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हाफिज की राजनीतिक चोला पहनने की कोशिश को तगड़ा झटका, MML का पंजीकृत आवेदन खारिज
इस्लामाबाद, खूंखार आतंकी और मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद के राजनीतिक चोला पहनने की कोशिश को एक बार फिर से तगड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान चुनाव आयोग ने हाफिज सईद की मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत करने से इनकार कर दिया है. लिहाजा उसके प्रत्याशी अब मिल्ली मुस्लिम लीग के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. आतंकी हाफिज ने अपने संगठन जमात-उद-दावा का नाम बदलकर मिल्ली मुस्लिम लीग बनाई है. मिल्ली मुस्लिम लीग सिक्युरिटी क्लियरेंस हासिल करने में विफल रही, जिसके चलते पाकिस्तान चुनाव आयोग ने उसका पंजीकरण आवेदन खारिज कर दिया. अब हाफिज सईद के पास आम चुनाव में अपने प्रत्याशियों को निर्दलीय उतारने या फिर किसी छोटे राजनीतिक दल से सांट-गांठ करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है. वो इस आम चुनाव में 200 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहा था. यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान चुनाव आयोग ने मिल्ली मुस्लिम लीग के पंजीकरण को रद्द किया है. इससे पहले आयोग ने मिल्ली मुस्लिम लीग के लाहौर की NA-120 सीट से उपचुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद इसके उम्मीदवार को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा था. हालांकि चुनाव के दौरान इस पोस्टर और बैनर में आतंकी हाफिज सईद की तस्वीर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ था. हाफिज ऐसे बदलता रहा अपने संगठन का नाम 9/11 आतंकी हमले के बाद हंगामा मचा, तो हाफिज सईद ने दुनिया को चकमा देने के लिए अपने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का नाम बदल दिया और नया नाम रखा जमात-उद-दावा. इसके बाद मुंबई में 26/11 का आतंकी हमला हुआ, तो उसने फिर वही खेल खेला. अबकी जमात-उद-दावा का नाम बदल दिया और फिर एक नया नाम रखा तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल. फिर इस पर भी पाबंदी लग गई, तो एक नई राजनीतिक पार्टी खड़ी कर ली 'मिल्ली मुस्लिम लीग' (MML). उसने MML का गठन अगस्त 2017 में किया. खूंखार आतंकी हाफिज सईद आम चुनाव जीतकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनना चाहता है. मगर उसकी इस ख्वाहिश को एक बार फिर झटका लगा है. पहले अमेरिका और फिर चीन ने दी थी पाकिस्तान को नसीहत पहले अमेरिका ने कहा खुदा 'हाफिज़'. फिर चीन ने कहा गुडबाय 'मौलाना'. कुल मिलाकर पाकिस्तान के लिए भी अब हाफिज़ सईद को खुदा हाफिज़ कहने का वक्त आ गया है. हाल ही में पाकिस्तान के सबसे बड़े हमदर्द चीन ने साफ लफ्ज़ों में कहा था कि इस मुसीबत को मुल्क से बाहर निकालो, वरना बहुत पछताओगे. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय दबाव में इस आतंकी को बिना गिरफ्तार किए मुल्क में रहने देने से पाकिस्तान ऐसी मुश्किल में आ जाएगा कि चाहकर भी चीन उसे इस मुसीबत से बाहर नहीं निकाल पाएगा.

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