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पीएम मोदी के संबोधन की ये हैं दस बड़ी बातें, चाणक्य से लेकर रवींद्र नाथ टैगोर को किया याद

वाशिंगटन,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 76वें सत्र को संबोधित किया। कोरोना, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन समेत कई अहम मुद्दों पर उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में चाणक्य और महान कवि रवींद्र नाथ टैगोर को भी याद किया।पीएम मोदी ने अपने चाय बेचने वाले दिनों का भी जिक्र किया। आइये जानते हैं संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी की वो दस बड़ी बातें जिस पर उन्होंने लोगों का खास दिल जीता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन में पीएम मोदी ने सबसे पहले कोरोना महामारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ सालों से पूरा विश्व 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी का सामना कर रहा है। ऐसी भयंकर महामारी में जान गंवाने वाले सभी लोगों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं और परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने अपने चाय बेचने वाले दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन की टी स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था वो आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी ने चाणक्य के शब्दों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चाणक्‍य ने सदियों पहले कहा था कि जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को नाकाम कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद में सुधार करना होगा। कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों को हमने कोरोना और आतंकवाद और अफगानिस्तान संकट में गहरा कर दिया है। भारत की कोरोना वैक्सीन को लेकर पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन विकसीत कर ली है, जिसे 12 साल से ज्यादा आयु के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दुनियाभर के वैक्सीन मैन्युफैक्चर्स को भी आमंत्रित किया कि आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए। अफगान मुद्दे पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरुरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा वहां कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश न करे। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का बगैर नाम लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि प्रतिगामी सोच के साथ, जो देश आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। संयुक्त राष्ट्र के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। एक ऐसा देश जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अलग-अलग रहन-सहन, खानपान हैं। ये जीवंत लोकतंत्र का बेहतरीन उदाहरण है। संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी ने कहा कि बीते 7 सालों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को बीमा कवच मिला है जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे। 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ देकर उन्हें क्वालिटी हेल्थ से जोड़ा है। संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी ने कहा कि प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक पाइप से साफ पानी पहुंचाना का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन का अंत पीएम मोदी ने रवीन्‍द्र नाथ टैगोर द्वारा रचित एक कविता से की। बंगाली भाषा में रवींद्र नाथ टैगोर की कविता पढ़ी। जिसके द्वारा उन्‍होंने दुनिया को संदेश दिया कि अच्‍छे काम करते समय कठिनाई आएंगी लेकिन नेक काम करते रहना चाहिए।

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