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पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर बोले पीएम मोदी- किसानों, श्रमिकों से वादे बहुत किए काम नहीं किया, अब काम हुआ तो फैला रहे झूठ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर कृषि संबंधी विधेयकों और श्रम सुधारों की दिशा में उठाए गए सरकार के कदमों पर विस्तृत बात की। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर ही सोचती है और उसी के अनुरूप काम करती है। मोदी ने कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों एवं संगठनों पर झूठ बोलकर किसानों को बरगलाने का आरोप लगाया। आर्टिकल 370, राम मंदिर का जिक्र मोदी ने कहा कि हर घर जल की योजना हो या हर गांव तक तेज इंटरनेट का वादा, ये करोड़ों देशवासियों के जीवन को आसान बनाने वाले हैं। उन्होंने कहा, 'इसमें आर्टिकल 370, अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जैसे वह वादे भी शामिल हैं जो दशकों की हमारी तपस्या के आधार रहे हैं।' उन्होंने कहा कि संकल्प सिद्ध करने की हमारी ताकत को बनाए रखना है। 'किसानों से झूठ बोलकर कर रहे भ्रमित' प्रधानमंत्री ने कहा, 'किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं। ये लोग अफवाहें फैला रहे हैं। किसानों को ऐसी किसी भी अफवाह से बचाना बीजेपी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। हमें किसान के भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।' उन्होंने कहा, बीजेपी का वैचारिक तंत्र और राजनीतिक मंत्र साफ है। हम लोगों के लिए राष्ट्रहित सबसे ऊपर है। नेशन फर्स्ट यही हमारा मंत्र है, यही हमारा कर्म है। 'वादों के मुताबिक काम नहीं हुआ' पीएम ने विपक्ष पर किसानों और श्रमिकों के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'आजादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणापत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थी। देश इन बातों को भली-भांति जानता है।' उन्होंने आगे कहा, किसान और श्रमिक के नाम पर देश में, राज्यों में अनेकों बार सरकारें बनीं लेकिन उन्हें मिला क्या? सिर्फ वादों और कानूनों का एक उलझा हुआ जाल। एक ऐसा जाल, जिसको ना तो किसान समझ पाता था और ना ही श्रमिक।' पुरानी नीतियों से किसानों की आमदनी नहीं बढ़ी, कर्ज बढ़ा' प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था। नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी। हां, उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने निरंतर इस स्थिति को बदलने का काम किया है। पहले लागत का डेढ़ गुना एमएसपी तय किया, उसमें रिकॉर्ड बढ़ोतरी की और रिकॉर्ड सरकारी खरीद भी सुनिश्चित की।' 'नए श्रम कानून से सबको मिला समान दर्जा' पीएम ने कहा कि किसानों की तरह ही देश में दशकों तक देश के श्रमिकों को भी कानून के जाल में उलझाकर रखा गया है। पीएम ने कहा, 'जब-जब श्रमिकों ने आवाज उठाई, तब-तब उनको कागज पर एक कानून दे दिया गया। जो पहले के श्रमिक कानून थे, वो देश की आधी आबादी, हमारी महिला श्रमशक्ति के लिए काफी नहीं थे। अब इन नए कानूनों से हमारी बहनों को, बेटियों को, समान मानदेय दिया गया है, उनकी ज्यादा भागीदारी को सुनिश्चित किया गया है।' उन्होंने कहा, 'किसानों, श्रमिकों और महिलाओं की ही तरह छोटे-छोटे स्वरोजगार से जुड़े साथियों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था, जिसकी सुध कभी नहीं ली गई। रेहड़ी, पटरी, फेरी पर काम करने वाले लाखों साथी जो आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार भरण-पोषण करते हैं, उनके लिए भी पहली बार एक विशेष योजना बनाई गई है। किसानों, खेत मजदूरों, छोटे दुकानदारों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन और बीमा से जुड़ी योजनाएं हमारी सरकार ने पहले ही आरंभ कर दिया है। अब नए प्रवधानों से सामाजिक सुरक्षा का ये कवच और मजबूत होगा।' पं. दीनदयाल को किया याद प्रधानमंत्री ने पंडित दीनदयाल के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा, 'आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक-एक देशवासी अथक परिश्रम कर रहा है, तब गरीबों को, दलितों, वंचितों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, आदिवासी, मजदूरों को उनका हक देने का बहुत ऐतिहासिक काम हुआ है।' उन्होंने कहा,'ये दीनदयाल जी ही थे, जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति और समाजनीति, इन तीनों को भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी, लिखी थी। 21वीं सदी के भारत को विश्व पटल पर नई ऊंचाई देने के लिए, 130 करोड़ से अधिक भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, आज जो कुछ भी हो रहा है, उसमें दीन दयाल जी जैसे महान व्यक्तित्वों का बहुत बड़ा आशीर्वाद है।'

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