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हरियाणा में भी चली यूपी की सियासी फिल्म, 31 साल पुराने मोड़ पर वापस पहुंचा चौटाला परिवार
चंडीगढ़ वर्चस्व की जंग में एक और सियासी परिवार आपसी फूट की भेंट चढ़ गया। यूपी में मुलायम परिवार में चाचा-भतीजे की जंग वाली फिल्म हरियाणा में दिग्गज चौटाला परिवार में भी चल गई। यहां चाचा अभय चौटाला और भतीजे दुष्यंत चौटाला की लड़ाई का चरम गोहाना रैली में कुछ यूं खुलकर सामने आया कि पूरी पार्टी स्तब्ध है। पार्टी के वफादार काडर और आम कार्यकर्ता के जहन में 31 साल पुराना माहौल ताजा हो गया है। स्व. देवीलाल के जन्मदिवस के मौके पर गोहाना रैली में हूटिंग से बेहद नाराज चौटाला ने एक झटके में अपने युवा सांसद पोते दुष्यंत चौटाला के समर्थकों को चुन-चुन कर ठिकाने लगा दिया है वहीं युवा इकाई और इंडियन स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन (इनसो) की राष्ट्रीय एवं राज्य इकाई को तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया है। इनसो की कमान दुष्यंत के भाई दिग्विजय संभाल रहे थे। दोनों अजय चौटाला के बेटे हैं। दोनों युवा शाखाओं को अनुशासनहीनता के कारण और पार्टी के आदर्शों के विरुद्ध काम करते हुए पाया गया था। पार्टी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक गोहाना रैली में पार्टी की युवा इकाई पूरी तरह अपनी भूमिका निभाने में असफल रही। यह भी पाया गया था कि इनसो पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है। इनसो पर आरोप है कि पार्टी विरोधी शक्तियों से मिलकर षड्यंत्र करते हुए उपरोक्त रैली में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश की गई और पार्टी की साख को बट्टा लगाने का प्रयास किया गया है। 31 साल पहले इसी तरह के हालात आईएनएलडी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के पिता स्व. देवीलाल के सामने बने थे। 1987 में बड़ा न्याययुद्ध जीतकर एकतरफा जीत से मिली ताकत ही उनके बेटों के बीच वर्चस्व की जंग की बड़ी वजह बन गई थी और 1989 तक आते-आते देवीलाल के सामने अपने तीनों बेटों रणजीत सिंह, प्रताप सिंह और ओमप्रकाश चौटाला में से किसी एक को अपना राजनीतिक वारिस चुनने का बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। विधानसभा में 90 में से 85 सीट जीतकर ताकतवर बने देवीलाल के लिए यह चयन करना किसी बेबसी से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने ओमप्रकाश चौटाला को सबसे उपयुक्त राजनीतिक वारिस के रूप में देखा और मुख्यमंत्री पद पर बैठा दिया था। यह कलह उस वक्त नहीं थमी थी और रणजीत और प्रताप सिंह चौटाला धीरे-धीरे अलग राहों पर चले गए। चौटाला परिवार की आज की राजनीति को देखें तो पार्टी में चाचा अभय चौटाला और भतीजे दुष्यंत चौटाला के बीच जंग लंबे समय से चल रही थी। अभी तक यह घर की दीवार के भीतर थी, लेकिन 9 अक्टूबर को गोहाना में परिवार के सबसे बड़े दिग्गज स्व. देवीलाल के जन्मदिवस पर रखी गई रैली से परिवार की राजनीति खुलकर सबके सामने आ गई। पार्टी में यह बड़ी घटना ठीक उस समय हुई है जब पार्टी 14 साल से ज्यादा समय से सत्ता से बाहर है और अब नए सिरे से सत्ता की दहलीज छूने के लिए संघर्ष कर रही थी। साफ है कि आईएनएलडी और इसको चलाने वाला चौटाला परिवार इस दौरान बड़े उतार-चढ़ाव से गुजरा है। पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला तथा उनके बड़े बेटे अजय चौटाला के जेबीटी टीचर घोटाले में जेल चले जाने के बाद पार्टी चलाने का चुनौती भरा दारोमदार छोटे बेटे अभय चौटाला पर आ गया। उन्होंने पूरी ताकत लगाकर न केवल काडर का आत्मविश्वास बनाए रखा बल्कि चुनाव भी लड़े। उनकी पार्टी बेशक सत्ता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन प्रमुख विपक्षी दल की हैसियत जरूर बचाए रखने में कामयाब रही। सत्ता पर आंख लगाए अभय चौटाला ने कुछ समय पहले ही बीएसपी के साथ गठबंधन कर माहौल बनाने की कोशिश की लेकिन, घर के भीतर से मिल रही चुनौतियों से जूझने को मजबूर होना पड़ा। दुष्यंत पर लगी सबकी नजर अब सबकी निगाह युवा पार्टी सांसद दुष्यंत चौटाला की अगली कदमचाल पर लग गई है। स्वभाव से नम्र दुष्यंत चौटाला फिलहाल चुप नजर आ रहे हैं। वहीं उनके भाई दिग्विजय चौटाला ने दिन में छात्रसंघ चुनावों के सिलसिले में दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कॉन्फ्रेंस ठीक उस समय हुई थी जब उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला अपनी कलम से संगठन में आमूल-चूल बदलाव की इबारत लिख रहे थे।

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