Rajasthan

जयपुर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सोमवार को राजस्‍थान से राज्‍यसभा सदस्‍य चुन लिए गए। मनमोहन सिंह का चुनाव निर्विरोध हुआ है। चूंकि बीजेपी ने मनमोहन के खिलाफ कोई उम्‍मीदवार न उतारने का फैसला किया था इसलिए उम्‍मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख बीतने के बाद उन्‍हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। राज्‍य के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने मनमोहन सिंह को राज्‍यसभा के लिए चुने जाने पर बधाई दी। कांग्रेस ने ट्वीट करके उनके निर्वाचित होने पर शुभकामनाएं दीं। राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, 'मैं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को राजस्‍थान से राज्‍यसभा के सदस्‍य के रूप में निर्विरोध चुने जाने पर बधाई देता हूं। डॉ. सिंह का चुना जाना पूरे राज्‍य के लिए गर्व की बात है। उनके व्‍यापक ज्ञान और समृद्ध अनुभव से राजस्‍थान की जनता को बहुत लाभ होगा।' कांग्रेस ने भी दी बधाई इसी तरह कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से उनके निर्वाचन का प्रमाणपत्र साझा करते हुए ट्वीट किया, 'हम पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को राजस्‍थान से राज्‍यसभा सदस्‍य चुने जाने पर बधाई देते हैं। उनके ज्ञान के भंडार, कर्तव्‍य निष्‍ठा और वर्षों के अनुभव से सभी को लाभ होगा।' निर्विरोध चुना जाना लगभग तय था गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का राजस्थान से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना जाना लगभग तय था। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा था कि बीजेपी राजस्थान से राज्यसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी। राज्य विधानसभा का संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में है। राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 100 विधायक हैं जबकि उसके गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल का एक विधायक है। भारतीय जनता पार्टी के पास 72, बहुजन समाज पार्टी के पास छह, भारतीय ट्राइबल पार्टी, सीपीएम और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पास दो- दो विधायक है। 13 निर्दलीय विधायक हैं तो दो सीट खाली हैं।
जयपुर जहां एक ओर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने पहलू खान लिंचिंग मामले के सभी छह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के लिए राज्य की कांग्रेस सरकार की आलोचना की है, वहीं राजस्थान के बीएसपी विधायक सरकार के समर्थन में सामने आए हैं। राजस्थान में कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रहे बीएसपी के छह विधायकों ने शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और पार्टी प्रमुख के रुख से अपना अलग रुख दिखाया। मायावती ने शुक्रवार को ट्वीट किया था, 'राजस्थान कांग्रेस सरकार की घोर लापरवाही व निष्क्रियता के कारण बहुचर्चित पहलू खान माब लिंचिंग मामले में सभी छह आरोपी वहां की निचली अदालत से बरी हो गए, यह अतिदुर्भाग्यपूर्ण है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मामले में वहां की सरकार अगर सतर्क रहती तो क्या यह संभव था, शायद कभी नहीं।' बीएसपी विधायक राजेंद्र गुडा ने गहलोत से मुलाकात के बाद कहा, 'मायावती को गलत जानकारी दी गई थी। वह लखनऊ में बैठी हैं और जांच की प्रक्रिया से अपडेट नहीं हैं। वास्तव में, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कोई भी दलित अत्याचार का शिकार नहीं हो सकता।' गुडा ने हाल ही में मायावती पर उन उम्मीदवारों को चुनाव के लिए टिकट देने का आरोप लगाया था, जो पार्टी को सबसे ज्यादा रकम देते हैं। अन्य बीएसपी विधायकों ने भी पहलू खान के मामले में गहलोत पर भरोसा जताया। हालांकि, उन्होंने हरीश जाटव मॉब लिचिंग और पुलिस निष्क्रयता के कारण उनके नेत्रहीन पिता के आत्महत्या कर लेने के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
जयपुर राजस्थान के अलवर में पहलू खान की हत्या के मामले में अलवर जिला न्यायालय ने बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। उधर, राजस्थान अडिशनल चीफ सेक्रटरी (होम) राजीव स्वरूप ने कहा कि राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने फैसले के खिलाफ अपील करने के बारे में निर्णय लिया है। पहलू खान की हत्या की वारदात में 9 आरोपी पकड़े गए थे, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आपको बता दें कि गोतस्करी के शक में 1 अप्रैल 2017 को कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा पहलू खान की जमकर पिटाई की गई थी। डेयरी बिजनस करने वाले पहलू की 2 दिन बाद ही मौत हो गई थी। उधर, कोर्ट के फैसले पर पहलू के बेटे इरशाद ने अफसोस जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले से खुश नहीं है और आगे अपील करेंगे। कोर्ट में फैसला सुनाते वक्त कहा गया कि पुलिस आरोपियों को दोषी साबित नहीं कर पाई है। अडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर योगेंद्र खटाना ने कहा, 'कोर्ट ने लिन्चिंग के सभी 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।' उन्होंने यह भी कहा, ‘फैसले की प्रति अभी हमें नहीं मिली है। फैसले का अध्ययन करने के बाद हम अपील करेंगे।’ उधर, यह भी दावा किया गया कि विडियो में आरोपियों का चेहरा स्पष्ट तौर पर नहीं नजर आया। दूसरी तरफ विडियो बनाने वाला शख्स भी अपने बयान से मुकर गया। इन लोगों को किया गया बरी न्यायाधीश डॉ. सरिता स्वामी ने 7 अगस्त को दोनों पक्षों की बहस और अंतिम जिरह सुनने के बाद अपना फैसला बुधवार के लिए सुरक्षित रख लिया था। बालिग आरोपियों में विपिन यादव, रविंद्र कुमार, कालूराम, दयानंद, योगेश कुमार और भीम राठी शामिल थे, जिन्हें अदालत ने बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकील हुकुम चंद शर्मा ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, ‘यह उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो इस मामले की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे थे।’ 'विशेष रंग देकर उठाया गया था मामला' इस बहुचर्चित घटना के समय राज्य के गृहमंत्री रहे और फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने अदालत का फैसला आने के बाद कहा, ‘मैं शुरू से ही इस मामले में स्पष्ट था कि कानून की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। इस मामले को एक विशेष (राजनीतिक) रंग देकर देश भर में उठाया गया मानों हम इस तरह की हत्याओं के पक्षकार हैं।’ गाय खरीदने के बाद घर जा रहे थे पहलू गौरतलब है कि जिस वक्त पहलू खान पर हमला हुआ था, उस समय वह राजस्थान में गाय खरीदने के बाद हरियाणा जा रहे थे। यह मामला देशभर की मीडिया में सुर्खियां बना था। काफी समय तक यह मामला सियासी गलियारों में भी उछला। 6 लोगों को दे दी गई थी क्लीन चिट इस केस की खास बात यह है कि पीट-पीटकर हत्या की वारदात में 6 आरोपियों को क्लीन चिट दी जा चुकी थी। पुलिस के मुताबिक, सबूतों के आधार पर 6 आरोपियों को क्लीन चिट दी गई। उधर, पहलू खान के बेटे ने इसे धोखा बताया और कहा कि उनका परिवार फिर से जांच की मांग करेगा। एडीजी (सीआईडी-सीबी) पंकज कुमार सिंह ने बताया था, 'पहलू खान केस की जांच में 6 लोगों को क्लीन चिट दिया गया है। 9 दूसरे आरोपियों को आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ेगा।'
जयपुर , 14 अगस्त 2019,जयपुर में सोमवार की रात दो समुदाय आमने-सामने आ गए. दोनों तरफ से जमकर ईंट-पत्थर चले. सांप्रदायिक बवाल की इस घटना में 9 पुलिसकर्मियों समेत दोनों ही पक्ष के कुल 24 लोगों के घायल होने की खबर है. समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार बवाल के बाद एहतियातन 10 थाना क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बुधवार की रात तक के लिए निलंबित कर दी गई है और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह बवाल उस समय भड़का, जब एक पक्ष के लोग गाल्टा गेट के समीप दिल्ली हाईवे जाम कर रहे थे. इसी बीच हरिद्वार से चलने वाली एक बस पर किसी ने पत्थरबाजी कर दी. इस घटना में कुछ बस यात्रियों के चोटिल होने के बाद एक अफवाह उड़ी और दूसरे संप्रदाय के लोग भी सड़क पर उतर आए. देखते ही देखते दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस को भी भीड़ ने नहीं बख्शा. पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया. पुलिस के अनुसार उत्तेजित भीड़ ने लगभग आधा दर्जन कारों के शीशे टूट गए, वहीं एक दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ है. पुलिस के अनुसार तनाव की शुरुआत रविवार को हुई थी, जब कथित रूप से एक संप्रदाय की धार्मिक यात्रा में जा रहे यात्रियों के साथ दूसरे धर्म के लोगों ने गाल्टा गेट के समीप गलत बर्ताव किया था. एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर सरकारी कर्मचारियों के कार्यों में बाधा डालने, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध करने और पुलिस पर हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले तीन चिन्हित एडिशनल पुलिस कमिश्नर (प्रथम) संतोष चाके ने बताया कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले तीन व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है. इन लोगों ने ऐसी घटना की अफवाह फैलाई, जो हुई ही नहीं थी. वहीं एसीपी लांबा ने कहा कि अतिरिक्त पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है. मंगलवार को किसी घटना की खबर नहीं मिली. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और दोनों समुदायों के लोगों की शांति बैठक कराई.
जयपुर, 14 अगस्त 2019,राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुए सांप्रदायिक बवाल के बाद पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई है. पुलिस के मुताबिक, जयपुर मे गलता गेट, रामगंज, सुभाष चौक, माणक चौक, ब्रह्मपुरी, कोतवाली, संजय सर्किल, नाहरगढ़,शास्त्री नगर, भट्टा बस्ती, आदर्श नगर, मोती डूंगरी, लाल कोठी, ट्रांसपोर्ट नगर और जवाहर नगर में सोमवार रात से धारा 144 लागू कर दी गई है. जयपुर में सोमवार की रात दो समुदाय आमने-सामने आ गए. दोनों तरफ से जमकर ईंट-पत्थर चले. सांप्रदायिक बवाल की इस घटना में 9 पुलिसकर्मियों समेत दोनों ही पक्ष के कुल 24 लोगों के घायल होने की खबर है. बवाल के बाद एहतियातन 10 थाना क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बुधवार की रात तक के लिए निलंबित कर दी गई है और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह बवाल उस समय भड़का, जब एक पक्ष के लोग गाल्टा गेट के समीप दिल्ली हाईवे जाम कर रहे थे. सी बीच हरिद्वार से चलने वाली एक बस पर किसी ने पत्थरबाजी कर दी. इस घटना में कुछ बस यात्रियों के चोटिल होने के बाद एक अफवाह उड़ी और दूसरे संप्रदाय के लोग भी सड़क पर उतर आए. देखते ही देखते दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस को भी भीड़ ने नहीं बख्शा. पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया. पुलिस के अनुसार उत्तेजित भीड़ ने लगभग आधा दर्जन कारों के शीशे टूट गए, वहीं एक दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ है. पुलिस के अनुसार तनाव की शुरुआत रविवार को हुई थी, जब कथित रूप से एक संप्रदाय की धार्मिक यात्रा में जा रहे यात्रियों के साथ दूसरे धर्म के लोगों ने गाल्टा गेट के समीप गलत व्यवहार किया. एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर सरकारी कर्मचारियों के कार्यों में बाधा डालने, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध करने और पुलिस पर हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है
जयपुर, 12 अगस्त 2019, जनवरी 2017 में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' का जमकर विरोध करने वाली श्री राजपूत करणी सेना के एक धड़े ने दावा किया है कि वह भगवान राम के बड़े पुत्र लव के वंशज हैं. इससे पहले जयपुर की पूर्व राजकुमारी दिया कुमारी ने दावा किया था कि वह कुश की वंशज हैं. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई चल रही है, लेकिन इन दिनों राजस्थान के राजपूतों में एक बहस छिड़ गई है कि भगवान राम के असली वंशज कौन हैं. इस विवाद में कूदते हुए श्री राजपूत करणी सेना ने भगवान राम से नाता जुड़ने का दावा किया है. आजतक से बातचीत में श्री राजपूत करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी ने दावा किया कि वह भगवान राम के बड़े पुत्र लव के वंशज हैं. वह सिसोदिया राजपूत हैं जो लव के वंशज माने जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट के सवाल से शुरू हुआ विवाद इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पिछले हफ्ते 9 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या राम का कोई वंशज है, जवाब में राम जन्म भूमि की ओर से वकील ने कहा था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन जयपुर राजघराने की वंशज और पूर्व राजकुमारी दीया सिंह ने दावा किया कि जयपुर का राजघराना भगवान श्री राम के बेटे कुश का वंशज है और इसका दस्तावेज जयपुर राजघराने के पास मौजूद है. राम के वशंज होने का दावा करते हुए लोकेंद्र कालवी ने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद का हिस्सा बनना चाहेंगे, पूरे विवाद का जल्द से जल्द निपटारा हो. कई और घरानों का दावा लोकेंद्र कालवी ने जयपुर की पूर्व राजकुमारी दिया कुमारी का समर्थन करते हुए कहा कि वह कुश की वंशज हैं और हम लव के वंशज हैं. हालांकि उन्होंने यह साफ करने की कोशिश की कि यह बहस राम के वंशजों के बारे में नहीं बल्कि अयोध्या की भूमि को लेकर है. राजस्थान के राजसमंद से बीजेपी सांसद दीया कुमारी ने पिछले दिनों दावा किया कि वह श्री राम की वंशज हैं और श्रीराम के बेटे कुश से उनका रजवाड़ा निकला है. उनके इस दावे के बाद राजस्थान का मेवाड़ राजघराने ने भी भगवान श्रीराम के वंशज होने का दावा किया. दीया कुमारी ने एक पत्रावली के जरिए इसके सबूत भी पेश किए जिस पर अयोध्या के राजा श्री राम के वंश के सभी पूर्वजों का क्रमवार नाम लिखा हुआ है. इसी में 209वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है. मेवाड़ राजघराने के महेंद्र सिंह मेवाड़ ने भी दावा किया कि मेवाड़ राजपरिवार भगवान राम के पुत्र लव का वंशज है. मेवाड़ के पूर्व राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने दावा करते हुए बताया था कि कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक 'एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान' में जिक्र किया था कि श्रीराम की राजधानी अयोध्या थी और उनके बेटे लव ने लव कोट यानी लाहौर बसाया था. जबकि लव के वंशज बाद में गुजरात से होते हुए आहार यानी मेवाड़ में आकर बस गए जहां सिसोदिया राज्य की स्थापना हुई. पूर्व राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने दावे में कहा कि मेवाड़ का राज प्रतीक सूर्य है. श्रीराम भी शिव के उपासक थे और मेवाड़ परिवार भी भगवान शिव का उपासक है. यह मेवाड़ आज श्रीराम के वंशज होने के दावे को प्रमाणित करता है. कांग्रेस प्रवक्ता का भी दावा राम के वंशज होने के दावे पर राजस्थान में चल रहे विवाद पर कांग्रेस प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव ने भी भगवान राम के वंशज होने पर अपनी दावेदारी ठोक दी. सत्येंद्र सिंह राघव ने दावा किया कि लव और कुश राम-सीता के जुड़वा बेटे थे. कुश को दक्षिण कौशल यानी छत्तीसगढ़ में और लव का उत्तर कौशल में अभिषेक किया गया था. उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए वाल्मीकि रामायण के पेज नंबर-1671 का उल्लेख भी किया. कांग्रेस प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव ने अपने दावे की पुष्टि के लिए कहा कि कालिदास की कालजयी रचना रघुवंश के अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का और कुश को कुशावती का राजा बनाया था.
जयपुर, 31 जुलाई 2019,राजस्थान में अपराधी बेलगाम हो चुके हैं. इसका एक उदाहरण बीती रात देखने में आया. जोधपुर में आधी रात को बदमाशों ने 22 गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए. खास बात यह है कि इन वारदातों को अंजाम देने के बाद बदमाश बिना किसी रोकटोक मौके से फरार हो गए. ये सभी गाड़ियां पार्किंग में खड़ी थीं. इस वारदात के बाद लोगों में आक्रोश है. पुलिस इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. घटना के मुताबिक, अज्ञात युवकों ने देर रात नागौरी गेट ऊन गली गोदाम के बहार खड़े 22 चारपहिया वाहनों के कांच फोड़ डाले. नागौरी गेट ऊन गोदाम गली में एक ट्रस्ट है. इस ट्रस्ट के बाहर कई गाड़ियां खड़ी रहती हैं और देर रात भी यहां 30-35 गाड़ियां खड़ी थीं. रात को इनमें से 22 गाड़ियों के कांच अज्ञात लोगों ने फोड़ डाले. 22 गाड़ियों के कांच फोड़ने पर यहां के लोगों में आक्रोश है. कांच किसने फोड़े, उन युवकों का पता नहीं चल पाया है. लोगों की सूचना पर नागौरी गेट पुलिस मौके पर पहुंची और मौके का मुआयना किया. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस के अनुसार, नागौरी गेट ऊन गली के ट्रस्ट में कई लोग ठहरते हैं. ये लोग अपनी गाड़ियां बाहर पार्क करते हैं. बाहर चौकीदार नहीं होने की वजह से अज्ञात लोगों ने इन गाड़ियों के कांच फोड़े हैं. वारदात के बाद मोहल्लेवासियों में तोड़-फोड़ को लेकर रोष है. एक व्यक्ति की दोनों कारों में तोड़-फोड़ की गई है. मोहल्लेवासियों का कहना है कि कुछ युवक आए दिन तोड़-फोड़ और उत्पात करते हैं. शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है.
जयपुर देश भर में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर छिड़ी बहस के बीच राजस्थान सरकार ने इस मसले पर कानून बनाने की पहल की है। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग पर रोकथाम के लिए मंगलवार को विधानसभा में दो बिल पेश किए। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने वैवाहिक संबंधों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक, 2019 और राजस्‍थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 को सदन में पेश किया। विधेयक के अनुसार कथित सम्मान के लिए की जाने वाली हिंसा व कृत्य भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है और इन्हें रोकना जरूरी है। उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को अपने निर्णय में इस संबंध में कानून बनाने की सिफारिश की थी। मॉब लिंचिंग पर लगाम लगाने के मकसद से लाए गए विधेयक के अनुसार, भारत का संविधान समस्त लोगों को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता और विधियों के समान संरक्षण के अधिकार देता है। हाल में ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं, जिनके परिणामस्वरूप मॉब लिंचिंग के कारण व्यक्तियों की जीविका की हानि और उनकी मृत्यु हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 16 जुलाई को बजट भाषण के जवाब के दौरान मॉब लिंचिंग और आनॅर किलिंग को रोकने के लिए कानून बनाने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि मंगलवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस लीडर गुलाम नबी आजाद ने सरकार से कहा था कि उसे मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार इस मसले पर कुछ करने से पीछे हट रही है।
जयपुर, 29 जुलाई 2019, जयपुर के जेके लोन अस्पताल में आग लग गई. अस्पताल के प्रथम तल के आईसीयू वार्ड में एक कमरे में शॉर्ट सर्किट से धमाका हुआ जिसके बाद वहां मौजूद लोगों का दम घुटने लगा. जब आग लगी तो करीब 25 बच्चे उस वार्ड में थे. पहले सभी बच्चों को आईसीयू वार्ड में एडमिट कर दिया गया. एक डेढ़ साल की बच्ची की भी मौत हो गई. तीसरे मंजिल स्थित आईसीयू में बच्चों को लाया जा रहा है. दम घुटने की वजह से एक हरियाणा की डेढ़ महीने की बच्ची की मौत हो गई है. आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है. आग पूरे अस्पताल में नहीं फैली.
जयपुर राजस्थान के जयपुर में वैशाली नगर पुलिस स्‍टेशन में रविवार को 35 वर्षीया रेप पीड़‍िता ने खुद को आग लगा ली। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला की इलाज के दौरान मृत्‍यु हो गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले पीड़िता को 60 प्रतिशत जली हुई अवस्‍था में सवाई मान सिंह अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। पीड़‍िता का आरोप था कि पुलिस उसकी शिकायत पर ध्‍यान न देकर मामले में लापरवाही बरत रही है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में महिला के पति ने बताया, 'मेरी पत्‍नी ने दो महीने पहले 29 साल के शख्‍स के खिलाफ रेप की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन अब तक पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। पिछले दो महीने से जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है। उलटे पुलिस वाले मेरी पत्‍नी के साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं जैसे वही दोषी हो। एक एसीपी ने तो उस पर केस वापस लेन के लिए भी दबाव डाला। इसी सब से परेशान होकर उसने रविवार को खुद को आग लगा ली।' पुलिस की दलील वैशाली नगर पुलिस स्‍टेशन के एसएचओ संजय गोदारा का कहना था, 'रविवार को वह अपने बेटे के साथ पुलिस स्‍टेशन आई। अचानक उसने आग लगा ली। उसे तुरंत अस्‍पताल ले जाया गया।' जब एसएचओ से एफआईआर पर प्रगति और परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा अभी जांच चल रही है। एक दूसरे पुलिस अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, 'हमने फौरन ही एफआईआर लिख ली थी। आरोपी महिला का रिश्‍तेदार है। जांच में कुछ नई बातें निकल कर आई हैं जिनकी पुष्टि के लिए कुछ समय चाहिए।' इस बीच एक मैजिस्‍ट्रेट ने अस्‍पताल जाकर महिला का बयान ले लिया है।
जोधपुर, 28 जुलाई 2019,देश के बाकी हिस्सों की तरह राजस्थान में भी बारिश ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है. जोधपुर में रविवार को एक इमारत का एक हिस्सा गिर गया. इस हादसे में एक महिला की मौत हो गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत काफी पुरानी थी और भारी बारिश के कारण हादसे का शिकार हो गई. पुलिस के मुताबिक, जोधपुर के सरदारपुरा इलाके में रविवार सुबह एक बिल्डिंग गिर गई. बिल्डिंग जब गिरी उस समय एक महिला अंदर मौजूद थी. महिला की मौत हो गई है. यह बिल्डिंग काफी लंबे समय से जर्जर थी. नगर निगम प्रशासन ने नोटिस भी जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद महिला ने मकान नहीं खाली किया. स्थानीय पार्षद राम स्वरूप प्रजापत ने बताया कि निगम ने लंबे समय से मकान मालिक को नोटिस दे रखा था, लेकिन मकान मालिक ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा. इस कारण आज सुबह करीब छह 6:30 के बीच में मकान की छत गिर गई. इस हादसे में महिला की मौत हो गई.
जयपुर, 25 जुलाई 2019,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरुवार को जल संकट पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से चंडीगढ़ में मुलाकात करेंगे. राजस्थान के 10 जिले भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं. पानी की किल्लत को दूर करने के लिए अशोक गहलोत पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से बात करेंगे. राजस्थान सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरुवार को चंडीगढ़ में प्रदेश के इंदिरा गांधी नहरी तंत्र से जुड़े पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों की वर्षों से लंबित जल समस्याओं के समाधान के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे. बयान में कहा गया है कि दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक में फिरोजपुर फीडर की रिलाइनिंग के प्रस्ताव तैयार करने के लिए पंजाब सरकार से आग्रह किया जाएगा ताकि गंगनगर प्रणाली और भाखड़ा नहर प्रणाली को पूरा पानी मिल सके. इस फीडर की मरम्मत से दोनों प्रदेशों के किसानों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा. बैठक में हरिके पर स्थित हेड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी ताकि इंदिरा गांधी नहरी तंत्र की पूरी क्षमता का उपयोग हो सके और बरसात में पाकिस्तान जाने वाले व्यर्थ पानी का उपयोग हो सके. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं की बैठक में पंजाब से आने वाले गंदे पानी की समस्या निपटाने और राजस्थान के हिस्से के बाकी 0.60 एमएएफ पानी को प्राप्त करने पर भी चर्चा होगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, जल संसाधन के शासन सचिव नवीन महाजन समेत अन्य उच्च अधिकारी मौजूद रहेंगे. इस बैठक में पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.
पाठ्यक्रम से इतर विकसित करें कौशल : बिजारणियां लूणकरणसर, 15 जुलाई। पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री के अध्ययन के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपने कौशल को भी विकसित करना चाहिए ताकि रोजगार की समस्या का निस्तारण हो सके। यह बात युवा साहित्यकार राजूराम बिजारणियां ने कही। वे सोमवार को राजकीय महाविद्यालय लूणकरणसर में निःशुल्क प्रतियोगिता दक्षता कार्यक्रम के शुभारम्भ में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर नवाचार कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिजारणियां ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ साथ भाषा में रोजगार के रास्ते बताते हुए कहा कि 'साहित्य, पत्रकारिता, प्रूफ रीडिंग सहित विभिन्न ऐसे मार्ग हैं जिनके माध्यम से रोजगार की ओर कदम बढ़ाए जा सकते हैं।' इस दौरान महाविद्यालय प्राचार्य डॉ.नीरा सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ साथ समय समय पर विभिन्न सेमीनार एवं गतिविधियों में शिरकत करनी चाहिए ताकि उनका चहुंमुखी विकास हो सके। 'निःशुल्क प्रतियोगिता दक्षता कार्यक्रम' प्रभारी डॉ.रामकिशन चौधरी ने कहा कि इस मुहिम के तहत विद्यार्थियों को नई ऊर्जा एवं दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में सहायक आचार्य अक्षय कुमार ने विद्यार्थियों को लक्ष्य पर नजर रखने, डॉ.अलका झाझड़िया ने नियमित अध्ययन करने, डॉ.अर्चना पुरोहित और अर्चना गजराज ने टाइम मैनेजमेंट करने सम्बन्धित टिप्स दिए। कार्यक्रम का सफल संयोजन करते हुए सहायक आचार्य सुनीता बिश्नोई ने कार्यक्रम के तहत नवप्रवेशित विद्यार्थियों का का स्वागत अभिनन्दन किया।
तस्वीर जयपुर राजस्थान हाई कोर्ट ने अदालतों में जजों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप' जैसे संबोधनों पर रोक लगाने की सलाह दी है। कोर्ट ने संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का हवाला देत हुए कहा है कि वकीलों और कोर्ट के सामने पेश होने वाले लोगों को ऐसे संबोधनों का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। फुल कोर्ट की 14 जुलाई को हुई मीटिंग में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया। हाई कोर्ट ने जारी की नोटिस हाई कोर्ट ने एक नोटिस जारी कर इसकी जानकारी दी है। सोमवार को जारी नोटिस में राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान में वर्णित समानता के अधिकार का सम्मान करते हुए कोर्ट वकीलों और अदालत के सामने पेश होने वाले लोगों से यह आग्रह करती है कि वे माननीय न्यायाधीशों को 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप' जैसे संबोधनों से अड्रेस करना बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है टिप्पणी गौरतलब है कि देश में यह पहला ऐसा मौका है जब किसी कोर्ट ने जजों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे संबोधनों को खत्म करने का फैसला किया है। हालांकि, इससे पहले भी साल 2014 में एचएल दत्तू और जस्टिस एसए बोबडे की पीठ ने जजों के लिए ऐसे संबोधनों के इस्तेमाल की अनिवार्यता से इनकार किया था और कहा था कि उन्हें केवल सम्मानित तरीके से संबोधित किया जाना चाहिए।
जयपुर, 14 जुलाई 2019,राजस्थान में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. राज्य के राजसमंद जिले में जमीन विवाद से जुड़े मामले की जांच करने गए हेड कांस्टेबल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है. बताया जा रहा है कि कॉन्स्टेबल गनी मोहम्मद मामले की तफ्तीश करने गांव में गए थे. इस दौरान मामले में लिप्त आरोपियों ने 48 वर्षीय कॉन्स्टेबल की पिटाई शुरू कर दी. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ग्रामीण मूक-दर्शक बने रहे. बताया जा रहा है कि पिटाई के बाद कॉन्स्टेबल गनी मोहम्मद को घायल अवस्था में अस्‍पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस मामले में पुलिस महकमे के बड़े अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कॉन्स्टेबल की पिटाई की सूचना पर डीएसपी राजेंद्र सिंह, सीआई लाभूराम विश्नोई और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पड़ताल शुरू की. टीम हमलावरों का पता लगाने में जुटी है. एडिशनल एसपी राजेश गुप्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि अज्ञात शरारती तत्वों ने एक मामले की जांच के दौरान गनी मोहम्मद पिटाई की, उनके सिर पर गंभीर चोट आई जिससे उनकी मौत हो गई. अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. मामले में जांच जारी है. बता दें कि हेड कॉन्स्टेबल अब्दुल गनी पिता अब्दुल अजीज जहाजपुर भीलवाड़ा के रहने वाले थे. वे फरवरी 1995 में राजस्थान पुलिस की सेवा से जुड़े थे. उसके बाद पुलिस कॉन्स्टेबल के रूप में राजसमंद जिले के कुंवारिया, आमेट, देवगढ़, राजसमंद एवं भीम पुलिस थाना क्षेत्र में सेवाएं दी. जानकारी के मुताबिक हेड कॉन्स्टेबल के परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है.
नई दिल्ली, 12 जुलाई 2019, राजस्थान के बूंदी जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई. पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी 2 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें कुछ लोग हाथापाई करते दिख रहे हैं. पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है. इस मामले पर बूंदी के तहसीलदार बीएस राठौर ने कहा कि आरएसएस की शाखा के दौरान पास के ही पार्क में मुस्लिमों का एक कार्यक्रम चल रहा था. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. स्थिति नियंत्रण में है. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की शाखा के दौरान झड़प का ये कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई बार संघ की शाखा में झड़प की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) उन लोगों पर भी खास फोकस कर रहा है जो उसकी विचारधारा के समर्थक तो हैं, मगर नौकरी आदि कारणों से भोर में लगने वाली शाखाओं में नहीं जा पाते हैं. ऐसे लोगों को अपने मिशन से जोड़ने के लिए संघ में बड़ी योजना पर काम चल रहा है. युवाओं को उनके प्रोफेशन से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. संघ के प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तरह उन्हें भी महत्व दिया जा रहा है. संघ की ओर से ऐसे युवाओं को प्रस्ताव दिया जा रहा है कि स्वयंसेवक बनने कि लिए शाखा में जाना ही जरूरी नहीं है, वे नौकरी से जब भी फुर्सत पाएं तो सुविधानुसार कुछ घंटे आरएसएस के अनुषांगिक प्रकल्पों (प्रोजेक्ट) के लिए निकालें.
राजस्थान के बूंदी में बुधवार शाम को आरएसएस शाखा पर हमले की घटना पर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ. सदन में बीजेपी नेताओं ने कहा कि ये केरल, बंगाल नहीं राजस्थान है ये कष्ट का विषय है, आरोपी गिरफ्तार हों. ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं होंगे. ऐसे लोगों को संरक्षण न दें. हम मुंडी पकड़कर पुलिस के हवाले करेंगे. सरकार दबाव में है, इसलिए कार्यवाही नहीं हो रही है. विपक्ष के आरोपों के बाद संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि मामलू सी घटना थी किसी को चोट नहीं आई. मामूली सी घटना, 2 गिरफ्तारियां बूंदी में आरएसएस कार्यकर्ताओं पर हमले पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने सदन में बूंदी की घटना पर सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने कहा, सरकार बताए क्या कार्यवाही की गई? इस पर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल बोले, लड़कियां झूला झूल रही थी, संघ की शाखा के लड़के आये विवाद हो गया. दिलावर ने 50 का नाम लिया तो 5-6 के खिलाफ ही मामला दर्ज क्यों कराया? 2 गिरफ्तारी हो चुकी है. मैंने रात को ही मदन दिलावर और गुलाब चंद कटारिया को जानकारी दे दी थी. मामूली सी घटना थी, किसी को चोट नहीं आई. सदन में हुआ हंगामा, स्पीकर डॉ. जोशी को आना पड़ा आरएसएस की शाखा पर हुए हमले के मामले में विधायक मदन दिलावर ने सवाल उठाया था. इस मसले पर गुलाबचंद कटारिया बोलना चाहते थे. उन्होंने कार्रवाई की मांग की. इस पर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि पर्ची पर आप नहीं बोल सकते. इस टिप्पणी पर इस दौरान हंगामा हुआ. नाराज भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया. हंगामा बढ़ने के बाद सभापति की जगह अध्यक्ष सीपी जोशी को सदन में आना पड़ा. जवाब तो देना पड़ेगा विधानसभा में हंगामे के बाद नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने गृहमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा, घटना गम्भीर है, जवाब तो देना पड़ेगा. इस पर माहौल को संभालने के लिए आसन पर लौटे डॉ. सीपी जोशी ने गुलाब कटारिया की बात को काटा. उधर, जोशी ने धारीवाल को हिदायत देते हुए कहा कि आप संसदीय कार्य मंत्री हैं आसन पैरों पर है, फिर भी आप बोल रहे हैं. मैं सदन की गरिमा कम नहीं होने दूंगा. सदस्यों को बोलने का पूरा मौका दूंगा. पर्ची का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा. ये है मामला विधानसभा में बताया गया कि बूंदी के बालचन्द पाड़ा में बुधवार को शाखा चल रही थी इसी बीच योजनाबद्ध तरीके से हमला किया गया. मासूम बच्चों से मारपीट का वीडियो भी बनाया गया. जानकारी के अनुसार मारपीट में तीन बच्चों को मामुली चोटें आई. हिन्दू संगठनों ने आरोपियों की गिरप्तारी की मांग की गई. कोतवाली पुलिस ने शफी मोहम्मद नामक एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया.
जयपुर, 11 जुलाई 2019, राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार भले ही बना ली हो लेकिन सरकार के अंदर खींचतान का दौर जारी है. अब तक इशारों-इशारों में एक दूसरे पर हमला कर रहे अशोक गहलोत और सचिन पायलट अब खुलकर आमने-सामने आ गए हैं. सचिन पायलट कह रहे हैं कि जनता ने अशोक गहलोत के नाम पर वोट नहीं दिया और ऐसा ही आरोप अशोक गहलोत भी सचिन पायलट पर लगा रहे हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बारे में कहा जाता है कि उन्हें (अशोक गहलोत) पता है कि कब, कहां और कितना बोलना है. बजट पेश करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री बनने के 8 महीने बाद आखिरकार उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को साफ कर दिया कि वह राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने का मंसूबा ना पालें. अशोक गहलोत ने कहा कि विधानसभा चुनाव में लोगों ने उनके नाम पर वोट दिए हैं. उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिए हैं. इसलिए कांग्रेस पार्टी ने उनको मुख्यमंत्री बनाया है. किसी और के नाम पर वोट नहीं मिले हैं. जो मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में भी नहीं थे वह भी अपना नाम आगे ला रहे हैं. दरअसल कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने के छुपे हुए अभियान से परेशान हैं और बजट पेश करने के बाद इस मुद्दे पर आर-पार करने के मूड में हैं. गहलोत ने इशारों-इशारों में आलाकमान को भी साफ कर दिया राजस्थान का बॉस मैं हूं. यहां दो नेता नहीं चलेंगे, लेकिन 5 साल तक राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष रहकर विधानसभा चुनाव में नेतृत्व करने वाले नौजवान नेता सचिन पायलट कहां चुप बैठने वाले थे. पायलट को लगता है कि 5 साल तक हमने मेहनत की और जब मलाई खाने का वक्त आया तो गहलोत टपक पड़े. पायलट को लगता था कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी उनको मौका देंगे मगर कोई कुछ नहीं बोल रहा है तो पायलट की भी बेसब्री बढ़नी लाजमी है. बिना पत्रकारों के सवाल पूछे ही पायलट ने कहा कि राजस्थान में सरकार कार्यकर्ताओं की मेहनत से बनी है और राहुल गांधी के नाम पर बनी है न कि किसी और के नाम पर बनी है. पायलट ने बजट पर बोलने के लिए पत्रकारों को बुलाया था मगर किसी ने अशोक गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं मांगी तो खुद ही बोल दिया और पत्रकारों को यह भी कह दिया कि आप लोग कठिन सवाल नहीं पूछते. माना जा रहा है कि राजस्थान में दोनों के बीच की लड़ाई अब इस स्तर पर पहुंच गई है कि अगर इस मुद्दे पर जल्द कोई फैसला नहीं हुआ तो पार्टी के लिए ठीक नहीं होगा और राज्य में सरकार चलाना भी कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा.
जयपुर, 10 जुलाई 2019,राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने आज यानी बुधवार को बजट पेश किया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसान कल्याण कोष बनाने का ऐलान किया है, जिसके लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया है. इसके अलावा हर ग्राम पंचायत में नंदी गाय आश्रयों की स्थापना की जाएगी. बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बजट दस्तावेज प्रदेश की आर्थिक नीतियों का एक ऐसा आईना है जिसमें जनता अपनी उम्मीदों और अपने सपनों का प्रतिबिंब देखती है. यह बजट हमारे पंचवर्षीय विजन पर आधारित है. आगामी 5 वर्षों में विकास के लाभ से वंचित रहे समस्त आकांक्षी वर्गों तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता है. बजट में प्रमुख घोषणाएं- -कुचामन डेगाना नागौर के कुल 1926 ढाणियों में रहने वाले 315000 की आबादी को लाभान्वित करने के लिए परियोजना स्वीकृत. -बीकानेर में भी पेयजल परियोजना की 11 लाख 40000 आबादी को परियोजना पेयजल. -जवाई बाध से शिवगंज ग्रामीण क्षेत्र के लिए पेयजल परियोजना के लिए डीपीआर तैयार की जाएगी. -नवीन औद्योगिक क्षेत्रों की भी स्थापना की घोषणा. -MSME के नए कानून बनाने का जिक्र. -उद्यमियों को प्रतिस्पर्धा के लिए मुख्यमंत्री लघु उद्यमी योजना की घोषणा. -10 करोड़ तक के ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाएगा. इसमें स्वयं सहायता समूहों को भी चिन्हित किया जाएगा. -इसके लिए 2019-2020 में 50 करोड़ और ढाई वर्षों में 200 करोड़ का प्रावधान होगा. -3 वर्ष तक बिना रजिस्ट्रेशन उद्योग चलाने की मंजूरी वाला पहला राज्य. -राज्य में मोहल्ला और जनता क्लीनिक खोले जाएंगे. -निःशुल्क जांच की सुविधा 70 से बढ़ाकर 90 कराने की घोषणा. -मेडिकल कॉलेज से संबंधित सभी अस्पतालों में होगी जांच. -किडनी, हार्ट और कैंसर जैसे गंभीर रोग की दवाएं निःशुल्क दवा योजना में शामिल. -कुल 104 प्रकार की नई दवाएं भी इसमें शामिल करने की घोषणाएं. - गुटखा आदि खाने की रोक की योजना बनेगी. -श्रीगंगानगर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा. -50 करोड़ की लागत से महात्मा गांधी संस्थान बनाने की घोषणा. -गांधी दर्शन म्यूजियम भी बनाया जाएगा. -राजीव गांधी जल संचय योजना शुरू करने की भी घोषणा. -प्रदेश के गांवों में मास्टर प्लान बनाए जांएगे. -वृद्धावस्था, विधवा और निशक्त पेंशन बढ़ाने की घोषणा. -पेंशन में वृद्धि से 62 लाख पेंशनधारियों को लाभ. -गंगापुर सिटी के वर्तमान चिकित्सालय को क्रमोन्नत करने की घोषणा. -शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य के चिकित्सा संस्थानों में इंदिरा प्रियदर्शिनी बेबी किट उपलब्ध करवाई जाएगी. -अस्पतालों में 500 बेड बढ़ाए जाएंगे. -राज्य के कुचामन सिटी में अस्पताल में ब्लड बैंक की स्थापना की जाएगी. - इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी. -वाहन प्रदूषण में कमी लाने, पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राथमिकता. - इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति लाई जाएगी.
जयपुर राहुल गांधी के खिलाफ कोकीन टिप्पणी को लेकर राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यन स्वामी चौतरफा घिर गए हैं। उनके खिलाफ राजस्थान में 20 याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं के बाद मंगलवार को विभिन्न पुलिस स्टेशनों में सुब्रमण्यन के खिलाफ 39 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। ये एफआईआर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दर्ज कराई हैं। लिखें सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव और पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख सुशील शर्मा ने भी यहां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की। बयान के लिए माफी मांगें स्वामी सुब्रमण्यन स्वामी ने कथित रूप से राहुल पर नशीले पदार्थ लेने का आरोप लगाया था। इसके बाद से कांग्रेस कार्यकर्ता उनपर भड़के हुए हैं। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने आवेदन में धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 505 सार्वजनिक अपमानित करने वाले बयान) और आईपीसी की धारा 511 के तहत केस दर्ज कराया। कांग्रेस ने मांग की है कि स्वामी अपने बयान के लिए माफी मांगें। शिकायतकर्ताओं ने अपने परिवाद में कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ स्वामी द्वारा की गई टिप्पणी से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं और यह कृत्य मानहानि के रूप में माना जाना चाहिए। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और विधि, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग के अध्यक्ष सुशील शर्मा की ओर से जयपुर की एसीजेएम अदालत नं. 12 मेट्रो सिटी में स्वामी के खिलाफ सोमवार को अपराधिक परिवाद दायर कराया गया। शर्मा ने अपने परिवाद में सीआरपीसी की धारा 357 (3) के तहत एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की है। कांग्रेस की छवि खराब करने की कोशिश शर्मा ने कहा कि डॉ. सुब्रमण्यन स्वामी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छवि को खराब कर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए पांच जुलाई को जानबूझकर राहुल गांधी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की। स्वामी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसी तरह के परिवाद बांरा और बूंदी के मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट की अदालतों में शनिवार को और टोंक के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सोमवार को दायर किए गए।
जयपुर, 07 जुलाई 2019,जयपुर के सीरियल रेपिस्ट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. सिकंदर उर्फ जीवाणु नाम का यह आरोपी जयपुर में 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के बाद कोटा में छुपा हुआ था. सिकंदर इससे पहले भी 2014 और 2015 में छोटी बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार हो चुका है. हालांकि, वह जमानत पर बाहर था. 22 जून और 1 जुलाई को भी इसने जयपुर शहर में 2 छोटी बच्चियों के साथ रेप किया. रेपिस्ट सिकंदर की वजह से पिछले 5 दिनों से जयपुर शहर में तनाव का माहौल बना हुआ था और पुराने शहर में इंटरनेट सेवाएं तक बंद करनी पड़ी थीं. सिकंदर की पहचान सीसीटीवी फुटेज से हुई, जिसमें वो बच्ची को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाते हुए दिखा था. पुलिस ने जब जयपुर के अपराधियों की सूची खंगालने शुरू की तो सिकंदर उर्फ जीवाणु का पता चला. पिछले तीन मामलों में अपराध करने का इसका एक ही तरीका था. छोटी बच्चियों से जाकर का कहता था कि उसके रिश्तेदार बुला रहे हैं. कभी कहता कि पिता या भाई बुला रहे हैं और फिर मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म कर उन्हें फेंक देता था. 2001 में इसने पहली वारदात की थी तब नाबालिग होने की वजह से यह छूट गया था. 2014 में भी एक छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसने हत्या कर दी थी जिसमें उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी, लेकिन 2015 में उसे जमानत मिल गई. 34 साल का यह सीरियल रेपिस्ट खानाबदोश है और जयपुर में नाई की थड़ी में किराए के मकान में रहता है. 7 साल और 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म पुलिस से पूछताछ में उसने कबूला है कि 1 जुलाई और 22 जून को जयपुर के शास्त्रीनगर इलाके में 7 साल और 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था. 2015 में भी जमानत पर बाहर आने के बाद उसने भट्टा बस्ती इलाके में दो बच्चों से छेड़छाड़ की थी, तब पुलिस ने पकड़ लिया था लेकिन वो पुलिसकर्मियों पर सरिए से हमला कर भाग निकला था. इस पर अब तक 12 केस दर्ज हो चुके हैं और 6 बार जेल जा चुका है. जयपुर में सिकंदर की वजह से सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए पुलिस ने 400 पुलिसकर्मियों की 20 टीमें बनाई थीं. रेपिस्ट के मोबाइल नंबर की लोकेशन को खंगालते हुए पुलिस कोटा तक पहुंची. शनिवार की शाम 5:00 बजे रेपिस्ट सिकंदर कोटा में भीमगंज में बाबू चाय वाले की थड़ी पर चाय पी रहा था तभी पुलिस ने उसे धर दबोचा. सिकंदर के घर में पुलिस को कॉपी मिली है जिसमें लिखा है सिकंदर उर्फ मौत का कहर .कॉपी के पहले पेज पर उसने एक महिला का स्केच बना रखा है जिस पर लिखा है शहनाज. इसी कॉपी के आखिरी पेज पर आरोपी ने खुद का भी स्केच बनाया है.
जयपुर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में भारत का एक और शहर शामिल हो गया है। राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज घोषित कर दिया गया है। यह ऐलान यूनेस्को ने शनिवार को किया। बता दें कि राजस्थान में 37 वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं। इनमें चित्तौड़गढ़ का किला, कुंभलगढ़, जैसलमेर, रणथंभोर, और गागरोन का किला शामिल हैं। लिखें पीएम ने दी बधाई यह ऐलान यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी के अजरबेजान के बाकू में जारी 43वें सत्र के बाद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर ट्वीट कर बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया है- 'जयपुर का संबंध संस्कृति और शौर्य से है। उत्साह से भरपूर जयपुर की मेहमाननवाजी लोगों को इसकी ओर खींचती है। खुशी है कि इस यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया है।' पिछले साल भेजा था प्रस्ताव पिछले साल अगस्त में पिंक सिटी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करने के लिए सरकारी की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। आईसीओएमओएस (स्मारक और स्थल पर अंतरराष्ट्रीय परिषद) ने 2018 में शहर का निरीक्षण किया था। नामांकन के बाद बाकू में डब्ल्यूएचसी ने इस पर गौर किया और इसे यूनेस्को विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल किया। राजस्थान में ऐतिहासिक शहर जयपुर की स्थापना सवाई जय सिंह द्वितीय के संरक्षण में हुई थी। यह सांस्कृतिक रूप से संपन्न राज्य राजस्थान की राजधानी है। 2017 के ऑपरेशन गाइडलाइन के तहत एक राज्य से हर साल सिर्फ एक स्थान को ही वर्ल्ड हेरिटेज बनाने के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। यह दर्जा मिलने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने से लोकल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और लोगों को रोजगार भी मिलता है। हस्तशिल्प और हस्तकरघा उद्योग की भी आमदनी को भी फायदा होता है।
जयपुर , 04 जुलाई 2019,जयपुर में इनकम टैक्स विभाग को 100 करोड़ की संपत्ति की ऐसी मालकिन मिली है जो परिवार चलाने के लिए पाई-पाई की मोहताज है. इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर दिल्ली हाईवे पर 100 करोड़ से ज्यादा की कीमत की 64 बीघा जमीन खोज निकाली है जिसकी मालकिन एक आदिवासी महिला है और उसे यह भी पता नहीं है कि उसने जमीन कब खरीदी और कहां पर है? इनकम टैक्स विभाग ने इन जमीनों को अपने कब्जे में ले लिया है. जयपुर-दिल्ली हाईवे पर दंड गांव में पड़ने वाली इन जमीनों पर इनकम टैक्स के अधिकारियों ने बैनर लगा दिए हैं. बैनर पर लिखा है कि बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम के तहत इस जमीन को बेनामी घोषित करते हुए आयकर विभाग अपने कब्जे में ले रहा है. 5 गांव के 64 बीघे की जमीन पर लगे बैनरों पर लिखा हुआ है कि इस जमीन की मालकिन संजू देवी मीणा हैं. जो इस जमीन की मालकिन नहीं हो सकती हैं, लिहाजा इस जमीन को इनकम टैक्स विभाग फौरी तौर पर अपने कब्जे में ले रहा है. दरअसल आयकर विभाग को शिकायत मिली थी कि दिल्ली हाईवे पर बड़ी संख्या में दिल्ली और मुंबई के उद्योगपति आदिवासियों के फर्जी नाम पर जमीन खरीद रहे हैं. इनका सिर्फ कागजों में लेन-देन हो रहा है. कानून के मुताबिक, आदिवासी की जमीन आदिवासी ही खरीद सकता है. कागजों में खरीदने के बाद यह अपने लोगों के नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी साइन करा कर रख लेते हैं. इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने इसके असली मालिक की खोजबीन शुरू की तो पता चला की जमीन की मालकिन राजस्थान के सीकर जिले के नीम के थाना तहसील के दीपावास गांव में रहती हैं. पहाड़ियों के नीचे बसे इस गांव में पहुंचना आसान नहीं है. आजतक की टीम जब दीपावास गांव में पहुंची तो संजू देवी मीणा ने कहा कि उसके पति और ससुर मुंबई में काम किया करते थे. उस दौरान 2006 में उसे जयपुर के आमेर में ले जाकर एक जगह पर अंगूठा लगवाया गया था. मगर उनके पति की मौत को 12 साल हो गए हैं और वह नहीं जानती हैं कि कौन सी संपत्ति उनके पास है और कहां पर है. पति की मौत के बाद ₹5000 कोई घर पर दे जाता था जिसमें से ढाई हजार रुपए फुफेरी बहन साथ रखती थी और ढाई हजार मैं रखती थी, लेकिन कई साल हो गए अब पैसे भी देने कोई नहीं आता. मुझे तो आज ही पता चला कि मेरे पास इतनी संपत्ति है. संजू देवी के पति की मौत के बाद कमाई का कोई जरिया नहीं है और दो बच्चों को पालने के लिए खुद ही मजदूरी करती हैं. संजू देवी खेती के अलावा जानवर पालकर गुजारा करती हैं. इनकम टैक्स के इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि गांव वालों का कहना है कि कई कंपनियों ने यहां जमीन खरीदी है जिनके बारे में कहा जाता है कि कंपनी की जमीन है मगर कोई नहीं जानता किसकी है. पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स विभाग इस इलाके में 1400 करोड़ की जमीन जब्त कर चुकी है जिनमें से 69 मामलों में कोर्ट ने फैसला देते हुए जमीन को इनाम घोषित कर सरकार को सौंप दी है.
जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर के शास्‍त्रीनगर इलाके में सात साल की बच्‍ची से दुष्‍कर्म का मामला सामने आया है। सोमवार शाम को हुई इस घटना के बाद नाराज लोगों ने देर रात प्रदर्शन किया। स्‍थानीय लोगों की उग्र भीड़ का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा, इस वजह से हालात तनावपूर्ण बताए जाते हैं। कानून-व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए इलाके में आरएसी ओर एसटीएफ को तैनात किया गया है। स्थानीय पुलिस ने मासूम से रेप की पुष्टि की है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार, शास्‍त्रीनगर थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक बाइक सवार घर के बाहर खेल रही नाबालिग बच्‍ची को अपने साथ ले गया। उसने बच्‍ची से कहा था कि वह उसके पिता का दोस्‍त है। बताया जाता है कि आरोपी अमानीशाह नाले के पास रेप करके करीब दो घंटे के बाद बच्‍ची को उसके घर के पास फेंककर चला गया। अस्पताल के बाहर गुस्साई भीड़ मासूम की हालत गंभीर देखकर परिवार ने उसे पहले कांवटिया अस्‍पताल में भर्ती कराया, हालत में सुधार न होने पर देर रात उसे जेके लोन अस्‍पताल में रेफर कर दिया गया। नाराज भीड़ रात भर अस्‍पताल के बाहर जुटी रही। मौके पर पहुंचे पुलिस के आला अधिकारियों ने आरोपी की जल्‍द‍ गिरफ्तारी का आश्‍वासन दिया है। गौरतलब है कि शास्‍त्रीनगर थाना क्षेत्र में कुछ ही दिन पहले चार साल की बच्‍ची के साथ भी रेप की घटना हुई थी। इस मामले में पुलिस अभी तक अपराधियों का पता नहीं लगा पाई है।
जयपुर, पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह राजस्थान से राज्यसभा उम्मीवार बन सकते हैं. भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य मदन लाल सैनी के निधन के बाद राज्य के कोटे की एक राज्यसभा सीट खाली हुई है. जिसे लेकर कांग्रेस के अंदर मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेजे जाने की कवायद चल रही हैं. बता दें कि 24 जून को मदनलाल सैनी का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. कांग्रेस के पास BJP से ज्यादा MLA मदन लाल सैनी के राज्यसभा सदस्य बने हुए अभी 6 महीने हुए थे. ऐसे में पांच साल से ज्यादा का वक्त अभी बचा हुआ है. माना जा रहा है कि जुलाई में प्रदेश में कभी भी राज्यसभा के लिए चुनाव हो सकता है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद राजस्थान में कांग्रेसी विधायकों की तादाद बढ़ी है. ऐसे में कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में जीतने की उम्मीद है. कांग्रेस के पास सीट जीतने का मौका कांग्रेस के पास फिलहाल 100 खुद के विधायक हैं और ग्यारह निर्दलीय विधायक हैं, जो कांग्रेस के एसोसिएट मेंबर बन चुके हैं. इसके अलावा कांग्रेस को यहां बहुजन समाज पार्टी और भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायकों का भी समर्थन हासिल है जबकि बीजेपी के पास केवल 72 विधायक ही हैं. ऐसे में 200 सदस्यीय वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास राज्यसभा की यह सीट जीतने का मौका है. इसके बाद अगस्त 2020 में बीजेपी के तीन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. मगर कांग्रेस इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहती है और मनमोहन सिंह को राज्यसभा में भेजना चाहती है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार इसके लिए तमिलनाडु में डीएमके से भी बातचीत चल रही थी. मगर अब राजस्थान में मौका आया है और जीत सुनिश्चित है. लिहाजा कांग्रेस मनमोहन सिंह को लेकर कहीं और रिस्क नहीं लेना चाहती है. 14 जून को खत्म हुआ कार्यकाल गौरतलब है कि मनमोहन सिंह का राज्यसभा में कार्यकाल 14 जून को खत्म हो गया है. वह असम से लगातार पांच बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. जब वह प्रधानमंत्री थे, तब भी वह राज्यसभा से ही चुनकर आए थे. 15 जून, 2013 को उनका आखिरी कार्यकाल शुरू हुआ था जो 14 जून को खत्म हुआ
धौलपुर राजस्थान के धौलपुर में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर ने आत्मसमर्पण कर दिया है. जगन गुर्जर पर धौलपुर के एक गांव में 12 जून को दो महिलाओं से मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने का आरोप है. इसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी, लेकिन वह चंबल के भीहड़ में छिपा हुआ था. आज यानी शुक्रवार को उसने धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सामने आत्मसमर्पण किया.
धौलपुर राजस्थान के धौलपुर में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर ने आत्मसमर्पण कर दिया है. जगन गुर्जर पर धौलपुर के एक गांव में 12 जून को दो महिलाओं से मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने का आरोप है. इसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी, लेकिन वह चंबल के भीहड़ में छिपा हुआ था. आज यानी शुक्रवार को उसने धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सामने आत्मसमर्पण किया.
जयपुर, 27 जून 2019,जयपुर में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के दफ्तर के बाहर कई मीडियाकर्मी धरने पर बैठ गए हैं. दरअसल, सरकार ने विधानसभा में पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाने के साथ मंत्रियों को अपने कमरों में पत्रकारों से बातचीत न करने का फैसला किया है. इस फैसले का मीडियाकर्मी विरोध कर रहे हैं. बता दें कि राजस्थान विधानसभा का सत्र आज से शुरू हुआ है. सदन के अंदर विपक्ष के हंगामे से ज्यादा सदन के बाहर पत्रकारों का हंगामा चल रहा है. इस बार विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने विधानसभा के कवरेज के लिए बनने वाले पासों में भी भारी कटौती कर दी है. वरिष्ठ पत्रकारों के पास और एक संस्थान से पांच-पांच पास बनने पर रोक लगाते हुए एक संस्थान से एक पास का नियम बना दिया है, जिसमें स्वतंत्र पत्रकार और ऑनलाइन पत्रकारों के लिए कोई जगह नहीं रखी गई है. कैमरामैन और फोटोग्राफर भी विधानसभा के अंदर नहीं जा सकते हैं. इसके अलावा पत्रकारों को पत्रकार दीर्घा के अलावा कहीं और जाने नहीं दिया जाएगा. जो पास दिए जा रहे हैं उस पर साफ लिखा हुआ है कि पत्रकार पत्रकार दीर्घा के बाहर नहीं जाएंगे . इससे पहले विधानसभा कवरेज के लिए पास बनाने के लिए कभी परेशानी नहीं होती थी और विधानसभा उदार भाव से पत्रकारों का पास बनाता था. पुराने और स्वतंत्र पत्रकार भी कवरेज के लिए जाते थे. ऐसे पत्रकार भी जाते थे जो छोटे सप्ताहिक और मंथली मैगजीन निकालते हैं. पत्रकारों को कैंटीन में जाकर खाना खाने और चाय पीने की भी छूट हुआ करती थी. इसके अलावा हां पक्ष और ना पक्ष लॉबी में जा सकते थे. मंत्रियों के कमरे में भी जाने की छूट थी. मगर विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने इस सब पर रोक लगाते हुए पत्रकारों के पास पहले की तुलना में 80 फीसदी कम कर दी है. यही नहीं विधायकों के साथ आने वाले लोगों की संख्या भी सीमित कर दी गई है. अब एक विधायक और एक अधिकारी के साथ 2 से ज्यादा लोग विधानसभा के अंदर नहीं आ सकते हैं. विधानसभा के इस नए नियम के खिलाफ पत्रकार विधानसभा अध्यक्ष के कमरे के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. विधानसभा के बाहर भी पत्रकार अपना विरोध जता रहे हैं. इसके पहले बीजेपी शासन के दौरान भी विधानसभा के अंदर कैमरा ले जाने पर रोक लगा दी थी.
जयपुर. प्रदेश सरकार के छह माह के कार्यकाल के मुद्दों को लेकर भाजपा सदन में सरकार को घेरेगी। गुरुवार से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ। जिसके बाद उसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सरकार के पिछले छह माह के कार्यकाल में सामने आए बड़े मुद्दों को लेकर भाजपा सदन में सरकार घेरेगी। किसान आत्महत्या, कर्जमाफी, दुष्कर्म, घोटाले और बेरोजगारी भत्तों को लेकर भाजपा विधायकों ने विधानसभा में सवाल लगाए हैं। बुधवार तक सत्र के लिए करीब 3 हजार प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। इनमें सबसे कानून व्यवस्था, पानी-बिजली, मेडिकल, खेती-किसान के मुद्दे पर सबसे ज्यादा सवाल पूछे गए हैं। इनमें कानून व्यवस्था से जुड़े गृह विभाग से 160 सवाल, मेडिकल से जुड़े 217 सवाल, पानी और बिजली से जुड़े 300 से ज्यादा सवाल, किसानों से जुड़े 200 से ज्यादा सवाल पूछे गए हैं। भाजपा ने अपने पूर्व मंत्रियों व वरिष्ठ विधायकों को खास तौर पर यह जिम्मेदारी दी है कि जिन महकमों के बारे में उन्हें अच्छी जानकारी है उन्हें लेकर विधानसभा में सवाल लगाएं ताकि वाद-विवाद की स्थिति में पार्टी कमजोर न पड़े और सरकार मंत्रियों को घेरा जा सके। भाजपा की तरफ से नेता प्रतिपक्ष व पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कानून व्यवस्था, उपनेता प्रतिपक्ष व पूर्व पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ कर्जमाफी,आर्थिक आरक्षण, वरिष्ठ विधायक व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था, पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने यूडीएच, स्थानीय निकाय,शिक्षा, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने उच्च शिक्षा ने पीएचईडी, पंचायती राज व अशोक लाहोटी ने ऊर्जा, फूड और मेडिकल हेल्थ को लेकर सवाल लगाए हैं। सवाल ही सरकार की मुश्किलें बढ़ाएंगे गैंगरेप पीड़िताओं को भी नौकरी देगी सरकारी? थानागाजी दुष्कर्म मामले में सरकार ने पीड़िता को पुलिस में नौकरी दी है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने सवाल पूछा है कि सरकार प्रदेश में हुए अन्‍य गैंगरेप पीड़िताओं को भी नौकरी देने का विचार रखती है। कितने बेरोजगारों को भत्ता दिया? शिक्षित बेरोजगारों की कुल संख्‍या कितनी है? अब तक कितने शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया है ? आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी की ऑडिट कब हुई? उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी के घोटाले पर सरकार से सवाल पूछे हैं। उन्होंने सवाल लगाया है कि प्रदेश में पंजीकृत सहकारी सोसायटीज के खिलाफ पिछले पांच सालों में कितनी शिकायतें मिली हैं। इसके साथ ही यह भी पूछा है कि आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी की प्रदेश में अंतिम ऑडिट कब हुई थी। कितने किसानों के खातों में कर्जमाफी ऋण माफी समायोजित की? राठौड़ ने प्रदेश में खरीफ ऋण वितरण तथा किसान कर्जमाफी को लेकर सवाल लगाए हैं। इसमें उन्होंने पूछा है कि कितने किसानों के खातों में कर्जमाफी की राशि समायोजित की गई है। लाेकसभा के बाद विधानसभा में गूंजेगा जगन का मुद्दा पिछले दिनाें नागाैर विधायक हनुमान बेनीवाल ने लाेकसभा में धाैलपुर के दस्यु जगन गुर्जर का मुद्दा उठाया था। अब विधानसभा में विधायक किरण माहेश्वरी ने भी जगन गुर्जर काे लेकर सवाल लगा दिया है। उन्हाेंने सरकार से पूछा है कि धौलपुर के बसई डांडा क्षेत्र में दस्‍यु जगन गुर्जर ने 2 महिलाओं को पीटा एवं निवस्‍त्र करके घुमाया था। कांग्रेस ने तय की रणनीति मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को देर शाम मुख्यमंत्री आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें पिछली सरकार की नाकामियों पर भाजपा को घेरने की रणनीति बनाई गई। इस दौरान विधायक दल की ओर से राहुल गांधी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया गया। सर्वसम्मति से राहुल गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बने रहने के लिए प्रस्ताव पास किया गया। विधायक दल की बैठक में नहीं बोले विधायक कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायक नहीं बोले। उन्हें अपनी राय नहीं रखने दी गई। तर्क दिया गया कि विधायक बैठक के भीतर बोलेंगे कुछ। बाहर टीवी में कुछ चलेगा और अखबारों में कुछ छपेगा। इसलिए विधायकों को बोलने की जरूरत ही नही है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में बयानों का दौर जारी हैं, जिससे बचने के लिए यह कदम उठाया गया। ताकि कांग्रेस विधायकों के कारण पार्टी की बेवजह सुर्खियां न बने।
जयपुर. कांग्रेस सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र की पूर्व संध्या पर 10 आईएएस अफसरों के तबादला आदेश जारी कर नई चर्चा छेड़ दी। इनमें से तीन से चार अफसरों से उनके विभाग के मंत्री नाराज चल रहे थे। दो विभागों में भारी घोटाले सामने आने से सरकार की किरकिरी हो रही थी। नई ट्रांसफर लिस्ट में प्राइम पोस्ट से हटाकर दुबारा प्राइम पोस्ट पर पवन अरोड़ा को लगाया गया है। डीएलबी डायरेक्टर से अब पवन अरोड़ा को हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर बनाया गया है। सिद्धार्थ महाजन का ट्रांसफर चौंकाने वाला रहा। भवानीसिंह देथा को संभागीय आयुक्त उदयपुर से सचिव, स्वायत्त शासन। विकास सीताराम भाले को आयुक्त कृषि विभाग से संभागीय आयुक्त उदयपुर। मुग्धा सिन्हा को सचिव खाद्य नागरिक एवं आपूर्ति से सचिव विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी। सिद्धार्थ महाजन को सचिव स्वायत्त शासन से सचिव, खाद्य नागरिक एवं आपूर्ति। डाॅ. समित शर्मा को एमडी एनएचएम से आयुक्त श्रम एवं एमडी आजीविका मिशन। डाॅ.ओमप्रकाश को पीडी राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना एवं प्रशासन कृषि विपणन बोर्ड से आयुक्त कृषि ( पूर्व के विभाग यथावत। वीरेंद्रसिंह एपीओ को विशिष्ट सचिव एवं आयुक्त चिकित्सा शिक्षा। पवन अरोड़ा को डायरेक्टर डीएलबी से आयुक्त राजस्थान हाउसिंग बोर्ड। उज्ज्वल राठौड़ को सचिव यूआईटी उदयपुर से डायरेक्टर डीएलबी। निकया गोहाएन को डायरेक्टर कौशल एवं रोजगार से संयुक्त सचिव जल संसाधन विभाग में लगाया गया है।
जयपुर, राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसे दी जाए यह फैसला पिछले 20 सालों में बीजेपी के लिए कभी भी आसान नहीं रहा है. साल 2018 में जिन परिस्थितियों में मदन लाल सैनी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने थे उसे अगर ध्यान में रखा जाए तो तय माना जा रहा है अब उनके देहांत के बाद एक बार फिर पार्टी पर कब्जे को लेकर गुटबाजी देखने को मिल सकती है. सोमवार को मदन लाल सैनी का निधन होने के बाद से ही अटकलों का बाजार गर्म है कि बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा. दरअसल, बीजेपी में राजस्थान में एकछत्र राज करने वाले भैरो सिंह शेखावत को दरकिनार कर जब वसुंधरा राजे को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था तब भारी विरोध हुआ था और उस वक्त से अब तक यही सिलसिला चल रहा है. चाहे ओम माथुर हों या अरुण चतुर्वेदी या फिर गुलाब चंद कटारिया, हर बार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर घमासान चलता रहता है. घमासान के बाद अध्यक्ष बने थे मदन लाल सैनी साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खेमे के बीच खींचतान देखने को मिली थी. महीनों तक प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली पड़ा रहा और अंतत: कंप्रोमाइज कैंडिडेट के रूप में मदन लाल सैनी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए. सोमवार (24 जून) को मदन लाल सैनी ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. उनके देहांत के बाद अब एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. किसे मिलेगी बीजेपी की जिम्मेदारी? कहा जा रहा है कि संघ का खेमा आमेर से विधायक सतीश पुनिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता है. संगठन के कामकाज देख रहे चंद्रशेखर भी पुनिया के पक्ष में बताए जा रहे हैं. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहती हैं कि बीजेपी के राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. पंचारिया कमोबेश मदन लाल सैनी की तरह ही हैं जो संघ, वसुंधरा और पार्टी के बीच बराबर का संबंध रखते हैं. राज्यवर्धन के नाम की भी चर्चा जयपुर से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को इस बार मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया है. कहा जा रहा है कि राठौड़ को अमित शाह प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते हैं. ऐसे में उनके नाम की भी चर्चा जोरों पर है. इसी तरह चूरू से विधायक राजेंद्र राठौड़ को लेकर भी चर्चा चल रही है लेकिन कहा जा रहा है कि बीजेपी संघ पृष्ठभूमि के व्यक्ति को ही प्रदेश अध्यक्ष का पद देना चाहेगी. राजेंद्र राठौड़ जनता दल से आए हैं जबकि राज्यवर्धन सिंह राठौर नए-नए बीजेपी के नेता हैं. पार्टी का एक खेमा ऐसा भी है जो नए चेहरे के रूप में और वसुंधरा राजे को चुनौती देने वाली नेता के रूप में राजसमंद की विधायक दीया कुमारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की वकालत कर रहा है. फिलहाल, ये तमाम कयास हैं. मदन लाल सैनी को जब प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब सियासी हालात जुदा थे. राज्य में बीजेपी की सरकार थी और वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री की कमान संभाल रही थीं. अब सत्ता में कांग्रेस है और तजुर्बेकार नेता के रूप में अशोक गहलोत सीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि युवा चेहरे के रूप में सचिन पायलट डिप्टी सीएम के पद पर आसीन हैं. पायलट के पास लंबे समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी है. ऐसे में पायलट के सामने क्या बीजेपी राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के रूप में किसी नए और चर्चित फेस को पार्टी की कमान सौंपती है या फिर किसी और नेता के नाम पर मुहर लगाई जाती है, इसका सभी को इंतजार है.
जयपुर,राजस्थान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) एक बार फिर चर्चाओं में है. एनएचएम में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के 2500 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी. 22 जून को इसकी परीक्षा भी होनी थी लेकिन 22 जून को ही मामला सरकार की जानकारी में आ गया. इसके बाद इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया. वहीं बीजेपी इस मामले को विधानसभा में उठाएगी. IEC की तरफ से इस परीक्षा को लेकर 19 जून को प्रेस रिलीज जारी करवाई गई थी. इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने साफ कहा है कि न तो उन्हें और न ही ACS रोहित कुमार सिंह को इस भर्ती परीक्षा के बारे में कोई जानकारी थी. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की वो जांच करवा रहे है और मामले में दोषी पाए जाने वाले हर स्तर के व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. शुरुआती तौर पर इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोषित कुमार सिंह ने एनएचएम की पूरी HR सेल और वरिष्ठ सहायक अशोक भंडारी को सस्पेंड करने के आदेश भी जारी कर दिए है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि परीक्षा में कुल 30 हजार आवेदन आए और कई अभ्यर्थियों से नियुक्ति देने के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये भी वसूले गए. हालांकि इस बात के अभी तक कोई प्रमाण सामने नहीं आए है. वहीं एनएचएम के मिशन निदेशक समित शर्मा पर आरोप है कि सरकार की जानकारी के बिना गुपचुप तरीक से 2500 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की भर्ती निकाल दी गई. इन पदों के लिए 30 हजार आवेदन आए थे. 22 जून को ऑनलाइन परीक्षा होनी थी. समित शर्मा ने खुद ही प्रश्न बैंक तैयार कर लिया था. लेकिन किसी तरह स्वास्थ्य मंत्री और एसीएस हेल्थ यानी अतिरिक्त मुख्यसचिव रोहित कुमार सिंह तक ये मामला पहुंचा. तब स्वास्थ्य मंत्री हैरान रह गए क्योंकि मंत्रीजी को पता ही नहीं था कि उनके महकमे में 2500 भर्तियां निकली है. मंत्रीजी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह से पूछा तो वे भी चौंक गए. रोहित कुमार सिंह ने जांच कराई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. इस पद पर नियुक्ति के नाम पर डेढ़-डेढ लाख की वसूली करने और बदले में प्रश्न पत्र देने की योजना के घोटाले के आरोप भी सामने आए. जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे की एचआर सेल और आरोपी वरिष्ठ सहायक अशोक भंडारी को संस्पेंड कर परीक्षा रद्द कर दी गई. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए है. बीजेपी ने बताया महाघोटाला वहीं बीजेपी ने इसे महाघोटाला करार दिया है और सीबीआई से जांच की मांग की है. बीजेपी ने चेतावनी दी कि इस घोटाले पर वे सरकार को माफ नहीं करेंगे. विधासनभा के आगामी सत्र में गहलोत सरकार को घेरेंगे कि आखिर चिकित्सा मंत्री की नाक के नीचे कैसे इतना बड़ा भर्ती घोटाला हुआ. पूर्व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने कहा कि इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे. ये बड़ा घोटाला है. इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिए. वहीं समित शर्मा ने कहा कि एनएचएम में कम्युनिटी हेल्थ स्कीम में फंड का 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार और 60 फीसदी केंद्र सरकार वहन करती है. केंद्र से 2500 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की भर्ती के लिए आदेश आए थे. तब आचार संहिता लगी थी. लिहाजा केंद्र के निर्देशानुसार हमने चुनाव आयोग से इजाजत लेकर अखबारों में इश्तहार देकर भर्तियां निकाली है. एनएचएम के एमडी डॉ. समित शर्मा ने ही गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में मुफ्त दवा योजना लांच की थी. ब्रांडेड की जगह जेनरिक दवा अस्पतालों में अनिवार्य की थी. इससे समित शर्मा की तारीफ देश ही नहीं दुनियाभर में होने लेगी थी.
जयपुर, 27 जून 2019,राजस्थान में 15वीं विधानसभा का दूसरा सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है. अशोक गहलोत सरकार पहला पूर्ण बजट भी पेश करेगी. इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार दिन में कैबिनेट की बैठक बुलाई तो शाम को कांग्रेस के विधायक दल की बैठक बुलाई. इस बैठक में सरकार का समर्थन कर रहे 11 निर्दलीय विधायकों को भी बुलाया गया था, जिन्हें कांग्रेस का एसोसिएट मेंबर बनाया गया है. कांग्रेस के विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पर मुहर लगी कि कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथ में रहे और वे पार्टी अध्यक्ष बने रहें. प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी से अपने पद पर बने रहने का अनुरोध किया गया है. विधायक दल की बैठक में लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान राहुल गांधी के संपर्क कार्यों की सराहना की गई. विधायक दल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अपील की है कि वे अपने पद पर बने रहें और कांग्रेस को मजबूत करने के संकल्प पर आगे बढ़ें. विधायक दल की बैठक में विपक्षी पार्टियों पर गलत खबरें प्रचारित करने का आरोप भी लगाया गया. राजस्थान कांग्रेस अपने सभी महत्वपूर्ण फैसलों का प्रचार अब जनता तक करेगी, और अपने कथित गुड गवर्नेंस के बारे में जनता को सूचना देगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रियों से कहा है कि विधानसभा सत्र खत्म होने के बाद वह ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में रहें और प्रदेश का दौरा करें. मुख्यमंत्री ने अपने विधायकों से अपील की है कि वे लोगों की समस्याओं को सुलझाएं जिससे लोगों को यह एहसास हो कि सरकार बदल गई है और कांग्रेस की सरकार अच्छा काम कर रही है.
बाड़मेर राजस्थान के बाड़मेर में रविवार को बारिश और तूफान ने कई लोगों की जान ले ली। जिले के एक गांव में धार्मिक कार्यक्रम चल रहा था और अचानक तेज तूफान आने से पंडाल गिर गया। इस हादसे में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए, जिन्हें पास के नाहटा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि तूफान इतना तेज था कि लोगों को संभलने का भी मौका नहीं मिला। दरअसल, बाड़मेर के जसोल गांव में राम कथा चल रही थी और तूफान के कारण आयोजन स्थल पर पंडाल गिर गया। टीवी रिपोर्टों में बताया गया है कि बारिश के दौरान पंडाल गिरने से करंट दौड़ गया, जिससे लोगों की जान चली गई। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है। बालोतरा के ASP रतन लाल भार्गव ने बताया कि हादसे में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 50 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि सैकड़ों की संख्या में लोग इस धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे हुए थे। मुख्यमंत्री गहलोत का ट्वीट, जांच के निर्देश राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर हादसे के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट किया, 'जसोल, बाड़मेर में राम कथा के दौरान टेंट गिरने से हुए हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की जानकारी अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को संबल देने की प्रार्थना है। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बताया, 'स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव का कार्य किया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को हादसे की जांच करने, घायलों का शीघ्र उपचार सुनिश्चित करने तथा प्रभावितों एवं उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।' पीएम मोदी ने जताया दुख इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। पीएम ने कहा, 'बाड़मेर में पंडाल गिरना दुर्भाग्यपूर्ण है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है और मैं घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करता हूं।' वसुंधरा की बीजेपी कार्यकर्ताओं से मदद की अपील राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट पर हादसे पर दुख जाहिर किया। उन्होंने लिखा, 'बाड़मेर के जसोल में राम कथा के दौरान तेज आंधी से गिरे पंडाल हादसे में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत का समाचार सुनकर बेहद दुख हुआ। मैं ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा को शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को कष्ट की इस घड़ी में संबल प्रदान करने की कामना करती हूं।' एक अन्य ट्वीट में वसुंधरा राजे ने कहा, 'मेरी सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं से अपील है कि बाड़मेर हादसे में घायल हुए भाई-बहनों व उनके परिजनों की हरसंभव सहायता करें। साथ ही राज्य सरकार से निवेदन है कि मृतकों व घायलों के परिजनों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं।'
जयपुर, 21 जून 2019,अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर 21 जून को पूरी दुनिया ने भारत संग योग किया लेकिन राजस्थान में ‘योग दिवस’ राजनीति की भेंट चढ़ गया. यहां योग दिवस बिल्कुल फीका रहा, ना स्कूलों में योग हुआ और ना ही कहीं भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. और तो और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी योग करने के लिए नहीं निकले. बता दें कि राजस्थान में इस समय कांग्रेस की सरकार है. ‘योग दिवस’ पर सीएम अशोक गहलोत की बीजेपी की नीतियों को लेकर तल्खी साफ दिखी. जब पूरा देश सुबह से योग कर रहा था. सोशल मीडिया पर भी लोग ट्वीट के जरिए लोगों को ‘योग दिवस’ की बधाई दे रहे हैं. वहीं सीएम गहलोत ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे लोगों को योग की बधाई दी. हालांकि इससे 2 घंटे पहले ही उन्होंने एक ट्वीट के जरिए लोगों को अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस की बधाई दी. BJP शासन में धूमधाम से मनाया गया था योग पूरी दुनिया में भले ही योग के फायदे बताए जा रहे हो लेकिन राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस राजनीति की भेंट चढ़ गया. सरकार बदली तो योग करने वालों का भी टोटा पड़ गया. राजस्थान के स्कूलों में छुट्टियों का दिन बढ़ा दिया गया लिहाजा अब 1 जुलाई से स्कूल खुलेंगे. ऐसे में राजस्थान के स्कूलों में शुक्रवार को योग नहीं हुआ. पहले बीजेपी शासन के दौरान स्कूलों की छुट्टियां 18 जून को खत्म हो जाती थी तो 21 जून को स्कूलों में धूमधाम के साथ योग दिवस मनाया जाता था. डिप्टी CM सचिन पायलट ने भी नहीं किया योग उस वक्त की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी स्टेडियम में लोगों के साथ योग करती थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत योग करने के लिए अपने घर से बाहर नहीं निकले. जब मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय समारोह में हिस्सा नहीं लिया तो लोगों ने भी योग से दूरी बनाकर रखी. राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी छुट्टियों पर है लिहाजा वह भी ‘योग दिवस’ में हिस्सा नहीं लिए. हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा को अजमेर में राज्य स्तरीय योगा समारोह में हिस्सा लेने के लिए भेजा गया था. मगर इस स्तर पर बेरुखी की वजह से राजस्थान में योग दिवस फीका रहा. बीजेपी के विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने आरोप लगाया कि जानबूझकर राजस्थान की कांग्रेस सरकार ‘योग दिवस’ के दिन योग करने से लोगों को रोकना चाहती है, लिहाजा स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गईं और मुख्यमंत्री योग करने के लिए लोगों के बीच नहीं आए.
नई दिल्ली, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में मंथन और समीक्षा का दौर जारी है. कांग्रेस के नेता हार के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. राजस्थान कांग्रेस के हारे हुए उम्मीदावारों ने अपनी हार की सबसे बड़ी वजह पार्टी के नेताओं की गद्दारी बताया है. राजस्थान में कांग्रेस के सभी 25 लोकसभा प्रत्याशियों से दिल्ली में प्रदेश के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने मुलाकात की और हार के कारणों का फीडबैक लिया. अविनाश पांडे के साथ सहप्रभारी भी मौजूद रहे. इस दौरान एक-एक करके सभी लोकसभा प्रत्याशियों के साथ अकेले में चर्चा की गई और हार के कारणों की वजह पूछी गई. जिसमें उन्होंने बताया कि कांग्रेस के प्रत्याशियों की हार के लिए कांग्रेस के नेता ही जिम्मेदार हैं. इन्होंने अपने फीडबैक में कहा कि टिकट मिलने के बाद कांग्रेस के ज्यादातर पदाधिकारी घोषित उम्मीदवार के खिलाफ काम करते रहे और उन्हें हरवाने का काम किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को सहयोग नहीं मिला. इसके अलावा कांग्रेस के प्रत्याशियों ने यह कहा कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का बूथ मैनेजमेंट जबरदस्त रहा. दिल्ली में कांग्रेस के वॉर रूम में प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे और सह प्रभारी विवेक बंसल पिछले 3 दिनों से सभी उम्मीदवारों के साथ मिलकर उनके फीडबैक को लिखित में दर्ज कर रहे हैं. कांग्रेस के प्रत्याशियों ने यह भी कहा कि गुटबाजी के अलावा कांग्रेस के चुनाव लड़ने की रणनीति फेल रही. राज्य सरकार ने चुनाव से पहले जो फैसले किए थे, उसे जनता के बीच सरकार के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता नहीं पहुंचा पाए. उम्मीदवारों ने बताया कि जिस तरह से राजस्थान सरकार ने किसानों की कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ता देने का फैसला किया, उसके बारे में जमीनी स्तर पर जनता को नहीं पता चला. उन्होंने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस बड़ी-बड़ी रैलियां करके सीमित रह गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी एक-एक घर तक प्रचार के लिए पहुंची. इस फीडबैक की पूरी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को दी जाएगी. इस पूरे फीडबैक में कहीं भी हार के लिए नेतृत्व को किसी ने भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है. आपको बता दें कि राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटे हैं, जिनमें से कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली.
नई दिल्ली, 18 जून 2019, जयपुर नगर निगम में इन दिनों सुबह राष्ट्रगीत के साथ कामकाज की शुरुआत और शाम को राष्ट्रगान के साथ कामकाज खत्म होने की परंपरा बंद हो गई है. इसे शुरू करने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावर है. बीजेपी के पूर्व मेयर अशोक लाहोटी ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की विरोधी है, जिसकी वजह से नगर निगम की अच्छी परंपरा बंद कर दी गई है. लाहोटी ने आरोप लगाया है कि लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना भरने के साथ ही कार्यस्थल पर अनुशासन लाने के लिए बीजेपी शासन के दौरान जयपुर नगर निगम में इस परंपरा की शुरुआत की गई थी, लेकिन कांग्रेस शुरू से ही इसका विरोध करती रही है. यही वजह है कि जानबूझकर मशीन की खराबी के नाम पर इसे बंद किया गया है. उन्होने कहा कि इसे वापस शुरू नहीं किया गया तो बीजेपी आंदोलन करेगी. हालांकि, जयपुर के मौजूदा मेयर विष्णु लाटा का कहना है कि यह तकनीकी कमी की वजह से बंद हुई है, इसे बंद नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि रील कंपनी के इंस्ट्रूमेंट नगर निगम में लगे थे जो सभी कमरों में बजते थे और उसके बजते ही लोग अपनी-अपनी कुर्सी से उठकर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाते थे, मगर मशीन में अचानक से खराबी आ गई है, जिसकी वजह से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गीत नहीं बज पा रहा है, हालांकि जो भी गाना चाहता है वह अपनी सीट पर खड़ा होकर गा सकता है. मेयर विष्णु लाटा ने बताया कि हमने कंपनी को इसकी जानकारी दी है और कंपनी ने वादा किया है कि दो दिन के अंदर मशीन को ठीक कर दिया जाएगा. लाटा ने बीजेपी पर जानबूझकर मामले को सियासी रंग देने का आरोप लगाया है. गौरतलब है कि बीजेपी शासन के दौरान नगर निगम में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने और दफ्तर खत्म होने के समय राष्ट्रगान गाने की परंपरा शुरू हुई थी, जिसका तब कई मुस्लिम पार्षदों ने विरोध भी किया था. इसके बाद देश के कई हिस्सों में भी इस तरह की परंपरा शुरू हुई थी. कांग्रेसी शासन के दौरान भी यह परंपरा जारी थी, लेकिन कुछ दिनों से नगर निगम में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत नहीं बज पा रहा है
जयपुर राजस्थान में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए अलग से विभाग बनाया जाएगा. राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए लोगों के बीच सद्भावना होनी जरूरी है. राजस्थान सरकार अपने स्तर इस तरह के प्रयास करेगी. इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अलग से विभाग बनाने की तैयारी करें. माना जा रहा है कि आम जनता के बीच बीजेपी के हिंदुत्व की विचारधारा की काट के लिए कांग्रेस को पार्टी से ज्यादा सरकार पर भरोसा है. सरकार के जरिए सभी धर्मों को एक समान मानने की विचारधारा फैलाई जाएगी. RSS की विचारधारा से अलग सरकारी अधिकारी लोगों के बीच जाकर आपसी सद्भाव और शांति का पाठ पढ़ाएंगे. दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह सुझाव गांधीवादी विचारक डॉ एसएन सुब्बाराव ने जयपुर के एक शिविर में दिया था. तभी से विचार किया जा रहा था कि क्या गांधीवादी विचारधारा को फैलाने के लिए अलग से एक मंत्रालय बनाया जाए या फिर कला एवं संस्कृति विभाग के अंदर ही इसे एक विभाग के रूप में रखा जाए. मगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली बार सुब्बाराव के 10 दिवसीय शिविर के समापन समारोह में बोलते हुए कहा कि राज्य में शांति और सद्भावना की जरूरत है जिसके लिए सरकारी स्तर पर एक विभाग स्थापित किया जाएगा. इस मौके पर गहलोत ने कहा कि सुब्बाराव ने भारतवर्ष की अनेकता में एकता बनाए रखने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है. केवल 13 साल की उम्र में महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर सुब्बाराव देश में शांति और सद्भावना का संदेश देने के लिए निकल पड़े थे. आज वह लाखों युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं. गहलोत ने ये भी कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है कांग्रेस पार्टी ने देश में लोकतंत्र की स्थापना की थी और इसी वजह से नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं.
धौलपुर चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर और उसके गैंग की करतूत सामने आई है। आरोप है कि धौलपुर के एक गांव में गैंग के डाकुओं ने बुधवार रात बच्चों और महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया। इससे पहले दिन में जगन और उसके हथियारबंद लोग व्यस्त बाड़ी मार्केट पहुंचे। बताया जा रहा है कि मंगलवार रात गैंग के एक सदस्य ने जब एक दुकान पर चाय पी तो दुकानदार ने उससे पैसे मांगे। इसी के बाद दहशत फैलाने के लिए अगले दिन गैंग के लोग मार्केट पहुंचे और कुछ दुकानदारों की पिटाई करने के साथ फायरिंग भी की।सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि डकैतों को दबोचने के लिए चंबल इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बाड़ी के बाजार में तोड़फोड़ के बाद जगन गुर्जर गैंग के सदस्य बुधवार रात बसईडांग थाना क्षेत्र के एक गांव पहुंच गए। गैंग के लोगों ने एक घर में घुसकर तीन महिलाओं और उनके बच्चों को बाहर निकाला और कपड़े उतारने को कहा। जगन ने इसके बाद कथित रूप से बंदूक के बल पर महिलाओं को निर्वस्त्र हालत में गांव की संकरी गलियों में घुमाया। इस दौरान दहशत की वजह से ग्रामीण अपने घरों से नहीं निकले। गिरोह के लोगों ने बार-बार महिलाओं और बच्चों की पिटाई भी की। घायलों को बाद में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। धौलपुर के एसपी अजय सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'आईपीसी की धारा 354 (आपराधिक इरादे से किसी महिला पर हमला और उसका अपमान करना) के तहत आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।' हालांकि एसपी ने बंदूक की नोंक पर महिलाओं को निर्वस्त्र करने की बात को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि एक महिला ने दावा किया है कि चार लोगों ने स्टिक से उसकी पिटाई की। बताया जा रहा है कि यह घटना देर रात तीन बजे के करीब हुई और इस दौरान कोई ग्रामीण पुलिस को मामले की जानकारी देने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आरोपियों के वहां से जाने के बाद ही मामले का पता चला। चंबल के बीहड़ों का कुख्यात दस्यु सरगना जगन गुर्जर कई बार सरेंडर कर चुका है। थोड़े वक्त के लिए वह जेल में भी रहा। पिछले साल उसने भरतपुर रेंज की आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने आत्मसमर्पण किया था। कुछ हफ्ते पहले ही जमानत मिलने के बाद वह जेल से छूटकर आया था।
जयपुर राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच लंबे समय से वर्चस्व को लेकर लड़ाई की सुगबुगाहट जारी है। इसके संकेत इस बात से मिलते हैं कि अशोक गहलोत जहां दिल्ली में अहमद पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, वहीं पायलट पार्टी काडर के बीच अपनी जमीन और मजबूत करने में लगे हुए हैं। पायलट रविवार को जालोर जिले में पहुंचे और पूरी रात एक किसान के घर में गुजारी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद दोनों के बीच की लड़ाई खुलकर सामने आ गई। पूर्व में अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर लोकसभा सीट पर हार का जिम्मेदार सार्वजनिक तौर पर पायलट को ठहराया था। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में गहलोत ने कहा था कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को जोधपुर मे वैभव की हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। खास बात यह है कि राजस्थान की जोधपुर सीट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का घरेलू मैदान माना जाता है। वह खुद इस निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार चुने गए हैं। बवाल शुरू हुआ तो दी सफाई पायलट पर गहलोत की टिप्पणी के बाद जब बवाल शुरू हुआ तो मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। राज्य कांग्रेस के कई नेता इस लड़ाई में खुलकर सामने आए और उन्होंने गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग भी की। कांग्रेस विधायक पृथ्वीराज मीणा ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की सिफारिश की। हार की जिम्मेदारी तय करने की मांग पृथ्वीराज से पहले राज्य के दो मंत्रियों- रमेश मीणा और उदय लाल अंजाना ने कहा कि राजस्थान में हार के पीछे जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट जीत पाने में असफल रही जबकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की थी।
जयपुर, 06 जून 2019,सरकार बदलने के साथ योजनाओं के नाम बदलने का सिलसिला अक्सर जारी रहता है. इसी कड़ी में अब राजस्थान सरकार ने एक और योजना से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विचारक और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटा दिया है. वसुंधरा सरकार ने राज्य में दीनदयाल उपाध्याय के नाम से स्कॉलरशिप देने की योजना शुरू की थी, लेकिन अब अशोक गहलोत की सरकार ने योजना तो जारी रखी है लेकिन नाम बदल दिया. अशोक गहलोत की सरकार ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रतिभा खोज अभियान के तहत बीजेपी सरकार के द्वारा शुरू की गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्कॉलरशिप योजना का नाम बदलकर अब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्कॉलरशिप कर दिया है. इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा में टॉप करने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप मिलती है. इस फैसले पर राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि स्कॉलरशिप योजना के आगे दीनदयाल उपाध्याय लगाने का कोई मतलब नहीं है. यह बच्चों की प्रतिभा का मामला है, शिक्षा में इस तरह की राजनीति नहीं करनी चाहिए. उनका आरोप है कि बीजेपी ने राजस्थान में जो शिक्षा का भगवाकरण किया है उसको ठीक किया जाएगा जिसके तहत शिक्षा में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉक्टर हेडगेवार के नामों को हटाया जा रहा है. हालांकि, राज्य सरकार के इस फैसले से भारतीय जनता पार्टी आग बबूला हो गई है. पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी नेता वासुदेव देवनानी का कहना है कि राजस्थान सरकार को दीनदयाल उपाध्याय के नाम से डर लगता है, लिहाजा एक-एक करके सभी योजनाओं से उनका नाम हटा रहे हैं. इससे पहले भी स्कूली किताबों में दीनदयाल उपाध्याय के चैप्टर को कम कर दिया गया था.
नई दिल्ली, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का इस्तीफा मांगा है. वसुंधरा ने कहा कि राज्य सरकार की नाकामी के चलते मात्र पांच माह के कार्यकाल में प्रदेश में 26% अपराध बढ़ गया है. वसुंधरा ने कहा कि अखबारों के फ्रंट पेज पर छप रही दुष्कर्म की खबरें हर मां को बैचेन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सीएम मंत्रियों और विधायकों का विश्वास खो चुके हैं उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. राज्य में बढ़ रही रेप की घटनाओं का जिक्र करते हुए वसुंधरा ने कहा कि राजस्थान में जब से गहलोत की सरकार बनी है, सबसे ज्यादा जुल्म हमारी बेटियों पर हुआ है. उन्होंने कहा कि अखबारों के फ्रंट पेज पर छप रही दुष्कर्म की खबरें हर मां को बैचेन कर रही हैं. वसुंधरा ने कहा कि हर तरफ अराजकता का माहौल है और जिम्मेदार मंत्री कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते तक नहीं है. वसुंधरा ने कानून-व्यवस्था की नाकामी पर राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि थाना गाजी गैंगरेप का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि पाली में एक और सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आ गया. पूर्व सीएम ने दावा किया कि राजस्थान में रोजाना करीब 12 दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं. राज्य सरकार की नाकामी के चलते मात्र पांच माह के कार्यकाल में प्रदेश में 26% अपराध बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि जनता इस सरकार को माफ नहीं करेगी. वसुंधरा ने टोंक में कांग्रेस विधायक हरीश मीणा के धरने पर बैठने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं, विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठे हैं. कुशासन से त्रस्त जनता सरकार को ढूंढ रही है पर सरकार कहीं दिखाई नहीं दे रही. सीएम गहलोत अपने ही मंत्रियों और विधायकों का विश्वास खो चुके हैं ऐसे में उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. बता दें कि राजस्थान में एक के बाद एक दो वीभत्स रेप की घटनाएं हुई हैं. रेप की पहली घटना अलवर में हुई जहां अपने पति के साथ जा रही महिला के साथ बदमाशों ने दुष्कर्म किया, दूसरी घटना पाली जिले में हुई. यहां भी एक शादी-शुदा महिला के साथ पांच लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया. इन घटनाओं पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है.
जयपुर, 05 जून 2019,राजस्थान के जेयरण उपखण्ड के धनेरिया गांव में नाबालिग दलित लड़के के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया है. वीडियो में दलित लड़के को कुछ भगवा गमछा पहने लड़के बुरी तरह पीट रहे हैं. पीड़ित युवक रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन दबंगों ने एक नहीं सुनी और बेरहमी से पिटाई करते रहे. राजस्थान पुलिस ने बताया कि नाबालिग दलित लड़के के खिलाफ लड़की से छेड़छाड़ का आरोप है. उसके खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. जांच के बाद उसे किशोर संरक्षण गृह भेज दिया गया. अब एक वायरल वीडियो सामने आया है जहां स्थानीय लोग उसकी पिटाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं, उन्हें भी रिमांड पर लिया गया है. वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दलित लड़का गांव के मंदिर जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद कुछ दबंगों ने लड़के को सबक सिखाने के लिए उसे पहले रस्सी से इस कदर बांधा की वो खड़ा नहीं हो सका और फिर तेज धूप में पटक कर बेरहमी से पीटते रहे. वीडियो में दलित लड़का रहम की भीख मांगता रहा, कभी मंदिर में नही जाने के बात कहता रहा लेकिन दबंगों ने एक नहीं सुनी और बेरहमी से पिटाई करते रहे. इस पूरी घटना का वीडियो किसी ने बना लिया और वायरल कर दिया. हालांकि, पुलिस इससे इंकार कर रही है. यह घटना 1 जून को हुई थी, जबकि वीडियो 3 जून को सामने आया था. पुलिस ने लड़के के खिलाफ मामला दर्ज किया है. लड़के के मामा की शिकायत पर पुलिस ने उन लोगों को रिमांड पर लिया है, जिन्होंने लड़के की पिटाई की थी.
जयपुर, 05 जून 2019, लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं. राजस्थान में चंद महीने पहले विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है. आलम यह रहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत भी चुनाव हार गए. अब सूबे के कांग्रेस नेताओं में मुख्यमंत्री गहलोत के लिए असंतोष सामने आ रहा है और सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जानी की मांग जोर पकड़ रही है. टोडाभीम से कांग्रेस विधायक बी आर मीणा ने कहा की सचिन पायलट को राज्य का मुख्यमंत्री होना चाहिए था और युवा चेहरे को दरकिनार करने की वजह से ही लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनसमर्थन नहीं हासिल हुआ. उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की है और इसके लिए सचिन पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. 'हार के जिम्मेदार पायलट' कांग्रेस विधायक का यह बयान गहतोल के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने अपने बेटे वैभव की हार के लिए सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहरा दिया था. प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट पर बेटे की हार का ठीकरा फोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने बयान दिया, 'सचिन पायलट ने कहा कि वैभव बड़े अंतर से जीत हासिल करेंगे, क्योंकि वहां हमारे 6 विधायक हैं और हमारा चुनाव प्रचार अच्छा है. ऐसे में मुझे लगता है कि उन्हें (पायलट) वैभव के हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. जोधपुर सीट पर पार्टी की हुई हार का पोस्टमार्टम होगा कि आखिर हम जीत दर्ज क्यों नहीं कर सके.' उधर, देशभर में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए पार्टी हाई कमान भी वरिष्ठ नेताओं से नाराज है. राहुल गांधी ने पिछले महीने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में नेताओं के बेटों को टिकट दिए जाने पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि बेटों को जिताने के लिए बड़े नेताओं ने मेहनत की और एक संसदीय क्षेत्र में सीमित रह गए. हालांकि, राहुल ने किसी नेता का नाम नहीं लिया था. इस बार अशोक गहलोत, पी. चिदंबरम और कमलनाथ के बेटों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था.
जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सचिवालय में अधिकारियों को एक शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। खाद्य और आपूर्ति विभाग की सचिव मुग्धा सिंह विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों की मीटिंग ले रही थीं, तभी बीच मीटिंग में अचानक से स्क्रीन पर पॉर्न विडियो चलने लगा। विभाग की सचिव की मौजूदगी में हुए इस शर्मनाक वाकये से हर कोई हैरान रह गया। आनन-फानन में स्क्रीन को ऑफ किया गया। घटना के बाद राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के डायरेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। मुग्धा ने बताया, 'विडियो कॉन्फ्रेंस के बीच में अचानक से एक आपत्तिजनक क्लिप स्क्रीन पर चलने लगी। मैंने तुरंत एनआईसी डायरेक्टर को कॉल की और उनसे मामले की जांच कर एक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।' उन्होंने बताया कि सचिवालय के कमरे में बैठक के दौरान विभाग और एनआईसी के प्रतिनिधि समेत करीब 10 लोग मौजूद थे। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के 33 जिलों के आपूर्ति अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा की जा रही थी। सिन्हा ने बताया कि राज्य की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए यह बैठक आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि एनआईसी के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सचिवालय में अधिकारियों को एक शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। खाद्य और आपूर्ति विभाग की सचिव मुग्धा सिंह विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों की मीटिंग ले रही थीं, तभी बीच मीटिंग में अचानक से स्क्रीन पर पॉर्न विडियो चलने लगा। विभाग की सचिव की मौजूदगी में हुए इस शर्मनाक वाकये से हर कोई हैरान रह गया। आनन-फानन में स्क्रीन को ऑफ किया गया। घटना के बाद राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के डायरेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। मुग्धा ने बताया, 'विडियो कॉन्फ्रेंस के बीच में अचानक से एक आपत्तिजनक क्लिप स्क्रीन पर चलने लगी। मैंने तुरंत एनआईसी डायरेक्टर को कॉल की और उनसे मामले की जांच कर एक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।' उन्होंने बताया कि सचिवालय के कमरे में बैठक के दौरान विभाग और एनआईसी के प्रतिनिधि समेत करीब 10 लोग मौजूद थे। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के 33 जिलों के आपूर्ति अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा की जा रही थी। सिन्हा ने बताया कि राज्य की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए यह बैठक आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि एनआईसी के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं है। पार्टी की भीतरी लड़ाई उस समय और आगे बढ़ गई, जब अशोक गहलोत ने कहा कि पार्टी प्रदेश कमिटी के चीफ और सरकार में उनके डेप्युटी सचिन पायलट को उनके बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर से हार की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में सचिन पायलट ने इस पर कोई कॉमेंट करने से इनकार कर दिया, लेकिन गहलोत के इस बयान पर आश्चर्य जताया। टीवी न्यूज चैनल एबीपी के साथ इंटरव्यू में गहलोत से पूछा गया कि क्या यह सच है कि जोधपुर से आपके बेटे का नाम पायलट ने ही सुझाया था? गहलोत ने कहा, 'यदि पायलट ने ऐसा किया था तो यह अच्छी बात है। यह हम दोनों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करती है।' इस बयान में उन्होंने कहा, 'पायलट साहब ने यह भी कहा था कि वह बड़े अंतर से जीतेगा, क्योंकि हमारे वहां 6 विधायक हैं, और हमारा चुनाव अभियान बढ़िया था। तो मुझे लगता है कि उन्हें वैभव की हार की जिम्मेदारी तो लेनी चाहिए। जोधपुर में पार्टी की हार का पूरा पोस्टमॉर्टम होगा कि हम वह सीट क्यों नहीं जीत सके।' जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें वाकई लगता है कि पायलट को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए? सीएम ने कहा, 'उन्होंने कहा कि हम जोधपुर जीत रहे थे (जोधपुर से), इसलिए उन्होंने जोधपुर से टिकट लिया। लेकिन हम सभी 25 सीट हार गए। इसलिए यदि कोई कहता है कि सीएम या पीसीसी चीफ को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मेरा मानना है कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है।' अपने डेप्युटी के खिलाफ खुलकर पहली बार तब सामने आया, जब पायलट समर्थकों ने सार्वजनिक तौर पर यह कहना शुरू कर दिया कि राज्य में कांग्रेस की हार का कारण सीएम के काम करने का तरीका है। इस इंटरव्यू में गहलोत ने कहा कि हर किसी को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि कोई जीतता है सब श्रेय मांगते हैं, लेकिन यदि कोई हारता तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। चुनाव सामूहिक नेतृत्व में पूरे हुए हैं।' केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वैभव गहलोत को करीब 4 लाख वोटों के अंतर से हराया है। यहां तक कि गहलोत की विधानसभा सीट सरदारपुरा से भी वैभव 19000 वोटों से पीछे रहे, जबकि गहलोत 1998 से वहां से जीतते आ रहे हैं। गहलोत के बेटे का इस सीट से हारना इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि गहलोत वहां से 5 बार चुनकर संसद पहुंच चुके हैं।
नई दिल्ली, 20 मई 2019, लोकसभा चुनाव 2019 में लोगों की नजर राजस्थान पर लगी हुई है, जहां हाल ही में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी है. आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल (Exit Poll) ने देश का सबसे बड़ा एग्जिट पोल किया है. इस एग्जिट पोल में राजस्थान में एक बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू चलता दिख रहा है. बीजेपी राज्य में क्लीन स्वीप करती दिख रही है और कांग्रेस का खाता खुलता नहीं दिख रहा है. दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर सीट भी फंसी हुई नजर आ रही है. आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक राजस्थान की कुल 25 सीटों में भारतीय जनता पार्टी को करीब 23 से 25 तो वहीं कांग्रेस को 0 से 2 सीटें मिलती दिख रही हैं. यानी अगर 23 मई को आने वाले नतीजों में भारतीय जनता पार्टी सभी 25 सीटें जीतती हैं तो कोई हैरान करने वाली बात नहीं होगी. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इस राज्य में क्लीन स्वीप किया था. यहां देखें राजस्थान की हर एक सीट का एग्जिट पोल- General Election 2019 Exit Poll - Rajasthan Seat By Seat Most Popular Party PC Code Parliamentary Name Most Popular party 1 Ganganagar BJP 2 Bikaner BJP 3 Churu BJP 4 Jhunjhunu BJP 5 Sikar BJP 6 Jaipur Rural BJP 7 Jaipur BJP 8 Alwar BJP 9 Bharatpur BJP 10 Karauli-Dholpur ★TF - CONG / BJP 11 Dausa BJP 12 Tonk-Sawai Madhopur ★TF - BJP / CONG 13 Ajmer BJP 14 Nagaur RLP 15 Pali BJP 16 Jodhpur BJP 17 Barmer ★TF - BJP / CONG 18 Jalore BJP 19 Udaipur BJP 20 Banswara BJP 21 Chittorgarh BJP 22 Rajsamand BJP 23 Bhilwara BJP 24 Kota BJP 25 Jhalawar-Baran BJP बता दें कि, आजतक और एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल (Exit Poll) देश का सबसे भरोसेमंद एग्जिट पोल होता है. 35 में से 34 एग्जिट पोल सबसे सटीक रहे हैं यानी 95 फीसदी सही अनुमान का रिकॉर्ड है. देश के सभी 542 सीटों पर 7 लाख से अधिक वोटर्स की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है.
जिला कलक्टर श्री जाकिर हुसैन ने साप्ताहिक मौसमी बिमारियों की बैठक में दिये विभिन्न निर्देश हनुमानगढ़, 13 मई। जिला कलक्टर श्री जाकिर हुसैन ने सोमवार को साप्ताहिक मौसमी बीमारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले में अत्यधिक गर्मी को देखते हुए आम लोगो को गर्मी से बचाव व मौसमी बीमारियों से बचाव के बारे में स्वास्थ्य विभाग ज्यादा से ज्यादा जागरूक करें। साथ ही उन्होनें कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्मिक अपने अपने मुख्यालय पर मुस्तैद रहकर बीमार लोगों का तत्परता से ईलाज भी करें। स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले में पेय पदार्थ, खाद्य पदार्थ, फल व सब्जियों की नियमित रूप से जांच करें ताकि लोगो को शुद्व पदार्थ प्राप्त हो सके। उन्होने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा जारी किये गये जन घोषणा पत्र को लागू करने के लिए सभी विभाग तत्काल तैयारी शुरू कर देवे। शिक्षा विभाग द्वारा दिनांक 10 मई 2019 से 18 जून 2019 तक ग्रीष्म अवकाश घोषित किया हुआ है परन्तु कई निजी विद्यालयों के ग्रीष्म अवकाश में खुलने की शिकायते प्राप्त हो रही है इसके लेकर जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक को सख्त हिदायत दी गयी कि ग्रीष्म अवकाश में नियमानुसार सभी विद्यालयों में अवकाश रखा जाना सुनिश्चित करें। नगरीय निकाय के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगरपरिषद व नगरपालिकाओं में मच्छरों से रोकथाम के लिए वार्ड वाईज फोंिगंग करवाये जाने की व्यवस्था तत्काल की जावें ताकि मच्छरों से होेने वाली बीमारियों को लोगो को राहत दी जा सके। जिला कलक्टर ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा 15 मई तक तूफान व तेज बरसात आने की सम्भावना व्यक्त की गयी है इसे देखते हुए सभी विभाग आपातकालिन व वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिशिचत कर लेवें ताकि किसी भी प्रकार की आपादा आने पर लोगो को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि कलैक्ट्रट परिसर में स्थित राजीव गांधी सेवा केन्द्र में जो शौचालय बना हुआ है उसमें मूलभूत सुविधाओं की कमी पायी गई है उनको दूर करने के लिए नगर परिषद, पीडब्ल्यूडी व पीएचडी विभाग संयुक्त रूप से प्रयास करे। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिले में गर्मी को देखते हुए शुद्व पेयजल सप्लाई किये जाने की व्यवस्था की जावें। बिजली विभाग पूरे जिले में ढीली तारों को कसवाने की व्यवस्था करे व बिना किसी अवरोध के विद्युत सप्लाई करने का प्रयास करें। बैठक में एसडीएम हनुमानगढ श्री कपिल यादव, आयुक्त नगरपरिषद श्री शलैन्द्र गोदारा, पीएमओ श्री एमपी शर्मा, सीएमएचओ डॉ. अरूण चमडि़या, संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ. मुखराम कडवासरा, एसई पीडब्ल्यूडी श्री गुरनाम सिह, एसई जोधपुर डिस्कॉम श्री अरूण शर्मा, सहकारिता के उप रजिस्ट्रार श्री अमीलाल, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक श्री राजेन्द्र सिंह यादव, आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजवीर सिंह व अन्य अधिकारी उपस्थित रहेें।
जयपुर, 13 मई 2019,सरकार बदलती है तो देश के महापुरुषों के बारे में नजरिया भी बदल जाता है. सत्तारूढ़ सरकारें अपने प्रतीक पुरुषों को महत्व देती हैं तो विपक्ष के नेता हमलावर भी हो जाते हैं. राजस्थान में पिछली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रमों में बदलाव करते हुए वीर सावरकर को महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम का योद्धा बताया था. सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने पाठ्यक्रम में तब्दीली करते हुए वीर सावरकर के पाठ्यक्रम में जोड़ दिया है कि अंग्रेजों की यातनाओं से तंग आकर सावरकर चार बार माफी मांग कर जेल से बाहर आए थे. राजस्थान की स्कूलों में दसवीं कक्षा के भाग-3 के पाठ्यक्रम में देश के महापुरुषों की जीवनी के बारे में पढ़ाया जाता है. पिछली बीजेपी सरकार ने महापुरुषों के चैप्टर से प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को ही गायब कर दिया था. साथ ही वीर सावरकर पर एक चैप्टर लिखा था, जिसमें उन्हें महान स्वतंत्रता स्वतंत्रता सेनानी बताया गया था. वीर सावरकर के जीवनी को महान क्रांतिकारी के रूप में लिखा गया था. सत्ता में कांग्रेस ने आते ही घोषणा की थी कि बीजेपी सरकार ने जो पाठ्यक्रम बदले हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी. समीक्षा के बाद अब नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है. छात्रों को जो नई किताबें बांटी जा रही हैं उनमें एक बार फिर से वीर सावरकर की जीवनी में जोड़ दिया गया है कि सेल्यूलर जेल में अंग्रेजों की यातनाओं से इतना तंग आ गए थे कि सावरकर ने 4 बार अंग्रेजों से माफी मांगी थी. बाद में उनके साथ काम करने के लिए तैयार भी हो गए थे. पाठ्यक्रम में आए इस परिवर्तन को लेकर बीजेपी के नेताओं में आक्रोश है. राजस्थान सरकार के शिक्षामंत्री गोविंद सिंह ने कहा इस मामले में कहा है कि सरकार पाठ्यक्रम नहीं बनाती है, उसके लिए एक शिक्षाविदों की कमेटी होती है और शिक्षाविद् तय करते हैं कि क्या पढ़ाया जाए. सरकार पाठ्यक्रम के मामले में हस्तक्षेप नहीं करती है. उधर, कांग्रेस वही पुराना तर्क दे रही है, जो पिछली बार पाठ्यक्रम में तब्दीली करने पर बीजेपी सरकार तर्क देती थी. हालांकि सरकार की सफाई पर ना तो तब भरोसा था और ना हीं अब भरोसा है और रही बात शिक्षाविदों की तो वहां भी विचारधारा के स्तर पर बंटवारा हो चुका है.
थानागाजी(अलवर) वे तीन खौफनाक घंटे अलवर गैंगरेप पीड़‍िता का जिंदगी भर पीछा करते रहेंगे। लेकिन 20 साल की, 12वीं में पढ़ने वाली इस दलित विवाहिता ने तय कर लिया है कि वह अपने लिए इंसाफ की लड़ाई को जारी रखेगी। 26 अप्रैल को पांच लोगों ने उसके पति के सामने तीन घंटों तक उसका रेप किया, वह सदमे में है पर एक बात को लेकर तय है कि उन पांचों को फांसी की सजा दी जाए। गुरुवार को टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पीड़‍िता ने कहा, 'मैं चाहती हूं कि उन पांचों को जिन्‍होंने मेरा रेप किया, विडियो बनाया और मेरा जीवन बर्बाद कर दिया फांसी की सजा दी जाए। अगर कोई इससे भी बड़ी सजा हो तो वह इन पांचों की दी जानी चाहिए।' पुलिस की प्रतिक्रिया डराने वाली स्‍थानीय पुलिस ने जिस तरह शुरू में उसकी शिकायत पर प्रतिक्रिया जताई और बाद में जब आरोपियों में से एक ने 4 मई को गैंगरेप का विडियो सोशल मीडिया पर डाला, उस समय भी एफआईआर लिखने में पुलिस ने जो आनाकानी दिखाई उससे पीड़‍िता खौफ में है। पीड़‍िता के पति बताते हैं, 'जैसे ही विडियो वायरल हुआ हम पुलिस स्‍टेशन गए पर हमें बताया गया कि स्‍टाफ की कमी की वजह से केस दर्ज नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने तो यहां तक कह दिया कि चुनावों की वजह से 5 और 6 मई को भी इस मसले पर कुछ नहीं किया जा सकेगा घर से निकलते ही पांचों ने पीछा किया था घटना वाले दिन की याद करते हुए पीड़‍िता के पति ने बताया, 'जैसे ही मैं अपनी ससुराल से निकला उसके 10 मिनट बाद ही ये पांचों लोग हमारा पीछा करने लगे और हमें जबरन रोक लिया। वे हमें एक नाले में घसीट कर ले गए और हमसे कपड़े उतारने को कहा। जब हमने इसका विरोध किया तो उन्‍होंने हमारे कपड़े फाड़ दिए और हमें पीटा। इसके बाद तीन घंटों तक हमारी जिंदगी जीते-जी नर्क बन गई। केस लिखाने के बाद भी धमकी और पैसों की मांग जारी रही। पीड़िता बताती हैं, 'हमने शुरू में मामले की शिकायत नहीं की क्‍योंकि उन लोगों ने मेरे माता-पिता और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी। लेकिन बाद में हमें लगा कि हमें पुलिस में रिपोर्ट लिखानी चाहिए ताकि किसी और को यह दरिंदगी न झेलनी पड़े।' उस शारीरिक और मानसिक आघात से उबरते हुए पीड़‍िता और उनके पति ने तय कर लिया है कि वे गुज्‍जर समुदाय के आगे नहीं झुकेंगे और न्‍याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। गौरतलब है कि पांचों आरोपी गुज्‍जर समुदाय से हैं। पीड़‍िता के पति कहते हैं, 'अब मुझे किसी से डर नहीं है। हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। केवल उनकी गिरफ्तारी हमारा मकसद नहीं है। हम उन्‍हें मौत की सजा पाते हुए देखना चाहते हैं।'
जयपुर लोकसभा चुनाव के लिए जब राजस्‍थान में वोट डाले जा रहे थे, उस समय अलवर पुलिस दलित महिला के साथ तीन घंटे तक हुए गैंगरेप पर पर्दा डालने में लगी थी। अलवर पुलिस ने राज्‍य के आला पुलिस अधिकारियों को भी इस दरिदंगी के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी, जबकि घटना का विडियो जंगल में आग की तरह सोशल मीडिया में फैल गया था। इस बीच गैंगरेप के खिलाफ जयपुर में जोरदार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। ये लोग सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और दोषी पुलिसवालों के खिलाफ सख्त ऐक्शन की मांग कर रहे हैं। पुलिस की इस लापरवाही की अब आईजी स्‍तर के अधिकारी जांच कर रहे हैं, जबकि सूत्रों ने बताया कि जिले के एसपी डॉक्‍टर राजीव पचार को इस पूरे मामले को ठीक ढंग से नहीं संभालने और गैंगरेप की गंभीरता का आकलन करने में असफल रहने पर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है। वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डॉक्‍टर पाचर को रेंज के आईजी और पुलिस मुख्‍यालय को घटना के दिन 30 अप्रैल को ही इस बारे में बता देना चाहिए था। साथ ही जिम्‍मेदार पुलिस अधिकारियों की एक टीम को अपराधियों को पकड़ने के लिए तत्‍काल रवाना कर देना चाहिए था। 'पूरे मामले में हरेक जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया' पुलिस अधिकारी ने कहा, 'एसपी डॉक्‍टर पाचर इस पूरे मामले और उसकी जटिलता को समझने में असफल रहे।' उधर, डॉक्‍टर पाचर ने दावा किया है कि उन्‍होंने इस पूरे मामले में हरेक जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया था। डॉक्‍टर पाचर ने कहा, 'इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई और मैंने साइबर सेल को अलर्ट करने और फोन नंबर को ट्रैक करने समेत सभी जरूरी कदम उठाए थे।' डॉक्‍टर पाचर कुछ भी दावा करें लेकिन इस गैंगरेप की जांच कर रहे अधिकारियों ने अब तक की जांच में पाया है कि कई स्‍तरों पर गड़बड़‍ियां की गईं। उन्‍होंने कहा कि गैंगरेप 26 अप्रैल को हुआ था और एफआईआर दो मई को दर्ज हुई। शुरू में ऐसी खबरें आई थी कि चुनाव की वजह से पुलिस पर काफी ज्‍यादा काम का दबाव था लेकिन जांच में इस दावे की हवा निकल गई। पुलिस मुख्‍यालय के सूत्रों ने बताया कि बड़ी संख्‍या में आरक्षित पुलिस बल अलवर में मौजूद था और पुलिस की कोई कमी नहीं थी। 'पुलिस की नहीं थी कोई कमी' अधिकारी ने कहा, 'सबसे पहली बात एसएचओ को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया गया था। दूसरी बात अगर वह कानून और व्‍यवस्‍था के काम में लगे हुए थे तो कुछ अन्‍य अधिकारियों को इस जांच में लगाया जा सकता था या अलवर पुलिस राज्‍य के पुलिस मुख्‍यालय से मदद मांग सकती थी। सीकर अपहरण की तरह हम एटीएस के विशेष अभियान दल को जांच में लगा सकते थे।' उधर, राज्‍य पुलिस ने उन खबरों को खारिज कर दिया है कि अलवर पुलिस ने चुनाव के बीच इस पूरे मामले के राजनीतिक असर को देखते हुए उसे छिपाने की कोशिश की। अधिकारी ने कहा, 'चुनाव को देखते हुए कई वीआईपी और वीवीआईपी अलवर के दौरे पर थे। सुरक्षा व्‍यवस्‍था प्राथमिकता थी लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस तरह के गंभीर मामले को अनदेखा कर दिया जाए। यह संवेदनशीलता की कमी और एफआईआर दर्ज करने की अनिच्‍छा का संकेत है।'
जयपुर राजस्थान के अलवर गैंगरेप केस में पीड़िता और उसके परिवार के साथ पुलिस की चौंकाने वाली संवेदनहीनता सामने आई है। 26 अप्रैल को हुई घटना पर पुलिस ने पांच दिन तक शिकायत दर्ज नहीं की। यही नहीं 1 मई को जब 20 साल की पीड़िता का परिवार अलवर एसपी राजीव पचार के कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करने की गुहार लगा रहा था, उस समय महिला के पति के फोन पर लगातार एक आरोपी से उगाही की कॉल आ रही थी। इसके बाद भी पुलिस ने कोई ऐक्शन नहीं लिया। यह देखकर परिवार को अपने स्तर पर मामले की जांच करनी पड़ी और आरोपी के नाम पुलिस को बताए। मामले में अब तक 4 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसपी पर आरोप है कि उन्होंने उन फोन कॉल के आधार पर बलात्कारियों और वसूली करने वालों को ट्रैक नहीं किया। इसी के चलते उन्हें एपीओ (प्रतीक्षा सूची में डालना) कर दिया गया है। पीड़िता के पिता ने कहा कि 26 अप्रैल को गैंगरेप के बाद भी पीड़िता की परीक्षा कम नहीं हुई बल्कि पुलिसकर्मियों की संवेदनहीनता के चलते और बढ़ गई। महिला के पिता ने कहा, 'हम 30 अप्रैल को अपनी शिकायत दर्ज कराने एसएचओ थानगाजी पुलिस स्टेशन गए लेकिन हमें वहां झूठा दिलासा देकर वापस भेज दिया गया कि पुलिस ने उन आरोपियों को पकड़ने के लिए टीमें बनाई हैं जिन्होंने मेरी बेटी के साथ बर्बरता की और दामाद की बुरी तरह पिटाई की।' एसपी ने दी सफाई पीड़ित परिवार ने बताया, 'अगले दिन हम अलवर एसपी राजीव पचार के पास गए और उन्होंने भी हमारी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जबकि एक आरोपी उस वक्त लगातार कॉल भी कर रहा था। पुलिस अधिकारी एक ही रट लगाए थे कि वे जल्द ही आरोपियों को पकड़ लेंगे और हमें सलाह दे रहे थे कि घटना के बारे में किसी को न बताएं।' जबकि एसपी ने दावा किया कि उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया। सफाई देते हुए एसपी ने कहा, 'मैंने तुरंत ही साइबर सेल को अलर्ट किया ताकि आरोपी ने जो विडियो बनाए थे वे सर्क्युलेट न किए जाए और उनसे मोबाइल फोन को भी ट्रैक करने को कहा जिससे शिकायतकर्ता को कॉल आ रही थी।' पीड़िता के परिवार ने अस्पताल पर भी लापरवाही के आरोप लगाए। पीड़िता के पिता ने कहा कि महिला मेडिकल स्टाफ की कमी की वजह से उनकी बेटी की मेडिकल जांच में भी देरी हुई। 'मेडिकल टेस्ट के लिए महिला स्टाफ नहीं था' महिला के पिता ने कहा, 'पुलिस अपराध की बर्बरता को समझ नहीं रही थी और थानागाजी में 2 मई को हमसे कहा गया कि अस्पताल में मेरी बेटी का मेडिकल टेस्ट करने के लिए कोई महिला स्टाफ भी नहीं है। मेरी बेटी को टेस्ट के लिए 3 मई को अलवर जाना पड़ा।' स्थानीय पुलिस का ढीला रवैया देखकर परिवार ने खुद से पड़ताल शुरू की और कुछ आरोपियों के नाम और पते पुलिस को मुहैया कराए लेकिन पुलिस ने उन्हें भी गंभीरता से नहीं लिया। 'पुलिस को आरोपियों के नाम बताएं फिर भी कुछ नहीं किया' पीड़िता के देवर ने बताया, 'अपने संपर्क के जरिए मैंने कुछ अपराधियों की पहचान की और पुलिस को उनकी जानकारी भी दी लेकिन वे हाथ पर हाथ धरे बैठे ही रहे। 30 अप्रैल तक पांचों आरोपी खुलेआम घूमते रहे और फिर फरार हो गए। यहां तक कि इसके बाद भी पुलिस उनके परिवार से पूछताछ कर सकती थी लेकिन कुछ नहीं किया।' कोर्ट में अहम कागजात लाना भूल गई पुलिस पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने पूरी जांच में इतनी ढिलाई बरती और उसी का नतीजा था कि इतने घिनौने अपराध को अंजाम देने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूमते रहे। राज्यभर में मामले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए लेकिन पुलिस की कार्रवाई में कोई तेजी नहीं आई। जब पीड़िता बुधवार को मैजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराने पहुंची तो पुलिसकर्मी कुछ बेहद जरूरी कागजात लाना भूल गए, इस वजह से पीड़िता को गुरुवार को दोबारा बयान दर्ज कराने जाना पड़ेगा। परिवार न्याय की आस में इधर-उधर भटक रहा है। कांग्रेस सरकार ने मुआवजा घोषित किया उधर पुलिस ने मामले में बुधवार को 2 और लोगों को गिरफ्तार किया। मामले में अब तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है जिनके खिलाफ पति के सामने दलित महिला का गैंगरेप करने का आरोप है। आरोपियों ने गैंगरेप की क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी थी। बुधवार को गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशोक और हमेश गुर्जर के रूप में हुई है। दोनों ट्रक ड्राइवर हैं। दोनों उन 5 आरोपियों में से हैं जिन्होंने महिला के साथ रेप किया था। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। इस बीच प्रदेश सरकार ने पीड़िता के परिवार को 4.12 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। पीड़िता के पिता का कहना है, 'यह गिरफ्तारी और पहले हो सकती थी लेकिन पुलिस अब बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए 48 घंटे का वक्त मांग रही है। हम कब तक इंतजार करें?'
अलवर, 09 मई 2019, राजस्थान के अलवर जिले में दलित युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इसको लेकर दलित समुदाय का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर ने दलित युवती के साथ गैंगरेप करने वाले आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की है. उन्होंने मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी मांग भी उठाई है. वहीं, इस मामले में पुलिस ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में गिरफ्तार चौथे आरोपी की पहचान महेश गुर्जर और पांचवें आरोपी की पहचान हंसराज गुर्जर के रूप में हुई है. इससे पहले पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. इन आरोपियों के नाम इन्द्राज गुर्जर, अशोक गुर्जर और मुकेश गुर्जर हैं. इसके अलावा मामले में आरोपी छोटे लाल गुर्जर और हंसराज गुर्जर की तलाश जारी है. पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया कि अलवर गैंग रेप मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है. आपको बता दें कि अलवर जिले के थानागाजी थाने में 2 मई को दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था. उधर, अलवर पहुंचे भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि अलवर जिले के थानागाजी में घटित एक दलित युवती के साथ गैंगरेप का मामला बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है. आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए. चंद्रशेखर ने कहा कि राजस्थान के अलवर जिले में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन अधिकारी लापरवाह नजर आते हैं. उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर आक्रोश जताते हुए कहा कि जो काम पुलिस अधिकारियों को करना चाहिए वह काम पीड़ितों ने किया है. आरोपियों के नाम पते मोबाइल सब पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को दिया गया है. चंद्रशेखर ने अलवर के पुलिस अधीक्षक का जिक्र करते हुए कहा कि आरोपी पक्ष के लोग पुलिस अधीक्षक अलवर को फोन करते हैं और धमकाते हैं. और पुलिस अधीक्षक अपने आप को असहाय बताते हैं. ऐसे पुलिस अधीक्षक का स्थान जेल में है और उन्हें जेल मिलनी चाहिए. रावण ने आरोप लगाया कि पैसे के लालच में ऐसे पुलिस अफसरों ने अपना जमीर बेच दिया है. रावण ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार शीघ्र आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करेगी तो वे राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाकर आंदोलन करेंगे. दूसरी ओर महिला विकास एवं समाज अधिकारिता मंत्री ममता भूपेश ने थानागाजी के पीड़ित परिवार से मुलाकात की. संपूर्ण घटना की जानकारी भी ली. बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनकी प्राथमिकता सबसे पहले पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है और सरकार पीड़ित परिवार के साथ है. उन्होंने बताया कि सरकार ने इस मामले में तुरंत एक्शन लिया और एसपी को एपीओ कर दिया जबकि थानेदार को सस्पेंड कर दिया गया है. राज्य की मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है और जो लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें धरना प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. सरकार की भी मंशा साफ है, जो भी इस मामले में दोषी हैं. उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. 3 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. शेष 2 लोगों की गिरफ्तारी बाकी है. श्रम मंत्री टीकाराम जूली ने कहा कि इस मामले में पुलिस की लापरवाही और मिली भगत सामने आई है. जांच की जा रही है. उनकी कॉल डिटेल निकलवाकर इन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे और दोषियों के खिलाफ जो भी सख्त से सख्त कार्रवाई होगी, वह की जाएगी. राजस्थान सरकार ने पीड़ित परिवार को फौरन आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है. मंत्री ने बताया कि दो-तीन दिन में बाकी दो तीन आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
जयपुर राजस्थान में अलवर के थानागाजी इलाके में एक दलित महिला से गैंगरेप की घटना ने सियासी रंग ले लिया है। घटना को दबाने का आरोप झेल रही राज्य सरकार अब ऐक्शन मोड में है। थानागाजी थाने के एसओ सरदार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है, वहीं एसपी राजीव पचार का तबादला कर दिया गया है। मामले में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक आरोपी को वॉट्सऐप ग्रुप में विडियो फैलाने के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया है। अलवर के थानागाजी इलाके में बाइक से अपने पति संग जा रही एक महिला से उसके पति के सामने ही 3 घंटे तक बलात्कार किया गया और पूरी घटना की विडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। विरोध करने पर आरोपियों ने महिला और उसके पति को पीटा भी था। आरोप है कि पीड़ित महिला ने जब थानागाजी थाने और एसपी अलवर के पास 2 मई को गैंगरेप की शिकायत दी तो उन्होंने चुनाव ड्यूटी का हवाला देकर कोई कार्रवाई नहीं की थी। दलित महिला से गैंगरेप पर कोई कार्रवाई ना करने के आरोप झेल रही राज्य सरकार मंगलवार को तब और घिर गई, जब इसी इलाके में एक 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की एक और घटना सामने आई। इसके बाद सरकार ने थानागाजी पुलिस स्टेशन के एसओ सरदार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। 'चुनाव तक दलित महिला से गैंगरेप मामले को दबाना चाहती थी सरकार' उधर मामले पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने ट्वीट किया, 'रोज सामने आती ऐसी घिनौनी घटनाएं कांग्रेस के महिला सुरक्षा के वादों की पोल खोलती हैं।' राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष मदनलाल सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार दलित महिला से गैंगरेप की घटना को चुनाव खत्म होने तक दबाए रखना चाहती थी, जिससे उसे कोई सियासी नुकसान ना हो। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, 'दलित महिला से गैंगरेप के मामले में आरोपियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमारी सरकार महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।' पीड़िता के परिवार का आरोप, पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई बता दें कि पीड़िता और उसके परिवार का आरोप था कि पुलिस आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। पीड़िता के देवर ने बताया था कि जब हम पुलिस के पास केस दर्ज करवाने गए तो उन्होंने चुनाव ड्यूटी की वजह से स्टाफ कम होने का हवाला देकर केस दर्ज करने से इनकार कर दिया था। डीजीपी का चुनाव के चलते कार्रवाई ना करने के आरोपों से इनकार हालांकि राजस्थान के डीजीपी कपिल गर्ग ने चुनाव के चलते कार्रवाई ना करने के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, 'पुलिस अपनी जांच से संबंधित प्रोटोकॉल्स को पूरा कर रही थी। इस घटना के एक आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। एक आरोपी को मंगलवार रात गिरफ्तार किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की 14 टीमें लगाई गई हैं।'
जयपुर अलवर में गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। अलवर के थानागाजी इलाके में एक महिला से उसके पति के सामने 3 घंटे तक बलात्कार किया गया और पूरी घटना की विडियो रिकॉर्डिंग भी कई गई। विरोध करने पर आरोपियों ने महिला और उसके पति को पीटा भी। महिला अपने पति के साथ बाजार तक शॉपिंग करने गई थी। पूरी घटना का विडियो बनाने के बाद आरोपियों ने रेप पीड़िता को ब्लैकमेल करना भी शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार, गैंगरेप में शामिल सभी आरोपी ट्रक ड्राइवर या हेल्पर हैं। जितना रोका, उतनी ही दरिंदगी ' रेप पीड़िता ने बताया कि उसने आरोपियों को जितना रोका, उन्होंने उतनी ही दरिंदगी की। पांचों आरोपियों ने तीन घंटे तक कई बार महिला से रेप किया। घटना के बाद पीड़िता को एक आरोपी ने फोन किया और रिकॉर्ड किए गए 11 विडियो लीक ना करने के एवज में पैसों की भी मांग की। तीन आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य दो आरोपियों की धर-पकड़ के लिए पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। थानागाजी थाने के एसओ को सस्पेंड कर दिया गया है और अलवर के एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया है। एक आरोपी की हुई पहचान, सभी आरोपी ट्रक ड्राइवर या हेल्पर गैंगरेप में शामिल एक आरोपी की पहचान ट्रक ड्राइवर इंद्रराज गुर्जर के रूप में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया सभी आरोपियों की उम्र 20-25 के बीच है। शुरुआती जांच में पता चला है कि सभी आरोपी ट्रक ड्राइवर या हेल्पर हैं। पुलिस ने बताया कि मुकेश गुर्जर (20) के नामक एक शख्स को वॉट्सएप पर गैंगरेप का विडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 'पीछा कर वारदात को दिया अंजाम' पीड़िता के देवर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'मेरा भाई जयपुर में काम करता है और भाभी थानागाजी स्थित अपने मायके में रहती हैं। 26 अप्रैल को दोनों शॉपिंग के लिए गए थे। दोनों अपनी बाइक से थे कि तभी दो अन्य बाइक पर सवार पांच युवक उनका पीछा करने लगे। सुनसान इलाका आने पर उन्होंने जबरन बाइक रुकवाई और उसे पास के गड्ढे में गिरा दिया। इसके बाद दोनों को खींचकर रोड के नीचे रेत के टीलों के पीछे ले गए।' पति को बचाने के लिए महिला ने किया सरेंडर रेत के टीलों के पीछे कपल के कपड़े उतरवाए गए और उसकी विडियो रिकॉर्डिंग की गई। महिला के देवर ने बताया, 'पांचों लोगों ने मेरे भाई को डंडों से पीटना शुरू कर दिया। भाभी ने भाई को बचाने का प्रयास किया तो उन्होंने दोनों को और ज्यादा पीटा। अपने पति को बचाने के लिए आखिरकार उन्होंने सरेंडर कर दिया। जिसके बाद उन पांचों ने बारी-बारी से उनके साथ दरिंदगी की। यह सब तीन घंटे तक चला। जाते समय उन्होंने दोनों के पास रखे 2000 रुपये भी लूट लिए।' गहरे सदमे में चले गए थे दोनों, तीन दिन बाद परिवार को बताया उसने आगे बताया, 'मेरी भाभी ने घटना के बाद बाइक में धक्का लगाया और दोनों उसे ऊपर सड़क पर लेकर आए। दोनों गहरे सदमे में जा चुके थे। उन्होंने हमें तीन दिन बाद इस बारे में बताया।' आरोपियों में से एक ने बाद में कपल को फोन कर 9,000 रुपये की फिरौती भी मांगी। पैसे ना देने की सूरत में विडियो वायरल करने की भी धमकी दी। आरोपियों ने सोमवार को सोशल मीडिया पर घटना का एक विडियो वायरल भी कर दिया।
जयपुर. लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में सोमवार को राजस्थान की 12 सीटों पर मतदान शाम छह बजे खत्म हो गया। शाम 6 बजे तक प्रदेश में 60.10 प्रतिशत मतदान हुआ है। वर्ष 2014 में हुए चुनाव में इन क्षेत्रों में 61.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। प्रदेश में कई स्थानों पर मशीन में खराबी के कारण मतदान आधा घंटे रुका रहा। इन 12 सीटों पर दाे केंद्रीय मंत्रियों समेत 134 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें 16 महिलाएं हैं। सबसे ज्यादा प्रत्याशी जयपुर और सबसे कम दौसा संसदीय क्षेत्र में हैं। दूसरे चरण में श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली-धौलपुर, दौसा व नागौर सीटों पर मतदान हुआ। ईवीएम ने अटकाए रखा राज्य में कई केंद्र पर वोटिंग मशीनों के खराब होने से वोटर परेशान रहे। लालकोठी में सांसद रामचरण बोहरा और भाजपा नेता अशोक परनामी ने तीन लोगों पर फर्जी वोटिंग का आरोप लगाते हुए पकड़ा। जयपुर : राजधानी में कई पोलिंग बूथ्स पर ईवीएम खराब होने की शिकायतें। हवामहल विधानसभा क्षेत्र के बाजोरिया स्कूल में ईवीएम की खराबी, इस वजह से आधा घंटा देरी से शुरू हुआ मतदान, बाद में भी ईवीएम के अटक अटक कर चलने की शिकायत हुई। वार्ड 85 में भाग संख्या 114 पर शुरू होते ही खराब हुई ईवीएम मशीन, हवामहल भाग 164 में भी आधे घंटे ईवीएम खराब रही, सरस्वती स्कूल में बने पोलिंग बूथ पर ईवीएम खराब हुई। जयपुर के मानसरोवर में बूथ नंबर 82 पर मशीन खराब होने से मतदान आधा घंटे रुका रहा। भाजपा प्रदेश कंट्रोल रूम के इंचार्ज निर्मल नाहटा ने बताया की राजस्थान में बहुत जगह ईवीएम मशीन की खराबी के कारण काफी देर तक वोटिंग शुरू नहीं हो पाई। भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में एक मतदानकर्मी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। दूसरे चरण में 23 हजार 783 मतदान केंद्र बनाए गए थे। प्रदेश में 1550 संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग के जरिए नजर रखी गई। दूसरे चरण की 12 लोकसभा सीटों के लिए कुल 134 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस से 12, बीजेपी से 11, बसपा से 10, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से 1 और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से 3 जबकि 29 अन्य दल और 68 निर्दलीय प्रत्याशी हैं। प्रदेश में पहले चरण की 13 सीटों पर 29 अप्रैल को रिकॉर्ड 68.22 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। यह 1952 से लेकर अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा थी और 2014 के लोकसभा चुनाव से 3.95 प्रतिशत अधिक। पिछले लोकसभा चुनाव में इन 13 सीटों पर 64.27 फीसदी मतदान हुआ था। इन सीटों पर नजर बीकानेर: इस सीट पर दो मौसेरे भाई आमने-सामने हैं। भाजपा के प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम जहां पूर्व आइएएस हैं तो कांग्रेस के प्रत्याशी मदन गोपाल मेघवाल पूर्व आईपीएस हैं। अर्जुन राम 2009 और 2014 में लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। वहीं मदन गोपाल राजनीति में नए हैं। अर्जुन राम बीकानेर में पुराने भाजपाई देवी सिंह भाटी का विरोध झेल रहे हैं। बीकानेर से अर्जुन राम की उम्मीदवारी पर देवी सिंह ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। जयपुर ग्रामीण : केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जयपुर ग्रामीण से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस ने विधायक व पूर्व ओलिंपियन कृष्णा पूनिया हैं। इस क्षेत्र में जाट समाज के चार लाख से अधिक वोट होने के कारण मुकाबला कड़ा है। राज्यवर्धन मोदी का चेहरा आगे करके ही वोट मांग रहे हैं और यहां के युवाओं में पीएम मोदी के प्रति आकर्षण के कारण राज्यवर्धन की स्थिति अच्छी है। अलवर : यहां में कांग्रेस के भंवर जितेंद्र सिंह का मुकाबला भाजपा के बाबा बालकनाथ से है। बालकनाथ हरियाणा से हैं और कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है। नुक्कड़ सभाओं में कांग्रेस प्रत्याशी मतदाताओं से कहते है कि अलवर का अपमान मत होने देना। बाहरी को भगा देना। वहीं भाजपा प्रत्याशी कहते है कि हमें सुरक्षित अलवर चाहिए तो कांग्रेस को भगा देना। दोनों पार्टियों का गणित फिलहाल कांटे की टक्कर मान रहा है। नागौर : भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाने वाले हनुमान बेनीवाल का मुकाबला नागौर के ताकतवर मिर्धा परिवार की बेटी ज्योति मिर्धा से है। ज्योति मोदी लहर में यहां से चुनाव हार गईं थीं। इससे पहले वे यहां से सांसद चुनी गई थीं। भाजपा ने यहां बेनीवाल की पार्टी से गठबंधन किया है। बेनीवाल को भाजपा के साथ युवाओं का भी साथ मिल रहा है। दौसा: यहां कांग्रेस और भाजपा ने महिला प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा की जसकौर मीणा के सामने कांग्रेस की सविता मीणा हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट देने वाले गुर्जर कांग्रेस से नाराज हैं। माना जा रहा है कि उनके वोट भाजपा की झोली में आ सकते हैं। 14 सीटों के प्रत्याशियों पर एक नजर - सीट उम्मीदवार कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा श्रीगंगानगर भरतराम निहालचंद बीकानेर मदन गोपाल मेघवाल अर्जुन राम मेघवाल चूरू रफीक मंडेलिया राहुल कस्वां झुंझुनूं श्रवण कुमार नरेंद्र खींचल सीकर सुभाष महरिया सुमेधानंद सारस्वत जयपुर ग्रामीण कृष्णा पूनिया राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जयपुर ज्योति खंडेलवाल रामचरण बोहरा अलवर भंवर जितेंद्र सिंह बाबा बालकनाथ भरतपुर अभिजीत जाटव रंजीता कोली करौली-धौलपुर संजय कुमार जाटव मनोज राजौरिया दौसा सविता मीणा जसकौर मीणा नागौर ज्योति मिर्धा हनुमान बेनीवाल (गठबंधन प्रत्याशी)
जयपुर, 06 मई 2019, लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण में राजस्थान की 12 सीटों पर वोटिंग जारी है. यहां कांग्रेस की सारी उम्मीदें राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट पर टिकी हैं. तो वहीं भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) को प्रधानमंत्री के नाम से. विधानसभा चुनाव में यही वह इलाका था, जहां से सचिन पायलट ने कांग्रेस को जीत दिलाई थी. पहले चरण में हुए 13 सीटों के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस फंसी भी नजर आ रही थी, लेकिन माना जा रहा है कि दूसरे चरण की 12 सीटों पर सचिन पायलट की अच्छी पकड़ है और यहां से कांग्रेस को उम्मीदें हैं. इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 12 सीटों के लिए चार रैलियां की. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्र सरकार में मंत्री वीके सिंह से लेकर मोदी सरकार के 15 मंत्री इन 12 सीटों के लिए अपने ताकत लगाए हुए हैं. बीजेपी को इन सीटों पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का सहारा है. इन इलाकों में दौसा, धौलपुर-करौली, भरतपुर, नागौर जैसी सीटें हैं. जहां माना जा रहा है कि कांग्रेस जीत सकती है. बीकानेर, झुंझुनू, सीकर और जयपुर ग्रामीण सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में टक्कर का मुकाबला माना जा रहा है. कोई भी दल अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है. जयपुर शहर में कांग्रेस और बीजेपी दोनों भीतरघात के समस्या से उलझ रही हैं. जिस पार्टी में ज्यादा भीतरघात हुआ, उस पार्टी के जीतने की संभावना कम है. माना जा रहा है कि सचिन पायलट के मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से गुर्जर नाराज हैं, लेकिन सचिन पायलट ने इस इलाके में ताबड़तोड़ रैलियां कर नाराज गुर्जरों को मनाया है. धौलपुर-करौली की सभा में तो सचिन पायलट ने कहा कि मेरे हाथ मजबूत करने के लिए आप कांग्रेस को वोट दीजिए. सचिन पायलट अगर अपने प्रभाव वाले इलाकों में जीत दिला पाएंगे तो पार्टी के अंदर उनका कद बढ़ेगा. उधर कहा जा रहा है कि धौलपुर-करौली, जयपुर शहर, भरतपुर जैसी सीटों पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपनी ताकत लगाई है.
जोधपुर राजस्थान की 25 में से 13 लोकसभा सीटों पर चौथे चरण के तहत मतदान हो रहा है। यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए एक-एक सीट बहुत मायने रखती है, क्योंकि इसका सीधा असर बहुमत के खेल पर पड़ने की संभावना है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटें जीत ली थीं लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद इस बार कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इस चरण में राज्य के पश्चिमी इलाके मारवाड़, दक्षिणी इलाके मेवाड़ और पूर्वी इलाके हाड़ौती में वोटिंग हो रही है। मारवाड़ को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहीं मेवाड़ को बीजेपी का किला माना जाता है। जिन बड़ी सीटों पर इस चरण में मतदान हो रहा है, उनमें जोधपुर की सीट पर प्रतिष्ठा की जंग है। यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच लड़ाई है। इसे गहलोत और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की टक्कर के तौर पर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते जोधपुर के अलावा बाड़मेर में रैली की थी। इसका एक हिस्सा शेखावत के जोधपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है। शुक्रवार को अमित शाह ने आरएसएस के पूर्व प्रचारक शेखावत के पक्ष में जोधपुर में एक रोड शो किया। एक अनुभवती राजनेता गहलोत भी इस सीट पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह लोगों से लगातार मिल रहे हैं। गहलोत को यह बात अच्छी तरह पता है कि अगर वैभव की हार होती है तो इसे अपने गृहक्षेत्र में सीएम की हार के रूप में देखा जाएगा। 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने से पहले गहलोत यहां से पांच बार जीत चुके हैं। सिर्फ 1989 में वह पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह से हारे थे। पड़ोसी बाड़मेर संसदीय क्षेत्र में भी दिलचस्प जंग है। यहां कांग्रेस उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह अपने परिवार के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं। 2014 में बीजेपी से टिकट न मिलने पर उनके पिता जसवंत सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी। जाट बहुल सीट पर इस बार बीजेपी ने सिटिंग एमपी सोनाराम चौधरी का टिकट काटकर युवा जाट नेता कैलाश चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। राजसमंद में जयपुर के पूर्व शाही परिवार की सदस्य दिया कुमारी (बीजेपी) की टक्कर कांग्रेस के कम चर्चित चेहरे देवकीनंदन गुर्जर से है। झालावाड़-बारां सीट पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बेटे और तीन बार से सांसद दुष्यंत सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने प्रमोद शर्मा को उतारा है। पाली में केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी का मुकाबला पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बद्रीराम जाखड़ से है। टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस कैंडिडेट नमो नारायण मीणा बीजेपी सांसद और राज्य के सबसे अमीर प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनापुरिया के खिलाफ मैदान में हैं। डेप्युटी सीएम सचिन पायलट विधानसभा में टोंक सीट की नुमाइंदगी करते हैं। अजमेर में पूर्व मंत्री बीना काक के दामाद रिजू झुनझुनवाला कांग्रेस के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी टक्कर पूर्व विधायक भागीरथ चौधरी से है।

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