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भारत-तालिबान दोस्‍ती से घबराए पाकिस्‍तान ने सिख गुरुद्वारे पर कराया आतंकी हमला!

काबुल: अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल में कर्ते परवान सिख गुरुद्वारे पर आईएस आतंकियों के हमले के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान का पाकिस्‍तान के साथ करीबी संबंध है और यह हमला तालिबान और भारत दोनों को ही संदेश देने के लिए किया गया हो सकता है। भारत और तालिबान के बीच अफगानिस्‍तान में नई दिल्‍ली के फिर से फिर वापसी को लेकर काफी बातचीत चल रही है जो पाकिस्‍तान को पसंद नहीं है। ऐसे में यह आतंकी हमला कई तरह के सवाल उठा रहा है। आईएसकेपी के आतंकियों ने दावा किया है कि उन्‍होंने नूपुर शर्मा के पैगंबर को लेकर दिए गए बयान का बदला लेने के लिये सिखों पर हमला किया है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच गुरुद्वारा कर्ते परवान पर हमले से अब एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है कि क्‍या भारत का काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलना चाहिए या नहीं। वह भी तब जब काबुल की सुरक्षा तालिबानी गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्‍कानी के पास है जो पाकिस्‍तान का पाला हुआ अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी है। आईएसकेपी के आतंकियों को पाकिस्‍तान पाल रहा रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसकेपी के आतंकियों को पाकिस्‍तान तालिबान पर चेक एंड बैलेंस बनाये रखने के लिए पाल रहा है। इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी जेपी सिंह के नेतृत्‍व में एक भारतीय दल तालिबान के कब्‍जे के बाद पहली बार काबुल के दौरे पर गया था। इस दल ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्‍ताकी और गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्‍कानी से मुलाकात की थी। सूत्रों का कहना है कि काबुल में भारत के दूतावास को फिर से खोलने की योजना को काफी गति मिल गई थी और अधिकारियों का एक दल भी भेजा जाना था ताकि वीजा और मानवीय सहायता के कार्यों को अंजाम दिया जा सके। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने 111 अफगान हिंदू और सिख लोगों को आपातकालीन वीजा जारी कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने टीम भेजने की खबर पर टिप्‍पणी नहीं किया है लेकिन सूत्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि अफगानिस्‍तान जाने वाले दल को सुरक्षा अनुमति मिलने का इंतजार है। अभी फिलहाल स्‍थानीय लोगों की मदद से दूतावास के कार्यों को चलाया जा रहा है। वहीं विभिन्‍न शहरों में स्थित महावाणिज्‍य दूतावास पूरी तरह से बंद हैं। स‍िख गुरुद्वारे पर हमला भारत के लिए सीधी चेतावनी' हक्‍कानी नेटवर्क के भारतीय दूतावास पर हमले के बाद पैदा हुई दुश्‍मनी के बाद भी तालिबान ने कई बार भारत से अपील की है कि वह अपने दूतावास को फिर से खोले। तालिबान ने भारतीय दूतावास को सुरक्षा की पूरी गारंटी दी है। फिलहाल अफगानिस्‍तान में 13 देशों रूस, चीन, ईरान, पाकिस्‍तान, तुर्की आदि के दूतावास अफगानिस्‍तान में सक्रिय हैं। अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि भारत अफगानिस्‍तान का ऐतिहासिक दोस्‍त है और दूतावास के वापसी का यहां की जनता निश्चित रूप से स्‍वागत करेगी। वहीं भारत के अफगानिस्‍तान में पूर्व राजदूत अमर सिन्‍हा कहते हैं कि गुरुद्वारे पर यह हमला इस बात की स्‍पष्‍ट चेतावनी है कि भारत हितों और अल्‍पसंख्‍यकों को निशाना बनाया जाएगा। तालिबान चाहता है कि भारत दवाओं और मानवीय सहायता को फिर से पहले की तरह से शुरू करे लेकिन विशेषज्ञ इसको लेकर चेता रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि भारतीय दल के दौरे और तालिबान की दोस्‍ती की पहल से पाकिस्‍तानी सेना के कान खड़े हो गए हैं। पाकिस्‍तान को यह भी नागवार गुजरा है कि तालिबान के रक्षामंत्री और मुल्‍ला उमर के बेटे मुल्‍ला याकूब ने भारत में अफगान सैनिकों के प्रशिक्षण को फिर से शुरू करने का प्रस्‍ताव दिया है।

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