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2019 में अजित सिंह चुनाव लड़ेंगे या नहीं? उलझन में छोटे चौधरी
नई दिल्ली,राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष चौधरी अजित 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ें या नहीं इसी उलझन में फंसे हुए हैं. मंगलवार को बागपत में पार्टी की समीक्षा बैठक में कहा कि अब 80 साल का हो गया हूं, 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लडूंगा. हालांकि कुछ ही घंटे के बाद अजित सिंह अपनी ही बात से पलट गए. उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा. गौरतलब है कि अजित सिंह ने अपने पिता चौधरी चरण सिंह की सियासी विरासत को संभाला था. वे 1986 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद अपने पिता की परंपरागत सीट बागपत से 1989 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद 1991 और 1996 में जीत कर संसद पहुंचे, लेकिन दो साल के बाद जब 1998 में चुनाव हुए तो उन्हें शिकस्त खानी पड़ी. अजित सिंह ने 1998 में राष्ट्रीय लोकदल पार्टी का गठन किया. इसके बाद 1999, 2004 और 2009 में लगातार चुनाव जीते, लेकिन 2014 में मोदी लहर में बीजेपी के उम्मीदवार सतपाल सिंह से हार झेलनी पड़ी. इतना ही नहीं उनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुला. अजित सिंह ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बागपत में पार्टी की समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महागठबंधन के तहत 2019 का चुनाव लड़ना हर दल की मजबूरी है. अगर अगला लोकसभा चुनाव कोई दल अकेले लड़ता है तो वह समाप्त हो जाएगा. बीजेपी से गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का बीजेपी से गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता. आरएलडी मुखिया ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी के खिलाफ बन रहे महागठबंधन के साथ मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि परिवर्तन की बयार बहनी शुरू हो गई है और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो जाएगा. देश में बीजेपी का नहीं आरएसएस का राज चल रहा है. सिंह ने कहा कि बीजेपी लोगों को बरगलाने और नफरत की सियासत कर रही है. वह हिंदू-मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदुओं को भी जातिगत आधार पर बांट कर लड़ा रही है. संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष नहीं बल्कि पीएम की हार हुई है, क्योंकि राहुल गांधी पीएम मोदी के गले लग यह संदेश देने में सफल रहे कि हम प्यार की सियासत करते हैं और बीजेपी नफरत की राजनीति करती है. केंद्र सरकार के सात हजार करोड़ के गन्ना पैकेज को ढकोसला बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को इससे रत्तीभर फायदा नहीं मिलने वाला.

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