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पीएनबी स्कैमः एक लापरवाही की वजह से 7 साल तक चलता रहा घोटाला
नई दिल्ली 7 साल तक पीएनबी घोटाला चलता रहा, लेकिन आरबीआई और वित्त मंत्रालय को इसकी भनक तक नहीं लगी। पीएनबी में हुए 11,300 करोड़ रुपये के घोटाले में नया खुलासा हुआ है, पीएनबी ने अगर आरबीआई की एक सलाह मान ली होती तो आज बैंक को इतने बड़े घोटाले का सामना शायद नहीं करना पड़ता। ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक में हैकर्स ने स्विफ्ट टेक्नॉलजी के जरिए हेरफेर करके 525 करोड़ रुपये उड़ा लिए, इसकी खबर भारत के सेंट्रल बैंक आरबीआई को लगी। आरबीआई ने इस बारे में तमाम भारतीय बैंकों को आगाह किया। आरबीआई ने बैंकों को अपने कंप्यूटर नेटवर्क को सुरक्षित तरीके से स्विफ्ट से जोड़ने को कहा, ताकि बांग्लादेश की तरह धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश ना रहे। पीएनबी के कर्मचारियों ने बैंक के सिस्टम में गडबड़ी का फायदा उठाकर 5 साल तक धोखाधड़ी को अंजाम दिया, माना जा रहा है कि इसी तरह से पीएनबी को 11,300 करोड़ रुपये की चपत लगी है। इस रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले बताया है कि स्विफ्ट टेक्नॉलजी और पीएनबी के बैक एंड सॉफ्टवेयर में कोई तालमेल नहीं था, इसी का फायदा उठाकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरे घोटाले में कमजोर टेक्नॉलजी का इस्तेमाल, रिस्क मैनेजमेंट का सही तरीक से इस्तेमाल ना करना और दूरदर्शिता के आभाव की बहुत बड़ी भूमिका रही। अगर यह घोटाला एक साल पहले ही पकड़ में आ गया होता तो नुकसान 5,000 करोड़ के अंदर ही होता, लेकिन बैंक की लापरवाही ने नुकसान को इतना बड़ा कर दिया। पीएनबी के अनुसार उसके कर्मचारी गोकुलानाथ शेट्टी ने नीरव मोदी और उसके सहयोगियों को विदेश से लोन लेने के लिए गारंटी दी। यह गांरटी 2011 से 2016 के बीच बिना काउंटर गारंटी के दी गई। 2011 से 2017 की शुरुआत में लगभग 6500 करोड़ की राशि नीरव मोदी ओर उसके सहयोगियों को दी गई। 2017 के ही मार्च और मई के बीच में पीएनबी कर्मचारी गोकुलनाथ के सहयोग से 4900 करोड़ रुपये और जारी कर दिए गए। बैंकों का कंप्यूटर नेटवर्क स्विफ्ट टेक्नॉलजी के हिसाब से अनुकूल नहीं था, शुरुआत में आरबीआई ने स्विफ्ट टेक्नॉलजी और बैंकिंग सॉफ्टवेयर्स को एक दूसरे के अनुकूल बनाने की जरूरत नहीं समझी, हालांकि बांग्लादेश में हुई हैक की घटना के बाद आरबीआई जागा और रिस्क को देखते हुए बैंकों को अपने नेटवर्क को स्विफ्ट के साथ इंट्रिग्रेट करने को कहा। पीएनबी समेत कई बैंको ने आरबीआई की इस सलाह को नजरअंदाज किया और मैन्युअली स्विफ्ट मेसेज का हिसाब-किताब रखने लगे। पीएनबी को अपनी इसी लापरवाही का खामियाजा इतने बड़े पैमाने पर भुगतना पड़ा। एक्सपर्टस् का कहना कि ग्लोबल ट्रेड की वजह से स्विफ्ट पर भेजे गए मेसेज पर ऑटोमैटिक या मैन्युअली नजर रखना जरूरी हो जाता है, यहीं पर पीएनबी से चूक हुई ।

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