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सुप्रीम कोर्ट ने आधार लिंक करने की डेडलाइन फैसला आने तक बढ़ाई
नई दिल्ली आधार लिकिंग को लेकर आम आदमी को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आधार लिकिंग की समयसीमा को फैसला सुनाए जाने तक के लिए बढ़ा दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस मामले में फैसला आने तक बैंक अकाउंट, मोबाइल फोन और पासपोर्ट की अनिवार्य आधार लिकिंग की समयसीमा को बढ़ाया जा रहा है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई में 5 जजों वाली संवैधानिक पीठ ने यह भी कहा कि सरकार अनिवार्य आधार के लिए जोर नहीं डाल सकती है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला वकील वृंदा ग्रोवर की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जो उन्होंने पासपोर्ट के लिए आधार की अनिवार्यता को लेकर दायर की थी। गौरतलब है कि बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर से आधार की लिकिंग के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय की गई थी। सरकार लगभग सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को भी आधार से जोड़ चुकी है। याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2018 में जारी पासपोर्ट नियमों के तहत तत्काल योजना में नया पासपोर्ट बनवाने या नवीनीकरण के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया गया है। उन्होंने तत्काल में पासपोर्ट रिन्यू का आवेदन दिया तो उनका पुराना पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। अब नए पासपोर्ट के लिए आधार नंबर देने को कहा जा रहा है। पासपोर्ट अधिकारियों ने आधार के बिना पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया है जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आधार सिर्फ कल्याणकारी योजनाओं के लिए ही अनिवार्य है। उन्हें तीन दिन के भीतर पासपोर्ट चाहिए क्योंकि उन्हें एक सेमिनार में हिस्सा लेने ढाका जाना है। इससे पहले आधार ऐक्ट की वैधता को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कि यूनीक आइडेंटिटी नंबर्स के इस्तेमाल से नागरिक अधिकार समाप्त हो जाएंगे और नागरिकता दासत्व तक सिमट जाएगी। आधार मामले पर यह बहुचर्चित सुनवाई पिछले पांच सालों से चल रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और हाई कोर्ट के एक पूर्व जज ने आधार स्कीम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

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