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सीडीएस का हेलिकॉप्टर क्रैश, 7000 लोगों की बचाई थी जान.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का नया पद सृजित करने के ऐलान किया। उसके बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद बनाने को मंजूरी दी। भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल विपिन रावत को पहले सीडीएस की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को यह पद संभाला। ​पीढ़ियों से सेना में सेवाएं दे रहा परिवार देश के 27वें थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत सितंबर 2016 में भारतीय सेना के वाइस चीफ बने थे। रावत ने जनरल दलबीर सिंह के रिटायर होने के बाद भारतीय सेना की कमान 31 दिसंबर 2016 को संभाली थी। रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत थे जो कई सालों तक भारतीय सेना का हिस्सा रहे। जनरल बिपिन रावत इंडियन मिलिट्री एकेडमी और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। इन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस सर्विसेज में एमफिल की है। अमेरिका से वापस आकर लिया देश सेवा का फैसला पढ़ाई पूरी करने के बाद बिपिन रावत अमेरिका चले गए। वहां उन्होंने आगे की स्टडी जारी रखी। सर्विस स्टाफ कॉलेज में ग्रेजुएट करके उन्होंने हाई कमांड कोर्स भी किया। इसके बाद वह भारत वापस लौट आए और देश सेवा करने का फैसला लिया। उन्हे16 दिसंबर 1978 में सफलता मिली। उन्हें गोरखा 11 राइफल्स की 5वीं बटालियन में शामिल किया गया। ​अशांत इलाकों में काम करने का अनुभव रावत के पास अशांत इलाकों में लंबे समय तक काम करने का अनुभव रहा। भारतीय सेना में रहते उभरती चुनौतियों से निपटने, नॉर्थ में मिलटरी फोर्स के पुनर्गठन, पश्चिमी फ्रंट पर लगातार जारी आतंकवाद व प्रॉक्सी वॉर और पूर्वोत्तर में जारी संघर्ष के लिहाज से उन्हें सबसे सही विकल्प माना जाता था। ​वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर बनाया था आर्मी चीफ उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे रावत 16 दिसंबर 1978 में गोरखा राइफल्स की फिफ्थ बटालियन में शामिल हुए। यहीं उनके पिता की यूनिट भी थी। दिसंबर 2016 में भारत सरकार ने जनरल बिपिन रावत से वरिष्ठ दो अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीन बक्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज को दरकिनार कर भारतीय सेना प्रमुख बना दिया। जनरल बिपिन रावत गोरखा ब्रिगेड से निकलने वाले पांचवे अफसर हैं जो भारतीय सेना प्रमुख बनें। 1987 में चीन से छोटे युद्ध के समय जनरल बिपिन रावत की बटालियन चीनी सेना के सामने खड़ी थी। 7000 लोगों की बचाई थी जान बिपिन रावत ने भारत में ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कर्तव्यों का पालन किया। वह कांगो के यूएन मिशन का हिस्सा थे। उस समय एक बड़ा हादसा हुआ। बिपिन रावत ने समय रहते और अपनी सतर्कता से 7000 लोगों की जान बचाई थी। 37 साल आर्मी में दी सेवाएं बिपिन रावत ने अपनी जिंदगी के अहम 37 वर्ष आर्मी को दिए। उनकी शादी मधुलिका रावत से हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। उन्हें विशिष्ट सेना मैडल और युद्ध सेना मैडल मिला था। बिपिन रावत ने कई भारतीय राजनीति पर कटाक्ष वाले लेख लिखे।

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