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आर्मी चीफ ने कहा, 'रक्षा खर्च एक बोझ' की धारणा गलत, 35 फीसदी राष्ट्र निर्माण में होता है खर्च
नई दिल्ली आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को कहा कि चीन आज इस स्थिति में है कि वह अमेरिका को चुनौती दे सकता है क्योंकि वे नहीं भूले कि सैन्य ताकत और अर्थव्यवस्था समान रूप से बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यही वजह है कि वे आज इंटरनैशलन वर्ल्ड बॉर्डर पर पूरी मजबूती से खड़े हैं और अमेरिका को चुनौती दे पा रहे हैं।' जनरल रावत ने आगे कहा कि इसके बाद ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय का फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र की तरफ शिफ्ट हुआ है। सेना प्रमुख ने कहा कि जैसे-जैसे चीन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, दुनियाभर के देशों ने भारत की ओर देखना शुरू कर दिया कि क्या हम एक ऐसा देश बन सकते हैं जो चीन की बढ़ती ताकत को संतुलित कर सके। यह सब चीन की दबंगई के कारण है। इकॉनमी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपकी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है तो आपको अपने देश में हो रहे निवेश की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। रक्षा खर्च पर दो टूक जनरल रावत ने रक्षा खर्च की बात करते हुए कहा कि 'आम धारणा है कि रक्षा खर्च वास्तव में देश पर एक बोझ है। उनका मानना है कि जो कुछ भी डिफेंस में खर्च किया जाता है उसका कोई रिटर्न नहीं मिलता है। मैं इस मिथक को दूर करना चाहता हूं।' उन्होंने कहा कि थल सेना, वायु सेना और नेवी तीनों को समान रूप से मजबूत करने की जरूरत है। सेना प्रमुख ने आगे कहा कि क्या पूरे रक्षा खर्च का इस्तेमाल सेना को बनाए रखने के लिए ही किया जाता है? उन्होंने कहा, 'यह दूसरा मिथक है जिसे मैं दूर करना चाहता हूं। हमारे बजट का करीब 35 फीसदी राष्ट्र निर्माण में खर्च होता है।' जनरल बिपिन रावत ने कहा कि जब हम सीमाओं पर ढांचागत विकास करते हैं, हम उन लोगों को भी जोड़ते हैं जो सुदूर इलाकों में रह रहे हैं। यह देश को एकजुट करने में मदद करता है। पाकिस्तान को चेतावनी पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि अगर वे सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ाते हैं तो हमारे पास अगले लेवल पर जाने का विकल्प है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पता है कि वह आतंकी गतिविधियों को बढ़ा नहीं सकता। सीमा पार बैठे लोगों को हमसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। जनरल ने कहा कि 'हमने यह सुनिश्चित किया है कि उन्हें भी (पाकिस्तान) बराबर नुकसान हो। जब उन्हें लगेगा कि उनका ज्यादा नुकसान हुआ है तो हम अपनी शर्तों पर संघर्षविराम की बात करेंगे। हम पाकिस्तान की शर्तों पर संघर्षविराम नहीं चाहते हैं।' चीन और डोकलाम पर भी बात चीन के साथ अभ्यास पर आर्मी चीफ ने कहा कि यह हर साल होता है। पिछले साल स्थगित हो गया था, लेकिन यह अभ्यास (हैंड इन हैंड) एक बार फिर पटरी पर है। डोकलाम के बाद चीन के साथ फिर से मीटिंग हुई है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ मिलिटरी डिप्लोमैसी कारगर रही है और यह आगे बढ़ रही है।

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