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इन्सेफलाइटिस : यूपी ने 2 ही साल में काबू किया, बिहार में रुक नहीं रहा मौतों का सिलसिला

नई दिल्ली बिहार में इस वक्त अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम की वजह से अब तक 129 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश ने इस बीमारी पर काफी हद तक काबू पा लिया है। प्रदेश के 14 सबसे प्रभावित जिलों में इन्सेफलाइटिस से मौत के आंकड़े में 67% तक की गिरावट दर्ज की गई है। जापानी इन्सेफेफलाइटिस और अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। दोनों ही राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है और इस कारण इससे निपटना और मुश्किल है। योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने भी 2017 में गोरखपुर में इस बीमारी के कारण हुई बच्चों की मौत से बड़ा संकट पैदा हो गया था। अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इन्सेफलाइटिस के कारण हुई बच्चों की मौत के मामले ने बहुत तूल पकड़ा था। गोरखपुर में 2017 में 500 से अधिक बच्चों की मौत इन्सेफलाइटिस के कारण हुई थी। इस बीमारी पर काबू पाने के लिए 2018 में राज्य सरकार ने ऐक्शन प्लान लॉन्च किया। राज्य सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के साथ मिलकर इन्सेफलाइटिस की रोकथाम के लिए युद्ध स्तर पर काम किया गया। इसका असर भी सिर्फ एक साल में ही नजर आने लगा। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़े के अनुसार, 2018 में इन्सेफलाइटिस के कारण होनेवाली मौत का आंकड़ा घटकर 166 तक रह गया। 2017 में यह आंकड़ा 511 का था। यूपी के 14 जिलों में इस बीमारी से 2017 में कुल 2,247 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा घटकर 1,047 तक पहुंच गया। 2019 में अब तक ऐसे 82 केस रेकॉर्ड किए गए हैं जिनमें से 20 बच्चों को बचाया नहीं जा सका। उत्तर प्रदेश सरकार में मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग के डायरेक्टर के के गुप्ता ने बताया, 'सरकार ने व्यापक योजना के तहत काम किया और उसका असर अब यहां नजर आ रहा है।' उन्होंने बताया कि सरकार ने बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया, साफ सफाई के लिए भी लोगों को जागरूक किया गया। गुप्ता के अनुसार, सरकारी प्रयासों की बदौलत स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर अस्पतालों में अधिक बेड लगाने, डॉक्टरों, नर्सों और पारा-मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करनेवाले कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर ही करने और उसकी रोकथाम के लिए काफी उपाय किए। 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बीमारी पर रोकथाम के लिए कई संस्ताओं के साथ मिलकर काम किया। 2 साल में ही बीमारी की रोकथाम और इससे होनेवाली मौत पर काफी काबू पा लिया गया है।

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