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25 साल में पहली सीरीज जीत, कोहली की टीम ने रचा इतिहास
नई दिल्ली 25 साल हो गए भारत को साउथ अफ्रीका का दौरा करते। इस चौथाई सदी में भारतीय क्रिकेट टीम साउथ अफ्रीका में कोई वनडे सीरीज नहीं जीत पाई थी। पर मंगलवार का दिन भारतीय टीम के लिए खूब मंगल रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर शानदार तरीके से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। कप्तान कोहली की कप्तानी वाली टीम पोर्ट एजिलाबेथ वनडे जीतकर साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय टीम बन गई। दुनिया की नंबर एक वनडे टीम ने साबित कर दिया कि आखिर वह इस मुकाम पर क्यों पहुंची है। जीत में कप्तान कोहली की अहम भूमिका रही। आखिरी मैच में वह भले ही 36 रन बनाकर रन आउट हो गए, लेकिन इस सीरीज में अभी तक उन्होंने जबरदस्त बल्लेबाजी की है। भारत अब छह वनडे मैचों की सीरीज में 4-1 की अजेय बढ़त बना चुका है। भारत ने डरबन में खेला गया पहला वनडे छह विकेट से जीता। सेंचुरियन में एक बार उसने मेजबान टीम को पटखनी दी और 9 विकेट से मुकाबला अपने नाम किया। 124 रन से केप टाउन में जीत हासिल कर भारत सीरीज में 3-0 से आगे हो चुका था। यानी अब वह कम-से-कम सीरीज हार नहीं सकता था। शनिवार को साउथ अफ्रीका ने वर्षा-बाधित मैच में भारत को हराया। अब भारत साउथ अफ्रीका को 73 रनों के बड़े अंतर से हरा ट्रोफी पर अपना नाम दर्ज कर चुका है। कोहली इसके साथ ही साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए। बल्ले से कैप्टन कोहली ने जो खेल दिखाया उसने साउथ अफ्रीका में भी कई नए प्रशंसक बना लिए। पांच मैचों में कोहली ने 429 रन नबाए। इसमें दो शतक और एक अर्धशतक शामिल है। वह साउथ अफ्रीका में किसी वनडे सीरीज में 400 का आंकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी बने। भारत की जीत में रिस्ट स्पिनर्स की जोड़ी की भूमिका भी कम नहीं रही। पांच में से चार मुकाबलों में तो घूमती गेंदों के सामने मेजबान बल्लेबाज नाचते से नजर आए। चाइनामैन कुलदीप ने जहां पांच मैचों में 16 विकेट लिए हैं तो लेग स्पिनर चहल के खाते में 14 सफलताएं आईं हैं। भारत को साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज जीतने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। भारत ने 1992 में साउथ अफ्रीका का पहला दौरा किया था। मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारत को सात वनडे मैचों की सीरीज में 2-5 से हार मिली थी। इसके बाद 1996-97 (0-4), 2000-01 (इसमें एक ट्राएंगुलर सीरीज खेली गई जिसमें कीनिया भी शामिल था, भारत फाइनल में साउथ अफ्रीका से हारा), 2006-07 (0-4), 2010-11 (2-3) और 2013-14 (0-2) भी भारत के लिए निराशाजनक रहे। 2003 में सौरभ गांगुली की कप्तानी में भारत आईसीसी विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा। भारत को फाइनल में रिकी पोंटिंग की टीम के सामने उन्नीस साबित होना पड़ा। 2009 में चैंपियंस ट्रोफी में महेंद्र सिंह धोनी की टीम नॉक-आउट से पहले ही बाहर हो गई थी। वनडे रैंकिंग में फिलहाल दूसरे पायदान पर मौजूद साउथ अफ्रीकी टीम को सीरीज में चोटों से काफी परेशान रहना पड़ा। नियमित कप्तान फाफ डु प्लेसिस, एबी डि विलियिर्स और क्विंटन डि कॉक चोटिल रहे। पहले मैच में डु प्लेसिस ने 120 रनों की पारी खेली। इसके बाद उनकी उंगली में फ्रैक्चर हो गया और वह सीरीज से बाहर हो गए। दूसरे वनडे के दौरान नियमित विकेटकीपर बल्लेबाज क्विंटन डि कॉक चोटिल हो गए। पहले तीन मैचों से बाहर रहने वाले एबी डि विलियर्स भी चौथे वनडे में ही टीम के साथ जुड़ पाए। ऐसे में हाशिम अमला जो पांच मैचों में सिर्फ एक हाफ सेंचुरी लगा पाए हैं को छोड़ दें तो मेजबान टीम की बल्लेबाजी काफी कमजोर रही है। भारतीय टीम की जीत के दौरान यह देखना अच्छा रहा कि साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज पूरी सीरीज के दौरान चहल और कुलदीप की गेंदों को नहीं समझ पाए। 27 वर्षीय चहल ने 2/45 के बाद करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 5/22, 4/46 के बाद अब इस मैच में 2/43 का खेल दिखाया।

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