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योगेंद्र यादव के साथ राहुल गांधी, कांग्रेस में चल रहा नया प्रयोग!

नई दिल्ली : दिल्ली में जब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया था तो उस समय भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का उसे अपार समर्थन मिला था। अन्ना हजारे के आंदोलन के समय उसके नेतृत्व करने वालों ने निर्वाचित संस्थाओं के नकारेपन से पैदा हुए शून्य को भरने के लिए सिविल सोसायटी को विकल्प माना था। अन्ना के आंदोलन को असली ताकत जनता से ही मिली थी। देश के युवाओं, हजारों कार्यकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और यहां तक कि पुलिसकर्मियों ने अन्ना के आंदोलन को सही माना था। यह सही भी है कि इस तरह के आंदोलन से किसी भी सिविल सोसायटी को ताकत भी मिलती है। जब सिविल सोसायटी अपना धैर्य खो देती है तो वह सड़कों पर उतर आती है। अब 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस का फोकस इसी सिविल सोसायटी की ताकत के जरिये बीजेपी की धार को कुंद करना है। 12 राज्य, 3500 किलोमीटर का सफर भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक होगी। इस दौरान यात्रा में 3500 किलोमीटर का सफर होगा और लगभग 12 राज्यों से होकर गुजरेगी। इस दौरान कांग्रेस पदयात्रा और रैलियां करेगी। माना जा रहा है कि इस भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस 2024 के लोकसभा की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 1991 में हुई अपने पिता राजीव गांधी की हत्या के स्थान ‘श्रीपेरंबदूर स्मारक’ पर सात सितंबर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कुछ देर 'ध्यान' लगाएंगे और फिर कन्याकुमारी में 'भारत जोड़ो यात्रा' की शुरुआत करेंगे। यात्रा तमिलनाडु में सात से 10 सितंबर तक चार दिन चलेगी। इसके बाद 11 सितंबर से यात्रा पड़ोसी केरल में जारी रहेगी। कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगी भारत जोड़ो यात्रा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की तरफ से यह प्रयास तो अच्छा है लेकिन इसके परिणाम कैसे होंगे यह यात्रा के खत्म होने के बाद ही पता लगेगा। विश्लेषकों के अनुसार यात्रा को सिविल सोसायटी का कितना समर्थन हासिल होता है यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है। सोमवार को हुई बैठक में योगेंद्र यादव भी मौजूद थे। ऐसे में स्वराज इंडिया का साथ कांग्रेस को मिलना तय है। इसके अलावा पार्टी कई अन्य संगठनों से भी विस्तृत विचार विमर्श कर रही है। 2024 चुनाव भले ही दूर हो लेकिन देखना होगा कि कांग्रेस की यह भारत जोड़ो यात्रा पार्टी के संजीवनी बन पाती है या नहीं?

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