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हरकत में योगी आदित्यनाथ सरकार, इन भ्रष्ट अधिकारियों को किया बर्खास्त

बागपत,उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर रहे आनंद कुमार ने डीजी जेल का कार्यभार संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बड़ा एक्शन लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्ट व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने की चेतावनी के बाद शासन ने ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी है. बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए जेलर उदय प्रताप सिंह व मेरठ जेल में स्टिंग ऑपरेशन मामले में डिप्टी जेलर धीरेंद्र कुमार सिंह को बर्खास्त कर दिया गया है. जांच में दोनों अधिकारी ड्यूटी में लापरवाही के दोषी पाए गए और कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके. दोनों अधिकारियों के कृत्यों से शासन व कारागार विभाग की छवि को गहरा आघात पहुंचा था, जिसके चलते यह कठोर कदम उठाया गया. दरअसल, बागपत जेल में 9 जुलाई 2018 को उच्च सुरक्षा बैरक में बंदी सुनील राठी ने माफिया प्रेम काश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस वारदात ने सूबे की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जेलों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े किए थे. इस पर सरकार की काफी किरकिरी भी हुई थी. घटना के बाद जेलर उदय प्रताप सिंह को निलंबित कर जेल अधीक्षक, कानपुर को विभागीय जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जांच में सामने आया कि जेलर ने बागपत जेल की अव्यवस्था दूर करने की महज औपचारिकता की. हत्यारोपित बंदी सुनील राठी का बागपत जेल में पूरा प्रभाव था और उसके मुलाकात करने वालों व उनके द्वारा लाए जाने वाले सामान की तलाशी नहीं होती थी. इसके चलते ही सुनील राठी तक पिस्टल व कारतूस पहुंचे. जेलर को जानकारी थी कि सुनील राठी और मुन्ना बजरंगी दोनों शातिर अपराधी हैं, इसके बावजूद मुन्ना बजरंगी को सुनील राठी के अहाते में बंद किया गया. इसके नतीजे में मुन्ना की हत्या हुई. इसके अलावा मेरठ जेल में एक न्यूज चैनल द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में बंदियों को अनाधिकृत सुविधा दिलाने की बात कर रहे डिप्टी जेलर धीरेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ 20 अप्रैल 2017 को अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए जांच उप महानिरीक्षक, कारागार बरेली को सौंपी गई थी. जांच में डिप्टी जेलर का आचरण भ्रष्टाचार से जुड़ा पाया गया. प्रमुख सचिव गृह ने जेलर व डिप्टी जेलर को सेवा से बर्खास्त किए जाने का शासनादेश जारी कर दिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार ही लोक भवन में गृह और सचिवालय प्रशासन की समीक्षा बैठक में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था कि अब वह नकारा व भ्रष्ट अधिकारियों को बर्दाश्त करने के मूड में हैं. जिसके बाद ये पहली कार्रवाई की गई है

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