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यासीन मलिक दोषी करार तो पाकिस्‍तान को क्‍यों लगी मिर्ची? तिलमिलाहट में भारत को सौंपा डिमार्शे

नई दिल्‍ली: टेरर फंडिंग केस में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को NIA कोर्ट ने दोषी करार दिया है। यासीन पहले ही आरोपों को स्‍वीकार कर चुका था। दो दशक से भी ज्‍यादा समय तक घाटी में आतंकवाद फैलाने वाले यासीन मलिक को दोषी ठहराए जाने से पाकिस्‍तान को मिर्ची लगी है। यासीन पर एनआईए कोर्ट गुरुवार को अपना फैसला सुनाता, इससे पहले ही पाकिस्तान ने पैंतरे दिखाने शुरू कर दिए थे। बुधवार रात पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास प्रभारी को तलब कर लिया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दूतावास अधिकारी को आपत्तियों से जुड़ा एक दस्तावेज (डिमार्शे) सौंपा, जिसमें यासीन मलिक के खिलाफ 'मनगढ़ंत आरोप' लगाए जाने की कड़ी निंदा की गई थी। मलिक ने गुनाह कबूले पर पाकिस्‍तान ने अलापा अलग ही राग पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि कश्मीरी हुर्रियत नेता मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद है। भारत सरकार ने कश्मीरी नेतृत्व की आवाज को दबाने के लिए मलिक को फर्जी मामलों में फंसाया है। पाकिस्तान ने भारत सरकार से मलिक को सभी निराधार आरोपों से बरी करने और जेल से तत्काल रिहा करने का मांग की ताकि वह अपने परिवार से मिल सकें और अपने स्वास्थ्य में सुधार कर सामान्य जीवन जी सकें। पाकिस्‍तान ने यह सब तब कहा है कि जब यासीन मलिक ऑन द रिकॉर्ड सभी गुनाह कबूल चुका है। आजीवन कारावास की सजा संभव, 25 को बहस यासीन पर सख्त गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत लगाए गए आरोप भी शामिल हैं। यासीन पर जो धाराएं हैं, उनमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास है। अदालत में अब 25 मई को सजा पर बहस होगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों से कहा गया है कि वे यासीन की आर्थिक स्थिति का पता लगाएं ताकि उस पर जुर्माना लगाया जा सके। पिछली सुनवाई में यासीन ने अपने वकील को वापस ले लिया था। उसने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था। वहीं सुनवाई से पहले ही पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी और मीडियाकर्मियों को सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर इंतजार करने को कहा। यासीन मलिक ने क्‍या-क्‍या कबूला? यासीन मलिक पर आपराधिक साजिश रचने, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, अन्य गैरकानूनी गतिविधियों और कश्मीर में शांति भंग करने का आरोप है। मलिक ने इस मामले में अपना गुनाह कबूल कर लिया था। सुनवाई की आखिरी तारीख पर उसने अदालत के सामने बताया कि वह धारा 16 (आतंकवादी अधिनियम), 17 (आतंकवादी अधिनियम के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश), यूएपीए की धारा 20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने के नाते) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 124-ए (देशद्रोह) सहित अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का मुकाबला नहीं करेगा। इनपर भी तय हुए आरोप यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, पूर्व विधायक राशिद इंजीनियर, व्यवसायी जहूर अहमद शाह वटाली समेत कई अन्य कश्मीरी अलगाववादी नेता हैं, जिन पर आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के आरोपों के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। यह मामला विभिन्न आतंकी संगठनों- लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल-मुजाहिदीन, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट और जैश-ए-मोहम्मद से संबंधित है। यह जम्मू-कश्मीर की स्थिति को बिगाड़ने के लिए आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

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