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गुरमीत को भगाने के लिए खून की नदियां बहाने की थी साजिश!
जींद सिरसा डेरा के दो अनुयायी राम रहीम की करीबी हनीप्रीत और डेरा चेयरपर्सन विपासना के खिलाफ खड़े हो गए हैं। सरकारी गवाह बने गुरमीत + के इन भक्तों ने हनीप्रीत और डेरा के चेयरपर्सन के काले कारनामों का चिट्ठा खोल दिया है। इन दोनों ने गवाही दी है कि 25 अगस्त को खूनी संघर्ष के पीछे गुरमीत को भगाने की योजना थी। भक्तों को संदेश दिया गया था कि गुरमीत को पुलिस से छुड़ाने के लिए खून की नदियां बहाने में भी पीछे न हटें। सिरसा निवासी अनिल कुमार और राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी राजेश कुमार ने सरकारी गवाह बनते हुए डेरा चेयरपर्सन विपासना के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। दोनों की इस गवाही से साफ हो गया है कि डेरा प्रमुख को छुड़वाने के लिए जो संघर्ष हुआ था उसके पीछे हनीप्रीत और विपासना का बड़ा रोल था। हनीप्रीत ने ली थी मीटिंग राजस्थान + के संगरिया के माला रामपुरा निवासी राजेश कुमार ने पुलिस को बताया कि 17 अगस्त को डेरा सच्चा सौदा सिरसा में मुख्य कार्यक्रम था। डेरा प्रेमी होने के नाते वह उस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचा था। उस रात डेरे के तेरावास में हनीप्रीत, आदित्य इंसां की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई थी। राजेश के मुताबिक वह इस मीटिंग में गलती से चला गया था। उसने बताया कि बैठक में सरदार चमकौर सिंह, विपासना, अभिजीत, गुरलीन, राकेश, ड्राइवर फूल, गोभी राम, दिलावर, राम सिंह के अलावा कुछ अन्य लोग मौजूद थे। राजेश ने दावा किया है कि वह उनके नाम तो नहीं जानता, लेकिन शक्ल पहचानता है। यूं रची गई थी साजिश इसी मीटिंग में साजिश रची गई थी कि 25 अगस्त को राम रहीम का सीबीआई कोर्ट में फैसला होना है। इस दौरान वहां से गुरमीत को भगाने के लिए लाखों की संख्या में डेरा प्रेमी पंचकूला में अलग-अलग हिस्सों से डंडों, लाठियों, छतरियों, पेट्रोल-डीजल के साथ पहुंचाने हैं। बैठक में यह तय किया गया कि अगर फैसला खिलाफ आया और गुरमीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया तो पंचकूला में तोडफ़ोड़, आगजनी करके किसी भी कीमत पर गुरमीत को पुलिस के चंगुल से छुड़ाना है। भक्तों को यहां तक कहा गया था कि उनके सामने जान लेने और देने की नौबत आई तो भी वह पीछे न हटें। दूसरे गवाह सिरसा के डबवाली क्षेत्र के गांव चौटाला के अनिल कुमार ने भी पुलिस को इसी तरह का बयान दिया है।

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