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ये हैं कैंसर के कारण और लक्षण, ऐसे लड़ें कैंसर से
नई दिल्लीः असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा के मुताबिक, पाप का फल है कैंसर. उनके इस बयान से हर कोई उनकी आलोचना कर रहा है. बहरहाल, आज हम आपको बता रहे हैं कैंसर के कारणों, लक्षणों और उससे होने वाले बचाव के बारे में. बुढ़ापे के साथ जल्दी बढ़ता है कैंसर- हर साल कैंसर के लगभग 11 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. इनमें से भारत में किसी भी वक्त 33 लाख लोग कैंसर से जूझ रहे होते हैं. कैंसर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और बुढ़ापे में कैंसर होने की संभावना काफी अधिक होती है. पहचानें इसके लक्षण- कैंसर कई तरह के होते हैं. ऐसे में कोई एक निश्चित लक्षण बताना संभव नहीं. कैंसर के लक्षण व्यक्ति की उम्र और उसके रहन-सहन भी नि‍र्भर करते हैं. डॉक्टर जांच के बाद ही कैंसर के टाइप की पुष्टि कर सकते हैं. कैंसर के लिए कौन है जिम्मेदार- चंडीगढ़, पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च के कम्यूनिटी मेडिसिन प्रोफेसर डॉ.अरूण.के.अग्रवाल के मुताबिक, लाइफस्टाइल और पर्यावरण कैंसर होने का एक बहुत बड़ा कारण है. इसमें बढ़ता वजन, डायट, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, मोटापा, शराब का सेवन, तंबाकू, काम का बोझ और कुछ इंफेक्शन शामिल हैं. ऐसे लोगों हो सकता है कैंसर का अधिक खतरा- जर्मनी की एक रिसर्च में ये बात सामने आई हैं कि जिन लोगों की हाइट अधिक होती है उन्हें कैंसर का खतरा अधिक होता है. यदि व्यक्ति की लंबाई सामान्य व्यक्ति से 6.5 इंच अधिक है तो उन्हें कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 6 फीसदी कम हो जाता है. लेकिन कैंसर होने का खतरा चार फीसदी बढ़ जाता है. लंबे लोगों को आमतौर पर ब्रेस्ट, आंत और त्वचा का कैंसर अधिक होता है. कैंसर का इलाज- कैंसर के इलाज के कई तरीके उपलब्ध हैं. यह मरीज की आयु, बीमारी की तीव्रता और फैलाव पर निर्भर है. लेकिन इलाज कैसा हो यह कोई अनुभवी और कुशल डॉक्टर ही बता सकता है. कैंसर का इलाज हर मरीज के लिए अलग-अलग होता है इससे मरीज के ज्यादा समय तक जिंदा रहने की संभावना बढ़ जाती है. घर का माहौल कैंसर रोगी को करता है जल्दी ठीक- एक रिसर्च के मुताबिक, घर का माहौल मरीज के ठीक होने में बेहतर भूमिका निभाता है क्योंकि वह अपने आरामदायक माहौल में रहता है और जल्दी स्वस्थ होने के लिए प्रेरित होता है. कैसे लड़े कैंसर से- कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाकर, लोगों की कैंसर को लेकर गलतफहमियों को दूर करके कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है. स्कूलों और वर्कप्लेस पर 30 मिनट किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करवाकर. फिर चाहे योगा हो या फिर कोई और फिजिकल एक्टिविटी. बच्चों और बड़ों दोनों को जंकफूड से दूर रखें. वर्कप्लेफस पर कर्मचारियों को हेल्दी बिहेवियर और सेहत के लिए मोटिवेट करें. घर और ऑफिस को स्मोकिंग, नशे और मादक पदार्थों से मुक्त माहौल दें. समय-समय पर बॉडी चैकअप करवाते रहें और कैंसर केयर के लिए विशेष कदम उठाएं. कैंसर के रोगियों को सपोर्ट करें और उनका साथ दें. सबसे जरूरी है हमें हेल्दी लाइफस्टाइल को प्रमोट करना है. अच्छी डायट लें. व्यायाम करें. कैंसर पेंशेट की सही से देखभाल करें. आयुर्वेद पद्धति के अनुसार इलाज- हल्दी, अदरक, मेथीदाना, अश्वगंधा, त्रिफला और अजवाइन ऐसी चीजें हैं जो हमारे शरीर की अग्नि को बनाए रखती हैं और अगर कीमोथैरेपी के साथ इन्हें दिया जाए तो कीमो के अन्य कुप्रभाव और दर्द दोनों ही काफी कम हो जाते हैं. इनसे रोगी में कैंसर की दवा को सुप्रभावी बनाने की क्षमता बढ़ जाती है और उसके शरीर में कमजोरी नहीं आती.

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