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खेलों को पाठ्यक्रम में अनिवार्य बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट स्कूलों के पाठ्यक्रम में स्पोर्ट्स को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल करने की मांग पर सुनवाई के लिए राजी है। शिक्षा के अधिकार के तहत प्राथमिक और हायर सेकेंड्री लेवल के पाठ्यक्रम में स्पोर्ट्स को अनिवार्य तौर पर शामिल करने की मांग को लेकर कानून की विद्यार्थी कनिष्का पांडे ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट + ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी), नैशनल काउंसल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च सेंटर (एनसीईआरटी) और ट्रेनिंग ऐंड स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। ये सभी संस्थाएं इस पर जवाब देंगी कि स्पोर्ट्स को एक अनिवार्य विषय के तौर पर पाठ्यक्रम में शामिल करने और शिक्षण संस्थाओं में खेल के मैदान और उपकरणों आदि की क्या स्थिति है। याचिकाकर्ता कनिष्का पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील राजीव दुबे की तरफ से याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता की मांग है कि देश में खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रमों में स्पोर्ट्स को अनिवार्य किया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि खेलों को बढ़ावा देने से बच्चों और युवाओं के बीच धैर्य, एक-दूसरे का सहयोग, दोस्ती बढ़ाने और कई अन्य सामाजिक विकृतियों को दूर करने में मदद मिलगी। याचिकाकर्ता का कहना है, 'जब तक खेल + गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे ओलिंपिक और दूसरी प्रतियोगिताओं में भारत का मेडल सूची में ऊपर आना लगभग असंभव है। यह वक्त की मांग है कि देश में खेलों की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए और इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।'

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