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शाहीन बाग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी,

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी को अपने अधिकारों के इस्तेमाल के लिए दूसरे के अधिकारों को कुचलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। दिल्ली के शाहीन बाग में महीनों चले धरना-प्रदर्शन के कानूनी पहलुओं पर टिप्पणी करते हुए सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि धरना-प्रदर्शन के नाम पर अन्य नागरिकों के आवागमन का अधिकार अनिश्चित काल तक रोका नहीं जा सकता। आखिर सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग के धरने पर इतनी सख्त टिप्पणी क्यों की? 15 दिसंबर, 2019 से लॉकडाउन लगने तक चला धरना याद रहे कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशभर के विभिन्न स्थानों के साथ-साथ शाहीन बाग में भी 15 दिसंबर, 2019 को धरना शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-नोएडा मार्ग पर जमावड़ा लगा दिया जिससे कालिंदी कुंज से होकर नोएडा से दिल्ली और फरीदाबाद आने-जाने वाले लाखों लोगों को महीनों तक परेशानी हुई। इन्हें कई किलोमीटर का चक्कर काटकर आना-जाना पड़ रहा था। वहीं, इस मार्ग के बंद होने के कारण रिंग रोड, मथुरा रोड और डीएनडी पर यातायात का अतिरिक्त दबाव पड़ा। इस कारण इन मार्गो पर भयंकर जाम लगता रहा। आने-जाने में भारी परेशानी का हुआ था सामना परेशानी में स्थानीय लोगों के सब्र का बांध टूटने लगा तो जनवरी के दूसरे हफ्ते में मदनपुर खादर गांव के खारीकुआं चौपाल पर आसपास के दर्जनभर गांवों की पंचायत बुलाई गई थी। इसमें खिजराबाद, तैमूर नगर, सराय जुलैना, भरत नगर, जसोला, मदनपुर खादर, आली गांव, आली विस्तार, बदरपुर, जैतपुर, मीठापुर, जेजे कॉलोनी समेत आसपास के तमाम गांवों के लोग शामिल हुए थे। रोड जाम हटाने के लिए इस तरह की दूसरी कोशिशें भी हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किए थे तीन वार्ताकार इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को कुछ याचिकाओं पर सुनवाई की। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, सुप्रीम कोर्ट की वकील साधना रामचंद्रन और वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े को वार्ताकार नियुक्त कर दिया। रामचंद्रन और हेगड़े 19 फरवरी को प्रदर्शनस्थल पहुंचे और उन्होंने वहां भारी तादाद में जुटे प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़कर सुनाया। असफल रही सुप्रीम कोर्ट की कोशिश फिर वार्ताकारों ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने प्रदर्शन करने के आपके अधिकार को बरकरार रखा है लेकिन अन्य नागरिकों के भी अधिकार हैं जिन्हें बरकरार रखा जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'हम मिलकर समस्या का हल ढूंढना चाहते हैं। हम सबकी बात सुनेंगे।' सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त तीसरे वार्ताकार पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह शाहीन बाग नहीं गए। बहरहाल, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने वार्ताकारों की बात नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट की पहल रंग नहीं ला सकी। शाह से मिलने प्रदर्शनकारियों ने किया था मार्च सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से पहले प्रदर्शनकारी 16 फरवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के लिए उनके आवास की तरफ बढ़े। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 15 फरवरी की रात ही शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से लिस्ट मांगी थी कि जो लोग गृह मंत्री से मिलने जाना चाहते हैं, उनके नाम दे दें, लेकिन तब कोई लिस्ट नहीं दी गई। उस वक्त साउथ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी आरपी मीणा ने कहा बताया था कि शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों ने उन्हें बताया कि वे गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए मना कर दिया क्योंकि उनके पास अपॉइंटमेंट नहीं था। ट्रंप का भारत दौरा और दिल्ली में दंगे बहरहाल, शाहीन बाग की तर्ज पर दिल्ली के अन्य इलाकों में भी सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्गों पर जुटना शुरू किया और हालत ऐसी हो गई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी में दंगे भड़क गए। 23 फरवरी को 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम में शिरकत करने भारत पहुंचे और अचानक जाफराबाद समेत दिल्ली के कई हिस्सों में दंगे शुरू हो गए। तब एक तबके ने शाहीन बाग में इतने लंबे चले धरने के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए संदेह जताया था कि अगर यह धरना जल्द खत्म नहीं हुआ तो यह देश और समाज के लिए गलत मिसाल बनेगी। लॉकडाउन का ऐलान और धरने पर पाबंदी खैर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के कारण विश्वव्यापी कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए 22 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। लॉकडाउन के दो प्रमुख नियमों- कहीं भी भीड़ जमा नहीं करना और सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करना के तहत शाहीन बाग के धरने को खत्म किया जाना था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने धरना खत्म करने में आनाकानी की, लेकिन आखिरकार उन्हें प्रदर्शन स्थल से उठना पड़ा। अनलॉक 1 के ऐलान के साथ ही जुटने लगे थे प्रदर्शनकारी बाद में जब केंद्र सरकार ने जून महीने में अनलॉक वन का ऐलान किया तो शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी फिर से धरना स्थल पर जुटने की कोशिश करने लगे। कुछ महिलाएं 3 जून को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं, लेकिन पुलिस बलों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें वहां से हटा दिया।

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