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पंजाब में कांग्रेस के संकट के बीच दो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, अशोक गहलोत ने ठोकी ताल

नई दिल्ली पंजाब में कांग्रेस के सियासी संकट के बीच अब राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी में हलचल बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि पंजाब की उठापटक के बाद पार्टी को छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी अंतर्कलह से निपटने की चुनौती बढ़ गई है। सवाल यह भी है कि क्या छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मौजूदा मुख्यमंत्रियों की कुर्सी बढ़ाने की चुनौती बढ़ गई है। इस बीच छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने बयान देकर अपनी-अपनी कुर्सी मजबूत होने की बात कही है। ऐसे में अब आप ही तय करें कि दोनों सीएम के इन बयानों के मायने क्या है। छत्तीसगढ़ कभी पंजाब नहीं हो सकता छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के कथित बंटवारे की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है उनका राज्य कभी पंजाब नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में एक ही समानता है कि दोनों के नाम नंबर से बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पांच आबों यानी पांच नदियों का है। वहीं 36 गढ़ के नाम से छत्तीसगढ़ बना है। दोनों में समानता केवल यही है कि दोनों राज्य का नाम अंकों से बना हुआ है। बघेल राज्य के मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें भाजपा ने कहा था कि कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ और पंजाब में सत्ता को लेकर उथल-पुथल मचा हुआ है। कार्यकाल का ढाई साल पूरा, सीएम बदलने पर चर्चा राज्य में इस वर्ष जून माह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री पद के ढ़ाई—ढाई वर्ष के कथित बंटवारे के फॉर्मूले की चर्चा जोरों पर है। जून 2021 में मुख्यमंत्री पद पर बघेल के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के खेमे ने दावा किया था कि आलाकमान ने ढाई-ढाई वर्ष मुख्यमंत्री पद के लिए सहमति दी थी। पिछले तीन दिनों के दौरान बघेल के करीबी माने जाने वाले लगभग दो दर्जन विधायक एक बार फिर दिल्ली के दौरे पर हैं। इसी के साथ राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों का राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जमावड़े को लेकर कहा कि विधायक एक-एक कर दिल्ली गए हैं। वहां जाने में कोई पाबंदी नहीं हैं। सभी स्वतंत्र हैं और कहीं भी आ-जा सकते हैं। वह कोई राजनीतिक मूवमेंट नहीं कर रहे है। इसमें किसी को क्या तकलीफ हो सकती है। टीएस सिंहदेव बनेंगे सीएम? राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के सीएम बनने को लेकर भी चर्चा है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे सिंहदेव ने राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन के बारे में पूछे जाने पर दोहराया था कि निर्णय पार्टी आलाकमान के पास सुरक्षित है। हालांकि, सिंह ने भी विधायकों के दिल्ली दौरे को तवज्जो नहीं दी थी। उन्होंने कहा था कि इसे कोई मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही बघेल और सिंहदेव के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं। राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के बाद कांग्रेस आलाकमान ने विवाद को सुलझाने के लिए अगस्त में बघेल और सिंहदेव को दिल्ली बुलाया था। गहलोत बोले- 5 साल पूरा करेंगे, अगली सरकार भी बनाएंगे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कहा कि उनके राज्य में कांग्रेस सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। अगली सरकार भी बनाएगी। गहलोत ने अपने एक बयान के एक तीर से दो निशाने साधे हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने अपने बयान से आलाकमान को संदेश देने के साथ ही विरोधी गुट को भी अपनी मजबूती दर्शाई है। गहलोत ने अपने बयान से साफ किया है कि उनकी सीएम की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। साथ ही अगली बार भी मुख्यमंत्री वही बनेंगे। मुझे 15-20 साल कुछ नहीं होगा सीएम गहलोत ने यह भी कहा कि दिल्ली से खबरें चली कि पंजाब के बाद अब राजस्थान की बारी। ऐसे लोगों को रात के सपनों में भी मोदी दिखता है। मुझे 15-20 साल कुछ नहीं होगा, जिसे दुखी होना है, वो हो, सरकार 5 साल चलेगी और रिपीट भी होगी। उन्होंने बीजेपी और सचिन पायलट खेमे की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष कहता रहता है कि मुख्यमंत्री ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। गहलोत ने कहा कि अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान और अन्य के ‘सौजन्य’ के कारण हमने खुद को लगभग 34 दिनों के लिए एक होटल के कमरे में बंद कर लिया। हमारे विधायकों के ‘आशीर्वाद’ से वह समय भी बीत गया।’ राजस्थान में फेरबदल को मिली हवा पंजाब के सियासी संकट के बाद राजस्थान में फेरबदल को ज्यादा हवा मिली है। सचिन पायलट खेमा लगातार मंत्रिमंडल विस्तार की सिफारिश करता रहा है। दूसरी तरफ, सचिन पायलट सियासी संकट के दौरान बनाई गई सुलह कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल स्थिति जस की तस है। इसी बीच पायलट पिछले दिनों में कई बार दिल्ली आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। इसके बावजूद मंत्रिमंडल विस्तार के संबंध में फिलहाल अभी तक उन्होंने भी कोई बयान नहीं दिया है।

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