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5 राज्यों के आखिर में राजस्थान के विधानसभा चुनाव BJP के पक्ष में जाएगा?
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2018, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अगले महीने हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को आखिरी सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा है. चुनाव आयोग ने शनिवार को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है. बीजेपी के लिए ये विधानसभा चुनाव करो या मरो जैसे हैं. इसमें राजस्थान की सियासी बाजी जीतना बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती नजर आ रही है. ऐसे में चुनाव आयोग का आखिरी दौर में राजस्थान में मतदान कराना कहीं बीजेपी के लिए फायदे का सौदा तो साबित नहीं होगा? चुनाव आयोग ने जिन पांच राज्यों की तारीखों का ऐलान किया है, उनमें से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की सरकारें हैं. बीजेपी के लिए इन तीनों राज्यों में सत्ता को बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती है. छत्तीसगढ़ में सबसे पहले मतदान होंगे. राज्य में 12 और 20 नवंबर को दो चरणों में वोटिंग होगी. वहीं, मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को मतदान किया जाएगा. जबकि राजस्थान में 7 दिसंबर को वोटिंग की तारीख तय की गई है. 2013 विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान में जितने भी उपचुनाव हुए हैं उसमें से एक भी बीजेपी जीत नहीं सकी है. इसी साल फरवरी में अजमेर, अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है. ये तीनों सीटें पहले बीजेपी के पास थीं. वसंधुरा राजे के खिलाफ राज्य में एंटी-इनकमबेंसी और बीजेपी की अंदरूनी गुजबाजी व जातीय समीकरण बीजेपी के खेल को लगातार बिगाड़ रहे हैं. ऐसे में आखिरी में विधानसभा चुनाव होना बीजेपी के लिए एक तरह से संजीवनी बन सकता है. दरअसल, राजस्थान में जब विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे, उससे करीब 10 से 11 दिन पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 20 दिन पहले चुनाव हो चुके होंगे. बीजेपी के सारे नेता इन राज्यों से खाली हो चुके होंगे. इन राज्यों से फ्री होने के बाद वे सभी राजस्थान में लगाए जा सकते हैं. इससे पार्टी को प्रचार के लिए अच्छी खासी टीम मिल जाएगी. दूसरा सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि राजस्थान में मौजूदा समय में जिस तरह की एंटी-इनकमबेंसी वसुंधरा राजे के खिलाफ है. उसके लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का माहौल का भी फायदा मिल सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि चुनाव आयोग का आखिरी में राजस्थान चुनाव कराना वसुंधरा राजे के लिए कहीं संजीवनी तो नहीं है.

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