taaja khabar...लद्दाख में अब चीनी सैनिकों का 1962 जैसा पैंतराः बजा रहे पंजाबी गाने, PM मोदी के खिलाफ भड़का रहे ...पैंगोंग झील: भारत के ऐक्‍शन के बाद 33 साल में पहली बार सबसे ज्‍यादा अलर्ट पर चीनी सेना ...लद्दाख: राजनाथ सिंह के बयान पर चीनी मीडिया को लगी म‍िर्ची, दे डाली युद्ध की धमकी ...लद्दाख में चीन से लंबा चलेगा तनाव! देपसांग में ग्राउंड वाटर की संभावनाएं तलाश रही सेना...महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ाई बच्चन फैमिली की सुरक्षा, बीजेपी बोली- सुशांत और कंगना को क्यों नहीं दी? ...योगी आदित्यनाथ ने 87 लाख गरीबों के खाते में ट्रांसफर की 1311 करोड़ रुपये पेंशन ...चीन से तनाव के बीच शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक, कांग्रेस उठाएगी LAC का मुद्दा...UP के बाहुबली MLA विजय मिश्रा पर कसा शिकंजा, पत्नी-बेटा नहीं हुए हाजिर तो संपत्ति होगी कुर्क...नवंबर तक भारत में आ जाएगा कोरोना का रूसी टीका! डॉ. रेड्डीज से हुआ करार ...सरकार किसानों को दे रही 80% सब्सिडी, ऐसे ले सकते हैं फायदा..तीन महीने का इंतजार और फिर ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ चला सेना ने ऐसे दी चीन को मात...जया पर रवि किशन का पलटवार, 'जिस थाली में जहर हो उसमे छेद करना ही पड़ेगा'..

पुलिस अधिकारी के नए दावे से अल्पसंख्यक तुष्टीकरण को लेकर फिर घिर सकती है कांग्रेस

नई दिल्ली दिल्ली में 2008 में हुए बम धमाकों की जांच का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी करनैल सिंह का नया दावा कांग्रेस पार्ट के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। उन्होंने कहा कि इन धमाकों के करीब एक हफ्ते बाद हुई बटला हाउस मुठभेड़ पर दिल्ली पुलिस ने जब कुछ संवाददाता सम्मेलन किए तो गृह मंत्रालय की तरफ से उसे निर्देश मिला कि जांच में प्रगति के बारे में मीडिया को और जानकारी न दी जाए। ध्यान रहे कि यह घटना मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के पहले कार्यकाल में घटी थी। आईपीएस अधिकारी ने रूपा प्रकाश से प्रकाशित हो रही अपनी किताब में दावा किया, 'आतंकवादियों के अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े होने के विवरण बाहर आने से राजनीतिक हलकों के कुछ लोग खुश नहीं थे। मेरी यह दलील व्यर्थ साबित हुई कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और एक पुलिस अधिकारी के तौर पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम आतंकवादियों को पकड़ने के लिए सुराग पर काम करें, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो।' 'मीडिया को अंधेरे में छोड़ना खतरनाक' उन्होंने कहा कि वह जानते थे कि 'ऐसे महत्वपूर्ण मामले में मीडिया को यूं ही अलग छोड़ देने के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि ऐसे में आधी-अधूरी जानकारी बाहर आएगी या फिर उससे भी बुरा यह हो सकता है कि गलत और मनगढ़ंत खबरें आने लगें।' उनके मुताबिक, मीडिया हमसे जानकारी मांग रहा था लेकिन हमें सख्त आदेश थे कि मीडिया से जांच संबंधी कोई बात साझा न की जाए। 'इसलिये, वहां अफरा-तफरी थी। मैं दावे से कह सकता हूं कि दिल्ली पुलिस धारणा की लड़ाई हार रही थी।' एनकाउंटर में मारे गए थे IM के दो आतंकी सिंह ने 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुई मुठभेड़ से जुड़ी यह और ऐसी ही कई अन्य जानकारियां अपनी किताब 'बटला हाउस: ऐन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन' में साझा की हैं। इस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो आतंकवादी मारे गए थे। इस मुठभेड़ के दौरान बटला हाउस इलाके में पुलिस कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। विभिन्न स्रोतों से जानकारियां जुटाकर दिया विस्तृत ब्योरा लेखक ने खुफिया ब्यूरो (IB), विभिन्न भारतीय शहरों में घटनाक्रम से जुड़े तारों, स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारियों और मुखबिरों से मिली विभिन्न जानकारियों को एक साथ गूंथकर मुठभेड़ की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले घटनाक्रम का मिनट-दर-मिनट ब्योरा अपनी इस किताब में पेश किया है। मुठभेड़ के समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त रहे सिंह ने कहा कि पुलिस की तरफ से मीडिया के साथ कुछ मौकों पर जानकारियां साझा किए जाने के बाद उन्हें पुलिस आयुक्त का एक फोन आया कि गृह मंत्रालय नहीं चाहता कि वे जांच में होने वाली प्रगति के बारे में और मीडिया ब्रीफिंग करें। बाटला हाउस एनकाउंटर से हिल गई IM की नींव उन्होंने कहा कि बटला हाउस मुठभेड़ आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम साबित हुई। रूपा प्रकाशन की तरफ से प्रकाशित की जा रही इस किताब में सिंह ने लिखा, 'इसने आईएम को करारा झटका दिया क्योंकि उसके प्रमुख सदस्यों को काबू में किया गया और भारत में उसके नेटवर्क की कमर टूट गई। हमने अपने सबसे होशियार और बहादुर अफसरों में से एक को खो दिया, जिसकी तफ्तीश से हम आईएम के मुख्य सदस्यों तक पहुंचे।' यह मुठभेड़ विवादों के घेरे में रही और इसको लेकर काफी सियासत भी हुई। कुछ दिनों पहले राजधानी में हुए धमाकों की वजह से सरकार पर भी दबाव था। दिग्विजय सिंह के बयान पर मचा था बवाल गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं। इसी घटना को लेकर पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इसके बारे में जानकर सिसक पड़ी थीं। दिग्विजय के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी की बड़ी फजीहत हुई। दरअसल, दिग्विजय सिंह समेत कई कांग्रेस नेताओं का मानना रहा है कि बाटला हाउस एनकाउंटर एक फर्जी एनकाउंटर था। यह आरोप लगाते हुए यह तथ्य दरकिनार कर दिया जाता है कि फर्जी एनकाउंटर में पुलिस वाले शहीद नहीं होते हैं जबकि इस घटना में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मी शहीद हुए थे।

Top News