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चीन के साथ तनाव के बीच भारत ने लीज पर लिए अमेरिका के 2 प्रीडेटर ड्रोन, LAC पर हो सकती है तैनाती

नई दिल्ली एलएसी पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से लीज पर 2 प्रीडेटर ड्रोन हासिल किए हैं। नेवी इन ड्रोन्स का इस्तेमाल हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए करेगी। इसे पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भी तैनात किया जा सकता है। सी गार्जियन प्रीडेटर ड्रोन्स को अमेरिकी कंपनी जनरल ऐटॉमिक्स बनाती है जो एक बार में लगातार 37 घंटे उड़ान भर सकते हैं। यह समंदर में हो रही हर हलचल पर नजर रखेंगे और इंडियन नेवी को अपने दुश्मनों पर बढ़त लेने में मददगार होंगे। इन दोनों ड्रोन्स को नेवी ने भारत-चीन तनाव के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय से मिले इमर्जेंसी प्रोक्युरमेंट पावर्स के तहत लीज पर लिए हैं। एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, 'ये ड्रोन नवंबर के दूसरे सप्ताह में भारत आए और इन्हें 21 नवंबर को इंडियन नेवी के फ्लाइंग ऑपरेशंस में शामिल कर लिया गया।' इन ड्रोन्स ने उड़ानें भी शुरू कर दी हैं। सूत्रों ने बताया कि ये हवा में 30 से ज्यादा घंटों तक उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं और इससे नेवी की ताकत बढ़ गई है। जिस अमेरिकी फर्म से ये ड्रोन लीज पर लिए गए हैं उनके क्रू भी ड्रोन्स के साथ भारत आए हैं और नेवी को इन्हें उड़ाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस तरह के 18 और ड्रोन अमेरिका से खरीदने की तैयारी कर रहा है लेकिन उससे पहले नेवी ने इन 2 ड्रोन्स को 1 साल के लिए लीज पर लिया है। सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत और अमेरिका बहुत ही तालमेल के साथ काम रहे हैं। दोनों देश सर्विलांस में एक दूसरे की मदद करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सूचनाएं एक दूसरे से साझा कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि इन ड्रोन्स के मैंटिनेंस की जिम्मेदारी अमेरिकी फर्म की ही है। लीज अग्रीमेंट के मुताबिक अमेरिकन सपोर्ट स्टाफ सिर्फ मैंटिनेंस और तकनीकी मामलों में ही मदद करेंगे। कब और कहां, कितनी देर तक ड्रोन्स को उड़ान भरने हैं यह सब इंडियन नेवी वालों के हाथ में होगा। अग्रीमेंट के मुताबिक उड़ान के दौरान ड्रोन्स से जो डेटा इकट्ठे होंगे उस पर सिर्फ और सिर्फ इंडियन नेवी का हक होगा। भारतीय सेनाएं पिछले कुछ सालों से अपनी सर्विलांस जरूरतों के लिए अमेरिकी सिस्टम पर भरोसा दिखा रही हैं। इंडियन नेवी पहले ही 9 पी-81 लॉन्ग रेंज सर्विलांस प्लेन हासिल कर चुकी है और अगले कुछ सालों में 9 और सर्विलांस प्लेन हासिल करेगी। इसके अलावा नेवी ने 24 एमएच-60 हेलिकॉप्टर भी खरीदे हैं।

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