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तालिबान संग वार्ता पर विवाद, विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत अनाधिकारिक तौर पर शामिल
नई दिल्ली रूस में तालिबान के साथ आज हो रही वार्ता में भारत के शामिल होने पर बढ़े विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने साफ कहा कि मॉस्को बैठक में भारत अनाधिकारिक तौर पर शामिल हो रहा है। उन्होंने भारत की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि रूस ने अफगानिस्तान पर यह बैठक बुलाई थी और भारत ने नॉन-ऑफिशल लेवल पर भाग लेने का फैसला किया। उन्होंने आगे कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति और सुलह के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। देश की सुरक्षा और खुशहाली के लिए भारत हमेशा उसके साथ है। विदेश नीति पर कुमार ने कहा कि जो भी प्रयास अफगानिस्तान की ओर से किए जाते हैं और हमें लगता है कि यह हमारी नीति के तहत है, हम उसमें शामिल होंगे। आपको बता दें कि नैशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने मॉस्को मीट में भारत के शामिल होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अनाधिकारिक तौर पर तालिबान के साथ वार्ता में शामिल हो रही है तो जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों के साथ ऐसी अनाधिकारक वार्ता क्यों नहीं की जाती है? अफगानिस्तान के हालात पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत सुलह की प्रक्रिया का समर्थन करना है। मॉस्को मीट पर उन्होंने साफ कहा कि भारत तालिबान के साथ वार्ता नहीं कर रहा है। उन्होंने यह जरूर कहा कि हम उन सभी प्रयासों में शामिल होंगे, जिसमें अफगानिस्तान शामिल होगा और उसकी बेहतरी की बात होगी। 17 को मोदी जाएंगे मालदीव विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। सोलिह का शपथ ग्रहण समारोह 17 नवंबर को होना है। कूटनीति और क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर पीएम मोदी के इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, मालदीव की पिछली सरकार के समय में भारत के साथ संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था। पीएम मोदी अपनी इस यात्रा के जरिए पड़ोसी देश के साथ संबंधों को दोबारा मजबूत करना चाहेंगे। करतारपुर मार्ग पर रवीश कुमार ने कहा कि इस पर बात हो रही है पर पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक तौर अभी कुछ नहीं कहा गया है।

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