन तलाक को हटाने का मु्द्दा उठाया. राज्यसभा में बहुमत न होने के चलते यह बिल पास नहीं हो सका. लेकिन 2019 में पीएम मोदी की दोबारा सरकार बनते ही तीन तलाक पर कानून बना दिया. तभी से देशभर के मुसलमानों ने खुशी जाहिर की थी. लेकिन इस बार कोरोना काल में घर में ही मुस्लिम महिलाओं ने अपने मोदी भाई जान की तस्वीर पर राखी बांधकर उनका मुंह मीठा कराया है और शुक्रिया भी अदा किया है.
अयोध्या अयोध्या में 5 अगस्त के भूमि पूजन को लेकर तैयारियों के बीच हड़कंप मच गया है। यहां पर रामलला के एक पुजारी समेत सुरक्षा में लगे एक दर्जन से ज्यादा पुलिकर्मियों को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट आने के बाद सभी लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। संपर्क में आए लोगों का सैंपल भी लिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मंदिर में इन लोगों के संपर्क में आए भक्तों की भी सैंपलिंग की जाएगी। रामजन्मभूमि में 5 अगस्त को भूमि पूजन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमिपूजन के लिए पहुंच रहे हैं। अयोध्या में तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत डेप्युटी सीएम तक अयोध्या का निरीक्षण करके तैयारियों का जायजा ले चुके हैं। जांच के लिए भेजा गया था सैंपल बताया जा रहा है कि राम जन्मभूमि का सहायक पुजारी की तबीयत खराब होने के बाद उनका सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। इसके साथ ही सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की भी जांच कराई गई। गुरुवार को आई रिपोर्ट के बाद तब हड़कंप मच गया जब सहायक पुजारी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रधान पुजारी के शिष्य हैं पॉजिटिव आए पुजारी सहायक पुजारी रामलला मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के शिष्य हैं। पॉजिटिव पुजारी को होम आइसोलेशन में रखा गया है। अब और लोगों की सैंपलिंग की जा रही है ताकि उनकी भी कोरोना वायरस की जांच हो सके। रामजन्मभूमि के पूरे परिसर को सैनिटाइज किया जा रहा है।
नई दिल्ली राहुल गांधी (Rahul Gandhi News) पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर अपने हमले लगातार जारी रखे हुए हैं। कल राफेल पर तीन सवाल पूछने के बाद आज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी पर बड़ा हमला बोला है। राहुल ने रोजगार, अर्थव्यवस्था (Indian Economy) जीएसटी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पीएम मोदी देश को बर्बाद कर रहे हैं। चार सवाल पूछ, पीएम मोदी को फिर घेरा राहुल ने ट्वीट चार सवाल ट्वीट कर पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'मोदी देश को बर्बाद कर रहे हैं। 1- नोटबंदी, 2- GST, 3-कोरोना महामारी में दुर्व्यवस्था, 4- अर्थव्यवस्था और रोजगार का सत्यानाश।' बता दें कि राहुल गांधी पिछले काफी समय से लगातार पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। राहुल राफेल से लेकर अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताने वाले राहुल ने अपने ट्वीट में इसका भी जिक्र किया है। बता दें कि जीएसटी के बकाए भुगतान पर राज्यों की केंद्र से ठनी हुई है। केंद्र सरकार ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकारा है कि जीएसटी के तहत निर्धारित कानून के तहत राज्यों की हिस्सेदारी देने के लिए उसके पास पैसे नहीं है। जीएसटी सिस्टम 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। राफेल पर भी उठाए थे सवाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi on rafale arrival) ने देश को 5 लड़ाकू राफेल जेट मिलने पर वायुसेना को बधाई दी लेकिन साथ ही सरकार से सवाल भी पूछे थे। उन्होंने ट्वीट किया, 'राफेल के लिए वायुसेना को बधाई। इस बीच, सरकार क्या इसका जवाब दे सकती है- 1) प्रति विमान 526 करोड़ रुपये के बजाय 1670 करोड़ रुपये की कीमत क्यों पड़ी? 2) कुल 126 विमानों के बजाय 36 विमान क्यों खरीदे गए? 3) HAL (हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड) के बजाय दिवालिया हो चुके अनिल (अंबानी) को 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका क्यों दिया गया?'
नई दिल्ली खुफिया एजेंसियों ने 5 अगस्त और 15 अगस्त को लेकर बड़े हमले का अलर्ट जारी किया है। खासकर हिंदूवादी नेताओं की जान को खतरा बताया है। 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने का एक साल पूरा हो रहा है। इसी तारीख को रामजन्म भूमि पूजन है। ह्यूमन इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट्स के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आतंकवादियों की टोली स्लीपर मॉड्यूल की मदद से खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में है। इनपुट दिल्ली, यूपी, पंजाब, कश्मीर और मुंबई के लिए जारी किया है। कहा गया है कि 5 अगस्त के आसपास इस बार आतंकी संगठन कुछ बड़ा करने की फिराक में हैं। आरएसएस, हिंदूवादी संगठन और बीजेपी नेताओं को निशाना बनाया सकता है। माना जा रहा है कि आतंकी पुलिस या आर्मी यूनिफॉर्म में हमला कर सकते हैं। नेताओं की सुरक्षा में लगे जवानों को सर्तकता बरतते हुए अपनी मूवमेंट के बारे में पुलिस को पहले से जानकारी देने के लिए कहा है। सभी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस को साझा किए गए इंटेल नोट की जानकारी में कहा गया है कि पाकिस्तान के आईएसआई समर्थित आतंकवादी संगठन 5 अगस्त को हमले को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। आईएसआई ने लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के टॉप कमांडर को हमला करने का आदेश दिया है। ऐसे में दिल्ली पुलिस और सटे हुए राज्यों की पुलिस के साथ कॉर्डिनेशन कम्यूनिकेशन जारी है। कॉर्डिनेशन मीटिंग भी होने जा रही है। संवेदनशील इलाकों में आने जाने वालों पर पैनी निगाह है। डोर-टु-डोर चेकिंग भी की जा रही है। पुलिस अफसर ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी। दिन हो या रात, लोकल इंटेलिजेंस की पैनी नजर है। सुरक्षा एजेंसियों की चिंता यूएन की रिपोर्ट ने और बढ़ा दी है, जिसमें कहा गया है कि केरल और कर्नाटक में आईएसआईएस ने गहरी जड़ें जमा ली हैं। हमले की साजिश रची जा रही है। संगठन में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यामांर के करीब 200 आतंकवादी हैं, जो एक बड़े खतरे का संकेत हैं। इस बीच, अदालत व अन्य ट्रिब्लयूनल में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों को 31 जुलाई तक अपने संबंधित थाने, यूनिट, पीएचक्यू डीसीपी को रिपोर्ट करने का निर्देश जारी किया गया है। आला अफसर ने बताया कि इन दिनों कोरोना की वजह से थानों, यूनिटों में स्टाफ की कमी चल रही है। 5 अगस्त और 15 अगस्त को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
नई दिल्ली दुनिया के सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाने वाला राफेल (Rafale fighter jets landed in Ambala) भारत आ चुका है। फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के तहत 5 लड़ाकू विमानों की पहली खेप बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंची। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बीच (Rafale arrived India amid tension with China) राफेल लड़ाकू विमानों का हिंदुस्तान आना बहुत ही महत्वपूर्ण है। ये विमान भारत को हवाई युद्धक क्षमता के मामले में चीन और पाकिस्तान पर बढ़त देने वाले हैं। खास बात यह है कि 2019 के आम चुनाव में राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा भी बनाया था। यह भी दिलचस्प है कि राफेल खरीद की पहल कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार ने ही शुरू की थी लेकिन 7 साल लंबे जद्दोजहद के बाद भी यह परवान नहीं चढ़ सकी और बाजी नरेंद्र मोदी सरकार के हाथ लगी। चीन और पाकिस्तान को इसलिए होगी चिंता राफेल लड़ाकू विमानों के आने से भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान पर स्पष्ट बढ़त मिलने वाली है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच आसमान के इन सिकंदरों के भारत आने से निश्चित तौर पर चीन और पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों देशों का नाम लिए बगैर यही बात कही कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता की ओर बुरी नजर रखने की चाहत वालों की चिंता बढ़ने वाली है। चीन, पाक के पास राफेल की टक्कर का लड़ाकू विमान नहीं चीन और पाकिस्तान दोनों ही के पास राफेल की टक्कर का कोई लड़ाकू विमान ही नहीं है। एयर टु एयर और एयर टु ग्राउंड स्ट्राइक के मामले में राफेल का चीन या पाकिस्तान के विमानों से कोई तुलना ही नहीं है। पाक के पास जो सबसे आधुनिक विमान हैं, वे हैं अमेरिका से आए एफ-16 और एफ-17। पिछले साल फरवरी में विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया था। एफ-16 चौथी पीढ़ी का विमान है, जबकि राफेल 4.5 वीं पीढ़ी का है। एफ-16 सिंगल इंजन का है तो राफेल डबल इंजन है। इसमें एफ-16 के मुकाबले काफी अधिक घातक हथियारों, मिसाइलों को लोड किया जा सकता है। चीन के जे-20 की तुलना में बहुत आगे है राफेल चीन के पास जो सबसे आधुनिक विमान है वह है चेंगदु जे-20। राफेल में उससे ज्यादा खूबियां हैं। दूसरे देशों की टेक्नॉलजी की नकल में माहिर चीन ने जे-20 को नकल के जरिए बनाया है इसलिए उसकी क्षमताओं के बारे में वह जो दावा करता है वह भी संदिग्ध है जबकि राफेल लीबिया, इराक और सीरिया में अपना लोहा मनवा चुका है। खास बात यह है कि भारत ने राफेल में अपनी जरूरतों के हिसाब से कुछ अहम बदलाव भी कराए हैं। इसमें इजरायली हेल्मेट-माउंटेड डिस्प्ले को जोड़ा गया है। इसके अलावा भारत की गुजारिश पर इसमें रेडार वॉर्निंग रिसिवर्स, लो बैंड जैमर्स, 10 घंटे की फ्लाइट डेटा रिकॉर्डिंग, इन्फ्रारेड सर्च ट्रैकिंग सिस्टम जैसे कुछ अहम खूबियां जोड़ी गई हैं। इसलिए मौजूदा वक्त में दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर है राफेल वायु रक्षा, बेहद सटीकता से हमले, जहाज रोधी हमले की खासियत समेत इसकी अधिकतम रफ्तार 1.8 मैक है। अमेरिका के एफ-35 और एफ-22 लड़ाकू विमानों से भी इसकी तुलना की जाती है। विशेषज्ञों की माने तो राफेल एफ-35 से ज्यादा फुर्तीला है क्योंकि यह लंबे समय तक हथियारों को लेकर उच्च गति के साथ उड़ान भर सकता है। हालांकि वैमानिकी और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली के मामले में एफ-35, राफेल से आगे है। रक्षा विशेषज्ञ लक्ष्मण बेहेरा ने पीटीआई को बताया, 'वैश्विक बाजार में उपलब्ध यह सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमान है। चीन में उपलब्ध लड़ाकू विमानों की तुलना में यह अत्याधुनिक है और मारक क्षमता भी अधिक है। निश्चित तौर पर भारत की रक्षा तैयारियों को इससे बढ़ावा मिलेगा। राफेल के आगमन का समय भी बिल्कुल उपयुक्त है।' चीन के लड़ाकू विमान जे-20 के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसकी तुलना राफेल से नहीं की जा सकती क्योंकि फ्रांस निर्मित विमान चीनी लड़ाकू विमान की तुलना में ज्यादा दक्ष है। पूर्व वायु सेना प्रमुख फली होमी मेजर ने भी डॉक्टर बेहेरा की राय से सहमति जाहिर की। पूर्व वायु सेना प्रमुख ने पीटीआई से कहा, 'राफेल और जे-20 के बीच कोई तुलना नहीं है। दुनिया जे-20 के बारे में नहीं जानती है। राफेल विमान भारतीय वायु सेना की क्षमता को और बढ़ाएंगे। ...तो कांग्रेस के सिर बंधता राफेल डील का सेहरा भारतीय वायुसेना की जरूरतों के मद्देनजर राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की पहल सबसे पहले कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार ने ही की थी। साल 2007 में एयरफोर्स ने सरकार के पास मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) खरीदने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों को खरीदने का टेंडर जारी किया। टेंडर में सबसे कम कीमत पर राफेल ने बोली लगाई थी। मनमोहन सिंह सरकार लड़ाकू विमान खरीदना चाह रही थी लेकिन उसके लिए चल रही बातचीत कभी अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। यूपीए के दौरान 18 राफेल विमानों को फ्रांस से खरीदा जाना था जबकि बाकी 108 विमानों का भारत में ही निर्माण के लिए बातचीत चल रही थी। 2014 के आम चुनाव में यूपीए सरकार सत्ता से बाहर हो गई। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और 23 सितंबर 2016 को फ्रांस की सरकार के साथ 59 हजार करोड़ रुपये में हथियारों से सुसज्जित 36 राफेल लड़ाकू विमानों की डील फाइनल हुई। 8 अक्टूबर 2019 यानी वायु सेना दिवस के दिन भारत को फ्रांस से पहला राफेल लड़ाकू विमान मिला जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रिसीव किया। अब 5 लड़ाकू विमान अंबाला एयरबेस पहुंच चुके हैं जो कॉम्बैट रेडी हैं यानी जरूरत पड़ने पर कभी भी इनका इस्तेमाल के लायक हैं। क्यों जरूरी थे राफेल राफेल विमानों की खरीद का यह सौदा भारतीय वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था, क्योंकि वायुसेना के पास फिलहाल 31 लड़ाकू विमान हैं जबकि वायुसेना के स्क्वॉड्रन में इनकी स्वीकृत संख्या के अनुसार, कम से कम 42 लड़ाकू विमान होने चाहिए। चीन के साथ तनाव और पाकिस्तान की धूर्तता के इतिहास के मद्देनजर भारत के पास पर्याप्त संख्या में लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत थी। अंबाला पहुंचे पांच राफेल विमानों में से तीन विमान एक सीट वाले जबकि दो राफेल दो सीट वाले लड़ाकू विमान हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के अंबाला स्थित स्क्वॉड्रन 17 में शामिल किया जाएगा जो 'गोल्डन एरोज' के नाम से मशहूर हैं। राफेल डील से चूकी कांग्रेस ने विमानों के भारत आने का स्वागत तो किया है लेकिन डील में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े अपने पुराने सवालों को फिर दागा है। दूसरी तरफ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ब्रह्मास्त्र के भारत आने का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी निर्णय क्षमता को दिया है।
लखनऊ अयोध्‍या में 5 अगस्‍त को राम मंदिर भूमि पूजन की तैयारियों के बीच मस्जिद निर्माण से जुड़ी भी खबर आई है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अयोध्या में आवंटित की गई जमीन पर मस्जिद निर्माण के लिए बुधवार को ट्रस्ट का गठन कर सदस्यों के नाम घोषित कर दिए। बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारुकी ने बताया कि बोर्ड ने अयोध्या के धन्नीपुर गांव में आवंटित की गई 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद, इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर, लाइब्रेरी और अस्पताल के निर्माण के लिए 'इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन' नाम से एक ट्रस्ट बनाया है। ट्रस्‍ट में होंगे 15 सदस्‍य, फारुकी मुख्‍य ट्रस्‍टी फारुकी ने बताया इस ट्रस्ट में अधिकतम 15 सदस्‍य होंगे। अभी 9 सदस्‍यों के नाम घोषित किए गए हैं। बोर्ड खुद इसका संस्थापक ट्रस्टी होगा और बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी इसके पदेन प्रतिनिधि होंगे। इसके अलावा वह खुद इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी और अध्यक्ष होंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 नवंबर को राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण करने का आदेश दिया, साथ ही मुसलमानों को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। सोहावल में मिला है 5 एकड़ जमीन इसके बाद उत्‍तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या की सोहावल तहसील स्थित धन्नीपुर गांव में 5 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड को दी थी। वक्फ बोर्ड ने उस जमीन पर मस्जिद के साथ-साथ इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर, अस्पताल और पुस्तकालय बनाने का ऐलान किया था। यह तमाम निर्माण कैसे होगा, इस बारे में फैसला लेने के लिए इस ट्रस्ट का गठन किया जाना था, जो बुधवार को कर दिया गया।
अयोध्या, 29 जुलाई 2020,श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट ने देश भर के राम श्रद्धालुओं से अपील की है कि 5 अगस्त को वे भूमि पूजन के मौके पर अयोध्या पहुंचने के लिए आतुर न हों. ट्रस्ट ने कहा है कि लोग सायंकाल में अपने घरों में दीपक जलाकर इस दिव्य अवसर का भव्य स्वागत करें. ट्रस्ट ने कहा है कि भविष्य में किसी उचित अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण यज्ञ में सभी राम भक्तों को शामिल होने का अवसर मिले, यह प्रयास अवश्य होगा. राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए ट्विटर अकाउंट बता दें कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ट्विटर पर एंट्री शानदार रही है. वेरिफाई होने के कुछ ही देर बाद इस अकाउंट को हजारों फॉलोअर मिल गए हैं. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्विटर अकाउंट पर परिचय में कहा गया है कि इस ट्विटर अकाउंट को राम मंदिर निर्माण और इसके प्रबंधन के लिए बनाया गया है. इसमें कहा गया है कि ये श्री राम रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आधिकारक अकाउंट है. 5 अगस्त को अयोध्या में भूमिपूजन कार्यक्रम के बारे में ट्वीट करते हुए श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा, "1984 में प्रारंभ हुए श्री राम जन्म भूमि मन्दिर निर्माण आन्दोलन में लाखों करोड़ों राम भक्तों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग प्राप्त हुआ हैं. उन सभी की यह स्वाभाविक इच्छा होगी कि वे इस भूमि पूजन के पवित्र ऐतिहासिक अवसर पर प्रत्यक्ष उपस्थित रहें." कोरोना की वजह से सबकी उपस्थिति संभव नहीं ट्रस्ट ने कहा कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की भी ऐसी ही भावना थी. किंतु कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थिति में ऐसा करना असंभव है, किंतु प्रधानमंत्री इस ऐतिहासिक प्रसंग पर अयोध्या आकर श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रारंभ करा दें, इसलिए भूमि पूजन आवश्यक है. अयोध्या आने के लिए आतुर न हों श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास सभी राम भक्तों से निवेदन करता है कि अयोध्या पहुंचने के लिए व्यग्र न हो , सभी लोग अपने स्थान से समारोह का सजीव प्रसारण देखें और सायंकाल अपने घर पर दीपक जलाकर दिव्य भव्य अवसर का स्वागत करें. ट्रस्ट के मुताबिक भविष्य में किसी उचित अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण यज्ञ में सभी राम भक्तों को सम्मिलित होने का अवसर मिले, यह प्रयास अवश्य होगा.
अयोध्या, 29 जुलाई 2020,अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम की मेजबानी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई हस्तियां मौजूद रहेंगी. हालांकि, सीएम योगी को छोड़कर और किसी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री को बुलाया नहीं गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने कहा है कि पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम की मेज़बानी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेगें और किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया जाएगा. उनके अलावा किसी भी अन्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया जा रहा है. चंपत राय ने कहा कि कोरोना महामारी खत्म होने के बाद हम सभी को बुलाएंगे. हम भूमिपूजन के समय मुख्यमंत्री सम्मेलन नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा और कौन अतिथि भूमिपूजन में शामिल होंगे, भूमिपूजन का कार्यक्रम कितनी देर का होगा इसके बारे में हम मीडिया को नहीं बताना चाहते. चंपत राय ने कहा कि भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान सरकार द्वारा कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन्स का पूर्ण रूप से पालन होगा. हम साधु-संतों से अपील करते हैं कि वह भूमिपूजन के दो दिन पहले से मंदिरों में रामायण, हनुमान चालीसा का पाठ, भजन व कीर्तन करें. 5 अगस्त की शाम को लोग अपने घरों के बाहर दीप जलाएं.
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,फ्रांस से भारत को मिले लड़ाकू विमान राफेल को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं. पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक ट्वीट कर सरकार से 5 सवाल पूछे हैं. हालांकि सुरजेवाला ने राफेल को लेकर वायुसेना के जांबाजों को बधाई दी लेकिन सरकार से उन्होंने 5 सवालों पर जवाब मांगे. बता दें, ये वहीं सवाल हैं जो काफी अर्से से कांग्रेस पूछती रही है. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राफेल का भारत में स्वागत! वायुसेना के जांबाज लड़ाकुओं को बधाई. आज हर देशभक्त ये जरूर पूछे- 1. 526 करोड़ का एक राफेल अब 1670 करोड़ में क्यों? 2. 126 राफेल की बजाय 36 ही क्यों? 3. मेक इन इंडिया की बजाय मेक इन फ्रांस क्यों? 4. 5 साल की देरी क्यों? इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट कर राफेल जेट्स को लेकर एयर फोर्स को बधाई दी गई है. ट्वीट में कहा गया है कि राफेल सौदे के लिए 2012 में की गई कांग्रेस की मेहनत आखिरकार रंग लाई और यह समझौता साकार साबित हुआ. कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस और बीजेपी की डील में बड़ा अंतर है जिसमें बीजेपी के घोटाले सामने आए हैं. कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट में लिखा, ''कांग्रेस की डील में देश को 126 जेट्स मिलने थे जबकि बीजेपी ने 36 का सौदा किया है. देश में मेड इन इंडिया के तहत 108 राफेल जेट बनने थे. कांग्रेस के सौदे के मुताबिक, साल 2016 तक भारत को राफेल मिल जाने थे. हर जेट की कीमत 526 करोड़ रुपये निर्धारित थी.'' इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी राफेल को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ''आखिर राफेल fighter plane आ गया. 126 राफेल खरीदने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में UPA ने 2012 में फैसला लिया था और 18 राफेल को छोड़कर बाकि भारत सरकार की HAL में निर्माण का प्रावधान था. यह भारत में आत्मनिर्भर होने का प्रमाण था. एक राफेल की कीमत ₹746 करोड़ तय की गई थी.'' दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मोदी सरकार आने के बाद फ्रांस के साथ मोदी जी ने बिना रक्षा व वित्त मंत्रालय व केबिनेट कमेटी की मंजूरी के नया समझौता कर लिया और HAL का हक मार कर निजी कंपनी को देने का समझौता कर लिया. राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी कर 126 राफेल खरीदने के बजाय केवल 36 खरीदने का निर्णय ले लिया.
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2020,देशभर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कोरोना की टेस्टिंग ने भी रफ्तार पकड़ी है. ऐसे में 15 अगस्त को लेकर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं. स्वतंत्रता दिवस के लिए कई बड़े फैसले और एहतियात बरतने की हिदायत दी गई है. स्वतंत्रता दिवास कार्यक्रम के मद्देनजर इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी और दिल्ली पुलिस के सभी अधिकारी जो कार्यक्रम में हिस्सा रहेंगे उन्हें 15 अगस्त तक क्वारनटीन किया जाएगा. इसमें अधिकारियों के ड्राइवर, ऑपरेटर, कुक, बस ड्राइवर, ट्रेनर समेत उनसे जुड़े तमाम स्टाफ को 15 अगस्त तक के लिए क्वारनटीन किया गया है. क्वारनटीन के दौरान कार्यक्रम से जुड़े और कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी अधिकारी और उनके तमाम स्टाफ केवल रिहर्सल और 15 अगस्त से जुड़ी तैयारियों में हिस्सा ले पाएंगे और इसके बाद सीधा घर जाएंगे. दिल्ली पुलिस के वो सभी स्टाफ जो इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे या सुरक्षा में शामिल होंगे उन सभी को मौखिक तौर पर भी यह आदेश दिया गया है. रेड कार्पेट पर गार्ड ऑफ ऑनर के वक्त खुद प्रधानमंत्री, कमांडर और जवानों के बीच से होकर गुजरते हैं, जिसको ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है. ताकि में शामिल होने वाले देश के पीएम समेत VVIP और VIP अधिकारी, जवान हर कोई कोरोना महामारी से बचा रहे. 15 अगस्त तक में शामिल हर सरकारी वाहन को रोजाना सैनेटाइज करने के भी सख्त आदेश एजेंसियों की तरफ से सभी यूनिट को दिए गए हैं. इंडियन आर्मी की पहल और प्लान के बाद कोरोना बचाव की यह रूपरेखा तैयार की गई है.
लखनऊ, 28 जुलाई 2020,उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परविंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. पत्र में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निकट ही सिख गुरुओं की स्मृति में स्मारक बनाए जाने की की मांग की गई है. सरदार परविंदर सिंह ने वीडियो जारी करते हुए भी कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने निहंग सिखों की फौज को राम मंदिर को मुगलों से आजाद कराने के लिए अयोध्या भेजा था. जिन्होंने हिंदू समाज को, मुगलों से मंदिर आजाद करा कर दे दिया था. परविंदर सिंह के मुताबिक पवित्र मंदिर में साहिब श्री गुरु नानक देव जी महाराज द्वारा सन 1672 में दर्शन भी किया गया था. गुरु तेग बहादुर जी एवं गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के भी चरण पवित्र स्थल पर पड़े हैं. गुरुद्वारा ब्रह्म कुंड में गुरु गोविंद सिंह महाराज के रखे गए शस्त्र घटना का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं. तो वहीं इसके अतिरिक्त और साक्ष्य के तौर पर वर्ष 1558 में निहंग सिंह फकीर तथा उनके साथियों के ऊपर श्री राम जन्मभूमि परिसर में हवन और पूजा करने पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी. अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परविंदर सिंह कहते हैं कि ऐसे पवित्र स्थल जहां प्रभु श्री राम के भव्य एवं विशाल मंदिर का निर्माण हो रहा है उसके निकटस्थ किसी भी स्थान पर सिख गुरुओं की स्मृति में स्मारक का निर्माण किए जाने पर संपूर्ण सनातन समाज में भाईचारा एवं सद्भाव का एक अति उत्तम सामंजस्य दिखेगा और साथ ही साथ अच्छा संदेश भी समाज में जाएगा. परिवंदर सिंह ने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म को मानने वाले, उसमें विश्वास रखने वालों के लिए अत्यंत ही गौरव और हर्ष का विषय है कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर, जो कि श्री राम जी की जन्मस्थली थी, वहां 500 वर्षों के उपरांत पुनः ऐसा अवसर प्राप्त हो रहा है, जिसमें श्री राम जी का मंदिर स्थापित होने जा रहा है. जिसका भूमि पूजन प्रधानमंत्री के कर कमलों द्वारा 5 अगस्त को होना सुनिश्चित किया गया है. हिंदू समाज ही नहीं बल्कि सनातन धर्म को मानने वाले समस्त भारतीयों की यह जीत है. उन्होंने आगे कहा कि मैंने प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा है, जिसमें मैंने कहा है कि जो श्री राम जन्म भूमि स्थल है, वहां पर जाकर गुरु नानक जी ने दर्शन किए थे, गुरु तेग बहादुर जी के जाने के वहां प्रमाण मिलते हैं. गुरु गोविंद सिंह जी के जाने का प्रमाण बाल्यकाल में मिलते हैं. गुरु गोविंद सिंह महाराज ने निहंगों की सेना वहां भेजी थी जहां पर पहुंच कर निहंगों की सेना ने मुगलों से मंदिर को मुक्त करवाया था और हिंदुओं को दिया था. इसके पश्चात अगर हम 18 सौ अट्ठावन की बात करते हैं तो माननीय उच्चतम न्यायालय में भी इस चीज को सबूत के तौर पर माना है कि वहां पर निहंग सिंह फकीर और उसके साथियों ने परिसर में पूजा अर्चना और हवन किया और प्राण प्रतिष्ठा की. परिवंदर सिंह ने आगे कहा कि इस तरीके का कृत्य सिख समाज और महापुरुषों के द्वारा बलिदान किया गया है. इन सभी घटनाओं को संजोने के लिए, उसकी यादों को बनाए रखने के लिए, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है कि, उस पवित्र स्थल पर जहां मंदिर बने वहां उसके निकटस्थ किसी भी स्थान पर, सिख गुरु की याद में एक स्मारक का निर्माण किया जाए. क्योंकि यह कदम सनातन धर्मावलंबियों में भाईचारा और प्रेम को बढ़ाने वाला होगा. हम समाज को बेहतर संदेश दें. इसीलिए हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.
नई दिल्ली, दिल्ली में हुई हिंसा पर याचिकाकर्ता अजय गौतम ने हाईकोर्ट से इस मामले में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कुछ नेताओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. इसके साथ अजय गौतम ने अपनी याचिका में कहा कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के पीछे राष्ट्रविरोधी ताकतों के समर्थन की एनआईए जांच होनी चाहिए. दिल्ली पुलिस ने भी इन प्रदर्शनों के पीछे गहरी साजिश को लेकर अपना जवाब दाखिल किया है. इन मामलों में अकेले दिल्ली पुलिस की जांच पर्याप्त नहीं है. इस गहरी साजिश की एनआईए जांच जरूरी है. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से अगले हफ्ते तक याचिकाकर्ताओं की ओर से रखी गई दलीलों का जवाब देने के लिए कहा है. इस मामले में सुनवाई अगले हफ्ते फिर होगी. डीसीपी व्यक्तिगत रूप से करें जांच की निगरानी- दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं. कोर्ट के ध्यान में लाया गया था कि पुलिस ने अभी तक जाफराबाद और मौजपुर मेट्रो स्टेशनों पर और फोटोग्राफरों के कैमरों से दंगों से जुड़े वीडियो-फुटेज को जब्त या सुरक्षित नहीं किया है. मामले में साक्ष्य के अहम हिस्से यानी वीडियो फुटेज के महत्व पर जोर देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने डीसीपी से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से जांच की निगरानी करें. कोर्ट ने पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ताओं देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां की न्यायिक हिरासत को बढ़ाते हुए 14 अगस्त तक यह आदेश पारित किया. दिल्ली हिंसा के इस मामले की जांच दिल्ली स्पेशल सेल द्वारा UAPA मामले के तहत की जा रही है.
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2020,दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा है कि जिस केस की जांच चल रही हो, उसकी कोई सूचना बाहर जारी न करें. दिल्ली हाईकोर्ट में पिंजड़ातोड़ ग्रुप की एक एक्टिविस्ट ने इसके लिए गुहार लगाई थी. पिंजड़ातोड़ ग्रुप की एक्टिविस्ट देवांगना कलिता दिल्ली हिंसा मामले की आरोपी है और उसके खिलाफ जांच चल रही है. कलिता ने अदालत से गुहार लगाई है कि जांच के दौरान कोई भी सूचना लीक न की जाए. कलिता की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्दश दिया है. कलिता ने आरोप लगाया था कि पुलिस केस से जुड़ी सूचनाएं जारी कर रही है और प्रेस रिलीज भी बांटे जा रहे हैं, जिससे मीडिया ट्रायल का प्रभाव देखा जा रहा है. हाईकोर्ट ने माना है कि सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामले संवेदनशील होते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जो एफआईआर दायर होती है, उसके बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई सूचना नहीं दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आगे से जब तक आरोप सिद्ध न हो जाएं तब तक किसी आरोपी या गवाह के बारे में सूचना नहीं दी जाएगी. पुलिस ने हालांकि याची के इस आरोप को मानने से इनकार कर दिया कि पुलिस चुन-चुन कर सूचनाएं लीक कर रही है. कोर्ट ने कहा कि प्रेस रिलीज में जो बातें लिखी गई हैं वे आरोप पत्र से ली गई हैं. कोर्ट ने कहा कि पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी को दोषी या निर्देश बताए.
जम्मू, 28 जुलाई 2020,जम्मू, जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की आवाज उठाने वाले नेता सैयद अली शाह गिलानी पर पाकिस्तान की सरकार मेहरबान हुई है. पाकिस्तानी संसद ने सोमवार को सैयद अली शाह गिलानी को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का ऐलान किया है. ये सम्मान पाकिस्तान की आवाज उठाने और जम्मू-कश्मीर के लिए देने की बात कही गई है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस मामले में आग बबूला है. पाकिस्तानी सीनेट ने सोमवार को सैयद अली शाह गिलानी को निशान-ए-पाकिस्तान खिताब देने की बात कही. जिसमें कहा गया है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहकर भारतीय फौजों और सरकारों के खिलाफ आवाज उठाई, जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज बने. इतना ही पाकिस्तान ने गिलानी के नाम पर इस्लामाबाद में एक यूनिवर्सिटी बनाने की बात कही है. इस्लामाबाद में बन रही एक यूनिवर्सिटी का नाम अब सैयद अली शाह गिलानी यूनिवर्सिटी कर दिया गया है. बता दें कि कुछ वक्त पहले ही सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफे की घोषणा की थी. एक ऑडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने इसका ऐलान किया था. सैयद अली शाह गिलानी ने कहा था कि उन्होंने हुर्रियत से खुद को दूर कर लिया है. पाकिस्तान के इस ऐलान पर भारत में रोष है. जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रविंदर रैना ने पाकिस्तान पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि हुर्रियत और पाकिस्तान एक ही हैं. यहां पर हुर्रियत के नेता पाकिस्तान के इशारों पर चलते हैं, जिनकी वजह से जम्मू-कश्मीर के निर्दोष लोग मारे जाते हैं. सैयद अली शाह गिलानी को निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित करने का प्रस्ताव पाकिस्तानी सीनेटर मुश्ताक अहमद ने पेश किया था, जो आसानी से पास हो गया. अब पाकिस्तान की ओर से 5 अगस्त के मौके पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक स्पेशल सदन बुलाने की कोशिश है, ताकि अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया जा सके.
बेंगलुरु सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी ऐजुकेशन (CBSE) ने कोरोना वायरस के चलते कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक का पाठ्क्रम घटाया है। सीबीएसई के बाद अब कर्नाटक सरकार ने स्टेट बोर्ड स्कूलों का पाठ्यक्रम कम किया है। इस पाठ्यक्रम को अब 120 दिनों के वर्किंग डे के हिसाब से तैयार किया गया है और इसे 30 फीसदी घटाया गया है। नया पाठ्यक्रम सोमवार को कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसायटी की वेबसाइट में अपलोड किया गया। इस नए पाठ्यक्रम से टीपू सुल्तान और हैदर अली का चैप्टर हटा दिया गया है। कक्षा 7 की इतिहास की किताब में हैदर अली और टीपू सुल्तान का चैप्टर शामिल था। दिलचस्प बात है कि वेबसाइट पर अपलोड इस पाठ्यक्रम से दोनों चैप्टर गायब हैं। नए पाठ्यक्रम में पीपीटी के जरिए विषयों को दर्शाया गया है। चैप्टर-5 से मैसुरु के वाडियार हटा दिया गया है। इन चैप्टर का किया गया विस्तार चैप्टर 4 में कर्नाटक में ब्रिटिश शासन का विरोध, हालागली बेदास और कित्तूर चेन्नमा-रायन्ना को चार्ट के जरिए विस्तृत किया गया है। चैप्टर से टीपू सुल्तान और हैदर अली के बारे में हटाए जाने से विवाद शुरू हो गया है। शिक्षा निदेशक ने दी सफाई इस मामले में केटीबीएस के निदेशक मेड ग्वाडा ने कहा, 'हमने हैदर अली या टीपू सुल्तान को हटाया नहीं है। पाठ्यक्रम के जो बदलाव किए गए हैं, वे विशेषज्ञों ने किए हैं। हम विशेषज्ञों के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। यहां तक कि हम उनके काम में कोई विशेष टिप्पणी या सुझाव भी नहीं दे सकते हैं।' 'विषय की महत्ता के हिसाब से बना पाठ्यक्रम' निदेशक ने कहा कि विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम में जो बदलाव किए हैं वह उन्होंने विषय की महत्ता को ध्यान में रखकर किए हैं। आखिरकार 220 दिनों के पाठ्यक्रम को मात्र 120 दिनों में करना था। यह पूरी तरह से विशेषज्ञों का काम था। सरकार ने की थी घोषणा आपको बता दें कि जब कर्नाटक में बीजेपी की सरकार आई थी, तब भी इस बात को लेकर विवाद हुआ था। सरकार ने घोषणा की थी कि पाठ्यक्रम से टीपू सुल्तान का चैप्टर हटाया जाएगा। इस घोषणा के बाद सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी जिसके बाद सरकार ने एक कमिटी गठित की थी और इस मामले में सुझाव मांगा था।
े नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के राम मंदिर भूमि पूजन (PM Narenda Modi in Ayodhya) के लिए जाने पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। AIMIM चीफ असदुद्दीन औवैसी ने पीएम के मंदिर के शिलान्यास में जाने को संविधान के शपथ का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्षता भारत के संविधान का अभिन्न अंग है और यह उसका अनादर होगा। बता दें कि पीएम मोदी 5 अगस्त को अयोध्या जाएंगे। वहां वह राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी जब 5 अगस्त को राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे उसी के बाद से मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। 'अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई' ओवैसी ने कहा, 'हम यह नहीं भूल सकते कि 400 वर्षों से ज्यादा वक्त से बाबरी मस्जिद अयोध्या में थी और 1992 में क्रिमिनल भीड़ ने इसे ध्वस्त कर दिया था।' मोदी का यह होगा कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या के राम मंदिर (PM Modi Ayodhya Visit Program) का भूमि पूजन करने के साथ इसके निर्माण का शुभारंभ करेंगे। पीएम का कार्यक्रम तय हो गया है। वह दिन में साढ़े 11 बजे यहां पहुंचेंगे तथा लोगों को संबोधित भी करेंगे। इस कार्यक्रम में करीब 200 गणमान्य लोगों के भाग लेने की उम्मीद है। मेहमानों की सूची पीएमओ को सौंपी जा चुकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि भूमि पूजन के दिन, 5 अगस्‍त को दुनियाभर में फैले सभी राम भक्‍त और भारत के संत-महात्‍मा जहां हैं, वहीं पर पूजन करें। उन्‍होंने कहा, 'सभी श्रद्धालु संभव हो तो परिवार के साथ या नजदीक के किसी मंदिर में 5 अगस्‍त को सुबह 11.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक भजन-पूजा करें।' उन्‍होंने बड़े ऑडिटोरियम में भूमि पूजन का लाइव टेलीकास्‍ट दिखाने की भी अपील की है।
जयपुर। राजस्थान के सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस (Rajasthan congress) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। जहां पहले बीएसपी प्रमुख मायावती (bsp leader mayawati) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस में बीएसपी विधायकों के विलय को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने के रूख को साफ कर दिया है। वहीं अब दोबारा बीजेपी के वरिष्ठ नेता मदन दिलावर ने एक बार फिर राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। जानकारों का कहना है कि दिलावर की ओर से हाई कोर्ट में दोबारा याचिका दायर करने के बाद कांग्रेस की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती है। नए सिरे से लगाई याचिका आपको बता दें कि कांग्रेस में बीएसपी विधायकों के विलय को लेकर जहां पहले दिलावर ने स्पीकर के सामने इस मामले में अर्जी लगाई थी। वहीं सोमवार को इस मुद्दे को लेकर दिलावर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे थे, लेकिन कोर्ट ने याचिका को सारहीन बताते हुए रद्द कर दी थी। वहीं अब उनकी ओर से नए सिरे से याचिका दायर की है। नई याचिका में दिलावर ने स्पीकर के 24 जुलाई के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी है। कांग्रेस को मजबूती के साथ देंगे चुनौती- दिलावर याचिका दायर करने के बाद एक चैनल से बात करते हुए दिलावर ने बताया कि पहले जो याचिका लगाई गई थी, उसमें स्पीकर की कॉपी सत्यापित नहीं हुई थी, लिहाजा अब दोबारा याचिका नए सिरे से लगाई गई है। दिलावर ने इस दौरान कहा कि बीजेपी कांग्रेस को मजबूती के साथ अब चुनौती देगी। वहीं माना जा रहा है कि इस मामले में शुक्रवार तक सुनवाई हो सकती है।
मुंबई, 27 जुलाई 2020, अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना के साथ बातचीत में कहा कि हर कोई अयोध्या जाना चाहता है, लेकिन कोरोना के कारण स्थिति खराब है. उद्धव ने सुझाव दिया कि आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ई-भूमिपूजन कर सकते हैं. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अयोध्या को लेकर मेरा रुख कभी नहीं बदलेगा. भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने के सवाल पर सीएम उद्धव ने कहा कि एक व्यक्ति के रूप में मैं हां या ना में कोई जवाब दे सकता हूं. संयोग से मैं पिछले साल नवंबर में अयोध्या गया था और अगले नवंबर में विवाद सुलझ गया और मैं सीएम बन गया. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि विवाद सुलझने और सीएम बनने को आप अंधविश्वास कह सकते हैं, लेकिन यह मेरा विश्वास है. कोरोना के कारण स्थिति खराब है. मैं कह सकता हूं कि मैं अयोध्या जाऊंगा. मुझे वहां सम्मान मिला है और मिलता रहेगा. बतौर सीएम मुझे सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. मैं पूजा कर सकता हूं और वापस आ सकता हूं. सामना से बात करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह कोई सामान्य मंदिर नहीं है. जब एक गांव में एक मंदिर बनाया जाता है, तो ग्रामीण एक साथ आते हैं और इसका निर्माण करते हैं. ऐसे लोग अयोध्या नहीं जा सकते. उनके लिए गांव में मंदिर महत्वपूर्ण है. अयोध्या को लेकर संघर्ष पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि हां, इसकी पृष्ठभूमि है. बाबर ने आक्रमण किया और फिर मस्जिद का निर्माण किया. हम वहां मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहे हैं. यह हिंदुस्तान के लिए नहीं बल्कि विश्व व्यापी जिज्ञासा का विषय है. आज कोरोना में मंदिरों में प्रवेश वर्जित है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं अयोध्या जा सकता हूं और वापस आ सकता हूं, लेकिन उन लाखों राम भक्तों के बारे में क्या कहना चाहूंगा जो भाग लेना चाहते हैं? क्या आप उन्हें रोकेंगे? क्या आप वायरस के प्रसार की अनुमति देंगे? यह खुशी का क्षण है. हर कोई वहां जाना चाहता है या फिर आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ई-भूमिपूजन करा सकते हैं. अपनी बात दोहरात हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं सीएम के रूप में जा सकता हूं. आधिकारिक तौर पर तारीख की घोषणा नहीं की गई है. मैं तय करूंगा कि जब आधिकारिक कार्यक्रम का ऐलान होगा, लेकिन लाखों लोग कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं. आप उन्हें कैसे रोकेंगे? उनके लिए सरयू के तट महत्वपूर्ण हैं. भावनाएं और लक्ष्य इसके साथ जुड़े हैं. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान पर बीजेपी नेता राम कदम ने कहा कि कुछ दिन पहले शरद पवार ने राम मंदिर का परोक्ष रूप से विरोध किया. एमआईएम नेताओं ने भी इसका विरोध किया. एक अलग भाषा और जुमले का इस्तेमाल करके उद्धव ठाकरे भी राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं. कुर्सी और सत्ता के लिए उन्होंने हिंदुत्व को भूला दिया है.
नई दिल्ली, 27 जुलाई 2020,अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करवाने का सुझाव देने पर विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला है. VHP ने कहा कि यह सुझाव केवल एक अंध विरोध की भावना से आया है. विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अलोक कुमार ने कहा कि यह शिवसेना का कैसा पतन है जिसे कभी बाला साहब ठाकरे ने प्रखर हिंदुत्व की राजनीति के लिए गढ़ा था. भूमि पूजन पवित्र रस्म अलोक कुमार ने आज कहा है कि भूमि पूजन भवन निर्माण के पहले एक आवश्यक और पवित्र रस्म है. भूमि को खोदने से पहले पृथ्वी मां की पूजा की जाती है, उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है और वहां नींव खोदने की अनुमति ली जाती है. यह काम दिल्ली में बैठ कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से नहीं किया जा सकता. कोरोना की सारी सावधानियां बरतते हुए देश सामान्य जीवन जीने की ओर बढ़ रहा है. थोड़े समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने की अनुमति दी थी. अमरनाथ यात्रा के स्थगित होने के बावजूद उस यात्रा के सारे धार्मिक रीति-रिवाजों को निभाया गया है. उद्धव की चिंता विरोध करने के लिए रचा गया ढोंग मात्र विश्व हिन्दू परिषद् ने हमेशा स्पष्ट किया है कि भूमि पूजन के कार्यक्रम में केवल 200 लोग ही रहेंगे और सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के सारे निर्देशों का पालन किया जाएगा. VHP ने कहा कि इस स्थिति में सार्वजनिक स्वास्थ्य के बारे में उद्धव ठाकरे की चिंता विरोध करने के लिए रचा गया ढोंग मात्र है. 5 अगस्त को अयोध्या जा रहे हैं पीएम बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए आ रहे हैं. इसके अलावा कई वीआईपी हस्तियों को भी इस कार्यक्रम में न्योता दिया जा रहा है.
नई दिल्ली बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी देश में नहीं हैं। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया कि राहुल विदेश में हैं क्योंकि ट्विटर पर जारी किया जा रहे वीडियो में वो एक ही पहनावे में दिख रहे हैं। पात्रा ने एक नैशनल न्यूज चैनल पर यह दावा करते हुए राहुल को चुनौती भी दी कि अगर वो देश में हैं तो मंगलवार को राजस्थान के मामले पर एक फ्रेश वीडियो रिलीज करें। उन्होंने कहा कि वक्त आने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका खुलासा किया जाएगा। एक वीडियो काट-काटकर हो रहा है रिलीज: पात्रा पात्रा ने कहा, 'राहुल गांधी को लेकर एक खुलासा करता हूं कि वीडियो रिलीज देश में, दिख रहे हैं एक ही वेष में क्योंकि राहुल हैं विदेश में। ये जो रोज-रोज रिलीज हो रही है, आप देख रहे हैं राहुल गांधी एक ही वेष में हैं। दो-दो मिनट का चंक को काट-काटकर रिलीज किया जा रहा है क्यों? राहुल गांधी हर दिन क्यों नहीं बोलते हैं आके? क्योंकि राहुल गांधी विदेश में हैं।' पात्रा ने बताया क्यों है राहुल के विदेश में होने की संभावना हालांकि, बाद में पात्रा ने शायद शब्द का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि 'राहुल गांधी शायद देश में नहीं हैं। मैं पूछता हूं- हैं क्या? हमलोग सब खबर रखे हुए हैं, समय आने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। शायद देश में नहीं है, एक घंटे का एक वीडियो बना करके रोज दो-दो मिनट रिलीज करते हैं।' बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल के विदेश में नहीं होने की संभावना पर कहा कि वो डिफेंस काउंसिल की मीटिंग में भी हिस्सा नहीं ले रहे हैं। पात्रा ने कहा, '11 मीटिंग डिफेंस काउंसिल की हुई, एक मीटिंग में नहीं गए। राजस्थान के विषय में एक वीडियो रिलीज करके यह कहना कि मैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट को बिठाकर समझा देता हूं, यह मेरा कर्तव्य है। वो नहीं करते। फोन करना पड़ रहा है, चिट्ठी लिखना पड़ रहा है मोदीजी को। एक दिन भी आपने देखा कि गहलोतजी ने राहुल गांधीजी को चिट्ठी लिखी हो? राहुल गांधी को चुनौती पात्रा ने कांग्रेस सांसद को चुनौती भी दी। उन्होंने कहा, 'मैं राहुलजी को चैलेंज देता हूं कि आप अगर देश में हैं और दो-दो मिनट का विडियो काटकर रिलीज नहीं किया जा रहा है तो कल राजस्थान पर वीडियो रिलीज कीजिए। उन्होंने कहा, कल एक फ्रेश वीडियो राजस्थान के ऊपर रिलीज कीजिए और बोलिए कि आप दोनों, अशोक गहलोत और सचिन पायलट को बिठाकर बात करेंगे। मैं चैलेंज देता हूं।' चीन के मुद्दे पर आ रहे हैं राहुल के वीडियो ध्यान रहे कि केरल के वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इन दिनों चीन के मुद्दे पर बार-बार वीडियो जारी कर सरकार को घेर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया ट्विटर पर सोमवार को भी एक वीडियो जारी किया और सरकार पर भारत की सीमा में चीनी घुसपैठ को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि वो चीन के मुद्दे पर कभी झूठ नहीं बोलेंगे, भले ही उनका पॉलिटिकल करियर ही खत्म क्यों न हो जाए।
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2020,राजस्थान में चल रहे सियासी नाटक के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जोरदार हमला बोला है. गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर कहा है कि जहां मुख्यमंत्री खुद राज्यपाल को धमका कर असुरक्षित महसूस करवाए, वहां मुख्यमंत्री से सुरक्षा की गुहार बेकार है. गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि चोरी, डकैती, रेप, हत्या और हिंसक झड़पों से त्रस्त राजस्थान के लोगों के लिए मुख्यमंत्री के आगे अपनी सुरक्षा की गुहार लगाना बेकार है. उन्होंने #RajasthanPoliticalCrisis हैशटैग के साथ वह वीडियो भी ट्वीट किया है, जिसमें राजभवन के अंदर कांग्रेस विधायक 'रघुपति राघव राजाराम' गा रहे हैं. शेखावत ने भगवान राम के बहाने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने तंज किया है कि, "कोर्ट में इनका था बयान, सत्य नहीं हैं राजा राम." गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में भी आरोपी हैं. राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पिछले दिनों विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में संजीव जैन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था. इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में शेखावत का भी नाम आने का दावा किया जा रहा था. बता दें कि गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट ने बगावत कर दी थी. सचिन पायलट ने न तो पार्टी छोड़ी और ना ही पद, लेकिन दो बार हुई विधायक दल की बैठक में बुलाने पर भी नहीं पहुंचे.
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2020,कश्मीर घाटी में सुरक्षा बल लगातार आतंकियों का सफाया कर रहे हैं. अब सुरक्षा बल एक महीने के अंदर ही आतंकी को ढेर कर देते हैं यानी अब कश्मीर घाटी में कोई भी आतंकी एक महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रह पाता है. उत्तरी कमांड के सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी ने बताया कि आतंकी संगठन जॉइन करने वाले को सुरक्षा बल महज 30 दिन में ही मार गिराते हैं. लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी ने बताया कि हम आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बेहद सतर्कता बरतते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि आम नागरिक को किसी तरह का नुकसान न होने पाए. कई बार आम लोगों को ढाल बनाकर आतंकी बचकर भागने में भी कामयाब हो जाते हैं, लेकिन फिर आम नागरिकों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाता है. उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान आम लोगों की जिंदगी बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी ने बताया कि अब कश्मीर घाटी में आतंकी ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह पाते हैं और उनको आतंकी संगठन में शामिल होने के एक महीने के अंदर ही ढेर कर दिया जाता है. खुफिया जानकारी बेहतर करने के चलते सुरक्षा बलों को यह कामयाबी मिल रही है. यही वजह है कि आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल सीजफायर उल्लंघन में 39 फीसदी इजाफा हुआ है उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सीजफायर तोड़कर सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश करता है. जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दी फैलाने के लिए पाकिस्तान आतंकियों को पूरी मदद देता है. हालांकि भारतीय सेना ने प्रभावी तरीके से आतंकियों की घुसपैठ रोकने में कामयाबी हासिल की है. इसके चलते स्थानीय स्तर पर न तो आतंकवादियों की भर्ती हो पाती है और न ही ट्रेनिंग दे पाते हैं. इससे कश्मीर घाटी में आतंकियों की कमर टूट गई है.
अहमदाबाद, 25 जुलाई 2020,गुजरात एटीएस ने राज्य में सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने के आरोप में तीन कथित नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार तीनों लोग झारखंड के रहने वाले हैं. गुजरात एटीएस का आरोप है कि ये तीन गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में लोगों को सरकार के खिलाफ बरगला रहे थे. एटीएस ने इन पर राजद्रोह और आपराधिक षडयंत्र की धारा लगाई है. गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों से गिरफ्तारी गिरफ्तार लोगों की पहचान सामू ओरिया, बिरसा ओरिया और बबीता कच्छप के रूप में हुई है. एटीएस ने सामू और बिरसा को आदिवासी बहुत तापी जिले के व्यारा तालुक से गिरफ्तार किया, जबकि बबीता को महीसागर जिले के संतरामपुर तालुक से गिरफ्तार किया गया. गुजरात पुलिस ने बताया कि ये तीनों झारखंड में अलग-अलग मामलों में वांछित हैं. पत्थलगड़ी आंदोलन से है लिंक गुजरात एटीएस के मुताबिक ये तीनों झारखंड के पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़े हैं. पत्थलगड़ी आंदोलन में एक सरकारी आदेशों की नाफरमानी की जाती है और एक निश्चित भूभाग में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों का प्रवेश भी रोक दिया जाता है. गुजरात एटीएस अब गुजरात में इनके लिंक की जांच कर रही है. बता दें कि गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में भी कभी-कभी नक्सली गतिविधियों और पत्थलगड़ी की खबरें आती रहती हैं. राजद्रोह और आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा गुजरात एटीएस ने इन तीनों लोगों पर आईपीसी की धारा-124-ए लगाई है. आईपीसी की धारा-124-ए राजद्रोह से संबंधित है और इसके तहत आजीवन कारावास का भी प्रावधान है. इसके अलावा इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी यानी आपराधिक षडयंत्र रचने का भी आरोप लगाया गया है.
अहमदाबाद, 25 जुलाई 2020,कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपने एक ट्वीट को लेकर बीजेपी के मुख्यमंत्रियों के निशाने पर आ गए हैं. अब निशाना गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने साधा है. सीएम विजय रुपाणी ने राहुल गांधी पर गुजरात सरकार की पहल को खुद का आइडिया बताने का आरोप लगाया है. दरअसल, कांग्रेस नेता ने हिमाचल प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट को चुनने को लेकर किए जा रहे सर्वे की तारीफ की और कहा कि उन्होंने इसका सुझाव कुछ समय पहले ही दिया था. राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए विजय रुपाणी ने कहा कि गुजरात सरकार की पहल को कॉपी करना और उसे अपना आइडिया बताकर बेचना आपको शोभा नहीं देता. सीएम रुपाणी ने आगे कहा कि मैं ये उम्मीद नहीं करता कि आपको सबकुछ पता होगा, लेकिन आपकी स्क्रिप्ट लिखने वालों को तो ज्यादा जानकारी होगी. राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विजय रुपाणी आगे लिखते हैं कि ‘One defeat, One reinvention’ पॉलिसी के बारे में आप क्या कहते हैं. विजय रुपाणी ने गुजरात की पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल के एक स्क्रीनशॉट को भी साझा किया है. जिसमें आनंदीबेन पटेल ने 2016 में बतौर सीएम वन विलेज, वन प्रोडक्ट योजना का ऐलान किया था. सीएम योगी ने भी साधा निशाना विजय रुपाणी के अलावा सीएम योगी ने भी राहुल गांधी को निशाने पर लिया. सीएम योगी ने कहा कि शायद उनकी याददाश्त कमजोर हो गई है. थोड़ा जोर डालेंगे तो याद आ जाए. बीजेपी के 2017 विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में हर जिले के स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने की बात कही गई थी. आज यह योजना छोटे उद्योगों और स्थानीय कामगारों के लिए वरदान साबित हो रही है.
नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने अपने ट्वीट के माध्यम से नफरत फैलाने वाले जेएनयू के स्कॉलर साजिद बिन सईद पर शिकंजा कसा है। सईद ने भारतीय सेना और आरएसएस पर कश्मीरियों के विनाशकारी नरसंहार ’का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस ने सईद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जल्द ही दिल्ली पुलिस सईद से पूछताछ शुरू कर सकती है। सईद ने ट्विटर पर अपने पोस्ट में कहा, “भारतीय सेना कश्मीरियों के नरसंहार को अंजाम देती है जो आरएसएस द्वारा तैयार किया जाता है। भाजपा सरकार को अपने क्षेत्रीय लालच को रोकना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र द्वारा गारंटीकृत स्व-निर्णय के लिए कश्मीरियों के अधिकार को स्वीकार करने के लिए तैयार होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का सही समय आ गया है। बता दें कि साजिद बिन सईद कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया का अध्यक्ष हैं। इमाम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल दिल्ली पुलिस ने जेएनयू पीएचडी स्कॉलर शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया है। बता दें कि पिछले साल दिसंबर में जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुई हिंसा और इस फरवरी के दिल्ली दंगों में आरोपी है, हाल ही में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। इमाम पर दिल्ली, असम और उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों द्वारा राजद्रोह, दंगे और सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने के लिए मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शरजील ने पिछले साल दिसंबर में जामिया परिसर के बाहर एक भड़काऊ भाषण दिया था।
अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के प्रस्तावित मॉडल की संशोधित आर्किटेक्ट डिजाइन अब फाइनल हो गई है। मंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा के मुताबिक मंदिर में एक शिखर होगा। इसके अलावा पांच गुंबद बनेंगे। इससे पहले के मंदिर मॉडल में दो गुंबद और एक शिखर प्रस्तावित था। सोमपुरा ने बताया कि शिखर की ऊंचाई बढ़ाकर 161 फुट की गई है। इसके साथ ही गुंबदों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की गई है। निखिल ने एनबीटी को फोन पर बताया कि मंदिर के जमीन का आकार भी बढ़ा दिया गया है। मंदिर निर्माण में पत्थरों का काम पूरा करवाने का दायित्व निखिल सोमपुरा और उनके भाई आशीष सोमपुरा को सौंपा गया है जबकि तकनीकी काम एल ऐंड टी कंपनी करेगी। गर्भगृह का उपरी भाग ही होगा मंदिर का शिखर सोमपुरा के मुताबिक, जहां रामलला का गर्भगृह बनेगा, उसके ऊपर के हिस्से को ही शिखर बनाए जाएगा। वहीं पांचों गुंबदों के नीचे के हिस्से में चार हिस्से होंगे। इसमें सिंहद्वार, नृत्य मंडप, रंगमंडप बनेगें। यहां श्रद्धालुओं के बैठने विचरण करने और विविध कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जगह रहेगी। निर्माण शुभारंभ के बाद काम होगा तेज सोमपुरा ने बताया कि पीएम मोदी जैसे ही मंदिर निर्माण का शुभारंभ 5 अगस्त को कर देंगे, उसके बाद से ही मंदिर निर्माण का काम तेज हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा सारा फोकस मंदिर के निर्माण को समय से पूरा करने पर होगा। इसको लेकर मेरी टीम काम कर रही है। मंदिर के मूल मॉडल में नहीं होगा परिवर्तन निखिल ने बताया कि मंदिर के मूल मॉडल में कोई परिवर्तन न करके केवल मंदिर के शिखर की ऊंचाई बढ़ाई गई है। गुंबदों की संख्या दो से बढ़ाकर पांच की गई है। मंदिर की भव्यता बढ़ाने के लिए इसका जमीनी क्षेत्रफल भी बढ़ाया गया है। मंदिर में पत्थर वही लगेंगे जो राम मंदिर कार्यशाला में तराश कर रखे गए हैं। इन पत्थरों की साफ सफाई कर चमकानें का काम दिल्ली की कंपनी कर रही है। मंदिर बनाने की ही जिम्मेदारी निखिल ने बताया कि मंदिर निर्माण पूरा करना ही उनकी जिम्मेदारी है, इसलिए सारा फोकस मंदिर के निर्माण पर ही है। 70 एकड़ क्षेत्र के बाकी प्रॉजेक्ट का काम श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट करवाएगा। इस क्षेत्र पर ट्रस्ट कई परियोजनाओं को लॉन्च करेगा। इसके अलग-अलग प्रॉजेक्ट बनाए जा रहे हैं।
भोपाल मध्य प्रदेश में बढ़ते कोरोना केस के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कोरोना पॉजिटिव (Shivraj Singh Chouhan corona positive) पाए गए हैं। उन्होंने खुद ट्वीट करके यह जानकारी दी है। शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा। आगे लिखा कि जरा सी चूक कोरोना को न्योता देती है। शिवराज सिंह चौहान ने लिखा मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, मुझे कोविड-19 के लक्षण आ रहे थे, टेस्ट के बाद मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी सभी साथियों से अपील है कि जो भी मेरे संपर्क में आए हैं, वह अपना कोरोना टेस्ट करवा लें। मेरे निकट संपर्क वाले लोग क्वारंटाइन में चले जाएं। जरा सी चूक कोरोना को निमंत्रण: शिवराज शिवराज सिंह ने आगे लिखा कि मैं कोरोना गाइड लाइन का पूरा पालन कर रहा हूं। डॉक्टर की सलाह से खुद को क्वारंटाइन करूंगा और इलाज कराऊंगा। मेरी प्रदेश की जनता से अपील है कि सावधानी रखें, जरा सी असावधानी कोरोना को निमंत्रण देती है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने कोरोना से सावधान रहने के हर संभव प्रयास किए लेकिन समस्याओं को लेकर के लोग मिलते ही थे। उन्होंने उनके संपर्क में आए लोगों से भी टेस्ट करवाने की अपील की। चौहान ने आगे लिखा कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना का समय पर इलाज होता है तो कोरोना बिल्कुल ठीक हो जाता है।
उधम सिंह नगर उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में फरार बदमाशों की उल्टी गिनती शुरू होने वाली है। जिले के पुलिस कप्तान दिलीप सिंह कुंवर ने फरार बदमाशों को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर बदमाश पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करते हैं तो पुलिस ताबड़तोड़ एनकाउंटर शुरू करेगी। इतना ही नहीं एसएसपी ने वांछित चल रहे अपराधियों को भी एक सप्ताह के भीतर धर दबोचने के निर्देश अधीनस्थ अधिकारियों को दिए हैं। एसएसपी ने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी दिलीप सिंह कुंवर के सख्त रुख अपनाने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। एसएसपी ने बताया कि जिले में 45 ऐसे बदमाश फरार चल रहे हैं जिन पर ढाई से 20 हज़ार रुपये तक का इनाम घोषित है। 140 अन्य बदमाश हैं वांछित इसके अलावा 140 लोग अलग-अलग मामलों में वांछित चल रहे हैं। इन सब की धरपकड़ के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। फरार इनामी बदमाश अगर पुलिस के सामने सरेंडर करते हैं तो उनको सीधे जेल भेज दिया जाएगा। लेकिन अगर 15 दिन के भीतर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो पुलिस अपराधियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ एनकाउंटर शुरू करेगी।
प्रयागराज अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Nirman) के लिए पांच अगस्त को प्रस्तावित भूमि पूज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली के पत्रकार साकेत गोखले की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आशंका आधारहीन है। दिल्ली के पत्रकार साकेत गोखले की ओर से भेजी गई लेटर पीआईएल में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाला भूमि पूजन कोविड-19 के अनलॉक-2 की गाइडलाइन का उल्लंघन है। कहा गया था कि भूमि पूजन में लगभग 300 लोग एकत्र होंगे, जो कोविड-19 के नियमों के विपरीत होगा। लेटर पिटीशन के माध्यम से भूमि पूजन के कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी। कहा गया था कि भूमि पूजन का कार्यक्रम होने से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ेगा। राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बनने जा रहे राम मंदिर (Ram Mandir) का भूमि पूजन 5 अगस्त को होना है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (shri ram janmabhoomi teerth kshetra) की आखिरी बैठक में मंदिर के डिजाइन में कई बदलावों को मंजूरी मिली। मसलन, अब मंदिर की ऊंचाई 120 फीट बढ़ाकर 161 फीट होगी। यह जानकारी मंदिर के चीफ आर्किटेक्ट रहे सी सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा ने दी है।
प्रयागराज अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Nirman) के लिए पांच अगस्त को प्रस्तावित भूमि पूज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली के पत्रकार साकेत गोखले की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आशंका आधारहीन है। दिल्ली के पत्रकार साकेत गोखले की ओर से भेजी गई लेटर पीआईएल में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाला भूमि पूजन कोविड-19 के अनलॉक-2 की गाइडलाइन का उल्लंघन है। कहा गया था कि भूमि पूजन में लगभग 300 लोग एकत्र होंगे, जो कोविड-19 के नियमों के विपरीत होगा। लेटर पिटीशन के माध्यम से भूमि पूजन के कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी। कहा गया था कि भूमि पूजन का कार्यक्रम होने से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ेगा। राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बनने जा रहे राम मंदिर (Ram Mandir) का भूमि पूजन 5 अगस्त को होना है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (shri ram janmabhoomi teerth kshetra) की आखिरी बैठक में मंदिर के डिजाइन में कई बदलावों को मंजूरी मिली। मसलन, अब मंदिर की ऊंचाई 20 फीट बढ़ाकर 161 फीट होगी। यह जानकारी मंदिर के चीफ आर्किटेक्ट रहे सी सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा ने दी है। पायलट खेमे के विधायकों पर फिलहाल विधायकी जाने का खतरा नहीं है। राजस्थान हाईकोर्ट के शुक्रवार को आए आदेश से उन्हें राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने स्पीकर से मौजूदा स्थिति बनाए रखने को कहा। मौजूदा स्थिति का मतलब ये कि स्पीकर सीपी जोशी अब सचिन पायलट समेत 19 विधायकों को कम से कम सोमवार तक अयोग्य घोषित नहीं कर पाएंगे। सोमवार को इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। सबसे पहले जानते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की कलह कठघरे तक क्यों पहुंची थी? राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने फोन टैपिंग कर 10 जुलाई को दावा किया था कि गहलोत सरकार गिराने की साजिश रची गई है। अगले ही दिन पायलट और उन्हें समर्थन देने वाले विधायक दिल्ली चले गए। गहलोत की बुलाई विधायक दल की बैठक में भी जब पायलट खेमे के विधायक नहीं पहुंचे, तो कांग्रेस ने स्पीकर से शिकायत की। 14 जुलाई को स्पीकर ने पायलट समेत 19 विधायकों को नोटिस जारी कर पूछा था- क्यों न आपको अयोग्य घोषित कर दिया जाए? 16 जुलाई को पायलट खेमा हाईकोर्ट पहुंच गया। तब से कांग्रेस की कलह कठघरे में है। जब हाईकोर्ट ने स्पीकर को कार्रवाई करने से रोक दिया है, तो आगे क्या होगा? 14 जुलाई के नोटिस पर स्पीकर सोमवार तक कदम नहीं उठा सकेंगे। दरअसल, हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई 21 जुलाई को हुई थी। तब हाईकोर्ट ने अपना फैसला 24 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया था और स्पीकर से कहा था कि वे तब तक इन विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें। स्पीकर ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी पर सोमवार को सुनवाई होगी। बागी विधायकों पर किस स्थिति में खतरा रहेगा? अगर अदालतों का आखिरी फैसला आने से पहले विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होता है तो पार्टियां व्हिप जारी करेंगी। फ्लोर टेस्ट में पायलट समेत सभी 19 विधायकों को भी कांग्रेस के पक्ष में वोट करना होगा, नहीं तो सदस्यता जाने का खतरा रहेगा। अगर वे वोटिंग करने विधानसभा नहीं पहुंचे, तो भी उनकी सदस्यता पर खतरा बना रहेगा क्योंकि ये व्हिप का उल्लंघन होगा। राजस्थान विधानसभा की मौजूदा स्थिति कुल सीटें = 200 बहुमत के लिए जरूरी = 101 कांग्रेस = 107 पायलट खेमे के 19 विधायकों को छोड़कर कांग्रेस (107-19) = 88 भाजपा+रालोपा (72+3) = 75 अन्य (निर्दलीय: 13, रालोद: 1, बीपीटी: 2, सीपीएम: 2)​​​​​ = 18 अब तक क्या हुआ? 10 जुलाई: राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने दाे फाेन नंबर सर्विलांस पर रखे थे। सरकार का दावा है कि टेप हुई बातचीत से पता चला कि राज्यसभा चुनाव के वक्त गहलोत सरकार गिराने की साजिश रची गई थी। 11 जुलाई: पायलट गुट के विधायक दिल्ली पहुंचे। सीएम ने मंत्रियों की बैठक ली। 12 जुलाई: पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया। 13 जुलाई: गहलोत ने विधायक दल की बैठक की, पायलट समेत 19 विधायक नहीं पहुंचे। 14 जुलाई: स्पीकर ने सचिन पायलट सहित 19 विधायकों को अयोग्यता का नोटिस दिया और 17 जुलाई को दोपहर 1:30 बजे तक जवाब मांगा। 16 जुलाई: नोटिस के खिलाफ पायलट सहित 19 विधायक हाईकोर्ट चले गए। पीछे-पीछे व्हिप चीफ महेश जाेशी ने सरकार की तरफ से कैविएट लगा दी कि कोई भी फैसला किए जाने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए। 17 जुलाई: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई की और मामला दो जजों की बेंच में भेजा। इस बेंच ने 18 जुलाई को सुनवाई तय की। 18 जुलाई: अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की और स्पीकर से कहा कि वे 21 जुलाई तक नोटिस पर कार्रवाई नहीं करें। स्पीकर ने भी कार्रवाई टाली। 20 जुलाई: हाईकोर्ट ने बहस पूरी न हो पाने के कारण कहा- 21 जुलाई को भी सुनवाई होगी। 21 जुलाई: हाईकोर्ट ने फिर मामले को सुना और फैसला 24 जुलाई के लिए सुरक्षित रख लिया। स्पीकर को भी तब तक के लिए कोई निर्णय नहीं करने के लिए कहा। 22 जुलाई: स्पीकर सीपी जोशी ने हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सचिन गुट ने भी कैविएट दाखिल की। 23 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। 24 जुलाई: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पीकर से मौजूदा स्थिति बनाए रखने को कहा। इससे पायलट खेमे के विधायकों को राहत मिल गई। इन विधायकों को नोटिस दिया गया सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पीआर मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत।
श्रीनगर, 24 जुलाई 2020,जम्मू कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 पिछले साल हटा दिया गया था. जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था. 5 अगस्त को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर एक साल हो रहा है. जम्मू कश्मीर के पहले उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने आजतक से खास बातचीत में प्रदेश के विकास से लेकर आतंकवाद और सुरक्षा-व्यवस्था तक, हर मुद्दे पर खुलकर बात की. मुर्मू ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के कारण विकास ने रफ्तार पकड़ी है. उन्होंने आतंकवाद में भी कमी आने का दावा किया और कहा कि साल 2015 में जम्मू कश्मीर के लिए केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए गए विशेष पीएम पैकेज का मात्र 17 फीसदी हिस्सा ही पिछले साल तक खर्च हुआ था. उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री विशेष पैकेज का 50 फीसदी हिस्सा पिछले एक साल में खर्च किया गया है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में कुछ बड़े प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं. आने वाले समय में इससे हुआ बदलाव नजर आने लगेगा. पिछले साल 5 अगस्त को करीब 4000 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे. उनमें से कुछ के अब भी हिरासत में होने के संबंध में पूछे गए सवाल पर मुर्मू ने कहा कि अधिकतर लोग रिहा किए जा चुके हैं. जो लोग अभी भी हिरासत में हैं, उनकी रिहाई की प्रक्रिया जारी है. मुर्मू ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के कारण विकास ने रफ्तार पकड़ी है. उन्होंने आतंकवाद में भी कमी आने का दावा किया और कहा कि स्थानीय आतंकियों की भर्ती में पिछले एक साल के दौरान बड़ी गिरावट आई है. इससे साफ है कि प्रदेश के लोग विकास चाहते हैं. उपराज्यपाल ने युवाओं को रोजगार देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया और कहा कि 30000 शिक्षकों को स्थायी किया गया है. 10000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. उपराज्यपाल ने कहा कि साल 2015 में जम्मू कश्मीर के लिए केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए गए विशेष पीएम पैकेज का मात्र 17 फीसदी हिस्सा ही पिछले साल तक खर्च हुआ था. प्रधानमंत्री विशेष पैकेज का 50 फीसदी हिस्सा पिछले एक साल में खर्च किया गया है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में कुछ बड़े प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं. आने वाले समय में इससे हुआ बदलाव नजर आने लगेगा. पिछले साल 5 अगस्त को करीब 4000 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे. उनमें से कुछ के अब भी हिरासत में होने के संबंध में पूछे गए सवाल पर मुर्मू ने कहा कि अधिकतर लोग रिहा किए जा चुके हैं. जो लोग अभी भी हिरासत में हैं, उनकी रिहाई की प्रक्रिया जारी है. पीएम ने मुझे लोगों को अधिकार दिलाने के लिए भेजा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ने हाई स्पीड इंटरनेट पर पाबंदी को लेकर कहा कि ऐसा कानून-व्यवस्था के चलते किया गया. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी समीक्षा की जा रही है. जहां-जहां जरूरत है, वहां हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा मुहैया कराई गई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुझे जम्मू कश्मीर में विकास की गति तेज करने और जमीनी स्तर पर लोगों को अधिकार दिलाने के लिए भेजा था. वह अपना काम कर रहे हैं. उपराज्यपाल मुर्मू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी के चुनाव हुए. विकास कार्यों में जमीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाई गई. उन्होंने दावा किया कि बैक टू विलेज कार्यक्रम के तहत जम्मू कश्मीर के दूरदराज के इलाकों में 20000 छोटे-बड़े कार्यों की सिफारिश की गई थी. इनमें से लगभग 7000 कार्य पूरे कर लिए गए हैं. कोरोना से विकास पर पड़ा असर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ने यह स्वीकार किया कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण विकास की रफ्तार पर भी असर पड़ा. उन्होंने कहा कि बाधाएं आई हैं, लेकिन आने वाले दिनों में जम्मू कश्मीर के विकास की रफ्तार और तेजी से बढ़ेगी. बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संसद में प्रस्ताव पास कराकर जम्मू कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 हटा दिया था. साथ ही पूर्ण राज्य का दर्जा भी समाप्त कर जम्मू कश्मीर और लेह, दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे.

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