A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: fopen(/tmp/ci_session360d09e106706821db7badd2fab45d31f9aaed67): failed to open stream: Disk quota exceeded

Filename: drivers/Session_files_driver.php

Line Number: 156

Backtrace:

File: /home/hanumangarhlive/public_html/index.php
Line: 315
Function: require_once

A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: session_start(): Cannot send session cookie - headers already sent by (output started at /home/hanumangarhlive/public_html/system/core/Exceptions.php:272)

Filename: Session/Session.php

Line Number: 140

Backtrace:

File: /home/hanumangarhlive/public_html/index.php
Line: 315
Function: require_once

A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: session_start(): Cannot send session cache limiter - headers already sent (output started at /home/hanumangarhlive/public_html/system/core/Exceptions.php:272)

Filename: Session/Session.php

Line Number: 140

Backtrace:

File: /home/hanumangarhlive/public_html/index.php
Line: 315
Function: require_once

Hanumangarh Live || politics || अमित शाह की नसीहत के बाद भी दिल्ली बीजेपी में नहीं सुधरे हालात
taaja khabar....अमेरिका ने भारत को हथियार क्षमता वाले गार्जियन ड्रोन देने की पेशकश की: सूत्र....अविश्वास प्रस्ताव: मोदी सरकार को मिलेगा विपक्ष पर निशाना साधने का मौका....संसद भवन पर हमले के लिए निकले हैं खालिस्तानी आतंकी: खुफिया इनपुट....धरती के इतिहास में वैज्ञानिकों ने खोजा 'मेघालय युग'....कठुआ केस में नया मोड़, पीड़िता के 'असल पिता' कोर्ट में होंगे पेश...निकाह हलाला: बरेली में ससुर पर रेप का केस, अप्राकृतिक सेक्‍स के लिए पति पर भी मुकदमा...मॉनसून सत्र: अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी शिवसेना?....देश के हर गांव को जाएगा कुंभ का न्योता, योगी पत्र लिख मुख्यमंत्रियों को बुलाएंगे....क्या अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर मोदी सरकार के दांव में फंस गया विपक्ष?...लखनऊ में बड़े कारोबारी के यहां छापे, 89 किलो सोना-चांदी बरामद, 8 करोड़ कैश भी...
अमित शाह की नसीहत के बाद भी दिल्ली बीजेपी में नहीं सुधरे हालात
नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले महीने एकदिवसीय दिल्ली प्रवास के दौरान दिल्ली में पार्टी के कामकाज को लेकर नाखुशी जताई थी। कोर कमिटी की मीटिंग में शाह ने दिल्ली बीजेपी के नेताओं को आपसी गुटबाजी से दूर रहने की हिदायत दी थी। साथ ही पार्टी में खाली पदों को जल्द भरने और सांसदों को जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने के अलावा केजरीवाल सरकार को घेरने के लिए मजबूत रणनीति बनाने पर जोर दिया था। बावजूद इसके दिल्ली बीजेपी में सुधार के लक्षण कहीं नजर नहीं आ रहे। इसका एक और उदाहरण रविवार को देखने को मिला, जब दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन की शुरुआत करने के लिए आम आदमी पार्टी ने प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया था। बीजेपी ने इसके विरोध में राजघाट पर धरने का आयोजन किया। इसके जरिए बीजेपी यह मांग कर रही थी कि पहले दिल्ली सरकार लोगों को पूर्ण बिजली और पानी मुहैया कराए, लेकिन धरने में फिर आपसी तालमेल, एकजुटता और सहयोग की कमी दिखाई पड़ी। धरने में संगठन की मौजूदगी भी नजर नहीं आई सूत्रों के मुताबिक, धरने में शामिल होने का मेसेज तमाम पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और पार्षदों को भेजा गया था, बावजूद इसके कुछ लोग ही धरने के लिए इकट्ठा हो पाए। सात में से छह सांसद और चारों विधायक नदारद थे। तीनों एमसीडी में बीजेपी के 182 काउंसलर हैं, लेकिन धरने में 29 पार्षदों ने हिस्सा लिया। इनमें साउथ एमसीडी के 13, नॉर्थ एमसीडी के 6 और ईस्ट एमसीडी के 10 पार्षद शामिल थे। पार्टी के तीनों महामंत्री इस कार्यक्रम में जरूर मौजूद रहे और धरने को लीड किया। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते सांसद मनोज तिवारी भी यहां पहुंचे, लेकिन अन्य अधिकारी नदारद ही दिखे। पार्टी के 8 में से 6 उपाध्यक्ष नदारद थे, तो 8 में से 5 मंत्री भी नहीं आए। यहां तक कि 14 जिलाध्यक्षों में से भी सिर्फ 5 जिलाध्यक्ष इसमें शामिल हुए। धरने को लेकर रणनीति भी साफ नहीं पार्टी ने कार्यक्रम की मुख्य जिम्मेदारी प्रदेश के पूर्वांचल और महिला मोर्चे को दी थी, लेकिन महिला मोर्चे की अध्यक्ष और महामंत्री के अलावा और पूर्वांचल मोर्चे के भी कई पदाधिकारी गायब थे। सूत्रों के मुताबिक, जितने पदाधिकारियों को इस धरने में शामिल होने की सूचना भेजी गई थी, उनमें से महज 10 प्रतिशत पदाधिकारी ही शामिल हुए। कार्यक्रम को लेकर पार्टी की रणनीति भी साफ नहीं थी। पहले शहीदी पार्क पर इकट्ठा होकर दिल्ली सचिवालय तक मार्च करने की योजना थी। इसके बाद जिस इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में, जहां आम आदमी पार्टी का कार्यक्रम चल रहा था, उसके बाहर प्रोटेस्ट करने की योजना बनी, लेकिन अंत में पार्टी राजघाट के सामने धरना देने तक ही सीमित रही। ऐसे में अब पार्टी के अंदर एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पार्टी के सांसद, विधायक और अन्य पदाधिकारी पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से दूरी क्यों बनाए हुए हैं?

Top News

http://www.hitwebcounter.com/