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कांग्रेस को तीसरे मोर्चे की कोशिश में दिख रही 'बीजेपी की चाल'
नई दिल्ली तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के नेता के चंद्रशेखर राव की तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश के पीछे कांग्रेस को कई मकसद दिख रहे हैं। इनमें 'बीजेपी विरोधी विपक्ष को बांटने के लिए बीजेपी का छिपा हाथ' शामिल है। राव ने हाल ही में घोषणा की थी कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस वाला क्षेत्रीय दलों का तीसरा मोर्चा बनाया जाएगा। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इसका उद्देश्य एक बीजेपी-विरोधी बड़ा गठबंधन बनाने की उसकी कोशिशों को रोकने के साथ ही राहुल गांधी को प्रस्तावित गठबंधन का अध्यक्ष बनाने की राह में रुकावटें डालना है। इसी के मद्देनजर सोनिया गांधी ने विपक्ष की एकजुटता को मजबूत करने के लिए 13 मार्च को विपक्षी नेताओं को डिनर पर आमंत्रित किया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री राव की तीसरे मोर्चे के लिए क्षेत्रीय नेताओं की पसंद में भी कांग्रेस को गड़बड़ी नजर आ रही है। राव और उनके सहयोगियों ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी और बीजू जनता दल (बीजेडी) के प्रमुख नवीन पटनायक जैसे नेताओं के साथ संपर्क किया है। इन दोनों नेताओं ने अपने राज्यों में कांग्रेस से मुंह मोड़कर खुद को दोबारा स्थापित किया है। इसके साथ ही वे चुनाव के बाद के गठबंधन के विकल्प भी खुले रखते हैं। बनर्जी अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी-विरोधी दलों के नेता के तौर पर राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करना चाहती। कांग्रेस के सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा, 'धर्मनिरपेक्ष दलों को बांटने के किसी कदम से बीजेपी को चुनाव से पहले विपक्षी दलों की एकता को तोड़ने में मदद मिलेगी।' कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि राव तीसरे मोर्चे के मुद्दे का इस्तेमाल खुद को एक गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस मोर्चे के नेता के तौर पर पेश करने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इसके जरिए राव अपने मतदाताओं को लुभाना और उनका ध्यान अपनी सरकार की नाकामियों से हटाना चाहते हैं। टीआरएस को बीजेपी के साथ दोस्ताना संबंध रखने और कांग्रेस का विरोध करने वाली पार्टी के रूप में जाना जाता है और इसी वजह से कांग्रेस को तीसरे मोर्चे की कोशिश के पीछे बीजेपी का हाथ होने का शक है। हालांकि, तीसरे मोर्चे की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी बीजेडी सतर्कता से चल रही है। पार्टी के सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा, 'हम क्षेत्रीय दलों के मोर्चे के विचार का स्वागत करते हैं और हमारी पार्टी इसके लिए हमेशा तैयार रही है। हम बीजेपी और कांग्रेस के साथ समान दूरी रखते हैं। लेकिन हमें देखना होगा कि इस विचार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कैसे काम किया जाता है।' कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीआरएस तीसरे मोर्चे के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी से संपर्क कर सकती है। कांग्रेस भी अगले लोकसभा चुनाव के लिए इन दोनों दलों के साथ मिलकर बीजेपी-विरोधी बड़ा गठबंधन बनाना चाहती है।

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