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मौसमी बीमारियों के लिए 44,387 घरों का हुआ सर्वे बीकानेर। डेंगू-मलेरिया-चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के प्रति जनजागरण करने सोमवार से शुरू हुए त्रिदिवसीय “हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी” अभियान में उत्साह चरम पर है। नर्सिंग विद्यार्थी, आशा, ए.एन.एम. व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 478 दल पहले दिन में 44,387 घरों तक स्वास्थ्य सन्देश लेकर पहुंचे। बीकानेर, देशनोक, नोखा व श्रीडूंगरगढ़ के शहरी क्षेत्रों में अभियान पूरे जोर-शोर से चला। नर्सिंग विद्यार्थी डिस्पेंसरी वार दलों में विभक्त होकर क्षेत्रीय आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर पहुंचे। सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सर्वे के दौरान दलों ने 893 स्थानों पर मच्छरों के लार्वा चिन्हित किए और उनका उपचार किया। कुल 281 बुखार के रोगी मिले जिनकी रक्त की स्लाइड जाँच हेतु बनाई गई व दवा दी गई। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर ने बताया कि दलों द्वारा कुल 48,826 पानी की टंकियों, 55,484 कूलरों, 7,271 अन्य पात्रों व 37 वाटर बॉडीज का सर्वे किया गया और मौके पर एंटीलार्वल गतिविधियाँ करते हुए आमजन को इससे जोड़ने का प्रयास किया गया। एंटी एडल्ट गतिविधियों के अंतर्गत मेट व इलेक्ट्रिक रैकेट के उपयोग की सलाह दी गई। एपीडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह ने बताया कि मौसमी बीमारियों के स्थाई समाधान के लिए एंटी लार्वल गतिविधियों पर जोर देते हुए आमजन को स्वच्छता को दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। बरसाती मौसम में हर घर अपनाए एंटी लार्वल गतिविधियाँ डॉ. चौधरी के अनुसार मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है एंटीलार्वल एक्टिीविटी जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। इस क्रम में गंदे पानी के इकट्ठा होने पर एमएलओ/काला तेल पाइरेथ्रम छिड़काव, साफ पानी के तालाबों पर बीटीआई, पेयजल में टेमीफोस, घरों में पाइरेथ्रम स्प्रे तथा जल स्त्रोंतो में मच्छर का लार्वा खाने वाली गम्बूशिया मछली डलवाने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण यह समय मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन हेतु अनुकूल है अतः आमजन को चाहिए कि पक्षियों के लिए रखे जाने वाले परिंडों को सप्ताह में एक बार खाली कर उन्हें बर्तन साफ करने वाले झामे से रगड़ कर, साफ कर व सुखाकर मच्छर के अण्डे एवं लार्वा नष्ट कर पुनः भरा जाये। कूलर, फ्रीज के पीछे की ट्रे, गमले, फूलदान इत्यादि हेतु भी यही प्रक्रिया अपनानी जानी चाहिए। इसके साथ ही छत पर रखे टूटे-फूटे सामान, कबाड़-टायर इत्यादि को हटाकर पानी इक्कठा होने से रोका जाये। पानी की टंकी एवं अन्य बर्तनों को ढंक कर रखा जाये जिससे मच्छर उनमें प्रवेश कर प्रजनन न कर सकें।
बीकानेर। डेंगू-मलेरिया-चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के प्रति जनजागरण करने सोमवार से शुरू हुए त्रिदिवसीय “हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी” अभियान में उत्साह चरम पर है। नर्सिंग विद्यार्थी, आशा, ए.एन.एम. व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 478 दल पहले दिन में 44,387 घरों तक स्वास्थ्य सन्देश लेकर पहुंचे। बीकानेर, देशनोक, नोखा व श्रीडूंगरगढ़ के शहरी क्षेत्रों में अभियान पूरे जोर-शोर से चला। नर्सिंग विद्यार्थी डिस्पेंसरी वार दलों में विभक्त होकर क्षेत्रीय आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर पहुंचे। सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सर्वे के दौरान दलों ने 893 स्थानों पर मच्छरों के लार्वा चिन्हित किए और उनका उपचार किया। कुल 281 बुखार के रोगी मिले जिनकी रक्त की स्लाइड जाँच हेतु बनाई गई व दवा दी गई। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर ने बताया कि दलों द्वारा कुल 48,826 पानी की टंकियों, 55,484 कूलरों, 7,271 अन्य पात्रों व 37 वाटर बॉडीज का सर्वे किया गया और मौके पर एंटीलार्वल गतिविधियाँ करते हुए आमजन को इससे जोड़ने का प्रयास किया गया। एंटी एडल्ट गतिविधियों के अंतर्गत मेट व इलेक्ट्रिक रैकेट के उपयोग की सलाह दी गई। एपीडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह ने बताया कि मौसमी बीमारियों के स्थाई समाधान के लिए एंटी लार्वल गतिविधियों पर जोर देते हुए आमजन को स्वच्छता को दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। बरसाती मौसम में हर घर अपनाए एंटी लार्वल गतिविधियाँ डॉ. चौधरी के अनुसार मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है एंटीलार्वल एक्टिीविटी जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। इस क्रम में गंदे पानी के इकट्ठा होने पर एमएलओ/काला तेल पाइरेथ्रम छिड़काव, साफ पानी के तालाबों पर बीटीआई, पेयजल में टेमीफोस, घरों में पाइरेथ्रम स्प्रे तथा जल स्त्रोंतो में मच्छर का लार्वा खाने वाली गम्बूशिया मछली डलवाने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण यह समय मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन हेतु अनुकूल है अतः आमजन को चाहिए कि पक्षियों के लिए रखे जाने वाले परिंडों को सप्ताह में एक बार खाली कर उन्हें बर्तन साफ करने वाले झामे से रगड़ कर, साफ कर व सुखाकर मच्छर के अण्डे एवं लार्वा नष्ट कर पुनः भरा जाये। कूलर, फ्रीज के पीछे की ट्रे, गमले, फूलदान इत्यादि हेतु भी यही प्रक्रिया अपनानी जानी चाहिए। इसके साथ ही छत पर रखे टूटे-फूटे सामान, कबाड़-टायर इत्यादि को हटाकर पानी इक्कठा होने से रोका जाये। पानी की टंकी एवं अन्य बर्तनों को ढंक कर रखा जाये जिससे मच्छर उनमें प्रवेश कर प्रजनन न कर सकें।

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