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Hybrid Warfare: भारत के खिलाफ चीन की खतरनाक साजिश, बिना गोली चलाए ही जीतना चाहता है जंग

पेइचिंग लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच चीन ने बिना एक भी गोली चलाए भारत पर जीत के लिए एक नई तरह की जंग छेड़ दी है। यह जंग कुछ उसी तरह से है जैसे रूस ने क्रीमिया पर कब्‍जा करने के लिए किया था। चीन राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविद , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 10 हजार लोगों और संगठनों पर निगरानी रख रहा है। चीन की इस नापाक साजिश में उसका साथी चीनी कंपनी झेन्‍हुआ डाटा इंफॉरमेशन टेक्‍नॉलजी कंपनी लिमिटेड (Zhenhua Data) दे रही थी। इस चीनी कंपनी ने बिग डेटा की मदद से भारत के खिलाफ 'हाइब्रिड वॉरफेयर'(Hybrid Warfare) छेड़ रखा है। इंडियन एक्‍सप्रेस अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक चीन सरकार से जुड़ी हुई कंपनी झेन्‍हुआ चीन के शेनजेन शहर में स्थित है। इस चीनी कंपनी के विदेशी लक्ष्‍यों के डेटाबेस में भारत के 10 हजार लोग और संगठन शामिल हैं। यह कंपनी बिग डेटा का इस्‍तेमाल 'हाइब्रिड वॉरफेयर' और 'चीन के व्‍यापक कायाकल्‍प' के लिए काम करती है। इस कंपनी ने भारत में रियल टाइम निगरानी के लिए जिन लक्ष्‍यों की पहचान की थी, वे बड़े व्‍यापक थे। आइए जानते हैं क्‍या है हाइब्रिड वॉरफेयर और भारत के खिलाफ क्‍या है चीन का खतरनाक इरादा..... भारत के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रही चीनी कंपनी चीन की कंपनी राजनीति, सरकार, बिजनस, टेक्‍नॉलजी, मीडिया और सिविल सोसायटी को अपने निशाने पर लेती है। कंपनी का दावा है कि वह चीन की खुफिया एजेंसी, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है। यह चीनी कंपनी डिजिटल दुनिया में अपने टारगेट के हरेक कदम की बारीकी से नजर रखती है। इसके जरिए वह एक 'सूचना लाइ‍ब्रेरी' तैयारी करती है जिसमें कंटेंट को केवल न्‍यूज सोर्स, फोरम के रूप में नहीं रखा जाता है बल्कि दस्‍तावेज, पेटेंट, भर्ती के पदों की भी सूचना रखी जाती है। महत्‍वपूर्ण बात यह है कि यह चीनी कंपनी एक-दूसरे से जुड़ाव का भी डेटाबेस तैयार करती है जिसमें लोगों, संस्‍थानों और सूचनाओं के साथ संबंध का रेकॉर्ड रखा जाता है। इस विशाल डेटाबेस को तैयार करने के पीछे चीन का मकसद अपने लक्ष्‍य को लेकर जनता के मन में क्‍या चल रहा है, उसका पता लगाना होता है। चीनी कंपनी सोशल मीडिया पर अपने लक्ष्‍य के किसी पोस्‍ट पर उसके फॉलोवर्स के क्‍या कॉमेंट आ रहा है और कितने लाइक आ रहे हैं, इसका विश्‍लेषण करती है। इसके अलावा चीनी कंपनी अपने लक्ष्‍य के कहीं आने जाने पर उसके भौगोलिक लोकेशन का आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की मदद से पता लगाती रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश कंपनी के इस तरह के डेटा को जुटाने पीछे एक खतरनाक मकसद छिपा हुआ है। यह है 'हाइब्रिड वॉरफेयर' जिसमें चीनी कंपनी खुद को विशेषज्ञ बताती है। क्‍या है हाइब्रिड वॉरफेयर और क्‍या चाहता है चीन? वर्ष 1999 के शुरू में चीन के पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी ने हाइब्रिड वॉरफेयर के लिए 'असीमित युद्धकौशल' नाम से रणनीति बनाई जिसके तहत हिंसा को सेना से ले जाकर नेताओं, अर्थव्‍यवस्‍था और तकनीक की दुनिया में शुरू करना था। इस नए युद्ध के मास्‍टरमाइंड चीन के कर्नल कीआओ लिआंग और कर्नल वांग शिआंगसूई थे। हाइब्रिड वॉरफेयर के तहत चीन अपने दुश्‍मन देश में सामाजिक विद्वेष को बढ़ा रहा है, आर्थिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा और संस्‍थाओं को खोखला कर रहा है, राजनीतिक नेतृत्‍व और उसकी क्षमता को कलंकित कर रहा है। एक शीर्ष साइबर सिक्‍यॉरिटी एक्‍सपर्ट ने कहा कि रूस के बिना युद्ध के ही क्रीमिया में सफलता के बाद अब हर दूसरा देश अ‍ब हाइब्रिड वॉरफेयर का इस्‍तेमाल कर रहा है। हालांकि चीन की तुलना में किसी ने इसका व्‍यापक इस्‍तेमाल नहीं किया है। चीन ने इसका व्‍यापक इस्‍तेमाल हॉन्‍गकॉन्‍ग में किया। चीनी ऐप को बैन करने से नहीं होगा कोई असर भारत और चीन के बीच वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बाद भारत ने चीन के 100 से ज्‍यादा ऐप पर बैन लगा दिया है। व‍िशेषज्ञों का कहना है कि इस बैन से झेन्‍हुआ जैसी चीनी कंपनी के मंसूबों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। चीन का लक्ष्‍य दुश्‍मन देश पर बिना गोली चलाए ही प्रभुत्‍व कायम करना या उसे नुकसान पहुंचाना है। इसके अलावा उस देश में अपना प्रभाव बढ़ाना है। चीन की रणनीति सूचना प्रदूषण, छवि प्रबंधन और प्रोप्रेगेंडा के जरिए दुश्‍मन को परास्‍त करना है। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि चीन सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका और यूरोप से बेहद संवेदनशील सैन्‍य, खुफिया और आर्थिक सूचनाएं इकट्ठा करने में लगा हुआ है। इसके लिए चीनी कंपनी को अमेरिका या किसी अन्‍य देश में ऑफिस खोलने की भी जरूरत नहीं है। चीनी कंपनी दुनियाभर के लोकतांत्रिक देशों के उदार नियमों का फायदा उठाकर डेटा जमा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के विदेशी नागरिकों की निगरानी का खतरा बेहद वास्‍तविक है।

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