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सुंजवान टेरर अटैक: रोहिंग्या कैंप में रहकर हुई रेकी, अमेरिका-चीन के हथियार से हमला?
जम्मू सुंजवान के आर्मी कैंप में सेना का ऑपरेशन खत्म हो चुका है। सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और इस बात की भी जांच की जा रही है कि आतंकियों की इस साजिश की जड़ें कहां तक फैली हैं। रविवार देर शाम एनआईए की टीम भी मौके पर पहुंच गई। उधर, अब रक्षामंत्री ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि हमले की जांच एनआईए से कराई जाएगी। सुंजवान के आतंकी हमले की एनआईए जांच शुरू हो, इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों ने रविवार शाम जम्मू पहुंचकर इस मामले की शुरुआती पड़ताल शुरू कर दी है। उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक पुलिस विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की जांच के आधार में आतंकियों का पाकिस्तान कनेक्शन भी है। खुद रक्षामंत्री ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकियों के जैश-ए-मोहम्मद से संबद्ध होने और पाकिस्तान के हैंडलरों से संपर्क में होने की बात कही है। वहीं पुलिस और अन्य एजेंसियों के अधिकारी यह मान रहे हैं कि आतंकियों ने जिस तरह से यह पूरा हमला किया है, उसके लिए उन्हें विशेष ट्रेनिंग और स्थानीय स्तर पर ग्राउंड सपॉर्ट दिया गया है। इसके अलावा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि हमले में शामिल आतंकियों के पास तमाम विदेशी हथियार कहां से पहुंचे हैं? रोहिंग्या बस्ती के जरिए रेकी होने का शक सुंजवान कैंप पर हमले के बाद आतंकियों की रोहिंग्या बस्तियों में छिपी साजिश की जड़ों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसियों को मिली प्राथमिक रिपोर्ट्स में इस बात का शक जताया गया है कि जम्मू में अपनी मौजूदगी के दौरान आतंकियों ने इसी कैंप में पनाह लेकर कैंप की गतिविधियों की रेकी की है। खुद जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष कविंद्र गुप्ता ने भी सदन की कार्रवाई के दौरान आतंकियों को रोहिंग्याओं द्वारा मिली स्थानीय मदद का शक जताया था, ऐसे में अगर एजेंसियों द्वारा जांच की जाती है तो इस मामले में रोहिंग्या बस्तियों में भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। हर बार मिले विदेशी हथियार पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई मुठभेड़ों में सेना ने जैश के जिन आतंकियों को मारा है, उनमें से कई के पास से विदेशी अत्याधुनिक असलहे बरामद हुए हैं। साल 2017 के अंतिम रोज पुलवामा के लेथीपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले, आतंकी मसूद अजहर के भतीजे के साथ हुई सेना की मुठभेड़ और अब सुंजवान के आतंकी हमले सभी में विदेशी हथियारों के इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। लेथीपोरा हमले में स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल लेथीपोरा के हमले में जिन स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल हुआ था वह चीन की आर्मी या अवैध समुद्री लुटेरे इस्तेमाल करते हैं। बुलेट प्रूफ जैकेट और हेल्मेट को भेद सकने वाली इन स्टील बुलेट्स को चीन से मंगाए होने की बात कही जा रही थी। इसके बाद आतंकी मसूद अजहर के भतीज तल्हा रशीद के साथ हुई पुलवामा में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को एम 4 कार्बाइन बरामद हुई थी। इस हमले के बाद सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी एसएन श्रीवास्तव नेटाइम्स नाउ से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की थी कि इस हमले में जैश के आतंकियो स्टील की बनी बुलेट्स का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा सीआरपीएफ के आईजी रविदीप शाही ने भी मीडिया से बातचीत में इस हमले के दौरान स्टील बुलेट्स के इस्तेमाल की बात कही थी। मसूद अजहर के भतीजे के पास मिली थी यूएस की हाईटेक बंदूक अमेरिका की स्पेशल फोर्सेज द्वारा इस्तेमाल होने वाली इस कर्बाइन को आतंकी के पास बरामद होने के बाद कश्मीर के जैश आतंकियों के तार अफगानिस्तान तक जुड़े होने का शक जताया गया था। इसकी वजह यह थी कि आतंकी तल्हा रशीद के पास जो बंदूक बरामद हुई उसे अमेरिकन फोर्सेज द्वारा अफगानिस्तान में ऐंटी टेरर ऑपरेशंस के लिए इस्तेमाल किया जाता था। हमले के बाद अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी मुनीर खान ने कहा था कि तल्हा रशीद के पास अमेरिकन बंदूक मिली है जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को अवैध असलहे मुहैया कराए हैं। सुंजवान के हमले में भी स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल इन सब के बाद सुंजवान के हमले में भी आतंकियों ने एके-56 राइफल और विदेशी ग्रेनेड्स का इस्तेमाल किया है। हथियारों के अलावा बड़ी चिंता का सवाल वह स्टील बुलेट्स भी हैं जिन्हें पुलवामा के बाद अब सुंजवान के कैंप पर भी हमले के लिए इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में एजेंसियां अब उन बुलेट और ग्रेनेड शेल्स को इकठ्ठा करने में जुटी है, जिनसे आतंक के फॉरेन कनेक्शन की जड़ें खंगाली जा सकें। कहां गया साथ आया चौथा आतंकी रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार आतंकियों के कैंप तक आने की बात कही है। सीतारमण ने शनिवार को पत्रकारों के बात करते हुए अपने बयान में यह कहा था कि सुंजवान के आतंकी हमले में 4 आतंकियों के होने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जबकि सेना के ऑपरेशन में अब तक तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। सीतरमण ने यह भी कहा कि एजेंसियों को शक है कि चौथा आतंकी गाइड हो सकता है और संभव है कि वह कैंप में दाखिल ना हुआ हो। ऐसे में एजेंसियों के सामने किसी चौथे आतंकी की मौजूदगी एक अनबूझी पहेली जैसी है क्योंकि राज्य में अलर्ट और सख्त निगहबानी के बाद भी चौथे किसी आतंकी के कैंप से भाग पाने की स्थितियां सामने आती हैं तो यह जम्मू और खासकर यहां मौजूद सैन्य कैंपों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा सवाल होगा।saabhar nbt

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