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चुनावी राज्यों में इसलिए एसपी और बीएसपी को महत्व नहीं दे रही कांग्रेस, यह है रणनीति
नई दिल्ली मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस-बीएसपी और कांग्रेस-एसपी के ब्रेकअप को भले ही पार्टी के लिए झटका माना जा रहा हो। लेकिन कांग्रेस इसमें भी रणनीति देख रही है। कांग्रेस के रणनीतिकार ट्विन प्लान पर काम कर रहे हैं, पहला एकजुट होकर बीजेपी के दुर्गों को घेरने का काम करना और दूसरा क्षेत्रीय दलों को कम स्पेस देना। कांग्रेस ने अपनी ओर से एमपी में बीएसपी को अधिकतम 10 सीटें और समाजवादी पार्टी को 3 सीटें देने का फैसला लिया था। चुनावी राज्यों में कांग्रेस की रणनीति तैयार करने में जुटे नेताओं का कहना है कि यदि एसपी और बीएसपी अपने आधार वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जगह देने में कोताही बरतते हैं तो फिर उन्हें भी उसकी मजबूती वाले इलाकों में उदारता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस को लगता है कि यदि वह राज्यों में एसपी और बीएसपी को बड़ी हिस्सेदारी देती है तो फिर लोकसभा चुनाव में इनकी मांग और बढ़ जाएगी। यहां तक कि दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को खासी कम जगह दे सकती हैं। राज्यों में बेहतर कर आम चुनाव में ताकत दिखाएगी कांग्रेस मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ने में कांग्रेस लंबे वक्त के लिए अपना फायदा देख रही है। कांग्रेस इन चुनावी राज्यों में अपनी ताकत को बढ़ाना चाहती है ताकि वह लोकसभा चुनाव से पहले खुद को मजबूती के साथ विपक्ष का नेता साबित कर सके। यही वजह है कि कांग्रेस गठबंधन न करने के रिस्क को भी फायदे के तौर पर देख रही है। जहां डायरेक्ट मुकाबले में कांग्रेस, वहां नहीं देगी एंट्री एक कांग्रेस लीडर ने कहा, 'हम जानते हैं कि बीएसपी, एसपी, तृणमूल और एनसीपी जैसे दल चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस कमजोर होकर उभरे ताकि 2019 में वह बढ़त में रहें। लेकिन, हमें अपने हितों की रक्षा करनी होगी।' भले ही कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य से सत्ता से बाहर है, लेकिन वह यहां बीजेपी के साथ खुद को ही मुख्य मुकाबले में मानती है। इसके अलावा कांग्रेस राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल, गोवा और असम में खुद को बीजेपी के साथ मुख्य मुकाबले में मानती है। उसकी रणनीति यह है कि यहां किसी अन्य तीसरे या चौथे प्लेयर को एंट्री क्यों दी जाए। अपने आधार में सेंध से आशंकित है कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ओबीसी-एससी-एसटी वोटरों की बड़ी संख्या है। कांग्रेस मानती है कि यदि इन राज्यों में वह एसपी और बीएसपी को स्पेस देती है तो उसे भविष्य में अपने जनाधार को खोना पड़ सकता है। यूपी और बिहार में ऐसा ही हुआ है, जहां क्षेत्रीय दलों के मजबूत होने के बाद से कांग्रेस वापसी नहीं कर सकी है।

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