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राहुल के नियुक्त किए नेताओं पर खड़गे ने भरी मीटिंग में उठाए सवाल
नई दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों पार्टी में तमाम नई नियुक्तियां कीं. महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य और बड़े सहयोगी नेता शरद पवार के चलते राहुल ने लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रभारी महासचिव नियुक्त कर दिया. साथ ही खड़गे के सहयोग के लिए 5 राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति भी की. मगर मल्लिकार्जुन खड़गे ने पांच में से तीन सचिवों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने साफ कहा है, 'पांच में से तीन राष्ट्रीय सचिव अनुभवहीन हैं, गंभीर नहीं हैं, और मेरे साथ सहयोग के नाम पर बेकार हैं.' गौरतलब है कि खड़गे के साथ राहुल ने ही इन सचिवों की नियुक्ति की थी. सूत्रों के मुताबिक खड़गे के सहयोग के लिए नियुक्त इन सचिवों के खिलाफ रिपोर्ट दे दी गई है. पूरा मामला राहुल के दरबार में है, लेकिन खड़गे ने राहुल की गैरमौजूदगी में अहमद पटेल और अशोक गहलोत को पूरा मामला भरी मीटिंग में बता डाला. खड़गे ने अपने साथ जुड़े 5 राष्ट्रीय सचिवों में से तीन को नकारा बता दिया, जिनकी नियुक्ति खुद राहुल ने की थी. पांच राष्ट्रीय सचिवों पर खड़गे की राय बी.एम. संदीप बी.एम. संदीप से खड़गे खासे नाराज हैं. संदीप कर्नाटक से आते हैं और खड़गे भी कर्नाटक से नाता रखते हैं. बिना सलाह के इनकी नियुक्ति हुई जिससे खड़गे नाखुश हैं. संदीप इससे पहले राजीव गांधी पंचायती राज संगठन में काम करते थे. उसके बाद यूथ कांग्रेस के चुनाव कराते थे. इन्हें महाराष्ट्र के लिए समय नहीं मिल पा रहा है. संपत कुमार और वश्मी रेड्डी ये दोनों नेता तेलंगाना से आते हैं. अजीब बात है कि दोनों एक ही ज़िले महबूबनगर से हैं. राज्य में चुनाव हैं, दोनों किसी बैठक में नहीं आते, दोनों कह चुके हैं कि उनके पास वक़्त नहीं. अव्वल अब तो राज्य विधानसभा भी भंग हो चुकी है. आशीष दुआ और सोनल पटेल तीन सचिवों से खफा खड़गे ने दो सचिवों के साथ काम करने पर सहमति दे दी है. एक हैं, सोनल पटेल जो गुजरात महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं और खड़गे के कार्यक्रम में समय दे रही हैं. दूसरे हैं आशीष दुआ जो पिछले कई सालों से, यूपीए के वक़्त में संगठन और सरकार का काम बारीकी से देखते रहे हैं. दुआ हाल में मीडिया के नेशनल कॉर्डिनेटर और उससे पहले कर्नाटक चुनाव में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं. कुल मिलाकर खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष की बनाई टीम पर सवाल उठाकर संकेत दे दिया कि राहुल को बुजुर्गों की और ज़्यादा सुननी होगी.

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