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लालू को सजा का ऐलान होने के बाद अब बदलेगी बिहार की सियासत, सभी दलों ने शुरू की तैयारी
नई दिल्ली शनिवार की शाम 4 बजे झारखंड में रांची की एक अदालत में चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा का ऐलान हो रहा था, ठीक उसी समय बिहार के पटना में आरजेडी की हाल के दिनों की सबसे बड़ी मीटिंग हो रही थी। इस मीटिंग में आरजेडी के तमाम टॉप नेताओं के अलावा पूरे प्रदेश से पदाधिकारी भी शामिल हो रहे थे। जाहिर था, पार्टी बड़ी सजा की आशंका के बीच आगे की रणनीति और सबको एकजुट रखने की कोशिशों के बीच संदेश देना चाह रही थी कि लालू की अनुपस्थिति में भी वह मुकाबले के लिए तैयार है। जल्द ही पार्टी को 'अग्निपरीक्षा' से गुजरना है। दरअसल, बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है, जो RJD सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन से खाली हुई है। यही नहीं, अक्टूबर में राजद विधायक मुद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद से जहानाबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। वहीं, भाजपा विधायक आनंद भूषण पांडेय का नवंबर में निधन होने से भभुआ विधानसभा सीट भी खाली हो गई है। वहीं, सजा के ऐलान पर नीतीश कुमार की अगुआई वाली जेडीयू और बीजेपी भी इस फैसले पर टकटकी लगाकर देख रही थी। इनका आकलन था कि अधिक दिनों तक लालू प्रसाद के जेल में रहने का मतलब है- विपक्ष मुक्त बिहार को अमल में लाने का समय। आरजेडी जहां लालू के लिए अधिकतम 3 साल सजा की दुआ कर रहा था जिससे तत्काल जेल से जमानत मिल जाए। वहीं, बीजेपी और जेडीयू का गणित था कि 5 साल जेल मिलने पर जमानत मिलने में देरी होगी। इसके लिए हाई कोर्ट तक जाना होगा। हालांकि जब जज ने न 3 साल न 5 साल की सजा दी बल्कि 3.5 साल की सजा सुनाई तो दोनों खेमा नए सिरे से आकलन में जुट गया। फैसले के तुरंत बाद आरजेडी के एक सीनियर नेता ने कहा कि- कोर्ट का रुख देखते हुए हमने 5 साल की सजा की उम्मीद की थी। अब सजा कम होने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि हाई कोर्ट से तुरंत जमानत मिल जाएगी। हालांकि लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी के नेतृत्व में शनिवार को हुई मीटिंग में पार्टी के आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। पार्टी में तय किया गया कि तुरंत एक सामूहिक नेतृत्व खड़ा करना होगा, जो पार्टी का कामकाज देख सके। अगले महीने ही बिहार में लोकसभा सीट पर उपचुनाव है और वह सीट आरजेडी की है। ऐसे में उस सीट को बचाए रखना आरजेडी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मीटिंग में तय किया गया कि लालू प्रसाद यादव की चिट्ठी को पूरे प्रदेश में बांटा जाएगा, लेकिन पार्टी की मीटिंग के बाद जिस तरह तेजस्वी यादव ने पूरी मीटिंग के बारे में बात रखी उससे साफ संकेत गया कि लालू की अनुपस्थिति में वही कमान संभालने वाले हैं। वहीं, आरजेडी नेताओं ने कहा कि सजा की पूरी कॉपी मिलने के तुरंत बाद वे हाई कोर्ट में अपील करेंगे। हालांकि फिलहाल जो केस की स्थिति है उस हिसाब से लालू प्रसाद का तुरंत जेल से निकल पाना आसान नहीं है। अभी इस केस में सजा मिलने के अलावा चार और केस में कोर्ट का फैसला आना है। सूत्रों के अनुसार जनवरी महीने में ही उन सभी मामले में अगर लालू प्रसाद को सजा मिलती गई तो सबमें अलग-अलग सजा मिलेगी और सबमें अलग-अलग जमानत लेनी होगी। कांग्रेस ने कहा- गठबंधन पर असर नहीं उधर, लालू यादव के जेल जाने के बाद कांग्रेस ने भी तुरंत संकेत दिया कि इससे आरजेडी के साथ गठबंधन पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने कहा कि पार्टी ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। जहां तक गठबंधन का सवाल है, वह आरजेडी के साथ है, किसी व्यक्ति के साथ नहीं। सूत्रों के अनुसार पार्टी के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं आएगा।

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